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न्यायकुसुमाञ्जलिक_डिकोडिंग.mp4
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- 0:00–0:09नमशकार, आई हम्रा सब एक आजन एतिहास एक बोद्धिक तरोरक विष्लेषन करब, जे कुनो सादारन पोठी नहीं, बलकी एक ता क्रान्ति अच्छे.
- 0:09–0:14चलू, एक आर्वम शताभदिक महान दार्ष्न ग्रन्त नियाए कुसुमाअजली के दिकोड करी.
- 0:14–0:23संगे योंग देखव जिकोना एप्राषीन पोठी एक हाजार वर्ष्ख लामबा अंप्रालक बाद अपन आदूनिक मेठली बाशा में एक ता अदबुत यात्रा तैके लगचे.
- 0:23–0:27सچ कहीता इमात्रेक अनुवादक कगब नहीं आजी
- 0:27–0:29ये एक ता बवद्धिक क्रान्तिक पुनर्जागरन आजे
- 0:29–0:34इआवरन जे सोजा आचे उक्रा कोनो सादारन अनुवादक अवरन नहीं भुज्वू
- 0:34–0:39इई हाजार वर्स पुरान मास्तर पीस का नवका मेठली स्वरूप अचे,
- 0:39–0:42एक रहां से दिख्ला पर इस सक्षात हम्रा सब का
- 0:42–0:45हेरायल बूद्धिक द्हरोबर का गर बाप्सीजका लगे तचे,
- 0:45–0:50अनुवादक गजेंद्ध्धाकृ कप्रेयाज्स़ इपोती वापस अपन मुल दर्ती
- 0:50–0:52यानी मित्ला कब आशा में गुर काईलगचे
- 0:52–0:57सोचु जे ग्रन्त एतेएक सताब्दीसर मात्र संस्क्रित कक कतोर गेरा में बन्द्छिल
- 0:57–1:00अब आम जन मानस कब आशा में सुलब हचे
- 1:15–1:19उद्यानाचारे के इप वूल रच्ना वास्तम में कतेख पहिग बाच्चल
- 1:19–1:25इग आरवम शताप्दिक इग ग्रन्त प्राची न्याय अन्नवे न्याय के बीच के तो मस्वुथ से तूएची
- 1:25–1:29इप इप आदा उगाई के बीज के तो मस्बूथ से तूछी
- 1:29–1:32उद्याना चारे मिठिला के तो महान विबुती चला
- 1:32–1:36आहुनक इग आज भारती इदर्षन में के पएग बदलाओ लाभिक राखी देलक
- 1:36–1:38मुदा एक तो विदंबना देखू
- 1:38–1:43आब आवी दोसर बागपर, तरक कक फुल कक गुच, न्याय कुसुमानजलिक संच्रच्ना,
- 1:44–1:50न्याय कुसुमानजलि सब्दक् साब्दिक अर्थ अची, न्याय कुसुमानजलि सब्दक् साब्दिक अर्थ अची,
- 1:50–1:54अब आवी दोसर भागपर तर्क कक फुल कक गुच न्याय कुसुमानजलिक सन्रचना
- 1:54–1:58न्याय कुसुमानजलि शब्दक्षाब्दिक अर्थ अची न्याय रूपी फुल कक अनजलि
- 1:58–2:05आब आवी दोसर बहाग पर, तर्क कक फूल कक गुच, न्याय कुसुमानजलिक सन्रचना.
- 2:05–2:10न्याय कुसुमानजलि, शब्दक्षाब्दिक अर्थ अची, न्याय रूपी पूल कक अनजलि.
- 2:10–2:16इज तालिका आची उक्रा ध्यान से देखू इपोथिक मान्सिक मान्चित्र तेयार करेताची
- 2:16–2:19इपूरा ग्रन्त पाच्ता स्तबक यानी गुच्छमे बाच्तल आची
- 2:19–2:25पहल स्तबक कल्म, अद्रिष्ट अद्रिष्ष्क्ति आ आत्मक नित्तिता पर बाद करेता ची.
- 2:25–2:29तो सर स्तबक यान कप्रमानिक्ता स्रिष्टी अप्रले पर अची.
- 2:29–2:32तेसर स्तबक नास्तिक तरकक खंडन करेता ची.
- 2:32–2:39चारे में इश्वरक ज्यान का स्वरूपर भहस अची, अपाचम स्थबक जेकी हे ग्रन्द का चरमोद कर्ष अची,
- 2:39–2:42उक इश्वरक अस्तित्वक लेल आट्टा तारकिक प्रमान देटची,
- 2:42–2:46इविबाजन एतेक जकिल दार्षनिक तरकक एक ता बहुत स्पष्ट चित्र,
- 2:46–2:48हम्रा सबख सोजा राखी देटची.
- 2:48–2:53तेसर भाग ची, इश्वर्य भहस पाचम स्टबख में ततस्तरक.
- 2:53–2:57एट्हाम उदेना चार्या आट्टा अकाट्य प्रमान प्रस्तुत करिच फती,
- 2:57–3:02सब से निक बात एएज, जि हूनक एद तरक पूरनता तारकेख अगनित एएज.
- 3:02–3:05हूनी कोनो बावनाव अंदविष्वासक आदार पर नहीं,
- 3:05–3:10बलकी शुद तरक का आदार पर, जिना कार्यात, आयोजनात,
- 3:10–3:14द्रूते हसलोग का संख्या विषेशात जगाखा प्रमानक प्रेोग केलने
- 3:14–3:20इसब तर्क मुल्रूब से चार्वाक अब भाद्धन नास्तिक दर्षनक तार्किक उतर्देवाके लिल्केल चल
- 3:20–3:23एते हम्रा सबकाज कोन पक्ष्लेब नहीं आची
- 3:23–3:30बलकी एी देख हवची जिश्वोद सामगरी में एते जटिल विचार के किते के विवस्तित तरीकान साम प्रस्तुत के लगे लची.
- 3:30–3:38आब एक ता बहुत रोचक बात समजू, उदैना चार्या चार्वाक नास्तिक लोकनिक तरक कच सामना कोना करे चति.
- 3:38–3:47उ व्यावहारिक आत्म विरोद, अठात प्राग्मातिक स्ध्व्रिफ्व्टेशन, प्राग्मातिक स्ध्व्रिफ्व्टेशन का सिद्द्द्दान तक उप्योग करे च्छति,
- 3:47–3:53एकर सीथा मतलबी भेल, जे ओविरोदिक तर्क के ओखर अपने ही जाल में फसाएदे च्छती.
- 3:53–3:59मुदा सब सबेसी द्यान देबगभात यह चे जे एही पूरा प्रक्रिया में ग्रन्त्ख स्वर कतो,
- 3:59–4:02एक बर लेल सहो अनादर पूरन नही होईत अची.
- 4:02–4:08उदेश्य मात्र भहस में जितब नहीं चल, बलकी सत्यक अनवेशन चल, उहो पुरा सम्मानक संगे.
- 4:09–4:15चारिम बाग अन्वादक कला, इगार हम शताब्दीक संस्क्रित आ आदूनिक मात्लिक भीच के खाई के पातब.
- 4:15–4:22अब इस सोचु जे एते गंगोर दार्षनिक विष्यक अनुवाद होईत कनाएच
- 4:22–4:29अग्धाम श्कोपोस �theory अनुवादक दुन्याख एक ता नव नजरीया देई तचे
- 4:29–4:36इस इदान्त कहे तची जे कोनो भी अनुवादक तरीका अकर उदेश्ष सा तैहो बाख चाही
- 4:36–4:41अनुवादक गजें़र ताकृर कुन उदेश एक दम स्पष्ट चल.
- 4:41–4:48इजटिल न्याए दरषन आदूनिक मेठली बजे वाला लोकक लेल, सुलभ अशिक्षाप्रत बनाएब.
- 4:48–4:52इक रामात्र एक ता अकाद्दमिक पोठी नई बन वेचल,
- 4:52–4:56बलकी जन मानसक समज मे आईवला जीवित ग्रन्त बनाई भिचल.
- 4:56–4:59अनुवादक सोजा मुख्ये रूपस दूईता बात होएच्छे.
- 4:59–5:02एक दिस अप्चारिक सम्तुलिता, अप्चारिक सम्तुलिता, अप्चारिक सम्तुलिता,
- 5:02–5:06अदो सर दिस गती शील सम्तुलिता दिनामिक इक्विलिन्स
- 5:06–5:09जदे अद्ध आए अगर प्रभाव पर भेशी द्यान दिल जदे जदे
- 5:09–5:13अगर प्रभाव बेशी द्यान दिल जदे
- 5:13–5:16अगर प्रभाव बेशी द्यान दिल जदे
- 5:16–5:19अगर प्रभाव बेशी द्यान दिल जदे
- 5:19–5:31अगर पालन केल हैं अजधे अदूनिक पाथखक समच का बाथचल उप्रभाव आदारित अनुवाद केल हैं
- 5:31–5:34अनुवादक करिक्ता आवर गजबक रन्नीती देखूँ
- 5:34–5:39देशी करन आवी देशी करन, दोमेस्टिकेशन वर्सिस फोरनाएशेशन
- 5:39–6:09बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा ब�
- 6:09–6:11श्लेश आ कविता कनुवाद
- 6:11–6:13श्लेश कद दिविधा के सुजाएब
- 6:13–6:15प्राजीन संस्क्रित साहित्ति में
- 6:15–6:17श्लेश अथात एक ही शब्दक
- 6:17–6:19दूी अर्थी प्रयोग बहुत आम बाच्छल
- 6:19–6:21मुदाएकर अनुवाद करल जेनाई
- 6:21–6:23बहुत कतिन मनल जाएत छे
- 6:23–6:27तो उग़ाई सिद्धान्तक अद्छी तो तोईदी का दूईता स्पष्ट समानान्तर वाख्यमे बड़ी दिलनें.
- 6:27–6:31अ फुलग अद्छ मे अ न्याय सिद्धान्तक अद्छ मे लिखिका दूनु अद्छ स्थर के सोजा सोजी राखि दिलनें.
- 6:31–6:35तो उदिता स्प़ष्ट समानान्तर वाख्यमे बड़ी दिलनें।
- 6:35–6:37याई ता स्पःट समानान्तर वाख्यमे बदली दिलनें
- 6:37–6:39उ फूलग अध्छ मे
- 6:39–6:41उ न्याय सिद्धान्तक अध्छ मे
- 6:41–6:43लिखिक तुनु अध्छ स्थर के
- 6:43–6:45सोजा सोजी राखि दिलनें
- 6:45–6:47एकर परिनाम एब हिल
- 6:47–6:48जे कवीता करस सो हो नहीं मरल
- 6:48–6:52अदर्शनक मुल आथ सो पुरनता सुरक्षित रही गेल.
- 6:52–6:55एही ताम एक तब बहुत सुन्दर उद्दारन आचे
- 6:55–6:57एही पर तनी क्रूकिया विचार करी.
- 6:57–7:00दबावल गेलो पर इप फुल मुजहित नहीं
- 7:00–7:02इग कते काव्यात्मक अची
- 7:02–7:04एकर आची
- 7:04–7:09जे साद्दरन पूल्त दबाला पर मुज्जाई जाई तची, मुदन न्याय रूपी एप फूल,
- 7:09–7:14यानी तर्क, जटेक दबावल जाई तची, जटेक उक्रापर प्रष्नक्यल जाई तची,
- 7:14–7:17उततेक ही आमर अतीख्ष्न बहुजाई तची.
- 7:17–7:21इपंक्ती दर्षन अकाव्यक इक तब बहुत दुल्लब संगम अची
- 7:21–7:25आब हम्रा सभेक अंतिम भाग बोद्धिक संपदाक गर वाप्सी
- 7:25–7:28मेठली अनुवादक का संस्क्रिति प्रभाव
- 7:28–7:31सबसम महत्व पुरन बिन्दू इए ची
- 7:31–7:35तर्क ख़ियो मित्लाक हुई तो मेठली में नहीं चल उ आब आपन माटिक बहाशा में बाजी रहा लगजी रहा लगजी.
- 7:35–7:40इवास्टव में आपन भाशाई समप्रबुता, लिंविस्टिक सववरने टीकन वापस प्राप्त करबाक एक ता सचक्त प्रयास अची.
- 7:40–7:47अजूनिक आवास्दवकड़ इई अनुवाद मेठली भाशा के दार्षनिक गद्यक इक्ता नव याकरन्द़ रहा लगचे.
- 7:47–7:54जे तर्क कही यो मित्लाक होई तो मेठली में नहीं चल, ओ आब आब आपन माटिक भाशा मे बाजी रहा लगचे.
- 7:54–7:58मैत्ली में नहीं चल, उ आब आपन माटिक भाशा में बाजी रहा लगची
- 7:58–8:03इं मैत्लीक शब्द कोश में दाशनीक शब्दाविलिक एक ता नव समपती जोडी रहा लगची
- 8:03–8:05जे हमरा सब के लिल बहुत गर्व के बाद अच्छी
- 8:05–8:09ता अन्तमी एक ता बहुत प्यक प्रश्न हम्रा सबिक के सोजा अवेत अच्छे
- 8:09–8:12आई हम्रा सबजे आदूनिक मात्र भाशा बाजे ची
- 8:12–8:16औही में आपन प्राच्छीन बोद्धिग द्रोहर के सन्रक्षित करबाक
- 8:16–8:18वास्तविक मुल्लिक की आच्छी
- 8:18–8:20कि इं मात्र अतीत के बचाए वच्छी
- 8:20–8:23वा अपन भाशाक भविश्षके मस्वूध करीना यए ची
- 8:23–8:26जखन व्यान अपन भाशामे गुरे ताची
- 8:26–8:29तो उईक ता पुरा संसक्रती के पुनर जीवित करे ताची
- 8:29–8:32एह विचार पर विमश अख्टिन्तावष्षक अची
- 8:32–8:34इसपर इत्वेधरी, नमश्कार
Plain text
नमशकार, आई हम्रा सब एक आजन एतिहास एक बोद्धिक तरोरक विष्लेषन करब, जे कुनो सादारन पोठी नहीं, बलकी एक ता क्रान्ति अच्छे. चलू, एक आर्वम शताभदिक महान दार्ष्न ग्रन्त नियाए कुसुमाअजली के दिकोड करी. संगे योंग देखव जिकोना एप्राषीन पोठी एक हाजार वर्ष्ख लामबा अंप्रालक बाद अपन आदूनिक मेठली बाशा में एक ता अदबुत यात्रा तैके लगचे. सچ कहीता इमात्रेक अनुवादक कगब नहीं आजी ये एक ता बवद्धिक क्रान्तिक पुनर्जागरन आजे इआवरन जे सोजा आचे उक्रा कोनो सादारन अनुवादक अवरन नहीं भुज्वू इई हाजार वर्स पुरान मास्तर पीस का नवका मेठली स्वरूप अचे, एक रहां से दिख्ला पर इस सक्षात हम्रा सब का हेरायल बूद्धिक द्हरोबर का गर बाप्सीजका लगे तचे, अनुवादक गजेंद्ध्धाकृ कप्रेयाज्स़ इपोती वापस अपन मुल दर्ती यानी मित्ला कब आशा में गुर काईलगचे सोचु जे ग्रन्त एतेएक सताब्दीसर मात्र संस्क्रित कक कतोर गेरा में बन्द्छिल अब आम जन मानस कब आशा में सुलब हचे उद्यानाचारे के इप वूल रच्ना वास्तम में कतेख पहिग बाच्चल इग आरवम शताप्दिक इग ग्रन्त प्राची न्याय अन्नवे न्याय के बीच के तो मस्वुथ से तूएची इप इप आदा उगाई के बीज के तो मस्बूथ से तूछी उद्याना चारे मिठिला के तो महान विबुती चला आहुनक इग आज भारती इदर्षन में के पएग बदलाओ लाभिक राखी देलक मुदा एक तो विदंबना देखू आब आवी दोसर बागपर, तरक कक फुल कक गुच, न्याय कुसुमानजलिक संच्रच्ना, न्याय कुसुमानजलि सब्दक् साब्दिक अर्थ अची, न्याय कुसुमानजलि सब्दक् साब्दिक अर्थ अची, अब आवी दोसर भागपर तर्क कक फुल कक गुच न्याय कुसुमानजलिक सन्रचना न्याय कुसुमानजलि शब्दक्षाब्दिक अर्थ अची न्याय रूपी फुल कक अनजलि आब आवी दोसर बहाग पर, तर्क कक फूल कक गुच, न्याय कुसुमानजलिक सन्रचना. न्याय कुसुमानजलि, शब्दक्षाब्दिक अर्थ अची, न्याय रूपी पूल कक अनजलि. इज तालिका आची उक्रा ध्यान से देखू इपोथिक मान्सिक मान्चित्र तेयार करेताची इपूरा ग्रन्त पाच्ता स्तबक यानी गुच्छमे बाच्तल आची पहल स्तबक कल्म, अद्रिष्ट अद्रिष्ष्क्ति आ आत्मक नित्तिता पर बाद करेता ची. तो सर स्तबक यान कप्रमानिक्ता स्रिष्टी अप्रले पर अची. तेसर स्तबक नास्तिक तरकक खंडन करेता ची. चारे में इश्वरक ज्यान का स्वरूपर भहस अची, अपाचम स्थबक जेकी हे ग्रन्द का चरमोद कर्ष अची, उक इश्वरक अस्तित्वक लेल आट्टा तारकिक प्रमान देटची, इविबाजन एतेक जकिल दार्षनिक तरकक एक ता बहुत स्पष्ट चित्र, हम्रा सबख सोजा राखी देटची. तेसर भाग ची, इश्वर्य भहस पाचम स्टबख में ततस्तरक. एट्हाम उदेना चार्या आट्टा अकाट्य प्रमान प्रस्तुत करिच फती, सब से निक बात एएज, जि हूनक एद तरक पूरनता तारकेख अगनित एएज. हूनी कोनो बावनाव अंदविष्वासक आदार पर नहीं, बलकी शुद तरक का आदार पर, जिना कार्यात, आयोजनात, द्रूते हसलोग का संख्या विषेशात जगाखा प्रमानक प्रेोग केलने इसब तर्क मुल्रूब से चार्वाक अब भाद्धन नास्तिक दर्षनक तार्किक उतर्देवाके लिल्केल चल एते हम्रा सबकाज कोन पक्ष्लेब नहीं आची बलकी एी देख हवची जिश्वोद सामगरी में एते जटिल विचार के किते के विवस्तित तरीकान साम प्रस्तुत के लगे लची. आब एक ता बहुत रोचक बात समजू, उदैना चार्या चार्वाक नास्तिक लोकनिक तरक कच सामना कोना करे चति. उ व्यावहारिक आत्म विरोद, अठात प्राग्मातिक स्ध्व्रिफ्व्टेशन, प्राग्मातिक स्ध्व्रिफ्व्टेशन का सिद्द्द्दान तक उप्योग करे च्छति, एकर सीथा मतलबी भेल, जे ओविरोदिक तर्क के ओखर अपने ही जाल में फसाएदे च्छती. मुदा सब सबेसी द्यान देबगभात यह चे जे एही पूरा प्रक्रिया में ग्रन्त्ख स्वर कतो, एक बर लेल सहो अनादर पूरन नही होईत अची. उदेश्य मात्र भहस में जितब नहीं चल, बलकी सत्यक अनवेशन चल, उहो पुरा सम्मानक संगे. चारिम बाग अन्वादक कला, इगार हम शताब्दीक संस्क्रित आ आदूनिक मात्लिक भीच के खाई के पातब. अब इस सोचु जे एते गंगोर दार्षनिक विष्यक अनुवाद होईत कनाएच अग्धाम श्कोपोस �theory अनुवादक दुन्याख एक ता नव नजरीया देई तचे इस इदान्त कहे तची जे कोनो भी अनुवादक तरीका अकर उदेश्ष सा तैहो बाख चाही अनुवादक गजें़र ताकृर कुन उदेश एक दम स्पष्ट चल. इजटिल न्याए दरषन आदूनिक मेठली बजे वाला लोकक लेल, सुलभ अशिक्षाप्रत बनाएब. इक रामात्र एक ता अकाद्दमिक पोठी नई बन वेचल, बलकी जन मानसक समज मे आईवला जीवित ग्रन्त बनाई भिचल. अनुवादक सोजा मुख्ये रूपस दूईता बात होएच्छे. एक दिस अप्चारिक सम्तुलिता, अप्चारिक सम्तुलिता, अप्चारिक सम्तुलिता, अदो सर दिस गती शील सम्तुलिता दिनामिक इक्विलिन्स जदे अद्ध आए अगर प्रभाव पर भेशी द्यान दिल जदे जदे अगर प्रभाव बेशी द्यान दिल जदे अगर प्रभाव बेशी द्यान दिल जदे अगर प्रभाव बेशी द्यान दिल जदे अगर पालन केल हैं अजधे अदूनिक पाथखक समच का बाथचल उप्रभाव आदारित अनुवाद केल हैं अनुवादक करिक्ता आवर गजबक रन्नीती देखूँ देशी करन आवी देशी करन, दोमेस्टिकेशन वर्सिस फोरनाएशेशन बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा बवाज़ा ब� श्लेश आ कविता कनुवाद श्लेश कद दिविधा के सुजाएब प्राजीन संस्क्रित साहित्ति में श्लेश अथात एक ही शब्दक दूी अर्थी प्रयोग बहुत आम बाच्छल मुदाएकर अनुवाद करल जेनाई बहुत कतिन मनल जाएत छे तो उग़ाई सिद्धान्तक अद्छी तो तोईदी का दूईता स्पष्ट समानान्तर वाख्यमे बड़ी दिलनें. अ फुलग अद्छ मे अ न्याय सिद्धान्तक अद्छ मे लिखिका दूनु अद्छ स्थर के सोजा सोजी राखि दिलनें. तो उदिता स्प़ष्ट समानान्तर वाख्यमे बड़ी दिलनें। याई ता स्पःट समानान्तर वाख्यमे बदली दिलनें उ फूलग अध्छ मे उ न्याय सिद्धान्तक अध्छ मे लिखिक तुनु अध्छ स्थर के सोजा सोजी राखि दिलनें एकर परिनाम एब हिल जे कवीता करस सो हो नहीं मरल अदर्शनक मुल आथ सो पुरनता सुरक्षित रही गेल. एही ताम एक तब बहुत सुन्दर उद्दारन आचे एही पर तनी क्रूकिया विचार करी. दबावल गेलो पर इप फुल मुजहित नहीं इग कते काव्यात्मक अची एकर आची जे साद्दरन पूल्त दबाला पर मुज्जाई जाई तची, मुदन न्याय रूपी एप फूल, यानी तर्क, जटेक दबावल जाई तची, जटेक उक्रापर प्रष्नक्यल जाई तची, उततेक ही आमर अतीख्ष्न बहुजाई तची. इपंक्ती दर्षन अकाव्यक इक तब बहुत दुल्लब संगम अची आब हम्रा सभेक अंतिम भाग बोद्धिक संपदाक गर वाप्सी मेठली अनुवादक का संस्क्रिति प्रभाव सबसम महत्व पुरन बिन्दू इए ची तर्क ख़ियो मित्लाक हुई तो मेठली में नहीं चल उ आब आपन माटिक बहाशा में बाजी रहा लगजी रहा लगजी. इवास्टव में आपन भाशाई समप्रबुता, लिंविस्टिक सववरने टीकन वापस प्राप्त करबाक एक ता सचक्त प्रयास अची. अजूनिक आवास्दवकड़ इई अनुवाद मेठली भाशा के दार्षनिक गद्यक इक्ता नव याकरन्द़ रहा लगचे. जे तर्क कही यो मित्लाक होई तो मेठली में नहीं चल, ओ आब आब आपन माटिक भाशा मे बाजी रहा लगचे. मैत्ली में नहीं चल, उ आब आपन माटिक भाशा में बाजी रहा लगची इं मैत्लीक शब्द कोश में दाशनीक शब्दाविलिक एक ता नव समपती जोडी रहा लगची जे हमरा सब के लिल बहुत गर्व के बाद अच्छी ता अन्तमी एक ता बहुत प्यक प्रश्न हम्रा सबिक के सोजा अवेत अच्छे आई हम्रा सबजे आदूनिक मात्र भाशा बाजे ची औही में आपन प्राच्छीन बोद्धिग द्रोहर के सन्रक्षित करबाक वास्तविक मुल्लिक की आच्छी कि इं मात्र अतीत के बचाए वच्छी वा अपन भाशाक भविश्षके मस्वूध करीना यए ची जखन व्यान अपन भाशामे गुरे ताची तो उईक ता पुरा संसक्रती के पुनर जीवित करे ताची एह विचार पर विमश अख्टिन्तावष्षक अची इसपर इत्वेधरी, नमश्कार