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न्यायकुसुमाञ्जलि_मैथिली_अनुवाद_आ_बौद्धिक_घरवापसी.m4a

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Part 11 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 11
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  1. 0:00–0:04अगर अगर अगर अगर जाबिया हम्रा सबक लक नहीं अछि।
  2. 0:04–0:06सही कालू, चाभिया अछि।
  3. 0:06–0:10अगर अपन जीवन में उतार नहीं सकते ची
  4. 0:10–0:14बलकोल, कारन अगर चाभी आ फम्रा सबखग लक नहीं अच्छे
  5. 0:14–0:17सही खालू, चाभी नहीं अच्छे
  6. 0:17–0:20अब भारतिय दर्षन अप प्राचीं ग्यानक संग
  7. 0:20–0:23सद्योस्वा कि चु अईने बहर हल आचे
  8. 0:23–0:31अग, इदव, तव आजुक चर्चा गजेंदर ताकृ दारा अनुदीत उदेना चार्यक जे हजार वरस पुरान संस्क्रिप गरन्त हैची न्याय कुसु मानजली अगर 2004 अ 2006 परिवर्दित संस्करन पर केंद्रे ताकृग.
  9. 0:31–0:34मुदा आजको इजे हमरा सबख गान विसलेशन आच्छेन अच्छेन
  10. 0:34–0:37से मुल रुब सां उही शीशक गेरा के तुर्वाक विषेम आच्छे.
  11. 0:37–0:44आजुक ता आजुक चर्चा गजेंद्र ताकुर दोरा अनुदित
  12. 0:44–0:47उदेना चार्यक जे हजार वरस पुरान संस्क्रिप ग्रन्त है थी
  13. 0:47–0:49न्याए कुस्वा अंजिली
  14. 0:49–0:53उकर 2004 ता 2006 परिवर्देद संसकरन्पर केंद्रेत है ता ची
  15. 0:53–0:57मने ये खेवल एक ता पोथिग भाशान्त्रन्द नहीं आची
  16. 0:57–1:02इं मेठली भाशाग दार्ष्निक परमपरा के टा पैग पुनर जागरना ची
  17. 1:02–1:06इक राहा ग्यान के टा बोद्धिक गर वापसी कही सकत ची
  18. 1:06–1:11जता ए उ आमोल यक हाजाना आब हमरा सब के अपन गरेक आगन में उपलब दची
  19. 1:11–1:14ता आई एक रादनी विस्तार से बुजी?
  20. 1:14–1:19आँ, दिको आग इ रोपकत इस थिती के एक दम स्पष्ट कर दे तची
  21. 1:19–1:24जवम सब नयाए कुस मानजली क इतिहासिक महतो पर तनिक द्रिष्टी डाली ने
  22. 1:24–1:31तव उद्याना चार दसम एगारम सदाभ्दीक मित्लाक एक ता आँन कुशागर दाशनिक चला
  23. 1:31–1:33आँ, दसम शताब्दिक बाद भूरल आच्छे.
  24. 1:33–1:37एक्दम, जिनका बार्तिया तर्क शास्ट्रक इस्टम्भ मानल जाईत आच्छी.
  25. 1:37–1:42वूनकर इज ग्रन्त आच्छी उ इश्वरक अस्थ्ट्व सिद्खर बाख लिल,
  26. 1:42–1:46बार्तिया दर्षनक सब से व्यवस्तित असुक्ष्म्रच्नाची
  27. 1:46–1:48बाप्रे, सब से व्यवस्तित?
  28. 1:48–1:55रह, मुदा विदम नात इच्जल, जिस सद्योंदरी ज्यान के वल संस्क्रितक पन्टिद सब खोट्री में बंद चल,
  29. 1:55–2:00वा कहो जे पाश्चात ते अकादमिक गेरा में अंग्रेजी अनुवादक रूप में सी मिट्चल.
  30. 2:00–2:02मैंने आम लोकरक पहुच से बहुत दूर?
  31. 2:02–2:04बलकुल.
  32. 2:04–2:08ता गजेंद्र ताकृ द्वारा केल गेल इजे मेठली अनुवाद अच्छेने,
  33. 2:08–2:12उ उ ही ज्यान पर मत्री भाशाक पुनरा दिकार अची
  34. 2:12–2:16इसिद करेत अची, जे उच्च कोटी का दाशनिक विमर्ष कलेल
  35. 2:16–2:21हम्रा सब के कोन दोसर भाशाक मुखा पेखषी है बाक अवष्चकता नहीं अची
  36. 2:21–2:24तए इजे पुनरा दिकार का बात आहा कहलू ने
  37. 2:24–2:29से हमरा इसोच्वा पर भीवष करेत आजी, जे ग्यान पर अखिर अग्धिकार कख्कर होईत.
  38. 2:30–2:32वह, इप पैग प्रष्न आजी.
  39. 2:32–2:36कारन, हम्मर स्रोट सामगरी में एक तबहुत रोचक बिन्दू आजी,
  40. 2:36–2:39जे ही अनुवाद कोनो पैग विष्वे विद्ध्याल आए,
  41. 2:39–2:44वा माने राज्ज प्रायुजित अकाद्मिक संस्त्ताक अनुदान से नई भेलाची
  42. 2:44–2:45सही बात अची
  43. 2:45–2:52एकर निरमान विदेः इपत्रिका का जे समनान्तर सहित यान्दूलन अची उकरन्तर गद वेलाची
  44. 2:52–2:56तजगन हम सब ग्यान का केंद्री करन का बात करेची
  45. 2:56–2:59तप्राया विष्वविद्याले सब के हिरेची
  46. 2:59–3:03तकी इस संस्ता बाया प्रयास एक तद सचेत क्रान्ती अची
  47. 3:03–3:05मने एक रा कुना देखी?
  48. 3:05–3:09आ, दिख हो, इआन्दोलनक मूल मर्म थेक
  49. 3:09–3:13समननतर साहित ते आन्दोलन इए अस्तापित करेत अची
  50. 3:13–3:19ज्यान पर कोनो एक ता खास अकादमिक वर्गक एक अदिकार नहीं भसके तच्छे
  51. 3:19–3:22आँ मने कोनो एक यी ता गूड की निंट्रन नहीं?
  52. 3:22–3:29एक दम जखन ज्यान केवल विष्प विद्यालेएक अनुदान आप पाथ्ध्रमक अदिन रहे तच्छी ने
  53. 3:29–3:33तकन उ आम जन मानस्सं कत्थू नक्थू कती जाएत छी।
  54. 3:33–3:37आई अनुवाद ई मिठक के से हो तोडे तछी
  55. 3:37–3:41जी मैठली के वल गीट, कत्था, वा कविताक कोमल बाशा आचे
  56. 3:41–3:45आँ, इग ता बहुत पेग दारना आचे लोकक
  57. 3:45–3:48भिल्कुल! मुदा इ अनुवाद प्रमानित करे तची,
  58. 3:48–3:52जे मैठली प्रमान प्रमे विमर्ष जका,
  59. 3:52–3:55अट्यन्त रुक आर कतिन तरक्षास्त्रक लेल से हो,
  60. 3:55–3:57पुड रुपेन समर्त भाशा जे.
  61. 3:57–3:59मने दर्जनाग भाशा?
  62. 3:59–4:29आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  63. 4:29–4:59तच्छ इस्टबक बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्�
  64. 4:59–5:04अगरा जानी भूच के हैकर्स कब भीच चोडी देल जाए.
  65. 5:05–5:08जाएस ने अगरा इस्ट्रेस टेस्ट केल जासके.
  66. 5:09–5:14लेखख अपन सिद्धान के चारो दिस्सों हम्ला करवाक लेल एक दम खुजल चोड़ देई चतीन.
  67. 5:14–5:25यह ता अदालत जगा आची, जदे बचाओ पक्ष्क वकिल आपन सबसो मस्वुद तर्क देतची, अद्तकन अभी योजक अग्रा एक एक कग काटे तची.
  68. 5:25–5:33आँ, आहा के यी इस्ट्रेस् टेस्ट आ अदालत्वला तुलना तो ग्रन्त्ख कार्यप्रनाली के सतीक रूपिन दर्षावे तची.
  69. 5:34–5:42इप्रक्रिया के साहित्ति सिद्धान्त में रूशी विचारक मिक्हाल बाख्तिन कर बहु स्वर्ता सो जोडी कर देखाल जासके तची.
  70. 5:55–5:57विरोदि स्वरक उपस्तिति स्यो हो अची
  71. 5:57–6:00अचा मैंने सबह के बाद सूनल जजी
  72. 6:00–6:01इक दम
  73. 6:01–6:02अचसर हम सब देखा ची
  74. 6:02–6:07जि कोनो विमर्ष में लेक्ख अपन तर्क के सही साभित कर बाख लिल
  75. 6:07–6:10विरोदिक तर्क के जानी भूज कक कमजोर दिखा देख चतिन
  76. 6:10–6:40जगरा वी बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बा�
  77. 6:40–6:44तदेखु चार्वाग दर्षन का जे देज़े तन्यवाद अखर उदारन लिया.
  78. 6:45–6:51चार्वाग का इस सिद्धान तचे जे चेतना कवत्पती केवल शरीरिक भूटिक तच्व सबसम होई तचे.
  79. 6:52–6:53भूटिक तच्व? मने?
  80. 6:53–6:55बवोदिक तत्व सबसूं होई तचे
  81. 6:55–6:57बवोदिक तत्व, मने?
  82. 6:57–6:59आन जन प्रत्वी, जल, अगनी वायू
  83. 6:59–7:04जन पान, चूना, और कत्धाक मिलास्सन लाल रम बने तचेने
  84. 7:04–7:07तहीना, बवोदिक तत्व सा चेतना बने तचे
  85. 7:07–7:09आत्माजका कुन अलक तत्व नहीं जे
  86. 7:09–7:12उ, मने शरीर से बाहर कुछ नहीं
  87. 7:12–7:17हाँ, आउदेयाना चार्या इटर्क पर हसाइत ने चती
  88. 7:17–7:21उ, एक्रा पूरन गंभेर्यो कसंटापित करे चते
  89. 7:21–7:26उकर बाद, उ, उई टर्क भी टर्पस कव, उकर खंदन करे चती
  90. 7:26–7:30जै खेई केवल बहुतिक तत्वसा चेतना आवे तची
  91. 7:30–7:33तब म्रित शरीर में उ चारो तत्वत रही ते आचे
  92. 7:33–7:36तक हन चेतना कियक लुप्त बहाजाई तचे
  93. 7:36–7:39बाप्रे ये तब बहुत गहीर बाद आचे
  94. 7:39–7:40बिल्कोल
  95. 7:40–7:42इज समवादक जे दाचा आचे ने
  96. 7:42–7:45उ पात्ध के स्वेम विचार करभालेल प्रेरिद करेताची
  97. 7:45–7:49आर एते अनुवादक कब वूमिका स्योता बहुत महत्लपून बहाजाए थाचे
  98. 7:49–7:55गजिंद्र ताकोर अपन अनुवाद में इस समवादात्मक शैली के बाशा के लैसन सजीव बनाने चती
  99. 7:55–7:58आँ अद्वादक का जे ते बहुत उट्क्रिष्ट आचे
  100. 7:58–8:02जिना श्रोथ मे देल आची जे तक्हन प्रष्न उठे तची
  101. 8:02–8:06कहल जा सके तची मुदा इमत टीकएत नहीं आची
  102. 8:06–8:10जे का वाक रचना सा इवाद-विवाद के इग्दम नाटके रूब बेटर आचे
  103. 8:10–8:11एक दम नाट की है
  104. 8:11–8:13जगन नी पडल जायतची
  105. 8:13–8:15तब लागत अची जे दूटा बोद्धिक महारती
  106. 8:15–8:18आमने सामने बैसकर शास्टरात कर रालजती
  107. 8:18–8:18हाँ
  108. 8:18–8:23आई य समवाच शेली कारन ग्रन्त में एक दा अदबुत रस पैदा होएत ची
  109. 8:23–8:24य बोद्धिक युद्ध
  110. 8:24–8:30जक्रा हम सब तर्क वीर रस कही सकए च्ये, अकर अंत गमन्द में नहीं होए तच्यी.
  111. 8:30–8:31तच्यं कते होए तच्या.
  112. 8:31–8:35जखन तर्क सुख्ष्मता अपना चरम पर पहचाई तच्ये.
  113. 8:35–8:39जखन विरोदिक सब संच्या यसमाप्त बहुजाई तच्यी.
  114. 8:39–8:43तक्हन ग्रन्त शान्द्रस आब भक्ती में परिनत भोजाईता दी
  115. 8:43–8:44वाज
  116. 8:44–8:49अन्तता इसब्ता दाशनि ग्यान इश्वरक चरन में अर्पिद भोजाईता ची
  117. 8:49–8:52इताई तर्क अपने आप में साद्ध्यन नहीं आची
  118. 8:52–8:55याल की यीश्वर प्राप्तिक एकता सादन मत्र बनी जाईता ची.
  119. 8:55–8:59मने मस्तिषकक पुरन व्यायाम भलाग बाद, आत्माक विष्राम.
  120. 8:59–9:01आप, एक दम सही शब्द कहलो हूँँँ.
  121. 9:01–9:03यात्रा त अदबूत अचे.
  122. 9:03–9:07मुदो आज अखन हम सब एहन जटिल दार्ष्निक युधद कबात करेजची
  123. 9:07–9:09ते एक तब रहुत सहथ प्रष्नूथ है तच्छ.
  124. 9:09–9:10की?
  125. 9:10–9:14जे एक हाजार वरष पुरान संस्क्रितक एह वैचारी गामभीर्यके
  126. 9:14–9:17आदूनिक मेठली में उतारवतक एहन रहल होएत.
  127. 9:17–9:21इद अद्वादक के लेल एक तदोदारी तर्वार जगाए हुएत
  128. 9:21–9:23आँ इद अच्छे ले
  129. 9:23–9:27इष्वोट समगरी अद्वादक कलापर प्रकाष्टल लेई तची
  130. 9:27–9:31अद्देशी करन बनाम विदेशी करन का चर्चा करे थची
  131. 9:31–9:34तो इवदारना की अच्छी
  132. 9:34–9:38देखो अनुवादक लोकनिक सामने सदिकहन एक तद्ध धार्म संकत रहेत आची
  133. 9:39–9:44जे ख्रेट्रिक्ष लायान माकर से लगका आदूनिक सिद्धान्त कार लोरेंस वेनुती दरी चर्चा मे रहे लगची
  134. 9:44–9:45रहा हा
  135. 9:45–9:54मुल प्रष्नी इए ची जे की अनुवाद मे पाटके पाटक कस विद्धानुसार पुर्नताः अस्तानिया वा देशी बना दिल जाए,
  136. 9:54–9:59जाए सा पाटक के लागे जे इग्रन्त हूंकर अपन भाशा में लिखल गेल अची.
  137. 9:59–10:01एक रा देशी करन कहे चती.
  138. 10:01–10:04अच्छा, माने, दोमेस्टिकेशन.
  139. 10:04–10:09वाग ग्रन्त का मुल संस्क्रित, वा विदेशी स्वाद के बरकरार राखल जाए,
  140. 10:09–10:15जाही सा पात्ख के इबुज्मा में आवे जे ओएक ता भिन्न, काल्खन्द अ संस्क्रितिक चिन्तन पडी रहल आची.
  141. 10:15–10:19जेक्रा विदेशी करन वा फोरेनाइशेशन कहल जाईताची
  142. 10:19–10:22बलकल, आठाकुर जी यताई मद्ध्यम मार्गपने ने चेथ
  143. 10:22–10:25ता इस शन्तुलन कोना काज करेट आची
  144. 10:25–10:28कारन स्रोत में किछु विषिष्ट उदाहरन देल गेल जी
  145. 10:28–10:33जिना गंगायाम गोशव, का अनुवाद गंगामे गोट केल गेल अची
  146. 10:33–10:37अशश्श्रिंग कल लेल, करहाक सींग लिखल गेल अची
  147. 10:37–10:39रह, यी बहुत रोचक अची
  148. 10:39–10:43ये ते गोट शब्द ता, सीधे मितला गाम गर सजुडा लची
  149. 10:43–10:47इपुर्नत्देशी करन आची जे पाथके एक दम अपना लगगत आची.
  150. 10:47–10:48बिल्कोल.
  151. 10:48–10:57मुदा दूसर दीस, व्याप्ती, समवाए, प्रत्योगी जका बहारी संसक्रत पारीभाशिक शब्द सब के अनुवाद मे उहीना राकले लगे लगी.
  152. 10:57–10:59तहीना राकल लगे लगी.
  153. 10:59–11:01तए तई विदेशी करन लागी आवी आची
  154. 11:01–11:03मुदा हमर प्रष्न इए आची
  155. 11:03–11:04जे जे व्याप्ती
  156. 11:04–11:07वा समवायज़का बारी शब्दावली राखल जायत
  157. 11:07–11:10तब की इसामाने पाथके समथ सा बाहर नहीं बहजायत
  158. 11:10–11:12की एक रा सरल भाशा में
  159. 11:12–11:15जिना सम्वाय के केवल सम्वाय ने लिखल जासक अच्छल?
  160. 11:16–11:19इप्रश्न अच्छल प्रासंगे कच्छे आगाखा
  161. 11:19–11:22मुदा दार्ष्नेक गरन्त्ख अनुवाद में
  162. 11:22–11:26पारिभाशिक शब्द सब के संग चेर्चाड का लिए नहीं जासके तचे
  163. 11:26–11:26की एक नहीं?
  164. 11:26–11:56अगर बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान ब
  165. 11:56–12:01उगराई उगराएक ख़ाई के बादिग स्वाद्ख तर्ले करव नहें अची
  166. 12:01–12:05बलकी पाथक कब बध्धिख स्थर के उपर उपर उठावे आची
  167. 12:05–12:09इबाद बलकुल स्पष्ट करेत आची जटिलता आवष्षक आची
  168. 12:09–12:13बड़क बाद्ख कब बध्दिक स्थर के उपर उठावाय जी
  169. 12:13–12:17इब आत बलकुल स्पस्ट करे तजी जटिलता आवश्षक आजी
  170. 12:17–12:20मुद्द तकन इशु पाच्छे कोना बने तजी
  171. 12:20–12:24करन भारी शबदक बोज से तो वाक ये तुटल जाका लागे लागत
  172. 12:24–12:31अदतकन यी सु पाच्छे कोना बने तची, करन भारी शब्दक भोज से तो वाख ये तूटल जाका लागे लागत.
  173. 12:31–12:36आद आद आद मेतली बाशाक आपन प्राक्रतिक वाख के सन्रचना का आजाई बैट ची.
  174. 12:36–12:41मेतलिक जोंता वा जेसे वाला जे ले बद्वाग के सन्रचना आचीने
  175. 12:41–12:45उो उई बारी संसक्रित शब्द सब के चारो दिस
  176. 12:45–12:47एक ता गद्दा जका काज करे तची
  177. 12:47–12:50गद्दा जका, मने कुष्निं
  178. 12:50–12:54एक दम, जगन वाख्यक ले आजक आपन मात्री भाश्षा कोई तची
  179. 12:54–13:00तकन भीच मे आयल बारी दर्षनिक शब्द सो प्रवाह मे भुजहा मे आए जाएत छी.
  180. 13:00–13:00वाआ.
  181. 13:00–13:04इएक ता कुशल अनुवादकक पहचान आची,
  182. 13:04–13:10जे उ दर्षनिक गामभीर्य, आब भाशाई प्रवाहक भीच एक ता प�लक निरमान करे तची.
  183. 13:10–13:20इप पुलक बात्तम बहुत सती कची, तै आ आ अब उईक हन्त्दिस चलेत ची, जे एही चर्चाक सबसे बिस्मै कारी बाग ची औमरलेद.
  184. 13:20–13:27इश्रोथ समगरी बतार रहल ची, जे इग्रन्त, जे एगारामा शताभदी में लिखल गेल चल,
  185. 13:27–13:34अई आदूनेक पश्च्मी दर्षन अब आब आश्चा विग्यान का अनेक सिद्दान्ता सबक पहने हे पुर्वानुमान का लेत है जी
  186. 13:34–13:37एक दम यी तब सबसे गजब बात अथ आद्छे
  187. 13:37–13:41पन्चम स्थबक में इश्वर सिद्धिक आप्टा प्रमान दिल गे लती
  188. 13:41–13:43जिना कार्यात आयोजनात
  189. 13:43–13:46इआ इआदूनेक कौंटर्फक्ष्वल रीजनिंग
  190. 13:46–13:48मने प्रतित तत्यात्मक तरक
  191. 13:48–13:51आउस्टिन सरल का स्पीच अक्ट छोरी से
  192. 13:51–13:54आश्चर ए जनक रुप से मेल काईत अची
  193. 13:54–13:56हम सब एक एक कईगर भूज़ब
  194. 13:56–14:09तदेख हो नियाए दर्षनक पन्चम स्तबक इश्वर सिद्धिक चरम शिक्धर आची, एते उदेयाना चार्या आच्टा तार्किक आदार देच्छती.
  195. 14:09–14:21जिना आहा कारेयात का चर्चा केल हूँ एकर अथ है ची, जे कोनो भी कारे, मने अप्ट्ट, कबाचा कोनो करता, कोज वा मेकर होई तची.
  196. 14:21–14:24जिना गाला आचे तं कुमार होईत.
  197. 14:24–14:37बलकुल, ता समपुर ब्रमहांद एक ता कारे आची, ये बनाल आची, ता एकर कोनो-नो-कोनो करता हो बाख चाही, जे इश्वर आची, दोसर आची आयोजनात्मक, माने संझोजन.
  198. 14:37–14:39संझोजन माने जोडव.
  199. 14:39–14:43अनु सब अपने आप जूडी के स्रिष्टी नहीं कर सके ताछी
  200. 14:43–14:47वूनका दिशा देवाक लेल एक तचेतन तत्वक आवश्ष्टा होई तची
  201. 14:47–14:52ये तरकसब उही समय देलगेल चल, जकन आदूनिक विग्यानक
  202. 14:52–15:22यानक अगर नाद़ा बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद
  203. 15:22–15:25जब हाशा केवल वणन नहीं करे तची,
  204. 15:25–15:27इग काज ज़ो करे तची.
  205. 15:27–15:27बलक्क।
  206. 15:27–15:30इग आर हम शताब दिए दर्षन में,
  207. 15:30–15:31कोन आची?
  208. 15:31–15:31हाँ.
  209. 15:31–15:34इज चछ मुजे अदबुद समान अंतर आच.
  210. 15:34–15:35उदेना चार्या जखन,
  211. 15:35–15:37वेद मनत्र आए विदी,
  212. 15:37–15:42मैंने, इंजंख्शन्द्वा कमाँद्श के स्वरूपक विष्लेषन करेच थीने,
  213. 15:42–15:48तो उ इस पष्ट करेच फीन, जे वेद के आग्या वाचक्यर केवल सुचना नही देई तची.
  214. 15:48–15:49तखं की करेट ची?
  215. 15:49–15:54इवाक्या श्रोता के वितर एक ता प्रव्रित्ति ज्यान उत्पन्न करेता ची
  216. 15:54–15:57जक्रा सा मनुश्ष कर्म कर्वादिस प्रेरित होईता ची
  217. 15:58–16:02अस्टिनक के जे इलोक्छौशनरी अक्ट का मुल अवदारना आचे
  218. 16:02–16:05जे शब्द कधेब आपने आपने एक ता क्रिया आचे
  219. 16:05–16:12उदेना चार्या उक्रा प्रेरना अश्वध भावना करूप में बहुत पहीने स्थापित कर देने चल हैं
  220. 16:12–16:14इसुनिकतर रोम-रोम सिहरी जाएत ची
  221. 16:14–16:21जे एक हजार वर्ष पहीने हमर दार्षनी कस सब भाशा विग्यानक उही परद्धरी पहुची गेल चला
  222. 16:21–16:23जदे पश्च्ट्म आई पहुची रहालाची.
  223. 16:23–16:27एक दम, हमर बवद्देख शम्ता काई प्रमान आचे.
  224. 16:27–16:31आद दोसर जे आदूनिक सिद्दान्त कक बात भेल
  225. 16:31–16:34प्रतित तथ्थ्यात्मक तर्क वा कुंटर्फक्ट्वल्रीजनिं
  226. 16:35–16:39इ की अची आ उदेनाचारे एकर प्रियोग कोना करे चथ?
  227. 16:39–16:43प्रतित तथ्यात्मक तर्क का अची
  228. 16:43–16:48जे कोनो वस्तुस्त्तिती, जों दोसर रुप मेरहत तक की होए त?
  229. 16:48–16:54एते उदेनाचार्य एक्रा नास्टिक सबक तर्क कगड़न में प्रवोग करे चते जी.
  230. 16:54–16:55कोना?
  231. 16:55–16:59दिखो नास्टिक कहत जी जे इश्वर नहीं आची.
  232. 16:59–17:03उदेनाचार्य पुछे चती जे आहा जेक्रा नहीं कही रहल ची,
  233. 17:03–17:06अगर कोनुन कोनो अवदारना ता आहाक मस्तिष्क में होएद?
  234. 17:06–17:08आप, सबहावी कची.
  235. 17:08–17:12जाँ कोनो वस्तुक अस्तित्ववाव अवदारना विलकुल असमभव अची,
  236. 17:12–17:16जिना गोल चोकोर, माने सक्वेर सरकल,
  237. 17:16–17:20ता आहा उकर खन्दन सो हो तारकिक रूपे नहीं कर सकव.
  238. 17:20–17:24इश्वर नहीं अची कबाक लेल से हो,
  239. 17:24–17:27पहिले इश्वरक अवदार नामाने,
  240. 17:27–17:31कुन्सेप्त अवगोड के एक तारकिक कोटी क्रूपे माने पडेट ची.
  241. 17:31–17:35इई आदूरेक विष्लेशनात्मक दर्षनक बहुत निकत अची
  242. 17:35–17:39जदे खन्दन करवाक लेल से हो विष्यक अस्तित्व के
  243. 17:39–17:41बडदेक रूपे स्विकार करे पडई तची
  244. 17:41–17:46इद अहिना भेल, जे कोन सुन्यके परवाशत करवाक लेल से हो
  245. 17:46–17:48ये ता गीरा का वशक्ता पड़ेत ची
  246. 17:48–17:50यी अकल्पनी गंबीरे आची
  247. 17:50–17:52एक दाम
  248. 17:52–17:54मुदा अनुवाद एतेक नीक भेल ची
  249. 17:54–17:56सिद्धानत सब एतेक गंबीर ची
  250. 17:56–17:58तता थापी
  251. 17:58–18:00स्रोत समिक्षक बतारहल चतीन
  252. 18:00–18:02जी यी संसक्रन पूड न नहीं ची
  253. 18:02–18:04लिए बात ता चे
  254. 18:04–18:10अगर बाटाग गे समवाए बुजबाक अची अची अची अखत आजान्ते की इई ता पैग कमी नहीं जी जी पिते एक पैग काज काज का प्रबहाव के कम गडेत अची
  255. 18:10–18:14तो तो थो बगाग ग़ाज तो प्रबाव के कम ग़े थाची
  256. 18:15–18:18देखो इग कमी सब निष्चित रूपेईचे
  257. 18:18–18:22तो समीखषक बहुत सुक्श्मता सा एक रारे खानकिच सुए खाने चाथी
  258. 18:22–18:25मुदजा हम सब अनुवाद कर तो प्रबाव के लिए थाची
  259. 18:25–18:30तो तो बगाग बग खाज गद बखाग गद देताची?
  260. 18:31–18:34देखो यी कमी सब निष्चित रूपे ही चाए
  261. 18:34–18:38अँच समिक्षक बहुत सुख्ष्मता सा एक रारे खांकिट से अगचा थी
  262. 18:38–18:41मुदजा हम सब अनुवादा की तिहास पनजर दाली
  263. 18:41–18:46तो कोनो भी महान गरन्त्ख अनुवाद एक दिन में वा एक संसकरन में पूरन नहीं होता चे.
  264. 18:46–18:47आ, उतो समए लेए थे चे.
  265. 18:47–18:49इक कोनो दोष नहीं.
  266. 18:49–18:55बलकी, बहविश्वक संसकरन के लेल एक ता दिशा निर्देश वा बलूप्रिंट अची.
  267. 18:55–18:59ये 2026 के परवर्दित संसकरन अची
  268. 18:59–19:01समिक्षक्कर यी सुजाव,
  269. 19:01–19:03जे बहुविष्य में
  270. 19:03–19:06आलोच नात्मक द्वीभाशिक संसकरन निकाल जाए
  271. 19:06–19:08आ एक ता विस्त्रित शब्द्खोष दिल जाए
  272. 19:08–19:11ये ही काजक महत्व के बड़ावेत अची
  273. 19:11–19:13माने जे कमी अची
  274. 19:13–19:15उ आगक रास्ता देखा रहे लची.
  275. 19:15–19:16बलकुल.
  276. 19:16–19:19एक ता पहाड काटी कर रास्ता बनावल गय लची,
  277. 19:19–19:22आब उही पर आलकत्रा भिच्छाएब,
  278. 19:22–19:25आसाईन बोड, मने शब्द कोष लगाएब बाखी ऐचे.
  279. 19:25–19:27जे काज भे लचे,
  280. 19:27–19:29उक्रर, क्रान्तिकारी महेद्व,
  281. 19:29–19:33इज्ट्पूट कमीसा तनिक भी कमने होई तच्छे
  282. 19:33–19:35इद्ष्टिकों बहुत सही अची
  283. 19:35–19:37इबवद्धिग गर वापसी क्यात्राक
  284. 19:37–19:40एक ता महतपृन प्डाव अची
  285. 19:40–19:42अन्ति मनजिल नहीं
  286. 19:42–19:43तद समग्र रूप में
  287. 19:43–19:44नये कुसुमानजलिक
  288. 19:44–19:46की मेठली अनुवाद
  289. 19:46–19:51इसिद्द करतषी जियान कोनो काल वा बाशाक मोताज नहीं होई तचे.
  290. 19:51–19:52एक दम सही.
  291. 19:52–19:57इन वाद इग्यार्म्म् सताब्दिक कुशाग्र मस्तिष्क के
  292. 19:57–20:00एकईस्वम् सताब्दिक जिग्यासु मन संजोडई तची.
  293. 20:00–20:14जित्तर् कहाजार वर्ष्पहीने मित्लाक गुरुकूल में गारगी आयाग्गिवल के कि फुमी में गुजेई चल औए दिजितल युग में टे पीटीव कु माद्धिम से कुनो पातख अपन सक्रीम पर पडी रहाल आची.
  294. 20:14–20:22आई इसामर्त ची आची बहाशाक आइसामर्त आची एक ता निस्वार्त अनुवादग कक
  295. 20:22–20:29इप्रयास इस्सिद करत आची जे मात्र बहाशा केवल अटीत के याद करवाक सादन नही आची
  296. 20:29–20:35बलकी सन्सारक गंभीर से गंभीर विचार विमर्षक वाहन वंसके तची
  297. 20:35–20:39इज़ार्चा हमरा उईप्रारमभिक विचार पर वापिस लाभी देटेची
  298. 20:39–20:43उखजाना जि संगरहाले में बंदचर्व उआप गर आवी गेलगची
  299. 20:43–20:46मुदा एही गहन विष्लेशनाक अंथ में
  300. 20:46–20:50हम श्वूताक समखष एक उत्टेजक विचार चोड के जाएब जाएब
  301. 20:50–20:56या एह गण विशलेशनाक अंद में, हम श्वूताक समखश एक ता उतेजक विचार चोड के जाएभ चाहब.
  302. 20:56–21:00न्याया कुसु मानजली जका एक हाजार वर्ष पृान ग्रन्त,
  303. 21:00–21:03जिस सदियो से दूली खाएच्छल, औ आदूनिक भाशा विच्यान,
  304. 21:03–21:07अदनिक विग्यान, खबोल शास्त्र, वा दर्षनक आईन आईन सिद्धान्त चूपल होई,
  305. 21:07–21:11जे मात्र एक ता सही मात्र भाशिक अनवादक बादजोई रहलाची.
  306. 21:11–21:15रहा, इब बाश्चात दर्षन का अवदारना के इतेक सहज्ता से पुर्वानुमान काउसकईताची.
  307. 21:15–21:21पूरान पान्दूलिपी सब में जे एकनो कताउ तालपत्र पर वा पूरान संदूक में बन्द ची
  308. 21:21–21:27आदूनिक विग्यान, खगोल शास्ट्र, वा दर्षनक एहन एन सिद्धानत चूपल होए,
  309. 21:27–21:32जे मात्र एकता सही मात्र भाशिक अनुवादक बाद जोई रहल ची.
  310. 21:32–21:35आँ, इब बहुत पैग समबावना आची
  311. 21:35–21:40की इज समबव आची, जे जेक्रा हम सब आपन अतीत भुजी रहाल चीए
  312. 21:40–21:44उही में हम्रा सबक बहुविश्ख कुनजी नुकाया लची
  313. 21:44–21:47इएक ता एहन प्रष्नाची, जक्रा पर हम्रा सबक के
  314. 21:47–21:49गंबिर्ता से विचार करे पड़ित
  315. 21:50–21:54की उही अनेहार कोटरीक शीशा के तोडबाक समय आभी ने गेले ची
  316. 21:54–21:55इज़े सोचबाक विशाए ची

Plain text

अगर अगर अगर अगर जाबिया हम्रा सबक लक नहीं अछि। सही कालू, चाभिया अछि। अगर अपन जीवन में उतार नहीं सकते ची बलकोल, कारन अगर चाभी आ फम्रा सबखग लक नहीं अच्छे सही खालू, चाभी नहीं अच्छे अब भारतिय दर्षन अप प्राचीं ग्यानक संग सद्योस्वा कि चु अईने बहर हल आचे अग, इदव, तव आजुक चर्चा गजेंदर ताकृ दारा अनुदीत उदेना चार्यक जे हजार वरस पुरान संस्क्रिप गरन्त हैची न्याय कुसु मानजली अगर 2004 अ 2006 परिवर्दित संस्करन पर केंद्रे ताकृग. मुदा आजको इजे हमरा सबख गान विसलेशन आच्छेन अच्छेन से मुल रुब सां उही शीशक गेरा के तुर्वाक विषेम आच्छे. आजुक ता आजुक चर्चा गजेंद्र ताकुर दोरा अनुदित उदेना चार्यक जे हजार वरस पुरान संस्क्रिप ग्रन्त है थी न्याए कुस्वा अंजिली उकर 2004 ता 2006 परिवर्देद संसकरन्पर केंद्रेत है ता ची मने ये खेवल एक ता पोथिग भाशान्त्रन्द नहीं आची इं मेठली भाशाग दार्ष्निक परमपरा के टा पैग पुनर जागरना ची इक राहा ग्यान के टा बोद्धिक गर वापसी कही सकत ची जता ए उ आमोल यक हाजाना आब हमरा सब के अपन गरेक आगन में उपलब दची ता आई एक रादनी विस्तार से बुजी? आँ, दिको आग इ रोपकत इस थिती के एक दम स्पष्ट कर दे तची जवम सब नयाए कुस मानजली क इतिहासिक महतो पर तनिक द्रिष्टी डाली ने तव उद्याना चार दसम एगारम सदाभ्दीक मित्लाक एक ता आँन कुशागर दाशनिक चला आँ, दसम शताब्दिक बाद भूरल आच्छे. एक्दम, जिनका बार्तिया तर्क शास्ट्रक इस्टम्भ मानल जाईत आच्छी. वूनकर इज ग्रन्त आच्छी उ इश्वरक अस्थ्ट्व सिद्खर बाख लिल, बार्तिया दर्षनक सब से व्यवस्तित असुक्ष्म्रच्नाची बाप्रे, सब से व्यवस्तित? रह, मुदा विदम नात इच्जल, जिस सद्योंदरी ज्यान के वल संस्क्रितक पन्टिद सब खोट्री में बंद चल, वा कहो जे पाश्चात ते अकादमिक गेरा में अंग्रेजी अनुवादक रूप में सी मिट्चल. मैंने आम लोकरक पहुच से बहुत दूर? बलकुल. ता गजेंद्र ताकृ द्वारा केल गेल इजे मेठली अनुवाद अच्छेने, उ उ ही ज्यान पर मत्री भाशाक पुनरा दिकार अची इसिद करेत अची, जे उच्च कोटी का दाशनिक विमर्ष कलेल हम्रा सब के कोन दोसर भाशाक मुखा पेखषी है बाक अवष्चकता नहीं अची तए इजे पुनरा दिकार का बात आहा कहलू ने से हमरा इसोच्वा पर भीवष करेत आजी, जे ग्यान पर अखिर अग्धिकार कख्कर होईत. वह, इप पैग प्रष्न आजी. कारन, हम्मर स्रोट सामगरी में एक तबहुत रोचक बिन्दू आजी, जे ही अनुवाद कोनो पैग विष्वे विद्ध्याल आए, वा माने राज्ज प्रायुजित अकाद्मिक संस्त्ताक अनुदान से नई भेलाची सही बात अची एकर निरमान विदेः इपत्रिका का जे समनान्तर सहित यान्दूलन अची उकरन्तर गद वेलाची तजगन हम सब ग्यान का केंद्री करन का बात करेची तप्राया विष्वविद्याले सब के हिरेची तकी इस संस्ता बाया प्रयास एक तद सचेत क्रान्ती अची मने एक रा कुना देखी? आ, दिख हो, इआन्दोलनक मूल मर्म थेक समननतर साहित ते आन्दोलन इए अस्तापित करेत अची ज्यान पर कोनो एक ता खास अकादमिक वर्गक एक अदिकार नहीं भसके तच्छे आँ मने कोनो एक यी ता गूड की निंट्रन नहीं? एक दम जखन ज्यान केवल विष्प विद्यालेएक अनुदान आप पाथ्ध्रमक अदिन रहे तच्छी ने तकन उ आम जन मानस्सं कत्थू नक्थू कती जाएत छी। आई अनुवाद ई मिठक के से हो तोडे तछी जी मैठली के वल गीट, कत्था, वा कविताक कोमल बाशा आचे आँ, इग ता बहुत पेग दारना आचे लोकक भिल्कुल! मुदा इ अनुवाद प्रमानित करे तची, जे मैठली प्रमान प्रमे विमर्ष जका, अट्यन्त रुक आर कतिन तरक्षास्त्रक लेल से हो, पुड रुपेन समर्त भाशा जे. मने दर्जनाग भाशा? आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� तच्छ इस्टबक बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्ः बाद्� अगरा जानी भूच के हैकर्स कब भीच चोडी देल जाए. जाएस ने अगरा इस्ट्रेस टेस्ट केल जासके. लेखख अपन सिद्धान के चारो दिस्सों हम्ला करवाक लेल एक दम खुजल चोड़ देई चतीन. यह ता अदालत जगा आची, जदे बचाओ पक्ष्क वकिल आपन सबसो मस्वुद तर्क देतची, अद्तकन अभी योजक अग्रा एक एक कग काटे तची. आँ, आहा के यी इस्ट्रेस् टेस्ट आ अदालत्वला तुलना तो ग्रन्त्ख कार्यप्रनाली के सतीक रूपिन दर्षावे तची. इप्रक्रिया के साहित्ति सिद्धान्त में रूशी विचारक मिक्हाल बाख्तिन कर बहु स्वर्ता सो जोडी कर देखाल जासके तची. विरोदि स्वरक उपस्तिति स्यो हो अची अचा मैंने सबह के बाद सूनल जजी इक दम अचसर हम सब देखा ची जि कोनो विमर्ष में लेक्ख अपन तर्क के सही साभित कर बाख लिल विरोदिक तर्क के जानी भूज कक कमजोर दिखा देख चतिन जगरा वी बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बा� तदेखु चार्वाग दर्षन का जे देज़े तन्यवाद अखर उदारन लिया. चार्वाग का इस सिद्धान तचे जे चेतना कवत्पती केवल शरीरिक भूटिक तच्व सबसम होई तचे. भूटिक तच्व? मने? बवोदिक तत्व सबसूं होई तचे बवोदिक तत्व, मने? आन जन प्रत्वी, जल, अगनी वायू जन पान, चूना, और कत्धाक मिलास्सन लाल रम बने तचेने तहीना, बवोदिक तत्व सा चेतना बने तचे आत्माजका कुन अलक तत्व नहीं जे उ, मने शरीर से बाहर कुछ नहीं हाँ, आउदेयाना चार्या इटर्क पर हसाइत ने चती उ, एक्रा पूरन गंभेर्यो कसंटापित करे चते उकर बाद, उ, उई टर्क भी टर्पस कव, उकर खंदन करे चती जै खेई केवल बहुतिक तत्वसा चेतना आवे तची तब म्रित शरीर में उ चारो तत्वत रही ते आचे तक हन चेतना कियक लुप्त बहाजाई तचे बाप्रे ये तब बहुत गहीर बाद आचे बिल्कोल इज समवादक जे दाचा आचे ने उ पात्ध के स्वेम विचार करभालेल प्रेरिद करेताची आर एते अनुवादक कब वूमिका स्योता बहुत महत्लपून बहाजाए थाचे गजिंद्र ताकोर अपन अनुवाद में इस समवादात्मक शैली के बाशा के लैसन सजीव बनाने चती आँ अद्वादक का जे ते बहुत उट्क्रिष्ट आचे जिना श्रोथ मे देल आची जे तक्हन प्रष्न उठे तची कहल जा सके तची मुदा इमत टीकएत नहीं आची जे का वाक रचना सा इवाद-विवाद के इग्दम नाटके रूब बेटर आचे एक दम नाट की है जगन नी पडल जायतची तब लागत अची जे दूटा बोद्धिक महारती आमने सामने बैसकर शास्टरात कर रालजती हाँ आई य समवाच शेली कारन ग्रन्त में एक दा अदबुत रस पैदा होएत ची य बोद्धिक युद्ध जक्रा हम सब तर्क वीर रस कही सकए च्ये, अकर अंत गमन्द में नहीं होए तच्यी. तच्यं कते होए तच्या. जखन तर्क सुख्ष्मता अपना चरम पर पहचाई तच्ये. जखन विरोदिक सब संच्या यसमाप्त बहुजाई तच्यी. तक्हन ग्रन्त शान्द्रस आब भक्ती में परिनत भोजाईता दी वाज अन्तता इसब्ता दाशनि ग्यान इश्वरक चरन में अर्पिद भोजाईता ची इताई तर्क अपने आप में साद्ध्यन नहीं आची याल की यीश्वर प्राप्तिक एकता सादन मत्र बनी जाईता ची. मने मस्तिषकक पुरन व्यायाम भलाग बाद, आत्माक विष्राम. आप, एक दम सही शब्द कहलो हूँँँ. यात्रा त अदबूत अचे. मुदो आज अखन हम सब एहन जटिल दार्ष्निक युधद कबात करेजची ते एक तब रहुत सहथ प्रष्नूथ है तच्छ. की? जे एक हाजार वरष पुरान संस्क्रितक एह वैचारी गामभीर्यके आदूनिक मेठली में उतारवतक एहन रहल होएत. इद अद्वादक के लेल एक तदोदारी तर्वार जगाए हुएत आँ इद अच्छे ले इष्वोट समगरी अद्वादक कलापर प्रकाष्टल लेई तची अद्देशी करन बनाम विदेशी करन का चर्चा करे थची तो इवदारना की अच्छी देखो अनुवादक लोकनिक सामने सदिकहन एक तद्ध धार्म संकत रहेत आची जे ख्रेट्रिक्ष लायान माकर से लगका आदूनिक सिद्धान्त कार लोरेंस वेनुती दरी चर्चा मे रहे लगची रहा हा मुल प्रष्नी इए ची जे की अनुवाद मे पाटके पाटक कस विद्धानुसार पुर्नताः अस्तानिया वा देशी बना दिल जाए, जाए सा पाटक के लागे जे इग्रन्त हूंकर अपन भाशा में लिखल गेल अची. एक रा देशी करन कहे चती. अच्छा, माने, दोमेस्टिकेशन. वाग ग्रन्त का मुल संस्क्रित, वा विदेशी स्वाद के बरकरार राखल जाए, जाही सा पात्ख के इबुज्मा में आवे जे ओएक ता भिन्न, काल्खन्द अ संस्क्रितिक चिन्तन पडी रहल आची. जेक्रा विदेशी करन वा फोरेनाइशेशन कहल जाईताची बलकल, आठाकुर जी यताई मद्ध्यम मार्गपने ने चेथ ता इस शन्तुलन कोना काज करेट आची कारन स्रोत में किछु विषिष्ट उदाहरन देल गेल जी जिना गंगायाम गोशव, का अनुवाद गंगामे गोट केल गेल अची अशश्श्रिंग कल लेल, करहाक सींग लिखल गेल अची रह, यी बहुत रोचक अची ये ते गोट शब्द ता, सीधे मितला गाम गर सजुडा लची इपुर्नत्देशी करन आची जे पाथके एक दम अपना लगगत आची. बिल्कोल. मुदा दूसर दीस, व्याप्ती, समवाए, प्रत्योगी जका बहारी संसक्रत पारीभाशिक शब्द सब के अनुवाद मे उहीना राकले लगे लगी. तहीना राकल लगे लगी. तए तई विदेशी करन लागी आवी आची मुदा हमर प्रष्न इए आची जे जे व्याप्ती वा समवायज़का बारी शब्दावली राखल जायत तब की इसामाने पाथके समथ सा बाहर नहीं बहजायत की एक रा सरल भाशा में जिना सम्वाय के केवल सम्वाय ने लिखल जासक अच्छल? इप्रश्न अच्छल प्रासंगे कच्छे आगाखा मुदा दार्ष्नेक गरन्त्ख अनुवाद में पारिभाशिक शब्द सब के संग चेर्चाड का लिए नहीं जासके तचे की एक नहीं? अगर बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान बाद़ान ब उगराई उगराएक ख़ाई के बादिग स्वाद्ख तर्ले करव नहें अची बलकी पाथक कब बध्धिख स्थर के उपर उपर उठावे आची इबाद बलकुल स्पष्ट करेत आची जटिलता आवष्षक आची बड़क बाद्ख कब बध्दिक स्थर के उपर उठावाय जी इब आत बलकुल स्पस्ट करे तजी जटिलता आवश्षक आजी मुद्द तकन इशु पाच्छे कोना बने तजी करन भारी शबदक बोज से तो वाक ये तुटल जाका लागे लागत अदतकन यी सु पाच्छे कोना बने तची, करन भारी शब्दक भोज से तो वाख ये तूटल जाका लागे लागत. आद आद आद मेतली बाशाक आपन प्राक्रतिक वाख के सन्रचना का आजाई बैट ची. मेतलिक जोंता वा जेसे वाला जे ले बद्वाग के सन्रचना आचीने उो उई बारी संसक्रित शब्द सब के चारो दिस एक ता गद्दा जका काज करे तची गद्दा जका, मने कुष्निं एक दम, जगन वाख्यक ले आजक आपन मात्री भाश्षा कोई तची तकन भीच मे आयल बारी दर्षनिक शब्द सो प्रवाह मे भुजहा मे आए जाएत छी. वाआ. इएक ता कुशल अनुवादकक पहचान आची, जे उ दर्षनिक गामभीर्य, आब भाशाई प्रवाहक भीच एक ता प�लक निरमान करे तची. इप पुलक बात्तम बहुत सती कची, तै आ आ अब उईक हन्त्दिस चलेत ची, जे एही चर्चाक सबसे बिस्मै कारी बाग ची औमरलेद. इश्रोथ समगरी बतार रहल ची, जे इग्रन्त, जे एगारामा शताभदी में लिखल गेल चल, अई आदूनेक पश्च्मी दर्षन अब आब आश्चा विग्यान का अनेक सिद्दान्ता सबक पहने हे पुर्वानुमान का लेत है जी एक दम यी तब सबसे गजब बात अथ आद्छे पन्चम स्थबक में इश्वर सिद्धिक आप्टा प्रमान दिल गे लती जिना कार्यात आयोजनात इआ इआदूनेक कौंटर्फक्ष्वल रीजनिंग मने प्रतित तत्यात्मक तरक आउस्टिन सरल का स्पीच अक्ट छोरी से आश्चर ए जनक रुप से मेल काईत अची हम सब एक एक कईगर भूज़ब तदेख हो नियाए दर्षनक पन्चम स्तबक इश्वर सिद्धिक चरम शिक्धर आची, एते उदेयाना चार्या आच्टा तार्किक आदार देच्छती. जिना आहा कारेयात का चर्चा केल हूँ एकर अथ है ची, जे कोनो भी कारे, मने अप्ट्ट, कबाचा कोनो करता, कोज वा मेकर होई तची. जिना गाला आचे तं कुमार होईत. बलकुल, ता समपुर ब्रमहांद एक ता कारे आची, ये बनाल आची, ता एकर कोनो-नो-कोनो करता हो बाख चाही, जे इश्वर आची, दोसर आची आयोजनात्मक, माने संझोजन. संझोजन माने जोडव. अनु सब अपने आप जूडी के स्रिष्टी नहीं कर सके ताछी वूनका दिशा देवाक लेल एक तचेतन तत्वक आवश्ष्टा होई तची ये तरकसब उही समय देलगेल चल, जकन आदूनिक विग्यानक यानक अगर नाद़ा बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद जब हाशा केवल वणन नहीं करे तची, इग काज ज़ो करे तची. बलक्क। इग आर हम शताब दिए दर्षन में, कोन आची? हाँ. इज चछ मुजे अदबुद समान अंतर आच. उदेना चार्या जखन, वेद मनत्र आए विदी, मैंने, इंजंख्शन्द्वा कमाँद्श के स्वरूपक विष्लेषन करेच थीने, तो उ इस पष्ट करेच फीन, जे वेद के आग्या वाचक्यर केवल सुचना नही देई तची. तखं की करेट ची? इवाक्या श्रोता के वितर एक ता प्रव्रित्ति ज्यान उत्पन्न करेता ची जक्रा सा मनुश्ष कर्म कर्वादिस प्रेरित होईता ची अस्टिनक के जे इलोक्छौशनरी अक्ट का मुल अवदारना आचे जे शब्द कधेब आपने आपने एक ता क्रिया आचे उदेना चार्या उक्रा प्रेरना अश्वध भावना करूप में बहुत पहीने स्थापित कर देने चल हैं इसुनिकतर रोम-रोम सिहरी जाएत ची जे एक हजार वर्ष पहीने हमर दार्षनी कस सब भाशा विग्यानक उही परद्धरी पहुची गेल चला जदे पश्च्ट्म आई पहुची रहालाची. एक दम, हमर बवद्देख शम्ता काई प्रमान आचे. आद दोसर जे आदूनिक सिद्दान्त कक बात भेल प्रतित तथ्थ्यात्मक तर्क वा कुंटर्फक्ट्वल्रीजनिं इ की अची आ उदेनाचारे एकर प्रियोग कोना करे चथ? प्रतित तथ्यात्मक तर्क का अची जे कोनो वस्तुस्त्तिती, जों दोसर रुप मेरहत तक की होए त? एते उदेनाचार्य एक्रा नास्टिक सबक तर्क कगड़न में प्रवोग करे चते जी. कोना? दिखो नास्टिक कहत जी जे इश्वर नहीं आची. उदेनाचार्य पुछे चती जे आहा जेक्रा नहीं कही रहल ची, अगर कोनुन कोनो अवदारना ता आहाक मस्तिष्क में होएद? आप, सबहावी कची. जाँ कोनो वस्तुक अस्तित्ववाव अवदारना विलकुल असमभव अची, जिना गोल चोकोर, माने सक्वेर सरकल, ता आहा उकर खन्दन सो हो तारकिक रूपे नहीं कर सकव. इश्वर नहीं अची कबाक लेल से हो, पहिले इश्वरक अवदार नामाने, कुन्सेप्त अवगोड के एक तारकिक कोटी क्रूपे माने पडेट ची. इई आदूरेक विष्लेशनात्मक दर्षनक बहुत निकत अची जदे खन्दन करवाक लेल से हो विष्यक अस्तित्व के बडदेक रूपे स्विकार करे पडई तची इद अहिना भेल, जे कोन सुन्यके परवाशत करवाक लेल से हो ये ता गीरा का वशक्ता पड़ेत ची यी अकल्पनी गंबीरे आची एक दाम मुदा अनुवाद एतेक नीक भेल ची सिद्धानत सब एतेक गंबीर ची तता थापी स्रोत समिक्षक बतारहल चतीन जी यी संसक्रन पूड न नहीं ची लिए बात ता चे अगर बाटाग गे समवाए बुजबाक अची अची अची अखत आजान्ते की इई ता पैग कमी नहीं जी जी पिते एक पैग काज काज का प्रबहाव के कम गडेत अची तो तो थो बगाग ग़ाज तो प्रबाव के कम ग़े थाची देखो इग कमी सब निष्चित रूपेईचे तो समीखषक बहुत सुक्श्मता सा एक रारे खानकिच सुए खाने चाथी मुदजा हम सब अनुवाद कर तो प्रबाव के लिए थाची तो तो बगाग बग खाज गद बखाग गद देताची? देखो यी कमी सब निष्चित रूपे ही चाए अँच समिक्षक बहुत सुख्ष्मता सा एक रारे खांकिट से अगचा थी मुदजा हम सब अनुवादा की तिहास पनजर दाली तो कोनो भी महान गरन्त्ख अनुवाद एक दिन में वा एक संसकरन में पूरन नहीं होता चे. आ, उतो समए लेए थे चे. इक कोनो दोष नहीं. बलकी, बहविश्वक संसकरन के लेल एक ता दिशा निर्देश वा बलूप्रिंट अची. ये 2026 के परवर्दित संसकरन अची समिक्षक्कर यी सुजाव, जे बहुविष्य में आलोच नात्मक द्वीभाशिक संसकरन निकाल जाए आ एक ता विस्त्रित शब्द्खोष दिल जाए ये ही काजक महत्व के बड़ावेत अची माने जे कमी अची उ आगक रास्ता देखा रहे लची. बलकुल. एक ता पहाड काटी कर रास्ता बनावल गय लची, आब उही पर आलकत्रा भिच्छाएब, आसाईन बोड, मने शब्द कोष लगाएब बाखी ऐचे. जे काज भे लचे, उक्रर, क्रान्तिकारी महेद्व, इज्ट्पूट कमीसा तनिक भी कमने होई तच्छे इद्ष्टिकों बहुत सही अची इबवद्धिग गर वापसी क्यात्राक एक ता महतपृन प्डाव अची अन्ति मनजिल नहीं तद समग्र रूप में नये कुसुमानजलिक की मेठली अनुवाद इसिद्द करतषी जियान कोनो काल वा बाशाक मोताज नहीं होई तचे. एक दम सही. इन वाद इग्यार्म्म् सताब्दिक कुशाग्र मस्तिष्क के एकईस्वम् सताब्दिक जिग्यासु मन संजोडई तची. जित्तर् कहाजार वर्ष्पहीने मित्लाक गुरुकूल में गारगी आयाग्गिवल के कि फुमी में गुजेई चल औए दिजितल युग में टे पीटीव कु माद्धिम से कुनो पातख अपन सक्रीम पर पडी रहाल आची. आई इसामर्त ची आची बहाशाक आइसामर्त आची एक ता निस्वार्त अनुवादग कक इप्रयास इस्सिद करत आची जे मात्र बहाशा केवल अटीत के याद करवाक सादन नही आची बलकी सन्सारक गंभीर से गंभीर विचार विमर्षक वाहन वंसके तची इज़ार्चा हमरा उईप्रारमभिक विचार पर वापिस लाभी देटेची उखजाना जि संगरहाले में बंदचर्व उआप गर आवी गेलगची मुदा एही गहन विष्लेशनाक अंथ में हम श्वूताक समखष एक उत्टेजक विचार चोड के जाएब जाएब या एह गण विशलेशनाक अंद में, हम श्वूताक समखश एक ता उतेजक विचार चोड के जाएभ चाहब. न्याया कुसु मानजली जका एक हाजार वर्ष पृान ग्रन्त, जिस सदियो से दूली खाएच्छल, औ आदूनिक भाशा विच्यान, अदनिक विग्यान, खबोल शास्त्र, वा दर्षनक आईन आईन सिद्धान्त चूपल होई, जे मात्र एक ता सही मात्र भाशिक अनवादक बादजोई रहलाची. रहा, इब बाश्चात दर्षन का अवदारना के इतेक सहज्ता से पुर्वानुमान काउसकईताची. पूरान पान्दूलिपी सब में जे एकनो कताउ तालपत्र पर वा पूरान संदूक में बन्द ची आदूनिक विग्यान, खगोल शास्ट्र, वा दर्षनक एहन एन सिद्धानत चूपल होए, जे मात्र एकता सही मात्र भाशिक अनुवादक बाद जोई रहल ची. आँ, इब बहुत पैग समबावना आची की इज समबव आची, जे जेक्रा हम सब आपन अतीत भुजी रहाल चीए उही में हम्रा सबक बहुविश्ख कुनजी नुकाया लची इएक ता एहन प्रष्नाची, जक्रा पर हम्रा सबक के गंबिर्ता से विचार करे पड़ित की उही अनेहार कोटरीक शीशा के तोडबाक समय आभी ने गेले ची इज़े सोचबाक विशाए ची

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