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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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अशोक कुमार ठाकुर

किछु गजल-गीत

१
मैथिली गजल
कहलो नहि जाइत अछि

मतला


ई ग़म नहि जे ग़म सहलो नहि जाइत अछि,
पीर ई जे ककरो कहलो नहि जाइत अछि॥

हृदयमे उठैत अछि पीड़ाक बड़का लहर,
नयनक नोर मुदा बहलो नहि जाइत अछि॥

हँसीक ओटमे राखल अछि कतेक पीड़ा,
सभकेँ अपन व्यथा कहलो नहि जाइत अछि॥

किछु घाव समयक देल एहन गहिर अछि,
सभ घाव जगकेँ देखेलो नहि जाइत अछि॥

अपनहि लोक जखन अनजान बनि जाइत अछि,
तखन मनक बात सभ कहलो नहि जाइत अछि॥

कतेक बेर मन करैत अछि जोर सँ कानब,
मुदा नोर नयन सँ बहलो नहि जाइत अछि॥

किछु भार साँससँ भारी भऽ जाइत अछि,
सभ भार माथ पर लऽ चललो नहि जाइत अछि॥

जखन कियो मनक भाषा बुझि नहि पबैत अछि,
तखन पीड़ा शब्दमे ढरलो नहि जाइत अछि॥

किछु सम्बन्ध मौनक दीप जकाँ जरैत अछि,
ओकर बात शब्दमे सजेलो नहि जाइत अछि॥

अशोक, ई हृदय सेहो अचरज करैत अछि,
हर पीड़ा जगसँ कहलो नहि जाइत अछि॥

२
अहाँके की लिखू?

मतला


अहाँके अपन लिखू कि अहाँक तकदीर लिखू,
अहाँके सपना लिखू कि मनक तहरीर लिखू।

अहाँ हमर प्रिय छी, हमर हृदयक नेह छी,
अहाँके प्रेम लिखू कि प्रेमक तासीर लिखू?

अहाँक मुस्कानमे जे सुख भेटैत अछि हमरा,
ओहि सुखक पलके लिखू कि तस्वीर लिखू?

अहाँ दूर छी, तैयो हृदयक बहुत लग छी,
अहाँक दूरी लिखू कि भेटक तकदीर लिखू?

रातिक निस्तब्धतामे यादि अहाँक आबि जाय,
अहाँके निन्न लिखू कि नेहक खुमार लिखू?

अहाँ हमर चुप्पी सेहो बुझि लैत छी,
अहाँके आवाज लिखू कि मनक तासीर लिखू?

जे बात अहाँसँ कहबाक रहि गेल मनमे,
ओहि मौनक कथा लिखू कि मनक तहरीर लिखू?

अहाँक नयनमे जे अपनापन देखाइत अछि,
ओहि नयनक छवि लिखू कि तस्वीर लिखू?

अहाँ हमर सपना छी, अहाँ हमर विश्वास छी,
अहाँके सत्य लिखू कि मनक तासीर लिखू?

शब्द बहुत छथि, मुदा भाव समेटल नहि जाय,
अहाँके पूर्ण लिखू कि अधूर तहरीर लिखू?

मकता

अशोकक कलम अहाँक नामपर रुकि जाइत अछि,
अहाँके प्रिय लिखू कि हृदयक तस्वीर लिखू?
अहाँए कहू, एहि नेहके नाम आखिर की दिअ—
अहाँके प्रेम लिखू कि जीवनक तकदीर लिखू?

३
स्वभावसँ नंगे छथि
मतला


पहिने लोक अभावमे नंगे छल,
आब स्वभावसँ नंगे छथि।
तन पर वस्त्र हजारो अछि,
मुदा विचारसँ नंगे छथि॥

पहिने झोपड़ीक जीवन छल,
मुदा मोन उदार छल।
आब महल-अटारी बीच रहि,
व्यवहारसँ नंगे छथि॥

पहिने आधा रोटी खाइत,
आधा आनकेँ दऽ देत।
आब भरल भण्डारक मालिक,
मुदा बाँटबमे नंगे छथि॥

पहिने लाज-धरम बचल छल,
मान-सम्मानक बात छल।
आब लोभक अन्हारमे डूबल,
चरित्रसँ नंगे छथि॥

पहिने दुःखमे साथ ठाढ़ रहथि,
सुखमे सभकेँ बाँटि लेथि।
आब स्वार्थक घेरामे रहि,
सम्बन्धसँ नंगे छथि॥

दर्पण लऽ कऽ अपने देखू,
दोष दोसरमे खोजू नहि।
समय बदलल अछि एहन जे,
कतेक लोक भीतरसँ नंगे छथि॥

अशोक समयक ई तस्वीर,
दर्पण जकाँ देखबैत अछि।
तन ढँकल अछि वस्त्रसँ, मुदा
मन-विचार नंगे छथि॥

४
मिथिला हमर महान

पाग, पान आ मखानसँ,
महकल मिथिला धाम।
माछ-दहीक संस्कृति सँ,
जगमे उज्ज्वल नाम॥

मधुश्रावणीक पावन पर्व,
नेहक बहय धार।
जनक-जानकीक पावन भूमि,
मिथिला अनुपम धाम॥

शादी, मुंडन, उपनयन सभ,
मंगल रीत अपार।
संस्कारक अमूल्य धरोहर,
मिथिलाक श्रृंगार॥

कोहबर, सोहर, लग्नक गीत,
गूँजय घर-आँगन।
लोकगीतमे बसल अछि,
मिथिलाक अपन जीवन॥

विद्यापतिक मधुर वाणी,
ज्ञानक निर्मल धार।
पान, माछ आ मखानसँ,
भरल स्नेह-भंडार॥

जुड़ि-शीतल, सामा-चकवा,
लोक-पर्व अनुपम रंग।
मिथिलाक माटिक गंधमे,
बसल नेहक उमंग॥

जनकपुरीक गौरव-गाथा,
संस्कृतिक अनुपम थाति।
अपन परंपरा सँ मिथिला,
आज धरि जगमे छाती॥

माछ, मखान आ पानसँ,
मधुर बनल पहचान।
संस्कारक राजधानी हमर,
मिथिला अछि महान॥


-अशोक कुमार ठाकुर; ग्राम–करमौली, पोस्ट–करमौली,थाना–खजौली, जिला–मधुबनी (बिहार)मोबाइल नंबर:-8709568993,जनसेवा:-एस.डी.आर.एफ,मे कार्यरत सिपाही।

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