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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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प्रीति कुमारी बीए. बीएड.

स्मृति शेष डॉ कमला कान्त भंडारी -शिक्षाविद्



मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी अनुमंडलके अड़ेर थानाक सिनुवारा, मौजा- अड़ेरमे दि० ६-२-१९५१ ई० केँ स्व० मारकण्डे भंडारी जीकेँ तेसर पुत्र रत्न जन्म लेलकनि,जिनक शुभ संज्ञा राखल गेलनि - कमला कान्त भंडारी। दू पैघ भाय छलनि लक्ष्मी बाबू (हाईस्कूलके शिक्षक),वकील - राधा कान्त भंडारी (झंझारपुर लोकसभा चुनावमे अभ्यर्थी) आ जेष्ठ बहिन - भैयादाय देवी(पति प्रो० रामदेव भंडारी, राज़ सभा भुतपूर्व सदस्य- १६ साल धरि)। ओ बालपन सँ मेधावी छात्र रहल छलाह। स्व० कमला कान्त बाबू दू विषयमे एम.ए. (अर्थशास्त्र आ मैथिली) कयने रहथि। सन् १९९३ मे हुनकर पीएचडी. केर विषय रहनि -: संत कबीर भणित मैथिली पदावलीक विवेचनात्मक अध्ययन। आजिवीका लेल प्रो० भंडारी जी मधुबनी स्थित 'मिथिला जनता महाविद्यालयमे मैथिली व्याख्याता पद पर १९८५ सँ ८९ धरि तत्पश्चात् बिहार सरकारके शिक्षा विभागमे - रा० कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शास्त्रीनगर ,पटनामे +२ मैथिली विषयमे बतौर लेक्चरर रहलाह।
हुनकर अरेड़मे कबीर उपासक परिवार सँ मुखिया पद आरम्भिक समय सँ चलि आबि रहल छन्हि। कांग्रेसी नेता बच्चा बाबू उर्फ शिवनन्दन भंडारी मुखिया छलाह,हुनक पुत्र हितेंद्र भंडारी तीन खेप सँ मुखिया छथि। बच्चा बाबूक भाय क्रमश: रामदेव भंडारी, जिनक वियाह - अलोला गाममे भेल छन्हि ; रामनन्दन भंडारी जीक संवंध सिरखड़ियाक स्व० बेचन बाबू ओतय छन्हि। चंदू भंडारी आ बिशनू भंडारी जौंवा भाए छथि। विष्णु भंडारी जीक वियाह सूड़ियाही गाममे स्व० नन्द लाल बाबूक बहिन सँ भेल छन्हि,जे कि साढ़ु सरौतीक हरिनाथ बाबु प्रभृति छथिन। हरि नन्दन भंडारी ओ रघुनंदन भंडारी पेसर स्व० बंशी भंडारी, आओर जयनारायण भंडारी जीकेँ तीन पुत्र क्रमशः प्रो० ब्रजकिशोर,केशव आ नवल जी भेलनि । स्व० सकुन्त भंडारी मादे एहि लघु आलेखमे विवरण नहिं समा सकल। कवीर साहित्य प्रथम संस्करण डॉ० कमला कान्त भंडारी जी अपन गाम सँ प्रकाशित १६३ पृष्ठके मैथिली भाषा मेँ छपल पोथी ' संत कबीरक मैथिली पदावली' १९९८ मे शास्त्री नगर , पटना सँ अपन माय बाबूकेँ समर्पित कयने छथि। जाहि पोथीमे मैथिली भाषा मेँ कबीर पदाबली संकलित कयने छथि। संत लोकनि सँ परिभ्रमणक दौड़ान भेंट कय पाण्डुलिपि प्राप्त कयलन्हि आ डाॅ० सुभद्र झा डि.लीट. केर सात पृष्ठ'क कबीर भजनादि जे नवम्बर १९५६ मे जनरल ऑफ दी यूनिवर्सिटी ऑफ बिहार रिप्रिंट फ्रौम भोलूम-11 बहराएल रहनि,से सब सामग्री हिनक साहित्यके सौन्दर्य बढ़ेलकनि । विद्यापतिक बाद कबीर साहेबक मिथिला आ मिथिला सँ बाहर क्षेत्रमे प्रभाव बनल रहलैक अछि। संत कबीर दास जीक प्रसार हुनक शिष्य आ अनुयायी द्वारा सम्पूर्ण भारत वर्ष आ विदेश धरि भेल। कबीर जीके जन्मस्थली मगहर ओ वाराणसी जहिना श्रुति आधार पर छैन,तहिना मिथिलामे होयब एक किंवदंती थीक। पोथी पर व्यापक विमर्श भूमिका रूपेँ स्व0 मोहन भारद्वाज जी कयने छथि। कबीर विषय पर पहिल उल्लेख १५५० ई० मे धनपतक रचना सँ भेटैत छैक। तकरावाद अबुल फजल लिखित 'आईन-ए- अकबरी १५९६ ई० मे भेल छैक। तहिया सँ सैकड़ों विद्वान कबीर मादे अध्ययन देश-विदेशमे कयलन्हि आओर धार्मिक तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण सँ क्रम जारी अछि। संत कबीर'क इच्छा छलनि वा नहिं, मुदा हुनक सम्प्रदाय सँ प्रभावित अनुयायी लोकनि हुनका नाम पर एकटा पंथक जन्म देलनि। कबीरपंथीक अतिरिक्त किछ स्वतंत्र सम्प्रदायक प्रवर्तक एवं अनुयाई लोकनि सेहो कबीर केँ अपन गुरु मानैत हुनक जीवन ओ साहित्यिक प्रसंग लिखलन्हि अछ। रामपाल दासके संदर्भ नहिं आबि सकल अछि,जखनकि हुनक हालमे खूब चर्चा पसरल छन्हि। कबीर विषयक एकटा जिज्ञासा एहि पोथीमे डॉ०(प्रो०) भंडारी जी कयने रहथि। ता दि०३-२-२०२६ केँ हुनक आकस्मिक निधन भेला सँ स्वजन- परिजन आ अड़ेर परिक्षेत्रीय जन मानसमे शोक उमड़ि गेलैन। विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित!
 
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