विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

सोशल मीडिया आ मैथिली

आशीष अनचिन्हार · 2020-07-15 · अंक 302

आशीष अनचिन्हार
सोशल मीडिया आ मैथिली

जियोसिटीजक साइटसँ होइत मैथिली इंटरनेटपर सोशल मीडियाक सहारे बढ़ल। कोना बढ़ल से जनबाक लेल विदेहक अंक 230 (15/7/2017)मे हमर आलेख "कतेक रास बात" इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति नै अछि" केर शीर्षकसँ प्रकाशित भेल से देखू। ई सोशल मीडिया की थिक आ कतेक प्रकारक होइत छै से जानी--
ओना तँ सोशल मीडियाक बहुत परिभाषा छै मुदा से तकनीकी छै। हम एकरा गामक चंडालचौकड़ी माध्यमे परिभाषित करब। चंडालचौकड़ीमे की होइ छै किछु लोकक समूह अपन-अपन ठेकनाएल जगहपर जाइत छै आ विभिन्न तरहक क्रियाकलाप करै छै। ई क्रियाकलाप ज्ञान, हँसी-मजाक, मारि-पीट सभ तहहक होइत छै। केखनो काल एक-एक काज लेल अलग-अलग चंडालचौकड़ी होइत छै तँ केखनो काल एकै चंडालचौकड़ीमे सभ क्रिया भऽ जाइत छै। गौरसँ देखियौ चंडालचौकड़ी लेल तीन अनिवार्य तत्व छै, लोक, निश्चित जगह आ लोककेँ अएबाक लेल प्रेरक। आधुनिक समयमे "लोककेँ अएबाक लेल प्रेरक" तत्व इंटरनेटमे बदलि गेलै आ इंटरनेटपर सेहो निश्चित जगह बना देल गेलै लोक लेल। लोकक जेहन प्रवृति तेहने-तेहन जगह। कुल मिला कऽ ओहन चंडालचौकड़ी जे कि इंटरनेटक माध्यमसँ कोनो निश्चित साइटपर होमए लागए तँ ओकरा सोशल मीडिया कहल जाइत छै। ओना मैथिलीमे चंडालचौकड़ी निगेटिभ अर्थमे प्रयोग होइत छै मुदा हम जोर दऽ कऽ कहब जे चंडालचौकरीमे किुछए देर सही ज्ञानक बात सेहो होइत छै, समाजक भलाइ केर बात सेहो होइत छै। सोशल मीडियाक किछु विभिन्न रूप निच्चा देल जा रहल अछि--
1) Social networks - ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ जोड़बाक लेल बनै छै जेना- Facebook, Twitter, LinkedIn एहूमे LinkedIn मात्र प्रोफेशनल लोक सभ लेल छै से चाहे प्रोफेशन बहुत प्रकारक भऽ सकैए। समान्यतः नौकरीपेशा आ बेपारी LinkedIn पर बेसी रहै छथि। Twitter नेता ओ राजनीतिक ओ समाजिक संगठन लेल बेसी प्रयोग होइए तँ Facebook केँ सभ जनता जनार्दन अपना अनुकूल पाबै छथि तँइ अपना देशमे Facebook हदसँ बेसी लोकप्रिय छै। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए।
2) Media sharing networks — ई विभिन्न तरीकासँ फोटो, आडियो ओ भडियो सार्वजनिक करबाक सुविधा दै छै जेना- Instagram, Snapchat, YouTube, soundcloud आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए।
3) Discussion forums — ई विभिन्न तरीकासँ लोकक बीच तर्क करबाक, प्रश्न करबाक, उत्तर देबाक सुविधा दै छै जेना- reddit, Quora, Digg आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए।
4) Bookmarking and content curation networks — ई विभिन्न तरीकासँ कोनो टेकस्ट वा पी.डी.एफकेँ सुरक्षित करबाक सुविधा दै छै जेना - Pinterest, Flipboard आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए।
5) Consumer review networks — ई विभिन्न तरीकासँ बेपार ओ ग्राहकक रुचि-अरुचि जनबाक सुविधा दै छै जेना- Yelp, Zomato, TripAdvisor आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए।
6) Blogging and publishing networks — ई विभिन्न तरीकासँ कोनो टेक्सटकेँ आनलाइन प्रकाशित करबाक सुविधा दै छै जेना- blogger, WordPress, Tumblr, Medium आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए।
7) Interest-based networks — ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ अपन वयक्तिगत रुचि-अरुचिकेँ सार्वजनिक करबाक सुविधा दै छै जेना - Goodreads, Houzz, Last.fm आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए।
8) Social shopping networks—Shop online ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ कोनो वस्तु आनलाइन किनबाक-बेचबाक सुविधा दै छै जेना - Polyvore, Etsy, Fancy आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए।
9) Sharing economy networks—Trade goods and services ई विभिन्न तरीकासँ अर्थव्यवस्था ओ विभिन्न सेवा संबंधी जानकारी देबाक सुविधा दै छै जेना - Airbnb, Uber, Taskrabbit आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए।
10) Anonymous social networks— ई विभिन्न तरीकासँ लोककेँ अपन पहिचान नुका कऽ कोनो विषयपर संवाद करबाक सुविधा दै छै जेना- Whisper, Ask.fm, After School आदि। एहि कैटेगरीमे आरो नाम भऽ सकैए। आब किछु एहम सोशल मीडियाक विवेचना देखी जकर महत्व मैथिली लेल बेसी अछि--
फेसबुक आ मैथिली
2004 मे फेसबुक केर शुरूआत भेल आ लगभग 2008सँ फेसबुकपर मैथिली आएल (आएल मने साहित्य ओ भाषाक रूपमे)। कहबाक मतलब जे लगभग 2008सँ मैथिल सभ खुलि कऽ बिना कोनो संकोचकेँ फेसबुकपर मैथिली भाषाक प्रयोग शुरू केलाह। सभ चीजक दुरूपयोग होइ छै आ फेसबुकक सेहो भेलै। तथापि ओइ दुरूपयोगक अलावे मैथिलीक संदर्भमे बहुत रास उपयोगी बात भेलै फेसबुकपर। प्राप्त जानकारीक अनुसारें 7 July 2008 केँ विदेहक फेसबुक भर्सन (फेसबुक ग्रुप केर रूपमे) विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका केर नामसँ एलै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी-https://www.facebook.com/groups/10299304978/ एहि ग्रुपक पहिल पोस्टक लिंक अछि-https://www.facebook.com/groups/10299304978/permalink/428765254978/ बादमे एहि ग्रुपक सभ पोस्टकेँ विदेहक दोसर आ बेसी उन्नत ग्रुपमे परिवर्तित कऽ देल गेलै जकरा एहि लिंकपर देखि सकै छी-- https://www.facebook.com/groups/videha/ ई बदलाव लगभग 2010-11मे भेलै। इंटरनेटपर पहिल उपस्थिति कोन अछि तेहने सन तथ्यहीन बहस फेसबुकपर सेहो चलल जे "फेसबुकपर मैथिलीक पहिल ग्रुप कोन?"। मुदा पहिनेहें जकाँ सभ गोटा अपन-अपन ग्रुपक पहिल हेबाक दाबी बिना कोनो लिंककेँ करैत रहलाह। विदेह सदिखन प्रमाण प्रस्तुत करैत रहल अछि। एहि ठाम सेहो लिंक देल गेल अछि। तँइ एखन धरिक प्रमाणक आधारपर ई मानबामे कोनो संकोच नै जे ग्रुप केर रूपमे विदेहक ग्रुप फेसबुपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति अछि। निच्चा किछु एहन तथ्य देल जा रहल अछि जाहिसँ मैथिलीक संदर्भमे फेसबुकक उपयोगिता साबित हएत---
फेसबुक, भाषा आ साहित्य
फेसबुक मैथिली भाषा आ साहित्य लेल बहुत योगदान केलक। बिना कोनो स्कूल गेने, बिना कोनो कोंचिंग गेने जतेक लोक एहिठाम मैथिली सिखलाह तकर गिनती नै। जँ सच पूछी तँ मैथिली आंदोलनकारी सभ जे स्कूल वा कालेजमे मैथिली पढ़ाइ लेल अनेरे मारि करै छथि ताहिसँ नीक जे ओ ओतबे समयमे फेसबुकपर मैथिली लिखबा लेल लोककेँ प्रोत्साहत करथि तँ बेसी नीक रिज्लट निकलत। ओना हमरा ई मानबामे संकोच नै जे स्कूल वा कालेजमे कोनो भाषाक पढ़ाइ केर एकटा अलग महत्व होइत छैक।निच्चा किछु एहन तथ्य देल जा रहल अछि जाहिसँ मैथिलीक संदर्भमे फेसबुकक उपयोगिता साबित हएत---
1) मैथिली भाषाक लिखित प्रयोग--- फेसबुकपर मैथिली लिखनाइ एकटा स्टेटस सिंबल बनि गेल आ शिक्षित-अशिक्षित, नेता-जनता, स्त्री-पुरुष सभ गोटा बिना कोनो वर्तनीकेँ वा कोनो गलतीकेँ चिन्ता केने मैथिली लिखला जाहिसँ मैथिली लिखए बला संख्या बढ़ल आ ई मैथिलीक भविष्य बहुत नीक रहत। फेसबुकपर साहित्य केर संदर्भमे विदेहक फेसबुक भर्सन बहुत रास काज केलक। एहि भर्सन द्वारा नव-नव लेखककेँ प्रोत्साहन भेटल जकर प्रभाव निकट भविष्यमे देखबामे आएत।
2) मैथिलीमे स्त्री लेखिकाक संख्या-- मैथिली लेल ई बहुत नीक जे फेसबुक मैथिली स्त्री लेल ओहन साधन बनि गेल जिनकर बोलकेँ बहुत रास कुच्रकमे फँसा कऽ राखि देने छल ई समाज। आजुक स्त्री कोनो बातक परबाह केने बिना अपन भावनाकेँ फेसबुकपर परसि रहल छथि। आ तइसँ मैथिलीमे नव-नव अध्याय-अनुभव जुड़ि रहल अछि।
3) मैथिली दलित साहित्य केर प्रचारक-- फेसबुकक माध्यमे भारत-नेपाल मिला कऽ जतेक मैथिलीक दलित लेखक, विचारक एलाह ततेक मात्र सिद्ध सरहपादे कालमे छल मने मैथिलीक एकदम शुरूआती समयमे। लगभग हजार सालसँ मैथिलीक समाजिक ताना-बानाकेँ जे तोड़ने छल तकरा फेसबुक तोड़ि देलक आ सही अर्थमे "मैथिल समाज" केर निर्माणमे सहयोग देलक।
फेसबुक आ समाज

फेसबुक आ फेसबुक ग्रुपसँ किछु लेखक बंधु तमसाएल रहै छथि। हुनक तामसक कारण ई जे लोक हुनकर कथित गंभीर रचनापर धियान नै दऽ फालतूक फोटो, बात आदिपर बेसी सक्रिय रहै छथि। ताहूमे जखन कियो कोनो घास-पात, तर-तरकारी, गाछ-बिरिछक फोटो दऽ पूछै छै-ई की छै आ ताहिपर हजारो लोकक लाइक-कमेंट आ से देखि लेखक सभ तखने जरि कऽ छाउर भऽ जाइत छथि। हुनका बुझाइ छनि जे हमर एतेक गंभीर विचार नष्ट भेल जा रहल अछि आ लोक सभ फालतू काजमे लागल अछि। मुदा एहन लेखक सभकेँ फेसबुकक उद्येश्ये नै बूझल छनि। वस्तुतः फेसबुकक जन्म एही सभ लेल भेल छै जाहिसँ लोक एक-दोसरसँ जुड़ल रहै। बादमे किछु प्रबुद्ध एकर उपयोग साहित्य-संगीत-राजनीति एवं अन्य काज लेल करए लगलै। लेखक सभकेँ धैर्य राखि एहि माध्यमकेँ लेखन लेल सार्थक बनबए पड़तनि आ तखन संभव जे साहित्यो केर दिन घुरतै। ओना घास-पात, तर-तरकारी, गाछ-बिरिछक फोटो लेल हमर विचार अछि जे ई ओहन लोक सभ लेल उपयोगी जे कि गाम-घरसँ कटि गेल छथि। आ फेसबुकपर एहन संख्या लाखोमें अछि तँइ एहन पोस्ट सभपर बेसी सक्रियता रहै छै। कहियो काल किछु वस्तुक संदर्भमे हमरो जानकारी बढ़ि जाइए एहन-एहन पोस्टसँ से हम स्वीकारै छी। हम मात्र हिंट देलहुँ एहि विषयपर कोनो समाजशास्त्री काज करथि तँ नीक विवेचना भऽ सकैए। फेसबुकसँ समाजिक संगठन हेबामे सुविधा भेलैए से चाहे ओ कोनो पाबनि-तिहारक संदर्भमे हो वा कि बाढ़ि-अकाल वा आन कोनो परस्थितिमे। बहुतो एहनो घटनाक सबूत अछि जाहिमे कोनो हेड़ाएल लोक अपन परिवारक लोक फेसबुकक कारण भेटलै। फेसबुकपर एक मिनटमे कोनो समाद हजार ठाम पसरि जाइत छै।

फेसबुक आ धर्म

फेसबुक मिथिलाक अपन निज ओ खाँटी पाबनि तिहार लेल अमृतक समान काज केलक अछि। बड़का पाबनि जेना दुर्गापूजा, होली, दिवाली, छठि आदिक शुभकामना तँ प्रचलित छल मुदा एहि माध्यमसँ हैप्पी तिलासंक्रांति, हैप्पी जूड़शीतल, हैप्पी जितिया, हैप्पी चौरचन, हैप्पी भरदुतिया आदि बेसी प्रचलित भेल। एकर अतिरिक्त मिथिलामे पसरल उपासक आगू सेहो हैप्पी लागए लागल। मिथिलाक एकटा बहुत बड़का वर्ग (गैर-ब्राह्मण ओ कायस्थ) सेहो अपन-अपन पूजाक लऽ कऽ फेसबुकक प्रयोग कऽ रहल छथि आ ई आरो नीक बात भेलै। निश्चित तौरपर मिथिलाक पछुआएल पाबनि-तिहार फेसबुक ओ अन्य प्लेटफार्म पाबि मजबूत भेल अछि। किछु एहन पाबनि जे कि व्यक्तिगत होइत छै जेना कोजगरा, मधुश्रावणी, भुँइया बाबाक पूजा आदिक कायाकल्प सेहो भऽ रहल अछि एहि माध्यमसँ। धर्मक एहि रूपसँ मैथिलीक गीत विधा बेसी लाभ उठेलक। जाहि पाबनि सभहक गीत प्राचीने कालसँ नै केर बराबरि होइत छल ताहू पाबनि सभहक गीत आब बहुतक संख्यामे भेटत। अप्रैल २०१६ मे फेसबुक लाइभ हेबाक सुविधा देलकै मने अहाँ अपन भीडियो रूपमे कोनो बात सेहो कहि सकैत छी। ई सुविधा आन विषय लेल जेहन हो मुदा मैथिली गीत-संगीत लेल अमृतक समान काज केलक। लोक अपन-अपन लाइभ प्रस्तुति दऽ अपन प्रतिभाकेँ समाजक सामने राखि देलखनि। जकर प्रत्यक्ष लाभ एहि विधाकेँ भेटि रहल छै।

फेसबुक आ राजनीति

जखने समाज छै तहने राजनीति हेबे करतै से चाहे कोनो स्तरक किए ने हो। आइ स्थिति ई छै जे देशक हरेक नेता ओ पार्टीक सोशल मीडिया प्रभारी छै। आ एहि लेल भारी-भरकम खर्च प्रस्तावित करै जाइए एहि प्रोफेशन केर लोक सभ। भारतमे भारतक चुनाव प्रचार जमीनपर कम आ सोशल मीडियापर बेसी होइत छै। आ एहिसँ कोनो नेताक हारि-जीतक समीकरण सेहो तय होइत छै। २००८ मे अमेरिकामे बराक ओबामा अपन चुनाव केर प्रबंधन सोशल मीडियामे सेहो करबेलाह आ जितलाह ताही तर्जपर २०१४ मे भारतक प्रधानमंत्री चुनाव भाजपा सोशल मीडिया द्वारा लड़लक आ ओहि चुनावमे जीतल आ तकर बाद भारतक सभ राजनैतिक दल अपन-अपन पक्ष फेसबुकपर राखए लागल ताहूमे एखन धरि भाजपे आगू अछि। एहिसँ पहिने भारतेमे अन्ना हजारे द्वारा २०११ मे कएल गेल अनशन सेहो फेसबुकक कारणे पसरल आ ओहि आंदोलनसँ किछु नीक नेता जेना अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया आदि निकललाह। फेसबुक राजनीतिकेँ पलटियो दैत छै। २०१० मे मिश्र (इजिप्ट) मात्र फेसबुकक सहारासँ अपन भ्रष्ट ओ निरंकुश शासनकेँ खत्म केलक एकरा Egyptian revolution of 2011 केर नामसँ जानल जाइत छै। विश्वक हरेक कोनामे अपन अवाज उठेबाक लेल फेसबुक आ सुलभ साधन छै।

फेसबुक आ बेपार

विज्ञापन लेल फेसबुक लेल नीक साधन अछि आ बेपार तँ मुख्यतः विज्ञापनेपर टिकल अछि। जहाँ आन माध्यमसँ विज्ञापन लेल पाइ खर्चा करए पड़ैत छै ततए फेसबुक ओ अन्य सोशल मीडियासँ अपेक्षाकृत नमहर सर्किलमे अहाँ अपन चीजकेँ राखि सकैत छी। प्रायः हरेक कम्पनी केर सोशल मीडिया एकांउट छै जतए ओ अपन नव वस्तु, स्कीम आदिक विवरण दै छै।
एकर अतिरिक्त आनो विषयमे फेसबुक सहायक भेल। आ एहने एकटा विषय अछि मजाकिया फोटो, मीम, कार्टून आदि। फेसबुकपर मैथिलीमे लिखल आ मैथिलसँ संबंधित मजाकिया फोटो, मीम, कार्टून बहुत आएल आ आबिए रहल अछि। इंटरनेटपर मैथिली लेखकक उपर पहिल बेर एडिट कएल फोटो (मजाकिया, मीम, कार्टून) एकै संगे तीन टा लेखक गजेन्द्र ठाकुर, आशीष अनचिन्हार ओ उमेश मंडलपर एलै जे विकास ठाकोर नामक एक फेक आइडी 2011 मे बनेने रहै। जे ओहि समयमे फेसबुकपर एक्टिभ रहथि से जनैत हेता जे विकास ठाकोर दू मासमे मिथिला राज्य बना देबाक दावा केने रहै। फोटो दऽ रहल छी। अपनेपर हँसि कऽ अपन नाम इतिहासमे पहिल हेबाक घुसिया रहल छी। ई कार्टून बनबए बला लोक कार्टूने धरि नै रहलाह हरेक पाबनि-तिहारपर ओकर अनुकूल फोटोशाप सेहो करए लगलाह जे कि आकर्षक छल आ पाबनि-तिहारकेँ एकटा नव रंग देलक।

ई छल सकारात्मक पक्ष मुदा एकर अतिरिक्त किछु नकारात्मक तत्व सेहो छै आ ई तँ संसारक नियमे छै जे कोनो वस्तुमे गुण-अवगुण दूनू रहैत छै।

फेसबुकपर मैथिलीक किछु प्रसिद्ध ग्रुप आ एकर काज ---
1) विदेहक फेसबुक भर्सन https://www.facebook.com/groups/videha/, एहि ग्रुप मुख्य एडमिन गजेन्द्र ठाकुर छथि। एहिठाम हम विदेहक फेसबुक भर्सन केर किछु काज संक्षिप्त रूपें देखा रहल छी
A) विदेह फेसबुक ग्रुपपर सभसँ पहिल काज मैथिली हाइकू केर अछि। गजेन्द्र ठाकुर पहिने हाइकू केर आलेख देलखिन तकर बाद हरेक दिन एकटा गाछक वा कोनो फोटो द' क' हाइकू लिखबाक आग्रह करै छलखिन। एकर प्रभाव तेहन तेहन भेलै जे सभसँ पहिने मैथिलीमे हाइकू केर लेखकमे अभूतपूर्व वृद्धि देखल गेल जाहिमे सुनील कुमार झा, मिहिर झा, ओमप्रकाश झा, इरा मल्लिक, शिव कुमार झा, ज्योति सुनीत चौधरी, अमित मिश्र, चंदन कुमार झा, मुन्नाजी, रामविलास साहु सहित एहि पाँतिक लेखक सेहो सम्मलित छथि। 2008सँ मैथिली हाइकू केर ब्लाग सेहो अछि जाहि ठाम विदेहक फेसबुक भर्सनसँ हाइकू केर संग्रह कएल गेल अछि। ई ब्लाग एहि पतापर देखल जा सकैए http://maithili-haiku.blogspot.in/
B) फेसबुकक माध्यमसँ विदेह मैथिलीक वर्तनी ओ मानकता लेल नीक प्रयास केने अछि आ तही कारणसँ कमसँ कम इंटरनेटपर सुदूर नेपालसँ लए कऽ दरंभगाक मैथिली एकसमान भेल अछि (ईहो धातव्य जे किछु जबरदस्ती बला मानकता बला विद्वान सभ एखनो कृत्रिम मैथिलीकेँ पकड़ने छथि)। विदेहक एहि मानक भाषाक लेखककेँ "विदेह भाषा पाक" नाम देल गेलै जे कि विदेह पोथी डाउनलोडपर सेहो उपल्बध अछि।
C) विदेहक फेसबुक भर्सनपर जतेक नाटक संबंधी रचना आएल तकरा विदेह मैथिली नाट्य उत्सव नामक ब्लागपर राखल गेल अछि। विदेह ग्रुपक सहयोगसँ लगातार चनौरागंजमे विदेह नाट्य उत्सवक आयोजन भेल अछि जे कि मैथिलीमे समानांतर नाट्य अवधाणाकेँ मजगूत केलक।
D) विदेहक फेसबुक भर्सन मैथिली बीहनि कथाक लगातार सहयोगी बनल रहल। एहि ठाम देल गेल आ प्रोत्साहित भेल बीहनिकथाकारकेँ मैथिली बीहनिकथा ब्लागपर राखल गेल जकरा एहि लिंकपर देखल जा सकैए http://vihanikatha.blogspot.in/
E) विदेह ग्रुपपर आएल प्रमुख कविताकेँ मैथिली कविता नामक ब्लागपर राखल गेल अछि जकरा http://maithili-kavita.blogspot.in/ लिंकपर देखल जा सकैए। लगभग 400सँ उपर कविताक संकलन अछि।
F) विदेह ग्रुपपर आएल प्रमुख कथाकेँ मैथिली कथा नामक ब्लागपर राखल गेल अछि जकरा http://maithili-katha.blogspot.in/ लिंकपर जा क' देखि सकै छी।
G) विदेह ग्रुपपर आएल प्रमुख आलोचना, समीक्षा आदिकेँ मैथिली कथा नामक ब्लागपर राखल गेल अछि जकरा http://maithili-samalochna.blogspot.in/ लिंकपर जा क' देखि सकै छी।
2) मिनाप MINAP(Mithila Natyakala Parishad) https://www.facebook.com/groups/258380252004/ एडमिन, सुनील कुमार मल्लिक, प्रवेश मल्लिक।,
3) मैथिली गजल भंडार, https://www.facebook.com/groups/mghajal/ एडमिन कुंदन कुमार कर्ण
4) मिथिलांगन ("MITHILANGAN" - A Literary, Social and Cultural Organisation), https://www.facebook.com/groups/mithilangan/, एडमिन आनंद रंजन
5) घटकैती झारखंड मिथिला मंच https://www.facebook.com/groups/226653764434000/, घटकैती झारखण्ड मिथिला मंचक शुरुआत 26 नवम्बर 16 के झारखण्ड मिथिला मंच के स्वयंसेवक भाई सुजीत झा जी केलथि। वर्तमान एडमिन निशा झा एवं सुजीत झा छथि। एहि ग्रुप द्वारा
पहिल विवाहक समाचार मई 17 मे प्राप्त भेल जे संपन्न भेल छल बोकारोमे, तकर बादसँ एखन धरि 40 गोटे समाचार देने छथि जे हम्मर पुत्र-पुत्री के विवाह एहि घटकैती ग्रुप द्वारा भेल, विवाह त बहुतो होइ ये ग्रुपक माध्यमे लेकिन ग्रुप मे सुचना बहुतो कम गोटे देइ छैथ, खैर कोनो बात नै हम सब निःस्वार्थ अप्पन कार्य में लागल छी, वर्तमानमे एहि ग्रुपमे 3000 सँ ऊपर बायोडाटा राखल अछि।
6) धूआ धजा https://www.facebook.com/groups/dhuadhaja/ (एडमिन परमेश्वर कापड़ि, कुमार भाष्कर),
7) समदिया https://www.facebook.com/groups/samadiya/ (प्रियंका झा, पूनम मंडल),
8) विदेह नाट्य उत्सव (https://www.facebook.com/groups/136683676426547/?ref=group_browse_new) एडमिन बेचन ठाकुर,
9) मैथिली थियेटर (https://www.facebook.com/groups/MAITHILIRANGMANCH/) एडमिन आशुतोष अभिज्ञ,
10) अछिंजल (https://www.facebook.com/groups/achhinjal/) एडमिन पवन झा,
11) नेना भुटका (https://www.facebook.com/groups/101930576873357/) एडमिन देवाशुं वत्स,
एकर अतिरिक्तो बहुत रास ग्रुप अछि जकरा जोड़ल जा सकैए। २०१४ केर बादसँ फेसबुक ग्रुपक एकटा ट्रेंड देखबामे आएल जे एडमिन कोनो पोस्ट एप्रूभ करबाक काज अपना हाथमे लऽ लै छथि आ सौंसे हल्ला केने फीरै छथि जे हमर ग्रुपमे साफ-सुथरा पोस्ट अबैए मुदा ई बात निश्चित जे एहन पोस्टमे बेमतलब पोस्ट बेसी अबैत छै।

Suggested citation: आशीष अनचिन्हार. “सोशल मीडिया आ मैथिली.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 302, 2020-07-15. https://www.videha.co.in/research/2020/302/सोशल-मीडिया-आ-मैथिली.htm

मूल विदेह अंक / Original issue