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तत्त्वचिन्तामणिमे_अभाव_ईश्वर_आ_उपमानक_तर्क.m4a

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Collection
Part 11 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 11
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.794988)
Duration
1:59
Source
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Timestamped machine output

  1. 0:00–0:08इगंगेश उपाद्ध्याए रचित महान ग्रन्थ, तत तो छिन्ता मनी पर आहाक स्रोथ समगरीक के एक तवरित सारानश अची.
  2. 0:08–0:16चोव्दहमा शताब दिक मित्लाक इग्रान्तिकारी ग्रन्थ, नव्यन्याई दर्षन के एक आहें तारकिक आदार प्रस्त॥ करे तची,
  3. 0:16–0:21जिस सत्य आयातार्त के दिखबाक आहाक द्रिष्टी कोण पुन रूपेन बदली सकेता ची.
  4. 0:21–0:26तबहले एक ता बद्ड रोचक विचार सा शूरू करी ची अबहाँ,
  5. 0:26–0:28यानी कुनो चीजक नहीं रहेब.
  6. 0:28–0:32नव्य न्याय दर्शन मेंना अबहाँ केबल कुनो खाली पन नहीं आची
  7. 0:32–0:37बलकी एकरा एक्ता स्वतन्त्र आ एक्दम वास्तविक कारन मानल गेला ची
  8. 0:37–0:40सुचु जअ आहा कुनो पजल मिला रहल ची
  9. 0:40–0:43तो उही में हेरायल तुक्डाक अबहाँ उद्वे वास्तविक आची
  10. 0:43–0:49जितक उपस्तित तुक्डा के एक ता कोनो काज पूरुन हो मेले बादक सबक अबहाव से हो
  11. 0:49–0:51एक ता अनिवार्ये कारन थीक
  12. 0:51–0:55तो सर इदर्षन इश्वर के कोनो अंदा आस्था से नहीं
  13. 0:55–0:57बलकी विषुद तरक संसिध्ध करेता ची
  14. 0:57–1:03दिखु जई दुन्या एक्ता कारे है, तब गलाकले कुमारजका एकर कोनो करता ता अवष्षे हैता.
  15. 1:03–1:09मुदा एते यहां पूछी सकेची, कि उही करता के काज करबाकले भहतिक शरीर का अवष्वकता नहीं चनी,
  16. 1:09–1:12तएकर सीथा उत्तर आची जे इश्वर निराकार चती,
  17. 1:12–1:19आखेवल आपन शाश्वत ग्यान इच्छा आप प्रयास सब बना कोनो शरीर के स्रिष्टिक निरमाड करे चती
  18. 1:19–1:23अन्त में गब करे ची उपमान यानी तुलनाच
  19. 1:23–1:26इणव्वस्तू के बुजबाक एक ता बिलकल अलक सादन आची
  20. 1:26–1:31जे ना आहा सुनलो जे गवाए या नील गाए गाए जगाग होए तची
  21. 1:31–1:36आज जंगल मे उक्रा देखित आई आहा तुरन्त बुजी जाएची जे उशब्द क अर्थ की थिक
  22. 1:36–1:40मुदा आहा सुची सके ची की खी एक एक ता अनुमान नही थिक
  23. 1:40–1:49बिल्कुल नहीं कि अक्ता इ अनुमानक बिना सोजे एक ता नवषषड आ अकर अर्थ के बीच सीदा शक्ती समवंद इस्थापित कडदे तची.
  24. 1:49–1:52नव्वे नैए दर्शन केवल तरकख जाल नहाची
  25. 1:52–1:56बलकी इसत्तिक परिक्षन असन्सार के यतार्त के बुज्वाग
  26. 1:56–1:58एक ता पुन वेग्यानिक अत्तार्किक विदिदिथी

Plain text

इगंगेश उपाद्ध्याए रचित महान ग्रन्थ, तत तो छिन्ता मनी पर आहाक स्रोथ समगरीक के एक तवरित सारानश अची. चोव्दहमा शताब दिक मित्लाक इग्रान्तिकारी ग्रन्थ, नव्यन्याई दर्षन के एक आहें तारकिक आदार प्रस्त॥ करे तची, जिस सत्य आयातार्त के दिखबाक आहाक द्रिष्टी कोण पुन रूपेन बदली सकेता ची. तबहले एक ता बद्ड रोचक विचार सा शूरू करी ची अबहाँ, यानी कुनो चीजक नहीं रहेब. नव्य न्याय दर्शन मेंना अबहाँ केबल कुनो खाली पन नहीं आची बलकी एकरा एक्ता स्वतन्त्र आ एक्दम वास्तविक कारन मानल गेला ची सुचु जअ आहा कुनो पजल मिला रहल ची तो उही में हेरायल तुक्डाक अबहाँ उद्वे वास्तविक आची जितक उपस्तित तुक्डा के एक ता कोनो काज पूरुन हो मेले बादक सबक अबहाव से हो एक ता अनिवार्ये कारन थीक तो सर इदर्षन इश्वर के कोनो अंदा आस्था से नहीं बलकी विषुद तरक संसिध्ध करेता ची दिखु जई दुन्या एक्ता कारे है, तब गलाकले कुमारजका एकर कोनो करता ता अवष्षे हैता. मुदा एते यहां पूछी सकेची, कि उही करता के काज करबाकले भहतिक शरीर का अवष्वकता नहीं चनी, तएकर सीथा उत्तर आची जे इश्वर निराकार चती, आखेवल आपन शाश्वत ग्यान इच्छा आप प्रयास सब बना कोनो शरीर के स्रिष्टिक निरमाड करे चती अन्त में गब करे ची उपमान यानी तुलनाच इणव्वस्तू के बुजबाक एक ता बिलकल अलक सादन आची जे ना आहा सुनलो जे गवाए या नील गाए गाए जगाग होए तची आज जंगल मे उक्रा देखित आई आहा तुरन्त बुजी जाएची जे उशब्द क अर्थ की थिक मुदा आहा सुची सके ची की खी एक एक ता अनुमान नही थिक बिल्कुल नहीं कि अक्ता इ अनुमानक बिना सोजे एक ता नवषषड आ अकर अर्थ के बीच सीदा शक्ती समवंद इस्थापित कडदे तची. नव्वे नैए दर्शन केवल तरकख जाल नहाची बलकी इसत्तिक परिक्षन असन्सार के यतार्त के बुज्वाग एक ता पुन वेग्यानिक अत्तार्किक विदिदिथी

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