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चादँ_सौदागर_आ_देवी_मनसाक_टकराव.m4a
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- 0:00–0:06इछि चंपानगरक प्रसिद सती भिहुला अचान सदागर कक गातक अग्टा चोट संचर चा आचि
- 0:06–0:09इप्राषीन कता देवता आ मनुखक्क भीचक,
- 0:09–0:11औही भ्यश्कर तक्रावक अची,
- 0:11–0:12जे दिखाई तची,
- 0:12–0:14जे कोना कखनो काल,
- 0:14–0:16मनुखक्क जिद आनिष्था,
- 0:16–0:19सक्षाड देवताक प्रकोः सर्जो पैग भाजाई तची.
- 0:19–0:20तपहिल्बात,
- 0:20–0:26जे आंके बुज़ावाक अची उ अची चान्थ सव्दागर अ देवी मन्साक बीच कब भयानक तक राव.
- 0:26–0:33देखू चान्थ चंपानगरक एक ता बहुत धनी व्यापारी अ भबभान शिव्का परम भक्त चलाँ.
- 0:33–1:03मुदा सर्पलोक्क्क्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्
- 1:03–1:05सब सदनी लोक रातो रात कंगाल बहगेला
- 1:05–1:07एक ता पैएक प्रष्न उठही तची
- 1:07–1:09जे सर्वस्व गमाईलक बादो
- 1:09–1:11कोनो लोक अपन जिद पर
- 1:11–1:12कोना आडल रही सके तची
- 1:13–1:15की साचो मे विषुद बख्ती चल
- 1:15–1:16वा मात्र हुंकर आहंकार
- 1:16–1:21अन्त में इगाता अटूट संकल्प अएक तन्व आसक जन्मक सन्देश देई तची.
- 1:21–1:24एते कि चुक बादो चान्द भएसने जुकला,
- 1:24–1:29कारन हुनकर सपष्ट मानव्चल, जे भएसम मांगल गेल पूजा कोनु पूजा नहीं होई तची.
- 1:29–1:34एही गोर अंदार में हुँक ता नव बेटा लखिन्द्रक जन्मभेलनी
- 1:34–1:38जते सचान्द कपूतो हु सती भीहुला कषाहसी संगर्षक नीम पडईतची
- 1:38–1:43इठीक उईना आची जेना राक कदेरी में कोनो चिन्गी फेर सेजरी उठल होए
- 1:43–1:49कुल मिलालका एे गाता हमरा लोकनी के सिखवैत अची जे म्रित्तुक दार में से हो,
- 1:49–1:53बिना हार मानल अपन सिद्धान्त पर कोना अटल रहाल जासके तची.
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इछि चंपानगरक प्रसिद सती भिहुला अचान सदागर कक गातक अग्टा चोट संचर चा आचि इप्राषीन कता देवता आ मनुखक्क भीचक, औही भ्यश्कर तक्रावक अची, जे दिखाई तची, जे कोना कखनो काल, मनुखक्क जिद आनिष्था, सक्षाड देवताक प्रकोः सर्जो पैग भाजाई तची. तपहिल्बात, जे आंके बुज़ावाक अची उ अची चान्थ सव्दागर अ देवी मन्साक बीच कब भयानक तक राव. देखू चान्थ चंपानगरक एक ता बहुत धनी व्यापारी अ भबभान शिव्का परम भक्त चलाँ. मुदा सर्पलोक्क्क्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध् सब सदनी लोक रातो रात कंगाल बहगेला एक ता पैएक प्रष्न उठही तची जे सर्वस्व गमाईलक बादो कोनो लोक अपन जिद पर कोना आडल रही सके तची की साचो मे विषुद बख्ती चल वा मात्र हुंकर आहंकार अन्त में इगाता अटूट संकल्प अएक तन्व आसक जन्मक सन्देश देई तची. एते कि चुक बादो चान्द भएसने जुकला, कारन हुनकर सपष्ट मानव्चल, जे भएसम मांगल गेल पूजा कोनु पूजा नहीं होई तची. एही गोर अंदार में हुँक ता नव बेटा लखिन्द्रक जन्मभेलनी जते सचान्द कपूतो हु सती भीहुला कषाहसी संगर्षक नीम पडईतची इठीक उईना आची जेना राक कदेरी में कोनो चिन्गी फेर सेजरी उठल होए कुल मिलालका एे गाता हमरा लोकनी के सिखवैत अची जे म्रित्तुक दार में से हो, बिना हार मानल अपन सिद्धान्त पर कोना अटल रहाल जासके तची.