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तत्त्वचिन्तामणिमे_अन्यथाख्याति_आ_अख्यातिवादक_विवाद.m4a

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Part 11 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 11
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  1. 0:00–0:09वल्क्व तो देबेट, स्वागत अछि आहा सबबाक, तक, कल्पना करू जे आहाक कात कसी परलो आहाक हदी तुटकिल
  2. 0:09–0:13आच्वबाविक अछि जे आहा तुरन्त डौक्टर लग जाएच्छी
  3. 0:13–0:22इक्दम सही. आहा दोक्र लग जाए ची उ अ ऐक्ष्रे करजथें आए ऐक्ष्रे मशीन में हर्दीक तुटल एक्दम सपष्ट सादा अकारी दिखा जाए तचे.
  4. 0:22–0:28माने, उता इ कोनो ग़बरी वा संदेहक गुन्जाइश नहीं हुई चेक.
  5. 0:28–0:31हदी आता तूतल अची या फिर नहीं तूतल अची.
  6. 0:31–0:33रहा एक दम बाईन्री स्तिती.
  7. 0:33–0:35मुदा आप तनी सोचो,
  8. 0:35–0:39जा इ एकस्रे मशीन हमरा सबूक आपन मानव चेतना वा दिमाग होई,
  9. 0:39–0:40तक्चन की हैत?
  10. 0:40–0:43औह लोग, तक्चन तस्तिती पून तबदली जाएत.
  11. 0:43–0:49आजे यदार थम देखी रहल ची, उ वास्तविक्ता में एक ता ब्रम हुई तक्चन?
  12. 0:49–0:56तखन उजे नेदानिक स्पष्टता वक्लेनिकल क्लारेटी च्यकने उपुन रुप से समाप्त बहुट आप जाएत छी.
  13. 0:56–1:01मैने हमरा सब के स्पष्ट रुप से वर्गीक्रिच्ची सब बहुत नीक लगे तखची.
  14. 1:01–1:03जदे ब्रमक कोनो स्थान नहीं हो.
  15. 1:03–1:06इक्दम मुदा जकन आहा मानग गराडी मे जाएची
  16. 1:06–1:09तसते आब्रमक जे सीमारेखा आची
  17. 1:09–1:10उबहुद दुंदला बहाजाएची
  18. 1:11–1:13दुंदला बहाजाएची सही खाला हूं
  19. 1:13–1:16जे चीज हमरा एक्दम सते बुजाएची तची
  20. 1:16–1:21और अगो कखनो काल के वल हमर मन के लेग मात्र प्रमाडी तची.
  21. 1:21–1:28आई, यह कारेन अची जे आईजम्रा सब प्राचीन भार्टे दर्षना के लेग दा बहुत गंभीर विश्या पर बात करो रहल चे.
  22. 1:28–1:31ये मनो विज्यानेक रूपसे अथ्यन्त जतिल विश्या चे.
  23. 1:31–1:38आँगेश उपाद्याएक पर स्द्द गरन्त तत्तो चिन्तामनी पर, विशेश रुबसे उकर प्रत्यक्ष्खंड पर.
  24. 1:38–1:42एक दम एही में का बहुत मूलभूत प्रश्न अथाल गिल आची.
  25. 1:42–1:46मने जखन कोन व्यक्ती समुत्र के कात में सीप के देखाइ तची,
  26. 1:46–1:49जगर दर्शन में शुभ्ति कहल जाईता जी,
  27. 1:49–1:50मुदा चमक के कारन,
  28. 1:50–1:53उक्रा चान्दनी वार रजद बुजले था जी.
  29. 1:53–1:55तवई शान उकर दिमाग में,
  30. 1:55–1:56वाचेतना में,
  31. 1:56–1:58वास्तव में की बहर हैल हूए चे?
  32. 1:58–2:00हा, प्रष्न यहे आची.
  33. 2:00–2:02आई किवल एक ता सीप,
  34. 2:02–2:04अच्छाननिक भात नहीं अच्छी भूजलों ने?
  35. 2:04–2:05नहीं
  36. 2:05–2:08इस समपुरन मानव गयनक बनावद पर प्रषन थेख
  37. 2:08–2:10मुख्य विवाद यह अच्छी
  38. 2:10–2:12जे की इब्रम
  39. 2:12–2:17मात्र दूईता अलग-लग सत्ते गयनक भीचक अन्तर के नबूजी पाभप थेख
  40. 2:17–2:19जख्रा अख्याति कहल जाएत छी
  41. 2:19–2:21आख्याति
  42. 2:21–2:27वा एक्ता वस्तुक, दोसर वस्तुक रूप मे एक्ता सक्क्रिय, सकारात्म कारोप विप्रीत ज्यान्तिक
  43. 2:27–2:29जख्रा अन्नता ख्याति कहल जाएत छी
  44. 2:29–2:31एक्ताम सही
  45. 2:31–2:38अपना आई प्रद़ियान तेख नियाई दर्षन के द्रिष्टिकोन थे प्रत्निदिद्व करएद एही अन्नेता ख्यातिवाद का पक्ष्राखब.
  46. 2:38–2:43नियाई मानत अची जे ब्रहम एक्ता सक्रिय गलत ग्यान थेख.
  47. 2:43–2:48आहाम प्रभाकर मिमान्सक द्रुष्टी कोनक प्रतिनिदित्वा करेद अख्यातिवाद का पक्ष्राखभ
  48. 2:48–2:52हमर मानबची जे ब्रम कोनो नव मिथ्ध्या ज्यान नहीं थेक
  49. 2:52–2:59ता आहा कनुसार इग्यातिवाद के नदर के नहीं बुज्पाबखत्त्ख
  50. 2:59–3:02कुनो नव बलत ग्यान का निर्मान इत्यान नहीं भाराहला ची.
  51. 3:02–3:07बेस, तहाँ न्याय दर्षनक अन्यदा ख्याती वाद सा बात शुरू करे ची.
  52. 3:07–3:13आ गंगेश उपाद्याय जे कहच छती, अकरा एक ता आदूनिक उदाहरन्सा समजो.
  53. 3:13–3:15आ, राख हूपन उदाहरन्?
  54. 3:15–3:18जखन आहा बाट पर चंकी रहल शीप के देखची
  55. 3:18–3:21तदूरत्व, सूरेज का प्रकाश
  56. 3:21–3:23वा आखी कोनो दोश कारक कारन्सद
  57. 3:23–3:26आहा उई वस्तूक शीप तव
  58. 3:26–3:28वा उकर वास्तविक स्वरुप नहीं दिखिप बाएची
  59. 3:28–3:31माने आहा मात्र उकर चमक देखची
  60. 3:31–3:33अग, मात्र चमक
  61. 3:33–3:38अब ही चमक आहा के दिमाग में पोरोव में देखाल गल चाननी के समरन करा दे तची
  62. 3:38–3:43मदा एत्या नाय कहे तची, जी आहा के दिमाग इत्भी पन नहीं रुकगे तची
  63. 3:43–3:45तची, आगु की करे तची दिमाग
  64. 3:45–3:53आहा के दिमाग उही चाननी केस्म्रिती के उठाकग, सोजा राखर शीप पर प्रजेक्त कर देतची, मने आरोपित कर देतची.
  65. 3:53–3:58इठीक उही ना जी जका आहा आखे पर एक ता वी आर हेट्सेत लगा लेल हूं.
  66. 3:58–4:01आच्छा, वर्च्छल रेल्टी वला हेट्सेत?
  67. 4:01–4:06इक्दम अव वास्तट विक्त्याक उपर एक्टक्रित्रिम चित्र देखी रहाल ची
  68. 4:06–4:10अहा वास्तम में एक वस्तूके दोसर वस्तूको रहाल ची
  69. 4:10–4:14इक्चोनो अबहाव नहीं अची एक्ट सक्रिय ब्रमात्मक निरमार थेक
  70. 4:14–4:17मुदा इते आहा के सिद्दान समस्यास बहरल आची
  71. 4:17–4:21हमे अख्याती वादग के भिस्चा से एक रब वहुस सरल रूप मे देखाई जी
  72. 4:21–4:25आहा मानब दिमाके अनावश्यक रूप से जतिल की एक बना रहा रहा रहा रहा रहा रही
  73. 4:25–4:27जतिल कोना भेली
  74. 4:27–4:32अगर मिमान सक द्रिष्टी कोन से ब्रहम कोनो सकारात्मक गलत गयान नही थेक.
  75. 4:32–4:33बूजु कना?
  76. 4:33–4:35जगन व्यक्ती अहि सीप के देखेत अची,
  77. 4:35–4:40तो उकर दिमाग में वास्तो में दूईत सत्ते गयान एक संचली रहल होई तची.
  78. 4:40–4:41दूईत सत्ते गयान?
  79. 4:41–4:43मदा वस्त्तो ते एक आची?
  80. 4:43–4:44आची
  81. 4:44–4:46मुदा ग्यान दूईता आची
  82. 4:46–4:47पहल ग्यान आची
  83. 4:47–4:49इंद्रिया सो भेल प्रत्यक्ष
  84. 4:49–4:51इकिचु चमकएत वस्तू आची
  85. 4:51–4:52इसच्त्य आची
  86. 4:52–4:54कारन वस्तू अची
  87. 4:54–4:55तीग आची
  88. 4:55–4:56इत भामु मानेच्छी
  89. 4:56–4:58आदोसर ग्यान आची
  90. 4:58–5:00इस्म्रति चान्नी से हो चमकएत आची
  91. 5:01–5:05इहो सत्तिः आची कारन्ट चान्नी वास्तों में चमकएत आची
  92. 5:05–5:07आवा पूर्वे उक्रा दिखने ची
  93. 5:07–5:09ता आवाक अनुसार गधबडी कते बेल
  94. 5:09–5:13जे दूनु सत्तिः आची तव्यक्ती भ्रमित कीक बेल
  95. 5:13–5:20गडवड़ी मात्र इत्बे अची जे वेक्ती एही दूनु सत्यग्यानक भीज के सीमा रेखाके नहीं भूजी पवएत अची.
  96. 5:20–5:23एक्रा दर्षन में भेदाग्रह कहल जाईत अची.
  97. 5:23–5:25मने भेदक अग्रह.
  98. 5:25–5:27अन्तर नहीं भूजब.
  99. 5:27–5:35आप, अगरा एक ता कार चलाएवित काल कु दारन ससोचो, कारक रीरविव मिरर में एक ता बलाईंड स्पोत होईत आची, बुजल हूने?
  100. 5:35–5:38आप, जदे पचा कारी नहीं देखा पबेइची.
  101. 5:38–5:45इग्दम, जा कुनो दोसर कार उही बलाईंड स्पोट में आची, ता आहा उक्रा नहीं दिखी पबेत ची.
  102. 5:45–5:49आहा अपन दिमाग में कुनो नाउ कालपनिक कार नहीं बना रहल ची.
  103. 5:49–5:50औह औह.
  104. 5:50–5:54आहा बस जे यतारत छी उक्रा देखवासा चुकी रहल ची.
  105. 5:54–5:56मी मान्सा ये कहेता था थी
  106. 5:56–6:00आहा शीप और चान्निक अंतर के नहीं देखी पाई ब्रहल थी
  107. 6:00–6:05आहाग दिमाग कुनो वीर हेट सेट जगा मिठ्फ्या चीजक प्रोजेक्षन नहीं कराहला थी
  108. 6:05–6:07उ मात्र एक ता जानकारी मिस कराहला थी
  109. 6:07–6:12आहां की बलाँईट स्पार्ट वला उदारन सूनी में बहुत तार्किक लगाईताची
  110. 6:12–6:19मुदा जो हम गाराई में जाई ते इ मानो भ्याभारक व्याख्या करभा में पुडता विफल बहुजाईताची
  111. 6:19–6:21विफल बहुजाताची कुना?
  112. 6:21–6:51वहाँ उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्या
  113. 6:51–6:55आजानकारी कबहाव में कि आजा दोडी कोग्रा पक्डी ची?
  114. 6:55–6:59इक्तम जानकारी कबहाव में कि आप दोडी कोगरा पक्डी ची?
  115. 6:59–7:05नहीं, संदेव अ अग्यान किस्तिती में मानो मनोविग्यान अची पैर पाचा किचप.
  116. 7:05–7:07मुदा इते संदेव नहीं आसीने?
  117. 7:07–7:09इह ता मरवात अची.
  118. 7:09–7:14इह ता हमर भात अची. ब्रहम में व्यक्ती पून विष्वास की संग दोगे तची.
  119. 7:15–7:17जे ही चानी खिख, आवक्रा उठावे तची.
  120. 7:18–7:22जगंदरी व्यक्ती क मन में इच्चयात्मक यान नहीं होएत,
  121. 7:22–7:27यह वस्तु निष्चित रूप से चानी थेक तक्हन्दरीो काज की अग्करत।
  122. 7:27–7:31ता आहा कहे ची जे अख्यातिस से यी संबार नहीं आची
  123. 7:31–7:36वह केवल अंपर नहीं भूजब से ये तेक सक्रिय प्रविर्ती संबार नहीं आची
  124. 7:36–7:42अगरा लेल एक ता सकारात्मक आरोपन अदात अन्निधा ख्याती आवश्षक अची.
  125. 7:42–7:46कोनो जानकारी कबहाव व्यक्ती के दोडा नहीं सके दची.
  126. 7:46–7:47एक मेंट रूको.
  127. 7:47–7:53इतन आहा मानाव मनोवि याननक एक ता बहुत मुलबूत पक्ष के नजर अंदाज कराल चे.
  128. 7:53–7:59आम आनी रहल चे जे काज करबाक लेल एक ता नव गलत विष्वास पेदा होईब आवश्षक अची
  129. 7:59–8:01आम इह माने ची
  130. 8:01–8:07मुदा प्रभाकर में मान सा कहे तची जे भेदागर है प्रव्रतिकले पुर्नता पर्याप्त ची
  131. 8:07–8:14अपर्याब्त थछी कोना एबुजु चानी प्राब्त करबाक सवबाविक इच्छा पहले ही से विक्तिक मन में विद्दिमान अची
  132. 8:14–8:16कारन चाननी मुल्यवान होई तछी
  133. 8:16–8:32एक्दम चान्दनी सब के निक लगे तज, जखन व्यक्ती सीप के समान ने प्रत्यक्ष मने इच्वंकईत वस्तू, अच्चान्दनीक इस्म्रतिक भीच कोनो भेद नहीं देखाई तज, तज, उही स्वाभाविक इच्चा के रोखबाक लिल कोनो अव्रोध नहीं बचेख.
  134. 8:46–8:48अखरा काज करवाकले दखेल देछेख.
  135. 8:48–8:52माने मात्र अव्रोदख अबहावस्सन काज बहर्हल अचे.
  136. 8:52–8:58आप, एक्रा लेल न्याए दर्षन जका कोनो ब्रामात्मक नव थ्यानक रच्ना करवाक अवषकता नहीं आच.
  137. 8:58–9:02अग, जेख्रा आदूनिक विग्यान में अखम्स रेजर काल जाईताज,
  138. 9:02–9:07जा हम बिना कोनो नव सिद्धान्त वा जतिल सक्रीय प्रोजक्षन गडने,
  139. 9:07–9:12केवल इच्छा आ अव्रोदक अबहावसा मानविय प्रव्रितिक के पुरन व्याख्या कर सके ची,
  140. 9:12–9:19अगर दर्ख च्छनी में सरल अचे मुदा जे विश्वास उही व्यक्तिक आखी में होई तचे जखन उह शीप के चान्दी मानिंग का दो गगे तचे.
  141. 9:19–9:23वाग में इविप्रीत ग्यान बनेवाक अनावष्षक जन्जाल के क्डागगरी.
  142. 9:23–9:31लागव वासरल्ता, तक्हन्धरी नीकची जक्हन्धरी ओईतार्त्ताक पूर्न व्याख्या कर सके.
  143. 9:31–9:35अग्तर लागे तच्ये जे जाग्षात देखी रहल अचे
  144. 9:35–9:42मुदा खेर आगु बड़ेज्ये करन मीमान्सक इसिद्धानत एक ता कान पैक समस्या क्ष्ट्या करे तच्ट्याग.
  145. 9:42–9:46अगरा लागे तचे जे उचान्दी साख्षात देखी रहल अचे
  146. 9:46–9:50मुदा ख़र हम एही सागु बड़़ है च्ये
  147. 9:50–9:55करन मी मान सक इषिद्धानत एक ता कान पैक समस्या क्ड़ा करे तचे
  148. 9:55–9:57आन पैक समस्या? उखी
  149. 9:57–9:59उचे ज्यानक प्रामानिकता
  150. 9:59–10:00अच्या
  151. 10:00–10:02अद प्यग समस्या उ की?
  152. 10:02–10:04उ आचे ज्यानक प्रामानिक्ता
  153. 10:04–10:06आच्या
  154. 10:06–10:08मुदा इबिन्दु तो हमर सिद्धान तक सबसा प्यग सक्ती थिक
  155. 10:08–10:10अख्याति वाद वास्तो में समपूरन ज्यानक प्रमानिक्ता के
  156. 10:10–10:12बचावाग लेल आची
  157. 10:12–10:14अगाक माने आची सुत्टाप्रामानिवाद
  158. 10:14–10:17एकदम, हमरा सब सुत्टाप्रामानिवाद माने चीए
  159. 10:17–10:20शुत्टाख लिल हमेक्रा तनी अस्पष्ट को देईची
  160. 10:20–10:22सुत्टाप्रमानिवाद अख आची
  161. 10:22–10:24जगचन भी कोनो ग्यान उत्पन होई तची
  162. 10:24–10:32स्वतः प्रमाने वादक अथ है जग्खन भी कोनो ग्यान उत्पन होई तची, उवआपन उत्पती से स्वतः सत्य होई तची.
  163. 10:32–10:35मुदा ग्यान तग गलत सह्योभ हसके तचे?
  164. 10:35–10:40नहीं, आहांके दिमाग जानी भूज कगलत ग्यान पेडा नहीं कर सके तची.
  165. 10:40–10:51यह दी न्याइक के बात मानल जाए, ज़े दिमाग अन्यताख भी ख्याती जका सक्रीय रुप से गलत गयान पेदा का सके तची, तद तारकिक रुप से एक ता बहुत भ्यालक समस्स्या उत्पन न होएत.
  166. 10:51–10:54आहा अनन्त श्रिंक्लाक बात कर हो लग ची
  167. 10:54–11:00आप, जखन भी आजा के कोनो नूतन ज्यान प्राप्ता होएत, मानु आजा एक तगाच देखी रहल ची.
  168. 11:00–11:04तढवाज सरवदा संदे हमे रहव, जे इगाच वास्तो मे आची,
  169. 11:04–11:08वा हमर दिमाग कोनो वीर हेट्सेट जखा एक रप प्रजेक्त कर रहल आची.
  170. 11:08–11:12अगा के अखर सत्यता प्रमानित करवाग लेल तुसर ज्यानक अवष्ष्टा प्राडद, तुसरख लेल तेसरख आई अनन्त वस्था दरी चलेत रहत.
  171. 11:12–11:13अनवस्था दोष
  172. 11:13–11:14अनवस्था
  173. 11:14–11:23अगर सत्ते नहीं अची तो अहाके अखर सत्तिता प्रमानेत करवाग लेल तो सर ज्यानक अवष्ष्टा प्राडद, तो सरख लेल तेसरख आई अनन्त वस्था दरी चलेत रहत.
  174. 11:23–11:25अनवस्था दोष.
  175. 11:25–11:29अगा के इदर स्वाब्विक अची जे अनन्त् संदे है,
  176. 11:29–11:33मुता गंगेश उपाद्याय अईही दर सन न नहीं गब्राए चती,
  177. 11:33–11:38उबहुत सब श्थ रूब से स्वताध प्रमानिता वादध क्चन्दन करे चती.
  178. 11:38–11:40खन्दन करे चती, तव उकी मने चती,
  179. 11:40–11:43स्वाब्विक अची जे अनन्त सन्दे हिब हो जाएत,
  180. 11:43–11:47मुता गंगेश उपाद्याय अही दरसन नहीं गब राएच छती.
  181. 11:47–11:52उबहुत स्पष्ट रूभ से स्वता प्रमानिता वादक क्चन्दन करे चती.
  182. 11:52–11:55क्चन्दन करे चती, तब उकी मानेच चती.
  183. 11:55–11:59उपरत्द्ध प्रमानिता वादध किस्ठापना करच्छती
  184. 11:59–12:02मने ज्यान आपन आप में सत्ते नहीं जे
  185. 12:02–12:04उक्रा प्रमानित करप्प्प्रत
  186. 12:04–12:06इत बहुत क्ष्तर ना किस्तिया ची
  187. 12:06–12:07नहीं नहीं
  188. 12:07–12:11ज्यान अख सत्तिता स्वत्ध प्रमानित नहीं होईत ची
  189. 12:11–12:13एकरा बहार से जाचषब पड़ेत आची
  190. 12:13–12:17आओ कैसी की तिक औव अची सबहल प्रव्रिती
  191. 12:17–12:20मने कपासेटी फुर सक्सेस्फुल अक्तिविटी
  192. 12:20–12:21सबहल प्रव्रिती
  193. 12:21–12:23एकरा तनी सपष्ट करू।
  194. 12:23–12:24आओ
  195. 12:24–12:27एकरा एक ता बहुत जीवन्त साद्द्रुष्य
  196. 12:27–12:30कि माद्ध्यम सबूजिय, जे गरन्त में सिहो अची.
  197. 12:30–12:33मानिली, जे अंदार में आहा बाट पर चली रहल ची.
  198. 12:33–12:36आएक ता रस्सा के साप बुजे लेच ची.
  199. 12:36–12:38ती कचे, वेदाग्रह.
  200. 12:38–12:42आहा, आहा, के वेदाग्रह वा बलाईंट स्पाटक सिद्धान्त कहत,
  201. 12:42–12:46जे इप्रत्यक्श अस्म्रितिक अंथर नहीं भूज़ब मात्र थेक
  202. 12:46–12:49मुदाय एकर परिक्षन कोना होई तची?
  203. 12:49–12:50कोना?
  204. 12:50–12:54जक्चन हम एक ता प्रकाश वा तोर्च लके हो तची
  205. 12:54–12:58जे और रस्सा ची आहम उक्रासा कि चु बाधे सकए ची
  206. 12:58–13:00अथा त्हमर कार सफल भिल
  207. 13:00–13:04ता हमर पहल ग्यान आमानेवा आप रमाड़ भोजायता ची
  208. 13:04–13:06आई तव्यवहारीक जाजबहिल
  209. 13:06–13:10एक दम एक राएक टा आदूनेक उदारन सासे हो भूजू
  210. 13:10–13:13रगिस्तान में मरीचिका में पानी खोजब
  211. 13:13–13:16व्यकती चमकएद बालु के पानी भूजगयता चे
  212. 13:16–13:19अखर प्यास अखर दवाव बकलेल प्रेरिद करे तचे
  213. 13:19–13:20तीक आचे
  214. 13:20–13:22जखन अखर उतै पहुचाई तचे
  215. 13:22–13:24अप पानी पीबखलेल मुह लगवे तचे
  216. 13:24–13:27तख अखर वह में केवल सुखा भालू आवाए च्छेक
  217. 13:27–13:30ये तख अखर कारे विष्छल बहुगेल
  218. 13:30–13:32तए एक्रा सा की प्रमानित भेल?
  219. 13:32–13:35इविप्लता इप्रमानित करेता जी,
  220. 13:35–13:39जे उग्यान में पानी केवल जानकारिक अबहाँ नहीं चल,
  221. 13:39–13:41दिमाग अदे पानी आरुपित करेने चल.
  222. 13:41–13:46बालु क्यतार्त इषिद्द करेता जे व्रहम एक्ता सकरात्मक त्रुती थिक,
  223. 13:46–13:49बुद्दि एक्ता मिथ्ट्या रूपा क्रचना करी तची
  224. 13:49–13:53आच्छा, इट्टोर्च आ मरिचिका कुदारन बहुत प्रभावकारी आची
  225. 13:53–13:54हमी मानेची
  226. 13:54–13:59आँ, मुदा आही में एक ता बहुत पैग तारकिक दूश आची
  227. 13:59–14:02जक्रा आहा नजर अंदाज करो हल चे
  228. 14:02–14:05तार्किक दोश की दोश अची आही में?
  229. 14:05–14:08जा आहा कही च्छन जे प्रविद्टी सब्ठल भेलासा,
  230. 14:08–14:10ज्यान सत्य प्रमानित होई तची,
  231. 14:10–14:13तची उही प्रविद्टिक सब्ठल ताक के ज्यान अची,
  232. 14:13–14:15उखुना सत्य प्रमानित होई तची.
  233. 14:15–14:16माने?
  234. 14:16–14:22जखन आहा रस्सा से बक्सा बान्दल हूं, तो उ बान्दवा के ज्यान से होता गलत वहसा कै तची,
  235. 14:22–14:26कि उक्रा लेल एक ता आन प्रव्रित्तिक आवशकता नहीं परता,
  236. 14:26–14:30आहा फिर से उही अनन्त शिंखला वा प्रव्वाग रिगरेस में फसी राल ची.
  237. 14:30–14:36नहीं नहीं करन व्यवहारिक जीवन में जते एक आर्य निरबाद रूप से चली रहाल ची
  238. 14:36–14:38उती परिष्शनक आवशकता नहीं होई तची
  239. 14:38–14:41मुदा तारकिक रूप सत आआप पसी गिलूने
  240. 14:41–14:45जकन आहक प्यास भूजी गिल तकन संदेस वते समाप्त भाजाई तची
  241. 14:45–14:48अनन्त्ट्श्रिंखला व्यवाहार में नहीं होईता ची
  242. 14:48–14:50मुदाहाम भूजी रहल ची
  243. 14:50–14:54जे आहा परताह प्रमान्या वाद से पूनताह संथुष्ट नहीं ची
  244. 14:54–14:55एक दम नहीं
  245. 14:55–14:59ताओ, एक रा एक ता अजुको गंभीर दाशनेक बिन्दूपर लग जाए
  246. 14:59–15:03विशेवस्तु आ एंद्रिय समपर कखतार किक्ता
  247. 15:03–15:05आप एही पर हमरा बहुत कलवा पत्ती आची
  248. 15:05–15:10आप आप नयाई दर्षन आपन यत्हार्थ्वाद वार रियलिजम के लेजानल जाईत आची
  249. 15:10–15:13आप नयाई पुनत हा यत्हार्थ्वादी आची
  250. 15:13–15:14यतारत वादक अर्थ अची
  251. 15:14–15:17जे किचु हम आद्रीया से प्रत्ट्खष करएची
  252. 15:17–15:21वोकर कोनो अकोनो वास्तविक अस्तित्वो हम्रा सोजा होईत अची
  253. 15:21–15:22एक दम सई
  254. 15:22–15:24आब देखो यह दियाग कही चती
  255. 15:24–15:26जे विक्ती सीप में
  256. 15:26–15:28चान्दिनी तो आरोपित करएची
  257. 15:28–15:31अग्रा आखिए से प्रत्ट्यक्ष देखाई ता आखिए
  258. 15:31–15:33ता हमर प्रष्नए एख्छी
  259. 15:33–15:35जे चक्षू जखन सीप से समपरक मे आखिए
  260. 15:35–15:39तो उगो ते आवि दिमान चाननी तो के कोना देखी सके ता छी?
  261. 15:39–15:40इब आप उचीत प्रष्न आखिए
  262. 15:40–15:42आखी केवल उही वस्तुके देखी सकएत आची
  263. 15:42–15:45जे बहुतिक रूप से वोकर सोजा आची
  264. 15:45–15:47जो चाननी समुद्र कात में च्फबे नहीं करे
  265. 15:47–15:50उ चाननी तक तख शहरक कोनो दुकान में राखल आची
  266. 15:50–15:52आची चानननी आची आची
  267. 15:52–15:55ता आखी उक्रा कुना गरान कर रहाला ची
  268. 15:55–15:58इता आख आख अपन सी यद्हार्थ वादक सिद्धन्त के विरुद्द बहुगे ला
  269. 15:58–16:00आखा बहुतिक विज्यनक नियम के तोडे रहाल ची
  270. 16:00–16:01रूको रूको
  271. 16:01–16:05इता है न्याय दर्शन भूदिक विज्यनक नियमा के नहीं तोडे रहा लाचे
  272. 16:05–16:11बलकी इमानव विज्यनक एक ता बहुत सुख्श्म प्रक्रिया के उद्गाटित करा रहा लाचे
  273. 16:11–16:15न्याय दर्शन अपन यदार्द वादक के तनी को नहीं चोडे थाची
  274. 16:15–16:20कोना नहीं चोड़े तची, आहाता अविद्यमान चीजके प्रत्वष करा रहल ची.
  275. 16:20–16:26ब्रम्मेजे चानी देखा रहल ची, उशुन्निवाज़का पूनता काल्पनिक नहीं आची,
  276. 16:26–16:32सीप इतःए आची, अचानी कतो आन्ठाम विद्यमान आची, दूनु या थार्त्थिक.
  277. 16:45–17:15अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ�
  278. 17:15–17:17आख आखी निबोग फोटो देख्रोहल आखी
  279. 17:17–17:20मुदा आखी ता खटापन नहीं देखे सके तची
  280. 17:20–17:22आखटापन तच्वाद आखी
  281. 17:22–17:24जिक रा जीव ग्रहन करात आखी
  282. 17:24–17:30ता आखे सा देखल पोटो आख शरीर में सारे रेक प्रतिकरीया कोना पैदा कर दे लेक
  283. 17:30–17:36ये ते की भेल जे आखेक द्रिश आहाक दिमाग में खट्टापनेक स्म्रिती के जागरित के लक?
  284. 17:36–17:39थी का ची इस्म्रिती जागरित भेल?
  285. 17:39–17:44आव अस्म्रिती स्वयमेक्त सन्निकर्ष वा संपरक सूत्रक्काज के लक
  286. 17:44–17:50अज्म्रितिक माद्यम्सा आईक आखे निवो के खथा पनक प्रत्यक्ष अनुबभव कर ले लक
  287. 17:50–17:53यह थिक ज्याने लक्षन सन्निकर्ष
  288. 17:53–17:58अहो! माने आईक इस्म्रितिके अईद्रिय समपरक सादन बना रहल ची?
  289. 17:58–18:00द्रहमे सहो यह होई तची
  290. 18:00–18:06जखन आखे सीपक चमक देखगटाची, उ चमक स्म्रितिक चादनी के जाग्रित करेट ची,
  291. 18:06–18:10आ उ स्म्रित्यात्मक जान एक ता पूलक निरमान करेट ची,
  292. 18:10–18:18जकर माद्यम्सा आखे उई दूर राखल चान्दनी के सोजाग सीप पर आरोपिद का प्रत्यक शुरुप से देखाई तची.
  293. 18:18–18:20इद बहुत गुमाव दार बात भेल.
  294. 18:20–18:22इकोन जादू नहीं आची.
  295. 18:22–18:25इमानव मस्तिष्कक असाथारनक शम्ता थिक.
  296. 18:25–18:38यही तरहे आरोपिच्चाननी सो हो यतार्द अची, यद्यपी उ दोसर्थाम अची, अब्रहम एक ता सक्क्रिया सकरात्मक विप्रीद ज्यान बनेट ची, यहे अन्यता ख्याती अची.
  297. 18:38–18:43अगा उगर बेसाकि की एक कही रहल ची यी तो मनोवी ज्यान अचे
  298. 18:43–18:47मुदा शमा करव फम इबात नहीं मानी सके ची
  299. 18:47–18:48की एक नहीं?
  300. 18:48–18:51इजे ग्यान लक्षन सनिकर्षत्थी
  301. 18:51–18:55इएक ता क्रित्रिम भॆउद्दिक बैसाकी जका बुजाईत आचे
  302. 18:55–18:59जे नये दर्षन आपन सिद्धान्त के बचाईवा कलिल गर्णने आचे
  303. 18:59–19:03आहा एक रब एसा कि कि एक कही रहल ची, इतो मनो विग्यान अचे.
  304. 19:03–19:10कारन, आहा स्म्रती और प्रतेखष के आपस में मिलाका एक ता ब्यंकर खिच्डी बना रहल ची.
  305. 19:10–19:17जो स्म्रती प्रतेखष्चका काज कर अचे, ता स्म्रती आर प्रतेखष में की अंतर रहीगल?
  306. 19:17–19:20अन्तर अची मुदा समपर कस्तापिद भेसके चे
  307. 19:20–19:24प्राभाकर मीमान सा एह जटिलता के अज्स्विकार कर अची
  308. 19:24–19:27हमर सिद्धानत एक दम सपष्ट अची
  309. 19:27–19:31जे स्म्रती स्म्रती खिक अर प्रत्ट्च प्रत्ट्च थे
  310. 19:31–19:34जगन आहा फोटो में नीभू दे के ची
  311. 19:34–19:40उ प्रत्यक्ष थी, जगन आहा उकर खटा पन शमरड कर अज्छी, उस्म्रिती आची.
  312. 19:40–19:42मुदा प्रतिक्रिया तो शारी रेग भेल ने.
  313. 19:42–19:48आहाक मूमे पानी एही ले लवाए तची, कारन आहा दूनु ज्यानक भीच कसीमा रेखाके,
  314. 19:48–19:50उही श़ नहीं पड़ी पाभे रहल ची
  315. 19:50–19:56आहाक न्याए दर्षन एही दूनुके मिलाग के एक ता असमबव अन्यत्था ख्याती बनेवाग प्रैज करे तची
  316. 19:56–19:57मुदा
  317. 19:57–20:02सूनु की बहुत बेशी तारकेख अप परश्क्रित वाख ख्लीनर नहीं आची
  318. 20:02–20:07अग, उदो बवाद बवाद बहुत, अग, बवाद बवाद बहुत,
  319. 20:07–20:11मुदा अ केवल ब्रमित नहीं होई तची उ चालनी देखाई तची
  320. 20:11–20:13एही में यतार्थवाद से हो सुरक्षित ची
  321. 20:13–20:16अग कोनो नव असमवव एंद्रिय समपर कक
  322. 20:16–20:19वास्म्रितिक पुलक कल्पना से हो नहीं करब पडे तची
  323. 20:19–20:22अख्यातिवाद सा बहतर कोनो याख्या नहीं बहुज सकते ची
  324. 20:22–20:24अहां की तरक सूनी में नीक लगे तची
  325. 20:24–20:26मुदा हम्रा लगे तची
  326. 20:26–20:30जे अहां मानव अनुबववग गेराई के कम कखा आखी रहल ची
  327. 20:30–20:32मिमान साक अख्यातिवाद
  328. 20:32–20:34दाशनेक रूप से सुरक्षिद भाषा कै तच्छे,
  329. 20:34–20:37मुदा मनोवे जानेक रूप साई पुरनता अपुरना च्छे.
  330. 20:37–20:38अपुरन कुना च्छे?
  331. 20:39–20:40इट सबस शरल वैख्या च्छे.
  332. 20:40–20:44जान लक्छन सन्निकरष कोनो क्रित्रम पुल नही आच्छी.
  333. 20:44–20:46इं मानव चेतना का यतार्त्तिक
  334. 20:46–20:50जगन वेक्ती सीप के चान्दनी मानी कदोगे तच्छ
  335. 20:50–20:54उ इं नक रत्छी जे हम चान्दनी के समरन कर रहल्ची
  336. 20:54–20:58मुदा उ काई तच्छ, हम एते चान्दनी देखी रहल्ची
  337. 20:58–21:03अखर स्म्रती अखर द्रिष्ट्टन्द्र के पूरी तरह से हाईजैक कचुकल होई चैक.
  338. 21:03–21:05एह ता अन्निथा ख्याती थेक.
  339. 21:05–21:09रहां बूजी रहां चीजे आहाके तार केख संद्रचना कते जारहला ची.
  340. 21:09–21:11आहाके न्याए दरशन माने ताची,
  341. 21:11–21:14जे मानवी मन केवल निषक्रीए द्रिष्टा
  342. 21:14–21:17वा पैसेव अबजर्वर नही आची
  343. 21:17–21:20जे बस जानकारी ग्रहन कर आई तची
  344. 21:20–21:22एक दम मन सक्री आचे
  345. 21:22–21:26आखन असार उस सक्री ए रुब से अनबवव के गड़़ेई तची
  346. 21:26–21:28इंद्रिये वा परस्तिति दोश पूर न आची,
  347. 21:28–21:30तम मन आपन इस्म्रतिसे समगरी
  348. 21:30–21:33लोका याठार्थ पर थोपी देई ताछी.
  349. 21:33–21:35आआ, एह सत्या ची.
  350. 21:35–21:37मुदा, मिमान सक द्रिष्टिकोंसा
  351. 21:37–21:40हम पुना औही मुल भुड़ दर पर आवी जाएची.
  352. 21:40–21:45इमानब, जे ज्यान आपनुद पत्तिक शन में विप्रीत वमिथ्ध्धा भहस कैता ची,
  353. 21:45–21:51इस समपृर शास्त्र अग्यान के प्रामानिकता के संदेज के गेरा में ताडाइता ची.
  354. 21:51–21:54संदेज ता अनवेशना का जननी थेख अनई थेची,
  355. 21:54–21:57तग्यान क्मुल पवित्रता सर्वदा सुरक्षित रहेत आजी
  356. 21:57–22:02आई है हमरा सब क्मद्यक, मुल भूध, वैचारिक भिन्नतात हैक
  357. 22:02–22:07जो ते हमरा सब के सहमत हो में परत थची, जे हमरा सब असहमत चीए
  358. 22:07–22:09आजी ता मानभेई परत
  359. 22:09–22:23हमर विचारस्स, मानविय प्रव्रत्तिक तीव्र संचालन, अग्यानक निवारन, आसत्तताक व्यवावारिक परिक्षनक लेल, इस्विकार करभ अनिवार या ची, जि भ्हम एक ता विषिष्ट सकरात्मक आरोप थेक.
  360. 22:23–22:26अहां कि द्रिष्ती कोंसा यी अन्नेता क्याती ये छी?
  361. 22:26–22:29अह, मन ब्र्मक समय मात्र निद्रा में,
  362. 22:29–22:31या ब्लाईन्स्पोट में नहीं रहे तची,
  363. 22:31–22:36बलकि उसक्रिय रूपसा एक्ता ब्रान्ती पुरन रचना करे तची.
  364. 22:36–22:37गंगेश उपाद्याए,
  365. 22:37–22:43इही अन्निता ख्यातिक के स्तापित का नकेवल व्रमक स्वरुप स्पष्ट करे च्छती,
  366. 22:43–22:49अपितु समपुरन यदार्थ्वाद के एक ता नव सूक्ष्म तारकिक आदार देच्छती.
  367. 22:49–22:52अदोसर दिस, हमर प्रभाकर मीमान्सक अख्यातिवाद
  368. 22:52–22:58इस थापित करे कची, ज्यानक प्रमानिकता के अनन्त संदेह सबचेवाक लेल,
  369. 22:58–23:01असिद्धानत में अनावश्षक जतिलता नहीं अनवाक लेल,
  370. 23:01–23:06ब्रहम के मात्र दुईता सत्टिज्यानक भीचक भेदाग्रह मानब बेशी तारकी कची.
  371. 23:06–23:07पारसे मानिक सिद्धानत?
  372. 23:07–23:17आप, एक दम, दाशनिक रूप से कोनो नव मित्या ग्यानक, रचना करव, एक त अनावश्यक बहार थिक जक्रा से हम्रा सब के बच्बाग चाही.
  373. 23:17–23:20इवेमर्ष अत्यंत गंभीर आव विचारनी आरहल
  374. 23:20–23:24हम्रा सब देखनु, जि सत्य आभ्रमकी विष्लेशन
  375. 23:24–23:28मात्रिक्ता सीप वाच्चाननिक चोट्सन विवाद नहीं हैच
  376. 23:28–23:32नहीं, इज समपूरन मानव ज्यान मिमान साक आदार शिला थिक
  377. 23:32–23:38इवेमर्ष कोनो एक पक्षके पुन विजयी गोषित कैने समाप्त नहीं भोरो है लाचे
  378. 23:38–23:42मुदा इवेम्रा सब के इविचार करवागले लवसे प्रेरिट करे तचे
  379. 23:42–23:46जि तत्व चिन्तामनेक एह सुख्श्मतार की क सन्सार में
  380. 23:46–23:48सत्तिक प्रकती करनक कते को आयाम आचे
  381. 23:48–23:49सत्ते कहला हूं
  382. 23:49–23:53इदार्ष्निक प्रष्न अक्हूनो अनवेशन कबाट जोही रहा लाची
  383. 23:53–23:57जे हमर ज्यान कतेग दूर्दरी वस्तुगत आची
  384. 23:57–24:00अक कतेग दूर्दरी हमर अपन मनक निरमान आची
  385. 24:00–24:02करिकमक प्रारम में हम्रा सब
  386. 24:02–24:04उही एकसरे मशीनिक बात कैने चलूं
  387. 24:04–24:07जि सत्यके पार्दर्षी रूप में दिखावे तच्ये.
  388. 24:07–24:10आप जदे सब किच श्पष्ट थच्यी.
  389. 24:10–24:16मुदा आप भुजही तच्यी, जे मानव चेतना उनिशक्रिय अख्सरे माशिन नही आच्छी.
  390. 24:16–24:20आपि तू एक ता एहन चतृृर चित्र कार आच्छी,
  391. 24:20–24:28जे अपन स्म्रितिक रंग सा वर्तमानक क्यनवास पर यतार्त अब ब्रहमक मिस्रित चित्र बनावे था ची.
  392. 24:28–24:34बहुत सुन्दर विचार की हम्रा सब वोही चित्रक रंके सही सही चिनही सके ची.
  393. 24:34–24:39वा! हम्रा सब आजीवन अपने बनायल ब्रहमके सत्तिमानत रहब.
  394. 24:39–24:46यह विचारनी यह प्रश्नक संग आज हमरा सब भिदालेप विमर्ष्क यह मंच पर जुदवक लेल दन्निवाद

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वल्क्व तो देबेट, स्वागत अछि आहा सबबाक, तक, कल्पना करू जे आहाक कात कसी परलो आहाक हदी तुटकिल आच्वबाविक अछि जे आहा तुरन्त डौक्टर लग जाएच्छी इक्दम सही. आहा दोक्र लग जाए ची उ अ ऐक्ष्रे करजथें आए ऐक्ष्रे मशीन में हर्दीक तुटल एक्दम सपष्ट सादा अकारी दिखा जाए तचे. माने, उता इ कोनो ग़बरी वा संदेहक गुन्जाइश नहीं हुई चेक. हदी आता तूतल अची या फिर नहीं तूतल अची. रहा एक दम बाईन्री स्तिती. मुदा आप तनी सोचो, जा इ एकस्रे मशीन हमरा सबूक आपन मानव चेतना वा दिमाग होई, तक्चन की हैत? औह लोग, तक्चन तस्तिती पून तबदली जाएत. आजे यदार थम देखी रहल ची, उ वास्तविक्ता में एक ता ब्रम हुई तक्चन? तखन उजे नेदानिक स्पष्टता वक्लेनिकल क्लारेटी च्यकने उपुन रुप से समाप्त बहुट आप जाएत छी. मैने हमरा सब के स्पष्ट रुप से वर्गीक्रिच्ची सब बहुत नीक लगे तखची. जदे ब्रमक कोनो स्थान नहीं हो. इक्दम मुदा जकन आहा मानग गराडी मे जाएची तसते आब्रमक जे सीमारेखा आची उबहुद दुंदला बहाजाएची दुंदला बहाजाएची सही खाला हूं जे चीज हमरा एक्दम सते बुजाएची तची और अगो कखनो काल के वल हमर मन के लेग मात्र प्रमाडी तची. आई, यह कारेन अची जे आईजम्रा सब प्राचीन भार्टे दर्षना के लेग दा बहुत गंभीर विश्या पर बात करो रहल चे. ये मनो विज्यानेक रूपसे अथ्यन्त जतिल विश्या चे. आँगेश उपाद्याएक पर स्द्द गरन्त तत्तो चिन्तामनी पर, विशेश रुबसे उकर प्रत्यक्ष्खंड पर. एक दम एही में का बहुत मूलभूत प्रश्न अथाल गिल आची. मने जखन कोन व्यक्ती समुत्र के कात में सीप के देखाइ तची, जगर दर्शन में शुभ्ति कहल जाईता जी, मुदा चमक के कारन, उक्रा चान्दनी वार रजद बुजले था जी. तवई शान उकर दिमाग में, वाचेतना में, वास्तव में की बहर हैल हूए चे? हा, प्रष्न यहे आची. आई किवल एक ता सीप, अच्छाननिक भात नहीं अच्छी भूजलों ने? नहीं इस समपुरन मानव गयनक बनावद पर प्रषन थेख मुख्य विवाद यह अच्छी जे की इब्रम मात्र दूईता अलग-लग सत्ते गयनक भीचक अन्तर के नबूजी पाभप थेख जख्रा अख्याति कहल जाएत छी आख्याति वा एक्ता वस्तुक, दोसर वस्तुक रूप मे एक्ता सक्क्रिय, सकारात्म कारोप विप्रीत ज्यान्तिक जख्रा अन्नता ख्याति कहल जाएत छी एक्ताम सही अपना आई प्रद़ियान तेख नियाई दर्षन के द्रिष्टिकोन थे प्रत्निदिद्व करएद एही अन्नेता ख्यातिवाद का पक्ष्राखब. नियाई मानत अची जे ब्रहम एक्ता सक्रिय गलत ग्यान थेख. आहाम प्रभाकर मिमान्सक द्रुष्टी कोनक प्रतिनिदित्वा करेद अख्यातिवाद का पक्ष्राखभ हमर मानबची जे ब्रम कोनो नव मिथ्ध्या ज्यान नहीं थेक ता आहा कनुसार इग्यातिवाद के नदर के नहीं बुज्पाबखत्त्ख कुनो नव बलत ग्यान का निर्मान इत्यान नहीं भाराहला ची. बेस, तहाँ न्याय दर्षनक अन्यदा ख्याती वाद सा बात शुरू करे ची. आ गंगेश उपाद्याय जे कहच छती, अकरा एक ता आदूनिक उदाहरन्सा समजो. आ, राख हूपन उदाहरन्? जखन आहा बाट पर चंकी रहल शीप के देखची तदूरत्व, सूरेज का प्रकाश वा आखी कोनो दोश कारक कारन्सद आहा उई वस्तूक शीप तव वा उकर वास्तविक स्वरुप नहीं दिखिप बाएची माने आहा मात्र उकर चमक देखची अग, मात्र चमक अब ही चमक आहा के दिमाग में पोरोव में देखाल गल चाननी के समरन करा दे तची मदा एत्या नाय कहे तची, जी आहा के दिमाग इत्भी पन नहीं रुकगे तची तची, आगु की करे तची दिमाग आहा के दिमाग उही चाननी केस्म्रिती के उठाकग, सोजा राखर शीप पर प्रजेक्त कर देतची, मने आरोपित कर देतची. इठीक उही ना जी जका आहा आखे पर एक ता वी आर हेट्सेत लगा लेल हूं. आच्छा, वर्च्छल रेल्टी वला हेट्सेत? इक्दम अव वास्तट विक्त्याक उपर एक्टक्रित्रिम चित्र देखी रहाल ची अहा वास्तम में एक वस्तूके दोसर वस्तूको रहाल ची इक्चोनो अबहाव नहीं अची एक्ट सक्रिय ब्रमात्मक निरमार थेक मुदा इते आहा के सिद्दान समस्यास बहरल आची हमे अख्याती वादग के भिस्चा से एक रब वहुस सरल रूप मे देखाई जी आहा मानब दिमाके अनावश्यक रूप से जतिल की एक बना रहा रहा रहा रहा रहा रही जतिल कोना भेली अगर मिमान सक द्रिष्टी कोन से ब्रहम कोनो सकारात्मक गलत गयान नही थेक. बूजु कना? जगन व्यक्ती अहि सीप के देखेत अची, तो उकर दिमाग में वास्तो में दूईत सत्ते गयान एक संचली रहल होई तची. दूईत सत्ते गयान? मदा वस्त्तो ते एक आची? आची मुदा ग्यान दूईता आची पहल ग्यान आची इंद्रिया सो भेल प्रत्यक्ष इकिचु चमकएत वस्तू आची इसच्त्य आची कारन वस्तू अची तीग आची इत भामु मानेच्छी आदोसर ग्यान आची इस्म्रति चान्नी से हो चमकएत आची इहो सत्तिः आची कारन्ट चान्नी वास्तों में चमकएत आची आवा पूर्वे उक्रा दिखने ची ता आवाक अनुसार गधबडी कते बेल जे दूनु सत्तिः आची तव्यक्ती भ्रमित कीक बेल गडवड़ी मात्र इत्बे अची जे वेक्ती एही दूनु सत्यग्यानक भीज के सीमा रेखाके नहीं भूजी पवएत अची. एक्रा दर्षन में भेदाग्रह कहल जाईत अची. मने भेदक अग्रह. अन्तर नहीं भूजब. आप, अगरा एक ता कार चलाएवित काल कु दारन ससोचो, कारक रीरविव मिरर में एक ता बलाईंड स्पोत होईत आची, बुजल हूने? आप, जदे पचा कारी नहीं देखा पबेइची. इग्दम, जा कुनो दोसर कार उही बलाईंड स्पोट में आची, ता आहा उक्रा नहीं दिखी पबेत ची. आहा अपन दिमाग में कुनो नाउ कालपनिक कार नहीं बना रहल ची. औह औह. आहा बस जे यतारत छी उक्रा देखवासा चुकी रहल ची. मी मान्सा ये कहेता था थी आहा शीप और चान्निक अंतर के नहीं देखी पाई ब्रहल थी आहाग दिमाग कुनो वीर हेट सेट जगा मिठ्फ्या चीजक प्रोजेक्षन नहीं कराहला थी उ मात्र एक ता जानकारी मिस कराहला थी आहां की बलाँईट स्पार्ट वला उदारन सूनी में बहुत तार्किक लगाईताची मुदा जो हम गाराई में जाई ते इ मानो भ्याभारक व्याख्या करभा में पुडता विफल बहुजाईताची विफल बहुजाताची कुना? वहाँ उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्यागा उद्या आजानकारी कबहाव में कि आजा दोडी कोग्रा पक्डी ची? इक्तम जानकारी कबहाव में कि आप दोडी कोगरा पक्डी ची? नहीं, संदेव अ अग्यान किस्तिती में मानो मनोविग्यान अची पैर पाचा किचप. मुदा इते संदेव नहीं आसीने? इह ता मरवात अची. इह ता हमर भात अची. ब्रहम में व्यक्ती पून विष्वास की संग दोगे तची. जे ही चानी खिख, आवक्रा उठावे तची. जगंदरी व्यक्ती क मन में इच्चयात्मक यान नहीं होएत, यह वस्तु निष्चित रूप से चानी थेक तक्हन्दरीो काज की अग्करत। ता आहा कहे ची जे अख्यातिस से यी संबार नहीं आची वह केवल अंपर नहीं भूजब से ये तेक सक्रिय प्रविर्ती संबार नहीं आची अगरा लेल एक ता सकारात्मक आरोपन अदात अन्निधा ख्याती आवश्षक अची. कोनो जानकारी कबहाव व्यक्ती के दोडा नहीं सके दची. एक मेंट रूको. इतन आहा मानाव मनोवि याननक एक ता बहुत मुलबूत पक्ष के नजर अंदाज कराल चे. आम आनी रहल चे जे काज करबाक लेल एक ता नव गलत विष्वास पेदा होईब आवश्षक अची आम इह माने ची मुदा प्रभाकर में मान सा कहे तची जे भेदागर है प्रव्रतिकले पुर्नता पर्याप्त ची अपर्याब्त थछी कोना एबुजु चानी प्राब्त करबाक सवबाविक इच्छा पहले ही से विक्तिक मन में विद्दिमान अची कारन चाननी मुल्यवान होई तछी एक्दम चान्दनी सब के निक लगे तज, जखन व्यक्ती सीप के समान ने प्रत्यक्ष मने इच्वंकईत वस्तू, अच्चान्दनीक इस्म्रतिक भीच कोनो भेद नहीं देखाई तज, तज, उही स्वाभाविक इच्चा के रोखबाक लिल कोनो अव्रोध नहीं बचेख. अखरा काज करवाकले दखेल देछेख. माने मात्र अव्रोदख अबहावस्सन काज बहर्हल अचे. आप, एक्रा लेल न्याए दर्षन जका कोनो ब्रामात्मक नव थ्यानक रच्ना करवाक अवषकता नहीं आच. अग, जेख्रा आदूनिक विग्यान में अखम्स रेजर काल जाईताज, जा हम बिना कोनो नव सिद्धान्त वा जतिल सक्रीय प्रोजक्षन गडने, केवल इच्छा आ अव्रोदक अबहावसा मानविय प्रव्रितिक के पुरन व्याख्या कर सके ची, अगर दर्ख च्छनी में सरल अचे मुदा जे विश्वास उही व्यक्तिक आखी में होई तचे जखन उह शीप के चान्दी मानिंग का दो गगे तचे. वाग में इविप्रीत ग्यान बनेवाक अनावष्षक जन्जाल के क्डागगरी. लागव वासरल्ता, तक्हन्धरी नीकची जक्हन्धरी ओईतार्त्ताक पूर्न व्याख्या कर सके. अग्तर लागे तच्ये जे जाग्षात देखी रहल अचे मुदा खेर आगु बड़ेज्ये करन मीमान्सक इसिद्धानत एक ता कान पैक समस्या क्ष्ट्या करे तच्ट्याग. अगरा लागे तचे जे उचान्दी साख्षात देखी रहल अचे मुदा ख़र हम एही सागु बड़़ है च्ये करन मी मान सक इषिद्धानत एक ता कान पैक समस्या क्ड़ा करे तचे आन पैक समस्या? उखी उचे ज्यानक प्रामानिकता अच्या अद प्यग समस्या उ की? उ आचे ज्यानक प्रामानिक्ता आच्या मुदा इबिन्दु तो हमर सिद्धान तक सबसा प्यग सक्ती थिक अख्याति वाद वास्तो में समपूरन ज्यानक प्रमानिक्ता के बचावाग लेल आची अगाक माने आची सुत्टाप्रामानिवाद एकदम, हमरा सब सुत्टाप्रामानिवाद माने चीए शुत्टाख लिल हमेक्रा तनी अस्पष्ट को देईची सुत्टाप्रमानिवाद अख आची जगचन भी कोनो ग्यान उत्पन होई तची स्वतः प्रमाने वादक अथ है जग्खन भी कोनो ग्यान उत्पन होई तची, उवआपन उत्पती से स्वतः सत्य होई तची. मुदा ग्यान तग गलत सह्योभ हसके तचे? नहीं, आहांके दिमाग जानी भूज कगलत ग्यान पेडा नहीं कर सके तची. यह दी न्याइक के बात मानल जाए, ज़े दिमाग अन्यताख भी ख्याती जका सक्रीय रुप से गलत गयान पेदा का सके तची, तद तारकिक रुप से एक ता बहुत भ्यालक समस्स्या उत्पन न होएत. आहा अनन्त श्रिंक्लाक बात कर हो लग ची आप, जखन भी आजा के कोनो नूतन ज्यान प्राप्ता होएत, मानु आजा एक तगाच देखी रहल ची. तढवाज सरवदा संदे हमे रहव, जे इगाच वास्तो मे आची, वा हमर दिमाग कोनो वीर हेट्सेट जखा एक रप प्रजेक्त कर रहल आची. अगा के अखर सत्यता प्रमानित करवाग लेल तुसर ज्यानक अवष्ष्टा प्राडद, तुसरख लेल तेसरख आई अनन्त वस्था दरी चलेत रहत. अनवस्था दोष अनवस्था अगर सत्ते नहीं अची तो अहाके अखर सत्तिता प्रमानेत करवाग लेल तो सर ज्यानक अवष्ष्टा प्राडद, तो सरख लेल तेसरख आई अनन्त वस्था दरी चलेत रहत. अनवस्था दोष. अगा के इदर स्वाब्विक अची जे अनन्त् संदे है, मुता गंगेश उपाद्याय अईही दर सन न नहीं गब्राए चती, उबहुत सब श्थ रूब से स्वताध प्रमानिता वादध क्चन्दन करे चती. खन्दन करे चती, तव उकी मने चती, स्वाब्विक अची जे अनन्त सन्दे हिब हो जाएत, मुता गंगेश उपाद्याय अही दरसन नहीं गब राएच छती. उबहुत स्पष्ट रूभ से स्वता प्रमानिता वादक क्चन्दन करे चती. क्चन्दन करे चती, तब उकी मानेच चती. उपरत्द्ध प्रमानिता वादध किस्ठापना करच्छती मने ज्यान आपन आप में सत्ते नहीं जे उक्रा प्रमानित करप्प्प्रत इत बहुत क्ष्तर ना किस्तिया ची नहीं नहीं ज्यान अख सत्तिता स्वत्ध प्रमानित नहीं होईत ची एकरा बहार से जाचषब पड़ेत आची आओ कैसी की तिक औव अची सबहल प्रव्रिती मने कपासेटी फुर सक्सेस्फुल अक्तिविटी सबहल प्रव्रिती एकरा तनी सपष्ट करू। आओ एकरा एक ता बहुत जीवन्त साद्द्रुष्य कि माद्ध्यम सबूजिय, जे गरन्त में सिहो अची. मानिली, जे अंदार में आहा बाट पर चली रहल ची. आएक ता रस्सा के साप बुजे लेच ची. ती कचे, वेदाग्रह. आहा, आहा, के वेदाग्रह वा बलाईंट स्पाटक सिद्धान्त कहत, जे इप्रत्यक्श अस्म्रितिक अंथर नहीं भूज़ब मात्र थेक मुदाय एकर परिक्षन कोना होई तची? कोना? जक्चन हम एक ता प्रकाश वा तोर्च लके हो तची जे और रस्सा ची आहम उक्रासा कि चु बाधे सकए ची अथा त्हमर कार सफल भिल ता हमर पहल ग्यान आमानेवा आप रमाड़ भोजायता ची आई तव्यवहारीक जाजबहिल एक दम एक राएक टा आदूनेक उदारन सासे हो भूजू रगिस्तान में मरीचिका में पानी खोजब व्यकती चमकएद बालु के पानी भूजगयता चे अखर प्यास अखर दवाव बकलेल प्रेरिद करे तचे तीक आचे जखन अखर उतै पहुचाई तचे अप पानी पीबखलेल मुह लगवे तचे तख अखर वह में केवल सुखा भालू आवाए च्छेक ये तख अखर कारे विष्छल बहुगेल तए एक्रा सा की प्रमानित भेल? इविप्लता इप्रमानित करेता जी, जे उग्यान में पानी केवल जानकारिक अबहाँ नहीं चल, दिमाग अदे पानी आरुपित करेने चल. बालु क्यतार्त इषिद्द करेता जे व्रहम एक्ता सकरात्मक त्रुती थिक, बुद्दि एक्ता मिथ्ट्या रूपा क्रचना करी तची आच्छा, इट्टोर्च आ मरिचिका कुदारन बहुत प्रभावकारी आची हमी मानेची आँ, मुदा आही में एक ता बहुत पैग तारकिक दूश आची जक्रा आहा नजर अंदाज करो हल चे तार्किक दोश की दोश अची आही में? जा आहा कही च्छन जे प्रविद्टी सब्ठल भेलासा, ज्यान सत्य प्रमानित होई तची, तची उही प्रविद्टिक सब्ठल ताक के ज्यान अची, उखुना सत्य प्रमानित होई तची. माने? जखन आहा रस्सा से बक्सा बान्दल हूं, तो उ बान्दवा के ज्यान से होता गलत वहसा कै तची, कि उक्रा लेल एक ता आन प्रव्रित्तिक आवशकता नहीं परता, आहा फिर से उही अनन्त शिंखला वा प्रव्वाग रिगरेस में फसी राल ची. नहीं नहीं करन व्यवहारिक जीवन में जते एक आर्य निरबाद रूप से चली रहाल ची उती परिष्शनक आवशकता नहीं होई तची मुदा तारकिक रूप सत आआप पसी गिलूने जकन आहक प्यास भूजी गिल तकन संदेस वते समाप्त भाजाई तची अनन्त्ट्श्रिंखला व्यवाहार में नहीं होईता ची मुदाहाम भूजी रहल ची जे आहा परताह प्रमान्या वाद से पूनताह संथुष्ट नहीं ची एक दम नहीं ताओ, एक रा एक ता अजुको गंभीर दाशनेक बिन्दूपर लग जाए विशेवस्तु आ एंद्रिय समपर कखतार किक्ता आप एही पर हमरा बहुत कलवा पत्ती आची आप आप नयाई दर्षन आपन यत्हार्थ्वाद वार रियलिजम के लेजानल जाईत आची आप नयाई पुनत हा यत्हार्थ्वादी आची यतारत वादक अर्थ अची जे किचु हम आद्रीया से प्रत्ट्खष करएची वोकर कोनो अकोनो वास्तविक अस्तित्वो हम्रा सोजा होईत अची एक दम सई आब देखो यह दियाग कही चती जे विक्ती सीप में चान्दिनी तो आरोपित करएची अग्रा आखिए से प्रत्ट्यक्ष देखाई ता आखिए ता हमर प्रष्नए एख्छी जे चक्षू जखन सीप से समपरक मे आखिए तो उगो ते आवि दिमान चाननी तो के कोना देखी सके ता छी? इब आप उचीत प्रष्न आखिए आखी केवल उही वस्तुके देखी सकएत आची जे बहुतिक रूप से वोकर सोजा आची जो चाननी समुद्र कात में च्फबे नहीं करे उ चाननी तक तख शहरक कोनो दुकान में राखल आची आची चानननी आची आची ता आखी उक्रा कुना गरान कर रहाला ची इता आख आख अपन सी यद्हार्थ वादक सिद्धन्त के विरुद्द बहुगे ला आखा बहुतिक विज्यनक नियम के तोडे रहाल ची रूको रूको इता है न्याय दर्शन भूदिक विज्यनक नियमा के नहीं तोडे रहा लाचे बलकी इमानव विज्यनक एक ता बहुत सुख्श्म प्रक्रिया के उद्गाटित करा रहा लाचे न्याय दर्शन अपन यदार्द वादक के तनी को नहीं चोडे थाची कोना नहीं चोड़े तची, आहाता अविद्यमान चीजके प्रत्वष करा रहल ची. ब्रम्मेजे चानी देखा रहल ची, उशुन्निवाज़का पूनता काल्पनिक नहीं आची, सीप इतःए आची, अचानी कतो आन्ठाम विद्यमान आची, दूनु या थार्त्थिक. अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ� आख आखी निबोग फोटो देख्रोहल आखी मुदा आखी ता खटापन नहीं देखे सके तची आखटापन तच्वाद आखी जिक रा जीव ग्रहन करात आखी ता आखे सा देखल पोटो आख शरीर में सारे रेक प्रतिकरीया कोना पैदा कर दे लेक ये ते की भेल जे आखेक द्रिश आहाक दिमाग में खट्टापनेक स्म्रिती के जागरित के लक? थी का ची इस्म्रिती जागरित भेल? आव अस्म्रिती स्वयमेक्त सन्निकर्ष वा संपरक सूत्रक्काज के लक अज्म्रितिक माद्यम्सा आईक आखे निवो के खथा पनक प्रत्यक्ष अनुबभव कर ले लक यह थिक ज्याने लक्षन सन्निकर्ष अहो! माने आईक इस्म्रितिके अईद्रिय समपरक सादन बना रहल ची? द्रहमे सहो यह होई तची जखन आखे सीपक चमक देखगटाची, उ चमक स्म्रितिक चादनी के जाग्रित करेट ची, आ उ स्म्रित्यात्मक जान एक ता पूलक निरमान करेट ची, जकर माद्यम्सा आखे उई दूर राखल चान्दनी के सोजाग सीप पर आरोपिद का प्रत्यक शुरुप से देखाई तची. इद बहुत गुमाव दार बात भेल. इकोन जादू नहीं आची. इमानव मस्तिष्कक असाथारनक शम्ता थिक. यही तरहे आरोपिच्चाननी सो हो यतार्द अची, यद्यपी उ दोसर्थाम अची, अब्रहम एक ता सक्क्रिया सकरात्मक विप्रीद ज्यान बनेट ची, यहे अन्यता ख्याती अची. अगा उगर बेसाकि की एक कही रहल ची यी तो मनोवी ज्यान अचे मुदा शमा करव फम इबात नहीं मानी सके ची की एक नहीं? इजे ग्यान लक्षन सनिकर्षत्थी इएक ता क्रित्रिम भॆउद्दिक बैसाकी जका बुजाईत आचे जे नये दर्षन आपन सिद्धान्त के बचाईवा कलिल गर्णने आचे आहा एक रब एसा कि कि एक कही रहल ची, इतो मनो विग्यान अचे. कारन, आहा स्म्रती और प्रतेखष के आपस में मिलाका एक ता ब्यंकर खिच्डी बना रहल ची. जो स्म्रती प्रतेखष्चका काज कर अचे, ता स्म्रती आर प्रतेखष में की अंतर रहीगल? अन्तर अची मुदा समपर कस्तापिद भेसके चे प्राभाकर मीमान सा एह जटिलता के अज्स्विकार कर अची हमर सिद्धानत एक दम सपष्ट अची जे स्म्रती स्म्रती खिक अर प्रत्ट्च प्रत्ट्च थे जगन आहा फोटो में नीभू दे के ची उ प्रत्यक्ष थी, जगन आहा उकर खटा पन शमरड कर अज्छी, उस्म्रिती आची. मुदा प्रतिक्रिया तो शारी रेग भेल ने. आहाक मूमे पानी एही ले लवाए तची, कारन आहा दूनु ज्यानक भीच कसीमा रेखाके, उही श़ नहीं पड़ी पाभे रहल ची आहाक न्याए दर्षन एही दूनुके मिलाग के एक ता असमबव अन्यत्था ख्याती बनेवाग प्रैज करे तची मुदा सूनु की बहुत बेशी तारकेख अप परश्क्रित वाख ख्लीनर नहीं आची अग, उदो बवाद बवाद बहुत, अग, बवाद बवाद बहुत, मुदा अ केवल ब्रमित नहीं होई तची उ चालनी देखाई तची एही में यतार्थवाद से हो सुरक्षित ची अग कोनो नव असमवव एंद्रिय समपर कक वास्म्रितिक पुलक कल्पना से हो नहीं करब पडे तची अख्यातिवाद सा बहतर कोनो याख्या नहीं बहुज सकते ची अहां की तरक सूनी में नीक लगे तची मुदा हम्रा लगे तची जे अहां मानव अनुबववग गेराई के कम कखा आखी रहल ची मिमान साक अख्यातिवाद दाशनेक रूप से सुरक्षिद भाषा कै तच्छे, मुदा मनोवे जानेक रूप साई पुरनता अपुरना च्छे. अपुरन कुना च्छे? इट सबस शरल वैख्या च्छे. जान लक्छन सन्निकरष कोनो क्रित्रम पुल नही आच्छी. इं मानव चेतना का यतार्त्तिक जगन वेक्ती सीप के चान्दनी मानी कदोगे तच्छ उ इं नक रत्छी जे हम चान्दनी के समरन कर रहल्ची मुदा उ काई तच्छ, हम एते चान्दनी देखी रहल्ची अखर स्म्रती अखर द्रिष्ट्टन्द्र के पूरी तरह से हाईजैक कचुकल होई चैक. एह ता अन्निथा ख्याती थेक. रहां बूजी रहां चीजे आहाके तार केख संद्रचना कते जारहला ची. आहाके न्याए दरशन माने ताची, जे मानवी मन केवल निषक्रीए द्रिष्टा वा पैसेव अबजर्वर नही आची जे बस जानकारी ग्रहन कर आई तची एक दम मन सक्री आचे आखन असार उस सक्री ए रुब से अनबवव के गड़़ेई तची इंद्रिये वा परस्तिति दोश पूर न आची, तम मन आपन इस्म्रतिसे समगरी लोका याठार्थ पर थोपी देई ताछी. आआ, एह सत्या ची. मुदा, मिमान सक द्रिष्टिकोंसा हम पुना औही मुल भुड़ दर पर आवी जाएची. इमानब, जे ज्यान आपनुद पत्तिक शन में विप्रीत वमिथ्ध्धा भहस कैता ची, इस समपृर शास्त्र अग्यान के प्रामानिकता के संदेज के गेरा में ताडाइता ची. संदेज ता अनवेशना का जननी थेख अनई थेची, तग्यान क्मुल पवित्रता सर्वदा सुरक्षित रहेत आजी आई है हमरा सब क्मद्यक, मुल भूध, वैचारिक भिन्नतात हैक जो ते हमरा सब के सहमत हो में परत थची, जे हमरा सब असहमत चीए आजी ता मानभेई परत हमर विचारस्स, मानविय प्रव्रत्तिक तीव्र संचालन, अग्यानक निवारन, आसत्तताक व्यवावारिक परिक्षनक लेल, इस्विकार करभ अनिवार या ची, जि भ्हम एक ता विषिष्ट सकरात्मक आरोप थेक. अहां कि द्रिष्ती कोंसा यी अन्नेता क्याती ये छी? अह, मन ब्र्मक समय मात्र निद्रा में, या ब्लाईन्स्पोट में नहीं रहे तची, बलकि उसक्रिय रूपसा एक्ता ब्रान्ती पुरन रचना करे तची. गंगेश उपाद्याए, इही अन्निता ख्यातिक के स्तापित का नकेवल व्रमक स्वरुप स्पष्ट करे च्छती, अपितु समपुरन यदार्थ्वाद के एक ता नव सूक्ष्म तारकिक आदार देच्छती. अदोसर दिस, हमर प्रभाकर मीमान्सक अख्यातिवाद इस थापित करे कची, ज्यानक प्रमानिकता के अनन्त संदेह सबचेवाक लेल, असिद्धानत में अनावश्षक जतिलता नहीं अनवाक लेल, ब्रहम के मात्र दुईता सत्टिज्यानक भीचक भेदाग्रह मानब बेशी तारकी कची. पारसे मानिक सिद्धानत? आप, एक दम, दाशनिक रूप से कोनो नव मित्या ग्यानक, रचना करव, एक त अनावश्यक बहार थिक जक्रा से हम्रा सब के बच्बाग चाही. इवेमर्ष अत्यंत गंभीर आव विचारनी आरहल हम्रा सब देखनु, जि सत्य आभ्रमकी विष्लेशन मात्रिक्ता सीप वाच्चाननिक चोट्सन विवाद नहीं हैच नहीं, इज समपूरन मानव ज्यान मिमान साक आदार शिला थिक इवेमर्ष कोनो एक पक्षके पुन विजयी गोषित कैने समाप्त नहीं भोरो है लाचे मुदा इवेम्रा सब के इविचार करवागले लवसे प्रेरिट करे तचे जि तत्व चिन्तामनेक एह सुख्श्मतार की क सन्सार में सत्तिक प्रकती करनक कते को आयाम आचे सत्ते कहला हूं इदार्ष्निक प्रष्न अक्हूनो अनवेशन कबाट जोही रहा लाची जे हमर ज्यान कतेग दूर्दरी वस्तुगत आची अक कतेग दूर्दरी हमर अपन मनक निरमान आची करिकमक प्रारम में हम्रा सब उही एकसरे मशीनिक बात कैने चलूं जि सत्यके पार्दर्षी रूप में दिखावे तच्ये. आप जदे सब किच श्पष्ट थच्यी. मुदा आप भुजही तच्यी, जे मानव चेतना उनिशक्रिय अख्सरे माशिन नही आच्छी. आपि तू एक ता एहन चतृृर चित्र कार आच्छी, जे अपन स्म्रितिक रंग सा वर्तमानक क्यनवास पर यतार्त अब ब्रहमक मिस्रित चित्र बनावे था ची. बहुत सुन्दर विचार की हम्रा सब वोही चित्रक रंके सही सही चिनही सके ची. वा! हम्रा सब आजीवन अपने बनायल ब्रहमके सत्तिमानत रहब. यह विचारनी यह प्रश्नक संग आज हमरा सब भिदालेप विमर्ष्क यह मंच पर जुदवक लेल दन्निवाद

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