SADEHA — 4

Publication: SADEHA · Issue: 4
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मैिथली कथा २००९-१० i िवदेह मैिथली कथा २००९-१०

ii िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िवदेह: Ćथम मैिथली पािक्षक ई-पिÿका (http://www.videha.co.in/) १५ जनबरी २०१० वषर्:३ मास:२५ अंक ५० िवदेह: सदेह:४ ( िवदेह ई पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकक दस Ćितशत चुनल रचनाक संग) दाम: १०० टाका ( ĭयिक्तगत ƅय लेल) आ $40 (for institutions and library India and Abroad) सĦपादक- गजेĠƖ ठाकुर सहायक सĦपादक- āीमती रिĮम रेखा िसĠहा, āी उमेश मंडल भाषा सĦपादन- āी िवńानĠद झा आ āी नागेĠƖ कुमार झा ISBN: 978-93-80538-07-5 (c)२००८-१०.सवŭिधकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम निह अिछ ततय संपादकाधीन। रचनाकार अपन मौिलक आ अĆकािशत रचना (जकर मौिलकताक संपूणर् उþरदाियĜव लेखक गणक मğय छिĠह) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेěटक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉमųटमे पठा सकैत छिथ। रचनाक संग रचनाकार अपन संिक्षĢत पिरचय आ अपन İकैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौिलक अिछ, आ पिहल Ćकाशनक हेतु िवदेह ( पािक्षक) ई पिÿकाकेँ देल जा रहल अिछ। मेल ĆाĢत होयबाक बाद यथासंभव शीƈ (सात िदनक भीतर) एकर Ćकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’िवदेह' Ćथम मैिथली पािक्षक ई पिÿका अिछ आ एिहमे मैिथली, संİकृत आ अंƇेजीमे िमिथला आ मैिथलीसँ संबंिधत रचना Ćकािशत कएल जाइत अिछ। एिह ई पिÿकाकेँ āीमित लŞमी ठाकुर Ņारा मासक ०१ आ १५ ितिथकेँ ई Ćकािशत कएल जाइत अिछ। (c) २००४-१० सवŭिधकार सुरिक्षत। िवदेहमे Ćकािशत सभटा रचना आ आकŭइवक सवŭिधकार रचनाकार आ संƇहकþŭक लगमे छिĠह। रचनाक अनुवाद आ पुनः Ćकाशन िकंवा आकŭइवक उपयोगक अिधकार िकनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपकर् करू। © āुित Ćकाशन- िवदेह:सदेह:४-िĆंट वसर्न- DISTRIBUTORS: AJAY ARTS, 4393/4A, Ist Floor, Ansari Road, DARYA GANJ, New Delhi-110002 Ph. 011-23288341, 09968170107 Website: http://www.shruti- publication.com e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com http://www.videha.co.in/ एिह साइटकेँ Ćीित झा ठाकुर, मधूिलका चौधरी आ रिĮम िĆया Ņारा पािक्षक रूपेँ िडजाइन कएल जाइत अिछ।

मैिथली कथा २००९-१० iii (कायŭलय Ćयोग लेल) िवदेह:सदेह:१ ( ितरहुता/ देवनागरी)क अपार सफलताक बाद आगाँक अंक लेल वािषर्क/ िŅवािषर्क/ िÿवािषर्क/ पंचवािषर्क/ आजीवन सƄİयता अिभयान। ओिह बखर्मे Ćकािशत िवदेह: सदेहक सभ अंक/ पुिİतका पठाओल जाएत। नीचाँक फॉमर् भरू :- िवदेह:सदेहक देवनागरी/ वा ितरहुताक सदİयता चाही: देवनागरी/ितरहुता सदİयता चाही: Ƈाहक बनू (कूिरयर/रिजİटडर् डाक खचर् सिहत):- बखर् YEAR INDIA NEPAL Abroad एक ( २०१०ई.) रु.२००/- INR ६००/- US$25 दू ( २०१०-११ ई.) रु.३५०/- INR १०५०/- US$50 तीन ( २०१०-१२ ई.) रु.५००/- INR १५००/- US$75 पाँच ( २०१०-१३ ई.) रु.७५०/- INR २२५०/- US$125 आजीवन (२००९ आ ओिहसँ आगाँक अंक) रु.५०००/- INR १५०००/- US$750

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(Ƈाहकक हİताक्षर)

iv िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

मैिथली कथा २००९-१० v

िवदेह मैिथली कथा २००९-१० (िवदेह:सदेह:४ िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल आ सĦपािदत कएल)

िĆय पाठकगण, िवदेहक नव अंक ई Ćकािशत होइत अिछ पािक्षक रूपेँ - लॉग ऑन करू http://www.videha.co.in । ई िĆंट वसर्न माने िवदेह:सदेह:४ िवदेह ई-पिÿकाक २६म ( १५.०१.२००९) सँ ५०म (१५.०१.२०१०) अंक धिरक चुनल रचना ( मोटा-मोटी दस Ćितशत)क संग Ćİतुत अिछ। मुदा िवदेहमे ई-Ćकािशत पाखलो (मूल कॲकणी उपĠयास तुकाराम रामा शेट आ मैिथली अनुवाद डॉ. शĦभु कुमार िसंह), Ĕयोित झा चौधरीक किवता संƇह अिचर्स् आ नताशा ( मैिथली िचÿ-शृंखला- देवांशु वĜस) अलगसँ पुİतकाकार Ćकािशत कएल जा रहल अिछ। िवदेह Ņारा ĆारĦभ भेल मैिथली (ितरहुता आ देवनागरी) सािहĜय आĠदोलनमे २००सँ बेशी लेखक जुिड़ चुकल छिथ, ५० टा अंक ( देवनागरी, ितरहुता आ ƙेल तीनूमे) ई-Ćकािशत भऽ गेल अिछ आ पी.डी.एफ. डाउनलोड लेल िवदेह आकŭइवमे राखल गेल अिछ। दू टा सदेह अंक (देवनागरी आ ितरहुतामे) सेहो Ćकािशत भऽ गेल अिछ। िविवध िवषयपर ६००० पृơक नूतन मैिथली सािहĜय आ ५० लाख शĤदक मैिथली कॉपŸरा अĠतजŭलपर िवĂक सĦमुख Ćİतुत कएल गेल अिछ। ११०० पृơक भोजपÿ-तालपÿक आ अĠयाĠय पÿक पाěडुिलिपक िमिथलाक्षरमे अंकण आ िमिथलाक्षरसँ देवनागरी िलĢयंतरण कएल गेल अिछ। िवदेह आकŭइवमे माÿ शािĤदक कॉपŸरा निह अिछ वरन् १००सँ बेशी मैिथली ऑिडयो फाइल, १०० घěटासँ बेशीक मैिथली वीिडयो फाइल जािहमे कैकटा सĦपूणर् मैिथली नाटक सेहो अिछ, आधुिनक कला, िचÿकला, छायािचÿक संग िमिथला िचÿकलाक फोटो आ पी.डी.एफ. रूपमे सएसँ बेशी मैिथली पोथी सेहो देखबा, पढ़बा आ डाउनलोड लेल उपलĤध अिछ। संगमे बच्चा सभक सािहĜय आ काटूर्न सभ सेहो िनिमर्त आ Ćदिशर्त कएल गेल अिछ आ पढ़बा लेल आ

vi िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) डाउनलोड लेल उपलĤध अिछ। मैिथलीक पिहल ƙेल पोथी उपĠयास- सहćबाढ़िन ( हमर पोथी कुरुक्षेÿम् अĠतमर्नक मे संकिलत हमर उपĠयास) सेहो िĆंट रूपमे आिब गेल अिछ। िमिथलाक सभ जाित आ धमर्क मैिथलीमे संİकार, िविध-ĭयवहार आ āमगीत िवदेह ऑिडयो आ वीिडयोमे राखल गेल अिछ। मैिथलीक लेल भाषा सĦपादन पाƁयƅमकेँ अĠतजŭलक िवदेहक ३००० सँ बेशी सदİय Ņारा अिĠतम रूप सेहो Ćदान कएल गेल अिछ। िमिथलाक्षरक यूनीकोड आवेदनमे िवदेहक योगदानकेँ आवेदनकतŭ Ņारा आवेदनमे विणर्त कएल गेल अिछ।संगिह िवदेह आकŭइवक आधारपर यूनीकोडमे २००८ सँ पोथीक Ćकाशन शुरु भेल (निचकेताक नो एěƏी:मा Ćिवश पिहल यूनीकोड िĆंट मैिथली पोथी छी) मुदा िहĠदीमे पिहल यूनीकोड िĆंट पोथी फरबरी २०१० मे वाणी Ćकाशनसँ आएल। संगिह हमर िलखल सहćबाढ़िन जे मैिथलीक पिहल ƙेल पुİतक अिछ (ISBN:978-93-80538-00-6) २००९ मे िरलीज भेल आ पुअर होम दरभंगा िİथत ĤलाइĠड İकूलकेँ पठाओल गेल अिछ। मुदा ई तँ माÿ ĆारĦभ अिछ। एिह खěडमे कुछु चुनल मैिथली कथा ( िवदेह:सदेह:४ िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल आ सĦपािदत कएल) देल जा रहल अिछ, आ एिहमे लघुकथा, नाटक, ĭयंग्य आ उपĠयास अंश सेहो अिछ कारण ई सभ िवधा मोटा-मोटी एĸे अिछ। आ एतए मैिथलीमे दोसर भाषासँ अनूिदत कथा सेहो अिछ। सूचना: पंकज पराशर उफर् अरुण कमल उफर् डगलस केलनर उफर् उदयकाĠत उफर् ISP 220.227.163.105, 164. 100.8.3, 220.227.174.243 उफर्....केँ डगलस केलनर आ अरुण कमलक रचनाक चोिरक पुिƠक बाद (http://www.box.net/shared/75xgdy37dr) बैन कए िवदेह मैिथली सािहĜय आĠदोलनसँ िनकािल देल गेल अिछ।केलनरक संदेश नीचाँ अिछ। िवशेष जानकारी मैिथली ĆबĠध:िनबĠध:समालोचना २००९-१० ( िव देह : सदेह : २ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मे देल गेल अिछ।

kellner@ucla.edu" <kellner@ucla.edu.Dear Gajendra thanks for the detective work. was there a response? best regards, Douglas Kellner, Philosophy of Education Chair, Social Sciences and Comparative Education, University of California-Los Angeles, Box 951521, 3022B Moore Hall, Los Angeles, CA 90095-1521, Fax 310 206 6293, Phone 310 825 0977 -गजेĠƖ ठाकुर

मैिथली कथा २००९-१० vii ƅम कुमार मनोज कĮयप चौबिटया पर 1 डॉ. शंभु कुमार िसंह (मैिथली अनुवाद) एकटा आर रिब 4 कुसुम ठाकुर ĆĜयावतर्न - पिहल खेप 9 सुरेĠƖ िकशोर झा साथी दुखमे न कोइ 17 डॉ.शंभु कुमार िसंह अवसरक िनमŭण 30 डॉ.शंभु कुमार िसंह (मैिथली अनुवाद) सॲगर 36 डॉ.शंभु कुमार िसंह (मैिथली अनुवाद) नागपंचमी 45 अनमोल झा Ćाथिमकता 50 िमिथलेश कुमार झा एडभांस युग मे 51 पालन झा गरीबक िजĠदगी 53 कािमनी कामायनी लाल काकी 60 जगदीश Ćसाद मंडल बहीन 64 साकेतानĠद कृतं न् मĠये 73 सुजीत कुमार झा िĆयंका 79 आशीष चमन पछता रोटी 84 आशीष कुमार चौधरी जीत गयो मोर काĠहा 90 दुगŭनĠद मंडल कथा: बकलेल 91 किपलेĂर राउत छूआ-छूत 96 राजदेव मंडल रखबार 97 शरिदĠदु चौधरी समय–संकेत 104 िवजय–हरीश िकछु लघु कथा: छॴट बला गमछा 106 िकिकऔनी 106 भावी–रणनीित 106 तृįणा 107 सुनीता ठाकुर अपहरणक सच 108 राकेश कुमार रोशन पĖचैित (कथा) 110

8 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) हेमचĠƖ झा बाट 113 सुभाष चĠƖ यादव पित-पėी सĦवाद 118 मानेĂर मनुज जीत 120 परमेĂर कापिड़ धुमिग Ĕ जर 129 ऋृिष विशơ जुआनी िजĠदाबाद 133 िशवशंकर āीिनवास पिěडत ओ हुनक पुÿ 138 Įयामल सुमन अथŭत लोकतंÿीय मुिक्त 142 मनोज झा मुिक्त इĔजितक खाितर 144 जगदीश Ćसाद मंडल बाल-िकशोर लेल Ćेरक कथा 1. उĜ थान-पतन 148 2. Ćितभा 148 3. ममर् 149 4. अधखडुआ 149 5. समयक बरबादी 150 6. पिहने तप तखन ढ़िलहेँ 151 डा. सुरेĠƖ लाभ माई गे ! भूख लागल हए 152 āी लĪलन Ćसाद ठाकुर साढूनामा (कĭवाली, तेसर कड़ी)157 उमेश मंडल परहेज 160 कमला चौधरी कथा-गुणनफल 161 बेचन ठाकुर ‘छीनरदेवी’ 168 डॉ. कैलाश कुमार िमā सखी कुĠती 174 गजेĠƖ ठाकुर स॒हć॑ शीषŭ॒ 183 िवńानĠद झा िकशोर लोकिनक लेल दूटा कथा 190

मैिथली कथा २००९-१० 1

कुमार मनोज कĮयप जĠम-१९६९ ई़ मे मधुबनी िजलांतगर्त सलेमपुर गाममे। İकूली िशक्षा गाममे आ उच्च िशक्षा मधुबनीमे। बाĪय कालेसँ लेखनमे अिभरुिच। कैक गोट रचना आकाशवाणीसँ Ćसािरत आ िविभž पÿ-पिÿकामे Ćकािशत। सĦĆित केंƖीय सिचवालयमे अनुभाग अिधकारी पदपर पदİथािपत।- सĦपादक। चौबिटया पर ‘भैया ! हम कहैत छी आब अवİथा भेल, आबो तँ चैनक साँस िलय। किहया धिर कॲढ़ तोरैत रहब? आब तँ बौआ वयİक भऽ गेल छिथ; आबो तँ िकछु करथु िक सभ िदन पढ़ाईकेँ नामपर बापेकेँ कमाईपर फुटानी करैत रहताह। सभकेँ कोनो सरकारीये नोकरी भेटैत छैक? अपने गाम िक टोलेमे देिखयौ ने जे हुनकासँ कतेक छोट सभ जकरा नाक पोछबाक लुिर निह छलैक सेहो सभ िदĪली-बĦबई जा कऽ हजारक-हजार रूपैया घर पठबैत अि छ। साँच पुिछ तँ मैिथलक पछुएबाक कारण सरकारी नोकरीकेँ पाछु भागब अि छ। से जँ निह भेटल तँ कतहुँ के निह रिह गेलहुँ धोिबक गदहा बला पि़र। हम तँ कहैत छी किलयुगमे तपİया केलासँ भगवान भने भेट जािथ; मुदा सरकारी नोकरी िकžहुँ निह एकरा तँ मरीिचका बुझु़ एतेक भाए-भतीजावाद आ घुसखोरीक जुगमे ओना कतऽ नोकरी राखल छै़ ओ तँ जमाना रहई जे आहाँ सभकेँ सरकारी नोकरी भेट गेल़आब ककरो नाम गनाउ गाममे?।' कĸा आरो बहुत िकछु बजैत चिल गेलाह। मुदा दलानक कोनटामे ठाढ़ हमरामे आर बेसी सुनबाक सामĝयर् निह रिह गेल छल हम झमा कऽ खसल छलहुँ। मोिĮकलसँ सĦहािर पओलहुँ अपनाकें। बाबूक Ćिति ƅया हम बुिझ निह पओने छलहुँ ओ मुँहसँ साईत िकछु बाजल निह छलाह। बाजलो हेताह तँ सĦभव जे मनोŅेगक कारणे हमहॴ सुिन निह पओने होईयैक। कĸाक शĤद हमरा जमीनपर पटिक देने छल।मगर िसिवल सेवाक बुनल सभटा सपना जेना एके चोटमे टुिट कऽ हमरे सोझँामे खंड-खंड पसिर गेल आ हम ओिहपर ओंघरा कऽ अपन सवŮग शरीर शोिणते-शोिणत कऽ लेने छी । हमर बाबू परम शुŀ़़बेसी बाजऽ वला निहं। ओिह िदन कĸाकेँ İपƠ जवाब निह देबाक पाछु हुनका मोनक कोनो कोनमे नुकाएल कोनो अनजान भय

2 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) छलिन से हमरा ओिह िदन माएक बातसँ बुझाएल - 'सरकारी नोकरी निह भेल तँ कतहु Ćाईवेटोमे तँ देखितयैक। बाबूएपर कतेक भार देबैन पँाच-छौ मिहनामे ओहो तँ िरटायरे कऽ रहल छिथ। वेतनक समुचा पाईमे तँ घर चिलये निह रहल छैक। पेंसनक अधोर पाईमे कोना पार लगतैक? मुनमुन तँ अखन बी०ए० मे गेबे केलैए, ओकर पढ़ाई तँ कहुना पूरा करबैए पड़तैक।' माएक İवरमे जे एकटा चेतावनी छलैक से हम निह बुिझितयैक, एतबो अबोध हम निह। हम ओिह राित कतेक कानल रिह से हमहॴ जनैत िछयैक। जािह सपनाकेँ हम एक-एक िवंदुसँ उकेरने रही, जकर पँािखपर बैिस कऽ हम कĪपना लोकमे िनच्छंद िवचरण करैत रिह, तकर जेना पँािख कतिर कऽ भू-लुंिठत कऽ देल गेल छलैक। हमरा अपन भिवįयक िचंतासँ बेसी दुख एिह बातक आछ जे कĸा अपन वुिटल िसŀांत- ' दुिभ, दािल आ देयाद जतेक गलय ततेक नीक' - हमरो पिरवारपर अजमेबामे सफल भऽ गेल छलाह। निह तँ जे बाबू एकटा सपना देखने रहिथ अपन संतानकेँ Ćशासिनक सेवा कए उच्चþर İतरपर पहुँचेबाक सदा ĆोĜसािहत कएने रहिथ एिह लेल, जे गवर्सँ कहिथ जे साधनक अभावमे हम İवयं निहं बिन सकलहुँ तँ की; अपन बेटाकेँ आई०ए०एस० बना कऽ देखाएब से एकाएक यू-टनर् लऽ लेताह से हम सपनोमे निह सोचने रही। पिहल चाँĠ समे हम पी०टी० तँ िनकािलये लेने रही़एिह बेर दोसर चाँĠ स एिपयर होयब। एतबेमे बाबू अगुता जेताह; ई हुनकर İवभाव तँ िकžहुँ निह .....। हम अपन िपþकेँ पीिब गेलहुँ। अपन सफाइमे िकछु बाजब उिचत निह बुझना गेल। सुतली राितमे अपन दु-चािरटा कपड़ा बैगमे रािख घरसँ चुपचाप िनकिल गेलहुँ िबना ककरो जनेने। मोनमे रंग-िवरंगक भवना आएल़ आĜम-हĜया तककेँ। अंतमे मोन İवीकारलक चंडीगढ़ चल जाइ िदनेश लग कतेक जीĿ करैत छल ओ चंडीगढ़ एबाक लेलक हैत छल। बड नीक शहर छै। Əेन एबामे एखन देरी छैक फरीछ सेहो भऽ रहल छैक हम िदनेशकेँ फोन करैत छी - 'परसू हम चěडीगढ़ पहुँच रहल िछयौ भोर मे İटेशनपर आिब कऽ अपना ओतऽ लऽ जैहैं।' आर िकछु हम निह किह सकिलयै ओ पुिछते रिह गेल़़ फोन कािट देिलयै। İटेशनपर ओ आएल छल हमरा आरयाित कऽ अपन घर लऽ जेबाक हेतु। िदनेश हमर लंगोिटया यार पढ़लक-िलखलक कĦमे जिĪदये कोनो Ćाईवेटमे नोकरी पकिड़ लेलक। सुनैत िछयैक नीक कमाईत आि छ। भिर रİता ओ हमर अकİमात एबाक Ćयोजन पुछैत रहल हम बातकेँ घुमबैत रहिलयै। बस एतबे कहिलयै जे हमरा कोनो नोकरी धरा दे जे होई हम करै लेल तैयार छी। ओ हमरा अपना भिर बुझेबाक Ćयास करैत रहल यार! तोरामे Ćितभा छौ़ तोँ आई०ए०एस कऽ सकैत छैँ तोरापर गाम समाजकेँ आँिख लागल छैक तोँ Ćाईवेट नोकरी-चाकरीकेँ झंझट छोड़ तैयारी करैत रह माँ भगवतीकेँ कृपासँ सफलता अवİसे भेटतौ़। मुदा हमहुँ िजिदयाएल रही। ओ हािर मािन लेलक हमरा एकटा केबल-ऑपरेटर ओिहठाम नोकरी रखा देलक तीन हजार रूपैया मिहनापर।

मैिथली कथा २००९-१० 3 गाम-घर, माए-बाप, भाए-बिहन सभकेँ िबसिर जेबाक Ćयास कऽ रहल छी हम। कतऽ कहाँसँ पता करैत-करैत एक िदन माएक फोन आएल बड़ कनैत छल। हमरो बकोर लािग गेल। हम िकछु बािज निह सकल रिह फ़ोन कािट देिलयै। िबतैत समएक संगे एक िदन नरेƖजीसँ भेंट भेल़़ नरेंƖजी अपने ओĦहरके समवयİके जकाँ। दोİती बढ़ल पता चलल हुनकर िपता बैंक-मैनेजर छिथन समİतीपुरमे। बैंकसँ लोन लऽ कऽ İवयंकेँ केबल शुरू करबाक िवचार जागल। बात आगू बढ़ल क़ाज करबाक अनुभव आइ दू सालमे भइये गेल। योजनापर काज करए लगलहुँ एक-एक मुĿापर गहन सोच-िवचार Ćोजेक्ट-िरपोटर् तैयार भेल कतएसँ मशीन सभ कीनब केहन आदमी सभकेँ काजपर राखब क़ोना Ćचार-Ćसार करब सभ िकछुक योजना राित भिर जािग कऽ बना लेलहुँ। लोन भेिट गेल मशीन, आवĮयक वİतु-जात सभ खरीद भऽ गेल। कािŎ धूम-धामसँ उľाटन करबाक िदन छल। सोचलहुँ बाबू-कĸा सिहत गामक सभ लोक कऽ बजाएब उľाटन-समारोहमे। अचानकसँ एहन पैघ योजना देिख कऽ घरक लोक गवर्सँ गद्-गद भऽ उठत क़ĸा कऽ जलन तँ हेबे करतैन। जे देयाद गिल निह, उिठ रहल आछ मुदा तािहसँ हमरा िक? हुनकर मोने एहने छिन तँ दोसर की करतैन?। बुधना आिब कऽ समाद देलक - ' आहँ करैत रहू उľाटन, ओĦहर पायल-केबल सभकेँ मुपþमे केबल देखेबाक घोषणा कऽ देलकैए। जेहो एक-दू गोटे तैयार छल अपन केबल लेबाक लेल, सेहो पायले िदस चिल गेल। Ąी ककरा निह रूचतै ?' पायल केबल के मािलक भवेश तँ हमरा संगे गामक İकूलमे पढ़ने अि छ, ओकरा एना निह करक चािहयैक। हम दौड़लहुँ भवेशक घर िदस। रİतेमे भेटा गेल ओ। हम कहिलयै- ' यार! तोरा एना निह करक चािहयौ। तॲ तँ पुरान छैं; कमा चुकल छैं, कनेक िदन Ąीयोमे केबल देखा सकैत छैं। मुदा हम बैंकसँ लोन लऽ कऽ शुरूये करए जा रहल छी। हमरा पेटपर तँ लात निह मार।' भवेश चौआिन यॉं मुिİकयाएल छल। ओकर एिह मुİकीमे वुिटलता हमरा साफ बुझा रहल छल। ' देखही दोस! दोİती अपना जगहपर छैक आ िबजनेस अपना जगहपर। ने दोİतीमे िबजनेस एबाक चाही; ने िबजनेसमे दोİती।' से िबजनेसमे दोİती निहये एलै। हमर सभ मशीन, सामान ओ आधया दाममे खरीद लेलक। हमर सपना एक बेर फेरसँ चकनाचूर भऽ कऽ हमरा आगँ िछिड़या गेल आछ। हम अपन मोनकेँ बुझबैत छी---सपना टुटबे खाितर बुनल जाईत छैक आर कोनो बात निह।

4 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मैिथली रूपाĠतरण

डॉ. शंभु कुमार िसंह मूल अँƇेजी कथा : अनदर संडे कथाकार : गैİपर अĪमीडा एकटा आर रिब ओ अपन पड़ोसक पाथरसँ भरल फशर् वला हातामे जएबाक लेल जिहना दरबĔजा खोललक, भोरक शीतल हवा ओकर İवागत केलकैक। ओतए केवल पाँचेटा घर छलैक जािहमे रहए वलाक अपन पुĮतैनी नाम छलैक, ओकर वाडर् केर पुĮतैनी नाम छलैक, अĪमीडा वाडो। दरबĔजाक बाहर पुरनका कल, जकरा बहुत पिहनिह नबका कलकेँ। कारणेँ छोिड़ देल गेल छलैक, तािहसँ नमगर नोकगर बरफ लटकल रहैक। ओकरासँ सटले इनार देख-रेख केर अभावमे सूिख गेल छलैक। तेऔ एिहपर एखन धिर बालु निह जमल छलैक। रोĪडाओ ƙेगेĠजा झुकल, आँगुरसँ ओकरा पकड़लक आ ओिह जमलका बरफकेँ एखनिह पूरब िदससँ आिब रहल सुरूजक िकरण कऽ समक्ष उठौलक। ओिह बरफपर Ćकाश कऽ िकरण पिड़तिह इĠƖधनुषी रंग जगमगा उठलैक। छोटगर-सन गेट, जािहपर İपƠ रूपसँ ƙेगेĠजा िवला िलखल छलैक, अपन कĤजापर झुलल चरर्-चरर् केर आवाज भेलैक, ई आवाज हाता केर जानवरकेँ सचेत कऽ देलकैक। जे िक ओकर Ćतीक्षा कऽ रहल छल, बुझनामे आएल जे ओ सभ किह रहल हो, “ चारा कऽ समय तँ कखनिह भऽ चुकल छैक? रोĪडाओ पाथरक बाट छोिड़ भूसासँ झाँपल धरतीपर आएल आर पएरक नीचाँ नरम मौसममे बनल खुरसँ बनल उभर-खाभर बाट महसूस कएलक। पूबिरया देवालक इमारतकेँ पार कऽ कए जखन ओ दरबाजा खोललक तँ ओकर İवागत बाछाक आवाज आर पिरिचत जानवर सभक महक कएलक। उठलका कूड़ादानक मुँह खुजल आर देवालसँ लािग कऽ टनटनाएल, आर एकटा भुरा केश (फर) फहराएल, जेना जलखै कऽ रहल मूस उछिल पड़ल हो। ओकरा ठोरपर छोट-सन अपभाषा एलैक आ ओ चारा नापै वला बरतनसँ मूसकेँ

मैिथली कथा २००९-१० 5 मारलक। आगूक एक घंटामे ओ िबना िकछु िबसरने अपन िदनचयŭ एक िनयत गितसँ पूणर् कएलक। ओ अपन भोरक कएल गेल काजसँ आनĠद उठौलक आ पिरिचत दाियĜव ओकरा आĜमसंतुिƠक अनुभूित देलकैक। रोĪडाओ बहुत बेसी Ćेम ĭयक्त करए वला ĭयिक्त निह छल, मुदा चारा देबा काल बाछा ओकर हाथ चाटैत रहैक आ िबलाइ ओकरा पएरसँ अपन पीठ नहु-नहु रगड़ैत छल, एिहसँ ओ बेसी आƪािदत भऽ रहल छल, जािह भावकेँ ओ Ćायः िछपौने रहैत छल, तािक लोक भाँिप निह सकए। ओकर सभ काज पूणर् होइत-होइत सुरूज बगैचा आ आन गाछ-िवरीछपर पड़ल ओसकेँ मेटाबैत-जराबैत अपन छाँही छत आर बगैचाक अधखुला İथानपर पसारने जाइत छल। भानसघरमे घुसतिहँ ओकरा एकटा सुखद अनुभूित भेलैक िकएत तँ मिŀम आँचपर सूगरक माउस शनैः-शनैः सीझैत रहैक, जकर तेज महक ओकरा आƪािदत कएलक। अपना जेबीमे हाथ दए ओ सलाय िनकाललक जकरा ओ Ćायः एकटा चामक बौगलीमे राखैत रहैक, आ एक िदन पिहलुका पाईपकेँ भरए आ सुनगाबाक लेल ओ बढ़ल। ओकर ई काज ओकर िİथर आ मĠद गित वला िनयामकक अनुरूप छलैक। जेना-जेना Ćकाश अपन पएर पसारलक, मिŀम लील रंगक मेघसँ हवा भिर गेलैक। İटोवक लौ जिहना एकटा भभकारक संग कम- बेसी होइक तिहना ओकर ğयान Ćितिदनक चीज-बीतपर चिल जाइक। जाड़मे बाहर अएलाक बाद ओकरा भानसघरक गरमी िदवाİवĨ जकाँ बुझाइक। क्यो ओकरा आइ याद केने हेतैक, ओ सोचलक, मुदा नाİतापर िकछु बािज निह भेलैक.....कखनहुँ िकछु बेसी निह कहल गेलैक, कतेक समए बीत गेलैक एखन धिर? ओ सािठक अिछ वा एकसिठ कऽ? ओ İमरण निह कऽ सकल। ठीक! ओ धीरेसँ बाजल, “जँ हम निह याद कऽ सकैत छी तँ क्यो आन िकएक?” ओ अपन पएर पसारलक आ ठाढ़ भऽ गेल। दरबĔजा लग खूँटीसँ टाँगल कोटकेँ पार करैत ओ अपन जैकैट पिहरलक ओ कोनमे राखल छड़ीकेँ हाथमे एना पकड़लक जेना ओ ओकर पुरान मीत होइक। रोĪडाओ दरबĔजासँ बाहर िनकिल सड़क पार कएलक, चारू िदस गामक अवलोकन कएलक। कोना एहन एिह छोट-सन गाम ‘ पारा’ मे सभ चीज बदैल गेलैक। वषर्क अविधमे सभ िकछु उसराह भ’ गेलैक, मुदा ओ जानैत छलैक जे धरतीक नीचाँ सूतल जीवन समएक जादूसँ फेर जािग उठतैक। ओ घुमल आ नापल-जोखल पएरे सड़कक नीचाँ िदस चिल पड़ल, एकटा छोटका बाटपर जतए एकटा किरया-झबड़ा कुकुर Ćितिदन दौड़क ĆĜयाशामे Ćतीक्षा करैत छल। कुकुर अपन उजŭक पिहल İफोटमे गाछ आ झुरमुट िदस दौड़ पड़ल, ओ िविभž Ćकारक गंधकेँ सूँघलक आ िनरीक्षणक बाद नव आनĠदमे डूिब गेल। कुकुर ‘ Ĥलैकी’ रूकल , अपन कानकेँ ठाढ़ कऽ बुझू जेना हवामे अपन पिरिचत जूताक चािलक ğविनकेँ पकड़ए चाहैत हो। उजŭक दोसरिह İफोटमे ओ सिƅय भऽ गेल, अपन मािलकक चािलक अनुसरण करए लागल, सड़कक कात- कात रोचक चीज सभकेँ ओ जाँचए लागल। पएर उठाकए ओ अपन जागीरकेँ

6 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कुकुरक मुƖामे िनिĀĠतताक संग िचिƭत कएलक। गलीक मोड़पर रोĪडाओ अपन छड़ीकेँ एकटा Ģलािİटक बैग, जािहपर—दुबई Ƃयूटी Ąी—ģलाई दुबई—İपƠ रूपसँ िलखल रहैक आ जकरा जारमे कोनो लापरवाह फेक देने छलैक, तािहमे खोधबाक लेल रूकल। ओ सावधानीसँ एिह वİतुकेँ उठाकए कूड़ेदानी िदस लऽ गेल, ई सोचैत जे ओ एना करबलाक बगैचामे फेिक देत। मोनमानी जेहन चीज ओकरा भीतर ƅोध उĜपž कऽ दैत छलैक, ओ ĭयवİथा ओ िनयमक पक्षधर छल, सभ चीज-बीतक लेल एकटा िनयत İथान आ सभ İथानक चीज-बीत अपन İथानपर। कोनो चीज खराब निह होइत छलैक, तागक टुकड़ी सभ जमा कएल जाइत छलैक आ Ģलािİटकक पžी धिर तह लगा कऽ राखल जाइत छलैक। जकरा ओ ĭयथर् पदाथर् बुझैत छल ओकरा अपन िपयरगर लाल रंगक टाइलसँ बनल घरक िपछुआड़मे उिचत मौसम आ हवाकेँ देिख कऽ ओकरा जरा दैत छलैक। रोĪडाओ एक जागरूक ĭयिक्त छल, भोरसँ लऽ कऽ साँझ धिर काज करबाक आदित ओ अपन उमेरक शुरूहे अवİथामे धऽ नेने छल, माँिटसँ जीिवका िनकालबाक आ ओकरा संगिह अपन पिरवारक जीवन-यापन चलएबाक लेल अपना-आपकेँ योग्य बनएबाक ओकरा गवर् छलैक। ओकरा अपना-आपपर गवर् हेबाक एकटा आर कारण छलैक ओ ई जे ओ ने तँ ककरहुँसँ िकछु माँगैत छल आ ने ओकरापर ककरहुँ कोनो कजर् छलैक। ओकरा भगवानसँ डर लागैत छलैक आ ओ ईĂरीय तĜवकेर िनभर्रतासँ अवगत छल, मुदा गामक चचर्-Ćशासन, संगिह पिवÿ ƅॉस कऽ छोट पदािधकृत छोट चैपल कऽ आलोचक सेहो छल। ओ ने केवल अपन िवचार सभकेँ वा अपन कोनो जानएवलाकेँ सुनबैत छल, अिपतु अपन भावनाकेँ अपन İपƠ मुख मुƖासँ ĭयक्त सेहो कऽ दैत छल अथवा गĢपक काल िवषएक उþर चुĢपीसँ दऽ दैत छल। नमहर तंग सड़कसँ खेत धिर ओकर याÿा आर एक छोट नदी पतझड़ कऽ पातसँ भारी भऽ गेल छल आ ओकरा पएर तर दबा गेल छलैक, कखनहुँ- कखनहुँ डािरकेँ टुटबाक आवाजकेँ छोिड़। कुकुर अपन नाँगिर आ मुँहक संग कखनहुँ-कखनहुँ कटनूर मूसक िबलक लग सूँिघ लैत छल, जतए मूस भोरे-भोर अपन घरक िवİतार करबाक हेतु बहुत रास मािट बहार कएने छल, ओ ओकर ताजा गंध िचĠहैत छल। जिहना ओ गाछसँ बाहर आएल, रूिक गेल। कुकुर “Ĥलैकी” फĭवारासँ जे िक सालो भिर बलबलाइत रहैत छलैक, पािन पी कऽ खŀासँ बाहर आएल, माथ िहलाकए पािन झाड़लक आ एकटा िचपकल गुरचाकेँ िनकालबाक लेल ओ अपन कान िहलबैत नीचाँ बैिस गेल। अपन Ćेक्षण İथानसँ रोĪडाओ गाड़ीक बाट देखए लागल, मानू गामपर कोनो चोटकेर िनसान छैक, शोरगुल करैत गाड़ी धुइयाँ िनकालैत एना बुझाइक जेना कंकरीटक फीतापर चुņी चिल रहल हो। गामक शांितक भीतर आĜमघातक जĪदीबाजीमे ओ गाड़ी सभ चुपचाप देखए जइसँ अĠजान बढ़ल जाइत छल।

मैिथली कथा २००९-१० 7 रोĪडाओ बनाओल जा रहल सड़ककेँ ğयानसँ देखलक, अमोल जमीनसँ हाथ धो लेबाक कारणेँ ओकरा दुख छलैक, मुदा ओकरा बदलामे देल गेल हरजानासँ ओ खुश छल। ओ माँिट खोधए वला उपकरणसँ चिकत छल, ओकर आकार आ काज करबाक क्षमतासँ ओ अिभभूत छल, अंततः पिरणाम जे ओ आĀयर्चिकत छल िकएकतँ जे िकछु ओकरा देखा पड़ैत छल ओ ओकरा समझसँ दूर छलैक। अपना जवानीक िदनकेँ याद करैत ओ अपन सािठ बरखक अवİथासँ पाछू देखलक, जखन केवल खेत आ गाछ-िबरीछ, पड़ोसक गाम नगोआ, सेिलगाओ धिर देखल जा सकैत छल आर पहाड़क उपर माĠटे-डी-ग्यूिरम इसकूलक भवन..... जते धिर ओकर दृिƠ जा सकैत छल। कैक तरहक पिरवतर्न भेल छलैक मुदा रोĪडाओ İपƠतः एकरा İवीकार निह कऽ सकल जे, जे िकछु भेलैक से नीकेक लेल भेलैक। िभनसरबाक काजक लेल आवाज दैत चचर् कऽ घंटा हवामे İपƠ सुनबामे आएल, समय देखबाक लेल ओ दिहना हाथसँ वाİकट वला जेबीसँ घड़ी िनकाललक आ कैक बेर घुमा-िफरा कऽ देखलाक बाद ओकरा आिपस रािख देलक। फेर ओ पाइप भरबाक लेल अपना हाथपर तमाकुल रगड़लक, अपन अĥयİत हाथक आँगुरसँ िविधवत पाइप भरलक आ आिगक सुलगा सॲटलक। आगू बढ़बासँ पूवर् ओ कैक बेर सॲट मािर धुइयाँ िनकािल अपनाकेँ आĂİत कएलक जे तमाकू बरोबिर जड़ैत रहए।

घरक बाहर लटकल धातुक बुरूशसँ ओ अपन जूþामे लागल मािट झारलक आ फेर बुरूशसँ गंदगी साफ कएलक। ओ भानसघरमे गेल जूता उतारलक आ दरबĔजा लग पुतर्गाली कुसŰपर बैिस गेल, अपन पिछला जनमिदन पर भेटल पनही (चĢपल) अपन पएरमे पिहर लेलक। दुपरहक भोजन ( िडनर) बारह बजे मेजपर राखल जाइत छलैक। आन चीज जकाँ भोजन सेहो िनयत समयपर खा लेल जाइत छलैक, लंच शĤदक Ćयोग निह होइत छलैक। दूध दूहए आर चारा देलाक पĀात् नाĮता आठ बजे देल जाइत छलैक। बारह बजे िडनर, चािर बजे चाह आर दस बजे सपर (राितक भोजन)। एिह तरहेँ सभ िदनक िदनचयŭ िनयत छलैक, ई ƅम तखनिह बदलैक जखन क्यो भेंट करए आबैक वा कोनो समाचार देबए आबैक। मेजपर बैसैत ओिह रिबक भोजन करबाक हेतु ओ काँटा आ चĸू उठौलक.....बदामी रंगक भाफ िनकलैत सालनसँ झाँपल पुिडंग कऽ सुनहरा रंग पैघ टुकड़ा। एकर बाद ओकरा समक्षिह बीफ ( सुगरक माउस) राखल रहैक, जकरा ओ अपन समक्ष राखल चĸूकेँ İटीलपर धार तेज करैत िनकाललक। ककरहुँ आन Ćकारक भोजन पिसž हेबाक िİथितमे ओहो सभ भोĔय पदाथर् ओतए राखल रहैक, सामाĠयतः रिबक भोजन ककरहुँ लेल पयŭĢत होइत छल। चाहक सएय चािर बजे भलैक। चाह पीलाक पĀात् ओ िखड़कीसँ आबैत रोशनीक िदस पीठ कऽ कए बैसबाक लेल सामने वला घरमे गेल। अपन चĮमा

8 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) लगौलक आ शेष दुिनयाँक समाचार जानबाक लेल ओ रिब िदनका समाचार-पÿ उठौलक। ओ शीƈिह अलसा गेल, जिहना ओकरापर िनž सवार होमए लागलैक, ओ माथकेँ आरामसँ कुरसीक कुशनपर रािख देलक। घरमे लोकक आवाजसँ रोĪडाओ जािग गेल—दौड़बाक कारणेँ पएरक खड़बड़ाहिट आ दूई बच्चा Ņारा एक दोसराकेँ धकेलैत दरबाजा खोलबाक आवाज, ओिह दुनूकेँ ओकरा लग पहुँिच पासर्ल देबाक जĪदी। ओ कुरसीपर चढ़ल ओकरा चुमलकै आर जĠमिदन केर बधाई देलकैक, ओ बड़ कुशलतासँ एक दोसराकेँ अपन बाहुपाशमे जकड़लक। पिहने ककर पासर्ल खोलल जाए? एिह समİयाक समाधान ‘लेडीज फİटर्’ किह कए समाधान कएल गेल। बालक बाजल, “दादा नीक चीजकेँ बादक लेल राखैत छिथ”। जिहना टकराव केर िİथित उĜपž भेलैक, ओ ओिह दुनूकेँ कपड़ा बदलबाक आ बाहर जा कए खेलबाक लेल कहलकैक। जेना ओकरा दुनूकेँ मोनमे आनĠदक अनुभूित भेलैक, ओकरा कानमे हँसी केर आवाज आिब टकराएल। भानसघरमे नओ बजबाक आवाज सुनबा धिर, दुपहरसँ साँझ धिर ओकर मीत, संबंधी लोकिनक बधाई ओ उपहार लऽ कए अएबाक ƅम चिलतिह रहलैक। ओ राितकेँ पिहरए जाएवला पयजामा पिहरलक, खूņीसँ İकाफर् खॴचलक गरदिनमे लपेटलक आ जाड़क अनुसारेँ ओकरा नीक जकाँ बाĠहलक, सभ िदनक रािÿकालीन िनयमक अनुसार लकड़ीक नमगर ‘अदाĦबो’ सँ मुख्य Ņार धिर िखड़की ओ दरबĔजाक िछटिकनी जाँचलक। िखड़की लग राखल एक बहुत महĜवपूणर् चीज—छओ सेलवला बड़का टाचर् उठौलक, ओकर Ćकाशमे अपन सभ सामान कऽ िनरीक्षण कएलक। ओकरासँ कनेक आगू सदा ओकरा संग रहएवला ओकर कुकुर Ĥलैकी ओकरा संगिह-संग घूमल। अकाशमे जगमग करैत तरेगण केर राितमे जिहना ओ उपर देखलक, शीतल बसात ओकरा गालपर थपेड़ा मारलकैक, एकटा मिŀम Ćकाशक संग चान फामर् कऽ घरकेँ आलोिकत करैत रहैक। आपस आबैत ओ सभ दरबाजाकेँ बंद कएलक आर ई सुिनिĀत कएलक जे सभ िकछु सुरिक्षत अिछ िक निह। तखन ओ उिठकए भानसघरमे राखल चमचम करैत कागदक टुकड़ा उठौलक। कागदक नीचाँ िलखल शĤद रहैक, “जĠमिदन मुबारक.....िदन मंगलमय हो ”। ओ िलखावटपर ğयान देलक, शĤदकेँ धीरे-धीरे पढ़लक आर फेर मोनिह- मोन मुसकी देलक आ जोरसँ कहलक। “भगवानक सौगĠध, हँ........ई एकटा नीक रिब रहल।”

मैिथली कथा २००९-१० 9

कुसुम ठाकुर उपĠयास- ĆĜयावतर्न - पिहल खेप १ एक बेर हमरा एकटा पिÿकामे िकछु िलखए लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गĢप िथक। हम बस एतबे िलिख सकलहुँ- "हम की िलखी हमर तँ लेखिनये हेरा गेल"। मुदा आइ बुझना जाइत अिछ जे निञ, हमरा एकटा कतर्ĭयक िनवŭहण करबाक अिछ। २ हम सिदखन अपनाकेँ हुनकर िशįया सहचरी आ निह जािन िक सभ बुझैत रही। हुनक िक एकोटा एहन रचना छलिन जकरा िक हम पूरा होमसँ पिहने कै-एक बेर निह सुनइत रही। हम तँ हुनक एक-एक रचनाकेँ ततेक बेर सुनइत रही जे करीब करीब कंठİत भऽ जाइत छल। एक-एक संवाद आइ धिर ओिहना हमर कानमे गूंजैत रहैत अिछ। हम तँ हुनक सभसँ पैघ आलोचक, सभसँ पैघ Ćशंसक रही। अłुत कलाकार छलाह, एक कलाकारमे एक संग एतेक रास गुण भिरसक निह होइत छैक। लेखक, िनदųशक, अिभनेता, गीतकार, संगीतकार, सभ गुण िवńमान छलिĠह। हमरा िक बुझल रहए जे नीक लोकक संग बेसी िदनक निह होइत छैक। भगवनोकेँ नीक लोकक ओतबे काज होइत छैĠह जतबा िक मनुįयकेँ। हम तँ भगवानसँ किहयो िकछु निञ माँगिलयिन, बस हुनक संग सदा भेटए- यैहटा कामना छल। मुदा एकटा बात िनिĀत अिछ जे जओँ भगवान छिथ आ किहयो भेटलिथ तँ अवĮय पुछ्बिĠह जे ओ हमरा कोन गलतीक सजा देलिथ, हम तँ किहयो ककरो खराब निञ चाहिलयैक। एतेक कम िदनक संग, परंच ओ जे हमरापर िवĂास केलिĠह आ हमरा İनेह देलिĠह, शायद हमरा सात जĠमोमे निह भेट सकैत छल। एखनो जँ हम हुनक फोटोक सोझाँ ठाढ़ भऽ जाइत छी तँ बुझाइत अिछ जे ओ किह रहल छिथ- हम सिदखन अहाँक संग छी।

10 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ३ जािह िदन हम पĠƖह बरखक भेलहुँ ओकर दोसरे िदन हमर िवआह भऽ गेल। ओिह समए हम िवआहक अथर् की होइत छैक सेहो निञ बुझैत छिलयैक। हम तँ मैिƏकक परीक्षा दऽ अपन िपितऔत बिहन कऽ िवआह देखए लेल गाम गेल रही। हमरा की बुझल छल जे हमरो िवआह भऽ जाएत। ओिह समए हमर बाबूजी अरुणाचल (ओिह समय केर नेफा ) मे पदासीन छलाह, हम रांचीमे अपन छोटका काका लग रिह कऽ पढ़ैत रही।

हमर िपितऔत बिहन कऽ िवआह भेलाक तुरंत बाद हमर बाबूजी आ छोटका काका कþहु बाहर चिल गेलाह, कतय गेलाह से हम निञ बुझिलयैक। हम सभ भाए-बिहन आ हमर छोटका काकाक बड़की बेटी, अथŭत हमर िपितऔत बिहन सेहो हमरा सभ संग गामपर रिह गेिल, कारण हमरा सबहक İकूलमे गमŰ छुņी छलैक , हम सभ खूब आम खाइ आ खेलाइ। मुदा हम देखी जे हमर दादी हमरा िकछु बेसी मानिथ। अचानक एक िदन भोरमे जखिन हम उठलहुँ तँ देखैत छी जे सभ िकयो ĭयİत छिथ। हमर दादी सभ काज करिनहार सभकेँ डाँिट रहल छलीह, कहैत छलीह- "आब समए निञ छैक, जĪदी जĪदी काज करए जो"। हमरा िकछु निञ फ़ुराइत छल जे ई की भऽ रहल अिछ। हमरा देिखते हमर दादी कहलिथ- "हे देिखयौ, अखिन तक ई तँ फराके पिहर कऽ घूिम रहल छिथ"। हमरा िकछु बूझयमे निञ आिब रहल छल जे ओ की बजैत छलीह। तखिन हमरा ğयान आएल जे िकंसाइत हमर जĠमिदन कािŎ छैक तािह दुआरे दादी कहैत हेतीह-हमरा िकचिकचाबए लेल। ओ सभ िदन कहैत छलीह जे अइ बेर जĠमिदनमे अहाँकेँ साड़ी पिहरए पड़त आ हम खौँझा जाइत छलहुँ। ई सभ सोिचते छलहुँ ताबत देखिलयैक जे छोटका काका आँगन िदस आिब रहल छलाह। हुनका संग हमर बाबा सेहो छलाह। ओ दुनु गोटे दलानपर सँ आिब रहल छलाह, से बाबाकेँ देखलासँ बुझएमे आिब गेल। हुनका सभकेँ देिखते हमर माँ आ दादी दुनु गोटे आगू बिढ़ कऽ हुनकर İवागत केलिथ आ माँ केँ हम कहैत सुनिलयैĠह- "आब कहू जĪदी सँ जे लड़का केहेन छिथ"। हमरा िकछु निञ बुझना जाइत छल, तावत हमर काका हमरा िदस देखलिथ आ देिखते देरी कहलिथ- “अरे तोहर िबआह ठीक कऽ कए आएल िछयहु, िमठाइ खुआ”।

हम तँ एकदम अवाक रिह गेलहुँ। हम ओतएसँ भािग कऽ अपन कोठरीमे आिब बैिस कऽ सोचए लगिलयैक, आब की होयत हम तँ अपन दोİत सभकेँ

मैिथली कथा २००९-१० 11 किह कऽ आएल रही जे अपन दीदीक िबआहमे जा रहल छी, ओ सभ की सोचत। हमरा एतबो ज्ञान निह छल जे हम िबआहक िवषएमे सोिचतहुँ।, हमरा िचंता छल जे दोİत सभ िचढाएत। बेश, किन कालक बादसँ हमर भाए-बिहन सभ खुशी-खुशी हमरा लग अबिथ आ सभ गोटे खुशी-खुशी कहिथ, "हम सभ नबका कपड़ा पिहरब"। ओ सभ तँ आर बहुत छोट-छोट छलिथ, हमहॴ सबसँ पैघ छी। हमर काका जĪदी जĪदी İनान ğयानक बाद भोजन कऽ तुरंत चिल गेलाह, पता चलल जे ओ बिरयाती आनए लेल गेलाह। ओिह िदन, िदनभिर सभ ĭयİत छलिथ। हम अपन माएकेँ ĭयİत देिखयिĠह, परंच खुश निञ लगलीह। भिर गामक लोकक एनाइ-गेनाइ लागल छलय। दोसर िदन भोरे हमर बाबूजी अयलाह। हुनका चाह देलाक बाद आ हुनकासँ गĢप केलाक बाद माएकेँ हम Ćसž देखिलयिĠह। तावत धिर हमहूँ बूिझ गेल छिलयैक जे आब सþे हमर िवआह भऽ रहल अिछ आ हमरा दोİत सभसँ बात सुनइये पड़त आ ओ सभ िचढायत तकरासँ हम निह बिच सकैत छी। ओिह िदन हमर जĠमिदन सेहो छलय, साँझमे दादीकेँ मोन रिह गेलिĠह आ हमरा साड़ी पिहरय पड़ल। ४ खैर हमर िवआह बड़ धूम धामसँ भेल आ हम तेहेन लोकक जीवन संगनी बनलहुँ जे हमर जीवन धĠय भऽ गेल। गामक ओ समए हम किहयो निञ िबसिर सकैत छी। ई ओिह समएक गĢप िथक जखिन िक हमर बिहनक िवआह भऽ गेल छलिĠह आ ओ सभ चिल गेल छलीह। हमर बाबूजी आ छोटका काका हमरा लेल वर ताकए लेल गेल छलिथ। आइ-कािŎक िहसाबसँ तँ हम ओिह समए एकदम बच्चा रही आ शहरमे रहलाक कारणेँ हम गाम घरक बहुत िकछु निह बुझैत छलहुँ। सभसँ बेसी िवआह बैसाख, जेठ आ आषाढ़मे होइत छैक, अथŭत शुŀ रहैत छैक। ओिह ज़मानामे अथŭत १९७२ ईİवीमे गामक रौनक िकछु आर रहैत छलय। Ćितिदन कतो ने कतो िववाह होइत छलैक जािहमे दादी हमरा लय जयबाक आƇह अवĮय करैत छलीह। हमहूँ किहयो िववाह नइ देखने छलहुँ, पिहल िवआह हम अपन दीदीक (िपितऔत) देखिलयिĠह। ओही समयमे बेसी िवआह सभासँ ठीक भेलहा सभ रहैत छलैक जािह कारणेँ हरबड़ी वाला िववाह हमरा देखय कs ओतेक इच्छा निञ होइत छल, मुदा दादीकेँ मोन रखबाक लेल हुनका संग कतहु-कतहु चिल जाइत छलहुँ। ओिह समए हम परीक्षा फलक Ćतीक्षामे रही आर कोनो काजो तँ हमरा निह छल। एक िदन हम, माए आ दादी आंगनमे बैसल छिलयै िक एकटा खबासनी आएल आ दादीकेँ कहलकिĠह- "मिलकैन कने एĦहर आएल जाओ"। ई सुनतिह दादी ओकरा लग चिल गेलीह, पता निञ ओ हुनका िक

12 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कहलकिĠह। किन कालक बाद दादी हमरा कहलिथ- "चलऽ हम तोरा एकटा सोलकिन सबहक िवआह देखाबैत िछयौक"। हमरा आĀयर् भेल जे आइ दादीकेँ की भेल छिĠह जे ओ हमरा सोलकिनक िववाह देखए लेल कहैत छिथ। हम आĀयर्सँ पुछिलयिĠह- "अहाँ सोलकिनक िवआह देखए लेल जाएब"? दादी मुसकैत हमरा कहलिथ- "चलिह नए अिह ठाम, ƙĦह-İथान लग बिरयाती छैक, दूरेसँ खाली बिरयाती देिख चिल आएब दूनू गोटे"। हमारा मोन तँ निह होइत छलए बिरयाती देखबाक मुदा हम दादीकेँ संग जएबाक लेल तैयार भऽ गेिलयिĠह। ƙĦह-İथान लगे छलए, हम दुनु गोटे जखन ओतिह पहुँचलहुँ तँ देखिलयए जे ओतिह बीचमे पालकी राखल आ ढोल िपपही बाजैत छल, जोँ आगु बढ़लहुँ तँ देखैत छी जे ओिह पालकीमे वर मुँहपर रूमाल देने बैसल छिथ आ एकटा बच्चा हुनका आगूमे बैसल छलिĠह, बिरयाती सभ सेहो बैसल छलैक। खैर हम सभ आगू बिढकए बिरयाती लग पहुँिच गेिलयैक। हमरा िनक भलिह निञ लागैत छल मुदा पिहल बेर अिह तरहक बिरयाती देखैत रही। हम आĀयर्सँ बिरयाती देखैत रही िक किनये कालक बाद सभ बिरयाती ठाढ़ भऽ गेलिथ आ िपपही ढोल जोरसँ बाजए लगलइ। हम सभ कने पाछू भऽ गेलहुँ, जिहना पालकी उठलए िक हमरा माथपर िकयो पािन ढािर देने छल। हम तँ हĸा बĸा भऽ कऽ एĦहर-ओĦहर ताकए लगलहुँ, तँ देखैत छी दादीक हाथमे िगलास छलिĠह। हम कानए लगिलयए। ई देिख कऽ दादी हँसैत तुरंत हमरा कहलिथ- “गमŰ छलैक तािह Ņारे ठंढा कऽ देिलयौक।“ हमरा बड़ तामस भेल।

हम सभ जखिन घर पहुँचलहुँ, हम कानइत माएसँ कहिलयए- “हम किहयो दादी संग िवआह देखैक लेल निञ जाएब”। हमर एकटा पीसी ओिह ठाम बैसल रहिथ, किह उठलीह, "निञ कानी, तोहरे िनक लेल केलथुन"। हमरा िकछु निञ बुझएमे आएल आ बकलेल जकां हुनकर मुँह देखैत पुछिलयिĠह- "िक नीक भेल, सभटा कपड़ा भीिज गेल"। ई सुिन कऽ ओ कहलिथ- "गेए बिरयातीक जेबा काल पािन माथपर देलासँ लोकक िवआह जĪदी होइत छैक, तािह लेल तोरा पािन देलथुन "। हम आर जिल भुिन कऽ ओतएसँ चिल गेलहुँ। ओकर किनये िदनक बाद हमर िवआह भऽ गेल।

मैिथली कथा २००९-१० 13 ५ जिहया हमर िवआह भेल ओिह समए हमर घरवाला āी ललन Ćसाद ठाकुर इंजीिनयिरगक अिĠतम बरखमे पढैत छलाह। हम मैिƏकक परीक्षा देने रही आ परीक्षा फल सेहो िनकिल गेल छल। हमर िवआह आषाढ़ मासमे (िदनांक १३ जुलाईकेँ भेल छल। िवआहक तुंरत बाद मधुāावणी छलैक तािह Ņारे हम गामपर रही गेलहुँ आ हमर काका मधु-हमर िपितऔत बिहनक संग राँची चिल गेलाह। काका हमरा कहैत गेलाह जे ओ हमर परीक्षा फल आिद İकूलसँ लऽ कॉलेजमे हमर नाम िलखवा देताह। तैं हम िनिĀĠत रही। हमर काका नाम िलखवेलाक बाद हमरा खबिर सेहो कऽ देलिĠह। हमर नाम " िनमर्ला कॉलेज रांची" मे िलखाएल छल। दादीक आƇहपर हमरा गामपर रिह मधुāावनी करवाक छल, बिहनक िवआहसँ अपन िवआह आ मधुāावनी धिर किरब दू माससँ बेसी रहए पड़ल छल। हम पिहल बेर अपना होशमे एतेक िदन गामपर एक संग रहल रही। ओना तँ हम सभ, सब साल गाम जाइत रही, मुदा एक संग एतेक िदन निञ रहैत रही। ओ पिहल आ अिĠतम बेर छल जे हम गामक मजा िनक जकाँ लऽ सकिलयैक। चतुथŰ आ दहनहीक बाद सभ गोटे चिल गेलाह। िहनको कॉलेज खुजल छलिĠह, ईहो- हमर घर वाला- मुजģफरपुर, अपन कॉलेज चिल गेलाह। आनक गेलापर ओतेक सुž निञ लागल, मुदा जिहया ई गेलाह ओिह िदन बड़ सुन लागल। ई िकएक होइत छैक निह जािन, िववाह होइतेक संग एतेक Ćगाढ़ सĦबĠध कोना भऽ जाइत छैक जे एक दोसरासँ अलग रहनाइ िनक निञ लागैत छैक। दादी िहनकासँ करार करवा लेलिथन जे मधुāावणीमे अवĮय अओताह। दादीकेँ तँ हँ किह देलिथ मुदा हमरासँ कहलिथ ओ निह आिब सकताह। हमर मोन तँ छोट भऽ गेल मुदा फेर सोचलहुँ हमर तँ क्लास छूिटये रहल अिछ िहनकर िकएक छूटिĠह। हम कहिलयिĠह िकछु निञ, ओिह समएमे हम िहनकर बातक हँ वा निञमे जवाब दैत रिहयिĠह। ओनाहुँ हम कम बाजैत रही आ िहनकासँ तँ िनक जकाँ बाजएमे हमरा एक साल लािग गेल। गामपर बाबा दादीकेँ छोिड़कए घरमे, हमर माँ बाबुजी आ हम छहु भाए बिहन रही। ओिह समएमे असगरो जे सभ गामपर रहैत छलाह वा छलीह, िकनको ई निञ बुझाइĠह जे असगर छिथ। आ हमर घरमे तँ िवआह भेल छल। रोज भोर साँझ गाम घरक लोकक अएनाइ-गेनाइ लागल रहैत छलैक। एक तँ अहुना जिहया-जिहया हम सभ गाम जाइ, लोक सबहक एनाइ-गेनाइ लागल रहैत छलैक आ अिह बेर तँ हमर िवआह भेल छल। अिह बेर किन िबशेष लोकक एनाइ-गेनाइ रहैत छल आ हमर किन िवशेष मान-दान सेहो होइत छल। किहयो कतहुँसँ खेनाइ आबए कतहुसँ खोइंछ भरए कऽ लेल िकयो कहए लेल आबिथ, सभ िकयो एतबा अवĮय कहिथ, ठाकुरजी बड़ जĪदी चिल गेलिथ। दादी सभकेँ

14 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कहिथ-“ फेर जिĪदये अओताह, पंचमीसँ मधुāावणी धिर रहताह”। हुनका सभकेँ की बुझल जे ठाकुर जी निञ आिब रहल छिथ, हम सुिन कऽ चुप रही, िकनको िकछु निञ किहयिĠह, माए तककेँ निञ कहने रही, मुदा जखन िहनकर एनाइ- गेनाइक गĢप सुिन मोन उदास भऽ जाए। हमर जिहया िवआह भेल हम ओिह समए Ąाक या İकटर् Ĥलाउज पिहरै रही। अचानक हमरा साड़ी पिहरय पिड़ गेल। जहाँ िकयो आबिथ, ख़ास कऽ मौगी महाल महक तँ हमरा बजाएल जाय। हमर बिहन सभ दौड़ कऽ हमरा लग अबिथ कहए कऽ लेल, ओकर बाद हम जĪदीसँ ककरोसँ साड़ी ठीक करवाबी आ तखिĠह हम हुनका सभ लग जाइ। िदयािद महक काकी-पीसी सभ गोटेमेसँ बराबिर िकयो ने िकयो रहैत छलीह, ओ सभ ठीक कऽ देिथ, तइयो कैक बेर हमर पैर साड़ीमे फँसल हएत आ हम खसल होयब। जे िकयो आबिथ एतवा अवĮय कहिथ, "देिखयौ कुसुम केहेन लागैत छिथ"। आ देखलाक बाद कहिथ- "बड़ सीरी चढ़ल छैक"। कतेक िनĮछल भावना आ कतेक अपनापन रहैत छलैक हुनका लोकिनमे।

हमर दु-तीनटा पीसी सेहो ओिह समएमे ओतिह रहैत छलीह, िजनकर सबहक िवआह ओिह बरख भेल छलिĠह आ ओ सभ हमर संग तुिरया छलीह। भिर-दुपहिरया घर भरल रहैत छल, हुनका सभ संग ओिहना समए बीित गेल आ पंचमी आिब गेल। पंचमीसँ एक िदन पिहने भोरे भोर हमर सासुरसँ भार आएल, ओिहमे सभ िकछु िबधक ओिरओनसँ आएल छल। भिर गामक लोककेँ दादी हकार िदयवा देलिथन, सभ भार देखैक लेल आबिथ आ जे देखिथ से कहिथ, एतेक िनक भार िकनको ओतहुसँ निञ आएल छलैक, गामपर सभ गोटे भार देिख कऽ बड़ Ćशंसा करिथ, हमरा ई सुिन बड़ िनक लागए। िजनका हम किहयो देखने सुनने नइ- हुनकर Ćशंसा सुिन हम खुश होइ। हमर दादी सेहो खुशीसँ सभकेँ कहिथ- “अरे महादेव झा ओतएसँ भार आएल अिछ”। हमरा ओिह समएमे िकछु निञ बुझाए, हम सोची हमर ससुरक नाम तँ हीरानंद ठाकुर छिĠह, दादी बेर-बेर िकएक कहैत छिथ महादेव झा ओतएसँ आएल अिछ। हम पुछऽ चाही िकनकोसँ मुदा एĦहर ओĦहरमे िबसिर जाइ। कॉलेजसँ हमरा ई Ćितिदन एकटा िचŇी िलखिथ, ओिहमे सभ िदन जवाब देवाक लेल िलखैत छलिथ, मुदा हमरा जवाब देबएमे लाज होइत छल। एक िदन हमर भाए आ बाबुजी कोनो काजसँ मुजģफरपुर जाइत छलाह। ओिह िदन हम पिहल िचŇी िलिख कऽ भाएकेँ देिलयिĠह जे हुनका दऽ देबाक लेल। पंचमीसँ एक िदन पिहनिह भोरमे भार आएल छल, साँझमे बाबुजी सभकेँ सेहो अयबाक छलिĠह। हमरा अपन संगी आ पीसी सभ संगे फूल लोढ़य लेल

मैिथली कथा २००९-१० 15 जयबाक छल। दादी सभ Əेनसँ िहनकर बाट ताकिथ अंतमे हमर बिहन सभसँ किह पुछओलिथन, हम बिहन सबकेँ किह देिलयिĠह- हमरा िकछु निञ िलखने छिथ। दादी तकर बादसँ िनिĀंत भऽ गेलीह आ तखनसँ कहिथ जे तोहर बाबुजी सभ संग अवĮय अओताह। साँझमे सभ घाँउझ बािĠह कऽ हमरा ओतिह आएल देखए लए- सबहक हाथमे फूल डािल आ पिथया छलैक िकयो-िकयो अपन खबािसनीकेँ सेहो संगमे लऽ लेने छलिथ िकछु कुमािर सभ सेहो संगमे छलिथ। हमरो संग दादी एकटा खबािसनी लगा देलिथ ओ हमर फूल डािल आ पिथया लऽ लेलिथ। हमसभ पूरा टोलक सभ गोटे गीत गाबैत हँसी मजाक करैत अपन अपन फूल डािल पिथया लेने पिहने गाछी िदस गेलहुँ। दादी हमरा िहदाइत देने रहिथ- जे बाँस वा अĠय पैघ गाछक पात िकयो तोरय, जािह जूही कऽ पात आ फूल सभ हम अपने तोड़ी। हमरा बड़ पोŎा कs कहलिथ- "हे मधुāावणी लोककेँ एकइ बेर होइत छैक जिहना कहैत छी कयने जाउ"। हमहुँ िनक बच्चा जकाँ मुरी िहला कऽ हँ किह देिलयिन। हम सभ, सभसँ पिहने बंसबņी िदस िबदा भेलहुँ। बाँसक पात तोड़लाक बाद हम सब जािह जूही आ अĠय अĠय पात आ फुलक खोिजमे सबहक बाड़ी- बाड़ी जाइ आ सभ तिरसँ फूल सभ बटोरैत जाइ। हमरा तँ बुझलो निञ छल जे कोन-कोन फूल आ कोन-कोन पात चाही। जेना जेना सभ िकयो तोड़िथ हमहुँ तोरैत जाइ। दादीक िहदाइत हमरा मोन छल। हम पिथयाटा निह उठा पाबैत रही, सेहो हमर िपितऔत बिहन, देयािद महक छलीह - से उठा दैत छलीह। जखिĠह हमरा सभ गोटे कहलिथ जे आब भऽ गेल, हमहुँ हुनका सभ संगे आपस हेबाक लेल चिल देिलयिĠह। हमरा देिख कऽ ततेक आĀयर् भेल, हमसभ एक-एक पिथया भिर कऽ पात जाही जूही लऽ लेने रिह।

आब ओ हमरा बसक निह छलैक जे ओ हम उठा कऽ एको डेग आगू बिढतहुँ। हमर िपितऔत बिहन ओकरा अपन माथपर लऽ कऽ चललीह। राİता भिर हँसी मजाक होइत छलैक, ओहीमे सँ बेसी मजाक हम निह बुझैत रही। िबच-िबचमे बटगमनी सेहो हैत छलैक। इहो गĢप होइत छलैक जे िकनकर सभहक वर आएल छिथ आ िकनकर सभहक बादमे अथŭत मधुāावणीसँ पिहने अओताह। हमारोसँ सभ पुछिथ, हम िकछु निञ, बाजी हमरा लाज होइत छल। निह बजलापर सभ हमर आर मजाक उड़ाबिथ, हम अिहना दुखी छलहुँ तािहपर ई सभ मजाक करिथ। कखनो मोन होइत छल बेकारे सभ संग अएलहुँ। हमरा होइत छल हम कहुना घर पहुँची, हम मजाकसँ तंग आिब कऽ अपन बिहनसँ जे पिथया लेने रहिथ, कहिलयिĠह, अपना सभ आगू चलू। हम सभ आगू जĪदी जĪदी बिढ रहल छिलयैक मुदा कथी लेल हमरा िकयो जĪदी जाए देत पकिड़ कऽ िबचमे हमरा सभ गोटे कऽ लेलिथ। ओिहना करैत हम सभ मुिखया बाबाक घर लग पहुँिच गेलहुँ । हमर घर

16 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ओकर बाद छलैक हम हाथमे फुलक डाली लेने सभ संग िबचमे चलैत रिह। घर लग पहुँिच सभ गोटे जोर जोरसँ हंसिथ हमरा ई किह आगू कऽ देलिथ जे आब हमर दादी देख िलतिथ तँ हुनका सभकेँ डाँिट परतिĠह। हम आगु आिब जिहना बरामदा िदस बढलहुँ देखैत छी कुसŰपर बाबा आर बाबुजीक संग ई बैसल छिथ आ तीनू गोटे चाह पीिब रहल छिथ। हम लाजसँ जĪदी-जĪदी आँगन िदस भािग गेलहुँ। आँगन पहुँिच देखैत छी दादी आ माए ĭयİत छिथ। एक तँ पाबिनक ओिरयाओन होइत छलैक, दोसर जमाए िवआहक बाद पिहल बेर आएल छलिथ, तेसर समिधयोिनसँ पाहुन भार लऽ कऽ से आएल छलिथ। हमरा देिखतिह दादी कहए छिथ- "यै अहाँ िबना माथ झपने अिहना बाबा आ बाबुजीक सॲझासँ आिब गेलहुँ"। हम िकछु निञ बजिलयिĠह, हम आ हमर बिहन चुप-चाप कोहबर घर जाए कऽ फुल डािल आ पिथया रािख देिलयैक। ओिह समएमे हमरा माथ झांपयमे बड़ लाज होइत छल। हम बाहिर आिब कऽ माएसँ पुछिलयैक, "बाबुजी मुजģफरपुर सँs कखिĠह एलिथ" जकर जवाब दादीसँ भेटल, "अहांक बाबुजी कॉलेजसँ ठाकुर जीकेँ पकिड़ कऽ लऽ अनलिथ "। साँझमे िकछु-िकछु िबधक ओिरओन आ गीत भेलैक आ दादी कहलिथ सभ गोटे जĪदी सुतए जो भोरे उठए परत। राितमे सुतए काल पता निञ हमरा कोना मोन छल, हम िहनकासँ पुछिलयिĠह- "भार कतएसँ आएल छैक"? िहनका िकछु बुझएमे निञ अयलिĠहĠह, हमरा कहलाह- "मतलब.... कोन भार "? फेर मुİकुरैत हमरा कहलाह- "अहाँकेँ हमरा देिख कऽ खुशी निञ भेल जे अहाँ हमारासँ भारक िवषएमे पुछैत छी "। हम मुड़ी िहला कऽ हाँ किह देिलयिĠह मुदा फेर आİतेसँ कहिलयिĠह- "दादी सभसँ कहैत छिथ महादेव झा ओतएसँ भार आएल छैक। ई सुनतिह जोरसँ ठŇा कऽ हँसैत हमरा कहलाह- "ओ.., अच्छा..., ओ महादेव झा, ओ हमर सबहक पाँिज़ अिछ तािह लेल बाजैत होयतीह"। तकर बाद हमरा पाँि जक िवषएमे सेहो बता देलिथ। हमरा अपनापर हँसी लागल-कहु तँ भोरसँ हम ई सोिच कऽ परेशान छलहुँ जे महादेव झा के छिथ। (अिगला अंकमे)

मैिथली कथा २००९-१० 17

सुरेĠƖ िकशोर झा गाम कठरा-िजला दरभंगा साथी दुखमे न कोइ एक साधारण मğयमवगीयर् कुलीना पिरवारमेंजĠम ( कलयुगमे कुलीन पिरवारक परंपराके िनमाएब बड़ किठन, तकलीफ होएत परंतु मुँहसँ उफ आ आह तक निह उच्चािरत कऽ सकैत छी कारण काट वाकील मोकएवला और बेशी मजाक उड़ेताह, कहताह की भेल? आ किहकहकहा लगओताहा)। अİतु, जĠम आ बालकपन लगभग सभ मğयमवगीयर् ĭयिक्तक पिरवारमे थोड़बेक उनैस बीस ढ़गसँ ĭयतीत छोरंत छैक। आ िहनकहु बीतकिन नीकिहं रूपमे। माए-बाप आ पिरवारक नीक Ćितơा और आवĮयकतानुकूल पयŭĢत संपित तथा गामक चािरटा जेठ रैयतमे सँ एक िहनकहु िपतामह हेबाक कारण िहनक बाĪयकाल बहुत नीक लाड़ Ģयारमे बाल-कीड़ा करैत िबतलिन। पĀात िवńाथŰ जीवन शुरु भेलिन । िकछु िहन गाममे पचकौड़ी माİटर साहबक ओिहठाम भňा पकरलाक बाद लहेिरयासराय ( दरभंगा ) एलाह । एतय पोख-िरया İकूलमे Ćाथिमक कक्षाक पढ़ाई कऽ पुन सरİवती İकूलसँ मैिƏक कएल । Ćाथिमक कक्षाक पढाईक समए , एक नेगरा माİटर साहब सेहो गामसँ बलभƄपुर आएल रहिथ । सौसे मुहĪलाक िवńाथŰ सभ भोिह समएमे हुनकेसँ ƀयूशन पढ़िथ इहो हुनका लग जाए लगलाह । िवńाथŰक बीच İपधŭ और पढ़बाक Ćित अिभरूिच और ओिहसँ एक नीक िवńाथŰक रूपमे इĔजत भेटब ओही ठामस शुरु भेलिन। बाĪयकालवा िवńाथŰ अवİथाक हर रोमांचकरी समए हुनका आइयो याद अबैत छिन तँ आंिखसँ नोर बहए लगैत छिन । एक ओकर याद आ दोसर िजंदगीक रथक दोसर पिहयाक रूपमे भेटल

सुलक्षणा नारी (पėी) । आहा हार रे भाग्य हुनकसतत् मुİकुराईत छेहरा आई एकटा हिथनीक लगमे मृगपुरुषसँ बेशी निह रिह गेल छिन । अİतु, उपरोक्त िकछु बात भावावेशमे कालƅमकेँ ĭयतीत हेबासँ पूवर् िलखा गेल आिह।

18 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) हुनक Ćाथिमक िशक्षा बहुत नीक िबतलिन । नेंगरा माİटर साहब ( āी राजेĠƖ झा, सॲथा, बेनीपĿी ) ओिह समएमे कोना दोसर िवńाथŰकेँ जँ िवńाथŰक आदशर् बुझबैत रहिथ तँ िहनकिहं नाम लए । िहनका अपन पाƁयपुİतकक अिधकांश िवषए तँ बुझले रहिन जे दोसरो बच्चा वािवńाथŰ सभक जोरसँ पढ़ल गेल िवषए कंठाƇ भए जाइत रहिन। जािहसँ िवńाथŰ मğय एवं मुहĪलामे सभ नीक नजिरसँ एवं Ģयारसँ देखिĠह । पĀात् एम. एल. एकेडमी (सरİवती İकूल) लहेिरयासरायसँ १९७४ ई०मे मैिƏक ( ११ वलास) पास कएलिन । ओिहवषर् मैिƏकमे गामक गाम िरजĪटक बाद सžाटा पसरल छल। कारण कोनो गाममे १५ मे सँ २-३ तँ कतहु २० मे सँ २- िवńाथŰ माÿ पास भेल रहिथ । िहनको पर माँ भगवातीक कृपा रहिन मैिƏक पास केलिथ। पुन: मैिƏकक बाद घरसँ लग हेबाक कारण आई.एस.सी ( िफिजक्स, केिमİƏीई एवं गिणत िवषय ) १९७७ ई० मे पास कएल । तावत िरजĪट सभ िनकलबासंॅ पिहनिह एकटा आई.एस. सी. के िवńाथी माÿके रूपमें गामसँ पिĀम २ कोसक करीबक दूरीपर िवआह भऽ गेलिन । कारण िहनकर िपताजी एकटा साधारण गृहİथ रहिथĠह िजनका माÿ खेती गृहİथीक आमदनीपर िहनकासँ जेठ तीनटा बेटीक िवआहक खचर्क भर पिर चुकल रहिन संगिह ईआिहनक छोट भाएक पढ़ाई िलखाई आ पुन: एकट कुमारी बेटीक िववाह-दुरा-गमनक भिवįयं भावी खचर्क बोझ जेहन जीणर्-शीणर् बना देने होइिĠह एिह िवषएकेँ केवल एकटा सĜपुरुष आ İच्चिरÿ नारी माÿ बूिझ सकैत छिथ । एहने एक महाĜमा गृहİथ ƙाहमनक छ: संतानमे सँ चािरम एवं Ćथम पुÿ इहो रहिथ जे िपþी-िपितयाइनक ओिहठाम रिह बलभƖपुरमे पढ़ाई िलखाई केलिन । एिह तरहक एकटा गृहİथकेँ अपन तीनटा पुÿीक िवआह-दुरागमनक बाद पुÿक िवआह करबाक केहन अिभलाषा रहैत हेतैक अंदाज लगाएल जा सकैत अिछ। एहने समएमे समयानुकूल बहुत लोक िहनकहु ओिहठाम कुटुमैतीक Ćसंगमे एलिन । एक-दू ठाम पिरवार नीक पसंद परलिन तँ समगोÿी उहिर गेलिन। पĀात् एकटा माİटर साहेब ( हेड माİटर) सेहो आिब अपन Ćİताव ( पुÿीक, जेठपुÿीक Ćित ) रखलिĠह । िहनक गृहİथ िपता िबना कोना िवशेष मंथन आ मंÿना के हेड माİटर साहेबक Ćİताव İवीकार कए लेलिन। हेडमाİटर साहेब कथाक Ćसंगमे इहो कहलिखĠह जे हमरा पिरवारमे तीन पीढ़ीक बाद बेटी जĠम लेलिन आिछ आ ई हमर तीनटा बेटीमे Ćथम बेटी िथकीह, िजनकर िवआह तीन पीढ़ीक बाद पायल बेटीक रूपमे हेतिन । बस िहनकर सोझ लोक िपताकेँ और की चाही मन गƄगद भऽ गोलिन एवं कथा İवीकार कऽ लेलिन। पĀात् िहनका (अपन जेठ बेटा) संकहल, बौआ आब खेतीसँ बहुत नीक आमदनी निह भऽ रहल अिछ। अहांक छोट भए सेहो बच्चे छिथ आ पढ़ाई िलखाई बांकीये छिन। संगिह अहांक एकटा छोट बिहन सेहो कुमािर छिथ। अहांक िपþी खचर्क भय सँ पिरवार िभž कय नेने छिथ । एहेन हालतमे हेड-माİटर साहवक बेटीसँ िववाह

मैिथली कथा २००९-१० 19 बहुत नीक रहक चाही । अपने बहुत पढ़ल – िलखल, िवŅान हेड-माİटर साहब छिथ तेँ हेतु बेटीयो के जरूर नीक पढ़ेने िलखेने हेिथĠह । एिहसँ अहांक आगांक पढ़ाई िलखाईमे नीक मदद भेटत । ई सभ सोिच हम हुनका कुटुमैतीक लेल हँ किह देिलएिन । िहनका लेल माता-िपताक वचन भगवान रामक लेल माए-बापक वचनसँ िकछु ओ कम महĢतक निह छल। नीक सौख मनोरथसँ िहनको िबआह भेल। बड़ बिढ़या शुभारंभ भेला सुलक्षणा पėीक सुलक्षण ĭयवहार ƅमवत Ćहिशर्त होएत। िहनक एवं िहनक िपताक मनोरथ िदनक िदनानुिदन हवामे पूरब शुरु भऽ गेल। कहब छैक भगवान सभक आश ओ अपन िहसाबसँ पुरबैत छिथĠह आ िहनकहु मनोरथ आकाशक हवामे पूरब शुरु भेल। ओिह समएमे हवागाड़ी आ टीवी आिदक चलन निह छल पतुर् जतेक ठीक-ठाकपिरवारक पढ़ए-िलखए पला लड़काक िवआह भेल रहिन सभकें साईिकल, घड़ी आ एकटा रेिडयो भेटब आमं बात रहिन। िहनको दुनू बापूतकेँ बड़ शौक रहिन जे तीन पुĮतक बाद हेडमाİटर साहब बेटीक िवआह केलिन अिछ तेँ एिह मासमे निह तँ अिगला मासमे तँ साईिकल घड़ी आ रेिडयो देबे करिथĠह । ओिह समएमे Ćाय: िवआहसँ तेसर सालमे िŅरागमन होईत छलैक। तेँ आश रहिन जे एिह महीनामे निह तँ आिगला मिहनामे, अिगला मिहना निह तँ अिगला पाविनक उपलŞयमे। एिह तरहै आशक आ पूरब हवामे पूरब आĂासन शुह भऽ गेलिन। परंतु अपनेक लोकिनकेँ एिह कथाक आरंभिहमे कहल गेल अिछ जे किलयुगमे कुलीन मैिथल ƙाहमणकेँ कुलीन रीितसँ जीवन िबताएब बड़ किटन होईत छैक। िहनको लेल इएह भेलिन। कİट बहुत भेल हेतिन लेिकन मुँहसँ उक निह कऽ सकैत छलाह। जीवन िछएक “नाव कागज का गहरा है पानी , िफर भी हर हालमे (दु:ख, अपूिरत आश आ सुलक्षणा पėी, पैघ बापक पैघ बेटी Ņारा हेए दृिİतसँ देखब सदृश दु:ख तकलीक के सहैत) मुİकुराकर दुिनयादारी पडेगी िनभानी। “ एिह कहावतकेँ सĜय करैत िजनगी िबताबैत रहलिन । पती Ņारा किहयो सुलक्षणा पėीकेँ सुझावक ƅममे “आँखो का भूषण कĔजल है ये अनुिचत ऐसा कहना है, ललना लोचन में लाज रहे लĔजा नारी का गहना है। पितƙता İवयं तगड़ी होती िफर तगड़ी का क्या करना है, सबसे अच्छी पित सेवा ही भव से तारने की तरनी है। िकĠतु आजकल है नही’ इसमे कुछ िवĂास, पितदासा İथान पर िकये İवयं पित दास // “ सुनेबापर िहनक बिहन आ भाउज सभ Ņारा हषर् पूवर्क सुनल गेल परंतु िहनका (सुलक्षणा) Ņारा उपहास सुनबा लेल भेटलिन । तथाİतु उपहास सुिनयो भिवįयमे सुलक्षणा (जीवन रूपी रथक दोसर पिहया) के Ĥयवहारमे सुधारक आश कऽ कोनहुना मनक दु:ख मनिहमे रािख (ये ऐसी आग है िजसमें धुआं नही होता, और मणुįय जलकर समाĢत हो जाता है ।) आश कऽ İवीकार कएलिन । अİतु, समए बीþेत रहल। िवआह भेलिन। आइ-एस-सी क परीक्षा देलिन। आई-एस-सी पासो केलिन।

20 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) तावत, आई-एस.सी.क परीक्षे देने रहिथ, िरजĪट निहं आएल रहिन आ ओही बीच कामेĂरिसंह दरभंगा संİकृत िवĂिवńालयमे बी.ए.एम.एस (एम्.बी.बी.एस के समतुĪय आयुवųद-शाİÿक िचिकĜसा पŀितक डॉक्टर) वला पढ़ाई शुरु भेल रहैक। एिहमे मैिƏक सिटर्िककेट वलाकेँ लेल सात वषर् आ आई एस.सी.पास वलाक पांच वषर् पढ़ए पड़ैत छलैक । गिणतक िवńाथŰकेँ डॉक्टरी पढ़बाक लेल ई बहुþ नीक पढ़ाई रहैक । बहुत रास िवńाथŰ ओकर परीक्षामे बैसलाह । िहनकर िमÿ Ćो-फेशर सोमदेवजीक बालक वþर्मानमे डॉक्टर अिमत वधर्न िहनकहुँ ओिह परीक्षामे बैसए लेल सुझाव देलकिĠह इहो परीक्षा देलिन । कंपी- टीशनमे पास भेलिथ । पुन: इंटरĭयू भेलिन ओहूमे ६०-६५ टा चुनल गेल िवńाथŰमे सातम İथानपर चुनल गेलाह । सेलेक्शनमे नाम एलापर अपना पिरवारमे अपन ईƠ िमÿमे एवं समाजमे तथा सासुर सभमे थोड़ेक खुशी तँ जरुर भेल हेतिन । पĀात एडिमशनक समए नजदीक ऐलिन । िपताजीसँ एडिमशन लेल पुछलिखन । िपताजी कहलिखन “ बौआ! सात सालक पढ़ाई बहुत लंबा भऽ जाएत । आई.एस.सी क िरजĪटपर जौ कतहुँ नौकड़ी पकिर िलतहुँ तँ बेशी नीक रहैत ।“ िपताजीक बात िसर-माथपर लेलिन । पुन: एक िदन सासुरो गेलाह । ओतहुँ एिहबातक चचŭ अपन हेड माİटर ससुरजी लग सेहो केलिन । मुंॅह खोिलके िकछु मांगब सेहो İवीकायर् निह रहिन । आ कतेको उĜसवपर जे नव जमाएकेँ िकछु भेटैत छैक ताहू सभमे सािड़ – सरहोिज सभ मजाक उड़ाबिन जे कलासंॅ मांिग यौन कलासंॅ कला वİतु मािग िलय परंतु िहनका तँ सोमदेव जीक ओिह-ठाम पुİतकमे पढ़ल रहिन जे राजा अकबरकेँ सेहो खुदासंॅ दुआ मंगैत देिख जे गड़ेिड़या ३ गाम मंगए आएल छल ओ िकछु निह मांिग “ बकड़ी ३ गांव खागइ के बदला, खुदा देंगे तो लूंगा “ के पाठ पढ़ए लगलाह । आ एिहबातक जानकारी राजा अकबरकेँ भेलापर ओ तीन गामक बदलामे ई गाम हुनका खयं बजाकेँ ससĦमान देने रहिथĠह से कहावत चिरताथर् होमय लगैत छलिन। एिह तरहै पिर िİथित वशात् ओ बी.ए.म. एसमे एडािमशन निह होलिथ। हुनकर संगी आिमतवधर्न जी आई वएह कोसर् कऽ डॉक्टर छिथ सम िवńाताक िलखल कपाड़क फेर - - भाग्य आ कमर्क लुकका िछĢपी खेल पाछां पिरिİथतवश नौकडीक तलाश शुरु भेल । एिहƅममे ईंĢलायमेंट एक्शचेंज लहेिरयासरायमे नाम Ɩजर् करेलिन । ƅमश: एयर इंिडयामे Əेनी टेकिनिशयन, पुन: एयर फोसर्केँ दģतर कदम कुआंमे एयर मैनलेल आ ƙांच िरƅूिटंग ऑिफस मुĔģफरपुरमे आमŰ वा नेवीकेँ भतŰ लेल पयास शुरु केलिन । दुबर-पातर शरीर लऽ जखन ई भोड़मे १००-२०० केँ भीड़मे ठाढ़ होिथ आ सांझ तक ओिहमे संॅ माÿ २०-३० िवńाथŰ सेलेक्शन लेल बाचिथ आ इहो ओिहमे बंचल रहिथ तँ ईĂरक धĠय-वाद बापनकेँ अलावा िहनका मुँहपर और कोनो ĮĤद निह बचिन । कहब छैक िनबर्लकेँ बल राम “ । िहनकर िİथित जखन कमजोर होमय लग्लिन, दु:खक िİथित अपन आ आनके ज्ञान करा दैत

मैिथली कथा २००९-१० 21 छैक । िवńाथŰये जीवनमे िवआह भऽ गेल रहिन । न अपन जेब खचर् लेल पाई रहिन न सुलक्षणा पėीकेँ āृंगारक वसु लेल िकछु कऽ सकैत छलाह । बहुत िवलक्षण िİथितमे ईĂर पहुचा हेने रहिथĠह । परंतु शाİत कहैत छिथ जे ईĂर जंॅ दु:ख दैत छिथĠह तँ सुखहु दैत छिथĠह । आ मणुįयक लेल जॱ आिधकांश Ņारा बंद कऽ दैत छिथĠह उžित हेतु, तँ þैयो ओ सभटा Ņार बंद निह करैत छिथĠह । आ िहनको संग दिहन भेलिन । िहनक मकरĠदा वाली बिहन िहनका आƇहपर िहनका बिहनो के आƇह केलिखन जे जेठ साढ़ िथकाह । हमर छोट भाए िथकाह । िहनका अहॴ अपने संग लऽ जैितयिĠह । िकछु अपनेक Ćयास। मददनैकड़ी लेल कऽ देविन िकछु अपने करताह। भगवान कराथीĠह कतहु अपना पैरपर ठाढ़ भऽ जेताह तँ नीक हेतिन। ओिह समए ओ सोनपुर जी आरपीमे जमादार ( ए.एस. आई ) रहिथ । दु:खक ओिह घड़ीमे जग संॅ परेशान डूबैत कऽ ईĂरक कृपा संॅ ितनकाक सहारा भेटलिन। बाबूजी थोड़ बहुत जेब खचर् हेतु कोनहुना इंतजाम कऽ द्इये दैत छलिखĠह। बस एतिहसंॅ एयर फोसर् लेल, पटना एक दूबेर गेलाह । ओतए पता लगलिन जे एअर फोसर्क बहालीमे एखन दू-तीन महीनाक देरी छैक। एिह कममे ओ एक िदन अपना बिहनोकेँ आƇह केलिखन जे हुनका गाममे एक सĔजन जे िबहार होमगाडर्मे नौकड़ी करैत रहिथ कहने रहिन जे मुजģफरपुरमे चĸर मैदानमे आमŰक भतŰ होईत रहैत छैक से हमरा जेबाक अनुमित िदतौह। िहनकर बिहनो बहुत Ćसž मनसंॅ आशीवŭद दैत िहनका जेबाक इंतजाम केलिन। एकटा िसपाहीक संग ( डयूटीवला िसपाही) मुजģफरपुर गेलाह। िसपाहीजी चककर मैदानक कोनापर िहनका पहुंचा देल जतएसंॅ ओ िरƅूिटंग ऑिफस पहुंचलाह। ओतए बच्चा (िवńाथŰ) सभ लाईनमे लािग गेटकेँ अंदर जाईत रहिथ। इहो लाईन (कतार) मे लगलाह। गेटपर पहुंचलापर िहनकासंॅ मौिƏकक सिटर्िफकेट मंगल- किन। ई पुरना समए बला हाथसंॅ िलखल अटेİटेड कापी सिटर्िफके टक देखए देलिखन जािहपर िहनका गेटसंॅ अंदर निह जाए देलकिन जे ऑिरिजनल सिटर्िफकेट होने पर ही गेटके अंदर जाने िदया जाता है। अİतु, ई आƇह केलिखĠह जे मेरे पास घरपर मूल सिटर्िफकेट भी है िजसे देखकर िकसी ने यह अटेİट िकया है अत: आपके अफसर-इन-चाजर् से िमलना चाहता हुँ। थोड़ेक कालकबाद अफसर इंचाजर्संॅ भेट करा ओल गेल। हुनकहु वएह बात कहल – िखĠह। ओ पूछलिखĠह –कहां तक पढे हैं। सर-आई एस.सी पुन: Ćितशत आिद पूिछ अिगला सĢताह आबए कहलिखĠह। ई आƇह केलिसĠह जे सर आज िफिजकल चेक अप हो जाने से एक सĢताह का समय बच जाता । हुनकर कहब रहिन – घबराने की । कोई बात नहॴ है। अभी काफी समय है आपका सबकाम हो जायगा। ƅमश: फीिजकल आिद के छंटैया सभसंॅ ईĂरक कृपासंॅ २००० मे सँ ३०० बंचल िवńाथŰमे इहो रहलिथ। पुन: िलिखत परीक्षा भेलैक। मेिरटिलİटमे एके.साही Ćथम रहिथ आ िहनकर दोसर İथान रहिन। भþॴ भेलाह। नेवीए नौकड़ी भेलिन।

22 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) एिह दरĥयान एकटा लŞमी रूपी बािलकाक िपता सेहो बनलाह । िवआहक तेसर वषर्मे नौकड़ीमे चिल गेलाक कारण िŅरागमन निहर् भेल रहिन । संगिहं किहयो िववाहक बाद सासुर-सुलभ कोनो सौख –मनोरथ पुरलिन वा निह तकर हेतु किहयो सुलक्षणा पėीकेँ िकछु निह ककलिसĠह जे हुनका कोनो तहर्क तकलीफ निह होईĠह बस ईĂरक लीला बूिझ अपन कþर्Ĥय पथपर ईĂरकेँ याद करैत आ मनमे धारणा खुदा देंगे तो लूगा “” क्या जानेगा अमीर फकीरी में मजा है वो कांटा भी है फूल जो मािलक ने िदया है । रखने कमर् पथक हर एक कांट भरल मागर्केँ हँसैत पार करैत रहलाह । भगवानक कृपा होईत छिन तँ कांट भरल-मागर् सेहो फूलसंॅ भरल भऽ जाईत छैक यथा “गोपद िसंधु अनल िसतलाई, गरल सुधा िरपु करिह िमताई”। अथवा कांॅटक ददर् देबो करैत हेतिन तँ िजहवापर तैयो िनकलैत रहिन “कांॅटा भीहै फूल जो मािलकने िदया है।“ समए बीþैत रोलिन । िवआहक तेसर साल िबतलिन । पतो निह लगलिन आ चािरमो साल बीत गेलिन आ चािरममे िŅरागमन िमिथलामे निह होईत छैक । पांचम वषर्क सेहो Ćारंभ भेल । अकİमात हुनकर दु:खक समएके माए-बापक अलावा ओ एकमाÿ सĢतुरुष सहारा भगवानक Ģयारा भऽ गेलिसĠह आ ( हमरा िमÿ) हुनका सभकेँ एिह मरा संसार (मृĜयुलोक) मे छोिड़ िवदा भऽ गेलिसĠह । हुनका घरक लोक ई शोक संदेश समएपर निह देलिसĠह जे दु:खक संदेश अĪपवयसकेँ एकसरमे रहएबलाकेँ निह देल जाए । परंतु सĜय कतहु नुकाएल रहलैक अिछ । लगभग दू महीना पĀात् हुनका सूचना भेटैत छिन जे अहांक िĆय बिहनो आब निह रƪिथ । हुनका काटूत खून निह बला हालत भए गेलिन । शोकाकुल अवİथामे तुरंत छुņी लथ अपन िĆय बिहनकेँ साĜवना देमए एवं भेंट करए गेलाह । ओही समयमे पता लगलिन जे छुņी बढ़ेलापर िŅरागमन सेहो भऽ सकैत छिन । माÿ ढ़ाईपषर्क नौकड़ीमे िरİक लऽ िŅरागमन हेतु छुņीक दरखाİत डाका तार Ņारा भेिज िŅरागमन करभोलिन । पुन: वापस Ƃयूटी Ĕवाईएन केलिथ । वहुत रास परेशानी एिह सभक कारण उठाबय पड़लिन परंच हँिसकेँ सहैत रहलाह । ƅमेण समय बीतैत रहलिन । बहुत रास सुख – दुख बोगलिन । समए बीतैत रहल .... पुन: एकटा पुÿ रė सेहो ĆाĢत भेलिन । समए बीतल - - पुन: एकटा कोसर् करए हेतु गुजरात गेलाह । ईच्छा भेलिन जे आब दूटा बच्चा सेहो भऽ गेलिन तेँ सपिरवार Əेिनंग करए गुजरात जािथ मए-बाबूजीसंॅ आदेश लेलिन । आदेश İवीकृत भेलिन सहषर्। İİसु-ससुरसँ िशƠचारसँ पूछलिसन ओहो लोकिन आदेश देलिखĠह । िदĪलीमे पėी, पुÿ एवं िमÿािदकेँ संग पयर्टन करैत गुजरात पहुचलाह । ओतए पहुंिच घर गृहİथीक सामान सभ खरीदैत – खरीदैत बहुत थािक गेलाह आ ६ अगİतकेँ Əेिनग आरंभक पिहले िदन जौिडसक िशकार भऽ अİपताल एडिमट भेलाह । उपचार भेलिन ठीक भेलाह । िसक लीव भेटलिन । छुņीमे गाम तँ निह गेलाह जे अपन पढ़ाई

मैिथली कथा २००९-१० 23 करताह आ संगे अपन एकमाÿ सार जे पढ़एमे नीक निह रहिथĠह जखन िक सिटर्िककेट मैिƏक फİटर् िडिवजन रहिन आ हुनका जखन एक िदन गाम सभक सहज भाषामे गािड़ पढ़ने रहिथनत आभास भऽ गेल रहिन जे िहनकामे बहुत आमूल सुधारक आवĮयकता छिन तेँ Ăसुरजीक देल पिछला सुख-दुखकेँ िबसर हुनका आƇह केलिखĠह जे जौ हुनका नेवीमे भेþŰ करेबाक ईच्छा होिĠह तँ भेिज िदयौĠह। हुनकर İİढ़ एबो केलिखĠह । पहुंचला उþर एक-दू िदन बाद ओ अपना सारकेँ पहुंचनामा िचňी अपना बाबूजीकेँ िलिख भेजबा लेल कहलिखĠह । अंƇेजीमे। अंƇेजीमे ओ पÿ िलखबामे असमथर् रहिथ । पĀात् हुनका पÿक पता अंगरेजीमे िलखए कहलिखĠह सेहो समथर् रहिथ । एहन आई-कािŎक मैिƏक फİटर् िडिवजनक िवńाथŰ होईत छिथĠह । अİतु अपन पढ़ाई शुरु केलिन । दू-चािर िदनकेँ, लेल िवńालय सभक िशक्षक लग Əयूशन सेहो पढ़ए गेलाह । बादमे बिहनोकेँ कहलिखन जे हमरा हुनका सभक लग भेजएसँ नीक अपनिह पढ़िबतहुँ । अİतु ... ओ भोर सांझ हुनको पढ़ाबिथ, अपनहुँ पढ़िथ आ नव-नव पिरवार लऽ गेल रहिथसे हुनको सभपर ğयान देिथ । कोनहुँ तरहे सभए बीतैत गेल । हुनकर सार जे अंƇेजीमे बाबूजीक नाम पता निह िलिख सकैत रहिथ, अंƇेजी मीिडयमसँ नेवीक आरटी-िकसर अĆेंिटशकेँ परीक्षा पास कएल । हुनकहुँ िमहनतकेँ यश भेलिन । Əेिनंग सेंटरमे २ बैचमे िरजĪ ट िनक भेल रहैक जिह कारण िहनका खूब यश भेलिन । सासुरमे सारक िमÿवगर् आ Ƈामीणकेँ आĀयर् होइĠह जे ई अंƇेजी मीिडयमसँ कोनो परीक्षा पास केलिथ । एĦहर सुलक्षणजीक सुलक्षण ĭयवहार अपन सुĢतावİथासँ जागृतावİथाक तरफ Ćवेश कऽ रहल छिथĠह जकर पिरचए समयपर अपनेक लोकिनकेँ भेटत। कमर् और भाग्यक ƅम समएक संग चलैत रहैत छैक । िहनकहुँ संग चलैत रहलिन । छोट-आ पैघ बहुत रास सुखाअ दु:ख एलैन, झकझोड़लकिन आ बीित गेलैन । एही ƅममे िहनका Ăसुरजीकेँ कुिसयारक, रस, राव आ गुड़ आिदक िबजनेश लेल पैसाक आवĮयकता भेलिन जे ई किहकेँ लेलिखन जे एिह धंधामे पूजी फंसेलासँ नीक फायदा छैक आ हुनका सेहो िकछु लाभ भेटतिन । अİतु, मानव-मानवक मदद करिथ (यदयिप किलयुगमे नीक लोककेँ ई शुभ कायर् तकलीफो दैत छिन ) तँ कोनो गलत निह भेलैक । पैसा लेल सेहो बहुत समए बीतल । बीचमे हुनकर भिगनी ( जे बिहनो िहनका पु:खक समएके एकमाÿ सहारा रहिथĠह हुनक दू पुÿी आ एक पुÿ महक Ćथम्, अा पुÿी) बिढ़केँ िवआह योग्य भऽ गेल रहिन । आ ई ओिह िवआहमे अपन ĥयागीदार बनाएबा लेल पूणर् Ćयलशील रहिथ संयोगवश िहनकर Ăसुरकेँ सेहो अपन दोसर पुÿी लेल बर तकबाक आवĮयकता रहिन । संगिह िहनका छुņीक दरĦयान ओ चाहिथĠह जे अिधकसँ अिधक लोकसँ संपकर् कएल जाए जािहसँ ओ अपन जमाएक Ģलस Ģवाईटसँ फायदा उठा सकिथ । खैर एिह बात सभ लऽ िहनका हुनका सभसँ कोनो िशकाइत निह रहिन आ इहो तँ अपन भिगनी खाितर Ćयासमे लगले

24 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रहिथ। एहने एह Ćसंगमे िहनक Ăसुर भावी समिध जीकेँ बुझाबैत रहिथĠह जे अपनेक बालककेँ हम नेवीमे नौकड़ी धरा देविन । देखैत िछएक जे पिहले तँ हमर जमाए नेवीमे रहिथ तँ ओ हमर बालककेँ एवं एकटा अपन मिमयौतकेँ नौकड़ी धरेलिखन । आब तँ हमरा बेटा आ जमाए दूनू नेवीमे छिथ तेँ हमरा लेल नेवीमे नौकड़ी धराएब कोनो किठन निह अिछ। आिद-आिद आĂासन दऽ रहल छलिखन । बादमे इहो ओिह लड़का िपताकेँ सभक सोझेमे कहलिखन, āीमानजी वतर्मानमे हमरा एकटा भिगनी छिथ आ हमरा दु:खक समएमे एकमाÿ सहारा हुनकर िपताजी (İवगीय) रहिथ । तेँ हेतु ओिह भािगनीसँ िवआह करताह तिनका लेल पढ़ा िलखा के नेवी लेल तैयार करब हमर पिहल कþर्Ĥय िथक । िहनका लोकिनक बेटी-जमाए सभ लेल हम थोड़-बहुत मदद माÿ करबिन आ पूणर् रूपेण हमर Ćयė अपन भिगनीक वरक लेल रहत एिह बातकेँ ğयानमे रािख अपनेक लोकिन हमरा भिगनीक लेल सेहो वर दूंढ़बामे मदद करब तँ बड़ पैघ कृपा होएत । बस बरक गृहİथ बापकेँ लेल “ ĆĜयक्षं िकं Ćमाणं “ वला वाक्य सुनबामे आिब गेलिन आ ओ लोकिन िहनकर वाक्य आ शĤदकेँ ƙहमवाक्य सदृश बूिझ िहनका परोक्षेमे िहनका भिगनीसँ िवआह कऽ देल । थोड़ेक समए लेल बदनामीक दौड़ सेहो शुरु भेल िहनकापर थोड़ेक आरोप दबले जुबानसँ। िहनकर सासुरक लोक लगेलिखĠह । जकर ई सोझ जवाब देलिख Ġह जे ई जतए-जतए हुनका (Ăसुर-जी) संग गेलिखĠह सभठाम इएह कहलिखĠह जे भिगनीक वर हेतु Ćयास हमर कतर्ĭय िथक आ हुनकर पुÿीक वरक Ćित Ćयास हुनका सभक काज िछयिन जािहमे हम सीिमत मदद माÿ İवेच्छासँ ईच्छा होयत तँ करबिन । ई वाक्य ओ सबठाम कहलिखĠह आ ओकरे ओ पिरणाम छल । परंतु हुनक सुलक्षणा पėी जे पुवर्हुँमे शाİÿो वक् त सभ बात सुिन पिरहास माÿ करैत छलिखĠह आ पितकेँ Ćतािड़त करबामे कोनहुँ दुĮमनसँ कम Ćयास निह केलिखĠह। बार-बार ओ अपन पėीकेँ उपरोक्त यथाथर् बातकेँ बुझबैत रहलिखĠह लेिकन ओिह सुलक्षणा पėी पैघ बापक बेटी एवं पैघ पाईबला भाइयक बिहनकेँ अंधकार रूपी अहंकारी एवं नािİÿक बुिŀपर कोनो सुधाराĜमक Ćभाव निह पड़लिन । ƅमश: समए तँ सुखसँ कटय वा दु:खसँ एिहना बीतैत रहैत छैक। िहनका अपन भिगन जमाए हेतु देल वचनकेँ पूरा करबामे जे तकलीक भेलिन िवधाता ककरहु दोसरकेँ निह देिथĠह तँ नीक । समए अपन रģतारसँ बीत रहल छल । िकनकहुँ जखन कनेक समए नीक बीतए लगलिन तँ इच्छा भेलिन जे गाममे कोनड मेन रोड सभक कातमे दू- चािर कňा जमीन िलतहुँ तँ नीक छल । ओ अपन मनक बात अपन िपताजीकेँ कहलिखन । िपताजी हुनकर बातकेँ मािन, जखन एकटा जमीन मेनरोडक कातमे पता लगलिन तँ िहनका सूिचत केलिखĠह । ई ओिह जमीनक बात िपताजीसँ कऽ, कीमतकेँ तैयारी केलिन आ Ăसुर जीकेँ जे पाई काफी समए पूवर् देने रहिथĠह तािहमे सँ एक ितहाई कमसँ कम एखन वापस करए कहलिखन । िहनक Ăसुर देवता िहनका वचनो दऽ देलिखन जे हँ अपनेक िवशाखापटनमसँ

मैिथली कथा २००९-१० 25 गाम आऊ हम पाई रखने छी । ई गाम गेलाह । बाबूजीसँ सभ तरहक बात केलिन । बाँकी पाई Ăसुरजीक आĂासन वला पाई छोिड़ ई िवशाखापņनमसँ लैइये गेल रहिथ । केवल कनेक पाई जे Ăसुर जी िहनके पाईयक एक ितहाई वापस करबाक वचन देने रहिथĠह । ओतय गेलापर निह देलिख न । मनमे दु:ख तँ बड़ भेलिन, मुदा करताह की” ये ऐसा आग है िजसमे धुआं नहॴ होता । छुņी गेनाई-एनाई िकराया आिद सभ Ĥयथर् गेलिन । सुलक्षणा पėीकेँ किलयुगमे जाि ह तरहक आनंद भेटय चाही वएह भेटलिन” जे नीक भेल “ । किह उþर देलिखĠह कारण जे ओ रोड कातक जमीन तँ हुनकर पितकेँ कपारपर रिहतैन ओिहसँ पėी आ बाल बच्चाकेँ कोन सुख? कहबी छैक जे कोनहु बात वा वİतु अपनेक कोन रूपमें Ƈहण करैत िछएक तािहपर िनभर्र आिछ । आ हुनका Ăसुरकेँ दोसरिह कऽ पाइ ( जमाएयक पाइ) सँ घर लगमे कोनो घरारीक बात माÿ होइत रहैत तािह लेल सुरिक्षत रखबाक रहिन । जखन िक ओ घरारी ओिह समएमे िबकेबो निह केलैक । हुनका अपन पाइसँ निह आिपतु जमाएकेँ पाई लेल सेहो जमाएकेँ धोखा देबामे कोनहुँ टा संकोच निह भेलिन । आ पėी सुलक्षणा जी तैयो हुनके (अपना पितकेँ) Ćतािड़त करबामे कोनो कसर निह बांकी रखलिन । अİतु , समए िबतþे जाईत छैक । परंतु हुनको घाइल िहरणी जकाँ ददर् तँ रहबे करिन । ओ अपन ददर् ĭयक्त निह करैत छिथ लाजसँ, तेँ ददर् निह होईत छिन से बात तँ निह । ददर् तँ बहुत बेशी होइते हेतिĠह । अİतु “लगा दे आग में पानी जवानी उसको कहते है िमटा दे बाप की दौलत फुटानी उसको कहते हैं।“ ओहो लोकक मुँहसँ सुनैत रहिथ लेिकन ओ ईĔजदार Ĥयिक्तकेँ मुँहसँ उच्चिरत निह होईत रहिन तेँ िहनकर उिक्त रहैĠह “ लगा दो आग में पानी जवानी उसको कहते हैं, िमटा दो खुद अिजर्त दौलत को फुटानी उसको कहते हैं “। अनकर कमाईपर फुटानी सभ केयो कऽ सकैत छिथ । लेिकन फुटानी लेल İवयं Ņारा ओतेक धन िबना िकनको आāयकेँ अिजर्त ( माएक Ģयार एक असीमीत İनेह भरल ममता पėीक Ģयार-बघबा दुलार, ताहूमे जोँ अज्ञान रूपी अंधकारमे डूबल पैघ बापक बेटी होिथ) कऽ सकी ई इĔजतक िवषए थीक । तेँ हेतु अपन पिरāमसँ “ िवńा ददाित िवनयं, िवनयात् यात् पाÿतां, पाÿĜवां धन माĨोित, धनात् धमर्: तत: सुखं “एिह मागर्पर चलबाक पूणर् Ćयास किह कएलिन । बहुत रास िवआह Ņारा गमनक बाद दोसर वर सभकें ĆाĢत सुख सभ देिख िहनकहुँ आश- मनोरथ जे ओिह समए पूरा निह भेल रहिन अपन पिरāमक बले आ भगवतीक कृपासँ ĆाĢत कएलिन । एकटा घड़ी, साइिकल आ रेिडयो ओिह समएक साधारण मणुįयक साधारण आवĮयकता, माए-बापक साधारण आवĮयकता सभकेँ पूरा करैत, इहो अपन आश पुरौलिन। बादमे पėी जीकेँ पैघ बापक पैघ बेटीकेँ सेहो ईच्छा भेलिन जे आई कािŎ आ चवžी-अठžी सभक Ćचलन कम भऽ गेल छैक तेँ एकटा चेन िलतहुँ । हुनका लेल पėी जीक मनक बात िशरोधायर् भेलिन । दून गोटे बंबईमे बाजार गेलिथ और अपन आिथर्क िİथितकेँ देखैत एकटा चेन लेलिथ ।

26 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) बादमे पायल, कान आिद महकजे कोनो वİतुक आश भेलिन से ई सामĝयर्केँ िहसाबसँ खरीद कए पėीकेँ आश-मनोरथ सेहो पुरेलिखन । कारण जे पैघ बापक बेटी माÿ हेबासँ आश-मनोरथ निह पूरैत छैक अाि पतु पैघ बाप वा एकटा गरीब गृहसथ िकसान अपन बेटीकेँ हाथ उठाकऽ की दैत छिथन तािहसँ आश मनोरथ पूरैत छैक । यथा घरमेँ खीर बेनेबा काल खीरमे चीनी कतेक दैत िछएक, िमलबैत िछएक तािह अनुकूल खीर मीठ होएत न िक घरमे दू पņा पीनी चीनी राखल अिछ तािहसँ खीर मीठ अपने आप भऽ जेतैक । आ एिह छोट बातकेँ सेहो बुझबाक लेल थोरबहुत ज्ञान-चक्षु जरूर खूजल हेबाक चाही । पर अफसोस जे हुनकर आिभमानी अज्ञानी बंद आँिख एिह सभमे सँ कोनो वİतु बातकेँ निह सूझए देलकिन न बूझए देलकिन । कारण जे हुनकर तँ एकमाÿ उĿेĮय किलयुगक अपन जवानीपर हेबाक कारण “पितदासा İथानपर िकए İवयं पित िद िश देि खकेँ सािबत करबाक रहिन । पितकेँ देहमे आिग लगा अपन हाथ सेकैत छिथ । जलनसँ की ददर् होईत छैक ओ जलनाहर बूझैत छिथन न िक हाथ सेकिनहार । ताहूमे जखन किलयुग अपन पूणर् शैơवपर हो । यथा=६६ हे उधो बैरी नंद िकशोर, Ćसव पीड़ा की बांझ परेखत, रिव की बूझत चकोर, हे उधो बैरी नंद िकशोर ॥ आद-İवाद की मरकह जानए, परिहत जानए चोर । अबला (कमजोर) केँ दुख अबला जानए, अबला घरमे शोर, हे उधो तेँ हेतु जलनाहरक दु:ख, जलनाहरेटा बूिझ सकैत छिथĠह आिग सेकिनहिर हुनकर – सुलक्षणा पिė निह । तथािप समए तँ देवी-देवताक लेल सेहो जखन निह रूकल तँ िहनका सन अबला ƙाहमण लेल सेहो जखन किलयुग अपन पूणर् जवानी समए अपन गितसँ बीतैत रहल । िहनका लेल तँ िनयित बिन गेल रहिन जे “ नाव कागज का गहरा है पानी, िफर भी हर हालमे ( सभ दु:खकेँ सिहतहु) मुİकुराकर दुिनयादारी पड़ेगी िनभानी । “ दुिनयादारी कोनहुना हॅसैत िबता रहल रलिथ । ताहूमे जॱ िकनको दुĮमन िकछु तकलीफ दैत िछ्थĠह तँ ओ ओतेक अिधक कƠदायी निह होईत छैक जतेक अपनक देल कƠ होईत छैक । कƠ दैत छैक । कारण, करैला मणुįयकेँ जे तीत लगैत छैक तँ ओतेक तकलीफ निह होईत छैक । परंतु जँ खीड़ वा रसगुĪला करैला सदृश तीत लागत तँ शायद अपनेक लोकिन Ƈहण (İवीकार) निह करबैक । परंतु ओहो सहैत घर जे शाित बनल रहए तािह लेल शाँत रहलाह । लेिकन हुनका पėीकेँ भूत अपन अलगे िदशामे नेने जा रहल छिन । िहनका पėीकेँ लेल िहनक िपता, माता, भाए आ बिहन बड़ पैघ बोझ छिथĠह । िहनकर (पėीक) िपता, माए, भाए (अपन सहोदर वा िपितयौत) या बिहन जे िकछु कहिन से सही िथकैक । ओ झूठहू बाजिथ, िहनका पितकेँ ठिक कऽ बेवफूफ बनाबिथ, िहनका पितकेँ घोखा दऽ अपन ऊंगली सीधा करिथ ओ िहनका लेल ईĔजतक बात िथक । कारण िहनक

मैिथली कथा २००९-१० 27 पितकेँ अपमान तँ हुनकर पित माÿकेँ Ćभािवत करैत छिन । िहनकर ईĔजतपर ओिहसँ कोनो फकर् निह पड़ैत छिन ई िहनकर बुिŀकेँ अज्ञान रूपी िवशेषता िछयिन । नैहरमे िकनको िवआह होिन, उपनयन हो, āाŀ हो, मुंडन हो, िŅरागमन हो भाँज पूरब हुनक पėीकेँ वड़ पैघ आवĮयक काज भऽ जाईत छिन । ओिह सभ िवषएमे चचŭ लेल हुनका लाख बुझेलाक बावजूदहु सभसँ नीक समए जखन बच्चा दूनू सांझ या भोरमे पढ़ए लेल बैसल रहतिन, तखनिह पढ़ाई जािहसँ बािधत हो, ताही समएमे िहनका घरमे अŇा-बĔजर खसाएब सभसँ बेशी िĆय छिन पिरणाम आई हुनकर दूनू बच्चामे सँ एकोटा ओतेक नीक पिरणाम निह पािब सकलिथ जकर संपूणर् पिरवार आ समाजकेँ आशा छल । िहनका लग आिब जािह समयमेँ िहनकर उĢतात एतेक जवानीपर निह छल िहनकर सहोदर भाए (पėीजीक भाए) एवं एकटा मिमयौत भाए माÿ हुनकर िनदųशनमे पढ़ाई कऽ आशातीष सफलता पौने छिथ । आ जखन िहनकर अपन बच्चाकेँ पिढ़-िलिख नीक बनबाक समए एलिन तँ िहनकर उĜपातक जवानी ओिह लŞयकेँ दूर िखसकबैत चल गेल । आई ओ अपन भाए-वा-बिहनकेँ ओिहठाम कोनो काजमे जेबामे कोन कथा जे ओकर चचŭ करबामे भय कऽ अनुभूित करैत छिथ । जािहमे मनसँ निह बािĪक नाम माÿ लेल गाम जेबाक आƇह करैत छिन, जेबा लेल Ĥयाकुल भऽ जाईत छिथ । बूझल छिन जे ओ िपितयौत मुंडनक समएमे एक पेट भोजनक अलावा भोरमे चाह-जलपान सेहो निह देिथĠह । बच्चाक लेल सभटा कपड़ा बच्चाक भाए लेल सभटा कपड़ा आ िबिधगत सामान सभ भेिजये देने रहिथन आ तैयो िबध पूरए लेल गाम जेबाक लेल पितकेँ एकटा दाससँ सेहो बेशी परेशान कऽ देने रहिथन । ओिहठाम जखन हुनकर माए हुनका संगमे रहिथĠह तखन हुनका उपर आ हुनका माएकेँ उपर लांक्षणा उपराग और जुĪम कतेक केलिखन तकर वणर्ण जतेक कएल जाए से कम हएत । आवेशमे आिब, जवानीक अज्ञानी शĤदमे एतेक तक जे “ रौ पापी , हमरा लग िकएक सुतैत छैं, अपना माए लग सूत, आइसँ तोहर माए तोहर बहू िछयौ, हमरा लेल तू मिर गेलैँ, हम िसंदूर धो लैत छी आ चूड़ी फोिर लैत छी, तोहर भाए सेहो िकएक ने माएक खेबा-खचŭ जोड़तौक, एही रंडीकेँ हम भार निह उठेबै आि द-आिद ततेक तांडव नृĜय ई भोर – सांझ पसारब शुरु कऽ देलिखन जे अंतमे अपना नौकड़ीमे छुņी निह भेटलापर हुनके एक िपितयौत भायक संग, ई अपन माएकेँ अāुपूिरत नेÿसँ िटकट कटाए िवदा केने रहिथ । ओ िदन आईयो िहनका याद भेलपर आँिख भिर जाईत छिन । तैयो िजĠदगी िछएक । आिखर मौतहु तँ एतेक आसानीसँ िकनको निह भेटैत छिन । तेँ खूनक घूट पीिब जीवैत रहलाह, सभ दुख सहैत रहलाह । एिहना समए बीतैत रहल । िहनका लेल घरमे चािर आदमीक आāम छिन जािहमे मोटा- मोटी एक आदमीकेँ भोजन एक्İƏा (अितिरक्त) बिनतिह छिन । ओकोनो अितिथ अĥयागतकेँ एलापर भोग होईत छिन निह तँ फेकल जाईत अिछ । परंतु िहनक

28 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) माए ओिह भोजनकेँ एतय Ƈहण किरतिथĠह तँ ओिहमे िहİसेदारीक Ćķ आिन बƌपात कऽ दैत छलिखन । िहनक िपता ओिहसँ िकछु वषर् पूवर्िह गत भऽ गेल रहिथन जे कथाक Ćसंगमे ि वषए याद निह रहबाक ƅममे छूिट गेल अिछ । जावत तक िहनकर िपता जीवैत रहिथĠह, िहनकर माता-िपता एक ईĔजत दार गृहİथक िजंदगी िबतौलिन जे आईयो गाममे एक आदशर् मानल जाईत आिछ । परंतु समए बड़ बलवान होईत छैक । यमराज बाबा एक भाƖ शुक्ल नवमी ितिथ केिहनक िपताकेँ उठा लेलिखन । तकरा बादिहसँ तँ किलयुग अपन िवकराल रूप िहनका आ िहनका माएकेँ देखाएब शुरु केलिन जरर उपरो तक पिरणाम भोगलिन । एिहना िजंदगी कखनहुँ दुखक पहाड़क शीषर्पर तँ कखनहु मğयमे तँ कखनहुँसँ योगवशात् िकछु शांितयहुसँ बीतैत रहल । परंतु एिह ƅममे शांितकेँ क्षण बहुत कम आएल जिह कारण िकछु िनिĀत िदशा तेँ करब बड़ किठन रहलिन । तथािप कालक गित चलैत रहल, समए बीतैत रहल । पुन: एक बेर गाममे सपिरवार छुņी गेलाह। आ पėीसँ आदेश ĆाĢत भेलापर माएकेँ िदĪली अनलिन । िकछु िदन समए बड़ बिढ़या बीतल । परंतु शांितक िदन राİताक पड़व सदृश कमिह िदन चलल आ जे जननी िहनका जĠम देने रहिथĠह, ओिह अबला िवधवा जे मड़लापर अपन पितक छोड़ल जमीन कपाड़पर निह लऽ जेतीह तिनका पुन: Ćताड़ना पिहले जकाँ शĤद सभसँ शुरु भऽ गेल । एक िदन भेल, दू िदन बीतल, रोज-रोज एहने आतंक होइंत गेल आ बढ़ैत गेल । अंतमे एक िदन िहनका मजबूर भय अपन माएकेँ अपन छोट भाए लग पहुंचाबए पड़लिन । एिह दुखकेँ एकटा माए, एकटा संतान आ एकटा इंसान माÿ समिझ सकैत छिथ । एकटा हैवान, सुलक्षाणा निह, आ इएह भेल । हुनकर सुलक्षणा ĭयवहार निह सुधरलिन । हुनकर İकूल कालेजक पढ़ाईक दरĦयान पढ़ल पंिक्त “ ऐ खुदा तू मौत दे पर बदनशीबी निह दे “ एतय फेल भऽ गेलिन । ओ बदन-शीबक िजĠदगी जीबैत रहलाह आ आइयो जीब रहल छिथ । बादमे हुनकर माताक वृŀ शरीर, पित पिहनिह İवगीयर् भऽ गेल छलिखन, बेटा-पुतोहुकेँ एहने Ĥयवहार, एिह सभक कारण बहुत अिधक टूिट चुकल शरीर बहुत कमजोर भऽ गेलीह । दुिखत रहए लगलीह, छोट बेटा पुतहुँ गाममे संगमे रहबाक कारण यथासाğय सेवा शुāुषा केलिखĠह । लेिकन िहनका तीन महीना तक छोट भाए समाद दैत रिह गेलिन । भैया अिबयौक-भैया अिबयौक , आब माए निह बचतीह, माÿ िकछु िदनक मेहमान रिह गेल छिथ । भौजीकेँ एतिह रहए पड़िन, िहनका हरदम हरपल सेवा शुāुषाकेँ जरूरत िछ । ई आिब अबैत छी, कािŎ अबैत छी, करैत रहलिखन । पėीजी किहयो जोर निह देलिखन जे अहाँ जैयो माताजी िथकीह । हमहूँ ( पėी जी लेल) जाएब आिखर ओ हमर सासूजी िथकीह । हम हुनकर सेवा करबिन । िकछु एिह तरहक सुिवचार किलयुगक Ćभाव निह उĭपž होमए देलिखन । अंतमे हुनक माए- बेटा-बेटा करैत, ३ महीनातक असाğय तकलीक सहैत छ: सतानमे सँ िहनका सन भाग्यशाली (किलयुगक अनुकूल) संतानक मुँह िबना देखने वा देखौने एिह नाĂर शरीरकेँ Ĝयािग चिल गेलीह । हाय रे िहनकर

मैिथली कथा २००९-१० 29 भाग्य ।... बादमें ई हुनकर āाŀ कमर् हेतु अिग्न संİकार सभक बाद गाम पहुंचलाह । जीवैतमे दूटा मधुर बोल वा दू बेर पैर जाँित हुनकर सेवा कऽ आशीवŭद िलतिथ से निह कऽ सकलाह । मुदा बादमे मायक āाŀ बड़ बिढ़याँ जकाँ केलिन। सॱसे गाममे यश भेलिन, सुलक्षणा पėीजी सेहो एिहमे केनो िवरोध निह कऽ पूणर् सहयोग केलिखन अ पूणर् यश भेलिन । परंतु की एिह उिक्तक पिरचय निह देलिखĠह –कभी Ģयासे को पानी िपलाया निह । बाद (मृĜयु उपरांत) अमृत िपलाने से क् या फायदा ॥ ओ िहनक सासुजी रहिथन, िवधवा रहिथ, आबला रहिथ, िहनकर पितक माताजी रहिथĠह । हुनका संग ई Ĥयवहार की िहनका अपना बच्चापर नीक Ćभाव देतिĠह । की ई कुकुरक कथा जे हुनका सूखल हƂडी िचबाबए लेल देल जाईत छिन, हुनका हƂडीसँ निह अिपतु अपने मुँहसँ खूब खून िनकलैत छिन आ मािलक, हƂडी देनहार कहैत छिथन, हँसी करैत अओर चुबाऊ देिखयौक केहन ताजा माउस अिछ । ली? की हुनका (सुलक्षणा जी) अपन समथर् बेटा बेटीक अछैत एिह तरहक करबाक चाही? की हुनक िपितयौत भायक बच्चाक मुंडनक उपलŞयमे गाम जाएब, सासुजीकेँ दुिखत अवİथासँ बेशी जरूरी रहिन । परंतु के सोचत? ककरा फुसर्त छैक ? एिहना मूखर् लोकिनक गित होइते रहतिन । आ अंतमे पĀाताप-पĀाताप-आ पĀाताप माÿ हेतिन जखन İवयं ज्ञान हेतिन आ बजतीह-“अब पछताये होत क्या िचिड़या चुग गई खेत “। ई िलखल गेल अिछ किलयुगक हर ओिह ĭयिक्तक लेल जे आम खेबाक अिभलाषासँ नीमक गाछ रोपैत छिथ|

30 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

डॉ.शंभु कुमार िसंह जĠम : 18 अĆील 1965 सहरसा िजलाक मिहषी Ćखंडक लहुआर गाममे। आरंिभक िशक्षा, गामिहसँ, आइ.ए., बी.ए. ( मैिथली सĦमान) एम.ए. मैिथली (İवणर्पदक ĆाĢत) ितलका माँझी भागलपुर िवĂिवńालय, भागलपुर, िबहारसँ। BET [िबहार पाÿता परीक्षा (NET क समतुĪय) ĭयाख्याता हेतु उþीणर्, 1995] “मैिथली नाटकक सामािजक िववþर्न” िवषएपर पी-एच.डी. वषर् 2008, ितलका माँ. भा. िवĂिवńालय, भागलपुर, िबहारसँ। मैिथलीक कतोक Ćितिơत पÿ- पिÿका सभमे किवता, कथा, िनबंध आिद समए-समएपर Ćकािशत। वतर्मानमे शैिक्षक सलाहकार ( मैिथली) राįƏीय अनुवाद िमशन, केĠƖीय भारतीय भाषा संİथान, मैसूर-6 मे कायर्रत। अवसरक िनमŭण (1)

धनमाक थुथूने देिख हम बुिझ गेलहुँ, जे आई फेर ओकर कुहबा पाबिन भेल छैक। Ćो. साहेबक ओिहठाम नोकरी करबाक ई धनमाक चिरम मास छलैक। ओकर बड़का भाय सेहो िहनकिह ओिहठाम दू बरखसँ नोकरी करैत रहैक, पिछले मास ओकर Əाँसफर Ćो. साहेबक छोट भाए लग झिरया भऽ गेलैक। धनमाक भाइये तीन माससँ ओकरा Əेिनंग दैत छलैक बतर्न-बासनसँ लऽ कऽ रसोई बनाएब, बारहिन पोछा, कपड़ा-लþा साफ करब आिद-आिद। सभ लूिर तँ धनमा सीिख नेने रहए, खाली ओकरा तरकारीमे नून देबाक ठेकान निह रहैक आ तािह कारणेँ ओकरा किहयो-किहयो कुहबा पाबिन सहए पड़ैक। बारह बरखक धनमा देखएमे एकदम गोर-नार। उĔजर दग-दग अँगाकेँ जखन ओ िसलेिठया रंगक हाफ-पेĠटक तर िबना बेĪटिहक डोराडोिर चढ़ा अंडरसेिटंग करैक तँ बुझाइक जे कोनो अंगरेजी İकूलक चिटया हो। छौँड़ा चौथा िकलास धिर पढ़लो रहैक, बाप कहलकै “ गरीबक बेटा आब एिहसँ बेसी पिढ़ कऽ की करतैक? जो नोकरी कर गऽ घरमे दू पाइक मदित भऽ जाएत।”

ने जािन िकएक हमरा धनमासँ िसनेह भऽ गेल छल। तेँ जिहया-जिहया हम Ćो. साहेबक बासापर राितकेँ ठहरी, भिरपोख धनमासँ गĢप-सĢप करी। नेना जाित, पिहल बेर घरसँ िनकलल रहैक, से जखन-जखन ओकरा अपन माए- बापक यािद आबैक ओ कपिस-कपिस कऽ कानए लागए। ओकर कानब आ

मैिथली कथा २००९-१० 31 मनोदशा देिख हमरा ओकरापर दया आिब जाइत छल। ओकरा Ćित दया हेबाक कारण हमरा आ धनमामे एकटा सामानता रहैक। धनमो अपन पिरवारक लेल नोकरी करैत रहए आ हमहुँ अपन पिरवारक खाितर नोकरी करैत छलहुँ। अंतर यैह छलैक जे धनमाक उिमर रहय 13बरख आ हम रही 25 बरखक। धनमा अपन सभटा दरमाहा अपन- माए-बापकेँ दऽ दैत छल आ हम दरमाहामे सँ िकछु बचा कऽ पिढ़तो छलहुँ। एखन हम एम.ए. क छाÿ रही। ओना तँ धनमा सभ िदन Ƒाइंग हॉलमे सूतैत छल मुदा ओिहिदन ओ हमरिह पलंगक नीचाँ अपन पिटया-दरी िबछा पिड़ रहल। जखन राित िन:शĤ द भऽ गेलैक, Ćो. साहेब आब सूित गेल हेताह, ई जािन धनमा हमरा टोकलक। “अइँ यौ भाइजी, टाटाक नून आर नूनसँ बेसी नूनगर होइत छैक की?” “निह तऽ!” निह यौ भाइजी हम से निह मानब, एिहसँ पिहने हमरा ओिहठाम ‘ कैĢटन कूक’ नून अबैत रहैक, तरकारीमे दू चĦमच िदयैक तखनो मािलक आ मिलकाइन िकछु निह बाजए। ई सार टाटाक नून जिहयासँ आएल छैक हमरा एकर अंदाजे निह रहैए। डेढ़ चĦमच िदऔक तखनो जहर आ एक चĦमच दऽ िदऔक तखनो जहर। अही नूनक खाितर हम एतेक मािर खाइत छी। अच्छा एकटा बात कह धनमा, “ तोरा ओिहठाम टाटाक नून किहयासँ अबैत छौक?” “एक माससँ।“ “एिह एक मासमे तोरा कैक बेर मािर लागलौ?” “अही बेर।” “बस । एकर माने भेलैक जे गलती तोहर छौक नूनक निह।” आ हमरा मािलकक कोनो गलती निह? ओ निह बुिझ सकैत छिथ जे िधया-पुता छैक एक िदन गलतीए भऽ गेलैक तँ की हेतैक, एहन छोट-सन गलतीक लेल एहन मािर? हुनक बेटो तँ हमरे तुिरया छैक, ओकरा िकएक निह मारै छिथन? जानै छी भाइजी कािŎए गणेश हमर 30 टा टका चोरा कऽ आइसƅीम खा लेलक, मुदा चोिर-सन अपराधक बाबजुदो मािलक ओकरा िकछु निह कहलिथन। “तोहर 30 टका चोरा लेलकौक! तोरा कतसँ टका एलौ?” हुँ-हुँ भाइजी, हमरा 93 गो टका छैक। मािलकक ओिहठाम जे पर-पाहुन सभ अबैत छिथन से हुनका सभक अटैची आ बैग जे नीचाँ धिर लऽ जाइत िछयैक तँ ओ सभ किहयो-किहयो हमरा पाँच-दस टका दऽ दैत छिथ। हम ई टका अपना मािलकीिनकेँ दऽ दैत िछयैक राखए लेल। ओिह घरमे टेबुलपर एसनो वला एकटा उजरा िडĤबा देखने िछऐक? ओिहमे हमर सभटा टका रहैत छैक। 100 सए टका पूिर जतैक तँ हम अपना छोटकी बिहन लऽ फराक कीनबै। कािŎ गणेश ओिहमेसँ टका चोरा नेने छलैक। अच्छा कोनो बात निह, Ćो. साहेब गणेशकेँ िकछु निह कहलिथन एकर

32 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) माने भेलैक जे आगू चिल कऽ ओकर संİकार खराब भऽ जेतैक। तोँ चोिर निह करैत छैँ एिह लेल तोहर संİकार नीक भऽ जेतौक। एखन तो नेना छैँ ई सभ बात निह बुझबेँ। हँ यौ भाइजी, हम सभ बात बुझै िछयै। गणेश पढ़ै-िलखै छैक ओकर संİकार कतबो खराब हेतैक तैयो ओ बाबूए कहौताह आ धनमा धनमे रिह जाएत। एहन बात निह छैक धनमा, गुलटोपीकेँ िचĠहैत छही? ओ कतेक पढ़ल- िलखल छैक से जानैत छही? निह ने! ओ औंठा छाप छैक, औंठा छाप, आ केहन चमचम करैत गाड़ीपर चढ़ैत छैक? ओकर मुंसी बी.ए.पास छैक। गुलटोपी िठकेदार िछयै। लोकमे बस मेहनित, लगन आ इमानदारी हेबाक चाही ओ किहयो िकछु कऽ सकैत अिछ। ई सभ बात तोँ एखन निह बुिझ सकबेँ कने आर चेठनगर भऽ जो तखन अपनिह बुिध भऽ जेतौक। .............................. “अइँ यौ भाइजी! अहुँ गरीब िछयै?” “के कहलकौ?” Ćो. साहेब बाजैत रहिथन जे “िववेक बƂड गरीब छैक। कमा कऽ घरो देखै छैक आ पढ़बो करै छैक।” “हँ, ठीके कहलथुन।” तँ अहाँ मैिथली िकएक पढ़ैत छी, साइंस िकएक निह पढ़ैत छी? साइंस पिढ़कए लोक डागदर, इंजीिनयर बनैत छैक। Ćो. साहेब कहैत रहिथन “बेचारा साइंस कतएसँ पढ़तैक? ƀयूशनक टका कतएसँ आनतैक तैँ मैिथली पढ़ैत छैक।” अइं यौ भाइजी मैिथली बड़ खराप िवषए होइत छैक? निह रौ बकलेल। भाषा कोनहुँ खराप निह होइत छैक। भाषाक िवषएमे सोचएबला खराप होइत छैक। अच्छा एकटा बात बता “तोरा जँ मैिथली बाजए निह आिबतौक तँ तू हमरासँ बात कऽ सिकतेँ?” निह यौ भाइजी! Ćो. साहेब फूिस बाजैत रहिथन। मैिथली सन सरस आ नीक आन कोनो भाषा भइयेँ निह सकैये। हुनका देखैत िछयैन जे ओ Ćो. सभक संगे मैिथली बाजैत-बाजैत अंगरेजीमे िकदन कहाँ िगिटर-िपिटर, िगिटर-िपटर बाजए लागैत छिथन। अच्छा ई बताउ मैिथली पिढ़ कऽ अहाँ Ćो. बिन सकै छी? हँ, िकएक तिह! तखन तँ अहाँ Ćो. अवĮये बनब भाइजी। धुर, पकलाहा निहतन। भाइजी एकटा बात आर कहू, “ गरीब लोक किहयो धिनक बिन सकैत अिछ?” “एकदम बिन सकैत अिछ?” धनमा कने काल चुप रहल, आ चुĢपे-चुप सुित रहल।

मैिथली कथा २००९-१० 33

(2) हम साल भिरसँ िदĪलीक एकटा Ćाइवेट कĦपनीमे काज करैत छी। Ćेमनगरसँ लाजपतनगर धिर Ćायः बससँ आन-जान होइत अिछ, किहयो काल लोकल Əेनसँ सेहो चिल जाइत छी। आइ कĦपनीमे कने बेसी काल रुकए पड़ल से भूखसँ छोहाटल रही, तेँ पापड़-पापड़क शĤद सुिन पापड़वलाकेँ बजेिलए “ ऐ पापड़वाले! एक पापड़ देना।” पापड़ वला सोझाँ आएल, पापड़ देलक। पाइ देबए लागिलऐक की ओ पापड़ वला हमरा पएरपर खिस पड़ल आ बड़ दुखी İवरेँ बाजल—“भाइजी हमरा निह िचĠहिलयै? हम धनमा।” िधयानसँ देखलहुँ ओ धनमे छल। हमरा कने ग्लािनओ भेल। हम तĜक्षण उिठ धनमाकेँ हृदय लगा लेिलऐक दुनू गोटे भाव-िवभोर भऽ गेलहुँ। हम धनमाकेँ अपन कातमे बैसाबैत पूछिलऐक, “कह धनमा की हाल-चाल, एतए कोना?” ओ बाजल भाइजी अपनेकेँ İमरण अिछ हमर ओ मािर? ओ राित? हम ओतए मािर खाइत-2 तंग भऽ गेल रही। तरकारीमे नून बेसी भऽ गेल तँ मािर, नून कम भऽ गेल तँ मािर, कपड़ामे दाग रिह गेल तँ मािर......। भाइजी अंितम राितकेँ जे हमरा अपनेसँ भेंट भेल छल तकर परातेक बात िछयै, Ćो. साहेबक डेराक नीचाँ जे चाहक दोकान रहैक हलाल खानक, तकरिह बेटा िदĪलीमे दरजीक काज करैत रहैक, ओकरेसँ हमर भेंट भेल तँ ओ कहलक—“चल हमरा संगे िदĪली, ओतए कपड़ामे काज-बुटाम लगिबहेँ बैसल-2, खेनाय-िपनाय आ पाँच सए टका मिहना देबौ।” हमरा लग भाड़ा जोगड़ पाइ रहबे करए, ओिहिदन भािग गेलहुँ ओतएसँ। तीन मास धिर ओकरिह दोकानपर रहलहुँ। ओिह दोकानक बगलिहमे एकटा पापड़बला रहैक जकरा ओिहठामसँ िनतिदन देिखऐक हमरे सभक तुरक बच्चा सभ थाकक-थाक सेदल पापड़ लऽ जाइक। एक िदन हम ओिह दोकानपर गेिलऐक तँ भाइसाहेब ( पापड़वला) हमरा कहलक- “ पापड़ बेचोगे? देखते हो ये लोग तुĦहारी ही उƛ के हैं 100 रुपया रोज कमाता है। पूंजी भी तुĦहारी नहॴ लगेगी, बस यहाँ से सेंका हुआ पापड़ ले जाओ, िदन भर घूम- घूमकर बेचो और शाम को पैसा जमा कर दो। एक पापड़ का तुमको 50 पैसा देना होगा उस पापड़ को दो रुपये में बेचो। मतलब एक पापड़ पर तुमको 1.50 पैसा बचेगा, िजतना बेचोगे उतना ही कमाओगे।” हमरा ई िबजनेस जँिच गेल। हम दोसरिह िदनसँ पापड़ बेचए लागलहुँ। पिहने िकछु िदनतँ करोलेबाग धिर रहैत छलहुँ, मुदा आब तँ ततेक ने उडाँत भऽ गेल छी जे िदĪलीक साइते कोनो एहन कोन हेतैक जतए हम निह गेल छी। एखन हमर दूटा िबजनेस चलैए भाइजी। भोर 8 बजेसँ 11 बजे धिर राम मनोहर लोिहया अİपतालक गेटपर नािरयर बेचैत छी, ओहुमे एक पीसपर सरपट आठ अनाक बचत छैक। दू सए पीस तँ िनदान िबिकए जाइत छैक। सए टका रोज हमरा ओिहसँ अबैत अिछ। साँझ चािर बजेसँ राित नओ बजे धिर बस, Əेन, पाकर् सभमे पापड़ बेचैत छी तँ

34 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ओतहुँ िनदान 4-5 सए पीस पापड़ बेिचये लैत छी। हम मोने-मोन िहसाब लगबए लागलहुँ, “ नािरयरमे 100 सए टका आ पापड़मे 400 डयोढे 600 टका। एकर माने धनमाक कमाइ एखन 700 सँ 800 टका रोज छैक।” धनमा आगू बाजल—भाइजी, हम तीन साल धिर ने घरमे कोनो िचňी-पÿी देिलऐक आ ने ककरो जानए देिलऐक जे हम कतए छी। हमर माए-बाप आ गाम समाजक लोक बुझए जे “धनमा मािर-हिर गेल।” तीन सालक बाद गाम गेलहुँ। ओतए दू कोठलीक पĸा ढोकलहुँ। तीन िबगहा खेत िकना, देिलऐक बाउकेँ। एक जोड़ बड़द आ एकटा पिĦपंगसेट सेहो कीिन देिलऐक। अिगला मास एकटा टेक्टर िकनए चाहैत छी। हमर बड़का भाय आब गामिहमे रिहकए खेती-बारी करैए। ओकरो Ćो. साहेबक भायक ओिहठामसँ चाकरी छोड़ा देिलऐक। हमर बिहन िमĪलत İकूल दिरभंगामे पढ़ैत अिछ। ओ एखन दसमामे छैक। पढ़एमे बड़ चĠसगर, सभ साल अपन कक्षामे फİटे करैत छैक। कहैत छैक “हम डाकदर बनब”। हमरा िवĂास अिछ भाइजी हम ओकरा डागदर बना देबैक। धनमा आगू बाजल—“अहाँ अĢपन कहू भाइजी अपने एतए कोना?” हम एतए एक बरखसँ छी, एकटा Ćाइवेट कĦपनीमे काज कऽ रहल छी। 5000 हजार टका दरमाहा अिछ हमर। “बस पाँच हजार! एिहमे कोना गुजर करै छी यौ भाइजी?” रौ धनेसर तोरा बुझल छौक ने जे हम मैिथलीसँ एम.ए. केने रही। मैिथलीक सिटर्िफकेट लऽ कऽ सॱसे िदĪली धांिग देिलऐक? एतए भाषा निह टेिĊकल ज्ञान चाही। धनमा कनेकाल चुप भऽ गेल..... ओ बाजल-- भाइजी अहाँ तेँ तेहन ने बात हमरा किह देिलऐक जे हमरा िकछु फुिरते निह अि छ? आब आइ हम अहाँकेँ निह छोड़ब, अहाँकेँ हमरा बासापर जाए पड़त।

धनमा हमरा िववश कऽ देलक, ओिह िदन हम करोले बाग टीसनपर उतिर गेलहुँ। धनमाक बासा करोलबाग टीसनसँ लगीचे रहैक। ओिह छोट-सन घरक एक िहसमे रसोई बनएबाक बरतन-बासन रहैक, दोसर िदसमे ओकर कपड़ा–लþा, ओछाओन आिद आ शेष भागमे एकटा बड़काटा रैक रहैक जािहमे िकताब सभ ढाँसल। ओकरा ओछाओनपर सेहो कैकटा मैिथलीक पÿ-पिÿका सभ िछिड़आइल रहैक, से देख हमरा कने अचरज भेल। धनमा हमर मनोदशाकेँ भाँिप लेलक। ओ बाजल—“भाइजी ई हमरे डेरा िथक िनिĀĠत रहू। हम अहाँकेँ एतय निह अिनतहुँ, अहाँ जतबे बािज देिलयैक जे मैिथलीसँ एम.ए.....। भाइजी हमरा अहाँक ओ उपदेश सभ एखन घिर İमरण अिछ। अही ने हमरा एकिदन कहने रही जे, Ćेमचंद गिणतमे फेल भऽ गेल

मैिथली कथा २००९-१० 35 छलाह, जयशंकर Ćसाद पचमे धिर पढ़ने छलाह, गुलटेन औंठा छाप अिछ आ...., भाषा कोनो निह खराप होइत छैक, मेहनित, लगन, इमानदारीसँ.......। भाइजी अहाँ मैिथलीक धनेसार कामितकेँ जनैत िछयैन?” हँ, हुनकर िकछु रचना सभ पढ़ने छी, चेहरासँ हम हुनका निह िचĠहैत िछयिन। ओ बाजल तऽ िलअ आइ चेहरो देिखए िलअ हमही छी अहाँक धनेसर कामित। भाइजी हम अहीसँ Ćेरणा लऽ कऽ आइ İवाğयायक बलेँ मैिथली सािहĜय मğय धनेसर कामितक नामे ख्यात् छी। यौ आइ हम Ćितमास ओतेक टका कमा लैत छी जतेक Ćो. साहेबक दरमाहा छिन। भाइजी अहाँ पढ़ल- िलखल लोक छी, 5000 केँ 50000 मे कोना बदलल जाए? से अहाँ सोिच सकैत छी। माफ करब भाइजी! छोट मुँह पैघ बात। हमरा जिनते अहाँ अवसरक Ćतीक्षा कऽ रहल छी, िकछु निह भेटत, िकछु निह कऽ सकब, भाइजी अवसरक िनमŭण करू , िनमŭण.....। हम मोने-मोन सोचए लेल बाğय भऽ गेलहुँ जे 18 बरखक अनपढ़ (?) धनमा नीक आिक हमरा सन 30 वषŰय मैिथलीक İनातकोþर?

36 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) गń-पń भारती सॲगर मूल कॲकणी कथाः खपच्ची, लेखकः िहĠदी अनुवादकः मैिथली रूपाĠतरण :

āी सेबी फनŭनडीस डॉ. चĠƖलेखा िडसूजा डॉ. शंभु कुमार िसंह सॲगर 13 िसतĦबर, िदन मंगल। भोरे-भोर मोबाइल खनकल। हमरा ओछाओनक लगिहमे मोबाइलक Ćकाश एना िझलिमलाइत छल जेना िभनसरे कोनो अİपतालक ‘वैन’ रोगीकेँ ल’ क’ िनकलल हो। हम अपन आँिख मलैत मोबाइल उठौलहुँ...देखलहुँ तँ नĦबर िचर-पिरिचत छल। शैलीकेँ। शैली माने हमर िमता, जे हमरे ऑिफसमे काज करैत अिछ। बहुत नीक आ िजĦमेवारीक पदपर ओकर िनयुिक्त भेल छैक। ओना देखल जाय तँ अपन İवभावसँ ओ एकदम सरल आ अपन काजसँ मतलब राखए वाली। नरम-नरम घॲघा-सन। जँ क्यो िकछु किह देलक तँ चुपचाप सुिन लइवाली। साँच पुछू तँ ओ हमरो बड़ नीक लागैत अिछ। हमरा बुझने सभ कĠयाकेँ शैलीए-सन हेबाक चाही। हम अपन मोनक बात कैक बेर ओकरा बतएनहुँ छी मुदा ओ ओकरा अनसुना किर दैत अिछ। हम सभ एक दोसराकेँ लगधक सात बरखसँ जानैत छी। हमरा सभक दोİती िवĂिवńालयमे पढ़बाकाल भेल छल। शैलीक हँसबाक अंदाज आ ओकर सरल İवाभाव दुनू हमरा अतीव पिसž अिछ। संभवतः यैह कारण रहल हेतैक जे हम ओकरा िदस झुकल चिल गेलहुँ। आइ तँ जेना ओ हमर िमता निह अिपतु हमर छाँह हो तिहना बुझाइत अिछ। आइ ओ हमरा लेल हमर सभसँ करीबी बिन गेल अिछ। हेलो..... हम मोबाइल उठबैत कहलहुँ। “शागू हम शैली बािज रहल छी.... हम एखनिह अहाँसँ भेंट करए चाहै छी।” शैलीक ई जबाब तँ जेना हमरा आँिखक िनžे उड़ा देलक। “मुदा बाद की िथक? से तँ साफ-साफ बताउ.......”

मैिथली कथा २००९-१० 37 “बताएब, सभ िकछु बताएब। मुदा अहाँ भेंट तँ िदअ।” ठीक छैक भेंट क’ रहल छी... ऑिफसमे... 9:30 बजे। “निह, निह एखनिह िमलबाक अिछ।” शैली बाजिल। “मुदा एखन...” “निह, निह हम िकछु निह सुनए चाहैत छी।” किहतिह ओकर बोली जेना काँपए लागलैक। “देखू शैली कानू निह Ģलीज.....” “हम की करी शागू! हमरा समझमे िकछु निह आिब रहल अिछ।” ओ बाजिल। हमरा शैलीपर दया आिब गेल। “ठीक छैक, हम एखनिह अहाँक ओतए आिब रहल छी। साढ़े आठ बजे धिर हम आिब जाएब, अहाँ घबराउ जुिन।” ओकर साहस बढ़बैत हम कहिलऐक। “ठीक छैक, हम अहाँक बाट देिख रहल छी।” कहैत शैली मोबाइल बž क’ देलक। हे भगवान ! की भेल हेतैक ? ई सोचैत-सोचैत हम हाँइ-हाँइ कऽ मुँह धोलहुँ, कŎुके पिहरलाहा अंगा-पेंट पिहर िनकिल गेलहुँ। घरसँ िनकलतिह हमरा मोनमे कैक Ćकारक शंका-कुशंका केर चƅ चलए लागल। आिखर की भेल हेतैक शैलीकेँ? की ओकर मोन खराब भ’ गेलैक? वा अचानक टकाक कोनो बेगरता पिड़ गेलैक? हम आर झटिक कए चलए लागलहुँ। पौने आठिहं बजे हम शैलीक घर पहुँच गेलहुँ। पिछला बेर जे शैली अपन घर गेल छलीह तँ ओ “वाल” (एक Ćकारक तरकारी) क लþी आनने छलीह। आब ओ लþी नरम-मोलायम पातक संग सॲगरक सहारे उपर िदस बिढ़ रहल छल, संगिह ओ अपन जिड़ जमएबाक जतन क’ रहल छल। दरबĔजा खटखटएलासँ पूवर्िहं शैली दरबĔजा खोललक। ओ शाइत हमर पयरक आहिट सुिन नेने छल। जिहना हम घरमे Ćवेश कएलहुँ, शैली दरबĔजा बž क’ हमरासँ िलपिट गेल। शैलीक ई ĭयवहार हमरा लेल एकदम अĆĜयािशत छल। “ शैलीक ĭयवहार एहन िकएक भ’ गेलैक?” हम मोने-मोन सोचलहुँ। जरूर िकछु िवशेष भेल छैक, तखनिह तँ ओ हमरा अपन िहतिचंतक बुिझ एना क’ रहल अिछ? हम नहुँए-नहुँए ओकर पीठ सहलाबैत रिहलऐक। “की भेल शैली? ऐना बतािह जकाँ िकएक क’ रहल छी? िकछु बाजबो तँ करू ?” ओ शनैः-शनैः अपनाकेँ हमरासँ अलग कएलक आ हमरा मुँह िदस िनहारए लागलीह। हमरा बुझा रहल छल जे जरूर शैलीक संगे िकछु अिनƠ भेल छैक? ओकरा आँिखसँ नोर तेना बहैत रहैक जेना भदवािरक इनारसँ पािन बहराबैत

38 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) छैक। हमरा मोन पड़ल अपन गामक “ सेजांव” उĜसव जािहमे लोक इनारमे कूिद जाइत छैक आ छपाक होइतिह पािनक छॴटा एमहर-ओमहर पसिर जाइत छैक। शैलीक आँिखक पािन फेर उफन’ लागलैक। ओ फेर हमरासँ िलपिट गेल। एिहबेर ततेक नोर बहलैक जे हमर अँगा भीज गेल। ओकर शीतलता मानू हमरा हृदयकेँ सेहो भीजा देलक। हमहूँ बरफ जकाँ िपघलए लागलहुँ। हमरा जीवनमे सदैव एकटा दृढ़ गाछक सदृश ठाढ़ रहएवाली शैली आइ िसगरेटक पुþी जकाँ ढ़िह रहल छलीह। “शैली आिखर िकछु बताउ तँ ! आब तँ हम अहाँक समक्ष छी।” ई सुनतिह शैली आर फफिक-फफिक कऽ कानए लागलीह। “देखू शैली, एना कानने कलपनेसँ काज निह चलत, जाधिर अहाँ िकछु बताएब निह हम कोना बुझू?” “हम लूिट गेलहुँ शागू.... हम तबाह भ’ गेलहुँ.....फँिस गेलहुँ....हमर इĔजित पािन भ’ गेल.... हमरा लूिट लेल गेल.....।” “अरे.....अरे.....शैली, ई अहाँ की बािज रहल छी? बाजएसँ पिहने अपन शĤदकेँ नािप-जोिख लेल करू। ” हमरा लेल ओकर ई बात बहुत दुखदायी छल। आइ शैली एना बतािह जकाँ िकएक क’ रहल छलीह? एिहसँ पिहने तँ ओ हमरा संगे शĤदक एहन खेल निह खेलने छलीह? “बाजू शैली, की भेल...” “हमर कपारेमे आिग लािग गेल अिछ....। हमर महीनवारीक िदन बीत गेल अिछ, आ....। कािŎ हम डॉक्टरसँ चेकअप करौलहुँ तँ...।” ओ ई बात! तँ शैलीक परेशानीक ई कारण छैक। हम मोने-मोन सोचलहुँ। “पिछला महीनवारीक कोन तारीख छल? हम पुछिलऐक।” “दुइ अगİत।” ओ बाजिल। हम मोनिह-मोन िगनती लगएलहुँ....कैक िदन िनकिल चुकल छलैक। हमरा िकछु बाजएसँ पूवर्िह शैली बाजल—सात िदन धिर हम बाट देखैत रहलहुँ कािŎए डॉक्टरसँ देखएलहुँ, िरपोटर् + + आएल छैक। + + केर माने भेलैक जे शैलीक कोिखमे नव ‘ जीव’ अिİतĜवमे आिब गेल छैक। हमरा िमताकेँ िबयाहसँ पिहनिह कĪयाणक योग भ’ गेलैक। हम ई की सुिन रहल छी? कोना भ’ गेलैक ई सभ? हमरा माथ घूमए लागल... कैक Ćकारक सवालसँ हमर माथ फाटल जा रहल छल। ओमहर शैली अनवरत रूपेँ कािन रहल छलीह। हे भगवान! शैलीक घरक लोककेँ जखन एिह बातक आभास हेतैक तखन की हेतैक? एखन शाइत शैलीकेँ साĠĜवनाक आवĮयकता छलैक। शैलीक कपारपर िवपितक पहाड़ टूटल रहैक आ हम पþा जकाँ काँिप रहल छलहुँ। जेना जाड़क िदनमे शीशीक तेल जिम जाइत छैक तिहना हमहुँ जड़वत भेल जा रहल छलहुँ।

मैिथली कथा २००९-१० 39 के छी जे शैलीकेँ एिह दशामे आिन देलक? ई जानब हमरा लेल आवĮयक भ’ गेल छल मुदा तािहसँ पिहने ई जानब जे, जे िकछु शैली किह रहल छलीह से साँचे िथक वा...। “शैली भ’ सकैछ अहाँक अंदाज गलत भ’ गेल हो..। भ’ सकैछ डॉक्टरक िरपोटर् गलत हो....। अहाँ घबराउ जुिन। हम हरदम अहाँक संग छी, दुखमे, सुखमे सभमे।”हमरा बातसँ शैलीक मोन कने हĪलुक भेलैक। आइ धिर जे बात हम शैलीकेँ निह कहबाक साहस केने रही से आइ एतेक आसानीसँ कहा गेल। शैली एकर माने की िनकालने हेतैक से भगवाने जानिथ। ओना शैली एखन जािह मानिसक िİथितसँ गुजिर रहल छलीह एहनमे हुनकासँ एहन सभ बातपर उमेदो करब उिचत निह छलैक। “शैली अहाँ जे किह रहल छी से गलतो तँ भ’ सकैछ? पिहने डॉक्टरसँ नीक जकाँ पूिछ तँ िलअ।” “आ जँ डॉक्टर फेर वैह बात कहलक तखन?” शैली बाजिल। “ओ बादमे देखल जेतैक।” हम कहिलऐक। “हम अपन जान द’ देब। मिर जाएब। हम आब जीबए निह चाहैत छी।”कानैत-कानैत ओ बाजिल। “हमसभ आइए डॉक्टर लग जाएब।” हम कहिलऐक। “कखन?” शैली तपाकसँ बाजिल। “ऑिफसक बाद, छओ बजेक लगधक। आइ हमहुँ अपन ऑिफसक काज जĪदीए जĪदी िनपटा लेब।” ई कहैत हम ओकरा सांĜवना देबाक Ćयास कएलहुँ। शैली हमरा मुँह िदस देखैत रहलीह। हम ऑिफससँ जĪदी िनकलए वला निह छी से शैली नीक जकाँ जानैत छलीह। ओ सोिच रहल हेतीह जे “शाइत हम हुनका समए द’ कए मुकिर जाएब।” “अरे हम अहाँसँ Ćॉिमस क’ रहल छी हम अवĮय आएब। चाहे कतेको काज िकएक निह हो।” शैली िकछु पल केर लेल अपन आँिख बž क’ लेलक। जेना ओ सोिच रहल हो जे जँ हम निह आएब तखन की हैत? “शैली अहाँ जĪदी-जĪदी तैयार भ’ जाउ। हम बाहर अहाँक बाट जोिह रहल छी। कहैत हम ओकरा गालपर हाथ फेरलहुँ आ ओकर आँिखक नोर पोछलहुँ।” “अहाँ डरब निह चलू देखैत छी जे आइ साँझकेँ डॉक्टर की कहैत छिथ”—कहैत हम ओकर देहरी पार कएलहुँ। शैली शीƈिह अपन कपड़ा बदललक आ हम दुनू बाहर िनकिल गेलहुँ। अहाँ नाĮता कएलहुँ की निह? ई पूछब हम उिचत निह बुझलहुँ, तथािप पुछलहुँ--- “ऑिफसेक कैंटीनमे क’ लेब” ओ बाजिल। ओिह िदन भिर रİता शैलीक पएर नहुँए-नहुँए आगू बढैत रहल। ओकर

40 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मोन जे टूिट गेल रहैक! हम ओकर ओिह मोनक टुटलका तागकेँ जोड़बाक Ćयास क’ रहल छलहुँ। हमरा मोनमे एक पलक लेल भेल जे हम शैलीक हाथ अपन हाथमे थािम ली, मुदा बाट चलित एिह तरहक ĭयवहार हमरा शोभा निह देत, ई जािन हम अपन िवचार दिमत क’ देलहुँ। गुमसुम शैली अपनिह िवषएमे िकछु सोिच रहल छलीह ई जािन हम ओकरा टोकिलऐक---- हाँ.....25। शैली उþर छल। “की भेल?” हम पुछिलऐक। शैली मौन रहलीह। हम फेर पुछलहुँ। शैली मौन। हमरा मोनमे भेल जे शायत शैली सीढ़ी चढ़ैत काल अपन उिमरक संबंधमे सोिच रहल छलीह। हम पाछू मूिड़ क’ सीढ़ीक िगनती कएलहुँ ओ ठीक पच्चीसे छल। पच्चीस सीढ़ी आ पच्चीस साल, मेल बड़ नीक छलैक। पच्चीस सीढ़ी चढ़लाक पĀात् ऑिफसमे Ćवेश आ पच्चीस सालक पĀात् माए बनब......कुमािर माए? शाइत एिह लेल ई क्षण ओकरा लेल सुखदायी निह छलैक। कैंटीनमे हमरा दुनूक नाİता-पािन भेल आ साँझमे िमलबाक बात क’ हम दुनू अपन-अपन ऑिफस चिल गेलहुँ। पूरा िदन काज करैत हम शैलीएक संबधमे सोचैत रहलहुँ। बीचिहमे हम एकबेर ओकरा इंटरकॉम नĦबरसँ फोन केिलऐक। शैली, केनह छी अहाँ? देखू धैयर् राखब, हम अवĮय आएब....कहैत हम फोन रािख देलहुँ। दूपहरमे एकबेर फेर हमसभ लंचक समएमे िमललहुँ। ओ भोजन करबासँ मना करैत छलीह। हमहुँ उपासे करब। ऐहने नाजुक समएमे तँ िमतकेँ िमतक आवĮयकता होइत छैक। हम ओकरा सहारा द’ रहल छिलऐक ई सोिच हमरा खुशी भ’ रहल छल। एखन घड़ीमे पाँच बजैत रहैक। ठीक ओिह काल शैली हमरा मोबाइलपर ‘िमसकॉल’ द’ क’ समएक संबंधमे आगाह कएलक। साढ़े पाँच बजएसँ पूवर्िह हम ऑिफससँ बाहर आिब गेलहुँ। शैलीओकेँ झटिक क’ आबैत देखिलऐक। “चली?” हमर Ćķ सुनएसँ पिहनिह शैलीक पएर बिढ़ चुकल छलैक। हमसभ अİपताल पहुँचलहुँ। हमरा आभासो निह भ’ सकल जे कखन शैली हमर हाथ किस क’ पकिड़ नेने छलीह। ओ डिर रहल छलीह। ओकर हाथ काँपैत छलैक। “डॉक्टर छिथ?” हम İवागत कक्षमे पुछिलऐक। “हँ, हँ छिथ” कहैत ओ İवागत अिधकारी हमरा बगल कुसŰपर बैसबाक इशारा कएलिथ।

मैिथली कथा २००९-१० 41 हम दुनू जा क’ कुसŰपर बैिस गेलहुँ। हम डॉक्टरक कक्षमे हुलकी मारलहुँ, आ सामने नामपņपर सेहो, िलखल रहैक—डॉ. गीता। हम बुिझ गेलहुँ जे यैह डॉ. िथकीह। देखएमे एकदम सुžिर, सौĦय। हम मोने मोन सोचलहुँ जे शायत डॉ. गीता कहतीह—“शैली अहाँ एकदम नामर्ल छी” आ हुनक ई वाक्य शाइद हमरा सभक मोनक ƚम तोिड़ देत। एतबिहमे नसर् आवाज देलक—“अहाँ सभ अĠदर जाउ।” डॉ. गीता एकदम मधुर आवाजमे पुछलिथ— “कहू की तकलीफ अिछ।” डॉक्टरक पķ सुिन हमर रोइयाँ ठाढ़ भ’ गेल। डॉ. केर Ćķ एखन चिलए रहल छलैक। हम हुनका िदस देखिलएिन की ओ हमरा कहलिथ— “ कनेक कालक लेल अहाँ बाहर जाउ” हम ओतएसँ उिठ बाहर ओिह कुसŰपर जा बैसलहुँ जतए पिहने बैसल रही। नसर् दरबĔजा बž क’ दैलकैक। हमरा मोनमे तखन कतेको Ćकारक Ćķ सभ उिठ रहल छल। थोड़बे कालक बाद डॉ. दरबĔजा खोललक। हमरा फेर बजाओल गेल। हमरा ओतए पहुँचएसँ पिहने शैली डॉ. केँ िकछु बता रहल छलीह। डॉ. हमर नाम पुछलिथ--- “शागू गांवकर।” हम जवाब देिलयिन। डॉ. हमर नाम पुरजापर िलख लेलिथ। हम देखतिह रिह गेलहुँ। हमरा अपनिह आँिखपर िवĂास निह भ’ रहल छल। हम अपन आँिख आर कने िबदोिड़ क’ देखलहुँ—हँ! ई शालीए रहैक। शैली, शाली किहया भ’ गेलैक? “हँ तँ अहाँ सभकेँ बच्चा एखन निह चाही, यैह ने?” डॉ. हमरा दुनूसँ पूछलक। “जी निह। हमरा सभक आिथर्क पिरिİथित एखन बच्चा जĠम देबाक इजाजत निह द’ रहल अिछ।” शैली उफर् शाली चोņिह बाजिल। हम ओकरा िदस साĀयर् देखतिह रिह गेलहुँ। “तँ ई िनणर्य अहाँ दुनूक छी ने?” “जी हँ, डॉक्टर! हमरा दुनूक यैह सĦमित अिछ।” शैली बाजिल। शैलीक जवाब मानू हमरा अंतमर्नकेँ झकझोिर क’ रािख देलक। बच्चा ककरहुँ हो मुदा ओकरा Ćित कने ममता तँ हेबाक चाही? डॉ. ओिह पुरजापर आर िकछु िलखलक आ हमरा दुनूसँ हİताक्षर करबा लेलक। शैली, शाली गांवकर नामसँ हİताक्षर केने छल जे पूणर् रूपसँ जाली छलैक। अपन हİताक्षर केलाक पĀात् ओ कलम हमरा हाथमे थमा देलक। हम की करी, की निह एिह अंदŅर्ĠŅमे रही। शैली एकबेर हमरा िदस देखलक---हम बात बुिझ गेिलऐक, हमहुँ हİताक्षर क’ देिलऐक। डॉ. अपन अलमारीसँ िकछु दबाइक गोली आ एकटा किरया-सन शीशीमे दबाइ शैलीकेँ थमा देलकैक। शैली अपना पसर्सँ आठ सए टका िनकाललक आ तीन सए हमरासँ माँगलक। हम ततेक ने नवर्स भ’ गेल रही जे शैलीए हमरा जेबीसँ ओ टका िनकािल डॉ. केँ देलकैक। शैलीक ई ĭयवहार देख डॉ. केँ हँसी लािग गेलैक। “ साँचे अहाँ दुनूक

42 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) Ćेम बेजोड़ अिछ।” हमरा दुनूक बीच पित-पėीक संबंध अिछ, ई िवĂास डॉ. केँ िदएबाक लेल शैलीक ई नाटक एकदम ‘परफेक्ट’ सािबत भेलैक। “िम. शागू! अपन पėीक ğयान राखब, िहनका एिह समए अहाँक सख्त आवĮयकता छैक।” ई कहैत डॉ. गीता हमरा सभकेँ िबदा कएलिथ। हम आ शैली बाहर एलहुँ। पेशेंट सभकेँ İƏेचरपर ल’ जएबाक जे पथ होइत अिछ ओिह बाटे हम सभ अबैत रही हमरा बुझाएल जे जेना हमर अपन संतुलन िबगिड़ रहल अिछ। हम शाइत अपनिहसँ उलिझ गेल छलहुँ। िकछु आगू चललाक पĀात् शैली दबाइक दोकानपर पुरजा दैत िकछु आर दबाइ िकनलक। हमरा मोनमे एकटा जबरदİत जĿोजहद भ’ रहल छल। “हम पापी छी, हĜयारा छी, हमरिह कारणेँ आइ एकटा ओहन िशशुक हĜया भ’ रहल छैक जे एखन धिर दुिनयाँमे आएलो निह छैक” कोनहुँ बच्चाक लेल संसारक सभसँ सुरिक्षत İथान होइत अिछ ओकर माइक कोिख, हम ओिह कोिखक लेल मृĜयुक सौदागर बिन गेल रही। दबाइ सभ गभर्नाड़ीकेँ बž क’ नेना ƚूणकेँ समाĢत करबाक Ćिƅया भ’ रहल छलैक। हमरा लागल आइ हम एहन अपराध केने छी जकरा लेल भगवान हमरा किहयो माफ निह करताह। मुदा जँ हम एहन निह किरतहुँ तँ शैलीओ तँ आĜमहĜया क’ लेितऐक? यैह सभ सोचैत हम बहुत कालक लेल एकदम गुĦम भ’ गेल रही। जखन हम कॉलेजमे पढ़ैत रही आ परीक्षामे कम अंक आबए तखन मैडम पापाकेँ बजा क’ आनए कहैत छलीह। तखन हम गलीक नुĸुड़पर जा क’ “साइिकल पायलट” केँ दस-बीस टका द’ कए िकछु कालक लेल भाड़ाक पĢपा बना कए ल’ जाइत छलहुँ। परीक्षाक अपन गलती छुपएबाक लेल भाड़ाक पĢपासँ नाटक करबैत छलहुँ....। आइ हम अपनिह नाटक करैत रही। शैली केँ बचएबाक नाटक। बातो तँ साँचे रहैक, घौर बला केलाक गाछमे जेना संतुलन बनएबाक लेल ‘ सॲगर’ लगाओल जाइत अिछ, तिहना आइ हम शैलीक संतुलन ठीक रखबाक लेल सॲगरक काज क’ रहल छलहुँ। “चलू चलैत छी।” दबाइ ल’ कए घूिर आएल शैली बाजिल आ हम अपन िवचारसँ बाहर िनकलबाक Ćयास कएलहुँ। ओिह दबाइमे ओिह छोटका “ जीब” क लेल “जहर” छलैक। हम शैलीकेँ ओकरा घर धिर पहुँचा देिलऐक। शैली हमरा बैसबाक लेल कहलक। शाइत ओ बुझैत छलीह जे आइ जे िकछु भेल छैक तकर पिरणामİवरूप हमरा मोनमे की भ’ रहल हैत। आइ भोरसँ जे िकछु भ’ रहल छैक तकर जिड़केँ संबंधमे हम ओकरासँ पुछबैक। मुदा कािŎ भेंट करब, ई किह हम ओकर मोन हĪलुक क’ देिलऐक। “ गुड नाइट” किह हम चिल देलहुँ। राित शनैः-शनैः भीजल जाइत छलैक आ ओकरा संगिह हमर िचंतन सेहो गंभीर भेल जा रहल छल। हमर एकटा मोन हमरा लांिछत करैत छल आ दोसर मोन मजगूत क’ रहल छल।

मैिथली कथा २००९-१० 43 एिह अनजान शहरमे हमरा िसवाय शैलीक क्यो निह छलैक। जँ हम आइ ओकरा सहारा निह देितऐक तँ ओ अपन इहलीला समाĢत क’ लेितहैक। हे भगवान! हमरा माफ करब! जािह ƚूणकेँ अहाँ जनम देबए चाहैत छलहुँ हम ओकरिह िवनाश करबाक लेल शैलीक संग देलहुँ। कतेक पैघ गĿार छी हम! दोसर िदन शैली ऑिफस निह अएलीह। हमहुँ ओकरासँ िमलबाक साहस निह जुटा पएलहुँ। एिहना कैक िदन बीित गेल। एक िदन अकİमातिह हमरा शैलीसँ ऑिफसमे भेंट भ’ गेल। “शागू हम घर जा रहल छी।” शैलीक बात सुिन हम छगुĠतामे पिड़ गेलहुँ। “मुदा एना अचानक?” “कािŎ भेंट करब” ई कहैत ओ ऑिफस चिल गेलीह। कािŎ शिन रहैक, से हम शैलीक घर जएबाक सोचलहुँ। आइ शुƅ िदन देर धिर ऑिफसक काज करैत रहलहुँ। दोसर िदन हम शैलीक घर पहुँचलहुँ तँ देखैत छी जे ओकरा घरमे ताला लागल छल। तालाक भूरमे एकटा पचŰ खॲसल रहैक। ओ संभवतः हमरे लेल हैत से जािन हम ओकरा खोललहुँ। हमरे िचŇी छल। िĆय शागू, हम घर जा रहल छी। घरक लोक सभ हमर िबयाह तँइ क’ देने छिथ। अहाँक कएल गेल उपकारकेँ हम िजनगी भिर निह िबसरब। हमरा जीवनक लेल अहाँ बहुत महĜवपूणर् छी। हम बुझैत छी जे हमरा िबसिर जाएब अहाँक लेल एकदम असंभव हैत। मुदा हम आइसँ अहाँकेँ िबसरैत छी, संभव भ’ सकए तँ अहूँ हमरा िबसिर जाउ। शैली िचŇी पिढ़ हमरा लागल जेना एकटा जोरगर समुƖक लहिर आएल आ हमरा पयरक िनचलका सभटा बालु बहा कए ल’ गेल। हमरा आँिखसँ नोरक दूइटा बुž कखन ओिह िचŇीपर पिड़ पसिर गेल के हम निह बुिझ सकलहुँ। “कािŎ भेंट करब” कहएवाली शैलीकेँ कािŎ आ आजुक बीचक अंतर िकएक निह बुिझमे एलैक? शैली हमरा एिह तरहेँ िकएक फँसौलक? शाइत ओ सोचने हेतीह जे हम ओकरा िबयाह करबासँ मना क’ देबैक। जखन हम ओकरा गभर्पात करबैत काल निह रोकिलऐक तँ एखन िकएक रोिक देितऐक? शैली आब पिहनुक शैली निह रहल। ओ आब बहुत समझदार भ’ गेल छलीह। आब समाजक सामना करबाक साहस ओकरामे भ’ गेल छलैक। शैली शुƅ िदनक राितएमे रेलसँ चिल गेलीह आ छोिड़ गेलीह हमरा लेल कैकटा अनुþिरत Ćķ सभ। ओिह दरबĔजाक आगू हमर ğयान गेल जतए शैली किहयो “ वाल” केर

44 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) लþी लगौने छलीह। ओ लþी आब खूब पैघ भ’ गेल रहैक। ओकर जिड़ चतिर गेल छलैक आ ओिह लþीपर आब कैकटा फूल-फल लािग गेल छलैक। एिह “आल” केर फूल-फल आ ओकर पातक तरकारी खएबाक लेल शैली एतए निह छलीह। शैली िबयाहक लग्न मंडपमे छलीह। ई सभ सोचैत हम देबालक कोनसँ सिट गेलहुँ एकदम “सॲगर” जकाँ।

मैिथली कथा २००९-१० 45

मूल कॲकणी कथा : नागपंचम िहĠदी अनुवाद : नागपंचमी मैिथली अनुवाद : लेखक : अनुवादक :

āी वसंत भगवंत सावंत āी सेबी फनŭनडीस डॉ.शंभु कुमार िसंह

नागपंचमी अĮलेशा नक्षÿिहसँ बरखा झमाझम होमए लागलैक। गत सात िदनसँ बरखा होइत छलैक। साओनमे तँ बरखा बž भ’ जएबाक चाही, मुदा ओ तँ बž हेबाक नामिह निह ल’ रहल छलैक। बोलकणųं केर Ņीप पािनसँ दहाबोह भ’ गेलैक। गामक खेतक फाटक सिहत दहोिदस पािनमे डूिब गेलैक। मिĪलकाजूर्न मंिदरक दू सीढ़ी धिर बरखाक पािन छूिब लेलकैक, मुदा ठेहपर रहए बलाक लेल कोनो असौकयर् निह रहैक। मजूरी आ रोजीमे ĭयवधान हेबाक कारणेँ लोक सभ हकोबको भ’ गेल छल। साँच तँ ई िथक जे खेती-बारीक काज साओन धिर भ’ गेलाक पĀात् लोक गोबरछþाक धंधामे लािग जाइत छल। बहुतॲ जंगलक खाक छानलाक पĀात् लोक गोबरछþा जमा क’ लगीच वला साकोƂडें नामक गाममे बेिच दैत छल। ओहुना ओ सभ ककड़ी ओ गैता फॲडाक बजारमे बेचैत छल। जँ पैघ-सन माछ हाथ आिब गेलिन तँ ओकरा देसाई पिरवारमे बेिच 10-20 टका कमा लैत छल। मुदा एिह बेर बरखा बेसी हेबाक कारणेँ भिर साल रोजगार बािधत भ’ गेलैक। नाह चलाबए वला मलाह सभ तँ कखने अपन-अपन नाहकेँ उपर आिन रािख देने छल। ओकरा नीक जकाँ लकड़ीक गुटखासँ अटका देल गेल छलैक। ओकरा उपर नािरयरक पातक छतरी सेहो बनाओल गेल छलैक जकर सुरक्षाक लेल ओकरा नािरयरक गाछसँ बािĠह देल गेल छलैक।

हिर भगत अपन बरěडामे एकटा सॲगरक सहारे अपन पीठ अटका कए बैसल छल, बेर-बेर नदीमे आएल बािढ़केँ देखैत छल। घनघोर बरखाक कारणेँ ओ नदीक दोसर िदसक गाम साकोडųंकेँ सेहो निह देख सकैत छल। ओिह क्षण ओ सपनिहमे अपन भिवįयक सोचकेँ मूतर् रूप देमए लागल। आिड़क बाटे जेबाक बजाए ओ िबसू भņजीक गाछी बाटे रİतासँ िनकिल गेल। वेगसँ बहैत नलीकेँ

46 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) पार क’ कए पनशी पहुँच गेल आ गाड़ीक Ćतीक्षा करए लागल। बरखाक कारणेँ गाड़ीक आवाजाही बहुत कम भ’ गेल छलैक। मोलेंसँ एकटा टेंपू आबैत रहैक। मोलें साकोडųंसँ लोक ससत दामपर गोबरछþा कीनए गेल छलैक आ आब ओकरा मडगांवक बजारमे बेचबाक लेल जाइत रहैक। हिर ओिह टेंपूसँ िलģट ल’ कए ितİक्यार आिब गेल। डॉक्टरसँ िमिलकए बेमार नेनाक लेल औषिध लेलक आ दूधक सोसोइटीमे सभ िदन दूध लेबाक लेल आबय वला टेंपूपर बैिस ओ सांकोडųं आिब गेल। नदीक कछेर आिबतिह ओकर पएर काँपए लागलैक। नदी पािनसँ लबालब रहैक आ दुनू िदस बस पािनए पािन देखएमे आिब रहल छलैक। ओकर रूप वीरभƖ ( रौƖ) जकाँ बुझाइत रहैक। ओिह काल ओकरा नजिरक समक्ष ओकर बेमार नेनाक सूरित आिब गेलैक। ने जािन ओकरा देहमे तखन कतएसँ उजŭ आिब गेलैक, ओ आव ने देखलक ताव झटसँ ओिह भयानक नदीमे कूिद गेल। ओकरा समक्ष केवल मृĜयुये देखार दैत छलैक, मुदा ओ कोहुना हेलैत नदी पार क’ गेल। ओकर सॱसे देह पािनमे भीज गेल रहैक। ओ अपन सॱसे देहकेँ टटोललक तँ देखलक जे ओकर सभटा पीबएवला औषिध आ गोटी भीज गेल छलैक। * * * खाइक लगा दी.....खाएब ने? पėीक टोकलाक पĀात् ओ होशमे आएल। सपनासँ जागल लोक जकाँ ओ एमहर-ओमहर देखलक। कĠहापर राखल गमछासँ ओ अपन मुँह पोछलक आ िकछु कालक लेल आँिख मुिन एकटा नमहर साँस लेलक। खाइक लगा िदऔक, हिर बाजल। पėी खाइक लगा देलकैक। İनानघर जा कए ओ हाथ-पयर धोलक। िचलका कखन सुतल? एखनिह सुतल छैक.....पėी नहुएँ बाजलीह। बोखार उतरलैक? “........” ओकरा गोटी खोआ देिलयैक? हँ जे बाँचल छलैक ओ द’ देिलऐक। आब कोन दबाइ िदयैक िकछु बुझनामे निह आिब रहल अिछ। बुझाइत अिछ जेना ई अपन जĠमिहसँ मुँहमे दबाइक चĦमच ल’ कए आएल अिछ। देिखयौक ने कािŎ नागपंचमी िछयैक हम बूट फूलबा लेल द’ देने िछऐक, भगवती करैथ िचलकाक बोखार कने कम भ’ जाइक। हँ, साँचे कािŎ तँ नागपंचमी छैक। ई तेसर खेप िछयैक...... ओ एकटा गिहरगर साँस लेलक। बुझाइत अिछ एहु साल हमरा सभक लेल अपशकुने अिछ, ओ बहुत आतर् İवरमे बाजल। भगवतीक ईच्छा.......। ई किह ओकर पėी ओकरा मुँहपर अपन हाथ

मैिथली कथा २००९-१० 47 रािख देलकैक आ ओकरा आँिखसँ दहो-बहो नोर बहय लागलैक। तकर बाद दुनूक मूँहमे एĸोटा दाना निह गेलैक। गामक सभटा नेना-बूढ़ राणू भगत (हिरक बाबूजी) केँ ƚƠाचारी भगत केर नामसँ िचढ़बैत छलैक। राणू भगत समूचा गाममे धािमर्क ओ आन अनुơान करबैत छल। गामक गरीब लोककेँ भगवानक नामपर फँसएबामे ओ ततेक मािहर छल जे तकर कोनो सीमा निह। खेती-बारी सिहत आन सभटा िजĦमेदारी ओ हिरक काĠहपर लािद देने छल आ İवयं आरामक बंसी बजबैत छल।

हिरकेँ अपन बाबूजी एĸोटा आदित पिसž निह छलैक, मुदा राणू भगत किहयो हिरक बात निह बुझलकैक। ओतिह राणू सदित हिर आ ओकर पėीकेँ अधलाहे बात कहैत रहैक। हिरक िबयाहक तीन मास भ’ गेल रहैक आ ओिह काल एकिदन राणू नेनपन जकाँ मजाक करबाक लेल नािरयरक गाछपर चिढ़ गेलैक आ ओतएसँ जे िगरलैक तँ अपन डाँड़ तोिड़ खाट पकिड़ लेलक। राणूक खाट पकिड़ लेलासँ हिरक िजĦमेदारी दुगूना भ’ गलैक।

“एिह हराशंिखनीक कारणेँ हमरा घरक सभटा खुशी पािन भ’ गेल अिछ” राणू सदैव हिरक पėीकेँ कहैत रहैक। एतेक सुनलाक पĀातो हिरक पėी ओकर देखभालमे कोनो कसिर निह छोड़ैक। िदनपर िदन बीतल गेलैक, राणू चिढ़ते अखाढ़ परलोक िसधािर गेलाह आ एिह कारणेँ हिरक पėीकेँ तीन मासक लेल घर छोड़ए पड़लैक। बाबूजीक मृĜयुक कारणेँ ओ ओिह बरख नागपंचमी निह मना सकल। दोसरिह बरख हिरक पėी एकटा नेनाकेँ जĠम देलकैक आ सोइरी हेबाक कारणेँ ओ ओहू बरख नाग देवताक पूजा निह क’ सकल। एिह बेर एक बरखक िचलका बोखारसँ जूझैत रहैक.....। जेना-जेना समए बीतैत छलैक, िचलकाक हालित आर िबगड़ले जाइत छलैक। आयुवųिदक औषिधक सेहो कोनो असिर निह भ’ रहल छलैक। दोसर िदस नदीक पािन बिढ़ते जाइत छलैक आ िचलकाकेँ ल’ कए नदी पार करब संभव निह छलैक।

हिर अपन गाछीक मोड़पर ठाढ़ छल। जँ हमर िचलका नीक भ’ जाएत तँ हम एिह बेर भगवान, कुलदेवता, Ƈामदेवता आिदकेँ छागर बिल देबैक। ओकर मनौन सुिन कए ओकर पėी अबाके रिह गेलीह। जाधिर ओ ओकरा देखैत ताधिर ओ नदी पार क’ कए हाथमे पूजाक समान ल’ कए मंिदर पहुँिच गेल। * * * अहाँ िहĦमित निह हारब बाउ! बोखार उतिर जेतैक, एकटा पड़ोसनी ओकरा सांĜवना देलकैक। तखनिह मंिदरक घंटा बािज उठलैक आ दुनू गोटे हाथ जोिड़ लेलक। ई हम एकदम साँच किह रहल छी, ई किह ओ िचलकाक माथपर हाथ रािख देलक। देिखयौक बोखार उतिर रहल छैक। पसेना चिल

48 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रहल छैक।

हिर मंिदरसँ आनल भेभूत िचलकाक माथपर लगा देलकैक। ओकर पėी बड़ भिक्त-भावसँ ओ भेभूत िचलकाक सॱसे देहमे मिल देलकैक। िचलकाक बोखार उतरैत देिख ओ दुनू परानी बेस खुश भेल। हिरक पėी भीजल बूटकेँ देखबाक लेल गेलैक आ हिर जंगलसँ आनल मािटसँ देबालपर नागक आकृित बनबए लागलैक। ओिहपर कुंकुमसँ ओकर रेखांकन कएलक आ कोयलासँ ओकरापर “ ओउम” बना देलकैक। हाथ धोलाक पĀात् हिर फेर दरबĔजापर आिब ठाढ़ भ’ गेलैक आ नदीक बहैत पािन िदस देखए लागल। खेतमे एकनहुँ पािन भरले रहैक, मुदा बीच-बीचमे छोट-छोट गाछ सभ लखा दैत छलैक।

हिर घुमबाक लेल नकिल गेल आ तािह समए िचलकाक कानब-कुहरब सुरह भ’ गेलैक। हिरक पėी ओकरा छातीसँ सटा दूध िपयौलकैक। िचलका एक िमनटक लेल तँ चुप भेलैक मुदा चोņिहं जोर-जोरसँ कानए लागल। िचलका एकबेर ओछरलक आ सभटा दूध बाहर आिब गेलैक। िचलकाकेँ अचानक एकटा चĸर लागलैक आ ओ काठ जकाँ कठोर भ’ गेलैक। हिर केँ ई समाद कोनो आन नेनाक माğयमे भेटलैक। हिरक हाथमे दूटा नािरयर छलैक, ओ ओकरा ओþिह फेकलक आ हकासल घर िदस भागल। घरमे पड़ोिसयाक भीड़ लागल रहैक। ओकर पėी जोर-जोरसँ कानैत रहैक आ ओकरा दूटा पड़ोिसया सभ सĦहारबाक Ćयासमे लागल रहैक। िचलकाक आँिख बž क’ रहल छलैक। एकटा पड़ोिसन िकछु औषिधए पातक चूणर् बना क’ ओकरा नाक लग रािख देलकैक। िचलकाक केवल साँसेटा चलैत रहैक।हिरक लेल ओतए िबलमब मोसिकल भ’ गेलैक, ओ बाहर आिब बरěडापर अपन दुनू हाथेँ माथ पकिड़ बैिस रहल। किरया मेघमे िछपल सूरूज ,पिछम िदस डूबिह बला छल। आब हिरक िजनगीमे एकटा आर आफत आबिह बला छल आ नागपंचमीक पाबिन ओिह आफतमे शरीक होमए बला रहैक। सभटा मनौती आ Ćाथर्ना बािढ़क पािनमे भािस गेलैक। िचलका एखन धिर आँिख निह खोलने छलैक।

लोहारक भŇी जकाँ हिरक छाती धड़कैत रहैक। िचलकाकेँ देखबाक लेल आएल लोक सभ अपन-अपन घर आपस जा रहल छल। पड़ोसी सभक शĤद हिरक हृदयमे तीर जकाँ लागैत रहैक ओ घवाह भ’ रहल छल। शाबा! िचलका आइ राित निह कािट सकतैक, एकटा İÿी बाजल। हमरा तँ बेचारा हिरपर दया आिब रहल अिछ, दोसर बाजल। भगवाने जानिथ ई कोन बेमारी चलल छैक, तेसर बाजल। एक-एक किर कए बहुत भयानक बेमारी पसिर गेलैक अिछ। िकछु िदन पिहलुके बात िथक, मालूक पोता, जे माÿ डेढ़ बरखक रहैक, ओकरो एहने

मैिथली कथा २००९-१० 49 चĸर ऐलैक आ छओ घंटाक भीतरे मिर गेलैक। ई गाम ककरो लेल शुभ निह अिछ। चारू िदस पािनए पािन। एहनामे डॉक्टरो-बैदकेँ िक क्यो आसानीसँ बजा आिन सकैत अिछ? साँच पूछू तँ हम एकटा बात कही, हिरक भिक्तमे िनĀये कोनो-ने-कोनो खोट हेतैक यैह कारण छैक जे ओ आइ तेसर बेर नागपंचमी निह मना सकत। हँ सþे ..... कािŎ तँ नागपंचमी छैक? मािटकेँ तँ हाथो निह लगा सकैत छी, आ एहनामे जँ िचलका मिर गेलैक तँ ओकरा गाड़तैक कोना?

हिरकेँ िकछुओ निह सुझैक। कािŎ नागपंचमी छैक आ मािटकेँ घवाह निह करबाक चाही। जँ िचलका भोरिह मिर गेल तँ शव अंितम संİकारक िबना भिर िदन आर भिर राित घरिहमे पड़ल रहत.....आर...... ओ आर िकछु निह सोिच सकल...... उठल आ घरक कोनमे पड़ल कोदािर आ गैंता ल’ क’ घरक बाहर िनकिल गेल अĠहारेमे। ओ खािध खुनब सुरह क’ देलक..... कािŎ मर’ वला िचलकाकेँ गाड़बाक लेल.......!

50 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

अनमोल झा (१९७०- )- गाम नरुआर, िजला मधुबनी। एक दजर्नसँ बेशी कथा, सएसँ बेशी लघुकथा, तीन दजर्नसँ बेशी किवता, िकछु गीत, बाल गीत आ िरपोतŭज आिद िविभž पिÿका, İमािरका आ िविभž संƇह यथा- “कथा-िदशा”-महािवशेषांक, “Ăेतपÿ”, आ “एĸैसम शताĤदीक घोषणापÿ” (दुनू संƇह कथागोơीमे पिठत कथाक संƇह), “Ćभात”-अंक २ ( िवराटनगरसँ Ćकािशत कथा िवशेषांक) आिदमे संƇिहत।– सĦपादक। Ćाथिमकता -बौआक मूड़नमे कतेक खचर् भेल हेतउ बुच्ची। -तोरा सऽ कोन लाथ माय, यैह बीस-पच्चीस हजारक आस-पास। -की कहले! बीस-पच्चीस हजार। -हँ, ओिहमे भोज-भात, कपड़ा-लþा, लेआओन-हकार सबटा ने भेलै। -अएँ गइ, एते पाइ छलिन ओझाक हाथपर। -नै सब पाइ तँ नै छलिन हाथपर, िकछु एĦहर-ओĦहर, पैंच उधार सेहो भेलै। -चल भगवतीक दयासँ काज नीक जकाँ पार लािग गेलउ, जस देलकउ समाज आर की चाही। अच्छा कह तँ बौआक सभ भेकसीन (सूइ) सभ पड़लै की नै। -हँ गइ पड़लै। माÿ दू-तीनटा बेसी दामी बला पĠƖह सै, दु-हजार बला सभ बाँकी छैक से िदया देबै बादमे। -िछः िछः िछः। तोरा बेटाक भेकसीन बाँकी छउ देनाइ आ तू भोज केले हे। कोन मनुक्ख भेलेँ तू...!!

मैिथली कथा २००९-१० 51

िमिथलेश कुमार झा पिरचय-पात-िपता- āी िवĂनाथ झा, जĠम- 12-01-1970 केँ मनपौर (मातृक) मे पैतृक Ƈाम-जगित, पो.-बेनीपņी, िजला-मधुबनी, िमिथला। िशक्षा : Ćाथिमक धिर- गामिहक िवńालयमे। मğय िवńालय धिर- मğय िवńालय, बेनीपņीसँ। माğयिमक धिर- āी लीलाधर उच्च िवńालय, बेनीपņीसँ इितहास-Ćितơाक संग İनातक- कािलदास िवńापित साइंस काँलेज उच्चैठसँ, पÿकािरतामे िडĢलोमा-पÿकािरता महािवńालय (पÿाचार माğयम) िदĪलीसँ, कĦĢयुटरमे डी.टी.पी ओ बेिसक ज्ञान। रचना: िहĠदी ओ मैिथलीमे किवता, गजल, बाल किवता, बाल कथा, सािहिĜयक ओ गैर-सािहिĜयक िनबंध, लिलत िनबंध, साक्षाĜकार, िरपोतŭज, फीचर आिद। Ćकािशत पिहल रचना: िहĠदीमे– मुखपृơ अखबार का- जनसþा (कलकþा संİकरण) मे 19-10-94 केँ (किवता) मैिथलीमे- िवधवा (किवता) -Ćवासक भेंट (मैिथली मािसक कोलकाता)-िरकाडर् ितिथ उपलĤध निह, आरक्षण िसफर् सþाक हेतु- आलेख(Ćवासक भेंट-कोलकाता)- नवĦबर 1994 कें। Ćकािशत रचना: मैिथली:- Ćायः 15 गोट किवता, 17 गोट बाल किवता, 18 गोट लघुकथा, 3 गोट कथा, 1 टा बालकथा, 44 गोट आलेख आ 6 गोट अĠय िविवध िवषयक रचना Ćकािशत। Ćकािशत रचना:- िहĠदी:- Ćायः 10 गोट किवता/गजल, 18 गोट आलेख, 1 गोट कथा ओ 3 गोट िविवध िवषय Ćकािशत।–सĦपादक। एडभांस युग मे ___ की हाल-चाल यौ? भैयाक िवआह भ’ गेल की? केहन रहलै बिरयातीक सĜकार? ____ सब ठीके रहलै।--- İवागत-सĜकारमे तँ बुझू जे कोनो कमी निह।--- खूब एडभांस पिरवार छै। ____ वाह ! खूब नीक बात। ____ आ नीक बात आरो, जे बिरयातीमे İÿीगण- वगर् सेहो छलीह। ____ ऐं ! --- ठीके? --- के सभ रहिथ? ____ हँ यौ, सतबारावाली मौसी, सौराठवाली दीदी, मलंिगयावाली मामी, कहरुयावाली भौजी सभ रहिथ, खूब मोन लगलै।

52 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ____ िछः नाक कटेलौ। ____ एह, दुिनयाँ कते एडभांस भ’ गेलै आ अहाँ परंपराकेँ पडनिह छी ! ____ ऐं यौ, कोन मूहसँ बजै छी ! --- यौ सात लाख काटर नै लेने रिहतौ तखन ने एडभांस बुिझतहुँ, धुर जी !!

मैिथली कथा २००९-१० 53

पालन झा

गरीबक िजĠदगी रामकुमार सभ बाले-बच्चे िचĜकार कािट कऽ कािन रहल छल। कानए िकएक निह सभ संसार ओकर उजिड गेलैक। दू चािरटा बकरी छलैक से हो सभ अिगलग्गीमे झुलिस क’ मिर गेलैक। लोकसभकेँ मुदा आब जुटनिह की।सभ चीज वİतु तँ सुƂडाह भ’ गेल छलैक। लोकसभके सांĜĶा देबाक अितिरक्त आओर कहाँ रिह गेल छलैक, हँ एकटाधिर भगवानक कृपा जे दुनू बाल-बच्चा समेत रामकुमार दुनू Ćाणी बिच गेल। जतेक तरहक लोक ततेक तरहक गप। लोक सभ ढाढस बढबैत जे आब की करबा िवधाताक घरमे इएह मंजूर भेल छल, हुनको लगमे गरीबक दुःख देबालेल रहैत छिन रिजİटरमे िलखल, नीक कहाँसँ िलखिथन। कतेक िदन जोगार कएलाक बादे ओ खोपरी ठाढ भेल छलेक, कोनहुना सभ ओहीमे िनवाह करैत छल।वषॉ-बुžीसँ तँ बचल रहैत छल। थाकल-मारल चैनसँ तँ सुतैत छल। आब कतए रहतैक, कतए ई दुनू बाल-बच्चा रहतैक। आब ई कोना फेर खोपडी ठाढ करतै, दुनू बाल-बच्चाकेँ पोसतै िक घर बनेतै। आब किनए क’ की हेतैक, जे वİतु नƠ भ’ गेलैक से आब थोडेक घुिरकए अओतैक कतेक काल धिर कानैत रिहतए रामकुमार, किनते थोडे़ साहस क’ बजबाक Ćयास करैत कहैतािछ “आब हम कोना जीबै, हमर बाल-बच्चा कोना रहतै, कोनहुना भिरिदन काज कएके बोिन अनैत रही, ओहीमे सँ दोकान-दौडी, दबाइ-दारु करैत रही, टुटलो घर छलते रौद वसातसँ बचल रहैत छलहुँ, आबतँ ओहो खोता उजिड गेल” एखनहु समाज िनơुर निह भेल छैक, टोल-पडोसक लोक सभ िकछु ने िकछु मदित करए लगलैक। आगाँ फेर सभ नीके होएबाक बोल भरोस देबए लगलैक।रामकुमार फेर भोकािर पािर क’ कनैत अिछ आ,िकछु साहस क’ अपन दुःखनामा सुनबए लगैत अिछ “चािर िदन पिहने भुटकुन िगरहथ परती बला खेत ल’ लेलिन। कहने रहिथ जे ई दसो कňा जमीनकेँ तोिडकए खेत बनाए ले आ हमरा तोँ एकर उपज तीन वषॅ धिर िकछु निह िदहे, तकर बाद तोरा जाबत धिर खेतकेँ अपन खून-पसेनासँ बनेलहुँ, बच्चाकेँ आिरपर

54 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सुताकए ओिह चैतक रौदमे काज करैत रही। पिहल वरख तँ िकछु निह भेल, एिहबेर आलू रोपैक िवचार कएनिह रही, की खेत ल’ लेलिथन, एिहलेल हम सभ बैसार कएके जाइ िछयिन कहैक लेल, जे हतैक से हतैक, फिरछा लेबिन, आ खेत धिर निह जोतए देबिन” किह कऽ ओिहठामसँ बच्चा सभक लेल िकछु खेनाइक इंतजाम करए चिल गेल। रामकुमार अपन टोल-पडोसक लोककेँ अपन दुःख ददर् सुनिबतिह छल जे कोना हमर बुिधया बेती हमरा सभक संग-संग काज करैत छल, बडका-बडका ढेपकेँ फोडेत छल, घास-पात िविछ-िविछ क’ आिरपर जमा करैत छल। किहते छल िक मटकुनमा एक गेँट सोहारी, नोन-तेल-मिरचाइ सभ नेने ओिहठाम आिब गेल। रामकुमारक किनयाँ, अरहुिलयाकेँ हाथमे सोहारीक गेँट दैत कहैत अिछ- “बच्चा सभकेँ ताबत खुआ-िपआकेँ शांत करु आ अहूँ सभ िकछु खा-पी िलअ, आब जे वİतु नƠ भ’ गेल से घुिरकए थोडेक आएत आगाँक िचंता आब करू , भगवानक इच्छा हेतिन तँ फेर सभ भ’ जेतैक। हमहुँ सभएक- दू िदनमे भुटकुन िगरहथक अĠयाक िवरुŀ बैसार करैत छी।“रामकुमार िकछु साकाँक्ष होइत-“निह, हम िगरहथ सभसँ झगडा निह करब, हमरा संग जे अĠयाय भेल अिछ तकर िनसाफ भगवान İवयं करिथन, फेरतँ हमारा एही समाज मेरहब, ओने हमरा संग अĠयाय कएलिन हमतँ निह ने केिलअिन नीक उपजाक सभावना देिख करेज फाटए लगलिन आ खेत छीन लेलिन। कतेक मेहनत हम कएने छलहुँसे निह देखने छलाह की कहाँ भेलिन जे दस टाका व दूसेर अžोक मदित कए िदयैक” बीचेमे लुटना किह उठैत अिछ –“ अहा कतेक मेहनितसँ घर बनओने छल, दू मासक बाद साओन-भादव आिब रहल छैक, कोना रहतैक! की करतै! दू-चािर िदनक बात रहैक तखन ने घरोतँ ने छैक बेशी ककरो, जे एिह छोट-छोट नेनाक आāय भऽ जइतैक।” रामकुमार एकमाÿ भगवानपर भरोस करैत,” चिल जेबैक िदĪली-पंजाब िदस। सुनैत िछयैक कजे ओिहठाम खूब काज भेटैत छैक, अपन जतेकटा ईगाम छैक ततेक-ततेकटा जगहमे पच-पच महलक मकान सभ बनैत छैक, एकबेर काज लािग गेलापर पाँच-पाँच बरख धिर दोसर ठाम जाइक कोनो काज निह। साल-दू-साल काज चलएबला मकानक’तँ कोनो किमए निह, ओतिह चिल जेबैक, केओ ने केओ काज धराइये देते, एिहठाम हमरा आब की अिछ! अरहुिलया काज निह करतै, िधया पुताकेँ तँ सोझाँमे रखतै, भानस-भातसँ करतै नै! ”एतेक कहैत देरी की ओमहरसँ कĠहैया टोक दैत जे-हँ, रौ रामकुमार मंगल’क बेटा भोलबा पंजाब मे रहैत छैक आ ओ, जे सहदेबाक बेटा राजकुमार छौक सेहो पढनाइ छोिड िदĪली की हिरयाणा चिल गेलेक आ खूब कमाइ-खटाइ जाइ छै। सहदेब’क बेटा राजकुमार तँ अपन सार सभके सेहो ल’ गेलैक। चमर टोिलयो’क कतेक छौडा सभके काज धरेलकैक। चमर टोलीक छौडा सभके देखैत िछयैक खूब नीक-नीक कपडा-लता पिहरने, हाथमे घडी आ काँख तर रेिडयो लटका क’ घुमैत-रहैत अिछ। आबतँ ओसभ खेतो भरना लेबए लागल अिछ, पिहने ई सभ खाइ बेतरेक मरैत छल। माए-बाप, भाइ-बिहिन सभलेल् सेहो

मैिथली कथा २००९-१० 55 नीक-नीक कपडा सभ अनैत अिछ। ओकरे सभसँ गप कएकेँ चिल जो िदĪली- हिरयाणा, तोरो िदन-दुिनयाँ नीक भ’ जेतौक िचंता निह। “िदĪली-पंजाब’क चचŭ चिलते छलैक की मंगल सेहो आिब गेलैक। मंगल सभ चीजके िनहािर रामकुमार लग आिवकए बैिस गेल की तखनिह रामकुमार हबो-ढकार भ’ कनैत अपन दुःċनामा सुनबैत-सुनबैत िदĪली ल’ जएबाक पैरवी करए लगलैक। राजकुमार कतहु हमरो िदĪली सभमे काज धराए िदनए तँ बाल-बच्चा सभकेँ पोिस िलतहुँ, सुनैत िछयेक जे ओतए बोिन बेशी दैत छैक, एतए तँ तीन सेर धान वा दू िकलो गहूम भेटैत छैक, एतेकमे कोना िनबŭह करबै, ताहूमे किह ओ बेराम भ’ जेबैक तँ बाल-बच्चा सभकेँ के देखतै? अरहुिलया सभ िदन बेरामे रहैत अिछ। मंगल बोल-भरोस दैत जे हँ, िकएक ने लए जेतैक, हमतँ कहबे करबे तोहुँ जाकेँ भेंट क’ अपनेसँ किह िदहक। ओ आब आठसँ दस िदनक भीतरे पूिणर्मा सभक लगीचमे जेतैक। रामकुमार अĠहरगरे भोरमे उिठ राजकुमारकेँ भेंट क’ अपन दुःख-ददर् सुनबैत िदĪली ल’ जएबाक आƇह करैत अिछ। राजकुमार काज धरएबाक आĂासन दैत रेल-मासूलक इंतजाम क’ लेबाक लेल कहैत अिछ।रामकुमारक मुखमěडलपर मुİकानक संग चमक आिब गेलैक। आĂİत भ’ रामकुमार घरमे पन-िपआइ क’ बोिन करबाक लेल चिल गेल। सांझुक पहर अबैत काल बेसाहक िकछु वİतुजात लएकेँ आएल। खाए-पीकेँ सुतबाक Ćयास करैत अिछ मुदा िनĠदो होइक तखनने,कारण रेल मासूलक इंतजाम जे निह भ’ सकलैक।घरमे सĦपिþमे सĦपिþ माÿ अरहुिलयाक नैहरमे देलगेल`` हँसुलीटा छलैक मुदा ओकरा बेचला’सँ पैसे कतेक िदतैक, तीन सए निह साढे़ तीन सए टाका``।चािर गोटेक मासूल, बटखचŭ आ तािहपर बेर वख्त लेल िकछु हाथोमे रहैक चाही।जाइते देरी जँकाज निह भेिट सकै दू-चािर िदन रुकए परैक तखन की हेतैक? िचंतासँ िनž निह भ’ रहल छलैक।कोनहुना पसरखोलबाक बेरमे िनž भेलैक, फेर भोरमे काजपर जएबाक छलैक। रामकुमार आइ एकेवेिरयाँ काज क’ सबेरे घर चिल आएल मासूलक इंतजाम करबाक लेल। मासूलक कोन-हुना इंतजाम क’ िदĪली जएबाक तैयारीमे लािग गेल। कािŎ अĠहरगरे िदĪली जएबाक छैक। राजकुमारसँ भेंटकए पुणर् आĂİत भ’ आइ राितएमे मोटरी-चोटरी पाथेय सभ बािĠह-छेक रािख देलक, भोरे आब माÿ Ćİथानक काज। रामकुमार सबेरे-सकाल उिठ बाले-बच्चे तैयार भ’ िनयत समएपर िवदा भ’ गेल। ƙŌİथानमे जाकए बैसल छल िक ताबत राजकुमार दस डेग पिहनेसँ चल-चल देरी भ’ गेलैक, बस छुटतै तँ Əेनो छुिट जेतैक। समएपर निह पहुँचबै तँ फेर Əेन कािŎये भेटतै। सभ झटिक क’ भगवती चौकपर पहुँचल िक ओमहरसँ बस हनहनाइत पहुँिच गेल। कोनहुना सभ बससँ िदĪली टीशनधिर पहुँचल। गाडी अएबामे घंटा भिर िबलĦब छलैक। ताबत राजकुमार पैसा ल’ िटकट कटाए अनलक। िकछु पनिपआइ सभ करैत गेल िक Əेनो आिब गेलैक। भीड तँ छलैहेँ तथािप कोनहुना सभ चिढ क’ िदĪली İटेशन आिब गेल। िदĪलीमे बडका-बडका शाँिपंग माल सभ बनैत देिख अचंिभत ओ मने-मने

56 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) काजक आशामे खुिशयो भ’ रहल छलैक। सएक-सए मजदूर काज क’ रहल छल। रामकुमार सभ किहओ महानगर देखने रिहतए तखन ने, िजज्ञासाथर् राजकुमारसँ िकछु-िकछु पुछए लागल। राजकुमार आब गामक भाषाकेँ छोिड टूटल-फूटल िहĠदीमे ओकरा बुझबैत िहĠदीमे बजबाक िनदųश दैत कहए लगलैक, ”हे! ई बडका शहर िथकैक, एिहठाम गामक भाषा निह बिजहे, निहतँ लोक देहाती बुझतौक, िनछĠछ देहाती। अपना सभमे गप करबहतँ निह कोनो, मुदा हािकम हुकुमसँ िहĠदीएमे बात किरहह, ओना ओ सभ अपनामे अंƇेिजएमे गĢप करैत छैक” रामकुमार उþर दैत कहैत अिछ” अँए हौ राजकुमार! ओसभ जखन अंƇेजीमे गĢपकरैत छैक तँ Ąेर िरक्शा-टेĦपू-टेक्सी बला सभसँ कोना गĢप करैत हेतैक, ई सभतँ देखैत िछयैक जे िहĠदीएमे बजैत छैक ओकरा अंƇेजी बजैत कहाँ देखैत िछयैक” की राजकुमार कहैत अिछ हँ, हौ एिह लोककतँ ओ सभ उपेक्षा दृिƠएँ अवĮय देखैअ छैक, मुदा जािहठाम मजदूर-िरक्शा आिदक काज पडैत छैक तािहठाम ओकरो िहĠदीएमे बाजए पडैत छैक मुदा सभ छोटका िहĠदीएमे गĢप करैत छैक चाहे ओ चाय-पानबला हो ठेला-िरक्शाबला हो चाहे जन- मजदूर हो” ,रामकुमार िकछु आगाँ बढैत अिछ की,पुनः राजकुमारसँ पुिछदैत चैक जे अँए हौ एिहठाम देखैत िछयैक जे बुिढया-बुिढया सभ िजंस-पेंट पिहरने रहैत छैक, कतेककेँ देखैत िछयैक जे भिर देह कपडो निह पिहरने रहैत छैक, से िकएक? गाँव-घर सभमे एना रहतै तँ लोक कतेक चौल करतै।“ राजकुमार डँटैत जे, ” हे, ई बडका शहर िथकै एिहठाम सभ सेठ-साहूकार सभ छैक एिहठाम एिहना रहैत छैक, ई सभ बात एिहठाम निह बिजहेँ निहतँ पुिलसकेँ बजाए जेलमे द’ देतौक” रामकुमार सहिम गेल, मुदा भीतरसँ आओरो िजज्ञासा सभ उमिर रहल छलैक। गप-शप करैत सभ राजकुमारक डेरापर पहुँिच गेलैक। राİताक सभ झमारल छल। गामसँ जे िकछु अनने छल सएह सभ खा-पी क’ आराम करए लागल। साँझुक पहर चािर बािज गेलैक, काजक तलाशमे से हो जएबाक छलैक। राजकुमार अरहुिलयाकेँ भानस भात करबाक सभ वİतु देखाए रामकुमारक संग िनकिल गेल। संयोगवश लगिहमे िकछु दुरीपर एकटा नवपर मकान बिन रहल छलैक। धखाइत- धखाइत ओिहठाम पहुँचल । मािलक मनेजरक संग ठीकेदार सेहो छलैक। राजकुमार मािलककेँ रामकुमारक िदस इशारा लकरैत जे काजक तलाशमे गामसँ आएल छैक। रामकुमार से हो टुटल-फूटल िहĠदीमे अपन दुदŶĠयक िवषएमे कहए लगलैक। संयोगवश रामकुमारकेँ काज भेिट गेलैक। दोसरेिदन मािलककेँ एकटा एपाटर्मेटक ने ओ लेबाक छलैक, सए-दूसए लेबरक काज छलैक। दोसरे िदन आठ बजे काजपर बजाओल गेलैक। राजकुमारक देह सेहो हĪलुक भऽ गेलैक आ रामकुमार सेहो Ćसž भऽ गेल । रामकुमार दोसर िदन समएपर पहुँिच काज ĆारĦभ क’ देलक। मनसँ काज करए लागल, मेहनितया तँ छलहे, मािलक काज देिख Ćसž भऽ गेलैक। दू-चािर िदन काज कएलाक उपरांत िकछु अिƇम आ िकछु अपनो िदससँ रहबाक

मैिथली कथा २००९-१० 57 लेल वİतु जात खरीद आनएलेल कहॴ देलकै। रहबाक लेल एकटा झोपडीनुमा घर दऽ देल गेलैक। सभ बाले-बच्चे रामकुमार रहए लागल। िकछुए िदनमे सभ िहिल-िमिल गेल। िधयो-पुतो सभ जगहसँ पिरिचत भऽ अपन खेलाए धुपाए लागल। बडका छौडा ललटुनमा काज करए कालमे बापक छोट-छीन टहल सेहो कऽ दैक। आबतँ ईसभक िĆय पाÿ बिनगेल। मािलक-मिलकाइन जखन अबैकतँ चाहो सभ िपआए दैक। मािलक आब गेटक चाभी सेहो एकरे हाथमे थĦहा देलकै। कखनहु ककरो िबषएमे नीक अधलाह जे िकछु पुछबाक रहैत छलैकसे रामकुमारेसँ पुछैत छलैक। इहो सभटा बात सĜय-सĜय किह दैत छलैक। िकछु िदनमे घरक छत सभ ढला गेलैक, रामकुमारककेँ आब ओहीमे रहबाक लेल आज्ञा भेिट गेलैक। गेटक चाभी सेहो दऽ देल गेलैक। आवए-जाए बलापर नजिर रखबाक हेतु सेहो किहदेल गेलैक। मािलक-मिलकाइनकेँ कोनो गुĢत बातक जानकारी लेबाक होइतँ रामकुमारेसँ पुछैत छलैक। दू-तीन वरख धिर एिहमे काज चलतै से सोिच खूब Ćसž भ’ रहए लागल। समए िबतैत गेल देिखते-देिखते आब तेसरो बरख बीतल जाए रहल छलैक एपाटर्मेटक दोसरमहल घिरक सभ ढांचा तैयार भ’ गेलैक, मुदा एखनो बहुत काज बाँकी छैल। आबतँ िफिनिशंगक काज चालू कएल जेतैक। मािलक धीरे-धीरे मजदूर सभक छँटनी करए लागल, झोपडी सभ सेहो हँटए लगलै। रामकुमारक िचंता सेहो बढए लगलैक जे आब हमरो ई İथान छोडए पड़त। ठीकेदार,रामकुमारकेँ मकानक एकटा कातमे रहबाक İथान सीिमत कऽ देलकै। रामकुमार उदास भ’ कए रहए लागल तथािप ओ छओ-मास घिर आओर ओहीमे खेप लेलक। पĠƖह िदन ठीकेदार मािलककेँ एपाटर्मेँटक चाभी सौप देतैक। रामकुमार पėी अरहुिलयाक संग भिवįयक िचंता करैत अवसर पािब काजक खोज सेहो करए लागल। “ िदĪली सभ महानगरमे काज कतहु निह भेटैक, ताहूमे मजदूरीक काज। एखनहुँ इंिजिनयर, डाक्टर, िशक्षकक काज पडततँ एकक बदला अनेक उपिİथत भऽ जाएत मुदा मजदूरक िदĸततँ सभ िदन रहतैक, कतबो मशीनी युग एलैक मजदूरकतँ काज पडबे करतै। मजदूर की आब मजदूरे रहलैक? ओहो सभ आब अपन İवयंक काज करए लागल आ ओिहमे ओकरा खूब आमदिनयो होइत छैक बाबू-भैया सभ गाममे जमीन बेचैत छिथ आ ओसभ खरीद करैत अिछ। “मकानमे िफिनिशंगक काज सेहो लगचाए गेलैक। बाहरमे रंग िवरंगक फूल सभ सेहो लागए लगलै। रामकुमार केँ भगवान-भगवतीक कृपासँ दोसरो ठाम काज भेिट गेलैक मुदा ओिह काजमे एखन दस िदन समए आओर लगतै, एहने एकटा शाँिपंग माँल बनतै, ओहूमे चािर-पाँच वषर् धिर काज चलतै। रामकुमार दुनू Ćाणी खूब खुश छल िक कुसंयोगसँ बडका बेटा ललटुनमा दुःिखत पिडगेल। टाइ-फाइड भ’ गेलैक की कालाĔवर एकसए तीन आ चािर िडƇी धिर बुखार रहए लगलैक। बुखार उतरए केनाम निह। कखनहु-कखनहुँ आँिखसभ बž भ’ जाइक तँ कखनहु देह पािन- पािन मुदा िजĿी Ĕवर्र जĪदी छुटबाक नामे निह लैक। ठीकेदार एहनो िİथितमे घर खाली करबाक हेतु अंितम चेतावनी दऽ देलकै। घर तँ खाली कइये देने

58 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रहैक, पिरसरमे बनल एकटा िगलेबापर जोडल ईटक घरमे छलैक। मािलक से हो आिब कऽ किह गेलैक, मािलक İवयं ललटुनमाक मरनासž अवİथा देखलकै तथािप कोनो हालतमे पिरसर खाली करबाक आदेश दैत चिल गेल। आइ भोरे पिरसर खाली करबाक छलैक मुदा ओ खाली करबासँ िववश छलैक, छौडा एक-दूिदन िजतै की निह से कहब किठन छलैक। सांझुक पहर ठीकेदार, मािलक, मिलकाइन सभ एलै एकरासँ िवनु िकछु कहनिह सामान सभ बाहरमे कनैल फूलक गाछ िदस छहर िदबालीक कातमे फेकए लगलैक। रामकुमार-अरहुिलया दुनू Ćाणी िनहोरा-िवनतीसँ जे,” मािलक दू चािर-िदनमे हम खाली क’ देब, एिह जड़कालामे राितमे ई लएकेँ कतए जेबैक। मािलक! मिरजेतैक ललटुनमा। इएह ललटुनमा छल जे अहुँ सभक टहल क’ दैत रहए। किहओ चाह आनए, किहओ िसगरेट तँ किहओ पािन। एही जरकालामे किहयै ललटुनमा ठँढ लािग जेतौक İवेटर खरीद क’ पिहिर िलहेँ, पएरमे चĢपल लए लेआ पैसो दैत रिहयै। मािलक! ओयेह ललटुनमा मिर रहल छैक कहाँ दूटा टको दैत िछयेक जे एकटा गोिटयो खेतै। मािलक दू चािर िदन रहए िदऔक हमारा खाली कए देब।“ मुदा ठीकेदार आ मािलकपर तकर कोनो Ćभाव निह। ललटुनमा जािह टूटल खाटपर पड़ल छल, ओिह खाट सिहत ललटुनमाकेँ पिरसरसँ बाहर गाछक तर रािख देलक। ओकरा सभकेँ संका जे कही मिर गेल तँ आओरो आफत होएत। रामकुमार मािलकसँ Ćाथर्ना करैत कलजोिरकए जे” मािलक! एकरा बड किठनसँ पोसने िछयैक, अहाँ सभ गरीबक ददर् ओ ममता निह बुझैत िछयैक। अहुँ सभकेँ बाल-बच्चा अिछ मुदा अहाँ सभतँ बच्चाकेँ माएक दूधो निह िपअए दैत िछयैक िकएक तँ माएक शरीर खराब भ’ जेतैक नब निह देखेमे अओतै।बच्चा सभकेँ दाइ सभक भरोसे छोिड जतए ततए रंगीन दुिनयाँमे घूमए चिल जाइत िछयैक। अपने सभखाली धनकघमौर करैत िछयैक। बच्चाकेँ रंग- िवरंगक कीमती कपड़ा-िखलौना गाडी जे चाहीसे दैत िछयैक मुदा असली İनेह तँ माइये-बापसेँ होइत छैकसे İनेह देवए अहाँ सभ निह जनैत िछयैक यिद से İनेह रिहतैक तँ ललतुनमाकेँ एना निह बाहर क’ िदितयै, अहाँ सभकेँ कनेक बो दरेद निह अिछ मतलब ओतबे काल रहैत अिछ जतेक काल अपने लोकिनकेँ काजक जरुरी रहैत अिछ। “ मािलक! एकरा राित भिर रहए िदऔक। मुदा मािलक- मिलकाइन पर तकर कोनो Ćभाव निह। सगरो राित रामकुमार दुनू बच्चाकेँ नेने जगले रिहगेल। भगवान-भगवतीक İमरण करैत जे”, हे भगवान! सभटा दुःख हमरे सन गरीबकेँ देिलयै। गाममे तँ सरो समाज छल बोलो भरोस देलक एिहठाम तँ केओ निह अपन होइत छैक सभ İवाथर्मे लागल रहैत अिछ, गरीबक िदस ककरो ğयान निह। ओहो जे राजकुमार छल सेहो पंजाब चिल गेल, आब हम एखन कतए जाउ, हमर सभक रक्षा करु! रक्षा करु!”भोर होइतिह देरी ललटुनमाक आँिख खुिल गेलैक, साक्षात जेना सूयर् भगवान अपन Ćकाश पुĽसँ रोगकेँ हरण कए लेलिथन। ललटुनमा

मैिथली कथा २००९-१० 59 पािन मंगलकै पीबाक लेल। अरहुिलया-रामकुमारक बात जेना िदनकर दीनानाथ सुिन लेलिथन। दुनू Ćाणीकेँ होश आिब गेलैक। ललटुनमाकेँ गाएक दूध पीआए दवाइ द’ देल गेलैक। िकछु कालक बाद होश भेलापर ललटुनमा बजैत अिछ- “माए एतए िकएक िछयैक? मािलक सभ हमरा सभकेँ िनकािल देलिखन? माए माथपर हाथ ध’ सहला बैत अपन दुःख कहए लगलैक। बीच-बीचमे ललटुनमा आिखँ सेहो मुिन िलअए। िकछु कालक बाद होश भेलापर ” माए! एतएसँ चल, एिह घरक सोझाँ हम निह रहब, गाछेक तरमे रहबाक अिछतँ बरक गाछ तर चल जाे, मुदा एिहठाम आब निहरह, एकोक्षण हमरा निह राख एिहठाम। ओिह Ĕवरसँ हमरा ई बेशी दुःख बुझाइत अिछ, जĪदी चल” रामकुमार सभ वİतु- जातकेँ एकटा बोिरयामे ल’, ललटुनमाकेँ काĠहपर लटकाए धमर्-वृक्षक छयामे रहबाक लेल बाले-बच्चे रामकुमारक दुनू Ćाणी एक-टक ओिह मकानकेँ िनहारैत िवदा भ’ गेल। निह जािन, कोन धमर्-वृक्षक छयामे ओ रुकल।

60 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

कािमनी कामायनी

लाल काकी टक टक टक टक टुन टुन टुन टुन .... घंटी बजबैत तांगा क’ सोरसँ ओिह सूतल सूतल सुİत सुİत टोलमे हरकत आिब गेलए । कोनो अĥयागत सएह आबैत छलाह ताँगापर िकनको बेटा पूतौह िकनको धी जमाए िकनको समधी़ िकनको सर कुटुम।आऽ टक टक टुन टुन क’ ğविन जेना अिह खबिरकेँ समİत घर धिर पहुँचा दैत़ िकयो आएल अिछ पाहुन पड़क । िदनक करीब दस बाजल छल । मुदा गाममे तँ पराते सभ उिठ पराती गबैत पूजा पाठ नेम टेम करैत़ अपन िदनचयŭमे ĭयİत भऽ जाइत छल तािह लेल दस एगारह बजैत बजैत फुरसते फुरसत। िकछु अपन दरवĔजासँ िनकिल िकछु अपन दलानसँ बिहराित ताँगा धिर औला़।आऽ खबिर पसिर गेल चारूकात जे लालकाकी पटना जा रहल छिथ। हुनक बड़का पाैÿ कĠहैयाजी आिब गेलिखĠह लेबए लेल । लाल काकी अपन जमानाक परम सुžिर गोरवािह İÿी ततेक गोर जेना साक्षात चान बुिल रहल अिछ धरतीपर। आऽ एकदम लाल बूँद जेना अंगरेज । िखİसा छल हुनका पाछाँ जे बड़का घरक बेटीकेँ गौरव ढाह लेल सासुरमे हुनक पितकेँ दोसर िववाह कराओल गेल ।ओिह समए समाजमे बहु िववाह पूणर्रूपेण Ćचिलत छल । आऽ एकए गोट कतेक कतेक िववाह करैत छलाह । मुदा सौितिनयाँ डाह। सौितन संगे रहनाय एकटा बड़का दुखदायी Ćसंग छलैक İÿीगण समाजक लेल । सौितन एतैĠह करेजपर राहिड़ दड़रतैĠह तखन िहनक टहंकार मारैत गौरव ढहतैĠह बड़ उþान भऽ कऽ चलैत छिथ। घरवलाकेँ िववाह भऽ गेलिĠह मुदा नबकी किनया सासुरक मुँहो निह देख सकलीह।नैहरेमे भोजक पात उठब गेलीह तँ कोना नै कोना िबषहरा महाराज डँिस लेलिखĠह ।जखन लाल काकीकेँ ई खबिर भेटलैĠह तँ ठňा कऽ हॅसैत बजलीह ‘लैह हमर गौरव तँ भगवित सेहो निह

मैिथली कथा २००९-१० 61 ढािह सकलीह ।’बाजए कालमे हुनक बुņी बुņी चमकैĠह । आऽ दोसर िखİसा हुनक जे Ćचिलत छल ‘िववाहक बड़ िदन धिर हुनका पूत नै होए छल खाली धी धी धी। तँ ओ भगवानसँ कबुला केलिथ़ ‘ हे स़þनारैन महाराज Ĕयोँ हमरा पूतौह झोँट पकिड़ कऽ मरत तँ हम बाजा गाजासँ अहाँक पूजा करब ।’एिहपर बड़ हॅसी ठňा भेलए मुदा भगवान जेना हुनकापर बड़ अनुƇही छलिखĠह । आऽ ओहो िदन एलैĠह जखन घरमे पूतौह आिब गेलिĠह । मुदा ओ कबुला भगवानक पूजा कऽ। आब करल की जाए । कबुला कबुला छल।आखीरमे भगवानक पूजाक समए बीध जकाँ पूतौह हुनक एकटा लट पकड़लिखĠह ओ ढोल पीपहीसँ पूजा सĦपž भेल छल । मुदा हम जे लाल काकीकेँ देखने रिहयैĠह पाकल़ पाकल छोछ-छोट केश़ वृŅा़ किन देहगर मुदा गेराई वएह बड़ İनेिहल़ गĢपक सĢपक िसनेह । हम सभ जखन गाम जाई हमर पपा ढेर रास फलफूल नेने जाइथ ।आऽ शरीफा लाल काकीकेँ बड़ पिसž । ‘गै बच्चा दूटा सरीफा ला’।तखन एकोटा नैकसँ पाकल शरीफा नै छलै हम किन किन पाकल शरीफाकेँ हाथसँ कैस कैस कऽ दािब दािब कऽ एकदम घुĪलल बना कऽ दऽ देिलयैĠह ।किनए कालक बाद काकी हमरा तकने िफरैत छलीह ‘ कþ छै बुिचया’ । आऽ हमरा देखैत मातर बजली ‘ हे ले अपन सरीफा काँचे छाै।’ एक िदन हमर आंगनमे बनल मॅड़वा़ भाई सबहक उपनैनकपर बैिस हमरा िखİसा सुनबूत छलीह ‘ जाजर् पंचम इंगलैंडक गĿी पर बैसलै तेकरा बाद जाजर् छठम जाजर् सĢताम ।’आऽ ओिहƅम जे ग्Ģपर मोन पङैत अिछ ओ बाजल छलीह ‘उजरा जीर होइत छै ऊजरा मरीच हमर पीþी कलकþासँ आनैत छलाह।लोक चान पर पहुँच गेलए।’ हम अपन दायसँ पूछिलयैĠह। ‘ दूर हुनक गĢपठ सĢपल एहने रहैत छैĠह उजरा मरीच आऽ चान परलोक ।चौरचनमे चान महाराजकेँ अरघ देल जाइत अिछ ओ भगवान छिथ हुĠकर िक ओ तँ किनए िदनक बाद सूरूज महाराजपर सेहो लोकवेदकेँ पठा देती ।’ हुनक गĢपपर पीठ पाछाँ बड़ मखौल उड़ैए।जीभक बड़ पातिर नीक नूकूत खायब नीक पिहरब। एक िदन दाइकेँ बड़का पोत जमाए एलिखĠह तँ ’ हुनक किनए कालक बाद अपन दरवĔजासँ टहलैत टहलैत हमरा आंगनक मॅड़वापर आिब बैसिलह ‘बौआ दाए मैयॉं अपन छोट िदयािदनीकेँ ओ अिह नामसँ बजबए छलीह ‘िक सभ बनेलहुँ अिछ जमाएक लेल’ । आऽ दाइ जे परम ओिरयानी बुिधयािर मृदूभाषी़ मयŭदा वाली सुžिर İÿी छलीह बड़ आदरसँ अपन पैघ िदयािदनीसँ जमाए्केँ गेलाक बाद चाह िपयाबैत बैस कऽ िवĠयाससँ गĢप करैथ । जीभ बसमे निह छलैĠह तँ पेट सेहो जवाब द’ देने छलैĠह । आऽ लालकाकी बीमार भऽ गेल छलीह ।छोटका बेटाकेँ पेलवार तँ लगमे छलैĠह मुदा पटना वला बेटाकेँ मोनमे छरपņी लािग रहल छलै ‘माएकेँ हम अपन लग रािख

62 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कऽ बड़का डाक्टारसँ इलाज करैब।आँिखक सोझा रहत तँ हमरो मोनमे चैन रहत।’ आऽ तािह लेल टमटम आएल छल । उĦहर काकी बड़काटा कऽ भांगिट ठाढ केनो ‘मिर जाएब मुदा मगह निह जाएब कॅह कासी कॅह उसर मगहर मगहमे जे मरै छै तेकरा पैठ नै होय छाै मगं दोषं दधाित इित मगध ’ ‘ मगहीया डाेमसँ बþर हƛ जीनगी भऽ जाएतँ ‘िकžो िकžॲ हम मगह नै जाएब।’ छोटकी पूतौह दरवĔजापर बैस ĭयाख्यान दऽ रहल छलीह ‘ तीन िदनसँ अž पािन ितयागने छिथĠह भिर राइत जागल कुहरैत ‘हम मगह नै जाएब।’ अपन नूआ आंगीवला झोराकेँ छोटका टेबूलपर ठाढ भऽ क” दहीक खाली मटकूड़ीमे रािख चारसँ लटकैत सॴकपर टाँिग कऽ नूका देने रहिथ कखनो ओकरा कोठी के दोगमे नूका दैथ मुदा ताकैत ताकैत लोक तािकए लैक।कखनो अपना लगमे रहए वला पोता सभकेँ बजा कऽ नहुँ-नहुँ िनहौरा करैथ’ ‘ हे बाऊ अपन िहİसाकेँ जमीन हम तोरे सभकेँ िलख देबऽ हमरा मगह नै जाए दऽ ।’ मुदा हुनक Ćाणक रच्छा करए लेल सभकेँ लगै पटना जेनाए आवĮयक छल ओतए पैघ पैघ डाक्टर। कĠहैया जी हुनक झोरा झपटा उठाबैĠह ताँगापर राखए लेल गेल तँ ओ झपिट कऽ ओकर हाथसँ झीक कऽ अपन करेजसँ लगा कऽ घाना पसािर दैथ ‘हम निह जाएब ई गाम छोि ड़ कऽ एतयसँ हमर अथŰए उठत अिह आंगनमे हम मॅहफापर सँ उतरल छलहुँ। ’आऽ ओ भोकासी पाि ड़ कऽ नीच्चामे औंघड़ा औघड़ा कानिथ दरवĔजाक नीचा ठाढ सबहक आँिख झर झर बहैत छल िवशेष कऽ पूरना लोक सभकेँ जे हुनका बड़ िदनसँ कएक बरकसँ जनैत छल। Əेनक समए लगिचया गेल छल ।जेनाए परम आवĮयक ।आऽ बेर बेर अपन हाथक घड़ी देखैत एþे काल धिर िकंकþर्ĭय िवमूढ ठाढ कĠहैयाजी काकीकेँ भिर पाॅज पकिड़ कोरामे उठा ताँगापर बैसा देलकैĠह जा ओ अž पािनक पोटरा पोटरी बाेरा झोरा राखए लेल मुड़ला असक्तद िनबर्ल कािक नै जािन कोन दैवीक शिक्तसँ उछैलकऽ ताँगासँ नीचा उतिर दुगŭİथान िदस पड़ए लगलीह।जेना कसाई के देख कऽ गाए िचकरैत छै ओिहना ओ अपन िĆय बड़का पाैÿकेँ देख कऽ। िचकरय लगलीह । िचकरैत िचकरैत हुनक गरा बािझ गेलिĠह़ । कĠहैयाजी हुनका पाछाँ भगला आऽ लपिक कऽ फेर अपन कोरामे उठा ताँगा पर बैसा देलकैĠह िकयो लोटा मुँहमे लगा कऽ दू चािर घोँट पािन पीया देलकैĠह।कĠहैयाजी अपनो छरिप कऽ बैस रहला आऽ कािककेँ पॅिजएने रहला। चीज वाेİत लोके सभ रािख देलकै आऽ तांगा वलाकेँ इसारा किर देलकै ओ तड़रासँ भगबए लागल घाेड़ा ओ हुनक कानब जेना कोने बच्ची दुरगमिनया किनयाकेँ । ताँगाकेँ पाछाँ पाछाँ भिर टोलक लोक अिड़ यातए बाेल भरोस दैत़ िदयािदनी आऽ पुतौह सभ ‘हे बौआ यौ गोड़ लगैत छी काकी के अवİसे पठा देबैĠह ।’’ ‘ इलाज करा कऽ चिल अिबहिथ ’ ‘जुिन कानैथ़ िहनका हमर सĢपहत़ ।’ आऽ पोखिर धिर अि ड़यैत कऽ जखन ओ सभ आपस हुनक दरवĔजापर

मैिथली कथा २००९-१० 63 आिब बैसली तँ सबहक मूँह नाक आँिख लाल-लाल जेना रंग अबीर मिल देने होइ । झर झर नोर बिह रहल छलै एखनो धिर । आऽ ओिह िदन की राितयोमे िधया पुþाकेँ छोि ड़ पैघ ककरो अž नै धसले मुँहमे। रिह रिह कऽ लाल काकीकेँ ओ करूण ƅंदन जेना सबहक कानमे घुिरयाित रहल छल। पचासो वरखक अपन बास छोि ड़ पिहल बेर ओ नैहर वा’ सासूरक आगाँ कþाे पएर राखने छलीह।

64 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

जगदीश Ćसाद मंडल गाम-बेरमा, तमुिरया, िजला-मधुबनी। एम.ए.।कथाकार (गामक िजनगी-कथा संƇह), नाटककार(िमिथलाक बेटी-नाटक), उपĠयासकार(मौलाइल गाछक फूल, जीवन संघषर्, जीवन मरण, उĜथान-पतन, िजनगीक जीत- उपĠयास)। माक्सर्वादक गहन अğययन। िहनकर कथामे गामक लोकक िजजीिवषाक वणर्न आ नव दृिƠकोण दृिƠगोचर होइत अिछ।-सĦपादक बहीन ‘आब अिधक िदन माए निह खेपतीह। ओना उमेरो नĤबे बखर्क धत-पत हेबे करतिन। तहूँमे बखर् पनरह-बीसेकसँ किहयो बोखार कऽ कहए जे उकािसयो निह भेलिन अिछ। एक तँ ओिहना पाकल उमेर तिहपर सँ देहक रोगो पछुआएल, तेँ भिरसक एिहबेिर उिठ कऽ ठाढ़ हेबाक कम भरोस। िकऐक तँ एक न एक उपƖव बिढ़ते जाइत छिĠह। अžो-पािन अरुिचये जेकाँ भेिल जाइ छिन।’’ - भखरल İवरमे राधेĮयाम पėीकेँ कहलिथन। पितक बात सुिन, कने काल गुĦम रिह, रािगनी बाजिल- ‘‘ककरो औरुदा तँ िकयो निहये दऽ सकैत अिछ। तहन तँ जाधिर जीवैत छिथ ताधिर हम-अहाँ सेबे करबिन की ने?’’ ‘हँ, से तँ सैह कऽ सकैत िछयिन। मुदा िजनगीक किठन परीक्षाक घड़ी आिब गेल अिछ। एते िदन जे केलहुँ, ओकर ओते महĜव निह जते आबक अिछ। िकएक तँ कखनो पािन मंगतीह वा िकछु कहतीह, तिहमे जँ किनयो देरी हएत आ िकयो सुिन लेत तँ अनेरे बाजत जे फĪलांक माए पािन दुआरे िकिकहािर कटैत रहैत छिथन। मुदा बेटा-पुतोहू तेहन जे छै घुिर कऽ एको-बेिर तिकतो निह छिĠह। ककरो मुंहमे ताला लगेबै। देिखते िछयै जे गाममे कोना लोक झुठ बािज-बािज झगड़ो लगबैत आ कलंको जोडै़त अिछ। तेँ चैबीसो घंटा ककरो निह ककरो लगमे रहए पड़त। जँ से निह करब तँ अंितम समएमे कलंकक मोटरी कपारपर लेब।’’

‘‘कहलहुँ तँ ठीके, मुदा बच्चा सबहक िहसाबे कोन, तहन तँ दू परानी

मैिथली कथा २००९-१० 65 बचलहुँ। बेरा-बेरी दुनू गोटे रहब। अĠतुका काज अहूँ छोिड़ िदऔ। िकएक तँ अंगनेक काज बिढ़ गेल। बहीनो सभकेँ जनतब दइये िदअनु।’’ ‘‘अपनो मनमे सैह अिछ। जँ तीनू बहीिन आिब जाएत तँ काजो बँटा कऽ हĪलुक भऽ जाएत। ओना अंगनासँ दुआिर धिर काजो बढ़बे करत। जखने सर- संबंधी, दोİत-मिहम बुझताह तँ िजज्ञासा करए अएबे करताह। जखन दरबĔजापर औताह तँ सुआगत बात करै पड़त”। मूड़ी डोलबैत रािगनी बजलीह- ‘‘हँ, से तँ हेबे करत।’’

‘‘एखन िनचेन छी आ काजो करैऐक अिछ। तेँ अखने तीनू बहीिनयो आ ममोकेँ जानकारी दइये दैत िछअिन।’’ आन कुटुĦबकेँ एखन जानकारी देब जरुरी निह छै। मोबाइलमे मामाक नĦबर लगौलक। िरंग भेलै।

‘‘हेलो, मामा। हम राधेĮयाम।’’

‘‘हँ, राधेĮयाम। की हाल-चाल?’’

‘‘माए, बड़ जोर दुिखत पिड़ गेलीह।’’

‘‘एखन हम एकटा जरुरी काजमे बँझल छी। साँझ धिर आिब रहल छी।’’ मोबाइल बž कऽ राधेĮयाम जेठ बहीिन गौरीक नĦबर लगौलक। ‘‘हेलो, बहीिन। माए दुिखत पिड़ गेलथुन।’’ ‘‘एखन हम İकूलेमे छी आ अपनहुँ ( पित) कओलेजेमे छिथ। छुņीक दरखाİत दइये दैत िछअए। साँझ धिर पहुँच जाएब।’’ मोबाइल बž कऽ छोटकी बहीिनक नĦवर लगौलक। ‘‘सुनीता। हम राधेĮयाम।’’ ‘‘भैया, माए नीके अिछ की ने?’’ ‘‘एखन की नीक आ िक अधलाह। तीिन िदनसँ ओछाइन धेने अिछ। तेँ िकछु कहब किठन।’’ ‘‘हम अखने छुņीक दरखाİत दऽ आिब रहल छी।’’ ‘‘बड़बिढ़या’’ किह मिझली बहीिन रीताक नĦबर लगौलक। ‘‘हेलो, रीता। हम राधेĮयाम। माए, बड़ जोर दुिखत छथुन।’’

‘भैया, हम तँ अपने तते िफरीसान छी जे खाइक छुņी निह भेटैत अिछ। कािŎयेसँ दुनू बच्चाक Ćितयोिगता परीक्षा िछयै’ िबना िİवच ऑफ केनिह राधेĮयाम मोबाइल रािख अकास िदिश देखए लगल। ठोर पटपटबैत- ‘ बच्चाक परीक्षा......, मृĜयु सĔजापर माए....! केकरा Ćाथिमकता देल जाए? एक िदिश, जे बच्चा एखन धिर िजनगीमे पैरो निह

66 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) रखलक, सॱसे िजनगी पड़ल छैक। दोसर िदिश कƠमय िजनगीमे पड़ल बृŀ माए। खैर, सभकेँ अपन-अपन िजनगी होइ छैक आ अपना-अपना ढ़ंगसँ सभ जीबए चाहैत अिछ। हम चािर भाँइ बहीिन छी तेँ ने दोसरपर ओंगठल छी। मुदा जे असकरे अिछ, ओ कोना माए-बापक पार-घाट लगबैत अिछ। िकछु सोिचतिह छल िक नव उĜसाह मनमे जगल। नव उĜसाह जिगतिह नजिर पाछु मुँहे ससरल। चारु भाए-बहीिनमे माए सभसँ बेसी ओकरे ( रीता) मानैत छिल आ ओकर सेबो केलक। कारणो छलैक जे बच्चेसँ ओ रोगा गेल छिल। मुदा आĀयर्क बात तँ ई जे जेकरा माए सभसँ बेसी सेवा केलक वैह सभसँ पिहने िबसिर रहिल अिछ। गोसाँइ डूबैत-डूबैत मामो आ दुनू बहीिन-बिहनोइ पहुँच गेलिख न। अिबतिह डॉ. सुधीर ( छोट बिहनोइ) आला लगा माए ( सासु) केँ देिख कहलिखन- ‘‘भैया, माए बँचतीह निह। मुदा मरबो दस िदनक बादे करतीह। तेँ एखन ओते घबड़ेबाक बात निह अिछ। अखन हम जाइ छी, मुदा बहीिन ( डॉ. सुिनता) रहतीह। ओना हमहूँ दू-िदन तीन-ि दनपर अबैत रहब।’’ डॉ. सुधीरक बात सुिन सभकेँ क्षिणक संतोष भेलिन। मामा कहलिखन- ‘‘भािगन, ओना हम ककरो छॴटा-कİसी निह करैत िछअिन मुदा अपन अनुभवक िहसाबे कहैत िछअह जे भिर िदन तँ İÿीगण सभ मुİतैज रहथुन मुदा राितमे निह। ओना हमरो गाम बहुत दूर निहये अिछ। एखन तँ धड़फड़ाइले चिल एलहुँ। तेँ एखन जाइ छी। कािŎसँ साँझू पहरकेँ एबह आ भोर कऽ चिल जेबह। भिर राित दुनू माम-भिगन गप-सप करैत ओगिर लेब।’’ दुनू बिहनोइयो आ मामो चिल गेलिखन। ‘‘आइ सातम िदन माएकेँ अž छोड़ब भऽ गेलिन। दू-चािर चĦमच पािन आ दू-चािर चĦमच दूध, माÿ अधार रिह गेल छिन।’’ - आंगनसँ दरवĔजापर आिब रािगनी पितकेँ कहलिथन। पėीक बात सुिन राधेĮयाम मने-मन सोचए लगलाह। मनमे उठलिन चारु भाए-बहीिनक पािरवािरक िजनगी। कतेक आशासँ दुनू गोटे (माए-िपता) हमरा चारु भाए-बहीिनकेँ पोिस-पािल, पढ़ा-िलखा, िवआह-दुरागमन करा पिरवार ठाढ़ कऽ देलिन। जिहना गौरी ( जेठ बहीिन) एम.ए. पास अिछ। तिहना एम.ए. पास बिहनोइयो छिथ। हाई İकूलमे बहीन नोकरी करैत अिछ तँ कौलेजमे बिहनोइ। पिरवारक Ćितơा, समाजोमे बढ़वे केलिन जे कमलिन निह। तिहना छोटिकयो बहीिन अिछ। बहीनो डॉक्टर आ बिहनोइयो डॉक्टर। तिहना तँ िपताजी मिझिलयो बहीिनकेँ केलिन। दुनू परानी इंजीिनयर। बĦबईमे दुनू गोटे नोकरी करैत अि छ। जिहना तीनू बहीिन पढ़ल-िलखल अिछ तिहना बिहनोइयो छिथ। अजीव नजिर िपतोजीक छलिन। मनुįयक पारखी। तेँ ने बहीिनक िवआह समतुĪय बिहनोइक संग केलिन। एक माए-बापक तीनू बेटी, पढ़ल-िलखल, एक पिरवारमे पालल-पोसल गेिल, मुदा तीनूक िवचारमे एते अंतर कोना अिब गेलै। एिह Ćķक जबाव राधेĮयामकेँ बुझैमे अयबै निह करिन। मन घोर-घोर होइत। एक िदिश

मैिथली कथा २००९-१० 67 माइक अंितम अवİथापर नजिर तँ दोसर िदिश मिझली बहीिनक ĭयवहारपर। िवचारक दुिनयाँमे राधेĮयाम औनाए लगलाह। Ćķक जबाब भेिटबे ने करिन। अपन पिरवारपर सँ नजिर हटा बहीिन सभक पिरवार िदिश नजिर दौड़ौलिन। गौरीक ससुर उमाकाĠत हाई İकूलक िशक्षक रहिथन। अपने बी.ए. पास मुदा पėी साफे पढ़ल-िलखल निह। नाओ-गाँव िलखल निह अबिन। ओना िपता पंिडत रहिथन। मुदा बेटी कऽ पिरवार चलबैक लूिरकेँ बेसी महĜव देिथन। जािहसँ कुशल गृिहणी तँ बिन जाएत, मुदा ने िचŇी-पुरजी पढ़ल होइछै आ ने िलखल। ओना जरुरतो निह रहै। िकऐक तँ ने पित-पėीक बीच िचŇी-पुरजीक जरुरत आ ने कुटुĦब-पिरवारक संग। मुदा दुनू परानी उमाकाĠत आ सिरताक बीच असीम İनेह। माİटर सैहबकेँ अपन बाल-बच्चासँ लऽ कऽ िवńालयक बच्चा सभकेँ पढ़बै-िलखबैक माÿ िचĠता। जिह पाछू भिर िदन लगलो रहिथ। जखन िक पėी सिरता पिरवारक सभ काज सĦहारैत। एखनुका जेकाँ लोकक िजनिगयो फĪलर निह, समटल रहए। गौरीक पिरवारपर सँ नजिर हटा राधेĮयाम छोटकी बहीिन डॉ. सुिनताक पिरवारपर देलिन। जिहना बहीिन डॉक्टरी पढ़ने तिहना बिहनोइयो। जोड़ो बिढ़याँ। सुिनताक ससुर बैń रहिथन। जड़ी-बुņीक नीक जानकार। जिहना जड़ी-बुņीक जानकार तिहना रोगो िचĠहैक। जिहसँ समाजमे Ćितơो नीक आ िजनिगयो नीक जेकाँ चलिन। तेँ अपन िचिकĜसाक वंशकेँ जीिवत रखैक दुआरे बेटाकेँ डॉक्टरी पढ़ौलिन। पिėयो तेहने। अंगनाक काज सĦहािर, बाध-बोनसँ जिड़ओ-बुņी अनैत आ खरलमे कुटबो करैत रहिथ। दवाइ बैńजी अपने बनाबिथ िकऐक तँ माÿाक बोध गृिहणीकेँ निह रहिन। छोटकी बहीिनक पिरवारपर सँ नजिर हटा मिझली बहीिनक पिरवारपर देलिन। रीताक ससुर मलेटिरक इंजीिनयिरंग िवभागमे हेĪपरक नोकरी करैत। अपनिह िवचारसँ मलेटिरऐक बेटीसँ िवआहो - लभ-मैिरज- केने। मलेटिरक नोकरी, तेँ पाइयो आ रुआबो। हाथमे सिदखन हिथयार तेँ मनो सनकल। मुदा बेटा-बेटीकेँ नीक जेकाँ पढ़ौलिन। जिहना रीता इंजीिनयिरंग पढ़ने तिहना घरोबला। दुनू बĦवईक कारखानामे नोकरी करैत। कमाइयो नीक खरचो नीक, तिहना मनक उड़ानो नीक। एकाएक राधेĮयामक मनमे उठल जे आब तँ माइयक अंितमे समए छी तेँ एक बेिर रीताकेँ फेिर फोन कऽ कऽ जानकारी दऽ िदअए। मोवाइल उठा रीताक नĦवर लगौलिन। िरंग भेल बाजिल - ‘‘हेलो, हम राधेĮयाम।’’ ‘‘हेलो, भैया। अखन हम İटाफ सबहक संग काजमे ĭयİत छी।’’ रीताक जबाव सुिन राधेĮयाम सž रिह गेलाह। राितक दस बजैत। इजोिरयाक सĢतमी अĠहार-इजोतक बीच घमासान लड़ाइ िछड़ल। िकछु पिहने जिह चĠƖमाक Ĕयोित अĠहारपर शासन करैत, वैह चĠƖमा पछिड़ रहल अिछ। तेज गितसँ अĠहार आगू बिढ़ रहल अिछ। तिह बीच छोटकी बहीन डॉ. सुनीता आंगनसँ आिब भाय राधेĮयामकेँ कहलक- ‘‘ भैया, हम तँ भगवान निह छी, मुदा माइयक दशा जिह तेजीसँ िबगिड़ रहल छिन, तिहसँ अनुमान करैत छी जे कािŎ

68 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) साँझ धिर परान छुिट जेतिन।’’ एक िदिश माइक अंितम दशा आ दोसर िदिश रीताक िबचारक बीच राधेĮयामक धैयर्क सीमा डगमग करए लगलिन। िविचÿ िİथित। िजनगीक तीिनबņीपर वौआए लगलाह। तीिनबņीक तीनू रİता तीिन िदस जाइत। एक राİता देवमंिदर िदिश जाइत तँ दोसर दानवक काल-कोठरी िदिश। बीचक राİता पर राधेĮयाम ठाढ़। एकाएक िनणर्य करैत राधेĮयाम बहीिन सुिनताकेँ कहलिखन- ‘‘कने गौिरयो कऽ बजाबह।’’ आंगन जा सुिनता गौरीकेँ बजौने आएिल। दुनू बहीिनक बीच राधेĮयाम बजलाह- ‘‘बहीिन, जिहना हमर बहीन रीता तिहना तँ तोड़़ो सबहक िछअह। तेँ, तोहूँ सभ एक बेिर फोन लगा माइक जानकारी दऽ दहक। हम िनणर्य कऽ लेलहुँ जे जिहना एिह दशामे माइक रहनहुँ, ओकरा अपन िधया-पूतासँ अिधक निह सुझैत छैक तिहना हमहूँ ओकरा भरोसे निह जीबैत छी। तेँ जँ माए के जीिवतमे निह आओत तँ मुइलाक बाद नहो-केश कटबैक जानकारी निह देबइ। हमरा-ओकरा बीच ओतबे काल धिर संबंध अिछ जते काल माइक Ćाण बँचल छैक। कहलो गेल छैक ‘ भाए-बहीिन महीिसक सॴग, जखने जनमल तखने िभž।’ मन तँ होइत अिछ जे भने ओ एखन İटाफ सभक बीच अिछ, तेँ एखने सभ बात किह िदयै। मुदा कहनहुँ तँ िकछु भेटत निह, तेँ छोिड़ दैत िछयै।’’ जिहना अकासमे उड़ैत िचड़ैकेँ बंश रिहतहुँ पिरवार निह होइ छै तिहना जँ मनुक्खोक होइ तँ अनेरे भगवान िकऐक बुिŀ-िववेक दइ छिथन। िकऐक निह मनुक्खोकेँ िचड़ैइये-चुनमुनी आ िक चिरटंगा जानवरेक िजनगी जीबए देलिखन।’ बजैत-बजैत राधेĮयामोक आ दुनू बहीिनयोक करेज फाटए लगलिन। आँिखसँ नोर टघरए लगलिन। भाए-बहीिनक टूटैत संबंधसँ सभ अचंिभत हुअए लगलिथ। सबहक हृदयमे रीता नचए लगलिन। बच्चासँ िवआह धिरक रीताक िजनगी सबहक आँिखमे सिट गेलिन। एक िदिश रीता बĦबईक घोड़दौड़ िजनगीक Ćितयोिगतामे आगू बढ़ए चाहैत छिल तँ दोसर िदिश देवालमे टांगल फोटो जेँका सबहक हृदयमे चुहुट कऽ पकड़ने। जिहना बाँसक झॲझसँ बाँस कािट िनकालैमे कड़चीक ओझरी लगैत तिहना िध या-पूताक ओझरीमे रीता। ‘तीनू ननिद-भौजाइ ( गौिर, सुिनता आ रािगनी) माए लग बैिस मने-मन सोचए लगलीह। िकयो-ककरो टोकैत निह। तीनू गुमसुम। िसफर् आँिख नािच- नािच एक-दोसरपर जाइत। मुदा मन Ăेतबान रामेĂरम् जेँका। एक िदिश िजनगी रुपी भूिम (İथल) जेँका िवशाल भूभाग देखैत तँ दोसर िदिश मृĜयु रुपी अथाह समुƖ। यैह िथक िजनगी आ िजनगीक खेल। जिह पाछु पिड़ लोक आĜमाकेँ बिल चढ़वैत। तिह बीच माए बाजिल- ‘ रीता.....।’ रीताक नाम सुिन तीनूक हृदयमे ऐहेन धĸा लगलिन जिहसँ तीनू ितलिमला गेलीह। राितक एगारह बजैत। गामक सभ सुित रहल। इजोिरयो डुबैपर। झल- अĠहार। दलानक आगूमे, कुरसीपर बैिस राधेĮयाम आँिख मूिन अपन वंशक संबंधमे सोचैत रहिथ। मनमे अएलिन जे आइ सĢतमीक चान डुिब रहल अिछ,

मैिथली कथा २००९-१० 69 अĠहार पसिर रहल अिछ, मुदा िक कŎुका चान आइसँ कम Ĕयोितक होएत? की अिगला Ĕयोित पैछला अĠहारक अनुभव निह करत? सभ िदनसँ अĠहार- इजोतक बीच संघषर् होइत आएल अिछ आ होइत रहत। फेिर मनमे उठलिन जे आजुक राित हमरा लेल ओहन राित अिछ जे भिरसक माइक िजनगीक अंितम राित हएत। जिनका संग हजारो राित बीतल ओिहपर िवराम लिग रहल अिछ। िवचारक दुिनयाँमे उगैत-डूबैत राधेĮयाम। तिहकाल शबाना पोतीक संग पहुँचलीह। दलान-आंगनक बीच राİतापर दुनू गोटे चुपचाप ठािढ़। दुनू डेराएल। राधेĮयाम आँिख मुनने तेँ निह देखैत। परोपņामे िहĠदु-मुसलमानक बीच तना-तनी। जिह डरसँ शबाना िदनकेँ निह आिब अĠहारमे आएिल। िकऐक तँ सरोजनीक İनेह खॴिच कऽ लऽ अनलकै। रेहना शबानाकेँ कहलक- ‘‘दादी, अइठीन िकअए ठाढ़ छीही, अंगना चल ने?’’ रेहनाक अवाज सुिनतिह राधेĮयाम आँिख तकलिन तँ दुनू गोटेकेँ ठाढ़ देखलिन। पुछलिथ- ‘‘के?’’ शबाना बाजिल- ‘‘बेटा, राधे।’’ ‘‘मौसी।’’ ‘‘हँ’’ ‘‘एþी राित कऽ िकऐक अलेहेँ?’’ ‘‘बौआ, से तू नै बुझै छहक जे गाम-गाममे केहेन आिग लािग रहल छैक। पाँचम िदन सुनलॱ जे बहीिन बड़ जोड़ अİसक छिथ। जखने सुनलहुँ तखने मन भेल जे जाइ। मुदा की किरतॱ? मन छटपटाइ छलए। बेटाकेँ पुछिलयै तँ कहलक जे से तू नै देखै छीही रİता-बाटमे इĔजत-आवरुक लुिट भऽ रहल अिछ। मार-काट भऽ रहल अिछ। ऐहन िİथितमे कोना जेमए। मुदा मन नै मानलक। िजनगी भिर दुनू बहीिन संगे रहलॱ, आइ बेचारी मिर रहल अिछ तँ मुँहो नै देखब? जी-जाँित पोतीकेँ संग केने एलॱ।’’ कुरसीपर सँ उिठ राधेĮयाम शबानाक बाँिह पकिड़ आंगन िदिश बढ़ैत बहीिनकेँ कहलिख न- ‘‘मौसी एलखुन। पाएर धोइले पािन दहुन।’’ राधेĮयामक बात सुिन दुनू बहीिनयो (गौरी आ सुिनता) आ रािगिनयो घरसँ िनकिल आंगन आइिल। गौरी बजलीह- ‘‘मौसी, शबाना मौसी!’’ शबाना बजलीह- ‘‘हँ।’’ दुनू गोटे (शबानो आ रेहनो) पाएर धोए सोझे बहीिन (सरोजनी) लग पहुँच दुनू पाएर पकिड़ कनए लगलीह। कनैत देिख सरोजनी पुछलिख न- ‘‘कनै िकअए छेँ। हम िक कोनो आइये मरब? एþी राितकेँ िकअए एलैहेँ?’’ शबाना बाजिल- ‘‘ बहीिन, रİता-पेरा बž अिछ। दू बखर्सँ भौिरयो-बņा (घुिम-घुिम बेचनाइ) बž भऽ गेल। जखैनसँ अहाँ दऽ सुनलॱ, तखैनसँ मनमे उड़ी-बीड़ी लिग गेल तेँ िदन-देखार नै आिब चोरा कऽ अखैन ऐलॱहेँ।’’ सरोजनी बहुत कठीनसँ बाजिल- ‘‘िधया-पूता नीके छौ कीने?’’ शबाना कहलकिन- ‘‘ शरीरसँ तँ सब नीके अिछ, मुदा कारबार बž भऽ

70 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) गेल अिछ।’’ ‘‘गामो (नैहर) िदिश गेल छलेँ?’’ ‘‘नै। कžा जाएब....। तेसर सालक बािढ़मे अहूँक गाम किट कऽ कमला पेटमे चिल गेल आ हमरो गाम कोसीमे। आब सुने छी जे हमरो गाम भरनापर बसल हेँ आ अहूँक गाम कमलाक पछबिरया छहरक पछबिरया बाधमे। घनĮयामपुर तक तँ रİता छइहो मुदा ओइसँ आगू रİते सबपर मोइन फोिड़ देने अिछ। पौरुका जे जाइत रही तँ लगमा लगमे डूबै लगलॱ।’ सरोजनी गौरीकेँ इशारासँ कहलक- ‘‘ दाइ, बड़ राित भेलइ। मौसीकेँ खाइले दहक।’’ शबाना बाजिल- ‘‘बहीिन, पिहने हम कना खाएब? पिहने बौआ (राधेĮयाम) के खुआ िदऔ। खा कऽ सुित रहत। हम भिर राित बहीनसँ गप-सप करब। बहुत िदनक गप पछुआइल अिछ।’’ शबानाक बात सुिन राधेĮयाम मने-मन सोचए लगल जे दुिनयाँमे बहीिनक कमी निह अिछ। लोक अनेरे अĢपन आ बीरान बुझैत अिछ। ई सभ मनक खेल िछअए। हँसी-खुशीसँ जीवन िबतबैमे जे संग रहए, ओइह अĢपन। शवानाकेँ कहलक- ‘‘मौसी, माए तँ ने िसफर् हमरे माए छी आ ने अहॴक बहीिन। सबहक अĢपन-अĢपन िछअए, तेँ िकयो अĢपन करत की ने?’’ पूबिरये घरक ओसारपर राधेĮयाम सुतल। बाकी सभ पूबिरया घरमे बैिस गĢप-सप करए लगलीह। गौरी पुछलिन- ‘‘मौसी, अहाँ दुनू बहीिन तँ दू गामक िछअए। दुनू गोरेमे चीĠहा- पिरचए किहया भेिल?’’ शबाना बाजिन- ‘जइहेसँ ज्ञान-परान भेिल, तेिहयेसँ अिछ। हमरा बाप आ तोरा नाना (कका) कऽ दोसितआरै रहिन। कोस भिर पूब हमर गाम (झगड़ुआ) अिछ आ कोस भिर पिछम बहीिनक। अखन तँ दुनू गाम उपिट कऽ दोसर ठीन बसल अिछ। मुदा पिहने बड़ सुĠदर दुनू गाम छलै। गौरी बाजिल- ‘‘ मौसी, हम तँ बच्चेमे, बहुत िदन पिहने गेल रही। तइ िदनमे तँ बड़ सुĠदर गाम रहए।’’ शवाना बजलीह- ‘‘हँ, से तँ रहबे करए। मुदा आब देखवहक तँ िबसबासे ने हेतह जे अइह गाम िछअए। हँ, तँ कहै छेिलहह, काकाकेँ ( गौरीक नाना) बहुत खेत-पथार रहिन। चािर जोड़ा बड़द खुņापर, चािर-पाँचटा महीिसयो रहिन। मुदा हमरा बापकेँ खेत-पथार नै रहए। गामेमे खादी-भंडार रहए। सौँसे गामक लोक चरखोे चलबै आ कपड़ो बीनए। सभसँ नीक कारीगर रहए हमर बाप। घरक सभ िकयो सुतो काटी आ कपड़ो बनबी। सलगा, चĿेिर, गमछी आ धोती बीनएमे हमरा बापक हाथ पकिड़िनहार िकयो निह। बहीिनक गामक सभ हमरे बापसँ कपड़ा कीनए। सौँसे गामसँ अपेछा रहए। पाँचे-सात वखर्क रही तिहयेसँ बहीिनक ( ऐठाम) अइठीन जेबो किरयै आ खेबो किरयै।’’

मैिथली कथा २००९-१० 71 शबानाक बात सुिन गौरीकेँ अचरज लगलै। मने-मन सोचए लगली जे एक तँ गरीब तहूमे मुसलमान। तिह बीच दोİती। मुİकी दैत रािगनी बाजिल- ‘‘कोन पुरना िखİसा मौसी जोित देलिखन। ई कहथु जे दुनू बहीिनक िबआह एĸे िदन भेलिन?’’ शबाना बाजिल- ‘धूरर् किनयाँ! अहाँ की बजै छी। हमरासँ बहीिन दू-तीन बरख जेठ छिथ। बहीिनक िवआहसँ दू वखर् पाछु कऽ हमर िवआह भेल। कĸा हमरा बापकेँ कहलिखन जे पूबिरया आ दिछनविरया इलाका कोिशकĠहा भऽ गेल तेँ आब कथा-कुटुमैती उþरेभर करब नीक हएत।’ कžे गुम रिह, शबाना बाजिल- ‘‘ बेटी, कपारक दोख भेल। आब अपनो बुझै छी जे नैहरक काजक जे महौत छेलै से अइ काजक (भौरीक) नै अिछ। मुदा की किरितयै? अइठीम ( सासुर) उ काज अिछये निह। ने खादी-भंडार छै आ ने कारोवार अिछ।’’ मुİकी दइत रािगनी बाजिल- ‘‘ मौसी, अपना िवआहमे तँ हम किनयेटा रही। सभ गप मनो ने अिछ। िहनका तँ मन हेतिन, िवआहमे झगड़ा िकअए भेल रहए?’’ कने काल गुम रिह शबाना ठाहाका मािर हँिस, बजए लगलीह- ‘‘ अहाँक बावू बड़ मखौिलया रहिथ। हँसी-चैलमे ककरो नइ जीतए देिथन। घरदेखीमे अयलिथ। हम दुनू बहीिन खूब छकौिलएिन। पीढ़ी तरमे खपटा, झुटका आ रुइयाँ तिर कऽ सेहो देिलएिन। खा कऽ जहाँ उठलाह िक एक डोल किरĸा रंग कपारपर उझिल देिलएिन। मुदा हुनका िलए धिन सन। तिहना बिरआतीमे ओहो छकौलकिन। सबहक धोतीमे चािर-पाँच िदनक सड़लाहा खैर लगा देलकिन। पिहने तँ बिरआती सभ अपनमे रĸा-टोकी केलक। मुदा जखन भाँज लगलै जे घरवारी सभकेँ सड़लाहा खइर लगा देलक। तखन बिरआितयो सभ टूटल। मुदा कहे-कही भऽ कऽ रिह गेलइ। मािर-पीिट निह भैल।’’ किह हँसै लागिल। सभ हँसल। राधेĮयाम ओसारपर सुतल रहिथ। मुदा एĸो बेिर आँिख बž निह भेलिन। िकऐक तँ मनमे शंका होइत जे अनचोकेमे ने माए मिर जाए। िखİसे-िपहानीमे राित किट गेल। भोर होइतिह शबाना राधेĮयामकेँ कहलक- ‘‘ बौआ, अपन मन अिछ जे आब बहीिनकेँ एक काठी (लकड़ी) चढ़ाइये कऽ जाएब। मुदा गामे-गाम जे आिग लगल देखै िछअए तइसँ डर होइए।’’ राधेĮयाम- ‘‘मौसी, एिहठाम िकयो िकछु निह िबगािड़ सकैत छओ। जिहया तक तोरा रहैक मन होउ, िनभŰकसँ रह।’’

72 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) शवाना बाजिल- ‘‘बौआ, मन होइए जे बहीिनक सभ नुआ-िबİतर हम खीिच िदअए। फेिर ई िदन किहया भेटत’’ राधेĮयाम- ‘‘दुनू बहीिनक बीच हम की कहबौ। जे मन फुड़ौ से कर।’’ इĦहर आब राधेĮयामक माए सरोजनीक टनगर बोलो मिŀम भेल जा रहल छलिन।

मैिथली कथा २००९-१० 73

साकेतानĠद विरơ कथाकार, गणनायक (कथा-संƇह) लेल सािहĜय अकादेमी पुरİकारसँ सĦमािनत। Ćकािशत कृित: मैिथली कथा सािहĜयमे 1962 स’ सिƅय । गोडेक चािलस_पचास टा कथा, िरपोतŭज. संİमरण, याÿा_िववरण मैिथलीमे Ćकािशत अिधकांश पÿ_पिÿकामे छपल । पिहल मैिथली कथा “ग्लेिसयर” 1962मे ‘िमिथलािमिहर’मे Ćकािशत । िहिĠदयोमे दू दजर्न कथा आिद Ćकािशत । सन 99मे छपल पिहल कथा_संƇह “गणनायक’ के ओही वषर् ‘सािहĜय अकादमी पुरİकार। पैघ बाĠध’ स’ अबैबला िवपिþके रेखांिकत करैत, पयŭवरण के कथा वİतु बना क’ राजकमल Ćकाशन स’ Ćकािशत एवं अĜयंत चिचर्त उपĠयास (‘डौकूमेंƏी िफक्शन’) “सवर्İवांत” ।आकाशवाणीक राįƏीय कायर्ƅममे Ćसािरत दू टा उĪलेखनीय वृþ रूपक _ ‘महानĠदा अभयारěय’ पर आधािरत “जंगल बोलता है” एवं झारखंड के Ƈामीण क्षेÿक Ĕवलंत डाइनक समİया पर आधािरत वृþरूपक “ नैना जोगन” चिचर्त एवं Ćिसŀ ।- सĦपादक। कृतं न् मĠये “नँइ बाबू साहेब, तलाशी तँ एक-एक वİतुक हएत, पुिलस पाटŰ आिब रहल अिछ...एस.पीए साहेबकेँ औडर्र छै, साहेब अपनिह आिब रहल छै... झट द’ जनी-जाितकेँ ल’ एक कात भ’ जैयौ...!” सभ साल परबी ल’ जाइबला हुनकर गाम चांवरडीहक चौकीदार अजोधी ; नमोनारायण िसंहकेँ किह रहल छलिन। कहै कहां छलिन महराज ! िधरा रहल छलिन, धमका रहल छलिन; बाप-दादाक बनाएल घरकेँ तुरंते खाली करैक फरमान सुना रहल छलिन। चांवरडीह गाम धिर छैक बेस झमठगर । बारहो बरन बसै छल अिछ अिह दू धारक बीच, लमछुरका जमीनपर बसल ई गाममे। बीच गाम देने सडक; जे आब तँ धारपर पुल भ’ जेबाक कारणे सीधे िजला मुख्यालय तक जाइ छैक, मुदा तिहया कतए पाबी ? तिहया एक पेिडया िक सुखŰ बला सडकक चलनसार छलै। साफ-साफ कहॴ तँ अंƇेजक अमलदारी छलै। बाबू साहेबक गाम, ताहूमे नमोनारायणक İवगŰय िपता जीकेँ तहसीलदारसँ घुňी सोहार, तैं अमला-फैला, कर-कचहरी सभ ठां बाबू जयनारायण िसंहक जयजयकार होित रहै तािह िदन

74 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) चांवरडीहमे। भिर चौमासा तँ एतए आएब असंभवे छलै जे नीको समए सालमे तिहया, गाम आएब बड दुरूह रहै। तखन भिर बरसात नावक सवारी रहै। गरीबो लोकके एकटा घसकņीयो, नाव जरूर होइ छल। मुदा सभ एĸे बेर दमदमाकेँ पहुंिच गेलै....दू जीपमे भिर क’ िसपाही रहै। ओकर संग हवलदार आ एकटा डी.एस.पी.। सभ हिथयार बĠद , जेना कोनो पैघ डकैतकेँ पकडैले आएल हुए। नमोनारायण अवाक् भेल आंगनक मोखा लग जे ठाढ भेलासँ िकĦहर पडे़ता िक की करता से िकछु फुरेबे निह करिन। ताबे एकटा िसपाही पाछांसँ िहनकर गंजी पकि़ड क’ अपना िदस टनैत पुछलकिन- ” तोरे नाम नमोनारायण िछयह...? चलए एस.पी. साहेब बजबै छथुन।“ नमोनारायण सदर् पि़ड गेला, नमोनारायणक मुँह कारी भ’ गेलिन, नमोनारायण मुँहमे धान दैथ तँ लाबा होिन । जिहना गंजी धोतीमे छला तिहना िसपाहीक पाछां-पाछां िवदा भेला बड़ए गाछतर, जािहठाम कािŎयेसँ िज़लाक एस.पी. कैĦप केने छै । वैह चतरलका बडक गाछ तँ एखनहु छैहे गवाही सभ कथुक। अही गाछ लगसँ सवणर् आ महादिलत टोला अलग-अलग होइ छै । अही बड़क गाछक चलते लोक चांवरडीहक दिलत बİतीके ‘बडतर टोल’ कहैत रहै। नमोनारयणक İवगŰय िपता, जे अिह कुकांडक नायक छला, से तँ गेला सुरपुर धाम। बांचल छिथन हुनकर एकमाÿ सुपुÿ, जे बिलदानी छागर जेकाँ बिढ रहल छिथन ओž जतए निह जािन कैक युगक तामस, घृणा आ बदलाक भावनासँ भरल एस.पी. Ćतीक्षा क’ रहल छिन। पिहने तँ चांवरडीहक आम Ƈामीणे जेकाँ िहनको पता निह रहिन जे ई सभ िकयैक भ’ रहल छिन, पुिलस एकाएक िहनकर घर-आंगनक एना तलाशी िकयैक ल’ रहल अिछ? मुदा एस.पी.क नाम आ ई जिनते जे एस.पी. वैह घनĮयामक जमाए भाİकर िछयै; सभ बात िबजली जकां िदमागमे िछटिक उठलिन...आइसँ पच्चीस बरख पिहलुका घटना एना लागए लगलिन जेना काŎुक घटना हो ! ओ सभ बात िहनका आ िहनकर िकछु बूढ़ िदयादेटा के ने बूझल छिन? गामक लोक ई सभ कतएसँ जनलकै? खाएर, आब तँ जाइये रहला अिछ । आिखर कोन कारणसँ पुिलस घरक ओ दशा क’ रहल छिन आ िहनकर चोर-डकैत जकाँ पेशी भ’ रहल छिन, सेहो तँ लोककेँ बुझए जोगर होइतै? मुदा जेना भ’ क’ पुिलस घर ढुकलिन आ जेना भ’ क’ सचर् क’ रहल छिन....राम-राम ! से िक ई कोनो अपराधी छला अिछ ? होिथ िक निह होिथ; पुिलस तँ एखन तेहने ĭयवहार क’ रहल छिन; जेना चोर-डकैतक घरक तलाशी लेल जाइ छैक, तिहना एक-एकटा वİतु-जात खोिल-खािल क’, एþे तक जे कोठीक चाउर तक िनकािल क’ तलाशी ल’ रहल रहिन। ओ बड गाछ िदस जाइयो रहल छिथ आ सोिच रहल छिथ जे घनĮयमवाक ओ जमाए भाİकर एस.पी. बनत, आ बनबो करत तँ अही ि जलामे आओत, ई तँ किहयो सपनोमे ने सोचने रहिथन। ... एह बातो आझुक िछयै ? जोडबै तँ कैक युग बीत जेतै! कोिसक झमारल चांवरडीह गाम, बारहो मास तीसो िदन अबै-जाइमे बड़

मैिथली कथा २००९-१० 75 तकलीफ होइ लोककेँ। भूिलये-भटिक क’ कोनो सर-कुटुĦब अबए। आजुक हाल देिख क’ तँ अहांकेँ परतीते ने हएत जे वैह चांवरडीह िछयै! रोग-बेरामी, पर- परसौत जँ गडबडायल तँ जाबे अहां चरŭइन िक सहरसा पहुंचब गे, रोगी भगवान लग दािखल भेल रहत। तािह िदनुका बात भेलै जखन कोसी, जंगल आ अंƇेज सन जािलयाक शासन रहै...मुंॅह देिख क’ मुंगबा परसैबला ! तिहया पुिलस थाना, कोटर् कचहरी जे रहिथ से जयनारायण िसंह छला। हुनकर फैसला पिहल आ अंितम होइ छलै तिहया अिह गाममे ! अही गाममे ओ वर बिन क’ आएल रहै...यैह बडक गाछ तर ओ कुसŰपर...आंॅिखमे काजर, गलामे बेली फूलक मौलाएल जाइत माला पिहरने बैसल रहै...बगलक खाटपर ओकर िपता आ िपþी बैसल रहिथन । घनĮयाम, ओकर होइबला ससूर पीयर धोती आ गोलगला पिहरने अपन फूल सनक बेटी फुलमितयाक होइबला वरकेँ देख क’ मोन हुलिस आएल छलिन चांवरडीह गामक अधवयसू आ अपन समाजक Ćितिơत सदİय; घनĮयामके । ओ हलसल- फुलसल अपन आंगन िदस जा रहल छला जे अपन मोनक आƪाद अपन लोक, जनी-जाितकेँ कहिथ आ वर-विरयाती लए पान-सुपारी-बीडी-िसगरेट आिद आनिथ। मोन गदगदायमान छलिनहें जे बडतर; जतए वर-बिरयातीक डेरा माने जनवासा रहए, ओþएसँ उठलै हĪला...मचए लगलै गदर् आ गूंजए लगलै आतर्नाद िनरपराधक । “मार सारकेँ ! घेर क’ मार सभकेँ..क्यो बचौ निह, देिखहें नमोनारायण ! एह, खिटयापर मटोमाट केहन अिछ ? सुनरा! ला फरसा आ छफािट ले सबहक कुŎा !!” जयनारायण िसंह अपन चानीक मूिठ लागल डंटाकेँ चलाइयो रहल छला आ गरिजयो रहल छला। ठीक कोनो राक्षस सन लािग रहल छला। जखन ओ एकरा लग, माने भाİकर लग पहुंचल रहिथ तँ माला पिहरने, थरथर कंपैत भाİकर धधकैत जयनारायणक आंॅिख िदस बड कातर भावे देखने रहिन आ कल जोिड क’ ठाढ होइते रहै जे चानीक मूठ बला लाठीक समधानल वार पीठपर भेलै आ तकर बाद की भेलै...कोना ओ पडा क’ ककरो घरमे शरण लेलक...कोना ओकर िबआह भेलै...टूटल हाथ-पैर लेने ओ आ ओकर बाप-िपþी कोना अहल भोिरये किनया संग ल’ क’ नावपर पड़एला... सभ ओकरा सपना सन लगैत अएलै अिछ एखन धिर । पिढते रहय तँ एक बेर फेर एतए आएल तँ पता चलल रहै जे जे किनयांॅसँ एकर िबआह भेलै, ओकरापर नमोनारायणक नज़िर बहुत िदनसँ गडल रहिन, तेँ ओना तांडव मचौने छला ओकर िबआहक राित। कहां दन तीन िदन तक अिह टोलक लोक थर-थर कंपैत घरमे सुटकल रहल। ओ तँ सुकुर भेलै जे वर-विरआती संगे ओ राता-राती िनकिल गेल...ने तँ जान बांचब मोिİकल रहै ओइ राित । ओही िदन ओ संकĪप केने रह जे ओ पढत, खूब पढत आ पुिलसक नौकरी करत।...साल दू सालपर ओ चांवरडीह आबै...छुņा सांढ जकां सभ कथूपर मुंॅह मारैत पिहने जयनारायणकेँ देखैत रहै आ तकर बाद ओकर बेटा

76 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) नमोनारायणकेँ, जे एखन सुटुकिपĪली सन िसपाहीक पाछां-पाछां बिलदानी छागर सन बढल जा रहला अिछ, िजĦहर अिह पलक Ćतीक्षा कैक युगसँ करैत अबैबला एस.पी. भाİकर ,सžŀ बैसल अिछ। मुदा ई घटना कोनो आजुक िछयै ? पच्चीस वषर् पिहने भेल अपराधक सजाए, ओकरा आइ देल जेतै ? ओकरो अइ घटनाक पĀाताप भेल रहै। समए बदलल रहै, युग बदललै, नमोनारायणकेँ िवचारो बदलल रहिन। ई तँ सपनोमे नै सोचने रहिथन जे घटना चƅ अिह तरहें घुमतै। बाबुओकेँ मुइना तँ आब पंƖह वषर् भेल हेतिन।...पता निह, पुिलसकेँ आंगनमे घुिसते ओकर माए आ किनयांॅ कतए गेलै ! की पता ? ओहू राित ककरो कहांॅ पता चललै जे वर-विरयाती िक किनयांॅ कतए गेलै? कुĦहर पडेलै? भिर गाम तँ जयनारायण िसंहक िसंहगजर्ना सुनैत रहलै-- “...मैिƏक पास जमाय छै तँ की ? आिग मूतत ? एþेटा साधंस जे हमरा सबहक सामने खाट-कुसŰपर बैसत...एþे धू-धू-पू-पूसँ बेटीक िबआह करत? से की हम सभ मोसĦमात ? िक ई सभ बाबू साहेब बिन गेल ..? खच्चर निहतन...।“ संग िसपाहीक जाइत ओ िफर क’ अपन Ņार, आंगन आ बरंडा िदस तकलिन...घरक सभ सामान ओइपर िरĿ-िछĿ भेल छलै...बक्सा...अलमीरा... पलंग...ओकर किनयांबला Ƒेिसंग टेबुल...ओकर, माइक आ बाबूक पुरना पेटी, ओकर भी.आइ.पी. सभ मुंॅह बेने...ओकरा देखल निह गेलै ! आिखर ओकरा कोन अपराधक सजाए भेट रहल छै...जे आइसँ पच्चीस वषर् पिहने भेल छलै ? ओ आगां-आगां जाइत िसपाहीक पीठ िदस ताक’ लागल िक तखनिह माइक आवाज़ सुनाइ पडलै--”बौआ, हमहूं अबै िछय’ !” नमोनारायण पाछां पलिट क’ घरक सभ वİतु-जातकेँ देखैक बदला उĔजर साडीमे डोलैत मायक काया देखै मोनमे होइ छिन जे ‘ ई कथी लए संग लािग गेली ?’ फेर भेलिन जे कहॴ-कदाच माएकेँ देिख क’ जँ एस.पीके दया आिब जाइ, भाİकरक मोन पिघल जाइ...! भिर गामक लोक अपन-अपन दरवाजापर सँ अपन-अपन डांडपर हाथ धेने अइ घटना ƅमके, अपन-अपन ढंगसँ देिख रहल छल, अथर् लगा रहल छल। खाली बूढ-बुढानुस, दर-देयादकेँ पिछला सभ बात फटसँ मोन पि़ड एलै...जयनारायण िसंहक चानीक मूठ बला लाठी मोन पिड एलै.... नमोनारायणक सांढ जेकां सभ हक खेतमे मुंॅह मारैक लुतुक मोन पडलै...ओकर बापक कारİतानी सभ मोन पडलै। जखन बापे गुंडइ िसखाबे तँ बेटाकेँ की कहल जाए ? मुदा ई जरूर जे ई सभ भेना बहुत िदन, पचीसो साल भेलै...आब गडल मुदŭ उखाडल जेतै ? नमोनारायण दुनू बाप-पुते तिहया जे केने रहै, तकर सजाए आब देतै भाİकर एस. पी. ? नै देबाक चाही ? जिहना खूनक घॲट पुĮत-दरपुĮत िपबैत आएल, तिहना िपबैत रहए ? िक ओइ राित ई दुनू बापं-पूत पशुतोक सब सीमाक उĪलंघन निह केने रहिथ जखन िक वर बिन क’ ई गाम आएल भाİकरकेँ दुनू बाप-पूत िमल

मैिथली कथा २००९-१० 77 क’ बिरयातीक संगे अइ लेल मािर पीट क’बेइĔजत-बेइĔजत केलिखन जे ओ लोकिन खाटपर आ वर कुसŰपर िकयैक बैसल अिछ? ई चांवरडीह िछयै, बाबू साहेबक बİती...तािह ठाम ई मजाल? लगलै जे िहनके दुनू गोटेक ज़िमĠदारीमे बसल हो सभ क्यो ! तेँ गामक लोक डांडपर हाथ देने, आगां-आगां िसपाही, तकर पाछां ओ, आ सभसँ पाछां हुनकर िवधवा माएकेँ दिलत-टोला जाइत देखैत रहल। मुदा, ने क्यो सबदल आ ने क्यो संग देलकिन !

बुझले अिछ जे नमोनारायणकेँ देिखतंिह एस.पी. केँ की भेल हेतै । पचीस वषर् बीतल होइ िक पचास...ई सभ िबसरैबला बात छै ? तेँ नमोनारायणकेँ सिर भ’ क’ एस.पी.क हाथो जोड़ल निह भेल रहिन जे अशोक-चƅक मूिठ लागल एस.पी.क हंटर सटाक पीठपर लागल रहिन...जाबे ई िकछु सोचिथ िक दोसरो हंटर बजरलिन, जे हुनकर पीठपर गुणाक िचƭ बना देने छलिन आ जे हुनका मािमर्क चोट पहुंचबैए पयŭĢत छलिन। हुनकर िचĜकारसँ ओिह ठाम उपिİथत हुनकर सभ गॱआक मोन दहिल गेलै तँ कोन आĀयर् ! मुदा कठोरसँ कठोर अपराधीकेँ मनोबल तोडबाक, तोिड क’ सĜय बोकरेबाके Əेिनंग भेटल छैक ओकरा; तैं ओकर कडकदार आवाज़ गूंजैत अिछ--”हवलदार ! अइ डािरसँ उĪटा लटका एकरा !” भूिमपर भाİकर एस.पी.क पैर गरेछने माइक काया थरथरा उठैत छिन, संभवतः दांती लािग जाइ छिन कþौसँ एकटा मिहला िसपाही Ćगट होइत अिछ आ माइक पिरचचŭमे लािग जाइत अिछ।मुदा नमोनारायणक डांडमे रİसा बĠहा गेल अिछ...बस आब िहनका लटकैले जाइबला अिछ।िहनकर मुंहमे गदŭ उिड रहल छिन... ...चेहरा कारी भ’ आएल छलिन...बुिŀ काज निह क’ रहल छलिन...िसņी- िपņी गुम। पीठ परहक चोटक संग अबैबला कƠक कĪपने करैत चौĠह अबैत रहिन। “िकयै, हमरो अिहना चोट लागल रहै रे नमोनारायण...एखन तँ िकछु भेबे ने केलौए...तोहर लाठीक मािरसँ तँ हमर िपþी दुइयो मासने बचला...हमर बापक माथक ददर् किहयोने छुटलिन...तोरा तँ साले...!” ताबे चांवरडीह गामक एĸा-दुĸा Ƈामीण बडतर एकňा हुअ’ लागल छलै...िहनकर मिसयौत दौिड क’ गेल आ िनहोरा-िमनती क’ क’ घंĮयामकेँ िखंचने आएल। ओहो सामनेक दृįय देिख भीडमे अवाक् भेल ठाढ...।पिहने सþो

78 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िनकलला तकर बाद धीरे-धीरे सभ हाथ जोडने कातर भावसँ देखैत। ”मर, तँ अहांकेँ एþए केँ बजेलक ? गैरलाइसेंसी हिथयार एकर घरसँ बरामद भेलैए, एकरा जेल हेतै !” एस.पी. तþे जोरसँ बजला जािहसँ गामक लोक ठीकसँ सुिन िलयै। उþरमे क्यो िकछु निह बाजल। बजै जोग िकछु शेषो निह रहै। सब बस गुम भ’ क’ भाİकर एस.पी.के देिख रहल छल। ओ पिहने अपन ससुर घनĮयामक नत दृिƠ आ बादमे अपन सासुरक सभ गोटाक क्षमाक मूक गोहािर अनुभव केलक...आगांमे पडिल नमोनारायणक माइक उĔजर साडीमे लपेटल काया छलैक।ओ चारूकात नजिर घुमा क’ देखलक...अइ ठाम अĜयंत कातर भावसँ ओकर ĆĜयेक िƅया-कलापकेँ देखैत आन क्यो निह, ओकरसासुरक लोक अिछ ,जकरा ओ बच्चेसँ देखैत आिब रहल अिछ । अनकňल चुĢपी िक िनगूढ शांितकेँ भंग करैत भाİकर एस.पी.क İवर बडतर फेर गूंजल--”हवलदार ! खोिल दिहंक...आब एकरा ककरो अपमान करबाक साधंस निह हेतै ।“

*** (ई कथा “कृतं न् मĠये” āी आर.बी. राम सेवा िनवृþ आइ.जी. के सİनेह एवं सादर ! लेखक।)

मैिथली कथा २००९-१० 79

सुजीत कुमार झा

िĆयंका गामसँ छुņी िबतओलाक बाद काठमाěडूम जा रहल छलॱ । बसमे चिढ़ते एक युवतीके देखिलयै तþ क्षण मन रोमांिचत भऽ उठल मुदा अपनाके सĦहा। रैत िसटपर बिस गेलॱ । युवती हमरे पाछुमे बैसल छली । बेर—बेर हमर मोन ओिह युवती िदश आकृƠत होइत छल ओकरासँ बात करबाक हेतु । तथािप हम अपन मनके िनयिĠÿ तँ कऽ ढĪकेसवर, पथलैया, हेटौडा, नारायणगढ़, मुगिलंग पार करैत कतेको İटेौशन गनैत काठमाěडू पहुँचलॱ । काठमाडू बस पड़ावमे पहुँचैत—पहुँचैत Ćायः सभ याÿी उतिर गेल छल । माÿ ओ युवती आ हम बाँिच गेल छलॱ । हम अपन बैंग सĦहाौिर उतिर गेलॱ । हमरे पाछा—पाछा ओ युवती सेहो उतिर गेली । हमर हृदय जोर जोरसँ धड़कऽ लागल िक आब ओ अपन घर चिल जएती । हम हुनकासँ गĢपह करबाक लेल Ĥय्ाकुल छलॱ । बस पड़ावमे उतैरते पािन िटप िटपाए लागल । हम बैंगमेसँ छþा िनकािल लेलॱ । सिमपमे ओ युवती चुपचाप ठाढ छलीह । कखनो ओ बाट िदस तकैत तँ कखनो घड़ी िदस । िकछु देरकबाद हम िहĦमोित कऽ हुनका सँ पुछिलयैिन अहाँके कतऽ जाइकेँ अिछ ? िबनू बजने ओ हमरा िदस तकली आ फेर अनुहार झूका लेली । हम िहचिकचाइत हुनकासँ पुनः पुछिलयै, अहाँ कतऽ जेबै ? ओ हमरा िदस देख कऽ कहिल ‘कतौ निह ।’ हमरा चटकन जेकाँ लागल आ हम मुक रिह गेलॱ । िकछु देरक बाद पािन सेहो जोड़सँ बिरसए लागल छलैं हम छाता िनकािल डेरा िदस िबदा भऽ गेलॱ । तखने पाछुसँ आवाज आएल ‘सुनु तँ ।’ हम पलिट कऽ देखलॱ ओ İवोर ओिह युवतीके छल । हम िहĦमाित कऽ

80 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) हुनकासँ कहिलयैन ‘कहू ?’ ‘अहाँ कतऽ जेबै ? ’ िकछु सकुचाइत लड खडाएल İवतरमे पुछली । कुपěडो लऽ, ओना अहाँके कतऽ जएबाक अिछ ? हम पुछिलयैक । ‘जी हमरा...कतौ निह ।’ हम तमसाइते किहलयौ ‘ बहुत भारी बात अिछ । एखने अहाँ बजओने छलॱ आ पुिछ रहल छी तँ बताबए निह चाहैत छी । िठक छै ‘ई किह हम पुनः जायकेँ लेल िवदा भेलॱ । िकछु डेग चलल छलॱ िक हमरा कानधिर ओ युवतीके िससकए कऽ अबाज आएल । हम पलिट कऽ देखलॱ । ओ ओढ़नीमे मुँह नुकाँ कानए लगली । हम फेर रुिक गेलॱ । आब हमरामे गĢपन करबाक िहĦमलित तँ आिबये गेल छल । अतः हम सिमपमे जा कऽ पुछिलयैए ‘अहाँ कािन िकए रहल छी?” हमरा पुछलाकबाद ओ आओर जोरसँ कानऽ लगली । हम घवरा गेलॱ िक यिद िकयो ई सभ देखत तँ िपटाइ अवĮयँ हएत । अतः हुनकासँ किहलयिन ‘कृपया अहाँ कानव बĠद करु आ बताउ जे अहाँके कतऽ जएबाक अिछ । हम एक नोकरीहारा सĥयह ĭयिक्त छी हमरापर िवĂास करु । एिहपर ओ वजली, हमरा कोनो घर निह अिछ, हमरा लेल ई शहर अनजान अिछ तें.. । हम आĀयर्मे पिड़ गेलॱ एक अित सुĠदार, जुआन असगरे युवती आिखर एिह पहाड़क शहर काठमाěडूजमे की कऽ रहल छैक ? अनेक Ćķल मानसपटलपर घुमल । हम कहिलयै ‘ ओना अहाँ जाए कतऽ चाहैत छी ? ’ एतऽ सिमप कोनो होटलमे जा कऽ असगरे कोना िवताओलजाऽ सकैत छैक ? आई अहाँके घरमे रिह सकैत छी... ? यिद अहाँ कही तँ ? ई बात सहजिह किह िससकए लगली । हनुकर गĢप सुिनकए मनमे गुदगुदी सेहो भेल आ डर सेहो लािग रहल छल हम हुनकर बैंग उठा िवदा भेलॱ । टैक्सीमे बैिस कुपěडोलल एलॱ । पुरा बाट हम चुप रहलॱ । घरमे आएलाक बाद ओ चारु िदस देखऽ लगली हम हुनका बैसऽ किह İवयं Ąेस होबऽ बाथरुममे चिल गेलॱ । िकछु देरक बाद घूिमकए एलॱ तँ ओ अनिचĠहार युवती पुरा घरकेँ िठकठाक कऽ देने छल हम मुिİकया कऽ हुनका िदस तकलॱ एिहपर ओहो मुिİकुया देली । हम पुछिलयै— िकछ खाएब ? ओ चुिĢप रहली तँ हम कहिलयिन आब चुĢपओ रहलासँ काम निह चलत। एकरबाद हम İटोपभपर चाह चढ़ा देिलयै आ गामसँ माए बटखचŭके लेल बिगया देने छल तेकरा दूटा Ģलेहटमे धऽ हुनको देिलयै आ हमहु लेलॱ । ओ चुप—चाप खाए लगली । एकरा बाद हमरा गĢपस करबाक उĜसुकता

मैिथली कथा २००९-१० 81 भेल, तँ पुछिलयै आब अहाँ सĜयच गप कहुँ अहाँ के छी ? ‘हमर नाम िĆयंका अिछ आ हम धनुषा िजĪलाँके रहएवाली छी । हमरा घरमे माए बाबुजीक अितिरक्तह दूटा छोट भाए आ एक बिहन अिछ हम जीवनमे िकछु करए चाहैत छी, िकछ बनए चाहैत छी परंच हमर गामे ई सĦभइव निह अिछ । बाबुजी हमर िवआह गामक लगमे परवाहा गाम छैक ओþै करा रहल छलाह । तें हम भािग एलॱ । हम एस.एल.सी. पास कएने केने छी । हम नाम कायम चाहैत छी, जीवनमे संघषर् करऽ चाहैत छी । तेँ हेतु एिह राजधानीमे एलॱ अिछ ... आब तँ िकछु कएलाबकाद घूिरकऽ जाएब । बसमे एकदम शाĠतह सौĦयम बैसिल ओ युवतीक वाक पटुताके देख हम आĮयचर्मे छलॱ । हम कहिलयिन— ई अहाँ िठक निह कएलॱ घरक लोक कतेक िचिĠतुत हएत । होमए िदयै । यिद िवआह भऽ जाइत तँ हम कतेक िचिĠतकत रिहतॱ?’ िवआहसँ केहन िचĠताद? अहाँकेँ अपन घर पिरवार रहैत ....” जी निह, हम असगरे İवतĠÿँ रुपसँ िकछु करए चाहैत छी । की ? अहाँ िचिĠतनत निह होउ । हम भोरे चिल जाएब । कतए ? ‘कतौ... नोकरी ताकए ।’ नइ अहाँ असगरे निह जाएब हम अहाँके सँगे चलब । आ केटलीमे सँ चाह छािन दुनू गोटे लऽ लेलॱ आ भात चढा़ए देिलयैक । चाह िपलाक बाद राित भऽ गेल छलै तेँ बजारसँ तरकारी लाबए लेल हम िवदा भेलॱ ।

भोजनक बाद हम हुनका घरमे छोिड़ अपने वरěडापर ओछाइन कऽ सूित रहलॱ । ओछायनपर सुितकऽ सोचए लगलॱ ‘ मन पसंद युवती सेहो िवआह करए लेल निह भेट रहल छल से भगवान िĆयंकाकेँ हमरा लेल पठा देलैथ । सुडौल, पढ़लिलखल, सुĠदभर किनयाँ हो तँ आओर की चाही हम मनेमन योजनामे उलिझ गेलॱ आ लागल जेना हम हुनकासँ Ćेम करऽ लागल होइ । परात भेने िĆयँका तैयार भऽ कए जाए लगली तँ हम कहिलयिन, ‘ चलु हम अपन एक पिरिचतसँ भेंट करबै छी सĦभवतः नोकरी भेिट जाएत । हमर योजना छल िक हम हुनका एतै रोिक ली आ हुनका िवआह करबाक लेल मना ली । हम िĆयंकाकेँ अपन पिरिचत मानबहादुरसँ भेट करओिलयैन। ओ िहनका देख बड़ खुशी भेल । आ िĆयंका सेहो मानबहादुरक बैभवकेँ देिख अकचका लगली । हमर िनवेदनपर मानबहादुर अपन कायŭलयमे नोकरी दऽ देलकैन । आब सभ िदन भोरे हमरे सँग िनकलैत छली आ राित हमरे घरमे

82 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िवतबैत छली । हमरा दुनू गोटेमे एखनो तक दूरी यथावत छल । िकछु िदन िवतलाक बाद हम हुनकासँ िहलमील गेलॱ तँ िहĦमीत कऽ हुनका सĦमुलख िवआहक Ćİताकव रखिलयै । ई सुिन ओ अकचका गेली आ िकछु निह बजली । सांझखन हम मानवहादुरकेँ कायŭलयमे गेलॱ तँ ओ बजली कुपěडोकल एतसँ दूर पड़ैत छैक तेँ हमरा मानबहादुरजी एतै एकटा घर उपलĤध करा देलिन अिछ । यिद एकरा अĠयरथा निह मानी तँ आइसँ हम एतै रहब । हम हृदयक शीशा िĆयंकाक कठोर शĤद रुपी पाथरसँ चकनाचुर भऽ गेल। हम बुिझ गेल छलॱ की मान बहादुरकेँ बैभव आ िĆयंकाक सुĠद रता बीच एक सĦझौरता भऽ गेल छैक । हम घर एलॱ बहुत दुःिखत छलॱ ओिह राित खेवो निह कएलॱ आ भिर राित सोचैत रहलॱ जे आब किहयो निह जाएब हुनका लग करीब एक हĢता तक हम गेबो निह कएलॱ । आठम िदन मोन निह मानलक तँ हम िĆयंकासँ भेटवाक लेल हुनकर कायर्लय गेलॱ । िĆयंका तँ पुरा बदिल गेल छली । जीĠसं आ भेƠमे ओ एकदम आधुिनक लािग रहल छिल । हुनक अनुहार ताजगी आ आँिखमे सफलताक चमक İपƠे देखाइत दैत छल । ओ कहली कािŎक ओ एकटा िफĪम आ िनमŭतासँ भेट करए जेती । िकए ? हम अकचका कऽ पुछिलयिन । ओ मानबहादुरजीक पिरिचत िफĪमा िनमŭता छिथ । ओ हमरा भेटबाक लेल कािŎ समए देने छिथ । आब देखब हम िकछुए िदनमे सुपरİटार अिभनेÿी बिन जाएब । हम हुनका सĦझाहएबाक ĆयĠत करैत कहिलएिन निह जाउ बादमे बहुत पछताएब परĠच निह मानलैथ । हुनकापर तँ िसनेमाक भूत सवार छलिन । हम ओतसँ चिल एलॱ । समए िवतैत गेलैक हमहुँ अपन काममे ĭ यİ त भऽ गेलॱ । अचानक किरब २, ३ वषर्क बाद िĆयंका हमरा राजिवराजमे भेटली । हम हुनकर मेकअप आ Ƒेस देिख दंग रिह गेलॱ । हम अिधकारसँ पुछिलयिन, की छै हालचाल? की अहाँ जे चाहैत छलॱ से भेट गेल .... ? अिहपर ओ िनतराइत बजली ‘ भेटीयो गेल आ सĦभावतः निहयो...’ ‘से कोना ? हम ः पुछिलयैन । हमरा लग ओ सभ तँ अिछ, जे निह होएबाक चाही । तखन ओ निह अिछ जे होएबाक चाही । ‘हम बुझलॱ निह ? ’— हम पुछिलयै । ‘अहाँक बात शुरुहेमे मािन लेने रिहतॱ तँ आइ... आĜमह ग्लाानी भरल İवरमे कहैत रहैथ की तखने सिमप एक मारुती आिब रुकल । ओइमेसँ एक युवक उतिर िĆयंकाके सिमप आिबकऽ बाजल— हाय लभली बहुत Ćतीक्षा करैलॱ

मैिथली कथा २००९-१० 83 आइ कािŎय तँ अहाँ बड़ अनमोल िचज भऽ गेल छी ... तेँ हातक हात िवका रहल छी । िĆयंका एक नजिर हमरा िदश देखैत ओकरा सँग मारुतीमे बैिस गेली आ हम देखैत रिह गलॱ.. ओिह िचजकेँ... ओिह लभलीके.... ।

84 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

आशीष चमन मूल नाम- आशीष कुमार िमā, िपता-āी सिच्चदाĠ द िमā अिधवक् ता। जĠ मितिथ-7 जनवरी 1973 टीचसर् क् वाटर, िजला गĪ सर् हाइ İ कूल सहषŭ। योग् यता- बी.ए. (Ćितį ठा) राजनैितक कायर् कलाप- ĆारĦ भ मे S.F.I के संयुक् त सिचव, पुन: अ.भा.िव.प. के कायŭलय एवं बौिŀक Ćमुख, िविहपकेँ नगर मĠ ÿी, पĮ चात् राजनीितसँ मोहभंग। सामािजक-सांİ कृितक गितिविध- सांİ कृितक चेतना सिमितक संİ थापक सिचव आ एिह बैनरसँ Ćायः- दुइ दशक बाद सुपौलमे िवńापित पवर् समारोहक संचालन, Ćलेस के िजला सिचव, िवĢ लव फांउडेशन के सिचव आ एिह बैनर के तĜ वावधानमे नागाजुर्न जयंती, सगर राित दीप जरयकेँ आयोजन। वृित:— कौिलक दबाइ ĭ यवसायक सफल संचालन िकĠ तु आपसी कलह के कारण िनįकासन, पुन: जीिवका हेतु अनेक जगह िछिछयाएब आ पूणर्त: ƖिरƖ बनलाक बाद लघु उńमसँ पािरवािरक पोषण। लेखन: 1984 सँ सिƅय आरंभमे किवता बादमे िहĠदी कहानी लेखन आ परती पलार संविदया आिदमे Ćकािशत पुन: मैिथलीमे लेखन आ भारती मंडल िमिथला चेतना, घर बाहर, कणŭमृत Ćवासी मैिथल, अंितका आिद अनेक पिÿका सभमे Ćकािशत। पछता रोटी ‘की रौ भीम! मोटरसाइिकल सभक बहुत भीड़ देखैत िछयैक....’’ गजीĠ दर बाबूक ओिहठाम करमान लागल लोक सभकेँ देखैत ओ पुछलकैक ....ओिहकाल भोरूक लगभग छओ बजैत छलैक....। ’गजीĠ दर बाबू मिर गेलिथन....’। ओंघाएल İ वरेँ भीमा उतारा देलकैक। ओकर बढ़ैत डेग अकİ तात् रूिक गेलैक आ अनायास मुँहसँ िनकललैक-‘अँय कखिन....आ की भेल छ लिन हुनका? ‘की भेलैक? िकछुओ निह, राितमे केहन बि़ढया छलिथन, िकĠ तु अकİ मात्। भीमा पूवर्वते जेकाँ बाजल। ई कने काल लेल गुĦ म पिड़ गेलैक। ओĦहर भीमाकेँ ओिहठामसँ जĪदी हटबाक हलतलबी छलैक मुखाकृितपर एकरा उŅेग तकरा ओ दबने छल-, िकĠ तु ओ पिहने कोना हिरतए चमन भैया ठाढ़ छिथ अपनासँ दस पनरह बरखक जेठ।

मैिथली कथा २००९-१० 85 ओकर आतुरताकेँ पारेख करैत ई ओतए ससिर कऽ चिल गेलैक जतए दुइ जन अपनामे बात करैत िसकरेट धुकैत छलैक, ओतए ई सहारेकेँ देखलैक, भीमा मनोयोग पूवर्क भिर रातुक संिचत लग् धीकेँ बहार कऽ रहल छलैक, एकरा िनवृिþक भावकेँ अपन चेहरापर पसारने । ’ओ İवाइत!’ ओ मोनिह-मोन बाजल आ आगाँ चौबिटया िदिश बि़ढ गेल। चौबिटया, लग आबल जा रहल छलैक- ओकरा अजय चौधरीक ओिहठाम जयबाक छलैक। अजय चौधरी पानमसाला, िसकरेट सभक फेिरया छल जे साइिकलपर माल लािद गामे-गाम आ हाट-बाजार सभमे बौआइत रहेक, िकĠ तु िकछु लŞ मी कृपा आ िकछु जĠ मजात वािणक बुिŀ एिह दुनुक संयोगसँ ओ दुइये- तीन बरखमे कमा कऽ टाल लगा देने छलैक....। ओ ओकरे लग जा रहल छल उपेक्षा आ बेकारी भरल िजनगीसँ ÿाणě यबा लेल, िकछु राय िवचारक हेतु अपन पुरान जान-िचĠ हक संिचत िनिध लऽ कऽ। ओ भिर रातुक संकĪ प लऽ कऽ भोरे चलल छल जे Ćात-काले ओकरासँ भेंट भऽ सकैत अिछ, भिर िदन तँ ओ पतनुकात धयने रहैत अिछ। ओकर मोनमे िविभĠ न Ćकारक िवचार उिठ-बैिस रहल छलैक। ‘ गजीĠ दर बाबूक मृĜ यु....,तीनटा लड़का दुइटा तँ बƂड कमबैत छैक मुदा जेठका कने गड़बड़ा गेलैक- तकरा सĦ हारक लेल ओ दोकान खोिल देलिथन-ओना दोकान पिहनो दुइ-दुइ बेर खोलल गेल छलैक मुदा तकरा ओ खा पका नेने छलैक.... तेँ एिहबेर ओ-İ वयं बेसीकाल बैसिथ....एकटा आशा तीन फूके चानीक-ओवर बेटा माने अपन पोताकेँ ओ मोट डोनेशन दऽ कऽ राँचीक इİ कूलमे भतŰ करौलिन-बेटा निह तँ की भेलैक पोते सु तिर जाइक-एकरा मृग-मरीिचका....। ओ आब चौबितया लग आिब गेल छलैक भोरूका पहरमे चाहक दोकानपर भीड़ कने बेशीये रहैत छैक ओ सोझे आगाँ बि़ढ गेलैक आ थोड़े दूरक बाद एकरा गली होइत अजय चौघरीक घर लग आिब गेलैक....। ‘की यौ चाचा जी! अजय बाबू उठलाह....?’ अपन İ वरमे चीनीक चाशनी सन घोरैत ओकर िशक्षक िपतासँ पुछलकैक....। ‘अबह आबह! अजय लैिƏनमे छैक....। ई किह गृहपित ओिहठाम पिहनेसँ बैसल आन लोक सभसँ गĢ प करए लगलाह....। एकरा पेटमे खलबली छलैक- ‘गजीĠ दर बाबूक’ घरसँ ई घर आधा माइलपर छैक आ एतेक भोरमे ई घटना एकरा सभकेँ तँ निहयेटा बूझल होयतैक....। ओ चचŭ करए चाहैत छल गजीĠ दर बाबूक असामियक िनधन किर। हुनक िशक्षक संघक िवषएमे, हुनक ĭ यिक्त व ओ कृितĜ वक चचŭ कऽ ओ İ वयं ओिह दरबĔ जापर बैसल समİ त लोकक केĠ Ɩ-िबĠ दु बनऽ चाहैत छल....लोक सभकेँ चौकाएब अचंिभत करए चाहैत छल- ‘ अँय कखिन मुइलाह गजीĠ दर बाबू? आ हा-हा-केहन İ वİ थ लोक रहिथ ....भगवानक लीला अपरĦ पारक कहू चमनजी अहाँ कखिन बुझलहु आिद आिद....। ओ, बाजब शुरू कयनिह छल िक दीघर्-Į वास छोड़ैत गृहपित बािज

86 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) उठलाह-‘ की करबहक ओिहना होइत छैक....बƂड नीक लोक छलाह....िशक्षक समुदायक बƂड पैघ िहतैषी....,हुनक देहावसानसँ हम सभ लोक बƂड ममŭहत छी....। ’के मुइलाह? ‘उपिİथत लोक-सभमे सँ एक गोटे पुछलिथ। ’अरे वैह माİटरसाहेब ने राितए....।’ दोसर गोटे यĠ ÿवतń सन बाजल....। अच् छा तँ वैह ने....।’ ‘अच् छा तँ ई बात एकरा सभसँ हमरा पिहने बुझल छलैक आ एकटा नव गĢ प ई जे गजीĠ दर बाबू भोरमे निह अिपतु राितए मुइलाह....ई खबिर एकरा सभक लेल आब बासी भऽ गेलैक अिछ....।“ओ सोचए लागल....। ता धिर अजय आिब गेल छलैक....। ओतएसँ घुमलाक बाद ओ पुन-चौबिटया लग ठाढ़ भऽ गेलैक....। चाहक दोकान लग आब भीड़ बेसी भऽ गेल छलैक। एकरा नेता सन लोक-चाहक मफाएल िगलास धऽ कऽ भाषण झािड़ रहल छलैक मुदा महगीक छैक आ केĠ Ɩ सरकारक पतनकेँ भिवįयवाणी सेहो-आगाँ, के सरकार बनाओल तकरापर िवचार- िवमशर् चिल रहल छल। मोहĪ लाक एकरा पैघ ĭ यिक्तक मृĜ युपर कोनो चचŭ निह भऽ रहल छलैक ओ कनेकाल ठाढ़ रहल आ फेर घुिमते चाहैत छल की लतीफ भेटलाह- ‘की यॱ पंडीजी! अहाँक पीसा छिथ, की गाम गेलाह’? लतीफ एिह ग्ामक पुरान काĮतकार अिछ आ पीसासँ मोकदमाबाजी सेहो करैत अिछ....। उþर देलाक बाद ओ जहाँ गजीĠ दर बाबूक चचŭ शुरू कयलक तँ लतीफ बािज उठल-‘अĪ ला हो अĪ ला’! ज खिन सुनिलयेक तखिनसँ भिर राित नीĠ दे निह भेलैक....। ई सुिनतिह ओ आगाँ बि़ढ गेल ओ अपन िवचारक कड़ीकेँ सोझराबए चािहते छल िक ‘ बड़े’ भेट गेलैक। बड़े माने अिनल झाक मािझल बेटा-ƙेन पारालैिससक पुरान िशकार, आब कने सुधारक संकेत देखैत िछयैक ओकरामे....। अिनल भैया ओकरा लेल चौराहापर “ सोना जेनरल İ टोर” खोिल देने छिथ आ बेटाक बदलामे İ वयं बेसीकाल गĿीपर बैसैत छिथ....। ओ मजाकमे बेसीखन बजैत रहैत अिछ-‘की यौ भाय साहेब! खोललहँ बड़ेकेँ लेल आ बैसेत छी अपने....। अिनल बाबू िबझुँसैत उþर दैत रहैत छिथ- ‘ की करबैक ओिहना होइत छैक िचĪ हकाक लाथे िचĪ हकौर सेहो....।’ बड़े राित कऽ दोकानेमे सुतैत अिछ। ओ बड़ेकेँ सभ िदन जेकाँ एखनुहुँ सैĪ युर ठोकैत अिछ....। ओ ओकर İ वाभािवक िमÿ अिछ भाितज निह समान धमŭ....। ओ किह उठैत ‘अिछ- ‘चचा! गजीĠ दर बाबू, आ आँगुरकेँ आडर केर मुƖामे

मैिथली कथा २००९-१० 87 उठा दैत अिछ। ओģफ! तँ ईहो बूिझ गेल अिछ?’ ओ पुन: घर िदिश िवदा भऽ जाइत अिछ। गजीĠ दर बाबूक घरसँ एकर घर कने बेसी दूरपर छैक बीचमे जनशूĠ यता छैक आ बसिबटािर तथा कलमबाग सेहो छैक....। ‘िनिĀत रूपसँ हुनक मृĜयुक खबिर घरपर निह गेल होयताह’ ओ झटिक कऽ िवदा होइत अिछ कþहु निह रूकबाक संकĪ प लऽ कऽ–मुदा ओकर मोनपर िवचार पुन-हावी भऽ रहल छैक-‘बड़े पारालौिससक िशकार अबोध रिह गेल मिİतįकबला एकरा जवान मानव देह धारी, गजीĠ दर बाबूक जेठ नशेरी बालक, दुनूक िपता किर अपन-अपन ओिह अक्षम सĠ तान लेल भगीरथ āम....। ओकरा लगलैक जे गजीĠ दर बाबूक नशेरी बालक आ बड़े चिल रहल अिछ आ जाइत लटपटा कऽ खिस पड़ैत अिछ दुनू बूढ़ िपता अपन-अपन धोती सĦ हारैत दौगैत छिथ आ भीजल İ वरसँ पूिछ रहल छिथ- ‘ बाज’ चोट तँ निह लगलौ?’ ओ आँिख मुनने कने िबलिम जाइत अिछ। फेर ओ देखैत अिछ- जे ‘पुन’ ओ दुनू जा रहल अिछ आब दुनूक घरपर एक-दोसराक मूड़ी लािग गेलैक अिछ फेर ओिह घरपर सँ मूड़ी िफर भऽ गेलैक अिछ।’ सभटा असंगत लेतरल िचÿ सभ, चलिचÿ जेकाँ एकर मानस पटलपर आबऽ जाऽ लगलैक....। एक िदिश गजीĠ दर बाबू अिनल भैया आ दुनूक सं तान, एकटा ई आ एकटा एकर बाप....? सवर्ÿ, İ वरिचत, कपोल किĪपत एकर अक्षमताक ढ़ोलहा पीटैत....। ओकर मोन ितवूत भऽ गेलैक, भेलैक जे ‘वैह िकयैक ने अिनल झा आ गजीĠ दर बाबूक बेटा भऽ कऽ जनमलैक....बस अक्षमे सही....। ओ एक बेर मूड़ी झमकारलक आ पुनः घर िदिश िबदा भऽ गेल-िवचार पुन: अपन तारतĦ य बैसाबए लगलैक- ‘ओ गजीĠ दर बाबूक मृĜ युक खबिर सभसँ पिहने बाँिट, लोककेँ अचांिभत करैत पिहने पĜ नीकेँ कहतैक....घरबाली एकरासँ सोझ मुँहे किहयो निह बजैत छैक...,जेना झुरािपþी सन उठल रहैत छैक....। पĜ नीकेँ संमाद देतैक ओ अपन Ćकृितक अनुरूपेँ लहोिछकेँ पुछतैक- ‘ के गजीĠ दर बाबू’? तकरा अनसून करैत ओ बाजत- ‘ अरे! वैह राजाक दादा! वैह राजा जे अपन सिनक संग पढ़ैत छलैक आ आब राँचीमे एडमीशन करौलक अिछ....।’ पĜ नी आँिख गोल करैत कहतीह- ‘ अच् छा तँ ओ....? । ओ तकर बाद बुि़ढया माए अथŭत् दादी लग जाएत, बूढ़ी एकरा आइ-कािŎ मछी दैत छिथ....। अरे िकयैक निह, जखिन घरक मुिखया सभ निह छलिथन तँ वएह ने ओिह राित बुिढ़ केँ ददर् भेलापर अड़ोस-पड़ोस एक करनैत दवाइ िवरोक ĭयवİ था कएने छलैक....। बूढ़ी िसनेह देखबैत बजने छलिथन- ‘तँ हौ बच् चा! तोँ निह रिहतह तँ हमर Ćाण निह बिचतह....।

88 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) पिहल बेर ओकरा अपन ĭ यिक्त व सĦ पूणर् रूपेँ साथर्क बुझना गेलैक....। जे-सें ओ बूढ़ी लग जाइत आ एिह आकिİमक मृĜ युक ओकरा हाल-चाल कहत....। तखिन दुइ-चािर आँगनमे हĪला मिच जयतैक- ‘ कखिन मुइलाह आ हा-हा....ओ....हो....तो कोना बुझलहक हौ चमन....। तखिन ओ फि़डछा फि़डछा कऽ आńोपाĠ त सभ गĢ प कहत आ लोक सभ ओकरा िदिश मुँह बािब ताकत...सवर्þ चमन, क्षणभंगुरे सही मुदा सवर्ĭ यापी चमन....। ई सोचैत ओ आँगन िदिश िवदा भेल। ड़योढ़ी लग पĜ नी िछटटा छाउर काढ़ने जाइत छलीह, ओ डुलŭस कऽ बाजल- ‘अइ सुनैत छी।’ पĜ नी छाउरक िछņा उनटबैत लहोिछ कऽ बजलीह-‘इह कमैनी ने धमैनी आ टहंकार केहन....एकोटा जारिन काठी ने....छओड़ाकए इİ कूलक भऽ रहल छैक ऊपरसँ छओंड़ीक नंगो-चंगो....आइ ओकरा हम खून कऽ देबैक। ‘ई किह ओ Ɩुतगित आँगन गेिल आ बेटीकेँ ओध-बाध उठाबऽ लागिल.... छओंड़ी चीĜ कार कऽ उठिल....। एकर भीतरमे आƅोश िबरंड़ो तांडव करए लगलैक तकरा दबौने ओ दादी गेलैक, आ बाजल ‘बुि़ढया माँ गइ। गजीĠ दर बाबू....।’ बूढ़ी बातकेँ िबच् चĠ हसँ कटैत बजलीह-‘हम तँ राितये बूिझ गेल हूँ....आह केहन भƖ लोक....एकूटा हम छी....हमर बही जमराज लगसँ हरा गेल अिछ, आं आगाँक जनमल लोक सभ उठल जा रहल अिछ।’ ‘अ च् छा तँ ईओ बुि़ढया बुिझ छल....त खिन हमही देरीसँ बुझलहुँ....सþे हम िपछड़ल छी-पĜ नी ठीके कहैत अिछ जे अहाँ पछता रोटी खएने छी....।’ ओ İ वयंकेँ िधक् कारऽ लागल ओकर समİ त उĜ साह आब ितरोिहत भऽ गेलैक ओ अपरतीब भऽ गेलैक। तथािप बातकेँ बढ़बैत बाजल-मरर्, ओ की कोनो कम उमेर के छलिथन सþिरसँ कदािप कĦ म निह। बूढ़ी हाथ नचबैत बजलीहेँ दुर बतहा निहतन । सþिर के तँ इĠ जीरा आ मंदािग्न सेहो निह अिछ। ओ अपन समİ त कुě ठा आ हतबुिŀकेँ बूढ़ीपर कुतारैत मुँह दुसलक- ‘हुँह! इĠ जीरार आ मĠ दािग्न कईक बेर कहल हूँ ले इिĠदरा आ मंदािकनी बाजू....। बूदी ĆĜ योƅमण करैत बजलीह-‘रौ बाउ! हम निहयॲ पढ़लहुँ तथािप ओिह कोशीक िवकराल सभटा मे छओ गॲट बच् चा सभकेँ पढ़ा-िलखा मनुक्ख बनेलहुँ जगह-जमीन आ मकान बनेलहुँ केओ िधया-पुता मुँह निह दुसैत अिछ आ एकटा कािबल तोँ छेँ बƂड बुिधयार छेँ तेँ ने ई हालाित छैक जे बापोसँ निह पटैत छैक अिछ आिद कहैत बूि़ढ घर-चिल गेलीह। ओ हतबुिŀ भेल जड़वत ठाढ़ छल ओकर समİ त उĜ साह कखिन ने िबला गेल छलैक आ ऑंिख नोरा गेलैक....।

मैिथली कथा २००९-१० 89 कनेक्शन कालक बाद पĜ नी आचिल आ गौरसँ मुँह देखैत बाजिल- ‘ अरे आठ बजैत अिछ- िकछु जलखै खा िलतहुँ फेर तँ भिर िदन अहाँकेँ की करबैक काजक जोगाड़ आ टाका-पैसा कोनो अपना हाथमे छैक की.... जिहया जे हेबाक हैतैक से तँ हेबे ने करतैक....। ओ अपन हाथक घड़ी देखलक आ बाजल- ‘सते आइयो फेर बहु अबेर भऽ गेलैक....।

90 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

आशीष कुमार चौधरी िपताक नाम: āी नवल िकशोर चौधरी, पता: गाम–चरैया, िजला–अरिरया, िबहार। लघु कथा जीत गयो मोर काĠहा बƂड पुरान एकटा सच कथा अिछ। एकटा मंगलवार गामक लड़का छलै जकर नाम िवńानंद छलै। ओकर िबआह निह होअए छल। िकऐक तँ उ आंिखसँ आĠहर छलै। बƂड िदनक बाद एकटा धीमा गामक लड़कीसँ िबआह तँइ भेल आ बƂड पैसा लऽ कए ओकर िबआह धीमा गाममे तँइ भेल। िकएक तँ उ लड़का हाई İकूलमे माİटर सेहो छलै। अइ Ņारे ओकरा बƂड रास पैसा दऽ कए लड़कीक बाप िबआह तँइ केलक। बƂड रास बिरयाती लऽ कए लड़काक बाप पहुंचल लड़की बलाक ओतए। ओतए िविध िवधानसँ ओकर दुनूक िबआह भेल राितमे सभ बिरयातीगण खेनाइ खऽ कए सभ सुतेले चिल गेल। भोरमे िबग्जी कऽ कए सभक इच्छा भेल लड़की देखैक। िकऐक तँ ƙाŌण सभक िनयम छलै लड़कीक सुहाग देबेक तखन जाकै सभ लड़कीक देखैत छलै तखन ओकरा बƂड रास समान आ पैसा देल जाए छलै। लड़काक बाप राितमे िबआहक बाद लड़कीक देखैत कहलक रहै “जीत गयौ मोर काĠहा” तखन जा कए लड़कीक बाप कहलक “भोर भयो तब जानो” िकऐक तँ लड़की जे छलै उ एकटा पैरसँ लाचार छलै। तँ जा कए लड़कीक बाप ढ़ेर रास टका पैसा दऽ कए अपन लड़कीक िबआह माİटर लड़कासँ िबआह करबाक बƂड खुश छलै। ते उ कहलक जे भोर भयो तब जानो। भोर होबेपर जखन लड़काक बाप कहलक कनेकटा लड़कीक खड़ा करू हम लड़कीक लĦबाई देखब तँ लड़की जब खड़ा भेल तँ लड़काक बापकेँ लागल जे हम हािर गेलो आ सभ बिरयाती गण वापस अपन गाम मगंलवार चिल गेल। लेिकन ई एकटा कहानी बिन गेल। उ दुनू लड़का आ लड़की बƂड खुश रहै लागल िकऐक तँ उ माİटर सेहाब छलै। अखन उ सुमिरत हाई İकूलमे िहĠदीक माİटर छलै। आ बƂड नीक माİटर अिछ। िकएक तँ हमहुं उ माİटरसँ पढ़ने छलॱ।

मैिथली कथा २००९-१० 91

दुगŭनĠद मंडल सहायक िशक्षक, उ. िव. िझटकी-बनगावाँ, मधुबनी (िबहार)। कथा: बकलेल गमŰक समए, जेठक दुपहिरया, Ćचěड रौद, िबजली लापþा। ऐहन बुझना जाइत छल, जेना दाता-दीनानाथ आइ मनुखक परीक्षा लेमए चाहैत छिथ। कतौसँ वसातक कोनो आश निह। नेेना-भुटका सभ एमहर भेँए तँ ओĦहर भेँह, एĦहर केँ तँ ओĦहर कॲ करैत छल। बुझना जाइत छल जेना मखना तेलीक पहरा होअए। माल-जाल गमŰसँ परेशान भऽ एकहक हाथ जीभ बवैत छल। लेड़ू आ परड़ुक तँ तेरहो करम भऽ गेल छल। कोनो तरहेँ चंडलवा रौद आ दुपहिरया झुकल, मन कनेक िथर भेल मुदा राित खन उएह हाल, जतवे गमŰसँ परेशानी ततवेक मच्छड़ आ उड़ीसक उपƖव। ओकरा सभमे एकता ततेक जँ हाँ-हाँ निह किरयोक तँ सोझे उठालेत आ नेने-नेने सकरी चीनी मील लग रिख आओत। कतहुँ चैन निह...। भोजनोपरांत देह-हाथ सोझ करवाक लेल िवछाउनपर गेलॱ, मुदा चैन निह। कछमछ-कछमछ कऽ रहल छलॱ। कती राित गुजारलाक वाद कने जािक आंॅिख लागल, आिक ğयान िकछु आर-आर िवषए िदस चल गेल। आॅंिख यधिप बž मुदा चेतनामे अनेकानेक तरहक बात धुमए लगैत अिछ। पड़ल छी िवछौनपर मुदा मन जीनगीक चैबņीपर ठाढ़ वतर्मानक अधरपर भूतसँ भिवįयक, भिवįयकेँ िवषएमे सोचए लगैत अिछ। सरकारी सेवामे रहवाक करणें कमे-काल गाम जेवाक मौका लगैत अिछ। पाविनयो ितहार जतए छी ततए करए पडै़त अिछ। तखनो अİसी बखर्क बुिढ़ माए आ करीब सए वखर्क बुढ़ बावूजीकेँ देखए लेल गाम जरुरे चल जाइ छी। टोला-पड़ोसाक लोक सभकेँ भेंट कऽ सबहक कुशल छेम जािन अपना कऽ धĠय बुझैत छी। एिह Ćकारे िविभž Ćकारक लोकक चािरिÿक िवĮलेषण करबाक सेहो मौका लािग जाइत अिछ। संभवतः ऐहने िİथितमे मोन पड़ैत छिथ एकटा सĔजन सरोज बावू। ओ ऐहेन ĭयिक्त जे कोनो सुरतमे अपना कऽ िकनकोसँ कम मानए

92 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) लेल तैयार निह होइत छिथ। माए-बापक एक माÿ बेटा नािĠहएटा सँ पढ़ै-िलखैमे तेजगर मुदा ततवेक थेथरलोजीमे सेहो िनपुण। िवषए कोनो िकएक निह हो मुदा एक चैखिड़ थेथरलोजी जरुर करताह। जेना की ओ सवर्ज्ञ होिथ। तेँ हुनकर िकछु संगी- साथी हुनका ‘‘ िमİटर नो आॅल’’ सेहो कहैत छिन। आर ि कछु लोक सभ बकलेल सेहो कहिथĠह। परुकेँ साल अगहन मासमे हुनकर िवआह झंझारपुरक बगलिह महरैल गाममे सĦपनन भेल। िवआहक मादे एकोटा सर-कुटुम निह छुटिथ एिह लेल ओ एकटा बही अलगसँ बना आ ƅमवŀ कऽ सभकेँ नत-िलऔन आ हकार पठाएव निह िवसरलाह। िवआहोĜसवमे सभ उपिİथत भऽ बिर याती गेलाह। जािहसँ एक बात İपƠ भऽ गेल जे लड़का कोनो नीके समाजसँ जुड़ल छिथ। गौँवा-धरुआ आित Ćसž भऽ बिढ़-चिढ़ कऽ बिर यातीक İवागत-बात कएलैिĠह। मिमऔत-िपिसऔत सभ एिहसँ Ćसž जे बर आ किनयाँ दुनूक जोड़ी सीता-रामक जोड़ी लगैत अिछ। भगवानक असीम कृपासँ अनुगृिहत भऽ नीके कथा सĦपž भेल। असली कथा आव एिह ठामसँ शुरु होइत अिछ। िवआहोपरांत किनयाँ िवदागरी भऽ सासुर ऐलीह। दाइ-माइ लोकिन अरिछ -परिछ किनयाँ घर केलैिĠह। आ अइहव-सुहव होथू अशीरवाद दैत अपन-अपन घर चल गेलीह। किनयाँ तँ किनए िदनमे अपन सासु-ननिदक िदल जीत लेलैिĠह। बर- किनयाँ समथर् रहवाक कारणें िवदागरी चैठारी िदन निह भऽ साओन-भादोमे भेल। पिहल साओन-भादो नवकी किनयाँ नैहरमे मनवैत छिथ, एिह तरहक िमिथलाक आ मैिथलक एकटा माĠयता छैक। नीक िदन तका किनयाँ िवदागरी भऽ सासुरसँ नैहर चल गेलीह। आव तँ भेल पहपिट। सरोज बावू जे एते िदन सिदखन घरेमे धुसल रहिथ आ सिदखन किनयाँए कऽ िनंधारैत आ गवैत छलाह ई गीत ‘‘ मन होइए अहाँकेँ हम देखते रही, िकछु बाजी अहाँ हम सुिनते रही, मन होइए अहाँकेँ........। आठ मास कोना िवतल से निह बुिझ सकलाह आ किनयाँ आठे मासक फला-फलक रुपमे नौ मासक सनेश लऽ नैहर चल गलीह। से तँ, एको िदन, एको पहर, िवतव सरोज बावूक लेल पहाड़ सन बुझना जाइत छलैिĠह। कोनो वातक सुधए-बुिधए निह रहैिĠह। सिदखन एकदम बकलेल जेँका करिथ। एहन सन वुझना जाइत छलैिĠह जे शरीर गाममे होइिĠह आ आĜमा सासुरमे। भोजनक Ćित अरुची जागए लगलैिĠह। समएसँ İनान-भोजन करब सेहो सुिध-बुिध निह। लोक सभ अपनेमे बाजिथ जे सरोज बावू ऐना िकएक करैत छिथ- एकदम बकलेल जेकाँ। जिहना अपना गाम बेरमामे सरोज बावू तिहना अपना नैहर महरैलमे सरोजनी दुनू ĭयिक्त एक दोसराक िवरहािग्नमे जरैत। िदनो-िदन मुरझाइल जाइत छलाह। İवाभािवकेँ िथक। िकएक तँ बड़-किनयाँ समथर् रहवाक कारणे जीवनक

मैिथली कथा २००९-१० 93 अपूवर् आनĠद जे उठौने रहिथ, एकटा पूणर् पित-पėीक रुपमे। एक-एक िदन पहाड़ भेल चल जाइत छलैिĠह। निह तँ ऐĦहरे आँिखमे िनž आ ने ओĦहरे एको िमĠटक चैन। माए-बापक डरे निह तँ किनयाँ करैिĠह आ ने बावूजीक डरे सरोज सासुर जेवाक साहस कऽ पबिथ। िकएक तँ एखनो कतउ- कतउ ऐहन Ćथा छे जे िवना िदन-दूरागमनक बर-सासूर निह जाइत छिथ। तेँ सरोज बावूक डेग सासुर जेवाक लेल निह उठैिĠह। समए बीतेत देरी निह लगैत छैक देखैत-देखैत चैठ-चĠƖ पाविन आएल....... चल गेल। जीतीआ बीतल आिव गेल आषीण मास.... सगरो दुगŭपूजाक तैयारी शुरु भऽ गेल। ओĦहर सरोजनीक नैहरमे जोड़ा किरआ छागर बिल-Ćदानक लेल राखल छल। जकरा ओ लोकिन खुब जतनसँ दाना-पािन खुआविथ-िपआवैिथ। देखते-देखते दुनू छागर, सवाइयासँ डोढ़ा भऽ गेल। जँ जँ दूगŭपूजा लग आएल जाइत, सरोज बावू आ सरोजनीक हृदयक धड़कन हृदयागंम हेवाक लेल मचलए लगलिन । देखते-देखते कलश İथापन भेल। पिहल पूजा बीतल दोसर बीतल आिव गेल पंचमी। मुदा एखन धिर सासुरसँ सरोज बावूक लेल कोनो खोज-खविर निह कएल गेल! एकिदन माए पुछलिथĠह- ‘‘ बौआ, किनआक खोज खविर निह केलहक? कोनो फोनो-तौनो निह अवै छह? बेचारे की बजताह अपन हारल आ वहूक मारल क्यो की बजै छै? हािर-थािक पंचमीराित फोन लगौलिĠह। घंटी भेल, फोन उठौलिथĠह हुनकर शािर-कमलनी, ओĦहरसँ अवाज अवैत अिछ- ‘‘ हेलो.... हम महरैलसँ वजै छी? ‘‘हम छी सरोज बेरमासँ। कनी...... दीदी.......केँ फोन .....। कमलनी माँ िदस तकैत बािज उठैत अिछ- ‘‘ माए गे माए जीजा जीकेँ फौन िछए। एĦहरसँ हेलौ-हेलौ होइत रहैत अिछ। कमलनी फोन लऽ कऽ दैत छैक अपन दीदी सरोजनीकेँ। सरोजनी फोन लइत- ‘‘ परनाम करै छी। अहाँ नीके छी की नै? माँ बावूजी कोना छिथ? अपना शरीरपर ğ यान दैत छी की नै? मन लगैए की ने? मेला देखए किहआ ऐवै? कमलनी आ अजय, िवजय अहाँक िवषएमे पुछैत रहैए। दीदी गै दीदी, जीजा जी किहया ऐतौ?'' सरोज बावूक जवाव छल एको रĜ ती मन निह लगैत अिछ। संभवतः दूगŭपूजामे निह आिव सकब। िधया-पूताकेँ मेला देखक लेल दस-दसटा टाका दऽ देवई। तामसे टीक ठाढ़ केने फोन कािट दैत छिथ। सरोज बावूक लेल असमंजसक िİ थित रहिन, जे जकरा घरमे जोड़ा छागर बिल Ćदान हेतै, से एखन धिर एको बेर अएवाक लेल निह कहलैिĠ ह। ऐहेन कोन सासुर कोन सासु? आ ससुर, केहेन सािर आ शरहोिज। तामसे मन अधोड़ आ टीक ठाढ़। की करी आ की निह करी? ई ŅĠ ŅाĜ मक िİ थित बनल रहैिĠ ह। िकछु निह फुरैिĠ ह। मुदा अį टमी अवैत-अवैत- ये िदल है िक मानता नहॴ

94 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ये वेकरारी क् यॲ हो रही है, ये जानता नहॴ....। अपना कऽ निह रोिक सकलाह। आ चिल गेला अपन सासुर महरैल। भगवती दशर्न कऽ जहाँ की पानक दोकानपर जाए छिथ, पान खेवाक लेल, आिक मेला देखक लेल आएल सािर-शरहोिजक नजिर हुनकापर पड़ैत अिछ आ ओ सभ पकिड़ लैत अिछ िहनकर गņा। जीजा जी, जीजा जी अहाँकेँ गामपर चलए पड़त। दीदीयो कहने छिल, सĢ पत दऽ कऽ। मुदा सासु ससुरक आƇह निह तेँ एखनो धिर िहनक टीक ठाढ़े। अĠ ततः थािक-हािर एक िकलो मधुर लऽ सािर-शरहोिजक संग चललाह सरोज बावू सासुर। पिहल-पिहल बेर सासुर गेल छलाह तेँ İ वागत बातमे कोनो कमी निह रहल। चाह-पान बिढ़यासँ भेल। मुदा खेवा काल ओ पसारलैिĠ ह बड़का नाटक, जे हम निह खाएब। हम खाऽ आएल छी, भुख निह अिछ। सासु आƇह केलिथन कोनो असर निह, ससुर हाथ पकड़लिथĠ ह, कोनो फरक निह, बड़का सार सेहो खुशामद् केलिथĠ ह मुदा कोनो असर निह। एकिह ठाम जे हम खा कऽ आएल छी, भूख निह अिछ। आ ओ भोजन निहए केलैिĠ ह। ओĦ हर दुनू छागर जे बनल ओकर सुगĠ धसँ टोला-पड़ोसा गम-गम करैत। टोलाक िनमंिÿत सĔ जन सभ आिब माउस-भात अथŭत छागर रुपी Ćसाद पाविथ आ ओकर İ वादक सिवİ तार चचŭ करिथ। ऐह छागर जे जुआएल छल, चवŰ केहेन तरहĝ थी सन छलै आ Ćसाद बनल कतेक सुĠ दर अिछ! वाह मन तँ भीतरसँ ĆसĠ न भऽ गेल, चचŭ करैत बाँका सीक् कीसँ खैरका करैत कुकुर कऽ पान खा ओ लोकिन तृिĢ तक ढेकार लैत चल जाइ गेला। एĦ हर सरोज बावूक पेटमे िबलािड़ कुदए लगल। ओत भुखे लहालोट। राित खसल जाए, बहरवैआक बाद घरवैयो सभ खा कऽ सुतए गेलाह। मुदा िकछु िलऔनवाली सभ एखनो जगले, ओ लोकिन पाँछा काल कऽ भोजन करिथ, फैलसँ पलथा मािर माउस आ भात, खािथ आ ओिह छागरक माउसक चचŭ करिथ। आƇह अलग जे दीदी कलेजी दू पीस िलअ। हे यै देवहीटोल वाली हे ई चुİ ता िलअ। हे यै दाइ, हे, ई हड् डीबला दूटा पीस िलअ। आƇहपर आƇह। आ ओ लोकिन बड़ी काल धिर गĢ प-सĢ प करित, भोजन करए गेली। एĦ हर सरोज बावू जठरािग् न आओर तेज भेल चल जा रहल छल। आव होएत छलैिĠ ह जे क् यो आिव आƇह किरतिथ तँ भिर पेट माउस-भात खइतॱ। मुदा से तँ आव सभ क् यो सुतए लेल चल गेल छल। िधयो-पूता माउस-भात खा फोफ कटैत छल। आव तँ िहनका िकदुन- ‘‘जे अपने करनी गै मुसहरनीक पिर भऽ गेल छल। थािक हािर िकछु कालक वाद हरलैिĠ ह ने फूरलैिĠ ह सरोज िवदाह भेलाह भनसा घर िदस। आ अपनिहसँ मउस-भात भिर थारी िनकािल आ चुपे- चाप भोकसए लगलाह। िकनको एिह बातक पþो निह। जागल जे सभ रहिथ से सभ िहनका खोजए लागल जे पाहुन कतए, पाहून कतए। आ पाहून तँ भनसा घरकेँ केवाड़ तर नुका कऽ गुप-गुप माउस-भात दऽ रहल छिथĠ ह। तात गणेश जीक वाहन एिह कोठीसँ ओिह कोठी जा िक छरपल आ िक कोठीपर राखल

मैिथली कथा २००९-१० 95 खापिड़ पाहूनक कपारपर खसल। अवाज सुनतिह लोक सभ ओिह घर िदस दोगल। देखलक जे पाहून तँ केवाड़क दोगमे नुका कऽ माउस-भात भोकिस रहल छिथ। परल बड़का िपहकारी, शािर-शरहोिज मारलक ताली खुब जोरसँ शोर-गुल सुिन सुतलहो लोक सभ जािग गेल। ताली आ िपहकारी पिड़ रहल अिछ। पाहून तँ लाजे कठौत भऽ गेलाह। रित जखन सुतए घर गेलाह तँ किनयाँक कटू ĭ यंग वाणक वषŭ होमए लागल। पाहूनक तँ मने शांत। िकछु निह फूरैन। सोचलाह जे अĠ हरोखे गाम चल जाएव। िवदाहो भैलाह, मुदा अĠ हार वेशी रहवाक कारणे कुकुर सभ झॉउ- झॉउ करए लगल। लोक सभ जािग गेल देखलक जे आँगा-आँगा पाहून आ पाछाँ-पाछाँ कुकुर िहनका िखहारने जाइत अिछ। लोक सभ दोड़र महरैिलक हाटपर आिव िहनका पकड़लक। धुिर जएवाक आƇह कएलक। मुदा िहनकर मन तँ तामसे अधोड़ छल। िकनको वातक मोजर निह दऽ, हाक दैत-दैत धोती पकड़लक से हुनकर ढेका खुिज गेल, धरफरा खसलाह, मुदा ओ तइयो निह रुिक लटपटाइत धोती खोिल फेकेत गािर दैत परात होइत-होइत अपन घर पहुुँचलाह। कहू तँ ऐतेक पढ़ल-िलखल लोकक ई काज कोनो वकलेले जेकाँ ने भेलैिĠ ह। सिरपॲ जँ अधलाह निह लागए तँ हुनका बकलेले ने कहवैिĠ ह।

96 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

किपलेĂर राउत गाम-बेरमा, वाया-तमुिरया, िजला-मधुबनी, िबहार। छूआ-छूत दूगŭपूजाक समए रहए। सभ अपन-अपन उमंगमे मİत। सभ िकयो नव- नव पिरधानमे सजल। िकयो पूजामे मİत तँ क्यो नाच देखएमे मİत, िकयो दारु पीवैमे मİत। İटेजक आगाँमे लग्धी-िवरती कऽ देखएमे मİत, िकयो कुमािर भोजन करएवामे ĭयİत। क्यो ƙाŌण भोजनमे मİत। एक-एकटा कुमािर आ ƙाŌण पचँ-पँच गोटेकेँ नोत खाइले तैयार छल। तखनिह शंभू मंडल लƂडू लऽ कऽ भगवतीकेँ चढ़ैवाक लेल गेल। ओकरा मंिदरक भीतर जेवासँ पंिडतजी रोकैत बजलाह- ‘‘ तु सोलकन सभ भगवतीकेँ अपने हाथे ने लƂडु चढ़ा सकै छै ने Ćणाम कऽ सकै छै। एिह बातपर थोड़े काल हĪला-गुĪला सेहो भेल। अंतमे फैसला भेल जे पूजेगरी आ पुरोिहत छोिर कऽ क्यो भीतर निह जा सकैत अिछ। चाहे ओ कोनो जाितक रहए। जखन चौकपर एलॱ तँ एकटा दोसरे नाटक पसरल छल। एकटा डोम चाहक दोकानपर बेंचपर वैिस कऽ चाह पीवाक लेल तैयार छल दोकानदार रोिक रहल छल। अĠतमे बलजोरी ओ बेंचपर बैिस गेल। आ ओ डोम दोकानदारसँ सवाल पूछलक। पिहल सवाल छल- ‘‘हम िहĠदु छी िक नै छी। दोसर सवाल छल जे जहन सभ जाइतक अहाँ आंइठ धोइत छी तँ हमर आंइठ िकऐक निह धोअव। तेसर सवाल छल जे एक तँ अहाँ बावाजी छी कंठी बĠहनै छी तहन अहाँ सबहक आंइठ धोइत छी से धोनाइ छोिर िदऔ आ से निह तँ बावाजी जी बाला आडĦबर छोिर िदऔ, Ćķ िवचारनीय छल हम सोचमे पिर गेलॱ।

मैिथली कथा २००९-१० 97

राजदेव मंडल Ƈाम-मुसहरिनयाँ, पो.- रतनसारा (िनमर्ली), िजला- मधुबनी (िबहार)। िशक्षा- एम.ए.Ņय, एल एल बी.,पता- Ƈाम-मषहूरिनयाँ, रतनसारा(िनमर्ली)। Ćकािशत कृित- िहĠदी ,नाम-राजदेव िĆयंकर,उपĠयास- िजĠदगी और नाव,िपजरें के पंछी,दरका हुआ दरपन। अĦबरा (मैिथली पń संƇह)- शीƈ ĆकाĮय। रखबार धानसँ भरल खेतमे गाछ सुतल अिछ। पिछला साल तेहेन भयंकर िबहािड़ आएल जे एकिह थĢपरमे गाछकेँ सुता देलक। तिहयासँ ई सुतलो अिछ आ जागलो। एकर पाँचटा डािर पहरुदार जेँका ठाढ़ अिछ आर टकटकी लागौने सॱसे बाधक पसरल गĦहरैल आ पाकल धान िदस तािक रहल अिछ। ‘‘खबिरदार, िकयो भरल चासमे हाथ लगेबेँ तँ भारी डěड जिरमाना लगतउ।’’ ई शĤ द सुनमसान बाधमे हवापर हेल रहल अिछ। आ एिह शबदकेँ सभ निह सुनैत अिछ। सुनैत अिछ चोइर कमर्मे संलग्न बेकती। ओकरा तँ अĠहारमे ठाढ़ गाछ लोक सन आ भुक-भुकाइत भकजोगनी हथबþीक इजोत सन बुिझ पड़ैत अिछ। चंचल मन आ िभतिरया डर....। चोर कहुँ इजोत सहै। ओना लोक कहैत अिछ- ‘‘जे ई गाछ संगिह ई बाध देवगनाह अिछ। आ गाछक खाली जगहमे ई पाँचोटा मॲटका डािर कतेक िदनसँ ठाढ़ आिछ। ओ मुईल वा जीअत रखवार थोड़े भऽ सकत। एिह भरल दुपहिरयामे असल रखबार तँ भेटत गामपर। चैबिटया गाछतर। सरुपा, गणेशी, भोली आओर चोरेबाल ताशक पþा फेकबामे अपİयाँत। बुइधक कैंची चलबैत पूरा तागदकेँ साथ। जे हािर जएताह ओकरा साँझमे मूढ़ीकेँ जलखई आ चाह िपयाबए पड़तैक। तैं सभ अपन दाव-पेंच लगेबाक लेल सतकर्। ओना िचĠताकेँ कोनो गĢप निह। िकछु िगरहतक धान पािक गेल अिछ। दू-चािर िदनमे किट जएतैक। कटतैक िकएक निह। ओ सभ बुइधगर आ चंखार िगरहत अिछ। धानक बीया शहर-बजार आ बाहरसँ मंगाकेँ समएसँ पूवर् लगौने

98 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) अिछ। मास िदन पिहले कािटयो लेत। नवका धान, बलौिकया बीज। बूढ़ सभ ओिहना िचिचआइत रहत-जे एिह अँगरेिजया धानमे ताकत निह होएत अिछ। ई पुरनका राग अलापलासँ देस-दुिनयाँ ठाढ़ थोडे़ रहतैक। ई तँ आगू बढ़ैत रहल अिछ आ बढ़ैत रहत। नव अिवसकारकेँ रोिक सकैत अिछ। िकĠतु एिह नवका धानक चोर बƂड-बेसी िचड़ई-चुनमुनी आ जीव-जĠतुसँ लऽ कऽ लोक-वेद धिर। चोराक धान छोपताह रखवार। मूरही लेताह आ चाह िपबताह आ नाम लगतैĠह चोरकेँ। चोरेबालकेँ गामक लोक कहबामे सुभीताक लेल चोरबा कहैत अिछ। चोरबा नाम रिहतो ओ इमनदार अिछ। िकछु खेतीसँ आ िकछु रखवािरक धान बचाकेँ हरेक साल जमीन िकनैत अिछ। एिहना ढोलाय मड़र पिरāम करैत आर ईमानकेँ साथ रखवािर करैत छल। आई ओ सĦपž िगरहत बिन गेलाह। तिहना चोरबो बिन जाएत। िकएक निह बनत?’’ ओ अपन इमान बचैने अिछ लगन लगा कऽ काज करैत अिछ। असल चोर आ लुच्चा तँ अिछ मुसबा रखबार। केकर जजैत आ फिसल कखन कािट छोिप लेत वा कटवा दैत से ककरो पता निह। गामक कतेक लोक िवरोध कएलक- ‘‘जे मुसबाकेँ अिगला बिरस रखवारसँ हटा देबैक। िकĠतु अिगला बिरस पुनः रखवािरक लेल एक नंबरपर मुसबाकेँ नाम। एकर सबसँ पैघ कारण रामशरण िसंह। िसंह जी गामक सभसँ पैध िगरहत। सब दृिƠकोणसँ। कुनक खेत-पथारकेँ देखवा-सुनबा आओर रखवािरक पूणर् िजमेवारी मुसबेपर रहैत अिछ। बारहो मासक लेल। मुसबाकेँ नामो बदिल गेल अिछ। सभ गोटे ओकरा रखबारे कहैत छैक। मुसबाकेँ रखवार रहलासँ िसंह जीकेँ दुई फैदा। रखवार सॱसे गामक िकĠतु िसंहजीक खेती केँ िवशेष देखभाल। दोसर ई जे बारह मासक मजदूरी मुसबाक भेटबाक चाही। िकĠतु िसंह जी तीन मासक मजदूरी कम दैत छल। आ ई किह संतोख दैत छल- ‘‘जे तीन मासक लेल तँ तू गामक रखवार रहैत छी। तोरा गाम िदशसँ रखबािरमे अनाज भेटतिह छौ। तेँ तीन महीनाक कािट कऽ भेटतौक।’’ सभ गĢप बुिझतो मुसबा अपना समांग जेँका िसंहजीक खेती-पथारीकेँ देखैत छल। आर अपनाकेँ धĠय बुझैत छल। ओ सोचैत छल- जे िसंहजीक िकरपा रहत तँ हमरा िकयो रखबािरसँ हटा निह सकैत अिछ। सँगिह समाजमे जे नीक-अधलाह करैत छी वा बजै छी तेकर बादो हमरापर िकछु निह होइत अिछ। िसंह जीक परभावसँ बचल रहैत छी। आब रखबारो चुनैत काल गाममे बƂड राजनैित होइत अिछ। के बेकती कोन पैघ िगरहतसँ िमलल अिछ आ केकर गĢपक परमुखता समाज देतैक। केकरा रखवार रािख लैत आ केकरा हटा देतैक से कहब मोसिकल।

मैिथली कथा २००९-१० 99 पिहले ई सामािजक ĭयवİथा छल जे गामक पंचायतमे सभसँ बेसी जमीन- बाला मािलक जेकरा सभकेँ चुिन दैत छल ओ सभ रखवार भऽ जाइत छल। िकĠतु बादमे एिह गĢपक िवरोध भेलैक। धन आ िशक्षा बढलासँ सभ जाित अपन-अपन िसर उठौलक। तँ आब सभ जाितसँ एक-एकटा रखवार राखल जाइत अिछ। जेकर संख्या कम अिछ तँ दू जाित िमिल एकटाकेँ राखल जाइत अिछ। ऐनामे के रखवार रहताह के हटताह से कहब मोसिकल। कोन िगरहकतसँ केकरा बेसी परेम भाव अिछ। जे ओकरा लेल पंचायतमे लड़त। आ ओकर गĢप रिहये जाएत, कहब किठन। ओना रखवार बनैक लेल बहुत गोटे तैयार रहैत अिछ। एिहसँ दूटा लाभ। अपना खेतीकेँ रखबािर नीक जेंका तँ होएतिह अिछ। संगिह रखवािरसँ ĆाĢत िवशेष आमदिनयो। तेँ एिह कारजक लेल बहुत गोटे तैयार। िकĠतु बनताह तँ भाग्यवाला। तईयो िकछु एहनो तेज आ गुणी बेकती अिछ जे सभ साल रखवार बनबे करताह। ओहने बेकती अिछ-मुसबा। पाँचो रखवार िमिल रखबािर वाला धान मुसबा एिहठाम जमा रखता। ओिहठाम दौनी करा कऽ पाँचटा कुड़ी लागत आ सभसँ बड़का कुड़ी मुसबे उठा कऽ लए जएताह। मुसबाक पिरबारोमे कोनो बेसी काज निह। रखवारिक लेल एकदम ठीक बेकती। राित-िबरैत न चोर-डकैतक डर आ निह साँप-कीड़ाकेँ। चाकर-चैरठ, भुटगर कारी देह। पैंतालीस बरख उमेर भेला बादो जुआन सन लगैत अिछ। अकेल खड़ खाईवाला। गाममे मारा-पीटी कएलाक कारणे दूई बेर जहलसँ िखचड़ी खा कऽ आपस आएल अिछ। पėी दमा रोगक कारणे िदन-राित खॲिखआइत पड़ल रहैत अिछ। चािर बरस पूवर् एक राित पुतोहसँ थĢपर-मुĸा करैत छल। जुआन बेटा िकमहरोसँ आएल। पėीकेँ बेसी मािर लगैत देिख ओहो मुसबाककेँ मारए लागल। मुसबा करोधमे आिब मोटका डेढ़हĝथीसँ बेटाक कपार फोिड़ देलक। ओिह िदनसँ बेटा-पुतोह िभž भऽ गेल। बेटा िदĪलीमे कमाइत अिछ। आ जाईत काल ओ अपना पėीकेँ भाला-बरछी देने गेल अिछ। आर किह गेल अिछ- ‘‘जँ हमर बाप तोरासँ झगड़तौ तँ सीधे भाला भॲिक िदहैक। ओ तोहर ससुर निह काल िछओ।’’ एिह गĢपक पूरा पþा मुसबाकेँ छै। तैं ओकरा कतउ डर निह िकĠतु आँगनमे डैरा जाइत अिछ। हेओ अपनो गाछी बƂड भुताह। भिर िदन मुसबा बाधक ओगरबािह करैत अिछ आ साँझिखनकेँ चैकपर सँ ताड़ी पीिब आबैत अिछ। आर िनशॉंमे मातल अधरितयोमे अŎा-रुदलक गीत गाबै लगैत अिछ। चोर-चहार धसबािहनी बाध जाइते ओकरा डरे थर-थर कँपैत। कहॴ मुसबा आिब गेल तँ िक होएत पता निह। बेसी काल मुसबा ओिह सुतलाहा गाछक झॲिझमे बैसल रहैत अिछ।

100 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िकĠतु एखन तँ ओिहठाम अिछ-सुमनी। िसहारबाली अथŭत सुमनी। जोखनकेँ पुतौह। कद-काठी बेस नमगर, छरगर गोर पतिरया चमड़ी। ओकर पित फेकुआ चािर मास बाहर खटैत अिछ तँ दू मास गामपर रहैत अिछ। अगहन आ अखाढ़क समएमे िगरहतक काज करैत अिछ। सुमनीकेँ तीन बरख पिहले एकटा संतान भेल रहैक। तेकरो छिठहारक राित पछुआ दािब देलकै। तकर बादसँ कोिख निह भरल। िकĠतु सुमनी एिह बातसँ िनराश निह अिछ। ओ बुझैत अिछ जे आइ निह कािŎ बाल-बच्चा हेबे करत। आब तँ शहरमे बड़का-बड़का डागदर बैसैत अिछ। ओकरा बाल-बच्चासँ अिधक िचĠता ख्ेाती-पथारी बढेबाक अिछ। आओर ओ उžैत माल-जालसँ उžैत करबाक लेेल परेशान रहैत अिछ। तेँ दुपहिरयाक टह-टह करैत रौदमे सुमनी धास िछलबाक लेल िनकलल अिछ। की करत बेचारी। घर-आँगनाक काज ओकरिह करए पड़ैत अिछ। बूिढया सौस हरदम बेमारे रहेत अिछ। ससुर कखनहुँ-काल खेत-पथार देिख आबैत अिछ। से बात ठीक। िकĠतु दुआरपर आिबतिह बूढबाकेँ अİसी मन दुख सवार भऽ जाइत छैिĠह। आ अनका दरबĔजापर खूब गĢप हाँकैत रहैत अिछ। सभकेँ फिरयाक कहैत रहैत अिछ- ‘‘ बेटाक बाहर चिल गेलासँ बेसी काजक भार हमरिहपर पिड़ गेल। एको पलक पलखित निह।’’ िकĠतु सभटा फूिस। सभसँ अिधक खटनी सुमनीकेँ। तइयो सुमनी अपना सौस-ससुरकेँ िनदादर निह करै चाहैत अिछ। कारण ई अिछ जे िबयाहमे सुमनीक बापसँ एकोटा रुपया दहेजक नामपर निह लेलक। बादोमे एिह बातक लेल उलहन-उपराग निह देलक। संगिह सुमनी जँ बेमार पड़ैत अिछ तँ ओकरा ससुर दबाई-िवरो करबामे एको रती कोताही निह करैत अिछ, सौस िदन-राित सुमनीक सेवा-टहलमे लगल रहैत अिछ। सुमनीक सभ िदनसँ कनेक झनकािह आ बाजै-भुकएमे टेिटयाह। िकĠतु सौस-ससुर ओकर बातकेँ सहज भावसँ İवीकार करैत अिछ तेँ सौस-ससुर आ पुतौहमे खूब गाढ़ परेम...। जिहना माइक दुलािर तिहना सौसक दुलारी। कोनो बातमे अिड़ जाएव। अपना मोनक अनुकूल। ई लक्षण ओकरा बेदरिहसँ अिछ। माÿ दूई िदन िदयारीकेँ रिह गेल अिछ। जािहसँ काज आरो बिढ़ गेल अिछ। िजनकर घर टाट-बाँसक अिछ। िदनभिर घर-आँगनमे गोबर-मािटसँ घरबा- दुअरबा खेलैत रहू। कतबो नीपब-पोतब तइयो एकटा कोनचार टूटले रहत। तइयो सभ अपना पड़ोिसयासँ ĆितİपƄर्धा करैत काजमे ĭयİत। गाछक छाँहमे बैसल सुमनी सोिच रहल अिछ। सोचबाक निह चाही। चोइरसँ पूवर् जँ िकयो सोचए लागत तँ चोइर हेबै निह करतैक। फेिर पुिलस- दरोगा, कामकेँ। कोटर्-कचहरी कोन कमा कऽ। िकĠतु चोरोकेँ कखनहुँ-काल सोचए पड़ैत अिछ। खास कऽ नवका चोरकेँ। चोरो तँ बहुत Ćकारक होइत छैक। ताहूमे ई तँ चोर निह चोरनी छल। तेँ बेसी सोचैत छलीह।

मैिथली कथा २००९-१० 101 ‘‘लार-पुआरक अभाव भऽ गेलासँ गाए-मालकेँ सभसँ बेसी िदĸत। आब जँ टगली बेरमे घास िछलब तँ साँझतक घास िछलैत रिह जाएब। बगलमे खसलाहा धान अिछ। छाँहमे धान तँ हेतैक नािह। ओहो गाछतर दबल अिछ। ऐतेक बड़का िगरहतक अिछ। दस मुŇी छोिप लेलासँ एकर की िबगड़तै। िकĠतु हमर तँ िबगड़त। दुधगर गाएकेँ खाइक ितरोटी भेलासँ दूध सूिख जएतैक। दोसर बहनजोग बाछीकेँ भिर पोख धास निह भेटलासँ ओ कमजोर भऽ जएतैक। एखन तँ बेबस आ लाचार छी, नचारकेँ आगू िबचार की। एकरा कुकरम निह कहल जा सकैत छैक। एिह बेरसँ हम अपना पितकेँ बाहर कमाए लेल निह जाए देबैक गेल छैक। रुपया कमा कऽ आनबे करता। एकटा औरो खरीद लेब। तीनू गायकेँ पालब-पोसब आ दूध चैकपर उठौना लगा देबैक। तेना कऽ राİता लगेबै जे एकटा िबआएल रहत तँ दोसर गािभन। आब एकरिह पाईल बढ़ेबाक छै। सĦहार निह हैत तँ एक आधकेँ बेिच खेतो कीिन लेब। चारा कऽ िदĸत छै तँ पछुआरक बाड़ीमे धासक बीया बुिन देबैक।’’ ओ कलेजाकेँ मजगुत कएलक। रखवारसँ कžी किटकेँ आएले रहए। हाँय-हाँय धान छोपए लागल। पिहलेसँ काटल घासक पिथयाक लगमे गेल। गĦहरैल छोपल धान छीटामे रखलक, उपरसँ धास फुलकैक रािख देलक जािहसँ धान देखबामे निह आिब सकए। तरका धान उपरका घाससँ झँपा गेल। तब जेना भीतरका थरथरी कम होअए लागल। सुमनीकेँ बुझएलै जेना पाछूमे िकयो ठाढ़ भेल हो। आ ओकर सभटा अधलाह काज देखैत हो। फेिर सोचलक-जे एतेक टह-टह करैत दुपहिरयाकेँ रौदमे के एताह। ई सोचेत संतोख भेल। खर-खर जेना पाछूमे िकछु खड़खड़ाएल हो। ओकरा डर पैिस गेल। साइत भूत-Ćेत न हो। घुिमकेँ पाछू िदस देखलक आ देखतिह रिह गेल। मुँहक बोली बž। छातीक धुक-धुकी तेज भऽ गेल। हाथ-पाइर जेना कठुआ गेल हो। िकĠतु एहेन िİथित बेसी काल तक निह रहल। तĜक्षण आएल पिरिİथितसँ लड़बाक क्षमता मनुक्खमे आिब जाइत छैक। ई क्षमता िकनकोमे िकछु कम िकनको िकछु बेसी होइत अिछ। अपना देह आ मनकेँ समाĠय करबाक चेƠा करैत सुमनी धासक पिथया उठेबाक चेƠा कएलक। मुसबाक कड़कैत İवर िनकलल- ‘‘ ऐ, धासक पिथया उठा निह सकैत छेँ। आइ धरा गेलँह। दस िदन चोरकेँ तँ एकिदन साउधकेँ। ओिह िदन गामक लगीचमे रिह तँ गािर दैत गामपर चिल गेलँह। अखन िचिचएबो करबिह तँ एतेक दूरसँ िकयो सुनतॱ।’’ याइद पड़ल सुमनीकेँ ओिह िदन मुसबा सुमनीकेँ देखैत ऐँिठकेँ बाजल रहै- ‘‘बाधमे धान रहे चाहे घसबािहनी सबहक मािलक मुसबा। जे मन हेतै से करबै।’’

102 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) इएह सुिनकेँ सुमनी गािर दैत चिल गेल रहैक। सुमनीकेँ चुप देिख मुसबा फेर बाजल- ‘‘ आब तँ तोरा जिरमाना लगबे करतउ। िकयो निह बचा सकैत छौ।’’ सुमनीकेँ İमरण भऽ उठल-ससुरक लाठीक हूर। सौसक खोरनीक मािर। भरल पंचायतमे छॱड़ा सभक िपहकारी। जिरमाना जे लगत से अलगे। तइयो ओ िहĦमत बाĠहलक- ‘‘हम देसराकेँ खेतमे हाथ निह देिलए। हमरा पिथयामे कहाँ िकछु अिछ। लोग घासो निह कटतैक। माल-जालकेँ एतेक िदĸत छैक। हमरा बेर भेल जाइत अिछ। हम जा रहल छी। हमरा िकयो निह रोिक सकैत अिछ।’’ पिथया उठा कऽ चलल। करोधमे आिब मुसबा घासक पिथया ठेल कऽ िगरा देलक। आ घास उझिलकेँ िझिड़याबैत बाजल- ‘‘ई की िछओ? आब कोना बँचबे?’’ सुमनी लाजे कठुआ गेली िकĠतु कोनो बहाना तँ करए पड़त सुमानीकेँ बाजिल- ‘‘ ई धान हम अपना खेतमे काटलहुँ। माल-जालकेँ बचेबाक लेल तँ कोनो उपाय करऽ पड़त।’’ मुसबा ओकरा देहकेँ गहॴकी नजिरसँ देखैत मुड़ी िहलाबैत बाजल- ‘‘ हँ, अपना मालक जान बचा आ दोसरकेँ गरदिन काट। गे कहै िछयौ-आबो लत हो। हमर बात सुन। साँपो मिर जाएत लािठयो निह टूटत।’’ सुमनी सोचलक- कहॴ कोनो नीके गĢप कहैत हुए। डुबैत काल ितनका भेेट जाए। पूछलक- ‘‘अच्छा की कहै चाहैत छहक।’’ मुँहक सुपारीकेँ चपर-चपर करैत। आँिख-मुँह चमकाबैत मुसबा बाजल- ‘‘कहबौ की। कतेक िदनसँ आस लगौने छी। कतेक बेर तोरा इशारासँ कहबो केिलयौ। एक बेर हमरा मनक आस पूरा कऽ देिख, तोरा कोनहु गĢपक दुख- तकलीफ निह होए देबौक। की मौिगयाह फेकुआकेँ पाला पड़ल छेँ। सुžर जुआनीकेँ गारथ कऽ देतौक।’’ सुमनी थर-थर कँपैत, लिलआएल आँिख मुसबा िदस तकलक। आओर सोचलक-उमेर देखहक आ पिपयाहाक गĢप सुनहक। जँ इĔजत निह रहत तँ जीिव कऽ की करब। िकĠतु लगैत अिछ जे आइ देवी, महरानी बचैत तबे बाँचव। अपना शिक्तकेँ संƇह करैत। कड़िककेँ बजली- ‘‘रे तोरा बाजैकेँ ठेकान छौ िक निह। सभ धन बाइसे पसेरी बुझै छी। बƂड खेत खेने छी। आई सभटा बोकरा देबौक।’’ कठहँसी हँसैत मुसबा एकरा मौगीक मलार बुिझ लपिक सुमनीकेँ बाँिह पकड़लक। एिह बातमे मुसबा पिहलहुँसँ अĥयİत छल। कतेकोकेँ साथे कुकरम कएने छल, िकĠतु आसक वीपरीत मुसबाकेँ सुमनी एक ऐँड़ मारलक। मुसबा फेर उिठ सुमनी िदश बढ़ल। ओकरा बुझेलए घोड़ापर सवारी करबाक लेल एक दू चैताड़ तँ सहए पड़तैक। धाक छुटल निह छैक। कने बलजोरी कऽ लेबै तँ िक कऽ सकैत अिछ एिह सुन-मसान बाधमे। बात बढ़तैक तँ िसंहजी िगरहत

मैिथली कथा २००९-१० 103 अिछये। ओकर िकरदानी देिख सुमनीक सॱसे देह आिग नेश देलक। आँिख लाले- लाल थर-थर कँपैत शरीर। बाजिल- ‘‘ सोझहासँ भािग जो निह तँ...। िकĠतु मुसवा निह रुकल। आगू बढ़ल हँसुआ नेने सुमनी हुड़कल। चर-चर-चराक हँसुआक Ćहार कुरताक सँगे मुसबाक कनेक छातीयो िचरा गेल। आँिख उठा कऽ देखलक तँ बुिझ पड़ल। ओ सेाझामे सुमनी निह िकयो आन ठाढ़ अिछ। साइत गाछक झॲिझसँ कोनहु देवी ओकरापर सवारी भऽ गेल। हाथमे खूनसँ भीजल हँसुआ। साड़ीकेँ ढठा बĠहने करोधसँ किरआएल मुख, लाल-लाल आँिख, थर-थर काँपैत मुसबा िदश बढ़ल आिब रहल अिछ। गरजैत बजली- ‘‘ आइ सभटा खून बोकरा देबोक। सभटा पाप पेट फािड़केँ िनकािल देबोक। ठाढ़ रह ओिहठाम।’’ मुसबाकेँ बुझेलै जे आब Ćाण बँचाएब मोिसिकल। ओ िखिखर जेँका पाछू घुिर पड़ेलाह। धाँिह-धाँिह खसैत पड़ा रहल अिछ। ओकरा बुिझ पड़ैत अिछ जे पाछूसँ खूनमे भीजल आँिख आ हँसुआ दौड़ल आिब रहल अिछ। आिब रहल अिछ। िनĀय मनुक्ख निह देवी चढ़ल अिछ ओकरा देहपर। ओ िचिचया उठल- ‘‘हौ मािलक, हौ िगरहत, दौड़केँ आबह हौ।’’ िकĠतु कतउ िकयो निह आबैत अिछ। ओ अपİयाँत भऽ गेल अिछ। हलफ सूिख रहल अिछ। आँिखक आगू अĠहार सन बूिझ पड़ैत अिछ। फेर मोन पिड़तिहं जोर-जोरसँ पाठ करै लागल- ‘‘जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कपीश िनहुँ लोक उजागर।

104 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

शरिदĠदु चौधरी सĦपादक, समय-साल। समय–संकेत बलराज घरमे बैसल अपन आतीत िदस झाँिक रहल छल। एहन अवसर किहयो निह भेटल छलैक ओकरा जे ओ अपन इितहासकेँ İवयं अपन नजिरसँ आंिक सकए। ईहो अवसर ओकरा एिह कारणे भेिट गेलैक जे िक ओकर पėी सेहो बेटा संग मुबंइ चिल गेल छलैक आ ओ घरमे िनतांत असगर रिह गेल छल। वयİकक अंितम पड़ावपर आइ ओ अपनाकेँ एकदम असगर पािब रहल छल। ओ सोचए लागल जे िकएक आइ ओ असगर भऽ गेल अिछ? िकएक एक–एकटा कऽ सभ ओकरासँ अलग भऽ गेलैक? पिहने दुनू बेटी अपन–अपन सासुर चिल गेलैक। फेर दुनू बेटाक समए अएलै। पिहने शोभराज पढ़बाक हेतु िदĪली गेलैक आ पढ़ाइ समाĢत कएलाक बाद ओतिह एकटा कĦपनीमे काज करए लागल। फेर ओकर िवआह भेलैक। िकछु िदन ओकर पėी पटनामे ओकरा सभ लग रहलैक आ फेर ओ अपन पित लग िदĪली गेिल आ ओतिह रिच-बिस गेल। एिह तरहे केशव सेहो नोकरीक खोजमे मुंबइ गेल आ ओहीठाम İथायी रूपेँ रहबाक िनणर्य लऽ लेलक। माइक कोरपच्छु रहबाक कारणे आब माएकेँ सेहो अपना संग रखबाक हेतु िकछु िदन लेल लऽ गेल अिछ। मालती सेहो िकछुए िदनमे बेटा ओतए रिम गेल अिछ। ओना ओ जाइत काल किह गेिल छिल जे जĪदीये आपस आिब जाएत। बलराज सोचैत चल जा रहल छल जे आिखर िकए एक दोसरासँ अपन लोक अलग भेल चल जाइत अिछ जखन िक पिरवािरक सभ सदİय रक्त सĦबĠधसँ जुड़ल एकटा माला सदृश होइछ। ओ ई सभ सोिचये रहल छल िक ओकरा बुझएलैक जे ओकर दांतमे एकटा छोट–िछन केश फंिस गेल छैक जे बेर-बेर दांतसँ फराक करबाक हेतु ओकरा अपना िदस आकृƠ कऽ रहल छैक। ओ सोचलक जे पिहने एिह केशकेँ दांतसँ बाहर कऽ देल जाए तकर बाद ओ िनिĀंतसँ बैिस कऽ अपन िचंतन

मैिथली कथा २००९-१० 105 Ćिƅयाकेँ आगाँ बढ़ाओत। ई सोिच ओ मुँहसँ नकली दांत बाहर िनकािल ओिहमे फंसल केशकेँ ताकए लागल। मुदा ई की– ओकरा ğयान अएलैक जे ओ चĮमा तँ लगौनिह निह अिछ तँ दांतमे फंसल केश ओकरा कोना सुझतैक? ओकरा İमरण अयलैक जे चĮमा बगलबला कोठरीमे टेबुलपर राखल छैक। ओ चĮमा अनबा लेल ठाढ़ भेल। बगलबला कोठरीमे जएबा लेल डेग बढ़एबापर छल िक ğयान अएलैक जे छड़ी तँ हाथमे लेबे ने कएलक तँ कोना ओिह कोठरीमे जा सकत? मुदा तुरंते ओकरा देवालसँ सटल छड़ी ओहीठाम भेिट गेलैक। हठात् ओकरा अनुभूित भेलैक जे जिह Ćķक उþर ओ तािक रहल छलसे तँ छड़ीक संगे भेिट गेलैक। ओ हँसए लागल आ İवयंसँ कहए लागल–हमर दाँतजे हमर अपन छलसँ निह अिछ। हमर आँिख जे Ĕयोित Ćदान करैत छल, सेहो अपना भरोसे निह रहल, हमर पैर जािह भरोसे एतेक याÿा कएलहुँ सेहो आब अपनापर िनभर्र निह अिछ आ एिह सभक अछैत हम कृिÿम अंगक सहयोगसँ जीिव रहल छी। फेर ओकर िचंतन Ćिƅयाक आगाँ बढ़लैक–ई सĦबĠधो सभ तँ कृिÿमे छैक तखन एकरा जनबा लेल एतेक ĭयाकुल िकए छी। की हम अपन सर-सĦबĠधीक संगे धरतीपर आएल छी। िकए हमर ई अंग सभ अपन रिहतो काज करब बंद कऽ देलक? आब ओकर िचंतन Ćिƅया िवराम लेबाक संदेश दऽ रहल छलैक। ओकरा ओ ई किह देलकै जे समऐ ओ तंÿ छैक जे मनुįयकेँ सभ साधन उपलĤध करबैत छैक आ समएपर पुनः ओकरासँ आपस लऽ लैत छैक। ओ तँ एकटा माğयम माÿ अिछ जे समए–संकेतक पालन करैत अिछ।

106 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

िवजय–हरीश मूलनाम-–िबजय कुमार िमā, िपता-İव. āी हिरĀĠƖ िमā, जĠम ितिथ- 11/01/1970, शैक्षिणक योग्यता- İनातक Ćितơा (राजनीित िवज्ञान), राँची िवĂिवńालय, राँची। जीवनवृत- कृिष एवं नीिज पठन–पाठन। Ƈाम.पो.–परसरमा, भाया–सुखपुर, िजला–सुपौल। िकछु लघु कथा: छॴट बला गमछा हम हुनका िदस दैखिलयै तँ ओ बैसले-बैसल मुिİकया देलिखन। कने आर लग जे गैिलयै तँ ओ िखलिखला कऽ हँिस देलिखन। हम अित–उĜसािहत भऽ हुनक आरो लग जे गैिलयै तँ ओ कने सइिट कऽ कानमे कहलिखन–“भाइयौ हमहुँ अहॴक जाित–िबरादरी छी”। आ अपन माथ परक छॴटबला गमछा हटा देलिखन। िकिकऔनी दुइ गोट लेखक िमÿ छलाह। एकटा नव तँ दोसर पुरान। पुरान िकछु हद धिर एक मोकामपर पहुँिच गेल छलाह। तँ नवका हुनका लग बेर–बेर दौड़िथ। पुरनका बेचारे आिजज भऽ गेल छलाह अपन नव िमÿसँ। मुदा बाजताह की? कहबाके लेल, मुदा छलिथ तँ िमÿ। एक िदन ओ किवताक माğयमे अपन पीड़ा ĭयक्त केलिखन आ किवताक शीषर्क देलिथन–िकिकऔनी। नोट- “ सगर राित दीप जरय” सरसिठम कथा गोơी, मानाराय टोल, नरहन (समİतीपुर) मे पिठत भावी–रणनीित हम बच्चा सभकेँ ƀयूशन पढ़बैत छलहुँ। एक ठाम नव ƀयूशन शुरू करबाक छल। हम ओतए पहुँचलहुँ। मौसम कने गमर् छल। कुसŰपर बैसते गमछासँ हाथ–मुँह–पोछए लगलहुँ।

मैिथली कथा २००९-१० 107 तखने कुसंयोगे हमरा दिहना आँिखमे िकछु पिड़ गेल। आँिख िलिबर– िलिबर करए लागल। बगलेमे बच्चा सभक दादी बैसल छिल। ओ हमरा िदस कने नजिर कड़ा करैत बािज उठलीह–“हो माİटर! आइ तोहर पिहले िदन िछअ आ हमरा तोहर िछच्छा नीक निञ बुझबै छअ”। हुनकर ई गĢप हमरा िटकासन धिर लेिस देलक। मुदा हम िपतमरू भेल हुनका कहिलयिन–“निञ माताराम कोनो तेहेन गĢप निञ छै। हम तँ अपनेक आँिखक रोशनी टेİट करैत छलहुँ। िकएक तँ ओिह िहसाबे ने हम अपन भावी– रणनीित तेँ करब”। तृįणा हमरा टोलामे ‘ एकगोट’ छल। नमरी कोिढ़या। पुरखाक अजर्ल संपैत बेिच–बेिचक जीवन भिर अपन आिĜमक आ शारीिरक सुख मौज केलिथ। जीह तँ बहसले रहिन अħयाशो तेहने। हुनक गĢप सुिनक तँ नवका छौड़ा सभ आँगुरमे दाँत काटे लागैत छलै। अपन छुतहरपनीक लेल ओ Ćिसŀ छलाह आ एिह आगाँ ओ िधयो–पुताक भिवįयक लेल किहयो निञ सोचलिन। तँ समए एलिन तँ बेटा–पूतोह खूब ऐराठेन, खूब दुगर्Ĕजन करिन। ई रोज–रोजक फजीहत देिख अड़ोस–पड़ोस बलाक अनसहज लािग जािन मुदा हुनका लेल कोनो हरख िव षए निञ। एिह ƅममे एक िदन एकटा हुनके मेिरया आिजज भऽ बािज उठलाह–एह! िहनका जगहपर जौ दोसर िकयो रिहते तँ िनİतुके िबख खा िलत मुदा एिह चावŭक Ćवृित इंसान लेल कोनो बात निञ। सभ िकछुकए कुþŭमे पड़ल गदी जकाँ झािड़ दैत रहिथन लागै जेना िनलर्Ĕजताक सभ घाटक पािन ओ पीने रहिथ। िछः िछः ऐना बेटा पूतोहूक खोरनाठबसँ मिर जाएब बेसतर एहेन जीनगी कतो मनुक्खल जीते। संयोगे एक राित हुनके घर लग बाटे हम जाइत छलहुँ िक एकटा आवाज हमरा कानमे सुनाई पड़ल ‘ राम जानकी, राम जानकी’ हम अकनाबे लगलॱ िक फेर वैह आवाज ‘ राम जानकी, राम जानकी’ रक्षा करहुँ Ćाण की ओ अपन मचानपर पड़ल रटेत छलाह। कने मुसकीयाबेत हम आगाँ बिढ़ गेलॱ।

108 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

सुनीता ठाकुर गाम–भवानीपुर, िजला मधुबनी। अपहरणक सच वषर् २००३ िसतĦबरक घटना अिछ। हमर िपितयौत भाय āी राजीव कुमार इंटरमीिडएटकेँ छाÿ छलिथ संगिह मेिडकलकेँ तैयारी सेहो करैत रहैथ। ओ पटनाक बोिरंग रोडमे एकटा भाड़ाक मकानमे संगीक संग रहैत छलाह। १५ िसतĦबरक िदन हुनका एकटा संगी आशीष हुनके संगे रहैत रहए हुनका ठिग कऽ लऽ गेल जे चलु गया घुिम आबए लेल। राजीब संगीपर िवĂास कऽ हुनका संगे गया लेल िबदा भेलाह। दुनु गोटे िरक्शा पकिड़ पटना İटेशन पहुँचलाह। Əेनमे बैसलापर िकछु दूर गेला िक बगलमे एकटा लड़का आिब कऽ बैिस गेल। राजीब छलिथ सीधा लड़का ओ िकछु बुिझ निह सकलाह। िकछु दूर गेलापर दूटा लड़का आ ओर बगलमे आिब कऽ बैिस गेलिन। आशीष कहलिखन जे ई सभ हमरे संगी छिथ। राजीब सोचलिन जे ठीक छैक सभ गोटे संगे गया जाएब तेँ मोन लागत। मुदा ओ िक बुझताह जे ई सभ िहनकर जीवन बबŭद करबाक तैयारीमे छिथ। Əेनमे सभ खूब बातचीत करैत जाइत गेलाह। बहुत दूर गेलाक बाद राजीब पुछलिखन जे एखन धिर गया निह आएल तँ आशीष कहलिन जे “देिखयो ने राजीव हमर भैया सीवानमे रहैत छिथ, हुनका हमरासँ कोनो जरूरी गप करबाक छिन फोन केलिथ जे पिहने सीवान आऊ तािह Ņारे पिहने चलु भैयासँ भेंट कऽ लैत िछयैन, तकर बाद गया चलब। राजीबसँ बुिझ सीवान पहुँचलाह मुदा ओ सभ गोटे एकटा होटलमे नाİता कएलिन। नाİताक समए िमठाईमे बेहोशीक दवाई िमला कऽ राजीवकेँ खुआ देल गेल। िमठाई खाइत देरी ओ बेहोश भऽ गेलाह। तकर बादक घटना ओ िकछु निह बुिझ सकलाह। संगी सभ िमल कऽ हुनका देविरया ( यू.पी.)मे अपहरणकतŭकेँ िगरोहमे दऽ देलिन। राजीवक िपता किटहारमे कोनो साधारण नौकरी करैत छलाह। राजीवक फोन निह लगलिन तँ ओ िचंितत भेला आ पुनः अपन पैघ भाय जे िक पटनामे रहैत छिथन हुनका लग एलिथ। पूरा पिरवार िचंतामे डुबल छ्लाह मुदा राजीवक कोनो खबिर निह लगलिन। सभ बहुत घबरा गेलाह। पुिलस İटेशन जा कऽ िरपोटर्

मैिथली कथा २००९-१० 109 िलखैलिन। बहुत ठाम पता लगैलिथन मुदा िकछु पता निह चलल। चािर िदनक बाद सांझ कऽ अपहरणकþŭ फोन कएलक आ राजीवक पापाक कहलिन जे “ अहाँक बेटा हमरा लग अिछ अहाँ २५ लाख टाका लऽ कऽ आऊ, तखन अहाँक बेटाकेँ छोड़ब”। ई सुिन राजीवक पापा कहलिथन जे “हम साधारण आदमी छी, एतेक टाका कतयसँ आनब”। आ बहुत िचंितत भऽ गेलाह। ओिह बेचाराक दुटा बेटीक िबआह करबाक रहिन, कतयसँ ओतेक टाका ओ अनतिथ बहुत परेशान भऽ गेलाह। माए, भाए, बहीन, चाचा सभ केओ सोचए लगलिन जे आब की होएत। कतएसँ ओतेक टाका इंतजाम होएत आ राजीवकेँ छोड़ा कऽ आनब। हमहुँ गेल छलहुँ चाचासँ भेट करबाक लेल। हमहुँ बहुत िचंितत भेलहुँ, आ चाचाकेँ समझेिलयिन जे िचंता निह करू सए ठीक भऽ जाइत। बीस िदन धिर बहुत घमथर्न भेल। अंतमे अपहरणकþŭ चािर लाख टाकाक इंतजाम कयलिन आ दुनू भाँइ अपहरणकþŭक गपपर टाका इंतजाम कएलिन आ दुनू भाँइ अपहरणकþŭक गपपर टाका लऽ कऽ छपरा गेलाह। ओतए गेलापर हुनका सभकेँ भरोस निह होइत छल जे राजीव भेटत। बहुत परेशान कएलिन अपहरणकþŭ सभ कखनो फोन कऽ कऽ कहैन जे होटल आऊ तऽ कखनो फोन कहैत जे İटेशनपर आऊ। बहुत परेशानी भेलिन मुदा अंतमे राजीव भेंट गेलिन। राजीवकेँ देखलिथ आँिखपर पņी बाĠहल, पूरा कारी भेल, पूरा पातर सेहो भऽ गेल छलैक। एकटा चेन पिहरने रहैथ सेहो छीन लेने छल, मोबाइल, घड़ी, सेहो लऽ लेने रहए। पापा एवं चाचाकेँ देिख कऽ राजीव बहुत कानए लागल। ओ सभ समझा बुझा कऽ हुनका पटना डेरापर अनलिथन। राजीवकेँ देिख पूरा पिरवार बहुत खुश भेला आ सभ केओ पकिड़ कऽ कनलिन। राजीव सेहो कनलिन, तखन ओ सबकेँ जनौलिन जे एहन संगी भगवान दुĮमनोकेँ निह देिथ। आ पूरा जनौलिन जे केना कऽ ओ बीस िदन अपहरणकतŭक संग िबतौलिन। जंगल रहैथ पूरा आ ओतय एकटा घरमे बंद कऽ कऽ राखिन। खेनाइ –िपनाइमे िदĸत निह होइत मुदा ओ खेता िक ओ तँ पूरा घबराएल रहिथ आ हरदम कनैत रहिथ। जेना तेना कऽ िदन कटलिन। बादमे पता चलल जे आशीष मधुबनी िजलाकेँ छल, हुनके सभटा हाथ रहैथ राजीवक अपहरणमे। हुनका गलत फहमी भऽ गेल रहिन जे राजीव बहुत बड़का बापक बेटा छिथ। पुिलसकेँ जखन आशीषक नाम बताओल गेल तँ ओ सभ छान बीन कऽ ओकरा थाना अनलक। बहुत िदन धिर मािमला चलल। तािह बीचमे आशीषक पापा राजीवक पापाकेँ कहलिन जे चािर लाख टाका हम दैत छी हमरा बेटाकेँ नाम कटवा िदयौ, मुदा ओ सभ तैयार निह भेलाह। आ एखनो धिर आशीष जेलमे अिछ। राजीव िदĪलीमे एम.बी.ए.क तैयारी कऽ रहल अिछ। ई छल अपहरणक सच।

110 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) राकेश कुमार रोशन लालापिह-६, सĢतैरी हाल, पो.ब. न: ५४३२ काठमाँěडूर पĖचैित (कथा) थप!....थप!....थप!....खैिन तरह िथपर रगड़लाकेँ बाद चपिड़ ठोिक धूल उड़बैत बाजल िसफैत “आजुक पĖचैितमे बड़ मोन लागल....निह रौ?....चžाड़। “खैिन खाइल जीसँ लेर चुबबैत बािज उठल चžा “ तँ!....आइ खुब मजा एतै....बड़ मोनसँ दुलारसँ आइ.ए., िब.ए. आ आओर िकदन िबग्दनन पढ़ेलक िजवछ। माटर....अपन दूनु बेटा आ बेिटयोकेँ। कहै छल जे....बलु हमरा धन जोडबाक निह अिछ....बेटा बेटी सभक पढा िलखा देव तँ कमाइयोकेँ खेतै आ....िनक लोकसेहो बिन जएतै”। “ तह!....आइए माटरबाकेँ बुझा जाएत जे दुकŇा जमीन जोड़नेसँ फाएदा होइतै की बेटा पढ़ेनेसँ फाएदा भेलैय”। खैिनकेँ मोनसँ घुİसादैत बाजल िसफैत तखने िसफैतक गोहािलमे साँझुका खानिपन खा’ क’ हाथ सुखबैत पहुँच गेल िदिलफ आ चट् दऽ बािज उठल “किथकेँ बातिचत चलैत छै....िसफैत का....महरो एक जुम खैिन िदयह”।“धुर....खैिन खेता! ....बड़ सौख छौ तँ लगाकेँ खेबिह तँ निह हेतौ?....अच्छाह ले कनेक्शन खा हमहुँ तँ बेर-बेर माँिगक खाइत छी आ फटसँ दू जुम खैिनकेँ ितन भागल गाबैत आ बातक अगािड़ बढ़बैत फेर बाजल िसफैत “तोँ आइ भिर िदन गाममे निह छी से....निह िकछु बुझिल एखनी धरी”। बातकेँ जॲक नािहत नमराबैत देिख िबचेमे बािज उठल चžाछ “रे!....िजवछा माटर ńा गफहोइत छलै....तोहर बाप तँ तोरा बेिस निह पढेलकौ तँ बुढवा 14 कŇा खेतो तँ िकनकेँ राखलक ने एकटा जे ई माटर हँ....देखैत निह िछ 4 कňा खेत छै ओ कनी दूटा घर।....कमाक नै एĸोब कňा खेत िकनलकै आ....नै दसो हजार रुपैया जĦमाक कऽ सकलै....। िĆिĠसपलक नामपर भेटल पैसा बुि़ढया बेिटकेँ िबयाहोमे निह जुमले तँ राखी की सकत। आब आइ ओकर पुतहु सभमे झगड़ा भऽ गेलै तँ बेटा सभ पĖचैित बैठेने छै....िभन है ले....आब दे खैत रिह सार बुढवाकेँ पुछै छै”। बुि़ढया बोिछ एिह सĠदीभर्मे कहने छल जे माİटदर अपन बेटीकेँ İनाआनþक धिर पढा देलकै बाद िवआह कएने छल २१ वषर्क उमेरमे। िदिलफ सभ वात बुक्तसतो अिĠठया लऽ नािहत बाजल ए आइ पँĖचैित िछयै ने तब देिखिलयै बुढवाकेँ Ņारपर दूटा िविरĖच लागल छलै आ-आ हमरो घर गेल छलै ओकर पोता एकटा िविरĖच लाबे”।....तह....देखह बुढबाकेँ आब गĽन भऽ जेतै.....एखन चलै बुलैत छै तँ कहुनाक िदन किटए जेतै....आ जखन लोथ भए जेतै तँकेँ....केँ देखतै....देहमे िपलुबा फिड जेतै....”। आिगमे घी ढारैत बात बढौलक चžान” तँ देखैत जािहने....पाँच कňा खेतमे दूओ कňा माटरकेँ पĖच सभ द’ देत तैयो कोइ निह

मैिथली कथा २००९-१० 111 राखैले तैयार होतै।....छोटका तँ ओर हरामी छै,....कहते वलु मिर जाउ बुढवा....हमरा कोनो मतलब निह छै।....आ बढका।....किन िİथर गरे छैत की भेल....दूकňा खेतसँ िक होइतै बुढवाकेँ सो ओहो राखत।....आइसँ तँ िजबछा माटर अबİसे. िभख मँग्गा भऽ जेते। एĦहखर ठोर तरक खैिनमे सँ पच्चो दऽ थुक फेकैत बाजल िदिलफ”....तह! आब बुढवा माटरकेँ देखह ने दमाक दवाइकेँ िकनक लाइवदैत छै बजारसँ आ कोन पुतहु....भोर साझ एक लोटो पािन देतै ĤलडĆेसरक गोिट खिहले”।“....ओना आब पँचैित शुरु भऽ गेल होत।....चलै चलहने ओते बुझवो तँ करवै केना केना करैत छै पĖचसभ आ....आ बुढबाकेँ हालो तँ देख लेबै” बाजल िसफैत आ एिह वाले तीनु सहमित होइन डेग बढेल एक उĜसुगक नजर लऽ कऽ िजबछक Ņार िदस। िजबछ एक आधुिनक सॲचक िथक। िजनकर िशक्षा Ćित िवशेष झूकाव छल। ओना अपना तँ गामेक Ćाथिमक İकूकलक िशक्षक छल आ माÿ मैिƏक पास। मुदा अपन दुनु बेटा जेठका गनपैत आ छोटक धनपैतकेँ पढेमे कोनो कसैर बािक निह रखने छल। तैं गनपैत एम.ए. पास केन छल आ धनपैतो बी.ए. पुरा केने छल गनपैत गामक लगेमे रहल एकटा छोट बजार कĖचनपुरमे एकटा बोिडर्ग İकुकलमे पढ़बैत छल ओही नोकरी ओकरा बड मुिİकलसँ भेटल छल आ एतेक ने कमाइ होइत छल जे खापीक बेटाबेिट पढबैत पढबैत एĸोर टाका निह बचैत छल। बेरोजगारीकेँ समİयासँ Ƈİत एिह समाजमे धनपैतकेँ एहन एĸोत गोट नोकरी निह भेटल छल तािह लक ओ गामेमे भोर साझ िटसन पढावैत छल आ कहुना कहुनाक ओहो अपन गुजाराकर लैत छल। बुढबा एखन एतके उमरगर भऽ गेल छलिथसे ओ नोकरीसँ िरटाएडर् भऽ गेल छल आ पेĠसलनक नामपर हुनका जे टाका भेटैत छलिथ जे बĪडकĆेसर आ दमाक िनयिमत दवाइयोमे मुिĮकलसँ जुिम जाइत छल । आइ बुढवा िजवछा माटरकेँ भरल छै। मडर मनेजर, राĦफयल, िभक्खतना सँगिह िसफैत, चना, िदिलफ लगाएत बहुटो लोग सभ गोल बृŀ भए बैसल छल। Ņारक ितनुकातक घरक कोĠटाल सभ भरल छल छॱडी आ जिनजाइत सभ सेँ आ सभक उĜसुलकता पूणर् आँिख केĠƖी तँ छल पĖचसभ िदस। साँझुक किरब साढें आठ बजयत होयत। गनपैत तİतकरीमे ‘सुपािड, िविड, मोहिलसॲफ आ पान लैत आँगनसँ दुवारपर आएल आ सुभक वाट’ लागल। एĦहयर मडर मौनताक भंग करैत बोलल” शुरु कर ने....की भैलेए....खाितर ई पĖचैित बैसाओल गेल?’’ ओना सभ बुझैत छल जे बाİतैिवकताकी िथक? ई तँ बाट शुरु करैके औपचारीक घोषणा माÿ छल धनपैत बाजल ‘’हम दुनू भाँइ िभन होव चाहैत छी से बलु हमरा सभक’....सभ िकछु बाँिटिदय। बिड सोक्त आ İपƠु भाषामे किह गेल छोटका एĦहार राĦफतल कनेक्शन गिĦभर होइत बाजल कहल जाइत अिछ जे जतेक माथ ततेकबात तेँ बातक सुब मोथलक, चौहु तफर् नजर दौडबैत- ‘’की हौ पĖचसभ बढवाकेँ कतेक खेत जीवका देनेसँ िनक होयत। एĦहरसँ मनेजर बाजल ‘’ पाँच कŇा खेतमे की देवह बेटा बेटी सभक....ओना निह देवह

112 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) तैमो तँ निह हो तै ने....से निह....तीन कŇा आ ई छौडा सभी जेकर बाल बच्चा. छै ओ सभक एĸे कŇाक....”। सभलोक अपन अपन िहसाबे आ बात ओझराइते गेल तावतमे मड़र पुिछ उठल” क हौ!.... िजबछ माİटकर छे....सभ बरबैरक बाँिट दह दुनकेँ। बैसल सभ एक बेर जेना चॱक गेल कहल जाइत अिछ जे जटेक माथ टटेकबा ते बातक खुब मोथलक, वातावरण कनेक गिĦभर बिन गेल आ ओइ गिĦभरक कारण छल बुढबाक ई गप। िकएक तँ सभी सोचने छल जे ओ बाजत पाँच कŇा खेत आ छटा कोĠटाक की बाँटब कह....कहक बरु कमाकेँ खाएत आ ई सभ हमरा छाँिट देव। मुदा....ओकर िवपरीत बुढबा आइ अपना िहİसा. सेहो निह माँगलएक।....कहलक जे हुनके बरोबरी बाँिट दहक बुढबाकेँ ई बात सुिन निह रहल गेल मनेजरक आ ओ जेना िवलाड़ पठरुक झपैट लेना छौ आ बु िढ़या बकँरी भऽ देखैत रहैत हो। तिहने गिĦभर बाताबरणकेँ िचरैत बािज उठल”। तुँ! तुँ कत जेबह।....केँ तोराकेँ राखत....िभख माँगब कािŎसँ िभख....िभन भेलाक बाद ई बेटा सभ एकटा फूटलहो बािट निह देत िभखो माँगो बाİतेत....”। बात पूरी निह भेलछल ता गनपैत बािज उठल”....अपन बाउकेँ हमिह राखब....हमिह राखब अपन बाउकेँ।....िजिवका लेल आ निह....मुदा हम अपन बाउकेँ बुड़हािरमे सेवा करब। एĦहहर सभ आĀयर् चिकत भऽ गेल। एखन तक एहन पĖचैित निह भेल छल। आन पँचैित सभमे िजिवको होइत जबरजिİत लादहल जाइत छल बुढवा बुिढयाके....ओकरे कोनो िधयापुतापर आ....आ लाधनहार रहैत छल पĖचसभ....ओहे पĖचसभ एĦहँर बुढवाकेँ आँिख नोरा गेल छल। ओĦहहर....एक कातमे ठाढ़ धनपैतो तुरुĠते. बािज उठल”निह....हम राखब अपन बाउ केँ।....हम अपन बाउके बीन जी निज सकैत छी....”। आब बुढबाकेँ याद पिर गेल ओ िदन जखन बुढबा कतेक मेहनतसँ पालने छल ई दू बेटा। एक बेिटकेँ....। ओकरा सभक माय ते किनएटामे छोिड चैल बैसल छिलिथ एिह सँसारमे मुदा....मुदा बुढबा माİटरर माए आ बाप दुनुके भुिमका पुरा केने छल ओिह सभक लेल। से आब....आब अपन जीवनकेँ सफलताकेँ खुिसक नोर निह रोिक सकल आ पािनक धार नािहत बनल बुढवाकेँ िसकुड़ल गालक चमडीकेँ िबचोिबचा वह लागल नोर एक सफलताक नोर।

मैिथली कथा २००९-१० 113

हेमचĠƖ झा दूटा कथा बाट रामाक बी.ए. (आनसर्)क परीक्षा खतम भऽ गेल रहैक। िबनु समए गमौने ओ तुरंत आगूक Ćितयोिगताक परीक्षा समएक तैयारीमे जूिट जाई चाहैत छल। ऑनसर्मे नाम िलखिबतिह Ćितयोिगता परीक्षा सभक तैयारीमे लािग गेल रहता ओ। एक दूबेर बैंकक आ कमर्चारी चयन आयोगक िलिपक āेणी परीक्षामे बैिसयो चुकल छल। आ तेँ Ćķक पÿ सभक हाँज भाँज छलैक। संगिह पिहनेसँ िविभžी पÿ-पिÿका पढ़बाक कारणे िहĦमरत कने खूिज गेल छलैक। िहĦमपत केने छल जे यिद ढंगसँ एक-डेढ़ साल Ćितयोिगता परीक्षा सभक तैयारी कयल जाय, तँ कोनो ने कोनो िलिपकीय परीक्षामे उþीणर् भेल जा सकैत अिछ। तेँ अपन पिहल लŞय जँ िलिपकीय परीक्षा रखने छल आ बादमे िकछु आर। तथािप शुरूआत कतऽ कयल जाए तेकर बाट नै देखाई छलैक। गामपरसँ परीक्षाक तैयारी असंभव छलैक, कारण एिहठाम एक तँ पÿ-पिÿका भेटब मोशिकल छलैक, दोसर परीक्षा सभक फाँमौ भेटब दुलर्भ छलैक। आ तेँ कतौ बाहर रहब आिनवायर् छलैक। ओकर दोİतो - महीम सभ सही Ćकरममे लागल छलैक। तथािप ओकर सभक लŞया ‘पटनामे रिह तैयारी करक छलैक, परĠतुर दोİतै महीमसँ रामाक िİथित िकछु िभž छलैक। रामाक बाबूजी महेश बाबू पिकया गृहİथ। बाप-पुरुषाक देल ९-१० बीघा जमीनक बलपर अो महेश बाबू अपन तीनू बेटाकेँ बी.ए. करौने छलाह। दुनू जेठ बेटा बाहर छलिन आ अपन पाएरपर ठाढ़ हेबाक उपƅममे लागल छलिन। सभसँ छोट छलिन रामा। ओहो बी.ए. ऑनसर् कऽ चुकल छल। एिहबीच दूटा कनेदानो केने छलाह। एिह सभ Ņारे महेश बाबूक आिथर्क दशा नीक निह छलैन। रामा एकरा अनुभव करैत छल आ तेँ बाबूसँ आगूक पढ़ाइक वाİतेआ पाई मंगबाक ओ िहĦमलत निह कऽ पािब रहल छल। ऑनसर् परीक्षाक तुरंत बाद Ćितयोिगताक क्षेÿमे भीड़बाक लŞय् पिहनेसँ बनने छल। दुगŭपूजामे बड़का भैया लग एिह संबंधमे Ćİताव रखलक, परंतु

114 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) आĂाहसनक बात तँ दूर ओ कहलिन जे एिह Ćितयोिगता परीक्षासँ िकछु ने होएत, कतौ नोकरीक जोगार करू। संभवतः- बड़का भैयाक अपन ĭयतिक्तगत अनुभव रहिन। कारण ओहो एिह तैयारी सभमे दु तीन साल गमौने छलाह आ कतहु निह चयन हेबाक िİथितमे अंततः Ćाईवेट कंपनीमे कलकþामे नोकरी पकड़ने छलाह। मिझला भैया बी.कॉम. केलाक बाद 5–6 महीना पिहने पूणर्त: िİथरो ने भेल छलाह। एहन िİथितमे बड़का भैयासँ मदिदक आशा केनाई ĭयतथर् छल। आब एĸेटा राİताँ छल जे कोनो शहरमे रिह ƀयूशन करए आ अपना बलबूतापर Ćितयोिगता सभक तैयारी करए। एिह लेल रामा तैयारो छल, परंतु शुरूआत कतऽ करए से निह फुराईत छलैक। इंतजार छलैक फगुआक, जािहमे ओकर मिसऔत भाए आबएबला छलिथन। ओकर मिसऔत पटने रहैत छलाह आ संजोगसँ ƀयूशन आिछ सेहो करैत छलाह। फगुआमे मिसऔत भाय रमणजी गाम एलिखन। फगुआ Ćाते रामा हुनका लग पहुँचल आ अपन सभटा समİया रखलक। रमण जी पूणर् सहायताक आĂाासन देलिखन आ कहलिखन जे हम पुन: मईमे गाम अबैत छी तँ हमरा संग पटना चलब। तथािप ओ कहिथिĠह “पटनामे रहनाई। खेनाईक खचųटा बेसी छैक तेँ ओतए बेसी ƀयूशन करए पड़त। िलिपकीय परीक्षाक तैयारीक लेल पटना रहब आवĮय।क निह छैक। एकर तैयारी मधुबनीमे रिहकेँ सेहो कएल जा सकैत छैक। तथािप अहाँ फेरसँ सोिच िलअ आ मईमे हमरा संग चलू”। मिसऔतक उक्तू सुझाव रामाकेँ ठीक लगलैक। मधुबनी रिह गामोक संपकर्मे रिह सकैत छल आ जरूरत पड़लापर गामो आिब सकैत छल आ पटनासँ गाम अवैमे पयŭĢत समए आ पाई लगैत छलैक। संगिह अपन दुनू भाँइक बाहर रहने आ İवयं पटना रिहने बाबूजी सेहो एसगर भक् जेताह, ई सभ सोिच ओ अपन पटना रहबाक ĆोƇामपर फेरसँ सोचए लागल। तथािप पटना निह रहत, तँ कतए रहत ? ई Ćķ् एखन धिर अनुþिरत छल। एही ऊहापोहमे अĆैलक महीना लिगचा गेलैक। मईक अंत धिर पटना जएबाक छैक रामाकेँ आ मधुबनीमे शुरूआत करक छैक। ऑनसर्क दौरान मधुबनीमे रिह चुकल छल तेँ सभटा देखल सुनल छलैक। बस समİया छलैक जे शुरूआतमे कमसँ कम एकोटा ƀयूशन भेिट जाईत तँ नीक रहैत। बादमे आसे ƀयूशन भेिट जयबाक संभावना रहैत छैक। ƀयूशन माÿ अपन गुजर-बसर जोग करए चाहैत छल। मेसमे खयबाक पक्षमे छल तािक भानस भात बनेबाक समए बिच जाए। ƀयूशन करैत अğययन जारी रखनाई कने किठनाइ अवİसन छलैक तथािप दोसर कोनो उपाईयो तँ निह छलैक। एही सभ उधेर-बुनमे एक िदन दलानपर बैसल छल िक तखने मंगनूकेँ अबैत देखलक। मंगनू ओकरे गामक एकटा छाÿ छल आ एखन मधुबनीमे बी.एस.सी.मे पिढ़ रहल छल। मंगनू रामासँ तीन-चािर साल जूिनयर छलैक आ मैिƏक परीक्षाक समएमे रामा ओकरा पयŭĢतढ़ मदिद कएने छलैक। से मंगनू

मैिथली कथा २००९-१० 115 रामाकेँ दलानपर खाली बैसल देिख ओतए आयल। कुशल मंगल भेलैक आ फेर शुरू भऽ गेलैक पढ़ाई-िलखाईक मुĿा। रामा सिवİतार मंगनूकेँ अपन गĢप बतेलक। पटना जएबाक संबंधमे मिसऔत भाएक िवचार सेहो बतेलक आ अपन Ćितयोिगता परीक्षाक तैयारीक शुरूआत मधुबनी या दरभंगासँ करक अपन मंशा Ćकट केलक। मंगनू मैिƏकक समयमे रामा Ņारा कएल गेल मदिदकेँ िबसरल निह छल। ओ Ćकटत: बाजल- “ हम बी.एस.सी.मे पढ़ैत मधुबनीमे ƀयूशन करैत छी आ एतबा आमदनी भऽ जाईत अिछ जे बाबूजीसँ हरदम निह माँगय पड़ैत अिछ। अहाँ तँ हमरा पढ़ेने-िलखने छी। जँ हम ƀयूशनसँ अिजर्तकेँ सकैत छी तँ अहाँ िकएक ने कऽ सकैत छी। अहाँ शीƈे मधुबनी आऊ आ अपन शुरूआत करू। हम करब अहाँक लेल ƀयूशनक जोगार”। असमंजसक िİथितसँ दू-तीन महीनासँ गुजरवला रामाकेँ जेना एकाएक अपन बाट भेिट गेलैक। ओ तुरंत अपन सहमित देलक। लगेमे रामाक बाबू बैसल छलिथन। दुनू गोटाक गĢप सूिन ओ बजलाह, “जहन तॲ İवायं ƀयूशनसँ आगूक पढ़ाई जारी राखए चाहैत छह तँ जा धिर तोँ पूरा ƀयूशन निह पकड़बह, हम तोरा मदिद करबह”। बाबूजीक एिह बातसँ रामाकेँ आर सĦबरल भेटलैक। ओ शीƈे मधुबनी गेल, डेरा डंटाक भाँज-पता लगेलक आ सभ सामान लऽ कऽ मधुबनी पहुँिच गेल। मंगनू ओकरा तुरंत ƀयूशन तँ निह दे सकलैक, तथािप कहलकै जे अहाँ पिहने एकटा पिĤलक İकूओल पकड़ू। ƀयूशन अनेरे भेिट जाएत। रामा एक-दू िदनक भीतर एकटा पिĤलक İकू्ल पकड़लक। शीƈे ƀयूशनो भेिट गेलैक। शुरूआत नीके जना भऽ गेलैक। ता कमर्चारी चयन आयोगक िलिपकीय परीक्षा क िलिखत भागमे पिहले चांसमे सफलता भेिट गेलैक। ओकर खुशीक िठकाना निह रहलैक। सभटा खबिर ओ गाम आ भैया सभकेँ कएलक। ओकर बड़का भैया पिहने चांसमे भेटल ओकर सफलतासँ Ćभािवत भेलाह आ पाई-कौड़ीक मदित देब शुरू केलिन। फेर की छल रामाक आगू बाट अनायासे खूजैत चिल गेल। अƇसोची आई महेश बाबू अपन तीनू बेटा अजय, िवजय आ दुजर्यक संग कोनो िवशेष मुĿापर गĢप कऽ रहल छिथ। गĢप कखनो फुसुर-फुसुर होईत अिछ तँ कखनो तेज भऽ जाईत अिछ। ओना महेज बाबू पिकया गृहİथ । अपन गृहİथीजक बलपर तीनू बेटाकेँ पढ़ेलिन–िलखेलिन आ तीनू बेटीक िवआहो केलिन। सिदखन गाम घरसँ जूड़ल रहएबला महेश बाबू पिहले बेर िदĪली अएलाह अिछ, तीनू बेटा िदĪलीएमे छिन। अपने दुनू Ćािण गाममे छिथ। तीनू बेटी सासुर बसैत छिन। खेत पथार बटाईपर

116 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) छिन, तथािप ततेक भऽ जाईत छिन जे कोनो बेटासँ किहयो मंगबाक पयोजन निह पड़ैत छिन। गाममे सभ कहैत अिछ जे महेश बेस सुिखतगर आदमी अिछ, एकर पिरवार बेस नीक छैक, सभ अपन पाएरपर ठाढ़ छैक------आिद। आ तेँ महेशबाबू गाममे िनिĀत छलाह। किहया िदĪलीा बेटा सभसँ भेंट करक लेल या धीया पुता सभकेँ देखबाक लेल ओ निह अएलाह सालमे एक- आध बेर बेटे सभ गाम जाईत छलिन। तथािप एिहबेर मुĿासे फँिस गेलिन जे दुगŭपूजाक बाद ओ अपन एकटा गॱआक संग िदĪलीा अएलाह। सामने िदयावाती या छिठ रहबाक बावजूदो ओ एलाह। यńिप तीनू बेटामे थोड़-बहुत मतांतर रहैत छल, परĠतुस ओ Ćाय: Ćकट निह होईत छल। मुदा एिह बेर फागुनमे अजयक जेठकी बेटीक कनेदानमे से निह भेल। गĢप-शĢपक ƅममे निह जािन कोन गĢपफपर मिझली पुतोहु आĜमादाहक Ćयास केलकिन। यńिप िदनक समए छल आ कनेदान-दुरागमन रहबाक कारणे बेिटयो सभ छलिन तेँ बात आगू निह बढ़लैक आ मािमला थिम गेलैक। गाममे ई बात जंगलक आिग जेकां पसिर गेल आ देखैत-देखैत पूरा गामक लोक जमा भऽ गेल। महेश बाबूक सभटा संिचत Ćितơा आ सुख-चेन जेना छनिहमे देखार भऽ गेलिन। किनये िदनक बाद बेटा सभ सपिरवार वापस चिल गेलिन आ तीनू बेिटयो अपन-अपन सासुर िनचेनसँ आब महेश-बाबू पूरा Ćकरनपर िवचार करए लगलाह जे एना भेल िकएक। गाम-घरमे सेहो लोक सभसँ िवचार-िवमशर् केलिन ई बुझवामे भांगठ निह रहलिन जे सभक जिड़ छैक पाई। माİटलर साहेब तँ Ćकटत: किहयो देलिखन जे अहाँ अपन जीबैत पाईबला झंझिट िकएक ने फिरया दैत िछयैक? वİतु त: ६-७ साल पहदिन महेश बाबू पाही पņीक एकटा एक िबघवा खेत बेचलिन। अपनासँ आब ओकर रखवाली कएल पार निह लगैत छलिन, तेँ ओकरा बेच देलिन। िकछु पाईं तँ जमीनमे फँसेलाह, िकछु जमाए सभ लऽ गेलिखन आ बाँकी ४०,००० िफक्सर कऽ देलाह। ओही साल अजयक बेटाक मूड़न जमा भेल। अजय येन-केन Ćकारेण दुनू छोट भाएकेँ बुझा देलिथ जे बैंकमे पाई राखलासँ की फायदा होएत। ई पाई हमरा दऽ िदअ। हम शेयर बजारमे एकरा लगाएब आ गामक बाँकी सभ काज हमरा िजĦमाहमे रहत। हम एĸ िह सालमे एकरा दोबर-तेबर कऽ लेब आिद। परंतु से भेल निह। कारण जे हो। दू-तीन साल बीतलाक बाद अजय राम कहानी शुरू केलिन जे हमरा शेयरमे घाटा लािग गेल। तथािप सभ सƙ केने रहल जे की पता शेयरक दाम बिढ़ जाई। परंतु ई की? एक िदन गĢप- शĢपक ƅममे जेठकी िदयादनी मिझली िदयादनीकेँ कहलिथĠह- जे अहाँ सभ आब ओई पाईकेँ िबसिर जाईयौ। अहाँक भैंसुर घरक लेल ई केलिथ ओ केलिथ.....। आ एही मुĿापर कनेदान आ दुरागमन संपžह होईतिह उक्ते घटना-घटल। महेश बाबू शीƈाितशीƈ एकर समाधान करए चाहैत छलाह। तथािप आषाढ़-

मैिथली कथा २००९-१० 117 सोनमे गामसँ बहरेताह कोना, तेँ दुगŭपूजाक बाद िदĪली अयलाह, खास कऽ कऽ एिह मािमलाक पंचैती करक लेल। पिहने पहुँचलाह अजयक डेरापर, ओिहठाम हाँज-भाँज लेलिन ,परंतु ई निह कहलिन जे एिह काजक लेल आयल छी। िवजयक डेरा लगे छल। ओतहु गेला आ समटा बात बुझलिन। भरदुितया िदन पहुँचलाह दुजर्यक डेरा। अजय आ िवजय सेहो रहिन संगमे। फिरछौढ भऽ सकैत छल ओही िदन परंतु दुजर्यक िबनु हाँज-भाँज लेने ओ गĢप कहब उिचत निह बुझलाह। दुजर्यकेँ İपओƠ त: कहलिन जे हम एिह काजक लेल आएल छी आ एकर समाधानक रİताल देखौलेन से तोँ ओई ४०,०००मे िहİसाह निह लहक। हम किह सुिनकेँ िवजयकेँ िकछु िदया दैत िछयैक आ एिह तरहेँ हमर इĔजुित Ćितơा बचा दय। चूंिक गĢप इĔजमत Ćितơाक छल, दुजųय मािन गेल आ रिव िदन सभ भाईक बजाहिट भेल एिह लेल। पिहने तँ अजयक सामनेमे Ćİताएव भेल जे तोँ ४०,०००×२ = ८०,००० केँ तीनू भाईमे बाँिट देहक। परंतु अजय तकर् रखलक जे हम एिह बीच गाममे अलान-फलान खचर् केलहुँ आ तेँ हम पाई निह देब। संगिह ई पिरवारक पिहल कनेदान छलैक, एिहमे िहनको सभकेँ शेयर देबए पड़तिन आ ई सभ शेयर निह देलाह, तेँ िहनका सभक िहİसास किट गेल। तकर् सूिन सभ अकक् रिह गेल। दुजųय İवायं कनेदानमे Ćİताव रखने छल जे अहाँक की पोजीशन अिछ से कहू तँ हमहूँ िकछु इंतजाम करैत छी। अजय मना कऽ देने छलाह। परंतु हुनका की बूझल छलिन से ओिह सझीवा पाईमे सँ हुनक िहİसा किट गेलिन। तहन अजयकेँ कहल गेल जे ई ठीक निह केलह तँ ओ दोसर Ćİताकव रखलिन जे अहाँ गाम जाउ आ खेत बेिचकेँ दुनू भाँइकेँ ४०–४० दऽ िदयनु। ई Ćİतावव तँ िकžमहु नै मानल जा सकैत छल। पयŭिĢत कहा-सुनीक बाद अंतत: अजय २०,००० देबपर सहमत भेलाह आ ई फैसला भेल जे ओ २०,००० िवजयकेँ दऽ देिथन। एवं Ćकारेण महेश बाबू एिह मुĿासँ जान छोड़ेलिन। एिह सभ घटना ƅममे अƇसोचीक बुिŀक तारीफ करए पड़त। कनेदानसँ ६-७ साल पिहने योजना बŀ ढंगसँ समटा सझेवा पाई अपन कĤजाफमे करब आ कनेदानक बाद िहİसा क नामपर काटब, वİतु तः- हुनक धूतर्ता आ चालाकीक उĜकृसƠ उदाहरण छल। अƇसोची सुखी रहलाह। िबनु कोनो हुĔजँितकेँ पिहल कनेदान िनकिल गेलिन। सभसँ घाटामे रहल दुजर्य। ओकरा हाथ िकछु नै एलैक। लेिकन ओ पयŭĢत खुश छल जे सभटा पिहने देखार भऽ गेलैक। अĠयथथा भाँइमे सभसँ छोट रहने ओ सभ िदन सभक मदिद करैत रिहतय आ अपना बेरमे िकयो नै आिब तैक मदिद करए आ तटबक पछतेलासँ की लाभ होईतैक?

118 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

सुभाष चĠƖ यादव

पित-पėी सĦवाद (एिह कथामे पिहल सĦवाद पित आ दोसर पėीक अिछ।) (एिह नाटकमे पिहल पाÿ पित आ दोसर पाÿ पėी अिछ।)

यै, सुनै िछऐ? हमरा कान छै जे सुनबै?

कखैनसँ हाक दाइत रही! की िछऐ?

चाह बना रहल छी? बैठल लोगकेँ एिहना चाह सुझै छै!

करै की छी? सुतल िछऐ!

तमसाएल छी की ? नै, हम िकए तमसाएब!

तखन एना िकए बजै छी? अहाँ बहीर छी की?

से िकए? आबाज नै जाइए?

मैिथली कथा २००९-१० 119 कोन आबाज? िसĪला के?

अरे अहाँ िकछु पीस रहल छी? तब ने बैठल-बैठल गीरब?

की पीस रहल छी? मसĪला, अओर की पीसब? अपन कĢपार!

धुर, अहूँ कथी-कथीमे लागल रहै छी। चाह बनाएब से नै? अहॴ कोन उनटन करै छी! हरदम कहब; चाह बनबै छी? चाह बनबै छी? हम एिहसँ अकच्छ भऽ गेल छी।

तखन छोड़ू। छोड़ू िकए? बना दै छी। लेिकन पीसल होएत तब ने! बेस, जे अहाँक इच्छा!

120 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

मानेĂर मनुज

जीत लोक गाममे रहए वा शहरमे सूयर् आ चĠƖपमा ओिहना उगैत छैक आ डुबैत छैक। सूयŸदय होइत छैक आ सूयŭİतम होइत छैक। साँझ होइत छैक आ भोर होइत छैक। दुपहिरया रौद आ बसातमे कोनो अंतर निह होइत छैक। मुदा सुिवधामे अंतर होइत छैक। िवजुरी आ महल देिख गामसँ शहर आएल लोक छगुĠतामे पिड़ जाइत अिछ। छगुĠतामे रघुवीर पड़ल छल। छगुĠतामे कमल सेहो पड़ल छल। जहाजक Ƃयूटी ओहीमे सूतब–बैसब। अहीमे सभ िनĜय िƅया– कमर्। मुदा İÿीक दशर्न दुलर्भ। किहयो काल केओ ककरो घुमबए–िफरबए अबैत छल तँ सभ देिखते रिह जाइत छलैक। कैसेट चलैत रहैत छलैक। बीच–बीचमे एनाउĠसमेĠट होइत छलैक। ककरो बजाएल जाइत छलैक तँ ककरो काजमे लगाएल जाइत छलैक। Ƃयूटीकेँ बादो केओ कोनो काज करएसँ मना निह कऽ सकैत छलैक। तैँ जहाजसँ बाहर िन किल घुमबए–िफरबए आवĮयरक छलैक। कमल जहाजसँ िनकलल आ मुĦबइयक महल, मुिĦबइयक सड़क आ मुिĦबइयक İÿीछ–शरीरकेँ देखैत आगाँ बढ़ैत जा रहल छल। मİतीममे चिल रहल छल। कखनो िरजवर्–बैंकक सामने पाकर्मे बैसैत छल तँ कखनो Ħयूािजयमक सामने बस–İटेĠडरपर कृįण चĠदबरक कथाकेँ याद करैत छल तँ कखनो लव ĢवाइĠटजपर बैिस लघु–कथा पढ़ैत छल। एक नजिर लघु–कथापर तँ दोसर नजिर अगल–बगलमे बैसल युगल जोड़ीपर रहैत छलैक। युगल जोड़ी पिहने समुƖ िदस पीठ कऽ कए बैसल छल आ जेना जेना सूयर् समुƖमे समाएल जाइत छल युगल जोड़ी समुƖ िदस घुमल जाइत छल। सूयर् डुबल। युगल जोड़ी समुƖ िदस घुमल। आगाँ बि़ढ नमहर–नमहर पाथरपर जा बैसल। जतए दस–बीसटा Ćेमी Ćेिमका ओतै ओकर ĭयगवसाय करएवाली सेहो। के कहैत अिछ Ćेम न बारी उपजे Ćेम न हाट िबकाए। जकरा Ćेम करऽ निह अबैत छैक सेहो Ćेम कीिन सकैत अिछ। कमल मंटोक कथा पिढ़ रहल छल। सभसँ ĢƜगर बच्चाछ ओ अिछ जे

मैिथली कथा २००९-१० 121 एखन धिर जमीनपर पैर रखलक निह अिछ। सभसँ िĆय बात ओ अिछ जे हमरा अहाँक कानमे एखन कहक अिछ। जािह हेतु हमर ठोर फुस–फुसा रहल अिछ; िकĠतुे एखन धिर अहाँसँ कहलहुँ निह अिछ। बगलमे दूटा िकशोरी बड़ İĭभािवक ढंगसँ गĢपह–सĢपख कऽ रहिल छिल, जेना दूटा सुग्गाज वेदक चचŭ करैत होए जे:– वेद İवढयं Ćमािणत अिछ िक एकरा Ćमािणत करक Ćयोजन छैक। िकशोरी गĢपा कऽ रहिल छिल जे Ćेम करब नीक बात छैक िक अधलाह। एक ओकर जवाब İपएƠत शĤदामे जानऽ चाहैत छिल मुदा दोसर ओकरा सवालक जवाब िकछु िछिड़आएल शĤद्े दैत छिल। पिहने ओ बाजिल:–Ćेम एक अधलाह काज छैक। फेर िकछु Ćिķ कएलाक बाद बाजिल:–िकछु सीमा धिर रहलासँ Ćेम एक नीक काज छैक। आ अंतमे एिह बातपर आएिल जे Ćेमसँ बिढ़ कऽ जीवनमे छैहे की। जी भिर कऽ Ćेम करू। अइमे कोनो पाइ खचर् होइत छैक। दुिनयाकेँ अहाँ कने Ćेमक नजिरसँ देिखयौक। दुिनयोँ अहाँकेँ Ćेमक नजिरसँ देखत। Ćेम न बाड़ी उपजे, Ćेम न हाट िबकाय, राजा–Ćजा जेिह रूपें बँिट–बाँिटकेँ खाए। पिहल पुछलकैक:– देखला आ सुनलासँ Ćेम भऽ जाइत छैक; मुदा िक एतवासँ संतुिƠ भेटैत छैक आदमीकेँ? एना कऽ पिहल दोसरासँ एकपर एक सवाल करैत छिल आ चालाकीसँ दोसरक पेटक बात िनकािल नोट कएने जा रहिल छिल। सभ बात ओ दोसराक पेटसँ िनकाललाक बाद ठहĸा दऽ कऽ हँसऽ लागिल आ दोसर नĦबरक िकशोरीसँ कहलक: तेँ नीक जकाँ अइमे रमलो छाँह आ हमरासँ सभ बात छुपबैत रहलाँए– हाँ। आब सþ कह जे तोँ ककरासँ Ćेम करैत छाँह आ एखन तक तोँ कहाँ धिर पहुँचलाँ –हाँ?’’ कमल पाँछौ घुिर तकलक। सूयर् बाँस भिर पािनमे चिल गेल छलैक। कमल आ ओइ दुनू िकशोरी छोिड़ सभ केओ अĨ््य मुँह समुƖक अĠहामर िदस कऽ लेने छल आ युगल जोड़ी–सभ एक दोसराकेँ किस कऽ पकिड़ रहल छल। कमल दुनू िकशोरीक बात सुिन रहल छल; मुदा जखन ओ दुनू बात किरते ओतँसँ उिठ गेिल तँ ओहो उिठ कऽ सड़कक कात पाकर्मे जा बैँचपर एसगर बैिस गेल। सामनेक बैँच सभपर कतौ दू–एकटा İÿी आ दू–तीनटा पुरूषक एक संग बातिचत कऽ रहल छल। सामने एक ठाम एक पुरूषक संग दूटा İÿी छलैक। दुनू–İÿीछ पुरूषक दुनू कात एक संग घासपर बैसल छलैक। कमलकेँ याद अएलैक गामक ओ गĢप । जखन ओ पिरक केश पकड़ैत छल तँ शिश टीक पकिड़ लैत छलैक आ जखन पिरकेँ छोिड़ शिशक केश पकड़ैत छिल तँ ओĦहरसँ पिर बाँिह पकिड़ िघचैत छलैक। तािहपर ओ िखिसया कऽ पिरक गाल पकड़ैत छल। तखन शिश गरदिन पकिड़ लैत छलैक। एना कऽ दुनू ओकरा उछžरर दैत छिल तािहपर ओ िखिसएबाक नाटक कऽ दुनूक अंग–अंग संग खेलौड़ करैत छल। एक बेर पिरक हाथ मचोिड़ जमीनपर खसाए देने छल आ हाथ–दुनू पकिड़ लेलकैक। फेर पिरकेँ छोिड़ शिशकेँ जमीनपर

122 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ओघरा टाँग पकिड़ िघिसयाबए लागल छल। खेल खतम हेवाक नाम निह लऽ रहल छलै। गाल बाँिह िक आब ओ एका–एकी दुनूक छाती तक चिल जाइत छल। पिर हारब निह िसखने छिल। मुदा शिश बीच–बीचमे तंग आिब पिरसँ मदैत मँगैत छिल आ पिर शिशकेँ छोड़बए जाइत छिल, मुदा İवायं ओकरा हाथमे आिब जाइत छिल। पिरकेँ पीठ भरे जमीनपर लेटाए दुनू हाथ पकिड़ िक दुनू पएर पकिड़ िघचलासँ ओकरा साइत ƅँिलंग करऽमे नीके लगैत छलैक। पकिड़ कऽ िघचलाक बादो ओ हािर मानए–वाली निह छिल आ तीनू लगातार हँİसीऽक आ आनĠदक चरम उĜकाषर् तक बढ़ल जा रहल छल। शिश आ ओ पूणर् पिरिचत छल। ओकरा दुनुक बीच एिह तरहक कोनो लĔजसयाक बात निह छलैक। ओ शिशकेँ संग औपचािरकता करैत छल आ चाहैत छल जे पिर हािर मािन ओकर चोराएल चĢपकल दऽ िदयाए। एिह बेर ओ पिरक देहपर पिड़ ककुड़ा बना शिक्तिवहीन कऽ देलक। शिश िचिचया उठिल:–अिहरे दैवा। बीच अङनामे। जुलुम भऽ गेलै। मुदा निह। पिर साड़ीकेँ धोती बना अपना शरीरकेँ पूणर् सुरिक्षत रखने छिल आ एना जाँघमे केँच लगाए देलाक बादो ओ जीतऽ निह देलकैक आ अंतमे वैह हािर मािन पाएरक चĢपएल ओतै छोिड़ चिल देलक। दूनू जीतऽ निहए ने देलकैक। ओकर िजĿ चकनाचूर भऽ गेलैक। राितमे जखन दुनुक िमलन अपना घरमे भेलैक तँ शिश पुछलकैक: अपना घरमे भेलैक तँ शिश पुछलकैक: आइ बीच अङनामे अहाँ पिरकेँ िकछु बाँकी निह रखिलयैक”। पाकर्मे तिहना एक पुरूष आ दूटा İÿी Ćेमालाप कऽ रहल छल। पुरूष जखन एककेँ पकड़ैत छल तँ दोसर छोड़बैत छलैक आ जखन दोसरकेँ पकड़ैत छलैक तँ पिहल छोड़बैत छलैक। एिह ƅममे पुरूष दुनुक अंग–अंग तक जाइत छल आ तिहना दुनू–İÿीख सेहो। कमलकेँ ओइ तीनूक खेल देखैत देखैत आकच्छं लािग रहल छलैक मुदा ओकर सभक खेल समाĢत निह भऽ रहल छलैक। Ćित–पल उमंग–उĜसाखह आ उþेजना नव अनुभूितक हेतु आगाँ बढ़ले जा रहल छलैक। एक बेर एक िदस मुड़ल फेर दोसर िदस। एक İÿी छोड़बक बहžेह अपना िदस िघचैत छिल आ जखन देह–İपेशर्क आनĠदक चरम–उĜकषर् िदस जाइत देखाइ–दैत छलैक तँ दोसर ईĮयŭ–वश ओकरासँ पुरूषकेँ हेट करैत छिल आ अपना िदस घीिच लबैत छिल। ई िƅया Ĝविर त गितसँ लगातार दोहराएल जा रहल छल, मुदा समािĢत निह भऽ रहल छल। कमल सोिच रहल छल जे ई सभ एतँसँ कतए जाएत से देखी। कोनो घर िदस जाएत िक होटल िदस जाएत िक गाड़ीमे बैस चिल जाएत। मुदा समए जखन बहुत आँगा बिढ़ गेल छलैक आ ओ सभ ओतँसँ उिठ निह रहल छल तँ İवतयं सभ Ćķँ ओतै छोिड़–अपना जहाजक लेल रİतास नपलक। कािŎ सेिलंग छलैक। दू मास तक मुĦबनइयक सड़क, मुĦबजइयक महल आ अĜयासधिनक–फैशनसँ रंगल–ढ़ंगल युगल–जोड़ीकेँ निह देख सकत।

मैिथली कथा २००९-१० 123 मुदा निह जहाजक सेिलंगक ĆोƇाम करीब पĠƖह बीस िदनक हेतु िİथिगत भऽ गेलैक। आनिदन ओ कोनो सािहिĜयक पिÿका हाथमे लेने एसगर घुमैत छल। कतौ कोनो गाछ तर बैसैत छल िक लगातार दूर–दूर चिर चिलते रहैत छल। आइ रघुवीर आ ओकर संगी इरफान कमलकेँ संग कऽ लेलक, ओतँ हेतु जतँ ओ दुनू बरमहल जाइत छल आ एक बस माÿ ओकरा दुनूकेँ सही जगहपर उतािर दैत छलैक। कोठापर सोफा लगाएल छलैक। तीनू बससँ उतिर सीढ़ी चढ़ल आ सोफापर जा बैस गेल। देह–āिमक सिज–धिज कऽ देह सुĠदरी बनिल छिल। एक–एकटा रघुवीर आ इरफानक बगलमे बैस गेिल। ओ सभ पूवर् पिरिचत छल। अपना ĆोƇामक अनुसार एक–एकटाकेँ हाथ पकिड़ दबौलक। यानी आइ तोरा चुिन लेिलयौक। आ इशारा केलकैक आँगा बढ़क हेतु। नĦहर हाँलमे नेवार मढ़ल लोहाक खाट लगाएल छलैक। थोड़ेक काल ओ दुनू गĢप–सĢप केलक आ नसर् जकाँ मरीजकेँ देखक हेतु खाटकेँ चारू िदससँ डंटा ठाढ़ कऽ परदा लगौलक रघुवीर एक खाटक गĿापर जा बैस गेल। इरफान सेहो दोसर खाटक गĿापर जा बैस गेल। दुनू देह–सुĠƖी रित–िƅयाक हेतु खाटपर चिल गेिल। थोड़ेक काल गĢप – कएलक आ फेर गĿापर पिड़ रहल। रघुवीर ओकरा देहक संग खेलब शुरू कऽ देलक। इरफान सेहो दोसरक संग आइ नव अĠदाज आ उमंगसँ खेलब शुरू कऽ देलक। दुनू िदलक मरीज बराबर ओतँ थोड़ेक शांितक एहसास लैत छल। इरफान अपना उŅेगक संग आतुर छल मुदा ओ, सीमा अĢपन मूड़ी परदासँ बाहर िनकािल िसगरेट पीबए लागिल। ओकर गरदिन सेहो खाटसँ बाहर लटिक रहल छलैक। कमल ओĦहनरे बैसल छल। ओ पूिछ बैसलैक:– भऽ गेलैक? “तँ जवाब देलकैक–निह।” कमल ओतँसँ उिठ सीढ़ी िदस बढ़ल जे िनच्चाँ उतिर आब बसे–İटे Ġडनपर इĠतवजार कएल जाए। ताबे एक देह–āिमक िनच्चासँ उĢपनर आिब रहल छलैक। छोट–गोर–नार मुदा कठगिर। तनल छाती देिख कमल अĢपन हाथ लपका जकाँ बढ़ा देलक आ आधा सीढ़ीसँ िनच्चाँ उतरऽ लागल िक ओ ओकरा माथपर उपरेसँ हाथ मारलक। ताबे ऊपरसँ दुनू मालती आ सीमा आिब गेलैक आ पुछलकैक: की भेलौक गई? “तँ कहलकैक सीढ़ीपर पटसँ लपिक लेलकाए। पइसा बचा कऽ राखत आ मगनीमे मजा लेत”। इरफान आ रघुवीर ताबे बाथरूममे साफ ---------- सफाई कऽ रहल छल। सीमा कहलकैक: हँम तँ एही–लाए एकरा िनच्चाँसँ ऊपर बजौिलयैक। हम सभ तँ अही सभक छी ने। एतँ िकछु करू अपराध निह मानल जाएत। बाहरमे ई सभ अपराध छैक। कतौ तािक झाँिक देबैक से अपराध। धĸा देबैक तँ अपराध आ एना लपकबैक–झपटबैक तँ से अपराध मानत। मुदा एतँ पाइ खचर् करू आ आनĠदँ िलअऽ। एतँ अहाँ बलाĜकाैरी निह कहाएब। लोक कमाइ– खटाइए कथी लाए? ई पसंद अइ तँ ई अहीकेँ अइ। लऽ जाऽ एकरा आ

124 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) करेजापर चिढ़ मड़मड़ा िदअऽ। एतँ केओ शमŭएत निह। केओ लजाएत निह। ओहो सीढ़ीसँ ऊपर चढ़ऽ–वाली कहलकैक :–हाँ तँ। ठीके तँ कहैत अइ। ताबे रघुबीर आ इरफान आिब गेल। दुनू पुछलकैक ओकरा सँ ;–की भेलैक? कमल कहलकैक:– चल, आगाँ कहबौक।” आ तीनू ओतँसँ िवदा भऽ गेल। आ अपना अपना İथाकनपर गेल। एक िदन इĠसटीच्यूटक टेरसपर कमल मदनक संग दूग्ला समेरम भिर पहुँचल। मदन कमलकेँ अपना राधाक िवषए घंटा–घंटा िकछु सुनबैत छलैक। िजनगीक अनेक पक्षपर ओ ओकरा कहैत रहैत छलैक, मुदा कमल घोटँ भरैत छल कथा जगतक अथाह सागरमे डुबकी लगबए–लए। ओ मदनकेँ कथा तĜवद आ िकछु उĜकृकįका कथाक िवषए कहए लगलैक। मुदा मदन ओकरा मुँहपर हाथ धऽ राधाक िवषए कहए लागल। ओकर ओ कथा सĜयज कथा छलैक। पिहल बेर जखन राघा भेँट भेल छलैक तँ ओ ओकर हाथ िदस तकलक हाथ सुž लगैत छलैक। बाजल:– “एक दोकानमे एतेक सुĠ दर चूड़ी सभ देखिलए जे मोन ललचा गेलाए। ओ चूड़ी तोराँ हाथमे खुलतौक”। तािहपर राधा कहलकैक: “हमरा कतँसँ पाइ आएत”? तािहपर मदन चņसँ जेबीसँ बीस रूपैया िनकािल कऽ देलकैक आ कहलकैक, “ जो, ओइ दोकानमे चूड़ी पिहरले गऽ”। राधा खुशीसँ रूपैया लऽ लेने छलैक आ चूड़ी पिहिर आएिल छिल। आ मदनक एिह उपकारसँ ओ बहुत खुश छिल। कतौ मदन जाइत अबैत छल तँ राधा दौिड़ जाइत छिल। ओ ओकरापर आकिषर्त भऽ गेिल छिल। दुनूक बीच चािर–पाँच साल Ćेम रहलैक मुदा बादमे राधा ओकरा संग Ćेम तोिड़ लेने छिल; एकरे तड़प छलैक मदनक मोनमे। मदन तेँ किह रहल छलैक जे आजुक जीवन अिनिĀतासँ भरल अिछ। चारू िदस पाथर जकाँ िसफर् धोखे–धोखा पड़ल अिछ। सिदखन ठेस लगबाकसँ भावना अिछ। Ćेमोमे धोखा िछपल रहैत छैक। आजुक जीवन िसफर् सþपर आिāत निह अिछ। जीवनमे छल आ संदेहक अहं भूिमका छैक। िचड़ै कखन केमहर घूिम जाएत, हवा अĢपमन रूिख कखन बदिल लेत, माल–जाल कखन बमिक जाएत आदमी निह जनैत छैक। मदनकेँ भावुक भेल जाइत देिख कमल फेर कथा–जगतक बात उठौलक। तािहपर मदन कहलकैक:–हमरा कोन काज अिछ कथा जगतसँ; हमरा कोनो लेखक बनक अिछ। हम तँ अपन िजनगी िजबैत छी। हमरा कोन काज अिछ कĪपनासँ। हमरा कोन काज अइ सभसँ। मदन ओकरा बातकेँ कािट दैत छलैक तेँ ओ लगातार ‘ घूँट’ लैते गेल छल आ तिहना मदन राधाक गममे डुबल जाइत छल। दुनू तरमराइत ओतँसँ उठल आ बाहर िनकलल आ चलैत-चलैत सोझे िसनेमा हॉलक सामने जा कऽ ठाढ़ भऽ गेल। थोड़ेक काल दुनू पोİटर

मैिथली कथा २००९-१० 125 देखलक। मदन कहलकैक:– हम तँ िसनेमा देखब।” कमल कहलकैक, “ हमरासँ िसनेमा हॉलमे तीन घंटा बैसल पार निह लागत”। ई िसनेमा हॉल निह जेल अिछ। हम एिहमे बĠद निह होएब। बाँकी दुिनयाँ कतेक सुिĠदर छैक! कतेक फलल फूलल छैक! कतेक हिरयर-हिरयर छैक! हम एिह फुजल दुिनयाँमे रहब। केĦहरोसँ हवा चलैत छैक, तँ केĦहरोसँ िवजुरी चमकैत छैक। केĦहरोसँ मेघ उठैत छैक तँ केĦहरोसँ वषŭ शुरू भऽ जाइत छैक। एकरा कहैत छैक फुजल दुिनयाँ। पक्षी सन İवतĠÿह दुिनयाँ। आकाशमे जतँ तक जेवाक होए चिल जाऊ। जल आ जमीनसँ खेल करब। ओ हँलसँ बाहर िनकलल तँ बदबदा कऽ वषŭ शुरू भऽ गेलैक। कमल देखलक–सड़कपर पाँिन लािग गेल छलैक, मुदा ओ सोचलक जे ई पािन अĢपलन ĆोƇाम निह बदिल रहल अिछ तँ हम अĢपन ĆोƇाम केएक बदलू। वषŭ होइत रहत आ हम चलैत रहब। चĦपा रघुवीरकेँ बॉिहमे पिजया रूममे लऽ जाइत छलैक। जॉघपर बैिस गरदिन पकिड़ धिर रूममे रहैत छिल ओकरा संग। बाहर एलाक बादो ओकरा बगलमे सिट कऽ सोफापर बैसैत छिल। िबदा हेबाक काल फेरसँ पाँच िमनटक लेल अढ़मे लऽ जाइत छिल आ ओकर दुनू हाथ पकिड़ अपना करेजापर रखैत छिल आ ओकरा िवदा कऽ िखड़कीसँ बहुत-बहुत काल धिर ओĦहर िनहारैत रहैत छिल। कमलकेँ दोिİत सभ अĢपन पसर्–आइडेĠटीकाडर् आ अउठीकेँ सĦहाहिर कऽ राखक हेतु लऽ जाइत छल। कमल िरिसĢसनमे चुपचाप बैसल छल। ओतुĸा İटनĠडडर् िकछु अिधक छलैक। िĄज, टी.वी., वाथरूम , एयर कूलर आ ए.सी. रूम सभक ĭयवİथाा छलैक। एक गोटे एकटा छौड़ाक संग एलैक आ िकछु पीबाक आडर्र दैत अĠदर घुिस गेल आ कहलकैक ओकरा सभक हेड कऽ—संगमे एवाक हेतु। ओ सभ चीज लऽ भीतर गेलैक आ वापस हँसैत अएलैक आ बाजिल:– “आइए छड़वेक िदन खराप छिĠह।” कमलक बगलमे परी सन एक देह–āिमक–सुĠदरी आिब कऽ बैिस गेलैक आ ओकर हाथ पकिड़ लेलकैक आ ओकरा हाथक आँगुरमे अĢपन आँगुर सिĠहया देलकैक। कमल ओकरासँ ओकर नाम, ठेकान, पता, इĜयािद पुछए लगलैक। ओ बुझौएल जकाँ छ-छी–च-ची–लगा कऽ– एक अजीब सन भाषामे ओकरासँ पूिछ रहल छलैक आ ओ ओही भाषामे हँिस–हँिस कऽ जवाब दऽ रहल छलैक। कमल कुसŰपर बैसल छल। ओ ओकरा जाँघपर आिब बैस गेलैक आ दोसरो हाथक आँगुरमे आँगुर सिĠहया देलकैक। कमल िनजीवर् जकाँ अपना शरीरकेँ िİथर रखने छल आ ओकरा शरीरमे उþजेना भरए चाहैत छिल। ओ कहैत छलैक जे ओ सभ गरीब अए। बाप माİटरक काज करैत छैक। दीदी नĦहर शहर देखबए लाऽ अनलकैक आ कहलकैक िकछु िदन छोट– िछन काजो कऽ ले–घर–भाड़ाक। मुदा ओकरा आदमीकेँ Ćसžह करक काज लगा देलकैक। आदमीकेँ Ćसžी करैत ओकरा सुख भेट रहल छलैक आ ओ बजैत छिल जे ओ ओतँ बƂड खुश अिछ। दीदी मानैत छैक। कथुक दुःख निह

126 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) छैक। अĢपन मानैत छैक। किहयो काल बाहरो जाइत अिछ। केओ अĢपने घर लऽ जाइत छैक तँ केओ होटल। जहाजमे सेहो जाइत अिछ। तीन िदन ओहीमे रहल अिछ। बहुत पाइ कमौनी छिल। आब कतौ अबैत जाइत डर निह होइत छैक। किहयो काल सिज-धिज कऽ िसनेमा सेहो जाइत अिछ। ओ कमलक जाँघपर मोटर साइिकल जकाँ पैर फैला कऽ बैसिल छिल। ओ कमलकेँ किस कऽ पिजया कऽ पकड़लक आ छातीकेँ-छातीसँ िमलौलक। कमलक शरीरमे कोनो तरहक उþेजना निह अएलैक। ओकर दुनू हाथ पकिड़ कपड़ाक तरसँ अपना छाती धिर लऽ गेिल आ ओकर तरहĜथीकक ऊपर अĢपन तरहĜथी रखने रहल। कमल ने तँ ओकरा िकछु करएसँ Ćितवाद करैत छलैक आ ने कोनो तरहक उĠमानद देखबैत छल। ओ पाँछा िदससँ हुक छोड़ा लेलक। कमल हाथ हटबक कोिशश केलक तँ चņसँ ओकर हाथ पकिड़ लेलक आ ओकर हाथ अपना छातीपर लऽ गेिल। आब ओकरा लगलैक जे कमल हाथ हटबक कोिशश निह कऽ रहल अिछ। हाथ छोिड़ देलोँ पर हाथ ओतेँ रखने अिछ। ओ अपन हाथ कमलक दुनू जाँघक बीच सिĠहया देलक। एिह िƅयासँ कमलक आँगुर नहूँ-नहूँ गितमे आबए लगलैक। ओ Ćायः–कमलक हाथ अपना शरीरक सभ क्षेÿ तक लऽ गेिल छिल तिहना ओ बहुत देरी तक अĢपन हाथ ओकरा सĦपूणर् शरीरकेँ टटोलैत–उþेिजत करैत असफल देखल जाइत छिल। ओकर दीदी ओकरा अपİयाँत देिख धूप–दीपक संग कामदेवकेँ Ćसž करबाक हेतु नाचए–गाबए लागिल। ताबे इरफान आ रघुवीर रूमसँ िनकिल गेल छल। आ ओ िनराश भऽ मुँह िवधुआ कऽ अलग–बैस गेिल छिल। हािर कऽ दोİतग सभकेँ कहलक:– एकरा कहकने चलक हेतु।” तािहपर रघुवीर डाँिट देलकैक:– फाĪतू परेशान िकएक करैत छही। ई अिहना हमरा संग आएल छल।” जाइ काल ओकर दीदी गाि र देलकैक:– िहजरा निह तन।” तािहपर ओ जवाब देलकैक:– नइ गइ! से बात निह छैक। तािहमे तँ धाकर अिछ मुदा की जािन एना िकएक भेलैक।” एना िकएक कऽ रहल छैक से रधुवीर नीक जकाँ जनैत छल। मेिडकल कॉलेजक िजमना िजयमक बगलक घटनासँ कमल बहुत दु:खी छल आ ओ ओहने गलती फेरसँ दोहराबए निह चाहैत छल िजमना-िजयमक बगलमे रेल– लाइनसँ सटल एक साधारण साड़ीमे ठािढ़ एक सम–वयİकाबकेँ देखलक तँ बुझेलैक जेना– ओ ओकरे गामक पिन–भरनी होइक। ओ पुछलापर सैह कहलकैक जे मािलक गामसँ लऽ अनने छिथ घरक काज करक हेतु। मोन एसगिर नीक निह लगै त अिछ तँ एĦहर आिब जाइत छी। ओ जगह लवĢवांट इĠटनक लगेमे छलैक। कमलक मोनमे सेहो लवक बात आिब गेलैक मुदा झाँझ उĠहाविर भऽ गेल छलैक। ओकरा ओ जामुन िबछैत मालती लगलैक। ओ गाछीमे मालतीक पेटक चमड़ी पकिड़ दवा देने छलैक आ अपने हाथसँ जामुन निह बीिछ ओकरा खोइछा मेसँ जामुन मंगैत छलैक आ जामुन लेबक बहžेा

मैिथली कथा २००९-१० 127 ओकर नािभ İपकशर् करैत छल। मालती एसगिर छिल तैँ डेरा कऽ भािग गेिल छिल। मुदा ओकर हाथ पकड़लाक बादो ओ डेराएल निह छिल, मुदा पुिलसकेँ देिख कमल ओतँसँ चिल देने छल। ओ रोकैत रिह गेल छलैक। कहैत रिह गेिल छलैक जे हवलदारसँ निह डेराइ। ओकर बोल कमलपर नशाँक काज कएने छलैक आ दोसरो िदन ओ कनेक्शन देरीसँ ओतँ चिल गेल छल। ओ कमलकेँ भांङ आ भािटक बीच अढ़मे लऽ गेल छलैक। कमल िकछु निह बुिझ रहल छल जे ओ ओकरा कतए लऽ जा रहल छलैक। ओ ओकरा जेबीसँ पशर् िनकाललक। दू एकटा फोटो छलैक, िकछु काडर् आ िकछु रूपैया। ओ सभ रूपैया गनए लागिल आ गिन कऽ ओकरा वापस कऽ देलकैक आ कहलकैक:– एिहमेसँ हमरा चालीस रूपैया िदअऽ? “ ओ पुछलकैक, “िकएक?’’ “निह, अबलाकेँ िकछु देबक चाही। हम सभ अबला छी। पाइ देलासँ पाप किटत होइत छैक ने तँ āाप पड़ैत छैक। ई सभ हमर मजूरी अइ।” ’’ओ कहलकैक देब ने, एखन तँ बैसवे कएलहुँ अिछ।” ओ बाबू, बौआ किह तेना ने परतािर चुचकािर कऽ कहलकैक जे–ओकरा भेलैक जे अपन करेजो कािट कऽ दऽ िदयैक। ओ पाइ िनकािल कऽ दऽ देलकैक। ओ अĢपन Ĥ लाजक बटन खोिल ओकरा जाँघपर मूड़ी धऽ सूित रहिल छिल। ओकरा भेल छलैक:–लवकेँ िलए कुछ भी करेगा। ओकरा ओ िबनु िबयाहिल काँच कुĦमिर लागल छलैक जे ओकरापर तन–मनसँ Ġयोछावर छलैक। रघुवीर कहने छलैक:–तोँ सभसँ İनेह रखैत छही ताहीपर तोरापर Ɩिवत भऽ जाइत छैक। जो जाहुकेँ सĜयम İनेहु, Ćभु कृपा िमलहुँ न कछु सĠदेवहु। हम पाँचे बजेसँ ओकरा तािक रहल िछऐक मुदा हमरा ओ निह भेटल आ तोरा भेट गेलौक। मुदा ओकरा बादमे पता चललैक जे एĦहर-आĦहर जे ठाढ़ रहैत अिछ गĠदलगीक कारण बीमारीसँ Ƈिसत रहैत अिछ। एकरा सभकेँ गामक गोरी निह बुिझयैक, कमल वषŭमे िभजैत-िततैत खतराक िबना पवŭह कएने एİगर ओकरासँ िमलए चाहैत छल जे ओकरा उþेिजत करक ओतेक Ćयास कएने छिल आ िवफल भऽ गेिल छिल। ओकर दीदी ओकरा िहजरा कहने छलै तँ वैह ओकरा िदससँ ओकरा लेल बाजिल छिल जे ई तँ धाकर पुरूष अिछ, मुदा निह–जािन एना िकएक भऽ रहल छैक। आइ ओ अपना आपकेँ ओकरा समिपर्त कऽ देबए चाहैत छल। मुदा लाख कोिशशक बादो ओतँ निह पहुँच सकल। ओ तँ रघुवीर छल जे एक बेर ओतँ ओकरा ई–गली–ओ गली घुमवैत–िफरबैत लऽ गेल छलैक। ओकरा कोनो रोड आ गलीक ğयान निह छलैक। वषŭ नाली आ अĠहैर-िवहािरक िचĠता तँ ओ निह कएने छल। लौट कऽ एक बजे राितमे सुरािक्षत अपना घर यानी जहाजमे आएल।

128 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िभजल-िततल पेĠट लऽ–शटर् आ जुþा िनकालै लगलैक जे: वाह! आइयो हम जीत गेलहुँ। नशाँमे केहन खोँट बात मोनमे आिब गेल छल आ केहन खतरनाक Ćतीज्ञा लऽ लेने छलहुँ जे–पािन, िवहाि़ड आ अĠहतरसँ की हम हािर जाएब आ एकरा डरे िसनेमा हॉलक बĠद वातावरणमे अपना आपकेँ तीन घंटाक हेतु कैद कऽ देब।” ओकरा कहाँ बुझल छलैक जे एतए पूराक–पूरा बस–Əक आ कार पािनमे किहयो डूिब गेल छलैक। ओकरा कहाँ बुझल छलैक जे एतए पािन बहक हेतु सड़कक िनच्चा केहन–केहन नाला छैक। आइ तक कतेक की घटना आ दुघर्टना एतए भेल छैक ओकरा थोड़े बुझल छलैक। तथािप ओ अपना बेडपर गेल तँ लगलैक: वाह हम योŀा छी’’ गलत राहपर–पएर रािखयो देलाक बाद ओकर आĜमाे ओकरा गलत काज निह करए देतैक। भोरमे सूयर् उगलैक तँ ओकरा नव संसार देखाइ देलकैक। वाह! गॉड ऑफ िवग िथĠगकस। एक सालक बाद ओही जगहपर अपनाकेँ आया कहए–वालीसँ ओ पुछलकैक:– अहाँ हमरा िचĠहैत छी? “ तँ चņसँ जवाब देलकैक, “अहाँकेँ एĸे सालक बाद िबसिर जाएब।” ओकरा आĀयर् लगलैक। ओतेक ओतेक लोकसँ ओकरा सभकेँ मुलाकात होइत छैक मुदा एखन धिर कमलकेँ याद रखने अिछ। पचीस-छबीस वषर्क बाद समुƖक कात ओ अपना İमृितकेँ ताजा करक हेतु बैसल छल तँ सभ बात माथमे नाचए लगलैक आ ओकर माथ ददर्सँ फाटए लगलैक। ओ ओिहना सड़कपर दूटा िकशोरीकेँ जाइत देखलक। एक मोटकी आ एक पतरकी। सोचलक:– ई सभ ओकर सभक बेटी भऽ सकैत अिछ। ओ गाम गेल। ओकरा होइत छलैक जे एतेक िदनुका बाद पिर ओ सभ बात िवसिर गेल हेतैक। एक िदन ओ पुछलकैक: याद अइ की िबसिर गेलहुँ:– हमर सभक खेल। पिर चņसँ जवाब देलकैक:– हाँ, देखलहुँ जीतए नइ ने देलहुँ। आ ओकर करेजा तिन गेल छैलैक।

मैिथली कथा २००९-१० 129

परमेĂर कापिड़ धनुषा, नेपाल। धुमिग Ĕ जर नामी-गरामी वंशक कहबैका–बड़ैता लोक छिथ डागडर साहेब । मैिथली िवभागक पहुँचल Ćोफेसर। ई आओर बात जे जतेक छिथ नइँ ततेक देखबए लेल अफिसयाँत रहैत छिथ। बपौती धनक बले घाँटी बजबएमे कोनोे चुक- कोताही निह करैत छिथ। ताहूमे एमरी शहरक तीन कठबा ओ खुआखािन घराड़ी िबकाएल छिĠह। धन दंरभंगा की दोहरी अङा रहबे करतिन । से एिह शुिŀ लागनमे िहनकर छोटकी दुलरी ननिकरबीक कĠया दान छिĠह। एिह बेर अगते िनयार भेलै जे बिरयातीकेँ भोजन बाİते अपना हाथक, अपन आँिखक देखल शुŀ नीक माँउस खातीर िकछु पूवų खİसी िकनलिन । तँ से कैला तँ असल िभतिरया बात रहै जे िहनकर पड़ोिसया पैकारक खİसी रहै आ गĢप-सĢप दऽ कऽ नफगरे माल बेचए लाथे उĠटाै-सुĠटा पढ़ा अॉंि खपर झोल मािर देलकिĠह। दू ढौैआक खİसी तीनमे िकना अपन सुरखुरु भऽ गेल फेरहा। तहूमे िक तँ रहिन खगता दू गोट खİ सीक तँ घटी–बेसी लेल तीनटा बेसिह लेलाह। नइँ कहू बिरयातीकेँ किनको किम गेलै तँ नाहँसी आ सोहरा भऽ जाएत तैला जैं चालीस तैं घपचािलसो रहओ । ितरिपत नेहाल डागडरनी खİसीकेँ आबए बला बिरयातीयोसँ बेसीए ğयािन देबए लगलिख Ġह । कोनो उपेक्षा कोताही नइँ हुअ पाबए । आबएले तँ अएलै हेंड़े िकिन कए आब भऽ गेलए गराक घेघ, – एकरा चराएत–बझाएत के? किनके कालमे ततेक ने झौहरा– अंकाल कएलक जे डागडर साहेबकेँ टेĠशन बढ़ए लगलिन । टहलनी कहलकै मर, अपन दूध उठओनाबाली हएबे करै । चराओन पोसान ओकरे दऽ िदयौन । उहे चरा– बझाकऽ पोसतै । बड़ बेस बड़ बिढयाँ, शुभ–शुभ कऽ नीक जेकाँ पĸाह–पĸीक गछा खिरयािर कऽ ओकर िजĦमा लगाओल गेल। गĦहओिरयाबाली दूधबालीक सैंझली िढ़लही बेटी गछने छलै, ओकरा बाİते

130 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सेहो िकटुआ पोसान छुिटया देल गेलै। खँसी िपच्छेा दू–चािर मुŇी चाउर, बदाम भुजा बाİते अलगसँ सेहो । भुजा भूजैले आमक ढेङ जरना लेल भेटलै । िढलही माए आबले बलैया िनतराए लगली–गे माइ, अगबे चाउर दािल देने तँ पेटमे चिल जएतै। जौले िरहĠतै नइँ तौले खएते केना? मर तेकरो ला भनिसया चाही । ओिह भनिसयाकेँ पेटपर लात िहनका आउरके मारल जएतिन ? हे िलअ भेल दू पसेरी चाउर अहूँकेँ। गुिड़या िबयाहमे अहुँ जै सँ Ćसžे रही। गĦहिरयाबाली सतखेिलया रहए, असली घैंहिर खेलािड़ । खँसीकेँ बूझऽ लागिल गोनू बाबूक िबलािड़ । िदन दशो नइँ बीतल हएतै िक दौड़ल आएल हबेलीमे । गुिड़या माए हपसले बहरेली महखरसँ, यै गĦहिरयाबाली। खँसीकए समाङ नीके ना अइ ने। दुर िक नीक रहतै। पिहलका बाĠहल खुटेसल खँसीकेँ पेट बैठल रहै । तैला खाएले अहगरेसँ छौिड़या सभ लपेलप भुजाभरी देलकै, से आब पेट–मुँह चलै हए। से सूिनते हहाएले गेलीह डागडरनी गोसाइ घर,–हे भगवती! केहन भाग करम भऽ गेलै एिह छौिड़याक से नइँ जािन। ओइ िदन गहुम िपसबए गेलै तँ आँटे दोखरा रिह गेलै। दहीक खोर पौड़बला जेकरासँ साइ गछा कऽ अएलै तेकर मिहसे दू िदन रिह कऽ िबका गेलै। केहुनाकऽ खँसी बचा कऽ भरमा इĔजित बचा दाए हो देवता-िपतर। िजउके बदलामे झाँप आ सभटा नीकेना िसŀ भऽ जएतै तँ पातिर सेहो देबऽ हे गोसैंयाँ। मर अइमे देवता िपतर की करतै– गĦहरीयाबाली एहन समधानल चोट ठोिक देलकिन जे िछलिमला गेलीह गुिड़या माए, जे करत सेैे बैदा ने करतै। सुइया–दवाइ िदअएबै तै सँ ने ठीक होतै। नइँ तँ झाँप पातिर पड़ले रिह जाएत आ खँसी जाएत िटङ। हे देवता िपतर नामे एखन एहन कुभाख नै बाजू। हे आब दबे–दारुसँ मालो–जाल ठीक होइ छै । गेठरी खोलू हम चलब । िफस आ दबाइमे सवा सात सए खरच भऽ गेलिन । डागडर साहेब उसास फेरलिन मर बिह, ढौओ लािग कऽ केहुना खँसीक बलाय तँ टरल । िचकबा लुचैया नदाफक सलाहे खँसीकेँ एक–आध चĦमच घीउ उठौना शुरु भेेल। एिहसँ खँसी एबरसँ दोĤबर िभिसěडु लगले भऽ गेल । िदनकेँ िबतैत देरी नइँ लगलै। धराएल शुभ िदनमा भल अएबे कएलै। उँजबड़ेड़ा आ भीड़ भरĸासँ बरनेमा नइँ। सख–सोहर लेनदेनक लेखा–जोखा नइँ । पाल–पěडालक कोन खेरहा । मुĔजोफरपुरके ऊ नामी हलुवाइ िमठाइ बनबऽ बला, जनकपुरके बढ़का İटार होटलके “कूक” खाना बनबऽ बला आ काठमाěडू मीट हाउसक भनसीया İपेशली माछ–मँाउसक पिरकार बनबऽ लेल मंगाओल गेल रहै। एĦह र तरुआ-बघरुआ, ितलौरी, दनौरी, बड़ी–कढ़ी बाİतेै गाम गमैतक बूढ़ पुरैिनयाँ सभ रहबे करिथĠह।

मैिथली कथा २००९-१० 131 ठाम–ठाम िभिडयो कैमरा चालू रहै । एकदम िसनेमा मािफक। जेकरा निहयो काम रहै सेहो अफिसयाँत, कैला तँ िभिडयो िसडीमे देखार होएब। राितमे मन मािफक रंग–िवरंगक मधुर िमơान संगे माछक ĭयबİथा रहै। माछ रहे से देख पड़ोसनी जैर मरऽ बला। बीस–बीस िकलोके । बनबऽ कालमे दू–दू पŇा जुआनके सĦहार नइँ धरै । ओकर बनौनाइ देखबऽ लए िभिडयो कैमरा एकदम रेडी। धन कही सुखरा मलहबाक पहलमनमा बेटा सॲिसयाके जे माछ कािट बना देलकै। दैव रे दैव, माछ रहौ िक बनेल से नइँ जािन, सोिसया मलाहके कएल खेती गमल बात रहै तँए बना सकलै नइँ तँ नइँ बैनतै। मुड़ा िनकलै पँँच–पँँच िकलोके आ कुिटया याह-याह टाके। खाइतकाल एक छोिड़ दोसर कुिटया कोनो बिरयितया नै गछिन। सॱसे मुरा एĸेह गोटा लेलिन। ितनको सॱसे नइँ अघरलिन । िबहान भने भतखइ मे माँउस एकदम अलेल। डĤबुके लऽ कऽ परसल गेल। घरबैयाकेँ होइ जेना माँउस से तोइप कऽ तऽर कऽ दी। खनाइसँ इĔजती बढ़ै छै। जेहन भोज तेहन मान Ćितơा। बराइ आ Ćशंसासँ डागडरो साहेबक बराती िनहाल कऽ देलकिन। आब गिच्छ अघाएल बिरयाती ढेकार संग मुँह Ćशंसा करऽ लगलिथ । नै िवलक्षण। गच्छ अघाएल बराती अिछनरे रहलै। हँ तँ कािŎयो आ आइयो मधुर िमơारनसँ थैहर-थैहर कऽ देलिथन। माछ–माउस अनपूछे रहलै। जिहना परसऽ मे उपरॱझ तिहना बड़ाइ Ćशंसामे रहलै। अघएला उþर मूĪयााĹन िकछु गोटे खोदवेदक रुपमे शुरु कएलिन। – नइँ–नइँ बड़ बेस, बड़ बिढयाँ रहलिन। खाली माछ बेसी जुआएल छलिन । ĭयƇ डागडर साहेबकेँ पछताबा हुअ लगलिन– केहन हम रिजनराक बात नइँ मािन सेिरए-असेरी माछ िकनने रिहतहुँ तँ आइ ई िखधाĠस नइँ होइत। ततबे, कुिटया कने छोट-छोट रिहतिन । कने तरल झूर छलिन । घरबैयाकेँ होइक, सभ बूरल आ से भनिसया कारणे। सरबेके बोइने कािट लेबिन । इह । माउस कनेे बेिसए सीझल रहिन । एकगोटे ĭयंगसँ बजलाह- से नइँ बूझल गेलै। İपेशल भनिसया भेने एिहना होइ छै। खाएला तँ हमहुँ खएबे कएिलऐ। पाइ लागल रह,ै धिर एते तँ अबĮये कहब जे खसी बेसी तेलाह रहैक से कोनो खास İवाद नइँ रहैक। जतेक मुँह ततेक छेद । डागडर साहेब झाम घुरैत मथा-हाथ दैत, सभ कएल–धएल अकारथ गेल। ओिहमे एकगोटे एहन बिरयाती रहिथ जे वरपक्षक नइँ रहिथ। खाली अइ दुआरे माकर्ěडेय झाजी केँ लाएल गेल रहिन जे हुनकर कामे रहिन बहुते खाएब।

132 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) चूड़ा दही भेल तँ अढ़ैया चूड़ा, खोरभिर दही, िबन ढेकारेक देख देताह। खाएल–िपयलपरसँ सािठ–सþिर रसगुĪला देिख देताह। आम मिहना चालीस–पचास आम उिठतो–उिठतो गॴर जएता। से पुरुष अहू बिरयातीमे खएनाइए देखऽ वाİते मङाओल गेल छलाह। ओ देखिह जोग खएने छलाह । ई िदगर बात जे भोजमे हुनकर मन नइँ भरलिन । खॱझाएल माकर्ěडेय िखžे होइत बजला,– हँ कहऽ तँ पड़लै जे नीके खएनाइ रहिन। मुदा मन पछताइए जे कएक ठामसँ बिरयातीमे खाए चल लए बजाहिट आएल रहए। ओĦहपर गेल रिहतहुँ तँ पछताए निह पड़ल रिहतए । एिह बीचमे एकगोटे जे खाइत काल हुनकर बहुत रास फोटो िखचने रहिथ से देखा देलकिन-–देिखयौ तँ फोटोमे अपने केना–केना कते–कते खएने िछऐ। अएना जेकाँ आब फोटबो बजै छै साँच, से देिख भड़िक गेला माकर्ěडेय- रौ साऽऽर, ऐमे हमरा बजिनयाँ के बना देलक? लोको उĜसुकतासँ फोटो देखऽ लागल तँ देखलक जे ई दुनू हाथे कोकाकोलाक जे बोतल िपबैत छिथ, से फोटोमे बुझाइक सहनाइ बजबै छिथ। चौल करैत एकगोटे बजला- होउ आब इएह फोटो देखा-देखा साइयो बाĠहब। आऽरौ बिहं, से ओतबे, के ने के यैह टा के बेढब मूड़ा हमरा पातपर रािख देलक। होउ तँ एहन मूड़ा आनठाम कतौ देखनहुँ ने हएब तकर Ćमाण भेल। माने िक जे से, िक जे से सेहे रिहतै तँ नीक। ओइमे तँ हमरा मरपर लुधकल सनके बुझाइए । छीया–छीया। आरे बाप रे बा, अĠहेेर कएलक ई सभ माकर्ěडेय जी ! अहाँकेँ तँ गया–गांग लागल । होउ धोती जनउ जĪदीसँ बदलू आ गंगाजली छीिट शुŀ होउ।

मैिथली कथा २००९-१० 133

ऋृिष विशơ Ćकािशत कृित- जे हारय से नाक कटाबय (बाल सािहĜय), कोिढ़याघर İवाहा (बाल सािहĜय), झुठपकड़ा मशीन (बाल सािहĜय), मैिथली धारावािहकक कथा, पटकथा आ संवाद लेखन। एकर अितिरक्त कथा आ ĭयंग्य पÿ-पिÿकामे Ćकािशत। पता- तेजगंगाधाम, पिरहारपुर, मधुबनी। जुआनी िजĠदाबाद सगरो टोलमे एĸिह बातक चचर्-बचर् छलैक। बुढ़-बुढ़ानुस सभ साँझक चािर बजबाक बाट तकैत छलाह। सबहक मूँहे एĸे बात- ‘‘ लाख छै तेँ िक, देखहक काली-बाबुक बेटाकेँ। एखनुको समएमे सरबन पूत होइ छै की !’’ िकयो- िकयो इहो कहैत छलै जे- ‘‘बाबू, काली बाबू बƂड कƠेँ बेटाकेँ इंजीिनयर बनौने छिथ।’’ -‘‘से तँ ठीके, मुदा आइ कािŎ ई कƠ ककरो-ककरो साथर्क होइ छै ! आ से काली बाबूकेँ भेलिन।’’ यैह गमŰक समए िछऐ। परुकाँ साल कालीबाबूकेँ दू-बेर मासे िदनपर हाटर् एटैक भऽ गेल छलिन। सगरो गामक लोक कहैत छलै जे आब िहनकर बाँचब मोिİकल छिन। आ िİथित छलिनहॲ तेहने। दोसर बेरक हाटर् एटैकक खबिर जखने कालीबाबुक बेटा नबोनाथकेँ लगलिन तँ ओ तुरत अमेिरकासँ अपना गाम आपस आिब गेलाह। गाम आिब ओ कालीबाबुक हालत देखलिन। ओ अपना संग कालीबाबूकेँ अमेिरका लऽ जेबाक तैयारी कएलिन। पिहने तँ कालीबाबू तैयारे निह होइत छलाह मुदा बुझा-सुझाकए नबो तैयार केलिन। नबो तँ चाहैत छलाह जे माइयो संग चलए। ओ मुदा एĸिह ठाम किह देलिखन जे- ‘‘ हमरा लऽ जेबाक िजĿ करबह तँ हम माहुर खा लेब। हम िबलेँत जा कऽ एको िदन जीिब निह सकै छी।’’ सभ कागज-पþर तैयार कऽ नबो अपन िपताक संग अमेिरका जेबाक तैयारीपर छलाह। टोल-पड़ोसक लोकक कहब छलै जे- ’’आब बेकारे बुढ़ाकेँ लऽ जेबहुन। आब अबİथो भेलिन। सािठ टिप गेलिन तँ आब की !’’ कालीबाबुक छोट भाए तँ रुƠ भऽ कऽ एतेक तक किह देने छलिखन

134 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) जे- ‘‘अमेिरकासँ हमर भाए-साहेब घुिम कऽ औताह से उमेद Ĝयािगये कऽ लथु।’’ इंजीिनयर नबोनाथ सभकेँ बुझेबाक Ćयास करैत छलाह। माइ पयर्Ġत सिदखन कनैत रहैत छलीह। कालीबाबू चुĢपचाप सभटा तमाशा देखैत छलाह। नबोनाथक माइ ई कखनो निह कहैत छलिखन जे बाबूकेँ नै लऽ जाहून। हुनका एिह बातक िवĂास छलिन जे कालीबाबू अमेिरका जा कऽ ठीक भऽ जेताह। जेना-तेना इंजीिनयर साहेब कालीबाबूकेँ लऽ कऽ अमेिरका चल गेलाह। साल भिर बीत गेल अिछ। एिह बीचमे रंग-िबरंगक समाचार आएल गेल। आइ वषर् िदनपर कालीबाबू आपस आिब रहल छिथ। कालीबाबूकेँ नबका हाटर् लगाओल गेलिनहेँ, से सभकेँ बुझल छैक। सबहक मोनमे िविभž तरहक िजज्ञासा छैक। िकयो कहै जे- ‘‘ अमेिरका जए कऽ की भेलिन ! रोगीक रोिगये रिह गेलाह ! कहाँदन दोसराक हाटर् लगाओल गेलिनहेँ।’’ ‘‘आब तँ आर अपİथक भऽ गेल हेताह। अनेरे बुढ़ारीमे गंजन। कहू तँ बेकारे ने चीड़-फाड़ करौलिन।’’ समए िबतैत कतेक देरी। चािर बािज गेल। बारह बजे पटनामे हवाइ जहाज अएबाक समए छलै। पटनासँ अएबामे बेसीसँ बेसी चािर घंटा। आब जइ घड़ी जे क्षण ने अएलाह। सड़कपर अबैत सभ गाड़ीकेँ सभ िठिकयबैत छल। ‘‘यैह आिबये गेलाह।’’ ....मुदा ओ गाड़ी सुरर्...रर्.............दऽ आगाँ बिढ़ गेल। कालीबाबुक दलानसँ किनके दूर चौराहा छलै। चौराहापर िवशाल िपपरक गाछ आ सड़कक काते-कात चाह-पानक दोकान। गाछक छाँहमे बैसल बच्चा िकशोर आ बुढ़-बुढ़ानुस तँ सहजिहँ। खास कऽ सभकेँ कालीबाबुक Ćित बेिसये िजज्ञासा छलिन। ‘‘केहेन भेल हेताह? साफे बदिल गेल हेताह िक ओहने हेताह! ककरो िचĠहबो करताह िक नै?’’ ‘‘जे जþिह सुनलक आगवानीमे पहुँिच गेल। कालीबाबुक दरवĔजापर एखनो भĦह पड़ैत छिन मुदा एतए भीड़ जूटल अिछ। पुरुष-पातकेँ गामपर नै रहने यैह दशा होइत छैक। भिर ठेहुन कऽ घास जनिम गेल छिन। सभ अही बातक चचर् करैत छल। मोन मुदा सबहक टाँगल छलै पिच्छम भरसँ आबएबला चािरपिहया वाहनपर। कालीबाबु Ćाथिमक िवńालयमे िशक्षक पदसँ िरटायर भेल छलाह। ठेंठ देहाती लोक। कोनो आधुिनकताक हवा निह लागल छलिन। ओ वषर् िदन अमेिरकामे कोना रहल हेताह। सभ यैह बात सोचैत छल। नबोक माइ कोनटा परसँ हुĪकी मािर जाइत छलीह। ......यैह, लालरंगक चािरपिहया वाहन आिब कऽ रुकल। पीपर तरक भीड़ कालीबाबुुक दरवĔजापर पहुँचल। िकयो दौड़ैत, िकयो झटकैत आ िकयो िघिसयाइत। गाड़ीक आगाँक गेट खुजल। इंजीिनयर नबोनाथ उतरलाह। आँिख परक किरया चĮमाकेँ माथपर चढ़बैत हाथ जोिड़ सभकेँ Ćणाम केलिन आ पिछला गेट खोललिन। भीड़मे जूटल वृŀ सभकेँ जेना साँस रुिक गेल छलिन। गेट

मैिथली कथा २००९-१० 135 खूजल.....। ..........अचरज! भारी अचरज!! कालीबाबू सूट-बूट पिहरने छलाह। किरया िजĠस आ लाल रंगक फोटो बनल टी शटर्। आँिखपर किरया चĮमा। बेस िचĸन-चाĸन मूँह-कान। खूब िनरोग। हाथमे िगटार लेने उतरलाह। बुढ़ सभ देिख कऽ अचरजमे पिड़ गेलाह। ‘‘देखहक हौ, ई की छिन कालीबाबूकेँ?’’ ‘‘सारंगी लेलिनहेँ।’’ ‘‘गुदिरया भऽ गेलाह-ए की?’’ ‘‘वाह रे वाह! यैह भेलै बुढ़ारीमे घी ढारी।’’ इंजीिनयर साहेब िटका-िटĢपणी सुनलिन। ओ हँसैत बजलाह- ‘‘बाबू जीकेँ अİपतालमे पड़ल-पड़ल अकच्छ लगैत छलिन। असलमे डाॅक्टर िहना पुछलिखन जे आहाँकेँ सभसँ बेसी रुिच कथीमे आिछ? संगीत पढ़ाइमे आिक आन कोनो काजमे! बाबूजी कहलिखन- ‘‘रंगीतमे। सेहो संगीत गाबए आ बजाबएमे। गाएब तँ मना छिन मुदा बजेबाक लेल िगटार डाॅक्टर देबाक अनुमित देलिन।’’ एतबा कालमे तँ कालीबाबू एक हाथमे िगटार लेने आ दोसर हाथ माथमे सटबैत नमİकार केलिन। िकछु बुढ़ हँिस कऽ मूँह घुमा लेलिन आ हँसैत नजिरसँ नजिर िमलबैत रहलाह। कालीबाबू डेगाडेगी दैत नाचए लगलाह आ िगटारपर बेसुरा टुम टाम करए लगलाह। राजधर बुढ़ाकेँ नै रहल गेलिन। ओ ĭयंग्य करैत बजलाह- ‘‘ई तँ कीदन भऽ गेलाह हौ इंजीिनयर। चौबे चलला छĤबे बनए आ दुĤबे बनल अएलाह। अँइ हौ, ई तँ काली बताह भऽ गेलह-ए?’’ इंजीिनयर साहेब सहज भऽ बजलाह- ‘‘ असलमे बाबा, ओतुĸा तँ एहने माहौल छै िकने।’’ ‘‘हैइ, िकछु रहौ। ई तँ साफे पगलेठ जकाँ करै छै। जीवन भिर एतए रहलै तँ िकछु नै आ एक बखर्मे ओतुĸा सबार भऽ जेतै?’’ गाड़ीबला सामान सभ उतािर कऽ िवदा भऽ गेल। गाड़ी कनेक आगाँ बढ़ल। कालीबाबू मूँहकेँ गोल करैत सीटी बजबैत Ƒाइवरकेँ बाॅइ.....बाॅइ केलिन। कोनटापर ठाढ़ भेल अपन पėीकेँ जखने देखलिन िक फेर मूँह चुकिरयबैत सीटी बजौलिन.......‘हू......हूँ.......उ..... ’’ ’ओ बेचारी लजाइत कोनटापर सँ पड़ेेलीह। लोक सभ तमाशा देिख अपना घर िदस कऽ िवदा होबए लागल। कालीबाबू फेर ओिहना सीटी बजबैत हाथ िहलबैत रहलाह। भीड़ तँ उसिर गेल मुदा लोकक मोनमे चैन निह भेलै। एतए ओतए सगरो कािलयेबाबुक चचर्। िकयो बताह कहए तँ िकयो घताह। एĸे बरखमे लोक एना कऽ बदलतै। ओिहठाम तँ हुनकर बेटो छिन। ओ तँ दसो सालसँ अमेिरकामे रहए छै। कहाँ कोनो चािल-ढािल बदललैए ! राजधर बुढ़ा अपना मंडलमे घोषणा करैत बजलाह- ‘‘ नबो इंजीिनयरकेँ नीकक काज होइ तँ बापकेँ कोनो माथाबला डाॅक्टरसँ देखबौक।’’ रंग-िवरंगक िटका-िटĢपणी होइत रहल। देखलाहा दृĮय राित भिर लोकक

136 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) सोझाँ ओिहना नचैत रहलै। कथीलए ककरो िनžो हेतइ। कालीबाबुक राितक िनž तँ अमेिरकेमे छुिट गेलिन। ओ राित भिर कछमछ करैत आ िगटारकेँ टुनटुनबैत रिह गेलाह। भोरे-भोरे कालीबाबुक दलानक सोझाँमे फेर भीड़ जुिट गेल। एहन अनगर्ल काज काली बाबुक नै होइतिन जँ माथ ठीक रिहतिन। ओ अपना कहलमे नै रहलाह। सबहक िनįकषर् एĸिहटा। गमŰक समए छलै। कालीबाबू भोरे-भोरे गंजी आ ठेहुन धिरक पैंट पिहरने, डाँड़ झुकलाहा सन अवİथामे, माथक केश मेहदीसँ राँगल। ओ चौकीपर ठाढ़ िगटार बजेबामे अपिसयाँत छलाह। मूँहक आकृित रंग-िवरंगक भऽ रहल छलिन। िगटारक अवाज साफे बेसुरा। एहन उĠमþ भऽ बजेनाइ निह देखल-ए। देखलासँ कोनो Ćवीण िगटारवादक लगैत छलाह मुदा सुनलापर साफे अनारी। राजधर बुढ़ाकेँ कालीबाबुक बेस िचĠता छलिन। ओ िचिĠतत सन मुƖामे बजलाह- ‘‘एहेन कोन पागलपन भेलै? कहह तँ जे काली किहयो नचािरयो निह गौलक तकरा ई बजेबाक कोन भूत सवार भऽ गेलइ।’’ नबोनाथ जेĦहरे िनकलिथ सभ बाबूक हालचाल पुछिन। ‘‘केहन छिथ? आब नीक जकाँ रहए छिथ िक ओिहना सारंगी लऽ कऽ नचै छिथ?’’ कतेक कऽ की जबाब देिथन। सबहक कहब आ अपनो तँ देिखये रहल छलाह। नबो कालीबाबूकेँ मानिसक रोग िवशेषज्ञसँ इलाज Ćारंभ केलिन। डाॅक्टर समूचा जाँच-पड़तालसँ मानिसक रोगक लक्षण निह पौलिन। आब तँ मामला आरो ओझराएल जा रहल छल। इंजीिनयर साहेब कऽ टपाक दऽ कहा गेलिन जे- ‘‘असलमे एहन सभ चािल-चलन आ ĭयवहार हृदय ĆĜयारोपनक बाद भेलिनहेँ।’’ डाॅक्टर साहेब गंभीर अनुसंधानमे लगलाह। कालीबाबूकेँ जखन-तखन डाॅक्टर ओिहठाम बजाहिट होबए लागल। समए िबतैत गेल। साँझक समए रहए। डाॅक्टर निसर्ग होममे मानिसक रोगी सभ भरल छलइ। रंग-िवरंगक उटपटाँग हरकैत सभ भऽ रहल छलै। डाॅक्टर साहेब गंभीर भेल कुसŰपर बैसल छलाह आ टेबुलपर राखल कागज सभकेँ उनटबैत छलाह। सामनेक कुसŰपर कालीबाबू उĜसुक सन मुƖामे बैसल छलाह। आ बामा कात इंजीिनयर नबोनाथ चॱकल सन मुƖामे छलाह। डाॅक्टर की कहिथन की नइ! डाॅक्टर साहेब सभ कागजकेँ पसारैत अपन लैप-टापकेँ आसİतेसँ दबाबए लगलाह- ‘‘इंजीिनयर साहेब, हम एिह केसक गंभीर अनुसंधान केलहुँ अिछ संगिह सभटा सबूत जमा केलहुँ अिछ।’’ इंजीिनयर साहेब चौचंग भेलाह। ‘‘अहाँक िपताजीकेँ जे हृदय ĆĜयारोिपत कैल गेल ओ वİतुतः एकटा एĸैस वषर्क मशहुर पाॅप गायकक हृदय छैक। ओ बेचारा एकटा दुघर्टनामे मारल गेल आ ओकर दान कएल हृदय आइ अहाँक िपताकेँ जीवन देने छिन।’’

मैिथली कथा २००९-१० 137 ‘‘मुदा’’- इंजीिनयर साहेब उĜसाहमे बजलाह। - ‘‘हँ, इंजीिनयर साहेब। कोिशकामे İवभावक याददाĮत रहैत छैक।...... आ यैह कारण अिछ जे ई रिह-रिह कऽ संगीतक पाछाँ बेहाल भऽ उठै छिथ। एिह तĝयकेँ युिनविसर्टी आॅफ एिरजोना सेहो िसŀ करैत अिछ। ई युिनविसर्टी अंग ĆĜयारोपनक कतेको मािमलापर शोध कऽ चुकल अिछ।’’ डाॅक्टर साहेब आँगुरसँ लैपटाॅपक İƅीन िदस इशारा करैत बजलाह- ‘‘हे, देिखयौ ने ! आब कोनो काज किठन छैक? अहीठाम बैसले-बैसले सभटा शोधक जानकारी लऽ िलअ।’’ इंजीिनयर साहेब झुिक कऽ लैपटाॅप िदिश तकैत बजलाह- ‘‘एकर मतलब आब बाबूजी अिहना रिह जेता?’’ डाॅक्टर हँमे मूड़ी डोलबैत बजलाह- ‘‘ हूँ! कलाकारक जुआनी अवİथा छलैक ने! ओ तँ औनाहिट उिचते छैक।’’ कालीबाबू पीठपर टाँगल िगटार उतारलिन। खोलसँ बहार केलिन आ थैया-थैया...... िदग् िदग थैयाा करैत िगटार बजेबामे लीन भऽ गेलाह।

138 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

िशवशंकर āीिनवास जĠम İथान लोहना मधुबनी, िबहार । चिचर्त कथाकार ओ आलोचक । गीत ओ किवता सेहो किहयो काल िलखैत छिथ । Ćकािशत कृित : िÿकोण, अदहन, गाछ-पात, गामक लोक (कथा संƇह)। (िमिथलाक लोक-कथापर आधािरत बाल कथा) पिěडत ओ हुनक पुÿ नैनापुर गाममे एकटा पिěडत रहिथ। नाम रहिन- बौआ चौधरी। नैनापुर टोलक िवńालयक ओ Ćधान गुरुजी रहिथ। सभ हुनका बड़का गुरुजी कहिन। बड़का गुरुजीक पिěडताइक सोरहा ओिह समयमे देश-िवदेशमे छल। ओिह समएक Ćिसŀ युवा िवŅान् मे बेसी गोटे हुनके िशįय रहिथ। देश-िवदेशक लोक हुनका लग शाİÿक गĢप बूझऽ अबैत छलाह। िकĠतु बड़का गुरुजी रहिथ बड़ ƅोधी, से सभ जनैत छल। ƅोध छोिड़ हुनकामे सभ टा गुणे रहिन। िकĠतु हुनक ƅोधक चचŭ सभ करए। बड़का गुरुजीक एक माÿ संतानमे बेटा, नाम रहै धनंजय। धनंजय बड़ तेजİवी रहय। लोक कहै धनंजय अयाची िमāक बेटा शंकरक दोसर अवतार छी। धनंजय बारहे-तेरह वषर्क उƛमे बड़का िवŅान् भऽ गेल। इलाकाक लोक कहऽ लगलै- जेहने गुणमĠत बाप तेहने बेटा। िकĠतु धनंजय उदास रहैत छल कारण जे बाप किहओ नीक भाखा निह कहिथन। ई कोनो िवषयमे कतबो अंक आनय, परीक्षामे Ćथम घोिषत होअए, किठनसँ किठन शाİÿाथर् जीित कऽ आबय आ सोचय जे एिह बेर बाबू अवĮय Ćसž भऽ िकछु कहता, िकĠतु बाबू ओिहना धीर-गंभीर, िकछु निह कहलिथन। धनंजय अपन िपताक मुखसँ नीक गĢप सुनबाक लेल वा कोनो वाहवाहीक शĤद सुनबाक लेल ओिहना तरसय जेना उपासल पािन लेल तरसैत अिछ। ओना बड़का-बड़का िवŅान् Ćशंसा करिथन, कतेको Ćिसŀ िवŅान् हृदएसँ लगबिथन िकĠतु िपताक मुँहसँ Ćशंसा सुनबाक हेतु मन रकटले रहै। अठारह वषर्क उƛमे धनंजय Ġयाय शाİÿक एहन पोथी िलखलक जे सवर्ÿ

मैिथली कथा २००९-१० 139 चचŭमे आिब गेल। धनंजय अपन पोथी पढ़बाक लेल िपताकेँ देलक, िकĠतु ओ पिढ़ घुमा देलिथन, िकĠतु िकछु कहलिथन निह। एक िदन धनंजय साहस कऽ केँ िपताकेँ पुछलक- “बाबू, पोथी पिढ़ अहाँ िकछु सĦमित निह देलहुँ।” “थोड़े आर पिरāम करू। ” किह िपता गंभीर भऽ गेलिथन। धनंजयकेँ िपताक गĢप बहुत अधलाह लगलै, ततबे निह, मनमे घोर Ćितिƅया भेलै। सोचलक- “ई हमर शÿु छिथ, जावत जीता तावत हमर यश- Ćितơासँ जरैत रहताह, किहओ Ćशंसा निह करताह।” से सोचैत-सोचैत बुझू बताह भऽ गेल। मनेमन िनणर्य कएलक जे आइ राितमे जखन ओ भोजन कऽ आङनसँ बहरेता तँ खगर्सँ गरदिन कािट पड़ा जाएब। अĠहिरया छैके केओ ने देखत। िदन बीतल, साँझ भेलै आ तकर बाद राित। बड़का गुरुजी भोजन कऽ रहल छलाह, आगूमे पėी अंजनी बैसिल छलिथन। आ इĦहर धनंजय खगर् लऽ कऽ ठाढ़ छल जे भोजन कऽ कोनटा लग औताह िक कािट कऽ पड़ा जाएब। अंजनी कहलिथन- “धनंजयक पोथीक सुनै छी बड़ चचŭ छै।” “हूँ”- पėीक गĢपपर बड़का गुरुजी बजलाह। “एकटा बात कहू, तमसायब तँ निह।” अंजनी अपन ƅोधी पित बड़का गुरुजीकेँ पुछलिन। “कहू ने”- गुरुजी पुछलिथन। “पिहने कहू जे तामस निह करब।” “अच्छा निह करब, पूछू।” “अहाँ धनंजयपर तमसाय िकएक रहै िछयिन? ” “तमसाय िकएक रहबिन? ” “अहाँ आइ तक हुनकर Ćशंसा कयिलयिन? ” पėी गĢपपर बड़का गुरुजी बहुत हँसलाह आ कहलिथन- “अहाँ निह बुझै िछऐ।” “हम बुझै िछऐ, ओ अहाँकेँ निह सोहाइ छिथ।” “के एहन अभागल होएत जकरा बेटा निह सोहेतै? बेटे एकटा एहन होइ छै, जकरा लोक अपनासँ पैघ देखऽ चाहैए।”- गुरुजी बजलाह। तािहपर पėी पुछलिथन- “कहू तँ अहाँक बेटा केहन पिěडत छिथ? ” “बहुत पैघ पिěडत छिथ। हमरासँ बहुत आगू बिढ़ गेलाह।” गुरुजी बहुत आनĠदमे अंजनीकेँ कहलिन। ओिहना आनĠदसँ आनĠद लैत अंजनी पुछलिथन- “ओ पोथी जे िलखलिन से केहन छै? ” “बहुत उþम, हम कएटा बात ओिह पोथीसँ जनलहुँ अिछ, बूझू गदगद छी। धनंजय पुÿे निह, पुÿ रė िथकाह।” “तखन हुनकर Ćशंसा िकएक ने करै िछयिन?”

140 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) पुनः पėीक गĢपपर भभा कऽ हँसैत गुरुजी कहलिथन- “ बुझलहुँ, हम हुनकर बाप िछयिन, Ćशंसा करबिन तँ घमěड भऽ जयतिन आ तखन िवकास रुिक जयतिन।” “सुनू, हम अहाँक İÿी छी। अहाँ जिहया हमर काजक Ćशंसा करै छी तिहया हम आरो नीकसँ काज करै छी। आ जिहया कोनोपर िबगड़ै छी तकर बाद आरो काज गड़बड़ा जाइए, तािहपर अहाँ ğयान देिलऐ? ” “हूँ...।” किह पėीक गĢपपर गुरुजी गंभीर होइत पुछलिन- “अहाँ आइ ई सभ िकए पुछैत छी? ” “अहाँ धनंजयकेँ पोथी दैत कहिलयिन जे आर पिरāम करू , से हुनका नीक निह लगलिन। “अहाँ कोना बुझलहुँ? ” “हम माय िछऐ, हम ओतबो निह बुझबै। तखनसँ हुनक माथ ठीक निह बुझाइए।” “ओ ज्ञानी छिथ, हुनका हमर बातक कतहु ƅोध होइन? ” “तखन अहाँकेँ ƅोध िकए होइए? अहूँ तँ ज्ञानी छी।” “हँ, से...।” पėी गĢपकेँ İवीकारैत गुरुजी सोचैत भोजन करऽ लगलाह। मने-मन सोचलिन अंजनी ठीक कहैत छिथन। ओĦहर कोनटाक अĠहारमे ठाढ़ गĢप सुनैत धनंजयक हालत िविचÿ भऽ गेलै- “ओ एहन महान िपताक हĜयाक लेल ठाढ़ अिछ? ओ वİतुतः पिěडत निह मूखर् अिछ।” सोचैत धनंजय कानऽ लागल। भोजन समाĢत कऽ गुरुजी ओसारापर सँ उतिर अङना अएलाह आिक धनंजय पएरपर खिस कनैत कहलक- बाबू हम िबना िवचार कएने अहाँक हĜया कऽ दैतहुँ। हम बताह छी। हम मूखर् छी। पातकी छी।” “निह धनंजय, अहाँ हमर हĜया करऽ लेल छलहुँ से बात नुका सकै छलहुँ, िकĠतु अहाँ सĜयकेँ नुकेलहुँ निह। अहाँ सĜयकेँ समक्ष अनबामे डरेलहुँ निह। अहाँ वİतुतः पिěडत छी।” “निह बाबू। हम ƅोधमे रही। अहाँक हĜया करब सोचलहुँ, तकर ĆायिĀत? ” “ĆायिĀत् भऽ गेल।” “से कोना? ” “सĜयक खुलासासँ। आँिखक नोरसँ।” “िकĠतु बाबू? ” “बेटा धनंजय, आइ अहाँक Ćसङसँ हमहूँ िकछु िसखलहुँ।” “बाबू!” “जावत ƅोध रहत तावत ज्ञान हँटल रहत। हम सभ िदन िवńा िसखलहुँ आ िसखौलहुँ िकĠतु हमरामे ƅोधक İवभाव रहबे कएल आ...। ”

मैिथली कथा २००९-१० 141 “आ की बाबू? ” “सभकेँ, जे काज करए ओकरा ĆोĜसाहन दीऐ। आ कोनो बात केओ कहए वा निह कहए, दुनू िİथितमे सोची, से निह कएने अहाँ सन ज्ञानी बापकेँ मारब सोचैत अिछ। ”

142 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

Įयामल सुमन

अथŭत लोकतंÿीय मुिक्त तीन िदन पूवर् अपन िनकटतम िमÿ घनĮयाम बाबू केर दुघर्टनामे मृĜयु भेलाक पĀात आइ गजानन बाबू चौपालमे बैसल उदास रहिथ। योग्य रहलाक बादो एक Ćाइवेट İकूल मेकम वेतनपर नौकरी करब घनĮयाम बाबूक िववशता छल िकयैक तँ घरमे वृŀ माता, पėी, िवआहक योग्य पुÿीक अितिरक्त िशक्षारत पुÿक भरण पोषणक भार हुनके कमायपर। आइ पूरा पिरवारे बेसहारा भऽ गेल। एहेन घटना तँ ककरो वाİते दुखद होइते छैक लेिकन गजानन बाबूक दुख तािहसँ बेसी बुझना जाइत अिछ। जखन चौपालक लोक सभ आƇह करैत खोिद खोिद पुछलिखĠह, तकर बाद पता चलल हुनक दुखक असली कारण। दुघर्टनाक बाद घाइल घनĮयाम बाबूकेँ अİपताल आनल गेल आ डाक्टर देखतिह मृतघोिषत कऽ देलक। पुÿक बाहर रहबाक कारणेँ अंितम संİकार तĜकाल सĦभव निह छल। गजानन बाबू आर लोक सभसँ िवचार कऽ लाशकेँ शीत गृहमे रखबाक Ćबंध करयलगलाह। लेिकन सरकारी अİपताल – सीधा- सीधी िबना घूस कऽ एको डेग चलब मुिĮकल। शीत-गृहक कमर्चारी बाजल - "जगह नहॴ है"। गजानन बाबू िİथितसँ उĜपž सĦवेदना देखबैत, अपन सभ ज्ञान, अनुभव लगाकए थािक गेलाह िकĠतु शीत-गृह कमŰ अपन राग बजबैत रहल जे - " जगह नहॴ है"। गजानन बाबू परेशन छलाह। ताबत सरकारी तंÿ कमौन संकेत बुझिनहार एक नवयुवक आिब कमर्चारीक हाथमे एकटा नमरी थमबैत कहलिखĠह - " अब तो जगह है न"? तĜकाले जगह भेट गेल। लाश राखल गेल। काजभेलाक पĀातो गजानन बाबू दुखी छलाह। अिगला िदन पुÿक आगमनक बाद पोİटमाटर्मक तैयारी होमए लागल। अİपताल मेएĦबुलेĠसक सुिवधा सेहो छल। जिहना आजुक समएमे सरकारी गाड़ीसँ सरकारक काज छोिड़ शेष सभ काज होइत अिछ तिहना अİपतालक Ćबंधककेँ घरमे Ćबंध करवाक हेतुएĦबुलेĠसक साथर्क उपयोग भऽ रहल छल। Ćबंधकक नामपर अपन घरक Ćबंध करवा मे Ƒाइवर साहेब सेहो संकोच निह

मैिथली कथा २००९-१० 143 करिथ। एĦबुलेĠसक कारणे देरी होमए लाग। एĦबुलेĠस आएल आओर Ƒाइवर साहेब आबतिह बजलाह - " अभी हम तुरत आये हैं, एक घěटे के बाद दूसरे िशģट का आदमी जायगा"। एतबा सुनतिह फेर शीत-गृहमे काज आयल वोयोग्य आधुिनक युवक अपन चमĜकार देखौलिĠह। पचास टाकाक एकटा नोट Ƒाइवर साहेबकेँ दैत बजलाह -"अब चिलए"। Ƒाइवर तĜकाल तैयार भऽ गेल। गजानन बाबू िमÿक िवछोह, िमÿक पिरवारक भिबįयक िचĠतासँ तँ िचिĠतते छलाह, ऊपरसँ ई सभ देख भीतरे भीतर छटपटावैत रहलाह जे नैितकता, ईमानदारी कतए चिलगेल। पोİटमाटर्म हाऊसमे सेहो भीड़ छल। बेसी आĜमहĜया आओर बेसी दुघर्टना हमरा लोकतंÿक िबिशƠ िबशेषता अिछ। िकनारा जाऽ कऽ जखन सरकारी करमचारी सँजानकारी लेबाक कोिशश भेल तँ वो असंवेदनशील Ćाणी बाजल - " ये भीड़ तो आप देखही रहे हैं। सब इसी काम के िलए आया है। कोई राशन या वोट की लाइन तो है नहॴ। औरमेरे दो ही हाथ हैं। आपका नĦबर जब आयगा तब देखेंगे"। लोक सभ अनुमान करए लगलाह तँ चािर घěटासँ कम केर मामला निह छल। ताबत धिर तँ राित भऽ जाएत।सभकेँ िचिĠतत देख पुनः वो योग्य युवकक योग्यताक काज उपिİथत भेल।येन-केन-Ćकारेण पाँचटा नमरीपर बात फिरयाइल आओर मरलाक बादो लाइन तोिड़ कऽ घनĮयाम बाबूक लाशकेँ पोİटमाटर्म हाऊससँ मुक्त कराओल गेल। गजानन बाबूक नैितकिशक्षा, ज्ञान, अनुभव सभटा राखले रिह गेल। ककरा िचĠता अिछ जे मृतकक पिरवार परकतेक संकट आएल अिछ। अपन वेतनक अितिरक्त बेसीसँ बेसी आमदनी करब सरकारी सेवकक युगधमर् अिछ। एिह युगधमर्क पालन सरकारी सेवकगण अबाध गितसँ सĦपूणर्देशमे कऽ रहल छिथ। एिह ƅममे पुिलसकेँ सेहो यथायोग्य दिक्षणा देबय पड़ल। थाकल हारल मृतकक İवजन पिरजन समेत गजानन बाबू Įमशान घाट एलाह। सभ जगहसँ बेसी भयावह दृĮय छल। ओहनिहयो Įमशान तँ भयावह होइते छैक। िकĠतु जे भयावहता लोक सभकेँ देखए पड़लिĠह वो आओर भयावह छल। जगहक वाİते, लकड़ी कवाİतें, अिİथ कलश रखबाक हेतु एतए तक िक मृतकक मृĜयु Ćमाण पÿक वाİते सेहो, सब जगह िनयुक्त कमर्चारीक िनयिमत काजक बदलामे अिनयिमत रूपसँ यथायोग्य टाका खचर् करए पड़लिĠह। एवम Ćकारे घनĮयाम बाबू वतर्मान लोकतंÿीय पŀितक जालसँ मुक्त भऽ İवगŭरोहण केलाह। गजानन बाबू सोिच सोिच भावुक एवं िचिĠतत छलाह संगिह एक यक्ष Ćķ सेहो ठाढ़ छल जे घनĮयाम बाबू तँ कहुना लोकतंÿीय मुिक्त पािबİवगŭरोहण केलाह िकĠतु हमर मुिक्तक कोन राİता िनकलत? हमर İवगŭरोहण भऽ सकत कीनिह?

गामक चौपालसँ

144 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

मनोज झा मुिक्त

इĔजितक खाितर एिह लोकिĆय कायर्ƅम ’ मैिथली गुĽनमे’ बहुतोलोकेक िजवनक घटना सुनैत-सुनैत आई हम अपना जीवनमे िवतल या िक कहु िवित रहल घटना िलिख कऽ, पठािव रहल छी ई आशा लक जे अवĮय Ćशारण कऽ, देब। अपन मोनक बोझ कम करब आ मैिथल समाजमे ĭयाĢत एिह चलन Ćित सĦपूणर् समाजक लेल हमर ई Ćķ अिछ। हमर नाम सुची अिह। हमर घर सागरमाया अĖचलमे पडै़त अिछ। हम (3) तीन भाए-बिहन छी। (2) टा भाए आ हम बहीन मे एसगरे छे। बाबुजी हमर एकटा सरकारी कमर्चारी छिथ आ माए गृिहणी। हमर जĠम 2030 साल, आइसँ 33 वषर् पिहने भेल। बाबुजी सरकारी नोकिरहारा आ एसगर बिहन होएबाक नाते घर-पिरवारक सभ क्यो बड़ मानैत छलीह हमरा। बाĪय काल बहुत दुःखमय रहल हमर। हम सभ अथŭत माए, दुनू भाए आ हम अपना गामेमे रहैत छलहुँ आ बाबुजी ओतही जतए-जतए हुनकर पोिİटंग होइत। हमरा गामेमे हाइİकूल होएबाक कारणे हमारा सभ भाए-बिहन İकूल संगे जाइत-अवैत छलहुँ। मैिƏक हम बहुत नीक जका पास कयलहुँ। मैिƏकक बाद गामसँ तीने िकलोमीटरपर रहल एकटा काँलेजमे हमर एडिमशन भेल। काँलेजमे लड़कीक संख्या ओते बेसी नै तँ कमो नै छलै। हम I.A. First year क पिरक्षा देलहुँ आ कनी िदनक बाद िरजĪट सेहो आएल, बहुत नीक नĦबर आएल छल हमरा। हमर बाबुजी पढल-िलखल आकी कहु बुझिनहार होएबाक कारणे हमरा İवतंÿ जकाँ छूट भेटल छल कोनौ अंकुश निह। एिह तरहे हमारा I.A. फİटर् िडिवजनसँ पास कयलहुँ 2043 सालमे। आब B.A. मे पढबाक लेल हमरा िवराटनगरक महेĠƖ मोरंग केंपसमे

मैिथली कथा २००९-१० 145 एडिमशन भेल। ओना िवराटनगरमे तँ हमरा अपन पिरवारक केओ ĭयिक्त नइ छल हँ, हमर मामा-मामी ओतइ रहैत छलीह। मामा एकटा फैक्Əीमे मैनेजर छलाह। हम हूनेकेँ सभ संगे रहेत छलहुँ। काँलेजक हमरा क्लासमे हमरा अलावा एकटा आर मैिथल लड़की छली- पुनम। ओना लड़का सभ तँ बहुत छल मूदा एकटा लड़का अरुण यादव बहुत सĥय आ पढा़इयोमे िनक छल। ओना हमरा ककरोसँ ओते मतलब नइ रहैत छल। मतलब रहैत छल तँ माÿ अपन पढाइसँ। हँ सािहĜयमे हमर रुची होएबाक कारणे किव सĦमेलन सभमे हमर जाएब मामाकेँ किनको नीक नइ लगैत छलिन। एिह तरहे हम फİट इयर नीक नĦबरसँ पास कएलहुँ किहयो शाम चिल आएल बेरमे वा आवĮयक नोट सभ हमरा अरुण सहयोग कऽ दैत छलाह। अरुण हमर बहुत नीक िमÿ भऽ गेला। हमरा दुनू गोटाक बीच आर कोनो तरहक सĦबĠध नइ छल, मुदा सĦबĠध तँ माÿ एकटा असल िमÿक। अरुण किहयो काल हमरा डेरापर अबैत छल। जे हमरा मामा अौर मामीकेँ किनको िनक नइ लगैत छलिन। मामी आब एकटा कोनो छोटो बातमे अरुण लगाक उलहनक रुपमे बात किह दैत छलीह। एकिदन भोरे हमर बाबुजी िवराटनगर पहुँचलाह आ हमरा पढाइ-िलखाइ आर सभ बात-ĭयवİथा सĦबĠधमे पुछलिन । हम-सभ बहुत नीक कहिलयैन। बाबुजी तइ कऽ बाद हमरा अरुणक सĦबĠधमे पुछलिन - के छीयै ई अरुण यादव। ओकरासँ केहन सĦबĠध छो तोरा? बाबुजीकेँ बहुत सरल रूपमे हम कहिलिन - अरूण यादव हमरे क्लासक एकटा सĥय आ लगनशील िवŀाथŰ िछयै, आ हमर बहुत नीक िमÿ। बाबुजी अइस बेसी हमरा नइ पुछलिन आ- “िनक जेकाँ पढब, सभ िवचार करैत.” किहक ओिह िदन चिल गेलिथ । बाबुजी तँ चिल गेलािथ मुदा हमरा मोनमे एकटा मामा-मामी आ बाबुजी Ćित किन केनादोन सोचाए। लागल। हम अरूणक माÿ एकटा िमÿ मानैत िछयै आ ई सभ एहन शंका िकएक कऽ रहल छिथ । फेर हम अपनाकेँ सामाĠय बनएबाक Ćयाश करए लगलहुँ। पिहने जेकाँ काँलेज जएबाक हमर िदनचयŭ शुरु भेल। हमारा आब अरुणसँ बहुत कमे बजैत छलहुँ। पिहने तँ ओना हमारा कहयो हम नइ सोचैत छलहुँ, मुदा आब हमरा कखन काँलेज जाइ आ अरुणकेँ देखैत रही जकाँ होइत छल। अिहना शुरु-शुरुमे अरुण Ćित कोनो भावना नइ आएल हमरा मोनमे मामा-मामी जबरदİती किहक अरुण Ćित हमरा सोचबाक लेल िववश कऽ देलिन । B.A. सेकेěड इयर अथŭत फाइनलक परीक्षा होबमे माÿ चािरमास बाँिक छल

146 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मुदा आब हमरा पढ़मे किनको मोन नइ लगैत छल। आिखर एक िदन हम अपना-आपकेँ नइ रोक सकलहुँ आ अरुणकेँ किह देिलयै जे- हम आहाँसँ Ćेम करैछी। अरुण एकदम चूप-चाप छल। हम पुछिलयै- िक हम अहाँकेँ पसĠद नइ छी? अरुणक बोल फुटल- नइ-नइ से बात नइ िछयै। आहाँ सभ तरहेँ बहुत नीक छी, हम अहाँक एही Ćİतावकेँ हृदयसँ İवागत करैत छी। मुदा डर अिछ हमरा अइ बातक जे हम यादव छी, आहाँ ƙाĦहण छी, की हमरा आहाँक िवआह संभव छीयै? अरुणक एही Ćķक कोनो उþर हम नइ देिलयैक। हमरा मोनमे ई पूरा िवĂास छल जे अखन आब एि ह जमानामे जाित-पाित कोनो बड़का कारण नइ िछयै, हम अपना बाबुजीकेँ कहुना मना लेबै। परीक्षा नजिदक भेलोपर हम दुनु गोटे ओते नइ पि़ढ रहल छलहुँ जतेक पढबाक चाही। Ćेम छुपाओल नइ जा सकै छै, सैह हमरो सभ संगे भेल। मामा-मामी बाबुजीकेँ खबर केलािखĠह, बाबुजी िवराटनगर आिबक हमरसँ समान लइत , हमरा नेने गाम चिल एलिथ । हम बाबुजीकेँ कहए चाहिल यिन जे आब माÿ 2 मासक बाद हमर B.A. फाइनल परीक्षा अए। मुदा बाबुजी कोनोबाते हमर सुनबाक फेरीमे नइ रहिथ। बस दस िदनक िभतर इिěडयाक एकटा गाममे हमर िवआह िठक कऽ देल गेल। हमरा नइ चािहतो हमर िवआह करादेल गेल। हमर आ अरुण दुनू गोटेक सभ सपना चकनाचुर भऽ गेल। चािहयो कऽ िकछु नइ करए सकलहुँ। हम तँ आब भाग्यमे ि वआह िलखल सोची कहुना अपन नव जीवनक İवीकारबाक लेल बाğय भऽ गेलहुँ। िवआहक पाँचे िदनपर िŅरागमन भऽ गेल। अपना सासुर गेलहुँ। सासुरमे आएल जे उमंग एकटा नव िववािहतामे होइत छै वा अपन नइहर छोड़ए कालमे जे दुःख होइत छै से किनको हमरा नइ बुझाएल, िकएक तँ हम अपना आपकेँ माÿ एकटा कठपुतली बुझैत छलॱ माÿ कठपुतली। िवआहक छः िदन भेलाक बादो हमरा हमर पित नइ टोकलिथ, हमरा लग हमर पित एलिथ । आइये हम ओइ मनुį यकेँ िनक जेकाँ देिख रहल िछ जकरा संग हमर िजवनक ĆĜयेक साँस बĠहागेल अिछ। बर पलंगपर बैसलिथ । ओहो चुप आ हमहुँ चुप। दुनु गोटे चुपे-चुप बैसल ओ राित िबित गेल। Ćातः भने राितमे फेर एलिथ , ओइ िदन ओ दारु िपिबक आएल रहिथ। दारुसँ हमरा एकदम घृणा लगैत छल मुदा हम एकहुँ रित हुनका मना नइ कऽ सकिलएिन । बेगर िकछु बजने हम सभ संगही सुतलहुँ। Ćातःभने पाँच बजे हमर बर उिठ कऽ िदĪली चिल गेलिथ । िदĪलीमे ओ कĦĢयूटर इंिजिनयिरंग कऽ रहल छलिथ । िŅरागमनक तीन

मैिथली कथा २००९-१० 147 मासक बाद हमर बाबुजीक अएलाक बाद पता चललिन जे ओ नाना बनएबला छिथ । समए अपना समएसँ िवित रहल छल। हम एकटा बच्चाक माए बनलहुँ। सासुरमे सउस, ससुर सभ गोटे बƂड मानैत छलीह हमरा। बच्चा भेलाक एकिह मासमे हमर बाबुजी अपन गाम लऽ ऎलिथ । हमर आठ मास रहलाक बाद ससुर िवदागरी करा कऽ हमरा सासुर लऽ गेलिथ । तीन वषर् िवित गेल छल हमरा बरकेँ िदĪली गेना। एक िदन हमर ससुर इमरजेंसी तार पठा कऽ हमरा वरकेँ गाम बजौलिखĠह। गाम एलाक बाद राितमे हमरा दुनु गोटेमे पिरचए-पाÿ भेल। एतेक िदन धिर ने िकयो सभ िकछु कहलिथ आ ने हम ककरो बतेिलयै, हम तँ माÿ एकटा हƂडी आ माउसक बनल मुितर् आ की कहुँ रोबोट जका छलहुँ। ओइ राितमे हमर पित सभ िकछु हमरा बतौलिन । ओ कहलिन -देखु हमारा आहाँसँ िवआह करबाक पक्षमे नइ छलहुँ, हमर तँ िदĪलीएमे एकटा लड़की संगे Ćेम किरत छलॱ जे हमरा बाबु-माएकेँ बुझल रहए। मुदा सभ िकछु बुिझतो ओ जाितक किनयाँ आ दहेजक लेल जबरदİती हमर िववाह आहाँसँ कए देलिन । आहाँसँ भेल िवआह हम माÿ अपन बाबुक इĔजित बचाबए लेल केने छलहुँ। िवआहक बाद हम िदĪली जाक ओही लड़कीसँ िवआह कऽ लेलहुँ, जकरा हमारा Ćेम करैत छिलयै, हम चािहतो आहाँसँ Ćेम नइ कऽ सकेछी हँ माÿ आहाँ हमर किनयाँ छी आ आहाँक बच्चाक बाबु हमहॴ छी सैहटा हमारा किह सकेछी।“ हम हुनका िकछु नइ कहिलयैन आ ओिहना बच्चाक संग किहयो नैहर-किहयो सासुर करैत हमर जीवन िवतैत छल। अखन दू वषर्सँ एकटा वोिडर्ङ İकूलमे हम पढािब रहल छी आ शेष अपन जीनगी गुजािर रहल छी। एिह तरहे जिहया अरुणसँ हम Ćेम बड़ करैत छलहुँ जबरदİती ताना मािर-मािर कऽ हमरा अरुण संग Ćेम करबाकलेल िववश कऽ देलक। जाित आ समाजक खाितर हमर जीवनक डोरी ओइ खुņामे बािĠह देल गेल जे लड़का पिहनहीसँ एकटा दोसर लडकी संग Ćेम करैत छल आ लड़काकेँ नइ चािहतो जाित आ समाजक डरसँ चिर लाख दहेज लक हमरासँ िवआह कए देल गेलै। अइमे घाटा कोन समाजकेँ भेलै वा फायदा कोन समाजकेँ भेलै। घाटा आ फायदा तँ जकरा जे होऊ मुदा हमर जीवन अिभशĢत बना देल गेल हमरा बाबुजी आ हमरा साउस- ससुर Ņारा। नइ अपने Ćेम करए बला मनुख्ख सँग िजवन िवताव सकलहुँ आ नइ अपना पितक िजवनेमे समािहत भऽ सकलॱ। ई दोष ककरा देल जाए, हमर Ćķ सभ समाजसँ अिछ। उतरो चेहे जे अबए मुदा हमर जीनगी-----, हमर जीनगी तँ-------।

148 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

जगदीश Ćसाद मंडल बाल-िकशोर लेल Ćेरक कथा (1) उĜथान-पतन एकटा िशįय गुरुसँ पुछल- ‘ मनुįय शिक्तक भंडार छी, फेिर ओ िकऐक डूबैत-िगरैत अिछ?’ िशįयक Ćķ सुिन गुरु कने काल सोिच अपन कमंडल पािनमे फेिक देलिखन। कमंडल तैरए (हेलए) लगल। कने कालक बाद कमंडल िनकािल पेन (पेंदी) मे भूर कऽ देलिखन। भूर केला बाद फेिर कमंडल कऽ पािनमे फेकलिखन। कमंडल डुिब गेल। डूबल कमंडल कऽ देखबैत गुरु कहलिखन- ‘जिहना छेद भेिल कमंडल पािनमे डूिब गेल मुदा िबनु छेद भेिल कमंडल निह डूबल, तिहना मनुक्खोक अिछ। जिह मनुįयमे संयम छैक ओ एिह संसाररुपी पोखिरमे निह डूबैत अिछ मुदा जे असंयमी अिछ, ओ ओिह छेद भेिल कमंडल जेँका, डूिब जाएत अिछ। गाए कऽ अगर चालिनमे दुहल जाए तँ दूध धरतीपर िगरत मुदा जँ सौँस बतर्नमे दुहल जाएत तँ वरतनमे रहत। तिहना इिĠƖय शिक्त जँ मानिसक शिक्त कऽ कुमागर् िदिश लऽ जाएत तँ ओ ओही चालिन जेँका भऽ जाएत। मुदा जँ सुमागर् (सही राİता) िदस बढ़त तँ ओ जरुर शिक्तशाली मनुįय बनत।’ (2) Ćितभा डाॅक्टर राममनोहर लोिहया जेहने िवŅान तेहने देशभक्त रहिथ। देशĆेमक िवचार िपतासँ िवरासतमे भेटल रहिन। ततबे निह ओहने मİत-मौला सेहो रहिथ। सिदखन िचĠतन आ आनĠदमे िजनगी िवतविथ रहिथ। िवदेशसँ अबै काल मƖास बĠदरगाहपर जहाजसँ उतिड़लिथ। कलकþा जेबाक छलिन। मुदा संगमे िटकटोक पाइ निह। िबना भाड़ा देने कोना जइतिथ। बंदरगाहसँ उतिर सोझे ‘िहĠदू’ अखबारक कायŭलयमे जा सĦपादककेँ कहलिखन- अहाँक पिÿकाक लेल हम दूटा लेख देव।’ सĦपादक पूछलिखन- ‘लाऊ कहाँ अिछ।’

मैिथली कथा २००९-१० 149 ‘िलख कऽ दऽ दइ छी’ लेख तँ िलखल छलिन निह, कहलिखन- ‘ कागज-कलम िदअ, अखने िलिख कऽ दइ छी।’ लोिहया जीक जबाव सुिन सĦपादक बकर-बकर मुँह देखए लगलिन। तखन डाॅक्टर लोिहया अपन वाİतिवक कारण बता देलिखन। कारण बुझलाक बाद सĦपादक जी बैसबोक आ िलखबोक ओिरयान कऽ देलिखन। िकछु घंटाक उपराĠत दुनू लेख तैयार कऽ लोिहया जी दऽ देलिखन। दुनू लेख पिढ़ सĦपादक गुĦम भऽ मने-मन हुनक Ćितभाक Ćशंसा करए लगलिखन। ज्ञानक महþा सवŸपिर अिछ। ई बुिझ एĸो क्षण ĭयथर् गमेबाक चेƠा निह करक चाही। सिदखन अपनाकेँ नीक काजमे लगौने रहक चाही। (3) ममर् एकटा İकूल। जिहमे हेलब िसखाओल जाइत। नव-नव िवńाथŰ Ćवेश लइत आ हेलैक कला सीिख-िसिख वाहर िनकलैक। İकूलेक आगूमे खूब नमगर चैड़गर पोखिर। जेकरा कातमे तँ कम पािन मुदा बीचमे अगम पािन। िशक्षक घाटपर ठाढ़ भऽ देखए लगलिथ। िवńाथŰ सभ पािनमे धँसल। िवńाथŰ सभकेँ आगू मुँहे ( अगम पािन िदिश) बढ़ल जाइत देिख िशक्षक कहए लगलिखन- ‘ बाउ, अखन अहाँ सभ अनजान छी। हेलब नइ जनैत छी। तेँ अखन अिधक गहीर िदस नै जाउ। नइ तँ डूिब जाएब। जखन हेलब सीिख लेब तखन पाइिनक उपरमे रहैक ढ़ंग भऽ जाएत। जखन पाइिनक उपरमे रहैक ढ़ंग (कला) सीिख लेब, तखन ओकर लाभ अपनो हएत (होयत) आ दोसरो कऽ डूबैसँ बचा सकब। एिहना संसारमे वैभवोक अिछ। अनाड़ी ओिहमे डूिब जाइत अिछ, जबिक िववेकवान ओिहपर शासन करैत अिछ। जिहसँ अपनो आ दोसरोक भलाई होइत छैक।’ वैभवक िİथितमे ĭयिक्त अपने कुसंİकारसँ गहीर खाइ खुिन İवयं डूिब जाइत अिछ। (4) अधखड़ुआ दूटा चेलाक संग गुरु घूमले िवदा भेला। गामसँ िनकिल पाँतरमे Ćवेश किरतिह बाध िदिश नजिर पड़लिन। सगरे बाध खेत सभमे मािटक िढ़मका देखलिखन। तीनू गोटे रİतेपर सँ िहयािस-िहयािस देखए लगलिथ, जे ऐना िकऐक छै? िकछु काल गुनधुन कऽ दुनू चेला गुरुकेँ कहलकिन- ‘ अपने एतै छाहिरमे बैिसयौक, हम दुनू भाँइ देखने अबै छी।’ ‘बड़बिढ़या’ किह गुरु बैिस रहलिथ। दुनू चेला िवदा भेल। कातेक खेतसँ िढ़मका देखैत दुनू गोटे सौँसे बाधक िढ़मका देिख, घुिर गेल। सभ िढ़मकाक बगलमे कूप खुनल छलैक। मुदा कोनो कूपमे पािन निह छलैक। िसफर् एĸेटा

150 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) कूपमे पािनओ छलैक आ ढ़ेकुलो गारल छलैक। ओना तँ सॱसे बाधे खीराक खेती भेिल छल मुदा सभ खेतक लþी पाइिनक दुआरे जिर गेल छलै। िसफर् एĸेटा खेतमे झमटगर लिþओ छल आ सोहरी लागल फड़लो छल। गुरु लग आिब चेला बाजल- ‘सभ िढ़मकाक बगलमे कूप खुनल छैक मुदा पािन निह छैक, िसफर् एĸेटाटा कूपमे पािनयो छैक, ढ़ेकुलो गारल छैक आ खेतमे सोहरी लागल खीरो फड़ल छैक।’ चेलाक बात ğयानसँ सुिन गुरु पूछलिखन- ‘ऐना िकऐक छै?’ दुनू चेला चुĢपे रहल। चेलाकेँ चुप देिख गुरु कहए लगलिखन- ‘ ऐहन लोक गामो सभमे ढ़ेिरआइल अिछ जे चट मंगनी पट िवआह करए चाहैत आिछ। जते उĝथर कूप छैक, जिहमे पािन निह छैक, ओ खुनिनहारो सभ ओहने उĝथर अिछ। कोनो काज-चाहे आिथर्क होए वा बौिŀक वा सामािजक- अगर ढ़ंगसँ निह कएल जयतैक तँ ओहने हेतैक। बीचमे जे एकटा कूप देखिलऐक, ओ खुनिनहार िकसान मेहनती अिछ। अपन धैयर् आ āमसँ मािटक तरक पािन िनकािल खीरा उपजौने अिछ। तेँ ओकरा मेहनतक फल भेिटलैक। बाकी सभ कामचोर अिछ तेँ आशापर पािन फेरा गेलैक।’ (5) समयक बरबादी एकटा ĭयवसायी िकİसा सुनलक जे राजा परीिक्षत एĸे सĢताह भागवत सुिन ज्ञानवान भऽ गेल छलाह। तेँ हमहू िकऐक ने भऽ सकै छी। ओ कथावाचक भिजअबए लगल। कथावाचक भेटलैक। दुनू गोटे ( कथोवाचक आ ĭयवसािययो) अपन-अपन लाभक फेिरमे। कथावाचक सोचैत जे मालदार सुिनिनहार भेटल आ ĭयवसायी सोचैत जे िजनगी भिर बईमानी कऽ बहुत धन अरजलॱ आबो मरै बेिर िकछु ज्ञान अरिज ली, जिहसँ मुिक्त हएत। कथा शुरु भेल। सĢताह भिर कथा चलल। सĢताह बीतलापर ĭयवसायी ĭयास जी ( कथावाचक) कऽ कहलकिन- ‘ अहाँ नीक-नहाँित कथा निह सुनेलहुँ, हमरा ज्ञान कहाँ भेल?’ दिछना निह देव।’ ĭयवसायीक बात सुिन ĭयासजी कहलिखन- ‘ अहाँक ğयान सिदखन पाइ कमाइ िदस रहैए ते ज्ञान कोना हेत?’ दुनू एक-दोसरकेँ दोख लगबए लगल। केयो अपन गĪती मानैले तैयारे निह। दुनूक बीच पकड़ा-पकड़ी होइत-होइत पटका-पटकी हुअए लगल। ओिह समए एकटा िवचारवान ĭयिक्त राİतासँ गुजरैत रहिथ। ओ देखलिखन। लगमे जा दुनू गोटेकेँ झगड़ा छोड़बित पूछलिखन। दुनू गोटे अपन-अपन बात ओिह ĭयिक्त कऽ कहलक। दुनूक बात सुिन ओ ĭयिक्त दुनूक हाथ-पाएर बािĠह कहलिखन- ‘आब अहाँ दुनू गोटे एक-दोसरक बाĠह खोलू।’ बाĠहल हाथसँ कोना खुजैत? बंधन निह खुजल। तखन ओ िनणर्ए दैत कहलिखन- ‘ दुनू गोटेक मन कतौ आओर छल तेँ सफल निह भेलहुँ। सĢताह

मैिथली कथा २००९-१० 151 भिरक समए दुनूक गेल तेँ अपन-अपन घाटा उठा घर जाउ। एकाĜम भेने िबना आğयािĜमक उĿेĮयक पूितर् निह होइत छैक।’ (6) पिहने तप तखन ढ़िलहेँ। एक िदन एकटा कुĦहार मािटक ढ़ेरी लग बैिस, मािटसँ लऽ कऽ पकाओल बरतन धिरक िवचार मने-मन करैत छल। कुĦहार कऽ िचĠतामग्न देिख मािट कहलकै- ‘भाय! तोँ हमर ऐहन बरतन बनावह जिहमे शीतल पािन भिर कऽ राखी आ िĆयतमक हृदय जुरा सकी।’ मािटक सवाल सुिन, कने काल गुĦम भऽ कुĦहार मािटकेँ कहलक- ‘तोहर िबचार तखने संभव भऽ सकै छउ, जखन तोरा कोदािरक चोट, गधापर चढ़ैक, मुंगरीक मािर खाइक, पाएरसँ गंजन सहैक आ आिगमे पकैक साहस हेतउ। एिहसँ कम गंजन भेने पिवÿ पाÿ निह बिन सकै छेँ।’

152 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

डा. सुरेĠƖ लाभ (नाटक) माई गे ! भूख लागल हए दुĮय –१ (मंचपर अĠहार पसरल अिछ । नायक युवककेँ बृŀ माता–िपता िनžामे भेर अिछ। िवघ िवचरो मंचपर हिरयर मिŀम Ćकाश फैल जाइत अिछ। दशर्ककेँ माÿ नायक युवक आ’ माताक िवचमे चलैत सĦवाइद सुनबामे अवैत छैक।) युवक माई गे माई । हमरा बचाले । हमरा बचाले माई । माता वौआ कोžी छैँ ? युवक एननी िछयौ माई, एžीा । माता रे केĦहौर छे बेटा ? की भेलउ ? युवक करेजमे गोली मािर देलक । माता हमर करेजके टुकडाके कोन जोइनढाहा गोली मारलक ? बेटा रे बेटा –कान लगैछ) युवक एžी आ’ ना माई । देखही नै कते खून बहै है । माता बेटा हमर आँिखमे तँ’ अĠहहरजाली लागल हउ । युवक माई कनी अपना हाथे पानी िपया दे । बड िपयास लागल हए । माता अनै िछयो बोआ । कतौ जइहा नै । युवक माई! हम तँ जाइिछयो । आइ दुिनया से जाइ िछयौ । माता बौआ रे बौआ ! नै जो रे बौआ ! नै जो, नै जो रे बौआ । (मंचपर अĠहाइर नीक जकाँ पसिर जाइत छैक)

दृĮय –२ (अĠहार मंचपर Ćकाशक एकटा टुकडी सूतल माता िपतापर जाइत छै। माता िनžवमे बडबडा रहल छै–‘नै जो रे बौआ ! नै जो।’ िपता हडबडाक, उठैत अिछ। मंचपर Ćकाश पसिर जाइत छैक।)

मैिथली कथा २००९-१० 153 िपता– ( माताके उठवैट) एना कथी बडबडाई है ? की भेलै ? माता– ( नीĠमे ) बौआ बौआ! बौआ! । िपता– हे उठौ नै । भोर भेलै आब । सपना देखै है िक ? माता– ( हडबडाक’ उठैत) बौआ कोनो कोरामे के बच्चा ल है जे एना िचĠता करै है । माता– ( हडबडक उठैत) बौआ! कत है हमर करेज ? िपता– केना करै है । बौआ कोनो काेरामे के बच्चाक है जे एना िचĠताच करै है । माता– हमर बेटाके कुच्छो भ’ गेल । हम बड खराप सपना देखिलए । िपता– सपना तँ सपने होइ है । माता– आई कþे िदन देखला भ’ गेल बौआ के । – पितक पएरपर खसैत) केहन पाथर करेज है । जाउक नै कþौसँ हमर बेटाकेँ खोिजक’ ले ल’ अवौक । ( फकिक फफिक क’ कान लगैछ ) िपता– ( कान लगैछ ) गे हम कत से आिन िदयो। हमरा कोनो बुझल हए जे उ कþ है । माता– ( कौत) बौआ रे बौआ । िपता– कोन खेबने उ बौआइत होतै से त’ भगबाने जनिथĠहझ । माता– हे िदनकर िदनानाथ रछा किरहा हमर बेटा के । िपता– करेज मजगूत कर गे रमलगरावाली । जो हाथ मूँह धो ग’ । माता– जावत हमर बेटा नै आओतै । हम मूँहमे पािनयो नै देबै । किह दै िदयो । िपता– जे हमरा करेजमे दरद नै होइहए ? माता– तोरा की हएतो ? िपता– जकर जवान बेटा भूखल– िपयासल एना गामे गाम भागल िफरतै त’ ओकर बूढ बापके की हाल होइत होतै ? माता– ई की जान गेलै मतारी के ममता । िपता– जवान बेटाके देखक’ बापके हौसला केहन बुलĠद होइ है से तोँ की जान’ गेलही ? लेिकन आइृ ? (कान लगैछ) माता– तोँ कुच्छोै कह’ । हमरा मोन नै थीर, होइए । हमर बेटा के कुच्छोह भ’ गेल । िपता– चĢपक अलच्छीह । उ मरद के बेटा है मरदकेँ । कुच्छोह नै होतौ। (मंचपर अĠहा र पसैर जाइछ)

154 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) दृĮय –३ (मंचपर अĠहार पसरल छै । चािरटा आदमी नायक युवककेँ आँिखपर पņी एवं हाथमेँ रİसी बĠहमने ठाढ़ अिछ । सभक हाथमे बĠदुाक छै )

पिहल आदमी– (युुवकसँ) जोभाग, जतेक जोरसँ तोँ भािग सकैत छेँ भाग । ( मंचपर धीरे धीरे इजोत पसरैत अिछ ) दोसर आदमी धमह। पिहने ई सभ हटा दै िछयै। बेचाराके भागमे सुिवधा हएतै।–कहैत आगू बिढ दुनू हाथक रİसी एवं आँिखक पņी खोिल दैत छैक) तेसर आदमी – भागने आब ढाढ कीया छेँ ? युवक– ( तेसर आदमीकेँ पएर पकडैत) नै हमरा एना भगाउ नै । हम गोर लगै छी । ( सब आदमी ढहाका लगबैछ ) चािरम आदमी –रे तोरा हमसब मुक्त क’ रहल िछयौ। तखन तोँ भगैत कीयाक ने छेँ ? युवक– हमरा बुझल अिछ अहाँसब हमरा केहन मुिक्त देब। हम नै भागब। हमरा माफ क’ िदय। पिहल आदमी– (ढहाका लगवैछ) अरे एकरा त’ सब पलान बुझल छै सब –पुन ः ढहाका लगवैछ आ’ एक लात ओिह युवककेँ मारैत अिछ ) ( ततपइचात सभ आदमी अņहास करैत अपन लातसँ। युवकपर Ćहार करैत अिछ आ’ पुन ः मंचपर अĠहातर पसैर जाइछ) दृĮय –४ अĠहारसँ इजोत होइत छैक मंचपर। एकटा फरकीपर आशकेँ चािरगोटे अपन कनहापर लदने जा’ रहल अिछ। पाछू– पाछू तीन चािर गोटे रहल छैक। एकगौटे आगू–आगू कोहा आिद ल’ क’ चिल रहल अिछ। सभ िचचीया रहल अिछ–‘राम नाम सþ है, सबका यही गत है’। पुन ः तेसर। शव याÿामे पाछू– पाछू चलिनहार लोढ नारा लगा रहल अिछ– ‘राम नाम सþ है, सबका यही गत है’ । मंचपर अĠहार पसैर जाइछ । दृĮय –५ (मंचपर अĠहारसँ इजोत होइत छैक । लाल मुखौटाधारी तीन ĭयिक्त नायक युवककेँ घेरने ढाढ अिछ । युवक डरे थरथरा रहल अिछ । एकटा मुखौटा धारीक हाथमे कता छै, दोसरके हाथमे लाठी आ’ तेसरके हाथमे पेİतौहल छैक)

मैिथली कथा २००९-१० 155 पिहल मुखौटा धारी ः ( युवककेँ हाथ उपर उठा ओिहपर कता रखैछ ) एिह हाथकेँ छपिट िलयौ गŀार । दोसर मुखौटा धारी ः नै छोड , एकर टाडे तोिड दै छी – कहैत लाठी युवकके टाडपर बजारैत अिछ ) युवक– ः इİसै । –हाथ जोडैत अिछ) छोड दीए, छोिड दीए हमरा । तेसर मुखौटा धारी– ः ( पेİतौवल देखवेत) अखन गीडगौडाइत अिछ । गोरगीट निहतन । युवक ः हमरा माफक दीए भाईसब तेसर मुखौटाधारी – ः हमसब माफ नै करै िछयै , सक्सगन करै िछयै, एक्स) न । तोरो माफ नै करबौ । युवक– ः तखन की करब ? तेसर मुखौटा धारी ः पिहने दुनू हाथ पएरपर गोली मािर क’ लोथ बनएवै आ’तखन धीरे धीरे परान लेबौ । युवक– (डराइत) नै भाइजी नै तेसर मुखौटाधारी–ः (ठहाका लगवैछ) हा..........हा.............. हा........... युवक– ः ई सन हमरा नै िचĠहैकत छैथ । मुदा अहाँ त’ नीक जकाँ िचĠहै त’ छी । पिहल सुखौटाधारी– ः (अņहास करैत) हमरा सभक दुिनयाँमे ककरो केयो ने होइत छैक । युवक ः हमर पराने लेबाक अिछ त’ सीधा हमर करेजपर गोली मारु भाइजी–सीधा! हे लीय –अपन सटर्क बटन खोली करेज देखवैछ ) दोसर मुखौटाधारी– ( कडिकक’) नै से नै हएतौ । हमसब िवसरी कटा कटा क’ जान लेबौ । युवक– (कनैत) Ģलीकज भाइजी! Ģलीहज । सीधा करेजपर गािल मारु । Ģलीलज –कहेते पेİतौुलवला मुखौटाधारीक पएरपर खसैत अिछ । मंचपर अĠहार पसैर जाइछ ) दृĮयौ –६ (मंचपर इजोत होइत छैक । िकछु युवक युवती ( १०–१२ गोट) अपन अपना माटरी चोटरी परदेश जा’ रहल अिछ । िकछु वुढवा– वुिढया लाठीक सहारापर ढाढ युवा युवतीकेँ हाथ िहला िहला क’ िवदा क’ रहल अिछ । युवा युवती सभ सेहो हाथ िहलवैत आगू बिढ िहलवैत आगू बिढ रहल अिछ । िबच– िबचमे कोनो युवा – युवती बुढवा बुिदयाकेँ चरण İपलशर् करैत अिशवŭद लैत आगू बिढ रहल अिछ । ) एकटा युवा– (बृŀ िपताकेँ चरण İप शर् करैत) जाइ िछयो बाउ । (अपन ओिखक नोर पोछैत अिछ ।) बुढवा– हँ जĪदी से जा’ बौआ । परदेशमे कमसे कम जानकेँ रछा तँ

156 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) होतो । जा हमरा सूनके िचĠता नै किरहा –कान लगैछ। (युवक आगू बिढ जाइछ । बाँकी युवा युवतीसँ मंच खाली भऽ जाइत अिछ । माÿ रिह जाइछ िकछु जोडी बुढवा बुिढया । ओ लोकिन देखैत रिह जायछ बाटकेँ जिहबाटे ओकर बेटा वेटी परदेश गतैक।) मंचपर अĠहाखर पसिर जाइछ) दृĮय – ७ (अĠहार मंचपर Ćकाश होइछ । िपता आंगनमे वैिस डोरी बना रहल छैक। माता जाँतामे गहूम िसिस रहल अिछ एंव संगिह छिठ भगवानक गीत गािव रहल अिछ– उगू हे सूरुज नाथ.......... नेपĝयछसँ युवककें आवाज अवैछ माई ! माईगे ।) (गीत चिलए रहल छै ) िपता– किनका चुĢपं भ’ जा’ त’ । माता– (चुĢपल होइत) किथला ? िपता– बौआके आवाज जेका बुझाई है । पुनः युवककेँ आवाज अवैछ– माई ! गे माई । माता– हँ ई तँ, हमरे बेटा हए । बौआ ? आबह नै, आबह। (युवक Ćवेश करैछ – अİतौ ĭयİतन अवİथाआ छै । माता–िपता पकिडकऽ कान’लगैछ– वौआ रे वौआ ) िपता–(आँिख पोछैत) एहन हालतमे किथला घरे अएला बौआ ?

मैिथली कथा २००९-१० 157

āी लĪलन Ćसाद ठाकुर āीमती सुभƖा देवी आ āी हीरानंद ठाकुरक िŅतीय बालक āी लĪलन Ćसाद ठाकुरक जĠम ५ फरबरी १९५१, नरकिनवारण चतुदर्शी कऽ मुंगेरमे भेल छलैĠह। िहनक Ƈाम- समौल, िजला-मधुबनी, आ कमर् İथली जमशेदपुर छैĠह। İकूल-वॉƀसन हायर सेकेंडरी İकूल , कॉलेज-एम.आई.टी मुजģफरपुर। İकूली िशक्षा मधुबिनक वॉƀसन İकूलसँ केलाक बाद मुजģफरपुर इंजीिनयिरग कॉलेजसँ िसिवल इंजीिनयिरंग केलाह। नेन पिनसँ िहनक अिभरुिच कला आ सािहĜयक Ćित रहलैंह आ अनेको कायर्ƅम मेभाग लैत रहलाह। अपनिह िलखल नाटकक मंचन ओ अपन İकूलेसँ करैत रहलाह। कॉलेजकेँ पिहले बरखमे अपन कॉलेजक सांİकृितक कायर्ƅमक भार िहनका दs देल गेलैंह। कॉलेजक िŅतीय बरख सs लs कs अिĠतम बरख तक अपन कॉलेजक छाÿ संघक जेनेरल सेƅेटरी रहलाह। कॉलेजक पढ़ाई पूणर् भेलापर टाटा İटील मे कायर्रत भेलाह। ऑिफसक ĭयİतताक बावजूद ओ अपन सािहिĜयक गितिविध कs आगू बढ़ाबित रहलाह। ओ सिदखन अपने िलखल नाटकक मंचन करैत छलाह आ ओिह मेहुनक मुख्यभूिमका रहैत छलैĠह। Ćकाश झा कs िफ़Īम " कथा माधोपुर की "मेमुख्य भुिमका सेहो केने छिथ। हुनक िलखल सभ नाटक िमथांचलमे अखैनो खेलाएल जाइत छैक। हुनक िलखल िकछु Ćिसŀ मैिथिल नाटक छैĠह:१ - बड़का साहेब २ - िमİटर िनलो काका ३ - लॲिगया िमरचाई ४ - बकलेल ५ - आिद वा अंत ललन ठाकुर जीक िकछु रचना पाठक लोकिनक समकक्ष Ćİतुत अिछ।–सĦपादक। साढूनामा (कĭवाली, तेसर कड़ी ) कैएक साल सौराठ सभा गेलाक बाद बरक िव वाह भs जाइत छैĠह, आ ओकर बाद होलीमे हुनक साढू सभ सेहो पहुँचित छिथ। होलीमे सभ साढूक जुटान होइत छैक। िववाहक बादक साढूक ĭयथा :

158 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) साढूनामा सासुर िथक कैलाशे ........दूर हो िक पासे , सािर सारक गĢप कोन सास ससुर दासम दासे। तs अहॴ िकयाक अघुताएल छी यौ साढू , एखैĠह तs भेल एके मासे।

बहुत जतनसँ होइत छैक िववाह मनुखकेँ, सुखक आरĦभ आ अंत दुःखकेँ। आ...भक्तक लेल जेना मिĠदर -मिİजद गुरुŅारा, मैिथलक लेल मोिहनी मुरितयासँ सुशोिभत ससुर Ņारा।

तँ Ćेमक ĭयापार करू , छĢपन तरहक ĭयंजन मुģतिहं उदरİथ करू। लगैत निह छैक कोहबर घरक कोनो भाड़ा, संठी सन जे अबैत छिथ, मोटा कs मोटा कs भs जाइत छिथ पाड़ा। तँ अहॴ िकयैक अघुताएल छी .......................एके मासे।

नइ गाम परहक झंझट, नइ बाबूकेँ फटकार , बाबू खुश भेला लय हजारक हजार। ........2 िजĠदगीमे आएल बहारे बहार, चान सनक सािर आ फूल सनक सार।

İविणर्म अक्षरसँ िलखाएत ऑ चातुिथर्क राित, जखन नॉत देल भोजनपर सोन सन मुखराक दशर्न भेल छल। मोन मे ई झंकार भेल छल आ Ũदयमे ई गजर्न भेल छल। की गजर्न भेल छल ?

हमरा तँ लूिट िलया िमलके हुİन वालॲ ने, गोरे गोरे गालॲ ने, काले काले बालॲ ने।

हम छोिर चलल छी सासुरकेँ, हमरा किथ लेल रोकए छी। मुिĮकलसँ कतेक जतरा कयलहुँ, पाछूसँ किथ लेल टोकइ छी।

मैिथली कथा २००९-१० 159 नइ चान सनक सािर, नइ सार गुलाबक फूल, िववाह जे कs लेलहुँ, से भेल भारी भूल। नय छĢपन तरहक भोजन, ससुरकेँ लाचारी, यौ डेढ़ आँिख वाली सासु गाबथी नचारी। यौ कƁखोधी सन मुँह वाली हमर घरवाली, सड़कपर जोँ चलती तँ कहतैन मदारी। बच्चॲ बजाओ ताली ....२ नय चतुिथर्क राित नइ होली नइ बरसाित, यौ कमर्क िलखल कहल गेल छय सुआित। िजĠदगीसँ साढू हम मािन गेलॱ हारी, गेलॱ नेपाल सँग गेलय कपार ।

पिहनेसँ अिधक दुखी छी हम, छूरा किथ लेल भॲकइ छी। हम छोिर चलल छी सासुरकेँ ................. पाछूसँ किथ लेल टोके छी........ ।

गीतकार : ललन Ćसाद ठाकुर संगीतकार : ललन Ćसाद ठाकुर

160 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) उमेश मंडल लघुकथा परहेज साहु जी मैनेजर सहाएब आइ भोरमे मिर गेलाह। कोना नै मिरतिथ। तीन मास पिहनिह िदĪलीक İकोटर् अİपतालमे बाइपास सजर्री करबौने छलाह। सफल सजर्रीक बाद मैनेजर सहाएब डाक्टरसँ पुछने रहिथन- ‘‘डाक्टर सहाएब, परहेज की कोना करबै?’’ “नोन-चीनीक परहेज तँ पिहनिह जेकाँ करब मुदा आब ğयान राखब जे िचĠताजनक बातचीतसँ दूर रिह, झर-झमेलसँ कात रहब।’’ परहेज सुिन मैनेजर सहाएब तेना सकदम भऽ गेला जेना अखनेसँ परहेज करए लागल होिथ। गाम अिबते नौकरी Ĕवाइन केलिन। बैंक जाए-आबए लगलाह। समएपर सुइया-दवाइ चिलते रहिन। साते िदनपर डाक्टरसँ रक्तचापक जाँच करबैत रहिथ। िनकेना रहए लगलाह। िचĠताक नामपर िदĪलीक अİपतालमे भेल खचर् टा नचैत रहिन। आिखर ढाइ लाखक खचर् रहिन। मुदा मैनेजर सहाएबक लेल पनरहसँ मास िदनक आमदनी माÿ छिĠह। पुरबैक लेल भरपूर Ćयासमे लािग गेलाह। आब मैनेजर सहाएब Ƈाहककेँ बेसी तंग निह करै छिथन। सभक काज िमलािनयेसँ करए लगलाह। गिहिकयो सभ मैनेजर सहाएबकेँ खुश कऽ कए अपन काज तेजीसँ िनकािल रहल अिछ। िकछुए िदनमे समए तेना बदिल गेल जेना कोनो पिथक अपन पथ ƚिमत भऽ गेने औनाए लगैत अिछ, तिहना। आ एिह लेल सİपेĠड कऽ देल गेलाह। आब मैनेजर सहाएब अपन परहेज आ िजनगीक उपर सोचए लगलाह। Ƈाहको सभ डेरेपर आिब-आिब तगेदा िदअए लगलिन। क्यो कहिन जे- ‘‘ हमर रुपैया आपस कऽ िदअ।‘‘ तँ िकयो कहिन- ‘‘काज करेबा लेल जे रुपैआ नेने छी से काज करु, नइ तँ हमर बेटीक िवआह भङिठ जाएत। समएपर काज जँ निह करब तँ बहुत अधला फल होएत।’’ इĦहर डीस बलाक तगेदा, िबजली िबल, जनरेटर बलाक आƇह, दूध बलाक खुशामद, İकूलक फीस माथपर रहबे करिन। मैनेजर सहाएबक आदत सĢपत रुपमे ĭयाĢत रहिन जे ई सभ खचर् धेलहा रुपैआसँ आइ धिर नै केने रहिथ तेँ आब कोना किरतिथ। जेना-जेना ई सभ झमेल बढ़ैत गेलिन तेना-तेना रक्तचाप सेहो बढ़ैत गेलिन। किनयेँ कालक बाद डाक्टर बजौल गेला। डाक्टर सहाएब जाँिच कऽ बजलाह- ‘‘नै छिथ।’’

मैिथली कथा २००९-१० 161

कमला चौधरी-१९५३ कृित- मैिथलीक वेश-भूषा-Ćसाधन सĦबĠधी शĤदावली, Ćकाशनाधीन: बाटे िबलायल पािन (कथा संƇह), िपया मधुमास (किवता संƇह), आशापूणŭ देवीक बंगला लघु उपĠयास मन मंजूषाक मैिथली अनुवाद। मुजģफरपुरसँ Ćकािशत मैिथली सािहिĜयक पिÿका İवातीक सĦपादन (१९८४-८५)। कथा-गुणनफल मीरा माइक Ćसžताक कोनो सीमा निह। आइ भोरेसँ छोट–मोट मोटरी बĠहबामे लागिल छिथ। आिखर नव गृहİथी बसतैक। कतेक छोट–िछन वİतुक खगता होइत छैक। ताबत ğयानमे अएलिन जे थोड़ेक कोबीक सुखॱत आ िचĸस सेहो बािĠह देबाक िथक। निह तँ जाइते बजारक मुँह देखए पड़तैक। ई सभ करैत–करैत आँिख नोरा गेलिन। मीरा–फूल सन कोमल आ सादा कागत सन İवच्छ। आँिखक आगाँ चमिक गेलिन िववाहक ओ िदन। पिरछन करैत काल दाइ–माइ सभकेँ मीराक भाग्यपर ईįयŭ भेल रहिन। केओ िटपैत कहने छलीह-–गे दाइ, ई तँ सþे मीरा आ कृįणक जोड़ी हेतै। वर जिहना कुतŭ आ गंजी खोललिन आिक सभक नजिर हुनक उžत आ पुƠ छातीपर रूिक गेलिन। मीराक माए जĪदीसँ जमाएकेँ डोपटा ओढ़ाए, काजर लगाए देलिथĠह आ गोसाऊिन घर लऽ कऽ चिल गेलीह। आĻन घर शुभे हे शुभेसँ मुखीत भऽ गेल रहए। िसनुरदान नीक जकाँ सĦपž भऽ गेलैक। मीरा माए िनिĀंत निह रिह सकलीह। चािर िदनुक बादे ओझाक नाकर–नुकुर कानमे पड़ए लगलिन। ओझा माने सुनील बाबू,–खबासक संग İनान करए जएबाकाल आङनेमे ठािढ़ सासुकेँ सुनबैत कहलिन-–हमरा तँ सूनल छल जे मीरा मैिƏकक परीक्षाथŰ छिथ। मुदा िहनका तँ िमिडल माÿक योग्यता छिन। हम शहरमे रहिनहार लोक छी। पढ़ल–िलखल लोक सभक संग उठब बैसब अिछ। ओिहमे मीरा कोना एडजİट करतीह? मीरा माए कमलपुरवाली अित िवनƛ शĤदेँ ओझाकेँ बुझबैत कहने छलीह-

162 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मीरा एखन माÿ चौदह वषर्क अिछ। ओकरा जेना जे पढ़बए चाहिथन से पिढ़ लेतिन। हम एकसिर अपना भिर मीराकेँ सुयोग्य İÿी बनबाक िशक्षा देने िछऐक। आब आगाँ िहनकर िथकिĠह। जेहन बनाबिथ। जेना राखिथ। सĢताह िदन माÿ सासुरमे रिह ओझा िबदा भऽ चल गेल छलाह। सासुक बहुत आƇह पर फगुआमे अएबाक भरोस देलिथन। मुदा तीन फगुआ बीित गेल। ओझाक कोनो पता निह। िशवरािÿक मेलामे ओझाक कोनो गौआँ बौआ ककाकेँ कहने रहिथ जे हुनकर जोगर किनञा निह भेलिन। तेँ आन-जान छोड़ने छिथ। ई बात बुिझते कमलपुरवाली कबुला–पातीक आमार लगा देलिन। बेटीक मुँह देिखते Ũदए टुकड़ी-टुकड़ी होबए लगिन। मुदा साğय की ! तीन वषर् तीन युग सन बीतल छल। ओझाकेँ नहा कऽ घर जाइत देिख कमलपुरवालीक ğयान टुटलिन। मोटरी बाĠहब छोिड़ दौगलिथ भानस घर। जैधीकेँ चूिŎ लग बैसा आएल रहिथ। कटोरी सभमे तीमन तरकारी सजबए लगलीह। ओझाकेँ भोजन पठा कऽ फेर पेटी सिरआबए लागल रहिथ। जेठकी िदयािदनीकेँ सोर पािड़, मीराकेँ नूआ बदिल केश खोपा कऽ देबए कहलिन। सभ ओिरओन होइत बेर खिस पड़लैक। ओझाक सĦबाद आएल जे पटना पहुँचैत राित भऽ जाएत, तेँ जĪदी िबदा होएब जरूरी। आङनमे आइ माइ जुिम गेल छलीह। कमलपुरवाली मीराकेँ भिर पाँज पकिड़ घर लऽ गेलीह। हृदएमे हाहाकार भऽ रहल छलिन। िकछु फूिट कऽ बाहर होमए चाहैत छल मुदा अपनाकेँ िनयंिÿत कैने छलीह। ईहो िदन भेल जे तीन बरखक बाद ओझा मीराकेँ लेबए अएलाह अिछ। दुनू हाथेँ बेटीक गाल पकिड़ बुझबैत कहलिन- दाइ, आइसँ सभ िकछु वएह छथुन। जेना रखथुन तिहना रिहहेँ। िबनु पुरूषक İÿी पाथर होइए। िबसिर जइहेँ सभ िकछु। बस किहयो काल पोİटकाडर्पर कुशल मंगल खसा िदहेँ। आर िकछु निह। माए, काकी, काका सभकेँ गोर लािग िबदा भऽ गेल छलीह मीरा। बसमे चुपचाप बैसिल मीराक आँिखक आगाँ झुलैत रहलिन सभ दृĮय-– पोखिर, इनार, कलम, सिरसोक साग आ संगी बिहिनया–जोड़ी, फूल, लॱग....। माएक बात मोन पिड़ गेलिन। ई सभ तँ िबसिर जएबाक िथक। मन रखबा लेल छिथ, बस इएह टा! पटना पहुँिच अपन गृहİथी बसएबामे मीरा लािग गेलीह। बहुत िकछु तँ माए संग कऽ देने रहिथन। बाँकी आवĮयक वİतु सुनील जुटाए देलिथĠह। मीरा अपन गृहİथीमे लीन भऽ गेलीह। मास िदन तँ पाँिख लगा उिड़ गेल। मुदा एिह बात िदस मीराकेँ आइ ğयान गेलिन। ऑिफस जएबाक तऽ एकटा कोनो िनिĀत समए होइत छैक। सुनीलकेँ बाहर जएबाक तँ कोनो िनिĀत समए निह छिĠह। ओ ई बात आब

मैिथली कथा २००९-१० 163 सुनीलकेँ पूछबे करतीह। एक िदन उदास İवरमे सुनील कहने रहिथĠह मीरा, हम बहुत दुिवधामे जीिब रहल छी। अहाँसँ नुकाएब ठीक निह। वİतुतः हमर नोकरी छूिट गेल अिछ। इĦहर–ओĦहरसँ पैंच–उधार लऽ घरक खचर् चला रहल छी। आब दोİतो– महीम संग छोिड़ देलिन अिछ। एहन समएमे अहॴ हमर मदिद कऽ सकैत छी। मीरा हतĆभ भऽ गेलीह। ओ कोना मदिद कऽ सकैत छिथ ? ओ तँ अिधक पढ़लो–िलखल निह छिथ। हुनक मनोभाव पिढ़ सुनील बुझओने रहिथन- यएह कातिहमे सॱदयर् केĠƖ छैक। ओिहमे तीन मासक Ćिशक्षण लऽ िलअ आ फेर ओतिह काज करब शुरू कऽ िदअ। दू–तीन हजार मास कमायब साधारण बात अिछ। ओिहना ठािढ़ रहली मीरा। हुनका बुझबामे िकछु निह अएलिन। सॱदयर् केĠƖ ? Ćिशक्षण ? रूपैया ? तीनू शĤद मनमे बेर–बेर–हौड़ए लगलिन। ओ तँ İÿीक काज घर सĦहारब बुझैत छलीह। ई हुनकासँ की करबए चाहैत छिथ? सुनील मीराक हाथ पकिड़ चौकीपर बैसा लेने रहिथन-–मीरा, हम सभ बुझा देब। बस, जेना हम कहैत छी से करैत चलू। अहाँ सुंदिर छी। कने İमाटर् भऽ जाउ। फेर देखू ने, हमर सभक दिरƖा कोना भािग जाएत। ई सभ िकछु सुनबामे मीराकेँ नीक निह लागल रहिन मुदा माइक कहल- जिहना रखथुन, तिहना रिहहेँ- मन पिड़ गेलिन। ठीके तँ छैक, जिहना रखताह तिहना रहब। ओिह िदन साँझमे सुनील नव ‘ िडजाइन’क साड़ी, रेिडमेड Ĥलाउज, िहल चĢपल एवं अĠय फैशनक वİतु मीराक आगाँ पसािर देलिन। -ई सभ पिहिरकेँ तँ अहाँ परी जकाँ लागब मीरा। मुदा हमरा िबचारेँ अहाँक नाम बदिलकेँ जँ ‘ रूबी ’ रिहतए तँ बेसी नीक होइत। मीरा ! बहुत ‘ओĪड’ फैशनक नाम िथक। आइसँ हम अहाँकेँ रूबी कहल करब। सभ िकछु İवीकार करबाक अितिरक्त ओ कए की सकैत छलीह ? Ćातःकाल सुनीलक संग हुनका सॱदयर्–केĠƖ जएबाक छलिन। सुनीलक िबचार छिन जे Ćिशक्षणसँ पूवर् हुनकर अपन सॱदयर्मे िनखार आिब जएबाक चाही। तखनिह ओ ठीक ढ़ँगसँ Ćिशक्षण लऽ सकैत छिथ। आज्ञाकारी नेना जेना अिभभावकक संग पाठशाला जाइत अिछ, तिहना दोसर िदन सुनीलक पाछाँ–पाछाँ मीरा िबदा भेलीह। सॱदयर् केĠƖक ĭयĭİथािपका िमस डेजीसँ मीराक पिरचय दैत सुनील कहने रहिथन, ई हमर पėी रूबी छिथ। िहनका कने अहाँ İमाटर् बना िदयनु–जािहसँ इहो अहाँक ‘ एिससटेंट’ बिन सकिथ। बेस, तँ जावत िहनका िनखारबामे समए लागत, ताबत हम एकटा िमÿसँ भेंट कऽ अबैत छी। सुनील तँ चिल गेल छलाह मुदा मीरा बिलक छागर जकाँ भएभीत दृिƠसँ िमस डेजी िदस तिकते रहलीह। तिकते तँ रिह जइतिथ मुदा िमस डेजी मीराकेँ केĠƖक भीतर लऽ कऽ

164 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) चल गेलीह। ओतए मोट–मोट İÿीकेँ कुसŰपर ओंघरल आ मुँहपर लेप लगौने देिख मीराक मन िभनिक गेलिन। ओतुका बात ĭयवİथा बड़ अजगुत बुझना जाइिन। ई कोन दुिनयाँ िथक ? एिह दुिनयाँक िखİसा तँ कतहु निह सुनने छी। िकछु काल मीराक सुिध–बुिध जेना हेरा गेलिन। ğयान तखन भंग भेलिन जखन िमस डेजीक कैंची हुनक केशपर चलब शुरू भेल। मीरा, ‘निह निह’ कहैत उिठ कऽ ठाढ़ भऽ गेलीह। -देखू, अहाँक पित जे िनदųश देलिन अिछ, सएह हम कऽ रहल छी। हमर समए बबŭद निह करू। भॱ चढ़बैत िमस डेजी बजलीह। ठीके तँ ओ सुनीलक िनदųशक अनुसार सभ िकछु करैत छिथ। तखन िवरोध कथीक ? मीरा धĤब दऽ कुसŰपर बैिस गेलीह। िकछु कालक बाद हुनक केश आ भॱहुक आकार–Ćकार बदिल चुकल छल। कुसŰक नीचाँ काटल केशकेँ देिख भीतरे–भीतर कुहिर गेलीह मीरा। केश बĠहैत काल माइक मुँहसँ झहरैत गीत मन पिड़ गेलिन। केशक पोरे–पोरे तेल लगा केहन सीिटकेँ केश बĠहैत रहिथन। आब से सĦभव निह भऽ सकत। नोरक Ćबल वेगकेँ बलात िनयंिÿत कएने रहलीह। केĠƖक दाइ सुनील बाबूक अएबाक सूचना दऽ गेल रहिन। मीराक संग िमस डेजी सेहो बाहर अएलीह। िमस डेजी आ सुनीलमे िकछु गĢप–सĢप भेलिन आ िनिĀत भेल जे कािŎसँ दस बजे ओ अपन पėीकेँ ओतए पहुँचाए देल करताह। िरक्शापर सुनील मीराकेँ चुटकी लैत कहने रहिथ-–वाह, हमर रूबी ! आइ तँ अहाँ कमाल लािग रहल छी। चलू एही बातपर एकटा िसनेमा देखल जाए। िरक्शा िसनेमा हॉल िदस बिढ़ गेल छल। िसनेमा हॉलमे आँिखक आगाँ अबैत–जाइत िचÿ मीराकेँ कनेको नीक निह लािग रहल छलिन। िचÿमे एकटा खूब अिधक आधुिनकाकेँ देखबैत सुनील कहलिन—रूबी ! छौ मासमे अहाँ एहने İमाटर् भऽ जाएब। तखन तँ अहाँकेँ गामक सखी बिहिनया िचĠहबो निह करतीह।- आ सुनील मीराक हाथ अपना हाथमे लेबए चाहलिन। मीराकेँ िकछु नीक निह लािग रहल छलिन। ओ ओिहन चुपचाप िनजŰव सन बैसल रहलीह। हुनकर चुĢपीकेँ सुनील लŞय कऽ रहल छलाह। घर अएलापर ओ िवशेष तमसाए गेल रहिथ-–अहाँ अपन देहाती चािल–ढ़ािल छोड़ब आिक निह ? पित जँ पėीसँ हँसी मजाक करए चाहैत अिछ तँ ओकर काज िथक ओिहमे संग देब। अहाँ एना–पाथर सन िकए बनल रहैत छी ? गामसँ की अहाँकेँ हम पूजा करए अनलहुँ अिछ ? हम कजर् लऽ कए अहाँपर खचर् कऽ रहल छी, एकर बदलामे अहाँसँ िकछु चाहैत छी तँ से अहूँकेँ नीक निह लगैए। मीरा, समदाउन आ सोहरक आब समए निह अिछ! Ćैिक्टकल बनू Ćैिक्टकल। जतएसँ आएल छी से िबसिर जाउ। जतए आइ छी बस ओकरे टा ğयानमे राखू। निह तँ बाजू, कािŎए माए लग पहुँचा आबी ?

मैिथली कथा २००९-१० 165 दुनू हाथेँ कान बĠद कऽ लेने छलीह मीरा। निह, निह ओ माए लग निह जएतीह। तीन वषर् धिर माइक अंतःपीड़ाकेँ ओ भोगने छलीह। फेरसँ हुनका वएह दुःख देबए निह जएतीह। मीरा ओछाओनपर कछमछाइत रहलीह। सुनील नीन पिड़ गेल छलाह। कािŎसँ ओ नव दुिनयाँमे Ćवेश करए जा रहल छिथ। निह जे नीक लगैत, ओिहमे मन लगेबाक छिन। माइक कहब पुनः मन पिड़ गेलिन। जिहना रखथुन, तिहना....’। िभनसरे मीरा सुनीलक उठबासँ पिहनिह घरक काज धĠधासँ िनिĀंत भऽ İनान कऽ रहल छलीह। सुनील हुनक फुतŰ देिख अचंिभत छलाह। देखू, हम तैयार छी। अपने िवलĦब करब तँ हमर दोष निह।- İनान घरसँ बहराइत मीरा बजलीह। सुनील सेहो तैयार भऽ मीराकेँ Ćिशक्षण केĠƖ धिर दए अएलाह। लऽ जएबाक ओ लऽ अनबाक ई ƅम सĢताह भिर चललाक बाद मीरा सुनीलकेँ एिह भारसँ मुक्त कऽ देलिन। आब हुनकामे आĜमिवĂास आिब गेल छल। िनयत समएपर जाएब आएब हुनक जीवनक अिभž अंग बिन गेल छल आ एकर संगिह िदन Ćितिदन िमस डेजीक कुशलता अपन आĻुरमे समेटने जािथ। तीन मास िबतैत–िबतैत āृंगार-कलामे मीरा िनपुण भऽ गेलीह। किटंग, फेिशयल, Ĥलीिचंग, वैिक्संग, मैनीक्योर, पैडीक्योर आिद, सॱदयर्क सभ िवńापर हुनका दक्षता भऽ गेल छलिन। ओना तँ केĠƖमे आर Ćिशिक्षता सभ रहिथ मुदा िमस डेजीक बाद दोसर नाम रूबी सएह छल। िमस डेजी सेहो अपन Ƈाहकक सोझाँ रूबीक नाम गवर्सँ लैत छलीह। कोनो आकिİमक काजक िदन केĠƖक चाभी रूबीक ओतए दऽ अबैत रहिथ। रूबीकेँ आमदनी सेहो नीक होमए लगलिन। पिहल आमदनी लऽ जिहया सुनीलक हाथमे देलिन तँ ओ आनĠदसँ मीराकेँ कोरामे उठा लेने रहिथ। ओना मीराक भीतर िकछु िभनिक गेलिन मुदा बाहरसँ Ćसž होएबाक नाटक कैने छलीह- अच्छा कहू, आब हम अहाँ जोगर ‘İमाटर्’ आ ‘Ćैिक्टकल’ छी आिक निह? आब तँ ने हमरा गाम दए आएब ? -सेĠट परसेĠट! रूबी आब अहाँ ‘ फİटर् क्लास’ भऽ गेल छी। अहाँकेँ भला हम गाम छोिड़ आएब ? कथमिप निह। जनैत छी रूबी , अहाँक ई रूप गढ़बामे हमर िमÿ Ćकाशक बड़ पैघ हाथ अिछ। ओ अहाँक फोटो देिख हमरा िबचार देने छल, तोहर पėी तँ सुĠदिर छथुĠह। हुनका पटना आिन ले आ Ćिशिक्षत कऽ काजमे लगा दहुन। फेर तँ ओ ‘सोनाक अंडा’ देिनहािर मुगŰ भऽ जएथुन। भभा कऽ हँिस देने छलाह सुनील। -सोना अंडा देिनहािर मुगŰ ?- मीराक मनमे चोट लगलिन। मुदा आब तँ ओ ओिह चोटक अĥयİत भऽ गेल छिथ। जĪदीसँ कपड़ा बदिल जलखै बनबए चल गेलीह। मुदा मुगŰ शĤद माथमे नचैत रहलिन। मीराक मूĪय बस यएह अिछ। हृदए हाहाकार करए लगलिन। एहन समएमे माएक İमृित मनकेँ शांित दैत छलिन। मुदा एिह सभ पीड़ासँ माएकेँ

166 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) अनिचĠहार रखने छलीह। ओ बरोबिर अपन माएकेँ अपन सुख आ खुशीक िमĝया वणर्न पÿ Ņारा दैत रहैत छिथ। मीराक माए ओ पÿ टोल–परोसमे लोकसँ पढ़ा कऽ कतेक आनिĠदत होइत होएतीह से मीरा खूब जनैत छिथ। बस, यएहटा खुशी तँ ओ अपन माएकेँ दऽ सकलीह अिछ। मुदा माए हुनका अनबा लेल ककरो िकएक निह पठबैत छिथ ? मीराक आँिख भिर गेलिन। ओ जनैत छिथ माइक आशंकाकेँ - जे अनलासँ फेर कतहुँ ओझा छोिड़ ने देिथ। माइक िबचारे िबना पुरूषक İÿी देवाल बराबिर िथक। İमृितक झंझावातकेँ बसात रोिक मीरा सुनीलक आगाँ जलखै दऽ अएलीह। आब मीराक बेसी समए केĠƖमे िबतैत अिछ। ओिहसँ आमदनी सेहो बिढ़ गेलिन। तेँ सुनीलकेँ कोनो िवरोध निह। हँ घरक टहल िटकोरा लेल एकटा बीरू नामक टेŎकेँ रािख लेल गेल अिछ। मीरा संğयामे घर आबिथ। सुनीलकेँ िमÿ मěडली संग ताश खेलाइत देखिथ। बीरू चाह जलखैक ओिरआओनमे लागल। मीराकेँ मोन होइिन जे जखन ओ थािक कऽ अबैत छिथ तँ सुनील हुनका लग आबिथ। हाल चाल पूछिथ। मुदा सुनील तँ -आिब गेलहुँ- पूिछकेँ अपन खेलमे लािग जाइत छिथ। एĦहर मीराक मन िकछु िदनसँ खराप लािग रहल छिन। एक िदन केĠƖपर जोरसँ कै भऽ गेलिन। िमस डेजी बुझाकेँ कहने रहिथन, अहाँ डॉक्टरसँ देखाऊ, अहाकेँ आरामक जरूरी अिछ। घर आिब सुनीलकेँ मीरा अपन िİथित कहने रहिथ। सुनील एिह बातसँ बहुत िचंितत आ ĭयƇ भऽ गेलाह। रूबी , ई ठीक निह भेल। एखन अहाँ कुशलताक चोटीपर छी। यएह समए तँ अिछ कमएबाक। एिहमे बाल बच्चाक समİया बड़ बाधक होएत। एिह लेल तँ एखन पूरा जीवने पड़ल अिछ। हमर बात मानू। डॉक्टरक ओतए चलू। एकरा खतम कए आबी। मीराकेँ सुनीलक मुँह िदिस तािक निह भेलिन। लगलिन जेना हजारक हजार संख्यामे िपĪलू सुनीलक चेहरापर ससिर रहल अिछ। घृणासँ मन भिर गेलिन। एहने पुरूष िबना İÿी देवाल िथक ? -मीरा ओछाओनमे मुँह गाड़ने कनैत रहलीह। मनक िवषाद दूर करबाक हुनका लग आर दोसर कोनो राİता निह छलिन। जँ कनेक काल लेल हुनका उड़बाक शिक्त भेिट जाए तँ माएकेँ जा किह अिबतिथ। एहुना तँ ओ देवाले बराबर छिथ; जकरा मकान मािलक अपन मनोनुकुल रंगमे समए–समएपर रङैत रहैत अिछ। मुदा माइक ƚम तोिड़केँ ओ शांत रिह सकतीह ? सुनीलक इच्छा आगाँ झुिक गेल छलीह मीरा। सĢताहक भीतरे डॉक्टरक ओतए सुनील हुनका लऽ गेल छलाह। आ मीरा खाली मन आ खाली हाथेँ घर िफरल छलीह। मुदा ओकर बाद मीरा कखनो सहज निह रिह पाबिथ। घरक आगाँ दए कोरामे नेनाकेँ नेने जाइत कोनो İÿीकेँ देिख भीतरसँ जेना ओ कुहरए लागिथ। दोकानपर धीया–पूता लेल टाङल छोट–छोट वİÿ िदस टकटकी लािग जाइिन।

मैिथली कथा २००९-१० 167 एक िदन केĠƖसँ िफरैत काल पता निह कतेक काल एकटा दोकानक आगाँ ठािढ़ रिह गेलीह। दोकानमे िकनबा लए आएल İÿी लोकिनक नेना आ िकनल जाइत वİतुकेँ अपलक देखैत रहलीह। संयोगे कात दऽ जाइत केĠƖक सहाियका नीलू टोिक देने रहिथन। पिरिİथितक आभास होइतिह सिĹत भऽ गेल छलीह। आ घर िदस झटकल डेगे िबदा भऽ गेल रहिथ। घर पहुँिच देखलिन जे सुनील Ĕवरमे पड़ल छिथ। समीपेक डॉक्टरकेँ बजा अनने छलीह। दवाइ चलए लागल। सॱदयर् केĠƖसँ थाकल आिब फेर सुनीलक सेवामे लािग जािथ। केĠƖसँ िफरबाकाल सुनीलक हेतु फल, दूध, अंडा आ दवाइ लऽ आबिथ। सुनीलकेँ पूणर् İवİĝय होएबामे करीब मास िदन लािग गेल रहिन। डॉक्टर पूणर् आरामक िबचार देने रहिथन। मीरा अपन कþर्ĭयमे रþी भिर कमी निह आबए देने छलीह। मुदा कखनो कऽ जीवन भार सदृश लगिन। पटरीपर िनिवर्कार भावेँ दौगैत िनजŰव Əेन सन अपन जीवन बुझाइिन। ओ आगाँ बढ़बा लेल िववश छिथ। ओिह िदन मीरा केĠƖ जएबाक लेल तैयार भऽ रहल छलीह। बीरूक िशकायत करैत सुनील कहने रहिथ–बीरू दुपहिरयामे सूित रहैत अिछ। लाख बजौलासँ निह उठैए। दुपहिरयाक दवाइ आ जूस लेबामे देरी भऽ जाइए। निह हो, तँ िकछु िदनक छुņी लऽ िलअ। एखन हमरा िवशेष सेवा चाही। से तँ अहॴ कऽ सकैत छी। मीराकेँ कंघीक दाँत जेना माथमे गिड़ गेलिन। भीतरसँ छटपटा उठलीह। एतेक िदनमे ओ बहुत सहनशील भऽ गेल रहिथ। मुदा आजुक बात कानमे पिघलल शीशा सन बुझएलिन। शरीरमे एक संचार जेना बहुत तीवर् भऽ गेल रहिन। कनपņीक नस तिन कऽ टुटबा लेल तैयार भऽ गेल छल। आइ कतबो चाहलिन मुदा चुप निह रिह सकलीह! -बस करू आब ! सहन करबाक सेहो एकटा सीमा होइत छैक। चाही....चाही....अहाँकेँ बस चाहबे टा करी। किहयो िकछु देबए तँ निह जनलहुँ। हमर शरीर हमर कमाइ, हमर मातृĜव सभ तँ अहाँ लऽ चुकल छी। हमरा लग आब देबा लेल िकछु अिछ निह। मन पाड़ू....। हम मीरा निह....रूबी छी। सॱदयर् केĠƖक शीषर्İथ Ćिशिक्षका। अहाँक शĤदमे सोनाक अंडा देिनहािर मुगŰ। से तँ अहाँक हाथमे सोना दैते छी। मुदा आब हमरो िकछु चाही....। हमरो आब अपन िकछु ĭयिक्तĜव अिछ....। दस लोकक बीच उठब–बैठब अिछ। कतेको ‘कİटमर’ रूबीक Ćतीक्षा कऽ रहल होएतीह। हमर जाएब जरूरी अिछ। अहाँ लग सेवा लेल बीरू तँ अिछए। धैयर् राखू। अहॴक िनदųशनमे हम Ćैक्टीकल बनब िसखलहुँ अिछ....। पसर् काĠहपर लटकबैत, परदाकेँ तेज हाथेँ उठा मीरा बाहर िनकिल गेल छलीह। सुनील बाबू परदाक डोलब बहुत काल धिर देखैत रहल छलाह।

168 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) बेचन ठाकुर चनौरा गंज, मधुबनी, िबहार। ‘छीनरदेवी’ पाÿ पिरचय- पुरुष पाÿ १. सुभाष ठाकुर- एक साधारण िशिक्षत ĭयिक्त। २. ललन ठाकुर- सुभाष ठाकुरक इकलौता पुÿ। ३. पवन- सुभाष ठाकुर भाितज। ४. मटुक- सुभाष ठाकुरक पड़ोसी। ५. राजू- सुभाष ठाकुरक बुजुगर् भािगन। ६. संजय- सुभाष ठाकुरक भािगन। ७. सुखल िकयोट- एकटा साधारण भगत। ८. यदुलाल ठाकुर- सुभाष ठाकुरक छोट भाए। ९. सोमन ठाकुर- यदुलाल ठाकुरक इकलौता बेटा। १०. परबितया कोइर- एकटा Ćिसŀ मनोवैज्ञािनक। ११. घटकराज ठाकुर- सुभाष ठाकुरक पीसा। १२. बलदेव महतो- एकटा साधारण िकसान। १३. िवनोद झा- काली मंिदरक पुजारी। İÿी पाÿ- १. मीरा देवी- सुभाष ठाकुरक पėी। २. सुकनी देवी -यदुलाल ठाकुरक पėी। ३. मालती देवी- बलदेव महतोक पėी। ४. अनु अंजना- बलदेव महतोक इकलौती बेटी। पिहल दृĮय- (İथान- सुभाष ठाकुरक घर। मीरा देवी सुभाष ठाकुरक पėी छिथĠह। ललन ठाकुर िहनक इकलौता बेटा छिथĠह। ललन बताह अवİथामे अपन दरवाजापर अंट-संट करैत छिथ। िहनक उपƖवकेँ देिख सुभाष ओ मीरा मनहुस अवİथामे) मीरा- İवामी, ई छॱरा हमरो बताह बनए देत। सुभाष- सएह तँ हमहुँ कहैबला रही। हमर मुँहक बात छीिन लेलहुँ। हमरा िकछु निह फुराइत अिछ। की करी की निह। ककरासँ देखाबी, ककरासँ निह। यै ललन माए, मोन होइत अिछ जे एकरा राँची वा दिरभंगा लऽ जाइ। की िवचार अहाँक ?

मैिथली कथा २००९-१० 169 मीरा- हमर िवचार इएह अिछ जे राँची दिरभंगा लऽ जाइसँ पूवर् एकरा कतउ एĦहर-ओĦहर देखाए िदयौ। नजिर-गुजिर सेहो भए सकैत अिछ। सुभाष- तहन ककरासँ देखाए िदयिĠह ? मीरा- यौ ललन बाप, सुनैत छी सुखलाहा िकयोट एिह सभमे बड़ पहुँचल अिछ। हुनकिहसँ देखाए िदयौĠह। सुभाष- हुनक नाम तँ हमहुँ बड़ सुनैत छी। (ललन धरामसँ खिस पड़ैत छिथ आ मुँह रगड़ए लगैत छिथ। दुआिरपर ललन ओंघराए रहल छिथ।) मीरा (अफिसयाँत भऽ) बौआ रओ बौआ। की भए गेलौक रओ बौआ? ललन- (माथ पटकैत) हम तोरे संग जएबौक। हम आब निह जीबौक। हम तोरो लऽ जेबौक अपनिह संग। हम तोरो खएबौक। हम कोनो भात- दािल खाइत छी। हमरा चाही िपयोर खून। हमरा बिगया देने रहौक। बिगएमे सभ टा कारामात छल। ( सॱसे दुआिर ललन ओंघरए रहल अिछ। कपड़ा-लþा फािर लैत अिछ। पवन, मटुक, राजू आ संजयक Ćवेश। ललनक दृĮय देिख रहल छिथ सभ िकयो। सुभाषकेँ अक-बक िकछु निह फुराइत छिĠह।) मटुक- यौ सुभाष, बौक जेकाँ ठाढ़ रहने काज निह चलत। अहाँ सुखल िकयोट लग जाउ। हुनका जĪदी बजौने आउ। (सुभाष, सुखल िकयोटक ओिहठाम गेलाह। िकछुए खनक बाद सुभाषक संग सुखलक Ćवेश।) सुखल- अहाँ सभ कने कात भऽ जाउ। (सभ िकयो कात भऽ जाइत छिथ। सुखलकेँ देिख कऽ ललन आओर माथ पटकए लगैत अिछ।) सुभाष- कने जĪदी देिखयौक सरकार। सुखल- अहाँ सभ हरबराउ निह। हम बैसल निह छी, सभ देिख रहल छी। (अपन जेबीसँ िकछु िनकािल कऽ ललनपर फेंकैत छिथ। ललन िबĪकुल शांत भऽ जाइत अिछ।) ललन- आब निह हओ। आब किहयो निह अएबह। सुखल- तॲ, के िछअएँ? ललन- हम निह कहबह। हम निह कहबह। हम निह कहबह। हम निह कहबह। हम निह कहबह। निह हओ। तॲ हमर के छह, जे तोरा हम कहबह। सुखल- हम तोहर बाप िछयौक।

170 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) ललन- हमहुँ तोहर बाप िछयह। (सुखल ललनकेँ एक चाट गालपर मािर दैत छिथ।) आब निह अएबह। सुखल- नाम कऽह। ललन- हमर नाम छी देवकी कुमारी। सुखल- के रखने छौक? ललन- छोटकी काकी। सुखल- कþए रखने छौक? ललन- से निह कहबह- से निह कहबह- से निह कहबह। (फेर सुखल एक चाट छऽ कऽ माथा हाथ दैत छिथ।) सुखल- आब कहबें। ललन- हँ हओ। आब कहबह। सुखल- तहन कह। जĪदी बाज। निह तँ बुिझ ले। ललन- मारह निह, किह दैत िछयह। कोहामे। पैखाना घरमे। सुखल- िकएक अएलें ? ललन- ललनकेँ लऽ जेबाक लेल। एकसरे हमरा मोन निह लगैत अिछ। हम ललनकेँ निहए छोड़बै। (सुखल ललनकेँ किसकए माथा हाथ दैत छिथ। भूत भािग जाइत अिछ। ललन चंगा भऽ जाइत अिछ। देह- हाथ झािर कऽ कुसŰपर बैस जाइत छिथ।) बाबूजी, एतेक भीड़ िकएक अिछ? सुभाष- निह कोनो खास बात। िहनका सभकेँ हमरासँ िकछु िवशेष गĢप छलिĠह। ललन, तॲ जाह बौआ।(ललनक Ćİथान) सुखल गोसांइ, हमर बेटा कोना ठीक होएत ? एकरा अिछ की ? सुखल- एकरा केलहा अिछ ? एकरा केिनहािर अहाँकेँ अपनिह पिरवारमे अिछ। सुभाष- गोसांइ, एकर इलाज अहॴकेँ करए पड़त। सुखल- सुभाष बाबू, एकर इलाज हमरासँ असंभव अिछ, हम आब ई काज छोिड़ देलहुँ। हाथ जोड़ैत छी, दोसर जुगार कए िलअ।

(Ćİथान) (पटाक्षेप)

मैिथली कथा २००९-१० 171 दृĮय दोसर (İथान- सुभाष ठाकुरक घर। दलानपर सुभाष ओ मीरा िचिĠतत मुƖामे बैसल छिथ। पवन, मटुक, जाजू ओ संजयक Ćवेश।) मटुक- सुभाष भाए, अहाँक बेटा भिर-भिर राित बौआइते रहैत अिछ। पवन- हँ सुभाष कका, हमहूँ देखिलऐक, आठ बजे राितमे गाछी िदिश जाइत। आ कहिलयिĠह तँ कहलिन तूँ हमर बाप छें। राजू- हमहुँ देखिलयिĠह, बारह बजे राितमे मुसहरी िदिश िनछोहे भागल जाइत। तखन हम राम एकबाल ओिहठामसँ भोज खा कऽ अबैत रही। संजय- सुभाष मामा, कािŎ साँझमे हमरो एिहठाम गेल रहए। हमरा कहलक- हमहुँ पढ़बै आ बड़का हािकम बनबै। शटर् उनटा पिहरने छल आ एकिह पएरमे जूता छलै। सुभाष- अपने सभ िवचार िदअ जे हम की करी? (ललनक Ćवेश। पूणर् बताह अवİथामे छिथ। अिबतिह शटर् िनकािल फेिक दैत अिछ। गंजी फारैत-िचरैत अिछ। बाप रओ बाप, माए गै माए करैत ओंधरा रहल अिछ। माथ पकिड़ बैिस कऽ झुिल रहल अिछ।) ललन- आब हम चािरए िदन जीबौैक। हम तोरे लै लए आएल छी। हमरा एतऽ नीक निह लािग रहल अिछ। छोटकी काकी देबकी दीदीकेँ खा कऽ िसखलकैक। हमहुँ देबकी दीदी लग रहब। ओ हमरा बड़ मानैतए। देबकी दीदी हमरे खून पीिब ओिह पैखाना घरमे कोहामे रहैत अिछ। पाँच िदनक अĠदरमे हम िनपþा भऽ जेबौक। (फेर ओंघराए रहल अिछ। कुकुर जेकाँ मािट भोमहिर कऽ खाए रहल अिछ। दलानपर दशर्क अपार भीड़ अिछ।) सुभाष- यौ āोÿा-समाज लोकिन। अपने सभ एकर बकनाइ सुिन रहलहुँ अिछ। हम की करी, हमरा अहाँ सभ िबचार िदअ। मटुक- सुभाष भाए, अहाँ िकछु निह करु अहाँ एĸे गोट काज करु। सुभाष- की करु। अहॴ बाजू। मटुक- एकरा उठा-पुठा कऽ छोटकी अंगनामे रािख िदयौक आओर ओकरा किहयौ जे तूँ एकरा हौँसैत दिहन। जिद ओ एकरा हौँसैथ देतैक तखनिह ई ठीक भए जाएत आन कोनो उपाए निह। ललन- जाधिर छोटकी काकी हमरा निह छुतैक ताधिर हम बताहे रहब, चािर िदनमे मिर जाएब। मटुक- कहलॱ ने सुभाष भाए। एकरा जĪदी लऽ चलू। निह तँ ई निह बाँचत।

172 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) पवन- कका, अहाँ डरैत िकएक छी ? हमरा लोकिन छी ने पीठपर। यौ कका, ओ कथीमे फिरएतैक ? मािरमे-गािरमे, भालामे-लाठीमे आङमे-समांगमे, घनमे- संपिþमे, केशमे फौदारीमे। हम सभ िकछुमे सक्षमे छी अहाँ डरु नइ कका। आ निह तँ अहाँ अपन जानू। बेटा हाथसँ चिल जाएत। (सुभाष आ मीरा ललनकेँ उठा-पुठा कऽ सुकनी लग लऽ जा रहल अिछ। सुकनी यदुलाल ठाकुरक घरवाली आ सोमन ठाकुरक माए छथीन। सुकनी रोटी पकबैत अिछ आ सोमन कुņी कािट रहल अिछ। सुभाष आ मीरा ललनक संग Ćवेश होइत। ओ सभ ललनकेँ सुकनीक अंगनामे पटिक दैत अिछ। ललन पिहनिह जेकाँ कऽ रहल अिछ।) मीरा- भैडाही, एकरा हसौथ, नइ तँ बापसँ भेट करेबौ। सैंखौकी-बेटखौकी एकरा एखन ठीक कर निह तऽ भकसी झॲकेबौक। सुकनी- ओइ हाथमे लकबा धरतौक। सैंडाही मङजरौनी लुŎी पकड़तौक। (आंगनमे हो-हĪला भऽ रहल अिछ। हĪला सुिन यदूलाल आ सोमनक Ćवेश।) सोमन- माए तॲ शाĠत रह। कका, अहाँ नीक काज निह कएलहुँ एिहसँ कोन फेदा ? कोन इĔजत कोन Ćितơा, हमरा सबहक Ćितơा अहाँ मािटमे िमला देलहुँ। आबहुँ चेत जाउ निह तँ एकर पिरणाम बड खराप हएत। सुभाष- पिरणाम जे हेबाक हएत से हएत मुदा गै मौिगया एखन तॲ एकरा एĸो बेिर छुिब दिहन नै तँ आइ तोहॴ नइ आिक हमहॴ नै। सोमन- गै माए तॲ एĸो बेर नै बाज आ ने एĸो बेर एतएसँ उठ। एै कुþाकेँ एिहना भुकए दही। सुभाष- चौņा तूँ हमरा कुþा कहमे। एखने मारैत-मारैत सोझ कऽ देबो, नइ कहीन एै मौिगयाकेँ जे ललनमाकेँ चुप-चाप हासॱिथ देतौ। सोमन- चौņा, अĠहरा कहॴ कऽ सभ खचरै िनकिल जाएत। (राजूक Ćवेश) राजू- हौ सोमन सुनह, हĪला-गुĪला नइ करह, एक बेर माएकेँ कहक जे एकरा हसौिथ देतै, एकरो संतोष भऽ जेतै आ हĪलो-गुĪला शाĠत भऽ जेतै। तोरा नीक लगै छह एहन अशािĠत? सोमन- अहाँ पढ़ल-िलखल लोक भऽ एहन भासल गĢप कए रहल छी ? ई गĢप हमरा बड अिĆय लागल। ऐँ यौ राजू बाबू एइ छौँड़ाक माथा खराप भऽ गेलैक। तँ सुकनीसँ छुआ दहीन ठीक भऽ जेतइ। ककरो बोखार लागल तँ सुकनीसँ छुआ दहीन, ककरो ललबा मािर देलक तँ सुकनीसँ छुआ दहीन। सभसँ बुरबक दीनेनाथ होइ छै की ने ? ठीके कहबी छै मुँह-दुबरा बौह सभक भौाजइ।

मैिथली कथा २००९-१० 173 राजू- सोमन, हम अपन बात आपस लेलॱ, हमरासँ गलती भेल। तॱ सभ अपसेमे फिरया लएह। वा जे मन हो से करह। हम जाइ छी। (राजूक Ćİथान) मटुक- सोमन, अहाँ माएकेँ किहयौन ललनमाकेँ छुबै लए नै तँ बुिझ िलअ। सोमन- हमर माए कोनहुँ हालेत मे निह छुिब सकैत अिछ अइ लेल अहाँ सभकेँ जे करबाक हुअए से करु। मटुक- हरामी निहतन, डाइनकेँ Ćāय दैत अिछ। एहन माएकेँ भरल सभामे िजनदै जरा दैततहुँ। सोमन- िनकाल सार, बजा कोन धाइमकेँ बजाबै छेँ। जिद हमर माए डाइन साबीत भेल तखन धाइमक टोटल खचर् हमर आओर माएकेँ भरल सभामे मोटीया तेल ढािर कऽ आिग लगा देब। मटुक- एक मिहनाक भीतरे हम तोरा माएकेँ डाइन िनकािल कऽ देखा दै िछयौ। सार हम तोरा माएकेँ एक मिहना कऽ भीतरे भकसी नइ झॲका देलहुँ तँ हम पाजी। सोमन- सार, तोहूँ सुिन ले, डाइन सािबत भेलापर हमहुँ अपन माएकेँ िजनदे निह जरा देलॱ तँ हम पाजी। पवन- कका, चलू अपन आंगन। लऽ चलू ललनमाकेँ। ई खच्चरी नइ छुअत एकरा। एकटा िचĸन धािमकेँ लाउ आ पिहने एकरा डाइन सािबत करु तखन एकरा सभकेँ बापक िबआह आ िपितयाक सगाइ देखाएब। रुपैआक बड़ गरमी भऽ गेलैए सोमनाकेँ। चलू कĸा। लऽ चलू सोमनाकेँ।

(कहैत सबहक Ćİथान) -पटाक्षेप-

ƅमशः

174 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल)

डॉ. कैलाश कुमार िमā जĠम ( ८ फरबरी १९६७-) िदĪली िवĂिवńालयसँ एम.एस.सी., एम.िफल., “मैिथली फॉकलोर İƏक्चर एěड कॊिग्नशन ऑफ द फॉकसांग्स ऑफ िमिथला: एन एनेिलिटकल İटडी ऑफ एĠƕोपोलोजी ऑफ Ħयुिजक” पर पी.एच.डी.। मानव अिधकार मे İनातकोþर, ४०० सँ बेशी ĆबĠध -अंƇेजी-िहĠदी आ मैिथली भाषामे- फॉकलोर, एĠƕोपोलोजी, कला-इितहास, याÿावृþांत आ सािहĜय िवषयपर जनर्ल, पिÿका, समाचारपÿ आ सĦपािदत-ƇĠथ सभमे Ćकािशत। भारतक लगभग सभ सांİकृितक क्षेÿमे ƚमण, एखन उþर-पूवर्मे मौिखक आ लोक संİकृितक सवŮगीन पक्षपर गहन रूपसँ कायर्रत। यूिनविसर्टी ऑफ नेƙाİका, यू.एस.ए. केर “फॉकलोर ऑफ इिěडया” िवषयक रेफ़ेरी। केĠƖीय िहĠदी िनदेशालयक पुरİकारक रेफरी सेहो। सय सँ ऊपर सेमीनार आ वकर्शॉपक संचालन, बहु- िवषयक राįƏीय आ अĠतरŭįƏीय संगोơीमे सहभािगता। एम.िफल. आ पी. एच.डी. छाÿकेँ िदशा-िनदųशक संग कैलाशजी िविजिटंग फैकĪटीक रूपमे िवĂिवńालय आ उच्च-Ćशिİत ĆाĢत संİथानमे अğयापन सेहो करैत छिथ। मैिथलीक लोक गीत, मैिथलीक डहकन, िवńापित-गीत, मधुपजीक गीत सभक अंƇेजीमे अनुवाद। सखी कुĠती हम करीब तेरह वषर्क भऽ गेल रही। रही बƂड खुरलुच्ची आ अगाध बदमास। किहयो एहेन निह होइत छल जिहया ककरोसँ झंझट निह होइत हो। हĦमर माए लोकक उपरागसँ तंग आिब गेल छलीह। सभ उपाए केलिĠह; डांटब, बुझाएब, मारब। मुदा बेकार हम अपन खुलुर्च्ची İवभावकेँ निह Ĝयागलहुँ। एहनो बात निह छल जे हमरा अपना मोनमे अपन कमर्क Ćित घमěड हो। Ćित िदन सुतबा काल ई िनणर्य लैत रही जे आब लोक सभसँ झगड़ा–फसाद

मैिथली कथा २००९-१० 175 निह करब। खूब मोन लगा कऽ पढ़ब। लोक आब माए लग ई कहए अएतिĠह जे अहाँक बेटा अपन कक्षाक सभसँ नीक िवńाथŰ अिछ। लोक सभसँ आपसी Ćेम बना कऽ रखैत अिछ, आिद–आिद। मुदा ई सभ िकछु क्षणक िनणर्ए होइत छल। भोर होइतिह हम अपन बदमासीक Ćवृिþमे पुनः संलग्न भऽ जाइत रही। माए सोचलिĠह; “आब ई बबŭद भऽ जाएत”। तामससँ घोर होइत बाढ़िन उठा एक िदन कतेको बेर मारलिĠह। बीचमे हफैत रहली वा कहैत रहलिĠह “राघव ! तोरासँ नीक कुकुर! कमसँ कम अपन पोसिनहारक बात तँ मनैत अिछ”। माएक हाथ चलैत रहलिĠह आ हम मािर खाइत रहलहुँ। फेर ओ बजलीह; तूँ तँ बतहा कुकुर छेँ। मारैत मारैत माए थािक कऽ चूर भऽ गेलीह। ओना तँ कतेको िदन माएसँ मािर खाइत छलहुँ मुदा ओिह िदनक बात जीवन पयर्ंत याद रहत। शरीर बेदनासँ कराहए लागल। माएकेँ सेहो बुझेलिĠह जे आइ ओ िकछु बेशी मािर देलिĠह। हम िबना िकछु कहने मिěडलक पाछाँ जाए कानए लगलहुँ। आधा घंटाक बाद माए मालीमे करूक तेल लेने अएलीह। पाछाँसँ हमर झोटकेँ सहलाबए लगलीह। हमरा भेल फेर मारतीह। मुदा जखन हुनका िदस ğयान गेल तँ देखलहुँ, आँिखसँ नोर चुबैत छलिĠह। कहए लगलीह- “ चािरटा बाल बच्चा भगवान देलिĠह। तीनटा सँ किहयो कोनो िशकाइत निह भेल। सबहक कसिर तोँ पूरा कऽ देलह राघव। माए कहैत रहलीह आ माथा सहलाबैत रहलीह। आब हमहुँ कानए लगलहुँ। कहिलयिĠह- “माए! आब हम बदमासी निह करब ! हमरा आइ अहाँ बƂड मारलहुँ। सĦपूणर् शरीर गूड़ जकाँ ददर् करैत अिछ”। ई किह हम माएकेँ पकिड़ हुनकर गरसँ लािग बƂड जोरसँ कानए लगलहुँ। पूरा शरीरमे बाढ़िनक ओदरा पिर गेल छल। माए ओकरा देखैत हमरे जकाँ जोरसँ कानए लगलीह। फेर तेल लगौलिĠह। İनान केलहुँ आ भोजन केलहुँ। माए िदन भिर कनैत रहलीह। िदन भिर अž निह खेलिĠह। लोक सभ आƇह केलकिĠह तँ कहलिखĠह जे हĦमर ĆायिĀत यएह थीक जे हम चौबीस घंटा अž जल Ƈहण निह करी। जखन हमरा पता लागल हम दीदीक हाथसँ चाह लए माए लग गेलहुँ। हमरा बुझल छल जे माए अž बेतरे तँ रिह सकैत छिथ मुदा चाहक िबना निह। हम कहिलयिĠह- माए ! अहाँ चाह पी िलअ। आब हम किहयो गलती निह करब। लोक कहत ‘राघव केहेन नीक लड़का छैक’। माए हमरा िदस देखलिĠह आ बजलीह; चुपचाप चाह लऽ कऽ घर चिल जो। आइ हम िकछु निह खएब ! राितयोमे माए निह खेलिĠह। भोरे भइया दरभंगासँ अएलाह। आिबते मातर माए हुनका कहलिथĠह; “पवनजी, राघब हमर जीनाइ दुलर्भ कऽ देने अिछ। लोकक उपरागसँ तंग आिब गेल छी। कािŎ जानवर जकाँ मािरिलऐक। कचोट बादमे बƂड भेल। ई महामुखर् िनकिल गेल। तेँ एकरा िपताजी लग िसमडेगा पठा दहक। रामनगरवाली बिहन कहैत छलीह जे रोिहत चािर पाँच िदनक भीतर राँची जाए बला छिथ। हुनके संगे पठा दहक। बाबूजीकेँ एकटा िचŇी िलिख दहुन”।

176 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) हĦमर घरमे माएक राज चलैत छलिĠह। भैया हुनकर आज्ञाकेँ İवीकार केलिĠह। साँझमे भैया रोिहत भाइकेँ लऽ कऽ अएलाह। रोिहत भाइ माएकेँ कहलिथĠह- कोनो बात निह किनया काकी, हम राघबकेँ िसमडेगा बला बसपर बैसा देबैक। िसमडेगामे बसे İटेंड लग खादी भěडार छैक। बसक कěडक्टर राघबकेँ ककाजी लग पहुँचा देतैक। माए हमर जएबाक तैयारी करए लगलीह। हमरा गामसँ िसमडेगा गेनाइ नीक निह लािग रहल छल। जे एकबेर जे कोनो बात माए मोनमे ठािन लेलिĠह तकरा दुिनयाक कोनो तागित निह टािर सकैत अिछ। तँए िबना कोनो Ćितकार केने हमहुँ िसमडेगा जेबाक तैयारीमे लािग गेलहुँ। अपन तीन चािरटा लंगौिटया यार सभकेँ किह देिलऐक- “हम आब िसमडेगा चललीयौक। तूँ सभ रह एतएक राजा”। चािर िदनक बाद हम रोिहत भाइ संग िसमडेगा लेल Ćİथान केलहुँ। आबए काल माए बƂड कनलीह। बड़ हृदएसँ लगौलिĠह। पिहल बेर पता चलल जे माए हमरा कतेक मानैत छलीह। कहलिĠह- “ बाबूजी लग मनुक्ख जकाँ रहबाक Ćयė किरहेँ राघब। तंग निह किरहĠहु। माए एकटा िचŇी सेहो बाबूजीकेँ िलखलिथĠह। िचŇीक अंितम भागमे िलखल रहैक; “राघब बƂड बदमास अिछ। Ćितिदन लोकक उपरागसँ मोन आिजज भऽ गेल अिछ। तािहसँ एकरा अहाँ लग पठा रहल छी। साइत अहाँक डरसँ बदमासी कम करत। हम जनैत छी, ई हमर कोरपछुआ अिछ। तइयो एकर उþम भिवįयक लेल अपन छातीपर पाथर रािख अहाँ लग दूर देशमे पठा रहल छी। एकरा डांट फटकार अवĮय करबैक, मुदा अहाँकेँ हĦमर आ चारू धीया– पुताक सĢपत अिछ, एकरा मारबै निह”। माएक िचŇी हम िसमडेगा अएलाक आठ िदनक बाद पढ़लहुँ। माएक यादमे चुपचाप बƂड कनलहुँ। लागल केहेन महान चीजक नाम छैक ‘माए’। İवयं तँ मारैत छलीह, मुदा जखन बाबूजी लग भेजलिĠह अिछ तँ बाबूजीकेँ सभ तरहे बुझा रहल छिथĠह जे राघबपर हाथ निह उठेबैक। बाह रे माएक ममता ! बाबूजी माएकेँ बƂड मनैत छलिथĠह। ओ हमरा बुझबैत छलाह- “राघब, अहाँ खूब मोनसँ पढ़ु। अहाँकेँ जे कोनो चीज चाही से िलअ आ पढ़ू। लोक सभसँ झगड़ा–दान निह करू ”। अगल–बगलक चािर–पाँच लड़का-लड़की सभसँ बाबूजी हमर पिरचए करा देलिĠह। हम अपनामे आĀयर्जनक पिरवþर्न अनलहुँ आ लोक सभसँ झगड़ा-झाँटी Ĝयािग देलहुँ। बाबूजी Ćसž छलाह, जे चलू राघबमे एहेन पिरवþर्न अएलिĠह। हमरा लोकिनक घरक बगलमे एकटा तमाकुल बेचएबला बिनया छल। ओकर नाम रहैक सोहन साहु। सोहन साहुक बेटी शीला छलैक। हलांिक शीला हमरासँ एक कक्षा जुनीयर छिल। शीलाक नाक-नक्श बड़ सुĠदर, रंग कारी मुदा सोहनगर। शीला जवान भऽ रहिल छिल, से शरीरक अंगसँ İपƠ पिरलिक्षत होइत छलैक। पातर ठोर, डोका सनहक आँिख, मğयम कद। कपड़ा–लþा सेहो

मैिथली कथा २००९-१० 177 ठीक पिहरैत छिल। शीलाक माए हमरा बƂड मानैत छलीह। कहैत छलिथĠह; “बेचारा राघब ! िबना माएक िसमडेगामे रहैत अिछ”। शीला सेहो हमरा बƂड मानैत छिल। िपताजी हमर नाम िसमडेगाक सरकारी İकूलमे िलखा देलिĠह। हमर İकूलक ठीक पाछाँ शीला कĠया िवńालयमे पढ़ैत छिल। ओना तँ शीला बरसमे हमरासँ डेढ़ वषर्क पैघ छिल, परंतु कक्षामे हमरासँ एक कक्षा पाछाँ। İकूलक समए दूनू İकूल एĸे रहैक। हम सभिदन İकूल शीलेक संग जाइत रही। शीलाक संग शीलाक एक सहछाÿा सेहो हमरा लोकिनक संग िवńालय जाइत छिल। ओिह छाÿाक नाम रहैक कुंती। कुंती मğयम कदकाठीक करीब पĠƖह वषर्क İवİथ आ गोर लड़की छिल। नमहर कारी–कारी केश, सुĠदर नाक, कान। कनीक बएससँ बेशी बुझना जाइत छिल कुंती। शनैः शनैः कुंतीसँ हमर नीक बातचीत होमए लागल। पता निह िकएक कुंती हमरा शीलासँ बेशी नीक लगैत छिल। िनĮछल, सहज आ सुĠदिर। ओकर आँिख िदस जखन–कखनो ğयान जाइत छल तँ एना बुझाइत छल जेना ओ सहज भावसँ मोनक कोनो गप हमरासँ बाँटए चाहैत अिछ। बातक ƅममे पता चलल जे कुंती मैिथल ƙाŌणी थीिक। पूरा नाम रहैक कुंती झा। चुंिक हमरा लोकिन सभवयİक आ संगीक रूपमे रहैत रही आ उपर कुंती हमर सखी शीलाक अिभž संगी रहैक तािहसँ हम सभ ओकरासँ तूँ किह कऽ बात किरऐक। ओना तँ एक िदन शीलाक माए हमरा कहलिĠह- राघव, अहाँ सभ कुंतीकेँ तूँ निह किहयौक ! हम पुछिलयिĠह, “ िकएक काकीजी ? कुंती आ शीला दूनू हमर संगी जकाँ थीिक। हम शीलोकेँ तूँ किह कऽ बजबैत िछऐक मुदा अहाँ किहयो मना निह केलहुँ, परंतु कुंतीक लेल ई बात िकएक किह रहल छी”? शीलाक माए हमर Ćķक जवाब देमए लगलीह। अही बीचमे शीला आ शीलाक िपताजी हुनका रोिक देलिथĠह। शीलाक िपताजी शीलाक माएसँ कहलिथĠह; “अहाँ बच्चा सभक बीचमे िकएक टांग अरबै छी ? जखन कुंतीकेँ कोनो समİया निह छैक, तँ अहाँकेँ की समİया अिछ ? राघबकेँ अनेरे अहाँ िशक्षा निह िदयौक”। शीला सेहो अपन माएकेँ भाषण देमए लागिल- “गे माए, ई तोहर बड़का समİया छौक। अपना जे करक छौक से कर। जकरा जेना बजबै चाहैत छेँ, बजा। हमरा सबहक बीचमे निह बाज। हम कुंती आ राघब ओिहना रहब जेना रिह रहल छी। हमरा सभकेँ ĭयथर्मे नैितकताक िशक्षा निह दे माए”। हमरा बूझऽ मे निह आएल जे एकाएक बाप–बेटी िमल कऽ बेचारी शुŀ मिहलाकेँ िकएक बजबासँ रोिक देलकैक। ओना शीलाक माएक बातपर हमरा िकछु िवİमय जकाँ सेहो लगैत छल। शीला हमरा िदस देखैत बाजिल; “राघब,! तॲ जेना चाहैत छैं तिहना कुंतीकेँ सĦबोिधत कऽ सकैत छेँ। ओिहना जेना हमरा कहैत छेँ, तिहना कह”- कुंती कहैत रहिल। समए चलैत रहल। हम अपन माएक देल वचनपर थोड़ेक Ćितबŀ रहलहुँ। खूब मोनसँ पढ़ी। लोक सभसँ

178 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) झगड़ा–फसाद लगभग छोिड़ देलहुँ। İकूलक िशक्षक सभ सेहो हमर ĭयवहार आ कोनो चीज अथवा ज्ञानकेँ सीखबाक उĜकंठा वा िजज्ञासासँ Ćसž छलाह। बाबूजी हमर Ćशंसा सुिन गद्–गद् भऽ गेलाह। झट दिन माएकेँ िचŇी िलिख देलिथĠह। िचŇीक मजमून ई रहैक- राघबमे आĀयर्जनक पिरवþर्न भेलैक अिछ। गामसँ एकरा िसमडेगा ऐनाइ करीब सात मास भऽ गेलैक मुदा आइ धिर राघबक िखलाफ ककरो कोनो िशकाइत निह भेटल अिछ। िशक्षक सभसँ राघबक सĦबĠधमे हमेशा जानकारी लैत रहैत छी। सभ िकयो मुक्त कंठसँ राघवक Ćशंसा करैत रहैत छिथ। हमरा राघव कोनो तरहेँ परेशान निह करैत अिछ। राघब एतेक नीक भऽ जाएत तकर तँ हम कĪपनो निह केने रही। िपताजीक पÿ पिढ़ माँ बƂड Ćसž भेलीह। तुरत िनणर्य लऽ लेलिĠह जे कमसँ कम दुइयो मासक लेल िसमडेगा अएतीह आ हमरा सभक संगे रहतीह। माँ िपताजीकेँ पÿ Ņारा सूचना देलिथĠह जे धनकटनीक पĀात् ओ िसमडेगा आिब रहल छिथ। िकछु िदनक बाद माए िसमडेगा आिब गेलीह। हम बƂड Ćसž रही। माएक İनेह, माएक हाथक भोजन भेिट रहल छल। बाबूजी सेहो Ćसž छलाह। लगभग हमर झंझटसँ İवतंÿ िकछु िदन लेल भऽ गेल छलाह। माए अपन िमलनसार İवभावक कारणे िसमडेगाक नीचे बजार मुहĪलामे Ćशंसाक पाÿ भऽ गेलीह। İÿीगण सभ अपन सभ टा नीक काजमे हुनका बजबए लगलिĠह। हमरा िसमडेगा अएना आब लगभग एक वषर् भऽ गेल छल। एिह बीचमे िकछु अĆĜयािशत घटना घिटत भेलैक। कुंती लगातार चािर–पाँच िदनसँ निह आिब रहिल छिल। शीलासँ ज्ञात भेल जे कुंतीक घरमे िकछु झंझिट चिल रहल छैक, तािह कारणे ओ निह तँ İकूले आिब रहल छिल आ ने हमरा सभ लग। लगभग दस िदनक बाद कुंती शीलाक घर आयिल। हम शीलेक घरमे रही। हमर माए सेहो ओतए छलीह। कुंतीक चेहरा उतरल रहैक। मुँह कारी İयाह। आँिखक उपर–नीचा फूलल। अिहसँ पिहने की हम िकछु ओकरासँ पुिछितऐक, हमर माए आ शीलाक माए कुंतीकेँ आिबतिह ओकरा भाषण देमए लगलिĠह। माए हमर बाजए लगलीह- “देखू कुंती ! अहाँक ƙाŌण कुलक İÿीमे जĠम भेल अिछ। पित नीक, अधलाह जेहेन होइत छैक, İÿीगण हेतु भगवान होइत छैक। अहाँक भोलाझा पित छिथ। अहाँकेँ हुनकर आज्ञाकेँ अवĮय मानक चाही। िबना हुनकर आज्ञाक कोनो काज केनाइ या कतहुँ जेनाइ उिचत निह। अहाँ अĢपन गलतीकेँ İवीकार करू आ जीवनकेँ आनĠदपूवर्क जीबू”। हम माएक बातकेँ सुनलहुँ तँ आĀयर्मे पिड़ गेलहुँ। पिहल बेर ई ज्ञात भेल जे कुंती कुमािर निह अिपतु Ĥयािहत मिहला िथक। आब बुझना गेल जे शीलाक माए हमरा िकएक कहैत छलीह जे कुंतीकेँ तूँ किह कऽ निह बजेबाक हेतु ! िचंताक अथाह सागरमे डुिम गेलहुँ। कतए सतरह वषर्क कुंती आ कतए बाबन वषŰय भोला झा। केहेन अनमेल िववाह!!! हे भगवान, ई केहेन जोड़ी बना

मैिथली कथा २००९-१० 179 देिलऐक! लोहामे सोना सिट गेल। भरल दुपहिरयामे अĠहार!! एक क्षण लेल एना बुझना गेल जे कुंतीक आĜमा हमर शरीरमे Ćवेश कऽ गेल! हम अपनाकेँ कुंती बुिझ मोनिह मोन कानए लगलहुँ, काँपए लगलहुँ। अपन िपतयौत बिहनक िववाहक कालक İÿीगण सभ Ņारा गाओल गीतक एक पाँित बेर-बेर मोनमे हुमरय लागल; “लोहामे जिड़ गेल हĦमर सोना। हम जीबै कौना”!! मुदा कुंती पाथरक मूिþर् बनिल हĦमर माएक आ शीलाक माएक अनगर्ल भाषण सुनैत रहिल। िबना कोनो उचाबच केने। कुंतीक माथ जमीन िदस रहैक। िकछु कालक बाद देखिलऐक जे धरतीपर नोरक बुĠद मािरते पड़ल छैक। मुदा ओ सभ ठोप बेकार भऽ गेलैक। दिकयानूशक पिरवेशमे हमर माए ततेक रमिल छलीह जे हुनका कुंतीक नोर निह देखेलिĠह। िकछु कालक बाद कुंती मुँह ऊपर उठा अपन गालपर हाथक लाल िनशान देखेलिĠह, ई भोला झा चमेटाक िनशान छलैक। माए अपन हाथसँ कुंतीक गालकेँ सहलाबए लगलिथĠह। माएक ममĜवकेँ देिख कुंतीक हृदए फािट गेलैक। कुहेस फािर कानए लागिल। हĦमर माए अपन छातीसँ लगा लेलिथĠह। कहलिथĠह- “अहाँ आब नीकसँ रहूँ। भोला झा गलत कायर् केलिĠह अिछ। हम मैनेजर साहेब - हĦमर िपताजी- कहबिĠह जे हुनका बुझेिथĠह। अहाँक जेठ बिहनसँ हुनकर छोट भाएक िबयाह भेल छिĠह आ अहाँक जेठकी भिगनी अहाँसँ एĸे वषर्क छोट अिछ। मुदा आगू नीकसँ रहूँ। केवल İकूल जाइकाल İकटर् आिद पिहरू। İकूलसँ आपस अएलाक बाद सारी पिहरू , नीक जकाँ रहूँ। जतए–ततए निह बौआऊ। छौरा सभसँ हँसी–ठŇा निह करू ”। आ लाचार कुंती हĦमर माएक बातकेँ सुनैत रहिल। एना बुझना जाइत छल जेना ई सभ माए–बेटी हो। अही बीचमे शीलाक माए चूराक भूजा आ कचरी बनाए सभकेँ खाए लेल देलिथĠह। कुंती निह लैत छिल मुदा हĦमर माए एवं शीला ओकरा बƂड आƇह केलिथĠह तँ कुंती खाए लागिल। नोर मुदा एखनहुँ खिस रहल छलैक। ओिह िदन साँझमे शीला हमरा कुंतीक सĦबĠधमे तमाम जानकारी देलक। भेलैक ई जे कुंतीक जेठ बिहनक िबयाह भोला झाक छोट भाएसँ भेल रहैक। कुंतीक बिहनकेँ दूइ लड़की आ दूइ लड़का छलैक। भोला झा समİतीपुरक कोनो गामसँ कĦमे बएसमे िसमडेगा आिब गेल छलाह। एतए आिब गुजर–बसर करबाक लेल मुख्य सड़कक कातमे एक लाइन होटल खोिल लेलिĠह। होटलक बगलमे िसमडेगाक नामी पेƏोल पंप रहैक। पेƏोल पंपक अगल बगलमे गाड़ी– घोड़ा ठीक करबाक मािरते दुकान आ मेकेिनक सबहक भरमार। एिह सभ कारणे पाँच–दस बस–Əक आ अĠय गाड़ी सदिरकाल ओतए लागल रहैत छलैक। आ गाड़ीक Ƒाईवर, सहायक इĜयािद भोला झाक लाइन होटलमे सामाĠयतया खाटपर बैिस भोजन करैत छलैक। लाइन होटलक भोजन होइत छलैक अित İवािदƠ

180 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) आ चहटगर। किहयो काल कऽ हĦमर िपताजी ओिह होटलसँ तरकारी इĜयािद मंगबैत छलाह। तँ भेलैक ई जे भोला झा अपन पिरवारकेँ ठीक करएमे लागल रहलाह। तीन कुमािर बिहनक िववाह, माए–बापक संİकार, िƅया कमर्, दूटा छोट भाएक रोजगारक तलाश आ िबयाह दान करैत–करैत किहयो अपना िवषएमे सोचबे निह केलिĠह। अही बीच जखन कुंती करीब चौदह वषर्क छिल तँ अपन जेठ–बिहन लग िसमडेगा आयिल। ओिह समएमे भोला झा ईकावन वषर्क छलाह। कुंतीक शरीर भरल रहैक। आ देखबामे अठारह-उžैस वषर्क लगैत छिल। भोला झाकेँ अचानक िवयाह करबाक इच्छा भेलिĠह। अपन छोट भाए अथŭत् कुंतीक जेठ बिहनोइकेँ कहलिथĠह जे ओ कुंतीसँ िबयाह करए चाहैत छिथ। तावत धिर कुंतीक िपताक İवगर्वास भऽ गेल छलिĠह। िवधवा माए ओिह जमानामे चािर हजार टकाक लोभसँ कुĠतीक िबयाह भोला झासँ करा देलकैक। पिहने तँ कुंती निह बुिझ सकिल अिह सभ चीजक पिरणाम। मुदा िİथित İपƠ होमए लगलैक। हालिहमे भोला झा कुंतीकेँ राितमे हवशक िशकार बनबए चाहैत छलिथĠह, जकर ओ Ćितकार केलकिĠह तँ झोटा नोिच गालपर बƂड मारलिखĠह। शीला ईहो कहलक जे भोला झा िदन भिर गाजा पीबैत रहैत छिथ, राक्षस जकाँ मोछ रखैत छिथ, मुँहसँ गंध अबैत रहैत छिĠह, तािह सभ कारणे कुंती हुनका लग जाएसँ बचए चाहैत अिछ। खएर ! अिह घटनाक बाद आ कुंतीक अतीत जनबाक कारणे हĦमर ĭयवहार ओकर Ćित बदिल गेल। कुंती आन ठाम गेनाइ बĠद कऽ देलक परंतु शीला आ हमरा लग एनाइ निह रूकलैक। हम आब ओकरा िकछु सĦमानसँ बजबए लगिलऐक तँ बािज उठिल; “ निह राघब, ई ठीक बात निह। तोँ हमर परम िमÿ छँह ! हमरा पूवų जकाँ कुंती किह सĦबोधन कर, तँ नीक लागत। हम एकबेर पुनः कुंतीक संग वएह पुरनका ĭयवहार करए लगलहुँ। समएक चƅ चलैत रहलैक। एिह बीच हमरा लोकिन दसम कक्षामे पहुँिच गेलहुँ। हĦमर उƛ करीब सोलह भऽ गेल। कुंतीक लगभग अठारह वषर्क। एकाएक कुंतीक शरीरमे आĀयर्जनक पिरवतर्न आबए लगलैक। ओकर वक्ष एकाएक बƂड भारी भऽ गेलैक, गाल मोट भऽ गेलैक। शरीरक वजन बिढ़ गेलैक। आँिख छोट भऽ गेलैक। ओना तँ एिह सभ पिरवþर्नक बादो कुंतीक सौĠदयर्मे कोनो कमी निह भेलैक। एखनो हमरा कुंती अजीब सुĠदिर लगैत छिल। करीब आठ मास पिहने एकबेर पता निह िकएक कुंती हमरा भिर पांज पकिड़ अपन हृदएसँ सटा लेलक आ हĦमर माथा चूिम लेलक। हम सž रिह गेलहुँ। लाजे िकछु निह कहिलऐक। मुदा तिहयासँ सदिरकाल मोनमे यएह सपना आबए लागल, जे िकनसाइत कुंती हमर जीवन संिगनी बिन जाइत। ओना हमरा ई नीक जकाँ बुझल छल जे ई संभव निह अिछ। एक िदन हम कौतुहलमे पुछिलऐक, “ कुंती तोरामे अतेक पिरवþर्न िकएक भऽ रहल छौक। तॱ िकएक अचानक मोट भऽ रहल छेँ ”? हĦमर कौतुहल सुिन कुंती हँसए लागिल। कहलक; “ राघव, तोँ निह

मैिथली कथा २००९-१० 181 बुझमेँ !!” से किह कुंती चिल गेल। एिह घटनाक लगभग एक मास बाद कुंती İकूलो गेनाइ बĠद कऽ देलक। कुंती हमरा ई िकएक कहलक जे “राघव, तोँ निह बुझमेँ ”!! हमरा िकछु निह फुराइत छल। अंततः एक िदन जखन İकूलसँ डेरा आबैत रही तँ बाटमे जेल लग शीला भेट भऽ गेल। शीलासँ कुंतीक िवषएमे जानकारी लेमए लगलहुँ तँ पता चलल जे कुंती गभर्वती अिछ। आब बूझऽ मे आएल जे कुंती िकएक हँसिल आ कहलक जे तोँ निह बुझमेँ”!!! हम शीलाकेँ पुछिलऐक- “आब कुंतीक पढ़ाइक की हेतैक”? शीला कहलक- “ िकछु निह, भोला झा कहलकैक अिछ पढ़ाइ छोिड़ देबाक हेतु। आब डेढ़ मासमे कुंती अपन बच्चाकेँ जĠम देत आ बच्चाक लालन पालनमे लागत। पढ़ाइक अंत भऽ गेलैक। खएर, छोड़ राघब ! हमरो िपताजी आब हमरा लेल लड़का तािक रहल छिथ। हमरा माए लग तीन लडकाक फोटो छैक। हम तोरा देखा देबौक”। मुदा हमरा कोनो लड़काक फोटोसँ कोन मतलब! खएर ! करीब डेढ़ मासक बाद एक िदन शीलासँ ज्ञात भेल जे कुंती सरकारी अİपतालमे एक लड़काकेँ जĠम देलकैक अिछ। दोसरे िदन भोला झा दू िकलो िमठाइ लऽ कऽ हमर िपताजीकेँ दऽ गेलिथĠह। भोला झा खुशीसँ गद्–गद् छलाह। एिह घटनाक िकछु िदनक बाद िपताजीक İथानांतरण िसमडेगासँ िगिरडीह भऽ गेलिĠह। िपताजी संग हमहुँ िगिरडीह आिब गेलहुँ। करीब चािर वषर्क बाद िसमडेगा गेलहुँ तँ शीला निह भेटिल। शीलाक माए कहलिĠह जे शीलाक िबयाह राऊरकेला भऽ गेलैक। लड़का चाऊरक ĭयवसायी छैक। शीलाकेँ एक सालक एकटा लड़की छैक। शीला अपन पित आ बच्चा संगे बƂड Ćसž अिछ। कुंतीसँ भेट निह भऽ सकल मुदा शीलाक माए बतौलिĠह जे कुंतीकेँ एकटा लड़की सेहो छैक। आब ओकर पित भोला झा अपन माएसँ िभž भऽ गेल छिथ। कुंती पूणर्रूपेण एक सफल गृहणी, पėी आ माए बिन गेल अिछ। सदिरकाल अपन पिरवार, बेटा, बेटी आ पितक सेवामे लागिल रहैत अिछ। शीला निह छिल तँ हमरा कुंतीसँ के िमला सकैत छल। इच्छा रिहतहुँ हम कुंतीसँ निह भेंट कऽ सकलहुँ। इमहर करीब बीस वषर्क बाद कोनो Ćयोजने िसमडेगा गेल रही। राँचीसँ जखन िसमडेगा लेल बस पकड़लहुँ तँ कोनो िवशेष पिरवþर्न ओिह क्षेÿमे निह बुझना गेल। िकछु मकान इĜयािद अवĮय बिन गेल रहैक। िसमडेगामे कोनो िवकास निह बुझना गेल। िपताजीक िमÿ āी देवचĠƖ िमāजीक ओतए हम ठहरलहुँ। पाँच िदन िसमडेगामे रहलहुँ। बहुत पुरान लोक सभसँ भेँट भेल। शीलाक छोट बिहनक िववाह सेहो भऽ गेल रहैक। ओकर माए एखनो ओिहना नीक İवभावक İवािमनी छिल। शीलाक छोटका भाइ दीपू बड़ पैघ पीबाक भऽ गेल रहैक। हĦमर घरमे कायर् करए बला दाइ असहाय जीवन जीिब रहल छिल। पित मिर गेलैक आ बेटा नालाएक। चĠदन िमā वकील साहेबकेँ नक्शली सभ् बेटा संगे कुņी–कुņी कािट देलकिĠह।

182 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) आ अंततः जखन कुंतीक सĦबĠधमे जनबाक Ćयė केलहुँ तँ पता चलल जे जािह छोट भाए लेल भोला झा एतेक Ĝयाग केलिĠह, अपन जवानी बबŭद केलिĠह, बुढ़ापामे Ĥयाह केलिĠह, सएह छोट भाइ हुनका संगे बेइमानी केलकिĠह। लाइन होटलसँ बेदखल कऽ देलकिĠह। भोला झाकेँ दĦमा भऽ गेलिĠह। पैसाक तंगीमे ठीकसँ इलाज निह भऽ सकलिĠह। कुंती आब िसलाइक कायर् कऽ रहल अिछ। आ अपन बच्चा सबहक पोषण कऽ रहल अिछ। बच्चा सभ की, तँ बेटी दसमामे पढ़ैत छैक आ बेटा एक नĦबरक नालायक। देवचĠƖ िमāक पėी कहलिĠह- “राघव, अगर अहाँ चाही तँ साँझमे हम सभ कुंतीक दोकान जाएब”। मुदा हम मना कऽ देिलयिĠह। हम ओिह कुंतीकेँ निह देखए चाहैत छी जकर चेहरापर वैधĭय होइक, āीहीन हो, कƠसँ कनैत हो। हम जीणर्-शीणर् कुंतीकेँ निह देिख सकैत छलहुँ। तैं हम पुरनके कुंतीक यादमे जीबए चाहैत छलहुँ।

मैिथली कथा २००९-१० 183

गजेĠƖ ठाकुर उपĠयास स॒हć॑ शीषŭ॒ हजार माथ, हजार मुँह, हजार तरहक गप-िखİसा, सĜय आ ...। (सहćशीषŭ पुरुष: सहćाक्ष:सहćपात्। सभूिमग्वंसवर्तİपृĜवाĜयितơĿशांगुलम्॥...)

… पƄĥयांशूƖो अजायत|| ..पƄĥयां भूिमिदर्शः ...||

चारू कात गाछ-बृच्छ, पोखिर। गाममे एक..दू..तीन आ एकटा आर, चािर टा पोखिर। ओना तँ तीन टा आर पोखिर अिछ। एकटा उþरबिरया पोखिरक उþरभर बड़का डकही पोखिर। लोक बजै छिथ जे कोनो डकैत एĸे राितमे खुनने रहए ई पोखिर। मुदा तकर Ćमाण पुछने यैह पता लागत जे आन तँ कोनो Ćमाण निह मुदा खुनैत-खुनैत भोर भऽ गेल रहए आ तािह कारणसँ ओ डकैत पोखिरमे जािठ निह गािर सकल रहए। हड़बड़ीमे ओिह डकैतक, डकैत की राक्षस कहू, एक पएरक पनही सेहो छुिट गेलै पोखिरक कातमे। बƂड िदन धिर पोखिरक कातेमे रहए मुदा फेर बािढ़मे ओहो बिह गेल। से जे एकटा Ćमाण रहए सेहो निह बचल। गामसँ दूर अिछ से छिठक पाबिनसँ कोनो सĦबĠध आइ धिर एिह पोखिरक निह İथािपत भऽ सकल अिछ। हँ उपनयन िबध-बाधमे धिर एकर उपयोग होइतिह अिछ। िकिसम-िकिसमक माँछ रहै छै एिह पोखिरमे। माँछक कोनो कमी निह। किहयो डकही पोखिरमे जीरा देबाक खगताक अनुभव निह कएल गेल। सालमे एक बेर मछहिर-पĠƖह िदनसँ मास िदन धिर मलाह एिहमे महाजाल खसबैत छिथ। मलाहक टोल जुिम अबैए। पोखिरक कातमे मास िदन लेल मलाहक गाम बिस जाइत अिछ। पिहने तँ मास भिरसँ ऊपर ई सालाना मछहिर चलैत रहए मुदा आब घीच तीर कऽ बीस िदन। फेर मलाहक सरदार घोषणा करैत छिथ- जे आब माँछ शेष भऽ गेल। आब जे मारब तँ महाजालमे तँ एको टा बड़का माँछ निह आओत। भौरी जालसँ मारब तँ सभटा छोटका माँछ

184 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) मिर जएत आ अिगला साल तखन जीरा देमए पड़त। ओिह पĠƖह-बीस िदनमे गाममे उĜसवक वातावरण रहैत अिछ। अही बहžे पोखिरक साफ-सफाई सेहो भऽ जाइत अिछ। भोरे चािर बजे सँ दुपहिरया धिर माँछ मारल जाइत अिछ आ फेर बेरू पहर धिर सभ टोलक लोककेँ-दिछनबाइ टोलकेँ छोिड़ कऽ- अपन-अपन टोलक िहİसा दऽ देल जाइत छै। सभ अपन-अपन िहİसा लऽ गामपर अबैत छिथ। ओतए टोलक सभ पिरवार अपन-अपन िहİसा बाँिट लैत छिथ। टोलक माँछक कतेक कूड़ी लागत, एिह िवषयपर किहयो काल िववाद सेहो भऽ जाइत अिछ। िजबैत भने मसोमात काकीसँ टोका-बĔजी निह होइिĠह। मरबा काल बेटीकेँ िहİसामे सँ िकछु देबाक मसोमातक इच्छाकेँ कंठ मचोिड़ देने होिथ। आ बेचारी मसोमातक मुइल शरीरक औँठा İटाĦप पेपरपर लगबेने होिथ। हुनकर İमरण आन काल भने निह अबैत होइिĠह मुदा डकही पोखिरक िहİसा लेबा काल सभकेँ अपन-अपन मसोमात काकी मोन पिड़ये जाइत छिĠह। एिहपर िवरोध ĭयक्त सेहो होइत अिछ आ पहलमान िजनका सभ Ćेमसँ खिलģफा सेहो कहैत छिĠह, केँ छोिड़ िकनको एिह Ćकारक िहİसा निह भेटैत छिĠह- भने खिलģफाक अँगनाक ओ मसोमात बीस बखर् पिहनिहये मिर गेल होिथ। डकही पोखिरक एकटा आर िवशेषता अिछ। एिहमे माँछ, काछु सभ İवयम बढ़ैत अिछ। पोखिरक कातमे मलकोका सभ अनेरुआ, मारते रास लीढ़ केचुलीलीक Ćकार। कातमे भेंट-कĠद मिहसबार बच्चा सभक भोजन। पोखिरक सटल गड़खै सभ, थलथल करैत दलदली भूिम सेहो। ओिहमे िबसाँढ़ कोिर-कोिर कऽ मुसहर सभ खाइत छिथ। १९६७ ई.क अकालमे जखन सभटा पोखिर, गड़खै सुखा गेल ई डकही पोखिर मुदा निह सुखाएल। Ćधानमंÿी आएल रहिथ तँ हुनका देखेने रहिĠह सभ जे कोना एतएसँ िबसाँढ़ कोिड़ कऽ मुसहर सभ खाइत छिथ। दिछनबिरया पोखिरक दिक्षणमे अिछ बुिचया पोखिर। गामसँ दुरगर अिछ मुदा जािठ छै बीचोबीच। काठक एिह जािठकेँ गारबा काल पीअर बच्चाक, आइक जमीĠदार, अित वृŀ Ćिपतामह एकटा बƂड पैघ आयोजन कएने छलाह। बİतीसँ दुरगर आ खेतक बीचमे रहबाक कारणसँ एतहु लोक सभ İनानक लेल कĦमे-सम अबैत छिथ। मछहिर सेहो होइत अिछ मुदा से माÿ एिह दिछनबिरया टोलक लेल। एिह पोखिरक एकटा आर िवशेषता अिछ। जखन दुगŭपूजाक िदनमे दुगŭजी फेरसँ नैहरसँ सासुर दसम िदन जकरा जतरा सेहो कहल जाइत अिछ, िबदा होइत छिथ तँ हुनकर मूितर्क भसान अही पोखिरमे होइत अिछ। पुरुखपाÿ तँ निह, हँ मिहला लोकिन दुगŭजीक भसानपर हबोढ़कार भऽ कनैत छिथ। दुगŭजी एिह टोलकेँ के पूछए, एिह गामेमे निह बनै छिथ। ओ बनै छिथ पड़ोसक गढ़ टोलीमे। एिह गामक लोक तँ अगþी सभ। खơी िदन धिर दुगŭजीकेँ झाँिप कऽ राखल जाइत अिछ, माÿ मूितर्कार हुनका उघािर कऽ देिख सकैए, कारण ओ निह देखत तँ फेर दुगŭजी बनतीह कोना। आन िकयो देखत तँ आĠहर भऽ जएत। हँ, खơी िदन बेलनोतीक बाद मूितर्क अनावरण बाद हुनकर दशर्न लोक कऽ सकैए। आ ओही िदनसँ मेला सेहो लगैत

मैिथली कथा २००९-१० 185 अिछ। एिह गाममे दुगŭ बनतीह तँ कतेक लोक खơीक पिहनिहये आĠहर भऽ जएत। आ पड़ोसक गाम कम अगþी अिछ। मुदा पूजाक नामपर देखू सभ सĖच-मĖच भऽ जाइत अिछ। नाममे टोल लागल छैक- गढ़ टोल मुदा अिछ गाम। अही गाम जेकाँ महीसबार ƙाŌणक गाम। अगतपनामे हम आगू आिक हम- एकर तँ बुझु Ćितयोिगता होइत रहैत छैक दुनू गामक मğय। गढ़ टोलाक गाम दऽ कऽ जाऊ तँ ओिह गामक बाĠहक क्लातक दलानपर बैसल छौड़ा सभ िकछु ने िकछु सुनेबे टा करत। मुदा एिह गामक फसादी Ćकृितक छौड़ा सभ अरबिध कऽ ओिह गाम बाटे जएबे टा करत। हँ, सध-बध सभ अही बुिचया पोखिरक बाटे गेनाइ āेयİकर बुझैत अिछ, भने कनी हिट कऽ रİता छै। तेँ की। गाममे एकटा आर पोखिर होइत छल। मुदा गामक पूबमे कमला आ बलान एिह दुनू धारकेँ िनयिĠÿत करबा लेल दू टा बाĠह बाĠहल गेल। गामसँ सटल पूब िदस उþर-दिक्षण िदशामे एकटा छहर, फेर छिथ कमला महरानी, फेर कमला महारानीक भाइ बलान धार आ तखन जा कऽ फेर ओिहसँ पूब उþर- दिक्षण िदशामे दोसर छहर। अही दुनू बाĠहक बीचमे दोसर छहर अिछ बĪली पोखिर। एिह िवशाल पोखिरक सटले रहए एकटा फुटबॉल ƅीडाक्षेÿ- िवशाल रमना। िकछु तँ बालू जमा भेने आ िकछु जमीĠदारक करतब सँ ई पोखिर आ रमना पीअर बाबूक चकबĠदी बला खेतमे चिल गेल। सरकार सेहो ओिह बीचमे निह जािन कोन कारणसँ चकबĠदीपर जोर देने रहए। सुरुजू भाइक गोबरसँ सीटल खेत सेहो चकबĠदीमे पीअर बच्चाक खेतमे िमिल गेल छल। दुनू छहरक बीच मिहसबार सभक मालक लेल बौआचौड़ी अिछ। मिहसबार एतए अबैत छिथ, खेलाइत छिथ आ कमलामे हेलैत छिथ। कखनो अपना-अपनीकेँ कमलाक धारमे िबना Ćितरोधक ओ सभ बहए दैत छिथ तँ कखनो धारक Ćवाहक उनटा हेलैत छिथ। दुनू बाĠहक बीच गुअरटोली। पिहने ई गामक टोल छल मुदा आब एतुĸा मतदाता सूची झंझारपुर बजारमे चिल गेल छै। गामक İकूलपर वोटक बूथ रहने पिहने, बहुत पिहने, एकरा सभकेँ वोट निह देमए दैत रहए। आब तकर उĪटा छै। बौआ चौरीक ई İनातक सभ- आब िकयो िदĪली-बĦमै मे तँ िकयो सउिदयामे छिथ। िकयो सेक्युिरटी गाडर् छिथ तँ िकयो सेक्युिरटी गाडर्क कĦपनी खोिल लेने छिथ।

गामक आमक गाछी सभ, कैक टा। बड़का कलम। खढ़ोिरक नवगछली। भोरहा कातक कलम। पोखिरक महार सभपर गाछी। खढ़ोिरमे खेत रहए। मुदा एक गोटे जे नवगछली लगेलिĠह से छाह भेने दोसर खेतमे धानक खेती दिब गेल। से ओहो कने चौक-चौराहापर अनट-बनट बजैत आमक गाछी लगा देलिĠह। एक टा जमबोनी सेहो अिछ। नमगर-नमगर गाछ सभ। पीपरक गाछ सभ

186 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िडहबारक İथानसँ लऽ कऽ İकूलक Ćांगण धिर एþऽ ओþऽ पसरल अिछ। पीपर गाछक जिड़ एþऽ आ िशरा सभ दहोिदस। बाĠह सभक कातमे बोनसुपारीक गाछ, साहर दातमिनक झोँझ, बँसिबņी आ मािरते रास फूल आ काँट सभ। लजिबĔजी तँ सभ कलममे। चाकर आमक गाछपर रखबार सभ ओछैन कऽ सुित रहैत छिथ। वरक गाछ मुदा एĸेटा, पीचक कातमे मीआँटोली लग।

खेत पथार सेहो कैक तरहक। दुनू बाĠहक बीचक खेतकेँ आब सभ ओइ पार बला खेत कहए जाइत छिथ। बलुआही खेत। परोर, तारबूज, फुइट, अŎुआक खेती, सभसँ सİत खेत जे िकनबाक हुअए तँ एतए आऊ। मुदा बािढ़क बाद खेतक आिरक मूह-कान बदलल भेटत। कोनो साल बािढ़क बाद खेतक रकबा घिट जाए तँ अरािड़ निह ठाढ़ कऽ लेब। अिगला बािढ़मे भऽ सकैए कमला महारानी ओकर रखबा बढ़ा सकै छिथ। खेती ओना तँ धानोक होइत छै। मुदा से सुतारपर छै। कोनो बखर् तीन बेर रोपलोपर बेर-बेर बािढ़मे दहा जएत तँ कोनो साल कमला महारानी खेतमे ततेक पाँक भिर देतीह जे जतेक मोनक कŇा मोनमे सोचब तािहसँ बेशी उपजत। कनेक महग खेत िकनबाक हुअए तँ मोड़ बला आ गĦहािरक गाछ लग बला खेत कीनू। एतए लोक खेतीसँ बेशी बसोबास लेल जमीन कीिन रहल छिथ। डकही पोखिर बला खेतकेँ बढ़मोतर कहल जाइत अिछ। पिहने ƙŌोþर रूपमे िकनको मँगनीमे राजा Ņारा भेटल होएतिĠह। पिहने सुनैए िछयै नीक खेती रहए मुदा आइ कािŎ पािन भरल रहै छै। इलाकामे जे िछटुआ धानक खेती होइत अिछ से अही बाधमे। बड़का कोला, धूरपर, भोरहा आ पुणŭहा बाधक अितिरक्त आइ कािŎ िकछु गोटे छहरक ढलानपर सेहो खेती-बारी शुरु कऽ देने छिथ, सीढ़ी बना कऽ खेती केिनहारक संख्या भूगोलक पोथीमे भने पहाड़पर माÿ देखौने होिथ। महीसक मरलापर कžारोहटक İवर आ जादूटोना, ककरो दरबĔजापर पूजल फूल राितमे फेकब। आब लोको मुदा बूिझ गेल अिछ जे ई कोनो छौड़ाक िकरदानी अिछ। गाम अिछ मिहसबार ƙाŌणक गाम। कृįणाƠमीक लगाित हूड़ा-हूड़ीक खेल जे एिह मिहसबाड़ ƙाŌण सभक देखब तँ पोलोक खेलमे कोनो रुिच निह रहत। सिमयाक डोमसँ कीनल सुग्गरकेँ भाँग पीिब मातल महीस Ņारा हूड़ा लेब। चरबाह जे महीसक पहुलाठ पकिड़ कलाकारीसँ बैसल रहैत छिथ सेहो अłुते। गाममे आनो जाित अिछ। दुनू बĠहक बीचमे उचका भीरपर गुअरटोली तँ अिछये। बािढ़यो मे ओ टोल निह डुमैत अिछ। नाहसँ आबाजाही होइए। कमलाक नाह खेबाह मलाह निह राउतजी छिथ। गामक लोकसँ तकर बदलामे अž लैत छिथ। अनगौँआसँ हँ धार पार करेबाक बदला पाइ लैत छिथ।

मैिथली कथा २००९-१० 187 पीचपरक िमआँटोली बगलक गामक वोटर िलİटमे अपन नाम अंिकत करा लेने अिछ। ओतिह डोमक चािरटा घर सेहो अिछ। बगलक गामक वोटर िलİटमे नाम अंिकत करा लेबाक कारण कारण वैह जािह कारणसँ गुअरटोली आब एिह गामक वोटरिलİटमे निह अिछ। मुदा वोटरिलİट सँ गाम थोड़बेक बनै छै। ईहो दुनू टोल अही गामक सीमानमे अबैत अिछ। डोमक काज पाबिन- ितहारमे तँ होइते अिछ। पेटार बनेबासँ सूप, बीअिन सभ िकछु बनेबामे डोमक काज आ पाहुन परख लेल आ बिरयाती लेल जे खİसी काटल जएत तािह लेल िमआँटोलीक काज। खİसीक मूड़ा दुगŭपूजाक बिलमे किमटी लऽ लैत अिछ। िमआँ जे खİसी काटैत अिछ से हलाल कऽ कऽ। गरदिन अदहा लटकले रहैत छै, मुदा बना सोना कऽ गरदिन लऽ जाइये आ खलरा सेहो। तखन मिहसबार ƙाŌणमे सँ जे हनुमानजी मिĠदरपर भजन आ अƠजाम करैत छिथ से ओही खलरासँ बनल ढोलक िकनैत छिथ। फेर धनुख टोली। पिहने यैह लोकिन भार उघैत रहिथ मुदा पछाित दुसधटोलीक लोक सेहो भार उघए लागल छिथ। खेती करब धनुकटोली आ दुसधटोलीक पुरान पेशा अिछ। हँ पिहने ई सभ माÿ बोिनपर काज करैत रहिथ आब बटाइपर करैत छिथ। कोनो झगड़ा-झाँटी भेलापर मिहसबार ƙाŌणक चािन कारी खापिड़सँ तोड़ैत एिह दुनु टोलक मिहलाकेँ अहाँ सालक कोनो एहन मास निह अिछ जािहमे निह देिख सकै छी। बकरी पोसब आ दुगŭपूजामे छागर बिलक लेल बेचब एिह दुनू टोलक पशुपालनमे अहाँ गािन सकै छी। एक-एकटा बरद सेहो िकयो राखए लागल छिथ आ पार लगा कऽ तकर उपयोग जोड़ा बरदसँ खेती करबामे करैत छिथ। तीन टा घरक रहलोपर धोिबयाटोली एकटा टोल बिन गेल अिछ। झंझारपुर धिरक मारवाड़ीक कपड़ा एतए साफ कएल जाइत अिछ। मिहसबार ƙाŌण सभ जे बिरयातीमे बेलबटम झािड़ कऽ सीिट-सािटकऽ िनकलैत छिथ से कोनो अपन कपड़ा पिहिर कऽ। वैह मँगिनया कपड़ा, महगौआ मारवाड़ी सभक। मारवाड़ी सभक ई कपड़ा रजक भाइ दू िदन लेल भाड़ापर िहनका सभकेँ दैत छिथĠह। नौआटोली सेहो तीन घरक। बड़ बजĠता सभ। कमाइलक िलİट लऽ कऽ तगेदा करैत छिथ। दुगŭपूजामे जे बाहरी लोक अबैत छिथ से कमाइल िबना देने घुिर निह पबैत छिथ। पिहने हĢतामे एक बेर दलाने-दलाने केश कटबा लऽ जाइत रहिथ मुदा आब िजनका केश कटेबाक छिĠह से आबथु हमर दुअरा। हँ बर-बिरयाती जएबाक होएत तँ से सालमे अकाध बेर टोल सभक दलानपर चिल जेताह। मुदा सेहो एके ठाम। िजनका कटेबाक हेतिĠह पंिक्तबŀ भऽ बैसथु। ई निह जे क्यो अखन आिब रहल छी तँ क्यो तखन आिब रहल छी। आब सभ घरसँ एक-एक गोटे झंझारपुरमे सेहो सैलून खोिल लेने छिथ। सैलून कोन एकटा Ģलािİटक पटरी कातमे ठाढ़ कऽ देने जाइ छै? नहरनीक Ćयोग तँ बžे भऽ गेल अिछ। नह अपना-अपनीकऽ काटै जाऊ। छुतकामे बौआसीनक आँगुर किनयाँ

188 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) आिब कऽ कािट देत, बस। आ िपजेलहा अİतूरासँ दाढ़ी काटब। खून खिस रहल अिछ से कोनो हम छह मािर देने छी। फोँसरी रहए। निञ बाबू, टोपाजबला अİतूरा झंझारपुरक सैलून लेल छै। फेर एकटा आर टोल अिछ। पिहने गामसँ बाहर रहए, बसिबņीक बाद। मुदा आब तँ सभ बाँस कािट कऽ खतम कऽ देने अिछ आ लोकक बसोबास बढ़ैत-बढ़ैत एिह चमर्कारक टोल धिर आिब गेल अिछ घरहट आ ईँटा पजेबा सभ अगल-बगलमे खिसते रहैत अिछ। ढोलहो देबासँ लऽ कऽ धोल-िपपही बजेबा धिरमे िहनकर सभक सहयोग अपेिक्षत। माल मरलाक बाद जाधिर ई सभ उठाकऽ निह लऽ जाइत छिथ लोकक घरमे छुतका लागले रहैत अिछ। कृिष-मĜİय-पशुपालन आधािरत मिहसबार ƙाŌण बहुल एिह गामक चारूकात पढ़ल िलखल (मुदा एकटा चोरक टोल सेहो अिछ ओतए), ततेक निह पढ़ल िलखल आ मुहदुĤबर गाम सभ अिछ। पड़ोसक चोर सभक िहĦमत निह छिĠह जे एिह गाममे कोनो जाितक घरमे चोिर कऽ लेिथ। एिह गाममे जे िबयाह भऽ गेल तँ सभटा फसादी जमीनक िनपटार भऽ जाइत अिछ, लोक समंगर भऽ जाइत अिछ। एतएसँ हसेरी दूर-दूर धिर जाइत अिछ। कुटुमक जमीनक झगड़ाक िनपटारासँ लऽ कऽ वोट लुटबा धिर हसेरी बहराइत अिछ। जमीन एिह गाममे पचीस हजारक कŇा अिछ, वैह जमीन पड़ोसक गाममे दस हजार रुपैये कŇा। उँचगर जमीन गाममे सİत कारण बखŭक पािनसँ पटौनी निह भऽ सकैए उĜथर जमीनक। मुदा बाĠह बनलाक बाद बनराहा गाम सभक जमीन सभ सेहो महग भऽ गेल अिछ। पिहने घटक अबैत रहए तँ एिह गामक लड़कापर जे दस कŇा आ बनराहा गमक लड़कापर एक बीघा िहİसा देखै छल तैयो अही गाममे कुटमैती करैत छल। कारण बनराहा गाममे दसो बीघा खेत िहİसा रहने गुजर किठन छलै। मुदा आब ओकर सभक भाग्य खुिज गेल छै। जखन बािढ़ अबै छै तँ ओकर सभक खेतक पटौनी भऽ जाइ छै। बनराहा.. बुझलहुँ निह, ओिह गाम सभक गाछीमे बानर सभ भरल छै आ लोको सभ बानरे सन पीअर कपीश। कपीश ! आ माİटरी पिहने िकयो करै निह से सभटा बनराहा सभ माİटर भऽ गेलै। आ आब माİटरक दरमाहा देखू। सभटा बनराहा धोआ धोती पिहिर जे िनकलैए तँ देहे जिर जाइ छै एिह गौँआक। धिर दुगŭपूजा एिह गाममे निह शुरू भेल। मुहदुबरा गाममे सेहो शुरू भऽ गेल मुदा एþऽ। चाहबै तँ िकएक निह होयत। रामलीला एक मिहना केलहुँ हम सभ आिक निह। धू, बाĠह लगहीसँ िघना गेल। भने निह होइए दुगŭ पूजा। एक तँ धी बेटीकेँ िलयाउन करेबाक झमेला रहत आ जे मेलपेँचसँ रहै जाइ छी सेहो पाटŰ-पोिलिटक्स खतम कऽ देत। ..........

िकशनगढ़ गाम। िदĪलीक पौश एिरया वसĠतकुँजक बगलमे। पाइबला सभ सेक्टरमे रहै छिथ आ गरीब सभ िकशनगढ़ आ मसूदपुरमे। सेक्टरमे ओतुĸा

मैिथली कथा २००९-१० 189 लोक सभ कĦयुिनटी हॉलमे खैराती हॉİपीटल खोलने छिथ। सेक्टरक पता देलापर फीस देमए पड़ैत अिछ। गामक पतापर फीस तँ निहए देमए पड़ै छै, दबाइयो मँगनीमे भेटै छै। बगलमे मॉल अिछ। दू तरहक। एकटा सामाĠय लोक लेल। आ दोसर डी.एल.एफ.क इĦपोिरया, वसĠतकुँजक नेĪसन मंडेला मागर्पर। असमानताक आ अपाथųइडक िवरुŀ संघषर् करएबला नेĪसन मंडेला। मुदा हुनकर नामपर बनल एिह मागर्पर बनल एिह इĦपोिरया मॉलमे लाख रुपैयासँ कममे कोनो समान भेटब असंभव। सभसँ सİत अिछ लाख रुपैयाक लेडीज पसर्। बंगलोरक कİतूरबा गाँधी मागर्पर शराबक फैक्Əी आ महाĜमा गाँधी मागर्पर बीयर बार सभ। गाइड लोक सभकेँ कहैत अिछ- वर शराब बनबैत अिछ आ किनया बेचैत अिछ कारण महाĜमा गाँधी मगर् िİथत ओिह बीयर बार सभमे शराबक िबƅी होइत अिछ। तेहने सन कथा अिछ नेĪसन मंडेला रोडक। मुदा समाजवाद अिछ एतए। से पाइ अिछ तँ सेक्टरमे रहू आ निह अिछ तँ गाममे, दुनु सटले-सटल। जमीनक दलाल एतुĸा सभसँ पाइबला लोक अिछ। अपन िबजनेस काडर् छपबैए ई सभ- िरअल एİटेट एजेĠट कऽ कऽ। बगलमे मेहरौली गाम सेहो अिछ। माछ मुदा िकशनगढ़ आ मेहरौली दुनू ठाम भेटत। िदĪलीक लोक माँछ कम खाइत अिछ। अपने िदसुका लोक एकरा सभकेँ माँछ खेनाइ िसखेने छै।

(आबैबला उपĠयाससँ)

190 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) िवńानĠद झा

िकशोर लोकिनक लेल दूटा कथा

नैितक योग

कोनो गाममे एकटा नािपत छल ओ अपन कायर्मे तँ िनपुण छलैहे, जािहसँ गामक लोक ओकरापर Ćसž रहैत छल, ओकर दोसर गुण छलैक जे छोट–मोट घाव घॲसकेँ चीर–फािड़ कऽ के जड़ी–बूटी दऽ ओकर इलाज कऽ दैत छल। लोक नीकेना भऽ जाइत छल। गामक लोक सभ Ćशंसा करैत छल। ओकर ई िचिकĜसा सĦबĠधी कायर् खूब चलैत छलै। पाइयो नीके कमाइत छल, बƂड िदन धिर ओकर कायर् चलैत रहल। िकछु िदनक बाद ओिह गाममे एकटा डाक्टर साहेब अएलाह। ओ नीक सजर्न छलाह, बƂड पैघ–पैघ िडƇी सेहो छलिĠह। ओिह गाममे ओ डाक्टर साहेब अपन क्लीिनक खोललिĠह। हुनका लग चीर– फािड़क सभटा यंÿ छलिĠह, नीक–नीक औषिधक ĭयवİथा सेहो कएलिĠह। पचŭ– पोİटर छपाए आस–पासक गाममे सटबेलिĠह। ओकर बाद डाक्टर साहेब िनयिमत रूपसँ अपन क्लीिनकमे भिर िदन बैसिथ। मुदा ई की ? रोगीक कोनो पता निह, डाक्टर साहेब बैिस कऽ झख मारिथ। डाक्टर साहेबकेँ िकछु फुरैबे निह करिĠह, की करी की निह करी। डाक्टर साहेब कĦपाउěडर सेहो रखने छलाह, तकरा घरेसँ वेतन दै छलाह। आमदनीक कोनो रİता निह छलिĠह। क्लीिनकक खचर् सेहो अलगेसँ। बेचारा डाक्टर साहेब मन मसोिस बैसल रहिथ। ओĦहर गामक लोक सभकेँ एिह पढ़ुआ डाक्टरसँ बेसी ओिह नािपतक कएल िचिकĜसापर िवĂास छलैक। एक िदन डाक्टर साहेब ओिह गामक परम बृŀ ओ नीितज्ञ लोकक शरणागत भेलाह। डाक्टर साहेब हुनकासँ सिवİतार अपन हाल सुनाओलिĠह। ओिह नीितज्ञ बृŀक संग समİत गामक लोक सभ िहनक समİया सुनलिĠह। डाक्टर साहेब कहलिखĠह जे हम एतेक िदन धिर पिढ़–िलिख िचिकĜसाक उिचत वैज्ञािनक िशक्षा पािब तखन एिह कायर्क लेल क्लीिनक खोललहुँ अिछ। जािहसँ गामक लोकक इलाज नीक ढ़ंगसँ होएत। ओकर बाबजूदो समाजक लोग सभ हमर क्लीिनक निह आिब ओिह नािपत देहातीसँ इलाज करबैत छिथ। नीितज्ञ, बृŀ लोकिन डाक्टर साहेबक समİया सुिन िकछु उपदेश देलिखĠह आ कहलिखĠह जे अहाँ ई तरीका अपनाउ शीƈे समİया मुक्त भऽ जाएब।

मैिथली कथा २००९-१० 191 डाक्टर साहेब हुनक आदेश िशरोधायर् कऽ वापस डेरापर अएलाह। अिगला िदन सुरूिचगर भोजनक ओिरयाओन कऽ ओिह नािपतकेँ अपना ओिहठाम भोजन करबा लेल आमंिÿत कएलिĠह। डाक्टर साहेब अपनेसँ जा कऽ ओिह नािपतकेँ नोत देने छलिखĠह। ओ नािपत खुशीसँ ओत-Ćोत भए गेल, नचैत–नचैत भिर गामक लोककेँ ई संवाद किह आएल जे डाक्टर साहेब हमरा गुरू मािन लेलिĠह अिछ। भोजनक बेरमे ओ नािपत डाक्टर साहेबक ओिहठाम पहुँचल। डाक्टर साहेब ठाढ़ भए आƪाद पूवर्क ओिह नािपतकेँ बैसाओल। भिर पोख भोजन करौलिĠह, आदर देलिĠह आ कहलिखĠह जे अपनेक िचिकĜसा िवńासँ हम Ćसž छी। हम डाक्टरी पिढ़योकऽ जतेक निह िसखलहुँ तािहसँ बेसी अहाँ अपन अनुभवसँ कĪयाण करैत छी। जँ एतेक किरते छी तँ कनेक आओर ğयान देबैक तँ पैघसँ पैघ आपरेशन अपने कऽ सकैत छी, माÿ थोड़बे ğयान राखए पड़त। ओ नािपत परम Ćसž भेल डाक्टर साहेबक मुँहे अपन Ćशंसा सुिनकऽ डाक्टर साहेबसँ पुछलक जे कोन–कोन बातक ğयान राखए पड़त। डाक्टर साहेब ओकरा अपना िदश उĠमुख होइत देिख भीतरे–भीतर Ćसž होइत बजलाह-–जेना पएर परक घाव भेलापर िकछु नश–नाड़ीकेँ चीिĠह ओकरा कटबासँ बचा कऽ अहाँ पैर परहक घावकेँ चीर–फािड़ कए िचिकĜसा कए सकैत छी। ओ पुछलक जे डाक्टर साहेब पएर परहक नश कटलासँ की होएतैक? डाक्टर साहेब बतौलिखĠह जे ओ नश कटलासँ तीवर् रक्तćाव होएत जे साधारण ढंगे िनयंÿणमे निह आओत, तखन रोगीक रक्त शुĠयताक िİथितमे Ćाणांत भए सकैछ। तिहना धौना परहक नशकेँ देखबैत बतौलिĠह जे एिह ठामक घावक आपरेशन करए काल नश सभपर बेसी ğयान राखऽ पड़त, से निह कएलासँ नश कटबाक भए बनल रहत। एिहसँ रोगीकेँ लकबा मारबाक सĦभावना बिढ़ जाएत। जँ नश सभकेँ िचिĠह–िचिĠह आपरेशन करब तँ सफल रहत। ई सभ सुिन नािपत घर िदश िबदा भेल, आब ओ अिगला िदनसँ नशक ज्ञान ĆाĢत करबामे लागल। ओकर नैसिगर्क बुिŀ हेड़ाए गेल। जखन ओ चीर– फाड़ िदश सोचलैक की नश कटबाक भए सतबए लगैक। ई नश कटत तँ ई रोग होएत, आ ओ नश कटत तँ ओ रोग होएत। परĖच ओकरा लेल एिह समİयासँ पार पाएब सĦभव निह भेलैक आ अंततः ओ िचिकĜसा कायर्सँ िवरक्त भए गेल। आ ओĦहर डाक्टर साहेबक क्लीिनक ताबड़तोड़ चलए लगलिĠह।

दीप तर अĠहार दूटा िमÿ छल। दुनहुँक मğय बƂड Ćेम छल। जतए जाए संगिह, भोजन संगिह, खेलाइत संगिह, मुदा घरक कोनो काज ओ दुनू निह करैत छल। सतत् काल दुनू योजना बनबैत छल। शेख–िचĪली जकाँ गĢप बघारब मुदा कोनो जोगरक निह। घर–पिरवारक लोक सभ आिजज भए दुनूकेँ गामसँ भगा देलिĠह। दुनू िमÿ वापस अपन गाम जाए िकछु काज कए पाइ जमा कएलक आ आपसमे

192 िव देह : सदेह : ४ (िवदेह ई-पिÿकाक २६म सँ ५०म अंकसँ बीछल) दुनू िवचार कएलक जे गामसँ बहुत दूर शहरमे जाए कोनो काज करब तािहसँ खूब पाइ कमाएब आ तखन गाम वापस आएब। दुनू िमÿ पाइसँ गामिहमे िकछु बट खचŭक ओिरयाओन कएलक। ओ ओढ़ना, िबछौनाक मोटरी बनाए दुनू िमÿ िबदा भेल। शहरसँ जखन बहुत दूर छल तँ संğया भए गेलैक। कतहु कोनो गाम नजिर निह अबैत छल। चलैत रहल–चलैत रहल अĠहार गुĔज साँझ भए गेलैक। चोर सभ सतबए लगलैक आब की करत? कतए जाएत? दुनू िमÿकेँ िकछु फुरएबे निह करैक। इतİततः करैत–करैत जंगलक बीच जा रहल छल। तखन एकटा बरगदक गाछ नजिर अएलैक। ओ दुनू िमÿ थािक गेल छल। ओिह गाछ तर राित िबतएबाक िबचार कएलक। ओिह बरगदक गाछ तर मोटरी रािख धĦमसँ बैिस रहल। एक तँ बाटक थकान दोसर अĠहार गुĔज राित। दुनू िबछौना िबछा कऽ पिड़ रहल। दुनू िमÿ आपसमे िनणर्य कएलक जे बेरा बेरी सुित कऽ राित िबताएब, एिहसँ चोर उचĸा सामान आ पाइ निह चोराबै सकत। परंतु से सĦभव निह भेलैक। दुनू ततेक बेसी थाकल छल जे कखन दुनूक आँिख लािग गेलैक से दुनू निह बुझलक। खूब सूतल, भोरहरबामे जखन एकटाकेँ िनž टुटलैक तँ ओ मोटरी निह देिख िचिचआबै लागल, दोसरो उठल ओहो िचिचयाबै लागल। दुनू एक दोसराकेँ चोिर करबाक आरोप लगबए लागल, बहुत काल धिर दुनू झगिड़ते रहल। ओिहठाम तँ तेसर क्यो रहैक निह जे ओकर दुनू लोकिनक झगड़ा छोड़िबतैक। अपनिह थोड़ेक कालक बाद शांत भए िनणर्य कएलक जे नजदीकक कोनो गाम जाए ओिह गामक पंचसँ िनसाफ कराएब जे दोषी के ?

दुनू िमÿ िबदा भेल। थोड़े दूर चलैत–चलैत जखन जंगलसँ बाहर भेल तँ एकटा खेतमे हर जोतैत एकटा हरबाह नजिर अएलैक। दुनू िमÿ ओिह हरबाह लग पहुँचल, एकटा िमÿ बाजल जे भाए हो–राितमे हमर दुनू िमÿक सामान आ पाइ कौड़ी चोिर भऽ गेल, तेसर तँ क्यो छलै निह तखन तोहॴ कहऽ जे–(दोसर िमÿ िदश आंगुर देखबैत)–एकरा छोिड़ दोसर के लेने होएत ? दोसर िमÿ फेर बमकल। ओ पिहलकेँ गािर āापक तर कऽ देलक। ओ हरबाहा बेचारा İवयं अपनाकेँ िनसाफ देबामे असमथर् पािब कहलक जे एिह बातक गाममे एकटा नीक पंच छैक हिर चरण। तोँ सभ ओकरे ओिहठाम जा कऽ सभ वृतांत बता दहक, ओ िनजगुत फैसला कऽ देतौक। दुनू िमÿ आगाँ बढ़ल। अपिरिचत गाम छलैक, बेर–बेर चौक चौराहापर पंचक घरक मादे पुछऽ पड़ैक। तखने एकटा जोन– बोिनहार भेटलैक। एक िमÿ ओकरासँ पूिछ बैसल जे हौ हिरचरण पंचक घरक पता बता देबह। ओ पुछलक जे अहाँकेँ ओिह पंचसँ कोन काज अिछ। तखन दुनू िमÿ बताबऽ लागल जे हमरा सभक बीच िववाद भेल अिछ हुनकासँ िनसाफ कराए। ओ बोिनहार बाजल- ओ की फैसला करताह ओ तँ बड बेइमान छिथ। दुनू िमÿ अचिĦभत होइत आगाँ बढ़ल। िकछु दूर आगाँ गेलाक बाद एकटा समथर्गिर कुमािर कĠया नजिर अओलैक। तखन दुनू हुनकासँ पंचक घरक

मैिथली कथा २००९-१० 193 राİता देखा देबऽ लेल कहलकैक। ओहो कĠया िहनकासँ Ćयोजन पुछलकिĠह। दुनू िमÿ रातुका सभटा िखİसा कहलकैक। ओ कĠया बाजिल जे ओ की िनसाफ करताह ओ तँ आĠहर छिथ। दुनू िमÿ घोर िनराशामे पिड़ गेल। िकछु निह फुरए जे आब कतऽ जाए। लेिकन दुनू िमÿकेँ हरबाहाक कहल गĢपपर िबĂास छलैक ओ आगाँ बढ़। राहमे एकटा अधेड़ मिहला पुछलकै। ओ सभ İÿीगण बाजिल जे जँ अहाँ सभ कोनो िनसाफ लए जाइत छी तँ बेकार होएत। ओ िदन खाइ छिथ तँ राित लेल झखै छथ। आब तँ दुनू िमÿ भयंकर असमंजसमे पड़लाह जे आब हिरचरण पंचक ओिह ठाम जाइ आिक निह। ई सोिचते बिढ़ रहल छलाह की पंचक घर आिब गेल। हिरचरण दलानेपर सुतरी कढ़ैत छलाह। दुनू िमÿ हुनकर दलानपर जाए Ćणाम कएलिĠह। सरपंच हुनक लोकिनक समİया सुिन युिक्तपूवर्क Ġयाय कऽ देलिखĠह। दुनू िमÿ Ćसž भेलाह। परĖच मनमे ओ सभटा बात उमड़लिĠह जे पंच तँ बड़ िनसाफी छिथ तखन ओ लोकिन िहनकर मादे एना िकएक कहलिĠह। निह रहल गेलिĠह। एकटा िमÿ पंचसँ राİताक सभटा वृतांत कहलिखĠह। हिरचरण गĦभीर भए कहलिखĠह जे हम एखन गरीबीमे छी। ओिह बोिनहारक िकछु बोिन हमरा लग बाँकी छैक जावत दऽ निह दैत िछऐक तावत् ओकरा लेल बेइमान िथकहुँ। ओ कुमारी कĠया हमर बेटी िथकीह। तॲ सभ देखने होएबह जे हमर बेटी िवयाह करबाक जोगिर भऽ गेल अिछ। हम ओकर िववाह निह करा सकिलऐक अिछ तैँ ओकरा हेतु हम आĠहर छी। अंतमे जे मिहला भेटल छलीह ओ हमर दोसर पėी िथकीह। हम एक िदन िबता कऽ हुनका लग जाइ छी तैँ ओ कहलिĠह जे एक साँझ खाइ छिथ दोसर साँझ उपासल रहैत छिथ। तैँ ओ सभ अनगर्ल तँ निहए कहलिĠह।