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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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परमेश्वर कापड़ि

अक्षर सत्ता प्रज्ञा चक्षुक आकाश पुरुषेत्तम विमल / डा विमल चौक, विमल रोड नामकरण

अक्षर सत्ता प्रज्ञा चक्षुक आकाश पुरुषेत्तम विमल


महामना डा विमलक अवसानस’ एगो तरंग, एकटा हलचल आ एकतरहक संचेतनात्मक प्रकाशज्योति प्रवलतास’ प्रज्वलित भेल देख’मे आबि रहल अछि । रह’ला ओ प्राध्यापन पेशामे रहथि तैयो प्रोफेसरी वृतिटामे खुटेसल, मेह पाटिटामे बहैत नहि रहलथि । हिनक मूल जीवनदर्शन, सम्पूर्ण साधनामय रचनाधर्मिता आ प्रज्वल प्रज्ञामय विद्या प्रखरता वैश्वीक रहनि, विश्व भाषा–साहित्य, कला–संस्कृतिक संचेतना प्रतिवद्धता युगीन सन्दर्भ तथा लोकयथार्थके परिप्रेक्ष्यमे विरलरुपस’ प्रवाहित रहनि । हुनका खोज', थाह आ पाब' के लेल कोनो भाखाक नाटक, कथा कवितागत विधा, रचनास' बाहर आबि, अनन्त आकाशक उचाइमे विचरहि पड़त।
जतबे व्यष्ठि ओतबे समष्टिक आग्रही, युगपुरुष डा विमल अपनाके कला–साहित्य संसारमे मूलमे मिथिला मैथिलीके आधार अवलम्वन ल’ बढ़’, बढ़ब’ आ सम्पुष्ट कर’मे प्रतिवद्ध रहलाह । विमलसर एहन कठजीव रहथि जे अपन भौतिक शारीरिक दुख–दर्द आ शोक–विषादस’ आहत नहि भेलाह । ओ अपनामे समग्रमे वैश्वीक सन्दर्भ एवं परिप्रैक्ष्यमे, सकल ब्रह्माण्डीय महत्वाकांक्षा हुनकामे नकसिक व्यामोहमे अकसक भरल रहनि । ओ अपना मनमे थाकल–हारल आ हियावस’ हुसल नहि रहथि । आ’ ऐ बातके उदुघोष ओ ‘विमल प्रतिष्ठान’क अनुष्ठानिक उदुघोषस’ देल करथि ।
महान मैथिली भाषा–संस्कृति आन्दोलनी अभियन्ता विमल, मिथिला आन्दोलनके विरुद्धमे मधेश आन्दोलन, मैथिली भाषा–संस्कृति अभियानके विरुद्धमे सम्पर्क भाषा हिन्दी आ मधेशी समाज–संस्कृतिके बिखपाद आ एहि सनातनी पौराणिक ऐतिहासिक मिथिलाके सम्पूर्ण अस्तित्व एवं पहचानक,े षर्यन्त्रपूर्वक बलात् भाषिक–सांस्कृतिक उपनिवेश लदबाक हिसाबस’ एहि प्रदेशके नाम मधेश प्रदेश राखि, एकर कामकाजोके भाषाके रुपमे मैथिली भोजपुरी नहि राखि जे विडम्वनापूर्ण राजनीतिक चक्र–कुचालि चलि रहल अछि, अकाशोस’ उच्च, जनक–बुद्धक पहचानस’ युक्त अक्षर सत्ता आ प्रज्ञा चक्षु, संग–निसंग विमल निर्मल मनुआक आक्रोश आ आहत आवेगके उद्वेगित हाक–वाक अछि—
- ‘न पहाड़ी, न मधेशी, न हिमाली लेखियोस् !
...उचाई मेरो लेख्नलाई सागरमाथा देखाई दिनु !!

डा विमल चौक, विमल रोड नामकरण

महान व्यक्तिके अमर ऐतिहासिक बनब'लेल प्रथमत: हुनक रचनागत वैशिष्ट ओ प्रसिद्धि आधार आ उपादेय बनैछ।
महान् विद्वान, सुप्रसिद्ध रचनाकार डा विमलक सम्पूर्ण कृतित्व एवं व्यक्तित्वके, मिथिला मैथिलीक अस्मिताक पहचानस' जोड़ि, एकरा सर्वजनिन यादगार आ' पुरातात्त्विक अमरत्व प्रदान करबाक लेल, एखनके सच्चा श्रद्धाञ्जलि होएत हुनका नामपर चौक आ रोडक नामकरण करब।
एहि लेल एखन, एखनके महत्वपूर्ण कार्य ओ आस्थावान् कर्तव्यतासब इहो महत्वपूर्ण होएत-
क) हुनका नामपर पदक, पुरस्कार आ वृति
आदिक नामकरण ओ घोषणा करब।
ख) देश, प्रदेश, गाम शहरक अनन्त सडक आ असंख्य चौकसबमेस', ठाम-ठाम ' विमल-रोड' ,' डा विमल चौक'क नाम घोषणा करब अछि।
ग) महत्वपूर्ण चौकसबपर हुनक शालिक लगाएब।
संवेगीत सरकार, दरेगी आस्थावान व्यक्ति, विद्वान, सरकारी तथा गैरसरकारी संघसंस्था, कल्व आदिके एहि पुनित कार्यमे अगुअएबे करत, से डा विमल प्रति शुद्ध शुभकामना आ श्रद्धाञ्जलि होएत, से फेरुस' निहोरा करब!

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साहित्य अकादेमीक संकीर्ण मैथिली भाषा विभागसँ विदेह (मैथिली साहित्यक समानान्तर मंच) ऐ अर्थमे सेहो फराक अछि जे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिका सन सहभाषाकेँ संग लऽ कऽ मिथिलाक बोली-वैविध्यक समग्र चित्र देल जाइत अछि। विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक भाषा विज्ञान, रचना आ व्याकरण मैथिलीक संग देल गेल अछि मैथिलीक एकटा समानान्तर व्याकरण, रचना आ भाषा विज्ञान (ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाकेँ संग लऽ कऽ)- गजेन्द्र ठाकुर, संगे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक साहित्य ई-प्रकाशित आ समीक्षित सेहो होइत अछि।– गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक, विदेह ISSN 2229-547X
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