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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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डॉ किशन कारीगर

अहाँ कोन गिरोह मे छी? (हास्य कटाक्ष)

बाबा बड़बड़ाइत बजैत रहै कहू त एहनो अजगुत सवाल भेलैयै? तोरा की हम डाकू ताकू बूझना जाइ छियह. हौ भागेसर भिंसरे भिसंरे भांग तांग खा मंदिर दिस एलहअ यै की? आईं केहेन बढ़िया हम कले बले मंदिर मे बैसल रहै छी, भक्त सब जल चढ़ा जेकरा दू चाइर अना दसटकिया बीसटकिआ सरद्धा मनोरथ होईत छै त से चढ़बै जाइए. सेहो मठ मंदिर आब ई भागेसर उजाइड़ के मानत की. भक्त सब जे चढ़बै जाइए तै मे स नीक मिठाई आ नमरी बिछके ई डकूबा सबटा हंसोइत के अपने नेने जाइए आ खुदरा खुदरी, बसिया जिलेबी हमरा कपार पर धेने जाइए.

आ भवडाह कते करत जे बाबा अहाँ चिंता जूइन करू ई सबटा चढौआ रूप्पैया हम मंदिर कमेटी मे जमा क देब. शिवराइतक मेला लगतै त सलिया समारोह करबै. कते मैथिली साहित्यकार सबके बजेबै कए टा सत्र आयोजित हेतै. किशन कारीगर लिखित हास्य नाटक बाबा भक्त धरधरा देब के मंचन करेबै आ संचालन हम अपने करबै. तेकरा बाद त बाबा अहाँक नांउ गिनिज बुक मे लिखबा देब की. मुदा ई पहिने कहैयैए टा परत जे बाबा अहाँ कोन गिरोह मे छी?

भागेसर पंडा के गप सुनि बाबा बोललकै हौ भागेसर तोरा माथा थाता खराप भऽ गेल छह की? कहए त हम बाबा छि त हम सबहक छियै जहिना साहित्य सर्व समाजक होइत छै. आ तोरा की हम डाकू ताकू बुझा रहलिय जे एहेन बात पूछै छह जे बाबा अहाँ कोन गिरोह मे छी. लोक, गौंआ घरूआ, भक्त सब त यैह बुझतै जे बाबा मंदिर दिस चोर डाकू सबहक बसेरा भऽ गेलयै त डरे कोई मंदिर दिस घूइर के औतै से कहू? हौ भागेसर तूं हमरा गिरोह दिया पूइछ डेरा तेरा के मंदिर स उजारह चाहै छह की? तों एकदम उकपाती भऽ गेलह यै. अखने हम तांडव करब शुरू करबह त तोहर सबटा भावट बहार कऽ देबह की. गिरोह किरिआ खा कहैत छियै आब तों जा अई ठाम स आब हमर दिमाग खराब नै करहअ. आब त मंदिरो में रहब पहले काल भऽ गेल.

बाबा के बात सुनि भागेसर बोललकै यौ बाबा हम त ठीके गप पुछलहुँ त अहूँ एतेक खौंजाएल छि. अहाँ के एक्को रति साहित्यक भान अछि. मैथिली साहित्य मे कोई अहाँ के चिन्हैतै अछि. भने कोनो गिरोह ध लेब त लगले मैथिली साहित्य मे अहाँ जगजिआर भऽ जाएब की. हमर बात हिनका बड्ड खराब लगै छैन्ह त रहू परल मंदिरे मे. बाबा तामसे खौंजाइत दमसी देने बजैत रहै हमरा नै साहित्यक भान अछि की तोरा एक्को रति नै. कहू त साहित्यकार होइ लै गिरोह मे रहअ पड़तै?

ई मैथिली वला सब साहित्यकार कम आ डकूबा सब बेसी छी. जहिना चंबल घाटी के लूटेरा मे डाकू सबहक गिरोह होइत रहै तहिना ई मैथिली वला सब गोंधिया गिरोह बनेने यै. अनि बाबा के गप सुनि भागेसर सेहो बमैक गेलै जे मैथिली गिरोह दिआ किछो कहबै त बड्ड बेजाए भऽ जाइत से कहै दै छी. बाबा बोललकै हम तोरा धमकी स डेरा जेबै की. एतबा मे बाबा आ भागेसर पंडा मे हमरा बमकी शुरू भऽ गेलै. हम अहाँ के देख लेब बाबा त धू तों की हमरा देखबह हमहीं तोहर देखार क तोरा देख लेबह की?

दुनू गोटे मे कहा कही बमका बमकी होइते रहै ताबे हम साइकिल पर बैसल मंदिर दिस पहुँचल रही. घंटी टुनटुना बजलियै कथि के एते हो हल्ला छियै. किए अहाँ दुनू मुक्कम मुक्की पर उतारू भेल छि? बाबा बोललकै हौ कारीगर तामसे हमरा देह मे आइग धेने यै आ तों की अई बीच मे मुखिया सरपंच बनै लै एलहअ यै? एम्हर फेर पंडा जी सेहो शुरू भऽ गेलै यौ बाबा गिरोह किरिया खा कहैत छि जे तामसे हमरो बिख धेने यै आई मंदिर पर किछो भऽ सकैयैए. हम कहलियै जे आहां हां हां एना नै कनि काल थमै जाउ. हम त बेलक सरबत लेने एल रही जे बाबा के चढ़ा देबै त कनी पंडा जी के सेहो थोड़े अपनो उठब लागि जाएत त एक गिलास हम अपनो ध देबै. अहाँ आ बाबा त दोसरे ताल मात्रा धेने छि. पहिले बात कि छहो से तोरा अरू बोलै जाहो? तबे ने फैसला होतै?

हमर गप सुनि बाबा हां हां के बोले लगलै हौ कारीगर बेलक सरबत त बाद मे चलतै पहिने तूं फैसला करह जे एहने सवाल पूछब होइत छै जे बाबा अहाँ कोन गिरोह मे छी? हम त बाबा छि त अपन मंदिर मे एकात भऽ बैठल रहै छि हम कोनो डाकू छि जे डकूबा जेंका गिरोह मे रहू गै. ताबे भागेसर बोललकै यौ किशन जी अहाँ त पत्रकार साहित्यकार आदमी छि अहिं कनी बाबा के समझबयौ जे मैथिली साहित्य मे गिरोह छै किने? आ सब कोनो ने कोनो गिरोह धेने मैथिली साहित्यक बेतरनी पार करै मे लागल छै. हम त बाबा स एतबा पुछलियैन जे यौ बाबा अहाँ कोन गिरोह मे छी त ई तामस फाइल भऽ गेलाह. पंडा जी के गप सुनि हमरा हंसी स रहल नै गेल.

बाबा बोला लगलै हौ कारीगर की हां हां करै मे लागल छह की मैथिली मे गिरोह की छियै से कहक बेलक सरबत बलू बाद मे पिअब. हम कहलियै यौ बाबा अहाँ मंदिर मे बाबा आ भागेसर पंडा मैथिली साहित्यक बाबा छियै. ठीके त पूछलक यै जे बाबा अहाँ कोन गिरोह मे छि. बाबा हां हां के बजलै ई भागेसर अपने जेंका हमरो डकूबा बना के मानत. हम कहलियै यौ बाबा मैथिली साहित्य मे त गिरोह आदि काल स लके अखनी तक सक्रिय छै की. एकटा बौआ त युवा पुरस्कार लोभ एतेक तक लिख देलकै जे गिरोहे मैथिलीक प्राण थीक कोनो गिरोह धेने तबे पहिचान भेटत. बाबा अकचकाइत बजलै आरो तोरी भलीके डाकूए जेंका साहित्यकार सबहक गिरोह सेहो होइ छै की? कनि सबटा गिरोह सब दिआ बुझाए दैए त.

हम कहलियै देखियौ बाबा मैथिली साहित्य मे कएटा गोंधिया गिरोह सब सक्रिय छै की. जेना वरिष्ठ साहित्यकार गिरोह दसो टा किताब नै बिकाइ छै आ लोकार्पण खेला मे बेहाल अनका साहित्यकार नै बुझतै. दोसर कवि सम्मेलन गिरोह ई सब बानरक हेंज सन कपि बनल हुलबुल केने फिरतह की. ई सब मंच पर किछो लिख बाइज दौ से कविता भऽ जाइत छै आ आन कतबो नीक लिखौ त उ गीत की कविता नै? तहिना सगर राति दीप जरय गिरोह आब दू ग्रुप मे बंटि आयोजन संख्या फरिछबै मे बेहाल. अन्हरा ज्यूरी गिरोह सब त पुरूस्कारी मनमाना करै मे बेहाल रहैयैए. तैं मे त अई बेर रूसल छै बाबा महाकाव्य लै भागेसर जी के नाम फाइनल भेलैयैए. बाबा बजलै अईं हौ कारीगर भागेसर के किताब कहां छपलैया आ नै लोक देखलकैयै त फेर कोना घोषणा भेलै. यौ बाबा मैथिली पुरस्कार के घोषणा बादो पोथी छपलैयैए की.

बाबा हां हां के बजलै हौ कारीगर मैथिली गिरोहक किरदानी सब त कहबा जोग नै कनी आनो गिरोह सब दिआ बुझाए दै. हम कहलियै हो बाबा मानकी दलाल गिरोह सब भाषा मानक शोध हो हो क जबरदस्ती सब पर सोतिआमी मानक लाधे चाह रहलौ. ई सब मैथिली मानक बहन्ने लोक बोली ठेठी राड़ आमजन समाज मैथिली के मोजर नै करअ चाहतौ. एम्हर प्रकाशन गिरोह सब पुरस्कार सटा के भाँज मे ज्यूरी संगे गोंधियागिरी खेला जे पुरूस्कार हमरे प्रकाशन के पोथी के भेटक चाही. जेना पेनड्राइब मे बाबा किताब के देल गेलै. नाटक कलाकार फिल्मकार गिरोह सब. ई सब देश परदेश मे जा नाटक टा खेलेतह भोजपूरी मैथिल फिल्म बनौतह. गाम घर लोक समाज किछ बुझबे ने केलकै तै स की?

आयोजनी होहकार ठेकेदार गिरोह सब त मिथिला मैथिली नामे खूब बेबसी करै जाइए. विद्यापति समारोह मिथिला रत्न हो हो ई समारोह उ समारोह त लिटरेचर फेस्टीवल करै जेतह. आ कई मे साहित्यकार हेबा कहेबा लै लोक सब चंदा द आ चंदा ल बाहरक गेंद बना डगराक भांटा सन ढेंगरल फिरतह. ई सब अगूआ पिछलगुआ सबके पोइस के रखै जाइए. आ होहकारी क साहित्यकार हेबाक फुफकारे लोक फूइल के तुम्मा. तहिना गलथोथरा गिरोह सब छै. कते गलथोथरा सब यथार्थ देखैतो फूइसबुक पर गिरोह बनौने कमेंट पर कमेंट क गलथोथरी केने रहत आ तेकरा वरिष्ठ साहित्यकारक दाबी वला सब सरंक्षण दै जाइत छै. तहिना गजल गिरोह बनौने छै आ प्रसिद्ध शाइर देखार चिन्हार बौआ सबके गजल लेखन सीखबह चाहै छै. आ अपने नुक्ता लिखबे ने करै छै बहर रदिफ का़फिया बेर बौक बनल रहतै आ ढा़ढरस जे उ लोक के डंइस लेतै की. आ चेला चटिआ सब हो हो कए चाबसी ई टीटही अपना के उस्ताद ग़ज़लकार बुझह लगैइए. तहिना मैथिली पत्रिका प्रकाशन गिरोह जेकर कोनो सरकुलेशन नै आ दू मास त्रैमासिक छमाहि छाइप सब अप्पन गिरोह के जिअबै के फिराक मे रहै जाइए. ओनैहिते विदेह सदेह वला सब सेहो समानान्तर साहित्य नामे गिरोह बना केस वला आ चैनउड़ा टकलाक जोड़ि के खूब प्रदर्शन मे लागल रहैए. मैथिली मे त एक पर एक डकूबा गिरोह सब भेटतह की.

हम्मे बाबा स कहलियै हो की छिरहारा खेलाई रहलहो? आबो त बोलहो ने बाबा तोंई कोन गिरोह मे छहो से बोल्हो ने कनि. बाबा हां हां के बोललकै जे हौ कारीगर तोरा त बुझले छह जे हमहूँ तोरे जेंका कोनो गिरोह मे नै छी. हमरा की साहित्यकार हेबाक कहेबाक एक्को रति लोभ यै जे मैथिली गिरोह मे रहू गै? चुपचाप कला बला अप्पन मंदिर मे बैसल रहैत छी. जहिना कारीगर तों अप्पन एकात भऽ यथार्थ लेखन मे लागल छह तहिना हमहूँ मंदिर मे बैसल रहै छी मैथिल मे भ रहल किरदानी पर जरूर बजै छी. मुदा कोनो गिरोह मे नै रहै छि. एकटा काज करहअ आब कनि भागेसर स सेहो पूइछ लहक जे उ कोन गिरोह मे छै? इ त सरदार पंडा छी सबटा भाँज भूंज त एकरा हेबे करतै की.

हम पंडा जी स पुछलियौ की हो भागेसर जी अहाँ कोन गिरोह मे छियै. भागेसर बजलै यौ किशन जी पहिने बेलक सरबत पियाउ एक गिलास बाबू के दियौन आ अपनो पीबू. दिमाग ठंढा होइए त कहैत छि. हम तीनू गोटे बेलक सरबत पियैत रही त भागेसर पंडा बजलै यौ कारीगर जी अहाँ के त बुझले यै जे हम सब गिरोह दिस रहैत छि. जेम्हर मंच पुरस्कार लोकार्पण सम्मेलन तेम्हरे हम. गिरोह मे नै रहब त मंच नै भेटत फेर अहीं आ बाबा जेंका मैथिली वला सब हमरा बाइर देत कीने? तैं हमरा जेन्हर उठब लागल हम सबदिस्सा बनल निरलज्ज भेल सब गिरोह मे रै छि.

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साहित्य अकादेमीक संकीर्ण मैथिली भाषा विभागसँ विदेह (मैथिली साहित्यक समानान्तर मंच) ऐ अर्थमे सेहो फराक अछि जे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिका सन सहभाषाकेँ संग लऽ कऽ मिथिलाक बोली-वैविध्यक समग्र चित्र देल जाइत अछि। विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक भाषा विज्ञान, रचना आ व्याकरण मैथिलीक संग देल गेल अछि मैथिलीक एकटा समानान्तर व्याकरण, रचना आ भाषा विज्ञान (ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाकेँ संग लऽ कऽ)- गजेन्द्र ठाकुर, संगे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक साहित्य ई-प्रकाशित आ समीक्षित सेहो होइत अछि।– गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक, विदेह ISSN 2229-547X
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