विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' एवं हुनक परिवारक योगदान-८

कल्पना झा · 2026-09-01 · अंक 449

Keywords: Maithili literary history, Shrikant Thakur Vidyalankar, Mithila studies

कल्पना झा

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' एवं

हुनक परिवारक योगदान- ८

चेतना समितिक उद्धारक

' विद्यालंकार '

चेतना समितिक प्रेरणास्रोत आ संस्थापक भले यात्री जी छलाह मुदा एहि संस्थाक विकास

मे उल्लेखनीय योगदान रहलनि श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' क।

18

जुलाइ

1954

ई. कऽ चेतना समितिक स्थापना भेल छलए। प्रारम्भ मे एहि संस्थाक नाम मात्र "चेतना"

छलैक ,

जे यात्री जी द्वारा राखल गेल छलए। पछाति ओहि मे "समिति" जोड़ल गेल ,

जखन ओहि संस्था लेल संविधानक निर्माण भेल। एहि संस्था केँ स्थापना कालहि सँ पटना

विश्वविद्यालयक मैथिली-भाषी छात्र ,

प्राध्यापक ,

राज्य सरकारक अधिकारी ,

अधिवक्ता ,

चिकित्सक ,

सभक सहयोग भेटैत रहल। एकर अतिरिक्त

' इंडियन

नेशन '

एवं

' आर्यावर्त्त ' क

अधिकारी आ कर्मचारी लोकनिक सहयोग ,

सहायता सेहो निरन्तर भेटैत रहल। आ इएह कारण छलए जे स्थापनाक उपरान्त बहुत कम समय मे ,

मिथिला-मैथिली सँ संबद्ध सभ सँ पैघ आ प्रमुख संस्थाक रूप मे जानल जाए लागल पटनाक

चेतना समिति। सम्पूर्ण भारतवर्षक लोक चिन्हए-जानए लगलाह एहि महत्वपूर्ण संस्था केँ।

एहि संस्थाक स्थापना काल सँ नहि ,

स्थापनाक पूर्वहि सँ ;

माने जखन एकर स्थापनाक लेल विचारे-विमर्श चलि रहल छलए ,

रूपरेखा तैयार भऽ रहल छलए ,

तखनहि सँ एकर प्रचार-प्रसार आ उत्थान लेल श्रीकान्त ठाकुर जी-जान सँ तत्पर छलाह।

आर्यावर्त्त सन प्रतिष्ठित एवं बिहार राज्यक गाम-गाम मे लोकप्रिय हिन्दी दैनिक

समाचार पत्रक प्रधान सम्पादक रूप मे पं. श्रीकान्त ठाकुरक जे असीम सहयोग एहि संस्था

केँ प्राप्त छलैक ताही कारण सँ एहि संस्थाक हरेक क्रिया-कलापक प्रचार-प्रसार व्यापक

रूप सँ प्रदेश आ प्रदेश सँ बाहर ,

देस भरि मे होइत रहलैक। माने स्पष्ट रूप सँ ई कहल जा सकैछ जे चेतना समितिक

लोकप्रियता श्रीकान्त ठाकुर द्वारा देल गेल समय आ श्रम ,

दुनूक दानेक प्रतिफल छलए।

शुरुआतक किछु समय धरि चेतना समितिक कार्यालय यात्री जीक आवास लग लंगरटोली मे चलल।

तकर बाद आर्थिक अभावक कारणेँ अजन्ता प्रेस मे आनल गेल चेतना समितिक कार्यालय। से

चेतना समिति ,

मिथिला-मैथिली सँ जुड़ल देसक सभ सँ समृद्ध संस्था मे गानल जाइत अछि आइ। फर्श सँ

अर्श धरि आनबा मे जाहि महानुभाव लोकनिक अनुपम योगदान रहलनि ओहि मे श्रीकान्त ठाकुरक

नाम सर्वप्रथम लेल जाइत रहल छनि।

आइ

भले ही

' चेतना

समिति '

' अ ' चेतनाक

लेल जानल जा रहल अछि ,

मुदा एक समय छलए जखन मिथिला मैथिली सँ संबद्ध सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थाक रूप मे

जानल जाइत छलए ई संस्था। एहि संस्था सँ जुड़ब सम्मानक बात छलए। एहि संस्था सँ जुड़ल

लोक वास्तव मे मिथिला-मैथिलीक संवर्द्धन लेल बेहाल रहैत छलथि। एहि संस्थाक माध्यम

सँ कतेको एहन काज सभ जमीनी स्तर पर सेहो होइत रहल अछि। ओहि प्रतिष्ठित संस्थाक

अध्यक्ष सेहो रहल छलाह श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' ।

एक बेर नहि ,

दू टर्म अध्यक्ष मनोनीत भेल छलाह। हिनकर अध्यक्षता काल मे चेतना समितिक मंच पर पैघ

सँ पैघ कलाकार बिनु पारिश्रमिक मंगनहु अएबाक लेल लालायित रहैत छलाह। कारण ,

कलाकारक नाम आ फोटोक प्रकाशन आर्यावर्त्त दैनिक मे होएब निश्चित रहैत छल। आ एकटा

कलाकार लेल नाम कमाएब ,

पाइ कमएबा सँ बेसी महत्व राखैत छै ने !

' विद्यालंकार '

जी चेतना समितिक अध्यक्ष रहलाह ,

वा नहिओ रहलाह ,

तैयो हिनका सँ परामर्श कएने बिना समितिक कोनो कार्य नहि होइत छल। ततेक धाख मानैत

छलनि सभ हिनकर। हिनकहि सहयोग सँ चेतना समिति केँ राजेन्द्र नगर मे दस कट्ठा भू-खण्ड

उपलब्ध भेलैक। ओही जमीन पर

' मिथिला-भवन ' क

निर्माण कएल गेल अछि। मैथिली भाषा आ संस्कृतिक विकासक लेल योजनानुसार भिन्न-भिन्न

कक्षक निर्माण कएल गेल अछि।

' विद्यापति

भवन '

' मिथिला

भवन ' क

निर्माण सँ समिति आर्थिक रूप सँ सबल भेल अछि। संगहि अप्पन मातृभाषा आ साहित्यिक ,

सांस्कृतिक गतिविधि-संबंधी कोनो तरहक आयोजन लेल एकटा अप्पन सुनिश्चित जगह भऽ गेलैक।

उक्त सभ सुविधाक लेल श्रीकान्त ठाकुरक ऋणी अछि आ रहत "चेतना परिवार"। एहि बातक

प्रत्यक्षदर्शी रहल छी हम आ हमर पतिदेव श्री त्रिवेणी झा जी। हम दुनू प्राणी कतेको

बेर देखलहुँ/सुनलहुँ अछि ,

चेतना समितिक वर्तमान अध्यक्ष श्री विवेकानन्द झा वा पूर्व अध्यक्षा निशा मदन झा

सेहो ,

बहुत सम्मानपूर्वक स्मरण करैत छथि

' विद्यालंकार '

जी केँ। हुनकर कएल सहयोग बिसरल नहि छथि केओ गोटे।

हालांकि पछिला किछु दिनक घटनाक्रमक कारणेँ चेतना समितिक छवि कने धूमिल अवश्य भेल

अछि मुदा आशा करैत छी पुनः चेतना समितिक

' चेतना '

पूर्ववत जागृत भऽ कऽ रहत। समिति मिथिला-मैथिलीक उत्थान लेल काज करैत पल्लवित

पुष्पित होएत आ ई देखि स्व.

' विद्यालंकार '

जीक आत्मा निश्चित प्रफुल्लित हेतनि।

नोट : उक्त लेख मे किछु जनतब सुरेश्वर झाक पोथी "भारतीय साहित्यक निर्माता :

श्रीकांत ठाकुर विद्यालंकार" सँ लेल गेल अछि।

संपादकीय सूचना- एहि सिरीजक पुरान क्रम एहि लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकैत छी-

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' एवं

हुनक परिवारक योगदान - 1

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' एवं

हुनक परिवारक योगदान - 2

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' एवं

हुनक परिवारक योगदान - 3

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' एवं

हुनक परिवारक योगदान - 4

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' एवं

हुनक परिवारक योगदान - 5

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' एवं

हुनक परिवारक योगदान - 6

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर

' विद्यालंकार ' एवं

हुनक परिवारक योगदान - 7

विद्यालंकारजीसँ पहिने विदेहपर व्यासजीक कृतित्वपर कल्पनाजी लीखि रहल छथि। पाठक

व्यासजीपर प्रकाशित एखन धरिक सभ खंड निच्चा केर लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकै छथि-

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

' व्यास '

एवं हुनक परिवारक योगदान- 1

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

' व्यास '

एवं हुनक परिवारक योगदान- 2

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

' व्यास '

एवं हुनक परिवारक योगदान- 3

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

' व्यास '

एवं हुनक परिवारक योगदान- 4

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

' व्यास '

एवं हुनक परिवारक योगदान- 5

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

' व्यास '

एवं हुनक परिवारक योगदान- 6

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

' व्यास '

एवं हुनक परिवारक योगदान- 7

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

' व्यास '

एवं हुनक परिवारक योगदान- 8

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

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एवं हुनक परिवारक योगदान- 9

मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

' व्यास '

एवं हुनक परिवारक योगदान- 10

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एवं हुनक परिवारक योगदान- 11

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एवं हुनक परिवारक योगदान- 12

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एवं हुनक परिवारक योगदान- 13

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एवं हुनक परिवारक योगदान- 14

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एवं हुनक परिवारक योगदान- 15

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एवं हुनक परिवारक योगदान - 16

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एवं हुनक परिवारक योगदान - 17

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एवं हुनक परिवारक योगदान - 18

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एवं हुनक परिवारक योगदान - 19

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एवं हुनक परिवारक योगदान - 23

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मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा

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Suggested citation: कल्पना झा. “मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' एवं हुनक परिवारक योगदान-८.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 449, 2026-09-01. https://www.videha.co.in/research/2026/449/श्रीकान्त-ठाकुर-विद्यालंकार-परिवारक-योगदान-८.htm

मूल विदेह अंक / Original issue

Videha Digital Research Archives — preserved releases

All eight archive releases are published and their DOIs are minted.