मुख्य सामग्रीपर जाउ · Skip to main content
VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
Twitter / X Facebook Archive
विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
विदेह ई पत्रिकाक नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू: [Windows / Linux: Ctrl + F5 / Ctrl + Shift + R  ·  macOS: Command (Cmd) + Option + E + F5 / hold Shift + Click the Refresh button]

विदेह अंक ४४७-४४८ पर पाठकीय मन्तव्य

प्रणव झा, नई दिल्ल॥
विदेह अंक 448 (डॉ. रामानन्द झा रमण विशेषांक) एकटा आरो मैथिली सेवी विद्वान के विषय मे जानबाक आ प्रेरणा लेबाक अवसर दै अछि। ई अंक मैथिली साहित्य आ संस्कृति मे हुनक योगदानक नीक तरीकासँ चर्चा करैत अछि। डॉ. रमणक मैथिली भाषा साहित्य के योगदान ऐ अंक मे छपल लेखक विविधता आ संख्या सँ अंदाजा लागैत अछि। विदेहक संपादकीय में डॉ. रमानन्द झा रमणक साहित्यिक योगदानक संग-संग हुनक आलोचनापद्धतिक सीमा सभक सटीक विवेचन कएल गेल अछि। संपादक रमण जीक समीक्षाक सबल आ निर्बल पक्ष, विशेष कए मूल पाठक अनुपलब्धता आ मूल्य-मानदण्डक अंतर्विरोधकेँ इमानदारीसँ उजागर कएलनि अछि। संपादक जी जे ठेठी आ अंगिका मे संपादकीय लिखलाह अछि, से मजेदार लागल। साक्षात्कारकर्ता के रूप मे कल्पना झा नीक क्वेश्चन सेट केने छथि मुदा ओकर उत्तर नै भेटनाइ विशेषांक मे एकटा शून्य पैदा केने अछि। प्रवीण झा योगदान बनाम परिणामक नीक प्रश्न ठाढ़ केलाह अछि।
विदेह अंक 447 मे लालदेव कामात भगत सिंह के अंतिम पत्र सभक चर्चा केने छथि, आ किछु अनुवाद सेहो। ई काज प्रशंसनीय थिक। यदा-कदा अपन सभक आजादी के मतवाला नेता सभ के काज आ व्यक्तित्व के याद करबाक चाही। हमरा लागैत अछि जे मिथिला क्षेत्र के आजादी के आंदोलन मे उत्कृष्ट योगदान देबय बला आंदोलनकारी सभक चर्चा सेहो होइत रहबाक चाही, जेना उदाहरण लेल एखन हमरा मोन पड़ैत अछि वैकुंठ शुक्ल, योगेन्द्र शुक्ल, राजकुमार शुक्ल, सूर्यनारायन सिंह, सात शहीद बला सतीश प्रसाद झा, बिहार केसरी डॉ० श्री कृष्ण सिंह, रामफल मंडल, बटुकेश्वर दत्त आ राजेंद्र बाबू आदि।  कैलाश कुमार ठाकुर के लेख “विद्यापतिक धरा पर मैथिलीमे रैप-संगीत”  बहुत शोधपरक, रोचक आ इन्फोर्मेटिव लागल। गजेन्द्र ठाकुर द्वारा संस्कृत सँ मैथिली मे अनूदित व्यंग्यात्मक प्रहसन 'पालाण्डुमण्डनप्रहसनम्' मे प्याज  आ लहसुन के केंद्र मे रखि कऽ सामाजिक ढकोसला, रूढ़िवाद, खान-पान सं जुड़ल अन्धविश्वास आ तथाकथित पाखंडी विद्वता पर तीक्ष्ण व्यंग्य कएल गेल अछि। आशीष अनचिन्हार के गजल के लाइन “मिश्री जकाँ आँखि लागल, सपना बताशा भऽ गेलै” मजेदार लागल। राजदेव मंडल के कविता संबोधन रोचक छैक। संबोधन, संबंध पर खूब निर्भर करय छैक संगहि पेशेवर सफलता मे सेहो संबोधनक महती भूमिका छैक। मैथिली के आम जीवन आ भाषा मे अदका-फदका के एक समय तक खूब भूमिका देखल जाय, परमेश्वर कापड़ि के हमर रचनागत अदका-फदका” मजेदार लागल।



नरेन्द्र झा,रांची।
अहाँ काज गजेन्द्र ठाकुर जी झमटगर करैत छी आ लागि कऽ,रमि कऽ करैत छी।डा.रमानन्द झा रमण जीक आलोचनात्मक गवेषणात्मक -समीक्षात्मक व्यक्तित्व पर ई काज नीक कयल गेल हेतनि से विसवास अछि। मैथिली थेसॉरस पर अहाँक काज अछि नैं जानि कोशक जे नियम छैक -ढंग छैक तकर अनुपालन करैत कयल गेल अछि वा नहि! अहाँ बहुत जमि कऽ आ रमि कऽ अनुराग सहित अपनाकेँ मैथिलीक प्रति समर्पित कयने छी ताहि लेल अहाँ सहित अहाँक समस्त मंडली केँ हृदयतल सँ असीम एवं अनवरत बधाइ आ मंगलकामना।

चन्द्रमणि झा, दरभंगा।
बहुत प्रसन्नताक बात। हमरा ततेक रचना भेटि गेल जे ओकरा पूरा पढ़ियों नहि सकलहुँ, लिखितहुँ की? रमणजी बहुत काज कयने छथि। हार्दिक शुभकामना।

योगेन्द्र यादब, नेपाल।
आदरणीय श्री गजेन्द्र ठाकुर जी,
सर्वप्रथम मैथिलीक एतिहासिक पत्रिकाक नियमित प्रकाशनक लेल अहाँ आर अहाँक टीमकेँ हमर हार्दिक धन्यवाद । हम ई पत्रिका नियमित रूपसँ पाबि रहल छी। 'किछु नव सुधार' अन्तर्गत बुँदा २ मे उल्लेखित अहाँक जानकारी सम्बन्धमे हम नेपालक परिपेक्ष्यमे ई जानकारी देब चाहैत छी जे नेपालमे सम्पन्न २०११ आर २०२१क जनगणनामे अंगिका आर बज्जिका मैथिली भाषासँ भिन्न स्वतन्त्र भाषाकै रूपमे enumerated कएल गेल अछि। एहिसँ सम्बन्धित Mark Turin and Yogendra P.Yadava (हम) क लेख "Languages Shared by India and Nepal" (PLSI vol.39) शीघ्र प्रकाशित होम जा रहल अछि। अहाँक लिखल मैथिली, ठंठी, अंगिका आर बज्जिकाक तुलनात्मक व्याकरण उपलब्ध करा देबाक लेल विनम्र आग्रह अछि।
शुभकामनासहित।

 

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।

साहित्य अकादेमीक संकीर्ण मैथिली भाषा विभागसँ विदेह (मैथिली साहित्यक समानान्तर मंच) ऐ अर्थमे सेहो फराक अछि जे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिका सन सहभाषाकेँ संग लऽ कऽ मिथिलाक बोली-वैविध्यक समग्र चित्र देल जाइत अछि। विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक भाषा विज्ञान, रचना आ व्याकरण मैथिलीक संग देल गेल अछि मैथिलीक एकटा समानान्तर व्याकरण, रचना आ भाषा विज्ञान (ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाकेँ संग लऽ कऽ)- गजेन्द्र ठाकुर, संगे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक साहित्य ई-प्रकाशित आ समीक्षित सेहो होइत अछि।– गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक, विदेह ISSN 2229-547X
नव विदेह अंक — मासमे दू बेर · New Videha Issue — twice monthly  ·  ई-पत्र सदस्यता · Email subscription  ·  RSS feed