विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

कन्यादानक भीषण समस्याक कारण

डॉ. बचेश्वर झा · 2018-08-01 · अंक 255

क]यादानक भीषण सम6याक कारण
म­य िमिथल©चलमे वैवािहक परपराक पालन आइसँ अनुमानत: सय वष;क ...... दोसर रीितसँ होइत
छल। तािह समयक हेतु ई रीित-रेवाज िहतकर रहल होएत, मुदा तकर Bभाव बादक मैिथल स]तानपर तािह
तरहR पड़ल जे एखनहुँ तकर छाप अिमट अिछ।
ओनातँ क]यादानक सम6या Bाय: सभ िदनसँ एक कठीन सम6या रहल अिछ। समयानुसारे भलR ओकर
£प पिरविŒ;त होइत गेल हो...।
महाकिव िव\ापित अपन ‘पुªष-परीHा’मे एही सम6याक स]दभ; चचच† कएलि]ह-
“क]या ककरा दी?पुªषकR?”
पुªष शŸदक Bयोग ओ िविश§ अथ;मे कएने छिथ। अ]यथा सभ पुªषाकार िथकाह।
वीर, ­यय;वान, िव¯ान आ वुि°मान, चािरटा पुªषक लHण होइछ,एकर अभाव जकरामे छैक से पूँछ हीन पशु
िथक। तR क]याक िववाह पुªषसँ हो।
खास कऽ क]यादानक सम6या आजुक सम6यासँ िभ± होएबाक कारण ओिह समयमे जनसं²या कम आ
भूिम अिधक रहलोपर स]तo भूिमसँ भरण-पोषण सहजिह भऽ जाइत छल। आजुक अपेHा आव³यकता कम आ
उपभोगक पदाथ´ पिरमािज;त निह। िवµान अपन Bभाव ओतेक निह देखओने छल। आइ तँ िवµान िमिथलाक
कथे कोन सपूण; धरतीक देश लोक, सं6कृितकR जोिड़ देलक अिछ। तR ओिह समयमे िमिथलाक लोकक
उि—त छल-
“उŒम खेती, म­यम वाण।

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िनिष° चाकरी, भीख िनदान।।”
अथ†त् खेतीकR उŒम, zयापारकR म­यम, चाकरी वा नौकरीकR िनषेध तथा भीख म©गव सभसँ नीच कम;
मानल जाइत छल। इएह कारण छल जे एिहठाम कहल जाइत अिछ-
“कर खेती घरही भला।”
कहबाक तापय; घरेमे रहू, खेती क£ अमोधमंJ छल। एतबे निह, ओिह समयक हेतु अिधक
स]तानवान होएब मा]य छलैक। िकएक तँ Bाकृितक Bकोपक कारण जनािध आ निह होमए पबैत
छल, जािहसँ जन सं²याक वृि§क ऊपर अंकुश 6वत: लािग जाइत छल। एतए तक जे पिरवारक कोन
कथा? गामक गाम जनशू]य भऽ जाइत छल। तR अिधक स]तानबला लोक पुuयवाण कहबैत छलाह। बेटा
निह रहलापर बेटीक स]तान वंशक टेक रखैत छल.........।
काल-·मे बेटी ............ होपरा]त जमीन-जथा दऽ घरेमे राखब पिरपाटी चलल जे ‘कनेदानी’ कहबैत
छल। कनेदानी राखब BितPाक बात बुझल गेल। कनेदानीक स]तान भिगनमान कहबैत छिथ। जिनक पुªषा
कनेदानी रखलि]ह से डीही कहबैत छिथ। कनेदानीक स]तान डीही पHक परम भ—त होइत छलाह। िबना
दरमाहाक नोकर ई भिगनमान होिथ, संगिह डीहीक कृपाक©Hी सेहो। तR जनहासक कारण निह बुझाइत छल।
कनेदानीक Bित Bाय: भलमानुष होइत छलाह, जे बादमे िबकौआक नामसँ जानल गेलाह।
िबकौआक स]दभ; िकछु चच† : हिर िसंह देव महाराजक ¯ारा प¸ी-Bव]ध कएल गेल। एिहसँ मैिथल-
वžा¹णक प¸ीकृत भेलापर jेणी बनल। ओिहमे योग, jोJभ्, भलमानुष Bभृितक उदय भेल। प¸ीक अनुसार
जे िनº jेणीकR BाŽत कएलि]ह ओिहमे सँ िकछु सप± zयि—त उ”च jेणीक वžा¹णसँ सब]ध कए सव;
साधारणक दृि§मे BितPा हािसल करबाक चे§ा कएलि]ह। एतए तक जे िनº jेणीक वžा¹ण पैघसँ पैघ
जमॴदार रिहतहुँ ओिह BितPाकR BाŽत निह कए सकैत छलाह। फलत: अथ; अपन Bभाव देखओलक
अ]तरालमे एक बाट Bश6त भऽ गेल जे िनºो jेणीक »ा¹ण वैवािहक सब]ध ¯ारा अपनाकR ऊपर उठा
सकैछ। 6प§ अिछ कनेदानी राखब एिह प¸ी-Bथाक कारणे चलाउल गेल। सुखी सप± लोक एिह
सुिवधाक उपयोग करए लगलाह। उŒरोŒर देखा-देखीमे एक तरहक उपरॱझक ि6थित उप± भऽ गेल।
िक]तु, ओिहकालक मा]यताक कारणR एहन बहुत कम लोक छलाह जे िनº jेणीक लोकसँ सब]ध करए
चाहैत छलाह। फल ई भेल जे एिह अ™पसं²याक वžा¹णक म©ग बिढ़ गेल। एिह वग;क लोककR समाज तेहन
ने टीकासनपर चढ़ा देलक जे सभ zयाहकR माJ पेशा बनाए लेलक। इएह वग; िबकौआ कहाओल अथ†त् जे
िबकिथ। िव·यबला पदाथ;सँ ई वग; िभ± छलाह। पूण; मू™य देलहुँ स]तo ·य कएिनहारक जूितमे ई निह
रहिथ। ई िबकौआ िबकिथ माJ िववाहक हेतु। िववाहोपरा]त ई पूण; 6वतंJ रहिथ। ने 6Jीक Bितदाियव आ
ने स]तानक Bित 6नेह। मतलब रहि]ह केवल िवदाइसँ कोनोटा Jुिट सासुरमे भेलापर £िख एहन तँ साधारण
बात रहि]ह, अपन स]तानक ज]मक सब]धमे ½ामक Bचार कऽ देबामे संकोच निह करिथ। एहन तरहक
द]त कथा व¾मीझाक आिदक सब]धमे Bचिलत अिछ।
िबकौआक लHण : ई िबकौआ आजुक तुलनामे कम निहिक]तु, मुiा मोचन हजार-लाख जँ निह निह
करैत छलाह तँ दान जैतुक ....... सँ लेिथ। जािह क]यासँ िववाह होइ]ह तकर पालनक भारसँ मु—त रहबे

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करिथ, संगिह अलाबा ऊपरसँ िहनक धाक कड़गर रहि]ह। उŒम भोजन, व6J आ ढेउवा िवदाइक £पमे
भेिट जाइि]ह। एतए तक जे बाप-पुªषा वा नीज रीन-कज† लेल सेहो सासुरेसँ चुकाएब उÀे³य रहि]ह। सालमे
एक-आध बेर सासुर जािथ तािह सहवाससँ जे स]तान उप± होइि]ह वएह कनेदानीक वा डीहीक उपलिŸध
बूझल जाइत छल। ई िबकौआ आकम;uय जीवनक अÁयासी भऽ गेल छलाह। ...... िकछु निह माJ पेट
पोशव उÀे³य रहि]ह। तबाकू, भ©गक पूण; अÁयासी रहिथ। शरीिरक चे§ा िघनौन बनौने रहिथ। चािल-ढािल
पूण; असÁय जेकo रहैत छलि]ह। माथमे चानन-ठोप लगौने रहिथ। पैरक वेमाय िवदरल ठोर नमरल पेट
चुबैत कनेरक टारी रिथ तथािप एहनो अj° £प भेलापर महग रहिथ, िकएक तँ प¸ीक Bमाण पJ भेटल
रहि]ह। तR क]या पH िहनक £प, गुण वैभवक मू™य©कन निह कऽ सोन सन क]याकR ढग संग बाि]ह दैत
छल। बादमे ई िबकौआ वदु-िववाही होमए लगला, जािहसँ मैिथल वž¹णमे क]यादानक मु²य सम6या छल।
बहुिववाहक सम6या िबकौआ ¯ारा केवल उप± भेल से निह आओरो कारण भऽ सकैछ,जेना राजकुलक
संसग;सँ वžा¹णमे कुBथा अएबाक संभावना। पिहने वžा¹ण तपी, यागी होिथ िक]तु मंJी अथवा राजपुरोिहत
भेलापर देखाउससँ बहु िववाहक अÁयासी भेलाह। िकएक तँ राजभवनमे रािनक अितिर—त सु]दरीक झुuड
िनवास करैत छल। परÂच, मैिथलक ई िबकौआ वग; अथ;क लोभसँ िनº कुलमे प”चीस-तीस 6Jीसँ िववाह
करैत छलाह। एतबे निह, ³मशानघाट जेबासँ पूव´ िववाह कऽ लैत छलाह। जँ Bथम 6JीकR घर अिनतो
छलाह तँ शेषकR नैहरेमे छोिड़ दैत छलाह। इएह जीवन िनव†हक उŒ साधन छलि]ह। एिह बहु िववाहक
BथाकR तोड़बाक चे§ा Žयारेलाल मुंशी 1870 ई.मे कएने छलाह। हुनका आ]दोलन जोर-शोरसँ चलल छल।
ओिह पिरBेšयमे 1878 ई.मे ितरहुतमे 54 िबकौआ वžा¹ण मृयुसँ 665 6Jी िवधवा भेल छल जािहमे
अिधक©श युवतीमे छल। एतए तक जे मधुबनी िजलाक कोइलख िनवासी एक िबकौआ 50 वष;क आयु तक
35 िववाह कऽ नेने छलाह। सन् 1875 ई. दरभंगा जखन सविडिवजन बनल तँ ताकालीन पदािधकारी
मेटलाक आदेश कएल जे Žयारे लाल मुंशीक आ]दोलनक अनुसार बहु िववाह ब]द हो। एिह तरहR िबकौआ
¯ारा बहु िववाहक सम6या उप± भेल से कही वा िमिथलाक लोक ¯ारा बनाओल गेल। £िढ़वादी िवचारक
कारण क]याक भिवÈयक समीHा निह कऽ अपन उŒरदाियवकR समािŽतक बहानामे िबकौआक ठॲठमे क]या
बा]हब िथक।
बंगालक कुलीन Bथा सेहो िमिथलाक िबकौआ Bथाक समान छल। वाड; (Ward) महोदयक अिभलेखसँ
पता चलैत अिछ जे वंगपराक उदय च]iकR 65 6Jी छलि]ह, कुशदाक राम िकंकरकR 72 6Jीसँ िववाह
रहि]ह। एक एहनो घटना भेटैत अिछ जे दुगलीक रामच]i मुखजÊकR 32 6Jी रहै]ह आ वो 65 वष;क
अव6थाकR पार कएने छलाह, दैवात् यšमाक िशकार भऽ गेलाह, मृयुक िनिœतता जािन बालक कहलिथ]ह-
“दीन भावसँ बाबूजी अपने तँ मरैत छी घरमे एको चुटकी अ± निह अिछ, एहन हालतमे jा°ो कोना
होएत?”
िपता िकछु गंभीर भऽ िनहसंकोच भऽ कहलिथ]ह-
“अिवलब नव गोपाल चटजÊक 9 वषÊय क]यासँ हमर िववाहक zयव6था क£, िकछु िदन पूव; B6ताव
आएल छल, एखनो ओ क]या अिववािहते अिछ।”

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पुJ सवाद पठा कए 250 £पैया पर बात िनिœत कएलिथ]ह। िववाहक 9 मासक अÁयंतरे रामच]i
मुखजÊक मृयु भऽ गेलि]ह। एिह तरहR ओ अपन jा°क इ]तजाम िववाहे ¯ारा पूरा कए मुइलाह। ई सभ
छल बहु िववाहक कुपिरणाम! िववाह सन पिवJ रेवाजकR दुिषत करब समाजक कुचािल कहू वा कलंक।
िबकौआ ¯ारा िववािहत क]याक जीवन झoकी :एिह Bथाक Bकोप तँ तेहन छल जे
बूढ़, बकनेर, अकम;uय वरक संग त£णीक िववाह एक Bकारक िवडवना कहल जा सकैछ। अनेको कोम
ल©गी जीवनक सोलहम वस]तक पिहने िवधवा भऽ कठीन जीवन जीबाक अÁयासी होइत गेल। राजा राम
मोहन रायक शती-Bथा उ]मूलनसँ अनेको िवधवा वा बूढ़क 6Jी काम िपपासावश कुिसत कम;क भाजन भेल।
एतबे निह, िबकौआ ¯ारा िववािहत िकशोरी िपताक घरमे आजीवन थोपल रहलासँ कुमाग; गामी भऽ जाइत
छल। एिहसँ दा£ण ि6थित ई भेल जे मैिथलक दिरi समुदाय िबकौआक वंशधर एखनो अिछ। िह]दू6तानक
अिधक©श शहरमे भनिसया, भीमंगा वा ताË नीच कम;मे Bवृत मैिथल »ा¹ण िबकौआक स]तान िथकाह। इहए
कारण अिछ जे िमिथलेŒर Bा]तमे िमथलाक कु²याितक कुचे§ा लोक करैत अिछ। आब िबकौआ Bथाक
अ]तो आव³यक छल।
िबकौआ Bथाक अ]त कहू वा िवक™प दहेज Bथाक आरंभक कारण - अंÌेजी िशHाक Bचार-Bसारसँ लोक
नैितक 6तर ऊपर उठए लागल। िवµान िवकाल भेल। वैµािनक आिवÈकारसँ लोक जीवनमे आमूल पिरवŒ;न
होमए लागल। िचिकसा िवµान Bाकृितक BकोपकR रोिक देलक। जनÍास निह भेलासँ जनवृि° अवाध गितमे
होमए लागल। 6वाधीनताक कारणR जन जीवन उ°;गामी होइत गेल। तR आब कनेदानी राखब आ ओकर
स]तानक भार उठाएब असौकज; भऽ गेल। िशिHत समुदायमे वैचािरक ·ाि]त आएल तR पुरना
Bथा, £िढ़वािदता, कुलीन Bथा वा िबकौआक समूल न§ करब आव³यक Bतीत भेल। अनमेल िववाह, वृ°
िववाह, बाल िववाहक परपराकR ....... अपन वैभवक अंश नगद £पमे दऽ क]याक िववाह कराएबक पिरपाटी
शु£ भऽ गेल।
दहेजक दा£ण 6व£प : जिहना िबकौआक jेणी छल तिहना िशिHत वग;क माप दuड कायम भेल
zयव6था £पमे। डा—टर, इंजीिनयर, ओभरिसयर,टेकनीिसयन ........ jेणी सरकारी सेवक Bथम, ि¯तीय तथा
तृतीय jेणी ओ चतुथ;वगÊय गैर सरकारी सेवकक संगिह िशHण सं6थाक सेवक jेणी कायम भेल। आब की
छल वरक िव·ी उपयु;—त आधारपर होमए लागल। बरदहटा जकo वरक हाट सेहो लागल रहैछ जेन सौराठक
सभा गाछी। जािह क]याक िपताकR जेहन उपाय रहैछ तेहन jेणीक वरकR खरीद कऽ िववाह करबैत छिथ।
िदनानुिदन दहेजक Bकोप बढ़ले जाय रहल अिछ। एिह दहेजक दा£ण £प तँ ई भेल जे गरीब कुमार वž¹ण
जे अयो¤य अिछ ओ अिववािहते मरैत अिछ। अनेको उदाहरण भेटैत अिछ। िबकौआ Bथामे एहन बात निह
भेल रहए। खैर! दहेज-Bथामे सšमक संग िववाह करायब युग-धम; मानल गेल अिछ, मुदा दहेजक िवकराल
£प सामने अिछ। िबकौआ £सैत छल तँ ओ मनौती कएलापर मािन जाइत छल, िक]तु ई दहेज-Bथाक
िशिHत वग; तँ £सलापर 6Jीक जान लऽ लैत अिछ। एतबे निह, क]याक अपमान, ितर6कार ओ अवहेलना
करब 6वाभािवक होइछ। मनोनुकूल िवदाइ वा दहेजक रािशमे कमी भेलापर सासु, ससुरक संग आगत zयवहार
तककऽ दैत छिथ। पिहलुका िबकौआ म©ग, तमाकू खाइत छल तँ आजुक वर मिदरा,िसगरेट, चरस ओ
....... अÁयासी होइत अिछ। िबकौआ एक आध बेर सासुर अबैत छल, मुदा आजुक ई िबकौआ सालो भिर

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सासुरे रहबाक आकंHी अिछ। अ]तर िसफ; एतबाटा जे िबकौआक 6Jी िपतेघरमे रहैत छल जािहसँ मय†िदत
छल, मुदा एखनुका वरक 6Jी संगिह रहैत अिछ, िक]तु एिह पढ़लाहीक शील,6वभाव रहन-सहन चािल-ढािल
वातावरणक कारणR िवकृत भऽ जाइछ। अिधक©श 6Jी तँ शीलहरणक िशकार भऽ जाइत अिछ। कोना बूझब
जे िबकौआ Bथाक अ]त भेल? आजुक ई दहेज Bथा तँ ओकरोसँ िविभ± £पमे सामने आएल अिछ। आजुक
दहेज Bथाक कारणR क]याक िपताक धम;, धन ओ इÎजत सभ नीलाम भऽ जाइत अिछ। पाईक अभावमे
क]याक िपता बोझ तरहक दूिभ जकo िपअरगात कृशकाय भऽ समय कािट रहल अिछ। कतबो £प-गुणसँ
यु—त क]या छि]ह,मुदा पाईक अभावमे हुनक िपताकR केओ मोजर निह दऽ सकैछ। पैसाक िपशाची लोक
यो¤य-अयो¤य क]याक सीमाकR सि]द¤ध कऽ देने अिछ। अनेको िपता-पुJीकR िशिHत करैत छिथ, तािक हुनका
बेटाबला दहेजमे छूट देताह मुदा से सभव निह। यो¤य वर क]याक वरण करिथ से ²याल केओ निह करैत
छिथ जािहसँ िनम;ल दापय जीवन नशीव होएब कठीन भऽ गेल अिछ। एकर Bितफल की होएत? मैिथल
समाजक jृंखला टूिट जायत, आिथ;क िवषमता सामािजक ज]म देत।
एक िदिस जँ क]या पH बालक भीत जकo ढहल जाय रहल अिछ तँ दोसर िदिस वरक पH
मनोरϵक पूल िबनु िसमे]ट-बालुक जोड़बामे त™लीन अिछ। किहया धिर ई दहेजक दाहसँ स]तŽत रहत से
निह जािन।
दहेजक कारण अिववािहत क]याक जीवन झoकी : दहेजक दद;नाक असिर तेहन तरहR पिड़ रहल अिछ
जे अिधक©श स½ा]त पिरवारक क]याक कौमाय; अव6था िववाहक पितHेमे समाŽत भऽ जाइछ। एतए तक जे
यौवनकालमे नारकीय अव6थाक अनुभव करैत अिछ। Bाय: बेटीबला ओ बेटाबला दूनूक समH ई सम6या
उप± छि]ह।केओ एिहसँ मु—त निह छिथ मुदा टाका गनाएब आ गानबकR आइ मय†दाक िवषय जानल जाइत
अिछ। जे जतेक टाका गनबैत छिथ ओ ओतेक गव´ि—तसँ समाजकR बुझबैत छिथ, संगिह जे गनैत छिथ से
अŽपन बड़Žपनक िवशद् वण;न करैत छिथ।
सभसँ खेदक िवषय तँ ई जे गरीब लोक जे बेटीक Bित ताका लैत अिछ वा छल, तकरा लोक बेटी
बेचबा कहैत छल। घृणाक दृि§सँ देखैत छल, आइ ओकर उनटा हवा बिह गेल अिछ। बेटा बेचिनहारकR
लोक बेटा बेचबा निह किह समाजमे उ”चासन दैत अिछ जािहसँ बेटाक िववाह टाका लऽ कए करबामे
गौरवाि]वत होइत अिछ। ई समाजक लोकक िवचारहीनता निह तँ आर की? एिहसँ िन]दनीय बात आइ की
होएत? तखन तुलसीक पoित 6मरण भऽ जाइछ-
“समरथकR निह दोष गोसाË।”
अथ†त् पैघ लोककR दोषी निह कहल जाइछ। ओइ दहेजक पृPपोषक समाज पैघे लेाक छिथ तR एकर
उ]मूलन सभव कोना? निह जािन िबकौआक जगह दहेज आएल आ ई किहया धिर लोककR िखहारैत
रहत? आइ तँ आइ तँ अिधक©श ललना अभावी िपताक छातीपर दुग;म पहाड़ बिन बैसिल अिछ। कतेक तँ
िववाह सूJमे बा]हलोपर भा¤यपर झखैत अिछ। मनोनुकूल घर-वरक अभवमे संघष;रत जीवन िबता रहल
अिछ। सुख सुिवधामे पलल बािलका पितक घरमे गंजन, दुzयव;हार, zयं¤यपूण; वाक् वाणसँ िव° होइत रहैछ
जकर कारण होइछ लेन-देनक गड़वरी, दान जैतुकमे मनचाही व6तुक आपूिŒ;मे कमी। एतबे निह दहेजक
उपरा]त विरयातक िविश§ सेवा निह भेलासँ वा कोनो तरहक िवघटन भेलापर क]याकR सासुरमे पित ¯ारा वा

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पितक घरक लोक ¯ारा अमय†िदत zयवहार कएल जाइछ। कतेकठाम तँ क]याक हया कऽ देल जाइछ आ
निह तँ क]या 6वयं आम हया कऽ लैत अिछ। सभक मूलमे दहेजे अिछ जे क]याक िपताकR िववश कऽ
दैछ, िववशताक कारण होइछ izयाभाव, अथ†भाव। कोजागरा, जड़ाडरक संग-संग साल भिर तक वžा¹ण
समाजमे बेटीबलाक तनोतरी ढील भऽ जाइछ तR िववाहसँ िवध भारी कहल जाइछ।
दहेज -Bथाक उ]मूलनक उपाय - य\िप वŒ;मान सरकार दहेज लेिनहार ओ देिनहार दुनूकR कठोर दuड
देबाक अ­यादेश जारी कएल अिछ, मुदा ई नैितक पतनबला लोक एखनहुँ कबल ओिढ़ कऽ घी पीबएबला
बात रखने अिछ। सरकारक ऑंिखमे तँ गद† दैते अिछ संगिह समाजोकR उ™लू बना रहल अिछ। लेन-देन
कऽ लइए। गुŽत £पसँ तािक हम आदश; £पमे कुटमैती कएल अिछ। तR सरकारक ¯ारा एकर उ]मूलन
कथमिप सभव निह। एकरा लेल वैचािरक ·ाि]त चाही,समाजक हरेक zयि—तक नैितक समथ;न चाही। ई
एक कलंकपूण; रेवाज िथक जतए पाइपर दू आजीवन िमिल कए रहए बला जीव तकर Bेमक आकलन पाइपर
हो। िनœय एिह तरहक समाजकR कलंिकत समाज घोिषत कएल जाय जतए टाकाक आधारपर दापय
सब]ध बनाओल जाइछ। एक शŸदमे कहए पड़त जे िववाहक पिवJताकR तखने कायम राखल जायत जखन
हरेक वग;क लोक आमगत िवचार कऽ िववेकपूण; िनण;य लेिथ। आडवरपूण; िववाह Bि·याक संग दहेजक
िवकृत पिरपाटीक िवरोध करिथ। भिवÈयक जननी सृि§क संरचना करिनहािर आजुक क]या काि¾ पूण;
अिभशŽत भए जाएत।
यJ नाय; व6तु पूÎय]ते,
रम]ते तJ देवता।
मनु6मृितक ई वा—य सव;था अमा]य भऽ जाएत आ एक िदन हमरा लोकिनकR अवनितक महान गत;मे लऽ कए
चल जायत!q

Suggested citation: डॉ. बचेश्वर झा. “कन्यादानक भीषण समस्याक कारण.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 255, 2018-08-01. https://www.videha.co.in/research/2018/255/कन्यादानक-भीषण-समस्याक-कारण.htm

मूल विदेह अंक / Original issue