विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
कल्पना झा- साक्षात्कार

विदेहक डा. रमानंद झा 'रमण' विशेषांक लेल हमरा रमणजीक साक्षात्कार लेबाक भार भेटल। हम बारह गोट प्रश्नक प्रश्नावली दिनांक 26/05/2026 कऽ व्हाट्सएप्प पठा देने छलियनि। संगहि फोन एवं साक्षात् भेंट मे सेहो एहि लेल मोन पाड़ैत रहलियनि। रमणजी मैथिली साहित्य सँ जुड़ल नव-पुरान लोक केँ उचित दिशा-निर्देश देबाक पात्रता राखैत छथि। इएह बात सभ ध्यान मे राखि एहि साक्षात्कार लेल प्रश्न तैयार कएल गेल अछि। मतलब एकटा वरिष्ठ साहित्यकार रूप मे ओ समाज लेल की-कोना-कतेक किछु कएलनि, ताहि सभ सन्दर्भक प्रश्न सभ पूछल गेल अछि। पूछल गेल हमर प्रश्न सभ हुनकर साहित्यिक अवदान सँ संबंधित नहि अछि। एहि साक्षात्कारक माध्यम सँ एकटा स्थापित साहित्यकारक व्यक्तित्व केँ लोक जानि सकथि आ लाभान्वित होइथ; तेहन प्रश्न सभ अछि सभटा।
मुदा कोनो कारणवश हमरा रमणजीक उत्तर नहि भेटि सकल। तैं उक्त प्रश्नावली जस-के-तस प्रकाशित कएल जा रहल अछि। कम-सँ-कम पाठक लग ई प्रश्न पहुँचनि। ओना एकर उत्तर कोनो-ने-कोनो समय मे भेटत अवश्य; से आशा रखैत छी।
1) मैथिलीमे कोन विधा आवश्यकतासँ बेसी भऽ गेल छै, आ कोन विधाक एखन जरूरति छै?
2) संपादन माने की भेलै? मैथिलीमे जसकेँ तस कोनो सामग्रीकेँ एक भूमिका लीखि सेहो अपन नाम संपादकक तौरपर लिखा लैत अछि। एहिपर अपनेक की विचार अछि।
3) मैथिलीमे अधिकांशतः कोनो विधाक रचना पहिने छपैत छै बादमे ओकर पोथी। तऽ कोनो विधाक इतिहास कोन ठामसँ मानल जेबाक चाही, पत्रिका बला रचनासँ वा कि पोथी बला रचनासँ?
4) एक पत्रिकाक संपादक हिसाबें मैथिली पत्रिकाक भविष्यकेँ कोना देखैत छियै?
5) मैथिली साहित्यमे अहाँक प्रवेश आकस्मिक भेल वा कि पारिवारिक-सामाजिक पृष्ठिभूमिसँ सहायता भेटल?
6) जेनरेशन गैप जेना युवा के सामंजस्य बूढ़ संग नै होइत छै से मानल गेलैए। तहिना कोनो बूढ़ लेखक संगे दोसर बूढ़ लेखक के सामंजस्यपर अपनेक की विचार अछि?
7) मैथिली आलोचना-समीक्षा-समालोचनामे एकटा वाक्य अतिप्रसिद्ध अछि जे "ई रचना वा पोथी अपना सन पहिल अछि"। एकर माने की भेलै आ ई कतेक धरि उचित छै?
8) मैथिलीमे दू उदाहरण बहुत देल जाइत छै एक जे मैथिली भाषा बहुत पुरान छै आ दोसर जे मैथिलीमे ई काज पहिल बेर हमहीं कलेहुँ। ई दूनू उदाहरण एक दोसरक उन्टा छै एहिपर अपनेक की कहब अछि? की सभ काज एखने पहिल बेर भेलैए?
9) कोनो भाषा, साहित्य, संस्कृति लेल संस्था कतेक जरूरी छै? की एक समयक बाद संस्था अप्रसांगिक भऽ जाइत छै? वर्तमानमे संस्था सभ निराश करैत अछि वा कि भरोस दैत अछि?
10) मैथिली साहित्य मे 'गुटबाजी' सभदिन सँ चर्चाक विषय रहल अछि। मुदा किछु गोटेक मुहेँ एहनो सुनबा लेल भेटल अछि हमरा, "आब कोनो गुटबाजी नहि छै। सभ घालमेल बुझू।" अपनेक की कहब अछि, एहि सन्दर्भ मे?
11) मैथिली साहित्य मे केओ ककरो द्वारा कएल नीक काजक सराहना नहि करैत देखाइत छथि। विशेष रूप सँ वरिष्ठ साहित्यकार लोकनिक कोनो उत्साहवर्धक टिप्पणी नहि अभरैत अछि, जखन कि बहुत रास नऽब आ नीक काज भऽ रहल अछि। मैथिली साहित्य सँ जुड़ल लोकक एहि बेमारीक की कारण भऽ सकैत अछि?
12) एकटा वरिष्ठ साहित्यकारक रूप मे अपने स्थापित छियै। अपने साहित्य मे रुचि रखनिहार कतेक नवागन्तुक के आगाँ बढ़बा मे सहयोग केलियनि? यथा मनोबल बढाएब, मार्गदर्शन करब।
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