विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-९
मैथिली अकादमी आ 'विद्यालंकार'
मैथिली अकादमीसँ 'विद्यालंकार'क केहन-की कनेक्शन छलनि, की-की कएलनि ओ मैथिली अकादमीकेँ ठाढ़ करबालेल, तदुपरान्त एहि साहित्यिक संस्थाक अध्यक्ष रहैत कतेक-की काज सभ भेलैक, एहि सभ पर हम अपना दिससँ की लिखि सकैत छी ? कोना लिखि सकैत छी ? हमरा देखल-सुनल तऽ किछु विशेष अछि नहि। तखन पढ़लाहे विषय-बस्तु टाक सहारे एकत्रित कएल जनतब, आधार रहत एहि आलेखक।
निश्चिते बहुत रास जनतब सुरेश्वर झाक पोथी "भारतीय साहित्यक निर्माता : श्रीकांत ठाकुर विद्यालंकार" सँ भेटल अछि मुदा एहि अंकलेल हम भीमनाथ झाक लिखल एकटा आलेख "मैथिली अकादमी : महलसँ मड़ैया"सँ बहुत किछु उद्धृत करबाक नेआर कएलहुँ अछि। भीमनाथ झाक उक्त आलेख हुनकर पोथी "नाममात्र"मे संकलित छनि। बहुत नीक ढंगसँ लिखलनि अछि भीमनाथ झा। तैं ओहि आलेखक शुरुआती दू पैराग्राफ हम जस-के-तस राखब, बिनु एक्कहु टा शब्दक हेर-फेर कएनहि। मैथिली अकादमीक स्थापनाक वृत्तान्तसँ परिचित करबैत भीमनाथ झा लिखैत छथि -
"मैथिली अकादमीक स्थापना बड़ धूमधाम सँ भेल छल। तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री आ बिहारक सभसँ मातवर नेता पं. ललित नारायण मिश्र मिथिला लेल अभिनव भगीरथ भऽ गेल रहथि आ एकरा देशक उन्नत क्षेत्रक मानचित्रपर लऽ जएबा लेल विकासक गंगा बहबहि लागल रहथि ता चिता सजि गेलनि। अनुयायी लोकनि हुनकर स्वप्नकेँ साकार करबाक घोषणा कएलनि। तऽब जा सेराइत ता मैथिली अकादमीक सोहारी संयोगसँ तइपर पड़ि चुकल छल। हुनक हत्याक मासे दिनक भीतर हुनक जन्मदिवस आएल। मुख्यमंत्री केदार पाण्डेय दू फरवरी 1975 केँ मैथिलीक एक सभामे मैथिली अकादमीक स्थापनाक घोषणा कएलनि। बिहारमे सत्ता परिवर्तन भेल। डॉ. जगन्नाथ मिश्र मुख्यमंत्री भेलाह। अगिला वर्ष 02 फरवरी 1976 केँ ललित बाबूक जन्मदिवस श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल मे खूब धूमधामसँ मनाओल गेलनि। बिहारक पूर्व लोकप्रिय राज्यपाल, साहित्य-संस्कृति-प्रेमी, 'Indira is India, India is Indira'क उद्घोषक देवकान्त बरुआ मुख्य अतिथि रहथि। ओतहि ओ मैथिली अकादमीक उद्घाटन कएलनि। कैबिनेटक मोहर पछाति एगारह मार्च 1976केँ लगलैक।
श्रीकान्त ठाकुर विद्यालंकार अध्यक्ष मनोनीत भेलाह। हुनक नाम लेबे पर्याप्त थिक। मुदा नाम लेले टासँ काज नहि चलत। ओ बिहारक पत्रकारशिरोमणि छलाह, 'आर्यावर्त'क सम्पादक रहल छलाह, के. बी. सहायकेँ उखाड़ि महामाया प्रसाद सिन्हाकेँ राजसत्ता सौंपबामे 'आर्यावर्त' हुनके नेतृत्वमे केन्द्रीय भूमिका निभौने छल। पत्रकारिता जगतमे हुनक रुतबासँ राजनीतिज्ञ थरथराइत रहथि, राजनेता धखाइत रहथि। ओ राज्यपाल-नामित एम.एल.सी.क अपन टर्म पूरा कऽ लेने छलाह। मुख्यमंत्री हुनकासँ अध्यक्ष बनबाक अनुरोध कएलथिन। ओ मानि लेलथिन। निदेशकक रूपमे प्रतिनियुक्ति भेलनि सरकारी अधिकारी साहित्यकार डॉ. भगवती शरण मिश्रक, जे ओहि समयमे बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमीक निदेशक रहथि आ बादमे आइ.ए.एस. भेलाह।"
मैथिली अकादमीक स्थापना आ 'विद्यालंकार'क अध्यक्ष मनोनीत होएबाक प्रकरण भीमनाथ झाक शब्दमे स्पष्ट कऽ देलहुँ अछि। आब गप्प करब 'विद्यालंकार'क अध्यक्षता कालमे संस्था द्वारा मिथिला-मैथिलीक हितलेल उठाओल गेल ठोस डेग सभक। योजनाबद्ध ढंगसँ एकटा रूपरेखा तैयार कएल गेल, उद्देश्य तय कएल गेल, आ तखन ओकरा क्रियान्वित कएल जेबाक पूरा-पूरा प्रयास कएल गेल। एना स्टेप-बाइ-स्टेप काज सभकेँ अंजाम देल जाइत रहल 'विद्यालंकार'क अध्यक्षता कालमे। तखन ने बहुत रास उल्लेखनीय काज सभ कऽ एकटा कीर्तिमान स्थापित कएलक मैथिली अकादमी, ओहि छओ बर्खमे। 'विद्यालंकार'क अध्यक्षताक दू टर्म (तीन-तीन बरखक) वास्तवमे मिथिला-मैथिलीक उत्थानक दृष्टिकोणसँ महत्वपूर्ण रहल। कहाँदनि जाहि दिनसँ अकादमीक अध्यक्ष मनोनीत भेलाह 'विद्यालंकार', प्रतिदिन कार्यालय जएबे करथि ओ। अपन सम्पूर्ण कार्यकालमे एक्कहु दिन अनुपस्थित नहि भेलाह ओ, एहनो सुनल अछि। तैं प्रायः घरक लोक (हमर ससुर, ममिया ससुर, मसिया सासु-ससुर आ हमर पतिदेव) बेस गौरवान्वित होइत कहैत छथि जे अपन खून-पसेना सँ सिंचित कऽ मैथिली अकादमीकेँ ठाढ़ कएने छलाह ओ।
मैथिली अकादमीक स्थापनाक उपरान्त, कार्यसमिति आ सामान्य परिषद् गठित होइतहि सभसँ पहिने अकादमीक उद्देश्य तय कएल गेल। आ से तय कएल उद्देश्य पर व्यवहार रूपमे सेहो काज भेल। मात्र देखावटी वा कागजे टा पर नहि, धरातल पर सेहो काज सभ भेल। खूब काज भेल। मैथिली साहित्यक कतेको हेराएल-भोतिआएल पाण्डुलिपि सभक खोज कऽ ओकरा प्रकाशित कराओल गेल मैथिली अकादमीसँ। जीवन झा रचनावली आ श्यामानन्द रचनावली एकर उदाहरण अछि।पाण्डुलिपि आ विद्यापति पदावली सहित आनो धरोहरक संग्रह, संरक्षण एवं प्रकाशन, मैथिली अकादमीक उद्देश्यमे सँ एकटा प्रमुख उद्देश्य जे छल। से ताहि उद्देश्य केँ पूर्णता प्रदान कएल जा रहल छलए। विद्यापतिक संस्कृत ग्रन्थ 'विभागसार' पं. गोविन्द झाक सम्पादनमे मूल सहित मैथिली अनुवाद मैथिली अकादमी-ग्रन्थमालाक प्रथम पुष्पक रूपमे प्रकाशित भेल। वर्णरत्नाकर, विद्यापति गीतावली, चन्दा झा आ लादासक रामायण, मिथिलातत्त्वविमर्श प्रभृति दुर्लभ साहित्यनिधिक पुनर्मुद्रणक अतिरिक्त किसुन रचनावली, श्यामानन्द रचनावली, राजकमल साहित्य, हरिमोहन झा आ
लक्ष्मीपति सिंहक आत्मकथा, सुभद्र झाक यात्रा संस्मरण एवं पत्रात्मक शैलीमे निबन्ध संग्रह मैथिली भाषा एवं व्याकरण ग्रन्थ - ई सभ मैथिलीक निधि थिक जे मैथिली अकादमीक भण्डारकेँ समृद्ध कएलक, एहन कहलनि अछि भीमनाथ झा अपन आलेख "मैथिली अकादमी : महलसँ मड़ैया"मे।
पाण्डुलिपि आ विद्यापति पदावली सहित आनो धरोहरक संग्रह, संरक्षण एवं प्रकाशनक अतिरिक्त मैथिली अकादमीक आरो उद्देश्य सभ छल, जाहिमे प्रमुख छल सर्जनात्मक एवं अन्य रचनाक प्रकाशन एवं विक्रयक प्रबन्ध। संगहि पत्रिका-प्रकाशन, व्याख्यानमालाक आयोजन, पुरस्कार योजना, मिथिला-मैथिलीक साहित्य इतिहास लेखन, भाषा-सर्वेक्षण, अनुसन्धान एवं अन्वेषण, कोषनिर्माण, संगीत-नाटकादिक प्रदर्शन-मंचन, साधनरहित प्रतिभाशाली लेखक-कवि-कलाकारकेँ पुरस्कार, प्रोत्साहन एवं हुनक रचनाकेँ प्रकाशनक दिशामे प्रयत्न, वृद्ध असहाय किन्तु महत्वपूर्ण साहित्यसेवीक हेतु मासिक वृत्ति प्रभृति।
उक्त सभटा उद्देश्यक पूर्ति भेल, से दावा तऽ नहि कएल जा सकैछ मुदा अधिकांश उद्देश्य पर गम्भीरतासँ काज भेल। सम्मेलन सालमे तीन-चारिटा होइतहि छल। भाषणमाला/व्याख्यानमालाक आयोजन सेहो होइतहि छल। 'स्मृतिसंध्या' नामसँ एकटा आर चर्चित कार्यक्रम आरम्भ कएल गेल छलए अकादमीक तत्वावधानमे। दिवंगत श्रेष्ठ साहित्यकारक स्मृतिलेल ई आयोजन समर्पित छलैक।
समग्रतामे कहल जाए तऽ 'विद्यालंकार'क अध्यक्षता कालमे संस्थाक 'फोकस' साहित्यकारक संरक्षण, शोध-संवादक परम्परा स्थापित करब आ मैथिली वर्तनीक मानकीकरण करबा दिस रहल। तैं श्रीकान्त ठाकुर ‘विद्यालंकार’केँ मैथिली अकादमीक एहन उन्नायकक रूपमे स्मरण कएल जाइत अछि जे भाषा-सेवाकेँ मात्र लेखन धरि सीमित नहि राखि ओकरा स्थायी संस्थागत आधार देलनि।
श्रीकान्त ठाकुर ‘विद्यालंकार’ मैथिली अकादमी, पटनाक अध्यक्षे मात्र नहि छलाह, अपितु ओकर निर्माता छलाह। हुनकर कार्यकालमे अकादमी मैथिली भाषा, साहित्य आ शोधक प्रभावी संस्थाक रूपमे अपन अस्तित्व बनौलक। तैं कहैत छथि घरक लोक, अपन खून-पसेना सँ सिंचित कऽ मैथिली अकादमीकेँ ठाढ़ कएने छलाह ओ।
दुःखक बात जे 'विद्यालंकार'क खून-पसेना सँ सिंचित मैथिली अकादमी 2022 सँ बिनु डाइरेक्टर, बिनु अध्यक्षे के चलि रहल छलए। चलि की रहल छलए, घिसिऔर काटि रहल छलए। अन्ततः ताला लटका देल गेल। एकर पाछाँक कारण सरकारी उदासीनता, प्रशासनिक लापरवाही, स्टाफक कमी आ फंडक कमी, कहल जा रहल अछि। आशा करैत छी शीघ्रातिशीघ्र मैथिली अकादमी सुचारू रूप सँ क्रियाशील होएत आ नानाजी श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'क आत्मा प्रफुल्लित हेतनि।
संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी-
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर
'विद्यालंकार'एवं
हुनक परिवारक योगदान-1
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर
'विद्यालंकार'एवं
हुनक परिवारक योगदान-2
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर
'विद्यालंकार'एवं
हुनक परिवारक योगदान-3
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर
'विद्यालंकार'एवं
हुनक परिवारक योगदान-4
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर
'विद्यालंकार'एवं
हुनक परिवारक योगदान-5
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर
'विद्यालंकार'एवं
हुनक परिवारक योगदान-6
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर
'विद्यालंकार'एवं
हुनक परिवारक योगदान-7
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-8
विद्यालंकारजीसँ पहिने विदेहपर व्यासजीक कृतित्वपर कल्पनाजी लीखि रहल छथि। पाठक व्यासजीपर प्रकाशित एखन धरिक सभ खंड निच्चा केर लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकै छथि-
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-3
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-6
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-7
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-8
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-9
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-10
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-11
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-12
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-13
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-14
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-15
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-16
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-17
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-18
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-19
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-20
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-21
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-22
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-23
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-24
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा
'व्यास'
एवं हुनक परिवारक योगदान-25
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