विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

हिन्दू विवाह: एक समीक्षा

देवेश झा · 2018-09-15 · अंक 258

िह_दू िववाह :एक समीJा
Dमुख िवचार िवंदु : 1॰िववाह 2॰ कत=€य 3॰ यौवनक आवेग 4॰ –ान
5॰ Dित{पध‹क संवेग 6॰आदश= संबंध
30 जून 2018 के दैिनक जागरण पL िववाहक अदभूत दश=न करौलक । िकछू घंटाक िववाहक िविध
नवोढ़ा क_याक (नाियकाक) सम› {वœ_द अि{तeवकž शू_यक धरातल पर आनबा मे सJम भऽ जाइत अछ
। कतऽ नवयौवनक िनि _त आ म{त जीवन आऔर कत अपर पJक क‘=€यक कारख़ाना । प£ी एवं
गृिहणीक जीवन कोनो घरक आबालबृfद घर पधारल प£ी ¤पी बहूकžदेिख परमानंदक अनुभूित करैत बजै
छैिथ- आब की ? कोन िचंता ? घरमे नव किनया आिबये गेल छैथ, सब काज करबे करती आ सब सहबे
करती, चलू िमठाई खाऊ आ खुशी मनाउ। िक_तु एतिहसॅ असंतुलनक आ‘=नादमुखिरत होइत अिछ जे क_या
यौवनक आवेगमे –ान एवं Dित{पध‹क संवेग संबलसॅ अनु{यूत उœचपदाकvJाक संग “सुपर वुमेन “ बनवाक
कामनासॅ {फुिरत आर {पंिदत होदत रहैत छैिथ ओ प£ी तथा गृिहणीके दाियeवसॅ दिबकž आहत होइत अपना
जीवनके िधªारय लागैत छिथ । जाखनािक हमरा सभक मfय िकयो एहेन दुखद भाव निह रखैत छिथ ।
ते आवcयक बुझना जाइत अिछ जे पित-प£ीक आदश= संबंधके बुझबाक लेल िववाह एवं िववाह िविध
केर पुरातन-नूतन ¤पके बुझल-बुझाओल जाय।यथा-
िह_दू िववाह धमम= िववहके एक Dकरण सं{कार मानल गेल अिछ, जकरा दा7पeय जीवनक उ‘रदाियeव कहल
जा सकैत अिछ। अ_य धिम=क अनुसारे िववािहके पित-प£ीक बीच एक Dकरण समझौता सेहो किहत उिचते।

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ejournal 'िवदेह ' २५८ म अंक १५ िसत᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १२९ अंक २५८ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 222 9-547X VIDEHA
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ओना िववाह एक समझौता त िथिकए, मुदा िववाहोपरvत पित-प£ीक संबंध मे अि«नके साJी मनीके सात फेरा
लेगाबैत छी जे हम सदा दुनू साथ रहब, मुदा अजुक जमाना िकछू और अिछ। हम अि«नके साJी मानी
पिवL बंधनमे त बंधी जइत िछ मुदा समयके बदलैत ¬ममे िकछू िदनमे एिह पिवL संबंध िनवरहन करयमे
आजुक युवाती-युवक के िकछू उक¤ बुिझ पड़ैत अिछ।
वैिदक कालमे िववाह सं{कार एक महeeवपूण= सं{कार मानल गेल अिछ । ऐिह सं{कार मे {वागत-
सeकार, िववाहक उ­ोष, व{Lािद उपहार, वर- वधुक Dित–ा,क_यादान, गु®तदान, दहेज, पािण›हण, ›ंिथ
बंधन, िववाहक िवशेष य–, सात-पिर¬मा, िशलारोहण, ¯ुव आ सूय=क दस=नक, शपथ आrासन आिद ि¬यासॅ
िनवृ‘ होमय पड़ैत अिछ । िह_दू धम=मे गृह{थ जीवन मानु°य के दाियeव िनव=हाणक यो«य बनबाक एक माग=
थीक, जािहमे शारीिरक, मानिसक आ आिथ=क पिरप±वताक –ान होइत अिछ । एिह ¬ममžअनेक विरQ
€यि±त, गु²जन, कुटु7ब संबंधी सबसॅ धम=, पुजा-पाठ, देवेताक आवाहन, अनुQान करायबाक –ान Dा®त होइत
अिछ ।
ओना तॅ िववाह आठ Dकारसॅ स7प³ होइत अिछ।
1॰ ´ाµ िववाह :- सुयो«य वरसॅ क_याक िववाह िबना कोनो दान दहेजक करबाक Dथा दुनू पJक सहमित
सॅ होएब ´ाµ िववाह कहाबैत अिछ ।
2॰ दैव िववाह :- कोनो सेवाक भावसॅ िकछू मूjय लऽ क पिहने अपन क_याके दानमे दैत िथ_ह ई दैिववाह
भेल।
3॰आष= िववाह :- ओना तॅ ई िववाह पिहने क_यादान बदला गौदानक ²पमे होइत छल। पिहने पुिLक िववाहक
लेल वर पJ गायक दान करैत छलाह। एकरे आष= िववाह कहैत छी।
4॰ Dजापeय िववाह :- मैिथल संDदायमे क_याक िववाह दोसर वाग=क वारसॅ करा देव Dाजापeय िववाह कहाबैत
अिछ ।
5॰ गंधव= िववाह :- दुनू पJक सहमितसॅ कोनो रीित िरवाजक अनदेखी करैत वर- क_याक िववाहके गंधव=
िववाह कहल जाइत अिछ। एकरा ई युगमे Dेम िववाह सेहो कहैत छी । जेना :- दू°य_त-शकु_तलाक िववाह
गंधव= कहल गेल िजनक पुL भरत भेलाह। हुनके नाम पर हमर देश पड़ ल भारत ।
6॰ असुर िववाह :- व‘=मान सामयमे िववाहक जे Dथा चलैत अिछ, ओकरा असुर िववाह कही तॅ कोनो हज=
निह । ज़ोर जबरद{ती भगाक दान काय=क दहेजक िबना िववाह असुर िववाह कहाबैत अिछ ।
7॰ राJस िववाह :- क_याक सहमितक िबना िववाह करब राJस िववाह कहाबैत अिछ ।
8॰ िपशाच िववाह :- क_याक मदहोसक अव{थामे वा वरक िकछू नशाक अव{था मे िकछू खुआके लऽ जा
के िववाह कराएब िपशाच िववाह कहाबैत

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अिछ ।
भारतीय सv{कृितक अनुसार िववाह कोनो शारीिरक आ सामािजक अनुबंध माL निह अिछ अिपतु दूनूक
दा7पeय जीवानेकž एक wेQ आfयािeमक साधनाक ²पमे दश‹ओल गेल अिछ । ठीके कहल गेल अिछ :-
“ध_यो गृह{थाwम: ”।
िमथालमे पिहने सॅ िववाहक Dथा अनेक दृि¸कोणसॅ देवताक आवहानक उपरा_त अि«नदेवके साJी ²पमे
संकjप आिद करकž व²ण देवसॅ कृपालाभक बड़ अदृ¸ फल होएत अिछ अिह दुनू शि±तके एक िहएबाक
एक गंभीर बात आय= िववाहमे राखल गेल छल ।
िववाहक संबंधमे आय=यूगसॅ प£ीक िदिशसॅ पितक शतायु होयबाक Dाथ=ना आ पितक िदशसॅ अिभ³ दा7पeय
Dेम Dाथ=ना कएल गेल अिछ जेना ।
राघवे_oे यथा सीता िवनीता काcयपे यथा ।
पावके च यथा {वाहा तथा eवं मिय भ‘=िह । आिद आिद
(धम=िव–ान,पृ0156)
एिहDकारž जेना रामक Dित सीताक कcयपके Dित िवनताके, अि«नक Dित {वाहाक, िदलीपक Dित
सुदिJणाक, वासुदेवक Dित देवकीक, अग{तक Dित लोपमुoाक, अिLक Dित अनुसूइयाक, यमदि«नक Dित
रेणुकाक आ wीक़ृ°णक Dित ²ि±मणीक पिवL Dेम छलै_ह ओएह Dेम आजूक वर क_या मे मधुर Dेम जीवनक
ई Dाथ=ना आय= िववाह कालसॅ अिछ जे एिह युगमे संभव निह बुझाबैत अिछ ।
एतय हमर मंत€य अिछ जे िववाह एक पित प£ीक बीच पर{पर िवrासक एक समझौता तॅ िथकीए
संगे- संग एक Dकारक क‘=€य सेहो थीक जे िववाहोपरा_त €यि±तक जीवन शैिलमे कतेक Dकारक उतार-
चढाव अबैत अिछ जािह मfय मनु°य जीवन गाड़ीक दुनू पिहयाक सदृश घुमैत ई िजनगी सुख-दुखक अनुभव
करैत िबतैत अिछ ।
िववाहक िवषयमे िकछू िमलल-जुलल त»य युि±तसंगत बुिझ पड़ैत अिछ।
यथा –
जे पिहने एक दोसरसॅ आनिठया (अनिच_ह)
पुन: ¬मश: एक दोसर पर आिwत ,
उ‘रो‘र सॱसे (संपूण= ) िजनिगक संग ,
शनैह-शनैह पर{पर अिभ³ अपनामे,

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एक उदा‘ आनंदयु±त मधुर {पश= ,
अक{मात् अपनामे ²¸ नोक- झॲक,
उœचावच मित पर चलैत बढ़ैत िवरि±त-,
िवभेद-तलाकक िकनार तक।
कतहु िजद आ कतहु मानक अहम भाव ,
तथािप रकम-रकम दुनु िनकट सुLमे ब_हैत एक पु°प माल,
इ मधुर अ–ातसॅ –ातक िदशामे ,
चलैत Dाणा_त पय=_त समय साfय याLा ,
किनया वरक इ कटु मधुर संबंध कखनहु,
अचार कखनहु ित±त चटनी तॅ संगही मधुर ,
रसायनक शाही भोग कखनहु लावuय कखनहु नीम,
सब कीछु िमली भौितक जगतक ²पž पिरणत होइत अिछ ।
का€यक नवरश ²िचर भोगमे,
दु:खहुमे आनंद, परमानंद जािहमे €या®त ,
दुखज जीवनक सुख ।

पुन : िववाह थीक
एक आश िवrास िमलनमे आनंद ,
समाजमे जीवनक समप=ण ,
भल हो ओिह नवोढ़ा नािर केर ,
जे अचानक लेल अपनाके eयािग देलैथ,

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अपना लेलैथ, सव=था अनिभ–के ,
अपना ॲ◌ाचर मे समा लेलैथ।
तािहना ध_य छैथ ओ पु²ष िसंह,
जे नवागता अनिच_हािर अबला पर ,
{नेिहल िवrास करैत अपना गर धरा,
सम› ऐrय= आ {वयंके सौिप देलैथ ,
आओर की कहू-वाह रे िववाह, आह रे िववाह ।

Suggested citation: देवेश झा. “हिन्दू विवाह: एक समीक्षा.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 258, 2018-09-15. https://www.videha.co.in/research/2018/258/हिन्दू-विवाह-एक-समीक्षा.htm

मूल विदेह अंक / Original issue