विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

की अछि दिल्लीक जी.बी. रोडक कोठाक सत

विनीत उत्पल · 2010-10-15 · अंक 68

की अछि दिल्लीक जी.बी. रोडक कोठाक सत
हिन्दू मिथ कथामे वर्णित नर्क आआ॓र आ॓तुक्का ‘यातना’ साकार रूपमे देखबाक इच्छा होअए तँ दिल्लीक जीबी रोडक अगल-बगलके 25 टा बिल्डिंगमे रहैबला पांच हजार सेक्सवर्करकेँ देखि आउ। एहि नर्कसँ निजात दियाबैक सरकारी प्रयासक काजकेँ लऽ कऽ जहिना एकटा सेक्सवर्कर परवीनसँ पुछैत छी, आ॓ तमैक कऽ कहैत अछि, ‘एतए एतेक किछु भोगलहुँ अछि जे आ॓ नहि जानैत अछि। कतय के सरकार आआ॓र कोन सरकार?’ सरकार अछि तँ हम एतए टा मांगैत अछि जे आ॓ हमरा जीबैले दिअए।
धंधाक ‘नर्क’ केँ आ॓ बुझाबैत अछि, ‘देह बेचि कऽ जे टा पैसा मिलैत अछि आ॓करा छह टा हिस्सा होइत अछि, कोठा मालकिन, दलाल, पुलिस, राशन कार्ड मालिक, सूदखोर आआ॓र गुंडा।’ देहमंडीक गणित ई अछि जे सौ टकामे हिनकर हिस्सा मात्र पंद्रह टका आबैत अछि। एहि पाइमे हुनका परिवार चलबै पड़ैत अछि, ग्राहक लेल सजय-संवरै पड़ैत अछि आ ग्राहकक संसर्गसँ सौगातमे भेटल बीमारीक इलाज सेहो करए पड़ैत अछि। बाकी 85 टका दलाल, कोठाक मालकिन आआ॓र पुलिस सभक हफ्तामे बँटि जाइत अछि। ई केकरो मजबूरीपर बेइमानीसँ फलैत-फूलैत धंधा अछि। सरकारक नजरिमे ई धंधा दिल्लीमे केबल जीबी रोडपर भऽ रहल अछि, मुदा हयात होटलक इलाका हो वा लक्ष्मीनगर, पटेलनगर आ खानपुर जिस्मफरोशीक अड्डा बनल अछि। जीबी रोडपर दुकानक बीचसँ गुजरैबला अन्हार सीढ़ीक दरवाजापर लाल रंगसँ लिखल अछि, ‘दलालों और जेबकतरों से सावधान’। मुदा जिस्मक भूखक आगू ई चेतावनी बेइमान लागैत अछि। अहि कोठापर हमर भेंट होइत अछि, विमला, नसरीन, बबीता, सीता, परवीन, फरहाना आदिसँ जे दिनराति घुटैत रहैत अछि आ लड़ैत अछि अप्पन जिनगीसँ। देह व्यापार गैर कानूनी होएबाक कारण ई सभ दिनक उजालामे सामान कीनैलै नहि जाइत अछि। राशन बला मिट्टीक तेलमे मिलावट कऽ कऽ दैत अछि आ नापतौलमे बेइमानी करैत अछि। ताहिसँ ई सभ कमला मार्केट जाइत अछि बाजार करै लेल जाहिसँ आ॓तए कियो हिनका चिन्हि नहि लिअए। स्वीपर हिनकासँ घूस मांगैत अछि आ नहि देलापर सीढ़ीपर कूड़ा-कचरा फेंकि दैत अछि। एतए पांच हजार सेक्स वर्करमे सँ 12 सए वोटरक आइ-कार्ड तऽ बनि गेल अछि, आब आ॓ वोटर अछि। एकर बादो लाइमलाइटमे आबैसँ डरैत अछि जे समाज हुनका सभकेँ बारि नहि दिअए। एहन सेक्सवर्कर जे मजबूरवश अपना लेल फैसला कऽ कऽ एहि धंधामे उतरल अछि आआ॓र हुनकर घरबला एहि धंधासँ अनजान अछि, आ॓ सेहो अप्पन तस्वीर उजागर होएबासँ डरैत अछि। दूर-दूरसँ आएल लड़की पावनि-त्योहार, शादी-ब्याहक मौका्पर घर तँ जाइत अछि मुदा अप्पन धंधाकेँ लऽ कऽ केकरोसँ गप नहि करैत अछि। फोटो खिचाबैसँ एहि लेल मना करैत अछि। ई सेक्सवर्कर धंधाक पाइ-पाइ हिसाब बताबैत अछि जे कॉलगर्लक धंधा पनपैसँ हुनकर धंधाक रौनक कम भऽ गेल अछि। आ॓ पांच हजार टका महीना कमाबैत अछि जाहिमे 1500 टका बच्चापर खर्च भऽ जाइत छै। एक हजार टका कपड़ा आ मेकअपमे खत्म भऽ जाइत छै। संगे एक हजार टका रेंट दिअए पड़ैत छै। खाए-पीब के जे पैसा बचैत छै आ॓करा घर पठा दैत अछि। एकरामे सभकेँ अप्पन बच्चाक परवरिशक खास ख्याल छै। कियो-कियो अप्पन बच्चाकेँ एम.सी.डी. स्कूलमे नहि भेजि कऽ मंटो रोड लग प्राइवेट स्कूलमे भेजैत अछि आ मास्टरसँ कहैत अछि जे हुनकर धंधाक गप बच्चा लग नहि करू। कतेक सेक्सवर्कर एहनो अछि जे अप्पन धंधाक भेद बच्चाक लग खुजि नहि जाए, एकर डरसँ अपनासँ दूर बोर्डिंगमे राखि कऽ बच्चाकेँ पढ़ा-लिखा रहल अछि। देहक बाजार सर्वधर्म समभावपर चलैत अछि। जी.बी. रोडपर हनुमान मंदिर आआ॓र मस्जिद एकहि इलाकामे अछि। एक कमरा्मे मक्का-मदीनाक फोटो अछि तहि बगलमे हिन्दू देवी-देवताक कएक टा फोटो टांगल अछि। बालकनीमे लागल तुलसी आआ॓र मनीप्लांटक गाछ एहि गपक गवाह छल जे देहव्यापारक नहि कोनो धर्म होइत अछि आआ॓र नहि कोनो जाति होइत अछि। एतए सभक बस एक्के टा जद्दोजहद अछि, जिनगी गुजारैक।
गजेन्द्र ठाकुर
पिता-स्वर्गीय कृपानन्द ठाकुर, माता-श्रीमती लक्ष्मी ठाकुर, जन्म-स्थान-भागलपुर ३० मार्च १९७१ ई., मूल-गाम-मेंहथ, भाया-झंझारपुर,जिला-मधुबनी।

लेखन: कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सात खण्ड- खण्ड-१ प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना, खण्ड-२ उपन्यास-(सहस्रबाढ़नि), खण्ड-३ पद्य-संग्रह-(सहस्त्राब्दीक चौपड़पर), खण्ड-४ कथा-गल्प संग्रह (गल्प गुच्छ), खण्ड-५ नाटक-(संकर्षण), खण्ड-६ महाकाव्य- (१. त्वञ्चाहञ्च आ २. असञ्जाति मन ), खण्ड-७ बालमंडली किशोर-जगत कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नामसँ।

मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी-मैथिली शब्दकोशक ऑन लाइन आ प्रिंट संस्करणक सम्मिलित रूपेँ निर्माण। पञ्जी-प्रबन्धक सम्मिलित रूपेँ लेखन-शोध-सम्पादन आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यंतरण "जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी. सँ २००९ ए.डी.)-मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध" नामसँ।

मैथिलीसँ अंग्रेजीमे कएक टा कथा-कविताक अनुवाद आ कन्नड़, तेलुगु, गुजराती आ ओड़ियासँ अंग्रेजीक माध्यमसँ कएक टा कथा-कविताक मैथिलीमे अनुवाद।

उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) क अनुवाद १.अंग्रेजी ( द कॉमेट नामसँ), २.कोंकणी, ३.कन्नड़ आ ४.संस्कृतमे कएल गेल अछि; आ एहि उपन्यासक अनुवाद ५.मराठी आ ६.तुलुमे कएल जा रहल अछि, संगहि एहि उपन्यास सहस्रबाढ़निक मूल मैथिलीक ब्रेल संस्करण (मैथिलीक पहिल ब्रेल पुस्तक) सेहो उपलब्ध अछि।

कथा-संग्रह(गल्प-गुच्छ) क अनुवाद संस्कृतमे।

अंतर्जाल लेल तिरहुता आ कैथी यूनीकोडक विकासमे योगदान आ मैथिलीभाषामे अंतर्जाल आ संगणकक शब्दावलीक विकास।
शीघ्र प्रकाश्य रचना सभ:-१.कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सात खण्डक बाद गजेन्द्र ठाकुरक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक-२ खण्ड-८ (प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना-२) क संग, २.सहस्रबाढ़नि क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर उपन्यास स॒हस्र॑ शीर्षा॒ , ३.सहस्राब्दीक चौपड़पर क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर पद्य-संग्रह स॑हस्रजित् ,४.गल्प गुच्छ क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर कथा-गल्प संग्रह शब्दशास्त्रम् ,५.संकर्षण क बाद गजेन्द्र ठाकुरक दोसर नाटक उल्कामुख ,६. त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन क बाद गजेन्द्र ठाकुरक तेसर गीत-प्रबन्ध नाराश‍ं॒सी , ७. नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक तीनटा नाटक- जलोदीप, ८.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक पद्य संग्रह- बाङक बङौरा , ९.नेना-भुटका आ किशोरक लेल गजेन्द्र ठाकुरक खिस्सा-पिहानी संग्रह- अक्षरमुष्टिका ।
सम्पादन: अन्तर्जालपर विदेह ई-पत्रिका “विदेह” ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/ क सम्पादक जे आब प्रिंटमे (देवनागरी आ तिरहुतामे) सेहो मैथिली साहित्य आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि- विदेह: सदेह:१:२:३:४ (देवनागरी आ तिरहुता)।
ई-पत्र संकेत- ggajendra@gmail.com
मैथिली उपन्यासपर अंग्रेजी साहित्यक प्रभाव
उपन्यासक आरम्भ: वाणभट्टक कादम्बरी राजा शूद्रकक विदिशानगरीक वर्णनसँ प्रारम्भ होइत अछि। एकटा चाण्डाल अतीव सुन्दरी कन्या वैशम्पायन नाम्ना ज्ञानी सुग्गाकेँ लेने दरबार अबैत अछि आ प्रारम्भ होइत अछि सुग्गाक खिस्सा। चांडालक बस्ती पक्कणमे कियो भिखमंगा नै, कियो चोर नै, ओतुक्का राजा व्याघ्रदेव स्वयं रस्सी बँटैत छथि। संस्कृतक एहि उपन्यास नामसँ मराठीमे उपन्यासकेँ कादम्बरी कहल जाइत अछि। उपन्यासक बुर्जुआ प्रारम्भक अछैत एहिमे एतेक जटिलता होइत अछि जे एहिमे प्रतिभाक नीक जकाँ परीक्षण होइत अछि। उपन्यास विधाक बुर्जुआ आरम्भक कारण सर्वांतीजक “डॉन क्विक्जोट”, जे सत्रहम शताब्दीक प्रारम्भमे आबि गेल रहए, केर अछैत उपन्यास विधा उन्नैसम शताब्दीक आगमनसँ मात्र किछु समय पूर्व गम्भीर स्वरूप प्राप्त कऽ सकल। उपन्यासमे वाद-विवाद-सम्वादसँ उत्पन्न होइत अछि निबन्ध, युवक-युवतीक चरित्र अनैत अछि प्रेमाख्यान, लोक आ भूगोल दैत अछि वर्णन इतिहासक, आ तखन नीक- खराप चरित्रक कथा सोझाँ अबैत अछि। कखनो पाठककेँ ई हँसबैत अछि, कखनो ओकरा उपदेश दैत अछि। मार्क्सवाद उपन्यासक सामाजिक यथार्थक ओकालति करैत अछि। फ्रायड सभ मनुक्खकेँ रहस्यमयी मानैत छथि। ओ साहित्यिक कृतिकेँ साहित्यकारक विश्लेषण लेल चुनैत छथि तँ नव फ्रायडवाद जैविकक बदला सांस्कृतिक तत्वक प्रधानतापर जोर दैत देखबामे अबैत छथि। नव-समीक्षावाद कृतिक विस्तृत विवरणपर आधारित अछि। एहि सभक संग जीवनानुभव सेहो एक पक्षक होइत अछि आ तखन एतए दबाएल इच्छाक तृप्तिक लेल लेखक एकटा संसारक रचना करै छथि जाहिमे पाठक यथार्थ आ काल्पनिकताक बीचक आड़ि-धूरपर चलैत अछि।
अंग्रेजी उपन्यासक वाद: उत्तर आधुनिक, अस्तित्ववादी, मानवतावादी, ई सभ विचारधारा दर्शनशास्त्रक विचारधारा थिक। पहिने दर्शनमे विज्ञान, इतिहास, समाज-राजनीति, अर्थशास्त्र, कला-विज्ञान आ भाषा सम्मिलित रहैत छल। मुदा जेना-जेना विज्ञान आ कलाक शाखा सभ विशिष्टता प्राप्त करैत गेल, विशेष कए विज्ञान, तँ दर्शनमे गणित आ विज्ञान मैथेमेटिकल लॉजिक धरि सीमित रहि गेल। दार्शनिक आगमन आ निगमनक अध्ययन प्रणाली, विश्लेषणात्मक प्रणाली दिस बढ़ल। मार्क्स जे दुनिया भरिक गरीबक लेल एकटा दैवीय हस्तक्षेपक समान छलाह, द्वन्दात्मक प्रणालीकेँ अपन व्याख्याक आधार बनओलन्हि। आइ-काल्हिक “डिसकसन” वा द्वन्द जाहिमे पक्ष-विपक्ष, दुनू सम्मिलित अछि, दर्शनक (विशेष कए षडदर्शनक- माधवाचार्यक सर्वदर्शन संग्रह-द्रष्टव्य) खण्डन-मण्डन प्रणालीमे पहिनहिसँ विद्यमान छल। से इतिहासक अन्तक घोषणा कएनिहार फ्रांसिस फुकियामा -जे कम्युनिस्ट शासनक समाप्तिपर ई घोषणा कएने छलाह- किछु दिन पहिने एहिसँ पलटि गेलाह। उत्तर-आधुनिकतावाद सेहो अपन प्रारम्भिक उत्साहक बाद ठमकि गेल अछि। अस्तित्ववाद, मानवतावाद, प्रगतिवाद, रोमेन्टिसिज्म, समाजशास्त्रीय विश्लेषण ई सभ संश्लेषणात्मक समीक्षा प्रणालीमे सम्मिलित भए अपन अस्तित्व बचेने अछि। साइको-एनेलिसिस वैज्ञानिकतापर आधारित रहबाक कारण द्वन्दात्मक प्रणाली जेकाँ अपन अस्तित्व बचेने रहत।आधुनिक कथा-उपन्यास अछि की? ई केहन होएबाक चाही? एकर किछु उद्देश्य अछि आकि होएबाक चाही? आ तकर निर्धारण कोना कएल जाए ? कोनो कथा-उपन्यासक आधार मनोविज्ञान सेहो होइत अछि। कथाक उद्देश्य समाजक आवश्यकताक अनुसार आ कथा यात्रामे परिवर्तन समाजमे भेल आ होइत परिवर्तनक अनुरूपे होएबाक चाही। मुदा संगमे ओहि समाजक संस्कृतिसँ ई कथा स्वयमेव नियन्त्रित होइत अछि। आ एहिमे ओहि समाजक ऐतिहासिक अस्तित्व सोझाँ अबैत अछि।जे हम वैदिक आख्यानक गप करी तँ ओ राष्ट्रक संग प्रेमकेँ सोझाँ अनैत अछि। आ समाजक संग मिलि कए रहनाइ सिखबैत अछि।जातक कथा लोक-भाषाक प्रसारक संग बौद्ध-धर्म प्रसारक इच्छा सेहो रखैत अछि।मुस्लिम जगतक कथा जेना रूमीक “मसनवी” फारसी साहित्यक विशिष्ट ग्रन्थ अछि जे ज्ञानक महत्व आ राज्यक उन्नतिक शिक्षा दैत अछि।आजुक कथा एहि सभ वस्तुकेँ समेटैत अछि आ एकटा प्रबुद्ध आ मानवीय (!) समाजक निर्माणक दिस आगाँ बढ़ैत अछि। आ जे से नहि अछि तँ ई ओकर उद्देश्यमे सम्मिलित होएबाक चाही। आ तखने कथाक विश्लेषण आ समालोचना पाठकीय विवशता बनि सकत।कम्यूनिस्ट शासनक समाप्ति आ बर्लिनक देबालक खसबाक बाद फ्रांसिस फुकियामा घोषित कएलन्हि जे विचारधाराक आपसी झगड़ासँ सृजित इतिहासक ई समाप्ति अछि आ आब मानवक हितक विचारधारा मात्र आगाँ बढ़त। मुदा किछु दिन पहिनहि ओ एहि मतसँ आपस भऽ गेलाह आ कहलन्हि जे समाजक भीतर आ राष्ट्रीयताक मध्य एखनो बहुत रास भिन्न विचारधारा बाँचल अछि। तहिना उत्तर आधुनिकतावादी विचारक जैक्स देरीदा भाषाकेँ विखण्डित कए ई सिद्ध कएलन्हि जे विखण्डित भाग ढेर रास विभिन्न आधारपर आश्रित अछि आ बिना ओकरा बुझने भाषाक अर्थ हम नहि लगा सकैत छी।मनोविश्लेषण आ द्वन्दात्मक पद्धति जेकाँ फुकियामा आ देरीदाक विश्लेषण सेहो संश्लेषित भए समीक्षाक लेल स्थायी प्रतिमान बनल रहत।आ संवादक पुनर्स्थापना लेल कथाकारमे विश्वास होएबाक चाही- तर्क-परक विश्वास आ अनुभवपरक विश्वास, जे सुभाषचन्द्र यादवमे छन्हि। प्रत्यक्षवादक विश्लेषणात्मक दर्शन वस्तुक नहि, भाषिक कथन आ अवधारणाक विश्लेषण करैत अछि से सुभाषजीक कथामे सर्वत्र देखबामे आओत। विश्लेषणात्मक अथवा तार्किक प्रत्यक्षवाद आ अस्तित्ववादक जन्म विज्ञानक प्रति प्रतिक्रियाक रूपमे भेल। एहिसँ विज्ञानक द्विअर्थी विचारकेँ स्पष्ट कएल गेल। प्रघटनाशास्त्रमे चेतनाक प्रदत्तक प्रदत्त रूपमे अध्ययन होइत अछि। अनुभूति विशिष्ट मानसिक क्रियाक तथ्यक निरीक्षण अछि। वस्तुकेँ निरपेक्ष आ विशुद्ध रूपमे देखबाक ई माध्यम अछि। अस्तित्ववादमे मनुष्य-अहि मात्र मनुष्य अछि। ओ जे किछु निर्माण करैत अछि ओहिसँ पृथक ओ किछु नहि अछि, स्वतंत्र होएबा लेल अभिशप्त अछि (सार्त्र)। हेगेलक डायलेक्टिक्स द्वारा विश्लेषण आ संश्लेषणक अंतहीन अंतस्संबंध द्वारा प्रक्रियाक गुण निर्णय आ अस्तित्व निर्णय करबापर जोर देलन्हि। मूलतत्व जतेक गहींर होएत ओतेक स्वरूपसँ दूर रहत आ वास्तविकतासँ लग। क्वान्टम सिद्धान्त आ अनसरटेन्टी प्रिन्सिपल सेहो आधुनिक चिन्तनकेँ प्रभावित कएने अछि। देखाइ पड़एबला वास्तविकता सँ दूर भीतरक आ बाहरक प्रक्रिया सभ शक्ति-ऊर्जाक छोट तत्वक आदान-प्रदानसँ सम्भव होइत अछि। अनिश्चितताक सिद्धान्त द्वारा स्थिति आ स्वरूप, अन्दाजसँ निश्चित करए पड़ैत अछि।तीनसँ बेशी डाइमेन्सनक विश्वक परिकल्पना आ स्टीफन हॉकिन्सक “अ ब्रिफ हिस्ट्री ऑफ टाइम” सोझे-सोझी भगवानक अस्तित्वकेँ खतम कए रहल अछि कारण एहिसँ भगवानक मृत्युक अवधारणा सेहो सोझाँ आएल अछि, से एखन विश्वक नियन्ताक अस्तित्व खतरामे पड़ल अछि। भगवानक मृत्यु आ इतिहासक समाप्तिक परिप्रेक्ष्यमे मैथिली कथा कहिया धरि खिस्सा कहैत रहत ? लघु, अति-लघु कथा, कथा, गल्प आदिक विश्लेषणमे लागल रहत? जेना वर्चुअल रिअलिटी वास्तविकता केँ कृत्रिम रूपेँ सोझाँ आनि चेतनाकेँ ओकरा संग एकाकार करैत अछि तहिना बिना तीनसँ बेशी बीमक परिकल्पनाक हम प्रकाशक गतिसँ जे सिन्धुघाटी सभ्यतासँ चली तँ तइयो ब्रह्माण्डक पार आइ धरि नहि पहुँचि सकब। ई सूर्य अरब-खरब आन सूर्यमेसँ एकटा मध्यम कोटिक तरेगण- मेडिओकर स्टार- अछि। ओहि मेडिओकर स्टारक एकटा ग्रह पृथ्वी आ ओकर एकटा नगर-गाममे रहनिहार हम सभ अपन माथपर हाथ राखि चिन्तित छी जे हमर समस्यासँ पैघ ककर समस्या ? हमर कथाक समक्ष ई सभ वैज्ञानिक आ दार्शनिक तथ्य चुनौतीक रूपमे आएल अछि। होलिस्टिक आकि सम्पूर्णताक समन्वय करए पड़त ! ई दर्शन दार्शनिक सँ वास्तविक तखने बनत।पोस्टस्ट्रक्चरल मेथोडोलोजी भाषाक अर्थ, शब्द, तकर अर्थ, व्याकरणक निअम सँ नहि वरन् अर्थ निर्माण प्रक्रियासँ लगबैत अछि। सभ तरहक व्यक्ति, समूह लेल ई विभिन्न अर्थ धारण करैत अछि। भाषा आ विश्वमे कोनो अन्तिम सम्बन्ध नहि होइत अछि। शब्द आ ओकर पाठ केर अन्तिम अर्थ वा अपन विशिष्ट अर्थ नहि होइत अछि।आधुनिक आ उत्तर आधुनिक तर्क, वास्तविकता, सम्वाद आ विचारक आदान-प्रदानसँ आधुनिकताक जन्म भेल । मुदा फेर नव-वामपंथी आन्दोलन फ्रांसमे आएल आ सर्वनाशवाद आ अराजकतावाद आन्दोलन सन विचारधारा सेहो आएल। ई सभ आधुनिक विचार-प्रक्रिया प्रणाली ओकर आस्था-अवधारणासँ बहार भेल अविश्वासपर आधारित छल।पाठमे नुकाएल अर्थक स्थान-काल संदर्भक परिप्रेक्ष्यमे व्याख्या शुरू भेल आ भाषाकेँ खेलक माध्यम बनाओल गेल- लंगुएज गेम। आ एहि सभ सत्ताक आ वैधता आ ओकर स्तरीकरणक आलोचनाक रूपमे आएल पोस्टमॉडर्निज्म।कंप्युटर आ सूचना क्रान्ति जाहिमे कोनो तंत्रांशक निर्माता ओकर निर्माण कए ओकरा विश्वव्यापी अन्तर्जालपर राखि दैत छथि आ ओ तंत्रांश अपन निर्मातासँ स्वतंत्र अपन काज करैत रहैत अछि, किछु ओहनो कार्य जे एकर निर्माता ओकरा लेल निर्मित नहि कएने छथि। आ किछु हस्तक्षेप-तंत्रांश जेना वायरस, एकरा मार्गसँ हटाबैत अछि, विध्वंसक बनबैत अछि तँ एहि वायरसक एंटी वायरस सेहो एकटा तंत्रांश अछि, जे ओकरा ठीक करैत अछि आ जे ओकरो सँ ठीक नहि होइत अछि तखन कम्प्युटरक बैकप लए ओकरा फॉर्मेट कए देल जाइत अछि- क्लीन स्लेट ! पूँजीवादक जनम भेल औद्योगिक क्रान्तिसँ आ आब पोस्ट इन्डस्ट्रियल समाजमे उत्पादनक बदला सूचना आ संचारक महत्व बढ़ि गेल अछि, संगणकक भूमिका समाजमे बढ़ि गेल अछि। मोबाइल, क्रेडिट-कार्ड आ सभ एहन वस्तु चिप्स आधारित अछि। बाढ़िमे भोजन लेल मारि पड़ैत रहए मुदा क्रेडिट कार्डसँ ए.सी.टिकट बुक भए जाइए। मिथिलाक समाजमे सूचना आ संगणकक भूमिकाक आर कोन दोसर उदाहरण चाही? डी कन्सट्रक्शन आ री कन्सट्रक्शन विचार रचना प्रक्रियाक पुनर्गठन केँ देखबैत अछि जे उत्तर औद्योगिक कालमे चेतनाक निर्माण नव रूपमे भऽ रहल अछि। इतिहास तँ नहि मुदा परम्परागत इतिहासक अन्त भऽ गेल अछि। राज्य, वर्ग, राष्ट्र, दल, समाज, परिवार, नैतिकता, विवाह सभ फेरसँ परिभाषित कएल जा रहल अछि। मारते रास परिवर्तनक परिणामसँ, विखंडित भए सन्दर्भहीन भऽ गेल अछि कतेक संस्था।
अंगेजी उपन्यासक आरम्भ आ विकास: अंग्रेजी उपन्यास पिल्ग्रिम्स प्रोग्रेस- लेखक कथाक मुख्यपात्रक यात्राक आ ओहि यात्रा मध्य आओल संघर्ष आ उत्साहक वर्णन करैत छथि।
डेनियल डिफ़ो अपन रॊबिन्सन क्रूसो उपन्यासमे मुख्यपात्रक साहसिक समुद्र यात्राक वर्णन करैत छथि
सैमुअल रिचर्डसनक पेमेला अंग्रेजी उपन्यासकेँ पारिभाषिक स्वरूप देलक।
एफ़्रा बेनक ओरूनोको उपन्यासक नायक कारी रंगक दास अछि तँ हुनक ’लव लैटर्स बिटवीन ए नोबल मैन एंड हिज सिस्टर’ मे सामंतक प्रेम कथा सभक वर्णन अछि।
हैनरी फ़िल्डिंग ’टॉम जोन्स’ मे सामंतवादक आलोचना केने छथि समाजक विकृतिक चित्रण केने छथि।
हेनरी जेम्स “द पोट्रेट ऑफ ए लेडी” मे कलात्मक प्रस्तुति लेल जिनगीक उपेक्षा करै छथि।
रिचर्डसन ’कलैरिस’ मे मनुष्यक मनोविज्ञानक तहमे जाइ छथि।
जोजफ कोनरेडक ’द शैडोलाइन’ क पात्र समाज आ जीवनक प्रति दृष्टिकोणक एक्द पक्षीय होएबापर सोचै छथि।
डी.एच.लॉरेन्स “लेडी चैटर्लीज लवर” क पात्र विकृति लेल संस्कृति आधारित सभ्यताकेँ दोषी कहै छथि।
रुडयार्ड किपलिंगक उपन्यास “किम” यूरोपी साम्राज्यवादक लेल एकटा बहन्ना ताकि रहल अछि, यूरोपी सभ्यताकेँ ओ उच्च मानै छथि।
ई.एम.फोर्स्टरक “ए पैसेज टू इंडिया”मुदा शासक आ शासितक सम्बन्धकेँ व्याख्यायित करैत अछि।
मैथिली उपन्यासक आरम्भ आ विकास: हरिमोहन झाक कन्यादान आ द्विरागमन मिथिलाक बहुत रास सामाजिक व्यवस्थाकेँ सोझाँ अनैत अछि, महिला शिक्षा आ अंध-पाश्चात्यकरणक सेहो हास्य रसमे चित्रण आधुनिक अंग्रेजी उपन्यासक रीतिएँ करैत छथि।
यात्रीक बलचनमा यादव जातिक बलचनमाक आत्मकथ्यक रूपमे अछि। आर्थिक समस्या एकर मूल विषए छैक। बलचनमा कोना एकटा टहल करैबलासँ आगू जाइत किसानक हक लेल जान दैत अछि ताधरिक कथा। कांग्रेस आदि पार्टीक विरुद्ध कम्यूनिस्ट पार्टीक प्रति स्पष्ट झुकाव यात्रीजीक रहल छन्हि। आ पारो बलचनमाक आर्थिक समस्याक विपरीत सामाजिक लक्ष्य तकैत अछि। किछु दिनुका बाद एहि उपन्यासकेँ लोक असली फिक्शनक रूपमे लेताह कारण अगिला पीढ़ीकेँ विश्वास नै हेतै जे एहनो कोनो क्रूर व्यवस्था सभ मानवजातिक मध्य होइत हेतै। आ तैँ एकर महत्व आर बढ़ि जाइत अछि- ओहि सभ व्यवस्था सभकेँ पेटारमे सुरक्षित रखबाक जिम्मेदारी। मुदा जहिया यात्रीजी ओहि समस्यापर लिखने छलाह तहियासँ ओ समस्या रहै आ ई उपन्यास ओहिमे सार्थक हस्तक्षेप कएने छल।
रमानन्द रेणुक दूध-फूल उपन्यास समाजक उपेक्षित वर्गकेँ सोझाँमे रखैत अछि आ कलात्मक उपस्थापन करैत अछि।
ललितक पृथ्वीपुत्र सेहो समाजक उपेक्षित वर्गकेँ सोझाँमे रखैत अछि। ई उपन्यास कृषक जीवनक आर्थिक समस्यापर सेहो आंगुर धरैत अछि।
लिली रे क पटाक्षेप वामपंथक वर्ग-संघर्षक उत्थान आ फेर ओकर दमनक कथा कहैत अछि आ देशक समस्यासँ साहित्यकार द्वारा स्वयंकेँ तत्काल जोड़बाक मार्ग प्रशस्त करैत अछि।
धूमकेतुक मोड़ पर सेहो वामपंथी विचारक आलोकमे सामाजिक-आर्थिक समस्याक कथा बैकफ्लैशमे कहैत अछि।
साकेतानन्दक सर्वस्वान्त बाढ़िक आ सरकारी नीति आ राहतक कथा अछि।
जगदीश प्रसाद मण्डलक मौलाइल गाछक फूल गामक, गामसँ पलायनक आ गलल व्यवस्थाक पुनर्जीवनक लेल समाधानक उपन्यास अछि।
चतुरानन मिश्रक कला कलादाइक माध्यमेँ गलल सामाजिक व्यवस्थापर प्रहार अछि।
शेफालिका वर्माक नागफाँस अंग्रेजक धरतीपर विचरण करैत अछि। धारा आ सीमांतक मिलन एहि जिनगीमे कहियो हेतै, कोनो जादू हेतै की?
आ अन्तमे : से जौँ गहींर नजरिसँ देखब तँ लागत जे अंग्रेजी उपन्यासकारक कृति ओहि समएक वाद आ दृष्टिकोणकेँ संग लऽ कऽ चलबाक प्रयास अछि। मुदा सिद्धान्तसँ प्रयोगक क्रममे किछु विशेषता स्वयमेव आबि जाइ छै। तहिना मैथिली उपन्यासक सेहो स्थिति अछि। रमानन्द रेणुक उपन्यास होअए वा शेफालिका वर्माक, ई तथ्य शिल्पमे स्पष्ट रूपसँ देखि सकै छी। लिली रे अपन कलमक धारसँ जेना अपन लग-पासक घटनाक, समाजक, राजनीतिक वर्णन करै छथि से अद्भुत तँ अछिये अंग्रेजी उपन्यास सभसँ एक डेग आगाँ जाइत अछि। ललित, यात्री आ धूमकेतु आर्थिक आ सामाजिक समस्याकेँ सोझाँ रखैत छथि, आ ओहि क्रममे कोनो तथ्यकेँ कोनो रूपेँ नुकबैत नै छथि। साकेतानन्द बाढ़िक समस्याकेँ सोझाँ रखै छथि। हरिमोहन झा अपन शैलीमे अंग्रेजी साहित्यक धारकेँ बहबैत छथि आ नायक द्वारा नायिकाकेँ देल पढाइक सिलेबसमे सेहो ई तथ्य सोझाँ अनैत छथि। चतुरानन मिश्र आ जगदीश प्रसाद मंडल कम्यूनिस्ट आन्दोलनसँ जुड़ल छथि, प्रायोगिक रूपमे, पार्टी स्तरपर, मुदा हिनकर दुनू गोटेक उपन्यास देखला उत्तर हमरा ई कहबामे कनेको कष्ट नै होइत अछि जे जाहि रूपमे यात्री आ धूमकेतु मार्क्सवादक बैशाखी लऽ उपन्यासकेँ ठाढ़ करै छथि तकर बेगरता एहि दुनू उपन्यासकारकेँ नै बुझना जाइत छन्हि। मार्क्सवादक असल अर्थ हिनके दुनूक रचनामे भेटत। कतौ पार्टीक नाम वा विचारधाराक चर्च नै मुदा जे असल डायलेक्टिकल मैटेरियलिज्म छैक तकर पहिचान, जिनगीक महत्वपर विश्वास, द्वन्दात्मक पद्धतिक प्रयोग आ ई तखने सम्भव होएत जखन लेखक दास कैपिटल सहित मार्क्सवादक गहन अध्ययन करत।
मैथिली उपन्यासक भविष्य : सभ जीवित भाषामे सभसँ बेसी रचना उपन्यासक होइत छै मुदा मैथिलीमे सभसँ कम उपन्यास लिखल जाइत अछि। जाहि रूपमे अंग्रेजी शिक्षा आ साहित्यक अध्ययन कऽ मैथिली साहित्यमे आओल नव पीढ़ीक संख्या बढ़त, मैथिली साहित्य अपन सामाजिक- आर्थिक- राजनैतिक आ सांस्कृतिक अंतर्दृष्टिक विकास कऽ सकत। वीणा ठाकुरक भारती, आशा मिश्रक उचाट आ केदारनाथ चौधरीक चमेली रानी-माहुर आ करार हमर एहि दृष्टिकोणक पुष्टि करैत अछि।
सुजीत कुमार झा

Suggested citation: विनीत उत्पल. “की अछि दिल्लीक जी.बी. रोडक कोठाक सत.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 68, 2010-10-15. https://www.videha.co.in/research/2010/68/की-अछि-दिल्लीक-जी-बी-रोडक-कोठाक-सत.htm

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