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गङ्गेशक_तत्त्वचिन्तामणि_आ_सामाजिक_सङ्घर्ष.m4a
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- 0:00–0:13आई हम सब गजंद्र ताकृर दवारा अनुवादित, आस समपादित, गंगेश उपाद्याय रचित तत्व चिन्तामनी, आए नव्वे नयक मैथिली पान्दुलीपिक समिक्षा कर रहल ची.
- 0:13–0:24आई पात्त में प्राची नव्वे नयसिद्धान्त आदूनिक जीवनक उदारनक कबीच एक ता असन्तुलन आची जे पात्तक द्यान भद्का सकैत अची.
- 0:24–0:32एक दम. मने, कमजोरी इए ची जे श्रोथ समगरी में एक दिस अख्याती, अन्यता ख्याती,
- 0:32–0:38आदाज शक्ती जैका अट्यन्त गमभीर आजजटिल दाशनिक विमर्ष चली रहो जे
- 0:38–0:47आद दूसर देश आचानक सा इसमाथ फों किनब, समाजिक माद्यमक लत, आप बलोकर लगएभ आब ब्रोकलिक उदारन दिलगेल चे
- 0:47–0:49आद इत बहुत बेमे लगे तची
- 0:49–1:01इक ता विद्वान पाथक लेल जे नव्वे नयायक गेराई में दूबल अचे इई आचानक देलगेल बहुज सादारन आदूनिक उदारन गरन्तक दाशनिक गामभीर्यके क्हन्दित करे तची.
- 1:01–1:02भिल्कुल करे तची.
- 1:02–1:13जखन कोनो पात्ख, चोदावा शताब्दिक, यान मिमान्साक, उही सुख्श्मस्तर पर मन्तन करो हैं जदते बरम आप प्रमा कबीच का अंतर स्पष्ट केल जार हो लगा ची,
- 1:13–1:19उते आचानक सा इसमाट्फोनक नोटिखेशनक चर्चा एक ता वैचारिक जद्का देई तची।
- 1:19–1:22माने वो वैचारिक ले तूटी जाए कछी
- 1:22–1:28आप इजथका वैचारिक ले के कोना तोडे तची, उक्रा एक ता द्रस्टान् सबुजू
- 1:28–1:40जखन पात में अख्याती और अन्यताख्याती का खन्दन मन्दन चली रहा लगची, तब पात्खक मस्तिष्त एक ता विशेश दार्षने गंभीरता में प्रवेश कर चुकल होगी तची.
- 1:40–1:45सत्य, प्रभाकर मी मान्सक्क, अख्याती वाद कहेत अची,
- 1:45–1:52जे ब्रम् मात्र दूईता ज्यानक, माने स्म्रती अप्रत्यक्षक, भेद न भूज्वा कारने होई तची.
- 1:52–1:57आदो सर्दिस, न्याय दर्षनक अन्निता ख्याती कहेत अची,
- 1:57–2:00जे ब्रमक अद्द अच्छी कोनो वस्तूके,
- 2:00–2:03उकर आस्ली स्वरूप सा भिन्नरूप में देखवा,
- 2:03–2:06जे ना दोरी के साप भुज्वा,
- 2:06–2:10ये एक ता अट्टिन्त सुख्श्म संज्यनात्मक विष्लेशन आची.
- 2:10–2:12आएहन गमभीर विमर्श्ख भीछ,
- 2:12–2:17जखन अचानक सव उ आप ब्लोकर कप रहाई जाई तखछी
- 2:17–2:25तो उ ग्यान कउच अस्तर सव पाथक के खसा क देनन्दिन जीवन का एक ता बहुत सतही अस्तर पर लोवबे तखछी
- 2:25–2:29इआसन्तुलन पाथक के एक अग्रता बहंग करे तखछी
- 2:29–2:31इग्दम सही कहलु आहा
- 2:31–2:39तकी एकर अर्थ एब हेल, जे आदूनिक जीवन के उदाहरन सब के पान्दूलीपी सम्पोन रूपे हता देल जाए.
- 2:39–2:46इए उदाहरन सब तनव्य नयाय के आएकाल के पीडी के लेल प्रासंगिक बनेबा के लेल देल गेल अचीन अग.
- 2:46–2:48आप, औगो अची.
- 2:48–2:56जई इसब हता देव, तकी इपान्दूलीपी मात्र किछु गिनल चुनल पन्दितन सब के लिल सीमित नवव बहुजायत।
- 2:56–3:04सुजाव इणवव अची जे इआदूनिक उदाहरन सब के हता दिल जाये कारन इग्यान वर्दधख अची
- 3:04–3:14मुदा उक्रा मुख्या शास्त्रिये विमर्ष्छ के बीच में नारागी कव एक ता अलक खन्ड वा व्यवावारिक न्याये के रूप में प्रस्तुत क्यल जबाग चाही.
- 3:14–3:16औहो! मने अपलाएड न्याये?
- 3:16–3:17रागा!
- 3:17–3:24मोख्या दार्ष्निक प्रवाहा के अक्षुन ननक्यत इई आदूनिक अनुप्योग सब के इक्ता अलक स्थान्देल जिबाक चाही.
- 3:24–3:30इई एक्ता बहुत व्यवावारिक सुजावा ची, तई व्यवावारिक नयाय का मन्चन कोना केल जाए,
- 3:30–3:34जहीसा मुल ग्रन्त का शास्त्रिया अखंडता सेहो बनल रहे
- 3:34–3:36आ आदूनिक संदर्ब सेहो पाथक दरी पूँचे.
- 3:36–3:39आगर कोनो तोस उदाहरन अची.
- 3:39–3:42आगर तोस उदाहरन के लिल
- 3:42–3:44जिना बोद्द दर्षनक निर्वान
- 3:44–3:46आ नयाई दर्षनक अप्वर्ग
- 3:46–3:51कतुलना करित काल अचानक सां, समाथवोनक मोहा का चर्चा करवा का बडला,
- 3:51–3:54मुख्य पाथ में केवल परम परागत उदारन रखू,
- 3:54–3:57जिना दोरी में साप का ब्रम.
- 3:57–4:00तीख अची, आदूनिक उदारन सब के?
- 4:00–4:07आदूनिक जीवनक उदारन सब के अद्द्याय अंत मे आदूनिक सन्दर्ब नामक उप्सिर्षाक कक अंटर्गत राखि सकैची
- 4:07–4:11जाही सा मुख्य ग्रन्त का शास्त्रिय अख्डन्दता बनल रहे तशी
- 4:11–4:14आदूरी साव्सा अन्निता ख्याती सिद्धान समजाो
- 4:14–4:17आफिर अद्द्यायक अन्तिम भाग में बताओ,
- 4:17–4:20जे आईके सन्दर्प में ब्रामक खब्रीवा,
- 4:20–4:24दीप्टेक्निक से हो आही सिद्दान्त पर कोना काज करेता ची.
- 4:24–4:27इक्दम पाथक जखन अद्द्यायक अन्त्मे पहुचत,
- 4:27–4:34तकनोग्रा इ आदूनिक उनुप्रेजग एक ता बड्दिक विश्राम जचा लागत नाकी कोनो वैचारिक बादध जकां.
- 4:34–4:40मुदाज्जा रहम सब अप्लाइड न्याय का एक ता अलक खन्द अद्याय अंप्मे बनादेप,
- 4:40–4:43तकी मुख्य पात बहुत भेशी शूष्क नवो बजात
- 4:43–4:50एक ता सादारन पाथक लेल नवे नयायक सुत्र सब के बिना कोनो आदूनिक फुक कपचे बहुत कतिन बहुसके तची
- 4:50–4:53हम भूजी रहाल ची, आंकी कही रहाल ची
- 4:53–5:00हम्राता लगेत ची जे एई समाथफों जका उदाहरन एक ता साँस लेबाक जग़ादेत चे
- 5:00–5:06जा उक्रा रलक कदेब ता मुख्यपात केवल पारी भाशिक बोज बहो कर अईजाएत
- 5:07–5:08एहन जोखिम ता नवा अचे
- 5:08–5:14दिखु, आहाक प्रष्न बिचारनिया जी मुदा इ आशंका निरमूल आची.
- 5:14–5:16एक रा एक टा एनालोजी सबजू.
- 5:16–5:20इ भोजन सर नोन हताएब नवा आचे,
- 5:20–5:27अपितु नोन के डालिग भीच में सीदे नवो खसाक अगरा ठाली में अलक सपरो सव आची.
- 5:27–5:32जाही सब पाथग आपन स्वादानूसार उकर उप्योग कसके
- 5:32–5:39आप जनन दाली मे बहुत भेशी बहुजाए, तदाली क आपन जे विष्ट स्वाद अचे उ मरी जाए तची
- 5:39–5:42नव्यन नयायक आपन इक ता विष्ट स्वाद अचे
- 5:42–5:46अखर गनितिये सतीकता, अखर तारकिक संदरिय.
- 5:46–5:49आज जा उही मद्यमे समाथफों कहसादेप,
- 5:49–5:53तो उ नव्य नयायक स्वाब के विष्टडब्द कदैतची.
- 5:53–5:54भिल्कुल.
- 5:54–5:57जा आहा आदूनिक उदाहरन के अलक्खन्द मे रक्वे,
- 5:57–6:01तपाथक पहिले सास्त्रिये गामभेर्यक आस्वादन करत्
- 6:01–6:04अतकन आदूनिक संदर्भिक्ता बुजद्त्
- 6:04–6:06दूनु अपन अपन जगपर उत्किष्ट लागत्
- 6:06–6:08निक बात कहलों
- 6:08–6:13जकन हम सब आदूनिक संदर्भ के अलग करवाक बात करहल ची
- 6:13–6:18ता आदूनिक समाथ्फोंक उदाहरनस भेसी नीक इहोईत,
- 6:18–6:24जे ग्रन्त में गंगेश्ख जे अतिहासिक अस्सामाजिक वास्त्विक्ता देल गेल आची,
- 6:24–6:27अक्रे एक्ता दर्पन्जका प्रियोक खेल जाए.
- 6:27–6:29आई, ये बहुत महत्पोण बिन्दू आची.
- 6:29–6:37कमजोरी यह आची जे पाथ में दूसरी पनजी के आदार पर यह बहुत रोचक तत्थ प्रस्थ॥ केल गेल आची.
- 6:37–6:47जे ग्रंगेश्ष्यक जन्म पिताक म्रुत्त्युक पाच्वरक बहल्चल आ अ उ अन्तर जाती ए वाचमा कारेनी सा विवाह केने चला.
- 6:47–6:51जाहे कारन् समबवत्त हुंका सामाजिक भहिषकार सहाई परलचल.
- 6:51–6:52एक दं.
- 6:52–6:55मुदा पात यी एतियासिक तत्ध्य बतेबाग बाद
- 6:55–6:58आचानक फेर सांग्यान मिमान्सा पर गूरी जाई तची
- 6:58–7:06इसामाजिक वुमर्श आनब्व नयाएक उत्पत्टिक भीच जे गहीर संबन्द भहस अकाइत चिल उक्रा पाथ में चोडी दिलगेल आची.
- 7:06–7:14इहन भेलजना आहा कोनो महान वेग्यानिक जीवन्क सबसे बएर संगर्ष कता सूनावे ची
- 7:14–7:19अखरा हुँक सबसे बआर आविषकार सा जोडबा में चूक कजाएची.
- 7:19–7:23सत्तिक हलहू, ये एक ता बहुत पैग समभावना चल,
- 7:23–7:28जे करा पात में मात्र अतिहासिक फृटनोट बनी का रही ए जबाकलेल चोडी देलगल.
- 7:28–7:36मित्हिलाक पन्जीप्रबन्द, जे हर्सिंग देव के समय में शुरुब हेल चल, उईक ता अथ्यंत कत्होर सामाजिक वेवस्था चल.
- 7:36–7:43आ, उईईवेवस्था में गंगेशके दूशी मानलगल, उईक ता सामाजिक अूट्साइटर चला.
- 7:43–7:48मुदा पाथ मे इबताक सीदा प्रमान का चर्चा सुरुब हो जायत अची
- 7:48–7:54तई एतिहासिक तथ्य आग्यानी मिमान साक भीच से तु कोना बनावल जाय.
- 7:54–7:59सुजाअ एचे जे गंगेश्क सामाजिक हाश्ये पर रहबाक इस्तिती के
- 7:59–8:06उनक दार्शनिक सिद्धान सब विषेश का परतः प्रामाडे वाद प्रिष्ट्बूमी के रूप में जोडों.
- 8:06–8:10आप, गंगेश जे समाज में रही चला,
- 8:10–8:14उते हुनका जन्म आववन्ष का आदार पर स्विकार नाउ केल जारोहल चल.
- 8:14–8:19तवूनक दर्शन से हो उही सामाजिक यतार्द सन उपजल आची
- 8:19–8:22जिक्रा पाथ में स्थापित करव आवश्षक अची
- 8:22–8:26वूनकर तरक शास्त्र कोनो शून्ये में नो लिखल गयल चल
- 8:26–8:29इहूनक सामाजिक अस्तितवक रक्षक चल
- 8:29–8:32कि आहा एकर कोनो तोस उदाहरन दसके ची,
- 8:32–8:36जे लेखा कपन सामगरी में एक राख कोना वाकिर बद का सके चतें?
- 8:36–8:39तोस उदाहरनक लेल,
- 8:39–8:41पात में मीमान्सक सवक,
- 8:41–8:43सुतह प्रमानिक वाद
- 8:43–8:46अग गंगेशक परतह प्रमानिक वाद के
- 8:46–9:16तक्रहत के सामाजिक परीप्रेच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च
- 9:16–9:22अगरा कोनो भाहरी तारकिक परिक्षनक आवस्शक्ता नवव आचे
- 9:22–9:25और गंगेश जे स्वयम इटतता कतित
- 9:25–9:29स्वता प्रमानित विषेशाडिकार से वनजिच्छलाह
- 9:29–9:31ओईक्रा चुनोती दैच्छती
- 9:31–9:34आप पात में इजोडल जासके तची
- 9:34–9:46जगंगेश जन का अपन समाजिक सुईक्रुतक के लेल पारमपरिक आदारक बदला में कतोर वस्तूनिस्त प्रमानक आवश्श्व्ताचल उ परतह प्रमानिक्वाद का स्थापना किलने.
- 9:46–9:57अद्थात ग्यान वा वक्त प्रमानिक्ता जनम से नवज बलकी प्रव्रित्ती सामर्थ्य माने सफल कारे प्रमानित होई तची
- 9:57–10:04भिल्कुल जा आहत ग्यान सां कोनो कारे सफल होई तची तकन उ ग्यान प्रमानिकची
- 10:04–10:09उगर विष्च्ट तार्किक सब्व्रत्तिक सब्फल्ता हमर प्रमानिक ता आची.
- 10:09–10:14एई संयोजन अटिहासिक तत्ये के दार्षनिक क्रान्तिसों जोडी देद.
- 10:14–10:18मुदा की कोनो विक्तिख विक्तिगत सामाजिक जीवन के,
- 10:18–10:23इई संयोजन अदियासिक तत्ये के दार्षनिक क्रान्ती सो जोडी देत.
- 10:23–10:27मुदा की कोनो विक्तिगद समाजिक जीवन के,
- 10:27–10:32उकर विषुद्द तारकिक सिद्धान सो जोडब किचु भेसी अनुमानित नवभ हजाएत?
- 10:32–10:34आहाक इई सोचब सवाबे कची.
- 10:34–10:40वो वस्तूनिष्त था कि इस नवब हकरत था जो हम उक्रा एक तव यक्त विषेशक सामाजि कुन्ता वसंगर्ष्क परनाम मानिली
- 10:40–10:45दिक। पात में एक रास पष्ट करवा का वस्षकता जी इस इनक तरक वस्तूनिष्त था कम नवब हकरेत
- 10:45–10:51अगर अगर एक्ता विशेशक सामाजिक खुन्ता वसंगर्ष्क परनाम मानिली
- 10:51–10:55दिक। पाथ में एक्रा स्पस्ट करवा कावस्षक्ता आची
- 10:55–10:58जे इई हुनक तरक क्वस्तुनिष्तता कम न भखरेत
- 10:58–11:04बलकी देखावे तची जे उ एते कदोर वस्तु निष्ट्ता करच्ना की अक्किलनी
- 11:04–11:07अहो माने आवश्षकता आविष्कार का जननी आची
- 11:07–11:14आप, एक ता सामाजिक आउट्साईटर के समाज में आपन अस्थान बनेबा के लेल
- 11:14–11:17जे अकाट्यत्तर्क के आवश्व्टा हुई तची
- 11:17–11:23उही अकाट्यता कोज हूँनका, नवे नयाएक सिद्धानत गडेल प्रेरिद के लगा.
- 11:23–11:28अस्तापित वर्ग के परमपरा साम माननता भेटी जाएत अच्छी,
- 11:28–11:34उक्रा अपन बात सिद करभा लेल कुनो कत्होर तारकिक जाल भून्बाक आवश्चकता नाव.
- 11:34–11:42मुदा, जे हाशीए पर अची, उक्रा आपन बात मनबावे लेल एहन वस्तुनिष्त आए अकाट्ट्यतर्क चाही,
- 11:42–11:46जे करा कोनो पुर्वाग्र, कोनो पंजिकार काटी नों हसेके,
- 11:46–11:52गंगेशक इवस्तुनिष्तता हुनक सामाजिक असुरक्षाक सबसं सवल उतर चल.
- 11:52–11:57गंगेशक के ओही अकाट्ते तर्क का जे आवश्षकता चल,
- 11:57–12:02उही कारने ओहेट नवा पारी भाशिक शब्दावली करचना केलने,
- 12:02–12:07जाहिसा कुनो भी प्रतिपक्षी, हुनक तर्ग में कुनो छिद्रन्नाव ताके सके.
- 12:07–12:13एक दम, मुदा पात्ठ में इशब्दावली कुना प्रस्तुत कर गेल अची तक्रा समिक्चा अवस्षक अची.
- 12:13–12:23जटिल पारी भाशिक शब्दावली क अचानक प्रयोग बिना पर्याःत पूर्व पीछिकाक ग्रन्त कगती के बादित करे चे
- 12:23–12:30नव्या नयाएक पारी भाशिक शब्दावली वास्तव में पाथक कलेल एक ता बहुत पेग देवाल जका ची
- 12:30–12:46कमजोरी इआच्छी जे पाथ में सब्यभिचार, बादेत, उपादी, और व्यदिकरन द्रमाव छिन्न प्रयोगिता जका अछ्यन्त जतिल पारिभाशिक शब्द सब का अचानक सुची वा परिभाशा प्रस्तुत कर दिल गेलग.
- 12:46–12:55अद्यपी पाथक विद्वान अची ततापी इप्रस्तूती एकता दाशनिक यात्राक बडला में शब्द कोजगाई तची
- 12:55–12:59इएक्दम्सब पाथक पर एकता पारिभाशिक पहाड क्षाए बगेई
- 12:59–13:09बिल्ल्कुल, शब्द सब आचानक खसेतची बिनाई बतोने, जे इशब्द कोन विषिष्ट दार्षनिक संकत के दूर करवाक लेल गरहल गिलचल.
- 13:09–13:19जखन कोनो नया शब्द आवेत अची आ ओकर पच्धाक अटिहासेक वा दार्षनिक संगर्ष नवेबुजाई तची, तो उशवद मात्र रत्बाक समगरी बन जाए तची.
- 13:19–13:24आपाटख बाटख बहुत आप पहले ओही समस्या वः संकत में फ़साओ,
- 13:24–13:31जते ओख्रा इी महसुस होए, जे पुरान शब्दवा पुरान तरक से काज नवा चल रहलच,
- 13:31–13:37अद्तकन अद्खन अद्खन पुरान पुरान पुरान तरक से च्वाज नवाचल रहलच,
- 13:37–13:53अगर आहा पात्ख के पहले ओही समस्या वह संकत में फसाओ जते ओख्रा ई महसुस होई जे पुरान शब्द वा पुरान तर्क से काज नवा चल रहलच अत खन नव शब्द के एक तर्किक अस्ट्र जका प्रस्तूत करूए।
- 13:53–13:55अग, एक दम सही.
- 13:55–14:25अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अ�
- 14:25–14:55आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
- 14:55–14:58अगदा एक ता क्रन्तिकारी अस्त्रक निर्मान कर अच्छतिन
- 14:58–15:03तक्हन यी देखाओ जे गंगेस यी तारकिक क्रन्ति कोना केलनी
- 15:03–15:09जे उपादिके पहेचान कै अनुमानक त्रूटी के दूर केल जासकाई तची
- 15:09–15:22अगदम गंगेस आस्पष्ट करे चातिन जे आगी से दूँआत तकने उठाईत अछी, जकन आगी में भिजल कात हो, इबिजल कात ही अपादी अछी.
- 15:22–15:25विजल कात हो, इब विजल कात ही उपादी अची
- 15:25–15:29अगो, चारवाख कषंका कषमदान इची
- 15:29–15:32जे जो हम उपादी के पहचानिली
- 15:32–15:36ता हम कोनो भी व्याप्ती के दोश्मुखत कचाची
- 15:36–15:40बलकल, जगन पाथक चारवाख का हमला देखत
- 15:40–15:45तकन उक्रा गंगेशक उपादिक महिमा उकर आववस्शक्त्या बुजाएत.
- 15:45–15:47मुदा एक ता बात अची,
- 15:47–15:50जो हम इशास्त्रिया शब्द सब के,
- 15:50–15:53जेना विदिकरन दर्माव चिन्न प्रत्योगिता,
- 15:53–15:56बहुत भेसी सरल करबाक प्रयास करब,
- 15:56–16:01तकि नव्यन्यायक जे मुल गड़ितिय सतिक्ता अची और नश्ट नवब होजाते।
- 16:01–16:04औ, हम सरल करबाक बात नहां कर रहल चाहे।
- 16:04–16:08नव्यन्यायक तजान ले जाई तच्छि आपनो ही सतिक्ता लेल,
- 16:08–16:13जो अख्रा कता में बदलब, तशास्त्रियता क्शन्दित नभब हुजध.
- 16:13–16:17इत उही भेल, जिना क्वन्टम फिजिक्स के बाल कता बनादेप.
- 16:17–16:21बुजल हूँ, मुदा सुजाओ शव्द के सरल कर बाक नभब है ची,
- 16:21–16:24बलकी अगर मनचन बबाक अची.
- 16:24–16:30शब्द जटिल हे बाक चाही, मुदाओकर आगमक कारन एक दम सपष्ट हे बाक चाही.
- 16:30–16:33मैंने शब्द जहीना अची तेहने रहे?
- 16:33–16:41रहा, हम यी नवबख कहे रहा लचीन, जे आहा विदिकरन दर्माव अचिन्न प्रतीयोगिता के सरल भाशा में बदली दियोग.
- 16:41–16:46बलकी यी बताओ जे यी बहयंकर शब्द बनावए के आवशक्ता की अगपडल
- 16:46–16:51गंगेश के कोनो एहन सुख्श्म भ्रम वा तारकिक छद्र भेटल हितन ही
- 16:51–16:55जे क्रा बंद करबाक लेल हुनका यी बारी बहरक्कम शब्द गड़े पडल
- 16:55–17:02एक दम मन्चन बदलबासें शब्दक वजन नवबजन कम होईत, उकर सार्थखता बडीजायता ची.
- 17:02–17:07पाथक जोकन इबुजी जायता ची, जे इशवद कोनो प्रदर्षनक लेल नवबजन,
- 17:07–17:10बलकी एक टा विष्च्ट तारकिक यूध जीटबाख लेल आची,
- 17:10–17:14जीद्बाक लेल अची, तकोन उही जटिल्ता के से हो सहर्ष्ष्विकार करे तची.
- 17:14–17:21तरी में अध्वूट पान्टित्याची मुदाएकला आरो प्रभावी बनेबाक लेल तींटा काज करल जासकाएचे.
- 17:21–17:27आदूनेक जीवन्कुल उदारन सब के मुख्ये दार्ष्निक प्रवाहासां
- 17:27–17:30अलक्क व्यवावारे क्हन्ड में राखल जाई
- 17:30–17:34जैसा अख्याती जका सुक्श्म विमर्षिक भीच
- 17:34–17:38समार्ट्फों कर्चर्चा पात्खक एक अग्रता नुभभ्ह भंग करे
- 17:38–17:42अदोसर काज गंगेशक एतिहासिक आस समाजिक संगर्ष
- 17:43–17:49माने पन्जी प्रबंद में हुनक मरजनलाएज्द स्तिती के हुनक परतह प्रमाडवाद
- 17:49–17:53जका क्रान्तिकारी सिद्दान्तक प्रिस्ट्बूमिक रूप में प्रस्तुत कल जाए.
- 17:53–17:59अते सर नव्यन्यायक जत्ल शब्दावली के शब्द कोश जका सुची के रूब में नहां
- 17:59–18:05बलकी दाशनिक समस्या का समादानक रूप में क्रमिक कता के अंथरगत लावल जाए.
- 18:05–18:35जते उपादिजका शब्द चारवाग का संकर सबचैबाग अस्त्रक रूप में अवतरित हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 18:35–18:40अच्छ अद्टाग अश्वोद्टागे अपन सामगरी में इश्चन्शोदन सव कई एक्रा फेर से समिक्शार्थ पथे बाक लेल आमन्त्रित केल जाएत अच्छी अपर औरो सुख्ष्मविमर्स बहुसबहुसके।
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आई हम सब गजंद्र ताकृर दवारा अनुवादित, आस समपादित, गंगेश उपाद्याय रचित तत्व चिन्तामनी, आए नव्वे नयक मैथिली पान्दुलीपिक समिक्षा कर रहल ची. आई पात्त में प्राची नव्वे नयसिद्धान्त आदूनिक जीवनक उदारनक कबीच एक ता असन्तुलन आची जे पात्तक द्यान भद्का सकैत अची. एक दम. मने, कमजोरी इए ची जे श्रोथ समगरी में एक दिस अख्याती, अन्यता ख्याती, आदाज शक्ती जैका अट्यन्त गमभीर आजजटिल दाशनिक विमर्ष चली रहो जे आद दूसर देश आचानक सा इसमाथ फों किनब, समाजिक माद्यमक लत, आप बलोकर लगएभ आब ब्रोकलिक उदारन दिलगेल चे आद इत बहुत बेमे लगे तची इक ता विद्वान पाथक लेल जे नव्वे नयायक गेराई में दूबल अचे इई आचानक देलगेल बहुज सादारन आदूनिक उदारन गरन्तक दाशनिक गामभीर्यके क्हन्दित करे तची. भिल्कुल करे तची. जखन कोनो पात्ख, चोदावा शताब्दिक, यान मिमान्साक, उही सुख्श्मस्तर पर मन्तन करो हैं जदते बरम आप प्रमा कबीच का अंतर स्पष्ट केल जार हो लगा ची, उते आचानक सा इसमाट्फोनक नोटिखेशनक चर्चा एक ता वैचारिक जद्का देई तची। माने वो वैचारिक ले तूटी जाए कछी आप इजथका वैचारिक ले के कोना तोडे तची, उक्रा एक ता द्रस्टान् सबुजू जखन पात में अख्याती और अन्यताख्याती का खन्दन मन्दन चली रहा लगची, तब पात्खक मस्तिष्त एक ता विशेश दार्षने गंभीरता में प्रवेश कर चुकल होगी तची. सत्य, प्रभाकर मी मान्सक्क, अख्याती वाद कहेत अची, जे ब्रम् मात्र दूईता ज्यानक, माने स्म्रती अप्रत्यक्षक, भेद न भूज्वा कारने होई तची. आदो सर्दिस, न्याय दर्षनक अन्निता ख्याती कहेत अची, जे ब्रमक अद्द अच्छी कोनो वस्तूके, उकर आस्ली स्वरूप सा भिन्नरूप में देखवा, जे ना दोरी के साप भुज्वा, ये एक ता अट्टिन्त सुख्श्म संज्यनात्मक विष्लेशन आची. आएहन गमभीर विमर्श्ख भीछ, जखन अचानक सव उ आप ब्लोकर कप रहाई जाई तखछी तो उ ग्यान कउच अस्तर सव पाथक के खसा क देनन्दिन जीवन का एक ता बहुत सतही अस्तर पर लोवबे तखछी इआसन्तुलन पाथक के एक अग्रता बहंग करे तखछी इग्दम सही कहलु आहा तकी एकर अर्थ एब हेल, जे आदूनिक जीवन के उदाहरन सब के पान्दूलीपी सम्पोन रूपे हता देल जाए. इए उदाहरन सब तनव्य नयाय के आएकाल के पीडी के लेल प्रासंगिक बनेबा के लेल देल गेल अचीन अग. आप, औगो अची. जई इसब हता देव, तकी इपान्दूलीपी मात्र किछु गिनल चुनल पन्दितन सब के लिल सीमित नवव बहुजायत। सुजाव इणवव अची जे इआदूनिक उदाहरन सब के हता दिल जाये कारन इग्यान वर्दधख अची मुदा उक्रा मुख्या शास्त्रिये विमर्ष्छ के बीच में नारागी कव एक ता अलक खन्ड वा व्यवावारिक न्याये के रूप में प्रस्तुत क्यल जबाग चाही. औहो! मने अपलाएड न्याये? रागा! मोख्या दार्ष्निक प्रवाहा के अक्षुन ननक्यत इई आदूनिक अनुप्योग सब के इक्ता अलक स्थान्देल जिबाक चाही. इई एक्ता बहुत व्यवावारिक सुजावा ची, तई व्यवावारिक नयाय का मन्चन कोना केल जाए, जहीसा मुल ग्रन्त का शास्त्रिया अखंडता सेहो बनल रहे आ आदूनिक संदर्ब सेहो पाथक दरी पूँचे. आगर कोनो तोस उदाहरन अची. आगर तोस उदाहरन के लिल जिना बोद्द दर्षनक निर्वान आ नयाई दर्षनक अप्वर्ग कतुलना करित काल अचानक सां, समाथवोनक मोहा का चर्चा करवा का बडला, मुख्य पाथ में केवल परम परागत उदारन रखू, जिना दोरी में साप का ब्रम. तीख अची, आदूनिक उदारन सब के? आदूनिक जीवनक उदारन सब के अद्द्याय अंत मे आदूनिक सन्दर्ब नामक उप्सिर्षाक कक अंटर्गत राखि सकैची जाही सा मुख्य ग्रन्त का शास्त्रिय अख्डन्दता बनल रहे तशी आदूरी साव्सा अन्निता ख्याती सिद्धान समजाो आफिर अद्द्यायक अन्तिम भाग में बताओ, जे आईके सन्दर्प में ब्रामक खब्रीवा, दीप्टेक्निक से हो आही सिद्दान्त पर कोना काज करेता ची. इक्दम पाथक जखन अद्द्यायक अन्त्मे पहुचत, तकनोग्रा इ आदूनिक उनुप्रेजग एक ता बड्दिक विश्राम जचा लागत नाकी कोनो वैचारिक बादध जकां. मुदाज्जा रहम सब अप्लाइड न्याय का एक ता अलक खन्द अद्याय अंप्मे बनादेप, तकी मुख्य पात बहुत भेशी शूष्क नवो बजात एक ता सादारन पाथक लेल नवे नयायक सुत्र सब के बिना कोनो आदूनिक फुक कपचे बहुत कतिन बहुसके तची हम भूजी रहाल ची, आंकी कही रहाल ची हम्राता लगेत ची जे एई समाथफों जका उदाहरन एक ता साँस लेबाक जग़ादेत चे जा उक्रा रलक कदेब ता मुख्यपात केवल पारी भाशिक बोज बहो कर अईजाएत एहन जोखिम ता नवा अचे दिखु, आहाक प्रष्न बिचारनिया जी मुदा इ आशंका निरमूल आची. एक रा एक टा एनालोजी सबजू. इ भोजन सर नोन हताएब नवा आचे, अपितु नोन के डालिग भीच में सीदे नवो खसाक अगरा ठाली में अलक सपरो सव आची. जाही सब पाथग आपन स्वादानूसार उकर उप्योग कसके आप जनन दाली मे बहुत भेशी बहुजाए, तदाली क आपन जे विष्ट स्वाद अचे उ मरी जाए तची नव्यन नयायक आपन इक ता विष्ट स्वाद अचे अखर गनितिये सतीकता, अखर तारकिक संदरिय. आज जा उही मद्यमे समाथफों कहसादेप, तो उ नव्य नयायक स्वाब के विष्टडब्द कदैतची. भिल्कुल. जा आहा आदूनिक उदाहरन के अलक्खन्द मे रक्वे, तपाथक पहिले सास्त्रिये गामभेर्यक आस्वादन करत् अतकन आदूनिक संदर्भिक्ता बुजद्त् दूनु अपन अपन जगपर उत्किष्ट लागत् निक बात कहलों जकन हम सब आदूनिक संदर्भ के अलग करवाक बात करहल ची ता आदूनिक समाथ्फोंक उदाहरनस भेसी नीक इहोईत, जे ग्रन्त में गंगेश्ख जे अतिहासिक अस्सामाजिक वास्त्विक्ता देल गेल आची, अक्रे एक्ता दर्पन्जका प्रियोक खेल जाए. आई, ये बहुत महत्पोण बिन्दू आची. कमजोरी यह आची जे पाथ में दूसरी पनजी के आदार पर यह बहुत रोचक तत्थ प्रस्थ॥ केल गेल आची. जे ग्रंगेश्ष्यक जन्म पिताक म्रुत्त्युक पाच्वरक बहल्चल आ अ उ अन्तर जाती ए वाचमा कारेनी सा विवाह केने चला. जाहे कारन् समबवत्त हुंका सामाजिक भहिषकार सहाई परलचल. एक दं. मुदा पात यी एतियासिक तत्ध्य बतेबाग बाद आचानक फेर सांग्यान मिमान्सा पर गूरी जाई तची इसामाजिक वुमर्श आनब्व नयाएक उत्पत्टिक भीच जे गहीर संबन्द भहस अकाइत चिल उक्रा पाथ में चोडी दिलगेल आची. इहन भेलजना आहा कोनो महान वेग्यानिक जीवन्क सबसे बएर संगर्ष कता सूनावे ची अखरा हुँक सबसे बआर आविषकार सा जोडबा में चूक कजाएची. सत्तिक हलहू, ये एक ता बहुत पैग समभावना चल, जे करा पात में मात्र अतिहासिक फृटनोट बनी का रही ए जबाकलेल चोडी देलगल. मित्हिलाक पन्जीप्रबन्द, जे हर्सिंग देव के समय में शुरुब हेल चल, उईक ता अथ्यंत कत्होर सामाजिक वेवस्था चल. आ, उईईवेवस्था में गंगेशके दूशी मानलगल, उईक ता सामाजिक अूट्साइटर चला. मुदा पाथ मे इबताक सीदा प्रमान का चर्चा सुरुब हो जायत अची तई एतिहासिक तथ्य आग्यानी मिमान साक भीच से तु कोना बनावल जाय. सुजाअ एचे जे गंगेश्क सामाजिक हाश्ये पर रहबाक इस्तिती के उनक दार्शनिक सिद्धान सब विषेश का परतः प्रामाडे वाद प्रिष्ट्बूमी के रूप में जोडों. आप, गंगेश जे समाज में रही चला, उते हुनका जन्म आववन्ष का आदार पर स्विकार नाउ केल जारोहल चल. तवूनक दर्शन से हो उही सामाजिक यतार्द सन उपजल आची जिक्रा पाथ में स्थापित करव आवश्षक अची वूनकर तरक शास्त्र कोनो शून्ये में नो लिखल गयल चल इहूनक सामाजिक अस्तितवक रक्षक चल कि आहा एकर कोनो तोस उदाहरन दसके ची, जे लेखा कपन सामगरी में एक राख कोना वाकिर बद का सके चतें? तोस उदाहरनक लेल, पात में मीमान्सक सवक, सुतह प्रमानिक वाद अग गंगेशक परतह प्रमानिक वाद के तक्रहत के सामाजिक परीप्रेच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च अगरा कोनो भाहरी तारकिक परिक्षनक आवस्शक्ता नवव आचे और गंगेश जे स्वयम इटतता कतित स्वता प्रमानित विषेशाडिकार से वनजिच्छलाह ओईक्रा चुनोती दैच्छती आप पात में इजोडल जासके तची जगंगेश जन का अपन समाजिक सुईक्रुतक के लेल पारमपरिक आदारक बदला में कतोर वस्तूनिस्त प्रमानक आवश्श्व्ताचल उ परतह प्रमानिक्वाद का स्थापना किलने. अद्थात ग्यान वा वक्त प्रमानिक्ता जनम से नवज बलकी प्रव्रित्ती सामर्थ्य माने सफल कारे प्रमानित होई तची भिल्कुल जा आहत ग्यान सां कोनो कारे सफल होई तची तकन उ ग्यान प्रमानिकची उगर विष्च्ट तार्किक सब्व्रत्तिक सब्फल्ता हमर प्रमानिक ता आची. एई संयोजन अटिहासिक तत्ये के दार्षनिक क्रान्तिसों जोडी देद. मुदा की कोनो विक्तिख विक्तिगत सामाजिक जीवन के, इई संयोजन अदियासिक तत्ये के दार्षनिक क्रान्ती सो जोडी देत. मुदा की कोनो विक्तिगद समाजिक जीवन के, उकर विषुद्द तारकिक सिद्धान सो जोडब किचु भेसी अनुमानित नवभ हजाएत? आहाक इई सोचब सवाबे कची. वो वस्तूनिष्त था कि इस नवब हकरत था जो हम उक्रा एक तव यक्त विषेशक सामाजि कुन्ता वसंगर्ष्क परनाम मानिली दिक। पात में एक रास पष्ट करवा का वस्षकता जी इस इनक तरक वस्तूनिष्त था कम नवब हकरेत अगर अगर एक्ता विशेशक सामाजिक खुन्ता वसंगर्ष्क परनाम मानिली दिक। पाथ में एक्रा स्पस्ट करवा कावस्षक्ता आची जे इई हुनक तरक क्वस्तुनिष्तता कम न भखरेत बलकी देखावे तची जे उ एते कदोर वस्तु निष्ट्ता करच्ना की अक्किलनी अहो माने आवश्षकता आविष्कार का जननी आची आप, एक ता सामाजिक आउट्साईटर के समाज में आपन अस्थान बनेबा के लेल जे अकाट्यत्तर्क के आवश्व्टा हुई तची उही अकाट्यता कोज हूँनका, नवे नयाएक सिद्धानत गडेल प्रेरिद के लगा. अस्तापित वर्ग के परमपरा साम माननता भेटी जाएत अच्छी, उक्रा अपन बात सिद करभा लेल कुनो कत्होर तारकिक जाल भून्बाक आवश्चकता नाव. मुदा, जे हाशीए पर अची, उक्रा आपन बात मनबावे लेल एहन वस्तुनिष्त आए अकाट्ट्यतर्क चाही, जे करा कोनो पुर्वाग्र, कोनो पंजिकार काटी नों हसेके, गंगेशक इवस्तुनिष्तता हुनक सामाजिक असुरक्षाक सबसं सवल उतर चल. गंगेशक के ओही अकाट्ते तर्क का जे आवश्षकता चल, उही कारने ओहेट नवा पारी भाशिक शब्दावली करचना केलने, जाहिसा कुनो भी प्रतिपक्षी, हुनक तर्ग में कुनो छिद्रन्नाव ताके सके. एक दम, मुदा पात्ठ में इशब्दावली कुना प्रस्तुत कर गेल अची तक्रा समिक्चा अवस्षक अची. जटिल पारी भाशिक शब्दावली क अचानक प्रयोग बिना पर्याःत पूर्व पीछिकाक ग्रन्त कगती के बादित करे चे नव्या नयाएक पारी भाशिक शब्दावली वास्तव में पाथक कलेल एक ता बहुत पेग देवाल जका ची कमजोरी इआच्छी जे पाथ में सब्यभिचार, बादेत, उपादी, और व्यदिकरन द्रमाव छिन्न प्रयोगिता जका अछ्यन्त जतिल पारिभाशिक शब्द सब का अचानक सुची वा परिभाशा प्रस्तुत कर दिल गेलग. अद्यपी पाथक विद्वान अची ततापी इप्रस्तूती एकता दाशनिक यात्राक बडला में शब्द कोजगाई तची इएक्दम्सब पाथक पर एकता पारिभाशिक पहाड क्षाए बगेई बिल्ल्कुल, शब्द सब आचानक खसेतची बिनाई बतोने, जे इशब्द कोन विषिष्ट दार्षनिक संकत के दूर करवाक लेल गरहल गिलचल. जखन कोनो नया शब्द आवेत अची आ ओकर पच्धाक अटिहासेक वा दार्षनिक संगर्ष नवेबुजाई तची, तो उशवद मात्र रत्बाक समगरी बन जाए तची. आपाटख बाटख बहुत आप पहले ओही समस्या वः संकत में फ़साओ, जते ओख्रा इी महसुस होए, जे पुरान शब्दवा पुरान तरक से काज नवा चल रहलच, अद्तकन अद्खन अद्खन पुरान पुरान पुरान तरक से च्वाज नवाचल रहलच, अगर आहा पात्ख के पहले ओही समस्या वह संकत में फसाओ जते ओख्रा ई महसुस होई जे पुरान शब्द वा पुरान तर्क से काज नवा चल रहलच अत खन नव शब्द के एक तर्किक अस्ट्र जका प्रस्तूत करूए। अग, एक दम सही. अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अ� आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � अगदा एक ता क्रन्तिकारी अस्त्रक निर्मान कर अच्छतिन तक्हन यी देखाओ जे गंगेस यी तारकिक क्रन्ति कोना केलनी जे उपादिके पहेचान कै अनुमानक त्रूटी के दूर केल जासकाई तची अगदम गंगेस आस्पष्ट करे चातिन जे आगी से दूँआत तकने उठाईत अछी, जकन आगी में भिजल कात हो, इबिजल कात ही अपादी अछी. विजल कात हो, इब विजल कात ही उपादी अची अगो, चारवाख कषंका कषमदान इची जे जो हम उपादी के पहचानिली ता हम कोनो भी व्याप्ती के दोश्मुखत कचाची बलकल, जगन पाथक चारवाख का हमला देखत तकन उक्रा गंगेशक उपादिक महिमा उकर आववस्शक्त्या बुजाएत. मुदा एक ता बात अची, जो हम इशास्त्रिया शब्द सब के, जेना विदिकरन दर्माव चिन्न प्रत्योगिता, बहुत भेसी सरल करबाक प्रयास करब, तकि नव्यन्यायक जे मुल गड़ितिय सतिक्ता अची और नश्ट नवब होजाते। औ, हम सरल करबाक बात नहां कर रहल चाहे। नव्यन्यायक तजान ले जाई तच्छि आपनो ही सतिक्ता लेल, जो अख्रा कता में बदलब, तशास्त्रियता क्शन्दित नभब हुजध. इत उही भेल, जिना क्वन्टम फिजिक्स के बाल कता बनादेप. बुजल हूँ, मुदा सुजाओ शव्द के सरल कर बाक नभब है ची, बलकी अगर मनचन बबाक अची. शब्द जटिल हे बाक चाही, मुदाओकर आगमक कारन एक दम सपष्ट हे बाक चाही. मैंने शब्द जहीना अची तेहने रहे? रहा, हम यी नवबख कहे रहा लचीन, जे आहा विदिकरन दर्माव अचिन्न प्रतीयोगिता के सरल भाशा में बदली दियोग. बलकी यी बताओ जे यी बहयंकर शब्द बनावए के आवशक्ता की अगपडल गंगेश के कोनो एहन सुख्श्म भ्रम वा तारकिक छद्र भेटल हितन ही जे क्रा बंद करबाक लेल हुनका यी बारी बहरक्कम शब्द गड़े पडल एक दम मन्चन बदलबासें शब्दक वजन नवबजन कम होईत, उकर सार्थखता बडीजायता ची. पाथक जोकन इबुजी जायता ची, जे इशवद कोनो प्रदर्षनक लेल नवबजन, बलकी एक टा विष्च्ट तारकिक यूध जीटबाख लेल आची, जीद्बाक लेल अची, तकोन उही जटिल्ता के से हो सहर्ष्ष्विकार करे तची. तरी में अध्वूट पान्टित्याची मुदाएकला आरो प्रभावी बनेबाक लेल तींटा काज करल जासकाएचे. आदूनेक जीवन्कुल उदारन सब के मुख्ये दार्ष्निक प्रवाहासां अलक्क व्यवावारे क्हन्ड में राखल जाई जैसा अख्याती जका सुक्श्म विमर्षिक भीच समार्ट्फों कर्चर्चा पात्खक एक अग्रता नुभभ्ह भंग करे अदोसर काज गंगेशक एतिहासिक आस समाजिक संगर्ष माने पन्जी प्रबंद में हुनक मरजनलाएज्द स्तिती के हुनक परतह प्रमाडवाद जका क्रान्तिकारी सिद्दान्तक प्रिस्ट्बूमिक रूप में प्रस्तुत कल जाए. अते सर नव्यन्यायक जत्ल शब्दावली के शब्द कोश जका सुची के रूब में नहां बलकी दाशनिक समस्या का समादानक रूप में क्रमिक कता के अंथरगत लावल जाए. जते उपादिजका शब्द चारवाग का संकर सबचैबाग अस्त्रक रूप में अवतरित हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अच्छ अद्टाग अश्वोद्टागे अपन सामगरी में इश्चन्शोदन सव कई एक्रा फेर से समिक्शार्थ पथे बाक लेल आमन्त्रित केल जाएत अच्छी अपर औरो सुख्ष्मविमर्स बहुसबहुसके।