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गङ्गेश_उपाध्याय_आ_नव्य-न्यायक_तर्कशास्त्र.m4a

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Part 11 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 11
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  1. 0:00–0:04वास्तव में सत्ति होईते नहीं, मात्र एक ता संयोग होए.
  2. 0:04–0:07आप, यी बहुत गेर प्रषना छी.
  3. 0:07–0:11आप, करन देखु, हम्रा सबक चारो कात जे यी दिन्या आची,
  4. 0:11–0:15उक्रा हम्रा सब अपन आखेज देखे ची, कान से सूनेची,
  5. 0:15–0:26अगरा हमरा सब अपन आखेज देखेच़े, कान से सूनेच़े, आए मोन में एक दारना बनाई लेई चीे, जे यी सत्तिया चे.
  6. 0:26–0:31मते जे यी समपुरन दारना मत्र एक ता ब्रहम हो ता.
  7. 0:31–0:32तद?
  8. 0:32–0:33एकदम.
  9. 0:33–0:37आ, एही प्रष्न पर माने सद्यों से दार्ष्निक लोकनी विचार करीता लचती.
  10. 0:37–0:38बलक्ल.
  11. 0:38–0:42आ, आए, आए, हम्रा सब एही विषे पर बहुत गेराई में जार हल चीए.
  12. 0:42–0:44चोदावम शताब दिक मितला में,
  13. 0:44–0:46एक ता एहन दार्ष्निक भेल चला,
  14. 0:46–0:56जे केवल इप प्रशना त्हार नहीं के लें आपी तु तत्कालीन समपुन भारत्ये दार्षनिक विवस्ता के जरसी हिला कर लगी दिलने.
  15. 0:56–0:59हाँ, हमरा सब गंगेश उताद्याई जीक कगब कराल ची.
  16. 0:59–1:00एक दम चीक.
  17. 1:00–1:02उनकर रचिद जिक्रान्तिकारी गरन्त हैजी,
  18. 1:02–1:04तत्व चिंता मनी,
  19. 1:04–1:06आई हमरा सब उक्रे विष्लेषन करब.
  20. 1:06–1:08आश्रोता लोकनी के बतादे,
  21. 1:08–1:11जे एकर जे उतक्रिष्ट मेठ्ली अनुबाद सोजा आए लची,
  22. 1:11–1:14उगजेंद्र ताकृ जी केने चती,
  23. 1:14–1:17आई विदेह प्रकाशन से प्रकाशिद भेल अच्छे
  24. 1:17–1:20इकुनो सादारन पोथी नहीं अच्छे
  25. 1:20–1:23मने इई नव्व्य नयायक आदारस्तम अच्छे
  26. 1:23–1:26नव्व्य नयाय आभ दाध नव्व्तरक शास्त्र
  27. 1:26–1:29ता आई हम्रा सव इबुजब जे
  28. 1:29–1:59तो बबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबब
  29. 1:59–2:06ब्राचीन न्याय, जे महर्षी गोतमक समय से चली आवी रहल चल, उो सोलाथा बिन्न बिन्न पदार्त पर केंद्रिच्चल.
  30. 2:06–2:09सोलाथा? उो सब त बहुत बहागे ले?
  31. 2:09–2:17रहा. उही में उम, आत्मा, शरीर, इंद्रिय, मोक्ष, मने सब कचुके एक संगे राखल गेल चल.
  32. 2:17–2:27मुदा गंगेश कहलनी जरूकू, जो हम्रा सव यी नहीं जाने ची, जी कुनो ग्यान सत्ते कुना होईत ची, ता आन विषे पर गबकर वेरत ची.
  33. 2:27–2:31मैंने पहले इत प्रमानित करू, जे आहाग ग्यान सत्ते अची.
  34. 2:31–2:40इक्दम, उ सम्पुर्न दर्षन के केवल चार्टा प्रमाण पर किंद्रित कोदलनी, प्रत्यक्ष अनुमान, उप्मान आशव्द.
  35. 2:40–2:50ये दर्शन के इतिहास में जक्रा हम्रा सब ज्यान मिमान्सा या अपिस्तमलोगी कहत्छे, औही दिस एक ता अबहुत पूर्व कदम चल.
  36. 2:50–2:56ये ता बहुत अबहुत अछे. मुदा अगते एक ता बहुत पैग विरुदा बास दिखाई तछे.
  37. 2:56–3:04ज़ाहम्रा सब गंगेज जीवन व्रित्त पर नजरी दी, तई इतिहास आदूशन पंजीक विवरन अचमभित कर अच्छे.
  38. 3:04–3:07आई हूंकर जीवन कता बहुत रोचक अच्छी.
  39. 3:07–3:14माने, श्रोता सब से गयात होईत आची, जे हुनक जन्म, पिताक म्रित्युक पाच वर्ष बाद भेल चल.
  40. 3:14–3:21आए, एक टा एहन बाट आची, जे ततकालीन समाज में बहुत पैग विवादक विषे रहल हैता.
  41. 3:21–3:25बिल्कुल! चौदवी शताब्दिक समाज में एकर की एर्थ भेल है ते
  42. 3:25–3:28से हम्रा सब अनुमान लगा सक अच्छी एं
  43. 3:28–3:31तदुप्रान्त उम समाज कर सब नियम के तोड़ेत
  44. 3:31–3:34हुनक विवां एक टाच्चमारिन से भेल
  45. 3:34–3:38जे उही समयक वर्न वेवस्ताक हे साब से अकलपनी अचल
  46. 3:38–3:40एक दम अकन में
  47. 3:40–3:43आजन स्रूती तएते दरी कहत आची
  48. 3:43–3:46जे उ बालकाल में मंद बुद्दी चला
  49. 3:46–3:47माने लोक उनका साँ
  50. 3:47–3:51चिलम बरवाक आहुक का अनबा काज करावे चला
  51. 3:51–3:52ता हम्रा एबुजबा कची
  52. 3:52–4:01ये जे वियक्ती समाजिक रूप्सां ये देक बहिष्क्रित आँ सीमान्त क्रिच्छल उचानक सा महा महाँ बाद्ध्या ये तक रही तक तो बनी सके तची.
  53. 4:01–4:04ये एक ता पूरन अंदर दोग का कता जी.
  54. 4:04–4:09आप जदे बोद्दिक प्रतिबा जन्म आदारिज सब सीमारेखा के तोडी रहल आची.
  55. 4:09–4:12आब एक राजा तनिक विखंडित करे ची?
  56. 4:12–4:17दिको, इए टिहासिक संदर्ब ग्रन्त के महत्तोके आरो बड़ा देत ची.
  57. 4:17–4:23उही काल कहन्द मे विषेश रूपेईड जखन करनात वन्षी राजा राजा हरी सिंग देव के समः में,
  58. 4:23–4:30मित्फिला में पनजी प्रबंद लागु भारहल्चल, समाज जातिक अजजन्व कखधोर नियम में बंदल जारहल्चल.
  59. 4:30–4:33माने समाज बहुत रूडिवादी बारहल चल.
  60. 4:33–4:39आव, उही समाजिक वरजना सबख भीज्सा, गंगेशक उदैई प्रमानित करे तची,
  61. 4:39–4:45जिस सत्ते का अनवेशन आग्यान पर कोनो जातिक वजजन्म का एक आदिकार नहीं बहुस्टे तची.
  62. 4:45–4:52उनकर जे इ नव्य न्याय ची उ जन्म का आदार पर नहीं विशुद तरक का आदार पर वस्तू का मुल्यांकन करे दची.
  63. 4:52–4:59आ आब उही मुख्य प्रश्नपर बएच ची जिक्र गंगेश उध्होलन ने ग्यानक सते ता कोना प्रमानित होईत ची
  64. 4:59–5:03तची ज़ा हम कोनो वस्तू देखच्छी तची हमरा कोना गयात होएद
  65. 5:03–5:06जा हमर आखी हमरा दूखा नहीं दोरा लगजी.
  66. 5:06–5:10इप्रश्न उं उही समें कदार्षनिक सब कब भीच बहुत पैक
  67. 5:10–5:14विवादक विशैचल, जिना मिमांसक दार्षनिक लोकनिक
  68. 5:14–5:44उगड़ उद़़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़दद़दद़द़दद़दद़दद़ददद़दददददददददददददददददददद�
  69. 5:44–5:46तेसर प्रमानक आवश्शक्ता परत
  70. 5:46–5:49ओ, हो, आई श्रिंखलाता कहियो खटम नहीं होएत
  71. 5:49–5:52एक दम टीक, एक राद्दाशनिक भशा में,
  72. 5:52–5:56अनवस्ता दोश, वा अंग्रेजी में इन्फाइनाइट रिग्रेस कहल जाईत छी
  73. 5:56–5:59वुदारू कु, इत असमबववची
  74. 5:59–6:07अवाची, मने जग्यान उत्पन होगते स्वता सत्ते होगते ची, तो दून्या मे कोनो व्यकती कईो ब्रमिद की एक होगत,
  75. 6:07–6:14जब हम दूरस्से कोनो गाज के भूध भूजी लोग, तो मीमान सकक कन उसार तो सत्ती भोजे बाख जाही?
  76. 6:14–6:18अ, आ गंगेश थीक एही बिन्दू पर मी मांसक्कर क्हन्दन करे चन.
  77. 6:19–6:20गंगेश की कहजचते?
  78. 6:20–6:23गंगेश क्तर कची जे जग यान स्थप्रमानित होईद,
  79. 6:24–6:28तम मानव मन में संचय वा डाूट कतो उत्पन नहीं बहसके चल.
  80. 6:28–6:32बलकुल, ज़ सब यान जन्मस सत्या जी,
  81. 6:32–6:35तद सन्श्याय की कुन न स्थान हैने बजेत आची.
  82. 6:35–6:39तफीलिल गंगेश परत्धाः प्रमाना वाद कर वकालत करे चती.
  83. 6:39–6:45नव्यनयक अनुसार ज्यानक सत्तिता कब परिक्षन अकर व्यवारिक सपलता से होई तची.
  84. 6:45–6:49गंगेश एकरा प्रव्रुत्ती समर्त्य कही चती.
  85. 6:49–6:51उजीवन बहरी इमानत जे उते साब चल
  86. 6:51–6:57एक रा तनिक सरल बाशा मे समजाई एू, माने हमर जे आक्षन आची उकर सफलता?
  87. 6:57–7:06रा, जेना मानिलिया अंदारा मे रस्तापर खसल एक ता दोरी के कुनो व्यकती साप बुजलै तची, इप्रसिद रज्जू सरप न्याईभेल.
  88. 7:06–7:07नियाईभेल
  89. 7:07–7:09आई ये उदारन्त बहुत प्रसिद थचे
  90. 7:09–7:12तज़ा उ व्यक्ती दरा के बाग जाई तच्छी
  91. 7:12–7:14तच्छी उकर भ्रम्त मन में बनल रहल
  92. 7:14–7:15एक दम
  93. 7:15–7:18उजीवन बहरी इमानत जे उते साब चल
  94. 7:18–7:20मुदा ज़ौ तोर्च जार के
  95. 7:20–7:26तक्हन सत्त्त सोजा आवग तची जे इस साप नहीं मात्र दोरी आची
  96. 7:26–7:30जए उदोरी के उठा कग़ कोनो समान बान दे ले तची
  97. 7:30–7:33तो उगर प्रव्रित्ती वा आख्छन सफल भेल
  98. 7:33–7:38तक्ही गंगे शी कह रहल चतीन जे सत्तिर कोनो आमुर्त वस्तू नहीं
  99. 7:38–7:40वो आख्छन सफल भेल
  100. 7:40–7:42तकी गंगे शी कह रहल चत्हीन
  101. 7:42–7:44जे सत्तिर कोनो आमुर्त वस्तू नहीं
  102. 7:44–7:47अपी तु उ आची जे काज करे तची
  103. 7:47–7:49जे प्रक्टिकल आची
  104. 7:49–7:51उ तीक एही बात पर जोर देचत्हीं
  105. 7:51–7:54ग्यान की सत्तिता उकर उप्योगिता
  106. 7:54–7:56आप प्रिक्षन सपरमानित होईताची
  107. 7:56–7:58आये दे उमा ख्याती वाद
  108. 7:58–8:01आथाद व्रम कटन्त्र के बुजब आवष्षक आची
  109. 8:01–8:03व्रम कोना उत्पन्नो होईताची
  110. 8:03–8:05इक ता बहुत प्रश्ना आची
  111. 8:05–8:08प्राभाकर मिमान सक एक रा अख्याती कही चतिन
  112. 8:08–8:10हुनकर मत आची
  113. 8:10–8:14जखन कुनो व्यक्ती सीप के देखी कचानिबुज हैताची
  114. 8:14–8:16तो उस सीप के चमक देखाईताची
  115. 8:16–8:20आ उक्रा अपन इस्म्रिति में राखल चानिक अस्मरन होईताची
  116. 8:20–8:24माने उस सोजा राखल सीप आस्म्रिति कचानिक भीज के भेद
  117. 8:24–8:26नहीं बुजि पावे तची
  118. 8:26–8:31इक्दम, तप्राभाकरक अनुसार ब्रहम केवल भेदक अग्यान अची
  119. 8:31–8:34माने आहा फरक नहीं भूजी रहाल ची
  120. 8:34–8:36मुदा एकरा सांक की परक पडे तची
  121. 8:36–8:39जब हम सीप के चानी भूज रहाल ची
  122. 8:39–8:41ता हम गलडची
  123. 8:41–8:44हम्रा पडल चे जे न्याएक एकरा
  124. 8:44–8:49अन्निदाख्याती कहे चदिन, इसुख्ष्मताख की आविष्वक्ता चे?
  125. 8:49–8:54इते बहुत पैक ब्रक अची, आई मानव चेतना कारे प्रनाली के स्पस्ट करी तची.
  126. 8:54–9:00देखू, न्याएक कानुसार ब्रम केवल नहीं भुजब, वा अग्यान नहीं अची.
  127. 9:00–9:02इएक्ता सक्रिया गल्ती आची
  128. 9:02–9:04सक्रिया गल्ती
  129. 9:04–9:06मने अक्तिव आरर
  130. 9:06–9:08अग, व्यक्ती सचेत रूपेन
  131. 9:08–9:10सोजन राखल सीप में
  132. 9:10–9:12एक्ता एन गुन देखिड़ा लगा जी
  133. 9:12–9:14जे उते चब दे नहीं करे आची
  134. 9:14–9:16चानी पन
  135. 9:16–9:18एक वस्तु के आन वस्तू रूप में
  136. 9:18–9:28अग, मैंने प्राभाकरक लेल ब्रम एक ता कमी आची, मुदा गंगेशक लेल ब्रम एक ता मिथ्या आवो पन आची.
  137. 9:28–9:33बलकु, मस्तिष्क सक्रिय रूप से चीप पर चानिक गुन थोपी रहा लगची.
  138. 9:33–9:39इबूजब ताही लेया विष्यक अची कारन जब भ्रम एक ता सक्करी आरोपना ची,
  139. 9:39–9:45तो उखलब दूर करबक लेल हम्रा सब के उत्बे सक्करी अ रूप से सत्यक परिक्षन करे पडद.
  140. 9:45–9:48मने उही प्रव्रत्ती सामर्थ के प्रयोग करे पडद.
  141. 9:48–9:53अद्दादत, हामी भूजी रहल ची, जग गलती सक्रीया ची, तद समडान सी हो सक्रीया है बाक चाही.
  142. 9:53–10:03एक दम टीक, मुदा देखु, इत भेल प्रत्यक्ष ज्यानक गब, जटे हमरा सब तोर्च जारी, कर दोरी वा शापकेन देख सकए ची.
  143. 10:03–10:07वूदा जीवन में प्रत्तिक वस्तु प्रत्त्छ्ष नहीं होई तची
  144. 10:07–10:08आँ, बिल्कुल
  145. 10:08–10:11जा आम दूर पहाड पर दूवा दिख़ेखई ची
  146. 10:11–10:16तवम्रा सब अनुमान लगवएची जे उते आगी हे बाख चाही
  147. 10:16–10:20ततई इ अनुमानक तन्त्र कोना काज करई तच्छ नब याये में
  148. 10:20–10:23अनुमानक प्रान अच्छी व्याप्ती
  149. 10:23–10:29व्याप्ती अद्धात उं लेतु असाद्ध्यक भीचक अटूत असारुभहुम इक समबन
  150. 10:29–10:33आप दूवा आ आगे की समबन्त कईो तुटी नहीं सकेट आची
  151. 10:33–10:37गंगेश सपूर्व बोध्धारकिक आप प्राची नयाएक लोगनी
  152. 10:37–10:40व्याप्तिक बिन बिन परिबाशा सब देहनली
  153. 10:40–10:43मुदा उसब दोष्पूरन चल
  154. 10:43–10:49अद्द्तार्किक अप्राछी न्यायक लोगनी व्याप्तिक बिन-बिन परिबाशा सब देहन ली
  155. 10:49–10:51मुदा उसब दोष्पूरन चल
  156. 10:51–10:53दोष्पूरन की अख चल
  157. 10:53–10:56कारन उपरिबाशा सब उते विफल बहुजाई चल
  158. 10:56–10:59जते कोनो वस्तूक अबहाउ समबव नहीं होई चल
  159. 10:59–11:05गंगेश उसब पुरान परिबाशा के खंदित के एक ता नव सिद्धानत लक्षन स्तापित के लिए,
  160. 11:05–11:10आ एते उ एक ता बहुत महत्वपुन अवद्दारना दिलनी उपादी.
  161. 11:10–11:12उपादी, इग की आचे?
  162. 11:12–11:17जन्नियम इए जे जदे दूवावाची उते आगी आची,
  163. 11:17–11:19ता एमे उपादी कते साभी गेल,
  164. 11:19–11:23की गंगेस सामान ने तरक में कोनो चिद्र तलाश का रहल चलाए?
  165. 11:23–11:28नहीं नहीं, गंगेस तरक का चिद्र के बंद कर रहल चलाए.
  166. 11:28–11:32उपादी, ओ नुकायल वा अत्रिक्त शर्ट तची,
  167. 11:32–11:35जे कोनो अनमान के दूशित कोदाई तची
  168. 11:35–11:37माने एक ता हिडन कंटिष्चन?
  169. 11:37–11:41ता माने लियाओ, हम्रा सब यी तरक दियों
  170. 11:41–11:44जे जते आगी आची वो ते दूवा आचे
  171. 11:44–11:45की इसत्य आच?
  172. 11:45–11:46इसत्य आच
  173. 11:46–11:47नहीं
  174. 11:47–11:49तब तलोहा मे आगी आचे
  175. 11:49–11:51मुदा दूवा ता नहीं होई ता च्यो ही में?
  176. 11:51–11:55इक दम, दूवा तकने उठत जखन कात भीजलो.
  177. 11:55–11:59ता आगी अदूवा के भीजका समबंद सारो भोमिक नहीं आची.
  178. 11:59–12:02उईद में इक ता शर्ट लागल आची भीजल कात.
  179. 12:02–12:06अहो आई वीजल काते उपादी एचे
  180. 12:06–12:06बलकल
  181. 12:06–12:10ता जै हमरा सब एकरा आदूनेक भिग्यान के बाशा से जोडी
  182. 12:10–12:14ता एई हिडन वेर्येबल वानुकायल चर जका आची
  183. 12:14–12:17माने जेन आम मने लियाओ हमर लग एक ता मशीन अची
  184. 12:17–12:23अं देखे ची जे जक्यखन मशीन का स्विछ अंकरे ची मशीन चले लगे तची
  185. 12:23–12:29ता हम अनुमान लगवाम जे स्विछ अंकर अब हे तु अची अम मशीन अख्चलव साथ द्या चे
  186. 12:29–12:34मोदा मशीन तकने चलत जक्यखन उकर प्लग बिजली सा लागल हो
  187. 12:34–12:36इक्दम सटी कुप्मा
  188. 12:36–12:39तप्लग लागल रहब एक ता उपादी भेल
  189. 12:40–12:41या प्लग निकाला लची
  190. 12:42–12:44ता हम कतबो सुछ अण करी
  191. 12:44–12:45मशी नहीं चलत
  192. 12:45–12:48तब बिना उपादी के पहचान केने
  193. 12:48–12:51हमर निषकर्ष पूरन ता गलत बहुऽ सकेच्छे
  194. 12:51–12:53इब बहुत बड़िया सदमजे लूहां
  195. 12:54–12:56उपादि की विषेष्ता इए ची
  196. 12:56–12:59जे उ साद्द्द्यक सदाई रहत
  197. 12:59–13:02जेना मशीनक चलब वादुवामुदा
  198. 13:02–13:05हे तुक सदाई रहत से आवश्ष्यक नहीं
  199. 13:05–13:08नव्वे नयाई इई इस पष्ट करे तची
  200. 13:08–13:13जे सत्ते दरी पूछ बाक लेल हम्रा सब के असत्ते व्याप्ती के चिन्वो परत.
  201. 13:13–13:19माने इत आदूनिक विग्यानक नियंत्रिच चर्वा कंत्रोल्ट वेर्येबल्ज्जकाब हैल.
  202. 13:19–13:23जो हां प्रेयोश शाला मे उपादी के निंट्रित नहीं करव,
  203. 13:23–13:25ता आहाक शोद़क परिनाम दूशित बहुजायत.
  204. 13:25–13:27बिल्ल्कुल.
  205. 13:27–13:29आए एते सा आगु बड़ेद,
  206. 13:29–13:34मी मान्सक अनन्याइक के भीचकर एक ता आरो पैग विवाद परभएच ची.
  207. 13:34–13:38दाह सक्ती अथात आगीक जरेबाक छम्ता
  208. 13:38–13:40एह में की विवाड चल?
  209. 13:40–13:42आगीत जरे थे आचे?
  210. 13:42–13:44मी मान सक माने चती
  211. 13:44–13:47जे आगी में एक टाद्रष्षक्ती होई तची
  212. 13:47–13:50जक्रा कोनो जादुई मंत्रोवा मनी रोकी सकैता
  213. 13:50–13:51मनी?
  214. 13:51–13:52माने रत्न?
  215. 13:52–13:57इत तार के एक सबेसी जादूइ गप लगाई ताछी, गंगेष एक्रा कोना देख अच्छा थे.
  216. 13:57–14:01मिमान सक के इश्वक्ती वाद, उही समया बहुत प्रचलिच्छल,
  217. 14:01–14:05हुनका लोकनिक मानब्चल, जी आगिक अपन कोनो बहुतिक गुन सें,
  218. 14:05–14:07अद्रिश्य दाह सक्ती से ज़ाएतची
  219. 14:07–14:09अजक्हन आगिक लगे उ मनी राखी दील ज़ाएतची
  220. 14:09–14:11तो उ अद्रिश्य शक्ती नश्ट बहाजाएतची
  221. 14:11–14:13अगिक तरक उही चले
  222. 14:13–14:15मुदा गंगेश एक तीव्र खंडन करे चती
  223. 14:15–14:17उ लागव कषिद्धानत अपनावे चती
  224. 14:17–14:22अगर तरक उही चले, मुदा गंगेश एकर तीवर खंदन करे चती,
  225. 14:22–14:27उलागव कषिद्धान्त अपनावे चती, जकर हमरा सव अख्कम्स रेजर कहच्छी.
  226. 14:27–14:29सरलता कषिद्धान्त
  227. 14:29–14:32जे हमरा सव अपन गरके बत्तिक बात करी,
  228. 14:32–14:34जे बत्ति नहीं जरी रहला ची,
  229. 14:34–14:39तकी हमरा इमान्बाक चाही जे बत्ती में प्रकाष्षक्तिक हतम बोगेल?
  230. 14:39–14:41ने, उतो अनावष्ष्ष्टिल्ता बोगेल.
  231. 14:41–14:47आई, इस सोचब बेसी तारकि कची जे स्विछ अफ अची वाकुनो तार तूटल आची.
  232. 14:47–14:51अद्रिश्शक्तिक कल्पना तक कल्पना गवरब होगेल
  233. 14:51–14:55गंगेश थीक एही अनावश्ष्छ जटिल्ता पर प्रहार करे चति
  234. 14:55–15:03उ कहे चति जे आगी जरेबाक लेल, केवल आगी अप्रके बंधका अबहाव माने मनिक नही रहप पर्याप तची
  235. 15:03–15:06कोनो पाल्तु जादूई शक्तिक कल्पना वेर्त थाची
  236. 15:06–15:12मने जखन मनी आची ता उ एक ता बहुतिक ब्लोकर आची ता हीले हाथ नहीं जरे ताची
  237. 15:12–15:18एक दम जखन मनी हता लिल जाए ता प्रतिबंदधक अबहाँ बहाँ जाए ताची
  238. 15:18–15:20अखाज भाज बहाज आची
  239. 15:20–15:23यह ते गंगेशेक्ता क्रान्तिकारी बात कहे चतिन,
  240. 15:23–15:28उ आबहाउ वा आप्सेंस के एक ता यतार्त कारन माने चतिन.
  241. 15:28–15:33मने कोनो वस्तुक नहीं रहब, से हो कोनो गतनाक कारन बहुस अके तची.
  242. 15:33–15:37हा, इनवे नयाय कब बहुत पाइक देन आची.
  243. 15:37–15:40वी तो भेल प्रत्यक्ष आ अनमानक गब
  244. 15:40–15:46मुदा उम्म वंः राँ सबस सन्सार में बहुत रास नवशव्द अवस्तू के चिनहाए ची
  245. 15:46–15:50जकर हम्रा सब के पहली सब कोनो प्रत्यक्ष ज्यान नहीं होई तची
  246. 15:51–15:53पोती में उप्मान प्रमानक चर्चा आची
  247. 15:53–15:56अ, उप्मान, वा आनलोजी
  248. 15:56–15:59उही में जंगली गाय वा गवेक उदाहरन देल गी लची
  249. 15:59–16:02इउप्मान कोना काज करे तची
  250. 16:02–16:04उप्मान उग्यान स्रोत ची
  251. 16:04–16:07जकर माद्ध्यम साद्रिष्श
  252. 16:07–16:09वा सिमिलरेतिक आदार पर
  253. 16:09–16:13कोनो नुतन वस्तुक नाम आव उकर अर्ठक भोद होईताची
  254. 16:13–16:17मानिलिया कोनो गाँक वेक्ती कही उ जंगली गाय
  255. 16:17–16:20जक्रा गवे कहल जाईताची नहीं देखने आची
  256. 16:20–16:20तीख आची
  257. 16:20–16:24आव कोनो जंगल क निवासी उकरा उप्देस दैटाची
  258. 16:24–16:27जगवै समान ने गायजगगगग होई तची
  259. 16:27–16:30जगन उ वेक्ती जंगल जाई तची
  260. 16:30–16:35यहन पसु देख़े तची जे गाएज़का अची तव उक्रा उप्डेस समरन होई तची.
  261. 16:36–16:41औहे समान तक दर्षनसु बुजजजाए तची, जे यी पशु गववई आची.
  262. 16:41–16:42बलकल.
  263. 16:42–16:49जे आम्रा सबेक्रा वर्त्मान संदर्ब में समजी, मने मानी लिया कोनो बच्चा कहीो जब्रा नहीं देखने आची.
  264. 16:49–16:57हम उक्रा कहेच छी जे जब्रा गोडाजे का होई तची, मुदा उक्रा देः पर कारी उजर दारी होई तची.
  265. 16:57–17:27उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई �
  266. 17:27–17:29अगर दोशर गवई देखाई तव्यक्ति उक्रा की कहत
  267. 17:29–17:30उते कन्फुज भेजेत
  268. 17:30–17:31इक्दम
  269. 17:31–17:32ताहे लेल
  270. 17:32–17:34गंगेश तापित करे च्थिन
  271. 17:34–17:36जे वस्तूक वाच्चारत
  272. 17:36–17:38केवल उईक्टा वस्तूक लेल नहीं
  273. 17:38–17:40आपितु सम्पूरन जाति
  274. 17:40–17:42तव्यक्ती उक्रा की कहत?
  275. 17:42–17:44उतक खॉट बहेजेत?
  276. 17:44–17:48इग्दम. ताहे लेल गंगेश थापित करे चत्फीन,
  277. 17:48–17:52जे वस्तुक वाच्चार्त, केवल उईक्ता वस्तुक लेल नहीं
  278. 17:52–17:57आपि तु समपूरन जाती वा उनिवर्शल क्लासक लेल हुईत अची,
  279. 17:57–18:00जिना गवयत्व वाजेब्रापन
  280. 18:00–18:02इदर्क बहुत सुद्रिद है च्ये
  281. 18:02–18:07मुदा जखन आम्रा सब चार्वाक दर्शनक गब करे च्यी
  282. 18:07–18:10तो सब तए इसभ की चु आमान्ने कदे च्यती
  283. 18:10–18:13चार्वाक केवल प्रत्यक्ष प्रमान के माने च्यती
  284. 18:13–18:17चार्वाक, अनुमान, वाश्व्द प्रमाड के अमान ने करे चती.
  285. 18:17–18:23उनकर तर्क अची, जो हम भानस गर में आगी अदूवाके एक संगे देखल हूँ,
  286. 18:23–18:29ते एकर एए अद्ध नहीं जे बहूविष्ष में वा अन्यग्रह पर दूवाक संग आगी होए दे.
  287. 18:29–18:32मैंने हम भविश्ष्ट ग्यारन्टी कोना लोस कै ची
  288. 18:32–18:36देखो, चार्वाकक तरक एकता चरम संशे वाद आची
  289. 18:36–18:38अगर अव्यवाहारिक्ता पर प्रहार करे चतीन
  290. 18:38–18:40अव्यवाहारिक्ता माने प्रक्तिकल नहीं अची
  291. 18:40–18:42अव्यवाहारिक्ता
  292. 18:42–18:44माने प्रक्तिकल नहीं अची
  293. 18:44–18:46जब मानव जीवन
  294. 18:46–18:48केवल प्रत्यक्ष पर निरभर रहे
  295. 18:48–18:50तो समपुन जीवन व्यपार थब वजाएत
  296. 18:50–18:52अगर प्रक्तिकल नहीं अची
  297. 18:52–18:55ज़व मानव जीवन केवल प्रत्यक्ष पर निरभर रहें
  298. 18:55–18:58तो समपून जीवन व्यापार तब वजाएत
  299. 18:58–19:00एक दम सत्यद
  300. 19:00–19:02जो हम चारवाग के बात मानी
  301. 19:02–19:04आ अनुमान नहीं करी
  302. 19:04–19:06ता हम तब वस पर्यात्र नहीं का सकब
  303. 19:06–19:08वबविश्षित प्रत्यक्ष नहीं अची,
  304. 19:08–19:10तकी हम भविश्षिक लेल कोनो योजना नहीं बनाभी,
  305. 19:10–19:12नभ्यो नयाएक यी बहुत पएक दे अची,
  306. 19:12–19:14उशब्दवा टेस्टिमनी के अची बविश्वाग नहीं अची,
  307. 19:14–19:16विश्वाग नयायक नहीं अची,
  308. 19:16–19:21तो हमरा अखधक रासाएनिक सन्रचनाक प्रत्यक्ष ज्यान नहीं अची,
  309. 19:21–19:25मुदा हम दोक्तर के कतन पर विश्वास करे अखध काले ची.
  310. 19:25–19:28बहुविष्ष्ट प्रत्यक्ष नहीं अची,
  311. 19:28–19:31तकी हम भहुविष्ष्ट लेल कोनो योजना नहीं बना बी?
  312. 19:31–19:40नब्यो न्याएक यी बहुत पएक दे आची, उशब्द वा टेस्टिमनी के एक ता स्वतन्त्र आ अती महत्वपुरन जान के शूथ मानेच छती.
  313. 19:40–19:43मुदा कोनो भी शब्द प्रमान नहीं बहुशके तची.
  314. 19:43–19:45तक कोन शब्द प्रमान आची?
  315. 19:45–19:49गंगेश श्पष्ट करे चती जे केवल आप्द पूरुष के कतने प्रमान आची
  316. 19:49–19:52आप्द पूरुष उआची जे सत्ते जनाईत आची
  317. 19:52–19:55आप बिना कोनो दोखा देल सत्ते बजईत आची
  318. 19:55–19:58माने अख्स्पर्ट होए आ औनेस्थ होए
  319. 19:58–20:09आप ज़े दोक्तर अखध अखध ज्यान रहे चत्छ नि मुदा कुनो कमपनी सलाब लोक गलत अखध लिखिरहल चत्छ ता हुनकर कतन शब्द प्रमान नहीं भेल, कारन उ सत्टिनिष्ट नहीं रहला.
  320. 20:09–20:12इत बहुत प्रासंगिक बात अच्छी आई कालिक लिल
  321. 20:12–20:20मुदा इस समपूड विमर्ष प्रत्यक्ष अनुमान, उपमान, शब्द, उपादी, ख्यातिवाद
  322. 20:20–20:23इस अन्ततध कताई जारहल अच्छी
  323. 20:23–20:27हम्रा सब इस जटिल तारकिक व्याम केक करहल ची
  324. 20:27–20:32सम्पुर्ण्याय्दर्शनक अंत्म्लक्ष्ः अपवर्ग अर्थात मोख्ष अची
  325. 20:32–20:36मोख्ष इटर्ख्षास्ट्रस्ट्र से मोख्ष कोना भीतत
  326. 20:36–20:40महर्षी गोतमक नयाय सुत्रमे दुख्खक एक्टा चक्र बतोल गेल आचे
  327. 20:40–20:45जक्रा गांगेश नव्य न्यायक के तारकिक ध्रातल पर आरो पुष्ट करे चतिन.
  328. 20:45–20:53इच्च्र अची मिथ्याग्यान, उक्रा से दोष, फिर प्रव्रित्ती, फिर जन्म, आ अंत में दुख्ध.
  329. 20:53–20:58मने दुखक मुल जरी मिथ्ट्यागयान अचे असत्ते के सत्यमानी लेनाई
  330. 20:58–20:59एक दम
  331. 20:59–21:01एक तुल्टा करब लोचक होईत
  332. 21:01–21:04बोधदर्षन से हो दुखक अन्ते गओप करत अचे
  333. 21:04–21:08मुदा उद्रिशनावा इच्चाके निंट्रित करवापर भेसी बल दैटचे
  334. 21:08–21:11आद दर्शनक अप्रोच तने का लग आचे
  335. 21:11–21:15आर नयाय दर्शन मिथ्ख्या गयान के दूर करभापर बल दाई तचे
  336. 21:15–21:18एक रा एक ता उदारन्ट से बुजेई ची
  337. 21:18–21:21मानी लिया कोनो वक्ती के समाथ फुनक लद चे
  338. 21:21–21:22तीक आचे
  339. 21:22–21:26यो वेक्ती फोंके दूर राखी के अनुशासनक बलपरी लध चोडे थ सके ताची
  340. 21:27–21:29वा जखनो इसते बुजी जाई ताची
  341. 21:29–21:34जे फोनसे भेटल सुक शनेक अब्राम्म कची तक्हनो कर लध चुटे ताची
  342. 21:34–21:38इविश्लेशन नवे नयाये के रिदाये के सपष्ट कराई तची
  343. 21:38–21:43देखू बाय संझम्वा अनुशासन तातकालिक रहत दसकाई तची
  344. 21:43–21:48जखन इस्तिती गम्दीर हो, तची अनुशासन एक तब्रेक जगका काज कराई तची
  345. 21:48–21:51मुदा उ परमनेंट्ट सुल्श्टन नाई आची?
  346. 21:51–21:52नहीं
  347. 21:52–21:57नवे न्याये के अनुसार केवल अनुशासन से इस्थाई मुक्ती नहीं बहिताई तची
  348. 21:57–22:00जखंदरी भीतर मित्ट्या ज्यान बनल आची
  349. 22:00–22:03जे समाथफोन अनन्त सुखक सादन आची
  350. 22:03–22:06तक्हन्दरी व्यक्ती भीतर से चट पताईत रहत.
  351. 22:06–22:07तु समदान की आची?
  352. 22:07–22:12गंगेशक अनुसार तत्तु ज्यान वास्सत्ते का बोद हे जड़ी के काटे तची.
  353. 22:12–22:15जगन प्रमानसबख माद्यम से एस पष्ट भोजाई तची,
  354. 22:15–22:19जे इशुक अवास्त्विक अची तक्हन भ्रम दूर भोजे तची
  355. 22:19–22:21आजक्हन भ्रम नश्थ होई तची
  356. 22:21–22:23तराग्दुए स्वता शान्त बजाई तची
  357. 22:23–22:25बलकुल
  358. 22:25–22:28दोश समाप्त भेलासन सकाम कर्म रुकी जाई तची
  359. 22:28–22:31अक कर्म नई भेलासन पुनर जन मनही होई तची
  360. 22:31–22:35इसम्पून दुख्खक आत्यान्तिक अंत आची
  361. 22:35–22:40अंद विश्वास, रूडि, और बिना परिक्षनक मानल गेल ज्यान के चुनाति देलनें
  362. 22:40–22:45अद्दर्क और परिक्षनक एक ता नव मार्क प्रषस्त केलनें
  363. 22:45–22:51जे मानव चेतना के अग्यानक अंदारस से निकाली सत्किक प्रकाश में आनत अची.
  364. 22:51–22:56मने तत्व चिन्तामनी केवल चोदवम शताभ्दिक दर्षनक पोठी नहीं आची.
  365. 22:56–23:02इए आए मौन के सपष्ट रूपन सुच्बाक सत्ते के परक्बाक एक ता तूल के तची.
  366. 23:02–23:06इस नव्य न्याय बाशा और तर्क का एक ता एहन अभेद्द द्हाचा देलेग
  367. 23:06–23:13जकर प्रेोग बाद में व्याक्रन, आयुर वेद, साहित्य, और योधरिक की कानून में सवहल.
  368. 23:13–23:18इग्रन्त सिख्वाईत आची जिस सत्यक अनवेशन में प्रष्नपुषब आवश्षक आची.
  369. 23:18–23:19एक्दम!
  370. 23:19–23:23और इविमर्ष्स समाप्त करभास पूर्व एक्टा एहन विचार आचे,
  371. 23:23–23:26जे हम्रा लगातार मन्धन करभापर विवष्कर रहल आचे.
  372. 23:26–23:31इं नव्यन्यायक एक ता अवदारना ज़क्रा अनुव्यवसाय कहल जायतची
  373. 23:31–23:38औह, अनुव्यवसाय वा अपर्सेप्षन इं चेतना के गेराए के नापे तची
  374. 23:38–23:43इं बाय वस्तु ग्यान नहीं अपी तु आपन हे ग्यानक आन्तरिक प्रत्यक्ष चची
  375. 23:43–23:45मने ग्यानक ग्यान
  376. 23:45–23:47एक रा एहन बूजु
  377. 23:47–23:49जों कोनो वक्ती के
  378. 23:49–23:50कामला वा जोंदिस
  379. 23:50–23:52रोग बहोगे लची
  380. 23:52–23:54औक रा एक ता उज्जर दिवाल
  381. 23:54–23:56पीर देखाई दरहल अचे
  382. 23:56–23:56तीख शे?
  383. 23:56–23:57ता इस पष्ट अची
  384. 23:57–24:00जे उकर बाहे प्रत्तक्ष ग्यान
  385. 24:00–24:03इक ता ब्राम आची, क्योंकी दिवाल प्यर नहीं आचे.
  386. 24:03–24:06मुदा जगन उ वक्ती कहे तची,
  387. 24:06–24:08हम्रा दिवाल प्यर देखाई तची,
  388. 24:08–24:11तई इज आन्तरिग ज्यान आची,
  389. 24:11–24:12वोकर आपन अनुबहुती,
  390. 24:12–24:15जे वोकर प्यर देखाई तची,
  391. 24:15–24:17से सो प्रतिषत सत्ते आचे
  392. 24:17–24:19इबहुत पेग भात आचे
  393. 24:19–24:22हमर आख हमरा दूखा दशा के तची
  394. 24:22–24:27मुदा हमर उई दूखाक अनुवूती पुरनता हचते आचे
  395. 24:27–24:29इएक टा एहन सत्ते आची
  396. 24:29–24:34जे हमरा सब के अपना चेतनाक गाराई में जाखा बाकलेल प्रेरिथ करे तचे
  397. 24:45–24:50अख्रा देख्वा की प्रक्रिया और उही प्रक्रियाक अनुबूती में सहो नुकायल अचे.
  398. 24:51–24:56गंगेशक इदर्षन जे माना मात्रक सोचने समजनेक तरीका बदली दैता ची,
  399. 24:56–25:00उसद्यक अनवेशन में एक ता सदाय जीवित रहयोला मशाल अची.

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वास्तव में सत्ति होईते नहीं, मात्र एक ता संयोग होए. आप, यी बहुत गेर प्रषना छी. आप, करन देखु, हम्रा सबक चारो कात जे यी दिन्या आची, उक्रा हम्रा सब अपन आखेज देखे ची, कान से सूनेची, अगरा हमरा सब अपन आखेज देखेच़े, कान से सूनेच़े, आए मोन में एक दारना बनाई लेई चीे, जे यी सत्तिया चे. मते जे यी समपुरन दारना मत्र एक ता ब्रहम हो ता. तद? एकदम. आ, एही प्रष्न पर माने सद्यों से दार्ष्निक लोकनी विचार करीता लचती. बलक्ल. आ, आए, आए, हम्रा सब एही विषे पर बहुत गेराई में जार हल चीए. चोदावम शताब दिक मितला में, एक ता एहन दार्ष्निक भेल चला, जे केवल इप प्रशना त्हार नहीं के लें आपी तु तत्कालीन समपुन भारत्ये दार्षनिक विवस्ता के जरसी हिला कर लगी दिलने. हाँ, हमरा सब गंगेश उताद्याई जीक कगब कराल ची. एक दम चीक. उनकर रचिद जिक्रान्तिकारी गरन्त हैजी, तत्व चिंता मनी, आई हमरा सब उक्रे विष्लेषन करब. आश्रोता लोकनी के बतादे, जे एकर जे उतक्रिष्ट मेठ्ली अनुबाद सोजा आए लची, उगजेंद्र ताकृ जी केने चती, आई विदेह प्रकाशन से प्रकाशिद भेल अच्छे इकुनो सादारन पोथी नहीं अच्छे मने इई नव्व्य नयायक आदारस्तम अच्छे नव्व्य नयाय आभ दाध नव्व्तरक शास्त्र ता आई हम्रा सव इबुजब जे तो बबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबब ब्राचीन न्याय, जे महर्षी गोतमक समय से चली आवी रहल चल, उो सोलाथा बिन्न बिन्न पदार्त पर केंद्रिच्चल. सोलाथा? उो सब त बहुत बहागे ले? रहा. उही में उम, आत्मा, शरीर, इंद्रिय, मोक्ष, मने सब कचुके एक संगे राखल गेल चल. मुदा गंगेश कहलनी जरूकू, जो हम्रा सव यी नहीं जाने ची, जी कुनो ग्यान सत्ते कुना होईत ची, ता आन विषे पर गबकर वेरत ची. मैंने पहले इत प्रमानित करू, जे आहाग ग्यान सत्ते अची. इक्दम, उ सम्पुर्न दर्षन के केवल चार्टा प्रमाण पर किंद्रित कोदलनी, प्रत्यक्ष अनुमान, उप्मान आशव्द. ये दर्शन के इतिहास में जक्रा हम्रा सब ज्यान मिमान्सा या अपिस्तमलोगी कहत्छे, औही दिस एक ता अबहुत पूर्व कदम चल. ये ता बहुत अबहुत अछे. मुदा अगते एक ता बहुत पैग विरुदा बास दिखाई तछे. ज़ाहम्रा सब गंगेज जीवन व्रित्त पर नजरी दी, तई इतिहास आदूशन पंजीक विवरन अचमभित कर अच्छे. आई हूंकर जीवन कता बहुत रोचक अच्छी. माने, श्रोता सब से गयात होईत आची, जे हुनक जन्म, पिताक म्रित्युक पाच वर्ष बाद भेल चल. आए, एक टा एहन बाट आची, जे ततकालीन समाज में बहुत पैग विवादक विषे रहल हैता. बिल्कुल! चौदवी शताब्दिक समाज में एकर की एर्थ भेल है ते से हम्रा सब अनुमान लगा सक अच्छी एं तदुप्रान्त उम समाज कर सब नियम के तोड़ेत हुनक विवां एक टाच्चमारिन से भेल जे उही समयक वर्न वेवस्ताक हे साब से अकलपनी अचल एक दम अकन में आजन स्रूती तएते दरी कहत आची जे उ बालकाल में मंद बुद्दी चला माने लोक उनका साँ चिलम बरवाक आहुक का अनबा काज करावे चला ता हम्रा एबुजबा कची ये जे वियक्ती समाजिक रूप्सां ये देक बहिष्क्रित आँ सीमान्त क्रिच्छल उचानक सा महा महाँ बाद्ध्या ये तक रही तक तो बनी सके तची. ये एक ता पूरन अंदर दोग का कता जी. आप जदे बोद्दिक प्रतिबा जन्म आदारिज सब सीमारेखा के तोडी रहल आची. आब एक राजा तनिक विखंडित करे ची? दिको, इए टिहासिक संदर्ब ग्रन्त के महत्तोके आरो बड़ा देत ची. उही काल कहन्द मे विषेश रूपेईड जखन करनात वन्षी राजा राजा हरी सिंग देव के समः में, मित्फिला में पनजी प्रबंद लागु भारहल्चल, समाज जातिक अजजन्व कखधोर नियम में बंदल जारहल्चल. माने समाज बहुत रूडिवादी बारहल चल. आव, उही समाजिक वरजना सबख भीज्सा, गंगेशक उदैई प्रमानित करे तची, जिस सत्ते का अनवेशन आग्यान पर कोनो जातिक वजजन्म का एक आदिकार नहीं बहुस्टे तची. उनकर जे इ नव्य न्याय ची उ जन्म का आदार पर नहीं विशुद तरक का आदार पर वस्तू का मुल्यांकन करे दची. आ आब उही मुख्य प्रश्नपर बएच ची जिक्र गंगेश उध्होलन ने ग्यानक सते ता कोना प्रमानित होईत ची तची ज़ा हम कोनो वस्तू देखच्छी तची हमरा कोना गयात होएद जा हमर आखी हमरा दूखा नहीं दोरा लगजी. इप्रश्न उं उही समें कदार्षनिक सब कब भीच बहुत पैक विवादक विशैचल, जिना मिमांसक दार्षनिक लोकनिक उगड़ उद़़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़द़दद़दद़द़दद़दद़दद़ददद़दददददददददददददददददददद� तेसर प्रमानक आवश्शक्ता परत ओ, हो, आई श्रिंखलाता कहियो खटम नहीं होएत एक दम टीक, एक राद्दाशनिक भशा में, अनवस्ता दोश, वा अंग्रेजी में इन्फाइनाइट रिग्रेस कहल जाईत छी वुदारू कु, इत असमबववची अवाची, मने जग्यान उत्पन होगते स्वता सत्ते होगते ची, तो दून्या मे कोनो व्यकती कईो ब्रमिद की एक होगत, जब हम दूरस्से कोनो गाज के भूध भूजी लोग, तो मीमान सकक कन उसार तो सत्ती भोजे बाख जाही? अ, आ गंगेश थीक एही बिन्दू पर मी मांसक्कर क्हन्दन करे चन. गंगेश की कहजचते? गंगेश क्तर कची जे जग यान स्थप्रमानित होईद, तम मानव मन में संचय वा डाूट कतो उत्पन नहीं बहसके चल. बलकुल, ज़ सब यान जन्मस सत्या जी, तद सन्श्याय की कुन न स्थान हैने बजेत आची. तफीलिल गंगेश परत्धाः प्रमाना वाद कर वकालत करे चती. नव्यनयक अनुसार ज्यानक सत्तिता कब परिक्षन अकर व्यवारिक सपलता से होई तची. गंगेश एकरा प्रव्रुत्ती समर्त्य कही चती. उजीवन बहरी इमानत जे उते साब चल एक रा तनिक सरल बाशा मे समजाई एू, माने हमर जे आक्षन आची उकर सफलता? रा, जेना मानिलिया अंदारा मे रस्तापर खसल एक ता दोरी के कुनो व्यकती साप बुजलै तची, इप्रसिद रज्जू सरप न्याईभेल. नियाईभेल आई ये उदारन्त बहुत प्रसिद थचे तज़ा उ व्यक्ती दरा के बाग जाई तच्छी तच्छी उकर भ्रम्त मन में बनल रहल एक दम उजीवन बहरी इमानत जे उते साब चल मुदा ज़ौ तोर्च जार के तक्हन सत्त्त सोजा आवग तची जे इस साप नहीं मात्र दोरी आची जए उदोरी के उठा कग़ कोनो समान बान दे ले तची तो उगर प्रव्रित्ती वा आख्छन सफल भेल तक्ही गंगे शी कह रहल चतीन जे सत्तिर कोनो आमुर्त वस्तू नहीं वो आख्छन सफल भेल तकी गंगे शी कह रहल चत्हीन जे सत्तिर कोनो आमुर्त वस्तू नहीं अपी तु उ आची जे काज करे तची जे प्रक्टिकल आची उ तीक एही बात पर जोर देचत्हीं ग्यान की सत्तिता उकर उप्योगिता आप प्रिक्षन सपरमानित होईताची आये दे उमा ख्याती वाद आथाद व्रम कटन्त्र के बुजब आवष्षक आची व्रम कोना उत्पन्नो होईताची इक ता बहुत प्रश्ना आची प्राभाकर मिमान सक एक रा अख्याती कही चतिन हुनकर मत आची जखन कुनो व्यक्ती सीप के देखी कचानिबुज हैताची तो उस सीप के चमक देखाईताची आ उक्रा अपन इस्म्रिति में राखल चानिक अस्मरन होईताची माने उस सोजा राखल सीप आस्म्रिति कचानिक भीज के भेद नहीं बुजि पावे तची इक्दम, तप्राभाकरक अनुसार ब्रहम केवल भेदक अग्यान अची माने आहा फरक नहीं भूजी रहाल ची मुदा एकरा सांक की परक पडे तची जब हम सीप के चानी भूज रहाल ची ता हम गलडची हम्रा पडल चे जे न्याएक एकरा अन्निदाख्याती कहे चदिन, इसुख्ष्मताख की आविष्वक्ता चे? इते बहुत पैक ब्रक अची, आई मानव चेतना कारे प्रनाली के स्पस्ट करी तची. देखू, न्याएक कानुसार ब्रम केवल नहीं भुजब, वा अग्यान नहीं अची. इएक्ता सक्रिया गल्ती आची सक्रिया गल्ती मने अक्तिव आरर अग, व्यक्ती सचेत रूपेन सोजन राखल सीप में एक्ता एन गुन देखिड़ा लगा जी जे उते चब दे नहीं करे आची चानी पन एक वस्तु के आन वस्तू रूप में अग, मैंने प्राभाकरक लेल ब्रम एक ता कमी आची, मुदा गंगेशक लेल ब्रम एक ता मिथ्या आवो पन आची. बलकु, मस्तिष्क सक्रिय रूप से चीप पर चानिक गुन थोपी रहा लगची. इबूजब ताही लेया विष्यक अची कारन जब भ्रम एक ता सक्करी आरोपना ची, तो उखलब दूर करबक लेल हम्रा सब के उत्बे सक्करी अ रूप से सत्यक परिक्षन करे पडद. मने उही प्रव्रत्ती सामर्थ के प्रयोग करे पडद. अद्दादत, हामी भूजी रहल ची, जग गलती सक्रीया ची, तद समडान सी हो सक्रीया है बाक चाही. एक दम टीक, मुदा देखु, इत भेल प्रत्यक्ष ज्यानक गब, जटे हमरा सब तोर्च जारी, कर दोरी वा शापकेन देख सकए ची. वूदा जीवन में प्रत्तिक वस्तु प्रत्त्छ्ष नहीं होई तची आँ, बिल्कुल जा आम दूर पहाड पर दूवा दिख़ेखई ची तवम्रा सब अनुमान लगवएची जे उते आगी हे बाख चाही ततई इ अनुमानक तन्त्र कोना काज करई तच्छ नब याये में अनुमानक प्रान अच्छी व्याप्ती व्याप्ती अद्धात उं लेतु असाद्ध्यक भीचक अटूत असारुभहुम इक समबन आप दूवा आ आगे की समबन्त कईो तुटी नहीं सकेट आची गंगेश सपूर्व बोध्धारकिक आप प्राची नयाएक लोगनी व्याप्तिक बिन बिन परिबाशा सब देहनली मुदा उसब दोष्पूरन चल अद्द्तार्किक अप्राछी न्यायक लोगनी व्याप्तिक बिन-बिन परिबाशा सब देहन ली मुदा उसब दोष्पूरन चल दोष्पूरन की अख चल कारन उपरिबाशा सब उते विफल बहुजाई चल जते कोनो वस्तूक अबहाउ समबव नहीं होई चल गंगेश उसब पुरान परिबाशा के खंदित के एक ता नव सिद्धानत लक्षन स्तापित के लिए, आ एते उ एक ता बहुत महत्वपुन अवद्दारना दिलनी उपादी. उपादी, इग की आचे? जन्नियम इए जे जदे दूवावाची उते आगी आची, ता एमे उपादी कते साभी गेल, की गंगेस सामान ने तरक में कोनो चिद्र तलाश का रहल चलाए? नहीं नहीं, गंगेस तरक का चिद्र के बंद कर रहल चलाए. उपादी, ओ नुकायल वा अत्रिक्त शर्ट तची, जे कोनो अनमान के दूशित कोदाई तची माने एक ता हिडन कंटिष्चन? ता माने लियाओ, हम्रा सब यी तरक दियों जे जते आगी आची वो ते दूवा आचे की इसत्य आच? इसत्य आच नहीं तब तलोहा मे आगी आचे मुदा दूवा ता नहीं होई ता च्यो ही में? इक दम, दूवा तकने उठत जखन कात भीजलो. ता आगी अदूवा के भीजका समबंद सारो भोमिक नहीं आची. उईद में इक ता शर्ट लागल आची भीजल कात. अहो आई वीजल काते उपादी एचे बलकल ता जै हमरा सब एकरा आदूनेक भिग्यान के बाशा से जोडी ता एई हिडन वेर्येबल वानुकायल चर जका आची माने जेन आम मने लियाओ हमर लग एक ता मशीन अची अं देखे ची जे जक्यखन मशीन का स्विछ अंकरे ची मशीन चले लगे तची ता हम अनुमान लगवाम जे स्विछ अंकर अब हे तु अची अम मशीन अख्चलव साथ द्या चे मोदा मशीन तकने चलत जक्यखन उकर प्लग बिजली सा लागल हो इक्दम सटी कुप्मा तप्लग लागल रहब एक ता उपादी भेल या प्लग निकाला लची ता हम कतबो सुछ अण करी मशी नहीं चलत तब बिना उपादी के पहचान केने हमर निषकर्ष पूरन ता गलत बहुऽ सकेच्छे इब बहुत बड़िया सदमजे लूहां उपादि की विषेष्ता इए ची जे उ साद्द्द्यक सदाई रहत जेना मशीनक चलब वादुवामुदा हे तुक सदाई रहत से आवश्ष्यक नहीं नव्वे नयाई इई इस पष्ट करे तची जे सत्ते दरी पूछ बाक लेल हम्रा सब के असत्ते व्याप्ती के चिन्वो परत. माने इत आदूनिक विग्यानक नियंत्रिच चर्वा कंत्रोल्ट वेर्येबल्ज्जकाब हैल. जो हां प्रेयोश शाला मे उपादी के निंट्रित नहीं करव, ता आहाक शोद़क परिनाम दूशित बहुजायत. बिल्ल्कुल. आए एते सा आगु बड़ेद, मी मान्सक अनन्याइक के भीचकर एक ता आरो पैग विवाद परभएच ची. दाह सक्ती अथात आगीक जरेबाक छम्ता एह में की विवाड चल? आगीत जरे थे आचे? मी मान सक माने चती जे आगी में एक टाद्रष्षक्ती होई तची जक्रा कोनो जादुई मंत्रोवा मनी रोकी सकैता मनी? माने रत्न? इत तार के एक सबेसी जादूइ गप लगाई ताछी, गंगेष एक्रा कोना देख अच्छा थे. मिमान सक के इश्वक्ती वाद, उही समया बहुत प्रचलिच्छल, हुनका लोकनिक मानब्चल, जी आगिक अपन कोनो बहुतिक गुन सें, अद्रिश्य दाह सक्ती से ज़ाएतची अजक्हन आगिक लगे उ मनी राखी दील ज़ाएतची तो उ अद्रिश्य शक्ती नश्ट बहाजाएतची अगिक तरक उही चले मुदा गंगेश एक तीव्र खंडन करे चती उ लागव कषिद्धानत अपनावे चती अगर तरक उही चले, मुदा गंगेश एकर तीवर खंदन करे चती, उलागव कषिद्धान्त अपनावे चती, जकर हमरा सव अख्कम्स रेजर कहच्छी. सरलता कषिद्धान्त जे हमरा सव अपन गरके बत्तिक बात करी, जे बत्ति नहीं जरी रहला ची, तकी हमरा इमान्बाक चाही जे बत्ती में प्रकाष्षक्तिक हतम बोगेल? ने, उतो अनावष्ष्ष्टिल्ता बोगेल. आई, इस सोचब बेसी तारकि कची जे स्विछ अफ अची वाकुनो तार तूटल आची. अद्रिश्शक्तिक कल्पना तक कल्पना गवरब होगेल गंगेश थीक एही अनावश्ष्छ जटिल्ता पर प्रहार करे चति उ कहे चति जे आगी जरेबाक लेल, केवल आगी अप्रके बंधका अबहाव माने मनिक नही रहप पर्याप तची कोनो पाल्तु जादूई शक्तिक कल्पना वेर्त थाची मने जखन मनी आची ता उ एक ता बहुतिक ब्लोकर आची ता हीले हाथ नहीं जरे ताची एक दम जखन मनी हता लिल जाए ता प्रतिबंदधक अबहाँ बहाँ जाए ताची अखाज भाज बहाज आची यह ते गंगेशेक्ता क्रान्तिकारी बात कहे चतिन, उ आबहाउ वा आप्सेंस के एक ता यतार्त कारन माने चतिन. मने कोनो वस्तुक नहीं रहब, से हो कोनो गतनाक कारन बहुस अके तची. हा, इनवे नयाय कब बहुत पाइक देन आची. वी तो भेल प्रत्यक्ष आ अनमानक गब मुदा उम्म वंः राँ सबस सन्सार में बहुत रास नवशव्द अवस्तू के चिनहाए ची जकर हम्रा सब के पहली सब कोनो प्रत्यक्ष ज्यान नहीं होई तची पोती में उप्मान प्रमानक चर्चा आची अ, उप्मान, वा आनलोजी उही में जंगली गाय वा गवेक उदाहरन देल गी लची इउप्मान कोना काज करे तची उप्मान उग्यान स्रोत ची जकर माद्ध्यम साद्रिष्श वा सिमिलरेतिक आदार पर कोनो नुतन वस्तुक नाम आव उकर अर्ठक भोद होईताची मानिलिया कोनो गाँक वेक्ती कही उ जंगली गाय जक्रा गवे कहल जाईताची नहीं देखने आची तीख आची आव कोनो जंगल क निवासी उकरा उप्देस दैटाची जगवै समान ने गायजगगगग होई तची जगन उ वेक्ती जंगल जाई तची यहन पसु देख़े तची जे गाएज़का अची तव उक्रा उप्डेस समरन होई तची. औहे समान तक दर्षनसु बुजजजाए तची, जे यी पशु गववई आची. बलकल. जे आम्रा सबेक्रा वर्त्मान संदर्ब में समजी, मने मानी लिया कोनो बच्चा कहीो जब्रा नहीं देखने आची. हम उक्रा कहेच छी जे जब्रा गोडाजे का होई तची, मुदा उक्रा देः पर कारी उजर दारी होई तची. उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई उआई � अगर दोशर गवई देखाई तव्यक्ति उक्रा की कहत उते कन्फुज भेजेत इक्दम ताहे लेल गंगेश तापित करे च्थिन जे वस्तूक वाच्चारत केवल उईक्टा वस्तूक लेल नहीं आपितु सम्पूरन जाति तव्यक्ती उक्रा की कहत? उतक खॉट बहेजेत? इग्दम. ताहे लेल गंगेश थापित करे चत्फीन, जे वस्तुक वाच्चार्त, केवल उईक्ता वस्तुक लेल नहीं आपि तु समपूरन जाती वा उनिवर्शल क्लासक लेल हुईत अची, जिना गवयत्व वाजेब्रापन इदर्क बहुत सुद्रिद है च्ये मुदा जखन आम्रा सब चार्वाक दर्शनक गब करे च्यी तो सब तए इसभ की चु आमान्ने कदे च्यती चार्वाक केवल प्रत्यक्ष प्रमान के माने च्यती चार्वाक, अनुमान, वाश्व्द प्रमाड के अमान ने करे चती. उनकर तर्क अची, जो हम भानस गर में आगी अदूवाके एक संगे देखल हूँ, ते एकर एए अद्ध नहीं जे बहूविष्ष में वा अन्यग्रह पर दूवाक संग आगी होए दे. मैंने हम भविश्ष्ट ग्यारन्टी कोना लोस कै ची देखो, चार्वाकक तरक एकता चरम संशे वाद आची अगर अव्यवाहारिक्ता पर प्रहार करे चतीन अव्यवाहारिक्ता माने प्रक्तिकल नहीं अची अव्यवाहारिक्ता माने प्रक्तिकल नहीं अची जब मानव जीवन केवल प्रत्यक्ष पर निरभर रहे तो समपुन जीवन व्यपार थब वजाएत अगर प्रक्तिकल नहीं अची ज़व मानव जीवन केवल प्रत्यक्ष पर निरभर रहें तो समपून जीवन व्यापार तब वजाएत एक दम सत्यद जो हम चारवाग के बात मानी आ अनुमान नहीं करी ता हम तब वस पर्यात्र नहीं का सकब वबविश्षित प्रत्यक्ष नहीं अची, तकी हम भविश्षिक लेल कोनो योजना नहीं बनाभी, नभ्यो नयाएक यी बहुत पएक दे अची, उशब्दवा टेस्टिमनी के अची बविश्वाग नहीं अची, विश्वाग नयायक नहीं अची, तो हमरा अखधक रासाएनिक सन्रचनाक प्रत्यक्ष ज्यान नहीं अची, मुदा हम दोक्तर के कतन पर विश्वास करे अखध काले ची. बहुविष्ष्ट प्रत्यक्ष नहीं अची, तकी हम भहुविष्ष्ट लेल कोनो योजना नहीं बना बी? नब्यो न्याएक यी बहुत पएक दे आची, उशब्द वा टेस्टिमनी के एक ता स्वतन्त्र आ अती महत्वपुरन जान के शूथ मानेच छती. मुदा कोनो भी शब्द प्रमान नहीं बहुशके तची. तक कोन शब्द प्रमान आची? गंगेश श्पष्ट करे चती जे केवल आप्द पूरुष के कतने प्रमान आची आप्द पूरुष उआची जे सत्ते जनाईत आची आप बिना कोनो दोखा देल सत्ते बजईत आची माने अख्स्पर्ट होए आ औनेस्थ होए आप ज़े दोक्तर अखध अखध ज्यान रहे चत्छ नि मुदा कुनो कमपनी सलाब लोक गलत अखध लिखिरहल चत्छ ता हुनकर कतन शब्द प्रमान नहीं भेल, कारन उ सत्टिनिष्ट नहीं रहला. इत बहुत प्रासंगिक बात अच्छी आई कालिक लिल मुदा इस समपूड विमर्ष प्रत्यक्ष अनुमान, उपमान, शब्द, उपादी, ख्यातिवाद इस अन्ततध कताई जारहल अच्छी हम्रा सब इस जटिल तारकिक व्याम केक करहल ची सम्पुर्ण्याय्दर्शनक अंत्म्लक्ष्ः अपवर्ग अर्थात मोख्ष अची मोख्ष इटर्ख्षास्ट्रस्ट्र से मोख्ष कोना भीतत महर्षी गोतमक नयाय सुत्रमे दुख्खक एक्टा चक्र बतोल गेल आचे जक्रा गांगेश नव्य न्यायक के तारकिक ध्रातल पर आरो पुष्ट करे चतिन. इच्च्र अची मिथ्याग्यान, उक्रा से दोष, फिर प्रव्रित्ती, फिर जन्म, आ अंत में दुख्ध. मने दुखक मुल जरी मिथ्ट्यागयान अचे असत्ते के सत्यमानी लेनाई एक दम एक तुल्टा करब लोचक होईत बोधदर्षन से हो दुखक अन्ते गओप करत अचे मुदा उद्रिशनावा इच्चाके निंट्रित करवापर भेसी बल दैटचे आद दर्शनक अप्रोच तने का लग आचे आर नयाय दर्शन मिथ्ख्या गयान के दूर करभापर बल दाई तचे एक रा एक ता उदारन्ट से बुजेई ची मानी लिया कोनो वक्ती के समाथ फुनक लद चे तीक आचे यो वेक्ती फोंके दूर राखी के अनुशासनक बलपरी लध चोडे थ सके ताची वा जखनो इसते बुजी जाई ताची जे फोनसे भेटल सुक शनेक अब्राम्म कची तक्हनो कर लध चुटे ताची इविश्लेशन नवे नयाये के रिदाये के सपष्ट कराई तची देखू बाय संझम्वा अनुशासन तातकालिक रहत दसकाई तची जखन इस्तिती गम्दीर हो, तची अनुशासन एक तब्रेक जगका काज कराई तची मुदा उ परमनेंट्ट सुल्श्टन नाई आची? नहीं नवे न्याये के अनुसार केवल अनुशासन से इस्थाई मुक्ती नहीं बहिताई तची जखंदरी भीतर मित्ट्या ज्यान बनल आची जे समाथफोन अनन्त सुखक सादन आची तक्हन्दरी व्यक्ती भीतर से चट पताईत रहत. तु समदान की आची? गंगेशक अनुसार तत्तु ज्यान वास्सत्ते का बोद हे जड़ी के काटे तची. जगन प्रमानसबख माद्यम से एस पष्ट भोजाई तची, जे इशुक अवास्त्विक अची तक्हन भ्रम दूर भोजे तची आजक्हन भ्रम नश्थ होई तची तराग्दुए स्वता शान्त बजाई तची बलकुल दोश समाप्त भेलासन सकाम कर्म रुकी जाई तची अक कर्म नई भेलासन पुनर जन मनही होई तची इसम्पून दुख्खक आत्यान्तिक अंत आची अंद विश्वास, रूडि, और बिना परिक्षनक मानल गेल ज्यान के चुनाति देलनें अद्दर्क और परिक्षनक एक ता नव मार्क प्रषस्त केलनें जे मानव चेतना के अग्यानक अंदारस से निकाली सत्किक प्रकाश में आनत अची. मने तत्व चिन्तामनी केवल चोदवम शताभ्दिक दर्षनक पोठी नहीं आची. इए आए मौन के सपष्ट रूपन सुच्बाक सत्ते के परक्बाक एक ता तूल के तची. इस नव्य न्याय बाशा और तर्क का एक ता एहन अभेद्द द्हाचा देलेग जकर प्रेोग बाद में व्याक्रन, आयुर वेद, साहित्य, और योधरिक की कानून में सवहल. इग्रन्त सिख्वाईत आची जिस सत्यक अनवेशन में प्रष्नपुषब आवश्षक आची. एक्दम! और इविमर्ष्स समाप्त करभास पूर्व एक्टा एहन विचार आचे, जे हम्रा लगातार मन्धन करभापर विवष्कर रहल आचे. इं नव्यन्यायक एक ता अवदारना ज़क्रा अनुव्यवसाय कहल जायतची औह, अनुव्यवसाय वा अपर्सेप्षन इं चेतना के गेराए के नापे तची इं बाय वस्तु ग्यान नहीं अपी तु आपन हे ग्यानक आन्तरिक प्रत्यक्ष चची मने ग्यानक ग्यान एक रा एहन बूजु जों कोनो वक्ती के कामला वा जोंदिस रोग बहोगे लची औक रा एक ता उज्जर दिवाल पीर देखाई दरहल अचे तीख शे? ता इस पष्ट अची जे उकर बाहे प्रत्तक्ष ग्यान इक ता ब्राम आची, क्योंकी दिवाल प्यर नहीं आचे. मुदा जगन उ वक्ती कहे तची, हम्रा दिवाल प्यर देखाई तची, तई इज आन्तरिग ज्यान आची, वोकर आपन अनुबहुती, जे वोकर प्यर देखाई तची, से सो प्रतिषत सत्ते आचे इबहुत पेग भात आचे हमर आख हमरा दूखा दशा के तची मुदा हमर उई दूखाक अनुवूती पुरनता हचते आचे इएक टा एहन सत्ते आची जे हमरा सब के अपना चेतनाक गाराई में जाखा बाकलेल प्रेरिथ करे तचे अख्रा देख्वा की प्रक्रिया और उही प्रक्रियाक अनुबूती में सहो नुकायल अचे. गंगेशक इदर्षन जे माना मात्रक सोचने समजनेक तरीका बदली दैता ची, उसद्यक अनवेशन में एक ता सदाय जीवित रहयोला मशाल अची.

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