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Cintamani_Gavaya_Sabda_Maithili_Animated.mp4

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Part 11 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 11
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  1. 0:07–0:11सुत्रदार प्रवेश करेत अछि.
  2. 0:11–0:19काल ही राटी एही सबहा में गंगेश उपाद्याए चारी प्रमान में स्दूएके कसोटी पर कसलनी, प्रत्यक्ष्.
  3. 0:19–0:27जक्रास हम शंक्खे देखेथ छी, आ अनुमान, जक्रास हम दूासा अगिन दरी पहुचेथ छी.
  4. 0:27–0:31मुदा न्याए चारी प्रमान मानेत अची, दूई नहीं.
  5. 0:32–0:41आई राती बाकी दूएग भारी अची, आओ दूनु एक ही प्रष्नक दूई रूप थिक, शब्द आपन अर्थ दरी कोना पहुचेत अची.
  6. 0:41–0:47एक्ता बच्चा गाई शब्द सूनेत अच्छी अ एक्ता पशु दिस ताकेत अच्छी,
  7. 0:47–0:52औही ध्वनी आ उही पशुक भीचको अद्रिष्ष डोरी के बान है लक,
  8. 0:52–0:54आउ कोना जानल जाइत अच्छी?
  9. 0:54–1:00आजखन कोनो शब्द एहन वस्तुखे तु अची जे सुन्निहार कहीो नहीं देखलक,
  10. 1:00–1:04एक ता वनक पशु, एक ता दूर देषक रीती,
  11. 1:04–1:09एक ता वेदक देवता, तकन अ दोरी कोना पक्डल जाएत अची.
  12. 1:09–1:15पहल उत्रक नाम उप्मान थिक, साद्द्रिष्या संज्यान,
  13. 1:24–1:26अव वज तार होई बाक अची
  14. 1:26–1:30आमेच पर राखल अ दोसर मुर्टी पर द्यान राखू
  15. 1:30–1:34उ पशुजे गाई जका अची मुदागाई नहीं
  16. 1:34–1:38अगर नामे ही सबहा मे के अ अखन दरी नहीं जनैत अची
  17. 1:38–1:42सान समाप छोई छोई तसब के अ जानत
  18. 1:42–1:44आखोना जानत
  19. 1:44–1:47ये आई रातिक समपुल वाद थेक
  20. 1:47–1:53गंगेश आसीन चदी
  21. 1:53–1:59एक्ता वन्वासी प्रवेश करेत अची, प्रडाम करेत अची
  22. 1:59–2:03आचार्य रहम उत्तरक वन्स आयल ची
  23. 2:03–2:33ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
  24. 2:33–3:03वाद खुजी नहीं सकेच्छल तुछ वाद खुछ तुछ वाद खुछ वाद खुछ वाद खुछ वाद वाद खुछ वाद वाद खुछ वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वा�
  25. 3:03–3:11तेसर उहिक शन इनिश्चय उप्जल ये हो पशुत्धिक जक्रा गवए शब्द कहेत अची
  26. 3:11–3:21इते सर ज्यान कत्यसं आयल प्रक्यक्षस नही कि एक तं आखी केवल सिंग आखूर देख बैत अची शब्दक अर्ठ नही
  27. 3:21–3:24उख्रा उवाखेती निष्चे कहीो नहीं देए
  28. 3:24–3:27ये हो ग्यान ख्यान ख्यक्जक्रा हमर शास्त्र उप्मिती कहेत अच्छी, आउकर करन उप्माँ
  29. 3:27–3:31उख्रा उवाख्यती निष्चे कही अ नहीं देः
  30. 3:31–3:36ये हो ज्यान �theक जक्रा हमर शास्त्र उप्मिती कहेत अख्छी
  31. 3:36–3:44आउकर करन उप्माँ उख्छेत आए एह उस्ठान � theक गंगेश जते आख समप्रदाय आ हमर समप्रदाय
  32. 3:44–4:14ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
  33. 4:14–4:44वो बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद ब�
  34. 4:44–4:48तकन अनेक कहु अनन्त साद्रिश्य, सन्योग जका,
  35. 4:48–4:50हरेक दूरी आदार में बसल
  36. 4:50–4:52तकन दो सर्फास, पहिल सतीद
  37. 4:52–4:55ज़ साद्रिश्य, सन्योग जका दूनु आदार में बसल
  38. 4:55–4:57तन गव्य में बसल
  39. 4:57–4:59तकन दो सर्फास, पहिल सतीद
  40. 4:59–5:06तक्हन अनेक कहु अनन्त साद्रिष्य, सन्योग जका, हरेक दूरी आदार में बसल.
  41. 5:06–5:09तक्हन दोसर फास, पहिल सतीद.
  42. 5:09–5:13ज़ साद्रिष्य, सन्योग जका दूनु आदार में बसैत अच्छी,
  43. 5:13–5:18तनगव्य में बसल, उ साद्रिष्य गाय में से हो बसल अच्छी.
  44. 5:18–5:24अखन व्यापारी के वन में ताड करू, जतवे गाई नही अची, केवल गवई.
  45. 5:24–5:28उनक अखी गव्यके चुभगत अची गाई के नहीं.
  46. 5:28–5:35जव उ साद्रिश्य के देखगध चती, आउ उ साद्रिश्य गाई में से हो बसध अची, तकचन हुन का अनुप.
  47. 5:35–5:50समबलैत, हमर कुमारिलग कारिका एकता सुछम उत्तर दैत अची, साद्रिष्य कोनो नाव पदार्त नही, अपितु बहुत रास साजजा धर्मक समोधेक, अव्यव गुन आकर्मक समान दर्म, जे मिलिक साद्रिष्य कहबैत अची.
  48. 5:50–5:54जेना बहुत गाछ मिलिक वन कहबैत अची
  49. 5:54–6:00बहुत मिलैत अची माने बेसी साजाद्धर्म, कनी मिलैत अची माने कम.
  50. 6:00–6:03आब आहा हमर गर दिस आदारस्ता आभी गेल हु,
  51. 6:03–6:06समोज कहल हुता आप्धम पदार्च छोरी देल हुक,
  52. 6:06–6:10मुदाजतै आहारुकल हूँ तू तिकव कत्हिन अची
  53. 6:11–6:13तूई कमलक फूल लिए, एक ही जातिक,
  54. 6:13–6:16जक्रामे गंबा जोग अव्यव भेदे नहीं,
  55. 6:16–6:19तैयो लोग कहेत अची इप फूल औही फूल सन अची
  56. 6:20–6:21कोन समोज?
  57. 6:23–6:25आहमर प्रिय उदाहरन सुनु,
  58. 6:25–6:30जे हम अपन ग्रन्त मे देने ची एक्ता हातिक बच्चा अ एक्ता गद्धा.
  59. 6:30–6:36शरीरक बनावत में कत्फु मेल नहीं न अव्यव्त न गुन न अकार.
  60. 6:36–6:42तयो लोक रन्सआत कहेत अची ये गद्धा हातिक बच्चा जका खहेत अची.
  61. 6:42–6:46उते कों साजा दर्मक समो?
  62. 6:46–6:51केवल खईबाक दंगक एकता साधरिश्य, एकता धर्म समोज नहीं.
  63. 6:51–6:59आग परिभाशा उतै पहुष्भे नहीं कर आप अची जताय लोकक जी रोस पहुचात अची.
  64. 6:59–7:05तकन साधरिश्य की खेक, आचार्य, जन आप्फम पदार्त, नधर्मक समोज.
  65. 7:05–7:09अख्रा कुनो नव वस्तुक आवष्षकते नहीं
  66. 7:09–7:18गववे गाएस न अच्छी का अर्थ एद बे गव्यमे बहुत रास अद्वर्म अच्छी जे गाय मे से हो अच्छी आतायो गववे गाएस बिन अच्छी
  67. 7:18–7:25तद्विन्त्व सहित तद्गत भुयो दर्म वत्व वहिसन भिन्रहितो वोकर बहुत दर्म से युख्त होए.
  68. 7:25–7:36सात पदार्त पर्याप चल, आतम एक ता अनावष्यक अतितिछल जक्रा हम द्वार पर्स विदाकर अट्छी, आद्रक सं भुदा भोजन भिनु.
  69. 7:36–7:39पदार्त्ठारी गेल हु वानी लग्छी
  70. 7:39–7:42मुदा प्रमान अखन हो हमर अची
  71. 7:42–7:46उ ज्यान जे व्यापारी के लेल आ उक्रासा आगु
  72. 7:46–7:48गाम में लोटिक जे ग्यान होएत
  73. 7:48–7:50हमर गाय हो ही गव्यसन अची
  74. 7:50–7:52से आहा कोन प्रमान्स देब
  75. 7:52–8:22प्रत्यक्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्�
  76. 8:22–8:25अव भेटी जाएत अची गरे में
  77. 8:25–8:40अम दूई अची के आमने सामने टाड देखने ची, तूनूके एक दोस्रासन, एक ही अखिसन, अद्यस इसामाने व्याप्ती अची, जे जक्रामे बसल साद्रिष्षक प्रतीवोगी अची, से अख्रासन अची
  78. 8:40–8:51आब अनुमान ताड करू पक्ष्गाई साद्यगव्य साद्रिष्ष्व, हे तुगव्यमे बसल साद्रिष्ष्व प्रतिवगिता द्रिष्टान्त भाई हात्थिख भहिन हात्थिए.
  79. 8:51–8:55जान भेटिगेल आखूनो नव प्रमान भिनु.
  80. 8:55–9:04जक्रा आहा अर्था पत्ती वास्वतन्त्र उप्मान कहेट ची, से हम्रा लेके वियतिरे की अनुमानक एक ता वेश्थेग.
  81. 9:04–9:10बैसेत आदा प्राजत आदाचकित तकन आहा उप्मान के भिल्कुले काटी देल हूँ.
  82. 9:10–9:14अपने सम्प्रदायक तेसर प्रमान के?
  83. 9:14–9:23तीक विप्रीत हम वोक्रा कातल हू नही, हम वोक्रा वोकर अपन काज्देल हू, जे आई दھरी के अ तीक सन नही चिनहने चल.
  84. 9:23–9:29आव वोक्रा चिनहबास पहिने हम्रा अपन ही गरक एक ता पुरान दिवाल गिरे बाक अची.
  85. 9:29–9:59ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
  86. 9:59–10:12आदि वरनन प्रषंसा नही थेक पशू मे सबस नीच उजीव जकर गरगनी भेजाई नमहर, खोर नमगर आहिलाप, जे कडामुलायम दूनु तेहनी चिब बैत अचे आजकर देजुमस भरल.
  87. 10:12–10:18यात्री उत्तर पहुचल, एहन पशू देख्लक, आनिश्चे भेल एह गदा थेख.
  88. 10:18–10:21आप जयन तक परिभाशा लगा.
  89. 10:21–10:23साद्रिष्य कते?
  90. 10:23–10:29इता वेद्हर मेसक, निन्दनी विलक्षन तासं भेल पहीचान �thek.
  91. 10:29–10:33आप याप दिग्यान बिनु अनुमानो नहीं.
  92. 10:33–10:41जएन तक उप्मान एताई ताध नहीभा सकैत अची आताई यो ज्यान भेल आयातारत भेल.
  93. 10:41–10:45तकन उप्मानक अस्लिक आजकी तेक
  94. 10:45–10:51गाय आगव्यक मुर्ती दूनु के उथाख सबहाक सोजा राक है.
  95. 10:51–10:55दियान सचुनु की एक ताई एह एह अंककष्फल तेक.
  96. 10:55–11:04जखन व्यापारी वन में बाजल ये गववे थेक, तकन उ पषुक विष्वे नव किचु नहीं जनलक, पषुता अखिक सोजाचल.
  97. 11:04–11:11उ शब्दक विष्वे नव किचु जनलक, जे गववे इध्वनी एही जातिक पषुक वाचक थेक.
  98. 11:11–11:19शब्दा अर्थक भीचक अदोरी, जक्रा हम शक्ती कहेट ची, से उप्मान्स पकडलगे.
  99. 11:19–11:27आव उदोरी कोनो एक पशुस नहीं भान्हल जा सकेत अची, नहीं तंगवै शब्द डोसर गव्यपर लागभे नहीं करेत अब.
  100. 11:27–11:38दिरे संग आहा हमर पदार्त्ला लेल हु, हमर प्रमानक शेट्र लालेल हु, आब अदला मे उप्मान के अछता एहन सिनहासं देल हु, जक्रापर उपहिने कहीो नहीं बैसल चल.
  101. 11:38–11:42हम एही सवदापर गर जाक विचार करव.
  102. 11:42–11:47एह संभेसी कोनो वादी नहीं मान्दी सकैत अची
  103. 11:47–11:57आहा अखन जाओ नहीं की एक तन शब्दक उही दोरी कताजे हम अखने केल हूए पोक्रे पर आब एही सबहाक शेश साज्टिकल अची
  104. 11:57–12:07आआक समप्रदायक दोसर शाखा उही पर हम्रास लडबाक हे तु आये आयल अची.
  105. 12:07–12:11बोद्धा वैशेषिक आगु आबैद चती.
  106. 12:11–12:15दीप छीक कैल जाएत अची.
  107. 12:15–12:21काली राती गंगेश, हम अदरिष करता पर हारी मानने रही, पून नही, मुदा इमान दार.
  108. 12:21–12:28आई हम एक ता सरल दावाला का आयल ची, आई एही बेर तराजु हमर हाथ में आची.
  109. 12:28–12:35आख है ची शब्द आपने आप में प्रमान थेक, विष्वसनी वचन सुनिते यतार्त ज्यान होगत आची.
  110. 12:35–12:40हम कहै ची प्रमान उक्रे कहल जाए जे ज्यानक असादारन कारन हो.
  111. 12:40–12:49मुदा शब्द उपस्ठ्ट्र ही तो, कान दहरी पहुछतो, जए आकाव्शा नही, योगिता नही, ता अर्थ बोध होईते नही अची.
  112. 12:49–12:54भ्यल अगिन शिंच्छैत अची, तीनू शब्द सुनू किचु नही भुज्ठाए.
  113. 12:54–12:58जकर उपस्त्तिने कार्य अनिष्च्ट् से असादारन कारन नहीं
  114. 12:58–13:02तने शब्द स्वतन्त्र प्रमान नहीं
  115. 13:02–13:07शान्त्तास आहा अपन दावा जाही माद्यम्स हम्रा दहरी पध्हाल हूँ
  116. 13:07–13:10उही पर एक शन ध्यान दियाग.
  117. 13:10–13:14शब्द प्रमान नहीं खेक इवाक्य स्वयं शब्द खेक
  118. 13:14–13:21जएई सत्य अची तन एक ता वाक्य हम्रा यतार्त ज्यान देलक आश्वद प्रमान सिध्भेल
  119. 13:21–13:25जमित्य अची ता आख आपती खसी पडल
  120. 13:25–13:29दूरु रस्ता हम्रे आंगन अबआत अची
  121. 13:29–13:35अरहेल सहकारीक बात आखिके प्रकाष चाही तनकी आखिप्रमान नही?
  122. 13:35–13:44रर करन के सहकारी चाही सहकारीक आवष्षकता करनता के नष्ट नहीं करेत अची, ओकरा पूलन करेत अची.
  123. 13:44–13:50आखांख्षा आयोग्यता शब्दक प्रकाष थेक, ओकर प्रतिद्वंद वी नही.
  124. 13:50–13:55तक्हन हमर अक्रमन सुनु जे बवध्ध्धशन सुख्ष्म अची
  125. 13:55–13:59हम शब्द के प्रमाण मानेच ची मुदास वतन्त्र नहीं
  126. 13:59–14:02उ अनुमानक भीतर समाजाएत अची
  127. 14:02–14:15गाय आनु सुनिक जे ज्यान होएत अची से एही अनुमान सई पद समु परस्पर समबद्धर्धध भोदध ख्ध की एक तन एही में अकामशायो जतासन्मिदी अची जेना पहीने सुनल वाख्यः.
  128. 14:15–14:20शब्द एक्ता लिन्त्ख्छ दूवाजका, आशाब्द भोद एक्ता अनुमिति
  129. 14:20–14:24चारी प्रमानक बदला तीन लागव हमर पक्ष में
  130. 14:24–14:34लागव सुन्दर्तर्ख थिक जखन दूनु रस्ता एक ही जाम पहुच़त होई मुदा आहाक रस्ता पहुचते नहीं अच्छी, से हम देख बैद ची.
  131. 14:34–14:42अनुमानक हे तु पहिने व्याप्तिक स्मिती चाही फेर पक्षदर मताक ज्यान, फेर परामर्ष तक्हन अनुमिती.
  132. 14:42–14:47आब कोनो बालक के देखु जक्रा माय कहे च्यक बात काले
  133. 14:47–14:49अद्बा काल मे बात से राई जाएत
  134. 14:49–14:53वाके सुनिते अर्थ भूजाएत अची तक्षन बिनू कोनो भीचक सीधि
  135. 14:53–14:57इतात कालिकता स्वयं प्रमान थेख जे शब्दक अपन स्वतन्त्र प्रकाशन शक्ती अची
  136. 14:57–15:00वक्ताक आप्तता अनुमान करत अची
  137. 15:00–15:02वेर परामश
  138. 15:02–15:05उत्बा काल मे भाथ से राई जाएत
  139. 15:05–15:11वाके सुनेते अर्थ भूजाएत अची तक्षन बिनु कोनो भीचक सीधी
  140. 15:11–15:17इतात कालिकता स्वयम प्रमान �theक जे शबदक अपन स्वतन्त्र प्रकाशन शकती अची
  141. 15:17–15:26जते अनुबहो में सीटी नहीं देखाएत अची, उते सिद्धानत में सीटी तूसब लागव नहीं, गवरव थेक विर्थक बोज.
  142. 15:26–15:33मानी लिया, मुदा तक्हन आहीं कहू, कोरा पट समोहता वाख्य नहीं भाजाएत अची.
  143. 15:33–15:38द्यान राखु इन्यत साच्चर यह नहीं तिक,
  144. 15:38–15:43वगाई की चाही जे गेल आनु भूजाई
  145. 15:43–15:50चारी वस्तु आहरे कक परिभाशा हम उत्बे कसिख देब जक्भे काल ही व्याप्तिक देने रही
  146. 15:50–15:57पहल आकांख्षा एक पदक वो अपुनताजे दोसर पद भिनो अपन अनवैस थापित नहीं का सकए
  147. 15:57–16:07दियान राखु इनियत साचर यह नही थेक, नील कमल में नहर कमल नील, नहर नील वस्तृ कमल, तयो दुनु पद में आकांख्षा अची.
  148. 16:07–16:15आइश्रोताक जिग्यासू नही थेक, जेना किचु मीमान सक कहल नी, जिग्यासा बिनो वाक्य बुजायत अची.
  149. 16:15–16:192. सर्क्योگ्यता बादध जानक अबहा.
  150. 16:19–16:28अगिन्स्सिंच्छत अची अकाँव्शा अची, सन्निदिए अची, मुदा अचिन में सिंच्छबाक सामर्त्य नही, ते बोध नही.
  151. 16:28–16:36आशुख्श्मताई बादख निष्चे रोकेत आची, बादख संदेह नही, संदेह रही तो शाभ्द भोध भाजाइत आची.
  152. 16:36–16:42तेसर्ख संनिदि, पदख अविलंब उचारन आ अर्थख अविच्छन्नस्म्रती.
  153. 16:42–16:46आई गयल कहु अकाल ही आनु वाक्यमरीगे.
  154. 16:46–16:57आप पहल भेर उठेत, चारू स्विकार, गंगेश, मुदा एक्ता गहीर बात पर हमर समप्रदाय आहास फराक थाड आची, आवक्रा हम एते राखभ.
  155. 16:57–17:05हमर सिद्धानत थिक अन्विताविदान, शब्दक शकती केवल कार्यान वित अर्ठ में, क्रियास जुडल अर्ठ में.
  156. 17:16–17:23तखन कविता मरीजाएत, मित्र, आनातक, आकत्ठा, आई, हमर, भावुकता, नहीं, तर्ख्छित.
  157. 17:23–17:30चंद्र मा उगल अची एही वाख्यमे श्रोताक, हे तु कोनो कार्य नही, कोनो अदेश नहीं, तटयो अच्छाएत अची आ अनन्दो हो इत अची.
  158. 17:30–17:34अग्त्था आई भावुक्ता नहीं तर्ख्थिक
  159. 17:34–17:44चंद्रमा उगल अच्छी एही वाख्यमेश्रोताक हे तु कोनो कार्यन नहीं, कोनो अदेश नहीं, तटयो अर्थ भुजाएत अच्छे आ आनन्दो होएत अच्छीं
  160. 17:44–17:49ज़़ शक्ति केवल कार्यान वित में तटंगी भोद कत्यसं
  161. 17:49–18:01अबालकख शिक्षाजे आहा कहलहू से शक्तिग रहेक एक्ता द्वार थेक, शक्तिख सीमा नहीं काल ही हम उप्मान के से हो एहने एक्ता द्वार सिध्ध केने रही.
  162. 18:01–18:07शक्ति हरेक पदक अपन अची, अखाम शायो गिता तात पर्य अख्रा जोड़ात अची.
  163. 18:07–18:15पद स्वतन्त्र वाख्य संयुख्त यह अभिहितानवै आए यह लोकानु भूस मेल खायत अची.
  164. 18:15–18:21तकन अस्ली रन्भूमी दिस चलू, कि एक तंइ सभ होकर भूमी का चल.
  165. 18:21–18:22वेद
  166. 18:22–18:28हमर दूनुशाखा भाट आप्राभाखर एहपर एक ची वेद अपारुषे थेक
  167. 18:29–18:32कोनो रच्चिता नहीं कहीो नहीं
  168. 18:32–18:38गृृशिष्ख पात परमपरा अनादी जेना भीज आ अंकृर कोनो पहल कडी बिनु
  169. 18:38–18:45ते वेदक प्रामाने कोनो पूरुषक, मनुश्वा इश्वर, विवक्षापर नहीं तिकल अची.
  170. 18:45–18:48उस्वत्धा प्रमान थेक.
  171. 18:48–18:57आईये होकर महीमा थेक, जे वचन केक्रो मुहस नहीं निकलल, उही में केक्रो डोष नहीं पैसी सकैत अची.
  172. 18:57–19:09किछुकाल मान फेर दिरेसन, एक ता गमभीर सिद्धान्त, आहम एक्रा हन्सी में नहीं उडाएप, हम एक्रा कालेक उही हत्यार स्कातब जे आहु देखने चलू.
  173. 19:09–19:14पहल अनादी परमपरा के हब उत्तर नहीं उत्तरक स्थगन थिक.
  174. 19:14–19:22वर पात पचिला पात पर तिकल, उ अपनासम पचिला पर इशिंकला याता अन्वस्तात्ध, या आत्माश्रे.
  175. 19:22–19:29अकाल ही राती हम सभ जे स्तापित केल हूँ, जे स्रिष्ती आप रल्यक चकर चलायत अचीट से मानी लिए,
  176. 19:29–19:34तम्प्रल्यमे हर कंथ मुन भाजाएत अच्छी, हर स्म्रिती मेटा जाएत अच्छी.
  177. 19:34–19:37परमपराक दोरी तुतल.
  178. 19:37–19:40नव स्रिष्टी में उक्रा के जोडलक.
  179. 19:40–19:47तो सर्ख आगहीरच यतार्थ वाक्यरच्नाक हे तु वाक्यार्थक यतार्थ ज्यान चाही.
  180. 19:47–19:54रचना भिनु ग्याताक, वचन भिनु विवक्षाक, एहन थिक जेना लिखावत भिनु हात्ख.
  181. 19:54–20:02ते वेदक निर्दोष्ता वोकर अकर त्रिक्तासन नही अबआत अची, उअबआत अची वोकर कर ताक सर्वग्यतासन.
  182. 20:02–20:08वेद पारुषे थिक उही पूरुषक, जकर ज्यान नित्या निर्दोष इश्वरक.
  183. 20:08–20:26आजे रीती समाज में सर्वमान्य अची मुदाजकर वैदिक वचन आई नहीं भेटेः अची तकर हे तु हम नश्थ शाखाक अनुमान कर अची, मुल विधिचल, प्रलेवा कालक गरत में हेरागेल, आन आव स्रिष्टी में सर्वग्य वोक्रा फेर पडबैच्छती.
  184. 20:26–20:56ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
  185. 20:56–21:00विदिप्रक्त्यजक्रे कहेद अची
  186. 21:00–21:02कि आहा एक रो कातब
  187. 21:02–21:06कातब नहीं खेकान पर राखभ आई भेद बुजु कि एक तन एह एह साजक अंतिम पात ख्छु
  188. 21:06–21:09बीचक कडीक आवश्षकता हम हो मानेच छी
  189. 21:09–21:12शनेक यग्य आखा लान्तरक स्वर्गक बीच की चुचाही
  190. 21:12–21:22बीचक कडीक आवष्षकता हम हु मानेच्छी, शनेक यग्या आखालांतरक स्वर्गक बीच की चुचाही, आओ अगरिष्छ हो एहि में विवाद नहीं.
  191. 21:22–21:27विवाद एताय अची विधिप्रक्यक मुख्या अर्ठकी.
  192. 21:27–21:30आहा कहेट ची अपूर।
  193. 21:30–21:40वम कहेथ छी इष्ट साद्धनता, इखर्म अहाक अभीष्टक साद्धन खेख, आसंगही क्रिति साद्धनता आबल्वदनिष्टक अन्नुबन्धित्व.
  194. 21:40–21:42की एक तीनु?
  195. 21:42–21:44सूनु?
  196. 21:44–21:53विष्पान क्रितिसाद्या अच्छी प्रयास् स्भासकईत अच्छी तईो स्वस्त्लोक नहीं पीबैत अच्छी कि एक तं इष्टक साद्धन नहीं.
  197. 21:53–22:00वर्शा इष्टक सादन अच्छ, तव्यो के यो वर्शा करे नहीं लगात अच्छ, कि एक तं क्रितिसाद्या नहीं.
  198. 22:00–22:10आशेन्याग, शत्रुवदख, सादन, क्रितिसाद्यसे हो, ततईो विवेकी नहीं करत अची, कि एक ता उकर संण नरक भानल अची, भल्वान अनिष्त.
  199. 22:10–22:17तीनु ज्यान मिलिक प्रव्रित्ती जनमभेत अची, आविधिप्रक्ते तीनु के कहेत अची.
  200. 22:17–22:19अपुर्व
  201. 22:19–22:29जखन प्रत्यक्ष कडी असमभव भुजा, लंभा सांस चोड़ाइत, काल ही आहा बुधद्धसं कहने रही जे आहा अंत्मे भजिक जीताए नही आयल ची.
  202. 22:29–22:41आई हम गवाही देट छीजे आहा वचन निभाल हु, हमर पदार्त, हमर प्रमान, हमर अपूरुषेता, हमर अपूरव चारू के आहा चिल्लाक नही गानिक हताल हु.
  203. 22:41–22:48आचारूक स्थान पर हम कि चुन कि चु राकल हु, ये भेद थिक तोडब आ बनेभामे.
  204. 22:48–22:55साद्रिष्यक स्थान्पर भूयोदर्म वत्व, स्वतन्त्र उप्मितिक स्थान्पर स्क्तिगर्य,
  205. 22:55–23:00अपुरुषेताक स्थान्पर सरवग्यक्वानि, अपुरवक स्थान्पर इष्ट्साद्धन्ता.
  206. 23:00–23:03खाली हाथ हम के क्रो नहीं पध्हाल हूँ.
  207. 23:03–23:11सुत्रदार वापस आबैत अजी
  208. 23:11–23:14उगव्यक मुर्ती उटबैत अजी
  209. 23:14–23:21साजक आरंभ्ब हमे एही मुर्तिक आम एही सबहामे के ओई जनैत चल
  210. 23:21–23:24आप सब जनैत चती
  211. 23:24–23:29आई हो जनैत चती जे ओई आम कोन कोन सीरी चडे कुन का दरी पहुचल
  212. 23:29–23:31एक ता वन्वासीक वाख्या
  213. 23:31–24:01अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से ह
  214. 24:01–24:05आब आब आजनेद ची के उने के उ कही उ बानने चल
  215. 24:05–24:11उ दोरी तूटे नहीं ये एही विद्याक समपूर्ड प्रार्ठना थेक
  216. 24:11–24:15सब पात्र प्रस्थान करे चती
  217. 24:15–24:19दी पन्त में बाहर जाएत अची

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सुत्रदार प्रवेश करेत अछि. काल ही राटी एही सबहा में गंगेश उपाद्याए चारी प्रमान में स्दूएके कसोटी पर कसलनी, प्रत्यक्ष्. जक्रास हम शंक्खे देखेथ छी, आ अनुमान, जक्रास हम दूासा अगिन दरी पहुचेथ छी. मुदा न्याए चारी प्रमान मानेत अची, दूई नहीं. आई राती बाकी दूएग भारी अची, आओ दूनु एक ही प्रष्नक दूई रूप थिक, शब्द आपन अर्थ दरी कोना पहुचेत अची. एक्ता बच्चा गाई शब्द सूनेत अच्छी अ एक्ता पशु दिस ताकेत अच्छी, औही ध्वनी आ उही पशुक भीचको अद्रिष्ष डोरी के बान है लक, आउ कोना जानल जाइत अच्छी? आजखन कोनो शब्द एहन वस्तुखे तु अची जे सुन्निहार कहीो नहीं देखलक, एक ता वनक पशु, एक ता दूर देषक रीती, एक ता वेदक देवता, तकन अ दोरी कोना पक्डल जाएत अची. पहल उत्रक नाम उप्मान थिक, साद्द्रिष्या संज्यान, अव वज तार होई बाक अची आमेच पर राखल अ दोसर मुर्टी पर द्यान राखू उ पशुजे गाई जका अची मुदागाई नहीं अगर नामे ही सबहा मे के अ अखन दरी नहीं जनैत अची सान समाप छोई छोई तसब के अ जानत आखोना जानत ये आई रातिक समपुल वाद थेक गंगेश आसीन चदी एक्ता वन्वासी प्रवेश करेत अची, प्रडाम करेत अची आचार्य रहम उत्तरक वन्स आयल ची ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ वाद खुजी नहीं सकेच्छल तुछ वाद खुछ तुछ वाद खुछ वाद खुछ वाद खुछ वाद वाद खुछ वाद वाद खुछ वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वाद वा� तेसर उहिक शन इनिश्चय उप्जल ये हो पशुत्धिक जक्रा गवए शब्द कहेत अची इते सर ज्यान कत्यसं आयल प्रक्यक्षस नही कि एक तं आखी केवल सिंग आखूर देख बैत अची शब्दक अर्ठ नही उख्रा उवाखेती निष्चे कहीो नहीं देए ये हो ग्यान ख्यान ख्यक्जक्रा हमर शास्त्र उप्मिती कहेत अच्छी, आउकर करन उप्माँ उख्रा उवाख्यती निष्चे कही अ नहीं देः ये हो ज्यान �theक जक्रा हमर शास्त्र उप्मिती कहेत अख्छी आउकर करन उप्माँ उख्छेत आए एह उस्ठान � theक गंगेश जते आख समप्रदाय आ हमर समप्रदाय ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ वो बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद ब� तकन अनेक कहु अनन्त साद्रिश्य, सन्योग जका, हरेक दूरी आदार में बसल तकन दो सर्फास, पहिल सतीद ज़ साद्रिश्य, सन्योग जका दूनु आदार में बसल तन गव्य में बसल तकन दो सर्फास, पहिल सतीद तक्हन अनेक कहु अनन्त साद्रिष्य, सन्योग जका, हरेक दूरी आदार में बसल. तक्हन दोसर फास, पहिल सतीद. ज़ साद्रिष्य, सन्योग जका दूनु आदार में बसैत अच्छी, तनगव्य में बसल, उ साद्रिष्य गाय में से हो बसल अच्छी. अखन व्यापारी के वन में ताड करू, जतवे गाई नही अची, केवल गवई. उनक अखी गव्यके चुभगत अची गाई के नहीं. जव उ साद्रिश्य के देखगध चती, आउ उ साद्रिश्य गाई में से हो बसध अची, तकचन हुन का अनुप. समबलैत, हमर कुमारिलग कारिका एकता सुछम उत्तर दैत अची, साद्रिष्य कोनो नाव पदार्त नही, अपितु बहुत रास साजजा धर्मक समोधेक, अव्यव गुन आकर्मक समान दर्म, जे मिलिक साद्रिष्य कहबैत अची. जेना बहुत गाछ मिलिक वन कहबैत अची बहुत मिलैत अची माने बेसी साजाद्धर्म, कनी मिलैत अची माने कम. आब आहा हमर गर दिस आदारस्ता आभी गेल हु, समोज कहल हुता आप्धम पदार्च छोरी देल हुक, मुदाजतै आहारुकल हूँ तू तिकव कत्हिन अची तूई कमलक फूल लिए, एक ही जातिक, जक्रामे गंबा जोग अव्यव भेदे नहीं, तैयो लोग कहेत अची इप फूल औही फूल सन अची कोन समोज? आहमर प्रिय उदाहरन सुनु, जे हम अपन ग्रन्त मे देने ची एक्ता हातिक बच्चा अ एक्ता गद्धा. शरीरक बनावत में कत्फु मेल नहीं न अव्यव्त न गुन न अकार. तयो लोक रन्सआत कहेत अची ये गद्धा हातिक बच्चा जका खहेत अची. उते कों साजा दर्मक समो? केवल खईबाक दंगक एकता साधरिश्य, एकता धर्म समोज नहीं. आग परिभाशा उतै पहुष्भे नहीं कर आप अची जताय लोकक जी रोस पहुचात अची. तकन साधरिश्य की खेक, आचार्य, जन आप्फम पदार्त, नधर्मक समोज. अख्रा कुनो नव वस्तुक आवष्षकते नहीं गववे गाएस न अच्छी का अर्थ एद बे गव्यमे बहुत रास अद्वर्म अच्छी जे गाय मे से हो अच्छी आतायो गववे गाएस बिन अच्छी तद्विन्त्व सहित तद्गत भुयो दर्म वत्व वहिसन भिन्रहितो वोकर बहुत दर्म से युख्त होए. सात पदार्त पर्याप चल, आतम एक ता अनावष्यक अतितिछल जक्रा हम द्वार पर्स विदाकर अट्छी, आद्रक सं भुदा भोजन भिनु. पदार्त्ठारी गेल हु वानी लग्छी मुदा प्रमान अखन हो हमर अची उ ज्यान जे व्यापारी के लेल आ उक्रासा आगु गाम में लोटिक जे ग्यान होएत हमर गाय हो ही गव्यसन अची से आहा कोन प्रमान्स देब प्रत्यक्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्ष्� अव भेटी जाएत अची गरे में अम दूई अची के आमने सामने टाड देखने ची, तूनूके एक दोस्रासन, एक ही अखिसन, अद्यस इसामाने व्याप्ती अची, जे जक्रामे बसल साद्रिष्षक प्रतीवोगी अची, से अख्रासन अची आब अनुमान ताड करू पक्ष्गाई साद्यगव्य साद्रिष्ष्व, हे तुगव्यमे बसल साद्रिष्ष्व प्रतिवगिता द्रिष्टान्त भाई हात्थिख भहिन हात्थिए. जान भेटिगेल आखूनो नव प्रमान भिनु. जक्रा आहा अर्था पत्ती वास्वतन्त्र उप्मान कहेट ची, से हम्रा लेके वियतिरे की अनुमानक एक ता वेश्थेग. बैसेत आदा प्राजत आदाचकित तकन आहा उप्मान के भिल्कुले काटी देल हूँ. अपने सम्प्रदायक तेसर प्रमान के? तीक विप्रीत हम वोक्रा कातल हू नही, हम वोक्रा वोकर अपन काज्देल हू, जे आई दھरी के अ तीक सन नही चिनहने चल. आव वोक्रा चिनहबास पहिने हम्रा अपन ही गरक एक ता पुरान दिवाल गिरे बाक अची. ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ आदि वरनन प्रषंसा नही थेक पशू मे सबस नीच उजीव जकर गरगनी भेजाई नमहर, खोर नमगर आहिलाप, जे कडामुलायम दूनु तेहनी चिब बैत अचे आजकर देजुमस भरल. यात्री उत्तर पहुचल, एहन पशू देख्लक, आनिश्चे भेल एह गदा थेख. आप जयन तक परिभाशा लगा. साद्रिष्य कते? इता वेद्हर मेसक, निन्दनी विलक्षन तासं भेल पहीचान �thek. आप याप दिग्यान बिनु अनुमानो नहीं. जएन तक उप्मान एताई ताध नहीभा सकैत अची आताई यो ज्यान भेल आयातारत भेल. तकन उप्मानक अस्लिक आजकी तेक गाय आगव्यक मुर्ती दूनु के उथाख सबहाक सोजा राक है. दियान सचुनु की एक ताई एह एह अंककष्फल तेक. जखन व्यापारी वन में बाजल ये गववे थेक, तकन उ पषुक विष्वे नव किचु नहीं जनलक, पषुता अखिक सोजाचल. उ शब्दक विष्वे नव किचु जनलक, जे गववे इध्वनी एही जातिक पषुक वाचक थेक. शब्दा अर्थक भीचक अदोरी, जक्रा हम शक्ती कहेट ची, से उप्मान्स पकडलगे. आव उदोरी कोनो एक पशुस नहीं भान्हल जा सकेत अची, नहीं तंगवै शब्द डोसर गव्यपर लागभे नहीं करेत अब. दिरे संग आहा हमर पदार्त्ला लेल हु, हमर प्रमानक शेट्र लालेल हु, आब अदला मे उप्मान के अछता एहन सिनहासं देल हु, जक्रापर उपहिने कहीो नहीं बैसल चल. हम एही सवदापर गर जाक विचार करव. एह संभेसी कोनो वादी नहीं मान्दी सकैत अची आहा अखन जाओ नहीं की एक तन शब्दक उही दोरी कताजे हम अखने केल हूए पोक्रे पर आब एही सबहाक शेश साज्टिकल अची आआक समप्रदायक दोसर शाखा उही पर हम्रास लडबाक हे तु आये आयल अची. बोद्धा वैशेषिक आगु आबैद चती. दीप छीक कैल जाएत अची. काली राती गंगेश, हम अदरिष करता पर हारी मानने रही, पून नही, मुदा इमान दार. आई हम एक ता सरल दावाला का आयल ची, आई एही बेर तराजु हमर हाथ में आची. आख है ची शब्द आपने आप में प्रमान थेक, विष्वसनी वचन सुनिते यतार्त ज्यान होगत आची. हम कहै ची प्रमान उक्रे कहल जाए जे ज्यानक असादारन कारन हो. मुदा शब्द उपस्ठ्ट्र ही तो, कान दहरी पहुछतो, जए आकाव्शा नही, योगिता नही, ता अर्थ बोध होईते नही अची. भ्यल अगिन शिंच्छैत अची, तीनू शब्द सुनू किचु नही भुज्ठाए. जकर उपस्त्तिने कार्य अनिष्च्ट् से असादारन कारन नहीं तने शब्द स्वतन्त्र प्रमान नहीं शान्त्तास आहा अपन दावा जाही माद्यम्स हम्रा दहरी पध्हाल हूँ उही पर एक शन ध्यान दियाग. शब्द प्रमान नहीं खेक इवाक्य स्वयं शब्द खेक जएई सत्य अची तन एक ता वाक्य हम्रा यतार्त ज्यान देलक आश्वद प्रमान सिध्भेल जमित्य अची ता आख आपती खसी पडल दूरु रस्ता हम्रे आंगन अबआत अची अरहेल सहकारीक बात आखिके प्रकाष चाही तनकी आखिप्रमान नही? रर करन के सहकारी चाही सहकारीक आवष्षकता करनता के नष्ट नहीं करेत अची, ओकरा पूलन करेत अची. आखांख्षा आयोग्यता शब्दक प्रकाष थेक, ओकर प्रतिद्वंद वी नही. तक्हन हमर अक्रमन सुनु जे बवध्ध्धशन सुख्ष्म अची हम शब्द के प्रमाण मानेच ची मुदास वतन्त्र नहीं उ अनुमानक भीतर समाजाएत अची गाय आनु सुनिक जे ज्यान होएत अची से एही अनुमान सई पद समु परस्पर समबद्धर्धध भोदध ख्ध की एक तन एही में अकामशायो जतासन्मिदी अची जेना पहीने सुनल वाख्यः. शब्द एक्ता लिन्त्ख्छ दूवाजका, आशाब्द भोद एक्ता अनुमिति चारी प्रमानक बदला तीन लागव हमर पक्ष में लागव सुन्दर्तर्ख थिक जखन दूनु रस्ता एक ही जाम पहुच़त होई मुदा आहाक रस्ता पहुचते नहीं अच्छी, से हम देख बैद ची. अनुमानक हे तु पहिने व्याप्तिक स्मिती चाही फेर पक्षदर मताक ज्यान, फेर परामर्ष तक्हन अनुमिती. आब कोनो बालक के देखु जक्रा माय कहे च्यक बात काले अद्बा काल मे बात से राई जाएत वाके सुनिते अर्थ भूजाएत अची तक्षन बिनू कोनो भीचक सीधि इतात कालिकता स्वयं प्रमान थेख जे शब्दक अपन स्वतन्त्र प्रकाशन शक्ती अची वक्ताक आप्तता अनुमान करत अची वेर परामश उत्बा काल मे भाथ से राई जाएत वाके सुनेते अर्थ भूजाएत अची तक्षन बिनु कोनो भीचक सीधी इतात कालिकता स्वयम प्रमान �theक जे शबदक अपन स्वतन्त्र प्रकाशन शकती अची जते अनुबहो में सीटी नहीं देखाएत अची, उते सिद्धानत में सीटी तूसब लागव नहीं, गवरव थेक विर्थक बोज. मानी लिया, मुदा तक्हन आहीं कहू, कोरा पट समोहता वाख्य नहीं भाजाएत अची. द्यान राखु इन्यत साच्चर यह नहीं तिक, वगाई की चाही जे गेल आनु भूजाई चारी वस्तु आहरे कक परिभाशा हम उत्बे कसिख देब जक्भे काल ही व्याप्तिक देने रही पहल आकांख्षा एक पदक वो अपुनताजे दोसर पद भिनो अपन अनवैस थापित नहीं का सकए दियान राखु इनियत साचर यह नही थेक, नील कमल में नहर कमल नील, नहर नील वस्तृ कमल, तयो दुनु पद में आकांख्षा अची. आइश्रोताक जिग्यासू नही थेक, जेना किचु मीमान सक कहल नी, जिग्यासा बिनो वाक्य बुजायत अची. 2. सर्क्योگ्यता बादध जानक अबहा. अगिन्स्सिंच्छत अची अकाँव्शा अची, सन्निदिए अची, मुदा अचिन में सिंच्छबाक सामर्त्य नही, ते बोध नही. आशुख्श्मताई बादख निष्चे रोकेत आची, बादख संदेह नही, संदेह रही तो शाभ्द भोध भाजाइत आची. तेसर्ख संनिदि, पदख अविलंब उचारन आ अर्थख अविच्छन्नस्म्रती. आई गयल कहु अकाल ही आनु वाक्यमरीगे. आप पहल भेर उठेत, चारू स्विकार, गंगेश, मुदा एक्ता गहीर बात पर हमर समप्रदाय आहास फराक थाड आची, आवक्रा हम एते राखभ. हमर सिद्धानत थिक अन्विताविदान, शब्दक शकती केवल कार्यान वित अर्ठ में, क्रियास जुडल अर्ठ में. तखन कविता मरीजाएत, मित्र, आनातक, आकत्ठा, आई, हमर, भावुकता, नहीं, तर्ख्छित. चंद्र मा उगल अची एही वाख्यमे श्रोताक, हे तु कोनो कार्य नही, कोनो अदेश नहीं, तटयो अच्छाएत अची आ अनन्दो हो इत अची. अग्त्था आई भावुक्ता नहीं तर्ख्थिक चंद्रमा उगल अच्छी एही वाख्यमेश्रोताक हे तु कोनो कार्यन नहीं, कोनो अदेश नहीं, तटयो अर्थ भुजाएत अच्छे आ आनन्दो होएत अच्छीं ज़़ शक्ति केवल कार्यान वित में तटंगी भोद कत्यसं अबालकख शिक्षाजे आहा कहलहू से शक्तिग रहेक एक्ता द्वार थेक, शक्तिख सीमा नहीं काल ही हम उप्मान के से हो एहने एक्ता द्वार सिध्ध केने रही. शक्ति हरेक पदक अपन अची, अखाम शायो गिता तात पर्य अख्रा जोड़ात अची. पद स्वतन्त्र वाख्य संयुख्त यह अभिहितानवै आए यह लोकानु भूस मेल खायत अची. तकन अस्ली रन्भूमी दिस चलू, कि एक तंइ सभ होकर भूमी का चल. वेद हमर दूनुशाखा भाट आप्राभाखर एहपर एक ची वेद अपारुषे थेक कोनो रच्चिता नहीं कहीो नहीं गृृशिष्ख पात परमपरा अनादी जेना भीज आ अंकृर कोनो पहल कडी बिनु ते वेदक प्रामाने कोनो पूरुषक, मनुश्वा इश्वर, विवक्षापर नहीं तिकल अची. उस्वत्धा प्रमान थेक. आईये होकर महीमा थेक, जे वचन केक्रो मुहस नहीं निकलल, उही में केक्रो डोष नहीं पैसी सकैत अची. किछुकाल मान फेर दिरेसन, एक ता गमभीर सिद्धान्त, आहम एक्रा हन्सी में नहीं उडाएप, हम एक्रा कालेक उही हत्यार स्कातब जे आहु देखने चलू. पहल अनादी परमपरा के हब उत्तर नहीं उत्तरक स्थगन थिक. वर पात पचिला पात पर तिकल, उ अपनासम पचिला पर इशिंकला याता अन्वस्तात्ध, या आत्माश्रे. अकाल ही राती हम सभ जे स्तापित केल हूँ, जे स्रिष्ती आप रल्यक चकर चलायत अचीट से मानी लिए, तम्प्रल्यमे हर कंथ मुन भाजाएत अच्छी, हर स्म्रिती मेटा जाएत अच्छी. परमपराक दोरी तुतल. नव स्रिष्टी में उक्रा के जोडलक. तो सर्ख आगहीरच यतार्थ वाक्यरच्नाक हे तु वाक्यार्थक यतार्थ ज्यान चाही. रचना भिनु ग्याताक, वचन भिनु विवक्षाक, एहन थिक जेना लिखावत भिनु हात्ख. ते वेदक निर्दोष्ता वोकर अकर त्रिक्तासन नही अबआत अची, उअबआत अची वोकर कर ताक सर्वग्यतासन. वेद पारुषे थिक उही पूरुषक, जकर ज्यान नित्या निर्दोष इश्वरक. आजे रीती समाज में सर्वमान्य अची मुदाजकर वैदिक वचन आई नहीं भेटेः अची तकर हे तु हम नश्थ शाखाक अनुमान कर अची, मुल विधिचल, प्रलेवा कालक गरत में हेरागेल, आन आव स्रिष्टी में सर्वग्य वोक्रा फेर पडबैच्छती. ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ विदिप्रक्त्यजक्रे कहेद अची कि आहा एक रो कातब कातब नहीं खेकान पर राखभ आई भेद बुजु कि एक तन एह एह साजक अंतिम पात ख्छु बीचक कडीक आवश्षकता हम हो मानेच छी शनेक यग्य आखा लान्तरक स्वर्गक बीच की चुचाही बीचक कडीक आवष्षकता हम हु मानेच्छी, शनेक यग्या आखालांतरक स्वर्गक बीच की चुचाही, आओ अगरिष्छ हो एहि में विवाद नहीं. विवाद एताय अची विधिप्रक्यक मुख्या अर्ठकी. आहा कहेट ची अपूर। वम कहेथ छी इष्ट साद्धनता, इखर्म अहाक अभीष्टक साद्धन खेख, आसंगही क्रिति साद्धनता आबल्वदनिष्टक अन्नुबन्धित्व. की एक तीनु? सूनु? विष्पान क्रितिसाद्या अच्छी प्रयास् स्भासकईत अच्छी तईो स्वस्त्लोक नहीं पीबैत अच्छी कि एक तं इष्टक साद्धन नहीं. वर्शा इष्टक सादन अच्छ, तव्यो के यो वर्शा करे नहीं लगात अच्छ, कि एक तं क्रितिसाद्या नहीं. आशेन्याग, शत्रुवदख, सादन, क्रितिसाद्यसे हो, ततईो विवेकी नहीं करत अची, कि एक ता उकर संण नरक भानल अची, भल्वान अनिष्त. तीनु ज्यान मिलिक प्रव्रित्ती जनमभेत अची, आविधिप्रक्ते तीनु के कहेत अची. अपुर्व जखन प्रत्यक्ष कडी असमभव भुजा, लंभा सांस चोड़ाइत, काल ही आहा बुधद्धसं कहने रही जे आहा अंत्मे भजिक जीताए नही आयल ची. आई हम गवाही देट छीजे आहा वचन निभाल हु, हमर पदार्त, हमर प्रमान, हमर अपूरुषेता, हमर अपूरव चारू के आहा चिल्लाक नही गानिक हताल हु. आचारूक स्थान पर हम कि चुन कि चु राकल हु, ये भेद थिक तोडब आ बनेभामे. साद्रिष्यक स्थान्पर भूयोदर्म वत्व, स्वतन्त्र उप्मितिक स्थान्पर स्क्तिगर्य, अपुरुषेताक स्थान्पर सरवग्यक्वानि, अपुरवक स्थान्पर इष्ट्साद्धन्ता. खाली हाथ हम के क्रो नहीं पध्हाल हूँ. सुत्रदार वापस आबैत अजी उगव्यक मुर्ती उटबैत अजी साजक आरंभ्ब हमे एही मुर्तिक आम एही सबहामे के ओई जनैत चल आप सब जनैत चती आई हो जनैत चती जे ओई आम कोन कोन सीरी चडे कुन का दरी पहुचल एक ता वन्वासीक वाख्या अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से हो अगर अद्ध दरी पहजबाक डोरी से ह आब आब आजनेद ची के उने के उ कही उ बानने चल उ दोरी तूटे नहीं ये एही विद्याक समपूर्ड प्रार्ठना थेक सब पात्र प्रस्थान करे चती दी पन्त में बाहर जाएत अची

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