विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिलीक विकासमे नेपालक योगदान

डॉ. बचेश्वर झा · 2018-09-01 · अंक 257

मैिथलीक िवकासमे नेपालक योगदान
सaदभ> बोध- मैिथली सािहžयक उžपि“क जनमानसक हृदयसँ भेल अिछ तT एिहठाम जनमानसक हेतु
मनोरंजक गीत काय ओ नाटकक Eधानता रहल अिछ। एिह कारणT मैिथली सािहžयक िवकासधारा
िमिथलिहटामे निह Eवािहत भेल Ežयुत् िमिथलाक अितिरत एकर Eधानधारा उ“र नेपालमे एवम् दोसर

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पुवÊचल Eदेशमे Eवािहत भेल। जहp तक वाxतिवकता छैक नेपाल आ िमिथलाक स8बaध सदा-सव>दासँ आिब
रहल अिछ। कणट् वंशीय राजा हिर िसंह देव मुसलमान आततायी गयासुÉीन तुगलकसँ परािजत भऽ
िमिथलासँ भािग नेपाल गेला ओतिह रा”यक xथापना कएल। िमिथलाक िव®ान लोकिन सेहो अपनाकT
असुरिKत बुिझ नेपालेमे आvय लेलिन। नेपालक तžकालीन राजा लोकिन मैिथल िव®ावनक बड़ स8मान
कएलिन। ओिहठामक राजा संगीत आ नाटकक िवशेष Eेमी छलाह। कला मम>Ë मैिथल िव®ान अपना संग
अनेको िवषय-वxतुक पा{डुिलिप लेने गेल छलाह तT हुनका सभक समादृत हएब उिचते छल। संगीतसँ पिरपूण>
मैिथली नाटकक रचना नेपालक तžकालीन राजा लोकिनक अविधमे मैिथल िव®ान ®ारा भेल। यैह कारण जे
नेपाल मैिथला िव®ान आ भाषाक केad भऽ गेल रहए।
नेपालमे मैिथली भाषाकT राजकीय भाषा माaयता भेिट गेल छलै। मुœय भाषाक •पमे मैिथली गनल
जाइत छल। सािहžयक हरेक िवधा एिहठाम अनुEािणत भेल। एहुखन नेपालक तराई KेMमे मैिथली भाषी कए
िमिथलाक संxकृितक xपÇ Eभाव देखल जाइत अिछ।
‘नाÌयम् रसाžमक कायम्’ काय KेM तँ आरो चमžकृत भेल। खास कऽ हृदय कायक भरपूर सामšी
नेपालमे ओिरआओल अिछ।
सातम् आठम् शता¦दीक वौ„गानसँ लऽ कऽ जे ¡म नेपालक धरतीपर मैिथलीक िवकास हेतु चिल
पड़ल छलैक ओ मÍय कालमे आिब अित समृ„ अवxथामे देखल जाइ अिछ।
म.म. हर Eसाद शाxMी 1916 ई.मे िस„ सािहžयक अaवेषण नेपाल मÍय कएल, जेकरा बंगला भाषाक
Eाचीनतम सािहžय आिन वौ„गान ओ दोहाक नामसँ Eकािशत कएल।
”योितरीsर ठाकुरक ‘वण>रÏाकर’नेपालिहमे Eा˜त भेल। िव^ापितक Eमािणक पदावली एतु°े देन िथक।
कणट् वंशीय राजालोकिनक संग मcलवंशीय राजा लोकिन सेहो मैिथली सािहžयक अनaय Eेमी छलाह।
देखल जाइछ जे जय िxथत मcलसँ लऽ कऽ रंिजत मcल धिर एतए मैिथलीक सवÊगीण िवकास कएल।
मcलकालीन मैिथली सािहžयमे गीत तथा नाटकक Eधानता रहल अिछ। गीत काय भित Eधान अिछ।
भतपुर (भात गpव)क राजा भूपतीad मcल (1687-1731) ई. रा”यकाल िवÑणु, िशव आ भवानी आिदपरक
शतश: मैिथली गीतक रचना कएने छलाह। एिहठामक रिचत मैिथली गीतपर महाकिव िव^ापितक रचनाक पूण>
Eभाव अिछ। भाषा पिरमािज>त एवम् सुलिलत देखल जाइछ-
“हे देिव!शरण राखूभवानी,
तुअ पद कमल Óमर मोर मानस
जनम जनम ईहो मानी।
भूतीad मल नृप ईहो गाओल
जय िगिरजा पित xवामी।।”
िमिथलाक िछ±-िभ± भाषा, सािहžयक आकारकT सुरिKत स8वि„>त नेपालेक राजवंश ®ारा भेल। एहुखन
नेपालक लाइवÀेरीमे अमूcय šaथ ओ दुल>भ šंथ सभ ठेकनाओल अिछ जे जीण>वxथाकT Eा˜त कएने अिछ।

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िवs सािहžयक पयलोचन कएलासँ xपÇ भऽ जाइछ जे सािहžयक समxत Eभेदमे नाटकक xथान अित
महžवपूण> अिछ। संxकृतक आचाय> लोकिन कायेषुनाटकम् र8य8क अaतग>त नाटककT अनेक िवषयक दृिÇए
रमणीय किह एकर सžयतापर मोहर लगा देलिaह। नाटकमे अनुकरणाžमक अिभनय दृ©यमान होइछ तT एकरा
•पक कहल जाइछ। उaमेष युगक Eमुख नाटक केad भतपुर बनेपा कािaतपुर अिछ।
हिर िसंहदेवक नेपाल आगमनसँ इितहासमे नाना Eकारक पिरव“>न भेल तथा नेपाल आ िमिथलाक अनेक
Eकारक स8बaध भऽ गेलैक। हिर िसंह देवक मृžयुक पÔात् हुनक पुM मान िसंह देव तथा ©याम िसंह देव
नेपालमे रा”य कएलिaह। ©याम िसंह देव नेपालमे रा”य कएलिaह। ©याम िसंह देवक कaयाक िववाह िमिथलामे
भेल। एकर फल ई भेल जे मैिथल िव®ानक आदर सžकार नेपालक राजदरवार एवम् अaय िविशÇ समाजमे
बराबर होइत रहल। बादमे नेपालक मcलवंशी राजाक पािरवािरक स8बaध सेहो िमिथलामे भेल। एिहसँ
िमिथलाक भाषाक Eभाव नेपालपर नीक जकp पड़ल। िमिथलासँ िविशÇ
िव®ान,पि{डत, किव, धम>शाxMी, संगीतË सभ नेपाल जाय लगलाह। िमिथलामे हुनका लोकिनक संरKणक सेहो
कोनो यवxथा मुसलमान सविहक िनरंतर आ¡मणसँ निह रिह गेल। इहए कारण भेल जे मैिथल िव®ान
लोकिन िमिथलासँ मैिथली नाटकक बीज नेपाल लऽ गेलाह। मैिथली नाटकक जaम वxतुत: िमिथलामे भेल
मुदा िवकास नेपालमे।
नेपालमे मैिथली नाटकक िवकासक संKेपत: िनÕिलखत कारण भेल-
(क) पारxववत¸ KेM होएबाक कारण िमिथला आ नेपालक सxकृितक स8बaध बरोविर
अिछ।
(ख) नेपाल सभ िदन िहaदूरा”य रहल आ िमिथलामे सेहो िहaदूžवक Eित मोह। नेपालक
राजा एिहठामक िव®ान ओ पि{डतक स8मान कएलिaह।
(ग) नेपालक मcलवंश ओ िमिथलाक कण>ट् वंशक रत स8बaध दूनू KेMक
िनवासीमे, भाषा आ संxकृितकT आओर िनकट अनवामे सहमत भेला।
(घ) मुसलमानी आ¡मणक कारणT एिह भू-भागक िव®ान आ पि{डत नेपाल जाय xवxथ
िच“ भए सकलाह।
(ङ) हिर िसंह देव एतए 1324 ई. गमासुÉीन तुलकसँ परािजत भए नेपालमे भात गpवक
िनकट अपन रा”य xथािपत कएलिaह जे पpच पीढ़ी धिर चलल। एिह कण>ट शासन कालमे
किव सािहžयकारक पय˜त आदर भेल।
(च) मcलवंशक राजा सभ सेहो मैिथल िव®ान, पि{डत, किव संगीतË आिदकT स8मािनत
करैत छलाह आ वसवाक हेतु पय˜त भूिम आ स8पि“ देलिaह।
(छ) मcलवंशक शासनकालमे मैिथली नेपालक राज भाषा भए गेल तथा मैिथलीकT
िवकिसत होएबाक अवसर भेटल।
(ज) इितहास साKी अिछ जे मुसलमानी Eभुžवमे नाटक निह िवकिसत भेल। िहaदू रा”य
नेपाल तकर नीक वातावरण Exतुत कएलक।

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(झ) नाटकक िवषय-वxतु नेपाल आ िमिथलाक Eचिलत कथाक आधारपर लेल गेल।
मcलवंशक राजा जय िxथत मcल xवयं बड़ कलािEय छलाह। िहनक समय 1394 ई. धिर कहल
जाइछ। िहनक पÔात् मKमcल (1474) ई. धिर नेपालमे मैिथली नाटकक रचनाक कोनो पुÇ Eमाण निह
भेटैछ। मKमcलक पÔात् नेपाल तीन भागमे िवभत भऽ गेल आ तीनटा राजधानी भात गpव,बिनकपुर तथा
कािaतपुर आ लिलत पाटन आ काठमा{डू xथािपत भेल। एिह तीनू रा”वंशक राजा लोकिन xवयं नाटकार
छला तथा ओ लोकिन किव एवम् नाटककारकT Evय देलिaह। िविभ± अवसरपर नाटकक अिभनयक आयोजन
करबैत छलाह। नाटककT रचिनहारकT Eोžसाहन दैत छलाह।
भाग गpव शाखामे िवs मcलक समय (1533) मे नाटकक बहुत िवकास भेल। Eिस„ नाटक ‘िव^ा
िवलाप’क रचना ओही समयमे भेल। एिह नाटकक अनुवाद भारतेaदु हिरÔad सेहो ‘िव^ा िवलाप’नाम िवधा
सुaदर नामसँ कएल। जग”योित>मcल (1618-1833) रा”यकालमे मैिथली नाटक खूब िवकिसत भेल। िहनक
रा”यकालमे मुिदत कुवलमs वंशमिणक िलखलिaह। हर गौरी िववाह एवम् कुंज िवहारी नाटक सेहो कम
Eिसि„ निह पओलक। िहनक पौM जगžEकाश मcलक समयमे छौटा मैिथली नाटक िलखल गेल।
उषाहरण, नलीय नाटकम्, पािरजात हरण, पाव>ती हरण, मलय गिaधनी एवम् मदन चिरM। सुमित िनता िमM
मcल xवयं एक पैघ नाटककार छलाह जिनक िलखल आठ गोट नाटक भेटैत अिछ। िहनक पुM भुपतीad
मcल xवयं किव छलाह जिनका समय चौदहटा रचना भेल रंिजत मcलक समयमे तँ चरम सीमापर नाटकक
रचना पहुँच गेल छल ई मcल वंशक अिaतम राजा छलाह। 1921 ईxवीमे मcलवंशक अिaतम राजा रंिजत
मcलक समयमे (1921) मैिथली नाटक रचना एक Eमुख बात िथक।
नेपालमे शहवंशक उदय आ एकीकरणक पÔात् भाषाक नामपर गौण काज लेल अिछ। गोरखा बोलीक
Eभावमे पिड़ मैिथली तँ लग-भग मेटाय गेल। खाली नाच, गीत कतहु-कतहु लेखन आिदमे एकर •प सुरिKत
रहलैक। राणाकालीन नेपाल भाषा सािहžयक हेतु अaधकारक युगक •पमे मानल जाइत अिछ। मैिथलीक
अवxथा तँ नेपालमे िवचारणीय रहल।
2007 सालक मुित राणा शासनसँ आ बादमे 2017 साल धिर उथल-पुथलक समय होएबाक कारणT
मैिथलीक िवकास हेतु नेपालमे कोनो ठोस काज निह भऽ सकल। 2014-16 सालमे एकटा ‘नव
जागरण’ पMक एक माM अंकक Eकाशन संतोष िदया सकैत अिछ। 1960 ई.क बाद कनेक िxथरता तँ
आएल मुदा सरकारी संरKणक अभावमे गत 30 वष>मे जतेक सािहिžयक काज होएबाक चाही ओ निह भऽ
सकल। कोनो सािहžयानुरागी आ िपपासु मोनकT आ अहलािदत करएबला सामšीक अभाव सदैव खटकैत रहल
तथािप एिह अविधमे जे िकछु भऽ सकल अिछ तकर सािहžयक िवधागत लेखा-जोखा कएल जा सकैछ।
आधुिनक काल : मÍयकालीन मैिथली सािहžयक जएटा उपलि¦ध अिछ से आधार xतभक •पमे मानल
जाइछ। मुदा नेपालमे मैिथली सािहžयक स8पूण> काज 1960 ई.क बादे भेल जकरा हमरा लोकिन आधुिनक
कालक Eारंभ मािन कऽ चलैत छी।
एिहसँ पूव> पचासेक दशकमे पं. सुaदर झा शाxMी अपन मूल जaम xथान दरभंगासँ मैिथली लेखकक
•पT Eितिनिधžव करैत छलाह। गलीक कुकुर आिद एखनो दरबार नै खुजलैए सन रचना करैत छलाह।

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पं. जीवनाथ झा सेहो अपन Eवaध काय आिद रचनासँ EितिRत भऽ चुकल छलाह। वxतुत:
जनकपुरमे पं. जीवनाथक Eवेश एतु°ा वातावरणमे सािहžयक Eित अनुराग जगौलक आ ओ सािहžयक
गु³जीक •पमे सव>M चिच>त भेलाह। डॉ. धीरेad सािठक बाद जनकपुरमे आधुिनक मैिथलीक शु•आत
कएलिaह। ओ एिहसँ पूव> मैिथली लेखकक •पमे EितिRत भऽ गेल छलाह। 1962 ई.मे Eो. Eफुcल कुमार
िसंह मौन नेपालक मैिथली सिहžयक इितहास िलखलिaह, जािहमे Eाचीन सािहžयक •पमे चच भेल अिछ
ओतेक आधुिनक कालक सािहžय हcलुक Eतीत भेल अिछ। तT िहनकासँ तुलनाžमक दृिÇए डॉ. जयकाaत
िमvक इितहास लेखन vेRतर अिछ। पिहल कारण तँ एक दशकमे सािहžय लेखन ओतेक समृ„ निह छल।
दोसर सूचनागत Mुिट सेहो Eफूcल िसंहकT भेलिaह।
आब तँ तीन दशकमे िकछु-िकछु एहन रचना सभ भेल अिछ जकरा आंगुरपर गनल जा सकैत अिछ।
Eवaध कायमे पं. रमाकाaत झाक ‘यथा’डॉ. धीरेadक ‘िMपु{ड’पं. मथुरानaद चौधरी माथुरक ख{ड
काय ‘Mीशूली’Eमुख अिछ।
मुतक कायमे डॉ. धीरेadक ‘ह«गरमे टpगल कोट’क•णा भरल ई गीत हमर’राम भरोस कापिड़ Óमरक
ब± कोठरीमे औनाइत धुँआ, निह आब निह,मोमक िपघलैत अधर, अप±-अनिचaहार, िवनोद चad झाक ‘कृषक
बाला, पं. शुभ नारायण झाक ‘यंMणा’, पं. सुरेश झाक मैिथली रस कलश काय Eमुख कृित देखना जाइछ।
पं. झा मैिथली गीता सेहो िलखने छिथ। चad शेखर झा शेखरक ‘हम नेपाल हमर नेपाली’किवता संšह आएल
अिछ।
अनुवाद िवधा : नेपालक कितपय सािहžयकार िविभ± रचनाक अनुवाद मैिथली भाषामे कएलिन अिछ, जे
हुनक मैिथली Eेमक Eतीक िथक। यदुवंश लाल चad स˜तरी िजलाक ितलाठी šामवासी ®ारा ‘उसैको लािग’क
चॉंदनी साहक रचनाकT लोकेsर यिथत, पं. कृÑणा Eसाद उपाÍयायक ®ारा िव^ापितक पदावलीक, डॉ.
धीरेadक ‘उमर खैयानक’महाकिव भनुभतक रामायण मैिथलीमे अनुवाद कऽ वdीनायण वम अ¾ुत कएल
अिछ। Eकाशनक बाटपर अिछ पं. सूय>काaत झाक मेघदूतक, डॉ. रमेश ®ारा सात जापानी कथा अनुवाद
मैिथलीमे चमžकारी Eयास िथक।
कथा-उपaयास आ साKाžकार िवधा : वxतुत: नेपालमे मैिथली कथाक KेMमे सेहो नीक काज भेल
अिछ। िकछु Eितब„ कथाकारक संšह एखन धिर समK निह भेल अिछ तT छुछु± लगैत अिछ। एखन धिर
Eा˜त कथा संšहमे डॉ. धीरेadक ‘कूहेश आ िकरण’, ‘पझाइत धूरक आिग’,‘शत•पा आ मनु’ राम भरोस कापिड़
Óमरक तोरा संगे जयवो रे कुजवा, रेवती रमण लालक ‘पाधवनिह एलाहमधुपुरसँ’ Eमुख अिछ।
डॉ. धीरेadक स8पादनमे नेपालक Eितिनिध गcप संšह, Eो. सुरेad लाभक संपादनमे नेपालीय मैिथलीक
उžकृÇ गcप Eकािशत भेल अिछ।
उपaयास : एिह िवधामे ©यामाझाक ‘िबनु माइक बेटी’, कुमरकाaतक ‘सेहaता’क अितिरत ए8हर डॉ.
धीरेadक भो³कवा, कादो कोयला, ठुमुिक चल,पाठककT सेतोष दैत अिछ।
साKाžकार : साKाžकार िवधामे रेवती रमण लालक साKाžकार एक माM पोथी अिछ, ओना एिह KेMमे
राम भरोस कापिड़क नीक काज सभ भेल अिछ। जकरा अनतग>त अvेय, केदारनाथ यिथत, िवजय
मcल, मातृका Eसाद कोइरालाक साKाžकार खूब चिच>त भेल अिछ।

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नाटक : एिह िवधामे आधुिनक नाटककारमे महेad मलंिगया लेखनमे िभड़ल छिथ। Eारंिभक
रचना ‘ल×मण रेखा खि{डत’, जुआएल कन-कनी, ओकरा आंगनक बारह मासा, टूटल तागक एकटा छोर, एककी
संšह हुनक Eमुख पुxतकाकार छिaह। काठक लोक िफलहाल चचमे आएल अिछ। ‘देहपर कोठी खसा
िदअ’आलुक बोरी सन बहुतो रेिडयो •पक ओ िलखने छिथ। एककी लेखकक •पमे डॉ. धीरेad, राम भरोस
कापिड़, डॉ. ल×मण शाxMी, ©याम सुaदर शिश,ललनक Eमुख xथान अिछ।
िनवaध समालोचना तथा संxमरण : एिह िवधामे Eो. Øज िकशोर ठाकुरक अÍययन ओ िववेचन छोिड़
आन रचना पुxतकाकार •पमे निह आिब रहल अिछ। ओना, डॉ. धीरेadक सािहžय स8बaधी, Óमरक लोक
संxकृित स8बaधी, डॉ. िवमलाक सािहžय स8बaधी महेad मलंिगयाक, रेवती रमण लालक राजेad िकशोरक
िविवध सामियक िनबaध सभ Eकािशत भेल अिछ।
याMा संxमरण : एिह िवधामे राम भरोस कापिड़ Óमरक अžयaत महžवपूण> रचना आएल अिछ। Eो.
Eफुcल कुमार िसंह मौनक, रेवती रमण, ©याम शिश सेहो एक िदस संल²न छिथ। समालोचना संšहमे राम
भरोस कापिड़ Óमरक स8पादनमे नेपालक मैिथली पMकािरता आएल अिछ।
पM सािहžय : 2025 सालसँ Eार8भ भेल नेपालक सामियक संकलन युग आब एकटा ठोस •प लऽ
चुकल अिछ। Eो. Eफुcल कुमार िसंह ‘मौन’क स8पादनमे मैिथली िवराटनगरसँ डॉ. हिरदेव िमvक स8पादनमे
ईजोत काठमडूसँ, पं. सुaदर झा शाxMीक स8पादनमे फूल-पात काठमडूसँ, वाणीक िहलकोर जनकपुरसँ संगिह
दुिवधान एतिहसँ ए8हर 2019 सँ राम भरोस कापिड़क स8पादनमे गाम-घर सा˜तािहक िनरaतर Eकािशत भऽ
रहल अिछ। अच>ना ®ैमािसक गत 16 वष>सँ Eकाशन आ ‘ऑंजुर’ आब मािसक •पमे Eकािशत भऽ रहल
अिछ। नेपाली भाषी सािहžयकार ®ारा मैिथली सािहžय सेवामे डॉ. कृÑणा Eसाद उपाÍयायक नाम आदरसँ लेल
जा सकैछ। ओना, िहनके भाइ डॉ. ल×मण शाxMी तँ अ¾ुत काज कएलिन अिछ। ई अपन दू गोट पोथी दऽ
एक धम> काय युिधRीर महाकाय आ दोसर धीकताम् गीत काय। रामेsर Eसाद अयल ®ारा रिचत िशव-
मधुक भा²य रेखा नामक कथा काय देिख पड़ैत अिछ। फुटकर रचनामे मनुवÀाजकी, केवेर िधिमरे, जगदीश
िधिमरे आिद Eमुख छिथ।
उपसंहार वा िनण>याžमक िबaदु : एिह तरहT िविभ± िवधामे गत तीस वष>सँ भेल िवकासक •प रेखा पूण>
संतोष तँ निहयT दैत अिछ माM आशा टा जगबैत अिछ। िवकासक संभावना नीक छैक। अवसर पािब िच°न
काज कऽ सकैछ। नेपालमे संवैधािनक राजतंMक अaतग>त पूण> EजातंMक बहाली भेलासँ भाषा िवकासक गित
अपना ढंगसँ संचािलत कएल जा सकैछ। राजकीय EËा EितRानसँ सरकार‘मैिथली िवभाग’ खोललक अिछ
जािहसँ िकछु महžवपूण> रचना सभक Eकाशन होएब स8भव िथक। खास कऽ मैिथली सािहžयक इितहास, श¦द
कोषओ िवधागत संšह Eमुख रहत। तिहना अनुसंधानक हेतु िव®त वृितक संभावना सेहो छैक जािहसँ
सरकारी वा नीज पुxट सामšीमे सुरिKत मैिथलीक पुरना महžवपूण> पा{डूिलिपक उ„ार कएल जा सकैछ।
स8पूण> मैिथली संसारक हेतु अपन रचनासँ योगदान पहुँचेबाक लेल एिहठामक सािहžयकार तcलीन छिथ।
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Suggested citation: डॉ. बचेश्वर झा. “मैथिलीक विकासमे नेपालक योगदान.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 257, 2018-09-01. https://www.videha.co.in/research/2018/257/मैथिलीक-विकासमे-नेपालक-योगदान.htm

मूल विदेह अंक / Original issue