आशीष अनिच_हार
िहंदी िफjमी गीतमे बहर-२
गजलक मतलामे जे रदीफ-कािफया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नÉममे ई
कोनो ज¤री नै छै। एकै नÉममे अनेको कािफया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो
अलग भ' सकैए संगे-संग नÉमक शेरमे िबनु कािफयाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नÉममे गजले जकq
एकै बहरक िनवह कएल गेल अिछ। मैिथलीमे बहुत लोक गजलक िनयम तँ निहए जानै छिथ आ तािहपरसँ
कुतक= करै छिथ जे िफjमी गीत िबना कोनो िनयमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पिहल जे नÉम लेल
बहर अिनवाय= नै छै आ जािहमे छै तकर िववरण हम एिह ठाम द' रहल छी-----------------
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हसन कमालजीक िलखल आ "िनकाह" िफjम केर ई नÉम जकर बहर 2122 2122 212 अिछ। माLा
िनधरणमे उदू= ओ िहंदीक िनयम लागल छै। (ओना तेसर शेरक दोसर पqितक शËद "शायद" केर माLा¬म
21 करबाक लेल एकरा शाÌद मानल गेल छै) आन नÉमक अपेJा एकर शेर सभमे िविवधता अिछ तँइ हम
एकरा गजल कहब बेसी उिचत बुझैत छी।
िदल के अरमv आँसुओं म बह गए
हम वफ़ा करके भी तनहा रह गए
िज़ंदगी एक ®यास बनकर रह गयी
®यार के िक़{से अधूरे रह गए
शायद उनका आख़री हो यह िसतम
हर िसतम यह सोचकर हम सह गए
ख़ुद को भी हमने िमटा डाला मगर
फ़ा{ले जो दरिमयq थे रह गए
एिह नÉमक तेसे शेर बहुत मा²क अिछ। शेरमे विण=त "िसतम" शËद िकछु भ' सकैत छै। ई Dेमक िसतम
सेहो हेतै तँ यव{थाक िक दैवक िसतम सेहो भ' सकैए। िफjम देिख क' एकरा माL Dेमी Dेिमका लेल
बूझए बला लोक अबोध छिथ से हम साफ साफ कहब।
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िव दे ह www.videha.co.in िवदेहᮧथम मैिथलीपािᭃक ई पिᮢका www.videha.com
Videha Ist Maithili Fortnightly
ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA
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राजे_o कृ°णजीक िलखल आ "खानदान" िफjम केर ई नÉम जकर बहर 2122 2122 212 अिछ। माLा
िनधरणमे उदू= ओ िहंदीक िनयम लागल छै।
कल चमन था आज इक सहरा हुआ
देखते ही देखते ये ±या हुआ
मुझको बरबादी का कोई ग़म नहॴ
ग़म है बरबादी का ±यॲ चच हुआ
एक छोटा सा था मेरा आिशयq
आज ितनके से अलग ितनका हुआ
सोचता हूँ अपने घर को देखकर
हो न हो ये है िमरा देखा हुआ
देखने वालॲ ने देखा है धुआँ
िकसने देखा िदल िमरा जलता हुआ
(कल चमन था 2122 आज इक सह 2122 रा हुआ 212
देखते ही 2122 देखते ये 2122 ±या हुआ 2122)
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"तवायफ" िफjम केर ई नÉम जे िक आशा भॲसले ¿ारा गाएल गेल अिछ। नÉम िलखने छिथ हसन
कमाल। संगीतकार छिथ रिव। ई िफjम 1985 मे िरलीज भेलै। एिहमे अशोक कुमार, ॠिष कपूर, रित
अि«नहोLी,पूनम िढ़jलन आिद कलाकार छलिथ।
बहुत देर से दर पे आँख लगी थी
हुज़ुर आते-आते बहुत देर कर दी
मसीहा मेरे तूने बीमार-ए-ग़म की
दवा लाते-लाते बहुत देर कर दी
मुहËबत के दो बोल सुनने न पाए
वफ़ाओं के दो फूल चुनने न पाए
तुझे भी हमारी तम³ा थी ज़ािलम
बताते-बताते बहुत देर कर दी
कोई पल म दम तोड़ दगी मुराद
िबखर जाएँगी मेरी ख़्वाबॲ की याद
सदा सुनते-सुनते ख़बर लेते-लेते
पता पाते-पाते बहुत देर कर दी
एिह नÉमक सभ पqितक माLा¬म 122 122 122 122 अिछ। एिह नÉमक पिहल शेरक दोसर पqितमे
आएल "हुजुर" शËदक सही ¤प "हुजूर" अिछ मुदा बहर िनवह लेल "हुजुर" उचारण लेल गेल
छै। ओनाहुतो ई नÉम छै। जािहमे बहुत नीक जकq बहरक िनवह भेल छै। एिह नÉमक ई शेर बहुDयोगी
अिछ........
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ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA
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मसीहा मेरे तूने बीमार-ए-ग़म की
दवा लाते-लाते बहुत देर कर दी
ई शेर जतबे सvसािरक Dेम लेल छै ततबे राजनीितक यं«य सेहो छै। घरक कोनो सद{यक उपराग सेहो ई
शेर भ' सकैए।
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