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आत्मतत्त्वविवेक__घरवापसी.mp4
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- 0:00–0:02यह व्याख्यात्मक प्रस्तूती में स्वागत अछि।
- 0:02–0:07आई हम सब भाषावि ज्यान अदर्षनक एक ता एहन अटिहासिग गटना पर चर्चा करब,
- 0:07–0:11जि वास्तव में एक ता साँस्क्रतिक पूनर जाग्रनक शंखनाद अछि।
- 0:11–0:14इक ता उदार हम सताब दिक एक ता महान गरन्तक,
- 0:14–0:16जी हाजार वर्ष दरी,
- 0:16–0:18एक ता विषिष्ट भाश्चा में बन्द रहला दरी,
- 0:18–0:20अंतता अपन जडी दिस गुरे रहला चे.
- 0:20–0:23इक नो सादारन अनुवादक के गप नहीं चेक,
- 0:23–0:27बल की ये एक ता समपोड़िक परमपराक पनर जनम थेक
- 0:27–0:32ता एतन जे सवसने रोचक बात अची उछी ईपोठी स्वयमेव
- 0:32–0:38गजेंद्र थाकुल जी दोरा अनवादित आ विदेज समप्रकाषित आत्मत अप विवेख क त
- 0:38–0:40तो हाँजार छब विस का परीवरदित संसकरन
- 0:40–0:42उदेना चार्ये कर इमुल दार्षने गरन्त,
- 0:42–0:44हदार वर्स पूर व्रचल गेल चल,
- 0:44–0:47आएकर संस्क्रित इत्टिक गुल आ अबेदे च्यक,
- 0:47–0:51जि पैग पैग विद्वान एक्रा भुज्बा में हदबडा जाई चला.
- 0:51–0:53इग्रन्त न्यावैशिषिक दर्षनक,
- 0:53–0:57इक ता एहन कथिन हीमालै तेक, जख्रा पार करव सब के वश्वे नेच्छल.
- 0:57–1:01तो एहन जतिल गरन्तख उत्क्रिष्ट मैत्छिली अनुवाद प्रस्थूत करव,
- 1:01–1:07वास्ता में विलुप्त बहरहल बवद्धिद ध्रोहर के वापस अनबा एक ता एतिहासिक प्रयास तेक.
- 1:23–1:26बाशा के नव जीवन देताची इसब क्रमानुसार समज़व।
- 1:27–1:29तव आरंभ केल जाए पहल्क्हन्द्सा
- 1:29–1:31एक ता सांस्क्रतिग गर वापसी
- 1:32–1:35एक गरन्त्तक अपन्यात्रा कोनो महाकाविसक कम नहीं चाएक
- 1:36–1:37इहन लागे तची
- 1:37–1:41जका कोन विस्म्रित नायक, हसार वर्सक लंबा वन्वासक बाद
- 1:41–1:45पुर्न गोरव अग्यानाक संग आपन गर गुरी रहाल हों.
- 1:45–1:48इविशाल कालक्रम सुएमेव अद्बुदची
- 1:48–1:56इगार हम शताबदी में, जगन उदेनाचार या मितलाक दरती पर इमुल गरन्त रचले नी, तक हन इग्यान के एक ता महान केंद्र चल.
- 1:56–2:04मुदा समय के संग भेल इई जे इग्रन्त संसक्रितक प्राचीर में बंद बोगल, आसादारन लोकक पहुज से बाडर भोगेल.
- 2:04–2:12एक हाँजार वर्ष्चक नीरवता के बाद, दोहाँचार में एकर पहल मैठली संसकरन आयल, जे एह मौन के तोडबाक पहल प्रियाश्चल.
- 2:12–2:22आप 2016 में एकर परिवर्दित आप प्रमाडिक संस्करन रहाँ सब के सुन्जा आची, जे एह सहस्राब दी लंभा यात्रा के एक ता नवगन्त रदार होल आची.
- 2:23–2:26संस्करित आम मैत्लिक भीच की सम्मन्द बहुत मार्मे कचे.
- 2:26–2:34अदिहासिक रूप सा देखल जाये तस संस्क्रित एक गरन्तक लेल एक ता रक्षक मुद अभेद्द्य पित्र भाशाजक काम किलक.
- 2:34–2:41संस्क्रित विद्वान सबख का उ दूर्ग फिक जाहिमक कथोर व्याकरन अदार्षनक परमपरा कप पहरा चै.
- 2:41–2:48एक रव विप्रीत मैठली मितलाक माटी ठिक जे ए छित्र कर वास्त्विक मात्र बाशा चे
- 2:48–2:53इ उ बाशा छिक जाहिमक कविताक प्रवाह करूना आस्तानिय द्रोहर बसल अचे
- 2:53–3:00तई अनवाद उही गुड ज्यान के संसक्रित का कत्होर प्राचीर सनिकाल के मैठली कोक में
- 3:00–3:03उकर वास्त्विक गरे मा पुनर स्तापित करईत अची
- 3:03–3:06मूल ग्रन्तक अटिहासिक यात्राक बाद
- 3:06–3:09आब एकर मुक्छ्विषे दिश बड़ाल जाए
- 3:09–3:10दार्षनिक संगर्ष
- 3:10–3:13इपोत्फी भार्तिये दार्षनिक परमपराक
- 3:13–3:15विषेश कर न्याए वैशेषिक
- 3:15–3:20आ बोद्द मतक भीच भेल एक ता बयंकर संगर्षक का सक्षी अची.
- 3:20–3:23इस संगर्ष कोनो चोट मोट गप नहीं चल.
- 3:23–3:30उदेना चारिक इख्चन्दन मुख्यरुप से बोद्द दर्षनक चारी ता अदारस्तमप पर प्रहार करे तची.
- 3:30–3:35उदाहरन के लेल खषनिक वाद के सिद्धान्त पर विचार केल जाए,
- 3:35–3:41बहुत दर्षन के अनुसार संसार के सब वस्तुमात्र एक खषनक लेल अस्तित्वो मेरहेता,
- 3:41–3:45उदाहरन के लेल खषनिक वाद के सिद्धान्त पर विचार केल जाए,
- 3:45–3:51बहुत दरशन के अनुसार संसार के सब वस्तुमात्र एक खषनक लेल अस्तित्वो मेरहेत अची,
- 3:51–3:56अदो सरखषन नश्त भोजाए तची, उदाहरन एहेपर बहुत तीखषन प्रहार के चाछी,
- 3:56–4:00सनسार के सब वस्तु मात्र एक ख्षनक लेल अस्तिट्वमे रहेता ची
- 4:00–4:02अदो सर्ख्षन नष्ट बहजाईता ची
- 4:02–4:06उदेन एहेपर बहुत टीखषन प्रहार करे च्छत्छी
- 4:06–4:08उनक्तर का ची जै
- 4:08–4:10जै सब किछ ख्षनिक अची
- 4:10–4:13तद्मनुश्ष्व्ष्म्र्ति आप पहचान केनो समबवाच्ई
- 4:13–4:15जै काली जे व्यक्ति कोनो वस्थू देख्लक
- 4:15–4:18उ व्यक्ति आई अस्तित्व में है ये नाए
- 4:18–4:20तफिर स्मरन के करे रहा लगछी
- 4:20–4:22इद उभाद जका भेल
- 4:22–4:23जे रिन कोनो आन व्यक्ति लेलक
- 4:23–4:26अग्राभे लेल कोनो आन व्यक्ती बाद्धिब हर है लची
- 4:26–4:28इटर्क श्पष्ट करे तची
- 4:28–4:30जे आत्मा वाचे तनाक
- 4:30–4:32निरन्तरता आवश्षक अचे
- 4:32–4:35एक ता आन अद्यंत रोचक विषे अचे
- 4:35–4:36अपोज
- 4:36–4:37बोध दर्षन के अनुसार
- 4:37–4:38कोनो शब्दिक अर्ठ
- 4:38–4:41उकर विप्रीत वस्तूके नकार लासे बनेत छे
- 4:41–4:44उदाहरनार्त गाएक आर्थ अची
- 4:44–4:47जे गाए नहीं आचे उकर चोडका
- 4:47–4:50मुदा उदेन एक राएक दम अव्यवाहारिक माने च्छतीन
- 4:50–4:53जखन क्यो कही तची जे जल के लेल ग़ेला आनु
- 4:53–4:57तकन लोकक मन में एक ता सकारात्मक चित्र अवएत छी.
- 4:57–5:01एक कतेक हास्यस्पत लागत, जांक्यो गहला अनबाक लेल यी सुचे,
- 5:02–5:05जे हम्रा उवस्तू अनबाक छी, जे नहीं तगाछ थिक,
- 5:05–5:08नहीं भोडा थिक, नहीं पहार्थ थिक.
- 5:08–5:13बाशा सकारात्मक यदार्त पर अदारे तची केबल अनन्त नकारात्मक्ता पर नहीं.
- 5:13–5:19आस सब से गज़ब भात इजे उद्यन कतर्क केबल नीरस गनित्य सुत्रजका नहीं हैच.
- 5:19–5:26उ आहन जिवन्त द्रिष्टान्त देच्छतिजना राज्महल्क का पाटक पट्ठार एक आन्देर में चावर भुजिलेब
- 5:26–5:31एक आप पर्ष्ट्बस्थू के चावर भूजभ ब्रामग ज्यानक पराकास थातेक
- 5:31–5:36आईन जिस्टान्त साभित करे दाईज जे उद्द्यान के येबल एक्ता महान तारकिक नहीं
- 5:36–5:40बलकी प्रथम स्रीनिक सहथ्तेकार आएक्ता गजब के ब्यंगे कार से उचला
- 5:40–5:45मूल पात और अनवाद में एक्ता बहुत पैग विरोदा भास देख हल जासके तची
- 5:45–5:52उदेनक मुल संस्क्रित पात में एक अक्षरी नहीं वानेक पुयोग बारंभार भे लची,
- 5:52–5:56जे कोनो बज्र पाज्जका कत्होर अनिर्दाई तरकक रूप में अवाए तची.
- 5:56–5:59मुदा गजेंद्र ताकूरक अनवाद में,
- 5:59–6:02उही कत्होर तरक के एक ता प्रवाह मैं,
- 6:02–6:05समवादात्मक मेठली लेमे बदली देल गेल अची
- 6:06–6:11इणवाद संसक्रितक रुख्रापनके मेठलिक मिठास्सें कोमल बना दे तची
- 6:11–6:15जते भुजाईत ची जैना कोनो नीरस भाशन नही
- 6:15–6:18बलकी विध्वानक भीच एक ता जीवन्त शास्तरारत भूराल हो
- 6:18–6:24तारकिक युद्धाक इरोमान्चक यात्रा के बाद आब तीसर कहन्द दिस बड़ल जाए.
- 6:24–6:29अनुवादक कला, अनुवादक एस विशाल आ असमबव जका लागे वाला काजके,
- 6:29–6:33कोना समबभ बनालगेल, इबुजब अत्यन्त आवश्षक अची.
- 6:33–6:38ये काजिक मुल्यांकन करवाक लेल अनुदादक दुन्नो द्रिष्टिकोन के बुजगपभ्दत,
- 6:38–6:45येक दिस भारतिया कावे शास्तरक गंभीर सिद्दानताची, जना रस, द्वानी अवक्रोकती.
- 6:45–6:49वागाई दून्नो सिद्धान्तक के संथूलित कव एक आज केल बल आची
- 6:49–6:51इग आप आप आप वहतुपून ची
- 6:51–6:54एक रागनेश देविक विचारिसं बहुत नीक जका भोजल जासके तची
- 6:54–6:56जना विदेशी करन अदेशी करन
- 6:56–7:00मने की अनुवाद के पाथक भाशाजका सहवज बनादेल जाए
- 7:00–7:03वा उक्रा मुल भाशाजका कतिन अपराया राखजाए
- 7:03–7:06अनुवादक एदुन्नो सिद्धानतक के संथूलित कः
- 7:06–7:08एक आज केल बल आची
- 7:08–7:15इई अनुवाद की एक अते क महतुपून ची, एक रागनेश देविक विचारसं बहुत नीक जका भुजल जासके तची.
- 7:15–7:19हूनक माननाइ छन्नी जे अनुवाद कोनो यान्त्रिक नकल नहीं अची,
- 7:19–7:26अगर इस्म्रिती ब्रन्श वाब्व्ल्वाक बिमारी सु मुक्त कर्वाक एक्ता शक्तिशाली अजार्थेक।
- 7:26–7:33सद्यो द्हरी मित्ला अपन महान दाश्निक अतीत के भिस्री रहल चल कि एक ता उ ग्यान संस्क्रित के पोती में बंद चल.
- 7:33–7:36इई अनुवाद उही सुप्त दार्षनिक इस्मिरती के जगार हल अची.
- 7:36–7:39अनुवादक इचमत कार
- 7:39–7:42अकता बहुत उतक्रिष्ट रन्निती सदमबहल
- 7:42–7:46पहल काम इक ल्गेल जे पारिभाशेक दार्षनिक शब्द
- 7:46–7:50जना अपोज के विदेशी करन का सिद्दान्त पर जोग कात्तिव राखल गल,
- 7:50–7:52जाहिसे वैचारि गंभीरे बनल रही है.
- 7:52–7:59तो सर देस वाखे का सरष्ना के पुणता देशी करन का अस्थानिये मैठली मुहावरामे ताली देल गल.
- 7:59–8:07परनाम यवेल जे बारी बरक्म संस्क्रित शब्द अक्ता बहुत परिच्ट आआपन लागेवला मेठली वाख्यके भीच एहन बैश जाईत छी,
- 8:07–8:13जना कोनो गंवेर विद्वान आपन गावक चोपाल पर बैस के तेट भाशा में गंवेर यान बाद्राल हो थी.
- 8:13–8:22अनुवादक आह उत्क्रिष्ट कला के बुज्बाग बाद आब हम साब आपन अंतेम क्हन्द दिस बड़ेत ची बाशा का पुनर जन्म.
- 8:22–8:29इमात्र एक ता ग्रन्त्ध अनुवाद नहीं बलकी स्वेम आप बाशा मैत्रीक के लेल एक ता युगन्त कारीक शन्तिक.
- 8:29–8:35आई अनुवादक दूर्गामी प्रभाव मात्र एक ता पोठिदरी सीमित नहीं आचे,
- 8:35–8:41इस सदियो से चली आवी रहल संस्क्री तक एक अदिकारक दिवार के क्हन्द कडेता ची.
- 8:41–8:47बहुत रास लोकक इब्रहम चल, जिक छेट्रीय भाशा में गंभीर दर्षन नहीं लिखल जासकत छी.
- 8:47–8:51इए अनुवाद उई ब्रहम के तोईरित इप्रमानित करेत छी,
- 8:51–8:56जे मैठली, अमुर्त और जत्यल दार्षनिक विचार के संबालभ में पुँडता सक्छम आची.
- 8:56–9:01इई मेठली के मात्र गीतनाद आलोक कताक गेरा से बाहर निकाली
- 9:01–9:06एक्ता गंवीर शास्त्र भाशाक उच्यासन पर इस थापित करेता ची.
- 9:06–9:14अन्तत, इस सम्पोरन यात्रा एक्ता अट्यंत गंवीर अ विचारनी ए प्रश्न पर हमरा सोब के चोरी जाईता ची.
- 9:14–9:22जे एगारा शताबदिक एक ता ग्रन्द आजुक समय में एते पढ़ग भाशिक अस्संच्रतिक पुनर्जागरन लाभी सकेता ची,
- 9:22–9:27तए एहन कि तेक विशाल अप्राचीन ज्यान आची, जे आएदरी दूल फाकी रहा लची,
- 9:27–9:32आआ आपन मात्री भाशा में एक ता संसक्रते गर वापसिक भाद जो ही रहल आची?
- 9:32–9:37इएक ता एहन गंभीर प्रष्न ची जाही पर निरन्तर विचार कायल जानाय आवश्षक आची.
- 9:37–9:41एह व्याक्यात्मक प्रस्तूती सा जुर्बाक लेल, हर्दाय सद्धन्नेवाद.
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यह व्याख्यात्मक प्रस्तूती में स्वागत अछि। आई हम सब भाषावि ज्यान अदर्षनक एक ता एहन अटिहासिग गटना पर चर्चा करब, जि वास्तव में एक ता साँस्क्रतिक पूनर जाग्रनक शंखनाद अछि। इक ता उदार हम सताब दिक एक ता महान गरन्तक, जी हाजार वर्ष दरी, एक ता विषिष्ट भाश्चा में बन्द रहला दरी, अंतता अपन जडी दिस गुरे रहला चे. इक नो सादारन अनुवादक के गप नहीं चेक, बल की ये एक ता समपोड़िक परमपराक पनर जनम थेक ता एतन जे सवसने रोचक बात अची उछी ईपोठी स्वयमेव गजेंद्र थाकुल जी दोरा अनवादित आ विदेज समप्रकाषित आत्मत अप विवेख क त तो हाँजार छब विस का परीवरदित संसकरन उदेना चार्ये कर इमुल दार्षने गरन्त, हदार वर्स पूर व्रचल गेल चल, आएकर संस्क्रित इत्टिक गुल आ अबेदे च्यक, जि पैग पैग विद्वान एक्रा भुज्बा में हदबडा जाई चला. इग्रन्त न्यावैशिषिक दर्षनक, इक ता एहन कथिन हीमालै तेक, जख्रा पार करव सब के वश्वे नेच्छल. तो एहन जतिल गरन्तख उत्क्रिष्ट मैत्छिली अनुवाद प्रस्थूत करव, वास्ता में विलुप्त बहरहल बवद्धिद ध्रोहर के वापस अनबा एक ता एतिहासिक प्रयास तेक. बाशा के नव जीवन देताची इसब क्रमानुसार समज़व। तव आरंभ केल जाए पहल्क्हन्द्सा एक ता सांस्क्रतिग गर वापसी एक गरन्त्तक अपन्यात्रा कोनो महाकाविसक कम नहीं चाएक इहन लागे तची जका कोन विस्म्रित नायक, हसार वर्सक लंबा वन्वासक बाद पुर्न गोरव अग्यानाक संग आपन गर गुरी रहाल हों. इविशाल कालक्रम सुएमेव अद्बुदची इगार हम शताबदी में, जगन उदेनाचार या मितलाक दरती पर इमुल गरन्त रचले नी, तक हन इग्यान के एक ता महान केंद्र चल. मुदा समय के संग भेल इई जे इग्रन्त संसक्रितक प्राचीर में बंद बोगल, आसादारन लोकक पहुज से बाडर भोगेल. एक हाँजार वर्ष्चक नीरवता के बाद, दोहाँचार में एकर पहल मैठली संसकरन आयल, जे एह मौन के तोडबाक पहल प्रियाश्चल. आप 2016 में एकर परिवर्दित आप प्रमाडिक संस्करन रहाँ सब के सुन्जा आची, जे एह सहस्राब दी लंभा यात्रा के एक ता नवगन्त रदार होल आची. संस्करित आम मैत्लिक भीच की सम्मन्द बहुत मार्मे कचे. अदिहासिक रूप सा देखल जाये तस संस्क्रित एक गरन्तक लेल एक ता रक्षक मुद अभेद्द्य पित्र भाशाजक काम किलक. संस्क्रित विद्वान सबख का उ दूर्ग फिक जाहिमक कथोर व्याकरन अदार्षनक परमपरा कप पहरा चै. एक रव विप्रीत मैठली मितलाक माटी ठिक जे ए छित्र कर वास्त्विक मात्र बाशा चे इ उ बाशा छिक जाहिमक कविताक प्रवाह करूना आस्तानिय द्रोहर बसल अचे तई अनवाद उही गुड ज्यान के संसक्रित का कत्होर प्राचीर सनिकाल के मैठली कोक में उकर वास्त्विक गरे मा पुनर स्तापित करईत अची मूल ग्रन्तक अटिहासिक यात्राक बाद आब एकर मुक्छ्विषे दिश बड़ाल जाए दार्षनिक संगर्ष इपोत्फी भार्तिये दार्षनिक परमपराक विषेश कर न्याए वैशेषिक आ बोद्द मतक भीच भेल एक ता बयंकर संगर्षक का सक्षी अची. इस संगर्ष कोनो चोट मोट गप नहीं चल. उदेना चारिक इख्चन्दन मुख्यरुप से बोद्द दर्षनक चारी ता अदारस्तमप पर प्रहार करे तची. उदाहरन के लेल खषनिक वाद के सिद्धान्त पर विचार केल जाए, बहुत दर्षन के अनुसार संसार के सब वस्तुमात्र एक खषनक लेल अस्तित्वो मेरहेता, उदाहरन के लेल खषनिक वाद के सिद्धान्त पर विचार केल जाए, बहुत दरशन के अनुसार संसार के सब वस्तुमात्र एक खषनक लेल अस्तित्वो मेरहेत अची, अदो सरखषन नश्त भोजाए तची, उदाहरन एहेपर बहुत तीखषन प्रहार के चाछी, सनسार के सब वस्तु मात्र एक ख्षनक लेल अस्तिट्वमे रहेता ची अदो सर्ख्षन नष्ट बहजाईता ची उदेन एहेपर बहुत टीखषन प्रहार करे च्छत्छी उनक्तर का ची जै जै सब किछ ख्षनिक अची तद्मनुश्ष्व्ष्म्र्ति आप पहचान केनो समबवाच्ई जै काली जे व्यक्ति कोनो वस्थू देख्लक उ व्यक्ति आई अस्तित्व में है ये नाए तफिर स्मरन के करे रहा लगछी इद उभाद जका भेल जे रिन कोनो आन व्यक्ति लेलक अग्राभे लेल कोनो आन व्यक्ती बाद्धिब हर है लची इटर्क श्पष्ट करे तची जे आत्मा वाचे तनाक निरन्तरता आवश्षक अचे एक ता आन अद्यंत रोचक विषे अचे अपोज बोध दर्षन के अनुसार कोनो शब्दिक अर्ठ उकर विप्रीत वस्तूके नकार लासे बनेत छे उदाहरनार्त गाएक आर्थ अची जे गाए नहीं आचे उकर चोडका मुदा उदेन एक राएक दम अव्यवाहारिक माने च्छतीन जखन क्यो कही तची जे जल के लेल ग़ेला आनु तकन लोकक मन में एक ता सकारात्मक चित्र अवएत छी. एक कतेक हास्यस्पत लागत, जांक्यो गहला अनबाक लेल यी सुचे, जे हम्रा उवस्तू अनबाक छी, जे नहीं तगाछ थिक, नहीं भोडा थिक, नहीं पहार्थ थिक. बाशा सकारात्मक यदार्त पर अदारे तची केबल अनन्त नकारात्मक्ता पर नहीं. आस सब से गज़ब भात इजे उद्यन कतर्क केबल नीरस गनित्य सुत्रजका नहीं हैच. उ आहन जिवन्त द्रिष्टान्त देच्छतिजना राज्महल्क का पाटक पट्ठार एक आन्देर में चावर भुजिलेब एक आप पर्ष्ट्बस्थू के चावर भूजभ ब्रामग ज्यानक पराकास थातेक आईन जिस्टान्त साभित करे दाईज जे उद्द्यान के येबल एक्ता महान तारकिक नहीं बलकी प्रथम स्रीनिक सहथ्तेकार आएक्ता गजब के ब्यंगे कार से उचला मूल पात और अनवाद में एक्ता बहुत पैग विरोदा भास देख हल जासके तची उदेनक मुल संस्क्रित पात में एक अक्षरी नहीं वानेक पुयोग बारंभार भे लची, जे कोनो बज्र पाज्जका कत्होर अनिर्दाई तरकक रूप में अवाए तची. मुदा गजेंद्र ताकूरक अनवाद में, उही कत्होर तरक के एक ता प्रवाह मैं, समवादात्मक मेठली लेमे बदली देल गेल अची इणवाद संसक्रितक रुख्रापनके मेठलिक मिठास्सें कोमल बना दे तची जते भुजाईत ची जैना कोनो नीरस भाशन नही बलकी विध्वानक भीच एक ता जीवन्त शास्तरारत भूराल हो तारकिक युद्धाक इरोमान्चक यात्रा के बाद आब तीसर कहन्द दिस बड़ल जाए. अनुवादक कला, अनुवादक एस विशाल आ असमबव जका लागे वाला काजके, कोना समबभ बनालगेल, इबुजब अत्यन्त आवश्षक अची. ये काजिक मुल्यांकन करवाक लेल अनुदादक दुन्नो द्रिष्टिकोन के बुजगपभ्दत, येक दिस भारतिया कावे शास्तरक गंभीर सिद्दानताची, जना रस, द्वानी अवक्रोकती. वागाई दून्नो सिद्धान्तक के संथूलित कव एक आज केल बल आची इग आप आप आप वहतुपून ची एक रागनेश देविक विचारिसं बहुत नीक जका भोजल जासके तची जना विदेशी करन अदेशी करन मने की अनुवाद के पाथक भाशाजका सहवज बनादेल जाए वा उक्रा मुल भाशाजका कतिन अपराया राखजाए अनुवादक एदुन्नो सिद्धानतक के संथूलित कः एक आज केल बल आची इई अनुवाद की एक अते क महतुपून ची, एक रागनेश देविक विचारसं बहुत नीक जका भुजल जासके तची. हूनक माननाइ छन्नी जे अनुवाद कोनो यान्त्रिक नकल नहीं अची, अगर इस्म्रिती ब्रन्श वाब्व्ल्वाक बिमारी सु मुक्त कर्वाक एक्ता शक्तिशाली अजार्थेक। सद्यो द्हरी मित्ला अपन महान दाश्निक अतीत के भिस्री रहल चल कि एक ता उ ग्यान संस्क्रित के पोती में बंद चल. इई अनुवाद उही सुप्त दार्षनिक इस्मिरती के जगार हल अची. अनुवादक इचमत कार अकता बहुत उतक्रिष्ट रन्निती सदमबहल पहल काम इक ल्गेल जे पारिभाशेक दार्षनिक शब्द जना अपोज के विदेशी करन का सिद्दान्त पर जोग कात्तिव राखल गल, जाहिसे वैचारि गंभीरे बनल रही है. तो सर देस वाखे का सरष्ना के पुणता देशी करन का अस्थानिये मैठली मुहावरामे ताली देल गल. परनाम यवेल जे बारी बरक्म संस्क्रित शब्द अक्ता बहुत परिच्ट आआपन लागेवला मेठली वाख्यके भीच एहन बैश जाईत छी, जना कोनो गंवेर विद्वान आपन गावक चोपाल पर बैस के तेट भाशा में गंवेर यान बाद्राल हो थी. अनुवादक आह उत्क्रिष्ट कला के बुज्बाग बाद आब हम साब आपन अंतेम क्हन्द दिस बड़ेत ची बाशा का पुनर जन्म. इमात्र एक ता ग्रन्त्ध अनुवाद नहीं बलकी स्वेम आप बाशा मैत्रीक के लेल एक ता युगन्त कारीक शन्तिक. आई अनुवादक दूर्गामी प्रभाव मात्र एक ता पोठिदरी सीमित नहीं आचे, इस सदियो से चली आवी रहल संस्क्री तक एक अदिकारक दिवार के क्हन्द कडेता ची. बहुत रास लोकक इब्रहम चल, जिक छेट्रीय भाशा में गंभीर दर्षन नहीं लिखल जासकत छी. इए अनुवाद उई ब्रहम के तोईरित इप्रमानित करेत छी, जे मैठली, अमुर्त और जत्यल दार्षनिक विचार के संबालभ में पुँडता सक्छम आची. इई मेठली के मात्र गीतनाद आलोक कताक गेरा से बाहर निकाली एक्ता गंवीर शास्त्र भाशाक उच्यासन पर इस थापित करेता ची. अन्तत, इस सम्पोरन यात्रा एक्ता अट्यंत गंवीर अ विचारनी ए प्रश्न पर हमरा सोब के चोरी जाईता ची. जे एगारा शताबदिक एक ता ग्रन्द आजुक समय में एते पढ़ग भाशिक अस्संच्रतिक पुनर्जागरन लाभी सकेता ची, तए एहन कि तेक विशाल अप्राचीन ज्यान आची, जे आएदरी दूल फाकी रहा लची, आआ आपन मात्री भाशा में एक ता संसक्रते गर वापसिक भाद जो ही रहल आची? इएक ता एहन गंभीर प्रष्न ची जाही पर निरन्तर विचार कायल जानाय आवश्षक आची. एह व्याक्यात्मक प्रस्तूती सा जुर्बाक लेल, हर्दाय सद्धन्नेवाद.