मुख्य सामग्रीपर जाउ · Skip to main content
VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
Twitter / X Facebook Archive
विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
विदेह ई पत्रिकाक नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू: [Windows / Linux: Ctrl + F5 / Ctrl + Shift + R  ·  macOS: Command (Cmd) + Option + E + F5 / hold Shift + Click the Refresh button]

डा धनाकर ठाकुर

चेतना समिति द्रोणाचार्य रमणजी

 

रमानी पर पोथी निकलए आओर हम नहि लिखी से सम्भव नहि आओर हुनक समग्र मूल्यांकन सन झंझटटिया काज केओ करत नहि। किन्तु रमणजी आधुनिक मैधिली काल काल जकरा हम 1973 सँ जनैत छी जहिया हमरा द्वारा वायरस पर मैथिली भाषा में उत्कृष्ट लेखक सृजन भए गेल संभवतः रमणीक साहित्यिक काल कहाओत। जाहिमे मैथिलीक राजदरबारी चेतना समितिक दरबारमे गुरुसम्पादकीय रोलमे रहलाह निर्विवाद, मधुर, सौम्य मैथिलीक बुद्धिमत्ताक प्रतीक प्रस्तुतकर्ता तेँ जिनकर द्रोणप्रभामंडलीमे अनेक चेला चीनी भए गेलाह किन्तु श्वांसमो मै दिली बांचनिहार गुरु गुड़हि रहि गेलाह बिना साहित्य अकादमी पुरस्कार पौने लगातार मैथिली लिखैत नगर गाम डगर डगर सगर रातिमे मैथिली दीपक जरबैत जँ आधुनिक मैथिली आइ साहित्यिकरूपमे जे-जेना अछि ओहिमे काेनहुँ मैथिली प्राध्यापकक अपेक्षा गुरूतर काज केने छथि रिजर्व बैंक कर्मचारी रमणजी जे एतेक रिजर्व रहैत छथि कि केओ हिनका बुझिए नहि पाएल जे मैथिली लेल की-की रिजर्वक रखने छथि, जकर एकहु मैथिली पोथी निकलल ओकरा सीआरआर रेशियो बीस गुणा बधाइ जन्मतिथिक वा याद मरलक तेँ ने गुरु द्रोणाचार्य जिनक अधिक पटनिया शिष्य यदि कौरवसम नहि कही क्वचित पांडवसम तथापि जहिया कहिओ मैथिली राज्यसभाक विवरण लिखल जैत मैथिलीक लालू दुःशासनीय चीरहरण भेल कोनहुँ प्रतिरोध नहि गुरु द्रोणाचार्य आँखि मुनि रहबाक अतिरिक्त की करितां, मिथिला राज्यक बात चेतना समिति लेल सांढ़क लाल कपड़ा यद्यपि ओहि भवनमे डा जयकान्त मिश्रकेँ संक्षक मिथिला राज्य संघर्ष समितिक स्थापना हमरा द्वारा 8.1.1995 भेल आओर हम प्रायः समितिक द्वारा एहि वा जाह्नवी कारणसँ बारल रहल होइ रमणजीक हृदयमे ओतेक जे कोनहुँ अमैथिलहुँ छात्र भोरमे परीक्षा देब जाइत बाथरूम जेबाक आज्ञा मांगलिक बादमे हमर नाम लेलक स्नान-जलपान करा अज्ञातहुँकेँ पठौनिहार उदार व्यक्तित्व जिनक हुनकरहि सन लोक चलते ने आइ मैथिली वा काल्हि मिथिला राज्य होत जाहि लेल बिना संग चेतना समितिक प्रतिबद्धता वांछित आओर एहि एकपंक्तीय लेखन एहि रम्य, सुरम्य मैथिली लेखक, सम्पादक, समालोचक, संगठक रमणजीकँ जिनक बिना मैथिलीक आधुनिक अर्धशताब्दीक कोनहुँ आकलन अपूर्णहि मानल जैत ९े कोनहुँ पुरस्कारसँ ऊपर वस्तु भए गेलाह जिनक नाम पर आइ ने काल्हि यैह समितिक पुरस्कार हैत भनेर या हम देखे रहा वा नहि।

 

अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।

साहित्य अकादेमीक संकीर्ण मैथिली भाषा विभागसँ विदेह (मैथिली साहित्यक समानान्तर मंच) ऐ अर्थमे सेहो फराक अछि जे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिका सन सहभाषाकेँ संग लऽ कऽ मिथिलाक बोली-वैविध्यक समग्र चित्र देल जाइत अछि। विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक भाषा विज्ञान, रचना आ व्याकरण मैथिलीक संग देल गेल अछि मैथिलीक एकटा समानान्तर व्याकरण, रचना आ भाषा विज्ञान (ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाकेँ संग लऽ कऽ)- गजेन्द्र ठाकुर, संगे विदेहमे ठेठी, अंगिका आ बज्जिकाक साहित्य ई-प्रकाशित आ समीक्षित सेहो होइत अछि।– गजेन्द्र ठाकुर, सम्पादक, विदेह ISSN 2229-547X
नव विदेह अंक — मासमे दू बेर · New Videha Issue — twice monthly  ·  ई-पत्र सदस्यता · Email subscription  ·  RSS feed