राजदेव मण्डल
बहीराक बस्ती
चिचिया रहल छी हम
लगाक जोर
करूण क्रन्दन कअ रहल छी
बहि रहल अछि नोर ।
मन ताकि रहल अनुकूल सहारा
सहाराक मध्य भेल छी बेसहारा
सिनेहक पियास सँ भेल छी आकुल
तन-मन भेल अछि अति व्याकुल ।
सभक आंखि मे घृणा भरल
देखि कैँ अछि मन डरल
दौगैत-दौगैत भेल छी अपसियाँत
कियो नहि सुनैत अछि हमर बात
स्वरक नहि छै ऐठाम कोनो मोल
के सुनत केकर बोल
केना हेतै एक दोसर सँ मेल-जोल
सभ बहीरे अछि अइ टोल ।
कहैत अछि आर किछो
बुझैत अछि आर किछो
भअ रहल अछि खेला
माँगैत अछि गुड़ दैत अछि ढेला
कोय नहि सुनै छथि हमर बात
सुनि कैँ सब भअ जाइये कात
हम कहाँ केलिए कोनो अघात
कियक दुसमन जेकाँ करैत अछि हमरा साथ
इशारा सँ करै पड़त बात
तब देत ऐठाम कियो साथ
करै पड़त संचय अपन शक्ति
अपने भक्ति अपने मुक्ति ।
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