िहंदी िफcमी गीतमे बहर -१
गजलक मतलामे जे रदीफ-कािफया
बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नममे ई कोनो जरी नै छै। एकै नममे अ
नेको कािफया लेल जा सकैए। अलग-
अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगेसंग नमक शेरमे िबनु कािफयाक रदीफ सेहो भेटत।
मुदा बहुत नममे गजले जकp
एकै बहरक िनवह कएल गेल अिछ।मैिथलीमे बहुत लोक गजलक िनयमतँ निहए जानै छिथ आ तािहपरसँ कु
तक> करै छिथ जे िफcमी गीत िबना कोनो िनयमक सुनबामे सुंदर लगैत छै।
मुदा पिहल जे नम लेल बहरअिनवाय> नै छै आ जािहमे छै तकर िववरण हम एिह ठाम द' रहल छी----------
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1
"तेरे यार का आसरा चाहता हूँ"
ओना अंेजी किवतासँ Eभािवत उदू>क किवताकT सेहो नमे कहल जाइत छै मुदा उदू>क Eाचीन नम सभमे से
हो बहरक पालन कएल जाइत
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छलै। उदाहरण
लेल सािहरलुिधयानवीजीक ई नम देखू जे िक "धूल का फूल" नामक िफcममे िफcमाएल गेल छै जािहमे रा
जेad कुमार ओ माला िसaहाजी
नायक ओ नाियकाक
पमे छिथ। एिह नम केर बहर122 122 122
122 अिछ आ ई हरेक पpितमे िनमाहल गेल अिछ। सािहर जते िफcम लेल Eिस छिथ तािहसँ बेसी उदू>
शाइरी लेल सेहो। वxतुतः उदू> शाइरी
आ िफcमी गीतमे
अंतर नैकएल जाइत छै तँइ Eिस िफcमी पटकथा लेखक ओ गीतकार जावेद अतर िफcमक अितिरत उ
दू>क सािहय अकादेमी लेल सेहो
हकदार मानल जाइत छिथ (2013 मे "लावा" नामक पोथी लेल)। मैिथलीमे तँ सभ कामरेड ¡ितकारी छ
िथ की किह सकै छी। तँ पढ़ू ई नम आ देखू एकर बहर--
तेरे यार का आसरा चाहता हूँ
वफ़ा कर रहा हूँ वफ़ा चाहता हूँ
हसीनो से अहद-ए-वफ़ा चाहते हो
बड़े नासमझ हो ये या चाहते हो
तेरे नम> बालॲ म¥ तारे सजा के
तेरे शोख कदमॲ म¥ किलय िबछा के
मुह¦बत का छोटा सा मिaदर बना के
तुझे रात िदन पूजना चाहता हूँ,
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ज़रा सोच लो िदल लगाने से पहले
िक खोना भी पड़ता है पाने के पहले
इजाज़त तो ले लो ज़माने से पहले
िक तुम हुxन को पूजना चाहते हो,
कहp तक िजय¥ तेरी उcफ़त के मारे
गुज़रती नहॴ िज़aदगी िबन सहारे
बहुत हो चुके दूर रहकर इशारे
तुझे पास से देखना चाहता हूँ,
मुह¦बत की दु©मन है सारी खुदाई
मुह¦बत की तक़दीर म¥ है जुदाई
जो सुनते नहॴ ह« िदलॲ की दुहाई
उaहॴ से मुझे मpगना चाहते हो,
दुप¬े के कोने को मुँह म¥ दबा के
ज़रा देख लो इस तरफ़ मुxकुरा के
मुझे लूट लो मेरे नज़दीक आ के
िक म« मौत से खेलना चाहता हूँ,
गलत सारे दाव¥ गलत सारी कसम¥
िनभ¥गी यहp कैसे उcफ़त िक रxम¥
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यहp िज़aदगी है िरवाज़ॲ के बस म¥
िरवाज़ॲ को तुम तोड़ना चाहते हो,
िरवाज़ॲ की परवाह ना रxमॲ का डर है
तेरी आँख के फ़ैसले पे नज़र है
बला से अगर राxता पुख>तर है
म« इस हाथ को थामना चाहता हूँ,
2
“सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है"
शैल¥dजी ®ारा िलखल आ िफcम "तीसरी कसम"मे राज कपूरजीक उपर िफcमाएल ई नम देखू। ई नम िन
गु>ण अिछ। एिह नमक बहर 1222 1222 1222
1222 अिछ। एिह नममेमहल श¦दक बहर उदू> श¦द "शहर" केर िहसाबसँ अिछ। शैल¥dजी िफcमी गीतक
अितिरत अपन मास>वादी गीत लेल
सेहो Eिस छिथ
आ हुनक मास>वादी गीत आधुिनक गीतसेहो अिछ आ बहरमे सेहो। तँ देखू शैल¥dजीक ई नम आ ओकर ब
हर। मैिथलीक जे गजलकार ई सोचै
छिथ जे बहरसँ गेयता
खम भ' जाइत छै ितनका लेल ई िवशेष पसँ अिछ--
सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है
न हाथी है ना घोड़ा है, वहp पैदल ही जाना है
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तु8हारे महल चौबारे, यहॴ रह जाएंगे सारे
अकड़ िकस बात की यारे ये सर िफर भी झुकाना है
भला कीजै भला होगा, बुरा कीजै बुरा होगा
बही िलख िलख के या होगा, यहॴ सब कुछ चुकाना है
लड़कपन खेल म¥ खोया, जवानी नॴद भर सोया
बुढ़ापा देख कर रोया, वही िकxसा पुराना है
(सजन रे झू 1222 ठ मत बोलो, 1222 खुदा के पा 1222 स जाना है 1222
न हाथी है 1222 ना घोड़ा है, 1222 वहp पैदल 1222 ही जाना है 1222)
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"तेरी याद िदल से भुलाने चला हूँ"
सािहर लुिधयानवी ®ारा िलखल नम "तेरे यार का आसरा चाहता हूँ" केर बहर 122 122 122
122 छै से पिछला पोxटमे तती ®ारा देखने रही। आइ अही बहरमे शैल¥dजीक िलखलनम देखा रहल छी
। ई "हिरयाली और राxता" नामक
िफcममे मनोज कुमार
ओ माला िसaहापर िफcमाएल गेल छै। माMा िनधरणमे उदू> ओ िहंदीक िनयम लागल छै---
तेरी याद िदल से भुलाने चला हूँ
के खुद अपनी हxती िमटाने चला हूँ
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घटाओं तु8ह¥ साथ देना पड़ेगा
म« िफर आज आंसू बहाने चला हूँ
कभी िजस जगह वाब देखे थे म«ने
वहीँ खाक़ अपनी उड़ाने चला हूँ
गम-ए-इ©क ले, फूंक दे मेरा दामन
म« अपनी लगी यूं, बुझाने चला हूँ
(तेरी या 122 द िदल से 122 भुलाने 122 चला हूँ 122
के खुद अप 122 नी हxती 122 िमटाने 122 चला हूँ 122)
२
राकेश Eेमचad ‘पीसी’
लघुकथा- दशरथ िकसानकT डुबौलक लखन ठेकेदार
लखन ठेकेदारक पिरवार अंेजक गुलामी जंजीरमे रहल सीमापारसँ पीनीक कारोबार करबाक बाxते मधेसक
जलसरमे अएल बहुतबेसी िदन नभइ भेल रहे । हु°ाक लोलीमे खैनीकT डpठसँ बनल पीनी रािख धुमपान
करयवाला सामaत आ स8प± िकसानक संया िधरेिधरे पैर पसारैत समयमे कैयन पिरवार अंगे्रजक हुकुमत
सँ बचवाक लेल जलसर होएत आन गामशहरसभमे घर®ार बनाइव ¦यापार करय लागल छलिथ पीिनकT ।
नािरयलक खोपरैयाकT सुखा ओिहमे पािन भरल जाएत छल आ ओिह िभतरमे एक हावा पइसयवाला नली
बनाएल जाएत छल । ओिह नलीके मुहमे एकटा लकडीकT पाइप राखल रहैत । मािटक लोलीमे गोइठाक
आिगसँगे पीनी रािख हु°ाक मजा लेल जायत छल ।
दशरथ िकसान जलसरक किनक उदार सामaतमे िगनती होइत छलाह । ओ जनमजदूरसभक लेल अलगे
हु°ाकT ¦यबxथा सेहो क’ देने रहिथ । भोर , दूपहर आ सँिझयाके गुर>र, गुर>रक हु°ाक आवाज सुनल जा
सकैत छलै । लखनक माय दैिनक दशरथक घरसँ पीनी द’ बदलामे धान लजाकT पिरवार चलबै छली ।
सय िब²हा खेतीहर जमीन, भखारी, जMतM अ±पात । टोलपरोसक िधयापूता ओिहठाम चोरानुकी खेल
खेलवाक लेल दशरथकT खिरहान आ भखारीक दौडधुप लगबैत छल । जखन लखनक माय दशरथके तुलना
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Mेतायुगक राजा दशरथ सँ करैत छल त लखनकT चेहरा देखय लायक रहैत छल, िपसँ लाल । डमरस
अमधुर जकp ।
राणासभ राजकाजक लेल मधेशमे कर असुली करवाक बाxते अंेजक सेहो िवsासक पाM बना जा सकवाक
बाxते मधेशीया जेहन चेहरा िमलयवालाकT ठेकेदार बना मालगुजारी असुलबाक लेल ठे°ा बaदोबxतीमे दैत
छलिथ । ओसभ कर असुलीकT लेल िदनरात खटैत छल आ कर नइ बुझाववालाके मालजाल खोइल ल’
जाएत छल । मालगुजारी असुल करवाला ठेकेदार लठैत आ धकिरया रखैत छल । तेल िपयल किरया
किरया बpसक लाठी रखैत छल ओसभ । मालगुजारी असुली करवा लेल अंेजक गुलामी करहल अपन
भिगनमानसभके जलसरमे बोलावाके सु³ क’ देलक ।
लखन सेहो भिगनमान रहिथ । फरक इहे रहे जे ठेकेदारक बाप पिहने मधेशमे जंगल फरानी करय बाxते
जलसरमे एक दूिदन रिहजाय । समयमे कर बुझाव वाला सामaती िकसान दशरथक जमीन कोना क¦जा
होएत ओिह योजनामे परोसीराम ठेकेदार िदनराित मेहनत करिथ । योजना अनुसार पिहला अ±पातक डकैती
करवा लेल सेन खनय वाला काजमे लखनके लगाएल गेल । ओ दुइए िदनमे सेन खिन देलक । ह´ाक´ा
लठैतके स8प± आ सामaत िकसान दशरथक घरके कोनाकोना मालुम रहे ।
जिमनिभतर सँ बनायल जाएवाला राxताके सेन कहल जाइत छैक । दशरथसँ पिहने सेहो हिरराम, राधव,
िसताराम, िमठु, नथुनीसिहतक स8प± िकसानक घरमे डकैती करबा चुकल रहे । डकैत अंेजक गुलाम
देशसँ आएल िवदेशी रहल वात राणाक जनµल िरपोट> तयार क’ दैत छल । ओिह वापत जनरल ठेकेदारसँ
दाम आ दमडी पवैत छल ।
पहिरयाको धाकध8की आ कर असुली कर’ वाला ठेकेदारक डकैती सँ बजीसंघक बिनमा समुदाय गिरब बनैत
गेल । बजीसंघक बिनमा समूदाय ओ छलिथ िजनकर पुवज>के जनेउ तोडल गेल रहे । युकम> छोिड
¦यापार यवसायमे लागल समूदायके सतयुगी राजा अपन हरवाहा चरवाहा सँ जनेउ तो¶वौने रहिथ ।
स8प± दशरथ िकसानक घरमे तीन बेर सेन खिन डकैती भगेल छलैक । समय पर कर चुता नइ कयने
कारणे आधा जिमन अथत पचास िब²हा खेत पर कर असुली करयवाला ठेकेदार परोसीराम क¦जा कयने
छल । सेन राय एवं दरभंगा महाराजक समयमे लोिहया पैसा द’ क’ सरफी कारोबार सँ ज8मा भेल पुख·ली
असफ¸ सेहो डकैत लगेल छलैक । अंेजक क¦जा रहल KेMके नजिदक दोसर देशके जलसरमे नेपाली
सेनाक एक टुकुडी रखवाक पM जनµल धिर अएलावाद कर असुली करयवाला ठेकेदारसँग छलफल कायल
गेल । परोसीराम अपन लठैत लखनसँ बात क’ सेनाक लेल जमीन उपल¦ध करौला पर बसीसके ³पमे
प°ी घर देवाक आsासन देने छल । साथे सेनाक रासन ठे°ा देवाक Eि¡या आगू बढादेलक ।
दशरथकT जानकीपुर जाएवाला डगरक नाके पर रहल जमीन क¦जा करवाक परोसीराम र लखन बनाचुकल
छल । िकएक त सैिनक जमीनक बदला िकछ सोनाक िस°ा देवाक बाचा कयने रहैक । लखन पुरान िहत
भेल नाटक क ’ दशरथके घर पहुँच रासन ठे°ाप¬ामे बनवाक आह कयलक । रासन ठे°ामे बहुत रास
आमद होवाक लालच सेहो देखौलक। लेखनदासी करय सकवाक Kमता बराबरके पढाई कयला बाबजुद ऐहन
जालझेलक बात सँ दशरथ अलग रहलवालमे दशरथ छलिथ ।
जेनतेन दथरथ ठे°ाप¬ामे लखनकT साथ देवाक सहमत भेल । साथे एकटा शत> रखलक जे किहयो ओ
थाना, ¦यारेक आ सैिनक कहp नइ जाएव । अिह शत>मे दुनुगोट सतEितशत सहमित भेलावाद ठे°ाक
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धरौटीवाxते नाके परके जिमन धरौटीमे देवाक आह अिxवकार करय नइ सकल । तीन मिहनाकबाद ठे°ामे
िलखत शत> बमोिजम रासन आपूत¸ नइ कसकवाक आरोप लतबैत धरौटीमे रहल जमीनकT डाक पर चढावल
देल जानकारी दशरथके देलगेल । लेखनदासीधिरकT पढाई कयलावादो राजकाजक बहुत बात नबुझने दशरथ
राजाधिर िबaती पM हुलाक सँ पठौलक मुदा वो सरकार धिर पहँच सँ पिहनही चोरी भगेल ।
अaततः नाके परके जमीन पर सेना क¦जा क अपन ¦यारेक खडा कयलक आ िधरे िधरे ओिहठाम रहल
दशरथके बीस िब²हा जमीन पर सेना अºयासके नाम पर क¦जा कलेलक । दशरथसँ किहयो राजमाग> बनाब
त किहयो शहर बसएवाक नाम पर बpिक रहल स8पूण> जमीन क¦जा करावमे परोसीराम आ लखन सफल भेल
। जलसरमे रहल राजxथानी आ राजकाजक कर असुली करयवाला ठेकेदारक जमीनमे िदन दुगुना रात
चौगुना करवाक काजमे सरकारी लोकसभ सेहो साथ देलक ।
सय िब²हा जमीन राखयवाला दशरथ िधरेिधरे स8प±ता सँ िवप±तामे पिरणत भगेलिथ । नवनागिरक आ
शासककT चालबाजी सँ चौघरा हवेली सेहो बेचके िxथतीमे पहुँचा देलगेल । एक बरषके बाद अंेस अपन
शासन छोिड भािग गेल । िकछ समयक बाद जलसर आ जनकपुरीमे EजातaM आएवगेल । मुदा िवप± भेल
दशरथ बालब»चाके भोजनक ¦यबxथा करय लेल स8पूण> पिरवार िवहार िबxथािपत भगेलाह । छोटमोट
रोजगार क’ अपन आ पिरवारकT गुजारा चलाब लागल
समय पिरवत>न भेल । दशरथक बेटा, पोता धिनक बिनगेल । आब ओकरासभके नेपाली बनवाक मन
होइछिन । मुदा जालसाजक दूिनयामे ओसभ फेर सँ नइ परय चािह छिथ । अखनो हुनकसभक घरमे सेन
र शाहकािलन राजाक भोजपा आ कागजकT फाइल सनु°ीमे राखल अिछ ।
पिरचयः
पूरा नामःराकेश Eसाद चौधरी
जलेsर नगरपािलका ६
पMकार एवं अनुसaधानकत
Eकािशत ◌ः िखचडी किवता संह एवं फुटकर कथा, किवता, लेख ।
अEकािशत ◌ः फुलगाछ किवता संह
३
डॉ. योगेad पाठक ‘िवयोगी’
उपaयास - हमर गाम (आगp)
11. राजा-रानी
हमरा गाममे एकटा एलाह राजा। आ हमरे गामक पुMी भऽगेलिखन हुनकर रानी। एतए िहनक मूल
नाम, जaम ितिथ आिदसँ हमरा सबक¥ सरोकार निह अिछ, माM िहनक अ¾ुत चिरM लीख रहल छी जे
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िहनका दूनूकT वाxतिवक अथ>मे हमरा गामक पूय राजा-रानीक पमे xथािपत कऽदेलक आ इलाकाक अaय
गाम सबमे सेहो िहनकर याित बहुत पसरल।
राजा तऽजिहना नाम तिहना हुनक िवशाल शरीर आ उदा चिरM। हुनकर चिरMक Eशंसा सुिन बहुतो
कुमािर कaया अपन भा²य अजमौलिन मुदा राजाकT तऽएकेटा पिस± पड़लिन। भऽगेल राजा आ रानीमे Eेम।
से एहन Eेम जे लोककT िवsासे निह होइ। बूढ़ पुरान सब बाजए लगलाह-
“हौ, ई कोनो साधारण Eेमी-युगल निह छिथ, जर कोनो देव अंश छिथ। गामक ई उरदाियव जे
िहनका दूनूक रKा करए।”
बस, तिहना भेल। िहनकर आवास बनाओल गेल, सब तरहक सुख सुिवधाक इaतजाम कएल गेल।
पार बpिट गौआँ सब िहनकर भोजन पठबए लागल। जिहया जकर पार होइ ओ अपनाकT धaय बूझए जे आइ
ओकरे अ±-पािनसँराजा-रानी तृत भेलाह।
राजा-रानी एक दोसराक लेल Eाण दैत। रानी तऽअपनाकT अित भा²यशाली बूझिथ जे सब िकछु होइतो
हुनकर कोनो सौितन निह छलिन। बहुतो लोक Eयास केलक जे एको नजिर राजा अaय कaयापर दऽदेिथ
मुदा बेकार। राजा तऽरानीक Eित समिप>त छलाह। आब हुनका एहन आमतृित भेलिन जे ककरो अनका
िदस तकबो निह करिथ।
जेना िक Eकृितक िनयम िछऐक, राजा-रानीक Eेमक फल भेल हुनकर तीन पुM आ एक पुMी। पुM
लोकिन जेना जेना पैघ होइत गेलाह, अपन अपन यवसाय स8हारलिन। बिच गेलिखन पुMी। ओहो तीवÀ गितए
बढ़ए लगलिखन। रानीकT िचaता भेलिन एकर िबयाह कोना करौतीह। किहयो िबयाह निह करौलिन। अपने
तऽतेहन राजकुमारक Eेममे फँसलीह जे िबयाहक EÁे निह उठलैक। मुदा बेटी?
रानीकT डर छलिन जे जवान बेटीकT देिख कतहु राजाक मोन डोिल ने जािन। मुदा राजा अपनिह
अपनाकT स8हारने रहलाह।
ऋतुमासक समय पर बेटीकT पु³षक जरित भेलैक। ओ ए8हर-आ8हर तकलक। कतए
जाएत? ओकरा माए-बापक Eेमक िखxसा तऽबूझल निह छलैक। ओ लागल ओही पु³षक चा कात च°र
काटए जे सबसँ लगमे ओकरा भेटलैक। ओ िबसिर गेल जे ओ पु³ष ओकर जaमदाता छलैक।
पु³ष अथत हमरा गामक राजा अपनाकT बहुत स8हारलिन मुदा भावीकT के रोिक सकलए? ओ
नवयुवतीक चािलमे फँिसए गेलाह। ओकरा शरीरसँ उठैत मादक गaध हुनका मदम कऽदेलक। हुनक
संयमक बाaह टुिट गेलिन। नवयुवतीक काम-िपपासा तृत भेलैक। ई दृ©य रानीसँ नुकाएल निह रहलैक।
रानी बजली िकछु निह मुदा बहुत दुखी जर भेलीह।
ई घटना हमरा सबकT देखल अिछ जे ओही राित रानी मिर गेलीह। राजा अपनाकT दोषी मानए
लगलाह। एिह नवयुवतीकT अपन दोसर रानीक पमे ओ xवीकार निहए कऽसकलाह आ एक मासक भीतरे
शोकसँ डूबल ओहो शरीर याग केलिन।
राजा-रानीक एिह अमर Eेमक िखxसा इलाकाक आनो गाममे लोक सबकT बूझल छैक।
q
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जारी....