क]यादानक भीषण सम6याक कारण
मय िमिथल©चलमे वैवािहक परपराक पालन आइसँ अनुमानत: सय वष;क ...... दोसर रीितसँ होइत
छल। तािह समयक हेतु ई रीित-रेवाज िहतकर रहल होएत, मुदा तकर Bभाव बादक मैिथल स]तानपर तािह
तरहR पड़ल जे एखनहुँ तकर छाप अिमट अिछ।
ओनातँ क]यादानक सम6या Bाय: सभ िदनसँ एक कठीन सम6या रहल अिछ। समयानुसारे भलR ओकर
£प पिरवि;त होइत गेल हो...।
महाकिव िव\ापित अपन ‘पुªष-परीHा’मे एही सम6याक स]दभ; चचच कएलि]ह-
“क]या ककरा दी?पुªषकR?”
पुªष शदक Bयोग ओ िविश§ अथ;मे कएने छिथ। अ]यथा सभ पुªषाकार िथकाह।
वीर, यय;वान, िव¯ान आ वुि°मान, चािरटा पुªषक लHण होइछ,एकर अभाव जकरामे छैक से पूँछ हीन पशु
िथक। तR क]याक िववाह पुªषसँ हो।
खास कऽ क]यादानक सम6या आजुक सम6यासँ िभ± होएबाक कारण ओिह समयमे जनसं²या कम आ
भूिम अिधक रहलोपर स]तo भूिमसँ भरण-पोषण सहजिह भऽ जाइत छल। आजुक अपेHा आव³यकता कम आ
उपभोगक पदाथ´ पिरमािज;त निह। िवµान अपन Bभाव ओतेक निह देखओने छल। आइ तँ िवµान िमिथलाक
कथे कोन सपूण; धरतीक देश लोक, सं6कृितकR जोिड़ देलक अिछ। तR ओिह समयमे िमिथलाक लोकक
उित छल-
“उम खेती, मयम वाण।
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िनिष° चाकरी, भीख िनदान।।”
अथत् खेतीकR उम, zयापारकR मयम, चाकरी वा नौकरीकR िनषेध तथा भीख म©गव सभसँ नीच कम;
मानल जाइत छल। इएह कारण छल जे एिहठाम कहल जाइत अिछ-
“कर खेती घरही भला।”
कहबाक तापय; घरेमे रहू, खेती क£ अमोधमंJ छल। एतबे निह, ओिह समयक हेतु अिधक
स]तानवान होएब मा]य छलैक। िकएक तँ Bाकृितक Bकोपक कारण जनािध आ निह होमए पबैत
छल, जािहसँ जन सं²याक वृि§क ऊपर अंकुश 6वत: लािग जाइत छल। एतए तक जे पिरवारक कोन
कथा? गामक गाम जनशू]य भऽ जाइत छल। तR अिधक स]तानबला लोक पुuयवाण कहबैत छलाह। बेटा
निह रहलापर बेटीक स]तान वंशक टेक रखैत छल.........।
काल-·मे बेटी ............ होपरा]त जमीन-जथा दऽ घरेमे राखब पिरपाटी चलल जे ‘कनेदानी’ कहबैत
छल। कनेदानी राखब BितPाक बात बुझल गेल। कनेदानीक स]तान भिगनमान कहबैत छिथ। जिनक पुªषा
कनेदानी रखलि]ह से डीही कहबैत छिथ। कनेदानीक स]तान डीही पHक परम भत होइत छलाह। िबना
दरमाहाक नोकर ई भिगनमान होिथ, संगिह डीहीक कृपाक©Hी सेहो। तR जनहासक कारण निह बुझाइत छल।
कनेदानीक Bित Bाय: भलमानुष होइत छलाह, जे बादमे िबकौआक नामसँ जानल गेलाह।
िबकौआक स]दभ; िकछु चच : हिर िसंह देव महाराजक ¯ारा प¸ी-Bव]ध कएल गेल। एिहसँ मैिथल-
वा¹णक प¸ीकृत भेलापर jेणी बनल। ओिहमे योग, jोJभ्, भलमानुष Bभृितक उदय भेल। प¸ीक अनुसार
जे िनº jेणीकR Bात कएलि]ह ओिहमे सँ िकछु सप± zयित उच jेणीक वा¹णसँ सब]ध कए सव;
साधारणक दृि§मे BितPा हािसल करबाक चे§ा कएलि]ह। एतए तक जे िनº jेणीक वा¹ण पैघसँ पैघ
जमॴदार रिहतहुँ ओिह BितPाकR Bात निह कए सकैत छलाह। फलत: अथ; अपन Bभाव देखओलक
अ]तरालमे एक बाट Bश6त भऽ गेल जे िनºो jेणीक »ा¹ण वैवािहक सब]ध ¯ारा अपनाकR ऊपर उठा
सकैछ। 6प§ अिछ कनेदानी राखब एिह प¸ी-Bथाक कारणे चलाउल गेल। सुखी सप± लोक एिह
सुिवधाक उपयोग करए लगलाह। उरोर देखा-देखीमे एक तरहक उपरॱझक ि6थित उप± भऽ गेल।
िक]तु, ओिहकालक मा]यताक कारणR एहन बहुत कम लोक छलाह जे िनº jेणीक लोकसँ सब]ध करए
चाहैत छलाह। फल ई भेल जे एिह अपसं²याक वा¹णक म©ग बिढ़ गेल। एिह वग;क लोककR समाज तेहन
ने टीकासनपर चढ़ा देलक जे सभ zयाहकR माJ पेशा बनाए लेलक। इएह वग; िबकौआ कहाओल अथत् जे
िबकिथ। िव·यबला पदाथ;सँ ई वग; िभ± छलाह। पूण; मूय देलहुँ स]तo ·य कएिनहारक जूितमे ई निह
रहिथ। ई िबकौआ िबकिथ माJ िववाहक हेतु। िववाहोपरा]त ई पूण; 6वतंJ रहिथ। ने 6Jीक Bितदाियव आ
ने स]तानक Bित 6नेह। मतलब रहि]ह केवल िवदाइसँ कोनोटा Jुिट सासुरमे भेलापर £िख एहन तँ साधारण
बात रहि]ह, अपन स]तानक ज]मक सब]धमे ½ामक Bचार कऽ देबामे संकोच निह करिथ। एहन तरहक
द]त कथा व¾मीझाक आिदक सब]धमे Bचिलत अिछ।
िबकौआक लHण : ई िबकौआ आजुक तुलनामे कम निहिक]तु, मुiा मोचन हजार-लाख जँ निह निह
करैत छलाह तँ दान जैतुक ....... सँ लेिथ। जािह क]यासँ िववाह होइ]ह तकर पालनक भारसँ मुत रहबे
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ejournal 'िवदेह ' २५५ म अंक ०१ अग᭭त २०१८ (वषᭅ ११ मास १२८ अंक २५५ )
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करिथ, संगिह अलाबा ऊपरसँ िहनक धाक कड़गर रहि]ह। उम भोजन, व6J आ ढेउवा िवदाइक £पमे
भेिट जाइि]ह। एतए तक जे बाप-पुªषा वा नीज रीन-कज लेल सेहो सासुरेसँ चुकाएब उÀे³य रहि]ह। सालमे
एक-आध बेर सासुर जािथ तािह सहवाससँ जे स]तान उप± होइि]ह वएह कनेदानीक वा डीहीक उपलिध
बूझल जाइत छल। ई िबकौआ आकम;uय जीवनक अÁयासी भऽ गेल छलाह। ...... िकछु निह माJ पेट
पोशव उÀे³य रहि]ह। तबाकू, भ©गक पूण; अÁयासी रहिथ। शरीिरक चे§ा िघनौन बनौने रहिथ। चािल-ढािल
पूण; असÁय जेकo रहैत छलि]ह। माथमे चानन-ठोप लगौने रहिथ। पैरक वेमाय िवदरल ठोर नमरल पेट
चुबैत कनेरक टारी रिथ तथािप एहनो अj° £प भेलापर महग रहिथ, िकएक तँ प¸ीक Bमाण पJ भेटल
रहि]ह। तR क]या पH िहनक £प, गुण वैभवक मूय©कन निह कऽ सोन सन क]याकR ढग संग बाि]ह दैत
छल। बादमे ई िबकौआ वदु-िववाही होमए लगला, जािहसँ मैिथल व¹णमे क]यादानक मु²य सम6या छल।
बहुिववाहक सम6या िबकौआ ¯ारा केवल उप± भेल से निह आओरो कारण भऽ सकैछ,जेना राजकुलक
संसग;सँ वा¹णमे कुBथा अएबाक संभावना। पिहने वा¹ण तपी, यागी होिथ िक]तु मंJी अथवा राजपुरोिहत
भेलापर देखाउससँ बहु िववाहक अÁयासी भेलाह। िकएक तँ राजभवनमे रािनक अितिरत सु]दरीक झुuड
िनवास करैत छल। परÂच, मैिथलक ई िबकौआ वग; अथ;क लोभसँ िनº कुलमे पचीस-तीस 6Jीसँ िववाह
करैत छलाह। एतबे निह, ³मशानघाट जेबासँ पूव´ िववाह कऽ लैत छलाह। जँ Bथम 6JीकR घर अिनतो
छलाह तँ शेषकR नैहरेमे छोिड़ दैत छलाह। इएह जीवन िनवहक उ साधन छलि]ह। एिह बहु िववाहक
BथाकR तोड़बाक चे§ा यारेलाल मुंशी 1870 ई.मे कएने छलाह। हुनका आ]दोलन जोर-शोरसँ चलल छल।
ओिह पिरBेयमे 1878 ई.मे ितरहुतमे 54 िबकौआ वा¹ण मृयुसँ 665 6Jी िवधवा भेल छल जािहमे
अिधक©श युवतीमे छल। एतए तक जे मधुबनी िजलाक कोइलख िनवासी एक िबकौआ 50 वष;क आयु तक
35 िववाह कऽ नेने छलाह। सन् 1875 ई. दरभंगा जखन सविडिवजन बनल तँ ताकालीन पदािधकारी
मेटलाक आदेश कएल जे यारे लाल मुंशीक आ]दोलनक अनुसार बहु िववाह ब]द हो। एिह तरहR िबकौआ
¯ारा बहु िववाहक सम6या उप± भेल से कही वा िमिथलाक लोक ¯ारा बनाओल गेल। £िढ़वादी िवचारक
कारण क]याक भिवÈयक समीHा निह कऽ अपन उरदाियवकR समाितक बहानामे िबकौआक ठॲठमे क]या
बा]हब िथक।
बंगालक कुलीन Bथा सेहो िमिथलाक िबकौआ Bथाक समान छल। वाड; (Ward) महोदयक अिभलेखसँ
पता चलैत अिछ जे वंगपराक उदय च]iकR 65 6Jी छलि]ह, कुशदाक राम िकंकरकR 72 6Jीसँ िववाह
रहि]ह। एक एहनो घटना भेटैत अिछ जे दुगलीक रामच]i मुखजÊकR 32 6Jी रहै]ह आ वो 65 वष;क
अव6थाकR पार कएने छलाह, दैवात् यमाक िशकार भऽ गेलाह, मृयुक िनितता जािन बालक कहलिथ]ह-
“दीन भावसँ बाबूजी अपने तँ मरैत छी घरमे एको चुटकी अ± निह अिछ, एहन हालतमे jा°ो कोना
होएत?”
िपता िकछु गंभीर भऽ िनहसंकोच भऽ कहलिथ]ह-
“अिवलब नव गोपाल चटजÊक 9 वषÊय क]यासँ हमर िववाहक zयव6था क£, िकछु िदन पूव; B6ताव
आएल छल, एखनो ओ क]या अिववािहते अिछ।”
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पुJ सवाद पठा कए 250 £पैया पर बात िनित कएलिथ]ह। िववाहक 9 मासक अÁयंतरे रामच]i
मुखजÊक मृयु भऽ गेलि]ह। एिह तरहR ओ अपन jा°क इ]तजाम िववाहे ¯ारा पूरा कए मुइलाह। ई सभ
छल बहु िववाहक कुपिरणाम! िववाह सन पिवJ रेवाजकR दुिषत करब समाजक कुचािल कहू वा कलंक।
िबकौआ ¯ारा िववािहत क]याक जीवन झoकी :एिह Bथाक Bकोप तँ तेहन छल जे
बूढ़, बकनेर, अकम;uय वरक संग त£णीक िववाह एक Bकारक िवडवना कहल जा सकैछ। अनेको कोम
ल©गी जीवनक सोलहम वस]तक पिहने िवधवा भऽ कठीन जीवन जीबाक अÁयासी होइत गेल। राजा राम
मोहन रायक शती-Bथा उ]मूलनसँ अनेको िवधवा वा बूढ़क 6Jी काम िपपासावश कुिसत कम;क भाजन भेल।
एतबे निह, िबकौआ ¯ारा िववािहत िकशोरी िपताक घरमे आजीवन थोपल रहलासँ कुमाग; गामी भऽ जाइत
छल। एिहसँ दा£ण ि6थित ई भेल जे मैिथलक दिरi समुदाय िबकौआक वंशधर एखनो अिछ। िह]दू6तानक
अिधक©श शहरमे भनिसया, भीमंगा वा ताË नीच कम;मे Bवृत मैिथल »ा¹ण िबकौआक स]तान िथकाह। इहए
कारण अिछ जे िमिथलेर Bा]तमे िमथलाक कु²याितक कुचे§ा लोक करैत अिछ। आब िबकौआ Bथाक
अ]तो आव³यक छल।
िबकौआ Bथाक अ]त कहू वा िवकप दहेज Bथाक आरंभक कारण - अंÌेजी िशHाक Bचार-Bसारसँ लोक
नैितक 6तर ऊपर उठए लागल। िवµान िवकाल भेल। वैµािनक आिवÈकारसँ लोक जीवनमे आमूल पिरव;न
होमए लागल। िचिकसा िवµान Bाकृितक BकोपकR रोिक देलक। जनÍास निह भेलासँ जनवृि° अवाध गितमे
होमए लागल। 6वाधीनताक कारणR जन जीवन उ°;गामी होइत गेल। तR आब कनेदानी राखब आ ओकर
स]तानक भार उठाएब असौकज; भऽ गेल। िशिHत समुदायमे वैचािरक ·ाि]त आएल तR पुरना
Bथा, £िढ़वािदता, कुलीन Bथा वा िबकौआक समूल न§ करब आव³यक Bतीत भेल। अनमेल िववाह, वृ°
िववाह, बाल िववाहक परपराकR ....... अपन वैभवक अंश नगद £पमे दऽ क]याक िववाह कराएबक पिरपाटी
शु£ भऽ गेल।
दहेजक दा£ण 6व£प : जिहना िबकौआक jेणी छल तिहना िशिHत वग;क माप दuड कायम भेल
zयव6था £पमे। डाटर, इंजीिनयर, ओभरिसयर,टेकनीिसयन ........ jेणी सरकारी सेवक Bथम, ि¯तीय तथा
तृतीय jेणी ओ चतुथ;वगÊय गैर सरकारी सेवकक संगिह िशHण सं6थाक सेवक jेणी कायम भेल। आब की
छल वरक िव·ी उपयु;त आधारपर होमए लागल। बरदहटा जकo वरक हाट सेहो लागल रहैछ जेन सौराठक
सभा गाछी। जािह क]याक िपताकR जेहन उपाय रहैछ तेहन jेणीक वरकR खरीद कऽ िववाह करबैत छिथ।
िदनानुिदन दहेजक Bकोप बढ़ले जाय रहल अिछ। एिह दहेजक दा£ण £प तँ ई भेल जे गरीब कुमार व¹ण
जे अयो¤य अिछ ओ अिववािहते मरैत अिछ। अनेको उदाहरण भेटैत अिछ। िबकौआ Bथामे एहन बात निह
भेल रहए। खैर! दहेज-Bथामे समक संग िववाह करायब युग-धम; मानल गेल अिछ, मुदा दहेजक िवकराल
£प सामने अिछ। िबकौआ £सैत छल तँ ओ मनौती कएलापर मािन जाइत छल, िक]तु ई दहेज-Bथाक
िशिHत वग; तँ £सलापर 6Jीक जान लऽ लैत अिछ। एतबे निह, क]याक अपमान, ितर6कार ओ अवहेलना
करब 6वाभािवक होइछ। मनोनुकूल िवदाइ वा दहेजक रािशमे कमी भेलापर सासु, ससुरक संग आगत zयवहार
तककऽ दैत छिथ। पिहलुका िबकौआ म©ग, तमाकू खाइत छल तँ आजुक वर मिदरा,िसगरेट, चरस ओ
....... अÁयासी होइत अिछ। िबकौआ एक आध बेर सासुर अबैत छल, मुदा आजुक ई िबकौआ सालो भिर
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सासुरे रहबाक आकंHी अिछ। अ]तर िसफ; एतबाटा जे िबकौआक 6Jी िपतेघरमे रहैत छल जािहसँ मयिदत
छल, मुदा एखनुका वरक 6Jी संगिह रहैत अिछ, िक]तु एिह पढ़लाहीक शील,6वभाव रहन-सहन चािल-ढािल
वातावरणक कारणR िवकृत भऽ जाइछ। अिधक©श 6Jी तँ शीलहरणक िशकार भऽ जाइत अिछ। कोना बूझब
जे िबकौआ Bथाक अ]त भेल? आजुक ई दहेज Bथा तँ ओकरोसँ िविभ± £पमे सामने आएल अिछ। आजुक
दहेज Bथाक कारणR क]याक िपताक धम;, धन ओ इÎजत सभ नीलाम भऽ जाइत अिछ। पाईक अभावमे
क]याक िपता बोझ तरहक दूिभ जकo िपअरगात कृशकाय भऽ समय कािट रहल अिछ। कतबो £प-गुणसँ
युत क]या छि]ह,मुदा पाईक अभावमे हुनक िपताकR केओ मोजर निह दऽ सकैछ। पैसाक िपशाची लोक
यो¤य-अयो¤य क]याक सीमाकR सि]द¤ध कऽ देने अिछ। अनेको िपता-पुJीकR िशिHत करैत छिथ, तािक हुनका
बेटाबला दहेजमे छूट देताह मुदा से सभव निह। यो¤य वर क]याक वरण करिथ से ²याल केओ निह करैत
छिथ जािहसँ िनम;ल दापय जीवन नशीव होएब कठीन भऽ गेल अिछ। एकर Bितफल की होएत? मैिथल
समाजक jृंखला टूिट जायत, आिथ;क िवषमता सामािजक ज]म देत।
एक िदिस जँ क]या पH बालक भीत जकo ढहल जाय रहल अिछ तँ दोसर िदिस वरक पH
मनोरϵक पूल िबनु िसमे]ट-बालुक जोड़बामे तलीन अिछ। किहया धिर ई दहेजक दाहसँ स]तत रहत से
निह जािन।
दहेजक कारण अिववािहत क]याक जीवन झoकी : दहेजक दद;नाक असिर तेहन तरहR पिड़ रहल अिछ
जे अिधक©श स½ा]त पिरवारक क]याक कौमाय; अव6था िववाहक पितHेमे समात भऽ जाइछ। एतए तक जे
यौवनकालमे नारकीय अव6थाक अनुभव करैत अिछ। Bाय: बेटीबला ओ बेटाबला दूनूक समH ई सम6या
उप± छि]ह।केओ एिहसँ मुत निह छिथ मुदा टाका गनाएब आ गानबकR आइ मयदाक िवषय जानल जाइत
अिछ। जे जतेक टाका गनबैत छिथ ओ ओतेक गव´ितसँ समाजकR बुझबैत छिथ, संगिह जे गनैत छिथ से
अपन बड़पनक िवशद् वण;न करैत छिथ।
सभसँ खेदक िवषय तँ ई जे गरीब लोक जे बेटीक Bित ताका लैत अिछ वा छल, तकरा लोक बेटी
बेचबा कहैत छल। घृणाक दृि§सँ देखैत छल, आइ ओकर उनटा हवा बिह गेल अिछ। बेटा बेचिनहारकR
लोक बेटा बेचबा निह किह समाजमे उचासन दैत अिछ जािहसँ बेटाक िववाह टाका लऽ कए करबामे
गौरवाि]वत होइत अिछ। ई समाजक लोकक िवचारहीनता निह तँ आर की? एिहसँ िन]दनीय बात आइ की
होएत? तखन तुलसीक पoित 6मरण भऽ जाइछ-
“समरथकR निह दोष गोसाË।”
अथत् पैघ लोककR दोषी निह कहल जाइछ। ओइ दहेजक पृPपोषक समाज पैघे लेाक छिथ तR एकर
उ]मूलन सभव कोना? निह जािन िबकौआक जगह दहेज आएल आ ई किहया धिर लोककR िखहारैत
रहत? आइ तँ आइ तँ अिधक©श ललना अभावी िपताक छातीपर दुग;म पहाड़ बिन बैसिल अिछ। कतेक तँ
िववाह सूJमे बा]हलोपर भा¤यपर झखैत अिछ। मनोनुकूल घर-वरक अभवमे संघष;रत जीवन िबता रहल
अिछ। सुख सुिवधामे पलल बािलका पितक घरमे गंजन, दुzयव;हार, zयं¤यपूण; वाक् वाणसँ िव° होइत रहैछ
जकर कारण होइछ लेन-देनक गड़वरी, दान जैतुकमे मनचाही व6तुक आपूि;मे कमी। एतबे निह दहेजक
उपरा]त विरयातक िविश§ सेवा निह भेलासँ वा कोनो तरहक िवघटन भेलापर क]याकR सासुरमे पित ¯ारा वा
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पितक घरक लोक ¯ारा अमयिदत zयवहार कएल जाइछ। कतेकठाम तँ क]याक हया कऽ देल जाइछ आ
निह तँ क]या 6वयं आम हया कऽ लैत अिछ। सभक मूलमे दहेजे अिछ जे क]याक िपताकR िववश कऽ
दैछ, िववशताक कारण होइछ izयाभाव, अथभाव। कोजागरा, जड़ाडरक संग-संग साल भिर तक वा¹ण
समाजमे बेटीबलाक तनोतरी ढील भऽ जाइछ तR िववाहसँ िवध भारी कहल जाइछ।
दहेज -Bथाक उ]मूलनक उपाय - य\िप व;मान सरकार दहेज लेिनहार ओ देिनहार दुनूकR कठोर दuड
देबाक अयादेश जारी कएल अिछ, मुदा ई नैितक पतनबला लोक एखनहुँ कबल ओिढ़ कऽ घी पीबएबला
बात रखने अिछ। सरकारक ऑंिखमे तँ गद दैते अिछ संगिह समाजोकR उलू बना रहल अिछ। लेन-देन
कऽ लइए। गुत £पसँ तािक हम आदश; £पमे कुटमैती कएल अिछ। तR सरकारक ¯ारा एकर उ]मूलन
कथमिप सभव निह। एकरा लेल वैचािरक ·ाि]त चाही,समाजक हरेक zयितक नैितक समथ;न चाही। ई
एक कलंकपूण; रेवाज िथक जतए पाइपर दू आजीवन िमिल कए रहए बला जीव तकर Bेमक आकलन पाइपर
हो। िनय एिह तरहक समाजकR कलंिकत समाज घोिषत कएल जाय जतए टाकाक आधारपर दापय
सब]ध बनाओल जाइछ। एक शदमे कहए पड़त जे िववाहक पिवJताकR तखने कायम राखल जायत जखन
हरेक वग;क लोक आमगत िवचार कऽ िववेकपूण; िनण;य लेिथ। आडवरपूण; िववाह Bि·याक संग दहेजक
िवकृत पिरपाटीक िवरोध करिथ। भिवÈयक जननी सृि§क संरचना करिनहािर आजुक क]या काि¾ पूण;
अिभशत भए जाएत।
यJ नाय; व6तु पूÎय]ते,
रम]ते तJ देवता।
मनु6मृितक ई वाय सव;था अमा]य भऽ जाएत आ एक िदन हमरा लोकिनकR अवनितक महान गत;मे लऽ कए
चल जायत!q