गद्य पद्य भारती अनुवाद खण्ड-२ [विदेह सदेह ३७] Gadhya Padhya Bharti Anuvad Khand-2 [Videha Sadeha 37]: Translated prose and poetry Part-2 from Videha eJournal (www.videha.co.in) Issues 1-350: Translated and Edited by Gajendra Thakur. Compiled by Preeti Thakur © 2022/ 2026 Preeti Thakur/ Gajendra Thakur. All rights reserved. Published by Videha (videha.co.in) · Delhi Videha: First Maithili Fortnightly eJournal · ISSN 2229-547X ISBN:978-93-5890-150-4 First edition: 2022 Second Edition: 2026 Translator and Editor: Gajendra Thakur Cover design: Aum Gajendra Thakur Typeset in Times New Roman and Georgia; Devanagari set in Noto Serif Devanagari. Editorial: editorial.staff.videha@zohomail.in Sales: sales.videha@gmail.com for the writers, readers, and listeners of Mithilā, who have kept the lamp of Maithilī burning through a thousand years of storms ………………………….. "The Parallel is not the marginal but the truthful, in long delay." Mānuṣīm iha saṃskṛtām मिथिलाक ओइ लेखक, पाठक आ श्रोता लोकनि लेल, जे सहस्र वर्षक झंझावात मे सेहो मैथिलीक दीप प्रज्वलित रखने छथि। समानांतर कात-करोट मे हएब नै अछि, वरन् ई अछि असल सत्य, जे अपन समय लेलक अछि। अनुक्रम विभिन्न भारतीय भाषाक गद्यसँ अंग्रेजीमे अनूदित साहित्यक गजेन्द्र ठाकुर द्वारा मैथिलीमे अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाक गद्यसँ अंग्रेजीमे अनूदित साहित्यक अनुवादक लोकनि: जयलक्ष्मी पोपुरी [तेलुगु] के. पुरुषोत्तम [तेलुगु] रामा राव वी वी बी [तेलुगु] गोपा नायक [उड़िया] हेमांग देसाई [गुजराती] कमलाकर भट [कन्नड़] विभिन्न भारतीय भाषाक पद्यसँ अंग्रेजीमे अनूदित साहित्यक अनुवादक लोकनि: पुरुषोत्तम के. [तेलुगु] रामा राव वी वी बी [तेलुगु] जयलक्ष्मी पोपुरी [तेलुगु] हेमांग देसाई [गुजराती] माला मारवाह [गुजराती] सैलेन राउत्रे [उड़िया] इप्सिता सारंगी [उड़िया] हरिकृष्ण दास [उड़िया] गजेन्द्र ठाकुर [भोजपुरी] एस.एल.सन्धु [कश्मीरी] अनूदित गद्य खण्ड गद्य अनुक्रम तेलुगु खण्ड १. सदा लेल मित्र: मूल तेलुगु उपन्यास : पेद्दिंति अशोक कुमार; तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद: पी. जयलक्ष्मी; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर [पृष्ठ- ३-७७] २. २ टा दलित लघु कथा: [कोलकलुरी इनोच लिखित “कौआ” (तेलुगुमे काकी) आ विनोदिनी लिखित “कारी मसि” (ब्लैक इंक)]; मूल तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद: के. पुरुषोत्तम; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ७८-८७] ३. आदिवि बापिराजूक मूल तेलुगु 'ध्वस्त मन्दिर' सँ अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ८८-९१] ४. वेंकट सुब्बैया वी.क मूल तेलुगु 'अनुवादक कला' (अंश) क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ९२-९६] ५. करुणा टी.क मूल तेलुगु 'क्रूरता' क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ९७-१०२] ६. एन. गोपीक मूल तेलुगु 'नानीलु, द लिटिल वन्स' क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- १०३-१०५] ७. खदीर बाबूक मूल तेलुगु “हमर चित्रकला गुरु” क अंग्रेजी अनुवाद: जयलक्ष्मी पोपुरी; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- १०६-१०९] ८. वेम्पल्ले शरीफक मूल तेलुगु “जुम्मा” क अंग्रेजी अनुवाद: जयलक्ष्मी पोपुरी; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ११०-११६] ९. रामा राव वी वी बीक मूल तेलुगु “अभिशप्त” क अंग्रेजी अनुवाद: लेखक द्वारा स्वयं; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ११७-१२४] उड़िया खण्ड १०. उड़ियामे सरोजिनी साहूक मूल कहानी "दुःख अप्रमिता"; अंग्रेजीमे गोपा नायक द्वारा अनूदित; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- १२६-१३३] गुजराती खण्ड ११. सुन्दरमक २ टा गुजराती कथा: “माताक कोरामे” मूल गुजराती: “सुन्दरम”; गुजरातीसँ अंग्रेजी: हेमांग देसाई आ अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- १३५-१४३] सुन्दरमक मूल गुजराती कथा “माजा वेलोक निधन” अंग्रेजीमे हेमांग देसाई द्वारा अनूदित; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- १४४-१५४] १२. दलपत चौहानक मूल गुजराती 'डर'; हेमांग देसाई द्वारा अंग्रेजीमे अनूदित; अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- १५५-१६३] १३. नजीर मंसूरीक दू टा गुजराती कथा: “समुद्री बाज” आ “हंगामा”; मूल गुजरातीसँ अंग्रेजी: हेमांग देसाई आ अंग्रेजीसँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- १६४-१८८] कन्नड़ खण्ड १४. अशोक हेगड़ेक मूल कन्नड “अन्हार” क अंग्रेजी अनुवाद: कमलाकर भट्ट; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- १९०-२००] अनूदित पद्य खण्ड पद्य अनुक्रम तेलुगु खण्ड १ बोयी भीमन्नाक मूल तेलुगु कविता [मूल तेलुगु कविता अंग्रेजीमे पुरुषोत्तम के. द्वारा अनूदित; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर।] [पृष्ठ- २०३-२०६] २ तेलुगु दलित महिला कविता [मूल तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद के. पुरुषोत्तम ; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर।] मूल तेलुगु: “जे. सुभद्रा” क “लोढ़ब”, “लाण्डा”, “साड़ीक कोर - -हमर छाती पर पहरा दऽ रहै लेल कपड़ा नै”, ““अव्वा - दुख जमा करैत दरबज्जापर बिछल चौखटि”। [पृष्ठ- २०७-२१६] मूल तेलुगु: “चल्लपल्ल्ली स्वरूपरानी”क “मान्केनापुव्वु”; “माटि -भेल हाथ” [पृष्ठ- २१७-२२१] मूल तेलुगु: “दरिशे शशिनिर्मला” क “हमही छी जे सभ किछु हारि देलौं”, “हम रजस्वला कपड़ा ओढ़ि रहल छी”, “एक दलित स्त्री” [पृष्ठ- २२२-२२७] मूल तेलुगु: “एम. गौरी” क “मेहदी लागल हाथ” [पृष्ठ- २२८-२३०] मूल तेलुगु: “मद्दुरी विजयश्री” क “अलिसम्माक स्राप” [पृष्ठ- २३१-२३२] ३ वी.वी.बी. रामा रावक किछु पद्य [तेलुगु सँ कवि द्वारा स्वयं अनुवादित] [पृष्ठ- २३३-३०४] ४ एन. गोपीक मूल तेलुगु क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ३०५-३११] ५ अरुणा एन केर मूल तेलुगु क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ३१२-३१८] ६ शीला सुभद्रा देवीक मूल तेलुगु क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ३१९-३२४] ७ के. शिवा रेड्डीक मूल तेलुगु क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर। [पृष्ठ- ३२५-३२९] ८ अन्नवरम देवेन्द्रक तेलुगु पद्य [मूल तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद -जयलक्ष्मी पोपुरी; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर।] [पृष्ठ- ३३०-३४७] गुजराती खण्ड ९ नरसिंह मेहताक गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। [पृष्ठ- ३४९-३५०] १० हेमांग देसाईक ५टा गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद कवि द्वारा स्वयं; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। [पृष्ठ- ३५१-३६१] ११ राजेन्द्र पटेलक गुजराती कविता सभ, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। [पृष्ठ- ३६२-३६८] १२ पीयूष ठक्करक गुजराती कविता सभ, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। [पृष्ठ- ३६९-३७२] १३ पन्ना त्रिवेदीक कविता सभ, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। [पृष्ठ- ३७३-३७५] १४ बाबू सुथारक कविता सभ, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। [पृष्ठ- ३७६-३८१] १५ गुजराती दलित कविता [गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। अनीश गारंगेक "पोस्टर" [पृष्ठ- ३८२-३८२] राजेन्द्र वडेलक 'जीता' "सम्भोग" [पृष्ठ- ३८३-३८३] उमेश सोलंकीक "लोक, जमि जाए", "खरड़ाक डाँट सभ" [पृष्ठ- ३८४-३८७] १६ गुलाम मोहम्मद शेखक गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई/ माला मारवाह; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। [पृष्ठ- ३८८-३९४] १७ अजय सरवैयाक गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। [पृष्ठ- ३९५-४०४] १८ गनी दहीवाला क गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। [पृष्ठ- ४०५-४०६] उड़िया खण्ड १९ बासुदेव सुनानीक उड़िया कविता। उड़ियासँ अंग्रेजी अनुवाद सैलेन राउत्रे; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर [पृष्ठ- ४०८-४१६] २० मूल उड़िया भरत माँझी (ओड़ियासँ अंग्रेजी अनुवाद सैलेन राउत्रे आ अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर द्वारा) [पृष्ठ- ४१७-४१८] २१ इप्सिता सारंगीक उड़िया कविता। उड़ियासँ अंग्रेजी अनुवाद इप्सिता सारंगी द्वारा स्वयं; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर [पृष्ठ- ४१९-४२२] २२ इप्सिता सारंगीक उड़िया कविता। उड़ियासँ अंग्रेजी अनुवाद हरेकृष्ण दास; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर [पृष्ठ- ४२३-४२७] भोजपुरी खण्ड २३ भिखारी ठाकुरक भोजपुरी कविता गीतक मैथिली अनवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा [पृष्ठ- ४२९-४३०] कश्मीरी खण्ड २४ रहमान राहीक कविताक मैथिली अनुवाद (कश्मीरीसँ अंग्रेजी एस.एल.सन्धु, साभार भारतीय ज्ञानपीठ आ अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर) [पृष्ठ- ४३२-४३४]
अनूदित गद्य खण्ड तेलुगु खण्ड सदा लेल मित्र [मूल तेलुगु उपन्यास - जिगरी: पेद्दिंति अशोक कुमार; तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद - फ्रेण्ड्स फॉरेवर: पी. जयलक्ष्मी; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद - सदा लेल मित्र: गजेन्द्र ठाकुर] पेद्दिंति अशोक कुमार तेलुगु भाषाक एक प्रमुख उपन्यासकार आ कथाकार छथि । हुनकर जन्म आंध्र प्रदेशक करीमनग्र जिलाक भीमुनि मल्लारेड्डीपेटा गाममे मल्लव्वा आ अंजय्या दम्पतिक घर भेल छल। हुनका वारंगलसँ स्नातकोत्तरक उपाधि प्राप्त अछि आ ओ करीमनग्र जिलाक रामजीपेटामे एकटा स्कूलमे गणित पढ़बैत छथि। हुनकर पहिल कहानी "आशा निराशा आशा" १९९९ मे प्रकाशित भेल छल आ हुनकर पहिल उपन्यास एदरि मंटालु (रेगिस्तानक ज्वाला) तेलुगु मासिक पत्रिका चतुरा मे छपल छल। ओ अखन धरि पाँचटा उपन्यास (एदरि मंटालु, ऊरिकि उप्पुलम्, संचारि, जिगरी, आ दादी) आ मोटामोटी सय टा कहानी लिखि लेने छथि, जे पाँचटा संग्रहमे प्रकाशित भेल अछि । एदरि मंटालु खाड़ी देश सभमे श्रमिक पलायनपर लिखल गेल पहिल तेलुगु उपन्यास अछि। हुनकर कहानी संग्रह वलस बाथुकुलु (प्रवासक कथा) सेहो एहि विषयपर आधारित अछि। हुनकर बहुत रास कहानी सभक अंग्रेजी सहित आठटा भारतीय भाषा सभमे अनुवाद भेल अछि। प्रस्तुत उपन्यास फ्रेंड्स फॉरेवर, जे मूल तेलुगुमे जिगरी नामसँ अछि, २००६ मे अमेरिकन तेलुगु एसोसिएशन (एटीए) द्वारा आयोजित उपन्यास प्रतियोगितामे पुरस्कार जीतने छल । उपन्यासक अंग्रेजी आ मैथिलीक अलावे हिन्दी, मराठी, चांगुरबी, बंगाली, कन्नड़ आ गुजरातीमे अनुवाद भेल अछि। लेखक बहुत रास पुरस्कारसँ सम्मानित छथि, जाहिमे हुनकर कहानी संग्रह मायी मुंठा लेल २०१० मे आंध्र प्रदेश राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार उल्लेखनीय अछि। ओ कहै छथि, "स्कूल हमर प्रयोगशाला अछि, स्कूली बच्चा सभकेँ पढ़ेनाइ आ लिखेनाइ, दुनू काज हमरा सभसँ बेसी आनन्दित करैत अछि।" ओ तेलुगु साहित्यकेँ नव ऊँचाइ धरि पहुँचाबैमे अपन योगदान दऽ रहल छथि। पी. जयलक्ष्मी (अनुवादक): हैदराबादक उस्मानिया विश्वविद्यालयक निजाम कॉलेजसँ अंग्रेजी विभागक प्रमुख आ सहयोगी प्रोफेसरक रूपमे सेवानिवृत्त भेल छथि । हुनकर अनुवादमे कविता, उपन्यास आ कहानी सभ शामिल अछि, जाहिमे शीला सुभद्रा देवीक दीर्घ कविता युद्धम् ओका गुंडे कोथा क वॉर, अ हार्ट्स रेवेज (२००३) भार्गवी रावक संग, एन. गोपीक क्रांतिकारी ननीलु: द लिटिल वन्स (२००७), सलीमक साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता उपन्यास कलुथुन्न पूलथोटा क साइलेंट स्टॉर्म (२०११), अन्नवरम देवेन्द्रक तेलुगु कविता फार्मलैंड फ्रेग्रेन्स (२०११) आदि महत्वपूर्ण कृति सभ अछि। सदा लेल मित्र (तेलुगु उपन्यास) लेखक: पेद्दिंति अशोक कुमार अंग्रेजी अनुवाद: पी. जयलक्ष्मी अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर समर्पित: बहुभाषी व्यक्तित्व डॉ. नलिमेला भास्करकेँ समर्पित अनुक्रम अंग्रेजी अनुवादकक निवेदन सदा लेल मित्र शब्दावली परिशिष्ट समर्पित बहुभाषाविद् व्यक्तित्व डॉ. नलिमेला भास्करकेँ अनुवादकक निवेदन जून २०११ क लगपास पेद्दिंति अशोक कुमारक तेलुगु उपन्यास "जिगरी" हमरा एकटा साझा मित्रक माध्यमसँ एक वेबजीनसँ डाउनलोड कएल गेल प्रतिक रूपमे हाथ लागल । ई मूल रूपसँ ओहि ठाम उपन्यास प्रतियोगितामे पुरस्कार जितला उपरान्त प्रकाशित भेल छल। लेखकक एक लेखकक रूपमे प्रतिष्ठा जानैत आ जिज्ञासाक वश, हम इमाम आ शादुलक ई दुखद कथा एकहि बैसकीमे पढ़ि लेलहुँ । कथावाचनमे एहन लीन भेलहुँ जे हम मोटामोटी तुरत्ते उपन्यासक अनुवाद करबामे लागि गेलहुँ । ई एकटा मनुष्य आ ओकर पशु, जाति -समुदायक राजनीति आ सीमांत इतिहासक गाथा अछि । अशोक कुमारक "जिगरी" सन विषयक चयन अद्वितीय अछि, एहन उपन्यास कखनो -काल भेटैत अछि । ई हमरा एकटा विशिष्ट उपन्यास लागल-एकटा अल्पसंख्यक जातीय समुदायक परिवारक भीतरक संघर्षक कल्पनात्मक पुनर्रचना, जे परिवार द्वारा पकड़ल, प्रशिक्षित आ प्रदर्शित कएल गेल एकटा जानवरसँ संबंधित छल । सामाजिक -राजनैतिक प्राकृतिक परिस्थिति सभ परिवारकेँ विखंडित करबाक धमकी देलक, जखन सरकार जीविका लेल पशुसभकेँ प्रशिक्षित आ प्रदर्शित करबाक विरुद्ध कानून पारित कऽ देलक । ई उपन्यास पशु -संरक्षण अधिकारक इतिहासमे एकटा महत्वपूर्ण क्षणक उदाहरण अछि, मुदा ई केन्द्रीय पात्र इमाम लेल अपन पशुक त्याग आ पुनर्वासक प्रस्ताव स्वीकार करबाक पीड़ादायक आ तीव्र संघर्षक क्षण सेहो अछि । ई किछु लोककेँ कानूनक विरुद्ध गेल जकाँ लागि सकैत अछि, मुदा एकटा कल्पनाशिल्पक रूपमे ई उपन्यास एकटा आदर्श प्रस्तुत करैत अछि - मनुष्य आ पशुक बीचक संभावित सहानुभूति। भालु -नचबै वाला समुदायक आजीविका लेल संघर्ष आ ओकर मिझाइत जातीय अस्मिता हमरा लेल उपन्यासक अनुवाद करबाक प्रेरणा -बिन्दु बनल । ई उपन्यास समाजमे सत्ताक विमर्श आ कलन्दर (एकटा घुमन्तु पशु -प्रशिक्षक आ प्रदर्शनकर्ता समुदाय) क विलोपनकेँ दर्ज करैत अछि। एकटा रचनात्मक कृतिक रूपमे ई उपन्यास अपन भीतर ओहि समुदायक सामाजिक इतिहासक अभिलेख रखैत अछि, जे समाजक सीमांत पर रहैत छल । एहन बहुत रास जातीय आ स्वदेशी समूह-जे कहियो बानर -नाच, साँप -खेल, कठपुतली -नाच वा गांगिरेड्डु (आंध्र प्रदेशक बहुत भागमे लोकप्रिय बड़दक-प्रदर्शन) द्वारा आजीविका चलाबैत छल - ओ सब हमरा सभक बीचसँ तेजीसँ बिला रहल अछि। "फ्रेंड्स फॉरेवर", जे कलन्दर सभक जीवन, संस्कृति आ मूल्यक चारू कात घुमैत अछि, स्वतः उपन्यासकेँ एकटा सांस्कृतिक स्मृति -मंजूषाक रूपमे अभिलेखीय मूल्य प्रदान करैत अछि । ई समुदाय, जे अपन अस्तित्व आ विलोपन दुनू स्थितिमे विस्मृत आ उपेक्षित भऽ गेल अछि, ई उपन्यास अनुवादक माध्यमसँ ओहि स्मृतिकेँ पुनर्जीवित करय चाहैत अछि आ दोसर भाषा आ संस्कृति सभक संग संवाद स्थापित करबाक लेल ओकरा यात्रा करय लेल प्रेरित करैत अछि । अनुवादमे स्थानीय, क्षेत्रीय आ राष्ट्रीय हितक सेहो ध्यानराखल गेल अछि । ई भावना, विश्वास, रीति -रिवाज, उर्दूक विशिष्ट बोली, आ दैनिक बोलचालक गारि -कहबीक माध्यमसँ 'स्थानीयता' पर बल दैत अछि । विभिन्न पाबनि -तिहार आ पारम्परिक आदिवासी चिकित्साक सन्दर्भमे 'क्षेत्रीयता' पर; आ अन्ततः, परिवारक अपन चिन्हक खोज आ सम्मानजनक जीवनक संघर्षक प्रारूपिक चिन्ताक माध्यमसँ 'राष्ट्रीयता' पर बल दैत अछि। ई अनुवाद मात्र साहित्यिक वा भाषिक नहि अछि, जकर अर्थ अनुवादक केन्द्र आ दायराकेँ सीमित करब होयत, वरन् ई सचेत अछि जे कोनो संस्कृति अपन भाषासँ अभिन्न अछि। एकटा सफल अनुवादककेँ सदिखन स्रोत भाषाक अभिव्यक्तिकेँ लक्ष्य भाषाक अभिव्यक्तिक संग विवेकपूर्ण मिश्रण करबाक चाही, जाहिसँ ओहि ठामक मूल रङ्ग बनल रहय । "जिगरी" क अनुवाद ओहि संस्कृतिक अनुवाद अछि, आ "फ्रेंड्स फॉरेवर" आशा करैत अछि जे ई लक्ष्य भाषाक पाठक सभ लेल संचारक एकटा एहन माध्यम खोलत, जाहिसँ ओ लोकनि एकटा सामाजिक -राजनैतिक क्षण आ ऐतिहासिक परिस्थितिकेँ बुझि सकय । अनुवादक विधिक प्रश्न कोनो अनुवादककेँ अथक रूपसँ घेरैत रहैत अछि, जाहिसँ बचबाक कोनो सहज उपाय नहि अछि । मुख्य चुनौती ई छल जे एकटा आदिवासी अनुभवकेँ, जे ग्रामीण कृषि -प्रधान परिवेश आ वनक क्षेत्रसँ जुड़ल अछि, कइएक प्रकारेँ सर्वोत्तम रूपमे पुनर्जीवित कएल जाय । एकटा अनुवादकक रूपमे, ओहि आदिवासी अनुभवक कमी - जे पाठकेँ पर्याप्त रूपसँ बुझबाक लेल महत्वपूर्ण छल - सँ आसानीसँ बचि कऽ निकलबाक कोनो मार्ग नहि छल । संदेह बनल रहल जे ओहि जनजातीय मूल्य -बोधकेँ शहरी पृष्ठभूमि सँ आएल अंग्रेजी शिक्षित व्यक्ति द्वारा सफलतापूर्वक आह्वान कएल जा सकैत अछि वा नहि । अत्यंत असहजताक भावसँ घिरल ओहि समय, जनजातीय संवेदनाक अनुभव एक साथ दूर आ अलग सन लागल । एहि कारणेँ ई आशंका रहल जे अनुवाद आसानीसँ अपर्याप्त कहि देल जा सकैत अछि, जाहिमे ओहि जनजातीय संवेदनाक अंतरंग ज्ञानक कमी अछि । हमर स्वयं क ऐतिहासिक स्थिति आ अनुवादक भाषा अंग्रेजीक चयन - दुनू प्रभुत्वशाली कहल जा सकैत अछि । तखनो, ई जानि कऽ कि एकटा आदर्श अनुवाद मृग -मरीचिका जकाँ दुर्लभ अछि, हम एहि उपन्यासकेँ अत्यंत सहानुभूति आ एहिमे निहित जटिल मुद्दासभक समझक संग प्रस्तुत कएलहुँ । ओहि संस्कृति आ हमर संस्कृति, दुनू भारतीय छी - ई ज्ञान हमरा सम्बल देलक । एहि लेल एकटा उत्सुकता आ उत्साहक संग हम उपन्यासक स्वदेशी संस्कृतिकेँ एकटा 'उत्तर -जीवन' (Afterlife) देबाक प्रयत्न कएलहुँ । एकटा सांस्कृतिक मध्यस्थ आ राजदूतक रूपमे उपन्यासकेँ व्यापक पाठक वर्ग धरि पहुँचाएब हमर पैघ आ ईमानदार उद्देश्य छल, जे हमरा आगू बढ़बाक लेल पर्याप्त छल । अन्यथा ई एकटा दुखद स्थिति होइत जे हमरा "जिगरी" केर पाठ अनुवाद करबाक आनन्दसँ वंचित कऽ देइत । सभ अनुवादककेँ अतिरिक्त रूपसँ कोनो पाठकेँ भाषाई रूपसँ अनूदित करबाक कठोरताक सामना करय पड़ैत छनि । "फ्रेंड्स फॉरेवर" मे ई समस्या एकटा जटिल तरीकासँ सोझाँ आएल । मूल तेलुगु उपन्यास एकटा 'मण्डलिका' (क्षेत्रीय बोली) मे लिखल गेल अछि, जे उपन्यासक परिवेशक लेल विशिष्ट अछि । ओहि बोलीकेँ एकटा भिन्न संस्कृतिमे अनुवादक माध्यमसँ पुनर्सृजित करबाक कोनो सोझ उपाय नहि अछि, मुदा द्विभाषिकताक प्रश्नसँ निपटबाक छल । उपन्यास ओना तेलंगाना क्षेत्रमे बाजल जाए वाली तेलुगु बोलीमे लिखल गेल अछि, मुदा पात्र सभ क्षेत्र -विशिष्ट उर्दूक प्रयोग सेहो करैत छथि, किएकि कथा ओहि क्षेत्रक एकटा मुस्लिम समुदायक बारेमे अछि । बाजल जाए वाली उर्दू बिलकुल स्वाभाविक आ सहज अछि आ आश्चर्यजनक रूपसँ तीव्र भावनात्मक विस्फोटक समयमे "अरे बताह" वा "अरे बेवकूफ" जकाँ अभिव्यक्तिक रूपमे सोझाँ आबैत अछि। तखनो, तेलुगु ओहि क्षेत्रक संचारक मुख्य भाषा आ उपन्यासक स्रोत भाषा दुनू रहल, तँ मुख्य प्रश्न अनुवादमे मूल क्षेत्रक विशिष्ट 'देशी रङ्ग' आ संस्कृति -विशिष्टताकेँ बना कऽ रखबाक छल । उद्देश्य ईहो छल जे तेलुगु आ उर्दू दुनूक प्रभाव अंग्रेजी पर देखाय । एहि हेतु उर्दूक अभिव्यक्तिकेँ टेढ़ (Italic) अक्षरमेराखल गेल अछि, जाहिसँ ओ कथाक प्राकृतिक प्रवाहमे योगदान कऽ सकय आ पाठकेँ भाषाई बहुलताक बोध करा सकय । अधिकांश भारतीय पाठक तेलंगाना क्षेत्रक ओहि विशिष्ट उर्दूसँ परिचित छथि, मुदा जे नहि छथि हुनका लेल सन्दर्भ सँ अर्थ स्पष्ट भऽ जाइत अछि, जाहिसँ पाठककेँ अर्थ खोजबाक लेल कतौ दूर नहि जाए पड़य । भाषाक जटिलताक एकटा आन उदाहरण अछि संस्कृति -विशिष्ट शब्द, भावना, रीति -रिवाज, परम्परा, पाबनि -तिहार, खेल, आ वनस्पति -जीव सँ जुड़ल संदर्भ, जे ग्रामीण कृषि -पृष्ठभूमिक पात्र सभक भावनात्मक संरचनाक हिस्सा थिक । जाहि शब्द सभक विस्तारक आवश्यकता छल, ओकरा लेल पुस्तकक अन्तमे एकटा विस्तृत शब्दावली (ग्लोसरी) मे टिप्पणी देल गेल अछि । विभिन्न वृक्ष आ जड़ी -बूटी (ब्रह्मदण्डी, इष्टिकांत, विषमुष्टि, उप्पी, इप्पा, कठेरा, मंगा, जाजी आदि) क सम्बन्धमे सेहो ईहे स्थिति अछि, जाहिमे सँ अधिकांश जनजातीय चिकित्सामे प्रयुक्त होइत अछि । एकर अतिरिक्त, उपन्यास तेलंगाना बोलीक लोकप्रिय कहबी सभ आ किछु मुख्यधारा तेलुगुक प्रचलित कहबी सभसँ भरल अछि । इमाम अपन बातकेँ स्पष्ट करबाक लेल एहि कहबी सभक उद्धरण दैत छथि आ ई हुनकर स्वभावक हिस्सा थिक । एहिमे सोझ आ सार्थक अनुवादकेँ प्राथमिकता देल गेल अछि, जे तेलंगानाक सांस्कृतिक बारीकी पर प्रकाश डालैत अछि । अर्थक सहज बोध लेल शब्दावलीमे मुख्यधारा तेलुगु आ अंग्रेजीक समकक्ष कहबी सभक संग व्याख्या कएल गेल अछि । एहि श्रेणीमे "गुड़ सन -पीटल पाथर जकाँ अचल", "छूब तँ छौड़ी मरि जायत, आ चुम्मा लेब तँ जीयत?" वा "सियार, ऊँटक ठोढ़क लालसा करय" जकाँ कहबी अछि । अंतमे एकटा परिशिष्ट सेहो जोड़ल गेल अछि, जाहिसँ पाठक ओहि भालु -नचबै वाला समुदायक चिन्ता आ सामाजिक -राजनैतिक पक्षकेँ बुझि सकय, जे एहि लुप्त होइत जातीय अस्मितासँ परिचित नहि छथि । एकटा प्रमुख पहलू जे एहि अनुवादक दौरान पहेली जकाँ रहल, ओ छल क्रियाक रूप (काल) क प्रयोग। मूल तेलुगुमे उपन्यासक घटनाक्रम सामान्य वर्तमान आ वर्तमान निरंतर कालमे अछि, जे संभवतः कथामे नाटकीय प्रभाव उत्पन्न करबाक लेल प्रयुक्त भेल अछि; मुदा अंग्रेजीमे ओही कालक प्रयोग उपन्यासक लेल घातक सिद्ध भऽ सकैत छल। कथामे समयक चक्र सेहो आगू -पाछू घुमैत रहैत अछि। एहि समस्यासँ निपटबाक लेल, अनुवादमे 'सामान्य भूत' (Simple Past) आ 'पूर्ण भूतकाल' (Past Perfect) अपनाएल गेल अछि, जाहिसँ ई कोनो बीतल घटनाक वर्णन जकाँ लागय। एकर मुख्य कारण ई अछि जे उपन्यासक संदर्भ आ ऐतिहासिक क्षण एकटा अतीतसँ जुड़ल अछि, विशेष रूपसँ हालक ओहि समयसँ जखन भारत सरकार कलन्दर सभक विरुद्ध कड़ा कानून पारित कऽ ओकरा बोनहा जानवर सभकेँ पकड़बाक, प्रशिक्षित करबाक आ व्यावसायिक लाभ वा जीविका लेल उपयोग करबाक निषेध कऽ देने छल। इमामक परिवारक भीतरक संघर्ष एहि कारणेँ प्रासंगिक आ ऐतिहासिक अछि। एहि हेतु ई अनुभव कएल गेल जे कोनो सामाजिक -राजनैतिक आ ऐतिहासिक स्थितिक चित्रण 'सामान्य भूत' आ 'पूर्ण भूतकाल' मे कएला पर बेसी विश्वसनीय लागत। आशा अछि जे ई सभ प्रयास मिलि एहि अनुवादकेँ पारदर्शी बनाओत, जाहिसँ ई अंग्रेजीमे मूल रूपसँ लिखल गेल जकाँ नहि वरन् एकटा एहन कृतिक रूपमे पढ़ल जाय जे दोसर भाषामे मूलक आवाजकेँ मुखरित करैत अछि। ई मूल उपन्यासक महत्वकेँ कम करबाक लक्ष्य नहि रखैत अछि, वरन् लक्ष्य भाषा अंग्रेजीक माध्यमसँ स्रोत भाषाकेँ आर 'सशक्त' करबाक अवसर दैत अछि। कोनो अनुवाद विभिन्न क्षेत्रसँ भेटल सहायता आ समर्थनक बिना पूर्ण नहि होइत अछि। हम सबसँ पहिले उपन्यासक लेखक पेद्दिंति अशोक कुमारकेँ धन्यवाद दैत छी, जे हमरा अपन उपन्यासक अनुवादक अनुमति देलनि आ अनेक संवादात्मक सत्रक माध्यमसँ पारम्परिक आदिवासी प्रथासँ परिचित करौलनि। हम निजाम वेंकटेशमकेँ सेहो धन्यवाद दैत छी, जे हमरा उपन्यास आ उपन्यासकारसँ परिचय करैबामे महत्वपूर्ण भूमिका निभौलनि। उस्मानिया विश्वविद्यालयक वनस्पति विज्ञान विभागक नरसिंग राव वर्मा, जिनकर स्थानीय वनस्पति आ जीवक व्यापक ज्ञान शब्दावली तैयार करबामे अत्यधिक सहायक भेल; मुकुन्द रामा राव हुनकर प्रोत्साहन आ स्पष्ट राय लेल; आ शेषाद्री नायक हुनकर समयपर सलाह आ सहायता लेल, धन्यवादक पात्र छथि। तेलुगु समानान्तर सिनेमाक बी. नरसिंग राव हुनकर उत्साहजनक शब्द सभ लेल जे प्रकाशनक लेल आगू बढ़बाक प्रेरणा देलक; आ हमर सभक 'सदा लेल मित्र' आ 'जिगरी' - शान्त सुन्दरी आ गणेश्वर राव, सभ रस्तापर सहायता आ मार्गदर्शन लेल; लीला मसिलामोनि शुरूमे पाण्डुलिपि धैर्यपूर्वक पढ़ि कऽ जतय स्वरक गुणवत्ता लटपटाएल छल, ओकरा सुदृढ़ करबामे सहायता लेल; तूतुन मुखर्जी आ सीता दास हुनकर प्रोत्साहन आ समालोचनात्मक राय लेल; लीला लक्ष्मीनारायण उपन्यासक अनुवादक प्रगतिक विषयमे स्नेहपूर्वक पूछि कऽ उत्साह बढ़बैबाक लेल; आ युगादि प्रकाशनक श्रीनिवास शास्त्री आ उषा शास्त्री एहि कृतिकेँ रिकॉर्ड समयमे प्रकाशित करबाक उत्साह लेल धन्यवादक पात्र छथि। अन्तमे, हर्षिता प्रिण्टर्सक कर्मचारी सभक सेहो आभार जे पुस्तक प्रकाशित करबामे सहयोग कएलनि। हम सभक प्रति अपन कृतज्ञता व्यक्त करैत छी। पी. जयलक्ष्मी हैदराबाद, जुलाई २०१२ सदा लेल मित्र सूर्योदय भेल । सूर्यास्त सेहो भेल । दिन बीतल आ राति सेहो ढलि गेल । मुदा इमाम अखन धरि नहि आएल छल आ शादुलक कोनो संकेत नहि छल । बीबम्मा आ चाँद दुनू चूल्हिक सोझाँ बैसि भोजन रान्हैत मात्र इमाम आ शादुलक बारेमे गप्प करैत छल । चाँद उत्सुकतासँ पुछलक, "अम्मी, अब्बा अखन धरि नहि अयलाह!" बीबम्मा किछु नहि कहलक आ खौलैत दूधमे सेवइ धऽ देलक । बीबम्मा एहि बातसँ खुश छल जे इमाम आ शादुल दुनू दूर छल । चाँद सेहो निःसंदेह प्रसन्न छल, मुदा भीतर -भीतर किछु डेरायल सेहो छल । दुनू चिन्तासँ घरक भीतर -बाहर कऽ रहल छल, एतय धरि जे ओ सभ बाहरसँ आबैत सभ डेगक आवाजकेँ इमाम आ शादुलक आहटि जकाँ जाँचैत छल । पहिने बीबम्मा आ चाँद कहियो ओहि दुनूक बिना नहि रहैत छल; विशेष कऽ शादुलकेँ देखने बिना ओ सभ कहियो नहि रहल छल । शादुलक लेल निअम सँ मुक्त स्थिति रहैत छल । जँ शादुलक पएरमे काँट गड़ि जाइत, तँ ओकर सभक हृदय धक् -धक् कऽ उठैत छल । जँ शादुल भूखल रहैत, तँ ओकर सभक अंतड़ी जरि उठैत छल । एहिना, जखन ओकरा जड़ चढ़ैत छल, तँ ओ सभ एक क’ड़ सेहो नीचाँ नहि उतारि सकैत छल । भले ओ लोकनि उप्पिडी खाइ कऽ सुति जाय, मुदा शादुलक लेल चूल्हि जरबे करैत छल! भले ओ सभ अपन भोजन नहि खाय, मुदा शादुलकेँ अपन एल्युमिनिअमक प्लेटमे भोजन भेटबे करैत छल! शादुल, जे हुनकर सभक जीवनक एहन अभिन्न हिस्सा बनि गेल छल, वास्तवमे मनुष्य नहि वरन् एकटा जानवर छल- एकटा क्रूर बोनहा जानवर जे कोमल प्राणीक रूपमे पोसल -पालल गेल छल । ओकर कारी नाक, कारी रोइयाँक कोट, तेज दाँत, हाँसूक आकारक नह आ छोट -छोट आँखि छल । जतय धरि इमामक गप्प अछि, ओ एकटा एहन मनुष्य छल जे अपन जानवरक चारू कात स्वयं जानवर जकाँ घुमैत छल-छोट खुट्टीक, दुबर -पातर शरीर, उज्जर दाढ़ी, पातर मोंछ, नोंक सन नाक, चंचल आँखि, ठेहुन धरि उठाएल मस्कट लुंगी, कारी कोट, कारी जूता, दहिना हाथमे पीतलक कंगन आ गरामे एकटा ताबीज! गाममे कियो नहि जानैत छल जे हुनकर असली नाम की अछि! ओ पक्कीर वा पक्कीर साहबक रूपमे जानल जाइत छल। शादुल भालु वा सुस्त भालुकेँ कहियो हुनका सँ अलग नहि देखल गेल, ओ सदिखन एकटा निकट संगीक रूपमे संगे घुमैत छल । चबबैत, चलैत, खेलाइत, वा वन वा गाममे रहैत, शादुल सदिखन इमामक पाछाँ -पाछाँ चलैत छल । जखन इमाम ककरो सँ गप्प करैत छल, तँ शादुल ध्यानसँ हुनका तकैत छल । इमामक स्वर सँ शादुल स्थितिक अंदाजा लगा लैत छल । जँ ओ ककरो इमाम पर चिकरैत सुनैत वा इमामकेँ ककरो पर आवाज उठबैत देखैत, तँ शादुल क्रोधित भऽ जाइत छल । जँ इमाम ओकरा नजरि वा शब्दसँ संकेत नहि करैत, तँ शादुल ओहि व्यक्ति पर आक्रमण कएने बिना नहि छोड़ैत छल । इमाम सदिखन हाथमे एकटा जंजीर लेने चलैत छलाह आ शादुल ओहि जंजीरक दोसर छोर अपन मुँहमे दबौने रहैत छल। इमाम आगू आ शादुल हुनकर पाछाँ -पाछाँ। ओ लोकनि प्रतिदिन भोर होयबाक पहिने घरसँ निकलि जाइत छलाह आ राति भेला पर वापस आबैत छलाह; दुनूक बीच आँखि -आँखिमे संदेश क आदान -प्रदान होइत छल। जंजीर रहय वा नहि, शादुल सदिखन इमामक पाछाँ जाइत छल। कखनो -कखनो ओ जमीन सुंघैत आ ओकर बाद अपन थुथुन झुका कऽ हिलाबैत एकटा जोरक चूसबाक (slurping) आवाज करैत छल। ओहि दैनिक दिनचर्याक बादो, कुकुर सभ ओकरा गलीमे आस्ते -आस्ते चलैत देखि भुकैत छल, मुदा शादुल निडर भऽ कऽ अपन धुनमे गम्भीरताक संग चलैत रहैत छल। इमाम लेल शादुल बड़का पुत्र जकाँ छल। ओ प्रेमसँ ओकरा "बेवकूफ" कहैत छलाह, अपन हाथ शादुलक रोइयाँक कोट पर आ गरदनि पर फेरैत छलाह आ दुलार सँ डाँटैत छलाह: "अरे, बेवकूफ!" एतय धरि कि इमाम कखनो काल नशामे शादुलक पास बैसि कऽ कानय सेहो लगैत छलाह। कखनो -कखनो चाँद आ बीबम्मा सेहो शादुलक संग चलैत छलीह। जखन चाँद शादुलक लगपास रहैत छलीह, तखन शादुल हुनकर संग ठट्टा करैत छल, अपन पाछाँक पएर पर ठाढ़ भऽ कऽ कुश्ती लड़बाक मुद्रा बना लैत छल। बीबम्माक संगतिमे ओ बिल्लीक बच्चा जकाँ हुनकर पएरक चारू कात चक्कर लगबैत लाड़ -प्यार मांगैत छल, वा अपन पीठक भर लेटि कऽ पएरसँ हवामे पैडल चलेबाक चेष्टा करैत छल। मुदा इमामक सोझाँ ओ सदिखन आज्ञाकारी बनल रहैत छल। गामसँ बाहर ओकर एकचारी ओकरा सभक अपन संसार छल। चारू जन एकहि छतक नीचाँ रहैत छलाह, गुमार आ जाड़ सेहो संगे काटैत छलाह। जखन जाड़क रातिमे कनकनी बढ़ैत छल, तखन चारू गोटे गरम होयबाक लेल आगिक चारू कात बैसि जाइत छलाह। शादुल आगिसँ डरैत छल, एहि कारणेँ ओ दूर कोनमे सुटकि जाइत छल। जेना ओकरा किचकिचेबाक लेल, चाँद कखनो -कखनो एकटा जरैत मशाल ओकरा देखबैत छल। शादुल डरि कऽ कोनमे आरो सटि जाइत छल। चाँद मशाल उठबैत ओकरा ओहि दिशा मे फेंकबाक धमकी दैत छल, तखन शादुल डरसँ एक कोनसँ दोसर कोन कुदैत छल आ इमाम सँ दया मांगैत सन तकैत छल। चाँदकेँ डाँटि कऽ इमाम तखन शादुलकेँ अपन पास खींचि कऽ अङ्कवार भरि लैत छलाह। जखन तीनू-इमाम, बीबम्मा आ चाँद-एक संग बैसैत छलाह, तखन हुनकर बातचीत प्रायः शादुलक चारू कात घुमैत छल। ओ लोकनि प्रेमसँ शादुलक नटखटपनकेँ याद करैत छलाह। चाँद टिप्पणी करैत छल, "अब्बा, हमर शादुल बुढ़ भऽ गेल अछि?" एहि पर सशंकित भऽ कऽ बीबम्मा कहैत छलीह, "तोहर गप्प सही अछि चाँद! तोरा अकेले हमर, अब्बा आ शादुलक देखभाल करबाक छौ। हमरो उमर ढलि रहल अछि।" ई जानबाक कोनो तरीका नहि छल जे एहि शब्दसँ चाँदकेँ किचकिची लगलै वा नहि, मुदा इमामकेँ ई गप्प निश्चित रूपसँ ठेस पहुँचबैत छलनि। ओ विरोध करैत कहैत छलाह, "शादुल ककरोपर आश्रित नहि रहत। ओ हमर मृत्युक बादो बहुत दिन धरि सहारा देत। कि बुझल छौ, तोरा ओकर रोइयाँ वला खालक कतेक दाम भेटतौ?" जेना इमामकेँ किचकिचेबाक लेल बीबम्मा अपन बात जारी रखैत छलीह, "आह, कतेक... आर दू -तीन सालमे ओ बीमार पड़ि जयत। की हम ओकरा पर जीवित रहब? तखन तँ हमरा ओकरा पटा कऽ सेवा-सुश्रूषा करऽ पड़त, नहि?" इमाम आ चाँदकेँ हुनकर ई गप्प कहियो नीक नहि लगैत छलनि। चाँद हुनकर बातकेँ टालि दैत छलीह: "रहऽ दय... ओ कोनो मनुष्य नहि अछि जे पएर मोड़ि कऽ बिछौन पर पड़ल रहत। ओ जीवन भरि काज करत।" बीबम्मा चाँद आ शादुलक पालन -पोषण बेस प्रेमसँ कएने छलीह। चाँद शादुलक संग खेलाइत छल आ खेलाइत -खेलाइत दुनू बच्चा बनि जाइत छलाह। शादुल चाँदकेँ अपन सहोदर भाई जकाँ लगैत छल। इमामक मनमे एकटा अपराध -बोधक भाव रहैत छलनि। ओ कखनो काल अपन एहि भावकेँ व्यक्त करैत छलाह, "शादुल हमरा लेल सब किछु त्याग कएने अछि। ओ अपन वन -वास छोड़ि हमरा संग रहबाक लेल आएल; ओ हमर जीवन -शैली अपनेलक आ हमरा खातिर एतेक कोमल बनि गेल। ओ वास्तवमे हमर घरमे इजोत लऽ कऽ आएल!" बीबम्मा ओहि दुनू सँ बेसी बुधियार छलीह आ हुनकर विचारमे गम्भीरता रहैत छलनि। ओ चाँद आ शादुलकेँ कहियो अलग नहि देखैत छलीह आ शादुलकेँ सबसँ नीक जकाँ बुझैत छलीह। ओ जीवनक कोनो दार्शनिक सत्य जकाँ कहलनि, "नहि, मात्र हमर घरमे इजोत नहि... ओ हमरा सभकेँ जीवन सेहो देलक, नहि? ओ हमरा लगैत अछि जे पछिला जनममे हमर बच्चा रहल होयत। नहि जानि ओकर ऋण चुकेबाक लेल हमरा आर कतेक जनम लेबय पड़त!" नहि इमाम आ नहिये चाँद बुझि सकलाह जे बीबम्मा की कहय चाहैत छलीह, मुदा हुनकर हृदय कोनो अनचिन्हार हुदहुदी सँ भरि गेल। चाँद आ शादुलक उमेर मोटामोटी बराबर छल- संभवतः बीस -एक्कैस बर्खक बीच! जखन बीबम्मा चाँदकेँ जन्म देलनि, शादुल ओहि समयसँ घरमे खसि-पड़ि कऽ चलैत छल। चाँदक जन्मसँ पहिने शादुल परिवारक भार उठाबैत वयस्क भऽ गेल छल। चाँद ई सब जानैत छल, एहि लेल कहैत छल, "अम्मी, हमर दू टा पिता छथि-अब्बा आ शादुल।" भोरमे जल्दी उठि कऽ इमाम मकइक बालि भिजबैत छलाह। बीबम्मा ओहि भिजायल मकइकेँ सिझबैत छलीह आ चाँद दूध लऽ कऽ आबैत छल। शादुल अपन भूख दूधमे मिलायल मकइक लपसी सँ मेटाबैत छल। तीनू गोटे शादुल पर अपन स्नेह लुटाबैत ओकरा पेट भरि खियाबैत छलाह। घर पर रहैत बीबम्मा शादुलकेँ किछु -ने -किछु चबाबय लेल दैत रहैत छलीह, आ चाँद सेहो जखन बाहरसँ अबैत छल तँ ओकरा लेल किछु -ने -किछु खाइ लेल अनैत छल। शादुल सभटा नीक जकाँ खाइत छल। जतय धरि इमामक गप्प अछि, ओ जखन खाइ लेल बैसैत छलाह तँ शादुलक संग अपन भोजन साझा करैत छलाह। बीबम्मा सप्ताहमे एक दिन निअमपूर्वक ओकरा जाजीक रस दैत छलीह, किएकि हुनकर विश्वास छल जे एकरा सँ शादुलक पेट ठीक रहैत अछि आ पाचन नीक होइत छैक। ई मात्र दू -तीन सालक गप्प नहि छल, ओकर प्रगाढ़ साथ बीस बर्खक छल। ओ लोकनि संगे सुख -दुःख भोगलनि। राति हो वा दिन, चारू गोटे संग रहलाह। ओ लोकनि एक -दोसराकेँ नीक जकाँ बुझैत छलाह। बस एतेक छल जे शादुल बाजि नहि सकैत छल, मुदा ओ ओहि परिवारक अभिन्न अङ्ग छल। मुदा एखन ई सब अतीतक बात भऽ गेल छल। एखन शादुल ओहि एकचारीमे नहि छल। ओ एखन हुनकर हृदय पर अपन ओहि तरहक अधिकार नहि रखैत छल। शादुलक अनुपस्थिति पर बीबम्मा आ चाँद एखन ओतेक दुखक अनुभव नहि कऽ रहल छल। राति भऽ गेल छल आ भोजन रान्हैत चूल्हिसँ निकलैत ज्वालाक अतिरिक्त एकचारीक भीतर कोनो आन रोशनी नहि छल । पहिने ई चूल्हि केवल शादुलक लेल धधकैत छल, मुदा अखन स्थिति बदलि गेल छल । शादुल लगपास नहि छल, एहि लेल चूल्हि अखन अपन परिवारक लेल जरि रहल छल । अपन बेटाक आग्रह पर बीबम्मा ओकरा लेल दूध, चीनी आ सेवइक खीर बना रहल छलीह । चाँद लार टपकबैत अपन माएक बगलमे बैसल छल । "अम्मी... अब्बा अखन धरि नहि अयलाह," चाँद पुनः पुछलक । बीबम्मा कहलखिन, "ओ तखने एताह जखन ओकरा (शादुलकेँ) बेचि देताह..." । चाँद उत्साहसँ पुछलक, "अम्मी... शादुलक ओहि पीड़ासँ तखन हमरा सभकेँ छुटकारा भेटि जायत, नहि?" । बीबम्मा उत्तर देलखिन, "हँ, हमरा लागैत अछि जे हमरा सभकेँ ओकरासँ मुक्ति भेटि गेल । चारि दिन भऽ गेल अछि। जँ तोहर अब्बा कोनो सौदा नहि कएने होइत, तँ ओ कहिया वापस आबि गेल रहितथि। ओ एतेक दिनसँ दूर छथि, एकर अर्थ अछि जे सौदा पक्का भऽ गेल छैक" । "अम्मी... अंततः हमरा सभकेँ दू एकड़ जमीन भेटि रहल अछि, नहि?" । "हँ, भेटि जायत। मण्डल राजस्व अधिकारी नीक व्यक्ति छथि, मुदा हुनकर शर्त छनि जे ई भालु पुनः एतय नहि देखल जाय," बीबम्मा चूल्हिमे जारनि खसबैत कहलखिन। चाँदक उत्साहक कोनो सीमा नहि छल । ओ कहलक, "अम्मी... हम ओहि जमीन पर खेती करब, ओतहि एकटा खोपड़ी बनायब आ कुक्कुट पालन (मुर्गी फार्म) सेहो शुरू करब!" । चाँद लजाइत माएसँ सटि कऽ बैसैत कहलक, "तोरा एकटा निक बहु सेहो भेटतौ!" । बीबम्मा अपन बेटाक उत्साह देखि रहल छलीह आ ओ सेहो अपन पतिक वापसीक प्रतीक्षा कऽ रहल छलीह । मुदा मनक कोनो कोनमे एकटा अस्पष्ट डर आ संदेह नुकायल छल- की इमाम ओहि भालुक संग वापस तँ नहि आबि जेताह? ओ अपन मोनकेँ बुझौलनि; ओ सेहो जमीनक एकटा टुकड़ाक मालकिन बनय चाहैत छलीह । कतेक दिन धरि एहन घुमन्तु जीवन बिताओल जाय? खीर रन्हा रहल छल । दूधमे सेवइक सुगंध पूरा एकचारीमे पसरि गेल छल । बीबम्मा दू टा इलायचीक बीआ निकालि खौलैत दूधमे मिला देलनि । बीतल दिन माता -पुत्र मिलि कऽ पूरा स्थानक साफ -सफाई कएने छलाह। एकरा सँ पहिने घर गंदगीक ढेर जकाँ लगैत छल । जखन जमीन पर खाधि भऽ जाइत छल, तँ ओ लोकनि मात्र कनी पानि छीटि दैत छलाह । हवामे सदिखन एकटा दुर्गंध पसरल रहैत छल, जकर ओ लोकनि अभ्यस्त भऽ गेल छलाह । एहनमे खीरक ई नव सुगंध ओकरा सभकेँ अजीब आ मादक लागि रहल छल । अखन एकचारी पूर्णतः बदलल लगैत छल । ओ लोकनि भालुकेँ बाँधय वला हुक आ लकड़ीक ठूँठ उखाड़ि कऽ बाहर कऽ देने छलाह । ओकर बिछौन, पानि पीबय वला कुण्ड, अल्युमिनिअमक बर्तन आ ओकरा ढकय वला चमड़ाक चादरि-सभ किछु हटा देल गेल छल । बीस बर्खक ओहि सुस्त भालुक कोनो निशान बाँकी नहिराखल गेल छल । एकचारीकेँ पूर्णतः साफ कऽ कऽ सब ठाम लाल माटिसँ नीपि देल गेल छल । चाँद कहलक, "अम्मी... जखन शादुल लगपास रहैत छल, तखन घर कहियो एतेक साफ नहि देखाइत छल, नहि?" बीबम्मा समर्थनमे मुड़ी हिलओलनि । हुनकर अपन इंद्रिय सभ एखन धरि एहि परिवर्तनक अभ्यस्त नहि भेल छल, मुदा चाँद जेना कोनो नव दुनियामे विचरण कऽ रहल छल। ओ साधारण निवास ओकरा एकटा विशाल महल जकाँ लागल आ ओ पहिने कहियो एना प्रसन्न नहि छल । चाँद उत्साहसँ कहलखिन, "जखन शादुल एतय छल, ओ एकटा मुर्गीक बच्चा धरि नहि छोड़ैत छल । एखन हम एकटा कुक्कुट पालन (मुर्गी फार्म) सेहो खोलि सकैत छी, आ बत्तख सेहो... बत्तखक मसुआइक स्वाद बेस नीक लगैत अछि!" बीबम्मा प्रसन्नतासँ अपन पुत्रक संतोषकेँ देखि रहल छलीह, मुदा अपन पतिक बारेमे सोचि डरसँ थरथरा उठलीह। सबसँ पैघ बात ई छल जे हुनकर पुत्र अपन दू एकड़ जमीन पर किसान बनत, ई सोचिए कऽ हुनका अपार आनन्द भेटलनि । कहियो सपनामे सेहो ओ ई नहि सोचने छलीह । ओ ओहि घुमन्तु जीवनकेँ आजीवन अपन नियति मानि लेने छलीह । पहिने ओ कामना कएने छलीह जे हुनकर पुत्र सेहो अपन पिता जकाँ एकटा भालु लऽ कऽ अपन जीवन बितावय । मुदा एखन ओहि कामना आ ओहि जीवनक विचार मात्रसँ हुनका घृणा आ घिन लागैत छलनि। ओ सोचय लगलीह जे ओ कहियो किए एहन कामना कएने छलीह! ओ अपन पुत्रकेँ अपन पास खींचि लेलनि । "सही कहै छह... ओकर लगही जहरीला होइत छैक, नहि? एहि कारणेँ हम एकटा मुर्गीक बच्चा धरि नहि राखि सकलहुँ," एतेक कहि ओ ओकरा गिलासमे गरम खीर दऽ देलखिन। चाँद फूँक मारि खीर ठण्डा कएलनि । जखन ओ बैसि कऽ थोड़ -थोड़ ओकर स्वाद लेबय लगलीह, तँ नव जीवन ओहि खीर जकाँ मधुर लागलनि । बीबम्मा अपन लेल सेहो किछु खीर निकालि लेलनि आ बाकी अपन पति लेल एकटा अल्युमिनिअमक बर्तनमे राखि देलनि । मिठाईक स्वाद लेइत चाँद चिन्ताक स्वरमे कहलखिन, "अम्मी... अब्बा किएक नहि अयलाह... हमरा किछु डर लागि रहल अछि" । हुनकर एहि शब्दक कारणेँ वा मुँहमे अनचोक्के गेल खीरक मिठासक कारणेँ, बीबम्माकेँ हिचकी लागि गेलनि। खाँसैत ओ गिलास नीचाँ राखि देलनि । ओहि समय चाँद एकटा स्पष्ट परिवर्तन देखलखिन। खीरक प्रखर सुगंधक बादो हुनका मल -मूत्रक दुर्गन्धक आभास भेलनि-कोनो अनहोनीक भय जकाँ । कान लगा कऽ ओ डेगक आहटि सुनलखिन: "अब्बा जेहन जिद्दी छथि, ओ ओकरा वापस सेहो आनि सकैत छथि!" एतेक कहि ओ जाँचय लेल बाहर अयलीह। बाहर एतेक अन्हार भऽ गेल छल जे एक मनुष्य दोसरकेँ देखि नहि सकैत छल । दूर गाममे बत्ती सभ टिमटिमा रहल छल, मुदा ओ एकचारीक लगपासक क्षेत्रकेँ प्रकाशित करबाक लेल पर्याप्त नहि छल । एतेक अन्हार भेलाक बादो चाँद अपन पिताक एकचारीक पास आबय कऽ संकेत पकड़ि लेने छल । ओ अपन पिताक चालि सेहो चीन्हि लेने छल । ओ तीव्र दुर्गन्ध हुनकर नथुना धरि पहुँचि गेल छल । ओ डर जे एखन धरि मनमे नुकायल छल, पदचाप जकाँ -जकाँ नजदीक आएल, आरो गहरा भऽ गेल । चाँदक मुँहक मधुर स्वाद तित भऽ गेलनि । किछु क्षण पहिने कऽ सुखद गन्ध एखन हुनकर दम घोंटय लागल छल। हुनकर सन्देह सही साबित भेल, क्रोध आ दुःख एक साथ हुनका घेरि लेलकनि । हाथक गिलास नीचाँ पटकि ओ चिकड़लीह, "तेरी मकू... सुग्गर मारौ! ई शैतानकेँ फेर वापस लऽ कऽ आबि रहल छथि!" बीबम्मा अपन पुत्रक शब्द सुनि कऽ हड़बड़ा कऽ उठलीह। मधुर व्यंजनक स्वाद तखनहि बिला गेल छल, ओ चिन्तित भऽ बाहर आयलीह । हृदय पर हाथ धरि, ई प्रार्थना करैत जे ओ जे सुनलनि ओ गलत साबित हो, ओ गलीमे देखलखिन । अपन सबसँ पैघ डरकेँ सत्य देखि, इमाम आ भालु दू आकृतिक रूपमे हुनकर आँखि कऽ सोझाँ प्रकट भेलाह । जखन माता -पुत्र बाहर अयलाह, इमाम अंगना धरि पहुँचि गेल छलाह । ओ जानैत छलाह जे भालुक संग हुनकर स्वागत नहि होयत । तखनो ओ हठपूर्वक ठीक सोझाँ ठाढ़ भऽ गेलाह । शादुल, जे एहि सब परिस्थिति सँ अनजान छल, एकचारीक भीतर अपन ठाम पहुँचय कऽ प्रयास कएलक, मुदा इमाम रस्सा सँ खींचि कऽ ओकरा रोकि देलखिन । चाँद अपन पिता पर क्रोधित दृष्टि डालैत आगू बढ़ल आ बीबम्मा सेहो ओतबे क्रोधमे हुनकर सोझाँ अयलीह । बीबम्मा शोकाकुल स्वरमे बिख-सबिख भऽ कहलखिन, "तोरा की भऽ गेलौ, जे ओकरा वापस लऽ कऽ आबि गेलें? किछुओ दाम मांगि कऽ ओकरा देल जा सकैत छल... जँ एखन नहि तँ बादमे पैसा दऽ दितै... जँ पैसा नहि छलै, तँ मुफ्तमे दऽ कऽ आबि सकैत छलौं... हम ओहि पीड़ासँ मुक्ति पाबि सकैत छलहुँ... ई तँ हमरा सभकेँ सनि जकाँ चिपकल अछि!" इमाम कमजोर भऽ दलानेपर बैसि गेलाह । ओ भोर होयबाक पहिनहिये अपन सारेक घरसँ निकलल छलाह । ओ स्थान दूर छल आ दिन भरि हुनका पएरे यात्रा करबाक छल । एक -दू स्थान पर कोनो ट्रकमे सवारी भेटबाक संभावना छल, मुदा ओ ओकरा आवश्यक नहि बुझलनि । ओ एकर बदलामे शादुलकेँ पएरे लऽ जाएब बेसी नीक बुझलनि । ओहि पएरे यात्राक पीड़ा, शादुलकेँ खोयबाक पीड़ाक सोझाँ हारि गेल छल । गोट रस्ता शादुलकेँ पएरे लऽ जाइत इमाम ओकर बारेमे बहुत सोचलनि । हुनका पास पर्याप्त टका नहि छल। शादुलक खाय लेल किछु मकइक भुट्टा खरीदबाक आ दू ठाम पानि पीबय लेल रुकबाक अतिरिक्त ओ ओकरा लेल बहुत किछु नहि कऽ सकलाह । ओ जानैत छलाह जे शादुल लेल एतेक पर्याप्त नहि छल । जखन बीबम्मा क्रोधसँ बिख-सबिख भऽ रहल छलीह, इमाम असहाय भऽ देखि रहल छलाह । शादुल एहि सभमे सँ किछु नहि जानैत छल, आ जँ ओ किछु बुझैत छल तँ ओ मात्र ओकर भूखक बारेमे छल । एहि कारणेँ ओ अपनाकेँ मुक्त करबाक लेल रस्सा खींचि रहल छल । एक बेर मुक्त भेला पर इमामक चारू कात दू बेर घूमि ओ बीबम्माक पास गेल । ओ सोझ ठाढ़ भऽ हुनकर हाथ धरि पहुँचबाक प्रयास करय लागल । ओ हाथ जे पहिने ओकर रोइयाँदार शरीर पर प्रेमसँ फिरैत छल, पाछाँ हटि गेल । ओ पएर जे कहियो ओकर स्वागत लेल आगू बढ़ैत छल, पाछाँ हटि गेल । ओ आँखि जे हाल धरि ओकरा स्नेह आ दया सँ निहारैत छल, एखन आगि उगलैत छल । एक क्षणमे शादुल ओहि परिवर्तनकेँ देखि लेलक जे ओकरा प्रति आएल छल । अपन पएर नीचाँ कऽ शादुल पाछाँ हटि गेल । झुकल माथ आ नीचाँ जमीन सुंघैत ओ आस्ते-अस्स्ते घरमे प्रवेश कएलक । भीतरक भाग किछु नव सन छल । जेना कोनो पक्षी अपन उजड़ल खोताक चारू कात उड़ैत अछि, ओ अपन वस्तुसभक खोजमे घरक चारू कात चक्कर लगओलक । ओ अपन नाम थुथुनसँ उकासी केलक आ आवाज निकाललक । ओ अपन धातुक प्लेट, अपन पानिक टब, सुतय लेल अपन बिछौना आ ओहि लकड़ीक ठूँठकेँ खोजलक जतय ओ प्रायः बाँधल जाइत छल । शादुल अपन सामान्य उपयोगक ओहि वस्तुसभमे सँ कोनो कऽ निशान नहि पओलक । एकचारीक किछु चक्कर लगौला कऽ बाद ओ अंगनामे इमामक पास आबि गेल आ हुनकर पास सुटकि कऽ बैसि गेल । इमाम ओकर आँखिमे पीड़ा, पेटमे भूख आ ओकरा संग कएल गेल व्यवहारमे अंतर देखि रहल छलाह । आँखि नम कऽ इमाम ओतहि बैसि अपन हाथ शादुलक झबरा रोइयाँ पर ऊपर -नीचाँ फेरय लगलाह । ओहि आंगुर सभक माध्यमसँ शादुल धरि की संदेश गेल, ई तँ नहि जानल जा सकल, मुदा ओ इमामक आरो लग सटि गेल । इमाम जेना सोचमे डूबल ओकर रोइयाँकेँ सहलावय लगलाह। हुनकर भीतरक डर हुनकर आंगुरसभक माध्यमसँ कंपकपीक रूपमे बाहर निकलि रहल छल । किछु काल धरि कियो किछु नहि बाजल। बेचैन आ क्रोधित चाँद भीतर -बाहर कऽ रहल छल, जखनकि इमाम बाहर छलाह । बीबम्मा दुआरिक सहारे झुकि हुनका तीव्रता सँ देखि रहल छलीह । अंतमे अपन जिज्ञासा पर नियंत्रण नहि राखि सकला पर शब्द हुनकर कण्ठ सँ निकलि गेल । ओ बाजल छलीह, "तूँ कोनो खोज -पुछारीक जवाब नहि दैत छह... तूँ गुड़क धोकड़ा सन निश्चल बैसल छह ; गुड़ सन -पीटल पाथर जकाँ अचल। तोरा की भऽ गेलौ? अंतमे तूँ मामिलाकेँ अनिर्णीत छोड़बाक योजना बना रहल छह?" एतेक कहि ओ अपन पतिक दिस चललीह । शादुल किछु भाँपि कऽ सोझे बैसि गेल आ बीबम्मा कऽ दिस घबराहट सँ देखैत इमामक पास सुटकि गेल । अपन दु:ख पर काबू पाबैत इमाम उत्तर देलनि, "तोरा की बताबियौ? ओ सेहो एकटा एहनहि भालु सँ छुटकारा पाबय कऽ प्रयास कऽ रहल छल। ओ हमर ऊपर अपन भालु थोपबाक योजना बना रहल छल"। "कारी मुँह बला बदमाश!" बीबम्मा अपन आपा खोबैत चिकड़लीह । "तखन ओकर घरक तीन बेर चक्कर लगाबय सँ की भेल? तोरा तँ ओतय सँ सोझे अवुनूरु जएबाक छलौ" । "नहि अवुनूरु... नहिये गुडेम! हम सभ गाम आ सभ ठाम गेलहुँ- चिंतामडुका, बदुनाकल सेहो गेलहुँ । कियो ओकरा खरीदय लेल आगू नहि आएल, सभ साफ मना कऽ देलक। सभ ठाम एकहि स्थिति अछि जे भालु सभ कहियो नहि देखल जाय । ऊपर सँ दू ठाम पुलिस हमरा रोकि लेलक" । किछु याद कऽ बीबम्मा घबरा कऽ पुछलनि, "अपन गामक कियो देखलक की?" इमाम अपन मूड़ी हिला कऽ संकेत देलनि जे कियो नहि देखलकनि । "एतेक काज लेल तूँ एतेक दिन किएक लगा देलें? तोरा तँ परसू वापस आबय कऽ छलौ," बीबम्मा बाजि उठलीह। "जँ हम वापस आबि जइतहुँ तँ तूँ की करितह?" ओ ओतबे क्रोधमे पलटि कऽ जवाब देलनि । चाँद घरक भीतरसँ ओकर गप्प -सप्प सुनैत रहल। अपन पिता सँ व्यथित भऽ ओ क्रोधमे हुनका पर टूटि पड़ल आ माएक प्रतिक्रियासँ पहिनेहि चिकड़ल, "हम किछु 'एन्ड्रिन' पी कऽ मरि सकैत छी । वएह हमर भाग्यमे एखन धरि अछि । तूँ असगर रहि जयबह । तेरी...!" ओहि घरक कोलाहल आ शब्द सभ शादुलमे किछु डर पैदा कऽ देलक, एहि कारणे ओ इमाम लग चलि गेल, जेना हुनकर कोड़ा ओकरा लेल दुनियाक सबसँ सुरक्षित आश्रय होय । कखनो -कखनो झुकि ओ जमीन सुंघैत छल आ चुट्टी आ दिबार सभकेँ चूसय लेल जोर सँ आवाज करैत छल । मुदा शीघ्रे ओ ईहो करब बंद कऽ देलक । इमाम कोनो आवाज नहि कएलनि । शादुलक डरकेँ भाँपि कऽ ओ ओकरा एकटा बच्चा जकाँ अपन आरो पास खींचि लेलनि । माता -पुत्र दुनू अपन आवाज ऊँच कऽ ओहि विषय पर आपत्तिजनक भाषामे बहस करैत रहलाह । इमाम अंगनेमे रस्सीक खाट बिछौलनि आ थकल -हारल शरीरसँ ओहि पर ढहि गेलाह । एकचारीक दू बेर आर चक्कर लगौलाक बाद शादुल खाटक नीचाँ विनीत भावसँ बैसय लेल वापस आबि गेल । चाँद अपन पिताक संग एहि मामिलाकेँ अन्तिम रूपसँ सुलझेबाक निर्णय कएलनि । दू एकड़ जमीन खोयबाक डर हुनका अपन पितासँ टकरेबाक लेल मजबूर कऽ देलक। मण्डल राजस्व अधिकारी (एमआरओ) अगिला भोर ओकरा देखय आबय वला छलाह । जँ ओ भालुकेँ एखनहुँ लगपास देखताह, तँ ओ जमीनक पट्टा जारी नहि करताह- ओ दस्तावेज जे इमामकेँ भूमिक कब्जा आ मूल्यांकनक अधिकार दैत अछि । तखन ओ चाँदक कोनो बात नहि सुनतथि । एहि कारणे चाँद ओहि राति भालुसँ छुटकारा पाबय लेल कटिबद्ध छल। जतय पिता लेटल छलाह ओहि खाटक पास जा कऽ खतरनाक ढंगसँ ओ कहलखिन, "तूँ शादुलसँ छुटकारा पयबह की नहि... वा तूँ चाहैत छह जे हम ई करी? एहि राति तय करबाक अछि।" सभक आँखि एखन धरि अन्हारमे देखबाक अभ्यस्त भऽ गेल छल, तखनो एक -दोसराकेँ मात्र झलफल देखि सकैत छलाह । इमाम खाट पर बैसि गेलाह । असहाय भऽ हुनकर आवाज दु:खसँ भारी भऽ गेलनि, "तोरा की करबाक छौ? की हम ओकरासँ छुटकारा पयबाक आवश्यकतासँ इनकार कऽ रहल छी? हमरा बताउ की करी? हमरा ईहो बताउ की कतय जाइ? हम तोहर सभ कहल करब।" बीबम्मा, जे तखन धरि ओकर दुनूक बीचमे ठाढ़ भऽ गेल छलीह आ पिता -पुत्रक प्रतिक्रियासँ डरैत छलीह, अपन पतिक शब्दसँ हुनकर भयभीत मनकेँ किछु शान्ति भेटलनि। अपन पतिक शब्दसँ सहमत होइत बीबम्मा चाँदसँ कहलखिन, "हँ... तूँ अकेले हमरा बता! हमर शब्दक कोनो मोल नहि अछि । हम की करी... तूँ जे कहबह!" चाँद हुनकर शब्दसँ किछु राहत महसुस कएलनि, ओना ओ अखनहुँ आक्रामक मुद्रा मे छल । जखन निर्णय लेबाक भार हुनका पर छोड़ल गेल, तँ ओ किछु हिचकिचायल । तखनो ओ अपन मनक गप्प स्पष्ट कएलखिन, "चलू, एकटा गहीर खाधि तैयार करू आ आइ राति ओकरा ओहिमे गाड़ि देब, तखन एहि अभिशापसँ मुक्ति भेटत।" बीबम्मा कोनो आवाज नहि निकाललनि, मुदा इमाम चौंकि पड़लाह , "की... जखन ओ जीवित अछि?" चाँद कोनो समय गमेने बिना भीतर गेल आ हाथमे एकटा गैंती आ कोदारि लय कऽ बाहर आयल आ कहलक, "हँ गाड़ि देब... जँ जीवित नहि, तँ मारि कऽ गाड़ि देब।" ओहि एकचारीमे बिजली नहि छल । सभ साँझ चाँद बिजलीक खाम्ह पर दू टा तार फेकि कऽ बिजली अनैत छल आ भोर होइते ओकरा हटा लैत छल । मुदा ओहि साँझ ओ ई करब बिसरि गेल। एहि कारणे एकचारीक भीतर -बाहर अन्हार पसरल छल आ चूल्हिक आगि सेहो मिझा गेल छल । चाँद हाथमे गैंती आ कोदारि लय कऽ ओहि अन्हारमे अंगनाक एक कोनमे चलि गेल। शादुलकेँ जियते गाड़ि देबाक विचार मात्रसँ इमाम सिहरि उठलाह, हुनका ई अकल्पनीय आ घृणित लागल। ओ खाट सँ कोनो तरहें अपन शरीरकेँ उठबैत चाँदक हाथ पकड़ि विनती कएलखिन, "अरे चाँद बेटा... हमर बच्चा, कनी थम्हू... कनी प्रतीक्षा करू, चलू किछु सोचै छी... कनी थम्हू!" चाँद हुनका खतरनाक नजरि सँ देखलखिन, मुदा अन्हारक कारणेँ ककरो किछु नहि सुझल, नहि तँ इमाम डर सँ थरथरा उठिताह। चाँद अपन पिताकेँ एतेक जोर सँ धक्का देलखिन जे इमाम पीठक भर खसैत-खसैत बचलाह आ बीबम्माक सहारा सँ अपन संतुलन बना सकलाह। "देखू अब्बा... अहाँक राय एहि मामिलामे अलग लगैत अछि, मुदा अहाँक व्यवहार किछु आन कहैत अछि। सत्य ई अछि जे अहाँकेँ शादुलकेँ छोड़बाक कोनो इरादा नहि अछि। एहि कारणेँ अहाँ ओकरा बेचने बिना वापस आबि गेलहुँ। आइ राति नहि अहाँ आ नहिये अहाँक पुरखा ओकरा गाड़ल जाए सँ रोकि सकैत छथि।" "अरे बेटा... ओहन बात नहि अछि..." इमाम ओकरा बुझेबाक प्रयासमे बड़बड़यलाह। चाँद कोनो बोनहा जानवर जकाँ हुनकर दिस बढ़ल। ओतहि बीबम्मा फुर्ती सँ ओहि दुनूक बीचमे आबि ठाढ़ भऽ गेलीह। अन्हारमे ओ सभ एखनहुँ एक -दोसराकेँ झलफल देखि सकैत छलाह। "मात्र एक शब्द... अहाँ ओकरा गाड़ब की नहि... वा अहाँ चाहैत छी जे हम ई काज करी? अहाँकेँ याद अछि जे उप -निरीक्षक (एसआई) की कहने छल?" बीबम्मा अपन पुत्रकेँ किछु नरम करबाक लेल बीचमे कहलखिन, "ओ एसआई बेस तमसाह लोक छथि। जँ हुनका पता चलि गेलैन जे हम सभ झूठ बाजलहुँ अछि, तँ ओ जियते हमर सभक चाम खीचि लेताह।" इमाम जीह काटि कऽ रहि गेलाह। अपन पिताक उत्तरक प्रतीक्षा कऽ कऽ चाँद हुनकर मौन देखि फेर धमकी देलखिन, "जँ अहाँ हमर रस्तामे अयलहुँ... तँ ऐ शादुलकेँ नहि... अहाँकेँ काटि कऽ ओहिमे गाड़ि देब! तेरी...!" एतेक कहि ओ कनी दूर जा कऽ खाधि खुनय लगल। बीबम्मा किछु अस्पष्ट शब्द बुदबुदयलीह। इमाम निराश भऽ कऽ पुनः अपन खाट पर लेटि गेलाह। खाटक नीचाँ शादुल जोर -जोर सँ फोंफ काटि रहल छल। पछिला दस दिन इमाम लेल बेस कष्टकारी रहल छल, ओ शादुलक भविष्यक चिन्तामे एतेक व्याकुल छलाह जे ओकरा पेट भरि खियाइयो नहि सकलाह। शुरूआतक एक -दू दिन शादुल भूखक पीड़ाकेँ साहसपूर्वक झेललक। अपन मूड़ी उठा कऽ जोर सँ घुरघुराइत ओ सभ पर क्रोध सँ देखैत छल, मुदा बादमे ओकरा एकर अभ्यास भऽ गेलैक। किछु करबामे असहाय ओ दयापूर्वक अपन मालिकक दिस देखैत छल। तखनो, इमाम अगिला एक -दू घण्टामे शादुलक अन्त भऽ जाएत, एहि विचार सँ समझौता नहि कऽ सकलाह। एहि चिन्तामे ओ शान्त नहि बैसि सकलाह। ओ एकचारीक भीतर गेलाह आ माटिक बर्तनमे किछु बालि खोजय लगलाह, मुदा बर्तन खाली छल। ओकर बदलामे हुनका एकटा लटकल बर्तनमे किछु सिझल भात भेटलनि। शादुलक बर्तन नहि भेटला पर ओ अपनहि घिसल प्लेटमे दू ढेपाभात लय कऽ बाहर अयलाह। इमाम वापस आबि शादुलक सोझाँ प्लेट राखि देलखिन। भोजनक गन्ध पाबि शादुल खाटक नीचाँ सँ बाहर आयल। इमाम शादुलक कपार पर हाथ फेरैत ओकर मुँहक जाबी खोलि देलखिन। शादुल दू बेर सुंघलक आ निराश भऽ कऽ भातक किछु ढेपाचुनि कऽ खाय लागल। एहि बीस बर्खमे शादुल कहियो भात नहि खयने छल। बीबम्मा सदिखन मना करैत छलीह जे भात सँ वात बढ़ैत छैक। चाँद सेहो माएक बात मानैत छल, एहि लेल शादुलकेँ भात सुंघबोले नहि दैत छल। एतय धरि जे जखन कखनो ओकरा भात पड़सल जाइत छल, शादुल ओकरा अस्वीकार कऽ दैत छल। चाँद स्वयं कामारेड्डी जा कऽ शादुल लेल मकइ आ ज्वार किनैत छल। ओकरा एक संगे पिसबा कऽ बर्तन भरि कऽ रखैत छल। ओ एक लीटर दूध सेहो किनैत छल आ शादुलकेँ मकइ -दूधक लपसी खियाबैत छल। शादुलक भोजनक मामिलामे ओ ककरो पर भरोसा नहि करैत छल। इमाम एक बेर एकर विरोध कएने छलाह, "तूँ ओकरा सभ किछु किएक दऽ दैत छह? हमर बारेमे की? ओकर भोजनमे कनी कटौती करह।" एहि पर चाँद अपन बचाव करैत कहलखिन, "हम मनुष्य छी... हम कम सँ कम आशा पर जिऐत रहि सकैत छी। मुदा ओकरा भोजनक अतिरिक्त की अछि? हम ओकरा अपन परिश्रमक फल खियाबैत छी, अहाँक नहि।" बीबम्मा सेहो चाँदक बातक समर्थन करैत छल। कइएक एहन दिन आएल जखन ओ सभ भूखल रहलाह आ मात्र पानि पी कऽ रहलाह, मुदा शादुलकेँ दूध खियओलाह। अखन शादुलकेँ भोजन दैत इमाम ओहि बीतल दिन सभक बारेमे सोचय लगलाह। स्थिति पूर्णतः उलटि गेल छल आ ई इमामक मन पर भारी पड़ि रहल छल । ओ ओहि अन्हारमे बीबम्माकेँ खोजलनि मुदा देखि नहि सकलाह । ओ चाँदकेँ देखलनि जे पूर्ण एकाग्रताक संग अंगनाक एक कोनमे बिना कोनो रोक -टोकक खाधि खुनयमे लागल छल । ओकरा देखिते भयभीत आ व्याकुल भऽ इमाम पुनः अपन रस्सीक खाट पर ढहि गेलाह । शादुल, जे दू घोंटमे भोजन निगलि गेल छल, आर भोजनक खोज कएलक, मुदा इमामकेँ खाट पर पसरल देखि ओ निराश भऽ गेल । ओ पुनः खाटक नीचाँ सुटकि कऽ बैसि गेल । चाँद गैंती सँ धरती कोड़ैत रहल । ओहि सुन-सन्नाटामे गैंतीक घर्षणक ध्वनि इमामकेँ अपन हृदय पर गहीर प्रहार जकाँ लागल। डरक मारे ओ अपन शरीरक सभ नसमे कंपकपी महसुस कएलनि आ हुनकर रोइयाँ ठाढ़ भऽ गेलनि । ओ भावनाक उद्रेक सँ व्याकुल भऽ बैसि गेलाह। "हे... बीबी..." इमाम जोर सँ अपन पत्नीकेँ पुकारलनि । आश्चर्यचकित भऽ बीबम्मा एकचारी सँ बाहर आयलीह । "ओ बीस बर्ख धरि हमर सेवा कएने अछि आ बीस बर्ख धरि हमर देखभाल कएने अछि । की हम ओकरा एखन जियतहि गाड़ि देब?" बीबम्मा किछु क्षण धरि कोनो उत्तर नहि देलखिन । इमाम आशा कऽ रहल छलाह जे ओ शादुलक आसन्न अन्त पर शोक प्रकट करतीह, किएकि ओ जानैत छलाह जे बीबम्मा ओकरा कतेक स्नेह करैत छलीह । हुनकर मन बदलबाक विचार सँ इमाम तर्क कएलनि जे ओ हुनकर बेटा थिक, चाँदक समर्थन कऽ सकैत छथि, मुदा की हम हुनकर मन नहि जानैत छी? । हुनका सुनि बीबम्मा क्रोध सँ फुफकारलखिन, "हम तोरा मात्र एकटा बात पूछब । तूँ जमीन चाहैत छह की नहि? तूँ हमरा सुख सँ रहबाक अनुमति देबह की नहि?" इमाम किछु क्षण धरि आहत भऽ हुनका देखैत रहलाह आ हुनकर आँखि क्रोध सँ चमकि उठलनि । बीबम्माक बातक जवाब ओ ओतबे तीव्रता सँ देलनि, "नहि... हम ने तऽ जमीन चाहैत छी ने माटि। की हम एतेक बर्ख जीवित नहि रहलहुँ... आ की भविष्यमे नहि रहब?" इमामक आवाज पीड़ा सँ भरल आ शब्द अस्पष्ट छल । चाँद ओहि शब्दकेँ सुनि लेने जकाँ लागल । ओ हाथक गैंतीकेँ धरतीमे दू गुणा जोर सँ कड़कड़ाहटक संग गाड़ि देलखिन । जँ ओहि तीक्ष्ण घर्षणक ध्वनि इमामकेँ कष्ट देलक, तँ बीबम्मामे भय उत्पन्न कऽ देलक । ओही डर सँ बीबम्मा अपन पति सँ उत्तर मांगय लेल प्रेरित भऽ कहलखिन, "जँ तोरा जमीन नहि चाही, तँ की ओकरा (चाँदकेँ) नहि चाही? । तूँ ओकरासँ कोन जीवन बिताबय कऽ आशा करैत छह? । की तूँ सोचैत छह जे ई जमीन सदिखन बाँटल जायत? ।ओ हमरा जमीन दऽ रहल अछि किएकि एकर चर्चा अखनहि भेल अछि । बादमे जँ तूँ मांगय जयबह तँ की ओ देतौ, किएकि तोरा पास शादुल अछि जाहिसँ तोहर जीविका चलैत छौ?" इमाम कोनो शब्द नहि बाजलखिन । ओहि आवेशक बाद बीबम्मा कनी नरम भऽ अपन पति केँ फुसलायब शुरू कएलखिन, "ओकर इच्छा आ ओकर मर्जी, तूँ चुपचाप अपन हाथ -पएर मोड़ि कऽ बैसल रहह । ओ जे करैत छैक, करय दहक। हमरा की पता जे ओ ककरा सँ की कहलक । ओ एखन क्रोधित अछि आ मारि देबाक वा मरि जएबाक धमकी दऽ रहल अछि । जँ तूँ आइ राति पहाड़ आ जङ्गलमे निकलि गेलें, तँ हम कतय जाएब आ केकरा संगे जाएब? जँ ओ नहि सुनैत अछि तँ के की कऽ सकैत छैक? । की हम एहि भालु लेल अपन बेटाकेँ मारि देब?" इमाम हुनकर मन आ निर्णय स्पष्ट रूप सँ बुझि गेलाह । एकटा अवर्णनीय चिन्ता हुनका व्याकुल कऽ देलक । क्षितिज पर चाँदनी फूटि रहल छल । अन्हार घुलल एकटा झलफल प्रकाश चारू कात पसरि गेल । ओहि मद्धिम रोशनीमे ओ सभ एक -दोसराकेँ स्पष्ट देखि सकैत छलाह। गैंती गहीर गाड़ि कऽ चाँद कोदारि सँ माटी निकालय लागल । बीबम्मा सेहो खाट कऽ पास लेटि गेलीह, जखनकि इमाम पएर मोड़ि कऽ लेटल छलाह । खाट कऽ नीचाँ शादुल जोर -जोर सँ फोंफ काटि रहल छल । चाँदनी रातिक दृश्य देखि इमामक मनमे कइएक टा पुरान विचार जागय लागल। जखन कहियो हुनका शादुलकेँ कोनो गाम लय कऽ जाएब होइत छलनि, तँ ओ सदिखन एहन चाँदनी रातियेकेँ चुनैत छलाह। शादुल सेहो ओहि चाँदनी राति सभसँ प्रेम करैत छल आ बिना थकल कतेकहुँ दूरी धरि हाँफने बिना चलि सकैत छल । ओ चाँदनीक नीचाँ मगन भऽ कऽ अपन मनोरंजन सेहो करैत छल । विचारमे डूबल इमाम शादुलक जन्म आ ओकर बादक घटनाक्रमकेँ याद करय लगलाह । बीस बर्ख पहिने एहनहि चाँदनी रातिमे ई भालु हुनकर हाथ लागल छल । ओहि समय ई छह मास सँ कनी बेसीक बच्चा छल । बीबम्मा सेहो तखन हुनका संगे छलीह आ चाँद मात्र एक बर्खक छल। तीन दिन धरि राति -दिन जङ्गलमे भालुक माँद (गुफा) क पास घात लगा कऽ बेस कठिन प्रयासक बाद ओ लोकनि शादुलकेँ पकड़ने छलाह । जँ एक क्षणक सेहो देरी भेल रहितैक, तँ मादा भालुक चांगुरसँ हुनकर मृत्यु निश्चित छल! ओहि कठिन प्रयास आ फेर ओहि प्रेमसँ भालुकेँ पोसबाक सभटा स्मृति इमामक मनमे एक -एक कऽ कऽ खुलय लागल । "अरे इमाम!" एक दिन चन्द्रैया हुनकर एकचारीक सोझाँ ठाढ़ भऽ कऽ हुनका पुकारलखिन । इमामक पिताक मृत्यु भेला मात्र एक बर्ख भेल छल । हुनकर पिताक मृत्यु वला दिनहि हुनकर पोसल भालु सेहो मरि गेल छल । इमाम अपन हितैषी पिता आ आजीविकाक सहारा ओहि भालुक क्षतिसँ बेस दुखी छलाह । इमाम ई सोचि कऽ बाहर अयलाह जे कियो हुनकर शोकमे शामिल होयबाक लेल आएल अछि । बाहर चन्द्रैयाकेँ देखि ओ हुनका खाट पर बैसबाक इशारा कएलखिन । चन्द्रैया बैसतहि शिकाइत कएलखिन, "हमर फली (बादाम) क फसल पर एकटा भालु हमला कऽ रहल अछि... ओ सभ राति हमर खेत कोड़ि कऽ कहर मचाबैत अछि" । इमाम कहलखिन, "हम ओहिमे की कऽ सकैत छी? हमर अपन भालु मुइला मात्र एक साल भेल अछि। जखन ओ जिऐत छल, तँ कहियो ककरो फसल नहि छुलक" । चन्द्रैया कहलखिन, "अरे बताह... हमर बात तँ पूरा सुनह। हम तोरा ई बताबय आयल छी किएक तँ तूँ अपन भालु खो देने छह, हमर खेत पर हमला करय वला भालु एकटा मादा अछि आ ओकरा संगे एकटा बच्चा सेहो अछि । जँ तूँ ओकरा पकड़ि लेबह, तँ एक बर्खमे ओकरा सभ खेल सिखयबह आ तोहर जीविकाक साधन सेहो भऽ जयतौ। तूँ एकटा भालु राखय कऽ लालसा रखैत छह, नहि?" ई गप्प इमामकेँ नीक लागल, मुदा ओ जाल ओछा कऽ भालुकेँ पालतू बनेबामे कोनो विशेषज्ञ नहि छलाह । हुनकर पिता हुनका मात्र खेल देखेबाक तरकीब सीखने छलाह, मुदा भालुकेँ पकड़बाक आ पालतू बनेबाक तरीका नहि । बीबम्मा सुझाव देलखिन, "देखू... एक बेर अपन दिस सँ प्रयास कऽ कऽ देखू । एकटा प्रशिक्षित भालु खरीदय लेल हमरा सभकेँ कम सँ कम दू -तीन हजार टका खर्च करय पड़त । एकर बदलामे जँ हम ओकरा पकड़ि सकलहुँ, तँ लाभदायक रहत! हम ओकरा प्रशिक्षित कऽ सकैत छी!" बीबम्माक ई प्रस्ताव अजमाबय लायक लागल । इमाम चन्द्रैयाकेँ कहलखिन जे ओ ओही राति ओकर खेत पर जयताह । रातिमे चाँदनी पसरल छल, इमाम चन्द्रैयाक खेत पर गेलाह आ मध्यरात्रि धरि प्रतीक्षा कएलखिन, मुदा भालुक कोनो निशान नहि देखलनि! ओ मोटामोटी हारि मानि कऽ घर वापस आबय वला छलाह जे भालुक हाँफबाक आवाज हुनकर कानमे पड़लनि । इमाम एकटा झाँखुड़क पाछाँ नुका कऽ देखय लगलाह । भालु अपन माँदसँ बाहर निकलल । ओ बड़का आ झबरा रोइयाँक कोटसँ भरल देखाइत छल । चाँदनीक सफेदीमे ओकर कारी रोइयाँ चमकय लागल । ई भालु देखि इमामकेँ अपन मृत भालुक याद आबि गेलनि । जँ ओ मरि नहि गेल रहितैक, तँ इमाम ओकरा ईहे भालु बुझि लैताह! भालु लटपटा कऽ झाँखुड़ सभकेँ पार करैत एहन निडरतासँ चलल जेना पूरा जङ्गल ओकरे होय । ओना इमाम भालु सभक व्यवहार आ आदतिकेँ नीक जकाँ जानैत छलाह, मुदा ई बोनहा भालु हुनका नव सन लागल । ओकर चालिमे एकटा गरिमा, गतिमे निडरता आ नजरिमे एकटा सतर्कता छल । इमामक आँखि भालुक बच्चाक खोज कऽ रहल छल, मुदा कोनो बच्चा नजरि नहि आएल। एकटा बड़का भालुकेँ पकड़ब कोनो खेल नहि छल, ऊपर सँ ओकर जीवन -शैलीकेँ बदलब तँ मोटामोटी असंभव छल। नहिये ओकर बोनहा जीवनक गन्ध जल्दी लुप्त होइत छैक, नहिये ओ सहजहि अपनाकेँ पालतू बनबाक लेल समर्पित करैत अछि। ओ मनुष्य सभक लेल ओकरा पालतू बनेबाक लेल उपयुक्त नहि अछि। जहाँ धरि ओकरा खेल -तरकीब सिखयबाक गप्प अछि-बेसी नीक जे नहि सोचू, ई बेस थकाऊ काज छल। नर आ मादा भालुक बीच, नर भालुक संग ई आरो कठिन छल। कठेराक झाँखुड़ सभक पाछाँ सँ, मंगाक झाँखुड़ सभक फल सुंघैत, जमीन खोधैत, भालु मुँह खोलि लगपासक हवा सुंघैत आ दिबड़ा-भीर सभ लेल जमीन हिलाबैत, मूड़ी उठा कऽ टहलि निकलल छल। जङ्गलमे एकटा संन्यासी जकाँ स्वच्छन्द घुमबाक अभ्यस्त, ओकर चालिमे डरक कोनो निशान नहि छल। भालुक दर्शन सँ इमामक साँस थमि गेल, आ जेना अपन बहुत दिनक हेरायल मित्र सँ भेंट करैत होथि, ओ रोमांचित भऽ कऽ देखैत रहलाह। बोनहा सुस्त भालु ओहि झाँखुड़ धरि चलि आएल जतय इमाम नकायल छलाह आ मूड़ी उठा कऽ जोर सँ गुरड़ल। इमाम हृदय पर हाथ धरि ओकरा देखैत रहलाह। हुनकर प्राण ओही क्षण भाप बनि कऽ उड़ि गेल जकाँ लागलनि। इमाम सोचि रहल छलाह जँ मादा भालु हुनका देखि लेत तँ? ओना अपन सुरक्षा लेल ओ इप्पाक फूल सँ बनल देशी शराब अपन पूरा शरीर पर लगेने छलाह। मादा भालु ओहि स्थान पर ठाढ़ भऽ कऽ जोर सँ घुरघुराय लागल। इमाम जिबैत बचि निकलबाक सभटा उम्मीद छोड़ि देने छलाह। ओ सोचलनि: भालु शिकारी कुकुर सभ सँ बेसी फुर्तीला होइत अछि। शत्रुकेँ सुंघि कऽ निकालबाक क्षमता सेहो ओकरामे बेसी होइत छैक। मादा भालुकेँ हवामे मानवीय गन्धक आभास भऽ गेल छल। ओ हमरा नहि छोड़त, निश्चित रूप सँ हमर शिकार कऽ लेत। हम की करी, की हम भालु -प्रशिक्षकक परिवार सँ आबि कऽ अन्ततः एकटा भालुक हाथे मारल जाएब? वास्तविकतामे इमाम ओहि दिन शिकार करय नहि गेल छल। ओ मात्र भालुक रहय वला ठामक विवरण नोट करय गेल छल। ओहि कारणेँ ओ अपन पास माचिसक डिबिया सेहो नहि रखने छलाह। एकटा माचिसक काठी सेहो ओकरा निश्चित मृत्यु सँ बचाबय लेल पर्याप्त होइत, मुदा ओ ओकरा सेहो नहि आनने छलाह। अन्तिम प्रयासक रूपमे इमाम अपन पएरक सहारे भागि निकलबाक सोचलनि, मुदा ओ जानैत छलाह जे अपनाकेँ बचाबय कऽ संभावना बहुत कम छल, किएकि भालु घोड़ा सँ सेहो तेज दौगि सकैत अछि। ओ गाछ पर चढ़ि सकैत अछि, सहजहि झाँखुड़ सभ पर छलांग लगा सकैत अछि आ पाथरक ढेर सभ पर उछलि सकैत अछि। जखन इमाम बाहर निकलबाक प्रयास कऽ रहल छलाह, मादा भालु दूर जाए लागल। ओ राहतक साँस लेलनि, मुदा हुनकर निराशाक लेल ओतय एकटा आर भालु छल, ओ देखलनि, संभवतः ओकर साथी, जे अपन मादा साथीक संग जाए लेल ओतय बाट ताकि रहल छल। ओकर चालि सँ इमाम एकटाकेँ मादा आ दोसरकेँ नरक रूपमे चीन्हि लेलनि। एखन दुनू एक संगे दूर जा रहल छल। इमामक ठोढ़ पर एकटा मुसकान खेलि गेल। हुनकर शरीर रोमांचित भऽ गेल। जखन ओ सभ आगू बढ़लाह, दुनू इप्पाक गाछ लग ठाढ़ भऽ गेलाह। जखन नर भालु गाछ पर चढ़ि कऽ फूल सभ नीचाँ झारि देलक, तँ ओकर मादा साथी पंखुड़ी सभकेँ लोभ सँ चुनि कऽ खाय लागल। नर भालु ताड़क गाछ पर चढ़ि गेल आ ताड़ी नीचाँ अनलक। भालु ताड़ीकेँ मादाक मुँहमे उड़ेलि देलक। बादमे ओ मधु कऽ छत्ता नीचाँ अनलक जाहिसँ अपन मादा साथीकेँ मिठासक स्वाद चखा सकय। जेना कोनो नवविवाहित जोड़ा होय, दुनू एक -दोसरा कऽ शरीर सुंघैत आ रगड़ैत चलि गेल। इमाम प्रेमसँ ओकरा देखलनि आ सोचलनि: मनुष्य सभक बीच अनुपस्थित अनुशासन बोनहा भालु सभक बीच भेटैत अछि। ओ सभ कहियो आ कतौ सेहो संभोग नहि करैत अछि। ओ सभ बर्खमे मात्र एक मास लेल संभोग करैत अछि, आ ओहि मासमे सेहो मात्र एक बेर। ई राति भरि हुनका सभक घूमय लेल छल। जङ्गलक कोनो कोनमे रातिमे विचरण करैत, जतय चुट्टीक पएरक आवाज सेहो स्पष्ट सुनल जा सकैत अछि, ओ सभ भोर कऽ शुरुआती पहरमे कहियो संभोग कऽ लेत। भालु सभ एक संगे दूर चलि गेल, मुदा बच्चा सभ कतौ नहि छल। इमाम ओतहि बैसि कऽ पूरा राति बच्चा सभक प्रकट होयबाक प्रतीक्षा कएलक, मुदा ओ नहि आएल। अगिला दिन चन्द्रैया भालु सभक बारेमे पूछय लेल इमाम सँ भेँट केलनि। ओ पुछलनि, "कतय छल ओ सभ पटेल? बच्चा बिल्कुल नहि छल की? मात्र बड़का भालु?" जतय इमाम भालुक खोज कएने छलाह, चन्द्रैया ओकरा एकटा आर भालु कऽ निवास स्थानक विवरण देलक। इमाम आब पूरा-पूरी तैयार भऽ अगिला दिन पुनः जङ्गल लेल प्रस्थान कएलनि आ ओतय घात लगओलनि। वएह चाँदनी पसरल छल आ वएह जङ्गल... भालु ठीक पछिला रातिक समान समय पर देखा देलक। जेना चन्द्रैया संकेत कएने छलाह, एहि बेर माता आ ओकर बच्चा दुनू पूर्ण रूप सँ दृश्यमे छल। माता भालु पैघ आ पूर्ण विकसित लगैत छल, जखनकि ओकर बच्चा एकटा नवजात शिशु जकाँ छल। माता भालु फुर्तीसँ ताड़क गाछ पर चढ़ि गेल आ ताड़ी चूसय लागल। बच्चा दू बेर चढ़बाक प्रयास कएलक, मुदा आधा रस्तासँ पिछड़ि गेल। तखन माता भालु इप्पाक गाछ पर चढ़ि गेल आ ओकर डारि सभकेँ जोरसँ दोमय लागल तऽ फूल झारय लागल। जखन फूलक पंखुड़ी सभक जमीन पर पथार लागि गेल तँ बच्चा ओकरा चुनि -चुनि कऽ खाय लागल। पंखुड़ी चबबैत काल ओ खुशीसँ उछलैत छल आ झाँखुड़क चारू कात खेलाइत छल; ओ बानर जकाँ नीचाँक झाँखुड़ सभ पर चढ़ैत आ नीचाँ कूदैत छल। बच्चा हाँफैत छल आ अपन नहसँ जमीन नोछड़ैत छल। भालुक सभ रहय वला ठाम नोट कएलाक बाद, इमाम अत्यन्त सावधानीसँ बाहर निकललाह, किएकि भालु सहजहि मानवीय उपस्थितिक आभास कऽ सकैत अछि आ जँ ओ कऽ लेत, तँ इमाम कऽ पीछा करत। भालु सामान्यतः मानव मांसक परवाह नहि करैत अछि, मुदा अपन चांगुरसँ मारि मनुष्यक खोपड़ी फोड़ि दिमाग चूसि लैत अछि। इमाम अपन पिताक मुँहसँ सुनने छलाह जे जँ नर भालु महिला सभकेँ मारि कऽ खा जाइत अछि। तेसर दिन इमाम दू टा जाल लय कऽ घात लगौने छलाह, जकरा ओ इप्पाक गाछ कऽ नीचाँ दू टा झाँखुड़क बीच पसारि देने छलाह। हुनका पास एकटा बाँसक पिंजरा सेहो छल। ओहि राति बीबम्मा सेहो हुनका संग आएल छलीह। ओ सुखायल ताड़क पात आ माचिसक डिबिया लय कऽ तैयार बैसल छलीह। मध्यरात्रिक समय बीति गेल आ चाँद आकाशमे ऊँच भऽ गेल। चाँदनीमे बड़का कारी भालु भोजन खोजैत, अगराइत आबि रहल छल। ठीक ओकर पाछाँ ओकर चंचल बच्चा उछलि रहल छल। माता भालु पहिने जकाँ ताड़क गाछ पर चढ़ि कऽ ताड़ी चूसलक, जखनकि बच्चा सेहो अपन माए जकाँ गाछ पर चढ़बाक प्रयास कएलक मुदा आधा रस्तासँ पिछड़ि गेल। थोर काल बाद, माता भालु इप्पाक गाछ पर चढ़ि कऽ फूल दोमि कऽ खसा देलक आ बच्चा ओकरा लोभ सँ खाइत प्रसन्नता सँ उछलि रहल छल। एहन करैत बच्चा झाँखुड़क चारू कात गेल आ अन्ततः जालमे फँसि गेल। डरक कारण ओ चीत्कार कएलक आ पीड़ासँ चिकड़य लागल। इमाम जाल दिस तेजीसँ बढ़लाह। अपन बच्चाक जोर सँ चीत्कार सुनि, माता भालु इप्पाक गाछ सँ पिपनी झपकैत नीचाँ उतरि आएल। दू छलांगमे ओ अपन छोट बच्चा धरि पहुँचि गेल। माता भालु एतेक गतिसँ गाछसँ नीचाँ उतरि अपन बच्चा लग पहुँचत, एकर अनुमान नहिये इमाम कएने छलाह नहिये बीबम्मा। किछु आर क्षण होइत आ ओ जालकेँ टुकड़ा -टुकड़ा कऽ दैत! जालक सिरा सभ तेजीसँ एक संगे खींचि, इमाम बच्चाकेँ किछु दूर धकेलि देलखिन। तखन धरि माता भालु लगपास मानवीय गन्धक आभास पाबि, मुँह खोलि, अपन पाछाँक पएर पर ठाढ़ भऽ जोर सँ घुरघुराइत गरजय लागल। ओकर कारी थुथुन आ उज्जर दाँत चाँदनीमे चमकय लागल। एक क्षण आर होइत तँ ओ अपन चांगुरसँ थापड़ मारि हुनकर दिमाग चूसि लइतैक! ठीक तखने, एक क्षणक सेहो देरी नहि करैत, बीबम्मा माचिस जरौलनि जाहिसँ ताड़क पात सभमे आगि लागि गेल। ओ ओहि जरैत पातकेँ ऊँच कऽ पकड़लनि। आगि देखि माता भालु दू डेग पाछाँ हटि गेल। अवसर पाबि इमाम सेहो पाछाँ हटलाह। इमाम, जे पाछाँ हटि कऽ पाथर फेंकय लगलाह, जरैत डारि ऊँच कऽ भालुकेँ धमकी देलखिन। ओ ओकरा पर जोरसँ चिकड़लाह: "हे... हे...!" इमाम जानैत छलाह जे भालु आगिक प्राणघातक रूपसँ डरैत अछि। ओही डर सँ माता भालु अपन पएर पर उछलि तुरत्ते पाछाँ हटबाक लेल मजबूर भऽ गेल। हाथमे जरैत पात लेने, बच्चासँ भालुकेँ आर दूर धकेलैत इमाम जेना ओकरा पर हमला करय लेल आगू बढ़लाह। ओही समय ओ बच्चाकेँ आर पाछाँ धकेलि देलखिन। बच्चा एखन धरि जालक भीतर छटपटाबैत मुक्त होयबाक लेल सङ्घर्ष कऽ रहल छल, आ माता भालु बाहर सँ दहारि रहल छल। ओ हिचकिचयलीह, मुदा आगिक कारणेँ इमाम आ हुनकर पत्नी ओहि राति अपन प्राण बचेबामे लेल सफल भेलाह! एतबेमे बीबम्मा माचिस जरौलनि आ बिना कोनो देरी लगपासक सुखायल झाँखुड़मे आगि लगा देलनि। आगिक ज्वाला आकाश धरि उठल। ज्वालाक प्रखर प्रकाशमे इमाम आ माता भालु एक -दोसरा कऽ सोझाँ स्पष्ट रूप सँ आएल। अनचोक्के आगिक ज्वाला उठैत देखि माता भालु आरो डरि गेल। किछु दूर पाछाँ दौगि, ओ जोरसँ चिकरैत अपन बच्चाकेँ वापस बोलाबय लागल। फँसल बच्चा जवाबमे डर सँ चिकड़लक। भालु सभक कोलाहलपूर्ण गर्जना सँ पूरा जङ्गल जागि उठल। लगपासक गाछ सभ सँ पक्षी सभ डरि कऽ उड़ि गेल आ आन जानवर सेहो अपन नुकएबाक ठाम सँ बाहर भागि निकलल। इमाम एक क्षणक सेहो समय नहि गमौलनि। ओ जानैत छलाह जे जँ ओ मादा भालु अपन जीवनकेँ जोखिममे धऽ कऽ आगू बढ़ैत तँ की होइत। ओकरा देखि लागैत छल जे ओ ककनो आगू बढ़ि सकैत छल आ ओहि स्थितिमे ओ नहिये आगि कऽ परवाह करितैक नहिये ज्वालाक। इमामक हाथमे एकटा भाला छल आ ओकरा पास एकटा चक्कू सेहो छल। जँ ओ भाला ओकर थुथुन पर निशाना साधि कऽ फेंकितथि, तँ ओ निश्चित रूप सँ सङ्घर्ष करैत मरि जाइत, मुदा हुनकर इरादा कहियो माता भालुकेँ मारबाक नहि छल। ओहि प्रखर प्रकाशमे इमाम जालक बण्डल बनौलनि आ फुर्ती सँ बच्चाकेँ पकड़ि लेलनि। ओ डाँरमे खोंसल देशी शराबक बोतल निकाललनि। अपन ठेहुनक बर बैसि, एकटा फुर्ती-चालिसँ बच्चाकेँ नीचाँ कऽ कऽ पकड़लनि आ बीबम्माकेँ बोतलक शराब बच्चाक कण्ठमे उड़ेलि देबाक लेल कहलखिन। बच्चा इप्पाक फूलक स्वाद सँ अभ्यस्त छल, एहि लेल ओ देशी शराबक स्वाद जीह पर महसुस कएलक। बीबम्मा पूरा बोतल जालक बीचक फाँक सँ ओकर मुँहमे उड़ेलि देलखिन। ओ बोतलकेँ एहन स्थितिमेराखलनि जे भले बच्चा जालक भीतर अपन स्थिति बदलैत, बोतल ओकर मुँहमे झुकल रहय आ शराब ओकर मुँहमे खसैत रहय। इमाम बच्चाक पएर सभ एक संगे जोर सँ पकड़ने छलाह। बच्चा कतेको छटपटाएल आ विरोध कएलक, मुदा अन्ततः एक लीटर सँ बेसी शराब कण्ठ सँ नीचाँ उतरि गेला कऽ बाद ओ हारि मानि लेलक। थोरेक काल चिकड़ि कऽ बच्चा अचेत अवस्थामे खसि पड़ल। जालक पूरा बण्डल बना कऽ इमाम बच्चाकेँ बाँसक पिंजरा कऽ भीतर बन्द कऽ देलखिन। पिंजराकेँ एकटा झाँखुड़ कऽ भीतर घिसिया कऽ ओ रस्सा सँ गाछमे कसि कऽ बान्हि देलखिन। ओ सभटा काज किछु मिनट कऽ भीतर तेजी सँ समाप्त कऽ देलनि। पूरा समय माता भालु सुरक्षित दूरी पर ठाढ़ भऽ निगरानी राखैत आ गरजैत छल। बीबम्मा सदिखन सतर्क रहि सुखायल ताड़क पात सँ आगि जरौने छलीह। हाथमे लेल गेल काज पूरा भऽ गेल छल। जखन बच्चाक चीत्कार बन्द भऽ गेल, तँ माता भालुक पीड़ादायक दाँत पीसबाक आवाज बढ़ि गेल। अपन शुरूआती डर पर काबू पाबि कऽ ओ फेर सँ आगू बढ़य लागल। ओकर डेगमे साहस देखबाक जोग छल। ओहि राति बच्चाकेँ ओतय सँ हटायब अकल्पनीय छल। माता भालु निश्चित रूपसँ शरीरक गन्धक निशान पकड़ि कऽ इमाम आ बीबम्मा कऽ पीछा करितैक। जरैत पात सभ तखन ओकरा नहि रोकि सकितैक। भालु डरि कऽ किछु दूरी धरि पीछा कऽ सकैत छल, मुदा ओकर बाद निश्चित रूप सँ ओ हमला करबाक साहस करितैक। एहि कारणेँ इमाम आ बीबम्मा भालुकेँ चकमा दैत बाहर निकलि गेलाह। जाए सँ पहिने सुरक्षा लेल ओ लोकनि एकटा आर झाँखुड़मे आगि लगा देलनि। किएक तँ माता भालुक नजरि पूरा-पूरी अपन बच्चा पर छल, एहि सँ इमाम आ बीबम्माकेँ आसानी सँ भागि निकलवामे सहायता भेटलनि, नहि तँ ओ एतेक सहजहि नहि छोड़ितैक। तेजी सँ निकलि कऽ ओ लोकनि सुरक्षित घर पहुँचि गेलाह। ओ लोकनि बहुत काल धरि माता भालुक पीड़ा सँ भरल गम्भीर गर्जना स्पष्ट सुनि सकैत छलाह। ई चीत्कार जङ्गलमे गूँजैत रहल जखन धरि ओ आर दूर जा कऽ मद्धिम नहि पड़ि गेल। ओकर गर्जना कऽ तीव्रता सँ इमाम ओकर गतिविधिक अन्दाजा लगा सकैत छलाह: एखन ओ झाँखुड़ कऽ पास अछि... एखन ओ ओकर चारू कात घूमि रहल अछि... एखन ओ अपन थुथुन सँ जमीन खरोंचि रहल अछि... आ आब ओ बाँसक पिंजरा पर हमला करत! घर पहुँचि बीबम्मा अपन पति सँ सन्देहपूर्वक पुछलखिन, "तोरा लागैत छौ जे बच्चा हमर हाथ लागि जायत?"। "जँ नहि, तँ ओ कतय जयत? भले माता भालु जाल कऽ टुकड़ा -टुकड़ा कऽ दय, वा पिंजराकेँ भङ्ग कऽ दय, बच्चा नहि जागत। हम ताड़ीमे तमाखूक छाउर मिलौने छी, नहि?"। अगिला दिन सूर्योदय पर इमाम जङ्गल पहुँचि गेलाह। तखन धरि चन्द्रैया सेहो ओहि स्थान पर छलाह। माता भालु सँ रौंदल आ उजड़ल ओहि स्थान पर पिंजरा वला झाँखुड़ आब झाँखुड़ जकाँ नहि लगैत छल। पिंजरा झाँखुड़ सँ दूर फेंकल गेल छल आ लगपासक जमीन जोतल खेत जकाँ देखाइत छल। बच्चा एखनहुँ ताड़ी कऽ प्रभाव सँ नहि उबरल छल। पिंजरा कऽ आधा हिस्सा टूटि गेल छल। इमाम बच्चाकेँ, जे एक बण्डल जकाँ लेटल छल, एकटा पथियामे रखलनि आ तखन ओकरा अपन कपार पर उठा लेलनि। "अरे... ई की थिक? की बच्चा पकड़ला सँ काज खतम भऽ गेल? हमरा लागल तूँ माता भालुकेँ मारि देबह... इप्पा कऽ फूल खाइत ओ हमर खेतमे तबाही मचाबैत अछि। आब तँ ओ आर बताह जकाँ उत्पात मचायत," चन्द्रैया रुष्ट भऽ कहलखिन। इमाम एकटा अनुभवी जकाँ विश्वासपूर्वक उत्तर देलनि, "पटेल, काल्हि सँ ओ आर तोहर फली कऽ खेत लग नहि आयत, नहये एहि इप्पा कऽ गाछ लग। ओ एहि जङ्गलमे नहि रहत, ओ बहुत दूर चलि जायत। हम भालुक मनोविज्ञान जानैत छी।" बच्चाकेँ घर आनि कऽ इमाम ओकरा छाछ पियौलनि आ ओकर कण्ठमे एकटा रस्सा बान्हि देलनि। तखन ओकर थुथुन कऽ चारू कात एकटा नाकक छल्ला कसि देलखिन। ओ ओकर नह सेहो काटि देलनि आ बच्चाकेँ बाँसक सीक सँ बनल एकटा नव पिंजरामे कैद कऽ देलखिन। शरीरक रोइयाँ काटि कऽ ओ बच्चाकेँ साबुनक पानि सँ स्नान करौलनि। भालुक बच्चा अगिला दू मास धरि एहि नव व्यवस्थाक अभ्यस्त नहि भऽ सकल। ओ चम्मच सँ दूध पीबय सँ मना कऽ दैत छल। ओ दूधमे डुबाएल आंगुरकेँ माएक स्तन जकाँ चूसैत छल। एक बेर तँ ओ इमामक आंगुर सेहो काटि लेने छल। तखने सँ ओ लोकनि ओकरा निप्पल कऽ माध्यम सँ दूध पिआबय लगलाह। भालुक बच्चा सदिखन पिंजराक भीतरहि बन्द रहैत छल। जखन कखनो बाहर निकालल जाइत, ओ भागय कऽ प्रयास करैत छल। बताह जकाँ व्यवहार करैत ओ लोक सभ पर कूदैत छल। एक -दू बेर इमाम पर सेहो कूदल आ चारि -पाँच बेर बीबम्मा पर हमला करबाक चेष्टा कएलक, मुदा मुँहमे छल्ला रहलाक कारणेँ ओ ओतेक नुकसान नहि पहुँचा सकल। तखनो ओकर नह सँ चोट लागि जाइत छल। भोजनक रूपमे ओ छाछक स्वाद सेहो बेस मुश्किल सँ लैत छल। चाँद तखन एक बर्खक छल आ अखन चलब सीखि रहल छल। ओ कौतुक सँ भालुकेँ देखैत छल आ ओकरा संग खेलय चाहैत छल, मुदा बीबम्मा हुनका दूरहि रखैत छलीह किएकि हुनका अपन बच्चाकेँ भालु कऽ बच्चा संग छोड़बाक साहस नहि छलनि। ओ कहियो दुनूकेँ एक संगे नहि रहय दैत छलीह। दू मासक भीतर बच्चाक वजन आधा कम भऽ गेल, ओकर रोइयाँ झड़ि गेल आ चाम ढील पड़ि गेलैक। कमजोर भऽ कऽ ओ बिल्लीक बच्चा जकाँ देखाय लागल। एक समय तँ ओ लोकनि सोचलनि जे ई एहि संकट सँ नहि बचि सकत। इमाम बच्चाकेँ पिसल जड़ी -बूटीक औखध देलखिन। ओ लोकनि ओकरा एकटा नाम सेहो देलनि-'शादुल', बाघ। तखनो ओकर स्थितिमे सुधार नहि भेल। ई देखि कऽ जे महींसक दूध शादुलकेँ नहि पचैत छैक, इमाम ओकरा गाय कऽ दूध पिआबय लगलाह। ओ गाय कऽ दूधमे पिसल 'जाजी' मिलौलनि। कुदृष्टि सँ बचेबाक लेल बीबम्मा ओकर हाथमे एकटा कारी ताग बान्हि देलखिन। मुदा गाय कऽ दूध सँ बच्चाक हालत आर बिगड़ि गेलैक। अन्तिम प्रयासक रूपमे बीबम्मा बच्चाकेँ अपन दूध पियेबाक निर्णय लेलनि। बीबम्मा चाँदकेँ एक स्तन सँ दूध पिअबैत छलीह आ दोसर स्तन सँ शादुल लेल दूध निकालैत छलीह। बीबम्मा शादुलक नीक होयबाक लेल सभ देवी -देवता सँ कौबला मानलनि। ओ पैघ पहाड़ी वला दरगाह पर टका चढ़ेबाक वादा कएलनि आ मोहर्रमक दौरान जरैत अङ्गार पर चललीह। एक बेर जखन शादुल मानुस -दूधक अभ्यस्त भऽ गेल, तँ ओ आस्ते -आस्ते मानुस -जगतक हिस्सा बनय लागल आ सुधारक रस्ता पर चलि पड़ल। ओ चाँदकेँ धक्का दैत बीबम्माक कोड़ामे सुति कऽ दूध पीबय लागल। कखनो -कखनो शादुल बीबम्माक प्रेम पाबय लेल चाँद सँ होड़ सेहो करैत छल। इमाम मुसकुराइत टिप्पणी करैत छलाह, "तोरा एकटा नहि वरन् दू टा बेटा छौ!"। बीबम्मा हँसलीह, "हमरा ई शादुल चाँद सँ बेसी प्रिय अछि। चाँदकेँ तँ बीस बर्ख पोसय पड़त, तखन कतौ ओ सहारा देबाक जोगर बनत; तखनो ओ खियाओत की नहि, हमरा सन्देह अछि। मुदा शादुल तँ छह मासमे खेल देखायब सीखि जायत आ जीवन भरि हमरा खियाओत।" "शादुल एकटा जानवर थिक, नहि? ओ कहियो दोसरक श्रम नहि चोरायत। मुदा ई चाँद तँ मानुस जन्म लेने अछि। की मानुसक अर्थ स्वार्थ नहि अछि?" बीबम्मा मुसकुराइत दुनूकेँ एकहि अङ्कवारमे भरि लेलनि। चाँदकेँ अपन माएक ई समान व्यवहार कहियो नीक नहि लगैत छलनि। मात्र एक बर्खक भेला कऽ बादो ओ माएक एहि प्रवृत्तिक प्रति अपन नाराजगी नहि नुकाबैत छल। ओ माएकेँ पकड़ि कऽ ई देखबैत छल जे माए मात्र हुनकरे छथिन। शादुल कतबो मनुष्य सभक बीच घुलमिल गेल छल, ओ पूर्णतः ठीक नहि भेल छल। ठीक होयबाक संकेत देखबैते ओ फेर सँ बीमार पड़ि गेल। ओ कंकालक रूपमे बदलि गेल छल। बीबम्मा पूरा एक मास धरि एहि डरमे छलीह जे ओ आइ नहि तँ काल्हि मरि जायत। शादुल कमजोर भऽ कऽ एकटा एहन मुर्गी जकाँ लागि रहल छल, जेकर सबटा पाँखि नोचि लेल गेल हो। बीबम्मा चिन्ता सँ अपने परेशान रहैत छलीह। ओ अपन निराशा इमाम संग साझा कएलनि, "अरे... एहि शादुलकेँ की भऽ गेल छैक? ओ दिन -प्रतिदिन कमजोर होइत जा रहल अछि... हम की करी? अल्लाह!" इमाम अनिच्छुक भऽ कहलखिन, "हम की करी... ई ओकर भाग्य थिकैक! जे होयबाक छैक से होबय दियौ। जँ ओ हमर खिचड़ीक हकदार अछि तँ जिऐत रहत, नहि तँ मरि जायत। हमर हाथमे की अछि?" बीबम्मा तखनो मृत्युकेँ समस्याक अन्त कऽ रूपमे स्वीकार नहि कऽ सकलीह। ओ तखन धरि मात्र दू टा भालुक मृत्यु देखलनि- एकटा अपन सासुरमे आ दोसर अपन नैहरमे। ओकरा लेल ई दुःख परिवारक कोनो सदस्यक क्षतिक समान छल। दुनू बेर ओ बेस कष्ट भोगलनि आ अपन सामान्य स्थितिमे वापस आबयमे हुनका एक सप्ताह धरि समय लागलनि। हुनकर नैहरमे भालुक मृत्यु बेस अजीब परिस्थितिमे भेल छल। मजबूरीमे बीबम्माकेँ अपनहि हाथे भालुकेँ सुतबय पड़ल छल। हुनकर पिता रसूल ओ पीड़ादायक काज हुनका सौंपने छलाह। हुनका लेल सेहो ओहि कठोर निर्णय धरि पहुँचबामे एक सप्ताहक विचार -विमर्श लागल छल। शादुलकेँ एहि स्थितिमे देखि बीबम्माकेँ ओहि भालुक मृत्यु याद आबि गेल। रसूल तखन मल्लारेड्डिपेटमे रहैत छलाह। एक राति बिहाड़ि जकाँ भयंकर वर्षा भेल। टेंटक कैनवास, जाहि कऽ नीचाँ ओ आ हुनकर भालु आश्रय लेने छलाह, उड़ि गेल। दुनू भीजि गेलाह। एल्लम्मा मन्दिर नजदीक छल। रसूल ओहि अन्हर-बिहाड़ि बला मौसम सँ बचबाक लेल रातिमे मन्दिरमे शरण लेलनि। वेंकटव्वा, सफाई कर्मचारी, जे अगिला भोर मन्दिर साफ करय पहुँचल, रसूल आ भालुकेँ मन्दिरक भीतर देखि क्रोधित भऽ गेल। रसूल पूरा मन्दिर धो कऽ साफ करबाक वादा कएलनि आ हुनका सँ गिड़गिड़यलाह जे ओ मन्दिरमे हुनकर उपस्थितिक बारेमे ककरो नहि कहथि। मुदा वेंकटव्वा हुनकर अनुरोध पर ध्यान नहि देलनि आ गाममे रसूल द्वारा मन्दिर अपवित्र कएल जएबाक प्रचार कऽ देलनि- जे पवित्र मन्दिर परिसर भालुक मल -मूत्र सँ अपवित्र भऽ गेल अछि। सत्य ई छल जे पछिला दू बर्ख सँ वेंकटव्वा गामक बुजुर्ग सभ सँ मन्दिरक साफ -सफाई आ शुद्धीकरण करबाक आ उचित अनुष्ठान कऽ माध्यम सँ 'सिद्दोगम' मनैबाक अनुरोध कऽ रहल छल। किएक तँ गामक बुजुर्ग हुनकर बात पर ध्यान नहि दैत छलाह, तँ हुनका मनेबाक लेल ओ 'समाधि' मे सेहो चलि गेल जइसँ हुनका डरा कऽ कहि सकथि जे ककरो पर कोनो अनिष्ट भऽ सकैत अछि। मन्दिर परिसरकेँ अपवित्र कएल जएबाक कारणेँ क्रोधित भऽ बुजुर्ग सभ रसूलकेँ गामक मुख्य गलीमे उपस्थित होयबाक लेल बजौलनि। रसूल बुझौलनि जे ओ मात्र खराब मौसम सँ बचबाक लेल मन्दिरमे शरण लेने छलाह आ ओ क्षमा प्रार्थना कएलनि। "तोर कारणेँ जे किछु भेल हो, मुदा तूँ ईश -निन्दा कएने छह आ तोरा दण्डित करबाक अछि। एखन जँ मन्दिरकेँ पवित्र करबाक अछि आ शुद्धीकरण मनैबाक छैक, तँ की ई कम खर्चमे होयत? ओहि खर्चक वहन के करत?" रसूल सभक सोझाँ कतबो गिड़गिड़यलाह, कियो नहि सुनलक। एक हजार टकाक जुर्माना लगाओल गेल आ टका जमा नहि भेला धरि हुनका गाम छोड़ि कऽ जाए सँ मना कऽ देल गेल। एक हजार टका रसूल लेल वास्तवमे पैघ राशि छल आ ओकर भुगतान हुनकर क्षमता सँ बाहर छल। रसूल बुजुर्ग सभक पएर पर खसि कऽ गिड़गिड़यलाह, मुदा ओ सभ जुर्माना कम करय सँ मना कऽ देलखिन। मुदा ओ भुगतान लेल एकटा रस्ता देखौलनि। गाममे तेरह टा जातीय संघ छल। रसूल सँ विभिन्न संघ सभक नाम पर भालुक खेल देखा कऽ टका जमा करबाक लेल कहल गेल। बिना देरी कएने रसूल जुर्मानाक टका जमा करब शुरू कऽ देलखिन। गौड़ा समुदाय रसूल पर जुर्माना लगाओने अछि, ई जानि कऽ लोकक सहानुभूति एतेक बढ़ि गेलैक जे सभ खेल देखय लेल सहमत भऽ गेलाह। रसूल जतेक टका मंगलनि, लोक उदारतापूर्वक दैत गेलाह। सभ विद्यालयमे, सभ गलीक कोन पर आ सभ दोकानक सोझाँ ई घोषणा कएल गेल जे रसूल आवश्यक खर्च पूरा करबामे असमर्थ छथि। रसूल सभसँ सहायताक अनुरोध कएलनि आ घर -घर जा कऽ सेहो चन्दा जमा कएलनि। शुरूमे एतेक भारी जुर्माना सँ आहत भेला कऽ बादो, रसूल शीघ्रे एहिमे एकटा लाभ देखय लगलाह। जुर्मानाक नाम पर ओ पूरा एक मास धरि गाममे ठाढ़ भऽ गेलाह। अन्तमे रसूलक उम्मीद सँ बेसी टका जमा भऽ गेल। जखन गाम सँ विदा लेबाक अन्तिम दिन आएल, तखन एकटा अप्रत्याशित घटना घटि गेल। एकटा कुकुर ओकर पछोड़ धऽ लेलक। ओकरा सामान्य बात मानि ओ आगू बढ़ि गेलाह। थोरेक काल बाद कुकुर अनचोक्के आगू बढ़ि कऽ भालु पर कूदि पड़ल आ ओकरा काटि लेलक। रसूलकेँ तुरत्ते पता चलि गेलैन जे ओ कुकुर बताह छल। रसूल डरि गेलाह आ ओ सभटा सावधानी बरतलाह जे आवश्यक छल। ओ भालुकेँ विभिन्न बोनहा जड़ी -बूटी सँ बनल औखध देलखिन आ डॉक्टर सभ सँ सेहो परामर्श कएलनि। तखनो, ओहि बातक डर बनल रहल जे होयबाक छल। दू मासक बाद, एक दिन जखन आकाश करिया मेघ सँ घेरल छल, तँ भालु जे तखन धरि गलीमे संगे चलि रहल छल, अनचोक्के ठाढ़ भऽ गेल। ओ अपन थुथुन आकाशक दिस उठा कऽ बौआयल कुकुर जकाँ भूकय लागल। रसूलक धड़कन बढ़ि गेलैक। ओ सेहो चलनाइ बन्द कऽ देलखिन आ भयभीत भऽ कऽ भालुकेँ निहारय लगलाह। भालु अपन सामान्य खेल -तरकीब देखेबाक लेल मना कऽ देलक। ओकर अतिरिक्त ओ आगू चलबा सँ मना कऽ देलक आ थोड़ेकालमे बौआयल जकाँ एतऽ-ओतऽ कूदय लागल। भालुकेँ घर आनि कऽ रसूल ओकरा एकचारीमे बन्द कऽ देलखिन आ ओकर सोझाँ एकटा बाँसक टाट लगा देलखिन। भालु भुकैत छल आ जमीन नोछड़ैत छल। ओ दुपहरिया धरि एहना करैत रहल आ अन्ततः जखन सूर्य ऊँच भेल, तखन ओ सामान्य लागय लागल। रसूल आश्चर्य करैत छलाह जे की ई वएह पहिने वला भालु थिक। ओहि समय सँ, जखन हवामे कनी कनकनी होइत वा आकाश मेघ सँ ढकि जाइत, तँ भालुमे बतहपनक व्यवहार देखाय लगैत छल। अक्सर खेलक बीचमे, गामक चौक पर, रस्ताक बीचमे वा लोकक भीड़मे- कहियो ओकर ई अजीब व्यवहार प्रकट भऽ जाइत छल। रसूल अपन भालुक एहि बतहपनाकेँ नुकेबाक प्रयास कएलनि, मुदा सभ गोटे जानि गेलाह आ हुनका चेतावनी दैत रहलाह। ओ जतेक नुकेबाक कोशिश करैत छलाह, भालुक टपकैत लेर, झुकल आँखि आ ओकर लटपटाइत चालि सभटा भेद खोलि दैत छलैक। एक दिन शादुल एकटा कुकुरकेँ काटि लेने छल, आर एक दिन एकटा सुग्गरकेँ; आ फेर एक दिन अपन खेलक दौरान ओ एकटा महिलाकेँ पकड़ि लेलक। ओ महिला डरे सकदम भऽ गेलीह। गामक लोक भालुक एहि बौआयल व्यवहार सँ क्रोधित भऽ गेलाह। ओ सभ ई निष्कर्ष निकाललनि जे, "भाग्य नीक छल जे महिलाकेँ कोनो पैघ क्षति नहि भेल। जँ ओ ओकरा काटि लेने रहितैक तँ? एक दिन ओ निश्चित रूप सँ तोहर आज्ञा नहि मानत। ओकरा मारि देबहि नीक अछि!" ओ सभ लाठी -डण्डा लय कऽ भालु पर हमला कऽ देलखिन। भालु बेसी काल धरि ओहि प्रहारकेँ झेललक, मुदा अन्ततः व्याकुल भऽ कऽ दूर भागि गेल। भीड़ रसूलकेँ कड़ा चेतावनी दैत चलि गेल। रसूल पूरा दिन कानैत रहलाह। भालु अपन बौआयल स्थितिमे एकचारीक चारू कात घूमि रहल छल। एक सप्ताह धरि रसूल ओकरा बाहर नहि लऽ गेलाह। ओकरा घरेमे कैदराखलनि आ समय -समय पर ओकरा भोजन -पानि दैत रहलाह। अपन भालु लेल चिन्तित रसूल स्वयं कमजोर भऽ गेलाह। मोटामोटी एक सप्ताहक बाद ओ एकटा निर्णय पर पहुँचलाह आ भालुकेँ बाहर अनलनि। भालुक व्यवहारमे आमूल परिवर्तन आबि गेल छल आ ओकर बतहपनी आरो बढ़ि गेल छल। रसूल ओकरा मकइक बालि खियौलनि। अपन सबटा साहस बटोरि कऽ ओ अपन बेटी बीबम्माकेँ बजौलनि आ ओकरा भालु पर एकटा भिजल सीरक फेंकबाक लेल कहि कऽ स्वयं बाहर चलि गेलाह। रसूलक ई निर्णय सुनि पूरा परिवार कन्नारोहट करय लागल। ओ लोकनि अ़ँखिमे नोर भरि एक -दोसराकेँ सांत्वना देलखिन। बीबम्मा सेहो कानैत एकटा पुरान सीरक भिजाबय लेल बैसि गेलीह। बेस कष्टमे ओ ओहि भिजल सीरककेँ उठौलनि आ भालुक दिस चललीह। जेना सीरक सँ पानिक बुन्द खसि रहल छल, ओनाही हुनकर गाल सँ नोर खसि रहल छलनि। विलाप करैत बीबम्मा सीरककेँ भालु पर फेकि देलखिन। मोटामोटी पाँच सँ दस मिनटमे भालु, जेना ओकरा गोली लागि गेल हो, सङ्घर्ष करैत प्राण त्यागि देलक। बीबम्माक अतिरिक्त सभ गोटे ओहि दृश्यकेँ देखबामे असमर्थ भऽ अपन आँखि मुनने छलाह। बीबम्मा अपन हाथकेँ कोसलनि जे एहन पापपूर्ण कार्यमे सहभागी भेल। ओ तखने संकल्प लेलनि जे अपन एहि जन्ममे ओ आर कोनो भालुक मृत्यु अपन आँखि सँ नहि देखतीह। शादुलकेँ देखि बीबम्माकेँ ओहि भालुक मृत्यु एखन याद आबि गेल। ओ शादुलमे एकटा पुत्र देखैत छलीह। ओकर लटपटाइत चालि आ ओकर मुँहमे ओकरा एकटा मासूम बच्चाक छवि देखाय दैत छलनि। ओ चाँद आ शादुलकेँ अलग देखबाक कल्पना नहि कऽ सकैत छलीह। एहि कारणेँ बीबम्मा शादुलकेँ ओकर भाग्य पर छोड़ि देबाक मामिलामे इमाम सँ सहमत नहि छलीह। हुनका अपन गामक ओहि मस्जिद आ ओतय कऽ फकीर साहब याद आएल, जे बीमार बच्चा सभकेँ ताबीज आ रौद कऽ धुआँ औखधक रूपमे दैत छलाह। बीबम्मा इमामकेँ सुझाव देलखिन जे ओकरा फकीर लग लय जाएल जाय, मुदा इमाम सहमत नहि भेलाह। एक दिन इमाम सँ बिना पुछने वा हुनका सूचित कएने, बीबम्मा अपन नैहर लेल यात्रा शुरू कऽ देलखिन। ओ एक कान्ह पर चाँद आ दोसर पर शादुलकेँ लेने छलीह। वर्षा ऋतु अपन चरम पर छल आ आकाश सँ फूही खसि रहल छल। शादुलकेँ संग देखि बीबम्माकेँ बसमे चढ़बाक अनुमति नहि भेटलनि। एहि कारणेँ ओ बिना कोनो हिचकिचाहटक पएरे यात्रा शुरू कऽ देलखिन। चाँद आ शादुलकेँ वर्षा सँ बचेबाक लेल ओ अपन साड़ीक आँचर दुनू पर ओढ़ा देलखिन। मुदा साड़ीक आँचर दुनूकेँ ढकय लेल पर्याप्त नहि छल। ओ भोरमे घरसँ निकलल छलीह आ साँझ भेला कऽ बाद गाम पहुँचलीह। तखन धरि तीनू गोटे पूर्णतः भीजि गेल छलाह। चाँद कनकनी सँ काँपय लागल आ तुरत्ते बीमार पड़ि गेल। जतय धरि शादुलक गप्प अछि, ओ कनी मूड़ी -तुड़ि कऽ गोल बनि गेल। बीबम्माकेँ एहि स्थितिमे देखि हुनकर माए क्रोधित भऽ गेलीह, "तोर मति मारल गेलौ की! की एहि वर्षा मे तूँ अपन बच्चाकेँ मारि देबह? भाड़मे जाय तोहर ई भालु कऽ बच्चा, ओ जियत रहय वा मरय, ओकरा सँ की? तूँ तँ एहन दुःख कऽ रहल छह जेना तूही ओकरा जन्म देने होह।" अपन माएक शब्द सुनि बीबम्मा आहत भऽ गेलीह, मुदा ककरो अपन यात्राक असली कारण नहि बतओलनि। हुनका डर छल जे सभ गोटे हुनकर उद्देश्यकेँ गलत समझि लेताह। चाँदकेँ पाछाँ छोड़ि ओ शादुलकेँ फकीर लग लय गेलीह। शादुलकेँ देखि फकीर हँसय लागल, "ई मात्र बच्चा सभ लेल काज करत... मात्र मानुसक शिशु सभ लेल!" "हमर शादुल एकटा बच्चा नहि अछि की?" बीबम्मा मासूमियत सँ जवाब देलखिन। "ओ अखन धरि एक बर्खक सेहो नहि भेल अछि!" ओकरा विदा करबाक लेल फकीर किछु औखध दऽ देलक। ओ पूर्ण श्रद्धा सँ ओहि औखधकेँ घर अनलनि। घर वापसी पर बीबम्मा देखलखिन जे चाँदकेँ तेज जड़ अछि। इमाम सेहो हुनका पर तमसेलाह, मुदा ओ ओतेक चिन्तित नहि छलाह: "चाँद लेल की अछि... ओ ठीक भऽ जायत जँ हम ओकरा किछु अतिरिक्त खाइले दियै।" मुदा बीबम्माक चिन्ता शादुल लेल छल। ओ पीड़ित छल। शादुल लेल कियो जे किछु सुझाबैत छल, बीबम्मा वएह करैत छलीह। हुनका विश्वास छल जे धन नुका कऽ राखब नीक मुदा बीमारी सभकेँ बता देबाक चाही। एहि लेल ओ शादुलक बीमारीक समाचार सभ संग साझा कएलनि। ओ जतय कतौ काज करय जाइत छलीह, हुनकर बातचीत शादुलक चारू कात घुमैत छल। हुनकर गप्प सुनि सभ गोटे शादुलकेँ हुनकरे बेटा मानि लेने छल। एक बेर एल्लव्वा, जकरा पर भोलेनाथक आवेश अबैत छल, शादुलकेँ हुनकर बेटा मानि कऽ बीबम्मा सँ पुछलखिन, "ओकरा आइ राति हमर पास लाबहु, हम ओकर कपार पर सिन्दूर लनिपत्ता, ओकरा संग सब बीमारी आ पीड़ा दूर भऽ जायत!" जखन रातिक अन्हार पसरल, बीबम्मा शादुलकेँ अपन कोरामे उठौलनि आ अपन साड़ीक आँचर सँ ओकरा ढाँकि लेलनि। तखन धरि एल्लव्वा आवेशमे समाधिस्थ भऽ कऽ झूमि रहल छलीह। ओ लगपासक लोकक कपार पर सिन्दूर लगा रहल छलीह। जखन बीबम्मा एल्लव्वाक सोझाँ बैसि कऽ शादुलक मुँह सँ कपड़ा हठौलनि, तँ ओ बीबम्माक कोड़ा सँ उछलि कऽ एल्लव्वा पर कूदि पड़ल। ई तँ नहि बुझल भेल जे एल्लव्वाक समाधि आ हुनकर भोलेनाथ कतय विलीन भऽ गेलाह, मुदा ओ अपन प्राण बचयबाक लेल घरक भीतर भागि गेलीह। ओहि राति सभ गोटे बीबम्माकेँ कोसय लागल! शादुल बीमार अछि, एहि बहाने बीबम्मा ओकरा मुँहक पट्टा सेहो नहि लगाबैत छलीह। एक बेर जखन ओ ओकरा नग्रक डॉक्टर लग लय गेल छलीह, तँ शादुल हुनका पर झपटल आ मोटामोटी काटि लेने छल। "कुतिया! के तोरा ओकरा आनय लेल कहने छलौ? की तूँ हमरा मारि देबय चाहैत छह?" डॉक्टर चिकड़ल आ ओकरा बाहर निकालि देलक। ओहि दिन सँ बीबम्मा पुनः शादुलक मुँह पर पट्टा लगाबय लगलीह। ओ चाँद आ शादुलक संग समान व्यवहार करैत छलीह। शादुल बेसी दिन नहि जियत, ई सोचि कऽ ओ ओकरा सँ बेसी स्नेह करैत छलीह। जेना -जेना दिन बीतल, शादुल परिवारक अभिन्न अङ्ग बनि गेल। शादुल आ चाँद दुनू एकहि ठाम खेलाइत छलाह। जखन बीबम्मा चाँदक पाचन लेल 'उग्गु' (नरम सिझल भात) दैत छलीह, तँ शादुलकेँ मकइक बालि दैत छलीह। चाँदकेँ नहबैत काल ओ शादुलकेँ सेहो नहबैत छलीह। सुरक्षा लेल ओ शादुलक मुँहक पट्टा मात्र भोजन दैत काल खोलैत छलीह आ ओकर बाद तुरत्ते पुनः लगा दैत छलीह। ओ शादुलक नह काटि कऽ ओकरा साफ राखबाक सेहो पूरा ध्यान रखैत छलीह। एक दिन एकटा पशु चिकित्सक गाम आयल छलाह। बीबम्मा शादुलक बारेमे हुनका सँ परामर्श लेलखिन। ओ किछु औखध लिखि देलखिन, मुदा फार्मासिस्ट कहलक जे एहि औखध सभक लेल दू सय टका लागत। ओकरा पास तखन एतेक टका नहि छल। इमाम टकाक अनुरोध ई सोचि कऽ टालि देलखिन जे शादुल जखन मरबे करत तँ औखधक की आवश्यकता। तखनो बीबम्मा हारि नहि मानलनि। ओ शादुल लेल औखध खरीदबाक लेल लगातार दस दिन धरि खेत -मजदूरी कएलनि। एक बर्खक बाद बीबम्माक प्रयास रङ्ग अनलक। शादुल अन्ततः पूरा-पूरी ठीक भऽ गेल। ओकर शरीरक रोइयाँ पुनः उगि आएल आ ओ अपन बोनहा स्वभाव सेहो छोड़ि देलक। ओकर रूप -रङ्ग आ चालिमे एकटा उल्लेखनीय परिवर्तन आएल, आ अन्तमे ओ मानुसक भोजनक अभ्यस्त भऽ गेल। ओ मानुसक भाषा बुझय लागल आ लोकक बीच रहबाक लेल पैघ भऽ गेल। आब जखन शादुल कोमल बनि चुकल छल, इमाम ओकरा लोकक मनोरंजन लेल किछु खेल -तरकीब सिखयबाक इच्छा कएलखिन। ओ जानैत छलाह जे जँ ओ आरो प्रतीक्षा करताह तँ ई संभव नहि भऽ सकत। 'ठाढ़ हो' कहलाक बाद शादुल अपन पाछाँक पएर पर सोझ ठाढ़ होयब सीखि गेल छल। ओहि एकटा तरकीब सिखयबाक लेल शादुलकेँ इमाम सँ बहुत मारि खाय पड़ल छलैक। बीबम्मा इमामकेँ शादुलक थुथुन पर लाठी सँ मारैत देखि बेस रुष्ट होइत छलीह आ हुनका चेतावनी दैत छलीह। इमाम तर्क दैत छलाह, "जँ हम ओकरा नहि मारब, तँ ओ खेल कोना सीखत? पाथरकेँ सेहो मूरति बनय लेल चोट खाय पड़ैत छैक, नहि?"। तखनो बीबम्मा कहियो सहमत नहि भऽ सकलीह। घर पर शादुलकेँ प्रशिक्षित करब संभव नहि छल, एहि लेल इमाम शादुलकेँ एकचारी सँ दूर एकटा आन ठाम लय गेलाह। आश्रय लेल एकटा गाछक नीचाँ बैसि ओ शादुलकेँ सिखयब शुरू कएलखिन। अन्ततः शादुल 'चल' कहलाक बाद अपन दू पएर पर चलनाइ सीखि गेल। 'पकड़ू' कहलाक बाद ओ फेंकल गेल लाठी पकड़ि लैत छल। इमाम भोरमे स्नान कऽ कऽ अल्लाहक प्रार्थना करैत छलाह आ ओकर बाद अपन दिवंगत पिता लेल दुआ करैत छलाह। शादुलकेँ तौलिया सँ पोंछि कऽ इमाम ओकरा मकइक बालि खियाबैत छलाह। तखन ओकर मुँहक चारू कात एकटा पट्टा आ हाथमे एकटा रस्सा लगाबैत छलाह। ओकर बाद शादुलकेँ अपन पाछाँ -पाछाँ लेने इमाम घरसँ निकलि जाइत छलाह। शादुलकेँ मन्त्रायल ताबीज फेकबाक तरकीब सिखयबाक लेल इमाम ओकरा नीम आ धातरीम चबाबय लेल दैत छलाह। हुनका आशा छल जे ओकर तित स्वाद शादुलकेँ मन्त्रायल ताबीज थूकय लेल विवश करत, मुदा शादुल ओकरा चबा कऽ निगलि जाइत छल। ओहि एकटा खेल लेल ओकरा बहुत मारि पड़ल, आ ओ अखनहुँ ओकरा सीखबाक विरोध कऽ रहल छल। अन्तमे इमाम हरियर मेरचाइक प्रयोग कएलखिन। जलन सहयमे असमर्थ शादुल मन्त्रायल ताबीज थुकरय लागल। मोटामोटी दू मासक बाद इमामक प्रयास रङ्ग अनलक। शादुल बेस कुशलताक संग मन्त्रायल ताबीज बाहर फेंकब सीखि गेल। तखन सँ शादुल अपन मुँहसँ मन्त्रायल ताबीज केँ इमामक इच्छित ऊँचाई धरि फेंकैत छल। कुशलता सँ ओकरा पकड़ि कऽ इमाम ओकरा बच्चा सभक गट्टा पर बान्हि दैत छलाह। शादुल चाँदक संग खेलाइत काल एकटा बच्चा बनि जाइत छल आ बीबम्माक लगपास एकटा शिशु जकाँ रहैत छल; मुदा इमामक पाछाँ चलैत काल ओ परिवारक भार ढोबैत एकटा जिम्मेदार सदस्य छल। शादुलक प्रशिक्षण समाप्त भेला कऽ बाद इमाम एक दिन ओकरा संग लय कऽ भीख मांगय निकललाह। लोकक मनोरंजन करैत इमाम सदिखन कहानी सभ बुनैत छलाह आ शादुल सँ ओहि अनुसार खेल करबैत छलाह। शुरूआत करैत ओ कहैत छलाह, 'सभ लोककेँ सलाम करह', जाहि पर शादुल अपन पाछाँक पएर पर सोझ ठाढ़ भऽ कऽ घुमैत छल आ जमा भेल लोककेँ सलाम करैत छल। जँ दर्शकमे महिलाक संख्या बेसी रहैत छल, तँ इमाम शादुल सँ पुरुष सभक खेल करबैत छलाह, आ जखन पुरुष बेसी रहैत छलाह तँ ओकरा सँ महिला सभक खेल करबैत छलाह। शुरूआतमे इमाम चाहैत छलाह जे शादुल अपन गामक लोकक सोझाँ खेल देखाबय। जखन ओ अपन कौशलक प्रदर्शन कऽ गामक लोकक प्रशंसा जीति लेलक, तँ इमाम ओकरा जीविका चलयबाक लेल लगपासक दोसर गाम सभमे लय जाएब चाहलखिन। शादुल तखन धरि घर आ अंगना धरि सीमित छल, ओ कहियो बाहर गलीमे अकेले डेग नहि रखने छल आ नहिये भीड़ कऽ बीच खेल कएने छल। नियत दिन पर इमाम कारी कोट पहिरने छलाह, एकटा रेशमी लुंगी ठेहुन धरि उठा कऽ बान्हने छलाह आ कपार पर टोपी पहिरने छलाह। शादुलकेँ कनी बालि खिया कऽ आ स्वयं किछु खयला कऽ बाद इमाम ओकर थुथुन कऽ चारू कात पट्टा आ कण्ठमे एकटा रस्सा बान्हि देलखिन। ओ अपनहुँ एकटा बेल्ट आ रस्सा पहिरि लेलनि। जखन इमाम आगू बढ़लाह, शादुल पाछाँ -पाछाँ चलय लागल। रस्सा पकड़ने हाथमे मन्त्रायल-ताबीज सभ छल। जहिना ओ गलीमे डेग रखलखिन, गलीक कुकुर सभ लगातार भुकैत शादुलक पीछा करय लागल। एक -दोसरा सँ होड़ करैत सभ शादुल पर हमला करबाक प्रयास करय लागल। शादुल डरि कऽ एतऽ-ओतऽ भागय लागल, मुदा इमाम कुकुर सभकेँ भगाबैत आगू बढ़लाह। ई हुनका लेल कोनो नव बात नहि छल, किएकि पहिने सेहो जखन ओ भालु लय कऽ बाहर निकलैत छलाह, तँ एहिना होइत छलैक। शादुल स्कूल जाइत बच्चा जकाँ विरोध कऽ रहल छल। इमाम ओकरा गामक चौक धरि अनलखिन आ ठाढ़ भऽ गेलाह। शादुल अपन रस्सा खींचलक आ आगू एक डेग सेहो बढ़य सँ मना कऽ देलक। "तोरा मरि (प्लेग) लगौ! की तूँ कुकुर सभ सँ डरैत छह? किछु दिनमे तोरा एकर अभ्यास भऽ जयतौ। तूँ एकरा पहिल बेर देखि रहल छह, नहि?" इमाम ओकर रस्सा घिचैत बुझबैत छलाह। तखने शादुलक कण्ठक रस्सा अनचोक्के टूटि गेल आ इमाम मोटामोटी पीठक भरे खसि पड़लाह, मुदा समय रहैत अपन संतुलन बना लेलखिन। दू तरपानमे शादुल रस्तामे पड़ल पाथरक ढेर पर कूदि गेल आ बिना ई सोचने जे ओ कतय जा रहल अछि, तेजी सँ भागि निकलल। कुकुर सभ शादुलक पीछा कएलक आ इमाम कुकुर सभक पाछाँ दौगलाह। इमाम भालुक पीछा करैत बुदबुदयलाह, "हे!... तोरा सभ जे एकर पीछा कऽ रहल छह, मरि लगौ! आइ तूँ बचि गेलें किएकि ओकर मुँहमे जाबी लागल छैक, नहि तँ एखन धरि ओ तोरा सभकेँ टुकड़ा -टुकड़ा कऽ देने रहितौ।" एक दिस कुकुर सभ आ दोसर दिस इमाम- शादुल मात्र एक बेर मूड़ी घुमा कऽ देखलक आ ओकर बाद नहि रुकल। इमाम शादुल धरि नहि पहुँचि सकलाह, जे पछोड़ धेने कुकुर सभ सँ दूर भागय कऽ पूर्ण प्रयास कऽ रहल छल। इमाम किछु बुझि सकितथि, ओकरा सँ पहिनेहिये भालु गाम सँ बाहर चलि गेल। वास्तवमे कुकुर सभ ई सुनिश्चित कऽ देलक जे भालु गाम छोड़ि दय। इमाम ई देखय लेल प्रतीक्षा कएलखिन जे की शादुल कम सँ कम घर वापस गेल, मुदा शादुल वापस नहि आएल। इमाम गामक लगक सभ झाँखुड़ आ जङ्गल खोजलखिन, मुदा शादुलक कोनो निशान नहि भेटल। ओ खेत, परती जमीन आ सुखायल नाला सभ छानि मारलखिन। पूरा दिन ओ खोज करैत रहलाह, मुदा सभ व्यर्थ गेल। इमाम ककरो हाथे बीबम्माकेँ सन्देश पठा देने छलाह। बीबम्मा तुरत्ते चाँदकेँ लय कऽ पहुँचि गेलीह। तीनू गोटे राति जङ्गलमे बितौलनि। मध्यरात्रिक बाद चाँदनी मद्धिम पड़ि गेल आ अन्हार जङ्गलकेँ घेरि लेलक। ओ लोकनि सुखायल पात आ टहनी सँ अलाव जरौलनि आ ओकर पास बैसि गेलाह। इमाम बेर-बेर शादुलकेँ पुकारलखिन, मुदा कोनो जवाब नहि आएल। बीबम्मा अ़ँखिमे नोर भरि कऽ बैसल छलीह, एक्को बेर मूड़ी नहि उठौलनि। चाँद सेहो चुप भऽ गेलीह। तीनू गोटे सतर्क भऽ जङ्गलक कोनो कोना सँ शादुलक कोनो मद्धिम आवाज सुनय लेल कान लगेने छलाह। भरि राति खोज कएलाक बाद इमाम आ बीबम्मा भोर कऽ किछु घण्टामे घर पहुँचलाह। ओहि राति चूल्हि पर भोजनक बर्तन नहि चढ़ल। दुनू गोटे अपन -अपन कोनमे मूड़ी -तुड़ि कऽ सुति गेलाह। बीबम्मा चाँदकेँ भोजन लेल कानैत सुनि कऽ सेहो भोजन बनयबाक झंझट नहि कएलनि। इमाम आ बीबम्मा ई निष्कर्ष निकालि चुकल छलाह जे शादुलक भाग्यमे जङ्गलमे अपन अन्त भेटब लिखल छल। भले ओ पूरा जङ्गल भटकि कऽ अपन माता धरि पहुँचि जाय, मुदा माता भालु ओकरा चिनहत सेहो नहि आ नहिये स्वीकारत। एक बेर जखन ओ ई बुझि जइतैक जे ओकर बच्चा मनुष्यक बीच रहि आएल अछि, तँ माता भालु ओकर उपस्थिति बर्दाश्त नहि करतैक; वरन् ओकरा निर्दयतापूर्वक मारि देबामे सेहो संकोच नहि करतैक। जँ ओ नहि मारितैक, तखनो शादुल भूख सँ निश्चित रूप सँ मरि जायत। ई सभ कल्पना करैत बीबम्मा अपन नियंत्रण नहि राखि सकलीह। ओ क्रोध सँ अपन पतिक विरुद्ध बिख-सबिख भऽ बाजय लगलीह, "तोर मति मारल गेलौ अछि! जँ कुकुर सभ ओकर पीछा कऽ रहल छल तँ की तूँ ओकरा छोड़ि देबह? की तूँ ओकरा भगा नहि सकलें? की तूँ व्यर्थमे ओकर प्राण लेबय चाहैत छह?" एतेक कहला कऽ बादो, बिना आश छोड़ने ओ लोकनि राति -दिन अपन खोज जारी रखलनि। इमामक भालु कऽ बच्चा हेराएबाक गप्प पूरा गाममे पसरि गेल। गामक लोक ओकर क्षतिक पीड़ा देखि दया सँ भरि गेलाह। किसान सभ सेहो अपन खेतक लगपास ओकरा खोजबामे शामिल भऽ गेलाह। अगिला दिन एकटा किसान, जे जङ्गलमे अपन हेरायल परू केँ खोजि रहल छल, भालु कऽ बच्चाकेँ एकटा पुरान इनार कऽ खाधि मे देखलक। ओ इमामकेँ बजौलक आ बच्चाक ठाम बताबय लेल ई शर्तराखलक जे इमाम ओकर एक सप्ताह धरि फसल कटनीमे सहायता करताह। इमामकेँ लागल जेना हुनकर हेरायल प्राण वापस आबि गेल हो। ओ मात्र एक सप्ताह नहि, वरन् दस दिन धरि सहायता करबाक वचन देलखिन। वचन लेला कऽ बादहि किसान ओहि ठामक नाम बताओलक। ई जानि कऽ इमाम आ बीबम्मा एकटा पुरान सीरक आ जाल लय कऽ एक क्षणक सेहो देरी कएने बिना ओहि ठाम पहुँचलाह। ओहि पुरान इनारमे बहुत रास घन वनस्पति उगि आएल छल। ओ लोकनि देखलखिन जे शादुल झाँखुड़क बीच एकटा बण्डल जकाँ मूड़ी कऽ सुतल फोंफ काटि रहल अछि। ओ लोकनि अपन आँखि पर विश्वास नहि कऽ सकलाह। शादुलकेँ देखिते हुनकर प्राणमे प्राण आएल आ प्रसन्नताक कोनो सीमा नहि रहलनि। शादुलकेँ बचेबाक लेल ओ अपन जीवन जोखिममे देमय लेल सेहो तत्पर छलाह। झाँखुड़क पास जा कऽ इमाम मद्धिम आवाजमे पुकारलखिन, "शादुल!"। शादुल मूड़ी उठा कऽ देखलक। इमाम आ बीबम्मा डरि जाइ गेलाह जे कतहु ओ भागि नहि जाय। ओ लोकनि पहिने सँ रणनीति बना लेने छलाह जे जँ ओ भागत तँ की करबाक अछि, मुदा आश्चर्यक बात ई जे शादुल नहि भागल। ओ चुपचाप ठाढ़ भऽ गेल। "अरे बेटा... एतऽ!" इमाम पुकारलखिन। शादुल झाँखुड़ सँ बाहर इमामक दिस आएल; ओ आस्ते -आस्ते कुहरैत आ लटपटा कऽ चलि रहल छल। बिना भोजनक रहबाक कारणे ओ एतेक दुर्बल भऽ गेल छल जे लागैत छल आब मूर्छित भऽ जायत। इमामक आँखि नोर सँ भरि आएल। ओकरा अपन अङ्कवारमे भरि कऽ इमाम बाजय लगलाह, "अरे बेटा... शादुल... तोरा पर कतेक कष्ट आएलौ...!" बीबम्मा सेहो कानय लगलीह। ओ शादुलकेँ अङ्कवार भरि ओतबे खुश आ सन्तुष्ट छलीह जतेक अपन बेटा चाँदकेँ अङ्कवार भरि कऽ होइत छलीह। ओ लोकनि ओकरा तुरत्ते घर अनलनि, मुँहक जाबी हठौलनि आ ओकरा मकइक बालि खियौलनि। अपन वचनक पालन करैत, दस दिन धरि इमाम आ बीबम्मा दुनू गोटे ओहि किसानक खेत पर माथ पर चढ़ल सूर्यक परवाह कएले बिना फसल कटनीमे सहायता कएलनि। अगिला दस दिन ओ सभ शादुल लेल मकइक भुट्टा जमा करबामे लगलाह। बीबम्मा दोसर किसानकेँ प्रतिदिन घासक एकटा अठिया देबय लेल सहमत भऽ गेलीह, जाहि बदलामे शादुल लेल प्रतिदिन दूधक आपूर्ति होय। शादुलकेँ पूर्णतः नीक होबय आ डर पर काबू पाबि कऽ घूमय -फिरयमे एक मास सँ बेसी समय लागि गेल। ओहि एक मासमे बीबम्मा शादुलक देखरेख अपन बच्चा सँ बेसी कएलनि। जँ एक दिस चाँद सुतैत छल, तँ दोसर दिस शादुल। ओ ओकर सुरक्षित वापसी लेल मानल गेल सभ कौबला पूरा कएलनि। शादुलक पूर्णतः नीक होइते इमाम ओकरा खेल देखेबाक लेल लय जाय चाहलखिन। बीबम्मा कहलखिन, "एखन कोनो खेल नहि। ओ एखनहुँ डरल लगैत अछि। कनी दिन आर प्रतीक्षा करू।" मुदा इमाम हुनकर सुझावकेँ अनदेखा कऽ देलखिन। "जँ ओ घरहिमे रहत तँ सभ खेल बिसरि जायत। ओ अपन डर पर तखने काबू पाबि सकत जखन ओकरा बाहर लय जाएल जाय।" बीबम्माकेँ हुनकर बात पर विश्वास नहि छल। एहि कारणेँ ओ गलीक कुकुर सभ सँ शादुलकेँ बचेबाक लेल शुरूक किछु दिन स्वयं ओकरा संगे चललीह। ओना शुरूमे शादुल डरल छल, मुदा आस्ते -आस्ते ओ कुकुर सभक डर सँ मुक्त भऽ गेल। एक बेर, जखन शादुल पाँच बर्खक छल, ओ बीमार पड़ि गेल। कियो ओकर बीमारीक कारण नहि जानि सकल। इमाम ओकरा पिसल जड़ी -बूटीक औखध देलखिन, तखनो शादुलमे सुधारक कोनो लक्षण नहि देखायल। ओ नहिये बालि खाइत छल आ नहिये चलि पाबैत छल। ओहि ठामक एक झोराछाप डॉक्टर नागिनक केंचुलीक मांग कएलक। इमाम आ बीबम्मा ओकर खोजमे लगपासक क्षेत्रक सभ साँप कऽ बिलकेँ छानि मारलखिन। भीषण गुमारक समय छल आ साँप प्रायः अपन बिलक बहुत गहीरमे रहैत अछि। दू दिनक अथक खोजक बाद बीबम्मा कतौ सँ एकटा केंचुली जुगाड़ कएलनि। ओकरा सँ बनल औखध अन्ततः काज कएलक आ एक सप्ताहक भीतर शादुल ठीक भऽ गेल। जखन शादुल दस बर्खक छल, चाँद सेहो मोटामोटी ओही उमेरक छल। ओ शादुलक पीठ पर सवारी करैत छल। ओहि समय गाम भयंकर अकालक चपेटमे आबि गेल छल। शादुल ओहि कठिन समयमे इमामक परिवारक बेस रक्षा कएलक। सभ ओकर खेल देखि कऽ चकित रहि जाइत छलाह। इमाम जखन कखनो शादुलकेँ लय कऽ घरसँ निकलैत छलाह, तँ ओ शाइते कहियो खाली हाथ वापस अबैत होथि; हुनकर कान्ह वला झोरा सदिखन चाउर सँ भरल रहैत छल! किछु गाममे लोक भालु सँ 'बतुकम्मा' नृत्य करबैत छलाह, एहि विश्वास सँ जे एकरा सँ वर्षा होयत! जखन कहियो इमाम लग टकाक कमी होइत छल, वा कोनो आवश्यकता पूरा करबाक लेल किछु टकाक जुगाड़ करबाक रहैत छल, तँ ओ शादुलकेँ लय कऽ किछु स्कूलक चक्कर लगा लैत छलाह। शादुल एहन प्रकार सँ खेल देखबैत छल जे बच्चा सभ बेस प्रसन्न होइत छलाह। कठिन समयमे परिवारक भरण -पोषण लेल ओहि समयक चवन्नी -अठन्नी सेहो पर्याप्त भऽ जाइत छल। एतबेमे शादुल आ चाँदक बीच छोट -मोट झगड़ा सेहो शुरू भऽ जाइत छल-चाँद शिकाइत करैत छल जे शादुल ओकरा धक्का देलक, चुट्टी काटलक वा खरोंचि देलक। इमाम आ बीबम्मा लेल ई दू सहोदर भाईक बीचक छोट -मोट नोकझोंक जकाँ छल आ ओ लोकनि खुशी सँ दुनूक बीच सुलह करा दैत छलाह। एकर एकटा पैघ कारण छल। शादुलक इमाम आ बीबम्माक जीवनमे आबय सँ पहिने ओ लोकनि प्रायः भूखल रहैत छलाह। मुदा शादुलक अइला कऽ बाद एहन कोनो अवसर नहि आएल जखन ओ लोकनि भुखले रहलाह। किछु गलीक चक्कर लगौला मात्र सँ ओकरा प्रचुर मात्रा मे भोजन भेटि जाइत छलैक। शादुलक माध्यम सँ किछु ताबीजक बिक्री सँ ओकरा कनी अतिरिक्त टका सेहो भेटि जाइत छल। एहि कारणेँ शादुलक ओकरा सभक जीवनमे अइला कऽ बाद, इमाम आ बीबम्मा एको दिन भूखक कष्ट नहि झेललनि आ नहिये आजीविका लेल हुनका कोनो पैघ सङ्घर्ष करय पड़लनि। "अब्बा... अरे अब्बा!" चाँदक शब्द सुनि इमाम चौंकि कऽ वर्तमानमे वापस अयलाह। अपन रस्सीक खाट पर उठि कऽ बैसैत इमाम अपन बेटा दिस देखलखिन। चाँद अखनहि अंगनामे खुनल गेल खाधि (गड्ढा) सँ बाहर निकलल छल। ओ अपन पिताकेँ फेर सँ पुकारलखिन। इमाम ओतय बिना कोनो जवाबक व्याकुल बैसल छलाह। ओ बीबम्माकेँ खोजलखिन। ओ देखलखिन जे ओ दलानक एक कोनामे अपन साड़ीक आँचर ओछा कऽ सुतल छलीह। हुनकर फोंफ कटबा सँ इमाम बुझि गेलाह जे ओ गहीर निन्नमे छलीह। इमाम रुष्ट छलाह, मुदा बड्ड दुखी छलाह। इमाम घृणा सँ जमीन पर थुकरलखिन आ अपन मनहि मन बुदबुदयलाह, "थू... तोर माय पर लानत! तूँ कोना सुति सकैत छह... की तूँ मानुस छह?" हाथ सँ गैंती आ कोदारि फेकि कऽ चाँद अपन पिताक पास आयल। इमाम अपन बेटाक दिस देखबा सँ सेहो डरैत छलाह, जे ओहि समय कोनो शैतान वा दैत्य जकाँ लागि रहल छलीह, जेना हुनकर प्राण लेबय आयल होथि। "अम्मी..." चाँद अपन माएकेँ बजौलखिन। "यै..." बीबम्मा अचम्भित भऽ कऽ बैसि गेलीह। "हम की करी?" चाँद पुछलखिन। "की करबह?" बीबम्मा दोहरओलनि, ई जानबाक लेल जे ओ की करय चाहैत छथि। माता -पुत्रक बीच किछु बातचीत भेल। चाँद घाम सँ भिजल छल आ चाँदनी हुनकर मुँह पर पड़ि कऽ ओकरा भयावह बना रहल छल। हुनकर भाव एहन छल जेना कहि रहल होथि: "या तँ अहाँ हमर बात मानू, नहि तँ हम कोनो हद धरि जा सकैत छी।" जेना हुनकर सभ विचार पढ़ि लेल गेल हो, इमाम देखलखिन जे बीबम्मा मूड़ी हिला कऽ अपन सहमति दऽ रहल छलीह। खाट कऽ नीचाँ शादुलक फोंफ काटब सुनाइ पड़ि रहल छल। ओकरा सँ इमाम बुझि गेलाह जे ओ जे भोजन देने छलाह, ओ ओकर भूख मेटाबय लेल पर्याप्त नहि छल। ओ, जे बीस बर्ख धरि ओकरा सभकेँ खियौने छल, आब भूखल मरि रहल छल। ओ, जे ओकरा सभकेँ सुखमे देखबाक लेल जीवित छल, आब मरबाक तैयारी कऽ रहल छल। शादुलक बारेमे सोचि इमामक भीतर एकटा पैघ पीड़ा जागि उठलनि। चाँद अपन पिताक कोनो प्रतिक्रियाक प्रतीक्षा नहि कएलखिन। ओ हाथमे एकटा लाठी लेलनि आ शादुलकेँ जगाबय लेल ओकरा खोसलनि। दू बेर मारि खयला कऽ बाद शादुल खाट कऽ नीचाँ सँ बाहर आयल। ओ कोनो खतराक आभास पाबि कऽ उदास देखाय लागल। बीबम्मा तखन ओतहि ठाढ़ि छलीह जतय ओ लेटल छल, जखनकि इमाम अपन खाट पर जड़ि भऽ कऽ बैसल छलाह। शादुल जे खाट कऽ नीचाँ सँ बाहर निकलल छल, पुनः भीतर जाइ कऽ प्रयास कएलक, मुदा चाँद ओकर कण्ठक रस्सा कसि कऽ पकड़ने छल। शादुलक विरोधक बादो चाँद ओकरा खुनल गेल खाधि दिस घिसिया लेलखिन। एहि हड़बड़ीमे ककरो ध्यान नहि गेल जे भोजन दैत काल इमाम शादुलक मुँहक जाबी खोलि देने छलाह। प्रायः इमाम ओकरा तुरत्ते लगा देबाक ध्यान राखैत छलाह, मुदा आइ ओकरा पुनः बान्हब ओ जरूरी नहि बुझलनि। जखन चाँद ओकरा खाधि दिस घिचैत छल, शादुल छटपटाय लागल। चाँद किछु क्षण लेल खाधि लग ठाढ़ भऽ गेल। ओहि क्षण हुनका शादुलक संग बीतल बाल्यकालक कोनो स्मृति नहि अएलनि। सत्य तँ ई छल जे शादुल चाँदकेँ कतौ सँ अपन नहि, वरन् मात्र एकटा बोनहा जानवर जकाँ लागि रहल छल! चाँद बस ओतय ठाढ़ भऽ कऽ ई उपाय सोचि रहल छल जे शादुलकेँ कोना खाधिमे धकेलल जाय। खाधि कनी सांकर छल, मुदा शादुलक ऊँचाई सँ बेसी गहींर छल, जाहिसँ एक बेर खसला कऽ बाद ओकर बाहर निकलब कठिन होइत। भालु कऽ खसिते चाँदकेँ मात्र माटि खसा कऽ ओकरा तोपि देबाक छल। बस एतबे! इमाम खाट पर बैसि कऽ बेस अशान्त अनुभव कऽ रहल छलाह। ओ अपन बेटाकेँ रोकय चाहैत छलाह, मुदा हुनकर डर बाधक बनल छल। ओ बीबम्माकेँ किछु कहय चाहैत छलाह, मुदा हुनका सँ बात करबामे बेस घृणा लागि रहल छलनि। इमाम सोचि रहल छलाह: ओ शादुलकेँ अपन बेटा जकाँ पोसलनि। आब ओ अपन आँखि कऽ सोझाँ ओकर अन्त देखि रहल छथि। थू... की ई माए थिक? काल्हि जँ कोनो आन संकट आएल, तँ ई हमरो अन्त देखबामे संकोच नहि करतीह। जेना -जेना भय बढ़ैत छल, इमाम दृश्य सहन करबामे असमर्थ भऽ अपन मुँह दोसर दिस घुमा लेलनि। जखन दफन करबाक समय नजदीक आएल, तँ ओ अपनाकेँ ओतय सँ दूर खींचबामे स्वयंकेँ बेस असमर्थ पाबि रहल छलाह। मुदा बीबम्मा ठीक एकर विपरीत अडिग ठाढ़ छलीह। शादुलकेँ आश्वस्त करैत चाँद ओकरा खाधिक किनारे पर ठाढ़ कऽ देलखिन। ओहि बिन्दु सँ ओ शादुलकेँ खाधिमे खसबय लेल एकटा जोर सँ धक्का देलखिन। मुदा चाँदक आश्चर्यक ठिकाना नहि रहल जखन शादुल एकहि छलाँगमे खाधिक दोसर दिस उतरि गेल। जखन ओहि दिस सँ धकेलल गेल, तँ ओ एहि दिस कूदि गेल! एकटा निपुण खिलाड़ी जकाँ ओकरा ई पूरा अभ्यास कोनो खेल -तरकीब जकाँ लागि रहल छलैक। चाँद दू -तीन बेर शादुलकेँ खाधिमे धकेलबाक प्रयास कएलखिन, मुदा सभ बेर असफल भेला पर हुनकर धैर्य समाप्त भऽ गेलनि आ क्रोध तीव्र भऽ गेलनि। ओ शादुलक रस्सा पकड़लनि आ ओकरा अपन पएर सँ दबाबैत बौआयल जकाँ धकेलय लगलाह। शादुल घुरघुरायत बड्ड कबलतीसँ खाधिमे खसय सँ बचि गेल। इमाम शादुलकेँ छोड़ि देबाक लेल चाँद सँ गोहाड़ केलन्हि आ बड़बड़ाइत बाजल छलाह, "चाँद! नक्कोरे... नक्कोरे! (नहि मारू... नहि मारू!)"। बीबम्मा चिकड़लीह, "चाँद... सावधान! तूँ पिछड़ि सकैत छह! ओकरा कुशलता सँ धकेलू!"। चाँद अपन पूरा जोर लगा कऽ हाँफय लागल। जे काज शादुल लेल खेल जकाँ शुरू भेल छल, आब दुनूक बीच एकटा पैघ सङ्घर्षमे बदलि गेल। शादुल जे शुरूमे मात्र खाधिमे खसय सँ बचबाक प्रयास कऽ रहल छल, आब विद्रोही मुद्रा मे आबि गेल छल। चाँदक भीतर जे क्रोध तरबा सँ मगज धरि धधकि रहल छल, ओकरा कारणेँ ओ रस्सा सँ शादुलक पीठ पर प्रहार करय लागल। भालु ओकरा पर झपटल आ गुरड़ल। अपन पएर उठबैत चाँद एक अन्तिम जोर सँ धक्का देबाक प्रयास कएलखिन, मुदा शादुल पुनः बचि गेल। चाँद हाँफय लागल। ओ क्रोधमे अपन पिताक दिस झपटल आ शादुलकेँ मारि देबाक आदेश देलखिन, "अब्बा... अहाँ जाऊ! ओहि शैतानकेँ मारू!"। इमाम नहिये कोनो प्रतिक्रिया देलनि आ नहिये एक इंच हिललाह। ओ मात्र हुनका घूरि रहल छलाह। चाँदक आँखि क्रोध सँ लाल भऽ गेल। ओ अपन गप्प पुनः दोहरओलनि। खतरा देखि बीबम्मा अपन पति केँ उकसाओलनि, "जाऊ... जाऊ! की एक बेर कहला सँ नहि बुझैत छी? जाऊ!"। इमाम निश्चल भऽ कऽ अपन पत्नीकेँ खतरनाक नजरि सँ देखलखिन। क्रोधित चाँद दाँत पीसैत शादुलकेँ पुनः खाधिमे धकेलबाक लेल बढ़ल। एहि बेर शादुल ने केवल विद्रोह कएलक, वरन् ओ आब चाँद पर टूटि पड़ल। चाँद पर झपटि कऽ ओ हुनका अपन शक्तिशाली जबड़ाक बीच पकड़ि लेलक आ ठाढ़ भऽ कऽ गुरड़ल। चाँद भयावह रूप सँ चिकड़ऽ लागल। "अरे अल्लाह... बेटा मरि गेल!" बीबम्मा अपन बेटाकेँ मरल मानि कऽ घबरा कऽ आगू दौगलीह। चकित भऽ इमाम शुरूमे किछु बुझि नहि सकला, मुदा जखन देखलखिन जे चाँद जमीन पर छथि आ शादुल हुनकर ऊपर हावी भऽ गुरराय रहल अछि, आ चाँद मदति लेल चिकड़ऽ लागल। शादुलक प्रखर दाँत चाँदनीमे चमकय लागल। इमामक धड़कन तेज भऽ गेल। ओ "शादुल!" चिकरैत चाँद लग पहुँचलाह। बीबम्मा सेहो, जे तखन धरि चाँदक लग दौगि आएल छलीह, एकटा माए जकाँ अपन दू पुत्रक बीचक सङ्घर्ष सुलझबैत शादुलकेँ ओकर रोइयाँ सँ पकड़ि कऽ दूर खींचबाक प्रयास कएलखिन। इमामक मुँह सँ "शादुल" कऽ पुकार सुनि शादुल आज्ञाकारी जकाँ चाँदकेँ छोड़ि देलक आ हाँफैत एक दिस ठाढ़ भऽ गेल। चाँद ठाढ़ भऽ गेल, मुदा अखनहुँ आतंकित छल। दूर एकटा लाठी देखि ओकरा हाथमे लेलक आ प्रचण्ड क्रोधमे बौआयल जकाँ शादुलकेँ मारय लागल। बीबम्मा क्रोध सँ चिकड़लीह, "मारु... शैतानकेँ मारि दिअ!" प्रहारक विरोध करैत शादुल पीड़ा सँ दौड़ैत इमाम लग ठाढ़ भऽ गेल, मुदा इमाम पूर्णतः नहि बुझि सकलाह जे की करबाक अछि। ओ चाँद दिस दौगलाह आ बाजल छलाह, "नहि चाँद! नहि! प्रतीक्षा करू!" चाँद कोनो समझौता करबाक मूडमे नहि छल। शादुल पर गारिक बौछार करैत ओकरा पिटनाइ जारी रखलक। सभ प्रहारक संग शादुल गरजैत इमामक चारू कात दौड़य लागल। शादुलक ई पीड़ा देखब इमाम लेल असह्य भऽ गेल, ओ बीच -बचाव करैत चाँदक हाथ सँ लाठी छीनबाक प्रयास कएलखिन, मुदा चाँद कनिको नहि थमल। ठीक ओही क्षण, इमामक कान्ह पर एकटा जोर सँ लाठी बजड़ल। जँ ई चोट हुनकर कपार पर पड़ल रहितैक, तँ ओ निश्चित रूप सँ ओतहि ढहि कऽ मरि जाइत! एकटा ढेरक रूपमे खसैत, साँस लेबाक लेल सङ्घर्ष करैत ओ एकटा दयनीय चीत्कार कएलखिन। चाँद अपन पिताकेँ मारबाक लेल पुनः लाठी उठौलनि। इमामक पीड़ा सँ भरल चीत्कार सुनि शादुल क्रोध सँ चाँदकेँ घुरलक। एकटा एहन पुत्र जकाँ जे अपन पिताकेँ चोट खाइत नहि देखि सकैत हो, शादुल चाँद पर पुनः हमला करय लेल झपटल। अपन पाछाँक पएर पर अपन पूरा ऊँचाई धरि ठाढ़ भऽ कऽ शादुल चाँद पर खसल। ओहि प्रहार सँ चाँद अनचोक्के पीठ भरे जमीन पर खसि पड़ल। शुरूमे जखन शादुल विद्रोह कएलक, तँ ओ चाँदकेँ कोनो पैघ क्षति नहि पहुँचओलक, मुदा आब ओ प्रचण्ड क्रोधमे छल। पुनः अपन जबड़ा पसारैत शादुल चाँदक गरदनि पकड़ि लेलक; ओकर दाँत चाँदक कण्ठ पर छल। चाँद अपन प्राणक भय सँ एकटा कान फाड़ि देबय वला चीत्कार कएलखिन। एक क्षण आर होइत तँ शादुल हुनकर कपार फाड़ि दैत, मुदा इमाम समय पर "शादुल! नक्कोरे!" चिकरैत ओकरा रोकलखिन आ ओकरा रोइयाँ सँ पकड़ि कऽ पाछाँ हठौलनि। चाँद ठाढ़ भऽ गेल, मुदा भय सँ ओ अखनहुँ थड़थड़ाइत थरथरा रहल छल। बीबम्मा कानैत अपन हाथ अपन बेटा पर फेरि रहल छलीह, ई देखय लेल जे ओ घायल तँ नहि छथि। शादुल इमामक लग ठाढ़ भऽ चाँदक दिस अखनहुँ गुर्रा कऽ देखि रहल छल। आब ओतय दू टा युद्धरत गुट बनि गेल छल-एक दिस बीबम्मा आ चाँद, आ दोसर दिस इमाम आ शादुल। अपन माएकेँ एक दिस धकेलि कऽ चाँद भीतर दौगल। शीघ्रे ओ हाथमे एकटा रस्सा लय बाहर आयल आ अपन पिताक सोझाँ ठाढ़ भऽ गेल। "अहाँ हमरा मारि देबाक प्रयास कऽ रहल छी। अहाँ हमरा जियत नहि देखय चाहैत छी, एहि लेल अहाँ शादुलक मुँहक जाबी खोलि देलहुँ। अहाँ हमरा किएक मारब, हम अपन प्राण स्वयं लय लेब!" एतेक कहि ओ रस्सा लऽ कऽ एकटा गाछक दिस तेजी सँ बढ़ल। "अरे बेटा नक्कोरे... नक्को! ओ रस्सा छोड़ि दऽ रे!" बीबम्मा विलाप करैत दुनूक बीच आएल छलीह आ रस्सा छोड़ि देबाक विनती करय लगलीह। चाँद हुनका धकेलि देलखिन। बीबम्मा लटपटा कऽ जमीन पर खसि पड़लीह। अपन पएर पर ठाढ़ भऽ ओ अपन पतिक पास दौड़लीह। "ओ शैतान! अहाँ की कऽ रहल छी? ओकरा पकड़ू!" ओ इमामकेँ कोसय लगलीह। इमाम स्तब्ध ठाढ़ छलाह। ओ अपन पत्नीक गारि सुनि कऽ सचेत भेलाह आ चाँदक पाछाँ दौड़लाह। चाँदकेँ रोकि कऽ ओ हुनकर हाथ सँ रस्सा छीनि लेलखिन। अपन पिताक मुँह पर देखैत चाँद बौआयल जकाँ मांग कएलखिन, "की अहाँ ओकरा (शादुलकेँ) मारब... वा हमरा मारब? स्पष्ट कहू, अहाँ केकरा मारब?" बीबम्मा इमाम आ शादुलकेँ श्राप दैत जोर -जोर सँ कानय लगलीह। "अहाँक कपार फूटि जाय! अहाँ हमर बेटाकेँ मारि देब... अहाँ ओकरा नहि छोड़ब। अहाँ एकर विनाशे लेल जन्मल छी।" क्रोध आ दु:खक मिश्रण सँ इमाम व्याकुल भऽ गेलाह। ओ बीबम्माक दिस क्रूरता सँ देखलखिन आ हुनका पर तमसेलाह, "अपन जीह बन्द राखू!" जाहि पर बीबम्मा चौंकि कऽ एक क्षणमे विलाप करब बन्द कऽ देलखिन। "हे शैतान! हम की कएल? की हम शादुल सँ चाँद पर हमला करय लेल कहलहुँ वा ओकरा आत्महत्या करय लेल कहलहुँ? की हम अहाँ दुनू गोटे जे किछु कहि रहल छलहुँ, तकर एको शब्दक विरोध कएल? अहाँ ओकरा (चाँदकेँ) एकटा कुकुरमे बदलि देलहुँ!" "नहि... ई मात्र अहाँ छी... अहाँ ओकर मुँहक जाबी खोलि ओकरा चाँदक विरुद्ध भड़का देलहुँ। एक मिनट आर होइत तँ ओ हमर बेटाकेँ मारि दैत। तखन अहाँक आँखि ओहि दृश्य पर सुख पबितय। एखनहुँ अहाँ हमरा नहि छोड़ब। अहाँ हमरो अन्त देखब।" बीबम्मा अखनहुँ कानैत दहारि रहल छलीह। इमाम बीबम्मा दिस घुरलथि- "शादुल तोहर जकाँ भ्रष्ट नहि अछि। ओकर किछु नैतिकता छैक। ओकरा अपन स्तनक दूध पिआ कऽ पोसलाक बादो तूँ दू एकड़ जमीन लेल सभटा बिसरि गेलें। ओ तोहर जकाँ नहि अछि। हमरा सभक बीच रहैत -रहैत ओकर मनमे हमरा लेल स्थायी स्नेह जागि गेल छैक। एहि कारणेँ ओ ई ध्यान राखलक जे ओकर एकटा दाँतो हमर बेटाकेँ नहि गड़ै। नहि तँ ओ अखन धरि हमर बेटाकेँ टुकड़ा-टुकड़ा कऽ देने रहितौ, भले तोहर पुरखा सभ ओकर रस्तामे आबि जइतौ। तूँ देखलें नहि जे ओ पोथराजु कऽ की कएलक कोंडापुरममे? की तूँ नहि जानैत छह जे ओ हमरा कोनो क्षति होइत नहि देखि सकैत अछि?" एतबेमे जेना किछु भेलहि नहि छल, शादुल इमामक पएरक चारू कात चक्कर लगबय लगल। ओ कखनो -कखनो इमामक पएर सुंघैत छल आ क्रोध सँ चाँदक दिस देखैत अपन पएर पर ठाढ़ भऽ कऽ दाँत देखाबैत छल। चाँद अखनहुँ क्रोधमे उबलि रहल छल आ अपन माता -पिताक दिस कठोरता सँ देखि रहल छल। जखन चाँद शान्त रहैत छल, तँ पाथर जकाँ धैर्यवान छल, मुदा जखन बौड़ायल, तखन ओ की कहत वा की करत, एकर ओकरा कनिको परवाह नहि रहैत छल। इमाम ई नीक जकाँ जानैत छलाह। एहिमे कोनो आश्चर्य नहि जे जखन ओकरा खराब मूडमे देखैत छलाह, तँ इमाम सदिखन ओकरा कोमल स्वरमे मनेबाक प्रयास करैत छलाह। बीबम्मा आवेशमे कहलखिन, "तूँ अकेले छह जे ओहि असहाय प्राणीकेँ नहि छोड़य चाहैत छह। तूँ अपन बेटाकेँ सुखमे जिऐत देखय नहि चाहैत छह। जतेक पैघ मूर्ख मानुस होय, ओ एक टुकड़ा जमीनक मालिक बनय चाहत... हम नहि जानि तूँ केहन छह..."। इमाम खौंझा कऽ मांग कएलखिन, "हम की नहि कएल? बताउ तँ!"। "चाहैत छह हम तोरा बताबी जे तूँ की कएलें? तोरा ओकरा किछु दाम पर बेचबाक लेल पठाओल गेल छल, तूँ गेलें आ तुरत्ते वापस आबि गेलें।" "अर्थात्... तूँ हमरा सँ की करबाबय चाहैत छह? केकरा बेची जँ कियो ओकरा खरीदय लेल आगू नहि आएल?" "वापस आबय कऽ बदला तूँ अपन जीवन समाप्त कऽ सकैत छलें। हम तोरा सँ छुटकारा पाबि जाइतहुँ। तोहर कपार फूटि जाय!" "हँ, हम ओहो करब, मुदा हम कहियो उम्मीद नहि कएने छलहुँ जे तूँ एतेक जल्दी बदलि जयबह। हम सुनने छलहुँ जे पोसपुत्र (गोद लेल बच्चा) लेल प्रेम अपन बच्चा सँ बेसी होइत छैक। तोहर ओ प्रेम कतय गेल? चाँद तँ मात्र ओकर दूधक आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) रहल। आइ चाँद घोषणा कऽ रहल अछि जे ओ शादुलकेँ मारि देत... काल्हि ओ कहत जे ओ हमरो मारि देत... ओकरा छोड़ह! तोहर बारेमे की? तूँ ओकरा लेल सम्भव -असम्भव सभ किछु कएलें... आ ओतबे जल्दी बदलि गेलें।" चाँद ओकरा सभक बीचक बहस सुनि कऽ झुंझलाहटमे अशिष्टता सँ चिकड़ल: "हम की कहलहुँ आ अहाँ सभ की कऽ रहल छी? की अहाँ दुनू गोटे मौज -मस्ती कऽ रहल छी? एहि स्थितिमे हमरा पास आत्महत्या करबाक अतिरिक्त कोनो विकल्प नहि अछि!" एतेक कहि चाँद एक बेर पुनः गाछ दिस दौगल। इमाम हुनकर प्रयास विफल करबाक लेल हस्तक्षेप कएलखिन आ ओकरा अङ्कवारमे पकड़ि लेलखिन, जखनकि बीबम्मा चाँदक पएर पकड़ने छलीह। "अहाँ अकेले छी जे एहन कऽ रहल छी! अहाँ जानि -बुझि कऽ निर्णयमे देरी कऽ हमरा निराश कऽ रहल छी। अहाँ चाहैत छी जे सभ ओकर उपस्थितिक बारेमे जानि जाय," चाँद क्रोधित भऽ जोर -जोर सँ साँस लैत कहलखिन। इमामक आवाज बैसि गेलनि। ओ सोचलनि जे चाँद सँ बहस करबाक कोनो लाभ नहि अछि। चाँदक पास जा कऽ इमाम अपन हाथ पुत्रक कान्ह परराखलखिन। ओकरा शान्त करबाक प्रयासमे ओ कहलखिन, "हम की कएलहुँ रे? तूँ हमरा शादुलकेँ जङ्गलमे छोड़ि देबाक लेल कहलें। हम कएलहुँ, नहि? ओ स्वयं वापस आबि गेल! तूँ हमरा ओकरा बेचबाक लेल कहलें। हम प्रयास कएलहुँ, नहि? जँ ओ नहि बिका रहल अछि तँ हम की करी? आब तूँ ओकरा जियतहि गाड़य चाहैत छह... की हम नहि कहलहुँ? हमरा बताउ, जँ ओ ओहि खाधिमे नहि कूदेत तँ की करबाक छल? हम ओकरा जङ्गल सँ गाम अनलहुँ। बीस बर्ख सँ साथीक रूपमे रहलहुँ। ओकर सभ बोनहा आदत पर काबू पाबयमे सहायता कएलहुँ, ओकरा अपन सभ ईलम सिखौलहुँ आ सफलताक संग ओकरा पोसुआ बना लेलहुँ। आब जखन हमर आवश्यकता समाप्त भऽ गेल अछि, तँ ओ कतय जा सकैत अछि?" अन्तिम शब्द सभ आस्ते -आस्ते कम भऽ गेल, ओ मात्र अपन मनहि मन बुदबुदयलाह। इमाम ई अनुमान नहि लगा सकैत छलाह जे हुनकर पुत्र हुनकर गप्प पर की प्रतिक्रिया देताह। इमाम सोचलनि: जखन ओ नरम अछि, तखनहि ओकरा झुकेबाक प्रयास करबाक चाही। जखन ओ शान्त भऽ जायत, तखन ओ हमर पुत्र अछि। ओ बादमे मानुसक बीच वापस आबि कऽ वशमे भऽ सकैत अछि। "या हम रहब या तूँ। एहि क्षण निर्णय करू।" चाँद अपन पिताक हाथ अशिष्टता सँ एक दिस धकेलि देलखिन। बीबम्मा चाँदक पएर नहि छोड़लनि। ओ मनबैत कहलखिन, "हम कतय रहि सकैत छी... तोरा बिना... की हम कनीको जीवित रहि सकैत छी? की तूँही हमर जीवनमे सब किछु नहि छह?" "ओ शादुल साथी... शादुल साथी..." दाँत पीसैत आ बुदबुदाइत चाँद फेर सँ शादुल पर हमला करबाक तैयारी कएलखिन। हाथमे एकटा पाथर लैत ओ शादुल पर निशाना साधि कऽ फेकलनि मुदा चूक भऽ गेल। एकचारी गाम सँ बाहर छल, एहि लेल एहि मध्यरात्रिक समयमे ई तीनू गोटे दूरी पर रहथि, आ कोनो आनक सुनबाक पहुँचमे नहि छलाह, सिवाय गलीक कुकुर सभक भौंकबाक आवाजक, जे ओकरा सभक जोर -जोर सँ बाजय सँ डरि कऽ सन्न छल। चाँदकेँ शान्त करबामे इमामकेँ मोटामोटी एक घण्टा लागल। अपन बेटाक पास जाइत बीबम्मा सभटा दोष अपन पति पर मढ़ि देलखिन आ इमाम चुपचाप अपन बेटाक क्रोध शान्त करबाक लेल सभटा अपन माथ पर लेलनि। अन्तमे चाँद एहि शर्त पर अपन रुख नरम कएलखिन जे इमाम खाधिमे उतरि कऽ शादुलकेँ नीचाँ खसबयमे सहायता करताह। चाँद बादमे हुनका (इमामकेँ) बाहर निकालय लेल हाथ बढ़ौतथि। तखन शादुलक दफन सँ बचबाक कोनो उपाय नहि रहत। ओकर बाद तीनू गोटे मिलि कऽ खाधिकेँ माटि सँ तोपि देताह। शुरूमे इमाम योजना सँ सहमत भऽ गेलाह। किछु काल बाद जखन चाँदक व्यथित मन कनी शान्त भेल, तँ इमाम पुछलखिन, "तूँ नहि चाहैत छह जे शादुल लगपास देखल जाय, नहि?" "हँ... वएह बात अछि। जेना कहल गेल अछि तहिना करू। ओ देखाय नहि पड़य, भोर सँ पहिने निपत्ता भऽ जाय।" बीबम्मा अपन बात जोड़लखिन। हुनकर एकमात्र चिन्ता अपन बेटाक कल्याण छल। ऊपर सँ ओ डरल छलीह, एहि कारणेँ ओ चाँदक कहला सँ पहिनहि सहमति दऽ देलखिन। इमाम आ बीबम्माक बीच बहस जारी छल आ चाँद चुपचाप अपन माता -पिताकेँ देखि रहल छल। बीबम्मा घबरा कऽ कहलखिन, "जखन दिन इजोत होयत, तँ लोक सभ जानि जायत। कियो ने कियो भालुक उपस्थितिक बारेमे मण्डल राजस्व अधिकारी (एमआरओ) वा पुलिस स्टेशनमे सूचना दऽ देत। कतेको लोककेँ ई बात पहिने सँ पता छैक जे हम दू एकड़ जमीन लय कऽ किसान बनय बला छी। कतेको लोक एहि ईर्ष्या सँ जरि रहल छथि जे एकटा फकीरकेँ जमीनक की आवश्यकता अछि।" इमाम एकटा नव प्रस्तावराखलखिन, "ठीक अछि... ओ खाधिमे नहि कूदत आ नहि हम ओकरा सँ बाहर निकलब। हम ओकरा भोर होयबा सँ पहिने जङ्गल लय जाएब। हम ई सुनिश्चित करब जे एहि बेर ओ वापस नहि आबय। हम बिना ककरो ध्यान आकर्षित कएने गाम पार कऽ लेब।" इमामक गप्प समाप्त भेला सँ पहिने चाँद क्रोध सँ फाटि पड़ल। "देखू हुनका! की हम सही नहि कहलहुँ? ओ फेर सँ ओही ठाम आबि गेलाह... अरे बताह, अहाँ बताह छी, पछिला बेर की भेल छल? की शादुल पेद्दम्मा जङ्गलमे छोड़लाक बाद साँझ भेला सँ पहिने वापस नहि आबि गेल छल? एहि बेर सेहो ओहिना होयत! पूरा गाम ओकर बारेमे सुनि लेत। हम जे कहब, ककरो हमरा पर विश्वास नहि हेतै। अहाँकेँ की लागैत अछि जे एसआई साहब पछिला दिन की कहने छलाह? ओ कहने छलाह जे बोनहा जानवर राखब अपराध थिक। तखन अम्मी आ हम की झूठ नहि गढ़लहुँ? हुजूर, हमरा लग भालु नहि अछि, हमरा पास एक समय छल मुदा आब ओ मरि गेल... की हम ई नहि कहलहुँ? जखन हम आजीविकाक लेल एमआरओ कऽ पास गेलहुँ तखन की कहलहुँ, याद अछि? ई जमीन पाबय लेल हम सभ अयोग्य लोकक पएर छुलहुँ। पैघ राशि उधार लैत हम दस हजार धरि खर्च कऽ देलहुँ... कनिको कम नहि। जँ एमआरओ कार्यालयमे एकर भनक लागि गेल, एहि भालुक अस्तित्वक एकटा सङ्केतो भेटल, वा कियो ई इशारा कऽ देलक जे शादुल अखनहुँ हमरा सभ संगे अछि, तँ हमरा जमीन सँ वञ्चित कऽ देल जायत। पट्टा हमर नहि होयत!" बीबम्मा सेहो ओतबे जोर सँ शामिल भऽ गेलीह। "हँ। हमर बेटा कतेक भोथिआएल अछि! हम एतेक जिऐत रहलहुँ, की ओ कनीको आराम सँ नहि रहि सकैत अछि? ई भिक्षावृत्तिक जीवन ओकरा लेल नहि अछि... साहसक कमीमे अहाँ कमा नहि सकैत छी, कम सँ कम ओ तँ कमाओत!" इमाम दुनूक गप्प ध्यान सँ सुनलखिन आ हुनका शान्त करय लेल बैसि गेलाह। "ठीक अछि... हम कोनो तेसर आँखिकेँ ई नहि जानय देब। हम भोर होयबा सँ पहिने जङ्गल लेल निकलि जाएब। उप्पीक छालक पिसल पाउडरमे एक मूठी तमाखू मिलायब आ ओ मिश्रण शादुलकेँ खियायब। ई आधा घण्टामे ओकरा बौआ देत। याददाश्त हेराएला कऽ बाद ओ मनुष्यकेँ चिनहबाक स्थितिमे नहि रहत आ नहिये अपन घर वापसीक रस्ता याद कऽ सकत। औखधक तीव्र प्रभावमे ओ जङ्गलमे बताह जकाँ भटकत... की ई ठीक रहत?" चाँद जे किछु सोचलनि, ओ चुपचाप चलि गेलाह। ओकरा मौन देखि बीबम्मा सेहो आर किछु नहि कहैत चुप भऽ गेलीह आ ओकर पाछाँ -पाछाँ चलि गेलीह। इमाम खाट कऽ पास जा कऽ शिथिल भऽ ओकर फोकलापनमे ढहि गेलाह। थोरेक काल बाद इमाम देखलखिन जे एकटा तमाखूक बीड़ी हुनकर डाँर कऽ कपड़ा सँ खसि पड़ल अछि। थरथराइत हाथे ओ अपन लेल एकटा बीड़ी बनौलनि, जरौलनि आ ओकरा चूसय लगलाह। इमाम अपन बटुआमे कच्चा तमाखूक लपेटा महसुस कएलनि आ हुनकर पास उप्पीक गाछ छल। जँ उप्पीक छालकेँ तमाखू संग पिसि कोनो जानवरकेँ खियाओल जाय, तँ ई मिश्रण ओकरा बताह करबाक लेल पर्याप्त छल। उप्पी इमामकेँ दस बर्ख पहिनेक एकटा घटनाक याद दिला देलक। ओहि घटनाक स्मरण सँ हुनकर हृदय भारी भऽ गेलनि। हुनकर स्मृति एकक बाद एक घटनाक परत खोलय लागल। शादुल तखन दस बर्खक छल। नर भालु भेला कऽ कारणे ओ एकटा साथी लेल बताह जकाँ बेकल होइत छल। रातिमे ओ जोर -जोर सँ चिकरैत, गाछ सभकेँ अङ्कवार भरैत आ जमीन पर लोटैत छल। मनुष्यक दिस देखि ओ प्रेमपूर्ण जीवन लेल बेकल होइत छल। ओ मद (काम -उत्तेजना) कऽ समय विद्रोह करैत छल आ दू बेर चाँदकेँ काटय कऽ प्रयास सेहो कएने छल। दू बेर ओ इमामकेँ सेहो काटि लेने छल। एक बेर तँ ओ बीबम्मा पर गुरराइत झपटल छल आ हुनकर कान्ह पकड़ि लेलक आ खेल देखेबा सँ मना कऽ देलक। इमामक साला ओहि समय दू टा मादा भालु पोसने छलाह। इमाम शादुलकेँ ओकरा लग लय गेलाह आ ओकर संग मिलन करौलनि। तखनहि शादुल अपन सामान्य व्यवहारमे वापस आबि सकल। तखनो ओ साथी लेल बेकल होइत रहैत छल, मुदा इमाम ओकरा अक्सर ओहि दूर गाम नहि लय जा सकैत छलाह। आ जँ ओ लय जएबाक प्रबन्ध करितो छलाह, तँ हुनकर साला अपन भालु सभ संग यात्रा पर निकलल रहैत छलाह। परू सभकेँ बधिया करब सामान्य छल, मुदा भालु संग ओही प्रथाकेँ अपनायब संभव नहि छल। तखनो इमाम लग शादुल लेल बधियाकरणक ओहि पारम्परिक विधिकेँ अपनायबाक अतिरिक्त आन कोनो उपाय नहि छल। इमाम सुखायल बोनहा जड़ी -बूटी ब्रह्मदण्डी, उप्पी, विषमुष्टि आ इष्टिकाँतकेँ एक संगे उबालि कऽ एकटा काढ़ा बनौलनि आ एक सप्ताह धरि शादुलकेँ पिऔलनि। भालु पूरा एक मास धरि सोझ नहि ठाढ़ भऽ सकल। ओ काढ़ा ओकरा एतेक दुर्बल कऽ देलक जे एक मासमे ओ पूर्णतः वशमे आबि गेल। एक बेर अपन पुरुषत्व खोला कऽ बाद शादुल एकटा खेल -प्रदर्शकक रूपमे पुनः सामान्य जीवनमे वापस आबि गेल। आब गाछक नीचाँ बैसि ई सभ इमामक स्मृतिमे ताजा भऽ गेल। शादुलक दिस नजरि दौड़बैत इमाम देखलखिन जे ओ भोजनक खोजमे व्यस्त अछि। इमाम मनहि मन सोचलनि: "रे बेटा! हम तोरा इप्पाक ताड़ी पिआ कऽ जङ्गल सँ घर अनलहुँ। तोरा घर पर राखबाक लेल हम तोरा नशीला पदार्थ देलहुँ। अपन जीविका लेल हम तोहर पुरुषत्व दबाबय लेल तोरा बोनहा मिश्रण खियौलहुँ।" "आब फेर सँ हम तोरा बताह कऽ रहल छी ताकि तूँ अपन होश खो दएह। हम तोरा सभ चीज सँ वञ्चित कऽ देलियौ। हम आब तोरा अपनासँ सेहो दूर पठा रहल छी। ई पाप हमरा सहजहि नहि छोड़त... हम एकटा कीड़ा जकाँ मृत्यु कऽ सामना करबाक लेल अभिशप्त छी।" ई सभ सोचि इमाम हृदय सँ एतेक भारी आ ऊर्जाहीन महसुस कएलनि जे ओ अङ्ग सेहो नहि हिला सकलाह। ओ गहीर दु:ख सँ व्याकुल छलाह। व्याकुलतामे इमाम अपन हाथ शादुल पर फेरलखिन। जेना ओ एहन कएलनि, ओकर थुथुन पर चाँदीक छल्ला भेटलनि। तेजी सँ कान टटोललखिन तँ सोनाक बाली निपत्ता छलैक। हुनकर मुँह नोर सँ भिजल छल। इमाम कहलखिन, "शादुल... देखह... ओ सभ तोहर कमाईक सोनाक बाली सेहो निकालि लेलकह।" शादुल हुनका एकटा भावनाहीन उदासीनताक भाव सँ देखलक। दु:खक ओहि क्षणमे सेहो इमाम शादुलक वीरताकेँ याद कएलनि। इमाम प्रेम सँ शादुलक मुँह अपन हाथमे लेलनि, "रे बेटा... तूँ ओहि पहलवान मल्ल रेड्डीकेँ कोना हरेलें, आ तूँ ओहि सोनाक बालीकेँ कोना अर्जित कएलें!" शादुल हुनकासँ आरो बेसी सटि कऽ सुटकि गेल। इमाम बताबय लगलाह जे शादुल गम्भीरावपेटमे मल्ला रेड्डीकेँ कोना हरेने छल। इमाम तखन गाँधी प्रतिमाक पास शादुलक खेल देखा रहल छलाह। शादुल एकटा पहलवान जकाँ गर्व सँ सोझ चलैत छल आ कलाबाजी करैत छल। इमाम गामक लोकक मनोरंजन करैत एकटा साधारण टिप्पणी कएने छलाह, "ई गाम कोनो साधारण गाम नहि छैक शादुल। ई वएह गाम थिक जतय पहलवान मल्ला रेड्डी रहैत छथि। की तूँ मल्ला रेड्डीक विरुद्ध जीत सकबह? की तूँ ओकरा चुनौती देबह वा अपन नङ्गट (नाङरि) मोड़ि कऽ घर बैसबह?" शादुल जमीन पर चांगुर मारैत मल्ला रेड्डीकेँ चुनौती देबाक अपन उत्सुकता प्रदर्शित कएलक। ओ अपन बाम पएर उठौलक, अपन मोंछ घुमौलक आ हवामे उछलल। मल्ला रेड्डी, जे ओकरा गलीक दोसर दिस सँ देखि रहल छलाह, पास अयलाह। ओतय जमा भेल सभ दर्शक ठाढ़ भऽ गेलाह। "ई की मूर्खतापूर्ण बात थिक? की अहाँ एकटा मानुसक तुलना एकटा जानवर सँ कऽ रहल छी?" ओ क्रोधित भऽ कऽ पुछलखिन। इमाम विनम्रता सँ जवाब देलखिन, "मात्र अहाँ पटेल नहि... कोनो व्यक्ति केँ हारय पड़तैक।" मल्ला रेड्डीक अहङ्कार आहत भऽ गेल। "हम एक हजार टका दाँव पर लगाबैत छी जँ हम हारि गेलहुँ, तूँ की देबह?" इमाम उम्मीद नहि कएने छलाह जे गप्प एतेक आगू बढ़ि जायत। जखन ओ किछु बाजय लेल शब्द बटोरि रहल छलाह, चाँद हस्तक्षेप कएलखिन, जे अखनहि शादुलक संगे ओहि ठाम पहुँचल छल ई देखबाक लेल जे हुनकर पिताकेँ की भेल अछि। "हम अहाँकेँ दस हजार देब!" उपस्थित सभक मुँह खुजल रहि गेल। इमाम थरथरा उठलाह। मल्ला रेड्डी आरो क्रोधित भऽ कऽ ठाढ़ भऽ गेलाह। कियो मल्ला रेड्डीकेँ बुझयबाक प्रयास कएलक, "नहि पटेल, भालु अहाँकेँ क्षति पहुँचा देत!" मुदा ई चाँद लेल मात्र एकटा खेल जकाँ छल। चाँद साहसपूर्वक अपन बात जोड़लखिन, "भले अहाँ ओकरा कनीको चोट पहुँचा देब... ओकर अर्थ अछि जे अहाँ जीति गेलहुँ! ओ अपन नह सँ अहाँकेँ नहि खरोंचत आ नहिये दाँत सँ काटत। ओ मात्र कुश्तीक एकटा मुकाबला करत! बस एतबे!" मल्ला रेड्डी एक क्षणक लेल सेहो पाछाँ नहि देखलखिन। ओ दाँत पीस कऽ एक बेरमे अपन कुरता फाड़ि देलखिन, अपन लुंगी कछा मारि कुश्तीमे कूदि पड़लाह। इमाम घाम सँ भीजि गेलाह। अपन पुत्रक दिस क्रोध सँ देखि कऽ कहलखिन, "पटेल! हम एतय मात्र किछु घरक लगपास भीख मांगबाक इरादा रखैत छी, मुदा अहाँ सन लोक सँ झगड़ामे पड़बाक नहि। हम बजारमे अज्ञानतामे ई शब्द कहि देलहुँ। अहाँ आ ओहि भालु कऽ बच्चाक बीच कतय तुलना! अहाँ अकेले जीतब। ओकरा छोड़ू... हमर ई बच्चा नहि जानैत अछि। कृपया हमरा जएबाक अनुमति दिअ।" मुदा मल्ला रेड्डी सुनबाक मूडमे नहि छलाह। इमाम जतेक मल्ला रेड्डीक पएर पर खसि कऽ गिड़गिड़ायलाह, ओ ओतबे क्रोधित होइत गेलाह। जेना -जेना मल्ला रेड्डीक आवाज ऊँच भेल, शादुलक आँखि सेहो लाल होय लागल। ओ सेहो मल्ला रेड्डीकेँ घूरय लागल। "चल! मनमे आएल शब्द बकि कऽ आब तूँ हमर पएर पर खसि रहल छह। की तूँ दस हजार देबह वा कुश्ती करबह... एखने निर्णय करह!" गारि दैत ओ तेजी सँ इमामकेँ एक लात मारि देलखिन। जखन इमामकेँ चोट लागल, शादुल क्रोधित भऽ गेल। अपन शरीर फुलाबैत ओ अपन पाछाँक पएर पर ठाढ़ भऽ गेल। अगिला क्षण ओ मल्ला रेड्डी पर झपटल। मल्ला रेड्डी तुरत्ते एक दिस हटि गेलाह। शादुल जमीन पर सोझे खसि पड़ल। मल्ला रेड्डी तेजी सँ ओकर पीठ पर चढ़ि गेलाह। अपन पएर शादुलक डाँरमे फँसा कऽ आ अपन हाथ ओकर मुँह पर दबा कऽ मल्ला रेड्डी शादुलक गरदनि जोर सँ मचोड़ि देलखिन। शादुल हिलबाक लेल सेहो स्थान नहि पओलक। ओ छटपटाएल, उठबाक प्रयास कएलक मुदा कोनो लाभ नहि भेल। ओ अपन मुँह खोललक आ साँस लेबाक लेल हाँफय लागल। गर्व सँ मल्ला रेड्डी अपन समर्थक सभक दिस एक नजरि देलखिन। लोक सभ उत्साह सँ ताली बजओलक। किछु आर मिनट, आ शादुल अपन अन्तिम साँस लैत। इमाम बीच -बचाव करबाक लेल आगू बढ़लाह, मुदा अगिले पल कियो ओकरा खींचि कऽ एक दिस कऽ देलक। समर्थक सभक ताली सँ उकसाएल मल्ला रेड्डी शादुल पर अपन पकड़ आरो कसि देलखिन। शादुल प्राणहीन जकाँ एतऽ -ओतऽ छटपटाएल। इमाम चीत्कार करय वला छलाह जखन कियो हुनकर मुँह दाबि कऽ हुनका रोकि देलक। इमाम खतराक आभास कएलाक बादो साहस कएलनि, "पटेल... अनुचित तरीका सँ हमला करब मर्दानगी नहि थिक। जँ अहाँमे साहस अछि, तँ ओकरा संग कुश्ती करू।" चारू कात सन्नाटा छा गेल। दर्शक सभ इमामक साहस सँ विस्मित भऽ डर सँ ताकय लगलाह। मल्ला रेड्डी सेहो इमामक शब्द सुनि कऽ ठाढ़ भऽ गेलाह। साँस लैत शादुल अपन शरीरकेँ जोर सँ झटकैत ठाढ़ भऽ गेल आ अपन रोइयाँदार शरीर हिलओलक। पिता -पुत्र दुनू शादुलक पास दौड़लाह। चाँद बेश प्रेम सँ ओकरा अङ्कवार भरि लेलखिन। "ई की सुनैत छी... अहाँ मर्दानगीक गप्प कऽ रहल छी... हमर मर्दानगी पर कोनो सन्देह अछि?" एतेक कहि मल्ला रेड्डी इमामक गरदनि पकड़ि कऽ ऊपर उठा देलखिन। साँस लेबामे असमर्थ इमाम हुनकर हाथमे थरथरा रहल छलाह। शादुल एक बेर फेर क्रोधित भऽ गेल। एहि बेर ओ दुगुन गति सँ मल्ला रेड्डी पर झपटल। ओहि प्रहार सँ मल्ला रेड्डी पीठक बल जमीन पर खसि पड़लाह। शादुल बस ओकरा अपन जबड़ाक बीच पकड़य वला छल। एक क्षण आर होइत तँ ओ दाँत सँ ओकरा काटि लैत। "शादुल उतर रे !" इमाम चिल्लाइत ओकरा ठाढ़ होयबाक आदेश देलखिन। शादुल मल्ला रेड्डीकेँ छोड़ि देलक आ सोझ ठाढ़ भऽ गेल। घाम सँ तर -बतर मल्ला रेड्डी अपन शरीर सँ धूर झाड़लखिन। एहि घटनाकेँ एकटा खेलक रूपमे देखैत दर्शक सभ अपन नेताक समर्थनमे उत्साह सँ झूमि उठलाह। स्थिति देखि इमाम डरि गेलाह जे ओ दर्शक सभक हाथे पीटल जयताह। अपन हाथ शादुलक रोइयाँदार कोट पर फेरैत ओ कहलखिन, "ओ ओकरा पर विद्रोह करत जे हमरा पर हाथ उठौत, पटेल। ओ गप्प एक दिस। ओकरा संग कुश्तीक एकटा मुकाबला करू। देखू के जीतैत अछि। एहि कारणेँ हमरा व्यर्थ मारबाक आ ओकरा अहाँकेँ हानि पहुँचाबैत देखबाक चेष्टा नहि करू।" "ठीक अछि... तखन ओकरा भेजू। देखैत छी," कियो पुकारलक। "ओ एकटा जानवर थिक पटेल। जँ अहाँ कुश्ती कहबै, तँ ओ कुश्ती करत। ओ अपन शब्द पर कायम रहैत अछि। ओ किछु अनहोनी नहि करत। बिना अहाँकेँ हानि पहुँचेने ओ कुश्ती करत, बस देखि लियौ।" शादुलक कान सहराबैत इमाम ओकर कान्ह थपथपौलनि, "शादुल... तूँ आब एकटा पहलमान छह!" भालु अपन पाछाँक पएर पर ठाढ़ भऽ गेल। मल्ला रेड्डी सेहो मुकाबला लेल तैयार भऽ गेलाह। "शादुल, लड़ाई करू रे!" इमाम सङ्केत कएलखिन जे शादुल एकटा नीक मुकाबला करय। झपटैत दुनू आगू बढ़लाह। मल्ला रेड्डी कुश्तीक दाँव -पेचमे प्रशिक्षित छलाह। अपन हाथ -पएर चलबैत ओ शादुल पर शक्तिक प्रदर्शन करय लगलाह। शादुल सेहो एकटा बनावटी हमलामे अपन प्रतिद्वन्द्वी सँ निपटबाक लेल किछु करतब देखाबय लागल। एकटा अनुकूल स्थिति पाबि ओ मल्ला रेड्डीकेँ घेरि लेलक। एकटा तेज चालिसँ ओकरा ऊपर उठबैत नीचाँ खसा देलक। मल्ला रेड्डीक कोनो दाँव ओकरा पुनः अपन पएर पर ठाढ़ करबामे सहायता नहि कऽ सकल। शादुलकेँ एकटा आर मुकाबला लेल तैयार करैत इमाम पुनः ओकरा प्रोत्साहित कएलखिन। मल्ला रेड्डी क्रोध सँ उबलि रहल छलाह। ओ सेहो शादुलकेँ उठा कऽ नीचाँ खसेबाक ताकमे छलाह। जँ ओ एहन कऽ सकितथि, तँ ओ शादुलक अन्त करबाक योजना बना रहल छलाह। शादुल ओकरा कनीको मौका नहि देलक। अपन शक्तिक प्रदर्शन करैत ओ फेर सँ मल्ला रेड्डीकेँ घेरि लेलक। किछु समय धरि सङ्घर्ष कएलाक बाद, ओ एकटा प्रयासमे मल्ला रेड्डीकेँ ऊँच हवामे उठा लेलक आ जमीन पर जोर सँ पटकलक। मल्ला रेड्डी पीड़ा सँ छटपटाय लगलाह। इमाम चुपचाप देखैत रहलाह। दर्शक सभ शादुलक पकड़ि सँ मल्ला रेड्डीकेँ अलग करबामे डरि रहल छलाह। भीड़ सँ कियो भयभीत भऽ पुकारलक, "सभ गोटे... नहि देखि रहल छी? हुनकर सहायता करू... हमर पटेल सङ्घर्ष कऽ रहल छथि!" मल्ला रेड्डी नहि उठि सकलाह। ओ सङ्घर्ष करैत रहलाह... लड़ैत रहलाह... अपन हाथ -पएर मारैत किछु दाँव -पेच करबाक चेष्टा कएलखिन आ अपन पएर पर ठाढ़ होयबाक प्रयास कएलखिन, मुदा कोनो प्रयास सफल नहि भेलनि। मल्ला रेड्डीक पास जा कऽ इमाम पुछलखिन, "पटेल, अहाँ हारलहुँ कि जितलहुँ?" मल्ला रेड्डी एकटा शब्दो नहि बाजलखिन। ओ शादुलकेँ उतारि खसेबाक लेल कखनो एहि कात तँ कखनो ओहि कात लुढ़कि रहल छलाह, मुदा शादुल हुनका कनीको हलचलक अनुमति नहि दऽ रहल छलनि। किछु मिनट आर प्रतीक्षा कएलाक बाद इमाम फेर सँ पुछलखिन, "पटेल, अहाँ हारलहुँ कि जितलहुँ?" मल्ला रेड्डी कोनो जवाब नहि देलखिन, मात्र एकटा कराह हुनकर मुँह सँ निकललनि। भीड़ सँ कियो चिकडल, "हे तूँ! पटेल मरि जयताह... ओहि भालुकेँ हटाउ!" लगपासक कोलाहलपूर्ण शोरकेँ अनदेखी करैत इमाम निश्चल बैसल रहलाह। मल्ला रेड्डी अपन हाथ -पएर मारैत रहलाह। ओ साँस लेबाक लेल हाँफि रहल छलाह मुदा अपनाकेँ उठाबयमे असमर्थ छलाह। सभ गोटे भयभीत भऽ देखि रहल छलाह। एक अन्तिम बेर प्रयास करैत, एकटा कमजोर स्वरमे मल्ला रेड्डी विनती कएलखिन, "हे इमाम! एकर वजन हमरा पर सँ हटाउ!" तुरत्ते इमाम शादुलकेँ मल्ला रेड्डी पर सँ अपन पकड़ ढीला करबाक आदेश देलखिन, "शादुल, उतर रे !" अपन पएर पर ठाढ़ भऽ शादुल आबि कऽ इमामक पास ठाढ़ भऽ गेल। मल्ला रेड्डी उठलाह आ अपन शरीर सँ गर्दा झाड़लनि। इमाम डरल छलाह जे भीड़ की कहत, मुदा मल्ला रेड्डी एकटा शब्दो नहि बाजलखिन। ओ हार स्वीकार कऽ लेलनि। एक हजार टका इमामक हाथमे राखि ओ कहलखिन जे एहि गाममे फेर सँ नहि देखाइ देब आ ओतय सँ चलि गेलाह। इमाम चाँद सँ कहलखिन जे ओ ई टका घरक खर्च लेल राखय चाहैत छथि, मुदा चाँद शादुल लेल सोना खरीदबाक जिद कएलखिन आ ओकरा लेल एकटा बाली बनबौलनि। ओ ककरो ओहि बालीकेँ छुबय नहि दैत छलीह, चाहे कोनो आवश्यकता वा कोनो पैघ सङ्कट किएक नहि आबि जाय। इमाम आब पछता रहल छलाह जे किए ओ शादुलकेँ बोनहा मिश्रण (बताह करय वला औखध) देबाक निर्णय कएने छलाह, जे शादुल ओहि दिन ओकरा बचेबाक लेल अपन प्राण दाँव पर लगा देने छल। ओहि जङ्गलमे जतय लगपास कियो नहि छल, अपन अङ्कवार शादुलक चारू कात राखि इमाम बेस जोर सँ विलाप कएलखिन, जखन धरि हुनकर हृदय हल्लुक नहि भऽ गेलनि। थोरेक काल बाद अपनाकेँ शान्त कऽ ओ उप्पीक छाल आ तमाखूकेँ एक संगे पिसय लगलाह। मिश्रण तैयार करबाक पूरा प्रक्रिया इमाम लेल बेस कष्टकारी साबित भेल। एक बेर मिश्रण तैयार भेला पर इमाम सोचलनि: "एखने ओकरा किएक खियाबी? ओकरा थोरेक काल आर घूमय दियौ। ओ भूखल अछि, नहि? ओ जतेक खाय सकैत अछि, खाय दियौ। ओकर पेट भरि गेला कऽ बाद ओकरा ई दऽ सकैत छी।" एहन कहि एक घण्टा बीति गेल। मोटामोटी एक घण्टा बाद जखन समय नजदीक आएल, तँ ओ अपन मनहि मन कहलखिन, "एतेक जल्दी की अछि? हम ओकरा दुपहरमे सेहो दऽ सकैत छी। एखने घर जा कऽ की करब?" ई सोचि ओ गाछक नीचाँ अपन हाथ -पएर फैला कऽ लेटि गेलाह आ शीघ्रे गहीर नीन्दमे सुति गेलाह। दुपहरमे जखन हुनकर नीन्द खुजल, भालु अखनहुँ किछु चबायबामे व्यस्त छल। ओ विचार कएलखिन, "ओकरा अपन अन्तिम दिन कम सँ कम पेट भरि खाय दियौ। हम ओकरा ओनाही पर्याप्त भोजन नहि दऽ सकलहुँ... हम ओकरा साँझ धरि ई मिश्रण दऽ सकैत छी आ राति धरि घर वापस आबि सकैत छी। एतेक हड़बड़ी की छैक? एतय लगपास कियो अछि की?" तैयार कएल गेल मिश्रण सूखि कऽ कड़ा भऽ गेल छल। माछी आ दोसर कीड़ा सभ भनभनाइत ओकर चारू कात झुण्ड बनेने छल। इमाम चिन्तित भऽ ओहि कीड़ा सभकेँ देखलखिन आ बुझि गेलाह जे ई मिश्रण शादुल पर कतेक खतरनाक रूप सँ काज करत। ओ पुनः गाछक जड़िक सहारे बैसि गेलाह। जङ्गलक खग -मृगक शब्द आ हुनकर चहल -पहलक अतिरिक्त आन कोनो आवाज सुनाइ नहि पड़ि रहल छल। शादुल सेहो माछी -मच्छड़ ताकय लेल गाछक चारू कात घुमबाक अतिरिक्त इमाम संगे सटल छल। कखनो -कखनो ओ उछलि कऽ इमामक मुँह-कपार लग भनभनाइत माछी सभकेँ पकड़ि लैत छल। इमाम चुपचाप बैसल कहियो जमीन पर पिसल ओहि मिश्रणकेँ, तँ कहियो ओकरा पर झुण्ड बनेने कीड़ा आ एतऽ -ओतऽ दौड़ैत चुट्टी सभकेँ टकटकी लगा कऽ देखि रहल छलाह। "अम्मी... की आइ हम एहि अभिशाप सँ मुक्त भऽ जाएब? अहाँकेँ की लागैत अछि?" चाँद कौतुक सँ पुछलखिन। "निश्चित रूप सँ... तमाखूक संग ई मिश्रण बेस प्रभावशाली होइत छैक। एक बेर हमर मामा ई देने छलाह..." "केकरा... भालुकेँ?" "नहि, एकटा कुकुरकेँ," बीबम्मा हुनका आश्वस्त कएलखिन। "एकटा कुकुरकेँ...?" चाँद आश्चर्यचकित रहि गेल। "कुकुरकेँ किएक अम्मी?" "घर पर भालु कऽ संगे एकटा कुकुर रहैत छल। जखन भालुकेँ बच्चा भेल, तँ हमर घरक लोक डरि गेलाह जे कुकुर बच्चा सभकेँ कोनो क्षति नहि पहुँचा दय। एहि कारणेँ ओ लोकनि कुकुरकेँ ओ मिश्रण खिया देलखिन। शीघ्रे कुकुर बताह भऽ गेल आ घर छोड़ि कऽ भागि गेल।" "हमर डर ई नहि अछि। हमरा तँ ई भय अछि जे अब्बा भालुकेँ फेर वापस लऽ कऽ आबि सकैत छथि।" बीबम्मा अपन पुरान साड़ीमे थिगली (चेपी) लगाबयमे व्यस्त छलीह आ चाँद ठामे बैसल छल। सूईमे ताग दैत ओ कहलखिन, "ओ एखनहुँ किछु नहि सिखने छथि। की ओ भालु संग घर वापस औताह... की आबि सकैत छथि... पछिला रातिक ओहि बितण्डा कऽ बाद?" ओना ओ एहन कहलखिन, मुदा ओ अस्पष्ट डर हुनकर मनक कोनो कोनामे सेहो नुकायल छल। "नहि जानी... बेस डरपोक आदमी छथि। भालु नचाबय कऽ अतिरिक्त ओ किछु नहि कऽ सकैत छथि। हुनका गाम जेबाक वा लोक सँ बात करबाक साहस नहि छनि," चाँद अपन उद्वेग प्रकट कएलखिन। "ओ लोकनि दोसर गाम जाएब तँ पसन्द करैत छथि, मुदा अपन गाममे प्रवेश करबामे हिचकिचाइत छथि। जँ हमरा एतेक समर्थन भेटल अछि, तँ ई सब तोहर प्रयासक फल छौ," बीबम्मा प्रशंसाक भाव सँ चाँदकेँ देखलखिन। चाँद शोकाकुल भऽ कहलखिन, "की लाभ अम्मी... हम जे किछु कएलहुँ, सभ व्यर्थ भऽ गेल। आइ 'पल्लेबाटा' (गाम विकासक बैठक) छल। सभ अधिकारी ओतहि छलाह। हम सुनलहुँ अछि जे काल्हि -परसूमे कलेक्टर साहब पट्टा बाँटय औताह। जँ अब्बा भालुकेँ जङ्गलमे छोड़ि अबैत छथि तँ ठीक, नहि तँ हमर झूठक रहस्य खुलि जायत। जे लोक हमर उन्नति नहि देखि सकैत छथि, ओ अधिकारी सभ सँ शिकाइत कऽ कऽ ओकरा उकसा सकैत छथि, तखन हमर सभटा परिश्रम माटिमे मिलि जायत।" बीबम्मा चुपचाप सुनैत रहलीह, मुदा की जवाब देतीह से नहि बुझि सकलीह। पछिला एक सप्ताह सँ अपन पतिक क्रियाकलाप देखि ओ हुनका पर पूर्ण विश्वास नहि कऽ पाबि रहल छलीह। ओ मनहि मन गप्प सभकेँ दोहराबय लगलीह-पहिनहि ओ भालु बेचबाक वादा कएलनि, फेर कहलनि जे जङ्गलमे छोड़ि देब, मुदा नहये ओ बेचलनि नहये छोड़लनि। आब ओ ओकरा बताह करबाक बात कऽ रहल छथि। नहि जान एहि बेर ओ की करताह! अपन माएक मौन देखि चाँदकेँ सन्देह भऽ गेलनि जे किछु अनहोनी होय वला अछि। ओ अपन पिता पर आरो क्रोधित भऽ गेलीह आ हताशा मे सोझाँराखल बर्तन पर अपन कपार मारलनि। "जँ ओ आइ फेर सँ ओहि भालु संग घर वापस आबि गेलाह, तँ ई निश्चित अछि जे हम फाँसी लगा लेब। या तँ शादुल रहत या हम, हम दुनू मे सँ मात्र एकहि गोटे रहब।" बीबम्मा चौंकि कऽ उठि बैसलीह। ओ बेस भयभीत देखाय लगलीह। तखन बाहर ककरो पदचाप सुनायल आ दुनू गोटे चुप भऽ जाइ गेलाह। "इमाम! हे इमाम! अइ लड़का पर कते समृद्धि आबि गेलैक! तखनो ओ जमीनक प्रस्ताव लेल बजौला पर एक बेर सेहो नहि देखायल! ई तँ ओहिना भेल जेना कोनो अविवाहित लड़कीक हाथमांगय लेल जाति नीचा करब!" सुंकारी, गामक सहायक (विलेज असिस्टेंट), बाहर सँ चिकड़ि रहल छल। "यैह... आबि रहल छी!" चाँद बाहर दिस दौगल। "हमर लड़का! तोहर पिता घर पर नहि छथुन?" "ओ बाहर गेल छथि... अहाँकेँ हुनका सँ की काज अछि?" "एमआरओ (MRO) तोरा खोजि रहल छथुन।" "हम अबैत छी... चलू।" एतेक कहि चाँद आगू बढ़ल। "अहाँ सभ कोना एक संगे भऽ गेलहुँ- स्टेशनमे एसआई, मण्डल कार्यालयमे एमआरओ, डिवीजनमे आरडीओ... सभ मुसलमान! तूँ तँ अपन ठाम सँ हिलबो नै केलह आ जमीन भेटि रहल छौ... भालु कतय छौ? देखाय नहि पड़ैत अछि?" सुंकारी पुछैत एतऽ -ओतऽ देखय लागल। चाँद डरि गेल ओ भालुक उपस्थितिक कोनो सङ्केत तँ नहि अछि, से देखय लेल चारू कात नजरि दौगेलक। "भालु कतय छै मामा... ओ तँ बहुत पहिने मरि गेल। जँ ओ जीवित रहितय, तँ की अहाँ सोचैत छी जे हम एतय रहितहुँ? हम तँ कतौ भीख मांगि रहल रहितहुँ।" "हँ... एकटा नव निअम लागू भऽ गेल छैक। बोनहा जानवरकेँ जालमे फँसाएब वा मारि देब जेल जाए वला दण्डनीय अपराध थिक!" "ई अखनहि लागू नहि भेल अछि, ई तँ पहिने सँ अछि। बस हम पुलिसक तरहत्थी गरम करैत छलिऐ ताकि ओ दोसर दिस देखथि। वन अधिकारी सभ सेहो घूसक ताकमे रहैत छलाह। ओ सभ किछु ने किछु मंगैत छलाह आ हम हुनकर पएर पर खसि कऽ गिड़गिड़ाइत छलिऐ। एसआई साहब तँ नव नियुक्त भेल छथि, नहि? तँ निअम -कानूनक ई सभ गप्प... हमरा ओकरा सँ की मतलब? हमरा पास ओनाही भालु नहि अछि, अछि की?" चाँद अपन बचाव कएलखिन। दुनू गोटे ग्राम पञ्चायत कार्यालय गेलाह। ओतय भूमिहीन आ गरीबक चिन्ह कऽ बंजर जमीन वितरित करबाक कार्यक्रम चलि रहल छल। गाम छोट छल आ लाभार्थीक संख्या सेहो कम-दस सँ पन्द्रहक बीच। सभ एकटा ट्रैक्टर पर चढ़ि गेलाह। चाँद सेहो ओहिमे शामिल भऽ गेल। "लड़का! तोहर पिता कतय छथुन जे तूँ आयल छह?" कियो पुछलक। "ओ बाहर गेल छथि।" झूठ बोलैत चाँदक आवाज थरथरा गेल। "यैह... पिता अपन सुस्त भालु नचा कऽ कमाइत छथि आ बेटा एतय अपन नाम पर जमीनक जुगाड़ कऽ रहल अछि। बड़ नीक सँ दुनू काज चलि रहल छैक!" कियो दोसर गोटे टिप्पणी कएलक। चाँद सदिखन हाथमे 'मस्कट' कऽ घड़ी पहिरैत छल आ हुनकर जीन्स आ टी -शर्ट सेहो मस्कटक रहैत छल। ई सभ हुनका ककरो पएर पकड़ि कऽ गिड़गिड़एला कऽ बाद प्राप्त भेल छल। एकर अतिरिक्त ओ जूता सेहो पहिरैत छल, जे मस्कटक रहैत छल आ भीख मांगि कऽ भेटल छल। ई सभ गप्प जँ एक दिस राखि देल जाय, तखनो चाँदक रूप -रङ्ग कतौ सँ भूमिहीन गरीब जकाँ नहि लगैत छल। गाम सँ दूर रहबाक कारणेँ सभ लोक सोचैत छल जे ओ लोकनि बेस समृद्ध छथि। हुनकर बोली-बानी सेहो लोक पर एहन गहीर प्रभाव छोड़ैत छल। गाममे चाँदक कियो सेहो नहि छल, जेकरा ओ अपन सम्बन्धी वा मित्र कहि सकितथि। ककरो सँ अशिष्ट व्यवहार कएला पर गवाही देबाक लेल एकटा सेहो परिचित व्यक्ति नहि छल। एहि कारणेँ सभ गोटे हुनका जमीन देबा सँ रोकय लेल कटिबद्ध छल। चाँद ओहि षड्यंत्रक भनक पाबि गेल आ शुरू सँ एहि चुनौतीक सामना करय लेल तैयार छल, सभक प्रश्नक मुँहतोड़ जवाब दैत। "भालु कतय छै? की अहाँ ओकरा देखलहुँ? ओ तँ बहुत पहिने मरि गेल। बकबक बन्द करू!" चाँद खौंझा कऽ जवाब देलखिन। "हमरा की मतलब जे ओ जिऐत छैक वा मरल छैक?" एक व्यक्ति जवाब देलक। गामक लोकमे एहन लोक बेसी छलाह जे स्वयंकेँ लाभार्थीक दाबी कऽ रहल छलाह आ वास्तवमे लाभक पात्र सेहो छलाह। किछु कारण सँ ओ लोकनि लाभान्वित नहि भऽ सकल छलाह। तखनो ओ सभ अन्त धरि अपन नसीब अजमाबय चाहैत छलाह। ओ लोकनि तर्कक माध्यम सँ अधिकारी सभकेँ बुझयबाक प्रयास कऽ रहल छलाह जे चयनित लोक पूर्णतः असहाय नहि छलाह आ ओकरा सभक स्थिति तँ चयनित लोक सँ सेहो बदतर छनि। चाँद आ इमामक नाम पर शिकाइतमे बेर-बेर चर्चा भेल। अधिकारी सभ तर्क देलखिन जे उच्च अधिकारीक हस्तक्षेप सँ इमामक नाम सूचीमे शामिल कएल गेल अछि, मुदा गामक लोक कोनो स्थितिमे मानबाक मूडमे नहि छलाह। "इमामकेँ जमीनक की आवश्यकता छनि? ओ भालु नचा कऽ आजीविका चलबैत छथि। ओ बहुत टका कमाइत छथि। चाँद झूठ बाजय छथि जँ ओ कहैत छथि जे हुनका लग भालु नहि छनि," कियो शिकाइत कएलक। "की भालु सँ आजीविका चलब सम्भव छैक? की ओ अहाँकेँ सभ मास दरमाहा दैत अछि? की हमरा लग आजीविकाक कोनो दोसर साधन अछि? जँ हमरा सभ लग गाय रहितैक, तँ की हम भीख मंगितहुँ?" चाँद क्रोधमे जवाब देलखिन। "तूँ भीख किएक मंगबह? की तूँ दोसरक बटुआ नहि कतरैत छह? जतय कतौ तूँ भालुक खेल देखबैत छह, तूँ लोककेँ अजगुत-परेशान करैत छह। ई नहि सोचह जे हम सभ नहि जानैत छी," दोसर व्यक्ति अपन बात जोड़लक। "हम एतय छी आ अहाँ सभ भौंकि रहल छी। किएक नहि आबि कऽ देखैत छी जे हमरा घर पर भालु छैक वा नहि?" चाँद चुनौती देलखिन। "ओकरा देखबाक आवश्यकता नहि छैक... हम पहिने सँ जानैत छी," फेर दोसर व्यक्ति बाजल। सरपञ्च बहसमे हस्तक्षेप कएलखिन, "बस... बस। ई मानुस अहाँक प्रश्नक जवाब दऽ रहल अछि। की अहाँ सोचैत छी जे सभ जमीन मालिक लग गाय छैक? जँ अहाँ एहिना चलब तँ हम कहियो निर्णय पर नहि पहुँचि सकब।" पट्टा ओतहि तुरत्ते वितरित कऽ देल गेल, मुदा एहि शर्तक संग जे जमीन ने बेचब, नहिये हस्तान्तरित करब आ नहिये बन्धकराखल जाए सकत। तखनो बैंकक सहायता सँ खेती कएल जाए सकत आ ऋण (लोन) लेल जाए सकत। सभक आपत्तिकेँ शान्त कऽ देल गेल आ चाँदक खुशीक कोनो सीमा नहि रहलनि। पट्टा देखि हुनका लागल जेना ओ पहिने सँ ओहि जमीन पर ठाढ़ छथि आ ओकर माटि महसूस कऽ रहल छथि। ओ पट्टा हाथमे लेलनि आ बेस उत्साहित भऽ कऽ घर पहुँचला। "अम्मी..." ओ दूरे सँ माएकेँ बजौलखिन। बीबम्मा अंगनामे अयलीह, अपन हाथ साड़ीक आँचर सँ पोंछैत। "चाँद... की भेल... ओ सभ की कहलखिन?" "ओ लोकनि पट्टा दऽ देलखिन, अम्मी!" चाँद कहैत पट्टा माएक हाथमे दऽ देलखिन। बीबम्मा पढ़ब नहि जानैत छलीह, मुदा लागल जेना ओ पट्टाक सभ अक्षरकेँ बेस ध्यान सँ निहारि रहल होथि। "शादुलक बारेमे ओ सभ की कहलखिन? ओकरा बारेमे नहि पुछलखिन?" "ओ लोकनि मात्र पुछलखिन। सुंकारी, ओतहि छल। वएह हमरा सँ पुछैत छल। हम मात्र ओकरा आबि कऽ देखबाक लेल कहलिऐ।" "मुदा भालु देखय लेल के एतेक दूर जायत? तखनो अहाँकेँ तँ पता अछि हमर नसीबी... जँ अब्बा भालुकेँ संग लऽ कऽ वापस आबि गेलाह, तँ ओ सभ जानि जयताह जे हम झूठ बाजलहुँ। हमर नाम सूची सँ काटि देल जायत! तखन एहि सभक की लाभ?" "हम की कहू... जँ मात्र अब्बा ओकरा मिश्रण दऽ दैतथि।" चाँदकेँ ओहि पट्टामे कोनो आनन्द नहि भेटलनि, जाहि लेल ओ एतेक कड़ा परिश्रम कएने छल, ओ ओकरा झट सँ खाट पर फेकि देलखिन। ओही क्षण चाँद अपन पिता आ भालु (शादुल) लेल एकटा अनियंत्रित घृणा महसूस कएलनि। जँ शादुल नहि रहितैक, तँ जमीन हुनकरे होइतैक। ओ प्रतिशोध सँ दाँत पीसैत श्राप देलखिन-"एकरा टुकड़ा -टुकड़ा कऽ दियौ!" दिन आब ढलि रहल छल। इमाम कऽ हाथ थरथरा रहल छल आ जखन ओ ओहि भयानक मिश्रणकेँ हाथमे लेलनि जे शादुलकेँ बताह कऽ दैत, तँ ओ बेस विचलित भऽ गेलाह। तखने हुनका याद आएल जे भालुकेँ भोर सँ पिबय लेल पानि नहि भेटल छैक। एहि कारणे ओ पासक एकटा पानि कऽ स्रोत दिस चलनाइ शुरू कएलखिन। शादुल सेहो हुनकर पाछाँ -पाछाँ चलि पड़ल। पानि पिबि कऽ प्यास बुझौला कऽ बाद ओ दुनू पुनः गाछक लग वापस आबि गेलाह। इमाम सोचलनि, "रे शादुल... की तूँ जङ्गले मे रहितें तँ नीक नहि रहितैक... हम अपन मनकेँ तोरा ई भयानक मिश्रण देबाक लेल कोना तैयार करी... घर पर तोरा लेल कीराखल छौ जे तूँ वापस जाइ चाहैत छह... तूँ एतहि रहह... मत आबऽ!" शादुल नजदीक आबि कऽ हुनकर पास कुहरैत बैसि गेल। इमाम ओकर झबरा रोइयाँकेँ सहलाबय लगलाह। इमाम बौआयल जकाँ जङ्गलमे भटकैत शादुलक बारेमे सोचि कऽ बेस दुखी छलाह। हुनकर हृदय भारी भऽ गेलनि। एक समय तँ ओ शादुल संग घर वापस जएबाक निर्णय लऽ लेलनि, मुदा चाँदक शब्द याद पड़िते हुनकर साहस जवाब दऽ गेलनि। ओ बेस हठी छल-जे पकड़लनि, से नहि छोड़ता। जँ ओ अपन प्राण त्यागय कऽ निर्णय लेता, तँ ओ निश्चित रूप सँ कऽ लेता। अपन उन्मादमे ओ अपन माता -पिताक सोझाँ फाँसी लगाबय सँ सेहो नहि हिचकिचैता। "की हम एहि भालु लेल अपन बेटाकेँ खोयब सहि सकैत छी... कोना करी... की करी?" पन्द्रह दिन पहिने भेल एकटा घटना इमामक मनमे ताजा भऽ गेल। निराश भऽ चाँद तखन कहने छल जे ओ फाँसी लगा लेत। ओना चाँद ओहि क्षण क्रोधमे धमकी देलखिन, मुदा इमामकेँ आशा छल जे ओ शान्त भेला पर ई गप्प बिसरि जायत। मुदा आश्चर्यक बात ई जे चाँद वास्तवमे फाँसी लगयबाक प्रयास कएलक, ओहो माता -पिताक सोझाँ। इमाम अपन बेटाकेँ गाछ सँ लटकैत देखि घबरा गेलाह। ओ फुर्ती सँ समय रहिते रस्सा काटि देलखिन। जँ कनीको देरी भेल रहितैक, तँ ओ अपन आँखि सँ अपन बेटाक प्राण निकलैत देखितथि! इमाम आब अपन पुत्रक हठकेँ याद कएलखिन: "ओ एकटा बौआयल कुकुरमे बदलि गेल अछि। ओकर माए सेहो ओकरे बात सुनैत छथि। जँ हम आइ शादुल संग वापस जाएब, तँ ओ निश्चित रूप सँ किछु अनहोनी करतीह। जँ किछु नहि, तँ ओ हमरा मारि देबाक सेहो साहस रखतीह।" चाँदक ओहि भय सँ दबलाक बादो इमाम शादुलकेँ ओहि भयानक मिश्रण खिअयबाक साहस नहि जुटा सकलाह। जखन ओ मिश्रण हाथमे लैत छलाह, ओकरा दूर राखि दैत छलाह। साँझ ढलय लागल छल। दूर सूर्य दू टा पहाड़ कऽ बीच फँसल छल। पहाड़ कऽ छाह जङ्गलमे पसरि गेल छल। गाछ आ पहाड़ सभ विश्राम लेल तैयार भऽ रहल छल। बहुत सोच -विचार कएला कऽ बाद इमाम तैयार कएल गेल मिश्रणकेँ दूर फेकि देलखिन। ओ कहलखिन, "नहि जानि हमर पुत्र काल्हि हमरा भोजन देत वा नहि, मुदा हम तोरा कोना मारि सकैत छी जे हमरा बीस बर्ख धरि भोजन देलें?" ओना इमाम सही सोचलनि, मुदा घर वापसीक सोचि कऽ बेस भय भऽ रहल छलनि। ओ बेसी काल धरि एकहि स्थितिमे बैसि नोर बहाबैत रहलाह। इमाम पीड़ामे सोचि रहल छलाह, "हे अल्लाह की करी रे! नहिये हम ओकरा ई मिश्रण दऽ सकैत छी आ नहिय घर जाए लेल पएर उठि रहल अछि... की हम अपन प्राण लय ली?" अन्ततः इमाम लग एकटा विचार आएल। ओ अपन मनहि मन बुदबुदयलाह, "ठीक अछि, तखन हम ओकरा ई कहि कऽ बुझायब!" एहि निर्णय पर पहुँचि इमाम घरक रस्ता पर चलि पड़लाह। हुनकर गतिक आभास पाबि शादुल सेहो पाछाँ -पाछाँ चलय लागल। दिनक पसरैत छाहक संगे -संगे, दुनू आब अपन मन्द गति सँ घरक दिस बढ़ि रहल छलाह। जेना -जेना शादुल हाँफि रहल छल, इमाम अपन सोचमे ओतबे गहीर डूबैत जा रहल छलाह। इमामक छातीमे अनेक भावनाक ढेर लागि गेल छल। ओ ओहि विचार सभ पर डूमि गेलाह: बीबम्मा आब किएक एतेक बदलि गेलीह जे शादुलक बिना रहब हुनका लेल असह्य भऽ गेल? चाँद ओकरा लेल शादुल सँ बेसी महत्वपूर्ण किएक भऽ गेलाह? चाँद, जे भोजनक बचल -खुचल अंश सँ सन्तुष्ट रहैत छल, ओ आब किएक दूर होइत जा रहल छथि? ओकरा सभक बीच ई ईर्ष्याक आगि के लगाओलक? जे तखन धरि जे कमाइत -खाइत सन्तुष्ट जीवन बिता रहल छलाह, ओकरा दुनियाक सोझाँ किएक उजागर कएल गेल? के हुनकर दूध जकाँ शुद्ध जीवनमे विष घोरलक? के हुनकर जीवनक स्वाद कड़ू कऽ देलक आ हुनकर परिवारकेँ छिन्न -भिन्न कऽ देलक... इमाम गहीर चिन्तामे छलाह। जहिना ओ एहि पर ध्यान केन्द्रित कएलनि, पन्द्रह दिन पहिने भेल एकटा दोसर घटना हुनकर मनमे ताजा भऽ गेल। ओहि समय ओ लोकनि चारि गामक दूरी पर मद्दीमल्ला गाममे अपन तम्बू तानने छलाह। इमाम आ चाँद जखन कखनो कोनो गाम जाइत छलाह, तँ हुनका पहिने स्थानीय सरपञ्च वा गामक मुखिया सँ भेट करय पड़ैत छलनि। ओ लोकनि कागज पर लिखि कऽ अपन कब्जाक सभ वस्तु (भालु, रस्सा आदि) कऽ सूची प्रस्तुत करैत छलाह। मांग कएला पर ओ सभ वस्तु देखाबऽ पड़ैत छल आ गाममे कतेक दिन रहब आ कतय रहब, एकर जानकारी देबाक रहैत छल। शुरूमे तँ कोनो सरपञ्च कहितैक- "दिन नीक नहि अछि..." मुदा बेस गिड़गिड़यला कऽ बाद ओ मानि जाइत छल। सभ मामिलाकेँ बेस सावधानी सँ सुलझाबय पड़ैत छल। एक दिन इमाम मद्दीमल्ला गाममे अपन सभ काज समाप्त कऽ लेने छलाह। ओ दिन धानक कुटनी -फटनीक दिन छल। ओकर अर्थ छल जे अगिला छह मास लेल पर्याप्त अनाज जमा करब। जँ ककरो बोली मधुर रहैत, तँ गामक लोक सेहो ओकरा प्रति उदार रहैत छलाह, एतेक धरि जे जतेक भीख मांगि सकैत छलाह, ओतबे भेटि जाइत छलनि। ओहि स्मृति सभकेँ जगबैत एकक बाद एक दृश्य अबैत गेल। "चाँद... जागू! एक 'थुमु' धान जमा भऽ गेल छैक। ओकरा अपन साइकिल पर राखि कऽ घर छोड़ि आबू," इमाम अपन बेटाकेँ जगाबय कऽ प्रयास कएने छलाह। "काल्हि, काल्हि जाएब... आइ नक्को (नहि)!" बुदबुदाइत अपन करौट बदलैत ओ अगिला दिन जएबाक गप्प कहलखिन। "तेरी लङ्गे मारो (तोरा मुँह पर लात)... काल्हि... काल्हि किएक?" इमाम डाँटलखिन। "पछिला दिन जखन हम एक बोरा धान छोड़ि कऽ बाहर गेलहुँ तँ की भेल छल? कियो ओकरा उठा कऽ लय गेल, नहि की? जेना कियो कहने छल- जखन एक 'बुद्दी' धान लेल पात तोड़य गेलहुँ तँ एक 'अड्डा' धान बछड़ा खाय गेल, तखन जखन एक 'कुंचा' धान आनय गेलहुँ तँ भीख मांगि कऽ कमाएल एक पूरा बोरा धान निपत्ता भऽ गेल। की हमरा लग कोनो कपाट अछि वा ताला? जेना जमा करैत छी, ओनाही सुरक्षित राखय पड़त। जँ तूँ नहि जा सकैत छह तँ हमही जाएब," इमाम थाकि कऽ कहलखिन। सूर्य अखनहुँ नहि निकलल छल। दिनक शुरूआत होय वला छल। गरमी छल मुदा हवामे कनी कनकनी छल। चाँद आँखि मीडैत उठि बैसल। इमाम पहिनहि सँ बालि सिझा कऽ शादुलकेँ खिया देने छलाह। इमामकेँ आशा छल जे जँ ओ भोरमे किछु ताबीज -मन्त्र बेचि सकलाह तँ साँझ धरि धान जमा भऽ सकत। चाँद, जे शुरूमे साफ मना कऽ देने छल, बहुत बुझयला कऽ बाद धान घर पहुँचाबय लेल तैयार भऽ गेल। धानक बोरा साइकिल पर लदला कऽ बाद चाँद घर लेल निकलि गेल। जाए सँ पहिने ओ इमामकेँ कतेको बेर चेतावनी देलखिन जे शादुलकेँ रौदमे नहि घुमाबथि। इमाम वादा कएलनि आ ओकरा दुपहर धरि वापस आबय लेल कहलखिन। तखन ओ ताबीज बेचबाक लेल शादुलकेँ लय कऽ गामक दिस बढ़लाह। इमामक आवाज पातर आ कर्कश छल। ओहि आवाजमे जखन ओ सड़क पर निकलि कऽ पुकारैत छलाह: "शाकिनी, डाकिनी, कुञ्जिनी... कोनो सेहो भूत वा प्रेत होय- बच्चा, बूढ़, पुरुष वा स्त्री लेल मन्त्र! मन्त्र बान्हि देब... कोनो बाधा पर विजय पाबयमे सहायता करत... वा नीन्दमे चौंकि कऽ उठब... नीन्दमे डराएल ककरो लेल मन्त्र... शैतान वा दैत्यक डर... सभ बच्चा लेल मन्त्र बान्हि देब!" ओहि पुकार सँ सभ सचेत भऽ जाइत छलाह आ ताबीज खरीदबाक लेल मजबूर भऽ जाइत छलाह! एकर अतिरिक्त, ओकरा संग शादुलक खेल सेहो छल! शादुल किछु समय लेल मन्त्र (ताबीज) नुका लैत छल वा ओकरा अपन जीह पर घुमबैत छल। ओकरा अपन मुँहमे राखि कऽ शादुल किछु काल बाद ओकरा बाहर थूकैत छल, आ तखन पुनः राखि लैत छल। ओ अपन एहि किरदानी सँ सभकेँ हँसबैत छल। ओकरा एहन करैत देखि लोक स्वेच्छा सँ ओकरा पच्चीस -पचास पैसा वा ओहु सँ बेसी पाइ दैत छलाह। एहिना एक दिनक कमाईमे अनाज आ टका दुनू शामिल रहैत छल। टका किछु घरेलू आवश्यकता पूरा करबाक काज अबैत छल, जतय धरि अनाजक गप्प छल, ओ एक -दू दिन लेल पर्याप्त भऽ जाइत छल। इमामकेँ आशा छल जे चाँद दुपहर धरि वापस आबि जायत। तखन धरि ओ कम सँ कम दस -पन्द्रह घरमे मन्त्र बेचि चुकल रहितथि। ओ सभ एक संगे 'फटाई' (धानक खरिहान) सभक चक्कर लगबैतथि आ साँझ धरि वापस अबैत जइतथि। मुदा एहन योजना पूरा दिन साकार नहि भऽ सकल किएकि चाँद नहि आयल। इमाम साँझ धरि हुनकर प्रतीक्षा कएलखिन। कतौ हुनकर योजना धरले नहि रहि जाय, एहि लेल ओ बेसी दूर नहि भटकलाह। बेचल गेल मन्त्र बेसी नहि छल। टका आ अनाज सेहो कम भेटल छल। साँझ ढलय लागल छल। खरिहान सभ पर धान जमा करबाक समय छल, मुदा चाँदक कतौ कोनो पता नहि छल। जँ चाँद संगे रहितथि तँ खरिहानक चक्कर लनिपत्ता बेस सहज रहितैक। जँ ओ शादुलकेँ पकड़ितथि, तँ चाँद धान जमा करैत। जखन बोरा भरि जाइत, तँ ओकरा उठा कऽ तम्बू लग राखि अबैत। खरिहानपर शादुलक खेल सेहो अलग रहैत छल। ओ खरिहानक चारू कात छाउर सँ रेखा खिचैत छल। धानक ढेरीक सोझाँ अपन पाछाँक पएर पर सोझ ठाढ़ भऽ कऽ शादुल अपन आगूक पएर जोरि कऽ कटल फसलक प्रार्थना करैत छल। किसान सभक विश्वास छल जे एहि सँ आगू वला मौसममे फसल खूब नीक होयत। स्वाभाविक छल जे एना जमा कएल गेल धान भीख जकाँ नहि छल। ओहि दिन चाँदक बेसी काल धरि प्रतीक्षा कएला कऽ बाद इमाम खरिहानक चक्कर लनिपत्ता छोड़ि देलखिन। दिन अन्हारमे बदलि गेल मुदा चाँदक कोनो सङ्केत नहि भेटल। अगिला दिन भोरमे जल्दी उठि इमाम शादुलक सुतल ठाम पर पानि छिड़कलखिन आ दूध आनि कऽ शादुलकेँ बालि देलखिन। स्वयं किछु दूध पिला कऽ बाद ओ अपन कोट पहिरलखिन। चाँद तखनहुँ नहि देखायल। इमामकेँ आब डर लागय लागलनि। ओ डरि गेलाह जे कतौ किछु अनहोनी तँ नहि भऽ गेल। ओ सोचलनि जे की बीबम्मा अनचोक्के बीमार भऽ गेलि? ओ जा कऽ देखि सकैत छलाह मुदा शादुलक संगे नहि। हुनकर दृढ़ विश्वास छल जे चाँद बिना कोनो पैघ कारणक नहि ठाढ़ भऽ सकैत छल। अन्तमे ओ एक जानल -चिन्हल व्यापारीक माध्यम सँ अपन पत्नी सँ सम्पर्क कएलनि। बीबम्मा फोन पर आबि कऽ सूचना देलखिन, "उप -निरीक्षक (एसआई) ओकरा बजौने छथि। चाँद मण्डल कार्यालय (तहसील) गेल छथि। हम ओकरा काल्हि भेजब।" एसआईक नाम सुनिते इमाम घाम सँ तर भऽ गेलाह: "खरिहान सँ जे किछु कमायल, सभटा व्यर्थ भऽ जायत। बस पछिला दिन ओ लोकनि हमरा सँ दू सय टका ऐंठि लेने छलाह। जँ वन अधिकारी नहि तँ पुलिस। चोरि कर्मे नीक!" "मुदा किएक... ओ लोकनि ओकरा किएक बजौलखिन?" इमाम बेचैन भऽ पुछलखिन। "की जानि... ओ किछु कहैत नहि छथि!" बीबम्मा चाँदक मौन सँ रुष्ट भऽ फोन राखि देलखिन। ई तँ आब नियति बनि गेल छल- बजायल जायब, फेर धमकायल जायब आ पाँच -दस टकाक घूस मांगल जाएब। हालक दिनमे ई एकटा स्थायी बुराइ बनि गेल छल। ओहु पर सँ आब घूसक दर सेहो सय सँ ऊपर बढ़ि गेल छल। इमाम दू दिन धरि बेस निराशा मे बितओलनि। भोरमे शादुलकेँ बाहर लय जएबा कऽ अतिरिक्त ओ खरिहान सभमे नहि गेलाह। हुनका डर छल जे पुलिस ओतय सेहो हुनका खोजत। हुनका लागल जे कोनो पैघ सङ्कट हुनका घेरि लेत। चाँद अंततः तेसर दिन साँझ ढलैत जखन अंधियार भऽ गेल, देखाइ पड़ल। इमाम तखन तम्बूक भीतर छल। चाँद केँ देखि रोमांचित भ', शादुल स्वागत मे आगू बढ़ल आ खुशी सँ ओकर चारू कात घूमल। माथ उठाबैत हवा सुंघलक, अपन पाछूक पएर पर सोझ ठाढ़ भ' एकटा पोसुआ कुकुर जकाँ गरा लगाबय लेल ऊपर उठल। चाँद जे सदिखन ओकरा गरा लगाबैत छल आ सभ बेर जखन कतउ सँ वापस अबैत छल, अपन हाथ शादुलक रोइयाँक कोट पर फेरैत छल, ओह दिन ओ ओकरा पर ध्यान देने बिनु भीतर चलि गेल। से इमामक ध्यानसँ नै बचल; ओ चिन्तित छल। तखनो, ओ ओकरा पुछलक— “कथी भेल रे? ओ ऐंठी देखौलकौ? की ओ तोरा परेशान केलकौ?” थाकल-हारल चाँद जूटक बोरा पर बैसि गेल। “अब्बा, एसआई नव आएल छथि... एकटा बहुत नीक लोक, जे हमर दयनीय जीवनक स्थितिकेँ बुझैत छथि। ओ हमरा एकटा मनुष्यक रूपमे मानि कऽ हमरा संग बातचीत कएलनि।” चाँद, जे सदिखन पुलिसकेँ भरिगर गारि दैत छल, ओकरा पहिल बेर पुलिसक प्रशंसा करैत देखि इमाम आश्चर्यचकित भऽ कऽ आरो जानकारी मांगय लागल। “हँ अब्बा... जखन अहाँ पुलिस स्टेशनमे प्रवेश करैत छी, तँ सभ हमरा सभक बारेमे हीन भाषामे बाजैत अछि, मुदा ई आदमी एहन नै छथि। ओ हमरा हमर नामसँ पुकारलनि! सुनलहुँ अछि जे ओ हमरहि समुदायक छथि। बच्चामे ओहो हमरहि जकाँ एकटा भालुक संग खेलल छथि। ओ हमरा आजीविकाक किछु दोसर रस्ता देखबैबाक वादा कएलनि। ओ हमरा किछु व्यापार सीखबाक सलाह देलनि, आ भालुकेँ अपन पास नै राखय लेल कहलनि किएक तँ ई आब अवैध भऽ गेल अछि। ओ हमरा अपन भविष्यक बारेमे सोचय लेल सेहो कहलनि...” “एकटा ऊँच पद पर बैसल मनुष्य हमर भविष्यक लेल किएक चिन्तित होयत? एकटा पद पर आसीन मानुस हमर हिचकीक बारेमे कोना चिन्तित होइत अछि?” इमाम तिरस्कारक संग प्रतिक्रिया देलक। “तूँ जीवनक कतेक वर्षक अनुभव प्राप्त कएलह अछि, सभ रंगक दुनिया देखलह अछि, आ आब ओकर मीठ-मीठ गप्पमे आबि रहल छह?” इमाम सारमपल्लीक घटनाकेँ याद कऽ कऽ क्रोधित भऽ गेल। सारमपल्लीक उल्लेख सुनि चाँद सेहो थरथरा उठल। ओ घटना पाँच-छह साल पहिने भेल छल। जखन कहियो ओ कोनो मण्डलमे पैर राखैत छल, चाँदक ई विश्वास छल जे पहिने पुलिसकेँ सूचित कऽ देबाक चाही। ओ तर्क करैत छल जे चाहे ओकरा संग नीक होय वा खराप, गाममे अपन उपस्थितिक बारेमे पुलिसकेँ जानकारी देब आवश्यक अछि। इमाम कहियो चाँदक ओइ तर्कक समर्थन नै करैत छल। ओकर विचार छल: एकटा बड़द बंजर भूमिमे भटकि जाय मुदा जाधरि ओइ स्थानकेँ आरो अनुपयोगी नै कऽ दियै, ताधरि ओ ओकरा नै छोड़त। एकटा मनुष्य पुलिस स्टेशन जाय आ बिना किछु जुर्माना देने घुरि आबय, एहन आशा नै कएल जा सकैत अछि। ओकरा व्यर्थमे पचास वा सौ टका किएक दियैक? की एना नै भऽ सकैत अछि जेना एकटा कोमल फलकेँ पात छाह दैत अछि, तहिना हम चुपचाप अपन काज खतम करी आ अपन ठाम वापस आबि जाइ? ओहुना हम बचि तँ नै सकैत छी जहिया पकड़ा जाइ छी। पहिने चाँद सेहो ओहिना सोचैत छल। ओहो अनुभव करैत छल जे जँ छोड़ि देल जाय, तँ ओ सय टका ओकरा एक मास धरि गुजारा कऽ दय सकैत छल। ओकर अलाबे, पुलिस एक-दू बेरक मामला मानि कऽ नै छोड़ैत छल। ओ सभ जोर दैत छल जे एकटा मण्डलमे जतेक गाम अछि, ओतबे बेर स्टेशन आबि कऽ मिलू। भेट करला पर, इमाम आ चाँदसँ ओ लोकनि किछु घूस देबाक आग्रह करैत छल। एहन समय सेहो छल जखन पुलिस ई माँग करैत छल जे इमाम आ चाँदक पास जे 'मन्त्र' सभ अछि, ओइमे सेहो हिस्सा दिअ। एहि सभ झंझटिसँ बचबाक निर्णय लैत, फायदा-घाटाक चिन्ता छोड़ि चाँद शुरूमे ओकरा सभसँ मिलब एकदम बन्द कऽ देने छल। मुदा एक दिन एकटा गाममे चोरि भऽ गेल आ चाँदक दुर्भाग्य जे ओहि समय इमाम आ चाँद दुनू ओहि गाममे छल। पुलिसकेँ ओकरा सभ पर चोरीक सन्देह भऽ गेलै। पुलिस ओकर कोनो बात सुनय लेल तैयार नै छल, चाहे ओ जतेक बुझबैबाक प्रयास कएलक। “जखन तूँ गाममे छह तँ हमरा देखय किएक नै अयलह?” ओहि एकटा चूकक लेल इमाम आ चाँदक ओहि समय खूब पिटाई भेल। ओतय सँ छुटकारा पाबय लेल इमाम आ चाँद भीख मांगि कऽ जतेक धान जमा कएने छल, सभ दऽ देलक आ ऊपरसँ पैघ कर्जामे डूबि गेल। ओहि दिनसँ इमाम आ चाँद ई निर्णय कएलनि जे परिणाम जे किछु होअय, मुदा स्टेशन जाए कऽ पुलिससँ मिलब आवश्यक अछि । ओकर चरणमे गिरि कऽ गिड़गिड़ायब मंजूर, मुदा मिलब अनिवार्य अछि । एहन सोचि कऽ जखन ओ सभ सारमपल्ली गेल छलाह, चाँद पुलिससँ मिलय लेल गेल । ओहि समय एसआई प्रसन्न मुद्रामे छलाह आ ओ अनुमति दैत कहलनि- “जाऊ आ भालुक खेल देखाऊ!” चाँद मनहि मन सोचलक, “कतेक उदार छथि... एक शब्दो नहि कहलखिन! ओहु परसँ ओ टकाक मांग सेहो नहि कएलनि!” तकर एक सप्ताह वा ओहुसँ किछु दिनक बाद, एसआई कोनो मामलाक जाँच लेल सारमपल्ली अएलाह। बजारमे बाप-बेटाक जोड़ीकेँ भालु नचबैत देखि ओ कड़क भऽ गेलाह आ गारि-गलौज करय लगलाह । इमाम बीच-बचाव करैत कहलखिन, “डोरा... हमर बेटा कतेको दिन पहिने अहाँसँ भेट कएने छल, नहि? अहाँ हमरा भालु नचयबाक अनुमति देने छलहुँ नहि की?” “तूँ सभ स्टेशन आबऽ, हम ओतहि देखब तोरा सभकेँ। के तोरा सभकेँ गाममे भालु नचयबा लेल कहलक?” इमाम आ चाँद निर्देशानुसार शादुलक संग पुलिस स्टेशन पहुँचलाह, मुदा एसआई नहि अएलाह। ओ भोरू पहरमे पहुँचलाह आ तखन धरि इमाम आ चाँद बिना भोजनक ओतय लटकल रहलाह। ओ लोकनि तँ भूख सहि सकैत छलाह, मुदा शादुल नहि; ओ भूखसँ गुर्राय लागल छल। शादुलक अवस्था देखि इमामक हृदय फाटि रहल छलनि, तखनो पुलिस ओकरा स्टेशन छोड़बाक अनुमति नहि देलक। एसआई अएलाह तँ पूरा पुलिस स्टेशनमे झाड़ू-बुहारू आ धुलाईक आदेश दऽ कऽ चलि गेलाह। जखन ओ लोकनि काज समाप्त कएलनि, तखन साँझ ढलि गेल छल। जखन ओ लोकनि किछु खाय लेल गिड़गिड़यलाह, तँ एसआई बन्दूकक बटसँ हुनका सभकेँ धमकाओलनि। तीनुकेँ अगिला दिन साँझमे छोड़ल गेल। तखन धरि हुनकर हालत एहन भऽ गेल छलनि जेना कतौसँ अपन प्राण बचाय कऽ भागल होथि। ओहि मण्डलमे ओ लोकनि फेर कहियो पएर नहि राखलनि। आब ओ पूरा प्रसंग चाँदक मनमे आबि गेल। ओकरा सचेत करैत इमाम कहलखिन, “एहनहि होइत छैक चाँद... पहिने ओ सभ मधुर बाजैत छथि आ एक बेर जखन अहाँ हुनकर जालमे फँसि जाइत छी, तखन खञ्जर लहरा कऽ अपन असली रूप देखबैत छथि”। मुदा चाँद अपन पितासँ सहमत नहि छल। ओ विश्वासपूर्वक कहलक, “एहन नहि अछि अब्बा... सभ एक्के रंगक नहि होइत छथि। हम अहाँकेँ कहलहुँ नहि जे ओ अपने समुदायक छथि? ओ हमर नाम नोट कएलनि आ सरपंचक सेहो। ओ लोकनि कहलखिन जे एहिमे सभक लेल किछु खर्च अछि, मात्र हमरा लेल नहि। ओ लोकनि हमर गामक आर दस-बारह गोटेकेँ जमीन आवंटित कऽ रहल छथि। ई पैरवी बहुत दिनसँ चलि रहल छल, एहन हमरा पता चलल। सरपंच सेहो पैरवी कऽ रहल छथि, आ आश्चर्य अछि जे हम सभ एतेक दिन धरि एकर एक शब्दो नहि सुनलहुँ!” चाँद सभक नाम लेलक जे पैरवी शुरू कएने छलाह, आ बतओलक जे कतेक खर्च भेल आ प्रक्रिया कतय धरि पहुँचल अछि। अन्ततः इमाम ओकर गप्प पर विश्वास करय लागल। “जँ एहन अछि, तखन ओ कहिया जमीन देबाक वादा कएलनि आ कतेक जमीन?” इमाम कल्पना कएलक जेना ओ पहिनहि सँ किसान बनि गेल अछि आ शादुल खरिहानमे धानक ढेरीक चारू कात घूमि रहल अछि। “एमआरओ नग्रमे नहि छथि, एहन हम सुनलहुँ अछि। हमरा काल्हि सभटा पता चलि जायत। मुदा जे कोनो स्थिति होय, ओ एकटा शर्त राखलनि अछि”। “शर्त? ओ की थिक?”, इमाम, जे आब किछुओ करय लेल तैयार छल, पुछलक। “हमरा सभकेँ खेल देखायब बन्द करय पड़त आ एहि भालुकेँ छोड़य पड़त”। “हम किएक करब... आ कतय खेल देखायब... जखन हमरा जमीन भेटि जयत तँ हमर हाथ तँ काजसँ भरल रहत, नहि की?” इमाम दृढ़तासँ कहलक। “हमरा शादुलकेँ नग्रक चिड़ियाघरमे सौंपि देबाक छैक... जाहि सँ ओ हमर घर पर बिल्कुल नहि देखल जाय”। इमाम चौंकि कऽ उठि बैसल। ओ अखनहुँ नहि बुझि सकल जे ओकर बेटा कतेक कठोर निर्णय लेने अछि। ओ चाँदक गप्पकेँ अनदेखी करैत कहलक- “एहन किएक होयत? ओ हमर सभक संगे रहत। की हमरा पास गाय वा महींस अछि? ओहो तँ ओहिना छैक”। “नहि, अहाँ ओकरा ओना नहि राखि सकैत छी। कानून ओकरा मनुष्यक बीच रहबाक अनुमति नहि दैत छैक”। “तखन तूँ ओकरा की कहलें चाँद?” “जे हमरा पास भालु नहि अछि... जे हमर भालु एक सप्ताह पहिने साँस लेबाक तकलीफसँ मरि गेल”। इमाम अपन बेटाक दिस गौरसँ देखलनि। व्याकुल भऽ ओ ई देखय लगलाह जे की एहि शब्द सभकेँ बाजैत काल चाँदक आवाज कनीको लटपटाएल? मुदा चाँद बेस दृढ़ देखाय पड़ि रहल छल, जखनकि इमाम स्वयं घबराएल छलाह। “एसआई साहब ओकरा की कहलखिन?” इमाम बेस उत्सुकतासँ पुछलखिन। “ओ सरपंच आ ओतय ठाढ़ किछु आन लोकसँ पूछताछ कएलनि। ओ सभ गोटे कहलखिन जे पछिला दस दिनसँ ओ लोकनि भालु नहि देखलनि अछि। एसआई साहब हुनकर गप्प पर विश्वास कऽ लेलनि। मुदा ओ धमकी देलखिन अछि जे जँ ई गप्प गलत साबित भेल, तँ ओ हमर अन्त देखि लेताह।” इमाम चुप भऽ गेलाह। ओहि साँझ ओ खरिहान सभमे नहि गेलाह। एकटा अस्पष्ट डर हुनका घेरि लेलक— पुलिस तँ एहि अधिकारीसँ नीक लगैत अछि। जँ पचास-सय टका हाथ पर राखि देल जाइत छल, तँ पुलिस दोसर दिस देखब पसन्द करैत छल। मुदा ई आदमी की थिक... ओ तँ भालुएसँ छुटकारा पाबय चाहैत अछि! सामान्यतः इमाम सभ भोर गामक दू-तीन टा गली 'कवर' करबाक लेल निकलि जाइत छलाह। एक बेर जखन ओ एकटा गामक दौरा समाप्त कऽ लैत छलाह, तँ तम्बू उखाड़ि कऽ अगिला गामक लेल प्रस्थान करैत छलाह। चाँद सेहो अपन साइकिल पर हुनकर सब सामान लदबाक लेल हाथ बढ़बैत छल। चाँद, जे प्रायः गलीक कुकुर सभकेँ भगाबय लेल अपन पिताक पाछाँ चलैत छल, ओहि भोर अखनहुँ नहि जगल छल। ओ अपन पिताक संग चलय लेल तैयार नहि छल। इमाम सही अन्दाजा लगौलनि जे चाँद सोचमे डूमि गेल छल, मुदा इमाम कोनो पैघ अनिष्टक सोचि कऽ डरि रहल छलाह। ओ चाँदकेँ अकेले छोड़ि कऽ बाहर निकलि गेलाह। ओहि भोर चारि टा गलीमे ताबीज-मन्त्र बेचि कऽ जखन इमाम वापस अएलाह, तँ ओ चाँदकेँ अपन साइकिल पर चढ़ैत देखलनि। “कतय?” ओ पुछलनि जे चाँद कतय जा रहल अछि। “हमरा आइ मण्डल कार्यालय (तहसील) जाय पड़त। हम सुनलहुँ अछि जे एमआरओ आइ ओतहि छथि। कोनो परिवर्तन होइसँ पहिने एहि मामला पर ध्यान देब जरूरी अछि। जँ हम देरी करब, तँ ओ लोकनि सूचीसँ नाम काटि सकैत छथि!” “जाऊ, मुदा दुपहर धरि वापस आबि जाऊ। हमरा खरिहान सभमे जेबाक अछि,” इमाम ओकरा याद दिएलनि। चाँद कोनो जवाब नहि देलक। जवाब स्पष्ट छल— हुनका लेल मण्डल कार्यालय जाएब धान जमा करबा सँ बेसी महत्वपूर्ण छल। इमाम चाँदमे ई अनचोक्के आएल परिवर्तन देखि चकित छलाह। ओ आब हुनकर काजमे रुचि नहि लय रहल छल। ओकर शादुलमे मोह समाप्त भऽ गेल छलै। चाँदक ई बदलाव इमामकेँ परेशान कऽ रहल छल। ओहि दिन पूरा गाम बदलल जकाँ लागि रहल छल। गली-गलीमे लोक किछु नव गप्प कऽ रहल छलाह। कियो एमआरओक बारेमे तँ कियो कलेक्टरक बारेमे चर्चा कऽ रहल छल। फेर किछु लोक सरकारक ओहि नव योजनाक गप्प कऽ रहल छला जकर अन्तर्गत गरीबक बीच जमीन बाँटल जाए वला छल। किछु लोक 'इन्दिराम्मा योजना' कऽ गप्प कऽ रहल छला। कियो ई गप्प कऽ रहल छल जे कोना एकटा गाममे सरपंच लाभार्थीक सूची बदलि देलक। तँ कियो ई कहि रहल छल जे कोना एकटा मण्डलमे पट्टा ओकरा दऽ देल गेल जे भूमिहीन नहि छल। चारू कात मात्र जमीने-जमीनक गप्प भऽ रहल छल! कोनो मानुस शादुलक खेल नहि देखय चाहैत छल। ताबीज बान्हय लेल एकोटा बच्चा आगू नहि अयलैक। इमाम बिना एको टा मन्त्र बेचने घर वापस अएलाह। ओहि दिन ओ एक दाना अनाज सेहो नहि कमा सकलाह। अनाजक बर्तन, जे हुनकर दैनिक मजदूरी छल, खाली रहि गेल। इमाम अपन हृदयमे एकटा पैघ शून्य अनुभव कएलनि। घरमे जे किछु थोरेक टूटल मकइ बचल छल, ओकरा ओ सिझबय लगलाह। ओ अपन लेल बालि परसलनि, मुदा शादुल लेल पर्याप्त भोजन नहि बचल छल। राति उतरि अयलैक। इमाम अन्हारमे बैसि कऽ चाँदक वापसीक प्रतीक्षा कऽ रहल छलाह। शादुलक खाली पेटक चिन्ता हुनका अपन भूखसँ बेसी पीड़ा दऽ रहल छलनि। ओहो राति छल। इमाम शादुल लेल टूटल मकइक बचल थोरेक मात्रा सिझौलनि। अपना लेल ओहि भोर भीख मांगि जमा कएल चाउर छल। जारनि लकड़ी नीक सँ नहि जरल। इमाम एकटा फोकला बाँसक फुक्की सँ आगिमे हवा फुकलनि। जोरसँ फूँक मारब हुनका अपन हृदयक भारीपन हल्लुक करैत जकाँ लागल। चाँद सेहो जेना समाधिसँ बात करैत होअय, “अब्बा, ओ सभ हमरा काल्हि आबय लेल कहलखिन अछि... एसआई साहब अहाँसँ मिलय चाहैत छथि, हुनका अहाँसँ बात करबाक इच्छा छनि।” इमाम चिन्तित भऽ मूड़ी उठौलनि, “जँ हम दुनू जाएब... तँ शादुलक की होयत?” चाँदक मुँह पर कोनो भावनाक चिह्न नहि छल। ओ समस्याकेँ बेस सहजतासँ लेलक, “चलू, आइ राति शादुलकेँ छोड़ि देब!” इमामकेँ जेना गोली लागि गेल हो। जहिना ओ जारन लकड़ी चूल्हिमे दइ छलाह, ओ अपन पुत्र दिस व्याकुल भऽ देखलनि। मद्धिम चाँदनीमे चाँदक मुँह स्पष्ट रूपसँ देखल नहि जा सकैत छल। “की अछि... की तूँ ओकरा छोड़ि देबह... मुदा कतय?” चाँद मुसकुराइत इमामक ओहि प्रश्नकेँ टालि देलक, “जंगलमे... ओतहि वापस जतयसँ अयल छल!” इमाम ओहि बातसँ स्तब्ध भऽ गेलाह। जेना ओ एहन शब्द सुनि रहल होथि जे हुनका नहि सुनबाक चाही, हुनकर आवाज नहि निकलल। एक प्रकारक दुर्बलता हुनकर अंग-अंगमे दौगि गेल। फोकला बाँस हुनकर हाथसँ खसि पड़ल। चूल्हि पर मकइक बालि उधिया गेल। ओ ओहिमे नूनक दाना देब सेहो बिसरि गेलाह। उधियायलासँ आगि मिझा गेलैक आ ओकर छाउर उड़ि कऽ इमामक आँखिमे भरि गेल। “ओकरा जंगलमे छोड़ि देब? हम जानवरकेँ जंगलसँ गाम अनलहुँ, ओकर आदति सभ बदलि देलहुँ आ बीस बर्ख धरि ओकरा अपन संगे घुमौलहुँ। जँ हम आब अनचोक्के ओकरा जंगलमे छोड़ि देब... तँ ओ की खाइत... ओ कोना जियत?” ई विचार मात्रसँ इमामकेँ असहनीय पीड़ा भेलनि। इमामक शब्दसँ चाँद खौंझा गेल, “जँ ओ जंगल नहि जायत, तँ की गाम जायत? कल्पना करू गाममे जएबाक... जमीनक गप्प तँ छोड़ू, हमर जान सेहो नहि बचत। ओ सभ हमरा जेलमे ठूसि देताह। की अहाँ कानून जानैत छी... एसआई एकटा खतरनाक आदमी छथि। ओ मात्र नीक लोक लेल नीक छथि। जखन ओ कड़कैत छथि, तँ ककरो परवाह नहि करैत छथि,” ओ थाकि कऽ कहलक। इमाम चुप रहलाह। ओ आधा सिझल बालि थोरेक ठण्डा होय लेल थारीमे राखि देलनि। शादुल निश्चिन्त भऽ चाँदनीमे घूमि रहल छल। चाँद प्रतीक्षा कऽ रहल छल जे की हुनकर पिताकेँ किछु आर पुछबाक छनि। जखन ओ नहि पुछलनि, तँ चाँद जारी राखलक। “चलू जल्दी उठू... हमर बोरा सभ बान्हि कऽ साइकिल पर राखू, तखन शादुलकेँ गामसँ बाहर जंगलमे छोड़ि देब... ओकर बाद हम सोझे मण्डल कार्यालय जाएब, एसआई आ बाकी अधिकारीसँ मिलय... हम हुनकासँ गिड़गिड़ा कऽ कहब जे ओ हमरा आजीविकाक कोनो रस्ता देखाबथु... हम जमीन मांगब... आ अहाँक जमीन मांगब अलग अछि।” “हम नहि आएब... तूँ जा,” इमाम रूख सँ जवाब देलनि। हुनकर रूख उत्तर ओतबे कड़ा स्वरमे दैत चाँद कहलक, “जँ हम अकेले जाएब तँ काज नहि होयत... ओ लोकनि अहाँकेँ सेहो बजौने छथि। ओ सभ जमीनक पट्टा मात्र अहाँक नाम पर तैयार करताह: अपन पिताकेँ लाबू, ओ सभ हमरा कहैत छथि।” इमाम एक बेर फेर मौन भऽ गेलाह। भालुकेँ बालि खिएला कऽ बाद ओ भूखले लेटि गेलाह, मुदा हुनका नीन्द नहि अयलनि। जँ कखनो ओंघी लगितो छलनि, तँ ओ कोनो कुत्सित सपना देखि कऽ चौंकि उठैत छलाह। चाँदक स्थिति सेहो ओहिना छल। हुनका सेहो नीन्द नहि आबि रहल छलनि, बस एक-एक शब्द बेर-बेर बड़बड़ाइत छला: “जमीन... जमीन!” ओहि राति दुनू गोटे लेल भोर सुखद नहि छल। सूर्योदयसँ पहिने उठि कऽ चाँद अपन बोरा सभ समेटय लागल। धक-धक हृदय करैत इमाम अपन पुत्रकेँ रोकबाक प्रयास कएलनि, मुदा चाँद हुनका तामससँ गुराड़ि कऽ देखलक। “हम शादुलक अतिरिक्त किछु नहि चाहैत छी... हम ओकरा बिना नहि रहि सकैत छी!” इमाम बजलाह। “हमरा जमीनक अतिरिक्त किछु नहि चाही... हम ई भिक्षावृत्तिक जीवन नहि जी सकैत छी!” चाँद गप काटि कऽ कहलक। एक गोटे 'हँ' तँ दोसर 'ना'... हुनका सभक बहस चरम पर पहुँचि गेल। चाँद क्रोधमे रस्सा पकड़ि लेलक। “की अहाँ हमर जएबासँ सहमत छी... वा चाहैत छी जे हम फाँसी लगा ली?” “तोर मर्जी... मुदा हम नहि आएब। भले हम आबी, मुदा हम शादुलकेँ नहि छोड़ब,” इमाम दृढ़ स्वरमे कहलखिन। हुनका घूरैत चाँद रस्साकेँ गाछसँ बान्धय लागल। ठीक जखन इमाम देखि रहल छलाह, चाँद गाछ पर चढ़ि गेल आ अपन कण्ठमे फाँसीक फानी लगा लेलक। इमाम लेल चाँदमे ई परिवर्तन कनीको अपेक्षित नहि छल, हुनका लागल जेना कपार पर बज्र खसि पड़ल हो। ओ दूर-दूर धरि ई कल्पना नहि कएने छलाह जे चाँद वास्तवमे फाँसी लगा लेत। इमाम कनीको देरी करितथि तँ चाँदक जान चलि जइतैक। पासमे राखल बसुला पकड़ि इमाम रस्सा काटि देलनि आ चाँद जमीन पर खसि पड़ल। चाँद दोसर रस्सा पकड़ि, कानैत एक आन गाछ दिस दौड़य लागल। भय आ दु:खक मिश्रण एक संगे इमामकेँ घेरि लेलक। अपन जवान पुत्रकेँ खोयबाक विचारसँ हुनकर शरीर थरथरा उठल। ओकरा रोकि कऽ इमाम आँखिमे नोर भरि चाँदसँ गिड़गिड़यलाह, “अरे बेटा... हम तोहर पैर पकड़ैत छियौ... एहन मत कर। मत कर!” मुदा चाँद नरम नहि भेल। ओ बहस कएलक आ एको इंच पाछाँ हटयसँ मना कऽ देलक। “अहाँ आब हमरा रोकि सकैत छी, मुदा जँ हम गाम जा कऽ किछु 'एन्ड्रिन' (विष) पी ली... तखन अहाँ हमरा कोना रोकब?” इमाम बेस उत्तेजित भऽ सोचय लगलाह। ई आशा करैत जे चाँद कमसँ कम अपन माएक बात तँ मानत, ओ गाम जा कऽ अपन पत्नीकेँ बजौलनि। “अरे बताह... की तूँ अखनहुँ शुरू नहि कएलह? दू टा 'सुंकारी' घर आबि कऽ वापस चलि गेल। जल्दी आबह। हम सुनलहुँ अछि जे ओ लोकनि जमीन बाँटि रहल छथि!” बीबम्मा दोसर दिससँ कहलखिन। इमामक पैरक तरबा ठण्डा भऽ गेलनि। अपन माएक शब्द सुनि चाँद घर जाए लेल आरो बेसी उत्सुक भऽ गेल। इमाम ओकरा बुझयबाक कड़ा प्रयास कएलनि, मुदा असफल रहलाह। एकर बदला चाँद मिनटे-मिनट पर इमामकेँ धमकी दैत रस्सा दिस बढ़ि जाइत छल। हुनकर बहस साँझ धरि चलल। इमाम दयनीय भऽ नोर बहाबैत रहलाह आ चाँद हुनका पर चिचियाइत रहल। ई एहन स्थिति छल जतय इमाम कोनो दिस निर्णय नहि लय पाबि रहल छलाह। चाँद हुनका अपन 'विलम्बक रणनीति' मानि एकटा समय सीमा निर्धारित कऽ देलक- “या तँ हम सभ एक घण्टामे चली, नहि तँ हमर लाश भेटत।” इमाम एक बेर फेर अपन पुत्रकेँ मनेबाक प्रयास कएलनि जे शादुल पछिला बीस बर्खसँ हुनकर आयक स्रोत रहल अछि आ ओकरा बिना जीवनक कल्पना असम्भव अछि; शादुल हुनका लेल बहुत त्याग कएने अछि। मुदा ओहि तर्कक चाँद पर कोनो प्रभाव नहि पड़ल। हुनका जँ किछु बुझल छल, तँ ओ मात्र एक शब्द छल: जमीन! इमाम चाँदमे हठ देखि कऽ हृदयसँ टूटि गेलाह आ सोचय लगलाह: “ओकरा कोनो फर्क नहि पड़लैक जे हम शादुलकेँ अपन पुत्र जकाँ पोसलहुँ, ओकरा अपन हिस्साक दूध पियैलहुँ। ओकरा स्वयं शादुल लेल कोनो प्रेम नहि छैक। हमर बेटा शादुल लेल प्रेम किएक राखत?” ई सोचि इमामक हृदय विदीर्ण भऽ गेलनि। चाँदक मृत्यु आ शादुलसँ अलग होयबाक पीड़ाक बीच तौलैत इमाम अनुभव कएलनि जे शादुलसँ अलग होयबाक पीड़ा सहब हुनका लेल बेसी सहज होयत। बहुत सोच-विचार कएला कऽ बाद ओ एकटा निर्णय पर पहुँचलाह। अपन पहिनेक हठसँ पाछाँ हटैत इमाम चाँदसँ बजारसँ मकइक भुट्टा खरीदबाक लेल कहलनि, ताकि जंगलमे छोड़यसँ पहिने ओ शादुलकेँ पेट भरि खिया कऽ सन्तुष्टि पाबि सकथि। घटनाक्रमसँ प्रभावित चाँद अपन साइकिल पर निकलल आ थोरेक कालमे मकइक भुट्टा संग एक लीटर दूध लय कऽ वापस अयल। इमाम शादुलकेँ मकइक बालि पेट भरि खियौलनि, अपन ओहि पैघ दु:खक बादो जे शादुलक ई अन्तिम भोजन होयत। कतौ हुनकर पिताक निर्णय बदलि नहि जाय, एहि डरसँ चाँद तेजीसँ हुनकर सभ समानक बण्डल बना लेलक। ओ शादुलक सबटा सामान— अलमुनिअमक थारी, पानिक टब, अंकुश, औखध देबाक बर्तन, सूती रस्सा, जूटक बोरा आ आन वस्तु सभ फेकि देलक। इमाम शादुलक संगे आ चाँद साइकिलक संगे- सभ गोटे पसरल चाँदनीक नीचाँ जंगल दिस अपन यात्रा शुरू कएलनि। जखन तीनू गोटे गामक बाहरी इलाका पहुँचलाह, तँ चाँद अपन पितासँ शादुलकेँ आजाद कऽ देबाक लेल कहलक: “अब्बा, ओकरा रस्सा सँ मुक्त कऽ दियौ।” “अरे बेटा... ई अखनहुँ गामक बाहरी इलाका थिक, नहि की? गलीक कुकुर सभ एतय घूमि रहल छैक। ओकरा देखिते ओ सभ ओकरा टुकड़ा-टुकड़ा कऽ देत आ जँ मानुस सभ देखि लेतैक, तँ ओ सभ ओकरा पाथरसँ मारि देत। कनी आर भीतर चलू।” चाँद समर्थनमे मूड़ी हिलओलक। शीघ्रे इमाम आ चाँद दुनू जंगलक केन्द्रमे पहुँचि गेलाह । साइकिलक संगे-संगे चलैत चाँद अपन पिताकेँ शादुलकेँ छोड़ि देबाक याद दियेलक, “अब्बा... छोड़ू!” “ई जंगलक केन्द्र थिक। जँ ओकरा प्यास लगलैक तँ लगपास पानिक कोनो स्रोत नहि छैक। शादुलकेँ पूरा एक बर्तन पानि चाही नहि तँ ओ पियासे मरि जायत। ओकरा पानिक स्रोत लग छोड़ू,” इमाम बजलाह । चाँद भीतरहि भीतर उबलि रहल छल, मुदा कोनो स्थितिमे ओ अपन आवाज ऊँच नहि कएलक; एकर बदला ओ अपन सबटा क्रोध साइकिल पर निकाललक । चाँदनी राति छल आ चारू कात सन्नाटा पसरल छल । चाँद आगू आ इमाम पाछाँ... आ ठीक पाछाँ-पाछाँ शादुल । चाँद चुपचाप चलि रहल छल आ इमामक मुँहसँ शादुलकेँ छोड़ि देबाक शब्द सुनबाक प्रतीक्षा कऽ रहल छल । इमामक बारेमे एहन लागल जेना ओ पूर्णतः संज्ञाहीन छलाह आ अपनहि सोचमे डूमि कऽ चलि रहल छलाह। तीनू गोटे घन आबादी वला 'पेद्दम्मा' जंगलमे प्रवेश कएलनि । धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा कएला कऽ बाद, आब अपनाकेँ रोकबामे असमर्थ चाँद अपन पिताकेँ बजौलक- “अब्बा!” इमाम कमजोर स्वरमे बुदबुदयलाह, “ई मात्र नाम लेल पैघ जंगल छैक मुदा एतय मानुसक चहल-पहल बराबर रहैत छैक... शादुल जंगलक रस्ता सभ नहि जानैत छैक, नहि की? जँ ओ ककरो ध्यान आकर्षित कएलक, तँ ओ सभ ओकर चाम लेल ओकरा मारि देत” । साइकिल फेकि कऽ चाँद अपन पिताक सोझाँ ठाढ़ भऽ गेल आ हुनकर हाथसँ रस्सा छीनि लेलक । इमाम किछुओ करबामे असमर्थ ठाढ़ रहलाह। चाँद क्रोधमे शादुलक कण्ठक रस्सा खोलि देलक । एकटा लाठीसँ ओ शादुलक पएर आ पीठ पर प्रहार करब शुरू कऽ देलक, ओकरा जंगलक दिस भागय लेल विवश करैत । “पट्टा!... ओकर मुँहक पट्टा! चाँद, ओ हटाउ... ओ भूखे मरि जायत!” इमाम चिकड़ि उठलाह । दू छलांगमे चाँद शादुलकेँ पकड़ि लेलक आ बकल खोलि ओ पट्टा दूर फेकि देलक । ओकरा जंगलमे खदेड़य लेल ओकरा पर पाथर फेंकय लागल । अनचोक्के भेल एहि परिवर्तनकेँ बुझबामे असमर्थ शादुल जड़ि भऽ ठाढ़ रहल । कनी दूर जा कऽ ओ ठाढ़ भऽ दुनू गोटेकेँ निहारय लागल। “चल जो!” शादुलकेँ दूर जाए लेल कहैत चाँद ओकरा पर पाथर फेकलक । शादुल आर दूर चलि गेल । चाँद आगू दौड़ल आ ओकरा पर आर पाथर फेकलक । सभ फेकल पाथरसँ बचय लेल शादुल बड़ चतुराईसँ पाछाँ हटि जाइत छल। इमाम ओहि भोरक तनाव, संघर्ष आ शादुलक संग अपन बीस बर्खक संगतिकेँ याद कएलनि । एहि सभ बोझक नीचाँ दबि कऽ आब आरो सहयमे असमर्थ भऽ ओ एकटा भयंकर चीत्कार कएलनि आ हृदयविदारक विलाप करय लगलाह- “ओ...!” जेना कोनो मृत शरीरक सोझाँ बैसल होथि, ओ नग्न धरती पर ठेहुन टेकि देलनि, सिसकय लगलाह... अपन हाथसँ अपन कपार पिटनाइ शुरू कएलनि आ शादुलक थारीसँ बेर-बेर अपन माथ पिटलनि। शादुलकेँ जंगलमे खदेड़ि देला कऽ बाद चाँद अपन पिताक पास आयल। हुनका जबरदस्ती एक हाथसँ अपन साइकिल पर बैसा कऽ चाँद गामक दिस चलल । इमाम सिसकि-सिसकि कऽ फूटि पड़लाह, नोर हुनकर गाल पर बहय लागल छल । चाँद तेजीसँ पैडल मारैत रहल । एक निश्चित दूरीक बाद, शादुलक चीत्कार पाछाँसँ हुनकर कानमे पड़ल। ओ सभ भोरमे घर पहुँचि गेलाह। बीबम्मा जेना हुनकर वापसीक प्रतीक्षा कऽ रहल छलीह। इमाम उत्सुकतासँ हुनकर दिस देखलनि, ई आशा करैत जे ओ शादुलक बारेमे पुछतीह। मुदा ओ नहि पुछलनि, एकटा चर्चा सेहो नहि कएलनि। हुनकर मुँह पर दु:खक कोनो भाव नहि छल। ओ जेना शादुलकेँ पूर्णतः बिसरि चुकल छलीह। माता-पुत्र दुनू अकेले जमीनक बारेमे गप्प कऽ रहल छलाह । जखन ओ अपन बेटाक सभ प्रश्नक उत्तर दऽ रहल छलीह, इमाम दयनीय रूपसँ अपन टूटल रस्सीक खाट पर लेटि कऽ विलाप कऽ रहल छलाह। ओ पूरा दिन इमाम ने हिललाह आ नहिये पानि कऽ एक घोंट पियलाह। खाट कऽ धोधरिमे सूतल ओ लगातार नोरक धारा बहबैत कानैत रहलाह। इमामक दु:ख बुझि कऽ, जेना गर्भमे वापस लौटय चाहैत हो, शादुल ओहि राति झाँखुड़ आ जंगल सभ पर कूदैत, कतेको गाम पार करैत, पूरा शरीर पर चोट खाइत घर पहुँचि गेल। अगिला भोर जहिना कपाट खुजल, शादुल सोझाँ ठाढ़ छल। शादुलकेँ वापस देखि इमाम रोमांचित भऽ गेलाह। ओ तुरत्ते गेलाह आ शादुलकेँ अङ्कवार भरि कऽ चूमय लगलाह। मुदा बीबम्मा आ चाँद एकटा हृदयविदारक विलाप करय लागय गेल। इमाम पर शादुलकेँ अपन साला सभकेँ बेचि देबाक लेल दबाव बनाओल गेल, आ ओ सभ ओकरा शादुल कऽ संगे ओही राति विदा कऽ देलनि। शादुलकेँ जहर बला मिश्रण खिअयबामे असफल भेला कऽ बाद, आ अपन पत्नी आ पुत्रक क्रोधक सामना करबाक निर्णय कएला कऽ बाद, शादुलक अन्त देखबा कऽ बदला इमाम मन्द गतिसँ शादुलक पाछाँ-पाछाँ घरक रस्ता पर छलाह। इमाम सोचमे डूमि गेलाह। सोचमे लीन भेला कऽ कारणे हुनका ई ध्यान नहि रहलनि जे कखन सूर्य अस्त भऽ गेल आ मद्धिमका अन्हार चारू कात पसरि गेल। गाम अखनहुँ बहुत दूर छल। ओ एक नजरि शादुल पर देलनि जे पाछाँ-पाछाँ घुरघुराइत चलि रहल छल। इमाम बुदबुदयलाह- “तूँ हमर पाछाँ किए कऽ रहल छह शादुल, आँखि मूनि कऽ हमरा पर विश्वास करैत? तूँ हमरा किएक नहि मारि दैत छह, तोरा संग कएल गेल अन्याय कऽ सजाक रूपमे?” एक क्षण निराशा, तँ अगिला क्षण प्रेम; एक क्षण वीरता, तँ अगिला क्षण डर। इमाम बेरा-बेरी एकटा भावनात्मक उथल-पुथल अनुभव कऽ रहल छलाह। एक दिस ई सन्देह जे की हुनकर योजना काज करत, तँ दोसर दिस ई तनाव जे ओ शादुलकेँ सभ दिनक खतरा सँ कतेक काल धरि बचेबाक प्रयास करताह। सङ्घर्ष सँ आहत इमामक गति मन्द भऽ गेलनि। जहिना गाम नजदीक आयल, हुनकर हृदय आरो भारी भऽ गेलनि। “मामा! अहाँ हमरा संग गलत कएलहुँ... हम अहाँक एकटा बन्धुआ मजदूरक रूपमे सेवा कएलहुँ। अहाँ हमरा बेर-बेर भरोसा देलहुँ जे जमीन हमरा भेटत, आ आब हमर नाम सूचीमे नहि अछि।” नाराज बुच्चैया शिकाइत कएलक आ मेज पर आधा सेर इप्पाक ताड़ी राखि देलक। सरपञ्च ताड़ी देखि कऽ लार टपकावय लागल। “हम की करी बुच्ची... पूरा सूची तैयार कएल गेल छल। तोहर नाम बारहम पर छल। सूची एक बेर आरडीओ (RDO) कार्यालय पहुँचि कऽ हाथ बदललक। ओहि फकीर... ओ इमाम नहि छैक? ओकर नाम सूचीमे शामिल भऽ गेलैक आ तोहर नाम जे तखन धरि छल, निपत्ता भऽ गेलैक।” बुच्चैया हताश भऽ कुर्सी पर बैसि गेल आ ताड़ीक बोतल खोललक। “हमरा बताबू मामा, की हम कोनो अमीर छी? की हमरा लग एको गुंटा जमीन वा आजीविका अछि? हमरा तँ मजूरीक काज सेहो नहि भेटि रहल अछि। जमीन भेटत से मानि कऽ हम पाँच-छह हजार टका उधार लय कऽ खर्च कऽ देलहुँ... आब हमरा लग विष खयबाक अतिरिक्त कोनो विकल्प नहि अछि।” बुच्चैया पीड़ा सँ पुछलक। सरपञ्च बुच्चैयाक सोझाँ बैसि गेलाह, थारीमे सोहारी आ गिलास मेज पर आबि गेल। ताड़ीक तीव्र गन्ध सँ हवा महकय लागल छल। ओकरा शान्त करबाक लेल सरपञ्च कहलखिन, “हम की करी, हम जे किछु कऽ सकितहुँ, कएलहुँ। अन्तिम क्षणमे एसआई (SI) सूचीमे हेरफेर करबाक लेल अएलाह। हम सुनलहुँ अछि जे ओ एमआरओ सँ इमामक नाम सिफारिश कएलखिन। की अहाँ अधिकारी सभकेँ नहि जानैत छी? ओ सभ एक-दोसरा सँ बान्हल रहैत छथि... हुनकर अपन कोटा होइत छनि, नहि की?” “इमाम एसआईकेँ कोना जानैत छथि मामा?” बुच्चैया गिलासमे ताड़ी ढारैत पुछलक। “ओ सभ एकहि समुदायक छथि... नहि जानी कतय ओ सभ रिश्तामे बान्हल छथि। जखन कहियो हम स्टेशन जाइत छी, तँ ओ चाँद नाम कऽ लड़का स्टेशनक लगपास मँड़राइत देखाय पड़ैत अछि।” दू-तीन बेर ताड़ी पिला कऽ बाद दुनू गोटे नशामे धुत्त भऽ गेलाह। “ऐ सभ गप्पक अतिरिक्त, की हमर मामिला आब हारल मानल जाय?” व्यथित बुच्चैया फेर सँ पुछलक। “अखन अन्तिम निर्णय कतय भेल छैक? आवेदन अखनहुँ एमआरओ कऽ पास जमा करबाक अछि... पट्टा तैयार होयबाक अछि... अखन धरि तँ शुरूआत सेहो नहि भेल छैक। आइ मात्र ओ लोकनि प्रत्येक व्यक्तिक क्षेत्रक सीमाङ्कन कएलखिन अछि आ फाइल अखनहुँ आरटीओ (RTO) लग अछि। ई अखन कलेक्टर धरि नहि पहुँचल छैक!” सरपञ्च सहारी चबाबैत कहलखिन। बुच्चैयाक मनमे किछु आशा जागल। ओ विनती कएलक, “अहाँ अखनहुँ जे किछु कऽ सकैत छी, करू। हमरा पर एक नजरि राखू मामा... अहाँकेँ पुण्य भेटत।” “तोहर नाम फेर सँ सूचीमे शामिल करबाक लेल ककरो नाम सूची सँ काटय पड़त... हम देखि रहल छी जे केकर नाम सूची सँ हटाओल जाए सकैत छैक,” सरपञ्च नशामे बुदबुदयलाह। “कृपया ककरो नाम काटि दियौ मामा... एक बेर जँ अहाँ ठानि लेब, तँ अहाँ किछुओ कऽ सकैत छी। की अहाँ हमरा लेल एतबो नहि कऽ सकैत छी? पूरा मण्डलमे हमरा लेल अहाँक अतिरिक्त के अछि?” “केकर नाम छोड़ल जाए सकत? ओहि बारह गोटेमे सँ ग्यारह गोटे तँ ओहे छथि जकर सिफारिश हम स्वयं कएने छलहुँ!” सरपञ्च गहीर सोचमे डुमि कऽ कहलखिन। “तखन ई बारहम आदमी (इमाम) होयबाक चाही!” बिना कोनो संकोचक बुच्चैया जवाब देलक। “एसआई बेस शक्तिशाली छथि, हुनकर राजनीतिक प्रभाव सेहो छनि। ओ कलेक्टरकेँ सेहो मना सकैत छथि। लोक हुनका एकटा ईमानदार अधिकारीक रूपमे जानैत छनि। हुनका लेल निअम तँ निअम थिक।” “तखन हम की करी? की हम सभ उम्मीद छोड़ि दी?” बुच्चैया हताश भऽ पुछलक। “मात्र एकटा रस्ता अछि... हमरा ई देखय पड़त जे एसआई स्वयं अपन केसक विरुद्ध काज करथि— जेना कियो अपन आंगुर सँ अपनहि आँखि फोड़ि लैत अछि। एसआईकेँ प्रचण्ड क्रोधमे आनय पड़त, ईहे एकमात्र उपाय अछि!” सरपञ्च ताड़ीक अन्तिम घोंट समाप्त करैत कहलखिन। “कोना... एसआई बिना कोनो कारणक क्रोधित कोना भऽ सकैत छथि?” गिलास नीचाँ राखि बुच्चैया पुछलक। “गप्प ई छैक जे... एकटा कानून लागू भेल अछि जकर तहत जानवरक खेल देखायब दण्डनीय अपराध थिक। एसआई अधिकारी सभ पर प्रभाव दैत कहलखिन जे फकीर लग भालु नहि छैक। हमरा एसआईकेँ ई विश्वास दियाबय पड़त जे ओकरा लग वास्तवमे भालु छैक। तखन एसआई झूठ बाजय लेल इमामकेँ बेतरह पिटताह आ तखन इमामक नाम सूची सँ काटि देताह। तखन तोहर नाम ओहिमे आबि जायत!” “की वास्तवमे हुनका लग भालु छनि... वा नहि?” बुच्चैया सन्देह सँ पुछलक। “के जानैत छैक... हम गाममे छी आ ओ गाम सँ बाहर रहैत छथि। के ओतय जाँच करय जायत? मुदा एकटा बात सत्य छैक- सभ जमीन लेल हो-हल्ला कऽ रहल छथि, मुदा इमाम कहियो कार्यालय नहि गेलाह। ई सभ देखि हमरा सन्देह होइत अछि जे फकीर कतय भालु नचा रहल छथि।” “ई तँ देखय वला मामला छैक मामा... हम ओकर पीछा करब,” बुच्चैया जाए लेल ठाढ़ भऽ गेल। “जँ तूँ इमाम आ भालुकेँ एक संगे देखबह, तँ हमरा बताबह। हम ई समाचार एसआईक कान धरि पहुँचा देब आ तोहर काज भऽ जायत।” सरपञ्च लटपटाइत अपन पैर पर ठाढ़ भऽ गेलाह। मध्यरात्रिक समय छल आ गाम गहीर नीन्दक कोरामे छल। पूर्णिमासँ किछु दिन पहिनेक समय छल। आकाशमे जेना पाउडर छीटि देल गेल हो, पूरा श्वेत चाँदनीसँ ढकल छल। मध्यरात्रिक घण्टी बजल। शादुल एकटा चंचल मुद्रामे चलि रहल छल। इमाम घरक दिस थकल-हारल पएर घसीटैत चलि रहल छलाह। कोनो कारणें इमाम ओहि दिन चाँदनीक आनन्द लेबाक स्थितिमे नहि छलाह। जँ घोर अन्हार रहितैक, तँ ओ अपन गोपनीयताक ओटमे आत्मविश्वाससँ डेग बढ़ौताह, मुदा आब ओ भयसँ थरथरा रहल छलाह। हुनका लागल जेना ई चाँदनी हुनकर रहस्य दुनियाक सोझाँ उजागर कऽ रहल हो आ हुनका पकड़ि कऽ गामक लोकक ककरो हाथमे सौंपि देत। इमाम गाममे प्रवेश कएलनि। तखन धरि ओ अपन साहस बटोरने छलाह, मुदा आब ओ साहस जवाब दऽ रहल छलनि। जहिना ओ घरक लग पहुँचलाह, भय बढ़ैत गेल आ हृदयक धड़कन तेज भऽ गेलनि। ठीक ओही क्षण हुनकर मनमे शादुलक प्रति आक्रोश जागि उठलनि। ओ सोचलनि: “शादुलक मृत्यु निश्चित छैक। जंगलमे रहबाक बदला शादुल किएक घर वापस आबय चाहलक? की आब चाँद ओकरा रहय देत? की चाँद ओकरा छोड़त? ओ निश्चित रूपसँ शादुलकेँ काटि कऽ मारि देत। थू... तोरा पर प्लेग लागौक!” बहुत दूरसँ चाँदनीमे हुनकर एकचारी झलफल देखाय पड़ल आ पाछाँ गलीक बत्तीक उज्जर प्रकाशमे गाम देखायल। ओ आगू एको डग बढ़ाबयसँ डरि कऽ ठाढ़ भऽ गेलाह। इमामकेँ ठाढ़ देखि शादुल सेहो ठाढ़ भऽ गेल। घर पहुँचला पर की सुनय पड़त आ की हिंसा देखय पड़त, एकर कल्पना मात्रसँ इमामक पैर काँपय लगलनि। हुनकर जीवनक डोर हुनका घरक दिस खींचि रहल छल। हुनकर प्राण अपन बीस बर्खक पुत्रकेँ देखय लेल व्याकुल छल। ओ सोचलनि: “जखन ओ सभ (माता-पुत्र) शादुलकेँ छोड़ि देबाक लेल एतेक हठ कऽ रहल छथि, तँ हम ओकरा लेल किएक हाथ पसारि रहल छी?” एहि निराशासँ शादुलक प्रति घृणा जागल। इमामक स्थिति ओहि सैनिक जकाँ छल जे वीरतासँ लड़ल तँ खूब, मुदा अन्तमे मृत्युकेँ निश्चित देखैत अछि। इमाम सोचलनि- की हम शादुलकेँ जहर बला मिश्रण नहि खिया कऽ गलती कएलहुँ? ओ मनहि मन मन्थन कएलनि: “जँ हम ओ मिश्रण खिया देने रहितहुँ, तँ ओ कतौ नजरिसँ दूर मरि गेल रहितैक। आब तँ ओ हमर आँखि सोझाँ मरत। ई सभ हमर बतहपना अछि, की बीबम्मा आ चाँद हमर गप्प पर विश्वास करइ जायत?” ओहि चाँदनीमे शादुल इमामकेँ एकटा प्रेत जकाँ लागि रहल छल जे हुनका सता रहल हो। “थू!” ओ घृणासँ जमीन पर थुकरलनि। शादुल गुरड़ल। इमाम जहिना एकचारीक पास पहुँचलाह, अपन गति तेज कऽ देलनि। शादुल सेहो हुनकर संगे तेज चलल। जखन इमाम एकचारी पहुँचलाह, तँ देखलनि जे बीबम्मा आ चाँद दुनू गोटे बाहर बैसल छथि। इमामकेँ देखि ओ सभ एक शब्दो नहि बाजलखिन। हुनका सभकेँ मौन देखि इमाम डरि गेलाह। शादुल सूतय लेल एक कोना खोजबाक लेल चारू कात घूमि रहल छल। चाँदक पुछबासँ पहिने इमाम हुनकर क्रोध शान्त करबाक प्रयास कएलनि: “रे चाँद! हम ओकरा मिश्रण देलहुँ। ओ एक-दू घण्टा व्याकुल भऽ घूमि रहल छल। बस! ओकर बाद ओ सामान्य भऽ गेल। ओ बूढ़ भऽ गेल छैक, नहि की? एहि लेल ई मिश्रण ओकरा पर बेसी काज नहि कएलक।” ने चाँद बाजल ने बीबम्मा... दुनू गोटे चुप रहल। हुनकर ई मौन इमामकेँ आरो बेसी डराबय लागलनि। “बेटा... तोर मर्जी... तूँ जे कहबह हम वएह करब। हम ओकरा ओही खाधिमे गाड़ि देब। नहि तँ हम ओकरा बसुला सँ काटि देब,” इमाम आवेशमे बाजल छलाह। बीबम्मा अखनहुँ चुप्प छलीह। आब चाँद अपन मुँह खोललक! “अम्मी... शादुल लेल किछु बालि सिझाउ। ओ भूखल अछि। एक सोला (एकटा छोट मापक पात्र) पर्याप्त नहि होयतैक। ई एक थव्वा... एक थव्वा (एकटा पैघ पात्र) होबाक चाही!” चाँद अपन माएकेँ निर्देश देलक। हुनकर आवाजमे कोनो क्रोध नहि छल, हुनकर नजरिमे कोनो रोष नहि छल। ओ शान्त छल। सहमति दैत बीबम्मा भीतर गेलीह। इमाम स्तब्ध ठाढ़ छलाह। ओ अपन पुत्रक व्यवहारक आकलन करबामे असमर्थ छलाह। एक थव्वा टूटल मकइ पानिमे मिला कऽ बीबम्मा ओकरा उसीनय लेल चढ़ा देलखिन। इमाम सोचलनि: “काल्हि धरि घरमे एक दाना मकइ नहि छल, आइ ई कतयसँ अयल? चाँद पहिने कतेक उग्र स्वभावक छल, आइ ओ क्रोध कतय गेल? हमर पत्नी, जकरासँ हमरा आशा छल जे क्रोधमे बिख-सबिख भऽ जएतीह, हमरा देखि कऽ शान्त देखाय पड़ि रहल छथि... किएक? ओ सभ एक दिनमे कोना पलटि गेलाह?” कतेको प्रश्न इमामक हृदयमे कोलाहल मचाबय लागल। ओ पुछय चाहैत छलाह, मुदा डरे आगू नहि बढ़ि पाबि रहल छलाह। ओ अपन खाट लगेलनि आ ओहि पर बैसि गेलाह। घरक चारू कात घूमि कऽ शादुल सेहो वापस आयल आ खाटक नीचाँ बैसि गेल। इमाम बेर-बेर ओही गप्प पर सोचय लगलाह: “निश्चित रूपसँ किछु भेल छैक। अधिकारी सभ जमीन देबासँ मना कऽ देलखिन... जँ ई सत्य थिक, तँ ठीक छैक! नहि तँ एसआईक स्थानान्तरण (ट्रान्सफर) भऽ गेलैक। ओहो नीक रहत... ओहि पद पर रहि कऽ ओ केकर पक्षधर छल? वा, की ओकरा शादुलक उपस्थितिक बारेमे पता चलि गेलैक? तखनो ठीक छैक, ओ जानि लेत... की भालु हमर जीवनक हिस्सा मात्र आइ सँ छल? नहि। ओ तँ हमर प्राण थिक। ओ हमर पुरखाक समयसँ हमर आजीविकाक आधार थिक। ओ सभ जे करय चाहैत छथि, करथि। एहि मध्यम आयुमे हमरा एतेक सुख-सम्पत्तिक की आवश्यकता? जँ भालुकेँ नग्रक चिड़ियाघर जएबाक छैक, तँ हमरो ओतहि पठा दिअ।” बालि उधियाय लागल छल। आब इमामक मन सेहो चूल्हिक बालि जकाँ उबलि रहल छल। “अब्बा... पहिने अहाँ खा लिअ!” चाँद सुझाव देलक जे हुनकर पिता पहिने अपन भोजन कऽ लेथि। इमाम अपन भूखक बारेमे बिसरि गेल छलाह। चाँदक एहि निर्दोष शब्दसभसँ हुनकर भूख आब दुगुन भऽ गेलनि। जेना सम्मोहनक वशमे होथि, ओ अपन हाथ-पैर धोलनि आ दलानपर पटिया पर बैसि अपन भूख मेटाबय लगलाह। हुनकर पत्नी हुनकर सोझाँ थारी राखि भोजन परोसलीह। “तूँ खैलें रे?” इमाम अपन बेटासँ पुछलनि जे की ओ भोजन कऽ लेने अछि। “हँ, हम खा लेलहुँ,” चाँद शान्तिसँ उत्तर देलक। इमाम जतेक विश्लेषण कएलनि, ओ चाँदमे आयल एहि परिवर्तनकेँ बुझबामे असमर्थ रहलाह। ओ चकित छलाह जे की ई वएह चाँद अछि जे काल्हि धरि विद्रोही छल, आ की ई वएह पत्नी छथि! “की भेल? की ओ सभ कहैत छथि जे ओ लोकनि हमरा जमीन देताह, वा हमरासँ झूठ बाजि रहल छलाह?” इमाम आस्तेसँ पुछलनि। चाँद जवाब टालि गेल। “अब्बा... नीक भेल जे अहाँ ओकरा (शादुलकेँ) पाछाँ छोड़ि कऽ वापस आबि गेलहुँ। हम पूरा जंगलमे अहाँकेँ खोजलहुँ... कतौ नहि भेटलहुँ। हमरा डर छल जे कतौ अहाँ ओकरा ओ मिश्रण तँ नहि खिया देलियैक।” “हँ... एतेक दिनमे तूँ ई एकटा बेस नीक काज कएलह...” हुनकर पत्नी इमामक प्रशंसा कएलनि। ओहि शब्दसभसँ इमामकेँ सभटा बुझाय लागल: “स्थिति सँ एहन लगैत अछि जे ओ अधिकारी सभ धोखेबाज साबित भेलाह। एहि कारणें आब हमरा एतेक याद कएल जा रहल अछि। नीक भेल जे हम शादुलकेँ मिश्रण नहि खियैलहुँ!” हुनका महसुस भेलनि जेना कोनो पैघ बोझ हुनकर मनसँ उतरि गेल हो। एकटा अनियंत्रित खुशी हुनका घेरि लेलक। ओ रोमांचित भऽ गेलाह।इमाम अपन उत्साह पर काबू नहि राखि सकलाह। “जे आगाँ-पाछाँक गप्प पर विचार करैत अछि, वएह वास्तविक मानुस थिक। तूँ ओहि जमीनक पाछाँ बौआयल छलह, किएक तँ ओ लोकनि तोरा लोभ देखेने छलाह। जेना सियार ऊँटक ठोरक लालसामे पड़ल रहैत छैक, तहिना तूँ किछु टका व्यर्थ गमा देलह। सब किछु हेरायल जकाँ! ओहि लेल तूँ अपन जान लेबऽ चाहलह आ शादुलकेँ सेहो मारय चाहलह! तोहर गप्प मानि जँ हम हड़बड़ीमे किछु कऽ दैतहुँ, तँ की भेल रहितैक? की गामक लोक नहि कहने छल जे जँ हम ओकर पाछाँ पड़ब जे हमरा लग नहि अछि, तँ हम ओहो खो देब जे हमरा लग अछि? तूँ हमर बेटा छह। हम तोरा लेल किछुओ करब। हम एहि जमीनक की करब? हमर जीवन शादुलक संगे अछि। ओ हमर प्राण थिक, हमर गर्व, हमर सम्मान आ हमर चिन्ह थिक। जमीनक संग अपन चिन्ता अबैत छैक, शादुल तँ चिन्ता कम करैत छैक!” “अब्बा... वएह अछि... बस! की हम जमीन कहलहुँ... की ई ओ छी जे हम केलहुँ?” चाँद हुनकर दिस मुड़ल, ओकर क्रोध बढ़ि रहल छल। “जँ तूँ किछु नहि कएलह, तँ क्रोध किएक करैत छह? की हम तोरा बाली लेल नहि पुछलियौ? हम नहि पुछलियौ, नहि की?” इमाम शादुलक कानक दिस इशारा करैत कहलखिन। “सोनाक छल्ला जे हम ओकरा लेल बनबैलहुँ, ओ कतय छैक?” “हमरा जमीन लेल खर्च करय पड़ल! आर की करितहुँ? सिफारिश सभ लेल आ एमआरओ कार्यालयमे लोक सभकेँ टका देबाक लेल टका चाही। हम टका कतयसँ जुटैतहुँ? अहाँक भीख मांगि कऽ भेल कमाई तँ किछुओ नहि छल। की हम गाममे भीख माँगय जइतहुँ?” चाँद क्रोधित भऽ कहलक। “जँ हम सत्यक पता लगा लेब, चाहे ओ एसआई होय वा एमआरओ वा सरपंच, जे कियो होय, हम सभकेँ मारि देब। हम ओकरा नहि छोड़ब। ओ सभ हमरा अपन आश्वासनसँ धोखा देलक।” इमाम खाट पर अपन मुक्की पटकलनि। “ओ बात नहि अछि अब्बा,” चाँद बीच-बचाव कएलक। “तखन की छैक? तूँ शादुलक पहिरल सोनाक बाली किएक बेचि देलह?” “एसआई साहब हमरा लेल जमीनक पट्टा दियाबय कऽ वादा कएलखिन, मुदा ओ हमरा चेतावनी सेहो देलखिन जे भालु कहियो नहि देखाय पड़य। हम कहलियैन जे हमरा पास भालु नहि अछि। सरपंच, जे ओतय छलाह, सुझाव देलखिन जे ओ लोकनि हमरा पर विश्वास तखने करताह जखन घरमे भालुक उपस्थितिक कोनो निशान नहि रहत। ओ चाहैत छलाह जे हम शादुलक सबटा सामान फेकि दी। ओ एहि पर सेहो जोर देलखिन जे हम ओकर कानसँ सोनाक बाली निकालि दी... ई कहलखिन जे ई दूरसँ सेहो देखल जा सकैत छैक... ई ओकर अस्तित्वक एकटा स्पष्ट सङ्केत थिक... हमरा अखनहुँ पट्टा नहि भेटल अछि... हमरा ई मात्र प्राप्ति कऽ बाद करबाक चाही...” इमाम, जे एहि सभ समय क्रोधित छलाह, किछु शान्त भऽ गेलाह। ओ देखलनि जे हुनकर पुत्र जे कएलक, ओ ओतेक खराब नहि छल जेना ओ सोचि रहल छलाह। ओ सेहो जमीन लेल सोनाक बालीक बलिदानक आवश्यकता महसुस करय लगलाह। “ठीक अछि... ठीक अछि,” इमाम शान्तिसँ कहलनि। “जे भऽ गेल, से भऽ गेल। की ओ सभ तखन पट्टा देलक?” “हँ... ओ लोकनि देलखिन! आर की?” एतेक कहि चाँद भीतर दौड़ल आ पट्टा लय कऽ बाहर आयल। इमाम ओकरा हाथमे लेलनि। ओ पढ़ि नहि सकैत छलाह, मुदा ओ बुझि गेलाह जे पट्टा हुनकरे नाम पर छल। ओकरा देखि हुनकर आँखि नोरसँ भरि गेल। ओ अपन पत्नीक शब्दसभकेँ याद कएलनि। बीबम्मा सेहो भावुक भऽ गेलीह। ओ अपन साड़ीक आँचरसँ अपन नोर पोंछलनि। बालिक सुगन्ध हवामे घुलैत देखि हुनका होश आयल। “अब्बा... बालि तैयार अछि। किछु अहाँ लिअ आ बाकी शादुल लेल छोड़ि दियौ।” एतेक कहि चाँद भीतर गेल आ बालि लय कऽ बाहर आयल। बालि देखि शादुल तुरत्ते खाटक नीचाँसँ बाहर आयल। ओ इमामक दिस देखलक। इमाम एक मुट्ठी बालि लेलनि आ शादुलकेँ देलनि। शादुल ओकरा लेलक आ दू घोंटमे चट कऽ गेल। चाँद अपन माएसँ बाकी बालि लेलक आ शादुलक सोझाँ राखि देलक। तुरत्ते इमाम हाथमे विषक थोरेक मात्रा लेलनि। चाँद प्रतीक्षा करैत ठाढ़ छल। बीबम्मा भीतरसँ देखि रहल छलीह। इमाम हाथमे विष लय कऽ बालिक दिस देखैत बैसल छलाह। चाँद शीघ्रे हुनकर भ्रम बुझि गेल। “अब्बा! जँ अहाँ ओकरा नहि मारि सकैत छी, तँ हम मारब।” इमाम हुनका रोकलनि। “हम मारब... हम मारब... हम कहलहुँ नहि कि हम ओकरा देब। तूँ ठाढ़ रहह,” कहैत ओ विष बालिमे मिला देलनि। “शादुल,” इमाम बजौलनि। शादुल जे तखन धरि एक कोनामे सुतल छल, आस्ते-आस्ते इमामक दिस चलय लागल। 'हम ओकरा पहिले क’र मे विष कोना दऽ सकैत छी? पहिने ओकरा किछु खाय दियौ।' ई सोचि, थोरेक अलग राखि ओ आधासँ बेसी बालि शादुलकेँ दऽ देलनि। शादुल लोभसँ सभटा चट कऽ गेल आ आब इमामक हाथमे बचल बाकी हिस्साक दिस ताकय लागल। माता-पुत्र दुनू ठाढ़ भऽ ई दृश्य देखि रहल छलाह। इमाम एक हाथमे विष आ दोसर हाथमे बचल मकइक बालिक दिस बेस टकटकी लगा कऽ देखलनि। ओ बेरा-बेरी शादुल आ चाँद दिस देखलनि। हुनकर आँखि नोरसँ डबडबाय गेलनि। जहिना नोर खसल, ओ बालिमे साइनाइड मिला देलनि। कोनो कोमल नस सिहरि उठल? बीबम्मा दोसर दिस देखय लगलीह। मद्धिम चाँदनीक बादो इमाम देखलनि जे हुनकर आँखि नोरसँ झलफल भऽ गेल छलनि, मुदा चाँदक नजरि पूर्णतः अपन पिता पर टिकल छल, ई जाँचय लेल जे ओ साइनाइड मिला रहल छथि वा नहि। “शादुलकेँ जतेक देबैन, ओतेक ओ खा जायत। हम सुनने छी जे ई कड़वा नहि होइत छैक वरन् खायमे नीक लगैत छैक। पूरा मात्रा मिला दियौ, नहि तँ ओ नहि मरत!” चाँद हुनका उकसाओलक। जेना चाँदकेँ ई विश्वास दियाबय लेल जे ओ हुनकर मंशा बुझि गेलाह अछि, इमाम एक लाठीसँ सभटा हिला कऽ मिला देलनि। आब अन्ततः चाँदक मनकेँ शान्ति भेटलैक। इमाम ओकर ठोढ़ पर एकटा मन्द मुसकान देखलनि। “बेटा... चाँद!” “अब्बा... बाजू! कहू!” “हम अहाँ जकाँ सहजहि ओकरा नहि बिसरि सकैत छी। एकर अर्थ ई नहि जे ओ हमरा अहाँसँ बेसी प्रिय अछि। मुदा आखिर ओ एकटा बेजुबान जानवर थिक, नहि की? ओ पछिला बीस बर्खसँ हमर परिवारक भरण-पोषण करैत हमरा खियबैत आयल अछि। ई गप्प अलग रहितैक जँ ओ कोनो बीमारी वा रोगसँ मरि जाइत। हम एक बेर ओकरा लेल कनितहुँ आ बिसरि जइतहुँ। ओतेक दु:ख सेहो नहि होइत। मुदा आब हम स्वयं ओकरा मारि रहल छी, नहि की?” हुनकर गप्प समाप्त होयबासँ पहिने चाँद बीचहिमे टोकलिक, “अन्तमे अहाँ की कहय चाहैत छी? की अहाँ ओकरा ई विष खिआयब, वा चाहैत छी जे हम खियाबी? पहिने ओ स्पष्ट करू!” शादुल पिता-पुत्रक बहस सुनलक। ओ चाँदकेँ अपन पिता पर आवाज उठबैत देखलक। ओकर आँखि लाल होमय लागल आ ओ गुरड़ल। “ओकरा विष दैत काल हम ओकरा मृत्युमे पीड़ा सहैत नहि देखि सकैत छी... हम जा कऽ ओकरा जंगलमे छोड़ि अबैत छियै! ओहिना ओ जतेक काल पीड़ा सहि कऽ मरय।” चाँद खूब क्रोधित भऽ गेल। “नखरा नहि करू... अहाँ मामिला एतेक दूर आनलहुँ टालि-टालि कऽ- आइ एतय, काल्हि ओतय! आब फेर सँ अहाँ कहैत छी जे जंगल लय जाएब। वापस आबि कऽ अहाँ एकटा नव कहानी सुना देब! जँ अहाँ एहन कनी आर कएलहुँ... तँ हम ई विष स्वयं पी लेब। कतौ जएबाक प्रश्न नहि उठैत छैक, एखने... ओकरा हमर आँखिक सोझाँ एतहि पड़सू!” शादुल उत्सुकता सँ इमामक हाथमे बचल बालिक दिस देखैत छल आ क्रोध सँ चाँदक दिस। इमामक दु:ख आब क्रोधमे बदलि गेल। “अरे... बताह... कल्पना करह जँ हम ओकरा एतहि विष देलियैक... तँ की ओ पीड़ामे मरैत काल चिकड़त नहि? की ओ तड़पि कऽ छटपटायत नहि? कल्पना करह जँ गामक लोक ओकर चीत्कार सुनि लेतैक। की ओ सभ ओकरा बारेमे जानि नहि जयतह? हम मात्र तोरा लेल सोचि रहल छियौ... जँ जंगल रहत, तँ हमरा कनीको डर नहि रहत, ओकरा पीड़ामे सङ्घर्ष करैत देखय लेल लगपास कियो नहि होयत।” चाँद सोचमे पड़ि गेल। बीबम्मा की सोचलखिन, मुदा ओ इमामक समर्थन कएलखिन। “चाँद... अब्बाकेँ छोड़ि दियौ... हुनका भालुकेँ जंगल लय जाए दियौ... ओ ओतहि मरि जायत।” ई शब्द बजैत काल नोर हुनकर कण्ठमे फँसि गेलनि। “ठीक अछि तखन... मुदा तखन धरि प्रतीक्षा करू जखन धरि ओ मरि नहि जाय! जखन ओ मरि जाय, तखने वापस आऊ! नहि तँ हम अहाँकेँ देखय लेल जीवित नहि रहब। ई हमर अन्तिम शब्द थिक!” चाँद हुनका चेतावनी देलक। अपन नोर पोंछैत इमाम हुनका विश्वास दियओलनि, “हम बेसी समय नहि लेब, आधा घण्टामे वापस आबि जाएब। विष बेस शक्तिशाली छैक। ई तुरत्ते काज करत, निश्चित!” एतेक कहि ओ आब प्रस्थान कएलनि। एक हाथमे मकइक बालि आ दोसर हाथमे शादुलक रस्सा! इमाम आगू आ शादुल पाछू- दुनू आब जंगलक दिस जा रहल छलाह। कहल गेल आधा घण्टा, एक घण्टामे बदलि गेल। एकटा नव दिन शुरू भऽ गेल। दिन ढलि कऽ राति भऽ गेल। तखनो इमाम वापस नहि अएलाह। शब्दावली उप्पिडी: जेकरा 'उप्पुडु पिण्डी' वा 'उप्पिट्टु' सेहो कहल जाइत अछि। ई एकटा मसालेदार व्यञ्जन थिक जे टूटल चाउर वा सूजी आ दालि सँ बनाओल जाइत अछि, सामान्यतः व्रत कऽ दिनमे लेल जाइत अछि। लुङ्गी: एकटा नाम वस्त्र जे डाँर कऽ चारू कात लपेटल जाइत अछि, सामान्यतः पुरुष सभ पहिरैत छथि। पक्कीर: 'फकीर' वा एकटा साधु कऽ अपभ्रंश रूप। सुस्त भालु (Sloth Bear): ई 'लैबिएट भालु' (Melursus ursinus) थिक जे दक्षिण एशियाई देश सभ जेना भारतमे आम अछि। ई नाम सम्भवतः लोक सभ द्वारा देल गेल किएकि लोक ओकरा अक्सर गाछ सभ पर 'स्लॉथ' जकाँ उल्टा लटकल देखैत छलाह आ ओकर झुकल मूड़ी कऽ संगे मन्द गतिक कारणेँ। भालु, जे सदी सँ लोकप्रिय मनोरंजनमे प्रयुक्त होइत आएल अछि, ओ 'सुस्त भालु' छल। ओ सभ प्रायः नाचैत भालु कऽ रूपमे प्रयोग कएल जाइत छलाह, जे अपन पातर शरीर, हाँसूक आकारक नह आ नाम -झबरा कोट सँ चिन्हल जाइत छल। जाजी: जायफल। ई 'मिरिस्टिका फ्रैग्रेन्स' जातिक एकटा सदाबहार सुगन्धित गाछ थिक। पारम्परिक चिकित्सा पद्धतिमे जायफल आ एकर तेलक उपयोग स्नायु (तंत्रिका) आ पाचन तन्त्र सँ सम्बन्धित विकार सभक लेल कएल जाइत अछि। बीबम्मा शादुलक इलाज लेल एहि 'जाजी' कऽ उपयोग कएने छलीह। शनि: कहल जाइत अछि जे ओ यमक भाय छथि (मृत्यु कऽ देवता)। ज्योतिषीय चक्रमे हुनकर उपस्थिति अनिष्ट कऽ सङ्केत मानल जाइत अछि, किएकि कहल जाइत अछि जे शनिक जन्मक समय, सूर्य, ग्रहणमे चलि गेल छलाह। तूँ गुढ़ -पिटल पाथर जकाँ निश्चल बैसल छह: एकटा बेस लोकप्रिय तेलुगु मुहावरा। जेना एकटा पाथर सँ गुड़ पर प्रहार कएला सँ मन्द आवाज होइत अछि आ गुड़ ओहि पाथरमे चिपकि जाइत अछि। ओही पाथर सँ जखन कोनो आन वस्तु कूटल जाइत अछि तँ कोनो आवाज नहि होइत अछि। एहिना, एकटा मूर्ख आ सुस्त व्यक्तिक तुलना 'गुड़ -पिटल पाथर' सँ करब सामान्य अछि। वात: आयुर्वेदक तीन दोषमे सँ एक। अधिकांश स्नायु सम्बन्धी विकार 'वात' असन्तुलनक कारणेँ मानल जाइत अछि। एहि उपन्यासक घटनाक्रम आन्ध्र प्रदेशक ग्रामीण जिला सभमे स्थित अछि, एहि लेल पात्र अक्सर आयुर्वेद वा जनजातीय चिकित्साक सन्दर्भ दैत छथि। कठेरा: एकटा काँटबला झाँखुड़ जे वन क्षेत्रमे बहुत आम अछि, जकर काँट भीतर दिस मुड़ल रहैत अछि। मानल जाइत अछि जे भालु अपन झबरा रोइयाँ एहि काँटमे फँसबाक डर सँ एहि झाँखुड़ सँ डराइत अछि। मङ्गा: लोकप्रिय रूप सँ 'एमेटिक नट' कऽ रूपमे जानल जाइत अछि, जे खयला पर नशा उत्पन्न करैत अछि। जनजातीय समुदाय माछकेँ मूर्छित करबाक लेल पोखरि सभमे पिसल 'मङ्गा' कऽ बीया प्रयोग करैत छथि ताकि माछ सतह पर आबय आ सहजहि पकड़ल जा सकय। इप्पा: महुआ कऽ फूल जे ताड़ी बनाबय कऽ काजमे अबैत अछि। एकर पंखुड़ी भालु सभकेँ बेस प्रिय होइत छैक। भालुक ध्वनि: भालु सभक स्वर सीमा बेस विस्तृत होइत अछि आ ओ विभिन्न स्थितिमे अलग -अलग ध्वनि निकालैत छथि। १६ विभिन्न स्थितिमे २५ सँ बेसी ध्वनिक दस्तावेजीकरण कएल गेल अछि। जेना: बाघक सोझाँ भेला पर बेस जोर सँ चीत्कार; दिबार चूसबा लेल थूथुन सँ धूल उड़यबाक लेल 'हूवर, हफ एण्ड पफ' कऽ आवाज; आ एकटा 'सकिंग' ध्वनि जे कोसौ दूर धरि सुनाइ दैत अछि। क्रोधित भेला पर ओ दाँत किटकिटाबैत छथि, गुर्राइत छथि आ 'वूफ' करैत छथि। पीड़ामे चिकरब, डरे 'हफ' करब वा कराहब, आ बच्चा लेल 'कू' करब वा गुनगुनायब हुनकर स्वभाव थिक। सिद्दोगम: आन्ध्र प्रदेशक तेलंगाना जिला सभमे 'गौड़' समुदाय द्वारा देवी 'एल्लम्मा' कऽ पूजामे मनाओल जाए वला एकटा पाबनि। छूबू तँ मरि जायत तेहन लड़की, मुदा चूमब तँ जिबैत रहि सकैत अछि?: तेलंगाना बोलीक तेलुगुमे एकटा प्रसिद्ध कहबी। बतुकम्मा: तेलंगानाक एकटा लोकप्रिय वसन्त त्योहार थिक जे सितम्बर/अक्टूबरक मासमे पड़ैत अछि। बतुकम्मा फूलक ढेरी होइत अछि, जेकरा महिला सभ देवी गौरीक रूपमे पूजैत छथि। महिला सभ अपन -अपन बतुकम्मा लय कऽ अपन मोहल्लामे जमा होइत छथि, ओकरा बीचमे राखि कऽ चारू कात लोकगीत गाबैत नाचैत छथि। बादमे बतुकम्माकेँ पासक कोनो पोखरि वा तालमे प्रवाहित कऽ देल जाइत अछि। ईथा आ थाटी: ताड़ी एहि गाछ सभ सँ एकत्र कएल जाइत अछि। ई एकटा मादक पेय थिक जे भारतक विभिन्न भागमे 'कल्लू' कऽ रूपमे जानल जाइत अछि आ विभिन्न प्रकारक ताड़क गाछक रस सँ बनाओल जाइत अछि। दू मुख्य प्रकार अछि: 'थाटी कल्लू' (ताड़क गाछ सँ) आ 'ईथा कल्लू' (खजूरक गाछ सँ)। पहिल बेसी शक्तिशाली आ नशीला होइत अछि, जखनकि दोसर बेसी मीठ आ कम नशीला होइत अछि। पवाला आ अठन्ना: चारि आना आ आधा टाका (आठ आना) कऽ सिक्का, जे क्रमशः पच्चीस आ पचास पैसाक बराबर होइत अछि। पञ्चप्राण: पाँच मुख्य वायु वा प्राणक रूपमे जानल जाइत अछि: प्राण, अपान, समान, उदान आ व्यान। जीवन लेल आवश्यक ई प्राण शरीरक विशिष्ट क्षेत्र सभकेँ नियन्त्रित करैत अछि। पञ्चप्राणक विलय शरीरक पाँच छिद्रक माध्यम सँ जीवनक साँसक विलयक समान मानल जाइत अछि। चाँदमे जे क्रोध तरबा सँ कपार धरि धुआँ जकाँ उठि रहल छल: एक बेर फेर, ई एकटा बेस लोकप्रिय तेलुगु अभिव्यक्ति थिक जतय क्रोधक तुलना पएरक नीचाँ सँ ऊपर उठैत धुआँ सँ कएल जाइत अछि, जे प्रचण्ड क्रोधक भावकेँ देखबैत अछि। डोरा: कोनो मुखिया, स्वामी, मालिक, शासक वा अधिकारी लेल एकटा सम्मानजनक सम्बोधन। उप्पी: वारङ्गल आ सिरसिल्लामे व्यापक रूप सँ भेटय वला एकटा झाँखुड़। एकर फल खायल जा सकैत अछि, मुदा एकर छालक उपयोग जनजातीय चिकित्सा पद्धतिमे कएल जाइत अछि। ई अपच लेल एकटा शक्तिशाली औखध आ 'जलोदर' लेल एकटा उत्तेजक थिक। ब्रह्मदण्डी: मस्तिष्कक कतेको रोग, जोड़क दर्द, यकृत (लीवर) कऽ कार्यकेँ उत्तेजित करबा लेल आ एकटा कामोत्तेजकक रूपमे कतेको चिकित्सीय स्थिति सभक उपचार लेल एकर प्रयोग कएल जाइत अछि। जड़िक अर्क दुर्बलता, नपुंसकता आ उन्मादक इलाज लेल देल जाइत अछि, आ एकर काढ़ा अपच आ जऽर (जड़) मे देल जाइत अछि। विषमुष्टि: 'नक्स वोमिका' वा विषबीज। ई एकटा मध्यम आकारक गाछ होइत अछि जकर तना मोट आ पातर रहैत अछि आ पात अण्डाकार होइत छैक। एकर सेवन सँ शरीरमे प्रचण्ड ऐंठन होइत अछि। इष्टिकान्त: एकटा लत (बेल) जेकरा 'ड्वार्फ मॉर्निंग ग्लोरी', 'हरिक्रान्त', 'विष्णुक्रान्ता' वा 'श्यामक्रान्ता' सेहो कहल जाइत अछि। ई एकटा छोट बारहमासी जड़ी -बूटी थिक। ई गाछ दम्मा (अस्थमा) शान्त करबा, बाल झड़ब आ उज्जर होयब रोकबा, आ सामान्य दुर्बलता एवं मनोभ्रंश (Dementia) ठीक करबा लेल जानल जाइत अछि। भागोथम: श्रीमद्भागवतम, हिन्दू पुराण सभमे सँ एक। ई सन्दर्भ कोनो नमगर आ जटिल कथाक लेल व्यङ्ग्यक रूपमे कएल गेल अछि। पल्लेबाटा: आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा २००८ मे 'राजीव पल्लेबाटा' कऽ रूपमे शुरू कएल गेल एकटा योजना। ई लोक सभकेँ अपन समस्या सभ सोझे अपन निर्वाचित प्रतिनिधिक सोझाँ राखबाक अवसर प्रदान करैत छल। थुमु, कुंचा, अड्डा: आन्ध्र प्रदेशक तेलंगाना क्षेत्रमे पारम्परिक ओजन आ मापक सन्दर्भ दैत अछि। २ सोला = १ थव्वा २ थव्वा = १ माना ४ थव्वा = १ अड्डा ८ थव्वा = १ कुंचा १६ थव्वा = १ बुद्दी ४ बुद्दी = १ थुमु ४० बुद्दी = १ पंडुमु ८० बुद्दी = १ पुट्टी १ सेर = ४ पाव (चौथाइ) गुंटा: भूमिक एकटा वर्ग माप थिक, ११ × ११ = १२१ गज। जखन एकटा बुद्दी धान लेल पात तोड़य गेलियै, एकटा अड्डा धान बछड़ा खाय गेल: तेलंगाना बोलीक तेलुगुमे एकटा लोकप्रिय कहबी अछि। मुख्यधारा तेलुगुमे एकर अर्थ अछि: 'जखन एकटा थुमु धान फटकि रहल छी, तखन मूस सभ पाँच थुमु धान खाय गेल।' डाकिनी, शाकिनी आ कुंजिनी: संस्कृतमे तन्त्रक अधीन ई सभ देवी थिकीह। डाकिनी वा 'चुड़ैलि' स्त्री रूपमे सामान्यतः अस्थिर वा क्रोधी स्वभावक होइत छथि। एकर नकारात्मक सम्बन्ध अछि। डाकिनी, शाकिनी आ कुंजिनी शब्द एक -दोसराक बदला प्रयोग कएल जाइत अछि। हनुमानक डाकिनी आ दोसर पर नियन्त्रण होयबाक गप्प कहल जाइत अछि। शाकिनी ज्ञान वा शक्तिक प्रतिनिधित्व करैत छथि। मानल जाइत अछि जे हुनकर आत्मा सभ बच्चा सभमे डर आ जऽर (जड़) पैदा करैत छनि। भालुक रोइयाँ सँ बनल ताबीज पहिरबा सँ ओकरा सँ होय वला कोनो बुराइ दूर होयबाक विश्वास कएल जाइत अछि। एकटा पद पर आसीन मानुस हमर हिचकीक बारेमे कोना चिन्तित होइत अछि?: तेलंगाना बोलीक तेलुगुमे एकटा कहबी थिक। मुख्यधारा तेलुगुमे एकर अर्थ अछि: 'जे पत्नी अपन जलखइ खा चुकल छथि, ओ अपन पतिक भूखक बारेमे नहि सोचैत छथि।' इन्दिराम्मा योजना: आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा २००६ मे शुरू कएल गेल एकटा प्रमुख आवास कार्यक्रम, जाहिमे ५० लाख घर बनायबाक लक्ष्य छल। पाथर सँ घाम बहि सकैत छैक मुदा पुलिस वला दया सँ नहि पिघलि सकैत अछि: तेलंगाना बोलीक तेलुगुमे एकटा कहबी। एकर अर्थ अछि जे पाथर सँ खून नहि निकालल जा सकैत अछि। एकटा बड़द बंजर भूमिमे भटकि जाय पर जखन धरि ओ ठामकेँ गन्दा नहि कऽ दय, ता धरि नहि छोड़त, जे ओ कऽ सकैत छैक?: तेलंगाना बोलीक तेलुगुमे एकटा कहबी। एकर अर्थ थिक जे 'बाघ अपन दाग नहि बदलि सकैत अछि।' एकटा कोमल फलकेँ आश्रय दैत पातक छाया: एकटा तेलुगु कहबीक सोझ अनुवाद। एकटा आँखि खोयबाक बादो अपन अन्त सँ बचि निकलल: तेलुगुमे एकटा लोकप्रिय कहबीक सोझ अनुवाद। कार्तिक: हिन्दू चन्द्र क्यालेण्डरक अनुसार, ई बर्खक आठम मास थिक जे अक्टुबर-नोभेम्बरमे पड़ैत अछि। ई चारि पवित्र मास सभमे सँ एक मानल जाइत अछि। सुस्त भालु (Sloth Bears) एकर सभक एकटा विशेषता अछि जे जखन ओकरा बेशी दूर धरि लय जाएल जाइत छैक, तखन पहिने देखल गेल स्थान सभ सँ भिन्न भू -भागसँ सेहो अपन घर वापस आबय कऽ रस्ता खोजबाक असाधारण प्रवृत्ति ओकरामे होइत छैक। ऐ प्रवृत्तिक कारण ओकर सुँघबाक असाधारण क्षमता भऽ सकैत छैक। तेहने, ओ सभ गाछ सभ पर निशान बनबैत छथि जतय ओ अपन पाछाँ गन्ध छोड़ैत छथि ताकि दोसर भालु सभक संगे सञ्चार कएल जा सकय। जेना कियो अपन आंगुरसँ अपनहि आँखि फोड़ि लैत अछि: तेलुगुमे एकटा अक्सर उद्धृत कएल जाए वला कहबी, जकर अर्थ अछि अपनाकेँ नुकसान पहुँचाएब। 'आँखि फोड़ि लेब' वाक्यांशकेँ 'आँखिमे चोट पहुँचाएब' वा 'दु:ख पहुँचाएब' कऽ रूपमे सेहो पढ़ल जा सकैत अछि। सियार, उँटक ठोढ़क लालसामे: तेलुगुमे एकटा कहबी। मुख्यधारा तेलुगुमे एकर निकट एकटा दोसर कहबी अछि: 'पहाड़ दूर सँ चिक्कन लगैत छैक, मुदा पास गेला पर ऊबड़ -खाबड़।' जँ हम ओकर पाछाँ पड़ब जे हमरा पास नहि अछि, तँ हम ओहो खो देब जे हमरा पास अछि: तेलुगुमे एकटा लोकप्रिय कहबी जकर मैथिलीमे अर्थ भेल 'लोभे पाप, पापे मृत्यु' वा 'आधा तजि जे पूरा धावे, आधा मिले न पूरा पावे।' परिशिष्ट जे घुमन्तु समुदाय पारम्परिक रूप सँ मनोरंजन लेल सुस्त भालु सभकेँ राखैत छल, ओ कलन्दर समुदाय छल। कलन्दर वा क़लन्दर बानर आ भालु नचाबय वला प्रदर्शक होइत छलाह जे जीविका लेल गाम आ नग्रमे घूमैत छलाह, एहि कारणेँ ओकरा 'पर्यटक जनजाति' (Nomadic Tribe) कहल जाइत छल। ई समुदाय भारतीय उपमहाद्वीप कऽ जातीय आ सांस्कृतिक हिस्सा अछि। ऐतिहासिक आ साहित्यिक सन्दर्भमे एकर बहुत उल्लेख भेटैत अछि। कलन्दर सभ भालु आ बानर नचाबय कऽ अतिरिक्त आन कतेको व्यवसायमे सेहो लागल छलाह, जेना- उँटक प्रजनन आ चालन, महींस पालन, खेती, पथिया बुनाइ, नून सहित विभिन्न वस्तु कऽ व्यापार, आ सभ सँ महत्वपूर्ण- कुदृष्टि सँ बचेबाक लेल छल्ला, मन्त्र आ ताबीज बना कऽ बेचब। ओना प्रवास ओकर जीवनक एकटा विशेषता छल, तखनो ओ सभ गामक जीवन सँ निकटता सँ परिचित आ जुड़ल छलाह। किछु लोक लगातार चलैत रहैत छलाह (जकरा पर्यटक कहल गेल), मुदा किछु आन थोरेक समय लेल प्रवास करैत छलाह आ गामक बाहरी इलाकामे अस्थायी घर (तम्बू) बना कऽ रहैत छलाह। ई विशेषता ओहि लोकमे देखल जा सकैत अछि जकर प्रवास मौसमी कृषि गतिविधि सभ जेना- फसलक कटनी आ कुटनी -फटनी कऽ समय सँ मेल खाइत छल। कलन्दर सभक लेल फसलक मौसममे खेतमे मजूरी करब वा अपन भालु नचा कऽ धनी किसान सँ पुरस्कार पायब सामान्य छल। मुदा फसलक मौसम समाप्त भेला कऽ बाद ओ सभ पुनः जीविकाक खोजमे दोसर ठाम प्रस्थान कऽ जाइत छलाह। ई घुमन्तु समुदाय कोनो एक विशिष्ट जाति वा जनजाति सँ सम्बन्धित नहि अछि, किएकि ओ सभ छितरल खानाबदोश जनजाति थिक। एहि कारणेँ ओ सभ कोनो निश्चित जाति श्रेणीक अन्तर्गत नहि अबैत छथि आ कखनो -कखनो सरकारी लाभ लेल ओकरा गलत तरीका सँ सूचीबद्ध कएल जाइत अछि। ई एकटा पैघ समस्या अछि, कखनो ओकरा सुविधाक अनुसार ओबीसी (OBC) तँ कखनो एसटी (ST) श्रेणीमे राखि देल जाइत अछि। परिणामस्वरूप, ओ सभ जमीन, रोजगार आ भोजनक अधिकार सँ वञ्चित रहि जाइत छथि। सामाजिक स्थान आ व्यवस्थित समुदायक विपरीत, पहिचानक ई अभाव ओकरा सामाजिक व्यवस्थाक सभ सँ निचुलका पायदान पर धकेलि कऽ आधुनिक समाजमे सीमान्तकृत (marginalized) कऽ देलक अछि। ओना कलन्दर सभ आमतौर पर हिन्दू आ मुस्लिम दुनू समुदायमे भेटैत छथि, मुदा ओ सभ समान रूप सँ भेदभाव, अलगाव आ शोषणक शिकार होइत छथि। भारतीय समाजक हिस्सा भेला कऽ बादो ओ सभ समाजक सीमान्त (edges) पर बाहरी लोक जकाँ रहैत छथि। जखन ई लोक गाम जाइत छलाह, तँ ओ जाति -पातिक परवाह कएने बिना अपन सेवा दैत छलाह, मुदा कखनो-कखनो ओकरा उत्पीड़नक शिकार होयब आ 'चोर' मानि लेबाक स्थिति सेहो अबैत छल। ई सामाजिक -आर्थिक आ राजनीतिक चिन्ता सभ पाठककेँ एहि उपन्यास "फ्रेंड्स फॉरेवर" (Friends Forever) कऽ नायक इमाम आ ओकर कलन्दर जीवनकेँ नीक जकाँ बुझबामे सहायता करैत अछि। जेना इमाम अपन जीविकाक खोजमे प्रवास करैत छथि, ई घुमन्तु परिवार सभ अस्थायी तम्बू वा एकचारीमे एकल परिवारक रूपमे रहैत छथि। जङ्गलक छायादार स्थानमे खुल्ला आकाशक नीचाँ रहब, पाछाँ सँ पशु -पक्षीक आवाज सुनब इमाम लेल बेस सुखद छल। वास्तवमे, ओ अपन भालुक सङ्गतिमे जङ्गलमे ओहि शान्तिक अनुभव करैत छथि, जे मानुसक समाजमे नहि भेटैत छनि, जतय डेगे-डेग पर सङ्घर्षक भट्ठी जरि रहल छैक। समयक संग, राज्यक नीतिक सम्बन्धमे आर्थिक आ राजनीतिक स्थितिक कारणेँ, घुमन्तु जनजाति सभक संसाधनशीलता आ नव परिस्थितिक अनुकूल बनबाक क्षमता दबावमे आबि गेल, किएकि हुनकर पारम्परिक व्यवसाय आब अव्यावहारिक साबित भऽ रहल छल। एहन परिवर्तन सभ दीर्घकालिक आर्थिक, पारिस्थितिकीय आ सामाजिक बदलाव कऽ लेल प्रेरित कएलक। पशु अधिकारक संरक्षण आ घुमन्तु समुदायक पुनर्वासक बीचक चिन्तामे फँसल ई जातीय स्वदेशी समुदाय बेस नुकसान उठौलक। "भालु नृत्यक विरोध सँ पहिने हुनकर अत्यन्त खराब जीवन स्तर वास्तवमे भारतक सड़क सभ सँ एहि पेशाकेँ निपत्ता कऽ देलक।" ई नकारल नहि जा सकैत अछि जे ओकरा बीच किछु लोक, जेना "फ्रेंड्स फॉरेवर" कऽ मुख्य पात्र इमाम, अपन प्राकृतिक पर्यावरण आ अपन जानवरक संग घनिष्ठ साथीक रूपमे पूर्ण सामञ्जस्यमे रहैत छलाह। ओ सभ आब नव रस्ता खोजय लेल मजबूर छथि, किएकि कतेको पारम्परिक व्यवसाय-जेना सपेरा, भालु नचाबय वला, बानर प्रशिक्षक आदि-अवैध घोषित कऽ देल गेल अछि। ई मुख्यधाराक जीवनमे घुलय -मिलय कऽ प्रक्रिया एहि स्वदेशी समुदाय लेल नव समस्या सभ पैदा करय लागल अछि। दोसर दिस, पथिया बुनाइ जेहन पारम्परिक व्यवसाय लेल प्रयुक्त कच्चा माल (जेना नरकट आ बेंत) आब दुर्लभ भऽ गेल अछि। बढ़ैत औद्योगीकरण कतेको लोककेँ विस्थापित कऽ देलक अछि। कलन्दर समुदाय, जे किछु समय पहिने धरि शिकार, प्रशिक्षण वा सर्कस आ चिड़ियाघरकेँ जानवर बेचि कऽ जीविका चलबैत छलाह, आब एकटा बदलल समाजमे अपन पहिचान, स्वतन्त्रता आ विशिष्ट संस्कृतिक संरक्षणक प्रश्नक सामना कऽ रहल छथि। भारत सरकारक पुनर्वासक प्रयास बेसी काल सफल रहल अछि। कतेको प्रशिक्षक आब प्लास्टिकक वस्तु बनायब, पपीयर -माचेक मूर्ति बेचब वा साइकिल मरम्मत जेहन वैकल्पिक व्यवसाय अपना लेने छथि। किछु लोककेँ शिक्षा आ नौकरीक माध्यम सँ सेहो पुनर्वासित कएल गेल अछि ताकि भालु पर हुनकर निर्भरता समाप्त भऽ सकय। तखनो, ओ सभ आबो भेदभाव आ अधिकार सँ वञ्चित छथि आ एकटा अल्पसंख्यक समूहक रूपमे ओ सभ हमरा सभक बीच सँ पूर्ण विलुप्तिक खतराक सामना कऽ रहल छथि। उपरोक्त जानकारी निम्नलिखित ऑनलाइन स्रोत सभ सँ जमा कएल गेल छल: १. राधाकृष्ण, मीना। "सिविल सोसाइटीज़ अनसिविल ऐक्ट्स: डांसिंग बियर्स एंड स्टार्विंग कलंदर", इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली @२००७, एब्स्ट्रैक्ट, अक्टूबर २०, २००७, पृ. ४२२२ (http://www.jstor.org/pss/40276571), २५ फरवरी २०१२। २. सईद, विकार अहमद। "टेन्युअस लिव्स", फ्रंटलाइन, खंड २९ - अंक ०४, २५ फरवरी -०९ मार्च २०१२ (http://www.frontlineonnet.com/fl2904/stories/२०१२०३०९२९०४०९५००.एचटीएम), २५ फरवरी २०१२। ३. ब्राउर बारबरा आ जॉन्सटन बारबरा रोज़, संपा. डिसअपीयरिंग पीपल्स? इंडिजिनस ग्रुप्स एंड एथनिक माइनॉरिटीज एंड सेंट्रल एशिया, "पेरिपेटेटिक पीपल्स एंड लाइफस्टाइल्स इन साउथ एशिया" लेफ्ट कोस्ट प्रेस, इंक. कैलिफोर्निया, २० फरवरी २०१२। सदाक लेल मित्र (तेलुगु मूल उपन्यास "जिगरी" केर मैथिली अनुवाद) लेखक: पेद्दिंटि अशोक कुमार इमामक छातीमे अनेक भावनाक ढेर लागि गेल छल। बीबम्मा आब किएक एतेक बदलि गेलीह जे शादुलक बिना रहब हुनका लेल असह्य भऽ गेल? चाँद लेल आब शादुल सँ बेसी महत्वपूर्ण आन वस्तु सभ किएक भऽ गेल? चाँद शादुलकेँ छोड़य लेल किएक तैयार भऽ रहल छथि? ओकरा सभक बीच ई ईर्ष्याक आगि के लगओलक? हुनकर सन्तुष्ट जीवन दुनियाक सोझाँ किएक उजागर भऽ गेल? के हुनकर दूध जकाँ शुद्ध जीवनमे विष घोरलक? की एहि भयानक त्रासदीकेँ टालल जा सकैत छल? "सदाक लेल मित्र", पेद्दिंटि अशोक कुमारक लोकप्रिय तेलुगु उपन्यास "जिगरी" केर अनुवाद थिक। ई उपन्यास मनुष्यक स्वयंकेँ अमानवीय बनाबय वला क्षमता आ एकटा विलुप्त होइत जातीय समुदायक आजीविका पर मँड़राइत खतराक एकटा मार्मिक प्रतिबिम्ब थिक-सरकारक पुनर्वासक सभ श्रेष्ठ प्रयासक बादो। इमामक परिवारकेँ जीवित रहबा लेल अपन सीमा सभ पार करय पड़त आ एकटा राजनीतिक एवं सांस्कृतिक स्थान हासिल करय पड़त, नहि तँ भविष्यमे हमरा सभ लग एहि सीमान्त संस्कृतिक मात्र एकटा झलफल स्मृति शेष रहि जायत। एहि उपन्यासक अंग्रेजी आ मैथिली सहित आठ भाषा-हिन्दी, मराठी, पञ्जाबी, बङ्गाली, कन्नड़ आ गुजरातीमे अनुवाद भेल अछि। २ टा तेलुगु दलित लघु कथा [कोलकलुरी इनोच लिखित “कौआ” (तेलुगुमे काकी) आ विनोदिनी लिखित “कारी मसि” (ब्लैक इंक)]; मूल तेलुगु सँ अंग्रेजी अनुवाद: के. पुरुषोत्तम; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर।] मूल तेलुगु सँ अंग्रेजी अनुवाद: के. पुरुषोत्तम: के. पुरुषोत्तम काकतीय विश्वविद्यालय, वारंगलमे अंग्रेजी साहित्य पढ़बैत छथि। अध्यापन आ शोधक अलावे हुनकर रुचि तेलुगु साहित्यक अंग्रेजीमे अनुवाद करबामे अछि। ओ तेलुगु दलित उपन्यास 'कक्क' आ 'मल्लेमोग्गल गोदुदु' कऽ अनुवाद कएने छथि। १ कोलकलुरी इनोच मूल तेलगु: कोलकलुरी इनोच (ज. १९३९) कऽ जन्म गुंटूर जिलामे भेल छल। एकटा सर्जनात्मक लेखकक रूपमे प्रोफेसर इनोचक चारि टा कविता संग्रह, छह टा कथा संग्रह आ चौदह टा उपन्यास तथा नाटक प्रकाशित अछि। हुनकर लेखन पर काज कऽ कऽ पाँच गोटे पीएचडी आ आठ गोटे एम.फिल. कऽ उपाधि प्राप्त कऽ लेने छथि। ओ अपन लेखन लेल राज्य आ केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा राज्य सरकार सँ सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार प्राप्त कऽ लेने छथि। एकटा शिक्षाविद् कऽ रूपमे प्रोफेसर इनोच तेलुगु साहित्यिक आलोचना लिखबामे सक्रिय छथि आ पोट्टी श्रीरामुलु तेलुगु विश्वविद्यालय, हैदराबादक कुलपति (वाइस -चांसलर) कऽ रूपमे सेवा देने छथि। दलित विषयक अलावे ओ आन विषय सभ पर सेहो लिखैत छथि। कौआ [मूल तेलुगु काकी माने कौआ] एकचारीमे बुढ़िया, हुनकर बेटी आ नाती छल। एकचारीक छात आ लगपासक गाछ सभ पर बैसल कौआ सभ जोर-जोर सँ काँव-काँव कऽ रहल छल, जेना कियो डाँटि रहल हो। 'कौआ सभ तामसमे अछि,' अव्वा (दादी) कहलनि। हुनकर नाती एहि पर अचरजमे पड़ि गेल। 'एकर कुटुम कानि रहल अछि,' अव्वा कहलनि। जखन हुनकर नाती कनैत कौआ सभकेँ देखय लेल बाहर जाय कऽ प्रयत्न कएलक, तऽ अव्वा ओकरा रोकि देलनि। 'कौआ सभ लड़य लेल आयल अछि,' झाँपि -झाँपि कऽ देखैत ओ कहलनि। 'लगैत अछि कियो कौआकेँ मारि देने अछि। कौआ सभकेँ सन्देह अछि जे हमही ओकरा मारलहुँ। देखू ई मामिला की अछि,' एतेक कहि कऽ अव्वा बाहर एली। जखने ओ एकचारीक दुआरि सँ बाहर भेलीह, दुनू दिस सँ दू -चारि टा कौआ आबि कऽ हुनकर माथ पर एतेक जोर सँ ठोक मारलक जे मोटामोटी ओतऽ चाम उधेड़ि गेल। ओ एक क्षण सेहो बिना गमेने एकचारीमे ढुकि गेलीह। 'कौआ बहुत भयंकर होइत अछि,' अपन भुकुटल रोंइयाकेँ ठीक करैत ओ कहलनि। एकचारीक सोझाँ कौआक मूड़ी, गोड़, नह आ पाँखि सभ तोड़ि -मचोड़ि कऽ एक ठाम बान्हल गेल अछि। 'ई निश्चय ओकरे काज हएत,' अव्वा कहलनि। 'ककर?' नाती पुछलक। 'बण्डोडुक,' अव्वा घोषणा कएलनि। बण्डोडु मादिग (चर्मकार) जातिक एगारह उप -जातिमे सँ दशम उप-जाति सँ सम्बन्ध रखैत अछि, जे मात्र मादिग सभ सँ भीख मांगि कऽ जीवन बितावैत अछि। जेना कहबी अछि, जे हठी होइत अछि ओ राजा सँ सेहो शक्तिशाली होइत अछि! ओ मात्र राति मे भीख मांगैत अछि। ओ अपन संग ने तऽ कटोरा अनैत अछि, नहिये कपड़ा-लत्ता। ओ खाली हाथ अबैत अछि आ खाली हाथ चलि जाइत अछि। 'अम्मा, भोजन दिअ!' ओ एतबे कहैत अछि। ओकरा ओकर तरहत्थीमे कटोरा जकाँ आकार बना कऽ भोजन देबय पड़ैत छैक। ओ एहिना देल गेल भोजनक एकटा कण बिना खसेने खा लैत अछि। भोजन खतम कयला पर वा सन्तुष्ट भेला पर ओ कहैत अछि, 'अम्मा, पानि दिअ!' पानि पी कऽ ओ चलि जाइत अछि। बण्डोडु सभ राति एकटा विशेष परिवार सँ भोजन मांगय अबैत अछि। ओ एकचारीक सोझाँ धरती पर बैसि कऽ भोजनक प्रतीक्षा करैत अछि। जँ कहियो अनदेखी वा अनजानमे ओकरा भोजन नै देल गेल, तऽ बण्डोडु सँ पैघ झगड़ा होइत छल। ओ किछु नै कहैत छल; ओ मात्र कौआ सभकेँ उकसा दैत छल। कियो कौआ नै मारैत छल, ने ओकरा कियो खाइत छल। ई निअम मात्र बण्डोडु लेल सीमित नै अछि। कौआकेँ सभ कियो पकड़ि नै सकैत अछि। कौआ चतुर चिरै अछि। गुलेती देखि लेला पर कौआ ओतय नै ठहरत। मुदा बण्डोडु कौआ सभ पर गोली (मार्बल) सँ निशाना लगा कऽ आसानी सँ मारि सकैत अछि। ओ असगरे एहन कऽ सकैत अछि। गोलीकेँ अपन तर्जनी कऽ आगाँ राखि कऽ, आंगुरकेँ मोटामोटी टूटय बला कगार धरि पाछू घीच कऽ ओ गोली फेकैत अछि। तखन कौआ नीचाँ खसि पड़ैत अछि। ओहि दिन भोरमे ओ एकटा आलसी कौआकेँ निशाना बनौलक। पुआरक ढेरी लग ओकर पाँखि तोड़ि कऽ, मूड़ी, गोड़ आ नह सभकेँ एक ठाम बान्हि कऽ एकचारीक सोझाँ राखि देलक। एकर अर्थ ई छल जे एकचारीक लोक सभ पछिला राति ओकरा भोजन नै देने छलाह। जँ कम सँ कम आब ओकरा भोजन देल जायत, तऽ ओ खाय -पीय कऽ पाँखिक पुड़ियाकेँ दूर फेकि आयत। ओ कौआ सभ लेल काल अछि! वास्तवमे ओ ओकरा जकाँ देखाइत अछि। ओकर रोंइया काँटक झुण्ड जकाँ अछि। जँ कोनो कौआ ओकर माथ पर ठोक मारत, तऽ ओ ओहिमे उलझि जायत आ ओहि दिनक भोजन लेल पकड़ा जायत। बण्डोडुकेँ लगपास देखि लेला पर कौआ सभ मील दूर भागि जाइत अछि। ओ एकमात्र मनुष्य अछि जे कौआकेँ मारि -मारि कऽ भूजि कऽ खाइत अछि। कौआक कुटुम, चाहे कतेको पैघ संख्यामे किएक ने हो, बण्डोडुक सामना नै कऽ सकैत अछि। अव्वाक जमायकेँ काज लेल चेब्रोलु गेल एक सप्ताह सँ बेसी भऽ गेल अछि। ओ घुरती काल अनाज लऽ कऽ आयत। तखने भोजन वा 'गिड' (पानिमे भिजल भात) भेटत। काल्हि भोर सँ ओ किछु नै पकौने छलीह। पछिला राति चूल्हि नै जरल छल। बर्तन सभ खाली छल। हुनका लेल एहि सँ कोनो फरक नै पड़ैत छल जे ओ बण्डोडुक विनती सुनैत छथि वा नै। ओ किछु कऽ नै सकैत छलीह। मुदा बण्डोडु हुनका किएक माफ करत? जतेक कोलाहल करबाक छल कऽ कऽ ओ पुआरक ढेरी लग एकटा कौआ भूजि रहल अछि। कौआ सभ काँव -काँव करब बन्द नै कएलक। ओ बुझैत छल जे जतय पाँखि अछि, ओतय ओकर खुनीमा हएत। ओ लगपास डेरा जमेने छल, हमला करय लेल तैयार, जखने कियो एकचारी सँ बाहर निकलत। काँव -काँव सुनि कऽ आरो किछु कौआ सभ ओहिमे मिलि गेल। ओ बहुत शोर मचा रहल छल- घर, गाछ, देबाल (देवाल) आ बिजलीक तार सभ पर बैसि कऽ, जेना कोनो लाश पर पहरा दऽ रहल हो। नाती, माय आ अव्वा दुआरि बन्द कऽ कऽ एकचारीमे नुकायल रहल। जखन कौआ सभ खिड़कीक सलाख पर बैसि कऽ काँव-काँव करैत छल, तऽ ओ खिड़की सेहो बन्द कऽ लेलनि। अव्वा कोलाहल सँ डरायल नै छलीह; मुदा ओ भविष्यक अशुभ समय सँ डरायल छलीह। बण्डोडु कतौ कौआ मारि कऽ भूजि खा लेने हएत; मौस ने पचबाक कारण सँ छटपटा रहल हएत। जखन ओकरा भोजन नै देल जाइत छैक, तऽ ओहि दिन ओकरा सहन करब कठिन भऽ जाइत छैक। बण्डोडु जकाँ घृणित भिखारी दुनियामे कत्तौ नै देखल जा सकैत अछि। टोल कऽ मादिग सभ अपशकुन सँ घरक लोककेँ बचाबय लेल कौआ सभकेँ दूर खिहारलक। मुदा शीघ्रे कौआ सभ वापस आबि गेल आ काँव -काँव करैत रहल। कौआ सभकेँ हटाबय मे असमर्थ भऽ पड़ोसी लोक ओहि ठामकेँ छोड़ि देलनि; मुदा कौआ सभ नै छोड़लक। आरो बेसी कौआ ओहिमे मिलैत गेल। झुण्ड पैघ होइत गेल। कौआक झुण्डक शक्ति आ हमलाक सामना करब ओकरा सभ लेल कठिन भऽ गेल। कौआक कुटुम कऽ तुलनामे मादिग सभक ताकत काज नै कएलक। बण्डोडुकेँ भोजन देबय पड़त, तखनहि कौआ सभक झगड़ा खतम हएत। ओ तखन हुनका श्राप सँ मुक्त कऽ देत। ओ पाँखि हटा देत। कौआ सभ ओहि ठामकेँ छोड़ि देत। जँ बण्डोडुक बदला कियो आरो पाँखि हटा देत, तऽ कौआ सभ चलि तऽ सकैत छल, मुदा जे एहन करत ओ बिना खून बहेने वापस नै आयत। कौआ ओकर आँखि नोचि लेत। जँ खिसियायल कौआ सभ घरक लगपास नै आयत, तऽ पीढ़ीक अन्त धरि कोनो दोसर कौआ कहियो नै आयत। ओ कहियो लगपास नै बैसत। ई घरक लोक लेल अपमानक गप अछि जे कौआ सभ बैसय सँ मना कऽ देलक। जखन नाती कौआ सभकेँ भगाबय लेल पाथर फेंकय लेल बाहर जाय कऽ प्रयत्न कएलक, तऽ अव्वा ओकरा रोकि कऽ कहलनि, 'जँ अहाँ बाहर जायब, तऽ वापस नै आबि सकब।' नाती पाछू हटि गेल। कौआ सभक स्वर बिना रुकल जारी रहल। शोर कान फाड़य बला छल। आकाशमे सूरज ढलऽ लागल। बण्डोडु पुआरक ढेरी लग सँ उठल। ओ घर लग आयल, जकर दुआरि-खिड़की सब बन्द छल। जेना खुनीमाकेँ देखि लेलक हो, डरायल कौआ सभ काँव-काँव करब बन्द कऽ देलक; ओ सब चुपचाप नुका गेल, जेना मरल ढील-लीख कोनो शोर नै करैत अछि। कौआक मौस नै पचैत छैक, एहि लेल कियो एकरा नै खाइत अछि। कौआ, जे कौआक मौस खाय लेने छल, ओकरा तऽ छोड़ि देलक, आ निर्दोष अव्वा पर ठोक मारलक। ओ घरक लोक पर तामस देखबैत काँव -काँव कऽ रहल अछि। जकर कोनो अबाज नै छैक, ओकरा कौआ सेहो हल्लुक मानि लैत छैक। जखन बण्डोडु अपन तरहत्थी रगड़लक आ आंगुर नचौलक, तऽ सभ कौआ अपन ठाम पर घुरि गेल। जखन ओ कहलक, 'अम्मा, भोजन दिअ!' तऽ कौआ सभ वापस आबि गेल। एकचारीक तीनू लोक ओकरा भीख मांगैत सुनलनि; मुदा ओ ओकरा जवाब नै दऽ सकलनि, कारण हुनका लग देबा लेल कोनो भोजन नै छल। जखन बण्डोडु भीख मांगि रहल छल, तऽ कौआ सभ, जे कान फाड़य बला काँव -काँव कऽ रहल छल, चुप भऽ गेल, जेना ओकरा संग षड्यन्त्र कऽ लेने हो। चाहे डर सँ हो वा एहि कारण जे मादिग सभ ओकरा भोजन दऽ देताह तऽ ओ कौआ सभकेँ नै मारत, कौआ सभ ओकर समर्थनमे ओकरा संग एकजुटता देखबैत बुझाइत छल। अव्वा पर, जे ओकर दुश्मन नै छलीह, ठोक मारि कऽ कौआ सभ मोटामोटी एकचारीक लोक सँ ओकरा भोजन देबा लेल कहि रहल बुझाइत छल। की कौआ आ बण्डोडु दुश्मन छथि? वा ओ सब एक -दोसरक अपन छथि? की कौआ आ बण्डोडुक बीच कोनो सम्झौता अछि? 'ओ भोजन मांगलक अछि! ई होयब निश्चित अछि; जे किछु सन्देह कएल जा रहल अछि, से हएत,' अव्वा कनैत कहलनि। ओ ओकरा भोजन नै देलनि, आ ओ श्राप देबय लागत। बण्डोडु कौआक पाँखिक पुड़िया एकचारीक एकटा बाँस पर लटका देलक। ओ कौआक मौसक चबाएल खण्ड सभ बोकरि देलक। कौआक मौस सँ दुर्गन्ध अबैत अछि, सड़ल। नै पचल कौआक मौस आरो बेसी दुर्गन्धित होइत अछि। ई एहन सड़ल अछि जे नाक काटि सकैत अछि। कौआ सभ सेहो रद्द कएल गेल भोजनक आकांक्षा नै कएलक। की कौआ बोकरल गेल भोजन खेबाक प्रयत्न करैत छैक? कतेक अपमानजनक गप अछि! बण्डोडु ओहि ठामकेँ छोड़ि देलक। कौआ सभ सेहो साँझमे ओहि ठामकेँ छोड़ि देलक। बण्डोडु फेर कहियो ओहि घरमे भीख मांगय लेल नै आयत। जँ अगिला दिन कौआक झुण्ड वापस आबि जायत, तऽ बण्डोडुक बोकरायल भोजनक अवशेषक दुर्गन्ध रोकबा लेल माटि सँ नै तोपबाक चाही। ओकरा फेर घरमे पएर नै राखय देबाक चाही। कौआक पाँखि नै हटाबय कऽ चाही। कौआ सभ जे घर पर बैसैत छथि, ओहि घरकेँ दोसर दिन सेहो छोड़ि देबाक चाही; उपयोग नै करय कऽ चाही। घरमे कियो नै रहय कऽ चाही। जँ बोकरल भोजनक अवशेष माटि सँ तोपल जायत, पाँखि हटा देल जायत आ घर नै छोड़ल जायत, तऽ ई अपशकुन हएत। अन्यथा घरक कियो ने कियो मरि सकैत अछि। निर्धनता कऽ कारण भोजन नै देला पर की एतेक प्रतिशोध हेबाक चाही? जँ अगिला दिन कौआ सभ वापस नै अबितैक, तऽ ओ धरती नीपि-पोछि कऽ फर्श पर मुग्गु (अरिपन) बना सकैत छलीह; चूल्हि जरा कऽ भोजन पका सकैत छलीह। मुदा कौआ सभ ओहि घर पर फेर कहियो नै बैसत। ओ नै कहत, 'अम्मा, भोजन दिअ!' ई एकटा मुक्ति अछि। मुक्ति मात्र एकटा श्राप अछि। तखन सँ ई एकटा एहन घर हएत जतय कौआ नै बैसत। एकटा एहन घर जतय बण्डोडु भीख नै मांगत। ई अपमानक गप अछि। एकटा सामाजिक बहिष्कार! [२००८ मूल तेलुगु सँ के. पुरुषोत्तम द्वारा तेलुगुसँ अंग्रेजीमे अनूदित।] २. विनोदिनी मूल तेलुगु: विनोदिनी (ज. १९६९) कऽ जन्म तटीय आन्ध्रक गुंटूर जिलामे भेल छल। ओ आदिकवि नन्नय्या विश्वविद्यालयमे कार्यरत छथि। ओ मानैत छथि जे एकटा दलित ईसाईक रूपमे अपन अनुभव लिखला पर ओ अपनाकेँ लेखक हएब अनुभव करैत छथि। हुनकर कहानी "मारिया" बहुत लोकप्रिय अछि। कारी मसि (ब्लैक इंक) फ्लैट सभक तहखाना फूलक खिलल फुलवारी जकाँ छल। बच्चा सभक कोलाहल आ खेल-कूद सँ पूर्ण वातावरण गुंजायमान छल, जेना अनेक प्रकारक चिरै सभ एक संग चहचहाय रहल हो। बच्चा सभ जे छोट -छोट साइकिल चला रहल छल, ओ 'ड्रैगनफ्लाई' जकाँ बुझाइत छल, आ जे ओकरा पर सवार छल ओ टिकली जकाँ। भीड़ सँ साइकिल चलाबैत बच्चा सभ, अनचोक्के ब्रेक लगाबैत हँसी -ठट्ठा करैत छल। ओकर सभक मुँह फूल जकाँ खिलल छल। जखन केतलीमे चाह उबलि रहल छल, हम गैस मिझा देलहुँ। एक हाथमे चाहक कप आ दोसर हाथमे टीवी रिमोट लऽ कऽ हम देखलहुँ जे टीवी पर एकटा लोकप्रिय गीत चलि रहल अछि। हम 'कॉलिंग बेल' बजबाक बदला केबाड़ पर हाथक चोट सुनलहुँ। हम टीवीक अबाज बन्द कऽ केबाड़ खोललहुँ। ओतय हम एकटा बच्चीकेँ देखलहुँ जे अपन फ्रॉकमे टिकलीक पाँखि जकाँ बुझाइत छल। ओ आठ बर्खक हएत। ओकर आँखिमे उमंग भरल छल। जखन ओ अपन बुढ़िया आंगुर ठोढ़ पर रखैत छल, तऽ बुझाइत छल जेना फूल सभ पर पानि छीटि कऽ ताजगी अनैत हो। ओकरा भीतर आबय लेल इशारा कऽ कऽ हम फ्रिज दिस बढ़लहुँ। जखन ओ हमर पाछू -पाछू चलि रहल छल, ओकर पायल आस्ते-आस्ते छनकैत छल। "काकी, एक गिलास पानि पीबऽ लेल देबऽ?"– डलियाक एकटा फूलक मुँह सँ मुस्कान झरि पड़ल। ओकर आग्रहमे एकटा स्नेह छल। भले ओकरा पानि पिएबा लेल हमरा एक किलोमीटर खाली पएरे कंकड़-पाथर पर चलय पड़ितैक, हम बिना हिचकिचाए चलि जइतहुँ। ओ एक कऽ बाद एक दू गिलास पानि पी गेल। 'थैंक यू आण्टी; हम खेलाइत-खेलाइत एतय आबि गेलहुँ,' खाली गिलास टीपॉय (तिपाई) पर राखि कऽ ओ अपन पएर (जे परबाक बच्चा जकाँ छल) सैंडल मे धऽ पाँखि वला डॉल्फिन सन उछलैत-कूदैत नीचाँ तहखानामे उतरि गेलीह। हम ओ खाली गिलास उठा लेलहुँ आ टीवीक चैनल बदलि देलहुँ, जतय एकटा पुरान 'ब्लैक एण्ड ह्वाइट' गीत चलि रहल छल-जे बच्चा आ भगवानक निष्कपट सम्बन्धकेँ देखबैत अछि। हमर चाह ठंढा भऽ गेल छल। चाह गरमे पीबाक चाही, एहि लेल हम फेर सँ चाह बना लेलहुँ। जखन हम चाहक कप लऽ कऽ बैसय लेल तैयार भेलहुँ, फेर सँ केबाड़ पर हाथक चोट सुनलहुँ। फेर ओही चान जकाँ हँसि मुँह बला बच्ची ठाढ़ छल। ओ अपन कनी आंगुरकेँ आँखि लग राखि कऽ, शौच लेल बाथरूम प्रयोग करबाक अनुरोध कएलक। 'ओह, ई आब एहिना,' हमरा हँसी आबि गेल। हम ओकरा बाथरूमक रस्ता देखा देलहुँ। 'लगही मात्र शौचालयमे करय कऽ चाही, नहाय बला ठाममे नै; हमर माय एहिना कहने छथि। हम मात्र शौचालयमे लगही कएलहुँ।' ओकर आँखि चाँदनीमे डुबल फूलक पंखुड़ी जकाँ छल। ओकर पिपनी मधुमाछी जकाँ झपकैत छल। ओकर मुँह मुस्कान सँ भरल छल। 'की ओ सदिखन एहिना हँसैत रहैत अछि? ओकर नाम की हएत? हासिनी? हास्या? हसिता? स्माइली?' हम मनहि मन सोचलहुँ। 'आण्टी! की हम किछु समय अहाँ संग रहि सकै छी?' 'की एकर जवाब 'नै' भऽ सकैत अछि? जखन हमर गाममे नहाय बला ठामक टाट पर सजमनिक लता एकटा सुन्दर पीयर फूल खिलौने छल; ओ फूल पएरे आबि कऽ हमर कंक्रीट कऽ कोठलीमे अपन परागक मुस्कान पसारय चाहैत छल?' हम मनहि मन सोचलहुँ। 'बैसू। अहाँक नाम की अछि?' 'श्रिया। चौथा 'बी' मे।' 'अहाँ कोन फ्लैटमे रहैत छी?' 'हम गाँधी नग्रक छी आण्टी! हम २०२ मे, दोसर महला पर रहैत छी। मोहन राव हमर छोट दादा (चिन्ना -थाथा) छथि। आइ -काल्हि छुट्टी अछि, एहि लेल एतय आयल छी। हमर डैडी हमरा भोरमे एतय छोड़ि गेल छलाह,' ओकर कथा कहबाक शैली एहन छल जेना केबल कनेक्शन सँ एक संग सौ चैनल प्रसारित भऽ रहल हो। 'आण्टी! की अहाँ नौकरी करैत छी?' हम ओकरा अपन विषयमे बतौलहुँ। 'हमर स्कूल छुटबाक समय भऽ गेल। हम घर पहुँचैत -पहुँचैत चारि वा सवा चारि बजा दैत छी। घर पहुँचला पर हमर मम्मी सब सँ पहिने हमरा 'हॉर्लिक्स' दैत छथि,' बच्ची हमरा ओकर जरूरत मोन पाड़ि देलक। चाह पी कऽ हम ओकरा लेल हॉर्लिक्स तैयार कएलहुँ। ओ एकटा चॉकलेट जकाँ मुस्कान देलक। ओ गिलासकेँ दुनू हाथ सँ पकड़ि कऽ पीबाक आनन्द लेलक। हॉर्लिक्सक विज्ञापन जकाँ अपन डाँर आ हाथमे गिलास घुमाबैत ओ बजली, 'अपांग, जपांग, बपांग!' हम अपन हँसी नै रोकि सकलौं। हँसैत -हँसैत ओ हमर कप उठा लेलक आ गिलास तथा कप सिङ्कमे राखि देलक। 'एहिना ताकि -ताकि किएक देखैत छी? हमरा चुपचाप बैसल रहनाय पसिन्न नै अछि। हम सदिखन मायक मदति करैत किछु -ने -किछु करैत रहैत छी। एहि लेल हमरा किछु काज दिअ,' ओ कहलक। 'निश्चय। मुदा सब सँ पहिने एतय आबि कऽ बैसू। की अहाँक घरमे कोनो संगी अछि?' 'ओह हँ। तरुण, अशुतोष आ ललासा। आण्टी! ई तरकारी सभ फ्रिजमे राखबाक अछि?' भोरमे रिलायंस दोकान सँ कीनल गेल पैकेट कऽ दिस इशारा करैत ओ पुछलक। हम मुस्कुराबैत पैकेट सभ फ्रिज लग घीच लेलहुँ। दुनू गोटे ओतहि बैसि गेलहुँ। ओ गप करैत गेलीह। मात्र गप नै छल; मुस्कानक एकटा हेँज हुनकर बात सँ पहिने आ पाछू सेहो रहैत छल। तरकारीकें गहना जकाँ प्रयोग करबाक तरीका बताबैत -बताबैत, ओ छुरी आ छिलनी सँ ओकरा फूल -चिरैमे बदलबाक लेल जोर लगा रहल छल। जखन प्रयासमे असफल भऽ गेल, तऽ ओ हँसी-ठट्ठा करैत कहलक, 'एकर एकटा हाथ कटल छैक; एकर जन्म पेटमे एकटा पएर लऽ कऽ भेल अछि आ ऑपरेशन कऽ कऽ ओकरा बाहर निकालऽ पड़त।' ओ जेना बुझा रहल छल, ओहि तरीका सँ हमरा बहुत हँसी आबि रहल छल। फ्रिजमे तरकारी राखब खतम भऽ गेल। उठि कऽ ओ हमरा उठबामे मदति करबाक लेल हाथ बढ़ौलक। ओकर आंगुर, जे कोमल, चिक्कन, पारदर्शी आ नरम छल, जेना मलाई सँ बनल हो, ओकरा छूबितहि हमर आंगुर रंगाय गेल, एहने सन बुझायल। हमर स्पर्श सँ ओकरा कोनो सन्देश पहुँचल हएत, ओ हमर डाँरमे बाँहि धऽ कऽ हमर मुँह देखय लागल। ओ दूधक फूल फरय बला लता जकाँ छल। हमर हृदय ओहि पंखुड़ीक प्रेम मे डूमि गेल। बच्ची, जे चांगुर पर ठाढ़ भेला पर हमर छाती धरि मात्र छल, हमर गाल पर एकटा कोमल आ नम चुम्बन देलक। हृदय आ शरीर रुईक मेघ भेदि कऽ चानक एक किनारा पर झूला झुलैत सन बुझायल। दुनू गोटे -हम हुनकर कान्ह पर हाथ राखि कऽ आ ओ हमर डाँर पर हाथ राकि कऽ- कोठली मे वापस आबि गेलहुँ। 'हम की करी?' हम ओकरा पूछलहुँ। 'किछु करी; किछुओ,' ओ सुझौलक। सुखायल कपड़ा सभ भीतर आनि कऽ हम ओकरा सोफा पर राखि कऽ तह करय लगलहुँ। एकटा रुमालकेँ सिंघाराक आकारमे मोड़ि कऽ ओ ओकरा बेचबाक नाटक करैत घर भरि घूमऽ लागल। हम एकटा सिंघाराकेँ दू टा चुम्बनक दर सँ कीनि लेलहुँ। 'ओना, अहाँ खेलऽ लेल बाहर किएक नै जाइत छी?' हम पूछलहुँ। 'नै! हम अहाँ संगहि रहब,' ओ मुस्कुराबैत कहलक। बच्चीक मुँह मुस्कान सँ साक्षात छल। 'ठीक अछि,' हम कहलहुँ। 'की हम आरो किछु करी?' ओ पुछलक। 'निश्चय। चलू, किछु खाइ छी,' हम भनसामे गेलहुँ आ ओकरा लेल गव्वालु (एक प्रकारक मिठाई) लऽ अयलहुँ। ओ एकटा हँसीक गप कहलक, जे सुनि दुनू जोर सँ हँसि पड़लहुँ। ओ अपन पसिन्नक नाश्ताक सूची बनाबय लागल। ओ बजारमे रङ्ग -बिरङ्ग फूलक ढेरी जकाँ हँसीक फूलक ढेरी लगा दैत छल। ओहि बच्चीक गप सभ क्रिसमसक दिन छत, देबाल, दुआरि आ खिड़की पर साटल गेल रङ्गीन कागज जकाँ हवामे लहरा रहल छल। 'आण्टी! ई अबाज की अछि?' पड़ोसी फ्लैट सँ केबाड़केँ जोर सँ पटकय कऽ अबाज सुनि कऽ ओ अपन भौंह उठा कऽ पुछलक। 'पड़ोसी सभ कुकुरकेँ एकटा कोठलीमे बन्द कऽ दैत छथि जखन ओ बाहर जाइत छथि; ओ हुनकर घुरय धरि एहिना करैत रहैत अछि। कियो विश्वास नै करत जे ई अबाज कुकुर कऽ रहल अछि। ओ केबाड़ पर चांगुर मारैत रहैत अछि आ पटकैत रहैत अछि,' हम बुझौलहुँ। 'हाय! जानवरकेँ एना किएक प्रताड़ित करैत छथि?' हम नै जानलहुँ जे ओकरा की बताबी। 'हम बरदाश्त नै कऽ सकैत छी जँ जानवर पीड़ित होइत अछि। की हम अहाँकेँ बताबी की भेल छल, आण्टी! हम स्कूल सँ ऑटो सँ घर आबि रहल छलहुँ। ड्राइवर -अंकल सब बच्चाकेँ ओकर -ओकर घर पर उतारि देलनि। हम सब सँ अन्तिम छलहुँ जे उतरब। हमर घर धरि आरो पाँच मिनट लागितैक। जखन हम रस्तामे छलहुँ, एकटा सुगर -छौआ हमर ऑटोक नीचाँ दबि गेल। ओकर एकटा गोड़ टूटि गेलै। जखन हम ड्राइवर सँ ऑटो रोकय लेल कहलहुँ, ओ कोनो परवाह नै कएलक। मुदा हम ओकरा सँ लड़ि कऽ ऑटो रुकवा लेलहुँ आ ओकरा ऑटोमे राखि लेलहुँ। हम अपन रुमाल सँ ओकरा पट्टी बान्हि देलहुँ। ओकरा अपन कोरामे राखि कऽ हम क्लिनिक लऽ गेलहुँ, ओकर इलाज करौलहुँ, आ ओही गलीमे ओकर माय लग छोड़ि देलहुँ जतय दुर्घटना भेल छल,' ओ जरैत मोमबत्ती जकाँ ठाढ़ भऽ कऽ चमकल मुँह लऽ कऽ कहानी सुनबय लागल। 'तखन अहाँक देरी भेला पर अहाँक माय चिन्तित नै भेलीह?' 'नै! हम ड्राइवरक मोबाइल सँ हुनका खबरि कऽ देने छलहुँ। घर पहुँचला पर सुगर-छौआक मोन पड़ि जाइत छल, हमरा बहुत दया लागल। राति बारह बजे धरि हम अपन डायरीमे सब लिखलहुँ।' 'की? अहाँ डायरी लिखैत छी?' जखन ओ किछु आरो कहय कऽ प्रयत्न कऽ रहल छल, हम बीचमे टोकैत पूछलहुँ। 'हँ आण्टी, हम सभ दिन डायरी लिखैत छी। अंकल राघव हमरा डायरी लिखब सिखौलनि। हम डायरीमे सब गप लिखि लैत छी, कारण हम असगर छी, हमरा बहिन -भाइ नै अछि।' बाहर अन्हार भऽ रहल छल। मुदा हमर फ्लैटमे तीन फीटक चान चाँदनी बरसा रहल छल। ओ हँसीक इजोत पसारि अन्हारकेँ रोकय लागल। बच्चीक गप सुनैत -सुनैत हम गाजरक तरकारी आ रसम बनौलहुँ, आ किछु दालि सेहो, कारण बच्चीकेँ ई सब पसिन्न छल। 'की अहाँ भात खायब?' हम पूछलहुँ। 'एतेक जल्दी? ओना होइत तऽ हम अपन दादीकेँ खबरि कऽ देब जे हम अहाँ संगे भोजन करब।' 'जल्दी वापस आउ।' किछुए मिनट बाद ओ फ्लैटमे भीतर आयल, सात रङ्गक इन्द्रधनुष जकाँ हँसीक चमक सँ सम्पूर्ण देह रङ्गायल। अपन छोट औंठा (बुढ़बा आंगुर) विजयक चिन्ह जकाँ देखबैत ओ हमर कोरामे लागि कऽ कहलक, 'हम अहाँ संगहि भोजन करब।' ओकरा सँ सुगन्धक एकटा झोंका आबि रहल छल। ओकर सम्पूर्ण देह सुगन्धित छल। हमरा लगैत अछि जे बच्चा सभक शरीर एहन सुगन्ध बिखेरैत अछि जे लोकक मोन जीति लैत अछि। हम गहीर साँस लऽ कऽ ओहि सुगन्धकेँ हृदय सँ अनुभव कएलहुँ आ बच्चीक कपार पर चुम्बन देलहुँ। हम दुनू भनसामे गेलहुँ। ओ व्यंजन सभ टीपॉय पर लऽ कऽ आबय लागल। 'हम काल्हि घर जा कऽ अपन डायरीमे अहाँक विषयमे लिखब,' परोसय लेल चम्मच सभ व्यंजनमे राखैत ओ कहलक। 'ओना हम अपन डायरीक एकटा महत्वपूर्ण बात बतायब।' 'की भऽ सकैत अछि,' हम फ्रिज सँ पानिक बोतल निकालि कऽ ओकरा दैत पूछलहुँ। 'हम जे बेसी पसिन्न करैत छी, ओकरा नील मसि (Blue ink) मे लिखैत छी; हम जे नापसिन्न करैत छी, ओकरा कारी मसि (Black ink) मे लिखैत छी।' 'एकर अर्थ ई भेल जे अहाँ सुगर -छौआक विषयमे कारी मसिमे लिखने छलहुँ?' 'नै, नै! से तऽ बहुत पसिन्न करय बला बात छल। एक बेर हम अपन सखी महिमाक घरमे ओकर माय द्वारा परोसल गेल नाश्ता खैलहुँ, से हम कारी मसिमे लिखलहुँ। ओना, एहि कटोरामे की अछि आण्टी?' टीपॉय पर राखल व्यंजनमे सँ एकटा कऽ दिस इशारा करैत ओ पुछलक। 'ई चिकन अछि... काल्हिक। हम फ्रिज सँ बाहर निकालि देलहुँ।' 'की अहाँ मौस खाइत छी?' ओ बहुत सन्देह आ अचरज सँ पुछलक। हम ओकरा भात, दालि आ गाजरक तरकारी परोसलहुँ। 'हँ, तऽ की?' हम अपन लेल भात, मेरचाइक चटनी आ दू खण्ड चिकन लेलहुँ। 'की अहाँ ब्राह्मण नै छी?' ओकर आँखिमे सदिखन रहय बला मुस्कान अनचोक्के निपत्ता भऽ गेल। 'नै।' 'की अहाँ चौधरी छी?' 'नै।' 'तखन की अहाँ रेड्डी छी?' 'नै।' 'तखन अहाँ के छी?' 'हम एकटा दलित छी,' हम नै जानलहुँ जे ओकरा की आ कइ प्रकारेँ कहब। 'एकर मतलब... अहाँ कोनो दोसर हिन्दू छी?' 'नै। हम ईसाई छी।' 'एकर मतलब 'हरिजन', महिमा जकाँ?' जखन हमर शारीरिक शिक्षाक शिक्षक हमरा छठम कक्षामे दौड़ प्रतियोगितामे दौड़य लेल कहने छलाह, तखन एकटा छोट कनी आंगुर आकारक काँट हमर मौसमे गड़ि गेल छल। वएह काँट, आकारमे दुगुना भऽ कऽ आब हमर हृदयमे गड़ि गेल छल। 'पहिने भात खाउ,' हम अपन भात मिलाबैत कहलहुँ। 'की अहाँ सचमुच हरिजन छी? हमरा सच बताउ!' बच्चीक मुँहक सब रङ्ग आस्ते -आस्ते निपत्ता भऽ गेल, धूसर रङ्ग धारण कऽ लेलक। 'हँ! ओना आब अहाँ ई सब किएक जानय चाहैत छी? हम सखी छी, आ की ई सब जानब जरूरी अछि?' 'हमर पिता आ हमर मायक कोनो हरिजन (दलित) मित्र नै छनि! हमरो कोनो हरिजन सखी नै अछि। हम हरिजन सँ दोस्ती करब एकोरत्ती पसिन्न नै करैत छी। हमर सखी सभ ब्राह्मण, रेड्डी, चौधरी आ आन हिन्दू छथि,' ओकर अबाज एहन छल जेना आकाशक किनारा धरि उड़ैत पतङ्गक डोरी अनचोक्के टूटि गेल हो। 'हमर प्यारी! अहाँ हमरा पसिन्न करैत छी, नै?' हमर हाथमे भातक दाना सभ चूर -चूर भऽ रहल छल। 'हँ, पसिन्न करैत छी,' बच्चीक मुँह ओहिना छल जेना कियो वमन (उल्टी) रोकि कऽ राखने हो। 'तखन बैसू; चलू भात खाइ छी,' हम कहलहुँ। मुदा बच्ची बैसबाक कोनो परवाह नै कएलक। ओ ठाढ़ भऽ कऽ हमरा देखि रहल छल, बिना पिपनी झपकेने। ओकर आँखिमे एतेक घृणा छल, जेना ओ उमड़ैत कीड़ा देखि रहल हो। 'हमर दादी हमरा पुकारि रहली अछि,' ओ बाहर दौगि गेलीह, सैंडल पहिरलनि आ दौगैत भागि गेलीह, जेना कखनो खसि पड़तीह। फूसक छातक छेद सँ भीतर अबैत 'ओ' आकारक सूर्य -प्रकाश एकटा आवर्धक लेन्स सँ गुजरि कऽ हमर हृदयमे रहि गेल। पूर्ण कोठलीमे सुखायल टिकली सभ हमरा पर रेंगैत कैटरपिलरमे बदलि गेल। [२००८ मूल तेलुगु सँ अंग्रेजीमे के. पुरुषोत्तम द्वारा अनूदित।] ध्वस्त मन्दिर [आदिवि बापिराजूक मूल तेलुगु 'पाडु देवालयम' सँ अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर।] ______________________________________ जयलक्ष्मी पोपुरी पोपुरी जयलक्ष्मी २०१० मे उस्मानिया विश्वविद्यालयक निजाम कॉलेज सँ सेवानिवृत्त भेलीह। ओ अंग्रेजी विभागक प्रमुख सेहो रहलीह। हुनकर विशेषज्ञता क्षेत्र अंग्रेजीमे भारतीय कविता आ अनुवाद अछि। ओ शीला सुभद्रा देवी, एन. गोपी आ सलीमक रचना सभक अनुवाद कएने छनि। आदिवि बापिराजू आदिवि बापिराजू (१८९५ -१९५२) एकटा बहुमुखी प्रतिभाक धनी छलाह। ओ स्वतन्त्रता सेनानी, पत्रकार, कवि, उपन्यासकार आ कलाकार छलाह। ओ तेलुगु सिनेमाक पहिल आर्ट डायरेक्टर छलाह आ 'मीज़ान' अखबारक सम्पादक सेहो रहलाह। हुनकर उपन्यास 'नारायणराव' केँ आन्ध्र विश्वविद्यालय सँ प्रथम पुरस्कार भेटल छल। ओ एकटा पैघ चित्रकार सेहो छलाह आ श्रीलंकाक सिगिरिया गुफा मन्दिरक भित्ति चित्रक प्रतिलिपि सेहो बनौने छलाह। ध्वस्त मन्दिर [मूल तेलुगु: आदिवि बापिराजू] १ ओ बूढ़ बाबा जकाँ आकृति सभ दिन भिक्षा लेबाक लेल गाममे अबैत छल। कियो नै बुझैत छल जे ओ कतय सँ अबैत छल। ओ कहियो कोनो गीत नै गाबैत छल आ ने कोनो विशेष स्वरमे भिक्षा लेल पुकारैत छल! बिना किछु कहने ओ सभ केबाड़ पर ठाढ़ रहैत छल। जखन जाय लेल कहल जाइत, ओ बिना एक शब्द कहने चलि जाइत छल। जखन धरि जाय लेल नै कहल जाइत, ओ बिना कनियो मुस्कानक प्रतीक्षा करैत रहैत छल। दिन भरिक अन्न बटोरि कऽ ओ साँझ धरि नदी किनार बैसि जाइत छल। ओ बेसीकाल एक ठाम बिना हिलल -डुलल बैसल रहैत छल। हुनकर दाढ़ी मकइक रेशा जकाँ उज्जर भऽ गेल छल। हुनकर कपड़ा भले फाटल -चीटल छल, मुदा साफ रहैत छल। बूढ़क आँखिमे एकटा झलक देखि कऽ सभक मनमे स्नेह जागि जाइत छल। ओइ आँखिमे मानवता लेल आशाक भँवर देखि पड़ैत छल। जखनो ओ कोनो पीड़ित जानवर देखैत, ओ तुरत्ते अपन थैला सँ एकटा जड़ी -बूटी निकालि कऽ ओकर लुगदी बना कऽ घाव पर पट्टी बान्हि दैत आ ओकरा पी़ड़ा सँ मुक्त करैत। एहि सँ जानवर निश्चित रूप सँ ठीक भऽ जाइत छल। जखन ओ नदी किनार बैसि जाइत, तऽ दूर -दूर सँ चरवाहा सभ अपन जानवर संग अबैत छल। हम सभ बाबाकेँ बहुत रास भूखल लोक सभमे भातक 'कुन्चा' (एकटा माप) बाँटैत देखलहुँ। कियो नै बुझैत छल जे ओ एतेक चाउर कतय नुकाबैत छल वा हुनका लेल भोजन के पकैत छल। २ एक बेर हम आ हमर मित्र अपन गामक दक्षिणी छोर पर जंगलमे गेलहुँ। हम बुझैत छलहुँ जे ओहि जंगलक भीतर एकटा पुरान ध्वस्त मन्दिर अछि। काँटा बला झाँखुड़ आ गोखरुक झुरमुट पार कऽ कऽ हम मन्दिर धरि पहुँचलहुँ। ओतय मात्र फुटल -टुटल ईंटा बचल छल। भितुरका मन्दिरक अतिरिक्त ओकर खाली देबाल सभमे आरो किछु नै छल। बचल -खुचल चारि -पाँचटा मूर्तिकेँ गामक नव -निर्मित मन्दिरमे लऽ जाइ गेल छल। तैयो बहुत रास पाथरक खाम्ह, पाथरक शिलालेख आ नक्काशी बला पाथर ओतय छल। ई स्थान छितरायल अवस्थामे बहुत रास पाथरक नक्काशी सँ पटल छल। एहि महत्त्वक कारण पुरातत्व विभाग एकटा पट्टिका लगा देने छल जाहिमे सरकारी आदेश लिखल छल जे एहि वस्तु सभकेँ कियो नै छुअत। ई एकटा विशाल मन्दिर छल। सूर्य डूमि गेल छल जखन हम अपन मित्रकेँ खँडहर आ वस्तु सभ देखा रहल छलहुँ आ मन्दिर सँ सम्बन्धित कथा सुना रहल छलहुँ। सातम तिथि कऽ चान चारू कात चाँदनी बिखेरि रहल छल, जाहि सँ मन्दिर बहुत सुन्दर लागि रहल छल। ३ ओहिना हम घण्टी बजैत सुनलहुँ। हम दुनू घबड़ा गेलहुँ। ओहि जंगलमे एहन तीक्ष्ण गुञ्जैत अबाज कतय सँ आयल? हम ओहि अबाजकेँ बड़द क गरदनिमे बान्हल घण्टीक अबाज बुझलहुँ। ई तय कऽ कऽ जे एहि परिसरमे आरो बेसी देरी धरि रहब सुरक्षित नै अछि, हम जल्दी सँ मन्दिर सँ बाहर निकलि गेलहुँ, देबाल पार कऽ कऽ। घर घुरैत -घुरैत हम अपन डेग पर ध्यान दऽ रहल छलहुँ। तखने हम फेर सँ घण्टीक झनकार सुनलहुँ! एहि बेर हम चिन्हलहुँ जे स्पष्ट आ तीक्ष्ण झनकार भितुरका मन्दिर सँ निकलि रहल अछि। हम एक -दोसरक मुँह दिस ताकलहुँ आ तय कएलहुँ जे निश्चय आइ साँझ हमरा कोनो अजीब अनुभव होइ बला अछि। हम तेज डेग सँ सड़क दिस बढ़लहुँ। तैयो स्थान छोड़बाक इच्छा नै रहितो हम ठाढ़ रहि कऽ सुनैत रहलहुँ। किछुए क्षणमे हम मन्त्रक स्पष्ट उच्चारण सुनय लागलहुँ। जे हो, हम अंग्रेजी शिक्षाक कइएक बर्खसँ सँ ई निष्कर्ष निकालि लेने छलहुँ जे हमर शब्दकोशमे भूत -प्रेत नै अछि। हमरा डरबाक कोनो जरूरत नै अछि। की गोरा लोक डराइत छल? एक -दोसरक हिम्मत बँधबैत, हम चारू कात सावधानी सँ देखैत -परखैत जर्जर मन्दिरमे वापस जाय लगलहुँ। एक क्षणमे हम भितुरका मन्दिरक सोझाँ ठाढ़ छलहुँ। ओतय हम एकटा विशाल जरैत दीप देखलहुँ, जे हमरा पर छाह खिरेलक। की ई कोनो प्रेत -आगि नै छल? जखन हम भितुरका मन्दिरक पहिल देहरी पार कएलहुँ, हम एकटा मानव आकृति देखलहुँ, जे गहीर ध्यानमे पूजा करैत ओहि ऊँच चबूतरा सँ पहिने बैसल छल, जाहि पर बहुत पहिने कोनो मूर्ति स्थापित छल। हम भितुरका केबाड़ पार कऽ कऽ भीतर गेलहुँ। हमरा जइ बात सँ अचरज भेल, से छल जे हमर गामक वएह बाबा, जे सभ दिन भिक्षा मांगैत छलाह, पूजा कऽ रहल छलाह। ओ बिना ककरो टोकने, स्पष्ट स्वर आ शुद्ध उच्चारणमे, बिना कोनो भूल कएने निर्बाध रूप सँ संस्कृत मन्त्र गाबि रहल छलाह। हम दुनू खाम्ह जकाँ स्तब्ध रहि गेलहुँ। ओ मूर्तिहीन ओहि ऊँच चबूतरा पर फूल -माला सँ पूजा कऽ रहल छलाह आ कपूर तथा प्रसाद अर्पित कऽ रहल छलाह। ४ हमरा एतेक देरी धरि ठाढ़ देखि कऽ ओ पूजाक फूल हमरा देलनि। माथ झुका कऽ हम ओहि फूलकेँ अपन माथ पर राखि लेलहुँ। हम: अहाँ के छी? अहाँ एतय रहैत छी? बाबा किछु नै कहलनि। हमर मित्र: महाशय, अहाँ एतय कतेक देरी सँ पूजा कऽ रहल छी? एतेकमे हमर मित्र चीन्हि गेल जे बाबा एकटा विद्वान ब्राह्मण पुजारी छथि। ओ वृद्ध व्यक्ति मोटामोटी दस मिनट धरि हमरा दिस ताकैत रहलाह। ओहि आँखिमे कोनो तामस नै छल। बिनु बुझ्ने हम दुनू झुकि कऽ हुनकर पएर छूलहुँ। हमरा बैसबाक इशारा कऽ कऽ ओ सज्जन पलथा मारि कऽ नीचाँ बैसि गेलाह आ कहय लगलाह... "हमर पूर्वज एहि मन्दिर सँ जुड़ल पुजारी छलाह। हमरा नै बुझल अछि जे हमर पूर्वज कतेक पीढ़ी सँ एहि मन्दिरमे पूजा -पाठ आ दैनिक प्रसाद चढ़ाबय कऽ कर्तव्य निभा रहल छलाह। दिन खराब भेला कऽ कारण ई मन्दिर खँडहरमे बदलि गेल। एहि मन्दिरक चारू कात एकटा विशाल नग्र छल। हमरा बुझाइत अछि जे अहाँ एतेक तऽ बुझैत हएब। जखन लगपासक नग्र एहि मन्दिर कऽ संग खँडहरमे बदलि गेल, हमर पूर्वज लगक एकटा एकचारीमे रहैत अपन दैनिक पुजारीक कर्तव्य निमाहैत रहलाह। लगपासक गाम सँ लोक मन्दिरक वार्षिक उत्सव देखय अबैत छल। समय बितला पर मन्दिरक उत्सव आस्ते -आस्ते समाप्त भऽ गेल, आ हमर पैतृक परिवार सेहो दस कोस दूर दोसर गाममे चलि गेल। अहाँकेँ सेहो ओ गाम बुझल अछि। तैयो ओ सब सभ चन्द्रमासक एकादशी पर एहि मन्दिरमे पूजा करय अबैत रहलाह। जखन हमर परदादाक समय आयल, ओ सब मात्र मन्दिर उत्सवक समय अबैत छलाह आ ओहि तीन दिन पूजा करैत छलाह। एहिना हमर दादा आ बाबूजी सेहो एकटा कर्तव्यक रूपमे एतय पूजा करय अबैत रहलाह। जखन हम बी.ए. मे पढ़ि रहल छलहुँ, तखन हमर बाबूजीक मृत्यु भऽ गेल। जखन ओ मृत्यु -शय्या पर छलाह, ओ हमरा बजा कऽ किछु कहय चाहैत छलाह, मुदा नै कहि सकलाह। अन्तमे अपन अन्तिम साँस लेबा सँ ठीक पहिने ओ हमरा अपन पास बजा कऽ किछु अस्पष्ट शब्द बजलाह आ चलि बसलाह। हम ई मन्दिर पूर्णतः बिसरि गेल छलहुँ। हम पचपन बर्खक उमेर धरि सरकारी सेवा करैत रहलहुँ। अन्तमे हम उप -कलेक्टरक रूपमे पेन्सन लऽ कऽ सेवानिवृत्त भेलहुँ। जखन धरि हम सेवामे छलहुँ, सभ बेर मन्दिर उत्सवक समय हम एहन रोग सँ ग्रसित भऽ जाइत छलहुँ जे वैद्य -डाक्टर सभक समझ सँ बाहर छल। पेन्सन लऽ कऽ हम गाम घुरि अयलहुँ। मुदा भगवानक भक्ति आ तीर्थ -यात्रा कयलाक बादो हमर मन अशान्त रहैत छल। हमर परिवार बला सब हमरा बताह बुझैत छल। चारि बर्ख पहिने हम एहि गाम अपन पैतृक मन्दिर सँ सम्बन्धित धरती देखबाक लेल अयलहुँ। तखने हमरा ई मन्दिर भेटल। जखने हम मन्दिरमे पएर धयलहुँ, हम ठेंस खा कऽ खसि पड़लहुँ आ माथ चकरा गेल। तखन-हम की कहूँ! पूर्ण मन्दिर प्रकाशित भऽ गेल आ हम गाय कऽ घी सँ जरैत चाँदीक दीप देखलहुँ। हम घण्टी, रौदक लपट आ सोनाक मूर्ति सभ देखलहुँ! आ स्पष्ट रूप सँ हमर कानमे अबाज आयल: 'हमर पुत्र! हम कतेक दिन बिना पूजाक रहब?' ओहि दिन सँ हम अपन सम्पूर्ण सम्पत्ति दान दऽ देलहुँ। एकटा हिस्सा अपन दूरक सम्बन्धी सभकेँ देलहुँ आ दोसर हिस्सा अपन बेटाकेँ, जे चेन्नईमे पढ़ैत छथि। तखन सँ हम एहन जीवन बिता रहल छी।" ओ पुण्यात्मा व्यक्ति ओतहि ठाढ़ भऽ गेलाह। आ हम दुनू बाहर आबि गेलहुँ। एकटा अद्भुत आनन्द हमर आत्मामे भरि गेल। आ चाँदनी सम्पूर्ण देशमे पसरि गेल। टिप्पणी: १ कुन्चा: अन्नक एकटा माप अछि जे दस किलोग्रामक बराबर होइत छैक। वेंकट सुब्बैया वी 'अनुवादक कला' (अंश) [अनुवाद: जयलक्ष्मी पी. द्वारा] (स्वर्गीय वल्लमपाटी वेंकट सुब्बैया द्वारा मार्च २००० मे लिखल गेल आ pub.eemataa.com पर १० दिसम्बर २००७ कऽ प्रकाशित निबन्धक अंश) अनुवादक कला- हमर अनुभव जँ लेखन एकटा तरुआरि पर अभ्यास अछि, तऽ अनुवाद दू टा तरुआरि पर अभ्यास अछि। जेना मात्र एकटा भाषाक ज्ञान ककरो लेखक नै बनबैत छैक, ओहिना मात्र दू टा भाषाक ज्ञान ककरो अनुवादक नै बना दैत छैक। ओना एकटा अनुवादक लेल दू टा भाषाक 'नीक' ज्ञान हेबाक चाही, जाहिमे एक ओकर मातृभाषा हो आ दोसर सीखल तथा अर्जित 'आन' भाषा हो; बहुत लोक मानैत छथि जे अनुवाद बेसीकाल अपन मातृभाषामे करबाक चाही। ओना एहिमे किछु सत्यता अछि, मुदा ई बिना अपवादक नै अछि। पी.वी. नरसिंह राव द्वारा विश्वनाथ सत्यनारायणक 'वेयिपाडगालु' क हिन्दी अनुवाद, पुट्टपर्थी नारायणाचार्युलू द्वारा 'एकवीरा' क मलयालम अनुवाद, आ पी.एल. रेड्डी द्वारा तेलुगु कथा सभक हिन्दी अनुवाद, एस.एस. प्रभाकर द्वारा तेलुगु कथा सभक अंग्रेजी अनुवाद- ई सभ एहि श्रेणीमे अबैत अछि। एहि अनुवाद सभकेँ नीक मानल जयबाक कारण किंशाइत ई भऽ सकैत अछि जे हम जकरा 'आन' कहैत छी, से हुनका लेल एतेक आन नै अछि! आब हम एहि पर विचार करी जे भाषा जानबाक की अर्थ अछि। भाषा एकटा समुदायक संस्कृतिक एकटा महत्वपूर्ण पक्ष अछि। एकर अतिरिक्त, भाषा ओहि संस्कृति लेल एकटा माध्यम सेहो अछि। एहि लेल, दू टा भाषाक ज्ञानमे दू टा संस्कृति आ दू टा जीवन-शैलीक जानकारी शामिल अछि, कारण अभिव्यक्तिक एकटा ढङ्ग ओहि भाषाक लेल प्राणवायु जकाँ होइत छैक। ओहि भाषाक विशिष्ट अभिव्यक्ति-शैली ओहि भाषाक संस्कृति, ओकर भौगोलिक परिस्थिति, ओकर रीति -रिवाज आ परम्परा, आ ओहि क्षेत्रक गीत-खेल सँ उपजइत अछि। जेना, हम सुनैत छी जे एस्किमो भाषामे 'हिम' (बरफ) शब्द लेल मोटामोटी बीस टा शब्द अछि, ओहिना मराठीमे 'रणभूमि' शब्द पर आधारित एकटा पैघ शब्दावली अछि। एहिना अंग्रेजी भाषा अंग्रेज लोकक खेल आ नौ-परिवहनमे रुचिकेँ देखबैत अछि। हमर अपन भाषा तेलुगुक अधिकांश शब्दावली हमर कृषि -प्रधान चिन्ता सँ उपजल अछि। एहि लेल एकटा भाषा जानबाक अर्थ ओहि भाषाक शब्दावली आ अभिव्यक्तिक स्रोत जानब अछि। एहि लेल एकटा अनुवादकक पहिल योग्यता ई सभ-अर्थात् शब्दावली आ ओकर अभिव्यक्ति-जानब अछि। अनुवादक लेल दोसर योग्यता स्रोत पाठ (Source Text) क मुख्य विषयमे गहीर रुचि हएब अछि। सब विषयक अनुवाद करब सम्भव नै अछि। जँ कियो एहन विषयक अनुवाद करय लेल आगू बढ़ैत अछि जाहिमे ओकर रुचि नै छै, तऽ काज यान्त्रिक आ निर्जीव कऽ अलाबे आरो किछु नै बुझायत। स्रोत पाठक विषय सँ सम्बन्धित एकटा आरो महत्वपूर्ण पक्ष अछि। कोनो विषय पर विभिन्न कोण सँ चर्चा करब सम्भव अछि, जेना-गोलवलकर, राधाकृष्णन वा देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय, जे भारतीय दर्शनकेँ अपन -अपन ढङ्ग सँ भिन्न रूपमे देखैत छथि। ऐ तरहक स्रोत पाठक लेखक द्वारा विषयकेँ अपन शैली आ चुनल गेल शब्दावलीक अनुसार ढालि लेने भऽ सकैत अछि। एहि लेल स्रोत पाठक विषयक प्रति सहानुभूति नै राखय बला अनुवादककेँ ओहि पाठक अनुवाद करबा सँ बाँचब चाही। जखन कोनो अनुवादक कोनो पाठक अनुवाद करय लेल बैसैत छथि, तऽ हुनका स्रोत पाठक भाषा सम्बन्धी कठोर निर्णय लेबा लेल तैयार रहबाक चाही। अनुवादककेँ अपन अनुवादमे अपनाओल जाय बला भाषाक स्तर तय करबा सँ पहिने गहीर चिन्तन करबाक चाही, कारण अनुवाद विभिन्न स्तर पर काज करय बला भाषामे कएल जा सकैत अछि। ई स्तर मात्र शब्दावलीक नै, वरन् वाक्य -संरचनाक सेहो सापेक्ष होइत अछि। ई निर्णय लेबा सँ पहिने अनुवादककेँ स्रोत पाठक विषय, ओ जकरा सम्बोधित करैत अछि, आ अनुवादक लक्षित पाठकक स्पष्ट समझ हेबाक चाही। ई पक्ष सैद्धान्तिक आ वैज्ञानिक पाठ सभक अनुवादमे एकटा जटिल समस्या बनि रहल अछि। छह लाख शब्दावली सँ सम्पन्न अंग्रेजी जकाँ भाषा सँ पच्चीस हजार सक्रिय शब्दावली सेहो नै राखय बला तेलुगुमे वैज्ञानिक पाठ सभक अनुवाद करैत समय, अनुवादक नव शब्द आ नव शब्द -रचना करबा लेल मजबूर होइत छथि। सत्ते ई एकटा जटिल काज अछि जखन स्रोत शब्दावलीकेँ अनूदित शब्दावलीमे फिट करबाक बात सोचल जाय। भाषा सँ सम्बन्धित दोसर पक्ष 'स्वर' (Tone) अछि। स्वर कोनो निपुण लेखकक शैलीक एकटा महत्वपूर्ण पक्ष अछि। ई मात्र लेखक आ ओकर विषयकेँ व्यक्त नै करैत अछि, वरन् पाठक संग ओकर सम्बन्ध सेहो व्यक्त करैत अछि। जेना कोनो गायकक स्वर विभिन्न भावनाकेँ व्यक्त करैत अछि, ओहिना निपुण लेखकक शैलीमे सेहो तामस, प्रतिशोध, हास्य, व्यंग्य आ आरो बहुत किछु व्यक्त होइत अछि। अनुवादकक काज स्रोत लेखकक स्वरकेँ अचूक रूप सँ पकड़ब अछि, आ फेर सावधानी सँ रङ्ग, स्वाद, गन्ध आ शब्द -खेलकेँ व्यक्त करबा लेल उपयुक्त शब्द सभक चुनाव करब अछि। एकर अतिरिक्त अनुवादककेँ जे अतिरिक्त सावधानी बरतय कऽ चाही, ओ अछि-स्रोत पाठकेँ कएक बेर पढ़ि कऽ आत्मसात करब, अनुवाद शुरू करबा सँ पहिने शब्दावली तैयार करब, शब्द -रचनाक स्तर जाँचबा लेल बर-बेर पाछू देखब, आ सब सँ महत्वपूर्ण, अनुवादक अन्तिम प्रति स्वयं तैयार करब। हम अनुवादकक उपर्युक्त काज सभमे सँ अन्तिमक विषयमे एकटा बात कहय चाहब। रचनात्मक लेखनमे भावनात्मक उत्साह आ प्रेरणा मुख्य भऽ सकैत अछि, मुदा कठोर परिश्रम अनुवादकक अस्तित्वक केन्द्र -बिन्दु अछि। जँ कियो गहीर श्रम नै कऽ सकय, तऽ नीक अनुवादक बनब असम्भव अछि। अनुवादक कला पर अंग्रेजीमे किछु नीक पुस्तक उपलब्ध अछि। १७९१ मे अलेक्जेण्डर फ्रेजर टाइटलर 'एसेज ऑन द प्रिंसिपल्स ऑफ ट्रान्सलेशन' प्रकाशित कएने छलाह। ओकर बाद थियोडोर सेवरी आ रेनाटो पोगिओली सन विद्वान अनुवाद पर महत्वपूर्ण कृति प्रकाशित कएलनि। द्वितीय विश्वयुद्धक बाद पश्चिमी देश सभमे भाषाक अध्ययन आ ओकर सिद्धान्तक महत्त्व बढ़ल। जे.सी. क्याटफोर्ड सन भाषा विशेषज्ञ एहि विषयकेँ गहीर रूप सँ पढ़लनि। ताधरि अनुवाद एकटा कलाक रूपमे छल, मुदा आब ई एकटा विज्ञानक रूपमे देखि पड़य लागल। बादमे अनुवाद लेल कम्प्यूटरक प्रयोग सेहो बढ़ल। तैयो तेलुगुमे अनुवाद पर बहुत नीक पुस्तक उपलब्ध नै अछि। रा.रा. (राचमल्लु रामचन्द्र रेड्डी) क 'अनुवाद समस्यालु' वा किछु पत्रिका सभक सम्पादकीय कऽ अलावे कोनो व्यापक आ व्यावहारिक उपयोगी कृति नै अछि। _____________________________ कियो कहलक जे तेलुगु लोक तर्क -वितर्क आ अनुवादमे निपुण होइत अछि। जँ तर्क -वितर्क एकटा राजनीतिक आदति अछि, तऽ अनुवादकेँ एकटा साहित्यिक प्रवृत्ति कहल जा सकैत अछि। वास्तवमे तेलुगु साहित्यक उत्पत्ति अनुवाद सँ भेल अछि। कएक दशक धरि तेलुगु साहित्य मात्र अनुवाद सँ सन्तुष्ट छल। हमर बहुत रास महान कवि पैघ अनुवादक छलाह, जे स्रोत पाठमे कथा, ओकर संरचना, पात्र आ ओकर मनोविज्ञान, शैली आदि केँ बुझैत छलाह। एहि सँ लजेबाक कोनो जरूरत नै अछि, कारण संस्कृत, ग्रीक आ लैटिन सन प्राचीन साहित्यक अलावे आन भारतीय भाषाक साहित्य सेहो अनुवाद सँ विकसित भेल अछि। बीसम शताब्दीमे तेलुगु लोक अनुवादमे अपार रुचि देखौलनि। परिणामस्वरूप प्रेमचन्द, ठाकुर, शरत्, गोर्की आ राहुल सन लेखक तेलुगु पाठक लेल परिचित भऽ गेलाह। १९३० क दशकक प्रगतिशील लेखनक बहुत रास कृतिक अनुवाद आइओ जारी अछि। जे तेलुगु लेखक अंग्रेजीमे निपुण नै छथि, ओ विश्व साहित्यक साहित्यिक प्रवृत्ति आ विचारकेँ मात्र अनुवादक माध्यम सँ जानि पाबैत छथि। हमरा सन्देह अछि जे आइ धरि तेलुगुमे 'विपुला' एकमात्र एहन भारतीय साहित्यिक पत्रिका अछि जे मात्र अनुवादित कथा सभ लेल समर्पित अछि। ______________________________ जखन हम एकटा अनुवादकक रूपमे अपन अनुभव बतबइत छी, तऽ हमरा पाठक संग किछु गप साझा करबाक चाही। हम अपन लेखनक प्रारम्भ एकटा कविक रूपमे कएलहुँ। बादमे कविता छोड़ि हम कथा लिखय लागलहुँ। कथा लिखैत -लिखैत हम दू टा उपन्यास सेहो लिखि लेलहुँ। जल्दी पढ़बाक रुचि जागल आ अकस्मात हमर ध्यान अनुवादक दिस लागि गेल। मोटामोटी १९८१ मे 'हैदराबाद बुक ट्रस्ट' (HBT) खुजल आ ओकर सदस्य मिस्टर सी.के. हमरा सँ परामर्श लेलनि जे अनुवाद लेल किछु पुस्तक सुझाबी। हम जे पुस्तक सुझौलहुँ, ओ अछि-ई.एच. कारक 'व्हाट इज हिस्ट्री?'। अनुवादक लेल पाठ तय भेला कऽ बाद एचबीटी एकटा योग्य अनुवादक खोजय लागल। किछु लोककेँ लागल जे ई पाठ अनुवाद लेल अनुपयुक्त अछि। आन किछु लोककेँ लागल जे ई प्रयास व्यर्थ अछि, कारण जे इतिहास -लेखन बुझैत छथि ओ अंग्रेजी सेहो बुझैत छथि आ ओ अंग्रेजीमे पढ़ब पसन्द करताह। अन्तमे कोनो अनुवादक नै भेटल। मिस्टर सी.के. हमरा सँ पुछलनि, "किएक तँ अहाँ पुस्तक सुझौने छी, की अहाँ स्वयं अनुवाद करब?" हम राजी भऽ गेलहुँ। हम अनुवादमे अपन फुरसतिक एक बर्ख लगा देलहुँ। जे गप हम नै बुझि पएलहुँ, ओकरा लेल मित्र सभ सँ सलाह लेलहुँ आ एक बर्ख बाद अनुवाद खतम कएलहुँ। दू टा गलती, जकरा पर अनुवाद करैत समय ध्यान नै गेल छल, बादमे देखा पड़ल। पहिल गप ई जे स्रोत पाठक पाठक आ तेलुगु अनुवादक पाठकक समझक स्तर एक नै छल। कारक पाठ कैम्ब्रिज इतिहास समाजमे देल गेल व्याख्यानक संग्रह छल, जतय श्रोता इतिहासक विद्वान छलाह। एहि लेल कार ऐतिहासिक घटनाक उल्लेख बिना कोनो पैघ व्याख्याक कऽ सकैत छलाह। मुदा तेलुगुक नब्बे प्रतिशत पाठक ओहि स्तरक नै छलाह। एहि लेल हम फुटनोट (टीका) देबाक सोचलहुँ, मुदा प्रकाशक मना कऽ देलनि। हुनका डर छल जे साधारण पाठक एहन किताब नै पढ़त। एहि लेल हम अपन अनुवाद एकटा साधारण पाठक आ एकटा इतिहासक छात्रकेँ देखय लेल देलहुँ आ कठिन वाक्य सभकेँ चिन्हबाक लेल कहलहुँ। ओकर बाद हम व्याख्याकेँ पाठमे आ 'एण्डनोट्स' मे एहि तरहें शामिल कएलहुँ जे कैम्ब्रिजक ओहि स्तरक पुस्तककेँ एकटा साधारण तेलुगु पाठक बुझि सकय। दोसर गलती आरो पैघ छल। जखन हम अपन अनुवाद खतम कएलहुँ आ मूल पाठ सँ ओकर तुलना कएलहुँ, तऽ हमरा धक्का लागल। हम ओकर 'स्वर' (Tone) पकड़बामे असफल रहल छलहुँ। मूल पाठक हास्य आ व्यंग्य बला स्वर अनुवादमे नै आबि सकल छल। तेलुगु अनुवाद मात्र 'तथ्यात्मक' आ 'तटस्थ' बुझाइत छल। एहि लेल अनुवाद दोबारा लिखि कऽ हम स्रोत पाठक स्वरकेँ सुधारबाक प्रयास कएलहुँ। एतेक प्रयासक बादो किछु लोककेँ लागल जे ई पढ़ब कोनो व्यावसायिक उपन्यास जकाँ सहज नै अछि। हुनका लेल हमर मात्र एकटा सुझाव अछि-मूल पाठ पढ़ू। 'चरित्र अन्ते एमिटि' क आइ धरि तीन टा संस्करण आबि गेल अछि आ दस हजार सँ बेसी प्रति बिकल अछि। मात्र इतिहासक छात्र नै, वरन् आन लेखक/ पाठक सेहो एहि पाठकेँ मोन लगा कऽ पढ़लनि। हमर ओकर बादक अनुवाद छल वोले सोयिन्काक नोबेल व्याख्यान, जे हमरा निराशा सँ भरि देलक। हमरा बुझायल जे सोयिन्काक ओहि जुनूनकेँ हम अपन अनुवादमे नीक जकाँ नै उतारि सकलौं। ओहि व्याख्यानमे किछु सन्दर्भक स्रोत सेहो हम नै खोजि पएलहुँ। एहिना, नारीवादी लेखिका क्रिस ब्रेज़ियरक 'वर्ल्ड हिस्ट्री' क अनुवाद करैत समय हम पाठमे आयल किछु 'पैरोडी' (व्यंग्यपूर्ण अनुकरण) सभक अनुवाद करब कठिन पएलहुँ। जेना, पुस्तक एहि पंक्ति सँ शुरू होइत अछि-'इन द बिगिनिंग वाज स्लाइम' (In the beginning was slime), जे सेण्ट जॉनक बाइबलक पंक्ति 'इन द बिगिनिंग वाज द वर्ड' (In the beginning was the Word) क पैरोडी अछि। एहन सूक्ष्म सौन्दर्य सँ भरल पैरोडी सभ अनुवादमे खतम भऽ जाइत अछि। एकटा अनुवादकक रूपमे जइ पुस्तक सँ हमरा सन्तोष भेटल, ओ अछि- एस.जी. सरदेसाईक 'प्रोग्रेस एण्ड कन्जर्वेशन इन एन्शेण्ट इण्डिया'। हम ओकरा कएक बेर पढ़लहुँ जाहि सँ ओकर सामग्रीकेँ बुझि आ आत्मसात कऽ सकी। सरदेसाईक प्रज्वलित क्रोध आ असहिष्णुताकेँ अपन अनुवादमे सही अभिव्यक्ति देबाक आत्मविश्वास प्राप्त कयला कऽ बाद हम पुस्तकक अनुवाद करय लेल बैसलहुँ। सरदेसाई वैदिक साहित्य आ ओहि समाजक वर्णन करबा लेल जे उपयुक्त शब्द सभक प्रयोग कएलनि, ओकरा लेल हम गहीर शोध कऽ कऽ संस्कृतमे समतुल्य शब्द सभ खोजलहुँ। जखन विशेषज्ञ सभ हमरा बधाई देलनि जे हमर अनुवाद 'प्राचीन भारतीय देशमलो प्रगति, संप्रदायवादम' एकटा अनुवाद नै, वरन् एकटा मूल पाठ जकाँ पढ़ल जाइत अछि, तऽ हमरा बहुत गौरव भेल। एकर अतिरिक्त हम तस्लीमा नसरीनक 'लज्जा' क सेहो अनुवाद कएलहुँ, जे एकटा 'अनुवादक अनुवाद' छल। जँ मूल पाठक शैलीक कल्पना करब कठिन हो, तऽ अनूदित पाठ पर आधारित अनुवाद प्रभावशाली नै भऽ सकैत अछि। एकर बाद हम कन्नड़ सँ 'ओडलाला' क अनुवाद कएलहुँ, जे ओहि भाषाक एकटा लोकप्रिय उपन्यास छल आ देवनूरु महादेव (जकरा 'ओडलाला महादेव' सेहो कहल जाइत छल) द्वारा लिखल गेल छल। एचबीटी एहि उपन्यासकेँ तेलुगुमे 'बटुकन्ता' शीर्षक सँ प्रकाशित कएलक, मुदा ई ककरो ध्यान आकर्षित नै कऽ सकल। हमरा बुझाइत अछि जे एकर कारण कर्नाटक आ आन्ध्र संस्कृतिक बीच सामाजिक चेतनामे अन्तर भऽ सकैत अछि। एकटा संस्कृतिमे जे पुस्तक प्रगतिशील मानल गेल, ओ हमरा लेल ओतेक प्रगतिशील नै लागल। ई सेहो अनुवादमे एकटा सीख अछि। मूल भाषामे जे पुस्तक लोकप्रिय भेल, ओ दोसर भाषाक पाठक सभक लेल आवश्यक रूप सँ ओतेक रुचिकर नै भऽ सकैत अछि। एहि कारणें, खाहे विषय एकहि हो, मुदा चेतनाक स्तरमे अन्तर परिणाम बदलि सकैत अछि। एहि लेल अनुवादक लेल ई पकड़ब जरूरी अछि जे लक्षित भाषा -भाषी लोकक हित कतय अछि। एतेकमे एकटा अनुवादकक रूपमे हम आरो एकटा पाठ पढ़लहुँ। 'सॉयल एण्ड सिविलाइजेशन' पुस्तक भेजैत एचबीटी हमरा एकर अनुवाद करबा लेल कहलक। पुस्तक पढ़ि कऽ हमरा आश्चर्य भेल। पुस्तकमे सम्पूर्ण विश्व इतिहासक परिप्रेक्ष्यमे पर्यावरण आ संस्कृतिक बीचक सम्बन्ध पर चर्चा छल। ओना हम पुस्तकक केन्द्रीय विचार पकड़ि लेलहुँ, मुदा पुस्तक एहन छल जे हमर चेतनामे नीक जकाँ नै बैसल; एहि लेल हमरा बुझायल जे किंशाइत हम एकर संग न्यायपूर्ण अनुवाद नै कऽ पायब। एकटा योग्य अनुवादक खोजैत हमरा तल्लावज्जल पतञ्जलि शास्त्री मोन एला। ओ इतिहास पढ़ने छलाह आ सांस्कृतिक अध्ययन सँ पर्यावरण अध्ययनमे आयल छलाह। ओ पर्यावरण कार्यकर्ता आ कथाकार सेहो छथि। जखन हम हुनका सँ पूछलहुँ जे की ओ 'सॉयल एण्ड सिविलाइजेशन' क अनुवाद करता, तऽ ओ तुरत्ते तैयार भऽ गेलाह। ओ अनुवाद आब प्रगति पर अछि। जेना कोनो लेखकक हृदय चुनल गेल विषय सँ एकाकार होइत छैक, ओहिना अनुवादककेँ सेहो अपन हृदय मूल पाठक विषय सँ एकाकार करय पड़ैत छैक। सब अनुवादक सब विषयक अनुवाद नै कऽ सकैत छथि। किछु अनुवादक लेल किछु विषयक अनुवाद करब सहज भऽ सकैत अछि। जँ एहि सत्यकेँ स्वीकार कएल जाय, तऽ अनुवाद मात्र एकटा व्यावसायिक उद्यम नै रहि जायत जेना कि किछु लोक सोचैत छथि। अनुवादक प्रक्रिया दू टा भाषा आ संस्कृतिक बीच शब्दक एकटा पुल अछि। एहि लेल एकटा अनुवादक विश्व -नागरिक होइत अछि, जे सब भाषा, सब संस्कृति आ सब जीवन -अनुभव तथा ओकर सब विवेककेँ एक सूत्रमे पिरोयबाक प्रयास करैत अछि। ______________________________ करुणा टी. क मूल तेलुगु 'क्रूरता' क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। करुणा टी. क्रूरता [अनुवाद: जयलक्ष्मी पी. द्वारा तेलुगुसँ अंग्रेजीमे (मूल 'क्रोरत्वम' थायम्मा कथालु सँ, हैदराबाद, २००९)] जगिल्लो मूगिल्लो येक्कड़ा वरक्कड़े गुपचुप! जगिल्लो मूगिल्लो येक्कड़ा [जागल-सूतल कतहु (जग मे, मोन मे)/ जागल अवस्था आर मौनक बीचक स्थिति।] वरक्कड़े गुपचुप! [ततहि धरि चुपचाप, गुपचुप, गुपचुप, गुपचुप] [रहस्य आ खुशीक बीच एकटा "चुपचाप" रहबाक खेल चलि रहल अछि।] सैदम्मा देबाल दिस मुँह कऽ कऽ ठाढ़ छलीह, हाथ सँ मुँह झाँपने, अपन सखी सभक प्रतीक्षा करैत छलीह जे ओ सब चोरा-नुक्की खेलमे अपन -अपन ठाम नुका जाइथ। लड़की सभ अपन -अपन नुकायल ठाम पर चुपचाप रहलीह। खेल शुरू करबाक लेल कविता गओला कऽ बाद सैदम्मा घरमे प्रवेश कएलनि। चांगुर पर चलैत ओ सोझाँक तीन कोठली, अंगना आ फूसक भनसाघरमे ओकरा सभकेँ खोजलनि। ठीक ओहि समय जखन ओ अंगनामे वापस जाइत छलीह, ओ मंगाताईकेँ अपन नुकायल ठाम सँ निकलि कऽ भागैत देखलनि, ठीक ओहि देबाल धरि पहुँचबाक प्रयास करैत जतय सँ सैदम्मा सभकेँ नुकाबय लेल पुकारैत छलीह। सैदम्मा मंगाक नुकायल ठाम देखि लेलाक खुशीमे हाथ नचौलनि। ओ विजयक उल्लास सँ ओकर नाम पुकारलनि-मंगा आउट! मंगा आउट! सैदम्माक माय खेतमे मजदूरी करबाक लेल बाहर गेल छलीह आ घरमे कियो आरो नै छल, एहि लेल सैदम्माक सखी सभ चोरा-नुक्की खेल खेलऽ लेल जमा भेल छलीह। सुगुना, सैदम्मा आ मंगाताई एकहि उमेरक छलीह। विजया दोसर सभ सँ दू बर्ख पैघ छलीह। सुगुना आ मंगाताई तेसर कक्षामे छल, आ विजया पाँचममे। सैदम्माक माय ओकरा स्कूल नै पठेलनि कारण घरक काजमे मदति करबा लेल कियो आन नै छल। चारू सखी सभ नीक सहेली छलीह आ ओकर सभक घर सेहो ओही गलीमे लग-लग छल। रविवार भेला सँ सुगुना लेल खेलबाक दिन छल। ओ अपन मझिला भाइ सँ डराइत छलीह। एक बेर तऽ सैदम्मा संग खेलबाक कारण ओ ओकरा मारने सेहो छल, ओना बादमे हुनकर माय मारबाक लेल ओकरा तमसेलनि। 'सुगुना, हमरा शौच जेबाक अछि,' सैदम्मा अपन उछल -कूद रोकैत कहलनि। 'हमरा सेहो बहुत देरी सँ अछि,' सुगुना कहलक। 'एना अछि तऽ जा कऽ आउ,' विजया कहलनि। 'मंगे, की अहाँ सेहो हमरा संग नै आबय चाहैत छी?' सुगुना पुछलक। 'नै, हमरा तऽ नै लागल अछि, मुदा हम सेहो अहाँ सभ संग आबि सकैत छी, चलू,' मंगाताई कहलक। 'विजया चिन्नम्मा, अहाँ संग नै आयब?' ओ सब सम्बन्धी भेला कऽ कारण सुगुना सदिखन विजयाकेँ रिश्ता जोड़ि कऽ सम्बोधित करैत छलीह। 'चिन्नम्मा' माने मामी वा ओहि तरहक कोनो सम्बोधन। 'नै, हमरा नै अछि। अहाँ सभ जा कऽ आउ।' विजया कहलनि आ घर घुरि गेलीह। 'पानि लऽ कऽ आउ,' सैदम्मा सुगुना दिस घूमि कऽ कहलनि, जखन ओ एकटा पैघ बर्तन सँ अपन लोटामे पानि भरि रहल छल। 'हमरा पाछू -पाछू आउ, हम अपन लोटामे पानि भरि कऽ तुरत्ते अहाँ सभ संग आबि जायब,' सुगुना कहलक। 'जँ अहाँक माय हमरा सभकेँ एक संग देखि लेतीह, तऽ हमरा पर तमसेतीह। चलू, सरकारी गाछ सभक दिस चलय छी,' सैदम्मा कहलनि। 'हमर माय एतेक जल्दी नै औतीह। चलू,' सुगुना सैदम्माक हाथ पकड़ि कऽ कहलक। 'अम्मो, जँ अहाँक भाइ हमरा देखि लेत, तऽ हमरा मारत।' मंगाताई डर सँ कहलक। 'हमर भाइ अखन घरमे नै अछि। ओ बाहर गोली खेलि रहल अछि,' सुगुना उत्तर देलक। 'ठीक अछि, तखन चलू।' सखी सभ एक स्वरमे तैयार भेलीह। दौगि कऽ सुगुना अपन पानिक लोटा लऽ कऽ आयल। जखन ओ सब अपन लोटा हाथमे लऽ कऽ बाहर निकललीह, तऽ मंगाताई कहलक, 'सुगुने, अहाँक अंगनामे पैघ नीम आ तेतरिक गाछ अछि, अछि ने?' 'हँ!' सुगुना उत्तर देलक। 'मुदा ओ देखि कऽ हमरा डर लागैत अछि,' मंगाताई बाजि उठली। 'किएक?ओकर ठण्डा छाहरिक नीचाँ बैसि सकैत छी,' सैदम्मा कहलनि। 'ओ नै, कहैत छथि जे ओकर मोट डारि सभ पर भूत लटकल रहैत छैक,' मंगाताई कहलक। 'अम्मो, हम भूत सँ डराइत छी!' सैदम्मा हाथमे लोटा लऽ कऽ डर सँ जमि गेलीह। 'मुदा हम सदिखन ओतय जाइत छी। हम कहियो किछु नै देखलहुँ। हमर गाछ सभमे कोनो भूत नै अछि!' सुगुना कहलक, ओना मनहि मन भूतक गप सुनि कऽ ओहो डराय लागल छल। 'अम्मो, हम नै आबि सकैत छी!' मंगाताई दोबारा कहलक। 'हँ, हम सेहो नै आबि सकैत छी!' सैदम्मा सेहो बजलीह। 'नै, ओहन गप नै अछि। जँ हम सरकारी लगायल गाछ सभक बीच जायब, तऽ बैसलो रहब तऽ सुग्गर सभ हमरा धकेल देबय आयत आ हम सुग्गर सँ डराइत छी,' सुगुना निष्कर्ष निकाललक। 'जँ हम हाथमे लाठी राखब, तऽ ओ सब हमरा लग नै आयत,' सैदम्मा कहलनि। 'हम तीनू छी, छी ने? किछु नै हएत, चलू।' सुगुना आस्ते सँ विनती करैत कहलक। सैदम्मा आ मंगाताई चुपचाप ठाढ़ रहलीह, किछु नै कहलनि। 'हम सुनने छलहुँ जे दिनमे भूत नै देखि पड़ैत छैक!' सुगुना जोड़लक, बहुत दिन पहिने हुनकर दादी ओकरा जे कहने छलीह, से मोन कऽ कऽ। सैदम्मा आ मंगाताई डर सँ एक -दोसरक मुँह दिस ताकय लगलीह। ओकरा सभ दिस देखि कऽ सुगुना सेहो 'आउ' कहि कऽ आमन्त्रित करैत ठाढ़ रहि गेलीह। ओ नै बुझैत छलीह जे हुनका सभकेँ कोन प्रकारेँ विश्वास दियाउ जे भूत -प्रेत जकाँ किछु नै होइत छैक। ओकरा सभकेँ देखि कऽ दुःखी होइत ओ गाछ सभक बीच चलबा लेल तैयार भेलीह। 'ठीक अछि, चलू,' ओ अनिच्छा सँ कहलक। ई शब्द सुनि कऽ सुगुनाक मुँह राहत सँ खिलि उठल। तीनू गाछ सभक दिस ताकैत-ताकैत लग-लग चलय लगलीह आ गाछक नीचाँ बैसि गेलीह। जतेक देरी धरि ओ सब ताकैत रहलीह, गाछ सभ पर कियो भूत देखि नै पड़ल। 'हँ, अहाँ ठीक कहैत छी, लगैत अछि भूत नै अछि,' मंगाताई कहलक। 'हम नै कहने छलहुँ?' सुगुना उत्तर देलक। 'आइ राति चान चमकत। 'चाँदनी ढेर' खेल खेलब,' सैदम्मा कहलनि। 'ठीक अछि!' सुगुना तैयार भेल। 'हमरा सेहो शौच जयबाक अछि,' मंगाताई कहलक, जे ताधरि हुनका सभ सँ कनी दूर, हुनका सभ दिस मुँह कऽ कऽ ठाढ़ छल। 'तखन अहाँ सेहो एतहि बैसू,' सैदम्मा कहलनि। 'पानिक विषयमे?' मंगाताई पुछलक। 'हम अहाँ लेल अपन लोटा सभमे कनी पानि छोड़ि देब,' सैदम्मा ओकरा बतौलनि। 'सुगुने, अहाँ पाँच -बिन्दी बला रङ्गोली बनाबय बुझैत छी?' सैदम्मा धरती पर एकटा डँठल सँ पाँच -बिन्दी बला रङ्गोली बनाबैत पुछलनि। 'नै, हम नै बुझैत छी,' सुगुना उत्तर देलक। 'हम सेहो नै बुझैत छी,' मंगाताई कहलक। 'सैदे, हमरा शौच नै भऽ रहल अछि,' सुगुना कहलक। 'माथ पर खपरी राखि लेब तऽ भऽ जायत,' मंगाताई चारू कात खपरी खोजैत कहलक। 'अहाँ हमर माथ पर खपरी कइएक प्रकारेँ राखि सकैत छी?' सुगुना जोरसँ हँसि पड़ल। 'सत्ते, एहिना कऽ सकैत छी! ओना कऽ कऽ देखू!' सैदम्मा विश्वास सँ कहलनि। सुगुना दौगि कऽ एकटा ठीकरा उठौलक आ माथ पर राखि कऽ किछु देरी बैसल रहल। 'नै, हम नै कऽ सकैत छी,' ओ अखनो हँसैत कहलक। 'एहिना हँसब तऽ नै कऽ पायब,' सैदम्मा चेतावनी देलनि। 'कहल जाइत छैक जे लड़की सभकेँ जोर सँ नै हँसय कऽ चाही,' एकटा पैघ सयानी जकाँ मंगाताई तमसा कऽ कहलक। 'मुदा किएक?' सुगुना अखनो हँसैत पुछलक। 'हमहुँ नै बुझैत छी।' मंगाताई कहलक। 'हँसला सँ की हएत?' सैदम्मा पुछलनि। 'हम सेहो नै बुझैत छी।' मंगाताई स्वीकार कएलक। 'हँसला सँ की हएत?' सैदम्मा फेर पुछलनि। 'की जानी?' मंगाताई कहलक, मुदा जल्दी सँ सुगुना दिस देखि कऽ जोड़लक, 'अहाँक विजया चिन्नम्मा आ हम काल्हि शौच लेल गेल छलहुँ। तखन अहाँक विजया चिन्नम्मा लोटा सँ एक घोंट पानि पी लेलक।' 'एहन गप अछि? मुदा किएक?' सुगुना अचरज सँ पुछलक। 'जँ अहाँ हँसय चाहैत छी, तऽ जखन शौच लेल बैसू, तखन लोटा सँ एक घोंट पानि पी लिअ,' मंगाताई ओकरा विजया चिन्नम्मा कऽ कहल गप बतौलक। 'छी...छी... एहि लोटा सँ पीबैत अछि? गन्दा!' सैदम्मा कहलनि। 'हँ, गन्दा,' ओ अपन मुँह पर घृणाक भाव अनैत सहमति देलक। 'हम सप्पत खाइत छी, अहाँक विजया चिन्नम्मा एहिना पीबैत छल,' ओ अपन माथ पर हाथ राखि कऽ कहलक, कतौ ओ ओकर गप पर विश्वास नै कऽ लेथि। 'सत्ते?' सुगुना अविश्वास सँ दोबारा पुछलक। 'हम सप्पत खाइत छी!' मंगाताई अपन पूर्ण घाघरा एक हाथमे समेटि कऽ आ दोसर हाथ माथ पर राखि कऽ कहलक। "हुनकर दादी हुनकर माय सँ झगड़लीह: 'ओ दस बर्खक भऽ गेल अछि। अखन धरि अहाँ ओकरा सार्वजनिक रूप सँ बेपरवाह भऽ कऽ नै हँसब नै सिखा सकलौं?'" मंगाताई जोड़लक। 'हँसला सँ की हएत? सब हँसैत अछि, छै ने?' सुगुना अचरज कएलक जे एहि बात पर विजया चिन्नम्माक दादी ओकर माय सँ बड़का झगड़ा किएक कएलनि। 'हम की जानी?' ओ आगाँ कहलक, 'हम तखन सुनने छलहुँ जे अहाँक विजया चिन्नम्माक माय सेहो विजयाकेँ पीटने छलीह,' मंगाताई उदास मुँह बना कऽ कहलक। 'एहन गप अछि? कतेक खराब भेल!' सुगुना सेहो ओतबे उदास भऽ कऽ कहलक। 'हम ई गप नै सुनने छलहुँ,' सैदम्मा कहलनि। 'हँ, हम ई सुनने छलहुँ। 'अगिला बेर जखन शौच लेल जाइ, तऽ पानिक एक घोंट पी लेब, तखन हँसब नै'-ओ मारैत कहैत छलीह। बुझाइत अछि ओ विजयाकेँ धमकी सेहो देलनि जे अगिला बेर ओकरा लाठी सँ मारतीह, जखन धरि लाठी नै टूटि जाय।' मंगाताई कहलक। 'हमर माय हमरा एहिना कहियो नै मारैत छथि,' सुगुना उत्तर देलक। 'अहाँक विजया चिन्नम्माक माय सेहो अपन बेटीकेँ एहिना कहियो नै मारैत छलीह,' सैदम्मा कहलनि। 'हँ,' सुगुना तैयार भेल। 'तेँ जँ अहाँ हँसब नै, तऽ अहाँक माय कहियो अहाँकेँ नै मारतीह,' मंगाताई विजयाक माय मात्र हँसबाक कारणे ओकरा पीटने छलीह, ई निष्कर्ष निकालैत ओ जोड़लक। 'तखन की हम एहि लोटाक पानि एक घोंट पी ली?' सैदम्मा, जे पिटाइक डर सँ डरि गेल छलीह, पुछलनि। लोटामे देखि कऽ सुगुना कहलक, 'लोटामे पानि गन्दा अछि, छै ने?' 'हँ, अछि तऽ। मुदा हमर माय सभ सेहो हमरा सजा देतीह, छै ने?' मंगाताई पुछलक। 'ई पानि पीला सँ की कहियो हँसब नै होत?' सुगुना चिन्तित भऽ कऽ पुछलक, जे कतौ ई पानि पीला सँ ओ कहियो नै हँसि पाबय। 'हँ, एहन कहल जाइत छैक, सत्ते!' मंगाताई सेहो उदास भऽ कऽ कहलक। 'जखन मोन करैत छैक, तखन हँसबा सँ कोना रुकल जायत?' सुगुना अचरज कएलक। 'बुझाइत अछि, लड़की सभ लेल हँसब उचित नै अछि। ओकरा नै हँसबाक चाही,' मंगाताई घोषित कएलक। 'किंशाइत ओ सेहो अहाँकेँ विजया चिन्नम्मा जकाँ मारतीह।' सैदम्मा, विजया जकाँ मारि खयबाक तरीका सोचि कऽ कहलनि। 'सुगुने! अहाँ किएक कनैत छी?' सुगुनाकेँ कनैत देखि कऽ मंगाताई बड़ अचरज सँ पुछलक। 'हम नै जानै छी किएक, मुदा कननी आबि रहल अछि।' सुगुना अपन घाघरा सँ नोर पोंछैत उत्तर देलक। किंशाइत लड़की भऽ कऽ जन्मला कऽ कारण हुनका कहियो हँसबाक नै चाही। हुनका नै हँसबाक चाही, चाहे मोन कतबो करय। जँ ओ ई पानि पी लेत, तऽ दोसर सभ हँसत, मुदा ओ नै हँसि सकत। किंशाइत ओ मात्र दोसरकेँ हँसैत देखैत रहि जायत। ओ निश्चित नै छलीह जे हुनका किएक नै हँसबाक चाही। 'लड़की जन्म दिअ, आ हुनका हँसबा सँ मना करू'। ई कोन प्रकारक बन्धन अछि? ओ बुझि नै पाबि रहल छलीह जे एहि व्यवस्थाक विरोध कोना करी। ओ बाकी सब जकाँ खुलि कऽ हँसय चाहैत छलीह, मुदा जँ ओ हँसतीह, तऽ पिटाइ लागत। हे भगवान, ओ बाकी सब जकाँ खुलि कऽ हँसि सकितीह, मुदा ई पानि पीला सँ किंशाइत ओ जीवन भरि फेर कहियो हँसि नै पेतीह... एहन बहुत रास विचार ओकर छोट मोनमे आबि रहल छल। कोनो अचरज नै अछि जे ओ एना हाक्रोश कऽ कनैत छलीह। 'जँ अहाँ कानब, तऽ हमरो कननी आबि रहल अछि,' ओकर सखी सभ कहलक। 'ठीक अछि तखन। हम सभ मिलि कऽ पी ली।' एहिना कहि कऽ सुगुना जेना कोनो विष पी रहल हो, लोटा सँ पानिक एक घोंट कण्ठ सँ नीचाँ उतारि लेलक। कनैत -कनैत ओकर सखी सभ सेहो कनी -कनी पानि अपन मुँहमे धऽ लेलक। ____________________________ एन. गोपीक मूल तेलुगु 'नानीलु, द लिटिल वन्स' क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। एन. गोपी नानीलु: सूक्ति आ छोट कविता लेखनमे प्रयोग [नानीलु: द लिटिल वन्स] गोपीक 'नानीलु', छोट कविताक विधा सँ सम्बन्धित, आइ एकटा घर -घरक नाम अछि आ तेलुगु साहित्यिक जगतमे कविक विचार व्यक्त करबाक एकटा ताजा आ जीवन्त शैलीक पर्याय बनि गेल अछि। ई नव शैली प्रकाशनक समय सँ तेलुगु साहित्यिक जगतमे जे स्वीकार्यता प्राप्त कएलक, से अभूतपूर्व अछि। ई कविताक एकटा रूपक रूपमे व्यापक मान्यता पाबि लेने अछि, जे कवि आ पाठक दुनूक बीच अद्वितीय उत्साह उत्पन्न कएलक। ई बताबैत अछि जे एकर लेखक तेलुगु कवितामे सूक्ति लेखनक नव प्रारूप प्रस्तुत करबामे पथ -प्रदर्शक रहल छथि। एहि लेल ई अचरजक बात नै अछि जे गोपीक 'नानीलु' क अनुसरणमे लेखनक एहि रूपमे आइ धरि कम सँ कम डेढ़ सय प्रकाशित संग्रह भऽ गेल अछि आ से ओ २००८ मे अपन दशकीय उत्सव मनाबय मे देरी नै कएलक। 'नानीलु' तेलुगुमे सूक्ति वा कहबीक वर्णनक रूपमे स्थापित भऽ गेल अछि। तेलुगुमे शीर्षक सेहो ओकर संक्षिप्तता आ विचार तथा नामईक सघनताक लेल 'छोट बच्चा सभ' लेल एकटा स्नेहसूचक अभिव्यक्ति अछि। आगाँ, ई एकटा निश्चित नेनपन आ खुलापनकेँ सेहो देखबैत अछि जे कवि प्रत्येक सूक्तिक गम्भीर विचारक मूल तत्त्वकेँ नुकाबय लेल प्रयोग करैत छथि। एहि कारण अंग्रेजीमे शीर्षक 'नानीलु: द लिटिल वन्स'राखल गेल अछि। 'नानीलु' अपन संरचना आ संक्षिप्तताक दृष्टिसँ चौपाई (चतुष्पदी) मे लिखल गेल अछि। सब सँ महत्वपूर्ण गप ई जे मूल तेलुगुमे प्रत्येकमे एकटा निश्चित संख्यामे अक्षर रहैत अछि, जे निःसन्देह अंग्रेजी लक्ष्य भाषामे पूर्ण करब असम्भव अछि। प्रत्येक कविताक संरचना पर विस्तार सँ बजैत गोपी 'नानीलु: द लिटिल वन्स' क भूमिकामे ई कहने छलाह: "नानीलु छोट कविता अछि, बहुत छोट नै। ओकरामे सँ प्रत्येक नहिये अनावश्यक रूप सँ संक्षिप्त अछि, नहिये अत्यधिक संक्षिप्त विचार, नहिये ढील संरचना; तैयो ओकर संरचना हमर मोनमे २० -२५ अक्षरक नामईमे ढलल अछि। एतय, ओइमे कहियो २० सँ कम बा २५ सँ बेसी अक्षर नै होइत छैक। नानीलु अहाँक आ हमर अछि - तेलुगुमे 'ना' आ 'नी' क अर्थ 'हमर' आ 'अहाँक' होइत छैक, आ अन्तिम 'लु' कविता सभक बहुवचन देखबैत अछि - संक्षेपमे, ई सभ हमर अछि।" कनी बादमे अपन सूक्ति सभक संरचना पर विस्तार सँ कहैत ओ बजलाह: "जँ कियो दोसर पंक्तिक अन्तमे रुकैत अछि, तऽ व्यक्त अर्थ अपूर्ण अछि। ओहि समय पहिल भाग स्पष्ट नै होइत छैक जखन धरि दोसर भाग नै पढ़ल जाय। एकर अर्थ ई जे ओना संरचनामे समान आ दू टा वाक्य जकाँ देखि पड़ैत अछि, मुदा कविता विचारमे एक भेला पर पूर्ण होइत अछि।" आधुनिक गद्य कविताक तर्ज पर, जतय कोनो तार्किक अनुशासनक पालन करबाक आवश्यकता नै अछि, 'नानीलु' मे मुक्तक कविताक शास्त्रीय परम्परा, वेमनाक साहित्यिक परम्परा आ आधुनिक समयमे पाठक सभकेँ कविताक संक्षिप्तता लेल प्रशंसा करबाक दिस वापस अनबाक आवश्यकता सभ एकत्र अछि। मुदा संस्कृतमे शास्त्रीय मुक्तक कविता वा वेमनाक विपरीत, जे 'उपदेशात्मक' छल, नानीलु ओहि उपदेशात्मक परम्परा सँ हटि कऽ अछि। गोपी एहि सन्दर्भमे कहैत छथि: "गाथासप्तशतीमे प्राकृत कवि एहि ऊर्जाक शक्ति अपन सघन संक्षिप्ततामे ताकलक। रल्लपल्लि अनन्तकृष्ण शर्मा सेहो प्राचीन सूक्ति वा मुक्तक सभक तेलुगुमे अनुवाद लेल छोट कविताक प्रारूप चुनलनि, जेना कि अटवेलाडि, दगेगीति, कन्दम आदि। ओ शास्त्रीय सूक्ति कवितामे प्रकट सघनता, सूक्ष्मता आ अभिव्यक्तिक भाव सभकेँ अपन तेलुगु अनुवादमे स्थानान्तरित कएलनि।" 'नानीलु' क सूक्ति सभ चारि पंक्ति बला चौपाई अछि जाहिमे एकटा विचार दू टा दोहामे पसरल रहैत छैक। जेना गोपी पुस्तकक भूमिकामे कहने छलाह, दोहा एकटा विचारक दू टा इकाईक प्रतिनिधित्व करैत अछि। जखन कि पहिल इकाई वा दोहा एकटा विचार प्रस्तुत करैत छैक, दोसर पहिलक समर्थन करैत छैक, वा एकटा पूर्ण कविता एकहि विचार सँ बनि सकैत अछि। अधिकांश सूक्ति पहिल पैटर्नक अनुसरण करैत अछि, ओना समग्र अर्थ बुझबाक लेल दुनूकेँ एक संगे पढ़य पड़ैत छैक, आ बहुत बेर दोसर पंक्तिये पहिलमे रूपक, उपमा वा मानवीकरणक माध्यम सँ एकटा तमसायल संकेत दैत अछि। 'नानीलु' सभ सघन विचारक संक्षिप्त रचना अछि, जे अपन संक्षिप्तता, नेनपन आ अनुभव सँ संवाद करय बला अछि। ई पाठकक काव्य-संवेदनाकेँ आकर्षित करैत एकटा सत्य सँ साक्षात्कार कराबैत अछि, जे एक क्षणमे कविक बुद्धिमे 'समयक छोट-छोट बिन्दु' क रूपमे चमकि गेल। अपन सादगीमे प्रत्येक 'नानीलु' अपनामे पूर्ण अछि, जे जीवनक कोनो विचार, घटना वा स्थितिक प्रति प्रतिक्रिया अछि। ई गोपीकेँ अपन लगपासक जीवनक एकटा गहीर पर्यवेक्षकक रूपमे देखबैत अछि। हालक समयमे एहन संक्षिप्तता हाइकु सभक उद्भवमे एकटा ऊँच बिन्दु पर पहुँचल। हाइकुक सत्रह अक्षरक पैटर्नमे गोपी अनुभव करैत छथि जे ओकरामे सँ प्रत्येक एकटा 'स्नैपशॉट' वा 'स्थिर फोटोग्राफ' जकाँ अछि, जाहिमे गतिक अभाव आ प्रयोगक स्वतन्त्रताक कमी देखि पड़ैत छल। 'नानीलु' गोपीकेँ २० -२५ अक्षरक सीमामे गति करबाक ई स्वतन्त्रता प्रदान कएलक। सी.पी. ब्राउनक वृत्त वा 'नियत छन्द' आ उपवृत्त वा 'परिवर्तनशील छन्द' क बीच गोपी छोट कविता लेखनक लेल उपलब्ध स्थान देखलनि। मुदा 'नानीलु' केँ विस्तारित हाइकु बुझबाक भूल नै करबाक चाही। प्रत्येक कविता पढ़बाक अर्थ ई पहिचानब आ स्वीकार करब अछि जे वैह धारणा सेहो सम्भव अछि, आ किछु मामिला सभमे, वैह एकमात्र धारणा अछि। स्वतन्त्रता मात्र धारणामे नै, वरन् ओहि धारणाक काव्यात्मक रूप सँ सञ्चार करबामे सेहो अछि। गोपी किछु निअम आ शर्त निर्धारित कएलनि जे ओहि काव्य स्वतन्त्रताकेँ सीमित सेहो करैत अछि आ विचारकेँ कवितामे मुक्त सेहो करैत अछि। एहि अन्तरमे कविताक तनाव निहित अछि। 'नानीलु' जीवन सँ लेल गेल छवि सभक एकटा बहुरूपदर्शक अछि। ई विशेषता 'नानीलु' केँ तत्काल सफलता दिऔलक आ गोपीकेँ तेलुगु साहित्यिक जगत आ विभिन्न भाषा सभक अनुवादक सभक बीच प्रिय बना देलक। ई कहब अतिशयोक्ति नै हएत जे गोपी एकटा आधुनिक तेलुगु कवि छथि, जकर 'नानीलु' क व्यापक रूप सँ कइएक भाषा सभमे अनुवाद भेल अछि। थोड़बे समयमे 'नानीलु' प्रारूप ने केवल व्यापक प्रशंसा प्राप्त कएलक, वरन् तेलुगु साहित्यिक जगतमे गहीर जड़ि जमा लेलक आ राताराती बहुत लोककेँ कविमे बदलि देलक। आन किछु, जे अपन अधिकारमे कवि छथि, प्रारूप कऽ संग प्रयोग कऽ कऽ नव मोड़ आ विषय सभक आगू अन्वेषण करबाक लेल, नव सञ्चार मोड-उदाहरण लेल, एकटा मजगूत तेलंगाना बोलीमे क्षेत्रीय तेलंगाना संस्कृति, भावना, राजनीति, आक्रोश, क्रोध, वर्ग, जाति, क्षेत्रक नाम पर वर्चस्वक प्रतिरोध, संगहि परिवार आ समाजमे स्त्रीक स्थिति पर विचार करबाक लेल एकर प्रयोग कएलनि। गोपी 'नानीलु' क लगातार बढ़ैत आउटपुट देखि कऽ लगैए जे ओ गर्वित पूर्वज बनि कऽ रहि रहल छथि। एहि क्रममे निम्नलिखित 'नानी' अन्नवरम देवेन्द्रक एकटा उदाहरण अछि जे 'नानीलु' क पिता -निर्माताक रूपमे गोपीकेँ स्वीकार करैत छथि: भिजबैत-भिजबैत 'नानीलु' फूलि गेल। पिता गोपी चकित छथि! _____________________________ एन. गोपीक 'नानीलु: द लिटिल वन्स' सँ अंश (मूल तेलुगु सँ अंग्रेजीमे पी. जयलक्ष्मी द्वारा अनूदित) शोक नै करू टूटल माटिक बर्तन लेल। धरती तइयारी करैत अछि फेर सँ आकार देबा लेल। ओना चलैत देखि पड़ैत अछि लोलक चलैत नै अछि। चलब नीक अछि मुदा चलब सँ बेसी थम्हब नीक अछि। की बरखा कहियो नोर पोंछैत छैक? की सूर्य घामकेँ भाप बनाबैत छैक? बंगला उगि गेल तालाबक तलमे। एतेक मकबरा तालाब सभक लेल! दहिना हाथ श्मशानमे नै जरल। कारण? ई एकटा कलम धारण करय बला हाथ अछि। पात सभ की बुझैत छथि गाछक दुःख? गाछ की बुझैत छथि पात सभक सरसराहटि! ओ उघैत अछि शब्दकोश। तैयो नै बाहर करैत अछि एकटो विचार -कण! पोखरि सभ जतय कमल नै खिलैत अछि, कागज अछि बिना कविताक। चोट एकटा नव भाषा बाजैत अछि। ठीक भेला कऽ बाद एकर स्वर बदलि जाइत छैक! हमरा तरस अबैत अछि समुद्र पर। जतेक ओ ऊँच उठैत अछि, ओही ठाम वापस खसैत अछि। हुनकर पएरक अँगूठीक टनकार सँ हम जानि गेलहुँ ओ दुःख सँ भरल छथि! सृष्टिक गाथा लेल दुनू स्रष्टा छथि। मुदा कॉपीराइट मात्र हुनकर अछि! अश्वेत सभक जीवन भरल अछि लयबद्ध झटका सँ। कोनो अचरज नै लय हुनका लेल जीवन अछि! जीवनमे गोता लगा कऽ समुद्री सीप सभ भेटल। किछु मोती अछि आ किछु, नोर! हुनका जागब अछि सूर्यकेँ जगाबय लेल! आराम हुनका लेल मात्र हुनका सुतला कऽ बाद अछि! समय नोर नै पोंछैत छैक, एकर हाथ नै छैक। समय नोर नै बहबैत छैक, एकर आँखि नै छैक। विचार सभ शब्दक वस्त्र नै पहिरि सकैत छथि। कम सँ कम ओ सियौन सँ तऽ टूटि जायत! ई की अछि? पन्ना सभ गुनगुनाबय लागल अछि। की अक्षर सभकेँ ज’ड़ लागि गेल छै? अहाँ एतेक, एतेक किएक कनैत छी? मृत्यु तखन गर्व अनुभव करत! खदीर बाबूक मूल तेलुगु “हमर चित्रकला गुरु” क अंग्रेजी अनुवाद-जयलक्ष्मी पोपुरी; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। खदीर बाबू मोहम्मद खदीर बाबू, तेलुगुमे लघु कथाक लोकप्रिय लेखक छथि। हुनकर जन्म १९७२ मे नेल्लोर जिलाक कावलीमे भेल। ओ दस बर्ख धरि लोकप्रिय तेलुगु अखबार 'आन्ध्र ज्योति' मे फीचर पत्रकारक रूपमे काज कएलनि। ओ वर्तमानमे एकटा आरो तेलुगु अखबार 'साक्षी' क समाचार सम्पादक छथि। हुनका श्रेयमे तीन टा कथा संग्रह अछि-'दरगामिट्टा कथालु', 'पोलेरम्मा बण्डा कथालु', 'पप्पुजान कथालु'-आ संगहि हिन्दी फिल्म संगीत पर सेहो काज कएलनि अछि। ओ १९९९ मे अपन कथा "ज़मीन" लेल 'कथा अवार्ड' प्राप्त कएलनि। ओ मैसूर सँ 'भाषा सम्मान पुरस्कार' आ 'चासो पुरस्कार' सँ सेहो सम्मानित भऽ लेने छथि। हमर चित्रकला गुरु... [मूल तेलगु: खदीर बाबू] हमर चित्रकला गुरु हमर भगवान छथि। कोनो स्कूलमे वरिष्ठ छात्र सन कोनो गर्मजोश आ कोनो दुष्ट नै भऽ सकैत अछि। की! अचरज होइत छैक जे हम एकहि क्षणमे ककरो गर्मजोश आ दुष्ट, दुनू केना कहि सकै छी? हम बतायब। जखन हम आठम कक्षामे छलहुँ, तऽ दसम् कक्षामे दू टा ईसाई लड़का छल- एबेनेजर आ डेविड। ओना ओ सब एतेक नमगर छल आ ओकर सभक जाँघ एतेक मोट छल, तैयो ओ सब स्कूलमे मात्र हाफ -पेंट पहिरि कऽ अबैत छल। नव -भर्ती छात्रक रूपमे, हम गाछ सभक नीचाँ झिझकैत चलैत रही, छै ने? तखने ई वरिष्ठ छात्र सभ हमरा लग आबि कऽ हमर नाम -ठेकानाक विषयमे पूछैत छल। अपन प्रश्न सभक जवाब सँ सन्तुष्ट भऽ कऽ, ओ हमरा बगलमे बैसा कऽ कहैत छल, "हम अहाँ सभकेँ पहिने बता दैत छी कारण अहाँ नै बुझैत छी। एतय गणित पढ़बै लेल दू टा मास्टर छथि। पिच्चैया मास्टर जखन अबैत छथि तऽ नीक पढ़बैत छथि मुदा 'नोट्स' नै दैत छथि। जखन मधुसूदनराव मास्टर अबैत छथि तऽ ढेर 'नोट्स' दैत छथि मुदा एक शब्दो नै पढ़बैत छथि। एहि लेल जखन मधुसूदनराव मास्टर अबैत छथि, अहाँ चुपचाप दोसर मास्टर लग प्राइवेट ट्यूशन लिअ, आ जखन पिच्चैया मास्टर अबैत छथि, दोसर मास्टर लग ट्यूशन लिअ। तखन अहाँ सभकेँ कोनो परेशानी नै हएत," ओ हमरा सलाह दैत छल। देखू, ओ कतेक नीक अछि! ओतहि नै ठाढ़ भऽ कऽ ओ आगाँ कहैत छल, "तेलुगु लेल दू टा छथि-एक नरसैया मास्टर आ दोसर अन्नपूर्णा टीचर। जखन नरसैया मास्टर अबैत छथि, पाठ हएत 'दान वीर सूर कर्ण'। छत्तीस रील। बहुत शानदार। मुदा जँ अहाँ शोर करब, तऽ अहाँक कान ठेंगा सँ एतेक पिटल जायत जे गुलाब जामुन जकाँ फूलि जायत। ओ बहुत नीक पीटैत छथि। मुदा जँ अन्नपूर्णा टीचर अबैत छथि, तऽ पाठ बिल्कुल फुसफुसाहट सन, आ जखन ओ पीटैत छथि, सेहो ओतबे कोमल।" एहिना ओ जानकारी दैत रहैत छल। ई सब सुनि कऽ जँ हम सोचैत छलहुँ जे एहन दू प्रकारक मास्टर हेब कतेक नीक हएत, तखने शुरू होइत छल ओकर असली शरारत। "देखू! अहाँ सभकेँ लगैत हएत जे हम ई सब किएक कहि रहल छी? मात्र अहाँ सभ संग एकटा वास्तविक रहस्य साझा करबाक लेल। हम चारि टा बहुत महत्वपूर्ण शब्द बुझैत छी। हमर वरिष्ठ सभ हमर एहि शब्द सँ प्रताड़ित रहथि आ एतेक दिन धरि सावधानी सँ नुका कऽ रखला कऽ बाद, हम आब अहाँ सभ संग साझा कऽ रहल छी। अहाँ सभकेँ आब ई हृदय सँ लगा कऽ काल्हि अपन कनिष्ठ सभकेँ देबाक अछि। एतय ई रिवाज अछि," ओ एहिना कहि कऽ हमरा दिस ताकि रहल छल। जखन हम ओ शब्द सभ सुनबाक लेल उत्सुकता देखौलहुँ, ओ दाँत काटि कऽ खिसियाइत हँसि कऽ ओ शब्द सभ बतौलक: अनन्त गाथा, पनामा ब्लेड, दाँत नोचल जायत, आ दिव्य निद्रा। हमरा बादमे पता चलल जे ई हमर मास्टर सभक उपनाम छल। सब बच्चा हमर मास्टर सभकेँ एहि नाम सँ पुकारैत छल। एक मास्टरक मुहावरा छल 'अनन्त गाथा'। पढ़बैत -पढ़बैत ओ दोहराबैत छल, "जे हो, अहाँ ई अनन्त गाथा पचा नै सकब।" वा नै तऽ, "ई अनन्त गाथा जकाँ प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण अछि।" आरो किछु नै, तऽ कहैत छल, "जँ हम आब उठी, तऽ सबकेँ पीठ पर अनन्त गाथा खरोंचि देब।" एहि लेल ओ 'अनन्त गाथा' छल। दोसर मास्टरक मुहावरा एहि शब्द पर निर्भर छल-'पनामा ब्लेड'। सत्ते कहूँ तऽ 'पनामा' नामक कम्पनीकेँ एतेक प्रचार आरो कियो नै देने हेतैक। ओ धमका कऽ कहैत छल, "अरे! बजार सँ पनामा ब्लेड आनि कऽ तोरा सभकेँ बेकार बना देब।" वा हमरा चेतावनी दैत छल, "जँ काल्हि नोट्स लिखि कऽ नै आयब, तऽ अहाँ पर पनामा ब्लेड चला देब..." "अहाँ एहि सँ नै बचब। पौने आनामे पनामा ब्लेड कीनि कऽ...." पाठ एहि तर्ज पर चलैत छल। एहि कारण हुनकर नाम 'पनामा ब्लेड' पड़ल। एकटा आरो मास्टर छलाह, बहुत सज्जन। बच्चा सभकेँ चेतावनी दैतो ओ सज्जनता सँ दैत छलाह। "जँ कोलाहल करब, तऽ... बस ई... हाथमे ई बेंत देखैत छी? एहि सँ अहाँक दाँत नोचि देब," ओ धमकी दैत छलाह। 'दाँत नोचल जायत' हुनकर मानक अभिव्यक्ति छल। एहि कारण ओ अभिव्यक्ति हुनकर उपनाम बनि गेल। अहाँ सोचि रहल हएब जे 'दिव्य निद्रा' मास्टरक कहानी की हएत। दुपहरियामे भोजनक छुट्टी कऽ बाद, ई मास्टर चाहे कोनो कक्षामे जाइत छलाह, ठीक पाँच मिनट लेल ओंघी लैत छलाह। आँखि झपकबा सँ पहिने, ओ बच्चा सभकेँ चेतावनी दऽ कऽ घोषणा करैत छलाह, "सुनू! अहाँ सोचैत छी ई निद्रा अछि? नै। ई दिव्य निद्रा अछि। हम आँखि बन्द कऽ सकैत छी मुदा अपन तेसर नेत्र सँ अहाँ सभ पर नजरि राखैत छी।" एहि लेल हुनकर उपनाम 'दिव्य निद्रा' पड़ल। ठीक अछि। मनुक्खक उतार -चढ़ाव हेब स्वाभाविक अछि। सब तऽ हमर गुरु छथि आ हमरा पाठ पढ़बैत छथि। हुनका एहन भाषा-सहायक सभक प्रयोग करब स्वाभाविक छनि। की एकर अर्थ ई अछि जे हम हुनका हुनकर अपन शब्द सँ स्थायी रूप सँ नामकरण कऽ सकैत छी? ठीक अछि, कऽ लेलहुँ, तऽ की एकरा धरोहर रूपमे कनिष्ठ सभकेँ देबाक जरूरत अछि? जँ कहल जाय, "की ई अनुचित नै अछि?" तऽ ओ वरिष्ठ सभ तर्क दैत छल, "हाई स्कूलमे एहन मनोरंजनक बिना काज नै चलैत छैक।" मुदा एहन वरिष्ठ सभ, वा ओ कनिष्ठ सभ जे हुनकर चापलूसी करैत छल, वा हमर जकाँ नव -भर्ती छात्र सभ-हमर विश्वोदयमे एकटा मास्टर छलाह जे बिना ककरो 'हमर' वा 'अहाँक' भावनाक, सभ गोटेकेँ प्रेम करैत छलाह, आ जेकरा सब पसन्द करैत छल आ हुनकर चारू कात जमा होबय चाहैत छल। ओ छलाह हमर चित्रकला मास्टर। ओना हुनकर असली नाम जी. नागेश्वरराव छल, मुदा हुनका कियो ओहि नाम सँ नै बुझैत छल। हम हुनका मात्र 'चित्रकला मास्टर' कहि कऽ सम्बोधित करैत छलहुँ। जँ हमर समय-सारिणीमे चित्रकलाक दू टा पीरियड रहितैक, तऽ हम ओहि कक्षाक कतेक प्रतीक्षा करैत छलहुँ! ओहि कक्षामे अंकगणित आ अंग्रेजीक ऊब नै रहैत छल, गृहकार्यक पीड़ा नै रहैत छल। बेंत सँ पिटाइयो नै होइत छल। हमर काज छल बस मोन लगा कऽ चित्र बनाबैत रहब-कमल फूल, माटिक घैल, जोड़ा हंस, मेज पर मोमबत्ती, एकटा लालटेन, एकटा काँच आम.... जखन हमर चित्रकला मास्टर ओ चित्र सभ आसानी सँ बोर्ड पर चाक सँ बना दैत छलाह, तऽ ओहि छोट -छोट चित्रकेँ अपन चित्रकला कऽ कॉपीमे उतारबाक प्रयत्नमे हम चारि टा इरेजर घसिया दैत छलहुँ, छह टा पेन्सिल खतम कऽ दैत छलहुँ आ तीन टा शीट कागज कारी कऽ दैत छलहुँ। ओ टेढ़-मेढ़ आकार सभ पर कहियो किछु नै कहैत छलाह। आधा घण्टामे सभक काज देखि कऽ, तखन ओ असली पाठ शुरू करैत छलाह। कुर्सी छोड़ि कऽ मेज पर चढ़ि जाइत छलाह, पएर लटकबैत बैसि जाइत छलाह, आ तखन गप करब शुरू करैत छलाह। "आब सुनू! हमर एकटा लोक जानकार अछि, नाम येंकय्या। ओ माटिक भट्ठामे काज करैत बारह रुपैया दिन कमाबैत छल। बारह रुपैया कमायब कतेक कठिन! रौद आ भट्ठाक गुमार! तैयो की ओ अपन काज छोड़ैत छैक? नै। कारण हुनका एकटा बेटा छनि, जे आब आठम कक्षामे अछि। बेटाकेँ नवम, फेर दसम् पढ़बाक छैक। मात्र पढ़ब नै, पासो करबाक छैक। परीक्षा पास कऽ कऽ सफल आ उपयोगी बनबाक छैक। एहि कारण येंकय्या एतेक मेहनत करैत छथि। एहन मेहनती बाप कऽ बेटाकेँ कतेक मेहनत सँ पढ़बाक चाही?" ओ कक्षाक सभ दिस देखि कऽ प्रश्न करैत छलाह। "बहुत मेहनत सँ पढ़बाक चाही, सर," हम सब उत्तर दैत छलहुँ। "मुदा ओ एहिना नै करैत छैक, छै ने? स्कूल छुटला पर ओ सिनेमा देखय चलि जाइत छैक। ठीक अछि, ओकरा जाय दियौ। दोसर लोक अछि पेदपावनि बस स्टैण्ड पर सेशैया। ओ अदरक बला चाह बेचैत घूमैत रहैत अछि। आइ-काल्हि जखन एतेक तरहक कॉफी, चाह उपलब्ध अछि, की कियो अदरक बला चाह पीबैत छैक? तैयो ओ चाह बेचि कऽ जिबैत अछि। मुदा किएक? हुनका एकटा बेटा छनि। ओ बेटा एहि कक्षामे बैसि कऽ हमर गप सुनि रहल अछि। ओ बेचाराक इच्छा छनि जे हुनकर बेटा मात्र गपक लोक नै, वरन् कर्मठ लोक बनय। एहन गरीब लोकक पुत्र भऽ कऽ कतेक नीक ढङ्ग सँ मेहनत करबाक चाही?" ओ फेर सबकेँ देखि कऽ पुछलनि। "बहुत नीक ढङ्ग सँ मेहनत करबाक चाही, सर," हम सब बच्चा सभ दोहरौलहुँ। "नै करबाक चाही? मुदा ओ एहिना नै करैत छैक, छै ने? हँ, हम सब येंकय्या, पुल्लय्या आ कोंडय्या कऽ बच्चा छी। हमर बाप सभ हमरा पढ़बै लेल मजदूरी करैत छथि। अहाँ सभकेँ दसम् पास करबाक अछि। एकर मतलब अहाँ सभकेँ अखनहि सँ कठोर परिश्रम करबाक अछि। हम अहाँ सभकेँ ई गप जानि कऽ कहि रहल छी जे अहाँ सभ मेहनत करब।" ओ हमरा सभकेँ बुझबैत रहलाह। ओ छलाह हमर चित्रकला मास्टर। हम सब हुनका बहुत पसन्द करैत छलहुँ कारण ओ हमरा जीवनक नीक गप बतबैत छलाह। एहि नीक गप सभक अलावे हमर चित्रकला मास्टर अलग ढङ्ग सँ सेहो बाजि सकैत छलाह। हुनका सुनू। "आब, हमर स्कूलक पाछू की अछि?" ओ पुछलनि। "जवाहर भारती कॉलेज अछि, सर," हम उत्तर देलहुँ। "ओहि कॉलेजमे के अछि, हमर प्रिय लड़का सभ?" ओ पूछैत रहलाह। "ओहि कॉलेजमे लड़का-लड़की दुनू छथि, सर," हम उत्साह सँ एक संग बजलहुँ। "ओहि लड़का सभकेँ छोड़ू... लड़की सभकेँ देखू। एहि बुरबक लड़का सभक हाई स्कूलमे पढ़ैत, अहाँ लड़की सभक मामिला बिसरि गेल छी, छै ने लड़का सभ? सत्ते, ओहि लड़की सभक सुन्दरता आ ओ रोमांच, जे अहाँक कक्षामे ओहि लड़की सभ कऽ भेला पर होइत, एहि बुरबक लड़का सभक स्कूलमे कतय भेटत? जँ अहाँ ओहि सब आनन्दक अनुभव करय चाहैत छी, जँ अहाँ ओहि नाम चोटी वाली लड़की सभक पाछू चलय चाहैत छी... तऽ अहाँ सभकेँ की करबाक अछि?" ओ हमरा सँ पुछलनि। "हमरा दसम् पास करबाक अछि सर," हम फेर सँ बजलहुँ। "शाबाश! दसम् पास करू, फेर 'इण्टर' मे जाउ, ओहि कॉलेजमे दाखिला लिअ, लड़की सभक बगलमे बैसि कऽ खुशी -खुशी पाठ सुनू, हुनकर रोंइया सँ बहैत फूलक सुगन्धक साँस लिअ, आ पैघ भऽ कऽ नीक नौकरी करू।" एहिना कहि कऽ ओ पाठ समाप्त करैत छलाह। हफ्ताक सभ पीरियडमे, हमर बेचारा चित्रकला मास्टर, हमर स्कूलक ओहि सब बुरबक बच्चा सभमे -जकरा पढ़ाइमे कोनो रुचि नै छल- ओकरा सभकेँ जानवर जकाँ हाँकैत प्रेरित करैत छलाह, जाहि सँ ओ सब दसम् पास कऽ सकय। हुनकर विषयक सेहो परीक्षा होइत छल, मुदा किएक तँ ओकरा लेल कोनो अङ्क निर्धारित नै छल, एहि लेल कियो नै बुझैत छल जे ओ हमरा की पढ़बैत छलाह; मुदा हम बुझैत छलहुँ। हमर कुमारस्वामी मास्टरक कार्यालयमे हुनकर कुर्सीक पाछू, सभ साल दसम् परीक्षाक उत्तीर्ण प्रतिशत देखबैत एकटा चार्ट अछि-'९५, '९६, '९७... ओहि चार्टमे हमर चित्रकला मास्टरक भूमिका आन सब मास्टरक भूमिकाक बराबर अछि। एहि कारण, हमर चित्रकला मास्टरक उल्लेख एबेनेजर आ डेविड सन वरिष्ठ छात्र सभकेँ सेहो अपन गाल थपथपा कऽ, जीह किटकिटाबैत, बहुत श्रद्धा सँ क्षमायाचना करैत ई कहबा लेल मजबूर कऽ देलक, "भगवान सर्वशक्तिमान! की ओ हमर भगवान नै छथि?" सत्ते, हमर चित्रकला मास्टर हमर भगवान छथि। (अनुवादकक टिप्पणी: मूल कहानी 'पोलेरम्मा बण्डा कथालु' सँ। तेलुगुक रायलसीमा बोली एकरा एकटा मजगूत स्थानीय स्वाद दैत छैक आ एकर सूक्ष्म हास्य पाठकक बीच एकरा तुरत्ते सफल बना देलक। ई कथा सभ लेखकक अपन बच्चाक स्मृतिक रूपमे अछि।) वेम्पल्ले शरीफक मूल तेलुगु “जुम्मा” क अंग्रेजी अनुवाद-जयलक्ष्मी पोपुरी; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। वेम्पल्ले शरीफ शेख मोहम्मद शरीफ, जे वेम्पल्ले शरीफ नाम सँ बेसी जानल जाइत छथि, आन्ध्र प्रदेशक कडप्पा जिलामे जन्मल छलाह। ओ हैदराबादमे साक्षी टीवीक मुख्य उप-सम्पादक छथि। ओ पहिने आकाशवाणीमे रेडियो जॉकीक रूपमे काज कएने छथि। ओ आइ धरि कविता आ कथाक कएक संग्रह लिखि लेने छथि। जुम्मा [मूल तेलुगु: वेम्पल्ले शरीफ] हमर मायक निर्दोष मुँह हमर आँखिक सोझाँ अभरि अबैत अछि, चाहे आँखि खुजल हो वा बन्द। ओहि मुँह परक भय हमरा सताबैत अछि। एखनहुँ भय सँ भरल ओ शब्द, जे ओ कहने छलीह, हमर कानमे गूंजैत रहैत अछि। ओ दिन शुक्र छल, मक्का मस्जिदक हृदयमे बम विस्फोट भेल छल। चारू कात हाहाकार, टीवी चैनल सभ पर व्याकुल स्वर, पाथरबाजी, दहशत आ रक्तपात। हम काजमे व्यस्त छलहुँ, तखने फोन बजल। उठबैतहि हम देखलहुँ जे दोसर छोर पर हमर माय छथि... ओहि समय हुनकर फोन सुखदायक आ सान्त्वनादायक लागल। हम 'माय...' कहबा सँ पहिनेहि, "हमर बेटा...!" हुनकर चिन्ता सँ भरल अबाज आयल। "अहाँ ई बुझैत छी, माय...?" हम पूछलहुँ। "हँ, हमरा पता चलल... एखने... अहाँ सावधान रहू...! आशा अछि अहाँ आइ मस्जिद नै गेल छी, हमर बेटा...." हम सुनलहुँ जे ओ डर सँ पूछि रहल छथि। जीवनमे पहिल बेर ओ एहि गप सँ खुश छलीह जे हम मस्जिद नै गेलहुँ। ओहि विचार सँ हमरा पी़ड़ा भेल। की एहन कहैत छथि हमर माय? की ओ हमरा सँ ई पूछि रहल छथि? की हमर माय एतेक डराय गेल छथि? हमर मोन विचार सँ फाटि गेल आ स्मृतिक बाढ़ि मे बहि गेल। __________________ हमर माय शुक्रक नमाजसँ भक्तिपूर्वक प्रेम करैत छलीह। ओ किछुओ छोड़ि सकैत छलीह, मुदा शुक्रवारक नमाज नै; एहि लेल ओ ओहि दिन हमरा घरमे रहय नै दैत छलीह। हमर बाबूजी सेहो जँ रुकबाक जोखिम उठबैत छलाह, तऽ हुनकर डाँट सँ नै बचि पाबैत छलाह। हुनका जकाँ पैघ मनुक्ख, टोपी हाथमे लऽ कऽ चुपचाप मस्जिदक रस्ता पकड़ि लैत छल। हमर घरमे काम -चोर, भागल फिरय बला बच्चा, हमर बाबूजी आ हम सदिखन मस्जिद जाय सँ बचबाक बहाना खोजैत छलहुँ। हमर बाबूजी भोर सँ सीना तानि कऽ कहैत छलाह जे शुक्र अछि तऽ नमाज पढ़य जायब, मुदा समय अबिते बहाना बना दैत छलाह, "हमरा ओ काज अछि... आ ई..." आ मस्जिद जाय सँ बचि जाइत छलाह। आ हम अपन दाँव लगाबैत छलहुँ, "अरे! हम तऽ एखने माटिक ढेरी पर लगही कऽ कऽ आयल छी..." हमर माय लेल कोनो विकल्प नै रहैत छल। तैयो, ओ हाथमे ठेंगा लऽ कऽ अबैत छलीह, अंगनामे हमरा पर चिचियाइत छलीह, नीक जकाँ पिटबाक लेल। एहि लेल हम सोचलहुँ जे ओहि मारि सँ नीक अछि नमाज पढ़ि लेनाइ। हमर आलस्य मस्जिद पहुँचै धरि हवा भऽ जाइत छल। ओतय पहुँचि कऽ हम खुशी-खुशी आन बच्चा सभ संग घुलि-मिलि जाइत छलहुँ आ सभ सम्भव वरदान मांगैत छलहुँ- जे हमर बाबूजीकेँ खूब पाइ भेटय, मायक स्वास्थ्य ठीक रहय, हम नीक जकाँ पढ़ि सकी। हमर माय हमरा बुझबैत छलीह, "हम मात्र वरदान मांगय लेल मस्जिद नै जाइत छी हमर बेटा... हमरा नमाज पढ़बाक अछि... अल्लाह पर विश्वास रखबाक चाही। ओ हमर कल्याण देखैत छथि।" जखन आन बच्चा सभ हुनका शिकाइत करैत छल जे हम प्रार्थना कऽ समय बकवास करैत छी, तऽ ओ हमरा आस्ते सँ डाँटि कऽ कहैत छलीह, "हमर बेटा, प्रार्थना कऽ समय बाजब सँ बचू... कम सँ कम आन विचारकेँ मोनमे आबय नै दिअ। सदिखन अपन मोन अल्लाह पर केन्द्रित राखू, चाहे अहाँक बगलमे बम सेहो किएक नै फूटि पड़य।" किंशाइत ओहि समय ओ नै सोचैत छलीह जे कहियो सत्ते मस्जिदमे बम फूटत। एहि लेल ओ ओतेक आत्मविश्वास सँ गप कऽ सकैत छलीह। आब जखन सत्ते बम विस्फोट भेल अछि, तऽ ओ अनुभव कएलनि जे ई कतेक भयावह भऽ सकैत अछि। हम हुनकर पीड़ा नै देखि सकैत छी। ओ भय सँ भरल छथि। ओ नमाज सँ डराइत छथि। ओ अल्लाह सँ सेहो डराइत छथि। "माय..." हम गम्भीर स्वरमे कहलहुँ। "हमर बेटा...." ओ दोसर छोर सँ कहलनि। "अहाँ आइ मस्जिद नै गेल छी, छै ने हमर बेटा?" ओ फेर पुछलनि। हमर हृदय भरि आयल। शब्द नै भेटल। कण्ठ सूखि गेल। हमरा घुटन भऽ रहल छल। विचार सभ ज्वार जकाँ भीतर उठि रहल छल। हम एकटा पैघ खिंचाव अनुभव कएलहुँ, जे हमरा अतीतमे खींचि रहल छल। _____________________ शुक्र कऽ दिन मस्जिद सँ घुरि कऽ हम अपन मायकेँ सभ गप बतबैत छलहुँ। हम हुनकर सोझाँ कनी नमाज पढ़ि कऽ देखबैत छलहुँ। हमरा नमाज पढ़ैत देखि कऽ ओ तुरत्ते हमरा कोरामे लऽ लैत छलीह, चूमैत छलीह आ आशीर्वाद दैत छलीह, "अल्लाह सदिखन अहाँक रक्षा करथि, हमर बच्चा...." हम तखन प्रण करैत छलहुँ जे हम कहियो नमाज नै छोड़ब। सभ शुक्रवार ओ नमाजक महत्त्व बतबैत छलीह आ मस्जिद जाइ लेल जोर दैत छलीह। ओ कहैत छलीह जे एहि दिन कुरान रचल गेल; एहि दिन मनुक्ख अपन कर्मक हिसाब दैत छैक; आ जँ एहि दुनिया सँ प्राण छोड़बाक हएत, तऽ ओहो एहि दिन हएत। हमर मोन तुरत्ते बुझि गेल जे शुक्रवार मुसलमान सभ लेल किएक शुभ अछि। जखन कि आन सब बच्चा शुक्रवारक दिन स्कूलमे दिन भरि रहैत छल, हम असगर मध्याह्न अवकाशमे स्कूल सँ निकलि पड़ैत छलहुँ; मस्जिद जेबाक बहाना बना कऽ, अपन स्कूल बैग झुलबैत घर वापस चलि जाइत छलहुँ। हमर माय स्वयं शिक्षक सँ गप कऽ कऽ ई व्यवस्था करौने छलीह। आन बच्चा सभ देखि कऽ जरि उठैत छल जे हम एतेक जल्दी घर पहुँचि जाइत छी। ओ सोचैत छल जे हम कतेक भाग्यशाली छी आ कल्पना करैत छल जे काश ओहो मुसलमान रहितय। ओकर सभक ईर्ष्यालु मुँह देखि कऽ हम मनहि मन खूब हँसैत छलहुँ। हम हाथी पर चढ़ल सन मगन भऽ कऽ घर घुरैत छलहुँ। हमर माय ओहि पावन समय लेल हमरा तैयार करैत छलीह- गरम पानि सँ कनिये कालमे नहबैत, आँखिमे सुरमा लगबैत, रोंइयाक लटकें टोपीक नीचाँ दबबैत। हम, जे बेसीकाल हाफ -पेंट पहिरैत छलहुँ, ओहि दिन उज्जर कुर्ता -पाजामामे चमकय लागैत छलहुँ। आन स्त्री सभ हमरा देखि कऽ हाथ घुमा कऽ नजरि उतारैत कहैत छलीह, "शुक्रवारक सुन्दरता! की अहाँ सम्पूर्ण शुक्रवारक तेज नै देखि रहल छी!!" शुक्रवारक साँझ घर-घरक खुशी देखय जोग रहैत छल; दरगाहक फ्रेम कएल चित्र सभक सोझाँ दीप जरैत; अगरबत्तीक सुगन्ध वातावरणमे पसरि जाइत; स्त्री सभ माथ झाँपने अपन -अपन घरमे जल्दी -जल्दी आवा -जाही करैत; आ दोकानक खिड़की पर नारिकेलक दाम चढ़ि जाइत। एतय शुक्रवारक दिन दरगाहक चित्र पर नारिकेल चढ़ाबय बला अनुष्ठानक उल्लेख नै करब असम्भव अछि। किएक तँ हमर बाबूजी ई अनुष्ठान करबाक तरीका नै बुझैत छलाह, ओ गली -गली सँ भऽ कऽ हजरतकेँ घर लऽ अबैत छलाह। हमर माय हुनका ई सीखय लेल पाछू पड़ल रहैत छलीह। "अहाँ कलमा वा ग़ुस्लक अन्तर धरि नै बुझैत छी... अहाँ संग बियाह करबा लेल हम अपन माय -बापकेँ जिम्मेदार मानैत छी... कोनो नीक वर नै भेटला पर हमरा अहाँ संग बियाह कऽ देलनि। आब बच्चा सभ सेहो अहाँक लक्षण धऽ लेने अछि..." ओ एहिना कहि कऽ हुनका संग बहस करय लगैत छलीह। "अरे अहाँ... ई प्रताड़ना असहय भऽ गेल अछि...." तामस सँ भरल, ओ हाँफैत -हाँफैत मस्जिद धरि जा कऽ हजरतकेँ घर लऽ अबैत छलाह। हाथ -मुँह धोयला कऽ बाद, हजरत नारिकेल चढ़ाबय बला अनुष्ठान सम्पन्न कऽ कऽ, बाहर खाट पर बैसि कऽ अपन नाम दाढ़ीमे कँघी करैत छलाह। हमर माय ओहि बीच फूटल नारिकेलक गरी सँ गुदा सावधानीपूर्वक बारीक खण्ड काटि कऽ चीनी मिलबैत छलीह। फेर ओ मिश्रण अंगनामे जमा सब लोकमे बाँटि दैत छलीह। ओ सब सँ अन्तमे हमरा लग अबैत छलीह, हमरा लेल दू -तीन खण्ड बचा कऽ राखने रहैत छलीह। हम शिकाइत करैत छलहुँ, "हमरा लेल मात्र एतेक बाँकी अछि?" "हमरा सभकेँ भगवानकेँ चढ़ाओल चीज सँ लोभ नै करय कऽ चाही हमर बेटा... ओकरा दोसर सभमे बाँटि देबाक चाही, भले हमरा लेल किछु नै बचय," ओ हमरा मनबैत छलीह। नारिकेलक हिस्सा नै भेटबाक हमर निराशा हुनकर शब्दक मिठासमे बिला जाइत छल। बादमे हमर बाबूजी आ हजरत देर साँझ धरि गप करैत बैसल रहैत छलाह। हम दोसर कपड़ा पहिरि कऽ, पासक निर्माण स्थलक बालुक ढेरी पर सखा सभ संग खेलऽ लेल दौगि जाइत छलहुँ। ओहि दिन ई सभ मोन पड़ला पर हमर आँखि सँ नोर खसि पड़ल... "हमर बेटा, अहाँ किछु बाजैत किएक नै छी? की भेल? हमरा डर लागि रहल अछि... बाजू...." हमर माय आग्रह करैत रहलीह। ओना हमरा हैदराबाद एना तीन बर्ख भऽ गेल अछि, मुदा एको दिन नमाज नै पढ़लहुँ। काज करबाक समय उनटा हेबाक कारणे नमाज की होइत छैक, से हम बिसरि गेलहुँ। "माय..." हम मुश्किल सँ शब्द खोजैत उत्तर देलहुँ। "माय, हम हैदराबादमे कहियो मस्जिद गेलहुँ जे अहाँ एतेक डेरा रहल छी?" हम पूछलहुँ। हमरा अपन शुरूआती दिन मोन आयल, जखन ओ हमरा संग नग्र घुमय कऽ वादाक कारण हमरा लग हैदराबाद आयल छलीह। मुदा हैदराबाद पहुँचला पर विरोध कऽ कऽ कहलनि, "हम कत्तौ नै जाय चाहैत छी... हमरा पर पाइ किएक खर्च करब?" हम हुनकर मोनक गप बुझैत छलहुँ। ओ हमरा पर बोझ नै बनय चाहैत छलीह, मुदा हम हुनकर विरोधकेँ अनसुना कऽ देलहुँ। हमर आग्रह पर ओ एक बेर बाहर निकललीह। हाथ पकड़ि कऽ हुनका सड़क पार करबामे मदति कएलहुँ। एक बेर खैरताबादमे सड़क पार करैत समय हुनकर आँखि नम भऽ गेलनि। "अहाँ कतय जन्मलहुँ... कतय पललहुँ -बढ़लहुँ... आ की बनि गेलहुँ? एहि पैघ नग्रमे कोना रहैत छी? अहाँ बहुत पैघ भऽ गेल छी..." ओ हमरा आशीर्वाद दैत कनैत छलीह। "बच्चा रहैत हम अहाँकेँ बस सँ दादीक गाम लऽ जाइत छलहुँ। हम अहाँक हाथ कसि कऽ पकड़ि कऽ राखैत छलहुँ जे कतौ अहाँ हरा नै जाइ। आब अहाँ एतेक पैघ भऽ गेल छी जे हमर हाथ पकड़ि कऽ हमरा बस पर चढ़ाबय लऽ जाइत छी।" कहैत -कहैत हुनकर कण्ठ भरि आयल। ओ खोंखी केलनि, "खुस...खुस..." साँस लेबा लेल संघर्ष करैत। जखन ओ अतीत मोन पाड़ैत छलीह, हम हुनका सान्त्वना देलहुँ आ नोर पोंछलहुँ। "माय... हम एतय रहबा लेल आयल छलहुँ। हम साहस बटोरलहुँ आ बहुत कठिन समय सहलहुँ। जखन बीमार पड़लहुँ, असगरे सुई लेबा लेल गेलहुँ, ई सब माय... ई सब अहाँक आशीर्वाद सँ भेल, छै ने? ओना एहि विशाल नग्रमे हमर कोनो अपन नै अछि, मुदा हम असगर अनुभव नै करैत छी।" हुनकर नोर पोंछला पर ओ आशीर्वाद देलनि, "हमर बेटा, अहाँ जुग -जुग जीबू।" समस्या ओकर बाद शुरू भेल। "सभ शुक्रवार... की अहाँ नमाज पढ़ैत छी हमर बेटा?" ओ पुछलनि। "नै माय। हमरा कतय समय अछि, कहू तऽ?" "अहाँकेँ कहियो समय नै भेटत हमर बेटा, मुदा अहाँकेँ पढ़ब अछि, एकरा टालब से नै चलत। मुसलमान भऽ कऽ जन्मल छी, तऽ कम सँ कम सप्ताहमे एक बेर तऽ पढ़बाक चाही," ओ कहलनि। आगाँ कहलनि, "धनी -गरीब नमाजमे एक संग अबैत छथि। ओ एक कान्ह सँ दोसर कान्ह सटा कऽ नमाज पढ़ैत छथि। एहि दिन एकर पुण्य बेसी होइत छैक। एक बेर हरा गेल, तऽ ओ पुण्य कहियो वापस नै भेटत। एहि कारणे धनी लोक, लाखो टकाक लेन -देन करय बला, अपन व्यवसाय अलग राखि कऽ नमाज पढ़ैत छथि। एतऽ धरि जे दोकानदार, नुकसानक परवाह नै करैत, दोकान बन्द कऽ कऽ नमाज पढ़ैत छथि। आ ओ गरीब, जे दैनिक रोटीक जुगाड़ नै कऽ पाबैत छथि, ओहो नमाज पढ़ैत छथि।" हम डराय गेलहुँ जे कतौ हमर माय फेर सँ वएह पुरान कथा शुरू नै कऽ देथि। विषय बदलैत हम कहलहुँ, "अहाँ बुझैत छी, एतय निजाम नवाब सभ द्वारा बनायल एकटा पैघ मक्का मस्जिद अछि...?" "एहन गप अछि? की अहाँ हमरा ओतय नै लऽ जायब?" ओ उत्सुकता सँ पुछलनि। "एक बेर ओतय गेलहुँ, तऽ अहाँ हमरा नमाज पढ़बाक लेल मजबूर नै करब, छै ने?" हम विनती कएलहुँ। "हमर बेटा... ई अहाँक कमी अछि... हम अहाँक भलाई लेल सलाह दैत छी।" "ठीक... चलू!" हम ओतय सँ सोझे बस सँ मस्जिद गेलहुँ। ओ चारमीनार देखलनि जे मस्जिदक मीनार सँ सेहो ऊँच छल। "अम्मा, ओ चारमीनार अछि। पहिने ओतय चलू... वा मस्जिद?" हम पूछलहुँ। "चारमीनारमे की अछि हमर बेटा?" "ओतय किछु नै... जइ दिससँ ओकरा देखू एक्के रंग देखा पड़ैत छैक। मुदा अहाँ ऊपर चढ़ि सकैत छी। ऊपर सँ मक्का मस्जिद साफ देखा पड़ैत छैक। आब देरी भऽ रहल अछि। चारमीनार बादमे देखब... आब मस्जिद देखी।" ओ तैयार भेलीह। मस्जिदक भीतर शान्ति छल। ठण्डा, आरामदायक आ विशाल। आगन्तुक सभक भीड़ बेसी छल। महिला सभ सामान्यतया मस्जिदमे प्रवेश नै करैत छथि, एहि लेल माय झिझकलीह। मुदा किछु बुरका वाली महिलाकेँ पहिने सँ ओतय देखि ओ भीतर पएर रखलनि। साड़ीक आँचर माथ पर खींचैत ओ कहलनि, "हम अपन बुरका सेहो लऽ कऽ अबितहुँ तऽ नीक रहितैक।" घर सँ निकलैत समय ओ मँगने छलीह, मुदा हम हुनका पहिरबा लेल मना कऽ देने छलहुँ। कारण अपन ठाम पर ओ ओकरा हटा नै सकैत छलीह, एहि लेल हम चाहैत छलहुँ जे एहि नव ठाम पर कम सँ कम ओहि कष्ट सँ तऽ बाचथि। मुदा अपन समुदायक स्त्री सभक बीच, बिना बुरकाक ओ अपनाकेँ उघार जकाँ अनुभव करय लगलीह। जखन हम हुनका भय सँ डेग रखैत देखलहुँ, तऽ हमरा पछतावा भेल जे बुरका पहिरबाक अनुमति नै देलहुँ। तैयो अपन बचावमे हम कहलहुँ, "हम कोना जानितहुँ माय जे हम मस्जिद देखय जायब?" ओ किछु नै कहलनि। "कोनो बात नै... आउ।" हम हुनका भीतर लऽ गेलहुँ। ओ हमर पाछू -पाछू एली। हम अपन चप्पल एक कात खोलि देलहुँ, जाहि सँ बादमे आसानी सँ भेटि जाय। बहुत लोक मस्जिदक सीढ़ी पर बैसल छलाह। ओकरामे सँ किछु परबा संग खेलाइत, ओकरा दाना खुआबैत छलाह। किछु परबा उड़ि गेल आ किछु फेर आबि कऽ बैसि गेल। किछु परबा कने दूर पानिक हौजक कातमे बैसल एतय -ओतय ताकि रहल छल-सत्ते एकटा मनमोहक दृश्य छल। माय मुग्ध भऽ कऽ ओकरा देखैत रहलीह। ओकर बाद ओ हमर पाछू -पाछू सीढ़ीक ऊपर चबूतरा धरि एली। चारू कात देखैत ओ बजलीह, "हमर बेटा, एक बेरमे एतय कतेक लोक बैसि कऽ नमाज पढ़ि सकैत छथि?" "नै जानी माय... कइएक हजार, हमरा लगैए। रमजानक दिन लोक चारमीनार धरि बैसि कऽ नमाज पढ़ैत छथि।" हम उत्तर देलहुँ। "हँ, टीवी पर देखौने छल।" माय जोड़लनि। ओ नीक जकाँ पहिचानि गेल छलीह, हम मनहि मन सोचलहुँ। चारू कात घुमबैत अन्ततः हुनका मस्जिदक पाछू लऽ गेलहुँ। पाथरक टाइल सभमे चिरै -चुनमुनीक बीट सँ खूब दाग लगल छल। परबा सभ देवारक दरारिमे अपन खोंता बना लेने छल। मीनारक दीवार छूबैत आ श्रद्धा सँ आँखिमे लगबैत ओ भाव -विभोर भऽ गेलीह। "एतय नमाज पढ़ब पुण्यक काज अछि, हमर बेटा," ओ कहलनि। एहि बेर हमरा कोनो खौंझी नै भेल। "हँ। सत्ते, हमरा कम सँ कम एक बेर एतय नमाज पढ़बाक चाही।" हम मनहि मन कहलहुँ। मक्का मस्जिद हमरा रहबाक ठाम सँ बहुत दूर अछि। शुक्र आ पाबनि -तिहारक दिन एतेक दूर बस सँ यात्रा करब थका दैत अछि। तैयो, हम अगिला बेर असगरे एतय नमाज पढ़बाक संकल्प कएलहुँ। "हम अगिला हप्ता एतय नमाज पढ़य लेल आयब माय," हम कहलहुँ। ओ खुशी सँ भरि गेलीह आ खुशी आ स्नेह सँ हमरा दिस देखलनि। "एहन ठाम सभ पर नमाज पढ़बाक सौभाग्य ककरो-ककरो भाग्यमे होइत छैक," ओ कहलनि। "एतेक दूर रहैत, की अहाँक बाबू एतय नमाज पढ़य आबि सकैत छथि? अहाँ एहि नग्रमे छी... एतय नमाज पढ़ू," ओ कहलनि। "मात्र एतहि नै, जतहि कोनो पुरान मस्जिद हो, नमाज पढ़ू। बहुत गण्यमान्य लोक ओतय नमाज पढ़ने हएताह। एहन ठाम सभ पर नमाज पढ़ला कऽ बाद पछताबय नै पड़त। अल्लाह अहाँकेँ खुश राखथि।" हम मस्जिदमे जेना सम्मोहित भऽ गेल छलहुँ। हम ध्यान सँ हुनकर गप सुनैत रहलहुँ। बादमे बाहर निकलैत हम सब किछु बिसरि गेलहुँ। हम मस्जिद जेबाक अपन वादा कात कऽ देलहुँ। ओहि साँझ हम मायकेँ बस स्टैण्ड पर विदा कएलहुँ। ओना एकर बाद दू टा शुक्र आएल, मुदा ओ शुक्र सन नै रहल। आब बम विस्फोट कऽ समाचार सुनि कऽ हम शुक्र सँ डराइत छी। "माय... अहाँ कम सँ कम ई तँ बुझैत छी जे बम कोन मस्जिदमे फूटल?" हम फोन पर पूछलहुँ। "कोन मस्जिदमे, हमर बेटा?" ओ उत्सुकता सँ पुछलनि। "अहाँ हैदराबाद एक बेर आयल छलहुँ, मोन अछि? हम ओहि समय अहाँकेँ एकटा मस्जिदमे लऽ गेल छलहुँ... मक्का मस्जिद... बड़का बला? ठीक ओतहि, ओहि मस्जिदमे... रक्तपात भेल माय... लाश खसल... अहाँ कहने छलहुँ जे ओतय नमाज पढ़य बला धन्य भऽ जायत... ओहि मस्जिदमे माय..." हम कहलहुँ। "बहुत छोट बच्चा... ओकर देह चारू कात शोनित (शुनीत) सँ लथपथ... परबा सभ सेहो मरि गेल..." अनियन्त्रित दुःख सँ नोर बहि पड़ल। हम नोर पोंछय लेल बाहर गेलहुँ। हमरा कनैत सुनि कऽ हुनकर हृदय टूटि गेल। ओहो कानय लगलीह। हम जारी राखलहुँ, "माय, नै कानू... बाबूजी सोचताह जे हमरा किछु भऽ गेल अछि... हुनका कहि दियौक जे हम ठीक छी।" कनैत -कनैत ओ हमरा सँ पुछलनि, "फोन जुनि काटब हमर बेटा।" "जल्दी कहू, माय।" "अहाँ घुरि आउ... गाम घुरि आउ... हमर गप मानू।" "हमरा किछु नै भेल अछि माय।" "बाहर जुनि जाउ... हमर बेटा।" "ठीक अछि माय।" "ओहि मस्जिद लग जुनि जाउ हमर बेटा।" हमर हृदय फेर फाटय बला छल। हम तुरत्ते फोन काटि देलहुँ, हुनका वचन दैत जे हम ओहि मस्जिद लग कहियो नै जायब। मुदा विचार सभक बाढ़ि बढ़ैत रहल। कतेक भिन्न! काल्हि सँ कतेक परिवर्तन! की एहन कहैत छथि हमर माय? की ओ हमरा ओहि मस्जिद लग नै जाय लेल कहि रहल छथि? की अपन सन्तानक प्रेमक आगाँ भगवान आन भऽ गेल अछि? की अपन कोखिक मिठास सँ बढ़ि कऽ खुदा फीका लागय लागल अछि? की नमाज अस्वीकार करबाक योग्य भऽ गेल अछि? हमरा क्षमा करू अल्लाह! हमरा क्षमा करू! आरो कोनो शुक्र रक्तपात नै हो... औज़ बिल्लाही... मिनाशशैतान... निर्रजीम... बिस्मिल्लाह इर्रहमान निर्रहीम...! (माय सभकेँ समर्पित, जे हमर माय जकाँ मक्का मस्जिद विस्फोट कऽ बाद बदलबा लेल विवश भेलीह... लेखक) _______________________ शब्दावली: • सुरमा: आँखिमे लगाबय बला काजर। • दरगाह: भक्त सभ द्वारा सन्त सभक मकबरा पर बनाएल संरचना। • कलमा: इस्लामक अनुयायी द्वारा खुदा आ पैगम्बर मुहम्मद पर अटूट विश्वास व्यक्त करय बला पवित्र वचन। • ग़ुस्ल: दफनाबय सँ पहिने मृतककेँ कराओल जाय बला अन्तिम स्नान। • हजरत: कोनो पवित्र आ श्रद्धेय व्यक्ति। ____________________________ रामा राव वी.वी.बी. क मूल तेलुगु “अभिशप्त” क अंग्रेजी अनुवाद-लेखक द्वारा स्वयं; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर। रामा राव वी.वी.बी. डॉ. वी.वी.बी. रामा राव (ज. १९३८) एकटा बहुमुखी आ विपुल लेखक, कवि, उपन्यासकार, अनुवादक आ शिक्षाविद् छथि। हुनका ५० सँ बेसी पुस्तकक श्रेय छनि। ओ अंग्रेजी साहित्यमे पीएचडी छथि आ विजयनगरमक महाराजा कॉलेजमे पढ़ौने छथि। सेवानिवृत्ति कऽ बादो ओ अपन साहित्यिक गतिविधि जारी रखने छथि। हुनकर रचना अनेक प्रतिष्ठित प्रकाशन सभ आ अनलाइन पत्रिका सभमे प्रकाशित भेल अछि। अभिशप्त मूल तेलुगु: रामा राव वी.वी.बी. ठण्डा हवा सरसराइत तेजी सँ बहि रहल छल। भारी बरखा भऽ रहल छल। चक्रवात आयल छल। अदहा राति बीति गेल छल। घनघोर अन्हारमे हमर माथ परक रुमाल कोनो खास सुरक्षा नै दऽ रहल छल। सुनसान सड़क पर हमर संघर्ष करैत कपड़ा सभ बहुत अबाज कऽ रहल छल। स्ट्रीट लाइट काज नै कऽ रहल छल। हम अपन कोठली धरि तऽ पहुँचि गेलहुँ, मुदा ताला टटोलि कऽ नै पाबि सकलौं। थकल हृदय मुट्ठी भरि 'एड्रेनालिन' छोड़ि देलक आ हम ठंढा घाम सँ तर भऽ गेलहुँ। हम केबाड़ धकेललहुँ आ किएक तँ ओ भीतर सँ बन्द नै छल, चरमराबैत खुजि गेल। हम भीतर गेलहुँ आ बत्ती जरौलहुँ। अचरजक गप ई जे बत्ती तेज इजोत सँ जरि उठल; कम सँ कम ई तऽ बचल छल। हम राहतक साँस लेलहुँ। "हम्म-" फर्श सँ एकटा कराह सुनाइ पड़ल। शर्मा फर्श पर बिछल चादर पर सुतल छल। बच्चा सँ हम सब एक संगे गाबैत, खेलाइत आ बादमे कॉलेजक दिनमे एकहि कोठली साझा करैत पैघ भेल छलहुँ। सिनेमा घर, रेस्टोरेण्ट आ कॉफी क्लब सभमे हम सब युवावस्थामे प्रवेश कएलहुँ। शर्मा बस थोड़ेक सँ चूकि गेल; ओना नै तऽ ओहो मेडिकलक अन्तिम बर्खमे रहितैक। "पहिने कपड़ा बदलू आ तौलिया सँ केश सुखाउ। अहाँकेँ जल्दी सर्दी लागि जायत! अहाँ कहिया अयलहुँ? ताला कोना खोललहुँ?" "हमरा लग चाभी अछि। अहाँ ताला सेहो नै बदलने छी। जखन हम खोलि रहल छलहुँ, हमरा फेर सँ छात्र जकाँ अनुभव भऽ रहल छल।" ओकर गप सुनैत -सुनैत हम ध्यान सँ ओकर मुँह देखलहुँ। सयो प्रश्न हमरा परेशान कऽ रहल छल। "पहिने केश सुखाउ..." ओ एहिना कहैत खोंखय लागल। हम ओकर मुँह देखलहुँ आ ओकर खोंखी सुनलहुँ; दुनू हमर मोनमे बहुत सन्देश पठा रहल छल। ओकर स्वास्थ्य खराब छल। शर्मा सदिखन एकटा नीक मनुक्ख रहल अछि, जे अपन आदर्शकेँ मात्र शब्द धरि सीमित नै राखैत छल। ओ सदिखन ई सुनिश्चित करैत छल जे ओकर शब्द ओकर छोट -पैघ सभ कर्ममे देखा पड़य, आ एहि प्रक्रियामे ओ सदिखन स्वयं फँसि जाइत छल। ओकरा फेर सँ नौकरी सँ हाथ धोबय पड़ल हएत। ओ बहुत देरी सँ किछु नै खैने हएत। हप्ता सँ ओ दाढ़ी नै बनौने छल। कमीजक कान्ह पर लागल छेद बता रहल छल जे ओ कतेक बदहाल अछि। मुदा आँखि सभ पहिने जकाँ चमकदार छल। बहुत देरी धरि ओकर आँखिमे देखब सहज नै छल। ई एकटा छद्म आशीर्वाद रहल जे हमर केबाड़ पर ताला खोलैत काल कियो ओकरा ठाढ़ नै देखलक। फेर खोंखीक एकटा उग्र विस्फोट भेल। हमर प्रशिक्षण आ अनुशासन हमर अन्तरात्माक गतिकेँ नियन्त्रित कएने राखलक। आस्ते -आस्ते हम कपड़ा उतारय लागलहुँ, कमीज हेंगर पर टाँगि कऽ देबाल कऽ काँटी पर लटका देलहुँ। हम तौलिया लपेटि लेलहुँ आ पतलून उतारि कऽ दोसर काँटी पर टाँगि देलहुँ। "अहाँक पोस्टिंग कतय अछि आब?" खोंखी थमतहि ओ पुछलक। "परिधि पर। काल्हि हम टी.बी. अस्पताल जा रहल छी। हम सिनेमा देखय गेल छलहुँ। शो खतम भेला कऽ बाद ओ सब गप -सप करैत रहल, हम ओतय सँ निकलि अएलहुँ।" "एकटा अज्ञात बन्धन अछि, जे अहाँकेँ लगातार अपन कर्ज चुकाबय लेल प्रेरित करैत अछि।" ओ एकटा फिल्मी गीतक अंश गुनगुनौलक, जे एहि भावकेँ प्रभावशाली रूप सँ व्यक्त करैत अछि। ओ ऋणी-ऋणदाताक सम्बन्धमे विश्वास करैत छल जे लगातार जन्म -जन्मान्तर चलैत रहैत छैक। "ओ बकवास बन्द करू! हम एहन सब अन्धविश्वासक विरोध करैत छी।" हम ओकरा अपन सामान्य अवस्थामे वापस आनबा लेल कहलहुँ। "अहाँ बहुत कोमल भावना राखैत छी!" हमर मुँह लाल भऽ गेल हएत; हम लजा गेलहुँ। "अहाँ खाट पर सूतू।" "हम एहिमे अभ्यस्त छी!" "ई गेरुआ लऽ लिअ।" "हमरा एकर जरूरत नै अछि। हमरा लग ई अछि, एहि सँ काज चलि जायत!" - ओ चादरक नीचाँ पुरान अखबारक ढेरी देखौलक। "अहाँ ईस्ट कोस्ट वा कोणार्क एक्सप्रेस सँ अयलहुँ?" हम पूछलहुँ। हमर मोनमे प्रश्न छल ओकर पत्नीक ठिकानाक विषयमे। ओहो बुझैत छल, एहि लेल ओ उत्तर देलक। "ओ आब सातम मासमे अछि आ ओकर भाइ सभ प्रसव लेल ओकरा अपन घर लऽ गेल। एहि खोंखीक आरो एकटा कारण ईहो अछि।" "बधाई हो! अहाँ फेर अपन नौकरी खतरामे धऽ देलहुँ?" हम बिना घुमौने सोझे पूछलहुँ। जखन हम दुनू एक -दोसर सँ गप करैत छी, तखन लुकाब -छुपाब बेकार अछि। "पहिने केश सुखाउ। जँ अहाँकेँ सर्दी लागि गेल, तऽ समस्यामे पड़ि जायब।" ओ कहलक। ओ सदिखन एहिना रहल अछि, हमर लेल चिन्तित। हम बत्ती मिझा देलहुँ। ____________________________ छह मास पहिने हम हैदराबादमे ओकर घर खोजने छलहुँ। हमरा लग घरक नम्बर छल मुदा ओकरा खोजब सहज नै छल। अन्ततः जखन हम ओ घर पाबि कऽ भीतर गेलहुँ, ओ बहुत प्रसन्न भेल। "भैया आबि गेलाह, महालक्ष्मी!" ओकर अबाजमे खुशी छल। "नमस्ते! हम करुणाकर राव!" "करुणा, अहाँ पहिने नहा -धो कऽ आउ, हम नीक जकाँ गप करब! महालक्ष्मी, अहाँक भोजन महाकाव्यक भारद्वाजक भोज सँ होड़ करबाक चाही।" "आब भोजक गप नै करू। ओतय हमर प्रतीक्षा भऽ रहल अछि। हम एक घण्टामे वापस घुरय कऽ वादा कएने छलहुँ आ अहाँक घर खोजबामे चालीस मिनट लागि गेल।" "मूर्ख जुनि बनू! एहि राति वापस जा कऽ की करब? अहाँक पत्र पओला कऽ बाद मात्र हम नै, अहाँक वादिना (भौजी) सेहो अहाँक प्रतीक्षा कऽ रहल छलीह।" हम ओकर भावनाकेँ आहत नै करय चाहैत छलहुँ, एहि लेल हम भोजन करबा लेल ठाढ़ भऽ गेलहुँ। ई मात्र एक कोठलीक मकान छल। ई नै अछि जे हम निर्धनता सँ अपरिचित छी। हम बस गरीबी रेखा सँ कनी ऊपर छी। हम मेडिकल कॉलेजमे छी, मुदा दरिद्रता सदिखन हमर संगी रहल अछि। हुनकर घरमे मात्र एकटा छोट मटियातेल बला स्टोव छल जे ओ अपन पतिक दवाई बनाबय लेल प्रयोग करैत छलीह। "अहाँ चिड़िया जकाँ चुगैत छी! एकटा उभरैत डॉक्टरकेँ एहि तरहें खेबाक चाही?" ओ कहलनि जखन हम भोजन कऽ रहल छलहुँ। ओ गप करैत रहलीह, जखन कि ओ सदिखन हमरा किछु बेसी खाय लेल प्रेरित करैत रहलीह। मुदा हम महिला सभक बीच बहुत लजाइ छी। कोनो ने कोनो तरहें भोजन खतम कएलहुँ। "हमरा क्षमा करू भौजी, ओ सब एक संगे बदमाश लड़का सब अछि आ हमरा आसानी सँ माफ नै करत। हमरा आब चलबाक अछि।" ओ हमरा संग बस स्टॉप धरि आयल आ हमरा कनेक समय गप करबाक मौका भेटल। "आब प्रबन्धन होशमे आयत। हम ओकरा कएक बेर नीचाँ देखौने छी, एक -दू बेर नै। हम सर्वसम्मति सँ यूनियनक नेता चुनल गेलहुँ आ बोर्डक बैठकमे ओकरा सोझे सवाल कएलहुँ। प्रबन्ध निदेशक अवाक् रहि गेल। आब ओ जानि गेल जे हम की चीज छी। आखिरकार ई अहाँक भीतर हेबाक चाही आ अहाँक लेखनीमे पर्याप्त शक्ति। अन्यायक सामना करब आ लड़ब बहुत पैघ बात नै अछि।" "ई सब ठीक अछि। मुदा एहि लड़ाइमे के जीतत? कनी स्वार्थी सेहो बनू: मात्र अपना लेल नै, वरन् हमर भौजी लेल सेहो। अपन वीरता देखबै लेल हबामे जुनि कूदू।" हम उचित समय देखि कऽ विनती करय लागलहुँ। "हम अपन परवाह नै करैत छी। ओकरा सभकेँ कम सँ कम न्यूनतम मजदूरी देबय पड़त। ओ सब सदिखन हमरा धोखा दैत रहल, कम पाइ दैत, मीठ गप सँ बहकबैत रहल। ई एहिना नै चलत, कम सँ कम जखन धरि हम संग छी। एतेक शोषण हम कहिया धरि सहब?" हम चुप रहलहुँ। हमरा चिन्ता सताबय लागल जे राजधानीमे ओ जे किछु कमाबैत छल, से ओकर लेल पर्याप्त होइत हएत की नै। "दरमाहा कऽ अलावे कहानी सभक चित्रण कऽ कऽ हम दुनू लेल पर्याप्त कमा लैत छी। हमर लेल चिन्ता जुनि करू। हमर ससुर बेटीकेँ बीच -बीचमे किछु पाइ पठा दैत छथि। हम नीक नौकरीक खोजमे सेहो छी। अहाँक संग की समाचार अछि? एक बर्ख सँ कम समयमे अहाँक हाथमे डिग्री हएत। अहाँ कोनो डॉक्टर लड़की खोजि कऽ बियाह कऽ लिअ।" ओ आशावाद सँ भरल अछि आ हमर भविष्यक सब प्रकारक सपना देखैत अछि। ओकरा पता नै छै जे बिना कोनो मजगूत पृष्ठभूमिक मेडिकल छात्र हेबाक की अर्थ होइत छैक। भगवान जानथि जे हम कहियो पाइ कमा पायब वा नै, आ एतेकमे हमरा डॉक्टर जकाँ देखयबाक सेहो अछि: पएरे नै चलब, बस सेहो नै लेब। मेडिकल ग्रेजुएट, पूर्ण डॉक्टर, जे नौकरीक प्रतीक्षा मे अछि। ओकरा सभमे सँ जेकर कम सँ कम एक अभिभावक प्रैक्टिसमे होइत छथि, ओ दुर्लभ अछि। मुदा हम मोन बना लेने छलहुँ जे हम अपन समस्या सँ ओकरा चिन्तित नै करब। ओकर सपना तोड़ब क्रूरता हएत: ओकर घनिष्ठ मित्र हेबाक लेल अनुपयुक्त। जखन बस देखा पड़ल, तऽ कण्डक्टर हमरा घूरि -घूरि कऽ देखय लागल। स्नेह आ आत्मीयता देखायब सेहो एकटा कला अछि, आ शर्मा एहिमे अद्वितीय प्रतिभा राखैत छथि। ओ बुझैत छथि जे हम मोनक भाव व्यक्त करबामे सक्षम नै छी, एहि लेल ओ कोरामे लऽ कऽ आश्वस्त कएलक। ई एक प्रकारक सान्त्वना छल। हम ओकरा बतौने छलहुँ जे हमर मोनमे की अछि। ओहि अवसर लेल हम ओकरा पूरा शक्ति सँ सावधान कएलहुँ। भावुकता आ अकड़ मात्र धनी आ सम्पन्न सभकेँ शोभा दैत छैक। हमर जकाँ लोक, जे मजदूर जकाँ कठोर परिश्रम नै कऽ सकय, ओकरा लेल आदर्श आभूषण नै बनि सकैत अछि। "ओ हमरा किछु नै कऽ सकैत छथि। हमरा पाछू एक हजार लोक अछि।" ओ जखन ई कहलक, तखने ई बात हमरा बहुत असहज कएलक। धनिकक हाथमे गरीब सभ असहाय मोहरा सँ बढ़ि कऽ आरो किछु नै अछि; ओ हमरा अपन मनोरंजन लेल मारि सकैत छथि। हम सोचलहुँ जे ओ कहिया धरि अपन धरती पर डटल रहि पाओत। _____________________________ सभ राति ओ चादरि पर करौट बदलैत खोंखैत रहल। ओकर स्वास्थ्यक विषयमे प्रश्न पूछब बेकार अछि। हम निर्णय कएलहुँ जे ओकरा यथाशीघ्र अस्पताल लऽ जा कऽ मुख्य डॉक्टरकेँ देखायब। किंशाइत भोर सँ पहिने कहियो हम सुतलहुँ। जखन हम जागलहुँ, तऽ आठ बजे सँ बहुत बेसी भऽ गेल छल। मुख्य डॉक्टर बाह्य रोगी विभागमे छलाह। हम काउण्टर पर अपन कक्षाक सहपाठी रोहिणी लग गेलहुँ आ हुनका सँ बालागंगाधर शर्मा, पुरुष, २४ बर्खक नाम सँ एकटा ओपीडी पुर्जा देबाक लेल कहलहुँ। "ई शर्मा के छथि आ हुनकर कहानी की अछि?" रोहिणी मजाक करबाक प्रयत्न कऽ रहल छलीह। "हमर सहपाठी," हम गम्भीर मुँह बना कऽ कहलहुँ, आ ओ फार्म भरि कऽ हमरा थमा देलक। हमर सखा सभ मदति कएलनि आ बहुत कम समयमे हम ओकरा मुख्य डॉक्टरक कोठलीमे लऽ गेलहुँ। ओ ओकर जाँच कएलनि आ स्पष्ट स्वरमे कहलनि, "ओकरा भर्ती करू। मामिलाक ध्यान सँ फलो-अप करू!" ओ स्नातकोत्तर छात्र सभकेँ निर्देश देलनि। हम बहुत खुश भेलहुँ आ पूरा तरहें राहत अनुभव कएलहुँ। हम काफी समय ओकरा संग रहैत ओकर मनोबल बढ़बैत रहलहुँ। हम बहुत रास बात पर गप करैत छलहुँ। एक सप्ताहक बाद ओ हमरा कारण बतौलक जे ओ ओहि ठामकेँ किएक छोड़ि आयल, ओइ नौकरी छोड़ि कऽ। प्रबन्धन सँ ओकर संघर्षक दौरान, अदहा राति मे ओकर घर पर पाथरबाजी शुरू भऽ गेल। पहिने ओकरा बुझायल जे ई विरोधी यूनियनक काज हएत। किछु राति कऽ बाद, एकटा लोक राति मे ओकरा लग आबि कऽ कहलक जे पचास लोकक झुण्ड बाहर ठाढ़ अछि। "ठीक अछि, समस्या की अछि, यादगिरी?" शर्मा पुछलक। "पंतुलू! अहाँकेँ ई ठाम छोड़बाक अछि, आ जल्दी।" "किएक?" "अहाँक घरक सोझाँ बला लोक अनचोक्के मरि गेल। ओ सब कहैत छथि जे अहाँ ओकरा मारलहुँ, काला जादू सँ। ओ सब कहैत छथि जे अहाँ ओकरा अभिशाप देलहुँ। हम चुप रहि सकैत छी, मुदा ओ सब नै रहत; जँ अहाँ भागलहुँ नै, तऽ अहाँकेँ मारि देल जायत!" "की! अहाँ होशमे छी! काला जादू, अभिशाप, आ हम एकर पाछू छी! आ हमरा भागि जयबाक अछि! ई सब की अछि?" एकटा आरो लोक हाथमे लाठी लऽ कऽ धक्का दऽ कऽ भीतर आबि गेल। "अहाँ ठहरू, यादगिरी! पंतुलू, अहाँ ओकर मृत्युक कारण छी। ओ शोनित (शुनीत) बोकरैत मरल। ओ साँढ़ जकाँ हृष्ट-पुष्ट छल। जँ अहाँ अखने नै भागलहुँ, तऽ अहाँ गेलहुँ।" एकटा आरो, आ फेर एकटा आरो आयल। "हम अहाँक अन्त देखि लेब। हम सोचैत छलहुँ जे अहाँ हमरा अधिकार दिआयब, मुदा अहाँ बस एतबे कऽ सकैत छी। जँ अहाँ अपन मर्जी सँ निपत्ता नै भेलहुँ तऽ..." "तखने हम बुझलहुँ जे ई राजनीति छल। आगू बढ़ब मुश्किल भऽ गेल। यादगिरी हमरा अपन घरमे नुका लेलक। हमर 'प्रभाव' बस निपत्ता भऽ गेल। एहन निरन्तर भयमे रहब एकटा दुःस्वप्न सन छल। ओकर सभक मूर्खता चौंकाबैत छल। प्रबन्धन हमरा बोलौलक, स्पष्टीकरण मांगलक। प्रबन्ध निदेशक आ कल्याण अधिकारी हमरा बुझबैत रहलाह। हमरा बिना कोनो हल्ला -कोलाहल कएने चलि जयबा लेल कहल गेल। ओ हमरा तीन मास कऽ वेतन आ बर्खास्तगीक आदेश देलनि। आदेशमे काला जादूक कोनो उल्लेख नै छल। ओ बस एतबे कहलनि जे 'असंतोषजनक सेवा' कऽ लेल अहाँकेँ विदा कऽ रहल छी। हम विरोधी यूनियन आ प्रबन्धनक मिलीभगत पर आश्वस्त छी। हम अपन दुश्मन सँ घृणा करय लागलहुँ। फूट कऽ ओ हमरा बाँटि देलक। सोझ -साधा लोकक बचब कठिन अछि। समझ सँ बाहर अछि जे ओ सब हमरा दुश्मन कोना देखि सकैत छथि, आ सब सँ खराब, काला जादू करय बला!" हम धैर्य सँ ओकर गप सुनैत रहलहुँ। ओकरा सँ बेसी हम आरो किछु कऽ नै सकैत छलहुँ। "नौकरी जयब, एकर मतलब दुनियाक अन्त नै अछि। अहाँकेँ दोसर, आरो नीक नौकरी भेटि जायत। एक मास धरि धैर्य राखू आ पहिने अपन स्वास्थ्यक देख -रेख करू।" हम फेर सँ आश्वस्त करबाक प्रयास कएलहुँ। मुदा मनहि मन हम चिन्तित छलहुँ जे हम ओकरा लेल किछु कऽ नै सकैत छी। ओ स्वयं खराब हालतमे रहितो सदिखन स्नेहशील, चिन्तित आ आशावादी रहैत छल। ओ सदिखन हमर भविष्यक विषयमे सपना देखैत रहैत छल जे हम की करब, कोना समृद्ध होएब आदि। मुदा हम कहियो ओकर सपनाकेँ टालय नै चाहैत छलहुँ। सपना देखब, हम सोचैत छलहुँ, ओकरा लेल नीक हएत। "एतय की राखल अछि! एहि गरीब सभकेँ नीक खाय लेल आ कसौली जकाँ स्वास्थ्य रिसोर्टमे छुट्टी मनाबय लेल कहबाक बदला, कोनो खाड़ी देश चलि जाउ आ धनीक बनू।" ओ हमरा कहैत छल। हम अचरज कएलहुँ जे ओकर आदर्शवाद एहिना कोना बिला गेल। बहुत दिन नै भेल छल जखन ओ हमरा लगपासक कमजोर लोकक सेवा, हमर देश आदिक विषयमे व्याख्यान दैत रहैत छल। मुदा जखन ओ हमर भविष्यक सपनामे डूबल रहैत छल, हमर सोझाँ इन्द्रधनुष जकाँ डरीड़ खिंचैत छल, तऽ हमर भीतर एकटा अजीब सन इच्छा जागृत होइत छल। रोहिणी आ हम एक साँझ टीबी अस्पताल सँ घुरि रहल छलहुँ। अनचोक्के ओ हमरा सँ पुछलक: "अहाँक बालागंगाधर शर्मा केना छथि?" "नीक! ओ ठीक भऽ रहल छथि!" "हम पहिने कहि देने छलहुँ, ओहि पीड़ित सभक लग जायब ठीक नै अछि!" हम घबड़ा गेलहुँ; कहियो आस नै छल जे ओ एतेक निष्ठुर भऽ सकैत अछि। "हम बुझैत छी!" हम दाँत पीसैत कहि सकलौं। ओकर आँखि सँ नोर खसि पड़ल। ओ एतेक आहत भेलीह जेना हम कहि देने होइयै जे "अपन काज सँ मतलब राखू!" वास्तवमे हमर मोनमे सेहो ई भावना छल। मुदा हम क्रूर नै बनय चाहैत छलहुँ। जँ ओकर भाइ रहितैक, तऽ की ओ एहि तरहें चेतावनी दितैक? ओ पीअर पड़ि गेलीह। "ई हमर इच्छा नै छल... ओना अहाँ ई बात बहुत नीक जकाँ बुझैत छी..." "मिस रोहिणी! जँ हम एहि तरहें डराय जायब, तऽ हम कहियो आगू नै बढ़ि सकब..." हमर बस आबि गेल आ रोहिणी आगाँ सँ चढ़ि गेलीह, आ हम, असामान्य रूप सँ, पाछू सँ चढ़ब पसन्द कएलहुँ। मोटामोटी दू सप्ताहमे शर्मा ठीक भऽ गेल; ओकर खोंखी निपत्ता भऽ गेलै। स्टाफ सँ हमर कनी जान -चिन्ह ओकर स्वास्थ्य लाभमे सहायक भेल। ओकरा सब सँ नीक दवाई आ भोजन भेटि रहल छल आ ई ओकरा पूरा तरहें बदलि देलक। एक भोर ओ खुशी सँ भरल अबाजमे हमरा बतौलक: "हमर पोस्टकार्ड पओला पर हमर हैदराबाद शाखाक सचिव आयल, हमर गप सुनलक आ किछु करबाक वादा कएलक।" मुदा किछु कारणे हम चिन्तित भऽ गेलहुँ। टीबी अस्पतालमे हमर पोस्टिंग समाप्त होइ बला छल। हमर अगिला पोस्टिंग मानसिक अस्पतालमे छल। हम तीन -चारि दिनमे एक बेर ओकरा देखय जाइत छलहुँ। जखन हम ओकरा देखय गेलहुँ, तऽ ओ हमरा बतौलक जे हमर पोस्टिंग ओतय समाप्त भेला कऽ दिनहि ओकर समस्या शुरू भऽ गेल। ओकर शरीर पर चोटक निशान छल आ ओ ठाढ़ हेबाक स्थितिमे सेहो नै छल। "की भेल?" "साँझक समय हम ताजा हवा लेबा लेल कनी बाहर टहलैत छलहुँ... काल्हि, तीन टा बदमाश आबि कऽ हमरा पीटि देलक। ओकरा सभमे सँ एक गोटे इशारा कएलक जे हमरा बुझायल जे ओ संकेत दऽ रहल छल: 'ई बानामती बापनय्या (ओझा) अछि, खतरनाक, छिल्लंगी आ बानामती (काला जादू) करैत छैक। एकरा मारू!' हास्यास्पद बात अछि जे हम बाहर निकललहुँ आ फेर सँ ओहीमे फँसि गेलहुँ।" हम ओकरा सँ आरो किछु पूछबाक साहस नै कऽ सकलौं। "करुणा, कृपया हमरा एतय सँ बचा लिअ। ओ सब हमरा मारि देताह।" ई दयाक स्थिति छल: ओ एहि सँ पहिने कहियो एना सन्तुलन नै खोने छल। मुदा हम की कऽ सकैत छलहुँ? हमरा लग ने तऽ पाइ छल ने कोनो समर्थन। ऊपर सँ ओकर बेमारी छल, जाहिमे काफी पाइ लगैत छल। अस्पताल बदलला सँ किंशाइत किछु फायदा भऽ सकैत छल, मुदा हमर अनुरोध पर के की करितैक? मेडिकल छात्रक रूपमे हम बुझैत छलहुँ जे ई सहज नै हएत। हम एकटा सहपाठी सँ ओकरा पर नजरि राखबाक अनुरोध कएलहुँ, मुदा तुरत्ते जवाब आयल: "सरी बॉस! ई एकटा मानसिक रोगी जकाँ मामिला बुझाइत अछि। लगपासक सब लोक ओकरा सँ डराइत छथि।" हम शान्त रहलहुँ, ओना ई एकटा धक्का छल। हम शर्माकेँ किछु सान्त्वना देलहुँ आ अपन कोठली घुरि अएलहुँ, गम्भीरता सँ सोचैत जे ओकर मदति कोना करी। दस मिनट बाद रोहिणी भीतर आबि कऽ कहलक: "अहाँक मित्र हमर प्रेम पर ग्रहण लगा देलक।" हम तामस सँ भरि गेलहुँ: "की मूर्खता अछि ई! अहाँ एकटा मेडिकल छात्रा छी। की अहाँ एहन बकवास पर विश्वास करैत छी? ओ हमर दुनूक प्रेम कऽ बीच किएक ग्रहण लगायत?" "अहाँ ओतेक भरोसा आ प्रेम करैत छी अपन मित्र सँ!" "कृपया! ने तऽ शर्माक विषयमे हल्लुकसँ बाजु, न हमरा दुनूक बीचक एहि प्रेम कऽ विषयमे। दशक सँ हम सब घनिष्ठ मित्र रहल छी।" "जँ अहाँ ओकरा त्यागि नै देब तऽ..." ओ धमकी देबय लगलीह। "हमरा परवाह नै अछि," हम कहि कऽ उठि गेलहुँ। तेसर दिन हमरा समाचार भेटल आ हम दौगि कऽ अस्पताल गेलहुँ। शर्मा मरि गेल छल। हम शोक सँ स्तब्ध रहि गेलहुँ। एक दिन पहिने ओकरा एकटा पत्र भेटल रहै, जाहिमे एकटा बच्चीक जन्मक समाचार छल, संगहि ई खबरि सेहो जे नवजात आ माय दुनू नीक छथि। की काल बाद अस्पतालमे एकटा मरीज मरि गेल। कएक टा मरीज ओहि गोटेकेँ मरैत देखलक, आ शर्मा सेहो देखलक। हम अनुमान लगा सकैत छलहुँ जे की भेल हएत। जँ हम किछु कऽ कऽ ओकरा दोसर ठाम लऽ गेल रहितहुँ, तऽ ओ नै मरितैक। ई असली 'काला जादू' अछि। हैदराबाद बहुत दूर अछि, आ के एतेक दूर धरि ओकर पीछा कऽ सकैत छल? की ओ एतेक खतरनाक लोक छल? ओ ककरो बाल बाँका कोना कऽ सकैत छल? हम कइएक हप्ता धरि कठोर चिन्तन करैत रहलहुँ, कोनो उत्तर नै भेटल। रोहिणी फेर कहियो हमरा सँ गप करबाक प्रयत्न नै कएलक। कहबाक जरूरत नै, हम कहियो पछतैलहुँ नै। ______________________________ उड़िया खण्ड सरोजिनी साहूक मूल कहानी "दुःख अप्रमिता"; अंग्रेजीमे गोपा नायक द्वारा अनूदित; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। गोपा नायक गोपा नायकक जन्म आ पालन -पोषण ओड़िशामे भेल। अक्सफोर्ड विश्वविद्यालय सँ डीफिल कएला कऽ बाद ओ एखन पोस्ट -डॉक्टरल शोधकर्ता छथि। सरोजिनी साहू सरोजिनी साहू अपन स्पष्टवादिता लेल विख्यात छथि| डॉ. सरोजिनी साहू समकालीन उड़िया साहित्यमे नारीवादक एकटा प्रमुख हस्ताक्षर छथि। हुनका लेल नारीवाद कोनो लैंगिक समस्या वा पुरुष वर्चस्व पर कोनो टकराव नै अछि। ओ नारीवादकेँ स्त्री -जीवनक एकटा सम्पूर्ण इकाई मानैत छथि जे पुरुषक दुनिया सँ अलग अछि। ओ स्त्री -शरीरकेँ बेशी चेतना संग लिखैत छथि। हुनकर उपन्यास आ कथा सभमे किशोरावस्था सँ लऽ कऽ रजोनिवृत्ति धरिक स्त्री -संवेदनाक चित्रण भेटैत अछि। साहू एकटा द्विभाषी लेखिका छथि, जे उड़िया आ अंग्रेजी दुनूमे लिखैत छथि। हुनकर उपन्यास The Dark Abode विदेशमे बहुत प्रशंसित भेल आ कइएक भाषामे अनूदित भेल अछि। हुनका भारतक 'सिमोन द बोउवार' मानल जाइत अछि। हुनकर रचना सभ अछि: अंग्रेजी कहानी -संग्रह: Sarjini Sah Shrt Stries (2006), Waiting fr Manna (2008); उड़िया कहानी -संग्रह: Sukhara Muhanmuhin, Dukha Apramita, Srujani Sarjini आदि। उड़िया उपन्यास: Upanibesh, Gambhiri Ghara, Bishad Ishwari आदि। सम्पादन आ ब्लग: ओ 'Indian AGE' पत्रिकाक सह -सम्पादक छथि आ 'SENSE & SENSUALITY' नाम सँ एकटा प्रसिद्ध नारीवादी ब्लग सेहो चलबैत छथि। पुरस्कार: ओड़िशा साहित्य अकादमी पुरस्कार (1993), झंकार पुरस्कार (1992), प्रजातंत्र पुरस्कार। दुःख अप्रमिता [उड़ियामे सरोजिनी साहू क मूल कहानी "दुःख अप्रमिता"; अंग्रेजीमे गोपा नायक द्वारा अनूदित] कहानीक शीर्षक "दुःख अप्रमिता" विख्यात उड़िया सन्त आ कवि भीमा भोइक एकटा भजन सँ लेल गेल अछि: प्राणीर अरत दुःख अप्रमिता जाणु जाणुकबा सहु ये जीवन पाछे नर्के पड़िथाउ जगत उद्धार हे॥ नीचाँ एकर अनूदित रूप अछि: अस्तित्वक दुःख जीअब, कष्ट सहब, सहब, किएक? हमरा बलिदानक आगिमे जरय दिअ संसार जिऐत रहय। कलम नै खसितैक जँ सोनाली हमरा सँ ओकरा नै छीनने रहितैक। हमर माय हमरा बेर-बेर चेतावनी देने छलीह जे कलम स्कूल नै लऽ जयबाक चाही; मुदा कलम एतेक सुन्दर छल जे हम ओकरा अपन सखा सभकेँ देखबय चाहैत छलहुँ। प्रतिदिन हम कलम संग किछु काल खेलाइत छलहुँ आ बड़ सावधानी सँ ओकरा आलमारीमे राखि दैत छलहुँ। हमर एकटा काकी ओकरा विदेश सँ अनने छलीह आ हमरा उपहारमे देने छलीह। हमर माय कहैत छलीह जे कलम सत्ते बहुत महग अछि। लिखबा काल कलम चमचम करैत छल। कलमक एक छोर पर एकटा छोट घड़ी सेहो छल। हम कलम स्कूल लऽ गेलहुँ प्रेमलताकेँ देखबय लेल। ओकरा बुझाइत छलैक जे हम ओकरा झूठ कहै छिऐ। ओ कहलक जे एहन कलम संसारमे नै अछि। तेँ हम ओकरा देखबय लेल लऽ गेलहुँ। हम ओकरा स्कूलक मैदानक एकटा कोनमे लऽ गेलहुँ आ ओकरा कलम देखेलहुँ। छुट्टीक समय हम खेलऽ लेल बाहर नै गेलहुँ कारण हमरा डर छल जे कियो ओकरा चोरि नै कऽ लिअय। प्रेमलता वचन देने छल जे ई रहस्य ककरो नै बताएत, मुदा ओ सोनालीकेँ कलमक विषयमे कहि देलक। स्कूल छूटला पर सोनाली हमरा सँ कलम मांगलक। पहिने हम नै देलहुँ। हम मनहि मन सोचलहुँ- हम स्कूल बस पकड़ि कऽ घर चलि जायब। मुदा स्कूल बस देरी सँ आयल। हमर माय हमरा स्कूल सँ पएरे घर नै आबय लेल चेतावनी देने छलीह कारण रस्तामे एकटा शराबक दोकान अछि। शराबी सभ रस्तामे घुमैत रहैत अछि। रस्ता बहुत सुनसान छैक। अहाँकेँ जँ कियो उठा कऽ लऽ जाएत तऽ ककरो पता नै चलत। मुख्य समस्या अछि नहरक टूटल पुल। नहर कहियो उपयोगमे नै अबैत छैक। ओ खरपात आ कादो सँ भरल अछि। ओना हमर माय हमरा ओइ रस्ता सँ नै आबय लेल कहने छलीह, हम कखनो -काल अपन सखा सभ संग ओइ रस्ता सँ अबैत -जाइत छलहुँ। स्कूल बस घुमघुमौआ रस्ता सँ लऽ जाइत छैक, जाहि सँ सभ गोटेकेँ उतारैत-उतारैत हमरा स्टॉप धरि पहुँचबामे मोटामोटी एक घण्टा लागि जाइत अछि। मोटामोटी प्रतिदिन हम साँझ भेला पर घर पहुँचैत छी। मुदा हमरा माएक सलाह मानबाक चाही छल। हम घर पएरे आबि कऽ भूल कएलहुँ। सोनाली कलम छीनि लेलक आ ओ नहरमे खसि गेल। हम कलम देखि सकैत छलहुँ। जँ कलम नै देखा पड़ितैक तऽ हम कनैत घर चलि जाइतहुँ। हम नहरक कादोमे नै फँसितहुँ। सोनाली आ हम दुनू आस्ते -आस्ते पुलक नीचाँ कलम लेबा लेल उतरि गेलहुँ। हम एकटा डारि सँ कलम निकालय कऽ प्रयत्न कएलहुँ। मुदा हम असफल रहलहुँ। हम ओतय सँ जा नै सकलौं कारण हम कलम देखि सकैत छलहुँ। जखने हम नहरमे पएर धएलहुँ, हमर पएर कादोमे धँसि गेल। दोसर पएर सेहो धँसि गेल। हम कादो सँ बाहर नै निकलि सकलौं। आस्ते -आस्ते हमर पएर भीतर धँसैत गेल आ हमरा डर लागल जे हम कादोमे धँसि जायब। हम सोनाली दिस देखलहुँ। सोनाली हमरा आगाँ बढ़ि कऽ कलम लऽ अनबा लेल कहलक। हमर पएर कादोमे सटि गेल अछि; हम बाहर नै निकलि सकैत छी। "हमरा खींचू," हम अपन हाथ सोनाली दिस बढ़ौलहुँ। ओ डेराय गेलीह जे ओहो डूमि जएतीह; ओ पाछू हटि गेलीह। ओ हमरा प्रतीक्षा करबा लेल कहलनि। ओ आश्वासन देलनि जे ओ मददि लऽ कऽ औतीह। ओ नहरक कात पर चढ़ि गेलीह। हम ओकरा फेर नै देखि सकलौं। हम नहरमे खरपातक बीच ठाढ़ रहि गेलहुँ। हमरा लेल काज कहियो सहज नै रहल अछि। ई हमर जन्म सँ पहिने सेहो भेल छल। हमर माय कहैत छलीह जे हमर गर्भधारणक समय सेहो गलत छल। ओ बच्चा नै चाहैत छलीह। जखन ओ जानलनि जे ओ गर्भवती छथि, तखन ओ बहुत दुखी भेल छलीह। ओ पापक डर सँ गर्भपात नै करौलनि। हमरा जन्म सँ पहिनहिये एकटा ज्योतिषी हुनकर हाथक रेखा देखि कऽ भविष्यवाणी कएने छलाह जे हुनका एकटा कननी बेटी भेटतनि। हमर माय ओहि दिन सँ बहुत दुखी रहैत छलीह। ज्योतिषी सभ प्रायः झूठ बाजैत छथि- ई सोचि कऽ ओ सम्पूर्ण घटना बिसरि गेल छलीह। मुदा ज्योतिषीक भविष्यवाणी सत्त साबित भेल; हमर जन्मक समय सेहो किछु असामान्य भेल। हमर माएक गर्भक पानि समय सँ पहिनहिये टूटि गेल, आ लोक हुनका धरती पर बेहाल पड़ल दशामे जोर -जोर सँ कनैत देखलनि। हुनका अस्पताल लऽ गेलनि। "कनी आरो देरी भेल रहितैक तऽ माय आ बच्चा दुनूक जान चलि जइतैक," डॉक्टर घोषणा कएने छलाह। जखन हम अस्पतालमे छलहुँ, हमर घरमे सिंघ लागि गेल। हमर माय अखनो अस्पतालमे रहि कऽ ई घोषणा कएलनि जे बच्ची भाग्यशाली नै अछि। "एहि लड़कीक जन्म भेला सँ हमर घरमे सिंघ लागि गेल।" चोर मूर्ख छल वा किंशाइत ओकरा बुझायल जे हमर माएक सोनाक बाली नकली अछि, ओकरा नै लेलक। ओ दराज सँ पन्द्रह टका चोरि कऽ लऽ गेल जे हमर माय भगवान लेल अलग राखने छलीह। जखन हम अस्पतालमे कारी -कारी चीज बोकरऽ लागलहुँ तऽ हमर माय बहुत डेराय गेलीह। हुनका हमर पेटमे एकटा नली धऽ कऽ सब प्रकारक गंदा बाहर निकालऽ पड़ल। ओकर बाद हमरा संक्रमण आ दस्त लागि गेल। एहि संसारमे एला कऽ दू दिन बाद हमरा सलाइन चढ़ाओल गेल। हम एकर बाद कोनो -ने -कोनो बिमारी सँ पीड़ित रहैत अयलहुँ। हम माएक दूध पीबय नै चाहैत छलहुँ। माय जतेक प्रयत्न कएलनि, हम कहियो प्रतिक्रिया नै देलहुँ। हम बोतल सँ दूध पी कऽ सुति जाइत छलहुँ। हम ई सब किएक मोन पाड़ि रहल छी? पछिला परीक्षामे हमर शिक्षिका हमरा कूड़ादानक आत्मकथा लिखय लेल कहने छलीह। हम बुझि सकलौं जे 'कूड़ादान' की होइत छैक, मुदा हम ई नै बुझि सकलौं जे आत्मकथा की होइत छैक। बहुत मेहनत कऽ कऽ हम किछु पंक्ति लिखलहुँ। हम देखलहुँ जे कियो कूड़ादानमे कचरा नै डालैत अछि, तेँ हम लिखलहुँ: 'कूड़ादान कहैत अछि- हमर उपयोग करू, हमर उपयोग करू, मुदा कियो एकर उपयोग नै करैत अछि।' ई पंक्ति सुनि हमर माय बहुत खुश भेलीह; मुदा ओ कहलनि-"अहाँ गलती कएलहुँ अछि, आत्मकथा माने अहाँक जीवनक कथा। माने अहाँकेँ अपनाकेँ कूड़ादान मानि कऽ अपन कथा लिखबाक चाही छल।" "बहुत कठिन अछि, छै ने?" हम पूछलहुँ। हमर माय पलटि कऽ कहलनि-"ओहिमे कठिन की अछि। हम सब एकटा बूढ़ बड़द क आत्मकथा वा एकटा किसानक आत्मकथा लिखैत छलहुँ।" "नीक रहितैक अपन जीवनक इतिहास लिखब।" हमर माय हँसि कऽ टिप्पणी करैत चलि गेलीह-"अहाँ एतेक जीलहुँ अछि जे अपन इतिहास लिखब?" सोनाली अखन धरि ककरो नै अनलक। हम कादो पर ठाढ़ छी। मच्छर सभ हमरा काटि रहल अछि। हमर आधा गोड़ कादोमे धँसि गेल अछि। हम जतेक हिलैत छी, ओतेक गहीर धँसैत छी। हम एतेक डेराय गेल छी जे मच्छरकेँ हटाबय कऽ सेहो प्रयत्न नै करैत छी। नै जानि हमर नाम 'टिकली' किएक राखलनि; हम आँखि झपकैत फूल सँ फूल पर उड़ि नै सकैत छी। घरमे हमरा सदिखन डाँट पड़ैत अछि कारण हम टिकली जकाँ सक्रिय आ प्रफुल्लित नै छी। सब हमरा आलसी, मूर्ख आ सुस्त हेबाक लेल खिसियाइत अछि। जखन हम बच्चा छलहुँ, बोतलक दूध खतम होइतहि हम सुति जाइत छलहुँ। फेर दूध पीबाक समय भेला पर हम जागैत छलहुँ। हमरा कतबो घुमाओल जाय वा पलटल जाय, हम कहियो नै उठैत छलहुँ। अस्पतालमे हमरा कनैत कियो नै सुनलक। दोसर बच्चा सभक विपरीत हम कहियो हाथ-पएर पटकि कऽ नै कानलहुँ। हमर काकी हमरा 'राढ़ीगाढ़ी' कहि कऽ बजबैत छलीह। ओ आइओ हमरा ओही नाम सँ सम्बोधित करैत छथि। हमर पैघ भाइ हमरा कुम्भकर्णक बहिन कहि कऽ किचकिचबैतत छथि। हमरा सुतब बहुत नीक लागैत अछि। सत्ते। मुदा ककरो हमर सुतय बला आदति नीक नै लागैत छैक। टीवी देखैत -देखैत हम ओंघी लऽ लैत छी। पढ़ैत-पढ़ैत ओंघीयाय लेल हमरा मारि पड़ैत अछि। हमर माय हमरा मोन पाड़ैत छथि-'तोर निद्रा तोर दुश्मन अछि'। तेँ हमर दिमाग नै बढ़ैत अछि। ई निद्रा हमर दिमागक सब दुआरि -खिड़की बन्द कऽ देने अछि। तेँ हम पढ़ाइमे बहुत कमजोर छी। आइ धरि जे कियो हमरा पढ़बय-लिखबय आयल, किछु दिनमे निराश भऽ कऽ हमरा मारैत -चिचिआइत चलि गेल। कखनो -काल हमरा लगैत अछि जे हम मात्र मारि -डाँट खाइ लेल जन्मल छी। एहि मारि -डाँटक एकमात्र कारण हमर पढ़ाइ अछि। हम जे किछु पढ़ैत छी, याद नै राखि सकैत छी; ओना हम बच्चाक बहुत रास गप याद राखैत छी। हमर पढ़ाइकेँ लऽ कऽ हमर माता -पिता सदिखन लड़ैत रहैत छथि। हमर बाबूजी हमरा पढ़बैत काल मारैत छथि आ हमर माय पर चिचियाइत छथि। आ जखन हमर बाबूजी हमरा गणित पढ़बैत छथि, तऽ हम कहियो अपन पहाड़ा याद नै राखि सकैत छी। कखनो-काल हम नौक पहाड़ा सेहो याद नै राखि सकैत छी। हमर बाबूजी तमसा जाइ छथि आ हमर गरदनि पकड़ि कऽ दबबैत रहैत छथि आ बेर-बेर कहैत छथि-"नौ दूनी कतेक? नै कहि सकलें तऽ मारि देबौ।" हमर माय भनसाघर सँ दौगि कऽ निकलि कऽ चिचिआइत छलीह "कहू, कहू, नौ दूनी अठारह।" तखन हमर बाबूजी माय पर भड़कि जाइत छथि, "तोरे कारण ई बौक अछि, तोरा कनियो धीरज नै छौ।" फेर ओ हमर पीठ पर मुक्का मारि कऽ चलि जाइत छथि। "जखन नौक पहाड़ा सेहो नै अबैत छौ तऽ तों पढ़ि कऽ की करबें? अहाँ हमरा लेल अभिशाप छी।" "अपन बेटीक विषयमे अहाँ एना कहि सकैत छी?" हमर माय भनसाघर सँ बाहर निकलि कऽ बड़बड़ाइत कहैत छलीह। हम अपने पर तामस करैत छी जे माता-पिताक बीचक झगड़ाक जिम्मेदार हम छी। हमर माय सदिखन बाबूजीक ऊँच अबाज आ टेढ़ नजरि कऽ सोझाँ हारि मानि जाइत छलीह। हमर माय कूही भऽकऽ कनैत छलीह। ओहि समय हमरा हुनका चूमय कऽ इच्छा होइत छल। हम पढ़ल गप याद नै राखि पाबैत छी मुदा बच्चाक बहुत गप याद राखैत छी। जखन हम बच्चा छलहुँ, एक बेर हम अक्षर 'म' नै लिखि सकलौं। हमर माय एतेक परेशान भेलीह जे हमरा उठा कऽ जोर सँ पटकि देलनि। किछु काल लेल हमरा किछु नै देखा पड़ल। तखनो हमर बुद्धिक केबाड़ नै खुजल। बच्चे सँ बहुत रास ट्यूटर आबि -गेल। जखन कोनो नव ट्यूटर अबैत छलथि, हमर माय बैठक कक्षमे हुनका चाह परोसैत छलीह आ हुनका हमर विषयमे सब किछु ठीक ओहिना बतबैत छलीह जेना डॉक्टरकेँ मरीजक विषयमे सब किछु बता देल जाइत अछि। "हमर बेटी पढ़ल गप याद नै राखि सकैत अछि। जखन ई छोट छल, ज’ड़ संग मिरगीक दौरा पड़ैत छलैक। ओकरा सुतबय लेल दवाई देबय पड़ैत छलैक। किंशाइत ओही कारणें ई कनी सुस्त अछि। हँ, पाँच बर्खक भेला कऽ बाद ओकरा कहियो कोनो दिक्कत नै भेलै। गणितमे ओकर दिमाग नीक अछि। रटैत नै अछि। ओकर 'आइक्यू' कनी कम छैक। हम प्रयास करैत -करैत थाकि गेल छी। आब अहाँ देखू जे किछु कऽ सकैत छी।" नव ट्यूटर कहैत छथि, 'जँ ओ गणित कऽ सकैत अछि तऽ सब ठीक भऽ जायत। पढ़बाक अलग तकनीक होइत छैक। चिन्ता नै करू।' तखन हमरा लगैत अछि जेना हम बहुत गम्भीर रोगी छी। हमरा बुझाइत अछि जेना हमर दादाजी, जखन बेमार पड़ल छलाह, तखन हुनका एक डॉक्टर सँ दोसर डॉक्टर लग, एक नर्सिंग होम सँ दोसर नर्सिंग होम लऽ गेल जाइत छल। हमर दादाजीक संग किछु भेल छल आ हुनकर दिमागक अधिकांश भागमे रक्त -संचार नै भऽ पाबैत छलैक। घरमे सब कहैत छल जे ई पक्षाघात (पैरालिसिस) छल। की हमर दिमाग सेहो रेगिस्तान जकाँ सूखि गेल अछि? अच्छा, अफ्रीकामे बहुत रेगिस्तान अछि; एकटा कालाहारी अछि आ दोसर सहारा। हमरा मारि पड़ैत अछि कारण हम सदिखन बिसरि जाइत छी जे कोन उत्तरमे अछि आ कोन दक्षिणमे। हमर स्कूलमे हमरा सँ बेसी सुस्त बच्चा सेहो अछि, मुदा महापात्रा मैडम मात्र हमरा मारैत छथि आ डाँटैत छथि। स्कूलमे ककरो हम पसिन्न नै छी। हमर दादाजी जेना नर्सिंग होम बदलैत रहलाह, हमहूँ बहुत स्कूल बदललहुँ। हमरा अपन पहिल स्कूल मोन अछि, जतय एकटा मोटी मिस छलीह जे हमर हाथ पकड़ि कऽ पन्ने-पन्ने लिखबामे मदति करैत छलीह। जँ ओ हमर हाथ छोड़ि दैत छलीह तऽ हम किछु नै लिखि सकैत छलहुँ। ओ हमरा पर चिचियाइत छलीह "हम तोरा ओहि आमक गाछमे बान्हि देबौ आ बानर सब तोरा काटि लेतौ।" आमक गाछ पर सत्ते किछु बानर रहैत छल। हम बानर सँ बहुत डराइत छलहुँ। जखन ओ सब दाँत देखबैत छल, हम आँखि बन्द कऽ लैत छलहुँ। हमर माय कखनो -काल बहुत दुखी भऽ कऽ कहैत छलीह "सब हमर गलती अछि। हम काज पर जाय लेल ओकरा अढ़ाई बर्खक उमेरमे स्कूल पठा देलहुँ।" "हमरा अढ़ाई बर्खमे स्कूल पठेबाक गलती अहाँ कएलहुँ" हम पलटि कऽ कहैत छी। ओ हमरा पर खिसिया जाइत छलीह। "हम की करितहुँ? तोरा नोकरनी संग असगरे छोड़ि कऽ कोना जइतहुँ? हमरा बिना तों कनैत नै रहितें? अहाँ बुझैत छी, कखनो -काल जखन हम घर घुरैत छलहुँ, तखन तोरा जंघियामे लगही-मल भेटैत छल। तेँ हम तोरा स्कूल पठा देलहुँ। हम सोचलहुँ जे अहाँ दोसर बच्चा संग खेलब। अहाँ हमरा मोन नै पारब। ओ मास्टरनी तोहर भविष्य बिगाड़ि देलक। हम ओकरा कहि देने छल जे अहाँकेँ पढ़य लेल नै कहय। अहाँ मात्र स्कूल जायब आ वापस आबि जायब। हम स्पष्ट रूप सँ ओकरा ई कहि देने छलहुँ" ओ कहैत छलीह। हम नै बुझि पएलहुँ जे ओ सही कएने छलीह वा गलत। हम अपन भाइ जकाँ फुर्ती सँ उत्तर नै दऽ सकैत छी; ने हम माय पर दू मिनट सँ बेसी तामस राखि सकैत छी। हमर माय कहैत छलीह जे ओ हमर भाइकेँ अंग्रेजी वर्णमालाक सभटा अक्षर अंगनाक माटि पर टूटल फिल्टर सँ लिखि-लिखि कऽ सिखौने छलीह। ओ ओकरा झूला पर बैसा कऽ कविता सिखौने छलीह। खियबैत -खियबैत ओकरा ध्रुव, प्रह्लाद आ श्रवण कुमारक कथा सुनौने छलीह। हमर संग ई सम्भव नै छल। ओहि समय हुनका काजमे बहुत तनाव छल। हुनका काज पर देरी सँ पहुँचबाक आ जल्दी छुट्टी लेबाक लेल डाँट पड़ैत छल। तेँ ओ हमरा पर उचित ध्यान नै दऽ सकलीह। हमर माय कहैत छलीह जे एतेक ट्यूशन कयलाक बादो हम पढ़ाइमे गति नै पकड़ि पाबि रहल छी कारण हमर नीव कमजोर अछि। जखन ओ हमरा मारैत छलीह तऽ हम हुनका कहैत छलहुँ, "जखन पहिने पढ़ाइ पर ध्यान नै देलहुँ तऽ आब मारला सँ की हएत?" ओ बहुत खिसिया जाइत छलीह। ओ तर्क दैत छलीह, "अधिकांश माता -पिता अपन बच्चाकेँ नै पढ़बैत छथि। की हमर माता -पिता कहियो हमरा पढ़ौने छलाह? हमर बाबूजी सेहो नै बुझैत छलाह जे हम कोन कक्षामे छी। ओ नै बुझैत छलाह जे हम स्कूलमे 'पद्मालय' नाम सँ दाखिल छी कि 'अपराजिता'। हमरा स्कूलमे दाखिल करबा लेल हुनका हमर मामाकेँ पठाबय पड़ल छल। हमर मामा हमर जन्मक बर्ख वा नाम याद नै राखि सकलाह। ओ हमरा स्कूलमे 'यशोदा' नाम सँ दाखिल करा देलनि आ उमेर मोटामोटी लिखा देलनि। तेँ आइ धरि हम अपन वास्तविक उमेर सँ एक बर्ख पैघ छी। हम एहिना बढ़लहुँ। हम अपने पढ़ि -लिखि कऽ जीवनमे किछु बनि गेलहुँ। तोहर सहपाठी अन्नपूर्णाक बाबूजी ड्राइवर छथि। की हुनकर बाबूजी कहियो ओकरा पढ़बैत छथि? ओ कक्षामे सब सँ ऊपर रहैत अछि। वैजयन्तीक बाबूजी सुरक्षा गार्ड छथि। ओ पढ़ाइमे एतेक नीक कोना अछि? प्रयास कयला सँ सफलता भेटैत छैक।" हमर सखा सभक एहि घटना सँ हमरा किछु मोन पड़ैत अछि। हमर सब सखाक नाम अन्नपूर्णा, वैजयन्तीमाला, प्रेमलता, रूपकुमारी अछि। हमर कक्षामे किछु लड़का सभक नाम राजालाल, जगन्नाथ, प्रशान्त, मनोरंजन आ बाबूराम अछि। हमर भाइ एहि पर हमरा किचकिचबैत अछि आ कहैत अछि जे हम गरीब स्कूलमे पढ़ैत छी। हम मायकेँ ई गप कहलहुँ। हमर माय भाइ पर चिचिअयलीह। "धनीक वा गरीब स्कूल जकाँ किछु नै होइत छैक। तेँ अहाँ सब वर्दी (यूनिफॉर्म) पहिरैत छी।" हम पैघ स्कूलमे जयबा पर जोर देलहुँ। हमर भाइ हमरा किचकिचबैत कहैत अछि जे हमर सखा सभक बाबूजीमे सँ कियो धनीक नै छथि। हम अपन भाइकेँ स्कूलमे दाखिल करबा लेल कहलहुँ। हमर माय कहलनि-"अहाँ ओतय कोना जायब? अहाँ पढ़ाइमे नीक नै छी।" हमर भाइ आ हम नग्रक सब सँ नीक स्कूलमे सँ एकटामे दाखिल करा देल गेलहुँ। हमर भाइ साक्षात्कार द्वारा चुनल गेल छल मुदा हमरा लेल हमर मायकेँ प्रधानाचार्यकेँ मनबय पड़ल। किछु बर्खक बाद हमर भाइ आरो नीक स्कूलमे चलि गेल आ हमरा नग्रक सब सँ खराब स्कूलमे जाय पड़ल। हम अपन पुरान स्कूलमे किछु नै पढ़लहुँ। जखन हम नवका स्कूलमे नव छलहुँ, तऽ मायक कारणें हमरा कक्षा शिक्षिका पहिल बेंच पर बैसौलनि मुदा जल्दीये हम ओकर जोग नै रहलहुँ। हमरा किछु पढ़य -लिखय कऽ मोन नै करैत छल। हम कहियो ककरो ध्यान नै देलहुँ; हमर माय हमर सखा सभ सँ गृहकार्यक विषयमे पता लगा कऽ हमर गृहकार्य करा दैत छलीह। आस्ते -आस्ते हम पढ़ाइमे खराब सँ आरो खराब होइत गेलहुँ, ठीक जेना हम आब कादोमे धँसैत -धँसैत नीचाँ जा रहल छी। पल्लवी, अर्पिता आ अंकिता हमरा सँ दोस्ती कऽ लेलक। हम एक-दू विषय छोड़ि कऽ सब विषयमे अनुत्तीर्ण भेलहुँ। हमर प्रधानाचार्य हमर मायक अपमान कएलनि। की जीवनमे शिक्षा सब किछु अछि? हमर माय कहैत छलीह-"हँ, ई एकटा पैघ चीज अछि। शिक्षा बिना जीवनक कोनो अर्थ नै अछि। अनपढ़क जीवनमे कोनो प्रकाश नै अछि।" हमर नोकरनी किरण पढ़ल -लिखल नै अछि मुदा ओ तखनो बहुत खुश अछि। ओकरा 'distance' वा 'disturbance' कऽ स्पेलिंग याद नै राखय पड़ैत छैक। हम नै जानि किएक मुदा जखनो हम 'D' सँ शुरू होइ बला कोनो शब्द पाबैत छी, हम भ्रमित भऽ जाइत छी। हम 'duration' केँ 'dnation' पढ़ि लैत छी। हम 'superstition' केँ 'separation' पढ़ि लैत छी। हम 'constituting' आ 'constituent' मे अन्तर नै बता सकैत छी। जखनो हम कोनो किताब देखैत छी, बहुत थकनी अनुभव करैत छी, जेना हमरा नामे रस्ता चलब आयल अछि। हम एकटा पैराग्राफ सँ बेसी नै पढ़ि सकैत छी। हमर सब ट्यूटर अद्वितीय छलाह। एक बेर एकटा बेरोजगार इंजीनियरिंग छात्र हमरा पढ़बै लेल अबैत छल। ओ सभ दिन एक घण्टा लेल अबैत छल। ओ एक मिनट सेहो बेसी नै रुकैत छल, कारण ओकरा बहुत रास ट्यूशन छलैक। ओ अबिते हमरा सँ एकटा मोट कॉपी मांगैत छल। ओ दोसर सँ पूछैत छल जे कक्षामे की पढ़ाओल गेल छैक आ सब प्रश्नक उत्तर हमर कॉपीमे लिखि दैत छल। जखन ओ उत्तर लिखैत रहैत छल, हम बैसल रहैत छलहुँ। 'ओकरा याद करू', ओ आदेश दैत छल आ चलि जाइत छल। हम किछु याद नै राखि सकैत छी। जखन 'यूनिट टेस्ट' कऽ समय अबैत छल, ओ हमरा सँ प्रश्न पूछैत छल। हम कहियो उत्तर नै दऽ पाबैत छलहुँ। ओ हमरा सजा दैत कुर्सी जकाँ ठाढ़ रहबा लेल कहैत छल। ओ हमर आंगुर सभक बीच पेंसिल राखि कऽ दबबैत छल। ओकर बामा हाथक नह बहुत नाम छलैक। जखन ओ हमरा नोचैत छल, हमर नाक आ कान सँ बेर -बेर शोनित (शुनीत) निकलैत छल। हम ओकरा सोझाँ कहियो नै कानलहुँ। हमर माय किछु नै जानि पाबैत छलीह कारण ओ भनसाघरमे रहैत छलीह। बादमे जखन ओ हमर घाव देखैत छलीह, बहुत दुखी भऽ कऽ मलहम लगा दैत छलीह। ओ हमरा कहैत छलीह जे ओ ट्यूटरकेँ नै आबय लेल कहतीह। मुदा अगिला दिन जखन ट्यूटर अबैत छल, ओ मुस्कुरा कऽ कहैत छलीह "सर, कृपया ओकरा नै मारू। काल्हि ओकर नाक आ कानमे घाव छल।" ने हम खुश छलहुँ, नहिये हमर माय ट्यूटर सँ खुश छलीह। हमर माय कहैत छलीह जे एहि ट्यूटर सँ नीक 'गाइड' किताब किननाइ अछि। ओ पढ़बै कऽ कोशिशे नै करैत छल। ट्यूटर चलि गेल। हमर माय हमरा अपने पढ़बै कऽ वचन देलनि आ सब किछु छोड़ि-छाड़ि हमरा पढ़बय लगलीह। ओ हमर सब गृहकार्य निअम सँ करा दैत छलीह। मुदा हम ओकरा शिक्षिकाकेँ देखयबा सँ डरैत छलहुँ। कए मास धरि हमर कॉपीमे किछु नै रहैत छल। हमर माय स्कूल जयबामे लाज अनुभव करैत छलीह जे शिक्षिका सभ शिकाइत नै करय। दोसर दिस ओ अपन भाग्य पर कनैत छलीह। आँखि सँ नोर बहैत ओ हमर जन्मक कथा सुनबैत छलीह। "डॉक्टर सभ कहैत छलाह जे नहिये माय बचतीह, नहिये बच्चा। मुदा देखू, हम दुनू बचि गेलहुँ। अहाँ एतेक कष्ट सहैत छी। अहाँकेँ सदिखन मारल-डाँटल जाइत अछि। अहाँक विषयमे सोचि -सोचि हमरा कष्ट होइत अछि।" हम हुनकर नोर पोछि दैत छी आ आश्वासन दैत छी जे हम पढ़ाइमे आरो बेसी प्रयास करब। एहि बेर हमर प्रधानाचार्य हमर रिपोर्ट कार्ड फेकि देलनि आ हमर माता -पिताकेँ आबय लेल कहलनि। ओ हमर मायकेँ हमर रिपोर्ट कार्ड देखा कऽ कहलनि- "हम ओकरा कोन प्रोन्नत कऽ दी? अहाँ मात्र अपन बच्चाकेँ स्कूल पठा दइ छी। ओकरा घर पर सेहो देख-रेख करबाक चाही।" नै जानि किएक मुदा हमर माय एकटा शब्दो नै बजलीह। ओ एतबो नै कहलनि जे हुनकर पुत्र ओही स्कूलक उच्च कक्षामे अछि आ सदिखन प्रथम स्थान प्राप्त करैत अछि। "हम ओकर उपेक्षा नै कएलहुँ अछि।" ओ बिना किछु कहले, माथ झुकौने ठाढ़ रहलीह। बुझाइत छल, कनी छूले मात्र ओ कूही भऽ कऽ कनतीह। हुनकर धैर्य देखि हम चकित भेलहुँ। हमर प्रधानाचार्य हुनका पर चिचिया रहल छलाह, जेना ओ हुनकर छात्रा होथि। हमरा बुझायल जेना हुनका कुर्सी सँ फेकि दी। घर घुरैत काल सेहो ओ एकटा शब्दो नै बजलीह। राति भोजन करैत काल सेहो ओ किछु नै कहलनि। जखन ओ विश्राम करय लेल गेलीह तऽ कहलनि: "अहाँ एहि दुनियामे किएक अयलहुँ? जँ आबैए कऽ छल, तऽ कोनो धनीक परिवारमे जन्म किएक नै लेलहुँ?" हम किछु नै कहलहुँ; हमरा नै बुझायल जे की कहू। हमर स्कूल बदलि गेल। एहि स्कूलमे पढ़ाइक दबाव कम छल, तेँ हमरा एतय स्थानान्तरित कएल गेल। कक्षा एक कऽ अंग्रेजीक पाठ्यक्रम कक्षा पाँचमे पढ़ाओल जाइत छल। मुदा तैयो हम नै सम्हारि सकलौं। हमरा पढ़ब नीक नै लागैत अछि। हमर भाइ बम्बई आ मद्रासक भ्रमण पर जाइत रहल। ओ विज्ञान प्रदर्शनीमे भाग लैत रहल। ओ अपन स्कूल संग पहाड़ी स्थान सभमे ट्रेकिंग करय जाइत रहल। मुदा हमर स्कूलमे हम सब पिकनिक धरि नै गेलहुँ। हमर शिक्षिका सभ सदिखन प्रधानाचार्यक शिकाइत करैत रहैत छथि आ प्रधानाचार्य शिक्षिका सभकेँ निकालैत रहैत छथि। सालमे कम सँ कम दू-तीन शिक्षिका बदलि जाइत छल। राजालाल स्कूलक इनारमे लगही कएने छल। बाबूराम स्कूलक छत पर चढ़ि कऽ गोड़ तोड़ि लेने छल। अन्नपूर्णाक रोंइयामे ढील-लीख लागि गेल छलैक आ ओ हमर हँसी उड़बैत छल कारण हमर माय पाश्चात्य शैलीक पोशाक पहिरैत छथि। हम एहि स्कूलमे पढ़य नै चाहैत छलहुँ। हम एहि बच्चा सभकेँ बुझैत छलहुँ। तेँ हम कहियो कलम स्कूल नै लऽ जाइत छलहुँ। प्रेमलताक कारणें हमरा ओकरा लऽ जाय पड़ल। "सोनाली कतय चलि गेलीह? ओ घर चलि गेलीह?" हमर एकटा काका पुल पार कऽ गेलाह। हम 'काका' कहि कऽ पुकारलहुँ; मुदा ओ हमरा सुनि नै पेलाह। कादो हमर जाँघ धरि आबि गेल अछि। मुदा हम की कऽ सकैत छी? की हम कादोमे धँसि कऽ मरि जायब? सोनाली नीक नै अछि। हमरा कननी आबि रहल अछि। हमर माय हमर घरक केबाड़ पर ठाढ़ हमर प्रतीक्षा कऽ रहली हएतीह। हुनका नै बुझल हतनि जे हम कादोमे धँसि गेल छी। जखन ओ हमरा डाँटैत छथि, सदिखन कहैत छथि "अहाँ मरि किएक नै जाइत छी?" मुदा हम बुझैत छी, जँ हम मरि जायब तऽ ओ कनतीह। मुदा ओ किछु काल लेल कनतीह, मुदा हमर बोझ सँ मुक्त भऽ जयतीह। ओ सभ दिन नै कनतीह। मुदा फेर "की हम सत्ते मरि जायब? नै, हम नै मरब। कारण जखन हमर माय हमर कुण्डली बनबौने छलीह, तऽ ज्योतिषी भविष्यवाणी कएने छलाह जे हम पढ़ाइमे नीक नै हएब मुदा हमर भाग्य एतेक खराब नै अछि।" "एहि लड़कीक जानकेँ आगि सँ खतरा छैक," ज्योतिषी कहने छलाह। हमर माय ओहि दिन बहुत कूही भेलीह। "हम बुझैत छी, हुनका सासुरमे जरा देत। अहाँ किएक नै बुझैत छी? आइ-काल्हि दहेज लेल नीक लड़की सभकेँ जरा देल जाइत अछि। ऊपर सँ अहाँ पढ़ाइमे नीक नै छी। हम एतेक ध्यान सँ पोसलहुँ, कियो अहाँकेँ जरा देत?" ओ कनैत रहलीह। तेँ हम डूमि कऽ नै मरब। कियो तऽ जरूर आबि कऽ हमरा बचायत। हम बचि जायब। जँ हम अखन मरि जायब तऽ जरि कऽ कोना मरब? नै, हम अखन नै मरब। जँ हमर मुँह धरि कादोमे धँसि जाय तखनो किओ हमरा केश पकड़ि कऽ बाहर निकालि लेत। मुदा सोनालीकेँ तऽ आबय कऽ चाही। हम ककरो पुल पर चलबाक अबाज सुनलहुँ। हम प्रतीक्षा करैत रहलहुँ। किछु देरी बाद एकटा गाय निकलि गेल। कियो तऽ जरूर आयत; राति भेला सँ पहिने कियो जरूर आयत। हमर माय चिन्तित हएतीह। ओ ककरो पठा देतीह। ओ स्कूलक केबाड़ खोलि कऽ हमरा खोजतीह। ओ हमर सखा सभक घर हमरा खोजतीह। ओ रस्ता सभ पर हमरा खोजतीह। मुदा की कियो पुलक नीचाँ देखत? के जानय? नै, नै, ओ हमरा देखि लेतीह कारण हमरा जरि कऽ मरबाक अछि। हम कादोमे धँसि कऽ नै मरब। गुजराती खण्ड [गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई। हेमांग देसाई (ज. १९७८) गुजराती आ अंग्रेजीमे कार्यरत कवि, कथाकार आ अनुवादक छथि। हुनकर रचना सभ विश्वक विभिन्न पत्र-पत्रिका सभमे प्रकाशित भेल अछि। ओ भारतीय शास्त्रीय संगीतमे प्रशिक्षित छथि।] सुन्दरमक २ टा गुजराती कथा “माताक कोरामे” मूल गुजराती “सुन्दरम”; गुजराती सँ अंग्रेजी: हेमांग देसाई आ अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। सुन्दरम सुन्दरम, टी.पी. लुहार (१९०८ -१९९१) क उपनाम अछि। ओ गाँधी युगक एकटा प्रमुख कवि, स्वतन्त्रता सेनानी आ आलोचक छथि। ओ गुजराती साहित्यमे नव कविताक आन्दोलन आरम्भ कएने छलाह। बादमे ओ पाण्डिचेरीक अरबिन्दो आश्रममे शान्ति खोजि लेलनि आ हुनकर लेखनमे सन्त जकाँ शान्ति देखाय लागल। माताक कोरामे [मूल गुजराती: सुन्दरम] नदीक कात पर एकटा ऊँच चट्टान पर पसरल एकटा गाम- गाम कोनो तेहन नै- कऽ बाहरी इलाकाक एकटा पातर गली सँ दू टा पुरुष आ एकटा स्त्री बाहर निकलि कऽ आबि रहल छलाह। पुरुष स्त्री सँ कनी आगाँ -आगाँ चलि रहल छलाह। 'अलविदा, शाबू!' 'अलविदा, बहिन!' 'रस्तामे सम्हरि कऽ जाउ!' 'अपन ध्यान राखब, दुलरी!' लगपासक स्त्री सभ हुनका बिदा करैत कहि रहल छलीह। शाबू अपन सासुर जा रहली छलीह। हुनकर ससुर आ पति ओकरा घर लऽ जयबा लेल आयल छलाह। घर सँ बिदा लैत -लैत हुनका बुझायल जेना हुनकर गोड़ कनी निर्जीव भऽ गेल छनि, आगाँ एक डेग चलबाक शक्ति नै छनि। अपन सम्बन्धी, पड़ोसी आ बच्चाक सखी सभ सँ विदा लैत -लैत ओ दुनू पुरुष सँ कनी पाछू रहि गेलीह। हुनकर पति आ ससुर सड़कक मोड़ पर अदृश्य भऽ गेलाह। ओ तेजी सँ चलय लगलीह जाहि सँ ओकरा सभकेँ पकड़ि सकथि। हुनकर एकटा सखी ओकरा संग मोड़ धरि आयल, हाथ हिला कऽ विदा कएलक आ जाइत शाबूक पीठ दिस ताकैत ठाढ़ रहि गेल। तखने ओकर मुँह सँ एकटा स्वर निकलि गेल। "अरे बाप रे!" गलीमे लोक घबड़ा कऽ उठलाह। "की भेल? की भेल?" "अपशकुन! शाबूक रस्ता बिलाइ काटि देलक।" शाबूकेँ वापस बजायब वा ओकरा किछु काल रुकय लेल कहब असम्भव छल। "माय अम्बा सब नीक करतीह!" एहिना कहि कऽ लोक अपन -अपन काजमे लागि गेलाह। कियो सान्त्वना देलक। सभ हुनका शुभकामना देलक आ अपन-अपन काजमे लागि गेल। शाबू पएर तेजीसँ बढ़ौलक। गामक सीमा पार करैत -करैत सड़कक नीचाँ खधाइमे उतरि गेल। बाप-बेटा खधाइमे हुनकर प्रतीक्षा करैत ठाढ़ छल। ओ सभ चिलम पी रहल छल। शाबू हुनकर मुँह आ नाक सँ धुआँ निकलैत देखलक। ओकरा देखि कऽ ओ अपन गति मद्धिम कऽ लेलक। सूर्य मोटामोटी दुपहरिया पार कऽ लेने छल। खधाइ सभक ऊपर सँ नदीक चमकैत पानि देखा पड़ि रहल छल। नदीक ज्वारीय पानि घटय लागल छल। भाटाक कारण नाङट किनारक कादो दर्पण जकाँ चमकि रहल छल। ओहि पर ककरो पदचिह्नक एकटा लीख दौगि गेल छल, जाहि सँ ओहिमे एकटा दरारि उत्पन्न भऽ गेल छल। शाबू अपन तरहत्थी सँ आँखि पर छाह कएलक। सूर्यक प्रकाश सँ चकचोन्ही लागल आँखि सँ, ओ नदीक सोझाँक किनार पर स्थित गामक हरियर सीमा दिस देखय लगलीह। सासुर? हुनकर शरीरमे भयक एकटा हल्लुक थरथरी दौगि गेल। ओ लज्जा सँ आँखि कनी मुनि लेलक। ई अनुभूति भेला कऽ बाद जे हुनकर ससुर नीचाँ ठाढ़ छथि, ओ रीति -रिवाजक अनुसार अपन फूल छपल चुन्नीक घोघट खींचि लेलनि। हुनकर नजरि पएरक दिस घूमि गेल। सड़कक दुनू कात 'हेज' लागल छल। बोनहा काँटबला सीताफल आ बेरक झाँखुड़ सभ ओहिमे घोसिआयल छल। कंथार गाछ पर लाल-बुन्द फल हिलि रहल छल। गाछ पर सीताफल अखनो काँच छल। 'घर जा कऽ पाकि जेतैक', ई सोचि कऽ ओ सीताफल तोड़बाक लेल हाथ बढ़ौलनि। तखने हुनकर पति नीचाँ सँ गुरड़ल। "चलु आब!" ओ घबड़ा गेलीह। कंथार गाछक काँट हुनकर कोहनीमे गड़ि गेलनि। ओ आस्ते सँ अपन हाथ बाहर निकालि लेलनि। कनी चलला कऽ बाद झाँखुड़मे चनोठीक गुच्छा सभ देखा पड़ल। "जे चिचियाउ, मुदा हम चनोठी बिना नै जाएब, एको डेग नै।" ओ बड़बड़ाइत काँट बला झाँखुड़मे हाथ धऽ देलनि। चनोठीक बीया अपन प्राकृतिक आवरणमे सीपीमे सजल मोती जकाँ लागि रहल छल। ओ दू -चारि टा तोड़ि कऽ अपन साड़ीक आँचरमे बान्हि लेलनि। फेर नीचाँ सँ तामस सँ भरल स्वर उठल। "हम आबि रहल छी, किएक रिरियाइत छी?" ओ जवाब देलनि आ तेजी सँ चलय लगलीह। हुनकर जूता सँ गर्दा उड़ैत छल। पएरमे पहिरल मोट कल्लन (पायल) आस्ते-आस्ते बजैत छल। नव कनी ढील चनियो (घाघरा) आ नव बिना बिनु-धोयल चुन्नी सनसनाहट संग फहराइत छल। ओ अपन चुन्नीक एक छोर पकड़बाक लेल हाथ उठौलनि। हाथक बाली आ काँचक चूड़ी सभ खनकैत छल। हुनकर आंगीक रेशमी कपड़ा चटचटाइत छल। ओ काजर लागल आँखि सँ चारू कात देखय लगलीह आ ठाढ़ भऽ गेलीह। सड़क पर गोबरक एकटा ढेरी पड़ल छल। "कतेक नीक गप! धानक छोट ढेरी जकाँ। ककरो भोथिआएल महींस छोड़ि गेल हएत, नै तऽ हमर सौतिन सभ एकरा कहियो छोड़ितैक?" ओ बड़बड़यलीह। हुनका बुझायल जेना ओ ओहि ढेरीकें घर लऽ जेतीह आ वापस आबि जेतीह। एहि रस्ता सँ कतेक ढेरी ओ जमा कएने छलीह! आइयो ओ ओइ ढेरीकें आरक्षित करबाक लोभ सँ नै बचि सकलीह। ओ अपन जूता सँ ढेरीकेँ एक कात सँ दबा देलनि आ पएर सँ ओहि पर गर्दा धऽ देलनि। हुनका पूर्ण विश्वास छल जे हुनका द्वारा आरक्षित ढेरीकें कियो लेबाक साहस नै करत। कनी आगू बढ़ला पर हुनका बुझायल जे ढेरी व्यर्थ आरक्षित कएल गेल; कम सँ कम कियो तऽ एकर उपयोग कऽ सकैत छल। फेर हवामे एकटा तामस बला चिकड़नाइ सुनायल। ओ तेजी सँ डेग बढ़ौलनि आ खधाइमे उतरैत रस्ता पर जल्दी -जल्दी उतरय लगलीह। हुनकर पएर सँ उड़ल गर्दा खधाइक ऊपर चक्कर काटैत रहल जेना घोषणा कऽ रहल हो-'शाबू एतय सँ गुजरल अछि।' खधाइ सभमे उतरला कऽ बाद सड़क समतल धरती पर लहराइत चलि गेल। नदीक नम हवा सड़कक गर्दाकेँ काबूमे रखने छल। हुनकर ससुर अपन मुरेठाक दुनू छोर बाहर निकालि कऽ एक प्रकारक छाता बना कऽ आगाँ -आगाँ चलि रहल छलाह। शाबूक जूता लयबद्ध ताल सँ बाजि रहल छल। ओ सावधानी सँ चारू कात देखलनि। दुनू कात ऊँच चट्टान छल। दूर एकटा चट्टान पर एकटा बकरी चरि रहल छल। कतेक बर्ख धरि ओ एहि एकपेरिया सभ पर, एहि चट्टान सभ पर पशु चरौने छलीह! कोनो गाछक छाहरि नीचाँ बैसि कऽ ओ झाँखुड़ सँ तोड़ल बेर खाइत छलीह। कतेक नीक होइत जँ हुनका सासुर नै जाय पड़ितनि! तखन ओ खाली एहिना घूमैत रहि सकैत छलीह। अनचोक्के ओ अपन नव कपड़ा आ भारी गहना सँ भारी घृणा सँ भरि गेलीह। "कनी आस्ते चलू..." ओ विनती कएलनि। मुदा बाप -बेटा हुनकर विनतीकेँ अनसुन करैत बिना रुकल चलैत रहलाह। विशाल खधाइ सभ पार कऽ कऽ ओ नदीक किनारक कछारी माटि पर चलय लगलीह। बालु सँ भरल क्षेत्र देखा पड़ल। हुनकर चलबाक गति मद्धिम भऽ गेल। ओ अपन माथ सँ साड़ी खींचि कऽ घोघट हटा लेलनि। नदी कऽ कात सँ बहैत हवा हुनकर मुँह परक घाम सुखाबय लागल। हुनकर मुँह पर खुशी आबि गेल। ओ कनी मुस्कुरा देलनि। ओ अपन नजरि चारू कात घुमौलनि। बालुक एकटा विशाल विस्तार पसरल छल। बालुमे कोनो पशुक पदचिह्न आ मनुक्खक पदचिह्नमे अन्तर नै कएल जा सकैत छल। ई सुन्दर बालु! चाँदनी राति मे सब एतय खेलऽ अबैत छल। आ हम कतेक जोश सँ दौगैत छलहुँ! हुनकर आँखि सँ नोर बहरा गेल। धिक्कार! आइ ई सब किएक मोन आबि रहल अछि? ओ व्याकुल भऽ गेलीह। सासुर नै जयबाक मोन, तेँ? कतेक बर्खक बाद अहाँ सासुर जा रहल छी! बालुमे हुनकर पएर हिम्मत हारय लागल। ओ अपन जूता उतारि कऽ, कपड़ाक छोट पोटरीमे राखि कऽ माथ पर धऽ लेलनि। बालु धिपल छल। ओ हुनकर उघार पएरकेँ जरा देलक। मुदा ओकरा सँ बेसी एकटा अस्पष्ट पियास हुनकर हृदयकेँ जरा रहल छल। ओ पानि अछि! ओकर शीतलता हमर पएरक ज्वाला मिझा देत। मुदा एहि अभागिन हृदयक पियास कोना मिझत? ओ नीचाँ बालुकेँ दबबैत, ठोस डेग सँ आगाँ बढ़ैत रहलीह। हे ओतऽ पानि अछि! ओतय अछि! हुनकर हृदय हिलसैत रहल। जखन पानि एतेक लग देखा पड़ैत छैक, तऽ हम अखन धरि ओतय किएक नै पहुँचलहुँ? जखन हम छोट छलहुँ, हम दौगि कऽ सोझे पानिक बीच पहुँचि जाइत छलहुँ। बाप -बेटा गहीर पानिमे छपाछप करैत चलि गेलाह। ओतय ठाढ़ भऽ कऽ शाबू दिस तामस सँ ताकय लगलाह। शाबू, जे अखन धरि बिना घोघट चलि रहल छलीह, घोघट खींचि लेलनि। कादोक कारी चमक, पानिक दमक-सब किछु किछु काल लेल अढ़ भऽ गेल। हुनकर पएर शीतल सुखद अनुभव करय लागल। हुनका बुझायल जेना हुनकर पएरसँ नीचाँक धरती कनी हिलि रहल अछि। ओ कादोक विस्तार पर पएर राखि रहल छलीह। शाबू आँखि खोलि देलनि, कतौ ओ पिछड़ि न जाथि! ओकरा कादोक नीचाँ ठोस जमीनक सहारा लैत चलय पड़ल। हँ, जखन ओ छोट छलीह, अपन सखी सभ संग कादो पर बिनु डर सँ पिछड़ैत छलीह। आब ई अभागल पुरुष सभ कादोकेँ धांगि कऽ खराब कऽ देलक। हुनकर हृदयमे बड्ड घृणा आयल। ओ हमर कादो खराब कऽ देलक! ओइ घरक लोक सत्ते विध्वंसकारी अछि। शाबू पानि धरि पहुँचि कऽ ठाढ़ भऽ गेलीह। ओ झुकि कऽ अपन आँजुरमे पानि भरि कऽ माथ पर धऽ लेलनि। "माय महिसागर! सब नीक हो!" ओ प्रार्थना कएलनि आ पानिमे उतरि गेलीह। छप -छप! पानि हुनकर पएरक चारू कात बहैत खेलाइत बुझायल। कतेक शीतल स्पर्श! कतेक कनकनी! ओ माय महिसागर, जँ हमरा मरब हेतैक, तऽ हम तोर कोरामे मरब पसन्द करितहुँ। एक दिन हम एहिना सोझे तोरा कोरामे चलि आयब। तखन हमरा अपन घर अहाँ लऽ जायब! धिक्कार, आइ एहन विचार किएक सताबैत छैक? किछु काल लेल हुनकर हृदय भय सँ थरथरा उठल। ओ गन्दा पानिमे अपन झलफल प्रतिबिम्ब देखलनि। ओ अपन बच्चाक सखी सभक यादमे चलि गेलीह। हुनकर एकटा सखीक बियाह ओही गलीक एकटा व्यक्ति सँ भऽ गेल छल आ आब ओकरा बेटा सेहो भऽ गेल छल! अनचोक्के ओकरा ओतय जा कऽ ओकरा सभ संग खेलबाक भारी इच्छा जागल। मुदा कहिया? आ तखने ओ अपन पेटमे किछु हलचल अनुभव कएलनि। अपन विकसित पेट पर हाथ राखि कऽ ओ किछु काल पानिमे ठाढ़ रहि गेलीह। कतहु सँ एकटा कनैत बच्चाक अबाज हुनकर कानमे पड़ल। ओ ध्यान सँ सुनय लगलीह। चारू कात सुनसान छल। पन्द्रह किलोमीटर धरि पसरल नदी किनारक विशाल, समतल, बालुक विस्तार पर गाछ, घर वा कुटिया धरि कोनो निशान नै छल। तैयो बच्चाक मद्धिम रिरियाहट हवामे बहैत रहल। "की हएत? माय अम्बा, सब ठीक करू!" ओ फेर प्रार्थना कएलनि आ आगू बढ़लीह। ओ पानिमे गहीर सँ गहीर उतरैत गेलीह। बहैत पानिक बल बढ़ैत गेल। ओ अपन पेटीकोट ऊपर खींचि लेलनि आ अपन पएर आरो खूब जोर सँ जमाबय लगलीह। पएरक नीचाँ किछु चिकनाहट बुझायल आ हुनकर पएर कनी पिछड़ि गेल। 'अरे, एतय तऽ हम खसि पड़लहुँ! अरे, एतय तऽ हम बहि गेलहुँ!' ओ घबरा गेलीह। आ ओ अभागल पुरुष सभ परबाहे नै करैत छथि! ओ अभागल स्वार्थी लोक सोझाँक किनार पर ठाढ़ भऽ कऽ दृश्य देखि रहल अछि! महिसागरक धारमे बहि जयबामे खरापीकी अछि? हुनकर घर किएक जायब? आ कतेक नीक होइत जँ एकटा बड़का भयंकर बाढ़ि हमरा बहा कऽ लऽ जाइत! हुनकर हृदय बेकल होइत रहल। मुदा हुनकर पएरमे हृदय सँ बेसी कौशल छल। कोनो जलीय जीव जकाँ ओ मजगूत आ दृढ़तापूर्वक चलय लागल। अनचोक्के हुनकर कण्ठ सूखय लागल। ओ महिसागरक एक ठोप पानि मुँहमे देलनि, मुदा तुरत्ते घृणा सँ थुकड़ि देलनि। एतेक नूनगर! मुदा फेरो पानि तऽ अछि! हे राम! सुखायल आ सुनसान नदी किनार पर एतेक भयंकर पियास! कहैत छथि जे ई कखनो-काल जान लेबय बला साबित भेल अछि। एतेक पानि सँ भरल नदी सेहो ककरो काज नै अबैत छैक। लगपासक पाँच गाममे मीठ पानिक एकटा ठोपो नै भेटि सकैत अछि। अरे बाप रे, एहि कछारी नदी किनार पर बहुत लोक पियास सँ मरि जाइत छथि। मुदा आइ-काल्हि प्याऊ लगा दैत छथि। तेँ कियो हमरा पीबय बला पानि लऽ चलबाक अनुमति नै देलक। 'अहाँकेँ तऽ सम्पूर्ण रस्ता पएरे चलबाक अछि, तऽ अपन सामान पर अतिरिक्त वजन किएक बढ़ायब?' ओना माय पीबय बला पानि सँ भरल एकटा बर्तन तैयार रखने छलीह। सब कहैत छल जे हम कनिये कालमे गन्तव्य पर पहुँचि जायब। कोनो बात नै। ओइ पार ओ दोसर किनार धरि चलि गेलीह आ ठाढ़ भऽ गेलीह। घूमि कऽ एकटा व्यापक नजरि खिरेलनि। नदीक चाकर तल, ओकर पाछू कादोक पसार, ओकरा पाछू बालु आ खधाइ, गामक परिसर, गली, हुनकर घर-हुनका बुझायल जेना एकटा नमहर डेगमे ओ अपन जन्मभूमि छोड़ि कऽ एकटा विदेशी भूमिमे पहुँचि गेलीह। निराशाक एकटा लहरि हुनकर कण्ठमे फँसि कऽ उठल। "ई आरो किछु नै, बस एकटा विदेशी भूमि अछि! हमर घर ओइ पार, ओतय अछि!" जखन धरि ओ नदीमे छलीह, शाबू अपन पैतृक भूमिक लग हेबाक, अपन सुखदायक मातृत्वक छाहरिमे हेबाक अनुभव कऽ रहल छलीह। मुदा जखने ओ दोसर किनार पर पहुँचि कऽ ठाढ़ भेलीह, ओकरा बुझाय लागल जेना ओ कोनो अज्ञात, विदेशी हाथमे खसि गेलीह अछि। ई नदी किनार अज्ञात अछि, कादो अज्ञात अछि, बालु अज्ञात अछि। आ ओ अभागल बाप -बेटा! ओ सब यमराज सँ कम नै लगैत छथि! हुनकर पएर सँ चलबाक इच्छाशक्ति आ ऊर्जा निपत्ता भऽ गेल। कतेक बर्खक बाद ओ एहि किनार पर पएर देने छथि! पछिला बेर, जखन हुनकर माता-पिता हुनका बच्चामे बियाहक बाद बिदा कएने छलाह, तखन ओ एहि भूमि पर पएर देने छलीह। ओहि समय ओ सब हुनका कटही गाड़ीमे बैसा कऽ लऽ गेल छल। हँ, हुनका एहि बालुमे खेलेबाक एकटा अदम्य इच्छा भेल छलनि। मुदा कियो नै छल जे ओकरा उतरय दितैक। सब किछु हुनकर पछिला जन्ममे भेल बुझाइत अछि! ओ सोचलनि। जँ हुनकर बाबूजी जिऐत रहितथि, तऽ ओ हुनकर बियाह कोनो आरो नीक परिवारमे करा देने रहितथि। मुदा बेचारी माय राँड़ आ असहाय छलीह। की माता -पिता अपन बियाहल बेटीकेँ कइएक बर्ख धरि घर राखि सकैत छथि? हुनकर साहसी बाबूजी अपन दृढ़ता आ संकल्प सँ पीड़ित बेटीकेँ सासुरक प्रताड़ना सँ बचाबैत ओकरा इज्जत संग घरमे रखने छलाह। ओना नै तऽ ससुर कतेक भयानक अछि! साक्षात राक्षस जकाँ! ओ बिना कोनो संकोचक एकटा मनुक्खकेँ मारि देबामे देरी नै लगाओत! लोक कहैत छथि जे हुनकर जेठ बेटाक मृत्यु भेलाक बाद ओ अपन पुत्रवधूकेँ मारि देलनि। के जानैए? धिक्कार! लोक कोन -कोन समाचार अनैत अछि! ओहि समय हम ई सब गप नै बुझैत छलहुँ- हँ, ओ पुत्रवधू हुनका सँ गर्भवती भऽ गेल छलीह आ बादमे जखन ओ मामिला नै सुलझा सकला, तऽ ओ हुनका सोझे स्वर्ग पठा देलनि। आ अफवाह फैला देलनि जे ओ नदीमे बहि गेलीह। रहय दियौ, कोनो बात नै। तऽ की ओ राक्षस छथि तऽ? तऽ की? जँ हम हुनका सँ डरायब तऽ हमरा लाज लगबाक चाही। हम अपन बाबूजीक नाम अपन नाम संग जोड़बा सँ नै रुकब। मुदा जखन खाम्ह कमजोर अछि, तखन ओकरा आरो खूब जोर सँ पकड़बाक की अर्थ अछि? मतलब हमर माननीय पति... कोनो बात नै। से अलग कथा अछि। बाबूजी, अहाँ खुश रहू, जे अहाँ एतेक बर्ख धरि हमरा एहि कष्ट सँ बचेने रहलहुँ। आ जँ ओ जिऐत रहितथि, तऽ एहि बर्ख निश्चित रूप सँ हमरा कोनो आरो घरमे बसा देने रहितथि। मुदा बेचारा बाबूजी एकटा डकैतीमे अपन जान गमा देलनि। ओ डकैती करय जाइत छलाह आ ओकर ठीक पहिने हमर पति, हमर बहादुर साहब, हमरा घर बजबय आयल छलाह। तखन बाबूजी पलटि कऽ कहलनि-"अहाँकेँ अपन बाप कऽ निर्णयम कोनो जुति नै अछि आ तैयो अहाँ हमर बेटी पर अपन पौरुष देखबय चाहैत छी? हमरा संग डकैतीमे चलू, जँ सत्ते साहस अछि तऽ। अपन वीरता देखाउ! हम अहाँकेँ अपन दोसर बेटी सेहो बियाहमे देब।" मुदा बेचारा बाप-भक्त! धिक्कार एहन बाप-भक्तकेँ! "हमरा हमर बाबूजी पठौने छथि हुनका घर लऽ जयबा लेल!" ओ बच्चा जकाँ औंठा (बुढ़बा आंगुर) चूसैत पूरा समय मुँह लटकौने बैसल रहल। आ हमर बाबूजी तिरस्कारपूर्वक हुनका ठोकरा देलनि! "बाबूजी पठौने छथि हिनका घर लऽ जयबा लेल! मतलब अहाँ अपन मर्जी सँ नै आयल छी, छै ने? जाउ, बस जाउ। पशु चरा कऽ गुजर करू। हमर बेटी अहाँ सन ककरो घर नै जायत।" आ ओ बेचारा डर सँ थरथरा रहल छल! हमर बाबूजी तऽ हुनका डकैतीमे संग चलबाक लेल सेहो नोत देलनि। मुदा जँ साहब तैयार भऽ जयतथि, तखन हुनका साहब कोन कहल जयतैक? अरे, ओकरा लेल सेहो हुनका अपन बाबूजी सँ पूछय पड़ितैक, छै ने? ओहि राति हमर बाबूजी डकैती पर गेलाह। आ हमर बहादुर साहब हमरा संग राति बितायब तय कएलनि। से छल एतेक बर्खक अलगावक बादक राति। हम सेहो ओहि क्षणक बाढ़िमे बहि गेलहुँ। अपन विवेक हरा देलहुँ। अरे अहाँ व्यभिचारी बदमाश! नि:सन्देह ओ एहन बाप -भक्त छल, मुदा फेरो ओ एकटा पुरुष छल! आ हम स्वयं एकटा स्त्री छलहुँ। स्त्री स्त्री अछि, ई कियो नै नकारि सकैत छैक! कतेक मारक ओ राति छल! अगिला दिन भोरमे हमरा पता चलल जे हमर बाबूजी ओहि राति मरि गेलाह आ हमर बहादुर साहब कखन पीठ देखौलनि, से पता नै चलल। मुदा हमर नीक सखा, जँ अहाँ हमरा पाछाँ बजा कऽ अपन डर बता देने रहितहुँ! मुदा जँ ओ एतेक स्पष्टवादी रहितथि, तऽ बहुत पहिने हमरा घर लऽ गेल रहितथि, छै ने? हमर बहादुर बाबूजी चलि बसलाह। तइ सँ स्पष्ट अछि जे आन सब हमरा पर हावी भऽ गेल। ऊपर सँ के चाहत जे ओकर बेटी ओकर उत्तराधिकारी बनय? आ ईर्ष्यालु लोक गाममे हुनकर विषयमे बदनामी पसारय लागल! आ हुनकर बेचारी माय आरो की करितीह? अपन बेटी सँ प्रिय के! आ ओहो गर्भवती! तइ सँ माय राहगीर सभ संग सन्देश पठाओलनि-'आउ आ अपन पुत्रवधूकेँ घर लऽ जाउ, हम हुनका पठेबा लेल तैयार छी।' आ बाप -बेटा एहिना आयल जेना कोनो अजेय चीज जीति लेबा लेल आयल होथि। मुदा हुनकर मुँह कतेक भयानक छल! आ हमर बहादुर साहब! की माय हमरा लेल किछु आरो सोचि नै सकलीह...? आ हम, जे सोझ-साझ छी, बिना ककरो दिस देखने धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करैत रहलहुँ। हम सोचलहुँ, एक दिन ओ आत्मविश्वासी बनत आ सब नीक भऽ जायत। मुदा ओ बर्खक बर्ख ओहिना बना रहल, अपन बाबूजीक बाँहि पकड़ि कऽ चलबाक अभ्यस्त। ओना नै तऽ हमरा एतेक बर्ख धरि हुनका प्रति बिसबासी रहबाक की कारण छल? की अहाँ सोचैत छी जे हमरा दोसरा सभ सँ प्रस्ताव नै अबैत छल? जे हो, हम महिसागरक शौर्य -प्रेरक जल पी लेने छी, तेँ कोनो डर नै अछि। हे माय महिसागर...! ओ प्रार्थना कएलनि। फेर हुनकर पेटमे बच्चा हिलल। ओ पवित्र माय अम्बाक नाम जपैत आगू बढ़लीह। बाप-बेटा दुनू किछु दूर बालुपर ठाढ़ छल। धुआँक कुण्डली हुनकर मुँह सँ निकलि रहल छल। अरे, बाप आ बेटाक मुँह सँ निकलैत धुआँमे सेहो कोन पैघ अन्तर अछि! हुनका अबैत देखि कऽ ओ सब चलय लागल। ओ किछु काल ठाढ़ भऽ गेलीह। माथ चकरा गेलनि। आँखि खोललनि आ दूर मरीचिका देखलनि। बाप-बेटा ओहिमे बिला जाइत बुझायल। ओ चिचिआबय चाहलनि, "हमरा पानि पीबाक अछि!" मुदा हुनकर कण्ठ सँ कोनो अबाज नै निकलल। ओ अपन पएरक सम्पूर्ण शक्ति एकत्र कऽ कऽ चलय लगलीह। दुनू पुरुष बीच -बीचमे एकटा नजरि पाछू खिरबैत चलैत रहलाह। हुनकर आँखि फेर एक बेर पाछू घूमि गेल। हुनका बुझायल जेना पाछू सँ कियो हुनका खींचि रहल अछि। "बेटी, वापस आउ, प्रिय, वापस आउ।" हुनकर पैतृक गामक ओ गाछ, खधाइ आ नदीक बालु, अरे नदीक पानि सेहो हुनका सँ दूर हटि रहल छल। हुनका बुझायल जेना ओ जतेक डेग चलैत छलीह, हुनकर पएर सँ चलबाक शक्ति आ ऊर्जा ओतबे खतम होइत जाइत छल। आ ओ दुनू बदमाश बिना कोनो बाधाक चलैत रहलाह। "अहाँ रुकब वा नै... हमरा पानि पीबाक अछि।" ओ चिचिअयलीह। सोझाँ सँ बहैत हवा हुनकर चिकड़ब केँ हुनकर पैतृक गाम दिस बहा कऽ लऽ गेल। हुनकर कण्ठ सुखाय लागल, असहय। जूता पहिरि लेलनि। नीचाँक बालु हुनकर जूतामे पैसैत गेल। तहि सँ किछु काल ठाढ़ भऽ गेलीह। हुनकर आँखि तेज रौद सँ किछु काल लेल चोन्हिया गेल। आँखि खोलला पर हुनका मरीचिकाक अलावे आरो किछु नै देखेलनि। चारू कात मरीचिका। नदी सेहो मरीचिकामे बिला जाइत बुझायल। दूर क्षितिज धरि लगपास किछु नै देखि पड़ैत; नहि गाछ, ने पात, नहिये मनुक्ख, ने जानवर। धिपल हवा सरसराबैत बहैत छल, हुनकर मुँह पर बालुक फूही मारैत। एहि दिस सासुरक गामक कनी कारी सीमा पसरल छल आ ओहि दिस हुनकर पैतृक गामक गाढ़ा कारी सीमा। ओ जेना रेगिस्तानक बीच ठाढ़ छलीह! एकदम असगरे! हँ, ओ दुनू पुरुष छथि, मुदा ओ सब चलैत रहैत छथि। ओ घूमि कऽ देखबाक परबाहे नै करैत छथि। एहि सुनसान धरती पर हुनकर जान चलि जाय, तऽ हुनकर खोज -खबरि करय लेल के ओतेक चिन्ता करत? हुनकर पेटमे बच्चा फेर हिलल जेना पूछि रहल हो-'मात्र अहाँक जान?' फेर रिरियाहट बहि आयल। एहि रेगिस्तानमे बच्चा कतय? कतेक भ्रम! हुनका अपन सखीक नवजात बच्चा मोन आयल। हुनका बुझायल जेना वएह बच्चा कनैत अछि! ओ जयतीह आ ओकरा दुलार करतीह आ किछु मासमे हुनका सेहो अपन एकटा बेटा हेतनि। हँ, मात्र बेटा। दुनू संग खेलत। हुनकर हृदय उत्साहक बाढ़ि सँ उमड़ि पड़ल। हुनकर छाती सँ दूध फूटि पड़य लागल। ओ कोमलता सँ अपन दुनू स्तन दबौलनि जे दूध सँ भरय लागल छल। धुक -धुक! धिक्कार एहि अनियमित धड़कनकेँ! ओ मुस्कुरा देलनि। आनन्दक दू ठोप नोर हुनकर आँखि सँ छलकि पड़ल। बिना पोंछने ओ आगू बढ़लीह। ओ बाप -बेटाकेँ देखलनि जे अनचोक्के ठाढ़ भऽ गेल छल। हुनकर हृदय भय सँ थरथरा उठल। दुनू धूम्रपान कऽ रहल छलाह। अनचोक्के हुनका बुझायल जेना पाछू सँ कियो आबि रहल अछि। ओ घूमि कऽ देखलनि। हुनका बुझायल जेना हुनकर बाबूजीक पदचिह्न सँ नीक अबाज होइत! हाय राम! ई की अछि? मुदा ओ ककरो नै देखि सकलीह। ओ आगू बढ़लीह। फेर अबाज सुनलनि! हुनकर हृदय भय सँ काँपय लागल। ओ बाप -बेटा लग पहुँचि कऽ हुनका सोझाँ चुपचाप ठाढ़ भऽ गेलीह। हुनकर पति किछु काल धरि हुनका ताकैत रहल। ससुर हुनका दिस पीठ कऽ कऽ ठाढ़ रहलाह। हुनकर पति किछु कहय जा रहल छल मुदा एकटा शब्दो नै कहि सकल। ओ कहलनि: "हमरा पानि पीबाक अछि। हमरा बुझाइत अछि जेना कचकीक काँट हमर कण्ठमे गड़ि रहल अछि।" "मुदा हमरा नै लगैत अछि जे लगमे कोनो प्याऊ घर हएत, छै ने?" हुनकर पति बड़बड़ायल। आ तखने रिरियाहट बहि आयल। हुनकर ससुर खोंखि कऽ थुकड़ि देलनि: "हँ, पानि। ओतय। आउ!" शाबू अपन पति कऽ मुँह पर एक प्रकारक उलझन देखि सकलीह। मुदा ओ ओकर कारण नै बुझि सकलीह। आ ससुर चलय लगलाह, आ हुनकर पति सेहो ओकरा संग डेग मिला कऽ चलय लागल। आ ओ ओकरा पाछू -पाछू चललीह। ओ कने दूर चललीह। हुनका आभास भेल जे ओ सब उल्टा दिस जा रहल छथि जिम्हर सँ अबाज आबि रहल छल। "हम एहि दिस किएक जा रहल छी? हम कतय जा रहल छी? प्याऊ घर एहि दिस अछि।" ओ पुछलनि। "प्याऊ घर एहि दिस अछि बहू! असलमे अहाँ जे अबाज सुनैत छी, से एहि दिस सँ आबि रहल अछि।" ससुर तर्क दैत ओहि दिस इशारा कएलनि जिम्हर ओ सब जा रहल छलाह। आ ओ सब चलैत रहलाह जाधरि बच्चाक रिरियाहट झींगुरक अबाजमे बिला नै गेल। पानि! पानि! पानि! सुखायल एकटा ढेपा हुनकर कण्ठमे जेना अटकि गेल। "हम आब आगू नै चलि सकैत छी। हमरा लेल पानि लय आउ।" ओ विनती कएलनि आ खसि पड़लीह। ओ दुनू पुरुष जे हुनकर आगाँ -आगाँ चलि रहल छल, ठाढ़ भऽ गेलाह। ससुर एकटा षड्यन्त्रपूर्ण नजरि सँ चारू कात देखलनि। चारू कात एकदम सुनसान छल। धिपल हवा दहकैत बालुक फूही सभकेँ चारू कात घुमबैत बहि रहल छल। "चलि नै सकब?" ससुर धमकी सँ भरल स्वरमे कटाक्ष कएलनि। "अरे, तूँ ककरा ताकि रहल छह?" ओ अपन बेटाकेँ उकसाबैत बुझयलनि। हुनकर पति हुनका लग आयल। ओ निराशा सँ माथ हाथमे धऽ कऽ घोघट काढ़ने बैसल छलीह। ओ अपन पतिक छाह हुनका पर नमहर होइत देखलनि। घोघट हटा कऽ ओ अपन पति दिस देखैत जाइत छलीह, तखने ओ अनचोक्के हमला कऽ कऽ दुनू हाथ सँ हुनकर गरदनि पकड़ि लेलक। ओ हुनका सँ सटि गेलीह। आस्ते सँ ढेर भऽ कऽ खसि पड़लीह। मुदा अगिले क्षण ओ एकटा जोरक लात हुनकर पेटक नीचाँ मारलक। पति हबामे जेना पिछड़ि कऽ दूर जा कऽ धड़ाम सँ खसल। ओ उठबाक प्रयास कएलक। मुदा तखने ओ ससुरक द्वेषपूर्ण आँखि सभकेँ अपन माथ पर मड़राइत देखलनि। ससुरक हाथ, भेड़िया कऽ चांगुर जकाँ टेढ़ -मेढ़ आंगुर सभ, हुनकर गरदनि जकड़ि लेलक। दाँत पीसैत ओ कहलनि, "चलि नै सकब? अहाँ कहैत छी, चलि नै सकब, छै ने? एतेक बर्ख धरि जखन नै चललहुँ तखन कोना चलब? अहाँ व्यभिचारी जीवन जीबय चाहैत छी, छै ने? अहाँ हमर घरमे नै रहि सकब। धिक्कार छौ! ई सुनसान जगह अहाँक एकमात्र शरण स्थल भऽ सकैत अछि... अरे तोँ नपुंसक! ककरा ताकि रहल छह? पकड़, ओकर पएर पकड!" गरदनि पर पकड़ कसैत गेल। ओ जोर सँ धरती पर पएर पटकय लगलीह। हुनकर पति ओकरा पकड़बाक प्रयास कएलक। भयंकर पियास सँ हुनकर कण्ठ जरि रहल छल। एक क्षण लेल हुनका बुझायल जेना ओ महिसागरक पानिमे डुबकी लगा रहल छथि। हुनकर आँखिमे बड़ पीड़ा भेल। ओ किछु काल लेल पूर्ण खुलि गेलीह। हुनकर मुँह पर हुनकर ससुरक मोंछ सँ भरल मुँह भेड़िया जकाँ मँड़राय रहल छल। हुनकर मुँह सँ धुआँक गन्ध आबि रहल छल। आकाशक जे कनी-मनी खण्ड ओ ससुरक मुँहक पाछू देखि सकैत छलीह, ओतय ओ अपन बाबूजीकेँ कछमछी सँ चक्कर काटैत देखलनि, ठीक ओहिना जेना एकटा गिद्ध अपन बच्चाकेँ क्षत -विक्षत होइत देखि कऽ उड़ैत हो। 'हे बाबूजी!' हुनकर कण्ठ सँ अन्तिम स्वर निकलल। हुनका बुझायल जेना ओ कोनो धातुक झोरामे बन्द कऽ देल गेल छथि। आ ओ बच्चाक रिरियाहट सुनैत -सुनैत सदा लेल आँखि बन्द कऽ लेलनि। ससुर हुनकर गरदनि पर अन्तिम जोरसँ दबाब देला कऽ बाद उठि कऽ ठाढ़ भेलाह। पुत्र बुझि गेल जे ओहि पएर सँ आब कोनो हलचल नै भऽ रहल अछि, तइ सँ ओ अपन पकड़ ढील कऽ कऽ उठि ठाढ़ भऽ गेल। शाबूक आँखि आ जीह दुनू बाहर निकलि आयल छल। "ओकर मुँह बान्हि दियौ।" पुत्र ठकायल ठाढ़ रहि गेल। "छोड़ू, अहाँ नपुंसक!" बाप गुरड़ल आ उठि ठाढ़ भेल। एकटा अनुभवी मनुक्खक सहजता सँ अपन पुत्रवधूक चुन्नी ओकर मुँह पर लपेटि देलनि। किछु देरीक बाद स्त्रीक लाश बालुमे गाड़ि कऽ दुनू गोटे ओहि दिस चलि गेलाह जिम्हर सँ बच्चाक रिरियाहट आबि रहल छल। ओ सब प्याऊ घर पहुँचि कऽ पानि पीलनि। ससुर पानि परोसैत महिला सँ पुछलनि, "बच्चा एतेक किएक कनैत छैक?" "ओकरा हैजा भऽ गेल छैक। ओ भोर सँ कनैत अछि, रूपा होन।" आ तखन ओ पुछलक, "अहाँ तँ अपन पुत्रवधूकेँ लयबा लेल गेल छलहुँ? ओ कतय अछि?" चिलम फूँकैत रूपा होन निराशा सँ कहलनि, "ओ सब हुनका नै पठौलक, बहिन!" "धिक्कार छैक! ओ सब एहनहि अछि! कतेक बर्ख सँ ओ ओकरा अपने संग रखने अछि! माय ओकरा खा जाय!" "कोनो बात नै बहिन! हमरा एहिना नै कहय कऽ चाही," रूपा होन उपदेश देलनि आ जाइत-जाइत एक रुपैयाक सिक्का महिलाक हाथमे दऽ देलनि। "ई लिअ। अपन बेटा लेल किछु कीनि कऽ खुआयब।" गाड़ीक पहिया जकाँ गोल एक रुपैयाक सिक्का पाबि कऽ महिला बहुत चकित भेलीह आ अचरज भरल आँखि सँ हुनकर पीठ कऽ दिस ताकैत रहि गेलीह। किछु दूर चलला कऽ बाद पिता मुँह सँ धुआँक एकटा पैघ गोला छोड़ैत पुछलनि: "मेघा, अहाँ ध्यान देलहुँ?" "की पिता?" पुत्र थरथराइत हृदय सँ पुछलक। "जे ओ गर्भवती भऽ गेल छलीह?" "हँ पिता! मुदा..." पुत्र कमजोर स्वरमे उत्तर देलक। ओ आरो किछु कहय चाहैत छल मुदा एक शब्दो नै कहि सकल। आ अपन बाबूजीक पाछू -पाछू लँगड़ाइत चलय लागल। एकटा लाश जकाँ। ________________________________ शब्दावली: • बालाइयाँ: चूड़ी वा कंगन। • बुन/बोन: बहिन वा स्नेहपूर्ण सम्बोधन। • चनियो: एक प्रकारक घाघरा। • चनोठी: मालकांगनीक बीया। • चिलम: धूम्रपानक माटिक नली। • कचकी: एक प्रकारक काँटबला झाँखुड़। • कल्लन: पएरक मोट पायल। • कंथार: एक प्रकारक काँटा बला गाछ। • मोढ़ियूँ: आंगीक हाथ पर कढ़ायल पट्टी। • जलनियूँ दान: एकटा पारम्परिक खेल। माजा वेलोक निधन लेखक: सुन्दरम (मूल गुजराती कथा “माजा वेलोक निधन” क अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई द्वारा; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर) माजा वेलो कोनो प्राचीन कुलीन परिवारक मुखियाक गरिमा संग पीठक भर ओंठगल छलाह। हुनकर माथ पर आकाश छुबैत एकटा मीनारक छाहरि झुकल छल, जे तपोवनक वृक्ष जकाँ देखा पड़ैत छल, जकर विशाल डारि सभ आकाशमे विलीन भऽ जाइत छल। हुनकर मोटामोटी तीन-चारि पीढ़ीक असंख्य सन्तान हुनकर चारू कात जमा छल। हुनकर पोतीक जौंआ बच्चा हुनकर कान्ह सँ खिलाड़ी सन लटकल छल। हुनकर साठि वर्षीय पुत्र हुनकर बगलमे बैसल छलाह, अपन माथ गोड़ पर टिकौने। हुनकर दू टा पोती-बहू कनी दूर बैसल छलीह। ओ सब डोनी सँ किछु निकालि कऽ तसनी (बासन) मे राखि रहल छलीह आ एक संगे अपन बच्चा सभकेँ स्तनपान सेहो करा रहल छलीह। आ आरो बहुत रास सम्बन्धी, जकरा माजा वेलो गिनती नै कऽ पाबैत छलाह वा मोनहु नै राखैत छलाह, तरेगण सभक चमकदार झुण्ड जकाँ एतय -ओतय छितरायल छल। जाड़क साँझक मोटामोटी सात बाजल छल। तपोवनमे व्याप्त धुआँ जकाँ, कारखाना सभक धुआँ चारू कात जमि गेल छल, जाहि सँ आँखिमे जलन होइत छल। हवनक धुआँ जकाँ नै, जे आहुतिक सुगन्ध सँ भरल होइत छल, ई गन्दा नाली जकाँ दुर्गन्धित छल। सदिखन माजा वेलोक सन्तान नग्रक किलाबन्दी बला देबालक ठीक बाहर एकटा मोटर डिपोक नीचाँ, अकाश-छुबैत मीनारक नीचाँ फुटपाथ पर जमा भेल छल। साँझक एहि समय, सभ दिन, जखन गलीक लोक मोटामोटी अपन दैनिक काज सँ मुक्त भऽ जाइत छल, माजा वेलोक सन्तान सभ गलीमे चक्कर लगाबैत, अपन माथ पर छोट -छोट डोनी राखि कऽ, मीठ, तमसायल आ गुञ्जैत स्वरमे विनती करैत-"हे स्वामी सभ, हमरा किछु दिअ..." एक बेर हुनकर डोनी भरि गेला कऽ बाद, ओ सब शान सँ मीनार लग अपन अड्डा पर वापस घुरि जाइत छल। कुलक पुरुष सभ अपन -अपन सब्जी वा गिलास -जार सँ भरल पैघ -पैघ पथिया लऽ कऽ, वा खाली हाथ, पहिने घुरि कऽ आराम करैत छलाह। फेर आस्ते-आस्ते डोनी सभ लुढ़कैत अबैत छल आ ओहिमे राखल चीज सभ खायल जाइत छल। अन्तमे, बचल -खुचल चीज सभ बस्तीक बूढ़ सभ लेल लऽ जायल जाइत छल। आइ माजा वेलोकेँ कनी-मनी ज’ड़ छल। सब ओकरा रुकबा लेल मनौलक, मुदा ओ ओकरा सभ संग जयबाक हठ कऽ बैसलाह। काल्हि एकटा बियाह सँ किछु शानदार व्यञ्जन आयल छल; ओहि आधार पर माजा वेलो ओहि बियाहक विषयमे ऊँच राय बना लेने छलाह। एहि कारणें ओ बियाह, ओहि जाति आ भोज देखबाक हुनकर इच्छा बहुत प्रबल भऽ गेल। "दादा माजा, जखन अहाँकेँ हल्लुक जड़ अछि, तऽ हठ किएक करैत छी?" हुनकर पुत्र जयबा सँ पहिने विनती कएने छल। "अरे, जड़क बापकेँ!" माजा वेलो थुकड़ि देलनि। एहि प्रकार अपन लाठी पर झुकैत माजा वेलो गाड़ी सँ भरल सड़क सभ पर अपन थका देबै बला रस्ता तय कएलनि, होटल सभक भव्य लालटेन सभ देखलनि आ पूरा तरहें थाकि कऽ मीनारक देबाल पर खसि पड़लाह। ओ किछु काल हाँफलाह, मुदा किछु काल बाद शान्त भऽ गेलाह। हुनकर पोतीक जौंआ बच्चा कुकुरक बच्चा जकाँ हुनकर चारू कात मँड़राय लागल आ हुनका दुलार करय लागल। हुनकर मोंछ खिंचय लागल, हुनकर कान्ह पर चढ़ि गेल आ हुनकर कोरामे उछलय-कूदय लागल। अजीब बात अछि, आइ माजा वेलोमे असामान्य उत्साहक लहर दौगि गेल आ ओ फेर एक बेर नग्र देखबाक इच्छाक अनुभव कएलनि। ओ चारू कात बैसल बच्चा सभ संग खेलाइत आ पुत्र -पुत्रवधू सभक गप-सप सुनैत, लोक सँ भरल ट्रक, साइकिल, मोटरसाइकिल आ कार सभकेँ जाइत देखैत रहलाह। मोटर डिपो पर एक गोटे सिगरेट फूँकैत ठाढ़ छल। ओकर सुगन्धक झोंका माजा वेलोक नाक धरि पहुँचल। हुनकर मुँहमे पानि भरि आयल। ओ ओहि गोटे दिस ताकैत रहलाह। किछु कश लेबा कऽ बाद ओ सिगरेट फेकि देलक। माजा वेलो तुरत्ते एकटा लड़काकेँ ओकरा उठा कऽ आनबाक लेल दौड़ा देलनि। "जो लालिया, ओ बीड़ी उठा कऽ लऽ आ।" "सिगरेट दादा!" "ठीक अछि, ठीक अछि, सिगरेट। हम बुझैत छी जे अहाँ सब शहरी भऽ गेल छी।" माजा वेलो अपन प्रिय अप्रसन्नता प्रकट कएलनि आ लड़का सिगरेट लऽ कऽ आयल। ओ ओकरा पीबय लगलाह, बीच-बीचमे अपन पुत्रकेँ एक-दू कश लेबय दैत। फेर अनचोक्के ओ प्रश्न सभक एकटा शृंखला लगा देलनि: "विजी अखन धरि किएक नै घुरल?" "मक्लोकेँ कतय पठौने छह?" "व्हाली, अहाँ तऽ एकदम बनियाँ जकाँ लगैत छी।" "भनाकी, तोहर बेटी एतेक किएक कनैत छौ?" "बुढ़िया काली बेमार छै?" "की! मागियो अस्पतालमे मरि गेल?" हुनकर साठि बर्ख धरिक विभिन्न आयु वर्गक सन्तान सभ यथासम्भव संक्षिप्त उत्तर देलक आ अपन व्यक्तिगत गप -सपमे मग्न भऽ गेल। अन्तमे माजा वेलो सभ गोटेकेँ चौंकबइत पुछलनि: "आ अहाँ सब हमरा ओकरा सभक विषयमे किएक नै कहैत छी जे डकैती पर निकलल छल?" माजा वेलोक बगलमे बैसल हुनकर भूर केश बला पुत्र हुनका 'चुप' रहबाक चेतावनी देलक आ फुसफुसा कऽ कहलक, "कनी आस्ते बाजू! एतय पुलिस घूमि रहल अछि।" तखने घर जकाँ पैघ एकटा पुलिस वैन पास आयल। एकटा नामी पुलिसकर्मी ओहि सँ उतरल आ डाँर सँ लटकल ठेंगा हिलाबैत चलि गेल। ओकरा देखि कऽ माजा वेलो तिरस्कारपूर्वक मुस्कुरयलाह: "तोहर पुलिसकेँ धिक्कार! हम एतेक बहादुर छलहुँ जे ओकरा जकाँ क्इएक दर्जन केँ अपन जेबीमे राखि कऽ घुमैत छलहुँ।" हुनकर एकटा परपोता आबि कऽ हुनकर कोरामे बैसि गेल: "दादा, कृपया हमरा फेर एक बेर ओहि डकैतीक कथा सुनाउ!" आ माजा वेलो नग्रमे कएल गेल डकैतीक कथा फेर सुनाबय लगलाह, किंशाइत सौम बेर। पैघ लोक सभ लेल कथा बहुत पुरान छल, एहि लेल ओकरा सुनबामे हुनकर रुचि नै रहल। तइ सँ ओ सब आपसमे गप -सपमे व्यस्त भऽ गेल आ बूढ़केँ चेतावनी दैत रहल: "आस्ते बाजू दादा, आस्ते!" माजा वेलो मद्धिम अबाजमे कथा सुनाबय लगलाह मुदा हुनकर कहबाक शैली एतेक रोचक छल जे पैघ लोक सेहो हुनकर जीवन्त वर्णन सुनय सँ नै रोकि पओलक। माजा वेलो अतीत खोदिआबय लगलाह। "जखन हम सब गाम सँ नग्र अयलहुँ, हम देबाल कऽ बाहर फाटक लग डेरा डलने छलहुँ। हम दातमनि बेचैत छलहुँ, बचल -खुचल भोजन भीख मांगैत छलहुँ आ मरघट राति मे, जँ कियो असगरे भेटि जाइत छल, तऽ हुनका लूटि लैत छलहुँ। मुदा कहियो एहि फाटक लग नै। अहाँ सभ बुझैत छी? एहि नग्रमे सत्रह टा फाटक अछि। एहि लेल हम अपन कला कोनो आने फाटक पर देखबैत छलहुँ। एतय अहाँकेँ सज्जन गाय जकाँ रहबाक अछि। अहाँ सभ बुझैत छी? आ पहिने, जतय मीनार अछि, ओतय किछु नै छल! हँ, एकदम किछु नै। एकटा गहीर खाधि छल। लोक ओहिमे लगही -दस्त करय अबैत छल, बचल -खुचल भोजन आ पतराडा (पत्तल) फेकैत छल। हम तय कएने छलहुँ जे एहि फाटक पर किछु नै करब। मुदा एक बेर बियाहक समय छल। आ अहाँक परदादी, भीख मांगि कऽ घुरला पर समाचार लऽ कऽ आयल छलीह जे हजार टकाक गहना सँ लदल एकटा घानचन पतराडा फेकबय एतय आबि रहल अछि। हम ओकरा बहुत मना कएलहुँ मुदा ओ बदमाश नागुडियो नै मानलक आ हम घानचनकेँ लूटि लेलहुँ। मुदा ओ बहुत चिचिआय लागलि। तखन हम आरो की करितहुँ? ओकर गरदनि दबा देलहुँ। ओकरा खाधिमे फेकि देलहुँ आ भागि गेलहुँ। हँ, बादमे हमर संगी सभमे सँ एक गोटे अपन हिस्साक गहना बेचैत पकड़ा गेल। हम अपन हिस्सा पहिनेहि पघिला लेने छलहुँ। तैयो हमरा दू बर्खक सजा भेल। से छल हमर पहिल भूल।" आ फेर माजा वेलो अपन साहसिक काज सभक कथा सुनाबय लगलाह। बच्चा सभ मन्त्रमुग्ध भऽ कऽ हुनकर कथा सुनैत रहल। "सत्ते दादा? एतय मीनार सेहो नै छल?" "नै।" "आ दादा, ओ पैघ बत्ती सेहो नै छल?" "नै बेटा। एतेक ठोस पक्का सड़क सेहो नै छल। सड़क सभ बालुक होइत छल आ कुकुर सभ सदिखन भूँकैत रहैत छल। मुदा ओ सब हमरा सँ परिचित छल, अहाँ सभ बुझैत छी? आ लोक ओहि समयमे पौष्टिक भोजनमे विश्वास करैत छल। ओ सब नीक पोशाक पहिरबामे विश्वास करैत छल। बेटा, आइ -काल्हि ई आधुनिक लोक की खाइत छथि? बेकार। आब घी बिना सादा भोजन। ओकरा सँ की लाभ भेटत? सत्ते गप अछि जे आइ -काल्हि महिला सभ बहुत गहना पहिरैत छथि, मुदा सब नकली अछि। मात्र देखाबय लेल। जँ अहाँ ककरो लूटि लेब तऽ दस टका सेहो जेबीमे नै आओत!" "की सिगरेट सेहो नै छल दादा?" "नै भाइ, पहिने लोक हुक्का पीबैत छल। आ हम आ हमर भाइ एक बेर एकटा दलान सँ हुक्का उठा लेने छलहुँ। हम ओकरा गलीक कोनमे बैसि कऽ सभ राति खींचैत रहलहुँ। दिनमे ओहि गलीमे पीबय कऽ सवाल नै उठैत छल। हम ओकरा मोटामोटी सात राति धरि पीलहुँ, आ फेर ओकरा बेचबाक बात पर झगड़ा कऽ कऽ तोड़ि देलहुँ।" "दादा, कहैत छथि जे अहाँ सिक्का गढ़ैत छलहुँ, सत्ते अछि?" "हँ...हँ, हँ!" माजा वेलो किछु कहय बला छलाह मुदा हुनकर पुत्र हुनका रोकि देलक। "पिताजी, चुप रहू, छै ने? एतय ई विषय जुनि उठाउ।" माजा वेलो किछु काल चुप रहि गेलाह। एकटा बच्चा, जे कथा सुनबामे मग्न छल, कहलक: "माय, हमरा भूख लागल अछि।" ओ उछलल आ अपन माय दिस जाइत-जाइत चिचिआयल: "दादा, हमरा सिक्का बला कथा बादमे सुनाएब, छै ने?" "ठीक अछि बेटा! जा, देखू तोर माय की अनैत छौ।" "दादा, अहाँ कतेक सिक्का गढ़ने छलहुँ?" दोसर लड़का पुछलक। "एतेक!" माजा वेलो अपन हाथ एतेक फैला कऽ कहलनि जेना कोनो पैघ बासन पकड़ि सकैत होथि, आ फेर ओहि लड़काकेँ प्रेम सँ कोरामे उठा लेलनि। "दादा, अहाँक मोंछ रुपैया जकाँ उज्जर अछि, छै ने?" लड़का हुनकर मोंछ संग खेलाइत कहलक। माजा वेलो हँसि देलनि आ अपन हाथक आंगुर सँ मोंछ उठौलनि: "नै बेटा। ई सुतारफेनी जकाँ अछि, खम्भातक सुतारफेनी!" "ओ की होइत छैक दादा?" लड़का उत्सुकता सँ पुछलक। "हे भगवान, अहाँ अखन धरि सुतारफेनी नै खयने छी?" माजा वेलो समयक गति पर विलाप करय लगलाह। "हाय! हम जे चीज सब मोन भरि कऽ खाइत छलहुँ, ओ चीज सब देखब सेहो अहाँ सभकेँ नसीब नै हएत! आइ -काल्हि लोकमे की स्वाद बचल छैक जे खाएत?" आ लगमे बैसल भीड़ पर नजरि खिरेबैत ओ आदेश देलनि: "अरे, जँ ककरो लग भीखमे सुतारफेनी भेटल अछि तऽ एतय लऽ आउ!" एहि पर महिला सभमे जोर सँ हँसी फूटि पड़ल। पुरुष सभमे सँ कियो मद्धिम अबाजमे कहलक: "देखू, एहि बूढ़केँ, जकर कबरमे एकटा पएर अछि, मुदा केना व्यञ्जन लेल तरसि रहल अछि!" "अरे, अहाँ सब सुनैत छी वा नै?" माजा वेलो चिचियेलाह। "ठीक अछि, जँ आबि जायत, तऽ हम अहाँकेँ देब, दादा। अखन धरि मात्र दाल -भात आयल अछि।" कियो मद्धिम अबाजमे आश्वासन देलक। "ठीक अछि, कोनो बात नै। बेटा, हम खाय नै चाहैत छी, बस एहि बच्चा सभकेँ देखाबय चाहैत छलहुँ।" जखन धरि असली सुतारफेनी नै आबि जाय, बच्चा सब हुनका ओकर वर्णन करबा लेल जोर देबय लागल, तखन माजा वेलो बुझबय लगलाह: "ई एहन होइत छैक... अहाँ सब गोइठा पाथैत छी, छै ने? गोइठा! ई एकदम छोट गोइठा जकाँ अछि। अहाँ सब बुझैत छी?" "छी! छी!" बच्चा सब नाक सिकोड़ि कऽ चिचिआयल। "अरे, कम सँ कम हमर गप तऽ पूर्ण करय दिअ! मुदा ई उज्जर होइत छैक, एकदम उज्जर, पूरा दूध जकाँ उज्जर!" "सत्ते?" ओकर सभक आँखि अचरज सँ पैघ भऽ गेल। "आ कतेक मीठ! आ जँ एहिमे केशर मिलाओल जाय तऽ पियराहट लऽ लेत।" "पिअर? खिचड़ी जकाँ?" "हँ, ठीक ओहिना। आ ऊपर सँ बादाम, पिस्ता, जावित्री इत्यादि कतेक चीज सजबा लेल!" "दादा, ओ सब की होइत छैक?" एकटा बच्चा उत्सुकता सँ बीचमे पूछि बैसल। "अरे, अहाँ सब ई सब चीज अखन धरि नै देखने छी?" माजा वेलो अवाक् रहि गेलाह। ओ तामस सँ भरि गेलाह जे हुनकर पुत्र सब एहि छोट बच्चा सभकेँ अखन धरि किछु ठोस नै खियौने छनि; ओकरा सभकेँ किछु नै देखौने छनि। हुनका बुझायल जेना कोनो किराना दोकान तोड़ि कऽ बच्चा सब लेल सब मेबा लऽ अनितथि। "जँ हम जिऐत रहलहुँ तऽ कहियो ने कहियो अहाँ सभकेँ ई सब देखायब।" ओ कहलनि। "ठीक अछि दादा। अहाँक मोंछ किएक थरथरा रहल अछि?" एकटा बच्चा पुछलक। "अरे, दादाक कान्ह सेहो थरथरा रहल छनि!" दोसर चिचिआयल। "दादा, जँ अहाँ सुतारफेनी खायब तऽ ई ठीक भऽ जायत?" तेसर पुछलक। "कनी ठहरू, हम लऽ अबैत छी।" आ ओ दौगि कऽ अपन पिता लग गेल आ सुझबय लागल, "बाबूजी, की हम दादाकेँ सुतारफेनी खुआबी? देखू, दादा कोना थरथरा रहल छथि!" ओ बुजुर्ग व्यक्ति, माजा वेलोक पुत्र, हुनका दिस घूरल। "बूढ़, अहाँकेँ ज’ड़ भऽ गेल अछि की? हम नै मना कएने छलहुँ?" "किछु नै अछि बेटा! बस कनी सर्दी अछि!" माजा वेलो बुदबुदौलाह। "अहाँ बापा, जे कऽ रहल छलहुँ, करैत रहू!" मुदा हुनकर भातिज वाणो हुनका लग आयल आ हाथ सँ हुनकर शरीरक तापमान देखय लागल। हुनकर शरीर ज’ड़ सँ धिपल छल। ओ अपन चारू कात लपेटल हरियर रङ्गक हल्लुक कम्बल हुनका ओढ़ा देलक आ कहलक, "आब बेसी जुनि बाजु!" आ ओ बच्चा सभकेँ हटाबय लागल। मुदा माजा वेलो बीचमे बाजि उठलाह: "कोनो बात नै, ओकरा सभकेँ हमर लग बैसय दियौ!" बच्चा सब दादाक कम्बलक छोर संग खेलाइत बुदबुदाय लागल: "दादा, अहाँ हमरा ओ सिक्का बला कथा सुनाएब, छै ने! जखन अहाँ ओ सब गढ़ब, तऽ हमरा एक -एकटा देब, छै ने? हमरा चाही। आ ओ व्यञ्जन सेहो दादा, हमरा ओकरा एक नजरि देखबाक अछि। ओकर नाम की छैक? उत्तर...उत्तर..." माजा वेलो हँसि देलनि। "सुतारफेनी! अहाँ सब एकरा बिसरि जाउ। अहाँ सब ओकर नामो ठीक सँ नै बाजि सकैत छी।" ओ मीनारक देबाल पर कनी आरो टेक लगा कऽ बैसि गेलाह आ अपन लगपासक गतिविधि देखैत रहलाह। हुनकर पुत्रवधू सब बासन साफ करबामे व्यस्त छलीह। हुनकर एकटा सम्बन्धी डोनी एक बेर खाली कऽ कऽ फेर फाटक कऽ दिस जा रहल छल। दूर सँ बाजाक अबाज आबि रहल छल। ओ फाटकक भीतर दूर लालटेनक चोन्हियाइत रोशनी देखि सकैत छलाह। खास कऽ आइ लोकक आवागमन असामान्य रूप सँ तेज छल। भातिज, जे माजा वेलोकेँ कम्बल ओढ़ौने छल, ओकरा दादा सँ विशेष स्नेह छलैक। ओ माजा वेलो लग आबि कऽ कहलक, "दादा, किछु खाय चाहैत छी?" "नै भाइ, जे आयत से खायब।" "नै-नै। अहाँ सुतारफेनी वा किछुक गप कऽ रहल छलहुँ, छै ने?" "नै भाइ, से हम मात्र एहि बच्चा सभकेँ देखबय चाहैत छलहुँ!" "ठीक अछि, अहाँ आरो किछु चाहैत छी?" ओ पुछलक। फेर ओ एकटा हल्लुक बाँसक पथिया लेलक, अपन माथ कऽ मुरेठा ठीक कएलक आ हाथमे लाठी लऽ कऽ चलि गेल। ओकरा जाइत देखि कऽ माजा वेलो घबड़ा गेलाह। लड़का सत्ते एकटा कुशल जेबीकटा छल। आ ओ निश्चित रूप सँ कतहु सँ व्यञ्जन उठा कऽ लऽ आनत। मुदा जँ ओ पकड़ा गेल? आइ-काल्हि ई पुलिस बला सब बहुत चलाक भऽ गेल अछि। नै-नै, ओकरा कम सँ कम आइ तऽ रुकबाक चाही, आ माजा वेलो जोर सँ चिचियेलाह। "वाणो! अरे वाणो! वापस आउ, वापस आउ।" मुदा हुनकर अबाज वाणोक कान धरि नै पहुँचल। फाटक लग लालटेनक प्रकाशमे माजा वेलो वाणोक चाकर पीठ फाटकमे प्रवेश करैत देखि सकलाह... अनचोक्के माजा वेलो अत्यधिक थकावट अनुभव करय लगलाह। ओ कनी झुकलाह आ जमीन पर लेटि गेलाह। बच्चा सब हुनका सँ पाँच -छह फीट दूर चलि गेल छल आ नव-नव आयल डोनी सभमे राखल भोजन पर झुकल छल। ओ सब दुनू हाथ सँ बासन सँ भोजन खाय लागल। खाइत-खाइत जँ ओकरा सभकेँ कोनो अपरिचित चीज भेटि जाइत, तऽ उत्साह सँ चिचिया कऽ कहैत छल, "अरे, उत्तरफेनी! उत्तरफेनी!" दस बजला पर मीनारक घड़ी बाजल। सोझाँक फाटक पर तैनात पुलिस चलि गेल। पुलिसकेँ जाइत देखि कऽ माजा वेलो अनचोक्के सुरक्षित आ आरामदायक अनुभव करय लगलाह। मुदा तइ संगे हुनका अपना पर तामस सेहो अयलन्हि। की अहाँ एकटा पुलिसकर्मी सँ डराइत छी? अहाँ नामर्द? नै-नै, ओ अखनो डकैती करय जा सकैत छथि। मुदा... ओकरा वाणो मोन पड़ल। किछु देरी पहिने जखन ओ फाटकमे प्रवेश कएलक, तखन ओकर चाकर पीठक कोन देखि पड़ल छल! जँ ओ पुलिसक हाथ लागि गेल? नि:सन्देह ओ एतेक बहादुर अछि जे असगरे हजार लोक सँ लोहा लऽ सकैत अछि। मुदा आइ किएक जानि, हुनका बुझायल जे कतेक नीक होइत जँ लड़का ठाढ़ भऽ गेल रहितैक। "अरे, अहाँ सभ लग गेरुआ लेल किछु अछि?" किछु काल बाद माजा वेलो पुछलनि। "दादा, एहि पथियाक सहारा लिअ।" गिलास-जार बेचय बला लड़की कहलक आ बूढ़क माथक नीचाँ पथिया राखि देलक। माजा वेलो राहतक साँस छोड़लनि आ पएर पसारि लेलनि। "ई पाथर सब बहुत ठंढा लागैत अछि। पहिने कहियो एतेक ठंढा नै लागल जेना आइ!" ओ सोचलनि। मुदा फेर हुनकर व्याकुल मोन शान्त भेल आ पास बैसल आनन्द सँ खाइत बच्चा सभक दिस लागि गेल। एकटा युवती डोनी माथ पर रखने डगमगाइत चालि सँ आयल। ओ वाणोक बेटी छलीह। माजा वेलो हुनका विशेष प्रेम करैत छलाह। डोनी राखितहि बच्चा सब हुनका चारू कात सँ घेरि लेलक। "की अनने छह खुड़ी?" "खुड़ी, हमरा दऽ?" "खुड़ी, हमरा दऽ?" "ठहरू, हम स्वादिष्ट चीज लऽ कऽ आयल छी। मुदा कनी ठहरू।" आ डोनीकेँ हाथ सँ झाँपि कऽ ओ सभ गोटेकेँ ओकरा सँ दूर रखलक। बच्चा सभ अपन-अपन हाथमे खाय बला चीजक चिकनाहटि सँ सनल बासन लऽ कऽ हुनकर चारू कात घूमि रहल छल। खुड़ी एकटा सत्तेक रानी जकाँ बजलीह: "देखू, जा कऽ एकटा पाँतिमे बैसू। सभ गोटेकेँ हिस्सा भेटत। हँ, आब ठीक अछि। जखन धरि हम बाँटि नै दैत छी, चुपचाप बैसू, ठीक अछि?" आ फेर ओ अपन प्रिय दादा लग गेलीह। "दादा, अहाँ सुतल छी की जागल छी? किछु खाय चाहैत छी?" माजा वेलो कनी घबड़ा कऽ जागलाह। खुड़ीकेँ देखि कऽ हुनकर आँखि स्नेह आ प्रेम सँ चमकि उठल। मद्धिम इजोतमे लड़कीक दिस ताकैत ओ कहलनि, "अहाँ खुड़ी छी? बेटी, की भेल अछि? की लऽ कऽ आयल छी?" आ अपन माथ दादाक कान लग लऽ जा कऽ खुड़ी कहलक: "आइसक्रीम!" "की, एतेक ठंढा राति मे आइसक्रीम!" "हँ दादा, हम घुरैत काल एकटा क्लब पर ठेंस खा गेलहुँ। तइ सँ हम एकर बहुत रास पुड़िया भरि कऽ लऽ कऽ आयल छी। ई बहुत स्वादिष्ट अछि दादा। कृपया कनी खाउ।" "नै-नै, हमर मोन ठीक नै अछि।" "ठीक भऽ जायत दादा। बस एक चम्मच खा लिअ। हम अपन जानक सप्पत दऽ कऽ अहाँकेँ बान्हैत छी।" आ खुड़ीक आग्रह सँ हारि कऽ माजा वेलो कनी उठि बैसलाह आ पुड़िया मुँह लगा कऽ पघिलल आइसक्रीम पीबय लगलाह। पीबैत -पीबैत ओ अपन तरहत्थी सँ अपन भीजल जाइत उज्जर मोंछ पोंछैत रहलाह। जखन ओ पघिलल आइसक्रीम पी रहल छलाह, बच्चा सब हुनकर नाम मोंछ देखि कऽ उत्साह सँ चिचिआय लागल, "देखू, देखू, दादाक मोंछ कोना अजीब लागैत छै!" वातावरण ठिठिआइत हँसी सँ गूँजि उठल। आइसक्रीमक पुड़िया खतम कयला पर माजा वेलोकेँ नीचाँक धरती आरो ठंढा लागल। ओ पुछलनि, "बेटी, ककरो लग धरती पर ओछाबय लेल कपड़ा, कोनो चादर अछि?" खुड़ी हुनका लग एली। दादाकेँ थरथराइत देखि कऽ ओ हाथ हुनकर शरीर पर राखलनि आ कहलनि: "अरे बाप रे! कतेक तेज ज’ड़ छनि! चलू, बस्ती चलू।" "अरे, ठीक भऽ जायत बेटी! हम संगे जायब जखन तोहर बाबू आबि जयताह।" आन पुरुष लग आबि कऽ बूढ़क चारू कात बैसि गेलाह आ चिन्ता देखबैत कहलनि, "काका, अहाँक मोन ठीक नै अछि?" "एतेक बेमार रहितो किएक अयलहुँ?" "अरे, अहाँक शरीर कोन जरि रहल अछि!" मुदा अगिलहि क्षण ओ सब अपन गप-सपमे व्यस्त भऽ गेलाह आ भोजनक स्वाद लेबय लगलाह। खुड़ी गिलास-जार बेचय बला महिला सँ अपन मालक बदलामे भेटल कपड़ा सभ लऽ लेलनि आ अपन दादा लेल नीचाँ ओछा देलनि। माजा वेलो आराम अनुभव कएलनि। "बेटी, अहाँ सवा सौ बर्ख जियू। बैसू बेटी। हमरा लग किछु काल बैसू।" आ ओ खोडियार माताक नाम लैत हाथ सँ हुनकर माथ सहलाबय लगलाह। खुड़ी खोडियार माताक कृपा छलीह। बूढ़ बधा-अखड़ी राखि कऽ हुनका जीवित रखने छलाह आ ओ खुड़ीकेँ अपन पुत्र-पुत्रीक सन्तान सँ बेसी प्रेम करैत छलाह। "बेटी, देखू तऽ तोहर बाबू कतौ देखा पड़ैत छथि की?" माजा वेलो पुछलनि। ओ आब आरो असहज होइत जा रहल छलाह। खुड़ी उठि कऽ ठाढ़ भेलीह आ फाटक दिस ताकय लगलीह। मोटामोटी सब अपन भोजन समाप्त कऽ लेने छल। तैयो बच्चा सब दू-तीनक समूहमे बासनमे राखल खाय बला चीजकेँ कुरकुरबैत रहल आ डोनी सँ बाहर निकलैत चीज सभक नाम बतबैत रहल। ई सुनि कऽ माजा वेलो मनहि मन मुस्कुरौलाह: "ई बच्चा सब कतेक पेटू अछि! हमरा लेल किछु नै लऽ कऽ आयल।" लोकक आवागमन आस्ते-आस्ते कम भऽ गेल। लगपासक दोकान सभ पहिनहि बन्द भऽ गेल छल। लालटेन सभ आस्ते -आस्ते मिझा गेल। दूर सड़कक बीचमे मात्र एकटा लालटेन जरि रहल छल। बुझायल जेना अदहा राति ढलि गेल अछि। अनचोक्के माजा वेलोक नजरि मीनार दिस घूमि गेल। हे भगवान! ई कतेक ऊँच बनाओल गेल अछि! जँ ई कनीसन हिलि कऽ ढहि गेल तऽ? माजा वेलोकेँ बुझायल जेना मीनार हिलि रहल अछि। "अहाँ बूढ़ भऽ गेल छी, माजा वेलो!" बूढ़ मनहि मन बड़बड़ौलाह। "नै, अरे नै, हम एहन ऊँचाइ सँ कूदि-कूदि कऽ भागैत छलहुँ। हम दौगैत रेलगाड़ी सँ सेहो कूदि पड़ैत छलहुँ।" आ हुनकर साहसिक जीवनक घटना सभ हुनकर आँखिक सोझाँ सँ गुजरि गेल। हुनकर तुलनामे ई नव पीढ़ी कतेक कायर अछि! "ओ सब बेसी सँ बेसी की करैत छथि? या तऽ ककरो घरमे सिंघ लगाबैत छथि, या ककरो जेबी काटि लैत छथि, या कतहु पड़ल चीज उठा लैत छथि! बस एतबे। मुदा वाणो बहादुर अछि। सत्तेक चोर। एहन बहादुर जे अपन नाम कऽ लेत।" एहि गप सँ मोन पड़लनि जे वाणो अखनो नै आयल। ओ घबरा कऽ बजलाह: "वाणो अखन धरि किएक नै आयल?" "ओ अबैत हएत, चलू आब चलू।" कियो आश्वासन देलक आ सब उठि कऽ ठाढ़ भऽ गेल। "उठू दादा। हम अहाँकेँ घर छोड़ि देब। देखू अहाँ कोना थरथरा रहल छी!" "अहाँ सभ जाउ, जँ जयबाक अछि! वाणो आ हम संगे आयब!" बूढ़ गुर्रायलाह आ मीनारक देबाल पर पीठ लगा कऽ ओठंगि गेलाह। "ओ आबि गेल! ओ आबि रहल अछि। सत्ते हमर बाबू आबि रहल छथि!" खुड़ी उत्साह सँ घोषणा कएलक। बूढ़ जल्दी सँ घूमि कऽ देखलनि। वाणो सोझाँक दुआरि सँ पूरा रफ्तार सँ आबि रहल छल। सब उत्सुक भऽ गेल जे ओ कतय गेल छल, ई जानबा लेल। वाणो लग आयल आ कपड़ामे लपेटल बाँसक एकटा पथिया नीचाँ राखि देलक। बच्चा सब पथियाक चारू कात घूमि कऽ पूछय लागल, "ई की अछि? ई की अछि?" "सब किछु अछि!" वाणो आस्तेसँ गुरड़ल। "उत्तरफेनी सेहो?" जौंआमे सँ एक गोटे उत्सुकता सँ पुछलक। "हँ!" वाणो कहलक आ मुस्कुरा देलक, आ पथिया खोलऽ लागल। ओ एकटा सुगन्धित चीज निकाललक, जे उज्जर गोइठा जकाँ देखा पड़ैत छल। ओकरा खण्ड-खण्ड कएलक आ बाँटय लागल। "अहाँ दादाकेँ किछु खियौने छी की नै?” “हँ, खियौने छी? आइसक्रीम खियौने छी?” खुड़ी खियौने छलीह? “ओह, बहुत नीक। चलू आब, दादाकेँ एकटा बासन दिअ।" ओ एकटा बासन लेलक, पथियामे आनल सब चीज कनी-कनी राखलक आ बूढ़ लग लऽ गेल। "दादा, कनी चखि कऽ देखब?" माजा वेलो उठि बैसलाह। ओ अपन खाय कऽ समयक आदतिक अनुसार पलथा मारि कऽ बैसि गेलाह। दहिना हाथमे बासन लेलनि आ बामा हाथ सँ ओहिमे राखल चीज सभकेँ अनुभव करय लगलाह। "एतय बहुत अन्हार अछि। हम किछु नै देखि सकैत छी। की-की लऽ कऽ आयल छह?" "दादा, अहाँ पहिचानू!" वाणो मुस्कुरा कऽ कहलक। "ओहो, अहाँ हमर परीक्षा लऽ रहल छी, छै ने?" माजा वेलो मुस्कुराइत कहलनि। ओ सभ एक खण्ड तोड़ि कऽ चखय लगलाह आ बजलाह: "ई जलेबी अछि, ई हलवा अछि, ई मैसूर अछि। की ई काड़ीक लड्डू अछि? ई की अछि? मागस वा मोहनथाल? आ अरे ई, अरे, अहाँ सुतारफेनी सेहो लऽ कऽ आयल छी?" आ वाणोकेँ लग बजा कऽ कानमे फुसफुसा कऽ पुछलनि: "ई सब कतय सँ उठौने छह? आ सब ठीक तऽ छैक, छै ने?" "माय खोडियार सब ठीक राखैत छथि दादा! अहाँ खाइत रहू।" आ ओ उठि गेल, पथियाक चीज दोसर सभमे बाँटि देलक, पथिया दूर कूड़ेदानमे फेकि देलक आ वापस आबि गेल। टेढ़ भऽ बैसल माजा वेलो बड़ सन्तोष सँ सभ चीज खाय लगलाह। खाइत-खाइत ओ बीच-बीचमे अपन हाथक उपरका भागसँ मोंछ उठाबैत रहलाह। सुतारफेनी खाइत -खाइत ओकरा खम्भात मोन पड़ि गेल। ओ समुद्रक ज्वारक कल्पना करय लगलाह। हँ, नि:सन्देह से छल हुनकर जीवनक सब सँ पैघ भूल। खम्भातमे डकैतीक बाद ओ सब एकटा छोट नाओमे बैसि कऽ सोझे समुद्री यात्रा पर निकलि पड़ल छल आ काठियावाड़मे उतरल छल। आ समुद्रमे ओ सब मात्र सुतारफेनी खाइत रहलाह! अन्तमे माजा वेलो बच्चा सभक दिस मुँह कऽ कऽ बजलाह: "अरे, अहाँ सभ सुतारफेनी खयलहुँ की नै?" "हँ दादा। ई, छै ने?" किछु बच्चा हुनका लग आबि कऽ एक-एक खण्ड दादाकेँ देबय लागल, "खाउ दादा, खाउ! खाउ दादा!" "अरे! हम बहुत खा लेलहुँ बेटा! आब अहाँ सभ खाउ, आब अहाँक बेर अछि!" आ अनचोक्के ओ एकटा कर्कश स्वरमे चिचियेलाह: "वाणो!" बूढ़क अबाज बदलि गेल छल। घबड़ा कऽ वाणो दौगि कऽ हुनका लग आयल। "की भेल दादा?" "हमरा पकड़ू बेटा। हमरा...अजीब...कछमछी लागि रहल अछि!" वाणो झुकि कऽ बूढ़क दुबर देहकेँ सहारा देलक। "हमरा टेक लगाबय लेल किछु दिअ," बूढ़ कहलनि। हुनकर सम्पूर्ण शरीर काँपय लागल। वाणो कसि कऽ कम्बल माजा वेलोक देह पर लपेटि देलक आ कहलक, "दादा, हमरा पर झुकि जाउ।" "खुड़ी कतय अछि? अरे हमर माय खोडियार!" "हम एतहि छी दादा।" खुड़ी, जे कनी दूर ठाढ़ छलीह, लग आबि कऽ बैसि गेलीह। माजा वेलो कहलनि, "आउ हमरा लग बेटी, अहाँ सौ बर्ख जीबू।" ओ अपन हाथ खुड़ीक माथ पर राखलनि: "वाणो, हमर खुड़ीकेँ एकटा नीक लोक सँ बियाह करा देब!" आ "खोडियार! खोडियार माय, माय!" जपैत, बूढ़ अपन माथ भातिजक कोरामे झुका देलनि। वाणो माजा वेलोक हाथ सँ बासन लेलक आ आस्ते सँ नीचाँ राखि देलक। बूढ़ मोटामोटी सब किछु खतम कऽ लेने छलाह। ओ अपन हाथ सँ बूढ़क मोंछ साफ कऽ देलक। "की भेल? की भेल?" सब चिचिआय लागल आ हुनकर चारू कात जमा भऽ गेल। "किछु नै भेल अछि!" वाणो दृढ़ स्वरमे बाजल। "कियो नै कानब। एहि बातक ध्यान राखू। बूढ़ शान्ति सँ चलि बसलाह!" एक प्रकारक शान्ति पसरि गेल। एक-दू गोटे माजा वेलोकेँ एक संगे उठाबय कऽ प्रयास कएलक। अन्तमे वाणो कहलक: "छोड़ू। ओना आराम नै भेटतनि।" ओ असगरे बूढ़केँ अपन कान्ह पर उठा लेलक आ चलय लागल। हुनका संग आस्ते-आस्ते चलैत माजा वेलोक सन्तान, मोटामोटी तीसटा, बड़बड़ाय लागल। "माजा वेलोक बहुत नीक मृत्यु भेलनि। बहुत आरामदायक मृत्यु। एकटा उत्तम मृत्यु!" __________________ शब्दावली बापा: [स्नेहसूचक सम्बोधन] प्रिय महोदय/भाई। बाधा -अखड़ी: देवताकेँ विशिष्ट वस्तु चढ़ाबय वा कोनो वस्तुसँ परहेज करबाक धार्मिक संकल्प। दातमनि: बबूलक गाछक एकटा पातर ताजा डँठल जाहि सँ दाँत साफ कएल जाइत अछि। डोनी: दूध, दही आदि राखबाक माटिक बासन। काड़ी: बेसनक छोट मीठ गोली जाहि सँ लड्डू बनैत अछि। पड़िया: पात सँ बनल कटोरा। पतराडा: पात सभकेँ सी कऽ बनल डिस्पोजेबल प्लेट। सुतारफेनी: ताग सन देखि पड़य बला एक प्रकारक मिठाई। तसनी: धातुक थारी वा प्लेट। दलपत चौहानक मूल गुजराती 'डर'; हेमांग देसाई द्वारा अंग्रेजीमे अनूदित; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। अवाक् जीवी अपन माथ पर पथियामे महींसक प’रुक लाश लऽ कऽ साथारी (हड्डी थकुचय बला ठाम) धरि आयल, पाछू -पाछू रणछोड़ चक्कू लऽ कऽ दौगैत आयल। बड़ी दूर सँ ओ ललकारा देलनि। "पथिया साथारीक ठीक बीचमे राखि दे।" "ठीक अछि... आब एतय आउ... हमरा उतारबामे हाथ बँटाउ।" जीवी किछु अधीरता सँ घूमि कऽ रणछोड़केँ इशारा करैत उत्तर देलक। रणछोड़ चक्कू जमीन पर राखि देलक आ पथिया उतारबामे ओकर मदति कएलक। जीवी पथिया साथारीक बीचमे पलटा कऽ खाली कएनहिये छल जे कुकुर सभ झपट्टा मारि कऽ आबि गेल। रणछोड़ ललकारा देलनि, "भाग... तोँ सब..." आ ओकरा सभकेँ भगा देलनि। ओ जमीन सँ चक्कू उठौलनि आ हबामे नचौलनि। कुकुर सब सुरक्षित दूरी पर घसकि गेल आ जीह लटकौने हाँफय लागल। कनाजी केर गाछक डारि पर बैसल गिद्ध सभमे सँ एकटा आकाशमे पाँखि फड़फड़ाबैत उड़ल, साथारीक लगपासक चक्कर लगओलक आ फेर ओही गाछ पर जा बैसल। सब गिद्ध लोभी नजरि सँ साथारी दिस ताकि रहल छल। "घर जा आ पथिया-छिट्टा संगे लेने जा। नै...नै... छोड़ि दे। ओ भीखो कोढ़िया लऽ कऽ आयत। हम सब किछु पथियामे राखि कऽ घर लऽ जायब।" "ठीक अछि..." जीवी कहलक आ तेजी सँ वापस भागल। "कनी ठहरू। रस्तामे जेकरा एहिमे हिस्सा होइ, हुनका सभकेँ कहि देबय जे अपन माँसक खण्ड लेबा लेल हमर घर आबि जाय... हँ, ई लाश ओतेक मोट नै छैक।" रणछोड़ महींसक बच्चा दिस इशारा करैत कहलनि। जीवी उत्तर देबाक बदला बिना किछु कहने घरक रस्ता पकड़ि लेलक। रस्तामे ओकर भेंट मीना सँ भेल। जीवी ठाढ़ भऽ गेलीह। "सत्ते अछि जीवी... लवजीक प’रु मरि गेल?" मीना उत्सुकता सँ पुछलक। "अरे हँ... तइ लेल समाचार अहाँ धरि पहुँचि गेल, छै ने मीना माय?" "अरे, हम अनजान कोना रहितहुँ... जखन लवजीक महींस बच्चा देने छल, ओही दिन सँ हम सब किछु बुझैत छलहुँ... एहि महींसक बच्चाक..." मीना अर्थपूर्ण ढङ्ग सँ हँसल आ फेर जोड़लक, "महींसक प’रु (पुरुष बच्चा) पन्द्रह दिन सँ बेसी जीवित नै रहैत छैक। लवजीक कनियाँक धैर्यक प्रशंसा हेबाक चाही जे ओ ओकरा एतेक दिन धरि उघैत रहलीह, ओना नै तऽ बहुत पहिने साथारीक गर्दा चूमि लेने रहितैक।" जीवी घृणा सँ उबि गेलीह। ओ अपन जीह काटि लेलनि आ बिना किछु कहने आगाँ बढ़लीह। "हिस्साक माँसक एक मुट्ठी हमरा सेहो देब, बहिन! सुनैत छी?" ई डनियाही मीना हुनकर पीठ पाछू बकबक करैत रहलीह। ओकर कोनो जवाब नै दऽ कऽ जीवी घर पहुँचि गेलीह आ घरेलू काजमे व्यस्त भऽ गेलीह। भीखो आबि कऽ कुरहड़ि जमीन पर राखि देलक। रणछोड़ लाश पलटा कऽ ठीक कएलक। अपन पएर सँ ठेसि कऽ ओकरा स्थिर कएलक। ओ चक्कूकेँ नाटकीय ढङ्ग सँ रगड़ि कऽ तेज कएलक। "अरे भीखो, लाशक पएर पकड़ू।" भीखो लग आबि कऽ पएर कसि कऽ पकड़ि लेलक। रणछोड़ बैसि गेल। ओ लाश सँ दूर ताकैत ओकर नाङरि पकड़लक। फेर ओकरा एकटक ताकय लागल। "धिक्कार! हमरा सम्पूर्ण जीवन एहिना घसीटैते बीतल अछि। धत् तेरी कऽ! मनुक्खक लेल केहन अभाग लिखल अछि? भूखक यातना सहैत हमरा ई करबाक अछि... जीवित प्राणी जीवित प्राणीकेँ खाइत छैक... की अधम मानव जीवन अछि ई..." ओ मनहि मन बड़बड़ाइत रहल। कने देरी बाद हुनका आभास भेल जे नाङरि पकड़ल तरहत्थी पसीझ रहल अछि। ओ नाङरि छोड़ि देलक आ तरहत्थी जमीन पर रगड़लक। फेर ओ अपन विचारधारा पर खिस्स -खिस्स हँसल आ फेर सँ नाङरि पकड़ि लेलक आ चक्कूक तेज धार ओकर रोंइया पर फेरय लागल। ओ अपन काज शुरू कएलक, हुनकर आँखि अखनो नाङरि पर टिकल छल। नाङरिक गोलाईक अनुपातमे एकटा गोलाकार चीरा लगौलक। अगिले क्षण चीरा सँ शोनित (शुनीत) क एकटा धारा बहराय लागल आ नाङरि चारू पएर सहित काँपय लागल। रणछोड़ किछु बुझबा सँ पहिने, अचरजमे पड़ल महींसक प’रु अनचोक्के उठि कऽ ठाढ़ भऽ गेल आ जोरक धड़ाम सँ जमीन पर खसि पड़ल। भीखो पएर छोड़ि कऽ पहिनेहि एकटा सुरक्षित दूरी पर भागि गेल छल। चक्कू रणछोड़क हाथ सँ छूटि गेल। हुनकर सम्पूर्ण शरीर घाम सँ लथपथ भऽ गेल। ओ आँखि फाड़ि -फाड़ि कऽ महींसक बच्चा दिस ताकैत रहला। अखनो ओकर पएर सभ कनी-कनी थरथरा रहल छल। हुनका एक -दू बेर ईहो भ्रम भेल जे पसलीक बीच सँ पेट जोर सँ फूलल आ घोंकचल। फेर सब किछु एकदम स्थिर भऽ गेल। हतबुद्ध रणछोड़ होशमे आयल। ओ लवजी कोरोट पर बहुत तमसाएल। "धिक्कार! धिक्कार लवजी! बहिनचोद, अहाँ हमर माथ पर पाप लादि देलहुँ। कम सँ कम हमरा तऽ बतेबाक चाही जे परु जिबैत अछि। ई डनियाही जीवी सेहो नै चीन्हि सकल।" ओ जोर -जोर सँ बकबक करैत जमीन पर खसल चक्कू उठौलक आ हाबामे जोर सँ नचौलक, जेना ओ लवजीकेँ काटि देबाक सोचि रहल हो। भीखो कनी दूर ठाढ़ भऽ सब किछु अचरज सँ देखि रहल छल। "अहाँ एतेक हल्ला किएक करैत छी रणछोड़ काका?" "हम आरो की करितहुँ? सत्यानाश, बदमाश पापक बोझ हमर माथ पर लादि देलक... ई महींसक बच्चा..." ओ किछु काल लाशकेँ घूरैत रहला आ फेर भड़कि कऽ बजला, "धिक्कार! ओ सब मजा लैत छथि आ हमरा माथ पर पाप लादि दैत छथि..." फेर जेना किछु मोन पड़ि गेलनि, ओ बजलाह, "अरे भीखो! जाउ, एक गिलास पानि लऽ आउ। अखनो जीव हिलि रहल अछि।" ई सुनि कऽ भीखो ठहाका मारि कऽ हँसि पड़ल। "ओ एकदम ठंढा भऽ गेल अछि काका। पानि सँ की हएत? अहाँ एहि अभागा लेल मुँहमे पानि भरि कऽ श्रद्धांजलि देबय चाहैत छी?" रणछोड़ चुप रहला। भीखो लाशक एकदम लग बैसि गेल। हाथ ओकर नाक पर लऽ गेल, पेट पर सहलौलक आ फेर घोषणा कएलक: "काका, शरीर कनी गरम अखनो अछि, मुदा प्राण नै छैक। बेचारा मरि गेल। आत्मा आँखि सँ शरीर छोड़ि गेल।" ओ कोमलता सँ अपन तरहत्थी जानवरक खुजल आँखि पर राखि देलक आ बन्द कऽ देलक। "आब अहाँ अपन बकवास बन्द करू। एखने तऽ ओ उठि कऽ ठाढ़ भऽ गेल छल। खसिते -खसिते एकदम कोना मरि गेल? अरे, एना नै भऽ सकैत छैक..." रणछोड़ ओहि नव जानवरक मृत्युक वास्तविकता स्वीकार नै कऽ पाबि रहल छलाह। दुनू किछु काल चुप रहला। माथ झुकौने भीखो अपन आंगुर सभ जानवरक बाहर निकलल शिथिल जीह पर बिना मतलब घुमबैत रहल। फेर अनचोक्के लाशक माथ हाथ सँ उठबैत ओ बाजल, "देखू, ई एकदम मुइल अछि। हम ओकरा खूब जोर सँ पकड़ि कऽ राखब, अहाँ नाङरि सँ काटब शुरू करू। थोड़बे देरीमे दुपहरिया भऽ जायत। जँ अहाँ जल्दी करब तऽ दुपहरिया भोजनमे मौसक तीमन बनि सकैत अछि। चलू...!" "तोहर तरकारी चूल्हिमे जरय। सत्यानाश 'चलू' पर। आइ हम ओहि लवजीसँ हिसाब बराबर कऽ लेब। ओ हमरा पापमे धकेल देलक। हम जा रहल छी। मौस काटू, जखन धरि हम ओहि बदमाश सँ फरिछा नै अबैत छी।" रणछोड़ आरो उग्र होइत जा रहल छलाह। ओ जयबाक लेल जल्दी करय लगलाह। "काका, शान्त होऊ। बैसू।" "नै, हम नै बैसब। हम गाम जा रहल छी। आइ हम दुनूमे सँ एकक मृत्यु निश्चित अछि।" ओ चक्कू भीखोक हाथमे थमा देलनि। भीखो चक्कू खूब जोर सँ पकड़ि कऽ उठि कऽ ठाढ़ भेल आ आस्ते -आस्ते लाशक दोसर दिस चलि गेल। "ठीक सँ काटू। हम अखन वापस अबैत छी।" रणछोड़ निर्देश देलनि आ साथारी पाछू छोड़ि कऽ सोझे घरक रस्ता पकड़लनि। अंगनामे पएर धरिते ओ जोर सँ जीवीकेँ पुकारलनि। "अरे ननियोक माय, कतय छी? ननियो कतय अछि?" "अरे ननियो घरमे बेसी देरी रहैत छैक? कहियो नै। ओ अपन नटखट सखा सभ संग खेलाइत हएत। अहाँ लाश काटि रहल छलहुँ, तऽ एतेक जल्दी किएक वापस आबि गेलहुँ?" जीवी बाहर निकलि कऽ पुछलनि। "हमर लाठी दिअ। हम गाम जा रहल छी। चिलम सेहो दिअ, आ जँ चूल्हिमे आगि जरि रहल अछि तऽ एकटा जरैत गोइठा सेहो दिअ।" जीवी रणछोड़ दिस ताकैत रहि गेलीह। फेर ओ बकबक करय लगलीह, "की अहाँ समय सँ कोनो होड़ लगा रहल छी? एतेक हड़बड़ी की अछि?" "धिक्कार छैक, तोर भाइक भाग्य फूटल अछि। अरे, अहाँ एकटा जिऐत महींसक बच्चा लऽ कऽ अयलहुँ आ अखनो हमरा सँ पूछैत छी की बात अछि?" जीवी किछु बुझबैत छलीह कि मावजी पंड्यो अंगनामे आबि कऽ ठाढ़ भऽ गेलाह आ अपन भिक्षाक झोरा कान्ह पर ठीक करय लगलाह। मावजी पंड्योकेँ देखि कऽ दुनू चुप भऽ गेलाह। एक हाथ सँ झोरा सम्हारैत आ दोसर हाथ सँ दम्पतीकेँ आशीर्वाद दैत मावजी पंड्यो कहय लगलाह: "राम -राम कहू भाइ। सबहक भलाई, सबहक विजय। आइ अछि एकादशीक पुण्य दिन। भिक्षुककेँ भिक्षा दिअ... अहाँ सभ पुण्यात्मा..." दुनूमे सँ कियो कनयो नै हिलला, तइ सँ मावजी पंड्यो आगू बढ़लाह; "आइ एकादशीक पुण्य दिन अछि। किछु अन्न दान दिअ। जतेक पुण्य सञ्चय कऽ सकैत छी, करू आ विजयी होऊ।" "अरे मावजी भा, की आइ एतेक भोर अहाँ भ्रमण पर निकलि पड़ल छी?" अनचोक्के रणछोड़क मुँह सँ ई प्रश्न निकलि गेल। मावजी पंड्यो हँसि पड़लाह। "भिक्षुक लेल भोर आ दुपहरियामे की अन्तर अछि? भिक्षुककेँ भिक्षा दिअ। अहाँ कहियो एकादशीक व्रत राखैत छी? जँ अहाँ किछु नै खैने छी, तऽ एकादशीक व्रत राखू। अहाँ बहुत रास पुण्य सञ्चय करब... धर्म पाप सँ मुक्ति दियाबैत छैक..." "सत्ते?" रणछोड़ अचरज सँ कहलनि आ हुनका तुरत्ते ओहि महींसक बच्चाक मोन पड़ि गेलनि। "सत्यानाश, हम धोखा-धोखीमे पाप कऽ बैसलहुँ... व्रत रखला सँ पाप सँ मुक्ति भेटैत छैक!" ओ विचारमे मग्न भऽ गेलाह। भिक्षुकक उपदेश सुनला कऽ बाद जीवी भीतर गेलीह आ मुट्ठी भरि कऽ बाजरा लऽ कऽ एली। "ई लिअ... भाइ।" मावजी पंड्यो अपन झोराक सभ झोराकेँ बेरा-बेरीसँ हाथ सँ दबा -दबा कऽ चिन्हलनि जे कोन झोरामे बाजरा अछि आ ओकर मुँह जीवी दिस बढ़ौलनि। जीवी बाजरा ओहिमे धऽ देलनि। "विजयी होऊ। भाइ, हम आशा करैत छी जे बस्तीक कुकुर सब कटाह नै छथि, छै ने!" "हँ... ओ सब एहन नै अछि..." रणछोड़ संक्षिप्त जवाब देलक। अपन दाता सभकेँ विजयी होएबाक आशीर्वाद दैत मावजी पंड्यो दोसर घर दिश प्रस्थान कएलनि। मावजी पंड्योकेँ जाइत देखि कऽ रणछोड़केँ लवजी मोन पड़ि गेल। ओ जीवी सँ कहलक- "आब हमरा हमर चिलम आ लाठी दिअ। जल्दी करू।" रणछोड़ गाम जयबाक लेल जल्दी करय लागल। "अरे, अहाँ अखनो ओकरा बिसरि नै पएलहुँ अछि?" "हम जे कहलहुँ से सुनलहुँ नै? बिना बेसी बुधियारी देखौने हमरा हमर लाठी दिअ। महाराज कहैत छथि जे आइ एकादशीक पुण्य दिन अछि। लवजी भा काटबा लेल एकटा जिऐत प्राणी देलनि। जखन अहाँ ओकरा एतय लऽ अयलहुँ, तऽ अहाँ सेहो ध्यान नै देलहुँ?" रणछोड़ कऽ प्रश्न सुनि कऽ जीवीक शोनित (शुनीत) जमि गेल। जखन ओ महींसक बच्चा उठाबय गेल छलीह, मनिमा फुसफुसा कऽ कहने छलीह: "अरे जीवी! ओकरा चुपचाप लऽ जा। ओ आस्ते -आस्ते साँस लऽ रहल अछि, मुदा रस्तामे ओ प्राण त्यागि देत।" ओ जानवर लऽ जयबा सँ मना कऽ देने छलीह मुदा मनिमा ओकरा पाँच किलो बाजराक लोभ देने छलीह, तइ सँ ओ राजी भऽ गेलीह। ओ रणछोड़केँ ई बतायब बिसरि गेलीह। ऊपर सँ लवजी भा पड़ोसी गाम महीस कीनबा लेल गेल छलाह। ओ अपन गलती नुकाबय लेल बहाना बनाबय लगलीह। "तऽ की भेल जे ओ ई जिऐत महीस पठौलक? आब तऽ ओ मरि गेल, छै ने?" "हँ, ओ मरि गेल, मुदा साथारी जे पाप सँ अपवित्र भेल अछि, ओकर की? सत्यानाश, ओ सब बेचारा जानवरकेँ दूध नै दऽ कऽ भूख सँ मारैत छथि आ फेर कहैत छथि जे मियोर सब सदिखन लाशक प्रतीक्षा करैत रहैत अछि, सत्यानाशी पापी सब!" जीवी बिना उत्तर देने ठाढ़ रहलीह, तइ सँ ओ भीतर चलि गेलाह। केबाड़क पाछू देबाल सँ टेक लगा कऽ राखल लाठी उठा लेलनि। चिलम आ तम्बाकूक पुड़िया लेलनि आ अपन हाफ-शर्टक जेबीमे राखि लेलनि। लाठी हाथमे लऽ कऽ बाहर एला। "सावधान रहब जे ककरो सँ झगड़ा नै हुअय। भगवान सब किछु देखैत छथि। हम महींसक बच्चा नै मारने छी, ठीक अछि।" "अपन बकवास बन्द करू अहाँ, स्वर्गक न्याय कऽ वकील! अपन भोजन पकाबय पर ध्यान दिअ। हम कनिये कालमे वापस अबैत छी।" "हम जे कहलहुँ से सुनलहुँ? झगड़ा सँ ककरो भलाई नै होइत छैक। लवजी भा असगरे नै छथि जे महीसक बच्चा मारैत छथि, सम्पूर्ण देश ई करैत छैक।" जीवीक बकवास पर कान नै दऽ कऽ रणछोड़ गामक लेल प्रस्थान कएलनि। हुनकर भीतर एकटा भारी अशान्ति उमड़ि रहल छल। जीवीक गप सभ हुनकर मोनमे बेर-बेर आबि रहल छल। "लवजी भा असगरे नै छथि..." "ठीक अछि... गप तऽ सही अछि... सम्पूर्ण देश ई करैत छैक। मानलहुँ, मुदा ओ सब जिऐत महीस साथारी नै पठाबैत छथि।" ओ अनायास बकबक करैत कहलनि। "आ जँ सम्पूर्ण गाम महीस काटबा लेल पठाबय, तखन मियोर आ कसाईमे की अन्तर रहि गेल?" ओ चलैत -चलैत गहीर विचार करैत गेलाह। चलैत -चलैत ओ जोर सँ माथ हिलाबैत रहलाह। हुनका अपन चिलम पीबय कऽ एकटा अदम्य इच्छा भेल। ओ सड़कक कातमे ठाढ़ भऽ कऽ अंगाक जेबी सँ चिलम निकाललनि। तम्बाकूक पुड़िया निकाललनि, मुदा 'पवित्र अङ्गार' कतय सँ आनब, ई सोचैत ओ ओकरा फेर जेबीमे राखि देलनि। तखने महीसक बच्चाक विचार मोनमे कौंधि गेल। ओकर थरथराइत पएर... हुनकर शरीरमे भयक थरथरी दौगि गेल। हुनकर माय हुनका कहैत छलीह, "जँ हम कोनो जिऐत प्राणीकेँ मारैत छी, तऽ हमरा भगवानकेँ ओकर सन सोनाक प्रतिमा भेंट करय पड़ैत अछि।" हुनका सोनाक महीसक बच्चा भेंट करय पड़त? ओ सोचलनि। से कतय सँ अनतथि? सोनाक विचार मात्र सँ ओ एहि दुर्दशाक बीचोबीच हँसि पड़लाह। "सत्यानाश, हमरा चारि बर्खक दासता कऽ कऽ अपन कनियाँ लेल एकटा काँटी गढ़ाबय कऽ जोगाड़ भेल। आ आब भगवानकेँ देबा लेल सोनाक महीसक बच्चा...!" ओ आगाँ बढ़लाह। विचारमे डूबल रहैत ओ लवजीक घर धरि पहुँचि गेलाह। मनिमा अंगनामे ठाढ़ छलीह। ओ रणछोड़केँ अबैत देखलनि आ तुरत्ते तमसा उठलीह। "अरे अहाँ! जीवीकेँ महीस लऽ गेला एतेक देरीओ नै भेलै आ अहाँ बिना लाज-धाखक अपन बाजरा लेबा लेल एतय आबि गेलहुँ। सत्यानाशी अभागा पेटू सब... अहाँ सभकेँ किछु मर्यादा नै अछि। ओतय कोनमे गाछक जड़ि लग बैसू। हम कनी कालमे अहाँकेँ अहाँक हिस्सा देब।" "कोन हिस्सा?" रणछोड़ मनिमाक गपक मतलब नै बुझि सकलाह। "आब चुपचाप बैसू, बिना कोनो की-किएक कएने।" रणछोड़ मनिमाक आज्ञा टालि नै सकलाह, कारण लवजी भा आबय बला छलाह। ऊपर सँ ई जानि कऽ जे लवजी भा आबि रहल छथि, ओ अपन लाठी देबाल सँ टेक लगौलनि, गाछक छाहरिमे जड़ि पर बैसि गेलाह आ विचारमे हरा गेलाह। ध्यान नै रहलनि जे हुनका एहिना झुकि-झुकि कऽ बैसल कतेक देरी भऽ गेल। थकनी आ भूख सँ बीच -बीचमे किछु ओंघी सेहो लागनि। "अरे महीसकेँ ओतय लोहाक खुट्टी सँ बान्हू। ओ जड़ि पर के बैसल अछि? अरे रणछोड़, एहि समय एतय की करैत छह?" लवजी भा कऽ ललकार सुनि कऽ रणछोड़ घबड़ा कऽ जागलाह। ओ अपन लाठी उठौलनि। महीसक बच्चाक गप मोन पड़ि गेलनि। लाठी पर पकड़ कसि लेलनि, मुदा लवजी भाकेँ अपन सोझाँ सोझ ठाढ़ देखि कऽ ओ डेराय गेलाह। हुनकर देहक सभ रोमकूप सँ घाम निकलि आयल। की कहब अछि आ की नै, ओकरा बुझिमे नै आबि रहल छल। एक गोटे महीसकेँ लोहाक खुट्टी दिस खींचि रहल छल। बड़ मुश्किल सँ हुनकर मुँह सँ शब्द निकलल- "महीस...बच्चा...!" "सत्यानाशी महीसक बच्चाक! हम तऽ ई महीस किनलहुँ अछि। ओकर जे परु भेल छल, ओ दू दिनमे मरि गेल बेचारा। महीस एक बेरमे खूब दूध दैत छैक..." लवजी भा अपन नव-कीनल महीसक प्रशंसा करय लगलाह। ई सुनि कऽ जे एहि महीसक बच्चा सेहो मरि गेल, रणछोड़ कऽ मुँह सँ अचरज बला शब्द निकलि गेल। "की...?" "अहाँ की-की करैत रहब? ऐ सिगरेट कऽ किछु कश लिअ। ई महींस पाँच हजारक अछि, एक पाइ कम नै... बुझलहुँ... अहाँ एतय किएक आयल छी ओना?" अपन डींग हाकला कऽ बाद लवजी भा एकटा जरैत सिगरेट फेकलनि, जाहि पर ओ किछु कश लेने छलाह। रणछोड़ लाठी छोड़ि देलनि, ओ अपन छाती सँ टेक लगौने रहि गेल आ तरहत्थी सँ सिगरेट पकड़ि लेलनि। सिगरेट आंगुर सभक बीच राखि कऽ ओ बिना किछु देखने ओकर दिस ताकैत एकटा कश लेलनि। ओ कश एकदम नीक नै लागलनि। ओ अकाश दिस एक नजरि खिरेलक। "सत्यानाश, दुपहरिया बीति गेल। की हम सुतल छलहुँ?" ओ मनहि मन बड़बड़यलाह आ सिगरेट पर फेर एकटा कश लेबाक प्रयत्न कएलनि। हुनका बुझेलनि जेना हुनकर सम्पूर्ण मुँह तीत भऽ गेल अछि। कनी झुकि कऽ ओ सिगरेट मिझा देलनि आ बचल खण्ड जेबीमे राखि लेलनि। हुनका बुझेलनि जेना हुनका भयंकर पियास लागल छनि, आ संगहि भूख सँ पेटमे मरोड़ सेहो भऽ रहल छनि। लवजी भा आ ओ दोसर लोक महींसक देख -रेखमे व्यस्त भऽ जाइ गेलाह। तखने मनिमा घर सँ बाहर निकललीह। "अखनो एतहि छी? जाउ... साँझमे आउ। धिक्कार छैक, अहाँ एतेक देरी धरि धरती सँ सटल रहलहुँ! अहाँकेँ नै बुझल अछि जे दुपहरिया भऽ गेल?" रणछोड़क महींसक बच्चाक मुद्दा पर लड़बाक सम्पूर्ण शक्ति कतम भऽ गेल छलनि। भयंकर पियास हुनका व्याकुल कऽ रहल छलनि। मुदा ओ पानि नै मांगलनि। "सत्यानाश... सब एक्के जकाँ अछि!" ओ बड़बड़यलाह आ घर दिस चलि गेलाह, मुदा बाजराक विषयमे सम्पूर्ण मामिला नै बुझि सकलाह। घर पहुँचि कऽ ओ लाठी अंगनामे फेकि देलनि आ जीवीकेँ पुकारैत रिरियाय लगलाह- "अरे ननियोक माय, हमरा एक गिलास पानि दिअ। पियास सँ मरि रहल छी।" "अरे, अहाँ लवजी भाक घर गेल छलहुँ। हम आशा करैत छी जे ओतय कोनो झगड़ा नै भेल, छै ने?" जीवी गिलासमे पानि लऽ अबैत बेस चिन्ता सँ पुछलनि। "लवजी भाकेँ धिक्कार! हमर थारी परसू। हम भूख सँ मरि रहल छी।" "अहाँ की...?" "हम किछु नै कएलहुँ अछि। जा आब। हमर थारी तैयार करू।" "रोटी आ तरकारी तैयार अछि।" जीवी राहतक साँस लैत कहलक आ जमीन सँ लाठी उठा कऽ जल्दी सँ घरमे ढुकि गेलीह। रणछोड़ हाथ, पएर आ मुँह धोलनि आ गिलास सँ पानिक किछु घोंट पी लेलनि। फेर भीतर जा कऽ गिलास पानि बला ठाम पर राखि देलनि आ अपन माथ कऽ कपड़ा सँ मुँह पोछैत, हठनी लग पलथा मारि कऽ बैसि गेलाह। जीवी पीतलक 'चारणी' मे रोटीक ढेरी आ महींसक बच्चाक माँस सँ बनल तीमन 'तसनून' मे राखि कऽ बाहर एली आ रणछोड़क पएर लग राखि देलनि। "ई तरकारी ककर अछि?" रणछोड़ तसनूनमे हुलकि कऽ पुछलनि। "अरे, महींसक बच्चाक माँसक। बिसरि गेलहुँ?" "की...?" रणछोड़ घबड़ा कऽ कहलनि। ओ आरो किछु कहय चाहैत छलाह, मुदा एकदम कहि नै सकलाह। ओ अपन आँखि तसनून पर टिकौने रहलाह। हुनका बुझायल जेना तसनूनमे राखल तीमन सचेत रूप सँ उसना रहल अछि। आस्ते -आस्ते तसनूनमे बड़कनाइ बढ़ैत गेल। पहिने महींसक बच्चाक खुर... फेर पएर... आ अन्तमे सम्पूर्ण महींसक बच्चा तसनूनमे अभरि आयल। ओ अविश्वास सँ जोर सँ अपन हाथ सँ आँखि मीड़लनि... तखने एकटा जोरसँ धड़ामक अबाज सँ ओ घबड़ा गेलाह। बुझायल जेना महींसक बच्चा तसनूनमे दया भावसँ छटपटा रहल अछि। ओ अपन नजरि तसनून पर जमौने रहलाह। जेना तसनून सँ शोनित (शुनीत)क एकटा पैघ धारा बहि रहल हो... आस्ते -आस्ते ओ आरो पैघ होइत गेल। थरथरात नाङरि... अनचोक्के धड़ाम सँ जमीन पर खसि पड़ल... महींसक बच्चा जमीन पर पछाड़ि खा गेल... सम्पूर्ण घर महींसक बच्चाक चीर-फाड़ सँ भरि गेल। सभ ठाम गाढ़ लाल... एकदम शोनित (शुनीत) जकाँ... ओ आँखि बन्द कऽ लेलनि। "जँ अहाँ अखन धरि किछु नै खैने छी... तऽ व्रत रखला सँ पाप सँ मुक्ति भेटैत छैक!" मावजी पंड्योक शब्द हुनकर मोनमे घूमि रहल छल। तखने हुनका बुझायल जेना डिड़ियाइत महींसक बच्चा धमकी दैत घर दिस दौगैत आबि रहल अछि, रणछोड़ घबड़ा कऽ उठि गेलाह। हुनकर सम्पूर्ण शरीर घाम सँ तर-तर भऽ गेल। "अहाँ किएक उठि गेलहुँ? एखने कहलहुँ जे भूख सँ मरि रहल छी!" जीवीक अबाज सुनि कऽ ओ आँखि खोललनि। जीवी हुनकर सोझाँ ठाढ़ छलीह। चारणीमे रोटी आ तसनूनमे मौसक तीमन राखल छल। ओ स्तब्ध छलाह। बुझि नै पड़ैत छल जे की करी। अनचोक्के आगू झुकि कऽ ओ तसनून हटा देलनि। फेर सोझ भऽ बैसलाह। हटल तसनूनक दृश्य मोन सँ हटला कऽ बाद ओ बहुत राहत अनुभव कएलनि, आ जखन ओकरा आरो किछु नै फुरल, तखन ओ जेबी सँ सिगरेटक बचल खण्ड निकाललनि आ खिसियाइत हँसी हँसि कऽ घोषणा कएलनि: "हमरा अजेनम सँ जरैत गोइठा दिय। आइ हम व्रत रखने छी।" _________ शब्दावली • अगियारश: चान्द्रमासक एकादशी; ओहि दिन व्रत राखल जाइत अछि। • अजेनम: चूल्हिक मुँह पर छाउर आ जरैत अङ्गार राखबाक ठाम। • भा: पैघ लोक लेल सम्बोधन। • चारणी: रोटी (रोटला) राखबाक लेल छिद्र बला धातुक थारी। • हठनी: एक कोठली बला घरमे चूल्हिकेँ अलग करबा लेल बनल छोट देबाल। • काका: सम्मानसूचक सम्बोधन; चाचा। • कांटा: नाकक गहना। • मियोर: चमार जातिक व्यक्ति। • रोटली: हाथ सँ थपथपा कऽ बनाओल मोटा रोटी। • साथारी: कनी खोधल धरती जतय लाश काटल जाइत अछि। • तसनून: एकटा पैघ छिपली-थारी। _________________________ नजीर मंसूरीक दू टा गुजराती कथा- “समुद्री बाज” आ “हंगामा”; मूल गुजराती सँ अंग्रेजी हेमांग देसाई आ अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर। नजीर मंसूरी नजीर मंसूरी (जन्म १९६५) समकालीन गुजराती साहित्यक क्षेत्रमे एकटा उभरैत साहित्यकार छथि। ओ कथा आ उपन्यास लिखैत छथि। एखन धरि हुनकर कथा संग्रह 'ढाल काचबो' प्रकाशित भ' चुकल अछि, जाहिमे हुनका देशभरि सँ प्रशंसा भेटल अछि। हुनकर दू टा पैघ उपन्यास 'चांडाल चक्रावो' आ 'वेशपालटो' शीघ्र प्रकाशित होबय वाला अछि। हुनकर कथा "भूथर" केँ कथा फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा 'द बेस्ट ऑफ द नाइनन्टीज फिक्शन' (नब्बेक दशकक सर्वश्रेष्ठ कथा) क लेल चुनल गेल छल आ १९९७ मे हुनका रचनात्मक कथाक लेल 'कथा पुरस्कार' सँ सम्मानित कएल गेल छल। १९९९ मे ओ 'संस्कृति प्रतिष्ठान पुरस्कार' सेहो प्राप्त भेलनि। नजीर गुजरातक नवसारीक एकटा कॉलेजमे प्राध्यापकक रूपमे कार्यरत छथि। हुनकर बहुत रास कथाक अंग्रेजी अनुवाद सचिन केतकर, संजीव खांडेकर आ हेमांग देसाई द्वारा कएल गेल अछि। हुनकर कथाक अनुवाद 'इंडियन लिटरेचर' आ 'न्यू क्वेस्ट' सन प्रतिष्ठित पत्रिकामे प्रकाशित भ' चुकल अछि। समुद्री बाज [मूल गुजराती: नजीर मंसूरी] फेर एक बेर जानू सासुर सँ खिसिया कऽ घर घुरि एली। लखा आता आ बन्या आई उदास भऽ जाइ गेलाह। बहुत दिन सँ दुनू बिना रुकल विलाप करैत छलाह: "अरे बाप रे... ई लड़की अछि की बेलाज छौड़ा? धिक्कार छैक, सासुरमे रहबाक तरीका बुझैत छैक की नै? फेर ढुकि आयल। आब छाती पीटू आ माथ कूटू। सत्ते हमर जीवन बरबाद भऽ गेल।" बन्या आई कनैत स्वरमे बकबक करय लगलीह। ओ कोठीक सोझाँ केबाड़ लग मुँह लटकौने बैसल छलीह। लखा आता अंगनाक देबाल कऽ कातमे उगल एकटा आमक गाछक छाहरिक नीचाँ पसरल एकटा छोट खाट पर सुतल छला। जानू देबाल सँ टेक लगौने, तेतरिक भुजल आँठी चबाबैत बैसल छलीह। "हँ... हम तोरा एकदम शुरूहेमे कहि देने छलहुँ। ओ विधुर छथि। ओ सुखायल ठाढ़ि जकाँ एकदम नाम-पातर छथि। एहन मनुक्ख एहि बेलाजक बेशर्मीक बराबरी नै कऽ सकैत अछि। मुदा अरे बाप रे, के हमर सुनैत अछि...?" लखा आता बन्या आईक बकबक पर खिसिया गेलाह। "अरे आब एकरा देखू, हम एहि मूर्खकेँ की कहूँ? मुदा हमरा तऽ ई बता दिअ जे सुखायल ठाढ़ि जकाँ होइ वा महींस जकाँ हृष्ट-पुष्ट, एहि सँ मनुक्खकेँ की अन्तर पड़ैत छैक? आ पातर भेलामे की खरापी छैक? कनिये कालमे ढेर रास बच्चा भऽ जयतैक। सभ साल गर्भवती। जखन हमर बियाह भेल, हम केहन छलहुँ...? हँ, बताउ। के कतेक जल्दी गर्भवती भेल? अहाँकेँ ककरा मोन रहै छै? ठीक अछि, तखन अहाँ सत्यानाश, कोना बकबक करैत छी?" "हम मानैत छी जे ओ विधुर छथि। हुनकर पहिल कनियाँ इनारमे डूमि कऽ आत्महत्या कऽ लेने छलीह। मुदा ई स्त्री एहन अछि जे ओकरा सेहो डुबा कऽ घुरि आयत। एकदम उपद्रवी! धिक्कार छैक, बच्चा एतेक नीच भेल।" लखा आता दूरक चीज साफ नै देखि सकैत छला। जानू चलाकी सँ मुस्कुराइत ई बकबक सुनैत बैसल रहलीह। लखा आताक मोटामोटी तीस बीघा खेत सोझे समुद्र किनारक टिब्बा क्षेत्र सँ लागल छल। बीस बीघा जमीनमे देशी नारिकेलक गाछ आ फलदार गाछ छल- मुनिगा, बादाम आ खजूरक गाछ। टिब्बाक दिस मोटामोटी दस बीघा जमीन बंजर छल। रामटाडिया आ रावणटाडियाक अलाबे किछु नै छल। सब किछु भयावह रूप सँ रहस्यमय लगैत छल। ताड़क बगैचा पूरा समुद्री बाज सभक कब्जामे छल। ओतय गाढ़ भूर पाँखि आ गरदनि पर उज्जर पट्टी बला समुद्री बाज, पूरा उज्जर समुद्री बाज, जकर उज्जर-कारी पाँखि छल, आ धूसर रङ्गक बोनहा बाज सभक खोंता कऽ अलाबे ओतऽ आरो किछु नै छल। गिद्ध सब सेहो सभ राति आ दिन ताड़क गाछ पर बैसल रहैत छल। ताड़क लहलहाइत हरियर पात ओहि पक्षी सभक बीट (गुआनो) क कारण सड़ि जाइत छल। काँट रहित कैक्टसक घेरा गडनी काँकच आ चनोठी कऽ झाँखुड़ सँ घेरल छल। घाटीक बाहरी कात पर एलोवेराक झाँखुड़ सँ एकटा मोट घेरा बनल छल। एलोवेराक कुण्डली सभ गाँथल-गुँथल छल। मीठ मौध सन पानिक एकटा इनार छल जाहि पर रहट लागल छल। एकर ठीक बगलमे कैक्टसक घन जंगल पसरल छल। दू सँ पाँच टा बड़द , दू सँ चारि टा बकरी, दू-तीन टा महींस आ ढेर रास मुर्गा-मुर्गी पालल-पोसल जाइत छल। लखा आताक परिवार गाममे सम्पन्न मानल जाइत छल। हुनकर सब सँ पैघ बेटी रम्भूड़ी, अफीमक तेज घोल पी लेने छलीह आ ओहि जलन बला पीड़ा सँ पएर पटकैत-पटकैत असमय आत्महत्या कऽ मरि गेल छलीह। जानू हुनका बाद छथि। पुंजो फटाड, हिजड़ा, सब सँ छोट अछि। लखा आताकेँ आँखिसँ ठीक सँ नै देखाइ दैत छलनि; दुनू आँखिमे मोतियाबिन्द भऽ गेल छलनि। ओ साठि बर्खक उमेर कऽ लगपास छलाह। मोटामोटी बीस बर्ख सँ ओ सब अपन डेरा एहि खेतमे जमा लेने छलाह। पुर्तगाली सभ संग युद्धक समय गाम पर बमबारी भेल छल। समुद्री बाज जकाँ हवाई जहाज उड़ल आ गड़गड़ायल। तखन सब गामक लोक डर सँ एतय-ओतय भागलाह आ शरण लेबा लेल एहि खेतमे धकेलाइत एला। गामक लोक सभ संग ओ सब सेहो एला; फेर ओ सब एतहि बसि गेलाह आ कहियो वापस नै गेलाह। बन्या आईक उमेर मोटामोटी पचास -पचपन बर्ख हएत। ओ अपन प्राकृतिक गठन सँ सत्ते बलिष्ठ आ हृष्ट -पुष्ट छलीह। युवावस्थामे हुनकर उद्दण्डता एकदम जानू जकाँ छल। रम्भूड़ीक मृत्युक बाद पछिला किछु बर्ख सँ ओ दुबरा गेलीह अछि आ हुनकर चाम ढील पड़य लागल छनि। हुनकर गोर मुँह पर झुर्री सभ जेना-तेना पसरि गेल छनि। हुनकर आँखि सँ लगातार मोतियाबिन्दक पानि चुबैत रहैत छैक। खेतमे एकटा नोकर राखल गेल छल- सीदी कढ़म, हृष्ट-पुष्ट। ओ भूत जकाँ मेहनत करैत छल। नमछुरुक, भारी आ एकदम पहलमान जकाँ। ओकर नाम घोसिआयल केशमे सदिखन गर्दा-कचरा लागल रहैत छलैक। सब कहैत छल जे ओकर बाबू ओकरा सँ बेसी बलिष्ठ छल। ओ गाममे मुगल जमीन्दारक पहरेदार छल; गरम स्वभाव आ चलाक। ठीक सीदी कढ़म जकाँ। सीदी सदिखन टिब्बा सँ लागल एलोवेराक घेरा वा कैक्टसक सघन पाँति सभमे जाल बिछौने रहैत छल। तीतर, खरगोश आ उज्जर वा कारी डोमकौवा ओहिमे फँसि जाइत छल। ओ बहुत चलाक छल आ बहुत कम बाजैत छल। जानू कऽ अलाबे ककरो सँ आवश्यकता सँ बेसी कहियो गप नै करैत छल। ओ रेती बला समुद्र तट आ कादो भरल नाला सभमे गाछ-बिरिछक बीच घुमैत-भटकैत रहैत छल। टिब्बा लग 'खुनीमा इनार' लग ओकर एकटा पैघ कारी एकचारी छल। ओ असगरे रहैत छल आ अपन भोजन अपने पकबैत छल। जाड़मे जखन सारस, राजहंस आ बतख सभ उड़ि कऽ अबैत छल, ओ ओकरा देखि कऽ कहियो छोड़ैत नै छल। जखन जाड़क एहन पक्षी हाथ नै लगैत छल, तऽ ओ पुंजो हिजड़ा द्वारा पालल मुर्गा -मुर्गीमे सँ एक -दू टा चोरा कऽ लऽ जाइत छल। जखन पुंजो हल्ला करैत छल, तऽ ओ बुझबैत छलैक, "हम ओहि धिक्कार समुद्री बाजकेँ देखलहुँ। अरे अहाँ पहरा किएक नै दै छी...?" "हमरा कनीको पता नै चलैत अछि जे ई सार समुद्री बाज कहिया झपट्टा मारैत छैक। ओना नै तऽ ओकर सभ पाँखि नोचि दैतहुँ। जखन समुद्री बाज झपट्टा मारलक, तखन अहाँ की कऽ रहल छलहुँ?" पुंजो हिजड़ा अजगुत नजरि सँ सीदी कढ़म दिस ताकैत रहैत छल। "अरे, आब एकरा सुनू। हम एतय खेतीक काज करबा लेल छी। की अहाँ हमरा धिक्कार समुद्री बाज भगाबय लेल रखने छी? अहाँ एहिना बाजैत छी जेना कहि सकैत छी जे समुद्री बाज कहिया आक्रमण करत।" सीदी बुधियारी सँ सम्पूर्ण मुद्दा टालि देलक। जानू दू बेर बियाह कएने छथि। दोसर बेर ओ एकटा विधुर सँ बियाह कएलनि। तखन सीदी कढ़म तामस आ ईर्ष्या सँ बताह भऽ गेल। ओ एतबो सहि नै सकल जे जानू एकटा विधुर सँ बियाह कएने छथि। भीतरहि भीतर ओ हुनका सँ प्रेम करैत छल। गामक ओझा-गुणी सभ कहैत छल: "एहि परेशानीक सम्बन्ध ताड़क गाछ वा 'खुनीमा रहट' बला इनार सँ अछि।" गामक जानकार बूढ़ सभ आपसमे गप करैत छल: "अरे बाप रे, ई खेत मूल रूप सँ एकटा बनियाक छल। ओ बनिया मालाबारक लेल अपन जहाज चलबैत छल। मुदा हुनका मात्र एकटा बेटी छलनि। ओ बनिया ओकरा खूब लाड-प्यार करैत छल। जेना ओकरा अपन तरहत्थी पर राखि कऽ दुलार करैत रहलाह। मुदा ओ बेटी खेतक नोकर पर मोहित भऽ गेलीह। 'हमर बियाह हएत तऽ हुनकरे संग हएत, नै तऽ सब हमर भाइ-बाबू छथि...!' बनिया बेस मुश्किलमे फँसि गेल। ओ सभ उपाय कएलक- बुझबैब, रिश्वत, सजा। मुदा ओ स्त्री अपन संकल्प सँ डगमगएलीह नै। ओ जिद्दी स्वभावक छलीह, ठीक समुद्री बाज जकाँ। ओ बनिया सेहो ओतबे जिद्दी छल। मुदा ओ लड़कीकेँ एतेक बेशी प्रताड़ित कएलक जे अदहा राति कऽ अन्हारमे खेत सँ चीत्कार सुनाइ पड़ैत छल। ओ ओकरा एहिना मारैत छल। अन्तमे ओ स्त्री एतेक घृणा सँ भरि गेलीह जे एहि टिब्बाक बगलमे एलोवेराक झाँखुड़ लग बला पैघ इनारमे अपन छाती सँ एकटा बेस भारी पाथर बान्हि कऽ डूमि मरलीह। एतेक सब उपद्रव एकटा मामूली बात पर। समय बीतैत गेल। कहानी अखनो बाकी अछि। हमर भगवान ऊपर सँ सब किछु देखैत छथि। बनियाक जहाज मालाबारक तट पर माल सहित बरबाद भऽ गेल। घाटा पूर्ण करबा लेल बनिया दोसर जहाज बेचि देलक। ओ चलाक बनिया खेत लखा आताकेँ, जे सामन्त छलाह, बहुत मामूली दाम पर बेचि कऽ बम्बई चलि गेल। जँ ककरो आह लागि जाय, तऽ ओकर धन नष्ट भऽ जाइत छैक। पीड़ितक आह सहन करब उचित नै अछि। ऊपर सँ कियो कहि रहल छल जे ओहि 'खुनीमा इनार' मे एकटा डाइन नियमित रूप सँ प्रकट होइत छैक। बनिया बहुत कटु भऽ गेल छल, तखन ओ ओतय कोना रहि सकैत छल? ओ स्त्री अपूर्ण इच्छा सँ मरलीह, तेँ ई ओझा-गुणी सभ मानैत छथि जे ओ समुद्री बाजक रूप धारण करैत छथि। ओ खेतमे ककरो एकोरत्ती शान्ति सँ नै रहय दैत छथि। बाकी रहस्य तऽ मात्र हमर राम बुझैत छथि...!" अपन रातिक भोजन समाप्त कयला कऽ बाद बन्या आई आ लखा आता बीचक कोठलीमे बैसि गेलाह। पुंजो हिजड़ा जरैत लालटेन लऽ कऽ अंगनामे बासन माँजबा लेल बैसि गेल। जानू घरक सब सँ पाछू बला अपन छोट कोठलीमे लेटल बीड़ी पीबि रहल छलीह। पछुआर दिस बला केबाड़ एकदम खुजल छल। ताड़क गाछक दिस सँ लालटेनक टिमटिमाइत इजोत आबि रहल छल। ओ सीदी कढ़मक एकचारी छल। समुद्री बाजक आँखि जकाँ चमकैत लाल बत्ती जरि रहल छल। ओकर कारी नाम छाह सभ चारू कात घूमि रहल छल। जानू वापस आयल छलीह, तेँ सीदी कढ़म बहुत असहज भऽ गेल छल। ओकर मनःस्थिति ठीक ओहि मुर्गी सभ जकाँ भऽ गेल छल जे समुद्री बाजक आक्रमण होइतहि कोलाहल मचबय लगैत छैक। पुंजो हिजड़ा, जकर उमेर मोटामोटी पन्द्रह-सत्रह बर्ख हएत, एकदम जानू जकाँ नाम -पातर ताड़क गाछ सन छल। मात्र एतबे फरक छल जे ओ ओतेक हृष्ट-पुष्ट नै छल। पहिने जानू खेतमे बहुत मुर्गी आ बतख पोसने छलीह; हुनकर जयबा कऽ बाद पुंजो सब किछु सम्हारैत छल। ओ तरह -तरहक काज करैत छल- मुर्गी सभकेँ खोंतामे बन्द करब, अण्डाक जाँच करब, बजार लऽ जायब, बेमार मुर्गी सभक देख -रेख आदि। मवेशीक गोबर साफ करब, कपड़ा धोब, बासन माँजब, तरकारी-रोटी पकाएब- सभ काज पुंजो हिजड़ा बिना ककरो कहन करैत छल। ओ बन्या आई कऽ चारूकात घुमैत रहैत छल... धिक्कार छैक! ओकर बाजब एहन छल जेना ओ एकटा स्त्री हो! ओ सदिखन अपन वाक्य शुरू करैत छल, "अरे बाप रे...!" जखन कियो महिला सभक विषयमे कोनो गन्दा हँसी करैत छल, तऽ ओ लजा जाइत छल। "अरे बाप रे, अहाँ सब मनुक्ख छी की जानवर? एतेक गन्दा हँसी किएक करैत छी? सत्यानाश, आब लाज करू। अरे बाप रे, हमरा बहुत लाज लागि रहल अछि...!" लगपासक खेतक मजदूर सब ओकरा परेशान करैत छल: "अरे पुंजो, आउ चलू बियाह करब। हमर कनियाँ बनू।" तखन ओ कहैत छल, "हम अखन किशोर छी। जखन विवाहक उमेर हएत, तखन अहाँ सँ बियाह करब।" शुभ वा अशुभ अवसर पर ओ बन्या आई संग महिला सभक भीड़मे बैसि कऽ खाइत छल। ओ बहुत खुश छल, कारण जानू सासुर सँ खिसिया कऽ वापस आबि गेल छलीह। "मेमुद बेगाडो फेर वापस आबि गेल। समुद्री बाजक प्रजाति सँ अछि।" जानू फेर बीड़ी लेसलनि। "हम ओकरा सभकेँ, ओहि नीच जन्मा सभकेँ, एकदम शुरू सँ कहि रहल छलहुँ जे हम एहन बड़द जकाँ मनुक्ख सँ बियाह नै करब। हमर बाबू सेहो एकटा शैतान मनुक्ख छथि...!" ओ भरल अबाजमे बड़बड़ाय लगलीह। "सत्यानाश! सभ दिन जखन उठैत छथि, तऽ भाँग घोटि कऽ पीबैत छथि। साधु -सन्त आ बच्चाक सखा सभ संग पड़ल रहैत छथि। राति भेला पर ओ लगपासक गाममे भजन गाबय जाइत छथि। काज -धाज करब तऽ दूरक बात। हम जीविका चलाबय लेल मजदूरी करय बाहर जा कऽ कतेक कमा सकितहुँ? दस बीघा खेत छल, तइ सँ गुजर-बसर भऽ जइतैक। हम सेहो साल भरि खेतमे मेहनत करैत रहैत छी। ठीक अछि, कोनो बात नै...! सेहो ओ बेचय कऽ हठ करय लागला... जँ हम बुझबैत छलहुँ, तऽ पूछैत छलाह की ओ हमर बाबूजीक छैक? 'मरला बाद की अपन छाती सँ सटा कऽ लऽ जायब?' फेर एक बेर हम अपन नियंत्रण छोड़ि देलहुँ आ ओकरा पीटि देलहुँ।" बन्या आईक शब्द लाल चुट्टी जकाँ जानूक मोनमे घिसिआय लागल। "आब अहाँ सत्यानाशी, चुप रहू... बस चुप रहू। जँ ओ एतेक नामर्द छथि, तऽ अहाँ सेहो ओतेक बलवान आ मर्द नै छी, छै ने? अरे देखू, एतय आएल 'मेमुद बेगाडो' महान! आब अहाँ हमरा बताउ।" बन्या आई कनैत -कनैत बकबक करय लगलीह। "अहाँ एहि मामिलामे मर्दानगी आ ओकर मायकेँ किएक लऽ अबैत छी? बताउ, जँ ओ आब एतय आबि कऽ ठाढ़ हएत, तऽ हम ओकरा एक मुक्कामे नै पछाड़ि दैतहुँ? तखन हम अपनेकेँ लखा सामन्तक वंशज नै कहब। अहाँ सत्यानाशी हमर सासु, अहाँ समुद्री बाज जकाँ चिचिआय किएक लागल छी? जँ अहाँकेँ अपन बेटीक पालन -पोषण कठिन लागैत अछि, तऽ हम चलि जाएब। अहाँ सभक माथ पर तऽ कोनो फानी नै लटकल अछि, जकर लोभमे हम रहबा लेल तैयार होएब, ठीक अछि? एतय खेतमे सेहो की हम दू टा मनुक्खक बराबर पानि पटाबय कऽ मेहनत नै करैत छी? सत्यानाश, मर्दाना लोक सब अपन मर्दानगीक डींग हाकैत छथि जेना ओ सब एकमात्र एहन छथि। हम सेहो कोनो नामर्दक आश्रित नै छी जे चूड़ी पहीरि कऽ डरपोक बनि कऽ बैसब, ठीक अछि...?" जानू चिचिअयलीह। लखा आता खिसिया तऽ गेलाह, मुदा अपन तामस दबा लेलनि। "मुदा प्यारी, हमर गप बुझय कऽ प्रयत्न करू। जँ अहाँक पति एहन छथि, तऽ हम हुनका बुझा -सुझा कऽ देखब। अहाँक रुख एकदम सही अछि। अहाँ जे ओकरा पीटलहुँ, सेहो उचित अछि। हमरा ई पसन्द आयल। मुदा अहाँक पहिल सासुरमे की समस्या छल?" "ओ एकदम हिजड़ा जकाँ छल... अहाँ देखितहुँ जे ओ कोना चलैत छल। एकदम स्त्री जकाँ। जेना ओ हमर पुंजो कऽ अलाबे आरो कियो नै हो!" एहि दुखद स्थितिमे सेहो ओ हँसि देलनि। "अरे, आब एकरा सुनू। हम अहाँकेँ एकदम शुरूमे चेतावनी देने छलहुँ जे एहि छौड़ीकेँ 'हमर बेटा... हमर बेटा' कहि कऽ जुनि पोसू। आब ओहि 'मेमुद बेगाडो' केँ घरमे राखू। आब ओकरा भरि पेट रोटी खियाउ। ओकरा संग झगड़ा करू। अहाँक पति तऽ लोककेँ एक मुक्कामे पछाड़ि देबय बला छथि...!" बन्या आई कछमछीमे आ तामसमे छलीह। जानूक ऊँचाइ सभक ध्यान खैंचैत छल। ताड़क गाछ जकाँ नाम। बलिष्ठ आ हृष्ट -पुष्ट शरीर, चाम परसोना रङक रोंइया; मुदा मोटाई कतहु नै देखि पड़ैत छल। हुनकर बनावटि पहलवान जकाँ छल। कनी आयताकार मुँह, नाक समुद्री बाजक बेस नोक लोल जकाँ। बिलारि सन धूसर आँखि। डाँर धरि लहराइत नाम, सोनहुल चमक बला घन केश। चलैत समय डगमगाइत तोप सन। भरल आ कर्कश अबाज। गरम स्वभाव, ओ निर्दयी आ उग्र देखि पड़ैत छलीह, एकदम मर्दाना मनुक्ख जकाँ। ओ सदिखन धूम्रपान करैत छलीह, कखनो बीड़ी तऽ कखनो हुक्का। ओ दाँत पर नोसि रगड़ैत छलीह। निअम सँ शराब आ ताड़ी पीबैत छलीह। बच्चा सँ कोनहु ताड़ आ नारिकेलक गाछ पर चढ़बाक कला विकसित कऽ लेने छलीह। ओ दू -चारि दिनमे एक बेर बिना कोनो लकड़ीक तख्ताक सहाराक समुद्र तटक दलदलमे नहाबय जाइत छलीह। मौसमक अन्तिम चरणक खतरनाक समयमे सेहो जँ ओ समुद्र तटक कादो बला पाँकमे नहाबय चाहैत छलीह, तऽ नहा लैत छलीह। ककरो बाबू कऽ नै चलैत छल। लगपासक खेतक मजदूर सब पुंजोकेँ परेशान करैत छल, तऽ ओ ताड़क पात सँ ओकरा सभकेँ मारैत छलीह। बिना झगड़ा -मारिपीट हुनका चैन नै भेटैत छलनि। बियाहक बाद ओ डाँर पर 'ज़िमी' आ रङ्गीन आंगी पहिरैत छलीह, मुदा पहिल नजरिमे ओ हृष्ट-पुष्ट पुरुष कऽ अलाबे आरो किछु नै बुझाइत छलीह। गामक एकटा लड़का हुनका उपनाम देने छल-'मेमुद बेगाडो'। पछुआरक खुजल केबाड़ सँ ओ सीदी कढ़मक घरक दिस ताकैत रहलीह। ओ ओकरा बहुत पसन्द करैत छलीह, मुदा ओकरा सँ सेहो ओ बिना गारि देने गप नै करैत छलीह। हुनकर दू बेर बियाह भेल छल आ सासुर सँ झगड़ा भेला पर सब जानूकेँ दोषी मानैत छल। मात्र सीदी हुनकर पक्ष लैत छल। "अरे, ओ एतेक सुन्दर स्त्री छथि, एकदम समुद्री बाज जकाँ। जँ अहाँ सभ, सत्यानाशी मूर्ख सब, हुनकर देख-रेख नै कऽ सकैत छी, तऽ मनुक्ख जाति निश्चित रूप सँ कानत... छै ने? मानलहुँ हुनकर हजार टा गलती भऽ सकैत छैक, मुदा अहाँ सभ अपशकुन चौपाया जकाँ हुनकर रस्ता किएक काटैत छी?" सीदी कढ़म, जे बहुत कम बाजैत छल, जानूक एला पर लखा आता आ बन्या आईक झगड़ाक समय भड़कि कऽ बाजल छल। अपन एकचारी सँ हुनकर छोट कोठली दिस ताकैत जानू खिसियाइत हँसलीह। ठंढा हवा बहि रहल छल, संगहि समुद्र तटक नुनगरहट लहराइत ठाढ़ बाजराक फसलकेँ भेदैत आयल। सीदीक कोठली पर अन्तिम नजरि खिरेलक आ ओ केबाड़ बन्द कऽ लेलनि। पुंजो बासन माँजि कऽ साफ कऽ लेलक, आ बाँसक पथियामे राखि कऽ भीतर लऽ गेल। हाथ-मुँह धोयबा कऽ बाद ओ अपन खाट बन्या आईक कोठलीमे हुनके कातमे पसारि कऽ लेटि गेल। "अरे अहाँ, एतेक गुमारमे कपड़ा पहिरने किएक लेटल छी?" बन्या आई बड़बड़यलीह। "अरे बाप रे, हम लाज सँ मरि जायब...!" मुँह पर कम्बल खींचि कऽ पुंजो लजा गेल। "अहाँ सत्यानाशी, लाज सँ किएक मरब?" बन्या आई खिसियाइत हँसलीह। लखा आता खोंखलाह। पुंजोकेँ ई नीक नै लागल। ओ साधारण रूप सँ सेहो ओहि पुरुष सभकेँ पसन्द नै करैत छल जे खोंखैत छल, अपन डाँरक नीचाँ कुड़ियाबैत छल आ जे पैघ-पैघ मोंछ बला आ उद्दण्ड छल। जाड़क आगमनक संकेत अनुभव कएल जा सकैत छल। सभ राति लगातार बरखाक कारण जाड़क चादरि वातावरणमे पसरि जाइत छल। दुपहरियामे रौद एतेक धिपल होइत छल जे चाम चटचटाबय लागैत छल। देशी बाजरा मोटामोटी पाकि गेल छल। नीचाँ पूर्ण पीयर। फतिङ्गा सभ सेहो पीयर कचोर छल। जानू लालटेनक जरैत बत्ती कऽ टेमी कम कऽ देलनि। चिमनी साफ नै छल, तेँ एक कात पूर्ण कारी भऽ गेल छल। ओ जल्दी सँ अपन देह सँ सटल आंगी उतारि फेकलनि। ज़िमी उतारि कऽ खाटक माथ दिस फेकि देलनि। अपन माथ पर हाथ राखि कऽ ओ एकटा हृष्ट-पुष्ट पुरुष जकाँ पएर पसारि कऽ बीड़ी पीबैत लेटि गेलीह। "धिक्कार छैक, ओ एहिना आँखि फाड़ि कऽ हमरा किएक ताकि रहल अछि? की ओ सीदी कढ़म अछि? हम ओहि पहलवानकेँ एक मुक्कामे बोकरा देबै।" अगिलहि क्षण ओ सोचलनि, "बेचारा कम सँ कम ओहि बूढ़ जिद्दी बड़द सँ तऽ नीक अछि। ओ एकदम नव मुर्गी जकाँ अछि...!" नथियाक चमकक संग हुनकर नाम मुँह एकटा बहादुर मनुक्ख जकाँ चमकि रहल छल। नाम दाँतक एकटा पाँति, गाढ़ लाल रङ्ग सँ रँगल। जखन समुद्री बाज अपन लोल पसारैत छैक, गाढ़ लाल मुँह देखबैत छैक, ओ एकदम ओहिना लगैत छलीह। ओ एकटा विधुर सँ बियाह कऽ कऽ चलि गेल छलीह। पहिलहि राति ओ डेराय गेलीह। "अरे माय, सत्यानाश एहि दुष्टकेँ, सदिखन हमर पाछू लागल रहैत अछि। किएक, एहिना किएक?" नि:सन्देह ओ मजगूत काँतिक छलीह, मुदा तैयो सभ राति झगड़ा होइत छलनि। दू -चारि बेर ओहो सहि लेलनि। मारि-पीट कऽ बाद ओ एकटा लाश जकाँ भऽ जाइत छलीह... अगिला दिन बेजान। एक -दू बेर ओ हुनका एहिना मारलनि जे ओ शोनित (शुनीत) सँ लथपथ भऽ गेलीह। भगवान जानथि ओकरा की भेल छल, मुदा ओ हुनकर पीठ पर लागल रहैत छल। एकदम जानवर जकाँ। जानू किछु बुझबा वा सोचबा सँ पहिने... ठीक ओहिना जेना समुद्री बाज झपट्टा मारि कऽ मुर्गाक अँतरी बाहर निकालि लैत छैक... जानूक मोट बीड़ीसँ कारी भेल ठोढ़मे मुस्कुराहटि पसरि गेल। ओ हाँसू (शार्कक आरी) रखने छलीह। ओ ओइ सँ ओकरा मारैत छलीह। बस एतबे, आ फेर जखने ओ चिचियाइत छलीह, विधुर मुर्गा जकाँ चुक्की -माली बऽ जाइत छल। ओ एकटा धिक्कारल भक्तक कला सीखय लागल। दिन -राति एकटा दुखद हंगामा मचल रहैत छल। भरि दिन विधुर जानू सँ डराइत रहैत छल। मुदा कथा किछु आरो छल। ओकर एकटा प्रिय आ भोली बहिन छलीह- गंगाड़ी, जकर बियाह पड़ोसी गाममे भेल छल। ओ बेर-बेर अपन भाइक घर अबैत छलीह। एक दिन दुपहरियामे ओ दुनूकेँ घरक भीतर एक-दोसर संग लिपटल देखि लेलक। ई दृश्य देखि ओकर आँखि आश्चर्य सँ फाटि गेल, ओ सहि नै सकल। गंगाड़ीकेँ कोरामे लैत जानू हुनकर ठोढ़ आ मुँह चूसि रहल छलीह। एकदम पुरुष जकाँ ओ गंगाड़ीक देह सँ लिपटल छलीह। "हे भगवान, ई कोना भऽ सकैत छैक? दू टा स्त्री एहन गन्दा काज किएक करैत छथि? धिक्कार छैक, दुनू बताह भऽ गेल अछि?" विधुरक माथ घूमि गेल। ओ असहज भऽ गेल। जखन जानू सँ दोस्ती भेल, तऽ गंगाड़ी अपन भाइक घरमे अपन सम्पूर्ण सामान लऽ कऽ सदिखन रहय लगलीह। ऊपर सँ ओ भाइ -भाउजक झगड़ामे जानूक पक्ष लेबय लगलीह। तकर बाद विधुर कइएक बेर ई दृश्य देखलक। एक बेर तऽ जाड़क कनकनाइत राति मे, जखन ओ भजन सँ घर घुरल, ओ दलानक जाली सँ दुनू गंगाड़ी आ जानूकेँ देखलक। बड़ मुश्किल सँ ओ खसबा सँ बचल। दुनू एकदम उघार, कुहरैत आ सनसनाइत। दुनू एकदम एक दोसरामे घोसिआयल छल। जमीन पर ताड़क पातक पटिया बिछल छल। गंगाड़ीकेँ ओहिना देखि ओ सहि नै सकल। ओ कामुक बेमारी सँ ग्रसित छल। हुनकर दिमाग घुमैत रहैत छल। ओकर बाद ओकर सभ राति खराब सपना सँ भरल बीतय लागल। ओ सम्पूर्ण राति जागल रहैत छल। गंगाड़ी हुनकर घरमे आराम सँ रहैत छलीह। ओ हुनका बुझबैत अपन सासुर जयबा लेल कहैत छल, मुदा सब व्यर्थ। अन्तमे ओ खिसिया कऽ हुनकर सामना करय लागल। अन्ततः गंगाड़ी तामस सँ भरि उठलीह: "अरे बाप रे, सत्यानाश अहाँ पर! अहाँ किएक चिचिआय लागल छी? की हम सभ अहाँ पर बोझ छी? हम तऽ मेहनति करय जाइत छी... हम तऽ ढेपा फोड़ैत छी... अहाँ एहि लेल किएक चिन्तित होइत छी?" बादमे ओ बकबकाय लगलीह, "की ई घर मात्र अहाँक अछि? बाबूजी खेत हमर नाम लिख देने छलाह। अहाँ किछु कमाइत तऽ छी नै, आ ऊपर सँ चिचियाइत छी, सत्यानाश अहाँ पर...!" जानू गारीक ढेर लगा देलनि। ओ हाँसू पकड़ि लैत छलीह, आ बस ओ पुरुष नै रहि जाइत छल। ओकर कण्ठ आत्म-दया सँ भरि उठैत छल। हुनकर मोन जानू आ गंगाड़ीकेँ अलग करबाक उपाय खोजैत रहैत छल। गंगाड़ीकेँ ओकर सासुर सँ बहुत बजाहटि भेल, मुदा ओ नै मानलीह। अन्ततः ओ थाकि गेल। ओ जादू -टोनाक सहारा लेलक, मुदा किछु नै भेल। ओ सम्पूर्ण राति जागल रहैत छल। जे सपना देखैत छल, सेहो डेरौन। दू टा समुद्री बाज हुनका पर आक्रमण कऽ रहल अछि। ओ मुर्गाक बच्चा सन नुकाबय लेल ठाम खोजैत एम्हर-ओम्हर भागैत। जखन समुद्री बाज झपट्टा मारैत छल, तऽ ओकर पाँखि तमसायल नख बला हाथमे बदलि जाइत छल, ओकर सभटा पाँखि नोचि लैत छल। ओ कल्पना करैत छल जे जानू आ गंगाड़ीक मुँह पर समुद्री बाजक नोक सन लोल उगि गेल अछि। ओ घबड़ा कऽ उठि पड़ैत छल। ओ एकाएक एहिना सिहरि कऽ जागि जाइ छलाह जेना अपन खाटसँ खसि रहल होथि। ओ कोनो अघोरीसँ अपना लेल एकटा ताबीज बनवा लेने छलाह। हुनका गाँजा भरल चिलम टानबाक आदत लागि गेल छलनि। ओ सन्यासी कहैत छलाह, "बौआ, ई डकढोल कपड़ा सब समुद्री बाजक भेष मे किएक मँडराइत अछि?" आ ओहि विधुरक आँखिसँ नोर बहय लगैत छलनि। ओ जानू कऽ गामक ओझा सब कें ई बजैत सुनने छलाह, "एकरा पर ताड़ कऽ बगैचा मे रहय वाला समुद्री बाजक प्रेत सवार भऽ गेल छैक।" हुनका सभ किछु गोल-गोल घुमैत बुझाइत छलनि जाहिसँ हुनका चक्कर आबि जाइत छलनि। गंगाड़ीक सासुरक लोक हुनका लऽ जेबाक लेल अबैत छलाह आ विधुर कें गारि दऽ कऽ विदा भऽ जाइत छलाह। विधुरक जिह्वा जेना जड़ भऽ गेल छलनि। एकदम चुप। ने किछु बजबाक सामर्थ्य, ने कोनो बात पर छटपटाहटि। सीदी कढ़मक विचार जानूक मोनमे बेर-बेर उठि रहल छल। "ओ नाजायज राँड़क बच्चा एतय आबि धमकल अछि जेना खेत ओकर बाबूजीक हो। एक दिन हम ओकरा बोकरा नै देब, तऽ हमर नाम नै। ओ ओहि नाविकक कनियाँ लग कोना लिपटल रहैत छैक! धिक्कार छैक! ओ हमर गंगाड़ी जकाँ नै अछि। झोरायल माछ जकाँ... ओकर ठोढ़ ताड़क फल जकाँ कोमल आ ओकर जीह कतेक अद्भुत छल! नारिकेलक मलाई जकाँ..." जानू अपन मोट ठोढ़ काटय लगलीह। जेना ओ गंगाड़ी संग लिपटल होथि। गंगाड़ी लजा जाइत छलीह। जानू जखन ओकरा कोरामे लैत छलीह, तऽ ओ धिपल सन भऽ जाइत छलीह। हाँफैत ओ हुनका काटय लागैत छलीह। ओ अपन नह सँ गंगाड़ीकेँ नोछड़ैत छलीह। फेर अनचोक्के ओ एकदम ढीला भऽ कऽ खसि पड़ैत छलीह। "गंगाड़ी कतेक अनमोल स्त्री छलीह!" हुनकर चाकर चिक्कन शरीर। भोरमे उठला पर गंगाड़ी जानूकेँ ओतेक सहजता सँ नै देखि पाबैत छलीह जेना राति मे देखैत छलीह। जानू अश्लील हाव-भाव सँ हुनका किचकिचबैत छलीह। गंगाड़ी लजा जाइत छलीह आ नूपुर जकाँ बाजैत हँसि पड़ैत छलीह। धूसर साँझ वा ओस-भीजल भोरमे, गंगाड़ी संग जानू शौच जयबाक गप पर घृणा सँ ठोढ़ घोकचि लैत छलीह। गंगाड़ी पड़ोसी स्त्री सभक भीड़ संग शौच जाइत छलीह। मुदा जानू असगरे जाइत छलीह। हँसी-मजाकमे सेहो जखन ओ गंगाड़ी संग चलबाक प्रस्ताव रखैत छलीह, गंगाड़ी लजबिज्जीक गाछ जकाँ लजा जाइत छलीह, "अहाँ हमरा संग ओतय किएक जबरदस्ती करैत छी? हमरा लाज लागैत अछि, अरे बाप रे... हमरा की होइत अछि, धिक्कार छैक...?" "अरे, अहाँ हमरा पुरुष बुझैत छी?" जानू हँसैत हुनकर आंगीमे आंगुर गड़बैत छलीह। "अरे, अहाँ तऽ हमर पुरुष छी। अरे बाप रे, हमरा लाज लागैत अछि। अहाँ किछु बुझैत छी की नै? अहाँ हमरा ओतय किएक धकेलैत छी?" लालबून्द भऽ कऽ, गंगाड़ी अश्लील इशारा कऽ कऽ मुस्कुराइत स्त्री सभक भीड़मे अढ़ भऽ जाइत छलीह। राति क दोसर पहर मोटामोटी बीति गेल छल। ताड़क गाछ सभक बीच, एलोवेराक झाँखुड़क झोंझ लग, घर मौन आ नीरव ठाढ़ छल, जेना चारू कात पसरल काँट रहित कैक्टसक झाँखुड़क बीच फँसि कऽ स्तब्ध भऽ गेल हो। काँट रहित कैक्टसक डारि सभ कारी कनामेंग्लोरी टाइल सँ छाजल छत पर लटकल रहैत छल। कैक्टस पर पिरौंछ हरियर कोमल नव अङ्कुर फूटल छल। टिब्बा सभक कारण कैक्टस पसरि गेल छल। अपन एकदम कारी कोठलीमे सीदी खाट पर लेटल छल। राति होइते ओ लालटेन मिझा देने छल। ओ मात्र अन्हारमे सूति सकैत छल। ठीक ओहिना जेना समुद्री बाज अपन माथ पाँखिमे दबा कऽ शान्त भऽ जाइत अछि, ओ अपन माथ नुका कऽ लेटल छल। हुनकर गलमुच्छ जेना-तेना बढ़ल छल। मोंछ कैंचीक नोकक धार जकाँ। घोसिआयल केश कऽ गुच्छामे कारी-उज्जर केश सभक छल्ला छल। दूर सँ देखला पर माथ समुद्री बाजक पीठ जकाँ लगैत छल। हुनकर एकदम निस्फिकिर जीवनमे जानू एकटा बाधा जकाँ लगैत छलीह। "सभ मामूली बात पर बन्धन पर ,सत्यानाश ! हमर शराब लऽ आउ। महुडो, किएक नै...? देशी शराब किएक लऽ कऽ अयलहुँ...? हुक्का लऽ आउ। तीतर लऽ आउ, खरगोश लऽ आउ। उथल -पुथल भरल समुद्र वा समुद्र तटक माछ लऽ आउ। ओना नै तऽ एक थापड़मे अहाँकेँ पटकि देब। सदिखन सत्यानाशी ई झंझटि सभ!" ताड़क गाछ सभ सँ एकटा उल्लूक कर्कश स्वर जेना हेलैत आबि रहल छल। ओ मोटामोटी पन्द्रह बर्ख सँ खेतमे मजदूर छल। जानूक बियाह बहुत देरी सँ भेल छल। हुनकर डर सँ ओ थाकि -हारि गेल छल। मुदा एक बेर बियाहक बाद जखन ओ चलि गेलीह, अनचोक्के ओ हुनकर मोन मे आबि गेल। एकटा विचित्र प्रकारक विरहक अनुभूति हुनका घेरि लेलक...! "सत्यानाश, नि:सन्देह स्त्री बहुत बलवान छथि। बहुत उद्दण्ड आ बदतमीज। ई स्त्री छथि की भेष बदलल पुरुष? एकदम मुगल बादशाहक सिपाही जकाँ, अहाँ देखू।" जखन हुनका बीच झगड़ा भऽ जाइत छल, सीदी बहस छोड़ि दैत छल जइ सँ मामिला शान्त भऽ जाय। हड़की (हड्डी) लऽ कऽ जानू आक्रामक भऽ जाइत छलीह आ चिचियाइत छलीह, "अरे, पीठ किएक देखौलहुँ? अरे, मर्द बनि कऽ देखाउ? जँ हम अहाँकेँ एक धक्कामे नै पटकि दी, तऽ कहब।" "अरे बाप रे, स्त्रीक बराबरी कियो नै कऽ सकैत छैक। हमर भगवान दस टा सज्जन पुरुषकेँ कुटि -कुटि कऽ ओकरा बनौने छथि। ओ दुनू सज्जन जे बियाहक घोड़ा पर चढ़लाह, हुनकर लेल सेहो एहनहि भेल हएत, जे सदिखन अपन साहस सँ वञ्चित रहि गेलाह। ओ सब हुनका घर लऽ जयबाक मुद्दा पर गपो नै उठबैत छथि। अहाँ बताउ, कनियाँ सभ मामूली बात पर खिसिया जाइत छथि। आ जँ ओ अपन नैहर चलि जाइत छथि, तऽ पुरुष सभ हुनकर पदचिह्न पर पाछू -पाछू दौगैत अबैत छथि। की बिना कनियाँक सूति सकैत छी? मुदा ई सत्यानाशी 'मेमुद बेगाडो' सत्तेमे बेगाडो अछि...!" हुनकर कम सँ कम दू ठाम बियाह भेल आ ओ खिसिया कऽ वापस आयल छलीह मुदा सासुर पक्ष सँ कहियो हुनका घर वापस बोलबय लेल कियो नै आयल। सीदी बहुत अचरजमे पड़ल। फिलहाल राजहंस आ छाउर सन रङ्गक बगुला सभ झुण्डमे आबि गेल अछि। मुदा आब की जायब सम्भव अछि? ई धिक्कारल विपदा फेर आबि गेल। ओ किछुओ काज बता देतीह, चाहे कतेक मामूली काज हो। ताड़क गाछ पर चढ़ब। नारिकेलक गाछ सँ पात, खोंइचा आ सुखायल पात तोड़ि कऽ खसायब। जँ ओकरा किछु नै फुरैत छल, तऽ ओ समुद्री बाजक खोंता उजाड़बा लेल ताड़ पर चढ़बैत छलीह। ओ सत्ते समुद्री बाज सभक जीवनक अभिशाप छथि। सम्पूर्ण दिन ओ समुद्री बाज जकाँ चिचियाइत रहैत छथि!" शरद ऋतुक प्रारम्भ सँ जाड़क पक्षी आबि गेल छल। एक हप्ता सँ ओ कादो भरल नाला सभमे जाल बिछौने छल। ललका झीलक कात। मुदा एकोटा सारस वा राजहंस हाथ नै लागल। "सत्यानाश, ओ मुर्गा-मुर्गी, राजहंस आ तीतर लेल एकदम पेटाह छथि। आब जँ ओ फानीमे फँसि गेल तऽ की फायदा? ओ असगरे भरि बासन चट कऽ जयतीह। की ओ हालेमे कम मोटाएल छथि? चलैत -चलैत हुनकर चर्बीक तह 'पचारक -पचारक..' करैत छैक। हमरा सँ बियाह करबामे ओकरा की आपत्ति छल? हँ, हँ... हम सदिखन एहन स्त्री चाहैत छलहुँ...!" जानूकेँ सब सँ बेसी किचकिचबैत छल समुद्री बाज सब। अधिकांश समय या तऽ सीदी वा पुंजो ताड़क गाछ पर चढ़ैत छल। जँ समुद्री बाज ताड़ पर अपन खोंता बना लैत वा खोंतामे छोट बच्चा वा अण्डा रहैत, तऽ जानू सबसँ पहिने बानर जकाँ चढ़ि जाइत छलीह। "अरे अहाँ सभ सत्यानाशी राँड़क सन्तान, सत्यानाशी नामर्द सब। सुखायल पात तोड़बाक डर सँ अहाँक कलेजा फाटि जाइत अछि?" ओ मुर्गी सभकेँ अण्डा सेयबा लेल बैसबैत छलीह आ जखन चूजा सभ चहकय लागैत छल, ओ समुद्री बाज सभ पर तमसा जाइत छलीह। जेना ओ सब हुनकर हिस्साक मुर्गा सभकेँ खाय जायत! सीदीक निद्रा टूटऽ लागल छ्ल। कोनो समस्या नै छल जँ जानू आयल छलीह, मुदा ई चिन्ता हुनका खा गेल जे ओ वापस नै जेतीह। "अरे, कम सँ कम किछु गप-सप तऽ होइत। ओना टिब्बा सभमे बूढ़, डाइन आ हिजड़ा पुंजो कऽ अलाबे आरो कियो नै अछि... धिक्कार छैक, मुँहमे रुइयाक गोला ठूसि कऽ सदिखन चुप बैसल रहैत छथि...!" भोर होइत-होइत सीदी जानू कऽ दिस ताकि रहल छल। जानू भड़कि गेलीह। ओ हुनका मारबा लेल नारिकेलक खपलइया उठौने छलीह। "अपन मायकेँ धिक्कार! अहाँ सत्यानाशी चापलूस, समुद्री बाज जकाँ आँखि फाड़ि-फाड़ि कऽ किएक ताकि रहल छी? जँ हम अहाँकेँ एक थापड़मे धरती पर पटकि देब, तऽ अहाँक बाबू सेहो बीचमे पड़बाक साहस नै करत।" ओ खिसियाइत हँसलीह। आ हतप्रभ सीदी चुप भऽ गेल। ओ तानल धनुष जकाँ असहज भऽ गेल। खाट पर करौट बदलैत रहल। दाँत पीसैत ओ बीड़ी सुलगौलक। ओ केबाड़ आधा खुजल रखने छल। हुनकर ध्यान चाँदनी राति मे बाहर हरा गेल। तापमानमे भारी गिरावट आबि जयबाक कारण जङ्गली बिलार आ लोमड़ी सभ खेतमे शिकारी सन बनि गेल छल। अदहा राति मे मुर्गा -मुर्गीक घेरा सँ जोरसँ हल्ला सुनाइ पड़ैत छल। गुमार भरल गुमार सँ व्याकुल भऽ कऽ लखा आता अंगनामे सुतल छलाह, आ एकटा जङ्गली बिलार हुनकर छाती पर चढ़ि गेल। सीदी खोंखैत बाहर निकलल। ओ जानूक एकचारी लग जयबा लेल ललचा उठल। गहीर साँस लेलक आ भीतर चलि गेल। सभ राति ठंढा हवा तेजी सँ बहि रहल छल। ठाढ़ फसल लहराइत छल। "ओ अखनो अपन पुरान ढङ्गक छथि। कनीको नै बदललीह। जेना आइ भोरमे हमरा संग केहन तामस कएलनि, से देखलहुँ नै?" सीदी कढ़म जखनो जानू सँ गप करबाक प्रयास करैत, ओ खिसिया जाइत छलीह। "अरे, बिना झंझट कएने बैसल रहू। सत्यानाश मूर्ख! अहाँ गप करबा लेल एतय ढुकि आयल छी? अहाँ एक बेरमे मक्खनक रोटी खा जाइत छी...!" के जानै दुनूक बीच केहन सम्बन्ध छल? ओ सब जेना मात्र झगड़ा करबा लेल एक संगे होइत छल। एक दिन दुनू सत्ते हाथाहाथी पर उतरि गेलाह। एक लात मारि कऽ जानू सीदीकेँ सिंचाई नहरमे डुबा देलनि। लखा आता दौगि कऽ हुनका अलग करबा लेल एला। "अरे बाप रे, जँ ई लड़का भेल रहितैक, तऽ सम्पूर्ण गामक नाश कऽ देने रहितैक। ओ सत्ते बहुत बहादुर अछि। मुदा ओ स्त्रीक साँचामे ढलल छथि आ हुनकर उद्दण्ड किरदानी सब देखू! जेना हुनकर भीतर पुरुष आ स्त्रीक तत्व एक संगे विलीन भऽ गेल अछि, छै ने?" बन्या आई बड़बड़ाइत छलीह, "पुरुष आ स्त्री, ओ सब एक्के संग अछि। जल्दी ओ अपन चिता पर चढ़ि जाय! हुनकर रूपमे एकटा समुद्री बाज जन्म लेने अछि। जेना समुद्री बाजक विषयमे कियो तय नै कऽ सकैत छैक जे ओ पुरुष अछि की स्त्री, छै ने? हम अपन अभाग्य सँ जन्मल एहि जरल-पेट वाली स्त्री कऽ की करब?" राति गहीर होइ बला छल, मुदा अखनो जानू सूति नै पाबय छलीह। हुनका गंगाड़ी बहुत मोन आबि रहल छलीह। "हम हुनकर घर छोड़ि आएलहुँ, हुनकर माय पर धिक्कार हो। मुदा आब हमर गंगाड़ीक की हएत...? जँ कियो साँखेड़ा-गंगाड़ा जाय, तऽ नोत पठा देब।" लालटेनमे मटिया तेल मोटामोटी खतम भऽ गेल छल। जानूक पिपनी भारी भऽ गेल। भोरे-भोर पहिल मुर्गा स्वर देलक। खेत (रैंच/ फार्म) मे मेरचाइक गाछक बीहनि आ तरकारीक लेल बनल आड़ि (मेढ़) मे... रहट केंय-केंय करय लागल। सीदी सम्पूर्ण राति जगैत रहल छल। जल्दी उठि कऽ ओ कारी चाह बनौलक। झीलक कात ओ फानी लगौने छल। पूर्व दिशासँ घेराक छोट छेद सँ निकलि कऽ ओ अपन तैयार फानी, ठेंगा, मशाल आदि लऽ कऽ ढलान पर उतरि गेल। पुलिनक बगल सँ होइत लाल झील तक जल्दी पहुँचल जा सकैत छल। जाड़क पक्षी सभ दिन निकलै सँ पहिने उड़ि जाइत छल। बदाम (चिनियाबदाम) खोदल जा रहल छल। सारस सभक झुण्ड खेत सभमे उतरि रहल छल। सीदीकेँ बुझायल, पुंजोकेँ संग लऽ जयबाक चाही। मुदा जानू सेहो घरमे कतहु सुतल रहैत छलीह। ओ भीतर जयबाक साहस नै कऽ सकल। पुंजोक सीदी कढ़म संग नीक बनैत छलैक। जानूक चलि जयबाक बाद दुनूक बीच आत्मीयता बढ़ि गेल छल। पुंजो सेहो जानू जकाँ देखा पड़ैत छल। जखन सीदी जानूकेँ मोन पाड़ैत छल, ओ अनायास कहि उठैत छल: "अरे, जँ अहाँ पुंजी रहितहुँ...? जँ अहाँ स्त्री रहितहुँ, ने कि पुरुष! हम निश्चित रूप सँ अहाँ सँ बियाह करितहुँ। अहाँ एकदम जानू जकाँ स्त्री लगितहुँ...!" पुंजो लजा जाइत आ बड़बड़ाइत कहथि, "अरे बाप रे, अहाँ तऽ एकदम असम्भव छी। अहाँ एहन खराप गप किएक करैत छी? अहाँ सँ बियाह कऽ कऽ हम की करब? हम तऽ मात्र कुमार सँ बियाह करब।" सीदी कढ़म ठहाका मारि कऽ हँसि पड़थि। "अरे अहाँ भाग्यक धनी, अहाँ तऽ बताह नै भऽ गेल छी?" पुंजोक निर्दोष मुँह पर लाजक लाली देखि कऽ सीदी उदास भऽ जाइत छल। "हम झाँकीक मुँह पर एहन चीज कहियो नै देखलहुँ। हुनकर अकड़ल थुथुन सदिखन अकड़ल रहैत छलनि। धिक्कार, ई स्त्री छथि की कोनो उपद्रव...?" भोर सँ जल्दी उठि कऽ जानू सोझे रहट-इनार धरि एली। बीड़ी जरा कऽ एकटा छोट चौकोर खाट पर बैसि गेलीह। एकटा पुरुष जकाँ। जेना लाली फोड़ा पर पसरैत छैक, ठीक ओहिना पूर्व दिशा लाल भऽ गेल। सूर्यक लाल गोला उगिते पुंजो बासन लऽ कऽ आयल आ साफ करबा लेल बैसि गेल। रोटी आ तिल कऽ तेलमे गूँथल गुड़ खाय कऽ पेट भरि लेबा कऽ बाद जानू ओहि खाट पर चढ़ि गेलीह। ओ जेना ओहि छोट खाटमे जकड़ि गेल छलीह। "सत्यानाश एहि नखरा बला छौड़ीक!" ओ मनहि मन बड़बड़यलाह। हालमे ओ ज़िमीक बदला घाघरा आ आंगी पहिरय लागल छलीह, जेना ओ अखनो कुमारि होथि! सूर्य मोटामोटी बाँस भरि ऊपर चढ़ि गेल छल, तखन सीदी दू -चारि टा सारस फँसा कऽ घुरल। सारस सभ जूटक बोरामे छल, ओकर पाँखि आ पएर बान्हल छल। "ई सत्यानाशी सारस नि:सन्देह बहुत सुन्दर अछि... मुदा ओकर नाम -नाम पएर सब देखू! ओकर गरदनि आ पएर एकदम जानू जकाँ छैक।" सीदी कढ़म रहट-इनार पर नहाबय लेल आयल छल। महींसक चाम सँ सीयल बाल्टी इनारमे झुलाबैत ओ एहिना कहलक। "की, अहाँ की कहैत छी धिक्कार दुष्ट!" जानू हुनका दिस ताकैत रहलीह। "तऽ अहाँ सोचैत छी जे अहाँ बहुत सुन्दर छी, छै ने? सत्यानाश, अहाँ तऽ सँपेरा सँ बेसी नै लगैत छी। अहाँ हमर बड़ाई करबा लेल किएक आयल छी?" मुस्कुराइत ओ खुशी-खुशी धरिया लगा कऽ नहाबय बैसि गेल। ओकरा मुस्कुराइत देखि कऽ जानू खौंझा गेलीह, "अहाँ सारस लऽ कऽ आयल छी, ई बहुत नीक बात अछि। मुदा आब अहाँ फुग्गी माछ जकाँ फूलू -फलू नै...!" जानू बड़बड़ाइत चलि गेलीह। "अरे, हमर जकाँ लोकक भाग्यमे की फुग्गी माछ जकाँ फुलबाक सौभाग्य अछि? जखन सभ भोर उठिते कष्ट कऽ अलाबे किछु नै भेटैत छैक? हालहिमे अहाँ फुग्गी माछ जकाँ फूलि गेल छी।" सीदीक गप जानूकेँ बिच्छी जकाँ गड़ि गेल। जानू घुरि एली। "अहाँ ककरा सम्बोधित करैत छी दुष्ट? हम बुझैत छी अहाँ कतेक चलाक छी। ताड़क पात सँ पिटाइ पड़त तऽ अहाँ ठीक भऽ जायब, सत्यानाश बेकार आवारा...!" अञ्जलि भरि गर्दा ओ सीदी कढ़म पर फेकि देलनि आ डगमगाइत चलि गेलीह। सीदी हुनकर चाकर पीठ आ डाँर कऽ दिस ताकि रहल छल। जानू तामस सँ अगिया-बेताल भेल छलीह, "धिक्कार छै, सदिखन स्त्री सभ पर नजरि राखैत छैक!" हुनका विधुर पति मोन पडि गेलन। जानूक मोन अकत-तीत भऽ गेलन्हि। सूर्यक रोशनी बाँस भरि ऊपर चढ़ि गेल छल। कारी-उज्जर डोमकौवा आ काग-कौवा सभक झुण्ड चिचिआय लागल। ताड़क पात सँ पथिया बनबै बला दू गोटे खेतमे आयल। सीदी कढ़म बनियाक परदादाक समयक नारिकेल गाछ पर चढ़ल छल पाकल पीयर-हरियर पात तोड़बा लेल। पुंजो हिजड़ा बहुत देरी सँ सारस काटबाक विचार कऽ रहल छल। जानू एखने तरकारीक क्यारी सभमे मेहनति कऽ कऽ घुरल छलीह। ओ तमसायल 'हाँसू' (शार्कक आरी) सन चक्कू पकड़ि लेलनि। सारसकेँ पकड़ि कऽ ओ पछुआरक दूर छोर पर कैक्टसक घेरा तर लऽ गेलीह। ओकर पाँखि आ पएर नीचाँ दबा कऽ, ओ गरदनि काटि कऽ मचोड़ि देलनि। शोनित (शुनीत)क बमकोला फूटि पड़ल। काँट रहित कैक्टसक तना सब शोनित (शुनीत) सँ लाल भऽ गेल। जानूक हाथ -पएर सब गन्दा भऽ गेलनि। पुंजो ओकरा देखि थरथरा गेल। बन्या आई आँखि सँ मोतियाबिन्दक पानि बहबैत बाहर निकसलीह। "अरे... अरे बाप रे! ई स्त्री छथि की कसाई? हुनकर चिता तैयार हो! हम तोरा कतेक बेर कहबौ जे मुर्गा-मुर्गी जुनि काटू? तोर कोखि केहन हएत, सत्यानाश बरबाद?" जानू बन्या आईक बड़बड़ाहट पर खिसियाइत हँसलीह। ओ थुकड़ि कऽ जल्दी सँ 'नान' (हौज) धरि उतरि गेलीह हाथ-पएर धोबा लेल। "तखन किएक? की हम बच्चा जनमब?" जानू बड़बड़यलीह। जानूक ई जवाब सुनि कऽ बन्या आई घृणा सँ ठोढ़ बिचकाबैत भीतर चलि गेलीह। "हे हमर राम... हुनका संग हमरा जड़ैत हृदय कऽ अलाबे आरो किछु नै बचल। बेगाडो, धिक्कार छिनार किछु बुझबाक लेल तैयार नै अछि... अरे हमर माय!" बन्या आईक गप पर पुंजो अचरजमे पड़ि गेल। जखन पथिया सब पूर्ण पात सँ भरि गेल, तखन बन्या आई सँ दाम पर मोलभाव शुरू भेल। कियो किछु बुझबा सँ पहिने जानू ओतय पहुँचि गेलीह। "अरे सत्यानाश, की ई पात मुफ्तमे भेटैत छैक? सत्यानाशी अति -चलाक बच्चा सब! अहाँ पथिया पात सँ भरि लेलहुँ आ आब टका देबाक समय आयल, तऽ जान पर बनैत अछि? टका दिअ वा फेर ताड़क गाछ पर पात सटा कऽ चलू। सत्यानाश लुटेरा सब!" ओ ओही ठाम दाम वसूल कऽ लेलनि। जानूकेँ देखि कऽ पथिया बला हुनका पर बहुत खिसिआयल, "ई सत्यानाशी समुद्री बाज जकाँ कतय सँ ढुकि आयल? आब अगिला बेर पात कीनय एहि खेतमे जुनि आउ। ओ सब पाँच टा पात बेसी नै देलनि आ एक पाइ कम नै लेलनि।" गामक खेत सभमे अपन मनमानी करबाक अभ्यस्त 'शेठ', जानूक अगिया-बेताल मुँह आ दमकैत आँखि देखि कऽ अपमान सँ कारी पड़ि गेल। काज -धाज आ भोजन सँ निवृत्त भऽ कऽ बन्या आई, लखा आता आ पुंजो हिजड़ा सुखायल नारिकेल आ तरकारी लऽ कऽ गाम दिस चलि गेलाह। सब सारसक तरकारी खाय लेने छल। जानू कनी काल विश्राम लेबा लेल लेटि गेलीह। खेतमे असहनीय शान्ति पसरि गेल। समुद्री बाज आकाशमे ऊँच चक्कर काटि रहल छल। जानूकेँ चैन नै छल। सीदी कढ़म ओतहि कतहु छल। कपड़ा आ बासन लऽ कऽ ओ पुरान 'खुनीमा इनार' क टिब्बा क्षेत्रमे स्नान करय चलि गेलीह। आइ ओ मोन भरि नहाबय कऽ वचार बना लेने छलीह। ओ जोरसँ धड़ाम सँ इनारमे कूदि गेलीह। ठीक ओहिना जेना गुमार सँ व्याकुल समुद्री बाज पानिमे गोता लगाबैत छैक। हौजमे पानि कम छल, तेँ ओ 'वाव' (बावड़ी) मे छपाक सँ कूदि गेलीह। इनारमे पानि एकदम साफ आ शान्त छल। सीदी नारिकेलक नव अङ्कुर जूटक बोरामे भरि कऽ, पानिमे पाथर सँ बान्हि कऽ डुबा देने छल। दुपहरियाक काज सँ छुट्टी लऽ कऽ सीदी नारिकेलक गाछ सभ पर समुद्री बाजक खोंता सभक टोह लगा रहल छल। "सत्यानाश, समुद्री बाज सब गाछकेँ बरबाद कऽ दैत छैक। ओ सब बहुत मुर्गा-मुर्गी खा जाइत छैक।" ओ एकटा नारिकेलक गाछ पर चढ़ल छल जे इनार पर झुकल छल। असहज मौन बला दुपहरियामे जानू इनारमे कूदि पड़लीह। सीदी घबड़ा गेल। जानूकेँ देखि कऽ ओ हक्का -बक्का भऽ गेल। "एहि बदमाशक उद्दण्डता देखियनु! चाँदीक माछ जकाँ कूदैत छथि। जँ ई हमरा देखि लेतीह, तऽ लड़बा कऽ अलाबे आरो कोनो उपाय नै रहितैक।" एहिना सोचैत -सोचैत ओ बिनु बुझने एकटा पुरान पात नीचाँ खसा देलक। सीदीक ध्यान सँ बहरा गेल छल जे ओ गाछ पर चढ़ल अछि। कौआ सब हल्ला मचबय लागल। अनचोक्के एकटा समुद्री बाज आबि कऽ सीदी पर झपट्टा मारलक। सीदीक उघार पीठ नख सँ नोछ्ड़ा गेल। ओ गाछ सँ पिछड़ैत उतरय लागल। जानू ओकरा देखि लेलनि। ओ बेहाल अवस्थामे बाहर निकसलीह। ओ मात्र अन्तर्वस्त्रमे छलीह। हुनकर देह एकदम उज्जर आ चाकर छल। सीदी हतबुद्ध भऽ गेल। "अरे, केहन स्त्री छथि ई! तखन पुरुष जकाँ किएक अकड़ैत छथि?" ओ मनहि मन बड़बड़ायल। "अरे अहाँ नामर्द, नारिकेल गाछ पर झूलि रहल छलहुँ? नहाबय काल हमरा निङहारय लेल? अहाँक मृत्यु हो! कोन बुढ़िया ताकि कऽ ओकरा सँ बियाह करू! अहाँ वेश्याक दलाल!" जानू चिचिऐ लगलीह। 'का -का' करैत सीदी तुरत्ते नरम पड़ि गेल। जानू लगक पाथरक हौजमे उतिरि गेलीह। ई एकटा पैघ हौज छल जे बनियाक समयक तराशल छल। "अरे अहाँ ठूँठ जकाँ ठाढ़ किएक छी? इनार सँ पानि खैंचि कऽ हौजमे दियौ!" जानू तमसायल स्वरमे कहलनि। सीदी पानि भरय लागल। हौजमे कइएक बर्खसँ सँ पानि रुकल छल, तेँ लीढ़ जमि गेल छल। पानि दैत काल ऊपर समुद्री बाज देखबाक चक्करमे सीदीक पएर पिछड़ि गेल आ ओ हौजमे जा खसल। जानू सीदीक पीठ पर दू-चारि टा मुक्का मारलनि। जानूक कर्कश अबाज गूँजय लागल- " नीच जनम, दलाल...!" हौजमे खसिते सीदीक छाबा मे चोट लागि गेलैक। पीड़ा असह्य छल। ओकर आँखि सँ पानि बहराय लागल। अपन छाबा सहलाबैत ओ हौजमे जानूक कातमे बैसि गेल। सीदीकेँ कनैत देखि कऽ जानू नरम पड़ि गेलीह। "अरे, बहुत पीड़ा होइत अछि? अहाँ सत्ते एकदम आन्हर छी। आन समय तऽ समुद्री बाज जकाँ आँखि फाड़ि-फाड़ि कऽ ताकैत रहैत छी... नै करैत छी?" जानू हुनकर ऊपर झुकलीह। लीढ़ पर हुनकर पएर पिछड़ि गेल आ ओ सीदीक ऊपर जा खसलीह। ठीक ओहिना जेना समुद्री बाज अपन पाँखि पसारि कऽ शिकारकेँ जकड़ि लैत छैक। दुपहरियाक सुन-सन्नाटा कौआ सभक स्वर सँ टूटि गेल। माटिक गैल चूर भऽ गेल। सीदी हौजक निकासी छेद सँ कपड़ाक गोला बाहर निकाललक। हौज सँ पानि बहय लागल... छप -छप... छप -छप... अरणी फूलक सुगन्ध चारू कात पसरल छल। (अनुवर्तते) हंगामा [मूल गुजराती: नजीर मंसूरी] अखाढ़क कारी पाँखिमे साँझ कनी पहिने आबि गेल छल, कारण आकाश कारी मेघ सँ भरल छल। समुद्र तटक दूर छोर पर मलाह सभक एकचारी पसरल छल। तटक एकदम अन्तिम छोर पर पानी केर एकचारी छल, चारू कात ताड़ आ नारिकेलक गाछ सँ घेरल। एकचारीक पाछू सम्पूर्ण धरती पर ताड़ आ नारिकेलक गाछक घन वन छल। पानी लग मोटामोटी छह बीघाक एकटा खेत छल। खेत चारू दिस कैक्टस आ पाथरक ढेर सँ घेरल छल। जखन मानसून आयल, समुद्र उन्मत्त जकाँ उछलऽ लागल। सभ राति विशाल लहर सभक टकरयबाक गर्जन गूँजैत छल। अन्ततः ओझा-गुणी द्वारा देल गेल ताबीज-ताग सेहो कोनो चमत्कार नै कऽ सकल। मुनिगाक गाछ तर एकटा छोट खाट पर बैसल पानी पश्चिम दिस ताकि रहलीह छलीह। हृष्ट-पुष्ट देह, चालीसक लगधग उमेर, समुद्री बाज जकाँ उज्जर गोर रङ्ग। ओ हालमे किछु असहज भऽ गेल छलीह। हुनकर जिद्दी सासु 'वालू मोटी' अपन हठ पर अड़ल रहलीह आ अन्ततः हुनकर पुनर्विवाह हुनकर पतिक छोट भाइ 'विस्राम' सँ करा देलनि। "सत्यानाशी दुष्ट सब! हमर गप कियो सुनैत नै अछि। वालू फुई (सास) एहि मुद्दा पर अपन बुद्धि हेरा देने छलीह।" पानी अपन खेतमे तरकारी उपजबैत छलीह आ ओकरा बजारमे बेचैत छलीह। "की ओझाक ताबीजक शक्ति एहि नम मौसममे खतम भऽ गेल छैक?" तैयो ओझाक शक्तिमे हुनका बहुत विश्वास छल। पछिला तीन बर्ख सँ डनियाही वालू जिद्द धऽ कऽ हुनकर पुनर्विवाह विस्राम संग करबाक प्रयास कऽ रहल छलीह। आ आब पानीकेँ लागय लागल छल जे विस्राम सेहो हुनका अजीब तरहें घुरैत छनि। विस्रामक व्यवहार सँ पानी मानसिक पीड़ा झेलि रहल छलीह। "सत्यानाशी बदमाश! कोना निर्लज्ज भऽ कऽ हमरा ताकैत अछि... कतय नुका-नुका कऽ हमरा घुरैत रहैत अछि..." विस्रामक उमेर दसे बर्ख हेतैक जखन पानी बियाह कऽ कऽ एहि घरमे आयल छलीह। ओ अपन छोट दिअरकेँ प्रेम सँ पोसने छलीह। पाँच बर्ख पहिने जखन विस्राम गहीर समुद्रमे माछ मारय जाय लागल, तखन ओकर देह खूब विकसित भऽ गेलै। ओ अपन पैघ भाइक एन-मेन प्रतिरूप बनि गेल। विस्राम संग पुनर्विवाहक नाम सँ पानी जड़ भऽ गेलीह, मुदा हुनकर विनय पर कियो धैर्यपूर्वक कान नै देलक, ने वालू मोटी आ नहिये हुनकर अपन सर-सम्बन्धी। ओना वालू डाइन ने तऽ मूर्ख छलीह आ ने कमजोर चरित्रक। ओ ओझा रामो सँ किछु अजगुत प्रेम-औषधि बनबौलनि, संगे -संग बहुत रास आकर्षक ताबीज आ जादू -ताग सेहो। वास्तवमे ओ विस्राम आ पानीकेँ बिनु बुझने ओ औषधि पीबय देने छलीह आ बुधियारी सँ बाकी जादू -टोना पानीक लकड़ीक खाटक पएरमे बान्हि देने छलीह। मुदा पानी साफ मना कऽ देलनि, तइ सँ डाइन तमसा उठलीह। विस्राम आ हृष्ट-पुष्ट, गोर पानीक बीच सफलतापूर्वक सम्बन्ध स्थापित भेले पर बुढ़ियाक आत्मा शान्ति पाओत। पानीक प्रति बुढ़ियाक स्नेह बुढ़ियाकेँ पूर्ण रूप सँ अपने वशमे कऽ लेने छल, ठीक जेना भारी ज्वारीय उफान समुद्री तट पर कब्जा कऽ लैत छैक। ओकर सुन्दर पुत्रवधू कोनो आरो विधुर सँ बियाह करतीह, एहि विचार मात्र सँ ओ अपमान आ ईर्ष्या सँ जरि रहल छलीह। ओ अपन बियाहक समय देल गेल सोनाक चूड़ी सेहो बेचि देने छलीह, ओझाकेँ जादू-औषधि आ मोहक ताबीज लेल भुगतान करबाक लेल। भोर सँ बहुत पहिने बुढ़िया कोटडा लेल प्रस्थान कएलनि, जानि -बूझि कऽ विस्राम आ पानीकेँ घरमे असगरे छोड़ि कऽ, हुनकर विवाहक चुनौतीपूर्ण कार्य सम्पन्न करा देला कऽ बाद। संसारक सम्पूर्ण चालाकी बुझय बला बुढ़िया, रणनीतिक रूप सँ नव -विवाहित जोड़ाकेँ एक -दोसरक सुखद साथमे छोड़ि कऽ निकलि पड़लीह। पानी बुढ़ियाक चालि कनिये कालमे बुझि गेलीह आ घबरा कऽ थरथराइत बजलीह, "सत्यानाश, मोटी सेहो कतेक चलाक अछि! ओ एतेक उछल -कूद किएक करैत छैक? की ओकरा भूत लागि गेल छैक? आ ओ ओझा सेहो हुनकर मांग किएक पूर्ण करैत छैक? सत्यानाश, आइ भोजन लेल की पकाएब? ई सत्यानाशी विस्राम कतय गेल? अरे बाप रे, भगवान जानथि, ओ उथल -पुथलमे, कादोमे वा तट पर कतय अढ़ भऽ गेल।" गाढ़ अन्हार उतरि आयल। कारी मेघ सँ घेरल आकाश जोरसँ गर्जन-तर्जन कऽ रहल छल। समुद्री गाम पर अन्हारक दस-दस टा कारी परदा तोपा गेल, जे ओकरा उदास आ हतप्रभ कऽ देने छल। समुद्रक नुनगरहट बहैत ठंढा हवा डराओन सरसराहटि सँ बहि रहल छल। बरखा, जेना गाम पर भारी बरखा करबाक लेल उपयुक्त क्षणक प्रतीक्षामे हो। पानी पहिने मुर्गा-मुर्गी सभकेँ ओकर घेरामे बन्द कऽ देने छलीह। ओ भनसाघरमे गेलीह। ओ दू टा पैघ कारी मुर्गा पोसने छलीह, जाहिमे सँ एकटा, नाम आ मोट, घेरामे नै छल। ओ खेतक दक्षिण बाड़ा लग चुगैत छल, जखन ओ ओकरा अन्तिम बेर देखने छलीह। पानी ई मुर्गा 'भूतरा दादा' (भूतक राजा) केँ बलि चढ़ाबय लेल निहुछि रखने छलीह, जँ विस्राम हुनकर जादूसँ प्रभावित भऽ कऽ विवाह प्रस्ताव अस्वीकार कऽ दैत। विस्राम भोरमे नाला सभमे गेल छल आ 'चिटकी' माछ तथा गुलाबी मौसल काँकड़ु पकड़ि कऽ घुरल छल। ओ दुपहरियामे काँकड़ुक तरकारी पका देने छलीह आ साँझ लेल किछु चिटकी माछ तरि देने छलीह। ओकरा अखनो बाजराक आटा सँ रोटी बनाबय बाकी छल, जे ओ पहिने सानि कऽ रखने छलीह। विस्राम बेसुध बैसल छल, माछ पकड़बाक डोरी हाथमे लऽ कऽ ओ समुद्रमे दूर फेकि देने छल। 'बीकन' सँ कनी पश्चिममे समुद्र तटक विशाल विस्तार पसरल छल। समुद्र तटक टिब्बा सब ताड़क झुरमुट सँ भरल छल। ओतहि ओ 'खुनीमा ताड़' ठाढ़ छल, जाहि पर कहैत छैक जे कहियो-काल भूत देखा पड़ैत छैक। विस्राम सभ पल पाछू सँ एकटा डरायल नजरि खिरेलक, एक कऽ बाद एक बीड़ी फूँकैत रहल। ओ पहिने किछु माछ निकालि लेने छल। नीक होइत जँ ओ किछु आरो नीक माछ पकड़ि लैत। उथल -पुथल भरल समुद्रक माछ सभक स्वाद सत्ते स्वादिष्ट होइत छैक। ओ सोचलक। मात्र धरिया पहिरने, ओ नुनगर पानिक फूहीपर ध्यान देने बिन एकठाम बैसल रहल। ओ साँझेसँ माछ मारि रहल छल, ओना ओकरा ओतेक आवश्यकता नै छल। पानी भौजीक विचार ओकर मोनमे घुरमि रहल छल। मोटामोटी तीन बर्ख सँ हवामे ओकर विस्राम संग विवाहक चर्चा छल। अन्ततः ओ पूर्ण भेल, मुदा पानी भौजीक सामना करब ओकरा लेल सत्ते असम्भव छल, आ ठीक सेहो, कारण बच्चे सँ ओ हुनका सँ बहुत डराइत छल। आ ऊपर सँ वालू मोटी ओकरा सावधान कऽ देने छलीह जे पानी ओकरा जादू-औषधि मिलाएल चाह-कॉफी पीबय लेल धोखासँ ने दऽ देथि। एहि लेल ओ सदिखन पानी सँ दूरी बना कऽ राखैत छल। "सत्यानाश, ई उपद्रवी स्त्री अपन औषधि-ताबीज सँ हमरा बरबाद कऽ देतीह। की ओझाक जादू विफल भऽ सकैत छैक?" आ किछु काल लेल ओ पाछू 'खुनीमा ताड़' केँ बिसरि गेल आ गहीर समुद्रमे दूर ताकय लागल। "सत्यानाश, बदमाश घरमे धमकल छल। ओ औषधि -ताबीज बनबावय लेल हुनका बजौने छलीह।" दुपहरियामे ओ अपन जाल लऽ कऽ नाला सभमे गेल छल। सूर्यास्त भेने जखन ओ घर घुरल, ओ डर सँ थरथरा गेल। ओझा डेरौन ढङ्ग सँ बैसल छल। विस्राम ओझाकेँ देखि स्तब्ध रहि गेल। ओकरा वालू मोटीक चेतावनी मोन आबि गेल। तामस सँ जाल फेकि कऽ ओ बाहर चलि गेल। पानी आ ओझा दुनू विस्रामक एहि व्यवहार पर तामस सँ भरि जाइ गेला। चौंका देबय बला मौन तोड़ैत ओझा कहलक, "आब हमरा नै लगैत अछि जे अहाँक समस्या हल करबा लेल किछु कएल जा सकैत अछि। डाइन बेसी शक्तिशाली जादू कऽ देने छैक।" "आब अहाँ एतेक निश्चित कोना भऽ सकैत छी?" अविश्वास सँ पानी उदास स्वरमे पुछलनि। "हम सब बुझैत छी... हम व्यर्थे ओझा नै कहाबैत छी, ठीक अछि?" भयक भारी आतंक जे ओझा हुनका विरुद्ध क्रूर जादू करत, हुनका पहिनेहि थकुचि रहल छल। मुदा जँ अहाँ एकटा कारी मुर्गा बलि देबा लेल तैयार छी, तऽ हम एकटा उपाय पर विचार कऽ सकैत छी... हम जादू -टोना लेल सब सामान लऽ कऽ आयल छी।" ओझा कामुक दृष्टि सँ कहलक। हतप्रभ भऽ पानी असहज भऽ गेलीह। एक कप कारी चाह पीला कऽ बाद ओझा चलि गेल। जाइत -जाइत ओ पानीकेँ मोन दियओलनि, "साँझमे हम अहाँ लेल मुर्गा बलि दऽ देब। कारी मुर्गा तैयार राखब...!" अपन माछ पकड़बाक डोरी समुद्रमे दूर फेकि कऽ विस्राम असहज बैसल छल। घरमे ओझाकेँ देखिते ओकर हृदयमे भयक कपकपी दौगि गेल। बीचक कोठलीमे राखल लालटेनक लौ कनी बढ़ा कऽ पानी भनसाघरमे गेलीह। चूल्हिमे आगि लगौलनि, मुदा गोइठा-लकड़ी सब नम वातावरणमे भिजि गेल छल, तेँ जल्दी आगि नै पकड़लक। परिणामस्वरूप सम्पूर्ण घर धुआँ सँ भरि गेल। ओ काँकड़ु आ माछ साफ कएलनि आ मसाला पीसबा लेल पछुआरक एकटा भारी पाथरक सिल पर बैसि गेलीह। "सत्यानाश एहि समुद्री दानवकेँ, के जानै ओ कतय नुकायल अछि?" बरखा जोर सँ बरसय लागल छल आ पानीक पीठ फूही सँ पूरापूरी भीजि गेल छल। "ई आकाश मेघ सँ एकदम कारी भऽ गेल अछि आ ई माछ मारबा लेल चलि गेल अछि। सत्यानाश, बदमाश घरमे रहि नै सकैत अछि। भोर सँ निपत्ता अछि... कोना ओते ढङ्ग सँ ताना मारैत छैक, अरे बाप रे!" पानी आत्म-प्रसन्न हँसी हँसलीह कारण ओ सिलौट सँ पिसल मसालाक आंगुर सँ पोछि लेलनि। जल्दी सँ भनसाघरमे गेलीह आ काँकड़ु तथा माछक तरकारी चूल्हि पर चढ़ा देलनि। अब मूसलाधार बरखा भऽ रहल छल। "ई कारी मुर्गा एहि भारी बरखामे कतय चलि गेल?" पानी सत्ते असहज भऽ रहलि छलीह, कारण ओहि पुण्यक कारी मुर्गाकेँ ओ 'भूतरा दादा' क नाम पर नै मारबाक प्रतिज्ञा कएने छलीह। ओ जरैत लालटेन लऽ कऽ अंगनाक कएक चक्कर लगौलनि, मुदा भयावह अन्हार राति मे निराशा हाथ लागल। ओ अपन कोठलीमे गेलीह। घरक चारू कात सँ पानि रिसि कऽ भीतर आबय लागल छल। कोनमे 'जीवो' क पुरान पेटी राखल छल। दीवार पर सँ बहैत पानि ओहि पर खसि रहल छल। जीवोक किछु पुरान कपड़ा ओहि भारी पेटीमे राखल छल। एकर परवाह नै करैत पानी सोझे भनसाघरमे चलि गेलीह। मोटामोटी पाँच बर्ख पहिने जीवोक जीवनक दुखद अन्त भेल छल। साढ़े सात फीट नाम आ चाकर हृष्ट-पुष्ट लोक। हुनकर जहाज ईरान, मोजाम्बिक सँ कोचीन धरि समुद्र पार करैत छल। ओ बेसीकाल जेठक अन्तमे घर वापस अबैत छलाह। मुदा ओहि बर्ख अखाढ़क कृष्ण पखमे ओ तट पर एला। जखन ओ मुम्बई सँ रवाना भेला, समुद्र एकदम शान्त छल। मुदा बीकन सँ पश्चिम दिस जयबा काल ओ एकटा बिहाड़िमे फँसि गेलाह। ओहि अन्हार खुनीमा राति मे जखन जहाजक मस्तूल टूटि कऽ खसल, जीवो पानिमे फेकि देल गेलाह। मस्तूल टूटिते जहाज बेकाबू भऽ कऽ चक्कर काटय लागल। भीषण बिहाड़िमे बीकन मुश्किल सँ देखा पड़ैत छल। जहाज विशाल लहर सभ संग चक्कर काटय लागल। अखाढ़क कारी पखमे भीषण हवा आ मूसलाधार बरखा स्थिति आरो खराब कऽ देलक। जीवो खधाइ सभक दिशामे बहैत गेलाह। अन्हारमे किनारा अढ़ भऽ गेल, आ ठीक ओही समय बीकनक लालटेन सेहो मिझा गेल। प्राणघातक लहरि सभक तमसायल प्रहार सहैत ओ खुनीमा खधाइ सभमे जा खसलाह। जँ ओ कनी आरो समुद्री तटक बालु लग बहि गेल रहितथि! विशाल ज्वारीय लहर सब पशुवत् बल सँ चट्टानी खधाइ सभ सँ टकरायत छल। जीवो एकटा पैघ काँकड़ु जकाँ लीढ़ सँ ढकल चट्टानक खधाइ सँ हताश भऽ कऽ सटि गेलाह। विशाल लहर सब हुनकर पीठ पर बेर-बेर भारी धक्का मारय लागल। ओ ओकर धक्का सहि नै सकलाह। अनचोक्के ठाढ़ चट्टानक खुरदुर सतह सँ हुनकर पकड़ ढील पड़ि गेलनि आ ओ लहर सभ संग ऊँच फेक देल गेलाह। - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - गरजैत मूसलाधार बरखा, चिचियाइत भीषण हवा आ गर्जैत पशुवत् लहरि सभक बीच हुनकर चीत्कार अश्रुत रहि गेल। - - - - - - - - - - - - - - - - - - अपन सम्पूर्ण साहस आ शक्ति समेटि कऽ ओ समुद्री दानव जकाँ देखि पड़य बला ज्वारीय लहर सभक विपरीत जोरसँ तैराकी करय लागल आ काँकड़ु जकाँ फेर सँ चट्टान सँ सटि गेल। खधाइ सभ सँ बाहर निकलब मोटामोटी असम्भव छल। फेर सँ उठल विशाल लहरक जानलेवा चोट सभ हुनका ऊँच फेकि देलक आ ओ गर्जैत खधाइ सभक घुमैत पानिमे जा खसल। भारी आघात सँ हुनकर पएर टूटि गेलनि। अन्ततः ओ कातर चीत्कार करय लागल-एकटा कारी-भारी अन्तिम स्वर। मुदा गरजैत मूसलाधार बरखा, चिचियाइत भीषण हवा आ गर्जैत पशुवत् लहर सभक बीच हुनकर चीत्कार कियो नै सुनि सकल। सभ राति खधाइ सभ सँ चीत्कार उठैत रहल। रातिक ओहि भयावह समयमे पानी भयभीत भऽ कऽ चीत्कार सुनि कऽ घबड़ा कऽ जागि गेलीह। वालू डाइन सेहो जागि गेल छलीह। विस्राम डर सँ अपन खाट पानीक लग खसका लेने छल। "अरे बाप रे, ओहि डेरौन समुद्री तट पर कोनो भूत हएत। सर्वशक्तिमानक नाम जपैत सूतू। हे भगवान... हे भूतरा दादा।" वालू अपन कल्याण लेल एकटा मुर्गा आ एकटा नारिकेल बलि चढ़ाबय कऽ प्रतिज्ञा कएलक। मुदा सम्पूर्ण राति डरायल ओहि त्रयी (तीनू लोक) खुनीमा समुद्री तट पर गूँजैत रीढ़-हिला देबय बला भयावह चीत्कार सुनैत रहल। जहाज समुद्री तट पर जा पटकायल आ टूटि -फूटि गेल। जहाजक भनसीया, बूढ़ रामो, उथल -पुथलमे जा पटकायल आ मरि गेल। बाकी नाविक सब रेतीला समुद्री तटक दिस बहैत गेलाह आ बचि गेलाह। जीवो सभ राति पीड़ा सँ चिचियाइत रहल। मात्र जखन दिनक पहिल मुर्गा स्वर देलक, तखन हुनकर चीत्कार थमल। भोर होइत-होइत दुखद समाचार पसरिते गाममे कोलाहल उठि गेल। टूटल जहाजक अधमरू नाविक सब घुरि आयल, मुदा ओकरा सभमे सँ दू गोटे बिना कोनो निशानक निपत्ता छलाह। दुर्घटनाक तेसर दिन गामक लोक क्रूर खधाइ सभमे माछ सँ भयानक तरहें कुतरल, शोनित (शुनीत) सँ सनल आ सड़ल-गलल लाश सब खोजि निकाललनि। ओहि अशुभ राति मे उठल गूँजैत चीत्कार पानी आ वालूक अस्तित्वक भीतर धरि धँसि गेल। नाम पाँच बर्ख बीति गेल, मुदा अखाढ़क कारी पखमे समुद्रक गर्जन हुनका असहज आ व्याकुल कऽ दैत छल। दुनू स्त्री लेल जीवोकेँ बिसरब असम्भव छल। अन्तहीन पछोर धेने छल ई यातनापूर्ण स्मृति, जइ सँ आजिज आबि कऽ वालू हालमे अपन सहनशक्ति कऽ पराकाष्ठा धरि पहुँचि गेल छलीह। तइ सँ पानीक पुनर्विवाह विस्राम सँ करा देला कऽ बाद ओ सोझे कोटडा लेल प्रस्थान कएलनि। टेढ़ बैसल पानी यन्त्रवत् काँकड़ु -माछक तरकारीमे रोटीक खण्ड डुबाबैत मुँहमे ठेलैत रहलीह। एकटा व्याकुल यातना हुनका भीतर जरि रहल छल। "सत्यानाशी कोटडाक ओहि ओझा पर जे वालू लेल जादू-टोना तैयार कएलक...!" ओझाक मोहक ताबीज-औषधिक उल्लेख सँ ओ चिन्ता सँ भरि गेलीह। "ओ चिता पर चढ़ि जाय! ओकरा निश्चित रूप सँ हमरा पर जादू करबामे सफलता भेटलै, तेँ हम बियाहक प्रस्ताव सँ सहमत भऽ गेलहुँ। की कोनो ताबीजक मोहक जादू सँ कियो बचि सकैत छैक?" बरखाक पानि छत सँ रिसि कऽ भनसाघरमे घुसय लागल छल। बरखा जोरसँ गर्जन-तर्जन आ बिजलीक चमक संग भऽ रहल छल। बुझायल जेना डाइन जकाँ गाढ़ कारी वस्त्र पहिरने ओ राति भयावह विलाप करैत गाम पर मँड़राय रहल अछि। "मात्र मूर्ख एहन भारी बरखामे समुद्रमे जायत। अरे बाप रे... समयक अपशकुन!" विस्राम लेल थारी परसि कऽ ओ दोसर थारी सँ झापि देलनि। अतिरिक्त भोजन बला बासन सभ पर ढक्कन लगा देलनि आ बरखाक फूही घरमे नै आबय, एहि लेल खिड़की पर लटकल टाटक परदा नीचाँ खसा देलनि। सोझाँक कोठलीमे गेलीह आ छत सँ जतय सँ पानि बेसी चुबैत छल, ओहि बिन्दुका नीचाँ फर्श पर एकटा छोट कटोरा राखि देलनि। ओ अखनो लालटेनमे मटियातेल नै भरने छलीह। दीप कऽ बत्ती कनी बढ़ा कऽ पानी खाट पर बैसि कऽ प्रतीक्षा करय लगलीह। अपन मुर्गा खोजबाक झमेलामे रहला कारण ओ लालटेनमे तेल भरब एकदम बिसरि गेल छलीह। सोझाँक केबाड़ खुजल रहि गेल छल। तटक दूर छोर पर एकचारी सभक समूह सँ कोनो भूत सँ ग्रस्त मनुक्खक पीड़ित चीत्कार आकाश भेदि कऽ उठि रहल छल। रामी बन्दरगाहक मुँह पर एकटा एकचारीमे जोर झटका सँ थरथरा रहल छलीह। हुनका 'एक -आँखिबला' भूत सँ ग्रस्त मानल जाइत छल। जखनो हुनका एहन झटका अबैत, वेलन गामक एकटा ओझा हुनका झाड़ -फूँक करय अबैत छल। रामी संग ओहो कान -फाड़यबला चीत्कार करैत छल। पानी ओहि घोर अन्हारकेँ चीरैत आबैत ओहि भयावह चीत्कार सँ थरथरा गेलीह। ओ जल्दी सँ केबाड़ बन्द कऽ लेलनि। "अरे बाप रे, के एना विलाप कऽ रहल हएत? के एतेक दुखी होइत हएत?" पानीक हृदय डर सँ धक-धक करय लागल। बन्दरगाहक मुँह लग एकचारीमे ओझा रामीकेँ गिट्ठऽ लागल रस्सी सँ मारय लागल। भय सँ थरथराइत आत्मा संग पानी खाट पर करौट बदललनि। - - - - - - - - - - - - - - - - - - "सत्यानाश, ओ दुबर-पातर आ नाम आलसी जकाँ घूमैत रहैत छल। आ आब देखू केहन हृष्ट-पुष्ट जवान भऽ गेल अछि।" - - - - - - - - - - - - - - - - - - - कोनो समुद्री दानव जकाँ लहरि सब पशुवत् जोर सँ तट पर टकरा रहल छल आ उन्मत्त मूसलाधार बरखाक भयावह गर्जन सँ मिलि कऽ गगनभेदी अबाज उत्पन्न कऽ रहल छल। "सत्यानाश, दुष्ट अखनो नै आयल। ओ कतय अढ़ भऽ गेल?" चीत्कारक किछु काल लेल नजरि अन्दाज कऽ कऽ पानी विस्रामक विषयमे सोचय लगलीह। पछिला मोटामोटी तीन बर्खमे विस्रामक देह जीवो जकाँ हृष्ट-पुष्ट भऽ गेल छल। ओ दिन-प्रतिदिन नाम आ बलिष्ठ होइत जा रहल छल। एकटा लजकोटर आ सुरक्षित विस्राम। "सत्यानाश, ओ दुबर-पातर आ नाम आलसी जकाँ घूमैत रहैत छल। आ आब देखू केहन हृष्ट-पुष्ट जवान भऽ गेल अछि।" विस्राम नाविक जीवोक उत्तराधिकारी जकाँ लगैत छल। जीवो सब भाइमे सब सँ पैघ छलाह। विस्रामकेँ नाम आ मजगूत होइत देखि कऽ जीवोक याद बुढ़ियाक मोनमे पीड़ादायक ढङ्ग सँ कौंधि जाइत छल। बहुत बेर ओकर रूप-रङ्ग सँ धोखा खा कऽ पानी ओकरा जीवो बुझि बैसैत छलीह। मुदा तखन ओ असहाय भऽ कऽ आह भरैत छलीह आ हुनकर मोनमे अशान्ति उठि जाइत छल। मोटामोटी दस बर्ख पहिने पानी आ विस्राम घरमे असगरे रहि गेल छलाह। वालू मोटी कोटडा गेल छलीह। फेर अनचोक्के विस्रामकेँ मलेरिया भऽ गेल। हुनका माथ सँ पएर धरि तीन-तीन टा कम्बल सँ झाँपलो पर विस्रामक जाड़ नै छुटनि। अन्तमे पानी ओकर लग जा लेटल छलीह, तखन ओकरा आराम भेटल छल। एहि सँ पहिने जखन ओकरा खसरा भेल छल, ओ अपन बच्चा जकाँ ओकर देख-रेख कएने छलीह। बहुत बर्ख सँ पानी अपन सन्तान लेल तरसि रहली छलीह। कतेक ताबीज-ताग कएने रहथि, मुदा सब व्यर्थ। विस्राम संग हुनकर पुनर्विवाहक उल्लेख मात्र हुनका चौंका दैत छल। "की कएल जा सकैत छैक, जखन अपनहि लोक दुश्मन भऽ जाय? हम ओकरा ओहि समय सँ पालल-पोसल जखन ओ डाँर धरि सेहो नै पहुँचल छल, आ आब हम ओकरा सँ बियाह करब? की ई सम्भव अछि?" पानी घबड़ा गेलीह कारण विस्रामक रूप-रङ्गमे जीवो सँ एकदम मिलान छल। एकटा भावशून्य मुँह जाहि पर चेचकक दाग छल। आकाश छुबै सन नाम। वएह धात्विक अबाज आ मौन। एकदम जीवो जकाँ... राति उत्तरोत्तर गहीर आ अन्हार होइत गेल आ बरखा -बिहाड़ि बहुत भीषण भऽ गेल। गर्जैत लहर सब आ उद्दाम मूसलाधार बरखा सामूहिक रूप सँ एकटा उग्र हंगामा मचौने छल जे सम्पूर्ण गामकेँ अपने कब्जामे लऽ लेने छल। जेना दुखित हृदय सँ उत्पन्न तीक्ष्ण चीत्कार दूर सँ बहैत बिहाड़िक गर्जन पर सवार भऽ कऽ आबि रहल हो। पानीक हृदय धक -धक कऽ रहल छल। "सत्यानाशी बदमाश, रातिक एहन भयावह समयमे एतेक भयंकर चीत्कार किएक कऽ रहल अछि? अरे बाप रे...!" ओ अपन भ्रम कहि कऽ ओकरा गलत करबाक प्रयास कएलनि। मुदा बेचारा जीवोक विनाशकारी मृत्यु सँ पहिने देल गेल तीक्ष्ण चीत्कार हुनकर मोनमे जोर सँ गूँजि रहल छल आ हुनकर आँखि सँ नुनगर पानिक धारा बहि रहल छल। जखन जीवो अपन समुद्री यात्रा सँ घुरैत छलाह, तऽ ओ तरह -तरहक कपड़ा आ मेबा सँ भरल जूटक बोरा लऽ अबैत छलाह। हुनकर उत्साहक सीमा नै रहैत छल। एहन बरखाक सभ राति मे दुनू समुद्री तटक ज्वारीय लहर सभक जुनून सँ ओ भरि उठैत छलाह। ने केवल घर मूसलाधार बरखा सँ भिजैत, वरन् दुनू प्रेम मे डूमि कऽ एकाकार भऽ जाइत छलाह। अनचोक्के खिड़की सँ एकटा झोंक आबि कऽ कादो-नीपल फर्शकेँ भिजाबय लागल। एकटा गगनभेदी चीत्कार सेहो ओहि झोंक संग घरमे प्रवेश कएलक। पानी डर सँ कुदकि कऽ खाट सँ बाहर निकलि पड़लीह। बड़ मुश्किल सँ केबाड़ खोललनि, जे बाहर सँ हवाक भारी दबाव कऽ कारण खुलऽ नै चाहैत छल। बाहर आबि कऽ गाढ़ अन्हारमे हुलकी दैत ठाढ़ भेलीह। बीकनक दैत्याकार प्रकाश... गर्जैत बज्र। चारू कात सब किछु बिजलीक चमक आ बीकनक रोशनीमे स्पष्ट देखि पड़ैत छल। बन्दरगाह लग तट पर मटियातेल बला लालटेन सभ ऊँच लौ सँ जरि रहल छल, जे अन्हर-बिहाड़ि बला मौसममे जेना-तेना ढङ्ग सँ लहराइत छल। पानी छत सँ बहैत फूही सँ भिजि गेल छलीह। फेर एकटा जोरसँ चीत्कार लालटेन आ जरैत दीप सभक दिशा सँ बहि आयल। पानी कनिये कालमे घरमे ढुकि गेलीह। "अरे बाप रे, हे हमर भगवान रामो पीर... ई सत्यानाशी बदमाश कतय अढ़ भऽ गेल? सत्यानाशी दुष्ट! घुरू, मारि -मारि कऽ सोझ कऽ देब।" मुदा फेर कोनो अपशकुन घटनाक विचार अबिते ओ चुक्की-माली भऽ गेलीह आ छत सँ चुबैत पानिक दिशामे बेसुध ताकैत रहलीह। - - - - - - - - - - - - - - - - - हुनकर आंगी पूरा तरहें भिजि गेल छल। पेरनुनक एक हिस्सा सेहो भिजबाक कगार पर छल। अपन सुन्दर शरीर पसारि कऽ ओ बेसुध करौट लेटि गेलीह। - - - - - - - - - - - - - - - - - घरमे कतेक ठाम बासन राखि कऽ फर्श भिजबा सँ बचाएल गेल। आन ठाम जूटक बोरा ओछाओल गेल। खिड़की पर टाँगल टाट फेर सँ ठीक कएल गेल। फेर एक बेर खाट पर घुरि कऽ बैसि गेलीह। हुनकर आंगी पूरा तरहें भिजि गेल छल। पेरनुनक एक हिस्सा सेहो भिजबाक कगार पर छल। अपन सुन्दर शरीर पसारि कऽ ओ बेसुध करौट लेटि गेलीह। "रामो कऽ अलाबे आरो कियो 'खुनीमा ताड़' लेल उत्तरदायी नै अछि। वएह सत्यानाशी बदमाश! हमर काका ओकरा कोन कऽ पीटने छलाह, हम नीक जकाँ बुझैत छी। ओ हमर परिवार सँ बदला लेबाक प्रतिज्ञा कएने छैक।" बड़का धरनि सँ पानि टपकय लागल, जे चूल्हि सँ उठल धुआँ सँ कारी भऽ गेल छल। पानी अपन खाट हटा देलनि। खुजल केबाड़ सँ भारी बरखाक बुन्न सब भीतर आबि रहल छल। छत सँ बहैत पानिक छप-छप अबाज वातावरणमे भरि रहल छल। भारी बरखाक गड़गड़ाहटि सुनि कऽ आ जीवो तथा हुनकर विनाशकारी मृत्युक विषयमे सोचि कऽ पानी शान्त भऽ गेलीह आ आस्ते-आस्ते गहीर निद्रामे डूमि गेलीह। ओ बड़ी काल धरि एकदम स्थिर रहलीह। अनचोक्के हवाक तेज झोंक सँ केबाड़ धड़ाम सँ बन्द भऽ गेल आ ओकरा संगे दूर सँ एकटा कारी भेदी चीत्कार बहि आयल। पानी भयभीत भऽ कऽ घबड़ा कऽ जागि गेलीह। "अरे बाप रे..." ओ डर सँ चिचिया उठलीह। हुनकर कण्ठ नोर सँ भरि गेल आ ओ भय सँ काँपय लगलीह। "जँ विस्राम कतहु खधाइ सभमे खसि पड़ल हएत आ मदति लेल चिचिया रहल हएत?" ई सोचि कऽ हुनकर छाती धौंकनी जकाँ फूलय-सिकुड़य लागल। "अरे बाप रे... हे भूतरा दादा... हे समुद्री देवता... जँ हमर विस्राम सुरक्षित घर घुरि आयत, तऽ हम अहाँक वेदी पर एकटा मुर्गाक बलि देब।" ओ माधवड़ आई, मेघरा दादा आ अन्य देवता सभक नाम पर प्रतिज्ञा करय लगलीह। चीत्कार उत्तरोत्तर तीव्र होइत जा रहल छल, जेना कोनो दुष्ट आत्मा सँ पीड़ित कोनो जीवक पीड़ा बढ़ि रहल हो। पानी आँखि कसि कऽ बन्द कऽ लेलनि आ खाट पर ओहिना थरथराइत रहलीह जेना उत्थड़ समुद्रमे फँसल कोनो जहाज। विनाशकारी शून्य हुनका थकुचि देलक। नाम, हृष्ट-पुष्ट आ भावशून्य मुँह बला जीवो साक्षात् हुनकर आँखिक सोझाँ अभरि आयल। विस्राम आ जीवोक छवि एक-दोसरमे विलीन भऽ गेल। पानी व्याकुल भऽ थरथराइत विलाप करय लगलीह, "अरे बाप रे, जँ हमर विस्राम सुरक्षित घर घुरि आयत, हे जनाशा पीर, हम एकटा बकरा बलि देब...!" ओ घबरा कऽ एकटा दीप लेसलनि आ तेज हवा सँ संघर्ष करैत बड़ मुश्किल सँ बाहर एली। चारू कात गाढ़ अन्हार पसरल छल। दूर बीकनक चमक भयावह लागि रहल छल। हुनका अन्हारमे विस्रामकेँ अबाज दऽ कऽ बजबाक मोन भेलनि आ ओ दौगि कऽ पछुआरक केबाड़ धरि पहुँचि गेलीह। बिहाड़िमे जरैत दीपक लौ डेरौन ढङ्ग सँ नाचि रहल छल। खधाइ सभकेँ सामना करैत पानी भयावह चीत्कार करैत चिचिया लगलीह- "अरे... विस्रा... ओ विस्राम...!" ओ बाड़ामे लागल बाँसक छोट केबाड़ खोलि देलनि आ मूसलाधार बरखामे उन्मत्त जकाँ चिचिआय लगलीह। बाड़ाक नीचाँ कारी मुर्गा एकदम स्थिर ठाढ़ छल, आँखि बन्द कएने आ पूरा भीजल। ओ पानि झाड़बा लेल पाँखि फड़फड़ौलक आ माथ पाँखिमे दबा कऽ फेर स्थिर भऽ गेल। खधाइ सभमे टकराइत लहरि सभक भयावह गर्जनमे पानीक चीत्कार कियो नै सुनि सकल। हुनकर कण्ठ नोर सँ भरि गेल, "अरे बाप रे... कतय जायब आ की करब...?" मानसूनमे विस्राम खेतमे पानीकेँ घास-पात निकालबामे मदति करैत छल। जखन घरमे तरकारीक कमी होइत, ओ नाला सँ काँकड़ु आ माछ पकड़ि कऽ संकट दूर करैत छल। जखन इनारमे पानिक स्तर नीचाँ चलि जाइत, ओ चामक बाल्टी सँ पानि खैंचि कऽ तरकारीक क्यारी सभक सिंचाइ करैत छल। हमर विस्राम कतेक मेहनती छल! नीक-मीठ भावनाक सरितामे डूबैत पानी निराश भऽ घरमे चलि गेलीह। अपन भीजल पेरनुन उतारि कऽ पानि निचोड़ि देलनि, फेर पहिरि लेलनि। हुनकर आंगी सेहो सम्पूर्ण रूप सँ भीजल छल। ओ ओकरा जोर सँ निचोड़लनि आ पहिरि लेलनि। हुनकर भीजल पेरनुन हुनकर गतिकेँ रोकय लागल, ओ खाट धरि गेलीह आ दुखी भऽ कऽ खसि पड़लीह, जेना कूही भऽ कऽ कानय लगतीह। केबाड़ खुजले छल। किछुए दिन पहिने ओ सपनामे जीवोकेँ देखने छलीह। ओ डर सँ जागि गेलीह कारण जीवो आस्ते-आस्ते विस्राममे बदलैत जा रहल छल। पानी विस्रामक आँखिमे जुनूनक ज्वार देखलनि। "ओ एकदम जीवो जकाँ अछि। अरे मूर्ख हम... दुनू कोना एतेक मिलैत छथि! दुनू शोनित (शुनीत)क सम्बन्ध सँ जुड़ल छथि... तेँ स्वाभाविक अछि। धिक्कार छैक, विस्राम जीवो कऽ अलाबे आरो कियो नै अछि।" पानीक मोनमे हलचल उठि गेल। विस्राम लेल तड़प धरतीक पर्तक नीचाँ सँ विस्फोटक रूपमे फूटि पड़ल। ओ माछ जकाँ करौट बदलऽ लगलीह आ हाँफय लगलीह। विस्रामक वापस अबिते सब सँ पहिल काज जे करब, से हएत गृहस्थीमे प्रवेश... की जीवो आ विस्राममे कोनो अन्तर अछि? ओ खधाइ सभमे टकराइत लहरि सन प्रबल इच्छा सँ जरि रहल छलीह। हुनकर भीतर एकटा कटु शून्य आ एकान्त छल। "घरमे कियो जागल अछि?" एकटा कर्कश अबाज जङ्गली बिलार जकाँ घरमे दौगि गेल। पानी डर सँ उठि पड़लीह। ओझाकेँ दीप कऽ रोशनीमे देखलनि। "कारी मुर्गा तैयार अछि? चलू जल्दी लऽ आउ... हम ओकरा तट पर बलि दऽ देब... फेर देखू की होइत छैक... हमर भूतरा दादा बहुत दयालु छथि... ओ मुर्गा सँ निश्चित रूप सँ प्रसन्न भऽ जयताह आ एहि सँ अहाँक पुरान पीड़ाक अन्त भऽ जायत।" ओझा जल्दीमे छल। बन्दरगाह लग रामी अखनो ठीक नै भेल छलीह। रस्सी सँ पीटल जयबाक कारण ओ बेचारी स्त्री मोटामोटी लाशमे बदलि गेल छलीह, मुदा तैओ ओ प्रेतात्मा जकाँ थरथरा रहल छलीह। जखन सब असफल भऽ गेल, तऽ ओझा लोहाक एकटा मोट जञ्जीर भट्ठीमे गरम करबा लेल राखि देलनि। जञ्जीर लाल होइमे अखन समय छल, तेँ ओझा मुर्गा बलि देबा लेल आबि गेल। "अरे अहाँ एतेक देरी धरि कतय रहलहुँ?" भीजल ओझाकेँ देखि पानी पुकारलनि। "बन्दरगाह लग एकटा स्त्री भूत सँ ग्रस्त भऽ कऽ थरथरा रहल अछि... ओकरा ग्रस्त करय बला आत्माक सत्यानाश, ओ बदमाश खुनीमा ताड़ पर रहैत छैक। ओकरा भगाबयमे अखन समय लागत!" पानी ओझाक गप सुनैत रहलीह, मुदा पछुआरक घेरामे गेलीह आ एकटा कारी मोट मुर्गा लऽ कऽ घुरलीह। "तेँ ई तीक्ष्ण चीत्कार सब तट सँ उठि रहल छल?" पानी पुछलनि। मुर्गा रातिक बीचमे नीन सँ जगाएल जयबा पर क्रोध सँ स्वर करय लागल। "ओ कोनो साधारण भूत नै छैक। ओ सत्यानाशी खुनीमा ताड़क बदमाश अछि, तेँ जखन ओकरा पीटल जाइत छैक, तऽ ओ बेचारी स्त्रीक देह सँ चिचियाइत छैक।" आ ओझा पछुआरक केबाड़ सँ तटक दिस तेजी सँ चलि गेल। हृदय धक -धक करैत पानी खाट पर बैसल रहलीह। हुनकर नवका कारी मुर्गा पहिनेहि हरा गेल छल आ ओ एहि मुर्गा सँ हाथ धोबय लेल तैयार नै छलीह। भारी मोन सँ ओ मुर्गा ओझाक हाथमे देलनि। गाम निद्राक चादरि ओढ़ने शान्त छल। विस्राम गामक दिस आँखि जमौने बेसुध बैसल एकटा बीड़ी पी रहल छल। ओ अन्हारमे किछु झलफल आकृति देखि सकल, जे बीकनक रोशनीक चमकमे देखा पड़ल। ओ डर सँ हुलकी दैत रहल। तखने एकटा अन्तिम चीत्कार गाढ़ अन्हारकेँ चीरैत आयल। विस्रामक हाड़-गोड़ धरि ठंढा भऽ गेल। "धिक्कार छैक, ई की भऽ सकैत छैक? भूत की किछु आरो...? मुदा खुनीमा ताड़ तऽ एहि दिस अछि।" भयभीत भऽ ओ आँखि फाड़ि-फाड़ि कऽ ताकय लागल। जल्दी सँ समुद्र सँ अपन माछ पकड़बाक डोरी खैंचि लेलक आ अपन सामान बटोरय लागल। ओ एकटा पैघ माछ निकालि लेने छल। सम्पूर्ण माछकेँ कपड़ामे समेटि कऽ ओ जल्दी सँ घर पहुँचबा लेल डोरी लपेटय लागल। ओ दूर सँ अपन नाम पुकारैत चीत्कार सुनलक... आ आब ई अपशकुनी मुर्गाक स्वर! ओ डरि गेल। गाढ़ अन्हारमे ठेंस लगबैत खसैत-पड़ैत ओ डरैत घर घुरल। ओझा जरैत दीप लग बैसल छल, चिलम सुलगा कऽ, बान्हल मुर्गा अपन झोरामे राखि कऽ- "आब कोनो समस्या नै हएत कारण ताबीज सक्रिय अछि... भूतरा दादाकेँ बलि सँ प्रसन्न करबाक जरूरत अछि, बस एतबे, आ फेर सब सँ शैतानी ताबीज सभकेँ सेहो निष्क्रिय कएल जा सकैत छैक।" तखने विस्राम केबाड़ पर आबि कऽ ठाढ़ भऽ गेल। 'ताबीज' शब्द ओकर कान भेदि कऽ सोझे ओकर अस्तित्वक भीतर धरि धँसि गेलै, ठीक ओहिना जेना माँछ पकड़बाक मौसमक अन्तमे ज्वारीय लहर समुद्री तट पर टकराइत छैक। ओझा सेहो लाज आ अपराध-बोध सँ पीअर पड़ि गेल। फेर स्थिर भऽ कऽ ओ कनी फोकला आ षड्यन्त्रकारी ढङ्ग सँ आँखि घुमबैत बन्दरगाह दिस प्रस्थान कएलक। "ठीक अछि तखन, हम बिदा लैत छी... किछु चिन्ता नै करू... सब ठीक भऽ जायत," ओ कहलक। "सत्यानाशी दलाल! की ई समय घर घुरबाक अछि? अहाँ कोन छौड़ीक पाछू दौगि रहल छलहुँ?" पानी एक नि:श्वासमे बकबक करैत कहलनि। विस्राम चुपचाप हाथ-पएर धोबय लागल, पाछू राखल 'नान' (हौज) सँ पानि खैंचि कऽ, मुँह फुला कऽ। "हम बुझैत छी जे अहाँकेँ किछुओ नै फुरैत अछि, अहाँ बेपरवाह दुष्ट! तेँ अहाँ एहन भयावह राति मे नाला सभक अढ़मे छलहुँ... जँ अहाँ कोन भूत-प्रेत सँ भिड़ि गेल रहितहुँ .. मुदा अहाँ कहब जे नर्कमे जाउ! की अहाँ नै बुझैत छी जे मानसूनमे तट पर कतेक भूत-प्रेत मँड़राइत रहैत छैक?" विस्रामक रेशमी झोरा माछ सँ ऊपर धरि भरल छल। पानी उग्रतापूर्वक बकबक करैत रहलीह कारण ओ विस्रामक भोजनक थारी तैयार कऽ रहल छलीह। "सत्यानाश, मामूली बात पर अहाँ चिचियाइत किएक छी?" विस्राम बीचक कोठली सँ बड़बड़ायल, कारण ओ अपन देह सुखा रहल छल। "अरे, अहाँ चिचियाइत किएक छी? कारण हम अहाँकेँ कनी डाँटि देलहुँ? सत्यानाश, गधा एतेक जल्दी आहत भऽ जाइत छैक। अहाँ हमरा पर किएक चिचियाइत छी? सत्यानाश, दलाल हमरा सिखाबय आयल अछि।" पानी माछ सब एकटा लकड़ीक बड़का थारीमे खाली कऽ देलनि आ रेशमी झोरा पछुआरमे लकड़ीक खाम्ह पर लटका देलनि। एकटा स्नेहपूर्ण मुस्कान हुनकर मुँह पर पसरि गेल जखन ओ विस्रामकेँ मात्र धरिया पहिरने देखलनि। चूल्हि सँ रोटीक थारी उतारि लेलनि। एकटा खाकी हाफ -पैण्ट पहिरि विस्राम चुपचाप बैसि कऽ भोजन करय लागल। दीप कऽ लाल रोशनीमे आँखि कऽ कोन सँ विस्रामक कारी काया पर नजरि खिरेलक पानी जल्दी सँ चूल्हिक आगि पर एकटा मसल्लाबला माछ सेकलनि। हुनकर रोम-रोम सिहरि गेल कारण विस्रामक छवि जीवो सँ भयानक रूप सँ मिलैत छल। जीवो सेहो जखन अपन यात्रा सँ घुरैत छलाह, तऽ मौसमक अन्तमे माछ मारय जाइत छलाह। देर राति ओ माछ सँ भरल झोरा लऽ कऽ घर घुरैत छलाह आ मात्र धरिया पहिरने चूल्हि लग बैसि कऽ देह गरमाबैत छलाह आ ठीक एहिना खाइत छलाह। भगवान जानथि किएक, मुदा विस्राम आइ धरियाक बदला हाफ-पैण्ट पहिरने छल। ओ काँकड़ु आ माछक स्वादिष्ट तरकारी खाइमे मग्न छल। पानी प्रेम सँ ओकरा ताकि रहल छलीह कारण ओ पेटू जकाँ हाँइ-हाँइ कऽ खा रहल छल। विस्राम लजा गेल। जीवनमे कहियो नै, मुदा आइ पानी भौजी ओकरा संग भोजन करबा लेल बैसल छलीह। वालू मोटीक चेतावनी ओकर मोनमे कौंधि गेल- "ओ वेलनक ओझा सँ अपन ताबीज-जादू तैयार करा रहल अछि। सावधान रहब, ओ अहाँकेँ जे किछुओ खियौती, से जुनि खायब... ताबीज सदिखन कारी कपड़ामे लपेटल रहत।" पानी मसल्लाबला माछ सेकैत रहलीह आ ओकरा कारी कपड़ामे लपेटने छलीह, जे देखि कऽ विस्रामक देह थरथरा गेल। मुदा ओ भूख सँ व्याकुल छल, तेँ ओ आँखि मूनि कऽ सब बिसरि कऽ खाइत रहल। हुनका बीचक नाम मौन तोड़ैत पानी बजलीह, "अरे बाप रे, ई लगातार मूसलाधार बरखा देखू! आ अहाँ माछ मारबा लेल कतय नुकायल छलहुँ? की अहाँ नै बुझैत छी जे मानसूनमे एहि समय तट पर बहुत असहज आत्मा सब मँड़राइत रहैत छैक? सत्यानाश, अहाँक कलेजा भूतक नाम मात्र सँ थरथरा उठैत अछि, आ तैयो अहाँ अपन बहादुरी देखबय गेलहुँ।" पानी प्रेम सँ विस्राम कऽ दिस देखलनि आ एकटा मनमोहक हँसी हँसलीह। फेर उठि कऽ बीचक कोठलीमे गेलीह आ ओतय बैसि गेलीह। विस्राम फर्श पर बैसल खाइत रहल। ओकर नजरि कनी माथ घुमबैते चूल्हिक कोन पर जा अटकल। नेबो, दू -तीन टा अण्डा, सुखायल मेरचाइ आ एकटा कारी ताग ओतय एकटा कड़ाहीमे राखल छल। ओकर रीढ़मे बर्फ सन ठंढा थरथरी दौगि गेल। पानी ताबीज-ताग तैयार रखने छलीह, मुदा ओझा पहिनेहि सामग्री संग आबि गेल छल। विस्रामक अनचोक्के एला सँ उत्पन्न भ्रममे ओ ओकरा हटाबय बिसरि गेलीह। "अहाँकेँ माछ मारबाक बेस शौख देखि पड़ैत अछि... मुदा जँ कहियो कोनो भूत-प्रेत आबि कऽ टकरा गेल... बेचाराक कलेजा थरथरा उठैत छैक आ तैयो ओ तट पर रेंगैत फिरैत छैक।" पानीक भीतरक ममता ओकरा बकबक करबय लागल। मुदा हुनकर गप सँ विस्राम आहत भेल। ओ पानीक चुलबुल ठोढ़ आ कामुक मुस्कुराहट देखि कऽ अपन तामस पी गेल। बीचक कोठलीक खाट पर बैसल पानी अविरल प्रेम भरी नजरि सँ विस्राम कऽ दिस ताकि रहल छलीह। की ओ भ्रममे जीवोकेँ एकटा नव रूपमे वापस आयल बुझि रहल छलीह? विस्राम पलटि कऽ कहलक, "हम नर्कमे जा सकैत छी... मुदा अहाँ सत्यानाशी ओझा सभकेँ घरमे किएक बजबैत छी? सत्यानाशी निर्लज्ज स्त्री...!" पानी अचरज सँ जमि गेलीह। हुनकर हृदयक सम्पूर्ण गुमार आ आनन्द हुनकर मुँह सँ अनचोक्के अढ़ भऽ गेल। "अरे, हम ककरा पर जादू कएलहुँ अछि जे अहाँ हमरा एहन ताना मारैत छी? दोसर दिस अहाँ बताउ, कतेक जादू-औषधि अहाँ हमरा खियौलहुँ? हम नै, अहाँक सत्यानाशी माय हमरा पर जादू कएने छथि। सत्यानाश, नामर्द हमरा ताना मारय आयल अछि..." पानीक मुँह तामस सँ लाल भऽ गेल। "अहाँ एहि सत्यानाशी ओझा सभकेँ घरमे किएक घूमय दैत छी? की ओ ओझा अहाँक पति लगैत अछि? सत्यानाशी निर्लज्ज मौगी...!" विस्रामक जोरसँ चिकड़ल। अपन तामस आ हताशा सँ प्रेरित भऽ कऽ विस्राम अपन निराशा बोकरलक, मुदा फेर अनियन्त्रित रूप सँ काँपय लागल। "हमर बेचारा पति ओहि तट पर... समुद्री देवताक कोरामे मरि गेला... हम ओहि ओझाकेँ पति किएक बनाएब? जँ अहाँ फेर ई गप कहब, तऽ हमर एक थापड़ अहाँकेँ कानय लेल मजबूर कऽ देत। मतलब हमर पति अहाँक आँखिमे काँट जकाँ गड़ैत छथि..." पानीक कण्ठ भरि आयल। विस्राम बिना भोजन पूर्ण कएने खिसिया कऽ उठि गेल। लापरवाही सँ हाथ -मुँह धोलक, पानि सेहो नै पी कऽ सोझे घर घुरल। "दुनू माय -बेटा मिलि कऽ जादू -टोना रचने छथि... आ आब हमरा दोषी मानैत छथि..." पानी भनसाघर साफ करैत बकबकाय लगलीह। "हम नाओमे सुतय जा रहल छी...!" - - - - - - - - - - - - - - - - "हम एतेक प्रेम सँ ओकरा पाललहुँ-पोसलहुँ, आ ई इनाम देखू!" - - - - - - - - - - - - - - - - - "धिक्कार छैक।" विस्राम थुकड़ि कऽ बीचक कोठली सँ बाहर चलि गेल। पानी जरैत दीप कऽ लाल इजोतमे ओकर पीठक दिस असहाय भाव सँ ताकैत रहलीह। नोर सँ हुनकर दृष्टि कनी ओम्हर गेलनि। "अरे, एहि भारी बरखामे कतय जा रहल छी?" ओ चिचिआय चाहलनि मुदा हुनकर कण्ठ भरि आयल। विस्राम पएर पटकैत चलि गेल। थरथराइत हाथ सँ ओ पछुआरक केबाड़ बन्द कऽ देलनि आ डगमगाइत सोझाँक केबाड़ धरि पहुँचलीह। किछु काल ठाढ़ रहलीह आ फेर जोर सँ केबाड़ पटकि देलनि। केबाड़ बन्द करिते एकटा गर्जन जकाँ अबाज गूँजल। "हम एतेक प्रेम सँ ओकरा पाललहुँ-पोसलहुँ, आ ई इनाम देखू! केहन गन्दा गप करैत छैक... ओ कहैत छैक जे हम ओझाकेँ अपन घर आ शरीरक आजादी देने छी..." अपमानक ई पीड़ा गरम नुनगर नोरक रूपमे हुनकर गाल पर ढरकि रहल छल। ओ जरैत दीप मिझा देलनि। भनसाघरमे बहुत पानि रिसि आयल छल। चूल्हि पर राखल छोट कटोरा पानि सँ भरि गेल छल। बीचक कोठलीमे छत सँ चुबैत पानि धरनि आ देबाल सँ बहि रहल छल। "एहि पैघ धरन सँ कोन पानि चुबैत छैक... अरे बाप रे!" ओ मनहि मन बड़बड़यलीह आ हाथमे लालटेन लऽ कऽ स्थितिक जायजा लेबा लेल सम्पूर्ण घरमे कछमछी सँ टहललीह। तामस सँ आँखि लाल कएने विस्राम बन्दरगाह लग लङ्गर डारल अपन नाओक दिशामे चलि गेल। चारू कात गाढ अन्हार पसरि गेल छल। बरखा गरजैत मूसलाधार रूप धारण कऽ लेने छल। नाओमे विस्राम नारिकेलक रेशा सँ बुनल एकटा छोट खाट रखने छल। खाट तिरपालक नीचाँ जालक ढेरी पर राखल छल। तीव्र तामस आ कटुता सँ विस्रामक होश-हवास निपत्ता छल, तेँ ओ गलत रस्ता पकड़ि लेलक। "हम साँझमे ओहि दुष्ट ओझाकेँ धमकैत देखने छलहुँ आ आब राति मे सेहो... किएक?" बेढ़क काँटबला झाँखुड़ सँ बचैत विस्राम बकबकाय लागल आ उन्मत्त ढङ्ग सँ पएर पटकैत चलल। 'खुनीमा ताड़' क रस्ता होइत बन्दरगाह धरि जा सकैत छल। बेढ़क काँटबला झाँखुड़ सँ बचि कऽ ओ एकटा बीड़ी पीबा लेल रुकल। अपन जेबीमे बीड़ी हथोड़ऽ लागल। तखने ओकर नजरि तटक दिस घूमि गेल आ ओ डर सँ थरथरा गेल। मोटामोटी पाँच -सात टा जरैत दीप ओकर दिस दौगैत आबि रहल छल। राति कऽ एहि घातक समयमे? ओ दीप सभ संग किछु झलफल आकृति सभकेँ अपन दिस खतरनाक ढङ्ग सँ बढ़ैत देखलक। आकृति सभमे सब सँ आगाँ बला आकाश-भेदी चीत्कार कऽ रहल छल। ओकर पाछू पाँच-सात टा दीप सेहो भयानक कोलाहल मचा रहल छल। विस्राम थरथरा गेल। ओकर आँखि डर सँ फाटि गेलै। "अरे बाप रे, ई भूत -प्रेतक झुण्ड हएत... सब डाइन सब शिकार पर निकलल छथि की..." आ बिना दिशाक ध्यान कएने ओ 'खुनीमा खधाइ' सभक दिशामे बताह जकाँ दौगय लागल। रामी एकटा क्रूर आत्मा सँ ग्रस्त छलीह-'खुनीमा ताड़क बदमाश'। गरम लोहाक जञ्जीरक क्रूर चोट सँ ओ दोहरी भऽ गेलीह आ चिचियाइत बताह जकाँ दौगय लगलीह, "हम जा रहल छी... हम अपन ठाम वापस जा रहल छी।" ओझा ठीक हुनकर पाछू छल, आ ओकर पाछू मलाह सभक झुण्ड। जखने ओ स्त्री ताड़ लग पहुँचलीह, ओ थाकि -हारि कऽ खसि पड़लीह। पाँच-सात टा लालटेन हुनकर चारू कात जमा भऽ गेल। ओझा चिचिआयल, "अहाँक ठाम कतय अछि? चलू, हमरा अपन अड्डा देखाउ!" आ हुनकर पीठ पर एकटा क्रूर चाबुक मारलक। स्त्री असहनीय पीड़ा सँ उठलीह आ दक्षिण दिस 'खुनीमा ताड़' क दिस दौगलीह। विस्राम उन्मत्त ढङ्ग सँ दौगि रहल छल। खधाइ सभक लग पहुँचि कऽ ओ अन्हारमे ककरो सँ टकरा कऽ खसि पड़ल। ओकर पएरक हड्डी उखड़ि गेल। असहनीय पीड़ा आ थकान सँ ओ धरती पर लोट -पोट होइत रहल। पाछू देखलक, जरैत दीप ओकर दिस आबि रहल छल। ओ गहीर साँस लेलक। पीड़ा सँ कराहैत ओ उठि कऽ दौगय लागल, मुदा पएरक व्यथा बढ़ैत गेल। बीकन लालटेन सेहो मिझा गेल छल आ बिजलीक चमक सेहो थमि गेल छल। चारू कात गाढ़ अन्हार छल। ओ फेर सँ पाछू एकटा डरल नजरि खिरेलक। जरैत दीप सभक झुण्ड अखनो ओकर पछोड़ धेने छल। पाछू देखबाक आ दौगबाक भ्रममे ओ सन्तुलन खो देलक, पिछड़ल आ सोझे 'खुनीमा खधाइ' सभमे जा खसल। उत्तेजित ज्वारीय लहर सब चट्टानी खधाइ सभ सँ पशुवत् बल सँ टकरा रहल छल आ धड़ाम-धड़ाम कऽ अबाज कऽ रहल छल, जाहिमे विस्रामक चीत्कार कियो नै सुनि सकल। समुद्री तटक ढलान लग एकटा रेतीला विस्तार छल। ग्रस्त स्त्री 'खुनीमा ताड़'क नीचाँ खसि पड़लीह। ओझा तुरत्ते एकटा मोट लोहाक कील ओकर जड़िमे ठोकि देलक। - - - - - - - - - - - - - - - - - पशुवत् ज्वारीय लहर सभक भारी चोट सँ तपेड़ खाइत विस्राम पीड़ादायक चीत्कार करय लागल। - - - - - - - - - - - - - - - ----- मलाह सब बेहोश स्त्रीकेँ उठा कऽ चुपचाप बन्दरगाह दिस चलि गेल। "आब पाछू जुनि देखब। जँ भूत फेर अहाँकेँ पकड़ि लेत, तऽ हमरा दोष जुनि देब!" ओझा जङ्गली बिलार जकाँ गुरड़ल। दीप सभक झुण्ड स्त्रीकेँ हाथमे उठा कऽ हड़बड़ीमे ताड़ सँ दूर चलि गेल। ओ सब कनी आगाँ सेहो नै गेल छल कि समुद्री किनार सँ एकटा अन्तिम चीत्कार हवा चीरैत उठल। मलाह सब तेजीसँ डेग बढ़ौलक। "आब ओ जानि-बूझि कऽ पाछू सँ मदति लेल चिचिया रहल छैक। आरो की करत, जखन हम ओकरा ठीक ओही ठाम कील ठोकि कऽ रोकि देने छी... चलू आब तेजीसँ डेग बढ़ाउ... पाछू जुनि देखू।" आ समुद्री तटक ढलान पर तेजी सँ उतरैत जरैत दीप सब अन्हारमे अढ़ भऽ गेल। बिहाड़ि कऽ वेग कम भऽ गेल छल, मुदा बरखा मूसलाधार भऽ रहल छल। पानीक खेतक ठीक पाछू कनी दूर पर 'भूतरा दादा' क ठाम छल। एकटा जङ्गली बिलार ओहि ठाम सँ निकलल आ बड़ी काल पानीक पछुआर सटल कैक्टसक घेरामे बैसल रहल। घेरा कऽ नीचाँ कारी मुर्गा पूरा भीजल, घोंकचल ठाढ़ छल। जङ्गली बिलारक आँखि अन्हारमे चमकय लागल। चांगुर दबा कऽ रेंगैत ओ एकटा सटीक छलाँगमे मुर्गाक गरदनि पर झपट्टा मारलक आ ओकरा खैंचि कऽ 'भूतरा दादा' क ठामक दिस लऽ गेल। पशुवत् ज्वारीय लहर सभक भारी चोट सँ पूरा तरहें उछालल जाइत पीड़ादायक चीत्कार करय लागल। सभ बेर जखन ओ समुद्री तटक तीख चट्टानी खधाइ सभ सँ टकराइत, ओकर शरीरमे मरणासन्न पीड़ाक झटका लगैत छलैक। पानी दीप कऽ बत्ती बढ़ौलनि आ कम्बल ओढ़ि कऽ खाट पर पड़ल रहलीह। "ओझा ग्रस्त स्त्रीकेँ झाड़-फूँक करय आयल छल। की ओ अखनो चिचिया रहल हएत?" सम्पूर्ण घर सँ पानि चुबैत छल। दूर सँ भेदी चीत्कार बहि आबि रहल छल। "ओ एहि भारी बरखामे नाओमे सुतय किएक गेल, हमरा नजरिअन्दाज कऽ कऽ?" ई विचार अबिते हुनकर भीतर एकटा शून्य पसरि गेल, जे विस्राम हुनका तिरस्कार करैत नाओमे सुतय चलि गेल। चीत्कार पर कान नै दऽ कऽ ओ आँखि बन्द कऽ लेलनि आ आस्ते-आस्ते शान्त भऽ गेलीह। मुदा अगिले क्षण हुनका चौंका देलक। अनचोक्के हुनका जीवो मोन पड़ि गेल। "सत्यानाश, विस्राम किछु बुझबाक लेल तैयार नै अछि... अरे बाप रे!" ज्वारीय लहर सब जकाँ पीड़ित भावनाक एकटा उग्र कोलाहल हुनकर मोनमे भरि गेल। विस्रामक व्यङ्ग्यपूर्ण उपेक्षा सँ ओ अपूरणीय रूप सँ आहत छलीह। अखाढ़क अन्हार डरौन राति मे, मूसलाधार बरखा सँ आरो भयावह बनल भेदी चीत्कार गरजैत ज्वारीय लहर सभ संग 'खुनीमा खधाइ' सभ सँ उठैत रहल। _____________________________ शब्दावली आई: माय। अगियारश: चान्द्रमासक एकादशी; ओहि दिन व्रत राखल जाइत अछि। अमस: अमावस्या; सभ चन्द्र मासक कारी पखक अन्तिम दिन। अन्दान: एक प्रकारक माछ। अखाढ़: विक्रमी संवत् अनुसार बर्खक चारिम मास (आषाढ़)। भौजी: भाउज। चनोठी: मालकांगनी। चूल्हि: आगि जरबाक ठाम; चौका। चिलम: धूम्रपान करबाक एकटा नली। दादा: सम्मानित वृद्ध पुरुष लेल सम्बोधन आ देवता लेल सेहो। धामिल: एक प्रकारक माछ, जकर छाल पर खोल होइत छैक आ जे मात्र मानसूनमे भेटैत छैक। धीमर: एक प्रकारक माछ। फुई: बुआ/पीसी (बाप कऽ बहिन); एतय 'मोटी' लेल प्रयोग। गादो: जड़ी -बूटी बला गुण सहित एकटा देशी लती। गोजी खागी: गाढ़ पीयर रङ्गक माछ। जेठ: विक्रमी संवत् अनुसार बर्खक तेसर मास। कोली: एकटा जाति वा जनजातिक नाम। धरिया: कोपीन; डाँर पर पहिरल कपड़ाक पट्टी। मोटी: सम्मानित वृद्ध स्त्री लेल सम्बोधन। नान: पानि राखबाक लेल माटिक एकटा पैघ घैला। पेरनुन: एक प्रकारक कारी साड़ी जे डाँर पर लपेटल जाइत अछि। पीर: एकटा मुस्लिम सन्त। रोटली: 'रोटलो' क बहुवचन; हाथ सँ आटा थपथपा कऽ बनाओल मोट रोटी। सारिंग: माटि रङ्गक एकटा माछ। बस्ती: गामक टोल/बस्ती। वेखला: एक प्रकारक माछ। कन्नड़ खण्ड अन्हार लेखक: अशोक हेगड़े (मूल कन्नड़ कथा; अंग्रेजी अनुवाद: कमलाकर भट्ट; मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर) कमलाकर भट्ट कमलाकर भट्ट महाराष्ट्रक अहमदनगर स्थित अहमदनगर कॉलेजक अंग्रेजी स्नातकोत्तर विभाग आ शोध केंद्रक प्रोफेसर आ विभागाध्यक्ष छथि। ओ एक द्विभाषी लेखक छथि आ अंग्रेजी, हिन्दी, उर्दू, मराठी, आ कन्नड़क बीच अनुवादक कार्य करैत छथि। कन्नड़ भाषामे हुनकर तीन टा कविता संग्रह प्रकाशित भेल छनि: “चुरुपारु रेशिमे” (सिल्क श्रेड्स, पुतिना पुरस्कार, २००६), “मुगियादा मध्याह्न” (अंतहीन दुपहरिया, २०१०) आ "जगदाजाते मटुकते" (दुनियाक संग गप्प-सप्प, २०१७)। मराठी कवि नामदेव ढसालक रचना सभक हुनकर अनुवाद २०१८ मे कुवेम्पु भाषाभारती द्वारा प्रकाशित कयल गेल अछि। दस टा भारतीय भाषा सभ सँ अनूदित कविताक संकलन “अक्कापक्काडा पातरगिट्टी” (पड़ोसी तितली) २०२१ मे कुवेम्पु विश्वविद्यालय, शिमोगाक प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित कयल गेल छल। ओ प्रोफेसर एच. एस. शिवप्रकाशक व्याख्यान आ निबंधक संपादन "द वर्ड एंड द वर्ल्ड" शीर्षक सँ कयलनि अछि, जे २०१९ मे मणिपाल यूनिवर्सल प्रेस द्वारा प्रकाशित भेल अछि। ओ संकथना प्रेस, मांड्या द्वारा प्रकाशित विश्व कविताक संकलन "संगम" क सह-संपादन कयलनि अछि। ओ कतेको आधुनिक कन्नड़ रचना सभक अनुवाद कयलनि अछि। ओ कन्नड़ पत्रिका जेना "आंदोलन", "केंदसंपिगे" आ "ईदिना.कॉम" मे स्तंभ लिखने छथि। हुनकर शोध पत्र साउथ एशियन रिव्यू, निदान, इंटरसेक्शन्स, लिटक्रिट (LittCrit) आदि पत्रिका सभ मे प्रकाशित भेल अछि। हुनका २००६ मे पुतिना पुरस्कार आ २०२३ मे बी. एच. श्रीधर पुरस्कार सँ सम्मानित कयल गेल अछि। वर्तमान मे ओ मराठी कवयित्री अनुराधा पाटिलक कविता संग्रहक कन्नड़ अनुवादक लेल साहित्य अकादमीक संग आ कीर्तिनाथ कुर्तकोटीक निबंधक अंग्रेजी अनुवादक लेल अशोक विश्वविद्यालयक संग अनुबंधित छथि। ओ विभिन्न शोध पत्र आ पत्रिकासभ मे नियमित रूप सँ लिखैत रहैत छथि। अशोक हेगड़े अशोक हेगड़े तकनीकक क्षेत्र मे काज क' रहल छथि। अपन पेशेवर क्षेत्रक अंतर्गत हुनकर वर्तमान रुचि मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा आ ब्लॉकचेन अछि। ओ लेखनक प्रति बहुत उत्साही छथि आ किछु समय सँ कथा लिखि रहल छथि। वर्तमान मे ओ एकटा उपन्यास पर सेहो काज क' रहल छथि। अन्हार (मूल कन्नड़: अशोक हेगड़े ) एकटा दिन एना कहियो शुरू नै हेबाक चाही, ओ सदिखन अनुभव करैत छल। मुदा फेर एकटा आर दिन सदिखन जकाँ शुरू भेल; घर सँ निकलबा सँ ठीक पहिनेक भागम -भाग। दूध बला दूध नै देलक; ओकरा पड़ोसीक दोकान धरि दौगि कऽ एक पैकेट लेबाक लेल जाय पड़ल। शौचालयमे बैसल-बैसल ओ भ्रष्टाचारी आ ओकर गुर्गा सभक विषयमे भोरक अखबारमे पढ़ि कऽ अकबार पढ़ब खतम कएलक। एकटा विज्ञापन कोनो फिल्मी सिताराक नवजात लेल नाम सुझौने पुरस्कार जीतबाक लेल उत्साहित कऽ रहल छल। जखन धरि ओ एहि हड़बड़ीक बीच अपन बेटाकेँ नहबौलक- बीच-बीचमे किछु काज 'ब्लैकबेरी' पर कऽ लेलक- आ अपन नाश्ता कएलक, ओ गप करबा लेल सेहो बहुत थाकि गेल छल। हुनकर कनियाँ हुनका अपन मायकेँ फोन करबाक लेल कहलखिन। माय पूछि रहल छलीह जे ओ छुट्टीक दिन गाम आबि रहल छथि की नै। हुनका उत्तर देबाक सेहो धैर्य नै छलनि। मनोहर अपन कनियाँ पर चिचिआयल- "की मात्र हमरा उत्तर देबाक अछि? अहाँ फोन पर रहैत किछु समाधान नै कऽ सकै छी?" ओ सिङ्कमे हाथ धो रहल छलीह। "आइ -काल्हि अहाँकेँ की भऽ गेल अछि? अहाँ सँ बिना गारिक कएल नै होइए? अहाँ आ अहाँक माय... हम बीचमे किएक पड़ी? अहाँ फोन करू वा नै। हम ऑफिस लेल लेट भऽ रहल छी।" ओ ओकरा नाश्ता पर असगरे छोड़ि कऽ ऑफिस लेल निकलि गेलीह। जखन ओ सड़क पर निकसल, ओकरा जी ओकियाय लगलै। एफएम पर सुनयना 'रूट वन' होस्ट कऽ रहल छलीह आ बकबक कऽ रहल छलीह; तरह-तरहक विज्ञापन; "ई गीत हमर भाइ लेल बजाउ, ओ गीत हमर प्रेमी लेल..." आइक नाम 'चो च्वीट' माधुरीक तेसर सन्तान; फोरम मॉलमे सलमान खान संग आइसक्रीम खयबाक मौका जीतू... ओकर जी ओकियायब आरो बढ़ि गेलै। रेडियो बन्द कऽ कऽ ओ बाहर देखलक: ट्राफिक जाम, धुआँ, गर्दा; ट्राफिक पुलिस सीटी बजा रहल छल-ओकर सीटीक पिर्र गाड़ीबला सब नजरिअन्दाज कऽ रहल छल, किछुए गज पर लाल बत्ती, बीटीएस बस सब भगवान जानथि कतय सँ कतय जा रहल छल, स्कूटर, रिक्शा, साइकिल, लारी; आ एहि सभक बीच पुरान बड़द सब पैघ प्रयास सँ लदल गाड़ी खैंचि रहल छल, लोक सब धक्का दऽ कऽ आगाँ बढ़ि रहल छल... ओ ई सब सहि नै पाबि रहल छल। ओ आशा करैत छल जे कम सँ कम आइ घर जल्दी पहुँचि सकए। ओकर नजरि गाड़ीक शीशा पर पड़ल आ ओ पिछला सीट पर पड़ल एकटा चिट्ठी देखलक। हुनका मोन पड़लनि, हुनकर बेटा ओ चिट्ठी हँसैत हुनका देने छल- "पापा, टीचर अहाँक लेल पठओने छथि।" ओ ओकरा फेकि कऽ वादा कएने छलाह जे ऑफिसमे पढ़ि लेता। मुदा ओ तीन दिन सँ ओतहि पड़ल छल। ओ ओकरा उठौलनि: फीस जमा करबाक लेल स्कूलक अन्तिम नोटिस छल। "जँ अहाँ ई नोटिस प्राप्त कएला कऽ एक दिनक भीतर फीस नै जमा करब, तऽ अहाँक बच्चाक नाम काटि देल जायत," नोटिसमे कहल गेल छल, जाहि पर प्रिन्सिपलक कड़गर हस्ताक्षर छल। ओह! दू दिन पहिने। काल्हि फीस जमा करबाक अछि। एतबेमे ओ इलेक्ट्रॉनिक सिटीमे कम्पनी कार्यालयमे प्रवेश कएलक, दिमाग खराब भऽ लेने छलै। ओतय पहुँचि कऽ ओ तुरत्ते असंख्य ऑफिसक मामिलामे डूमि गेल। बैठक, परियोजना, योजना, इंटरव्यू, नव भर्ती सभक अन्तहीन प्रशिक्षण, ग्राहक संग परामर्श... ओ काजक एकटा शृङ्खलामे ओझरा गेल। सब किछु साफ कऽ कऽ ओ घर जयबाक लेल तैयार भेल, तखने हुनकर बॉस फोन कएलनि- "मनोहर, एमडी फोन कएने छलाह, एकटा नव ग्राहक लेल प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) चाही, हम दोसर काजमे व्यस्त छी, कृपया अहाँ ई काज देखि सकै छी?" ई प्रश्न नै छल, आदेश छल। तइ सँ ओ बैसि गेल आ पता नै चललै जे समय कोना बीति गेल। अन्ततः सब किछु समाप्त भेल आ ओ लैपटॉप बन्द कएलक। तखन धरि राति कऽ दस बाजि गेल छल। एहि सभक बीच ओ हुनका (कनियाँकेँ) फोन करब बिसरि गेल छल। हुनकर एकटा मिस्ड कॉल छल। आब फोन करबाक विचार कएला पर ओ डरि रहल छल जे ओ की कहतीह, तेँ ओ मोबाइल बन्द कऽ देलक आ अपन सहकर्मी सभकेँ 'काल्हि देखब' कहि कऽ बाहर चलि गेल। "अरे यार, एतेक राति घर किएक जा रहल छी? एतेक देरी धरि के प्रतीक्षा करत, हमरा संग चलू, एकटा नव ढाबा खुजल अछि, ओतय भोजन करब, आ किंशाइत एक पेग 'जैक डेनियल', आ फेर घर जायब।" हुनकर मित्र सब जोर देलक। ओकरा सब घिसिया कऽ लऽ गेल। होसुर रोड राति ११ बजे सेहो व्यस्त छल। ओ गड्डमड्ड ट्राफिकमे ढुकि गेल- लरी, बस, स्कूटर, कार। सन्दीप कोसि रहल छल, एकटा ग्राहककेँ प्रोजेक्ट मना करबा लेल; कर्नाटक सरकारकेँ फ्लाईओवर नै बनयबा लेल, लालू प्रसाद केँ आइ.आइ.एम. मे व्याक्यान देबा लेल। समीर अपन तामस सलमान खान पर तानि देलक- "बहिनचोद, नशामे गाड़ी चलबैत मुम्बईमे हमरा सभक भवनक सोझाँ फुटपाथ पर सूतल किछु लोककेँ थकुचा कऽ देलक, देखू ओ अखनो कोना मजा कऽ रहल अछि।" मुलिमानी कहलक- "सत्ते कहू तऽ सभ साल पचास टा नव जेल बनबाक चाही।" बेतुका गप करैत ओ सब मसाला चिनियाबदाम आ चिकन बिरयानी 'जैक डैनियल' संग खैलक। मनोहर जखन घर पहुँचल, राति कऽ एक बाजि लेने छल। चौकीदार ओंघी लऽ रहल छल आ मनोहर जखन ओकर कान्ह ठोकलनि, तखन ओ गारि दैत उठल। ओ क्षमा याचना करय लागल- "सॉरी सर, हमर एखने आँखि लागल... हम कनीके अबाज सँ जागि जाइत छी।" मनोहर आस्ते सँ तमसेलथि- "कनीक अबाजक गप करैत छी जखन गाड़ीक अबाज सँ सेहो नै जागलहुँ, चलू आब गेट खोलू।" गेट खुजै धरि ओ खौंझाइत प्रतीक्षा कएलक, फेर गाड़ी पार्क कएलक आ सीढ़ी चढ़य लागल। हुनकर पड़ोसिन विभा, जे कॉल सेण्टरमे काज करैत छलीह, सीढ़ी पर भेटि गेलीह। विभा अदहा राति मे सेहो दिने सन सजग-चौकस लगैत छलीह। ओ ठाढ़ भऽ कऽ कहलनि- "अंकल, हम अहाँकेँ अपन बायोडाटा दऽ सकैत छी? की अहाँ बता सकै छी जे अहाँक कम्पनीमे कखन 'सपोर्ट इन्जीनियर' क पद खाली हएत?" "बिल्कुल, बायोडाटा दऽ दिअ," ओ गप करबाक तैयारी करय लागल, तखने हुनका लेबा लेल आयल टाटा सुमो हॉर्न बजेलक। आस्तेसँ चाभी घुमाबैत आ केबाड़ खोलैत हुनका जगयबा सँ बचबा लेल कोनो अबाज नै करबाक प्रयास व्यर्थ भेल, कारण केबाड़ धड़ाम सँ खुजि गेल। ओ जुत्ता उतारि कऽ रैकमे फेकि देलनि। मद्धिम इजोतमे हुनकर कनियाँ ओकरा सोझाँ ठाढ़ि छलीह। हुनका देखि कऽ ओ पाछू हटि गेल। "अखनो नै सूतल छी?" "तऽ स्वामी आब घर अबैत छथि? पहिने किएक नै आबि सकलौं? छअ बजे सँ कएक बेर मोबाइल पर फोन कएलहुँ। जखन फुर्सत भेल, एक बेर फोन नै कऽ सकलौं? हम अहाँक कतेक काल प्रतीक्षा करी... अहाँ मोबाइल किएक राखैत छी... अहाँ कनियाँ, बच्चा, घर किएक राखैत छी? अहाँकेँ हॉस्टलमे रहबाक चाही छल... मित्र सभ संग पार्टी करू। ई हमर अभाग्य अछि जे अहाँकेँ सहय पड़ैत अछि। हँ, हम सब बुझैत छी अहाँकेँ... अहाँक ई मर्दाबला जिदपना। हम सब सहि -सहि कऽ चुप रहैत छी, तेँ अहाँ एहन छी। चारि दिन पहिने अहाँकेँ रस्ता सँ फल -सब्जी लऽ कऽ आबय कहलहुँ, अनलहुँ? तीन दिन पहिने अहाँकेँ कहलहुँ जे हमर गाड़ीक बैटरी खराब अछि... आब ओ खतम भऽ गेल, गाड़ी ऑफिसमे अछि। हमरा दू टा रिक्शा लेबय पड़ल आ एक मील पएरे चलय पड़ल। अहाँ बुझैत छी ई कतेक थकाबय बला भऽ सकैत अछि? हमरा बिसरि जाउ, मुदा पापु लेल, की ओकर फीस जमा कएलहुँ? आइ.." ओ कानय लगलीह। ओ देबाल पर झुकलीह, खिड़की सँ बाहर शून्यमे ताकय लगलीह। "ई गैरजिम्मेदारी किएक मनोहर? बेचारा पापुकेँ स्कूल सँ निकालि देल गेल कारण ओकर फीस जमा नै अछि। ओ अपना संग एकटा चिट्ठी अनने छथि जाहिमे लिखल अछि 'काल्हि सँ स्कूल जुनि आउ'। जँ अहाँ नै सम्हारि सकैत छी, तऽ एहिमे किएक पड़ैत छी? पापुकेँ जखन कक्षा सँ बाहर ठाढ़ कएल गेल, अपन सब सहपाठी सभक सोझाँ, ओकरा कोन लागल हएत? की अहाँ कहियो एहि विषयमे सोचने छी?..." अपमान सँ व्यथित भऽ ओ कानय लगलीह। मनोहरकेँ अपन अंतड़ीमे एकटा भेदल जाय बला पीड़ाक अनुभव भेल। असलमे ऑफिसक झंझटिमे ई गप हुनकर मोन सँ निकलि गेल छल। बस एहि परिस्थिति सँ बचबा लेल ओ कहलनि- "मुदा हम तऽ जमा कएने छलहुँ।" झूठ बिना संकोच बहराएल। "की? अहाँ जमा कएने छलहुँ? रसीद कतय अछि? अहाँ झूठ किएक कहैत छी मनोहर, ककरा ठगबाक प्रयास करैत छी? मनु, देखू, हम ई आब सहि नै सकैत छी। पापुकेँ ज’ड़ छैक। हम ऑफिस सँ रिक्शा लऽ कऽ डॉक्टर लग गेलहुँ, घर अयलहुँ, ओकरा खुएलहुँ, दवाइ देलहुँ। आब हम मरल सन भऽ गेल छी। आ अहाँ एतय छी, राति कऽ एक बजे घर पहुँचल छी, नशामे, आ झगड़ा करैत छी। एकटा सीमा होइत छैक। जखन हम कहैत छी जे अहाँ फीस जमा नै कएने छी, अहाँ पलटि कऽ झूठ बजैत छी जे जमा कएने छी। किएक? अहाँ स्वीकार कऽ सकैत छी जे अहाँ सँ गलती भेल। मुदा नै, एकटा पुरुष सँ गलती कोना भऽ सकैत छैक, छै ने? ई अहाँक मर्दबला अहंकारक अपमान अछि जे गलती स्वीकार करी। नीक हएत जे असगरे रहू।" ओ कोठलीमे जा कऽ केबाड़ जोर सँ पटकि कऽ बन्न कऽ लेलनि। डाइनिङ्ग टेबुल पर हुनकर भोजन ठंढ़ा भऽ गेल छल। मनोहर फ्रिजमे सब किछु राखय लागल। जखन ओ फ्रिजक भीतर राखबा लेल झुकल, किछु प्लेट पिछड़ि कऽ नीचाँ खसि पड़ल, जोरसँ अबाज भेल। ठीक ओही समय टाटा सुमो जोर सँ हॉर्न बजौलक। शयन कक्षक केबाड़ फेर खुजल। ओ बाहर आबि कऽ हुनकर सोझाँ ठाढ़ भेलीह। "अहाँ नै बुझैत छी... पापु ५०० मिलीग्रामक एन्टीबायोटिक लेने अछि। आब ओ भगवान सन सुतल अछि। हम आब कुकुर -बिलारि जकाँ थाकि गेल छी। की अहाँ नै सोचैत छी जे बासन राखबामे अहाँकेँ सावधानी बरतब हेबाक चाही? की अहाँमे हमरा लेल कोनो भावना नै अछि? अहाँ दोसरक परवाहि नै करैत छी... जँ हम आब एक शब्द आरो कहब, तऽ अहाँ घर छोड़ि कऽ जयबाक धमकी देब... जँ हमहूँ एहिना करी तखन की हएत? बताउ, पछिला बेर डॉक्टर लग गेल छलहुँ, तखन की कहने रहथि?" मनोहर पुछलनि, "ओ की कहलखिन?" हुनकर इच्छा नै छल, मुदा स्वरमे तामसक संकेत रहि गेलनि। "अरे हँ, हम कोना आशा कऽ सकैत छी जे अहाँ मोन राखब? पापुमे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम छैक, ओकरा टॉनिक दियौ, डॉक्टर कहने छलाह। की अहाँ कहियो टॉनिक लऽ कऽ अयलहुँ? जखन आखिरीमे हम लऽ कऽ अयलहुँ, की अहाँ कहियो पापुकेँ ओ टॉनिक देबाक ध्यान रखलहुँ? आइ डॉक्टर हमरा सँ पुछलनि की हम पापुकेँ टॉनिक दऽ रहल छी आ हमरा झूठ बाजय पड़ल। अहाँक कारण। हम आब अहाँक लेल आरो झूठ नै बाजब, अहाँ बुझलहुँ?" मनोहर हुनकर आँखि देखलनि। ओ पीड़ा, तामस आ घृणा सँ भरल छल। जखन ओ कहलनि, तखन हुनकर स्वरमे तुच्छताक एकटा संकेत छल, "अहाँ बुझैत छी... वाल्मीकिक कथा... व्याध घर गेल आ एकटा ऋषिक निर्देश पर अपन कनियाँ आ बच्चा सँ पुछलक- की अहाँ हमर पाप साझी करब? हुनकर कनियाँ आ बच्चा सभ तुरत्ते अपन पापक कोनो जिम्मेदारी लेबा सँ मना कऽ देलखिन। व्याध जीवनक सत्य बुझि गेल आ तपस्या करबा लेल चलि गेल आ वाल्मीकि बनि गेल... रामायण..." अनचोक्के हुनकर आँखिमे जे देखलनि, ताहि सँ डरि कऽ ओ ठाढ़ भऽ गेलाह। "की? वाल्मीकिक रामायणकेँ बिसरू। पहिने अपन रामायण किछु आकारमे आनू।" फेर ओ अढ़ भऽ गेलीह आ शयनकक्षक केबाड़ जोर सँ बन्न भऽ गेल। एकटा असह्य अवसाद ओकरा सोफा पर ढेरी कऽ देलक। ओ ऊपर-नीचाँ देखलक। केबाड़ खुजबाक प्रतीक्षा कएलक। बाहर सड़क पर दू-चारि टा गाड़ी शोर करैत गुजरि गेल। कियो गैरेज सँ गाड़ी निकाललक... रिवर्स हॉर्नक सङ्गीत सँ ठाम भरि गेल। बगलक फ्लैटमे एकटा कुकुर भूँकय लागल। ऊपरक महलाक शौचालय सँ फ्लशक अबाज आयल। ओ पाइप सँ पानि बहैत स्पष्ट सुनलक। अकच्छ भऽ ओ 'सीएनबीसी' लगा देलक। बजारमे गिरावटक मुद्दा पर एकटा बहस चलि रहल छल। बेसी लोकक ई विचार छल जे ई गिरावट अमेरिकामे ब्याज दर आ मूल्य वृद्धिक प्रतिक्रिया अछि। चर्चा कऽ रहल लोक सभमे सँ एक गोटे बेस गम्भीरता सँ कहलखिन जे बजार काल्हि सुधरि सकैत छैक... वा आरो खसि सकैत छैक... वा आइ जे अछि, सेहो रहि सकैत छैक। मनोहर सोचलक- के जानै एहन मूर्खतापूर्ण गप कहबाक लेल हुनका के टका दैत हएत। "बड़ अद्भुत मनुक्ख छथि," मनोहर सोचलक, "एतेक चार्ट आ आँकड़ाक सहायता सँ ओ एहि निष्कर्ष पर पहुँचलाह अछि।" हुनका विचार आयल जे लोक मूलतः टेलीविजन देखैत छथि, सुनैत नै। एहि नव विचार सँ ओ कनी नीक अनुभव कएलक। ओ अपन कनियाँकेँ अपन एहि नव सोचक विषयमे बतेबाक विचार केलनि मुदा फेर डेराय गेलाह जे कतहु ओ फेर तमसा ने जाथि। अनचोक्के हुनका आभास भेलनि जे गिरावटक मतलब ओ कम सँ कम दू लाख टका गमा देलनि। ओ कनिये कालमे लैपटॉप निकालि कऽ अपन सम्पूर्ण निवेश पोर्टफोलियोक गणना करय लगलाह। दू लाख नै हएत, ओ सोचलनि आ सान्त्वना सन अनुभव कएलनि। ओ चैनल बदललनि आ 'एनडीटीवी' देखय लगलाह। विवाह पूर्व यौन सम्बन्धक विषय पर गरमा-गरम बहस भऽ रहल छल। "एहन बहस मात्र अर्धराति मे नीक लगैत छैक," मनोहर सोचलक। "बदमाश सब, नीक अछि जे बियाह सँ पहिने 'सेक्स' करू, कारण बियाह कऽ बाद एकरा लेल समय नै रहत।" मनोहर उकठपना सँ हँसल। ओ फेर चैनल बदललनि। एतय मिका सिंह आ राखी सावन्तक कोनो गप पर बहस छल। ओ टीवी बन्द कऽ देलनि। की ओ काल्हि स्कूल फीस जमा कऽ सकत? प्रश्न फेर घुरि आयल। ओ कपड़ा बदललक, दाँत साफ कएलक आ जोर सँ थुकड़ि देलक। किएक तँ ओ हुनका (कनियाँ) पर खिसियायल छल, ओ बर्तन धोबय बला बेसिन (वास बेसिन) मे लगही कएलक आ ओइमे पानि उझील देलक। फेर ओ सावधानी सँ, बिना कोनो अबाज कएने, शयनकक्षमे प्रवेश कएलनि आ मच्छरदानीक भीतर सुतय लेल गेला, तखने ओ कनियाँकेँ पापु कऽ माथ पर भीजल कपड़ा बदलैत देखलनि। पापु अर्धनिद्रामे 'पापा' बड़बड़ायल आ दोसर दिस घूमि गेल। ओ कनियाँ संग गप करबाक साहस नै कऽ पओला, मुदा किछु कहने बिना नै रहल गेलनि। ओ हुनकर कान्ह छुअलनि। ओ हुनकर हाथ हटा देलखिन। "सुनू, हमरा कम सँ कम एक घण्टा नीन चाही। अहाँ भोर सँ एतेक व्यस्त छी... आब अहाँक काज खतम, अहाँक पीयब खतम, अहाँक मित्र सभ संग बकबक खतम, अहाँक शेयर बजार आ बाकी सब खतम... की अहाँ कहियो सोचैत छी जे हमर की होइत अछि? आब ई अहलदिली बन्द करू... किछु काल पापु लग बैसू आ देख-रेख करू..." ओ मनोहर सँ मुँह फेरि कऽ सूति गेलीह। बिजली चलि गेल। पंखा बन्द भऽ गेल। मच्छरदानीक भीतर बहुत गुमार लागि रहल छल। मनोहर जोर सँ पीठ कुड़ियेलक आ करौट बदललक। फेर सँ भोर भेल। ओ कहलक, "नव दिन अछि।" ओ बिना उत्तर देने उठि गेलीह, दाँत साफ कएलनि आ मुँह धो कऽ भोरक काज लेल तैयार भऽ गेलीह। ओ पापु कऽ माथ छुलनि। जड़ उतरि गेल छल। पापु आँखि खोलि कऽ कहलक, "पापा, स्कूलमे हमरा कक्षा सँ बाहर ठाढ़ कऽ देल गेल छल।" मनोहर तामसे भेर भऽ गेल। ओ भनसाघरमे पहुँचल। ई कनियाँ संग गप शुरू करबाक एकटा बहाना छल। "जँ हम फीस नै जमा करैत छी, तऽ ओ नोटिस पठा सकैत छथि वा हरजाना लगा सकैत छथि, बच्चाकेँ कक्षा सँ बाहर किएक करैत छथि?" "ई हमरा सँ किएक पुछैत छी, स्कूल जा कऽ पूछू," ओ अधीरतापूर्वक सोहारी बेलैत कहलखिन। मनोहर शयनकक्षमे घुरि आयल। ओ पापुकेँ उठा कऽ बाथरूम लऽ गेल आ ओकरा पर कनी पानि ढारलक। सभ बेर जखन मनोहर ओकरा छुबैत छल, पापुकेँ गुदगुदी होइ छलै आ ओ हँसय लागैत छल। "पापा, पोकेमान खेलू, अहाँ छी 'चारीजार्ड' आ हम छी 'पिकाचू'।" की ई वएह छोट बच्चा अछि, जकर देह पूरा राति तेज ज’ड़ सँ जरि रहल छल? मनोहरकेँ नीक लगलै। पापु जलखै करबा सँ मना कऽ देलक आ एहि लेल हंगामा करय लागल। मनोहर खिसिया गेल आ पापु पर चिचिआयल- "की जलखै करबा सँ मना करबा लेल बताह भऽ गेल छी? जँ नै खायब तऽ एक थापड़ देब।" पापु डरा गेल आ कननमुँह भऽ गेल। ओ भनसाघर सँ बाहर आबि कऽ मनोहरक सोझाँ एली- "अहाँ की कहलहुँ? अहाँ बताह छी। ओकरा संग खेलाइत -खेलाइत ओकरा खुआ नै सकैत छी? की हमरा ई सेहो सिखाबय पड़त?" आ आर कोनो गप नै भेल। नाश्ता कयला कऽ बाद जखन ओ बासन सिङ्कमे राखय गेलीह, मनोहर आस्ते सँ हुनका सँ पुछलनि, "की अहाँ पापुकेँ स्कूल छोड़ब?" ओ व्यङ्ग्यपूर्ण ढङ्ग सँ मुस्कुराइत कहलखिन, "अहाँक जे इच्छा... हमरा लग तऽ आइ गाड़ी सेहो नै अछि।" ओ शयनकक्षमे गेलीह, ऑफिस लेल तैयार भेलीह आ सिक्योरिटी गार्डकेँ ऑटो बजाबय लेल कहलनि। क्षण भरिमे ओ ककरो आनसँ लिफ्ट लऽ कऽ चलि गेलीह। आब घरमे मात्र पापु आ मनोहर बचल छल। स्कूल बसक अबाज आयल। पापु दौड़य लागल। मनोहरकेँ मोन पड़लनि जे हुनका फीस जमा करबाक अछि, ओ बस ड्राइवर सँ कहलनि, "हम आइ ओकरा स्कूल छोड़ि देब, मुदा कृपया ओकरा वापस लऽ आयब।" ड्राइवर खिसियाइत कहलक, "पहिने सँ बतेबाक चाही सर, एतय दस मिनट सँ प्रतीक्षा कऽ रहल छी, नीक हएत जे आगाँ सँ पहिने सूचित करब।" मनोहर ओकरा पर चिचिआय चाहलथि मुदा डेराय गेलाह जे कतहु ओ पापुकेँ स्कूल सँ वापस नै आनय। मनोहर स्कूल कऽ आधा रस्ता सेहो नै पहुँचल छलाह कि एकटा बाइक सवार लगातार हॉर्न बजबय लागल। ओ दहिन गेल, हॉर्न बाजल, फेर बाम गेल, हॉर्न बाजल। कने देरीमे ओ मनोहरकेँ ओवरटेक कऽ कऽ आगाँ निकलि गेल। फेर ओ लाल बत्ती पर फँसि गेल। फेर सँ ओही बाइक सवार मनोहरक पाछू लागि गेल आ हॉर्न बजबय लागल। "ओकरा सबक सिखेबाक चाही," मनोहर सोचलनि आ अनचोक्के ब्रेक लगा देलनि। बाइक गाड़ीक पाछू सँ टकरा गेल आ साइडलाइट टूटि गेलै। बाइक सवार खसि पड़ल छल, ओ उठि कऽ अपन कपड़ा झाड़ैत कहलक- "अहाँ बताह छी? अनचोक्के ब्रेक लगा देलहुँ, तइ सँ हम खसि गेलहुँ। हमर बाइकक पहिया देखू, टेढ़ भऽ गेल अछि। एकर आब के मरम्मति करत? पहिने हजार टका निकालू।" लोक सभ ओहि ठाम जमा भऽ गेल। "की? बदमाशक सन्तान, अहाँ हमर गाड़ीमे ढुकि गेलहुँ, गाड़ीक लाइट तोड़ि देलहुँ, आ फेर हमरा सँ हजार टका मांगैत छी?" राति कऽ जमा भेल खौंझी ओकरा ओहि बाइक सवारक मुँह पर एक थापड़ मारबाक लेल उकसा देलक। बाइक सवारक ठोढ़ सँ शोनित (शुनीत) बहल, एक ठोप मनोहरक अंगा पर सेहो खसलै। बाइक सवार गारिसँ तोपि देलकै आ मनोहरकेँ मारय लगलै। दुनू सड़क पर लोटपोट होइत एक-दोसर सँ भिड़ि गेलाह। गाड़ीक भीतर पापु डरि कऽ कानय लागल। ओकरा देखि मनोहर लड़ब बन्द कऽ कऽ उठि ठाढ़ भेलाह। बाइक सवार सेहो गारि दैत उठल। "बदमाश, तोर मायकेँ... अगिला बेर देखलहुँ तऽ खतम कऽ देबौ।" ओ बाइक स्टार्ट कएलक आ चलि गेल। मनोहरक पाछू ट्राफिक जाम लागि गेल छल, जाहि सँ एकटा पुलिसबला आयल आ मनोहरपर आस्ते सँ तमसायल- "अहाँ पढ़ल -लिखल लगैत छी। अहाँ सन लोक सेहो जँ सड़क पर लड़ाई करत, तऽ की हएत सर? एक -दोसर संग तालमेल कऽ कऽ चलबाक अछि। चलू आब, अपन गाड़ी हटाउ।" शीसामे मनोहर अपन फाटल अंगा आ माटि सँ सनल मुँह देखलनि। पापु कानब बन्द कऽ देने छल। "पोकेमान खेलाउ पापा, हम पिकाचु आ अहाँ गोलम... पिकाचु पर अटैक!" पापु उत्साह सँ कहलक। स्कूल पहुँचबामे बहुत देरी भऽ गेल। मनोहरक हालत देखि सिक्योरिटी गार्ड हुनका भीतर जयबा सँ रोकि देलनि। "अहाँ की कहैत छी? हम पापु कऽ बाबू छी, अपन प्रिन्सिपलकेँ बजाउ, हुनका सँ गप करब।" मनोहर गार्डकेँ धक्का दऽ कऽ भीतर ढुकि गेलाह। "ठीक अछि, आब भीतर जाउ, मुदा जल्दी वापस आउ," गार्ड मनोहरक पाछू सँ कहलक। "हम पापु कऽ बाबू छी, बुझलहुँ?" मनोहर कहलनि। गार्ड खौंझा कऽ कान्ह हिला देलक। जखन ओ पापु कऽ क्लास टीचरकेँ देखलनि, मनोहर बकबक करय लगला- "हम विदेशमे छलहुँ, हम तुरत्ते फीस जमा कऽ देब।" "अहाँकेँ झूठ नै कहबाक चाही पापा, अहाँ तऽ बेंगलोरेमे छलहुँ," पापु ओकरा तमसा कऽ कहलक। शिक्षिका एकटा व्यङ्ग्यपूर्ण हँसी हँसलीह। मनोहर अपन ठुड्डी रगड़लनि आ स्कूल ऑफिस चलि गेलाह। हुनका बताएल गेल जे हरजाना संग हुनका तेईस हजार नौ सौ तीस टका जमा करबाक छनि, बिना कोनो रसीदक। "जखन हम हरजाना दऽ रहल छी, तऽ हमरा रसीद किएक नै देब?" मनोहर तर्क कएलनि। क्लर्क फटाक सँ बाजल- "नै भेटत। अहाँ मैनेजर सँ गप करू, जे आइ छुट्टी पर छथि, काल्हि अयताह। अहाँ काल्हि सेहो फीस जमा कऽ सकैत छी।" "सत्यानाशी बेईमान सब," मनोहर आस्ते सँ बड़बड़ेलाह। क्लर्क सुनि गेल आ ओ अपन सोझाँक खाता-बही धकेलि कऽ बाजल- "बाजैत काल सतर्की राखू। हम दू टा नोटिस पठेलहुँ, अहाँकेँ फीस जमा करबाक समय नै छल? फीस कार्ड देखू... ओतय पैघ अक्षरमे लिखल अछि। जँ अहाँ एतेक गरम स्वभावक छी, तऽ समय पर फीस जमा करबाक चाही छल। तखन कोनो समस्या नै रहितए। आब कतेक बाजि गेल... हम दस बजला कऽ बाद फीस नै स्वीकार करैत छी। आब दस बाजि कऽ पन्द्रह मिनट भऽ गेल अछि। तखनो हम दया कऽ कऽ सोचलहुँ जे अहाँ दूर सँ आयल छी। आब अहाँ हमरा अंग्रेजीमे गारि दैत छी।" क्लर्क कहलक आ फेर कहलक- "काल्हि आउ।" मनोहरक माथ घूमय लागल। ओ क्लर्क दिस ताकैत रहला। आरो कोनो शब्द नै कहि कऽ ओ टका गनि कऽ दऽ देलनि। आब हुनकर जेबीमे मात्र पैंतीस टका बचल छल। ऑफिस सँ निकलैत-निकलैत ओ प्रिन्सिपल बोलरकेँ देखलनि। मनोहर हुनका लग गेला। "फीस जमा करबामे देरी भेला कऽ कारण एकटा बच्चाकेँ कक्षा सँ बाहर ठाढ़ करब अमानवीय अछि," ओ कहलनि। प्रिन्सिपल बोलर अपन चश्मा चढ़ौलनि आ मनोहर कऽ दिस देखलनि। ओ अपन साड़ीक आँचर डाँरमे खोसि लेलनि आ समय देखलनि। फेर ओ बजलीह: "की हम पूछि सकैत छी जे अहाँ के छी?" मनोहर अपन पहिचान बताबय कऽ फाएदा-नोकसानक विषयमे सोचलनि। कोनहुना ओ आब पापुक नाम लेबा सँ बचय चाहैत छलाह, तेँ ओ कहलनि जे ओ एकटा बच्चाक सम्बन्धी छथि, जकर नाम सँ ओ परिचित छलाह कारण पापु अक्सर वएह नाम लैत रहैत छल। प्रिन्सिपल फेर अपन चश्मा ठीक कएलनि। "मुदा ओ सब तऽ फीस जमा कऽ देने अछि... मात्र एकटा बच्चा अछि जे नै जमा कएलक... अहाँ ओकर बाबू हएब," ओ क्रूरतापूर्वक हँसलीह। मनोहर अपन मुँह पोछलनि। ओ ओहि ठाम सँ निकलि जाय चाहैत छलाह। प्रिन्सिपल बोलर बजैत रहली- "एहिमे अमानवीय की अछि? अहाँकेँ पठाओल दू टा नोटिसक जवाब देबाक चाही छल। जँ अहाँ स्कूलक विषयमे एतेक खराब सोचैत छी, तऽ अहाँक स्वागत अछि, अपन बच्चाकेँ हमर स्कूल सँ हटा कऽ लऽ जाउ।" मनोहर फेर सँ स्कूल दाखिलाक प्रक्रिया शुरू नै करय चाहैत छलाह। "एहि स्थानकेँ एक टन आरडीएक्स सँ उड़ा देबाक चाही," ओ सोचलनि। पापुक विचार सँ ओ उदास भऽ गेला। हुनकर मोबाइल बाजय लागल। दोसर छोर पर प्रीति छलीह। "कतय छी बॉस? के. के. भोर सँ अहाँकेँ ताकि रहल छथि। लगैत अछि कोनो ग्राहक-प्रस्तुति अछि। अहाँ जतय छी, मीटिंग रूम वा लंच रूममे, सोझे आउ।" एकटा ट्राफिक पुलिसकर्मी गाड़ीक शीसा थपथपा कऽ मनोहरकेँ रुकबाक इशारा कएलक। "प्रीति, के. के. सँ कहि दियौ जे हम देरी सँ आयब, ट्राफिक जाममे फँसि गेलहुँ अछि, टायर पंक्चर सेहो भऽ गेल अछि," मनोहर झूठ कहि कऽ फोन काटि देलनि। ओ शीसा नीचाँ कएलनि आ पुलिसकर्मी कऽ दिस देखलनि। "गाड़ी चलबैत फोन प्रयोग नै कऽ सकैत छी। दू सय टका हरजाना।" मनोहर जोर सँ हँसि पड़ला। "अहाँ चाहू तऽ मुकदमा लिखि दिअ... फोन अस्पताल सँ छल। हमर कनियाँ एखने बच्चा जनमलनि अछि। हमरा लग मात्र पैंतीस टका अछि। जँ अहाँ ओहिमे सामञ्जस्य कऽ सकैत छी तऽ ठीक, वा हम अहाँकेँ अपन क्रेडिट कार्ड दऽ सकैत छी।" पुलिसकर्मी चारू कात देखलक आ पैंतीस टका लऽ लेलक। "जँ बेटा होइ, तऽ ओकर नाम उपेन्द्र राखब, एकटा नीक नाम अछि," ओ सलाह देलक आ दोसरकेँ पकड़बाक लेल चलि गेल। मोबाइल फेर बाजल। मनोहर फोन उठौलनि। "आइसीआइसीआई सँ फोन कऽ रहल छी सर... हम अहाँकेँ एकटा व्यक्तिगत प्रस्ताव देबय चाहैत छी... आजीवन मुफ्त क्रेडिट कार्ड... की हम अहाँक नाम जानि सकैत छी..." "चुप रहू आ फोन काटू... की ई सार्वजनिक शौचालय अछि... जे कियो आबि कऽ लगही कऽ जाय?" फोन बन्द भऽ गेल। जखन ओ ऑफिस पहुँचल, बारह बाजि गेल छल। लंच सँ एक घण्टा पहिने। आब मीटिंगमे जायब वा नै जायब, किछु फरक नै पड़ैत छल। मनोहर अपन केबिनमे बैसि गेला। शंकर जल्दी सँ भीतर आयल। "की अहाँ सँ एकटा गप कऽ सकैत छी, एम.एम.?" अपन अधीरता दबाबैत मनोहर कहलनि, "हँ।" शंकर ऊपर देखलक, नीचाँ देखलक। "आइ एकटा अमेरिकी ग्राहक आयल छल, नै?" ओ कहलक आ आगाँ जोड़लक- "अहाँ मीटिंगमे नै गेलहुँ।" मनोहर उदासीन भाव सँ उत्तर देलनि। शंकर अड़ल रहल। मनोहर असहज भऽ गेला। "बाजू शंकर, आब बेसी घुमैब -फिरैब बन्न करू... जे कहबाक अछि सोझे कहू।" शंकर मेज पर राखल पन्ना पलटलक। मेज पर राखल फोटो देखि कऽ पुछलक जे की ई मनोहरक बेटा अछि। फेर ओ बाजब जारी राखलक- "एम.एम., हमरा लग आइ.बी.एम. सँ एकटा प्रस्ताव अछि। ओ एतय सँ ३०% बेसी टका दऽ रहल छथि। लन्दनमे पोस्टिङ हएत। हम सोचि रहल छलहुँ... एतय पछिला पाँच बर्ख सँ काज कऽ रहल छी, कोनो वेतन वृद्धि नै भेल, अहाँ बुझैत छी।" "हम बुझैत छी," मनोहर कहलनि। "घुमा-फिरा कऽ गप करबाक कोनो मतलब नै अछि। हम सोझे पुछैत छी। की अहाँ हमरा २५% वृद्धि दऽ सकैत छी? आ प्रमोशन सेहो... हमर सब एम.बी.ए. क सहपाठी ऊपर पहुँचि गेलाह... हमरा लगैत अछि जे हम एहि इण्डस्ट्रीमे आबि कऽ गलती कएलहुँ।" मनोहर ओकरा दिस तकलनि। फेर ओ निर्णायक रूप सँ बजला- "शंकर, अहाँ आइयो इस्तीफा दऽ सकैत छी। एहि साल अहाँक प्रदर्शन नीक नै रहल। कोनो फरक नै पड़त। जँ सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहितहुँ तऽ विकल्प खोजब मुश्किल होइत। एम.बी.ए. पद लेल तीन दिन सँ बेसी नै लगैत छैक। पछिला पाँच बर्खमे अहाँक उपलब्धि सब स्वयं स्पष्ट अछि। अहाँक लग दू टा विकल्प अछि- इस्तीफा दिअ वा निकालल जायब। अन्तमे दुनू एक्के अछि।" लगैत छल शंकर लग कोनो प्रस्ताव नै छल आ ओ मात्र धमकी दऽ कऽ अपन मांग राखि रहल छल। ओ दुखी भऽ गेल- "एम.एम., एना जुनि बाजू, हम कम्पनीकेँ अपन जीवनक पाँच बर्ख देलहुँ। रहय दिअ, हम बहुराष्ट्रिय कम्पनीक प्रस्ताव पर गम्भीरता सँ नै सोचने छलहुँ, हम बस बजारमे वेतन देखय चाहैत छलहुँ, भेट तऽ गेल मुदा अखन धरि गम्भीरता सँ नै सोचलहुँ..." मनोहर ओकरा बीचमे काटि देलनि- "शंकर, अहाँक लग आइ.बी.एम. वा व्हाइट हाउस सँ प्रस्ताव हो, अहाँक लेल एतय कोनो स्थान नै अछि। हम अहाँकेँ अगिला हप्ता रिलीज कऽ देब। आब अहाँ जा सकैत छी।" शंकर आस्ते -आस्ते उठल। ओ बुझाइत छल जेना टूटि जाएत। मनोहर एकटा दुष्ट सन्तुष्टिक अनुभव कएलनि। बदमाश धमकी दऽ रहल छल। आब देखू, ओ कोना एतय सँ जाइत अछि। ओ काज शुरू करय बला छलाह कि मोबाइल बाजल। लाइन पर हुनकर बॉस के.के. छलाह। "के.के., सॉरी, ट्राफिक समस्या छल," ओ फोन पर कहलनि। के.के. नीक मूडमे छलाह। के.के. कहि रहल छलाह- "ठीक अछि, एतय लंच पर आउ... एडवर्ड अहाँ सँ गप करय चाहैत छथि। अहाँकेँ पसन्द करैत छथि।" ओ तुरत्ते वापस फोन कएलनि- "की अहाँ लग सूट अछि? जँ नै तऽ हमर पहीरि लिअ, हमर कोठलीमे एकटा अतिरिक्त अछि। हमर बियाहक सूट। मुदा हमर कनियाँकेँ जुनि बतायब।" एडवर्ड मनोहरकेँ देखिते गप शुरू कएलक। हुनकर कातेमे एकटा महिला बैसल छलीह। एडवर्डक लहजा सँ साफ छल जे ओ हुनका प्रभावित करबाक प्रयास कऽ रहल अछि। के.के. परिचय करौलनि- "ई छथि एर्विन, एडवर्डक नव बॉस।" एडवर्ड बाजैत रहल- "एम.एम., अहाँकेँ अपन लड़का सभ सँ बेसी मेहनत करबाक लेल कहबाक चाही। जँ काज समय पर पूर्ण नै भेल, तऽ हरजाना देबय पड़तै," ओ हुनका दिस देखि कऽ आगाँ जोड़लक, "छै ने?" ओ सब्जीक सूप पी रहल छलीह। "ठीक अछि," ओ एडवर्डक गपक पुष्टि लेल कहलनि। "नीक चामक सामान कतय भेटैत छैक?" ओ पुछलक, "की सत्त अछि जे मैसूरमे अखनो हाथी घूमैत रहैत अछि?" गप-सप खिचाइत रहल। एहि बीच ओ एकटा मित्रक एस.एम.एस. पढ़लनि, जे पुछि रहल छल जे ओ की कऽ रहल छथि। ओ जवाब देलनि जे अंग्रेजी अखबार पढ़ि रहल छी। मित्र फेर एस.एम.एस. पठा कऽ पुछलक जे की ओ नीक अछि। मनोहर लिखलनि- नीक अछि मुदा व्याकरण एकदम गलत छैक। ओ सोचलनि गप-सपसँ बचबाक चाही। मुदा एडवर्ड कहलक, "भारतमे सोनिया गाँधी कऽ अलाबे आरो कोनो नेता नै अछि, ई एकटा त्रासदी अछि।" मनोहर कहलनि, "अहाँ सभ संग सेहो ई त्रासदी अछि। अहाँ जॉर्जकेँ दू बेर चुनलहुँ। आब गाड़ीमे पेट्रोल भरेबा लेल सङ्घर्ष कऽ रहल छी। आब एक गैलनक दाम कतेक भऽ गेल?" एडवर्ड बचल सूप एक घोंटमे समाप्त कऽ देलक। एर्विन अपन ठोढ़ सँ मक्खन पोछब बिसरि गेलीह। के.के. अपन पएर सँ मारि कऽ हुनका चुप रहबाक इशारा कएलनि। सभ सँ बिदा भेला कऽ बाद ओ एडवर्ड आ हुनकर बॉसकेँ होटल 'लीला' धरि छोड़ि अयलाह। जखन ओ वापस अयलाह, के. के. हुनका भीतर बजा कऽ तमसेलाह- "अहाँ किछु बुझै-सुझै छी? एडवर्ड हुनका प्रभावित करय चाहैत छलाह... जँ ओ ओतऽ अपन नौकरी गमा देत, तऽ ओ एतय आबि कऽ हमरा सभ केँ तंग करत। अहाँकेँ ओतऽ सँ की मतलब अछि जे बिन लादेन बम फेकय वा बुश कतहु किछु करथि... ई एकटा मुर्गा चोर आ समुद्री डाकू कऽ बीचक युद्ध अछि... हम शाकाहारी छी... बीचमे किएक पड़ैत छी? काल्हि हुनका होटल सँ उठा कऽ लऽ आउ। हुनका सँ माफी मांगू आ गप ठीक करू। जॉर्जक बेटीक बड़ाइ करू जे अहाँकेँ बुझाय... की हुनका बेटी छनि?" के.के. फेर चुप भेलाह। मनोहर के.के. कऽ सूट उतारि देलनि। के.के. मनोहरक फाटल अंगा देखलनि- "अरे की भेल... अहाँकेँ मिस्त्री सँ गाडी ठीक करेबा लेल कहबाक चाही छल... अपने किएक करय लगलहुँ?" मनोहर के.के. कऽ दिस देखलनि- "की हमरा काल्हि हुनका लेबा लेल जयबाक अछि? हमरा दू टा प्रस्ताव पठयबाक अछि।" "भोरमे कहब, जँ अहाँ नै जा सकब तऽ हम आनि लेब," के.के. देबाल कऽ दिस ताकैत कहलनि। "एडवर्ड एकटा नीक मालिश पार्लरक विषयमे पुछैत छल, हम कहि देलहुँ जे अहाँकेँ बुझल अछि," के. के. आँखि मारलनि। कोठलीमे घुरि कऽ ओ देखलनि जे चारि टा मिस्ड कॉल छलनि। ओ वापस फोन कएलनि। दोसर छोर सँ ओ (कनियाँ) कहलखिन- "फीस जमा कएलहुँ?" "जमा कएलहुँ। कियो हरजाना नै लगौलक। प्रिन्सिपलकेँ सेहो डाँटि देलहुँ," मनोहर झूठ कहलनि। "अहाँ ओना किएक कएलहुँ? पापु कोनो आफतमे पड़ि गेल रहितैक तऽ? हम सुनलहुँ जे अहाँ सड़क पर ककरो संग झगड़ा कएलहुँ... पापु एतय सभ गोटेकेँ बता रहल अछि जे ई एकटा पैघ 'पोकेमान' लड़ाई छल। अपार्टमेंटमे सभ गोटेकेँ पता चलि गेल। मात्र एतबे नै, पापु नाचैत घूमि रहल अछि जे ओकर बाबू झूठ बजबाक लेल टीचर सँ डाँट खैलनि। अहाँकेँ की भऽ रहल अछि मनोहर? बैंगलोरमे मामूली गप पर लोक मारि देल जाइत अछि, अहाँ सड़क पर झगड़ा किएक कएलहुँ? लोक की सोचत? अहाँ एहन सब आफदमे किएक पड़ैत छी? जँ किछु भऽ गेल, तऽ पापु आ हम की करब? ऊपर सँ अहाँ प्लॉट आ एहि फ्लैट लेल करोड़ो टकाक कर्ज लेने छी। हम एहि सब सँ थाकि गेल छी... झगड़ा, लड़ाई... बाजू, रातिक भोजन लेल कखन अबैत छी? हमरा पापुकेँ ओकर मित्रक जन्मदिनक पार्टीमे लऽ जयबाक अछि... आशा करैत छी जे ओ ओतय जा कऽ अहाँक झगड़ा सभक कथा नै सुनायत," ओ अन्तमे आर जोड़लनि- "हम एकटा साड़ी किनलहुँ, बारह हजार टकाक।" "हमर बाट जुनि जोहू, हम राति दू-तीन बजे धरि पहुँचब। किछु प्रस्ताव तैयार करबाक अछि आ काल्हिक मीटिंग लेल तैयारी करबाक अछि। आशा करैत छी जे माफ कऽ देब।" "सम्पूर्ण जीवन हमरा ई माफीक काज देखैत रहबाक अछि। रहय दिअ... जँ सम्भव हो तऽ केरा लऽ कऽ आउ।" जखन ओ सब काज समाप्त कएलक, राति कऽ तीन बाजि गेल छल। ओ घरक लेल निकलल। रस्तामे ओ एकटा ऑटो-रिक्शा केँ आगाँ चीत्कार करैत बढ़ैत जाइत देखलक। सड़कक दुनू कात ऑटो-रिक्शा सँ निकसल धुआँक मेघ बनि रहल छल। मनोहर हॉर्न बजबैत रहल जइ सँ ओ ओवरटेक कऽ सकए। रिक्शा रस्ता नै देलक, ओ आर कनी तेज भऽ गेल। मनोहरक मोनमे ऑटो-रिक्शामे ठेंस मारबाक विचार एलै। अनचोक्के किछु टुटबाक अबाज आयल। रिक्शा एक दिस सँ दोसर दिस डगमग होइत चलय लागल। फेर ओ पलटि गेल आ फ्लाईओवर लेल खोधल खाधिमे जा खसल। किछु काल चारू दिस अबाज भेल, किछु टुटबाक अबाज, चीत्कार, सब मिश्रित। फेर सुन्न पसरि गेल। मनोहर मात्र पीड़ा सँ भरल हल्लुक स्वर सुनि सकैत छला। मनोहर गाड़ी रोकलनि आ अबाजक स्रोत ताकलनि। ओ ड्राइवरकेँ देखलनि जे भयंकर पीड़ा सँ कनैत छल। ड्राइवरक मुँहक सभ नस व्यथा सँ खिंचल छल। ओकर मुँह सँ शोनित (शुनीत) रिसि कऽ ओकर छाती पर खसि रहल छल। भय आ पीड़ाक बीच ओ मनोहरकेँ अपना लग अबैत देखलक। ओ विनती करय लागल- "कृपया मदति करू... एम्बुलेन्स बजाउ... घरमे एकटा छोट बेटी अछि... कृपया मदति करू..." ओ पीड़ा सँ चिचिआय लागल। मनोहर जेबीमे हथोरिया देलक। एकटा सिगरेट भेटलैक। ओ सुनगेलक, एक कश लेलक। ओ चिचिआइत, कनैत ड्राइवर कऽ दिस नजरि खिरेलक आ कहलक, "दुख भऽ रहल अछि बदमाश? सड़कक बीचमे गाड़ी एना चला रहल छलहुँ जेना रॉकेट लागल हो... आब भुगतू। अहाँ मरब तऽ हमरा की? हम अहाँक झमेलामे किएक पड़ी?" ओ अपन गाड़ीमे बैसि गेलाह आ इग्निशन चालू कएलनि। "सॉरी सर" ड्राइवर चिचिआइत रहल। आस्ते-आस्ते ड्राइवरक चीत्कार मन्द पड़ैत गेल। मनोहर साइड मिररमे देखलनि जे की देखा पड़ैत अछि। क्षितिज धरि मात्र अन्हार पसरल छल। _________________________________ (ई कथा २००७ मे कन्नड़ पत्रिका 'देशकाल' मे प्रकाशित भेल छल, जकर सम्पादन विवेक शाणभाग कएने छलाह।) अनूदित पद्य खण्ड तेलुगु खण्ड तेलुगु सँ अंग्रेजी अनुवाद पुरुषोत्तम के. डॉ. के. पुरुषोत्तम, वारंगलक काकतीय विश्वविद्यालयमे अंग्रेजीक सहयोगी प्रोफेसर छथि, हुनका सत्रह बर्खक शिक्षण अनुभव छनि। समान संख्यामे शोध अनुभवक संग डॉ. पुरुषोत्तम दू टा पुस्तक आ पच्चीस टा लेख प्रकाशित कएने छथि। सम्पादकक रूपमे ओ अतिथि सम्पादकक रूपमे काज कएने छथि आ एकटा पुस्तक तथा कविता अनुवादक दू टा संकलन प्रकाशित भेल छनि। एकटा अभ्यासरत अनुवादकक रूपमे डॉ. पुरुषोत्तम मोटामोटी सय टा तेलुगु कविता, दू टा तेलुगु दलित उपन्यास आ आधा दर्जन कथा सभक अनुवाद कएने छथि। वर्तमानमे ओ तेलुगु दलित कथा आ कविताक दू टा फराक-फराक संकलन पर मोन लगा कऽ काज कऽ रहल छथि। ओ अनुवाद अध्ययनमे एम.फिल. आ पी.एच.डी. शोधार्थी सभकेँ मार्गदर्शन कएने छथि। मूल तेलुगु: बोयी भीमन्ना बोयी भीमन्ना, जे गान्धीक राष्ट्रीय आन्दोलनक प्रभावमे लेखन शुरू कएने छलाह, ओ तेलुगु दलित साहित्यक अग्रदूत छलाह। एहि त्रयीमे दू टा आरो महापुरुष छलाह- गुर्रम जाशुवा आ कुसुमान धर्मन्ना। बोयी भीमन्ना जाति आधारित भेदभाव पर प्रश्न उठेबाक नीव रखलनि आ जातिवादी वर्चस्वक विरुद्ध कएक टा कविता लिखैत रहलाह। हुनकर पथ-प्रदर्शक कृति सभमे 'पालेरु' (नाटक) आ 'गुडिसेलु कालिपोतुन्नायी' अखनो तेलुगु दलित साहित्यक उत्कृष्ट कृतिक रूपमे स्मरण कएल जाइत अछि। बोयी भीमन्नाक मूल तेलुगु कविता (अंग्रेजी अनुवाद: पुरुषोत्तम के. द्वारा) १. जरैत खोपड़ी सभ खोपड़ी सब जरि रहल अछि, ओ हँ, ओ सब जरि रहल अछि! हाइ रे हाइ! ई केकर खोपड़ी अछि? निश्चय ई दलितक खोपड़ी हएत! आर ककर खोपड़ी भऽ सकैत छैक! जे हो, बहुत लोकक खोपड़ी हएत एहि देशक धर्मक अनुसार! हँ, तखन ई खोपड़ी सब जराओल जाइत छैक कम सँ कम सालमे एक बेर! एक बेर जरि गेला कऽ बाद, ई खोपड़ी सब कतय सँ बेर-बेर उगि अबैत छैक? हँ, ई सत्य अछि ई सब कतय सँ अबैत छैक? ई हमर धर्मक रहस्य अछि, ई खोपड़ी सब पुनर्जन्म लैत छैक बेर-बेर धर्म स्थापित करबाक लेल ओ सब निपत्ता भऽ जाइत छैक, आ बेर -बेर उगि अबैत छैक! ई दुष्चक्र कतेक दिन चलत? जाधरि एहि खोपड़ीक रहस्य एकर बासिन्दा सभकेँ पता नै चलि जाय! (मूल: गुडिसेलु कालिपोतुन्नायी) २. हमर पैतृक अधिकार सन्त वशिष्ठ, स्वयं जातिविहीन, ब्रह्मर्षिक रूपमे शुरू भेलाह आ एकटा विश्वसनीय कनियाँ ताकलनि जे विश्वकेँ आर्य बना सकए। आ ओ ओहि नीच जातिक कन्या अरुन्धतीकेँ हाथ नै लगा सकलाह! मत्स्यगन्धी अपनाकेँ मानवताक सेवामे समर्पित कऽ देलनि एक छोर सँ दोसर छोर धरि, अपन जीवनक पूर्तिमे जँ ओ थापड़ मारि कऽ दाँत तोड़ि देने रहितथि पराशरक, जे अरुन्धतीक पोता छलाह, आ जे कामुक प्रलोभन देने छलाह! अम्बा आ अम्बालिका, दू टा बहिन बियाह सँ पहिने राँड़। जँ ओ स्त्री-धर्म प्रदर्शित करैत व्यासकेँ, एकटा बाहरीकेँ, अस्वीकार कऽ देने रहितथि अपन सासुक आदेशक अवज्ञा कऽ कऽ, तऽ वेद व्यास नै जन्मल रहितथि! महाभारत बिना कथाक रहि जाइत! व्यास, वास्तुकार आर्य जातिक पहिचान, स्वयं जे हो, एकटा नीच जातिक मनुक्ख छलाह। आइ ओ एकटा सजाति-हिन्दू छथि, जखन कि हम, जे हुनकर जातिक छी, एकटा दलित अजाति छी ई भारतीय परम्परा अछि! हम आइ धरि जे प्रगति कएलहुँ! की अहाँ हमरा सँ पुछैत छी, हम ई कब्रिस्तान किएक खनि रहल छी? कारण वैदिक महानताक हमर पैतृक अधिकार एतय चोराएल आ दफनाएल गेल। कारण हमरा आइ धरि बहिष्कृत राखल गेल, हमर पैतृक अधिकार सँ वञ्चित राखि कऽ एहि डर सँ जे कहियो हम सत्ते ई जानि कऽ विद्रोह नै कऽ दी। ई सत्य अछि जे ओ अधिकार सब हमरा लेल कोनो मूल्य नै राखैत अछि, मुदा हम ओकरा खनि रहल छी दुनियामे प्रदर्शित करबाक लेल, ई घोषित करबाक लेल जे ओ कहियो हमर छल, मात्र गर्व सँ फेकि देबाक लेल! सम्पूर्ण सम्मान सँ साँस लेबाक लेल! (मूल: ना वारसत्वपु हक्कुलु) मूल तेलुगु: जे. सुभद्रा (अंग्रेजी अनुवाद: पुरुषोत्तम के. द्वारा) १. लोढ़ब देहक चाम जखन जरय लागल, पियास मेटेबा लेल बीच दुपहरियामे निकलि गेलहुँ, खाली घैला हाथमे लऽ कऽ। कनी ठाढ़ भऽ अपन दुखरा कहि देब भोरे-भोर उठि जयबाक अछि जमीन्दारक घर, हुनकर आंगन बहारि, गोबर-पानि सँ निपबाक अछि, गोरु-बाछीक पीबा लेल पानि भरबाक अछि, बथानक गोबर-गन्ध साफ करबाक अछि, अपन माथ पर कूड़ा-करकटक भार उठा कऽ आनबाक अछि। अपने घरक काज करबाक फुरसतियो नै भेटैत अछि। एहि मेहनतिक बदलामे भेटैत अछि भीख, बासी भात, संगे-संग दुआरि पर खरड़ा सँ मारि पिटाइ! जखन लोढ़ा लोढ़य लेल गेलहुँ, पटेल खेदने छल, तखन डेराय गेल रही। दम साधि कऽ बटोरलहुँ ओहि अनाजक कणकेँ, जे गर्दामे आ पाथरक दरारिमे खसि गेल छल। दौनी-भरनी, लदनी -ढोनी सब किछु कएलहुँ मुदा मुट्ठी भरि अनाज नै लोढ़ि सकलौं। भले एक ढेरी माटि काटलहुँ, आ बालु छानि-छानि कऽ आँकड़ अलग कएलहुँ, मुदा सेर भरि अनाज नै भेटल। ई बन्धुआ जिनगी कोना खतम हएत? (मूल तेलुगु: लेकी) २. लाण्डा जखन हमर पति अपना हाथे चून लगा कऽ चाम दैत छथि, हम ओकरा 'लाण्डा' मे राखैत छी, जतय सड़ैन गन्ध निकसैत रहैत छैक। हम लाण्डाकेँ सुखाएल ताड़क पात सँ झाँपि दैत छी, जेना आँखि पर पिपनी। हम पहरा दैत छी लाण्डा पर कुकुर-गिदड़ सँ बचाबय लेल। जँ कहियो हम बिनु बुझने निद्रामे पड़ि जाइत छी, तऽ हमर पीठ ढोलकक लयमे बाजि उठैत अछि, हे बहिन! जखन ओ सात दिन धरि सड़ल चाम साफ करैत छथि, हमरा सभ ठाम सँ पानि आनि कऽ साफ करय पड़ैत अछि। भले हमर अतड़ी मुँह सँ बाहर आबि जाय, भले मूर्छित भऽ जाइ कीड़ा -मकोड़ा आ गन्धक कारण, ई चाम कमयबाक नियति सहबे टा पड़ैत अछि! केसियाक गुद्दी पीसि कऽ लुगदी बना हमरा ओ लुगदी सब लाण्डामे पसारबाक अछि, जाहि सँ चाम रुइया जकाँ मुलायम बनि सकए। तेतरिक बीआ उसनि, ओकर भाप सँ ओ चाम साफ करैत छथि। चरचराइत जुत्ता आ ढोल बनेबा लेल ओ ढोल पर मधुर ताल दैत छथि। [मैथिली: "लंडा” एकटा कुण्ड (हौज) थिक, जतय जानवरक छाल केँ केसिया (एक प्रकारक गाछ) क लेई (गुद्दा) कऽ संग मिला कऽ शोधल जाइत अछि, जइसँ ओकरा नीक गुणवत्ता बला चमड़ामे बदलल जा सकय।] ३. साड़ीक कोर हमर छाती पर पहरा दऽ रहल कपड़ा नै हमर भूख सँ सटल हमर साड़ीक कोर लटकल रहैत अछि हमर पेट पर, बान्हक कातक 'मैसम्मा' देवी जकाँ। जखन हम बोनिहारी करैत घामे -पसीने भऽ जाइत छी, हवा रूपी साड़ीक कोर पोछि दैत अछि हमर मुँहक घाम। जखन हम तरेगण सन अन्न-कन्द-दाना साड़ीक कोरमे बान्हैत छी, ओ हमर माथ पर चन्द्रमा जकाँ चमकैत अछि। खेत-पथारमे काज कऽ कऽ जखन हम थाकि जाइत छी, सुतै लेल साड़ीक कोर बनि जाइत अछि ओछाउन। जखन हमर दुख आँखि सँ आकाश धरि झरय लागैत अछि, हमर मैल साड़ीक कोर माय जकाँ हमरा कोरामे लऽ लैत अछि हमर नोर पोछि। जखन हमर तमसायल साँय हमरा पर खिसियाइत बरसैत अछि, हम तुरत्ते ओकरा हाथक मुट्ठीमे मक्खन जकाँ पकड़ा जाइत छी। नोर पोछबा लेल साड़ीक कोर एकटा कपड़ा साड़ीक कोर एकटा कपड़ा एहि पर सभ सँ पहिने हाथ जाइत छैक, जखन भीतरक आ बाहरक पुरुष इज्जति संग खेलेबाक कोशिश करैत छैक। बरखामे साड़ीक कोर बनि जाइत अछि केसियाक फूलक छत्ता, हमर केशक लट केँ गरम राखैत। साड़ीक कोर बनि जाइत अछि गरम घूर, जे दुलारैत अछि हमर गाल-कान। कान्ह पर ओढ़नी बनि साड़ीक कोर छाह दैत अछि हमर मुँह पर दुपहरियाक गुमार वा लू लगला पर, सूरजक भेदैत ठहरल दृष्टि सँ रक्षा करैत अछि ओ। जखन हम पानि भरैत छी, घैला कऽ नीचाँ माथ पर ई बनि जाइत अछि गोल बीड़ी। चूल्हा-चौकी पर जखन ओकर प्रयोग होइत छैक, तखन अपन आङ्गुर जरबैत अछि ओ। झोरा बनि कऽ जखन हम काज पर रहैत छी, हमर बच्चाकेँ दुलार करैत अछि ओ। देहक गर्दा चाटैत अछि जेना गाय अपन नवजात बाछाकेँ चाटैत छैक। भीजल रजस्वला कपड़ा पर ओढ़नी बनि जाइत अछि। जँ हमर साड़ीक कोरक कपड़ा कमरिया लागल बंसी हो, तऽ रोपनी, बिछुड़ब आ दाउनक गीत सब ओकर 'कोरस' बनि जाएत। हमर साड़ीक कोरक ई कपड़ा ई अछि हमर घाम-मेहनति बिछौनक अविभाज्य अङ्ग। हमर सुख-दुखक संगी, साड़ीक कोरक ई कपड़ा, हमर जीवनक रस्ताक माटि जकाँ हमरा पर लागल रहैत अछि। काज आ गीतक बीच आ जरूरत पड़ला पर के कहि सकैत छैक कि ओ कखन हमर छाती पर झूलैत अछि? हमर साड़ीक कोर बिना रुकने काज करैत अछि। ई हमर छाती पर पहरा दऽ रहल कपड़ा नै अछि, ई हमर हृदय पर कोनो बोझ नै अछि। किएक हम एकरा लोकक सोझाँ दोषी ठहराबी? ओकरा आगि लगा कऽ हम कोना बचि सकैत छी? (मूल: कोंगु ना बोचे मीद कावलुंदे बोन्थपेग्गडु) (जयप्रभाक तेलुगु नारीवादी कविता "सेट अब्लेज द पूरा -एंड" क संदर्भमे) ४. अव्वा दुख जमा करैत दरबज्जा पर ओछाओल चौखटि सन अछि अव्वा, हमर माय ओ सुरक्षित बाती नै, भीतरमे राखल दीप अछि। ओ अछि सूर्ज, जे आकाशक कालीन मे कतहु हरा गेल। ओ अछि धरती मायक पसरल साड़ीक कोरमे अकाल। अव्वा ओ अछि कालजयी पूर्णिमाक चाँद। ओ अछि सङ्घर्षक मूर्त रूप, जकर कोनो भोर नै छैक। हुनकर जिनगी अछि खाली कोठीक धानक दाना, जे उखरि-समाठ सँ अराड़ि ठानने अछि अपन माथ उखरि-समाठमे दऽ। मुर्गाक स्वर सँ पहिने उगैत सूरज तापैत अछि, गरमी लैत अछि अव्वाक आँखिसँ। ओ बहारैत छथि भोरक तरेगण सब आ गोबर-पानिसँ निपैत छथि अंगना। हमरा जगा-जगा कऽ खुआ-पिया कऽ, ओ काज पर निकलि जाइत छथि। नहिये वनक गाय आ नहिये घरक बाछा एक-दोसर लेल बेकल होइत अछि। अव्वा, ओ अछि एकटा एकटा गुलाम, जकर कोनो मोजर नै। बेर-बेर झरकि जाइत अछि पिताक तामसक भट्ठीमे चाउर ठीक सँ नै पाकला पर वा असिद्ध रहला पर, चाउरमे आँकड़ वा केश भेटला पर, वा दारू पीबा लेल ओकर मजूरी वा बोनिक आन्न छिनय काल। अव्वा अछि हमरा सभक लेल पात पर परसल भोजन जकाँ। खेतक बाउग कएल बीआ बनि कऽ ओ उगि जाइत छथि हरियर फसिल बनि। ठेहुन भरि पानि भरल धानक खेतमे रोपनी-बिछनी करैत, दिन बितला पर सेहो काज सँ नै रुकैत छथि। वएह अछि हमर अव्वा! वएह अछि हमर अव्वा, जे हाथमे कोदारि धएल गाममे गीत फुकलनि, धानक खेतमे कियारी सन लहराइत धुन गढ़ैत। जखन अव्वा काज पर लगैत छथि, हुनकर घाम बनि जाइत अछि रेगिस्तानक इनारमे फूही। ओ बनि जाइत छथि चूल्हा-चौकी मुदा कहियो नै मिझाय बला आगि। हमरा मोन नै अछि जे कहियो अव्वाक डाँरकेँ कसिया कऽ पकड़ि लटकल हएब। हम कहियो नै सुनलहुँ लोरी-खिस्सा, खाइत सुतैत। हुनकर कठोर आ मैल काजर सन हाथ हमरा कहियो हुनकर कोरामे ओंघाइत सुतबाक मौका नै भेटल। हाथमे टूटल-फूटल कटोरा लऽ खाय लेल हमर चीत्कारक ठंढा भेल याद सब हमरा कहियो बिसरल नै गेल। हमर अव्वा, ओ अछि फाटल ढोलकक थाप। ओ अछि धन-धान्य सँ वञ्चित धुनि। धरती केँ फूलब-फरब सिखौने ओ चप्पलक चाम बनि गेलीह। ई अछि लट्टूक पीड़ा, जे जमीन्दारक हाथक डोरी सँ छूटि जयबा लेल बेकल रहैत अछि। भले ओ धरती मायकेँ अपन स्तन पियाबैत पोसने छथि, सेठ-सामन्त सब ओकरा हर-जोत सँ दूर रखने छथि। हमर अव्वा दुख जमा करैत दरबज्जा पर ओछाओल चौखटि इतिहासक नै खुजल पोटरी बनि गेलीह। डाँरमे साड़ीक आँचरकेँ कटोरा सन बना हमर अव्वा प्रश्न बनि ठाढ़ छथि हाथमे हाँसू लऽ। भाषाक अक्षर सब केँ धिक् धिक्कार! ओ कहियो ओहि सीमो धरि नै पहुँचल जतय-जतय हमर अव्वा घुमलीह। (दलित महिला सब आ भिखारी सब अपन साड़ीक आँचरकेँ कटोराक आकार दऽ कऽ भिक्षा ग्रहण करैत छथि।) (मूल: मां अव्वा दुक्कलनी दुन्नीपोसुकुन्ना तोक्कुडुबंदा) मूल तेलुगु: चल्लपल्ल्ली स्वरूपरानी (अंग्रेजी अनुवाद: पुरुषोत्तम के. द्वारा) १. मान्केनापुव्वु (सिम्मरक फूल जकाँ लाल) हम एकटा कुहरैत नील चिड़ै छी, काँट बला झाँखुड़मे फँसल! जइ दिस लुढ़कू, ओही दिस काँट हमरा भेदैत अछि! ई काँट नवका नै अछि, ई अछि गुलामीक बेड़ी, जे युग सँ हमरा चारू कातसँ बान्हने अछि। खतरा सदिखन फुफकारैत अछि, इनार आ डबराक बीचमे फँसल, की कहियो अपन जिनगी जी सकलौं? घरमे पुरुष -नियन्त्रण एक गाल पर थापड़ मारैत अछि, जखन कि गलीमे जाति-नियन्त्रण दोसर गाल पर। जखन जमीन्दार हमर घाम आ हमरा अपन वशमे कऽ लेलक, तखन हमरा बीआ जकाँ धरती मे धँसि जयबाक मोन करैत छल। जखन सब हमर आलोचना कएलक, जे बच्चामे हम काजर-टिकुली किएक नै लगबैत रही, तखन हमरा ओहि दुर्गन्ध भरल गामपर नाक बन्द करबाक मोन करैत छल। जखन सब हमर आलोचना कएलक युग सँ वञ्चित शिक्षाक चौखटि पर पहुँचला पर, जे हम कोनो आदरणीय जातिक नै छी, जवानीमे सेहो तखन हमरा अपना केँ मुट्ठीमे समटि कऽ दूर फेका जेबाक मोन करैत छल। जखन सब गप-सप कएलक जे हम 'कोटा' सँ अबैत छी, जीवन भरि अपमान सहि कऽ नौकरी पाबि कऽ तखन हमरा अपन कानमे शीसा गला कऽ ढारि देबाक मोन करैत छल। जखन सब हमरा मात्र काम-वासना लेल उपयोगी बुझलक, मुदा वैवाहिक बन्धन लेल नै, तखन हमरा अपन माथ कोनो खधाइमे धँसा देबाक मोन करैत छल। मुदा जखन हमर सहनशीलता खतम होइत अछि, घासक तिनका सूइया जकाँ भोकय लगैत अछि, से तखन हम दौगि नै सकैत छी। अपन जिनगीकेँ क्लेशक आगिमे धोइ, हम खिलि उठब मान्केनापुव्वु जकाँ! हम बहि पड़ब धारा जकाँ, पार कऽ क्लेशक वन। (मूल: मान्केनापुव्वु) २. माटि भेल हाथ ओ भोरक पहिल मुर्गाक बांग संग घर जगा दैत छथि, बर्तन-बासनक सङ्गीत सँ। सघन अन्हार भेदि कऽ खोपड़ीमे दीप जरबैत छथि, बच्चा सभकेँ मुट्ठी भरि भात खुआबैत छथि। जखन ओ हाथमे खेनाइ लऽ खेतमे अबैत छथि, जमीन्दार ओकर स्वागत गारि सँ करैत अछि। जखन ओ ठेहुन भरि कादोमे कोमलता सँ धानक रोपनी करैत छथि, तखन ओकर अतड़ी पेटमे भयंकर नाच नाचैत छैक। मुट्ठी भरि भात मेरचाइक बदलामे ओ खाद-बीआ छिटैत रहैत छथि, बिसरि कऽ जे ओकर बच्चा कानि रहल छैक गाछक डारि पर लटकल झुलनामे। भले ओकर प्रिय बेटी कादो भरल पोखरिमे खेलि रहल हो, बढ़ैत बिना ककरो पोस-पाल केने आ व्यस्त अछि ओ माटि भेल हाथ। भोजन पकेबाक लेल किछु नै अछि ओकरा लग, सभ दिन, सभ राति कष्ट सहय पड़ैत छैक ओकरा। भले चमकैत धानक शीश जमा करैत रहैत हो, मजूरी पाबि कऽ सेहो। अपन हाथ पर जोर देखा कऽ सोनहुल फूल खिला, ओकर स्त्रीत्व ओकर हँसी उड़बैत छैक। पति तैयार छैक ओकर घाम शराब जकाँ पी जयबा लेल। जखन ओ जाड़मे बैसैत अछि अपार आशा सँ अपन बच्चाक पेट भरबा लेल, रौदमे सूखि, बरखामे भीजि, साँझमे पतिक हाथ-पएरक मारि सहि, साले साल गर्भवती होइत। हुनकर शरीर, जे गेंदा फूल जकाँ चमकैत छल, मौलायल पातक डारि सन उदास होइत जाइत छनि। ओ निर्दोष माय, जकर चमक हरा गेल, जे नोरक धारमे बहि गेल। जराओल जाइत छथि साँझक रौद जकाँ, चूल्हि-चौकीक जारनि जकाँ। जीवनक पाथर, परती रस्ता पर भूखक क्रूस उघैत। (मूल: मट्टि चेतुलु) मूल तेलुगु: दरिशे शशिनिर्मला (अंग्रेजी अनुवाद: पुरुषोत्तम के. द्वारा) १. हमही छी जे सभ किछु हारि देलहुँ मोन अछि अहाँ की कहने रहौं जखन अहाँक पति हमरा काँट-कुस जकाँ नोचि -नोचि कऽ मुर्गी बना देने रहय? पता अछि कतेक बेर हमरा अहाँक आश्रित बुझि अपमानित कएल गेल? जखने दिन शुरू होइत अछि, अहाँ आ हमर बीच अपार दूरी आबि जाइत अछि। अहाँ हमर पति सोझाँ कहलहुँ, 'रे मूर्ख जड़बुद्धि!' ठीक अछि... कम सँ कम अहाँ अपन बेटीपर तऽ तमसयतहुँ जखन ओ हमर बच्चा पर हमला कएने छल? जे अहाँ कहैत छी हम अहाँक आश्रित छी आ अहाँ हमर मालकिन! अहाँ हमरा संग एकोटा नीक नै कएलहुँ। हमर पति कहियो हमरा मनुक्ख नै बुझलक, अहाँक पति कहियो अहाँकेँ सन्तुष्ट नै कऽ सकलाह। आखिरीमे हमही छी जे सभ किछु हारि देलहुँ। हमरा सेहो मुट्ठी बान्हि तैयार रहय पड़त, ताधरि अहाँ हमरा लेल किछु बाजू किछु नै सँ नीक तऽ किछु! जाधरि केबल पुरुष वा केबल स्त्री अछि, ताधरि कोनो समस्या नै। की अहाँ एक डेग नीचाँ उतरि आयब, ई वर्जना-रेखा पार कऽ? की हम एक्के एकपेड़िया पर चलब? (मूल: निंद चेदिंदन्नि नेने) २. हम रजस्वला कपड़ा ओढ़ि रहल छी ओ सब सूर्य-प्रकाश सँ गरमी छानि रहल अछि आ डारिये-डारि फूल मचोड़ि रहल अछि। हम हुनकर षड्यन्त्रक चक्की-पाथर पर अपन हाँसूमे धार लगा रहल छी, जे हमरा हमर नाड़ी-संवेदन सँ दूर फेकि देलक। हम पुछैत छी ओहि कलम सँ जे पुरुषक सोझाँ समर्पणक फूसि धारणा आरोपित करैत अछि। हम समयक आँखिमे मेरचाइ छीटि रहल छी, जे हमरा अनन्त कर्जमे धकेलि देलक जे हमर बच्चा आ हमर पूर्वज महिला सभ द्वारा चुकता भेल, सार्वजनिक इनार पर बिना कारण भेटल अपमान सँ। हमरा हुनकर क्रूर दृष्टिक विषयमे बुझल अछि जे हमर पीठ पर रेंगैत अछि, आ हुनकर घृणित टीका-टिप्पणी जे हमरा डसैत अछि। हमर मुँह, जे लगातार घाम बहबैत अछि, बुझैत अछि अदृश्य रहि कऽ जीबाक मतलब। हम बुझैत छी जे मीडिया सेहो कनियो ध्यान नै दैत अछि एहि खबरि सभ पर जखन बर्खाक भीजल शरीर जातिक वासनाक शिकार होइत अछि। ने तऽ पुलिसक लाठीकेँ, नहिये न्यायालयक दृष्टिकेँ हमर नोचल चाम सँ किछु सरोकार छै। हे उच्च जाति सब! नर्मदा घाटीमे अङ्कुरित भेल अहाँ सब! अहाँक पुकार दिशा सभकेँ जगाय रहल अछि। हमर प्रिय बहिन सभक तीत भेल कण्ड, जिनका काम -वासनाक पानि जबरदस्ती पियाओल गेल, जे गामक बीच अपन बाँहि फरकाबैत छल, ओकरा सबकेँ माटिमे धँसाओल जयबाक चाही। जतय हम सीढ़ीक डण्टा सँ थकुचल गेलहुँ। हम दुनिया सँ, सीढ़ीक दुनिया सँ, तरकारी काटय बला छुरी भिड़ा रहल छी। हम रजस्वला कपड़ा ओढ़ा रहल छी हुनकर फूसियाहींक तर्क पर, हुनकर बुधियारी पर, जे हमर कान अमेठैत अछि। बलात्कारी सभक रक्त अपन देहपर रगड़ि हम निकलि गेल छी 'अलिसम्मा' क रस्ता पर, 'मुथव्वा' क नसक चीत्कार संग, 'महादेवम्मा' क सह पर। (मूल: मुट्टु गुड्डा कप्पुटुन्ना) अनुवादक क नोट: अलिसम्मा, मुथव्वा, आ महादेवम्मा केँ ऊँच जातिक पुरुष लोकनि द्वारा नग्न कऽ कऽ घुमाओल गेल छल। कविक नोट: दलित स्त्री केँ दलित पुरुष आ हुनकर जीवन सँ अलग करबाक षड्यंत्रक विरुद्ध लिखल गेल। ३. एकटा दलित स्त्री कियो स्त्री बैसबाक लालसा मे अछि हमरा अपन निचुलका-मचिया बनाबैत। हमर नाकमे जाबी धऽ कऽ खेलबैत अछि, हमर चिक्कन-चुनमुन जिनगीक अंगनामे अरिपन छापैत। कोनो पुरुष अपन धरिया उठा कऽ हमर सोझाँ ठाढ़ होइत अछि, हमर आशा-आकाङ्क्षाक खौलैत कड़ाहमे थुकड़ैत अछि। हमर आँखिमे खेलाइत निर्दोष चिड़ै सभकेँ ठेलि दैत अछि, हमरा दुत्कारि कऽ हमर जीवनक सार मुट्ठीमे भरि फेकि दैत अछि। हमर जोड़ल हाथमे मूतैत अछि, हमरा दुहय लेल महींस बनाबैत अछि। हमर देहक बल आस्ते-आस्ते खतम करैत अछि, हमरा ककरो हाथमे सुखाएल पात सन देखैत अछि। कियो आन किए? हमर अपन दलित पुरुष चाहैत छथि हमरा अपन कपड़ा सुखाबय बला डोरी बनायब, हुनकर खोपड़ीक खाम्ह पर किल्ली बनेने राखब। कियो आन किए? हमर अपन स्त्री-जाति चाहैत छथि हमरा कीनय बजारक सौदा जकाँ। कुकुर सन मुट्ठी भरि भात फेकैत हमरा दिस। हमरा अपन ठोढ़क लिपिस्टिक बनाबय चाहैत छथि, अपन साड़ीक जरी सन प्रयोग करऽ चाहैत छथि, अपन उच्च जातिक साड़ीक। ई सब ताधरि हएत, जाधरि हम धानक बाली जकाँ माथ निहुरौने रहब। हुनकर खिस्सा-पिहानी ताधरि अछि, जाधरि हम मुँह बाबि कऽ सुनैत रहब। आब हम अपन मुँह आ आँखि खोलि रहल छी, देखी ओ की करतब करैत छथि। (मूल: दलितुरालु) मूल तेलुगु: एम. गौरी (अंग्रेजी अनुवाद: पुरुषोत्तम के. द्वारा) १. मेहदी लागल हाथ हमर गली अछि मास शोनित आ मौस केर, ई हमरा लेल खेल जकाँ अछि। महींसक सींघ उखाड़ि फेकब ओही सहजता सँ, जेना नह काटब। की हमरा संग खेलाइ लेल नै आयब? ओहि जुलूसमे बड़दक सवारी करबाक डरपोक खेल नै, हम अहाँकेँ एकटा बहादुरीक खेल देखाएब एकटा सुदृढ़ साँढ़केँ सोझे उर्ध्वाधर भेदि देबाक खेल। अहाँ, ओ वीर कृष्ण! अहाँ दैत्य-मायकेँ दूध चूसि कऽ मारि देलहुँ, हम अहाँकेँ मांसक किछु लोथ आ रक्तक एकटा पात्र देखायब, कि अहाँ बिना मूर्छित भेने ओकरा देखि सकैत छी? की हमर बिना मेहदी लागल शोनित सँ सनल बिना मेहदी सन हाथकेँ चूमि सकैत छी? अहाँ, ओ ग्वाल-बालिन सभक वस्त्र छल सँ छीनि लेनिहार, की हमर हृदय चोरा सकैत छी, जे हम सुरक्षित रखने छी माल-जालक चामक परदाक पाछाँ? अहाँ, ओ जे बौसुली सँ काम-संदेश पठबैत छलहुँ, की पढ़ि सकैत छी प्रेम-संदेश जे हम अपन कोमल आङ्गुर सँ देहरि पर लिखने छी? ई प्रेम नै छैक मालक घरमे ओंघरायब! हमर गली आब पोसुआ पिल्ला बा रखैल सभ लेल उपयुक्त नै रहल। एहि ठाम अहाँकेँ ओइ मनुक्खक लहाश नै भेटत जे हृदयकेँ मारि देलक। अहाँ हुनका सबकेँ अपन महलमे पायब, निर्दयता सँ गीड़ि जाउ हुनका सबकेँ। एतय मानव अछि, मास-शोनित सँ निर्मित। आउ, जँ आबि सकैत छी, हड्डी चुनब सिखाएब हम अहाँकेँ, बिना झुकल रीढ़ देखाएब। ई पाप नै छैक पानिक जे माटि मिलि कऽ ओ पीबओ जोग नै रहल, ई पाप नै छैक चामक जे 'अपराधी' भऽ गेल। जखन पानि भाप बनय काल मेघमे बदलैत अछि बिजलीक ठोप बरसाबय लेल, तखन गलीक पवित्रता पारदर्शी भऽ जाइत छैक। जखन हमर चाम केसिया* सँ धोयल जाइत अछि, अहाँक आङ्गुरक सभक दाग मेटाबैत ई बनि जाइत अछि ढोल, शुद्ध सङ्गीत गुञ्जाबैत। (मूल: पंडिन चेतुलु) *जानवरक छाल केँ केसिया (एक प्रकारक गाछ) क लेई (गुद्दा) कऽ संग मिला कऽ शोधल जाइत अछि, जइसँ ओकरा नीक गुणवत्ता बला चमड़ामे बदलल जा सकय।] मूल तेलुगु: मद्दुरी विजयश्री (अंग्रेजी अनुवाद: पुरुषोत्तम के. द्वारा) १. अलिसम्माक स्राप अहाँकेँ ई अद्भुत लागि सकैत अछि, अहाँकेँ ई हास्यास्पद लागि सकैत अछि, अहाँकेँ ई बहुत घिनौन लागि सकैत अछि, मुदा हम आब एकटा नव प्रश्न छी। ओना खाली अछि, मुदा स्त्री सभ लेल आरक्षित सीट पर नै बैसि सकैत छी। जखन सम्बोधित वा जोरसँ सोर कएल जाइत अछि, तऽ कोनो सम्मानजनक उपाधि नै अछि हमर नामक आगाँ वा पाछू लगेबा लेल। हम ओ दुख छी जे बेर-बेर विलाप करैत अछि, गली-गली ओंघराइत, दुष्ट सभक वासना सँ। हम अलिसम्मा छी, जे न्यायालय रूपी आँखिमे बाती जरौने छलहुँ। पहिने हमर कान-नाक काटल गेल छल प्रभु रामक आदेश पर। आब अखने तँ, हम पुलिसक हाथे बिना कोनो कारण यंत्रणा बनि गेलहुँ। स्त्री आ दलित भऽ कऽ सेहो हम अखन धरि जीवित छी। एकटा प्रश्न आ सङ्कट, युग सँ हँ, हमही बाजि रहल छी, अलिसम्मा! जखन कि अहाँक अहंकार गवाह अछि, जखन कि अहाँक पौरुष गवाह अछि, रे पशु सब! हम अहाँ सभकेँ स्राप दैत छी कि अहाँ मानवमे परिणत भऽ जाउ अपन नाङरि आ नोक दाँत तोड़ि कऽ। (मूल: अलिसम्मा शापम) मूल तेलुगु: वी.वी.बी. रामा राव (अंग्रेजी अनुवाद: कवि द्वारा स्वयं ) गर्भधारणक क्षणमे, एकटा कविता अपना लेल अपन सन्दर्भ, स्थान आ संरचना स्वयं सृजित कऽ लैत अछि। तुरत्ते आयल समाचार स्मरण, चिन्तन, पाठन, गायन, पूजन, ओहि सँ दूर किएक जायब निश्चये, ई आब सरल भऽ गेल अछि! हम हुनका तार सँ जोड़ि, लाइन पर आनि देब। एक 'क्लिक' मे हएत फीस देला पर, मुदा एकदम्म! 'त्वं शृणु' 'त्वं शृणु' जखन नाम पुकारबाक बात अबैत अछि, तखन तर्क मोटामोटी समाप्ति पर पहुँचि जाइत अछि।' एहि प्रकारेँ कहने रहथि सिंह सदृश जॉनसन। ककरा सरोकार छै, के हमर गुजर-बसरक खर्चा उठाबैत अछि? टका बहुत किछु करैत अछि, बेकार लोककेँ इनार लग लऽ जाइत अछि तोड़बा लेल। के कहलक वित्तीय सङ्कट अछि? एक बर्खमे २ हजार करोड़ टका छपल चिचियाएल आत्म-प्रशंसा। ओकरा माफ करू हे कम्प्यूटर! ओ नै जानय चाहैत छथि जे ओ की बिगाड़ि रहल छथि। करदाता 'पीटर' सभकेँ लूटि धनीक नेता मित्र सभकेँ पुरस्कृत करैत छथि। रेंगैत, घिसियाइत, आ चढ़ैत बेढ़ कऽ ऊपर सँ आ नीचाँ सँ विधानसभा सभ आ समिति सभक भीतर। सौन्दर्य आ भोज इच्छा शक्ति, सर्वोच्च, निर्णय आ आदेश दैत अछि, देवता सब मात्र आदेशक पालन करैत छथि। घटना आ शृङ्खला सब उद्देश्यपूर्ण अछि। व्यवस्था अछि: चिड़ैक पतनमे सेहो, ओहि गाछ-बिरिछमे जे मात्र ऊपर दिश अङ्कुरित हएब बुझैत अछि, ओहि लत्तीपर जे निरन्तर बढ़ैत चलि जाइत अछि। आदि शङ्कर सब किछु देखि लेने छलाह। सर्वोच्च (परमात्मा) क पएरक गर्दाक एकटा कण सब किछु बना दैत अछि स्रष्टा (ब्रह्मा) ओहि गर्दाकेँ अपन मुकुट पर धारण करैत छथि, पालनकर्ता (विष्णु) ओकरा हर्षित भऽ कऽ धारण करैत छथि, संहारकर्ता (शिव) ओहि गर्दाकेँ अपन सम्पूर्ण अङ्गमे लगबैत छथि। सौन्दर्यलहरी प्रवाहित होइत उज्ज्वल सौन्दर्य एहि प्रकारेँ दर्शन-प्राप्त सर्वोच्च, दिव्य आ आकाशीय बनल रहैत छैक। सौन्दर्य अपन महिमा सँ श्रद्धालु प्राणी सभकेँ आशीर्वादित करैत अछि। सौन्दर्य सँ की फायदा जँ ओ भक्ति सँ आशीर्वादित नै करय! टिप्पणी: सौन्दर्यलहरी: श्री आदि शंकराचार्यक महान रचना। सौन्दर्य: सुन्दरता / रूप। भक्ति: ईश्वरक प्रति अटूट श्रद्धा आ प्रेम। ऋषिक दृष्टि अविचलित अन्तर्दृष्टिमे घुमैत, ऋषिक आँखि एकटा श्वेत गिद्धक पाँखि सँ निर्मित खोंता पर पड़ल कोमल ऊन सँ आरामदायक बनाओल, विविध उपाय सँ सुरक्षित, बहुत रास सुरक्षा-चक्र सँ दृढ़ कएल गेल। कोन दृश्य छल आगाँक वा पाछूक! गिद्ध एकटा अछि, जकर टेढ़ लोल छैक, मोटाएल, सड़ल-गलल पदार्थ गीड़ि-गीड़ि कऽ, राक्षस-प्रेरित? की गिद्ध सब रूपान्तरित हएत श्वेत कपोत, नील परबा आ कारी चिरैमे? 'अवश्य हएत,' विश्वस्त भऽ ऋषि कहैत छथि। बॉबिट* सन धकेलल अंग-भंग करबा लेल आतुर बुश (अमेरिकाक राष्ट्रपति) स्वयं शिकार भेल, चाणक्यक सोझाँ मैकियावेली किछु नै, कौटिल्य कोनो ठग नै छल। पुरान जे अछि सएह अछि सोना। एहि प्रकारेँ सोना सेहो गड़बड़ीक नोचनी अछि। मोहम्मद घोरी- घोरी परास्त, चङ्गेज बेशी नीक, कोनो आदर्शक-धक्का नै छल, न गर्व ने आशमर्द। कुब्ला खाँ अफीमक सपना नै, गड़ल अछि जानाडूमे हड्डी सब सब विक्रम अछि आ कोनो सेठ नै। *ई शब्द १९९३ क एकटा प्रसिद्ध अमेरिकी मामिला (लोरेना बॉबिट) सँ आएल अछि, जतय एकर अर्थ पुरुष जननांग कऽ काटि देब अछि। आस्ते-आस्ते एकर प्रयोग कोनो वस्तु केँ क्रूरतापूर्वक काटि देबाक लेल वा ओकर शक्ति छीन लेबाक लेल एकटा 'क्रिया' क रूपमे कएल जाय लागल। बिहाड़ि-मेघ ऋषि कहलनि: श्वेत आ शोनित रंगक गिद्ध सब ऊँच उड़ैत अछि, व्यवस्थाक आह्वान करैत सावधानीक तुरही बजबैत। श्वेत कपोत नीक सुनबा लेल ऊँच उड़ैत अछि, नीला परबाकेँ अबैत-जाइत सन्देश वहन करैत देखैत अछि। पाँखि सँ निर्मित खोंता सब जीर्ण-शीर्ण भऽ जाइत छैक, वेल्डिंग-रॉड आ नङ्ग तार बाहर निकसल रहैत छैक। 'हमरा खोंता बनाबयमे सहायता करू ताकू मित्र धनक करू खोज' वेदना स्पष्ट आ मुखरित भऽ उठत; गिद्ध सब विष थुकड़ैत छथि आ बोकरैत छथि कखनो ई, कखनो ओ: माइक्रोफोन सब चूर-चूर करैत अछि। प्रणाली सब बिगड़ि जाइत छैक: समिति-सदस्य आत्महत्या कऽ लैत छथि, चारू कात खतराक घण्टा बाजि उठत। सब किछु देखलक ऋषिक आँखि: उच्च -वोल्टेज लाइन सब कम्पित होइत अछि, चिड़ैक बैसबाक जगह असुरक्षित भऽ गेल अछि। लाल बला 'करेण्टक शिकार' भऽ जाइत छैक श्वेत बला नीचाँ देखैत अछि, जाल सब ठाम-ठाम झरकि गेल अछि। ऋषि कहलनि: नपुंशक कएल सभ भागि जाइत अछि - नाङरि टाँगमे दबौने। शास्त्र सब शैतानकेँ उद्धृत करैत अछि - गिद्ध सब परोपकारी छथि, हुनका सबकेँ युद्धक पोशाक पहिराओल जायत वा मारि कऽ पोशाक बनाओल जायत। शीतकालक बर्खा दिल्लीमे हरियर फेफड़ा अछि - अलकतरा बला रस्ता सब, नाम-नाम ऊँच वृक्ष -पंक्तिबद्ध पद-पथ सभक बीच। धोएल, थकुचल, पीसल पात सब भीजल पीयर आ हरियर सेहो। भोरे-भोर पएरे चलैत लोकक पएर तर सरसराइत, भेदैत ठंढा हवा, ऊनबला हाथ सँ छनल। फेफड़ा आक्रमणकारी आ अतिक्रमणकारीकेँ आकर्षित करैत अछि। तिकरित -भूरसँ* मूस वा बिज्जीक धूर्ततापूर्वक हल्ला करैत शिकार कएल गेल। घृणा अर्जित करैत अछि वा, के जानय, प्रशंसा! के आक्रमणकारी आ के आक्रमित? चिन्तन -मनन बीमार कऽ दैत छैक, भुस्साक ढेरीमे सुइया ताकब सन। की ओ डङ्क मारत, वा भोथर आ बिझ लगलापर, दू खण्ड मे टूटि जायत? -"एल"(सीखि रहल अछि कियो, एल माने लर्नर) लागल गाड़ी हॉर्न बजबैत अछि, हम पएरे चलैत रहैत छी हाथ बगलमे सटा कऽ गरम रहबा लेल। *ई शब्द इराकक पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन सँ जुड़ल अछि। २००३ मे ओ अपन गाम तिकरित कऽ लग एकटा संकीर्ण आर अन्हार खधाइ (Spider hole) मे नुकायल भेटल छलाह। बेईमानी मारि देबाक युद्धक पोशाकमे, निराकार गैस आ शत्रुतापूर्ण भूभाग लेल अहंकारी, धूर्त, रणनीतिकार, अत्यन्त अ -मैकियावेली, मात्र डीङ्ग-हाँकब। नाङट कऽ देल गेल ठाढ़ भेल अपमानित हेबा लेल, हताश आ हारल भऽ बहरा जेबा लेल। भेटल विनाश, अशुभ आ निराशा करय बला। हुनकर विचार छल राज्य घोषणा आ कार्यान्वयनक बीच पड़ि गेल छाह। राज्य नै आबि सकल, भयंकर दुख दोहराओल गेल, विश्व सहलक। जोकर सब देखैत रहि गेला राज्य लेल, जे कहियो नै आबय चाहैत छल। ई मात्र निकास छल । सब बहरा जेता सेहो नै, मञ्च अखनो बाकी अछि, परदा नै खसल। की आर खलनायक सभक प्रवेश लेल वा खलनायक जोकरमे बदलत, वा जोकर सब खलनायक बनत फुसियाहींक? झुनझुन आ कनफुसकी “दाग तँ थामि लेत, मुदा ई घिनौन गंध?” ओ लगक सीट पर बैसल कन्या सँ कनफुसकी केलनि। “हमरा ओकर बगलमे बैसब नीक नै लगैत अछि, चेथड़ीसँ की होयत? निर्लज्ज, किछु लोक तँ छथि, निस्संदेह!” भृकुटि तानने ओ ‘लौंज लिजार्ड’ सँ कहलनि। व्यापार आ मुनाफाखोरी अपन चरमोत्कर्ष पर पहुँचल सोझे हव्वाक निजी अंग धरि आबि गेल। “भगवानक धन्यवाद जे हम अहाँक संग क्लास मे छी, एकटा अस्थायी तिरपालक नीचाँ जन्मल, एहन बस्ती मे रहैत छी जतय पानि दुर्लभ अछि, महग स्वच्छताक साधन हम कोना जोगाड़ करब?” ओ एकटा हितैषीक कान मे अपन दुख कहैत अछि। “हमरा लग पहिरबा योग्य मात्र तीनटा साड़ी अछि, हमर धीया कनफुसकी करैत अछि मिल-मालिक हमर बेचारी माय केँ टका दैत छथि एकटा चेथड़ी सेहो मुश्किल सँ भेटैत अछि, हमरा सनक लोक तँ शुरूए सँ अभिशप्त अछि,” गृहणी विलाप केलनि। “मेमसाहबक टी.वी. ओकरा आँखि मे सपना भरि दैत छैक मालकिनक कपड़ाक अलमारी सँ किछु पुरान मँगबाक सोचैत छी,” जर्जर बुढ़िया नानी कहैत अछि, जे अपने अछि अंशकालिक दाई, अपन घोंकचल आँखि कएने आह भरैत। सब दिस झुनझुन अछि चारू कात कनफुसकी आ आहक शोर अछि। अल्काट्राज़* चारू कात आत्मा सब बिक्री लेल अछि एतय, सस्तामे कीनल जाइत अछि- दाम एक टके सैकड़ा। आब पहिने सँ बेसी- उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम। पूर्वकालक चुनाव कुशासन स्थायी करबा लेल, ऐ सँ फास्टस** नीक- हुनकर विनाश स्वयं चुनल छल, हुनकर कृति सँ नै। एतय पूर्व-विनाश सब विलाप करैत छथि आ क्षीण भऽ रहल छथि 'ई अल्काट्राज़ अछि आ हम एतय सँ बाहर नै जा सकैत छी।' ओ शासन करबा लेल पठाओल जाइत छैक, आ ओ सदिखन शासन करैत छैक। कानून आब बहुत लोक द्वारा निर्मित नै अछि, कारण हुनकर राज्य अछि! हुनकर राज्य आबि गेल! तानाशाहीक बहुत रास मुँह अछि: श्वेत, भूर, श्वेताभ आ कारी। उद्दण्ड सब बढ़ैत छथि, चापलूस फलैत-फूलैत छथि। चितिर-बतिर मास्क हिटलर बला, बच्चा पहिरैत छैक, नारा गर्जैत छैक-बहिर करैत, नग्न करैत। अन्हार मग्न असहाय बाहर नै निकलि सकैत अछि, हेलैत, हाँफैत, बर्फ सन शीतल खार पानिमे। अन्हारमे 'चमकैत' अल्काट्राज़ वास्तविक अछि: शेष सब मात्र एकटा भरोस अछि। *अल्काट्राज़ अमेरिका (सैन फ्रांसिस्को) क एकटा कुख्यात 'द्वीप जेल' छल, जे चारू दिस सँ समुद्रक ठंढा पानि सँ घेरल छल। ओतय सँ ककरो भागब सम्भव नै छल। **फौस्टस (Faustus) क संदर्भ कविता मे बहुत गहीर अछि। ई मुख्य रूप सँ जर्मन लोककथाक ओहि पात्र "डॉक्टर फौस्टस" सँ लेल गेल अछि, जकर कथा पर क्रिस्टोफर मार्लो (Christopher Marlowe) आ गोयथे (Goethe) प्रसिद्ध कालजयी रचना केने छथि। कविताक परिप्रेक्ष्य मे एकर महत्व एहि रूप मे देखल जा सकैत अछि: आत्मघाती समझौता (The Devil's Bargain) फौस्टस एकटा एहन विद्वान छल जे असीमित ज्ञान आ शक्ति प्राप्त करबाक लेल अपन आत्मा केँ शैतान (Mephistopheles) लग बेचि देने छल। कविता-शिल्प बहुरङ्गी, सुगन्धित फूल सब गाड़ल एकत्र कएल गोबरक ढेरीमे सिन्दूर आ हड़दिक छोट-छोट स्पर्श सँ सज्जित। बाल-किशोरी सब श्रद्धा सँ घुमैत छथि घेरा लगा कऽ, आनन्दित भऽ गाबैत उर्वर पूर्ण, एकटा वरदान जेकरा लेल प्रार्थना करबाक चाही। हम कोनो बिलाड़ी-प्रेमी नै छी, मुदा ई हृदयस्पर्शी अछि मोम बनबय बला। दिल्लीक प्रचण्ड गुमारमे, एकटा नव-प्रसूता बिलाड़ि अपन बच्चा सभकेँ दूध पिया रहल अछि एकटा ऊँच पाथरक देबालक छाहमे। की बिलाड़ि-बच्चा देनाइ नै अछि, तखनो तत्वतः किछु समानता अछि ओहिमे। कल्पनाक रजस्वला अवस्था कृत्रिम रूप सँ नै आनल जा सकैत अछि, एकरा अन्तर्ज्ञान सँ अनुभव करब मुक्त करब आवश्यक अछि। कल्पना सदा विद्यमान आ जीवित, एकटा प्रेरक चाही ओकरा दिव्य कहू, एकटा लुत्ती एकटा प्रेरणा, एकटा उन्माद। परितृप्तिक कामुक सुख जकाँ अनुभूति मनक साफ, वा जे अहाँ चाहू। यात्रामे आत्मा मार्गदर्शक पिन-लाइट सब चारू कात फेकैत छैक, श्वेत तेजक कण सब हल्लुक बैंगनी रङ्गक आभा लऽ कऽ। पाँच हप्ताक भ्रूण अवतारक प्रतीक्षा मे पड़ल अछि: स्त्री अपन संगी संग कामुक क्रीड़ामे बिछौना पर अलसल रहैत छथि। तुरत्ते हम कूदि कऽ प्रवेश करैत छी ओहि छोट शरीरक भीतर। एहि सँ बचबाक एकमात्र उपाय अछि शान्ति-भङ्ग करय बला कर्कश तत्त्व सभकेँ मेटाएब, जे आवेग आ उन्मादमे अर्जित कएल गेल अछि- हत्या, चीर-फाड़, बलात्कार आ क्षत -विक्षत करैत। सब किछु एकटा बिलाड़ि-योनिक लालसामे, जे मात्र नोचनी करैत छल। ओ एकटा सम्राट छल मुदा अपन मलिन मनक नै। हुनकर अहंकारी आदेश पर एकटा इतिहास लिखल गेल, दुर्बल-मस्तिष्कक लोक ओकरा आकाश धरि ऊँच करैत अछि। हमरा चुकाबय पड़त पीसय पड़ैत अछि पछतावा, क्लेश, कष्ट आ धैर्यक घर्षण पाथर पर। सहानुभूति देखयबाक आ क्षमा करबाक असंख्य प्रयास, नपुंसक बनि सहन करब अप्राकृतिक भोंकि कऽ, चुट्टी आ सब किछु। कर्मजनित क्लेश एकमात्र उपाय अछि मैल मेटेबाक एकमात्र रस्ता अढ़ भेल संगी-प्राणी सभक सङ्गति पुनः पाबय लेल असीम आनन्द बोध। (माइकल न्यूटनक 'द जर्नी ऑफ सोल्स' लेल। न्यूटनक अनुसार, आत्मा सभ अपन कर्म आ शिक्षाक लेल शरीर धारण करैत अछि। ) एक पाइ .... "अहाँक विचार सभक लेल एक पाइ, पवित्र ..." "पाइ लिअ: एतय अछि ओ!" "एकटा बाँसक पथिया छोट-छोट पट्टी आर-पार दृढ़ खिज्जा महकैत हरियरी युक्त गर्दा, तुरत्ते कटल। मात्र देहाती सुतरी आकर्षक नै अछि, मुदा निश्चये, ई एकमात्र सम्भव गद्दी अछि। ई पारगमन एकटा प्रतीक अछि- मानव गरिमाक एकटा रथ। ओकरा लेल जे पाछू छोड़ि जाइत अछि- नीक-अधलाह ऋण आ बकियौता सब किछु, वासना, पासबुक, पेन्सन आ सब किछु। पथियाक प्रतीक्षा छल, कारण एहि सँ बेसी खराब रस्ता सेहो भऽ सकैत अछि बम विस्फोटमे जरि जायब वा कोनो विशाल चक्काक नीचाँ थकुचल जायब। हम सोचैत छी, जे लोक जेलमे छथि, हुनका संग की होइत हएत? हम पथियाक स्वागत करैत छी- कम सँ कम चारि गोटे तऽ उठाबय लेल रहताह। अन्य कोनो सङ्गी वैकल्पिक अछि, ओना कम सँ कम किछु तऽ रहत सात पग लेल 'राम नाम सत्य है!' जपैत।" भीतर देखू मुखौटा मुँह नै अछि, हम मुखौटा देखैत छी, मात्र मुखौटा-सदिखन मुँह नै। एकटा मुँह बहुत मुखौटा धारण कऽ सकैत अछि। दृष्टि सब बदलैत आ परिवर्तित होइत छैक- स्निग्ध वा दुष्ट बनि जाइत छैक। मोनालिजाक एकटा मुँह अछि; हम जे देखैत छी से एकटा मुखौटा अछि: एहि सँ एकटा प्रहेलिका। ककरो लग मात्र मुखौटा होइत छैक मुँह एकदम्मे नै। मुस्कान लेल एकटा मुँह चाही, एहि सँ बेसी किछु नै, बस एकटा मुँह। एकटा शिशुक एकटा मुँह होइत छैक, ओ मुखौटा नै पहिरैत छैक। बहुत बच्चा मे हम हुनकर (देवताक) मुँह देखैत छी, वा हुनकर (प्रियतमक)। प्रेमी वा प्रेमिका लग सेहो एकटा मुखौटा भऽ सकैत अछि। मुदा मायक मात्र एकटा मुँह होइत छनि अपन सन्तान लेल। भगवान जकाँ हुनकर मुँह अछि: एकटा मुँह। जे बाहर अछि, से भीतर अछि। देखू जकरा अहाँ प्रेम करैत छी, हुनकर भीतर शिशुक मुँह: बस भीतर देखू! जमीनी स्तर पर दिनमे बहुत बेर देखैत छी एकटा चश्माधारी ठगकेँ भव्य सेडानमे अपन मुँह पर तेवर लय कऽ, एकटा रिक्शा पर जे आगाँ जा रहल अछि, गरीबी आ वेदनाक मटियातेल कऽ धुआँ बोकरैत तामसमे ओवरटेक करबाक कोशिश करैत अछि, अपन अड्डा, अपन साम्राज्य धरि पहुँचबा लेल। दिनमे बहुत बेर देखैत छी एकटा पण्डितकेँ, सावधानी सँ तिलक लगौने, जेकरा बहुत लोक एकटा छली बुझैत छथि, जे ओ बेइमानी सँ ओकरा ठगि लेबाक कोशिश करैत अछि, सावधानी सँ अपन रस्ता बनाबैत, धक्का-मुक्की करैत भीड़मे सँ जल्दी कऽ रहल अछि, श्राद्ध-अनुष्ठान नै छूटय तइ लेल। दिनमे बहुत बेर देखैत छी एकटा जीर्ण-शीर्ण व्यक्तिकेँ गाछक छाहमे, सवारीक प्रतीक्षा मे। प्रतीक्षा करैत, प्रतीक्षा करैत, प्रतीक्षा करैत । स्कूटर चालक ओकरा देखि कऽ बुधियारी सँ सिग्नल कूदि जाइत अछि। पीड़ित व्यक्ति एकटा दया-दूत देखबाक आशमे रहैत अछि। दिनमे बहुत बेर देखैत छी अपन मायकेँ, अप्रत्याशित रूप सँ, थाकल आ मलिन। भीड़-भाड़ भरल सड़क पर, आँखि नीचाँ कएने आस्ते-आस्ते डेग रखैत, एकटा सन्तुलन-कला: एक बेर खसब माने सर्वनाश। समय पर मिल (कारखाना) पहुँचब, एकटा अजगुत, सभ दिन एकटा चमत्कार। दिनमे बहुत बेर देखैत छी भगवान् केँ, रङ्ग -बिरङ्ग वस्त्र सँ सजल, जोर सँ हँसैत। बस्ता, पानि-बोतल आ भोजन -डिब्बा उघैत, चमकैत भोरक मुँह संग, पएरमे उमङ्ग भरल, सड़क पार करैत, आनन्दित हंस-झुण्ड जकाँ, निस्फिकिर। उठि-पुठि बिदा होइत चारू कात देखू: चारू दिस आ भीतर देखू आब प्रिय पोती दौगि कऽ अहाँक कोरामे नै अबैत अछि। पुरान आ प्रिय फाइल -फोटो डरा दैत अछि। दर्पण-प्रतिबिम्ब जे सदिखन चापलूसी करैत रहल, हमर आत्म-सन्तोषकेँ बढ़ावा दऽ रहल छल, आब मुँह बिकचा कऽ तमसाइत अछि। डाक पातर होइत जाइत अछि नगण्य, बेकार, अनाड़ी सेहो। अहङ्कार भग्न होइत जाइत अछि। आकर्षण क्षीण होइत मसाला बला चीजक स्वाद नियन्त्रित। मात्र जीवित रहबाक इच्छा बचल रहैत अछि। चिकित्सक चिन्तित भऽ जाइत छथि एकटा इशारा दैत छथि जे अहाँ बुझि नै सकैत छी। हुनकर आह सँ पता चलैत छैक मुदा ऊबि हुनकर नै अछि। यात्री दयालु भऽ जाइत छथि, अहाँकेँ अपन सीट दऽ दैत छथि कम सँ कम किछु डर सँ हुनका सभकेँ सेहो ओ दिन देखय पड़त। कियो श्रद्धा राखैत छथि हुनका सेहो बच्चा अछि। बैंक काउण्टर पर बैसल लोक अहाँकेँ सोफा देखबैत अछि, आ अहाँक नगदी लय कऽ अहाँ लग आबि जाइत अछि। हवाई चुम्बनक दिन बहुत पहिने गुजरि गेल। राति मे साँसमे सीटी सुनबाक दिन आयल। विदा भेला काल कनियाँ अहाँकेँ टैक्सी लय लेबाक हेतु कहैत छथि। समय समाप्त, भऽ जाइत अछि, सीखू अपन चिकित्सक स्वयं बनब, बुझु अहाँक जूता कतय काटैत अछि! अञ्जीर पात अञ्जीर-पात नै झाँपैत अछि ओहि असली रङ्गकेँ; पद आ स्थिति सब बेसी नोकसान पहुँचाबैत छैक व्यक्ति सँ सेहो बेशी। रङ्ग देखाओल जा सकैत अछि, नारा चिचियाओल जा सकैत अछि, युद्ध जगाओल आ लड़ल जा सकैत अछि विश्व-शान्तिक नाम पर, जिन्दाबाद लेल। मुदा, अञ्जीर -पात असली रङ्गकेँ नै झाँपैत अछि- नग्न, शोनित-पियासल शैतान, नग्न, मानव-दहन करय बला आततायी-सब उजागर भऽ जाएत। प्रतीक्षा करैत अछि विद्युत-कुर्सी आ फाँसीक रस्सी- दुनू निश्चित रूप सँ दावा करत, एक -एक कऽ कऽ। अजीब कानून, अजीब अत्याचार लेल सभ्यता 'ओजिमान्डियास'* सब देखने अछि, बालु कऽ पहाड़ आ छाउरमे गड़ल कार्यकारी प्रमुख सभक माथ काटल। असली रङ्गकेँ अञ्जीर -पात कहियो नै झाँपैत अछि। *पर्सी बीश शेलीक 'ओज़िमेंडियास' सत्ताक विडंबना आ पतनक अनिवार्यताक चरम काव्य-साक्ष्य (साक्षी) अछि। तोहर राज्य, आबह! फलक-आन्तरिक मुँह ई.डी. क अण्डाकार कक्ष नौ गोटे मेजक चारू कात। एकटा दसम व्यक्ति अबैत अछि हताश, भेदी दृष्टि सभक उत्सुक, नाप-जोख करैत, हिसाब लगबैत, जिज्ञासु, बानर जकाँ, उदासीन, सरकारी अधिकारी जकाँ, अभिमानी, गर्वित। दयाक मुदा बहादुर मुँह, जाड़मे घाम सँ भीजैत बाहर ओना एतेक जाड़ नै अछि। ओ आत्मविश्वास लेल कण्ठ साफ करैत अछि युवा, तत्पर, उत्सुक, कटल-केश बला स्त्री तेज, स्पष्ट, आवरण-युक्त स्तन-अग्रभाग संग। बीचमे पुछलक, "बियाह भेल अछि?" - ई पता लगबै लेल कि एहिमे सटल रहब कोनो नोचनी कोनो हास्यास्पद मामिला नै अछि। बाहर निकलल आँखि सब अपन झूलैत चश्मा फाइलमे गाड़ि दैत अछि प्रश्न सब उड़ि रहल अछि, संक्षिप्त उत्तर दऽ रहल अछि। भोंकल कटल-केशक नोक सब सँ "अहाँक ...क प्रतीक्षा मे!" एकटा आहकेँ दबा देलक कोनो अभिव्यक्ति, मात्र निःश्वास सुनल गेल मेजक ओहि पार। शीतकालीन पुष्प चुम्बन, आलिङ्गन-क्रीड़ाक मास दिसम्बर अति रमणीय अछि। जाँघ छाती पर, मुँह केश-भरल छातीमे नुकाओल वा पएर आपसमे गाँथल, आ साँस सुखद रूप सँ फुफकारैत। ई सब मात्र कामुकता नै अछि: ई एकटा प्रस्तावना सँ बेसी अछि। की देह अन्तिम मुक्तिक साधन नै अछि? आ ई परम आनन्दक एकटा डेग नै अछि? अद्वैतक अवस्था पूर्ण एकत्व आ एकता अछि। अद्वैत अन्तिम सत्य अछि, जे बहुत बादमे अनुभूत होइत छैक शुरू होइत अछि बच्चा सभक माय सँ लटकबा सँ, आ फेर एक-दोसर सँ आ आस्ते-आस्ते परस्पर सब सँ एकटा क्रीड़ामे जे नीरस आ सामान्यकेँ हल्लुक बना दैत छैक। उत्साहपूर्ण गरम अनुभव लेल बेकल होइत जीवन सब, देबा लेल आ लेबा लेल ई सब भगवान् छथि आ सब प्रेम अछि, कारण भगवान् प्रेम छथि आ प्रेम भगवान् छथि! भेटैत अछि ... लक्ष्य! लक्ष्य सब लक्ष्य केँ मेटा दैत छथि, जँ किछु अछि तऽ आर कोनो निशान नै छोड़ैत छथि। जँ टार्गेट स्वयं गोल अछि, तखन मनुष्य एकटा मशीन आ मूर्ख बनि जाइत अछि। लोकाचार लक्ष्य निर्धारित करैत अछि हम ओहि सँ बहुत दूर आबि गेल छी। दिन-प्रतिदिन जीवन बिताबैत, हम मात्र लक्ष्य कऽ पाछू भागैत छी मृग -मरीचिका। हमरा किछु ऊपर सँ देल गेल अछि, हमर अपन बहुत इच्छा अछि। ग्राफ पर एकटा उभरल रेखा वा सुन्दर वक्र (शरीरक) एकटा उन्नति, एकटा जीत, एकटा विजय, एकटा स्मृति-पट्टिका: एक वा दोसर, वा एक साथ, एक पलमे। हम प्रेरित छी निरन्तर, आदिम प्रवृत्ति सँ, या तऽ ककरो द्वारा वा स्वयं द्वारा। हम अपन आगाँ बढ़बाक क्षमता आ शक्ति हेरा बैसल छी। हम अपन मनक प्रयोग करबाक शक्ति हेरा बैसल छी स्वयंकेँ प्रबुद्ध करबाक, अपन विश्वासक अनुरूप जीवन जीबाक। की अहाँ एकटा टार्गेट सँ आगाँ देखैत छी, जे स्वयं-आरोपित वा थोपल गेल अछि? "नहि! पहिने टार्गेट प्राप्त करू, गोल सब अपन देख-रेख स्वयं कऽ लेत!" की हास्यास्पद आत्मसन्तोष अछि ई! मानू टार्गेट प्राप्त करू, सीज़रकेँ देबाक चीज सीज़रकेँ दऽ दियौ।* मुदा की सब सँ ऊपर कोनो 'अनन्त' नै अछि? लक्ष्य सब अहाँकेँ पकड़ैत अछि गोलकेँ अपन अन्त बनाउ। *ई उक्ति बाइबलक एकटा प्रसिद्ध प्रसंग सँ लेल गेल अछि, जेकर अर्थ अछि- "जकर जे अधिकार अछि, से ओकरा दऽ दियौ।" भगवान् केँ देखब "की अहाँ कहियो भगवान् केँ देखलहुँ?" "भगवान्? अहाँ? कहियो?" "हम, मोटामोटी सभ दिन।" "कतय, कखन आ कोना?" "उत्फुल्ल मुँह सब, चमकैत केश आ मधुर स्वर, लड़की सभक झुण्ड आ लड़का सभक सङ्कोचसँ भरल लाली, आँखि सब चमचमाइत आ मन सब निर्मल, हम ओइ सभकेँ देखैत छी, धक्का-मुक्की करैत, स्कूल जाइत। "घास पर ओसक ठोप सब नम्रता सँ टिमटिमाइत, जखन हम भोरे-भोर टहलै लेल जाइत छी, हमरा धो-पखारि स्वच्छ आ उज्ज्वल कऽ दैत छथि। हम उत्साहित डेग सँ स्कूल-रोड दिस बढ़ैत छी, अपन प्रेम केँ ऊर्जावान बनायबाक आ देखयबाक लेल। हुनकर कोमल मुस्कीमे हुनकर (भगवानक) आशीर्वाद ताकबाक लेल, अपन मनक स्लेटकेँ प्रेमक स्वच्छ पोछा सँ साफ करबाक लेल, बच्चा सभक मुँहमे वास्तविक आनन्द आ वास्तविक प्रेम देखबाक लेल!" 'किछु लोक कहियो नै बदलैत छथि', हम सुनलहुँ सभसँ, ई, आह।" एकटा कवि केँ परखैत हम अखनो एकटा आर प्रयास कऽ सकैत छी, फेर प्रयत्न करू इन्द्रधनुषमे एकटा आर रङ्ग जोड़बाक। ओहि स्त्री लेल नव पङ्क्ति लिखू जकरा नग्न करबाक व्यर्थ प्रयत्न कएल गेल जनता-दरबारमे। कलंकित दरबार पर एकटा कलङ्क, ज्ञान आ परम बलिदानक उपस्थितिमे ओकरा देखाउ जे अछि सब सँ बेशी दुष्ट। एकटा आर मानवीय सत्य कष्ट आवश्यक रूप सँ नीच नै करैत छैक। एकटा दानवी, एकटा व्यभिचारीकेँ बता दियौ, कामवासना सब किछु नै अछि ओ एकटा आरो सुनगैत नरक प्रज्वलित कऽ सकैत अछि। नुकायल शस्त्रागार सब शैतान मनकेँ सतबैत रहैत अछि, कामुक महाद्वीप सब जुड़बा लेल आतुर, एकटा ग्लोबमे जे ठामे फाटि रहल अछि। सौम्य यात्रा लेल मन्त्र जपबाक कोनो मतलब नै अछि। अन्हार रस्ता सभकेँ तेज सँ प्रकाशित करबाक आवश्यकता अछि, जतय आलस्य आ कामवासना आश्रय नै पाबि सकय। आनन्दक टापू सब सज्जन लोक लेल सुलभ अछि। कष्ट उदात्त बनाबैत छैक करुणा सब किछु अछि। 'बार्डो' छन्द * बारडो' (Bardo) एकटा तिब्बती शब्द अछि, जकर शाब्दिक अर्थ अछि- 'अन्तराल' आकि 'मध्यवर्ती अवस्था'। 'बारडो' ओहि समय केँ कहल जाइत अछि जखन आत्मा एकटा शरीर छोड़ि देने अछि मुदा दोसर जन्म धरि नै पहुँचल अछि। एक-तरफा द्वार प्रवेश -द्वार लुभावन देखाइत अछि, नियोन साइन सजल अछि अक्षर-अक्षर घुमबा लेल। प्रवेश हरियर रङ्गमे डिजाइन कएल गेल, एकटा चमकैत हरियर चौरी सन देखाइत। भीतर प्रवेश सहज अछि, ओना ओ बहुत टका ठकैत छथि। भीतर रहब एकटा पीड़ा रहित उपच्छायामे, साँझमे आबय बला आगन्तुक सभ लेल आराम दै बला। भीतरक लोक लेल बाहरक दुनिया दुर्लभ भऽ जाइत छैक, भाग्यशाली बाहर निकलि जेतथि जँ सोझाँक केबाड़ सँ बाहर भऽ सकैत छथि। सब अछि पूर्ण-गोल अन्त एकटा पूर्ण वस्तु जकाँ देखबाक चाही। तागक गोला सँ सब ढील सूत्र एकत्रित, शान्तिपूर्वक बान्हल वा समाप्त कऽ देल, तोरा अपन आप सँ शान्ति देब। सुलझि जे नै सकल विवाद, बिना माफ कएल अपराध, बिसरायल नै गेल गलती आ बदला नै लेल गेल सब घाव बनि कऽ पीड़ा दैत रहैत छथि। सब नकारात्मक तत्त्व मेटाओल नै जा सकैत छैक। रिक्त स्लेट (टैबुला रासा) काज नै करत, पीड़ा देह-चेतनाकेँ आगिक चिन्हासीसँ दागि दैत छैक। दाग रहिये जाइत छैक, जेना कोनो मेटयबाक इच्छा पूरा नै होइत हो! स्वामित्व कतय अहाँ दावा कऽ सकैत छी केबल त्यागल चाम पर, केबल खोल पर। भीतरक किछुओ अहाँक नै अछि। अहाँकेँ त्यागि देल गेल अछि ओहि 'भीतर-वस्तु' द्वारा जे नव जैकेट पहिरैत छैक। अपन दावा करब बेकार अछि ओइपर जे अहाँक नै अछि। 'भीतर -वस्तु' सब नकारि दैत छैक, जे अहाँकेँ किछु काल लेल स्वामी बनौने छल आ बिना अनुमति प्रस्थान कऽ गेल। अहाँकेँ आशा अछि कि अहाँ अपने सँ शान्ति स्थापित करब, जाहि सँ फेर आगमन सहज आ सुखद हो, बेशी पूर्ण-गोलाई लेल श्वेत तेज, अनादि आ अनन्त आनन्दक दिशामे। बुद्धिक पथ अपन स्वयं कऽ कुम्भकार, चिकित्सक, अपन स्वयं कऽ निर्माता बनू। सीमित अछि 'हम', 'हमर', 'अपन' - ई सब प्रथम-पुरुष सर्वनाम। आकाङ्क्षा करू समावेशी 'सब' असीममे सँ एक होबाक। प्रत्येक वस्तु, दृश्य, अदृश्य, अनुभूत आ नै अनुभूत पूर्णता प्राप्त करबाक चाही। एकदम निर्मल श्वेत तेजक मेघ-विस्फोट। अन्तमे कोनो कोण नै रहत सब किछु गोल भऽ जाइत छैक। अपन श्रेष्ठ 'स्व' सँ शान्तिमे रहबा लेल, अपन उचित समय पर सब नकारात्मकता मेटाउ भावना, विचार, संवेदना। जाहि सँ कोनो ढील सिरा बाहर नै निकलि आबय, बेर-बेर दुख उत्पन्न करैत, बेर-बेर पीड़ा दैत। जखन बदला लेनाइ प्रश्न सँ बाहर अछि, की खराप मानबाक कोनो मतलब अछि? गोल करब 'भीतर-वस्तु' पीड़ा देबा जोग नै, खाली फेर कष्ट सहबा लेल! क्षमा जैतूनक डारि सँ सुशोभित अछि, विस्मृति शान्ति सँ मुकुटित अछि। एहि सँ श्वेत तेज दिस आरोहण, एकटा चिरस्थायी निश्चित तत्त्व बनि जाइत छैक। (कैरोल बोमनक 'चिल्ड्रेन्स पास्ट लाइव्स'* पढ़ला पर) टिप्पणी: बार्डो: (तिब्बती) मृत्यु आ पुनर्जन्मक बीचक चेतनाक अवस्था अछि। इनथिङ्ग (भीतर -वस्तु): से अछि जेकरा हम आत्मा (अनन्त चेतना) कहैत छी। कैरोल बोमैन (Carol Bowman) क पुस्तक "Children's Past Lives" (1997) पुनर्जन्म आ बाल-मनोविज्ञानक क्षेत्र मे एकटा क्रांतिकारी रचना मानल जाइत अछि। ई पुस्तक एहि धारणा पर आधारित अछि जे छोट बच्चा प्रायः अपन पिछुलका जन्मक याद (Past Life Memories) अपन गप्प, व्यवहार आ सपनाक माध्यम सँ व्यक्त करैत छथि। बोमैनक अनुसार, बच्चाक 'सहज बोध' (Intuition) बहुत प्रखर होइत अछि, किएक तँ ओ हालहि मे ओहि 'बारडो' वा परलोक सँ अइ लोक मे आयल रहैत छथि। भिखारि आ दोसर आधा ओ गिट्ठऽबला कपड़ा-झोरा कान्ह पर लटकबैत अछि ओकर दरारि सब देखैत अछि आ आँखि सँ आह भरैत अछि "दयापूर्ण भोजन लेल एतेक बहुत अछि।" एकटा आशासँ अंगना सोझाँ भरल कण्ठ सँ भिक्षा-याचना: "माय! भूखलकेँ भिक्षा दियौ!" एक मिनटक प्रतीक्षा, हुनकर आदति अनुसार आ फेर ओ अगिला दरबज्जा दिस डेग बढ़बैत अछि "माय! याचककेँ भिक्षा दियौ!" शीघ्र एकटा सुहागिन प्रकट होइत छथि थारी लय कऽ भरल चाउर, दालि आ तरकारी सब सँ, आ घी तथा दहीक छोट-छोट मटकूरी सेहो। "थम्हू माय! आधा बहुत हएत" गृहिणी अचरज सँ खाली झोरा कऽ देखैत अछि। "प्रभु-परमात्माक आशीर्वाद अहाँ पर बरसय!" शान्त आ आनन्दमय दृष्टि सँ चलि जाइत अछि ओ पथिक, मौन आ आस्ते-आस्ते मात्र सोझे देखैत। लीन राहगीर सब जल्दी-जल्दी गुजरि जाइत छथि कियो एक नजरि नै खिरेलक ओहि जीर्ण पथिक पर। "समय टका अछि: फेकबाक कोनो समय नै अछि!" ओ अपन झोरा गाछक ठूँठ डारि पर टाँगि दैत अछि आ गाछक नीचाँ बैसि जाइत अछि, एकटा अढ़ होइत लाश कऽ देखैत शाइत भगवान जानथि, की ध्यान मग्न। छोट बचिया, कतहु हटबाक कोनो इच्छा नै छैक ओ प्रतीक्षा मे अछि पथिक सँ गप करबाक मौका पाबय ओ हुनका अपन सेवा सेहो अर्पित करय चाहैत अछि। मोट ठोप सँ बरखा शुरू भऽ जाइत छैक श्मशान-घाट सुनसान भऽ जाइत छैक एकटा लाश, देबाक किछु नै अछि साधु जानि-बूझि कऽ उठैत अछि किछु जरैत लकड़ी, ओ ठेंगा खैंचैत अछि तीनटा पाथर पर अपन आगि साधबा लेल। छोट बचिया अपन बुधियार आँखि सँ देखैत रहैत अछि ओ झोराक सामग्री उझिल दैत अछि अपन बासनमे खौलैत पानिमे। ओ चारू कात एकटा डण्टा ताकैत अछि करछु बनाबय लेल तुरत्ते घुमबैत अछि ओहि छटपटाइत मिश्रणमे। "की हम अहाँ सभ संग भोजनमे शामिल भऽ सकै छी?" एकटा मधुर प्रश्न। बिना पाछू देखने ओ मुस्का कऽ कहैत अछि- "अहाँकेँ हमर अनुमति नै चाही ई भोजन अहाँक सेहो ओतबे अछि जतेक हमर।" एकटा छोट बचिया साधुकेँ देखैत अछि हुनकर ध्यान गृहिणीक आश्चर्य भरल मुँह पर सेहो पड़ैत छैक ओ आकर्षक दुबर-पातर आकृतिक पाछू डेग बढ़बैत अछि लोक कत्तौ नै रुकैत अछि आस्ते मुदा स्थिर डेग सँ आगाँ बढ़ैत जाइत अछि। छोट बचिया हुनकर दृष्टि सँ अढ़ नै होमय देबय चाहैत अछि। जखन रस्ता दू भागमे बँटैत छैक, ओ सोचैत अछि- "ओ कोन रस्ता पकड़त?" ओ खाधि-खरहोड़ि बला, टूटल रस्ता चुनैत अछि। साँझ भऽ जाइत छैक: मेघ डेरौन देखा पड़ैत अछि लगैत छैक बरखाक धार आबि रहल अछि। साधु चलैत जाइत अछि जेना हुनका सम्पूर्ण समय भेटल हो। हठी बालिका बिना कोनो चिन्ता ऊपर देखैत अछि दृढ़ अछि ओ आ दृढ़ रहय चाहैत अछि हुनकर आँखिमे एकटा चमक अछि। ओ देखैत अछि चारिटा पुरुषकेँ चिन्तित भौंह लय ऊपर ताकैत: हुनकर कान्ह पर बाँसक पथियामे एकटा लाश अछि शोक मनेनिहार सभक एकटा पैघ समूह पाछू आबि रहल अछि। एकटा शव-वाहन तेजी सँ दौगैत अछि, पाछू गर्दाक मेघ उठबैत बहुत शोक मनेनिहार जोर सँ छींकैत अछि छोटकी पिपनी सेहो नै मारैत अछि। दुबर-पातर बूढ़ लोक चलि कऽ अबैत अछि एकटा अन्हार, प्राचीन नीम लग श्मशान-घाटक धुआँ-भरल छोर पर शोक मनेनिहार, शव-वाहन आ बाँसक पथिया सँ दूर। जोड़ी प्रतीक्षा करैत अछि भोजनक सुखद गरम होयबाक "अहाँ पहिल कौर लिअ," ओ कहैत अछि आ छोटकीकेँ खुआबैत अछि। "हम अहाँक भोजन खैलहुँ, अहाँ सँ हमरा भेट करबाक चाही अहाँकेँ हम एकटा वर देब, अहाँ जे चाहू माँगू," ओ कहैत अछि। "हमरा कथूक आवश्यकता अछि की? अहाँ लग एहन की अछि जे अहाँ हमरा दऽ सकै छी?" अहाँ की देबय चाहै छी?" "हम अहाँ सँ वर मांगबाक लेल कहने छलहुँ, प्रश्न सभक शृङ्खला लेल नै!" ओ ठोढ़ फुला लेलक: आ ओहि सँ काज भेल। "ठीक अछि! हमरा दिअ जे सत्ते अहाँक अछि" ओ मुस्की सँ उत्तर दैत अछि आ मने-मन आनन्दित भऽ जाइत अछि। ओ रुष्ट नै होइत अछि: ओ सुन्दर उत्तर दैत अछि- "हम अहाँकेँ अपन 'स्वयं', अपन नीक-आधा भाग दऽ देलहुँ, किछु नै बचल हमर अपन: आब अहाँ हमर छी!" पथिक ओ बेघर साधु अछि जे हुनका सब किछु अर्पित करैत अछि, ओ हुनकर दोसर आधा अछि। दुनू अविभाज्य अछि: शिव आ हुनकर अपन शक्ति! हमर शिक्षक आर.ए.एस.ए लेल प्रकाश छल! मात्र हुनकर नै! ई हुनकर रहस्योद्घाटन सब अन्तर्दर्शन सब सँ बेसी छल। हुनकर व्याख्या आ उपदेश सब एहि कारण छल, ई मात्र जादू सेहो नै छल ई तेज छल, एकटा बहुरङ्गी मायावी दृश्यावली। हुनकर सम्पूर्ण विद्वत्ता, आकर्षण आ प्रतिबद्धता गाल सब आर्द्र अछि कृतज्ञता भरल नोर सँ, हम स्मरण करैत छी, हुनका श्रद्धाञ्जलि अर्पित करैत छी। हुनकर लैटिन, ग्रीक, फ्रेन्च, स्पेनिश आ संस्कृत हमरा मोहित कऽ लेने छल, अलौकिक क्षेत्रमे विचरण करबैत। एकटा वास्तविक स्वर्ग छल हुनकर सस्वर वाचन सुनब होमर, वर्जिल, बोलतेयर आ वालेरी, सरवान्तेस, मिल्टन, कालिदास आ भवभूतिक। हुनकर छोट सन काया, स्टार्च-लागल सूटमे अपन कुर्सी पर बैसल, व्याख्यान-मञ्चक सोझाँ नै ठाढ़। हुनकर दुनू छाबा एक-दोसर पर राखल, हुनकर टोपी मुस्की जगबैत छल ओ कहियो हास्यास्पद नै छलाह। के हँसि सकैत छैक ऋषिक जटा-जूट पर! बेजोड़ टाईक गिट्ठऽ कहियो दम्भ नै प्रदर्शित करैत छल। ओ हमर आर.ए.एस. छलाह मुदा हम हुनका एकटा आर 'ए' देलहुँ कारण ओ 'रस' छलाह, जीवनक अमृत। हमर पाठ्य -पुस्तक सदा एकटा बहाना मात्र छल, ई सदा परमात्मा धरि लय जयबाक एकटा सोपान छल। (हमर विजयनगरमक प्रोफेसर आर. अप्पलस्वामी लेल) मॉल-बीमारी -बुरबक भीड़ -भाड़ भीतर आ बाहर बतहपना मूर्खताकेँ तीव्र करैत छैक हाथक टका जीवन-सङ्कट बनि जाइत छैक। सड़क सब ट्राफिक-जाम सँ जाम अछि। ट्राफिक लाइट सब भीड़केँ रोकि नै सकैत छैक। लोक सब, भिखारि नै, गाड़ी-मालिक सेहो पीड़ित अछि दुःख-दर्दक समुद्रमे, आनन्द-साधक सभक द्वीप हेलैत अछि। चारू कात बहुत किछु अछि मुदा भूख वास्तविक अछि। सोच-विचार अढ़: स्वार्थ राज करैत छैक, व्यस्त सड़क पर मॉल सब उगि रहल अछि, बुरबक सभ गाड़ी चलाबैत छथि आ फलैत -फूलैत छथि। "कतय जा रहल छी?" एकटा प्रश्न, मुँह खुजल, अचरज -चकित। "मूर्ख! कतय सँ आएल छह?" एकटा खौंझायल उत्तर, टालि देबाक मुद्रा। "हम नै जानैत छी!" एकटा उदास, असहाय आह निकसैत छैक। "हम जानैत छी - शून्य सँ अहाँक बटुआमे किछु नै अइ!" जानि-बूझि कऽ देल गेल प्रहार छल। "पूछू नै जे दुनिया कतेक आगाँ आबि गेल अछि बुझू जे अहाँ कतेक आगाँ आबि गेल छी।" गम्भीर व्यक्ति शान्ति सँ उपदेश दैत अछि। रुग्णता बिना भोरक दिन टूटि जाइत छैक, बिना साँझ-गोधूलि राति खसि पड़ैत छैक। दुनिया सिकुड़ि कऽ चौदह गुणा चौदह भऽ जाइत अछि। खिड़की खुजैत अछि जखन मौसम कृपा करैत छैक, ओहि ठाम स्थिति अछि निद्रा आ जड़ताक बीच। एहि प्रकारेँ रोगी पड़ल रहैत अछि ने तँ कोनो हिनहिनाहट, ने एकटा आह सेहो! भेनाइ हम सोचैत छी आ अनुभव करैत छी तेँ हम छी। विचार स्वतन्त्र अछि मुदा मनुष्य नै। स्वतन्त्र विचार खतरा सँ भरल अछि। बानर जकाँ असंयत मन उड़ि जाइत अछि अजीब स्थान सभमे जतय सूर्य हुलकि सेहो नै सकैत अछि। मुदा देखब विश्वास करबाक योग्य नै अछि सब 'माया' अछि मात्र देखौंस! अनुभूति व्यक्तिगत अछि: विशिष्ट। भावना सँ बेसी अनुभव सँ बेसी वास्तवमे ई एकटा उदात्त रहस्योद्घाटन अछि: एकटा अमूल्य साक्षात्कार! अनुभव क्षणिक अछि साक्षात्कार चिरस्थायी अछि। जे माने राखैत अछि ओ अछि सब लेल तैयार रहब अपना सँ समझौता करब 'ओहि' सँ कहियो विरोध नै करब अपने सँ शान्ति स्थापित करब। हम खूब दृढ़ छी: हम अपने सँ शान्तिमे रहब। गाछ तर एतय मच्छर सब गुनगुनाइत अछि आ दुर्गन्ध राज करैत अछि। सीमेण्ट काँच आ स्टीलक जङ्गलमे खोपड़ी सब छोट-छोट कोनमे अवज्ञा सँ उगल अछि। वनस्पति आ जीव-जन्तु सब विलुप्त भऽ गेल अछि। बिना सोच -विचारक क्रूर कङकरीट-जङ्गलमे भिनभिनाइत कण सन हवाई-जहाज सब नीचाँसँ देखब गाछ नीचाँ ठाढ़ भऽ देखैत रहब एकटा असम्भव विलासिता अछि एकटा महान सपना। एकटा छाहक आश्रय पायब सत्ते स्वर्ग अछि। गिलहरी सभक एतय-ओतय दौड़ब देखब अपन काज पर जे मात्र भगवान जनैत छथि आ चिड़ै सब हुनका देखैत अछि अपरिमित फुरसतिमे। भागैत -दौगैत लुक्खी सब हमरा बहुत किछु सिखबैत अछि शान्ति आ आनन्दमे क्रीड़ा करैत। "हम चाहैत छी जे हम एकटा लुक्खी रहितहुँ" हम आह भरैत छी अपन घोंकचल भौंह सँ घाम पोछैत। "जरूरी नै अछि दादा अहाँ ओहि प्राणीक अनुकरण करू! पूरा दिन आनन्दित भऽ उत्सुक भऽ सेहो! हमरा देखू ऊपर आगाँ आ भीतर देखबाक तरीका सिखाउ आ बताउ गिलहरीक पीठ पर धारीक रहस्य!" हमर नाती -पोती सभ लेल मात्र अहाँक गट्टा पर एकटा नीक घड़ी रहब पर्याप्त नै अछि अहाँकेँ समयक मूल्य सेहो जानबाक चाही। मात्र अहाँक वर्दी बेदाग रहब पर्याप्त नै अछि अहाँकेँ अपन मनक विचार सेहो ऐना सन स्वच्छ राखबाक चाही। मात्र मृदु आ मधुर बाजब पर्याप्त नै अछि अहाँकेँ अपन कर्म सँ मिठास बाँटबाक चाही। मात्र अहाँ लग टका रहब पर्याप्त नै अछि अहाँकेँ ई सुनिश्चित करबाक चाही कि ओकर सदुपयोग हो। मात्र अहाँक टिफिन-डिब्बा भरल रहब पर्याप्त नै अछि अहाँकेँ ई देखबाक चाही कि अहाँ सभ संग कियो भूखल नै अछि। मात्र अहाँक आनन्दित आ प्रसन्न रहब पर्याप्त नै अछि अहाँकेँ अपन कर्म सँ दोसराकेँ सेहो एहन बनेबाक चाही। मात्र अहाँक विनम्र आ सज्जन रहब पर्याप्त नै अछि अहाँकेँ धैर्य राखबाक चाही जखन दोसर एहन नै हो। मात्र अहाँक स्वयं परिश्रमी रहब पर्याप्त नै अछि अहाँकेँ ई देखबाक चाही कि एहि सँ अहङ्कार नै हो। मात्र अहाँक ईश्वर-प्रेमी आ ईश्वर-भीरु रहब पर्याप्त नै अछि अहाँकेँ लगपासक दोसराकेँ सेहो एहन बनेबाक चाही काज कऽ कऽ। माय अपन बसन्तमे ओ किछु काल लेल 'शरद' सेहो देखबैत छथि जाड़ कहियो हुनका लग नै अबैत छैक। हुनका लेल ई सब बसन्त आ खिलब-फुलब अछि। गगनचुम्बी इमारत सब ओ कहियो प्रिय नै मानलनि भव्य रहस्योद्घाटनक मदमत्त ऊँचाइ सब हुनका सदा भेटैत छल। हुनका कहियो भ्रम नै छल हुनकर सब भक्त सन्तान ई सदा जानैत छलाह। हाय की आब सब बच्चा अपरिवर्तनीय रूप सँ हरा गेल अछि? बमबर्खा विमान आ रासायनिक युद्ध लेल हुनका कहियो कोनो प्रयोजन नै छल सांसारिक महत्त्वाकाङ्क्षा सँ ओ कहियो परिचित नै छथि। ओ एहि सँ नीक तपस्या-स्थल गढ़ने छलीह। सहज ऊर्ध्व-गमन लेल हुनकर सोपान छल ऊँच ऊँच आ अरो ऊँच चढ़बा लेल। देहरि-सरिता सब सँ गुजरि जयबाक हुनकर कुहेस शंकाक नै छल वरन् उदात्त छल आसन्न तेज -प्रकाशक लग पहुँचबाक सूचक। अपन सन्तानकेँ उड़बा लेल पाँखि देलनि अधिकांशतः व्यर्थताक व्यर्थता सँ ऊपर उठबा लेल- देखबा-बुझबा आ असीम ज्ञान सँ धन्य होबा लेल। आई.सी.यू. सँ देखब 'मात्र कर्मचारी आ मरीज लेल लिफ्ट' हम डिजाइनर सीढ़ीक चारिम महलापर चढ़ैत छी काँचक भूर सँ हुलकी दैत छी। बन्द अर्ध-चेतन वा कोमामे ऑक्सिजन मास्क लेने कठिन साँस लैत पड़ल अछि ओ प्रतीक्षारत। एम्बुलेन्सक चरम तात्कालिक साइरन-ध्वनि वार्ड-बॉय सभक गारि दौरा लगबैत चिकित्सक सभक दबल आह आ हाथक दस्ताना खैंचबाक सरसराहटि। सूँघैत, कनैत जीवनसाथी द्वारे बिसरा देलनि अल्पकालिक प्रेमिकाक झलफलाइत स्मृति कतेक दिन भेल- उमेर स्मृति कें कुंठित क' दैत अछि कुहेसक मेघ मे अदहा रस्ता धरि प्रेतात्मा सभ मेघ सन घनेरो लहरि कें पार करैत कामुक दृश्य, कुहरब आ आहकें सोझरैत जन्म लेबाक लेल तुरत्ते कोनो उपयुक्त योनीक खोज करैत संभव जे आत्मा अपन यात्राक बीचहि मे अछि जीवन-रक्षक प्रणाली पर अचल देह नबका अस्तित्वहीन आश्रय कें पकड़बाक लेल छटपटाइत अछि। उदासी दयनीय अछि: ई ककरो आध्यात्मिक नै बनबैत अछि आध्यात्मिकताक लेल विवेक आ पवित्रताक आवश्यकता होइत अछि। जवाबी हमला आवेग, सनक, इच्छा-वेग, उत्तेजना, उकसेनाइ, खौंझी स्वभाव बलाकेँ परेशान करैत अछि। ओकरा वशमे राखब सदा सहज नै होइत अछि। एकटा नाम कतार मुदा एकटा युवा आगाँ घुसि गेल जबरदस्ती, सोझे देखैत, ऐंठल जेना सब ओकरे हुअय। कतारमे बैसल लोक सब तिरस्कार सँ दृष्टि खिरेलक। ककरो किछु फरक नै पड़ैत छैक- काउण्टर पर बैसल कर्मचारी सहमति देखबैत अछि। तर्क-वितर्क मात्र आरो विलम्ब करबैत अछि, प्रगति ठप्प भऽ जाइत अछि! धरतीक नून जन-साधारण लेल साधारण नून पानि जकाँ पैक कऽ बेचल जाइत अछि त्वरित टका कमाइ लेल। कारखाना सब उगैत छैक उद्योगपति लूटिपाटि बाँटि लैत छथि। महात्माकेँ फेर सँ आबय पड़त एकटा आरो न्यायपूर्ण भूख हड़ताल लेल। गरीब लोक लेल तामस आत्मघाती अछि। जनता-शासनमे सब जनता पीड़ा साझी नै करैत छथि। सब लोक लग आवश्यक 'तागति' नै अछि। टीवी स्क्रीन पर एकटा दुर्लभ मूल्यवान कार्यक्रम। आशमर्द भरल धुन आ चमचमाइत आन्हर करय बला रोशनी। विज्ञापन अशिष्टता सँ बीच-बीचमे घुसि जाइत छैक, कान-कटु। दाँत पीसब बेकार, केश नोचब व्यर्थ बोन जाउ, सन्यास लऽ लिअ! बाबू, कतय अछि रहबा लेल कोनो गाछ वा गुफा? हिमाच्छादित पर्वत सेहो मुक्त नै अछि। स्वतन्त्रताक दुरुपयोग, एकटा ऐंठल सुघड़ युवती अजीब ढङ्ग सँ पहिरने, बसमे हंगामा मचबैत अछि। एकटा धीठ पाछाँसँ पोन छुबैबला, ओकरासँ उत्पीड़ित। हीरो पाछू सँ बाहर भऽ गेल। एगोटे अपन बटुआ हेरा दैत अछि; ध्वनि-प्रणाली चिचियाइत अछि। तानाशाही हवामे जारी रहैत अछि शील-विनय आवश्यक अछि मुदा अनेरे बाजि उठबाक आवेग सँ लड़ू। सब गीड़ि जाउ जँ अहाँ हुनका हरा नै सकैत छी, तऽ हुनका संग मेल कऽ लिअ। शिकारी पशु 'ट्रिफिड'* सब कल्पना अछि: शिकारी पशु, डायनासोर वास्तविक अछि। विपदा, जखन मानव-निर्मित हो, तऽ दुन्ना क्षत-विक्षत करैत छैक। 'ट्रिफिड' सब स्थिति वा लिङ्ग भेद नै करैत छथि। घातक डायनासोर सब फेर सँ आबि गेल अछि मानवक वेशभूषा धारण कऽ। विकास रहस्यमय अछि, कहियो पूर्ण तर्क -सङ्गत नै। सभ्यता भक्षक प्राणी सभकेँ आरो भयंकर बना देलक। मनुखताइ सब समान अविनाशी रहैत छैक। सामूहिक विलोपक खतरा फेर सँ मँडरा रहल अछि ई तेलक लेल भ' सकैत अछि, लोभक लेल, वा शासन करबाक शक्तिक लेल राज्य सभ साम्राज्य आ अपन एकाधिकार बला दुनियाक आकांक्षा रखैत अछि मूर्ख लालूसॉर्स (Laloosaurs), चारा-चबबइ बला सनकी, आ खलनायक सँ सेहो बढ़ि क' हिंसक पशु" राज्यकें समूचा निगलबाक लेल मोटाइल आ लोलुप मनुष्यक बीच सब सँ अधम लोक सत्ता अपन हाथ मे ल' लेने छथि यथार्थ मे ओ सभ टायरानोसॉरस छथि, बारोनिक्स सन चांगुर आ दाँत कऽ संग आरी सन दाँत आ हाथी सन चाम लय कऽ। चीरब -फाड़ब, पीसबय, आनन्द सँ सब किछु गीड़ि जयबा लेल वस्त्र-परिधानमे आ अबाजमे, जकरा पर देवता सब सेहो विश्वास कऽ लेताह। ओहन वस्त्र आ आवाज मे जेकरा पर 'दिगम्बर' (आकाश-रूपी वस्त्रधारी) सेहो विश्वास क' लेथि सिटाकोसॉरस, अपाटोसॉरस आ साल्टोसॉरस- भिन्न-भिन्न प्रकारक डायनासोरक बोलबाला अछि बड्ड डेरौन, अपन चिक्कन-चुनमुन आ मधुर गप्प सँ शासन करबाक बदला ओ सभ चलबाक, थकुचबाक, चबायब आ हर्षक संग गीड़ि लेबा मे लागल छथि" मुक्तिक दिन आब दूर, बहुत दूर जा रहल अछि हाइड्रा (बहुमुखी राक्षस) कऽ सभ मूड़ि एक संगे नै काटल जा सकैत अछि एकटा मुड़ि काटला पर ओतय कतेको नब मुड़ि निकलि आबैत अछि *जॉन विन्धमक उपन्यास 'द डे ऑफ द ट्रिफिड्स' मे ट्रिफिड्स चलैत-फिरैत मांसाहारी गाछ छथि, जाहि पर बाद मे १९६३ मे स्टीव सकेली द्वारा एकटा फिल्म बनाओल गेल छल। पड़ाव कऽ बाद जीह नीचाँ लटकल अछि आ आगिक लपटि धीरे-धीरे ऊपर उठय लागल अछि। आँखि सँ खसैत अविरल नोर कान्ह पर लदल बोझ (अर्थी) शोककुल लोक आब घर दिस घुरि रहल छथि। द्रव्यहीन सूक्ष्म कण हृदयक गुहा मे अंगुष्ठ आकारक आकाश (दहराकाश)* अपन सहजता सँ ओतय विचरण क' रहल अछि। अंग विलीन भ' गेल, इन्द्रिय सभ नष्ट भ' गेल मुदा एकटा चेतना एखनो सटल अछि, ओना ओ झलफल आ अवास्तविक अछि। संभोग करैत कुकुर, चारू कातक मैल आब ओकरा विचलित नै करैत अछि सेवाक मंत्र, समानता आ विकासक ढोंग मोट पेट बला धनपति सभ जे विनाश लीला रचैत छथि कुर्सी, सिंहासन आ सत्ताक ओइ लेल जे किचकिच होइत अछि ओ आब ओकरा घृणित नै लगैत अछि आब ओहि अस्तित्वहीन रीढ़क हड्डी सिहरैत नै अछि। ओ सूक्ष्म कण (आत्मा) पश्चाताप मे एकटा स्त्रीक ऊपर मँड़राइत अछि ओहि युवकक चारू कात घुरैत अछि जे नीक पद (मलाई) क' ताक मे अछि आ अपन सहोदरकें लूटि क' बड़का हिस्सा हड़पबाक फेर मे अछि। संध्या आरती आ घण्टीक आवाज ओहि द्रव्यहीन कण कें आकर्षित करैत अछि, जे ऊपरक उड़ान शुरू करैत अछि। आखिरीमे ओ सूक्ष्म कण मनुष्यक' एकटा हिस्सा त' छलैहे। चाँदक लेल आग्रह हम चाँदक लेल आग्रह नै करैत छी किऐक त' के जानय, कखन पहाड़ घुसकि जाय आ ओ (चाँद) नीचाँ उतरि आबय! मुदा हम अपन विश्वास कहियो नै त्यागब: ई (विश्वास) जीवित रखैत अछि, प्राण फूँकैत अछि आ संस्कारित करैत अछि। हम एकटा 'पाइ-विहीन' दुनियाक लेल प्रार्थना करब जतय संपत्तिक लेल कहियो दावा नै कएल जाय आ सब ठाम प्रचुरता (संपन्नता) हो। जतय पुरुष काज करय आ स्त्री प्रेम, आ बच्चा सभ लग खेलेबाक लेल पर्याप्त समय हो। जतय वस्त्र पहिरब वर्जित (Taboo) हो आ मशीन सभ सँ घृणा कएल जाय। जतय कानून कहियो नै बनाओल जाय मुदा तइयो ओकर पालन कएल जाय। जतय प्रत्येक पुरुष एकटा देवदूत हो आ प्रत्येक स्त्री एकटा दिव्य अप्सरा (Cherub)। जतय रंग मात्र विविधता दर्शाबय आ कहियो भेदभावक स्तर नै खसय। जतय सहायता कहियो माँगबाक आवश्यकता नै पड़य आ ई सहज प्रवृत्ति सँ देल जाय। जतय लोक कहियो अभाव कें नै जानि सकय आ सभ ईश्वरीय आभाक प्रकाश मे आनन्दित रहथि। जर्जर स्मृति सभ अहाँक आँखि छल-कपट आ चंचलता सँ भरल अछि अहाँ हमर आर-पार देखैत कहैत छलहुँ, आ तृप्ति सँ हमर हृदय (अंगा) क बटन सभ कें ऐंठैत छलहुँ। धन्य अछि ओ अंगाक आगू बला भाग: ओ अनमोल संपत्ति जेकरा हम समय-समय पर निकालैत छी आ मनहि मन ओहि ताजा, सिहरा दै बला युवा स्मृति सभ कें सुँघैत छी। एकटा पुरुष कहियो ओहि गहराई कें कोना नापि सकैत अछि? क्रिया (सम्भोग) आ हृदयक बीचक दूरी कतेको समुद्री मील क' होइत अछि। लम्पटक चुट्टे कटबाक इच्छा सँ बेसी सहले जाइत अछि। प्रेम मात्र देब जानैत अछि: एकटा पवित्र फूल जे पूर्ण समर्पण मे अर्पित कएल गेल हो। की हमरा पर शैतान सवार नै भ' गेल छल: "अहाँ बच्चा जनमाबय लेल आयल छी, नै?" पश्चाताप मे छटपटाइत हम अपन मुक्ति लेल ओहि दग्ध करय बला स्मृति सभ कें फेर सँ ताजा करैत छी। तीन बेर धिक्कार तीन बेर धिक्कार राक्षसी -लोकतन्त्र (डीमनोक्रेसी) लेल। एकटा सत्ताधारी सभक शानदार वादा सब लेल एकटा धिक्कार संपन्न लोकक धन-कुबेर बनबाक ओहि छल-कपट लेल, आ एकटा गरीबी -रेखा सँ नीचाँ पीड़ित सब लेल! क्षणिक कियो ओकरा देखबैत छथि हम चारू कात ताकैत छी याद राखबा लेल किछु लिखबाक लेल नै! कनीक आगाँ देखैत छी एकटा युवककेँ अपन प्रेमिका संग चलैत -चलैत कचरा फेकैत । हम ठाढ़ भऽ कऽ ओकरा उठा लैत छी। खाली सिगरेट-कार्टन फाटल काजमे आबि जाइत छैक। कियो ओकरा देखबैत छथि कियो ओकरा ताना मारैत छथि। कियो सङ्कोच सँ अदहा-अपूर्ण प्रदर्शित करैत छथि। कियो तङ्ग असुविधा सहि कऽ अपनाकेँ दण्डित करैत छथि। कियो अपन अप्रमुखता पर पछताइ छथि भेधबा मे आ सहारा देबा मे असमर्थता कतेको (याद वा विचार) हमरा हर्षित करैत अछि ओकरा कोमल आवरण मे राखू, ओकर दिव्य उपयोग करू ईश्वर-प्रदत्त जीवनक रस पिउ आ ओकरा बस रहय दियौक। भोरक शीतल सैर संवेदनशीलता कें बढ़ा दैत अछि चीज सभक प्रकृतिकें नब सिरा सँ देखबा मे मदद करैत अछि। भोथर ओ कटुता छल वा ओ गहन पीड़ा? कइएक बरख पहिने ओ निअम-मर्यादा तोड़लक शिष्टाचार भङ्ग कएलक जखन ओ एकटा उद्देश्य सँ हमरा ओतय आयल छल। स्वागतक कप स्वीकार नै कएलक जखन आखिरमे विदा होयबा लेल उठल माथ पर सिन्दूर-बिन्दु स्वीकार नै कएलक। हमर अर्द्धांगिनी मुरझाय गेलीह के बुझायत। फुलल गर्वित स्वयंकेँ प्रगतिशील मानैत छलीह सत्ते एकटा क्रान्तिकारी! एकटा सम्पूर्ण संस्कृति लेल तीव्र घृणा प्रकट कएलक। विविध पितर -पुरखा जिनका आशीर्वाद भेटैत छनि अस्वीकार कऽ देल गेल कालीन नीचाँ दबा देल गेल। छद्म फैशन! ई समझ समझौताक असफलता छल। आब कइएक बर्ख बाद पाछू देखैत बुझाइत अछि समय सब किछु नै मेटबैत छैक। तीक्ष्ण भेल आ दुर्गन्ध भले कम भेल मुदा अम्मत अछिये। हुनकर हठ असहाय हताशा अछि एतय सेहो नै ओतय सेहो नै होयबाक कारण। ने तऽ पूर्व दिशा जतय ओ जनमलीह ने पश्चिम दिशा जाहि सँ ओ लोभाय गेलीह। ओ अपनासँ बाहर छथि (अजाति)। सिद्धान्त आ नारीवादक बीच पड़ैत छैक छाह कारण हुनकर राज्य अछि। समय उपचार नै करैत: ई मात्र कुण्ठित करैत छैक। सब व्यर्थ नै अछि: पीड़ा वास्तविक अछि। आनन्दित कल्पना अन्तर्दर्शन केँ लऽ जाइत अछि: सोच -विचार लेखनीबद्ध करबा लेल लऽ जाइत अछि। स्त्री-पुरुष वयस्क-किशोर उझील देबाक इच्छा राखैत छथि आनन्द-वेदना क्लेश-विजय। के बतौत विचार-भाव सन -रहस्य? सब सरस्वती देवी पवित्र कला -देवी सँ प्रार्थना कएलनि। 'सब' मे तरह -तरहक मनुष्य शामिल नै छथि 'सब' मे मात्र विश्वासी शामिल नै छथि गम्भीर इच्छुक आ आकाङ्क्षी सब सेहो शामिल छथि। के कहलक भगवान् मात्र विश्वासीकेँ आशीर्वाद दैत छथि अविश्वासी सेहो भगवानक प्रिय छथि! देवता आ शक्ति सब एक स्वरमे कहलनि: "वेबसाइट सब हो!" एतय हम छी। अहाँ ओ ओ आ बिल्कुल "हम" वेब एकटा उपहार अछि सब लेल! जल्दी करू कृपया जल्दी करू समय भेल जखन अन्तःकरण अहाँक अपना पर घृणा बोकरैत अछि जखन पाछू देखब पीड़ादायक भऽ जाइत अछि जखन ई बोध होइत अछि कि घड़ी पाछू नै घुमाएल जा सकैत अछि जखन कोनो क्षतिपूर्ति सम्भव नै अछि जखन अहाँ मरय चाहैत छी आ मरि नै सकैत छी। जखन अहाँ जीबऽ नै चाहैत छी मुदा टिकल रहब अनिवार्य अछि जखन अहाँ असगरे चलैत छी अन्हर-बिहाड़ि बला अन्हार आ दुर्गन्धित एकपेरिया पर। बुझू कि अतीतकेँ झाड़ि -पोछि नै देल जा सकैत अछि। निराशा सहायक नै अछि। समय अछि एकटा अन्तिम चक्कर लगायबा लेल। अहाँ इच्छाशक्ति सम्पन्न छी इच्छा करू फूल-बिछल पथक आनन्दित शान्त स्थिर कोमल आश्वस्त आ ईश्वरोन्मुख। आस्ते-आस्ते खेबाह नाओक वा चक्का पर कोनो व्यक्तिक अपन इच्छा नै भऽ सकैत छैक। दिशा-सूचक यन्त्र नक्शा वा एकपेरिया विकल्प दैत अछि मुदा ओ लक्ष्य निर्धारित नै कऽ सकैत अछि। मात्र गन्तव्य नै अलग-अलग होइत छैक लक्ष्य सेहो विविध भऽ सकैत छैक। आकाङ्क्षा सब प्रायः उपलब्धि सँ दूरे रहैत छैक। नेता सब अपन उत्साह सँ प्रेरित होइत छथि बहुत अन्तमे माटिक पएर बला (दुर्बल) साबित होइत छथि। हुनकर 'उपलब्धि' सब जनता-प्रचार लेल अछि: हुनकर गुप्त आकाङ्क्षा शक्ति वा धन-संचालित होइत छैक। मात्र ओ व्यक्ति जे धार्मिक उद्देश्य सँ प्रेरित अछि अपन सब किछु समर्पित कऽ दैत अछि एकटा पैगम्बर एकटा तारणहार वा एकटा उद्धारक भऽ सकैत अछि। हम ऊपर ताकैत छी एकटा प्राप्ति लेल अखन एतय लज्जापूर्वक! हम जे विश्वास करैत छी की मरि जायब हत्या होयबा सँ नीक अछि? हत्या कऽ देल जायब फाँसी देल जयबा सँ नीक अछि? की शहीद होयब बम-विस्फोटमे मरबा सँ नीक अछि? शापित होयब आ आधा-जरल रहबा सँ। की कहियो कियो बुझने अछि जे अन्त कोना अबैत छैक! अहाँ ओकरा चुनय बला नै छी: ई कोनो चयनक विषय सेहो नै अछि। व्यवस्था या तऽ ऊपर सँ या नीचाँ सँ होइत छैक: कियो कहियो नै जानैत छैक। ई या तऽ लगपास भीतर वा बाहर होइत छैक। लीला साधनक नै अछि ई तऽ संचालकक अछि सदिखन विश्वास नै कएल जाय से बस एतबे सँ भऽ जाइत छैक। की अहाँ संचालककेँ जानैत छी? हम नै जानैत छी। राजसी "क्रिया खतरनाक अछि।" एकटा आँकड़ फेकू शान्त पोखरिमे लहर सब रोकबाक प्रयत्न करू! सरल कठिन अछि कठिन सरल अछि। एतबे बस अहाँकेँ बुझबाक अछि। आराम सँ बैसू आराम करू किछु नै करू। गाछक छाहमे बैसू आकाशमे तरेगण सब देखू। मुदा नै किछु नै करू एकदम्मे नै। जीवन राजसी ढङ्ग सँ जीउ। मुदा की कियो क्रिया सँ दूर रहि सकैत छैक? करबा सँ दूर निष्पादन सँ दूर सेवा सँ दूर उपदेश सँ दूर: षड्यन्त्र रचबा सँ दूर साजिश रचबा सँ दूर गिट्ठऽ सँ दूर: लालसा सँ दूर दीनता सँ दूर चाटुकारिता सँ दूर? हम बुझै छी अहाँ सभ दिन ध्यान करबाक कोशिश करैत छी पूजा अर्पित करैत छी सहज देवी-देवताक स्तुति-गान करैत छी। भगवान् भोला नै छथि। मुदा की अहाँ किछु नै करैत रहि सकैत छी? बहिरा बौका आन्हर अर्ध-विक्षिप्त जकाँ एकटा फुलगोबी जकाँ फर्नीचरक एकटा खण्ड जकाँ? सरल कठिन अछि। की अहाँ नङ्गटे घूमि सकैत छी सन्तुष्ट सन्यासी अवधूत जकाँ? कठिन सहज सेहो अछि साधक वास्तविक साधक लेल। की नेता सब कहियो 'नीक' करब, ई सोचता? "केकरा लेल भलाई?" ओ जवाब नै दैत छथि! भगवान्। जतय शब्द विफल 'अमोर विन्सिट ओम्निया' [लैटिन- प्रेम सब किछु जीतैत अछि] प्रेम सब पर विजय पाबैत छैक! आगाँ बढ़ि चुम्बन बला खेल सभमे भाग लेब घोसिआयल पएर सब आ सभक तादात्म्य सँ आगाँ पुष्पित एकतामे विलीन दूर आ आर दूर स्वर्गोन्मुख दिव्य। सावित्रीक विजय अछि विनम्रतामे कोनो छोटमोटसँ नै स्वयं धर्मराज पर। अनसूया खूबे गुरु-पत्नी योग्य छथि। की ओ हमर त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) केँ कोमल शिशुमे रूपान्तरित नै कऽ देलनि? की ई मात्र पति-प्रेम छल मात्र विश्वास निष्ठा आ पवित्र धर्म-निअमक पालन? जतेक अहाँ प्राचीन आदर्श पर सोचैत छी हमरा एहि धरती पर रहय बला लोक लेल एकटा आकाङ्क्षा ई परिभाषित कएल जा सकय सँ लाख गुणा बेशी अछि। वा ई मात्र गुदगुदबैत अनुभूति अछि एकटा कामुक नोचनी तात्कालिकता पर बल दऽ कऽ चरमोत्कर्षमे ढील दऽ छोटमे बहुत पैघ बना देल जाइत छैक। बिछौनमे एकटा क्रीड़ा एकटा क्षणमे बुझि जाय बला पर्दा पर किछु जकाँ कारी अन्हारमे विलीन? वा ई आत्म-समर्पण भरल भक्ति अछि पूर्णतः दिव्य? ई ओही ठाम अछि जतय शब्द विफल भऽ जाइत छैक। ओ कहियो नै मरैत छैक गाछ चिन्हल जाइत छैक फल सँ आशाजनक जड़ि सँ कहियो-कहियो पात सँ। उद्दाम कठोर हवा कसाई सन नोचि दैत छैक चाकर नाम हरियर आ शुभ पातकेँ। शीघ्र दोसर मौन भऽ कलिका रूपमे फूटैत छैक हरियरी लय कऽ आँखि लेल पर्व जकाँ केराक पात। आश्वस्त सान्त्वना दऽ विश्वास दियबैत आस्ते-आस्ते बाहर अबैत छैक एकटा सब दिनुका हरियरी आनन्द। आशा कहियो नै मरैत छैक। किछु कारगिल ई दिल्लीक जाड़-भरल कुहेस-युक्त भोर अछि। पएरे चलनिहार सब बिछौनमे छथि। एकटा अनेरुआ कुकुर घूमैत अछि शाइत गरम रहबा लेल। बस्ती सब लेपटल अछि मोट सीरक कम्बल आ तरह-तरहक स्वेटरक नीचाँ। चाकर खाली फाटक सब हमरा लेल खतराक घण्टा बजबैत अछि: खुजल ओ डेरौन अछि; बन्द आरो बेसी डेरौन। नै जानल जाइत कि भीतर की भऽ सकैत अछि। असगरे पहरेदार एकटा कुकुरकेँ कोरामे लेने अछि। असगर रहनाइ एकटा नरक अछि: कारगिल मनमे सेहो भऽ सकैत अछि! बिछौनक कात मे एकटा इशारा सँ हमरा भीतर आबय देल गेल ठोढ़ पर आङ्गुर राखि कऽ। हम चांगुरपर चलि कऽ मद्धिम इजोतमे बिछौन लग पहुँचलहुँ देहरि पर श्वेत -टोपी पाछू हटि गेल। भगवानक कृपा ओ एकटा आगन्तुककेँ अनुभव कऽ सकल। हम देखलहुँ हाथ हँसोथैत 'पेन्डेण्ट-स्विच' लेल: कोठली इजोत सँ भरि गेल हमरा आँखि पर हाथ राखय पड़ल। दुर्बलत ओ पलटल आ स्विचबोर्ड हमर आँखिमे पड़ल। ओ बेल (घण्टी) दबाबय कऽ प्रयत्न कऽ रहल छल हम झुकि कऽ सहायता कएलहुँ। चादरि सँ बाहर एकटा दुब्बर टाँग निकसल छल पेट ऊँच छल। हम देखि सकलौं पएर फूलल छल फाटि पड़त तेना। हम अपनाकेँ बिसरि गेलहुँ। "राम! ए राम! अहाँ!" ओ आँखिमे चमक लय कऽ पुछलक। की ई पहिचानक चमक छल? हम उदास मन सँ अचरज करैत छलहुँ। "हँ हम!" हम एहि सँ बेसी नै कहि सकलौं। हमर हाथ अपन हाथमे लय ओ हमरा बैसबाक इशारा कएलक: हम बिछौना पर बैसि गेलहुँ चारू कात देखैत। "अहाँ अयलहुँ हम बुझैत छलहुँ" हुनकर स्वर थरथरा रहल छल। हम जग सँ कनी पानि देबऽ चाहलहुँ मुदा ओ हाथ हिला देलक। "हम नै बिसरि सकैत छी हम कहियो नै बुझलहुँ जे अहाँ ओतय आयब बहुत लोक बाहर अपन-अपन गाड़ी लग किछु गरम घाममे सेक्रेटरी सदा अहाँक अत्यन्त सम्मान करैत छल। हम चाहैत छलहुँ ओकरा तुरत्ते भुगतान करा देबय आ" "आब ओकरा लय कऽ किएक चिन्ता? शान्त रहू।" "नै ओ किछु मिनट हमरा सब किछु सँ वञ्चित कऽ देलक हमर कनियाँ अगिला दिन मरि गेलीह। भगवान् दयालु रहथि!" "ओह! राम राम राम! क्षमा करू" स्वर मद्धिम भऽ गेल। आँखि सब छत पर टिकल रहल। हम जोर सँ पुकारलहुँ आ नर्स दौगि कऽ अयलीह। "हुनकर बच्चा सब कतय छथि? ओ चलि गेलाह!" आस्ते-आस्ते उदासी पसरि गेल। व्यथित "पूरा तरहेँ अछि ई भूमि बढ़ैत बुराईक शिकार" जतय सूरुज दुपहरियामे तरेगण देखबैत छथि आकाश लुभाबैत अछि। माय सब निराश्रित छोड़ल गेलीह जखन कि गाम-टोल दुर्बल-दुखी भऽ रहल अछि। बूढ़ पितर-पुरखा हाँफैत छथि आ बुझि जाइत छथि देखि कऽ जे धरती माय सुखायल आ फाटल अछि। पियासल धरती माय ऊपर देखैत छथि। मातल शक्तिशाली गाम बला सब नशा-भरल डकार लैत छथि। हृदय-विदीर्ण धरती भुरभुर भऽ जाइत छैक आ फाटि जाइत छैक। एकटा सत्य राष्ट्र अपन माटिक प्रति प्रेम राखैत छैक। मुदा युवा आब आकाश दिश देखैत अछि; मायक कण्ठ सुखायल ओ कछमछा रहल अछि। समय रहै जखन एकटा लोक एक मुट्ठी माटि संग राखैत छल जँ दूर परदेसमे रहब अनिवार्य होइत। की आकाश टिकि सकैत छैक जखन माय धरती परती पड़ल घोकचि जाइत छैक? नग्न-चित्र लिखब लड़की सब नग्न-चित्र नै लिखैत छथि सिखा देल जाइत छैक जल्दी हुनका युवावस्था सँ पहिनहिये। किशोर छौड़ा सब अलग अछि हुनका आसानी सँ नै सिखाओल जा सकैत अछि। ई एकटा वयस्क पुरुषक शौख अछि एकान्तमे अभ्यास कएल जाइत अछि। जिज्ञासा अपराध नै अछि कल्पनाकेँ रोकल नै जा सकैत अछि। वयस्क आँखिकेँ बुझबाक चाही। कोसिस नै करू ताजा मोंछकेँ अनचोक्के चकित करबाक ओ लाज सँ मरि जाएत। बढ़ैत संगीकेँ बुझू जँ अहाँ अपने उत्तेजित नै छी। सपना देखैत छी नै? सपना सत्य होइत अछि। जँ ओ सत्य नै होइत के सपना देखत! सपना सब अछि आ सपना सब निष्क्रिय प्रत्याशित कामुक वा सम्पूर्ण रूप सँ भयावह। किछु अनुचित भोजन सँ उत्पन्न किछु दोसरक अनुचितताक कारण। हमरा जुनि कहू कि अहाँ मात्र सपना देखैत छी अहाँ चमत्कारमे विश्वास नै करैत छी। जँ अहाँक एकटा सपना अछि अपन हाथ चढ़ाउ सपना आ योग्यता संगे -संग चलब हेबाक चाही। सपना हमर लेल स्वागत योग्य अछि! मूल तेलुगु सँ अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी पोपुरी जयलक्ष्मी २०१० मे उस्मानिया विश्वविद्यालयक निजाम कॉलेज सँ सेवानिवृत्त भेलीह। ओ अंग्रेजी विभागक प्रमुख सेहो रहलीह। हुनकर विशेषज्ञता क्षेत्र अंग्रेजीमे भारतीय कविता आ अनुवाद अछि। ओ शीला सुभद्रा देवी, एन. गोपी आ सलीमक रचना सभक अनुवाद कएने छनि। मूल तेलुगु: एन. गोपी (एन. गोपीक मूल तेलुगु क अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर) डॉ. एन. गोपीक जन्म १९५० मे आन्ध्र प्रदेशक नालगोण्डा जिलामे भेल। ओ उस्मानिया विश्वविद्यालयमे तेलुगुक प्रोफेसर रहलाह आ सेवानिवृत्तिक समयमे उस्मानिया विश्वविद्यालयक कला एवं मानविकी संकायका डीन सेहो रहलाह। ओ हैदराबादक पोट्टी श्रीरामुलु तेलुगु विश्वविद्यालयक कुलपति सेहो रहि चुकल छथि। एक प्रतिष्ठित तेलुगु कवि, डॉ. गोपीक प्रकाशित कृति सभमे शामिल अछि: तंगेडुपूलु (१९७६), मिलुरायी (१९८२), चित्रदीपालु (१९८९), वान्थेना (१९९३), कालान्नि निद्रापोनिव्वनु (१९९८), चुट्टाकुडुरु (२०००), एन्दापोडा (२००२), मारो आकाशम (२००४), अक्षराल्लो दग्धमाई (२००५), जलगीतम (२००२), एकटा नाम कविता, नानीलु (२००२), आलोचना: वेमना (१९८०), वामन्ना वादम (१९७९), व्यास नवमी (१९८७), वेमना पद्यालु -परिस प्रति (१९९०), गवाक्षम (१९९५), सालोचना -पीठिकालु (१९८९)। यात्रा वृत्तान्त: ४ आ अनुवाद। ओ २००० मे अपन कविता संग्रह 'कालान्नि निद्रापोनिव्वनु' लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ सम्मानित भेलाह। ओ हैदराबादमे रहैत छथि। ओ अखनो अखबार नै पढ़ने अछि अखबार कुर्सी पर पड़ल अछि एकटा कुकुरक बच्चा जकाँ घोंकचल। जखन कोठलीक परदा सब लहराइत अछि शब्द सब तखने घबड़ा कऽ उठि गेल। शब्द चाहैत अछि जे ओकरा ओ पढ़थि। जँ ओ पढ़ितथि तखन धरि ओ बारहम पन्ना पर पहुँचि गेल रहितथि; पछिला पन्ना सब सँ सटल मैल खेल पृष्ठ पर साफ भऽ गेल रहितय ओना हालमे खेल पर किछु कारिख लागल अछि। तैयो ठीक अछि। तैयो कोठली सँ कोनो अबाज नै अबैत छैक। आलमारीमे किताब सब पहिने जकाँ कहियो नै अधीरता सँ हिलैत अछि। द्विभाषी शब्दकोशमे शब्दार्थ सरसराइत अछि। हुनकर स्वयं लिखल किताबक पन्ना सब हुनकर आङ्गुरक किरदानीक अबाज निकालैत अछि। पङ्खा चलबाक लेल तैयार अछि। खिड़की सँ सूर्यक किरण सब हुनकर माथ सजाबय लेल प्रतीक्षा मे। धोल गमछाक हुनकर कान्ह पर पड़बाक इच्छा। सब जीतल ट्रॉफी सब गहना जकाँ सादा नै जानि जे के पहिरत। चित्रमे सेहो बधाई दैत राष्ट्रपति कोठलीमे हुलकि रहल छथि। नै जानि किएक केबाड़ पर सजल पातक तोरण सेहो लयमे हिलैत आशीर्वाद मांगि रहल अछि। कोठलीक भीतरक चिड़ै पाँखि फड़फड़बैत उड़ि गेल। बाहरक दुनियामे परिवर्तन कनीयो मनोयो ध्यान देबा योग्य नै अछि। कुर्सी पर अखबार उद्वेलित अछि। काल्हि आर एकटा आबि कऽ एकर बगलमे बैसि जाएत। ओ सेहो नै पढ़ि पाओत ओना हुनकर खबरि एकर पृष्ठ सभ पर अछि! (मित्र, एकटा प्रमुख तेलुगु-हिन्दी भाषा विशेषज्ञ आ अनुवादक, डॉ. पोली विजयराघव रेड्डीक मृत्यु पर ८ फरवरी, २०११ क लिखल शोकगीत) बिक्री / 'अम्माकम' गलीमे हॉर्नक अबाज शान्त पड़ि जाइत छैक। ठोढ़ सँ बहैत बौसुलीक सङ्गीत सुनाई पड़ैत अछि अमृत बरसाबैत। 'एक टकामे बौसुली' हुनकर पुकारमे शब्द छल। ओ फाटल कपड़ामे एकटा छोटका कृष्ण जकाँ देखा पड़ैत छल। ई वृन्दावन नै अछि कोनो गोपी सेहो नै वस्त्र चोरी करबाक अवसरो नै। तैयो ओ जइ रस्ता सब पर चलल ओहिमे मौधक नदी बहल। हमर बच्चाक चीत्कार एकटा बौसुली किनबा लेल। 'अहाँ एकटा अठन्नी देब?' हम पुछलहुँ। 'अहाँ ओकरा जारनि लेल लय जायब?' ओ पलटि कऽ पुछलक। जे हो हमर बच्चा जीति गेल। ओकर मुँह पर इन्द्रधनुष चमकि उठल ओकर हाथ बौसुली पर नाचि उठल ओकर ठोढ़ उत्सुक भऽ ओहि पर सटल। हम जतेको साँस भरलहुँ हमर गीत ओहि बच्चा जकाँ नै निकलल। हम तखन बुझलहुँ ओ जे बेचि रहल छल से बौसुली नै छल वरन् एकटा गीत छल। फेर सँ हमर गाम / 'मरोसारि मा वूरु' की कोनो माय थाकि सकैत अछि! हमर गाम तेहने अछि। हम जतेक बेर ओकरा देखय जाइत छी ओ हमर आतुर बाँहि सँ स्वागत करैत अछि। जेना किताबक सभ पन्ना पलटैत छी गली सब दोहराबैत अछि बीतल दिनक कहानी। जखन हमर धरती बाजैत अछि स्मृतिक फूल सँ सुगन्ध बहैत अछि। हमर पोखरि सभक पानि कोन रिक्त स्थानमे बहि गेल! जेना धड़कैत हृदय धड़कैत पसली सभक पाछू सँ अभरि अबैत अछि। जँ आब खोदल जाय की हम ओ 'बथुकम्मा'* सब वापस पाबि सकैत छी? जखन हमर माय माथ पर 'बथुकम्मा' रखने रेशमी साड़ीमे जाइत छलीह ओ स्वयं मुत्यालम्मा माता लगैत छलीह। जखन हुनकर साड़ीक आँचर हाथमे छल हमरा लागल जेना सम्पूर्ण संसार जीति लेलहुँ। ई पहाड़ी हमर सम्पूर्ण गामक पृष्ठभूमि अछि। किंशाइत अपन भीतर नुका लेने अछि हमर गाओल सब गीत डगमगाइत साँझक उद्विग्नतामे। की ओ सब वापस कऽ देत जँ मांगल जाय? वएह गाछ अखनो अछि। की झूला अदृश्य डोरी सँ अखनो झूलैत अछि? एहि रस्ताक खाधि सब अखनो किएक नै भरल गेल जे तखन बनल छल जखन हमर बाबू बोझ माथ पर उघैत छलाह? की हम अपन नोर सँ ओकरा भरि देब? हमर गाम एकटा अन्तहीन गाथा अछि जतेको पढ़ू कम। हेमनिमे हमर गाम हमरा देखि कऽ डराइत अछि। हम एकटा वैश्विक निवासी छी हए नै? हमरा लग आब कोनो श्रोता नै अछि जे हमर गामक कथा सुनत। किंशाइत हमर नाती-पोता काल्हि सुनत। *'बथुकम्मा' (Bathukamma) मुख्य रूप सँ तेलुगु भाषाक शब्द अछि आ ई तेलंगाना (आ आंध्र प्रदेशक किछु भाग) क सबसँ महत्वपूर्ण लोक-उत्सव अछि। जेना मिथिलामे 'सामा-चकेवा' वा 'मधुश्रावणी' महिला सभक लेल विशेष अछि, तेहिना तेलंगानामे 'बथुकम्मा' ओहि क्षेत्रक सांस्कृतिक पहिचान अछि। एहिमे फूलक सुंदर पिरामिड बना कऽ पूजा कयल जाइत अछि। प्रश्न ई अछि कि जँ एतेक गहींर दबल स्मृति सभ केँ 'खनि कऽ' बाहर आनल जाय, तँ की ओहि पुरान ओज आ सुंदरता केँ फेर सँ जीवित कयल जा सकैत अछि? शाब्दिक अर्थ: "हे माता, जीवित भऽ जाउ" आकाशक नाम पर / 'आकाशन साक्षिगा' मलाह सब ककरो सँ भीख नै मांगैत छथि अपन भोजन लेल। समुद्री घोड़ा पर सवार भऽ कऽ ओ सब निकलि पड़ैत छथि शिकार पर। घुमैत पानिक बीच जखन मृत्यु हुनका घेर लैत अछि ओ आश्चर्य करैत छथि मुदा व्याकुल नै होइत छथि। हवाक रुखि पकड़बाक प्रयास आकाशक छाह खोजबाक चिन्ता किनार दिस खैंचबा लेल पतवारक वीरतापूर्ण आक्रमण एहि सबक कारण अछि भोजन। मुदा तट पर दलाल सब टका सँ भरल थैला लय कऽ तैयार अछि। चाहे मानव लाश बहैत आबय जीवित माछ मूल्यवान अछि। सम्बन्धी सभक नोर सँ भरल आँखि सँ समुद्र फेर सँ फूलि गेल उच्च ज्वारमे। मूल तेलुगु: अरुणा एन. (मूल तेलुगु अरुणा एन. केर अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर) एन. अरुणाक जन्म १९४९ मे निजामाबाद लग एकटा गाममे भेल। ओना ओ तेलुगु कविताक साहित्यिक जगतमे देरी सँ प्रवेश कएलनि, मुदा ओ कम समयमे पाँच टा संकलन प्रकाशित कऽ कऽ तेज गति सँ पाठक सभकेँ प्रभावित कएलनि। ओ गर्व सँ दावा करैत छथि जे ओ शहरी जीवनक प्रभावमे कहियो नै अयलीह; आ ग्रामीण जीवनक अनुभव हुनकर निरन्तर प्रेरणाक स्रोत अछि। ओ प्रसिद्ध तेलुगु कवि डॉ. एन. गोपीक कनियाँ छथि। ई सेहो प्रवास अछि! अहाँ नै मानैत छी मुदा जे हो ई सेहो प्रवास अछि। एकर लक्षण षड्यन्त्र रूपमे जन्मक समय सँ निर्धारित छल। "आखिर लड़की अछि" छै नै? हुनका कोनो ने कोनो पुरुषक हाथमे जयबाके अछि। प्रवासी मात्र अमेरिका जाइ बला लोक नै छथि स्त्री सब सेहो एकर हिस्सा अछि। अहाँ सहजतापूर्वक एकर काट कऽ सकैत छी तैयो कतेक कठिन अछि जीवन भरि लेल जन्मभूमि छोड़ब एकटा अनचिन्हारक आङ्गुरि पकड़ि कऽ? अहाँ बीच-बीचमे घुरि सकैत छी मुदा मात्र एकटा अतिथिक रूपमे। जखन हम भीतर डेग रखैत छी कतेक दिन रहब हमरा लोक पुछैत छथि। "जतेक दिन जी चाहय" हम कहय चाहैत छी मुदा हमर इच्छा पर बन्धन बहुत पहिने लगा देल गेल। प्रवास उल्लास नै अछि ई छोड़ि जे किछु दिन बाद ई आदति बनि जाइत छैक। (तेलुगु कविता "इदी वालसे" सँ) मध्य आयु कोनो दुख नै जे हमर यौवन बीति गेल मुदा हम की कहियो एकरा सदा राखबा लेल लेने छलहुँ? ई की अछि ई जानबा सँ पहिनेहि ई भफा गेल बिला गेल। कोनो डर नै जे वृद्धावस्था लग अछि हमरा बुझल अछि जे हम आगाँ बढ़ि रहल छी दोसर किनार पाबि पूर्णता प्राप्त करबा लेल। जखन लोक हमरा 'बा' कहि कऽ सम्बोधित कएलनि तखन ओतबे उत्साहित भेलहुँ जेना 'काकी' कहला पर होइत छलहुँ। ओना परिवर्तन स्वाभाविक अछि मुदा ओहि रूपान्तरणक पीड़ा सामना करब 'वैतरणी' पार करब जकाँ अछि। मन आ शरीर निश्चये अविभाज्य अछि मुदा जखन हार्मोन सभक सामञ्जस्य बिगड़ि जाइत छैक तखन परिवर्तन दीर्घश्वास बनि जाइत छैक। जखन गर्भाशय निकालि देल जाइत अछि अहाँक पहिचान आकार बदलय लगैत छैक एकटा मिश्रित छवि अभरि अबैत अछि। काल्हि धरि हम झरना जकाँ बरसैत छलहुँ आइ हम हल्लुक फूही जकाँ कोमल बरखा सन बरसैत छी। ई सीढ़ी सब कतेक प्रेम सँ बनौने छलहुँ! आइ हुनका आ हमर ठेहुन सभक बीच कोनो गप-सप नै अछि। ओ झरना जे पहाड़क चट्टान सँ कूदैत छल आब पसरल नदी जकाँ आस्ते-आस्ते बहैत अछि। हमर पीठक विषयमे की पुछैत छी? हम श्रीनाथक सुन्दरी नै छी जकर पातर डाँर पर सन्देह होइत अछि। "हम छी" हए नै हमर पीठ कहैत अछि। ई जीवनक बोझ उठओने 'ढोलक' अछि बेचारी! आब ई डर सँ थरथराइत अछि बोझ उठेबाक सोच मात्र सँ। हम अपन नाति-पोताकेँ कोरामे लय प्रेम करैत छी मुदा ओकरा उठायब एकटा सुखद बोझ अछि। हमर पीठकेँ प्रणाम जे हमरा कोमल खाट सँ नीचाँ पटकि देलक। हम एकटा घुमक्कड़ छी असगरे भटकैत समयक सीमा पर। हम अङ्कगणितक शिक्षक छी लहरि सभक गिनती करैत साड़ीक आँचरमे बान्हल समुद्री सीप सब सँ। तैयो हमर भीतरक विद्रोही दबल नै अछि। धरतीक गुरुत्वाकर्षणकेँ चुनौती दऽ कऽ अवज्ञा माथ सँ पएर धरि दौगैत छैक जेना चेतना शोनित (शुनीत)मे प्रवाहित होइत हो। परिवर्तन मात्र शरीर लेल अछि मन लेल नै। हृदय अनुभवक सुखद मिठास सँ भरल अछि कठोर आ सुखद सुगन्धक मिश्रण। (श्रीनाथ: तेलुगु भाषाक प्रसिद्ध कवि छलाह, जे १३५० -१५०० ई. क युगमे रोमांच भरल कविता लिखैत छलाह। ई काल तेलुगु साहित्यक इतिहासमे सब सँ उज्ज्वल काल मानल जाइत अछि। हुनकर महान रचना 'शृङ्गार नैषधम्' तेलुगुमे काव्य शैलीक नव मार्ग प्रशस्त कएलक, जे अपन सम्पूर्ण शक्ति आ सजीवता लेल प्रसिद्ध अछि।) एकटा बोनहा फूल हमर घर आब नै रहल तैयो ओ हमरा लोभा कऽ कऽ देखैत अछि हमर हृदयक केबाड़ खोलि कऽ। हवा अखनो साँस लैत अछि गुमारक दुपहरियामे बुनल कथा सभक अंगनाक आमक गाछक नीचाँ नारिकेलक रेशा सँ बुनल खाट पर पड़ल। हमर अगल-बगलक चमेली अड़हुल आ गुलदाउदी हमर सोझाँक बगैचाक फूल सब। ओ अखनो हमर आँखिमे फुलैत अछि। मुर्गीक झुण्ड जे हमर मायक पएरक चारू कात चक्कर काटैत छल जखन ओ बाड़ामे प्रवेश करैत छलीह हुनकर कान्ह पर कुदैत छल फेर हुनकर माथ पर बैसि जाइत छल मोटामोटी 'घेराबा' बना कऽ। हुनका ताधरि नै छोड़ैत छल जाधरि ओ हुनका लेल अन्न नै छिटैत छलीह। आइ धरि ओ हमर हृदय पर लोल मारैत अछि। हमर पिताक स्मृति जे भोर सँ निकलि पड़ैत छलाह हाथमे ठेंगा लय कऽ रौद बरखा वा जाड़क परवाह नै करैत। हुनकर पदचिह्न अङ्कित खेतक बाड़ा सब पर अखनो ओहने अछि। हमरा लगैत अछि जे हम अखनो दौगि रहल छी रम्भाइ बला बाछा सभक पाछू गली सब सँ जे थन खाली कऽ कऽ नाङरि उठौने दौगि गेल। गेंदाक फूलक पंखुड़ी सब अंगनामे गोबरक निपाइ पर अरिपनक बीच अखनो हमर पिपनी जकाँ भऽ गेल बुझाइत अछि। हृदयक सरोवरमे अखनो हेलैत अछि ओ स्मृति अपन माता-पिता सँ बिदा लेबा काल बाढ़ि जकाँ बहल नोरक जेना हमर घरक नीव हिला देने हो। दूर देश उड़ि गेल चिड़ै सब खोंताक परवाह नै करैत अछि। बचल देबाल सब... ई आब घर नै रहल। बढ़ल बोनहा झाँखुड़ आ बोनहा फूल सब हमरा नव-दृष्टि सँ देखैत छथि। सत्ते हम आइक बोनहा फूल छी। (तेलुगु कविता "पिच्ची पुव्वु" सँ) दुनू पक्षक साक्षी परदा मनहि मन हँसल मात्र पाछू भऽ रहल नाटक देखि कऽ नै वरन् मञ्च पर खुजल नाटकीयता सेहो देखि कऽ। एकटा शानदार मञ्च-दृश्य जखन परदा लहरदार साँची देल धोती सन उठैत छैक। कतेक चरित्र-चित्रण कएल गेल कला लेल वा रोटी कमाबय लेल वा टकाक लालसामे वा नाम -यश लेल! ई एकटा चितिर-बितिर भ्रामक दुनिया अछि। अहाँ असगरे राजकुमार बनि कऽ मञ्च पर पएर धरब मुदा जँ पृष्ठभूमि बदलि जाय तऽ अहाँ भिखारि लागब। ओहि मञ्च पर कतेक सपना फूल जकाँ फूलल कतेक आँखि श्रद्धाञ्जलि स्वरूप नोर बहौलक कतेक उत्साहपूर्ण अभिनन्दन कतेक पैघ राजनीतिक प्रण सभ! सब ठीक अछि! परदा घबड़ा गेल मञ्चक पाछूक लोक सभकेँ देखि कऽ। हुनकर हँसीमे हँसी नै हुनकर शब्दमे हृदय नै हुनकर हृदयमे मौन नै। नै किछु अछि, जे ई अछि। परदा हिलैत रहैत अछि मञ्च पर आ मञ्चक पाछूक नाटक देखि नै सकैत अछि ई। लगैत अछि जेना टूटि कऽ खसि पड़त। असहिष्णु आ व्याकुल होइत अछि। जँ एहिना अछि तखन परदा ऐ नाटकक, कखन खसत! (तेलुगु कविता "उभयसाक्षि" सँ) मूल तेलुगु: शीला सुभद्रा देवी (मूल तेलुगु शीला सुभद्रा देवी केर अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर) विजयनगरम (आन्ध्र प्रदेश) मे १९४९ मे जन्मल शीला सुभद्रा देवी तेलुगु साहित्यक एकटा सशक्त स्वर छथि। ओ १९९७ मे तेलुगु विश्वविद्यालय सँ सर्वश्रेष्ठ लेखिकाक पुरस्कार प्राप्त कएने छथि। पसीझक काँट बाड़ीमे लगाओल पसीझक काँट गहना लेल केना ओऽ सभ पसड़ैत अछि सोहड़ैत! चुपचाप बुनैत रस्ता आच्छादित करैत स्थान। भीड़-भाड़ सभठाम सभ कोणमे काँटबला पसीझक झाड़ सभ, सभ रोकैत स्नेहक अनवरुद्ध प्रवाह चिन्तन विखण्डित पड़ि काँटक मध्य वाणी अवरुद्ध फँसि कोनो झाड़ मस्तिष्क उर्ध्वपतित चुपचाप हृदय बनैछ मात्र एकटा अंग आ मौन करैत राज यांत्रिक रूपे॥ मुनैत, बहत नै हवा एकताक तेनाकेँ ठुसैत सभक आश कोनहुना निकसी अकास। मुदा की अछि विस्तृत खेत मध्य? कतऽ गेल फूलक क्यारी फुनगैत मित्रताक हिलबैत अपन माथ आमंत्रणमे? कतऽ गेल ओ चाली सभ अपन तन्तुसँ बढ़ैत? सभकेँ समेटैत ओ लता-कुञ्जक मंडप कतऽ गेल छोड़ि मात्र अशोक आ साखुक वृक्ष जे पसारि रहल अकास मध्य अपन हाथ नीचाँ देखैत विश्वकेँ घासक पात सन तुच्छ? यदि हम मोड़ी आ घुमी घोरैत अपनाकेँ नोरमे वेधै बला मोथा नै भोकैत अछि मात्र पएर वरन् आँखि सेहो। सभठाम लोक उन्मुक्त ठाममे मानवीय सम्पर्कसँ घृणा करैत परिवर्तित केलक नगरकेँ सेहो बोनमे। पसारैत काँट सभ ठाम परिवर्तित भेल पसीझक झाड़मे साँसक फुलब पसड़ैत चारू दिस दोसराक संवेदना नै आबऽ दैए विचार जिनगी भेल उसनाइत खेत सन। इच्छा भागबाक पएर केने आगाँ। आश्चर्य, मथि नै सकै छी, औँठा धरि सेहो। देखि सकी जौँ अपनेकेँ मात्र भीतरसँ बाहर पसीझक काँट मात्र। कैक्टस बगानक सज्जा लेल लगाओल कैक्टस कोना प्रजनन कऽ कऽ पसरि गेल! मौन रहि अपन रस्ता बना सम्पूर्ण ठाम ओ घेरि लेलक। सब ठाम भीड़ अछि सभ कोण पर मात्र काँट बला कैक्टसक झाँखुड़ सब प्रेम-भावनाकेँ बहबा सँ रोकि रहल किएक ई? विचार ककरो काँट सँ फाटि गेल वाणी ककरो झाँखुड़मे ओझरा गेल। मन मौनमे लीन हृदय मात्र अङ्ग मौन यान्त्रिक ढङ्ग सँ राज कए रहल। साँसक बिनु दम सधने जतय एकताक हवा नै बहैत अछि बाहर निकलबा ले आतुर जे साँस लऽ सकी। मुदा बाहर खुला मैदान सभमे सेहो की अछि? कतय अछि भजारक फूल जे नीक लागय? कतय अछि ओ लत्ती जे अपन बाँहि पसारैत छल? कतय अछि सबकेँ आलिङ्गन करबाक मण्डप? अशोक वा सखुआक गाछ मात्र ठाढ़ आकाश दिस हाथ दुनिया पर घमण्डक दाबी। जँ हम नोरमे घुलि-मिलि कऽ बहय चाहब तऽ खरपात पएर आ आँखि सेहो भेदैत अछि। नग्र सभकेँ जङ्गल बना देलक लोक मानव-सम्पर्क सँ आब घृणा होइत अछि। चारू कात काँट चारू कात कैक्टस चारू कात गुमार कऽ घेराबा। कोनो विचारकेँ भीतर नै आबय दैत जीवन बनि गेल सुखायल धरती। डेग बढ़यबा लेल उठबाक चाही मुदा आश्चर्य पएरक आङ्गुर सेहो नै हिलैत अछि। जँ हम अपनाकेँ देखब भीतर-बाहर तऽ हम स्वयं कैक्टस छी ई सत्त बुझाइत अछि। शेष वस्त्र वा पवित्र वस्त्र कैनवास पर जखन कथकली खेलाइत छी वा कागज पर अक्षर बागु कऽ कविताक कटनी। सातो सुर अपन कण्ठमे नचबैत छी वा दैवी कलाक हाथ सँ उकेरनी। प्राकृतिक घटना सभकेँ हाथ सँ जीवन दैत हमर हाथ किएक दादीक सुखायल हाथक रेखा देखबैत? की हमर हृदयक धड़कन ओही करघाक ताल सँ गूँजैत जतय बाबा झुकल खत्ते-खत्ता काज करैत? की ई हमर उपहार स्वयं अर्जित नै अछि? तैयो जखन आशा करैत छी जे मन फूल जकाँ फुलायत बुद्धिक सुगन्धि चारू कात पसरत किएक दुष्ट उपहासक शब्द सँ हमरा मारल जाइत अछि? हँ हम बुनकर छी एहि सँ मना नै छह गजक साड़ीकेँ दियासलाइक डिब्बामे तह कएल। अपमान सभकेँ अपन ध्वनि-पेटीमे बन्द कऽ हम अपन आँखि फेर सँ बन्द कएल। कतहु हमर दुष्टता कियो पकड़ि नै ले ओही पुरान कपड़ा लेल जे 'शेष वस्त्र' कहल गेल। ओना सादा आ पुरान मुदा अहाँ तऽ एकर पवित्रतामे आनन्दित भऽ गेल छी। हम जे फेकल कपड़ा जकाँ तुच्छ बुझल गेलहुँ आब ठोढ़क पाछू मुस्कान नुकाबैत छी। देखि कऽ जे हमर पूर्वजक घाम पोछय बला कपड़ा आब अहाँ श्रद्धा सँ आँखि सँ लगबैत छी। (शेषवस्त्रम्: भगवानकेँ अर्पित कपड़ा जे खास लोक आ भक्त सभकेँ भेट कएल जाइत अछि) मूल तेलुगु: के. शिव रेड्डी (के. शिव रेड्डीक मूल तेलुगुक अंग्रेजी अनुवाद जयलक्ष्मी पोपुरी द्वारा; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर) के. शिव रेड्डी हैदराबाद में रहैत छथि। ओ विवेकवर्धनी कॉलेज, हैदराबाद सँ अंग्रेजीक व्याख्याता पद सँ सेवानिवृत्त भेलाह। ओ अंग्रेजी पढ़बैत छलाह आ तेलुगु मे लिखैत छथि। हुनकर नाम पर कविताक १८ टा संग्रह अछि, जाहि मे “रक्तम सूर्यडु”, “नेत्र धनुस्सु”, “आसुपत्री गीतम्”, “चर्या” आ “अजेयम्” सम्मिलित अछि। हुनका हुनकर कृति ‘मोहना! ओ मोहना’ लेल १९९३ मे केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ सम्मानित कएल गेल छल। ओ तेलुगु मे अनुवाद सेहो करैत छथि। मुख्य रूप सँ सामान्य मानुसक जीवन स्तर मे परिवर्तनक तीव्र इच्छा लेल जानल जाए बला शिव रेड्डी अपन रचना मे बिम्बक प्रयोग बहुत बुद्धिमानी सँ करैत छथि। हुनका कतेको प्रतिष्ठित पुरस्कार देल गेल छनि। बरखा पर कविता पहिल बरखा नहर सभमे पानि छोड़ल गेल गुमारक दिन धरती सूखि-फाटि गेल अछि। जखन नहर टूटैत छैक पानि धरतीक अतड़ीमे धँसैत छैक। की धरती पानि सोखैत अछि वा पानि धरती केँ स्तनपान करबैत छैक? नै जानी पियास जतेको पीबू कहियो नै मेटाइत छैक। जखन दरारि सब पानि सोखैत अछि हृदय सँ रेखा उभरैत भाव उत्सुकता सँ गरा मिलबाक अनुभूति माटिक एकटा निश्चित मीठ गन्ध जेना सुखायल धरती भिजतहि अबैत अछि। जीवनक एहन दोसर कोनो गन्ध संसारमे कतहु आबि सकैत अछि? जखन बरखाक ठोप सब खसैत अछि परिश्रमी शरीर पर जे दरारि सँ भरल अछि की गाछ उगि आयत आँखि सँ नवका पल्लव फूटत? जेना साँप अपन बिलमे रेंगैत अछि पानि दरारि फाटल धरती मे चुबैत अछि। पक्षी एक-एक कऽ गाछक चोटी सँ उतरैत बहैत पानिक सतह पर आबि कऽ बैसैत अछि चहकल धरती सँ निकलल सभ कीड़ा पर लोल मारैत अछि। अगस्ति (अविसी) क गाछ सँ गीत फूटि पड़ैत अछि खेत सभक किनार सजल ताड़क पंक्ति सब ओइमे संग होइत अछि कतहु पीपरक गाछक सीटी बीच-बीचमे सुनाइत अछि। सब मिलि कऽ गीत सभक एकटा गीतमे झूमैत अछि। किसानक नङ्ग पएर नीचाँक धरती खेतक काते -काते टहलैत लजा जाइत अछि आ देखू अनचोक्के प्रकृति युवावस्था प्राप्त करैत अछि। (गगनमान्त थलालो, २०१० सँ) बरखा आबि गेल मौनमे किछु बरखाक ठोप सब हमर कोरामे खसि पड़ल। पहिने नै जानैत छलहुँ जे बरखाक ठोप सभक पाँखि भऽ सकैत छैक सूर्य किरण जकाँ फुटबाक शक्ति भऽ सकैत छैक। परदा उठा कऽ ओ भीतर हुलकी दैत छथि खिड़कीक बाहर ठाढ़ अपन पएर पूर्ण पसारि कऽ धकेलैत छथि जेना बहुत पहिने बच्चामे अन्हारमे बेंचक नीचाँ चीज सब लेल हथोरिया दैत रही। बरखाक ठोप सभक चारू कात आँखि अछि कनियो विनम्रता नै। बिना पिपनी खसेने बेशी काल धरि चीज सभकेँ निहारू जेना बहुत बेसी लोक-लाज आ बहुत बेसी गोपनीयता मे डूमल कोनो जागृत अभिलाषा हो। बरखाक ठोप सभकेँ देखू बरखामे भीजल गाछ लोक गाड़ी आ आन चीज जेना अहाँक दृष्टि तखने वापस आयल हो जेना अगिले क्षण अहाँक दृष्टि चलि गेल हो। अपन नजरि बलजोरी खैंचि कऽ लग सँ ध्यान लगा कऽ आनन्दित आ अतृप्त दृष्टि सँ ताकू। ककरो हमर माथ झाँपि देलक भाव बरखाक साड़ीक आँचर सँ। हमरा सोझाँ पाँच महला पिञ्जरा सँ दू टा बरखाक ठोप कुहकल बरखा आबिये गेल। (वृत्तलेखिनी, २००३ सँ) बरखा! बरखा! बरखा! अनचोक्के बरखा शुरू भऽ गेल बरखा हमरा आ हमर मित्र सभकेँ एकटा पुरान टीनसँ छारल घरक नीचाँ रोकि देलक। राति मे दूर सँ बरखा सेहो भीतर हुलकी दैत छैक। अनचोक्के बाघ जकाँ हमरा बिनु बुझने झपट्टा मारलक हमरा आ हमर मित्र सभकेँ कैद कऽ देलक एकटा पुरान टीन-छारल घरक नीचाँ। बरखा अहाँकेँ माटि दैत अछि अहाँ असहाय भऽ जाइत छी। अहाँ लग कोनो हथियार नै अछि ने अहाँ स्वयं हथियार बनि सकैत छी। अहाँ ओकर सङ्गीत सुनबा लेल बाध्य छी जखन ओ टीनक छत पर कुदैत अछि वा पात सँ पिछड़ैत खसैत अछि। अहाँ सामना नै कऽ सकैत छी जे ओला सन बरसि रहल अछि। जखन अहाँ कैद भेल अपन विचार सभक समीक्षा करैत छी ओहि बन्दीगृहमे एकटा कारी कुकुर दौगैत अबैत अछि अहाँक पएर लग बैसि जाइत अछि। अहाँ निष्कर्ष निकालब ओहि स्थितिमे जे ओ अहाँक संग देबय आयल अछि। बरखामे अहाँकेँ एतय-ओतय पटकबाक शक्ति अछि अहाँकेँ एकहि ठाम जड़ बना कऽ। जेना बरखाक ठोप सब खाली बर्तनमे चुबैत छैक अहाँ अधीर भऽ जाइत छी मुदा ओकर क्रूर बलक सोझाँ अहाँ की छी? ओ टीन-छारल घरकेँ पुलिस हिरासत सेल बना देने अछि। की एहि अनचोक्के बरखामे, जखन अहाँ आबि रहल छलहुँ ओ नंगटे खेलाइत बच्चा सब जे बरखाकेँ चुनौती दऽ कऽ खेलमे कूदि रहल छल दर्शक सभकेँ कनी खुशी देबा लेल? अहाँ बच्चा नै बनि सकैत छी ने अहाँ साहसी बनि सकैत छी। अहाँ खाली जङ्ग खाइत रहि जाएब लगपास पड़ल पुरान साइकिल सभक बगलमे टीन-छारल घरक नीचाँ। जँ अहाँ प्रेम करैत छी बरखा अहाँक चारू कात घूमत अहाँक पाछाँ करत अहाँक भीतर बसि जाएत। बरखा एकटा दुःख एकटा सुख अछि एकटा जीवन एकटा सुगन्ध धरतीक गरदनिमे मोतीक एकटा चमकैत हार। (बर्खम! बर्खम! कवितासंग्रह, १९९९ सँ) मूल तेलुगु: अन्नवरम देवेन्द्र [मूल तेलुगु सँ अंग्रेजी अनुवाद: जयलक्ष्मी पोपुरी; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर] अन्नवरम देवेन्द्र आन्ध्र प्रदेशक करीमनगर जिला सँ एकटा लोकप्रिय तेलुगु कवि छथि, जे अधिकांशतः तेलंगाना बोलीमे लिखैत छथि। ओ तेलंगाना क्षेत्रक संस्कृति, भावना आ कएक दशक सँ एकटा अलग राज्य लेल भेल सङ्घर्षक मजगूत अबाज छथि। हुनकर संवेदनशीलता मुख्यतः ग्रामीण आ राजनीतिक अछि। हुनका महात्मा ज्योतिबा फुले फेलोशिप (२००१) आ रञ्जनी कुण्डूर्ति कविता पुरस्कारम (२००६) सहित अनेक सम्मान भेटल छनि। ओ करीमनगर जिला परिषदमे कार्यरत छथि। हृदयक गीत / "गुंडे पाटा" तेलंगाना! तेलंगाना! मनमे एकटा स्मृति पैसि गेल शरीरमे रोमाञ्च हृदयक अद्भुत व्यथा। हर्षक एकटा आच्छादन चाँदनी सँ प्रकाशमय गोबर सँ नीपल अंगना देबालक चारू कात पवित्र सिन्दूरक रेखा। पूर्णिमाक राति अड़हुलक फूल फुला गेल। तेलंगाना! तेलंगाना! अपन महानतामे भव्य! नदी सब पूर्ण बहैत थन दूध सँ भरल लार खसबैत बाछा-बाछी चरचराइत कटही गाड़ीक धुरी तरेगण सँ भरल भोर चहकैत मैना ओहि सब पर पहिल बरखा। बाग-बगैचा सभक सुगन्ध कतेक सघन कतेक महान हमर तेलंगाना! अहाँक कते राजसी ऐश्वर्य छल! ओ राजसी भव्यता कतय विलुप्त भऽ गेल? माय तेलंगाना! माय तेलंगाना! हम अहाँकेँ मोन पारब 'बथुकम्मा' गीत सभमे कबड्डीक खेल सभमे 'बिल्लम गोडू' खेलमे 'बोनालू' त्योहार पर परी जकाँ आँखि बला युवती सभक धुनमे अहाँक ढोलकक तालमे देद्देक्का देम देद्देक्का देम… हम अहाँकेँ मोन पारब। अहाँ एकटा सिद्ध सपना छी स्मृतिक उर्वर धरती व्यथित हृदयक कविता आ एकटा नव-स्वरित अबाज। अहाँ बन्द मुट्ठी छी हाँसू अहाँ छी लहरि अहाँ छी। हम लड़ि रहल छी अपन साम्राज्य लेल हमर झण्डा अहाँ छी तेलंगाना! हमर तेलंगाना! एकटा गोरा शासन / "थेल्ला पालन" की राष्ट्रवाद नशमे दौगि सकैत छैक जखन हृदय एकात अनुभव करैत अछि? सरकारी भाषा हमर नै अछि हमर वाणी शासक सभक बीच कोनो स्थान नै पाबैत अछि। पोषण करय बला आ पोषित हुनकामे सँ कोनो हमर नै। सम्पूर्ण संस्कृति एकटा विकृति अछि। शरीर सम्पूर्ण शरीर जेना बलसँ वशमे कएल जा रहल हो जेना आन होइ। पूरा शरीरमे अकड़ल, ऐंठल एहन सन अनुभूति। उपनिवेशवाद हमर दरवाजा पर अछि जखन ओ दाँत काढ़ि कऽ पहिल बेर मुस्कुरायल भूमण्डलीकरणक मुखौटा लगा कऽ। राष्ट्रक हृदय धड़कब बिसरि गेल। जखन एम.एन.सी. सब हमर भारतीयताकेँ निशाना बनौलनि ओही दिन उदारीकरण अपन सङ्केत भेजलक आ राज्यक अस्तित्व बिमरियाह भऽ गेल। ओना गोरा लोक भगा देल गेल मुदा मधुरसँ लेपल शासनक रूपमे भूमण्डलीकरण फेर सँ गोरा आदेशमे बदलि गेल। सब अछि गोरा भाषा आ गोरा वाणी। व्याकरण नोरसँ भरल इतिहास आहत शरीरक शोनित सँ सनल घाऽ कइएक बर्खसँ अन्तहीन पीड़ाक भ्रमण तैयो कतहु हमर नामक उल्लेख नै। हम इतिहासक पन्ना सँ निपत्ता भऽ गेलहुँ। लोकक मुँह सँ खसल जीवित शब्द शब्दकोश सभक शब्द रस्तामे थकुचा गेल। हमर भाषा हमर बोलीक कोनो उल्लेख नै प्रबन्ध सभक ककरो वाक्यांशमे नै। हमर वाणी सँ सनल कोनो वाक्य नै हमर स्वरबद्ध ध्वनि-पैटर्नक कोनो उल्लेख नै। अहाँ एक घोंटमे हमर भाषा पी गेलहुँ जेना हमर जीवनक साँस कैद कऽ लेलहुँ। लेखा-जोखामे सेहो खाली स्थान विभाजनक फलकमे समान वितरण नै। आंशिक विभाजनक अबाजकेँ समर्थन देल गेल सब सर्वेक्षण सभक योगमे हमर मूक अबाज एकाकी अछि। खेल वाणी आ गीतकेँ मिला कऽ तेलंगानाक संस्कृतिक क्षति भेल। हम जे अपन रूपमे अङ्कुरित भेलहुँ बढ़ब आ जीबक चाही मात्र अपन रूपमे। सब वाणी हमर धुन आ स्वरमे गूँजय आब सँ एकटा नव व्याकरण पर आधारित मोहाबरा रचब आब सँ नव सङ्ख्या पर आधारित सारणी बनायब। मनकम्मा बगैचा मजदूर पिकअप प्वाइंट / "मनकम्मा थोटा लेबर अड्डा" गामक सीमा सँ बाहर वस्तु बनेबाक व्यापार पूर्ण वयस्कक दृश्य अपनाकेँ बेचैत जेना बजारमे बड़द वा अन्न। मजदूर पिकअप प्वाइंट पर सबटा दुबर-पातर शरीर धँसल आँखि सँ देखैत छथि। "हमरा काज दियौ साहब... कम टका पर सेहो चलत... कोनो काज... हमरा काज चाही..." दयाक शब्द कोलाहल सगरे गाय जकाँ निर्दोष नजरि। दीवार पेण्ट करबाक ब्रुश पथिया खन्ती आ कोदारि चिड़ै सब एतय आबि उतरल अछि गाम सँ डेंगायल गेला पर। कान्ह पर लटकल गमछा बोरामे दुपहरियाक भोजन दोसर हाथमे उपकरण। के काज देत? आगाँ देखैत नजरि। ओ पाथर तोड़ैत छथि सुरङ्ग खनैत छथि महल बनबैत छथि फर्शक टाइल लगबैत छथि देबाल ठाढ़ करैत छथि भारी पाथर उठबैत छथि सब काज ओ सहजतापूर्वक करैत छथि। जे कहियो गाड़ी चलयबाक सपना सेहो नै देखलक ओ 'मेटल' रस्ता ओछाबैत अछि। जे 'हेलो' कहि कऽ सेहो अभिवादन नै कऽ सकैत अछि ओ टेलिफोन लाइन लेल गहीर रस्ता खनैत अछि। जे सङ्गमर्मरक महल बनबैत अछि मुदा स्वयं खोपड़ीमे रहैत अछि। हुस्नाबाद वेमुलावाडा सिरसिला... बरखा होय वा नै होय ई मनुक्ख गाम सँ डेंगायल गेल। मजदूर बनि गेल 'मनकम्मा बगैचा पिकअप प्वाइंट' पर। सुखायल पोखड़ि- चारि स्मृति/ "येन्दिना चेरुवु- नालुगु यादुलु" १. 'बथुकम्मा' पाबनि पर कियो गाबैत अछि: राम राम राम उय्यालो! रामने सीराम उय्यालो! गामक गलीमे गीत गाबैत नाचैत महिला सब 'बथुकम्मा' केँ पोखरिक पानिमे विसर्जित करैत छथि। ओ सजल 'बथुकम्मा' हे अहाँ लोकनि महिला सब अखन कतय विसर्जित करब? पोखड़िमे एकोटा ठोप पानि नै अछि 'बथुकम्मा' क माथ धरती पर मौलाय रहल अछि! २. ई बेकार अछि जँ जीवनमे हेलब नै अबैत अछि। कुम्हरक खोल बान्हि कऽ हमर बाबा हमरा हेलब सिखौलनि। आब जखन अपन बेटाकेँ हेलब सिखाबय लेल उत्सुक छी पोखड़ि दस बर्ख सँ एकदम सुखायल अछि। हमर बेटाक पएर सुखायल रेतमे फड़फड़ाइयो नै सकल। ३. गुनगुनाइत हम किनार पर बैसल रहैत छलहुँ हाथमे छिप्पी लय कऽ माछ पकड़बाक डोरी। आइक छौड़ा सभकेँ ने माछ पकड़बाक डोरीक पता छै नहिये बोर केर। की ओ लोकगीत गुनगुनाइत छथि वा माछ पकड़ैत छथि? ई सब तखन होइत छल जखन पोखड़ि भरल रहैत छल छै ने? ४. "गणपति बप्पा मोरया" चिचियाइत नग्रक चक्कर लगा कऽ उत्सव मनेलाक बाद विनायककेँ पोखड़िक पानिमे विसर्जित कएल जाइत छल। आइक पोखड़िमे पानि कतय अछि? गणपति जी तऽ श्मशान भूमि पर बैसल छथि! पानि अछि, आँखिमे नोर मात्र... ठोप ठोपे-ठोप खाली पानिक ठोप टपकैत छैक। हम अहाँकेँ नै कहि सकैत छी। पानि मुक्त रूप सँ नै बहैत छैक घैल कहियो नै भरैत छैक। नल सँ भनसा धरि भनसा सँ फेर अंगना धरि एतय-ओतय हड़बड़ीमे करघाक ताना-बाना जकाँ टेढ़-मेढ़ एकटा चलिते चलैत जाइत चक्करमे हम घुमैत छी। कानैत बच्चा पानि भरबाक समय दूध उधियाइत आ हमर मासिक धर्मक एकान्त धुर्! सब एक संग! दू दिनमे एक बेर पानि अबैए नल पर कोलाहल आ दङ्गा। तैयो हम स्त्री छी जे कठिन समयमे सङ्ग नै छोड़ैत छी अपन जान सेहो दऽ दैत छी। ओ सब हङ्गामा मात्र पानि लेल अछि अहाँकेँ हमर पानिक समस्या नै बता सकैत छी पन्द्रह मिनटक काज, आ सम्पूर्ण भोर बीति जाइत अछि। एक सेर चाउरक कमी भऽ जाय तऽ सूति सकै छी मुदा पानि बिना जिनगी चलि सकैत छैक? एकत्रित पानि हमर बेटाक लगही जतेक सेहो नै अछि ओकरा लेल रस्सी जकाँ नाम पाँति अछि। तैयो के हमर सङ्घर्षकेँ मोजर दैत अछि? घर भरि पुरुख-पात सब गाछ जकाँ ठाढ़ छथि वा कुर्सी जकाँ बैसल रहैत छथि हमरा पर तमसाइत जे हम देरी कऽ रहल छी। मुदा ओ सहायता करबा लेल एकटा आङ्गुर सेहो नै हिलबैत छथि। ओहि बोरवेल पर काज करैत हमर हाथमे पीड़ा होइत अछि। ओहि पम्पकेँ पीटैत-पीटैत मात्र खाली अबाज निकसैत छैक। हम ओकरा पर काज करैत-करैत मरि रहल छी ग्लक ग्लक... हमर बाँहिमे दर्द अछि आ हमर छाती पीड़ा सँ फूलि रहल अछि। गहींर पताल सँ पानि कतहु आरो गहीर निपत्ता भऽ जाइत अछि। तैयो हार नै मानि जँ हम ओकरा फेर चालू करबाक काज करी तऽ चम्मच भरि ठोप निकसैत अछि ओहो जङ्ग लागल गन्ध संग। कान्हमे पीड़ा अछि घैल उघैत-उघैत मस्सा भऽ गेल आंगी सेहो फाटि-चीटि गेल। एकटा क्षीण जीवन लेल हमरामे छल-कपट करबाक क्षमता नै अछि। हम की करू बहिन? पानिक मात्र उल्लेख सँ मृत्युक डर जागि उठैत छैक। पानि अछि आँखिमे नोर मात्र.... (‘नील्लन्ते कन्नील्ले.. मन्कम्मा थोटा लेबर अड्डा सँ) अन्तिम शब्द "लच्चम्मा हमर प्रिय! हम जा रहल छी! ध्यान राखू... हमर बच्चा सभक नीक सँ देखभाल करब। हमरामे जीबाक शक्ति नै अछि। लेनदार सब यमराज बनि गेल अछि। ई समय किसान लेल नै अछि हम जा रहल छी... ओ हमरा जीबय नै दऽ रहल अछि जतेक हम चाहैत छी। जिनगी की अछि जखन खाय लेल अन्न नै अछि? बैंक बला सब हमर इज्जत रस्ता पर खैंचि रहल अछि ऋणदाता हमर लाज लूटि रहल अछि। हम नै जीबि सकैत छी लच्छमी नै आर नै! बीस वा चालीस हजार आब 'सोसाइटी' केँ देनाइ अछि आर पचास हजार टका साहूकारकेँ चुकयबाक अछि। ई-ओ आरो बहुत कर्जा अछि। अपना सँ घृणा होइत अछि ई जिनगी जीबयमे लाज लगैत अछि। एहि कर्जा पर प्लेगक अभिशाप पड़य! लेनदार घर धरि आबि रहल अछि। हमरा रस्तामे रोकि लैत अछि इनार पर टोकैत अछि। हमर जिनगीक पाछू जतय हम जाइत छी बेइज्जत कऽ दैत अछि। हम की करी आ कोन प्रकारेँ जीबी? पोखड़ि बहुत पहिने सुखा गेल इनार सभमे घास-पात जनमि गेल। बोरवेलमे खाली टका छीटल गेल। कैएक सय फीट गहीर खोदल मुदा एकोटा बोरवेलमे पानि नै छूटल। हताश भऽ हाथ पीटि लेलहुँ सभक हँसीक पात्र बनलहुँ! आब देखू! बरखा नै पड़त ने अकाल-भूख जायत। खेत सब सूखि कऽ फाटि गेल समय सेहो उनटि गेल। जे बरखा बीआ बाउग करय काल नै बरिसल ओ कटनीक समय मूसलाधार भऽ कऽ आयल। थोड़-बहुत बचल दाना बाढ़िमे डूमि गेल। कपासक खेती कऽ कऽ दिवालिया भऽ गेलहुँ। चारू कात छल आ धोखा अछि। किसान सभक संग धोखा जतय देखू सब घाटा। हमर बच्चा सब बढ़ि रहल अछि मुदा किसान मरि रहल अछि। की बिजलीक दर बढ़ौलक? की ओ किसान सँ खेती बन्द करबय चाहैत छथि? अपनाकेँ बेचि देब तैयो की कर्जा चुका सकब? मोट-धनीक लोकक शब्द सुनलहुँ? ओ कहैत छथि जे किसान सम्पूर्ण पचाय नै सकलाह जे ओ लेने छथि तेँ मरि रहल छथि। के खेतीकेँ जुआमे बदलि देलक? के अपन पेट फुलौलक? अहाँ किसानक सटल अतड़ी नै देखैत छी? धान उपजा-उपजा कऽ देशकेँ खियैलहुँ आब अहाँ हमरा भोजन सँ वञ्चित करैत छी? ओ कहैत छथि जे हम 'अनुग्रह राशि' कमाबय लेल मरि रहल छी! अहाँ देखलहुँ हमर लच्छव्वा? ओ शब्द सभ हमरामे पीड़ा जगा दैत अछि। हमरा टका नै चाही हम गङ्गा जकाँ शुद्ध जीवन जीलहुँ। मुदा आब हम बड्ड बेशी कर्जा मे डूमि गेल छी। हम जा रहल छी... अहाँ अपनाकेँ उत्तेजित किएक कऽ रहल छी? हमर भाग्यमे ई लिखल अछि। अनुग्रह राशि स्वीकार नै करब लच्छव्वा। की ओ सभ नै कहने रहथि जे हम पचा नै सकलौं जे हम लेने छलहुँ? ओ टका हुनका सभकेँ अपन चितामे लय जाय दियौ ओहि घर सभ पर धिक्कार अछि। हम जा रहल छी... अहाँकेँ घाटा मे धऽ कऽ लच्छा! बच्चा सभक लेल कियो नै अछि। हम जा रहल छी.... लेनदार सभक कारण।" (‘आखरि माटा’, मन्कम्मा थोटा लेबर अड्डा’ सँ’) बसन्त हृदय-स्पन्दनक लय हमर कविता अछि। एकटा धाराक हहाइत पानि अछि। कविता हमर हृदय अछि हमर जीवन-दायिनी ऊर्जा अछि। भीतर सँ घुड़मैत दुःख कविता अछि नोर बनि कनैत सिसकी हमर काव्य-चेतना अछि। थन सँ बहल दूध हमर काव्य-प्रवाह अछि हमर अंगनामे फुइटक फूल हमर काव्य-प्रस्तावना अछि। हमर कविता मकईक बाली पर फुलायल फूल अछि हमर कविता पाकल धानक फसिल अछि। पाँक खेतक सुगन्ध हमर कविता अछि एकटा झरनाक हहाइत पानि हमर कविता अछि। हमरा लेल कविता अछि चार पर लटकैत सजमनिक लत्ती काँटा बला झाँखुड़ पर फुलायल फूल गायक गरदनिमे बान्हल घण्टी कण्ठ सँ मुक्त बहैत धुन। जेना कलात्मक रूप सँ गढल घैल जेना कुशलता सँ आकार देल पनही जेना सुन्दर ढङ्ग सँ बुनल गेल साड़ी हम देखैत छी जेना हम बुनैत छी। हम कवि छी ई धरती हमर अछि। बहैत हवा हमर अछि भोरुकवा हमर अछि। बरखल पानिक ठोप हमर अछि विकसित पुष्प हमर अछि। उड़ैत सुग्गा हमर अछि हेलैत माछ सेहो हमर अछि। हम सभ चीज-बौस्तुमे बहैत छी हम सम्पूर्ण प्रकृतिकेँ काव्यबद्ध करैत छी। हम सम्पूर्ण क्षितिजमे विचरण करैत छी। एकटा कवि देवाल पर बैसल बिलाड़ी नै अछि जे स्वार्थ देखय। ओ अछि जे जातिक कादो बाहर फेकैत अछि वर्ग-भेद काटि फेकैत अछि सत्ताक रस्ता नष्ट करैत अछि वएह असलमे कवि अछि। कविता गरदनिमे पहिरायल माला नै अछि ने कान्ह पर ओढ़ाएल तौनी नहिये माइक सँ निकलल खाली अबाज। सत्य कहू तऽ कविता अछि आकाशमे झण्डाक अहंकारी भऽ लहरायब म्यान सँ बाहर निकलल तलवार ओकर चमकैत तीक्ष्णता भट्टीमे गढ़ल हाँसूक चमक चकमक पाथर सँ छिटकैत चिनगी युद्धमे बहल शोनित झगड़ामे फाटल अंगा। हमर कविता अछि माटि देबाक अबाज नुकायल आक्रोश एकटा भेदल गेल जेलक देबार। ('चेलिमे', 'नदका' सँ) गुजराती खण्ड [गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई द्वारा। हेमांग देसाई (ज. १९७८) गुजराती आ अंग्रेजीमे कार्यरत कवि, कथाकार आ अनुवादक छथि। हुनकर रचना सभ विश्वक विभिन्न पत्र-पत्रिका सभमे प्रकाशित भेल अछि। ओ भारतीय शास्त्रीय संगीतमे प्रशिक्षित छथि।] मूल गुजराती: नरसिंह मेहता (नरसिंह मेहताक गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा।) नरसिंह मेहता: (१५ हम शताब्दी), नरसिंह मेहता गुजरातक सभ सँ प्रिय सन्त-कवि सभमे सँ एक छथि। हुनकर रचना सब गुजरात भरिमे प्रेम आ भक्तिक संग गाओल जाइत छैक। हुनकर 'वैष्णव जन तो...' अन्तर्राष्ट्रीय लोकप्रियता प्राप्त कएलक कारण ई महात्मा गान्धीकेँ विशेष प्रिय छल। हुनकर रचना सब जोशगर, भव्य आ नैतिक गम्भीरता सँ भरल अछि। हुनकर उपलब्धि ई अछि जे ओ जटिल आध्यात्मिक विचार सभकेँ अत्यन्त काव्यात्मक आ सुलभ भाषामे व्यक्त करबाक क्षमता रखैत अछि। हुनकर बादक किछु रचना सब अस्तित्वगत पीड़ा आ कटुता सँ अनुगूँजित अछि। अन्हर-बिहारि उठल (अनुवादकक टिप्पणी: ई कविता गुजरातमे बर्खा गीतक रूपमे बहुत लोकप्रिय अछि। कवितामे गोपी सभक कृष्णक प्रति विरहक चित्रण अछि, जे मथुरा चलि गेल छथि। बर्खा, प्रेम आ शारीरिक मिलनक ऋतु होयबाक कारण ई भावनाक लेल एकटा उत्कृष्ट सन्दर्भ प्रदान करैत अछि।) अन्हर-बिहारि उठल मेघ आच्छादित भेल गोकुलमे मोर पपीहा बाजय एक बेर आबू ने हे मोहन मनभावन श्याम। किएक नै अबैत छी हमरा देखय अहाँकेँ नन्दजीक जीवन सँ बान्हि देब एक बेर आबू ने हे मोहन मनभावन श्याम। अहाँ गोकुलमे गाय-महींस चरौने छलहुँ अहाँ एहन चोर रहलहुँ एक बेर आबू न हे मोहन मनभावन श्याम। अहाँ गरामे कारी ऊनी तौनी लपेटने छलहुँ हे ग्वालक सुन्दर भागिन एक बेर आबू ने हे मोहन मनभावन श्याम। अहाँ व्रजमे मनकेँ मोहै लेल बौसुली बजौने छलहुँ अहाँ गोपी सभक हृदय चोरयने छलहुँ एक बेर आबू ने हे मोहन मनभावन श्याम। नरसिंह मेहताक स्वामी छथि श्याम हुनका हाथमे उठा कऽ रास रचायब एक बेर आबू ने हे मोहन मनभावन श्याम। मूल गुजराती: हेमांग देसाई (हेमांग देसाईक गुजराती कविता, गुजरातीसँ अंग्रेजी अनुवाद हेमांग देसाई द्वारा स्वयं; अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर द्वारा। ) समीकरण दू टा अर्धवृत्त बढ़ि रहल अछि समानान्तर रेलक पटरी सन। नाम-नाम हाथ-हाथ भरिक घासक काछ हुलकि रहल ओकर अवतलतामे। बिन डोरीक धनुष कहि रहल अछि भारी हवाक खिस्सा जे राति भरि उठेने छल बेताल जकाँ पातर पीठ पर आ से मुर्गाक बाँग सँ उड़ि गेल। आ ओतेक वा कनीक बेशी कुबड़ी बुढ़िया तेहन लिबल जे अहाँकेँ हाँसू मोन पाड़ि दैत अछि अपन रेलगाड़ीक प्रथम श्रेणीक कूपा मे स्थिर झुकि क’ बैसल छी अहाँ जे साइडिंग (कात) मे ठेलि देल गेल अछि अहाँ बाट जोहि रहल छी बिना कोनो ओझरीक अपन आँखि सँ कोनो एकटा छोट सन हलचल लेल कमसँ कम एकटा त्वरित चमक लेल। आब, हँ आब ई तँ सुनिश्चित अछि, अवश्यमेव ओतय देखू जा रहल अछि। दूटा ठाढ़ पटरी सभ जे दूटा मेहराबक बीच पसरल अछि जड़ भ' क’ एहि तपइत दुपहरियाक भयंकर शून्यमे आ अहाँ एकटा अद्भुत समीकरण बना रहल छी। घबड़ा कऽ अहाँ सोझे बैसबाक प्रयत्न करैत छी आ ओ हाँसू जे अहाँ बहुत पहिने गीड़ि गेल छलहुँ अहाँक पेट चीरि दैत अछि। स्थिरता कियो निश्चित नै कऽ सकैत अछि कि ओ एतय कतेक काल सँ अछि। ओ एतय आबि गेल छल ओकरा सँ पहिने जे कियो एतय अछि हृष्ट-पुष्ट फेरीबला सस्ता कच्छा आ ट्रेंडी ब्रा बेचयबला नून-भुज्जा आ चना-चबेना भनसाक सिङ्क ब्लोअर खुरचन ब्रुश साबुनक डब्बी आ गिलास। वा ओ मस्सा वाली स्त्री जकर मुँह पर अंगूरक झाबा जकाँ लहसन छैक सभ दिन बेचैत अछि ओही झाबा जकाँ। वा ओहि पुरान नक्शा बेचय बलाक बात करू जकर मुँह पर कनी बेसी झुर्री अछि हुनकर खादी कुर्ता सँ। ओ एतय छल जखन ने तँ फुटपाथ छल ने मस्जिद नहिये रस्ता ने नग्र ने राज्य ने देश। ओ अनादि काल सँ पड़ल अछि फुटपाथक देबाल सँ सटल सभ चीजक जीवित गवाह जे किछु सेहो ओकरा पर लिखल खुरचल लिखल घसल चित्रित कएल वा मूतल गेल अछि। -भारत छोड़ो... तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा... स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ... पाकिस्तान मुर्दाबाद... अल्लाह-ओ -अकबर... गली गली मे नारा है हिन्दुस्तान हमारा है... पानी मांगा तो खीर देंगे कश्मीर मांगा तो चीर देंगे... आई लव मीना... बाजू जँ अहाँ बाजय चाहै छी कऽ लिअ दुनिया मुट्ठी मे जे चाहू भ’ जाय कोका-कोला एन्जॉय ई देबाल नगर निगमक अछि एकरा दकचब अछि अपराध ओ एहि सभ पर सूति रहल अछि। ओकर नीचाँक खाकी माटि रंगक पटिया ओकर आकृति धारण कऽ लेने अछि एकटा देशक प्राकृतिकताक अंत बला नक्शा जे आब नै रहल। ई उपनिवेशोत्तर भीष्म सांघातिक रूप सँ घायल अछि मुदा अपन मृत्युक समय निर्धारित कऽ लेने अछि अपन निर्जन'नो-मैन्स लैंड' पर नीकसँ जइ बेसी नीक नै भऽ सकैत अछि। ई अछि ओकर गहन चेतनाक आसन ओहि बर्ख सभक जे ओ समय-यन्त्र सँ चोरि कऽ अपन बना लेने अछि जाहि सँ कोनो दोसर आबय बला सहस्राब्दीमे सेहो ओकरा फेर नै जी सकय। जानबा लेल जे ओ की जानैत छल अनुभव करबा लेल जे ओ की अनुभव करैत छल। ओ एक्के गलती दोबारा नै करत नै उतरत अपन अधिकार-सिंहासन सँ भाय-भातिज वा पोता-पोती सभक लेल एकी खुनीमा बेमात्रेय धन्धा फेर नै। तेँ काटि दियौ ओहि पटियाकेँ समयक 'टाइम -कैप्सूल' संग गाड़ि दियौ ओकरा ओकर स्मृति-शैया पर। ओकरा अन्तिम साँस लेबाक अनुमति दियौ ई कहि जे ओकर जमीन फेर खण्ड-खण्ड नै हएत। युद्ध -गीत सभ सुन्न कऽ देल रातिक मृत-मध्यमे एकटा अनिद्र कुकुर भुकैत अछि हमर शयन-कक्षक कातमे चूर-चूर कऽ दैत छैक खोलमे सुरक्षित निद्राक तासक घर। जकर भीतर हम पूरा दिनक घाम चुएलाक बाद प्रयत्न सँ नुकाय चाहैत रही। सभ उपेक्षित कुकुड़ सँ तिरस्कृत आ अतड़ी धरि सड़ल-गलल पूरापूरी कुकुरक गति केँ प्राप्त आ आब आंशिक रूप सँ भगवानक शरण मे जेबा पर बिर्त्त मुदा ओ एखनो भुकैत अछि हमर संभोग-झरोखाक ठीक नीचाँ ठाढ़ भ' क' ओ हमर जासूसी करैत अछि, हमर बात चोरी-चोरी सुनैत अछि, हमरा तंग करैत अछि, खोंचारैत अछि, हमर उपहास उड़बैत अछि, गारि दैत अछि, हमरा निस्तेज क' दैत अछि उकसाबैत अछि, हमरा मजबूर करैत अछि नोर मे जोतैत अछि, माटि दैत अछि एकटा अंतिम महायुद्धक लेल। हमरा इच्छा होइत अछि कि 'शब्दभेदी बाण' चला दी मुदा हम 'एकलव्य' तँ छी नै यद्यपि हम अपन दहिना हाथक औंठा बहुत पहिनहि गमा देने छी। हम अर्जुन रहलहुँ जीवन भरि सभक प्रिय सभकेँ नीक लागय बला जकर बाण बेधि सकैत छल आकाशकेँ मुदा जकरा किछु दिन लेल नपुंसक बनि रहय पड़ल छल। ओहो बचि नै सकल आ ओ पिपनी फड़फड़ाइते मे ओकरा गसिया कऽ पकड़ि लेलक हुनका हताश भऽ अपन हथियार समर्पण करा देलक। आ शिखण्डीक ढालक पाछू सँ भीष्म पर बाण चला देलक जे द्रोणकेँ नै मारि सकल से युधिष्ठिरकेँ नैतिक पतन देलक- नरो वा कुञ्जरो वा। जे कर्णकेँ तखन मारलक जखन ओ विचलित आ निहत्थ छल। जे स्वयं प्रत्यक्ष स्वर्ग नै जा सकल बहुत कमजोर आ असहाय। मुदा ओ कुकुर तँ सहजे चलि गेल की ई वएह साहसी कुकुर भ’ सकैए जे हमर एतेक कमजोरी पर हमरा पर तमसाइत अछि? वा ओ कुकुर, जेकर भुकैत मुँह केँ एकलव्य अपन बाण सँ गाँथि देने छल ओकरा देखिते हमर अंग-अंग जड़ भ’ गेल? शाइत एहि दुआरे कि हम अपन मशहरी मे घुसल मच्छर केँ मारय लेल ताली नहि बजा सकैत छी अपन कनियाँ केँ जागि जेबाक डर सँ कि कतौ ओ हमरा, अहाँ बुझिते छी, बालगोविन नहि बुझि लेथि। हनुमान आ श्वान फुलल मुँहबला हनुमान, हाथ-पएर पसरल सिन्दूर सँ लथपथ एकटा ओहन मंदिर मे जड़ल, जे कोढ़िया सन मचोड़ल-घोकचल बैसल अछि, ओहि जरैत भिखारिक फूटपाथ पर अपन मर्द छाती केँ फाड़ैत, जेना जनताक कोनो फरमाइश होइक खूनक कमी सँ पीयर पड़ल सिया-राम, सिनेमाक चमकक चस्का लागल नव-विवाहित जोड़ी सन ओहि विशाल देहक मानुख-रक्तक बाढ़ि सन लाल पाथर मे रुसल ठाढ़ छथि। ओ सातो चिरंजीवी मे सँ एक छथि हनुमानजी ओहि अटल आ अमर उम्मीदक सन छथि, जेना कोनो कट्टर श्रद्धालु अपन मुक्ति लेल दैवी चमत्कारक बाट जोहैत अछि। ओना ओ कहियो नहि मरलाह सात जुग सँ जीवित कखनो सातो घातक पाप मे नहि फँसलाह कखनो तामस नहि कयलनि जँ केओ भीम होइक वा रावण हुनकर नांगरि केँ छुबय कऽ कोशिश कयलक। कखनो घमण्ड नहि कयलाह, चाहे कतबो विपत्ति एलैन अपन पुरुषार्थक अनुरूप सूर्य केँ गीड़ि जायब, हिमालय केँ उठा लेब एतेक संयमी जे कन्द-मूल आ फलक अतिरिक्त किछु नहि खैलाह एतेक फुर्तिगर जे एकहि साँस मे सातो समुद्र पार क’ गेलाह एतेक काम-रहित जे एखन धरि कोनो नारी-मोह सँ दूर छथि कियाक तँ ओ ब्रह्मचारी छथि जे कहियो वीर्यक एको बूंद नहि खसेलनि जे पौरुष सँ भरल छथि किएक तँ ओ कहियो पुनर्जन्मक गर्भ-सुरक्षा मे नहि जाय चाहलनि नहिये ओहि सब डेरबुक स्वाभावबला, नांगरि टांगक बीचमे लऽ भागय बला सुखायल कुकुर सब सन नहि कंकाल सन यमराजक मुँह वाला 'डैचशंड'* सन जे अपन हाँसू सन टेढ़ नांगरिकेँ सोझ क’ अपन टाँगक बीच एतेक चतुराई सँ नुका क’ भागैत अछि जे भास होइत अछि जेना कोनो लड़ाकू 'डोबरमैन'** हुअय एहन पाथर सँ डेरायल जे एखन धरि मारल नहि गेल अछि सभ घातक राति मे मादा कुकुड़क योनि मे शरण ताकैत अपन वंश-वृद्धिबला लैंगिकता केँ खतरा मे दैत आ जे एखन धरि हुनकर मंदिरक देबाल पर पेशाबक धार सँ चित्रकारी करैत अछि। “मंदिरक गर्भगृह मे महिलाक प्रवेश वर्जित अछि” आ “जूता-चप्पल बाहर खोलू।” आ जे कुकुर सब सुँघैत अछि सभ खण्डहर भेल गुम्बज आ चूर-चूर भेल घर केँ ई निश्चित करबाक लेल कि ‘राम’ लिखल पाथर सभ सँ ओही बासी पेशाबक गन्ध अबैत छैक वा नहि। *ई कुकुरक एकटा खास प्रजाति अछि जेकर शरीर लम्बा आ पैर छोट होइत छैक। कवि एहि प्रजातिक नाम लैत ओहि शहरी कुकुर सभक उपहास क’ रहल छथि जे देखय मे तँ अजीब छथि, मुदा स्वभाव सँ कायर छथि। **कुकुरक एकटा खास प्रजाति अछि; कवि कहैत छथि जे ओहि फूटपाथक कायर आ "डैचशंड" (छोट पैरबला) कुकुर सब जखन अपन नांगरि टाँगक बीच नुका क’ भागैत अछि, तँ ओ एतेक चतुराई सँ भागैत अछि जे देखय मे लागय कि ओ कोनो बहादुर "डोबरमैन" हुअय। समय केर कड़ाह अहाँ कतेक बेर आइ अपन ओहि टूटि क’ अलग भेल केश केँ टकटकी लगा क’ देखलहुँ जे एतेक काल सँ अहाँक कानक निचुलका नरम भाग सँ असहाय भऽ सटय चाहि रहल छल आ आब आरो सहन नहि कऽ सकबाक कारण अहाँक कान्हक गहींर खाधि मे हताशा सँ खसि पड़ल? काल्हि अहाँ कतेक बेर एकरा कनछिया क’ देखलहुँ? आ काल्हि कते बेर अहाँ एकरा ताकब? अहाँ अपन एहि सनक मे कते बेर लागल रहलहुँ, जँ ओहि सब समय केँ जोड़ल जाय तँ समयक एकटा विशाल कड़ाह भरि जायत आ जँ मानि लिअ अहाँ ओहि मे कूदि जायब, तँ अहाँ देखब: अहाँक पहिल दर्जाक 'उभयलिंगी' भेनाइ दोसर दर्जाक 'समलिंगी' भेनाइ आ तेसर दर्जाक 'विषमलिंगी' भेनाइ आकाश केँ चीरि देबाक हूबा राखयबला जिद्दी अशोकक गाछ शीर्षासन करैत बादुर, जे जुग-जुग सँ अइ उथल-पुथल दुनिया केँ पलटबाक प्रयत्न क’ रहल अछि अहाँक मुँहक थूक मे हेलैत विद्रोही माछ सभ आ कोनो ओहन माछक थूक मे हेलैत स्वयं अहाँ! बैसकीक देबाल पर नारिकेर तेलक जुगौं पुरान परत आ ओहि मे जीवश्म बनि गेल अहाँक पूर्वजक खसल केश छतक दरारि मे मुँह नुकेने नग्न कंकाल हड्डी सभ आ ओकर पीठ चाटैत 'लेर' चुबैत मकरी सभ माँक ओही फाटल एड़ी, जे 'भाखरी'* बेलि रहल छथि अहाँक कनियाँक कोमल स्तन पर अहाँक दाँतक टेढ़-मेढ़ चेन्ह कोनो मृत उज्जर 'अश्वमेध' घोड़ाक लहू सँ लथपथ लाश असंख्य बाँझ सुन्दरी सभक कात मे बैसल आ हुनका सभक कोखि मे असंख्य मृत-शिशु क जमल भ्रम भस्म भ’ गेल जिनगीक छाउर, जे गुम्बज पर मोट परत बनि क’ जमि गेल अछि ओहि भिजल-लचकैत खाट पर कुहरैत एकटा विशाल शून्य ओहि गीत सभक विलखैत चीत्कार जे रचित भेलाक बाद अपमानित भ’ गेल अपन पैखाना खाइत कामुक गदहा सभ आ जरल छाल सन चमकैत कादो मे अपन थूथुन घुसेने फोँफ काटैत सुग्गर सभ... आ एहि सबहक बीच मे अहाँ समय केर 'करघा' पर कोनो अनिष्टकारी चौबटिया मे कसि क’ बुनल गेल अपन फुटल अएना क’ आगू ठाढ़ अपन कपार पर उगैत 'सिंग' केँ टकटकी लगा क’ देखैत आ अहाँक झुर्रीक घन खोता मे ओहि हेरायल बाँझ अंडा सभ केँ जे कखनो फूटि नहि सकल मनुखक पशुकरण आ पक्षीकरणक एकटा शास्त्रीय उदाहरण। मुदा अहाँ गणित मे कमजोर छलहुँ तँ अहाँ ई कष्ट नहि करब आ अहाँक 'कैलकुलेटर' एतेक तेज अछि कि जोड़क एहन साधारण सवाल लेल समय नहि देत। *गुजराती भोजनक प्रकार। मूल गुजराती: राजेन्द्र पटेल (राजेन्द्र पटेलक गुजराती कविता सभ; गुजराती सँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर) राजेन्द्र पटेलक जन्म २८ अगस्त, १९५८ कऽ भेल। एकटा फार्मास्युटिकल कम्पनी चलबैत विज्ञान आ प्रबन्धनक छात्र भेलाक बादो, ओ तर्कसङ्गत रूप सँ कवितामे कोनो ठप्पा (लेबल) लगा कऽ अन्तर करबाक विरोध करैत छथि। हुनकर कविता आ कथाक अनेक सङ्ग्रह प्रकाशित छनि। शीर्षकहीन हमरा किएक लगैत अछि हाथ रहितो बिना डारिक ठूँठ जकाँ एहि हाथ सभक बादो? दूर-दूर धरि पसरल जीवित साँपक खोजमे ई हाथ सब एक-दोसर सँ टकरा गेल खाली नख सभक विशाल पसार रहि गेल। बाबाक लाठी पकड़बा सँ बसक हैण्डिल पकड़बा धरि मुट्ठीमे खाली मरल शून्य भेटल। एहि आशामे कि ई पसरल हाथ सब आकाशक दिशामे घूमि जाएत सम्पूर्ण खेत रोमाञ्चित भऽ उठल। धरतीक सभ कण खेत सँ सटि गेल हाथ सभ जकाँ। सभटा दरारि तरहत्थीक भाग्य-रेखा। रेखा सब नापि सकैत अछि खाली हाथक लम्बाइ ओकर जड़ि नै। हमर ई बुझबा सँ पहिने हाथ सब जड़ि पकड़ि लेलक सियाही सँ भरल उज्जर पसारमे नव-उगल आँखि सँ देखय लागल नव-उगल पाँखि पर उड़य लागल ओहि धूसर आकाशक पार। आब दिमागक सभ कोशिका मे हाथ सब दिन-राति ठाढ़ रहैत अछि गहीर सँ गहीर जड़ि पकड़ैत। अमर जालक सपना जरैत मशाल सब सेहो आब जकड़ल अछि मकड़ीक जाला सँ आ असहज अन्हार उग्र लौ नीचाँ उमेर भेने मांसल भऽ गेल कोमल माटि सँ कोमल भऽ कोड़ियुन* पघलि गेल तरकारीक कियारीमे घासक एकटा पातो नै। ओही पुरान प्रकाश सँ अकच्छ भेल आत्मघाती फतिङ्गा सब लौ सँ दूरी बना कऽ राखैत अछि। अमर जालक सपनामे भटकैत ओ अन्हारक कारी रस चूसैत छथि प्रकाश बुझि कऽ। व्याकुल मशाल बुझि जयबाक निर्णय कऽ लेने अछि। हाथक सभटा नस आ नखक पूर्ण पसार एकटा आर राति लेल जरैत रहबाक आग्रह करैत छैक। चोन्हिया दैत भोरक सुरुज मशाल सँ तर्क करैत अछि: "चीज सब सदा बिना कारण-अकारण होइत रहैत छैक।" एहि प्रकारेँ मेहनती मकड़ी जाला बुनैत रहैत अछि मशालक ज्वाला क्षीण होइत दूर फड़फड़बैत फतिङ्गा मशाल बचाबय लेल झपट्टा मारैत अछि। फतिङ्गाक आँखि फतिङ्गाक पाँखि फतिङ्गाक प्रकाश मशालकेँ प्रकाशित करैत छैक बेर-बेर। शब्दावली: कोड़ियुन (कोडियुँ): एकटा छोट माटिक बासन जाहिमे तेल आ बाती रहैत छैक। गर्दा हम जतेको साफ करी हमर कोठली गर्दा सँ भरि जाइत अछि। ओ मोट परतमे जमि जाइत अछि- आलमारीक दरारि सँ किताब-कपड़ा पर एतय धरि कि घुमैत पङ्खा पर सेहो। जँ हम बाहर छी ओ बन्द घरक भीतर पसरि जाइत अछि पाछू छोड़ल स्पर्शक रखबारि करैत अछि फ्रेममे बन्द मुँहकेँ झलफला दैत अछि। सपनामे सेहो आँखि गर्दा सँ भरैत देखाइत छैक जखन हम कण सभक बीचक फाँक सँ सादा दिन देखबाक प्रयास करैत छी। पाँखिहीन क्षण एकर नीचाँ दबल हमरा दमकैत रौद जकाँ आनन्दित करैत अछि। गर्दा धरती क वरदान अछि। बाबा सदिखन जोर दैत छलाह: घरमे प्रवेश करबा सँ पहिने जूता धो लिअ। मुदा ओ दिन भरि केश सभमे पैसि जाइत अछि कखनहुँ घाम सँ सनि कऽ आस्ते सँ अहाँक रङ्ग बदलि दैत अछि। हमर गहीर चिन्ताक बादो रूमाल गन्दा रहैत अछि। गर्दा समयक पदचिह्न अछि। गर्दा हमर डेग सभक सङ्गे तालमेल बैसाबैत अछि आ अतीत सुरक्षित राखैत अछि। दादीक हाथ मोन पाड़ैत अछि बाबाक छाउरमे मिलल आ तखन सँ बाबाक आभास कराबैत अछि। अवज्ञाकारी अरूप घूमैत रहैत अछि। जन्म सँ पहिने आ मृत्युक बादो ई चुपचाप ककरो प्रतीक्षा करैत अछि। ई हमर गहीर अटल जड़ि अछि हृदय सँ बेसी लग शोनित-मांस सँ सेहो। समयक कोमल डेगक ध्वनि मात्र ओ चलि गेल आ आगाँ बढ़ल ई हमरा जगा कऽ राखैत अछि। गर्दा अछि हमर 'गर्दा प्रवेश-द्वार'। सेहो सत्य नै झरल पात सब सँ नै होइत अछि गाछक अन्त आ ने किछु समाप्त होइत अछि जँ झरल पात सभमे आगि लगा देल जाय। एकटा भूमिगत दुनिया अदृश्य तरेगण सन नुकायल ठीक धुआँमे आकार लैत अछि। ई बहुत किछु अछि मुदा सदा नै वा ई एकटा असगर ढोल बनि जाइत अछि गाढ़ होइत राति मे बहैत समयकेँ अबाज दऽ कऽ। तैयो किछु हिलैत नै। बीच-बीचमे खण्डहर भवनमे भयावह घण्टा बजैत अछि। समुद्री तट पर परित्यक्त शङ्ख लगातार चीत्कार फूँकैत अछि जे किंशाइत बहिरा कान पर पड़ैत छैक। तैयो ई कहब जे सत्ते किछु नै होइत अछि बस एकटा ढोङ्ग हएत। एतबो बुझला पर कि गाछक चोटी एकटक देखबाक चाह राखैत अछि हुनकर अनन्त हृदयक हृदयमे आकाश केबल आकाश रहैत अछि जड़ि केबल जड़ि। तैयो कखनहुँ गाछ आकाशमे बदलि जाइत अछि जड़ि सेहो। सोनहुल सपना सँ उदार भऽ कऽ अपन हरियरी हेरा देने अछि आ सब किछु सड़ल धरती तर दबल अछि। कोनो बीआ नै अङ्कुरित होइत अछि। एहि लेल हम बेकल होइत छी समयक आँखि कऽ एक पल लेल जे कहियो खुलला पर बन्द नै होइत अछि। बादोमे एकटा खिड़की नै खुजैत अछि कनियो चरमरेनाइयो नै सुनाइत अछि दरारि सँ चाँदनी नै हुलकी दैत अछि। हम अन्हारक सयौ हाथ सँ वर्तमानक वस्त्र साफ करैत छी। एकटा चिनगी सेहो नै चमकैत अछि। घोर अन्हार राति मे कतहु एकटा भोथिआएल दीपक नै देखा पड़ैत अछि। सेहो सत्य नै। हमरा अनचोक्के किएक लगैत अछि मायक थरथराइत हाथ जखन ओ दीपक जरबैत छलीह हमर अपन हाथ जकाँ? एकटा जोरसँ सलाइक नोछार अति ज्वलनशील सतह पर किछु किएक नै जरबैत छैक? जखन एहन पीड़ा साँस लैत रोम-कूप सभमे अजीब बीआ बाउग कऽ देलक जे अंकुरा गेल हम अनुभव कएलहुँ हम एकटा मनुष्य छी दू आँखि-कान सहित एकटा नाक आ मुँह सहित... तैयो ई कहब जे मुँह सदिखन सपाट रहैत अछि एकदम झूठ हएत। पूर्ण चन्द्रमा बेशीकाल हमर मुखौटा बनि जाइत अछि आ आँखि जागैत रहैत अछि तरेगण जकाँ टिमटिमाइत अछि। आ असलमे पूरा निहारिका सँ कियो हमर नाम नै पुकारैत अछि सेहो सत्य नै। हम छी छलहुँ आ रहब। हम छी मुदा अखनो अस्तित्व नै अछि। जीवन चलैत छैक खेलाऊ साँस लिअ--छोड़ू बूढ़ भऽ जाऊ नख-केश बढ़य चश्माक नम्बर बढ़य वा दाँत बर्ख आ कोशिका गमाऊ। तैयो किछु घटैत नै ठीक तेहने जेना किछु बढ़ैत नै। पदार्थ आ स्थान परस्पर लगातार एक-दोसरमे रूपान्तरित होइत रहैत अछि। एहि लेल हम छी जे हम छलहुँ। किंशाइत हम छी जे हम कहियो नै छलहुँ वा सेहो सत्य नै। मूल गुजराती: पीयूष ठक्कर (पीयूष ठक्करक गुजराती कविता सभ; गुजराती सँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर) पीयूष ठक्करक जन्म १९७९ मे भेल। हुनकर कविताक पहिल पुस्तक साहित्य अकादमी, दिल्ली सँ प्रकाशित भेल। अपन गुरु, अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार आ गुजराती आधुनिकताक अग्रणी कवि गुलाम मोहम्मद शेख जकाँ, ओ एकटा कवि-चित्रकार छथि आ वडोदराक एम.एस. विश्वविद्यालयक ललित कला संकायमे पढ़बैत छथि। ओ एकटा प्रकाशन गृह, 'बिजल प्रकाशन' सेहो चलबैत छथि। ओ जिनगीक वास्तविकता आ मनोदशा सभकेँ ओकर दृश्य, स्पर्श्य आ ध्वन्यात्मक उत्पत्तिमे जाँचैत छथि। साँझ साँझ होइत पाथरक जाड़ भरल आहि आकाशकेँ घेरि लेने अछि। आब कनी कालमे आकाश ठसा-ठस भऽ जायत एहि पाथर सभक छाह सँ। पाथर सभकेँ आकाश भेटि जायत छाहकेँ प्रकाशित करू। शरीर निद्रामे डूमि जाय हृदय विरहमे ठीक तेहने जेना देवता सभकेँ मनुक्ख भेटल। एकटा पुरान घर अछि देबाल सब एकटा द्वार दीप केर स्थान एकटा देव एकटा देवी एकटा चिड़ैक खोंता दिन-राति साँझ अन्हार गुज्ज आ इजोत से एकटा पुरान घर अछि छै ने? अन्हारक तीनटा दस्तावेज १. स्थिर हवा पसरल अछि इजोत नै पिघलैत छैक। छोट -छोट डॆग एम्हर-ओम्हर अकानैत छी मुदा कियो नै अबैत अछि। हमर छाह अकाश-पतालक दूरी नापैत अछि। हम ओकरा आस्ते सँ छुबैत छी घोड़ाक ठरल साँस, मुदा ई जरा दैत अछि। इजोतक उड़ानक बाद हमर आँखिमे वैराग्य बसल अछि। अपन आङ्गुर डुबा कऽ साफ आकाशमे हम लिखैत छी अन्हारक नाम। २. हम अन्हारक लहाश पर हथोरिया दैत छी एक-दोसर पर थकिआयल जेना कारी नर्क बनैत हुअय दुर्गन्ध टघरैत स्पञ्ज जकाँ नरम कठोर बर्फ सन तबैत। राति पर राति हम हथोरिया दैत रहैत छी बिनु रुकने। किंशाइत कतहु कोनो जादू भेटि जाय आ जँ ई सब आगि धधड़ा बनि जाय तऽ हम देखि पायब ओइ भेषधारी जासूसकेँ ओइ जादूगरकेँ। ३. जँ इजोतक एकटा छोट चिनगी सेहो खसि गेल रहितय तऽ कोलाहल मचि जाइत। एतेक सघन छल अन्हार जे डर सँ हम बड़बड़ा उठलहुँ "की अर्थ अछि अर्धरात्रिमे घबड़ा कऽ जागबाक धत्! डर लगबाक आ अपनेकेँ बेर-बेर हथोरिया देबाक?" ओहि अन्हारमे हमर अबाज गूँजबाक लेल कनियो फोकला नै भेल छल आ हमर अबाज एतेक तमसायल छल जे अन्हारक तौनी चीरि सकैत छल। मुदा भगवान जानथि किएक ओहि सघन अन्हारक बदमाशी एतेक प्रभावी छल हम अपनासँ बात करैत रहलहुँ आ अपनाकेँ सुनैत रहलहुँ। एतेक अन्हार हम हटौलहुँ तैयो नै जानि किएक किछु नै भेल, सत्ते । सन्दर्भ: कविता 'साँझ' आ 'एकटा पुरान घर'- 'वही' खण्ड ९ -१०, सितम्बर -जनवरी, २००२ -०३ मे प्रकाशित। कविता 'अन्हारक तीनटा दस्तावेज'- 'तखनो' अङ्क ८ -९, जून -अगस्त, २००७ मे प्रकाशित। मूल गुजराती: पन्ना त्रिवेदी (पन्ना त्रिवेदीक कविता सभ; गुजराती सँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर) राजस्व हे परदेसी! हमरा एहन कोनो ठाम देखा देब जँ अछि कत्तौ जतय प्रकाश नै अछि, जतय स्पञ्ज सन नरम बिछौन नै अछि, जतय छाह नै अछि, जतय नै अछि मौनक चूरमचूर भेल खण्ड, फाटल हृदयक प्रतिध्वनि, ने ध्वनिक आङ्गुरक स्पर्श। हमरा एहन कोनो ठाम देखा देब जँ अछि कत्तौ हे परदेसी! जतय कियो साँसक राजस्व नै उगाही करैत अछि। ('वही', खण्ड १५, सितम्बर, २००४ मे प्रकाशित) चन्द्रमा-रोटी पूर्णिमाक चन्द्रमाक दृश्य तरेगण-जड़ित आकाश सँ लटकल, मोन पाड़ि दैत अछि एकटा गरीब बच्चाकेँ अपन बाबाक गप: "गोल होइत छैक रोटीक आकृति, पूरा-पूरी पूर्णिमाक चन्द्रमा सन!" आ हुनकर भूखल आँखि क्षण भरि लेल चमकि उठैत अछि, फेर निराशा मे जेना मिझा जाइत अछि। गरीबक रोटी एकदम्म चन्द्रमा सन अछि, जखन भूख पूर्णिमाक चन्द्रमा सन लागय लगैत छैक, तऽ रोटी घटैत जाइत छैक चन्द्रमा सन, अमावस्या दिस बढ़ैत। ('वही', खण्ड ९ -१०, सितम्बर -जनवरी, २००२ -०३ मे प्रकाशित) शब्दावली: रोटी: हाथ सँ थापि वा बेलि कऽ बनाओल भारतीय आटाक पकवान, जकरा बेसीकाल सोहारी कहल जाइत अछि। अनुपस्थिति पैघ पोथीमे एकटा छोट मुद्रण-त्रुटि जकाँ हम अपनाकेँ हेरा देने छी सुन्न गली सभमे, बाहर भीड़-भाड़ बला बजार सभमे, भीतरमे उठाओल ऊँच-ऊँच देबाल सभक पाछाँ। हँ! तखन हम जमि जाइत छी अलकतरा बला पक्क्का-सड़क सभ पर, जे कहियो कत्तौ नै पहुँचाबैत छैक। आशा करैत जे हम अपनाकेँ पाबि जायब वापसी कऽ रस्तामे। तखन हमरा लगैत अछि हम अवश्य पाबि जायब अपनाकेँ अपन मृत्युक बाद, ओना मात्र क्षण भरि लेल। ('तदर्थ्य', खण्ड ६, २००४ मे प्रकाशित) मूल गुजराती: बाबू सुथार (गुजराती सँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर) बाबू के. सुथार (१९५५) गुजरातक खेड़ा जिलाक भरोड़ी गाममे जन्मल छलाह। ओ पेन्सिल्भेनिया विश्वविद्यालय सँ डॉक्टरेट आ वडोदराक एम.एस. विश्वविद्यालय सँ भाषाविज्ञान तथा गुजरातीमे एम.ए. कएने छथि। हुनकर पाँच टा उपन्यास आ चारि टा कविता संग्रह प्रकाशित छनि। ओ अमेरिका सँ "संधि" नामक द्विभाषी पत्रिकाक सम्पादन करैत छथि। घर-सँ-दूरीक पीड़ा १ पहिल बरखाक सुगन्धि आ हम आराम सँ बैसि जाइत छी आ एक दोसरामे पसरि जाइत छी। फूही सँ छिद्रित बलुआही माटि भऽ गेल अछि सत्ते छलनी। गुमारसँ ताजा-ताजी भेल बड़बड़ा कऽ निकलल अछि चट्टानक चाम पर। आब देरी नै लागत बरखाक धार बहि पड़त खपड़ाक छाड़ल घरसँ चुअत धारसँ सँ झझायत किशोर बाछा सब कूदत घरक छारल खपड़ा दिस। सभ गलीमे बड़द सब पानि ऊघत सोलह टा तरिला गरदनिमे बान्हल। सभ घरमे बाँस सब अक्षौं भऽ नहा लेत। देबाल सब पर गाछक ठूठ पर स्मारक-पाथर सब पर बहैत पानि उझलि देने रहत भगवानक पूर्वज सभक हस्ताक्षर। तखन बरखा ठाढ़ भऽ जायत चमकैत अकाश फहरा जायत मायक नरम तरबा जकाँ। सुरुजक डेग चलत ठूठ गाछ सब पर डारि सब पर पात सब पर पात सब पर। सभ घरक तोडलो पर बैसि कऽ मोर सब गाबि उठत। मोन मोहय वाली नव-वधू जकाँ मादा मोर सब माथ पर पनिहार-घैला धरि थिरकि-थिरकि बाहर जायत गामक गली सँ पानि भरबा लेल। नंगटे छोट तालमे बदलि गेल वैतरणी डुमा देने रहत काँट बला नागफनीक पात सब। एक सङ्गे जीव आ शिव मनाओत रहत अठम आ अगियारस। चन्द्रमा उगत कीड़ाक पातर पीठ पर आ केंचुल सब बाहर आबि जायत परिपूर्ण परिधान आ राजसी मुकुटमे। सत्ते आइ किछु अनिष्ट होइ बला अछि हमर आइ पहिल बरखाक सुगन्धि आ हम आराम सँ बैसि जाइत छी आ एक दोसरमे पसरि जाइत छी। शब्दावली: तोडलो: घरक बाहरी देबालमे ठोकल लकड़ीक खुट्टी (चिड़ै सभक बैसबा लेल)। अठम: चान्द्र पक्षक आठम दिन। अगियारस: एकादशी। तरिला: गाड़ी खैंचय बला अतिरिक्त बड़दक गरदनि पर राखल लकड़ीक उपकरण। २. अनचोक्के पएर तरक पक्की सड़क बनि गेल गर्दा-भरल एकपेरिया जे कटही-गाड़ीक चाक सँ कटल अछि। दुनू कात पंक्तिबद्ध विशाल नागफेनी सब आवळ बबूड़क गाछ आकडिया पुरवाडिया आ दोडी। रेत पर सर्प-रेखाक सर्पिल निशान सब। ओहि ठाम एकटा कीड़ी हँसैत-हँसैत भागि जाइत अछि हम पुछैत छी: "श्री कीड़ी-जी अहाँ कतय जा रहल छी?" "महादेव मन्दिर" ओ जवाब दैत अछि। टिकली सब मँड़राय रहल अछि फूल-पात पर। ठीक ओहि समय एकटा घुणी जाइत अछि उघैत 'माता जमजार' क पहाड़ अपन पीठ पर। रामदे-वीरामदे खेलाइत छथि गेदीदाडो पुरवाडिया पात पर। हनुमानजीक आँखि खुजैत अछि आकाडोक पात पर आ बन्द होइत अछि। तुरत्ते हमर नजरि पड़ैत अछि एकटा लाल फल पर लटकल विशाल नागफेनी सँ। सौंफक सुगन्धि चीरैत खेत सँ बहि अबैत हम आस्ते सँ फल तोड़ि लैत छी। ओकर खोंइचा सँ काँट निकालैत छी खोंइचा उतारैत छी। मुश्किल सँ हम ओकरा मुँहमे रखिते छी कि किछु गड़बड़ाय गेल। माय-बाबाक आङ्गुर सब गहूम-धानक बाली सब आ हमर मोबाइल फोन पर अक्षर सब ओझरा गेल। एकटा मेघ हेलैत आयल आ ऐंठि कऽ चलि गेल जोरसँ धक्का दैत। आ ओकरा सङ्गे हम तड़पि कऽ गेलहुँ वापस पक्की सड़क सब पर अपन छाहमे बेजान बहैत जेना कटल डारि बहैत छैक बाढ़िक पानिमे। शब्दावली: आवल: एक प्रकारक गाछ, जकरा 'टैनर्स कैसिया' कहल जाइत अछि। ई एकटा पीयर फूल बला झाँखुर थिक। एकर छालक उपयोग चाम केँ पकेबा लेल कएल जाइत अछि, तइ लेल एकरा अंग्रेजी मे 'टैनर्स कैसिया' कहल जाइत अछि। आयुर्वेद मे एकर उपयोग मधुमेह आ चर्म रोगक इलाज मे सेहो होइत अछि। अकाड़िया: 'आकड़ो'क बहुवचन; एक प्रकारक झारी, जकरा 'आक' कहल जाइत अछि। घुनी: एकटा आन्हर सरिसृप वा दू मुँह बला साँप। गेड़ीदाड़ो: लाठी आ गेंदसँ खेलायल जाय बला एकटा स्थानीय खेल। पुवाड़िया: 'पुवाड़' क बहुवचन; वर्षा ऋतु मे पाओल जाय बला एकटा स्थानीय गाछ। डोडी: बाड़ीमे पाओल जाए बला एकटा लत्ती; जकरा 'लेप्टाडेनिया रेटिकुलाटा' कहल जाइत अछि। रामदेविरामदे: दू भाए, रामदेव आ विरामदेव, जिनका स्थानीय लोक संतक रूप मे पूजित करैत छथि। सप्तर्षि: सात ताराक समूह (नक्षत्र) जे सात ऋषि क प्रतिनिधित्व करैत अछि- मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु आ वशिष्ठ। जमजार: स्थानीय लोकगाथाक अनुसार, 'जमजार' एक देवी छथि, जे दोसर देवी 'कलेश्वरी' क बहिन छथि। कलेश्वरीक मंदिर गुजरातक लुनावाड़ा लग अछि। कलेश्वरी (जिनका १६ टा सन्तान छलनि) अपन सब बच्चा केँ अपन शरीर पर राखैत छलीह। जखने ओ १६म बच्चा केँ जन्म देलनि, तँ हुनकर शरीर पर कोनो जगह नहि बचल। किएक तँ जमजार निःसंतान छलीह, ओ ओहि बच्चा केँ मांगलखिन मुदा कलेश्वरी मना कऽ देलखिन आ ओहि बच्चा केँ अपन नाक पर राखि लेलखिन। ई जमजार केँ खराप लगलनि आ ओ कविक गाम लग एकटा पहाड़ पर आबि गेलीह, जे आब 'जमजार पहाड़'क नामसँ प्रसिद्ध अछि। ३. खिड़कीक कातमे बैसि एकटा टूटल 'कप-प्लेट' लय हम बाहर देखैत छी: एकदम शून्य जे हमर हाड़-मांसक- शोनित देहमे बहि रहल अछि। चन्द्रमा लटकल अछि अकाशमे तरेगण सब मरल कीड़ा जकाँ। ओकर पातर-पातर मोंछ हवामे फहरा रहल छैक। सात टा लहाश हमर पछिला सात जन्मक हेलि रहल अछि हमर आकाशगङ्गाक दूधमे। हमरा सँ पैघ एकटा कीड़ा छटपटा रहल अछि बाहर आबय लेल हमर नाभि सँ। हम पाछू हटि कऽ बैसि जाइत छी आ गहिंकी नजरि सँ देखैत छी एकटा खेल: हमर भीतर आ बाहर। एकटा हाथी अपन सूँढ़मे कमल लेने डूमि जाइत अछि एकटा डबरामे। एकटा बाज ऊँच आकाशमे एकटा चट्टान, जे अछि खोखरल। एकटा घाऽ ओकर पीठ पर सवारी केने अन्तहीन शून्य पैसे रहल अछि हमर भीतर आ फेर बहरा रहल अछि। गुजराती दलित कविता (गुजराती सँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई; अंग्रेजी सँ मैथिली: गजेन्द्र ठाकुर) अनीश गारंगे पोस्टर ई खोखरल मुँह बला पोस्टर सब हमर ऐना जकाँ अछि। देबाल पर गोंदक फेन उधिया रहल अछि। सिनेमाक गुदगुदी करय बला बैनर विज्ञापन सभ सँ मात्र एकटा मुँह अभरि अबैत अछि। 'खमण-खाड़ी'* सँ सनल मुँह हमर मुँह अछि। शोक सभाक समाचार हमर मृत्युक घोषणा करैत अछि। अहाँ 'पाइ दिअ आ प्रयोग करू' शौचालय सभमे हमरा पर लगही करैत छी। रैली सभमे हमर मुँह पर रोशनाइ लगाओल जाइत अछि। हम बेकार कागजक गेन्द छी। हम रेलवे स्टेशनक देबाल पर साटल छी रिक्शाक गर्दा भरल ओहार चकित। विलुप्त व्यक्ति सभक पोस्टर सभ दिन मुँह बदलैत अछि। ई खोखरल मुँह बला पोस्टर सब हमर ऐना जकाँ अछि। *गुजराती व्यंजन (ढोकला आ कढ़ी) (स्रोत पाठ: निर्धर, अंक ४३, नवम्बर २०१६ सँ) राजेन्द्र वडेल सम्भोग हमर कोमल ठोढ़ अहाँक ठोढ़ छुलक उच्च जातिक खोखरल अस्तित्वक अनुभूति भेल। जखन अहाँक नुकायल नजरि हमर आर्द्र आँखि दिस ताकलक तखन सभक सोझाँ भेल बलात्कारक एकटा घटना हमर सोझाँ नाचल। अहाँक देह अहाँक छातीसँ अहाँक पुरखाक ओ गन्ध आबि रहल छल जे दलित स्त्री सभकेँ थकुचैत मर्दन करैत काल आबि रहल हएत। अहाँ आह भरलहुँ जखन हम अहाँक आलिंगन कएलहुँ। मुदा ओहि झलफलाइत क्षितिजसँ अबैत चीत्कार हमर माथ फाड़ि देलक। हमर-अहाँक सम्भोग सँ जँ बेटा जन्मय तऽ ओकर नाम 'भारत' राखू जँ बेटी तऽ 'भारती'। (निर्धर, अंक ४३, नवम्बर २०१६ सँ) उमेश सोलंकी १ लोक, जमि जाय लोक जमि जाय कम-सँ-कम किछु कतहु जमि जाय। जाहि सँ कुहेसक ई मोट तौनी छँटि जाय। केतलीमे चाय जमि जाय सुपारीक खण्ड पाथर बनि जाय। तराकारी पाथरमे बदलि जाय तरुआ आँकड़ बनि जाय। टकाक स्पर्श मात्र सँ कोमल आङ्गुर सब मरल समुद्री शैलमे जमि जाय। रस्ता पर टहलैत लोक जमीनमे जमि जाय। कुहेसक ई मोट तौनी छँटबा लेल कम-सँ-कम किछु कतहु जमि जाय। (निर्धर, अंक ४४, दिसम्बर २०१६ सँ) २ खरड़ाक डाँट सब गांधी, हम अहाँक एहि चिक्कन कपार पर माहुर भेल दारू उझलि रहल छी हम अहाँसँ एकदम्मे हारि मानि लेलहुँ अहाँक खादी कनिये दिन मे फाटि जाइत अछि, अहाँकेँ ई पता अछि देबाल पर टांगल एहि संकुचित फ्रेम मे बन्द जीवनसँ अहाँकें घृणा होइत हएत, सत्य अछि आ कहियासँ मंदिर सभक प्रयोग मनुष्यक वासस्थानक लेल होमय लागल? अहाँ नै बुझैत छी? अहाँक एहि मंद मुस्कीक अर्थ की? धुर्! ऐ लेल, अहाँक माथ पर माहुर भेल दारूक एक धार। अहाँकेँ किछु देखाबय चाहैत छी, जँ अहाँ ध्यान दिऐ तँ नग्रक गुप्त गली सभ मे छिड़िआयल ख्हड़राक डाँट सभ ओ सभ फुसफुसाइत अछि, ओ सभ घूमैत अछि, कोना ओ सभ हिलैत अछि आ कुहरैत अछि देखलहुँ ओकरा, ओहि डाँटाकेँ? नालाक कात मे भिनभिनाइत आ भनभनाइत मंदिरक गर्दा मे लोटैत ओ 'पवित्र' डाँट ओहि गली मे घिसियाइत ओ दुबर-पातर छाह असकताह आ हेरायल सन देखा पड़ैत अछि, नीकसँ देखियौक, ईश्वर अहाँकेँ नीक दृष्टि दिअय भरि दिनक इजोत मे देखू, आ अन्हार गुज्ज राति मे देखू डाँटा सभक ई पूरा समूह मुदा अहाँ तऽ कोनो वैरागी छी वा कोनो चमकैत पाथर, हमरा पता अछि धुर्! ऐ लेल, अहाँक गुम्बद सन माथ पर शराबक एकटा पूरा बोतल। आऊ, अहाँकेँ एकटा खिस्सा सुनाबी किछु मास पहिने बिना मांसक दूटा हाथ नग्रक किछु गली सभ केँ खखोरि देलक कोन-कोन ताकि लेलक, एकटा पूरा झुण्डकेँ निकालि बाहर कएलक, रस्ताक बीच मे डाँट सभक एकटा टाल एकटा लुत्ती उड़ल, विशाल अग्नि-शिखा पजरि गेल बेचारा ओ छोट डाँट सभ! खरड़ाक ओ कमजोर डाँट सभ! आकाश ओहि चीत्कारसँ फाटि गेल हजार कानक पर्दा फाड़ि देलक ओ अबाज मुदा सभ किछु बिला गेल एक सप्ताह बितलो नै छल। कानक बहीर भेनाइ, निडर हाथ अन्हार आ इजोत सभ ओहि डाँट सभक संग बिला गेल कतहु कोनो तर्कक चिन्हासी नै बचल। आऊ, अहाँकेँ एकटा आन समूह देखाबै छी छाउरसँ बनल डाँट सभ फाटल साड़ी मे लपेटल डाँटा सभ पेट मे एकोटा अन्न नै, घामे-पसीने देखू! प्राइमस स्टोव पर ओ छोट डाँट सभ कोना बड़कि रहल अछि! चारू कात देखू, एहि एकचारीक घोर अन्हार मे ताकू कोना ओइ सुकुमार डाँटकेँ जीवन भरि लेल अपाहिज बनाएल जा रहल अछि! बहुत भऽ गेल आब हम ठाढ़ हएब आ संवेदनाक एहि चाकसँ निकलि कऽ भागब मुदा एकटा बात बताऊ गाँधी अहाँ वैरागी छी वा कोनो चमकैत पाथर? की करब बूझि कऽ, एहिने ठीक अपन माथ पर ई माहुर भेल दारू लिअ हम अहाँसँ एकदम्मे हारि मानि लेलहुँ अहाँक खादी कनिये दिनमे फाटि जाइत अछि फोटो फ्रेम मे ई जीवन निश्चित रूपसँ विनाशे अछि मंदिर कहियो मनुष्यक वासस्थान नै रहल अछि अहाँक एहि मंद मुस्कानक अर्थ की? ऐ लेल, मह्हुर भेल दारूक .... (संदर्भ: जुलाई, २००९ मे अहमदाबाद मे माहुर भेल दारू पीबासँ भेल त्रासदी; ओही ठामसँ महात्मा गाँधी भारतीय स्वतंत्रताक लेल महत्वपूर्ण आन्दोलन सभक नेतृत्व कएल कएने छलाह) (निर्धर, जनवरी २०१३ सँ) मूल गुजराती: गुलाम मोहम्मद शेख (गुलाम मोहम्मद शेखक गुजराती कविता; १-५: गुजराती सँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई; ६: गुजराती सँ अंग्रेजी अनुवाद: माला मारवाह आ कवि द्वारा; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर) गुलाम मोहम्मद शेखक जन्म १९३७ मे सुरेन्द्रनग्र, गुजरातमे भेल छल। ई चारि दशक सँ बेसी समय धरि भारतीय कलाक दुनियामे एकटा प्रमुख हस्ताक्षर रहल छथि। ओ यूके, यूएसए, फ्रान्स, जापान सहित दुनिया भरिक प्रमुख प्रदर्शनी सभमे भाग लेने छथि। गुलाम केबल कलाकार नै, वरन् एकटा प्रखर शिक्षक आ लेखक सेहो छथि। ओ बड़ौदाक कला महाविद्यालयमे चित्रकलाक प्रोफेसर रहि चुकल छथि। पुरस्कार: राष्ट्रीय पुरस्कार (१९६२), पद्मश्री (१९८३), कालिदास सम्मान (२००२), पद्मभूषण (२०१४), कुसुमाञ्जलि सम्मान (२०१९)। प्रकाशन: अथवा: बुताला, वडोदरा सं १९७४ मे प्रकाशित गुजराती कविता संग्रह। लक्ष्म गौड़: कलाकार लक्ष्म गौड़ पर एकटा मोनोग्राफ (विशेष लेख), हैदराबाद, ए.पी. ललित कला अकादमी, १९८१। कंटेम्परेरी आर्ट ऑफ बड़ौदा: सम्पादकक रूप मे, तुलिका प्रकाशन, नई दिल्ली, १९९६। निबंध, लेख आ शोध-पत्र: 'मार्ग' (Marg), 'जर्नल ऑफ आर्ट्स एंड आइडियाज', 'ललित कला कंटेम्परेरी' क संग-संग हिन्दी आ गुजरातीक पत्र-पत्रिका सभ मे प्रकाशित। प्रदर्शनी कैटलॉग: के.जी. सुब्रमण्यन, जेराम पटेल, लक्ष्म गौड़, डी.एल.एन. रेड्डी, डी. देवराज आदि कलाकारक प्रदर्शनीक विवरणिका। आत्मकथा: हुनकर आत्मकथात्मक पुस्तक 'घेर जता'वर्ष २०१८ मे प्रकाशित भेल छल। १. जँ निद्रा रूपी फलकेँ छीलि कऽ खण्ड-खण्ड कएल जाय तऽ बहुत रास अनन्त भ्रम चूर-चूर भऽ जायत प्रतिमा विलुप्त भऽ जायत देवता सब पीठ देखौताह आ पाथर सब छोड़ि बिदा भऽ जेताह। मोम जकाँ मस्जिद आ ओकर मीनार पानि सँ भरि जाएत लीढ़क ढेरी जकाँ। पहाड़ सब निद्रामे डूमि जायत आ आङ्गुरक रस अकाशक छलनी सँ आस्ते-आस्ते खसत। हम सब जे वर्तमानमे शतरंजक मोहरा जकाँ स्थित छी एम्हर-ओम्हर छिड़िया जायब। हम-अहाँ-ओ-हम सब-अहाँ सब-ओ सब सब कियो सब किछु बिना क्रमक इतस्ततः पड़ल रहत पाँच पाइक सिक्का जकाँ जे डिब्बामे हिला देल गेल हो। किंशाइत प्रलय सँ सेहो बढ़िया कोनो रहस्य एकरा सँ जन्म लेत। किंशाइत मृत्यु सँ सेहो गहीर कोनो मौन एकरा सँ विकसित हएत आ हम सब ओकरा खायब आ ओहि पर जीयब। २. हमरा लगैत अछि जँ हम जाड़क एहि चाँदनीकेँ जे नारिकेरक तेल जकाँ जमल अछि भरकुस्सा कऽ अपन सम्पूर्ण देहमे मीड़ि ली तऽ हमर भीतर मिझायल ज्वालामुखी सब फेर सक्रिय भऽ जायत। जँ हम गर्दाक एहि छिन्न-भिन्न सदस्य सभकेँ आदिम पीड़ाक ताग सँ सीबि दी तऽ पाथर सब फेर अपन वाणी पाबि जायत। जँ हम अपन देहक खेत सभकेँ एहि उजड़ल घासक ह’र सँ जोति दी तऽ दरारि सब हमर छातीकेँ चीरि सकैत अछि। हीराक चमक सँ जड़ल एहि राति मे जँ हम शैतानक उपजाऊ मस्तिष्कक इस्पातमे जड़ल भारी हथौड़ा सँ प्रहार करब तऽ एकर नीचाँ नुकायल देवता सब मकड़ीक रूप धरि रेंगबाक लेल विवश भऽ जएताह। जँ हम विश्वक प्रथम मन्त्रक रेखा एहि ताम्र सन शीत धरती पर खैंचि दी आ तरहड़िक अन्हारमे नन्त कालसँ राखल समयक झुर्री सभकेँ मिझायल सूर्य सभक शीत सँ झरका दी तऽ हमर भीतर सूतल जङ्गली जानवर सब उत्तेजित भऽ जायत आ- ३. नग्र-१ खराप भेल बासी मकइ जकाँ ई ग्रासक सङ्ग सोझे अतड़ीमे उतरि जाइत छैक। तीत आ कुरूप ई नशा सभमे पसरि जाइत छैक अपन कोण पसलीमे घुसा दैत छैक। हाथ-पएर आ जीह सँ घाम आ लार जकाँ सटि जाइत छैक। मल जकाँ दुर्गन्ध भरल आँखि आ गुदामे खिड़की जकाँ खुजैत अछि आ बन्द भऽ जाइत अछि। घूमि-घूमि कऽ हम नग्रकेँ थुकड़ि दैत छी फुटपाथ पर बोकरि दैत छी लगही कऽ दैत छी बकबक करैत छी आ एकर कविता बड़बड़ाइत छी। ४. नग्र -२ मुँहमे भुज्जा चिनियाबदाम लेर; आँखि देबाल पर पसरल नांगट सुन्दर स्त्रीक जाँघ पर। हाथ पोसुआ जानवर सहलाबैत पैजामा भीतर लिङ्ग पर। सड़क पर देवता कुकुरक अवतारमे मैथुनमे लीन। पृष्ठभूमिमे बस-कार -रिक्शा गड़गड़ाइत भागैत। बेरू पहर स्कूलक छौड़ा सब खेलाइत आ लगही करैत। हजार लिङ्ग बला नग्र आकाशकेँ लज्जित करैत सभ दिन नव-नव भवन उगबैत। ५. नग्र -३ हमरा अनचिन्हार बुझि कऽ नग्र हमरा धक्का दैत अछि लुटबाक धमकी दैत अछि स्टेशन पर धकेलि दैत अछि जतय हमरा सन लोक मुँह सँ खसल ग्रास जकाँ जमा रहैत छथि। भिखमंगा सब कारक 'मडगार्ड' चाटैत; दिनक इजोत मे पघिल गेल अलकतरा छीटि कऽ रातिक सुरंग मे अपन रातिक भोजन बनबैत वनवासी सभ, जे फतिङ्गा जेकाँ फड़फड़ाइत छथि आ धुआँ आ घाममे विलीन भऽ जाइत छथि। मजदूर सब रातिक सुरङ्गमे अपन रात्रिभोज पका रहल; वेश्याक दलाल सब मालिशक बहन्ने निजी अङ्ग सहला रहल; फेरी बला सब कसाई जकाँ चिचियाइत। बस-बकरी-कुकुर-गाय-गन्दा; देसी दारू सँ बेहाल शराबी सब; लटकल गाल खुनीमा लाल आँखि। कोढ़ी सब (मथुराक तोड़ल-फोड़ल बुद्धक सटीक प्रतिकृति!) जखन हम साइकिल तेजी सँ खैंचि कऽ भीड़ सँ बाहर निकसैत छी तऽ नग्र पाछू सँ गरजैत अछि पिञ्जरामे बन्द सिंह जकाँ। ६ दिल्ली (गुजराती सँ माला मारवाह आ कवि द्वारा अनूदित) किला पर पसरल, कोनो टूटल सोहारीक टुकड़ा सन कड़ू मूर तीख सुरुज। तुगलकाबादक खण्डहर मे एक दोसर सँ सटल घास आ पाथर। मेहराबक भीतरक छाहरि छाहरि मे डूबल मेहराब खिड़की मस्जिद। जामा मस्जिद मे सुइया सन आँखिसँ तेजीसँ जाइत सीढ़ी सभक पाँति। जड़िसँ कण्ठ धरि तनल, सोझ ठाढ़ कुतुब मीनार। चारू कात गन्ध, भोजनक, मांसक, शोनितक, कारागार आ राजमहल सभक, काल्हिक गन्ध, सदीक पुरान गन्ध। एहि क्षण मे सदम भेल अटकैत साँस, जीवन्त आँखि, अतीतक चरखी सन घुमैत गालिबक मजारक दरारि मे प्रवेश करैत अछि, खानखाना, रहिमन कवि, क जीवाश्म भऽ गेल हड्डीकेँ ताकैत, जहाँआराक बेचैन भाग्यक संग एक मकबरासँ दोसर मकबरा धरि भटकैत। एखनो, गर्दा आ कुहेस एखनो किछु मांस आ पाथरकेँ किछु अलग नै करैत अछि। लाल किलाक पश्चिम मेहराब पर सुतल कोनो परबाक योनिसँ पिछरैत सूर्यक एकटा किरण हमर आँखिकेँ छेदि दैत अछि। एखनो भोर अछि। सपना आ यथार्थ संभोग कऽ रहल अछि केहन हेतैक भोरक भुँह? (१९७३) मूल गुजराती: अजय सरवैया (अजय सरवैयाक गुजराती कविता; गुजराती सँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर) अजय सरवैयाक जन्म १९७५ मे मुम्बईमे भेल। ई दू दशक सँ बेसी समय सँ गुजरातीमे रचनात्मक लेखन (कथा आ कविता) सँ जुड़ल छथि। हुनकर कहानी सङ्ग्रह "फैक्ट एण्ड फिक्शन अने बीजी वार्ताओ" (२०१०) मे प्रयोगात्मक कथा सभ अछि। हुनकर आलोचनात्मक निबन्धक सङ्ग्रह "बोर्हेस अने हूँ: गुजराती ओळखनी शोध" (२००८) भाषा, संस्कृति आ कला केँ बुझबाक लेल नव दृष्टिकोण प्रदान करैत अछि। ओ वडोदराक एम.एस. युनिवर्सिटीमे भाषाविज्ञान पढ़बैत छथि। अहाँक वेदना हमर प्रवेश-द्वार अछि "अहाँ प्रतिध्वनि सँ बसल छी आ पुरान यादक स्वर सँ" - पाब्लो नेरुदा (चक्रधर आ पीयूष लेल) १ "एना कतेक दिन धरि घिसियाबै रहब?" ओ पुछैत छलीह भिजल मुँह लऽ हारल आँखि लऽ। हम शब्द राखैत छलहुँ ओ शर्त राखैत छलीह। हम इच्छा बतबैत छलहुँ ओ भ्रम राखैत छलीह। हम मेघ देखबैत छलहुँ ओ कुण्डली राखैत छलीह। हम प्रश्न उठबैत छलहुँ ओ बहन्ना करैत छलीह। हम गुण-दोष प्रस्तुत करैत छलहुँ ओ गिट्ठऽ दऽ दैत छलीह। हम सपना साकार करैत छलहुँ ओ उजड़ल ठाम देखबैत छलीह। कतेक दिन? हमरा खूब बुझल छल। हमर नक्षत्र अलग छल हमर दिन-राति अलग छल। हमर ऋतु-पाबनि अलग छल हमर स्थान-काल अलग छल। हमर अन्तर सेहो अलग छल। हम प्रेम करैत छलहुँ-कतेक दिन? २. "हम अहाँक छी खाली अहाँक" ओ कहैत छलीह शब्द पर विश्वास राखि कऽ। हम सोचलहुँ हम अर्थ प्राप्त करब। ओ बाजैत छलीह आ शब्द बीझ खा जाइत छल। ओ छुबैत छलीह आ हाथ लीढ़ सँ भरि जाइत छल। ओ चुम्मा लैत छलीह आ साँसमे बुलबुल्ला फुटैत छल। ओ लिखैत छलीह आ अक्षर ओझरा जाइत छल। ओ कानैत छलीह आ अर्थमे भूर सभ भरि जाइत छल। असमञ्जस मे हम बकबक करैत छलहुँ खाली बकबक करबा लेल। ३. "हमरा संगे लय चलू" ओ विनती करैत छलीह हमरा सँ सटि कऽ आँखि मूनि कऽ। फेर गेरुआ पर खसल केश बिछैत छलीह। हाथ सँ घोकचल बिछौन सोझ करैत छलीह। केश-तेलक बोतल प्लास्टिकमे राखैत छलीह ब्रुश पेस्ट ककबा साबुन एकटा झोरामे। बाथरूमक बत्ती मिझा दैत छलीह आ धोल-पखारल कपड़ा रैक पर सजा दैत छलीह। सपना छोड़ि दैत छलीह। हमरा स्टेशन पर विदा करैत छलीह चिट्ठी लिखबाक आग्रह करैत छलीह। ओतय ठाढ़ रहैत छलीह जाधरि ट्रेन बिला नै जाइत छल। फेर फोन पर प्रेमपूर्ण फुसफुसाहटि करैत छलीह। हम अपन छाहमे आस्तेसँ नुका जाइत छलहुँ आ फेर सब किछु अपन ठाम आबि जाइत छल। ४. "आब अहाँ बिना रहल नै जायत" ओ लिखैत छलीह। हम सूरज-चान एक सङ्गे जोड़ि दैत छलहुँ दिन पर राति उझलि दैत छलहुँ। सपनामे हाथ रगड़ि कऽ चिनगी उत्पन्न करैत छलहुँ। पूर्वजक धार्मिक हेबा पर प्रलाप करैत छलहुँ। एकान्तकेँ खण्ड-पखण्ड कऽ दैत छलहुँ आ यात्रा-भ्रमणक ताली सँ सीबि दैत छलहुँ। रसपूर्ण मुस्की पसारैत छलहुँ संग सुगन्धपूर्ण अट्टहास। क्षितिजकेँ नोरमे खैंचि दैत छलहुँ फेर हाँफैत-हाँफैत ढहि पड़ैत छलहुँ। हमर देह सपनामे डगमगाइत छल कुहरैत अनचोक्के घबड़ा कऽ जागि जाइत छल। ५. हम ओकरा कहब हमरा घुराउ हमर शब्द जे अहाँक सपनामे फुला रहल अछि हमर साँसक पहिल गर्जना ओ असगर आकाश जे गरमालो लटकल छल। राति-राति भरि हम जे चुम्मा बरसेने छलहुँ सुतलावस्था मे हमर वेदनाक जीवाश्म अर्थक तरेगण-मण्डल जे विस्मृति तर दबल अछि। ओकर चाम सँ सब किछु खोखड़ि-खोखड़ि कऽ ओ सब किछु वापस कऽ देत आ अपनाकेँ एकटा छाहमे लपेटि लेत। ६. ओ नै कहलक हम एना नै चला सकैत छी। ओ नै कहलक अहाँ हमर छी खाली हमर। ओ नै कहलक हम अहाँक सङ्गे आबब चाहैत छी। ओ नै कहलक हम अहाँ बिनु नै रहय चाहैत छी। ओ नै कहलक हमर जे किछु अछि से अहाँक अछि। अहाँक जे किछु अछि से हमर अछि। किछु कहियो सत्तेमे समाप्त नै होइत छैक। जे हेरा गेल ओ वापस कहियो नै भेटैत छैक। जे बिना माँगने नै भेटैत छैक जे पाबि कऽ त्याग नै कएल जा सकैत छैक। हम एक दोसराकेँ पाबि जायब जखन अर्थ अपन अर्थ बिसरि जायत। ('वही' अङ्क, ११ -१२, मई -सितम्बर, २००३ मे प्रकाशित) एक मरैत भाषाक गीत १. हँ हम एकटा भाषाक कवि छी जे अपन अन्तक बाट पर अछि। अरे! केहन असहनीय पीड़ा! हुनकर अमरता कतेक छोट! हमर नाम एक शताब्दीमे मेटा जायत आह! केहन व्यर्थ आशा! एकटा शताब्दी सेहो नै। कम आरो कम। कतेक? खाली अन्दाज लगाऊ। नगाड़ा बजाऊ। हम एकटा भाषाक कवि छी... आह! गाबू वैष्णवजन वैष्णवजन वैष्णवजन- ई शब्द नै टिकत। हाइ! एहन अलौकिक शब्द। केहन सुन्दर! 'पद्मिनी' सँ सेहो बेसी नीक गुजराती गढ़ने छल मुदा नै टिकत। हम ओही भाषाक कवि छी जे कनिये कालमे प्राण त्यागि देत। २. की? अहाँकेँ भूख लागल अछि? तऽ की? अरे! हम बिसरि गेलहुँ। सत्तेमे बिसरि गेलहुँ। हम क्षमा चाहैत छी। भाषा अहाँक कनियाँ नै अहाँक सन्तानो नै आ ने फर्नीचर। तऽ की? आह! भाषा अहाँक कैमरा नै छी अहाँक मोबाइल फोन नै। आ ने सभ साँझ अहाँक दरबज्जा पर नाङरि हिलबैत आबय बला पिल्ला। अहाँकेँ भूख लागल अछि हम सम्पूर्ण रूप सँ बिसरि गेलहुँ। भाषा अहाँक अंगनाक गाछो नै अछि ने अहाँक पुरखाक खोपड़ीमे धँसल दाँत। अहाँक अंगनामे कोनो गाछ नै अछि फूल नै पात नै। अहाँकेँ भूख लागल अछि हम सम्पूर्ण रूप सँ बिसरि गेलहुँ। ३. आ कहल जाइत अछि जे ई अन्तिम गीत नै आ हमर पीड़ा सेहो असहनीय नै। कनी ठाढ़ होउ हे उज्जर टोपी बला साहब! एक्सप्रेस-वे पर उड़ैत मेमसाहब! अहाँपर एक नजरि धऽ कऽ मुँह फेरि लैत छी। अहाँ एक ट्रैक पर चलब शुरू करैत छी आ रस्ता बदलि दैत छी। एक मिनट थम्हू अहाँक भूख रहबे करत अहाँकेँ पियासो लागत। अहाँक रस्ता नै टूटत मुदा समतल सड़क पर चलैत स्त्री सभक सुन्दरता सपाट आ कमजोर होइत छैक ठीक तेहने जेना हुनका लेल लिखल गीत। आ कहल जाइत अछि जे ई अन्तिम गीत नै आ हमर पीड़ा सेहो असहनीय नै। ४. हम कवि नै एकटा फेरी बला छी। हमरा खूब बूझल अछि जे अहाँ की कीनऽ चाहैत छी। हे सत्यवादी पाठक सब! हमरा लग आनन्दक लिपस्टिक नै अछि ने विपत्तिक काजर। हमरा लग नोरक मोती नै ने हँसीक धन वा व्यङ्ग्यक खञ्जर। हमरा लग शान्तिक गोली नै ने रोमांसक बरखा आ ने ओहिमे नहाइत मीठ छन्द। हमरा लग पौराणिक कथाक मसाला नै। हम शब्दक बाजीगर नै हम खाली भ्रम बेचैत छी। हे उपभोक्ता सब! नै बिसरू हम कवि नै एकटा फेरी बला छी। ५. थम्हू थम्हू। हम अहाँकेँ एकटा गीत देब- एकटा कीनू एकटा मंगनीमे! बस एक नजरि देखू देखबाक किछु नै लागत। फेर अहाँ ओहिसँ नजरि नै हटा पायब। तखन अहाँकें किछु आन देखबाक इच्छा नै हएत, अहाँकेँ अपन संचित धनसँ हाथ धोबय नै पड़त। बस एकटा मौका दियौ आ सुख-दुःख एक समान लागत। दिन-राति प्रवेश-निर्गम एक भऽ जायत। हमरा लग खाली ई गीत अछि चिक्कन, चमकैत आ सुगन्धित। ठाढ़ होउ हम किछु गजल सेहो रखने छी कविता छन्दबद्ध अछन्द नाम छोट। दामक गप किएक करैत छी बस एक बेर देखू आ लऽ लिअ। अहाँक इच्छा हमर प्राप्य मूल्य अछि। शब्दावली: पद्मिनी: सब सँ सुन्दर स्त्री। कामशास्त्रक रचनाकार सभ स्त्रीकेँ जइ चारि वर्ग (पद्मिनी, चित्रिणी, शंखिणी आ हस्तिनी) मे विभाजित कएने छथि, ओइ मे ई प्रथम आ सर्वोत्कृष्ट श्रेणीक होइत छथि। गरमालो: एकटा औषधीय गाछ (स्वर्ण -क्षीरी)। मूल गुजराती: गनी दहीवाला (गनी दहीवालाक गुजराती कविता; गुजराती सँ अंग्रेजी अनुवाद: हेमांग देसाई; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर) गनी दहीवाला (१९०८ -१९८७) एकटा एहन गुजराती कवि छथि, जे गजल, भजन, सॉनेट आ गीत सन विधा सभमे अद्भुत रचना कएलनि। मुदा गुजरातक जन-मानसमे ओ अपन हृदयस्पर्शी गजल सभक लेल विशेष रूप सँ पूजल जाइत छथि। हुनकर गजल सभकेँ मोहम्मद रफी, हेमन्त कुमार आ पुरुषोत्तम उपाध्याय सन दिग्गज गायक अपन स्वर देने छथि। "गता जरना", "महेक" आ "गनीमत" हुनकर प्रमुख कविता -सङ्ग्रह अछि। केकर सुन्दर नजरि केकर सुन्दर नजरि सँ आकाशक हृदय भीजि गेल? एतेक सन-सन करैत नील चोला धरती ओढ़ने अद्भुत चाल। अहाँ इन्द्रधनुषक पिचकारी सँ रङ्गमे किएक डुबौलहुँ? फागुन तँ अखन दूर अछि श्रावणमे होलीक जोगीरा किएक गएलहुँ? अहाँ अकाश जकाँ उधिया कऽ फूलल धरती केँ हृदय धरि भिजौलहुँ एतेक सन-सन करैत नील चोला धरती ओढ़ने अद्भुत चाल। देखू! पानिक कारी परी सभक आँखिमे बिजली चमकैत छैक की अहाँ जानैत छी हुनकर झलफल आँखि क्षितिज पार चमकैत छैक? की भक्ति-नोरक मेघ फूटि कऽ फूलल धरती केँ हृदय धरि भिजौलक? एतेक सन-सन करैत नील चोला धरती ओढ़ने अद्भुत चाल। ई आर्द्र एकान्त सत्तेमे नीक सङ्गतिक सम्भावना राखैत छैक केकर रेशमी पदचिह्न बुलबुलक पायल जकाँ हमर हृदयकेँ रोमाञ्चित करैत छैक? आनन्दक बाढ़ि आबि गेल फूलल धरती केँ हृदय धरि भिजौलक एतेक सन-सन करैत नीला चोल धरती ओढ़ने अद्भुत चाल। उड़िया खण्ड मूल उड़िया: बासुदेव सुनानी (बासुदेव सुनानीक उड़िया दलित कविता; उड़िया सँ अंग्रेजी अनुवाद: सैलेन राउत्रे; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर) बासुदेव सुनानी (ज. १९६२) उड़ियाक प्रमुख दलित कवि सभमे सँ एक छथि। ओ पशु चिकित्सा विज्ञानमे स्नातकोत्तर छथि आ वर्तमानमे ओ उड़ीसा सरकारमे अधिकारी छथि। ओ चारि टा कविता-सङ्ग्रह लिखने छथि, जाहिमे "अस्पृश्य" (२००१) आ "कराड़ी हाटा" (२००५) प्रमुख अछि। अनुवादक: सैलेन राउत्रे सैलेन राउत्रे एकटा शोधकर्ता, समाज-क्षेत्र सलाहकार, लेखक आ अनुवादक छथि। हुनकर रुचि विकासक मानवविज्ञान आ साहित्यक समाजशास्त्रक क्षेत्रमे अछि। ओ अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेङ्गलुरुमे आगन्तुक संकायक रूपमे सम्बद्ध छथि। फूसि जखन कखनो हमरा भेंट होइ छथि शबनम भौजी हमरा प्रसन्न मुखक आशीष भेटैए ईदक चानसन दीप्त आ ओइ प्रसन्नताक बाद एकटा रहस्योद्घाटन- “तूँ आब बड्ड पैघ भऽ गेल छेँ।” फूसि! पाँच फीट पाँच इंचक मात्र अइ वासुदेव, पएरसँ पहुँचा धरि अखनो हुनकर चौखटिक उपरका भाग नै छूबि सकै अछि! कहियासँ ई भऽ गेल पैघ? पुछू ककरोसँ... सभ कहत कि वासुदेव अछि एकटा मामूली अभागल बाट-बटोही इन्तजारीमे, एकटा बिसरल बस अड्डापर। अनुग्रह कएलापर कने काल लेल बिलमै अछि एकटा बस ओतऽ मुदा जखन ओ चढ़ैबला रहैए, ओकरा छोड़ि कऽ चल जाइए बस। शबनम भौजी एकटा फूसि बाजैवाली यक्षिणी छथि, आ ओ फुइस एहन बजै छथि, जकर नै रहैए कोनो ओरे आकि छोरे। जे कियो एतऽ अपनाकेँ बुझि रहल छी खैरात बँटनिहार, कृपा कऽ रोकू एकटा बस। वासुदेव एकर प्रतीक्षा कऽ रहल बड़ी कालसँ, मड़राइत आत्मविश्वासक पगहाक अन्तिम छोरपर। अनुमति हमरा अनुमति अछि श्रीमान! हम कऽ ली विश्राम कने काल? अहाँक आदेशानुसार छाह लग देने छी बहारि, बत्तू केँ देने छी खुआय, अहाँक नालाकेँ कऽ देने छी साफ, नै रहत कोनो दुर्गन्ध आब। हमर छी ढोल, बजबैले मधुमाछी युगसँ अहाँक मनोरंजनार्थ आ हमर आंगुर स्थिरताक राखय आश हम करी विश्राम थोड़बे काल? हम करैत छी अनुभव पुरखाक स्वेद हमर देव, हमर मृतात्मा। तइ लेल प्रिय श्रीमान् घंटा भरिक विश्राम मात्र अभिवादन जकाँ किएक तँ अछि जे हमर दुर्गन्ध, स्वेदक आ किछु आन वस्तुक। हम करय छी प्रतीक्षा अहाँक नीक समयक, तृप्तिक संगे अपन कीट-संक्रमित जिनगीक समाप्तिक संकेतक। प्रतीक्षा सेहो भरि दैत अछि थकान, श्रीमान् प्रियवर जखन लाख बरखक जौँ ई हुअय। से हम करै छी विश्राम थोड़ेक काल, श्रीमान्? कारण हमरो सन तुच्छकेँ बुझल छै छोट-मोट विद्रोहक कला। अखनो बहुत किछु हएब बाकी अछि घण्टीक अबाज सँ ढोलकक विस्फोट धरि लकड़ी, पातक तुच्छ सङ्ग्रह सँ घरक विध्वंस धरि जे किछु एतय हेबाक छल से भऽ गेल बिना कोनो चिन्हासीक। तैयो हमरा लगैत अछि नै जानि किएक जे ओतय कोन पर किछु लटकि-झूलि रहल अछि। हम बझैत छी जे एतय कोनो अबाज 'पाञ्चजन्य' सँ कम नै अछि। सब सँ छोट प्रतिक्रिया वज्रक समान गर्जन करैत अछि। किंशाइत तेँ घातक दुर्घटना सँ बचि कऽ हम चुपचाप सब सँ कालिमामय रहस्य फुसफुसाबय आयल छी। अहाँ सभ जे सदी सँ अन्हार बागु कऽ रहल छी निर्दोष उत्साह सब पर पाथरक ढेरी लादि कऽ अहाँ सभ जे सदीसँ कोमल हृदय सभमे सूइया भोकबाक खेलमे मस्त छी से ओ एकरा एकटा चेतौनी बुझथि! एतय अकाशमे एहने एकटा ठोप अछि जे अस्पष्ट होइतो चमकैत छैक आ इन्द्रधनुषक एकटा मीठ सपना देखि कऽ बेर-बेर प्रण लेने अछि विशाल अकाशकेँ रङ्गि देबाक। एतय एकटा बीआ प्रतिज्ञा लेने अछि अङ्कुरित हेबाक सब किछु हरियर कचोर करबाक इच्छा सङ्गे। आ एतय दुःखमे एकटा परित्यक्ता गर्भवती स्त्री शान्त क्षणक खोजमे अछि एहन बच्चा जन्म देबा लेल जे सात गोट योद्धाक सामना कऽ कऽ ओकरा रोकि सकय। तेँ हमरा लगैत अछि नै जानि किएक जे ओतय कोन पर किछु लटकि-झूलि रहल अछि। पता हम कहियो धृष्टता नै जुटा सकलौं बहैत नदीकेँ मशाल देखयबा लेल वा अदृश्य अकाश पर सीढ़ी लगा देबा लेल। तैयो हमर अबाज बजैत अछि सभ बेकार शब्दक सुन्दर पात सभक भीतर। हम अखनो छी घोंकचल स्तन सभमे ओहि बुढ़ियाक जे विवाहक बरियातीक आगाँ दीप अपन माथ पर उघैत अछि। हम अखनो छी रोगी, बूढ़क कटोरामे जे मन्दिरक आगाँ पाँच पाइक सिक्का लेल चिचियाइत अछि। आ हम अखनो छी सुतल बच्चाक डगमग सपना सभमे ओसारा जे अछि कोमल सुखायल दिसम्बरक जाड़मे। तैयो अहाँकेँ पता चाही! अजीबे गप! शुरू सँ अन्त धरि हमर उपस्थिति चुट्टीक टिमटिम करैत पाँति सन पसरल अछि आ झाँझक ठनकार सन गूँजैत छैक। तैयो अहाँकेँ पता चाही! सत्ते अजब! हमर पताक लेल अहाँकेँ आब पार्सल पठेबाक खगता नै जेकर ठेकाना 'द्वारा (C/o)' सूर्य वा चन्द्रमा हो। जँ अहाँ कऽ सकैत छी तऽ कृपया हमरा पठाउ रौद भरल सुन्दर सपना सब। कारण हम अखनो रहैत छी ओही अन्हार गलीमे जतय हम सदिखन रहलहुँ। सदिखन आइ धरि हम कहियो केकरा की देने छी? हमर सुखाइत अस्तित्व आत्मीयताक ठोप सब असमर्थ पदचिह्न वा सेहो विलुप्त होमय बला एकताक कण। हम नै जरि सकलौं भूखल चूल्हिमे जरय बला लकड़ी जकाँ ने फुला सकलौं एकटा सरल शब्द जकाँ एकटा बौक मुँहमे। हम हेलि रहल छी एकटा छोट सपना-सजल माछ सन एकटा विलुप्त होइत पोखरिक मुट्ठी भरि पानिमे। आ हम दिन गनि रहल छी आ ओही असमञ्जसमे छी की हम समुद्रमे कूदि पड़ी ओकरा अमृत देबा लेल वा गहीर खनि कऽ धक्का दी बासुकी नागक कोमल माथकेँ जे संसारकेँ सन्तुलित रखने अछि? मुदा मग्न खेलाइ काल अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण क्षण मे हम बगुला सँ द्वारा काटि लेल जाइत छी। सदानन्द समुद्र देखि कऽ अहाँ कहलहुँ जे हम नै बुझलहुँ वरन् हम गलत बुझलहुँ- लहर सभकेँ; हमर खेत सब पर उड़ैत बगुलाक भूखल पाँखि सभकेँ। समुद्र देखला पर सदानन्दक प्रतिक्रिया अहाँ कहलहुँ, जे हम नै बुझलहुँ अथवा ई जे हम गलत बुझि गेलहुँ। लहरि सभ कोनो बगुलाक भुखायल पाँखि सन जे हमर खेतक ऊपर सँ उड़ि रहल अछि। समुद्रक कात बालुसँ घेरल एकटा चौकोर अंगना जे बहुत पहिने हेरा गेल पद-चिह्न सभक एकटा निष्पक्ष हिसाब रखैत अछि। क्षेत्र एकटा खाली मुँह किसानक गीतक घेरा सन। हम अपन दुनू आँखि सँ देखलहुँ हम विश्वास कएलहुँ तइ लेल शाइत हम गलत बुझि गेलहुँ। हमर नाम सदानन्द अछि। हमर गामक नाम नगाँव अछि। हम किसान मेला लेल भुवनेश्वर आएल छी सभ सँ बड़का भाँटा लेल राज्यपालक पुरस्कार लेबय। कदाचित संसारक प्रारम्भ समुद्र सँ भेल छल आ समुद्र तइ लेल सभ वस्तुक भंडारगृह अछि। मुदा प्रत्यक्षतः हम गलत बुझि लेलहुँ। हमर इलाका मे अकाल किएक नै पड़त? जखन कि सभटा पानि समुद्र लग बन्धक राखल गेल अछि। मूल उड़िया भरत माँझी (ओड़ियासँ अंग्रेजी अनुवाद सैलेन राउत्रे आ अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर द्वारा) हमर घुरलाक बाद हमर घुरलाक बादो ओइ स्थानकेँ नै छोडू रिक्त पकड़ने रहू ओकरा। फूल सभकेँ नै फेकू की कोनो महत्व अछि एकर जे ओ टटका-टटकी फुलयल अछि आकि अछि मौलायल? खोलू हमर सभटा नुकायल भोथिआयल स्वप्न, ओकरा अलंकृत कऽ। उनटि दिअ सभ ठामक लैम्पकेँ, आ रोकि दियौ अन्हारक प्रति घृणा बिना घबरेने देखू समुद्र आ तखनो नै करू घृणा अकाससँ। नेहोरा अछि!!! पृथ्वीकेँ बुझू एकटा सममिश्रित स्थान प्रयास करू आ ठाढ़ रहू ओतऽ। कृपया बाट ताकू अपन आ से करय काल, रहू जागल! मोन राखू, हम घुरब ऐ पृथ्वीपर जे एहन एकेटा अछि राखू मोन जे हम घुरब हम बाउग केने छी पथकेँ सरिसवक बीआसँ, मोन राखू ओ पथ मूल उड़िया: इप्सिता सारंगी (इप्सिता सारंगीक ओड़िया कविता- गप आ हिलकोर- ओड़ियासँ इंग्लिश इप्सिता सारंगी द्वारा स्वयं, इंग्लिशसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर द्वारा) इप्सिता सारंगी (१९७५- ) क दूटा ओड़िया कविता संग्रह “पक्षी फेरिनी” आ “फेरिबा कथा” प्रकाशित छन्हि। गप नहरिक थरथड़ाइत पाइनसँ एकटा नान्हि सन बुच्ची बहराइए थुलथुल कजरी सन। धरातलपर सूर्य अदहा झाँपल किरिणक बीच सुखाइए कजरी छोट कोट सन भऽ जाइए स्वप्न- एकटा छोट राजकुमार अबैए एकटङा छरपान दैत हर्षित लैत ओकर हाथ अपन हाथमे खाली ओइ कोट लेल। ओ औंठा आकारक छोट राजकुमारी खोलैए अपन छोट बाकस, ओइ बुच्चीक ठोढ़पर प्रेमपूर्ण मुस्की दैत बिलाइए ओ। एकबेर ओ छोटकी बुच्ची खसैए नहरिमे भीजल फराक आँखि- भरल नोरसँ घोकचल सीढ़ीसँ ओइ बुच्चीक पनिसोखा सन नोर। बहार भेल औंठा आकारक छोट राजकुमार अपन मोलायम तरहत्थीक संग ओकर गाल आस्ते-आस्ते मीड़ैत अछि। ओकर नोरक रंगल बुलबुल्ला बिछि लैए आंगुर सभसँ। सूर्य ओकरा सभकेँ उधियाबैत; ओइ रंग सभकेँ राइतमे पसारैत ई रहहै जे पिरौंछ भोरमे। ओ छोट बुच्ची अगिला भोर देखलक ओ नहरि सुखा गेल, मुदा कजरी- अखनो अछि जिबैत ओइ छोटकी बुच्चीक बाट तकैत, आकि ओइ राजकुमारक? जिबैत टटका स्वप्न जकाँ तुरत्ते बहार होइत पिपनीसँ। हिलकोर कियो नै सिखेलक कहियो एक ठोप माहुर देनाइ बासनमे निर्दोख सरलताक। हम पूर्ण रूपेँ हारि गेलौं। फूसिक मरैत पानि सुच्चा सत्यमे् वा दोसर जीवन नै अछि जीवन, किंशाइत। हम हेरा गेलौं। कोन माहुर विश्वासकेँ संक्रमित केलक, जे लागल सदिखन हुअय मात्र टुकड़ी-टुकड़ी हेबा लेल। अकासक टुकड़ी चिड़ैक भँसियाइत पाँखिमे; नहिये अकास नहिये छाह छल एकर चांगुरमे। विश्वास, जेना पूर्णिमाक रातिक समुद्र जे घुरबैए सभटा लेल बौस्तु जखन ओ घुरबैए हिलकोर। की हिलकोर घुरबैए विश्वासक आरि छोट हाथसँ बालुपर बनल? की हिलकोर घुरा सकैए एकान्त जिनगीमे निराउ बर्खा? पनिसोखाक द्वीपसँ स्वप्न आवेशसँ छोट कागचक नाहमे? आ जीबाक स्थितप्रज्ञ अभिलाषा समयसँ ध्यान हटा कऽ? की हिलकोर घुरा सकैए पराजय? आ, हेरा गेनाइ? (इप्सिता सारंगीक ओड़िया कविता "धेउ कान") मूल उड़िया: इप्सिता सारंगी (इप्सिता सारंगीक उड़िया कविता; उड़िया सँ अंग्रेजी अनुवाद: हरेकृष्ण दास; अंग्रेजी सँ मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर) अनुवादक: हरेकृष्ण दास हरेकृष्ण दास (ज. १९७४) उड़ियाक नियाली महाविद्यालय, कटकमे अंग्रेजीक प्रवक्ता छथि। ओ उत्कल विश्वविद्यालय सँ एम.ए. आ एम.फिल. केने छथि आ वर्तमानमे बंशीधर सारंगीक कविता सभक अनुवाद पर शोध कऽ रहल छथि। मूल उड़िया इप्सिता सारंगी (ज. १९७५) एकटा सशक्त उड़िया कवयित्री, आलोचक आ अनुवादक छथि। हुनका 'राज्य युवा पुरस्कार' आ 'उड़ीसा पुस्तक मेला पुरस्कार' सँ सम्मानित कएल गेल अछि। बुद्ध … कतेक आसक्ति सँ कियो शान्त भऽ सकैत छैक ओ हिसाब अहाँ नै देलहुँ भिक्षु! बेकार/छोट-मोट टुकड़ा सभक संग खेलि कऽ रस्ता पार कएल जा सकैत अछि क्षण सभकेँ बिसरि कऽ। मुदा जे चाही अनासक्ति एकटा जीवन लेल ओइ अनुभवक कथा अहाँ नै देलहुँ सिद्धार्थ! की अहाँक कथा अष्टाङ्गिक मार्गक झूठ अछि? की एक सङ्गे आठ रस्ता पर चलल जा सकैत अछि? अहाँ दुःख सहन कएलहुँ अनन्त सँ बेसी गहीर सागर सँ गहीर आ रहस्यमय। रस्ता? से की अछि? दुःखक बोझ तर कोनो इच्छा जीवित नै रहैत छैक चाहे ओ अहाँ होइ वा हम। की ककरो लेल सहज नै अछि 'बुद्ध' कहायब सिद्धार्थ? …. सब रोग आ दुःख शरीर सँ उपजैत छैक शरीर बुढ़ाइत अछि देहक कारण सँ। क्षणभङ्गुर समयक सङ्गति मृत्यु सँ लग्न भऽ जाइत छैक। शरीर माया अछि आ माया उमेर, मृत्यु आ रोग। सत्य मायाक लग अछि वास्तविकता सँ भागि कऽ बेर-बेर सत्य ताकबाक की अर्थ अछि? तुषित-स्वर्ग कोनो आनन्द नै अछि ने ई रोग, दुःख आ मृत्युक शरीर। इच्छा कोनो सुख नै अछि दुःखो नै। सुख अछि किंशाइत सुखक विनाशमे। तऽ कतेक दुःखक विलोपन पर इच्छाक विघटनक कोन बिन्दु पर सुखक उपस्थिति निश्चित अछि ओ गवाही अहाँ नै देलहुँ भिक्षु! जँ मृत्यु वास्तविकता अछि तऽ की कलाहीन सत्यमे कोनो मुक्ति नै अछि? मनुष्य होयबाक अर्थ आसक्ति अछि जीवन पयबाक अर्थ माया अछि। प्रकृतिक उल्टा डेगक साँस सभकेँ बलिदान करब एकटा धोखाक जीवन लेल ई आर की अछि जँ भूल नै अछि तऽ? स्त्री क्षितिजक दू बिन्दु धरि हमरा अस्तित्व पसारबाक अछि। अपन आँखि हटा कऽ मन वचन आ कर्म सँ ठोढ़ पर सदिखन मुस्कान पोतल रहबाक चाही। अपनाकेँ सान्त्वना देबाक चाही सब भावनाकेँ गाछक ढोढरिमे बन्द कऽ आ जीयब सिखबाक चाही। कखनो-कखनो आकाश सँ बेसी रिक्त प्रतीत होइत छैक अस्तित्व। धानक कोमल बालि सँ बेसी ताजा सपना सब चूर-चूर होइत रहैत छैक अवाञ्छित होयबाक धधकैत रौदमे। फूल सभमे झुलबाक आनन्दमय दिन सभक बाद जीवन आब पँखुड़ी सभक बीच घेरायल एकटा साँस लेल भीख मांगब अछि! (उड़िया कविता "नारीजन्म" सँ अनूदित) बचिया एकान्त समयक जङ्गलमे अहाँ नोर बहबैत छी आ भरि दैत छी एकटा हरियरी। चेतना वास्तविकता आ समयक सीमा पार कऽ उड़ि कऽ अहाँ तरेगण तोड़ैत छी। अपन छोट-छोट जूता सँ जीवन कूदैत अहाँ सपना सजबैत छी ओ बुचिया! हम कहियो नै चाहलहुँ अहाँकेँ जीवित देखय हमर बुचिया। जँ कहियो अहाँ धरती पर उतरब अहाँक हाथी-दाँत सन गोर देह पीयर पड़ि जाएत। अहाँ बेकल हएब पानि, माटि आ हवा लेल। बीच-बीचमे साँस लेब आ खण्ड-पखण्ड जीवन जीयब। अपन छोट फ्राकमे नाचैत लहरि सभ सोनहुल माछ खेलाइत मुस्काइत मुदा हम नै पाबैत छी एकटा मुस्की एतय वर्जित अछि सेहो सपना, विलासिता, सौन्दर्य आ कोमलता। अहाँ ओतहि रहू हाथमे अर्धचन्द्र जादू-छड़ी घुमाबैत हमर समय चूसि लिअ जँ अहाँ चूसि सकैत छी। हमरा पात्र बना लिअ अपन नाचैत लहरि सभक छोट फ्राकमे। (उड़िया कविता "कुँजिझिया" सँ अनूदित) भोजपुरी कविता खण्ड मूल भोजपुरी: भिखाड़ी ठाकुर (भोजपुरीसँ मैथिली अनुवाद। मूल भोजपुरी- भिखारी ठाकुर (१८८७-१९७१), मैथिली अनुवाद- गजेन्द्र ठाकुर (१९७१- ) भिखारी ठाकुर (१८८७-१९७१)- लोकलाकार, छपरा जिला (बिहार)मे जन्म। प्रारम्भक रचना सभ मौखिक मुदा बादमे कैथी लिपिमे सेहो हिनकर हस्तलिखित भोजपुरी रचना प्राप्त भेल। भोजपुरीसँ मैथिली अनुवाद मूल भोजपुरी- भिखारी ठाकुर (१८८७-१९७१), मैथिली अनुवाद- गजेन्द्र ठाकुर (१९७१- ) वृद्धाश्रमक पक्षमे बिरहा १ कुतुबपुर अछि गाम, भिखारी ठाकुर अछि नाम। बाबू सभ गोटेकेँ करै छी प्रणाम॥ सभ गोटेकेँ करै छी प्रणाम हे राजा। उपरेसँ चिक्कन अछि चामक ओहरन॥ तीन दिनक सेखीमे, उड़बै छी मज्जा। बूढ़ा-बूढ़ीकेँ दुख भेल छनि, लगैए नै लाज॥ बाबू-भइया एकमत भऽ कऽ सभ मिलिये कऽ समाज। एक अरजीपर मोन आनू, मोनकेँ करू ताजा॥ महाबीरक नाम सुमरि लिअ, जइसँ बाजत बाजा। वृद्धाश्रम बनबाउ नै तँ हएत अकाज॥ सभ बाबूक पएर पड़ै छी, भिखारी ठाकुर नाम छी॥ बिरहा २ हिन्दू-मुसलमान, सभ हमर कहलपर दियौ कान। नै तँ होइए बूढ़क अपमान॥ होइए बूढ़क अपमान हमर भाइ। नेनपनेसँ जकरा तूँ कहैत एलेँहेँ माय॥ तकराले किए भऽ गेल छेँ तूँ कसाइ। बड़का हाकिम लग जखन जेमेँ तँ पुछल जेतौ हिसाब-किताब॥ जल्दीसँ बता हमरा की केलेँ तूँ कमाइ। नह जखन झारतौ तखन ओइ काल की करमे उपाय। आँखिसँ नोर खसतौ किछु ने हेतौ बाजल। कहैए भिखारी अखने दे तूँ वृद्धाश्रम बनबाय।। नै तँ होइए बूढ़क अपमान॥ कश्मीरी कविता खण्ड मूल कश्मीरी: रहमान राही (कश्मीरीसँ अंग्रेजी एस.एल.सन्धु, साभार भारतीय ज्ञानपीठ आ अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर) रहमान राही- छाह सभ (कश्मीरी कविता) ४०म ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोह ६ नवम्बर २००८: संसदक लाइब्रेरीक बालयोगी ऑडिटोरियममे कश्मीरी कवि श्री रहमान राहीकेँ प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह द्वारा प्रदान कएल जायबला ४०म ज्ञानपीठ पुरस्कार समारोहक आमंत्रण पाबि ओतय नियत समयसँ सायं छह बजे हम पहुँचलौं। अपन प्रतिष्ठाक अनुरूप प्रधानमंत्री निर्धारित समय ६.३० सायं पदार्पण केलन्हि। स्टेजपर श्री रवीन्द्र कालिया, निदेशक भारतीय ज्ञानपीठ, रहमान राही, डॉ. मनमोहन सिंह, सीताकान्त महापात्र, पुरस्कार चयन समितिक अध्यक्ष आ अखिलेश जैन, प्रबन्ध ट्रस्टी रहथि। दर्शकमे श्री टी.एन.चतुर्वेदी, अशोक वाजपेयी, आलोक पी. जैन आ ब्रजेन्द्र त्रिपाठी रहथि। ब्रजेन्द्रजी हमरा संग बैसल रहथि। स्व. साहू शान्ति प्रसाद जैन आ स्व. श्रीमति रमा जैन, ऐ पुरस्कारक प्रारम्भ कएने रहथि आ हुनकर दुनू गोटेक फोटो पाछाँमे लागल रहन्हि। आइ काल्हि ४०म सालक महत्व ऐ कारणसँ बढ़ि गेल अछि कारण ५०म वर्षगाँठक इन्तजारमे बहुत गोटे आयु बेशी भेने जीवित नै रहै छथि। सरला माहेश्वरी माइक पकड़ि कार्यक्रमक शुरुआतसँ पहिने अनीता जैनकेँ निराला रचित सरस्वती वन्दना गेबाक अनुरोध केलन्हि आ ओ मंचक दोसर भागमे महर्षि अगस्त्यक ’या कुन्देन्दु ’ सँ शुरु कऽ निरालाक रचना शास्त्रीय पद्धतिमे गेलन्हि। फेर फूलसँ प्रधान मंत्रीक स्वागत प्रबन्ध न्यासी अखिलेश जैन द्वारा भेल, फेर रवीन्द्र कालिया फूलसँ रहमान राहीक स्वागत केलन्हि। फेर श्री सीताकान्त महापात्र अंग्रेजीमे उद्गार व्यक्त करैत कहलन्हि जे राहीकेँ सम्मानित कऽ भारतीय ज्ञानपीठ अपनाकेँ सम्मानित केलक अछि। फेर प्रधानमंत्री द्वारा राहीकेँ शॉल ओढ़ा कऽ आ १०३५ ई.क राजा भोजक सरस्वतीक प्रतिमाक कांस्य अनुकृति जइमे ज्ञानपीठ द्वारा प्रभामण्डल जोड़ल गेल (मूल प्रतिमा लंदनक ब्रिटिश म्यूजियममे अछि) आ प्रशस्ति पत्र आ ५ लाख टाकाक ड्राफ्ट दऽ कऽ सम्मानित कएल गेल। राही उद्गार व्यक्य केलन्हि आ महान जवाहरलाल नेहरू जइ पदपर छला ओइ पदपर आसीन मनमोहन सिंहसँ पुरस्कार प्राप्त कऽ विशेष प्रसन्नता प्रकट केलन्हि। ओ ईहो बजला जे कश्मीरक राज्य सरकार कश्मीरीकेँ मान्यता नै देलकै मुदा ई केन्द्र सरकार द्वारा मान्यताप्रप्त भाषा अछि। फेर रवीन्द्र कालिया धन्यवाद ज्ञापन केलन्हि। राहीक प्रतिनिधि कविताक ज्ञानपीठ द्वारा कएल हिन्दी अनुवाद राही द्वारा प्रधान मंत्रीकेँ देल गेल। अब्दुल रहमान राहीक जन्म ६ मई १९२५ ई.केँ भेल। हुनकर पहिल कविता संग्रहकेँ साहित्य अकादमी पुरस्कार देल गेल। भारत सरकारक पद्म श्री आ मानव संसाधन विकास मंत्रालयक एमिरेट्स फेलोशिप हिनका भेटल छन्हि। हिनकर कविता संग्रहमे सनवुन्य साज, सुबहुक सोदा, कलाम-ए-राही प्रमुख अछि। हिनकर आलोचना आ निबन्धक पोथी अछि, कहवट आदि। हिनकर निच्चा देल कविता उपस्थित लोककेँ देल गेलन्हि। प्रस्तुत अछि हिनकर कविता (कश्मीरीसँ अंग्रेजी एस.एल.सन्धु, साभार भारतीय ज्ञानपीठ आ अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर) छाह सभ अपन नियतिसँ वाद आ अमरताक आशा आब छोड़ि दिअ, यदि जुटा ली किछु क्षण, तँ भेर भऽ जाउ तइमे। बस्तीक जइ पथपर चलैत रहलौं, ओ धँसि गेल घनगर बोनमे, जेना हमर आस्थाक कवच भेल भेद्य, शंकासभ द्वारा। आँखि खुजिते हमर स्वप्नकेँ लागल आँखि सभटा बासन्ती युवा छाती झरकि कऽ भऽ गेल सुनसान। देखू तँ देखायत आस-पड़ोसमे लावण्यमयी मेला, हाथमे आओत मात्र एकाध विचार, आ असगर एकटा कौआ उजाड़मे। कखनो हमर इच्छा रहय चान-तरेगन गढ़बाक, आब माथ भुका रहल छी, अपन कोनो नामकरण तँ करी। सभटा विश्वास घाटीक मौलायल हरियरी सन, सभटा चैतन्य खिसियायल साँप सन। सभटा देवता हमर अपन छाह छथि, सभटा दानव हमर अहं केर कनिया-पुतड़ा सन। सभा भवन भरल बुझू बानरक खोँ-खोँ सँ, सन्तक पहिरनक लेल ताकू बोने-बोन। केहन अछि नाओक खेबनाइ, कतय तँ अछि किनार! देशांस भोथलेलक नाओकेँ अन्हारमे। हे रौ नटुआ, नाच निर्वस्त्र चारू कात ओकर, राही तँ आगि-खायबला बताह अछि। समारोह एक घण्टामे खतम भेल आ घुरैत रही तँ एफ.एम.पर समाचार भेटल जे सचिन तेन्दुलकर अपन टेस्ट जीवनक ४०म शतक दिनमे पूर्ण केलन्हि, भीमसेन जोशीकेँ भारत रत्न पुरस्कार देल गेल आ चन्द्रायण-१ चन्द्रमाक १०० किलोमीटरक वृत्ताकार कक्षामे स्थापित भऽ गेल जतऽ ओ २ वर्ष धरि रहत। 2 2
गद्य पद्य भारती अनुवाद खण्ड-२ [विदेह सदेह ३७]