विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

हिन्दी फिल्मी गीतमे बहर—४

आशीष अनचिन्हार · 2018-11-01 · अंक 261

आशीष अनिचbहार
िहंदी िफnमी गीतमे बहर -४
गजलक मतलामे जे रदीफ-कािफया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा न¡ममे ई
कोनो जŸरी नै छै। एकै न¡ममे अनेको कािफया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो
अलग भ' सकैए संगे-संग न¡मक शेरमे िबनु कािफयाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत न¡ममे गजले जक„
एकै बहरक िनव‡ह कएल गेल अिछ। मैिथलीमे बहुत लोक गजलक िनयम तँ निहए जानै छिथ आ तािहपरसँ
कुतक< करै छिथ जे िफnमी गीत िबना कोनो िनयमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पिहल जे न¡म लेल
बहर अिनवाय< नै छै आ जािहमे छै तकर िववरण हम एिह ठाम द' रहल छी-----------------

"शराबी" िफnम केर ई न¡म जे िक िकशोर कुमारजी Óारा गाएल गेल अिछ। न¡म िलखने छिथ Dकाश
मेहारा। संगीतकार छिथ ब¢पी लािहड़ी। ई िफnम 1984 मे िरलीज भेलै। एिहमे अिमताभ ब—चन, जयाDदा
आिद कलाकार छलिथ।

मंिज़लॲ पे आ के लुटते, ह® िदलॲ के कारव„
किÄतय„ सािहल पे अ²सर, डूबती है ¢यार की

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ejournal 'िवदेह ' २६१ म अंक ०१ नव᭥बर २०१८ (वषᭅ ११ मास १३१ अंक २६१ )
मानुषीिमह सं᭭क ृ ताम्ISSN 2229 -547X VIDEHA
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मंिज़ल अपनी जगह ह®, राkते अपनी जगह
जब कदम ही साथ ना दे, तो मुसािफर ²या करे
यूं तो है हमदद< भी और हमसफ़र भी है मेरा
बढ़ के कोई हाथ ना दे, िदल भला िफर ²या करे

डूबने वाले को ितनके का सहारा ही बहुत
िदल बहल जाए फ़क़त इतना इशारा ही बहुत
इतने पर भी आसम| वाला िगरा दे िबजिलय„
कोई बतला दे ज़रा ये डूबता िफर ²या करे

¢यार करना जुम< है तो, जुम< हमसे हो गया
कािबले माफी हुआ, करते नहॴ ऐसे गुनाह
तंगिदल है ये जह| और संगिदल मेरा सनम
²या करे जोशे जुनूं और हौसला िफर ²या करे

एिह न¡मक सभ प„ितक माLा“म 2122 2122 2122 212 अिछ। बहुत काल शाइर गजल वा न¡मसँ
पिहने माहौल बनेबाक लेल एकटा आन शेर दैत छै ओना ई अिनवाय< नै छै। एिह न¡मसँ पिहने एकटा शेर
"मंिज़लॲ पे आ के लुटते, ह® िदलॲ के कारव„" (एहू शेरमे इएह बहर छै) माहौल बनेबाक लेल देल गेल छै।
एकर त²ती उदू< िहंदी िनयमपर कएल गेल अिछ। उदू<मे "और" शœदक माLा िनध‡रण दू तरीकासँ कएल
जाइत छै "और मने 21" आ "औ मने 2"। एिह न¡मक संगे आन न¡म लेल ई मोन राखू। जŸरी नै जे ई
िनयम मैिथली लेल सेहो सही हएत।अंितम बंदक दोसर प„ितक अंितम शœद अिछ "गुनाह" जािहमे एकटा लघु
अितिर²त अिछ। ई छूट उदू< गजलक संग मैिथली गजलमे सेहो अिछ।

"मदहोश" िफnम केर ई न¡म जे िक तलत महमदूजी Óारा गाएल गेल अिछ। न¡म िलखने छिथ राजा महदी
अली खान। संगीतकार छिथ मदन मोहन। ई िफnम 1951 मे िरलीज भेलै। एिहमे मनहर (देसाइ), मीना
कुमारी आिद कलाकार छलिथ।

मेरी याद म तुम न आँसू बहाना
न जी को जलाना, मुझे भूल जाना
समझना के था एक सपना सुहाना
वो गुज़रा ज़माना, मुझे भूल जाना

जुदा मेरी मँिज़ल, जुदा तेरी राह
िमलगी न अब तेरी-मेरी िनगाह

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मुझे तेरी दुिनया से है दूर जाना

ये रो-रो के कहता है टूटा हुआ िदल
नहॴ हूँ म® तेरी मोहœबत के कािबल
मेरा नाम तक अपने लब पे न लाना
न जी को जलाना, मुझे भूल जाना

एिह न¡मक सभ प„ितक माLा“म 122 122 122 122 अिछ। एकर त²ती उदू< िहंदी िनयमपर कएल गेल
अिछ। ई बहर संkकृतमे सेहो भुजंगDयात (माLा“म 122+122+122+122) केर नामसँ छै। उदू<मे एकरा
“बहरे मोतकािरब मोस6मन सािलम” कहल जाइत छै। एिह बहरपर बहुत नीक रचना अनेक भाषामे रचल
गेल छै। Dसंगवश एिहठाम हम गोkवामी तुलसीदास जीक ई रचना (°vाÊकम्) द' रहल छी.............

नमामीशमीशान िनव‡णŸपं
िवभुं ©यापकं ÇÈवेदkवŸपम् |
िनजं िनगु<णं िनिव<कnपं िनरीहं
िचदाकाशमाकाशवासं भजेङहम् ||१||

एिह °vाÊकम् केर छंद भुजंगDयात अिछ। एकरा एना देखू.. नमामी 122 शमीशा 122 न िनव‡ 122
णŸपं 122 आन प„ित सभकR एनािहते देिख सकैत छी। हमरा Óारा िलखल एिह िसरीजमे तेरे ¢यार का आसरा
चाहता हूँ, तेरी याद िदल से भुलाने चला हूँ, बहुत देर से दर पे आँख लगी थी सन न¡म एही बहरपर
अिछ।

"िखलौना" िफnम केर ई न¡म जे िक लता मंगेशकरजी Óारा गाएल गेल अिछ। न¡म िलखने छिथ राजा
आनंद बशी। संगीतकार छिथ ल×मीक|त ¢यारे लाल। ई िफnम 1970 मे िरलीज भेलै। एिहमे संजीव
कुमार, मुमताज, िजतेbv, शLुç िसbहा आिद कलाकार छलिथ। ई िफnम गुलशन नंदाजीक उपbयासपर
आधािरत अिछ।

अगर िदलबर की °सवाई हम मंजूर हो जाये
सनम तू बेवफ़ा के नाम से मशहूर हो जाये

हम फ़ुस<त नहॴ िमलती कभी आँसू बहाने से
कई ग़म पास आ बैठे तेरे एक दूर जाने से
अगर तू पास आ जाये तो हर ग़म दूर हो जाये

वफ़ा का वाkता देकर मुहœबत आज रोती है

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न ऐसे खेल इस िदल से ये नाज़ुक चीज़ होती है
ज़रा सी ठेस लग जाये तो शीशा चूर हो जाये

तेरे रंगीन हॲठॲ को कमल कहने से डरते ह®
तेरी इस बे°ख़ी पे हम ग़ज़ल कहने से डरते ह®
कहॴ ऐसा न हो तू और भी मग़Ÿर हो जाये

एिह न¡मक सभ प„ितक माLा“म 1222 1222 1222 1222 अिछ। एकर त²ती उदू< िहंदी िनयमपर
कएल गेल अिछ। उदू<मे दू दीघ<क बीच बला संयु²ताJरकR एकटा लघु मािन लेबाक छूट सेहो छै मुदा ई
मैिथली सिहत आन आधुिनक भारतीय भाषामे निह भेटत। एिह न¡मकR सुनलाक बाद सेहो बुिझ सकबै जे
"ए" केर उ—चारण "इ" मने "एक" केर उ—चारण "इक" जक„ छै आ ई उदू<क िविशÊता छै।


मोहनराज "गगन "
बीहिनकथा
"हिरयाणा पंजाबमे फेर अिह बेर कोट< रबािस फोरबाक समय सीमा िनदÚिशत कएने छैक कथी लँ कीन रहल
छह?" राजेश अपन दोस राजू सँ।
"िपछला बरख सेहो िदnली मे बž कएने रहैक मुदा कहा मानै छैक लोक"
"कथी लोक मानते होली मे इकोéडली होली! िदयावाती मे शुÅ बसात केर नाम पर िबन रबािसक िदयावाती
अिकल सभटा िहbदू पर छजै आिक आआरो कतौ..?
"हँ होऊ िवयाह मुरन िहंदुkतान पािकkतान केर मैच उपनयन सभमे ठीक मुदा िदयावाती मे «ान तखन की
कहूँ"
"kवkथ हवामे स|स लेब' के नR चाहइ छैक मुदा माL िदयावाती मे रोिक..? रबािसक कारखाना बž क' न
दौऊ"
"चलु छोड़ू नR कीनब कोट<क आदेश छैक मुदा पराली जरा शुÔ हवा ब„टबाक Dयास सेहो kवीकार नR"
"से बž ने हेतैए नाक रगिड़ मैिर जाऊ" उदास होइित दुनूगोटे मुँह हप कएने बैिस गेल।

Suggested citation: आशीष अनचिन्हार. “हिन्दी फिल्मी गीतमे बहर—४.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 261, 2018-11-01. https://www.videha.co.in/research/2018/261/हिन्दी-फिल्मी-गीतमे-बहर-४.htm

मूल विदेह अंक / Original issue