मैिथलीक िवकासमे नेपालक योगदान
सaदभ> बोध- मैिथली सािहयक उपिक जनमानसक हृदयसँ भेल अिछ तT एिहठाम जनमानसक हेतु
मनोरंजक गीत काय ओ नाटकक Eधानता रहल अिछ। एिह कारणT मैिथली सािहयक िवकासधारा
िमिथलिहटामे निह Eवािहत भेल Eयुत् िमिथलाक अितिरत एकर Eधानधारा उर नेपालमे एवम् दोसर
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पुवÊचल Eदेशमे Eवािहत भेल। जहp तक वाxतिवकता छैक नेपाल आ िमिथलाक स8बaध सदा-सव>दासँ आिब
रहल अिछ। कणट् वंशीय राजा हिर िसंह देव मुसलमान आततायी गयासुÉीन तुगलकसँ परािजत भऽ
िमिथलासँ भािग नेपाल गेला ओतिह रायक xथापना कएल। िमिथलाक िव®ान लोकिन सेहो अपनाकT
असुरिKत बुिझ नेपालेमे आvय लेलिन। नेपालक तकालीन राजा लोकिन मैिथल िव®ावनक बड़ स8मान
कएलिन। ओिहठामक राजा संगीत आ नाटकक िवशेष Eेमी छलाह। कला मम>Ë मैिथल िव®ान अपना संग
अनेको िवषय-वxतुक पा{डुिलिप लेने गेल छलाह तT हुनका सभक समादृत हएब उिचते छल। संगीतसँ पिरपूण>
मैिथली नाटकक रचना नेपालक तकालीन राजा लोकिनक अविधमे मैिथल िव®ान ®ारा भेल। यैह कारण जे
नेपाल मैिथला िव®ान आ भाषाक केad भऽ गेल रहए।
नेपालमे मैिथली भाषाकT राजकीय भाषा माaयता भेिट गेल छलै। मुय भाषाक पमे मैिथली गनल
जाइत छल। सािहयक हरेक िवधा एिहठाम अनुEािणत भेल। एहुखन नेपालक तराई KेMमे मैिथली भाषी कए
िमिथलाक संxकृितक xपÇ Eभाव देखल जाइत अिछ।
‘नाÌयम् रसामक कायम्’ काय KेM तँ आरो चमकृत भेल। खास कऽ हृदय कायक भरपूर सामी
नेपालमे ओिरआओल अिछ।
सातम् आठम् शता¦दीक वौगानसँ लऽ कऽ जे ¡म नेपालक धरतीपर मैिथलीक िवकास हेतु चिल
पड़ल छलैक ओ मÍय कालमे आिब अित समृ अवxथामे देखल जाइ अिछ।
म.म. हर Eसाद शाxMी 1916 ई.मे िस सािहयक अaवेषण नेपाल मÍय कएल, जेकरा बंगला भाषाक
Eाचीनतम सािहय आिन वौगान ओ दोहाक नामसँ Eकािशत कएल।
योितरीsर ठाकुरक ‘वण>रÏाकर’नेपालिहमे Eात भेल। िव^ापितक Eमािणक पदावली एतु°े देन िथक।
कणट् वंशीय राजालोकिनक संग मcलवंशीय राजा लोकिन सेहो मैिथली सािहयक अनaय Eेमी छलाह।
देखल जाइछ जे जय िxथत मcलसँ लऽ कऽ रंिजत मcल धिर एतए मैिथलीक सवÊगीण िवकास कएल।
मcलकालीन मैिथली सािहयमे गीत तथा नाटकक Eधानता रहल अिछ। गीत काय भित Eधान अिछ।
भतपुर (भात गpव)क राजा भूपतीad मcल (1687-1731) ई. रायकाल िवÑणु, िशव आ भवानी आिदपरक
शतश: मैिथली गीतक रचना कएने छलाह। एिहठामक रिचत मैिथली गीतपर महाकिव िव^ापितक रचनाक पूण>
Eभाव अिछ। भाषा पिरमािज>त एवम् सुलिलत देखल जाइछ-
“हे देिव!शरण राखूभवानी,
तुअ पद कमल Óमर मोर मानस
जनम जनम ईहो मानी।
भूतीad मल नृप ईहो गाओल
जय िगिरजा पित xवामी।।”
िमिथलाक िछ±-िभ± भाषा, सािहयक आकारकT सुरिKत स8वि>त नेपालेक राजवंश ®ारा भेल। एहुखन
नेपालक लाइवÀेरीमे अमूcय aथ ओ दुल>भ ंथ सभ ठेकनाओल अिछ जे जीण>वxथाकT Eात कएने अिछ।
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िवs सािहयक पयलोचन कएलासँ xपÇ भऽ जाइछ जे सािहयक समxत Eभेदमे नाटकक xथान अित
महवपूण> अिछ। संxकृतक आचाय> लोकिन कायेषुनाटकम् र8य8क अaतग>त नाटककT अनेक िवषयक दृिÇए
रमणीय किह एकर सयतापर मोहर लगा देलिaह। नाटकमे अनुकरणामक अिभनय दृ©यमान होइछ तT एकरा
पक कहल जाइछ। उaमेष युगक Eमुख नाटक केad भतपुर बनेपा कािaतपुर अिछ।
हिर िसंहदेवक नेपाल आगमनसँ इितहासमे नाना Eकारक पिरव>न भेल तथा नेपाल आ िमिथलाक अनेक
Eकारक स8बaध भऽ गेलैक। हिर िसंह देवक मृयुक पÔात् हुनक पुM मान िसंह देव तथा ©याम िसंह देव
नेपालमे राय कएलिaह। ©याम िसंह देव नेपालमे राय कएलिaह। ©याम िसंह देवक कaयाक िववाह िमिथलामे
भेल। एकर फल ई भेल जे मैिथल िव®ानक आदर सकार नेपालक राजदरवार एवम् अaय िविशÇ समाजमे
बराबर होइत रहल। बादमे नेपालक मcलवंशी राजाक पािरवािरक स8बaध सेहो िमिथलामे भेल। एिहसँ
िमिथलाक भाषाक Eभाव नेपालपर नीक जकp पड़ल। िमिथलासँ िविशÇ
िव®ान,पि{डत, किव, धम>शाxMी, संगीतË सभ नेपाल जाय लगलाह। िमिथलामे हुनका लोकिनक संरKणक सेहो
कोनो यवxथा मुसलमान सविहक िनरंतर आ¡मणसँ निह रिह गेल। इहए कारण भेल जे मैिथल िव®ान
लोकिन िमिथलासँ मैिथली नाटकक बीज नेपाल लऽ गेलाह। मैिथली नाटकक जaम वxतुत: िमिथलामे भेल
मुदा िवकास नेपालमे।
नेपालमे मैिथली नाटकक िवकासक संKेपत: िनÕिलखत कारण भेल-
(क) पारxववत¸ KेM होएबाक कारण िमिथला आ नेपालक सxकृितक स8बaध बरोविर
अिछ।
(ख) नेपाल सभ िदन िहaदूराय रहल आ िमिथलामे सेहो िहaदूवक Eित मोह। नेपालक
राजा एिहठामक िव®ान ओ पि{डतक स8मान कएलिaह।
(ग) नेपालक मcलवंश ओ िमिथलाक कण>ट् वंशक रत स8बaध दूनू KेMक
िनवासीमे, भाषा आ संxकृितकT आओर िनकट अनवामे सहमत भेला।
(घ) मुसलमानी आ¡मणक कारणT एिह भू-भागक िव®ान आ पि{डत नेपाल जाय xवxथ
िच भए सकलाह।
(ङ) हिर िसंह देव एतए 1324 ई. गमासुÉीन तुलकसँ परािजत भए नेपालमे भात गpवक
िनकट अपन राय xथािपत कएलिaह जे पpच पीढ़ी धिर चलल। एिह कण>ट शासन कालमे
किव सािहयकारक पयत आदर भेल।
(च) मcलवंशक राजा सभ सेहो मैिथल िव®ान, पि{डत, किव संगीतË आिदकT स8मािनत
करैत छलाह आ वसवाक हेतु पयत भूिम आ स8पि देलिaह।
(छ) मcलवंशक शासनकालमे मैिथली नेपालक राज भाषा भए गेल तथा मैिथलीकT
िवकिसत होएबाक अवसर भेटल।
(ज) इितहास साKी अिछ जे मुसलमानी Eभुवमे नाटक निह िवकिसत भेल। िहaदू राय
नेपाल तकर नीक वातावरण Exतुत कएलक।
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(झ) नाटकक िवषय-वxतु नेपाल आ िमिथलाक Eचिलत कथाक आधारपर लेल गेल।
मcलवंशक राजा जय िxथत मcल xवयं बड़ कलािEय छलाह। िहनक समय 1394 ई. धिर कहल
जाइछ। िहनक पÔात् मKमcल (1474) ई. धिर नेपालमे मैिथली नाटकक रचनाक कोनो पुÇ Eमाण निह
भेटैछ। मKमcलक पÔात् नेपाल तीन भागमे िवभत भऽ गेल आ तीनटा राजधानी भात गpव,बिनकपुर तथा
कािaतपुर आ लिलत पाटन आ काठमा{डू xथािपत भेल। एिह तीनू रावंशक राजा लोकिन xवयं नाटकार
छला तथा ओ लोकिन किव एवम् नाटककारकT Evय देलिaह। िविभ± अवसरपर नाटकक अिभनयक आयोजन
करबैत छलाह। नाटककT रचिनहारकT Eोसाहन दैत छलाह।
भाग गpव शाखामे िवs मcलक समय (1533) मे नाटकक बहुत िवकास भेल। Eिस नाटक ‘िव^ा
िवलाप’क रचना ओही समयमे भेल। एिह नाटकक अनुवाद भारतेaदु हिरÔad सेहो ‘िव^ा िवलाप’नाम िवधा
सुaदर नामसँ कएल। जगयोित>मcल (1618-1833) रायकालमे मैिथली नाटक खूब िवकिसत भेल। िहनक
रायकालमे मुिदत कुवलमs वंशमिणक िलखलिaह। हर गौरी िववाह एवम् कुंज िवहारी नाटक सेहो कम
Eिसि निह पओलक। िहनक पौM जगEकाश मcलक समयमे छौटा मैिथली नाटक िलखल गेल।
उषाहरण, नलीय नाटकम्, पािरजात हरण, पाव>ती हरण, मलय गिaधनी एवम् मदन चिरM। सुमित िनता िमM
मcल xवयं एक पैघ नाटककार छलाह जिनक िलखल आठ गोट नाटक भेटैत अिछ। िहनक पुM भुपतीad
मcल xवयं किव छलाह जिनका समय चौदहटा रचना भेल रंिजत मcलक समयमे तँ चरम सीमापर नाटकक
रचना पहुँच गेल छल ई मcल वंशक अिaतम राजा छलाह। 1921 ईxवीमे मcलवंशक अिaतम राजा रंिजत
मcलक समयमे (1921) मैिथली नाटक रचना एक Eमुख बात िथक।
नेपालमे शहवंशक उदय आ एकीकरणक पÔात् भाषाक नामपर गौण काज लेल अिछ। गोरखा बोलीक
Eभावमे पिड़ मैिथली तँ लग-भग मेटाय गेल। खाली नाच, गीत कतहु-कतहु लेखन आिदमे एकर प सुरिKत
रहलैक। राणाकालीन नेपाल भाषा सािहयक हेतु अaधकारक युगक पमे मानल जाइत अिछ। मैिथलीक
अवxथा तँ नेपालमे िवचारणीय रहल।
2007 सालक मुित राणा शासनसँ आ बादमे 2017 साल धिर उथल-पुथलक समय होएबाक कारणT
मैिथलीक िवकास हेतु नेपालमे कोनो ठोस काज निह भऽ सकल। 2014-16 सालमे एकटा ‘नव
जागरण’ पMक एक माM अंकक Eकाशन संतोष िदया सकैत अिछ। 1960 ई.क बाद कनेक िxथरता तँ
आएल मुदा सरकारी संरKणक अभावमे गत 30 वष>मे जतेक सािहियक काज होएबाक चाही ओ निह भऽ
सकल। कोनो सािहयानुरागी आ िपपासु मोनकT आ अहलािदत करएबला सामीक अभाव सदैव खटकैत रहल
तथािप एिह अविधमे जे िकछु भऽ सकल अिछ तकर सािहयक िवधागत लेखा-जोखा कएल जा सकैछ।
आधुिनक काल : मÍयकालीन मैिथली सािहयक जएटा उपलि¦ध अिछ से आधार xतभक पमे मानल
जाइछ। मुदा नेपालमे मैिथली सािहयक स8पूण> काज 1960 ई.क बादे भेल जकरा हमरा लोकिन आधुिनक
कालक Eारंभ मािन कऽ चलैत छी।
एिहसँ पूव> पचासेक दशकमे पं. सुaदर झा शाxMी अपन मूल जaम xथान दरभंगासँ मैिथली लेखकक
पT Eितिनिधव करैत छलाह। गलीक कुकुर आिद एखनो दरबार नै खुजलैए सन रचना करैत छलाह।
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पं. जीवनाथ झा सेहो अपन Eवaध काय आिद रचनासँ EितिRत भऽ चुकल छलाह। वxतुत:
जनकपुरमे पं. जीवनाथक Eवेश एतु°ा वातावरणमे सािहयक Eित अनुराग जगौलक आ ओ सािहयक
गु³जीक पमे सव>M चिच>त भेलाह। डॉ. धीरेad सािठक बाद जनकपुरमे आधुिनक मैिथलीक शुआत
कएलिaह। ओ एिहसँ पूव> मैिथली लेखकक पमे EितिRत भऽ गेल छलाह। 1962 ई.मे Eो. Eफुcल कुमार
िसंह मौन नेपालक मैिथली सिहयक इितहास िलखलिaह, जािहमे Eाचीन सािहयक पमे चच भेल अिछ
ओतेक आधुिनक कालक सािहय हcलुक Eतीत भेल अिछ। तT िहनकासँ तुलनामक दृिÇए डॉ. जयकाaत
िमvक इितहास लेखन vेRतर अिछ। पिहल कारण तँ एक दशकमे सािहय लेखन ओतेक समृ निह छल।
दोसर सूचनागत Mुिट सेहो Eफूcल िसंहकT भेलिaह।
आब तँ तीन दशकमे िकछु-िकछु एहन रचना सभ भेल अिछ जकरा आंगुरपर गनल जा सकैत अिछ।
Eवaध कायमे पं. रमाकाaत झाक ‘यथा’डॉ. धीरेadक ‘िMपु{ड’पं. मथुरानaद चौधरी माथुरक ख{ड
काय ‘Mीशूली’Eमुख अिछ।
मुतक कायमे डॉ. धीरेadक ‘ह«गरमे टpगल कोट’कणा भरल ई गीत हमर’राम भरोस कापिड़ Óमरक
ब± कोठरीमे औनाइत धुँआ, निह आब निह,मोमक िपघलैत अधर, अप±-अनिचaहार, िवनोद चad झाक ‘कृषक
बाला, पं. शुभ नारायण झाक ‘यंMणा’, पं. सुरेश झाक मैिथली रस कलश काय Eमुख कृित देखना जाइछ।
पं. झा मैिथली गीता सेहो िलखने छिथ। चad शेखर झा शेखरक ‘हम नेपाल हमर नेपाली’किवता संह आएल
अिछ।
अनुवाद िवधा : नेपालक कितपय सािहयकार िविभ± रचनाक अनुवाद मैिथली भाषामे कएलिन अिछ, जे
हुनक मैिथली Eेमक Eतीक िथक। यदुवंश लाल चad सतरी िजलाक ितलाठी ामवासी ®ारा ‘उसैको लािग’क
चॉंदनी साहक रचनाकT लोकेsर यिथत, पं. कृÑणा Eसाद उपाÍयायक ®ारा िव^ापितक पदावलीक, डॉ.
धीरेadक ‘उमर खैयानक’महाकिव भनुभतक रामायण मैिथलीमे अनुवाद कऽ वdीनायण वम अ¾ुत कएल
अिछ। Eकाशनक बाटपर अिछ पं. सूय>काaत झाक मेघदूतक, डॉ. रमेश ®ारा सात जापानी कथा अनुवाद
मैिथलीमे चमकारी Eयास िथक।
कथा-उपaयास आ साKाकार िवधा : वxतुत: नेपालमे मैिथली कथाक KेMमे सेहो नीक काज भेल
अिछ। िकछु Eितब कथाकारक संह एखन धिर समK निह भेल अिछ तT छुछु± लगैत अिछ। एखन धिर
Eात कथा संहमे डॉ. धीरेadक ‘कूहेश आ िकरण’, ‘पझाइत धूरक आिग’,‘शतपा आ मनु’ राम भरोस कापिड़
Óमरक तोरा संगे जयवो रे कुजवा, रेवती रमण लालक ‘पाधवनिह एलाहमधुपुरसँ’ Eमुख अिछ।
डॉ. धीरेadक स8पादनमे नेपालक Eितिनिध गcप संह, Eो. सुरेad लाभक संपादनमे नेपालीय मैिथलीक
उकृÇ गcप Eकािशत भेल अिछ।
उपaयास : एिह िवधामे ©यामाझाक ‘िबनु माइक बेटी’, कुमरकाaतक ‘सेहaता’क अितिरत ए8हर डॉ.
धीरेadक भो³कवा, कादो कोयला, ठुमुिक चल,पाठककT सेतोष दैत अिछ।
साKाकार : साKाकार िवधामे रेवती रमण लालक साKाकार एक माM पोथी अिछ, ओना एिह KेMमे
राम भरोस कापिड़क नीक काज सभ भेल अिछ। जकरा अनतग>त अvेय, केदारनाथ यिथत, िवजय
मcल, मातृका Eसाद कोइरालाक साKाकार खूब चिच>त भेल अिछ।
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नाटक : एिह िवधामे आधुिनक नाटककारमे महेad मलंिगया लेखनमे िभड़ल छिथ। Eारंिभक
रचना ‘ल×मण रेखा खि{डत’, जुआएल कन-कनी, ओकरा आंगनक बारह मासा, टूटल तागक एकटा छोर, एककी
संह हुनक Eमुख पुxतकाकार छिaह। काठक लोक िफलहाल चचमे आएल अिछ। ‘देहपर कोठी खसा
िदअ’आलुक बोरी सन बहुतो रेिडयो पक ओ िलखने छिथ। एककी लेखकक पमे डॉ. धीरेad, राम भरोस
कापिड़, डॉ. ल×मण शाxMी, ©याम सुaदर शिश,ललनक Eमुख xथान अिछ।
िनवaध समालोचना तथा संxमरण : एिह िवधामे Eो. Øज िकशोर ठाकुरक अÍययन ओ िववेचन छोिड़
आन रचना पुxतकाकार पमे निह आिब रहल अिछ। ओना, डॉ. धीरेadक सािहय स8बaधी, Óमरक लोक
संxकृित स8बaधी, डॉ. िवमलाक सािहय स8बaधी महेad मलंिगयाक, रेवती रमण लालक राजेad िकशोरक
िविवध सामियक िनबaध सभ Eकािशत भेल अिछ।
याMा संxमरण : एिह िवधामे राम भरोस कापिड़ Óमरक अयaत महवपूण> रचना आएल अिछ। Eो.
Eफुcल कुमार िसंह मौनक, रेवती रमण, ©याम शिश सेहो एक िदस संल²न छिथ। समालोचना संहमे राम
भरोस कापिड़ Óमरक स8पादनमे नेपालक मैिथली पMकािरता आएल अिछ।
पM सािहय : 2025 सालसँ Eार8भ भेल नेपालक सामियक संकलन युग आब एकटा ठोस प लऽ
चुकल अिछ। Eो. Eफुcल कुमार िसंह ‘मौन’क स8पादनमे मैिथली िवराटनगरसँ डॉ. हिरदेव िमvक स8पादनमे
ईजोत काठमडूसँ, पं. सुaदर झा शाxMीक स8पादनमे फूल-पात काठमडूसँ, वाणीक िहलकोर जनकपुरसँ संगिह
दुिवधान एतिहसँ ए8हर 2019 सँ राम भरोस कापिड़क स8पादनमे गाम-घर सातािहक िनरaतर Eकािशत भऽ
रहल अिछ। अच>ना ®ैमािसक गत 16 वष>सँ Eकाशन आ ‘ऑंजुर’ आब मािसक पमे Eकािशत भऽ रहल
अिछ। नेपाली भाषी सािहयकार ®ारा मैिथली सािहय सेवामे डॉ. कृÑणा Eसाद उपाÍयायक नाम आदरसँ लेल
जा सकैछ। ओना, िहनके भाइ डॉ. ल×मण शाxMी तँ अ¾ुत काज कएलिन अिछ। ई अपन दू गोट पोथी दऽ
एक धम> काय युिधRीर महाकाय आ दोसर धीकताम् गीत काय। रामेsर Eसाद अयल ®ारा रिचत िशव-
मधुक भा²य रेखा नामक कथा काय देिख पड़ैत अिछ। फुटकर रचनामे मनुवÀाजकी, केवेर िधिमरे, जगदीश
िधिमरे आिद Eमुख छिथ।
उपसंहार वा िनण>यामक िबaदु : एिह तरहT िविभ± िवधामे गत तीस वष>सँ भेल िवकासक प रेखा पूण>
संतोष तँ निहयT दैत अिछ माM आशा टा जगबैत अिछ। िवकासक संभावना नीक छैक। अवसर पािब िच°न
काज कऽ सकैछ। नेपालमे संवैधािनक राजतंMक अaतग>त पूण> EजातंMक बहाली भेलासँ भाषा िवकासक गित
अपना ढंगसँ संचािलत कएल जा सकैछ। राजकीय EËा EितRानसँ सरकार‘मैिथली िवभाग’ खोललक अिछ
जािहसँ िकछु महवपूण> रचना सभक Eकाशन होएब स8भव िथक। खास कऽ मैिथली सािहयक इितहास, श¦द
कोषओ िवधागत संह Eमुख रहत। तिहना अनुसंधानक हेतु िव®त वृितक संभावना सेहो छैक जािहसँ
सरकारी वा नीज पुxट सामीमे सुरिKत मैिथलीक पुरना महवपूण> पा{डूिलिपक उार कएल जा सकैछ।
स8पूण> मैिथली संसारक हेतु अपन रचनासँ योगदान पहुँचेबाक लेल एिहठामक सािहयकार तcलीन छिथ।
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