जगदीश प्रसाद मण्डल
जगदीश प्रसाद मण्डलक दूटा गीत
गीत-1
गाछक रंग बदलि रहल छै
मौसम संग सुधरि रहल छै।
थल-कमल जकाँ कहियो
गाढ़-लाल-उज्जर बनै छै।
तहिना फूल-फल कोढ़ि जकाँ
झरि-झरि कोनो फलो बनै छै।
गाछक रंग बदलि रहल छै
मौसम संग.......।
आशा आश लगा-लगा
जीत अपराजित बनैत रहै छै।
सुधरि रूप बदलि चालि
कारी काजर चमकि उठै छै।
गाछक रंग बदलि रहल छै
मौसम संग.......।
लत्ती पानि रूप बदलि
थल-कमल कहबैत चलै छै
तहिना लत्ती अपराजित
गाछ बनि गछाड़ि धड़ै छै।
गाछक रंग बदलि रहल छै
मौसम संग.......।
गीत-2
मुँहक हँसी केहेन अबै छै
ठोरक रूप देखैत चलू।
छाती केना दलकि रहल छै
सूर-तान भजैत चलू।
मुँहक हँसी केहेन अबै छै
ठोरक रूप.......।
जिनगी जेकर जेहेन रहै छै
छाती तेहने तेकर बनै छै।
हलसि-कलशि कहैत रहै छै
पारदर्शी एना बनैत रहै छै।
मुँहक हँसी केहेन अबै छै
ठोरक रूप.......।
जखने पालिस शीशा लगतै
झल अन्हार बनिते रहतै।
झल अन्हार अन्हार बदलि
एक्कभग्गु बनि शीशा कहतै।
मुँहक हँसी केहेन अबै छै
ठोरक रूप.......।
देखि-देखि, सुनि-सुनि
हँसैत डेग उठबैत चलू।
मुँहक हँसी केहेन अबै छै
ठोरक रूप.......।