SADEHA — 3

Publication: SADEHA · Issue: 3
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मैिथली पń २००९-१० i िवदेह मैिथली पń २००९-१०

ii िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िवदेह: Ćथम मैिथली पािक्षक ई-पिÿका (http://www.videha.co.in/) १५ जनबरी २०१० वषर्:३ मास:२५ अंक ५० िवदेह: सदेह:३ ( िवदेह ई पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकक दस Ćितशत चुनल रचनाक संग) दाम: १०० टाका ( ĭयिक्तगत ƅय लेल) आ $40 (for institutions and library India and Abroad) सĦपादक- गजेĠƖ ठाकुर सहायक सĦपादक- āीमती रिĮम रेखा िसĠहा, āी उमेश मंडल भाषा सĦपादन- āी िवńानĠद झा आ āी नागेĠƖ कुमार झा ISBN: 978-93-80538-08-2 (c)२००८-१०.सवŭिधकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम निह अिछ ततय संपादकाधीन। रचनाकार अपन मौिलक आ अĆकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूणर् उþरदाियĜव लेखक गणक मğय छिĠह) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेěटक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉमųटमे पठा सकैत छिथ। रचनाक संग रचनाकार अपन संिक्षĢत पिरचय आ अपन İकैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ पिहल Ćकाशनक हेतु िवदेह ( पािक्षक) ई पिÿकाकेँ देल जा रहल अिछ। मेल ĆाĢत होयबाक बाद यथासंभव शीƈ (सात िदनक भीतर) एकर Ćकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’िवदेह' Ćथम मैिथली पािक्षक ई पिÿका अिछ आ एिहमे मैिथली, संİकृत आ अंƇेजीमे िमिथला आ मैिथलीसँ संबंिधत रचना Ćकािशत कएल जाइत अिछ। एिह ई पिÿकाकेँ āीमित लŞमी ठाकुर Ņारा मासक ०१ आ १५ ितिथकेँ ई Ćकािशत कएल जाइत अिछ। (c) २००४-१० सवŭिधकार सुरिक्षत। िवदेहमे Ćकािशत सभटा रचना आ आकŭइवक सवŭिधकार रचनाकार आ संƇहकþŭक लगमे छिĠह। रचनाक अनुवाद आ पुनः Ćकाशन िकंवा आकŭइवक उपयोगक अिधकार िकनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपकर् करू। © āुित Ćकाशन- िवदेह:सदेह:३-िĆंट वसर्न- DISTRIBUTORS: AJAY ARTS, 4393/4A, Ist Floor, Ansari Road, DARYA GANJ, New Delhi-110002 Ph. 011-23288341, 09968170107 Website: http://www.shruti- publication.com e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com http://www.videha.co.in/ एिह साइटकेँ Ćीित झा ठाकुर, मधूिलका चौधरी आ रिĮम िĆया Ņारा पािक्षक रूपेँ िडजाइन कएल जाइत अिछ।

मैिथली पń २००९-१० iii (कायŭलय Ćयोग लेल) िवदेह:सदेह:१ (ितरहुता/ देवनागरी)क अपार सफलताक बाद िवदेह:सदेहक आगाँक अंक लेल वािषर्क/ िŅवािषर्क/ िÿवािषर्क/ पंचवािषर्क/ आजीवन सƄİयता अिभयान। ओिह बखर्मे Ćकािशत िवदेह:सदेहक सभ अंक/ पुिİतका पठाओल जाएत। नीचाँक फॉमर् भरू :- िवदेह:सदेहक देवनागरी/ वा ितरहुताक सदİयता चाही: देवनागरी/ितरहुता सदİयता चाही: Ƈाहक बनू (कूिरयर/रिजİटडर् डाक खचर् सिहत):- बखर् YEAR INDIA NEPAL Abroad एक ( २०१०ई.) रु.२००/- INR ६००/- US$25 दू ( २०१०-११ ई.) रु.३५०/- INR १०५०/- US$50 तीन ( २०१०-१२ ई.) रु.५००/- INR १५००/- US$75 पाँच ( २०१०-१३ ई.) रु.७५०/- INR २२५०/- US$125 आजीवन (२००९ आ ओिहसँ आगाँक अंक) रु.५०००/- INR १५०००/- US$750

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(Ƈाहकक हİताक्षर)

iv िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

मैिथली पń २००९-१० v िवदेह मैिथली पń २००९-१० (िवदेह:सदेह:३ िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल आ सĦपािदत कएल)

िĆय पाठकगण, िवदेहक नव अंक ई Ćकािशत होइत अिछ पािक्षक रूपेँ - लॉग ऑन करू http://www.videha.co.in । ई िĆंट वसर्न माने िवदेह:सदेह:३ िवदेह ई-पिÿकाक २६म ( १५.०१.२००९) सँ ५०म (१५.०१.२०१०) अंक धिरक चुनल रचना ( मोटा-मोटी दस Ćितशत)क संग Ćİतुत अिछ। मुदा िवदेहमे ई-Ćकािशत पाखलो (मूल कॲकणी उपĠयास तुकाराम रामा शेट आ मैिथली अनुवाद डॉ. शĦभु कुमार िसंह), Ĕयोित झा चौधरीक किवता संƇह अिचर्स् आ नताशा ( मैिथली िचÿ-शृंखला- देवांशु वĜस) अलगसँ पुİतकाकार Ćकािशत कएल जा रहल अिछ। िवदेह Ņारा ĆारĦभ भेल मैिथली (ितरहुता आ देवनागरी) सािहĜय आĠदोलनमे २००सँ बेशी लेखक जुिड़ चुकल छिथ, ५० टा अंक ( देवनागरी, ितरहुता आ ƙेल तीनूमे) ई-Ćकािशत भऽ गेल अिछ आ पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल िवदेह आकŭइवमे राखल गेल अिछ। दू टा सदेह अंक (देवनागरी आ ितरहुतामे) सेहो Ćकािशत भऽ गेल अिछ। िविवध िवषयपर ६००० पृơक नूतन मैिथली सािहĜय आ ५० लाख शĤदक मैिथली कॉपŸरा अĠतजŭलपर िवĂक सĦमुख Ćİतुत कएल गेल अिछ। ११०० पृơक भोजपÿ-तालपÿक आ अĠयाĠय पÿक पाěडुिलिपक िमिथलाक्षरमे अंकण आ िमिथलाक्षरसँ देवनागरी िलĢयंतरण कएल गेल अिछ। िवदेह आकŭइवमे माÿ शािĤदक कॉपŸरा निह अिछ वरन् १००सँ बेशी मैिथली ऑिडयो फाइल, १०० घěटासँ बेशीक मैिथली वीिडयो फाइल जािहमे कैकटा सĦपूणर् मैिथली नाटक सेहो अिछ, आधुिनक कला, िचÿकला, छायािचÿक संग िमिथला िचÿकलाक फोटो आ पी.डी.एफ. रूपमे सएसँ बेशी मैिथली पोथी सेहो देखबा, पढ़बा आ डाउनलोड लेल उपलĤध अिछ। संगमे बच्चा सभक सािहĜय आ काटूर्न सभ सेहो िनिमर्त आ Ćदिशर्त कएल गेल अिछ आ पढ़बा लेल आ डाउनलोड लेल उपलĤध अिछ। मैिथलीक पिहल ƙेल पोथी उपĠयास- सहćबाढ़िन ( हमर पोथी कुरुक्षेÿम् अĠतमर्नक मे संकिलत हमर उपĠयास) सेहो िĆंट रूपमे आिब गेल अिछ। िमिथलाक सभ जाित आ धमर्क मैिथलीमे संİकार,

vi िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िविध-ĭयवहार आ āमगीत िवदेह ऑिडयो आ वीिडयोमे राखल गेल अिछ। मैिथलीक लेल भाषा सĦपादन पाƁयƅमकेँ अĠतजŭलक िवदेहक ३००० सँ बेशी सदİय Ņारा अिĠतम रूप सेहो Ćदान कएल गेल अिछ। िमिथलाक्षरक यूनीकोड आवेदनमे िवदेहक योगदानकेँ आवेदनकतŭ Ņारा आवेदनमे विणर्त कएल गेल अिछ।संगिह िवदेह आकŭइवक आधारपर यूनीकोडमे २००८ सँ पोथीक Ćकाशन शुरु भेल (निचकेताक नो एěƏी:मा Ćिवश पिहल यूनीकोड िĆंट मैिथली पोथी छी) मुदा िहĠदीमे पिहल यूनीकोड िĆंट पोथी फरबरी २०१० मे वाणी Ćकाशनसँ आएल। संगिह हमर िलखल सहćबाढ़िन जे मैिथलीक पिहल ƙेल पुİतक अिछ (ISBN:978-93-80538-00-6) २००९ मे िरलीज भेल आ पुअर होम दरभंगा िİथत ĤलाइĠड İकूलकेँ पठाओल गेल अिछ। मुदा ई तँ माÿ ĆारĦभ अिछ। एिह खěडमे कुछु चुनल मैिथली पń ( िवदेह:सदेह:३ िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल आ सĦपािदत कएल) देल जा रहल अिछ, आ एिहमे किवता-गीत-अकिवता-गń-किवता सभटा अिछ आ एतए मैिथलीमे दोसर भाषासँ अनूिदत पń सेहो अिछ। सूचना: पंकज पराशर उफर् अरुण कमल उफर् डगलस केलनर उफर् उदयकाĠत उफर् ISP 220.227.163.105, 164. 100.8.3, 220.227.174.243 उफर्....केँ डगलस केलनर आ अरुण कमलक रचनाक चोिरक पुिƠक बाद (http://www.box.net/shared/75xgdy37dr) बैन कए िवदेह मैिथली सािहĜय आĠदोलनसँ िनकािल देल गेल अिछ।केलनरक संदेश नीचाँ अिछ। िवशेष जानकारी मैिथली ĆबĠध:िनबĠध:समालोचना २००९-१० ( िव देह : सदेह : २ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मे देल गेल अिछ। kellner@ucla.edu" <kellner@ucla.edu.Dear Gajendra thanks for the detective work. was there a response? best regards, Douglas Kellner, Philosophy of Education Chair, Social Sciences and Comparative Education, University of California-Los Angeles, Box 951521, 3022B Moore Hall, Los Angeles, CA 90095-1521, Fax 310 206 6293, Phone 310 825 0977

-गजेĠƖ ठाकुर

मैिथली पń २००९-१० vii अनुƅम

महेĠƖ कुमार िमā पूवर् सांसद, नेपाल 1 रोशन जनकपुरी चĢपल आ सड़क 2 ओम कुमार झा थर थर कािप रहल छौ तोहर पएर 3 Ćेम िवदेह ललन एकइसम सदीक नाम 4 सुिदप कुमार झा दूटा पń 5 अयोğया नाथ चौधरी एक भुम जोड़ एक सĜय। बराबर दू क्षण 6 एक पिरवोधन आ शेष किवता 7 Ćशांत िमā क्षिणका 8 कुमार मनोज कĮयप वसंती दोहा 9 निह सुित रहब अहाँ चĿिर तािन 10 कĪपना शरण एकटा हेरायल सखी 12 िबनीत ठाकुर गीत 13 सतीश चĠƖ झा ई जीवन 14 बी.के कणर् िमिथलाक लेल एक ओलिĦपक मेडल 15 सुबोध ठाकुर हम गामेमे रहबइ 16

viii िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िनिमष झा असमिपर्त उĠमाद 17 बुŀ आ आतंक 19 कािमनी कामायनी चĸा 20 डॉ शंभु कुमार िसंह लोरी 21 अतीत 22 आस 23 िनशाĆभा झा भगवती गीत (लोकगीत संकलन) 23 िववेकानंद झा किवता आ की सुजाता 24 चान आ चाžी 25 मिणकाĠत िमā “मिनष” िमिथला वĠदना 27 आशीष अनिचĠहार गजल 28 िकछु गń किवता 28 वौएलाल साह मधेशक आवाज 29 सĠतोष कुमार िमā हमर मीत 30 हेमांग आिĂनकुमार देसाइ समीकरण 31 अशोक चौधरी 32 उपेĠƖ भगत नागवंशी बुढ़वा 33 डा. सुरेĠƖ लाभ इितहास 34 इĠकलाब 35

मैिथली पń २००९-१० ix सरİवती चौधरी ‘रचना’ सĦबĠधक कोनो सूÿ 36 डॉ अिजत िमā िमिथला-धाम 37 सुनीलकुमार मिĪलक घड़ी 38 राजकमल चौधरी बही-खाता 39 एकटा Ćेम-किवता 40 जीवकाĠत वनदेवी 41 जन-जन याचक 42 रूपा धीरू Ćसव–पीड़ा 44 अžावरन देवेĠदर पािन अिछ, माÿ आँिखक नोर 45 अमरेĠƖ यादव आƫान 48 Įयामल सुमन मैिथली दोहा 49 िहमांशु चौधरी बाल गीत 50 तोँ İवतंÿ छेँ 50 दयाकाĠत पाँच लाख बौआक दाम 51 अिजत कुमार झा ओ तँ मुहेँक बड़जोड़ छिथ 53 सुिमत आनĠद जेĦहरे देखू तेĦहरे लाइन!! 54 िवजया अयŭल आजुक जीवन 55

x िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सरोज िखलाडी मनक बात मनमे 56 उमेश मंडल गिनयािर िपसबाक गीत 57 तेलकसाय लगबैक गीत 58 दसमासी सोहर 59 रूपेश कुमार झा “Ĝयॲथ” खेली सĢपत जा भुइयाँ थान 62 िवनीत उĜपल मनुख आ माल 63 समाजक ई रूप 64 राजदेव मंडल आह 65 ज्ञानक झंडा 66 झाँपल अिİ तĜ व 67 रहब अहॴ सभक संग 68 नदीक माछ 69 बाट-बटोही 70 सीमा परक झूला 71 चीड़ीक जाित 72 शेफािलका वमŭ बाजी 73 अनबुĔहल 74 Ćसंग चाहे जे होइ 75 वचनक मास 76 महाकाĠत ठाकुर की चाहलौं 77 उदारीकरण 78 İव. कालीकांत झा "बुच" (१९३४-२००९) िवरिक्त 79 पोताक अŇहास 80 दीनक नेना 81 मनीष ठाकुर िवरह गीत 82

मैिथली पń २००९-१० xi चĠƖकाĠत िमā जागु-जागु मैिथल 83 कुसुम ठाकुर चुल बुली कĠया बिन गेलहुँ 85 अिभलाषा 85 िशव कुमार झा ‘‘िटĪलू” चĮ माक बोखार 86 िहंसक नानी 89 कोप भवनमे किनयाँ 90 Ćेयसीक िवलाप 91 धमųĠƖ िवƫल ƙĦıबाबाक अवसान 92 ओकरासभक अĠत होबाक चाही 92 रघुनाथ मुिखया अनुþिरत Ćķ 94 किवताक शीषर्क जकाँ 95 लŞमण झा ‘सागर’ चुņीधारी 96 िवभूित आनĠद एक- दू- तीन- चािर- पाँच- छओ- सात- आठ- नओटा किवता 98 Ćितपक्ष: दू 100 मदारी युग 101 नब पी ढ़ी 102 अरािड़ जोतैए 104 वİतुत: 105 अंितम पीि़ढक बयान 106 एकटा साĦयवादीक आĜम कथा 108 दोसर अğयाय 109 तेसर अğयाय 109 चािरम अğयाय 110 İवĨ 110 पाँचम अğयाय 111 क्यो-क्यो, िछट फुट 111 वþर्मान अğयाय 112 कुहेसक अĠहड़ 112

xii िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रमण कुमार िसंह गुमशुदगी िरपोटर् 114 मायानाथ झा मातृिगरा 115 सिच्चदानĠद ‘सौरभ’ देखू नै.... 117 भोरक आसमे 118 अĠहारक संग रहैत रहैत 119 अशोक दþ बाल गीत 120 बाल गीत 120 बाल गीत (लोरी) 121 ओिध उपाड़ 122 शीतल झा टी..ऽऽऽऽ..स 124 शĦभु नाथ झा ‘वĜस’ िमिथलाक दशा 125 मोनसँ पढ़ू बढ़ू अओ बाउ। 126 िमिथला बचाउ 126 बेरोजगारीक समİया 127 डॉ. योगानĠद झा घर 130 वीरेĠƖ मिĪलक गितशीलता 132 गंगेश गुंजन राधा-१६म खेप 133 कीितर्नारायण िमā अकाल 134 İव. ĆशाĠत करू की वृŀ अथबल छी 135 काली नाथ ठाकुर सून िमिथलाĖचल…..। 136

मैिथली पń २००९-१० xiii अरिवĠद ठाकुर गजल 138 कुमार पवन निह िबसरैछ 140 कािŎ तँ रिव छै 142 āी िवńानĠद झा कोशीक ताěडव 145 दहेज दानव 146 मो. गुल हसन सभटा चौपņ भऽ गेल 147 मनोज कुमार मंडल बहीन 149 आमोद कुमार झा मैिथल नँइ–छोटका 150 गजेĠƖ ठाकुर आकाश मğय िलखल हमर लेख 152

मैिथली पń २००९-१० 1 महेन्ġ कु मार िमĮ पूवर् सांसद, नेपाल

चेला चĦ ाच आ दलाल राखू अपनेटा संग सेबाक सुिवधा िमलत जनतामे रहत रंग जनतमे रहत रंग चĦचा बहुत जरुरी चĦचा जॱ होए संग होएत सभ आशा पुरी चचŭ अिछ ओिह महा पुरुषक जे रामक वरण करए जनता सबहक बात निह बूझए अपने खुņा धरए अपने खुņा धरै िववेेकक रित निह लेस संवेदनाक İवर कतौ निह, जड़ै रहए मधेश िगरीजा माधव आ हो Ćचěड, िकएक चाही लोकतĠÿ। लोकतĠÿ आब लोप भेल भोग तĠÿ ला लडू जनता सबहक हक-हीत की, अपन झोड़ा भरु अपन भरु निह तँ पछतावा हेाएत वैर िवरोधक िचĠता निह अपन परार कतै जाएत जुड़ल रहू एिह जोगारमे अपन पिरजन निह छुटए लुटब अिछ संİकािर हमर लुइट सकी से लुटए गाथ कथमैप निह छोडूु धएने रहू झोड़ा पाÿ अपने वैह लाएक छी जेना सŎेसक घोड़ा मंÿी निह महामंÿी एिह धरतीक Ņय पुत शरमसँं िमिथला कािन रहल, देख िहनक करतुत देख िहनक करतुत जनता िधĸािर रहल अिछ लोभ लालचमे फसल नेताकेँे आब जनता झटकािर रहल अिछ संिवधान सभा िनवŭचनमे देखल एहन ताल जनतासभ आराम करैछ, नेता अिछ बेहाल पैसा सबहक लोभमे फसल, िबकाएल मधेशी नेता टेěडर भिर भिर मधेशक िटकट एतऽ देता गुĠडा बदमास आ उचĸा पौलक मधेशक िटकट जेकरा िवरोधमे मरल पचासो वैह मांग िसटत आबहु जागू, जागू औ मधेशी भैया िजनगी भिर पछतािव रहब, करब हाय दैया

2 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रोशन जनकपुरी चĢपल आ सड़क तिहया सडक गमर् कएने रहै ओ चĢपल सभ जकर चुŎा तँ रहै ठंंढा आ पेट रहै खाली, अपन चुŎाक पक्षमे चĢपलक चापसँ आ ठंढा चुŎाक तापसँ जनमलै एकटा Ĕवा लामुखी आ एकटा भूकĦप, आ हमर चĢपलवाली मायक आँिखमे आश भिर गेल रहै गमर् चुŎाक आ एखन, चĢपल सभ तँ अखनो सड़केपर अिछ मुदा जुþा सभ जे तिहया चĢपल संगे सड़केपर दौड़ैत रहै, िदशा बदिल लेने आिब हमर चĢपल वाली मायक पेट अखनो खािलए अिछ चुŎा अखनो ठंडे अिछ आ हĦमर चĢपलवाली मायक आँिखमे आƅोश भिर गेल अिछ तैं, आƅोशक गीत िलखाइते रहबाक चाही अग्नीत गीत गबैते रहबाक चाही आ चĢपल सभकेँ सड़क गमर् किरते रहबाक चाही ।

मैिथली पń २००९-१० 3 ओम कु मार झा थर थर कािप रहल छौ तोहर पएर रे खसवादी तोँ बाजल छेँ मधेिशया होइत अिछ कायर मुदा मधेिशयाक जोस देिख थरथर काँिप रहल छौ तोहर पएर।

जािग गेल छै मधेशी अपन अिधकार हिथयाबऽ लेल घर घरसँ उमरल छै मधेशी मधेशी सरकार बनाबऽ लेल

पचीस शहीदक खुन किह रहल छै, उठ मधेशी उठ उठ धोखा, फरेब देखा रहल छौ, िगिरजा कोइराला उँट ।

िहरěय कĮयप Ćचěडसँ बाजल ओ बĠदुक उठाओल मधेशीकेँ मारऽ लेल मधेशीक बच्चा बच्चा Ćहलाद बिन खनत गड़दा ओकरो गारऽ लेल

मधेशक भुिमसँ आĠदोलनक Ĕवा ला धधकल छै जे आओत ओकरा िमझाबऽ ओ ओिह जिर मरलै

झुकल िगरजा, झुकल Ćचěड झुकल मधेशी दलाल सभ पएर पकिड़ िगरिगरेनै िगरजा– दलाल सभ ।

बहुत खएले मधेशीक कमाइ आब निह तोरा पचतौ रे मधेशी अĢपन िहİसा नेने आब तोरा निह छोड़तौ रे।

दू सए अड़तीस बिरससँ मधेिशयाकेँ वड़ ठकले रे छŃ रुप तोहर देखार भऽ गेलौ आब तोँ निह बचबे रे ।

लोकतंÿक नकाब लगा राक्षसी रुप तॲ नुकओले रे हमरे घर फुटाकऽ हमरे भाइकेँ बंधुआ–बिहया बनौले रे

खबरदार आब सुने नङटा आब निह चािल चलतौ रे अĢपन अिधकार लेबऽ लेल मधेिशया िसंह दरबार बँटतौ रे ।

जनसंख्या क आधारमे चुनावी क्षेÿ लऽ छोड़बौ रे तोहर नाक रगिड़ संघीय ĭयकवİथा लऽ लेबौ रे ।

4 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

आइ मधेशीया हुनकर सुन जन जन वजै छै एके बात मधेशी एकता िजĠदाबाद मधेशी एकता िजĠदाबाद।

Ĥेम िवदेह ललन एकइसम सदीक नाम अजगूत एकइसम सदी अिछ कऽ रहल होएबाक ने चाही जे सएह अिछ भऽ रहल

करैत छल धिनक यौ शोषण गरीबक गरीबे गरीबपर जुलुम आइ कऽ रहल

बदिल गेल अिछ आब अपनक पिरभाषा अपन तँ अपने के घेंट अिछ कािट रहल

दहेजक बेपार अिछ बनल िववाह Ćेमक नाटक आइ फैसन अिछ भऽ रहल

करैत रहू मंचपर जाित–पाित अंत जातीय संगठन अिछ िदन–िदन बिढ़ रहल

एखने अिछ अनपढ़मे भाइ इमानदारी पढ़लहबा िजलासँ देशधिर लूिट रहल

चीउजे नै, मनुक्खो आब भेटैए नकली नाङट उघार ललन सदी अिछ भऽ रहल ।

मैिथली पń २००९-१० 5 सुिदप कु मार झा दूटा पń गामक िसमानपर फाटल दरािर िचबाबऽ बबलगम लाबऽ कोदािर

मनमे छऽ पोसने िकए गनगुआिर बाँिट लेब मसुरी तोड़ऽ ई आिर

एक पÿ Ćेमक िलिखकऽ तँ भेजऽ सांठब हम भार अपन आंचर पसािर

उठबऽ मानवता, छोिड़ अड़ािर तॲ हमरा दुवािर हम तोड़ा दुवािर

२ पहाड़क उचाइपर सँ एकटा गुĦबाक िखड़की दने एकटा लड़की िनचा देखैत छै उपĜयकामे बहुत–रासे गुƂडीसभ आकाशमे झुलुवा झूिल रहल छै अİतामइत सुरुजक कातमे एकटा गुƂडी डुबकी मारैछ धरतीकेँ चुĦमा लैत उठैछ आकाश िदस जखन घĠटी बजै छैक िनİतĤधतामे हेराइत ओकर पपनी भीिज जाइत छैक नइ जािन िकए उपर आकाशक लेल वा िनचा संसारक लेल ।

6 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) अयोध्या नाथ चौधरी एक भुम जोड़ एक सĜय। बराबर दू क्षण

कौखन हमरा सभक मौन आƅामक बिन जाइछ आ िववेक सहजिह कोनो िखड़िक दऽ उिड़या गेल रहैछ तावत धिर िकछु िनराश क्षणक Ćतीक्षा फेर ओकरा बजा लैछ आ तावते ओकर काया–कĪप भऽ जाइछ सभ मनुपुÿ मोम भऽ जाइत छिथ एक–दू क्षणक िजनगीमे ।

किहयो चॱकल अिछ अहाँक दुनू तरहĜथी? आ तदुपराĠत िकताब बनाकऽ पढ़लहुँ अिछ ओकरा ः तिहए िगरह बािĠह गेल हमर बातक िनजŰब भेल आँिखकेँ िनहारैत रिह जाएब अहाँ पलक टो–टो कऽ फुिसयाही आवेश करैत । मोने–मोने गुनैत ।।

एक क्षण बाद हाथ अपनाकेँ समेिट कऽ अहाँक माथपर चिढ़कऽ बाजत िनयामकसँ चिकत छी अहाँक दुƠ ĭयवहारपर आ ओ ओिह एक िदन सभसँ बजै छिथ ƚम आ Ćवंचनाक कथा सएह पुछलक अिछ की? केहन टाँट सĜयक रािख देिलयह अिछ सोझामे एकोबेर चुिम लैह टाँट भेल गदर्िन, आ माथ, आ मुँह एिहना बुझबहक की जीबैत मुिİकआइत गुलाबमे कांट ने होइछ िकदन ।

करĠतमे गछारल अहाँक हीरक, मुक्ता, रुपरानी वा जे िकछु ठीके बड़ कोमल आ सुĠदर अइ मुदा ततबे सĜय छैक िवधान आ परĦपरा ततबे कटु आ अिनवायर् । उिधयाइत िववेककें गछािरकऽ

मैिथली पń २००९-१० 7 मनुपुÿ सुखी भऽ पाएब िनिबर्वाद । दुƠता, ƚम, Ćवंचना आ एकरा सभक संज्ञामाÿ उिधयाइत कोनो गैस िथक ।

२ एक पिरवोधन आ शेष किवता एक मुņी अखरा बालु फँकबाक बाğयता जतबे छोट भऽ सकैछ, ततबे िवराट आ डूबल अिछ हमरा घरमे एक–एकटा सीताक आƅोश, आब बुझल जे सीता माने कोन दुःख ।

एकटा दृƠाĠत आ आओर िकछु निह माÿ एकटा िनमर्म दृƠाĠत चािहए कऽ एिह लोककेँ, समाजकेँ ओिह एकटाक पाछाँ सहİÿो कĜले आम होइत रहै िनिवर्Ěक....

जीह निह टकसैत छैक एखिन । एकटा दूरिĠत परĦपरा िकंबा रीित सहैत, बकार बž केने छी हम–अहाँ आ सभ अयाची हƂडी लुटौलिनहेँ, सेहो ठीक एकाएकी घाब बनाओल जाइत अंग अंगकेँ िनिनर्मेष तकैत रहू

तखिन, सभटा ठीके–ठीके समाज चाहैए जे ओकरामे रहिनहार लोथ भऽ जाए ओकर एक एकटा Ćाणी बीत राग बनल रहए आजीव, आ संघषर् करैत रहए अपना गराक घेघसँ ।

अहाँ अपनाकें अपने पिरबोिध िलअ एिहना कतेक छोट–छीन जीवन सामाĠय रुपेँ िबतैत–िबतैत कौखन मनोरंजन हेतु आ कौखन अज्ञात, अनचेकामे कतेक कीड़ा–फितंगा पोिस वा पीिच देल जाइछ । सिरपहुँ तžुक अइ ई जीब । लजिबĔजी ।

8 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कोनो ने, ई सब कोनो बात छैक, एतेक िनĀय राखू जे पिरबोिध निह रहल छी हम अहाँकेँ, िकएक तँ अहाँ आरो भयाƅाĠत कऽ देब अहूँ सएह कहैत छी किह । एतबे बुिझ राखू जिहयासँ अहाँ दृƠाĠते बनल छी हमरा अहाँसँ सहानुभूित अिछ ।

मनुक्खक पीड़ासँ मनुक्खक सहानुभुित होइ ककरो दूटा आँिख पिनछा जाइ एिहसँ पैघ जीवनक कोन उपलिĤध भऽ सकैछ ?

हम िकछुटा निह कहब । आĜम हĜया दूबेर Ćायः निह भऽ सकैछ , ई तँ महज मामुली बोध थीक ओना अहाँक कोनो िबकĪप हमरा नीक लागत ।

जखन जीवन माने तनुक तँ की हजर् एकटा ĿृƠािĠत बनल रही ? ओना हम पुछबाक ĭयाज माÿ करैत छी ।

क्षिणका Ćशांत िमā

हड़ािह

एकटा हड़ािह जे राितमे पटकलिĠह साँए के तोड़लिĠह चौकी भोरे-भोर पड़ोसनीकेँ गिरअबैत कहलिखĠह हँ, चुĢप रह गे सþबरती राँड़ी, छुच्छी, सँएखौकी

मैिथली पń २००९-१० 9 कु मार मनोज कश्यप1 वसंती दोहा गेंदा-गुलाब-पलाश संग, फूलल फूल कचनार। िचहुकय आहटपर गोरी, आिब गेला िपया Ņार॥

भरल वसंती मासमे, िपया िनदर्य बसल परदेश। अŎड़-मİत वसंत, फेर बढ़ा देने अिछ क्लेश॥

धरतीसँ िमलनक अिछ, ĭयाकुल भेल आकाश। िपया िवरहमे राित-िदन, पीयर पड़ल पलाश॥

रंग-अबीर-गुलालसँ, धरती भऽ गेल लाल। गोरीक गालपर जेना, मलल चुटकी भिर गुलाल॥

एĦहर-ओĦहर मटिक रहल, पीिब कऽ भांग वसंत। मन चंचल आइ भऽ रहल , िक योगी की संत॥

पीिब कऽ भांग बसातो आब, लागल करय उĜपात। धूड़ा उड़ा कऽ पड़ा गेल, देमय कान ने कोनो बात॥

सिख वासंती तोँिह हुनका, जा दय िदहनु संदेश। जी भिर मलबिन रंग हम, भेटता िपया जखन जे भेष॥

ककरा सँ मोनक ĭयथा कही, बुझत के मोर टीस । सुिन कऽ सभ हँसबे करत, बनत के मन-मीत ॥

1 कुमार मनोज कĮयप ।जĠम-१९६९ ई़ मे मधुबनी िजलांतगर्त सलेमपुर गाम मे। İकूली िशक्षा गाम मे आ उच्च िशक्षा मधुबनी मे। बाĪय काले सँ लेखन मे अिभरुिच। कैक गोट रचना आकाशवाणी सँ Ćसािरत आ िविभž पÿ-पिÿका मे Ćकािशत। सĦĆित केंƖीय सिचवालय मे अनुभाग आधकारी पद पर पदİथािपत।

10 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) निह सुित रहब अहाँ चĿिर तािन अमर देशक अमर पुÿ अहाँ, भारत माताक संतान। मातृभूिमक सजग Ćहरी, निह सुित रहब अहाँ चĿिर तािन॥

भगवान रामक धनुष चढ़ा िलअ, गुंजय तीनू लोक टंकार। साम-गानसँ जग अनुनािदत, गुंजय वाणीक वीणा झंकार।

भगवान कृįणक चƅ सुदशर्न, आसुर लीलाक संहार। शोिणत-रþसँ आइ करक अिछ, भारत माताक āृंगार।

असंख्य अमर बिलदानीक शोिणत, के अिछ करक सĦमान। मातृभूिमक सजग Ćहरी, निह सुित रहब अहाँ चĿिर तािन॥

शपथ अहाँकेँ आइ मातृभूिमक, शपथ अिछ भगवान के। निह िबसरब िनज गौरव-मिहमा, निह िबसरब बिलदान के। राजनीितक बात ने कथमिप, बात अिछ केवल शैतान के। मातृभूिम िहत रक्षामे तँ, दंश निह कोनो टा वाण के।

दुĮमन देशक हँिस रहल अिछ, करू मदर्न ओकर आइ गुमान। मातृभूिमक सजग Ćहरी, निह सुित रहब अहाँ चĿिर तािन॥

आगाँमे जॱ शाİÿ रहल, तँ पाछाँ शİÿ रहल सिद काल। शरणागतकेँ शरण देल , तँ भू-लुंिठत कयल आरक भाल। रþ-बीजक उĠमूलनमे, उिįमत शोिणत सिदखन लाल। फन थकुचइमे तारतĦय ने, जॱ िमÿहु बनय काल-ĭयाल।

िवĂ-शांित उľोषक के, निह मानय दुिनयाँ कायर-िनदान । मातृभूिमक सजग Ćहरी, निह सुित रहब अहाँ चĿिर तािन ॥

हĪदी-घाटीक रण-Ćांंगणमे, एखनो गुंिजत राणाक हुंकार। वीर िशवाजी िसखा रहल छिथ, दुदर्Ħय रण-कौशल संİकार।

वीर मराठा, राजपूतक उिįमत रþक अखनो Ćबल संचार। वीर जवानक कमर्भूिम ई, भारत अिछ सिरपहुँ वीरक संसार ।

मैिथली पń २००९-१० 11 जीिब कऽ मरय लोक अनुखन, मिरकय जीबय लोक महान । मातृभूिमक सजग Ćहरी, निह सुित रहब अहाँ चĿिर तािन ॥

गोपनीय अणु-अİÿ उठा कय, देखा िदअ अपन शिþ-अपार। दुĮमन देशक िसहिर उठय, देिख रूप अहाँक Ćलयंकार।

कएल जॱ घुसपैठ दुĮमन तँ, कय देब ओकर हम पूणर् संहार। दोİतसँ दोİती यńिप अिछ, दुĮमनसँ बिढ़ कऽ Ćहार।

रण-भूिममे रण-चंडी अिछ तैयार करक हेतु रण-अिभयान। मातृभूिमक सजग Ćहरी, निह सुित रहब अहाँ चĿिर तािन॥

बािज गेल रण-डंक आब, तारतĦयक गुंजाइश कहाँ अिछ। राजनीितक क्षुƖ-घाटपर पािन िपयब ने अहाँक काज अिछ।

युवा-वीर बिढ चलू समरमे, लाज देशक अहाँक हाथ अिछ। Ɩौपदीक चीर ने अपहरण हो, गांडीव-गदा अहाँक हाथ अिछ।

उिजर्त हो सĦपूणर् देश, तािन िदअ आइ नव-िनमŭण िवतान। मातृभूिमक सजग Ćहरी, निह सुित रहब अहाँ चĿिर तािन ॥

12 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कल्पना शरण एकटा हेरायल सखी भरल पूरल जीवनमे िकछु हेराएबाक आभास एकटा िविचÿ दु:खसँ सखी अिछ उदास फुĠगीपर जेना फुलैल एकटा असगर पलास नोरकेँ नुकाबैत आँिख करैत हँसैक Ćयास

जीवन तँ िनरĠतर बढ़ल जा रहल छल मुदा ओकर मोन घुिर-घुिर जा बैसल जतऽ िबतौने छल अŎड़तासँ भरल जीवनक अनुशासनहीन मुदा उĠमुक्त पल

एक हमरे लग छल ओकर अĠतमर्न देखार सोचलहुॅं समएक फैसलाकेँ करी İवीकार परĠतु एिहसँ निह दूर भेल मोनक िवकार एना तँ हĦमर संगी भेनाइ भेल िधĸार बीतल बात िबसरऽ ओकरो कहिलऐ जािह िदन उपाए सुझेनाइ जेना भऽ गेल आर किठन

अपन हठमे दृढ़ होइत गेल िदन Ćितिदन की जािन ककर भरोसमे छल अभािगन निह कम कऽ सकलहुॅं ओकर आसिक्त कतेक ƅोध छल भरल ओकरा Ćित खाली सोचैत रहलहुॅं ओकरे दऽ िदन राित ओ ĭयİत भऽ िलिख रहल छल Ćेमक पाँित

मैिथली पń २००९-१० 13 िबनीत ठाकु र गीत िनत ठाम पसरल सžाटा चहुँ िदश उजार लागे साँझे जँ हम घरसँ िनकली असगर डर लागे

चहुँ िदश देख हिरयाली नीक लगैत छल गाम घर घरमे सुखक अनुभुित छल ई पावन धाम

के बहुरुिपया सुख सभ िछनलक सुžा बजार लागे

घानक रुनझुन बालासँ िनकलैत छल संगीत ओिह संगीतमे झुिम कऽ मैना गबैत छल Ćेमक गीत आइ ओ मैना िहचुिक कऽ बाजे िजनगी जहर लागे

सुरुजक नव लाली संग उिदत अिछ अपन Ćीत अखन भले किरयाएल सुरुज होएत सĜयक जीत फसल समए काल चƅमे तँइ बसĠत पतझर लागे के बहुरुिपया सुख सभ िछनलक सुžा बजार लागे

14 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सतीश चन्ġ झा1 ई जीवन भेल ĭयथर् ई जीवन लऽ कऽ जĠम जगतमे। निह केलहुँ िकछु काज ĭयथा ई रहल हृदएमे। बीतल बचपन उड़ल संग िटकुलीकेँ धेने। कखनो मİत मलंग खेलमे जोर लगेने। आिब गेल चुप चाप उतिर कऽ यौवन किहया। चॱक उठल मन भेल भिवįयक आहट जिहया। लगा लेलहुँ संपूणर् जोर ताकत छल जतबा। अिछ की कम संघषर् करब पिरवारक सेवा। अž, वİÿ, भोजनक किरते उिचत ĭयवİथा। बीित गेल जीवनक सभटा नीक अवİथा। छै कमर्क ई खेल भाग्यकेँ कोना मेटेबै। भाग्य Ćबल छै किह कऽ ककरा केना बुझेबै। िकछु जीवनक दोष देवता छिथ िकछु दोषी। किरते रहलहुँ कमर् सतत् िकछु कम आ बेसी। भेटल िकछु सĦमान, मान लऽ कऽ अिछ भूखल। होइ छै एखनो सुनू, अथर्सँ सभटा Ćितफल। कहाँ शिक्त छिन सरोİवतीकेँ असगर अपना। सभसँ ऊपर ठाढ़ लŞमी सबहक सपना। िजनका जतबा अथर् पैघ छिथ जगमे नामी। िबना अथर् सभ ĭयथर्, दुखक जीवन अनुगामी। आब सोिच की करब उƛ उतरल अगुता कऽ। वानĆİथमे जाएब िकछु संताप उठा कऽ। हम रहलहुँ अिभलाषी भवमे मोक्ष मागर् के। चिलते रहलहुँ हम िघिसया कऽ पथ सुमागर् के। की भेटल अिभमान करब जकरा ले की हम। पेट पोिस कऽ माÿ िबतेलहुँ ई जीवन हम।

1 राम जानकी नगर, मधुबनी, एम.ए. ( दशर्न शाİÿ) सĦĆित िमिथला जनता इĠटर कालेजमे ĭयाख्याता पदपर १० वषर्सँ कायर्रत, संगे १५ सालसँ अपन एकटा एन.जी.ओ.क सेहो संचालन।

मैिथली पń २००९-१० 15 बी.के कणर्1 िमिथलाक लेल एक ओलिĦपक मेडल मुऱझाएल अिछ अपन ĭयिक्तĜवपर सेहĠता लगले रहल अपन Ćितभापर सफल िखलाड़ीक क्षेÿक शान आ मान देिख कए मोन होइए हमरो क्षेÿक शान आ मानपर भेटल रहैत एकोटा मेडल िमिथलाक लेल तािक रहल छी िमिथलाक लेल एक ओलिĦपक मेडल अथक Ćयास करबे करब ककरा जकाँ िƅकेटमे गावİकर आ तेंदुलकऱ शतरंजमे आनĠद िवĂनाथन जकाँ शुिटंगमे अिभनव िबĠƖा आ टेिनसमे सािनया िमजŭ जकाँ कते कहू ककरा ककरा जका़ चाही एकटा मेडल तािक रहल छी िमिथलाक लेल एकटा ओलिĦपक मेडल के नै जनैए िमिथलामे बािढ अिभशाप बनल अिछ मािहर भेल नेना भुटका सभ खुब हेलैए बािढक वरदान तखने बुझब जखने अगला ओलिĦपकमे मेडिलİट İवीमर फेĪपसपर करत Ćहार बािढ़ Ćतािरत एकटा मैिथल तािक रहल छी िमिथलाक लेल एकटा ओलिĦपक मेडल िबहारक Ćहार िमिथलापर िहĠदीक मैिथलीपऱ ताहुसँ पैघ मैिथलक Ćहार मैिथलीपर िबहार आ िहĠदीसँ लगाव कोनो कम निह मुदा िमिथला वा मैिथलीक उपेक्षा अगजसँ मगज धिर Ćहारो झेलब उपेिक्षत रहब जखन क्यो मैिथल़ जीत कऽ लओताह िमिथलाक लेल़ एक ओलिĦपक मेडल कोशीक देल कƠसँ की की नै गमेलहुँ राहत काेषसँ आहत भए अथाह टुअरक नाम कमेलहुँ इितहासमे िबलाएल िमिथलाक मिहमा पुनरिनवŭणक ƅािĠत सुनिग रहल किहया हएत से निह जािन मुदा एकटा भरोसा अिछ बनल 1 (१९६३-), िपता āी िनभर्य नारायण दास, गाम- बलौर, भाया- मनीगाछी, िजला-दरभंगा। पैकेिजंग टेĊोलोजीमे İनातकोþर आ यू.एन.डी.पी. जमर्नी आ इग्लैěडक कायर्ƅमक फेलोिशप, २२ वषर्क पेशेवर अनुभव आ २७ टा पÿ Ćकािशत। डायगनोिİटक िमिथला पेंिटंग आ िमिथलाक सामािजक-आिथर्क समİयापर िचĠतन। सĦĆित इिĠडयन इĠİटीƀयूट ऑफ पैकेिजंग, हैदराबादमे उपिनदेशक (क्षेÿीय Ćमुख)।—सĦ पादक

16 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मैिथल जनसँ िमिथलाक लेल एक ओलिĦपक मेडल भरोसा दऽ रहल नवतुिरया मैिथल सभ किह रहल अिछ अथक Ćयास करबे करब िमिथलाक लेल एक ओलिĦपक मेडल लेबे करब़

सुबोध ठाकु र हम गामेमे रहबइ रही दूर अपन मािटसँ मेनेजर रिह-रिह कलुशय छोिड़ अपन गाम मन रिह-रिह िबहुसए ओ सुĠदर मनभावन पोखिरक घाट ओ वसंत आर सावनमे सुĠदिर पाबिनहारिनसँ सजल बाट-घाट बिगयामे सिदखन कोइली कूकए रही दूर अपन गामसँ मेनेजर रिह-रिह कलुशय

अिछ सुबोधक कामना, जुिन करू दूर आब पुÿकेँ माँ अहींक सािनğयमे रहए लेल मन तरसए, छोिड़ अपन गाम मन रिह-रिह िबहुसए।

मैिथली पń २००९-१० 17 िनिमष झा असमिपर्त उĠमाद अहाँक वएह नयन, वएह मोन आ वएह तन हम देिख रहल छी, सुिन रहल छी आ भोिग रहल छी समयक नाम अĠतरालक बाद सेहो आँिख खोलैत आ िमचैत सेहो आ अहाँ हमर शरीरक अदृĮय सिरत Ćवाहमे सवŭĻ समािहत छी, सिĔजत छी।

ई अभीƠ रूप अहींक िथक जकर अनुपिİथ ितमे हमर िचþ शुįक िसकतातुĪय भऽ गेल अिछ ई शीतल छाहिर अहींक िथक जकर अभावमे ĆĜयेक िनिमष हमरा लेल नीरस आ उदास बसĠते बिन गेल अिछ ।

अहाँ पािन छी हमर िपयासक अहाँ बसĠती छी हमर बसातक तएँ एकटा अतृĢत उĠमाद नािच रहल अिछ भैरव बिन हमर मानसमे ।

हमर İनायुक रोम–रोममे एकटा िवषाक्त तृįणा बिह रहल अिछ आ बिह रहल अिछ हमर धमनीक कण–कणमे एकटा उĠमुक्त तृषा ।

बहुत बेर उघािर देिलऐ, फािर देिलऐ नृशंस बिन आवेशसँ लĔजाक पदŭ सभ आ बĠद कऽ देिलऐ नैितक मूĪयसँ पाशिवक उĠमाद सभ।

18 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) हँ ! आइयो ओिहना İमृितमे लटपटाएल अिछ अहाँक गरम साँसमे गुिĽत हमर जीवन सĻीत अहाँक आँचरमे ओझराएल हमर शटर्क बņम अनार जकाँ अहाँक दाँतपर िपछरैत हमर जीह अहाँक Ĥलाउजक हुक संग खेलाइत हमर दसो आँगुर आ अहाँक सुĠदर छालपर दौगैत हमर ठोर ।

तथािप िकएक निह िमझाइत अिछ छातीक ई उĠमþ मोमबþी िकएक िनįकाम निह होइत अिछ मोनक उþĢत बोखार सभ जेना अहाँ दारुक Ģयाला होइ आ हम चुİकी तँ लऽ रहल छी मदहोस भऽ रहल छी अहाँक İविĨल लĔजा बनत तनमे िनिमष िनिमषमे।

मुदा ओह! ई केहन िवडĦबना! िनĜयशः एĸेटा िबĠदुपर दुघर्टना होइत गेल हमर उच्छृĺल वासना सभ अहाँक दशर्न आ िसŀाĠतक िशखरसँ िनतिदन एĸे रİता घुिर जाइत छल अिभशĢत अहाँक िवचार हमर अिभशूĠय मिİतįककेँ झकझोरैत छल ।

शाइत कमजोरी हमरामे छल की िगŀ बिन हम युŀ निह कऽ सकलॱ अहाँक तनसँ शाइत महानता अहाँक छल माला बिन अहाँ समिपर्त निह भऽ सकलॱ हमर गरासँ ।

मैिथली पń २००९-१० 19 बुŀ आ आतंक अणु बमक िवİफोटक बाद भयाउन वातावरणमे आĜमाक शािĠत निह ताकू।

रक्तपातक बाद, शूĠय आकाशमे खुशीक चुĦबन निह करू ।

ओ अहाँक गलती हएत, महान रणभूिममे िविĂ शािĠतक नारा लगाएब ।

ओ अहाँक गĪती हएत तोपक गोलामे भातृĜवक सĠदे श ताकब ।

घृणा आ İवाथर्क सागरमे िवĂ आ बĠधु्Ĝवक शंखघोष िकए करै छी िहंसा आ आतंकक बीच गौतम बुŀक सĠदेश पिनसोह रहत ।

अपन फुिसयािहंक आदर्शकेँ कृिÿम रूपेँ निह झाँपू समए बƂड आगाँ बिढ़ गेल अिछ। İवाथŰ आ ĭयिक्तĜव वादी समाजमे कृिÿम आदशर्क बीजारोपण निह करू अहाँक आदशर् सभ कालाĠतरमे अहींकेँ डिस लेत।

20 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कािमनी कामायनी चĸा मैिथली, अंƇेजी आ िहĠदीक Ąीलांस जनर्िलİट छिथ। चĸा जे संİकृितक शान छल ़ आब उžितक पिहचान बिन गेल। एिह सĥय समाजमे जे जतेक नमहर तेकरा लग ततेक चĸाे बड़का दाैगल छाेटका दाैगल तेकरा पाछाँ नेंगड़ा दाेैिग रहल अिछ आ दाेेैिग दाैिग कऽ बैसाहय लागल नब नब पेेैघ पेेेेेेेेेैघ सुžर सुžर चĸा जेकर िकछु पूछ नेेेेेै छलै सेहाे गुड़िक रहल अिछ चारू कात चĸे चĸा आ ़ एिह चĸासँ जाम भऽ रहल अिछ नगरक महानगरक सीिमत सड़क गारा गारी ठाेकम ठाेक थाना पुिलस काेट कचहरी जेल सबहक पाछाँ लािग गेल अिछ चĸा चĸा हटै तखन नेेै जाम हटतै डंडा बरसाबेेेेेेेेेैत पुिलसबाे थाकले काेनाे राेक नै ई ससरैत ससरैत ततेक ऊपर पहुँिच गेल अिछ जþसँ नीचाँ महािवनाशक ढलान छेेै चĸाक िनयित आब की Ćगित आगाँ बढतै क़þऽ ढलानपर चिढ आेिह ठाम िवराम लेतै तँ काेना िक अिह पर साेचलिĠह किहयाे आधुिनक िवज्ञानी लाेक

मैिथली पń २००९-१० 21 डॉ शंभु कु मार िसंह1 लोरी तू लोरी गा हम सूित जाएब माए लोरी गा हम सूित जाएब लय निह छौक तँ की İवर तँ छौक? छी भूखल, देह अिछ काँिप रहल ठंढ़ासँ ई माया नगरी अिछ, हमरा बसन निह अिछ तँ की भेल जऽर तँ अिछ? माए! हे देखही.. ओकरा गाड़ीमे उजरा कुकुर अिछ घूिम रहल खा दूध-भात ई पशु जाित िकछु खाइत अिछ आ िकछु करैत अिछ िजयान तू मानव छेँ करैत छेँ āम िदन राितक āमक ई फल छौक तोहर नेना अžक लेल बेकल छौक कलुष-भेद-तम-िनअम िवषमक ई धार आब निह बहतैक हमर जाित ई कुठाराघात 1 जĠम : १८ अĆील १९६५ सहरसा िजलाक मिहषी Ćखंडक लहुआर गाममे। आरंिभक िशक्षा, गामिहसँ, आइ.ए., बी.ए. (मैिथली सĦमान) एम.ए. मैिथली (İवणर्पदक ĆाĢत) ितलका माँझी भागलपुर िवĂिवńालय, भागलपुर, िबहार सँ। BET [ िबहार पाÿता परीक्षा (NET क समतुĪय) ĭयाख्याता हेतु उþीणर्, १९९५] “मैिथली नाटकक सामािजक िववþर्न” िवषय पर पी-एच.डी. वषर् २००८, ितलका माँ. भा.िवĂिवńालय, भागलपुर, िबहार सँ। मैिथलीक कतोक Ćितिơत पÿ-पिÿका सभमे किवता, कथा, िनबंध आिद समय-समय पर Ćकािशत। वतर्मानमे शैिक्षक सलाहकार ( मैिथली) राįƏीय अनुवाद िमशन, केĠƖीय भारतीय भाषा संİथान, मैसूर-६ मे कायर्रत।

22 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कािŎसँ निह सहतैक टूिट जेतैक एĸर िवषदंत भऽ जेतैक कािŎ एĸर अंत अिछ अİÿ निह मुदा हाथ तँ अिछ? आ फेर उपर ‘हर’ तँ छिथ? तू लोरी गा हम सूित जाएब माए लोरी गा हम सूित जाएब।

अतीत अतीत छल, िथक वतर्मान आबो सĦहारऽ चाहै छी जे कािŎ िथक अतीतक पžा पिढ़कए बुझाइत अिछ ओ नीक-बेजाए, अŎड़, बीहड़ जे िकछु छल अपना समयक साक्षी आ आबऽबला कािŎक लेल ज्ञानक सागर छल अतीत जे लेलक ओ İमृित िथक जे देलक ओ िİथित िथक ई वतर्मानक बात िथक जँ İमृित आ िİथितक मंथन करी तँ काŎुक भिवįय.... भऽ सकैछ नीक।

मैिथली पń २००९-१० 23 आस किट जाएत राित फेर आओत िदवस लऽ संग िरतु पावन पावस छी एखन िववश! छी तममे समए िवषममे, झंझावात भरल अिछ हमरा जीवनमे भऽ मुखिरत एिह असार संसारमे िनत नव भाव-उĪलास संजोगने मोनमे आस छी आसमे आबऽबला कािŎक सĜय, İवच्छĠद, कमर्फलदायी समय चपलक!

िनशाĤभा झा भगवती गीत (लोकगीत संकलन) तारा नाम तोहार तारा नाम तोहार हे जननी काली करिथ पुकार सतयुग कलयुग दुइ Ćित हारल तीनू भुवन तोहार हे जननी तारा नाम तोहार। अƠ भुजा लए िसंहपर चढ़ली देखइत सकल संसार हे जननी, तारा नाम तोहार। सुर-नर मुिन सभ ğयान धरतु हे गले बैजĠती माल हे जननी तारा नाम तोहार। तारा नाम तोहार हे जननी, तारा नाम तोहार।

24 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िववेकानंद झा किवता आ की सुजाता

बूझल निह कखन कþऽ आ कोना हमरा आँिखमे बहऽ लागल किवता नदी बिन कऽ भऽ गेल ठाढ़ पहाड़ करेजमे जनक बिन कऽ देखिलऐ िचड़ै चुनमुन निह डेराइत अिछ आब खेलाइत अिछ हमरा संग गाछीक बसात अŎड़ अिछ मĔजर िवहीन भुखले पेट नचैत अिछ झूमैत अिछ कारी मेघ माथपर अकİमात कािन उठैत अिछ सुजाता सुžिर नोरसँ चटचट गाल चानपर कारी जेना

मैिथली पń २००९-१० 25 चान आ चाžी अहाँकेँ निह लगैछ जे चान आ चानक शुƚ धवल इजोत आ ओहूसँ नीक हेतै ई कहब जे चान आ ओकर चाननी आकी इजोिरया दूटा िनतांत िभž आ फराक चीज िथकै

ईĂर जखन बनौलकै चान तँ सुरुजसँ मंगलकै कनेक टा इजोत आ ओिह इजोतकेँ चान कोनो जादूगर जेकाँ इजोिरया बना देलकै जेना Ćेम जाधिर रहैत छै करेजमे कोनो जोड़ाकेँ लैला मजनू बना दैत छै चंƖमोहनकेँ चांद आ अनुराधाकेँ िफजा बना दैत छै आ फेर तँ वएह अĠहिरया ĭयािप जाइत छैक चहुँिदश

मुदा हम तँ कहैत रही जे जिहया सुरुजसँ पैंच लेल इजोतकेँ चान कोनो किवराज जेकाँ अपन िसलबņापर खूब जतनसँ पीस पीस कऽ चंदनक शीतल लेप सन इजोिरया बना देलकै तिहयासँ रखने छै अपना करेजमे सािट कऽ मुदा बेर बेखत बाँिटतो छै तेँ खतम होइत होइत एकिदन अमावĮयाक नौबित सेहो आिबए जाइत छैक आ फेर सुरुजसँ ओकरा मांगऽ पड़ैत छैक

26 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कोनो İवयंसेवी संगठन जेकाँ पैंचक इजोत लोककेँ सोझे सरकार रायबहादुर सुरुज लग जएबाक सेहंता तँ छै मुदा साहस कतऽ सँ अनतै ओ एतेक अमला-फैला छै सुरुजक चहुँिदश जे करेजा मुँहमे अबैत छै हुनका लग कोना जाऊ सवर् साधारण ओ तँ धधकै छिथĠह आिधक्यक तापसँ

खैर हम जिह चानक गĢप कऽ रहल छी ओकरासँ डाह करैत छै मेघ सिदखनसँ ओ ईषŭक आिगमे जरैत आएल अिछ भगवान मङने रहिथĠह वृिƠ मेघसँ चान लेल मुदा ओ निह देने छल एĸहु बुž पािन झाँिप देने छल चानकेँ हमरा बूझल अिछ ओ बनऔने होएत धमर्िनरपेक्षता आ सांĆदाियकताक बहाना लोक िहतमे काज निह अबैत ƫैतैक ओकरा मुĿा ओकर ƫैतैक िकछु आउर

मुदा हम तँ एĦहर माÿ एतबे कहऽ चाहैत रही जे हमरा केओ चान आ अहाँकेँ चाžी जुिन कहए की जखन मेघ झाँपैत छै चानकेँ तँ पिहने मरैत छै इजोत आ बादमे मरैत छै चान आ हम निह चाहैत छी जे हमर इजोत हमरासँ पिहने खतम हो हमरासँ पिहने मरय कखनहुँ निह िकžहुँ निह सþे

मैिथली पń २००९-१० 27 मिणकान्त िमĮ “मिनष”1 िमिथला वĠदना

देखू देखू हमर आंगनक भाग्य पिच्छममे बाजैत कौआ आ ! पूरबमे एला सूरज भगवान देखू देखू हमर आंगनक भाग !!

दीदी गािब रहल छिथ गीत माँ बना रहल छिथ तरूआ ! आइ एता हमर मूह लगुआए आिबते करबिĠह हम Ćणाम मनीष िथक हमर नाम !! दीदी Ĥयाहक भऽ गेल साल हमरा अंगनामे पसरलए कोजेगराक समान! एता पाहूनक बाबू लऽ जेता ई दोकान हमरा आंगनमे एला सूरज भगवान !!

देखू देखू हमर िमिथला कानए कोजेगरामे बटैए पान आ मखान ओ िमिथला रहत सबखन महान! मěडन आ िवńापितक होइत रहैए जतै गुणगान ओ जानकी धाम महान!!

राम बनलिथ पाहुन लव-कुश सन भिगनमान जािह ठाम गंगा देलिथ पुěयक ज्ञान ! ओिह िमिथलाकेँ सत् सत् Ćणाम सत् सत् Ćणाम !! मिणकाĠत िथका िमिथलाक संतान....।

1 गाम-बेलौचा, Ćखěड-लखनौर, िजला मधुबनी।

28 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) आशीष अनिचन्हार गजल रचना कतेक टका लगतै सपना िकनबाक लेल जूटल घर सरदर अँगना िकनबाक लेल

हम मुक्त छी राग-िवराग Ćेम-घृणासँ रचना कतेक टका लगतै भावना िकनबाक लेल

सþ मानू हम काज करै छी लोकतंÿक पŀितए रचना कतेक टका लगतै पटना िकनबाक लेल

पÿकािरता गुलाम छैक टी.आर.पीक रचना कतेक टका लगतै घटना िकनबाक लेल

िकछु गń किवता १) सीमा अथर् माİटरमाइĠड भए सकैत छैक। माİटरपीस भए सकैत छैक। माİटर निह।

२) काटब पेट भरबाक लेल घेंट कटैत छी आ घेंट ऊँच रखबाक लेल पेट

३) दोसराित जखन भए जाइत छी हम अपने अशक्त। तखने जरूरित पड़ैत अिछ दोसराितक।

४) Ćगित १. शंख। महाशंख। डपोरशंख। हराशंख।

मैिथली पń २००९-१० 29 Ćगित २. किनया देशी। िपया परदेशी। बच्चा िवदेशी।

५) मूलमंÿ अपन किनयाँक हाथ पकड़ू आ दोसरक किनयाँक करेज। िचĠहारक गरदिन पकड़ू आ अनिचĠहारक पएर। किहयो कोनो काजमे असफलता निह भेटत।

६) मोिĮकल काज कोनो कनैत जीवकेँ चुĢप करब ओतबे मोिĮकल काज छैक जतेक की अपन आँिखक नोरकेँ रोकब।

७ ) सुआद सोहारी आ गĢप दूनू नून मरचाइ लगेलासँ सुअदगर भए जाइत छैक ।

वौएलाल साह मधेशक आवाज मँा जानकीसँ कामना करै छी, शहीद सबहक िचर शािĠतक लेल बढ़ू मधेशी आगाँ बढ़ू मधेशक अिधकार ĆािĢत लेल युवा, िवńाथŰ आंदोलन करु, मधेशक अिधकार ĆािĢत लेल, एिह आंदोलनमे नै लड़लौं, तँ भाग्य बुझु जे फुटीए गेल ĭयापारी, कमर्चारी सेहो लड़ू, अपन भिवįय बचाबऽ लेल काम-काज छोिड़ आĠदो़लन करु, हजुरी Ćथा छोराबै लेल मधेशी शहीद पुकािर रहल छै, मधेशक अिधकार ĆािĢत लेल शहीदक सपना पुरा करु, िमटा िदअ शासकक खेल ई नेपालकेँ छै बाँटल, िहमाल, पहाड़, तराइ तँ कैला एिह मधेशीकेँ “मधेश” बाँटऽ मे छै पूरे उरीए गेल िहमाल, पहाड़, तराइ तँ कैला छुिटयौलिन, मधेश शासकक जेबीमे गेल जागु मधेशी जेबी फारु, अपन मधेश पाबैके लेल, मधेश, तराइक वोट लऽ कऽ शासक सभ आगाँ बिढ़ गेल। तराइ, मधेशी लिड़ रहल अइ, देखु केहन शासकक खेल पािनसँ ठंढ़ा आिगसँ गरम, ईएह आब आंदोलनक गित छै भेल, मधेशी आयोग कायम हो, एिह शासक वगर् सबहक लेल

30 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सन्तोष कु मार िमĮ हमर मीत रे ! हमर मीत सुगा तहूँ असगरे उिड़ गेलेँ भोरमे पराती आ संझामे साँझ गािबकऽ सुनऽबैछलेँ भोरमे उठऽबै छलेँ, किहकऽ सुनबै छलेँ “पटटु ! सीताराम कहो”।

फुलल छली संगिह तो असगरे मौर गेलेँ।

दूर जुिन जो हमरा तोँ छोिड़ कऽ क्षण भिर लेल आिब जो हमरा अĢपन बुिझ कऽ । िकछुए देर नाचब िकछुए देर गाएब हमहूँ तोरे संग कहब “पटटु ! सीताराम कहो”।

हमहूँ आएब तोरे लग मुदा िकछु क्षण बाद िकछुए देरक ई कƠ िथक भोगहे पड़त ।

एक िदन हावासँ तीƙ भऽ हमहूँ तोरे लग आएब तोरे संग नाचब तोरे गीत गाएब

मुदा आबिह परत हम अएबे करब फेर तोरे संग कहब “पटटु ! सीताराम कहो”।

मैिथली पń २००९-१० 31 हेमांग आिƳनकु मार देसाइ समीकरण1 दू टा अधर्वृþ जĠमैत समानाĠतर, समानाĠतर रेलगाड़ीक पटरी। हाथ भिर नमगर िलबल घास, झुकैत भीतर, िबना डोरीक धनुष सन। सुनबैत िखİसा भिरगर हबाक, राितभिर जĠमैत अİपƠ पीठ वेताल सन, जे उिड़ जाइत अिछ भोर भेने।

आ एतबे आिक कनेक बेशी झुकल बुिढ़या जे अहाँकेँ मोन पाड़त हाँसू।

झुकल िनĀल Ćथम āेणीक कĦपाटर्मेĠटमे, कातमे ठाढ़ कएल गेल Əेन अहाँक अपन आँिखसँ कएल Ćतीक्षा िबन कात भेल। एकटा छोटो आहिट एकटा Ĝविरत चमिक कमसँ कम आब, हँ आब ई हमर अिधकार अिछ, सþे है-ए, जाइत अिछ।

दूटा उğवŭधर पटरी टेढ़ कएल बीचमे दू टा तोरण जमल मृĜयु एकटा तीŞण गुमारबला दुपहिरया आ अहाँ बनबैत छी एकटा अłुत समीकरण। आĀियर्त छी अहाँ कƠ उठबैत छी सोझ बैसबा लेल आ जे हाँसू गीिर गेलहुँ कताक समय पिहने टोऐत अहाँकेँ खěडमे

1 मूल गुजराती पń आ तकर अंƇेजी अनुवाद- हेमांग आिĂनकुमार देसाइ मैिथली अनुवाद-गजेĠƖ ठाकुर

32 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) अशोक चौधरी

किहया अहाँसँ होएत आब िमलन एकहु घड़ी निह मोनमे होइए चएन अपन Ćेमकेँ मोन पारू िĆयतम तरिस खून रहल छी, तरिसते रहबै अहाँक िबना किहया अहाँसँ ..................

हमर सभटा अपराध माफ करब जे हमरासँ भूलमे भेल हो दुिनयाक सभ खुशी, अहाँकेँ भेटए हमर अहाँ Ćाण जीवन आ धन अहीकेँ चरणमे लागल अिछ लगन हमरो हृदयपर िवचारू िĆयतम ई जेना बरसै, बरिसते रहत, अहाँक िबना किहया अहाँसँ .......................

िवरहक अनेको उठैत अिछ तरंग आउ उठाउ लगाउ अंगसँ अंग अपना िवयोगेमे निह मारू िĆय भटिकते रहल मन भटिकते रहत, अहाँक िबना किहया अहाँसँ ...................

मैिथली पń २००९-१० 33 उपेन्ġ भगत नागवंशी बुढ़वा बुढ़बा बड़बड़ाइत रहैत छल टěडेली नइ कर, एिहसँ की होतौ देखै नइ छही समए कमो खटो पाइ कमो नइ तँ भुक्खे मरबेँ।

की करू चोरी करू , डकैती करू आिक पाकेटमारी करू नइ, मेहनित कर इमानदारीसँ कमो भुक्खे नइ मरबेँ।।

चलू अहींक बात मािन लेलौं बड़ मोसिकलसँ भेटल काज करऽ लगलॱ मेहनित कमाय लगलॱ टका बƂड नीक, मुदा कहाँ भरैत अिछ पाँचो परानीक पेट ।

गलल जाइए देह धीया–पुता हमरा कहैत अिछ बुढबा ..... हमरा लऽ की कएलह ? हे, दीनानाथ ........... हमहूँ आब बड़बड़ाइत छी ।

34 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) डा. सुरेन्ġ लाभ इितहास अबाजक समुƖ हĪलाक Ĕवारभाटा अनĠत.............. अनĠत कालसँ होइत पुनरावृिþ पुनरावृिþ बनैछ इितहास हĪलाक इितहास।

ğविनक अंकमे समािहत लोक मुक्त होएबाक हेतु ĭयाकुल लोक!

आवाजहीनता! शĤदहीनता! मौन ! İततĤध ! एकटा İव Ĩ िदवाİवĨ भऽ गेल अिछ।

इितहास–िसंहासनक हो वा हो संघषर्क इितहास दानवक हो वा हो मानवक सभ इितहास हँ ĆĜयेकक इितहास हĪलाक इितहास िथक ।

हĪलेरहĪ लासँ भरल जतए शूĠयेताक अभाव िथक शािĠतक अभाव िथक हँ, ĆĜयेकक इितहास हĪला िक इितहास िथक । सĦबĠधक नव सूÿक खोिजमे

मैिथली पń २००९-१० 35 इĠकलाब अĠहर उठल, िबहािर उठल अिछ, आिग उठल अिछ, पािन उठल अिछ, सभ िदलमे दावानल धधकए गाम गाममे बािढ़ उठल अिछ

बच्चा उठल, जवान उठल अिछ, जनी उठल अिछ, जाित उठल अिछ, गली गĪलीमे आिग पसरलै आइ हमर Įमेशान उठल अिछ

आइ राम उठल, रहमान उठल अिछ, कुरान उठल अिछ, रामायण उठल अिछ। शंख चƅ लए कृįण सभामे महाभारतमे अखिन तुफान उठल अिछ ।

बĠदूक उठल, गोला उठल अिछ बारुद उठल अिछ, बुट उठल अिछ छै नै ओतेक पेİतोलमे गोली बच्चा बच्चो जाित उठल अिछ ।

भार उठल, साँझ उठल अिछ, बेर उठल अिछ, राित उठल अिछ नस-नसक खून अिछ खौिल रहल चुŎी तक छाउरमे आिग उठल अिछ ।

शोिषत उठल, शािसत उठल अिछ दबल उठल अिछ, थकुचाएल उठल अिछ शासक वगर्क नीžे उड़ल अिछ ओकर डरे थर–थर काँिप उठल अिछ ।

नारा उठल , आकाश उठल अिछ, बस्ती उठल अिछ, गाम उठल अिछ, घर–घरमे अĠघोेल उड़ैए मुŇीमे इĠकलाब उठल अिछ ।

36 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सरस्वती चौधरी ÔरचनाÕ सĦबĠधक कोनो सूÿ सĦबĠधक कोनो सूÿ निह राखऽ चाहै छी बाĠहल अहाँक संग रþी–रþी छहोिछþ कऽ मुक्त होएबाक होइछ इच्छा एकटा खूजल पिरसरमे िवचरणक अĢपन फूट आनĠद होइछ । मुदा अहाँक संग हमर सĦबĠधक नव–नव पिरभाषा खोजबाक हमर इच्छाक । हमरा फेरसँ झिटआ देलक अिछ

हम अपने घरक बाट िबसरल जा रहल छी ।

की अिछ अहाँक संग सĦबĠधक सूÿ जतेक तोड़बाक कएल जाइछ Ćयė, Ćयास ततबए झमटदार भऽ आँिखक आगू भऽ जाइछ ठाढ़ आ देखलो बाट हेरा जाइछ आगू रिह जाइछ अहाँक माÿ अहाँक मूह आ राग–अनुरागसँ तर–बतर भेल सĦबĠधक मजगूत सूÿ आब तँ लाज लागल अिछ मुिक्तक हमर इच्छो माÿ लौलक रूपेँ कएल Ćयास अिछ । हम तँ किहया निह मिĠदरमे भजन करबा लेल İवयंकेँ Ćİतुत कऽ चुकल छी ।

मैिथली पń २००९-१० 37 डॉ अिजत िमĮ1 िमिथला-धाम चाननसन जतऽ मािट बसै छै ओिह मािटक हम वीर गे लए चलबौ हम तोरा सजनी पूर हेतौ सभ आस गे ।। १ ।। ओिह मािटक हम बात कहै छी जतऽ पूरल सभ आस गे मा जानकीक संग पािब कऽ चलल राम भगवान गे ।। २ ।। लए चलबौ ......... कोइली चहु िदस कुहु-कुहु बाजए िवńापितक गान गे धीर अयाचीक साग- भातमे जतए बसिथ भगवान गे ।। ३ ।। लए चलबौ ......... बालोsमक ज्ञान जतए छै सीता मैħयाक ğयान गे साग-भातमे जतए िबराजै İवािभमानक ज्ञान गे .।। ४ ।। लए चलबौ ......... शािĠतमयक जे पणर्कुटी छै िवĂमंचपर मान गे सतगुणक जे खान बनल छै िमिथला तकरिह नाम गे ।। ५ ।। लए चलबौ ......... िवńा - ज्ञानक नाम जतए छै सुमित मान-अपमान गे गुरूसँ िशक्षा जतए सुलभ छै पाबिथ सभ सĦमान गे ।। ६ ।। लए चलबौ ......... जग भिर जþय शीश नबावे बाट-घाट जत धाम गे कण-कणमे जत सोन िबराजै ओिह मािट परनाम गे ।। ७ ।। चाननसन जत मािट बसै छै ................................

1 “आिदĜय वास”, पाहीटोल, गाम सिरसव पाही संĆित राįƏीय अनुवाद िमशन, भारतीय भाषा संİथानसँ सĦबŀ।

38 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सुनीलकु मार मिल्लक घड़ी घड़ीमे घěटाेक सूइसँ बेसी िमनटक सूइसँ बेसी सेकेěडक सूइ चलै छै मुदा कतेक अनसोहाँत लगै छै जे सेकेěडसँ बेसी िमनटक आ िमनटसँ बेसी घěटाक मान भऽ जाइ छै अहाँ खूब दौड़ धूप करै छी अहाँक मगजसँ पसेनाक पमार बहैत रहैछ । माने, अहाँ खूब चलायमान छी मुदा, घěटाक घुसकुिनयाँ जकाँ अहाँक मािलकक मान बेसी बिढ़ जाइ छिन एना िकएक ने होइ छै जे चलबो अहीं बेसी किरतौं आ मान सेहो अहींक बेसी रहैत !

मैिथली पń २००९-१० 39 राजकमल चौधरी1 बही-खाता एिह खातापर हम घसैत छी संसारक सभटा िहसाब एिह खातापर हम सिदखन घसैत छी अपना कमर्क-अपकमर्क कारी िकताब! जे िकछु कयने छी पाप-धमर् जे िकछु बुझने छी जीवन-रहİय आ Ćाण-ममर् जे िकछु बुझने छी Ćाण-ममर् जे िकछु कयने छी पाप-धमर् सभटा अंिकत अिछ एिह लाल बहीमे एिह लाल बहीमे सभटा इच्छा, समƇ वासना जे जतबा अिछ जकरासँ लेन-देन जे रखने छी हेम-नेम सभ दजर् भेल अिछ सभ दजर् भेल अिछ एिह लाल बहीमे एिह लाल बहीमे सभटा इच्छा समƇ वासना जे जतबा अिछ जकरासँ लेन देन जे रखने अिछ हेम-क्षेम सभ दजर् भेल अिछ सभ दजर् भेल अिछ एिह लाल बहीमे ककरासँ की लेने छी हम सिदखन İनेह-दया, माया-ममता, घृणा-ƅोध ककरा की करबाक अिछ ऋणक शोध एतबा िदनमे ककरापर कतबा कजर् भेल अिछ सभ दजर् भेल अिछ एिह लाल बहीमे

किवता िलखबाक ई लाल-बही िथक हĦमर जीवन-खाता

1 दूटा अĆकािशत पń (सौजĠय डॉ. देवशंकर नवीन)

40 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) हमर सभटा अपराध, ज्ञान, अनुभव मोह-लोभ-संताप पराभव इच्छा-अिभलाषासँ लीपल-पोतल अिछ एĸर सभटा पाता ई हĦमर लालबही िथक जीवन-खाता जीवन-खाता

एकटा Ćेम-किवता कतेक राित िबतला पर फूल पात िततला पर मुदा इजोिरया उगबासँ कतेक पिहनें एकटा Ħलान-मुख İÿी, अनिचĠहार हमरा हृदयमे िकंवा अपन आँिखमे िकंवा अथाह समुƖ जकाँ पसरल अकाशमे तािक रहल अिछ अĢपन अतीत तािक रहल अिछ किहयो कतेक िदन पिहनें केकरोसँ सूनल कोनो गीत तािक रहल अिछ अĢपन अतीत एकटा Ħलान-मुख İÿी अनिचĠहार बहुत राित िबतलापर फूल-पात िततला पर मुदा हमरा िनž आिब जाइत अिछ आ काँच सपनामे बसĠत बहार निह

मैिथली पń २००९-१० 41 जीवकान्त1 वनदेवी वनवािसनी İÿी जंगलमे भोजन तकबा लेल बौआइत अिछ झाँखुरमे पकड़ए चाहैए बटेर िबछैए जंगली करैल आ खĦहारु थोड़ेक जारिनक काठ जमा करैए

क्यो िचमनी ईंट भŇापर पजेबा उघैए आ बोिन कमाइए चुिŎ जरैत छैक बहुत िनयारसँ मुदा िमझाइत छैक पट दए

हाथ धरबा लेल कम मदर् उपलĤध छैक शहर िदस गेल जुआन निह घुरलैए िरक्शा िघचबाक बोरा उतारबाक जानमारू काजमे बहुत पसेनाकेँ थोड़ कैंचा भेटैत छैक

1 पूणर् नाम- जीवकाĠत झा, िपता-गुणानĠद झा, माता-महेĂरी देवी, जĠम ितिथ- २५.०७.१९३६ İथान अभुआढ़, िजला-सुपौल। िशक्षा-मैिƏक ( १९५५ उ.िव.डेवढ़), आइ.एस.सी. (१९५७ आर.के.कॉलेज, मधुबनी), बी.ए. (१९६४ िबहार िव.िव.İवतंÿ छाÿ), िडप.इन.एड.(१९६९ िमिथला िव.िव.)। नौकरी-उच्च िवńालयमे सहायक िशक्षक। िवज्ञान िशक्षक (उ.िव.खजौली १९५७-८१), िहĠदी िशक्षक (उ.िव.डेओढ़ एवं उ.िव.पोखराम १९८१- ९८) पिहल रचना-इजोिड़या आ िटटही ( किवता, जनवरी १९६५ िमिथला िमिहर)। पिहल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उपĠयास १९६८)। नवीनतम पोथी-िखिखरक बीअिर (२००७ बाल पń कथा), अठžी खसलइ वनमे ( पń-कथा संƇह) आ पंजिर Ćेम Ćकािसया ( जीवन-वृþक अंश)। पुरİकार-सािहĜय अकादेमी ( िदĪली १९९८), िकरण सĦमान (१९९८), वैदेही सĦमान (१९८५)। Ćकािशत पोथी- किवता संƇह: नाचू हे पृĝवी (७१), धार निह होइछ मुक्त ( ९१), तकैत अिछ िचड़ै ( ९५), खाँड़ो ( १९९६), पािनमे जोगने अिछ बİती ( ९८), फुनगी नीलाकाशमे ( २०००), गाछ झूल-झूल ( २००४), छाह सोहाओन (२००६), िखिखिरक बीअिर (२००७)। कथा-संƇह: एकसिर ठािढ़ कदम तर रे (७२), सूयर् गिल रहल अिछ ( ७५), वİतु ( ८३), करमी झील ( ९८)। उपĠयास: दू कुहेसक बाट(६८), पिनपत(७७), निह, कतहु निह ( ७६), पीयर गुलाब छल ( ७१), अिगनबान (८१)। िहĠदी अनुवाद- िनशाĠत की िचिड़या (िहĠदी अनुवाद-तकैत अिछ िचड़ै, सािहĜय अकादमी, िदĪली २००३)।

42 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

वनवािसनी İÿी सेहो छोड़ने जाइए वन शहरमे सड़कपर राित कटबा लेल आ िदनमे हवेलीमे झाड़ू-पोछा देबा लेल... शहर ओकरा िचबा कए सुता दैत छैक ओकर खून चािट कए नेहाल होइत छैक शहरक मोटरमे तेल जकाँ जरैत अिछ वनवासीजन शहरक आकाशमे ओ डीिजलक धुआँ जकाँ िबलाइत अिछ

बाघक Ćजाित उपटैत छैक तँ िचĠता घेरैत अिछ जनमानसकेँ अंडमानसँ लोहरदग्गा धिर आ उजानक मुसहरीसँ निņन सभक िसड़की धिर उपटैत अिछ वनवासी İÿी-पुरुष अगबे बसात रोदना करैए सुतली राितमे पहाड़मे गĠहाइत धार नोर बिन टघरैत अिछ बबुआन सभक करेज िदĪलीसँ चतरा धिर पथर-कोइलाक खěड जकाँ सदर् अिछ (३०.०६.२००९)

जन-जन याचक अिगते देखल सूयर् तरिणसँ माँगल थोड़ Ćकाश कहलिन-“मुŇी बािĠह ठाढ़ रह अपनहु करिह Ćयास’’ मुŇी तँ भिर गेल खोिल कए देखी अित उĜसाह जते हजीिरया तते अĠहसिरया दूनू धार Ćवाह माँगल धरतीसँ हम याचक अžल-फलक भंडार गाछ फड़ल बड़ आगाँ देखी आधा खाली थार

मैिथली पń २००९-१० 43 नदी देिख कए भेल खुशी तँ माँगल आँजुर पािन बैसक्खाँमे बालु उड़ाबए भादवमे नकमािन लþी-लþी बहुत हिरयरी कोँढ़ी होइत फूल फूल-कुंजमे समय िबताबी तृįणा लाल अढ़ूल हवा उड़ाबए खढ़क खěडकेँ तिहना भासल जादू बहुत डािरपर बहुत फूलकेँ िसहरन निह िबसराइ कहल देशकेँ- दैह सुरक्षा, घूमी जंगल-झाड़ घर-घुसनाकेँ नोित बजाबए सागर आर पहाड़ रहलहुँ सभतिर िनįकěटक भए गड़ल ने कूशक काप बž कोठलीमे चेहाइत छी भिर घर सापे-साप देशो माँगइ- िनĜय करी हम सभ जन बाट Ćशİत बिहर भेल िकछु, सुिन निह पाबी अपन İवाथर्मे मİत किहयो माँगए धार-धिरÿी किहयो गगनक छोर िकछु निह सुनलहुँ जतबो सुनलहुँ देल ने हृदय कठोर āी गणेशाय नम: कुल देवताĥयोम नम:, Ƈाम देवताĥयो नम:, सवŸĥयो देवĥयोनम:, सवųĥयो ƙाŌणेĥयो नम:, सवųĥयो गुरुवेĥयो नम:। ऊँ शिक्त-ऊँ..........

44 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रूपा धीरू Ćसव–पीड़ा Ćसव–पीड़ासँ छटपटाइत ओ अइ कोलासँ ओइ कोला करैत बोदिर छिल पसेनासँ, िकछु कालक पĀात चौरीमे हलचल भेलैक आ Ćसžताक लहिर पसिर गेलैक ओकर बाप हाथमे राखल बिहंगाकेँ खुशीसँ उछािल फेकलक दूर कऽ ओ बड़ पोरगर नेनाकेँ जĠम देने छिल। ओ बड़ Ćसž छल ई सोिच जे कािŎसँ ई हĦमर बाँिह पूरत, पँचपĔजी बोझ उठएबाक सामथर् राखत, तखन फागुनेमे बेसाह लगबाक डर निह रहत Ćात भने िगरहतक खिरहानमे बोिन लेबाक लेल बड़ हुलसगर मोनसँ पहुँचल ओ हुनकर दलानपर बड़कीटा मोटर चमचमाइत छलिन पता चललै जे िगरहतक पुतौहुकेँ सातम मिहना िछयिन दिड़भंगा जा रहल छिथ दुİसाहस कऽ ओ अपन बुधनी, आ िगरहतक पुतौहुक तुलना कएलक आ बिहंगा ठामे गािड़ देलक बोझपर ओ िगरहतकेँ नेहोरा करऽ लागल— “मािलक परसौतीक लेल दािल–चाउर बड़ जरूरी छै कने, बोिन ........” “की बजलेँ ?” ओ गरिज उठलाह— “सार निहतन जतराक बेरमे तोँ ..... अपने भनिसया जकाँ बूझैत िछहीक ?”

मैिथली पń २००९-१० 45 अन्नावरन देवेन्दर1 पािन अिछ, माÿ आँिखक नोर ठोप, ठोपे टा मे टपटप खसैत पािन ठोपे-ठोपे, हम निह कऽ सकैत छी विणर्त, पािन निह बहैत अिछ िनरावरोध, सुबनŭ निह अिछ भरैत कखनो।

कलसँ भनसाघर धिर, भनसाघरसँ सोझाँक बारी धिर भागैत एतएसँ ओþऽ एĦहर-ओĦहर करघाक नमरैत ताग सन वİÿक संरचना सन एĸे घुमानमे हम जाइ छी घूिम।

कनैत बाल, पािन भरबाक अिछ काल दूधक झोंक आ हमर रजİवला एकाĠत हुँह ! सभटा एĸे बेर !

1 मूल तेलुगु पń- अžावरन देवेĠदर-अंƇेजी अनुवाद- पी.जयलŞमी आ मैिथली अनुवाद- गजेĠƖ ठाकुर किव अžावरन देवेĠदर आĠƗ Ćदेशक करीमनगर िजलासँ छिथ आ तेलुगु भाषाक तेलंगाना बोलीमे तेलंगाना राĔयक संवेदना आ संİकृित आ ओकर अलग राĔयक लेल संघषर्केँ İवर दैत छिथ। हुनकर छह टा किवताक संƇह छपल छिĠह। महाĜमा जोितबा फुले फेलोिशप २००१, रंजनी कुĠदुरती किवता पुरİकारम् २००६, डॉ. मलयāी सािहित पुरİकारम् २००६, रांिगनेनी येनĦमा सािहĜय पुरİकारम् २००७ पुरİकारसँ सĦमािनत। ओ िजला पिरषद, करीमनगरक पंचायती राज िवभागमे सीिनयर अिसİटेĠट छिथ। पी.जयलŞमी, ओİमािनया िवĂिवńालयक िनजाम कॉलेज हैदराबादमे अंƇेजी िवभागमे एसोिसएट Ćोफेसर छिथ। िवगत ३० बरखसँ अंƇेजीक अğयापन। हुनकर िवशेषज्ञता अंƇेजीमे भारतीय किवता, अनुवाद आ अनुवादशाİÿ अिछ।२००३ मे भागर्वी रावक संग िमिल कऽ शीला सुभƖा देवीक िसतĦबर ११ आ ओकर पिरणामपर तेलुगु काĭयक अंƇेजीमे वार अ हƀसर् रैवेज नामसँ अनुवाद। २००७ मे गोपीक ननीलू केर अंƇेजी अनुवाद। िİĆĠग नामसँ अžावरन देवेĠदरक किवताक अंƇेजी अनुवाद Ćेसमे अिछ।

46 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) पािन माÿ सĢताहमे दू िदन, छौंकी आ झगड़ा कलपर तैयो छी हम सभ İÿी जे रहैत छी िमिल कऽ बेकालमे दैत Ćाणोक उĜसगर्।

ई सभटा झंझवात पािनये टा लेल निह किह सकैत छी अहाँकेँ अपन पािनक समİया- सĦपूणर् भोर खतम होइत अिछ एिह १५ िमनटक कायर्क लेल कनेक काल भातक िबनु िबसिरयो सकैत छी मुदा िबनु पािनक जीवन चलत? एकिÿत भेल जे निह अिछ हमर बेटोक लेल पयŭĢत तािह लेल, रİसा भिर नमगर पाँित।

के अकानैत अिछ संघषर्? घर भरल लोक गाछ जेकाँ ठाढ़ आिक कुरसी जेकाँ बैसल तमसाइत हमरापर जे हम छी पछुआएल दौगैत छी िबनु लŞयक।

मुदा निह िहलबैत छिथ आँगुरो हमरा सहायताथर् हमर हाथ ओिह बोिरंगकेँ ठीक करैत भेल जे चोिटल।

ओिह पĦपकेँ पीटैत िनकलैत अिछ माÿ छुच्छ ğविन हमर Ćाण बहार भऽ जाइत अिछ ओतए काज करैत करर् करर् करर् करर् हमर बाँिहक ददर् आ छातीक पीड़ा पाताल धिर पािन िबला जाइत अिछ कतहु गहॴर नीचाँ मुदा तैयो निह बकसैत जे हम काज करैत छी खतम करबाक लेल चĦमच भिर पािनक बुĠद सेहो गĠहाइत।

मैिथली पń २००९-१० 47 काĠह भेल भोथ ठेला परल सुवणŭ उघैत Ĥलाउज फाटल एकटा अĪप जीवनक बाद हमरामे निह अिछ एकर जोड़-तोड़ करबाक सĸ हम की कऽ सकैत छी बिहन? पािनक चरचे माÿ मृĜयुक डरकेँ अिछ खॲचारैत पािन अिछ, आँिखक नोर माÿ...

[“नीलाĠटे कžीले...” मनकĦमा थोटा लेबर अƂडासँ]

48 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) अमरेन्ġ यादव आƫान हे हउ िदना–भदरी, तूँ दुनू भाय चाहक संग भाĻ पीिब कऽ भिर रहल छह पंजाबमे सरदारक बखारी । आ एतय तोहर घरमे कोनटा लग कािन रहल छह तोहर पाँच मनक कोदािर ।

हे हउ कृįणा राम–सोबरन, तूँ दुनू भाय साउदीक बालू–पहाडपर रोिम रहल छह हेँजक हेँज उँट आ एतय सुž लगै छह तोहर दौरी बथान अनŭ भेल जाइ छह तोहर अनेर भैँस ।

हे हउ भाय सलहेस, तूँ परदेशक दरबĔजापर दैत छह पहरा ठोकैत छह सलामी । आ एतय तोहर मायक आँचरमे मुदइ गड़ौने छह नजिर

हे हउ िदना–भदरी, हे हउ कृįणाराम सोबरन, हे हउ भाय सलहेस, बाँझ भेल जाइ छह तोहर चौरी चाँचर, सुž भेल जाइ छह गोहाली बथान

मैिथली पń २००९-१० 49 टुगर लगै छह तोहर देश । आबह घुिर कऽ जĪदी आबह घुिर कऽ अपने गामकेँ बनेबै पइĠजाब अपने समाजकेँ बनेबै कतार अपने देशकेँ बनेबै अिमरका ।

श्यामल सुमन मैिथली दोहा

Ćķ सोझाँमे ठाढ़ अिछ अĢपन की पहचान। तािक रहल छी आइ धिर भेटल कहाँ िनदान।। ककरासँ हम की कहू अपनामे सभ मİत। समाचार पूछल जखन कहता दुखसँ ÿİत।। फँसल ĭयूहमे İवाथर्क सभ देखू बेहोश। झूठ फूिस मुिखया बनिथ खूब बघारिथ जोश।। हम देखलहुँ निह आइ धिर मैिथल सनक िववाह। दान दहेजक चƅमे बहुतो लोक तबाह।। बिरयातीकेँ नीक निह लागल माछक झोर। साँझ शुरू भोजन करत उठैत काल तक भोर।। रसगुĪला गुĪला बना खाओत रस िनचोिड़। खाइसँ बेसी ऐंठ कऽ देता पातमे छोिड़।। मैिथलजन सĔजन बहुत लोक बहुत िवŅान। िनज-भाषा, िनज-लोकपर किनको निह छिĠह ğयान।। चोिर, िछनरपन छोिड़ कए करू अहाँ सभ काज। मैिथलजन तखने बचब बाँचत सकल समाज।। जाित-पाितकेँ छोिड़ कऽ बनू एक पिरवार। िमिथला के उĜथान िहत कोिशश करू हजार।। अपन लोक बेसी जुटए बाजू िमठका बोल। सुमन टूटल जॱ गाछसँ तखन ओकर की मोल।।

50 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िहमांशु चौधरी बाल गीत कुत–कुतामे िजतलहुँ तँ गोटरसमे ओसरा गेलहुँ गोटी देिख–देिख चिकत छी, की करु चकरा गेलहुँ

आस रखने छी िजतैत जाइ िझिझरकोनामे घेरा जाइत छी आस–पास कहैत–कहैत धĢपाो कहए ले िबसरा जाइत छी कņी करु ककरासँ झुला झुलैत ओझरा गेलहुँ

एक सलाइ, दु सलाइ तेसर बेरमे चोĠहरा जाइत छी पािन–पािन कहैत–कहैत अंगनेमे ओंघरा जाइत छी माछ–माछ बेंग कहए काल, अंगुरी मोड़एमे गड़बड़ा गेलहुँ कौड़ी तासमे पाइ हारने मĠहुआ जाइ छी तीर–धनमी चलबैत काल सङीएकेँ आिख फोिड़ देलहुँ

तोँ İवतंÿ छेँ िवचारक देवालमे बĠद छी हाथ-पएर काटल अिछ ने िलिख सकैत छी ने चिल सकैत छी तैयो कहैत छी--- तोँ İवतंÿ छेँ। ठोर हमर बोली अहाँक आँिख हमर दृिƠ अहाँक भाषा हमर िचंतन अहाँक तैयो कहैत छी--- तोँ İवतंÿ छेँ। िनदŸषता अशुŀ भेल ĆƠा िवपरीत भेल आशा गुदरी-गुदरी ओछाओन सन के शÿु, के िमÿ िवĂास जखन उपहास बनल के बूझत अंतरक धाह एिह उहापोहमे धरती भेल बाँझसन

मैिथली पń २००९-१० 51 तैयो कहैत छी--- तोँ İवतंÿ छेँ। एक कोनमे रिहतहुँ नव युगक वैजयंती ठाढ अिछ देश-देशांतरक कथा सूिन िसंहासन जĪलादक लगैत अिछ हमरा अभागल किहतहुँ अपनाकेँ İवतंÿ कहैत छी जे अĠहारकेँ निह बुझलक तँ ओ इजोत की बूझत गुज-गुज अĠहिरयामे बेउ कएने छी तैयो कहैत छी--- तोँ İवतंÿ छेँ।

दयाकान्त पाँच लाख बौआक दाम निह कमाइत छिथ फुटल कौड़ी निह रोजगारक कोनो ठेकान दस बरखसँ धेने छिथ िदĪली टाका आबै छिन अखनो गाम बाबु सुद-दर सुद जोिड़ कऽ लगबैत छिथन बौआक दाम पाँच लाख बौआक दाम।

कहैत छिथ एम.बी.ए. केने छी निह चाही सरकारी नोकरी, नाम एम.एन.सी. मे नोकरी करैत छी रखैत अिछ कĦपनी सभटा ğयान ĆवĠधनक कोनो गĢप करू तँ मुँह बेता जेना परम अकान पाँच लाख बौआक दाम ।

घटक देिख कऽ बाप बजैत छिथ

52 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) बड़का हािकम हमर संतान गाड़ी-बंगला नोकर-चाकर सभ चीजक ओतए ओिरयान आॅिफसमे बड़का-बड़का हािकम करैत रहैत छैक बौआकेँ सलाम पाँच लाख बौआक दाम।

अिबते लगन घटकक आसमे मखमल जाजीम शोभय मचान िसĪक कुतŭ संग परमसुख धोती सिज-धिज बैसिथ बाप दलान जखन देखु भरल रहिथ छिन चाहक संग िखलबņीमे पान पाँच लाख बौआक दाम।

अिह लगनमे लुŎा लंगड़ा निह बाँचल िकयो बिहर अकान पैंतीस बीतल चिढ गेल छþीस निह सुनैत अिछ िकयो कान हमर सपुतक शुभ लगनमे सभ अĢपन बिन गेल अिछ आन पाँच लाख बौआक दाम।

मैिथली पń २००९-१० 53 अिजत कु मार झा ओ तँ मुहेँक बड़जोड़ छिथ िरक्शापर माइक लगा जोर जोरसँ छोटगर-छोटगर भाषणे तँ देलिथ नेताजी िकछु कऽ कऽ देखाबिथ!

कहिथ जा घर-घरमे िबजली लगाएब आब अĠहारमे जीिब निह पाएब सभ राितकेँ हम दीवाली बनबाएब एको जे खĦहा गािरकऽ लबैथ नेताजी िकछु कऽ कऽ देखाबिथ!!

घर-घरक बच्चा İकूल जाएत पढ़ए-िलखएसँ निञ िकयो वंिचत हएत िशक्षाक İतर बहुत बढ़ाएब चािरयोटा शैिक्षक सामƇी बटबैतिथ नेताजी िकछु कऽ कऽ देखाबिथ!!

गाम-गाममे फोनेटा निह ई-मेल आ इĠटरनेट लगाएब मोबाइलक तँ बािढ़ बहायब एĸो दू टा पी.सी.ओ. तँ खोलाबिथ नेताजी िकछु कऽकऽ देखाबिथ!!!

कारखाना खुलत, काज बढ़त रोजगारीक अवसर Ćशİत बनबाएब बेरोजगारीक नामोिनशान मेटाएब एकोटाकेँ ढंगगर नोकरी िदयाबिथ नेताजी िकछु कऽ कऽ देखाबिथ!!

ओ तँ मुहेँक बड़जोड़ छिथ पाटŰ आ अĢपन माÿ काज करौलिथ िजतलाक बाद चेहरो निह देखओलिथ ओ तँ आब राज करै छिथ अनेरे िकए िकछु कऽ कऽ देखओबिथ!!!

54 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सुिमत आनन्द जेĦहरे देखू तेĦहरे लाइन!! Əेनमे लाइन, बसमे लाइन िसनेमाक हॉलमे लाइन गैसक गोदाममे लाइन राशनक दोकानमे लाइन सभसँ बड़का सैलूनमे लाइन! जेĦहरे देखू तेĦहरे लाइन!!

İकूलमे लाइन कॉलेजमे लाइन डॉक्टरमे लाइन आ वकीलमे लाइन अİपताल आ कोटर्मे लाइन सभसँ बड़का सकर्समे लाइन! जेĦहरे देखू तेĦहरे लाइन!!

चाहमे लाइन, पानमे लाइन पैखानामे लाइन आ पेशाबमे लाइन होटलमे लाइन, बोतलमे लाइन सभसँ बड़का पािनमे लाइन! जेĦहरे देखू तेĦहरे लाइन!!

मिĠदरमे लाइन, मिİजदमे लाइन योगीमे लाइन आ भोगीमे लाइन जोतखीमे लाइन, पंिडतमे लाइन सभसँ बड़का शमसानमे लाइन! जेĦहरे देखू तेĦहरे लाइन!!

नेतामे लाइन, अिभनेतामे लाइन खेलमे लाइन आ जेलमे लाइन ऑिफस आ आवासमे लाइन सभसँ बड़का सिवर्समे लाइन! जेĦहरे देखू तेĦहरे लाइन!!

मैिथली पń २००९-१० 55 िवजया अयार्ल आजुक जीवन ĆĜयेक िदन मृĜयुसँ सापट माँिग कऽ बाँकी–बक्यौती देबऽ लेल ऋणक रूपमे बाँिच रहल अिछ जीवन। ĆĜयेक क्षण मृĜयुसँ पैंचा माँिग कऽ क्षितपूितर् करबाक िहसाबसँ ĭयािजक रूपमे भिर रहल अिछ जीवन। जीवन आजर्न करबाक िहसाबमे निह जीवनक ĆĜयेक क्षणक ऋण देबाक िहसाबसँ चुकएबाक दरमे असुल–उपर भऽ रहल अिछ । युŀ आ शािĠतक जोड़–घटाउमे भूखक बारूद लऽ कऽ मािट खाएपर मजबूर भऽ रहल अिछ जीवन । अखन डेराओन मुँह सभ अमूतर् अथर्मे नुकाएल जीवनकेँ, आँटाक संग बदिल कऽ िववशतासँ बाँिच रहल अिछ। इच्छा आ महĜवाकांक्षीक कोठीकेँ Ćदूिषत वातावरणकेँ तोड़ल समयमे संघषų–संघषर्क बीचसँ भािग मनुक्खेक अिİतĜवपर दाग लगाबऽ लेल सकर्सक जोकर बिन बाँिच रहल अिछ जीवन। खोजमेसँ लाएल संरचनामे, अपनेसँ लगाएल आिग जिर रहल पृĝवीक भागमे शािĠतसँ शािĠत करत िछितर–िबितर भेल शताĤदीक हƂडीमे मलहम लगाबऽ क्षेĆयाİतसँ काटल गेड़ी लऽ कऽ कछुआक गितमे चिल रहल अिछ जीवन। (आबय बला पोथी अएना मैिथली किवता संƇह-सĦपादक संतोष कुमार िमāसँ)

56 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सरोज िखलाडी मनक बात मनमे सामनेमे तँ हम चुपचाप छलहुँ परोछमे हम बरबराइत रहै छी हुनका सामने हम हँसऽ निह सकलहुँ अएनाक सोझाँ हम िकए मुिİ कआइ छी?

मनक बात हम हुनकासँ कहऽ नइ सकलहुँ अखन हम िकए पछताइ छी हुनका आगू िकछु बाजऽ निह सकलहुँ अखन हम िकए नोर बहबै छी ?

मने मन कहै छलहुँ अहाँ िबन जीयब कोना सामनेमे निह कहऽ सकलहुँ संकोच आ डरसँ चुपचाप छलहुँ मोनसँ किहयो हँसऽ निह सकलहुँ ।

यादमे हुनक कते िदन नोर बहाउ हुनक इच्छाकेँ हम बुझऽ निह सकलहुँ ओ तँ हमरा पौने छली हुनका हम पाबऽ निह सकलहुँ ।

अखनो यादमे हुनक डूबल रहै छी किनयो चैन निह पाबऽ सकलहुँ एहन केहन रोग भऽ गेल हमरा इलाज हम करबऽ निह सकलहुँ।

गलती तँ हुनकेसँ भेल ओहो तँ हमरा कहऽ निह सकली ताली तँ हम बजाबऽ चाहलहुँ मुदा दुनू हाथक िमलन कराबऽ निह सकलहुँ मनक बात मनेमे … (आबय बला पोथी अएना मैिथली किवता संƇह-सĦपादक संतोष कुमार िमāसँ)

मैिथली पń २००९-१० 57 उमेश मंडल1 गिनयािर िपसबाक गीत कहमा के जिड़या कहमा िसलौिटया रे। ललना रे कओन मुँह भय पीसब, कौिशĪया पीआयब रे। दिछन के इहो जिड़या, पिछम िसलौिटया रे। ललना रे पूब मुँह भय पीसब, कौिशĪया पीयाअब रे। पिहने जे पीलिन कौिशĪया रानी, सुिमÿा रानी रे। ललना रे िसल धोइ पीयल कैकेयी रानी तीनू गरभ सँओ रे। कौिशĪया के जनमत राम, सुिमÿा के लछमन रे। ललना रे कैकेयी के भरत, शÿुघन, तीनू घर सोहर रे।

1 एक बेरक बात िथक। िविवध-भारती रेिडयो İटेसनसँ गीत सुनैत छलौं। एखन धिर मैिथली सािहĜयसँ कĦमे-सĦम िसनेह छल। ओना पिरवारसँ समाज धिर मैिथिलऐक बीच आठो पहर समए बीतैत अिछ। काितक पूिणर्माक िदन रहने, समाजक माए-बिहन लोकिन सामा भसा आंगन िदिस सोहर गबैत घुमलीह। एकाएक हमरो कानमे गीतक ğविन हवामे िछछलैत अबै लगल। रेिडयो बž कऽ सोहर सुनै लगलहुँ। गीतक İवर हृदयकेॅ झकझोड़ए लगल। जेहने माए-बहीिन लोकिनक İवरक मधुर टाँस तेहने एकरुपता। जिहना बहीिन, माए-बाप समाजक सखी-सहेली छोिड़, सासुर जेबा काल, अपन ƅĠदनसँ वातावरणकेॅ शोकाकुल बनबैत आ सखी-सहेली सोहरक İवरसँ िवदा करैत, तिहना भऽ गेल। हृदय िवदीणर् हुअए लगल। अनायास मनमे सवाल उठै लगल- (क) की हमर कला-सािहĜय, भूमěडलीकरणसँ आगू बढ़त?, (ख) आिक जतय अिछ ततय, अजेगर साँप जेकाँ थुसकुिरया मािर बैसल रहत? ( ग) आिक हमर कला-सािहĜय मिटयामेट भऽ जायत? एिह Ćķक बीच उलझल मोनमे, िडिबयाक िटमिटमाइत इजोत जेकाँ आएल जे अपनो मातृभाषा आ मातृभूिमक सेवा लेल िकछु कएल जाय! एिह िजज्ञासाक संग अपने लोकिनक बीच, एकटा छोट-छीन संकलन ‘संİकार गीत’ रािख रहल छी। आशा अिछ जे अधलापर ğयान निह दऽ आगूक सेवा लेल Ćेिरत आ ĆोĜसािहत जरूर करब। गीतक संकलन िकछु पोिथओक अिछ आ अिधकतर माए-बहीिनक कंठक सेहो अिछ। जिह गीितकार लोकिनक गीत संकिलत अिछ, हुनक आभारी छी। आ जे गीत माए-बहीिन लोकिनक कंठक अिछ, ओ जिहना कहलिन तिहना िलखलो गेल अिछ, तेँ शĤदक फेिड़-फाड़ आ टूटल सेहो अिछ। गीतक संकलन करैमे अƇज सुरेश मंडल आ अनुज िमिथलेश मंडलक भरपूर सहयोग रहल।

58 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) तेलकसाय लगबैक गीत १ कौने बाबा हरबा जोताओल, मेिथया उपजाओल हे। कौने बाबी पीसल कसाय, जे िक बरुआ ओंगारल हे। बड़का बाबा हरबा जोताओल, िक सरसो उपजाओल हे। ऐहब बाबी तेल पेरौलीह, बरुआ ओंगारिथ हे। २ काँचिह बाँस के मिलया हे, आिक तािह मिलया तेल फूलेल हे। कौने बाबी लगेतीह तेल फूलेल, आिक कौन बाबी लगेती उबटन हे। आिक फĪलाँ बाबी लगेती तेल फुलेल, आिक फĪलाँ बाबी लगेती उबटन हे। ३ गरजह हे मेघ गरजह गरिज सुनाबह रे। ललना रे ऊसर खेत पटाबह सािर उपजाबह रे। जनमह आरे बाबू जनमह जनिम जुड़ाबह रे। ललना रे बाबा िसर छÿ धराबह शÿु देह आँकुश रे। हम निह जनमब ओिह कोिख अबला कोिख रे। ललना रे भैलिह वसन सुतायत छौड़ा किह बजायत रे। जनमह आरे बाबू जनमह जनिम जुड़ाबह रे। ललना रे पीयर वसन सुताबह बाबू किह बजायब रे। ४ पलंगा सुतल तोहेँ िपया िक तोहें मोर साहेब रे। ललना रे बिगया जँ एक लगिबतहुँ िटकुला हम चिखतहुँ रे। भल निह बोलिलह धनी िक बोलहुँ न जानह रे। ललना रे बेटबा जँ एक तोरा होइत सोहर हम सुिनतहुँ रे। भानस करैत तोहें गोतनी िक तोहें मोर िहत बंधु रे। ललना रे अपन बालक िदअ पैंच िपया सुनु सोहर रे। नोन तेल पैंच उधार भेटय आर सभ िकछु रे। ललना रे कोिखआक जनमल पुÿ सेहो निह भेटय रे। मिचया बैसल तोरे सासु िक सासु सँ अरिज करु रे। ललना रे कओन-कओन तप केलहुँ पुÿ फल पेलहुँ रे। गंगिह पैिस नहेलहुँ हिरवंश सुनलहुँ रे। ललना रे देवलोक भेला सहाय िक पुÿ फल पयलहुँ रे। आिदत लगैत िबलĦब भेल होिरला जनम लेल रे। ललना रे लाल के पलंगा सुता देल िपया सुनु सोहर रे।

मैिथली पń २००९-१० 59 दसमासी सोहर

Ćथम मास जब आयल िचत फिरआयल रे। जािन गेल सासु हमार चढ़ल मास दोसर रे। सासु मोर बसु नैहर ननदी बसु सासुर रे। घर छिथ देबर नदान चढ़ल मास तेसर रे। बाट रे बटोिहया िक तोिह मोर भैया िक िहत बंधु रे। हमरो समाद लेने जाउ चढ़ल मास चािरम रे। अž पािन िकछु निह भावय खटरस भावय रे। कहब हम कओन उपाय चढ़ल मास पाँचम रे। रिच-रिच पितया िलखाओल नैहर पठाओल रे। िबनु आमा नैहर िवरान चढ़ल मास छŇम रे। आगु-आगु आबय दोिलया पाछु भैया आबय रे। घुिर-घुिर घर भैया जाउ चढ़ल मास सातम रे। तन भेल सिरसब फूल देह भेल पीयर रे। अब न बाँचत जीव मोर चढ़ल मास आठम रे। घर-घर बाजत बधावा िक भेल बड़ आनंद रे। अयोğयामे जनमल राम चढ़ल मास नवम रे। तुलसीदास सोहर गाओल गािब सुनाओल रे। भक्तवĜसल भगवान िक आजु Ćकट रे।

एक िदन छल बन झंझर आब बन हिरयर रे। बड़ रे सीता दाइ तपसी िक गरम सँ रे। के मोरा गरुअिन काटत िखनहिर बूनत रे। ललना रे मन होय िपयरी पिहरतहुँ गोद भरिबतहुँ रे। ललना रे राम दिहन भए बैसतिथ कौशĪया चुमिबतिथ रे।

Ćथम समय िनयराओल शुभ िदन पाओल रे। ललना रे देवकी दरदे ĭयाकुल दगिरन आयल रे। दोसरो वेदन जब आयल कृįण जĠम लेल रे। ललना रे तेसर हिरक Ćवेश कलेश मेटायल रे। दगिरन आिब जगाओल केओ निह जागल रे।

60 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ललना रे हिर देिख सभ मन अचरज सभ िहत साधल रे। सूरदास Ćभु िहतकर कृįण जनम लेल रे। बाजन बाजय सभ ठाम देव लोक हरिखत रे।

उतिर सावन चढ़े भादव चहुँ िदस कादब रे। ललना रे मेधवा झरी लगाबय दािमिन दमकय रे। जनम लेल यदुनĠदन कंस िनकĠदन रे। ललना रे फुिज गेल वƌ केवाड़ पहरु सब सूतल रे। शंख चƅ युक्त हिर जब देवकी देखल रे। ललना रे आइ सुिदन िदन भेल कृįण अवतार लेल रे। कोर लेल वसुदेव िक यमुना उछिल बहू रे। ललना रे हिर देल पैर छुआय नĠद घर पहुँचल रे। नĠद भवन आनंद भेल यशुमित जागल रे। ललना रे सूरदास बिल जाय िक सोहर गाओल रे।

घर से बहार भेली सुĠदिर, देहिर धय ठाढ़ भेली रे। ललना रे ओलती धय धिन ठािढ़ िक, दरदे ĭयाकुल रे। किथ लय बाबा िबआहलिन, बलमु घर देलिन रे। ललना रे रिहतहुँ बािर कुमारी, ददर् निह जिनतहुँ रे। अगाध राित िबराल पहर रित, बबुआ जनम लेल रे। ललना रे बाजय लागल बधाबा, िक गाओल सोहर रे।

पिहल परन िसया ठानल सेहो िविध पूड़ाओल रे। ललना रे भेटल अयोğया राज ससुर राजा दशरथ रे। दोसर परन िसया ठानल सेहो िविध पूराओल रे। ललना रे भेटल कौशĪया सासु लखन सन देओर रे। तेसर परन िसया ठानल सेहो िविध पूराओल रे। ललना रे माँगल पित āीराम सेहो िविध पूरल रे।

मैिथली पń २००९-१० 61 ७

गाँव के पिछम एक कुइयाँ सुĠदिर एक पािन भरु रे। ललना रे घोड़बा चढ़ल एक कुमर पािन के िपयासल रे। पािन पीबू पािन पीबू कुमर सुरित निह भुलह रे। तोरो सँ सुĠदर हमर İवामी जे तिज िवदेश गेल रे। कोन मास तोहरो िवयाह भेल कोने गवन भेल रे। कोने मास जोड़ल िसनेह िक तिज परदेश गेल रे। फागुन हमरो िवआह भेल िक चैत गवन भेल रे। बैसाख जोड़ल िसनेह िक तेिज िवदेश गेल रे।

जीर सन धिन पातिर फूल सन सुĠदिर रे। ललना रे सुतल Ćेम पलंगपर दरदे ĭयाकुल रे। सासु जे हुनका अलारिन बिहन दुलारिन रे। ललना रे ितल एक दरद अंगेजह, होिरला जनम लेत रे। जाहक हे ननदी जाहक, भइया के बजाबह हे। ललना रे भइया ठाढ़ देहिर बीच कहु बात मनके रे।

62 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रूप ेश कु मार झा “त्योंथ”1 खेली सĢपत जा भुइयाँ थान बड़ रे जतन सँ हम पोसली पुता केँ, भूखे सुतली अपने मर ओकरा सुतौली खुआ केँ। अपने हम मूरुख मुदा बौआ केँ पढौली, कािट कƠ पोथी लेल ढौआ जुटौली। देिखते हमर पूत भेल फूिट जुआन, मोने बीतल हमर कƠ मुख पसरल मुİकान। ओिह बेरा िजद कयलक गेल ओ असाम, मिहनो ने लगलै पठौलक ढौआ कऽ काम। तंग छली पिहने आब उबार भेल जान, तकलीफ भेल छू-मंतर भेल िदन हमर असान। आयल एक िदन बेरा मे बौआ कयने लाल कान, देखली ओकर कान आिक उड़ल हमर Ćाण। कमाइ हइ लोक ढौआ ढेरी परदेश जा, मुदा भािग आयल बौआ हमर मािर खा। िकछु िदनक बाद भेल ढौआ केर टान, भऽ गेल हमर समैया फेरो पिहने समान। फेर गेल बेटा बĦबइ अपन िपþीक संग, छली हम ने हरिखत मुदा ओकरा छलै नव उमंग। एिह बेर कमायल बौआ हमर ढौआ ढेर, आब ने गरीब रहली देलक िदन फेर। देखल निह गेलिन भगवान केँ हमर िदन, लेला हमर मुखक मुसकी ओ छीन। आयल फेर बौआ हमर मािर खा बĦबइ सँ, उपर सँ तऽ ठीके छल मुदा टूिट गेल मोन सँ। ककरा ने लगै हइ नीक अपन गाम-घर, पेटक खाितर परदेश जाय पड़ै हइ मर। भुखले रहब मुदा देबै ने जाय ओकरा देश आन, अखिनये हम खेली सĢपत जा भुइयाँ थान।

1 िपता-āी नवकाĠत झा, Ƈाम+पÿालय-Ĝयॲथा, भाया-िखरहर, थाना-बेनीपņी, िजला- मधुबनी। सĦĆित कोलकातामे İनातक (अिĠतम वषर्)मे अğययनरत। सािहिĜयक गितिविधमे सिƅय, अनेक रचना िविभž पÿ-पिÿकािदमे Ćकािशत।

मैिथली पń २००९-१० 63 िवनीत उत्पल1 मनुख आ माल आइ फिरयाएल जाए अपना सभ मनुख छी आिक माल िकएक तँ दुनूमे छैक जमीन आ आसमानक अंतर एकटा पेटक लेल रहैत अिछ ललाइत एकटा पिरवारक लेल रहैत अिछ कपसैत एकटा फूिस Ćितơाक लेल करैत अिछ छल-Ćपंच एकटा पाइ-कौड़ीक लेल घड़ी-घड़ी करैत अिछ नौटंकी एकटा मानिसक संतुिƠ लेल बौराइत अिछ िदन-राित एकटा शारीिरक संतुिƠ लेल होइत अिछ ĭयिभचारी एकटा पएरपर ठाढ़ भेलाक बाद माए-बाप कऽ दैत अिछ कात

दोसर तँ अिछ चािरटा टांगबला अपन पेट भरलाक बाद दैत छैक दोसरकेँ अवसर सभ िकयो ओकर सहोदर छिथ झूठ लेल Ćाण निह गमबैत अिछ दोसर निह बौराइत अिछ मानिसक वा शारीिरक संतुिƠ लेल पएरपर ठाढ़ भेलाक बाद माए-बाप İवतंÿ कऽ दैत अिछ एिहनामे के ककरासँ उþम

1 आनंदपुरा, मधेपुरा। Ćारंिभक िशक्षासँ इंटर धिर मुंगेर िजला अंतगर्त रणगांव आ तारापुरमे। ितलकामांझी भागलपुर िवĂिवńालयसँ गिणतमे बी.एस.सी. ( आनसर्)। गुरू जĦभेĂर िवĂिवńालयसँ जनसंचारमे माİटर िडƇी। भारतीय िवńा भवन, नई िदĪलीसँ अंगरेजी पÿकािरतामे İनातकोþर िडĢलोमा। जािमया िमिĪलया इİलािमया, नई िदĪलीसँ जनसंचार आ रचनाĜमक लेखनमे İनातकोþर िडĢलोमा। नेĪसन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कनिģलक्ट िरजोĪयूशन, जािमया िमिलया इİलािमयाक पिहल बैचक छाÿ भs सिटर्िफकेट ĆाĢत। भारतीय िवńा भवनक Ąेंच कोसर्क छाÿ। आकाशवाणी भागलपुरसँ किवता पाठ, पिरचचŭ आिद Ćसािरत। देशक Ćितिơत पÿ-पिÿका सभमे िविभž िवषयपर İवतंÿ लेखन। पÿकािरता कैिरयर- दैिनक भाİकर, इंदौर, रायपुर, िदĪली Ćेस, दैिनक िहंदुİतान, नई िदĪली, फरीदाबाद, अिकंचन भारत, आगरा, देशबंधु, िदĪलीमे। एखन राįƏीय सहारा, नोएडामे विरƠ उपसंपादक।

64 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ई कहैक गप निह अिछ मनसँ सोचैत आĜमासँ जाँचैत िनिĀत करू जे नीक के? मनुख आिक माल।

समाजक ई रूप इहो अिछ एिह समाजक चेहरा िदĪलीक बाटपर बþी लाल भेलापर इंदौरसँ िनजामुĿीन वा पटनासँ िदĪलीक लेल Əेन पकड़बा लेल आ फेर घरक दुआिरपर दİतक दैत देखबामे आबैत अिछ ओ निह तँ पुरूष अिछ आ निह एकटा İÿी भिरसक शारीिरक रूपमे मुदा मन वा अिभनयक İवरूप रहैत अिछ अलग-अलग से से हुनकर की नाम देल जाए

माएक कोिखसँ इहो लेलक जनम भाइ-बिहनक संग पोसाएल-बढ़ल İकूलमे पढाइक सीढ़ी चढ़ल मुदा फारम भरैत काल खसल भारी िबपैत िकएक तँ आपशन छल दू टा İÿी वा पुरूष तखन शुरू भेल हुनकर सामािजक बिहįकार निह घरक रहल निह रहल घाटक पिरिİथित सभकेँ जीयब िसखा दैत छैक से देखबामे आबैत अिछ बाटसँ लऽ कऽ Əेन धिर।

मैिथली पń २००९-१० 65 राजदेव मंडल1 आह िलअ पड़त आह करुणा अथाह बाहर शीतलता िकĠ तु भीतरमे दाह चारुभरसँ घेरलक आह लोक किह रहल वाह-वाह अिछ िवĮ वास छूिब लेब आकाश िकĠ तु पाइर तर अिछ असंख् य लहाश िचिचआइत दास तइयो बढ़ल जा रहल मनक चाह पार लगाउत कोन नाह िबनु लेने आह िक भेिट सकत वाह-वाह परंच, निह छी लापरवाह खोजब नवका राह।

1 िशक्षा- एम.ए.Ņय, एल. एल. बी., पता- Ƈाम-मुसहरिनयाँ, रतनसारा िनकट-िनमर्ली, िजला मधुबनी। Ćकािशत कृित- िहĠदीमे राजदेव िĆयंकरक नामसँ। उपĠयास- िजĠदगी और नाव, िपजरें के पंछी, दरका हुआ दरपन। शीƈ ĆकाĮय- अĦबरा (मैिथली किवता संƇह)

66 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ज्ञानक झंडा अनĠ त अिभलाषा बदिल देलक पिरभाषा आकाश सभ ठाम भरती भऽ गेल िचड़ै चह-चह लोग सह-सह गĠ ध मह-मह अĠ न गह-गह भरल जान-माल टूिट गेल जजर्र जाल ज्ञान आब तोड़ए ताल भागल तंÿ-मंÿ सवर्ÿ चिल रहल यंÿ आब निह चलत अंधिवĮ वासक हथकंडा फहरा रहल िवज्ञानक झंडा चहुँिदश छँिट गेल अĠ हार भऽ रहल जए-जएकार िनत नूतन आिवį कार अपरĦ पार बना रहल धराकेँ İ वगर् सन िकĠ तु कतऽ सँ आनत ओहन जन-मन तइयो लगौने आस कऽ रहल Ćयास निह जािन झंडा आब कतऽ गड़त कोन नव दुिनयाँक खोज करत।

मैिथली पń २००९-१० 67 झाँपल अिİ तĜ व निह जािन किहयासँ चाँपल अिछ हमर अिİ तĜ व एकटा आकृितसँ झाँपल अिछ कखनहुँ काल ओ देखबैत अिछ ÿास बारĦ बार हटेबाक हम कऽ रहल छी Ćयास िकĠ तु ओ निह छोड़ैत अिदबास टकराइत रहैत अिछ हमरा मितसँ िनबŭध अपना गितसँ देखऽ चाहैत छी हम सरुप निह अिछ हुनक कोनहुँ रुप सुनने छलहुँ हम िखİ सामे एहन अनजानकेँ देिख सकैत अिछ शीसामे हम मानैत छी खास ज्ञानेिĠ Ɩयसँ जानैत छी भीतरमे ओ लगा रहल अिछ फानी सुिन रहल छी वƅ-वाणी ĆाĢ त करबाक लेल उĜ कषर् करऽ पड़त आब संघषर् निह तँ बना सकैत अिछ हमरा जोगी िकĠ तु अिİ तĜ वक लेल अिछ ईहो उपयोगी।

68 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रहब अहॴ सभक संग िचिचयाकेँ सोर पाड़ैत हमर कंठ दुखा गेल िपयाससँ जेना ठोर सुखा गेल चारुभर भरल लहाश कऽ रहल अिछ हमर उपहास िकयो निह सुनैत अिछ हमर अबाज कतऽ चिल गेलाह हमर समाज जरुरी छल एिह रुिढ़केँ तोिड़ देब भिवį यक हेतु नव िदशा मोिड़ देब अहाँ सभ तँ अपनिह छी अगाध अƇसर होऊ छोड़ू िववाद निह रोिक सकत कोनो िबČ बाध हम निह कएलहुँ कोनहु बड़का अपराध हेओ एमहर आउ निह िखिसआऊ निह करब आब िनअम भंग निह करब अहाँ सभकेँ तंग िलअ अपन राज निह चाही हमरा ताज निह बदलब आब अपन रंग रहब िमिल जुिल सभक संग।

मैिथली पń २००९-१० 69 नदीक माछ नदीक कोिखसँ उछलल माछ कऽ रहल हवामे नाच याÿा पहरक सगुिनयाँ छोड़ए चाहैत अिछ जलदुिनयाँ देखऽ चाहैत अिछ पवनदुिनयाँ नदीमे रिहतो निह पािब सकल पािनक थाह सूखलमे जएबाक हेतु खोिज रहल राह करऽ चाहैत अिछ समािजक िहत बढ़बऽ चाहैत अिछ नव दुिनयाँसँ Ćीत छोिड़ देत अपन पुरान बास करत आब नव-नव Ćयास खोजत नव-नव चीज नव-नव बीज लाभ होएत आिक हािन जाँचत केहेन अिछ हवा पािन रचत नव इितहास नूतन चास बास परĠतु सुनने छल ओ अपनिह कान कहने रहिथन बूढ़-पुरान ‘‘किहयो निह जाइहेँ ओिह दुिनयाँ ओिहठाम भरल अिछ खुिनयाँ।’’ िकĠतु नव अनुसंधान माँगैत अिछ जीवनदान तखन भेटैत अिछ सĦमान कोिट-कोिटकेँ अž Ćाण मुदा ओ अिछ अभागल जलबूĠद कड़ी अिछ लागल िवफल भेल ओ छल बलमे पुनः खसल ओिह नदीक जलमे तńिप बारĦबार कऽ रहल Ćयास İपशर्क हेतु मुक्ताकाश छोिड़ देने अिछ मोह एिह जलक कऽ रहल कमर् िचĠता निह फलक।

70 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) बाट-बटोही जाएब ओिह पार खसौने घाड़ पुरान पहाड़ बिरसोसँ अिछ ठाढ़ हमरा मागर्केँ कएने अवरुŀ हड़पल भेल ƅुŀ कतेको लगेलहुँ बाँिहक जोर दुखा रहल अिछ पोर-पोर इंच भिर निह भेल टसमस भऽ गेलहुँ हम बेबस निह िकयो दऽ रहल अिछ साथ पहाड़ीपर पटकब आब माथ डूबा देबैक हम खूनसँ अपना घामक बूनसँ िवफल भेल छी देह जजर्र पाछाँ सुनैत छी असंख्य İवर İÿी-पुरुष, बाल अबाल आिब रहल अिछ तोड़ैत ताल गािब रहल अिछ समूह गान पुनः आएल शरीरमे जान मनमे उठए लागल उफान कतऽ गेल ओ पहाड़ी काँटसँ भरल झाड़ी आिह रौ तोरी ई कोन बात गिड़ गेल भूिम आिक भािग गेल कात आिक नभमे उड़ा देलक बसात मागर् भऽ गेल तĜक्षण समतल चल-चल चल-चल जय हो जनबल तािक रहल अिछ बटोहीकेँ बाट निह िकयो लगा सकैत अिछ टाट।

मैिथली पń २००९-१० 71 सीमा परक झूला ई जजर्र झूला लगैत अिछ जेना तुला सीमापर लटकल अिछ पुरान डािरपर अटकल अिछ पेंगापर झूिल रहल छी आब İवयंकेँ िबसिर रहल छी अिĠतम छोरसँ अपन बाँिहक जोरसँ लगा रहल छी आस निह छी िनराश आस-पास Ćभातक उजास कखनहुँ एिहपार कखनहुँ ओिहपार बारĦबार दोहराबैत छी कायर् Ĥयापार कट-कट-कट-कट टूिट रहल डािर दैत गािर तइयो सĦहािर धरतीसँ नाता जुिट रहल अिछ गाछसँ झूला छूिट रहल अिछ एĦहर आिक ओĦहर खसब रहब İवछĠद आिक जालमे फँसब जीएब वा मरब फेर िकएक डरब चाहे खसब एिहपार चाहे खसब ओिहपार रहत इएह धरती इएह भाव आर िवचार सुख हो वा दुख रहब अĠततः मनुक्ख।

72 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) चीड़ीक जाित धायल पाँिख पर लटकल लहाश लऽ कऽ पहुँचल नीड़क पास ओ जे ओकर निह िकĠतु ओकरे छल लहू सँ भीजल तन कण-कण सशंिकत अिछ चीड़ीक मन तइयो मातृĜव िसनेह िपयाबए चाहैत अिछ िखयाबए चाहैत अिछ लोलमे राखल अहराक दाना अनजान बच्चा गािब रहल गाना पाछू लागल िशकारी बनल अिछ अिधकारी जेकरा भूखल आँिखमे तरजू अिछ लटकल İवादक बैटखारा अिछ मनमे अटकल एकटा पलड़ामे Ćौढ़गात दोसरमे अिछ नवजात घायल देह टुटैत नेह टप-टप चुबैत खूनक बूनसँ धरती भऽ रहल İनात पूिछ रहल अिछ िचड़ै अपना मनसँ ई बात आबऽ बाला ई कारी आ भारी राित िक निह बाँचत हमर जाित...?

मैिथली पń २००९-१० 73 शेफािलका वमार्1 बाजी ई हमर देश थीक एिहठाम मानव की मानवकेँ चीिĠह सकल? तरहĜथीपर टघरैत पारा सन मानवक मोन िİथरता निह।

आदमीक जंगल बिढ़ रहल गाछ बृच्छ किट रहल कोनो बाट घाट, कोनो राह हाट मिĠदर मिİजद गुरुŅारा वा चचर्क हो वोसारा भीड़क अĠत निह... की पएरे की िरक्शा की कार की İकूटर तरहक सवारीपर भगैत उजिहया चढ़ल मानवक अĠत निह... ई िदशाहीन भीड़: भूत भिवįयक िचĠता निह वतर्मानसँ संतुƠो निह भािग रहल िनरĠतर भािग रहल जन Ćवाह... संवेदना िततीक्षा निह भेटत शĤदकोशोमे जĪदी मानवक आवĮयक आवĮयकता सन शĤदकोशो आकार पािब रहल

1 जĠम:९ अगİत, १९४३,जĠम İथान : बंगाली टोला, भागलपुर । िशक्षा: एम.ए., पी- एच.डी. (पटना िवĂिवńालय), ए. एन. कालेज मे िहĠदीक Ćाğयािपका (अवकाश ĤाƯ)। Ćकािशत रचना: झहरैत नोर, िबजुकैत ठोर। नारी मनक ƇिĠथकेँ खोिल करुण रससँ भरल अिधकतर रचना। Ćकािशत कृित :िवĆलĤधा (किवता संƇह), İमृित रेखा (संİमरण संƇह), एकटा आकाश ( कथा संƇह), यायावरी ( याÿा-वृþाĠत), भावाĽिल ( काĭयĆगीत)। ठहरे हुए पल (िहĠदी) ।

74 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िनरथर्क शĤद संसारक Ćयोजने की? कागदोक दाम तँ बिढ़ गेल पÿ-पिÿका छापत कोना Ćदूषणक हल होएत कोना जे एकटा गाछ रोपल जाइत अिछ तँ सए नेना जनम लए लैत अिछ ऑक्सीजन पाओत कþऽ मेिनंजाइिटस एƂस İपॲडीलाइिटस सन अनिचĠहार बीमारी लोककेँ मारए लागल एतबिह निह दहेजक बढ़ैत रोग बेटीक बापकेँ ढाहए लागल ओ िदन दूर निह अिछ जखन मानव मानवकेँ मािर खाए लागत आ एकटा Ćķ तखनो समİया बनल रिह जाइत अिछ मानवक बेशी वृिŀ की महगी क..? बाजी दुनूमे लागल अिछ के कतेक आगू केकर कतेक जोर...???? राम कतए चिल गेल...

अनबुĔहल अंतिरक्षसँ अकाससँ अĠतरक उजाससँ İवरपर İवर आिब रहल अिछ कानमे गूंिज रहल अिछ................ हम अहाँकेँ देखने छी मुĠहािर संझाक रुसल बेिरयामे .. जखन अĠहार िकरणक छातीसँ Ćकाश मचोिर िपबैत अिछ अिधककाल अहाँकेँ देखने छी गुĔज गुĔज अĠधकारमे इजोतक िनमŭण करैत

मैिथली पń २००९-१० 75 हतास िनरास मानवकेँ जीवनक वरदान दैत : अहाँक अंतमर्न अबाध लेखनी िथक अनकहल पिरभाषाकेँ जािहसँ आकार भेटल शĤदकेँ अथर् भेटल İवĨक िसनेह भेटल तैयो अहाँकेँ बुझबाक Ćयė केओ निह केलिन Ĝयागमयी बिन पीिब रहल छी िवष बाँिट रहल छी अमृत अहाँ शांितिĆय शांितिĆय

Ćसंग चाहे जे होइ सĦबĠधक सीमामे िसनेह निह İवाथर् बसैत अिछ, मानवक भेखमे राम निह रावण घुमैत अिछ ... İवाथर्पर जोड़ल संबंधक देवारक Ģलाİटर झिर जाइत छैक िवĂासक कांच रंग कालक रौदमे उिड़ जाइत छैक .... रंगहीन गंधहीन िनजŰव िरİताक लहासकेँ ƅॲस जकाँ अपन काĠहपर उठेनाइ अनुिचतमे अपन उिचतकेँ मारनाइ ई पिरभाषा िरĮता नाताक खूब अिछ ...........

नाम केओ लाख रािख लैक राम सन राजा लक्षमण सन ƚाता सुƇीव सन दोİत निह तँ भेल अिछ आ निह तँ होएत हंह ...

76 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सीता मौन मूक भए अिग्नपरीक्षामे जरबाक परĦपराक जĠम देलिĠह आ तैं सीता आइयो जिर रहल अिछ Ćसंग चाहे जे होए ..............

वचनक मास अहाँक वचन हम आएब हमर आँचरमे इĠƖधनुष उतरल सतरंगी भावनामे मोनक रस रूप पसरल आ क्षणपर क्षण कपूर जकाँ उड़ैत रहल कैलेंडरक पžा फाटैत रहल वचनक ओ मास किहयो निह आएल किहयो निह आएल जरैत िसगरेट जकाँ मोन हमर दहैत रहल कामना छाउर बनैत रहल मृĜयुक महक पसरैत रहल वचनक ओ मास किहयो निह आएल किहयो निह आएल............

मैिथली पń २००९-१० 77 महाकान्त ठाकु र1 की चाहलौं मुिक्त चाहएबला लेल जेल ऐ धरतीकेँ जेल बना देल गेल ऐ कहाँ चाहलौं हमर जĠम हुअय? छुच्छे भूख िपयास अकाल देखल जननीक आँिखमे घुमरैत हाहाकार देखल िठठुरैत पूसमे कहाँ चाहलॱ हमर जĠम हुअए? सदŰ गमŰ वİÿहीन सहल नेžाने नेनपन बूझल İवान तुĪय जीवन लेल कहाँ चाहलॱ हमर जĠम हुअए? देश जँ डकैत लेेल शांित ऐ लठैत लेल भूखसँ ऐंठल कोिखसँ कहाँहा चाहलॱ हमर जĠम हुअए? कहू कतए भूल ऐ? पापक की मूल ऐ? ƚूण हĜयाक सुिवधा छल कहाँ कहलॱ हमर जĠम हुअए? नंगटे तँ सभ छलॱ कहाँ िकयो मदर् भेलॱ नपुंसक संसारमे कहाँ चाहलॱ हमर जĠम हुअय? सƛाट कहए शांत रहू भले कते क्लांत बहू आĜमघाती बम बनए लेल कहाँ चाहलौं हमर जĠम हुअय? सूयर् सन इजोत होएत कमर् िनĜय कƠ घोएत देवतोसँ āेơ नर तेँ चाहलॱ हमर जĠम हुअए!!

1 जĠम भूिम- बाबू पाली (पाली मोहन), खजौली, मधुबनी, िमिथला। Ćकाशन- धरती आ चान (बाल सािहĜय), केहन İवगर् (काĭय संƇह) आ अनेको पÿ पिÿकामे किवता, कथा तथा िनबंध Ćकािशत।

78 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) उदारीकरण हाथमे कटोरी ऐ मौनी चंगेरी चंगेरा ऐ िवĂबैंक संग अमेिरका मुिसआइए भूतपूवर् जगत गुरु थोड़बो ने लजाइए। आर माँगू आर माँगू जे जे फूड़ाइए। जी आठ देशक ितजौरी फूजल ऐ लीअ उधार बीकए िदयौ नालको बालको बैंक बीमा कंपनी गैस तेल भंडार नदी पुल पहाड़ सािकन होबए धिर खाइत रहू उधार। हरीशचĠƖक वंशजकेँ राज पाट घुमा देत महािधपित अमेिरका İटार वारक बाद।

मैिथली पń २००९-१० 79 स्व. कालीकांत झा "बुच" (१९३४-२००९)1 िवरिक्त क्षण भंगुर संसार सजिन गय एिह ठाँ दुःखक पहाड़ भरल अिछ, नोरक िनरझर धार सजिन गय उमड़ल बनल दहाड़ चलल अिछ । बचा सकब कहू कोना आनकेँ, हम तँ अपने डूिम रहल छी । हँसा सकब कहू कोना आनकेँ, िसंगड़हार भऽ चूिब रहल छी । सजिन गय िहİसक सागर खार बनल अिछ, नोरक........।

मृगी जकाँ हम काँिप रहल छी, झाँखुरसँ तन झाँॅिप रहल छी। देिख-देिख संधान सायकक, आयुक छाँटी मािप रहल छी। करब कोना पथपार सजिन गय ठाम-ठाम सौतार भरल अिछ, नोरक .....।।

िवरहक शूĠय सुदूर देशमे, िदवसक किठन करेज जड़ल अिछ। रजनी अिछ जोिगनीक वेषमे, आंचर तर लुþी पसरल अिछ। िचर-िवयोगक भार सजिन गय लऽ कऽ कहार चलल अिछ, नोरक ....।। िवशेष:- İव. किव एिह किवताक रचना सन् १९९० ई. मे अĢपन अधŭंिगनीक मृĜयुक िवयोगमे कएलिन ।

1 िहनक जĠम, महान दाशर्िनक उदयनाचायर्क कमर्भूिम समİतीपुर िजलाक किरयन Ƈाममे १९३४ ई. मे भेलिन। िपता İव. पंिडत राजिकशोर झा गामक मğय िवńालयक Ćथम Ćधानाğयापक छलाह। माता İव. कला देवी गृिहणी छलीह। अंतरİनातक समİतीपुर काॅलेज, समİतीपुरसँ कएलाक पĀात िबहार सरकारक Ćखंड कमर्चारीक रूपमे सेवा Ćारंभ कएलिन । बालिहं कालसँ किवता लेखनमे िवशेष रूिच छल। मैिथली पिÿका िमिथला िमिहर, मािट- पािन, भाखा आ मैिथली अकादमी, पटना Ņारा Ćकािशत पिÿकामे समए- समयपर िहनक रचना Ćकािशत होइत रहलिन। जीवनक िविवध िवधाकेँ अपन किवता आ गीतमे Ćİतुत केलिन। सािहĜय अकादमी िदĪली Ņारा Ćकािशत मैिथली कथाक इितहास (संपादक डा. बासुकीनाथ झा) मे हाİय कथाकारक सूचीमे डा. िवńापित झा िहनक रचना ‘‘धमर् शाİÿाचायर्"क उĪलेख कएलिन । मैिथली अकादमी पटना एवं िमिथला िमिहर Ņारा समय-समयपर िहनका Ćशंसा पÿ पठाओल जाइत छल। āृंगार रस एवं हाİय रसक संग-संग िवचारमूलक किवताक रचना सेहो कयलिन। डाॅ. दुगŭनाथ झा āीश संकिलत मैिथली सािहĜयक इितहासमे किवक रूपमे िहनक उĪलेख कएल गेल अिछ।

80 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) पोताक अŇहास

पोता - खेत टी खिरहान टी आंगन टी दलान टी बाबा आब अहॴक कानमे, िटटही टहकै टी टी टी।।

बाबा - Ģयाली पी भिर चुĸा पी, घट घट पी सूरूĸा पी, रौ कुलबोरन गाम िघनौले, लाते, जुþा, मुĸा पी।।

पोता - लþी कू बा झĤबा कू, अĤबा कू बा बĤबा कू, आगाँ पाछाँ डोरा डोिरमे डोलए दू-दू िडĤबा कू।।

बाबा - जऽर छू जमौरा छू, नीपल पोतल दौरा छू, मुितते घऽरक सीरा चढ़ले, हिगते तुलसी चौड़ा छू ।।

पोता - लोक कहैए बाटोपर सँ, टीली लीली फņ औ भेल अहाँकेँॅ खाटोपर उतरब दुरू घņ औ

आब अहाँसँ डऽर कथी केल कतबो हुआ हुआ भूकू हुआ-हुआ की - की हुआ, मांगय िवधकरी नूआ, मैया-धीया साड़ी चाही पुरिहतकेँ धोती धूआ काँच बाँॅसक नऽव पालकी आबए चािर कहिरया जू, काशी ...........।

मैिथली पń २००९-१० 81 बाबा - कूिथ-कूिथ कठगील उगै छी, देखे टन दऽ चिल जेबे तोरे हम बरखी कऽ देबौ हमर āाŀ तोँ की करबैं सभ अपना नेनाकेँॅ बरजू चेता दैत छी औ बाबू जऽर छू ............................................ ।।

दीनक नेना देखहॴ रौ बौआ, ई कौआ गबै छौ। सुनहॴ रौ तोरे, कुचिर सुनबै छौ।।

एĦहर तोँॅ सूतल छेँ माँझे ओसारपर, ओĦहर ओ नाँॅचै पुबिरया मोहारपर, पुरबा बसात बँसुरी बजबै छौ............... । सुनहॴ रौ ...............।। तोरा लय बनलौ ने िबİकुट आ चाॅकलेट, नोनो रोटीसँ ने भरतौ ई गोल पेट, बातक मधुर İवरलहरी अबै छौ................. । सुनहॴ रौ ...............।।

बापे तोहर बनलौ परदेशी, िचŇी ने एलौ भेलौ िदन बेशी, माँक िननायल ĭयथा जगबै छौ । सुनही रौ ............।।

की बुझबेॅं ककरा कहै छै गरीबी, सपनोमे सुख निहं जतऽ āमजीवी, लुþी लगा कऽ नगर बसवै छौ ......... । सुनहॴ रौ .............।।

कोरामे तोरा सुताबै छौ िबिनयाँॅ झटकल औ अिबहेँ रौ, नूनूक िनिनयाँ, तोहर उपास हमरा लजबै छौ, सुनहॴ रौ ..............।।

82 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मनीष ठाकु र िवरह गीत चेहरापर पइन छिĠह, आँिखक झील सन गहराइमे, िकछु तँ जरूर छिĠह, िवरहक पीर छिĠह, वेदना गंभीर छिĠह İपƠतः हुनकर आँिख, केकरो Ćतीक्षामे, अतीव अधीर छिĠह, चेहरापर उदासीक İपƠ कइक िचĠह छिĠह िकĠतु निह, ई तँ कोनो आम वेदनासँ पूणर्तया िभž छिĠह, साड़ी छिĠह अİत ĭयİत देिखयौ तँ ! ओहो ĭयİत, बैसल छिथ िचĠतनमे; गहींर कोनो सोचमे अपने ओ डूबल छिथ। बात मुदा कहत के? िकएक ओ मौन छिथ? मोनमे िवचारक ई, केहेन छिĠह सतत Ćवाह? लगैए ƙŌॲ निह, पािब सकता मनक थाह के छिथ? कतए के? कोन गामसँ आएल छिथ? मिĠदरक आंगनमे, एिह पिवÿ Ćांगणमे, भगवानक पूजा लेल उńत की बैसल छिथ? िदĭय रूप शोिभत ई रमणी जे बैसल छिथ, देव पूजा हुनकर तँ, माÿ एकटा बहžा छिĠह। मिĠदरमे आबए के, अāुकेँ बहाबए के, िĆयतम जे हुनकर परदेस जा कऽ बैसल छिथ, भगवानक नामपर हुनका बजाबए के बैसल ओ सोचै छिथ- िĆयतमक गप सभ, पूछै छिथ मने मन- “हमरा बतिबयौ ने- सजा ई केहेन ऐह? िकएक ई िवरिक्त ऐह, दाĦपĜय जीवन सँ ? अपन एिह दासीकेँ िकएक िबसरने छी?” िकछो निह भेटै छिĠह, हुनका जबाब कतहु। ई सभ तँ गĢप मुदा मनक भुलाबा छै, माÿ बहलावा छै। मेनको तँ िजनकर सौĠदयर्सँ जरै छिथ, पारलौिकक सुĠदिरकेँ, छोिडकेँ बैसल ओ- केहेन मनुख छिथ, िनदर्य आ िनơुर छिथ। पैसा कमाबए ले, Ćितơा पाबए ले, जे िकछु काज संभव छिĠह, करए लेल आतुर छिथ।

मैिथली पń २००९-१० 83 िकĠतु ओ ई िबसरल छिथ जे- पėी आ अपन सुपुÿ, हुनकेपर िनभर्र छिथ। मात िपताक Ćित हुनक कतर्ĭय की? माÿ अिधकारे टा! हुनकर मĠतĭय छिĠह!! मानल अपन भिवįय, हुनके बनेबाक छिĠह Ćितơा जे पएबाक छिĠह- मेहनित जरूरी छै। अपने छिथ दूर मुदा िदलसँ िकएक दूरी छै। हुनक एहीमे मान, यैह माÿ छै िनदान- पैसा रहए गुलाम; इंसां तँ मािलक छै- भौितक सभ वİतुक। भौितकता इंसांपर, शासन जे करतै तँ ई तँ हेबाके छै, भौितकता हंसैत छै, मानवता कनै छै।

चन्ġकान्त िमĮ 1 जागु-जागु मैिथल कुĦभकणŰ नीž तोड़ु, आपसमे आपक्ता जोड़ु। साधनहीन जजर्र समाजमे, िवकाशक नव मĠÿ फूँकू।। आबो बदलू अपन िमजाज। जागु-जागु मैिथल समाज।। कतए गेल शान िमिथलाक? कतए गेल दूधक बहैत धार? सोना उगलैत मािट कतए गेल, कतए गेल ओ बात-िवचार? बुझु आइ एकर राज। जागु-जागु मैिथल समाज।।

1 जĠम-३०.१२.१९६८ िपता- āी जनादर्न िमā, Ƈाम-महथौर गोठ, पो-महादेवमठ, थाना- अĠधामठ, िजला-मधुबनी।

84 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सभटा िवकास मंÿीजीक घरमे। बाँचल लोक हकž कनै अए। एयर कंडीशनक नाम सुनै छी, रौदमे केहेन देह जड़ै अए।। सुखायल सोिणत करब कोन काज। जागु-जागु मैिथल समाज।। टूटल सड़क अĠहार गाम, भेटय निह ककरो कोनो काम। मुलूक छोिड़ भागए पड़ल, एलहुँ बड़ दूर आन ठाम।। रक्षक पिहरने छिथ भक्षकक ताज। जागु-जागु मैिथल समाज।। चारा खाइ छिथ तेल िपबै छिथ, अलकतरासँ मॲछ टेरै छिथ। सबहक िहİसा खएबाक िखİसा, मंÿीजी क्षणिहमे गढ़ै छिथ। शमर् बेचलिथ बेचलिथ लाज। जागु-जागु मैिथल समाज।। मैिथल आइ उपेिक्षत बनलिथ, िमिथलाक अिछ हाल-बेहाल। भासए हेंजक हेज माल-जाल।। मंÿी करिथ तइयो पाउज। जागु-जागु मैिथल समाज।।

मैिथली पń २००९-१० 85 कु सुम ठाकु र चुल बुली कĠया बिन गेलहुँ िबसरल छलहुँ हम कतेक बिरस सँ, अपन सभ अरमान आ सपना। कोना लोक हँसए कोना हँसाबए, आ िक हँसीमे सािमल होमए। आइ अनचोĸे अपन बदलल, İवभाव देिख हम İवयं अचंिभत। िदन भिर हम सोिचते रिह गेलहुँ, मुदा जवाब हमरा निह भेटल। एक िदन हम छलहुँ हेराएल, ğयान कतए छल से निह जािन। अकİमात मोन भेल ĆफुिĪलत, सोिच आएल हमर मुँहपर मुİकी। हम बुिझ गेलहुँ आजु िकएक, हमर İवभाव एतेक बदिल गेल। िकĠकहुपर िवĂास एतेक जे, फेर सँ चंचल, चुलबुली कĠया बिन गेलहुँ।। अिभलाषा अिभलाषा छल हमर एक, किरतॱह हम िधयासँ İनेह । हुनक नखरा पूरा करैमे, रिहतॱह हम तĜपर सिदखन। सोचैत छलहुँ हम िदन राित, की पिरछब जमाय लगाएब सचार। धीया तँ होइत छिथ नैहरक āृंगार, हँसैत धीया कनैत देखब हम कोना। कोना िनहारब हम सून घर, बाट ताकब हम कोना पाबिन िदन। सोचैत छलहुँ जे सभ सपना अिछ, ओ सभ आजु पूरा भs गेल। घरमे आिब तँ गेलीह धीया, िबदा निह केलहुँ, निञ सुž अिछ घर । एक माÿ कमी रिह गेल, सचार लगायल निहये भेल।।

86 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िशव कु मार झा ÔÔिटल्लू”1 चĮ माक बोखार सोलहममे कएल अंतःİ थ Ćवेश, हुलसल मन गेलहुँ नवल देश । िहय बसिथ कला । धयलहुँ िवज्ञान, राखल जननी इच् छाक मान । वैń अंगरेिजया बिन बचाबू दीनक परान, अथर्हीन िमिथलामे बढ़त शान। धऽ ğ यान सुनल सृिį टक इच् छा, गाँठ बािĠ ह लेलहुँ लऽ गुरूदीक्षा। कॉलेजमे बीतल पिहल सÿ, आओल तातक आदेश पÿ। पिढ़ते आबू अहाँ अपन गाम, हएत Ĕ येį ठक िववाह िवńापित धाम तन झमिक गेल, मन गेल मुदिक भौजीकेँ देखबिन हम हुलिक । आगत रिव पहुँचल जनम Ƈाम, शत अĥ यागत छिथ ताम-झाम । चहु - िदिश भऽ रहल चहल पहल, िचĠ ह-अनिचĠ ह सखासँ भरल महल। एक नव नौतािर बहुआयामी, पूछलसँ छिथ छोटकी मामी । Ćथमिह हुनकासँ भेंट भेल, भेल दुनू गोटेमे क्षणिह मेल। साँझे औतीह दीदी अिनता, आकुल माँक एक माÿ विनता । देिखते देखैत आिब गेल साँझ, माँ तिकते बाट ओसार माँझ ।

1 िपताक नाम ः İव. काली काĠत झा ‘‘बूच”, माताक नामः İव. चĠƖकला देवी, जĠम ितिथः ११.१२.१९७३ िशक्षाः İनातक ( Ćितơा)। जĠम İथानः मातृकः मालीपुर मोड़तर, िज.- बेगूसराय, मूलƇामः पÿालय-किरयन, िजला-समİतीपुर, िपन: ८४८१०१ अĠय गितिविधः वषर् १९९६सँ वषर् २००२ धिर धिर िवńापित पिरषद समİतीपुरक सांİकृितक गितविध एवं मैिथलीक Ćचार-Ćसार हेतु डाॅ. नरेश कुमार िवकल आ āी उदय नारायण चौधरी (राįƏपित पुरİकार ĆाĢत िशक्षक) क नेतृĜवमे संलग्न।

मैिथली पń २००९-१० 87 दीदी आंगन आयिल हँिसते हँसैत माँ गऽर लगौलिन ठोिह कनैत । दीदीक नयन हेरायल िरमलेसमे, देिख मामी पड़ली पेशोपेसमे। चĮ मामे सुĠ नर दाइक िवभा, बिढ़ रहल िहनक नयनक शोभा । मामी! ई सऽख निह आँिखक इलाज, माथ ददर्सँ छल बािधत सभ काज। सुिन मामी मोन भऽ गेल अलिसत, हुनक वाम आँिखमे पीड़ा अतुिलत । नोिचते नोचैत भेल नयन लाल, ददर् पसिर रहल सĦ पूणर् भाल। आंगन दलान पीड़ा िकĪ लोल, आँिख धोलिन लऽ जल डोले डोल। फूिल गेल नयनक अधर पल, हम सेकलहुँ लऽ गुलाब जल। वैńो आयल निह कोनो असिर, कछमछ कऽ रहली- रहली कुहिर। मा तेँ कयलिन बाबूजीक ğ यानाकषर्ण, आँगनमे आिब ओ दऽ रहला भाषण। सभ दोष सारक निह दैछ ğ यान, वयस तीस मुदा एखनहुँ अज्ञान। रक् त जमल िवलोचन िझĪ लीमे, सैिनक कंत पड़ल छिथ िदĪ लीमे। सरहोिजसँ पुछलिन पीड़ाक काल, पिहल बेर भेल छल परूकाँ साल। माँसँ कहलिन लाउ नव अंगा, िहनका लऽ जायब दिड़भंगा । ितरİ कार करब निह हएत उिचत, किनया दरदसँ अित िवहुँिसत । कािĪ ह अिछ िववाह अहाँ जुिन जाऊ, करैत छी उपाय निह घबराऊ भोरे ‘िटĪ लू' जेता िहनक संग, निह िववाहमे कऽ सकलाह हुड़दंग । भातृक सासुर जेता चतुथŰमे, मातृ आदेश लागल हम अथŰमे। निह बात काटल शांत छलहुँ सुनैत,

88 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) राित िबतल सुजनीमे किनते कनैत। कोन बदला लेलक बापक सार, अपन संकट बाĠ हल हमरा कपार। मामीकेँ हम निह चीिĠ ह सकलहुँ, भीतरसँ इĠ होर ऊपर शीतल । निह जा सकलहुँ हम बिरयाती, गाबै छी हुनक दुःखक पाँती, भोरे उिठ दिड़भंगा जा रहलहुँ, नैनक शोिणतसँ नहा रहलहुँ। पहुँचल डॉक् टर िमिसरक िक् लिनक, चक्षुक िचिकĜ सक सभसँ नीक दुआरे पर कĦ पाउĠ डर नाम पुछल, मामी नुपूर कहिन ओ कुकुर िलखल। देखऽ मे भल पर वƌ बहीर, उपिर मन हँसल, भीतर अधीर । वैń िमिसर कहल निह दृिį ट दोष दुहू आँिखये देखै छिथ कोसे- कोस। नेÿक आगाँ निह अिछ अĠ हार िहनका लागल चĮ माक बोखार । हम िलिख दैत छी शूĠ य ग् लास, बुझा िदऔन िहनक िरमलेशक Ģ यास। ताहूसँ जॱ निह हेती नीक, आँिख सेकू बिन İ नेही बिनक, अधरपर मुİ की आगाँ अĠ हार, कानल मन सोिच िववाहक मĪ हार। डॉक् टर बनक तृį णा मनसँ भागल, एहेन मरीज भेटत तँ हएब पागल। धुिर गाम माताकेँ करब नमन, तोड़ू जननी हमरासँ लेल वचन । चशिमश नैन मामी छिथ अित गदरल, हमर योजना िहनक भभटपनमे उड़ल ।

मैिथली पń २००९-१० 89 िहंसक नानी खापिड़ बेलनाक कहानी, आब निह दोहराबू अय नानी ।। नाना बनल छिथ िसयार, भक छिथ जेना हुलुक िबलार, दंतक गणना घिट कऽ बीस हुरिथ गूड़ – चूड़ाकेँॅ पीस गाबिथ दारा दरद जमानी । आब..........।। वरनक बखर् भेल चालीस, अिपर्त अहँक चरणमे शीश, अहाँ लेल लबलब दूध िगलास, नोर पीिब अपन बुझाबिथ ÿास, क्षमा करू ! छोड़ू आब गुमानी । आब............।। अवकाशक बीित गेल दस साल, पेंशनसँ आनिथ सेब रसाल, भिर िदन पान अहाँक गाल ऊपरसँ मचा रहल छी ताल, चमेलीसँ भीजल अिछ चानी आब.............।।

कतेक िदन सुनता िपतृ उगाही, संतित पूिर गेलिन दू गाही, मामा मामीक िबहुँॅसल ठोर, माँ छिथ, चुĢप! साधने नोर, कोना बिन जेता आĜम बिलदानी आब..............।।

90 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कोप भवनमे किनयाँ रूसिल िकए सूतिल छी बनबू ने कनेक चाह अय । िमिथला हम चललहुँ, टाटानगरीसँ आइ अय।। अहाँ जौं एना रहब तँ हम कोना जीअब, सिदखन किनते-किनते ĭयथे जहर पीअब । एना अहाँॅ रूसब तँ हम कऽ लेब दोसर सगाइ अय, िमिथला ...........।।

अहाँक रूप देिखते कामदेवो कानैत छिथ, ‘‘मृगनयनी‘‘ केॅ ओ उवर्शी मानैत छिथ । िबहुँसल मादक घुघना लागै लॱिगया िमरचाइ अय, िमिथला ..............।।

छगनलाल Ĕवेलरीसँ कनकहार लायब, आ जुरैन पूनमकेँॅ, पाकर्मे घुमाएब। हहरल मनक तृįणा, निह बनू हरजाइ अय, िमिथला ............।।

ऊठू िĆये, अहाँॅ जĪदी नहाबू, कोप भवनसँ उिठ कऽ लगमे आबू । मंदिह मुİकी मारू , हम अनलहुँॅ अिछ मलाइ अय, िमिथला ...........।।

मैिथली पń २००९-१० 91 Ćेयसीक िवलाप लागै बरखा इĠहोर, मारै बएसक जोर, िमलनक आशामे बैसिल- छी आबू ने चकोर ।

बाटे तँ तिकते तिकते, नयन सूिख गेलै, Ćेयसीक िवलापपर निह अहाँक ğयान एलै ।

ठनका गजर्य मांचल शोर, ितरिपत नृĜय मोरनी मोर । िमलनक आशामे बैसिल,- छी आबू ने चकोर। बेददŰ जुिन बनू, मोन टूिट गेलै। पावसक शीतलता- आतĢत भेलै।

लुĢत भगजोिगनी दशर्ए भोर, लटकल मेघ गगन घनघोर, िकएक हृदय तोिड़ रहलहुँॅ । हा ! हĦमर मन िचत चोर ।

92 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) धमȶन्ġ िवƾल ƙĦıबाबाक अवसान सरधुवा जोिनडाहा जािन ने कतऽसँ फेर आिब गेल लािठ टेिक चलैत एकटा वृŀाक मूहसँ अİफूटरुपेँ िकछु अक्षरक उच्चारण भेलै कहुना सही हम अपना मोने जीबैत तँ छलौं मुदा, मुदा ई जोिनडाहा ओकर मूह अनायास बĠद भऽ गेलै, ओ वृŀा जे पागिल घोषणा कऽ देल गेल छिल ƙĦहकथानक िडहवारक पँजरा ओकर आāय बनल छल सभ िकछु नƠ भऽ गेल आब ई ƙĦहोल बाबा रहताह िक निह ? ओकर मूहक बनैत िबगडैत आकृितसँ ओकर िचĠताबक पराकाơाक अनुमान कएल जा सकैत अिछ एखन धिर तँ ƙĦıबाबा जीिवत छिथ आब रहताह िक निह ? वृŀाक आँिख घोकचैत जा रहल छै ।

ओकरासभक अĠत होबाक चाही कािŎधिर उजाड रहल गाछमे छोट छोट पĪलव सभ अंकुिरत भेल अिछ ओ सभ तोहर अनुमितए िबना अंकुिरत भऽ गेल

मैिथली पń २००९-१० 93 आब सॱसे गाछ पसिर रहल अिछ ओ सभ सामĠत अिछ सामĠतक अĠत करबाक चाही सभ गाछकेँ जिड़सँ कािट देबाक चाही । नदी सभमे वषŸसँ पािन बिह रहल अिछ बहैत बहैत एक ठामसँ दोसर ठाम जाइत अिछ ओ सभ तोहर अनुमितए िबना बहैत अिछ ओ सभ साƛाĔयवादी अिछ साƛाĔयवादीक अĠत करबाक चाही सभ नदीक जलĆवाहकेँ रोिक देबाक चाही । चहुिदसक वातावरण बयारयुक्त अिछ बयारो अनेरे बहैत अिछ एकर कोनो सीमा निह छैक कतहुसँ कतहु पहुँिच जाइए ओ सभ तोहर अनुमितए िबना बहैत अिछ ओ सभ िवİतारवादी अिछ िवİतारवादीक समूल नƠ होएबाक चाही बयारकेँ बहबासँ रोकबाक चाही। ओ सभ साँच बजैए ओकरा सभकेँ झूठ बाजऽ निह अबै छै जे देखैए से कहैए ओ सभ तोहर अनुमितए िबना िनरĠतर बिजते जा रहल अिछ ओ सभ युगिवरोधी अिछ युगिवरोधी सभक अĠत करबाक चाही ओकरा सभकेँ बजबासँ रोकबाक चाही ओकरा सभकेँ सभ िदनक लेल चुप कऽ देल जेबाक चाही ।

94 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रघुनाथ मुिखया1 अनुþिरत Ćķ सहोदर अणर्वानĠद आ ĆणवानĠदक मघ्य बैसिल हमर अपूणų िÿवेषų तनया मैिथली एकलĭया İवतंÿता संƇामक इितहास उलटेबामे मग्न भेल गांधी, ितलक, लोिहया, सुभाषक फोटो सभपर तजर्नी रािख पुछैत गेिल पĢपा ई के िछऐ? हम कहैत गेलॱ- ‘बबा!’ फेर पžा उनिट गेल आब मैिथलीक समक्ष भेल रहै जनरल ओडारक ओ िवकराल िचÿ जकरा देिखतिह हमरा यािद पिड़ गेल छल देबालसँ घेरल मैदानक एक माÿ िनकास Ņारपर सँ िनहĜथापर तोपसँ चलाओल गेल १४५० राउěड गोली तावत मैिथली अपन तनल भृकुटी संग Ćķ दािग देलक पĢपा ई के हेतै ? आ हम अबाक एिह बेर ई निह किह सकलहुँ जे इहो तोहर बĤबे हेतऽ। हम सकदĦमे रही मुदा मैिथली हमरासँ आँिख िभरेने तावत मैिथलीक नजिर घरमे दंड िखचैत मूसरीपर पिड़ गेल

1 नेने बासा, Ƈा. पो.- बलहा, वाया- सुखपुर, िजला-सुपौल, िपन कोड- ८५२५३०

मैिथली पń २००९-१० 95 फँसल पžो उलिट गेल Ćķो बदिल गेल आ हमरो िपěड छुटल नेनाक अनुþिरत Ćķसँ

किवताक शीषर्क जकाँ एिह मािटपर जतऽ किहयो सुग्गा पढ़ैत छल वेद बुिझ पड़ल जे गागŰ कोना तैयार भेल हेतीह िवƖोहक लेल। भारती कोनो मसĪला िपसलिन धुरंधर सĠयासीक छातीपर तकर चचŭ एखनहुँ होइत अिछ मिहषीक मािटपर एखनहुँ चचŭ होइत छैक जे सहुआक फेरमे िसबरानी कोना ĆेमचĠदकेँ मािर देलिन आ भारती कोना शंकराचायर्केँ पराİत कऽ मंडन िमāकेँ तािर देलिन आ से एकटा अचरज देिखयौ जे भारतीक परािजत हेबाक कोन धूजा पुरातĜविवद् फनीकांत िमāकेँ कतौका संƇहलयमे भेिट गेलै जकरा ओ अपन बपौती आिक खितयौनी बुिझ िकएक िमिथलामे फहराबऽ लगलाह? ई सभ िकछु कहबाक लेल मंडन संतितक रुपमे Ćचěड रौदमे तĢत भेल निह, निह दुनुक बीचमे सĜयक İवरुपमे ‘िवयोगी’ ठाढ़ अिछ सĜयकेँ सĜय कहबा लेल भगवती उƇताराक खƂगपर अपन माथ रखने।

96 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) लêमण झा ÔसागरÕ1 चुņीधारी ओना निह देखबैक हरसŇे उड़ैत एĸोटा िगŀ। मुदा, जहन कोनो िनजर्न बाध-बोनमे मुइल पशुक खाल उधेि़ड लेल जाइए; तँ, देिख िलअ उड़न जहाज जेकाँ उतरैत हेँजक-हेँज िगŀ!! ओना निह देखबैक कौएकेँ कुचरैत कþहु जेर बािĠहकऽ....; मुदा, जहन बीच चौबņीपर िबजलीक तारमे सिट कोनो अभागल काग हित लइए अपन Ćाण.... तँ देिख िलअ काँउ....काँउ करैत करमान लागल कौआ।

1 जĠम– ०१.०४.१९५३ िपताक नाम– āी तारकेĂर झा उफर् āी भोला झा, माइक नाम– İव. गंगादेवी, गाम-ठढ़िबितया, घोघरडीहा, मधुबनी (िबहार)। आजीिवका–रूपा एěड कंपनीक इİपात संयĠÿ इकाइमे विरơ ƅय ĆबĠधकक पदपर कायर्रत- कोलकातामे। रुिच- सािहिĜयक आ सामािजक सरोकारसँ जुड़ल रहबाक। अरुिच– मैिथलीक नाम पर अनगर्ल आ अनसॲहाँत िƅया-कलाप। रचानाधिमर्ता- १९६८सँ मैिथलीक िविभžक िवघापर मैिथलीक िविभž पिÿका सभमे रचना Ćकािशत होइत रहल अिछ (बीचमे १९८३-१९९६ छोि़डकेँ)। चािरटा पोथीक (किवता, कथा, िनबĠध, िविवधा) Ćकाशन योग्य सामƇी उपलĤध। छपेबाक जोगार निह। Ćकाशक लोकिनक खोज जारी। सेहेĠताक–िमिथलांचलक समİत ( कĠवेंट छोि़डकऽ) Ćाथिमक िवńालयसँ लऽ कऽ उच्च-माğयिमक िवńालयमे पढ़ौनीक माğययम मैिथली माÿ मैिथलीए टा होइतैक।

मैिथली पń २००९-१० 97 मुदा, हमर किवताक दृिƠ एþिह टा घेरायल निह अिछ; घरक कोनो अĠहार कोणमे छीटल हो चीनीक िकछुओ दाना िकंवा िपचाएकेँ मिर गेल हो अझņे कोनो चुņा! हमर किवताक दृिƠ पँितआनीमे ससरैत ओिह तुच्छ जीवपर अटिक जाइत अिछ जे निह अरजने अिछ कोनो िवńा....; मुदा, छैक तइयो ओकरो अपन जैिवक संİकार! हमर किवता िगŀ....कौआ....आ चुņीक संसारकेँ भजािर रहल अिछ! संवेदना िसŀाĠतक चुिŎमे आदशर्क आिग पजािर रहल अिछ!!

98 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िवभूित आनन्द1 एक- दू- तीन- चािर- पाँच- छओ- सात- आठ- नओटा किवता Ćितपक्ष : एक जखन िदन भिरक उठापटकसँ थाकल-हारल सन घुरैत छी डेरा तँ मोन करैए, जे कोनो क्लैैिसकल संगीत कानमे अबैत हाथमे गरम-गरम चाह, आ ‘सूगर Ąी’ िबİकुट हड़ारितकेँ दूर करैत गामघरक हवा-बसातकेँ, आिक नगर-महानगरक चािल-कुचािलकेँ अकानैत किनयाँक तनावरिहत आकृितकेँ िनहािरतहुँ

1 जĠम: ०४.१०.१९५५, İथान: िशवनगर, मधुबनी। िशक्षा: पी.एच.डी. पटना िवĂिवńालय, पटना। वृिþ: दैिनक िमिथला िमिहरमे कायŭलय संवाददाता, मैिथली अकादमी, पटनामे शोध सहायक, िजला İकूल, मुंगेरमे +२ ĭयाख्याता। सĦĆित: आर. एन कालेज, पěडौलमे अğयापन। गितिविध: पूवर्मे िविभž राजनीितक दल, भाषा आĠदोलन ओ रंगमंचसँ सĦबĠध। तिहना मैिथली भाषी छाÿ संघ, भंिगमा, जानकी महोĜसव सिमित, जखन-तखन आिद संİथाक संİथापक-सदİय। ७४ क छाÿ आĠदोलनमे जेल याÿा। सĦमान : सािहĜय अकादेमी पुरİकार, २००६ िदनकर राįƏीय सĦमान-२००८।िवभूित आनĠदक चास–बास- किवता-संƇह : डेग, उपƅम, पुननर्वा होइत ओ छॱड़ी, नेहाइपर İवĨ, उठा रहल घोघ ितिमर, झूिम रहल पाथर–मन। कथा-संƇह: Ćवेश, खापिड़ महक धान, काठ। उपĠयास: गाम सुनगैत, परािजत–अपरािजत। नाटक: समय–संकेत, ितिþरदाइ, हाली–हाली बिरसू, Ąेममे बĠद एकटा उखरल फोटो। समीक्षा: āी लिलत आ हुनक कथायाÿा, İमरणक संग, लिलत, भाषा–टीका। संपादन: गीतनाद, िवńापित पदावली, मैिथली कथा–सािहĜय, अहुल, एकटा छला गोनू झा, कथा किहनी, िवńापितक पदावली (सभटा पुİतक)। संपादन: लालधूआँ, मािटपािन, भाखा, हालचाल, मैिथली अकादमी पिÿका, दैिनक िमिथला िमिहर, दृिƠ, कूस, अंग मैिथली, समाद, भंिगमा, हाक, मनीषा, डगर, जनता। सĦĆित: जखन–तखन (सभटा पिÿका) एकर अितिरक्त Ćो. हिरमोहन झा अिभनĠदनƇंथ’ तथा ‘िनिखल भारतीय मैिथली भाषी छल’, ‘अिरपन’ ओ ‘Ćो. हिरमोहन झा अिभनĠदन समारोह’ İमािरकाक संपादन सेहो। अनुवाद: मैिथल शहीद बैकुěठ शुक्ल (बंगला), मूल : िवभूित भूषण दास गुĢत तथा जीव। िवज्ञान (िहĠदी) मूल : सुबोध िबहारी सहाय। यंÿİथ: एकटा रहए गĢपू ( उपĠयास), ताला, एकटा उड़ल फुरर्! ( कथासंƇह), एकटा साĦयवादीक आĜमकथा ( किवतासंƇह), गामक िचŇी ( İतĦभ), हिरमोहन बाबूक रचना–संसार, İमरणक संग : भाग–दू ( समीक्षा)। सĦĆित: अनथक लेखन जारी. (-सĦपादक)

मैिथली पń २००९-१० 99 संतानक कुशल-क्षेमक मादे बतिबतहुँ । जखन िदन भिरक उठापटकसँ थाकल-हारल सन घुरैत छी डेरा तँ मोन करैए, जे कोनो िबसरल-िबछुरल सखाकेँ मोन पािड़तहुँ ! आिक बीतल साल भिरक सभसँ सुखद कोनो एकटा, माÿ एकटा िदनकेँ िहयािसतहुँ ! आिक आगत सालक लेल कोनो नीक सन एकटा, माÿ एकटा सपना बुिनतहुँ ! मुदा एहन सन कहाँ िकछु भऽ पबैए! अपन अनुकूल िकछु नइ बुझाइए ने खान-पान, ने इच्छा-आकांक्षा ने सोच, ने अपसोच......! लगैए जेना, हम यंÿ-मानव बनल सन जीबऽ लागल छी अपना अनुकुल िकछु निह होएबाक यंÿणा िदन-Ćितिदन बढ़ले जाइए..... ओ जे देखाबऽ चाहैए, सएह देखै छी ओ जे खोआबऽ चाहैए, सएह खाइ छी ओ जे सोचाबऽ चाहैए, सएह सोचै छी हम बदिल रहल एिह चचŭसँ खूबे िचंितत बुझा रहल छी बंधु ! जखन िदन भिरक उठापटकसँ थाकल-हारल सन घुरैत छी डेरा, तँ ई िचĠता आर-आर गाढ़ भऽ अबैए आ तखन हम एिह आरोिपत जीवन-िशĪपसँ खूबे परेशान भऽ उठैत छी !

100 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) Ćितपक्ष: दू Ćķ तँ ई नइ छै, जे हमर मोनक Ćितपक्ष अपन समİत ऊजŭकेँ सुता देलक अिछ िनĀेƠ आिक, किहयोक करजžीा सन आँिखमे मोितयािबĠद Ćवेश कऽ गेलैए ! Ćķ इहो नइ छै जे एिह िवलासी अĠहड़मे ओ मृĜयुक कामना करऽ लागल अिछ आिक, िवकलांगी नदीमे ठठबाक लेल नग्न. भावसँ पिड़ रहल अिछ ! Ćķ ई छै, जे जखन िचनमार धिरमे Ćवेश कऽ गेल हो गमर् हवा जादूगरी कला-कौशल कऽ रहल हो अपन-अपन आरिĦभक Ćदशर्न, आ जकर İवादक लेराह वातावरणमे भऽ रहल हो सभटा जीवन-संदभर् गडमड- तखन की करबाक चाही? तखन की करबाक चाही, जखन पक्ष आ Ćितपक्षक बीच निह रिह गेल हो किनयॲटा िवभाजक रेखा! जखन एक िदस कएल जा रहल हो युŀक जैिवक उदघोष, आ दोसर िदस ओही मुँहेँ कएल जा रहल हो शािĠतक वैिĂक मंÿोच्चार- Ćķ ई छै जे तखन की करबाक चाही? Ćķकक एिह जिटलताक बीच बाझल हम तािक रहल छी ठाम-ठामक जीवन जीवनमे िखच्चा-भाव, आ तािह िखच्चा-भावमे नव मानवीय उĜसुकता बंघु हमर एिह अनुसंघानमे जरूरे अहाँक कþर्ĭय रहत से िवĂािस लेलहुँ अिछ अपना अĠदर सहजेँ। ताबत सिह िलअ गमर् हवाक थापड़ बेसी सीिदत करए जँ ददर् तँ कैंसरक रोगी जकाँ ितल-ितल तकरा अपन मोनक हाथेँ सोहरबैत सहैत रहू, सहैत रहू.....

मैिथली पń २००९-१० 101 इएह हाथ एक िदन बनत गऽ मुŇी आ मुŇीक संख्यामे जेना-जेना होइत जेतै बढ़ोþरी, तँ अनेरो संघीय गप-सप भऽ जेतै मजबूरी संवादहीनता निह भेलैए दीघर्जीवी— किहयो निह, कखनो निह ताबत दू डेग पाछू आिब दू डेग आगू अएबाक करैत रहू दयनीय चेƠा िकएक तँ चƅवातक एिह धाहीमे पड़ल Ćितपक्ष लेल एखन जरूरी अिछ- ‘वेट एěड वाच’!

मदारी युग हमरा होइत रहैए, जे क्यो हमरा पोलहएबाक चेƠा कऽ रहल अिछ हम चीिĠह रहल छी ओकरा ओ हमर िमÿ निह अिछ मुदा तैयो िमÿ होएबाक घोषणा कऽ रहल अिछ बाजार-भाव गमर् छै, जे हमरा दुनूमे िमÿता भऽ गेल अिछ समिदयाकेँ पठा-पठा, अथवा दूरभाषेपर उठा-उठा अपन चािलकेँ ओ ठोिक रहल अिछ कखनो-कखनो अपन करतबसँ डेरा सेहो रहल अिछ फँसएबाक सरनिरया-िशिĪप सेहो अपना रहल अिछ निह सहज, तँ असहजे भऽ भऽ कऽ ककरो अĠदर पैसबाक ओकर ई कला बहुतोकेँ मोहिवƠ कऽ चुकल अिछ तेँ अपन िवजय-बाटपर रभिस सेहो रहल अिछ एĦहर हम बेस चौकऽ लागल छी ओकर अबरजात बढ़ले जा रहल अिछ ओना, इहो ओकर अपन िशĪपी छै किहयो लगातार अबैत रहत तँ किहयो बाटे िबसिर जाएत किहयो-किहयो तँ अपन वाणीक माğयमे अबरजात बढ़ाओत

102 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) आ से, तकर अनेक अथर् लागत ओना ओ बुझा देत जे एहन सन िकछु नइ छै मुदा तैयो तंग करबै तँ िवराम-अधर्िवराम-िवİमय आिद संकेतक रहन-सहन Ćयोग कऽ कऽ बुझा देत, जे अहाँ चिकत रिह जाएब! छिकत सेहो भऽ जाएब आ एहना िİथितमे जँ एक अहाँ माÿ गģफाक बीचसँ ससिर गेिलऐ तँ ओकरा लेल धन सन तकर एबजमे दोसर-तेसर अनेक भक्त ओकर वाकचातुरीक सोझाँ नतिशस भऽ जेतै आ ओ एक तरहेँ अहाँक, समथर्न-िशĪपमे अिभनĠदन कऽ अहाँक िबखरल िवरोधीकेँ संगोिर लेत..... एहन सन नइ छै जे हम कमजोर भऽ रहल छी ! शÿु, िमÿ नइ भऽ सकैए शÿु वाİतवमे एकटा जीन िथक जकर सभटा संबंध अनुबंधपर रहैत छी आ से हम नीक जकाँ बुझैत छी हम तँ संƅमण-कालक सभसँ पैघ अİÿ किवता Ņारा ओकर मन-मयूरक पएरपर नजिर देबऽ कहैत छी जकर रंगक संबंध ओकर मनक संग तँ ने जुड़ल छै, से सोचऽ कहैत छी हम िविभžे ढंगे साकांक्ष रहऽ कहैत छी मदारी-युगसँ सोझाँ-सोझी भऽ रहल छी

नब पी ढ़ी ओ हमर उĪलािसत गामक बीतल बसंत छल जे हमर डेराक मेन गेट लग थाकल-ठेिहआएल सन उदास, ठाढ़ छल अनायास ओकरापर नजिर पि़ड गेल भीतर आबऽ कहिलऐ मुदा जेना ओ िकछु नइ सुनलक चीनीक रोगी सन लागल

मैिथली पń २००९-१० 103 तथािप बड़ी काल धिर िठिकयबैत रहल आ हमरा अĠदर जेना िकछु दरकैत रहल िकछु काल बाद ओ िभझाएल हँसी हँिस देलक लागल जेना, ओकर अंदरक बीतल वसंतक आर िकछु पँखुरी झिड़ कऽ हमर मेन गेटक मािटपर आिब लेढ़ा गेल हमरा अंदरक िवकराल होइत पीड़ा िकछु सोिच निह पािब रहल छल अनुþिरत छल पूवर्क सभटा हल कएल Ćķ हम ‘ई मेल’ फोललहुँ हम ‘नेट’मे ओझरएलहुँ हम ग्लोिबल िचंतनपर पुनिचर्ंतन कएलहुँ..... एिह ƅममे बहुत िकछु भेटल नवीनतम सेहो। संभािवत सेहो मुदा ओ नइ भेटल, जे हमर डेराक मेन गेटपर लेढ़ाएल सन ठाढ़ छल, आ जे हमरासँ हमर नेनपनक िहसाब माँिग रहल छल हम एकरासँ लिड़ रहल छी लगातार लगभग दू-अढाइ दशकसँ तँ िनिĀते मुदा एिह दू-अढाइ दशकक अĠदर फूटल नव पीढी लग कहाँ देखैत छी एहन सन कोनो पीड़ा! ओ तँ अपन मिİतįकक ‘मैसेज बॉक्स’ सँ एहन सन भावकेँ Ćाय: खाली कऽ िनराशक्त अिछ पुछबै िकछु, तँ तेहन पूिछ देत जे हम महोमहो भऽ जाएब ओकरे दुिनयाँमे बिह जाएब एखन िİथित ई अिछ, जे हम सभ एक दोसरसँ आँिख चोरा सेहो रहल छी एक-दोसरकेँ देिखकऽ आँिख जुटा सेहो रहल छी!

104 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) अरािड़ जोतैए ई समय अतुकाĠत अिछ एहनामे जँ हम तुकक गप करी तँ से समय-सापेक्ष निह होएत एखन हम अनुवादमे जीिब रहल छी, जे शुŀ अतुकाĠत अिछ ओिहमे लय तँ छै, मुदा तुक नइ आजुक युगमे एकर, आिक एकरेटा अिİतĜव अिछ से, जिहयासँ िसकुिर गेल अिछ पृĝव्ी, एकर अिनवायर्ता ‘बेडरूम ’ धिर आम भऽ गेल अिछ सभ सभक गप बुिझ रहल अिछ İवाद बुिझ रहल अिछ İवर बुिझ रहल अिछ एिह İवर आ İवादपर दलाल İƏीटक मिहमा अिछ सेंसेक्İक उतार-चढ़ाव अिछ नĠदीकƇाम अिछ नासा आ सुनीता िविलयĦस अिछ लाल मिİजद आ बाि़ढ अिछ ..... सभटा नीक-अघलाह आइ एही सोचपर नृĜयमान अिछ तेँ आजुक समयमे िकछु असंभव निह अिछ िकछुओ लग-दूर निह अिछ सभ िकछु पारदशŰ, िकछु अदशŰ निह जेँ ई समय अतुकाĠत अिछ तेँ किवता आ जीवनक भाषा एकाकार भऽ गेल अिछ तेँ कैमराक लेंस धिर किवता िलखैत अिछ िवज्ञापनक भाषा किवता बजैत अिछ सĦपूणर् जीवने किवतामय भऽ गेल अिछ जतऽ ओकर सवŮगीण समİयापर िवमशर् सĦभव भेल अिछ तेँ एहनामे जँ हमर सुिचता ओ संİकार संİकृित ओ आचारसँ कोनो अमूþर् भाव सनक पिरिचित अपन अिİतĜव लेल, अपन-अपन Ăेतपÿ

मैिथली पń २००९-१० 105 जारी करैत जा रहल अिछ लगातार ‘नेट’ धिरमे ‘फीड’ करैत जा रहल अिछ अपन गौरवमय परĦपरा तँ हम की कऽ सकैत छी। हमरा तँ लगैत अिछ जे हमर ई पिरिचितजĠय ढाल बुढ़बा साँढ़ जकाँ जीवनक गित ओ Ćवाहकेँ अहेर कऽ कऽ रोिक राखऽमे िवĂास करैए समयक आिद-अĠतकेँ अपन एही हुकहुकी छरपानमे जीबैत देखैए सुĢत चेतनामे आएल सपना संग ƚम पोसैत अरािड़ जोतैए

वİतुत: अजीब अिछ ई महानगर हम एकरासँ जतबे पिरिचत होबऽ चाहैत छी ई ततबे अपिरिचत बिन जाइए हम िभनसरे जािह िनजर्न बाट धऽ कऽ जाइत डेराइत रहैत छी घुरती खेप ओतऽ बाट नइ भेटैए ! भऽ सकैए, मास िदन छओ मासपर जाइ तँ ओतऽ गोटेक अपाटर्मेंट देखी खेलाइत-धुपाइत....मुİकैत-िखलिखलाइत..... हम अपन पिरिचत िकराना पņीसँ राशन ली आ पुन: मास िदन बाद आबी, तँ िकरानापņीक अपन ओिह पिरिचत पिरसरपर मĪटी İटोरीज िबिĪडंग सनक बजार..... .... निह निह, ‘मॉल’ देखी, आ जकर अĠदर जाइते जेना हॉल ढुिक जाए ! से, अपन अĠदर उिग आएल एिह अिनिĀतताक पाँिख संग उिड़या जाइ आिक जकथक रही-

106 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ई सोचब-गूनब बड़ भयाओन लगैए पिहल-पिहल जिहया एकर दशर्न भेल छल, हमरा अĠदर तँ अदंक लऽ लेने रहए! सभ चेहरा ĭयİत सभ आँिख चौचंक सभ डेग अपİयाँित सभ इच्छा अतृĢत अजीब तरहक भागमभाग...... ओतिह अğययनरत अपन पुÿसँ सड़क पार करबा लेल ठाढ़ सहसा एक िदन पूिछ बैसल रही एिह Ćकारक अिİथरताक कारण? मुदा ओ तकर उþर निह दऽ सकल छल ओकर नजिर Əैिफक-बþीपर िटकल रहलै....िटकल रहलै..... आिक सहसा हमरा छोिड़ आ हाथक संकेत दऽ बजबैत, सड़क पार कऽ गेल! सड़कक एिह पार हम सड़कक ओिह पार ओ बीचमे भागमभाग......अफरातफरी...... अजीब अिछ ई ठाम बेर-बेर अपिरिचत बिन अबैत रहैए हमर समक्ष, आ हम तािहमे हेराएल जा रहल छी, हेराएल जा रहल छी..... से, वİतु अपिरिचत ठाम निह, हम भेल जा रहल छी हम भेल जा रहल छी....

अंितम पीि़ढक बयान मौसम कुहेसक सीरक ओढ़ा।। सूयर्केँ सुतबा लेल िववश कएने अिछ एकरे मारल बीच घुना रहल अिछ अनेक टुİसाी नेंगरा रहल अिछ तोतराइत सुिन रहल छी फूलकेँ सेहो मौसमक मरखाह चाँगुरसँ डेराएल

मैिथली पń २००९-१० 107 हमर आँिखमे बैसल िवĂास अपन डेरा रहल िवĂशसनीयतासँ भयभीत भऽ रहल अिछ िववश सूयर् सूतल अिछ, आ सात समुƖ पारसँ रंग-रंगक पेय रंग-रंगक İवĨ आ ओकर संसार ‘नेट’ Ņारा परसल जा रहल अिछ हमर आँिखमे मोितयािबĠद फुला रहल अिछ हम ओकरा संग रभिस रहल छी चुभिक रहल छी ओकरा संग सिदर्या रहल छी सवŮग तथािप मुिİकया रहल छी अनवरत एिह िवपरीत मौसममे तैयो हम Ćितरोधक संग जीिब रहल छी हम मोन पाड़ैत छी— हिथया-नक्षÿक पािनमे नहाइत कोना िसहरैत रही पाँतरक पीपरक गाछ तर घमाएल जेठक दुपहिरयामे कोना सुİताइत रही फगुआमे कोना गबैत रही जोगीड़ा....... हम मोन पाड़ैत छी— जाड़क साँझक पजरैत घूर आ भोरक गाँती बĠहने कटकटाइत दाँत। जूि़डशीतलमे उराही होइत पोखिर-इनार, आ आ थाल-पािनसँ जुड़ाइत अंग-अंग....... हम िचĸा खेलैत मचकी झुलैत मोन पाड़ैत छी बाध-बोन, चर-चाँचर Ćाती....सोहर....महराइ....लोिरकाइन.... गबैत मोन पाड़ैत छी ओ सभटा हेराएल जीवन-िशĪप ....

हम मोन पाड़ैत छी— कनसारसँ अबैत लाबा-भूजाक सोĠहगर गंघ हम मोन पाड़ैत छी— मालजालक गरदिनमे बाĠहल घंटीक संगीत हम मोन पाड़ैत छी— पािरवािरक अटूट संबंध, आ सदाबहार सामािजक सौहाƖर्क गान

108 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

हम मोन पाड़ैत छी— मोन पाड़ैत रहैत छी जखन-तखन ओ सभटा खुशी, जे बेदखल कऽ देल गेल अिछ हमर भावना, हमर पिरिचित, हमर मौिलकतासँ.... हम मौसमक एिह बदलल नेत संग एकरा Ćितरोध मािन एिहना जीने जा रहल छी अनथक....अनवरत.... हम एिह शताĤदीक अंितम एहन पीढ़ी छी जे Ćितरोधक एिह िशĪपकक संग लिड़ रहल छी मुदा....मुदा सĜय तँ ई अिछ जे ताही अनुपातमे जĪदीत-जĪदीी अपन संतानसँ अनिचĠहार भेल जा रहल छी....

एकटा साĦयवादीक आĜम कथा अपन जĠमकथाक मादे एतबेटा बूझल अिछ जे ओ बरोबिर हमर आँिखमे आँजन करैत रहै छिल कजरौटीसँ मांिग कऽ ओकर रंग हमर कपारक कातमे ठोप जकाँ लगबैत छिल भिरसक, अपन अĠदर कोनो याÿाक सपना रोपैत हमरा नजिर-गुजिरसँ बचएबाक ओ एकटा भावुक सन Ćयास करैत रहै छिल हमु कने छेटगर भेल रही तँ ओ हमरा ठेहुनमे भरबाक लेल कूबत ’लड़े लड़े’ कऽ ğविनक संग चलब िसखौने छिल.... बादमे तँ हम अपने चलऽ लागल रही.... से, िकछु समय घिर तँ ओकर छाती धरकैत रहलै

.‘लड़े लड़े’क ğविनमे पराजयक कĦपन बुझाइत रहलै मुदा बादमे तँ सभटा डर-भय पड़ा गेलै आ ओ हमरा िदससँ िनचैन भऽ गेिल.... अहाँ बूिझ गेल होएब जे ओ आन क्यो निह, हमर माँ छिल!

मैिथली पń २००९-१० 109 दोसर अğयाय िकछु समय बीतल, हम अपन जĠमकथा िबसिर गेलहुँ जीवनकथा िलखबा लेल पाछू तकबाक पलखित निह भेटल हमरा संग संगी-साथीक एकटा गोल बिन गेल छल, जकरा अĠदरमे नहु-नहु िसहकैत बसात छलै.... आँिखमे उजाससँ, कतहु कोनो खटास निह िकछु नव करबाक िसखबाक माÿ िजज्ञास..... हमर जीवन कथाक Ćेम-संबंधक ई केहन रूप छल, सहजेँ बूिझ निह पओलहुँ हम टूटल ताग सभकेँ जोड़ा लगलहुँ हम गुदरीकेँ सीिब-सीिब सुजनी बनबऽ लगलहुँ.... ई तँ बादमे जाकऽ बुझल भेल जे हमरा अपन जीवन-संदभर्क Ćसंग भेिट गेल आ एकटा अनाम अपिरिचत ऊजŭसँ जेना हमर मन-Ćाण रोमांिचत भऽ उठल अपन खानगी किह दी जे ई हमर, सृजनसँ जुड़बाक समय छल !

तेसर अğयाय समय-सापेक्ष हम अपन उĜकषर्क तमाम िनįकषर्केँ पूणर् मानबासँ सभ िदन अİवीकारैत कखनॲ काल कऽ पाछू सेहो ताकऽ लागल रही हम तकैत रही अपन िकछु िविशƠ İवĨदशŰ संगी सभक पूवर्-पिरिचत पदचापकेँ, िकएक तँ हम बीच सरोवरसँ काि़ढकऽ अनने रही िकछु रक्त-कमल पीठपर पाँिख उगा जीवन-रģतारक तमाम हदसँ आगू बहरा जएबाक

110 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) अकूत आकांक्षा छल हमरा अĠदर.... हमरा अĠदर िचĠतनक टटकापन वैिĂक जनाधारक संग, वþर्मान रहए चारूकात िदपिदपा रहल छल जीवनक समेिकत सौĠदयर् बंघु! ई हमर गितमान अविधक िशखर-काल छल

चािरम अğयाय आइ एिह जन-अरěय मğय चलैत एसगर, िनतांत एसगर लािग रहल छी हम मोन पिड़ रहल अिछ अपन गाम सनक अिछ अपन गाम सनक अनेक गाम ओकर हवा, ओकर नदी ओकर हँसी, ओकर रुदन, जतऽ अपन अनेक İवĨदशŰ संगी संग मुखर हम, िकछु बुनने रही आपसमे बहुत-बहुत याÿाकेँ गुनने रही आइ एिह जन-अरěय मğय चलैत चलैत-चलैत चकुआइत-चॱकैत हम अजीब तरहक दहशतमे जीिब रहल छी

İवĨ कोनो दीयर सन उदास तािक रहल अिछ— कतऽ गेल ओ İवĨदशŰक समूह? कतऽ गेलै ओकर İव र, ओकर सुभाव ? ठीके, काफी असोकयर्मे छी— एिह जन-अरěय मğय चलैत तकैत रहै छी चतुिदर्क जखन-तखन चॱकैत-चकुआइत रहै छी जखन-तखन आ ओकर सभक पूवर् पिरिचत पदचापक अधीरतासँ Ćतीक्षा करैत रहै छी, ई सोचैत

मैिथली पń २००९-१० 111 जे आिखर एहन कोन िबसंजोग भऽ गेलै जे िवराट सामूिहकताक ओ सपना एना छहोछीत कोना भऽ गेलै। आजुक एिह वैिĂक बाजारमे हमरा लेल ई िवचलन, ई िवखěडन िचताक ताप सन लािग रहल अिछ आ हम खोजी नजिर लेने चकुआइत तािक रहल छी बाट..... तेँ कहबामे कोनो हजर् निह जे िदशाहीनताक िवरुŀ ई हमर आĜम-मंथनक काल िथक।

पाँचम अğयाय आइ हम अचिĦभत छी, भयभीत सेहो िकएक तँ आĀयर्जनक रूपसँ हम िकछु तेहन िचÿ देखबा लेल बाğय भेलहुँ अिछ जकर तेहन कोनो अपेक्षा निह कएने रही— हम देखलहुँ जे हमर िकछु अनĠय संगी अपन-अपन हाथमे मĪटी-नेशनलक झािल लऽ लेलिन तँ िकछु भगवा धारण कऽ लेलिन

क्यो-क्यो , िछट फुट लालबþीमे अपन-अपन रूप ताकऽ लगली तँ अिधकांश, एकटा कऽ चौकिठ अँगेिज अपना-आपकेँ दादी-नानी बना लेलिन.... आ सभ जेना एक-दोसरसँ अनिचĠहार भऽ गेलहुँ! की पौलहुँ, की गमौलहुँ, तकर िहसाब-बही जेना कमला-कोसी सन कोनो-कोनो नदीमे Ćवािहत भऽ गेल....दहा-भिसया गेल अनंत सागरमे.... िकछु जे तैयो अपनाकेँ िचĠहार रािख सकल, सेहो अपनेमे सहİÿ दल भऽ गेल दलदलमे फँसैत चिल गेल, अथवा कोनो-कोनो राĔय, आिक देशक संसद मğय,

112 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) निह तँ कोनो-कोनो कल-करखानाक ĭयवİथा संग ĭयविİथत जीवन जीबऽ लागल.... वþर्मान अğयाय ओना ई अğयाय पूणर् निह गेल अिछ तथािप जतऽ गामसँ नगर-महानगर लेल फुटै छै रİता. हम ठाढ़, अपन हेराएल-भुितआएल संगी सभकेँ िहयािस रहल छी, संगिह जे बाटक Ćतीक्षामे अिछ, तकरो अपना िदस हकािर रहल छी... िहयासबाक आ हकारबाक ई ƅम अिवराम जारी अिछ .... आ से, एहन िवपरीत पिरवेशमे सहसा हमरा अपन माँ मोन पड़ैए आ हम ओकरे जकाँ सॱस जारिनक अभावमे खुहरी जोिड़-जोिड़ पुन:पुन: आिग पजारबाक ĭयॲत धरा रहल छी हम तमाम िवपरीतक बीच िपरीत तािक रहल छी वİतुत:, ई तँ हमर उजरल खॲतामे भगजोगनी अनबाक काल िथक आ तेँ हम फेरसँ नेना बिन गेल छी आ हमरा एकटा माँक बेगरताक पुन:पुन: अनुभव भऽ रहल अिछ ।

कुहेसक अĠहड़ इजोिरया राितमे पसरल अिछ अĠहार रजनीगंधाक गाछसँ बहरा रहल अिछ दुगर्ंध बाटपर चिल रहल अिछ थाकल डेग बहुत दूरसँ Ćाय: चलल छै कुहेसक अĠहेड़,

मैिथली पń २००९-१० 113 जे छािप लेबऽ चाहैए जेना कुमुिदनीक िखलिखल हँसीकेँ हम एिह दूरीकेँ नापऽ चाहै छी— अपन िवचारक घोषणापÿसँ आ फेरसँ िलखऽ चाहै छी पुनजŭगरणक सपना आइ लोक सपना देखैए बहुत नीक-नीक सपना देखैए मुदा, तकरा ताही नीक ढंगे िबसिर सेहो जाइए हम सपनाकेँ िबसरऽ निह चाहै छी हम अपन अतितक संग वþर्मानसँ लड़ैत फेरसँ भिवįयक किवता िलखऽ चाहै छी हम अपन किवतामे िनगुणर् निह, सोहर आ पराती गाबऽ चाहै छी

114 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रमण कु मार िसंह गुमशुदगी िरपोटर् राजधानीक एिह रोशनीसँ नहाएल सड़कपर एक िदन हमर बेटीक हँसी पता नै कतऽ गुम भऽ गेलै हमरा गामक रामधन काकाक बुढ़ौतीक लाठी एिह महानगरक भीड़मे हेरा गेलै महामिहम जी आ अपन हाल की कही गामसँ चलैत काल एगो उĦमीद एगो सपना लऽ कऽ आयल छलहुँ हम एिह महानगरमे पता निह राित-िदनक भागम-भाग आ हलतलबीमे ओहो सपना हेरा गेल हे महामिहम जी, सुनै िछऐ राजधानीक पुिलस बƂड मािहर होइ छै हमरासन अदना लोककेँ तँ बातो नै सुनतै कने अहॴ खोजबा िदअ ने हमर बेटीक हँसी रामधन काकाक बुढ़ौतीक लाठी आ हमर ऊ सपना जे लऽ कऽ आयल रही हम राजधानीमे...

मैिथली पń २००९-१० 115 मायानाथ झा1 मातृिगरा बनब केवल अंगरेिजया बाबू, की राखब मातृिगराओक िकछु ज्ञान? कěठ खखािर हम पूिछ रहल छी, बिन मलेच्छ की िबसरब अपन पिहचान? भऽ रहल अिछ युग पिरवþर्न, बदिल रहल अिछ आइ संसार। उलिझ अहाँ Ɨुबीकरणक जालमे, िबसरल जाइत छी िमिथलाक ĭयबवहार। Ćगितक डोिर पकिड़ कऽ चलब, बात तँ नीक अवĮये थीक। िकĠतु िनरादर जननी-भाषाक, से तँ आिखर िवडĦबने थीक। देश-िवदेश की गेलहुँ अहाँ, माइयेक बोलीकेँ िबसरलहुँ। अपना संग-संग धीयो-पुताकेँ, ओिहसँ िवमुख कयलहुँ। िलखबा-पढ़बाक तँ कथे कोन, बाजब तक छोिड़ देलहुँ। रही जे िनमर्म िपतृ-मातृ लेल, िनज भाषाओ लेल िनơुर भेलहुँ। घरक भाषामे गĢप-सĢप करब, आइ हेठीक बात बुझाइत अिछ। चािर आखर अंगरेजी बाजी तँ, तािहमे बड़Ģपन देखाइत अिछ। सपना भेलैक नेना-भुटकाक, दादी आओर नानीक संग।

1 जĠमİथली–भराम, मधुबनी। लेिģटनेंट कनर्ल मायानाथ झा (सेवा िनवृत), जĠम–ितिथ– ०५.०५.१९४६ शैक्षिणक योग्यता-–İनातक ( १९६६) ĭयवसाय–सेना डाक सेवामे िबिभž पदपर १९.०९.१९६९ सँ ३१.०५.२००६ धिर। अवकाश ĆािĢतक बाद लेखनोĠमुख। कृित–जकर नािर चतुर होइ (कथा–संƇह–मैिथलीमे), तब और अब (किवता–संƇह–िहĠदीमे), अनूठी सूिक्तयाँ ( संकलन), Unique Utterances (Collection), āŀा–सुमन (किवता–संƇह मैिथलीमे, Ćेसमे)।

116 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िखİसाे-िपहानी पाछुए रहलैक, रंिग गेल ओ सभ टी.वी.क रंग। माय-बापकेँ फुसर्ित निह छिĠह, पाइयेक पाछू छिथ बताह। फूहड़ आ घृिणत िवनोद दूरदशर्नक, बच्चा सभकेँ केलक घताह। की िनįणात िवŅान मैिथलीक, अंगरेिजयोक उपासक निह छलाह? घरमे सभ िदन बािज मैिथली, की ओ आ.ए.एस. निह भेलाह? एहन मनीषीक नाम निह गनाएब, माÿ इंिगत हम करैत छी। अपन भाषाक महĜवकेँ बुझू, सएहटा तँ हम कहैत छी। सभ भाषा गिरमामय होइत अिछ, िकंतु सवŸपिर िनज भाषा। जँ पारंगत होयब तािहमे, सुदृढ़ होयत अिभलाषा। भगवद् पूजा जेना करैत छी, सभ िदन िकछु समय बचाय। तिहना पूजू माँ मैिथलीकेँ, िदअ एकर पुिन मान बढ़ाय। निह अिछ थोड़ पाƁय–सामƇी, अिछ भरल मैिथिलयोक भěडार। भटिक गेल छी अहाँ मागर्सँ, तैँ घटल अिछ मोनक उƄगार। केवल नाम पािब अƠम सूचीमे, निह होयत मैिथलीक उŀार। अिछ Ćयोजन Ćबल Ćयोगक, तखनिह सĦभव एकर िवİतार। जँ पिěडत हैब मातृिगराक, आनहु शीस नबाओत। जिड़येकेँ जँ Ĝयािग देब तँ, के पुिन लाज बचाओत?

मैिथली पń २००९-१० 117 सिच्चदानन्द ÔसौरभÕ1 देखू नै.... ओ जनानी.... हमर भाउज िथक से बूझलए सभकेँ तैयो, कनफुसकी देिख चोĠहराय छी, िकऐ, एना? देखनाइये-ए तँ देखू ने.... िसनेमा हॉलमे पाकर् आ होटलमे İकूल–कॉलेजमे आ मंिदर पिरसरमे देखू–देखू ने घरमे, बाहरमे.... गाम आ शहरमे खेत–खिरहानमे.... कोना–कोना होइत रहै-ए छौड़ा–छौड़ीमे कनफुसकी मुंसा–मौगीमे मशखरी आ नेना–भुटकामे मुँहदुशी ओना, हमरा बूझल-ए ई सभ अहाँकेँ नीके लागत िकऐ तँ, अहुँ.... एिह युगक छी बस हमही–टा अहाँकेँ सतयुगी बूिझ पड़ै छी

1 िपता का नाम- āी रामानĠद झा, जĠम-ितिथ- १०.०१.१९७२ शैक्षिणक योग्यता: एम.एस.सी. ( भौितकी) बी.एड., एल.एल.बी., İथायी पता–Ƈाम+पो.–सुखपुर, िजला–सुपौल- ८५२१३०। रचना कायर्- किवता, कथा, लघुकथा। संपादन- अिनयतकालीन मैिथली पिÿका कोसीक संपादन एवं भारती–मंडन पिÿकाक सह–संपादन।

118 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) भोरक आसमे चािर िदनसँ किवजी! आधे पेट खाइत छिथ दुइये पसेरी चाउर आ तीिनये पसेरी िचकसमे मास खपेबा लेल साँझेसँ ओ परतारैत रहै छिथ धीया–पुताकेँ सूतय लेल आ घरनीसँ फूिस बािज ताकतक बदला िनžक गोली खा लैत छिथ किवजी! भिरपोख सूतबा लेल मुदा, तैयो किवजी उिठये जाइत छिथ भुरूकबासँ पिहने किवता िलखबा लेल किवता! जकरा हुनक घरनी सौितन किह गिरयाबैत रहै छिĠह किवता! जकरा हुनक सĦबĠधी डाइन किह लितयाबैत रहै छिĠह तकरे सृजनमे फिरच्छ धिर अपİयाँत रहै छिथ किवजी सहज, सरस आ चोखगर–चोखगर शĤद हेरय लेल ओ.... काटय छिथ अहोिछया ठीक ओिहना

मैिथली पń २००९-१० 119 जेना कमलक पंखुरी मğय कैद भॱरा अतुल रसपानसँ अफिरकेँ औनाइत रहै-ए भोरक आसमे..........

अĠहारक संग रहैत रहैत चहुँ िदस पसरल अिछ घुĢप अĠहार अĠहारमे बाट हेरबा लेल दऽ रहल छी हथोिरया मुदा, निह भेटय अिछ बाट आ निह भेटय अिछ अĠहारक ओर–छोर कतबो नोचै छी अपन देह–हाथ वा पीटै छी कपार रहै छी सिदखन ओतय ठाढ़ जतय अिछ अĠहारक एक छÿ राज! बुिझ पड़ैए हमर मोनक इजोत सेहो भेटाय लागल-ए हे अĠहार! अहाँ संग रहैत–रहैत हमर आĜमा सेहो भऽ गेल अिछ आĠहर तखन नै ओकरा देिख निह पड़ैए कमर्मागर् आ अपİयाँत अिछ ओ हेरबा लेल मुिक्त मागर्!

120 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) अशोक दƣ बाल गीत छुनमुन-छुनमुन बौवा हĦमर फुदकैत फुĿी जेकाँ रहैए कखनो मुİकी कखनो मटकी कखनो िद दीकेँ चुĢपी कहैए, छुनमुन. . . . . खुब िहलसगर बौवाक गात चुन-चुन बजैए सभ बात िमसरी सनकेँ बोली सूिन-सूिन मोन जुड़ाइए मोन जुड़ाइए, छुनमुन. . . . . थािह-थािह कऽ उठबए धाप रूनझुन बाजए पायलक चाँप कारी लट जे घूरमल-घूरमल गोर गालकेँ चूमल करैए, छुनमुन. . . . . . गोल-गोल पुआ सन गाल चान जेकाँ चĦकै-ए भाल िहरणी सनकेँ नयनक पुतली सभक मनकेँ मोहल करैए, छुनमुन. . . . . हाथमे धऽ कऽ हĦमर हाथ İकूल जएतै रटतै पाठ हमरे सनकेँ बौवा हĦमर हाथसँ कलम धरल करैए, छुनमुन. . . . .

बाल गीत सुन-सुन-सुन-सुन एगो बात चल रोपै छी ढ़ौवाक गाछ लुच्चीै जेकाँ ढ़ौवा फड़तै बढ़तै अपनो तैं िदन ठाठ एक िदन ढ़ौवाक गाछी बढ़तै खूब झमटगर हएतै घौछų-घौछų ढ़ौवा गाछमे फड़तै आ फल एतै तोिड़-तोिड़ करबै सभटा काज, सुन-सुन. . . . . . .

मैिथली पń २००९-१० 121 फुलबारीमे पोखिर खुनएबै सुĠदर घाट मढ़एबै आम लताम जामुन संग िमठका बैरक गाछ रोपएबै तािहपर झुलब साथे-साथ, सुन-सुन. . . . . बरिबघबा सन चौरमे अपनेसँ मेला लगबएबै अजब-गजबकेँ खेल-तमाशा आ सकर्स बजबएबै घुमएतै परी पकि़ड कऽ हाथ, सुन-सुन. . . . . . िकन कĦĢयुटर सेहो अनबै, माİटर आिब िसखए तैं दुिनया भिरक ज्ञानसँ जे हमरो पिरिचत करबएतै रहतै मोटरो गाड़ी पास, सुन-सुन. . . . .

बाल गीत (लोरी) आगे िनिनयाँ आ-आ बौवा लए िनन ला-ला देबौ तोरा नवका साड़ी दौगल-दौगल आ-आ बौवा हĦमर िमसरीक ढ़ेपा तोरा माथा जूड़ा-खॲपा खीर देबो तोरा भिर थारी सुĠदर सन गीत गा-गा आगे िनिनयाँ . . . . . . . मैना बनबए घरमे खॲता िसरोिलया करए ओिहमे चॲचाँ दाना आनय फोिड़ बखारी सभ िमल बाजय खा-खा आगे िनिनयाँ . . . . . . . चुिनयाँ पढ़ए बड़का पोथा सह-सह िढल करै छै झॲटा नĦहर केश ओकर बड़कारी दौड़ कऽ ककही ला-ला आगे िनिनयाँ . . . . . . .

122 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ओिध उपाड़ उपहास करैत इितहासक िनतरा रहल अिछ सफलतापर, सफलता जे छैक पािनक बुलबुĪलाा जेकाँ। सिĠहआएल छै अदंक कोँढ़मे उड़ल छै िनž तकने घुरैछ सुरक्षा कवच मुदा, उताहुल भेल अिछ मुँहमे जाबी लगा कऽ मेहमे बाĠहल बड़द जेकाँ जोतबाक लेल, छै दश-पाँच गोट लगुआ-भगुआ छै बĠदुक ते फेकैए गुड़-चाउर मने-मन िनत नवीन आडĦबरक। नइँ छै चौवžी भिर जनाधार तैयो िनतरा रहल अिछ, सफलताक नाम दऽ अतीतकेँ गुनैत वंश बढ़बऽ मे उनमþ। बुझैत अिछ ओ करची पङने दू-चािर गोट बाँस कटने नइँ उपटै छै बाँस तेँ िनतराइत अिछ बनल अिछ ढीठ। देश उएह अिछ पिरवेश नव देखैत छल पिहनहुँ

मैिथली पń २००९-१० 123 करूआइत छलै आँिख आब बूझऽ लागल अिछ बच्चासँ बुढ़ धिर नइँ होइत छै फूल बाँसमे नइँ होइत छै सुगĠधो नइँ लगैत छै फल मुदा, पनपऽ नइँ दैत छै ककरो अपना लगमे माÿ बढ़बैत अिछ अपन साƛाĔय। आब करची पड़लासँ नइँ दू-चािर गोट बाँस कटलासँ नइँ उपटाबऽ पड़त ओिध जिड़सँ कोिर कऽ तहन फुलएतै फूल िछिरअएतै सुगिĠध लगतै फल मुिİकअएतै ठोर।

124 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) शीतल झा1 टी..ऽऽऽऽ..स हमरोमे अहूमे एकटा टी..ऽऽ..स अिछ, निह किह ककर उžैस ककर बीस अिछ। िकनका आसपर हम छाती तािन चलू, हुनके तँ िबछुआएल िनहुरल शीश अिछ। जीबाक जोगाड़ बƂड कƠĆद अिछ, बाउ रे, पुजारीक हाथमे अमृत कहाँ िवष अिछ। शांितक शĤदसँ मोन आब उिठ गेल, भक्त िरक्त पेटसँ से माÿ रीस अिछ।

1 िपताक नाम–İव. लŞमीकांत झा, माताक नाम–İव. दाइ रानी झा, जĠम İथान–सुगा- मधुकरही–५, Ƈाम–नरिहया,धनुषा, नेपाल।वतर्मान बसोबास–जनक पुर–६, जानकीनगर पगला धमर्शाला, महाराज सागरसँ दिक्षण, िजला धनुषा, नेपाल।जĠम ितिथ-२०१२/०१/०१ जूड़शीतल। िशक्षा–बी.ए., बी.एड., बी.एल.।राजनीितक संलग्नता–नेपाल कĦयुिनƠ पाटŰ (एमाले), पद–सलाहकार, के.क. नेकĢपा एमाले।रूिच आ Ćकाशन–(i) संघीय संरचना आ िमिथला राĔय, िमिथलाक राजनीितक इितहास आ िमिथला (नेपालक सĠदभर्मे माÿ)। (ii) संİकृित, राįƏ आ मधेशक सĦबĠधमे िविभž रचना। (iii) किवता ( Ćकािशत िविभž पिÿकामे)। (iv) सुगौली सिĠध आ िमिथला ( अĆकािशत), “ सुगौली सिĠध”मीन राज उपाğयाय नागिरक उƂडयन िवभाग बाबरमहल।

मैिथली पń २००९-१० 125 शम्भु नाथ झा Ôवत्सÕ1 िमिथलाक दशा िमिथला मैिथल की भऽ गेलैए परदेशी ĭयवहार सनातन पĀातक रĻ रिĻ गेलैए िमिथला मैिथल की भऽ गेलैए कतए गेलैए मěडनक गिरमा िवńापितक गीत। पिहरब ओढ़ब िडİको भऽ गेलैए िबसिर गेलैए सभ रीित। वेद–मĠÿक ğविन हता गेलैए सुिन िलअ िफĪमी तान। िदन–राित िडİको लहरीसँ फािट रहल अिछ कान। कत गेलैए ओ पाग–दुपņा चĠदन–चिचर्त भाल। साँची धोती–अंगपोछा आ पावन रेशम शाल। िडİको पाछाँ देश िबका गेलैए िबगिड़ गेलैए संİकृित। दुŎा–दुिŎन सेहो बदलिल आयल केहेन नव रीित।

1 पिěडत शĦभुनाथ झा “वĜस”, योग्यता सािहĜयाचायर्, वेदिवद् Ĕयोितिवर्द्, अğयापन कायर्– १९८४ सँ १९९० धिर संİकृत महािवńालय, िवराट सरोवर, फारिबसगंज (अरिरया)। वतर्मानमे कायर्- कमर्काěड सĦपादन।िनवास İथल- Ƈाम–बहोरा, थाना–सरसी, िजला–पूिणर्याँ (िबहार)।

126 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मोनसँ पढ़ू बढ़ू अओ बाउ। सीमा हीन िक्षितजमे बिढ़ कए अपन लŞय् कए पाउ। मोनसँ पढ़ू बढ़ू अओ वाउ। जीवन-किठन तपİया बिढ़ गेल। बेरोजगारीक समİया बिढ़ गेल। िमटए क्लेश देशक जन-जन कऽ। Ćितभा एहन देखाउ। मोनसँ पढ़ू बढ़ू अओ बाउ। नेता ठगक भाषण पिढ़ गेल कपट-कुिटल कुशासन बिढ़ गेल। धन-लोलुप ƚƠ Ćशासन बिढ़ गेल। धवल कीिþर् ğवज वाहक बिन कए राįƀर्क अलख जगाउ। मोनसँ पढ़ू बढ़ू अओ बाउ। िबपिþसँ उबरब आस टूिट गेल। नेता परसँ िवĂास उिठ गेल। Ćबल राįƏ् इितहास छूिट गेल। क्षेÿवाद सामंत कहरसँ राįƏकेँ तुरत वचाउ। मौनसँ पढ़ू बढ़ू अओ वाउ। अनाचार कुिशक्षा बिढ़ गेल। िबनु पढ़ाइ परीक्षा बिढ़ गेल। लुिट-मािर बुभुक्षा बिढ़ गेल। देशक अहाँ कणर्धार यौ िबपदा दूिर भगाउ। मोनसँ पढ़ू बढ़ू अओ वाउ।

िमिथला बचाउ हे Ćभो! झटसँ बचाउ हमर िमिथला देशकेँ िवपद् Ƈİत संÿİत जनकेँ दूर करू दुःख क्लेशकेँ āृंखला परतंÿताक िचĠह एखनो निह छूटल।

मैिथली पń २००९-१० 127 शांितक रोटी सेहो जे आइ धिर निह भेिट सकल। जाित–भाषा धमर्मे भायसँ भाय अिछ लिड़ रहल। कतोक आिगक कुंडमे धन–जन भसम कए जाए रहल। सदबुिŀ समता शांित आओर िवĂास घटल जाए रहल। आचार अनुशासन िनअम आदशर् छूटल जाए रहल। परĦपरा–पावन–पुरातन पतन ओकर भए गेलैए उपदेश गीता बुŀक संदेश सुिक्त कतए गेलैए Ćाथर्ना भगवानसँ अिछ नेताकेँ सदबुिŀ दी। एहेन गĿीसँ ओकरा की İवगर्क ओ गĿी दी।

बेरोजगारीक समİया अहीं कहू हम जीबैत छी? पिढ़–िलिख घर बैसल छी घरनीक बात सुनैत छी। अहीं कहू हम जीबैत छी? रोजी रोटीक बात निह पूछब महगीक बोझ ढ़ुबैत छी। िदन–राित फेर कािŎ की खाएब उहै टा गीत गबैत छी। अहीं कहू हम जीबैत छी? बेर–बेर बहरायल वेकेंसी आवेदन तँ करैत छी। अंतवŰक्षा दए फुटपाथपर ऐखन धिर घुरैत छी। अहीं कहू हम जीबैत छी? पिहरन ओढ़न भए गेलैए गुदरी

128 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) फाटल धोती सीबैत छी। घरनीक ताना सुिन से ने बुझू िवषक घूंट पीबैत छी। अहीं कहू हम जीबैत छी? हमर दुःख के सुनताह हम ककरो कहबै की। हम “शĦभु नाथ” दुःखक गाथा गीत गािब सुनबैत छी। कतोक सुनाएब दुःखक िखİसा कोनो िविध िदन िबतबैत छी निह कोनो काज अिछ बैसल–बैसल िकछुसँ िकछु िलखैत छी। अहीं कहू हम जीबैत छी।

मैिथली पń २००९-१० 129 डॉ. योगानन्द झा1

1 िपताक नाम: İव. रामलखन झा, माताक नाम: āीमती भाग्यवती देवी, पािरवािरक सदİय: āीमती केवला झा,पėी; āी िमिलĠद कुमार झा–पुÿ, āी धीरज कुमार झा–पुÿ, सुāी कीिþर् झा–पुÿी।जĠम ितिथ: ११ जनवरी १९५५; İथायी पता: भगवती İथान मागर्, किबलपुर, लहेिरयासराय दरभंगा-८४६००१ (िबहार)। िशक्षा: एम.ए. ( मैिथली एवं िहĠदी), पी.एच.डी.।मातृभाषा: मैिथली, अĠय भाषा: िहĠदी, संİकृत, अँƇेजी, बंगला एम.ए. ĆबĠध: काơ ĭयावसाियक मैिथली शĤदावलीक ĭयाख्याĜमक अğययन, शोध ĆबĠघक िवषय: मैिथलीक Ćमुख पारĦपिरक जातीय ĭयवसाय ( पी.एच.डी. हेतु) सĦबĠधी शĤदावलीक ĭयाख्याĜमक अğययन। उþीणर्: यू.जी.सी. राįƏीय पाÿता परीक्षा, १९९० कĦĢयुटर अĢलीकेशन Ćमाण पÿ परीक्षा। DOEAC २००६ वृिþ: अंकेक्षक, िबहार राĔय िवńुत बोडर्, पटना। सदİय : भारती कला पिरषद्, किबलपुर। तुलसी मानस गोơी, किबलपुर, िमिथला िरसचर् सोसाइटी, किबलपुर, कणŭमृत, कणर्गोơीक, कोलकाता, चेतना सिमित, पटना, अिखल भारतीय सािहĜयम पिरषद्, नई िदĪली, िमिथला पिरषद, भागलपुर, मैिथली लेखक संघ, पटना, मैिथली भाषा परामशर्दातृ सिमित, सािहĜय अकादेमी, नई िदĪली (१९९८-२००२); İथािपत: लŞमी अिभनय (नाƀय संİथा), किबलपुर, कीिþर्लता सािहĜय सािहĜय सिमित ( Ćकाशन संİथा)। Ćेरक: पं. āीचĠƖनाथ िमā ‘अमर’ ( मैिथली किव), डा. रामदेव झा (मैिथली कथाकार एवं मनीषी), पं. सुरेĠƖ झा ‘सुमन’ (मैिथली किव-पÿकार), डा. सुभƖ झा (िवĂिवख्यात भाषा शाİÿी)। Ćितबŀता : माता, मातृभूिम, मातृभाषा। रंगमंचीय सिƅयता: भारती कला पिरषद, किबलपुर। लŞमीक अिभनयम, किबलपुर; संकĪप लोक, लहेिरयासराय। रुिच: लोक संİकृित एवं सािहĜय, अğħयन, शोध-कायर्, किवता-कथा-िनबĠध-समालोचनािद। Ćथम रचना: वषŭ (किवता) १९६९ Ćथम Ćकािशत कृित: िमिथलाक डोम जाित ओ ओकर जातीय शĤदातवली, िमिथला सांİकृ्ितक पिरषद İमािरका, बोकारो, १९८२; Ćकािशत कृित: लोकजीवन ओ लोक सािहĜय (िनबĠध) १९८६, पिरणीता (कथा-काĭयांश) १९८७, फकीर मोहन सेनापित (अनुवाद) २०००, आलेख सĖचयन ( िनबĠध) २००२, िबहारक लोककथा ( अनुवाद) २००३, İनेहलता ( िविनबĠध) २००६, मैिथली पÿकािरता के सौ वषर् ( िनबĠध) २००६, गहबरगीत ( िनबĠध) २००७, लोक-सािहĜय ओ शĤद-सĦपदा ( िनबĠध) २००७, मैिथलीक पारĦपिरक जातीय ĭयवसायक शĤदावली ( शोघ ƇĠथ) २००९; सĦपािदत कृित: संकĪप İमािरका ३,४,५ ( वषर् १९८५,८७ एवं ८९) युगदीप तुलसी २००४, अनमोल भजनावली २००५, मैिथली हनुमान चालीसा, २००७ पुरİकार: पी.सी.राय चौधरी कृत ‘फॉक टेĪस ऑफ िबहार’क मैिथली अनुवाद ‘िबहारक लोककथा’पर सािहĜय अकादेमी, नई िदĪली Ņारा २००५ मे पुरİकृत। सĦमान: िमिथला िरसचर् सोसाइटी, किबलपुर १९७०, िबहारी जनसेवा सिमित, मुĦबइ १९८६, āीसुमन अिभनĠदन सिमित, किबलपुर १९९८, िवńापित सिमित, दुमका २०००, राįƏीय िशखर सािहĜय सĦमान, सािहĜयकार संसद, समİतीपुर २००३, २००५, २००७; सरİवतीमĥययचर्ना, भारती पिरषद् Ćयाग २००४, चेतना सिमित, पटना २००६, अिखल भारतीय सािहĜय पिरषद्, दरभंगा शाखा २००६, िबहार İटेट इलेिक्Əक सĢलाइ वकर्सर् यूिनयन, िमिथला क्षेÿ २००८, िसŀाāम, कला पीठ, िसमिरया घाट २००८, िमिथला िवकास मंच, भागलपुर २००८, िमिथला सेवा संİथान, खगिड़या २००९, Ćमुख सािहिĜयक गितिविध: राįƏीय-अĠतरŭįƏीय संगोơीमे सहभािगता, आकाशवाणी, दरभंगासँ वाþŭ

130 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) घर भीतेटा चहकल निह सगरो चारो धिर उजड़ल अिछ यैह हमर घरक िथक नकसा हृदय हमर टूटल अिछ

किहया धिर आशापर जीबइ किहया धिर सपनामे भाग्य-भरोसे िनयŭत कते िदन लड़ब-कटब अपनामे एहन दशा सभ घरवासीक जनु भाग्ये फूटल अिछ यैह हमर घरक िथक नकसा हृदय हमर टूटल अिछ

जकरा जेĦहरे अवसर भेटल कयलक लूट-खसोट अपन-अपन कऽ सभ अिछ िचिĠतत सबहक मनमे खोट चालिन जे बिन गेल İवयं से सुपहुकेँ दूसल अिछ यैह हमर घरक िथक नकसा हृदय हमर टूटल अिछ

İवाथर्क मदमे सभ अिछ मातल अनकर की परवािह

Ćसािरत, सािहĜय अकादेमी अनुवाद कायर्शालामे सहभागी १९९०, मैिथली कथा आĠदोलन ‘सगर राित दीप जरय’मे सहभागी, किव गोơी एवं काĭय संğयामे सहभागी, सािहĜय अकादेमी नई िदĪली Ņारा Ćİतािवत याÿा अनुदानक माğयमसँ उिड़या सािहĜय एवं संİकृितक पिरचय; राįƏीय-अĠतरŭįƏीय पिÿकामे शोध एवं अनुवाद कायर् Ćकािशत; अिभनĠदन ƇĠथमे लेखकीय सहयोग आिद। अिƇम Ćकाशन योजना: सुमनजीक İवगदेश अमरजी: सĦपादक, मंगल-Ćभात, मैिथली गणकाĭय: āी सीता–राम िववाह पदावली, मैिथली लोक-संİकारपरक गीत, वषŭ ( किवता संƇह), संतसेवीक बोधकथा ( अनुवाद), सुख-दु:ख (अनुवाद), Ćितशोध ( नाटक), İनेही वािटका ( सĦपादन), सीतावतरण ( खěड काĭय), तीरĠदाज (अनुवाद), पगधूिल चिरत (Ćवचन काĭय), डा. रामदेव झा ओ हुनक संजीवनी समालोचना।

मैिथली पń २००९-१० 131 किहया धिर ई खतम भऽ सकत दिलत-पीिड़तक आिह कुकुर-कटाउझ मचल दहोिदश ओþिह सभ जूटल अिछ यैह हमर घरक िथक नकसा हृदय हमर टूटल अिछ

मिĠदर-मिİजद रण-Ćाङन अिछ धमर्क ककरा ğयान सबिह सुखी सभ रोगमुक्ता निह भारत कोना महान सĠतित सभ एिह घरमे एखनो अलस पड़ल सूतल अिछ यैह हमर घरक िथक नकसा हृदय हमर टूटल अिछ केओ नृप होय हमे का हानी कखनो ई संवाद हमर जाितक लोक िथका ई कखनो उठय िववाद गमलक निह मधु-ऋतु िशिशरोमे अĠतर, कतहु कुशल अिछ यैह हमर घरक िथक नकसा हृदय हमर टूटल अिछ कालक निह लीला ई सभ िथक ƙहमक निह िथक माया ई करनी मानव-दानवक भोग-वृिþक छाया संघषर्क आƫान करी तँ कमर् कतहु रूसल अिछ यैह हमर घरक िथक नकसा हृदय हमर टूटल अिछ

तािक रहल छी मािट राįƏक मािटक सोĠह सुगĠध संİकृित आ संİकार अपन पुिन परĦपिरत अनुबĠध İवणर्मुकुट धरणीक किहया

132 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ककरोसँ झूसल अिछ यैह हमर घरक िथक नकसा हृदय हमर टूटल अिछ पर-पड़ोसी फूट देिख घर लुटबा लय तैयार कखन करय के निह जानी जयचĠद सिरस ĭयवहार िवĂ भिरक चोरा मुँह बओने पिरखा लग जूटल अिछ यैह हमर घरक िथक नकसा हृदय हमर टूटल अिछ

वीरेन्ġ मिल्लक गितशीलता आब हम ओ निह रहलहुँ िकछु आओर भऽ गेलहुँ से की यौ? ओ आने लोक कहत।

मैिथली पń २००९-१० 133 गंगेश गुंजन राधा-१६म खेप बुझायल त एतबे जे अयलॱ माएक गभर् मे नौ मास अपनिह िनमŭणक नरक सहैत,माइयो के सहबैत Ćितपल भिर जीवनक पीड़ा माएक एक-एक साँस के दुघर्ट करैत हम अपनिह जĠम सँ कएल िवकट पराभव ओकरा लेल। ओ यńिप कहैत छैक- सĠतानक जĠम महासुख ! हम तं सĠतान, की बुझी तकरा कही की ? ...मुदा पुनः-पुनः माएक गभर् मे के रखलक हमरा ? भिरसक िपता...वैह हुनके राखल जे, होइत गेल िवकिसत बनैत गेल रिधया ! एक िदन...सुनै छी एिह गामक धरती पर ......खसल चेहॲ-चेहॲ करैत, यैह झरकलही देह। सेहो सुनै छी, माए तँ हिषर्त िकĠतु भेला बहुत सुख-िचिĠतत िपता। भेिलयिन जे बेटी, ककर दोख यिद दोखे त ? जेना देलिन हमरा माएक गभर् तेना देने रिहतिथ कोनो बेटा । बाधा की ? तें अपन काज केर फल सँ असंतुƠ माय पर थोपल दोख िकएक, कथीक ? ओना, जे हो आिब त गेबे केिलयिन मायक कोरा- एिह छोटोिछन घर-असोरा-आङन मे, बाड़ीक ओलक गाछ जकाँ अपनिह टॲटी सँ िवकिसत होइत, सॱसे चतरल गेल हिरयर गाछ समान। भ त गेवे कएलॱ। जेहने भेलॱ आब एतेक वखर् धिरक भ गेलॱ बेसी बेटी त ओिहनो ओले बुझल-कहल जाइए-कबकब, समाज ।

राधाक मन बड़े बौआइत छैक। एक क्षण एत, दोसरे क्षण नइं जािन कत ? मन खॱझाइत बड़ छैक जे ओ एहन आ एहने भेिल िकयेक ? अपने भेल िक बना देल गेिल एना ? की ? दुनू मे की ? बा एहू दुनू कारण सँ फराक िकछु कारण ? बा एिह दुनूक िमĔझर एकटा तेसर पिरणाम िथक ओ ? बड़ ĭयाकुल होइत अिछ- िकये रूसल छिथ कृįण ? आ िक हमहॴ िछयिन रूसिल हुनका सँ ! की ?

134 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) के करओ पुरबा साही एकर- यिद रुसले अिछ त ककरा सँ के ?... राधाक कंठ सुखाएल- ओह,जल पीिबतॱ दू घॲट ! िपयास आकुल घैलची सँ ढारऽ गेली- घैल िरक्त, ढन-ढन करैत...

कीितर्नारायण िमĮ अकाल सड़कपर हƂडी िचबबैत छॱड़ा सभ कुकूर आ पुिलसकेँ डěडा देखा रहल अिछ ऐंठल अंतड़ी वाली जनता भूख-हड़तालक धमकी दऽ रहल अिछ। आ बाँझ सरकार िवदेशक आĂासनसँ िववाह रचा रहल अिछ ’लूप’ लागल धरती तथा िनवीħयर् अकाशक बीचमे देशक नपुंसकता जोरसँ दहिड़ मािर रहिल अिछ। आ समय एिह सभसँ असĦपृक्þ नशामे मातल मैदानमे जा कए सूित रहल अिछ।

मैिथली पń २००९-१० 135 स्व. Ĥशान्त करू की वृŀ अथबल छी पूिणर्याँ किव İव. ĆशाĠतक किवता

करू की वृŀ अथबल छी िपþ तँ चढ़ैत अिछ बहुतो करू की वृŀ अथबल छी

सुदिमया माय जे आयल छिल नैहरसँ महफापर चिढ़ कऽ तिनका साइिकलपर चिढ़ देिख सड़कक कातमे दुबकल छी करू की वृŀ अथबल छी

नवका पैसा सन बुिधयार बिन चमकैत अिछ छॱड़ा! िपयरĸा दुअžीसँ अकायर् भेल बैसल छी- करू की वृŀ अथबल छी

मोकामा पुल बिन गेने िसमिरया घाटक İटीमर जेकाँ अकायर् भेल बैसल छी करू की वृŀ अथबल छी

िपþ तँ चढ़ैत अिछ बहुतो करू की वृŀ अथबल छी (İमृितपर आधािरत)

136 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) काली नाथ ठाकु र1 सून िमिथलाĖचल…..। सून िमिथलाĖचल, जनु बूिझ पड़ल छिथ रूिस रहल- धरती सुखा कऽ भय गेल टाँट पड़ती पराँट फाटल दरािड़- के देिख देिख अिछ कािन रहल जन जीवन, अžक अभाव पेटक िचĠता, सवर्ÿ ĭयाĢत अिछ- महगीसँ जन जन तबाह सभ जन कनैछ छै धँसल आँिख ओ रुच्छ केश भऽ गेल सुखा कऽ काँट काँट सिट पेट-पीठमे एक भेल तनपर माँसक निह छैक लेश। छिथ पूँजीपित बाबू भैया नेता मुिखया कतŭ-धतŭ पालनकतŭ सौँसे गामक छिथ कणर्धार

1 जĠम- २४-०६-१९४६, आĜमज िशवनाथ ठाकुर Ćिसŀ लोचन ठाकुर, Ƈाम सवर्सीमा, मधुबनी, िबहार। JK िसंथेिटक्स िल० कानपुरमे १९७३ सँ १९९५ धिर कायर् कएलाक उपराĠत İĝयक Ćितकूलतासँ İवैिच्छक सेवा िनवृिþ लय सĦĆित कानपुरमे सारİवत साधनामे संलग्न।

मैिथली पń २००९-१० 137 के बािज सकत? कर तिन िवरोध देिथन उजािड़ दय दय मुसकी किस ĭयंगवाण, अĭवल गरीबपर चलिन रोऽऽब बैसल दलानपर रचल करै छिथ षƂयĠÿ सतत िनज धोिध बढेवाक हेतु दू- चािर वा दस बीस रुपैया कजर् देिथ- आ सादा कागज पर- औंठा िनशान लगवाविथ िबहुँसैत छिथ रखैत कजरौटी बगलिहमे सदखिन के कय सकैछ हुनकर परतड़ बुिधयारीमे से बुझा दैत छिथ अपनिह सभकें हे भारत भूिमक पुÿ आबहु चेतह, ई धमर्राज सभ रक्त तोहर रहतह चूसैत सदा यिद निह होयबह जागरूक लड़ह अपन अिधकार हेतु लोकतĠÿक रक्षा भय सकैछ तोहरे बलपर एवं लोक तĠÿक रक्षिहसँ बचतह तोहरो Ćाण- इĔजित – मान॥

138 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) अरिवन्द ठाकु र गजल कोना अजुका िदन ससरतै, राित कटतै हओ भजार एक–एकटा पल हमरा लेल सूनामीक Ćहार िबसिर गेल छी मोन पिछला बेर किहया खुश भेलहुँ डािकया आइयो ने आनलक अिछ कोनो खुशखबरीक तार ई महाजन, ऊ महाजन, निञ कतहु अिछ रामबाण बाण बेगरताक अिछ भॲकल करेजक आर–पार यओ अĠहारक दास! आबहुँ संतितक िहत कामनासँ बजरगुĦमी तोिड़, करू िकछु आिग बारैक जोगार पीड़ासँ लड़बाक लेल राखए पड़त िनजपर भरोस पीड़ हरए के लेल िनþह निञ एताह कोनो औतार आधा–िछछा रिह जाइछ ‘अरिबन’ जीवनक सभटा गजल ओझरल रदीफो–कािफया आ माथ पर िमसरा सवार

२ कािनकए बड़ी काल नेना हािर कए चुप भए गेलै लगैए एिह ठामक सभ कान िदĪली भए गेलै पागधारी मगन छिथ अपनिह बनायल कूपमे हाथ भिर नĦहर जखनिक टीक िदĪली भए गेलै पेट, बासन, मुँह, जेबी, लोक–वेदक सभ िसंगार गाम, घर, सीमान सभकेँ छुछ िदĪली कए गेलै ठेठ िदĪलीसँ चलल अिछ Ćगितक दाबा सूनामी अनघोल िदĪलीमे भेलै जे देश िदĪली भए गेलै जे भेला औतार, पैगĦबर, मसीहा सन कनेको सभकेँ पोसुआ बना ‘अरिबन’ िदĪली लए गेलै।

३ मोनकेँ छः पाँच छोड़ू, िगरह राखब नीक निञ हाथमे साबून लए कए फागु खेलब नीक निञ आदम जकाँ जžतकेँ विजर्त फलपर निञ अहाँ लगाऊ क्षण भिरक जे खेल, सिदखन सएह खेलब नीक निञ शĤदक औजारसँ भड़काएब लोकक भावकेँ

मैिथली पń २००९-१० 139 खेल छै ई सहज िकंतु ई खेल खेलब नीक निञ ’ढ़ाइ आखर Ćेम’ पिढ़ पंिडत भेला फĸर कबीर अहाँ एकरा खेल बूिझ एकरासँ खेलब, नीक निञ हे! मखौलक वİतु निञ िथक एिह Ćकृितक उपादान मािट, पािन िक रौद, हवासँ अłुत खेलब नीक निञ खन आजादी, खन िकराँती, खन चुनाओक खेल–बेल पिहर खŀर खेलैत अएलहुँ, आर खेलब नीक निञ मृĜयुकेँ खेलौर बूिझ खेललहुँ सगर िजनगीक खेल आब लगैछ िजनगीसँ ‘अरिबन’ एना खेलब नीक निञ।

४ की कही एिह बािढ़मे डगरक कथा–िखİसा खराप समािध आरयमे खराप, ससुरािरमे बेसी खराप बािढ़मे छĢपर िनपþा, भेटल तारपोलीन खराप चाऊर खरबहे छलै आ दािल िकछु बेसी खराप बािढ़मे भेटत कतए िकछु नीक बोली िक वचन मुिखयाक बोली ओलसन, बी.डी.ओ. क मुँह खराप डाग्डरक तँ कथे निञ, एिह बािढ़मे औषिध खराब एिह खरबहा हालमे धीया–पूताक मोन खराप चढ़ल बािढ़ आ सूचना–सĦवादक साधन खराप हािकम सभक वाहन खराप अिछ, नाहक पेनी खराप की घसै छी बािढ़पर ‘अरिबन’, अहाँक माथा खराप मतला तँ बकबासे जकाँ, मकता कने बेसी खराप

140 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कु मार पवन1 निह िबसरैछ निह िबसरैछ....निह िबसरैछ एको पलक लेल निह िबसरैछ जाड़क ओ िठठुरैत कनकनायल भोर....

सघन कुहेसकेँ चीरैत मğयम गितएँ आगाँ बढ़ैत िबलमल छल मुजģफरपुर टीसनपर अवध आसाम एक्सĆेस İलीपरक कोच नĦबर सातमे इĸा दुĸी लोक सभ टायलेट िदस अबैत जाइत बाकी याÿी सभ मारने गुबदी अलसाइत.... चाहबला िबİकुटबला अपन अपन समानक सİवर िवज्ञापन करैत कऽ रहल छल जड़ताकेँ भंग.... िक तखनिह ओ चढ़ल छल बॉगीमे चुपचाप Ćायः दस बखर्क दुĤबर–पातर धुआ कँिच आयल आँिख बहैत सुड़सुड़ाइत नाक मैल–िचĸट फाटल शटर्सँ कहुना कऽ झँपने अपन देह गदर्िनसँ ठेहुन धिर

1 वाİतिवक नाम- डॉ. पवन कुमार झा, जĠमितिथ- २७/१२/१९५८; İथायी पता- Ƈाम+पÿालय–मुरैठा; भाया-कमतौल, िजला-दरभंगा, िबहार–८४७३०४; वþर्मान पता- पी. जी. टी. ( िहĠदी), केĠƖीय िवńालय, किटहार, ( िबहार)- ८५४१०५; िशक्षा- एम. ए. (िहĠदी), बी. एड., पी. एच. .; आजीिवका-केĠƖीय िवńालय संगठनमे पी. जी. टी. (िहĠदी)क रूपमे कायर्रत; लेखन—िवगत शताĤदीक नवम् दशकक Ćारंभमे किवता लेखनसँ सािहĜय–कमर् Ćारंभ। Ćायः डेढ़ दशक धिर किवता, कथा, ĭयंग्य आ आलोचनाĜमक िनबंधक िवरल लेखन। एक दशकक मौनक बाद लेखनक दोसर पारी २००८ ई.मे Ćारंभ। शीƈिह किवता–संƇह, कथा-संƇह आ ĭयंग्य–संƇहक Ćकाशनक तैयारी।

मैिथली पń २००९-१० 141 मुलकल कठुआयल खाली–खाली पएर....

िनःशĤद लागल बहारय ओ बॉगीमे िछिड़आयल Ćयुक्त–पिरĜयक्त पदाथर् सभ खाली िडİपोजेबुल कप खोइया िचिनञा बादामक िसगरेटक िमझायल शेषांश िसŇी तमाकुलक अँइठ–कुइठ भरल कागजी Ģलेट....

मािर कऽ ठेहुिनयाँ िनहुरैत िनचला बथर् तर ढुकैत चीज वİतु सभकेँ एĦहर ओĦहर घुसकबैत एतऽ सँ ओतऽ धिर बॉगी भिर बहारैत रहल....बहारैत रहल खुिज कऽ Əेन अपन गितसँ बढ़ैत रहल....

खतम कऽ काज पसािर देने रहय ओ अपन कठुआयल हाथ एĦहर बॉगी भिर पसरल देिख गंदगी राितमे जे याÿी सभ भेल रहिथ परेशान तिन गेल छलिन एखन हुनके सभक चेहरा देिख कऽ एिह अवांिछत याचककेँ क्यो असहज देिख छौड़ाक िघनायल धुआ Ćķाकुल क्यो जे कोन लापरबाहक ई अिछ संतान देशक बेसĦहार जनसंख्याक Ćित िचंितत क्यो िविİमत क्यो आिखर िवदाउट िटकट ई सभ चलैत अिछ कोना क्यो–क्यो तँ एकदम İपƠ छलाह– चोरक िगरोहक तँ ई अिछ एजेंट....

142 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) जाड़क ओिह कनकनायल भोरमे कोच नĦबर सातक बोनाफाइड याÿी सभ मसृण कĦबलक उįणतामे सुटकल करैत रहलाह धुरझाड़ िवमशर् जनसंख्या िवİफोटपर असुरिक्षत याÿापर बाल मजदूरीपर सरकारक असफलतापर देशक दुदर्शापर आ ओĦहर ओ दस बखर्क गरजू अबोध मजदूर सभ िकछु सुनैत रहल सुिनयो कऽ टारैत रहल ठोरपर ठोर सटौने एक–एक ĭयिक्त लग जाइत रहल अĢपन नािĠहटा खाली हाथ बेर–बेर पसारैत रहल....

निह िबसरैछ....निह िबसरैछ एको पलक लेल निह िबसरैछ खजूर–पातक बाढ़िन पकड़ने ओ वाम हाथ याचनामे पसरल ओ खाली–खाली दिहन हाथ आ काँचीसँ भरल ओ चमकैत आँिख दून निह िबसरैछ....।

कािŎ तँ रिव छै ओ आइ मुिदत छलाह दूनू बेकती कामकाजी कहुना कऽ एक दोसरासँ राजी बूढ़ छलिथन माय बाप तीन तीन टा बाल बच्चा अğययनरत पलखित निह दम लेबाक एक दोसराक हाल पुछबाक दगमगाइत सĦहरैत

मैिथली पń २००९-१० 143 कोसक कोस दौगैत कण–कणकेँ दुहैत क्षण–क्षण हकमैत मुŇीमे बसात पकड़ैत ठेिहआयल छलाह मुदा, आइ मुिदत छलाह

मुिदत छलाह जे सĢताहक आइ छैक अंत कािŎ तँ रिव छैक रहब कािŎ िनिĀंत कािŎ तँ रिव छैक....

जदिप ओ नीक जकाँ जनैत छलाह राखल छिन तैयार कयल काजक दीघर् पुजŰ काजक आगाँ अपन कोन मजŰ बजौने छिन कािŎए दजŰ कािŎए जुटयबाक छिन घरक खचŰ कीनबाक छिन माय–बापक लेल दबाइ ƀयूटर िबनु अटकल छिन बेटाक पढ़ाइ ठीक करयबाक छिन टी. बी. कतोक िदनसँ पėी छिथĠह परेशान गैसक चूिŎ कऽ रहल छिन हरान नोकरी करथु िक भुकभुकाइत चूिŎसँ संघषर् सऽख तँ भइए गेलिन सुƂडाह मुदा, तैयो ने कऽ सकैत छिथ आह....

से ओ नीक जकाँ जनैत छलाह जे पिछले अनेक रिव जकाँ कŎुको रिव आयल जेना अबैत रहल अिछ आिब कऽ चिल जायत जेना जाइत रहल अिछ औचके मोन चलल छलिन Ćķोþर की सिरपहुँ कािŎ रिव रहए?

144 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) की सिरपहुँ कािŎ रहब िनिफिĸर? निह! िजनगी मे कोनो रिव कहाँ? समय बीतैत अिछ अिवराम िजनगीमे कतय अिछ आराम? तदिप पता निह िकएक बना कऽ रखैत एकटा सुखद ƚम ओ आइ मुिदत छलाह चलू सĢताहक आइ छैक अंत कािŎ तँ रिव छैक रहब कािŎ िनिĀंत कािŎ तँ रिव छैक

मैिथली पń २००९-१० 145 Įी िवƭानन्द झा1 कोशीक ताěडव पूवर् िमिथला कोशी कातक चहुँिदिश करै िकलोल। अž-वİÿसँ वंिचत भए बसिथ केĦप धनजोर॥ नेना-भुटका ओ समरथुआ क्यो निह रहल सरपोक। पितएँ पėी, पुÿ पौÿसँ िछž-िभž चहुँओर।। िबपदा मारल देह नचारी गेल अž-अž बेहाल। जल िबिच बिस कऽ Ģयास मरै अिछ Ćाण पािब दुĜकार॥ नर ओ नर िरपु संग िनभै िकनको मुख निह अपमान। िविधना िलखेलिĠह अपर िवधान हुनकर निह पिरमाण॥ कƠक अĠत निह कहुखन देखलहुँ कƠिह िबतय Ćाण। भूखक Ĕवाला दग्ध करै अिछ- İनेह-Ćेम-सĦमान॥ िपता पुÿसँ झपिट खाए छिथ- रोटी-नोन महान। जठरानल धधकल अिछ सभतिर निह बुझिथ संतान॥ सवर् İवांत कएलिĠह कोशी माता निह िकछु बाँचल जोर। पूवर् िमिथला कोशी कातक चहुँ िदिश करए िकलोल॥ एिह िविच देखलहुँ अłुत “देखना” “मािरचक” भरमार। मौका पािब लूिट रहल अिछ सेवा भेल ĭयापार॥ दुिनयाँ दौड़ल बाँिह पसािर कऽ, बैसोलक घड़जोिड़, अž-वİÿ ओ आिलĻन दए, कएलक भाव-िवहोर॥ सचमे! दुिनयाँ एखनहुँ बाँचल- सĜय भेल निह थोड़। āृिƠ िवधाता रक्षा करता, निह होउ कमजोर- निह होउ कमजोर।

1 पĽीकार ( Ćिसŀ मोहनजी) जĠम-०९.०४.१९५७,पěडुआ, ततैल, ककरौड़(मधुबनी), रशाढ़य(पूिणर्या), िशवनगर ( अरिरया) आ’ सĦĆित पूिणर्या। िपता लĤध धौत पĽीशाİÿ माþर्ěड पĽीकार मोदानĠद झा, िशवनगर, अरिरया, पूिणर्या|िपतामह-İव. āी िभिखया झा। पĽीशाİÿक दस वषर् धिर १९७० ई.सँ १९७९ ई. धिर अğययन,३२ वषर्क वयससँ पĽी- Ćबंधक संवŀर्न आऽ संरक्षणमे संलग्न। कृित- पĽी शाखा पुİतकक िलĢयांतरण आऽ संवŀर्न- ८०० पृơसँ अिधक अंकन सिहत। गुरु- पĽीकार मोदानĠद झा। गुरुक गुरु- पĽीकार िभिखया झा, पĽीकार िनरसू झा Ćिसŀ िवĂनाथ झा- सौराठ, पĽीकार लूटन झा, सौराठ। गुरुक शाİÿाथर् परीक्षा- दरभंगा महाराज कुमार जीवेĂर िसंहक यज्ञोपवीत संİकारक अवसर पर महाराजािधराज(दरभंगा) कामेĂर िसंह Ņारा आयोिजत परीक्षा-१९३७ ई. जािहमे मौिखक परीक्षाक मुख्य परीक्षक म.म. डॉ. सर गंगानाथ झा छलाह।

146 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) १. केĦप- िशिवर २. धनजोर- सĦपž, धनी ३. सरपोक- खतरा मुक्त, िचĠतामुक्त ४. नर-िरपु- सपर् इĜयािद ५. मािरच- मायावी राक्षस ६. घड़जोिड़- एक संग

दहेज दानव पुÿ हुनक अिभयĠता छिĠह। मनमे बहुत सेहĠता छिĠह। बेटी बापक िटक पकिड़ कऽ। शोिणत चूषक इच्छा छिĠह।

िबन दामक निह बेटा िबयाहब। वरु कुमार रिह जािथ। ĭयापारी छी ĭयापार करब। वरु बेटे िबिक जािथ।

वरक बाप ओ ओढ़Ļल बैसल। क्षण-क्षणमे फुिचयािथ। जे िकछु मĻलिन से बड़ कम अिछ। कĠया दाता İवयं िबकािथ।

कĠयादाता अरमान करिथ। भलमानुष भेिट जािथ। माय बĠधु ओ कुटुम बेरागन। Ņार-Ņार घुिरयािथ।

की मांगी ओ की निह मांगी। एिहपर निह िकछु सोच-िवचार। जे फूरय ओ सभ िकछु मांगी। माँगक अĠत निह, कतऽ उदार।

लोलूप जीव िकछु निह बूझय। सभ बूझय- धन-पोषिनहार।

मैिथली पń २००९-१० 147 अनकर धनपर लूिट मचाबिथ। संसारक सब चोषिनहार। कĠया दाता भए बेगितर्त। अंट-शंट गिछ लेिथ। िमĝयालाप कखनहुँ निह िहतकर। तकर करिथ िनलųख।

िववाह एक धमर् िथक िववाह एक कमर् िथक। धमर्-कमर् रािख सकी समाजक ई ममर् िथक। दहेज एक लोभ िथक दहेज एक रोग िथक। लोभ-रोग छोिड़ सकी हमर ई धमर् िथक। हमर ई धमर् िथक...

मो. गुल हसन1 सभटा चौपņ भऽ गेल बड़ मेहनतसँ खेती कएलहुँ नीक-नीक धानक बीया लगेलहुँ गोबर-छाउरकसँ खेत भिर हम कादो कए हम धान लगेलहुँ मुदा निह जािन िवधना िक िलिख देल.... की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल।

धानक शान कहल नइ जाइ छल हिरयर कंचन धान लगै छल तुलसी फूल-बासमितसँ गम-गम करैत हमर खेत भरल छल मुदा, बािढ़क चपेटमे सभ चल गेल की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल

1 आई. कॉम, जĠ म ितिथ- ५. ०१. १९६४ ई., िपता- अĤ दुल रशीद भरहुम, Ƈाम+ पोİ ट- बेरमा, िजला- मधुबनी

148 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कमला तँ मािन गेली मुदा, कोशी िबगड़ल छल आ भुतहीकेँ तँ बाते निह करु जेना सोझहे ओ उलटल छल नहरक पािन आ वषŭ िमिल दुनू खेलल ऐहन खेल की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल

सरकारक अिभयान चलल नेता सभ केलिन पहल... एक हजार रुपैआ आ एक क् वीĠ टल अनाज देव से सुिन मनमे राहत तँ जरुर भेटल, मुदा हे, अढ़ाइये सए रुपैआ पचीसे िकलो चाउर एतनेपर ओहो ƙेक लािग गेल की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल

िलखैत ई बात गुल हसन कहैए की कहुँ भाय..... आब हमरा िकछु निह फुरैए... िकऐक तँ हेँ केलहा-धेलहा तँ सभटा पािनमे चल गेल की कहुँ भाय सभटा चौपट भऽ गेल।

मैिथली पń २००९-१० 149 मनोज कु मार मंडल1 बहीन जखन बहीन अिह घर जनम लेल, लार-Ģ यार व İ नेहक बरखा केलहुँ İ नेहक पुतला बना हम हृदयक मंिदरमे बैठाउल जखन İ नेह यौवन छूलक दुिनयाँ कहैछ जाइछिथ ई हम पुछलहुँ की कहैत छी? सबहक बहीन जाइ छािथ।

आँिखमे पािन ĭ यिथत हृदयसँ हम बाजल- ‘जो बिहन तू अपन घर, जतए खुशीसँ भरल बाग होउ दुखक छाँह तोरा निह भेटउ İ नेहक जतए राज होउ, कहैत-कहैत आँिखसँ िगरल पािनक दू गोट बूĠ न लोक सहृदए कहलक- ‘भुिल जाओ अहाँ हम पुछलहुँ की कहैत छी? सबहक बहीन जाइ छिथ। मिहना बीतल, बरखक बरख बीतल हमहुँ जेना भुिल जेँका गलहुँ नव बĠ धनमे बािĠ ŀ हम मायामे समाए गेलहुँ जखन किहयो मन परल पुरने İ नेह उमैर परल, İ नेहक मोटरी बािनह पहुँचलहुँ लोग कहलक- ‘भुिल जाओ अहाँ हम पुछलहुँ की कहैत छी? सबहक बहीन जाइ छिथ।

1 िपता- āी भगवान दþ मंडल, Ƈाम, पोİ ट– बेरमा, तमुिरया, िजला-मधुबनी

150 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) डोली लागल बरात साजल छल, सबहक आँिख नोरसँ भरल छल पग भारी छल, आगू डोली, पाछु बरात छल हम पुछलहुँ केहन ई उĜ सव? सभ कहलक- भूहल जाओ अहाँ हम.......

आमोद कु मार झा1 मैिथल नँइ–छोटका नइ हइ ककरो गरज शहरे अउरमे करे हइ बड़का–बड़का पाटŰ आ सĦमेलन गाम अउरमे हमरा सुहूनकेँ नइ बुझइ हइ मैिथल.. हमरा अउरकेँ बुझइ हइ ‘छोटका’ िगरहत अइयग एक िदन बजिलऐक आ बइसे गेिलऐक.. खुसŰयेपर फĔझित कऽ कऽ उठा देने छऽल गऽ बभना हमरा सुहून नइ बुझइ–गमइ िहअइ ‘मैिथली’ हइ हमरा अउरक भाषा

1 िपता: āी दयानĠद झा, Ƈाम : मोगलाहा, पोİट: िमसरौिलया, भाया: बाबूबरही, िजला : मधुबनी, जĠम : ०१/११/१९६८, िशक्षा: बी.ए.(मैिथली), एम.ए. (मैिथली), एन.इ.टी–जुलाइ– १९९६, बी.इ.टी।

मैिथली पń २००९-१० 151 सभ िदन बएह अउर बुझलकै माने िवńापित हइ ओकरे अउरक बुझू दादा–परदादा ई युग हइ लोकक कहबी हइ दस टके नइ िनतराय दस सगे िनतराय नइ करइ हइ किहयो राजा लोिरकक समारोह देवता सलहेसक फंगसन कािरख पिघयारक गाथा िकयो कहाँ याद करइ हइ बंठा चमारकेँ.. करौक एकर परचार–परसार गाम–घर चौराहा अउरपर देिखयौक ने िछिन लेतइक िकयो हमरा अउरक माइक भाषा ककर बापक िदन हइ िसर लेबइ आ िसर कटा देबइ।

152 िव देह : सदेह : ३ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) गजेन्ġ ठाकु र आकाश मğय िलखल हमर लेख

कागजपर िलखल क्यो पढ़त क्यो निह मुदा ओतए जे उठाओत आँिख देखत अंगैठी-मोड़ करैत उठैत भुजाक İपशर्सँ करत अनुभव जे िवĂक समािĢत होएत िकछु लोक बचत तखन करब कोन काज ने कोनो काज बाँचत निह ने मशीन ने जंजाल सुž चारू कात ने लूिर खेती करबाक हमरा कागत रंगबाक लेल रोशनाइ निह वादक सĦबल अथर्हीन िवकराल राित सोझाँ ठाढ़ गरजैत मेघ रौƖ मेघमे िवńुत वृÿहĠता इĠƖ चीरैत छिथ मेघ कवष ऐलूषक ऋक् शूƖ किव हमर िवńुत् Ćकाशसँ Ćकािशत मेघक शिक्तपात् शरीरक मğय हजारक-हजार धार रक्तक Ćवाहक साँपसन टेढ़-मेढ़ चािल हमर मोन दौिग रहल एिह अĠतमर्नक धारक बीच ओिह बिहजर्गतक िवńुतसँ तीवर् चतुįपात् पुरुष वा ƙŌ मुदा एकपाद ई जगत् अĠतमर्नक Ćचोदियता आसुरी वृÿ आ राक्षसी पिण शारीिरक धार संचार तĠÿ

मैिथली पń २००९-१० 153 चलू समुƖ िदस हमर नाड़ीतंÿ आ एकर लहिरमे डूमैत-उगैत अपन भोगल यथाथर्सँ बहार कएलहुँ मधु आहुित देबा लेल ओिह समुƖमे आ तखने शरीरक नदी-धार लहिरमे डुमैत करैत अिछ आनिĠदत जागिरत मोनसँ िनकसैत वाणी पीपड़क पातक नाड़ीतंÿ सन इला-सरİवती आ भारती छिथ िवńुत् बाल लेल भोजनक करैत सरंजाम Ĕयोितक हम साधक सĠदीपनकूट हुअए लावěयमय सहćशाख िवńुत् िहरěयमयी सहćिजत् अजć अĠतमुर्खी आ ऋतं बृहत्