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भामतीक_मैथिली_अनुवाद_आ_सम्पादकीय_सुधार.m4a

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Part 11 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 11
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  1. 0:00–0:07आई हम गजेंद्थाकुर्द्वारा वाचस्पती मिष्रक भामती चतु सुत्रिक मेठली अन्वाद पर चर्चा करहल ची,
  2. 0:07–0:14अप्रस्तुद समग्री में दर्षन शास्ट्र गेहन्ता के मेठलीक लोक मुहावरा से जोडबाक जे प्रयास अची,
  3. 0:14–0:20तक्रा और भेसी शुलब अप्रवाहमाए कोना बनूल जासके तची ताई पर बात करब.
  4. 0:20–0:23आँ, मुदा माने एक ता बात कहु,
  5. 0:23–0:29जगन हम वाचस पती मिष्रजक उदबभत विद्वानक दाशनिक तीकाक बात करे ची ता...
  6. 0:29–0:31उतो क्लिष्ट चबे करत.
  7. 0:31–0:36एक्दम की उकर मुल प्रक्रती गधन अक्लिष्ट नहीं आच्छी
  8. 0:36–0:39की एक्रा भेसी सुलब बनेबाक प्रयास में
  9. 0:39–0:43हम्रा सब मुलक गामभीर्यसा समजवोतात तनही कराल ची
  10. 0:43–0:46माने भामती कुनो लोका कतात नहीं देख
  11. 0:46–0:48जे एक्रा सर्व सुलब बनाओल जाए.
  12. 0:48–0:49तखी आची
  13. 0:49–0:50तखी आची
  14. 0:50–0:51तखी आची
  15. 0:51–0:54जब पात्छ मे दार्षनिग गनत्व आ मैठलिक लोक वेवारक भीच
  16. 0:54–0:56जब अचानक बडलाव होई तचे
  17. 0:56–0:59उपात्च के मान्सिक रूप से जगजोडी दे तची
  18. 0:59–1:02आचा बाक अरत आची
  19. 1:02–1:04जब तोन में जे शिफ्ट आची
  20. 1:04–1:08अगर उद्वादक वोग्डिक प्रहेंगाजाई जाहे सब पाथक लगेत अची जे ओगनो गनिष्ट समवादक हिस्चा आची,
  21. 1:09–1:12मुदा अचाक से जखन एपाटक प्रहेंगाजाई जाहे सब पाथक लगेत अची जे ओगनो गनिष्ट समवादक हिस्चा आची,
  22. 1:12–1:42आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  23. 1:42–1:48बज्यलिये ये अपना बेल जेना कुनो सुगम राजपत पर चलेज चलेज आचानक बिना कुनो चे तावनीक कखर पत्धर वला पहाड आबीजाये.
  24. 1:48–1:51तकन पात बहुत भोजिल बोजिल बोजात अची
  25. 1:51–1:54पातक के लेल कतिन संस्क्रित तरक सा
  26. 1:54–1:56मेठलिक सुगम ताक भीच सास लेबाक
  27. 1:56–2:00वा विचार करभाक के लेल पर्याबत योजक संदर्भ नहीं अचे
  28. 2:00–2:01बुजेलिय
  29. 2:01–2:08इत ओहना भेल जेना कुनो सुगम राजपत पर चले चले चले द, आचानक भिना कुनो चे तावनीक ककर पत्षर वला पहाड आबी जाये.
  30. 2:08–2:20अं बुज़ेर आल जी, आहाक तात्पर्या आची, जे मस्तिष्टिके, जकन नरेटेव माने कतात्मक शाएली सव, अचानक विष्च्दध सिद्दान तक सुची करन में दھके लल जाएत ची.
  31. 2:20–2:22तख कोगनेटेव लोड बड़ी जाएत ची.
  32. 2:22–2:27एक्दम, संज्यनात्मक भोच बहुत भेसी बड़ी जाई तचे.
  33. 2:27–2:39पाथक के यी नहीं भुज़ाई तचेक, जे ओ एही सुची के पड़ी के क्रहलग जे ना बिना कोनो संदरभ के जब हम केवल ख्याती वादक प्रकार गिनावे लागी.
  34. 2:39–2:46तो सिद्धान्त के गर्ण करवाक लेल, पाधखक मस्तिष्क मेल कोनो हुक वा आदार ने रहेत अचे.
  35. 2:46–2:52शत्या. तताही लेल एही समस्याक समदानक रूप में आग की सुजाव अचे.
  36. 2:52–2:58हमर सुजाव यह आचे, जे गहन दार्षनिक सुची वह सिद्धानतक वरनन करवासम पुर्व,
  37. 2:58–3:02एक ता चोट आदूनिक और संकेतात्मक योजक अनुच्छेद राखल जाए.
  38. 3:02–3:05माने एक ता ब्रिजिंग पारग्राफ.
  39. 3:05–3:35आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
  40. 3:35–3:42नहीं, बलकी सम्पाद की यह कोष्टक वह अस्पस्ट योजक्स के रूप में होई बाक चाहीं, तो सुदारन सब वूज़ा।
  41. 3:42–3:43आप, कहु।
  42. 3:43–3:46जखन ख्यातिवादक चर्चा सुरू हुएते आची,
  43. 3:46–3:51तसीदे बोध वा प्राभाकरक सिद्धान्त गिनावे से पहले,
  44. 3:51–3:53अनुवादक एक्ता वाग के जोर सके चती.
  45. 3:54–3:56जैना की अब प्रष्न उठाइत आची,
  46. 3:56–3:59जे जे भ्रम रम्रा सबखेन होएत आची,
  47. 3:59–4:01उकर वास्तविक सुवूप की आची
  48. 4:01–4:05एही पर विविन्न दर सनक मत एही प्रकार आची
  49. 4:05–4:06औह औह
  50. 4:06–4:08इएक छोट सन सांकू आचे
  51. 4:08–4:11जे पाथक के ख्यातिवादक जंगल में
  52. 4:11–4:14प्रवेश करवाक लेल मान्सिक रूप सा प्रस्तूत कराइत आचे
  53. 4:14–4:18आई, ये ये ये ता मनोवग्यानी कलक्स का जैका काज करेद,
  54. 4:18–4:21जे मस्तिषके गेर बदलबाक लेल समेद अईत अई.
  55. 4:21–4:23ये बहुत नी कुदारन अई थे,
  56. 4:23–4:28ता एही तरहक योजक संदरभ जो मोक्षक चार प्रकार अग कारिता,
  57. 4:28–4:31जिना उपाद्य, विकार्य, संस्कार्य, आप्यः
  58. 4:31–4:36आप आप, उवाला क्हन्ड में से हो राखल जाए, तो उखोना काजकरत
  59. 4:36–4:46उते आप आप, एहन योजक वाख्य जोडी सकेची, जिना वेदान्त में मोख्ष्के कोनो नव निरमित वस्तू के जकान नहीं मानल गेलाच,
  60. 4:46–4:50ताकिल कर्म को परनाम के जे चारगुटी स्रेनी आची
  61. 4:50–4:53ताही से मोक्ष्के कोना अलक केल गेलग
  62. 4:53–4:54आव दिखी
  63. 4:54–4:55वाए
  64. 4:55–4:59इस सेट्प वाख्यः पात्ख के इस पष्ट कर दे च्यक
  65. 4:59–5:02जे हम इच्चारीता सिद्धान्त की एक पडी रहल ची
  66. 5:02–5:05ताके हा मोख्षक भिन्नता के स्थापित कर सकी
  67. 5:05–5:10इक्दम एक्दम एक्रा बिना पात्ख मात्र शब्दक जाल में पसी जाईत चे
  68. 5:10–5:13और मुख्ध्य दाशनिक उद्टेश्य भिस्री जाईत चे
  69. 5:13–5:15सत्ति कहल हूँ
  70. 5:15–5:19योजक अनुच्ठेद कई उप्योख सा केवल मान्सिक प्रवाह सुलब होई तच्छे
  71. 5:19–5:22जखन की इग्रन्त खेवल मान्सिक रूपसा नहीं
  72. 5:22–5:28बलकी द्रिष्च रूपसा माने विज्वेली से हो एक तबहुत जटिल रच्ना आच्छी
  73. 5:28–5:58आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  74. 5:58–6:28उगर्द्यागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागाग
  75. 6:28–6:58यह आँद बज़ाज़ाज़ाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाच
  76. 6:58–7:00अगर बाद्ध जए एकी समान फांट्ध
  77. 7:00–7:05आ, एक के समान मार्जीना, आ, एक जे का परग्राफ में चलत,
  78. 7:05–7:09तब आठकी कोना बुजध, जे कते मुल सुत्र कतम भवेल?
  79. 7:09–7:12आ, कते संक्राचार्य आपन बात कहब सुरु के लूनी.
  80. 7:12–7:17आ, कते सवाचस पती मिष्र उकर भिष्लेशन करहल चेतिन.
  81. 7:17–7:25इक ता एहन गरक जक भगे ले ची, जटे ए भानस गर, सुत्बाक गर आब यैसारक कोनो दिवाल नही आची.
  82. 7:25–7:29मुदाक किछ परमपर एक विद्वानक तरक भहस खेटा ची,
  83. 7:29–7:34जे पुरान पोथी या पान्दूलिपी में से हुत कोनो पारग्राफ्या बोल टितालिक नही होए चल?
  84. 7:34–7:36नही होए चल सत्याच
  85. 7:36–7:39उताई तद सब किचु एक है प्रवाह में लिखल जाए चल
  86. 7:39–7:43तक य अनुवादके उही पोथी परमपरा के सुरक्षित नही राखे बाक चाही?
  87. 7:43–7:49देखो, पोथी परमपरा पान्दुलीपिक युग्क विवष्ताचल, उकर सुन्दर यह नहीं.
  88. 7:49–7:54आए जखन हमरा लग आदूनिक मुद्रन तकनी का ची,
  89. 7:54–8:00ता हम पात्खक, उही मानसिक श्रम में की आग दھके ली, जे कर कोनो दाशनिक मुल्ले नहीं आची.
  90. 8:00–8:04आप, पात्खक उर्जा ब्रम्म्सुत्रक आर्थ भुज्वामे लग बाख चाही.
  91. 8:04–8:09नहीं की इख उज्वामे जे वाख्य कते खतम भारहल ची.
  92. 8:09–8:15बिना स्पष्ट द्रिश्ष विभाजनक, इग्रन्त पाथकक लेल अभेद्यद दूर्ग बनी जायत.
  93. 8:15–8:19ताहे लेल एहे में हमर स्पष्ट सुजाओ इए अची,
  94. 8:19–8:23जे पाथ्ध्य विन्यास वा मुद्रन भेदक माद्ध्यम सं,
  95. 8:23–8:26सन्रच्नात्मक इस्पष्ट्ता लावल जाए
  96. 8:26–8:29मुद्रन भेद माने तोपोग्राफी में बडलाओ
  97. 8:29–8:33आँ, जतः जतः सुची वागगनना अबेट आची
  98. 8:33–8:37उतः एक ता इस्पष्ट दिशा निर्देश आत्मक वाग के जोडल जाए
  99. 8:37–8:40अस्सुत्रा बाशे तता ती का के
  100. 8:40–8:43अगर गल द्रिष्य स्वरूप देल जाए
  101. 8:43–8:46एक तोस उदारान की बहुशकाई ता ची?
  102. 8:46–8:49केवल फांट बदली देनाई पर्याप थाई?
  103. 8:49–8:52नहीं! केवल फांट सकाज नहीं चलत
  104. 8:52–8:54फांट बदलबाख संगे
  105. 8:54–8:57मरजिन वा इंदेंटेशन का उप्योग
  106. 8:57–9:08जेना की? जेना बाद्रायन का सुत्र के प्रिष्ट के मद्ध्यमे, पाइंग अ बोल्ड फाँट में राखल जाए, के एक ता ओ केंद्र बिन्दू अची. तीक अची.
  107. 9:08–9:15उकर थीक नीचा शांकर भाशिके इटालिक में वा किचु अलग मारजिन से शुरू करल जाए.
  108. 9:15–9:22यह वाचस्पतिक तीका अद्द में वाचस्पतिक भामतिक तीका के सामान ने फांट में मुदा पूरन प्रिष्टख चवडाई में राखल जाए.
  109. 9:22–9:26अन्त में वाचस्पतिक भामती तीका के सामान ने फाँट में
  110. 9:26–9:30मुदा पूरन प्रिष्थक चवडाई में राखल जाए.
  111. 9:30–9:34एही मुद्द्रन भेज सब पाथख पन्ना देखते बुज्जाएद
  112. 9:34–9:38जि ओ खुन विचारक के मस्तिष्क में प्रवेश कर रहल ची.
  113. 9:38–9:40ये बहुत स्पष्ट थचे
  114. 9:40–9:44और जते दरी उई तीन प्रकारक वला सुचिक बात अची
  115. 9:44–9:46उते अनुवादक के सुतन्त्रता लोक
  116. 9:46–9:49एक ता योजक वाग के जोडवाग चाही
  117. 9:49–9:52जना आब एही तीनो प्रकारक विस्त्रित विवेचन
  118. 9:52–9:54नीचा कील जा रहा लग ची
  119. 9:54–9:59इचोट चोट सन्रचनात्मक संके पाथक के बाद भद्कावे सरोके तची
  120. 9:59–10:07इद्रष्शवेद वद्रन्विन्यास पाथकक के वर्तमान में पन्नापर पडवाकाल बहुथ सहाईता करत
  121. 10:07–10:08एक दम करत
  122. 10:08–10:11इएक ततकालीन समस्याक समादान अची
  123. 10:11–10:16मुदा हमरा एकरा एक ता पैग परीप्रेक्ष्य मसि हो देख बाख चाही
  124. 10:16–10:18पैग परीप्रेक्ष्य मने की?
  125. 10:18–10:21तेसर और अन्तिम पैग बात इए ची
  126. 10:21–10:25जे एटिक विशाल आप पारिभाशिग ग्रन्थक उप्योगिता के
  127. 10:25–10:27दिर खकाल दरी सन्रक्षित राख्वा कलेल
  128. 10:27–10:36पात्खक सूविदार्त, किचु सहायक संदर्व सामग्ग्रीक, संयोजन, अर समपादकी आमान की करन, एही काजक पुर्नता देथ.
  129. 10:36–10:43औहो, आगतात पर्या ची, जे ब्रान्त का उप्योगिता, केवल पहिल भेर पडवाचाल के लेल नही,
  130. 10:43–10:47बलकी बहुविष्व्ग कषन्दर्बख लेल से हो सूनिष्छित कोयल जाएत
  131. 10:47–10:48बलकुल
  132. 10:48–10:51हम्रा एी माने कचलबा कचाही
  133. 10:51–10:54जे एे चार सो एकानवे प्रिष्ट्ख गरन्त अची
  134. 10:54–10:56एकोन उपन्यास नाय आची
  135. 10:56–10:58जे कर आरंभ्शा अंदधरी
  136. 10:58–11:00एक सास में पड़जाएत
  137. 11:00–11:02ये क्ता संदर्भग्रन्त आची
  138. 11:02–11:06कमजोरी ये आची जे यद्यपी अद्यास, अनिरवचनीए
  139. 11:06–11:10वा कुतस्त जका पारिभाशिक शब्दके प्रत्हम प्रयोग पर
  140. 11:10–11:13अनुवादक दवारा निक जका भुजहाँल गेल ची
  141. 11:13–11:18वूदजे कुना सुदार्ती के 3-100 शूम प्रिष्ट्प कुतस्त सबद बहिते च्यक
  142. 11:18–11:22आ उगर अर्थ भिस्री गेल अची तो की करत?
  143. 11:22–11:24एक्दम उख्रा फिर सपन्ना पल्ताबा पर्त
  144. 11:24–11:28आ जा उख्राई नेमों च्यक जे इश्वद पहिल बार कते आएल्चल
  145. 11:28–11:30तो उकर अद्यन बादित भज़ाइत
  146. 11:30–11:38आई, इही शोद बादा के और जगन न बनादै तची वर्टनी कवसम रूपता, माने स्पेलिंकज़ समस्याचे
  147. 11:38–11:39उकसन
  148. 11:39–11:45तमाद्द्री में क्प्रती लिप्यादिकार क्हन्द में प्रीती ताकर जका मुद्रन्दोश आच्फी,
  149. 11:45–11:48जकर सही रूप प्रीती ताकर हो बाख चाही.
  150. 11:48–11:57एकर अत्रिक्त सबसे गंभीर बात यह जे अप्रोक्छ़ सब्द, चारीभेर अ अप्रोती सबद साथबे राई लाई जे.
  151. 11:57–12:06मुदा की पाज्सो पन्ना कग्रन्त में दस बाराता वर्तनी दोष्वा मुद्रन दोष यतेक पैग बात आपची.
  152. 12:06–12:10पैक पैक गरन्त मे आहन चोट चोट त्रोटी तब भाई जाएत अचे
  153. 12:10–12:13एक रा लेल एते गंभीर हुमाय आवशकता ची की
  154. 12:13–12:18आवशकता आचे के एक तही केवल प्रूट रीटिंग के समस्या नहीं आची
  155. 12:18–12:22इडेटा रीट्रीवल वा तक थे सरच बाक समस्या आचे
  156. 12:22–12:24मैंने digital कोजक लेल?
  157. 12:24–12:25हाँ,
  158. 12:25–12:27आईकालिक-ईकाडमिक अद्यन में
  159. 12:27–12:30विशेज कजकन इग्रन्त, दिजिटल
  160. 12:30–12:31वब pdf रुप में
  161. 12:31–12:33विश्वविद्ध्याले सब हमें उपलब देते
  162. 12:33–12:36तश्वदार्ती अप्रोखच शब्दके सच्च करत.
  163. 12:36–12:37आजज,
  164. 12:37–12:38अनुवाद में
  165. 12:38–13:08अगर बाद में सात्बेर अप्रोती लिख्ध हैं ता सर्च एंजन उही सात्ट्टा महत्टुपूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  166. 13:08–13:13अपारिवाशिक शब्दावली कोष अनिवारी रूपन जोडल जाए.
  167. 13:13–13:14आया स्पेलिंग लेल.
  168. 13:14–13:20संगे समपुरन पात्ठ में वर्तनिक एक रूपी करन वा मानकी करन केल जाए.
  169. 13:20–13:25इग्रन्त कष समपाद की ए पालेशिंक अन्तिम अऽ सबसे आवश्षक चरन आची.
  170. 13:25–13:31एकर तो सुदाशन की आची? अनुक्रमनिका ता बहुत प्रकारक बहुत सकते थाची?
  171. 13:31–13:35दाशनि ग्रन्तक लेल केवल सब्द अनुक्रमनिका पर्याप्त ना आची
  172. 13:35–13:38एही में अदिकरन अनुक्रमनिका जोडल जाए
  173. 13:38–13:39अदिकरन?
  174. 13:39–13:40अदिकरन?
  175. 13:40–13:43वेदान्त दर्शन में अदिकरन के विषेश महत्त होगत था ची
  176. 13:43–13:46जेना समन्वया दिकरन, अनन्द मया दिकरन,
  177. 13:46–13:52जगगग कोनो विद्धर्ती के केवल समन्वया दिकरन पर वाचस्पतिक मत देगवा कची,
  178. 13:52–13:58तो उस्छीदे अनुक्रमनिका देखी का उही पन्नापर चल जाएत यी बहुत नीक विचार अच्छीए.
  179. 13:58–14:06तो सर थोश उदाल हरन एजे बहावी संसकरन में एक ता मैठिली संसकरत पारिबाशिक कोष जोडल जाए.
  180. 14:06–14:11एह में अद्यास, विवर्त, परनाम सन, सन्सक्रत मुल्षव्द,
  181. 14:11–14:14अ अकर मैठिली में प्रविक्त सम्तुल्यशव्द,
  182. 14:14–14:17वव्याख्याक वरनानु क्रम में सुची हो.
  183. 14:17–14:20अ वर्तनिक मान की करनक लेल की कैल जाए?
  184. 14:20–14:50अखर लेल एक ता सम्पाद की ये स्टाल्षीट बनावल जाए, जेन जन निरनेभेल जे अप्रोख्ष लिखभ तप फाँईंट अद रिपलेस वा सुक्श्म अवलोकं सं इस सुनिष्चत कहल जाए, जे समपून गरन्त में अपरोती वा अन्ये कोनो अपभश्व्हन्श र�
  185. 14:50–14:52अद्रिएदा अकादमिक जगत में बड़ी जाईत अची
  186. 14:52–14:56इग्रन्त मैठली दरशन वांँमयक लेल
  187. 14:56–14:58इक ता एतिहासिक इस्तम्भ अची
  188. 14:58–15:02ताई लेल एकर प्रस्तुती से हो उत्बे निर्दोश हुए वाख चाही
  189. 15:02–15:04इएक ता सत्ती अची
  190. 15:04–15:06जग्हन कोनो अनुरादक
  191. 15:06–15:12एतिक पवड भगिरत प्रयास कर एच थी, तो उ मूल पात्ख अर्थ बुज़ै,
  192. 15:12–15:16आवकरा मैठली मे धालवा मे एटिक गहराई मे चली जए चथी,
  193. 15:16–15:21जे एई तरहक समपाद किया अद्रिष्य सन्रचनात्मक त्रूती सब पर,
  194. 15:21–15:24उनक्द्यान नहीं जनाय स्वाभिक अच्छे.
  195. 15:24–15:41आजा कि इच्चाचा उही वनके इक ता सुसजित उद्यान में परिवर्तित करबाक बाड तेखा रहो अच्छे.
  196. 15:41–15:44इक्दम, तस्संख्शेप में कही सकए ची,
  197. 15:44–15:47जे आई हम्रा सब एही सामगरी पर,
  198. 15:47–15:50तींता मुख्य बिन्दूपर विस्तिरित चर्चा के लूँ.
  199. 15:50–15:53पहल, दार्ष्निक सुची सब,
  200. 15:53–15:55वा सिद्धान् सबक आरंभ से पुर्व,
  201. 15:55–15:57योजक संदर्भ या अनुच्छेद,
  202. 15:57–16:03जोडी का कोगनेटेव लोड कम करभ आपाथ्या के अदिक सुलब बनाएब
  203. 16:03–16:08दो सर सुत्रा भाश्या अटीकाग भीछ मुद्रन भेद
  204. 16:08–16:14जेना फोंट वा मारजीनक परिवर्तन अदिशा निर्देशात्मक वाख्यक उप्योख सों
  205. 16:14–16:17स्प्ष्ट सन्रज्नात्मक प्रवाह सुनिष्चित करव.
  206. 16:17–16:21अते सर ग्रन्तक दिर्ब कालिक उप्योगिता कलिल,
  207. 16:21–16:27अन्त में पारी भाशिक, कोष आ अदिक करन अनुक्रमनिका जोर का,
  208. 16:27–16:32वर्तनिक मानकी करन, जना अप्रोख्छ शब्दक पुरन एक रुपी करन करव.
  209. 16:32–16:37इसब्ता सुजाव हुनक काजक कोनो प्रकारे कम नहीं करे तची,
  210. 16:37–16:40बलकी ओक्रा आरो भेसी निखारे तची.
  211. 16:40–16:43हम अनुवादक अ संपादक मन्डलक,
  212. 16:43–16:46एही गमभीर अ उतक्रिस्ट प्रयासक लेल,
  213. 16:46–16:48ह्रिदे सप्रषंसा करे चे.
  214. 16:48–16:51हा, दर्षन शास्त्रक अनुवाद
  215. 16:51–16:57अपने आप में एक तक कांटक मुक्ट पहिर्भाजका आचे, अहो वाचस्पती मिस्रक भामती,
  216. 16:57–17:02इस चच्मुच मैठली सहित्तक लेल एक ता औमूल्या योग्दान आचे.
  217. 17:02–17:08हम लेक्ख के इस उजावसब आपन ग्रन्त में लागु करभाक लेल प्रुच सहित करे तची,
  218. 17:08–17:13अब हविश में आपन इस संसोदित समगरी या कोनो नव अनुवाद
  219. 17:13–17:17फेरसा एताई विमरस अ प्रतिक्रिया लेल पठाभे लेल आमन्त्रित करे ची.
  220. 17:17–17:21मोन राखु उतक्रिष्ट अनुवाद के वल ओ नहीं आची
  221. 17:21–17:25जे मुलक आर्थके सत्तितास दोसर भासा में उतारी दियो.
  222. 17:25–17:27बलकी उतक्रिष्ट अनुवाद उव अचे
  223. 17:27–17:30जे पाटख के यी अनुवभव करभग
  224. 17:30–17:33जे मुल ग्रन्तकार जा आई मेठिली में सोचे चला
  225. 17:33–17:35तथिक एहना लिखाई चला.
  226. 17:35–17:37इज समपाद किय परिमारजन
  227. 17:37–17:40उहे अनुबहवक पुरनता प्रदान करत.

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आई हम गजेंद्थाकुर्द्वारा वाचस्पती मिष्रक भामती चतु सुत्रिक मेठली अन्वाद पर चर्चा करहल ची, अप्रस्तुद समग्री में दर्षन शास्ट्र गेहन्ता के मेठलीक लोक मुहावरा से जोडबाक जे प्रयास अची, तक्रा और भेसी शुलब अप्रवाहमाए कोना बनूल जासके तची ताई पर बात करब. आँ, मुदा माने एक ता बात कहु, जगन हम वाचस पती मिष्रजक उदबभत विद्वानक दाशनिक तीकाक बात करे ची ता... उतो क्लिष्ट चबे करत. एक्दम की उकर मुल प्रक्रती गधन अक्लिष्ट नहीं आच्छी की एक्रा भेसी सुलब बनेबाक प्रयास में हम्रा सब मुलक गामभीर्यसा समजवोतात तनही कराल ची माने भामती कुनो लोका कतात नहीं देख जे एक्रा सर्व सुलब बनाओल जाए. तखी आची तखी आची तखी आची जब पात्छ मे दार्षनिग गनत्व आ मैठलिक लोक वेवारक भीच जब अचानक बडलाव होई तचे उपात्च के मान्सिक रूप से जगजोडी दे तची आचा बाक अरत आची जब तोन में जे शिफ्ट आची अगर उद्वादक वोग्डिक प्रहेंगाजाई जाहे सब पाथक लगेत अची जे ओगनो गनिष्ट समवादक हिस्चा आची, मुदा अचाक से जखन एपाटक प्रहेंगाजाई जाहे सब पाथक लगेत अची जे ओगनो गनिष्ट समवादक हिस्चा आची, आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� बज्यलिये ये अपना बेल जेना कुनो सुगम राजपत पर चलेज चलेज आचानक बिना कुनो चे तावनीक कखर पत्धर वला पहाड आबीजाये. तकन पात बहुत भोजिल बोजिल बोजात अची पातक के लेल कतिन संस्क्रित तरक सा मेठलिक सुगम ताक भीच सास लेबाक वा विचार करभाक के लेल पर्याबत योजक संदर्भ नहीं अचे बुजेलिय इत ओहना भेल जेना कुनो सुगम राजपत पर चले चले चले द, आचानक भिना कुनो चे तावनीक ककर पत्षर वला पहाड आबी जाये. अं बुज़ेर आल जी, आहाक तात्पर्या आची, जे मस्तिष्टिके, जकन नरेटेव माने कतात्मक शाएली सव, अचानक विष्च्दध सिद्दान तक सुची करन में दھके लल जाएत ची. तख कोगनेटेव लोड बड़ी जाएत ची. एक्दम, संज्यनात्मक भोच बहुत भेसी बड़ी जाई तचे. पाथक के यी नहीं भुज़ाई तचेक, जे ओ एही सुची के पड़ी के क्रहलग जे ना बिना कोनो संदरभ के जब हम केवल ख्याती वादक प्रकार गिनावे लागी. तो सिद्धान्त के गर्ण करवाक लेल, पाधखक मस्तिष्क मेल कोनो हुक वा आदार ने रहेत अचे. शत्या. तताही लेल एही समस्याक समदानक रूप में आग की सुजाव अचे. हमर सुजाव यह आचे, जे गहन दार्षनिक सुची वह सिद्धानतक वरनन करवासम पुर्व, एक ता चोट आदूनिक और संकेतात्मक योजक अनुच्छेद राखल जाए. माने एक ता ब्रिजिंग पारग्राफ. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � नहीं, बलकी सम्पाद की यह कोष्टक वह अस्पस्ट योजक्स के रूप में होई बाक चाहीं, तो सुदारन सब वूज़ा। आप, कहु। जखन ख्यातिवादक चर्चा सुरू हुएते आची, तसीदे बोध वा प्राभाकरक सिद्धान्त गिनावे से पहले, अनुवादक एक्ता वाग के जोर सके चती. जैना की अब प्रष्न उठाइत आची, जे जे भ्रम रम्रा सबखेन होएत आची, उकर वास्तविक सुवूप की आची एही पर विविन्न दर सनक मत एही प्रकार आची औह औह इएक छोट सन सांकू आचे जे पाथक के ख्यातिवादक जंगल में प्रवेश करवाक लेल मान्सिक रूप सा प्रस्तूत कराइत आचे आई, ये ये ये ता मनोवग्यानी कलक्स का जैका काज करेद, जे मस्तिषके गेर बदलबाक लेल समेद अईत अई. ये बहुत नी कुदारन अई थे, ता एही तरहक योजक संदरभ जो मोक्षक चार प्रकार अग कारिता, जिना उपाद्य, विकार्य, संस्कार्य, आप्यः आप आप, उवाला क्हन्ड में से हो राखल जाए, तो उखोना काजकरत उते आप आप, एहन योजक वाख्य जोडी सकेची, जिना वेदान्त में मोख्ष्के कोनो नव निरमित वस्तू के जकान नहीं मानल गेलाच, ताकिल कर्म को परनाम के जे चारगुटी स्रेनी आची ताही से मोक्ष्के कोना अलक केल गेलग आव दिखी वाए इस सेट्प वाख्यः पात्ख के इस पष्ट कर दे च्यक जे हम इच्चारीता सिद्धान्त की एक पडी रहल ची ताके हा मोख्षक भिन्नता के स्थापित कर सकी इक्दम एक्दम एक्रा बिना पात्ख मात्र शब्दक जाल में पसी जाईत चे और मुख्ध्य दाशनिक उद्टेश्य भिस्री जाईत चे सत्ति कहल हूँ योजक अनुच्ठेद कई उप्योख सा केवल मान्सिक प्रवाह सुलब होई तच्छे जखन की इग्रन्त खेवल मान्सिक रूपसा नहीं बलकी द्रिष्च रूपसा माने विज्वेली से हो एक तबहुत जटिल रच्ना आच्छी आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� उगर्द्यागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागाग यह आँद बज़ाज़ाज़ाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाचाच अगर बाद्ध जए एकी समान फांट्ध आ, एक के समान मार्जीना, आ, एक जे का परग्राफ में चलत, तब आठकी कोना बुजध, जे कते मुल सुत्र कतम भवेल? आ, कते संक्राचार्य आपन बात कहब सुरु के लूनी. आ, कते सवाचस पती मिष्र उकर भिष्लेशन करहल चेतिन. इक ता एहन गरक जक भगे ले ची, जटे ए भानस गर, सुत्बाक गर आब यैसारक कोनो दिवाल नही आची. मुदाक किछ परमपर एक विद्वानक तरक भहस खेटा ची, जे पुरान पोथी या पान्दूलिपी में से हुत कोनो पारग्राफ्या बोल टितालिक नही होए चल? नही होए चल सत्याच उताई तद सब किचु एक है प्रवाह में लिखल जाए चल तक य अनुवादके उही पोथी परमपरा के सुरक्षित नही राखे बाक चाही? देखो, पोथी परमपरा पान्दुलीपिक युग्क विवष्ताचल, उकर सुन्दर यह नहीं. आए जखन हमरा लग आदूनिक मुद्रन तकनी का ची, ता हम पात्खक, उही मानसिक श्रम में की आग दھके ली, जे कर कोनो दाशनिक मुल्ले नहीं आची. आप, पात्खक उर्जा ब्रम्म्सुत्रक आर्थ भुज्वामे लग बाख चाही. नहीं की इख उज्वामे जे वाख्य कते खतम भारहल ची. बिना स्पष्ट द्रिश्ष विभाजनक, इग्रन्त पाथकक लेल अभेद्यद दूर्ग बनी जायत. ताहे लेल एहे में हमर स्पष्ट सुजाओ इए अची, जे पाथ्ध्य विन्यास वा मुद्रन भेदक माद्ध्यम सं, सन्रच्नात्मक इस्पष्ट्ता लावल जाए मुद्रन भेद माने तोपोग्राफी में बडलाओ आँ, जतः जतः सुची वागगनना अबेट आची उतः एक ता इस्पष्ट दिशा निर्देश आत्मक वाग के जोडल जाए अस्सुत्रा बाशे तता ती का के अगर गल द्रिष्य स्वरूप देल जाए एक तोस उदारान की बहुशकाई ता ची? केवल फांट बदली देनाई पर्याप थाई? नहीं! केवल फांट सकाज नहीं चलत फांट बदलबाख संगे मरजिन वा इंदेंटेशन का उप्योग जेना की? जेना बाद्रायन का सुत्र के प्रिष्ट के मद्ध्यमे, पाइंग अ बोल्ड फाँट में राखल जाए, के एक ता ओ केंद्र बिन्दू अची. तीक अची. उकर थीक नीचा शांकर भाशिके इटालिक में वा किचु अलग मारजिन से शुरू करल जाए. यह वाचस्पतिक तीका अद्द में वाचस्पतिक भामतिक तीका के सामान ने फांट में मुदा पूरन प्रिष्टख चवडाई में राखल जाए. अन्त में वाचस्पतिक भामती तीका के सामान ने फाँट में मुदा पूरन प्रिष्थक चवडाई में राखल जाए. एही मुद्द्रन भेज सब पाथख पन्ना देखते बुज्जाएद जि ओ खुन विचारक के मस्तिष्क में प्रवेश कर रहल ची. ये बहुत स्पष्ट थचे और जते दरी उई तीन प्रकारक वला सुचिक बात अची उते अनुवादक के सुतन्त्रता लोक एक ता योजक वाग के जोडवाग चाही जना आब एही तीनो प्रकारक विस्त्रित विवेचन नीचा कील जा रहा लग ची इचोट चोट सन्रचनात्मक संके पाथक के बाद भद्कावे सरोके तची इद्रष्शवेद वद्रन्विन्यास पाथकक के वर्तमान में पन्नापर पडवाकाल बहुथ सहाईता करत एक दम करत इएक ततकालीन समस्याक समादान अची मुदा हमरा एकरा एक ता पैग परीप्रेक्ष्य मसि हो देख बाख चाही पैग परीप्रेक्ष्य मने की? तेसर और अन्तिम पैग बात इए ची जे एटिक विशाल आप पारिभाशिग ग्रन्थक उप्योगिता के दिर खकाल दरी सन्रक्षित राख्वा कलेल पात्खक सूविदार्त, किचु सहायक संदर्व सामग्ग्रीक, संयोजन, अर समपादकी आमान की करन, एही काजक पुर्नता देथ. औहो, आगतात पर्या ची, जे ब्रान्त का उप्योगिता, केवल पहिल भेर पडवाचाल के लेल नही, बलकी बहुविष्व्ग कषन्दर्बख लेल से हो सूनिष्छित कोयल जाएत बलकुल हम्रा एी माने कचलबा कचाही जे एे चार सो एकानवे प्रिष्ट्ख गरन्त अची एकोन उपन्यास नाय आची जे कर आरंभ्शा अंदधरी एक सास में पड़जाएत ये क्ता संदर्भग्रन्त आची कमजोरी ये आची जे यद्यपी अद्यास, अनिरवचनीए वा कुतस्त जका पारिभाशिक शब्दके प्रत्हम प्रयोग पर अनुवादक दवारा निक जका भुजहाँल गेल ची वूदजे कुना सुदार्ती के 3-100 शूम प्रिष्ट्प कुतस्त सबद बहिते च्यक आ उगर अर्थ भिस्री गेल अची तो की करत? एक्दम उख्रा फिर सपन्ना पल्ताबा पर्त आ जा उख्राई नेमों च्यक जे इश्वद पहिल बार कते आएल्चल तो उकर अद्यन बादित भज़ाइत आई, इही शोद बादा के और जगन न बनादै तची वर्टनी कवसम रूपता, माने स्पेलिंकज़ समस्याचे उकसन तमाद्द्री में क्प्रती लिप्यादिकार क्हन्द में प्रीती ताकर जका मुद्रन्दोश आच्फी, जकर सही रूप प्रीती ताकर हो बाख चाही. एकर अत्रिक्त सबसे गंभीर बात यह जे अप्रोक्छ़ सब्द, चारीभेर अ अप्रोती सबद साथबे राई लाई जे. मुदा की पाज्सो पन्ना कग्रन्त में दस बाराता वर्तनी दोष्वा मुद्रन दोष यतेक पैग बात आपची. पैक पैक गरन्त मे आहन चोट चोट त्रोटी तब भाई जाएत अचे एक रा लेल एते गंभीर हुमाय आवशकता ची की आवशकता आचे के एक तही केवल प्रूट रीटिंग के समस्या नहीं आची इडेटा रीट्रीवल वा तक थे सरच बाक समस्या आचे मैंने digital कोजक लेल? हाँ, आईकालिक-ईकाडमिक अद्यन में विशेज कजकन इग्रन्त, दिजिटल वब pdf रुप में विश्वविद्ध्याले सब हमें उपलब देते तश्वदार्ती अप्रोखच शब्दके सच्च करत. आजज, अनुवाद में अगर बाद में सात्बेर अप्रोती लिख्ध हैं ता सर्च एंजन उही सात्ट्टा महत्टुपूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अपारिवाशिक शब्दावली कोष अनिवारी रूपन जोडल जाए. आया स्पेलिंग लेल. संगे समपुरन पात्ठ में वर्तनिक एक रूपी करन वा मानकी करन केल जाए. इग्रन्त कष समपाद की ए पालेशिंक अन्तिम अऽ सबसे आवश्षक चरन आची. एकर तो सुदाशन की आची? अनुक्रमनिका ता बहुत प्रकारक बहुत सकते थाची? दाशनि ग्रन्तक लेल केवल सब्द अनुक्रमनिका पर्याप्त ना आची एही में अदिकरन अनुक्रमनिका जोडल जाए अदिकरन? अदिकरन? वेदान्त दर्शन में अदिकरन के विषेश महत्त होगत था ची जेना समन्वया दिकरन, अनन्द मया दिकरन, जगगग कोनो विद्धर्ती के केवल समन्वया दिकरन पर वाचस्पतिक मत देगवा कची, तो उस्छीदे अनुक्रमनिका देखी का उही पन्नापर चल जाएत यी बहुत नीक विचार अच्छीए. तो सर थोश उदाल हरन एजे बहावी संसकरन में एक ता मैठिली संसकरत पारिबाशिक कोष जोडल जाए. एह में अद्यास, विवर्त, परनाम सन, सन्सक्रत मुल्षव्द, अ अकर मैठिली में प्रविक्त सम्तुल्यशव्द, वव्याख्याक वरनानु क्रम में सुची हो. अ वर्तनिक मान की करनक लेल की कैल जाए? अखर लेल एक ता सम्पाद की ये स्टाल्षीट बनावल जाए, जेन जन निरनेभेल जे अप्रोख्ष लिखभ तप फाँईंट अद रिपलेस वा सुक्श्म अवलोकं सं इस सुनिष्चत कहल जाए, जे समपून गरन्त में अपरोती वा अन्ये कोनो अपभश्व्हन्श र� अद्रिएदा अकादमिक जगत में बड़ी जाईत अची इग्रन्त मैठली दरशन वांँमयक लेल इक ता एतिहासिक इस्तम्भ अची ताई लेल एकर प्रस्तुती से हो उत्बे निर्दोश हुए वाख चाही इएक ता सत्ती अची जग्हन कोनो अनुरादक एतिक पवड भगिरत प्रयास कर एच थी, तो उ मूल पात्ख अर्थ बुज़ै, आवकरा मैठली मे धालवा मे एटिक गहराई मे चली जए चथी, जे एई तरहक समपाद किया अद्रिष्य सन्रचनात्मक त्रूती सब पर, उनक्द्यान नहीं जनाय स्वाभिक अच्छे. आजा कि इच्चाचा उही वनके इक ता सुसजित उद्यान में परिवर्तित करबाक बाड तेखा रहो अच्छे. इक्दम, तस्संख्शेप में कही सकए ची, जे आई हम्रा सब एही सामगरी पर, तींता मुख्य बिन्दूपर विस्तिरित चर्चा के लूँ. पहल, दार्ष्निक सुची सब, वा सिद्धान् सबक आरंभ से पुर्व, योजक संदर्भ या अनुच्छेद, जोडी का कोगनेटेव लोड कम करभ आपाथ्या के अदिक सुलब बनाएब दो सर सुत्रा भाश्या अटीकाग भीछ मुद्रन भेद जेना फोंट वा मारजीनक परिवर्तन अदिशा निर्देशात्मक वाख्यक उप्योख सों स्प्ष्ट सन्रज्नात्मक प्रवाह सुनिष्चित करव. अते सर ग्रन्तक दिर्ब कालिक उप्योगिता कलिल, अन्त में पारी भाशिक, कोष आ अदिक करन अनुक्रमनिका जोर का, वर्तनिक मानकी करन, जना अप्रोख्छ शब्दक पुरन एक रुपी करन करव. इसब्ता सुजाव हुनक काजक कोनो प्रकारे कम नहीं करे तची, बलकी ओक्रा आरो भेसी निखारे तची. हम अनुवादक अ संपादक मन्डलक, एही गमभीर अ उतक्रिस्ट प्रयासक लेल, ह्रिदे सप्रषंसा करे चे. हा, दर्षन शास्त्रक अनुवाद अपने आप में एक तक कांटक मुक्ट पहिर्भाजका आचे, अहो वाचस्पती मिस्रक भामती, इस चच्मुच मैठली सहित्तक लेल एक ता औमूल्या योग्दान आचे. हम लेक्ख के इस उजावसब आपन ग्रन्त में लागु करभाक लेल प्रुच सहित करे तची, अब हविश में आपन इस संसोदित समगरी या कोनो नव अनुवाद फेरसा एताई विमरस अ प्रतिक्रिया लेल पठाभे लेल आमन्त्रित करे ची. मोन राखु उतक्रिष्ट अनुवाद के वल ओ नहीं आची जे मुलक आर्थके सत्तितास दोसर भासा में उतारी दियो. बलकी उतक्रिष्ट अनुवाद उव अचे जे पाटख के यी अनुवभव करभग जे मुल ग्रन्तकार जा आई मेठिली में सोचे चला तथिक एहना लिखाई चला. इज समपाद किय परिमारजन उहे अनुबहवक पुरनता प्रदान करत.

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