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भाटिनक_विषैला_प्रपंच_आ_ओकर_पतन.m4a
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- 0:00–0:05आ, प्राया जकन हम सब कोनो अप्राद, मने कोनो गमभीर भीमारी,
- 0:05–0:08या जीवनक कोनो जतल समस्याक बात करे ची,
- 0:08–0:13ता हम्रा लोकनी के लागत अची, जे सब किचु एक्दम सपष्ष्ट अची.
- 0:13–0:18आ, लोक चाहे तची, जिस सब किचु सादा अखर्या मेहो,
- 0:18–0:19यह गडम सपच्ट.
- 0:19–0:20भिलकल.
- 0:20–0:22जेना कोलो ऐकस्रे मशीन में
- 0:22–0:25तूटल हद्टी एक दम साप देखा जाईता ची.
- 0:25–0:25नहीं.
- 0:25–0:29दोक्तर उही उजर लेकादिस इशारा करे चती.
- 0:29–0:32अक आख छती जे देखू एते हद्टी तूटल आची.
- 0:32–0:33आप.
- 0:33–0:35इसोचत में बडान निक लागाता था ची
- 0:35–0:38इस हम्रा लोकनी का एक ता जुटा शान्तोना देटा ची
- 0:38–0:42जे मने हम सब सब किछ सब श्पष्ट रूप से देखी रहाल ची
- 0:42–0:43अनियंद्रन कर सके ची
- 0:43–0:45एक दम सही का लो हूँ आप
- 0:45–0:49मुदा वास्त्विक ताते एक्रासा बहुत भिन्न होई ताछी
- 0:49–0:55जकन हम सब मान्विय मनोविग्यान, दोखा, अविश्वास गातक ग़राई में उत्रे ची
- 0:55–0:58तकन, अएक्सरे मशीन काजकर बन कर देटाछी
- 0:59–1:02हा, करेन जे कुनो मशीन इन नहीं बतासकता ची
- 1:02–1:05जे कुन विक्ती भितर सक्केथे कप्टी बोचुका लाची
- 1:05–1:10एक्दम तकन हम सब एक ता एहन परिदिश्श में प्रवेश कराई ची
- 1:10–1:13जतै जल एक दम गहिर अग्गंदा आची
- 1:13–1:16कुन वस पाष्ट चित्र नहीं भेटाई तची
- 1:16–1:22बूजल्यना मात्र किचु लहर उठाई तची, जेकरा बूजभ अत्तिन्त कष्फिन होई तची.
- 1:22–1:26आ, उईगहि गहिर अग्गंडला जल में सत्ते नुकायल रहे तची.
- 1:26–1:30उते मनो विग्यानक अण्धार कूना सब होई तची,
- 1:30–1:33जेकरा सादारन आखी से देखाव असमभववची
- 1:33–1:37उते अख्सरे नहीं, बलकी बहुत सूछ बद्रिष्टी चाही.
- 1:37–1:39आएक हमर यी विस्त्रिट चर्चा,
- 1:39–1:44बिल्ल्कुल एही गहिर अग्गन्दा जलक सर्वत्तम उदाहरन्ट पर केंद्रत अची.
- 1:44–1:49विदेह इपत्रिका में प्रकाशित गजेंद्र ताकुर दवारा संपादित
- 1:49–1:53भाट भाटन कताक हम सब आए गहन विष्लेषन करव.
- 1:53–2:00आप, इप आप आप यह देखान लोग कतान नहीं चे जे बच्चा के सुटेवा के लिल सूना लगजाईत आची.
- 2:00–2:02इबहुत गहीर अची
- 2:02–2:04इग्दम नहीं
- 2:04–2:07इएक ता पूझ विखसित मनोविग्यानिक त्रिलर अची
- 2:07–2:09इक ता एहन गाता
- 2:09–2:12जते विश्वास खात अपन चरम पर अची
- 2:12–2:14रहस्च गहीर अची
- 2:14–2:16अब भुद्दिक खेल एहन अची
- 2:16–2:18अद्त दरी मतिब्रम प्यदा का देई तची
- 2:19–2:21तीक चे आव एक राविस्तार सवमजगी ची
- 2:21–2:24इक दाथा वास्तो में हत्प्रभ करे वाला ची
- 2:25–2:26लोग कथाक आबरन में
- 2:26–2:30इए मने मानव मनक सबसे कलुषित रुपक बाहर लाने तची
- 2:30–2:31हाँ
- 2:31–2:34इमात्रेक्ता हत्याक्श्ड्यन्त्र कता नहीं आची
- 2:34–2:35बलकु नहीं
- 2:35–2:38इदिखेबाक दार्शनिक प्रयास आची
- 2:38–2:44जि कुना अंदार, रहस्य, आअधार, अंतोता सुयम अपनाले ल्जाल बूने तची
- 2:44–2:47हम्रा लोकनिक के इस वोचे पर विवष करे तची
- 2:47–2:51जिजगन कोन व्यक्ती अने तिक्ताक चरम प्वूचे चे
- 2:51–2:54तो उकर पतनक कारन कोन बाहरी शक्ती नहीं हो इच्छे
- 2:54–2:56तक्की हो इच्छे, उकर अपन प्रपंच?
- 2:56–3:01आ, बलक्ल, उकर पतनक कारन उकर अपन रचल प्रपंच हे ते ये ची
- 3:01–3:02बाप्रे
- 3:02–3:05आएकर संगे संग, इग कता इभी दिखावाई तची,
- 3:05–3:07जे कोना दनिक जीवनक चोट-चोट आदत,
- 3:08–3:10आ पारिवारिग निष्ठा जीवन रक्षक बहुशके जे.
- 3:11–3:13कताक आरम होगे तची एक ता अस्वभाविक,
- 3:14–3:16आ अद्यन्त अजीबो गरी प्रेम प्रसंगसा.
- 3:16–3:17आप भाटेन का प्रसंग
- 3:17–3:22एक दम भाटेन जे भाट आथ आत लोग गायक का पतनी आची
- 3:22–3:25उक्रा एक तगवूमन साब सक गुप्त प्रेम वो जाए तची
- 3:25–3:27हमर मतलब अची एक तगवूमन
- 3:27–3:28आप सोची तो
- 3:28–3:30जना एक दम साख्षात मिद्तिओ से प्रेम
- 3:30–3:32इत सुंते आजीब लागेता ची
- 3:32–3:34मुदा इवस्वाबाविक प्रेम
- 3:34–3:36मनोवे ग्यानिक द्रुष्टिकोण सा
- 3:36–3:38बहुत पैग रुपक चे
- 3:38–3:40सादारनता, साब, क्हत्रा
- 3:40–3:44विश आदोखाक प्रतीक मानल जाईता ची
- 3:44–3:47आआ, लोक साब से दराईता ची
- 3:47–3:51अगर अपन पती जोगर वेदानिक अ समाजिक जीवन साथी अची
- 3:51–3:54अगरा मात्र एक ता बादा बुजाय लगाई तची
- 3:54–3:57आई विरोदा बास देखु बाटेन अपन अही भिष्ट्राए
- 3:57–4:00अपन अपन पती अपन पती अपन पती अपन पती
- 4:00–4:05अगर अपन पती जोगर वेदानिक असमाजिक जीवन सातिय अखरा मातर एक दाबादा बुजाय लगाई तची.
- 4:05–4:09आई विरोदा भास देखु भाटेन अपन औही भिश्शायला प्रेमी साप के निक-निकुत भोजन देच जलिये.
- 4:09–4:13अगरा मात्र एक दादा बादा बुजाय तची.
- 4:13–4:15आई विरोदा भास देखू,
- 4:15–4:18भाटेन आपन औही विश्यला प्रेमी साप के
- 4:18–4:20निक-निकुत भोजन देच छलीए.
- 4:20–4:22और दूसर देस,
- 4:22–4:24आपन पती के बलस्या खलस्या भोजन देच छलीए.
- 4:24–4:26अजिक्राम सब बासी खाना कहत ची.
- 4:26–4:30बिल्कुल, पती के बासी अ गड्या खाना,
- 4:30–4:32अ साप के उत्तम भोजन,
- 4:32–4:35इता एक्दम उही परजीवी जका बहुगे,
- 4:35–4:38जे अपना आश्रे दाता के भित्रे भितर कुखला कर रहो लोए.
- 4:38–4:40अपन एक्दम सईए निलोगी अची,
- 4:40–4:42बादेन उही सापके पोषी रहल चली
- 4:42–4:45और अपन गरा के आपन पती के मारे रहल चली
- 4:45–4:47अआ, करन बादेन खरेदे में
- 4:47–4:49दया कोनो स्थान नहीं बचल चल
- 4:49–4:51ओकर इख्रुर्ता करन
- 4:51–4:53बाद दुबर पातर बहर रहल चल
- 4:53–4:55मान्सेक स्थर पर
- 4:55–4:59यक्रुर्ता कारन भाद दूबर पातर भाराल चल
- 4:59–5:04मान्सेक स्तर पर जक्ञन कोन वक्ती भीतर सब रष्ट बजजाई तची
- 5:04–5:07तो उकर भाहरी विवार में उकर असर देखाई तची
- 5:07–5:13मोदा, यी मान्सेक आशारीरेक उपेख्षा जक्ञन चरम पर पहुचाई तची
- 5:13–5:18तक्हन भाटेन मात्र उपेख्षासन संतुष्ट नहीं रहे च्छती, नहीं?
- 5:18–5:23नहीं, उते मीरुके च्छती, उसाप के स्पष्ट आदेज दैच दैच च्छती,
- 5:23–5:26जे भाटक प्रान लले, उसाप के आदेज दैच दैच च्छती,
- 5:26–5:29जे भाटक दसी का मारी देल जाए.
- 5:29–5:38आ एतेसा कता मे आसल गत्या बेत छी, साप भातिनक अदेश पाभी, भातक पनही में चुप्चाप नुका जाए छी.
- 5:38–5:43उप्रतिख्षा करे तछी, जे भात, पनही पहिरत, आ उक्रा दसी लेत.
- 5:43–5:45मुदा भातक एक ता आदत छल.
- 5:45–5:52अद, बाते नक एक ता सादारन आदत छी, पनही पहरे से पूर्व उक्रा जार्बा कादत,
- 5:52–5:58जना हम सब दूरा माटी हताभे लेल जुता जारे ची, बात पर नहीं जारे तचे,
- 5:58–6:04साप खसेट छे, आ आत्म रक्षा में बात साप को वडखग दे तचे.
- 6:04–6:11सोचुता, की इआश्चरे जनक नहीं आजे, जि देनिक जीवनक एक ता चोट सन सादारन आदत,
- 6:11–6:15एक ता एते पेग, एते उन्योज चषर्यन्त्र पर भारी पडिगेल?
- 6:15–6:18एते जा सबसन द्याना कर सक बात अची,
- 6:18–6:21से ई जे मरित्यों के पनेई में नुकाएब,
- 6:21–6:27इस संकेत देईत जे खखत्रा प्राया सबस अनपेखषित आन नजिकख ताम पर भेसल रहीत चे
- 6:27–6:31आँ, लोग सोचाई तसे खखत्रा बहार सावत?
- 6:31–6:36एक दम, हम सब सोचाई ची खखत्रा बहार सावत, कुनो अपरिचित सावत
- 6:36–6:43मुता एते खत्रा स्वैम उकर गर में, उकर देनिक उप्लिोक कवस्तू में, उकर सबस शुरक्षित स्थान पर नुकाल चल.
- 6:43–6:46आब भाट को उआदत, उकर की अर्थभेल.
- 6:46–7:02उ आसल में अग्यानता आस्डलता का विजे, बात नहीं जानत चल, जो उकर पतनी उक्रा मारै चाहेत ची, उ बस आपने एक ता स्वबहाविक अनुशासित कारे करे रहे रहे चल, उकर अनजाने में केल गेल आत्मरक्षा, आसल में उकर निर्दोष्ताक परिनाम चल.
- 7:02–7:32अगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उ�
- 7:32–7:36अगर लागे ते जे पतनी बहादरी कहसा सूना रहले ची
- 7:36–7:39अगर लागे ते जे पतनी बहादरी कहसा सूना रहले ची
- 7:39–7:43अगर लागे ते जे पतनी बहादरी कहसा सूना रहले ची
- 7:43–7:46अगर लागे ते जे पतनी बहादरी कहसा सूना रहले ची
- 7:46–7:48अगर लागे ते जे पतनी बहुत खूछे थी है?
- 7:48–7:53आ, अगर लागे ता ची, जे पतनी इस शुन्नी का प्रसन नहेती,
- 7:53–7:56जे अखर पती एक ता पैग खत्रा से बजगेल,
- 7:56–7:58मुदाओई नहीं जाने ता ची,
- 7:58–8:00जे अग जेखर नार के आल आची,
- 8:00–8:03उकुन उ सादारन साप नहीं बलके उक्रे पतनिक प्रेमी चल.
- 8:03–8:07बप्रे, इत बहुत भ्यानक्स दे दिया जे.
- 8:07–8:11उ अग आन जाने में आपन पतनिक सबसम पएग मान्सिक अगाध दराल अची.
- 8:11–8:15सोग होई चे, तो कान्दैत चे, विलाप कर अचे.
- 8:15–8:45आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
- 8:45–8:49अगर, गरक, विबिन्न ठाम पर नुका देच्छती
- 8:49–8:51चारी तुक्ड़ा खातक पावालग
- 8:51–8:53एक ता मच्यानीचा
- 8:53–8:54एक ता तेल में
- 8:54–8:55एक ता नून में
- 8:55–8:56एक ता दार में
- 8:56–8:58माने अनाज भंदार में
- 8:58–8:59आ एक ता खोपा में
- 8:59–9:01आ, इख उनो सदारन बात नहीं आचे
- 9:01–9:31मुदा एक्ता बात कहो, जब कोनो व्यक्ती सोक मे रहेत अचे, तो तुरन्त प्रतिक्रिया दईतची, या भाबुक भजाई तची, मुदा एते इस्स्रीत एगं त्धन्डा दिमाग से, एक ता प्रानगा तक पहली रची देलक, इस सोक एक तक कोल्ड बलडेड पजल में कोन
- 9:31–9:33अगर शोग उक्रा कमजोर नहीं बनोलक
- 9:33–9:35बलकी उक्रा आर्क्रूर बनादे लक
- 9:35–9:37मुत्ता सबसम विचारनी आब आत यी आची
- 9:37–9:39जे ओ नोग तोक्रा कते नुकावेच्छती
- 9:39–9:41तेल में नुन में, खातक पावालग, दार में
- 9:41–9:43इसक ची आची
- 9:43–9:52अगर बीचारनी ये बात यी अची जी ओँ नो तोकरा कते नु कावे च्छती तेल में, नून में, खातक पावालग, डार में इसक ची अची.
- 9:52–9:54इसब तक ग्रियस्तिक चीज अची?
- 9:54–9:57अची. इसब ग्रियस्तिक मुल आदार अची.
- 9:57–10:02अग, इक दम तेल अनून बिनातक कोनो भानस नहीं बहासके तची.
- 10:02–10:05बलकल, उसाप के म्रित शरीर के माद्यम सब,
- 10:05–10:10उही वैवाही का परवारिक जीवनक आदार के प्रदूषिट करहल चली ए.
- 10:10–10:12खाटक पावा लग मतलप सैं कक्ष में,
- 10:12–10:14तेल नून मतलप रसोई में,
- 10:14–10:16दार मतलब अन्नबहन्दार में
- 10:16–10:20मैंने उआपन जीवनक हर कोना में प्रतिषोद के गूसा देल की
- 10:20–10:26आआआ, उआपन प्रतिषोद के आपन दैनिक जीवनक हर हिस्सा में प्रवेश करा देल की
- 10:26–10:30उआपन भावुकता के एक ता गातक प्रहे लिका में परिवर्तित कर देल की
- 10:44–10:50बाद्ट किट बुजले नी आची जोई की भूर आजी की प्रहली का आची की तुक्डा आची
- 10:50–10:54उक्रा लेल ये एक ता म्रित्यो दन्डक छद्मने आएक रक्रिया आची
- 10:54–10:58जते नयाय दिश अजल्लाद दोनो अगर पतनी आची
- 10:58–11:01अदिश अजलाद दोनो अकर पतनी आची
- 11:01–11:04अद यक दम असहाई भोगेल
- 11:04–11:07अपन प्रिथ्ट्यो सुनिष्ट देखे का दूई दिनक महिलत मागे तची
- 11:07–11:11ताकि अ मरी सब पहले अपन भहीन सब भेट कर सके
- 11:11–11:17आईतेई सब परिवारिक निष्था आएक्ता नुमहिला पात्रक प्रवेश होईता ची, जे भादीनक एक्दम भिप्रीत आची.
- 11:18–11:21बातक भहीन अपन भाएक अर्दा जोड़े चती.
- 11:21–11:24अर्दा जोड़़ब माने भागी या आयु जोड़़ नहीं?
- 11:24–11:31आँ उत्रन्त बाइक संगे चलबाक निने करे तची इणिने बहातक जीवन रक्षाक प्रथम सोपान आची.
- 11:31–11:35अख्रा आजाक संकत के पुर्वाभास भोजाईत अची
- 11:35–11:40कोनो जोतिष्ये या पारमपरिक विद्या से बहीन के बहान भोजाईत अची
- 11:40–11:42जे भाई पर संकत अची
- 11:42–11:45आओ उत्रन्त मदद लेल तयार भेजाई चती
- 11:45–11:49एक दम उत्रन्त भाएक संगे चलबाक निने करे तची
- 11:49–11:53इणिरने भाटक जीवन रक्षाक प्रथम सोपान आची
- 11:53–11:57दोनु भाई भहीन रस्ता में एक टरम्शाला मेरुगए चती
- 11:57–12:01रातेक समय आची भाईत �the कावद आने राशा से सुत रहल आची
- 12:02–12:05उम वानी चुकल आची जे उकर म्रुद्यो निष्चत आची
- 12:05–12:07मुदद भहिन के निद नहींद आबे च्छे?
- 12:07–12:10आप! भहिन के निद नहींद आवी रहा लगची
- 12:10–12:12उकर चिन्ता उकर जागरित रखले आची
- 12:12–12:16आप टक्चन कठा मे एक जादुई तत्वका प्रवेश होई तची
- 12:16–12:20दरमशालाक दिया सब आपस में गब करे लगे तची
- 12:20–12:22इब भफत रहेस से मैं बागा ची
- 12:22–12:27उसब भाटनक समपुन श़यंत्र आउही नोग तुक्डा कस्थान उजागर कर दे तची
- 12:27–12:30हम्राता एदिया सब कगब करब
- 12:30–12:33एक्दम जेना अइकाली खुफ्या केम्रा होई तची
- 12:33–12:36जे बन्द कोट्रिक सत्यके बहार लानाई तची
- 12:36–13:06उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई�
- 13:06–13:13आई ते दिया के वल एक ता प्रकाशक स्रोत नहीं चे, इब्रम्हन्दिय सत्य आन्याई प्रतिक चे.
- 13:14–13:19इब दावे तची, जे प्रक्रति में किचु से हो पुरन रूप सन नुकाल नहीं सके तची.
- 13:19–13:24मुदा सब समहत्वपुन बातिये ची, जे ओ दियाक बात के सूनेता ची
- 13:24–13:26भाई तशूती रहल चल
- 13:26–13:32इक दम, भाई सूती रहल चल, भहिन सूनेता ची, भहिनक अपन भाएक प्रती अगाद प्रेम,
- 13:32–13:39अगर अनिद्रा, अगर सतर्क्ता, अगर प्रक्रति आ �alokik shakti sa joordbaak chhanta delak.
- 13:39–13:44जवो अपन भाएक चिन्ता चोर सूती जाएत, तकि अई रहस से सूनी पवेद?
- 13:44–13:46आप आवेज्छी कत्था कचरम बिन्दोपर
- 13:46–13:49बहुर होईताची भाई बहाई बहन्गाम पूछे चथिन
- 13:49–13:51बहन सीदे भोजी लगजाई चथिन
- 13:51–13:54आद जिद करे चथिन जो परहे लिक उक्रा सूनाएल जाए.
- 13:54–14:01बिल्क्कुल ये एक ता बहुत गेर बात अची, जे जाग्रुक्ता कब रम्हान्द स्वेम पुर्स्कृत करे तची.
- 14:02–14:05आब आविच्छी कत्ठा कचरम बिन्दो पर.
- 14:05–14:14बोर होए तची बहाई बहन गाम पहुचे चच्ठिन, बहन सीदे भोजी लगजाई चच्ठिन, आद जिद करे चच्ठिन जो पहेलीक उक्रा सूनाल जाए.
- 14:14–14:23आए एते भाटीनी क्दम, उकर अहंकार पन चरम परज, उकर रचल पहली क्यो नहीं भूजी सकत अची.
- 14:23–14:25उकर लागे तची जे उजे आची.
- 14:25–14:31आप उननद के से हो मारवाग द्वम की देटच, जे उपहली नहीं भूजी पाव.
- 14:31–14:36इआँकार अचे जे विनास सपूर मरुष्षक मती ब्रष्ट कर देताची
- 14:36–14:40अख्रा लागे तची जे उम्रित्रु अजीवन क्नियंट्रक भोगे लियाची
- 14:40–14:43मुदा बहन पलट्वार करे च्थिन
- 14:43–14:49उ निरभीक भूक कहे च्छतिन, जो हम उतर दोदेब, ता हम आहाक भक्सी जोगका कर मारब.
- 14:49–14:51इबहुत पैक सहास का च्छल?
- 14:51–14:57आज्यना ही भाटिन पहली कहे च्छतिन, बहन तुरन्त नोध तुक्रा निकाली कर रगदे च्छतिन,
- 14:57–15:01खातक पावा लोग मच्यानी चातेल में नून में सब धामजा
- 15:01–15:02एक दम सती कुट्टर
- 15:02–15:05भाटिन्त एक दम अवाख रहे गल है दी
- 15:05–15:10आश्वर्त तक अनुसार बहिन भाटिनक के मार क आपन भाएक प्रानक रक्षा करे चे थीन
- 15:10–15:13ता आखिर आही सबक अद्ध की आचे
- 15:13–15:19मुदा एकta बात कहो, बहिन जे भाटिनक हत्या के लक की यो सही चला?
- 15:19–15:22मतलब एकta हत्याक बडला दोसर हत्या?
- 15:22–15:24इतन नयाय नहीं बडला भेल?
- 15:24–15:29आआ, इकta अछ्यनत सवबाबिक आ महत्वोपून प्रष्नाची.
- 15:29–15:33आदूनिक कानुन के द्रिष्टिसान इबदला लागी सके तची
- 15:33–15:37मुदा हम्रा लोकनिके, इग कता के नोक कता के नेटिक ता
- 15:37–15:40अब्रम्हन्टी ए न्याएक द्रिष्टी कोन सा देके पडदत
- 15:40–15:43माने लोक कता में न्याय दोसर तरह होई तची
- 15:43–15:48अग, लोग कत्हा में प्राया न्याय बहुत सीथा अप्रतिकात्मक होईता ची,
- 15:48–15:52यी कत्हा न्याय अववापादारीक विज़ाय अची,
- 15:52–15:55भाटिन क्रित, केवल विष्वास गात नहीं चल,
- 15:55–16:00उज़नादी तारेहल चलीं
- 16:00–16:03उआपन गर के शम्शान बनादेने चलीं
- 16:03–16:06अखर एहंकार अदी आत्मविश्वास
- 16:06–16:08अखराई भान नहीं होई दिलक
- 16:08–16:10जि सत्ति दोसर रूपसा
- 16:10–16:13जिना दिया के माद्धिम सा बहरा भी सकेत अची
- 16:13–16:15बहिन दूरा भाटीनक के मारब
- 16:15–16:18उआप बादिन जे जाल आपन पतिक लेल बूने चलिन,
- 16:18–16:20जे नियम उ स्वेम तए केने चलिन,
- 16:20–16:22जे पहली नहीं भूजल पर जान लेलेब,
- 16:22–16:25अथत तफ उही में उ स्वेम फसिगे लिया.
- 16:25–16:28इप रक्रती दूरा केल इज्याया ची,
- 16:28–16:31अंतता हआ अपना रचल जाल में स्वम फ़ष़गता थी
- 16:31–16:35बाटिन जे जाल आपन पतिक लेल बूने चलिन
- 16:35–16:37जे नियम उ स्वम तए केने चलिन
- 16:37–16:40जे पहली नहीं भूजल पर जान लेलेब
- 16:40–16:43अंतता हवही में उ स्वम फ़सी गलिया
- 16:43–16:49इप्रक्रती दूरा किल्गिल न्याया ची, जता एक आहंकारी आपन भार से स्वैम खसी पड़ई तची.
- 16:49–16:58ता हम सब देख्लो, जि कोना एक ता अस्वभाविक प्रेम, विष्वास गात, अप्रतीशोदक योजना अंतता आहंकार कारन विप्षल बजगद ची.
- 16:58–17:03इविस्त्रित चर्चा एक्ता एहन गाता पर समाप्त होगीता आची
- 17:03–17:08जत्टे एक्ता विश्वास गाती पतनीक गातक रहस्य अग्क्रे आहंकार
- 17:08–17:12आए एक्ता बहिन्नक तीख्षन बुद्दिः से पराजित बजाएत आची
- 17:12–17:14आई, यह आम्रा लोक्नी के बुजावे तची,
- 17:14–17:16जे जदेग पएक शद्यन्त्र हूँ,
- 17:16–17:19सत्या कोनो-कोनो रूप में बाहरा अविये जाई तची.
- 17:19–17:23आई, कता आईू आम्रा लोक्नी कलेल अट्यंत प्रासंगी कची.
- 17:23–17:27इज़ाना बहीं कब भाइक प्रती निस्वार्त प्रेम और सतरकता कम महत्वके रिखंकित करे तची
- 17:28–17:31अमरा लोकनी के अप्पन जीवन में से हुए देखबाक चाही
- 17:32–17:34जे हमर अप्पन पनही जारबाक आदत की अची
- 17:35–17:37मने हमर अकोन सतरकता अची
- 17:37–17:41अपन बन अपन पन ही जारबाक आदत की अची
- 17:41–17:44मने हमर अकोन सतरकता अची
- 17:44–17:47जे हमरा अद्दिश्य कबतरा सब बचाशकी तची
- 17:47–17:50अच्दम अच्चोड चोट अदते हमरा बचावए तची
- 17:50–17:51बलकुल
- 17:51–17:54ता अन्त में हम सब एक ता विचारो तेजक प्रष्नपर
- 17:54–18:00बिल्कुल! ता अन्त में हम सब एक ता विचारो तेजक प्रष्न पर इचर्चा चोड़ा इच्छे थ्छे
- 18:00–18:04कथा में दियाक गब करब ता एक ता जादूई तत्वाची
- 18:04–18:07उस्पस रूप सा सव रहसे बता दे तची
- 18:07–18:09मुदा असल जीवन में इदिया की थिख
- 18:09–18:13अपने बाद्टीग दोगा अविश्वास गातक कुनो अख्स्रे नहीं होगे तची
- 18:13–18:17अकर जल कहीन अपने लगा देखा प्रती अगा है तची
- 18:17–18:20जेना हम सब शुर्वात में बात केने चलहो
- 18:20–18:23जे दूखा अविश्वास गातक कुनो अख्स्रे नहीं होगे तची
- 18:23–18:28यह आप दियान से सुनी तकी हम्रा लोकनिक चारु दिसक वातावरन
- 18:28–18:31हम्रा अंदार रहस्सेख प्रती आगाह नहीं करे तची.
- 18:31–18:34जेना हम सब शुर्वात में बात केने चलहो,
- 18:34–18:37जे दूखा अविश्वास गातक कुनो अख्सरे नहीं होगे तची.
- 18:37–18:40उकर जल कहीन अगगन्दा होई तची
- 18:40–18:45मुदा ती उही गन्दा जल मे सो हो किछु आईन लहर उठ़े तची
- 18:45–18:50जेक्रा जा हम सब सतर्क भाँ का देखी ता सत्तिक भान भाँ सकई तची
- 18:50–18:57इक ता एहन प्रष्न जेक्रा पर गंभीरता सी विचार करवा का वश्चकता आची
- 18:57–19:04हम्रा लोक्निक्के आपन आस्पासक उही सुख्ष्म संकेद, उही दिया के सुन्बाक प्रयास करबाक चाही.
- 19:04–19:08दिया बाईजेट अची, बस सूनेवाला कान चाही.
Plain text
आ, प्राया जकन हम सब कोनो अप्राद, मने कोनो गमभीर भीमारी, या जीवनक कोनो जतल समस्याक बात करे ची, ता हम्रा लोकनी के लागत अची, जे सब किचु एक्दम सपष्ष्ट अची. आ, लोक चाहे तची, जिस सब किचु सादा अखर्या मेहो, यह गडम सपच्ट. भिलकल. जेना कोलो ऐकस्रे मशीन में तूटल हद्टी एक दम साप देखा जाईता ची. नहीं. दोक्तर उही उजर लेकादिस इशारा करे चती. अक आख छती जे देखू एते हद्टी तूटल आची. आप. इसोचत में बडान निक लागाता था ची इस हम्रा लोकनी का एक ता जुटा शान्तोना देटा ची जे मने हम सब सब किछ सब श्पष्ट रूप से देखी रहाल ची अनियंद्रन कर सके ची एक दम सही का लो हूँ आप मुदा वास्त्विक ताते एक्रासा बहुत भिन्न होई ताछी जकन हम सब मान्विय मनोविग्यान, दोखा, अविश्वास गातक ग़राई में उत्रे ची तकन, अएक्सरे मशीन काजकर बन कर देटाछी हा, करेन जे कुनो मशीन इन नहीं बतासकता ची जे कुन विक्ती भितर सक्केथे कप्टी बोचुका लाची एक्दम तकन हम सब एक ता एहन परिदिश्श में प्रवेश कराई ची जतै जल एक दम गहिर अग्गंदा आची कुन वस पाष्ट चित्र नहीं भेटाई तची बूजल्यना मात्र किचु लहर उठाई तची, जेकरा बूजभ अत्तिन्त कष्फिन होई तची. आ, उईगहि गहिर अग्गंडला जल में सत्ते नुकायल रहे तची. उते मनो विग्यानक अण्धार कूना सब होई तची, जेकरा सादारन आखी से देखाव असमभववची उते अख्सरे नहीं, बलकी बहुत सूछ बद्रिष्टी चाही. आएक हमर यी विस्त्रिट चर्चा, बिल्ल्कुल एही गहिर अग्गन्दा जलक सर्वत्तम उदाहरन्ट पर केंद्रत अची. विदेह इपत्रिका में प्रकाशित गजेंद्र ताकुर दवारा संपादित भाट भाटन कताक हम सब आए गहन विष्लेषन करव. आप, इप आप आप यह देखान लोग कतान नहीं चे जे बच्चा के सुटेवा के लिल सूना लगजाईत आची. इबहुत गहीर अची इग्दम नहीं इएक ता पूझ विखसित मनोविग्यानिक त्रिलर अची इक ता एहन गाता जते विश्वास खात अपन चरम पर अची रहस्च गहीर अची अब भुद्दिक खेल एहन अची अद्त दरी मतिब्रम प्यदा का देई तची तीक चे आव एक राविस्तार सवमजगी ची इक दाथा वास्तो में हत्प्रभ करे वाला ची लोग कथाक आबरन में इए मने मानव मनक सबसे कलुषित रुपक बाहर लाने तची हाँ इमात्रेक्ता हत्याक्श्ड्यन्त्र कता नहीं आची बलकु नहीं इदिखेबाक दार्शनिक प्रयास आची जि कुना अंदार, रहस्य, आअधार, अंतोता सुयम अपनाले ल्जाल बूने तची हम्रा लोकनिक के इस वोचे पर विवष करे तची जिजगन कोन व्यक्ती अने तिक्ताक चरम प्वूचे चे तो उकर पतनक कारन कोन बाहरी शक्ती नहीं हो इच्छे तक्की हो इच्छे, उकर अपन प्रपंच? आ, बलक्ल, उकर पतनक कारन उकर अपन रचल प्रपंच हे ते ये ची बाप्रे आएकर संगे संग, इग कता इभी दिखावाई तची, जे कोना दनिक जीवनक चोट-चोट आदत, आ पारिवारिग निष्ठा जीवन रक्षक बहुशके जे. कताक आरम होगे तची एक ता अस्वभाविक, आ अद्यन्त अजीबो गरी प्रेम प्रसंगसा. आप भाटेन का प्रसंग एक दम भाटेन जे भाट आथ आत लोग गायक का पतनी आची उक्रा एक तगवूमन साब सक गुप्त प्रेम वो जाए तची हमर मतलब अची एक तगवूमन आप सोची तो जना एक दम साख्षात मिद्तिओ से प्रेम इत सुंते आजीब लागेता ची मुदा इवस्वाबाविक प्रेम मनोवे ग्यानिक द्रुष्टिकोण सा बहुत पैग रुपक चे सादारनता, साब, क्हत्रा विश आदोखाक प्रतीक मानल जाईता ची आआ, लोक साब से दराईता ची अगर अपन पती जोगर वेदानिक अ समाजिक जीवन साथी अची अगरा मात्र एक ता बादा बुजाय लगाई तची आई विरोदा बास देखु बाटेन अपन अही भिष्ट्राए अपन अपन पती अपन पती अपन पती अपन पती अगर अपन पती जोगर वेदानिक असमाजिक जीवन सातिय अखरा मातर एक दाबादा बुजाय लगाई तची. आई विरोदा भास देखु भाटेन अपन औही भिश्शायला प्रेमी साप के निक-निकुत भोजन देच जलिये. अगरा मात्र एक दादा बादा बुजाय तची. आई विरोदा भास देखू, भाटेन आपन औही विश्यला प्रेमी साप के निक-निकुत भोजन देच छलीए. और दूसर देस, आपन पती के बलस्या खलस्या भोजन देच छलीए. अजिक्राम सब बासी खाना कहत ची. बिल्कुल, पती के बासी अ गड्या खाना, अ साप के उत्तम भोजन, इता एक्दम उही परजीवी जका बहुगे, जे अपना आश्रे दाता के भित्रे भितर कुखला कर रहो लोए. अपन एक्दम सईए निलोगी अची, बादेन उही सापके पोषी रहल चली और अपन गरा के आपन पती के मारे रहल चली अआ, करन बादेन खरेदे में दया कोनो स्थान नहीं बचल चल ओकर इख्रुर्ता करन बाद दुबर पातर बहर रहल चल मान्सेक स्थर पर यक्रुर्ता कारन भाद दूबर पातर भाराल चल मान्सेक स्तर पर जक्ञन कोन वक्ती भीतर सब रष्ट बजजाई तची तो उकर भाहरी विवार में उकर असर देखाई तची मोदा, यी मान्सेक आशारीरेक उपेख्षा जक्ञन चरम पर पहुचाई तची तक्हन भाटेन मात्र उपेख्षासन संतुष्ट नहीं रहे च्छती, नहीं? नहीं, उते मीरुके च्छती, उसाप के स्पष्ट आदेज दैच दैच च्छती, जे भाटक प्रान लले, उसाप के आदेज दैच दैच च्छती, जे भाटक दसी का मारी देल जाए. आ एतेसा कता मे आसल गत्या बेत छी, साप भातिनक अदेश पाभी, भातक पनही में चुप्चाप नुका जाए छी. उप्रतिख्षा करे तछी, जे भात, पनही पहिरत, आ उक्रा दसी लेत. मुदा भातक एक ता आदत छल. अद, बाते नक एक ता सादारन आदत छी, पनही पहरे से पूर्व उक्रा जार्बा कादत, जना हम सब दूरा माटी हताभे लेल जुता जारे ची, बात पर नहीं जारे तचे, साप खसेट छे, आ आत्म रक्षा में बात साप को वडखग दे तचे. सोचुता, की इआश्चरे जनक नहीं आजे, जि देनिक जीवनक एक ता चोट सन सादारन आदत, एक ता एते पेग, एते उन्योज चषर्यन्त्र पर भारी पडिगेल? एते जा सबसन द्याना कर सक बात अची, से ई जे मरित्यों के पनेई में नुकाएब, इस संकेत देईत जे खखत्रा प्राया सबस अनपेखषित आन नजिकख ताम पर भेसल रहीत चे आँ, लोग सोचाई तसे खखत्रा बहार सावत? एक दम, हम सब सोचाई ची खखत्रा बहार सावत, कुनो अपरिचित सावत मुता एते खत्रा स्वैम उकर गर में, उकर देनिक उप्लिोक कवस्तू में, उकर सबस शुरक्षित स्थान पर नुकाल चल. आब भाट को उआदत, उकर की अर्थभेल. उ आसल में अग्यानता आस्डलता का विजे, बात नहीं जानत चल, जो उकर पतनी उक्रा मारै चाहेत ची, उ बस आपने एक ता स्वबहाविक अनुशासित कारे करे रहे रहे चल, उकर अनजाने में केल गेल आत्मरक्षा, आसल में उकर निर्दोष्ताक परिनाम चल. अगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उगर उ� अगर लागे ते जे पतनी बहादरी कहसा सूना रहले ची अगर लागे ते जे पतनी बहादरी कहसा सूना रहले ची अगर लागे ते जे पतनी बहादरी कहसा सूना रहले ची अगर लागे ते जे पतनी बहादरी कहसा सूना रहले ची अगर लागे ते जे पतनी बहुत खूछे थी है? आ, अगर लागे ता ची, जे पतनी इस शुन्नी का प्रसन नहेती, जे अखर पती एक ता पैग खत्रा से बजगेल, मुदाओई नहीं जाने ता ची, जे अग जेखर नार के आल आची, उकुन उ सादारन साप नहीं बलके उक्रे पतनिक प्रेमी चल. बप्रे, इत बहुत भ्यानक्स दे दिया जे. उ अग आन जाने में आपन पतनिक सबसम पएग मान्सिक अगाध दराल अची. सोग होई चे, तो कान्दैत चे, विलाप कर अचे. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� अगर, गरक, विबिन्न ठाम पर नुका देच्छती चारी तुक्ड़ा खातक पावालग एक ता मच्यानीचा एक ता तेल में एक ता नून में एक ता दार में माने अनाज भंदार में आ एक ता खोपा में आ, इख उनो सदारन बात नहीं आचे मुदा एक्ता बात कहो, जब कोनो व्यक्ती सोक मे रहेत अचे, तो तुरन्त प्रतिक्रिया दईतची, या भाबुक भजाई तची, मुदा एते इस्स्रीत एगं त्धन्डा दिमाग से, एक ता प्रानगा तक पहली रची देलक, इस सोक एक तक कोल्ड बलडेड पजल में कोन अगर शोग उक्रा कमजोर नहीं बनोलक बलकी उक्रा आर्क्रूर बनादे लक मुत्ता सबसम विचारनी आब आत यी आची जे ओ नोग तोक्रा कते नुकावेच्छती तेल में नुन में, खातक पावालग, दार में इसक ची आची अगर बीचारनी ये बात यी अची जी ओँ नो तोकरा कते नु कावे च्छती तेल में, नून में, खातक पावालग, डार में इसक ची अची. इसब तक ग्रियस्तिक चीज अची? अची. इसब ग्रियस्तिक मुल आदार अची. अग, इक दम तेल अनून बिनातक कोनो भानस नहीं बहासके तची. बलकल, उसाप के म्रित शरीर के माद्यम सब, उही वैवाही का परवारिक जीवनक आदार के प्रदूषिट करहल चली ए. खाटक पावा लग मतलप सैं कक्ष में, तेल नून मतलप रसोई में, दार मतलब अन्नबहन्दार में मैंने उआपन जीवनक हर कोना में प्रतिषोद के गूसा देल की आआआ, उआपन प्रतिषोद के आपन दैनिक जीवनक हर हिस्सा में प्रवेश करा देल की उआपन भावुकता के एक ता गातक प्रहे लिका में परिवर्तित कर देल की बाद्ट किट बुजले नी आची जोई की भूर आजी की प्रहली का आची की तुक्डा आची उक्रा लेल ये एक ता म्रित्यो दन्डक छद्मने आएक रक्रिया आची जते नयाय दिश अजल्लाद दोनो अगर पतनी आची अदिश अजलाद दोनो अकर पतनी आची अद यक दम असहाई भोगेल अपन प्रिथ्ट्यो सुनिष्ट देखे का दूई दिनक महिलत मागे तची ताकि अ मरी सब पहले अपन भहीन सब भेट कर सके आईतेई सब परिवारिक निष्था आएक्ता नुमहिला पात्रक प्रवेश होईता ची, जे भादीनक एक्दम भिप्रीत आची. बातक भहीन अपन भाएक अर्दा जोड़े चती. अर्दा जोड़़ब माने भागी या आयु जोड़़ नहीं? आँ उत्रन्त बाइक संगे चलबाक निने करे तची इणिने बहातक जीवन रक्षाक प्रथम सोपान आची. अख्रा आजाक संकत के पुर्वाभास भोजाईत अची कोनो जोतिष्ये या पारमपरिक विद्या से बहीन के बहान भोजाईत अची जे भाई पर संकत अची आओ उत्रन्त मदद लेल तयार भेजाई चती एक दम उत्रन्त भाएक संगे चलबाक निने करे तची इणिरने भाटक जीवन रक्षाक प्रथम सोपान आची दोनु भाई भहीन रस्ता में एक टरम्शाला मेरुगए चती रातेक समय आची भाईत �the कावद आने राशा से सुत रहल आची उम वानी चुकल आची जे उकर म्रुद्यो निष्चत आची मुदद भहिन के निद नहींद आबे च्छे? आप! भहिन के निद नहींद आवी रहा लगची उकर चिन्ता उकर जागरित रखले आची आप टक्चन कठा मे एक जादुई तत्वका प्रवेश होई तची दरमशालाक दिया सब आपस में गब करे लगे तची इब भफत रहेस से मैं बागा ची उसब भाटनक समपुन श़यंत्र आउही नोग तुक्डा कस्थान उजागर कर दे तची हम्राता एदिया सब कगब करब एक्दम जेना अइकाली खुफ्या केम्रा होई तची जे बन्द कोट्रिक सत्यके बहार लानाई तची उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई� आई ते दिया के वल एक ता प्रकाशक स्रोत नहीं चे, इब्रम्हन्दिय सत्य आन्याई प्रतिक चे. इब दावे तची, जे प्रक्रति में किचु से हो पुरन रूप सन नुकाल नहीं सके तची. मुदा सब समहत्वपुन बातिये ची, जे ओ दियाक बात के सूनेता ची भाई तशूती रहल चल इक दम, भाई सूती रहल चल, भहिन सूनेता ची, भहिनक अपन भाएक प्रती अगाद प्रेम, अगर अनिद्रा, अगर सतर्क्ता, अगर प्रक्रति आ �alokik shakti sa joordbaak chhanta delak. जवो अपन भाएक चिन्ता चोर सूती जाएत, तकि अई रहस से सूनी पवेद? आप आवेज्छी कत्था कचरम बिन्दोपर बहुर होईताची भाई बहाई बहन्गाम पूछे चथिन बहन सीदे भोजी लगजाई चथिन आद जिद करे चथिन जो परहे लिक उक्रा सूनाएल जाए. बिल्क्कुल ये एक ता बहुत गेर बात अची, जे जाग्रुक्ता कब रम्हान्द स्वेम पुर्स्कृत करे तची. आब आविच्छी कत्ठा कचरम बिन्दो पर. बोर होए तची बहाई बहन गाम पहुचे चच्ठिन, बहन सीदे भोजी लगजाई चच्ठिन, आद जिद करे चच्ठिन जो पहेलीक उक्रा सूनाल जाए. आए एते भाटीनी क्दम, उकर अहंकार पन चरम परज, उकर रचल पहली क्यो नहीं भूजी सकत अची. उकर लागे तची जे उजे आची. आप उननद के से हो मारवाग द्वम की देटच, जे उपहली नहीं भूजी पाव. इआँकार अचे जे विनास सपूर मरुष्षक मती ब्रष्ट कर देताची अख्रा लागे तची जे उम्रित्रु अजीवन क्नियंट्रक भोगे लियाची मुदा बहन पलट्वार करे च्थिन उ निरभीक भूक कहे च्छतिन, जो हम उतर दोदेब, ता हम आहाक भक्सी जोगका कर मारब. इबहुत पैक सहास का च्छल? आज्यना ही भाटिन पहली कहे च्छतिन, बहन तुरन्त नोध तुक्रा निकाली कर रगदे च्छतिन, खातक पावा लोग मच्यानी चातेल में नून में सब धामजा एक दम सती कुट्टर भाटिन्त एक दम अवाख रहे गल है दी आश्वर्त तक अनुसार बहिन भाटिनक के मार क आपन भाएक प्रानक रक्षा करे चे थीन ता आखिर आही सबक अद्ध की आचे मुदा एकta बात कहो, बहिन जे भाटिनक हत्या के लक की यो सही चला? मतलब एकta हत्याक बडला दोसर हत्या? इतन नयाय नहीं बडला भेल? आआ, इकta अछ्यनत सवबाबिक आ महत्वोपून प्रष्नाची. आदूनिक कानुन के द्रिष्टिसान इबदला लागी सके तची मुदा हम्रा लोकनिके, इग कता के नोक कता के नेटिक ता अब्रम्हन्टी ए न्याएक द्रिष्टी कोन सा देके पडदत माने लोक कता में न्याय दोसर तरह होई तची अग, लोग कत्हा में प्राया न्याय बहुत सीथा अप्रतिकात्मक होईता ची, यी कत्हा न्याय अववापादारीक विज़ाय अची, भाटिन क्रित, केवल विष्वास गात नहीं चल, उज़नादी तारेहल चलीं उआपन गर के शम्शान बनादेने चलीं अखर एहंकार अदी आत्मविश्वास अखराई भान नहीं होई दिलक जि सत्ति दोसर रूपसा जिना दिया के माद्धिम सा बहरा भी सकेत अची बहिन दूरा भाटीनक के मारब उआप बादिन जे जाल आपन पतिक लेल बूने चलिन, जे नियम उ स्वेम तए केने चलिन, जे पहली नहीं भूजल पर जान लेलेब, अथत तफ उही में उ स्वेम फसिगे लिया. इप रक्रती दूरा केल इज्याया ची, अंतता हआ अपना रचल जाल में स्वम फ़ष़गता थी बाटिन जे जाल आपन पतिक लेल बूने चलिन जे नियम उ स्वम तए केने चलिन जे पहली नहीं भूजल पर जान लेलेब अंतता हवही में उ स्वम फ़सी गलिया इप्रक्रती दूरा किल्गिल न्याया ची, जता एक आहंकारी आपन भार से स्वैम खसी पड़ई तची. ता हम सब देख्लो, जि कोना एक ता अस्वभाविक प्रेम, विष्वास गात, अप्रतीशोदक योजना अंतता आहंकार कारन विप्षल बजगद ची. इविस्त्रित चर्चा एक्ता एहन गाता पर समाप्त होगीता आची जत्टे एक्ता विश्वास गाती पतनीक गातक रहस्य अग्क्रे आहंकार आए एक्ता बहिन्नक तीख्षन बुद्दिः से पराजित बजाएत आची आई, यह आम्रा लोक्नी के बुजावे तची, जे जदेग पएक शद्यन्त्र हूँ, सत्या कोनो-कोनो रूप में बाहरा अविये जाई तची. आई, कता आईू आम्रा लोक्नी कलेल अट्यंत प्रासंगी कची. इज़ाना बहीं कब भाइक प्रती निस्वार्त प्रेम और सतरकता कम महत्वके रिखंकित करे तची अमरा लोकनी के अप्पन जीवन में से हुए देखबाक चाही जे हमर अप्पन पनही जारबाक आदत की अची मने हमर अकोन सतरकता अची अपन बन अपन पन ही जारबाक आदत की अची मने हमर अकोन सतरकता अची जे हमरा अद्दिश्य कबतरा सब बचाशकी तची अच्दम अच्चोड चोट अदते हमरा बचावए तची बलकुल ता अन्त में हम सब एक ता विचारो तेजक प्रष्नपर बिल्कुल! ता अन्त में हम सब एक ता विचारो तेजक प्रष्न पर इचर्चा चोड़ा इच्छे थ्छे कथा में दियाक गब करब ता एक ता जादूई तत्वाची उस्पस रूप सा सव रहसे बता दे तची मुदा असल जीवन में इदिया की थिख अपने बाद्टीग दोगा अविश्वास गातक कुनो अख्स्रे नहीं होगे तची अकर जल कहीन अपने लगा देखा प्रती अगा है तची जेना हम सब शुर्वात में बात केने चलहो जे दूखा अविश्वास गातक कुनो अख्स्रे नहीं होगे तची यह आप दियान से सुनी तकी हम्रा लोकनिक चारु दिसक वातावरन हम्रा अंदार रहस्सेख प्रती आगाह नहीं करे तची. जेना हम सब शुर्वात में बात केने चलहो, जे दूखा अविश्वास गातक कुनो अख्सरे नहीं होगे तची. उकर जल कहीन अगगन्दा होई तची मुदा ती उही गन्दा जल मे सो हो किछु आईन लहर उठ़े तची जेक्रा जा हम सब सतर्क भाँ का देखी ता सत्तिक भान भाँ सकई तची इक ता एहन प्रष्न जेक्रा पर गंभीरता सी विचार करवा का वश्चकता आची हम्रा लोक्निक्के आपन आस्पासक उही सुख्ष्म संकेद, उही दिया के सुन्बाक प्रयास करबाक चाही. दिया बाईजेट अची, बस सूनेवाला कान चाही.