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मूँगा_आ_जालिम_सिंहक_प्रेमक_जीत.m4a
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- 0:00–0:07अव, बेत्या राजक अटिहासिक प्रेम कता, मुंगा आजालिम्सिं, कमुख्यबात सबख्ख, इट्वरिट साराव्ष्सुनी.
- 0:07–0:11गजेंद्र ताकुडवारा समपादित एगाता गजजब कची,
- 0:11–0:13जे हम्रा सब के देखावे तची,
- 0:13–0:17जे कोना एक तर राजपूट सबाही अदुसाध जाति कन्याक प्रेम,
- 0:17–0:22दर्बारी सच्ड्यन्त्र असमाजक क्रुट दिवाल के चीर कविजे पावे तची.
- 0:22–0:28पहल की दर्बार कर राजनीती आईईच्या सच्चा प्रेमक जान लेवा दुश्मन बनी सके तची
- 0:28–0:34एक्दम की आख्ता एनार लगक भेट से जगन जालिम आम वोंगाक प्रेम का बनक लागल
- 0:34–0:37तो कुचक्री दर्बारी राजा के भडखा दे लख्यन
- 0:37–0:42अएकर कीमत जालिमक वफदार मित्र पट्टू के अपन जान्दक चुकावे पडल
- 0:42–0:49तो सर शोचु जगन समाज अन्याएपोन होए तकी जंगल के निम् भेसी न्यायपोन भाजाईत अची
- 0:49–0:53दर्बारी उठल पुठल कका कारन मुंगा के जंगल पट्टा देलगले
- 0:53–1:02जते कन्वा नामक एक ता भ्यंकर शिकारी, उकर भली देवे चाहच्छिल, मुदा जालिम आन मोका पपोची कन्वा के मारी उक्रा बचे लक,
- 1:02–1:06अ समाजक परवाज केने बिना उतही जंगल में दूनु विवाज कले लक.
- 1:06–1:11अद्त में सब सब पेग विडम बनात एए आची जे बहारी धुशमन सजीत लाक बादो
- 1:11–1:16जालिम पर उक्रे आपन भाई, कोर जाते भेद ककारन जान लेवा हम्लाक डेलक
- 1:16–1:21तक्रा बाद, मुंगा आपन गायल पतिक जे रीज असेवा के लक
- 1:21–1:25अकर वैई समरपन अंतता परिवार कद्होर हिदैके सोबदल देलक,
- 1:25–1:28मानवे पडद, अटूट देर्या असच्छा प्रेम,
- 1:28–1:33अंतता समाजक सबस ख़्फोर जातिभेद के सोग रहा सके तची.
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अव, बेत्या राजक अटिहासिक प्रेम कता, मुंगा आजालिम्सिं, कमुख्यबात सबख्ख, इट्वरिट साराव्ष्सुनी. गजेंद्र ताकुडवारा समपादित एगाता गजजब कची, जे हम्रा सब के देखावे तची, जे कोना एक तर राजपूट सबाही अदुसाध जाति कन्याक प्रेम, दर्बारी सच्ड्यन्त्र असमाजक क्रुट दिवाल के चीर कविजे पावे तची. पहल की दर्बार कर राजनीती आईईच्या सच्चा प्रेमक जान लेवा दुश्मन बनी सके तची एक्दम की आख्ता एनार लगक भेट से जगन जालिम आम वोंगाक प्रेम का बनक लागल तो कुचक्री दर्बारी राजा के भडखा दे लख्यन अएकर कीमत जालिमक वफदार मित्र पट्टू के अपन जान्दक चुकावे पडल तो सर शोचु जगन समाज अन्याएपोन होए तकी जंगल के निम् भेसी न्यायपोन भाजाईत अची दर्बारी उठल पुठल कका कारन मुंगा के जंगल पट्टा देलगले जते कन्वा नामक एक ता भ्यंकर शिकारी, उकर भली देवे चाहच्छिल, मुदा जालिम आन मोका पपोची कन्वा के मारी उक्रा बचे लक, अ समाजक परवाज केने बिना उतही जंगल में दूनु विवाज कले लक. अद्त में सब सब पेग विडम बनात एए आची जे बहारी धुशमन सजीत लाक बादो जालिम पर उक्रे आपन भाई, कोर जाते भेद ककारन जान लेवा हम्लाक डेलक तक्रा बाद, मुंगा आपन गायल पतिक जे रीज असेवा के लक अकर वैई समरपन अंतता परिवार कद्होर हिदैके सोबदल देलक, मानवे पडद, अटूट देर्या असच्छा प्रेम, अंतता समाजक सबस ख़्फोर जातिभेद के सोग रहा सके तची.