विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

विद्यापतिक रचनामे विरह-वर्णन

डॉ. बचेश्वर झा · 2018-07-15 · अंक 254

िव_ापितक रचनामे िवरह वण>न
िव_ापित अपन वहुमुखी Eितभाक पिरचय अपन रचनामे देलि`ह अिछ, मुदा का}य Eितमाक वाxतिवक
पिरचय सुनक िवरह गीतसँ होइत अिछ। Eेमक Eगाढ़ता संयोगमे निह िवयोगेमे होइत छैक। महाकिव राधाक
िवरह-वेदनाक सजीव आ मम>xपश® वण>न कएलि`ह अिछ। जॱ सूर िवEल›भ kृंगारमे गोपीक वेदनाक टीसकT

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA
31

Ñमर गीतक अ`तग>त उजागर कएलि`ह तँ िव_ापित सू³म दृिµसँ राधाक मनोदशाक िवछोहावxथाकT िवरह गीत
´पमे उजागर कएल अिछ।
समयानुकूल िवरिहणीक िxथितक xवाभािवक वण>नमे िव_ापितक कलम माजल छि`ह।
सािह’य शाxLमे kृंगार रसकT रस राजक संÂा देल गेलैक अिछ। कमनीयताक कारणT अ`य सभ
रससँ एकर xथान उ™च मानल गेलैक अिछ। किवक वण>नमे स’यता रहबाक ....... ई स’यता Eेम वण>नमे
सव‰िधक पाओल जाइत अिछ।
Eेमक िचLणमे ‘िवरह’कT मह’वपूण> xथान देल जाइत छैक। िवरहक ¥ारा Eेमक Eगाढ़ताक पूण> पिरचय
भेटैत छैक। िवरह ओ कसौटी िथक जािहपर Eेम सुवण>क परीJा होइत अिछ। एकर अिधकतामे Eेमी एवम्
EेिमकाकT एक दोसराक Eित वाxतिवक भावावेश एवम् त`मयता होइत अिछ। िवरह Eेम जीवक एक मम>xपश®
घटना िथक। एिहसँ Eेमक पिरपुिµ होइत अिछ। िवरह एक Eकारक पुट िथक। िबनु पुटे वxLपर रंग निह
चढ़ैछ।
सािह’य-दप>णमे उ²लेख अिछ-
“न िबना िवEल›भेन संयोग: सुखम‘ुते, कषािमते िह वxLादो भूयान राग: Eव¶त।”
अथ‰त् िबनु िवरहक Eेमक xवतंL सा निह। एही ´पT िबनु Eेमक िवरहक अिxत’व निह। Eेमक
अिºनकT E“जविलत करैछ िवरह-पवन, Eेमक अंकुरकT बढ़बैछ िवरह जल, Eेम दीपक वि>काकT उस कबैछ
िवEल›भ। िवरह-वेदना मधुममी होइछ। एिहमे ´दन एवम् आमोद सामने मािलत होइछ। संयोगक अवxथामे
हृदयमे आशा एवम् िनराशाक ओतेक ¥`¥ निह होइत अिछ जतेक िवरहक अवxथामे। वरहमे वासनाक
अ`धकार Eाय: लु–त भए जाइत अिछ तथा Eेमक िवशुË अनुभूितमे िवरही डूिब जाइत अिछ।
kृंगार तथा िवरहक एतेक मह’वकT जनैत िव_ापित अपनाकT ओिहसँ फराक कोना रिखतिथ? एिह िवरह
वण>नक हेतु िव_ापितक लेखनी सेहो चलल आ चलबेटा निह कएल अिपतु अपना रचना शि±तक भाव एवम्
अनुभूितक बलसँ स›xत भारत वष>कT भाव-िवभोर कए देलक।
िवरह-वण>नमे िव_ापित हृदयक अनेक भावकT िनरलंकािरक भाषामे रिख सरलतासँ िचिLत कएल अिछ
जे ओ भाव सभ हृदय पटलपर xवभावत: अपन अिधकार xथािपत कए लैछ।
िव_ापितकT महाकिव कहएबाक एक Eधन कारण ईहो िथक जे िवरह एवम् िवरहक प¢ात् िमलनक
वण>नमे िहनकर xथान उ™चम रहल अिछ। एिह िमलनमे ओ जे अपन xवाभािवकता भवुकता सु`दर क²पना
तथा प_ योजनामे कमनीयता देखाओल अिछ से एक महान किवए सँ स›भव भए सकैछ। Eेम सूLमे ¦िथत
नायक लोकिनक िचL हुनक का}यमे सहसा जीवनक य˜यलय Eदिश>त कए देलक।
पं. जगœाथ सािह’य दप>णमे िवरह अथवा काम दशाक दश अवxथा कएल गेल अिछ-
अिभलाषाि¢`ता xमृित गुण कथनो ¥ंग संEलाप उ`मादो }यािधज>ड़ता मृित िरित दशाLeय कामदशा
अथ‰त् xमरण, गुण-कथन, अिभलाषा, मू™छ‰,}यािध, उ¥ेग, Eलाप, जड़ता, उ`माद एवम् मरण। एिह दस अवxथाक
अितिर±तो अनेक भावक िचLण िव_ापितक कएलि`ह अिछ। िवरहक मह’वपर दृिµपात करैत िव_ापित
िलखैत छिथ-

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA
32

“जेहन िवरह हो तेहन िसनेह।”
Eेमक असली xवादक अनुभव िवरहेक अवxथामे वाxतिवक ´पसँ भेटैत अिछ। िव_ापितक िवरह
}यिथता रािधका अनिभ छिथ। हुनका समीपमे निह छिथ`ह। राधा हुनक िवयोगमे शु¤ शीष‰ सुमनक
सदृeय धाराशािलनी छिथ। हुनक अkुEवाहसँ भूिम कद>मचु±त भए गेल अिछ। राधा ओिह थालबला भूिमपर
लेटा रहली अिछ। हुनक सखी सभ कृ°णक आगमनक आsासन दैत छिथ`ह पर`तु ई आsासन िवरहिºनमे
घीक काज करैत छि`ह। िहनक यौवन िवरहक वेदनासँ िदनानुिदन Jीण भए रहलि`ह अिछ। ..... हुनक
}यथा अिधकतर भए जाइत छि`ह।
िव_ापित राधाक हृदयक मनोवैÂािनक वण>न करैत छिथ-
“अंकुर तपन ताप यिद जारब, िक करब वािरदमेहे,
ई नव यौवन िवरह गमाएब िक करब से िपया ने हे।
हिर हिर की इए दैव दुराशा,
िस`धु िनकट यिद कंठ सुखाएब के दूर करत िपया सा।।”
एिहठाम दृµा`त दए रािधका जे अपन हृदयक दुख रखलि`ह अिछ से सहृदय संवेध िथक। सहसा
भावावेशमे आिब िवधाताकT ‘हिर-हिर की दए वैव दुराला’किह भ’स>ना करैत अिछ। एतए मधुमणी वेदनाक िचLण
कएल गेल अिछ।
सखीक स›वादसँ जखन काज निह चलैत छि`ह तखन राधा xवम कृ°णकT रोकबाक Eयास करैत छिथ-
“माधव तोहे जनु जाए िवदेशे
हमरो रंग रभस लए जएबए लएवह कोन संदेशे,
बनिह गमज क´ होइत दोसर मित िवसिर जएवए पित मोरा।
हीरा मिण मािणक एको निह म˜गव फेर
म˜गव पहु तोरा।।”
एतए राधाक Eेमक अलौिकक रसाxवाद अिछ। तक>क अनुसार आदान-Eदान सेहो होएबाक चाही। रंग-
रभसक Eित बदल की दए सकताह? ओ िथक कृ°णक Eेम। राधाक याचना। फेर म˜गव पहु तोरा, िन:xवाथ>
Eेमक भाव xपµ ´पसँ Eदिश>त भेल अिछ।
कृ°ण मथुरा Exथानक वात‰सँ स›पूण> गोकुल शोका कुल भए गेल अिछ। सव>L अkुक Eवाह एवम्
क´ण ची’कार Eार›भ भए गेल-
अव मथुरापुर माधव गेल, गोकुल
गोकुले उछलला क´णाक रोल नयन जले
देख बहए िहलोल।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA
33

राधा बहुत िदनसँ आशा लगौने छलीह जे कृ°ण औताह। अविधक अवसान भऽ गेल। बाट तकैत-तकैत
........... भए गेलि`ह। अ`तमे िनराश भऽ िवलाप करए लगलीह।
लोचन धाम फेदायल हिर निह आएल रे,
िशव-िशव िजवओ ने जाए आस अ´ झाएल रे।
पिहने रािधका कृ°णक Eेमक के`h िव`दु छलीह। एखन सभटा िवपरीत भए गेलि`ह अिछ। तखन
अपनाकT सॉंझक तारा बुझैत छिथ। जकर दश>न अशुभ होइछ, संगिह भादवक चौठीक चान अपन मुखकT
बुझैत छिथ जकर द>न अशुभकारी मानल जाइछ- िवरहािºनमे दºध रािधकाक लेल ई जतबा आ¢चय>क िवषय
भेल ओतबए लाजोक। िवरहािºनसँ जज>िरत राधाक हृदयक टीस xपµ अिछ-
“की हम सॉंझक एकसिर तारा, भादवचौठीक शशी,
इिथ दुहु झ˜झ कओन मोर आना जे पदुहँिख न हेरिल।।”
कािलदासक िeत अपना िवलापमे कहैत छि`ह-
“मदनेन िवना कृतारित: Jण माL िकल जीिवतेितमे,
वचनीय िमदं }यविxथतं रमणxवा मनुयािम।”
य_िप।
एतएव देखैत छी जे िव_ापित कािलदासहुक िवरह-वण>नसँ टिप जाइत छिथ। एतए िवरह वण>नमे किवक
क²पनाक चातुय‰दश>नीय अिछ-
“लोचन नीर तटिन िमर माने, ततिह कलामुिख करए सनाने।
सरस मृणाल करहजप माली, अएिनस जप हिरनाम तो´नी।।”
अथ‰त् िवरिहणी रािधका नयनक अkुसँ नदीक िनम‰ण कए ओहीमे xनान कए रहल अिछ, ता’पय> जे
ततेक अkुपात भेलि`ह अिछ जे ओ नारीक ´पधारण कए लेलक अिछ।
कृ°णक िमलनक आशा समा–त भए गेलापर नाियका राधा अपन सौ`दय>क ’याग करए लगलीह अिछ।
माL शरीर एवम् xनेह बिच गेल छि`ह-
“सरदक रसधार मुख ´िच सोपलक हिरन के लोचन लीला।
केसपाल लए भामिर के सोपलक पाए मनोभव पीला।।”
पावसकालीन िवरहो¥ेगक एकसँ एक उम प_ पदावलीमे पाओल जाइत अिछ। दु:खािभभूत राधाक
क´ण ­`दन हृदय िवदारक एवम् क´णो’पादक अिछ। एिह समयक E’येक वxतु जे संयोगक अवxथामे
आन`द दायक अिछ राधाक हृदयकT िवदीण> कए रहलि`ह अिछ। िEयतमक िवरहमे ओ सभ वxतु कµदायक
छि`ह।
सिख हे हमर दुखक निह ओर...।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA
34

िव_ापित कह..... िदन राितया।।
एिह पदक अJर अJरसँ मºन हृदयक हाहाकार Eित Åविनत भए रहल अिछ। दुखक आिग “वालामुखी
बिन फूिट पड़ल अिछ। हिर िबनु केसे गमाओल िदन राितयाक भावक किवता रवी`hनाथ सेहो िलखलि`ह
अिछ-
तुिम यिद नादाओ, करो अमाम हेला।
केमन करे कारबे आमार एमन बादल बेला।।
संxकृत सािह’यमे एिह Eकारक अनेक वण>न अिछ-
“इतो िवधु¥²ली िवलिसत िमत: केतिकतरो,
xफुरÚग`ध Eोधजलद िननाद xफूिज>तिमत:
इत: केिल­ीड़ा कलकलख: प³मल¥श˜
कथं भा’xय`तेते िवरह िदवसा: संमृतरसा:।।”
राधाक Eेमक त`मयता एतेक बिढ़ गेल अिछ जे ओकर वश‰`त निह भए सकैत अिछ। ओ कृ°णक
नाम लैत-लैत एतेक त`मय भए गेल छिथ जे ओ अपनाकT xवयं कृ°ण मानए लगैत छिथन तथा राधा-राधा
जपए लगैत छिथ। त’Jणिह हुनका अपन वाxतिवक दशाक Âान भऽ जाइत छि`ह। तथा िवरहक तीवß
वेदनासँ ओ आुल भए उठैत छिथ।
अहुखन माधव-माधव रटइत राधा भेिल मधाई।
भेल स`देह।।
एतए Eेम पराकाRापर पहुँिच गेल अिछ। नाियका राधाक ´पमे सेहो तथा कृ°णक ´पमे सेहो दुनू
अवxथामे मम>}यथा सहैत छिथ। एिह पदमे िव_ापित Eेमक त`मयताक एहन िचL उपिxथत करैत छिथ जे
संसारक स›पूण> सािह’यमे अपन सभता निह रखैत अिछ। इिह Eकारसँ िवरहमे िमलन एवम् िमलनमे िवरहक
वण>न िव_ापितिहक उ’कृ°ता िथक।
िव_ापितक िवरह वण>न कएक िवशेषता ई अिछ जे हुनक नाियका िवरहमे रिहतहु अपन भाºयक दोष
दैत छिथ नायकक निह। िहनक रािधका कुलवती ललना छिथ तT Eेममे जतेक बाधा, यातना आर जतेक
}यथा सहैत जाइत छिथ हुनक Eेम सोना जकy ओतेक चमकैत जाइत छि`ह। xवàोमे ओ कृ°णकT कटुि±त
निह कहैत छिथ। अ–पन कम>क दोष तथा िक करत नाए दैव भेलवाम।
एिह Eकारे अिछ-
“सिख किह कहब अपतोष, हमर अभाग िपयाक निह दोष।।”
अ`तमे युग-युग जीवथु लख कोष हमर अभाग हुनक निह दोष।।
िवरिहणीक िचLण कािलदासक श»दमे-

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA
35

“क²याण वुËैरथवा तवाणं न कामचारी मिमशंक नीय:।
ममैव ज`मा`तर पातकान˜ िवपाक िनxफूज>थुर: Eस³य।।”
सीता सेहो पूण> ज`म पापकT अपन दुखक कारण मानैत छिथ। एक xथलपर तँ राधा िनराश लऽ
मृ’युक अिभलाषा करैत छिथ जे भावो’पूण> अिछ-
“आन करह िहय िविह कएल आन,
अवहु न िनक सभ किठन परान।।”
िव_ापितक िवरहमे Eकृितक उ×ीपन, ´पक िचLण kृंगार रसक xथायी भाव रितकT जा¦ह करबामे
सफल भेल अिछ। जा¦तावxथामे तँ कृ°णसँ िमलन अस›भव अिछए, xवàहुमे नाियकाकT कृ°णसँ िमलन निह
भऽ पबैत छि`ह। तT नीन निह होइत छि`ह-
“सपनहुँ संगम पाओल, रंग बढ़ाओल रे
से मोर िविह िवधटाओल नी`दओ हेरायल रे।।”
िन`द होइति`ह कोना? ओ तँ िEयतक संग िवदेश चल गेलि`ह-
“सपनेहु ितलाएक त`ह सॲ रंगे,
िन`द िवदेसल ति`ह िपआ संगे।।”
कािलदासक मिणी- ‘’वंिहतxम िEयेित’किह कऽ पितक िवरहकT ........... करैत छिथ। िक`तु एतए
काकक भाषासँ िEयतमक आगमनक EतीJा एवम् आकुलताकT नव जीवन देल गेल अिछ-
“काक भाष िनज भाषहु रे, िपय आओत मोरा
Jीर खीर........................ कनक कटोरा
सोमे चलु.................. िपआ आओत मोरा।।”
जखन िवरहक कµ असहय भऽ जाइत छि`ह तँ स`देश पाठवए चाहैत छिथ-
“के पितया ले जाओत रे...। पास भेल साओन मास।”
िव_ापित िवरहक सू³मसँ सू³म दशाकT देखलि`ह तथा ओिहसँ अपन हृदयक स›ब`ध xथािपत कएलि`ह।
ई िवरहक E’येक दशाक वण>नमे अनुभूित पJ सव>था ऊँच xतरक एवम् मनो¦ाही रहल अिछ। िव_ापित
नायक-नाियका दुनूक िवरहक िचLण कएलि`ह मुदा xमरणीय जेहन आकष>क राधाक िवरह वण>न भेल अिछ
तेहन कृ°णक निह यथा-
“अइसन नागर अइसन नव नागिर अइसन स›प मोर,
राधा िबनु सब बाधा मािनए नयन तेिजअ नोर।।”
वाxतवमे राधा एवम् कृ°णक Eेम ‘सागर सागरोपम्’िथक।

िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com   

  
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५४ म अंक १५ जुलाइ २०१८ (वषᭅ ११ मास १२७ अंक २५४ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547 X VIDEHA
36

िवरहमे स“जनक Eेम आओरो अिधक िनखिर जा उठैत अिछ। िव_ापित xवयं िलखैत छिथ-
“सुजनक Eेम हेम समतूल,
द´इते कनक दुगुन होए मूल।।
टुटइते निह टुट Eेम अáुत,
ये सन बढ़ए मृणालक सूत।।”
िव_ापितक िवरह वण>न िवs सािह’यमे अपन xथान मूघ>`य बनौने अिछ। िहनक भाव Eार›भमे लौिकक
xतरक तथा वैयि±तक रहैत अिछ, िक`तु जखन ग›भीरताकT Eा–त करैत अिछ तखन अलौिकक, समिµ सूचक
एवम् िवsक िनिध भए जाइत अिछ।
भाव पJक संगिह संग िवरह वण>नमे िहनक कला पJक समावेश सेहो पूण> ´पसँ भेल अिछ।
कला’मकता कृिLम निह अिपतु xवाभािवक अिछ। अनुभूित }य±त करबामे सरलता अपनाओल गेल अिछ।
श»द चयन, वाºवैदºध, एवम् सु`दर उि±तसँ िहनक वण>न अलंकृत एवम् िवभूिषत अिछ। कलापJक रसक
पिरपाकमे सव>L सहायक भेल अिछ।
एिह EकारT देखैत छी जे िव_ापित अ`य भाषाक िवरह-वण>नसँ अिधक उ’कृµ वण>न कएने छिथ। अ`य
िवशेषताक संग भाव पJ kेR रिहतहु कलापJक उपेJा निह भेल अिछ। भावक ग›भीरताक अिभ}यि±तक
मनो वैÂािनक ढंगसँ कएल गेल अिछ। िमिथलाक संxकृितक अनुपालन सव>L करैत िवरिहणीक श»द-श»दसँ
वेदना िन:kृत भेल अिछ।

Suggested citation: डॉ. बचेश्वर झा. “विद्यापतिक रचनामे विरह-वर्णन.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 254, 2018-07-15. https://www.videha.co.in/research/2018/254/विद्यापतिक-रचनामे-विरह-वर्णन.htm

मूल विदेह अंक / Original issue