VIDEHA ISSN 2229-547X · First Maithili Fortnightly eJournal · Since 2000 · www.videha.co.in
विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-२ (पृष्ठ- ४-७)

कल्पना झा · 2026-04-15 · अंक 440

२.१.कल्पना झा-मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-२
कल्पना झा
कल्पना झा
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-२
कोइलखक अलंकार: 'विद्यालंकार'
श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' केँ कोइलख गामक अलंकार कहल जाए तऽ अतिशयोक्ति नहि होएत। ओ एहन अलंकार छलाह कोइलखक जनिकर जन्म सँ, जनिकर कर्म सँ हुनकर गामक मान बढ़लनि, नाम बढ़लनि। ओना कोइलखक मान बढ़ौनिहार आरो बहुत विद्वान लोकनिक जन्म एहि पहिनहुँ भऽ चुकल छलनि। एक सँ बढ़ि कऽ एक धुरन्धर (ई सिनेमा बेस चर्चित रहल तैं एहि शब्दक प्रयोग भऽ गेल स्वत:)क जन्म आ हुनकर योग्यता/विद्वता, सत्कर्मक प्रभावेँ मिथिलाक भूगोल मे 'कोइलख' अपन एकटा विशेष स्थान बनौने अछि। से आइ सँ नहि, सैकड़ो वर्ष पहिनहि सँ। श्री हितनाथ झा अपन ग्राम-गाथा लिखैत 'कोइलख'क मान बढ़ौनिहार सभ मनीषीक परिचय दैत, हुनका लोकनिक व्यक्तित्व ओ कृतित्व पर संक्षिप्त विवरण दऽ कऽ मैथिल समाज पर बड़का उपकार केलनि अछि। 'कोइलख' नामक एहि पोथी मे आदरणीय भीमनाथ झाक लिखल "कोइलख-प्रसंग" सँ उद्धृत अंश देखल जाए-
"एहि गाम मे एक सँ एक विद्वान भेल छथि। सोरहम शताब्दी मे विख्यात कीर्तनियाँ नाटककार महामहोपाध्याय उमापति उपाध्याय भेलाह, जनिक 'पारिजात-हरण' मध्यकालीन मैथिली साहित्यक मेरुदण्ड मानल जाइछ। हिनक उपाधि 'सुमति' तथा 'कविपण्डितमुख्य' छलनि, जे सामाजिक प्रतिष्ठा तथा पाण्डित्य एवं कवित्व प्रतिभाक शिखरत्वक सूचक छल। मैथिली साहित्यक आद्य दू प्राध्यापक कलकत्ता विश्वविद्यालय मे पण्डित खुद्दी झा एवं पण्डित बबुआजी मिश्र रहथि। व्याकरण, न्याय, ज्योतिष, कर्मकाण्ड, वेद, तंत्रक संगहि मैथिली साहित्यक अनेकानेक कवि-साहित्यकार एहि गाम मे होइत अएलाह अछि, जे अपन-अपन क्षेत्र मे पूर्ण प्रतिष्ठित-सम्मानित भेलाह अछि। राजनीति, पत्रकारिता, प्रशासन, चिकित्सा, शिक्षा, अभियांत्रिकी, व्यवसाय प्रभृति प्रायः प्रत्येक क्षेत्र मे कोइलखक सपूतक अवदान चिरस्मरणीय अछि।"
श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' जीक जन्म 17 जुलाइ 1901 ई. मे भेल छलनि आ अवसान 20 मइ 1989 मे। लगभग अठासी वर्षक हुनकर जीवन मूल रूप सँ राजभाषा हिन्दीक उन्नयन मे बितलनि। हिन्दीक जानल-मानल पत्रकार, सम्पादक, स्तम्भकार, रहलाह। मुदा मातृभाषा मैथिलीक प्रचार-प्रसार लेल सेहो तत्पर रहलाह; आजीवन रहलाह। हिन्दी पत्रकारिता मे तऽ खुट्टा गाड़बे केलनि, संगहि राज्यपाल द्वारा समाजसेवा आ शिक्षा क्षेत्र मे विशेष योगदान लेल मनोनीत कएल गेलाह। पाँच वर्ष लेल। बिहार विधान परिषदक सदस्य रूप मे 1968 सँ 72 धरि हिनकर कार्यकाल रहलनि एम.एल.सी. रूप मे। अपन 'पद' आ 'पावर'के वास्तव मे उपयोग केलनि। चेतना समिति लेल राजेन्द्र नगर मे प्लॉट आवंटित करबाएब एकटा महत्वपूर्ण काज रहलनि। हितनाथ झाक कहब छनि, "पटनाक चेतना समितिक सक्रिय उन्नेतावर्ग मे छलाह, 1963 सँ 66 धरि अध्यक्षो रहलाह। हिनके योगदानक प्रतिफल अछि राजेन्द्र नगरक भूखण्ड तथा ओहिठाम भवन-निर्माण मे भेल बाधाक निराकरण।"
चेतना समितिक अतिरिक्त मैथिली अकादमीक अध्यक्ष सेहो रहल छलाह 'विद्यालंकार' जी। से एक टर्म नहि; तीन-तीन वर्षक दू टर्म (1976-82) अध्यक्ष रहलाह आ सेवा देलथिन। वास्तव मे सेवा देलथिन। अपन खून-पसीना सँ सीँचि अकादमी कें ठाढ़ कएने छलाह, से कहबाक चाही। हिनकर अध्यक्षता काल मे मैथिली अकादमी मे सभ सँ बेसी काज भेल, से बहुत लोक केँ निश्चित बूझल हेतनि। शोधार्थी/विद्यार्थी, साहित्य प्रेमी लोकनिक अबरजात रहल अकादमी मे। सभ लाभान्वित होइत गेलाह। साहित्यिक गतिविधि, संगोष्ठी वगैरह होइत रहैत छलए। शताधिक पोथी प्रकाशित भेल। अनूदित आ मूल, सभ तरहक पोथी।
काज भले हिन्दी लेल बेसी केलनि, मुदा हृदय सँ 'सुच्चा मैथिल' छलाह ओ।
सन्दर्भ ग्रन्थ : "कोइलख" (लेखक हितनाथ झा)
संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी-
मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-1
संपादकीय सूचना- विद्यालंकारजीसँ पहिने विदेहपर व्यासजीक कृतित्वपर कल्पनाजी लीखि रहल छथि एवं आब विद्यालंकारजीपर भऽ रहल अछि। पाठक व्यासजीपर प्रकाशित एखन धरिक सभ खंड निच्चा केर लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकै छथि-
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-2
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-3
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-4
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-5
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-6
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-7
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-8
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-9
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-10
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-11
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-12
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-13
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-14
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-15
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-16
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-17
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-18
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-19
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-20
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-21
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-22
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-23
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-24
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-25

Suggested citation: कल्पना झा. “मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-२ (पृष्ठ- ४-७).” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 440, 2026-04-15. https://www.videha.co.in/research/2026/440/मैथिली-साहित्यमे-श्रीकान्त-ठाकुर-विद्यालंकार-एवं-हुनक-परिव-0171d54d1e.htm

मूल विदेह अंक / Original issue

Videha Digital Research Archives — preserved releases

All eight archive releases are published and their DOIs are minted.