108 विदेह २८ म अंक १५ फरबरी २००९ (वर्ष २ मास १४ अंक २८) एहि अंकमे विशेष:- भाग रौ (संपूर्ण मैथिली नाटक)-लेखिका - विभा रानी (आगाँ) एहि अंकमे अछि:- १.संपादकीय संदेश २.गद्य २.१. कथा-सुभाषचन्द्र यादव-कारबार २. मरीचका मरीचका- कुमार मनोज कश्यप (कथा) २.२.भाग रौ (संपूर्ण मैथिली नाटक)-लेखिका - विभा रानी (आगाँ) २.३. की नाम राखी एहि कथाक-गजेन्द्र ठाकुर २.४. जितेन्द्र झा- रिपोर्ताज २.५. विवेचना:केदारनाथ चौधरीक उपन्यास: चमेली रानी आ माहुर:- गजेन्द्र ठाकुर ३.पद्य ३.१. निमिष झा बुद्ध आ आतंक ३.२.ज्योति- विद्याधन ३.३. पंकज पराशर - रावलपिंडी ४. मिथिला कला-संगीत- हृदयनारायण झा ५. बालानां कृते-मध्य-प्रदेश यात्रा आ देवीजी- ज्योति झा चौधरी ६. भाषापाक रचना-लेखन - पञ्जी डाटाबेस (आगाँ), [मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] 7. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS (Festivals of Mithila date-list)- 7.1.Jyoti's Poem 7.2.The Comet-English translation of Gajendra Thakur's Maithili Novel Sahasrabadhani by jyoti विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( तिरहुता आ देवनागरी दुनू लिपिमे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Tirhuta and Devanagari versions both ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक तिरहुता आ देवनागरी दुनू रूपमे Videha e journal's all old issues in Tirhuta and Devanagari versions १.संपादकीय मैथिलीक पुरोधा जयकान्त मिश्र (1922-2009) क 3 फरबरी 2009 केँ सात बजे साँझमे निधन भ' गेलन्हि।
मैथिली साहित्यक एकटा बड़ पैघ विद्वान डॉ. जयकांत मिश्र 1982 ई. मे इलाहाबाद विश्वविद्यालयक अंग्रेजी आ आधुनिक यूरोपियन भाषा विभागक प्रोफेसर आ हेड पद सँ सेवा निवृत्त भेल छलाह। तकरा बाद ओ चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालयमे भाषा आ समाज विज्ञानक डीन रूपमे कार्य कएलन्हि।
स्व. मिश्र अखिल भारतीय मैथिली साहित्य समिति, इलाहाबादक अध्यक्ष, गंगानाथ रिसर्च इंस्टीट्यूट, इलाहाबादक अवैतनिक सचिव आ सम्पादक, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयागक प्रबन्ध विभागक संयोजक आ साहित्य अकादमी, नई दिल्लीक मैथिली प्रतिनिधि आ भाषा सम्पादक रहल छलाह।
मैथिली साहित्यक इतिहास, फोक लिटेरेचर ऑफ मिथिला, कीर्तनिया ड्रामा सभक क्रिटिकल एडीशन, लेक्चर्स ऑन थॉमस हार्डी, लेक्चर्स ऑन फोर पोएट्स आ द कॉम्प्लेक्स स्टाइल इन एंगलिश पोएट्री हिनक लिखित किछु ग्रंथ अछि।
हिनकर वृहत मैथिली शब्द कोष मात्र दू खण्ड प्रकाशित भए सकल, जाहिमे देवनागरीक संग मिथिलाक्षर आ फोनेटिक अंग्रेजीमे सेहो मैथिली शब्दक नाम रहए। ई दुनू खण्ड मैथिली शब्दकोष संकलक लोकनिक लेल सर्वदा प्रेरणास्पद रहत।
विदेह डाटाबेस आधार पर सोलह खण्डमे गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झाक मैथिली अंग्रेजी शब्दकोष जाहिमे मिथिलाक्षर आ अंतर्राष्ट्रीय फोनेटिक रोमन आ देवनागरीमे शब्द आ शब्दार्थ देल गेल अछि प्रेसमे अछि आ एहि मासमे ओकर पहिल खण्ड प्रकाशित भए जाएत। ई पोथी दीनबन्धु झा, जयकांत मिश्र आ गोविन्द झाकेँ समर्पित कएल जा रहल अछि।
स्व. जयकांत मिश्रकेँ मैथिल आर मिथिला परिवार दिससँ श्रद्धांजलि।
एहि घटनापर मैथिली भाषा-साहित्यक प्रसिद्ध समीक्षक प्रोफेसर डॉ. प्रेमशंकर सिंह जीक उद्गार-
" डॉ. जयकांत मिश्रक मृत्यु मैथिलीक लेल एकटा अपूरणीय क्षति अछि। मैथिलीक लेल हिनकर सेवाक कोनो जोड़ नहि अछि, ग्रियर्सनक बाद ई एकमात्र एहन मैथिली प्रेमी रहथि जे मैथिलीकेँ विश्व-स्तर तक अनलन्हि आ विश्वक सोझाँ अनलन्हि।"
एहि घटनापर मैथिली भाषा-साहित्यक प्रसिद्ध कवि-कथाकार डॉ. गंगेश गुंजन जीक उद्गार-
"जयकांत बाबूक निधन बहुत सांघातिक सूचना। समस्त मैथिल, मिथिला आ मिथिलांचल लेल। किछु कहल सम्भव नहि भ' रहल अछि....।" डॊ. रामभरोस कापड़ि “भ्रमर” जीकेँ नेपालक एकमात्र सरकारी प्रकाशन संस्था “साझा प्रकाशन”क चेयरमैन नियुक्त कएल गेल छन्हि। साझा प्रकाशनक ४५ बरखक इतिहासमे ई पहिल बेर भेल अछि जे कोनो मधेसीकेँ ई सम्मान भेटल छन्हि। भ्रमर जीक कार्यभार सम्हारिते विद्यापतिक फोटो प्रकाशित कएल गेल अछि आ आगाँ नेपालीक लेल मात्र काज केनिहार एहि संस्थासँ मैथिलीमे व्याकरण, शब्दकोष, बालकथा, कथासंग्रह आदि प्रकाशित कएल जएबाक योजना अछि। संगहि "विदेह" केँ एखन धरि (१ जनवरी २००८ सँ ३० जनवरी २००९) ७३ देशक ७११ ठामसँ १,४६,१६१ बेर देखल गेल अछि (गूगल एनेलेटिक्स डाटा)- धन्यवाद पाठकगण। अपनेक रचना आ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे। गजेन्द्र ठाकुर, नई दिल्ली। फोन-09911382078 ggajendra@videha.co.in ggajendra@yahoo.co.in २.संदेश १.श्री प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि। २.श्री डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह| ३.श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ४.श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बाधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ५.श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ६.श्री डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। ७.श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ८.श्री विजय ठाकुर, मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। ९. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका ’विदेह’ क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १०.श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका ’विदेह’ केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। ११.डॉ. श्री भीमनाथ झा- ’विदेह’ इन्टरनेट पर अछि तेँ ’विदेह’ नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब। १२.श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमर, जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत से विश्वास करी। १३. श्री राजनन्दन लालदास- ’विदेह’ ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक एहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल। १४. डॉ. श्री प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भ' गेल। (c)२००८-०९. सर्वाधिकार लेखकाधीन आऽ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। २.गद्य २.१. कथा-सुभाषचन्द्र यादव-कारबार २. मरीचका मरीचका- कुमार मनोज कश्यप (कथा) २.२.भाग रौ (संपूर्ण मैथिली नाटक)-लेखिका - विभा रानी (आगाँ) २.३. की नाम राखी एहि कथाक-गजेन्द्र ठाकुर २.४. जितेन्द्र झा- रिपोर्ताज २.५. विवेचना:केदारनाथ चौधरीक उपन्यास: चमेली रानी आ माहुर:- गजेन्द्र ठाकुर २.१. कथा-सुभाषचन्द्र यादव-कारबार २. मरीचका मरीचका- कुमार मनोज कश्यप (कथा) चित्र श्री सुभाषचन्द्र यादव छायाकार: श्री साकेतानन्द सुभाष चन्द्र यादव, कथाकार, समीक्षक एवं अनुवादक, जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल- मधुबनी। आरम्भिक शिक्षा दीवानगंज एवं सुपौलमे। पटना कॉलेज, पटनासँ बी.ए.। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्लीसँ हिन्दीमे एम.ए. तथा पी.एह.डी.। १९८२ सँ अध्यापन। सम्प्रति: अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, पश्चिमी परिसर, सहरसा, बिहार। मैथिली, हिन्दी, बंगला, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, स्पेनिश एवं फ्रेंच भाषाक ज्ञान। प्रकाशन: घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित। भूतपूर्व सदस्य: साहित्य अकादमी परामर्श मंडल, मैथिली अकादमी कार्य-समिति, बिहार सरकारक सांस्कृतिक नीति-निर्धारण समिति। कारबार ओ सभ अचानक सड़क पर भेटि गेल छलाह । हम अपन होटल घुरैत रही, तखने हुनका सभ पर नजरि गेल । ओ सभ चारि गोटय छलाह । दू गोटय केँ हम चिन्हैत रही । ओ दुनू हमर परिचित रहथि । हुनका दुनू केँ एतेक दिनक बाद देखि कऽ हमरा आश्चर्य आ प्रसन्नता भेल। वर्मा सँ तऽ घनिष्ठता रहय, मुदा दोसर नवयुवक सँ मात्र परिचय । हम वर्मा सँ पुछलिऐन—कहू-कहू , कुशल कि ने ? वर्मा हमर प्रश्नक कोनो जवाब नहि देलथि । कहलनि — अहाँ बढ़िया मौका पर भेटल छी । आउ, चलै छी। हम पुछलिऐन – कत्तऽ ? तऽ वर्मा कहलनि — चलू ने ! फेर डेग बढ़बैत कहलनि –हिनका सँ परिचय करू । ई छथि मिस्टर सिन्हा । आ हिनका तऽ अहाँ जनिते हेबनि । हम मिस्टर सिन्हा सँ हाथ मिलबैत ओहि चारिम व्यक्तिक बारेमे सोचय लगलहुँ जे एकरा सँ कहिया आ कतय भेंट भेल छल; मुदा किछु मोन नहि पड़ल । हम सभ फुटपाथ पर चलय लगलहुँ । हम छगुन्ता मे पड़ल ई जनबाक लेल व्यग्र छलहुँ जे हम सभ आखिर कतय जा रहल छी । हमर व्यग्रता जल्दिए खतम भऽ गेल । कनेक आगाँ बढ़ल रही कि देखलहुँ ओ सभ बार दिस घुमि गेल छथि । बारक गेट पर दरबान ठाढ़ छल आ भीतर जाइबला हरेक आदमीकेँ सलाम ठोकैत छल । ओकर सलामी हमरा अवढंगाह बुझायल । ओ बहुत जोरसँ सलाम ठोकैत छल । बार एयरकंडीशंड छलैक । भीतर घुसिते शीतल बुझायल । पूरा हॉल मे हल्लुक नील इजोत पसरल छलैक। मद्धिम आवाज मे कोनो पॉप गीत बाजि रहल छलैक । बार मे बेसी मर्दे रहैक । कोन मे एकटा स्त्री अपन छोट बच्चा आ घरवलाक संग छलि आ आब उठि कऽ विदा होबऽ बला छलि । ओकर मुँह साफ –साफ नहि देखाइत रहैक । अपन – अपन टेबुल लग बैसल लोक खाइत – पिबैत गपशप कऽ रहल छल । गपशप सुनाइत नहि रहैक । वेटर अबैत – जाइत रहैक । बुझाइत रहैक जेना ओ सभ धुंधमे चलि रहल हो । हम सभ एकटा टेबुलक दुनू कात बैसि गेल रही आ शराब आ खेबा - पिबाक वस्तुक प्रतीक्षामे रही । हम अपना लेल बीयर आनय कहने छलिऐक । तखने वर्मा बजलाह — दस बिगिंस आवर बिजनेस डिनर । ओ सभ नव कारबार शुरू कऽ रहल छलाह आ ओही खातिर एतय आयल छलाह । कारबारक ओरिआओन पूरा कऽ लेला पर ओ सभ प्रसन्न छलाह आ उछाह मे डिनर कऽ रहल छलाह । एक-एक पैग पिलाक बाद जखन हमरा सभ पर निशांक फुरफुरी शुरू भेल तऽ सिन्हा बाजल — भाइ, बिजनेस मिंस बिजनेस । बिजनेस अलग छै, दोस्ती अलग । दोस्तीक रूपमे हम अहाँक एक बेर मदति कऽ सकैत छी, दू बेर कऽ सकैत छी । लेकिन जँ अहाँ बिजनेस मे हमर समय लेब तऽ हमर समयक तऽ मोल अछि। आ ओ अहाँ केँ देबहि पड़त । हमर एकटा नव दोस्त रहय । एक दिन ओ आयल आ कहलक — यार, वाइफ केँ टी.भी. किनबाक बड़ सेहन्ता छैक । किछु पाइ अछि, किछु तों दऽ दे तऽ कीनि ली । हम ओकरा एकटा नव सेट बेसाहि देलिऐक । किछु दिनक बाद ओ फेर आयल । कहय लागल – यार, वाइफ फ्रिज लेल कहि रहल अछि । हम कहलिऐ — नाउ दिस इज टू मच । सिन्हा एक पैग और पीलक । सिगरेट धरेलक आ बाजय लागल — सभ चीजक मोल होइत छैक । एकटा खिस्सा सुनबैत छी । ध्यान सँ सुनबै आ कहब । एकटा स्त्री छलि । ओकर घरबला बेराम पड़ि गेलै । डॉक्टर लग लऽ गेलि । डॉक्टर कहलकै ऑपरेशन करय पड़तैक । ओहि स्त्री लग पाइ नहि छलैक आ डॉक्टर बिना पाइ लेने ऑपरेशन करक लेल तैयार नहि भेलै। ऑपरेशन नहि भेलासँ ओकर पति मरि जइतैक । ओ अपन पूर्व प्रेमी लग गेलि । ओकर पूर्व प्रेमी पाइ देबा लेल तैयार भऽ गेलै, मुदा ओकर एकटा शर्त्त रहै । शर्त्त ई रहै जे ओहि स्त्री केँ अपन पूर्व प्रेमी संगे एक राति बिताबय पड़तैक । हम सभ ई जनबाक लेल उत्सुक रही जे आब ओ स्त्री की करत । लेकिन तखने सिन्हा खिस्सा केँ ओत्तहि खतम करैत पुछलक — आब ई कहू जे गलती ककर रहै ? ओहि डॉक्टरक, पूर्व प्रेमीक या ओहि स्त्रीक ? हम सभ, जे एकटा मनलग्गू खिस्साक आनंद लैत रही, एकाएक चिन्ता मे पड़ि गेलहुँ आ सोचय लगलहुँ । बड़ी काल धरि क्यो किछु नहि बाजल । सभ नैतिकताक फाँस मे ओझरायल रहय । सिन्हा हमर सभक दुविधा केँ बूझि गेल आ बाजल –गलती ककरो नहि रहै । समस्याक एहि समाधान सँ हम सभ कने चौंकलहुँ, मुदा संतोषक अनुभव सेहो भेल । सिन्हा मामला केँ और स्पष्ट करैत बाजल – देखू , डॉक्टर जँ पाइ नहि लेत तँ ओकर रोजगार मारल जेतै आ ओकर पूर्व प्रेमी बिना किछु लेने एतेक पाइ किएक देतै ? आ ओ स्त्री जँ ओकरा संगे राति नहि बितायत तँ ओकर घरवला मरि जेतै । सिन्हाक स्पष्टीकरणक संगहि खिस्सा खतम भऽ गेल आ हमरा सभक भीतर चलैत उचित – अनुचितक उठा-पटक सेहो । हम सभ बार सँ निकलय लगलहुँ तँ दरबान फेर ओहिना जोर सँ सलाम ठोकलक । हमरा आब हरेक चीज मे पैसाक टनक सुनाय लागल, दरबानक सलामीयो मे। ओकर सलामी मे अवढँगपनी अखनो छलैक मुदा हम सभ ओकर अभ्यस्त भेल जाइत रही । बाहर आबि एहि डिनर लेल हम कृतज्ञता प्रकट कयलहुँ आ नव कारबारी सभ सँ विदा लऽ कऽ अपन होटल दिस चलि पड़लहुँ । मन भारी रहय । ओ स्त्री आ ओकर बेमार घरबला दिमाग मे चक्कर कटैत रहय । लघुकथा- कुमार मनोज कश्यप ।जन्म-१९६९ ई़ मे मधुबनी जिलांतर्गत सलेमपुर गाम मे। स्कूली शिक्षा गाम मे आ उच्च शिक्षा मधुबनी मे। बाल्य काले सँ लेखन मे अभिरुचि। कैक गोट रचना आकाशवाणी सँ प्रसारित आ विभिन्न पत्र-पत्रिका मे प्रकाशित। सम्प्रति केंद्रीय सचिवालय मे अनुभाग आधकारी पद पर पदस्थापित। मरीचका 'हे हर, हमरहु करहु प्रतिपाल ' - भवनीबाबूक मुंह सँ निकलल एहि गीतक भावार्थ सभ के बुझल छलैक। एते तक कि बच्चो सभ बुझि जाईत छल जे भावनीबाबू आब भोजनक प्रतीक्षा कय रहलाह अछि । भवानीबाबू -- जिला परिषदक सेवा-निवृत बड़ा बाबू । सस्ती जमाना मे भवानीबाबू एक-एक टा रुपैया जमा कऽ कऽ शहर मे जमीन खरीद लेलनि । मुदा घर टा बनि सकलनि सेवा-निवृति के बादे । सेवा-निवृति पर भेटल सभ पाई के लगा कऽ बनलनि चारि कोठली के पक्का-पुख्ता मकान । मुदा चारु कोठली दुनू बेटा आपस मे बाँटि लेलक । भवानीबाबू के आश्रय भेटलनि बालकनी मे । कनियाँ तऽ पहिने स्वर्गवासी भऽ चुकल रहथिन । भवानीबाबू अपने बनाओल घर मे आन बनि बालकनी के एक कोन मे टुटलहवा चौकी पर समय काटऽ लगलाह । हद तऽ तखन भऽ गेल जखन एक दिन भवानीबाबू के पेट सेहो बँटि गेलनि ---पार लगा कऽ दुनू भाई के घर सँ भोजन आबऽ लगलनि। आई भवानीबाबू बड़ी काल धरि गीत गबैत रहलाह ---बीच-बीच मे नजरि याचक-भाव सँ दुनू भाईक भनसा घर दिस बेरा-बारी सँ जाईत रहल । गीत अंतरा धरि पहुंचि गेल । फेर स्वर मद्धिम पड़ऽ लागल----उदास---- थाकल---हारल---हे हर, हमरहु करहु प्रतिपाल़। भाग रौ (संपूर्ण मैथिली नाटक)- (आगाँ) अंक 1 दृश्य : 3 लेखिका - विभा रानी पात्र - परिचय मंगतू भिखारी बच्चा 1 भिखारी बच्चा 2 भिखारी बच्चा 3 पुलिस यात्री 1 यात्री 2 यात्री 3 छात्र 1 छात्र 2 छात्र 3 पत्रकार युवक पत्रकार युवती गणपत क्क्का राजू - गणपतक बेटा गणपतक बेटी गुंडा 1 गुंडा 2 गुंडा 3 हिज़ड़ा 1 हिज़ड़ा 2 किसुनदेव रामआसरे दर्शक 1 दर्शक 2 आदमी तांबे स्त्री - मंगतूक माय पुरुष - मंगतूक पिता भाग रौ (संपूर्ण मैथिली नाटक) अंक : 2 दृश्य : 1 (बाजारक दृश्य। फेरीबाला रूमाल, टिकुली, सेब, नारंगी, खिलौना सभ बेचबाक आवाज नेपथ्य स' - 'ऐ बच्चा के खेलौना, साढ़े बीस रूपैया, दौग-दौग क' ले, जाऊ, दीदी, काकी, भैया,' खसि गेल खसि गेल, पेंटक दाम खसि गेल', हरेक माल 30 रूपैया, 30 रूपैया, 30 रूपैया' आदि।) (प्रकाश शनै-शनै: मंगतू पर केन्द्रित होइत अछि।) मंगतू : ओह, ई हल्ला-गुल्ला! ई भीड़, ई धक्का-धुक्की!.. नीक लागै छै। जिनगी चलि रहल छै अई सभ मे.. ई जगह.. बरगदक नाहित.. हमरा सन-सन कतेक लोकक आसरा.. कखनो, कखनो त' हम सड़क पर नजरि जमा देइत छी.. ओह खाली पएरे-पैर.. दौगैत-भगैत गोरे-गोर.. कनेक ओकरा स' ऊपर त' दायाँ-बाम डोलैत हाथ.. कनेक ओकरा स' ऊपर त' माथे-माथ.. कारी-कारी केस, स्त्रीक माथ, पुरूषक माथ.. सभक लक्ष्य अपना-अपना गंतव्य धरि पहुँचबाक, रहि जाइ छी त' हमी - लोथ, नांगरि., लूल्हि.. अही के अही ठां.. लोक आओर कहैत रहैत अछि जे हम बड्ड भगमंता छी.. बइसल-बइसल पाइ भेंटि जाइत अछि.. कोना क' हम बुझाबी जे हमरा भीख नञि, काज चाही काज। .. (शून्य मे चिकरि क') रौ, हम भगमंता छी त' तोहो सभ कियैक ने बनि जाइ छें हमरे जकाँ भगमंता.. (विक्षिप्त जकां हंसैत अछि) .. अरे, सभ हमरे जकाँ बनि जाएत, त' फेर कमाएत के.. हमरा आओर पर भीखक नजरि आ चवन्नी, अठन्नी फेंकत के? .. हं, बूझल। ई सभ चलैत रहौक, तकरा लेल साबुत लोकक भेनाई जरूरी छै.. आ ओ सभ पुण्य कमाबैथि, तकरा लेल हमरा आओरक रहनाई सेहो .. (मंगतू जहन ई बाजि रहलए, दू-तीन टा हिज़ड़ा ओम्हर अबैत अछि। सभक नजरि मंगतू लग छिड़ियाएल पाई पर छै। सभक के आँखि मे लालच छै।) हिजड़ा 1 : की राजा! की भेलौ रौ? सूखल गरी जकाँ मुंह कियै बनेने छें? अरे हाय, हाय, तोरा देखि क' हमरा त' किछु किछु होबैत अछि (गबैत अछि) 'क्या करूँ हाय, कुछ-कुछ होता है।' मंगतू : (अपनही धुन मे) धिया-पुता सभ स्कूल-बैग ल' क' स्कूल जाइत अछि.. कतेक नीक लगै छै.. हम नान्हि टा स' जवान भ' गेलहुँ, मुदा स्कूलक मुंह.. हिजरा 2 : त' की भेलौ रौ राजा। अपना ओहिठां बहुत रास लोक स्कूलक मुंह देखने बेगर मरि जाइत अछि। हमरे आओर के देख। मुदा फ़िकिर नईं। हमरा आओर खुशो छी आ हे देख, तोरा लेल गीतो गाबि रहल छी।.. (गबैत अछि) ''सैंया दिल में आना रे, आके फिर ना जाना रे, हो आके फिर ना जाना रे, छम-छमा-छम-छम!''(अथवा कोनो आधुनिक गीत)़ मंगतू : हमहू कहियो ई चाकर-चिक्कन रोड पर चलि सकब! बस- ट्रेन में चढ़ि सकब। अपना कमाई स' बसक टिकट कीनि सकब! .. भ' सकै छै.. कोनो मददगार आबि क'.. मुदा, की भेटत कोनो एहेन। हिजड़ा 3 : चल रौ, हम बनि जाइ छियौ तोहर खुदाई खिदमतगार। चल, चल, हम सभ तोरा ल' क' सनीमा जेबौ, चाट-पकौड़ी खुएबौ (गबैत अछि) ''चौपाटी जाएंगा, भेलपुरी खाएगा, पीछा न छोड़ेंगा हम, गाना बजाना, खाना-पीना, गाड़ी में होंगा सनम।'' (सभ मिलिक' मंगतू के झोरैत अछि। मंगतूक धेयान टूटैत छै।) हि. 1 : की रौ हीरो। एना अभिषेक बच्चन जकाँ मुंह कियैक लटकौने छे? हि. 2 : रौ, तों कोनो भीख थोड़बे मांगै छें। तोरा देखितही मातर लोक आओरक' हाथ अपने आपे अपन पॉकिट दिस बढ़ि जाइ छै। हि. 3 : हमरा आओर स' नीके छें रे। देख, तोहर हाथ-गोर नञि छौ, तइयो तों आदमी कहबैत छें - आदमी, मरद। हमरा आओर के अछि ई चारू हाथ-गोर! तइयो एक गोट पहिचान नञि अछि। तैं (ताली बजबैत अछि) कहबैत छी। हि. 1 : सिगनले-सिगनले, रोडे-रोडे भीख मंगैत फिरै छी। हमरा आओर के देखितही बाबू-मेम सभ सीसा चढ़ा लेइत छथि गाड़ीक। मंगतू : मुदा हमरा भीख नञि चाही। हमरा काज चाही। हि. 2 : (हंसैत) से तोरा भेंटतौ नञि! कह, त' स्टाम पेपर पर लिखि क' द' दियौ। (गबैत अछि) 'कोरे कागज पे मुझसे करा ले सही।' 'अरे हमर चिक्कन-चुनमुन राजा, हमर छैला, ई सनी देओल जकाँ डकरै स' तोरा काज भेंट जेतौ। भेंटल हमरा आओर के ? तोहर त' हाथ-गोर नञि छौ, हम्मर त' अछि। मुदा दोकानदार बाजल - रौ बाप रौ बाप! हे पानि मे आगि लगाब' लेल हमही भेटलियौ रौ? तोरा देखि क' त' गँहकी पराइए जेतौ। फेर बिक्री-बट्टाक की हएत। हि. 1 : हम ऑफिस-ऑफिस केहुरिया काटल। सभक एक्के टेर- पढ़ल-लिखल छें? डिग्री छौ? हि. 2 : सोचल, अपने कोना धंधा-पानी आरंभ करी त' -पूँजीए नञि (करूण हंसी) घर मे मुर्गी नञि, कीने चलल मसल्ला। हि. 1 : एखनि नीक भ' गेल अछि। रबि क रबि सभ दोकान पर रेट फिक्स अछि- एक रूपैया फी दोकान। (हंसैत अछि) फ़ी रूपैया, फ़ी दोकान, फ़ी छक्का । रौ, तोरा त' अठन्नी, रूपैया दू रुपैया डेली भेटै हेतौक। हमरा आओर के त' एक रूपैया फी हफ्ता, फी छक्का। देख, सभ किछु अछि - हाथ गोर, नाक-आँख, मूड़ी, दिमाग। हि. 2 : मुदा सभ किछु रहितहु किछु नञि छी हम सभ.. ने मनुक्ख, ने कुकुर। हि. 1 : बस एक रूपैया फी हफ्ता, फी छक्का (गबैत नचैत अछि। शेष दुनू ओकरा संगति देइत अछि) एक रूपैया मे.. एक रूपैया मे, पूड़ी खाऊं, जिलेबी खाऊं, नरेटी फाड़ि क' तान लगाऊ.. एक रूपैया मे। (नचैत गबैत ओ सभ मंगतूक माथ, बाल, मुंह छुबैत अछि, चूमैत अछि, नाच' लेल उठाबैत अछि। मंगतू सेहो प्रयास करैत अछि। पार्श्र्व स' नृत्य प्रधान संगीत तेज होइत अछि.. नाचबाक प्रयास करैत-करैत मंगतू खसि पड़ैत अछि। सांस सामान्य भेला पर।) मंगतू : हँ रौ, सही कहै छें तो सभ। अई ठाँ त' लोक-आओर अठन्नी - टाका, में पुण्य कीनैत छथि त' अपना आओर के काज द' क' किओ अपन पांच सौ, सात सौक खारा कियैक करत? लोक आओर त' इएह बूझैत छथि ने जे लोथ, लूल्हि-नांगड़ि. कोन काजक? तोरा आओर स्त्री-पुरूष नञि भेलें त' समाज मे तोहर गिनतीयो नञि! अरे किओ पूछल हमरा आओर स' जे हम सभ.. हम सभ की सभ क' सकै छी। अरे, किओ करबा के त' देखौ जे हम सभ की नञि क' सकै छी! हि. 2 : (हंसैत आ थपड़ी पीटैत) की सभ क' सकै छें रे? साला, दगेबाज, हमरा संगे प्रेम बना सकै छें! रौ सार.. (चिढ़बैत अछि। मंगतू पहिने खिसियाइत अछि, फेर हंसि पड़ैत अछि।) मंगतू : बनेबौ रौ, बनेबौ, मुदा पहिने अखबार त' पढ़' दें। भिन्सर स' नञि भेटल। नञि त' रामआसरे भाइ आ नहिए किसुनदेवे भाइ आइ अखबार देलैन्हि.. चली, अपनही स' ल' आनी। भ' सकै छथि, जे बेसी काज हुअए हुनका आओर के.. (मंगतू अखबारक औफ़िसक प्रवेश द्वार धरि अपना के ल' जाइत अछि। द्वार पर किसुनदेव आ रामआसरे अति सावधानक मुद्रा मे ठाढ़ छथि।) किसुन. : आई सीएमडी साहेब आब' बला छथि। राम. : हँ, तैं देखहक नें, सभकिछु कतेक चकाचक छै.. फिट-फाट.. फस्ट किलास। किसुन. : आई त' सभ स्टाफ सेहो आएल अछि। कोनो गैरहाजिर नञि । राम. : सुनल जे आइ सीएमडी साहेब सभ' स' भेंट करताह। मीटिंग करताह। किसुन . : तहन त' अपनो सभ स' भेंट करताह! राम. : भ' सकैत अछि। किसुन : एहेन हेतै त' हम पलखति निकालि क' हुनका पएर छुबि कहबै, जे साहब.. हमरा कनकिरबा के कोनो नोकरी.. राम. : सपना जुनि देख.. ई एतेक बड़का लोक सभ.. अर्जी दइयो देबही त' अई हाथ मे लेथुन्ह आ ओहि हाथ स'.. (अही बीच युवक आ युवती पत्रकार अबैत छथि। दरबानक मुंह पर पहिचानक मुस्की अबैत छै। दुनू ओहि दुनू के नमस्कार करैत छथि।) युवक : (भीतर जाइत) रामआसरे! की बात? वर्दी एकदम कलफदार। मूँछो-एकदम कड़क। मूछो के कलफ लगा देलही की? राम. : (लजाइत) ऊ साहेब, आइ.. ऊ.. सीएमडी साहेब.. युवक : ओ हो.. तोरा संगे हुनकर मीटिंग छौ की? बढ़िया, बहुत बढ़िया (दर्शक दिस) देख रहल छी ने प्रशासन के। ओ तखने चुस्त-दुरूस्त नजरि अबैत अछि, जहन ओकर माय-बाप सभ अबैत अछि.. वरना.. (रामआसरेक एक दिसक मोछ के नीचा क' देइत अछि आ भीतर चलि जाइत अछि। ओकरा गेलाक बाद रामआसरे अपन मोछ पूर्ववत करैत अछि।) (मंगतू ताबैत द्वार धरि पहुँचि जाइत अछि। दुनू दरबान के देखि क' मुस्काइत अछि। मुदा दुनू ओकरा दिस ध्यान नञि द' क' मुस्तैदी स' अपन ड्यूटी क' रहल अछि। मंगतू अपन एकलौता हाथ स' सलाम ठोकैत अछि।) मंगतू : रामआसरे भाई? किसुनदेव भाई? आई त' बड्ड जोरदार लगि रहल छी दुनू। (दुनू कोनो जवाब नञि देइत छथि) मंगतू : बेरहटिया भ' गेलै.. अखबार नञि भेटल.. मोन बेचैन भेल अछि.. आ रामआसरे भाई.. कहियो हमरो ई ओफिस भीतर स' घुमा दिय' ने। सुनै छी, बड्ड मोडन ओफिस छै.. कम्पूटर, त' की त' की सभ छै। अच्छा, अहीं सभक पुन्न परताप से पढ़ब सीखि गेलहुँ त' अहींक किरपे कोनो दिन ओफीसो.. (तखने गेट पर हलचल होइत अछि। 'साब आ गए'। 'हटो, हटो, रास्ता छोड़ो' आदि स्वर उभरैत अछि। सिक्यूरिटी अटेंशनक मुद्रा मे आबि जाइत अछि। रामआसरे आ किसुनदेव दुनू मंगतू के देखैत छथि, फेर पलखतिये मे दुनू मे जेना कोनो करार होइत अछि आ दोसरे पल मे दुनू मंगतू के घीचि क' गेट स' दूर ल' जाक' पटकि देत छथि आ झब स' अपना स्थान पर आबि क' ठाढ़ भ' जाइत छथि। एक गोट सूटेड-बूटेड साहेब कएक टा अधिकारी सभस' घेराएल अबैत छथि आ भीतर चलि जाइत छथि। दुनू हुनका खूब चुस्त, मुदा नमगर सलाम ठोकैत छथि। सीएमडी आ बाकी लोकके भीतर गेलाक बाद।) राम. : यार किसुनदेव! ई नीक नञि भेलै। किसु. : त' कइए की सकैत छलहुँ? सीएमडी साहेब आब' बला छलाह। ऐहेन स्थिति मे हम सभ एकटा लोथ.. नांगड़ि भिखमंगा स' गपियाइत रहितहँु त'.. अपन नोकरी त' सोझे.. राम : तइयो.. आराम स' ल' जा सकै छलियै.. एना बोरा जकाँ पटकि देलियै.. की जान' चोटो-तोटो लागल हेतै.. किसुन : चल, चल देखि लेइत छियै.. राम. : नराज हेतैक ओ.. किसुन : अरे अखबार ल' क' चलै छी। ओकर नराजगी दूर भ' जेतै.. अखबार त' ओकरा लेल चरसो-गाँजा स' बढ़िक छै.. राम : पढ़ियो कतेक जल्दी लइत छै। पढ़ै की छै, घोखि जाइ छै, (गर्व स') हमही त' सिखेलियै ओकरा, अहिना एक दिन आएल छल आ बाजल छल.. हमरो अखबार पढ़ाएब सीखा दिय' ने भाई जी। हम मजाक केलियै -'की रौ, पढ़ि क' की बनबें? शिक्षा मंत्री? ओ बाजल, मंत्री बन' लेल पढ़ब जरूरी थोड़बे छै। राम. : मंगतूक ई प्रश्न हमरा छुबि गेल। बड़का-बड़का लोक सभक धिया-पुता के पढ़ब नीक नयि लागे छै.. माय-बाप ओकर पढ़ाईक पाछा पागल बनल रहैत अछि आ धिया-पुता सभ हुनकर मंह पर पों-पों पदैत रहैत छथि.. आ ई एकटा लोथ.. भिखमंगा.. हम तय केलहुँ जे एकरा ओतेक त' पढ़ाइए देबै जे ई पेपर - तेपर पढ़ि सकय.. ई अ, ज आकारा जा.. ह उूकार हि.. आ आखर-आखर करैत ओ पढ़ब सीखि गेलै। आ आब त' ओ जतेक तेजी स' पढ़ैत अछि कि ओतेक तेजी से पढुओ सभ नञि पढ़ि सकत। किसुन : हिन्दी छै ने! तैं जीभ के लकबा मारि जाइ छै.. एना-एना मुंह बनाओत कि लागत जे कोनो लाटक नाती आबि गेल अछि बिलायत से। राम : कंपूटरो स' तेज ओकर दिमाग छै.. सभ किछु जेना जीहे पर राखल रहैत छै.. जेना कंपूटरक, की कहै छै... ऊ, मेमोरी में.. किसुन : अरे रामआसरे भाइ, ई मोरी तो सुने थे.. नाली। ई मेमोरी की छै? मोरीक बहीन की? राम : ननदि छै। रौ मेमोरी नञि बूझै छें.. कंपूटरक दिमाग। मुदा मंगतूआक दिमाग त' कंपूटरोक दिमाग स' बेसी तेज छै। एकदम फास्ट.. रौ, कंपूटर मे त' देख' लेल ओकरा पहिने फोलू, फ़ेर फाइल त' की दनि, कहाँ दनि फोलू.. तहनो सेभ माने दिमाग बचा क' राखने छी त' भेटत, नञि त'.. हवा.. लें सार.. गेल सभ.. आ जदि कोनो बेरामी घुसि गेल, तहन त' पूरे गुड्डी बकट्टा.. किसुन : अरे, ठीक इएह गप्प हमर साहेब कहै छथि। आ सएह सच्छात विराजमान छै मंगतुआक खोपड़ी में। ऊँहूँ, गलति बाजि गेलहुँ, ओकर मेमोरी त' ई कंपूटरोक मेमोरी स' फास्ट चलै छै। चालू कि बन्द करबाक झंझटि स' फ्री। कोनो घटनाक दिन, समय, साल, कारण पूछू, तत्काल हाजिर। पोलटिस पर पूछू कि सनीमा पर कि टीवी पर की मौगी सभक नवरंगा डरेस पर की ठोर पालिस पर। सभ कंठस्थ, हनुमान चलीसा जकाँ। भूत-पिचास निकट नहिं आबै.. राम : अरे, शुरू-शुरू मे लोक आओर बड्ड हैरान होइत छलै ओकरा अखबार पढ़ैत देखि क'। किओ-किओ त' मुंहो बिचकबैत छल जे एह, भेल भिखमंगा आ शान प्रधानमंत्री के। किसुन : ओकरा आओर के बुझले नञि छै ने जे मंत्री सभ अखबार नञि पढ़ै छथि.. पढ़ताह कोना.. फुर्सतिये कत' छै.. जन-सेवा स' (जनसेवा पर स्वर मे व्यंगात्मक जो।) (तखने पार्श्र्व स' तेज गति स' चलबाक ध्वनि अबैत छै। दुनू पुन: अटेंशनक मुद्रा मे आबि जाइत छथि। सीएमडी निकलैत छथि। दुनू खूब नमगर सलाम हुनका ठोकैत छथि। हुनका जाइते देर कि सभ किओ फक स' साँस छोड़ैत छथि आ फेर सभ-किछु ढील-ढाल भ' जाइत छै। रामआसरे आ किसुनदेव अपन वर्दीक कलफ ढीला करैत छथि, मोछो नीचा करै छथि।) राम : देखलही। साहेब के जाइते सावधानक कलफ मे लागल ई पूराक पूरा.. की कहै छै .. मैनेजमेंट ग्रुप.. सभ एकदम स' ढील-ढाल भ' क' लटकि गेलौ। एना (हाथ-गोर मूड़ी ढीला क' क' देखबैत अछि।) किसुन : चल आब मंगतुआ लग। द' आबी अखबार। (दुनू मंगतू लग पहुँचैत छथि। ओकरा अखबार देइत छै। मंगतूक चेहरा पर दुख, अपमान, नाराजगीक भाव छै। ओ अखबार लेब' लेल उत्सुक नञि देखाई पड़ैत अछि।) किसुन : रौ लाट साहेबक नाती। मंगबे भीख आ शान रखबें राजा-महाराजा के। (कनेक नरम भ' क') रौ, हम सभ त' अदना मोलाजिम छी। हुकुम नञि बजाएब त' नोकरी स' छुट्टी। देखलही ने आइ तों जे बड़का-बड़का हाकिम सभ सेहो कोना कुकुरक नांगरि जकाँ .. ले, राखि लें, काल्हि स' जल्दी आनि देबौ। (मंगतू ओकरा आओर दिस बेगर देखि क' अखबार ल' लैत अछि।) किसुन : की जानि एहेन कोन हीरा-मोती जड़ल रहै छै अई मे जाहि लेल ई एतेक पिरीसान फिरैत अछि। वएह त' खबरि होइत छै - हत्या, अपहरण, बलात्कार। लागै छै जे पूरा देस अई सभ' मे हाथ रोपि क' बइस गेल अछि। मंगतू : (अखबार मे डूबि गेल अछि।) ओहि दिन हम अखबार मे गिनती कएल.. 380 लोकक मरबाक समाचार। किओ अपन मौगत नञि मरलै.. किओ गोली स' त' किओ बस पलटी स, किओ बम स', किओ अपनही बेटा-पुतौहु द्वारा.. एखने त' खबरि छलै - बम फ़ुटबाक। खूब असमान चढ़ि रहल छै मौगतक ई धंधा। एखने त' लोक आओर निकलल छलाह, घर स', बजार स', काज स', हंसैत-खेलैत, सौंसे देहे आ एखने हाथ-गोर साफ.. भरि जिनगी लेल लोथ.. तहन एक दिन की ई पूरा दुनिये लोथ भ' जेतै? (ठेहुन मे मुंह नुका लइत अछि, दर्शक मे स' एक गोट बाजैत अछि। मंगतू चेहाक मूड़ी ऊपर उठबैत अछि।) दर्शक 1 : साँच कहल रौ भाई, साँच! ई देख (केहुनी धरि कटल हाथ देखबैत अछि) रौ, बम, दंगा, झगड़ा-फसाद - मरैये के? कोनो नेता? हुनकर बेटा-जमाय, नाती-पोता? ऊँहूँ - धूरि सन हम, तों, ई, ओ..। ओ सभ पैघ.. मातबर लोग.. पैघ लोक, पैघ गिनती.. पैघ गिनती मे छोट-छीन संख्याक मोजर नञि .. । दर्शक 2 : (महिला अछि) देखू हमर ई मुंह (झरकल मुंह) जहिया स' एना भेलए, ऐना देखब छोड़ि देलहुंए.. सुनैत छलहुं जे लोक प्रेम मे त्याग करैत छथि। आई प्रेमो जबर्दस्तीक चीज बनि गेलैय'! हमरा अहाँ स' प्रेम भ' गेलए तैं अहाँ के हमरा स' प्रेम करैये पड़त.. दोसर रस्ताक कोनो गुंजाइसे नञि.. वरना तैयार रहू.. परिणाम लेल.. आह.. हम शिकार भ' गेलहुँ एहेन प्रेमक। (चिकरैत) रौ, बिगाड़' त' आबै छौ, बनाब' आबै छौ? कोन हक्के तों एना केलें हमरा संगे.. (कनैत) आब ऊपरबला स' मौगत माँगै छी त' सेहो नञि भेटैय'.. दिन-राति ओढ़नी स' मुंह तोपैत चलैत रहू, अपना स' बेसी दोसर लोकक खेयाल करू जे हुनका हमर ई मुंह नञि देखाइ पड़य.. (ओत्तहि ठेहुन भरे बैसि जाइत अछि।) मंगतू : कहबी छै जे सात जनमक बाद मनुक्ख जनम भेटै छै। आ सएह मनुक्खक ई अवस्था? (विक्षिप्त जकाँ चिकरैत अछि) रौ, रौ सर्वशक्तिमान कहाब'बला भगमान! कत' छें तों? मनुक्ख बनेबाक बदले राक्षस कियैक बना रहल छें? एतेक फ़ुटानी कियैक रौ? आ सोझा मे, देखियौ तोहर हिम्मति.. रौ, बौक-बहीर छें की.. देखबही ई धरती के, किछु करबहीं एकरा लेल कि कान मे तेल ध' क' सुतल रहबें?.. रौ, किछु क' सकै छें त' कर.. नयिं त' हमरो मारि दे आ तोंहो कतहु डूबि-धँसि जों.. नञि जीबाक अछि.. मौगत.. द' दे.. भगवान, मौगत.. नञि जीब' चाहै छी राक्षस स' भरल अई दुनिया मे.. (भोकासी पारि क' कनैत अछि।) (जाहि समय मे मंगतूक प्रलाप चलैत अछि, ओहि समय ओम्हर स' पास होब बला लोक आओर ओकरा दिस देखैत चलि जाइत रहैत अछि। ककरो नजरि मे ओकरा लेल कोनो सहानुभूति नञि । ध्वनि सभ ऊभरैत अछि.. 'की भेलै रौ एकरा?', 'अरे, किछु नञि, पागल छै सार!','चोट्टा, भगवान के गरियबैत छै, पछिलो जनम मे गरियैने हेतै, तैं' अई जनम से सेहो..', 'रौ, बइसल बनिया की करय, ई कोठीक धान ऊ कोठी करय', 'काज ने धंधा, मौज-मस्ती ठंढा.. ', 'हमरा आओर जकाँ ट्रेन बस ट्रेन करितियइ, नौ स' पाँच मे जिनगी स्वाहा कर' पड़तियैत त' बुझितियइ.. गै चल, तोंहो कोन पगलेटक चक्कर मे फँसि गेलैं.. ', 'नञि रौ ई पगलेट नञि छै.. वाजिब गप्प कहै छै.. भीख माँगब एकरा नीक नञि लागै छै.. मुदा.. मजबूरी छै.. के काज देतै एकरा.. ' आदि - आदि । ..सभ पात्र एम्हर ओम्हर स' निकलि क' मंगतूक पाछा ठाढ़ भ' जाइत अछि आ समवेत स्वर मे कहैत अछि..) 'हम सभ.. मात्र पुतली भरि नियंताक अपन-अपन इच्छाक / कामनाक दीप लेसने हम सख्त अछि ताकीद देखू मात्र, बजाऊ कोर्निश गबैत रहू राग-दरबारी.. हे प्रभो, अन्नदाता बस कृपा करी एतबे जे बनल रही हम सभ पुतरी भरि.. डोरी अदृश्यक हाथ मे। (प्रकाश मंगतू पर केन्द्रित होबैत शनै: शनै: फेड आउट) -------- (अगिला अंकमे जारी) की नाम राखी एहि कथाक-गजेन्द्र ठाकुर “हम यादवजीक पत्नी बाजि रहल छी, ओ छथि की?” एकटा गम्भीर स्वर आएल। यादव जी एखने अपन प्रेमिकाक संग बाहर निकलल रहथि । अरिन्दमकेँ किछु नहि फुरएलैक जे की बाजए- “कोनो काजसँ बाहर गेल छथि, एखने दू मिनट पहिने। हुनकर मोबाइलपर फोन कऽ लिअ”। “मोबाइल नॉन-रीचेबल छन्हि, कोनो ऑफिसक काजसँ गेल छथि की?” अरिन्दमकेँ आब किछु नहि फुरएलैक- “नहि, से तँ लागैए जे कोनो व्यक्तिगते काज छन्हि कारण ऑफिसक काज रहितए तँ हमरा बुझल रहितए”। ओम्हरसँ फोन राखि देल गेल। अरिन्दमकेँ मोन पड़लैक जे यादवजी जाइसँ पहिने मोबाइल बिना ऑफ कएने बैटरी निकालि आ लगा कऽ मोबाइल बन्द कएने छलाह। स्वाइत नॉन-रीचेबल आबि रहल अछि। अरिन्दम लैपटापपर एक्सेल डॉक्युमेन्टमे ओझराएल हिसाब-किताब ठीक-ठाक करए लगलाह। किछु दिन पहिने एहिना एकटा स्वर फोनपर आएल रहैक- “यादवजी छथि की?” “अहाँ के”? “हम हुनकर पत्नी”। अरिन्दम फोन यादवजीकेँ देने रहए आ यादवजी खूब आह्लादसँ पत्नीसँ गप कएने छलाह। ओहि दिन बॉसक पत्नीक अबाज ओतेक गम्भीर नहि लागल रहैक अरिन्दमकेँ। चुलबुलिया सन अबाज रहैक। होइत छैक, लोकक मोन क्षणे-क्षणे तँ बदलैत रहैत छैक। अरिन्दम अपन घरक शान्त-प्रशान्त जीवन मे रहैत अछि। कारसँ नित्य अबैत काल रेडलाइटपर हिजड़ा-सभ सभ दिने भेँट होइत छैक। पुरनका कारमे ए.सी. नहि रहैक, से शीसा खसेने रहैत छल। ढेर गप-शप बजैत ओ सभ हाथ-मुँह चमका कऽ की-की सभ सुना दैत रहए। मुदा आब ओ एहिसँ बचबाक लेल शीसा खसबिते नहि अछि। ओ सभ शीसाक बाहरसँ मुँह पटपटबैत किछु कालमे दोसर गाड़ी दिस बढ़ि जाइत अछि। परसू एकटा बालगोविना तमसा कऽ हाथक झुटकासँ ओकर कारमे स्क्रैच लगा देलकैक। पाँच टकाक बदलामे ढेर नुकसान भऽ गेलैक- धुर। के करबैत गऽ डेंटिंग-पेंटिंग, स्क्रैच भने रहत किछु दिन। दिल्लीमे जे एहन चेंछमे डेंटिग पेंटिंग कराबए लागी तँ सभ दिने करबए पड़त। मुदा ई नवका बॉस ज्र् आएल अछि से अरिन्दमक मस्तिष्कमे एकटा भूकम्प आनि देने छैक। रस्तोमे की सभ सोचाइत रहैत छैक। “काल्हि अहाँक पत्नीक फोन आएल रहन्हि”। “अच्छा, कखन?” यादवजी बजलाह। “अहाँक गेलाक किछुए कालक बाद”। कोनो जवाब बिनु देने यादवजी फोन मिलेलन्हि- “ऑफिसमे किएक फोन केलहुँ......मोबाइल बेसमेन्टमे नॉन-रीचेबल रहैत छैक, तँ किछु काल प्रतीक्षा कएल नहि भेल...”। खटाकसँ फोन रिसीवरपर बजड़ल। अरिन्दम लैपटॉपसँ मुँह उठा कऽ देखलक। केहन परिवार छैक? साँझमे गामपर पहुँचल होएत तँ पत्नीसँ गपो नहि भेलैक की? गपक फरिछाहटि ऑफिसेसँ फोन कए कऽ रहल अछि। अरिन्दम डेस्कटॉपक आ वाशिंग मशीन दुनुक हेल्पलाइन नम्बरकेँ फोन मिलेलक, गामपर फुरसति कहाँ भेटैत छैक। घरपर दुनू चीज एके बेर खराप भऽ गेलैक। घरसँ ऑफिस निकलैत काल कनियाँ वाशिंग मशीनक खराब हेबाक तँ बेटा अपन कम्प्युटरपर गेम कैक दिनसँ खरापीक चलते बन्द रहबाक विषयमे कहने रहन्हि। “कतेक कालसँ फोन इनगेज रखने छी, गप सुनू, ककरो फोन आबए तँ कहबैक जे यादवजीक स्थानान्तरण भऽ गेलन्हि”। बॉस बाहर कतहुसँ फोन कएने रहथिन्ह आ एके सुरमे सभटा बाजि गेल छलाह। काल्हि साँझमे पत्नीकेँ छोड़ए लेल यादवजी गेल रहथि आ एम्हर हुनकर प्रेमिकाक फोन आएल रहन्हि ऑफिसमे। ओ कोनो होटलक नाम बाजल रहए आ कहने रहए जे यादवजीकेँ होटलक नाम बता देबन्हि ओ बुझि जएताह। अरिन्दम ई मैसेज यादवजीकेँ तखने दऽ देने रहथि। आब आइ नहि जानि कोन कारणसँ एखन धरि ऑफिस नहि आएल अछि। कनियाँ तँ गेलैक नैहरि आ तखन आब ककर फोन अएतैक जकरा कहबैक जे एकर स्थानान्तरण भऽ गेलैक। फोन तँ नहि आएल मुदा ओ आएलि रहए, बॉसक प्रेमिका। आइ ओ अपन नामो बतेलक, बड्ड नीक नाम रहैक ओकर- पारुल। “यादवजी कतए गेलथि”। “हुनकर स्थानान्तरण भऽ गेलन्हि”। अरिन्दम बाजल। “अच्छा”। ई कहि ओ चलि गेलि। “अहाँकेँ फोनपर आएल प्रश्नक उत्तरमे ई कहबाक रहए, सोझाँ आएल लोककेँ नहि”। ओकर सहकर्मी रोहिणी हँसैत बाजलि। “हम कनेक भाँसि गेल छी। आब आइसँ ऑफिसक फोन रिसीव करबाक भार अहाँपर”। अरिन्दम बाजल। रोहिणी एहि गपकेँ हँसीमे लेने रहए मुदा अरिन्दम तखनेसँ सभटा फोन रिसीव केनाइ छोड़ि देलक। एहन नहि रहए जे बॉस कार्यालय अब् नहि छल। जखन धरि ओ कार्यालयमे रहैत छल बेशी काल अपने फोन रिसीव करैत रहए, काजमे सेहो फुर्तिगर रहए। “एकटा गप बुझलिऐ। अजय गणेशन आइ भोरसँ मुँह लटकौने अछि”। “किएक”। रोहिणीक प्रश्नक उत्तर दैत अरिन्दम बाजल। “इन्टरनेटपर कोनो प्रेमिका संगे कतेक महिनासँ चैटिंग द्वारा प्रेमालाप करैत रहए। आइ पता लगलैक जे ओकरा संगे क्यो दोसर लड़का हँसी कऽ रहल छलैक। प्रेम वियोगमे अदहा बताह बनल अछि”- रोहिणी कहलक। यादव जी कोनो चीज बिसरि गेल छलाह से लिफ्टसँ तखने कक्षमे आएल रहथि, रोहिणीक गप सुनि लेने छलाह। “हमरा तँ इन्टरनेटक ई माध्यमे आकाशीय लगैत अछि”- कहैत ओ अपन चश्मा लेलन्हि आ चलि गेलाह। रोहिणीकेँ फोन रिसीव करबाक ड्युटी लगलन्हि तँ अरिन्दम निश्चिन्त भऽ गेलाह। “सुनैत छी, एक बेर फोनपर जे अबाज अबैत छैक जे हम यादवजीक पत्नी छी तँ ओहिमे कचबचियाक अबाज गुँजैत छैक आ दोसर बेर जे फोन अबैत अछि जे हम यादव जीक पत्न्नी छी तँ ओहिमे गंभीरता रहैत छैक। की रहस्य अछि किछु ने बुझाइए”। “लोकक मूड होइत छैक”। “एहन कोन मूड होइत छैक जे घण्टे-घण्टामे बदलैत रहैत छैक। आ देखू एहि बॉसकेँ। जखन चुलबुलिया मूडमे फोन अबैत छैक तँ ई हँ-हँ हमर सरकार कहि कऽ गप करैत अछि आ जखन गम्भीर स्वरमे पत्नीक फोन अबैत छैक तँ झिरकिकँ बजैत अछि जे ऑफिसक फोनपर फोन किएक केलहुँ- बुझू”। “ई अपना रहलापर फोन अपने उठबैक प्रयास करैत अछि”। “कोनो डर छैक ताहि द्वारे”। “अहाँकेँ तँ ओहिना लगैत रहैए, कथीक डर रहतैक एकरा”। आब अरिन्दमकेँ लगलैक जे रोहिणी कोनो चीजक अन्वेषणमे लागि गेल अछि। “दू दिनसँ देवगन तंग कएने अछि दुर्घटना बीमा करेबाक लेल”- रोहिणी बजलीह। “एजेन्सी लऽ लेलक अछि की?”- अरिन्दम पुछलन्हि। देवगन ऑफिसमे चपरासी छल। “हँ, एहि नगरमे जतेक पाइ भेटैत छैक ताहिसँ की होएतैक से पत्नीक नामसँ एजेन्सी लेने अछि। कहैत रहए पन्द्रह सालक दुर्घटना बीमा लेबाक लेल”। “ओ, तखन ई एल.आइ.सी. नहि जी.आइ.सी.क एजेन्सी लेने अछि”। “कम्मे प्रीमियम छैक लऽ लियौक, हमहू लऽ रहल छी”। देवगन खुशी खुशी दुनू गोटेकेँ फॉर्म भरबाक लेल देलक आ चाह बनेबाक लेल चलि गेल। तखने यादवजी धरधराइत अएलाह। “कोन फॉर्म सभ गोटे भरि रहल छी?” “देवगन कनियाँक नामसँ इन्स्योरेन्सक एजेन्सी लेने अछि, वैह दुर्घटना बीमा करबा रहल अछि सभक”। रोहिणी आ अरिन्दम जेना संगे बाजि उठलाह। तखने देवगन चाहक ट्रे लेने आएल। यादवजीकेँ फॉर्मक तहकीकात करैत देखि ओकर देह सर्द भऽ गेलैक। “दू टा फॉर्म हमरोसँ भरबा लिअ”- यादवजी देवगनकेँ कहलखिन्ह। देवगनकेँ तँ कानपर विश्वासे नहि भेलैक। दौगि कऽ दू टा फॉर्म अनलक। “एकटा हमरा नामसँ भरू आ एकटा सबीना यादवक नामसँ”। “मेम साहबक नाम सबीना यादव छन्हि?” “हँ”। फॉर्म जखन भराए लागल तँ नॉमिनेशनक कॉलम मे देवगन यादवजी बला फॉर्ममे सबीना यादव आ सबीना यादव बला फॉर्ममे यादव जीक नाम भरि देलक। “ई की केलहुँ, दुनू फॉर्म चेन्ज करू। नॉमिनेशनक की जरूरति अछि। हमरा पत्नीक पाइक कोनो खगता नहि अछि”। देवगन दुनू फॉर्म फाड़ि दू टा नव फॉर्म भरलक। अपन फॉर्ममे यादवजी हस्ताक्षर कएलन्हि आ दोसर फॉर्म साइन करेबाक लेल देवगनकेँ पता लिखि कऽ देबऽ लगलाह। “हमरा अहाँक डेरा देखल अछि साहब”। “ई दोसर पता छी, राखू”। रोहिणीक कान ठाढ़ भऽ गेलन्हि। ओ यादवजीक बाहर गेलाक बाद देवगनक कानमे किछु कहलन्हि। अरिन्दम अपन काजमे लागल रहल। “यादवजी छथि?” फोनपर पारुल रहथि। “यादवजीक ट्रान्सफर भऽ गेलन्हि”। “झूठ नहि बाजू, हुनका फोन दियन्हु”। “हे, नहि तँ हम अहाँक नोकर छी आ नहिये अहाँक यादव जीक। ई कहैत अरिन्दम फोन पटकि देलक। बीचमे कतेक दिनसँ रोहिणी फोन उठबैत छलीह। आइ ओ कतहु एम्हर-ओम्हर छलीह से अरिन्दमकेँ फोन उठाबए पड़ल रहैक। रोहिणी तखने पहुँचि गेल छलीह- “अभ्यास खतम भऽ गेने तामस उठि गेल अहाँकेँ”। अरिन्दम स्वीकृतिमे मूड़ी डोलेलक। आइ ऑफिस अबैत काल रेडियो मिर्ची एफ.एम. पर चलि रहल अण्ट-शण्ट गप नीक लागि रहल छलैक अरिन्दमकेँ। “हमर बड़का बेटा सुमन्त तेलुगु खूब नीक जकाँ बजैत अछि मुदा छोटका हिन्दी बाजए लागल अछि। हैदराबादसँ दादाक फोन अबैत छैक तँ हुनको हिन्दीयेमे जवाब दैत अछि। हुनका हिन्दी अबिते नहि छन्हि। घरमे पति तेलुगु बजबाक अभियान शुरु कएने छथि”- रोहिणी बाजि रहल छलीह। “अच्छा”। “बुझलहुँ, पारुलक फोन आएल रहए। कहैत रहए जे अरिन्दम जीक हम कोनो बकड़ी तँ नहि खोलि लेने छलियन्हि जे ओना कऽ फोनपर झझकारि उठल रहथि”। “हूँ”। “आ ई सेहो बाजि रहल छलि जे ओ यादवजी पर विश्वास कए धोखा खएलक”। “ओ”। “आ देवगन गेल रहए यादवजीक नवका घर”। “नवका घर? पुरनका घर बेचि देलन्हि की?” “नहि। देवगनेक कहल कहैत छी। पुरनका घरमे यादव जीक पहिल पत्नी रहैत छथिन्ह, वैह अहाँक गम्भीर स्वरवाली। आ नवका घरमे नवकी चुलबुली कनियाँ रहैत छन्हि। एकटा कोढ़चिल्को देखलक देवगन। यादवजीक बेटा रहन्हि प्रायः”। गजेन्द्र ठाकुर केदारनाथ चौधरीक उपन्यास “चमेली रानी” आ माहुर केदारनाथ चौधरी जीक पहिल उपन्यास चमेली रानी २००४ ई. मे आएल । एहि उपन्यासक अन्त एहि तरहेँ खतम भेल जे एकर दोसर भागक प्रबल माँग भेल आ लेखककेँ एकर दोसर भाग माहुर लिखए पड़लन्हि। धीरेन्द्रनाथ मिश्र चमेली रानीक समीक्षा करैत विद्यापति टाइम्समे लिखने रहथि- “...जेना हास्य-सम्राट हरिमोहन बाबूकेँ “कन्यादान”क पश्चात् “द्विरागमन” लिखए पड़लनि तहिना “चमेलीरानी”क दोसर भाग उपन्यासकारकेँ लिखए पड़तन्हि”। ई दुनू खण्ड कैक तरहेँ मैथिली उपन्यास लेखनमे मोन राखल जाएत। एक तँ जेना रामलोचन ठाकुर जी कहैत छथि- “..पारस-प्रतिभाक एहि लेखकक पदार्पण एते विलम्बित किएक?” ई प्रश्न सत्ये अनुत्तरित अछि। लेखक अपन ऊर्जाक संग अमेरिका, ईरान आ आन ठाम पढ़ाइ-लिखाइमे लागल रहथि रोजगारमे रहथि मुदा ममता गाबए गीतक निर्माता घुमि कऽ दरभंगा अएलाह तँ अपन समस्त जीवनानुभव एहि दुनू उपन्यासमे उतारि देलन्हि। राजमोहन झासँ एकटा साक्षात्कारमे हम एहि सम्बन्धमे पुछने रहियन्हि तँ ओ कहने रहथि जे बिना जीवनानुभवक रचना संभव नहि,जिनकर जीवनानुभव जतेक विस्तृत रहतन्हि से ओतेक बेशी विभिन्नता आ नूतनता आनि सकताह। केदारनाथ चौधरीक “चमेली रानी” आ “माहुर” ई सिद्ध करैत अछि। चमेली रानी बिक्रीक एकटा नव कीर्तिमान बनेलक। मात्र जनकपुरमे एकर ५०० प्रति बिका गेल। लेखक “चमेली रानी”क समर्पण “ओहि समग्र मैथिली प्रेमीकेँ जे अपन सम्पूर्ण जिनगीमे अपन कैंचा खर्च कऽ मैथिली-भाषाक कोनो पोथी-पत्रिका किनने होथि” केँ करैत छथि, मुदा जखन अपार बिक्रीक बाद एहि पोथीक दोसर संस्करण २००७ मे एकर दोसर खण्ड “माहुर”क २००८ मे आबए सँ पूर्वहि निकालए पड़लन्हि तखन दोसर भागमे समर्पण स्तंभ छोड़नाइये लेखककेँ श्रेयस्कर बुझेलन्हि। एकर एकटा विशिष्टता हमरा बुझबामे आएल २००८ केर अन्तिम कालमे जखन हरियाणाक उपमुख्यमंत्री एक मास धरि निपत्ता रहलाह, मुदा राजनयिक विवशताक अन्तर्गत जाधरि ओ घुरि कऽ नहि अएलाह तावत हुनकापर कोनो कार्यवाही नहि कएल जाऽ सकल। अपन गुलाब मिश्रजी तँ सेहो अही राजनीतिक विवशताक कारण निपत्ता रहलोपर गद्दीपर बैसले रहलाह्,क्यो हुनका हँटा नहि सकल। चाहे राज्यक संचालनमे कतेक झंझटि किएक नहि आएल होए। उपन्यास-लेखकक जीवनानुभव एकर सम्भावना चारि साल पहिनहिए लिखि कऽ राखि देलक। भविष्यवक्ता कोनो टोना-टापरसँ भेनाइ संभव नहि होइत अछि वरन् जीवनानुभव एकरा सम्भव बनबैत अछि। एहि दुनू उपन्यासक पात्र चमत्कारी छथि, आ सफल सेहो कारण उपन्यासकार एकरा एहि ढंगसँ सृजित करैत छथि जेना सभ वस्तुक हुनका व्यक्तिगत अनुभव होइन्ह। उपन्यासक बुर्जुआ प्रारम्भक अछैत एहिमे एतेक जटिलता होइत अछि जे एहिमे प्रतिभाक नीक जकाँ परीक्षण होइत अछि। “चमेली रानी” उपन्यासक प्रारम्भ करैत लेखक एकर पहिल परीक्षामे उत्तीर्ण होइत छथि जखन एकर लयात्मक प्रारम्भ पाठकमे रुचि उत्पन्न करैत अछि। कीर्तिमुखक पाँच टा बीटाक नामकरणक लेल ओकर जिगरी दोस कन्टीरक विचार जे – “पाँचो पाण्डव बला नाम बेटा सबहक राखि दहक। सुभिता हेतौ”। फेर एक ठाम लेखक कहैत छथि जे जतेक गतिसँ बच्चा होइत रहैक से कौरवक नाम राखए पड़ितैक। नायिका चमेली रानीक आगमन धरि कीर्तिमुखक बेटा सभक वर्णन फेर एहि क्रममे अंग्रेज डेम्सफोर्ड आ रूपकुम्मरिक सन्तान सुनयनाक विवरण अबैत अछि। फेर रूपकुम्मरिक बेटी सुनयनाक बेटी शनिचरी आ नेताजी रामठेंगा सिंह “चिनगारी”क विवाह आ नेताजी द्वारा शनिचरीकेँ कनही मोदियानि लग लोक-लाजक द्वारे राखि पटना जाएब, नेताजीक मृत्यु आ शनिचरी आ कीर्तिमुखक विवाहक वर्णन फेरसँ खिस्साकेँ समेटि लैत अछि। तकर बाद चमेली रानिक वर्णन अबैत छथि जे बरौनी रिफाइनरीक स्कूलमे बोर्डिंगमे पढ़ैत छथि आ एहि कनही मोदियानिक बेटी छथि। कनही मोदियानिक मृत्युक समय चमेली रानी दसमाक परीक्षा पास कऽ लेने छथि। भूखन सिंह चमेली रानीक धर्म पिता छथि। डकैतीक विवरणक संग उपन्यासक पहिल भाग खतम भऽ जाइत अछि। दोसर भागमे विधायकजीक पाइ आकि खजाना लुटबाक विवरण, जे कि पूर्व नियोजित छल, एहि तरहेँ देखाओल गेल अछि जेना ई विधायक नांगटनाथ द्वारा एकटा आधुनिक बालापर कएल बलात्कारक परिणामक फल रहए। आब ई नांगटनाथ रहथि मुख्यमंत्री गुलाब मिसिरक खबास जे राजनीतिक दाँवपेंचमे विधायक बनि गेलाह। २००८ ई.क अरविन्द अडिगक बुकर पुरस्कारसँ सम्मानित अंग्रेजी उपन्यास “द ह्वाइट टाइगर”क बलराम हलवाइक चरित्र जे चाहक दोकानपर काज करैत दिल्लीमे एकटा धनिकक ड्राइवर बनि फेर ओकरा मारि स्वयं धनिक बनि जाइत अछि, सँ बेश मिलैत अछि आ चारि बरख पूर्व लेख एहि चरित्रक निर्माण कऽ चुकल छथि। फेर के.जी.बी. एजेन्ट भाटाजीक आगमन होइत अछि जे उपन्यासक दोसर खण्ड “माहुर” धरि अपन उपस्थिति बेश प्रभावी रूपेँ रखबामे सफल होइत छथि। उपन्यासक तेसर भागमे अहमदुल्ला खाँक अभियान सेहो बेश रमनगर अछि आ वर्तमान राजनीतिक सभ कुरूपताकेँ समेटने अछि। उपन्यासक चारिम भाग गुलाब मिसिरक खेरहा कहैत अछि आ फेरसँ अरविन्द अडिगक बलराम हलवाइकेँ मोन पाड़ैत अछि। भुखन सिंहक संगी पन्नाकेँ गुलाब मिसिर बजबैत अछि आ ओकरा भुखन सिंहक नांगटनाथ आ अहमदुल्ला अभियानक विषयमे कहैत अछि। संगहि ओकरा मारबाक लेल कहैत अछि से ओ मना कऽ दैत छैक। मुदा गुलाब मिसिर भुखन सिंहकेँ छलसँ मरबा दैत अछि। पाँचम भागमे भुखन सिंहक ट्रस्टक चरचा अछि, चमेली रानी अपन अड्डा छोड़ि बैद्यनाथ धाम चलि जाइत छथि। आब चमेली रानीक राजनीतिक महत्वाकांक्षा सोझाँ अबैत अछि। स्टिंग ऑपरेशन होइत छथि आ गुलाब मिसिर घेरा जाइत छथि। उपन्यासक छठम भाग मुख्यमंत्रीक निपत्ता रहलाक उपरान्तो मात्र फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाओल जएबाक चरचा होएबाक अछि जे कोलिशन पोलिटिक्सक विवशतापर टिप्पणी अछि। उपन्यासक दोसर खण्ड “माहुर”क पहिल भाग सेहो घुरियाइत-घुरियाइत चमेली रानीक पार्टीक संगठनक चारू कात आबि जाइत अछि। स्त्रीपर अत्याचार, बाल-विधवा आ वैश्यावृत्तिमे ठेलबाक संगठन सभकेँ लेखक अपन टिप्पणी लेल चुनैत छथि। माहुरक दोसर भागमे गुलाब मिसिरक राजधानी पदार्पणक चरचा अछि। चमेली रानी द्वारा अपन अभियानक समर्थनमे नक्सली नेताक अड्डापर जएबाक आ एहि बहन्ने समस्त आन्दोलनपर लेखकीय दृष्टिकोण, संगहि बोनक आ आदिवासी लोकनिक सचित्र-जीवन्त विवरण लेखकीय कौशलक प्रतीक अछि। चमेली रानी लग फेर रहस्योद्घाटन भेल जे हुनकर माए कनही मोदियाइन बड्ड पैघ घरक छथि आ हुनकर संग पटेल द्वारा अत्याचार कएल गेल, चमेली रानीक पिताक हत्या कऽ देल गेल आ बेचारी माए अपन जिनगी कनही मोदियाइन बनि निर्वाह कएलन्हि। ई सभ गप उपन्यासमे रोचकता आनि दैत अछि। माहुरक तेसर भाग फेरसँ पचकौड़ी मियाँ, गुलाब मिसिर, आइ.एस.आइ. आ के.जी.बी.क षडयन्त्रक बीच रहस्य आ रोमांच उत्पन्न करैत अछि। माहुरक चारिम भाग चमेली रानी द्वारा अपन माए-बापक संग कएल गेल अत्याचारक बदला लेबाक वर्णन दैत अछि, कैक हजार करोड़क सम्पत्ति अएलासँ चमेली रानी सम्पन्न भऽ गेलीह। माहुरक पाँचम भाग राजनैतिक दाँव-पेंच आ चमेली रानीक दलक विजयसँ खतम होइत अछि। विवेचन: उपन्यास विधाक बुर्जुआ आरम्भक कारण सर्वांतीजक “डॉन क्विक्जोट”, जे सत्रहम शताब्दीक प्रारम्भमे आबि गेल रहए, केर अछैत उपन्यास विधा उन्नैसम शताब्दीक आगमनसँ किछु समय पूर्व गम्भीर स्वरूप प्राप्त कऽ सकल। उपन्यासमे वाद-विवाद-सम्वादसँ उत्पन्न होइत अछि निबन्ध, युवक-युवती चरित्र अनैत अछि प्रेमाख्यान, लोक आ भूगोल दैत अछि वर्णन इतिहासक, नीक- खराप चरित्रक कथा सोझाँ अबैत अछि। कखनो पाठककेँ ई हँसबैत अछि, कखनो ओकरा उपदेश दैत अछि। मार्क्सवाद उपन्यासक सामाजिक यथार्थक ओकालति करैत अछि। फ्रायड सभ मनुक्खकेँ रहस्यमयी मानैत छथि। ओ साहित्यिक कृतिकेँ साहित्यकारक विश्लेषण लेल चुनैत छथि तँ नव फ्रायडवाद जैविकक बदला सांस्कृतिक तत्वक प्रधानतापर जोर दैत देखबामे अबैत छथि। नव-समीक्षावाद कृतिक विस्तृत विवरणपर आधारित अछि। जीवनानुभव सेहो एक पक्षक होइत अछि आ दबाएल इच्छाक तृप्तिक लेल लेखक एकटा संसारक रचना कएलन्हि जाहिमे पाठक यथार्थ आ काल्पनिकताक बीचक आड़ि-धूरपर चलैत अछि। ३.पद्य ३.१. निमिष झा बुद्ध आ आतंक ३.२.ज्योति- ३.३. पंकज पराशर निमिष झा बुद्ध आ आतंक अणु बमक विस्फोटक बाद भयाउन वातावरणमे आत्माक शान्ति नहि खोजू । रक्तपातक बाद, शून्य आकाशमे खुशीक चुम्बन नहि करू । ओ अहाँक भूल हैत, महाभूल रणभूमिमे विश्व शान्तिक नारा लगायब । ओ अहाँक भूल हैत तोपक गोलामे भातृत्वक सन्देश खोजब । घृणा आ स्वार्थक सागरमे विश्व बन्धुत्वक शंखघोष किए करै छी हिंसा आ आतंकक बीच गौतम बुद्धक सन्देश फिका रहत । अपन फुसियाएल आर्दशकेँ बनाबटी ढोङ्ग सँ नहि झाँपू समय बहुत आगू बढ़ि गेल अछि । स्वार्थी आ व्यक्तित्ववादी समाजमे कृत्रिम आदर्शक वीजारोपण नहि करू अहाँक आदर्श सभ कालान्तरमे अहीँकेँ डसिलेत । विद्याधन-ज्योति झा चौधरी विद्याधन विद्या धन कतेक अनमोल सोन चांदी सऽ कोना तौलायत केहेनो संकट आऽ प््रालय आबै संगे रहत नहिं कतौ बिलायत संचय के कोन प््रावधान जतेक बांटू ततेक बढ़ैत जायत आऽ बॅंटनिहार सब लोक सऽ सम्मान एवम् प््राशंसा सेहो पायत अथाह सागर अछि विद्याके मंथन करै बला भने अघायत मुदा अहि अनन्त भण्डारक थाह कोनाकऽ कियो पायत ज्ञानक संसारक सम्पूर्ण विधाके ज्ञाता बनऽ जॅं कियो चाहत अपन लक्ष्यक प्राप्तिमे एक जीवन के तुच्छ पायत डॉ पंकज पराशर- रावलपिंडी ---------------------- (एक) रावलपिंडी सँ आइयो बहुत दूर लगैत छैक लाहौर बहुत दूर... जतय स्वतंत्रता केर समवेत स्वर प्रचंड नरमेधक अनंत इतिहास मे बदलि गेल छल दूर-दूर होइत समय मे अनघोल करैत अनंत स्वर-श्रृंखला... जेहो सब छल निकट से दूर भेल जा रहल अछि दूर-दूर होइत बहुत किछु विलीन भेल जा रहल अछि चारू दिशा मे टहलैत इंसाफी मरड़ आ छड़ीदार लोकनि इंसाफ करबाक लेल अपस्यांत वर्तमान सँ भविष्य धरि आश्वस्त होइत अगुताएल छथि इतिहासो मे घुरि कए इंसाफ करबाक लेल (दू) जखन हम फोन पर होइत छी खांटी मातृभाष्ी मायक लेल बजैत चिंताहरण बोल आ कि टैसी रोकैत ड्राइवर करीम खान अविश्वास आ आश्चर्य भरल स्वर मे पुछैत अछि- -भाय तोंय हिंदुस्तानी छहो? हमरा अबा सँ तनी मिलभो-हुनि बोलइ छथिन इएह बोली जे तोंय अखनी बोलइ रहो आ शनैः शनैः पसरि जाइत अछि हमरा टैसी मे आकुल-व्याकुल अविभाजित देशक भागलपुर आ मुंगेर लाहौरक बाट मे (तीन) हमरा डाकघरक मोहर मे आइयो कायम अछि मुंगेर आ एतय कतरनी धानक चूड़ा मोन पाड़ैत करीम खानक वृद्ध पिता दुनिया सँ जयबा सँ पूर्व एक बेर जाइ चाहैत छथि अपन देसकोस एकटा देश भेटबाक बादो ओ तकैत छथि अपन देसकोस अपन देस सँ नगर-नगर बौआइत कइक कोस हम पहुँचल छी रावलपिंडी जतय आइयो पछोड़ धयनेँ अछि देसकोस कोस-कोस पर परिवर्तित होति पानि एतेक कोस दूर ओहिना लगैत अछि जेहन अपन गाम केर इनारक आ दस कोस पर परिवर्तित होइत बोली साठि-एकसठ बरखक बादो ओहने लगैत अछि जेहन आजुक भागलपुरक हम तकैत छी इतिहास दिस आ सामूहिक स्मृति सँ विलीन इतिहास हमरा दिस जे भेटैत अछि हमरा कइक कोस दूर रावलपिंडी मे (चारि) जतय एके संग घटि रहल अछि अनेक घटनाचक्र गहूमक चिकस लेल तनाइत ए.के-सैंतालिस सैंतालिस सँ सैंतालिसक चक्रवृद्धि देखैत ठाम-ठाम सँ आयल रावलपिंडीक किछु वृद्धजन उच्चरित करैत छथि मंत्र जकां- इस्लामाबाद इस्लाम-आबाद आह...बाद आबाद लोकक बीच सब बर्बाद (पांच) बाघाक बाधा ब्रह्मांडक संपूर्ण बाधा सँ बेशी मोसकिल छैक नुनू तोंय अइलहो हमरा सँ मुलाकात करलहो... मिल विलीन होइत अस्सी बरखक जमकल नोर मे हमरा मात्र लहो...लहो...लहो...केर सृष्टिक सब सँ आदिम स्वर पंचम मे भागलपुरक सामूहिक स्मृति सँ विलीन इतिहासक जीवंत कथा वर्तमानक कैनवास पर पसरि रहल छल! Bottom of Form कला आ संगीत शिक्षा हृदय नारायण झा, आकाशवाणीक बी हाइग्रेड कलाकार। परम्परागत योगक शिक्षा प्राप्त। मिथिलाक लुप्तप्राय गीत
विवाह संस्कारक लुप्तप्राय गीत मिथिला मे अत्यंत व्यापक रहल अछि विवाह संस्कार गीतक परंपरा । विवाहपूर्वहि सॅ गीतक रीत अछि मिथिलाक लोक जीवन मे । विवाह योग्य कन्याक हेतु जखन सुयोग्य वर खोजऽ लेल पिता आ अन्य संबंधी लोकनि जाइत छथि तखन जे गीत गाओल जाइत अछि से सम्मर ,कुमार ,लगन आदि गीतक नाम सॅ जानल जाइत अछि । एहने एकटा सम्मर के बानगी अछि जकर विषय सीता स्वयंवर सॅ संबंधित अछि । मिथिलाक बेटी रूप मे सर्वमान्य सीताक विवाहक ओ सम्मर एखनहुॅ बीज रूप मे ,लोककण्ठ मे सुरक्षित किन्तु लुप्तप्राय अछि । से गीत अछि - जानकि अंगना बहारल धनुखा उठाओल हे । आहे पड़ल पिता मुख दृष्टि पिता प्रण ठानल हे ।। राजा राज ने भावय भाखथि रानी हे । आहे बेटी बियाहन जोग सुजोग वर खोजह हे ।। जे इहो धनुखा कॅे तोड़त देव लोक साक्षी हे। आहे राजा हो आ कि रंक ताहि देव जानकि हे ।। देश हि विदेश केर भूप स्वयंवर आयल हे । आहे धनुखा तोड़ल सीरी राम मंगल धुनि बाजल हे ।। विवाह सुनिश्चित भेला पर आंगन मे लगनक गीत गेबाक परंपरा रहल अछि । विवाह सॅ पूर्व कन्या क जे कोनो विध बेवहार होइत अछि ताहि मे लगनक गीत स्त्रीगण लोकनि द्वारा समूह मे गाओल जाइत अछि । एहन पारंपरिक गीतक पद आ धुन आबक विवाह संस्कार मे लुप्तप्राय अछि । लोककण्ठ सॅ प्राप्त एहने एकटा गीत अछि - राजा जनक जी कठिन प्रण ठानल आहो राम रामा । दुअरहि राखल धनुखिया हो राम रामा ।। जे इहो धनुखा केॅ तोड़ि नराओत आहो राम रामा । सीता केॅ व्याहि लय जाएत आहो राम रामा ।। देश हि विदेश केर भूप सब आएल आहो राम रामा । धनुखा केॅ छुबि छुबि जाय आहो राम रामा ।। लंकाधिपति राजा रावण आएल आहो राम रामा । ओ हो रे घुमल आधि बटिया हो राम रामा ।। मुनि जी के संग दुई बालक आएल आहो राम रामा । धनुखा तोड़ल सीरी राम आहो राम रामा।। विवाहक संबंध निश्चित कऽ बाबा अबै छथि आ विवाहक दहेज आ अन्य अनुष्ठान सभक चिन्ता मे सोचैत आॅखि मूनि बिछान पर पड़ि रहै छथि । आंगन मे सभक मोन मे विवाह सुनिश्चित हेबाक आनन्द आ उत्साह अछि । इ देखि बेटी केॅ जिज्ञासा होइ छै ओ बाबा सॅ हुनक एहि भावक कारण पुछैत अछि । एहि भावक एकटा ‘ कुमार ‘गीत अछि जाहि मे बाबा आ बेटी विवाहक संबंध मे परस्पर जिज्ञासाक समाधान अछि। पारंपरिक कुमार गीतक से पद आ धुन लुप्तप्राय अछि । ओहने एकटा गीत अछि - बेटी- नदिया के तीरे तीरे बाजन बाजल किए बाबा सूतह निचिन्त हे । बाबा- किछु बाबा सूतल किछु बाबा जागल किछु रे बियाहक सोच हे ।। के हे सम्हारत एते बरियात , के हे करत कन्यादान हे । बेटी -भइया सम्हारत एते बरियात , बाबा करता कन्यादान हे ।। कथिए बिना बाबा खीरीयो ने होअए ,कथी बिनु होम ने होय हे । कथिए बिना इहो सइरा अन्हार भेल , कथी बिनु होमा ने होए हे ।। बाबा-दूध बिना बेटी खिरीयो ने होअए , घीउ बिनु होम ने होय हे । बेटा बिना इहो सइरा अन्हार भेल , धिया बिनु धर्म ने होय हे।। मिथिलाक विवाह संस्कार मे परिछन गीतक बहुतो पारंपरिक गीत आ धुन लुप्तप्राय अछि। ओहेन किछु धुनक परिछन गीतक उदाहरण एहि रूपेॅ देखल जा सकइछ । बेटी के लछमी आ जमाय के विष्णु रूप मे व्यक्त करैत पारंपरिक परिछन अछि - सखी हे लछमी के दुलहा लगइ छनि कोना ? जेना विष्णु उतरि अएला अंगना ।। सखी हे दुलहा के चानन लगइ छनि कोना ? जेना बिजुरि तरंग छिटकु नभ ना ।। सखी हे दुलहा के केस लगइ छनि कोना ? जेना साओनक श्याम घटा घन ना ।। सखी हे दुलहा के हाथ सोभय कंगना । जेना हरि केर हाथ सुदर्शन ना ।। सखी हे नहूॅ नहॅू दुलहा चलइ छथि कोना । जेना सिंह चलय निरभय वन ना ।। परिछनक बिध जखन आरंभ होइत अछि तॅ सबसॅ पहिल बिछ होइछ धुरछक अर्थात् दुलहाक स्वागतगीत । एहि मे एक सोहागिन स्त्री माथ पर कलश लऽ कऽ दुलहाक समक्ष ठाढ होइत अछि आ परिछनक डाला सजओने विधकरीक सॅग स्त्रीगण लोकनिक समूह धुरछक के गीत गबइत अछि । ओहि गीत मे दुलहा सॅ जलपूर्ण घट मे द्रव्य अर्पित करबाक संकेत होइत अछि । एहन एक गीत अछि - सुन्दरि नवेली ठाढ़ि धुरछक गाबथि हे सोहाओन लागे । सोना के कलसिया नेने माथ हे सोहाओन लागे ।। आनन्द बधावा बाजे नृप जनवासा हे सोहाओन लागे । दशरथ बिराजथि सुत के साथ हे सोहावन लागे।। सुनल अवधपति दुलहा के स्वागत सोहाओन लागे । कलशा मे देल मानिक सात हे सोहाओन लागे ।। तखन वशिष्ठ मुनि देल अनुशासन हे सोहाओन लागे । करू जाय सिया के सनाथ हे सोहाओन लागे ।। धुरछक के बाद जे परिछनक बिध होइत अछि ताहि मे अरवा चाउरक पीसल चानन ,सिन्दुर , काजर , ठऽक ,बऽक , बेसन , भालरि ,राई ,लवण आदि विविध उपचार सॅ सजाओल डाला होइत अछि बिध बेबहारक रीत परिछन गीत में व्यक्त होइत अछि । एहने एक परिछन अछि - सखिया परीछू दुलहा हरषि अपार हे । जेहने सलोनी धीया तेहने कुमार हे ।। चानन सजाउ सखि ऊॅचे रे लिलार हे । काजर लगाउ सखी नयना किनार हे ।। निहुछू लवण राई टोनमा जे टार हे । बिहुॅसब चोराबे चित दिअ पान डार हे ।। लखिये हरैये सुधि बुधियो हमार हे । कनक परीछू खोलि अन्तर दुआर हे ।। एहन गीत गबइत दुलहा केॅ परीछि क आॅगन विवाहक वेदीक समीप ल जेबाक परंपरा अछि । दुआर सॅ आॅगन में प्रवेश भेला पर दुलहाक आॅगन मे स्वागत होइत अछि शुभकामनाक परिछन गीत सॅ । एहि भावक शुभकामना सॅ भरल परिछन गाबि गाइनि लोकनि दुलहा दुलहिन लेल शुभ शुभ कामना गीत मे व्यक्त करैत छथि । एहन एक गीत अछि - परीछि लिअ वर केॅ शुभे हो शुभे दूभि अक्षत निछारू शुभे हो शुभे ।। दधि केसर सम्हारू शुभे हो शुभे लगाउ निल दिठौना शुभे हो शुभे ।। लागे जइ सॅ नइ टोना शुभे हो शुभे नीहछू लौन राई शुभे हो शुभे ।। नैन करू आॅजनाइ शुभे हो शुभे फूल माला सजाउ शुभे हो शुभे ।।े पान बीड़ा पवाउ शुभे हो शुभे घ्राण बासू अतर दय शुभे हो शुभे ।। गाल सेदू शिला दय शुभे हो शुभे मूज लए मूजिआऊ शुभे हो शुभे ।। रही लऽ रहियाऊ शुभे हो शुभे धन्य सीता सहेली शुभे हो शुभे ।। ब्रह्म पाओल घरहि मे शुभे हो शुभे राखु हिय कोबरहि मे शुभे हो शुभे ।। आब आगॉ लऽ चलियनु शुभे हो शुभे बिध आगॉ करबियनु शुभे हो शुभे ।। मिथिला मे पर्वतराज हिमालय केॅ राजा , गौरी आ भगवान शिव केॅ जमाय रूप मानि कऽ बेटीक विवाह मे शिव विवाहक परिछन गीतक परंपरा समृ( रहल अछि । शिव विवाहक एक परिछन अछि - शुभ दिन लगन बियाहन गौरी बनि ठनि दुलहा अएला हे । कंठ गरल नर उर सिर माला कंठ नाग लपटएला हे ।। शुभ दिन लगन ..... भाल तिलक शशिपाल लगैला जटा मे गंग बहएला हे । बूढ़ बड़द असवार सदासिब डमरू डिमिक बजएला हे ।। शुभ दिन लगन ..... भूत परेत डाकिन साकिन संग जोगिन नाच नचएला हे । अन्हरा लुलहा बहिरा लंगरा अगनित भेस सोभएला हे ।। शुभ दिन लगन ...... स्वान सुगर सिर जाल मुखर तन संग बरियतिया लएला हे । नगरक लोक सब सुनि सुनि बाजनि कोठा चढ़ि कऽदेखएला हे ।। शुभ दिन लगन ..... बजर परौ बरियात भयंकर सब कोई देखि पड़ैला हे । साहस करि सब सखियन संग भए परिछन मैना कएला हे ।। शुभ दिन लगन ..... नाग छोड़ति फुफुकार डेरएला खसति पड़ति घर अएला हे । सब बरियतिया हुलसति छतिया सब जन बासा गएला हे ।। शुभ दिन लगन..... कन्यादानक वैदिक कर्मकाण्डीय विधिक बीच कन्यादानक गीतक परंपरा सेहो नवतुरिया पीढ़ीक बीच लुप्तप्राय अछि । एहन गीत मे शिव पार्वतीक विवाहक कन्यादान गीत गेबाक परंपरा अछि । एहन एक गीत अछि - देखियनु देखियनु हे बहिना जनक सुनयना मणिमंडप पर सुता दान दए ना ।। जनु मएना हिमगिरि पुनि अएला पुण्य सुकृत अयना । देखु दुलह दुलहिन के जोड़ी चारू रती मएना ।। पुलकित तन हुलसैछ मगन मन फूटनि नहि बएना । कर पर करतै पर फल अक्षत शंख सुसोहय ना ।। सदानंद मृदु मंत्र पढ़ावथि करथि लोक विधि ना । सियाराम वात्सल्य भाव रस हिय मे उमड़य ना ।। देखियनु देखियनु हे बहिना ।। सीता राम विवाहक जे कन्यादान गीत अछि ताहि मे बेटीक वियोगक करूणा भाव व्यक्त अछि । बेटीक प्रति माएक भाव एहन गीत मे व्यक्त होइत अछि । मुदा आबक विवाह मे ई गीत सभ लुप्तप्राय अछि । कन्यादानक एहन एक गीत अछि - जॅघिया चढ़ाए बाबा बैसला मण्डप पर बाबा करू ने धीया दान हे । वर कर कंजतर ललीकर ऊपर ताही मे सोहत फल पान हे ।। गुरू वशिष्ठ जी मंत्र उचारथि मंत्र पढ़थि सीरी राम हे । सब सखियन मिलि मंगल गाबथि फुलबरिसत वहु वार हे ।। सिसकि सिसकि कानथि मातु हे सुनैना आब बेटी भेल वीरान हे । जाहि बेटी लेल हम नटुआ नचओलहुॅ सेहो बेटी भेल मोर वीरान हे ।। चुपे रहू चुपे रहू मातु हे सुनयना ई थिक जग बेवहार हे ।। बरियातीक भोजनक समय मे प्रचलित ‘जेवनार ‘ गीत सेहो लुप्तप्राय अछि । परंपरा सॅ ई प्रचलन रहल जे जखन बरियाती भोजन जेमय बैसथि तॅ हुनक स्वागत जेवनार गीत सॅ कएल जाए । एहि गीत मे हास्य विनोदक शब्द ,स्वर आ प्रस्तुति सॅ परिपूर्ण बरियातक भोजन सेहो देखऽ जोग होइत छल । आब ओहन पद सभक गायन लुप्तप्राय अछि । ओहने एकटा ‘जेवनार‘ गीत अछि - भोर भए मिथिलापति मंदिर समधी जेमन आयो जी ।। खोआ के गिलाबा बना के बरफी के इटावा जोरायो जी । इमरती जिलेबी के जॅगला लगायो गुलजामुन के खंभा लगायो जी ।। भोर भए.... पापड़ के सखी छवनी छवायो निमकी के फाटक बनायो जी । दही चीनी के चूना पोतायो रचि रचि महल बनायो जी ।। भोर भए ...... पूड़ी कचैड़ी बिछौना बिछायो मलपूआ के चनमा टॅगायो जी । लड्डू के लटकन लटकायो खाजा के झाड़ लगायो जी ।। भोर भए .... मंदिर मे बइसल समधी जन बाजे आनन्द बधाबा जी । छप्पन भोग बत्तीसो बेअंजन भरि भरि सोने के थारी जी ।। भोर भए मिथिलापति मंदिर समधी जेमन आयो जी ।। दुलहा मे धैर्य ,विनम्रता आ सहिष्णुताक भाव जगाबऽ लेल ‘डहकन ‘गीतक परंपरा रहल अछि । मान्यता अछि जे मिथिला मे भगवान श्रीराम सेहो विवाह मे मैथिलानीक गारि सुनि कऽ प्रसन्न भेल छलाह तेॅ ई परंपरा निर्बाध प्रचलित रहल । श्री राम लला केॅ जे गारि डहकन मे सूनऽ पड़लनि तकर पद अछि - राम लला सन सुन्दर वर केॅ जुनि पढ़ियनु कियो गारि हे ।। केवल हास विनोदक पुछियनु उचित कथा दुई चारि हे ।। राम लला .... प्रथम कथा ई पुछियनु सजनी गे कहता कनेक विचारि हे । गोरे दशरथ गोरे कोशिल्या राम भरत किए कारी हे । । राम लला .... सुनु सखी एक अनुपम घटना अचरज लागत भारी हे । खीर खाय बेटा जनमओलनि अवधपुरी के नारी हे ।। राम लला .... अकथ कथा की बाजू सजनी हे रघुकुल के गति न्यारी हे । साठि हजार पु़त्र जनमओलनि सगरक नारि छिनारी हे ।। राम लला ..... मिथिला मे दुलहा सॅ हॅसी मजाकक परंपरा सेहो डहकन गीत मे अछि । दुलहाक समक्ष विवाहक विविध विध बेवहार सम्पन्न कराबऽ लेल उपस्थित गाइनि लोकनि डहकन गाबि कऽ दुलहा सॅ मजाक करैत छथि आ सब लोक हठाका लगाकऽ एकर आनंद लैत अछि । एहने एक गीत मे दुलहा के संबोधित गाइनि लोकनिक भाव अछि - दुलहा गारि ने हम दइ छी बेवहार करइ छी । हम्मर बाबा छथि कुमार अहॉ के दाई मॉगइ छी ।। दुलहा गारि ने हम दइ छी एकटा बात कहइ छी । हम्मर बाबू छथि कुमार अहॉ के माई मॉॅगै छी ।। दुलहा गारि ने हम दइ छी एक विचार पूछै छी । हम्मर भइया छथि कुमार अहॉ के बहिन मॉगै छी ।। विवाहक पश्चात् दुलहा दुलहिनक शयन कक्ष कोहबर मे चारि दिन तक रहबाक जे परंपरा अछि तकर पोषण करैत अछि कोहबर गीत । एहि तरहक गीत मेे कोहबरक बिलक्षण वर्णन होइत अछि जे दुलहा दुलहिन मे परस्पर प्रेम भाव केॅ बढ़ाबऽ बला भाव जगबइत अछि । सीता रामक कोहबर गीत मिथिलाक विवाह संस्कार गीत मे विशेष प्रसि( रहल अछि । मुदा आब ई गीत आ धुन लुप्तप्राय अछि । एहने एक गीत अछि - कंचन महल मणिन के दियरा कंचन लागल केबाड़ रे बने बॉस के कोहबर ।। गज दन्त सेज आ फूलक बिछौना । रतन के बनल श्रृंगार रे बने बॉस के कोहबर ।। ताहि पर सूतथि रघुवर दुलहा । सीता दुलहिन संग बाम रे बने बॉस के कोहबर ।। यों मुख फेरि सोवे रघुवर दुलहा । दुलहिन सोवे करि मान रे बने बॉस के कोहबर ।। दुलहा दुलहिन अंग परसि परस्पर । हरषि नयन जल छाय रे बने बॉस के कोहबर ।। मिथिला मे विवाह संस्कारक अभिन्न अंग अछि मधुश्रावणी । एहि पर्व मे नवविवाहिता तेरह दिनक व्रत अनुष्ठान एकभुक्त पूर्वक करैत छथि । नित्य दिन अपराह्ण मे फूल लोढ़ि कऽआनबाब परंपरा अछि । एहि परंपरा मे गाम भरिक नवविवाहिताक टोली फूल लोढ़बाक गीत गावि मनोरंजनपूर्वक व्रत निष्ठाक पालन करैत अछि । नाग नागिनक पूजा कएल जाइत अछि ताहि बीच बिसहाराक गीत गाओल जाइत अछि । ई दूनू तरहक गीत आब लुप्तप्राय अछि । फूल लोढ़ऽ सॅ संबंधित गीत अछि - दुई चारि सखी सब सामर गोरिया कुसुम लोढै़ लेै चललि मालिन फुलवरिया कुसुम लोढ़ै लए चलली मालिन फुलबरिया ।। मॉग मे सिन्दुर सोभे माथे पे टिकुलिया पोरिया पोरिया ना सोभे अॅउठी मुनरिया पोरिया पोरिया ना । हाथ मे लेल सखी फूल के चॅगेरिया से रहिया चलइ ना ताके तिरछी नजरिया रहिया चलै ना ।। फूल लोढ़ऽ के गौरीगीत विशेष प्रचलित रहल अछि । इ गीत परंपरा सॅ आबि रहल अछि आ वर्तमानहु मे प्रचलित अछि मुदा नवतुरिया पीढ़ीक बीच लुप्तप्राय अछि । एहन एक गीत अछि - गौरी फूल लोढ़ऽ गेली फुलबरिया संग मे सहेलिया ना ।। केओ सखी आगॉ आगॉ चलली केओ सखी पाछॉ पाछॉ चलली । केओ सखी बीचे बीचे गेली फुलबरिया संग मे सहेलिया ना ।। राधा आगॉ आगॉ चलली सीता पाछॉ पाछॉ चलली । गउरी बीचे बीचे चलली फुलबरिया ।। संग मे... केओ सखी डाली भरि लोढ़लनि केओ फुलडाली भरि लोढ़लनि केओ सखी लोढ़ि लेलनि भरि फूल डलिया ।। संग मे..... राधा डाली भरि लोढ़लनि सीता फुलडाली भरि लोढ़लनि गउरी लोढ़ि लेलनि भरि फूल डलिया ।।संग में..... केओ सखी कृष्ण वर मॉगलनि केओ सखी राम वर मॉगलनि केओ सखी मॉगि लेलनि तपसी भिखरिया ।। संग मे..... राधा कृष्ण वर मॉगलनि सीता राम वर मॉगलनि गउरी मॉगि लेलनि तपसी भिखरिया संग में सहेलिया ना ।। मधुश्रावणी पूजा मे पवनइतिन जखन नाग नागिनक पूजा करइ छथि तखन हुनक सुहागक शुभकामना व्यक्त करइत बिषहारा गीत गेबाक परंपरा अछि । विषहारा गीत कथी के घइला बिषहरि कथीके गेरूलि राम कथी केर डोरी सॅ भरब निरमल जल ।। सोना के घइला विषहरि रूपा के गेरूलि राम रेशमक डोरी सॅ भरब निरमल जल ।। घइला भरि भरि बिषहरि असरा पुराएब राम एहि पर नाग बाबूू करथि असनान ।। ओहि पार बिषहरि माइ रोदन पसार राम छोरू छोरू आहे नाग आॅचर हमार ।। राम रोबइत होयतीह सेवक हमार ।। लबे लब नबेरिया भइया लबे बॉस खेब राम कोने भइया खेबनहार किये होयती पर ।। लबे लब नबेरिया भइया लबे बॉस खेब हे भैरव भइयार खेबनहार बिसहरि होयती पार।। जहिना जुड़ाएलि सुहबे तहिना जुड़ाउ राम तोरो कन्त जीबउ गेे सुहबे लाख बरिस ।। लुप्तप्राय अछि विवाह संस्कारक समदाउन । समदाउनक गायन बेटीक द्विरागमनक अवसर पर स्त्रीगण लोकनिक समवेत स्वर मे होइत अछि । नवतुरिया पीढ़ीक बीच करूणा प्रधान उदासी ओ समदाउन गीतक पद आ भास प्रायः लुप्तप्राय अछि । दू विभिन्न भासक गीत उल्लेखनीय अछि - गोर लागूूॅ पैयॉ परूॅ सुरूज गोसइयॉ बेटी केे जनम जुनि देब ।। बेटी के जनम जुनि देब हे विधाता निरधन कोखि जन्म जुनि देब ।। निरधन कोखि जन्म जॅओ देब हे विधाता रूप अनूप जुनि देब ।। रूप अनूप जॅओ देब हे विधाता पुरूख मुरूख जुनि देब ।। कहरिया भासक एक समदाउन मे सीताक नहिरा सॅ बिछोहक करूणा भाव व्यक्त अछि - सुभग पवित्र भूमि मिथिला नगरिया । हमरा केॅ कहॉ नेने जाइ छेॅ रे कहरिया । बेला ओ चमेली चम्पा मालती कुसुम गाछ । आब कहॉ देखबई हाय रे कहरिया।। सुन्दर सुन्दर वन सुन्दर सुन्दर घन सुन्दर सुन्दर सब बाट रे कहरिया । केरा ओ कदम्ब आम पीपर पलास गाछ । आब कहॉ देखबइ हाय रे कहरिया ।। किनकर नयना सॅ गंगा नीर बहि गेल किनकर हृदय कठोर रे कहरिया । माएक नयना सॅ गंगा नीर बहि गेल बाबू के हृदय कठोर रे कहरिया ।। केहि मोरा सॉठल पउती पेटरिया । केहि मोरा देल धेनु गाय रे कहरिया । माए मोरा सॉठल पउती पेटरिया । बाबू मोरा देल धेनु गाय रे कहरिया ।। बाबा के मुॅह हम देखबइ कोना आब काकी कोना बिसरब हाय रे कहरिया । भाइ भतीजा आओर सखिया सलेहर आब कहॉ देखबई हाय रे कहरिया ।। आगॉ आगॉ रामचन्द्र पाछॉ भाइ लछुमन पहुॅचि गेल झटपट अवध नगरिया। महल मे कोसिला रानी आरती उतारए लगली अयोध्या बाजए बधाई रे कहरिया।। मिथिला के व्यावहारिक लोकगीत मे परस्पर सहयोग एवं श्रम प्रधान गीत ‘लगनी ‘;जॅतसार द्ध गृहस्थीक अभिन्न अंग रहल अछि । ई गीत जॉत चलबइत दू स्त्रीक स्वर मे गायनक परंपरा रहल अछि । लगनी गीत भक्तिभाव ,करूणा आ व्यवहार प्रधान हेबाक कारणेॅ परस्पर संबंध के समृ( बनेबा मे सहायक अछि । मशीनीकरणक युग मे जॉतक चलन प्रायः बन्द भऽ गेल ,मुदा दूर देहात मे एखनहुॅ कतहुॅ कतहुॅ लोक कण्ठ मे सुरक्षित अछि लगनीक गीत आ एकर भास । राधाकृष्ण भक्ति पर आधारित किछु लगनी गीत साहेबदास पदावली सॅ संकलित कए प्रस्तुत अछि । ;1द्ध बसहुॅ वृन्दावन मोर जीवन धन आ रे कान्हा सुनि सुनि छतिया मोरा सालय रे की ।। जौं तोहें जएबह हरि जियबइ ने एको घड़ी । आ रे कान्हा हमर सपथ तोहि माधव रे की ।। जाहु जुनि मधुबन तेजि कहुॅ मोहन । आ रे कान्हा हमर सपथ तोहि माधव रे की ।। कंस के जान हॅति दइए अधम गति । आ हे राधा साहेब आओत कृष्ण माधव रे की ।। ;2द्ध काहि कहब दुःख वचन ने आबए मुख । आ रे उधो धइरज धएलो नहि जाइछ रे की ।। किए तेजि हरि गेल कुबुजी अधीन भेल । आ रे उधो केओ ने कहए एहि गोकुल रे की ।। शरण धएल जन्हि दुःख न पाओल तनि । आ रे उधो सत्य निगम गुण गाओल रे की ।। कत गुण गएबउ कत नित हम रोएबउ । आ रे उधो कओन साहेब हरि आनब रे की ।। ;3 कत दूर मधुपुर जतए बसए माधव । आ रे सजनी वन वन माधव मुरली टेरए रे की ।। अनबो मे चनन काठी लिखबो मे भाति भाति । आ रे सजनी दुख सुख लिखियो बनाइए रे की ।। एक अंधियारी राति हरि बिन फाटय छाती । आ रे सजनी कोइली शबदे हिया मोरा सालय रे की ।। साहेब गुनि गुनि बैसलहुॅ सिर धुनि । आ रे सजनी जगत जीवन नियरायल रे की ।। मिथिला मे प्रचलित )तुप्रधान गीत मे मलार गीत आ धुन सेहो लुप्तप्राय अछि । मिथिला मे मलार गीतक परंपरा समृ( रहल अछि । वर्तमान मे मलारक ओ गीत आ धुन लुप्तप्राय अछि । मलार गीतक किछु पद साहेबदास पदावली सॅ संकलित प्रस्तुत अछि । ;1द्ध अली रे प्रीतम बड़ निरमोहिया ।। आतुर वचन हमर नहि मानए । परम विषम भेल रतिया ।। कॉपत देह घाम घमि आवत । ससरि खसत नव सरिया ।। आवत वचन थिर नहि आनन । बहत नीर दुहू अॅखिया ।। रमानन्द भामिनि रहूॅ थिर भए । सुख बीच कहू दुःख बतिया ।। ;2द्ध हे उधो लिखब कओने विधि पाती ।। अंचल पत्र नयन जल काजर । नख लिखि नहि थिर छाती ।। चन्द्र किरण बध करत एतय पिय । ओतय रहहु दिन राति ।। रेशम वसन कनक तन भूषण तेसर पवन जिबघाती ।। कहथि रमानन्द सुनु विरहिनि तोहे । आओत श्याम विरहाती ।। हे उधो लिखब कओने विधि पाती ।। ;3द्ध हे उधो बड़ रे चतुर घटबरबा ।। दूर सॅ बजओलनि नाव चढ़ओलनि । खेबि लए गेल मॅझधरबा ।। नाव हिलओलनि मोहि डेरओलनि । कएलनि अजब खियलबा ।। आॅचर धएलनि मोहि झिकझोरलनि । तोड़लनि गजमोति हरबा।। सुकविदास कह तुम्हरे दरस को । जुग जुग जीबए घटबरबा ।। प्रेम ,श्रृंगार आ रति भावक अभिव्यक्ति सॅ परिपूर्ण बटगमनी गीतक परंपरा सेहो लुप्त प्राय अछि । ओना एखनहु मांगलिक अनुष्ठान मे जखन स्त्री गण लोकनिक समूह ग्राम देवता डिहबार,ब्रह्मस्थान , माटिमंगल , आम महु बियाह आदि विधि लेल ढोल पिपही बाजा के संग निकलैत छथि तॅ बाट मे बटगमनी गीत गबइ छथि । मुदा नब पीढ़ीक मैथिल ललनाक बीच ओहि उमंग उत्साह आ प्रगल्भताक अभाव तॅॅॅ अछिए ,ओहन गीतक प्रति उदासीनताक कारणेॅ ओ बटगमनी गीत सभ लुप्त प्राय अछि । ओहने किछु संग्रहित बटगमनी प्रस्तुत अछि । स्नेहन , चुम्बन , आलिंगन ,राग आ अनुराग युक्त संभोगक वर्णन नायिकाक उक्ति मे प्रस्तुत बटगमनी अछि - कॉच कली पहु तोड़थि सजनी गे , लए कोरा बैसाए सजनी गे ।। अधर सुधा सम पीबथि सजनी गे , यौवन देखि लोभाय सजगी गे ।। लए भुजपाश बान्हि दुनू सजनी गे, जखन करथि बरजोरि सजनी गे ।। तखनुक गति की कहिए सजनी गे, पहु भेल कठिन कठोर सजनी गे ।। नहि नहि जौं हम भाखब सजनी गे , तौ राखिए मन रोख सजनी गे ।। पति जखन बहुतो दिन पत्नी केॅ विरह मे व्याकुल केलाक बाद अबैत अछि तॅ पति सॅ मिलनक उत्साह केहन भऽसकैत अछि ? बहुत दिनक बाद परदेश सॅ आएल पति सॅ मिलन हेतु की की तैयारी आ साज श्रृंगार करबाक उत्कंठा होइत अछि , तकर वर्णन करैत बटगमनी अछि - कतेक दिवस पर प्रीतम सजनी गे आएल छथि पहु मोर सजनी गे ।। मन दए नेह लगाएब सजनी गे , रचि रचि अंक लगाएब सजनी गे ।। पहु थिक चतुर सयानहि सजनी गे , हम धनि अंक लगाएब सजनी गे ।। ई दिन जौं हम काटब सजनी गे , तखन करब बर गान सजनी गे ।। गाबि सुनेबनि हुनकहुॅ सजनी गे , पहु करता बड़ मान सजनी गे ।। बालानां कृते- 1. मध्य-प्रदेश यात्रा आ 2. देवीजी- ज्योति झा चौधरी 1. मध्य प्रदेश यात्रा चारिम दिन ः 26 दिसम्बर 1991 आइर् भाेरे जल्दी उठीकऽ हम उर्मिला दीदी संगे “जय मां नर्मदे हर” मंदिर गेलहुं।आेतय नर्मदा कुण्डमे नहाकऽ पूजा केलहुं।श्री नर्मदेश्वर महादेवक मंदिर कुण्डक सामने छै। इर् बहुत छाेट मंदिर छै आर अकर फर्श पानि सऽ भरल छै।पूजाक बाद जखन घुरिक एलहुं तऽ सब उठि चुकल छल।नाश्ताक बाद पुनः भ्रमणक क्रम शुर्उ भेल। सर्वप््राथम कपिलधारा पहुंचलहुं।अतय कपिल मुनिक पदचिह्न उपस्थित अछि।आेतसऽ कनिये दूर पर इर् धारा दूधधारामे बदलि जाइत छै।कपिलधारा दऽ लाेकाेक्ति छै जे नर्मदा कपिलमुनिक पाछा करैत अतऽ तक एली आऽ जखन कपिल मुनि हुनका लग विवाहक प््रास्ताव रखलखिन तऽ आे भागि गेली।कपिलमुनि आेतै ठार रहि गेलाह।जतऽ हुन्कर पदहिह्न अखनाे तक विराजमान छैन।नर्मदा आेतय सऽ भागि करीब 100 फिट ऊॅंच झरनाक निर्माण करैत छथिन।अकरे कपिल धारा कहल गेल छै।कपिलधारा कनिक आगां जाकऽ एक अन्य झरना दूधधारामे बदलि जाएत छै।अहिठाम ऋषि दुर्वासाक आश्रम छलैन से मान्यता छै।कहलगेल छै जे वर्षाक समय अहिठामक जलधारा झागसऽ भरि जाइ छै जेना उफनइत दूध हाेइर्।ताहि द्वारे अहि धाराक नाम दूधधारा पड़ल छै।दूधधाराक निकलिकऽ हमसब जालेश्वर मंदिर पहुंचलहुं। इर् जंगलमे बसल एक छाेट मंदिर छै। इर् धर्मावलम्बि के लेल विशेष आकर्षक छै।हमर सबहक इर् यात्रा ट्रकसऽ भऽ रहल छल। बड़का ट्रक के पांछा बैस खुजल हवाक मजा लैत हमसब भ्रमण कऽ ुरहल छलहुं।हमसब भाेजनके लेल लाॅज वापस एलहुं। भाेजनाेपरान्त हमर सबहक पदयात्रा प््राारम्भ भेल जे लगभग 11 किलाेमीटर के छल।हमसब सबसऽ पहिन रंगमहल देखलहुं जकर निर्माता महाभारत कालक पाण्डव सब मानल गेल छैथ।कहल गेल छै जे पाण्डव सब 10 काेठलीवला अहि महल के केवल 24 घण्टामे तैयार केने छलैथ।अकर बाद हमसब वृक्कमण्डल पहुंचलहुं।अतय एकटा विशाल चट्टान छै जे एक दिस सऽ धरतीसऽ कनी उठल छै।अहि खाेहमे हाथ घुसेला सऽ पानि भेटैत छलै।एकटा लाेकल गाइड बतेलक जे जकरा इर् पानि भेट जाइत छै से भाग्यशाली हाेइत अछि।हमसब पानि पाबैमे सक्षम भेलहुॅं।वस्तुतः अतय चट्टानक बीचमे खाेखला जगह छै जाहिमे बरसातमे पानि भरि जाइत छै आर धीरे धीरे इर् जलस्तर घटैत जाइत छै आर गर्मीमे समाप्तप््राय भऽ जाएत छै।अकरबाद हमसब धुनीपानी पहुॅंचलहुॅं जतय अनेकाे फल फूलक वृक्ष तथा जलकुण्ड छै। अहिसबसऽ लाैटिकऽ हमरा सबहक रातिमे दू टा फिल्म देखक कार्यक्रम बनल।लेकिन चुंकि हमरा बेसी शाैक छलै नहिं तैं हम कनिक फिल्म देखलाक बाद एकटा शिक्षिका संगे सूतय आबि गेलहुं।फिल्म के चयनमे एकटा हास्यास्पद गप भेल।फिल्म आनैकाल वाेटिंग भेल जाहि मे दू टा फिल्म ‘फूल आैर कांटे’ एवम् ‘पत्थर के फूल’ इर् दू टा मे सऽ एकटा चुनैके बात भेल आ आेहि पर विद्यार्थी सबमे बहुत बहस भेल।जखन शिक्षक महाेदय वापस एला तऽ कहला जे हम ‘पत्थर के कांटे’ नामक फिल्म लऽ कऽ आयल छी ।सब आश्चर्य चकित रहैथ जे इर् काेन फिल्मक नाम अछि। बादमे पता चलल जे चुंकि शिक्षक महाेदय फिल्म सऽ बहुत अनभिज्ञ छैथ तैं हुन्का सऽ बाजयमे गलती भऽ गेलैन। 2.देवीजी : देवीजी -निबन्ध प्रतियोगिता विद्यालयमे आब प्रतियोगिताक समय आबि गेल छल। शुरुआत भेल निबन्ध़ भाषण एवम् वार्दविवाद प्रतियोगिता सऽ।देवीजी कहलखिन जे जॅं निबन्धके शीर्षक पहिने सऽ बूझल रहै तऽ प्रतियोगिता आर कठिन भऽ जायत छै लेकिन लेख लिखनाइर् आसान भऽ जायत छै।जखन शीर्षक प्रतियोगिता प्रारम्भ हुअ काल देल जायत छै तखन शीर्षक पर जानकारी रहनाइर् अत्यंत आवश्यक छै। देवीजी बच्चा सबके प्रतियोगिताक तैयारी लेल निम्नलिखित सलाह देलखिन ः ज्ञान बढ़ाबऽ के उपाय ः 1. देश विदेशक समाचार सऽ अवगत रहू।टेलीविजऩ रेडियो़ अखबाऱ मासिक वाऽ साप्ताहिक वा अन्य पत्रिका सब पढ़ल करू।ओहि सबमे कोनो तरहक विषय पर बतायल अथवा लीखल निबन्ध के स्वरूप पर ध्यान दियौ। 2. खाली समय मे शब्दकोष पढ़ैके अभ्यास राखू। शब्द अंताक्षरी़ क्राॅसवर्ड इत्यादि खेल खेलल करू। 3. विद्यालयके पुस्तकालयके पूरा लाभ उठाऊ।अपन कक्षाक विषय के अतिरिक्त आनो तरहक पुस्तक पढ़ल करू। 4. दूरदर्शन पर आबैवला विभिन्न प्रकारक प्रश्नाेत्तरी तथा विचार विमर्श वला कार्यक्रम देखल करू। 5. समय समय पर सामुहिक विचारगाेष्ठी करक विचार सेहो सहायक भऽ सकैत अछि। 6. शब्दके शुद्ध लिखऽ पर ध्यान दियऽ। वर्तनी सम्बन्धित अशुद्धि के दूर करू।अहि लेल श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द पर विशेष ध्यान दियऽ। 7. वाक्य संरचना के अभ्यास करू। अपन विचार ठीक सऽ व्यक्त केनाइर् नीक निबन्ध लीखक मुख्य आवश्यकता छै। अहि लेल व्याकरणके अभ्यास समर्यसमय पर करैत रहू। बढ़िया लेखके स्वरूप - लेखक स्वरूप बढ़िया होय तऽ साधारण लेख सेहो रोचक बनि सकैत छै।आ कतबो तार्किक आऽ रोचक बात बिना व्यवस्थित ढंग सऽ लीखल गेल होय तऽ नहिं नीक लागैत छै।ताहि लेल देवीजी लेखक स्वरूप के जानकारी देलखिन। लेखके भूमिका़ मुख्य भाग तथा सारांश अहि तीन भागमे बांटल गेल अछि। 1. भूमिका ः भूमिका मे शीर्षक के मतलब तथा आगां लीखल गेल भागके संक्षिप्त जानकारी देल जायत छै। कहल गेल छै ‘Morning shows the day’ अर्थात् दिवस केहेन हैत से भाेरे सऽ आभास भऽ जायत छै। भूमिका सबसऽ महत्वपूर्ण भाग छै कोनो लेखके। आंकलन करैबला शिक्षकके जॅं भूमिका नीक लगलैन तऽ बढ़िया असर होयत छै। 2. मुख्यभाग ः लेखक मुख्य भाग सेहो कम महत्त्वपूर्ण नहिं होयत अछि। बिना पुनरावृत्तिके वर्णनात्मक विवरण लिखनाइर् सेहो क्रमबद्ध एमव् सम्बन्धित श्रृंखलामे बड आसान काज नहिं होयत छै। जॅं शब्दक संख्या पर ध्यान दी तऽ अहिमे सबसऽ बेसी शब्दक प्रयोग होयत अछि।कोनो विषय के नीक आ बेजय दुनु रूपक बखान अहिमे होयत अछि। 3हृ सारांश ः अंतमे सारांशमे पूरा विचार मंथनके एक तरह सऽ परिणाम लीखल जायत अछि। कोनो लेखक मूल भाव सारांशमे परिलक्षित होयत छै। लेखके विशेष बनाबक तरीका ः कोनो लेखमे जॅं विषय सऽ सम्बन्धित उदाहरण विशेषतः हालके समाचार सऽ अथवा आसपासके जन जीवन सऽ देल जाय तऽ ओ बेसी नीक कहाय छै। उदाहरणमे जॅं इतिहासक कोनो घटनाक विवरण होय आऽ तिथि स्थान आ लोकक नाम सेहो उल्लेखित होय तऽ अति उत्तम। लीखैके सुन्दरता सेहो महत्व राखै छै।बेसी गन्दा अथवा कुदरूप लेखन सऽ नीको लेख कम आकर्षक लागि सकैत छै।अहि लेल रोज लिखना लीखू। भाषण एवम् वाद र् विवाद प्रतियोगिताक ज्ञान ः देवीजी भाषण एवम् वाद विवाद प्रतियोगिता लेल उच्चारणके शुद्धि पर विशेष ध्यान देलखिन।तकर बाद तर्कसंगत़ सत्य एवम् प्रमाणयुक्त बात के बाजैपर जाेर देलखिन। अहि सबलेल शीर्षक के नीक सऽ बुझबाक चाही।अभ्यास आऽ आत्मविश्वास के आवश्यकता बतेलखिन।अभ्यास सऽ समय आंकलन में विशेष रूप स सहायता होयत छै। देवीजी के अहि परामर्श सॅं सबके बहुत प्रोत्साहन भेटलै।सब देवीजीक बातक अनुसरणमे लागि गेल।आगामी प्रतियोगितामे सबके देवीजीक जानकारी बहुत उपयोगी सिद्ध भेल।चुंकि अन्तर्राष्ट्रीय मित्रता सप्ताह आऽ वैलेण्टाएन्स डे चली रहल छल तैं बेसी शीर्षक अही सब पर आधारित छल।अहुना वैलेन्टाएन्स डे द्वारा पाश्चात्य सभ्यताके आमंत्रित करै पर बुजुर्ग सबके त बड विराध छैन लेकिन अहि पर नब पीढ़ीके विचार ज्ञात करैके शिक्षक सब लेल ई बढ़िया अवसर छल। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना लेखन Top of Form Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.) Language: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) इंग्लिश-मैथिली कोष / मैथिली-इंग्लिश कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। English to Maithili Maithili to English Bottom of Form विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.पञ्जी डाटाबेस २.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली १.पञ्जी डाटाबेस-(डिजिटल इमेजिंग / मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण/ संकलन/ सम्पादन-पञ्जीकार विद्यानन्द झा, नागेन्द्र कुमार झा एवं गजेन्द्र ठाकुरद्वारा) जय गणेशाय नम: (43) अपरा ठ. महामहोपाध्याय ठ. मेघ सुतो सुतो ठ. (100/09) कृष्णानन्द: खौआल सँनन्दन सुत जगन्नाथ दौ।। (03/06) अपरा बाछे सुतो आड़नि: पबौलीसँ वाचस्पतिदे आड़निप्रि. रतनाकर सुता दिवाकर गदाधर धृतिकश: केडँटी एउढ़सँ हरिहर दौ। अपरौ लक्ष्मीकर: महुआ सँ सिद्धेश्वरा परनामक दौ।। लक्ष्मीकर सुतो नितिकर रूचिकरौ पनिचोभ सँ हरिवंश दौ।। छितिशर्मा सुतो बैकुण्ठ ऋषिकेशो:।। ऋषिकेश सुतौ वृरिवंश माने कौ।। हरिवंश सुता दिवाकर रतनाकर चन्द्रकर सूर्यकरा: बलाद्धिरसँ श्यामकंठ दौ।। नितिकर सुतो साधुकर: सरौनीसँनाइ सुतमहेश्वर महो (19/04) साधुकर सुतो महो (14/02) सुधाकर: तिसउँत सँ शुचिकर दौ।। (08/09) हल्लेश्वर सुतोबाभन: महुआ सँ बासुदेव दौ।। एक सुतौ गणपति तरूणी वरूआरी माण्डर सँ विघू दौ।। गणपति सुता रघुपति रामपतिनन्दीश्वरा: भरेहासँ देवे दौ।। रघुपति सुतो बाछे शुचिकरौ सकराढ़ी सँ महामहोयादमाट हरिहर दौ।। (03/02) महामहोपाध्याय (128/04) हरिहर सुता सदुपाध्याय (23/04) नादू सदुपाध्याय भाद्र सदुपाध्याय (30/01) सुये सदुपाधय चांडोका: सरिसबसँ जयादित्य दौ (03/04) महामहोजयादित सुतो (20/04) दामूक: देवहार सरैनिसँ सर्वानन्द दौ।। क्वाचित ब्रहमानन्द दौ ।। शुचिकर सुता विहनगार दरिहरासँ भोगीश्वर दौ।। (11/03) मण्डन सुतो ऐलौक: भदुआ भदुआल वासी एसुता जुहे पइम अनना पइम सुता भवशर्म्म जयशर्म्म विष्णु शम्मणि तत्र सोमशर्म्म सन्नतति विहनगर वासी।। सोमशर्म्म सुता वासुदेव जयदेव कामदेव यशोदेव: गंगोली सँ पुरूषोत्तम दौ।। वासुदेव सुतो चण्डेश्वर रातू कौ पण्डोली वासी जल्लसदीसँ (44) ''14'' शिवादित्य दौ।। सेतू सुतो भोगीश्वर: कंज्जोली मातृक।। भोगीश्वर सुता करमहा सँहरदत्त दौ।। हरदत्त सुता लक्ष्मीकर हरिकरौ दहुलासँ श्रीहर्ष सुत भवदन्त दौ ( 14/05) महो (24/05) सुधाकर सुतो बुद्धिकर: पाली सँ केशव दौ (09/08) श्री धर सुतो रामदन्त: गढ़ माण्डर से सुये दौ दियोयसँ सुरेश्वरटौणा रामदस्त।। सुता केशव (21/02) सुता केशव माधव नरसिहं मुरारिय: (20/09) पबौली सँ बागे दौ 07/03) महो गंगाधर सुता पराउँ जीवे परवाई का: दरि श्यामकंठ दौ।। पराउँ सुतो बागे क गढ़ निरबूतिसँ जगद्धा दौ (07/07) सिंहाश्रमसँ रतनेश्वर द्धौणा बागे सुतो धराधर महिधरौ (19/01) बुधौरा सकराढ़ीसँ प्रितिकर दौ।। केश्वर सुतो सदुपाध्याय गोदेक: नरउनसॅ कोने दौ (08/07) अपरा कोने सुता सक: जीवेश्वर दौ (08/01) खण्डबला सँ जाई दौ।। महामहोपाध्याय (42/07) बुद्धिक सुता (29/06) (126/05) वृद्धिकर कृष्णकरे नन्दना: बीाानि रूचिकर दौ (06/06) वीर सुता भगव कुमार शीत कान्हा तत्रादयास्त्रय पण्डोलि दरिहरासँ बामन दौ अन्यो डीह परिहरासँ लक्ष्मेश्वर दौ।। कुमार सुतो वसुकंठ: सक गिरीश्वर दौ।। वासुकंठ सुता रूचिकर रामकर सुधाकर मित्रकरा दरि वृद्धादिल्य दौ (07/04) चिन्तामणि सुतो अभिमन्यु विकर्णो।। अभिमन्यु सुतो दिवाकर (3031/05) गुणाकरौ दिवाकर सुतो वाचस्यति जनमेजमो भोरवरिसँ पजाकरदौ।। जन्मेजय सुता महा महोपा हरिदेव शिति कंठश्याम कंठ लक्ष्मीकंठ नील कंठाा: अपरौ देवादित्य गिरीश्वरौ।। महामहोउपा हरदेव सुता यवेश्वर विश्वम्भर लक्ष्मेश्नरा रादी कोइयारसँ सिंधुनाथ देल्हन दौ।। अपरौ लक्ष्मीपाणि (45) रतनपाणि सबौर मातुक:।। पाली सँगंगादित्य दौ।। विश्वम्मर सुतो लौरिक वृद्धादित्य शिवादित्य शिवादित्य (26/09) कोचे का।। तत्रादयास्त्रय रामपुर नरवालसँ सीनू सुत लक्ष्मीपतिदौ नरसिंह द्धौणा सुति घर पन्जी।। सीरदौ इति मंगलघर पभ्जी।। अन्त्यो माहव जल्लकीसँ रविभात योगेश्वर दौ।। लौरिक वृद्धादित्य सुतो नारू (28/04) डालू कौ बुधवाससँ मधुकर दौ खण्डवासॉं सुपै दौ।। अपरा सुता गोधुलि अलयसँ साठ दौ।। (13/08) साढू सुतौ (21/06) नारायण (32/08) हरिकी बलहा बलियाससँ रामशर्म्म ढौ।। (01/02)।। श्री नाथ सुत जयशर्म्म सुतो रामशर्म्म:।। रामशर्म्म सुता जाटू (37/05 (30/07) माधव बाटू का: टकबालसँ रतनधर दौ।। (36/03) रूचिकर सुता शुभंकर हरिकर शंकर: जगतिसँ केशव दौ।। धोधि सुतो गणपित नन्दी कौ तत्रदय: गंगोली मातृक अन्त्यो राउढ़ मातूक:।। नन्दी सुता शिरू नारू (27/07द्व वाचू मांगुरा: नेथाम सुएनसँ सुरेश्वर दौ।। शिरू सुतो माधव केशवौ मण्डसिमसँ धृतिकर दौ।। केशव सुता गढ़ खण्डबलासँ अनन्नत कुत सुपन दौ फनन्दहसँ भवाई द्धौणा एवंनन्दन मातृक चक्र।। नन्दन सुता जगन्नाथ देवनाथ (36/03) हौरिला (112/02) सोदरपुरसँ रातु सुत राम दौ।। सिंहारम सँ बीजी महामहोपाधय हलायुघर ए सुतौ मही दधिए।। सुतोमहो जाइक: ए सुतो महोमहिधर ए सुतो गांगुक: ए सुतो वागीश्वर ए सुतो रतनेश्वर रमेश्वरौ नगरदतसँ विसव दौ।। रतनेश्वर सुतो महामहोपाधय हल्लेश्वर महामहोपाध्याय (18/09) सुरेश्वर महामहो पात्याय (21/01) जीवेश्वरा: पारपुर सकराढ़ी सँ अन्नन्त दौहित्री जयदेवी पुत्रा: सोदरपुर गामौ पार्थका:।। महामहोपाधया हल्लैश्वर सुतो राजू हलधरौ गढ़ बेलउँचसँ (28/07) (46) ''15'' हल्लैश्वर दौ।। (04/05) सन्तोष सुतो लक्ष्मीपाणि: पालीसँ विकर्ण दौ।। ए सुता हल्लैश्वर पॉचू नीलकंठ देवकंठा पड़ारियॉं हासरू भवादित्य केश दौ हल्लैश्वर सुता बरैबा सँजयशर्म्म दौ सकराढ़ी सँ धरानन्द द्धौ।। (221/05) राजू सुता सुदपाध्यायभोगीश्वर (03/03) महेश्वरा: गढ़ निखूतिसँ नाने प्रसिद्ध रतनधर दौ अन्त्यो सकराढ़ीसँ जीवधन द्धौ।। तिलईसँ लक्ष्मीकर द्धौ।। नोने प्र. रतनधर सुता बहेराढ़ी सँ ठ. जयकंठ दौ।। (07/02) पबौलसँ वीर द्धौ सदुपाध्याय भोगीश्वर सुता महामहो (21/07) ग्रहेश्वर रूदेश्वर हिरेश्वर (40/07) धीरेश्वर विश्वेश्वरा: (19/08) दूबा सकराढ़ी सँ विभू दौ।। बैकुण्ठ सुतो श्रीवत्स: ए सुतौ सोमेश्वर ए सुतौ।। जागेश्वर देवेश्वरौ देवेश्वर सुतो विरेश्वर: छतौनीसँ माधव दौ।। वीरेश्वर सुता धीरेश्वर रजेश्वर यहेश्वरा: बमनियामसँ राम दौ।। रजेश्वर सुतौ वासुदेव विभूकौ छादन सरिसब सँ शिवादित्य दौ विभू सुतर बुधवालसँ हिरू दौ रेकौरा गंगोलीसँ मण्डन दौ।। मण्डुआसॅ नित्यकस्तुल सदुपाध्याय विश्वेश्वर सुतौ रातूक: पण्डौली दरिहरासँ मुनिदौ (07/04) अपरा देवधर मण्डौली वासी ए सुतौ उदयकर गौढि़ जल्लकीसँ खड़गधर दौ।। गोढि़ सुतो वामन: विठुवाल वासी भण्डारिसमसँ जगाई दौ।। ए सुता सप्त: धृतिकर गुणाकर सोमेश्वर लतनकर भीमेश्वर गुणेश्वर रज्जेश्वरा: तत्रादयो गंगोर सँ नारायणा दौ।। अपेरे सुसैला 29 लयसँ बलभद्रौ सोमेश्वर सुता वत्सेश्वर सिद्धेश्वर (21/03) (22/04) वीरेश्वर जीवेश्वरा: तत्राद्पास्त्रय अहपुर करमहा सँ रूचिकर दौ अन्त्यो तपनपुर पालीसँ नरसिंह दौ।। (47) वीरेश्वर सुतौ मुनिनम्नि (19/01) विदित: ए सुता दिवाकर (21/09) रविकर मित्रकरा: (56/05) बमनियाम सँ गोनन दौ (06/07) महवालसँ दिवाकर द्धौ।। अपरौ हरिकर: तल्हनपुरसँ लमशर्म्म दौ (07/09) लभशर्म्मा सुता चोटवाल सकराढीसँ गोविनद दौ।। चोटबाल सकराढ़ी सँ बीजी सिद्धेश्वर: ए सुतौ धृतिवर्द्धन त्रिलोचन प्र नामा: ए सुतौ हरदन्त: ।। ए सुता महादेव शिवदेव सिद्धेश्वरा:।। महादेव सुतौ व्यास वासुदैवौ: वासुदेव सुतो कुसुमाकर: बहेराढ़ी सँ जयकंठ दौ।। अपेरो कान्ह: अपरा नीमाटकबालसँ रतनेश्वर दौ।। एक सुता गोविन्द माधव जगन्नाथा: यमुगामसँ हरदन्त दौ।। गोविन्द सुता सुरगनसँ दुर्गादन्तदौ (135/06) सुता (48/07) भवे (135/02) माधव रामा बेलउँचसँ धर्मादित्य दौ।। (19/03) (72/10) धर्मादित्य सुतो रतिकर वागूकौ खौआलसँ उँमापति दौ (11/02) कान्ह सुतो नरसिंह: सुइरीसँ धर्माध्यक्षक देवे दौ।। अपरौ (20/10) डालूक: सरौनीसँ धर्माध्यक्ष्क गढ़ाउन दौ।। नरसिंह सुतौ धर्माध्यक्षक लमशर्म्म: गोधेलि अलय सँ भोगीश्वर दौ।। समशर्म्म सुता पनिहल नाने उँमापतिय:गोधोलि यलयसँ देवेस्मैव दौ।। तैनेवदन्तक:।। अन्त्यो केबौनी टकबाल सँ जगद्धदर सुत कान्ह दौ।। उँमापति सुतो (25/03) रमापति केउँटराम पण्डोलीसँ दामोदर दौ।। ब्रहमधुरासँ पृथ्वीधर दौ।। (27/04) राम सुता हरिअम सँ नाने सुत दिनू दौ (12/01) (41/09) माधव सुतौ (18/08) भाई नाई कौ पंचवक विस्कीसँ असाउँ दौ।। नाई सुतो धारूक: गंगोरसँ अनिरूद्ध दौ (07/07) विश्वनाथसुता लक्ष्मी नाथ शशिनाथ हरिनाथ श्रसपनाथ जगन्नाथा: पालीसँ ऐलो दौ।। 21 शिनाथ सुतो अनिरूद्ध नाने कौ फनन्दहसँ लखाई दौ।। (48) ''17'' अनिरूद्ध लोकेक सँ सुत दौ सँ द्धौ।। धारू सुतो नोनेक: माण्डर सँ कीर्तिधर दौ।। (02/02) अपर शिलपाणि सुतो शुभंकर: ए सुतौ रतनाकर ए सुतौ चांड़ो कीतिघरों नरवालसन धर दौ।। कीर्तिधर सुता श्रीधर पृथ्वीधर प्राणधर मुक्रिधर धर्मधा: पतिचोभसँ हरिहर दौ।। (25/08) नाने सुता (26/04) रति मति गुणै का: 46/04) एकना वलियाससँ नितिकर दौ (10/05) मित्रकर सुतोनितिकर: ए सुतौ (306/01) चन्द्राक्रर विभाकरौ (351/01) पालीस भगंब दौ।। गणपति सुतौ भगव: डुबासँ शुचिकर दौ।। भगव सुता सिम्मुनाम करमहासँ चारूदत्त दौ।। शाण्डिल्य गोत्रे करमह सँ बीजी सुरेश्वर: ए सुतो भूषण ए सुतो अमोथ: ए सुतो गुणदेव: ए सुतौ देहरि: ए सुता महार्णव कराक म.प. उ नारायणा मुरारी खेते का महार्ण कार महामहोपाधय नारायण सुतोहिंेक।। अरूपुर वासी मुरारी सुतोश्रीधर ए सुतो वंशधर ए सुतौहरदन्त: ए ुसता वरदन्त चारूदन्त भवदन्ता: तत्राद पा भिन्न अन्त्यो जगतिसँ धारेश्वर दौ।। चारूदत्त सुता जय दत्त ब्रहमदस्त त्रिलाठी धुसौतसँ देवदत्त दौ।। ( 11/04) सुपर सुतो देवदस्त: खण्डबलासँ विश्वनाथ द्धौ।। कटाईसँ भीम द्धौ।। (1120/10) मिश्र (20/09) दिनू सुता रामकर (72/01) हलधर दामोदरा: (57/03) माण्डरसँ लगाई दौ।। (02/04) नन्दीश्वर सुतौ जीवेश्वर वागीश्वरौ तियुरी संगगेश्वर दौ पदमनाम ति वासी ए सुतौ लक्ष्मीपति: विस्फीसँ मधुकरदौ।। ए सुतो भवेश्वर: खनौरी सकराढ़ीसँ धर्माध्यपक्षक सर्वानन्द द्धौ।। ए सुता गंगेश्वर जगद्धर शिवशम्मा सुरगनसँ कौ दौ।। (49) गंगोर सँ साबे द्धौ।। गंगेश्वर सुतो गिरीश्वर नरसिंहो बेला सकसढ़ीसँ हरदन्त दौ पनिचोभसँ महादेव द्धो।। (58/07) बागेश्वर सुता दूबे नगाई हिराई का: कुजौलीस राजू दौ।। (04/05) गंगोलीसँ केशव द्धौ।। नगाई सुता श्रीदन्त चाको नरसिंह विश्वम्मरा: दिनारी सरिसबसँ चाको दौ।। दिनारी सरिसबसँ बीजी जनार्दन।। जनार्दन सुता माने देवे कौ।। माने सुतो प्राणधर: प्राणधर सुता चंड़ो जीवे दिने भिरवे विठका: दहुलसँ ब्रहमेश्वर दौ चांडो सुता (23/01) जगन्नाथ भवेश्वरा: मछेटा पालसँ महेश्वर दौ।। एवं जगन्नाथ मात्रका चक्र।। जगन्नाथ सुतो (155/09) हरिकेश लक्ष्मीपति विरपुर पनिचोभसँ शम्भू दौ (10/03) विश्वनाथ सुतो (41/05) राम: माण्डरसँ कापनि माधवदौ।। राम सुतो बाटूक: पबौलीसँ मेढू दौ।। (11/07) हलधर सुता राम मेढ़ का: डीह दरिहरा सँ हरिहर मेढ सुता दो पोखरौ टकबालसँ शुक्त भिरवारी दौ।। (03/09) शुक्ल भिखारी सुतो चिलकौर दरिहरासँ गंगा दौ भारुर सरौनीसँ हरिवंश द्धौ।। बाढ़ सुता रात (140/04) हारू महेश्वर बागू फलहारी (27/08) दिनकर मधुकरा:।। तत्र दयो पंच पत्सुना खौआलसँ राम दौ अन्त्यो गढ़ विस्फीसमस्तक होराई दौ।। माहब बरेबासँ रूद द्धौ।। सिद्धेश्वर सुतो राम चाको कौ पिहवालसँ रूद दौ अलयसँ रूद क्षै।।। राम सुतो गोपाल मुरारि: कोइयार गुणाकर दौ।। कोइयारसँ बीजी शूलपाणि ए सुतो सिधूक: ए सुता दोहन विश्वनाथ श्रीनाथा: सिंहाश्रमसँ विद्यापति दौ।। देल्हन सुतो जीवधर: ए सुतौ पृथ्वीधर ए सुतो गुणाकर: ए सुल हरिसिंहपुर निरवूतिसँ जीवेश्वर सुत गोंढि़ दौ।। बागू सुता खांत (40/10) मित्तू (26/05) गोविन्द (26/05) बाछ लाखू का (30/01) का तत्रादया पंच चान्दो वलियास सँ होरदौ गंगोर सँ विश्वनाथ: (50) ''17'' (07/08) शिवनाथ सुतो पदम नाथ: टकबाल सँ सोनमनि दौ चाउँटी टकबाल सँ बीजी रतनेश्वर: ए सुतो बलदेव: ए सुता रतनाकर प्रभाकर धर्मकर सूर्यकरा:।। रतनाकर सुतो सोनमनि: दोहइन विस्कीसँ अरविन्द दौ।। सोनमनि सुतौ नरसिहं हरिसंहो अलारि दिधोसँ श्रीधर दौ।। खांतू सुता 84/07) डालू महो सुप महिधर पॉंखू ब्रम्मू का: जजिवालसँ रतिकर दौ।। (08/03) (37/06) गौरीश्वर सुतौ आवस्थिक सिद्धेश्वर विन्ध्यैश्वरो माड़रसँ वाहन दौ।। मानसिक सिद्धेश्वर सुता गयन धनेशनाने कोचे इन्द्रेश: पकलियांस नयदेव दौ।। इन्द्र सुतो सीम भवेकौ वसुआलीसँ छीतर दौ।। सोम सुता (36/02) गोपाल नारू भगब (31/05) दामूका: मण्डारिसमसँ साठू दौ।। अपरौ रतिकर मांगुकौ पण्डौलीसँ लक्ष्मीकर दौ रतिकर सुतो मति हरि: करहिया पनिचोभसँ प्रितिकर दौ (08/05) प्रतिकर सुता थरियासँ आनू दौ।। थरियासँ बीजी त्रिलोचन: ए सुतौ होरेक: दिधोय मातृक:।। होरे सुता रविनाथ जगन्नाथ नगनाथ शक्रिनाथ लक्ष्मीनाथा बुजौलीसँ बर्द्धमान दौ।। रविनाथ सुता आनू गोपाल युद्धिकरा: फेनहथ गंगोली सँ होरे भागिनेय: आनू सुता आदू नादू बासू गांगू का: खूरी पानिचोभस रघुपति सुत रताई दौ करहिया वासी बुजौलीसँ त्रिपुरे द्धौणा शम्भू सुतो चिकूक: बुजौली सँ जौर दौ।। (04/024) शुभंकर सुतो गाढि पण्डोली सँ रूद्रभागिनेय: एसुतौ महिपति वानू कौ विनतीसँ पराक अच्युत दौ बानू सुतो मानेक: निसूरीसँ भवेश्वर दौ।। माने सुतो गोपाल: टकबाल सगुणाकर दौ शिलपाणि केथौनीवासी।। ए सुतो जगदेव वरदेवौ बुधरासँ मणिकंठ दौ।। वरदेव सुतो गुणाकर इबासँ शिवशर्म्म दौ गुणाकर सुता (51) जजि. भवदत्त दौ।। सकराढ़ीसँ लमशर्म्म द्धौ गोपाल सुतो श्री (22/08) श्री वर्द्धन (23/03) वशवर्द्धनौ दूबा सकराढ़ीसँ विमू दौ (15/06) बुधवानसँ हिरू द्धौ।। वंशवर्द्धन सुते (35/09) (72/05) जीवे जोरो गढ़माण्डरसँ बागे दौ 07/03 यमुगामसँ जीवेश्वर द्धौ।। (72/01) जोर सुतो (153/05) गोविन्द माण्डरसँ शिवपति दौ (02/051) महामहोपाध्याय (20/01) मलेशसुता सदु नहो पशुपति महो रघुपति (23/06) महो आइन्नि महो 31/08 रतिपय: पनिचोभ सँ जीवेश्वर दौ 10/02) देवशर्म्म सुतो ब्रहमशर्म्म एसुतो जयशर्म्मा सिंहाश्रमसँ विधापति दौ मन्दबालसँ विरदोहिब द्धो।। जयशर्म्म सुतो जगद्धा रतिघरौ करमहा सँ खेते दो।। कलिया सँ वीर द्धदा।। अपरौ रामकर: दरिहरासँ जनमेजय दौ।। जगद्धर सुतौ जीवेश्वर भवेश्वरौ सरिसब सँ गयपाणि सुत हल्लैश्वर दौ।। जीवेश्वर सुता (241/027) मधुकर नाने नाथै का: ब्रहपुरा दियोग्यसँ मुझे सुत मासौ दौ पनिचोभ सँ नददेव द्धौण अपरौ रातूक: कटाई भी दौ।। कटाईसँ बीड़ी वाचस्पति: ए सुतौ देवपाणि ऐलपाणि।। ऐलपाणि सुतौ मौरीक: मौरी सुतो वी: वीर सुता हरि पुरूषोत्तम श्री पतिय:।। श्रीपति सुतो गंगाधर।। गंगाधर सुतो कवि केशरी महामहोपाधयभीम: निखूतिसँ सुरेश्वर दौ।। भीम सुतो देवेश्वर निखूनिसँ रतिकर दौ।। सदु. महो पशुपति सुतो तत्र (26/04) कृष्णपति: अलयसँ महामहोपाध्याय रामेश्वर दौ दरितरासँ रति द्धा अपरा पशुपति महो गुणपति महा शिवपति महो (20/07) इन्द्रपनिय: सोदरपुरसँ मह महोपाठ विश्वनाथ दौ।। (15/09) महामहोपादपायसुरेश्वर सुतौ महामहोपासरब महामहोपा विश्वनाथौ रतिनाथौ खौआतंज दामोदर सुख दिवाकर (22/010) (23/09) (19/01) (52) दौ महवालसँ देहरि द्धौ।। महो शिवपति (48/05) सुतौ यग्यपति (32/07) अलयसॅ बुद्धिपर बुधंदौ।। (02/01) महोग्रहेश्वर सुता धर्माधिकरणिक महोमहोपाध्याय गढ़घर (42/06) रतनघर बुद्धिकर बुधे सुद्ध बेलउँचसँ धरादित्य दौ।। (10/03) भरेहासँ गणपति द्धौ (21/01) बुद्धिधर प्र. सुता रधु कान्ह गणपतिय: गंगोलीसँ शिरू दौ (01/04) अपरा शूलपाणि सुत शंखद कमलपाणि शारड़पाणिय: कुमर वासन्य: पालसँ जगपाणि दौ।। कमलपाणि सुतौ रामदेव लक्ष्मीकरौ।। लक्ष्मीकर सुतौ डालूक: वेलउँच सँ अभिनन्द द डाल सुतौ शिरूक: सकुरीसँ धृतिपाणि रतनपाणि जालयसँ दाश दौ।। धृतिपाणि सुता थूवनिसँ धाम दौ।। शिरू सुता महिधर हलधर रामधए: फनन्दह नरसिहं दौ (05/02) रतनेश्वर सुतौ भीम (20/06) गुणे कौ तमादयो जगतिसँ सिधूदौ अन्त्यो गंगोर सँ बराह द्धौ।। भीम सुतो नरसिहं किठोकौ महवालसँ देहरिदौ।। नरसिंह युवा श्रीकर कुसुमाकर मुधकरा: करमौली गंगोलीसँ पण्डित करण सुत साधुकर दौ सँ द्धौणा एक ठ. कृष्णानन्द मातृक चक्र अपए म. म. उपा ठ. रामभद्र सुता ठ. हरिदेव महामहो ठ. (105/04) रामदेव महामहोठ रतिदेव महामहो ठ. कृष्णदेव महामहो ठ लक्ष्मीदेवा हरिउमसँ मणि सुत जगन्नाथ दौ।। (16/01) मॉं सुतौ (25/07) गांगु हारू कौ सिसै सक महेश्वर दौ।। हारू युवा वासुदेव हलधर श्रीधर शिरू का (शिरकता) माण्डरसँ गुणे सुत गयन दौ (02/04) अपर गुणे सुतौ गयन शोरे कौ पोर वरौनी एक (14/09) (53) दामोदर दौ।। मिश्र (20/06) गयन सुतौ होरे बाछेकौ हरिसिंहपुर निखूतिसँ गोंढि़ सुत पहिधर दौ गंगुआलसँ गौरीपति द्धौणि।। (38/08) शिरू सुतो (55/07) नारायण शिवौ वलिया रूचि दौ।। चण्डेवश्वर सुतो हरानन्द: टक जीवे दौ।। हरानन्द सुतो (49/05) सुरानन्द रूचि टक शिरी दौ।। रूचि सुता धर्मादित्य महादिल (63/04) रतनदित्या: नयसँ तपन सुत यटाधर दौ विस्कीसँ रविशर्म्म द्धौ।। (48/01) शिव सुता महो मणि (56/02) पारखू (32/07) गयणा: खौथालसँ विभाकर दौ।। (14/05) अपरा साधुकर सुतो श्रीकर (31/06) शुचिकरौ करमहासँ नाने सुत रामशर्म्म दौ पकलिमासँ मासौ द्धौ।। (75/09) पारखू गयणा (32/07) खौथालसँ विभाकर दौ।। 14/05) अपरा साधुकर सुतो श्रीकर (31/06) शुचिकरौ करमहासँ नाने सुत रामशर्म्म दौ पकलियमासँ मसौ द्धौ।। (75/09) श्रीकर सुतो(31/04) सुतो रामकर विभाकरौ गंगोर सँ केशव सुत नोने दौ (07/01) अपरा विदू सुतो हरिनाथ: पालसँ हिंगू दौ।। हरिनाथ सुतो गौरीनाथ: सक पदमपाणि दौ।। गौरीनाथ सुतो शक्रिनाथ: भणुरिसमसँ लखाई दौ।। शक्रिना सुतो केश्वनाथ: जगतिसँ वर्द्धन दौ।। केशवनाथ सुता नाने (29/07) सुकर शुभकर (47/08) रतिकरा: पालीसँ दुर्गादित्य दौ (05/02) प्रितिकर सुतो पदमकर ए सुतौ दुर्गादित्य त्वदोरसँ रतनेश्वर दौ।। ए सुतौधदित्य (28/02) बलियासँ रामशर्मा दौ टक वत्सेवर द्धौण नाने सुता खौआल सँ शुचिकर सुत हेतू दज्ञै करमहसँ गौरी द्धौणा विभाकर (54/01) सुता (81/04) (20/09) मित्रकर (96/05) रविकरा: बहैराढ़ीसँ ढोंढ दौ (09/04) अपरा रविसुतो गांगुक: बेला सकराढ़ीसँ भोगीश्वर सुत चक्रेश्वर दौ मनपुरस धर द्धौ गांगू (228/06) गादि सुता धाम ढ़ोढें कौ चुकी बलियाससँ दिनमणि दौ सुतो रतनाकर टक शुचिक सुत केछदौ सकराढ़ीसँ नयपति द्धौ।। (39/02) ढोंढं सुतापिलरवा माण्डर विभूसुत मानुकर दौ।। (09/06) विभूसुतो भानुकर गंगोलीसँ जीवेश्वर दौ मानुकर सुतो (53/06) बुद्धिका शुभंकरौ सकौनसँ गोपालसुत गौरी पति दौ।। हरिहरसुतो गोपाल एसुतो (24/09) नन्दीय गौरीपति सरिसबसँ धरणीधर दौ।। गौरीपति सुता दियोयसँ जादू द्धौ।। एवं मणि मातृक चक्रं।। मिश्र मणि सुता जानू मुकुन्द जगन्नाथ उँमापतिय: सोदरपुरसँ श्रीधर दं (54) ''19'' 18/010 रतिनाथ (24/04) सुतोडालू बाटू कौ दरिहरासँ विरेवर सुत मूनी दौ।। (31/07) वाटू सुतौ (128/04) हलधर श्री धरौ माण्डरसँ सुधाकर सुत होरे दो (09/03) सुधाकर सुता होरे (95/06) (95/06) शोर (48/07) शिरूका: करमहासँ गंगेश्वर द्धौ।। (02/08) खौआलसँ आगू द्धौ।। होरे सुतो रतनपाणि देवपाणि नरउब्सँ खातू दौ।। (08/02) डालू खांतू (30/04) रतिकरौ सक. जीवेश्वर दौ प्र. जाई द्धौण खांत सुतो सुपन शुचिकरौ (49/08) (27/06) माण्डरसँ बागेदौ।। 07/03) यमुगामसँ जीवेश्वर द्धौ।। श्रीधर सुतो वेणी (59/09) अन्दकौ बुध वानसँ शिहदौ।। सदुपाध्याय मानूकर सुता महेश्वर (49/01) गौरीश्वर (36/06) विश्वेवरा: दरिहरासॅ प्रतिशर्मा दौ।। (11/07) यमुगमसँ जीवेश्वर द्धौ।। (26/07) महेश्वर सुतो शिरू (25/06) पोखूको माण्डरसँ अमतू सुत रविदन्त द (02/05) सदुपाध्याय अमन्त सुता रविदन्त (91/01) वासुदेव हरिदन्ता: खण्डबसासें देही दौ।। रविदन्त सुता टकबालसँ बाटु दौ।। (09/04) नरवाससँ यशु दौ हित्र (27/09) शिरू सुता (35/09) लाखू (56/05) सीथू ( 30/04) माने का: बेलउँचसँ जीवादित्य सुत जोर दौ (10/03) महो जिवादित्य सुता जोर मदन (3/08) दिनकर हरिकरा: बुधदालसँ शुभकरद विस्कीसँ कीर्तिघर द्धौ।। जोर सुतो कोने (252/10) श्रीपति पवौलीसँ देवधर दौ (14/04) महिधर सुतो देवधर: सफ नयपति द्धौ देवधर सुता वलियास सँ भिखे सुत हिरम दो।। (11/03) जालसँ द्धौ।। एवं जगन्नाथ जागे मातृक चक्र।। (61/02( जगन्नाथ सुतो रामदेव कामदेवौ सोदरपुरसँ बागे सुत सुये दौ (15/04) विश्वेश्वर सुतो यहाधर: खौआल भूले दौ। (03/05) (84/05) देवादित्य सुतो पाखूक: ए सुतो भूलेक: खण्डबलासँ शिवथ दौ।। भूले सुता पइम (21/01) राम केउटू का कुनौलीसँ राजू दौ।। गंगोसँ केशव दैहिक यहाधर सुतो बागेक: धोसेतसँ रतिकान्त सुत कीर्तिकर दौ।। धोसोतसँ बीजी महाकहोपाधय वसुदेव: ए सुतौदिवाकर ए सुतो खेइक: ए सुतो हे ए सुतौ (23/08) रूचिकर प्रज्ञा करौ।। प्रजाकर सुतौ (29/04) विस्फीसँ धारेश्वर ।। ए सुतौ रतिकान्त सुपनौ माण्डसँ सुत हरदन्त दौ माने द्धौ (55) रतिकान्त सुतो (25/07) गुणाकर कीर्तिकरौ खौआलसँ शुचिकर दौ।। (03/06) (26/04) शुचिकर सुतौ नाने यवे कौ करमहार्स नितिकर दौ।। की कीर्तिकर सुतौ इबे चौको सुपरानी गंगोलीसँ होरे दौ(05/07) धीर सुतो होरेक: बलि अशोमनि दौ।। होरे सुता पनिचोभसँ जीवेश्वर दौ।। (18/05) ब्रहमपुरा दिद्योयसँ मासौ (76/01) बाग सुतो सुपेक: पानि ग्रहश्वेर (70/07) महेश्वर सुता हरिश्वर ग्रहेश्वर शिवा माण्डरसँ वागेश्वर सुत रूचिकर दौ पचटी जजिबालसँ भावक (66/02) ग्रहेश्वर सुता (44/06) अन्टू पुरखू रति मण्डना: सरिसबसँ गणेश्वर दौ।। (14/08) दामू सुता रामेश्वर माने (29/05) सोनेका: वरूआलीसँ सोसे दौ।। (27/03) माने सुतो ग्रहेश्वर (38/07) (41/06) गणेश ब्रहमपुरा ढरिहरासँ भवशर्म्म द्धौ।। गणेश्वर सुता विरेश्वर यरेश्वर बटेश्वरा (98/08) खनाम फनन्दह सँ मुरारि दौ (05/03) इन्द्रपति सुतौ वाचस्यति दुखाडि़ प्रसिद्ध नामा तरौनी करमहा सँ बाराह द्धौ वाराह सुतो रवि देवे कौ खण्डबलासँ ज्ञानपति दौ बलियासँ बन्द द्धौ।। (29/08) दुखडिसुत (223/06) (73/01) शंकर मधुकर रतिकर मतिकररा: पाली सँ रविनाथ दौ।। (41/03) (75/01) मुरारी सुतो रविनाथ: नरउनसँ कोने दौ। (14/05) सकराढ़ी सँ जीवेश्वर दोत्रि दौ रविनाथ सुता खैआलसँ रविनाथ दौ (16/06) जातू सुतो बांतर ए सुतौ विश्वनाथ सरिसब पिथाई द्धौ।। विश्वनाथ सुतो माधवनाथ (21/04) रघुनाथों खण्डबलासँ भवेश्वर द्धौ।। माधव (24/02) माधव सुतौ रविनाथ: सुपरानी गंगोलीसँ धीर सुत पौखू दौ जालयसँ होरे द्धौ। रविनाथ सुतौ (21/02) (56) ''20'' शंकरनाथ पाली सँ युश दौ (05/05) म बाछे सुता (21/05) रवि यशु वासूका एकमा खण्डबना सँ हरिनाथ दौ।। यशु सुतो (36/08) सुरथ: सुरगनसँ विरेश्वर दौ नरउनसँ गणपति द्धौ रतिकर सुता शिरू मुरारी कृष्णा: बेलउँचसँ नोने दौ (10/04) मित्रादित्य सुता (21/07) मित्रादित्य सुता नारू (71/05) गोपी नोने चक्रपाणिय: (51/03) चक्रपाणिय: अहपुरकरमहासँ शुंभशर सुतमधुकरदौ लक्ष्मीकर सुत शमंकर सुतो मधुकर: नी मीमदौ।। मधुकर सुतो आदिय: वलियास स देवानन्द सुत यशानन्द दौ अलयसँ बागेद्धौ नोने सुता श्री कुमार (11/04) (70/06) बसावन विलाश हिरइ (24/10) बेगम भानुकरा वादि पवौलीसँ देवदत्त दौ।। जगद्धर सुतो दिवाकर ए सुते सुपन: अलयसं भव दौ।। सुपन सुता (34/06) श्रीस्त लक्ष्मीदत्त हेवदला: एक रासं धाम सुत गणपति दौ स क हरिहर द्धौ।। देवदन्त सुतो (21/01) सुतो (40/09) गोगेक: फनन्द विश्वनाथ दौ (18/06) गुणे सुतो मोरीक: खण्डबलासँ धीर दौ।। मोरि सुता विश्वनाथ हरिनाथ (76/07) शिवनाथा माण्डरसँ गयन दौ (19/06) अपरागयन सुता (51/04) वीर सुरसर (22/02) गिरीश्वरा: (27/05) तिसउँतसँ गयन सुत नरसिहं दौ दरिहरासँ मुनि द्धौ।। विश्वनाथ सुतोबुधिनाथ (84/06) एकमा खण्डबालासँ मतिश्वर सुत शिव दौ 11/01) थरियासँ रविनाथ द्धौ।। एवं 6 हरिदेवादि मातृकचक्र।। अपरा म.म उ बामभद्र सुता म. म. उ क. मधुसूदन म.म. ठ. भवदेव म.म. 3 ठ. कामदेवा (77/07) खौआलसँ श्रीधर दौत्रिय दौ (19/08) मित्रकर (34/02) सुतो श्रीधर: कटमाहरिअमसँ दिन दौ (16/07) अपरा दिनू सुतो अमरूकमलू कौ ब्रहमपुरा जजिबालसँ कुश दौ (12/07) (25/05) नारू सुतो कुश: खौआलसँ विश्वनाथ दौ।। (20/011) खण्डबलासँ भवेश्वर द्धौ।। कुश सुतो देहरि: कनसम मण्डारसँ सुरपति द्धौ 18/02) अपरा म. म. उ पा बटेश सुतो (22/04) पक्षधर सुरपति खण्डबलासँ लोहर दौ सुरपतिसु (25/01) सुरपतिसु (28/21) (33/02) रतनेश्वर महेश्वरा: एकमा खण्डबलासँ राजू दौ(11/02) रात सुतो राजूक: दहनोसँ धएई दौ।। (44/08) (22/09) राजू सुतो शान्तीक: सकराढ़ीसँ श्रीधर सुत शिरू दौ (57) एवं श्रीधर मात्रिक चंन्द्र।। श्रीधर सुतौ ज्योतिविद (79/04) डीडर: महिया सोदरपुर सँ महिपति दौ।। 15/09 जीवेश्वर सुतौ गणपति (24/04) हेरदन्तो बलिमास सँ रतिकर दौ।। गणपति सुते वर्दन कान्हो विस्फी सँ लड़ावन दौ।। 49/01) वर्द्धन सुतौ हरिनाथ लोकनाथो (57/05) हरिनाथ लोकनाथौ (57/05) माण्डरसँ छीतू सुत भवन्त दौ (22/07) पॉंखू सुत छीतू सुतौ हरदन्त भवदन्तो अलयसँ राम: (26/07) भवदत्त सुतौ केशव पबौलि सँ गोढि़ दौ।। (23/10) हरिनाथ सुतौ नोनेक: दरिहरासँ राम द्धौ (15/09) वत्सेश्वर सुतौ राम: सकुरी सँ देवपति दौ।। रामसुता पनिचोभसँ समए़ सुत गोविनद दौ 89/01) सुत सुपनदाशे (81/03) पश्ुपतिय: पालीसँ विशोदौ (41/09) पुरूषौत्तम सुतौ आशा रामौ।। राम सुतोत्रिभुवन: ए सुतौ आदिदेव: ए सुतौ राजूक: ए सुतौ नारायण: ए सुतौ पएउँक: सकराढ़ीसँ ब्रहमेश्वर दौ।। पराउँ सता देवे (23/01) नादू हचलूका (31/01) नाउनसँ दिवाकर दौ।। नाउ सुनौ वागूक सरिवसँ चण्डेश्वर पाली सँ महेश्वर द्धौ।। बागू सुतौ रूद्र विशौ कौ माण्डरसँ सुरपति द्धै।। (20/01) खमुबलासँ राजू द्धौ।। विशो सुता रति (63/04) गुणे जाने (82/02) महाई साउलेका सोदापुरसँ भद्रेश्वर दौ।। 15/04) (30/02) ग्रहेश्वर सुता (57/01) नन्दीश्वर भद्रेश्वर राम (39/09) कान्हु का: नाउन सँ डालू दौ (10/02) सक एढीसँ जीवेश्वर द्धौ।। भद्रेश्वर सुतौ गोनन (33/010) सोहनो गाउल करमरासँ गणवर्क जगद्धासुत गयन सुतौ (300/11) गोरीपति सुरगनसँ विरेश्वर दौ।। ए सुतौ बादूक: सुरगन गौरीदों।। बाइ सुता (39/010) रतिपति लक्ष्मीपति महिपति गणपतिय: तल्हपुरह वीर दौ।। (21/01) वीर सुतौ (24/09) गोविन्द: वभनियाम सँ वीर दौ दरिवाभन द्धौ गणपति युवा डालू सुपन रूपना: (29/06) सबुरी गंगोलीसँ शोरे सुत राम दौ माण्डकर कृत्रिम एवं पशुपति मात्रिक चक्र।। पशुपति सुतौ चिकू क: खौआल सँ कमलू दौ।। 19/09) राम सुता (28/09) मति गहराई का: (31/05) फनन्नदसँ गोरी दो (20/06) माण्डरसँ गाटान द्धौ।। (58/10) मतिसु अमरू कमलू वेद लाखू का: (25/05) (84/01) (58) ''21'' बाढ़ अलयसँ बुद्धिधर बुधे देने (8/02) बुधे सुता डीह दरि नौरी पौत्र छीतू सुत गौरी दौ छीतर सुतौ गौरीक: सोदापुरसँ विश्वनाथ दौ।। गौरी सुतौ राजू गिरीक: सकुरी सँ यशु सुत लोचन सुत नारूदौ।। कमलू सुतौ परान रूपनौ पालीसँ महाई दौ (14/03) केशव सुतों सदुपात्यया गोढंक नर कोने दौ पलिर्ण भरेन द्धौण सदुपध्याय गोढ़े युवा (32/05) कान्ह लाखू (39/09) महाई का खौआल सँ रघुनाथ दौ (20/11) रघुनाथ सुता (33/05) धारू सोंसे विदूका: गंगोली सँ केशव दौ महाई सुतौ जीवे चान्दो खोआल सँ गोविन्द दों (03/01) लक्ष्मीघर सुतौ कवि किठो कृष्णपति कावी कृष्णपति सुतौ भगव: सरिण्इन्द्र दौ।। भगव सुतौ (32/09) नारायण गोविन्दो पाली सँ रवि दौ।। (20/01) रवि सुतो (47/08) सुमो हेलूक बलियासँसूर्यत दौ (10/09) मछेटासँ गणेश्वर द्दौ।। गोविन्द सुतों (52/09) रवि होरेकौ अलयसँ श्री कर दौ।। (15/03) (39/09) नारायण सुतों श्रीकर शुभकरौ (39/07) सोदाभोगीश्वर दौ (15/04) सकराढीसं निमूहों श्रीकर सुता बेलउँलसँ मित्रादित्य दौ (1120/02) अपरा मित्रादित्य सुतो (101/105) वासुदेव केशवी (34/03) सकराढ़ीसँ राजा दौ।। एवम मम्युसूदन मात्रिचक्र।। ठ. हरिदेव सुतो ठ. रघुपति: नहुआर करमहा सं केशव दौ।। (02/08) नरसिंह सुतो रतिकान्त: एकमा बलियाससँ शिवादित्य दौ (10/05) साधुकर सुतौ (28/02) जीवेश्वर: ए सुतौ शिवादित्य: पालीसँ दिवाकरदौ।। (33/08) शिवादित्य सुता टकबालसँ लाखू दौ।। (तिकान्तैं सुतौ श्री कान्त: परिहरासँ रविकर दौ।। (16/01) रविकर सुतौ (32/01) बुद्धिकर गंगोर सँ नोने दो।। (19/07) खौआलसँ हेलू दौ।। (128/04) श्री कान्त सुता (75/05) मताई कृष्णपति महो ( 72/08) हरपति महो (66/03) उँमापति महो जानपतिय: खौआल सँ गोविन्द दौ (59) (21/05) अपरा गोविन्द सुतौ (32/02) हरि (62/07) गुणे कौ खण्डबलासँ नरहरि दौ।। (06/09) दिवाकर सुतौ साढूक:।। साढ़ सुतौ गोपाल: गोपाल सुतौ नरहरि श्रीहरि दरिहएसँ शिवादित्य दौ।। नरहरि सुतो (69/04) गंगाहरि: नाउनसँ डालू सुत चन्द्रकर दौ माण्डरसँ विशो द्धौ।। (87/04) कृष्णपति सुना रतिपति श्रीपति (89/04) रघुपतिय: जजिवालसँ सोम दौ।। (12/07) गोविन्द सुतौ दामू सुयनो ढरिहरासँ माइवौ ।। (25/02) दामू दामोदर सुतोसोम: हरिअनसँ हारू दौ माण्डरसँ गयन द्धौ।। सोम सुता (84/09) रूद रवि रामा: सरहद माण्डरसँ धनपति दौ (20/01) (39/01) पक्षधर सुता धनपति (33/08) विद्युपति शुभपतिय: पनिचोभसँ मधुकर सुत हरिकर दौ मधुकर सुत हरिकर सुतों श्रीकर : गंगोलीसँ बॉंखू दो।। धनपति सुतौ विष्णुपति (62/05) हरिपति निसूरी सँ ग्रहेश्वर सुत सीधू दौ जमुनी जामवालसँ गोपाल द्धौ एवं रतिपति मात्रिक चक्र।। रतिपति सुतौ (108/01) मुरारीकेश बो माण्डरसँ शुचि दे (09/05) शान्तिकरणीक (21/02) पोखू सुत रतिकर सुतौ डालूक: केउँट राम सँ रूद दौ।। डालू सुता (30/09) (47/04) गदाइ हिराई का: सोदापुरसँ गणपति दौ (21।01) विस्फीसँ लड़वन द्धौ।। गढ़ाई सुता (38/04) दिनकर नन्दन विदूका: कुजौलीसँ श्री वर्द्धन दौ।। 18/01) श्री वर्द्धन सुतौ हरिहर: खौआलसँ विश्वनाथदौ विढ़ सुतौं शुचिकर (70/04) रघुनाथौ खण्डबलासँ सान्ही द्धौ।। (20/01) सान्ही सुतौ (40/09) उद्धव नोने प्रश्नारायगों सक शिव सुत देने दौ क्षरिसानूद्धौण शुचिकार विश्वनाथ भवनाथो बभनियामसँ हीरे दौ (06/06) गणिपति सुत जयतिसुत जयदित्यसुतौ साधुकर: ए सुतौ रतनाकर छादनसँ तत्व चिनतामणि कारक (60) ''22'' जगदगुरू गंगेश दौ।। रतनाकर सुतौ ग्रहेश्वर: खण्डबलासँ ठ. सुपन दौ।। रतनाकर सुतौग्रहेश्वर: खण्डबलासँ ठ. सुपन दौ।। ग्रहेश्वर सुतौ होरे कौ सकराढ़ीसँ भिक्रिसुत शिरूदौ गंगुआल सँ शिवाई औत्रिय (134/26) होरि सुतौ मेधवती: कटौना माण्डर सँ जगति द्धौ(20/07) मिस सुरसर सुता ग्रहेश्वर हरि (39/06) (41/05) ऋषि यति कीरतू (35/08) मतिश्वरा: कुजौलीसँ राजू दौ।। (41/05) गंगोलीसँ पण्डित केशव द्धौ।। 49/09) यति युवा करमाहा सँ बुद्धिकर सुत लान्हि दौ दरिहरासँ जगन्नाथ द्धौ केशव मात्रिक चक्र।। केशव सुता रतौली दरिहरार यशु सुत वाचस्यति दौ (15/09) सिद्धेश्वर सुतर (30/06) सुपन रूपन ईश्वरा: करमहा सँ रघु दौ (26/03) रूपन सुतौ भोगेश्वर भोगे गिरीश्वर (25/06) गिरीकौ पालीसँ रामदत्त दौ (14/102) पबौलीसँ बागे द्धौ।। भोगे सुता गोशे (30/08) शिव (37/08) शिव ओहरि मरसुरखा: (55/06) हारी सोदापुरसँ बराह दौ (51/02) अपरा राजू सुत मोगेश्वर (सुतौ बारात: कन्जौलीसँ धीरकंठ दौ। बाराह सुतौ (28/08) रति हरि वलियाससँ इबे सुत श्रीधर दौ पालीस देवशर्मा द्धौ मन सुख सुत पौखू यशु सुधी कान्हा (65/04) उजान सुधवालनसँ देवे दौ (11/03) गुणीश्वर सुतो (3/02) हरि देवे कौ एकहारासँ थानू दौ (13/02) रूचिकर सुतौ लक्ष्मीकर (28/05) आनन्दकरै करमाहसँ महिपति दौ।। आनन्दकर सुतौ धानूक: गंगोलीसँ रामकरदौ।। यानू (26/06) सुता शीत (25/10) मिते दिनेका: (32/05) दरिहरसूं प्रति शर्म्म दौ (11/07) यमुगामसँ जीवेश्वर द्धौ।। देवे सुतौ सोम (38/04) नोने कौ ओगही बेलउँचसँ गयादित्य दौ (10/03) महो गयादित्य सुता रघुपति एतिपति कृष्णपतिय: (29/08) भरेहासँ गणपति सुत केशव दौ सरगनसँ देवनाय एवम पशु मात्रिक चक्र।। पशु सुतौ वाचस्यति लाखू कौ सोदरपुरसँ गदाधरदौ (18/010) म. प उ पा. विश्वनाथ सुता म.प. उ पा. रविनाथ म. प. उपा. (27/07) रघुनाथ म. प. लक्ष्मीनाथा नरउनसँ प्रतिशर्म्मदौ कर नोने द्धौ।। म. म. उ पा. रविनाथ सुता म. प. (43/01) जीवनाथ म. उ पाठ भवनाथ परनामक अयाची दबे महामहो देवनाथा: भाण्डर (61) म. म. उ. बटेश दौ। (8/02) पनिचोभसँ जीवेश्वर द्धौ।। म. म. उ पा (39/07) भवनाथा परनामक अयाची दूबे सुता म.म.पा. शंकर महो (31/03) महादेव महोमासे महोदाशिका: खौआलसँ रघुपति दै (07/09) धुपरि सुतो (35/07) दूबे शुभ (30/07) कौ पनि वाट दौ (17/06) खौआल सँ राम द्धौ।। म. म. उ पा. (89/05) शंकर सुता महो गढाया यहॉं (37/09) गोविन्द महो हरखू का कुजौली सँ सुपन दौ।। 19/01।। वंशवर्द्धन सुता यशोधर (36/01) सुपन (43/03) लक्ष्मीकरा: (35/01) जालय (जल्ल्दी) सँ म. प. उ. रामेश्वर दौ।। 12/10 सकराढ़ीसँ धृतिकर द्धौण। सुपन (30/05) सुतानाथू पांथू सांथू का उपतिसँ कानह दौ (1106/02) भानू सुता होरे कान्ह गोपाला: पपुलियासँ बादे ढौ।। कान्ह सुता गंगोली सँ डांस देव सुत भवई दौ नाउन सँ चक्रेश्वर द्धौ महामहो गदाधर सुता उँमापति धनपति भवन (51/01) भूवन धनानन्द (166/07) भवदान्नदा: विजनपुर परिहरासँ नरपति दौ।। (1106) महो धृतिपतिसुतौ (25/09) भवशर्म्मा गोविन्द शर्म्मर्णो निसउँनसँ नोने दौ भवशर्म्म (25/09) सुतौ वर्द्धमान यटाधरौ खण्डबला सँ सोम दौ।। बर्द्धमान सुतौ खांतू विभूकौ फनन्दह सँ नरसिहं दौ (18/07) गंगोली सँ साधुकर दैहिकमदों खांतसुता धनपति (47/06) कुलपति नरपति (76/05) चन्द्रपतिय: कुजौली सँ सोमकर दौ (04/105) सोमकर सुतो मांगुक: सरिसबसँ श्रीकर दौ।। नरपति सुतो मुथे (119/110) जनदिना घुसौत स हरि दौ।। (19/110) रू चिकर सूतो शिवाइ सुतौ दामोदर: माण्डर से हरदन्त दौ (19/011) केउँटामसँ माने द्धौ दामोदर सुतौ हरिडालूक: करमहासँ मधुकर दौ व लियाससँ जसानन्द द्दोण हरिसुता सक लाख सुत श्री कर दौ भिगुआसँ माधव वछौ एवं वाया पति मात्रिक।। वाचस्यति सुता महियासोदरपुरसँ परान दौ।। (21/02) हरिनाथ सुतो रूचिनाथ कीर्तिनाथो (31/05) कुं वंशवर्द्धन दौ।। (23/03) जलायसँ रामेश्वर द्धौ।। रूचिनाथ सुतोगोढेक: पालसँ गांगु दौ (21/05) देवे सतो माधव: सक: सइदौ माधवसुतौ (62) गांगूक: माण्डरसँ नन्दीश्वर सुत वागीश्वर दौ खण्डवलासँ गोढि़ द्धौ।।गंगोरसँ नोने द्धौ यमरान चक्र।। परान सुतौ (96/09) द सुता सकराढ़ी सँ जाई दौ (041/11) कुजौली सँ राजू द्धौ। एवं गोढि़मात्रिक चक्र।। (20/05) गोढि़ सुतौ परान ऋषिकेशों टकबाल सँ रामकर सुत बाछे दौ ।। न खोध टकबाल अ बीजी शुचिकर:।। शुचिकर सुतौ थेद्य:।। रोध सुतौ प्रितिकर दामोदरो (64/08) कमग्राम सकराढ़ीसँ परपति दौ।। प्रितिकर सुतौ रतिकर लासू कौ खौआनसँ महामहो देवादित्य सुत जीवे दौ सुरगनसँ गंगाधर द्धौ।। रतिकर (46/07) रतिकर सुता रामकर रविकर ढोंढका सकगढ़ीसँ भीम दौ (14/07) सटुज नादू सुनौ भीम (64/06) सुरेश्वरो नरउन सँ गंगादाश दौ। भीम सुतो गंगेश्वर रतीवश्रौ अलयसँ म. म. उपा. रामेश्वर दौ (02/01) दरिहरासँ एति द्धौ।। रामकर सुतौ बाछेक: नरउनसँ श्रीकर दौ।। (08/07) (43/07) सुतो दूमे पर उकौ माण्डरसँ महो रघुपति दौ (18/03) मसे रघुपति सुता (57/09) (26/07) जाने पति विभापति नजापतिय: सोदापुर सँ महामहो पाच्याय सरबए सुत खानू दौ खॉंआलसँ कृष्णानि द्धौ एवं बाछे मात्रिक चक्र।। बादे सुता दरिहरा सँ सोमे सुत सौरि दौ।। (11/06) महामहो कीर्तिशर्म्म सुतौ केशव शिवौ बहेराढ़ी सँ लड़ावन सुत सुपनदौ पबौली रूदद्धौणा।। केशव सुता बागे साने कोने (30/02) ऋषय: पनिचोभ सँ सोंस दौ (08/51) सफराढीरू जीवेश्वर दौतित्य ढौ।। सोने सुता सिरू (35/02) कारू चन्द्र (50/06) मोरि सौत्री का: सोदरपुरसँ रामनाथ दौ।। (18/10) (30/07) रामनाथ सुता बलिदगन सँ भिखि सुत्र हिरमणि हो जल्लकीसँ भवेश द्धौण सोरि सुतो (32/10) दाशे दिने कौ (81/09) पालीसँ रतनपाणि दौ (05/04) नरसिहं सुत श्रीधर गुणीश्वर: (81/09) एकहरासँ रूचिककर दौ (59/01) गोयाल सुतौ (31/06) रतनपाणि भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली मैथिलीक मानक लेखन-शैली
1. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली आऽ 2.मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली 1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली
मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन
१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओलोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोकबेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोटसन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽकऽ पवर्गधरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽकऽ ज्ञधरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।
२.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आनठाम खालि ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्दसभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।
३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहिसभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।
४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएवला शब्दसभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, याबत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।
५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्दसभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारूसहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।
६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।
७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।
८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क)क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमेसँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख)पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग)स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ)वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ)क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च)क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।
९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटिकऽ दोसरठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु(माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्दसभमे ई नियम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।
१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्दसभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषासम्बन्धी नियमअनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरणसम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्षसभकेँ समेटिकऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनिकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽवला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषीपर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़िरहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषतासभ कुण्ठित नहि होइक, ताहूदिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। हमसभ हुनक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ चलबाक प्रयास कएलहुँ अछि। पोथीक वर्णविन्यास कक्षा ९ क पोथीसँ किछु मात्रामे भिन्न अछि। निरन्तर अध्ययन, अनुसन्धान आ विश्लेषणक कारणे ई सुधारात्मक भिन्नता आएल अछि। भविष्यमे आनहु पोथीकेँ परिमार्जित करैत मैथिली पाठ्यपुस्तकक वर्णविन्यासमे पूर्णरूपेण एकरूपता अनबाक हमरासभक प्रयत्न रहत।
कक्षा १० मैथिली लेखन तथा परिमार्जन महेन्द्र मलंगिया/ धीरेन्द्र प्रेमर्षि संयोजन- गणेशप्रसाद भट्टराई प्रकाशक शिक्षा तथा खेलकूद मन्त्रालय, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र,सानोठिमी, भक्तपुर सर्वाधिकार पाठ्यक्रम विकास केन्द्र एवं जनक शिक्षा सामग्री केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुर। पहिल संस्करण २०५८ बैशाख (२००२ ई.) योगदान: शिवप्रसाद सत्याल, जगन्नाथ अवा, गोरखबहादुर सिंह, गणेशप्रसाद भट्टराई, डा. रामावतार यादव, डा. राजेन्द्र विमल, डा. रामदयाल राकेश, धर्मेन्द्र विह्वल, रूपा धीरू, नीरज कर्ण, रमेश रञ्जन भाषा सम्पादन- नीरज कर्ण, रूपा झा 2. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर,तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन,अखनि,एखेन,अखनी ठिमा,ठिना,ठमा जेकर, तेकर तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय:भ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत:जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।
6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:-हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
20. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
21.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
आब 1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आऽ 2. मैथिली अकादमी, पटनाक मानक शैलीक अध्ययनक उपरान्त निम्न बिन्दु सभपर मनन कए निर्णय करू। ग्राह्य / अग्राह्य 1.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/ होएबाक 2. आ’/आऽ आ 3. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए 4. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल 5. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह 6. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’ 7. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करै बला/क’र’ बला 8. बला वला 9. आङ्ल आंग्ल 10. प्रायः प्रायह 11. दुःख दुख 12. चलि गेल चल गेल/चैल गेल 13. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन 14. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह 15. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि 16. चलैत/दैत चलति/दैति 17. एखनो अखनो 18. बढ़न्हि बढन्हि 19. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ 20. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ 21. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ 22. जे जे’/जेऽ 23. ना-नुकुर ना-नुकर 24. केलन्हि/कएलन्हि/कयलन्हि 25. तखन तँ तखनतँ 26. जा’ रहल/जाय रहल/जाए रहल 27. निकलय/निकलए लागल बहराय/बहराए लागल निकल’/बहरै लागल 28. ओतय/जतय जत’/ओत’/जतए/ओतए 29. की फूड़ल जे कि फूड़ल जे 30. जे जे’/जेऽ 31. कूदि/यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद 32. इहो/ओहो 33. हँसए/हँसय हँस’ 34. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/नौ वा दस 35. सासु-ससुर सास-ससुर 36. छह/सात छ/छः/सात 37. की की’/कीऽ(दीर्घीकारान्तमे वर्जित) 38. जबाब जवाब 39. करएताह/करयताह करेताह 40. दलान दिशि दलान दिश 41. गेलाह गएलाह/गयलाह 42. किछु आर किछु और 43. जाइत छल जाति छल/जैत छल 44. पहुँचि/भेटि जाइत छल पहुँच/भेट जाइत छल 45. जबान(युवा)/जवान(फौजी) 46. लय/लए क’/कऽ 47. ल’/लऽ कय/कए 48. एखन/अखने अखन/एखने 49. अहींकेँ अहीँकेँ 50. गहींर गहीँर 51. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए 52. जेकाँ जेँकाँ/जकाँ 53. तहिना तेहिना 54. एकर अकर 55. बहिनउ बहनोइ 56. बहिन बहिनि 57. बहिनि-बहिनोइ बहिन-बहनउ 58. नहि/नै 59. करबा’/करबाय/करबाए 60. त’/त ऽ तय/तए 61. भाय भै 62. भाँय 63. यावत जावत 64. माय मै 65. देन्हि/दएन्हि/दयन्हि दन्हि/दैन्हि 66. द’/द ऽ/दए 67. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) 68. तका’ कए तकाय तकाए 69. पैरे (on foot) पएरे 70. ताहुमे ताहूमे 71. पुत्रीक 72. बजा कय/ कए 73. बननाय 74. कोला 75. दिनुका दिनका 76. ततहिसँ 77. गरबओलन्हि गरबेलन्हि 78. बालु बालू 79. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) 80. जे जे’ 81. से/ के से’/के’ 82. एखुनका अखनुका 83. भुमिहार भूमिहार 84. सुगर सूगर 85. झठहाक झटहाक 86. छूबि 87. करइयो/ओ करैयो 88. पुबारि पुबाइ 89. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि 90. पएरे-पएरे पैरे-पैरे 91. खेलएबाक खेलेबाक 92. खेलाएबाक 93. लगा’ 94. होए- हो 95. बुझल बूझल 96. बूझल (संबोधन अर्थमे) 97. यैह यएह 98. तातिल 99. अयनाय- अयनाइ 100. निन्न- निन्द 101. बिनु बिन 102. जाए जाइ 103. जाइ(in different sense)-last word of sentence 104. छत पर आबि जाइ 105. ने 106. खेलाए (play) –खेलाइ 107. शिकाइत- शिकायत 108. ढप- ढ़प 109. पढ़- पढ 110. कनिए/ कनिये कनिञे 111. राकस- राकश 112. होए/ होय होइ 113. अउरदा- औरदा 114. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) 115. बुझएलन्हि/ बुझयलन्हि (understood himself) 116. चलि- चल 117. खधाइ- खधाय 118. मोन पाड़लखिन्ह मोन पारलखिन्ह 119. कैक- कएक- कइएक 120. लग ल’ग 121. जरेनाइ 122. जरओनाइ- जरएनाइ/जरयनाइ 123. होइत 124. गड़बेलन्हि/ गड़बओलन्हि 125. चिखैत- (to test)चिखइत 126. करइयो(willing to do) करैयो 127. जेकरा- जकरा 128. तकरा- तेकरा 129. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे 130. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/करबेलहुँ 131. हारिक (उच्चारण हाइरक) 132. ओजन वजन 133. आधे भाग/ आध-भागे 134. पिचा’/ पिचाय/पिचाए 135. नञ/ ने 136. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय 137. तखन ने (नञ) कहैत अछि। 138. कतेक गोटे/ कताक गोटे 139. कमाइ- धमाइ कमाई- धमाई 140. लग ल’ग 141. खेलाइ (for playing) 142. छथिन्ह छथिन 143. होइत होइ 144. क्यो कियो 145. केश (hair) 146. केस (court-case) 147. बननाइ/ बननाय/ बननाए 148. जरेनाइ 149. कुरसी कुर्सी 150. चरचा चर्चा 151. कर्म करम 152. डुबाबय/ डुमाबय 153. एखुनका/ अखुनका 154. लय (वाक्यक अतिम शब्द)- ल’ 155. कएलक केलक 156. गरमी गर्मी 157. बरदी वर्दी 158. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ 159. एनाइ-गेनाइ 160. तेनाने घेरलन्हि 161. नञ 162. डरो ड’रो 163. कतहु- कहीं 164. उमरिगर- उमरगर 165. भरिगर 166. धोल/धोअल धोएल 167. गप/गप्प 168. के के’ 169. दरबज्जा/ दरबजा 170. ठाम 171. धरि तक 172. घूरि लौटि 173. थोरबेक 174. बड्ड 175. तोँ/ तूँ 176. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) 177. तोँही/तोँहि 178. करबाइए करबाइये 179. एकेटा 180. करितथि करतथि 181. पहुँचि पहुँच 182. राखलन्हि रखलन्हि 183. लगलन्हि लागलन्हि 184. सुनि (उच्चारण सुइन) 185. अछि (उच्चारण अइछ) 186. एलथि गेलथि 187. बितओने बितेने 188. करबओलन्हि/ करेलखिन्ह 189. करएलन्हि 190. आकि कि 191. पहुँचि पहुँच 192. जराय/ जराए जरा’ (आगि लगा) 193. से से’ 194. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) 195. फेल फैल 196. फइल(spacious) फैल 197. होयतन्हि/ होएतन्हि हेतन्हि 198. हाथ मटिआयब/ हाथ मटियाबय 199. फेका फेंका 200. देखाए देखा’ 201. देखाय देखा’ 202. सत्तरि सत्तर 203. साहेब साहब 204.गेलैन्ह/ गेलन्हि 205.हेबाक/ होएबाक 206.केलो/ कएलो 207. किछु न किछु/ किछु ने किछु 208.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ 209. एलाक/ अएलाक 210. अः/ अह 211.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) 212.कनीक/ कनेक 213.सबहक/ सभक 214.मिलाऽ/ मिला 215.कऽ/ क 216.जाऽ/जा 217.आऽ/ आ 218.भऽ/भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक)219.निअम/ नियम 220.हेक्टेअर/ हेक्टेयर 221.पहिल अक्षर ढ/ बादक/बीचक ढ़ 222.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं 223.कहिं/कहीं 224.तँइ/ तइँ 225.नँइ/नइँ/ नञि 226.है/ हइ 227.छञि/ छै/ छैक/छइ 228.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ 229.आ (come)/ आऽ(conjunction) 230. आ (conjunction)/ आऽ(come) 231.कुनो/ कोनो Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor's choice award from www.poetry.com and her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London. My Valentine Marvels of the sweet moments Years past with love and faith Very carefully I do preserve Always in my deepest heart Leaving all evils behind Even if odd sometimes Nicest moments do remind Testing time needs patience I must admire his elegance Never easy to face the shine Emitted from my valentine English Translation of Gajendra Thakur's (Gajendra Thakur (b. 1971) is the editor of Maithili ejournal “Videha” that can be viewed at http://www.videha.co.in/ . His poem, story, novel, research articles, epic – all in Maithili language are lying scattered and is in print in single volume by the title “KurukShetram.” He can be reached at his email: ggajendra@airtelmail.in )Maithili Novel Sahasrabadhani by Smt. Jyoti Jha Chaudhary Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor's choice award from www.poetry.com and her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London. SahasraBarhani:The Comet translated by Jyoti He started believing in witches. He became sceptical to his neighbours. He was accompanying his children while going to appear in examinations suspecting that his enemies could harm his children. But after making his uncle his religious guru he became very confident. Again everything was going slowly - children’s education, their jobs, the same kind of middle class dreams, marriages, small matters of domestic conflicts etc. The confidence of surviving in and competing with the world shown by his children made Nand more relaxed because his children had never seen the outside world. As soon as they reached home they were away from the outside world, even his friends were not visiting his home. They used to pass the written examinations of all competitive exams but when it was time of interview they had to face the problems of distinction based on caste, language, region etc. Nand had never given his children such enviournment so they used to be very dumbfounded to see the outside world. Aaruni couldn’t achieve the post as higher as expected by his father but he got the ‘B’ group government job. Nand’s son-in-law was also an engineer so he got a government job too. His second son also got a job in a Bank. Nand’s children had not been watching cinema in the talkies for last 10 years. The fair of puja in Patna, Gol Ghar etc. had also not been visited for a long time. People used to laugh at those activities of Nand’s family but later on they started thinking that such things could be the reason of rise of Nand’s family. Nand’s didn’t have television that was also very unique for a general people. Aaruni bought a television after getting job. When Nand saw the advertisement of the Mahabharata in the television he asked his wife, “Why cannot we see Mahabharata in our TV?” His wife replied, “We only have DD1. Someone in the upper floor could see DD Metro because his son bought him a machine worth 300 rupees. (continued) (continued) महत्त्वपूर्ण सूचना (१):महत्त्वपूर्ण सूचना: श्रीमान् नचिकेताजीक नाटक "नो एंट्री: मा प्रविश" केर 'विदेह' मे ई-प्रकाशित रूप देखि कए एकर प्रिंट रूपमे प्रकाशनक लेल 'विदेह' केर समक्ष "श्रुति प्रकाशन" केर प्रस्ताव आयल छल। श्री नचिकेता जी एकर प्रिंट रूप करबाक स्वीकृति दए देलन्हि। प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (ISBN NO.978-81-907729-0-7 मूल्य रु.१२५/- यू.एस. डॉलर ४०) आऽ पेपरबैक (ISBN No.978-81-907729-1-4 मूल्य रु. ७५/- यूएस.डॉलर २५/-) मे श्रुति प्रकाशन, १/७, द्वितीय तल, पटेल नगर (प.) नई दिल्ली-११०००८ द्वारा छापल गेल अछि। 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-15 e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com website: http://www.shruti-publication.com महत्त्वपूर्ण सूचना:(२). पञ्जी-प्रबन्ध विदेह डाटाबेस मिथिलाक्षरसँ देवनागरी पाण्डुलिपि लिप्यान्तरण- श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत। पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- तीनू पोथीक संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा । महत्त्वपूर्ण सूचना:(३) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा' रहल गजेन्द्र ठाकुरक 'सहस्रबाढ़नि'(उपन्यास), 'गल्प-गुच्छ'(कथा संग्रह) , 'भालसरि' (पद्य संग्रह), 'बालानां कृते', 'एकाङ्की संग्रह', 'महाभारत' 'बुद्ध चरित' (महाकाव्य)आ 'यात्रा वृत्तांत' विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। - कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर महत्त्वपूर्ण सूचना (४): "विदेह" केर २५म अंक १ जनवरी २००९, ई-प्रकाशित तँ होएबे करत, संगमे एकर प्रिंट संस्करण सेहो निकलत जाहिमे पुरान २४ अंकक चुनल रचना सम्मिलित कएल जाएत। महत्त्वपूर्ण सूचना (५):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे। अंतिका प्रकाशन की नवीनतम पुस्तकें सजिल्द
मीडिया, समाज, राजनीति और इतिहास
डिज़ास्टर : मीडिया एण्ड पॉलिटिक्स: पुण्य प्रसून वाजपेयी 2008 मूल्य रु. 200.00 राजनीति मेरी जान : पुण्य प्रसून वाजपेयी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.300.00 पालकालीन संस्कृति : मंजु कुमारी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 225.00 स्त्री : संघर्ष और सृजन : श्रीधरम प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.200.00 अथ निषाद कथा : भवदेव पाण्डेय प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु.180.00
उपन्यास
मोनालीसा हँस रही थी : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00
कहानी-संग्रह
रेल की बात : हरिमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.125.00 छछिया भर छाछ : महेश कटारे प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 कोहरे में कंदील : अवधेश प्रीत प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 180.00 कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 बडक़ू चाचा : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 195.00 भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00
कविता-संग्रह
या : शैलेय प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 160.00 जीना चाहता हूँ : भोलानाथ कुशवाहा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 300.00 कब लौटेगा नदी के उस पार गया आदमी : भोलानाथ कुशवाहा प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 225.00 लाल रिब्बन का फुलबा : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु.190.00 लूओं के बेहाल दिनों में : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 195.00 फैंटेसी : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 190.00 दु:खमय अराकचक्र : श्याम चैतन्य प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 190.00 कुर्आन कविताएँ : मनोज कुमार श्रीवास्तव प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 150.00 मैथिली पोथी
विकास ओ अर्थतंत्र (विचार) : नरेन्द्र झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 250.00 संग समय के (कविता-संग्रह) : महाप्रकाश प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00 एक टा हेरायल दुनिया (कविता-संग्रह) : कृष्णमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 60.00 दकचल देबाल (कथा-संग्रह) : बलराम प्रकाशन वर्ष 2000 मूल्य रु. 40.00 सम्बन्ध (कथा-संग्रह) : मानेश्वर मनुज प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 165.00 पुस्तक मंगवाने के लिए मनीआर्डर/ चेक/ ड्राफ्ट अंतिका प्रकाशन के नाम से भेजें। दिल्ली से बाहर के एट पार बैंकिंग (at par banking) चेक के अलावा अन्य चेक एक हजार से कम का न भेजें। रु.200/- से ज्यादा की पुस्तकों पर डाक खर्च हमारा वहन करेंगे। रु.300/- से रु.500/- तक की पुस्तकों पर 10% की छूट, रु.500/- से ऊपर रु.1000/- तक 15% और उससे ज्यादा की किताबों पर 20% की छूट व्यक्तिगत खरीद पर दी जाएगी । अंतिका, मैथिली त्रैमासिक, सम्पादक- अनलकांत अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4, शालीमारगार्डन, एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023, आजीवन सदस्यता शुल्क भा.रु.2100/- चेक/ ड्राफ्ट द्वारा “अंतिका प्रकाशन” क नाम सँ पठाऊ। दिल्लीक बाहरक चेक मे भा.रु. 30/- अतिरिक्त जोड़ू। बया, हिन्दी छमाही पत्रिका, सम्पादक- गौरीनाथ संपर्क- अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4, शालीमारगार्डन, एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023, आजीवन सदस्यता शुल्क रु.5000/- चेक/ ड्राफ्ट/ मनीआर्डर द्वारा “ अंतिका प्रकाशन ” के नाम भेजें। दिल्ली से बाहर के चेक में 30 रुपया अतिरिक्त जोड़ें। पेपरबैक संस्करण
उपन्यास
मोनालीसा हँस रही थी : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.100.00
कहानी-संग्रह
रेल की बात : हरिमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 70.00 छछिया भर छाछ : महेश कटारे प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 कोहरे में कंदील : अवधेश प्रीत प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00 आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 90.00 कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 90.00
शीघ्र प्रकाश्य
आलोचना
इतिहास : संयोग और सार्थकता : सुरेन्द्र चौधरी संपादक : उदयशंकर
हिंदी कहानी : रचना और परिस्थिति : सुरेन्द्र चौधरी संपादक : उदयशंकर
साधारण की प्रतिज्ञा : अंधेरे से साक्षात्कार : सुरेन्द्र चौधरी संपादक : उदयशंकर
बादल सरकार : जीवन और रंगमंच : अशोक भौमिक
बालकृष्ण भट्ïट और आधुनिक हिंदी आलोचना का आरंभ : अभिषेक रौशन
सामाजिक चिंतन
किसान और किसानी : अनिल चमडिय़ा
शिक्षक की डायरी : योगेन्द्र
उपन्यास
माइक्रोस्कोप : राजेन्द्र कुमार कनौजिया पृथ्वीपुत्र : ललित अनुवाद : महाप्रकाश मोड़ पर : धूमकेतु अनुवाद : स्वर्णा मोलारूज़ : पियैर ला मूर अनुवाद : सुनीता जैन
कहानी-संग्रह
धूँधली यादें और सिसकते ज़ख्म : निसार अहमद जगधर की प्रेम कथा : हरिओम
एक साथ हिन्दी, मैथिली में सक्रिय आपका प्रकाशन
अंतिका प्रकाशन सी-56/यूजीएफ-4, शालीमार गार्डन, एकसटेंशन-II गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.) फोन : 0120-6475212 मोबाइल नं.9868380797, 9891245023 ई-मेल: antika1999@yahoo.co.in, antika.prakashan@antika-prakashan.com http://www.antika-prakashan.com (विज्ञापन) श्रुति प्रकाशनसँ १.पंचदेवोपासना-भूमि मिथिला- मौन २.मैथिली भाषा-साहित्य (२०म शताब्दी)- प्रेमशंकर सिंह ३.गुंजन जीक राधा (गद्य-पद्य-ब्रजबुली मिश्रित)- गंगेश गुंजन ४.बनैत-बिगड़ैत (कथा-गल्प संग्रह)-सुभाषचन्द्र यादव ५.कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आऽ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर ६.विलम्बित कइक युगमे निबद्ध (पद्य-संग्रह)- पंकज पराशर ७.हम पुछैत छी (पद्य-संग्रह)- विनीत उत्पल ८. नो एण्ट्री: मा प्रविश- डॉ. उदय नारायण सिंह “नचिकेता” ९/१०/११ 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-15 ३.पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आऽ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा । श्रुति प्रकाशन, रजिस्टर्ड ऑफिस: एच.१/३१, द्वितीय तल, सेक्टर-६३, नोएडा (यू.पी.), कॉरपोरेट सह संपर्क कार्यालय- १/७, द्वितीय तल, पूर्वी पटेल नगर, दिल्ली-११०००८. दूरभाष-(०११) २५८८९६५६-५७ फैक्स- (०११)२५८८९६५८ Website: http://www.shruti-publication.com e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com (विज्ञापन) (c)२००८-०९. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।(c) 2008 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ' आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ' संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ' पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ' रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका १५ फरबरी २००९ (वर्ष २ मास १४ अंक २८) http://www.videha.co.in/ मानुषीमिह संस्कृताम्
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