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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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प्रवीण कुमार झा

 

विद्वता, योगदान आ मैथिली लेल प्रयासक परिणाम

 

डा. रामानंद झारमण कोनों परिचय के मोहताज नहि. ओ आधुनिक मैथिली साहित्यक प्रमुख साहित्यकार, आलोचक, शोधकर्ता आ संपादकक रूपमे जानल जाइत छथि। हुनकर योगदान केवल साहित्य-रचना धरि सीमित नहि अछि अपितुओ मैथिली भाषा, साहित्य, साहित्यकारक विरासत, भाषाक मानकीकरणसँ संबंधित बहस आ मैथिली समाजक सांस्कृतिक विमर्शमे सेहो सक्रिय रहल छथि।

रमण जीक विशेष पहचान मैथिली साहित्यक आलोचक आ अध्येताक रूपमे छनि. हुनका द्वारा मैथिलीकेँ महत्वपूर्ण साहित्यकार आ साहित्यिक धारापर काज तS कएल गेल अछिये, साहित्यिक सामग्रीक संकलन-संपादनमे सेहो हुनक महत्वपूर्ण भूमिका रहल छनि. हुनकर संपादितआधुनिक मैथिली नाट्य संचयन सन कृति मैथिलीक आधुनिक नाट्य-साहित्यकेँ एक ठाम प्रस्तुत करबाक महत्वपूर्ण प्रयास रहल अछि. संगही रमण जी विभिन्न साहित्यिक गोष्ठी आ राष्ट्रीय स्तरक कार्यक्रममे मैथिली भाषा एवं साहित्यक प्रतिनिधित्व करैत रहल छथि। साहित्य अकादेमीक कार्यक्रमसभमे हुनका प्रमुख मैथिली साहित्यकारक रूपमे स्थान भेटल अछि. अहि क्रम में साहित्य अकादेमीक ‘Makers of Indian Literature’ श्रृंखलामे सेहो ओ मैथिलीक महत्वपूर्ण साहित्यकारसभपर काज कएने छथि। मार्कण्डेय प्रवासीपर हुनकर पुस्तक एकर उदाहरण अछि। साहित्य अकादेमीसँ जुड़ल एक कार्यक्रममे ओ मराठी आ तेलुगु जेकाँ भाषामे वर्तनी-निर्धारणक उदाहरण दैत मैथिलीक लेल सेहो सर्वमान्य वर्तनीक आवश्यकता पर विचार रखने छलाह।2024 मे भारतीय भाषा उत्सवक अंतर्गत ओ “Maithili Language and Literature” विषयपर व्याख्यान देने छलाह।

समकालीन योगदान के बात करी तs मैथिलीक मानक वर्तनीकेँ लऽ कऽ चलि रहल विमर्शमे हुनकर बनल सहभागिता अछि। मैथिली साहित्यकार सह विद्वतजन लेल ई विषय एहि लेल महत्वपूर्ण अछि कियेक तs हुनक ई मानब जे कोनो भाषाकेँ शिक्षा, प्रकाशन आ संस्थागत कार्यमे मजबूत करबाक लेल मानक लेखन-पद्धतिक होयब अत्यंत उपयोगी होइत अछि।

रमण जीक एकगोट  पैघ योगदान ओहि साहित्यकारसभपर काज करब अछि जिनका साहित्यिक विरासतकेँ नव पीढ़ी धरि पहुँचेनाइ आवश्यक अछि। उदाहरणक लेल, ओ मार्कण्डेय प्रवासी सन महत्वपूर्ण साहित्यकारपर अध्ययन कएने छथि। एहि तरहेँ विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमसभमे ओ मैथिलीक पुरान आ आधुनिक रचनाकारसभक योगदानकेँ रेखांकित करैत रहल छथि।

2017 मे चेतना समिति, जे मैथिली भाषा-भाषी लोकसभक प्रतिनिधि संस्था केर रूपमे काज करैत अछि, तकर महाधिवेशनमे रामानंद झारमण केँ संयुक्त सचिव चुनल गेल छल। चेतना समिति केवल साहित्यिक संस्था नहि, बल्कि मैथिली भाषा आ मैथिल समाजसँ जुड़ल प्रश्नसभकेँ उठाबयवाली संस्था रहल अछि।

मैथिलीक पारंपरिक तिरहुता अथवा मिथिलाक्षर लिपिक संरक्षण आ अध्ययनसँ जुड़ल विद्वानसभक संग सेहो हुनकर संपर्क रहल अछि। एहि क्षेत्रमे हुनकर महत्व एक एहन विद्वानक अछि जिनकर विशेषज्ञताक उपयोग मैथिलीक भाषा-सांस्कृतिक विरासतकेँ बुझबाक लेल कएल गेल अछि। संगही सीता, विद्यापति आ मैथिली साहित्यक परंपरा जेकाँ विषयपर हुनकर दृष्टिकोण मैथिलीक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचानकेँ सामने अनैत अछि। साहित्य अकादेमीक सीता-केंद्रित कार्यक्रममे ओ सीताक धैर्य, विनम्रता आ साहसकेँ रेखांकित कएने छलाह।

एखन धरि उपलब्ध विश्वसनीय प्रमाणमे हुनका भेटल दू गोट प्रमुख सम्मान स्पष्ट रूपसँ सामने अबैत अछि। 2022 मे मिथिला विभूति पर्वक स्वर्ण जयंती समारोहक अवसरपर रामानंद झारमण जीकेँ मिथिला विभूति सम्मान लेल चयनित कएल गेल छल। 2024 केर महाकवि पंडित लाल दास साहित्य गौरव सम्मान सेहो हुनका देबाक घोषणा कएल गेल छल।

जँ मैथिली आंदोलनकेँ तीन स्तरमे बाँटि कऽ देखी तँ पहिल राजनीतिक आंदोलन अछि, जाहिमे मैथिलीकेँ संवैधानिक आ प्रशासनिक मान्यता दिआयबाक संघर्ष अबैत अछि। दोसर सामाजिक आंदोलन अछि, जाहिमे मैथिल समाजकेँ भाषा आ सांस्कृतिक पहिचान लेल संगठित करब शामिल अछि। तेसर साहित्यिक-बौद्धिक आंदोलन अछि, जाहिमे भाषाक साहित्य विकसित करब, साहित्यकारसभकेँ स्थापित करब, इतिहास आ परंपराकेँ दस्तावेजीकृत करब तथा भाषाकेँ अकादमिक रूपसँ मजबूत करब शामिल अछि।

उपलब्ध प्रमाणक आधारपर रामानंद झारमण केर सभसँ प्रमुख योगदान तेसर क्षेत्रमे अछि, जखनकि चेतना समिति जेकाँ संगठनसँ जुड़ावक कारण हुनकर योगदान सामाजिक-संगठनात्मक स्तरपर सेहो रहल अछि।

चेतना समितिक संगही श्री रमण जी मैथिली साहित्यकार लोकनीक महत्वपूर्ण संगठन मैथिली लेखक संघ सौं सेहो जुडल रहला. अहि संघ के प्रमुख जिम्मेवारी बहुत व्यापक रहल अछि. मैथिली लेखक संघक मुख्य उद्देश्य मैथिली लेखक आ पत्रकारसभकेँ एकजुट करब, हुनका सामाजिक, आर्थिक आ संस्थागत सुरक्षा प्रदान करब तथा मैथिली साहित्यक विकास लेल अनुकूल वातावरण तैयार करब अछि।संघ सरकारी योजनासभकेँ मैथिली लेखक-पत्रकार धरि पहुँचाबय, पेंशन आ आर्थिक सहायता उपलब्ध कराबय तथा निर्धन, असहाय आ गंभीर रूपसँ बीमार साहित्यकारसभकेँ सहयोग देबाक प्रयास करैत अछि। मैथिलीक प्रतिष्ठित साहित्यकारसभकेँ पद्म-अलंकरण आ अन्य उच्चस्तरीय सम्मान भेटय, एहि दिशामे सेहो प्रयास करब एकर उद्देश्य अछि।

एकर संग देश-विदेशक लेखक संघ, भाषा केन्द्र आ अकादमीसभसँ संपर्क बढ़ेनाइ, मैथिली साहित्यक प्रचार-प्रसार करब, पुस्तक प्रकाशन, लेखन कार्यशाला, कवि-गोष्ठी आ विचार-गोष्ठीकेँ प्रोत्साहित करब तथा नवोदित रचनाकारसभकेँ सम्मान आ प्रोत्साहन देब सेहो संघक प्रमुख कार्य अछि।मैथिली लेखकसभक बौद्धिक सम्पदाक संरक्षण, विपन्न आ प्रतिभाशाली लेखकसभक पुस्तक प्रकाशनमे सहायता, मैथिली पुस्तकक वृहत् पुस्तकालयक स्थापना तथा अनुवाद साहित्यकेँ प्रोत्साहन देब सेहो एकर महत्वपूर्ण उद्देश्य अछि।समग्र रूपमे, ई उद्देश्य मैथिली भाषा आ साहित्यक संरक्षण, संवर्धन आ विस्तारक संग मैथिली साहित्यकारसभक सामाजिक-सांस्कृतिक आ आर्थिक हितक रक्षा करबाक व्यापक प्रयासकेँ दर्शबैत अछि।

पंडित स्व. गोविन्द झा, राजमोहन झा, मंत्रेश्वर झा, उषाकिरण खान, गजेन्द्र ठाकुर, तारानन्द वियोगी, वैद्यनाथ मिश्र, शिव कुमार नीरव, विनोद कुमारसरकार’  सन अनेकानेक विद्वान साहित्यकार सब अहि संघ सौं जुड़ल रहला अछि.

संक्षिप्त में कहल जाए तँ रामानंद झारमण मैथिली आंदोलनक एहन विद्वान छथि जे आंदोलनक राजनीतिक अग्रिम पंक्तिसँ बेसी ओकर साहित्यिक, बौद्धिक आ संस्थागत जमीनकेँ मजबूत करबाक काज कएने छथि।

मुदा मुदा मुदा !

एक होइत अछि योगदान आ दोसर होइत अछि वृहद योगदान. अर्थात् कोनो उद्देश्यकेँ अपन दीर्घ समय देब, अपन क्षमता आ कौशलकेँ ओहि उद्देश्य लेल पूर्ण रूपसँ समर्पित कऽ देब। एहि दुनू अर्थमे रमण जीक योगदानपर कोनो संदेह नहि कएल जा सकैत अछि। ओ मैथिली साहित्य आ साहित्यकारसभ लेल अपन ईमानदार शत-प्रतिशत देबाक प्रयास कएने छथि, एहि बातमे कोनो दू राय नहि अछि।मुदा जखन हम हुनकर योगदानक मूल्यांकन केवल हुनका द्वारा कएल गेल प्रयाससँ नहि, बल्कि ओहि प्रयाससँ निकलल परिणामक आधारपर करैत छी, तखन तस्वीर किछु अलग देखाइत अछि।

एतेक लम्बा समय धरि मैथिली साहित्य आ ताहिसँ जुड़ल संस्थासभमे सक्रिय रहबाक, महत्वपूर्ण पदपर बनल रहबाक आ संगही व्यापक बौद्धिक क्षमता रखबाक बावजूद मैथिली भाषाक हितमे हुनकर प्रयाससँ प्राप्त ठोस परिणामक सूची बहुत छोट देखाइत अछि। मैथिलीकेँ संविधानक अष्टम अनुसूचीमे स्थान दिआयबाक संघर्षमे हुनकर कोनो निर्णायक भूमिका स्पष्ट रूपसँ सामने नहि अबैत अछि। चेतना समिति सन महत्वपूर्ण संगठनमे पदपर रहैत मैथिली शिक्षाक क्षेत्रमे सेहो एहन कोनो पैघ परिणाम सामने नहि अबैत अछि, जेकरा हुनकर नेतृत्व अथवा प्रयासक प्रत्यक्ष परिणाम कहल जा सकय।

मैथिली लेखक संघक संग हुनकर सक्रियताकेँ देखी तँ ओतहु स्थिति बहुत अलग नहि देखाइत अछि। लेखक आ साहित्यकारसभक हित, साहित्यक संवर्धन आ संगठनात्मक गतिविधि लेल ओ निश्चित रूपसँ समय आ ऊर्जा देने छथि, मुदा एतेक महत्वपूर्ण पद आ एतेक दीर्घ साहित्यिक सक्रियताक बावजूद मैथिलीक व्यापक सामाजिक आ भाषायी हित लेल जे किछु प्राप्त कएल जा सकैत छल, तकर तुलनामे उपलब्धि अपेक्षाकृत कम देखाइत अछि।

एतय प्रश्न हुनकर समर्पणपर नहि, बल्कि ओहि समर्पणक परिणामपर अछि। कोनो व्यक्ति कतेक समय देलनि आ कतेक मेहनत कएलनि, ई एकटा पक्ष अछि,मुदा ओहि मेहनतसँ भाषा, शिक्षा, साहित्यकार आ समाजकेँ की ठोस उपलब्धि भेटल, ई दोसर आ बेसी महत्वपूर्ण पक्ष अछि।

एकर अतिरिक्त चेतना समितिक संग रहैत पुस्तक-साहित्यक संवर्धन आ संस्थागत गतिविधिकेँ लऽ कऽ हुनकर कार्यकालसँ संबंधित किछु विवाद आ आरोप सेहो चर्चामे रहल अछि। तहिना सरकार आ सत्ताप्रतिष्ठानक संग हुनकर संबंधकेँ लऽ कऽ सेहो ई आलोचना होइत रहल अछि जे मैथिलीक प्रश्नकेँ लऽ कऽ संघर्षपूर्ण ढंगसँ मांग रखबाक बदला ओ संबंध आ कूटनीतिक संवादकेँ बेसी महत्व दैत रहलाह। एहि आरोपसभकेँ अंतिम सत्य मानबाक पूर्व हुनकर प्रमाण आ संदर्भक स्वतंत्र जाँच आवश्यक अछि, मुदा कोनो गंभीर मूल्यांकनमे एहि चर्चासभक उपेक्षा सेहो नहि कएल जा सकैत अछि।

तेँ रमण जीक मूल्यांकन करैत समय दू अलग-अलग बातकेँ अलग राखब आवश्यक अछि - एक, मैथिली साहित्यक प्रति हुनकर व्यक्तिगत समर्पण, अध्ययन, लेखन आ दीर्घकालीन योगदान, आ दोसर, मैथिली भाषा आ समाजक व्यापक हितमे हुनकर पद आ प्रभावसँ उत्पन्न ठोस परिणाम।

पहिल पक्षमे हुनकर योगदान निश्चित रूपसँ पैघ अछि। मुदा दोसर पक्षमे, विशेष कऽ मैथिली शिक्षा, संवैधानिक अधिकार आ व्यापक भाषायी हितक संदर्भमे, हुनका सँ बेसी परिणामक अपेक्षा स्वाभाविक छल। ईएह ओ बिन्दु अछि जतय हुनकर योगदान आ हुनकर उपलब्धिक बीच एकटा महत्वपूर्ण अंतर देखाइत अछि।

रमण जी के स्वस्थ आ दीर्घायु रहबाक कामना!

 

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साहित्य अकादेमीक संकीर्ण मैथिली भाषा विभागसँ विदेह (मैथिली साहित्यक समानान्तर मंच) ऐ अर्थमे सेहो फराक अछि जे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिका सन सहभाषाकेँ संग लऽ कऽ मिथिलाक बोली-वैविध्यक समग्र चित्र देल जाइत अछि। विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक भाषा विज्ञान, रचना आ व्याकरण मैथिलीक संग देल गेल अछि मैथिलीक एकटा समानान्तर व्याकरण, रचना आ भाषा विज्ञान (ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाकेँ संग लऽ कऽ)- गजेन्द्र ठाकुर, संगे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक साहित्य ई-प्रकाशित आ समीक्षित सेहो होइत अछि।– गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक, विदेह ISSN 2229-547X
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