MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
Bhram_Me_Satya_Ke_Khoj.mp4
Timestamped machine output
- 0:00–0:04नमशकार, आएक एविष्लेषन में हमा सब एक ता आहान विष्ढेए पर चर्चा करब,
- 0:04–0:07जे वैसी था चोदहवी शताबदी के चिक,
- 0:07–0:12मुद्दा आएक दिजिटल युग में शावित सबसा भेशी प्रसाँगिक चाई,
- 0:12–0:14नव्व्या न्याया शास्थ्र,
- 0:14–0:18ये एक ता आहान पुरान और जबर्दस्त बोद्धिक उपकरन चाई
- 0:18–0:22जे आलोचनात्मक छिंटन अर्ठात क्रितिकल ठिंकिंके लेल
- 0:22–0:24आयो बिलकुल आदोनिक लगाए ची.
- 0:24–0:29कुब दियान से सूनु कि आकी एच्छिंटन दुन्या के देख्वाक नजर्या बदल सके चे.
- 0:44–0:46सच्चाया के कोना चिनहल जासके जी?
- 0:46–0:49इप्रस्तुती तही मुल प्रष्ना के उत्र कोजे चे
- 0:49–0:53और सिखावे चे कि इब्रम के जाल के कोना काटल जासके चे.
- 0:53–0:57और सबसा दिल्चस्प बात इच है कि इखनो नवा विचार नाइ च्यक
- 0:57–1:03इसीदा मित्ला के चादावी सतेबदी के एक्टा क्रान्तिकारी ग्रन्त सा आएज है,
- 1:03–1:08तत्व चिन्ता मनी, जिकर रच्ना महा महाँ पाद्ध्याय, गंगेशा उपाद्ध्याय केने चला.
- 1:08–1:13इग्रन्त भार्तिया दर्षन के दिशा और विष्लेशन के पुण्ना रोप सा बदल के रक्दिलक,
- 1:13–1:17इज समजू कि प्राषीन तर्क शास्तर के एक ता नवा अकार बहिंट के लक.
- 1:17–1:21तीच है आओ एक राजद्दध क्रमबद रोप सा भूजी लेएओ,
- 1:21–1:35कि हम सब की की चार्चा करब, पहल सत्यके संकत, दो सर ज्यान की चार्स्तम्ब, तेसर अनुमान की तरक, चोथम सत्यके परीख्षन, और अन्त में मुक्ती के मार्ग. चलू, शूरू करे ची.
- 1:35–1:41ता पहल बाग, सक्तिके संकत, आखिर भ्रम और रडी च्या के?
- 1:41–1:45कभी गवर केने च्ये, मनुश्ष्य सा गल्ती आखिर कुन ना हो आचे?
- 1:45–1:50मान लिया के उएक ता सीप के चमकाय देख के चान्दी समज बैटल.
- 1:50–1:53ता प्राभाकर मीमान्सा दर्षन कहे च्ये,
- 1:53–1:57की लोग, सीप, और चान्दी के बीच के फरक नाई समच पावेलक.
- 1:57–1:59बस यही लिया गल्ती बहिल.
- 1:59–2:02मुद्दन याए दर्षन एक्रा दोसर दंग सदेखे चे.
- 2:02–2:05उकर मुताबेग, यी सर्फ अग्यान्ता नाई चिएक,
- 2:05–2:09मनुश्य सक्री अरुप्से चान्दी के गुनके सीपर आरोपित करेच्छी
- 2:09–2:12एक रा अन्यत्ठा ख्याती कहल जाएचे
- 2:12–2:16याने हम सब आपन माँईड में एक ता चीस पर दोसर चीस थोब देच्छी
- 2:16–2:20इगल्ती हम सब आपन दैनिद जीवन में लगतार करेच्छी
- 2:20–2:25आब अगो बड़ाए ची दोसर भाग्दिस, ग्यान के चार स्टम्ब.
- 2:25–2:31ग्यान प्राप्ती के प्रमुख चार स्टम्ब चै, प्रत्यक्ष, अनुमाना, उपमाना, और शबद.
- 2:31–2:36इचार स्टम्ब एक कि सत्ठे मिलके न्याय बोधिक प्रनाली के मुल आदार बनावे चै.
- 2:36–2:40कोनो भी बाज सच्च्च्य या नहीं उ एक रे आदार पर कसल जाए चे.
- 2:40–2:46अरी चर्चा बदनीख जकन शार्वागा और न्याए दर्षन के भीज्ग के फरक के दिखाए वेचे.
- 2:46–3:16चार्वा का विचार माने च्याए की स्र्व प्रत्यक्ष अद्ध जो आख सदिखल गिल च्ये, सेहे सच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च
- 3:16–3:21बाबु तेसर बहाग पर चर्चा करे ची जेज है अनुमान के तर्क
- 3:21–3:24हम सब आपन देनेग जीवन में लोगिकली चीस के कोना फिगर अगट कर आई चे
- 3:25–3:29दिको न्याय के ये पाज अव्यव अगटात फाइस्टेप तार्टेक विदी चेए
- 3:29–3:59पहल, प्रतिजना, एक ता क्लेम, जैसे पहार्डपर आगी चै, दोसर, हे तु, कारन, क्या की, धूआचाई, तेसर, व्याप्ती, यूनिवर्सल रूल, जगा धूआचाई, वहा आगी होभे करत, चोथम, उपन्या, अप्लिकेषन, इपाहार्डपर धूआचाई, और पन्�
- 3:59–4:09तख हों जब उपादि आवे चे इउपादि की चेक इएक टा आपन अतरेक टिशर्ट या चिपल कारन चे जे पूरा तर्क के बिगार सकेचे
- 4:09–4:15जैसे हम सब कही चीए की आगीस दूवा होईज, मुद्दा सरफ आगीस दूवा न नहीं होईचे,
- 4:15–4:18तः में भीजल लक्डी के होनाई जरूरी चे.
- 4:18–4:20इबजल लक्डी एक ता उपादी चे.
- 4:20–4:23हीटन वेरेबल्स के समजनाई बाद महत्वपूंचे,
- 4:23–4:25अब आब ची चोथथबहाग पर
- 4:25–4:26सक्त्या के परिक्षन
- 4:26–4:28आखिर सच्के व्यवाहारिक रूप्सा
- 4:28–4:30तेस्ट कुन्ना केल जाए
- 4:30–4:32ता मुख्या बात इच आएच
- 4:32–5:02ता मुख्या बात इच आईच कि कोनो ग्यान सच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च
- 5:02–5:08अई के दिजितल युग में ज़ाह सोचल मीट्या पर फेख नुज अर दीप फेख श्भरल चाए,
- 5:08–5:11वहाई एप रगमाटेक अप्रूच बडधें कामावेच चे.
- 5:11–5:15कोनो बाद विष्वस निये चे यह नहीं तकर तींट खषोटी चे.
- 5:15–5:20सही गयान, सत्तिनिष्था, और निष्पक्ष्ष्था, अगर तात, कोनो स्वार्त नहीं.
- 5:20–5:25सर्फ कोनो पोस्ट वाडल भोगेल चाए, तकर मतलब एई नहीं कि उस सत्तिचे.
- 5:25–5:29कोनो भी सुचना पर विष्वास करक सबहले इप तीनो चेक लगानाई बरज़रूरी चे.
- 5:29–5:33अर अंत में पन्चम भाग, मुक्ती के मार्ग.
- 5:33–5:38इपुरा तरक शास्त्र, इए पिस्टमोलगी के अकहिर अल्टिम्ट गोल की चेख.
- 5:38–5:43गोल चाए मनुश्ष्यके दुख के चक्रसा बाहर निकालनाई.
- 5:43–5:45इचक्र किछ तरा गूमइत चाए.
- 5:45–6:15अब उई देखो इद तुलनबर दिल्च्छब चाए, बोध दर्शन और न्याई दर्शन दूक दूर करवाद, अब उग़ा दर्शन तुलनबर दिल्च्छब चाए, बोध दर्शन और न्याई दर्शन दूक दूर करवाद, अब उग़ा दर्शन तुलनबर दूक पर दू
- 6:15–6:17अगर उगर नियन्द्रन्पर जोर देच्छे,
- 6:17–6:19क्रेविंग क्धम करू,
- 6:19–6:21मुदन्याय दर्षन की कहेच्छे,
- 6:21–6:23उखर उगर बगाण्डाया मिठ्जाग्यान चे,
- 6:23–6:25उखर जडीस सवुखेर दियक परत,
- 6:25–6:28अग्यान्ता खटम ता इच्छा अर्दुक अपने आप खटम होजाइत
- 6:28–6:31ये एक तब बरड दीप मनोग एग्यानेक अच्छाए
- 6:31–6:34ता आए के यी चर्चा हमसव एक ता गाहन और सूचनिया प्रश्नपर कच्टम करब
- 6:34–6:38अग्यान्ता कथम ता इच्छा और दूक अपने आप कथम होजाएत,
- 6:38–6:41इएक तब बर दीप मनोग आग्यानेक अईच्छेए.
- 6:41–6:47ता आए की इच्चर्चा हमसव एक ता गाहन और सुचनिया प्रश्नपर कथम करब,
- 6:47–6:51की हमरा सब के दायनिक निरनै सच पर आदारित च्याय,
- 7:04–7:06अदबद दश्ण्यवाद
Plain text
नमशकार, आएक एविष्लेषन में हमा सब एक ता आहान विष्ढेए पर चर्चा करब, जे वैसी था चोदहवी शताबदी के चिक, मुद्दा आएक दिजिटल युग में शावित सबसा भेशी प्रसाँगिक चाई, नव्व्या न्याया शास्थ्र, ये एक ता आहान पुरान और जबर्दस्त बोद्धिक उपकरन चाई जे आलोचनात्मक छिंटन अर्ठात क्रितिकल ठिंकिंके लेल आयो बिलकुल आदोनिक लगाए ची. कुब दियान से सूनु कि आकी एच्छिंटन दुन्या के देख्वाक नजर्या बदल सके चे. सच्चाया के कोना चिनहल जासके जी? इप्रस्तुती तही मुल प्रष्ना के उत्र कोजे चे और सिखावे चे कि इब्रम के जाल के कोना काटल जासके चे. और सबसा दिल्चस्प बात इच है कि इखनो नवा विचार नाइ च्यक इसीदा मित्ला के चादावी सतेबदी के एक्टा क्रान्तिकारी ग्रन्त सा आएज है, तत्व चिन्ता मनी, जिकर रच्ना महा महाँ पाद्ध्याय, गंगेशा उपाद्ध्याय केने चला. इग्रन्त भार्तिया दर्षन के दिशा और विष्लेशन के पुण्ना रोप सा बदल के रक्दिलक, इज समजू कि प्राषीन तर्क शास्तर के एक ता नवा अकार बहिंट के लक. तीच है आओ एक राजद्दध क्रमबद रोप सा भूजी लेएओ, कि हम सब की की चार्चा करब, पहल सत्यके संकत, दो सर ज्यान की चार्स्तम्ब, तेसर अनुमान की तरक, चोथम सत्यके परीख्षन, और अन्त में मुक्ती के मार्ग. चलू, शूरू करे ची. ता पहल बाग, सक्तिके संकत, आखिर भ्रम और रडी च्या के? कभी गवर केने च्ये, मनुश्ष्य सा गल्ती आखिर कुन ना हो आचे? मान लिया के उएक ता सीप के चमकाय देख के चान्दी समज बैटल. ता प्राभाकर मीमान्सा दर्षन कहे च्ये, की लोग, सीप, और चान्दी के बीच के फरक नाई समच पावेलक. बस यही लिया गल्ती बहिल. मुद्दन याए दर्षन एक्रा दोसर दंग सदेखे चे. उकर मुताबेग, यी सर्फ अग्यान्ता नाई चिएक, मनुश्य सक्री अरुप्से चान्दी के गुनके सीपर आरोपित करेच्छी एक रा अन्यत्ठा ख्याती कहल जाएचे याने हम सब आपन माँईड में एक ता चीस पर दोसर चीस थोब देच्छी इगल्ती हम सब आपन दैनिद जीवन में लगतार करेच्छी आब अगो बड़ाए ची दोसर भाग्दिस, ग्यान के चार स्टम्ब. ग्यान प्राप्ती के प्रमुख चार स्टम्ब चै, प्रत्यक्ष, अनुमाना, उपमाना, और शबद. इचार स्टम्ब एक कि सत्ठे मिलके न्याय बोधिक प्रनाली के मुल आदार बनावे चै. कोनो भी बाज सच्च्च्य या नहीं उ एक रे आदार पर कसल जाए चे. अरी चर्चा बदनीख जकन शार्वागा और न्याए दर्षन के भीज्ग के फरक के दिखाए वेचे. चार्वा का विचार माने च्याए की स्र्व प्रत्यक्ष अद्ध जो आख सदिखल गिल च्ये, सेहे सच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च बाबु तेसर बहाग पर चर्चा करे ची जेज है अनुमान के तर्क हम सब आपन देनेग जीवन में लोगिकली चीस के कोना फिगर अगट कर आई चे दिको न्याय के ये पाज अव्यव अगटात फाइस्टेप तार्टेक विदी चेए पहल, प्रतिजना, एक ता क्लेम, जैसे पहार्डपर आगी चै, दोसर, हे तु, कारन, क्या की, धूआचाई, तेसर, व्याप्ती, यूनिवर्सल रूल, जगा धूआचाई, वहा आगी होभे करत, चोथम, उपन्या, अप्लिकेषन, इपाहार्डपर धूआचाई, और पन्� तख हों जब उपादि आवे चे इउपादि की चेक इएक टा आपन अतरेक टिशर्ट या चिपल कारन चे जे पूरा तर्क के बिगार सकेचे जैसे हम सब कही चीए की आगीस दूवा होईज, मुद्दा सरफ आगीस दूवा न नहीं होईचे, तः में भीजल लक्डी के होनाई जरूरी चे. इबजल लक्डी एक ता उपादी चे. हीटन वेरेबल्स के समजनाई बाद महत्वपूंचे, अब आब ची चोथथबहाग पर सक्त्या के परिक्षन आखिर सच्के व्यवाहारिक रूप्सा तेस्ट कुन्ना केल जाए ता मुख्या बात इच आएच ता मुख्या बात इच आईच कि कोनो ग्यान सच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च अई के दिजितल युग में ज़ाह सोचल मीट्या पर फेख नुज अर दीप फेख श्भरल चाए, वहाई एप रगमाटेक अप्रूच बडधें कामावेच चे. कोनो बाद विष्वस निये चे यह नहीं तकर तींट खषोटी चे. सही गयान, सत्तिनिष्था, और निष्पक्ष्ष्था, अगर तात, कोनो स्वार्त नहीं. सर्फ कोनो पोस्ट वाडल भोगेल चाए, तकर मतलब एई नहीं कि उस सत्तिचे. कोनो भी सुचना पर विष्वास करक सबहले इप तीनो चेक लगानाई बरज़रूरी चे. अर अंत में पन्चम भाग, मुक्ती के मार्ग. इपुरा तरक शास्त्र, इए पिस्टमोलगी के अकहिर अल्टिम्ट गोल की चेख. गोल चाए मनुश्ष्यके दुख के चक्रसा बाहर निकालनाई. इचक्र किछ तरा गूमइत चाए. अब उई देखो इद तुलनबर दिल्च्छब चाए, बोध दर्शन और न्याई दर्शन दूक दूर करवाद, अब उग़ा दर्शन तुलनबर दिल्च्छब चाए, बोध दर्शन और न्याई दर्शन दूक दूर करवाद, अब उग़ा दर्शन तुलनबर दूक पर दू अगर उगर नियन्द्रन्पर जोर देच्छे, क्रेविंग क्धम करू, मुदन्याय दर्षन की कहेच्छे, उखर उगर बगाण्डाया मिठ्जाग्यान चे, उखर जडीस सवुखेर दियक परत, अग्यान्ता खटम ता इच्छा अर्दुक अपने आप खटम होजाइत ये एक तब बरड दीप मनोग एग्यानेक अच्छाए ता आए के यी चर्चा हमसव एक ता गाहन और सूचनिया प्रश्नपर कच्टम करब अग्यान्ता कथम ता इच्छा और दूक अपने आप कथम होजाएत, इएक तब बर दीप मनोग आग्यानेक अईच्छेए. ता आए की इच्चर्चा हमसव एक ता गाहन और सुचनिया प्रश्नपर कथम करब, की हमरा सब के दायनिक निरनै सच पर आदारित च्याय, अदबद दश्ण्यवाद