198 विदेह ३१ म अंक ०१ अप्रैल २००९ (वर्ष २ मास १६ अंक ३१) एहि अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.कथा-साकेतानन्द.कालरात्रिश्च दारुणा- २.२. कथा- सुभाषचन्द्र यादव- तृष्णा / २.३.कामिनी कामायिनी-विलायत वाली कनिया २.४. उपन्यास- प्रत्यावर्तन - पहिल खेप- कुसुम ठाकुर २.५. बलचन्दा (मैथिली नाटक)- विभा रानी (पहिल खेप) २.६. सुखमे सब साथी दुखमे न कोय-सुरेन्द्र किशोर झा- २.७. डा.रमानन्द झा ‘रमण‘-मिथिलांचलक दलित समाजमे लोकगाथा मैथिली लोकगाथामे दीनाभद्री २.८. सार्वभौम मानवाधिकार घोषण: मैथिली अनुवाद रमानन्द झा 'रमण' : भाषा सम्पादन गोविन्द झा २.९. गजेन्द्र ठाकुरक मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोशपर- उदय नारायण सिंह "नचिकेता" ३. पद्य ३.१. कामिनी कामायनी: भाषा ३.२. डॉ. शंभु कुमार सिंह-लोरी ३.३. सतीश चन्द्र झा- तीन टा कविता ३.४ माय (कविता) -मनीष झा "बौआभाई" ३.५. ज्योति- मिठगर राैद ३.६. सुबोध ठाकुर- केना होएत मिथिलाक जीर्णोद्धार ४. बालानां कृते-मध्य-प्रदेश यात्रा आ देवीजी- ज्योति झा चौधरी ५. भाषापाक रचना-लेखन - पञ्जी डाटाबेस (आगाँ), [मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] ६.. VIDEHA MAITHILI SAMSKRIT EDUCATION(contd.) विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions संपादकीय २९ मार्च २००९ केँ मैथिली-भोजपुरी अकादमी द्वारा दिल्लीमे सेमीनार भेल, जाहिमे समकालीन रचनाकारक दायित्वपर गोष्ठी भेल। मोहन भारद्वाज, विदित, प्रदीप बिहारी, नीता झा आदि वक्ता भाग लेलन्हि। सांझमे मिथिलांगन द्वारा रोहिणी रमण झा लिखित आ संजय चौधरी द्वारा निर्देशित नाटक "किंकर्तव्यविमूढ्" मंचित भेल। दिल्लीमे होली आओर महिला दिवसक अवसर पर बिहार उत्सवक आयोजन कएल गेल। लोक बिहारक लोकगीत आओर लोकनाटकक संग कत्थक नृत्यक आनंद उठएलन्हि। नृत्यांगना पुनीता शर्मा अपन कत्थक नृत्य यात्रा थीमक नृत्यसँ तँ युवा कलाकार अंशुमाला बिहारमे पावनि-तिहारपर गाबय जाए वाला गीत जेना कजरी-जट-जटिन-शादी-विवाह आओर होली पर गाबय जाय वाला गीतसँ लोककेँ झुमा देलन्हि। लोक नाटक वाला हिस्सामे जयशंकरजी खुशबू आओर वंदनाक संग 'जट-जटिन' प्रस्तुत कएलन्हि।ई कार्यक्रम दिल्लीक सामाजिक संस्था राग विराग एजुकेशनल एंड कल्चरल सोसाइटीक दिससँ कएल गेल। संगहि "विदेह" केँ एखन धरि (१ जनवरी २००८ सँ ३० मार्च २००९) ७८ देशक ७८१ ठामसँ १,६६,७८७ बेर देखल गेल अछि (गूगल एनेलेटिक्स डाटा)- धन्यवाद पाठकगण। अपनेक रचना आ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे। गजेन्द्र ठाकुर, नई दिल्ली। फोन-09911382078 ggajendra@videha.co.in ggajendra@yahoo.co.in २. गद्य २.१.कथा-साकेतानन्द.कालरात्रिश्च दारुणा- २.२. कथा- सुभाषचन्द्र यादव- तृष्णा / २.३.कामिनी कामायिनी-विलायत वाली कनिया २.४. उपन्यास- प्रत्यावर्तन - पहिल खेप- कुसुम ठाकुर २.५. बलचन्दा (मैथिली नाटक)- विभा रानी (पहिल खेप) २.६. सुखमे सब साथी दुखमे न कोय-सुरेन्द्र किशोर झा- २.७. डा.रमानन्द झा ‘रमण‘-मिथिलांचलक दलित समाजमे लोकगाथा मैथिली लोकगाथामे दीनाभद्री २.८. सार्वभौम मानवाधिकार घोषण: मैथिली अनुवाद रमानन्द झा 'रमण' : भाषा सम्पादन गोविन्द झा २.९. गजेन्द्र ठाकुरक मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोशपर- उदय नारायण सिंह "नचिकेता" साकेतानन्द 1941-
वरिष्ठ कथाकार, गणनायक (कथा-संग्रह) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: गणनायक (कथासंग्रह), सर्वस्वांत (उपन्यास)। कालरात्रिश्च दारुणा * साकेतानन्द.
“ की कहैत रही..? छोडू घरक माया_मोह...भागि चलू...?” हुनकर स्वर मे प्राण_भय भरल रहनि. ”ओह, तखनि तक तक त’ बौअनिक ट्रैक्टरो चलिते रहै...जरलाहा के अक्किल पर पाथर पडि गेल रहय...” ओ सिसक’ लागल रहथि. ”आब पछताइये क’ की हैत..? हे एना कानू नंई ! मोन आर घबडा जाइ छै.” “ कानू नंइ त’ की करू यौ ? घर देने धार बहैयै...अहां कहै छी कानू नंहि ?” बंटू झाक हाथ मे एकटा हरवाही पैना रहनि. दू टा जोडल चौंकी, जाहि पर दुनू गोटे बैसल छला, तै पर स’ हाथ लटका क’ पैना पानि मे देलखिन ! कत्तौ नंहि ठेकलनि. ” सांझ स’ डेढ फीट बढि गेलै! निचला चौंकी बुझू डूबि गेल !” ” दैब हौ दैब ! आब हम कोन उपाय करबै ?” ओ विलाप कर’ लगै छथि. घौना करैत बांधक ठीकेदार, इंजीनियर के सराप’ लगै छथिन. बंटूझा नंहि रोकै छथिन. रोकैक आब एकदम इच्छा नंहि छनि.हुनकर पत्नी; बरसाम बालीक घौना आ अई कोठली, ओई कोठली देने बहैत कोसीक कलकल, एकटा अद्भुत स्वर_ श्रृष्टि क’ रहल छलै. जं’ जं’ सांझ गहराय लागल छलै___तौं_तौं कोसीक हाहाकार बढ’ लागल छलै. एत्ते तक जे बगल मे बैसल पत्नी स’ आब चिकडि क़’ गप्प’ कर’ पडै छलनि. ओ कानिये रहल छली__ ” कत्त’ पडेलें रे ठीकेदरबा सब ? कत्त’ छ’ हौ सरकार साहेब ? बान्ह तोडबाक छलौ त’ कहितें ने रे डकूबा सब...पडा क’ चल जैतौं डिल्ली ! अपन बौआ लग चल जैतौं...कहिते किने रे ... आब के बचेलकै हमरा सब के रौ दैब ?” ओ बच्चा सब जेकां भोकाडि पाडि क’ कान’ लागल रहथि. “ आइ तेसर राति छियै... आब की हेतै रौ दैब !” ” हे, कहने रही ने, कनै छी त’ मोन सुन्न भ’ जाइये.” ” कियैक ने भागि क’ वीरपुर चल गेलौं, किछु छियै त’ शहर छियै; ओइ ठाम स’ कत्तौ भागि सकै छलौं...माथपर कोन गिरगिटिया सवार भ’ गेल रहय यौ...गाम स’ कैक बेर ट्रैक्टर गेलै.” हुनका ई नहि बूझल छलनि जे वीरपुर आब वैह रहलै ? ओ आब सुन्न, मसान, भकोभन्न भ’ गेल छै. ओहि ठाम भरि छाती पानि बहि रहल छै. सब किछु के उपर देने, सब किछु के चपोडंड करैत कोसी बहि रहल छै. ओत्तुक्का लोक ? ओत्ते टा कस्बाक ओत्ते लोक कत’ गेलै ? कत’ गेल हेतै लोक सब हौ भोलेनाथ ? बंटूझा के किछु नहि बूझल छनि, किछु नहि. लोक त’ बेर पडला पर चिडैयो स’ बेसी उडान भरि सकैये...मखानक लाबा जकां छिडिया सकैये, देश्_विदेश पडा सकैत अछि.वीरपुर मे आब ध्वंस हेबाक प्रक्रिया मे सब किछु छै. अही बीच लक्ष केलखिन त’ पत्नीक कपसनाइ बन्द बुझेलनि. शाइत सुति रहली की...जं सूति रहल होथि..त’ हुनका नल राज जकां छोडि क’ गेल हेतनि ? छिः छिः की सोचि रहल छथि ओ ? मुदा बात मोन मे घुमडैत रहै छनि जे ई नंहि रहितथि त’ बंटूझा के पडाइक कैक टा बाट रहनि. अगल_बगलक कैकटा उंच स्थान सब मोन पडलनि...नेपाले भागि जैतथि. डेढ_दू किलोमीटर दूर परहक कैक टा ऊंच डीह सब मोनमे चमकि उठलनि. असकर रहितथि त’ कैक टा उपाय रहै... तैं तीन दिन स’ यैह चौंकी भरि सुखायल स्थान पर लटकल छथि दुनू व्यक्ति ! सत्ते माया चंडाल होई छै. मुदा ककरो की पता रहै जे एत्ते भरबा क’ ऊंच पर बनल घरक ई गति हेतै ! हे एकरा क्यो बाढिक पानि नहि कहै जेबै कहियो, ई प्रलयक प्रबल प्रवाह छियै, बलौं स’ बान्हल बान्ह तोडि क’ निकलल पानि छियै कोसिक, सब के रिद्द_छिद्द कइयेक’ छोडतै, बेरबाद क’ देतै सबके, अइ बेर नहि छोडतै. बंटूझा के साफ लागि रहल छलै जे कोसी अइ बेर नहि मानतै, बदला लइयेक’ रहतै . “ सुनै छियै, कत्ती राति भेल हतै ? भूख नहि लागल अछि ?” ”लागल त’ अछि, त’ देब खाइलय ?” हुनकर स्वर खौंझायल रहनि, जेना चैलेंज क’ रहल होथिन. ” कने ज’ साहस करी, त’ भंसाघरक ताख पर चाउरक टिन धैल छै, ताख डूबल छै की ?” ”ओह, चुप रहूने, जँ नहियो डूबल छै त’ भंसाघर गेल हेतै, अइ अन्हार रातिमे जखन घर देने कोसी बहि रहल हो...” ”घर कहाँ रहलै यौ, अपन घर देने त’ कोसी बहैये आब.” ”बीच नदी मे यै ?” ”हँ यौ, नदीक गुंगुएनाइ नहि सुनै छियै ?” ”सब सुनै छियै, तखन कहै छी जाइ लए ?” ”चाउरक टिन ज’ नहि आनब... आइ तेसर दिन छियै. टिन टा आबि जाय ने कोनो तरहे, दैब हौ दैब ! वेगो बढल जा रहल छै... एहन ठोसगर पक्को घर के तोडि सकयै कोसी ?” ”किछु घंटा लगतै ओकरा, डीह पर घर नहि सौ दू सै ट्रक राबिश पडल रहत.” ई कहि ओ चुप भ’ गेला. दुनू वेकती बडी काल तक चुप छला. ”अच्छा, नहि आनब त’ खायब की ?” “अहीं उतरू ने.” ”नै हौ बाप, वेग देखै छियै ? हम त’ एक्के डेग मे लटपटा_सटपटा क’ चपोडंड.... देखियौ, दरबज्जे_दरबज्जे, कोठलिये_कोठलिये कोना खलखला क’ बहि रहल छै !” ”नै उतरब त’ दुनु गोटे भूखे मरब!” ”मरि जायब, अही कोसी मे भांसि जायब! भांसि क’ कोपरिया कुर्सेला मे लहास लागत...गिध्ध_कौआ खायत!!” “ओह, चुप रहू ने!” बंटूझा बडी कालक बाद चौंकी आ छतक बीच हवा के संबोधित करैत बजला_” आइ तेसर दिन छियै ! आइ तक पटनां_डिल्ली के हमरा सबहक सुधि नहि एलै ?” “अहूं त’ हद करै छी...अहि बोह मे बौआ अबिते हमरा सबके बचबैलय ?” हुनका दिल्ली सुनिते अपन बेटा टा मोन पडै छनि, आर किछु नहि.सत्ते, हुनका लोकनि सनक हजार_दस हजार नहि लाखों लोक, आइ तीन__दिन स’ फंसल अछि, एकर खबरि ककरो नहि लगलैयै ? एहनो कत्तौ होई ? ओ जेना पत्नीक बात नहि सुनने होथि, भोर मे आंटा सानि क’ ओकर गोली खेने रहथि. आइ, तेसर बेर राति गहरा रहल छनि. हिनका दुनू व्यक्तिक अतिरिक्त कोनो चिडियो_चुनमुनीक आवाज़ कहां सुनै छियै ? एखन त’ कुसहा मे बान्ह तोडि क’ बहैत कोसियेक आवाज़ छै चारू भर...बान्ह, छहर, नहर, सडक, रेल, गाछी_बिरछी के मटियामेट करबाक स्वर ! सब किछु के ध्वस्त करबाक घुमडल मौन स्वर__गडर_गडर_गडर...ह’ ह’ ह’..हहा_हहा_हहा; विजयिनी कोसीक अट्टहास स’ हिनका दुनूक कान तीन दिन तीन राति स’ बहीर भेल छनि ! …मोबाइल. इंटरनेटक युगमे तीन दिन बीत गेल आ क्यो सुधि लै बला नंहि ? ..... काल्हि तक त’ दुनू व्यक्ति छत पर चादरि टांगि क’ रहथि . जखन सोपाने बरिस’ लगलनि, आ ओत्ते मेहनति स’ उपर आनल सब वस्तु जात भीज’ लगलनि; अपनो दुनू गोटे सनगिद्द भ’ गेला त’ भगि क’ कोठली मे एला त’ अपन कोठरी मे भरि जांघ रहनि.. चौंकिक ऊपर चौंकी धयलनि; त’ तखन स’ ओही पर बैसल छथि. आब त’ निचला चौंकी डूब’ लागल छलनि ! “दैब रौ दैब ! काल्हि मंचेनमाक नाव के की हाल भेलै हौ दैब...सत्तरि अस्सी गोटे, बाले बच्चा व्मिला क’ हेतै, नाव पलटिते कोना हाक्रोश करैत बेरा_बेरी डुबैत....हौ दैब, कोना हाथ उठाउठा जान बचेबाक गोहारि करैत रहै यौ !” ओ पुक्का फाडि क नेना सब जेकां कान’ लगली. पानिक हहास मे हुनकर रुदन बडा भयौन लगैत रहै. ” जुनि मोन पाडू यै... असहाय लोकके डुबबाक दृष्य नहि मोन पाडू !” ”मोन होति रहय ओत्तेटा कोनो रस्सा रहिते की आने कोनो ओत्तेटा वस्तु__त’ फेक दितियै...मुदा किछु नहि क’ भेल... ओत्ते लोक चल गेलै आ जा रहल छै, से छै ककरो परवाहि...बज्जर खसतौ रे पपियाहा सरकार बज्जर !” ”यै ई कयैक ने सोचै छी जे हमरा सब जीविते छी, जं मंचेनमाक नाव पर हमरो सब चढि गेल रहितौं त’ आइ कोन गति भेल रहिते ? अपना सब नहि चढलहुं त’ प्राण बांचि गेल ने !” ”देखैत रहियै, लोक कोना छटपटाइत रहै...? छत पर स’ त’ स्पष्ट देखाइ पडैत रहै!” ”सब टा देखैत रहियै ! बगल मे चुनौटी हैत दिय” त’ !” ”कत्ते खैनी खायब ?” ”भूख लागल यै.” ”तैं त’ कहैत रही... कनी साहस करू. भंसाघर मे घुसिते, सामने ताख पर चाउरक टिन छै; बगल मे नोनो छै.” ”अहां आयब पीठ पर ?” ”नै यौ, हमरा बड डर लगैये. हे ओ भीतर बला चौकठि के देखियौ त’... देवाल छोडने जाइ छै ?” ”हँ यै बरसामबाली! ई त’ देवाल छोडि देलक.” ”त’ आब घर खसतै की यौ ?” ..चुप्पी, संगहिं नदीक हहास! पानि मे कोनो जीव के कुदबाक छपाक ध्वनि ! ने त’ सगरे पसरल पानि... तै पर अन्धकार. ”किछु बजै कियैक ने छी ? सुनू , आब हमरो बड्ड भूख लागि गेल अछि...” ”देखै छियै, करेंट स’ आब चौंकीक पौआ सब दलकै छै; एखनो हम चाउरक टिन आनि सकैत छी. आयब हमर पीठ पर, उतरी हम ?” फेर चुप्पी. दुनू चुप छथि. बीच मे वैह अलगटेंट हरजाइ बाजि रहल अछि__कोसी बाजि नहि डिकरि रहल अछि ! “ठीक छै, हम उतरै छी...आब जे हुए, आब नहि सहल जाइये...!” ”नै यौ! हम अहांके ऐ अन्हार राति मे पानि मे नहि पैस’ देब. सांझ मे ओ सांप के देखने रहियै...मोन अछि कि नहि ?” ”ओ एत्तै हेतै ? नहि हम उतरै छी, किछु भेल हुए, आखिर अपने घर ने छियै यै ?” ”उतरबै ?”कहि बरसामबाली कनी काल चुप भ’ जाइ छथि; फेर कहै छथिन__”बुझलौं यौ, मोन होइयै गरम_गरम चाह पिबितौं; एकदम भफाइत.” “अच्छा, कत्ते राति भेल हेतै ?” ”देवाल पर घडी त’ लटकले छै, देखियौ ने.” ”एंह, ओहो साला बन्द भ गेल छै.” ”ठहरू, कने पानि के देखियै ! अरौ तोरी के, निचला चौंकी त’ डूबल बरसामबाली.” ”हे यौ, कने एम्हर आउ, हमरा डर लागि रहल अछि. हमरा लग आउ ने.” ”छीहे त’ ?” ”नै हमर लग आउ सब चिंता_फिकिर बिसरि क’ दुनू गोटे सूति रही. जे हेतै से परात देखल जेतै.!” ”भने कहै छी, दलकैत चौंकी आ भसकैत घर मे निश्चिंत भ’ क’ सुतै लए कहै छी...नीचा कोसी बहि रहल अछि ! भने कहैत छी.” ”खिडकी स’ देखियौ, भोरुकवा उगलै ? घडियो जरलाहा के बन्द भ’ गेलै....” ”कथी लए कचकचाइ छी, ई कालरात्रि छियै, अइ मे क्यो ने बचत...” ”ठीके कहै छियै यौ; ऐ बेर क्यो ने बचतै.” ”मारू गोली. जत्ते बजबाक हेतै, बाजल हेतै. सुनै छियै?सुति रहलियै ?” ”धुर जो, एहन परलय मे पल लगतै ? हम कहैत रही डिल्ली ठीक छै ने ? ओकरा खबरि भेल हेतै ? ओत्त’ बौआ अंगुनाइत हेतै...हे अइ बेर नहि अनठबियौ, अगिला सुद्ध मे करा दियौ. नहि करब आड्वाल; नहि गनायब. मुदा पुतहु चाही हमरा पढलि_लिखलि. एकदम स्मार्ट, अपन बौए जेकां.” बंटूझा के लगलनि जे एहन समय आ ताहि मे बियाहक गप, जरूर हिनकर दिमाग भांसि रहल छनि. कल्हुका भोर देखती की नहि तकर ठेकाने ने, चलली है बेटाक बियाह नेयार करै लए.मुदा बरसामबालीक त’ टाइम पास रहनि__बेटाक बियाहक प्लैन बनायब. हुनको मोन भेलनि जे ओ कथाक मादे कहथिन जे हाले मे यार अनने रहथिन. मुदा ओ चौंकी आ छतक दूरी के एकटक देखैत रहला. पानिक स्वर हुनकर कान के बहीर बना रहल छलनित त’ माथ मे कोनो धुंध, कोनो धुआं सन भरल बुझाइ छलनि. बरसामबालीक बुद्धि ठीके भांसि गेल छलनि, नहि त’ एहन मे बेटाक बियाहक नेयार करब ! ”से चाहे जे हुए, पुतहु हमरा सुन्नरि आ पढल चाही.” ”अहां के बड्ड भूख लागि रहल अछि की ?” ”हं यौ !” ”सुनू, अहां घबडायब नहि ! हम यैह चाउरक टिन नेने अबै छी ! ”नै जाउ यौ...नै उतरू यौ...नै जाउ यौ !”बरसामबाली अनघोल करिते रहली, जाबे तक हुनकर मुंह मे गर्दा नहि उडियाय लगलनि. मुदा बंटूझा फेर कोनो उतारा नहि देलखिन. कथा सुभाषचन्द्र यादव- तृष्णा / कामिनी कामायिनी-विलायत वाली कनिया चित्र श्री सुभाषचन्द्र यादव छायाकार: श्री साकेतानन्द सुभाष चन्द्र यादव, कथाकार, समीक्षक एवं अनुवादक, जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल- मधुबनी। आरम्भिक शिक्षा दीवानगंज एवं सुपौलमे। पटना कॉलेज, पटनासँ बी.ए.। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्लीसँ हिन्दीमे एम.ए. तथा पी.एह.डी.। १९८२ सँ अध्यापन। सम्प्रति: अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, पश्चिमी परिसर, सहरसा, बिहार। मैथिली, हिन्दी, बंगला, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, स्पेनिश एवं फ्रेंच भाषाक ज्ञान। प्रकाशन: घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित। भूतपूर्व सदस्य: साहित्य अकादमी परामर्श मंडल, मैथिली अकादमी कार्य-समिति, बिहार सरकारक सांस्कृतिक नीति-निर्धारण समिति। तृष्णा हमरा लागल अखिलनकेँ किछु भेल छैक । जखन ओ कलकत्तासँ घुरि कऽ आयल रहय, हमरा तखने खटकल छल । मुदा ओ थाकल – झमारल रहय, तेँ हम किछु नहि पुछलिऐक । ओ बदलि गेल छल । कोनो गप्प नहि करय; चुप आ उदास रहय । ओकर चेहरा देखला सँ बुझाइ जेना ओ कोनो विचार या स्मृतिमे डूबल – हेरायल हो । 'की भेल छौ?' पुछला पर ओ बाजल –'नहि, किछु नहि ।' लेकिन ओकर स्वरमे आ ओकर चेहरा पर हमरा वेदनाक स्पष्ट अनुभूति बुझायल । फेर दिन भरि अखिलन सँ कोनो गप्प नहि भेल । रातिमे अचानक कोनो सपनासँ निन्न टूटि गेल । सपनाकेँ मोन पाड़ैत चाहलहुँ, जे सूति जाइ । ठीक तखने चौंकि गेलहुँ । अखिलन, जे बगल वला बिछौन पर सुतल रहय, कुहरैत बाजल—'ओह, श्रीलता !' लागल जेना ओकरा कोनो पीड़ा भऽ रहल हो आ सहायता लेल ओ श्रीलताकेँ सोर पाड़ैत हो । चकित भेल हम ओकर बिछौन दिस तकलहुँ । इजोरियाक् हल्लुक इजोतमे देखल मूड़ी तर पड़ल गेड़ुआकेँ अखिलन बेर-बेर हाथसँ मीड़ि रहल अछि । ओ निश्चय जागल छल आ कोनो बेचैनीमे छटपट कऽ रहल छल । ओहि राति फेर सूति नहि भेल । बहुत जिद्द कयला पर अखिलन जे खिस्सा सुनौलक ताहिसँ मन भारी आ उदास भऽ गेल । खिस्सा सुनबैत ओ रहि –रहि कऽ अपन छातीकेँ मुट्ठी मे पकड़ि लैत छल जेना छातीमे दर्दक हूक उठैत हो । अखिलन कहऽ लागल –भोरे –भोर कलकत्ता लेल गाड़ीमे सवार भेलहुँ तँ सामने वला बर्थ पर एकटा अधवयसू बैसल सिगरेट पिबैत रहय । बादमे जानल जे ओकर नाम संतोष कुमार मंडल छल । ओ बंगाली रहय आ शौकिया चित्रकार । हैदराबादमे कोनो नौकरी करैत रहय । ओ हमरा बहुत ध्यानसँ देखलक आ पुछलक जे हम कतऽ जायब । फेर अपने कहऽ लागल—गाड़ीमे सवार होइसँ पहिने हम रिजर्वेशन चार्टमे अगल –बगल वला यात्रीक नाम, उमर आ गंतव्य जरूर देखि लैत छी । ओकर ई सतर्कता पहिने तँ प्रभावित कयलक , मुदा लगले जासूसी – सन बुझायल । धीरे – धीरे आओर मोसाफिर आयल—एकटा नव दम्पत्ति, युवक सुधीर आ एकटा प्रौढ़ महिला । मंडल बहुत गप्पी आ सहमिल्लू रहय । ओ जल्दिए सभसँ परिचय कऽ लेलक आ गपसपमे लागि गेल । नव दम्पत्ति हनीमून लेल दार्जिलिंग जाइत रहय । सुधीर अपन भाइसँ भेंट करऽ कलकत्ता जाइत रहय । प्रौढ़ महिला पता नहि कतय जाइत रहय । ओ बेसी काल गंभीरे बनलि रहलि । खाली बीच-बीच मे कोनो हँसी वला गप्प पर मुसकाइत रहय । बादमे कोनो स्टेशन पर ओ एकटा तेलुगू पत्रिका कीनलक आ ओहिमे व्यस्त भऽ गेलि । स्थिर रहब मंडलक स्वभाव नहि रहैक । ओ कखनो पानि पीबा लेल उठय तँ कखनो चाह पीबा लेल । कखनो सिगरेट जराबऽ लेल सलाइ ताकऽ लागय तँ कखनो दोसर कातक बर्थपर बैसल बंगाली परिवार सँ गपसप मारि आबय । अही सभक बीच पता नहि कतय वारंगल कि विजयवाड़ामे एकटा युवती हमर सभक बर्थ लग आयलि । एकटा सामान्य साधारण युवती । हमर बर्थ पर बैसलि महिला सँ बैसबाक अनुमति मँगलक । बर्थ अपन नहि रहबाक कारणे महिला असमर्थता प्रकट केलक तँ हम ओहि युवतीकेँ बैसि जयबाक इशारा कयल । मंडल, जे ऊपरका बर्थ पर पड़ल छल, ओहि युवतीकेँ गौर सँ देखलक । युवती थोड़े काल धरि असहज बनलि रहलि, फेर सामान्य भऽ गेलि । जखन कंडक्टर टिकट जाँचय आयल तँ युवती कने आशंकित भेलि, मुदा जुरमाना दऽ कऽ फेर निश्चिन्त भऽ गेलि । ओ जुरमाना दैत रहय, ठीक तखनहि ओ पहिल बेर आकृष्ट कयलक । कंडक्टर नोट पकड़ि लेलक आ टिकट बनबैत रहल । टिकट देखला पर युवती चौंकि उठलि । अपन गलतीक अनुभव कयलक आ पर्स सँ आओर पाइ निकालि कंडक्टरकेँ देलक। 'लेकिन एहिमे आकृष्ट करऽ वला कोन चीज रहैक ?’- अखिलनसँ हम पुछलिऐक । अखिलन कहलक - 'भगिमा। ओकर भंगिमामे किछु एहन सौन्दर्य रहैक, जकरा मात्र अनुभव कयल जा सकैत अछि; कहल नहि जा सकैछ ।’ अखिलन कने काल चुप भऽ गेल । हमरा लागल ओ श्रीलताक ओहि अदाकेँ फेर सँ पकड़बाक प्रयत्न कऽ रहल अछि जेओकर हृदयमे सीधे उतरि गेल रहैक । टोकि देलासँ खिस्साक प्रवाह टूटि गेलैक । ओकर छोर पकड़ि आगू बढ़ेबामे अखिलनकेँ थोड़े समय लगलैक। हमरा बुझेबाक प्रयास करैत ओ बाजल – 'युवतीक व्यक्तित्व मे किछु एहन लय आ गति छलैक, जे हमरा आकृष्ट कयने छल । ओ बहुत संवेदनशील आ सलज्ज छलि । खैर ।’ हमरा लागल अखिलनक हृदय दर्दसँ टीसि उठल होइ । परिचय आ गप करबामे प्रवीण मंडल जखन नीचा उतरल तँ ज्ञात भेल ओहि युवतीक नाम श्रीलता छलैक । 'खूब भालो नाम ।’ – मंडल बाजल । श्रीलता बिजनेस मैनेजमेंटक कोर्स करैत रहय । ओकर हाथमे मैनेजमेंटक कोनो किताब रहैक जे सुधीर लऽ कऽ देखऽ लागल । मंडल दोसर कातक बंगाली परिवार लग चल गेल आ ओहि परिवारक एकटा किशोरीक चित्र बनबऽ लागल । अपन चित्र पर प्रसन्न होइत किशोरी बाजलि –'थैंक यू अंकल ।' परिवारक सभ सदस्य चित्र देखलक आ मंडलक प्रति कृतज्ञ भेल । किशोरक माय बाजलि— 'ओ माँ, आपनी तो खूब भालो स्केच तूल छेन ।’ मंडल अपन बर्थ पर घुरि आयल। सिगरेट पीलक आ ओहि नव विवाहिताक चित्र बनबऽ लागल जे हनीमून लेल दार्जिलिंग जाइत रहय । नव विवाहिता मंडलक ठीक सामने बैसलि छलि । मंडल किछु रेखा खींचय आ रूकि कऽ नव विवाहिता दिस ताकऽ लागय । चित्रक प्रति सभ क्यो उत्सुक रहय । तैयार होइते ओ एक हाथसँ दोसर हाथ जाय लागल । जखन ओ हमरा लग आयल तँ चित्र देखि धक्का सन लागल । नव विवाहिताक चित्र एहन छलैक जाहिसँ ओकरा चिन्हल जा सकैत रहय । मुदा ओकर नीचा एकटा दोसरो चित्र रहैक—स्त्री –पुरुषक; पुरुष स्त्री दिस टकटकी लगा कऽ देखैत । यद्यपि चीन्हऽ योग्य स्पष्टता आकृतिमे नहि रहैक, तथापि हमरा बूझऽ मे भांगठ नहि भेल जे ई दुनू आकृति हमर आ श्रीलताक अछि । हम मंडल दिस तकलिऐक । ओ पहिनहि सँ हमरा दिस तकैत छल आ नजरि मिलिते बाजल –'इटस नोट यू ।’ जेना ओकर मोनमे कोनो चोर होइ । श्रीलता खिड़की सँ बाहर तकैत छलि । साँझ पड़ि रहल छलैक । मंडलो सिगरेट पिबैत खिड़की सँ बाहरक दृश्य देखऽ लागल । तखने पता नहि कोम्हरसँ एकटा बंगाली युवक आयल आ मंडल संगे गपमे लागि गेल। ओ हैदराबाद विश्वविधालयमे नाम लिखा कऽ घर जाइत रहय आ बहुत उत्साहमे रहय । रवीन्द्र संगीतक चर्चा भेलै तँ मंडल श्रीलता सँ पुछलकै –'डू यू नो रवीन्द्र नाथ टैगोर ?' 'आइ एम अफ्रेड, आइ डोंट ।'-श्रीलता कने संकुचित भेलि । 'शी मस्ट बी नोयिंग पोतन्ना ।’- जेना हम श्रीलता केँ सहारा देबा लेल बाजल होइ । 'याह, आइ नो पोतन्ना वेरी वेल ।’- श्रीलता उत्साहित भऽ उठलि । बंगाली युवक आ मंडल रवीन्द्र संगीत गाबऽ लागल । मंडलक गला नीक रहैक । हमरा भूख लागि गेल छल । दूपहरमे जे केरा किनने रही से पड़ले रहय । ओहि मे सँ दू टा छीमी तोड़ि हम श्रीलता दिस बढ़ाओल, मुदा ओ लेलक नहि । सुधीर, मंडल, युवक आ नव दम्पत्तिकेँ केरा देलाक बाद हम श्रीलता दिस फेर ताकल । 'हैव इट श्रीलता । यू मस्ट बी हंग्री ।’-हमरा स्वरमे किछु एहन उत्कट स्नेह आ याचना रहय, जे ओ चौंकि कऽ हमरा दिस देखऽ लागलि । फेर एकटा केरा लेलक आ संकोच तथा लज्जावश धीरे-धीरे खाय लागलि । श्रीलता विजयवाड़ामे पढ़ैत छलि आ अखन चारि दिनक छुट्टीमे घर विशाखापतनम जाइत छलि । ट्रेन लेट भेल जाइत रहैक आ ओहि संग श्रीलताक बेचैनी बढ़ल जाइक । श्रीलता सँ आओर गपसप भेल । ओ पाँचम दिन घूरति । 'अहाँ कहिया घुरब ?'-ओ हमरासँ पुछने छलि । विशाखापतनम आबि रहल छलैक । ओ उठि कऽ ठाढ़ भऽ गेलि । परिचित शहर-घर आबि गेलाक निश्चिन्तता आ दिन नीक तरहेँ कटि जयबाक संतोषसँ ओकर चेहरापर प्रसन्नताक लहरि अयलैक । कृतज्ञता आ सदभावना प्रकट करैत ओ मुस्कुरायल आ सभसँ विदा मँगलक । मुदा ओकरा दिस क्यो ध्यान नहि देलकै । सभ गप्पमे बाझल छल । ओ हमरा दिस तकलक आ एकटा स्निग्घ कोमलताक भाव चेहरा पर लेने विदा भऽ गेलि । तीन-चारि मिनट बीति गेल । स्टेशन अखनो आयल नहि छल । हमरा आश्चर्य भेल ओ एतेक पहिनहि गेट पर किएक चल गेलि । हमरा अचानक एकटा विकलता घेरि लेलक । ओकरा देखबाक विकलता, गप्प करबाक विकलता । आ ठीके, हम सीटपरसँ उठि गेलहुँ । गेट लग पहुँचिते ओ हमरा देखलक आ देखते मुस्कुरायलि । ओकर मुस्की औपचारिकताक कारणे आनल गेल बलात् मुस्की नहि छल; ओ स्वत: स्फूर्त्त आ हार्दिक छल । मंत्रमुग्ध सन ओकरा दिस तकैत हम आगाँ बढ़लहुँ आ कनेक दूरी पर डिब्बासँ सटिकऽ ठाढ़ भऽ गेलहुँ । ठाढ़ होइते ओ पल भरिक लेल हमरा दिस मुस्कुराइत तकलक आ संकोच तथा लज्जावश मूड़ी झुका लेलक। फेर पता नहि कोन प्रबल आन्तरिक प्रेरणासँ अगिले क्षण हमरा देखऽ लागलि । आँखिमे आ ठोर पर वैह मधुर आ कोमल मुस्की लेने । ओकर माधुर्य आ कोमलतामे नहाइत हम निरन्तर ओकरा देखने चल जाइत रही । बुझाइत रहय हृदयमे प्रेमक स्रोत फूटि पड़ल हो आ हम ओकर अनन्त प्रवाहमे भसिआयल चल जाइत होइ । गेट लग श्रीलताक आसपास किछु आओर लोक ठाढ़ रहय । भरिसक अहीसँ घबरा कऽ श्रीलता बाजलि – 'इट वाज ए नाइस कम्पनी ।' हम सहटि कऽ ओकर आओर लग चल अयलहुँ । कहऽ चाहलहुँ – 'आइ वांटेड टू हैव ए लास्ट लुक ऑफ यू । मुदा लोक-भयक कारणे कहा गेल –'आइ वांटेड टू सी यू ऑफ ।' श्रीलता किछु नहि बाजलि । 'अहाँ चारिम दिन नहि घुरि सकैत छी, श्रीलता ?' 'नहि, हमरा कैकटा काज करऽ पड़त । मजबूर छी ।' गाड़ी प्लेटफार्म पर लागि रहल छल । संग छूटि जेबाक आसन्न अवश्यम्भाविता सँ हम अस्थिर भऽ गेल रही । 'अहाँकेँ स्टेशनक गेट धरि छोड़ि आबी ?'- हमर एहि प्रस्तावसँ श्रीलता डेरा गेलि । गेटपर ओकर भाइ प्रतीक्षा करैत हेतैक । 'नो, नो । थैंक्स ।’- श्रीलता घबराइत बाजलि आ एहि तरहेँ धड़फड़ायल चलिदेलक जेना हम ओकरा खेहारने अबैत होइएक । ओकर एहि व्यवहारसँ स्तम्भित आ विमूढ़ भेल कने काल हम ठाढ़े रहि गेल रही । फेर तेजीसँ चलैत जखन प्लेटफॉर्मक गेट लग पहुँचल रही तँ ओतय क्यो नहि रहय । श्रीलता चल गेल छलि । भारी मने धीरे – धीरे डेग उठबैत हम अपन डिब्बामे घुरि आयल रही । अचानक लागल जेना बहुत थाकि गेल छी । जा कऽ ऊपरका बर्थपर पड़ि रहलहुँ । पड़िते करेज टीसि उठल । नीचा गपसपसँ जे हल्ला होइत रहैक से असहनीय लागऽ लागल । होइत रहय सभकिछु निस्तब्ध आ शांत भऽ जाय । फेर लागल जेना हल्ला बहुत पाछू छूटि गेल अछि आ सामने श्रीलताक दिव्य आ कोमल चेहरा आबि गेल अछि –शीतल आ स्निग्ध ज्योत्सना सन निर्मल मुस्की छिटकबैत । फेर ओकर भयभीत आकृति मोन पड़ैत रहल । फेर श्रीलता ... शून्य प्लेटफॉर्मक गेट । भोरमे निन्न टुटिते श्रीलता मोन पड़ल आ बड़ी काल धरि उदासी आ अवसाद घेरने रहल । कलकत्तासँ हम चारिम दिन नहि घुरलहुँ। पाँचम दिन घुरल रही, जाहि सँ श्रीलतासँ फेर भेंट भऽ सकय । विशाखापतनम आबि हम हरेक डिब्बा आ प्लेटफॉर्म सगरे श्रीलताकेँ तकलहुँ ; एकबेर नहिकैक बेर । ओ कतहु नहि छलि । की भऽ गेलैक श्रीलताकेँ ? दुखित तँ ने पड़ि गेल? या हमरे कारणे काल्हिए चल गेलि ? हम खिन्न आ निराश भऽ कऽ अपन बर्थपर चल आयल रही । गाड़ी खुजैत काल लगैत रहल श्रीलता अखने दौड़लि आओति आ कूदिकऽ डिब्बामे चढ़ि जायत । विशाखापतनमक छुटैत हरेक घरक खिड़की आ बालकोनीकेँ हम एहि आशासँ देखने चल जाइत रही जे श्रीलताक झलक भेटि जाय । लेकिन ओ हमर दुराशा मात्र छल । पता नहि आब कहियो श्रीलतासँ भेंट होयत कि नहि। अखिलन ई कहि चुप भऽ गेल । हमरा किछु नहि फुरायल अखिलनकेँ की कहिऐक । हम सोचऽ लगलहुँ अखिलन आब की करत । भऽ सकैत अछि ओ विजयवाड़ा आ विशाखापतनमक चक्कर काटऽ लागय आ अखबारमे विज्ञापन बहार करबाबय । ओ आओर की कऽ सकैत अछि ? हमरा लागल अखिलन केँ श्रीलता नहियो भेटतैक, तइयो ओकर स्नेहक स्मृति रहि जेतैक आ अखिलनक आत्माकेँ आलोकित करैत रहतैक । विलायत वाली कनिया-कामिनी कामायनी अप्पन माॅटि पानि सॅ दूर ़बागमती सॅ बङ दूर ़आेहि जमाना के हिसाब सॅ ़बरखाें पहिने ़नर्मदा के क्षेत्र विदिशा में आबि क’ चिरंजीब बाबू बसि रहलाह। प्िाहने त’ किराए के मकान में रहैत छलाह़ ़मुदा किन्ए दिन में पाॅच कटठा क’ सुन्दर चाकर चाैरस प्लाॅट कीनि अपन मनाेरथ के पूर्ण करैत बङका टा के हवेली सन ठाढ कए लेलन्हि।एकदम पूरना रइर्स सभक नक्काशी दार झराेखा वाला हवेली ़बङ सुन्दर ऊज्जर झक झक करैत संगमरमरक हवेली ।धीरे धीरे आगाॅ पाॅछा के किछु आआेर जमीन सेहाे खरिदलन्हि । मुदा तखन इर् घर भरल रहैत छल ।मैंया छली ़बाबा छलाह ़यानि की चिरंजीबि बाबू के मा ़बाबू ़एकटा छाेट भाए ़आ’ दू टा छाेट बहिन क संग अपन पेलवार में दू टा बेटा आ’ तीन कन्या ।नाैकर चाकरक सेहाे कमी नहिं छल ।जतए गुङ रहैत छैक ़चुटी आेतए आबिए जाए छै ससरति । दूनू बहिनीक विवाह भ’ गेलए बेटी सब सेहाे अपन अपन घर चलि गेलन्हि ।म्ैांया आ’ बाबा एकाएकी अपन आखिरी जतरा प’ चलि गेलाह ।भाइर् मद्रास आ’ छाेटका दूनू बालक बाहरे पढैन्ह ़घर एकदम सुन भ’ गेलए ।नाैकर चाकरक गिनती सेहाे कम हाेमए लगलैन्ह चिरंजीब बाबू के वकालत सेहाे कम हाेमय लगलैन्ह ।अपन आ स्त्री दूनू व्यक्ति के स्वास्थ खराप ।घरवाली के डायबिटिज छलैन्ह़ ़गठिया सेहाे । अपन बी ़पी ़ हार्ट प्राब्लम । घरक सुन दूर करय लेल ज्येष्ठ बालक विभूति बाबू के विवाहक’ याेजना बनाआेल गेल ।आेहाे वकालत पढने छलाह ।पिता के हाथ बॅटबए आबि गेलाह विवाह भ’ गेलन्हि ।कनियाके जाैं चानक टुकङा कहि त’ इर् हुनक अपमान हाेएतन्हि आे त साक्षात चान छलीह ।पढल गुनल कनि कम्मे मात्र बीए पास ।मुदा हुनका सब के अपन पूताैह सॅ नाैकरी त’ नहिं करेबाक छलैन्ह ़तााहि लेल कन्याक गुण आ खानदान प’ विशेष ध्यान देल गेलए । पुताैह के आबए सॅ पहिने जेना आेहि घर में चुहचुही फेर सॅ आबि गेल रहै़ ।ङ्राइर्ंग रूमक साेफा आ झाङफानूस के नवीनीकरण कराआेल गेल ।बरखाें बाद आेहि मकान में रंगाइर् पाेताइर् भेल छल ।चिरंजीब बाब्ूा क’ प्रसन्नताक काेनेा ठेकाने नहि छल ।बङ गुणवान ़ सुशील लक्ष्मी कनिया घर में आबि गेलीह । विभुति बाब्ूा के माए सेहाे ब्ङ प्रसन्न ।पूताैह के बेटिए जेकाॅ नाम सॅ बजाबथि ‘भारती’ ।आ’ भारती साल भरि क’ भीतरे हुनका सब के चान सन पाेता सेहाे दए देलन्हि । मुदा खिस्सा इर् नहि थीक ।नै हुनक दाैलतक ़नै साेहरतक ।खिस्सा क’ विषय छल विभ्ूाति बाबू के छाेट भाए ़जे इंजीनियर छलाह ।आ’अपना पसिन्नक’ आन जातिक कन्या सॅ विवाह करि लंदन चलि गेल छलाह ़सेहाे कियाे आने कहलकैन्ह । कत्तेक दिन धरि माए बाबू के तामस ़दुःख ़दर्द काेढ करेज में हिलकाेर मारैत रहलैन्ह ।पीर रहि रहि क’ टसि मारै ।आ’ कानैत कानैत ़माए बताहि भ’ जाइथ ।तखन चिरंजीब बाबू समझा बूझा क’ चुप्प करबथि ।पूर्व जन्मक पाप कहैथ आ” आन धिया पुता दिस ़पाेता पाेती दिस धियान लगाब’ कहैथ ।पूजा पाठ ़रामायाण ़भागवत सब त’ चलिए रहल छल । सप्ताह पन्दरह दिन प’ महाकालक’ दर्शन करि आे खूब मिनती करैथ ‘महाकाल ़सब सुख देने छी।छाेटका बेटा घूइर आबए ़़़़़़़़ ़़बस एक बेर मुॅह देख ली ़ फेर जतए रहै ़आहाॅ खुस रखबै ।’ प्रवासी क’ जीनगी भले सुख चैन सॅ ़ग्रामीणक’ हङ हङ खट खट सॅ दूर लगैत अछि ़मुदा इर् एकटा काल काेठरी के सजा जेना भ’ जाइत अछि ।अपन समाज क’ नीक बेजाय सॅ दूर ़संस्कृति आ’ रीति रिवाज सॅ मिलबाक लेल कखनाे क माेन आेइना जाए ़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़फूसियाही गप ़़़़़़़…आहे माहे ़़़़……इतियाैत पितियाैत ़़़़़़़़।आेहि में एकटा फराक सिनेह छै ।असगर ़असगर नहि लगैत अछि ।ज्याें ज्याें उमरि बढए लगलन्हि दूनू व्यक्ति के अपन गाम माेन पङय लागल।चिरंजीबी बाबू के स्त्री साेन दाय त’अपन मातृभूमि लेल आेहिना बेकल भ’ जायथ ़जहिना छाेटका पुत्र लेल । अहिना करैत करैत दिन बीतैत रहलै ।तीनाे बेटी के विवाह ़जबलपुर ़भाेपाल आ” इंदाैर मे भेल रहै ।अहि प्रकारे मिथिला सॅ संपर्क टूटले जकाॅ छलैन्ह ।कहु त’ करीब करीब सबटा लगक’ संबंधी इम्हरे उम्हर छल ।मुदा सब अपन अपन काज मे व्यस्त ।पूताैह भारती अहिना बङ कम बजैत छली ़आ’ मैथिली त’ बिसरिए गेल छलथि ।अहि मे हुनक काेन दाेख ।नैहराे मे सब कियाे हिन्दीए बजैत छल । आैनाइत बाैआइत माेन ़साेनदाय के बङ दिक करैन्ह ़त’ शारीरिक व्याधि आआेर बढि जाय ।गठिया के प्रकाेप एत्तेक बढि गेलन्हि कि दुनु ठेहुन जेना जकङि लेलकैन्ह ।जाङ मास में घरक बाहैर बगीचा मे लागल झूला प’ भारती बैसा दैत छलैन्ह ़़़़़़खवासिन चुप चाप हुनका मालिस करैन्ह ।दूर दूर ़़़़़़़़ ़ ़़ धरि हुनक दृष्टि घुइम फिर क’ वापस माली वाली प’ टिक जाए ।आदिवासी छैक ़हिन्दी बस दू चारि आखर जनैत अछि ।छत्तीस गढी बाेली बाजए लागैत छै ़जे साेनदाय के ब्ङ कम आबै ।आेकरा सॅ फालतु के गप केनाए सेहाे व्यर्थ ।पाॅच बीघा मे पसरल हुनक काेठी खे आगाॅ पाॅछा गाछिए गाछ ़़़ ़ ़़सब तरहकफल फूलक’ जेना आधुन्कि कण्व आश्रम हाे ।चिरू बाबू के पेङ पाैधा सॅ बङ लगाव । सङकक दाेसर कात सिन्धी ़पंजाबी सबहक काेठी छलैक ़़़़़़़़़़ ़़़कखनाे काल निमंत्रण प’ एनाय जेनाय हाेइत छल ।मुदा आब आे ़़़़़़़ ़़़़़़ ़़़नाटक बाज जिनगी सॅ तंग आबि गेल छलीह । विभुति बाबू पिता संग काेट चलि जायथि आ’ भारती दूनू बच्चा के स्कूल पठा क’ साैस लग बैस कखनाे कल्याण पढि कए सुनाबथि ़कखनाे गीता ़ कखनेा हिन्दी के एकबार ़़़ ़़ ़ ़ मुदा नब नुकूत आजू क’ जुबती कखनाे बाेर भ जाइत छली ़़ ़़़ ़।कतेक बेर घर वला के कहलन्हि ़बी़ एड’ करि लैत छी ़मुदा आे अनठबैत गेला़ ‘फुरसत कत्तए अहाॅ के ।बच्चा सब ़माॅ ़ ़़ बाबूजी हम ़घर दुआर ।” आ’ अहि घर दुआरक गिरहस्थी क’ तिलिस्म में हुनका आेझरा क’ राखि देने छलाह । एक दिन भिनसरे भिनसर जुलाइर् मास क’ घनघाेर बादरि आ’ बिजुरि आकाश मे हाेड लगाैने छल ।पानि अखन पडबा सुरू नहि भेल छलै कि घरक घंटी बङ जाेर सॅ बजलै ।नाैकर सूतले छल । चिरू बाबू चाैकला ।आेना त’आे चारिए बजे आे उठि जाएत छला मुदा आए कनि अस्वस्थ सन माेन लागैत छलैन्ह ़़़़़ ़़ ़ ़ ‘एखन के भ’ सकैत अछि’ ।उठि क दरवज्जा खाेलला ़़ ़़ ़ ़ ़। अन्हार छलै ।बिजुरि से चमकै ।बरांडा के लाइट जराैला त’ धक सॅ रहि गेला ़़़़़़ ़़ ़ वरूण छलाह ़़ ़ ़़हु नक करेज त’ ततेक जाेर सॅ धक धक करए लगलन्हि कि आे एक क्षण विलैम क’ इहाे नहि देखला’ जे हुनक संग आर कियाे छन्हि वा’ नहि ।नेना जेका चिकरैत ़़ ़ ‘ सुनै छी वरूनक’ माए ़़़़़ ़़ ़यै उठु यै ़़़़़़ ़़देखू बाैआ आयल ़़़़़़ ़़़।’आ’ भाैकासी पाङि क कानय लगला ।साेन दाय हङब्ङा क’ उठि गेलीह आ बिन गप बूझने हुनका कनैत देखि क’अ अपनाे कानय लगलीह ।ताबैत वरूण आ’ हुनक स्त्री पाॅच बरक कन्या सॅग घरक भीतर प्रवेश क चुकल छला ।माए बाबू के कनैत देखि हुनक पएर छूबैत बजला ़ ‘कथि लेल कनैत छी ।आब’ त हम आबिए गेलहू।’ उम्हर कनबा के साेर सुनि विभ्ुाति बाबू आ’ भारती से हाे अपन काेठरी सॅ बहरैला ।सबहक धियान वरूण प छल ।भाए भायक’ गल लगला ्र।पाॅच हाथक गाैर वर्ण वरूण ़़़़़़़ ़़आआेर सुन्नर लगैत छला कनि विलंब सॅ हुनक सबहक नजरि संग आयल स्त्री प’ पङल्ैान्ह । तखन आे हङब्ङा क’ बजला ‘इर् हीना़ ़ ़़ ़़ ‘हीना माॅ बाबूजी ़भैया भाैजी के प्रणाम करियाै’।अंगरेजी मे बजलाह ।भाउज के कहला ‘इर् हिन्दी बेसी नहि जनैत अछि । सब अवाक भ हुनका देखय लागल ।छाेट सन ़दूबर पातरि ़़़़़़़़़़़़ ़ ़़ ़पिरस्याम ़़ ़ ़ ़ नाक नक्स सेहाे नीक नहि ।नै जानि कि देखला वरून अहि मे ़़़़़़ ़़ ़़ ़़घर पेलपेलवार सब के बिसरि गेला ़़़़़ ़़ ़़साेन दाय माेने माेन साेचए लागल छलीह । आ” पाॅच वर्खक स्वीटी एनमेन वरूण जेकाॅ ।वएह छूरी सन नाक ़ बङका बङका आॅखि आ’ दप दप करैत गाैर वर्ण ़ ़ ़ ़।चिरू बाबू आेकरा अपन काेरा मे बैसब के काेशिश केलाह त’ कनि कनि सकपकाएल सन ़आे हुनक कात मे राखल कुर्सी प’ संच मंच भ” क बैस गेल । पन्दरह दिनक प्राेग्राम छल ़़़़़ ़ ़़ आे सब इंडिया घूमय आएल छलाह ।बाबूजी लेल पाइर्प ़जे आे हुनके वियाेग मे छाेङि चुकल छलाह़ ़़़़़ ़़मॅा लेल दुशाला ़़़़ ़़ भैया भाैजी आ’ बच्चा सब लेल अंदाजे सॅ किछ किछ सनेस । हिना क नाम सकीना छल ़आै केरल के छलीह ़़़़़ ़ ़़लंदन के एक गाेट नर्सिग हाेम मे काज करैत छलीह ।रूप रंग जे हाेयन्हि ़़़ ़ ़ ़पूर्ण व्यहवार कुशल ़़़़ ़़ ़़हिन्दी बाजए नहि आबए ़मुदा बाजए के काेशिश करथि । घुमनाए फिर नाए सॅ जे टैम बचै ़साैस लग बैसथि ़़़हुनक गेठिया के दवाए आनैत कि खेबाक चाही कि नै ़़़़ ़़ ़ ़ ।पथ परहेज ़़़़़ ़ ़़ एकटा चार्ट बना क’ डायनिंग रूम मे टाॅगि देलखिन्ह । शाेन दाए के दम्मा सेहाे रहैन्ह ़़़़़ ़़कखनाे क’ ततेक माेसकील भ’ जाए कि उपरक’ सांस उपरे रहि जाए ।घबङाक’ चीरू बाबू के राति बिराति डाक्टर बजब पङैन्ह ।हीना आक्सीजन वाला छाेटका़ मशीन आनने छलीह अपन काेने रिश्तेदारक लेल ़ ़़़़़ ़़ माॅजी के देलथि ।इर् दवाइर् उ दवाइर् ़़़़ ़़ ़ ़ एना सेवा आेना सेवा ़़़ ़़ ़एना उठू एना बैसू ़़़़़़ ़ ़़़’आ’ साेन दाय नेना जेकाॅ हुनक गप्प मानि सबटा करैथ ।हिना राेज भाेर सांझ हुनका रक्सर साइज सेहाे कराबथि । आ सत्ते ़सप्ताह भरि मे साेन दाए बङ स्व्स्थ भ’ गेलीह ।आब कनि कनि दूर बिन मददि के चलि लैत छलीह ।आक्सीजन मशीन सॅ चिरू बाबू के दुश्चिन्ता से दूर भ गेलन्हि ़़़ ़ ़़ राति बिराति कखन की हाेयत ़़़़़़ ़ ़़ प्राण अधर मे लटकल रहैत छलैन्ह ़़। पन्दरह दिन काेना बीतलै ़़़़़़़़ ़ कियाे नहि जानि सकल ।जेबा के दिन वरूण माए बाबू सॅ कहला ‘हमरा माफ करि देलहू नै ।हम फेर आयब ़ मुदा जाै जाै अहाॅ सब कानब त’ नै आयब ।’ आ सत्ते जयबा काल हुनका दूनू मै सॅ कियाे नहि कानल छल । वरूण के गेनाए सप्ताह भरि भेल हेतैक कि पहिल फाेन आयल छल ़़ ़ ़ ‘अहाॅ सब काेना छी ़ ़ ़ ़’ हीना से माॅजी सॅ बीस मिनट गप्प करि सबटा हाल चाल पुछलकैन्ह़ ़़’हुनका सबहक आॅखि मे जे चमक आबि गेल छल से दूरै सॅ देखार भ’ गेल छल ।मास दिन प’ दाेसर फाेन ।़ ़ ़ ़ ़छह मास प’ तेसर । आ’ आब दू बरक भ’ गेलए ़़़़़़एखन धरि काेनाे फाेन नहि आयल छल । इम्हर साेनदाए के बेटी जमाए सब भेंट करए लेल आबैत रहलैन्ह । भारती परछाइर् जकाॅ भरि दिन पाछाॅ पाछाॅ।साैस लग इर् दबाइर् ़़ ़ ़ इर् दारू ़़़ ़़ ़ इर् गाेटी नेने ठाढ ।हुनक माेन कनि बेसी असक्त भ’ गेल छलैन्ह ।पकङि कए टहलाबए उठाबए पङै ।कखन की खेतीह ़़़़़ ़़आ” संगहि संग पाहुन पङकक आवभगत सेहाे ।काेना इंदाैर वाला आेझा खेताह ़ ़़ ़कत्त सूतता ़़़़ ़़ ़ रायपुर वाला पीसा खेला कि नहि ़़़़नाैकर बाबू जी के पान लगा क पनबटा मे देलकन्हि की नहि ।आ’ अपन दूनू छाेट नेना भुटकाक’ दिनचर्या ़ पढाय लिखाए ़़़ ़ ़़।दूनू अपन अपन क्लास मे फर्स्ट आबैत छल । भरि दिन घिरनी जेका घूमैत भारती के देखिक भाेपाल वाला जमाए बाजि उठला ़ ‘माॅजी ़हिनका ््््््््््््््््् पुताैह महाकालक कृपा सॅ बङ नीक भैटले्े्ैन्ह ।कतैक सेवा करैत छन्हि ।हिनकाे आ प्ूृृृरा घर क देखभाल सेहाे ।’ आब साेन दाए के गठिया के सं ग हार्ट के बिंमारी सेहाे धए नेने छल धए नेने छल । बङी काल धरि कुर्सी प’ गुम सुम बैसल ़किछु साेचैत साेचैत ़ ़़ ़ खनि देर मे साेन दाए बाजल छली़़़़़़ ़ ़़ “आेझा ़़़़़़़़ ़़ विलाएत वाली कनिया बङ नीक’ । कामिनी कामायनी 25।3।09 उपन्यास- प्रत्यावर्तन - पहिल खेप -कुसुम ठाकुर १ एक बेर हमरा एकटा पत्रिकामे किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखि सकलहुँ- "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आइ बुझना जाइत अछि जे नञि, हमरा एकटा कर्तव्यक निर्वाहण करबाक अछि। २ हम सदिखन अपनाकेँ हुनकर शिष्या सहचरी आ नहि जानि कि सब बुझैत रही। हुनक कि एकोटा एहन रचना छलनि जकरा कि हम पूरा होमसँ पहिने कै-एक बेर नहि सुनइत रही। हम तँ हुनक एक- एक रचनाकेँ ततेक बेर सुनइत रही जे करीब करीब कंठस्त भऽ जाइत छल। एक एक संवाद आइ धरि ओहिना हमर कानमे गूंजैत रहैत अछि। हम तँ हुनक सबसँ पैघ आलोचक, सबसँ पैघ प्रशंसक रही। अद्भुत कलाकार छलाह, एक कलाकारमे एक संग एतेक रास गुण भरिसक नहि होइत छैक। लेखक, निर्देशक, अभिनेता,गीतकार, संगीतकार, सब गुण विद्यमान छलन्हि। हमरा कि बुझल रहए जे नीक लोकक संग बेसी दिनक नहि होइत छैक। भगवनोकेँ नीक लोकक ओतबे काज होइत छैन्ह जतबा कि मनुष्य केँ। हम तँ भगवानसँ कहियो किछु नञि माँगलियनि, बस हुनक संग सदा भेंटय- यैह टा कामना छल। मुदा एक टा बात निश्चित अछि जे जओँ भगवान छथि आ कहियो भेटलथि तँ अवश्य पुछ्बन्हि जे ओ हमरा कोन गलतीक सजा देलथि, हम तँ कहियो ककरो ख़राब नञि चाहलियैक। एतेक कम दिनक संग, परंच ओ जे हमरा पर विश्वास केलन्हि आ हमरा स्नेह देलन्हि, शायद हमरा सात जन्मोमे नहि भेट सकैत छल। एखनो जँ हम हुनक फोटोक सोझाँ ठाढ़ भऽ जाइत छी तँ बुझाइत अछि जे ओ कहि रहल छथि- हम सदिखन अहाँक संग छी। ३ जाहि दिन हम पन्द्रह बरखक भेलहुँ ओकर दोसरे दिन हमर विवाह भऽ गेल। ओहि समय हम विवाहक अर्थ की होइत छैक सेहो नञि बुझैत छलियैक। हम तँ मैट्रिक केर परीक्षा दऽ अपन पितिऔत बहिन केर विवाह देखय लेल गाम गेल रही। हमरा की बुझल छल जे हमरो विवाह भऽ जायत। ओहि समय हमर बाबूजी अरुणाचल (ओहि समय केर नेफा ) मे पदासीन छलाह, हम रांचीमे अपन छोटका काका लग रहि कऽ पढ़ैत रही । हमर पितिऔत बहिन केर विवाह भेलाक तुरंत बाद हमर बाबूजी आ छोटका काका कत्तहु बाहर चलि गेलाह, कतय गेलाह से हम नञि बुझलियैक। हम सब भाइ-बहिन आ हमर छोटका काकाक बड़की बेटी, अर्थात हमर पितिऔत बहिन सेहो हमरा सब संग गाम पर रहि गेलि, कारण हमरा सबहक स्कूलमे गर्मी छुट्टी छलैक , हम सब खूब आम खाइ आ खेलाइ। मुदा हम देखी जे हमर दादी हमरा किछु बेसी मानथि। अचानक एक दिन भोरमे जखनि हम उठलहुँ तँ देखैत छी जे सब कियो व्यस्त छथि। हमर दादी सब काज करनिहार सबकेँ डाँटि रहल छलीह, कहैत छलीह- " आब समय नञि छैक, जल्दी जल्दी काज करए जो"। हमरा किछु नञि फ़ुराइत छल जे ई की भऽ रहल अछि। हमरा देखिते हमर दादी कहलथि- "हे देखियौ, अखनि तक ई तँ फराके पहिर कऽ घूमि रहल छथि"। हमरा किछु बूझयमे नञि आबि रहल छल जे ओ की बजैत छलीह। तखनि हमरा ध्यान आयल जे किंसाइत हमर जन्मदिन काल्हि छैक ताहि दुआरे दादी कहैत हेतीह- हमरा किचकिचाबए लेल। ओ सब दिन कहैत छलीह जे अइ बेर जन्मदिनमे अहाँकेँ साड़ी पहिरय पड़त आ हम खौँझा जाइत छलहुँ। ई सब सोचिते छलहुँ ताबत देखलियैक जे छोटका काका आँगन दिस आबि रहल छलाह। हुनका संग हमर बाबा सेहो छलाह । ओ दुनु गोटे दलान पर सँ आबि रहल छलाह , से बाबा के देखला सँ बुझयमे आबि गेल । हुनका सबके देखिते हमर माँ आ दादी दुनु गोटे आगू बढ़ि कऽ हुनकर स्वागत केलथि आ माँ केँ हम कहैत सुनलियैन्ह- "आब कहू जल्दी सँ जे लड़का केहेन छथि"। हमरा किछु नञि बुझना जाइत छल, तावत हमर काका हमरा दिस देखलथि आ देखिते देरी कहलथि- “ अरे तोहर बियाह ठीक कऽ कए आयल छियहु, मिठाइ खुआ”। हम तँ एकदम अवाक रहि गेलहुँ। हम ओतय सँ भागि कऽ अपन कोठरी मे आबि बैसि कऽ सोचय लगलियैक, आब की होयत हम तँ अपन दोस्त सब केँ कहि कऽ आयल रही जे अपन दीदीक बियाह मे जा रहल छी , ओ सब की सोचत। हमरा एतबो ज्ञान नहि छल जे हम बियाहक विषय मे सोचितहुँ।, हमरा चिंता छल जे दोस्त सब चिढायत। बेश, कनि कालक बाद सँ हमर भाय बहिन सब खुशी खुशी हमरा लग अबथि आ सब गोटे खुशी खुशी कहथि, " हम सब नबका कपड़ा पहिरबय"। ओ सब त आर बहुत छोट छोट छलथि, हमही सबसँ पैघ छी। हमर काका जल्दी जल्दी स्नान ध्यानक बाद भोजन कऽ तुरंत चलि गेलाह, पता चलल जे ओ बरियाती आनय लेल गेलाह। ओहि दिन, दिनभरि सब व्यस्त छलथि। हम अपन माँ केँ व्यस्त देखियन्हि, परंच खुश नञि लगलीह । भरि गामक लोकक एनाइ-गेनाइ लागल छलय। दोसर दिन भोरे हमर बाबूजी अयलाह । हुनका चाय देलाक बाद आ हुनका सँ गप्प केलाक बाद माँ केँ हम प्रसन्न देखलियन्हि। तावत धरि हमहूँ बूझि गेल छलियैक जे आब सत्ते हमर विवाह भऽ रहल अछि आ हमरा दोस्त सब सँ बात सुनइये पड़त आ ओ सब चिढायत तकरा सँ हम नहि बचि सकैत छी। ओहि दिन हमर जन्मदिन सेहो छलय, साँझमे दादीकेँ मोन रहि गेलन्हि आ हमरा साड़ी पहिरय पड़ल। ४ खैर हमर विवाह बड़ धूम धाम सँ भेल आ हम तेहेन लोकक जीवन संगनी बनलहुँ जे हमर जीवन धन्य भऽ गेल। गामक ओ समय हम कहियो नञि बिसरि सकैत छी। ई ओहि समयक गप्प थिक जखनि कि हमर बहिनक विवाह भऽ गेल छलन्हि आ ओ सभ चलि गेल छलीह। हमर बाबूजी आ छोटका काका हमरा लेल वर ताकय लेल गेल छलथि। आइ-काल्हिक हिसाब सँ तँ हम ओहि समय एकदम बच्चा रही आ शहरमे रहलाक कारणेँ हम गाम घरक बहुत किछु नहि बुझैत छलहुँ। सब सँ बेसी विवाह बैसाख, जेठ आ आषाढ़ मे होइत छैक, अर्थात शुद्ध रहैत छैक। ओहि ज़मानामे अर्थात १९७२ ईस्वी मे गामक रौनक किछु आर रहैत छलय। प्रतिदिन कतो ने कतो विवाह होइत छलैक जाहिमे दादी हमरा लय जयबाक आग्रह अवश्य करैत छलीह। हमहूँ कहियो विवाह नय देखने छलहुँ, पहिल विवाह हम अपन दीदीक (पितिऔत ) देखलियन्हि। ओही समय मे बेसी विवाह सभा सँ ठीक भेलहा सब रहैत छलैक जाहि कारणेँ हरबड़ी वाला विवाह हमरा देखय कs ओतेक इच्छा नञि होइत छल, मुदा दादी केँ मोन रखबाक लेल हुनका संग कतहु-कतहु चलि जाइत छलहुँ। ओहि समय हम परीक्षा फलक प्रतीक्षामे रही आर कोनो काजो तँ हमरा नहि छल । एक दिन हम, माँ आ दादी आंगनमे बैसल छलियै कि एकटा खबासनी आयल आ दादी केँ कहलकन्हि- " मलिकैन कनि एम्हर आयल जाओ "। ई सुनतहि दादी ओकरा लग चलि गेलीह, पता नञि ओ हुनका कि कहलकन्हि। कनि कालक बाद दादी हमरा कहलथि- "चलऽ हम तोरा एकटा सोलकनि सबहक विवाह देखाबैत छियौक"। हमरा आश्चर्य भेल जे आइ दादी केँ की भेल छन्हि जे ओ हमरा सोलकनिक विवाह देखय लेल कहैत छथि। हम आश्चर्य सँ पुछलियन्हि- "अहाँ सोलकनिक विवाह देखय लेल जायब "? दादी मुसकैत हमरा कहलथि- "चलहि नय अहि ठाम, ब्रम्ह-स्थान लग बरियाती छैक, दूरे सँ खाली बरियाती देखि चलि आयब दूनू गोटे"। हमारा मोन तँ नहि होइत छलय बरियाती देखबाक मुदा हम दादी केँ संग जएबाक लेल तैयार भऽ गेलियन्हि। ब्रम्ह-स्थान लगे छलय, हम दुनु गोटे जखन ओतहि पहुँचलहुँ तँ देखलियए जे ओतहि बीच मे पालकी राखल आ ढोल पिपही बाजैत छल, जों आगु बढ़लहुँ तँ देखैत छी जे ओहि पालकी मे वर मुँह पर रूमाल देने बैसल छथि आ एकटा बच्चा हुनका आगू मे बैसल छलन्हि, बरियाती सब सेहो बैसल छलैक। खैर हम सब आगू बढिकऽ बरियाती लग पहुँचि गेलियैक। हमरा निक भलहि नञि लागैत छल मुदा पहिल बेर अहि तरहक बरियाती देखैत रही। हम आश्चर्य सँ बरियाती देखैत रही कि कनिये कालक बाद सब बरियाती ठाढ़ भऽ गेलथि आ पिपही ढोल जोर सँ बाजय लगलय। हम सब कनि पाछू भऽ गेलहुँ, जहिना पालकी उठलय कि हमरा माथ पर कियो पानि ढ़ारि देने छल। हम तँ हक्का बक्का भऽ कऽ एम्हर-ओम्हर ताकय लगलहुँ, तँ देखैत छी दादीक हाथमे गिलास छलन्हि। हम कानय लगलियए। ई देखि कऽ दादी हँसैत तुरंत हमरा कहलथि- “गर्मी छलैक ताहि द्वारे ठंढा कऽ देलियौक।“ हमरा बड़ तामस भेल। हम सब जखनि घर पहुँचलहुँ, हम कानइत माँ सँ कहलियए- “ हम कहियो दादी संग विवाह देखैक लेल नञि जायब”। हमर एकटा पीसी ओहि ठाम बैसल रहथि, कहि उठलीह, " नञि कानी, तोहरे निक लेल केलथुन"। हमरा किछु नञि बुझय मे आयल आ बकलेल जकां हुनकर मुंह देखैत पुछलियन्हि- "कि नीक भेल, सभटा कपड़ा भीजि गेल"। ई सुनि कऽ ओ कहलथि- "गय बरियातीक जेबा काल पानि माथ पर देला सँ लोकक विवाह जल्दी होइत छैक, ताहि लेल तोरा पानि देलथुन "। हम आर जलि भुनि कऽ ओतए सँ चलि गेलहुँ। ओकर कनिये दिनक बाद हमर विवाह भऽ गेल। ५ जहिया हमर विवाह भेल ओहि समय हमर घरवाला श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर इंजीनियरिंगक अन्तिम बरखमे पढैत छलाह। हम मैट्रिकक परीक्षा देने रही आ परीक्षा फल सेहो निकलि गेल छल। हमर विवाह आषाढ़ मास मे (दिनांक १३ जुलाईकेँ भेल छल। विवाहक तुंरत बाद मधुश्रावणी छलैक ताहि द्वारे हम गाम पर रही गेलहुँ आ हमर काका मधु-हमर पितिऔत बहिन-के संग राँची चलि गेलाह । काका हमरा कहैत गेलाह जे ओ हमर परीक्षा फल आदि स्कूल सँ लऽ कॉलेज मे हमर नाम लिखवा देताह। तैं हम निश्चिन्त रही। हमर काका नाम लिखवेलाक बाद हमरा खबरि सेहो कऽ देलन्हि। हमर नाम "निर्मला कॉलेज रांची" मे लिखायल छल। दादीक आग्रहपर हमरा गामपर रहि मधुश्रावनी करवाक छल, बहिनक विवाह सँ अपन विवाह आ मधुश्रावनी धरि करिब दू मास सँ बेसी रहय पड़ल छल। हम पहिल बेर अपना होश मे एतेक दिन गाम पर एक संग रहल रही। ओना तँ हम सब, सब साल गाम जाइत रही, मुदा एक संग एतेक दिन नञि रहैत रही। ओ पहिल आ अन्तिम बेर छल जे हम गामक मजा निक जकां ल सकलियैक। चतुर्थी आ दहनहीक बाद सब गोटे चलि गेलाह। हिनको कॉलेज खुजल छलन्हि, ईहो- हमर घर वाला- मुजफ्फरपुर, अपन कॉलेज चलि गेलाह। आनक गेलापर ओतेक सुन्न नञि लागल, मुदा जहिया ई गेलाह ओहि दिन बड़ सुन लागल। ई किएक होइत छैक नहि जानि, विवाह होइतेक संग एतेक प्रगाढ़ सम्बन्ध कोना भऽ जाइत छैक जे एक दोसरा सँ अलग रहनाइ निक नञि लागैत छैक। दादी हिनका सँ करार करवा लेलथिन जे मधुश्रावणीमे अवश्य अओताह। दादी केँ तँ हँ कहि देलथि मुदा हमरा सँ कहलथि ओ नहि आबि सकताह। हमर मोन तँ छोट भऽ गेल मुदा फेर सोचलहुँ हमर तँ क्लास छूटिये रहल अछि हिनकर किएक छूटन्हि। हम कहलियन्हि किछु नञि, ओहि समय मे हम हिनकर बातक हँ वा नञि मे जवाब दैत रहियन्हि। ओनाहुँ हम कम बाजैत रही आ हिनका सँ तँ निक जकाँ बाजय मे हमरा एक साल लागि गेल। गाम पर बाबा दादीकेँ छोड़िकऽ घर मे, हमर माँ बाबुजी आ हम छहु भाय बहिन रही। ओहि समय मे असगरो जे सभ गाम पर रहैत छलाह वा छलीह, किनको ई नञि बुझाइन्ह जे असगर छथि । आ हमर घर मे तँ विवाह भेल छल। रोज भोर साँझ गाम घरक लोकक अएनाइ-गेनाइ लागल रहैत छलैक। एक तँ अहुना जहिया जहिया हम सब गाम जाइ, लोक सबहक एनाइ-गेनाइ लागल रहैत छलैक आ अहि बेर तँ हमर विवाह भेल छल। अहि बेर कनि बिशेष लोकक एनाइ-गेनाइ रहैत छल आ हमर कनि विशेष मान-दान सेहो होइत छल। कहियो कतहुँ सँ खेनाइ आबय कतहुसँ खोइंछ भरय कऽ लेल कियो कहय लेल आबथि , सभ कियो एतबा अवश्य कहथि, ठाकुरजी बड़ जल्दी चलि गेलथि। दादी सभकेँ कहथि-“ फेर जल्दिये अओताह, पंचमी सँ मधुश्रावणी धरि रहताह”। हुनका सभ केँ की बुझल जे ठाकुर जी नञि आबि रहल छथि, हम सुनि कऽ चुप रही, किनको किछु नञि कहियन्हि, माँ तक केँ नञि कहने रही, मुदा जखन हिनकर एनाइ-गेनाइक गप्प सुनि मोन उदास भऽ जाय। हमर जहिया विवाह भेल हम ओहि समय फ्राक या स्कर्ट ब्लाउज पहिरै रही। अचानक हमरा साड़ी पहिरय पड़ि गेल। जहाँ कियो आबथि, ख़ास कऽ मौगी महाल महक तँ हमरा बजायल जाय। हमर बहिन सभ दौड़ कऽ हमरा लग अबथि कहय कऽ लेल, ओकर बाद हम जल्दी सँ ककरो सँ साड़ी ठीक करवाबी आ तखन्हि हम हुनका सभ लग जाइ। दियादि महक काकी-पीसी सभ गोटेमे सँ बराबरि कियो ने कियो रहैत छलीह, ओ सभ ठीक कऽ देथि, तइयो कैक बेर हमर पैर साड़ी मे फँसल होयत आ हम खसल होयब । जे कियो आबथि एतवा अवश्य कहथि, " देखियौ कुसुम केहेन लागैत छथि"। आ देखलाक बाद कहथि- "बड़ सीरी चढ़ल छैक"। कतेक निश्छल भावना आ कतेक अपनापन रहैत छलैक हुनका लोकनि मे। हमर दु तीन टा पीसी सेहो ओहि समयमे ओतहि रहैत छलीह, जिनकर सबहक विवाह ओहि बरख भेल छलन्हि आ ओ सभ हमर संग तुरिया छलीह। भरि-दुपहरिया घर भरल रहैत छल, हुनका सभ संग ओहिना समय बीति गेल आ पंचमी आबि गेल। पंचमी सँ एक दिन पहिने भोरे भोर हमर सासुर सँ भार आयल, ओहि मे सब किछु बिधक ओरिओन सँ आयल छल। भरि गामक लोक केँ दादी हकार दियवा देलथिन, सभ भार देखैक लेल आबथि आ जे देखथि से कहथि, एतेक निक भार किनको ओतहुसँ नञि आयल छलैक, गाम पर सभ गोटे भार देखि कऽ बड़ प्रशंसा करथि, हमरा ई सुनि बड़ निक लागय। जिनका हम कहियो देखने सुनने नय- हुनकर प्रशंसा सुनि हम खुश होइ। हमर दादी सेहो खुशी सँ सबकेँ कहथि- “अरे महादेव झा ओतय सँ भार आयल अछि”। हमरा ओहि समय मे किछु नञि बुझाय, हम सोची हमर ससुरक नाम तँ हीरानंद ठाकुर छन्हि, दादी बेर बेर किएक कहैत छथि महादेव झा ओतय सँ आयल अछि। हम पुछऽ चाही किनको सँ मुदा एम्हर ओम्हर मे बिसरि जाइ। कॉलेज सँ हमरा ई प्रतिदिन एकटा चिट्ठी लिखथि, ओहि मे सब दिन जवाब देवाक लेल लिखैत छलथि, मुदा हमरा जवाब देबय मे लाज होइत छल। एक दिन हमर भाय आ बाबुजी कोनो काज सँ मुजफ्फरपुर जाइत छलाह। ओहि दिन हम पहिल चिट्ठी लिखि कऽ भाय केँ देलियन्हि जे हुनका दऽ देबाक लेल। पंचमी सँ एक दिन पहिनहि भोर मे भार आयल छल, साँझ मे बाबुजी सब केँ सेहो अयबाक छलन्हि। हमरा अपन संगी आ पीसी सब संगे फूल लोढ़य लेल जयबाक छल। दादी सब ट्रेन सँ हिनकर बाट ताकथि अंत मे हमर बहिन सब सँ कहि पुछओलथिन, हम बहिन सबकेँ कहि देलियन्हि- हमरा किछु नञि लिखने छथि। दादी तकर बाद सँ निश्चिंत भऽ गेलीह आ तखन सँ कहथि जे तोहर बाबुजी सब संग अवश्य अओताह। साँझ मे सब घाँउझ बान्हि कऽ हमरा ओतहि आयल देखए लय- सबहक हाथ मे फूल डालि आ पथिया छलैक कियो-कियो अपन खबासिनीकेँ सेहो संग मे लऽ लेने छलथि किछु कुमारि सब सेहो संग मे छलथि । हमरो संग दादी एकटा खबासिनी लगा देलथि ओ हमर फूल डालि आ पथिया लऽ लेलथि। हमसब पूरा टोलक सब गोटे गीत गाबैत हँसी मजाक करैत अपन अपन फूल डालि पथिया लेने पहिने गाछी दिस गेलहुँ। दादी हमरा हिदाइत देने रहथि- जे बाँस वा अन्य पैघ गाछक पात कियो तोरय, जाहि जूही कऽ पात आ फूल सभ हम अपने तोड़ी। हमरा बड़ पोल्हा कs कहलथि- "हे मधुश्रावणी लोक केँ एकय बेर होइत छैक जहिना कहैत छी कयने जाउ"। हमहुँ निक बच्चा जकाँ मुरी हिला कऽ हँ कहि देलियनि। हम सब, सब सँ पहिने बंसबट्टी दिस बिदा भेलहुँ। बाँसक पात तोड़लाक बाद हम सब जाहि जूही आ अन्य अन्य पात आ फुलक खोजि मे सबहक बाड़ी-बाड़ी जाइ आ सभ तरि सँ फूल सभ बटोरैत जाइ। हमरा तँ बुझलो नञि छल जे कोन - कोन फूल आ कोन-कोन पात चाही। जेना जेना सभ कियो तोड़थि हमहुँ तोरैत जाइ। दादीक हिदाइत हमरा मोन छल। हम पथिया टा नहि उठा पाबैत रही, सेहो हमर पितिऔत बहिन, देयादि महक छलीह - से उठा दैत छलीह। जखन्हि हमरा सभ गोटे कहलथि जे आब भऽ गेल, हमहुँ हुनका सभ संगे आपस हेबाक लेल चलि देलियन्हि। हमरा देखि कऽ ततेक आश्चर्य भेल, हमसभ एक-एक पथिया भरि कऽ पात जाही जूही लऽ लेने रहि। आब ओ हमरा बसक नहि छलैक जे ओ हम उठा कऽ एको डेग आगू बढितहुँ। हमर पितिऔत बहिन ओकरा अपन माथ पर लऽ कऽ चललीह। रास्ता भरि हँसी मजाक होइत छलैक, ओही मे सँ बेसी मजाक हम नहि बुझैत रही। बिच-बिचमे बटगमनी सेहो हैत छलैक। इहो गप्प होइत छलैक जे किनकर सभहक वर आयल छथि आ किनकर सभहक बाद मे अर्थात मधुश्रावणी सँ पहिने अओताह। हमारो सँ सब पुछथि, हम किछु नञि, बाजी हमरा लाज होइत छल। नहि बजला पर सभ हमर आर मजाक उड़ाबथि, हम अहिना दुखी छलहुँ ताहि पर ई सभ मजाक करथि। कखनो मोन होइत छल बेकारे सभ संग अयलहुँ। हमरा होइत छल हम कहुना घर पहुँची, हम मजाक सँ तंग आबि कऽ अपन बहिन सँ जे पथिया लेने रहथि, कहलियन्हि, अपना सब आगू चलू। हम सभ आगू जल्दी जल्दी बढि रहल छलियैक मुदा कथी लेल हमरा कियो जल्दी जाय देत पकड़ि कऽ बिच मे हमरा सभ गोटे कऽ लेलथि। ओहिना करैत हम सब मुखिया बाबाक घर लग पहुँचि गेलहुँ । हमर घर ओकर बाद छलैक हम हाथ मे फुलक डाली लेने सभ संग बिच मे चलैत रहि। घर लग पहुँचि सभ गोटे जोर जोर सँ हंसथि हमरा ई कहि आगू कऽ देलथि जे आब हमर दादी देख लितथि तँ हुनका सभकेँ डाँटि परतन्हि। हम आगु आबि जहिना बरामदा दिस बढलहुँ देखैत छी कुर्सी पर बाबा आर बाबुजीक संग ई बैसल छथि आ तीनू गोटे चाह पीबि रहल छथि। हम लाज सँ जल्दी-जल्दी आँगन दिस भागि गेलहुँ। आँगन पहुँचि देखैत छी दादी आ माँ व्यस्त छथि। एक तँ पाबनिक ओरियाओन होइत छलैक, दोसर जमाय विवाहक बाद पहिल बेर आयल छलथि, तेसर समधियोनि सँ पाहुन भार लऽ कऽ से आयल छलथि। हमरा देखितहि दादी कहय छथि- "यै अहाँ बिना माथ झपने अहिना बाबा आ बाबुजीक सोंझा सँ आबि गेलहुँ"। हम किछु नञि बजलियन्हि, हम आ हमर बहिन चुप-चाप कोहबर घर जाय कऽ फुल डालि आ पथिया राखि देलियैक। ओहि समय मे हमरा माथ झांपय मे बड़ लाज होइत छल। हम बाहरि आबि कऽ माँ सँ पुछलियैक, " बाबुजी मुजफ्फरपुर सँs कखन्हि एलथि" जकर जवाब दादी सँ भेटल, "अहांक बाबुजी कॉलेज सँ ठाकुर जी केँ पकड़ि कऽ लऽ अनलथि "। साँझ मे किछु-किछु बिधक ओरिओन आ गीत भेलैक आ दादी कहलथि सब गोटे जल्दी सुतय जो भोरे उठय परत। राति मे सुतय काल पता नञि हमरा कोना मोन छल, हम हिनका सँ पुछलियन्हि- "भार कतय सँ आयल छैक "? हिनका किछु बुझय मे नञि अयलन्हिन्ह, हमरा कहलाह- "मतलब.... कोन भार "? फेर मुस्कुरैत हमरा कहलाह- "अहाँ के हमरा देखि कऽ खुशी नञि भेल जे अहाँ हमारा सँ भारक विषय मे पुछैत छी "। हम मुड़ी हिला कऽ हाँ कहि देलियन्हि मुदा फेर आस्ते सँ कहलियन्हि- " दादी सब सँ कहैत छथि महादेव झा ओतय सँ भार आयल छैक। ई सुनतहि जोर सँs ठट्ठा कऽ हँसैत हमरा कहलाह- "ओ.., अच्छा..., ओ महादेव झा, ओ हमर सबहक पाँज़ि अछि ताहि लेल बाजैत होयतीह"। तकर बाद हमरा पाँज़िक विषय मे सेहो बता देलथि। हमरा अपना पर हँसी लागल-कहु तँ भोर सँ हम ई सोचि कऽ परेशान छलहुँ जे महादेव झा के छथि। (अगिला अंकमे) बलचन्दा (मैथिली नाटक) विभा रानी (मंच पर अत्यन्त मद्घम प्रकाश.. मद्घम स्वर में एक गोट रहस्यमय संगीतक धुन, ब्रह्मांडक प्रतीत कराबइत.. प्रकाश सेहो समाप्त । मंच पर घोर अंधकार। लगभग एक मिनट धरि अंधकार आ पूर्ण शांतिक बाद एकगोट नवजातक क्रन्दन। क्रन्दन तेज होबैत-होबैत अंत में शनै.. शनै विलीन भ' जाइत अछि ..। मंच पर पूर्ण शान्ति आ एखनो अंधकार अछि। पुन: लगभग एक मिनटक बाद एकटा पातर लकीर सनक प्रकाश मंचक एक सीध स' दोसर सीध धरि अबैत अछि। ओ प्रकाश बढ़ैत-बढ़ैत एकटा वृत्त मे बदलैत अछि। एक स्त्रीक ओहि वृत्त मे कोरा मे एकटा गुड़ियाक संगे प्रवेश ..। गुड़िया के सोझा मे राखि ओ ओकरा पाछां ठाढ भ' जाएत अछि आ बाजैत अछि। ओकर स्वर मे प्रसन्नता आ आत्म-गौरवक भाव छै) स्त्री: हम धरिणी.. हम धरित्री सीता हम - हम सावित्री हम द्रौपदी - रम्भा, मेनका श्रद्घा हम, हमही इड़ा प्रेमक सुख, विछोहक पीड़ा समस्त विश्र्व मे हमरे स' त्राण देवी, माँ, सहचरी, प्राण देवी हम दुर्गा, काली, गौरी, शक्ति, बिनु हमरा, नञि ई सृष्टि (विद्यापतिक भजन आरंभ होइत अछि.. स्त्री कोरा मे बच्ची के ल' क' ई गीत गबैत अछि। गीतक संगे-संग ओ गुड़िया के दुलारैत-मलारैत अछि।) जय, जय भैरवि असुर भयाउनि पशुपति भामिनी माया.. सहज सुमति बर दिउऊ गोसाउनि अनुगति, गति तुअ पाया। (भजन समाप्त होइत-होइत ओ गुड़िया के मंचक पाछां राखि अबैत अछि आ फेर सासुक चरित्र मे आबि क' बाजैत अछि। स्त्री सासु, पति आदिक पात्र नेमाहइत अछि।) सासु एक त' आनि जातिक माउगि आ ओहि पर स' पहिल बच्चा बेटी? किन्नहु नञि। पहिल संतान त' बेटे। पति मां, किऐक अहां अतेक अपस्यांत होइत छी? अरे, निचिन्त रहू ने। जे अहां कहबै, सएह हेतै। स्त्री रोहित, ई हमर आ अहांक प्रेमक प्रथम पुष्प अछि। एना जुनि करू। एना जुनि करू प्लीज़। पति हमरा लेल मांकेर इच्छा सर्वोपरि। ..चलू, अहांक मोन राख' लेल एकटा बेटीक मंजूरी सेहो। मुदा पहिल बेर त' बेटे। स्त्री (स्त्रीक नज़रि जेना अपन पिता पर पड़ैत छै। ओ चिकरइत अछि) बाउजी, हमरा बचा लिय'। हमर बेटी के बचा.. बाउजी बेटी, चल हमरा संगे। एक बेर बच्चाक मुंह देखि लेतीह समधीनी जी त' अपनहि ममति उठि एतै। सासु खबरदार समधि। बेटी के उकसाऊ जुनि। मुंहे देखला स' ममति उपजितिऐक त' अपनही हाथे अपनही तीन- तीनटाक नरेटी नञि टीपने रहितियहुं। ई हमर घर अछि। अहांक बेटी ओ जहिया छली, तहिया छली। आब ओ ई घरक पुतौहु छथि। हुनका अइठांक केदा- कानूनक मोताबिक चल' पड़त, वरना हमर बेटा लेल त' एखनो एकटा के बजाऊ त' दस टा दौगलि आएत। एह..एक त' जाने कत' स' उठा आनल आनि जातिक रांड़ि.. बाउजी मुदा बेटा -बेटी त' अपना हाथक गप्प नञि छै ने? सासु मर्र। तहन ककरा हाथ मे छै? बउ. विज्ञानक हाथ मे। डाक्टर लग जाउ। ओ अहां के बता देत, जे बेटा बेटी बिधिक लिखलाहा नञि होइत छै। सासु हे, हमरा ई डागदरी फ़ागदरी नञि सिखाऊ। बाउ सीख' पड़त समधीनी जी। वरना भगवानक लेख मानि क' जनम जनम स' लोक आओर स्त्री के एकरा लेल दोषी बनबैत आएल अछि। आ जनम जनम धरि ओकरा बनबिते रहत। सासु हमरा एतेक कपड़फ़ेंच मे पड़' नञि अबैत अछि। आइ काल्हि डाक्टर आओर के सभ बूझल रहैत छै। हाथ लगबितहिं बता दइत छै जे बेटा कि बेटी..। बाउ त' समधीनी जी, वएह डाक्टर ईहो बता देत जे बेटा- बेटी जनमाब' मे स्त्रीक अपन कोनो विशेष भूमिका नञि होइत छै। ओ त' मात्र धरती अछि, बीज धारण करएवाली। आ जेहेन बीज, तेहेन फ़सील। (सासु किछु नञि बाजि कड़गर नज़रि स' बाउजी के आ फ़ेर स्त्री दिस देखैत अछि।) स्त्री नञि, हम नञि हटाएब। (पति स') रोहित, बेटी स' एतबहि दुश्मनी छल त' कियै केलहुं हमरा स' विवाह? अरे, अहूं त' एक गोट स्त्रीएक कोखि स' जनम लेने छी। अहांक माइयो त' एक गोट स्त्रीए छथि ने.. आ सभ किओ जौं अहिना बेटी स' छुट्टी चाहत त' कोना चलतै ई सृष्टि? कहू ने, कोना क' चलतै ई सृष्टि? (स्त्री भहराक' खसि पड़ैत अछि। पार्श्र्व स' करूण संगीत। स्त्री रसे- रसे उठैत अछि आ रसे- रसे सामान्य लड़की सनक व्यवहार करैत अछि। ओकर व्यवहार में कॉलेज जाएवाली लड़कीक अभिनय अछि। ओ हड़बड़ी मे अछि। ओ स्कर्ट पहिरबाक, कंघी करबाक, किताब- कॉपी हेरबाक, चप्पल पहिरबाक, बैग कन्हा पर टँगबाक आदिक अभिनय करैत अछि- ई सभ करैत-करैत ओ हबड़ि हबड़ि बाजियो रहल अछि - स्त्री : माँ, हम कॉलेज जा रहल छी..। बाउजी के कहि देबन्हि आब' लेल..। आ अहँू आएब हमर नाटक देख'। आ हं मां, भौजी के सेहो नेने आयब.. माँ, भौजीक मुंह पर स' कनेक घोघ हटब' दियऊ ने! हे देखियौ- देखियौ, अन्हरिया मे पूर्णिमा भ' गेलीह.. (नकली डर) नञि.. मारू। नञि.. नञि, हम दूध नञि पीब.. बाप रौ, उन्टी होब' लागैत अछि.. बाउजी के कहि देबन्हि ने.. जे हम पी लेलहुँ दूध.. हमर सुन्नर- सुन्नर, नीक नीक मां.. अछा, आब हम चलै छी। हमरा देर भ' रहल अछि। (कहैत-कहैत मंच स' निकलि जाइत अछि। संगीत.. शहनाईक धुन..। मंच पर कोनो कार्यक्रम होयबा सनक हलचल। स्त्रीक उद्घोषिकाक रूप मे प्रवेश। ओ मंचक एक कोना मे ठाढ़ भ' क' उद्घोषणा करैत अछि।) स्त्री/पु. नमस्कार। हमर कॉलेजक वार्षिकोत्सव मे अपने सभक हार्दिक स्वागत आ अभिनन्दन। मनोरंजन, आमोद आ आनन्दक संगे- संग अई वार्षिकोत्सव मे हम सभ सामाजिक सरोकार स' सम्बन्धित बहुत रास कार्यक्रम सेहो केलहुं अछि, जेना सड़क सफ़ाई अभियान, वृक्षारोपण, महत्वपूर्ण साहित्यकारक सम्मान, वंचित वर्गक नेन्ना लेल विभिन्न क्रिएटिव वर्कशॉप, आदि- आदि। आइ एकरे अगिला कड़ी मे प्रस्तुत अछि, समाजक एक गोट आओर ज्वलन्त समस्या स' अहां सभ के दू-चारि करबइत ई नाटक- बलचन्दा। (मद्घम अंधकार.. अंधकारे मे गीत ..) 'गै मैना, अंगना ओकरा जइहें रसे-रसे, कहिहें खिस्सा जोर स' जुनि बजिहें, गे मैना.. (स्त्री मंच पर अबैत अछि.. संवाद बजैत अछि, जेना मंच पर अभिनय क' रहल हुअए।) स्त्री धिक्कार अछि ओहि समाज पर, जे बेटी के अस्तित्व मे ऐबाक पहिनही ओकरा नष्ट क' देब' चाहैत अछि.. ई धरती.. ई धरतीयो त' एक गोट स्त्रीए अछि।.. देखियौ एकरा, सभ किओ एकरा दिन-राति धांगैत रहैत छथि, एकर करेज कोढ़ि के काटि-काटिक' बड़का-बड़का इमारत बनबैत छथि.. अमृत स' भरल एकर नदीक धार के अपना मर्जी स' एम्हर स' ओम्हर क' देइत छथि.. एकर कामनाक ज्वार के बाँध मे बाँधि दइत छथि.. मुदा तइयो ई धरती, उन्टे हमरा रौद, पानि, छाँहरि, अनाज सभ किछु दइत रहैत अछि.. कहियौ, जे जौं ई धरती ई सभ नञि करतीह त' हमर सभक अस्तित्व रहत की? हम- कन्या, स्त्री, माय, बहीन, बेटी- हमहूँ त' धरतीए छी.. धारण करयवाली.. आ देखियौ, आइयो कएलहुँए धारण- अई परंपरा के आगाँ बढ़ाब'वाली के..। आब दियऊ एकरा अहि संसार मे- अहांके धारण कर' लेल, अहि सृष्टि के आगां बढाब' लेल। अरे, वीर-विहीन धरती से सृष्टि त' चलि जाएत, मुदा बेटी- विहीन धरती स' सृष्टि नष्ट भ' जाएत। आब दियऊ एकरा। हमरा लागल जे हमर अजन्मल संतानक संगे-संग अई धरती परक अनेक अजन्मल बेटी सभ सेहो अपना- अपना माता-पिता स' कहि रहल अछि (स्त्रीक कविता वाचन बालिकाक स्वर मे।) हे हमर भावी माता-पिता हमरा पर नञि त' करू हुनका आओर पर किरपा जिनगी जनिक आरंभ भ' क' हमरा स' समाप्त होइत अछि हमरे पर.. सोचू, जे नञि हएब हम त' के धोअत भरि-भरि छिट्टा ऐंठ बासन के खाएत भाईक अवशिष्ट भोजन कोना नेबाहेम हिंदू धर्मक महादान - कन्यादान! कोना मेटायत नोचनी हमर सासु, ननद, स्वामीकेर जौं नञि भेटत दहेज मे डिबिया माचिस केर। कोना चलत अखबारक कार्य-ब्यौपार जाधरि छपत नञि, नान्हि-नान्हिटा स' अपनही लोकक बलात्कार! आ सोचू कने, नञि हएब हम', त' कोना मनाएब अतंर्राष्ट्रीय महिला दिवस बालिका वर्ष, नारी सशक्तीकरण ककरा राखब पर्दा मे कि बुर्का मे ककरा जोखब सोनाक सिक्का मे? हमहीं त' छी अमीना वा सोनाबाई! तैं, आब' दिय' हमरा, आब' दिय' हमरा, जाहि स' बदस्तूर चलैत रहय अहाँक नाम-सुनाम आओर किछुओ नञि त' घरे-घर त' पूजल जाएब जहन लाल चूनर, भरि माँग सेनूर आ सोलह सिंगारक संग हमरा अहां रूप कुँवर बनाएब.. ' (तेज संगीत आ तकरा बाद एकदम शान्ति.. स्त्री मंच पर आबि सभके नमस्कार करैत अछि.. हॉल मे थपड़ी..।) (अगिला अंकमे) साथी दुखमे न कोय -सुरेन्द्र किशोर झा- गाम कठरा-जिला दरभगा एक साधारण मध्यमवगीर्य कुलीना परिवारमेंजन्म (कलयुग मे कुलीन परिवारक परंपराके निमायब बड़ कठिन, तकलीफ होयत परंतु मुंह सं उफ आ आह तक नहिं उच्चारित कय सकैत छी कारण काट वाकील मोकयवला और बेशी मजाक उड़ेताह, कहताह की भेल ? आ कहिकहकहा लगओताहा)। अस्तु, जन्म आ बालकपन लगभग सभ मध्यमवगीर्य व्यक्तिक परिवार में थोड़बेक उनैस बीस ढ़ग से व्यतीत छोरंत छैक । आ हिनकहु बीतकनि नीकहिं रूप में । माय-बाप आ परिवारक नीक प्रतिष्ठा और आवश्यकतानुकूल पर्याप्त संपति तथा गामक चारिटा जेठ रै यत में सं एक हिनकहु पितामह हेबाक कारण हिनक बाल्यकाल बहुत नीक लाड़ प्यार में बाल-कीड़ा करैत बितलनि । पश्चात विद्यार्थी जीवन शुरु भेलनि । किछु हिन गाममे पचकौड़ी मास्टर साहबक ओहिठाम भठ्ठा पकरलाक बाद लहेरियासराय ( दरभंगा ) एलाह । एतय पोख-रिया स्कूल मे प्राथमिक कक्षाक पढ़ाई कय पुन सर–स्वती स्कूल सं मैट्रिक कयल । प्राथमिक कक्षाक पढाई के समय , एक नेगरा मास्टर साहब सेहो गाम सं बलभद्पुर आयल रहथि । सौसे मुहल्लाक विद्यार्थी सब भोहि समय में हुनके सं ट्यूशन पढ़थ्रि इहो हुनका लग जाय लगलाह । विद्यार्थीक बीच स्पर्धा और पढ़बाक प्रति अभिरूचि और ओहि सं एक नीक विद्यार्थीक रूप में इज्जत भेटब ओही ठाम सं शुरु भेलनि। बाल्यकालवा विद्यार्थी अवस्थाक हर रोमांचकरी समय हुनका आइयो याद अबैत छनि त आंखि सं नोर बहय लगैत छनि । एक ओकर याद आ दोसर जिंदगीक रथक दो सर पहिया के रूप मे भेटल सुलक्षणा नारी (पत्नी) । आहा हार रे भाग्य हुनकसतत् मुस्कुराईत छेहरा आई एकटा हथिनीक लग मे मृगपुरुष सं बेशी नहि रहि गेल छनि । अस्तु, उपरोक्त किछु बात भावावेश मे कालक्रम के व्यतीत हेबा सं पूर्व लिखा गेल आहि । हुनक प्राथमिक शिक्षा बहुत नीक बितलनि । नेंगरा मास्टर साहब (श्री राजेन्द्र झा, सोंथा, बेनीपद्दी ) ओहि समय में कोना दोसर विद्यार्थी के जौं विद्यार्थीक आदर्श बुझबैत रहथि त हिनकहिं नाम लय । हिनका अपन पाठ्यपुस्तकक अधिकांश विषय त बुझले रहनि जे दोसरो बच्चा वाविद्यार्थी सभक जोर सं पढ़ल गेल विषय कंठाग्र भय जाईत रहनि । जाहि सं विद्यार्थी मध्य एवं मुहल्ला में सभ नीक नजरि सं एवं प्यार सं देखन्हि । पश्चात् एम. एल. एकेडमी (सरस्वती स्कूल) लहेरिया सराय सं १९७४ ई० में मैट्रिक (११ वलास) पास कयलनि । ओहिवर्ष मैट्रिक में गामक गाम रिजल्टक बाद सन्नाटा पसरल छल। कारण कोनो गाम में १५ मे सं २-३ त कतहु २० में सं २- विद्यार्थी मात्र पास भेल रहथि । हिनको पर माँ भगवातीक कृपा रहनि मैट्रिक पास केलथि। पुन: मैट्रिकक बाद घर सं लग हेबाक कारण आई.एस. सी(फिजिक्स, केमिस्ट्रीई एवं गणित विषय ) १९७७ ई० में पास कयल । तावत रिजल्ट सब निकलबा सं पहिनहि एकटा आई.एस. सी. के विद्याथी मात्र के रूप में गाम सं पश्चिम २ कोस के करीबक दूरी पर विवाह बय गेलनि । कारण हिनकर पिताजी एकटा साधारण गृहस्थ रहथिन्ह जिनका मात्र खेती गृहस्थीक आमदनी पर हिनका सं जेठ तीन टा बेटीक विवाहक खर्चक भर परि चुकल रहनि संगहि ईआहिनक छोट भाएक पढ़ाई लिखाई आ पुन: एकट कुमारी बेटीक विवाह-दुरा-गमनक भविष्यं भावी खर्चक बोझ जेहन जीर्ण – शीर्ण बना देने होइन्हि एहि विषय् कें केवल एकटा सत्पुरुष आ स्च्चरित्र नारी मात्र बूझि सकैत छथि । एहने एक महात्मा गृहस्थ ब्राहमनक छ: संतान में सं चारिम एवं प्रथम पुत्र इहो रहथि जे पित्ती-पितियाइन के ओहिठाम रहि बलभद्रपुर मे पढ़ाई – लिखाई केलनि । एहि तरहक एकटा गृहस्थ कें अपन तीनटा पुत्रीक विवाह-दुरागमनक बाद पुत्रक विवाह करबाक केहन अभिलाषा रहैत हेतैक अंदाज लगायल जा सकैत अछि । एहने समय में समयानुकूल बहुत लोक हिनकहु ओहिठाम कुटुमैतीक प्रसंग में एलनि । एक-दू ठाम परिवार नीक पसंद परलनि त समगोत्री उहरि गेलनि । पश्चात् एकटा मास्टर साहेब (हेड मास्टर ) सेहो आबि अपन प्रस्ताव (पुत्रीक, जेठपुत्रीक प्रति ) रखलन्हि । हिनक गृहस्थ पिता बिना कोना विशेब मंथन आ मंत्रना के हेड मास्टर साहेबक प्रस्ताव स्वीकार कय लेलनि । हेडमास्टर साहेब कथाक प्रसंग में इहो कहलखिन्ह जे हमरा परिवार में तीन पीढ़ीक बाद बेटी जन्म लेलनि आछि आ ई हमर तीनटा बेटी में प्रथम बेटी थिकीह, जिनकर विवाह तीन पीढ़ीक बाद पायल बेटीक रूप में हेतनि । बस हिनकर सोझ लोक पिता के और की चाही मन गद्गद भय गोलनि एवं कथा स्वीकार कय लेलनि । पश्चात् हिनका (अपन जेठ बेटा) संकहल, बौआ आब खेती सं बहुत नीक आमदनी नहि भय रहल अछि । अहांक छोट भाई सेहो बच्चे छथि आ पढ़ाई – लिखाई बांकीये छनि । संगहि अहांक एकटा छोट बहिन सेहो कुमारि छथि । अहांक पित्ती खर्चक भय सं परिवार भिन्न कय नेने छथि । एहेन हालत मे हेड-मास्टर साहवक बेटी सं विवाह बहुत नीक रहक चाही । अपने बहुत पढ़ल – लिखल, विद्वान हेड-मास्टर साहब छथि तें हेतु बेटीयो के जरूर नीक पढ़ेने लिखेने हेथिन्ह । एहि सं अहांक आगांक पढ़ाई लिखाई में नीक मदद भेटत । ई सब सोचि हम हुनका कुटुमैतीक लेल हं कहि देलियनि । हिनका लेल माता-पिताक वचन भगवान रामक लेल माए-बापक वचन सं किछु ओ कमं महप्तक नहिं छल । नीक सौख – मनोरथ सं हिनको बिवाह भेल । बड़ बढ़िया शुभारंभ भेला सुलक्षणा पत्नीक सुलक्षण व्यवहार क्रमवत प्रहर्शित होयत । हिनक एवं हिनक पिताक मनोरथ दिनक दिनानुदिन हवा मे पूरब शुरु भय गेल । कहब छैक भगवान सभक आश ओ अपन हिसाब सं पुरबैत छथिन्ह आ हिनकहु मनोरथ आकाशक हवा में पूरब शुरु भेल । ओहि संमय में हवागाड़ी आ टीवी आदि के चलन नहिं छल पर्तु जतेक ठीक-ठाकपरिवारक पढ़य-लिखय पला लड़काक विइवाह भेल रहनि सभकें साईकिल, घड़ी आ एकटा रेडियो भेटब आमं बात रहनि । हिनको दुनू बापूत के बड़ शौक रहनि जे तीन पुश्त के बाद हेडमास्टर साहब बेटीक विवाह केलनि अछि ते एहि मास में नहिं त अगिला मास में त साईकिल घड़ी आ रेडियो देबे करथिन्ह । ओहि समय में प्राय: विवाह सं तेसर साल में द्विरागमन होईत छलैक । तें आश रहनि जे एहि महीना में नहि त आगिला महिना में, अगिलामहिना नहित अगिल पावनिक उपलक्ष्य में । एहि तरहै आशक आ पूरब हवा में पूरब आश्वासन शुह भय गेलनि । परंतु अपनेक लोकनि कें एहि कथाक आरंभहि में कहल गेल अछि जे कलियुग मे कुलीन मैथिल ब्राहमण कें कुलीन रीति सं जीवन बितायब बड़ कटिन होईत छैक । हिनको लेल इएह भेलनि । कस्ट बहुत भेल हेतनि लेकिन मुंह सं उक नहिं कय सकैत छलाह । जीवन छिएक “नाव कागज का गहरा है पानी , फिर भी हर हाल में (दु:ख, अपूरित आश आ सुलक्षणा पत्नी, पैघ बापक पैघ बेटी द्वारा हेय दृस्ति सं देखब सदृश दु:ख तकलीक के सहैत) मुस्कुराकर दुनियादारी पडेगी निभानी ।“ एहि कहावत कें सत्य करैत जिनगी बिताबैत रहलनि । पती द्वारा कहियो सुलक्षणा पत्नी कें सुझावक क्रम में “ आँखो का भूषण कज्जल है ये अनुचित ऐसा कहना है, ललना लोचन में लाज रहे लज्जा नारी का गहना है । पतिब्रता स्वयं तगड़ी होती फिर तगड़ी का क्या करना है, सबसे अच्छी पति सेवा ही भव से तारने की तरनी है । किन्तु आजकल है नही’ इसमे कुछ विश्वास, पतिदासा स्थान पर किये स्वयं पति दास // “ सुनेबा पर हिनक बहिन आ भाउज सब द्वारा हर्ष पूर्वक सुनल गेल परंतु हिनका (सुलक्षणा) द्वारा उपहास सुनबा लेल भेटलनि । तथास्तु उपहास सुनियो भविष्य मे सुलक्षणा (जीवन रूपी रथक दोसर पहिया) के ब्यवहार में सुधारक आश के कोनहुना मनक दु:ख मनहि में राखि (ये ऐसी आग है जिसमें धुआं नही होता, और मणुष्य जलकर समाप्त हो जाता है ।) आश कय स्वीकार कायलनि । अस्तु, समय बीत्तेत रहल । विवाह भेलनि । आइ-एस सी के परीक्षा देलनि । आई एस सी पासो केलनि । तावत, आई-एस.सी.के परीक्षे देने रहथि, रिजल्ट नहिं आयल रहनि आ ओही बीच कामे-श्वरसिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में बी.ए.एम. एस (एम्.बी.बी.एस के समतुल्य आयुर्वेद-शास्त्रक चिकित्सा पद्धतिक डॉक्टर) वला पढ़ाई शुरु भेल रहैक। एहि में मैट्रिक सर्टिकिकेट वला के लेल सात वर्ष आ आई एस.सी.पास वल के पांच वर्ष पढ़य पड़ैत छलैक । गणितकविद्यार्थी के डॉक्टरी पढ़बाक लेल ई बहुत्त नीक पढ़ाई रहैक । बहुत रास विद्यार्थी ओकर परीक्षा में बैसलाह । हिनकर मित्र प्रो-फेशर सोमदेवजीक बालक वर्त्तमान में डॉक्टर अमित वर्धन हिनकहु ओहि परीक्षा में बैसय लेल सुझाव देलकन्हि इहो परीक्षा देलनि । कंपी-टीशन में पास भेलथि । पुन: इंटरव्यू भेलनि ओहू में ६०-६५ टा चुनल गेल विद्यार्थी में सातम स्थान पर चुनल गेलाह । सेलेक्शन में नाम एलापर अपना परिवार में अपन ईष्ट मित्र में एवं समाज में तथा सासुर सभ में थोड़ेक खुशी त्त जरुर भेल हेतनि । पश्चात एडमिशन के समय नजदीक ऐलनि । पिताजी सं एडमिशन लेल पुछलखिन । पिताजी कहलखिन “ बौआ! सात सालक पढ़ाई बहुत लंबा भय जायत । आई.एस.सी के रिजल्ट पर जौ कतहु नौकड़ी पकरि लितहुं तऽ बेशी नीक रहैत ।“ पिताजीक बात सिर-माथ पर लेलनि । पुन: एक दिन सासुरो गेलाह । ओतहु एहिबातक चर्चा अपन ह्र्ड मास्टर ससुरजी लग सेहो केलनि । मुंह खोलिके किछु मांगब सेहो स्वीकार्य नहिं रहनि । आ कतेको उत्सप पर जे नव जमाय के किछु भेटैत छैक ताहू सब में साड़ि – सरहो जि सब मजाक उड़ाबनि जे कलां सं मांगि यौन कलां सं कला वस्तु मागि लिय परंतु हिनका त सोमदेव जीक ओहि-ठाम पुस्तक में पढ़ल रहनि जे राजा अकबरकेसेहो खुदा सं दुआ मंगैत देखि जे गड़ेड़िया ३ गाम मंगय आयल छल ओ किछु नहि मांगि “ बकड़ी ३ गांव खागई के बदला, खुदा देंगे तो लूंगा “ के पाठ पढ़य लगलाह । आ एहिबातक जानकारी राजा अकबर के भेलापर ओ तीन गामक बदला में इ गाम हुनका खयं बजा के ससम्मान देने रहथिन्ह से कहावत चरितार्थ होमय लगैत छलनि । एहित रहै परि स्थिति वशात् ओ बी.ए. म्. एस में एडामिशन नहि होलथि । हुनकर संगी आमितवर्धन जी आई वएह कोर्स कय डॉक्टर छथि सम विद्याताक लिखल कपाड़क फेर - - भाग्य आ कर्मक लुकका छिप्पी खेल पाछां परिस्थितवश नौकडीक तलाश शुरु भेल । एहिक्रम में ईंप्लायमेंट एक्शचेंज लहेरियासराय में नाम द्रर्ज करेलनि । क्रमश: एयर इंडिया में ट्रेनी टेकनिशियन, पुन: एयर फोर्स के दफ्तर कदम कुआं में एयर मैनलेल आ ब्रांच रिक्रूटिंग ऑफिस मुज्फ्फरपुर में आर्मी वा नेवी के भर्ती लेल पयास शुरु केलनि । दुबर-पातर शरीर लय जखन ई भोड़ मे १००-२०० के भीड़ में ठाढ़ होथि आ सांझ तक ओहि में सं मात्र २०-३० विद्यार्थी सेलेक्शन लेल बाचथि आ इहो ओहि में बंचल रहथि त ईश्वरक धन्य-वाद बापन के अलावा हिनका मुह पर और कोनो श्ब्द नहि बचनि । कहब छैक निर्बल के बल राम “। हिनकर स्थिति जखन कमजोर होमय लग्लनि, दु:खक स्थिति अपन आ आनके ज्ञान करा दैत छैक । विद्यार्थीये जीवन में विवाह भय गेल रहनि । न अपन जेब खर्च लेल पाई रहनि न सुलक्षणा पत्नी कें श्रृंगारक वसु लेल किछु कय सकैत छलाह । बहुत विलक्षण स्थिति मे ईश्वर पहुचा हेने रहथिन्ह । परंतु शास्त कहैत छथि जे ईश्वर जं दु:ख दैत छथिन्ह त सुखहु दैत छथिन्ह । आ मणुष्यक लेल जौं आधिकांश द्वारा बंद कय दैत छथिन्ह उन्नति हेतु, त त्तैयो ओ सभटा द्वार बंद नहिं करैत छथिन्ह । आ हिनको संग त्तहिन भेलनि । हिनक मकरन्दा वाली बहिन हिनका आग्रह पर हिनका बहिनो के आग्रह केलखिन जे जेठ साढ़ थिकाह । हमर छोट भाई थिकाह । हिनका अही अपने संग लय जैतियन्हि । किछु अपनेक प्रयास । मददनैकड़ी लेल कय देवनि किछु अपने करताह । भगवान कराथीन्ह कतहु अपना पैर पर ठाढ़ भय जेताह तऽ नीक हेतनि । ओहि समय ओ सोनपुर जी आरपीमें जमादार (ए.एस. आई ) रहथि । दु:खक ओहि घड़ी में जग सं परेशान डूबैत कैं ईश्वरक कृपा सं तिनकाक सहारा भेटलनि । बाबूजी थोड़ बहुत जेब खर्च हेतु कोनहुना इंतजाम कय द्इये दैत छलखिन्ह । बस प्तहि सं एयर फोर्स लेल, पटना एक दूबेर गेलाह । ओतय पता लगलनि जे एअर फोर्सक बहाली में एखन दू-तीन महीनाक देरी छैक । एहि कम में ओ एक दिन अपना बहिनो के आग्रह केलखिन जे हुनका गाम में एक सज्जन जे बिहार होमगार्ड में नौकड़ी करैत रहथि कहने रहनि जे मुजफ्फरपुर में चक्कर मैदान में आर्मीक भर्ती होईत रहैत छैक से हमरा जेबाक अनुमति दितौंह । हिनकर बहिनो बहुत प्रसन्न मन सं आशीर्वाद दैत हिनका जेबाक इंतजाम केलनि । एकटा सिपाहीक संग (डयूटीवला सिपाही) मुजफ्फरपुर गेलाह । सिपाहीजी चककर मैदानक कोनापर हिनका पहुंचा देल जतय सं ओ रिक्रूटिंग ऑफिस पहुंचलाह । ओतय बच्चा (विद्यार्थी) सब लाईन में लागि गेट के अंदर जाईत रहथि । इहो लाईन (कतार) में लगलाह । गेट पर पहुंचलापर हिनका सं मौट्रिकक सर्टिफिकेट मंगल-कनि । ई पुरना समय बला हाथ सं लिखल अटेस्टेड कापी सर्टिफिके टक देखय देलखिन जाहि पर हिनका गेट सं अंदर नहिं जाय देलकनि जे ऑरिजिनल सर्टिफिकेट होने पर ही गेटके अंदर जाने दिया जाता है । अस्तु, ई आग्रह केलखिन्ह जे मेरे पास घर पर मूल सर्टिफिकेट भी है जिसे देखकर किसी ने यह अटेस्ट किया है अत: आपके अफसर-इन-चार्ज से मिलना चाहता हुँ । थोड़ेक कालकबाद अफसर इं चार्ज सं भेट करा ओल गेल । हुनकहु वएह बात कहल –खिन्ह । ओ पूछलखिन्ह –कहां तक पढे है । सर-आई एस.सी पुन: प्रतिशत आदि पूछि अगिला सप्ताह आबय कहलखिन्ह । ई आग्रह केलसिन्ह जे सर आज फिजिकल चेक अप हो जाने से एक सप्ताह का समय बच जाता । हुनकर कहब रहनि – घबराने की । कोई बात नहीं है । अभी काफी समय है आपका सबकाम हो जायगा । क्रमश: फीजिकल आदि के छंटैया सब सं ईश्वरक कृपा सं २००० में सं ३०० बंचल विद्यार्थी में इहो रहलथि । पुन: लिखित परीक्षा भेलैक । मेरिट लिस्ट में एके.साही प्रथम रहथि आ हिनकर दोसर स्थान रहनि । भत्तीं भेलाह । नेवी एं नौकड़ी भेलनि । एहि दरभ्यान एकटा लक्ष्मी रूपी बालिका क पिता सेहो बनलाह । विवाहक तेसर वर्ष में नौकड़ी में चलि गेलाक कारण द्विरागमन नर्हि भेल रहनि । संगहिं कहियो विवाहक बाद सासुर-सुलभ कोनो सौख –मनोरथ पुरलनि वा नहिं तकर हेतु कहियो सुलक्षणा पत्नी कें किछु नहिं ककलसिन्ह जे हुनका कोनो तर्हक तकलीफ नहिं होईन्ह बस ईश्वरक लीला बूझि अपन कर्त्तब्य पथ पर ईश्वर के याद करैत आ मन में धारणा खुदा देंगे तो लूगा “” क्या जानेगा अमीर फकीरी में मजा है वो कांटा भी है फूल जो मालिक ने दिया है । रखने कर्म पथक हर एक कांट भरल मार्ग के हँसैत पार करैत रहलाह । भगवानक कृपा होईत छनि त कांट भरल-मार्ग सेहो फूल सं भरल भय जाईत छैक यथा “गोपद सिंधु अनल सितलाई, गरल सुधा रिपु करहिं मिताई”। अथवा कांटक दर्द देबो करैत हेतनि त जिहवा पर तैयो निकलैत रहनि “ कांटा भीहै फूल जो मालिकने दिया है ।“ समय बीत्तैत रोलनि । विवाहक तेसर साल बितलनि । पतो नहि लगलनि आ चारिमो साल बीत गेलनि आ चारिम में द्विरागमन मिथिला में नहि होईत छैक । पांचम वर्षक सेहो प्रारंभ भेल । अकस्मात हुनकर दु:खक समय के माय-बापक अलावा ओ एकमात्र सप्तुरुष सहारा भगवानक प्यारा भय गेलसिन्ह आ (हमरा मित्र) हुनका सभ कें एहि मरा संसार (मृत्युलोक) में छोड़ि विदा भय गेलसिन्ह । हुनका घरक लोक ई शोक संदेश समय पर नहिं देलसिन्ह जे दु:खक संदेश अल्पवयस के एकसरमें रहयवला के नहिं देल जाय । परंतु सत्य कतहु नुकायल रहलैक अछि । लगभग दू महीना पश्चात् हुनका सूचना भेटैत छनि जे अहांक प्रिय बहिनो आब नहिं रह्लथि । हुनका काटूत खून नहिं बला हालत भय गेलनि । शोकाकुल अवस्था में तुरंत छुट्टी लथ अपन प्रिय बहिन के सात्वना देभय एवं भेंट करय गेलाह । ओही समय में पता लगलनि जे छुट्टी बढ़ेलापर द्विरागमन सेहो भय सकैत छनि । मात्र ढ़ाईपर्षक नौकड़ी में रिस्क लय द्विरागमन हेतु छुट्टीक दरखास्त डाका तार द्वारा भेजि द्विरागमन करभोलनि । पुन: वापस ड्यूटी ज्वाईएन केलथि । वहुत रास परेशानी एहि सभक कारण उठाबय पड़लनि परंच हँसि के सहैत रहलाह । क्रमेण समय बीतैत रहलनि । बहुत रास सुख –दुख बोगलनि । समय बीतैत रहल .... पुन: एकटा पुत्र रत्न सेहो प्राप्त भेलनि । समय बीतल - - पुन: एकटा कोर्स करय हेतु गुजरात गेलाह । ईच्छा भेलनि जे आब दूटा बच्चा सेहो भय गेलनि तें सपरिवार ट्रेनिंग करय गुजरात जाथि माँ-बाबूजी सं आदेश लेलनि । आदेश स्वीकृत भेलनि सहर्४ष । स्स्सु-ससुर सं शिष्टचाखश पूछलसिन ओहो लोकनि आदेश देलखिन्ह । दिल्ली में पत्नी, पुत्र एवं मित्रादि के संग पर्यटन करैत गुजरात पहुचलाह । ओतय पहुंचि घर गृहस्थीक सामान सब खरीदैत – खरीदैत बहुत थाकि गेलाह आ ६ अगस्त के ट्रेनिग आरंभक पहिले दिन जौडिस के शिकार भय अस्पताल एडमिट भेलाह । उपचार भेलनि ठीक भेलाह । सिक लीव भेटलनि । भेटलनि । छुट्टी में गाम त नहिं गेलाह जे अपन पढ़ाई करताह आ संगे अपन एकमात्र साढ़ जेपढ़य में नीक नहिं रहथिन्ह जखन कि सर्टिकिकेट मैट्रिक फर्स्ट डिविजन रहनि आ हुनका जखन एक दिन गामसभक सहज भाषा में गाड़ि पढ़ने रहथिनत आभास भय गेल रहनि जे हिनका में बहुत आमूल सुधारक आवश्यकता छनितें श्वसुरजीक देल पछिला सुख-दुख के बिसर हुनका आग्रह केलखिन्ह जे जौ हुनका नेवी में भेर्त्ती करेबाक ईच्छा होन्हि त भेजि दियौन्ह । हुनकर स्स्ढ़ एबो केलखिन्ह । पहुंचला उत्तर एकदू दिन बाद ओ अपना साढ़ के पहुंचनामा चिठ्ठी अपना बबूजे कें लिखि भेजबा लेल कहलखिन्ह । अंग्रेजी में । अंग्रेजीमें ओ पत्र लिखबा में असमर्थ रहथि । पश्चात् हुनका पत्रक पता अंगरेजे में लिखय कहलखिन्ह सेहो समर्थ रहथि । एहन आई- काल्हिक मैट्रिक फर्स्ट डिविजनक विद्यार्थी होईत छथिन्ह । अस्तु अपन पढ़ाई शुरु केलनि । दू-चारि दिन कें,दीय विद्यालय सभक शिक्षक लग ट्रयूशन सेहो पढ़य गेलाह । बाद में बहिनो के कहलखिन जे हमरा हुनका सभक पास भेजय सं नीक अपनहिं पढ़बितहुं । अस्तु ... ओ भोर सांझ हुनको पढ़ाबथि, अपनहु पढ़थि आ नया-नया परिवार लय गेल रहथि से हुनको सभ पर ध्यान देथि । कोनहु तरहे सभय बीतैत गेल । हुनकर साढ़ जे अंग्रेजी में बाबूजीक नाम पता नहिं लिखि सकैत रहथि, अंग्रेजी मीडियम सं नेवीक आरटी-किसर अप्रेंटिश के परीक्षा पास कयल । हुनकहु मिहनत के यश भेलनि । ट्रेनिंग सेंटर में २ बैच म् रिजठ्ट निल भेल रहैक जहि कारण हिनका खूब यश भेलनि । सासुर में साढ़क मित्रवर्ग आ ग्रामीण कें आश्चर्य होइन्ह जे ई अंग्रेजी मीडियम सं कोनो परीक्षा पास केलथि । एम्हर सुलक्षणजीक सुलक्षण व्यवहार अपन सुप्तावस्था सं जागृतावस्थाक तरफ प्रवेश कय रहल छथिन्ह जकर परिचय समय पर अपनेक लोकनि के भेटत । कर्म और भाग्यक क्र्म समय के संग चलैत रहैत छैक । हिनकहु संग चलैत रहलनि । छोट-आ पैघ बहुत रास सुखाअ दु:ख एलैन, अकझो-ड़लकनि आ बीति गेलैन । एही क्रम में हिनका श्वसुरजी कें कुसियार, रस, राव आ गृड़ आदिक बिजनेश लेल पैसाक आवश्यकता भेलनि जे ई कहि के लेलखिन जे एहि धंधा मे पूजी फंसेला सं नीक फायदा छैक आ हुनका सेहो किछु लाभ भेटतनि । अस्तु, मानव-मानवक मदद करथि (यदयपि कलियुग मे नीक लोककें ई शुभ कार्य तकलीफो दैत छनि ) त कोनो गलत नहिं भेलैक । पैसा लेल सेहो बहुत समय बीतल । बीच में हुनकर भगिनी (जे बहिनो हिनका पु:खक समय के एकमात्र सहारा रहथिन्ह हुनक दू पुत्री आ एक पुत्र महक प्रथम्,अ पुत्री ) बढ़ि के विवाह योग्य भय गेल रहनि । आ ई ओहि विवाह में अपन भ्यागीदार बननाबा लेल पूर्ण प्रयलशील रहथि संयोगवशाहहिनकर श्वसुर के सेहो अपन दोसर पुत्री लेल बर ढूंढ़बाक आवश्यकता रहनि । संगहिं हिनका छुट्टीक दरम्यान ओचाहथिन्ह जे अधिक सं अधिक लोक सं संपर्क कयल जाय जाहि सं ओ अपन जमायक प्लस प्वाईट स फायदा उठा सकथि । खैर एहि बात सब लय हिनका हुनका सब सं कोनो शिकायत नहिं रहनि आ इहो त अपन भगिनी खातिर प्रयास में लगले रहथि । एहने एह प्रसंग में हिनक श्वसुर भावी समधि जी कें बुझाबैत रहथिन्ह जे अपनेक बालक के हम नेवी में नौकड़ी धरा देवनि । देखैत छिएक जे पहिले त हमर जमाय नेवी में रहथि त ओ हमर बालक के एवं एकटा अपन ममियौत के नौकड़ी धरेलखिन । आब त हमरा बेटा आ जमाय दूनू नेवी में छथि तें हमरा लेल नेवी में नौकड़ी धरायब कोनो कठिन नहिं अछि। आदि-आदि आश्वासन दय रहल छलखिन । बाद में इहो ओहि लड़का पिता के सभक सोझे में कहल खिन, श्रीमानजी वर्तमान में हमरा एकटा भगिनी छथि आ हमरा दु:खक समय में एकमात्र सहारा हुनकर पिताजी (स्वगीर्य) रहथि । तैहेतु ओहि भागिनी सं जे पर विवाह करताह तनिका लेल पढ़ा लिखा के नेवी लेल तैयार कख हमर पहिल कर्त्तब्य थिक । हिनका लोकनिक बेटी-जमाय सब लेल हम थोड़-बहुत मदद मात्र करबनि आ पूर्ण रूपेण हमर प्रयत्न अपन भगिनीक वरक लेल रहत एहि बात के ध्यान मे राखि अपनेक लोकनि हमरा भगिनी के लेल सेहो वर दूंढ़बा में मदद करब त बड़ पैघ कृपा होयत । बस बरक गृहस्थ बाप के लेल “ प्रत्यक्षं किं प्रमाणं “ वला वाक्य सुनबा में आबि गेलनि आ ओ लोकनि हिनकर वाक्य आ शब्द कें ब्रहमवाक्य सदृश बूझि हिनका परोक्षे में हिनका भगिनी सं विवाह कय देल । थोड़ेक समय लेल बदनामी के दौड़ सेहो शुरु भेल हिनका पर थोड़ेक आरोप दबले जुबान सं हिनकर सासुरक लोक लगेलखिन्ह । जकर ई सोझ जवाब देलसिन्ह जे ई जतय-जतय हुनका (श्वसुर-जी) संग गेलखिन्ह सभठम इएह कहलखिन्ह जे भगिनीक वर हेतु प्रयास हमर कर्तव्य थिक आ हुनकर पुत्रीक वरक प्रति प्रयास हुनका सभक काज छियनि जाहि में हम सीमित मदद मात्र स्वेच्छा सं ईच्छा होयत त करबनि । ई वाक्य ओ सबठाम कहल खिन्ह आ ओकरे ओ परिणाम छल । परंतु हुनक सुलक्षणा पत्नी जे पुर्वहु में शास्त्रो क्त सभ बात सुनि परिहास मात्र करैत छलखिन्ह आ पति कें प्रताड़ित करबा में कोनहु दुश्मन सं कम प्रयास नहिं केलखिन्ह । बार-बार ओ अपन पत्नी के उपरोक्त यथार्थ बात के बुझबैत रहलखिन्ह लेकिन ओहि सुलक्षणा पत्नी पैघ बापक बेटी एवं पैघ पाई वला भाईयक बहिन के अंधकार रूपी अहकारी एवं नास्त्रिक बुद्धि पर कोनो सुधारात्मक प्रभावन्हिं पड़लनि । क्रमश: समय त सुख सं कटय वा दु:ख सं एहिना बीतैत रहैत छैक । हिनका अपन भगिन जमाय हेतु देल वचन कें पूरा करबा में जे तकलीक भेलनि विधाता ककरहु दोसर के नहि देथिन्ह त नीक । समय अपन रफ्तार सं बीत रहल छल । किनकहु जखन कनेक समय नीक बीतय लगलनि त इच्छा भेलनि जे गाम में कोनड मेन रोड सभक कात में दू चारि कठ्ठा जमीन लितहुं त नीक छल । ओ अपन मनक बात अपन पिताजी कें कहल खिन । पिताजी हुनकर बात के मानि, जखन एकटा जमीन मेनरोडक कात में पता लगलनि त हिनका सूचित केलखिन्ह । ई ओहि जमीनक बात पिताजी सं कय, कीमत के तैयारी केलनि आ श्वसुर जे के जे पाई काफी समय पूर्व देने रहथिन्ह ताहि में सं एक तिहाई कम सं कम एखन वापस करय कहलखिन । हिनक श्वसुर देवता हिनका वचनो दय देलखिन जे हँ अपनेक विशाखापटनम सं गाम आऊ हम पाई रखने छी । ई गाम गेलाह । बाबूजी सं सब तरहक बात केलनि । बांकी पाई श्वसुरजीक आश्वासन वला पाई छोड़ि ई विशाखा पट्टनम सं लैये गेल रहथि । केवल कनेक पाई जे श्वसुर जी हिनके पाईयक एक तिहाई वापस करबाक वचन देले रहथिन्ह । ओतय गेलापर नहिं देलसिन । मन में दु:ख त बड़ भेलनि, मुदा करताह की” ये ऐस आग है जिसमें धुआं नही होता । छुट्टी गेनाई-एनाई किराया आदि सभ ब्यर्थ गेलनि । सुलक्षणा पत्नी कें कलियुग में जाही तरहक आनंद भेटय चाही वएह भेटलनि”जे नीक भेल “। कहि उत्तर देलखिन्ह कारण जे ओ रोड कातक जमीन त हुनकर पति के कपार पर रहितैन ओहि सं पत्नी आ बाल बच्चा कें कोन सुख? कहब छैक जे कोनहु बात वा वस्तु अपनेक कोन रूपमें ग्रहण करैत छिएक ताहि पर निर्भर आछि । आ हुनका श्वसुर के दोसरहिं क पाई (जमा ईयक पाई) सं घर लग में कोनो घरारीक बात मात्र होईत रहैत ताहि लेल सुरक्षित रखबाक रहनि । जखन कि ओ घरारी ओहि समय में बिकेबो नहिं केलैक । हुनका अपन पाई सं नहिं आपितु जमाई के पाई लेल सेहो जमाई के धोखा देबा में किनहु टा संकोच नहिं भेलनि । आ पत्नी सुलक्षणा जी तैयो हुनके (अपना पति कें) प्रता-ड़ित करबा में कोनो कसर नहिं बांकी रखलनि । अस्तु , समय बितत्ते जाईत छैक । परंतु हुनको घायल हिरणी जकां दर्द त रहबे करनि । ओ अपन दर्द व्यक्त नहिंकरैतव् छथि लाज सं, तैं दर्द नहिं होईत छनि से बात त नहिं । दर्द त बहुत बेशी होइत्ते हेतन्हि । अस्तु “लगा दे आग में पनि जवानी उसको कहते है मिटा दे बाप की दौ-लतफुटानी उसको कहते है।“ ओहो लोकक मुह सं सुनैत रहथि लेकिन ओ ईज्जदार ब्यक्तिके मुह सं उच्चरित नहिं होईत रहनि तें हिनकर उक्ति रहैन्ह “ लगा दो आग में पानी जवानी उसको कहते हैं, मिटा दो खुद अर्जित दौलत को फुटानी उसको कहते हैं “। अनकर कमाई पर फुटानी सब केयो कय सकैत छथि । लेकिन फुटानी लेल स्वयं द्वारा ओतेक धन बिना किनको आश्रय के अर्जित (मावक प्यार – एक असीमीत स्नेह भरल ममता पत्नीक प्यार-बघबा दुलार, ताहू में जौं अज्ञान रूपी अंधकार में डूबल पैघ बापक बेटी होथि) कय सकी ई इज्जतक विषय थीक । तें हेतु अपन परिश्रम सं “ विद्या ददाति विनयं, विनयात् यात् पात्रतां, पात्रत्वां धन माप्नोति, धनात् धर्म: तत: सुखं “एहि मार्ग पर चलबाक पूर्ण प्रयास कहि कयलनि । बहुत रास विवाह द्विरा गमन के बाद दोसर वर सभकें प्राप्त सुख सब देखि हिनकहु आश- मनोरथ जे ओहि समय पूरा नहिं भेल रहनि अपन परिश्रमक बले आ भगवतीक कृपा सं प्राप्त कयलनि । एकटा घड़ी, शाईकिल आ रेडियो ओहि समयक साधारण मणुष्यक साधारण आवश्यकता, माय-बापक साधाअरण आवश्यकता सब के पूरा करैत, इहो अपन आश पुरौलनि । बाद में पत्नी जी कें पैघबापक पैघबेटी के सेहो ईच्छा भेलनि जे आई काल्हि आ चवन्नी – अठन्नी सभक प्रचलन कम भय गेल छैक तें एकटा चेन लितहु । हुनका लेल पत्नी जीक मनक बात शिरोधार्य भेलनि । दून गोटे बंब ई में बाजार गेलथि और अपन आर्थिक स्थिति के देखैत एकटा चेन लेलथि । बाद में पायल, कान आदि महकजे कोनो पस्तुक आश भेलनि से ई सामर्थ्य के हिसाब सं खरीद-के पत्नी के आश-मनोरथ सेहो पुरेलखिन । कारण जे पैघ बापक बेटी मात्र हेबा सं आश-मनोरथ नहिं पूरैत छैक अपिति पैघ बाप वा एकटा गरीब गृहसथ किसान अपन बेटी के हाथ उठाकऽ की दैत छथिन ताहि सं आश मनोरथ पूरैत छैक । यथा घर में खीर बेनेबा काल खीर में चीनी कतेक दैत छिएक, मिलबैत छिएक ताहि अनुकूल खीर मीठ होयत न कि घर में दू पट्टा पीनी चीनी राखल अछि ताहि सं खीर मीठ अपने आप भय जेतैक । आ एहि छोट बातके सेहो बुझबाक लेल थोरबहु ज्ञान-चक्षु जरूर खूजल हेबाक चाही । पर अफसोस जे हुनकर आभिमानी अज्ञानी बंद आंखि एहि सब में सं कोनो वस्तु बात केन सूझय देलकनि न बूझय देलकनि । कारण जे हुनकर त एकमात्र उद्देश्य कलियुग के अपन जवानी पर हेबाक कारण “ पतिदासा स्थानपर किए स्वयं पति दस “ के साबित करबाक रहनि । पति के देह में आगि लगा अपन हाथ सेकैत छथि । जलन सं की दर्द होईत छैक ओ जलनाहर बूझैत छथिन न कि हाथ सेकनिहार । ताहू में जखन कलियुग अपन पूर्ण शैष्ठव पर हो । यथा=६६ हे उधो बैरी नंद किशोर, प्रसवपीड़ की बांझ परेखत, रवि की बूझत चकोर, हे उधो बैरी नंद किशोर ॥ आद-स्वाद की मरकह जानय, पर हित जानय चोर । अबला (कमजोर) के दुख अबला जानय, अबला घर में शोर, हे उधो तें हेतु जलनाहरक दु:ख, जलनाहरे टा बूझि सकैत छथिन्ह आगि सेकनिहरि हुनकर – सुलक्षणा पत्ने नहिं । तथापि समयत देवी-देवताक लेल सेहो जखन नहि रूकल त हिनका सन अबला ब्राहमण लेल सेहो जखन कलियुग अपन पूर्ण जवानी समय अपन गति सं बीतैत रहल । हिनका लेल त नियति बनि गेल रहनि जे “ नाव कागज का गहरा है पानी, फिर भी हर हाल में (सभ दु:ख के सहितहु) मुस्कुराकर दुनियादारी पड़ेगी निभानी । “ दुनियादारी कोनहुना हॅसैत बिता रहल रलथि । ताहू में जौं किनको दुश्मन किछु तकलीफ दैत छ्थिन्ह त ओ ओतेक अधिक कष्टदायी नहिं होईत छैक जतेक अपनक देल कष्ट होईत छैक । कष्ट दैत छैक । कारण, करैला मणुष्य के जे तीत लगैत छैक त ओतेक तकलीफ नहिं होईत चैक । परंतु जं खीड़ वा रसगुल्ला करैला सदृश तीत लागत त शायद अपनेक लोकनि ग्रहण (स्वीकार) नहिं करबैक । परंतु ओहो सहैत घर यें शाति बनल रहय ताहि लेल शांत रहलाह । लेकिन हुनका पत्नी के भूत अपन अलगे दिशा में नेने जा रहल छनि । हिनका पत्नी के लेल हिनक पिता, माता, भाई आ बहिन बड़ पैघ बोझ छथिन्ह । हिनकर (पत्नीक) पिता, माया, भाय (अपन सहोदर वा पितियौत) या बहिन जे किछु कहनि से सही थिकैक । ओ झूठहू बाजथि, हिनका पति कें ठकि के बेवफूफ बनाबथि, हिनका पति कें घोखा दय अपन ऊंगली सीधा करथि ओ हिनका लेल ईज्जतक बात थिक । कारण हिनक पति के अपमान त हुनकर पति मात्र के प्रभावित करैत छनि । हिनकर ईज्जत पर ओहि सं कोनो फर्क नहिं पड़ैत छनि ई हिनकर बुद्धि के अज्ञान रूपी विशेषता छियनि । नैहर में किनको विवाअह होनि, उपनयन हो, श्राद्धहो, मुंडन हो, द्विरागमन हो भांज पूरब हुनक पत्नी के वड़ पैघ आवश्यक काज भय जाईत छनि । ओहि सभ विषय मे चर्चा लेल हुनका लाख बुझेलाक बावजूदहु सभ सं नीक समय जखन बच्चा दूनू सांझ या भोर में पढ़य लेल बैसल रहतनि, तखनहिं पढ़ाई जाहि सं बाधित हो, ताही समय में हिनका घर में अट्ठा-बज्जर खसायब सबसे बेशी प्रिय छनि परिणाम आई हुनकर दूनू बच्चा में सं एकोटा ओतेक नीक परिणाम नहिं पाबि सकलथि जकर संपूर्ण परिवार आ समाज के आशा छल । हिनका लग आबि जाहि समय में हिनकर उप्तात एतेक जवानी पर नहिं छल हिनकर सहोदर भाई (पत्नीजीक भाई) एवं एकटा ममियौत भाई मात्र हुनकर निर्देशन में पढ़ाई कय आशातीष सफलता पौने छथि । आ जखन हिनकर अपन बच्चा के पढ़ि-लिखि नीक बनबाक समय एलनि त हिनकर उत्पातक जवानी ओहि लक्ष्य के दूर खिसकबैत चल गेल । आई ओ अपन भाई-वा-बहिन के ओहिठाम कोनो काज में जेबा में कोन कथा जे ओकर चर्चा करबा में भय के अनुभूति करैत छथि । जाहि में मन सं नहिं बाल्कि नाम मात्र लेल गाम जेबाक आग्रह करैत छनि, जेबा लेल ब्याकुल भय जाईत छैथ । बूझल छनि जे ओ पिति यौत मुंडनक समय में एक पेट भोजन के अलावा भोर में चाय-जलपान सेहो नहिं देथिन्ह । बच्चाक लेल सभटा कपड़ा बच्चाक भाई लेल सभटा कपड़ा आ बिधिगत सामान सब भेजिये देने रहथिन आ तैयो बिध पूरय लेल गाम जेबाक लेल पति कें एकटा दास सं सेहो बेशी परेशान कय देने रहथिन । ओहिठाम जखन हुनकर माँ हुनका संग में रहथिन्ह तखन हुनका उपर आ हुनका माँ के उपर लांक्षणा उपराग और जुल्म कतेक केलखिन तकर वर्णण जतेक कयल जाय से कम होयत । आवेश में आबि, जवानीक अज्ञानी शब्द मे एतेक तक जे “ रौ पापी , हमरा लग किएक सुतैत छैं, अपना माय लग सूत, आई सं तोहर माय तोहर बहू छियौ, हमरा लेल तू मरि गेलै, हम सिदूर धो लैत छी आ चूड़ी फोरि लैत छी, तोहर भाय सेहो किएक ने माय के खेबा खर्चा जोड़तौक, एही रंडी केहम भार नहिं उठेबै आहि-आदि ततेक तांडव नृत्य ई भोर – सांझ पसारब शुरु कय देलखिन जे अंत में अपना नौकड़ी में छुट्टी नहिं भेटला पर हुनके एक पितियौत भाई के सग, ई अपन माय के अश्रुपूरित नेत्र सं टिकट कटाय विदा केने रहथि । ओ दिन आईयो हिनका याद भेल पर आंखि भरि जाईत छनि । तैयो जिन्दगी छिएक । आखिर मौतहु त एतेक आसानी सं किनको नहिं भेटैत छनि । तें खूनक घूट पीबि जीवैत रहलाह, सब दुख सहैत रहलाह । एहिना समय बीतैत रहल । हिनका लेल घर में चारि आदमी के आश्रम छनि जाहि में मोटा-मोटी एक आदमी के भोजन एक्स्ट्रा ( अतिरि क्त)बनितहि छनि । ओकोनो अतिथि अभ्यागत के एला –पर भोग होईत छनि नहिं त फेकल जाईत अछि । परंतु हिनक माँ ओहि भोजन के एतय ग्रहण करितथिन्ह त ओहि में हिस्सेदारीक प्रश्न आनि बज्रपात कए दैत छलखिनच् । हिनक पिता ओहि सं किछु वर्ष पूर्वहिं गत भय गेल रहथिन जे कथाक प्रसंग मं बिषय याद नहिं रहबाक क्रम में छूटि गेल अछि । जावत तक हिनकर पिता जीवैत रहथिन्ह, हिनकर माता-पिता एक ई ज्जत दार गृहस्थक जिंदगी बितौलनि जे आईयो गाम मे एक आदर्श मानल जाईत आछि । परंतु समय बड़ बलवान होईत छैक । यमराज बाबा एक भाद्र शुक्ल नवमी तिथि केहिनक पिता के उठा लेलखिन । तकरा बादहि सं त कलियुग अपन विकराल रूप हिनका आ हिनका माँ के देखाअयब शुरु केलनि जरर उपरो त्क परिणाम – भोग – लनि । एहिना जिंदगी कखनहु दुखक पहाड़ के शीर्ष पर त कखनहु मध्य में त कखनहु सं योगवशात् किछु शांतियहु सं बीतैत रहल । परंतु एहि क्रम में शांतिके क्षण बहुत कम आयल जहि कारण किछु निश्चित दिशा तय करब बड़ कठिन रहलनि । तथापि कालक गति चलैत रहल, समय बीतैत रहल । पुन: एक बेर गाम में सपरिवार छुट्टी गेलाह । आ पत्नी सं आदेश प्राप्त भेलापर माय के दिल्ली अन-लनि । किछु दिन समय बड़ बढ़िया बीतल । परंतु शांतिक दिन रास्ताक पड़व सदृश कमहिं दिन चलल आ जे जननी हिनका जन्म देने रहथिन्ह, ओहि अबला विधवा जे मड़लापर अपन पतिक छोड़ल जमीन कपाड़ पर नहिं लय जेतीह तनिका पुन: प्रताड़ना पहिले जकां शब्द सब सं शुरु भय गेल । एक दिन भेल, दू दिन बीतल, रोज-रोज एहने आतंक होइंत गेल आ बढ़ैत गेल । अंत में एक दिन हिनका मजबूर भय अपन माय कें अपन छोट भाई लग पहुंचाबय पड़लनि । एहि दुख के एकटा माय, एकटा संतान आ एकटा इंसान मात्र समझि सकैत छथि । एकटा हैवान, सुलक्षाणा नहिं, आ इएह भेल । हुनकर सुलक्षणा व्यवहार नहिं सुधरलनि । हुनकर स्कूल कालेजक पढ़ाई के दरम्यान पढ़ल पंक्ति “ ऐ खुदा तू मौत दे पर बदनशीबी नहिं दे “ एतय फेल भय गेलनि । ओ बदन-शीबक जिन्दगी जीबैत रहलाह आ आइयो जीब रहल छथि । बाद में हुनकर माताक वृद्ध शरीर, पति पहिनहिं स्वगीर्य भय गेल छलखिन, बेटा-पुतोहु के एहने ब्यवहार, एहि सभक कारण बहुत अधिक टूटि चुकल शरीर बहुत कमजोर भय गेलीह । दुखित रहय लग-लीह, होट-बेटा पुतहु गाम में संगमें रहबाक कारण यथासाध्य सेवा शुश्रुषा केलखिन्ह । लेकिन हिनका तीन महीना तक छोट भाई समाद दैत रहि गेलनि । भैया अबियौक-भैया अबियौक , आब माय नहिं बचतीह, मात्र किछु दिनक मेहमान रहि गेल छथि । भौजी कें एतहि रहय पड़नि, हिनका हरदम हरपल सेवा शुश्रुषा के जरूरत छि । ई आबि अबैत छी, काल्हि अबैत छी, करैत रहलखिन । पत्नीजी कहियो जोर नहिं देलखिन जे अहां जैयोकमाताजी थिकीह । हमहू (पत्नी जी लेल) जायब आखिर ओ हमर सासूजी थिकीह । हम हुनकर सेवा करबनि । किछु एहि तरहक सुविचार कलियुगक प्रभाव नहिं उव्पन्न होभय देलखिन । अंत में हुनक माँ बेटा-बेटा करैत, ३ महीनातक असाध्य तकलीक सहैत छ: सतान में सं हिनका सन भाग्यशाली (कलियुगक अनुकूल) संताअन के मुंह बिना देखने वा देखौने एहि नश्वर शरीर के त्यागि चलि गेलीह । हाय रे हिनकर भाग्य ।... बादमें ई हुनकर श्राद्ध कर्म हेतु अग्नि संस्कार सभक बाद गाम पहुंचलाह । जीवैत में दूटा मधुर बोल वा दू बेर पैर जांति हुनकर सेवा कय आशीर्वाद लितथि से नहिं कय सकलाह । मुदा बाद में मायक श्राद्ध बड़ बढ़ियाँ जकां केलनि । सौंसे गाम में यश भेलनि, सुलक्षणा पत्नीजी सेहो एहि में केनो विरोध नहिं कय पूर्ण सहयोग केलखिन अ पूर्ण यश भेलनि । परंतु की एहि उक्तिक परिचय नहिं देलखिन्ह –कभी प्यासे को पानी पिलाया नहिं । बाद (मृत्यु उपरांत) अमृत पिलाने से कया फायदा ॥ ओ हिनक सासुजी रहथिन, विधवा रहथि, आबला रहथि, हिनकर पतिक माताजी रहथिन्ह । हुनका संग ई ब्यवहार की हिनका अपना बच्चा पर नीक प्रभाव देतन्हि । की ई कुकुरक कथा जे हुनका सूखल हड्डी चिबाबय लेल देल जाईत छनि, हुनका हड्डी सं नहिं अपितु अपने मुंह सं खूब खूननिकलैत छनि आ मालिक, हड्डी देनहार कहैत छथिन, हँसी करैत अओर चुबाऊ देखियौक केहन ताजा मौंस अछि । ली? की हुनका (सुलक्षणा जी) अपन समर्थ बेटा – बेटीक अछैत एहि तरहक करबाक चाही ? की हुनक पितियौत भाईक बच्चाक मुंडन के उपलक्ष्य में गाम जायब, सासुजी के दुखित अवस्था सं बेशी जरूरी रहनि । परंतु के सोचत? ककरा फुर्सत छैक ? एहिना मूर्ख लोकनिक गति छोईते रहतनि । आ अंत में पश्चाताप-पश्चाताप-आ पश्चाताप मात्र हेतनि जखन स्वयं ज्ञान हेतनि आ बजतीह-“अब पछताये होत क्या चिड़िया चुग गई खेत “। ई लिखल गेल अछि कलियुगक हरओहि व्यक्ति के लेल जे आम खेबाक अभिलाषा सं नीमक गाछ रोपैत छथि| डा.रमानन्द झा ’रमण‘ जन्म 02 जनबरी,1949,शिक्षा-एम.ए.,पीएच.डी., आजीविका-भारतीय रिजर्व बैंक, पटना (सेवा निवृत्त)। प्रकाशन: मौलिक- समीक्षा 1.नवीन मैथिली कविता,1982,2.मैथिली नऽव कविता,1993,3.मैथिली साहित्य ओ राजनीति, 1994,4.अखियासल, 1995,5.बेसाहल,2003,6.भजारल,2005.,7.निर्यात कैसे शुरू करें? हिन्दी- रिजर्व बैंक, पटनाक प्रकाशन सम्पादित 8.मैथिलीक आरम्भिक कथा, 1978 समीक्षा,9.श्यामानन्द रचनावली,1981,10.जनार्दनझा‘जनसीदनकृत निर्दयीसासु (1914) आ पुनर्विवाह(1926),1984 11.चेतनाथझाकृत श्रीजगन्नाथपुरी यात्रा (1910),1994,12.तेजनाथ झाकृत सुरराजविजय नाटक (1919), 1994,13.रासबिहारीलाल दासकृत सुमति (1918),1996,14.जीबछ मिश्रकृत रामेश्वर (1916),1996,15.भेटघॉंट (भेटवार्ता),1998,16.रूचय तँ सत्य ने तँ फूसि,1998 17.पुण्यानन्द झाकृत मिथिला दर्पण(1925), 2003,18.यदुवर रचनावली (1888-1934) 2003 19.श्रीवल्लभ झा(1905-1940)कृत विद्यापति विवरण, 2005,20.मैथिली उपन्यासमे चित्रित समाज, 2003,21.पण्डित गोविन्द झाः अर्चा ओ चर्चा,1997 प्रबन्ध सम्पादक, 22.कवीश्वर चेतना, 2008, चेतना समिति, पटना अनुवाद 23.मौलियरक दू नाटक,1991, साहित्य अकादमी,24.छओ बिगहा आठ कटठा,1999, साहित्य अकादमी,25.मानवाधिकार घोषणा Universal Declaration of Human Rights २००७( यूनेसको),26.राजू आ’ टाकाक गाछ, 2008 रिजर्व बेंक -वित्तीय शिक्षा योजना के अन्तर्गत पत्रिका सम्पादन-सह-सम्पादन 1.प्रयोजन,1993 (मासिक),2.कोषाक्षर (हिन्दी)1982,3.घर बाहर,त्रैमासिक, चेतना समिति, पटना कार्यशाला 1. National Workshop on Literary Translation,- Dec 20.1991 to January12,02,1992, Sahitya Akademi, New Delhi 2.Bonds Beyond the Borders ( India-Nepal civil society interaction on Cross Border issues) -Consulate General of India, Birgunj, Nepal and B.P.Koirala India-Nepal Foundation-May 27-28, 2006 2.Preparation of Intensive Course in Maithili- ERLC, Bhubneswar जूरी 6th Inter National Maithili Drama Festival,1992 -Biratnagar, Nepal पुरस्कार- सम्मान 1.जार्ज ग्रियर्सन पुरस्कार, 1994-95,राजभाषा विभाग,बिहार सरकार, मैथिली नऽव कविता पुस्तक पर,2.भाषा भारती सम्मान, 2004-05 छओ बिगहा आठ कटठा,(अनुवाद) CIIL, मैसूर डा.रमानन्द झा ‘रमण‘-मिथिलांचलक दलित समाजमे लोकगाथा :मैथिली लोकगाथामे दीनाभद्री 01 एवं 02 मार्च, 2009, भागलपुर राष्ट्रीय संगोष्ठी-मिथिलांचलक दलित समाजमे लोकगाथा मैथिली लोकगाथामे दीनाभद्री
हमर प्रतिपाद्य अछि-मैथिली लोकगाथामे दीनाभद्री । राष्ट्रीय संगोष्ठीक विषयक मूल शीर्षकमे दू टा महत्त्वपूर्ण पद,मिथिलाक स्थान पर मिथिलांचल तथा समाजक स्थान पर दलित समाज अछि। मिथिला अथवा समाजसँ सम्पूर्णताक जे बोध होइत रहल अछि, से एहिसँ नहि होइत छैक। किन्तु ई दूनू शब्द सम्प्रति नव अथर्वत्ता प्राप्त कए लेलक अछि। ई अर्थवत्ता थिक निर्वाचनीय लाभक हेतु मिथिलांचल एवं दलित समाजक नामक उदघोषपूर्वक प्रयोगक चालि । आब तँ दलितमे महा शब्द जोड़ि महादलितक उत्थानक गप्प किछु राजनीतिक दल करय लागल अछि। वस्तुतः इहो फुटाएबे थिक। आ’’ प्रायः एही हेतु दलितक पक्षधर नेतालोकनि महादलितक विरोध कए रहल छथि। किन्तु जे हो, एहिना जँ क्रम चलैत रहल तँ मिथिलांचलमे महादलित समाजक लोक गाथाक पर संगोष्ठी सेहो आवश्यक भए जाएत। ई लोकतन्त्रक युग थिक। लोकतन्त्रक सुदृढ़ताक हेतु जाहि कोनो तत्त्वक सभसँ अधिक महत्त्व अछि, से थिक लोकशक्तिक गरिमामय प्रतिष्ठापन। लोकशक्तिक गरिमाक प्रतिष्ठापन लेल समाजक प्रत्येक सदस्यके ँअपन गौरवमय इतिहासक परिचय कराएब आवश्यक अछि। संगठित लोकशक्तिक उदय आ‘ विस्तारक ओहि परिचयसँ सम्भावना बढ़ि जाइत छैक। प्रतिफल होएत विकासक बाटक प्रशस्त होएब। विकाससँ सुख समृद्धि अबैत अछि। लोकक क्लान्त मुखमण्डल पर सुख समृद्धिक फूही निरन्तर होइत रहैत छैक। सुख समृद्धिक निरन्तर फूहीसँ सन्तोषक हरितिमाक स्थायी विस्तार भए जाइत अछि।जागरण, संगठन, सामाजिक दायित्वबोध आ’ समन्वित राष्ट्रीय दृष्टिक विकासक अनेक बाट अछि। ओहि बाटमे प्रमुख अछि, स्वर्णिम अतीतक पराक्रमी व्यक्तिक अवदानक परिचय द्वारा लोकके ँउत्प्रेरित करब। मिथिलाक सांस्कृतिक इतिहास पराक्रमी महापुरुषक गौरव गाथासँ परिपूर्ण अछि। गाथा पुरुषक विषयमे जनबाक अनेक स्रोत अछि। ओ स्रोत सभ लिखित आ’ अलिखित दूनू अछि। जे लिखित अछि पढ़ल-लिखल लोक तकरा पढ़ि पढ़ि सामाजिक बोधसँ अभिभूत होइत रहलाह अछि आ’ जे लिखल नहि जा सकल, से लोक कंठहिक माध्यमे आइ धरि सुरक्षित रहि प्रेरणाक अजस्र स्रोत प्रवाहित करैत आबि रहल अछि। एहिठाम चर्चाक विषय समाजक ओहने पराक्रमी लोकक प्रेरणादायी व्यक्तित्व अछि जनिकर गौरव गाथा अलिखित रहल। एम्हर आबि किछु तँ लिपिबद्ध भेल वा भए रहल अछि। किछु काज असम्बद्ध वर्गक लोक द्वारा भेल अछि तथा शिक्षाक विकासक उपरान्त सम्बद्ध वर्गक लोकहुक द्वारा प्रारम्भ कएल गेल अछि। ओहीमे सँ एक अछि दीनाभद्री लोकगाथा। जकर पराक्रमी नायक छथि भ्रातृद्वय दीना आ’ भद्री।डा. वीरेन्द्रनाथ झा (मैथिली लोक महाकाव्यक आलोचनात्मक अध्ययन,शोधप्रबन्ध,1987, ल.ना.मिथिला विश्वविद्यालय ,अप्रकाशित) मैथिलीक जाहि नओ गोट लोकमहाकाव्यक उल्लेख कएल अछि, ओहिमे अछि-1.दीनाभद्री,2.दुलरादयाल,3.नइका बनिजारा,4.विहुला,5.रूइया रणपाल, 6.लवहरि कुशहरि,7.लोरिक,8.विजयमल्ल एवं 9.सलहेस। किन्तु एहिमे विजयमल्ल मैथिलीक लोकगाथा नहि थिक, ओ भोजपुरीक लोकगाथा थिक। एकर प्रकाशन जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन (जॉर्नल आफ दि एसियाटिक सोसाइटी आफ बंेगाल, 1889-ै 1889&Songs of Bijai Mal) कएने छथि। एकरा स्पष्ट करैत डा. आशा गुप्त (जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन और बिहारी भाषा साहित्य, 1970)े लिखने छथि जे भौगोलिक दृष्टिसँ अवश्य विजै मलक कथा पटना-गयाक सीमापर स्थित दायापुर पारवती नामक स्थानसँ सम्पृक्त एवं तेली जातिमे बहुप्रचलित कहल गेल अछि।उपर्युक्त लोकगाथा सभमे मिथिलाक विभिन्न जातिक उत्पीड़न एवं ओहि उत्पीड़नसँ त्राणकर्ताक पराक्रमक जयघोष अछि। ओ नायक सभ पराक्रमी जातीय नेताक रूपमे मान्यता पाबि स्मरणीय एवं पूज्य भए गेल छथि। ई लोकगाथा सभ कहिआसँ अस्तित्वमे अछि, एकर रचना के कएलनि, हुनक काल की थिक, से सभटा तँ अज्ञात एवं अस्पष्ट अछि, परंच एहि लोक गाथा सभसँ ई तथ्य अवश्य फरिछाइत अछि जे समाजमे विषमता छलैक, शोषण आ’ उत्पीड़नक उजाहि निरन्तर उठैत रहैत छल। वैयक्तिक भावना एवं मानवीय मूल्यक महत्त्व छलैक। बाहुबलक समक्ष आन सभ बल महत्त्वहीन भए जाइत छल। आ’ ओही बीचसँ एक जातीय बाहुबलीक जन्म होइत छलैक जे अपन पराक्रमक बल पर जातीय अस्मिताक अनादरकार्ता एवं शोषक वर्गक विरोधमे तनि कए ठाढ़ भए जाइत छलाह।ओ सभ अपन-अपन जातिक प्रतिष्ठा आ’ जातीय व्यवस्थाके ँ अक्षुण्ण रखबाक हेतु आजीवन सक्रिय एवं सतर्क रहैत छलाह एवं जातिक प्रतिष्ठा, उन्नति एवं अवनति आदिक सभ छारभार ओही नेता सभ पर निर्भर छलैक। एहि प्रकारक जातीय भावनाक विकास एकपक्षीय नहि छल। जातीय नेता जेना अपन जातिक हितचिन्ता सदिखन करैत रहैत छलाह, ओहिना हुनक जातिक समस्त सदस्य ओहि नेताके ँअपन उद्धारक एवं संरक्षक मानैत आदर एवं सम्मानक पद दैत रहल।हुनक शौर्य एवं पराक्रमके ँ गाबि-गाबि प्रेरणा ग्रहण करैत रहल। जे ँ कि एकर संक्रमण मौखिक होइत छलैक, जातीय नेताक गौरवगाथा, लोकगाथाक प्रतिष्ठा पाबि गेल । जेना कि लोकगाथाक विषयवस्तुसँ स्पष्ट अछि, दीनाभद्रीमे मुसहर, दुलरा दयालमे गो ँढ़ि, नइका बनिजारामे वैश्य, लोरिकमे अहीर, सलहेसमे दुसाध, बिहुलामे बनिआँ जातिक गौरव गाथा अछि। आनहु लोकगाथामे जातीय नायकेक गाथा अछि। सभ लोकगाथाक विषयवस्तु जाति आधारित अछि। मुदा लवहरि कुशहरिके ँ कोनो जातिक जातीय लोकगाथा मानब उपयुक्त नहि होएत। तखन ई अवश्य जे मलाह जातिक कंठमे सुरक्षित लवहरि कुशहरिक रचयिता मलाह जातिक प्रतिभा सम्पन्न कोना व्यक्ति अवश्य छल होएताह। उपर जाहि लोक गाथाक नामोल्लेख कएल अछि एवं जाहि-जाहि जातिक नेताक पराक्रमक गाथा ओ सभ थिक, से जाति सभ आजुक लोकतन्त्रक शासन व्यवस्थामे दलित समाजक आख्या पाबि गेल छथि। दोसर जे बिन्दु एहि लोक गाथा सभक सन्दर्भमे महत्त्वपूर्ण अछि, से थिक दैविक शक्तिक स्थान पर लोकशक्तिक प्रतिष्ठापन। एहि लोकगाथाक नायकक प्रेम पराक्रम, एवं शौर्यक उदघोष अलौकिकताक संग भेल अछि। किछुमे देवत्वक प्रतिष्ठा सेहो भए गेल छैक। दुलरा दयालक मानसिंहक राजगद्दी प्राप्त करबाक कथा, बिहुलाक द्वारा अपन पतिके ँ जिअएबाक कथा, लोरिक द्वारा हरबा बरबाक पराजयक कथा तथा सलहेस एवं दौना मालिनक प्रेम कथामे अलौकिकताक अंश पर्याप्त अछि। देवत्व प्राप्त करबाक दृष्टिसँ सलहेस, दीनाभद्री आ’बिहुलाक गाथा विश्ेाष उल्लेखनीय अछि। दुसाध द्वारा सलहेस, मुसहर द्वारा दीनाभद्री एवं बनियाँ द्वारा बिहुला लोकगाथाक नायकके ँ देवत्व प्राप्त छनि। ध्यान देबाक थिक जे बिहुलाके ँ छोड़ि समस्त लोकगाथा नायक प्रधान अछि। केवल बिहुला लोकगाथा नायिका प्रधान छैक। एहि तीनू लोकगाथामे सलहेस एवं दीनाभद्रीक अपेक्षा बिहुलाक क्षेत्र सीमित अछि। मुदा व्यापक क्षेत्र एवं उपलब्ध लोकगाथामे विशाल आकारक होइतो लोरिकके ँ अहीर जातिमे देवत्व प्राप्त नहि छनि। मैथिलीक एहि लोकगाथा सभमे कतेको प्रकारक साम्य भेटैत अछि। ओ साम्य सभ थिक घटना साम्य, कथानक साम्य, नाम साम्य आ’ लोक नायकक दृष्टि एवं पराक्रमकमे साम्य। कतेको लोकगाथामे सलहेस एवं बाघेसरी छथि। दूनूमे पहिने विरोध आ’ पछाति मेलसँ आततायीक विनाश होइत अछि। एकरा शैव( शैलेश) एवं शाक्त( बाघेश्वरी@सिंहवाहिनी)क मतवादीक विवाद एवं वर्चस्वक सन्दर्भमे सेहो देखल जा सकैछ। साम्यक किछु उदाहरण प्रस्तुत अछि। दीनाभद्री जोरावर सिंहके ँ परास्त कए चैन होइत अछि तँ लोरिक हरबा बरबाके ँ पराजित कए। हिरया तमोलिन आ’ जिरिया लोहारिन जहिना दीना भद्रीक परकिया नायिका थिक तहिना लोरिकमे चनैन अछि। फोटरा नामक गीदर जेना दीनाभद्रीमे अपन करामात देखबैत अछि, ओहिना नइका बनिजारामे तिलंगा बाछा। लोरिकमे जेना सनिका मनिका भागिनक मदति लेल जाइछ ओहिना सलहेसमे कारीकान्तक। अंकक समानता तँ सभ लोकगाथामे भेटत। रचनात्मक स्तर पर सुमिरन ओ बन्हन सेहो प्रायः सभ लोक गाथामे अछिए। आखिर दीनाभद्री लोकगाथामे एहन कोन बात छैक जे एक पुश्तसँ दोसर पुश्तमे अदौकालसँ संक्रमित होइत आइ धरि लोकक कंठमे सुरक्षित अछि। की ई आजुक राजनीतिक शब्दावलीमे एक दलित जातिक नायकक गाथा थिक, ते ँ ? की ई लोकगाथा हमरालोकनिक मातृभाषा मैथिलीमे अछि, ते ँ? की एकर संकलन एवं प्रकाशन जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन सन विश्वविश्रुत विद्वान कएलनि,ते ँ? हमरा जनैत दीनाभद्री सन लोकगाथाक महत्त्व एवं युग-युगसँ लोक कंठमे सुरक्षित रहि प्रेरणाक स्रोत बनल रहबाक मूल कारण थिक, एहि लोकगाथामे अनुस्यूत ओ जीवनमूल्य जे लोकके ँ अन्याय, अत्याचार, शोषण आदि सामाजिक दुर्गुण एवं विकृतिसँ संघर्ष करबाक प्रेरणा दैत अछि। एहिमे अभिव्यक्त ओ जीवनमूल्य जे लोकक स्वाभिमान एवं प्रतिष्ठा पर आघातकर्ताक आचरणक विरुद्ध ठाढ़ होएबाक शक्ति आ’ साहसक स्रोत भरैत रहैछ । एहिमे अभिव्यक्ति हो जीवनमूल्य जे व्यक्तिगत लाभहानि, एवं सुख-सुविधाक त्याग एवं सामाजिक प्रतिष्ठा, आदर सम्मान हेतु संघर्षक लेल लोकके ँ तैआर करैत अछि। वैदिक ऋषिक वचनक अनुसार ओहि जीवन मूल्यक महत्त्व छैक जे कुलक लेल शरीर, गामक लेल कुल, जनपदक लेल गाम एवं आत्माक लेल पृथ्वी त्याग करबाक प्रेरणा दैत हो। दीनाभद्री लोकगाथाक नायक दीनाराम आ’ भद्रीक चरित्र एहि लोकोपकारिताक एक सर्वोत्तम उदाहरण थिक। दीनाभद्री लोकगाथाक नायक द्वयक लोककामी आचरण एवं संघर्षक किछु उदाहरण प्रस्तुत अछि। दीनाभद्री निर्धन अछि, भैातिक सुख-सुविधा प्राप्त नहि छैक। अपन बाहुबल पर विश्वास कएनिहार दीनाभद्रीमे स्वाभिमान कूटि-कूटि कए भरल अछि। जखन गामक शक्तिसम्पन्न व्यक्ति धामी ई कहैछ जे परोपट्टाक आन-आन लोक ओकर खेतमे काज करब गछि लेलक आ’ ओहो दूनू भाइ ओकर जन भए खेतमे काज करौक तँ दीनाभद्री साहसपूर्वक एवं स्पष्टताक संग अस्वीकार करैत कहि दैत अछि-कबहु नऽ कैल खुरपी कोदारक बोनि, कहियो नऽ जानिऔ हो धामी, पँचा उधार।ष् हरिन सूगर मारि जोगिया कैल गुजरान। ( पृ.सं.637) समाजमे शोषण व्याप्त छलैक। शोषक आ’ अत्याचारीक नजरिमे गरीबक मान मर्यादाक कोनो मोल नहि छल। प्रभुत्व सम्पन्न लोक ककरो घर आङनमे घूसि गरीबक बहु बेटीक मानमर्दन कए सकैत छल। प्रायः एहनहि सामाजिक स्थितिमे कहबी बनि गेल होएत, गरीबक बहु सबहक भौजी। दीनाभद्री धामीक आतंककारी व्यवहारपर आक्रोश प्रकट करैत कहैत अछि- कौन गरू परलौं हो धामी, बड़ भोरे छे ँकल दुआर अपन बहु बेटीपु रखलन्हि घर सुताय हमर बेटी पुतहु देखलन्हि नाँगट उघार। ( पृ.सं.636) धामी, जे समाजक प्रभुत्वशाली वर्गक प्रतिनिधित्व करैत अछि, तकर निर्भीक विरोध समाजक एक दबल कुचल वर्गक सदस्य द्वारा होएब, एक महत्त्वपूर्ण घटना थिक एवं दीनाभद्रीक चरित्रक ई विश्ेाषता नैसर्गिक एवं प्रेरणादायी गरिमा प्राप्त कए लेलक अछि। दीनाभद्री अपन यात्राक क्रममे ताहिर मियाँक हबेलीक पुछारी करैत अछि। ताहिर मियाँ केहन एकवाली आ’आतंकी छल,जे ओकर नामेसँ धीयापूता सेहो डराइत छलैक। ओसभ दीनाभद्री के ँ चेतबैत अछि- रे बटोहिया, ताहिर मियाँ गामक गुमस्ता छैक, ओकर नाम केओ ने बाट बटोही धरैत अछि। ( पृ.सं.650) ओही ताहिर मियॉँक नोकर छी गुलामी जट। गुलामी जट अपन मालिकक सह पर समाजक निर्बल लोकके ँ उत्पीड़ित करैत अछि। अपमानित करैत अछि। लोकके ँ अपमानित करबाक अभ्यासी गुलामी जट दीनाभद्रीक अपमान सेहो कए दैत अछि। मुदा तकर फल ओ तुरत्ते पाबि जाइत अछि। गुलामी जट दीनाभद्रीक पराक्रमक समक्ष ठठि नहि सकल, पराजित भए गेल। तेसर उदाहरण अछि जोराबर सिंह सन दुराचारी, समाज विरोधी एवं शोषकक प्रतिकार एवं अन्त करब। एहि प्रसंग डा.जयकान्त मिश्र विस्तारसँ लिखल अछि। (In the last chapter Gulami Jata helps them to conquer Jorabar Singh, a Rajput, who used to enjoy all new brides first when he dares to attack the marriage march of the spirits of Dina and bhadri (The Folk Literature of Mithila) एहिठाम देखबाक थिक जे दीनाभद्री समाजविरोधी, अत्याचारी आ’ दुराचारीक विरोध एवं प्रतिकार कोना करैत अछि।तेसर बेर जखन फोटरा गीदर दीनारामके ँ पटकि हत्या कए दैत अछि आ’ अलक्षित रूपे ँ सलहेस भद्रीके ँगाम घूमि जएबाक परामर्श दैत छथिन्ह तँ भद्री हुनक परामर्शके ँ अस्वीकारि, कहैत अछि, जेना जेठ भाइ मुइलाह तहिना हमहु मरब। अर्थात अन्यायीक समक्ष आत्मसमर्पण नहि करब भनहिँ प्राणक आहुति देमय पड़ैक। मरब दूनू भाइ कटैया जाहि मँुहेंँ धैलक फोटरा गीदर जेठ भाइ के ताहि मुँहेँं धरौ हमरा के । ( पृ.सं.641) इएह एकजुटता एवं भ्रातृप्रेम दीनाभद्रीके ँ समाजमे दीन दुखीजनक विरुद्ध व्याप्त शोषण, अत्याचार, दुराचारक प्रतिकारक शक्ति प्रदान करैत अछि। कहि सकैत छी दुराचारीके ँ पराजित करबाक रणनीतिक सफलताक कारण इएह भ्रातृ प्रेम आ’ एकजुटता थिक। एकटा आओरो बिन्दु एहिठाम विचारणीय अछि। जेना नामहिसँ स्पष्ट अछि, गुलामी जट गुलाम थिक ताहिर मियाँक। ताहिर मियाँ सेहो ककरो गोमास्ता अछि। ओ गुलामी जटके ँ पोसि रखने अछि। ताहिर मियाँ ओकर माध्यमसँ आतंकक जाल पसारि रखने अछि। किन्तु जखनहि गुलामी जटके ँज्ञात भए जाइत छैक जे दीनाभद्री ओकरहि समाजक लोक थिकैक एवं ओ दीनदुखी एवं पीड़ितक सहायता एवं रक्षा लेल अपना के ँ सदिखन तैआर रखैत अछि, तथा दलित-पीड़ित वर्गक सम्मान एवं प्रतिष्ठाक रक्षा करब ओकर जीवनक मूल उद्देश्य थिकैक तँ गुलामी जट दीनाभद्रीक सहयोगी भए जाइत अछि एवं जोरावर सिंह सन दुराचारीक संहारमे बढ़ि चढ़ि भाग लैत अछि। मिथिलाक सांस्कृतिक उत्कर्ष एवं विशिष्टताके ँ रेखांकित करैत रमानाथ झाक कहब अछि जे मिथिला-जनपद -भाषामे संगीतक परम्परा अत्यन्त प्राचीन कालहिसँ आबि रहल अछि। मिथिला जनजीवनक एक गोट अभिन्न अंग रहल छैक ओकर संगीत। मिथिलाक संस्कृति संगीतमय अछि। ओ एही गीत सबहिक द्वारा मैथिल जातिक भावाभिव्यक्ति आदिअहिसँ होइत आएल, जहिना विद्यापतिक पश्चात तहिना ओहिसँ पूर्वहु मिथिलाक देशी साहित्य गीतमय छैक। (विविध प्रबन्ध)। रमानाथ झा मिथिलाक समान भाषा, समान संस्कृति ओ समान भौगोलिक क्षेत्रक निवासीके ँ मैथिल जातिक संज्ञा देल अछि। जकर साहित्यक एक महत्त्वपूर्ण विशेषता छैक गीतात्मकता। ओना, प्रारम्भहिमे कहल अछि जे मैथिल जातिअहुसँ एक दलित समाजके ँ बिलगाओल गेल अछि, जे वर्तमान युगमे राजनीतिक लाभजनित ध्रुबीकरणक मैथिली साहित्यमे अनुगुंज एवं साहित्यिक राजनीतिक क्षेत्र (पेालिटिकल स्पेस) निर्धारणक प्रयास थिक तथापि ओहि लोकगाथा सभमे जे वैशिष्ठय छैक, मैथिल संस्कृतिक विशेषता तँ थिके। जेना कि नामहिसँ गाओल जएबाक स्पष्ट बोध भए जाइत छैक, मैथिलीक अन्य लोकगाथा जकाँ दीनाभद्री सेहो मैथिल संस्कृतिक अनुरूप गीतात्मक अछि, ओ मैथिल संस्कृतिके ँ प्रतिनिधित्व करैत अछि एवं मैथिल संस्कृतिक अभिन्न धरोहरि थिक। लिखित रूपमे सुरक्षित साहित्यक पाठक शिक्षित वर्गहि टा भए सकैत अछि। एहन लोकक संख्या कम छलैक, ते ँओसभ समाजक शेष वर्गक पाठक@श्रोतासँ अपनाके ँ कात रखबा लेल लिखित साहित्यके ँ शिष्ट साहित्यक रूपमे अभिधान कएल। शिष्टक विलोम होइत अछि, अशिष्ट। शुकुर भेल जे शिष्ट साहित्यक विलोमके ँ अशिष्ट साहित्य नहि कहि, लोक कंठमे सुरक्षित साहित्यके ँ लोक साहित्यक गरिमा प्रदान कए देलनि। स्पष्ट अछि जे शिष्ट साहित्यक सर्जक शिष्ट वर्गहिक लोक होइत छलाह। हुनक अनुभव क्षेत्र सीमित छलनि। अपन शिष्टत्व प्रमाणित करबाक हेतु ओ सभ जाहि साहित्य सिद्धान्तक निरूपण कएलनि, ताहिमे नायकत्व लेल राजकुल सम्भूत होएब आवश्यक भए गेलैक। इएह कारण थिक जे तथाकथित .शिष्ट साहित्यक कोनो नायक तथाकथित दलित समाजसँ लेल गेल होथि, तकर उदाहरण भेटब दुर्लभ अवश्य अछि। आ’ ई परम्परा लोकशक्तिक उदय धरि कोना मैथिली साहित्यके ँ आच्छन्न कएने रहल, तकर उदाहरण प्रो.हरिमोहन झा सदृश मैथिलीक महान साहित्यकारक विपुल साहित्य अछि। किन्तु सम्प्रति जे राजनीतिक एवं सामाजिक परिदृश्य छैक आ’ जाहि प्रकारक चेतनाक बसात बहि रहल अछि, ओहिमे एकर महत्त्व नहि छैक जे दलित-महादलित जातिसँ भिन्न जाति-वर्गक साहित्यकार दलित-महादलित जातिक संवेदना एवं भूख, अभाव, असन्तोष आ’ पीड़ाक चित्रण कतेक प्रखरतासँ करैत छथि वा तथाकथित उच्चवर्गक सामान्तवादी एवं शोषणोन्मुखी मनोवृत्ति पर ओ कतेक निर्मम प्रहार करैत छथि, किन्तु प्रश्न छैक आ’ वास्तविकता अछि जे दलित-महादलित समाजक लोक अपन कथा-व्यथा स्वयं कहबा लेल एवं नायक महानायक गढ़बा लेल तैआर अछि। संगहिं ओ आयोजित साहित्यिक चर्चा वा लेखनमे अपन सहभागिता सेहो सुनिश्चित करय चाहैत अछि। (My point is that literary theorists and cultural historians need to pay attention to the way Dalits are trying to argue their case for writing about Dalits. In this sense, whether you have written supporting or reforming or attacking Brahmins, dalits now want dalit characters and dalit life to be portrayed. It does matter how secular you are, the place now has to go to dalits and just as there must be place for dalit characters, there must also be place for dalit writers.They would not like the upper caste writers to write about dalits and about literature today. Even if you write a critique of upper class/caste life, dalits are not bothered about that. I think, these questions ( like whose work should now gain a place and be discussed in public) seem to be more the issue than which upper caste writer wrote about or for dalits.- Dalitism: A Critique of Telugu Literature, K.Satyanarayan, Re-figuring Culture,2005, Sahitya Akademi ) ध एहि सन्दर्भमे लोकगाथा एवं लोकगाथाक महानायक एक आदर्श रूपमे भासमान भेटैत छनि। कारण जे लोकसाहित्यक नायक वा महानायक दलित,पीड़ित एवं शोषित समाजक छथि। दलित समाजक ओहि पात्रहुमे नायक वा महानायक बनबाक लेल जे चारित्रिक गुण चाही, जे पात्रता चाही, जे शौर्य चाही, जे पराक्रम चाही, सभटा विशेषता दलित समाजक लोकहुमे वर्तमान छैक। एकर उदाहरण थिक दीनाभद्री लोकगाथाक महानायक एवं देवत्व प्राप्त दीनाराम आ’ भद्री।दीनाभद्रीक आधार स्रोत दीनाभद्रीक अध्ययन विवेचनक सम्प्रति दू टा स्रोत सुलभ अछि। पहिल आधार स्रोत थिक जार्ज अब्राहम ग्रियर्सनक संकलन एवं प्रकाशन।एकर प्रकाशन1885 ई.र्मे Z.D.M.G.(Zeischrift der Deutschen Morgen lamdischen Gescllschaft) नामक प्रत्रिकामे ैमसमबजमक ैचमबपउमद व िजीम ठपींतप स्ंदहनंहमे.ज्ीम डंपजीपसप क्पंसमबज रूपमे भेल अछि । ओकर बादहि मैथिलीक एहि लोक गाथाक परिचय अक्षर जगतके ँ भेलैक एवं दीनाभद्रीक अध्ययन विवेचनक मार्ग प्रशस्त भेल। राष्ट्रीय वा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर जतय कतहु दीनाभद्रीक अध्ययन विवेचन भेल अछि तकर आधारभूत सामग्री ग्रियर्सन संकलित इएह पाठ थिक। एहिमे डा.जयकान्त मिश्र (Folk Literature of Mithila,1951) डा. आशा गुप्त (जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन और बिहारी भाषा साहित्य, 1970)ेक अध्ययन सेहो अछि। एहि विषय पर राजेश्वर झा (मिथिला मिहिर, 22. सितम्बर, 1974) डा. विश्वेश्वर मिश्र,डा. वीरेन्द्रनाथ झा (मैथिली लोक महाकाव्यक आलोचनात्मक अध्ययन, शोध प्रबन्ध,1987,ल.ना.मिथिला वि.वि.), डा. रामदेव झा ( मैथिली लोक साहित्यः स्वरूप ओ सौन्दर्य, 2002 ), डा.योगानन्द झा (लोक साहित्य ओ शब्द सम्पदा, 2007) आदि सेहो छिटफुट लिखल अछि। मुदा ओ सभ अपन लेखनक आधार स्रोत व्यक्तिगत संकलन कहैत छथि जे अद्यावधि गुरुमन्त्र जकाँ गुप्त अछि। एहि बिन्दु पर सभ केओ मौन छथि जे जार्ज ग्रियर्सनक पाठ आ’ हुनक संकलित पाठमे की अन्तर छैक। एम्हर महेन्द्रनारायण राम एवं फूलो पासवानक संयुक्त सम्पादनमे साहित्य अकादमीसँ ‘दीनाभद्री लोक गाथा साहित्य (2007) प्रकाशित भेल अछि। सम्पादकद्वय आँखि मूनि लिखि देलनि अछि-दीनाभद्री लोक गाथा पर बहुत गोटे विद्वान काज केलनि अछि, मुदा आइ धरि एकर मूल गाथा संग्रह नहि प्रकाशित भए सकल अछि।’ परंच ई कथन इतिहास सम्मत नहि अछि। ग्रियर्सनक अवदानके ँ बिसरि गेलाह अछि। जार्ज ग्रियर्सनक अवदानके ँ रेखांकित करैत प्रोराध् ााकृष्ण चैधरी लिखने छथि- NfFk&Dr.Grierson was the pioneer in bringing to light the folk literature of Mithila through his publications, viz. Bihar Peasant Life, Maithili Chrestomathy. Dinabhadrik Gita and Nebarak Gita etc.-(A Study of the Maithili Folk Literature पूर्वांचलीय लोक साहित्य,पृ.131, चेतना समिति,1973) ग्रियर्सनक गीत दीनाभद्री एवं दीनाभद्री लोक गाथा साहित्यमे अनेकहु बिन्दु पर अन्तर अछि। दूनूक विषय वस्तुमे अन्तर अछि, गाथा संयोजनमे अन्तर अछि, प्रयुक्त शब्दावलीमे अन्तर अछि तथा पात्रक काज आ’ प्रभावमे अन्तर अछि। जे ँ कि दूनू गोटेक स्रोत कथावाचक छथिन्ह एवं दूनूक कथावाचकमे कमसँ कम सवा सए वर्षक जेठाए-छोटाए छैक, अपन संकलनक प्रसंग गियर्सन लिखने छथि- ; ( The following two songs are published exactly as they were taken down from the mouths of two itinerant singers in the Nepal Tarai about six years ago.They are very popular throughout nothern Mithila and are excellent examples of the spoken dialect of that portion of the country.-Selected Specimen of the Bihari Language, ZDMG. Vol. 39, page No. 617,1885) अतएव ई अन्तर अस्वाभाविक नहि कहल जा सकैछ। कारण जे लोचकता लोकगाथाक विशेषता थिकैक। जा धरि ओ लोक कंठमे रहैत अछि, वाचकक पात्रता, स्थान, काल एवं प्रस्तुतिक ढ़ंग एवं श्रोता समुदायके ँ बान्हि रखबाक हेतु ओहिमे किछु किछु परिवर्तन होइत रहैत छैक। आ’ जँ संयोगवश कोनो लोकगाथामे लोचकता समाप्त भए जाइत छैक, आन्तरिक क्षमता नहि रहैत छैक तँ कालक्रमे ओहि लोकगाथाक प्रासंगिकता समाप्त भए जाइत अछि। (They (oral tales) change their contours so much that their social relevance is ever alive. If the grid of an oral tale does not have the capacity to sustain or imbide the new, then it meets its death without leaving any trace--Tales : Oral Tales, Komal Kothari, Narrative : A Seminar, Sahitya Akademi,1990) कृतिक समीक्षा लिखित पाठक आधार पर होइत अछि एवं आबयबाला समयमे ओ विवेचनक सामग्री बनैत रहैत अछि। अतएव, प्रकाशनसँ पहिने आवश्यक छलैक जे पूर्व प्रकाशित पाठक संग मिलान कए पाठ वा अन्ये प्रकारक जे कोनो अन्तर छैक, तकरा दर्शबैत सम्पादक अपन बात कहितथि। से नहि भेल अछि। एकर अभावमे ‘दीनाभद्री लोकगाथा साहित्य’ एक महत्त्वपूर्ण आधार-स्रोत होएबासँ रहि गेल अछि। एहिठाम जार्ज ग्रियर्सनक ‘गीत दीनाभद्री’ (Selected Specimen of the Bihari Language) ‘दीनाभद्री लोक गाथा साहित्य’मे भेटल किछु अन्तरक दिश सुधी पाठकक ध्यान आकृष्ट करए चाहब। ‘गीत दीनाभद्री’मे सात टा अध्याय अछि एवं ‘दीनाभद्री लोक गाथा साहित्य’मे तेरह टा अध्याय अछि। ‘गीत दीनाभद्री’मे फोटरा गीदरक हाथे ँ दीनाभद्री मारल जाइत छथि तँ दोसरमे बाघेसरी मारैत छथिन्ह। ‘गीत दीनाभद्री’मे बगहाक ताहिर मियाँक कथा अछि। गुलामी जट ताहिर मियाँक लोक अछि। अपमानित भेला पर फोटरा गीदरक रूप धारण कए के ँ दीनाभद्री गुलामी जटके ँ परास्त करैत छथि। गुलामी जट जखन दीनाभद्रीके ँचिन्हि जाइत अछि, क्षमाप्रार्थी होइत अछि एवं प्रयोजन भेला पर सहयोगक वचन दीनाभद्रीके ँ दैत छनि। लिखल अछि- ‘छरपिकै ँ फोटरा गीदर गुलामी जट कै धैलक चटि धैलक पटि दे मारलक, बान्हलक पछुआड़ि धै कै गोड़ लगैत छी, पै ँयाँ परैत छी, एहि नहि ँ जनली अहाँ भद्री छी।’( पृ.सं.651) ‘दीनाभद्री लोक गाथा साहित्य’मे गुलामी जट मक्का मदीनाक वासी थिक एवं दीनाभद्री मकेश्वरनाथक पूजा अर्चना करैत छथि। एकर अतिरिक्त हिन्दू एवं इस्लाम धर्मक चर्चा सेहो होइत अछि। पहिल संकलनमे दीनाभद्रीके ँ सलहेसक सहायता प्राप्त होइत छनि तँ दोसरमे योगमल किरातीके ँ ओ सहायता लेल आह्वान करैत छथि। पहिल संकलनमे दीनाभद्रीक परकिया नायिका हिरिया तमोलिन एवं जिरिया लोहारिन दोसर संकलनमे नहि अछि। ग्रियर्सनक संकलनक अन्त जोरावर सिंहक मृत्युक संग होइत अछि तँ दोसरमे दीनाभद्री स्वयं घूमि घूमि अपन पराक्रमक प्रसंग लोकसँ जिज्ञासा करैत छथि एवं गहवर बना कए पूजा करबाक आदेश दैत छथिन्ह। ओ इहो आदेश दैत छथिन्ह जे गहवरमे हुनक एक कात बाघेसरी आ’ दोसर कात योगमल किरातक स्थापना कए पूजा कएल जाए। पहिलमे महफा पर जाइत हिरिया तमोलिन एवं जिरिया लोहारिनक डोलीके ँ जोरावर सिंह छेकि लैत अछि तँ गुलामी जट एवं जोरावर सिंहक बीच कुश्ती होइत अछि। दीनाभद्रीक कहला पर ओ जोरावर सिंहके ँ पटकि दैत छथि आ’ जोरावर सिंह मारल जाइत अछि- जोरावर सिङ्घ देलक गुलामी जट के उनटाय नहि खलिफा एक बेरि ठाढ़ भै के कुस्ती लिअऽ। जोरावर सिङ्घ के गुलामी जट मारलक बाँसक ओधि लगाय। चटि दै भद्री देलक बान्हि कनौली गरद उठि गेल। कनौली मे ँ जोरावर सिङ्घ राजपूत मारल गेल, दीनाभद्री बैरी भेल कनौली मे ँ जोरावर सिङ्घ राजपूत मारल गेल दीनाभद्री सौ ँ। पृ..653 मुदा दोसरमे कहलो पर दीनाभद्री जोरावर सिंहक अखारा लगसँ नहि हटैत छथि तँ मल्लयुद्ध होइत अछि। दीनाभद्रीक आह्वान पर हुनक कायामे योगमल किराती प्रवेश कए जाइत छथिन्ह तँ ओ जोरावर सिंहके ँ पटकि हत्या करबामे समर्थ होइत छथि। आश्चर्यक गप्प जे ‘दीनाभद्री लोकगाथा साहित्य’मे दीनाभद्री के ँ अङरेजी भाषाक ज्ञान सेहो छनि। भद्री कहैत अछि-भैया से हम आर्डर नेने रहीतियै तऽ एकरा मारि के हम सारा बना दीतीये (76) डा.योगानन्द झाक निबन्धमे मगहक हंसराज एवं वंशराजक उल्लेख अछि। दीनाभद्री ओहि दूनू के ँमल्लयुद्धमे पराजित करैत छथि। अन्तमे दूनू भाइ जगन्नाथपुरी जाइत छथि। जगन्नाथजीक कृपासँ प्रेत योनिसँ मुक्त भए तिरहुत घूमि अबैत छथि, जतय भुइयाँ बाबाक रूपमे हुनक पूजा होअए लगैत अछि।पाठभेद सम्बन्धी एहि विवृत्तिक तात्पर्य जे दीनाभद्रीक अध्ययन कोन पाठक आधार लोक करए। ककरा दीनाभद्री लोकगाथाक प्रमाणिक पाठ मानल जाए। एक संकलनकर्ता दोसर संकलनकर्ताक काजके ँ मोजर देनिहार नहि, सभ केओ सभटा श्रेय स्वयं हपसि लेअय चाहैत छथि। ओ ई जनबय चाहैत छथि जे एहिसँ पहिने ककरो किछु ज्ञात नहि छलैक, सभटा हमही धरतीके ँ खोधि बाहर आनल अछि। ई साहित्यिक अराजकाता थिकैक। एहि अराजकताक दू टा कारण अछि-सम्पूर्ण श्रेय स्वयं लेबाक आतुरता तथा सम्पादक वा लेखकक अल्पज्ञता। दूनू स्थिति भाषा साहित्यक स्वस्थ विवेचन लेल बाधके अछि। ओहुना विद्वत्जन एहि बात पर एकमत होएताह जे सुनि उतारि लेब, गीत गायब एवं सम्पादन करब, एक नहि, दू प्रकारक प्रतिभाक अपेक्षा रखैत अछि। दीनाभद्री सन महत्त्वपूर्ण लोकगाथाक सम्यक अध्ययन-विवेचन लेल सर्वथा आवश्यक अछि जे उपलब्ध विभिन्न पाठ एवं पूर्व प्रकाशित पाठक आधार पर एक प्रामाणिक पाठ तैआर कएल जाए एवं संकलनकर्ताके ँ ई छूट नहि भेटनि जे अपन अल्पज्ञता एवं पूर्वाग्रहक कारणे ँ मैथिलीक सांस्कृतिक सम्पदा पर आघात करथि। अन्तमे हम लक्ष्मीपति सिंहक (मिथिलाक लोक संस्कृति एवं लोकजीवन, चेतना समिति, स्मारिका,1973 ई.) क मन्तव्य उधृत करए चाहब-‘कहि नहि, एहन एहन कतेको संग्रह कतेको ठाम ‘अग्नये स्वाहा’ तथा ‘कीटाय स्वाहा’ भए गेल होएत, वा भए रहल होएत। अस्तु, एहि सम्बन्धमे क्रियाशील मैथिली संस्था सभसँ हमर इएह अनुरोध जे सूठी कुमर, शशिया, बिहुला, कमला, जट जटिन, दीनाभद्री, विषहरा, आदिक सम्बन्घमे मिथिलाक बहुमुखी लोकसाहित्यक संकलन एवं प्रकाशन कार्यमे सक्रिय भए जाए। हमरा जनैत,जखन मैथिल मात्रके ँ अपन प्राचीन लोक जीवन पद्धतिक ज्ञान भए जएतन्हि, आओर ई विश्वास भए जएतन्हि कि धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समन्वय एवं सामुदायिक उत्तरदायित्वक प्रसादात एक समय मिथिला कतेक भरल पुरल छल तँ अगत्या वर्णद्वेष, धार्मिक कटुता तथा राजनीतिक छल-छद्मसँ मिथिलाक पिण्ड स्वतः छुटि जाए सकैछ। सार्वभौम मानवाधिकार घोषण: मैथिली अनुवाद रमानन्द झा 'रमण' : भाषा सम्पादन गोविन्द झा सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा : मैथिली अनुवाद रमानन्द झा 'रमण' : भाषा सम्पादन गोविन्द झा सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा UNIVERSAL DECLARATION OF HUMAN RIGHTS MAITHILI TRANSLATION (राष्ट्रसंघक साधारण सभा 10 दिसम्बर, 1948 के ँ एक सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा स्वीकृत आ‘ उद्घोषित कएलक जकर पूर्णपाठ आगाँ देल गेल अछि। एहि ऐतिहासिक घोषणाक उपरान्त साधारण सभा समस्त सदस्य देशसँ अनुरोध कएलक जे ओ एहि घोषणाक प्रचार करए तथा मुख्यतः, अपन देश आ‘ प्रदेशक राजनैतिक स्थितिक अनुरूप बिनु भेदभावक, स्कूल आ‘ अन्य शिक्षण संस्था सभमे एकर प्रदर्शन, पठन-पाठन आ‘ अनुबोधनक व्यवस्था करए।) एहि घोषणाक आधिकारिक पाठ राष्ट्रसंघक पाँच भाषामे उपलब्ध अछि-अंग्रेजी, चीनी, फ्रांसीसी, रूसी आ, स्पेनिश। एहिठाम एहि घोषणाक मैथिली रूपान्तरण प्रस्तुत अछि।)
उद्देश्यिका जे ँ कि मानव परिवारक सकल सदस्यक जन्मजात गरिमा आओर समान एवं अविच्छेद्य अधिकारके ँ स्वीकृति देब स्वतन्त्रता, न्याय आ‘ विश्वशान्तिक मूलाधार थिक, जे ँ कि मानवाधिकारक अवहेलना आ‘ अवमाननाक परिणाम होइछ एहन नृशंस आचरण जाहिसँ मानवक अन्तःकरण मर्माहत होइत अछि आओर अवरुद्ध होइत अछि एक एहन विश्वक अवतरण जाहिमे अभिव्यक्ति आ‘ विश्वासक स्वतन्त्रता तथा भय आ‘ अकिंचनतासँ मुक्ति जनसामान्यक सर्वोच्च आकंाक्षा घोषित हो; जे ँ कि विधिसम्मत शासन द्वारा मानवाधिकारक रक्षा एहि हेतु परमावश्यक अछि जे केओ व्यक्ति अत्याचार आ‘ दमनसँ बँचबाक कोनो आन उपाय नहि पाबि, शासनक विरुद्ध बागी नहि भए जाए; जे ँ कि राष्ट्रसभक बीच मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बढ़ाएब परमावश्यक अछि; जे ँ कि राष्ट्रसंघक लोक अपन चार्टर मध्य मौलिक मानवाधिकारमे, मानवक गरिमा आ‘ मूल्यमे तथा स्त्री आ‘ पुरुषक बीच समान अधिकारमे अपन निष्ठा पुनः परिपुष्ट कएलक अछि आओर व्यापक स्वतन्त्रताक संग सामाजिक प्रगति आ‘ जीवन स्तरक समुन्नयन हेतु कृत संकल्पित अछि; जे ँ कि सदस्य राष्ट्रसभ राष्ट्रसंघक सहयोगसँ मानवाधिकार आ‘ मौलिक स्वतन्त्रताक सार्वभौम आदर तथा अनुपालन करबाक हेतु प्रतिबद्ध अछि; जे ँ कि एहि प्रतिबद्धताक पूर्ति हेतु उक्त अधिकार आ स्वतन्त्रताक सामान्य बोध परम महत्त्वपूर्ण अछि, ते ँ आब, साधारण सभा निम्नलिखित सार्वभौम मानवाधिकार घोषणाके ँ सभ जनता आ‘ सभ राष्ट्रक हेतु उपलब्धिक सामान्य मानदण्डक रूपमे, एहि उद्देश्यसँ उद्घोषित करैत अछि जे प्रत्येक व्यक्ति आ‘ प्रत्येक सामाजिक एकक एहि घोषणाके ँ निरन्तर ध्यानमे रखैत शिक्षा आ‘ उपदेश द्वारा एहि अधिकार आ‘ स्वतन्त्रताक प्रति सम्मान भावना जगाबए तथा उत्तरोत्तर एहन उपाय-राष्ट्रीय आ अन्तरराष्ट्रीय-करए जाहिसँ सदस्य
राष्ट्रसभक लोक बीच तथा अपन अधीनस्थ अधिक्षेत्रहुक लोक बीच एहि अधिकार आ‘ स्वतन्त्रताके ँ सार्वभौम आ‘ प्रभावकारी स्वीकृति प्राप्त भए सकैक। ष् अनुच्छेद 1 सभ मानव जन्मतः स्वतन्त्र अछि तथा गरिमा आ‘ अधिकारमे समान अछि। सभके ँ अपन-अपन बुद्धि आ‘ विवेक छैक आओर सभके ँ एक दोसराक प्रति सौहार्दपूर्ण व्यवहार करबाक चाही। अनुच्छेद 2 प्रत्येक व्यक्ति एहि घोषणामे निहित सभ अधिकार आ‘ स्वतन्त्रताक हकदार थिक आओर एहिमे नस्ल, लिंग, भाषा, धर्म, राजनैतिक वा अन्य मत, राष्ट्रीय वा सामाजिक उद्भव, सम्पत्ति, जन्म अथवा अन्य स्थितिक आधार पर कोनहु प्रकारक भेदभाव नहि कएल जाएत। आओर ओ व्यक्ति जाहि देशक थिक तकर राजनैतिक अधिकारितामूलक वा अन्तरराष्ट्रीय आस्थितिक आधार पर कोनो भेदभाव नहि कएल जाएत-भनहि ओ देश स्वाधीन हो, ट्रस्ट हो, परशासित हो वा सम्प्रभुताक कोनो अन्य परिसीमाक अधीन हो। अनुच्छेद 3 सभके ँ जीवन-धारण, स्वातन्त्र्य आ‘ व्यक्तिगत ़सुरक्षाक अधिकार छैक। अनुच्छेद 4 केओ व्यक्ति दासता वा बेगारीमे नहि रहत आओर सभ प्रकारक दासप्रथा आ‘ दासक खरीद-बिकरी वर्जित होएत। अनुच्छेद 5 ककरहु क्रूर, अमानुषिक वा अपमानजनक दण्ड नहि देल जाएत आ‘ ककरोसँ एहन व्यवहार नहि कएल जाएत। अनुच्छेद 6 प्रत्येक व्यक्तिके ँ सभठाम कानूनक समक्ष एक मानव रूपमे अपन मान्यताक अधिकार छैक। अनुच्छेद 7 सभ केओ कानूनक समक्ष समान अछि आ‘ बिना कोनो भेदभावक कानूनक संरक्षणक हकदार अछि। अनुच्छेद 8 सभके ँ एहन कार्यक विरुद्ध जे संविधान वा विधि द्वारा प्रदत्त ओकर मौलिक अधिकारक हनन करैत हो सक्षम राष्ट्रीय न्यायालयसँ उचित उपचार (न्याय) पएबाक हक छैक। अनुच्छेद 9 केओ स्वेच्छासँ ककरो गिरफ्तार, नजरबन्द वा देश निर्वासित नहि करत ।
अनुच्छेद 10 सभ व्यक्तिके ँ अपन अधिकार आ‘ दायित्वक अवधारणार्थ तथा अपना पर लगाओल गेल कोनो आपराधिक आरोपक अवधारणार्थ कोनो स्वतन्त्र आ‘ निष्पक्ष न्यायालय द्वारा पूर्ण समानताक संग उचित आ‘ सार्वजनिक विचारणक हक छैक। अनुच्छेद 11 1. दण्डनीय अपराधक आरोपी प्रत्येक व्यक्ति ताधरि निर्दोष मानल जएबाक हकदार अछि जाधरि कोनो सार्वजनिक विचारणमे, जाहिमे ओकरा अपन समुचित सफाइ देबाक सभ गारंटी प्राप्त होइक, विधिवत् दोषी सिद्ध नहि कए देल जाए। 2. जँ केओ व्यक्ति एहन कोनो दण्डनीय कार्य वा लोप करए जे घटनाक कालमे प्रचलित कोनो राष्ट्रीय वा अन्तरराष्ट्रीय कानूनक दृष्टिमे दण्डनीय अपराध नहि थिक तँ ओ व्यक्ति एहि हेतु दण्डनीय अपराधक दोषी नहि मानल जाएत। अनुच्छेद 12 केओ व्यक्ति कोनो आन व्यक्तिक एकान्तता, परिवार, निवास वा संलाप (पत्राचारादि) मे स्वेच्छया हस्तक्षेप नहि करत आ‘ ने ओकर प्रतिष्ठा आ‘ ख्याति पर प्रहार करत। प्रत्येक व्यक्तिके ँ एहन हस्तक्षेप वा प्रहारसँ कानूनी रक्षा पएबाक अधिकार छैक। अनुच्छेद 13 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँ अपन राष्ट्रक सीमाक भीतर भ्रमण आ‘ निवास करबाक स्वतन्त्रता छैक। 2. प्रत्येक व्यक्तिके ँ अपन देश वा आनो कोनो देश त्यागबाक आ‘ अपना देश घूरि अएबाक अधिकार छैक। अनुच्छेद 14 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँ उत्पीड़नसँ बँचवाक हेतु दोसर देशमे शरण मङबाक अधिकार छैक। 2. एहि अधिकारक उपयोग ओहि स्थितिमे नहि कएल जाए सकत जखन ओ उत्पीड़न वस्तुतः अराजनैतिक अपराधक कारणे ँ भेल हो अथवा राष्ट्रसंधक उद्देश्य आ‘ सिद्धान्तक विरुद्ध कोनो काज करबाक कारणे ँ े। अनुच्छेद 15 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँ राष्ट्रीयताक अधिकार छैक। 2. कोनो व्यक्तिके ँ राष्ट्रीयताक अधिकारसँ अथवा राष्ट्रीयता -परिवर्तनक अधिकारसँ अकारण वंचित नहि कएल जा सकत। अनुच्छेद 16 1. सभ वयस्क स्त्री आ‘ पुरुषके ँ नस्ल, राष्ट्रीयता वा सम्प्रदायमूलक केानो प्रतिबन्धक बिना, विवाह करबाक आ‘‘ परिवार बनएबाक अधिकार छैक। स्त्री आ पुरुष दूनूके ँ विवाह, दाम्पत्य-जीवन तथा विवाह-विच्छेदक समान अधिकार छैक। 2. विवाह, तखनहि होएत जखन इच्छुक पति आ‘पत्नीक स्वच्छन्न आ पूर्ण‘ सहमति हो।
3. परिवार समाजक एक सहज आ‘ मौलिक एकक थिक आओर एकरा समाजक आ‘ राज्यक संरक्षण पएबाक अधिकार छैक। अनुच्छेद 17 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँ एकसरे आ‘ दोसराक संग मिलि सम्पत्ति रखबाक अधिकार छैक। 2. केओ स्वेच्छया ककरहु सम्पत्तिसँ वंचित नहि करत। अनुच्छेद 18 प्रत्येक व्यक्तिके ँ विचार, विवेक आ धर्म रखबाक अधिकार छैक। एहि अधिकारमे समाविष्ट अछि धर्म आ विश्वासक परिर्वतनक स्वतन्त्रता, एकसर वा दोसराक संग मिलि प्रकटतः वा एकान्तमे शिक्षण, अभ्यास, प्रार्थना आ अनुष्ठानक स्वतन्त्रता। अनुच्छेद 19 प्रत्येक व्यक्तिके ँ अभिमत एवं अभिव्यक्तिक स्वतन्त्रताक अधिकार छैक, जाहिमे समाविष्ट अछि बिना हस्तक्षेपक अभिमत धारण करब, जाहि कोनहु क्षेत्रसँ कोनहु माध्यमे ँ सूचना आ‘ विचारक याचना, आदान प्रदान करब। अनुच्छेद 20 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँशान्तिपूर्ण सम्मिलन आ संगठनक स्वतन्त्रताक अधिकार छैक। 2. कोनहु व्यक्तिके ँ संगठन विशेषसँ सम्बद्ध होएबाक लेल विवश नहि कएल जाए सकैछ। अनुच्छेद 21 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँ अपन देशक शासनमे प्रत्यक्षतः भाग लेबाक अथवा स्वतन्त्र रूपे ँ निर्वाचित अपन प्रतिनिधि द्वारा भाग लेबाक अधिकार छैक। 2. प्रत्येक व्यक्तिके ँ अपना देशक लोक-सेवामे समान अवसर पएबाक अधिकार छैक। 3. जनताक इच्छा शासकीय प्राधिकारक आधार होएत। ई इच्छा आवधिक आ‘ निर्बाध निर्वाचनमे व्यक्त कएल जाएत आओर ई निर्वाचन सार्वभौम एवं समान मताधिकार द्वारा गुप्त मतदानसँ होएत अथवा समतुल्य मुक्त मतदान प्रक्रियासँ। अनुच्छेद 22 प्रत्येक व्यक्तिके ँ समाजक एक सदस्यक रूपमे सामाजिक सुरक्षाक अधिकार छैक आओर प्रत्येक व्यक्तिके ँ अपन गरिमा आ‘ व्यक्तित्वक निर्बाध विकासक हेतु अनिवार्य आर्थिक, सामाजिक आ‘ सांस्कृतिक अधिकार-राष्ट्रीय प्रयास आओर अन्तरराष्ट्रीय सहयोगसँ तथा प्रत्येक राज्यक संघठन आ‘ संसाधनक अनुरूप-प्राप्त करबाक हक छैक। अनुच्छेद 23 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँ काज करबाक, निर्बाध इच्छाक अनुरूप नियोजन चुनबाक, कार्यक उचित आ‘ अनुकूल स्थिति प्राप्त करबाक आ‘ बेकारीसँ बँचबाक अधिकार छैक। 2. प्रत्येक व्यक्तिके ँ समान काजक लेल बिना भेदभावक समान पारिश्रमिक पएबाक अधिकार छैक।
3. काजमे लगाओल गेल प्रत्येक व्यक्तिके ँ उचित आ‘ अनुरूप पारिश्रमिक ततबा पएबाक अधिकार छैक जतबासँ ओ अपन आ‘ अपन परिवारक मानवोचित भरण-पोषण कए सकए आओर प्रयोजन पड़ला पर तकर अनुपूरण अन्य प्रकारक सामाजिक संरक्षणसँ भए सकैक। 4. प्रत्येक व्यक्तिके ँ अपन हितक रक्षाक हेतु मजदूरसंघ बनएबाक आ‘ ओहिमे भाग लेबाक अधिकार छैक। अनुच्छेद 24 प्रत्येक व्यक्तिके ँ विश्राम आ‘ अवकाशक अधिकार छैक जकर अन्तर्गत अछि कार्य-कालक उचित सीमा आ समय-समय पर वेतन सहित छुट्टी। अनुच्छेद 25 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँ एहन जीवन-स्तर प्राप्त करबाक अधिकार छैक जे ओकर अपन आ‘ अपना परिवारक स्वास्थ्य एवं कल्याण हेतु पर्याप्त हो। एहिमे समाविष्ट अछि भोजन, वस्त्र, आवास आ चिकित्सा तथा आवश्यक सामाजिक सेवाक अधिकार आओर जँ अपरिहार्य कारणवश बेकारी, बीमारी, अपंगता, वैधव्य, वृद्धावस्था अथवा अन्य प्रकारक दुरस्था उपस्थित हो तँ, ओहिसँ सुरक्षाक अधिकार । 2. परसौती आ‘ चिल्हकाके ँ विशेष परिचर्या आ सहायताक अधिकार छैक। प्रत्येक बच्चाके ँ, चाहे ओ विवाहावधिमे जनमल हो वा ताहिसँ बाहर, समान सामाजिक संरक्षणक अधिकार छैक। अनुच्छेद 26 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँ शिक्षा प्राप्तिक अधिकार छैक। शिक्षा कमसँ कम आरम्भिक आ‘ मौलिक अवस्थामे निःशुल्क होएत। आरम्भिक शिक्षा अनिवार्य होएत। तकनीकी आ व्यावसायिक शिक्षा सामान्यतया उपलभ्य होएत तथा उच्चतर शिक्षा सेहो सभके ँ योग्यताक आधार पर भेटतैक। 2. शिक्षाक लक्ष्य होएत मानव व्यक्तित्वक पूर्ण विकास आओर मानवाधिकार आ‘ मौलिक स्वतन्त्रताक प्रति आदरभाव बढ़ाएब। शिक्षा राष्ट्रसभक बीच तथा जातीय वा धार्मिक समुदायसभक बीच पारस्परिक सद्भावना, सहिष्णुता आ‘ मैत्री बढ़ाओत तथा शान्तिक हेतु राष्ट्रसंधक प्रयासके ँ गति देत। 3. माता पिताके ँ ई चुनबाक तार्किक अधिकार छैक जे ओकर सन्तानके ँ कोन प्रकारक शिक्षा देल जाए। अनुच्छेद 27 1. प्रत्येक व्यक्तिके ँ समाजक सांस्कृतिक जीवनमे अबाध रूपे ँ भाग लेबाक, कलाक आनन्द लेबाक तथा वैज्ञानिक विकासमे आ‘ तकर लाभमे अंश पएबाक अधिकार छैक। 2. प्रत्येक व्यक्तिके ँ अपन सृजित कोनहु वैज्ञानिक, साहित्यिक अथवा कलात्मक कृतिसँ उत्पन्न, भावनात्मक वा भौतिक हितक रक्षाक अधिकार छैक। अनुच्छेद 28 प्रत्येक व्यक्तिके ँ एहन सामाजिक आ अन्तरराष्ट्रीय आस्पद प्राप्त करबाक अधिकार छैक जाहिसँ एहि घोषणामे उल्लिखित अधिकार आ‘ स्वतन्त्रता प्राप्त कएल जाए सकए।
अनुच्छेद 29 1. प्रत्येक व्यक्ति ओहि समुदायक प्रति कत्र्तव्यबद्ध अछि जाहिमे रहिए कए ओ अपन व्यक्तित्वक अबाध आ‘ पूर्ण विकास कए सकैत अछि। 2. प्रत्येक व्यक्ति अपन अधिकार आ‘ स्वतन्त्रताक उपयोग ओहि सीमाक अभ्यन्तरे करत जकर अवधारण दोसराक अधिकार आ‘ स्वतन्त्रताक आदर आ‘ समुचित स्वीकृतिके ँ सुनिश्चित करबाक उद्देश्यसँ तथा नैतिकता, विधिव्यवस्था आ जनतान्त्रिक समाजमे सामान्य जनकल्याणक अपेक्षाक पूर्तिक उद्देश्यसँ कानून द्वारा कएल जाएत। 3. एहि स्वतन्त्रता आ‘ अधिकारक प्रयोग कोनहु दशामे राष्ट्रसंधक सिद्धान्त आ‘ उद्देश्यक प्रतिकूल नहि कएल जाएत। अनुच्छेद 30 एहि घोषणामे उल्लिखित कोनो बातक निर्वचन तेना नहि कएल जाए जाहिसँ ई घ्वनित हो जे कोनो राज्यके ँ वा जनगणके ँ एहन गतिविधिमे संलग्न होएबाक वा कोनो एहन काज करबाक अधिकार छैक जकर लक्ष्य एहि घोषणाक अन्तर्गत कोनो अधिकार वा स्वतन्त्रताके ँ बाधित करब हो। गजेन्द्र ठाकुरक मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोशपर- उदय नारायण सिंह "नचिकेता"
जखन सैमुअल जॉनसनक अ डिक्शनरी ऑफ द इंग्लिश लैंगुएज (१७५५) प्रकाशित भेल तखन जाऽ कऽ अंग्रेजी विद्वान आ विद्यार्थीकेँ यथार्थमे अपन भाषामे एकटा विश्वसनीय आ परिष्कृत कोश भेटलन्हि। अंग्रेजीक अधिकांश पहिलुका प्रयास गंभीरतासँ रहित छल। १६०४ ई.क रॉबर्ट काउड्रेक कोश जकर नाम अ टेबल अल्फाबेटिकल आ कतेक आन कृति आ तकर अनुकरण केनिहार आन कृति सभ ओहि मानदण्डक अनुरूप नहि छल जे शेष यूरोपमे कोश निर्माणक परम्पराक अनुरूप होअए। मुदा पहिलुका द्विभाषी कोश सभ जाहिमे विदेशज फ्रेंच, इटालवी वा लैटिन शब्द सभ अंग्रेजीमे परिभाषाक संग सम्मिलित छल एहि सभसँ नीक छल आ ताहिमे १५९२क रिचर्ड मुलकास्टरक ग्लॉसरी एकर एकटा उदाहरणक रूपमे राखल जा सकैत अछि। ई सभ तखनहु अरबी कोश सभक समकक्ष नहि छल जे ८म् आ १४म शताब्दीक बीचमे संग्रहित भेल विशेषतः सामान्य काजक लेल रचित कोश सभ जेना लिसान अल अरब (तेरहम शताब्दी)।
अंग्रेजी जेना एकरा हम आइ देखैत छी, भाषाक वैश्विक इतिहासमे एकटा सापेक्षतया नूतन घटना अछि संभवतः मैथिलीसँ किछुए पुरान। ई एहि लेल किएक तँ जखन मैथिलीक सभसँ पुरान उपलब्ध ग्रन्थ ज्योतिरीश्वर द्वारा लिखल जा रहल छल ओ समय रहए अंग्रेजीमे चौसरक। पाश्चात्य कोशमे सभसँ पुरान कोश तखुनका अक्कादी साम्राज्यमे रचित भेल जाहिमे सुमेरी-अक्कादी शब्द सूची रहए (आधुनिक सीरियाक एबलामे प्राप्त) आ एकर समय छल लगभग २३०० ई.पू.। मुदा सभसँ प्राचीन ग्रीक कोश एपोलोनियश द सोफिस्ट प्रथम स्शताब्दीक, ई होमरयुगीन शब्दपरिभाषा आ अर्थ सूचीबद्ध करैत अछि आ एकटा उदाहरण प्रस्तुत करैत अछि। द्वितीय सहस्राब्दी ई.पू. उर्रा= हुबुल्लु शब्दार्थसूची जे एहने द्विभाषी शब्द सूचीक संग पुरान कोशीय लेखाक उदाहरण एकटा आर उदाहरण अछि जेकर तुलना तेसर शताब्दीक चीनी परम्परे सँ कएल जा सकैत अछि। प्रारम्भिक जापानी प्रयास ६८२ ई.क चीनी अक्षरक नीना ग्लॉसरी आ सभसँ पुरान उपलब्ध जापानी कोश तेनरेइ बान्शो मैगी (८३५ ई.) सेहो महत्त्वपूर्ण प्रयास छल। भारतमे वैदिक साहित्यक संरक्षण व्याकरण आ कोशीय रचनाक लेल सभसँ पैघ उत्प्रेरक छल। संस्कृतक पाणिनीय आ दोसर वैयाकरणिक परम्परामे ई एकटा सामान्य आ पूर्णतः आधारभूत कार्य रहए- वैदिक वाक्यकेँ शब्दमे खण्ड-खण्ड करब आ शब्दकेँ खण्ड करब धातु-प्रत्ययगघतकमे। एहि क्रममे शाब्दिक संरचना, भाषायी ध्वनि तन्त्रक संग संरचनात्मक-ध्वन्यात्मक सिद्धांत सभ सेहो विकसित भेल। ई विश्वास कएल जाइत अछि जे निघण्टु (७०० ई.पू.) पर यास्क एकटा निरुक्त नाम्ना भाष्य लिखलन्हि जे आइ सभसँ पुरान ज्ञात कृति अछि आ ई परम्परा सेहो पाली परम्परा धरि चलल। ओ सभटा कोशीय सामग्रीकेँ समानार्थी आ समानह्रिजए-ध्वनि अनुसार सजेलन्हि। शास्त्रीय संस्कृतमे सभसँ लोकप्रिय कृति अछि अमरसिंहक अमरकोष (६ठम धताब्दी)। कटालोगस कैटालोगोरम मात्र अमरकोषपर कमसँ कम ४० टा भाष्यक सूची दैत अछि जे प्राचीन भारतमे एहि समानार्थी कोशक महत्व आ लोकप्रियता देखबैत अछि। एहि तरहक आर कोश जे कम-बेशी अमरकोषक आधारपर रचित भेल आ एहिमे सम्मिलित अछि (संदर्भ मल्हार कुलकर्णी- TDIL अन्तर्जालपर):-
१. भोजक कृत नाममालिका (११म शताब्दी) २. सहजकीर्तिक सिद्धशब्दार्नव (१७म शताब्दी) ३. हर्षकीर्तिक शारदीयाख्यानाममाला (१७म शताब्दी) ४. धनन्जय भट्टक पर्यायशब्दरत्न ५. कोशकल्पतरु ६. नानार्थरत्नमाला- इरुगप दण्डाधिनाथ (१४म शताब्दी) ७. राघवक नानार्थमञ्जरी ८. धरनीदासक धरणीकोश (१२म शताब्दी) ९. शिवदत्त मिश्रक शिवकोश १०. सौभरीक एकार्थनाममाला-द्वक्षारनभमाला ११. मकरन्ददासक परमानन्दीयनाममाला
पहिल अधुनातन युगक संस्कृत कोश जे पाश्चात्य सिद्धांतकेँ प्रयुक्त कए बनाओल गेल से अछि प्रोफेसर एच.एच.विल्सन द्वारा संगृहीत आ १८१३ ई. मे प्रकाशित संस्कृत-अंग्रेजी कोश। दू टा भारतीय कोश तकर बाद आएल पं. सर राजा राधाकान्त देवक शब्दकल्पद्रुम आ पं. ताराकान्त तर्कवाचस्पतिक वाचस्पत्यम् ।
हमर विचारमे प्रयुक्त शब्दकोशशास्त्र आकि कोश संग्रहक विज्ञान वा कला जे अछि कोश सभकेँ विभिन्न कार्यक लेल लिखब आ संपादन करब आ ई सेहो ततबे महत्वपूर्ण अछि जतेक सैद्धांतिक कोशशास्त्र महत्वपूर्ण अछि। शब्दकोशशास्त्र शब्द एकटा कथ्यक रूपमे १६८० ई.मे आबि कए प्रयुक्त भेल जखन कि कोश शब्द अंग्रेजी भाषामे १५२६ ई. मे आबि कए प्रयुक्त भेल जेनाकि मेरिअम-वेब्सटर कोश कहैत अछि। हमरा सभकेँ कहल जाइत अछि जे कोशमे ई सभ सम्मिलित होएबाक चाही:-
१. प्रिंत वा इलेक्ट्रॉनिक रूपमे संदर्भ स्रोत जाहिमे वर्णमालाक आधारपर सजाओल शब्द रहए, जाहिमे ओकर रूप, उच्चारण, कार्य, व्युत्पत्ति, अर्थ आ वाक्य रचना आ कहबी युक्त प्रयोग होअए। २. एकटा संदर्भ ग्रंथ जाहिमे संबंधित कार्य-विषयक महत्त्वपूर्ण पदबंध आ नामक वर्णानुसार सूची होअए- संगमे ओकर अर्थ आ अनुप्रयोगक चर्चा सेहो रहए। ३. एकटा संदर्भ ग्रंथ जाहिमे एक भाषाक शब्दक लेल दोसर भाषामे समानार्थ देल रहए। ४. एकटा संगणकीय संशोधित सूची (दत्तांशशब्द वा शब्द पदक) जे सूचना प्राप्ति वा शब्द संसाधकक लेल संदर्भक रूप उपयोग कएल जा सकए।
एहि असाधारण आ समय साध्य कलाक अनुप्रयोगमे सम्मिलित कार्य सभमे ई सभ आवश्यक रूपमे सम्मिलित अछि:-
*प्रयोक्ताक निर्धारण आ ओकर आवश्यकताक निर्धारण *सामान्यजनक शब्दशक्तिक आधारपर भाषिक शब्दक संख्याक निर्धारण आ एकटा निश्चित सीमित परिधिमे ओकर निर्णय *परिभाषा आ विवरणक सज्जाक विषयमे निर्णय *कोशक संदर्भमे सूचना संचरण आ विचार-क्रियाक निर्धारण *कोशक विभिन्न अंगक निर्धारण दत्तांशक संग्रह आ प्रदर्शनक लेल उचित संरचनाक चयन (जेना आवरण-संरचना, संवर्गीकरण, वर्गीकरण, प्रसारण आ एकसँ दोसर अंशमे सन्दर्भ-संकेत) *प्रधान शब्द आ जोड़एवला शब्दक चयन- पारिभाषिक शब्द बनएबाक लेल *समानधर्मिता आ संधिकेँ चिन्हित करब *अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला (आइ.पी.ए.) आ ब्लॉच एण्ड ट्रैगर चिन्हक प्रयोगसँ शब्द उच्चारणक निर्देश *सुरुचिपूर्ण आ वर्ग-स्थान-विशेष बोली स्वरूपक योग *बहुभाषिक कोशक लक्ष्य भाषाक लेल समानार्थी शब्दक चयन *छपल आ इलेक्ट्रॉनिक दुनू तरहक कोशमे उपयोक्ताक लेल प्रवेशमार्ग बटन आ आन सुविधा
बिहारक गंगाक मैदान आ नेपालमे हिमालयक निचुलका पहाड़ीक तराइ क्षेत्र मिलि कऽ मैथिली आ मिथिलाक सांस्कृतिक क्षेत्रक निर्धारण करैत अछि, जे बहुत पहिने १९०८ ई. मे जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन द्वारा चर्चित भेल, ओना ओ मुख्यतः भारतमे स्थित मिथिला क्षेत्रपर केन्द्रित रहल। एहि क्षेत्रमे बहुत रास परिवर्तन आ सीमाक पुनर्निर्धारण भेल। २०म शताब्दीक प्रारम्भमे ग्रियर्सन मैथिली भाषाक क्षेत्र सम्पूर्ण दरभंगा आ भागलपुर जिलाकेँ मानलन्हि। एकर अतिरिक्त ओ मैथिलीकेँ मुजफ्फरपुर, मुंगेर, पूर्णियाँ आ संथाल परगनाक बहुसंख्यक लोक द्वारा बाजल जाएवला भाषाक रूपमे चिन्हित कएलन्हि। मुदा आइ-काल्हि एहिमे सँ किछु अंश झारखण्ड राज्यक अंग भऽ गेल अछि।
एतए ई तथ्य आनब सेहो समीचीन होएत जे एहि बीच राज्यक मान्यताक क्रममे मात्र १७ मे सँ ५ जिला (ई अछि भागलपुर, पूर्णियाँ, सहरसा, दरभंगा आ मुजफ्फरपुर) बिहारक मैथिली भाषी क्षेत्रक रूपमे सामान्य रूपमे अभिहित भेल। पॉल ब्रास (१९७४) मैथिली आन्दोलनक अपन वृहत् अध्ययन उत्तर भारतमे भाषा,धर्म आ राजनीति मे एकरा सामान्य रूपमे परिभाषित भौगोलिक क्षेत्रक रूपमे लेलन्हि। १९८० क दशकमे बिहारक ३१ जिलामे भेल विभाजनक बाद एकटा प्रोजेक्ट रिपोर्टमे (द मैथिली लैंगुएज मूवमेन्ट इन नॉर्थ बिहार: अ सोशियो लिंगुइस्टिक इन्वेस्टीगेशन नामसँ) संयुक्त रूपसँ हमरा आ एन.राजाराम आ प्रदीप कुमार बोस बनाओल गेल, हम सभ एहि निर्णयपर पहुँचल छलहुँ जे ३१ मे सँ ई सभ १० जिलाकेँ मैथिली भाषी क्षेत्र मानल जएबाक चाही: भागलपुर, कटिहार, पूर्णियाँ, सहरसा, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर आ वैशाली। से एहि भौगोलिक सीमाक परिवर्तन प्राकृतिक परिवर्तन (कोशी धार २०० बरखमे सात बेर अपन दिशा बदलने अछि) आ जिलाक पुनर्गठनक परिणामस्वरूप भेल अछि।
ई ककरो लेल एकटा पैघ चुनौती होएत जे मैथिलीक एकटा भीमकाय कोश बनेबाक प्रयास करताह जेना गजेन्द्र ठाकुर कएने छथि। ई परिस्थिति आर ओझरा जाइत अछि कारण मैथिलीक शब्द चयन अंशतः वा अधिकांशतः एहि सांस्कृतिक क्षेत्रमे बाजल जाएवला १२ टा आन भाषासँ संभवतः प्रभावित होइत अछि। एतए एहि लगभग १२ टा दोसर भाषाक वर्णन सेहो वर्णन योग्य अछि। मैथिलीक आस-पड़ोसमे भोजपुरी आ मगही अछि आ हिन्दी एहि सभपर ऊपरसँ आच्छादित अछि जे एहि तीनू भाषा समूहक लोक द्वारा बाजल जाइत अछि। मुदा बिहार एकटा बहु-भाषी राज्य अछि आ नेपाली आ बांग्ला भाषी सेहो एतए प्रचुर मात्रामे देखल जा सकैत छथि। एकर अतिरिक्त किएक तँ मैथिली भाषी झारखण्ड क्षेत्रमे सेहो पर्याप्त मात्रामे छथि, ई बुझबाक थिक जे ओराँव, मुण्डारी, हो, बिरहोर, धांगर, संथाली आ संख्यामे कम ऑस्ट्रिक भाषा समूहक वक्ता सेहो हुनका संग निवास करैत छथि। ओना तँ मिथिला क्षेत्रक बहुत रास मुस्लिम अपन मातृभाषा मैथिली देखबैत छथि मुदा बहुत रास एहनो छथि जे अपनाकेँ उर्दूभाषी घोषित करैत छथि। एहि सभ भाषामे मात्र चारि टा केँ सांवैधानिक मान्यता भेटल अछि- हिन्दी, उर्दू, बांग्ला आ नेपाली (पछाति संथालीकेँ सेहो)। हमरा विचारेँ मैथिलीक वाक्य-रचनापर ऑस्ट्रिक भाषा समूह सहित विभिन्न कोणसँ प्रभाव पड़ल अछि। मुदा कोशीय स्तरपर योग आ अनुकूलन सीमित स्रोतसँ भेल अछि जेना उर्दू, हिन्दी, भोजपुरी आ मगहीसँ। कोश आत्मसात करैत अछि देशी शब्दावलीकेँ देशज शब्दावलीक संग। ई एहि कारणसँ कारण हमरा विचारेँ बेशीसँ बेशी २५-३०% वक्ता मैथिलीकेँ एकभाषीय रूपमे बजैत छथि। कारण शेष दोसर भाषामे सेहो नीक पइठ रखैत छथि। ओ मथिली भाषी जे बिहारक पश्चिमी सिमानपर रहैत छथि, भोजपुरी सेहो बजैत छथि आ पटना-राँची-गया-मुंगेर-क्षेत्रमे रहनिहार मगही जनैत छथि आ सेहो हिन्दीक अतिरिक्त। मुदा एकटा अत्यल्प प्रतिशत कहू जे ३-५ % सँ कम्मे, एहन मैथिल छथि जे अंग्रेजीमे सेहो प्रभावी रूपमे बाजि सकैत छथि। मुदा अंग्रेजीसँ मैथिलीमे शब्दक आगम ततबे वृहत अछि जेना ई कोनो दोसर नव भारतीय भाषा (न.भा.भा.) सभमे अछि।
बहुत गोटे ई शंका व्यक्त कऽ सकैत छथि जे कतेक गोटे एहन होएताह जिनका गजेन्द्र जी सनक प्रयाससँ लाभ भेटतन्हि ? ओना तँ मैथिली भाषीक संख्याक आधिकारिक आँकड़ा स्थिर नहि रहल अछि मुदा एहि तथ्यक विस्तारसँ वर्णन आवश्यक अछि। जनसंख्याक आँकड़ा वास्तविक नहि अछि जेना २००१ ई.क जनसंख्याक ई आँकड़ा: १,२१,७९,१२२. एकरापर अविश्वास पक्का अछि। जखन हम देखैत छी जे मैथिली भाषीक संख्याक संदर्भमे दस बरखक अंतरालमे लेल जनसँख्या आँकड़ामे बहुत बेशी परिवर्तन अछि। ई १८९१ सँ दस बरखक अंतरालमे जनसंख्याक आँकड़ामे बढ़ल आ घटल संख्याक तुलनासँ स्पष्ट अछि:
१९०१-११: +३.१२% १९११-२१: -०.७७% १९२१-३१: +७.६८% १९३१-४१: +९.१३% १९४१-५१: गणना नहि भेल १९५१-६१: +२२.३५% १९६१-७१: +२०.८९% १९७१-८१: +२४.१९%
तार्किक रूपेँ वास्तवमे मैथिली वक्ताक संख्या स्थिर रूपेँ बढ़ल अछि। हमर अनुमानसँ किछु संकेत देल जा सकैत अछि जे अनिमानित ४ करोड़ धरि पहुँचैत अछि। १८९११ मे ग्रियर्सन (१९०८) अनुमान कएलन्हि जे मैथिली भाषीक संख्या ९२,८९,३७६ अछि। एकर विरुद्ध १९६१क जनसंख्या आँकड़ा एकरा ४९,८२,६१५ कऽ दैत अछि। निश्चयरूपेण १९६१ क जनसंख्या आँकड़ा वास्तविक नहि अछि। ओना ग्रियर्सनक (१९०९) जनसंख्या आकलन जे हुनकर १८९१ ई. मे कएल सर्वेक्षणपर आधारित अछि, सभक द्वारा सम्मति प्राप्त नहि अछि। वर्तमान शताब्दीक प्रारम्भमे मैथिली निम्न क्षेत्रमे बाजल जाइत छल:-
(i) सम्पूर्ण दरभंगा आ भागलपुर (ii) मुजफ्फरपुरक ६/७ भाग (iii) मुंगेरक १/२ भाग (iv) पूर्णियाँक २/३ भाग (v) संथाल परगनाक ४/५ भाग जे जनगणना आँकड़ामे वर्णित हिन्दी भाषी छथि।
१८१६ ई. मे उत्तर दिसुका भाषायी क्षेत्र नेपाल राजशाही द्वारा स्थायी रूपसँ नेपालमे सम्मिलित कए लेल गेल। ताहि द्वारे भाषा बजनिहारक संख्या पर पहुँचबाक लेल नेपालक जनसंख्याक १४% हिस्सा आर जोड़ए पड़त। पॉल ब्रास (१९७४:६४-६) गेटक गणना (जनसंख्या वर्ष १९०१ ई.) १८८५ ई.सँ उपलब्ध विभिन्न दस्तावेजक आधारपर करैत छथि आ १,६५,६५,४७७ संख्यापर पहुँचैत छथि। ई गणना ग्रियर्सनक आकलनकेँ आधार लए आ तकर बादक ८ दशकमे बिहारमे जनसंख्या वृद्धिकेँ आधार लए कएल गेल अछि। १९८१ क जनसंख्या आँकड़ाक आधारपर आ मिथिला क्षेत्रक बाहर पसरल मैथिलक संख्याकेँ जोड़ि कऽ आ १० जिलाक जनसंख्याकेँ (३१ जिलामेसँ) ध्यानमे राखि हम आ हमर सहयोगी १९८० क दशकक मध्यमे २,२९,७२,८०७ (सिंह, राजाराम आ बोस १९८५) क संख्यापर पहुँचलहुँ। ई संख्या हमर विचारमे जनसंख्याक दसवर्षीय वृद्धिकेँ ध्यानमे रखैत ४ करोड़ धरि पहुँचल अछि आ ताहि द्वारे बहुत रास लोक कोशक एहि भीमकाय प्रयाससँ लाभान्वित होएताह। ई सामान्यतः मानल जाइत अछि जे मैथिली मिथिला क्षेत्रक ब्राह्मण द्वारा बाजल जाइत अछि। ई एकटा पहिलुका कुप्रचार छल जे एकरा हिन्दीक बोलीक रूपमे सिद्ध कए चाहैत रहथि मुख्यतः हिन्दी भाषीक आधिकारिक संख्यामे वृद्धिक उद्देश्यसँ। मुदा उत्तरी बिहारक जाति संरचनाकेँ देखैत मैथिलीक जनसंख्या संबंधी आँकड़ा एकर सत्य कथा कहत। सापेक्षतया मैथिलीक बेस संख्या जे जनगणना रिपोर्टमे आएल, केँ एहि तथ्य मात्रसँ व्याख्यायित कएल जा सकैत अछि जे ओना तँ मैथिली भाषी जिलाक कतोक क्षेत्रमे ४६.८४% धरि मुस्लिम आ ३१.०६% धरि हिन्दू निवास करैत छथि, मैथिलीक लेल जे सहयोग आएल अछि से एहिमे सँ एकटा पैघ संख्या द्वारा मैथिलीकेँ अपन मातृभाषा घोषित कएने बिना संभव नहि छल।
मिथिलामे भाषा प्रयोगक एकटा सर्वेक्षण ई देखा सकैत अछि जे ओना तँ भाषाक औपचारिक क्षेत्र सभमे प्रयोग कम भेल अछि मुदा ई सेहो सत्य अछि जे एकर साहित्यिक उत्पादकता आ उपलब्धि आइ अखिल भारतीय स्तरपर बेशी नीक जकाँ सोझाँ आबि रहल अछि तुलनात्मक रूपेँ जतेक ई आइसँ २० बरख पूर्व अबैत छल। मधुबनी चित्रकला वा मिथिला कला आइ भरि भारतमे सुप्रसिद्ध भऽ गेल अछि आ विश्व-बजार धरि पहुँचि गेल अछि। मात्र तखने जखन मैथिली भाषी नव-पीढ़ी अपन सांस्कृतिक भाषायी बोधसँ हटबाक निर्णय करताह तखने एकरा कोनो खतरा सोझाँ अएतैक। हमरा विचारेँ सांवैधानिक अधिकार नहि भेटनाइ अप्रत्यक्ष रूपमे मैथिलीक लेल वरदान साबित भेल कारण ई साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधिकेँ बल देलक। ई पहिनहियेँ बहुत रास सांवैधानिक मान्यता प्राप्त भाषा सभकेँ पाछाँ छोड़ि देलक, जेना मणीपुरी, कोंकणी, नेपाली आ सिन्धी सेहो। आ आब जखन की ई अष्टम सूचीमे अछि एकरा सभटा आधिकारिक आ आन तरहक संरक्षण भेटबाक चाही जकर ई अधिकारी अछि। एकरा एकर उपयोगकर्ताक सहयोग सेहो भेटबाक चाही जे आब आधुनिक अओजार सभक ताकिमे छथि जेना ऑनलाइन पत्रिका, ई-कोश, सुविधाजनक जंगम परिभाषा-कोश सभ आ स्वचालित प्रश्नोत्तर प्रणाली इत्यादि। ताहि स्तरपर ई मैथिली कोश जे अन्तर्जाल आ छपल दुनू संस्करणमे उपलब्ध होएत, से संग्रहकर्त्ता द्वारा एकटा महत्वपूर्ण योगदान होएत। मैथिली भाषी समुदाय आ आन भाषाक अनुवादक-विद्वान द्वारा गजेन्द्र ठाकुर आ प्रकाशक विशेष प्रशंसाक पात्र छथि। ई सत्य अछि जे मैथिली कोश-विज्ञान बहुत बादमे विकसित भेल, म.म. दीनबन्धु झाक प्रयासक बहुत बाद आ आब जा कए हमरा सभक सोझाँ महत्त्वपूर्ण कार्य सभ आएल अछि जेना पं गोविन्द झा द्वारा कल्याणी कोश वा जयकान्त मिश्रक वृहत् मैथिली शब्दकोश, मतिनाथ मिश्र ‘मतंग’ क मिथिला शब्द प्रकाश वा अलाइस डेविसक बेसिक कलोक्विअल मैथिली : अ मैथिली-नेपाली-अंग्रेजी वोकाबुलरी। संक्षिप्त मैथिली शब्दकोश आ द्विभाषी मैथिली शब्दकोश जे मैथिली अकादमी द्वारा संकल्पित अछि, अयनाइ एखन बाकी अछि। राष्ट्रीय अनुवाद मिशन द्वारा संकल्पित (देखू www.ntm.org.in) लांगमैन- सी.आइ.आइ.एल. बेसिक इंगलिश- इंगलिश- मैथिली जे कॉर्पोरापर आधारित अछिसेहो एकटा रुचिगर उत्पाद होएत। मुदा सभटा कहला आ केलाक बाद एहि कार्यक महत्त्व समय बितलाक संगे अनुभूत कएल जाएत।
२८.०२.२००९ प्रोफेसर उदय नारायण सिंह मैसूर निदेशक केन्द्रीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) ३. पद्य ३.१.कामिनी कामायनी: भाषा ३.२. डॉ. शंभु कुमार सिंह-लोरी ३.३. सतीश चन्द्र झा- तीन टा कविता ३.४. माय (कविता) -मनीष झा "बौआभाई" ३.५.ज्योति- मिठगर राैद ३.६.सुबोध ठाकुर कामिनी कामायनी: मैथिली अंग्रेजी आ हिन्दीक फ्रीलांस जर्नलिस्ट छथि। भाषा बङ दैन्य भाव सॅ आखर आखर खिहारि कल’ जाेरि करैत छल निहाेरा विकासक’ नाम प’ त’ छाेङिए देलिए गाम मुदा नै बिसरू हमरा हम अहाॅ के आन अहाॅक शान अहाॅक पहचान छी । पढुआ बाब्ूा भैया नूकैत रहला काेन तााकि क’ इम्हर उम्हर कान में तूर ठूॅसि बहिर सेहाे भ’ जायथ पाॅछा सॅ अंगा खीचैत दाॅत निपाेरति फेर कलपै भाखा जूनि बिसरू हमरा बाजू नहि त हम नष्ट भ’ जायब हम अहाॅक बाबू दादू के भाखा छी हमरा फेर कत्त पायब लिपि त’ विलुप्ते प्रायः असगरे आब हम ंंमातृभूमि के नाम आ’ मिथिळा के प्राण छी बाबू भैया तमसेळाह कंधा उचकबैत मुॅह बिचकबैत कहला ताेरा बाजि क’ हम गॅमार बनल रहू धैंंंंंंंम नहि जायत हमर उत्त्धान जाे तू गामे घर में नुकाएल रह सबहक अपमान आ दुत्कार सह इर् महानगरि छैक महानगरि एत्त साहबक भाखा चलै छै लार्ड मैकाले के आेहि दुर दुर सॅ कै बरख धरि पङल रहल बेसुध हाेश अबीते मातर फेर धेने रहल पछाेर परदेशाे में हिम्मत नै छाेङलक गहिएने रहल चरण कमल अहि भैया अहि दीदी आेही मैंया के आ’ एक दिन ठहक्का मारि क’ हॅसि पङल जाेर सॅ देखू हम त’ अमर बाेली जकाॅ महानगरि मे पसरि गेलहुॅ हम गमार कत्त’ हमर साहित्य विशाळ अछि आय देशक राजधानी में ठाठ सॅ अभिजात्य वर्गक’ मुॅह सॅ निकलि रहल छी जन मानस में पसरि रहल छी हम सरिपहुॅ बसि रहल छी । मैथिली कविता रचनाकार : डॉ. शंभु कुमार सिंह लोरी तू लोरी गा हम सूति जाएब माए लोरी गा हम सूति जाएब लय नहि छौक तँ की स्वर तँ छौक? छी भूखल, देह अछि काँपि रहल ठंढक सँ ई माया नगरी अछि, हमरा बसन नहि अछि तँ की भेल ज’र त’ अछि? माए! हे देखही.. ओकरा गाड़ीमे उजरा कुकुर अछि घूमि रहल खा दूध-भात ई पशु जाति किछु खाइत अछि आ किछु करैत अछि जियान तू मानव छेँ करैत छेँ श्रम दिन रातिक श्रम केर ई फल छौक तोहर नेना अन्नक लेल बेकल छौक कलुष-भेद-तम-नियम विषम केर ई नदी आब नहि बहतैक हमर जाति ई कुठाराघात काल्हिसँ नहि सहतैक टूटि जेतैक एक्कर विषदंत भ’ जेतैक काल्हि एक्कर अंत अछि अस्त्र नहि मुदा हाथ तँ अछि? आ फेर उपर ‘हर’ तँ छथि? तू लोरी गा हम सूति जाएब माए लोरी गा हम सूति जाएब। सतीश चन्द्र झा,राम जानकी नगर,मधुबनी,एम0 ए0 दर्शन शास्त्र समप्रति मिथिला जनता इन्टर कालेन मे व्याख्याता पद पर 10 वर्ष सँ कार्यरत, संगे 15 साल सं अप्पन एकटा एन0जी0ओ0 क सेहो संचालन। 1.नाव आ जीवन
नाव नदी मे चलल सोचि क’ दूर नदी के अंत जतय छै। देखब आई ठहरि क’ किछु छण नदी समुद्रक मिलन कतय छै। छै संघर्ष क्षणिक चलतै जौ जल धारा विपरीत दिशा मे। चलब धैर्य सँ भेटत निश्चय छै आनंद मधुर आशा मे। कखनो अपने पवन थाकि क’ मंद भेल चुपचाप पलटतै। फेक देब पतबार अपन ई जल धारा के दिशा बदलतै। छोट नाव के एतेक घृष्टता सुनि क’ भेल नदी के विश्मय। नाचि रहल अछि जल मे तृणवत बुझा रहल छै जीवन अभिनय। की बुझतै ई नाव नदी मे जीवन पथ धारा अवरोधक। केना चीर क’ निकलि जाइत अछि नहि छै भय ओकरा हिलकोरक। तेज धार छै प्राण नाव के जीवन छै सागर अथाह जल। नदी किनारक छाँह मृत्यु छै जल विहीन जीवन के प्रतिपल। नहि होइ छै किछु भय जीवन मे मृत्यु देखि सोझा मे प्रतिक्षण। अपने चलि क’ नाव मनुख के सिखा रहल छै जीवन दर्शन। क्रुद्ध नदी के जल प्रवाह मे उतरि गेल जे ‘तकरे जीवन’। भय संघर्ष,निराश,कष्ट सँ ठहरि गेल ओ ‘जड़वत जीवन’।
2. मौनक शब्द
हेरा गेल अछि शब्द अपन किछु तैं बैसल छी मौन ओढ़ि क’। वाणी जड़वत, जिह्वा व्याकुल के आनत ग’ ह्नदय कोरि क’। के बूझत ई बात होइत छै मौन शब्द,वाणी सँ घातक। राति अमावश के बितला सँ जेना इजोत विलक्षण प्रातक। अछि सशक्त जीवन मे एखनो ई अभिव्यक्तिक सुन्दर साध्न। एकर चोट छै प्रखर-उचय अग्नि सन शीतलता चंदन के चानन। नहि छै आदि -उचयअंत मे समटल अंतर मे विश्राम वास छै। आनंदक अतिरेक ह्नदय मे नव अनुभूतिक महाकाश छै। अछि अव्यक्त मौन अक्षर सँ ज्ञान दीप के प्रभा प्रकाशित दृष्टिबोध् सँ दूर मौन अछि शब्द अर्थ सँ अपरिभाषित। वाणी अछि ठहराव झील के मौन नदी के निश्छल धार। उठा देत हिलकोर हृदय मे जखने बान्हब धार किनार। छै संगीत मधुर स्वर झंकृत नै छै अर्थ मौन के जड़ता। कोलाहल सँ दूर मौन के वाणी सँ छै तिव्र मुखरता। कतेक विवस अछि शब्द जगत के वर्तमान के व्यथा देखि क’। असमर्थ अछि सत् चित्राण मे की लिखू हम शब्द जोड़ि क’। 3 चुनाव लागत फेरो पांच साल पर संगम तट पर कुंभक मेला। ओहिना फेरो पांच साल पर राजनीति के पसरत खेला। रंग बिरंगक चिन्ह बनायेल टांगल नव नव सुन्दर झंडा। अछि महान इ पर्व देश के निकलत बाहर जेलक गुंडा। छलथि जतेक अनपढ़ उदंड सब भेटलनि किछु रोजगार गाँव मे लाठी,ठेंगा,बैनर,झंडा भेटलनि पार्टी सँ इनाम मे। चमचम खाधी वस्त्रा देह पर किछु गमछा मे बान्हल टाका जोर जोर सँ नारा पढ़ि क’ गढ़ता किछु जीवन के खाका। बँटि जायत भोटक दुविधा मे पिता पुत्रा आ भाई सहोदर डुबत फेरो लाल रक्त सँ सौंसे धरती फाटत दर दर। लालच लोभ स्वार्थ मे परि क’ चलतै तेज हवा उन्मादक छल बल मे ओछरायत जनमत जड़त आगि सौंसे अवसादक। लगै कतेक छै नीक कान मे सुनि क’भाषन नेता मुख सँ। देखा देत किछु सुन्नर सपना राज करै अछि अपने सुख सँ। हमरे मिलि क’ दिअ भोट सब अछि हमरे दल सभ्य बिचारक। छी देशक हम असल हितैसी हम छी बेटा अहीं समाजक। रहत आब नहि कियो देश मे दीन,हीन,दुर्बल,बैसारी सबके शिक्षा, सबके भोजन सब घुमता घर घर अधिकारी। छी ! छी ! कतेक झूठ अछि भाषण मिठगर वाणी , कपट मोन मे। प्रजातंत्रा अछि भोट दैत छी सबटा बुझितो अपन मोन मे। भ जायत जँ प्रजा सुखितगर के नेता के पाछाँ चलतै । गाजा बाजा ढ़ोल बजा क’ नारा जयजयकार लगेतै। बनत फेर किछु मंत्राी, रंाजा सबटा दौड़ल दिल्ली भागत। हैत अनिष्ट एक दिन कहियो सूतल जनता जहिया जागत। माय (कविता) मनीष झा "बौआभाई" एक-एक क्षण जे बेटा के खातिर कर जोड़ि विनती करैइयै माय बिनु अन्न-जल ग्रहण केने बेटा लै जितियाक व्रत राखैइयै माय आ एहि तरहें माय हेबाक कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय जिन्दगीक रौदा में तपि क' बेटा के छाहड़ि दैइयै माय बरखा-बिहाड़ि सन विषम समय में आँचर स' झाँपि राखैइयै माय आ एहि तरहें माय हेबाक कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय घर में छोट-छिन बात पर में बाप स' लड़ि लैइयै माय बाप स' लड़ि बेटा के पक्ष में फैसला करैइयै माय आ एहि तरहें माय हेबाक कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय बेटा नै जा धरि घर आबय बाट टुकटुक ताकैइयै माय ओठंगि के चौकठि लागि बैसल राति भरि जागैइयै माय आ एहि तरहें माय हेबाक कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय वयस कियैक नै हुऐ पचासक तहियो बौआ कहैइयै माय अहू वयस में नज़रि ने लागय तैं अपने स' निहुछैइयै माय आ एहि तरहें माय हेबाक कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय होय जानकी वा अम्बे के प्रतिमा सभ रूप में झलकैइयै माय तीर्थ-बर्थ सब मन के भ्रम छी घर में जे' कुहरैइयै माय कर्त्तव्य हमरो ई कहैइयै घर में नै कलपय ई माय आ एहि तरहें जन्म देल त' माय के पद पाबय ई माय ज्योति मिठगर राैद ठिठुरैत ठंढ़ा के झटकारि कऽ प््राकृति पहिनलक वसन्तक आवरण खर पतवार के बहारि कऽ जाड़क मानू हाेलिका संग भेल दहन रंर्गबिरंग फूलक छींट सऽ फगुआ खेलाएत पूरा वतावरण एहेन मे हर्षित भऽ सबहक प््राशंसा अछि सूर्यके अर्पण जकर ऊष्मा पाबि कऽ आयल अछि अतेक सुन्दर परिवर्तन फागुनक मिठगर राैद सऽ डेराइत पड़ाइत माघ आऽ अगहन सुबोध ठाकुर ,सी.ए.। गाम-हैंठी बाली-मधुबनी। केना होएत मिथिलाक जीर्णोद्धार सभ मारि रहल चीत्कार सगरो मचल हाहाकार, किओ नहि ककरो दुख बुझएवला, आर नहि करएवला अछि विचार, सभ मारि रहल चीत्कार सगरो मचल हाहाकार, बेटीबाप मथाहाथ दए कानए बेटावला माला जापए, दहेज बनल अचि मिथिलाक अलंकार, सगरो मचल हाहाकार कहाँ गेल सुन्दर सृजन रचना कवि विद्यापति केर भैरवी वन्दना बदलि गेल सभक व्यवहार, सभ मारि रहल चीत्कार सभ अपन वर्चस्वक खातिर, बनल जाइत अछि कुटि दुष्ट शातिर, कहू एनामे केना होएत मिथिलाक जीर्णोद्धार? सभ मारि रहल चीत्कार सगरो मचल हाहाकार। बालानां कृते- 1. मध्य-प्रदेश यात्रा आ 2. देवीजी- ज्योति झा चौधरी 1. मध्य प्रदेश यात्रा सातम दिन ः 29 दिसम्बर 1991 ़ रविदिन ः अपन खानाबदाेशी जीवनके कायम राखैत हमसब आइर् 7ः30 बजे बससऽ ‘खटिया बेरियल’ के लेल विदा भेलहुॅं।करीब 1ः30 बजे दुपहरिया मे आेतय पहुॅंचलहुॅं।कनिये देरक प््रातीक्षाक बाद एकटा झाेपड़ी जकाॅं ढाबा सदृश रेस्तराॅंमे हमसब भाेजन केलहुॅं।चारिटा बाॅंस पर एकटा टाटक छत बनाआेल गेल छल।नजदीकक ऊॅंच ऊॅंच गाछ सबमे बानर सब छल जे हलचल मचाैने छल। हमर सबहक कतेकाे संगी सबहक टाेपी आ स्वेटर लऽ कऽ भागि गेल।स्वेटर तऽ वापस भेटल मुदा टाेपी नहिं भेटल।करीब 3 बजे दुपहरियामे हमसब सातटा खुजल जीप पर सवार भऽ कऽ ‘कान्हा नेशनल पार्क’ मे प््रावेश केलहुॅं। सड़क के आसपास स्वच्छन्द घुमैत छींटदार हिरण चीतल मयूर इत्यादि झुण्डमे घुमैत देखायल।बन्दर सबतऽ अनगिनत छल।इर् उद्यान प््रााेजेक्ट टायगर द्वारा संरक्षित छै।अतय बाघ आरक्षित छै।परन्तु हमरा सबके बाघ देखबाक सुअवसर नहिं भेटल।अहि उद्यानक बीचाेबीच एक संग्रहालय छै। अकरा चारिटा दीर्घामे बाॅंटल गेल छै।पहिल दीर्घामे गाैर बाघ चीतल आदि जन्तुआेंके अस्थि कंकाल एवम् जीवाश्म राखल छै।दाेसर तेसर आर चारिम दीर्घा मे क्रमशः पक्षीसबहक पंजा जानवरके सिंग इत्यादि राखल छै।विभिन्न जानवर सबहक खाद्यप््रावृति व जीवनक्रियक जानकारी सेहाे देल गेल छैै।इर् सब देखिकऽ घूरैत घूरैत पाॅंच साढ़े पाॅंच बाजिगेल।आब जबलपुर लाैटनाइ सम्भव नहिं छल तैं हमसब ‘मचान कम्पलेक्स’ नामक हाेटलमे रूकि गेलहुॅं।इर् शहरके हाेटल जकाॅं स्टैण्डर्स वला नहिं छल लेकिन अहि खपड़ैल मकानमे जंगलके नजदीक रहनाइर् बहुत राेमांचक लागल। 2.देवीजी : देवीजी ः बढ़िया भाेजन देवीजी विद्यालय पहुॅंचली तऽ देखली जे बच्चा सब खूब हुल्लड़ मचाैने अछि। पता लगलैन जे आे सब प्लास्टिकके नकली बिस्कुटके एक टा बच्चाके टिफिनमे राखि देलकै आ आे बच्चा आेकरा असली मानिकऽ खाय लगलै।अहि तरहे सब आेकरा अप््रािल फुल बनाैलक।देवीजी के सेहाे हॅंसी आबि गेलैन। फेर आे सबके कक्षामे जाय कहलखिन। आेतय भाेजने पर बात हाेयर्तहाेयत आे पाैष्टिक आहार दऽ बताबऽ लगलखिन।आे कहलखिन जे बच्चा सबमे शारीरिक व मानसिक विकास सबसऽ बेसी हाेयत छै आऽ अहि समयमे भाेजन पर विशेष ध्यान देबाक चाही। आे कहलखिन जे मुख्यतः तीन प््राकारक भाेजन हाेयत अछि। पहिल शरीर बनाबै वला भाेजन जेना कि प््रााेटीन। प््रााेटीन दूध़ दही़ मेवा़ दाल़ि विभिन्न प््राकारक बीन्स अर्थात काबुली चना़ राजमा इत्यादिमे प््राचुर मात्रामे भेटैत छै। दाेसर प््राकारक भाेजन अछि उर्जा प््रादायक भाेजन जेना कि काबाेर्हाइड्रेट जे कि तेल़ चीनी़ गुड़़ गहुम़ चाउर इत्यादि मे भेटैत छै।तेसर तरहक भाेजन अछि शरीर के सुचारू रूपसऽ चलाबैत रहैवला भाेजन जाहिमे विटामिऩ विभिन्न प््राकारक लवण इत्यादि आबै छै। अहि के पाबैलेल फल़ साग़ तरकारी सब खेबाक चाही।आे कहलखिन जे बेसी तेल नहिं खाउ। नून हमेशा आयाेडीन वला खाऊ।अहि तरहे बच्चा सबके संक्षिप्त रूपमे भाेजन के जानकारी देलखिन। विश्व स्वास्थ्य दिवस 7 अप््रािल कऽ छल जाहि दिन सन् 1948 इर्सवी मे वर्ल्ड हेल्थ आॅरगनाइजेशन के स्थापना भेल छल। आेहि दिन सब कियाे सामाजिक कल्याणक माेन बनाैलैथ। लाेकक जुटान कऽ गर्भवती महिला सब लेल विशेष रूपसऽ बढ़िया भाेजन आ चिकित्साक महत्ता बताैल गेल।ग्रामवासी सऽ बच्चा सबके बिमारी सऽ बचैलेल आवश्यक टीका उचित समय पर जरूर लगाबी से अनुराेध कैल गेल।गरीब सबके भाेजन कराैल गेल।तकर बाद चिकित्सा जगतमे आधुनिक विकासक जानकारी देल गेल। बालिका सब लेल विशेष रूपसऽ सर्विकल कैंसर सऽ बचैके टीका जे अखनाे भारतमे उपलब्ध नहिं अछि तकर जानकारी देल गेल।मुदा विदेशमे अकर प््राावधान बच्चेमे कैल गेल छै आ पैघाे भेला पर 21 वर्षके आयु तक के लेल उपर्युक्त टीका उपलब्ध छै।देवीजी के हार्दिक इर्च्छा छलैन जे भारताे मे इर् सुविधा यथाशीघ््रा उपलब्ध हाेइर्। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। इंग्लिश-मैथिली कोष/ मैथिली-इंग्लिश कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.) Language: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.पञ्जी डाटाबेस २.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली १.पञ्जी डाटाबेस-(डिजिटल इमेजिंग / मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण/ संकलन/ सम्पादन-पञ्जीकार विद्यानन्द झा, नागेन्द्र कुमार झा एवं गजेन्द्र ठाकुरद्वारा) जय गणेशाय नम: उँ नमस्य शिवाय: 166 (348) महि सुता मनोराम (188/05) बनकारी का खण्उpबलासॅ बालकृष्ण दौ ‘’87।।0911’’ रवौआलसॅ चतुर्भूज द्रौणा न. (121101) भूवनन्द न सुता घुसौत सं दुल्लwह दौन (121/0511) दुल्लनह सुतो लक्षमन: (234/02) सरिसवसॅ भिरिवदौ’’ 12।।10 211 भिखी सुतो (1981/04) देवयाथो करमहासॅ उॅमानाथ दौ 1।।24।।0511 पण्डु’आ सॅकृष्णrपति दौणा परशर्माण सुतो (245।।07) तीर्थ मणि. (23/11) खण्डलबला सॅ राजा दौ।। (127/0/।।) उ. कृष्णा1राम सुता रेवतीनाप बैयाकरण थीर्थ (197/06) चुन्नीि लाटे रेकनाथ मैयाका: सकराढ़ीसॅ घाने दौ।। (121/03) (178।।06) गंगाधर सुतो घानेवयनूकौ पालीसॅ यशाधर दौ ।। (112/05) दरिहरा सॅ छौणा धाने सुतो नारायणदत्त : कुश्रौलीसॅ छोटकू दौ।। (120/011) मंगरौनी पालीसॅ पॉ हिराछौणा ठक्कुसर रेवतीनाय सुता राजा प्र. श्या मनाथ प्रान्नाॅथ अर्तिनाथा:करमहासॅ लोकनाथ दौ ।। (140/02) वलियास सॅ ब्रजनाथ ट्रोणा 3. राजा प्र. श्यािकानाथ सुतो अपूद ज्यो।तिविद रामचन्द्रोव जगौर माण्डसर सॅ उशान्नामथ सुत जमाहि दौ।। (83/01) वैद्यनाथ सुता भवदेव जयदेव शिवदेवा पालीसॅ, देवनाथ दौ।। (131/02) देवनाथ सुतो जनार्दन: माण्डयर सॅपीताम्ब र दौ।। (53/08) सोदरपुर सॅ चतुर्भूज द्रौणा ।।(83/110) वैद्यनाथ सुता भवदेव जयदेव पालीसॅ, देवनाथ दौ ।। (131/0211) देवनाथ सुतो जनार्दन माण्डैर सॅपीताम्बजर दौ।। (53/08) सोदापुरसॅ चतुर्भूज द्रौणा (107/1106) जयदेव सुतो बछरूक करमहासॅ कृष्ण् दौ।। (107/08) सोदरपुर सै श्री पति दौ।। (23/05) ।। धूवा नन्दहसुतो हरिकेश: दरिकरण सैमनसुख सुत उधे दौ उजौतीसॅ विभूदौ।। हरिकेश सुता पआपति प्राणपति लक्ष्मीुपति श्रीपतिय: सतलरखा सॅ रामचन्द्रि दौ।। गौरी सुतकाशो सुतोरामचन्द्रु: हरिअमसॅ बुद्धिकर दौ।। रामचन्द्रत सुता नमनियाम सॅ सुरपति सुतमाने दौ माण्डार सै दामू द्रौणा श्री पतिसुता खौआल सै कृष्णादेव दौ हरिअम सै शिवपाणि द्रौ।। बघरू सुतो इशान्नाीथ: 4 बौली सैशरीबयौ।। (114/09) ।। करमहा सॅ गुणाकर द्रौ।। (205/।।06) इशान्ना।थ सुता हिराणि जमाहिर भिंगुर गिरधारी रामधना (215/03) (197/04)
(349) सरिसब सॅ धर्मपति दौ।। (124/06) ।। पणुआ सॅ पॉनन्दीॅश्व6र द्रौणा जमाहिर सुतो परमेश्वॅरीदत्तअ: बहेराढी सँकमलपणि दौ।। (131/02)।। रतिजघर सुतो कमलक एकहरा सं हरिश्ववर दौ।। 134/08।। हरिअम सँ जगन्नाकथ दौणा, कमलपार्षण सुतो देवघर मुरलीधरो बेलउचसँ विद्यानाथ दौ।। (61/0/)।। भवनाथ सुता विद्यानाथ छबन (199/04) जुड़ाउना जजिउवाल सँ निनाई दौ।1 (74।।02) ।। सकराढ़ी सँ पुरूषोत्तवम दौणा (233/06) विद्यानाथ सुतोज्योल. बचनाक. टकबालसँ बन्धु दौणा।। (45/।।0) सरिसबसँ नन्द0न 232’’ ठक्कुार राम प्र. कमलाकान्त सुतो जीवेश्ववर: धुरनौत सँ अच्छ घर दौ।। (127/05) अच्छुघर 246।।07 सुतो दुर्गा घर: सरिसब सँ छकौड़ी दौ।। (71/03)।। (256।।08) झाटी सुतों बतंहन: नाहस खौआल सँ गाना दौ ।। (144/04) ।। शिवराम सुता नरपति गाना ब.10/07 वागीश सहिवा (30/02) रखवारी हरियम सँ नयन सुत मदन दौ (1158/10)।। गति सुता श्री हारे ब. (13/08) रत्ननपति पति अच्युडत विष्णु्पति शिवपतिय: एकहरा सँ जीवे दौ।। शिवपति सुतो नयन: खौआल सँ रतनपति सुत यग्यतपति दौ पनिन. रातू छौणा (227/103) नयन सुतो चिकूमदनो एकहरा सँ उँमापति दौ।। रमानन्दय सुत बासुदेव सुतो उँमापति सुद्यापति दरिहरा सँ शूचिकर दौ।। यग्यपपति दौ पनि.रातू छौणा (227/03) नयन सुतो चिकूमदनो एकहरा सँ उँमापति दौ।। रमानन्दह सुत बासुदेव सुतो उँमापति सुद्यापति दरि हरा सँ शुंचिकर दौ।। उँमापति सुता कान्हूह 322।।06 राक प्रामीघर (250/08) मेहिपतिय: माण्डतर सँ दिवाकर सुत उधे दौ उत्तबमपुर सँ शिवनाथ छौणा (207/06) मदन सुता (317/0/0) (7/0) । बछरू हृषिकेश हिरा (229/0) काला का नेतवाड़ दरिहस सै बापू दौ।। लाखन सुत जगन्नािथ सुतो वाश्कर: अल्लाीरि सं गौनू दौ।। बापू सुता अलय सॅ रत्नपति सुत चित्रामणि दौ दिधो सँ बलम्मीक छौणा 108 चौधरी गाना सुता जमुना जतिवान सै भगीरथ सुत नन्द लाल दौ।। (159/08)।। मिश्र नन्दौलाल सुता दरिहरा सँ गोवर्द्धन दौ।। (160/09)।। पाली सँ प्रद्यूम्न दौ.
(167) बतहन सुतो बाछ छकौड़ीको करमहासॅ रूद्रमणि सुत भोला दौ।। (129/06) ।1 मोहन सुता 167 महिपति राम नारायण (250/07) हरपति विशोका बेलउँचसँ रामचन्द्रर दौ।। (52/02)।। करमहासं बैद्यनाथ छौणा रमा सुतो रूद्रमणि सतनरवा सँ शिरी सुत मघु दौ।। (59/10)।। मधुसूदन प्र. मधुसुता हरपति (171/07) अनिरूद्ध वैद्यनाथ कमला का हरिअम सँ कृष्णाकनन्दह दौ 2331 (1158/10)।। लक्ष्मी पति सुतो बामन: दरिहरा संअमरूदौ।1 बामन सुतो कृणानन्द : (350) ।।(122/02)।। सकराढ़ी सँ मणि सुत. लक्ष्मीत पति दौ हरियम सं हरिहर छौणा ल.6।।0।। कृष्णाानन्द सुता दरिहरा सँ बवूनी दौ।। (154/09)।। हरिअम सँ भवानीनाथ छौणा रूद्रमणि सुतो हेमपति भोलाकों एकहरा सैबल्लीस सुत पनॉंइ दौ।। (129/105)।। अपरा मुकुन्दि सुता जयकृष्णए प्र. (225/06) श्या1म विरधू बल्लीह लक्षमना: सतलरवा सँ भवानी दौ।। (129।।04)।। करमहासँ जीवनाथ दौ।। बल्ली( सुता गनाई पनॉंई चिन्ता मणि करमहा सँ बलमद्र सुत मोहन दौ।। (144/06) ।। माण्ड(र सँ हाड़ी छौणा पनाई सुता 171/05 भैयाराम हिरा काला का परहट बहेगढ़ी सँ सुन्द।र सुत म.म.प. भिखि दौ।। (158/0/) ।। सुन्द र म. म. पा. ज्यो.. भिरिव ऋषि को दरिहरा सँ विष्णु पति सुत बावू दौ।। 65/04।। पबौली सँ विश्व।नाथ दौणा।। म.म.पा. भिरिव प्र. अभिनन्दल सुतो ज्योो. (231/07) खगेश चाणे कन्हौणली सोदापुर संअनाथ दौ।। (74/06) ।। 300 हरिदेव सुतो नाथ अनाथौ बुघवाल सँ कृष्ण्देव दौ।। (131/07)।। सोदरपुर सँ महदौणा मट्टछौणा अनाथ (248।।08) सुता वलहा वलिसा सँ गोविन्दथ सुत देवानन्दप दौ।। रूचिकर सुत लक्ष्मीथनाथ सुतो भवानीनाथ 139/08 गोविन्दोस ब्रहमपुर सँ लक्ष्मीपदत्त दौ।। गोविन्दक सुतो (236/09) (351) देवानन्द (333/02) जगतानन्दोव सोदरपुर सँ हरिकेश दौ।। त्रिपुरे सुत धनपति सुतो हरिकेश छोटाईकौ पति चोमसॅ विशोदौ।। हरिकेश सुता महादेव घनश्यााम मोहन (297/06) रामचन्द्रस लक्षमन भगीरथा: बभनियाम सँ बासुदेव सुत चतुर दौ जजिवाल सँ चिकू दौणा देवानन्द सुतो प्राणपति (227/07) ब.9।।05 फकीरो करमहा सँ अनन्र दौ ।। (159/07)।। अनन्त सुतो परमानन्दथ गोपीनाथौ वारी माण्डवर सँ यदुनाथ दौ।। (93/02) ।। चाण सुत पीताम्ब र सुता (227/09) नरहरि श्रीहरि यदुनाथा: कोलहट्टा पाली सँ महेश दौ।। यदुनाथ सुतो काशीनाथ शुभंकरौ सनहरा वासी करमहा सँ मुकुन्दा सुत हरपति दौ।। (14/07) ।। गंगोलीसँ लोटन छौणा भोला सुता श्याोमलाल वेदपणि अमृतपाणिय: सतलरण्ण सँ ऋषिसुतमानु दौ।। (146/06)।। ऋषि सुतो भानु ननना (289/0।) सोदापुर सँ हरिजीवदौ।। (132/06) ।। हरिहर सुतो शिवदाश. कटाई सँ हरिवंश सुत ज्ञानपति दौ महुआ सँ धनपति छौणा शिवदाश सुता ब. (15/05) (251/04) वदन उमापति ब. (13/11) मलापतिय: बुधवाल सँ प्रितिनाथ दौ।। (87/0/) ।। प्रितिनाथ सुता जजिवाल सँ जीवनाथ सुत भगीरथ दौ पाली सँ भवनाथ छौणा कृष्णरदाश सुतो हरि जीव रामजीवो पाली सँ कनद सुत डीउ.र दौ।। (53/09)।। डीड.र सुता माण्डार सँ यदुनाथ दौ।। (74/06) ।। पनिचोभ सँ बुद्धिनाथ छौणा हरिजीव सुतो जयशीव: (253/05) करमहा सँ रघुदौण।। (43/02) माण्डहर सँ निरगति छौणा मानु सुता (319/02) रतन् गिरधर वंशीधर धरनीधरा: सोदापुर सँ चिलका दौ।। (58/03)।। (268/08) सुतो भैयाराम दुर्गादत्तो बहेराढ़ी सँ रघुनाथ दौ।। (160/0/)।। खौआल सँ दिनाराम छौणा छकौड़ी सुतो जमाहिर: खड़का एकहरा सँ जानकी नाथ सुत बवृजन दौ।। (67/03) ।। लरवाई सुता (238/08) बछाई हारेयदु पतिय: विस्फीलसँ विश्व नाथ
(168) (352) सुत पीताम्बार दौ।। (64/07) ।। सँ सुधायति छौणा यदुपति सुतों अभिराम: सोदरपुर सँ पुरन्दतर दौणा।। (149/05)।। पाली सॅनीकंठ छौणा अभिराम सुता बौध प्र. वंशीधर रूचियति जिमाका करमहा सँ बछाई सुत विवरभा दौ।। (144/05)।। (323/08) बछाई सुता हारे रघु विवरम गोविन्दा एकहरा सँ दमनी दौ।। (159/0/)।। दमनी सुता जमदौली पालीसँ ज्योम.जीवनाथ दौत 69।।02।। ज्यो ति विदि जीवनाथ सुता (227/09) (223/05) कगाई हरिहर बलभद्रा: दरिहरा सैन्व।मरूसुत हरखू दौ।। (49/04)।। हरखू सुता मझियामकुजौली सँ चाण सुत चिलकू दौ वलियास सँ रंजन छौणा चौधरी विवण सुतोकुलानन्दु: रूचैलि एकहरा भट्ट सुत लालू दौ।। (128/04) ।। लालू सुता दान प्र. उन्द्रलपति (258/10) पुरूखी मुरलीका दरिहरा सँ सदानन्दस दौ।। (135/02) ।। सोदापुर सॅअनिरूद्ध छौणा जीयासुता शंकरदत्त जानकी नाथ प्रेमनाथा सन्दरहपुर दिधो सँ चेथड़ू दौ।। (129/04)।। चेथड़ू सुता सनफूल मनफूल हिरफूला सकराढ़ी सँ वंशी सुत उँमानाथ दौ।। 158।।10।। बासुदेव सुता पीताम्बलर गोपीनाथ हरिनाथ गोविन्दत महेशा: पवौलीसँ नन्द1नसुत शशि दौ।। 170/03।। खौआल सॅ लक्ष्मीी छौणा महेश सुतो 906।।0/0 बावू वंशी कौ अल्यदसँ मोहन दौ।। 147/03।। वलियाससॅ होरेछौणा वंशी सुतो उँमानाथ: हरियम सँ भगीरथ दौ।। 74/05।। भगीरथसुतो 227/02 बन्धुौक: पवौलिसॅ जबद सुत मोहन दौ।। 43।।09।। घनपति सुत चन्द्र पति सुत चन्द्र पति सुतोजबद: फनन्दाह सॅ शिवाई दौ।। जबद सुतो मोहन ब. 21।।05 शंकरा सकराढ़ीसॅ जानूसुत महादेवदौ एकहरा जनार्दन छौणा मोहन सुतो 229।।0। भगीरथ: करमहा सॅ रामचन्द्रन दौ।। 27।।02।। पुरखू सुत मधुसूदन सुतो रामचन्द्र9: सकराढ़ी सं जानू दौ।। रामचन्द्र् सुता कुजौली सॅ पदनाम सुत विश्वदनाथ दौ मंगरौनी माण्ड्र सॅ चिन्ताढमणि छौणा उँमानाथ सुता बुधवान सॅ जयकृष्ण् सुत परमानन्दी दौ।। 151।।02।। जयकृष्ण सुतो परमानन्द्: सुखेत खौसाल सॅ (353) ।। शिरीसुत जगाई दौ।। 32।।02।। हरिसुता माघव वेणी परमूका: बेलउँच सॅबासू सुत चाण दौ बुघवाल सँ ग्रहेश्वदर छौणा परमू सुतो ब. 16/04 बाबूशीरीकौ जीजवालसॅ।। काशी दौ।। बाटू सुत काशी सुता बासुदेव यशोघर कान्ह प्र. कृष्णाृनन्दाज: बलिपयास सॅ विदू दौ।। कान्हब प्र. कृष्णाशनन्दु सुता भगीरथ।। गंगाराम मनीरामा माण्डर सॅ हकरूसुत हरिहरदौ सोदापुर सॅ रूचि छौणा शीरी सुतो जगाईक: पनि. छीतू सुत कामदेव दौ।। 152/03।। खौयाल सैयव्यापति छौणा जगाई।। सुतो अनीक: 207।।06 करमहा सॅ यंहू दौ।। 76/04।। गोविन्दय सुतो यदक: माण्डकर सॅ हरियाणि दौ।। यड्ड सुतो देवानन्दर: नरउन सँ गोयाल सुत जगदीश दौ दरिहरासॅ रतिघरसुत पइमछ।। ।।परमानन्द सुता गिरपति में 264।।02 मधुरपति 259/03 कुलपति ब्रह्मपति महिपतिय: सतौलि सतलरण सँ केशवदै।। 129।।04।। मनोहर सुतोमवंश नुशवो सोदरपुर सँ तुष्णमपति दौ।।0/072 ।। माघवसुत श्री नाथ सुतो कृष्ण पति शुभंकरो पनि. मनोघरसुत गौरि दौ माण्ड र सॅ सुपे सुत जागे छौणा कन्होतली घुसौतसँ रामसुन सोने करतूत: कृष्णतपति।।
2351 ।। सुता माण्डरर सँ गोविन्दौ दौ। बासुदेव सुत देवनाथ सुतो गोविन्द : खण्ड:बला सॅ गोपी छौणा गोविन्दड सुता खण्ड्बला सॅ जागू सुत रति दौ वलियाम्र सँ हरपति छौ.।। ।। केशवसुता करमहा सँ दामोदर दौ।1 159।।7।1 दामोदर सुता 333/0/ गंगेश रघुपति लक्षमना: सोदायुरसॅ जयराम दौ।। 151।।04।। हरिहरासॅवामनि छौणा जानकीनाथ सुतो।। ।। बवूजन: सकुरी पाली सँ सदाशिव सुत हरिदौ।। 36/08।। पॉथू सूत गोविन्दि सुता रामचन्द्रत बल भद्रा: बेलउँच सॅ ममरू दौ।। राममद्र सुता।। लक्षमन 258/09 भरथ भगीरथकामदेवी: माण्डीर सॅ पीताम्ब र दौ सरिसब सॅ जानू छौणा भगीरथ सुतो सदाशिव: सोदरपुरसॅ पुरन्द:र दौ।। 12/02 टीप दमनी सुता पुएदा।। (169) (354) ।। कृष्णॅदाश रत्ना करा. खोआल सँ रघुपति सुत श्रीपति दौ. बूधवालसँ 169 हरिकेशव दौणा पुरन्दुर सुतो भैरव: एकहरा सँ मोहन दौ।। 141/04।1 मोहन सुतो हरिवंश:।। ।। हरिअमसॅ यदुनाथ दौ।। 85।।09।। श्री राम सुतो रामनाथ यदुनाथौ सुरगन सँ बाकीश सुत गोढ़ाई दौ दरिहरा सँ साबय सुत झोटन दौ।। टकवाल गंगहरि कस्तुात:।। ।। यदुनाथ सुता सतलखा सँ गोविन्दत सुत लक्ष्कीरनाथ दौ।। 142।।02।। पलिचोभसॅ भवानी छौणा सदाशिव सुता मंगऩू कारू 236।।04 भोरा हरिका कुजौली सॅ यदुनन्दसन सुत।। ।। गोविन्द दौ।। 63।।63।। 308।।03 लक्ष्मीनकर प्रपौत्र बाद पौत्र विषणुपति सुता देवनाथ रविनाथभवानी नाथा अलय सॅ रतन् दौ।। भवानी नाथ सुतो भगीरथ जगन्ना0थो सकगकी। ।। सँ रति सुत गादू दौ पाली सँ दिनू छौणा भगीरथ सुतो यदुनन्दानहरिनन्दजनो जजिनवाल सॅ लक्ष्मीसनाथ सुत भवानीनाथ दौ।। 159/04।। पनि. लक्ष्मीलनाथ छौणा यदुनन्दसन।। ।। सुता 259/07 गंगानन्दौ महादेव ब. 09।।04 गोविन्दा् पालीसॅ कुलपतिसुत कमल दौ।। 58।।07।। कुलपति सुता गोपीनाथ 247/08 परमानन्द0 कमला: वलियास सॅ रतिदेव दौ।। कमल सुता।। ।। गढ़ माण्डदरसॅ रूचिनाथ सुतशोप दौ सरिसव सँ श्री पति छौणा गोविन्दन सुता बुधवाल सॅ महादेव प्रमहाई सुत वीर दौ।। 153/04 विरसुता आनन्दर किसुनी चैगन बलमदा:।। ।। सतलखासॅ जगदीश सुत प्राणपति दौ।। 145/04 प्राणपति सुता तुला हिरा कौ बेलउँच सँ जगदीश सुत बैद्यनाथ दौ 25।।03 येघु प्रपौत्र सड्डे रघुनाथ भौत्र जगदीश सुता 25206 काशीनाथ ब थ प्रान्ना थ 230।।05 देवनाथ 304/07 द्वारिका नाका: बुधवालं सॅ चिन्ताथमणि दौ।। बैद्यनाथ सुता बुधवाल सै सौरि सुत हरि दौ बेलउँच सॅ नरोन्तभम छौणा हरि सुता।। ।। महिनद्रपुर पण्डुौआ सँ नरोत्तम सुत कमलनयन दौ।। 166/05।। पॉं रामदेव सुतो नरोतम: टकबाल सॅ रामदेव दौ।। 133।।02।। कुश सुतो गोढ़ाई गोनू कौ।।
(355) (2361) सकराढ़ीसँ जगदत्त दौ गोढ़ाई सुतो रामदेव: दरिहरासॅ बुधाई सुत वामनि दौ रमहासॅ वाचस्प ति छौणा रामदेव सुता सकराढ़ी सँ जगदीश दौ। 141/।04 जगदीश सुतो अनिरूद्ध गनिरामौ नरउन सॅ लाखू सुत दौ टकवाल सॅहरिहर छौणा, म.म. नरोत्तम सुतो मलनयन: पनिचोम संबद्रीनाथ दौ 143/04 बद्रीनाथ सुता पबौली सँ माघव दौ शुभे सुत नन्दनन सुता मति शिवशशिका अलय सं देवपति दौ।। पाठक शशि सुतो माघव:खौआलसॅ अमरूसुत लक्ष्मीस दौ पनिचोभ सॅश्रवीकर छौणा माघव सुतो 224/08 प्रद्यूम्ने जयकृष्णोत बेलउँचसॅ पूरखू सुत लक्ष्मीव दौ खडबला सै जागे छौणा कमलनयन सुतो भैखदत्त आँखी को समौति पाली सँ नयन दौ 60/10 मिश्र चिकू सुतो हरिराम: बेलउँच सॅ राम सुत लड़ाई दौ खौआल सॅ गयन हौणा 249/04 हरिराम सुतो मनहरपुछाई कौ दरिहरा सैवाचस्प ति यदुपति दौ मैघाकर सुत वाचस्पजति सुतो श्री पति यदुपति पालीसं शंकर दौ।। यदुपति सुता कछरा पालीसं बावू दौ 142/05 मणिनाथा परनामक बावू सुता दामोदर काशीनाथ जगदीशा: दरिटरासॅ रूपे सुत गोपी दौ सकौनासॅ बॉकू हौणा 316/0/0 मनहर सुता बाला 299/0/0 घरनी 251/0 हरिकृष्णक नयन रूपनाथा माण्ड र सँ मोहन दौ।। 152/08 पालीसॅ बाछनि हौणा, मिश्र नयन सुता जमुनी जजिकवाल सँ शिवनी नित्याौनन्दम दौ 159/6 नित्याननन्दस सुतो दयाराम: बुधवान से योगी दौ।। 151/02 सदानन्दद सुतो योगी बह 8/06 गोशौइदाशो खेरिसोदरपुर से डींगरदौ।। 142/0 करमहा सॅभगीरथ द्रौणा योगीसुतो बछरूक: सोदरपुर सँ वैद्यनाथ दौ।। 151/02 बुद्यवानसं कृष्णा एवम् बवूजन मात्रिकचंक्र।। बश्जीन सुतो गंगाधर: वत्स0वाल नरउन सँ भीरवनी सुत बेचन दौ।। 158/06 अनिरूद्ध सुतो गणपति कुलपति बहेरादीसँ हरिदेव दॉ रामघर सुत
(170) (356) गोपीनाथ सुतो रघुनाथ सिद्धिनाथो पबौलि सँ मुरारिदौन रघुनाथ सुतो 170 मनोहर ब. 20/06 मनोहर हरिदेवो दरिहरा सँबासुदेव सुत कामदेव दौ बरही निखूति सँ राघव द्दौणा हरिदेव सुता सकराढ़ी सँ यदुनाथ दौ।। 68/08 यदुनाथ सुतो ब. 8/02 भवदूक: बुधवाल: सँ कुने दौ. दूबे सूत राजा सुतो विष्णु पति श्री रामो कुजौली सँ पद्मम दौ विष्णुवपति सुता कुने प्र. श्रीपति रघुपति गौरीफतिय: जजिवालसँ अमरूं सुत विश्वलनाथ दौ खौआल सँ द्दौणा कुने प्र. श्री पति सुता श्याोम मुकुन्दँ मनोहर पुरन्दपर विश्व नाथा. सतलाक बेजउँच सॅ शशि दौ. रूचि सुत सदसुता हरपति घनपति राशि नोने गणपतिय: जालय सँ करपति दौ।। शीश सुता समापति प्र. बावू विष्णु पति सौरीपति जगदीश प्र. अरविन्दत: पालीसं श्री नाथ दौणा 69/02 नरउनसँ जानू द्दौणा, गणपति सुता गरीब भोरा होरिल रकनी भीखनी लक्ष्मीादत्ता: जजिवाल सँ सदाय दौ।। 144/0 सतलखा सँ पदूम द्दौणा भीखनी सुता मानीक सौनी बेचना करमहा सॅहजीनन्दजन ग्रुत बछरू दौ।। 146/03 खौआल सँ परशुराम द्दोणा बेचन सुतो बवेक: पबौलीसँ रघु सुत माना दौ।। 134/03 230/06 मोहन सुतो पशुपति सकराढ़ी सँ लोटाई दौ।। 136/02 लोटाई सुतो भोरानाथ: सरिसब सँ चिकू दौ।। 71/09 चिकू सुतो रतिदेव 259/05 घनश्याामो सकराढ़ी सँ माघव सुत भवानीनाथ दौ नरउनसँ देवपाणि द्दौणा पशुपति सुतो रघुक: एकहरा सँ रमानन्द सुत कृष्णामनन्दन, दौ।। 127/03 रमानन्दश सुतो कृष्णा नन्दस: सकराढ़ी सँधनपति सुत रघुनाथ दौ जल्लरकीसँ परम् द्दौणा कृष्णािनन्दत सुतोजीवे 329/0/ हरि कौ माण्डथर सँ लक्षमन दौ।। 158/05 करमहासँ
(357) रघुसुतो माना गरीबनाथौ सतलखा सँ रामजीव दौ।। 142/02 रामकृष्णह सुतो समापति बुधवालसँ श्यागम दौ। 139/03 श्या0म सुता पुरन्दोर दारो कृष्णवदाशा: 236/08 257/10 सरिसब सँ जागे सुत लक्ष्मीौ दौ खोमाल सँ गादू द्दौणा 195/06 रमापति सुतो रामजीव: सोदापुर सँ रूपाई सुत मोहन दौ 26/0 गोनु सुतो घनेश 189/02 रूपाई को बुधवान सँ राजू दौ।। रूपाई सुतो मोहन: बतेराढ़ी सँ प्रज्ञाकरसुत कान्ह दौ माण्डकर सँ शुभे द्दौणा मोहन सुता माण्ड (सॅ गौरी दौ. नाने सुत हरखू सुतो गौरी: अलय संश्रीपति दौ।। गौरी सुता बुधवान सँ रामनाथ दौ।। 93/06 माण्डढर सँ भवनाथ द्दौणा ज्योगतिर्विद रामजीव सुतो नारायणदत्त: सोदरपुर सॅघरनी दौ।। 49/08 माण्ड्र सँ बदनी द्दौणा माना सुता एकहरा सॅ पनाँई सुत भैयाराम दौ।। 167/07 भैयाराम सुतो बचन् न्यानू को सरिसब सँ भोरा दौ 61/0/ घारू सुतो हरिदेव: विस्फी सँ बसाउन सुत जुड़ाउनदौ परिसरा सँ लक्ष्मी द्दौणा हरिदेव सुतो मटेशा: परमामन्दो बहोरना पाली सँ बावू दौ।। 170/07 दरिहरासँ गोपी द्दौणा परमानन्दट सुता श्यााम एम राजाराम महथा का पण्डुूआसँ पॉं रघुदेव दौ।। 64/07 वुघवाल सँ कामदेव द्दोणा महथा सुनो 324/09 तुलों भोराकों सततखा सँ अनिरूद्ध दौ।। 167/02 अनिरूद्ध सुताबंलम सँवीर दौ विस्की्संमोहन द्दोण भोरा सुता माण्डदर सँ रतिमलिसुत घमपति दौ।। 90/10 253/06 छत्रपति सुता उचतिसँ दिनेश दौ चाण सुत हरिहर सुता राम गोविन्दप नरहरि मुकुन्दल गादू का एकहरा सँ समरू दौ।। नरहरि सुता गंगोध्रग जगदीश माघव जयदेवा सकराढ़ी सँ गांगु सुत गागे दौ एकटरा सँ मछुछा।। गंगाधर सुत महिपाणि सुता रामकृष्णम ब. 8/02 रमानन्दट रांगारामा: खण्डकबला सॅ यट्टू दौ।। राजाराम सुता प्रितम भवेश नरेश दिनेश प्राणपतिय: नरउन सँ कमल सुत कशव दौ पनि.गोपी द्दौणा दिनेश सुले छक्क्न वैयाकरण
(171) (358) । खरखून कौ माण्डपर सँ गिरीदौ।। 74/07 गिरिश सुतो गवपति: खडंबला सॅहरिदेवदौ।। 69/06 हरिदेव सुतो देवीदाश: पाली सँ श्रीकृष्णि दौ।। 49/05 सोदरपुरसँ पुरूषोतम है।। टक्कु7र छोटकू प्र. वेदमणि सुता महिषी बुधवाल सँ पाठक हृदयराम सुत टेमनाथ दौ 37/06 पाठक परशुराम सुतो बालकराम विष्णुुदत्तों माण्डठर सँशुभंकर दौ। 87/0/ मधुयूदन सुतो अमरीक: करमहा सँवाबू दौ।। 159/0 बलियास सँ नारायण द्दौणा अमरी सुतो शुभंकर: सोदापुर सँ शिवदेव दौ. नरसिंह पौन रघुदेव सुतो शिवदेव।। खौआलसँ देवनाथ दौ।। शिवदेव सुता अलयसँ कृष्णा नन्दद सुत जघुसूदन दौ खौआल सँ रामचन्द्र द्दौणा शुभंकर सुता एकहरा सँ कृष्णाणन सुत घारू दौ।। 138/0 धारू।। सुता दरिहरा सँ रेमानन्दु दौ. नारायण सुत कंगाली सुतो रमानन्दस: हरीअम सँ देवकी नन्दसन दौ।। रमानन्दद सुता घुसौत सँअन्पुय सुत महादेव दौ खौआल सँ परमानन्दी दौ।। पाठक बालकराम सुता हृदयराम गोपीराम चिलकाराम मुकृाराम दुलारा: दरिटटासॅ सोनमनि दौ।। 137/10 सोनमनि सुता खण्डकबला सँ जयकृष्णल दौ।। 154/05 जयकृष्ण सुता पाली सँ नारायणदौ 154/03 नारायण सुता कृष्णसमणि जगतमणि: दरिहरासँ प्राणचति दौ।। 154/07 प्राणघति सुता बेलउँचसँ शिवदाशदौ. महेश सुत जगन्नाँथ सुतो शिवदाश बालकृष्णोु खौआल सँ जाने दौ।। शिवदाश सुता करमतासँ अच्युित बुद्धिनाथ दौ।। सुरगनसँ देवनाथ द्दौणा।। हृदयएम सुतो हेमनाथ: जजिवान सॅ हिरफूल दौ।। 88/06 बाछा सुतो छकनूक: बलियास सँ शतत्रीज्वादौ 120/03 पबौलीसँ कालीदारा द्दौणा छकनू सुता सनफूल हिटफूल लक्ष्मीृनाथा सकराढ़ीसँ रघुपति दौ।। 0/06 रमणीप्र. रामदेव सुतो शिवराम: पालीसँ मुकुन्दन दौ।। 69/0 दरिटरासॅरूचिहा (359) शिवराम सुतो रघुपति: अलयसॅगोपाई दौ 59/08 सतामखा सॅ शिरी द्दौणा रघुपति सुतो पॉं हेमपति झडलाको पवौलीसँ जीवकर्ण दौ 126/07 देवानन्द1 सुतो जीवकर्णरतनो बमनियाम सँ संथाउन सुत कन्तज दौ 51/02 सपाउनप्र. गोविन्दु सुता कन्तय: बेलउँचसॅहरि सुत दामू दौ सोदरपुरसॅ हरि द्दौणा पॉर्ट कन्त0 युतो छोक बासुदेवो वलियास सँ रमणी दौ।। 60/3 महो रामकृष्ण प्र. रमनी सुतो रोहिणी रमण चूड़ामणि चिन्त्रा मणि शिरोभाणिय: 1886/08 गंगोलीसंभगीरथ सुत भेयां दौ दरिहरासँ डीउ. द्दौणा जीवकर्ण सुतो बवनूक: 198/05 माण्डगरसँ हरिदेव दौ 61/07 255/08 हरिदेव सुता सोदरपुर सं अभिनन्दन दौ 57/05 अभिनन्द् सुता सकरदीस पांविश्वेणश्व7र दौ 52/09 बेसउँचसँबवूदी द्दोणा हिरफूल सुतो किशोर नाथ: बलियास सँ हेमाड.द सुत प्रान्नाशथ 112/01 राय प्रान्नािथ सुतो टेकनाथ सोदापुर सॅ चिलका दौ।। 90/03 शिवदेव सुतो जयकृष्ण देवकृष्णो जगदीश दौ 60/03 सकौना सँ नारायण दोहित्र दौ।। जयकृष्ण9 सुतो प्रद्यूम्नय चिलका को वलियास सँ हाड़ी दौ।। 94/08 अलय सँ गोपाई द्दौणा चिलका सुतो भिखूक: बुधवाल सँ मधुरापति दौ।। 165/07 रामचन्द्रल सुती लक्ष्मीिपति पशुपति दिछो सँ बावू दौ पुरन्द र सुत आनन्दपकर सुतो चित्रामणि: टकबाल सँ विशो दौ चिन्त्रामणि सुता बावू अनिरूद्ध होरिल मोहन सुन्दहरा: वुजौली सँ ठकरू सुत लक्ष्मीद दौ समसखा सँ रघु द्दौणा बावू प्र. वीरेश्वआर सुता कुलपति रामकृष्ण यशोधरा सकराढ़ी सॅ केशव दौ।। 160/07 निरवुति सॅ पूरखू द्दौणा पशुपति सुता ब्रह्मपति महिपति नरपति मेघापति मघुरामतिय: सरिसब सँ अपूछ सुत लक्षमन दौ 121/06 बेल्उँमच सॅ बवूदी द्दौणा मधुरापति सुतो विश्रीपति घरापति 189/02268/0
(172) (360) सरिसब सं नीलाम्ब8र सुत जीवनाथ दौ।। 114/06 जीवनाथ सुता बलियास सँ रमदी दौ।। 130/09 रमदी सुता सॅ यदुपति दौ।। 57/0 पाली सँ हरिनाथ द्दौणा पाठक हेमनाथ सुता बलियास सॅ ब्रजनाथ सुत भूलन दौ।। 140/02 ब्रजनाथ सुता साहेब 2431106 प्र. यदुनाथ झोंटू प्र. ललीतनाथ जागा प्र. जगन्नााथ भूलन प्र. डीहनाथा: सरिसबसॅ भैयन दौ।। 129/0 पाली सॅभवानीदत्त द्दौणा भूलन प्र. डीहनाथ सुतो काद्द साधुकों नर उन सँ भैरवदत्त सुत बाना दौ।। 39/05 सोनीसुता भैरवदत्त चिन्त्राहमणि छोटकनिका खौआल सँ धराधर सुत सोनी दौ।। 71/08 हरिअम सॅ जगन्नारथ द्दौणा भैर वदत्त सुतो महोवाना महो बच्ची कौ फनदहसँ सर्वस्व0दाता म.म. रघुनाथ सुत महामहोपाध्यातय भवानीदत्त दौ।। 41/0 मन्मीहोपाध्यासय पीताम्बदर सुता अभिनव सरस्वनती पदांकिल म.म. त्रिलोचन महो दण्डसपाणि प्र. घनत्रज्य महोपाध्यातय कारक गौकुमनाथ सदुपाध्याीय जगन्नाुथा: खौआन सं बाबू दौ।। 75/024 प्रजायक बाबू सुता बेलसाम बुधवालसॅं विष्णुगपति सुत कुने दॉ. इबेसुत राजासुन विष्णुसपति श्री रामों कुलौलीसँ पद्म दौ।। विषणुपति सुता कुने प्र. श्री मति 301/09 रघुपति गौरीपतिय: जीववालसॅअमरू सूत विश्वषनाथ दौ।। खौआल रूपे द्दौणा कुने प्र. श्री पा. सुता 238/08 मुकुन्दन मेनोटर पुरन्ददर विश्व3नाथा: सततरखी लड़च सशिश दौ़ रूचिसुत रूपसुता टरपति घनपति शशि नोने गणपतिय: जातयसँ हरपति दौ।। शशि सुता समापति प्र. बावू विष्णुेपति गोरीपति 32/08 गोरीपति जगदीश प्र. अरविन्दाश: पालीसॅ श्रीनाथ दौ। 69/02 नरउन सँ जानू द्रौ. महमहोपा. टीका कारक परयंत्री गोकुल नाथ सुतो सर्वस्वथदत्ता म.म. रघुना. लक्ष्मी।नाथौ दरिहरासं रामकृष्णर सुत जयकृष्ण दौ।। 165/02 जयकृष्ण् सुतो रमापति जजिवांत सं कविराज दौ।। 88/05 पासी सं नगन द्दौणा 188 महामहो पाध्याोय भवानीदत्त सुता
(361) (239/08) कवि शंकरस्तव (आरा जगदीशपुर (वीर कुंअर सिंहक राजगुरू) ब. 12/10 ननू प्र. रूद्रदत्त पॉखीप्र. इश्व2रीदत्त खेली प्र. उग्रदत्त माना प्र. गोविन्द दत्त बतहा 335/03 प्र. रमादत्त फतुरी प्र. तीर्थदत्ता: दरिहरा सॅ शिवदत्त दौ।। 139/08 सरिसब सँ महादेव द्दौणा महोपाध्या्य बाना सुतो तरस्कदर केशव महोपाध्यादय रूदानन्दो पण्डुबआसँ पॉ भैया दौ।। 124/08 पॉं भैया सुतं लोकनाथ धर्मनाथ पॉं भिरवारी का बुधवाल सँ रामसूत अचल दौ।। 37/04 छोटाई सुतो सदानन्दा 174/07 परमानन्दोन खौआलसॅ भिखूदौ।। 6/0/9 अपरा गौरी सुतो गिरू घीरूकौ विशोदौ गिरूसुतो भिरवूक जांजदत्यध सं हरिपांण दौ भिखू सूना करमहासॅ 39/0 पशुपति सुतो भवनाथ: माण्डजर सँ बुद्धिकर दौ।। 35/07 बुद्धिकर सुतो परान मुकुन्द9 करमहासँ रविकर सत सोने दौ माण्डमरसँ गोपाल द्दौणा भवनाथ सुता दरिहरा सं सोरि सुत पॉरदू दौ नरउन सँ गोविन्दस द्दौणा परमानन्दर सुतो देवकृष्णस रामौ सरिसबसँ चतुर्भूज. 145/02।। चतुर्भूज सुतो अनिरूद्ध नित्यानन्दाृ 255/07 खौआल सॅ डींगर सुत मंगाई दौ।। 79/0/4 ज्योत.डी.डर सुतो मंगाई क: पालीसॅ बासुदेव सुत बादू दौ माण्ड रसॅ पीताम्ब7र मंगाई सुना सरिसब सँ अपूधर दौ।। 61/02 पाली सँ रत्नर्पाण द्दौणा 239/04 राम सुतो महामहोपा. अचल: दरिटरासँ थे घू दौ 129/07 सिद्धिनाथ सुतो चतुर्भूज नारायणों 179/120 पाली सँ गोविन्दअ दौ 101/06 गोविन्द सुता सोदापुर सँ श्री निवास दौ 72/03 पौथू प्र. मणिघरसुतो गौपी रामो माण्डथर सॅ रघुपति सुत छीता दौ सोदरपुरसँ गणेश द्दौणा।। गोपीसुतो श्री निवास सं राजू दौ 36/06 राजू सुतो अच्यततु: माण्डुरसँ गोविन्दग 77/09 हरिअम सँ कोवे द्दौणा श्री 227/02 निवाठ सुतो वाणी नाथ श्री रामों एकहरासँ बैद्दयनाथ दौ।। 57/09 एक वालहँ चतुर्भूज सुतो म.म.थे प्र. वंशघर: फनन्दररसपँ म.म. पीताम्बरर दौणा।। 72/05 खौआत्र सँ प्रजापक बार द्दौणा म.म.पा. थेघु प्र. वंशघरसुता म.म. चित्रकर म.म. मनोघर म.म. घरण 307/02 188/03
(173) (362) म.म. रूप्रधरा: (बर्षकृत्यिरचयिता) हरिअत सँ कामदेव सुतमोहन दौ।। 73/02 पबौलीसॅ कालीदाश द्दौणा म.म. अचल सुतो हेमेनाथ: 256/06 खण्ड बलासँ ब्रजभूषण दौ।। 84/02 ड. ब्रजभूषण सुता करमहासॅ छबनू दौ।। 132/03 छबनू सुता 188/08 सोदरपुर सँ रघुवीर दौ।। 163/02 रघुवीर सुता भैयन बघरू प्र. ललीत जीवकर्ण वुद्धिनाथा. पुनन्दवह सँ त्रिदग्जी सँ त्रिदग्जीब सन्याुसीकारक म.न. 24,11 रतीश सुत इशान्नाथ दौ 129/04 इशान्नादथ सुता माण्डतर सँ शयाम दौ।। रामकृष्णय सुतो श्यातम: कुजौलीसॅ गौरीनाथ दौ 55/07 बलियास सॅ बूदब द्दौणा श्याशम श्याृम सुता सोदापुर सॅ देवानन्द: दौ 57/08 यदुनाथ सुता महादेव सदानन्द कृष्णानन्द् 2/6/06 रामकृष्ण सुतो श्याथम: कुजौलीसॅ गौरीनाथ दौ।। 55/07 वलियाससॅ बूदब द्दौणा श्या म सुता सोदरपुर सॅ देवानन्द दौ 57/08 यदुनाथ सुता महादेव सहानन्दि कृष्णादनन्दत परमानन्दार खौआन सँ हरिसहरदौ 80/06 पूरखू सुता हरीहर नरहरी बामना: सोदापुरसॅ इबेदौ दरिह एसॅ राम द्दौणा हरिहर सुता सोदरपुरसॅ चाण दौ।। 53/05 वलियास सँ गोढ़ी द्दौणा देवानन्दौ सुता सकराढ़ी सँ रघुनन्दसन दौ. थेघू सुत होरिल सुतो रतिदेव: नरौन सँ मांगु दौ।। रतिदेव सुतो रघुनन्दान: हरिअम सँ गोविन्दद सुत श्रीघर दौ बेलउँच सँ शुभे द्दौणा रघुनन्दँन सुता बुधवाल श्रीनाथ दौ।। 91/04 थेघ सुत जगन्नाघथ सुतो श्री नाथ विश्वँनाथौ सोदरपुर सँ मुकुन्दत दौ।। श्री नाथ सुता माण्ड्र सँ ठकरू सुत कामदेव दौ सोदरपुर सँ मघुसूदन द्दौणा एवं ठ. छोटकू प्र. वेदमणि विवाह:।। फाल्गुसन वृष्टद चक्षुर्णदश्यां बुधे 166/03 ठ. गंगाधर प्र. तेजपति सुगपतनुका माण्डदर सँ बूचन प्र. कृष्णृदत्त सुत रेवतीकान्ता दौ 116/03 खुशिहाल सुतो भवानीदत्त: करमहासँ बैद्यनाथ द्दौणा 05/09 महा शिवरात्री-18.02.04 बैद्यनाथ सुता सोदापुर सँ रतिदेव दौ 97/06 श्री कृष्णो सुता रतिदेव भवदेवकामदेवा महनौरा खौआल सँ देवनाथ दौ 02/06 और खण्डथबला सँ ठ. शुभंकर द्दौणा रतिदेव सुता पुड़ेनरउन सँ अभिनन्दद दौ 110/105 अभिनन्दान सुता सिहौलि माण्डार सॅ विरेश्वउर दौ महियासोदरपुर सँ द्दौणा भवानीदत्त सुतो दुखिया ठेठनिकौ हारीसोदापुरसं (363) सोनी दौ 123/08 दरिहरा सँ जीवनाथ द्दौणा उडे.नि सुता वूचन प्र. कृष्णउदत्त हनुमानदत्त भगवानदत्ता: सरिसव सोदरयुरसॅ भिरवन मिखन दौ 101/102 समौलि पालीसँ भवनाथ द्दौणा बूचन प्र. कृष्णरदत्त सुता बॉके प्र. 181/102 हेमकान्र चूली प्र. रेवतीकान्ताि : भौर खण्डणबला सँ बावू गणेशदत्तसिंह दौ 108/06 विविधेत्या2दे म.कु. गोविन्दन सिंह सुतो वाबू गणेशदल सिंह: अनलपुर करमहासँ जयदत्त दौ 162/02 जयदत्त सुता कौस्की्दत्त ठेड.नि टरखीका कनसम माण्ड र सँ दुर्गानाथ दौ 116/07 रत्ने8श्वतर सुता बूढ़न गयन विशो का जजिवाल सँ रविपाणि दौ।। गयन सुता रघु हरियाणि खखनूका पाली सँ देवनाथ दौ हरियाणि सुतो जयदेव: बहेराढ़ी पुरे सुत राम दौ दरिहरा सँ चाण द्दौणा जयदेव सुतो बावू चिकूकौ पवौली सँ वेणी दौ।। बलंभद्र प्र. चीकू सुता मोहन मनोहर लक्ष्मीानाथा नारन सँ हौरे दौ 150/09 वूध रघुद मोहन सुतो कृष्ण दत्त: सरिसबसँ परमानन्दा दौ 83/04 पाली सँकेशव द्दौणा कृष्णीदेव सुता चेथड़ प्र. कमलनयन पीताम्बमर बछरणा: बुधवाल सँ सदानन्दद दौ 173/03 सदानन्दत सुता माण्डर सँ चतुर्भूज दौ।। 149/09 श्रीपति सुतो जनार्दन छोटाई कौ करमहासँ मधुकर दौ 107/01 मधुकर सुतो गोपाल मुरारी कौ सोदापुर सॅ रामघर दौ।। 54/02 रामघर सुतो गुदी क: खौआल सँगोविन्द सुत गुणे दौ पकिचोभ सँ हरिहर द्दौणा छोटाई सुतो चतुर्भूज: पालीसँ रतनपाणिदं 115/07 माण्डलर सँ रघु पात्रण द्दौणा चतुर्भूज सुता सरिसब सँ माघव दौ।। 145/10 माण्ड र सँ रतिदेव द्दौणा चेथडू प्र. कमलनयन सुतो दुर्गानाथ: तरौनी करमहासँ शिवदत्त दौ 109/0/0 जौकी सरिरक्सॅर शंकर द्दौणा दुर्गानाथ सुतो बच्चीौ छोटकू की 179/05 295/07 नड़आर करमहासँ साहेब दौ।। 113/09 महिया सोदरपुर सँ इलपति द्दोणा।
(174) (364) बावू गणेशदत्त सिंह बावू 205/07 गिरिजादत्त सिंह बावू वंशधारी1 905/07 सिंहो रतौली दरिहरा सँ धननाथ दौ।। 126/0 सोदर पुर सँ जयदत्त द्दौणा तेवतीकान्त सुता कन्हो9ली 24/29 सोदरपुर सँ चण्डी0दत्त दौ।। 113/10 गणेश दत्त सुतो चण्डीदत्त नरउनसँ गदापणि दौ।। 131/02 बॉका उमानाथ सुतो 217/09 सुतो 194/0 जीवपाणि गदापणि दरिहसंसै मोतीनन्द1न दौ।1 04/04 मोतीनन्द न सुता बलिराजपुर हरिअम सँ मेघनाथ दौ।। 107/0/ खण्डौबला सं ठ. एकनाथ द्दौणा गदापणि सुता 193/03 ततरिहार सोदरपुर सँ मानीक दौ।। 81/0/ देवकृष्ण. सुतो मानीक प्र. तीर्थकृष्णम: रजौरा माण्डुरसँ मनबोध दौ।। 96/06 गोपीनाथ सुतो मनबोध: दिगउन्धु: सोदरपुर सँ हरिहर दौ 97/06 हरिहर सुतो जीवेश्वौर: 83/09 नरउन सँ रघुनन्दकन दौ 93/04 खौआल सँ गौरीपति द्दौणा मनबोध सुता मंगरौना हरिअमसँ नारायण दौ 82/0 और 24151 खण्डरबला सँ शिवराम द्दौणा मानीक प्र. तीर्थकृष्ण सुतो बैद्यनाथ ठीठरो 190/07 महिषी पाली सँ देवनाथ दौ।। 75/08 देवनाथ सुता सुत्हणनी नरउन सँ धनानन्दर सुत हसनू दौ।। 99/02 हसनू सुता पतनुका माण्डदर सँ खुशिहाल दौ।1 173/08 अनलपुर करमहासँ बैद्दनाथ दौ।। चण्डीतदत्त सुतो लेखदत्त: बलिण् हरिअम सँ 242 बावू लोकनाथ दौ।। 119/08 सोदरपुर सं गिरधारी द्दोणा एवम् ठं. तेजपति प्र. गंगाधर विवाह: 11,/161/08 ठ. विष्णुोपति सुतो मधुवति दरिहरा सँ म.म. बन्धुर दौ 98/08 सोदरपुर सँ घनश्या1म द्दौणा अपरा ठ. विष्णुोपति सुतो गोपाल गिरधारी 175/05 कौ नरउन सँ पौराणिक मनबोध दौ।। 123/03 पबौलि सँ परमानन्दर द्दौणा ठ. मघु पतिसुता
(365) पालीसँ धरनीघर दौ।1 118/02 महिया सोदरपुर भउज द्दौणा ठ. गोपाल सुतो ठ. रघुपति सिटौलि माण्डरर बैदिक जीवयति दौ।। 123/06 सोदरपुर सँ सोनी द्दौणा ठ. रघुपति सुता खौआल सँ बालह सुत धर्मनाथ दौ।। 80/09 छबन सुतो बालह बुधवाल सँ हरिश्वीर दौ 95/02 सोदरपुरसँ फकीर प्र. विष्णुनपति दौ बालह सुता श्या मनाथ धर्मनाथ 190/0 श्री नाथ झोटन प्र. काशीनाथ खड़गनाथा: सोदरपुर सँ नारायण दत्त दौ 92/04 नारायणदत्त 190/05 खण्डँबलासँ ठ. प्रेमनाथ दौ 2461 174/09 ठ. गिरधारी सुतो नरसिंह: लोहना सकराढ़ी सँ कृष्णखदाश सुत अमृतनाथ दौ।। 128/06 रमापति सुतो रामचन्द्रथ हरिश्वररौ रैयाम सोदरपुर सँ पॉ माघवदौ 87/03 बुधवाल सँ बाबू द्दौणा रामचन्द्रस सुतो कृष्णमदाश: हसौली सोदरपुर सॅ रमापति सुत लाला दौ।। 73/0 रजौरी माण्ड्र सँ हाडी द्दौणा कृष्ण दाश सुता अमृत नाथ: लोआम सुरगन सँ शय उत्तम नारायण दौ 113/0 डूमरा बुघवाल सँ भवेश द्दौणा अमृतनाथ सुता मित्रनाथ झपटी प्र. दयानाथ गोविन्दो नाथा 274/05 तेतरिहार सोदरपुर सँ दामोदर सुत जुड़ाउन दौ।। 121/09 वलियास सँ दुर्गानाथ द्दौणा ठ. नरसिंह सुता दरिहरा सॅ घनानन्दत दौ।। 100/04 गरीबानन्दस सुता घनानन्दौ चुम्मान प्र. दुर्गानन्दघ फेकू प्र. उग्रानन्द9 वाचा प्र. लिलानन्दा : वलिराज पुर हरिअम सँ म.म. सचल दौ।। 119/06 म.म. सचल सुता दरिहरा सँ बन्धुच सुपर्क चिन्ताामणि
(175) 118/05 अपरा म.म. बन्धुू सुतो दुर्गादत्त 189/09 चिन्तारमणि गंगोरा बुधवाल सँ हरिकृष्ण/ दौ।। 178/05 सोदरपुरसँ धनश्याधम द्दोणा चिन्ता8मणि सुता 246 मानी सोदरपुर सं दिश सुत मनसुख दौ।1 119/0 करमहा सँ छबन् द्दौणा 187/03 धनानन्दु सुता डुमरा बुधवाल सॅकलानाथ सुत जयनाथ दौ।। 106/07 जय नाथ 129/09 सुतो हर्वनाथ बहत्रलणों रतौली दरिहरा सँभवनाथ दौ।। 05/05 एवं ठ. नरसिंह विवाह:।। ठ. 161:04 ठ. परशुराम सुतो घराघर ग. घारौ खौआल सँ गौरीपति दौ।। 79/09 नरउन सॅ सरस्वबती राम द्दौणा ठ. गदाधर सुता रतौली दरिहरा सँ भिरवारी सुत गंगाधर दौ।। 97/04 2471 नरउन सँ दामोदर द्दौणा 161/04 ठ. शिवराम सुता करमहा सँ कृष्णादेन सुत उँमानन्दत दौ उँमानन्दन सुता बलियास संघीतू सुत रघुनन्दठन दौ 95/02 सोदरपुर सँ हरिकेश द्दौणा ठक्कुनर विश्वा तथ सुतो रतनपति: वुधवाल सॅ शुभे सुत रतिपति दौ।। 101/06 दरिहरा सँ रामदेव द्दौणा 161/02 ठ. बालकृष्णाल परनाम बछाइ सुतो हरिक: दरिह रा सॅ काशी सुत हेडू दौ पालीसँ सोने सुत श्री रामद्दोणा 160/02 उ. मुरारी सुता करमटा सँ कृष्णददेव सुत हटायदौ 97/03 दरिहरा सँ बासुदेव द्दौणा अपरा ठ. मुरारी सुता बुधवाल सॅ विश्वषनाथ दौ 79/02 माण्डनर सै अनिरूद्ध द्दौणा अपरा ठ. मुरारी सुता बावू प्र. विरेश्व र हरिश्व र विश्वे श्वनर 2/9/05 महेश्वठर रामेश्वरर विन्दबयेश्वदरा: कुजौम सॅ कृष्ण दाश दौ।। 80/08 सरिसब सॅ जगन्ना्थ द्दौणा उ. बावू प्र. विरेश्वार सुताबन्धुद प्र. जालेश्वॅर जहल प्र. सर्वेश्वसर 176/0 रत्नेश्वनर गरीक प्र. उर्ब्बीणशवरण नरउन सँ महिपति: 105/02 खौआल सँ गौरीपति द्दौणा ठ. जहल प्र. सर्वेश्व्र सुता करमहासॅ भवेश सुत घनेश दौ।। 0/09 खण्डपवलासँ ठ. गुबानन्द. द्दौणा अपरा ठ. जहल सुता करमहासॅं। (367) धर्मानन्द् दौ।। 113/06 माण्ड रसँ लाला द्दौणा अपरा ठ. जहल सुता दरिहरासँ पुरूपौत्तमदौं 05/08 सोदरपुर सँ रामेश्व3र द्दौणा 175/09 ठ. रत्नेश्वहर सुता परमेश्वुर प्र. ओरीश्वौर इन्द्रे्श्व र थेघी प्र. गुणीश्वँरा: माण्डारसॅ महादेव दौ।। 05/06।। करमहासँ शंकर द्दौणा ठ. परमेश्व्र प्र. कोटीश्वणर सुतो रामेश्व्र: पाली सँ खूनी दौ।। 103/0 कवि कृष्ण्पति सुतो खूनी प्र. रमापति: सोदरपुरसॅ धर्मपति दौ।1 103/09 बुधवाल सँ सदानन्दू द्दौणा रमापति प्र. खूनी सुता खण्ड बला सँ ठ. ठाकुर सिंह दौ।। 118/07 ठ. ठाकुर सिंह सुता दरिहरा सँ भगीरथ दौ।। 96/0 सोदरपुर सँ हरपति द्दौणा ठ. इन्द्र।श्व्र सुता महिषी पाली सँ कृष्ण पति सुत खूनी दौ।। 176/03 खण्डइबला सँ ठ. ठाकुरसिंह द्दौणा अपरा ठ. इन्द्रे श्वठर सुतो ठ. शिवनन्व न: दरिहरा सँ शोभाकर दौ।। 05/09 नरउन सँ सरसकवि कुलपति द्दौणा ठ. शिवनन्द न सुता रतौली दहिहरा सँ चुम्मान दौ।। 165/06 खण्डवबलासँ ठ. उद्योतसिंह द्दौणा अपरा ठ. शिवनदत्त सुता खोआलसं बनी दौ।1 124/02 नरउनसँ भवनाथ द्दौणा ठ. गुणीश्व रा परनामक थेघी सुतो बतहू सोनो दरिहरासॅं शोभाकरदौ।। 05।09 नरउन सँ सरस कबि कुलपति द्दौणा अपरा ठ. थेघी सुतो साधु प्र. 180/03 चक्रश्वभर बौकूको 180/07 हरिअमसँ रमानाथ दौ।। 126/02 सोदरपुर सँ अर्जून द्दौणा ठ. बतइ सुता करमहासँशंकर दत्त दौ।। 115/05 शंकरदत्त सुता कलरू विश्व.नाथ 194/09 बछरण राजीवा सकराढ़ी सँकराढ़ी सॅदुल्लपह दौ।। 122/06 बुधवालसँ लाला द्दौणा ठ. सोन सुता महेश्व र 176/03 हरिश्व र कृष्णे6श्वुर विश्वेौश्व रण: खोआलसँ बनी दौ।। 124/02 नरउन सँ भवनाथ द्दौणा ठ. महेश्व र सुतो नृपतेश्वणर: सकराढ़ी: सकराढ़ी धरानाथ दौ।। 124/03 खण्डव परशमणि दौ 249 ठ. नृपतिश्वेर सुता करमहासँ योगानन्दढ सुत कुंजन दौ।। 11/05 योगानन्द सुता शिवानन्दद विद्यानन्द प्र. शीतल कुंजन चुम्मतना 29/03 दरिहरा सँ महिनाथ सुतचित्रेश्वदर
(176) (368) दौ 1/05 महिनाथ सुता बालेश्वनर चित्रेश्वनर नारायणा पबौली सँचाण दौ 93/04 सकराढ़ीसँ रैया द्दौणा चित्रेश्वहर सुता पबौली सँ मनसुरनदौणा 148/03 चन्द्रलपति 209/05 सुतो मनसुख: करमहा सं दामोदर दौ।। 112/0 वलियास सँ राय हेमएद द्दौणा मनसुख सुतो 182/09 भचाक: अलयसॅ मही दौ 60/02 सरिसब सॅभ्रमर द्दौणा कुत्रज्न0 सुता सुता जयनन्द्न 202/09 जयनन्दमन दिना नन्द6न टेका नन्दभ खेलानन्दज: सोदरपुर सँ भूवन्धरर दौ।1 123/06 माण्डयर गोकुल द्दौणा 176/09 ठ. हरिश्वजर सुता गंगोरा बुधवाम सँ चण्डीि दौ।। 120/06 महो चण्डेाश्वरर सुतो वैयाकरण 276/07 शिविश्व0र: सोदरपुर सॅ वेदघर दौ।। 120/07 वेदघर सुता 200/07 राशिघर शम्भु0घर ननूका: हरिअमसँ मेघनाथ सुत बालहदौ।1 107/0 बालह सुतो दुखिया प्र. चक्रधर: सोदरपुर सँ भीखन दौणा 122/06 सकराढ़ी सँ नकटू द्दौणा, 1176/09 ठ. कृष्णे श्वनर सुता दुर्गेश्वसर गंगेश्ववर विश्वनाथ काशी नाथा: पालीसँ लक्ष्मीसदत्त सुत हर्षी दौ।। 108/03 खण्डबलासँ ठ. भगीरथ द्दौणा ठ. दुर्गोश्व र सुता करमहासँ बचकन सुत मन्धतनहै 162/06 भवानी दत्त सुतो लाल प्र. रूचिदत्त गोविन्दव दनो: माण्डतरसँ दुर्गादत्त दौ।। 89/05 भवदेव सुता दुर्गादत्त शिवन साधु साहिबा 185/04 पालीसँ जयदेवदौ 89/05 बलियास सँ परमानन्दु द्दौणा दुर्गादत्त सुता बुधवाल सँ नीलकंठ सुत गंगेश दौ 85/07 नीकंठ सुतो जंगेश हेमांगदो लोदरपुर सँ ओहरि दौ।। 148/06 बलियास सँ शंकर द्दौणा गंगेश सुता सोदरपुर सँ रामेश्वँर दौ 94/06 हिंगू सुतो शंकर: अनलपुर कर. गोढ़ाई दौ।। 78/0 सोदरपुर सॅ श्रीपति द्दौणा शंकर सुतो रामेश्व4र: हरिअमसँ दिनमनि सुत हरपति दौ।। 137/08 दिनमणि सुतो हरपति यदुपति सोदरपुर सं जगदीश दौ।। 60/03 सकौनासॅ नारायण द्दोणा हरपति सुता नरउन सँ महादेव दौ।। 118/05?
(369) महादेव सुता एकटरासँ महेश दौ।। 150/04 सोदरपुरसं विष्णु्पति द्दौणा रामेश्वुर सुता नरउन सॅ बन्धुक दौ।। 139/05 करमतासँ भनहर द्दौणा गोविन्दुत्त सुता तुलसीदत्त बचकन 194/04 छोटा का सोदरपुर सँ दीश सुत धीर दौ।। 126/03 करमहासँछबन् द्दौणा, बचकन सुतो मन्धटन 179/0 बल्लेर को सोदरपुर सॅ बचकन दौ।। 111/08 करमहासँ वेणी दौ।। मन्ध न सुता खण्ड1बला सँ जयनाथ दौ।1 106/0/0 ठ. जयनाथ सुतो रघुनाथ: खौआल सँ वैयाकरण मोदनाथ दौ।। 134/074 वैयाकरण मोदंनाघ सुते 278/03 पद्मनाथ विश्वसनाथों सोदरपुर सँ हेमनाथ दौ।। 123/0 हेमनाथ सुता घुसौत सँ कलानाथ सुत ननू दौ।। 162/04 विष्णुहदेव सुतो दिगम्बमर: माण्डुरसँ रघु देवदो 51/0 करमहासँ नारायण द्दौणा दिगम्ब4र सुतो कला नाथ: सोदरपुरसँ बहुड़ी दौ।। 11/09 पुसौत सँ हृषिकेश द्दौणा कलानाथ सुता नन् वंशमणि कुलमणि 28C/0/ हर्षमणिका सकराढ़ीसं गरीब दौ।1 113/09 पालीसँ भिखारी द्दौणा नन् हृषिकेश 182/06 अमृतकेश 217/ वैयाकरण गोपाला: सोदर पुरसँ वघरू सुत हृदयलाप दौ।। 99/03 करमहासॅं सुबोधद्दौणा अपरा ठ. दुर्गेश्वतर सुता बूधवालसँ वाचा सुत मणिश्वदर दौ 120/06 वाचा प्र. सोमेश्व्र सुतो फणीश्वशर मणीश्वधरौ कुजौलीसँ शोभाव सुत धूर्पी दौ।। 123/04 चाण प्र. चन्द्र शेखर मेघाकर: दरिहरासँ रैयादौ।। 05/07 सोदरपुर सँ महिपति द्दौणा मेघाकर सुतो शोभाक शिवकरो खण्ड बला सँ गोकुलनाथ दौ।1 97/02 दरिहरा सँ गंगाधर द्दौणा शोभाकर सुतो धूर्फी 194/11 टीकानाथौ हरिअमसँ रमानाथ दौ।। 126/02 सादा.अर्जून
(177) (370) ।। घुर्घी सुतो गोशाइक: 189/05 सोदरपुरसँ जानकीनाथ सुत ननू दौ।1 116/0/11 ननू प्र. धर्मनाथ सुतो शोमनाथ महिनाथो एकटरा सँ बाछ सुत तारादत्त दौ 162/04 तारादत सुता नरउन सँकुलपति सुत लक्ष्मीोनथ दौ: 117/02 पालीसँ जगन्नाथथ द्दौणा मणीश्व र सुतो कामेश्वकर: दरिहरासँ मनमरन दौ।1 100/05।1 मनमरनप्र. छीतीनन्दातन सुतो विश्वाानन्द 2/7/03 गोपालो 231/05 गोपालो सरिसब सँ धरापति दौ।। 116/06।। धरापति सुतो 190/03 शम्भु3पति करमहा सँ योगानन्द् दौ।। 176/0/ योगानन्द0 सुता सकराढ़ी सँ नकटू दौ।1 111/10 पबौली सँ।। गुहमंत्री 2531 नन्दी7पति द्दौणा एवम् ठ. दुर्गोश्वँर (द्विनीय विवाह:।। अपरा ठ. दुर्गेश्व।र सुता जगदीश विनोद मुकिनाथ शकिनाथ भकिनाथा: करमहा सँ जनार्दन सुत नरनाथ दौ।। 113/09 हतघर सुतो जनार्दन गोवर्द्धनों खण्डाबला सँ मोहन सिंह दौ।। 120/0 ठ. मोहन सिंह सुतो पदमनाम सिंह: बलियासँ धर्मदत्त दौणा 67/06/11 धर्मदत्त सुत मनफूल 214/0 दुर्मिलो करमहा हेमनारायण दौ।। 124/05/ सरिसबसँ धर्मपति द्दौणा जनार्दन सुतो नरनाथ तेजनाथौ सोदरपुइ सँर मुरली दौ।। 121/0/11 नन्दीरश्वार सुता भैया बवूजी 269/10 283/08 बदरी टुनी मुरलीका वलियाससँ हरिनाथ दौ खण्डसबला सँ ह. फकीर द्दौणा मुरली सुतो पुरूषोत्तम: घुसौत सै झोंटू सुत राम दौ।। 121/06।। 308/08 राम सुता 336/04 मकुन्दस 276/0/ मधुसूदना: दरिहरासँ विष्णुादत्त दौ।। 54/0/11 विष्णु6दत्त सुतो गेहनाथ वाचा को बघवास सारेसब संचाण दौ 87/04 यॉं कृष्णुदेव सुतो पॉं चाण: पण्डु4आ सं पॉं भगीरथ सुत पॉं पशुपति दौ।। 124/07।। बमानियाम सँ भगीरथ द्दौणा पॉंच चाल सुतो बोघनाथ: सकराढ़ी सँ जय दत्त दौ
(371) 152/09 पॉलच्छी0 प्र. लक्ष्मीतपति सुता पॉं धर्मानन्दत महो दुर्गानन्दढ पॉं जयदत्ता- गंगोलीसँ जयकृष्णत दौ।1 60/07 विश्वकनाथ सुतो जयकृष्णं: हरिअम सँ दुबन सुत अच्युुत दौ। 117/0/11 खण्ड।बला सँ हरपति द्दौणा जयकृष्णस सुता वलियास सँ रामचन्द्रि दौ।। 153/02 रामचन्द्रा सुता जजिवाल सँ छिताई दौ।। 147/07 छिताई सुता बुधवालसँ यदुनन्द1न दौ।। 151/0 खण्डवबला सँ बाबू द्दौणा जयदत्त सुता बमानियाम सँ बन्घलव दौ।। 166/05 बन्धौव सुता बलियास सँ रघुपति दौ।। 120/311 जजिवाल सँ निताई द्दौणा नरनाथ सुतो इन्द्रननाथ 215/09 गणेश मोलानाथ अमार शेचेद भूपेन्द्रज वाछ काको बेलउंच सँ बावू नाथ सुत नेना दो।। 133/03।। धनीराम सुतो बाबूनाथ करमहासँ जगन दौ।। 166/09 बलियास सँ. प्रद्मन द्दौणा वावूनाथ सुता वावू लाल भाई लाल रंगलाल नेना प्र. जग्य0 लाला: पालीसँ कमलास्त दौ: 69/06 बघरू सुतो उँमादत्त: बलियाससै भिखारी दौ।। 127/0211 भिखारी सुता 274/08 देवनारायण समापतिका एकहारा सँ बवूदी दौ।। 127/04 पण्डुीआसँ भंगीरथ द्दौणा उँमादत्त सुता कमलादत्त चेंगा प्र. गौरीदत्त शम्भुेदत्ता: 24/03 सरिसब सँ भोला दौ।। 139।।09 भोला प्र. रघुवीर सुतो प्रेमनाथ: रूचौली एक हरासँ ज्योथति. हरिश्व र दौ।। 134/08 ज्यो . हरिश्वरर सुता पालीसँ सोनमनि दौ।। 134/04 सँ शतत्रीज्व द्दौणा कमलादत्त सुता फेकन जलेश्व र कपिसिश्व र: खण्डुबला सँ फकीर सुत थानू दौ।। 120/05 थान् सुतो हृदयनिधि घुसौतसँ झौटू दौ।। 121/06 पगुआसँ बौघछोट।1 नेना सुतो हरिकृष्णन: कानाथर रामचन्द्र पबौली सँ बेदानन्द दौ।1 130/07 नारायण सुतो वेदानन्दो: बुधवाससँ हिरा भुत दुगीदत्त दौ।। 166/10 हरिश्वदर सतो हिराक: सतला वासँ देवकी दौ
(178) 138/03 नरउनसँ भवदेव द्दोणा हिरा सुतो 219/0 मोदी दुर्गादत्ता माण्ड र सँ पुरन्दतरसुत गौनू दौ।। 146/02 खण्डोबला सँ घारू द्दौणा दुर्गादत्त सुतो शंकरदत्त: पपुआ 267/104 सँ पशुपति सुत केदार दौ।। 124/07 केदार सुतो 98/10 तोती ननूकों सॅ दुर्गादत्त दौ।। 69/04 गुजानन्द। (ज्योकतिविर्द) सुतो दुर्गादत्त: सतलखासॅ महाई दौ 129/05 एक हरा सँ मुकुन्दसर द्दौणा दुर्गादत्त सुतो जीवन: गंगोलीसँ लक्ष्मी कांत दौ।। 85/08 वलियासूसँ शतत्रीज्वत द्दौणा वेदानन्दत सुता रमानन्दत 05/09. श्यांमानन्द8 सदानन्द गुणानन्दग ब. 12/10 नित्यादनन्दा्: दरिहरा सॅ गोकुल नाथ दौ 74/02 के पतीनाथ सुतो गोकुलनाथ: अमृतनाथ राजा 3 बेविंलाना 234/05 सरिसबसँ पॉं चाण दौ।1 177/09 सकराढ़ीसँ जयदत्त द्दौणा गोकुलनाथ सुतो डोमन प्र. मनहर: पालीसॅ मुनि दौ।। 129/0 भवनीदत्त वृत परशमणि गृहि मणि मुनिका सकराढ़ी सँ गंगाघर दौ।। 166/03 गंगाघर सुतो बाछ: फनन्द्रमत सँ म.म. उँमानन्द। सुत गुणी श्वघर दौ।1 41/0 म.म. उँमानन्दद सुतो धर्मेश्वसर म.म. गुणीखरौ खौआल सँ अच्युँत दौ।। 145/07 अच्युतत सुता घुसौत सँ शिवनाथ दौ।। 29/07 म.म. रामनाथ सुता रघुपति जीवनाथ बलभद्र शिवनाथ जगन्ना्थ दुर्गानाथा: खौआलसँ माघव दौ।1 95/02 सोदरपुरसँ बासुदेव द्दौणा शिवनाथ सुता सोदरपुर सॅभीमदों।। 54/02 हषिकेश सुतो राम मीमों कटका सँ रामनाथ सुत जीव दौ।। 32/05 राम नाथ सुता जीवथर माघव केशवा पनि. खोतू सुत डालू दौ।। 84/07 दरिहरासँ बादू द्दौणा जीवघर प्र. जीवे सुतो श्री पति यदापति नाउनसँ भवाई व्रत बसाउन दौ पालीसँ बुछे द्दौण। भीम सुता हिंगु रामदेव मधुसूदना नरउनसँ बाटू सुतश्री घर दौ टकबाल सॅ जिवाई द्दौणा (373) म.म. गुणीश्वमर सुतो गोशौई 214/04 धरानाथ: खौआल सँ पुरन्द र दौ।। 66/03 243/02 पुरन्दणर सुतो उँमानाथ: खण्ड0बलासँ ठ. रघुनन्दलन दौ।। 53/09 टरिहरासँ परका नन्द0 द्दौणा मुनी सुतो इशदत्त भिरवी कौ महिन्द्रडपुर पण्डुाआ सँ पॉ अच्यु त दौ।। 65/04 घुसौत सँ छत्रपति द्दोणा उ. जगदीश सुतो माघव: करमहासँ केशव सुत रामनारायण दौ।। 204/09 नरउन सँ मार्कण्डेदय द्दी.।। ठ. माघव सुता सँ सुत दौ सँ द्दौणा उ. विनोद सुता भरत लक्षमन कन्हैनयाका करमहासँ लितू सुत भूपनाथ दौ दरिहासँबलरामहँ अपरा ठ. विनोद सुता पानीसँ गुणघर सुत महेश दौ सोदरपुर सँ षष्ठी.नाथ द्दौणा ठ. भरत सुता नरउनसँ शोभनाथ सुत दुर्गानाथ दौ खण्ड बलासॅ दयाकान्तथ द्दौणा ठ. लक्षमन सुता नडुआ (करमहासँ/ राढ़ी) सुत भवनाथ दौ नाहस खौआल सँ सुशील कुमार द्दौणा ठ. कन्हैया सुतो कानन: महरैल पुड़े नरउनसे खड़गनाथ सुत नरनाथ दौ बलियास सॅ शचीनाथ द्दौणा ठ. मुिकृनाथ सुतो युक्रिनाथ: वलियास सॅ चण्डेदश्वरर सुत भोलानाथ दौ करमहासँ वेणी माघव दौ।। ठ. युक्रिनाथ सुता सँ सुत दौ ख सँ द्दौणा ठ. शव्हि नाथ सुतो केशवनं पतनुका माण्डमरसँ वॉंकेसुत बलभद्र दौ।। 290/0/11 पाली सँ ब्रजन नन्दथन द्दौणा ठ. मकिृनाथसुता नरउन सँ हरिनन्दंन दौ सोदापुरसँ बीए डि.
(179) (374) उ.गंगेश्वनर सुता करमहा सॅ बचकन सुत बलेल दौ।। 177/02 बलेल सुत हरिनन्ददन फणिनाथौ पबौलीसॅ मन्घन दौ।। 123/04 भेरवदत्त। सुता कमलादत्त घरभरण प्र. जाल्पाौज चन्द्र4दत्ता: 276/07 सकराढ़ी सँ दुल्लतह दौ।1 122/06 रघबान सॅ लाला द्दौणा धरमरन 185/03 सुता जयदत्त मन्धनन शीतेलासत्ता 214/0 खौआल सँ हेमनाथ दौ।1 34/06 सकराढ़ी सॅहिरेश्वुर द्दौणा मन्ध6नसुतो सुभद्र : माण्डौर सॅ कन्हाफई दौ।। कन्हाबई सुवा नरउन सॅ पुष्पॅनाथ दौ 113/06 करमटासँ ननू द्दौणा ठ. काशीनाथ सुता करमहा सँ गोवर्द्धन दौ।1 162/08 हेमदत्त सुता एकदत्त बचकन पुष्पीौ दककन 04/04 गोवर्द्धन कितू: रघुनाथ: माण्डेर सँ बच्ची दौ।। 74/0 बच्चीा सुतो होरिलदत्त मुरारी सॅ लक्ष्मी दत्त दौ।। 89/16.3 लक्ष्मीथदत्त सुतो योगदत्त: करमहा सँ विघ्नेचश सुत छोटी दौ।। 38/0/ महाई सुता हरिनाथ रामनाथ? मघुसूदना नरउन सँ रतिपति दौ।1 69/16 बहराढ़ी सँि गणपति द्दौणा मधुसूदन सुतो कृष्णथदेव: माण्डौरसँ प्राणपति सुतकाशी: 144/09 सोदरपुर सँ किर्तिनाथ द्दौणा कृष्ण देव सुता सदानन्द रमानन्दी उँमानन्दाश कुजौली सँ गोपीनाथ दौ।। सरिभव सं गोपीनाथ द्दौणा सदानन्दथ सुतो चतुर्भूज: खोआलसॅ रामचन्द्र दौ।। 153/09 सोदरपुर सँ कामदेव द्दौणा चतुर्भूज सुतो विदनेश: माण्ड र सँ पद्मापति दौ।। 70/0311 पद्मापति सुता एकहरा सॅ राजीव दौ।। 37/110/0 राघव सुतो राजीव खौआल सँ शभु सुत राम दौ फनन्दहह सॅ नोने द्दौणा राजीव सुतो हरेराम: बुघवाल सँ रूद सुत छोटाई दौ।। 37/04 माण्डहर सँ हरिहर द्दौणा विघ्नेाश सुते छोटी रतिको सरिसब सँ चन्द्र।पति दौ।। 61/03 वावू प्र. चन्द्रदपति सुता दरिहरा सँ नारायण दौ।। 173/07।। नारायण सुता बुधवाल सँ भवेश दौ।। 128/07 भवदेव सुता (375) शूलपाणि देवानन्द अनिरूद्धा : सरिसब सँ रघुनन्दँन दौ।। 71/01 विश्वरनाथ सुतो रघुनीक: पाली सँ प्राणघर दौ।। 72/04 प्राणघरसुतो बल्लीा भिरवारीको नरउनसॅरामनाथ दौ।। 36/0/711 पबौली सँ कल्या।ण द्दौणा रघुन्द्न सुतो 268/0 परान बवूनी कौर बुघवाल सँ चतुर्भूज दौ।। कोवे सुता ओहरि हीरे नितिकर पॉखूका दरिहरा सँ मतिकर द्दौणा वुघवाल सँ गौरि द्दौ. ओहरि सुतो काशी हरिकों सोदापुरसँ रतनू दौ सूइरी सँ शुचिकर द्दौणा काशी सुतो बैद्यनाथ प्र. बैजू जगन्नाोथों बेलउँच सॅजोर सुत वेणी दौ दरिहरासँ पॉंखू द्दौणा बैद्यनाथ सुता विश्वूनाथ दामादिरा 280/09 माण्डसरसं कृष्णा सुत बसाउन दौ बहोराढ़ी रतिद्दो 256 अपरा बैद्यनाथ प्र. बैजू सुतो हरिहर चतुर्भूजो खणडबलासँ मांगु सुत काशी दौ फनन्द2टसँ पूरखूद्दौणा चतुर्भूज सुतो बावूक: सोदायुरसँ कामदेव दौ।। 153/0/0 माण्डनर सँ गणेश द्दौणा छोटी 191/07 सुतो ऋद्धिपति सोदरपुर सँ गादा सुत आनन्द5 दौ।।96/09 राजा सुतो गादाक: करमहासॅ गोपाल दौ।1 87/04।। गौरीपति सुतो गोपाल: सोदरपुर सं श्री दत्त दौ।। गोपाल सुतो अर्जून देवेश्व रो: एकहरासँ यशोधर दौ।। 37/0/0 बहेराढ़ी सँ हरि द्दौणा गादासुतो आनन्दअ अभिनन्दोनो करमहा सै भोरानाथ दौ।। 125/06 माण्डढर सॅ अनाठ्र द्दौणा 87/0/11 अनाई सुतो बावूक: शोदरपुरसँ अर्जून दौ।। 74/05।1 रामदेव सुतो अर्जुन महादेवो टकबाल सँ मणि सुत विश्वसनाथ दौ खणडबला सँ मोहन द्दौणा अर्जून बुता सकराढ़ी सॅ रघुनाथ सुत बैवनाथ दौ त्रालय सँ नारायण द्दौ आनन्दजसुता सकराढ़ी सँ हरिश्व र सुत घनश्यााम दौ।। 175/05 हरिश्वीर सुतो घनश्या म: सोदरपुर से लाला दौ 73/0/11 माण्डशर सॅ हाड़ी दौहिय दौ।।
(180) (376) घनश्या0म सुता पालीसँ हिराक्षेत्र 120/02 सोदरपुर सँ कमला पति द्दौणा गोवर्द्धन सुतो जीवनाथ सीताराम 214/07 सिमरवाड़ खौआल सँ धर्मनाथ सुत कारी दौ।। 175/04 कारी प्र. विद्यानाथ सुता पुण्यसनाथ 185/07 चन्द्र नाथ प्र.मुकुन्द् रेवतीर्नाथा कवि शेखर ब्रद्रीनाथा: (एकावली परिणयक रचयिता) पासीसॅ उर्व्बीसघर।। 2571 सुतगंगाघ दौ।। 128/02 खण्डवबलासॅ ठ. गोपाल द्दौणा एवम् 6. काशीनाथ विवाह: 1, 176/07 ठ. साधु प्र. चक्रेश्वर सुतो महिघर हेमघरो।। बलिव्हएरपति सुत मणि दौ।। 126/03 सोदरपुर सँ धीर द्दौणा ठ. महिघर सुता करमहा सँ वेणी सुत राम दौ।। 1/0/0 राम सुतो मिमांथक 284/0 योगदत्त: सकराणि सँचचन्द्र दत्त दौ।। 165/0/ सोदरपुरसँ शक्रिदत्त द्दौणा ठ. हेमघर सुता पाती सँ धर्म नाथ दौ।। 316/0 गोपाल सुतो धर्मनाथ: सोदरपुरसॅ भवानीदत्त दौ।। 101/0 अपरा भवानीदत्त सुता बेहट करमहासॅं वेणदत्त दौ।। 95/06 दरिहरासं बवू आद्दांणा धर्मनाथ सुता मण्डवर सॅ भवानीदत्त सुत ठेठानि रौ।। 174/0 सोदरपुर सँ भिखन द्दौण 176/07 ठ. बौकू सुता करमहा सँ शंकरदत्त दौ।। 176/08// सकराढ़ी सँ दुल्लतह द्दौणा 175/08 हरिश्व र सुता उँमानाथ जगन्नारथ प्रान्नाौथ 219/02 रघुनाथा खोआलसँ भोरा दौ।। 97/08 हरिअम सँ महिपति द्दौणा अपरा ठ. हरिश्वरर सुतो 201/10 लक्ष्मी।नाथ गौरीनाथौं करमहासँ सदानन्द दौ।। 82/04 सोदरपुरसँ 25711 दामोदर द्दौणा उ. उँमानाथ सुता नरउन सँ कमलापति दौ।। 99/07 कमलापति सुता हरिअमसँ ऋषिकेश सुत जयकृष्णथ दौ।। 92/08 जयकृष्ण0 सुता माण्ड रसँ वैदिक विश्व0म्भ र सुत मोहन दौ।। 100/05।। मौहन सुतो भोराक: करमहासॅं विराई दौ।। 40/07 माण्ड2र सँ अनिरूद्ध द्दौणा अपरा ठक्कुर (377) ।। उँमानाथसुता अनलपुर करमहासँ शंकर दौ।। 99/06 माण्डरर सँ पुरूषोत्तम द्दौणा उ. जगन्नााथ सुता नरउन सँ लक्ष्मीौपति दौ।। 99/08 सोदरपुर सँ हरेराम द्दौणा 180/07 उ. प्रान्नाथ सुतो मोदनाथ मणिनाथौ माण्डीर सँ शतत्रीज्वं दौ।। नरउनसँ सरस्वाती गंगेश द्दौणा उ. मणिनाथ सुता म.म.उपा. रूपनाथ मोहन प्र.।। प्रेमनाथ 193/105 धर्मनाथ कवि 204/08 श्याममनाथ केशव प्र. मित्रनाथा: करमहा सँ जगन्नापथ दौ।1 94/0 सोदरपुर सँ कुलपति द्दौणा म.म.पा. ठ. रूपनाथ सुता मघुसूदन।। 181/0/0 मुकुन्द4 अच्यु त 182/103 देवकीनन्दथना दरिहरा सँ शोभाकर दौ।। 105/09 नरउन सँ कुलपति द्दौणा उ. मधुसूदन सुर्ता भिखूकं: नरउन सँ लक्ष्मी वत्त दौ।। 118/08 सोदरपुर सँ ऑखी द्दौणा ठ. भीखू सुतो सदाशिव: सकराढ़ी सॅ चन्द्रमदत्त दौ।। 165/0/0/ सोदरपुर सँ शक्रिदत्त द्दौणा उ. सदाशिव 2581 सुता पालीसँ पुरनदर दौ।। 02।।08 194/03 परिवया सुता पुरन्द्र धरानाथ 202/03 खगनाथा खौआल सँ बनी दौ।। नरउनसँभवनाथ द्दौणा 189/06 पुरन्द र सुतो बावू शशिनाथ: ओइनिसँ महाराज श्रीधरनारायण दौ।। 127/08 महाराज फतेह नारायण मुतो समस्ते त्यानदि महाराजा गिरधरनारायण: सौदरपुर सँ बछरू सुत गुड़ाउन दौ।। 130/09 26.4/02 बछरू सुतो जुड़ाउन: वलियाससँशतत्रीज्वु दौ।। 65/02 बभनियामसँ सदानन्दे द्दौणा ब. /0/0 जुड़ाउन सुता करमहा सँ रूद्रमणि सुत महियाणि दौ।। 167//05 अपरा रूद्रमणि सुता जयपाणि महिपाणि हरीपाणि चक्रमणि खड़गयाणिदण्ड/पाणि पद्ममपाणिम: छाम् सकराढ़ी सं नित्यानन्दद सुत दामोदर थौ।। 48/09 रघुसुतो महो माघव काशीकौ एकहरासँ बाटू दौ।। काशी सुतो बलभंद्र रामचन्द्रोद कुजौलीसं नोनेद
(181) (378) बलभद्रसुतो बट्राउँक: ब्रह्मपुरा सँ महथू दौ।। बटाउँ सुतो दिनमणि नित्यारनन्दोा समौलि पालीसँ जीवनाथ सुत श्रीकर दौ सुरगन सँ मुरारि दौहित्र दौ।। 258 नित्यारनन्दद सुतो देवानन्दी दामोदरौ कुजौली सॅत्रयकृष्णँ सुत गंगाघर दौ बुधवाल सॅ माघवद्दौणा 332/0/0 दामोदर सुतो ब. 13/03 गुजर बनमासीकौ करमहासँ।। गोपीनाथ सुतअच्युात दौ।। 143/09 गोपीनाथ सुता अच्युॅत कृष्णा नन्दर चक्रषाणिका जजिवाल सँ कान्हद दौ बाटू सुत काशी सुता बासुदेव यशोधर कान्हअ प्र. कृष्णाननन्दाक वलियास सँ विदू दौ।1 (कान्हा सुता भगीरथ गंगाराम मनीएमा: माण्ड रसँ एकरूसता) हरिहर दौ सोदरपुर सॅ रवि द्दौणा) अपरा कान्ह सुता पनि. शिवराज सुत कविराज दौ।। सकराढ़ीसॅ विश्वपनाथ द्दौणा।। अच्युौत।। सुता माण्ड रसॅ कामदेव सुत अपूछ दौ सकौनासॅ राजा द्दौणा महिपाणि सुता बवूनन्दन ननू ब. 19।।0/ प्र. चित्र चित्रघरा वलियाससँ शुभपतिसुत भवेश।। दौ।। 121/07 खण्डबबला सँ भोरानाथ द्दौणा महाराज गिरधर नारायण सुतो महाराज श्रीघर नारायण: सोदरपुरसॅ नन्दीाश्वार दौ।। 259।। 177।। 06 नन्दीशश्व9र सुतो 263/09 नेनाकौ पाली सँ भवानीदत्त दौ।। 178।।05 भवानीदत्त सुतो देवनाथ 197/07 रमानाथा 257/0/ वलियास सँ।। विद्यानाथ दौ।। 67/05/ सोदरपुर सँ गोनू द्दौणा महाराज श्रीधर नारायण सुतो महाराज तेजघर नारायण: घुसौत सँ राम दौ।। 177/08 दरिहरा सँ विष्णु दत्त द्दौणा। 181/04।। ठ. मुकुन्दौ सुता पालीसँ विश्वेहश्वार सुतदलल्ल्लुह दौल।1 11/02 दुल्ल9ह सुतो (379) झड़ूलाप्र. मित्रनाथ हेड़नि 191/0 प्र.घर्मनाथौ नरउनसँ काशी नाथ दौ।। 101/06 कामदेव सुतो हरि जीव: सक. सक. भवदेव दौ।। 111/06 नरउन सं राम द्दौणा हरिजीवा।। सुतो बलभद्र: घुसौत सॅ कृष्णिदेव दौ।। 39/04 म.म. मधुसूदन सुतो गौरीपति गंगानन्दों। बेलउँच होरे सुत मति दौ।। 30/07 होरे सुतो रति।। मति कौ बहेराढ़ीसँ गदाघर दौ।। 25/04 बेलउँच सॅ द्दौणा मतिसुता दरिहरा सँ शिरू सुत नन्दकन दौ जालय सँ मोहन द्दौणा शौरीपति सुतो सुन्द ह: सकरादीसँ गोपीनाथ दौ अदितु सुता नोने टुने खुदेक: नोने सुता गोढि शूलयाणि राजकरा: आवश् सँ रघु दौ।। रगोद्धि सुता रघुनन्द न युदनन्दतन बलभद्र छोटाई का करमहासँ नरहरि सुत पुरखू दौ माण्डँर (सँ अमरू द्दौणा) अपरा गोढि़ सुत हरिपाणि सुतो गोपीनाथ लक्ष्मी नाथौ पनियोभ सँ गोपाल दौ।। गोपी नाथ सुता नरउन सँ नरउन सँ गोनू सुत मुकुन्दष दौ।। 63/02 266/08 सुता खण्डतबला सँ केशु दौ।। 50/02 केशू सुता माण्डतरसँ खूदे सुत मुरारि दौ परि. खूदे द्दौणा सुन्दतर सुतो कृष्णददेव: खण्डबबला. सँ चीकी दौ।। 85/09 चीकी सुतो सदानन्दद : माण्डणरसँ अभिनन्दकन दौ 95/04 सोदरपुरसंश्री हरि द्दौणा कृष्णकदेव सुतो मोहिनीक- सकराढ़ी सँ दामोदर दौ।। 87/08 दामोदर सुतो रमाकान्तद कमलाकान्तो 195/02 करमहासँ कारम सुत मघुसूदन दौ।। 73/02 वलियास सँ यदुनाथ द्दौणा बलभद्र सुतो काशीनाथ रतन् कौ कृष्ण़ सुत लाल दौ।। 07/08 लाला सुता वलियास सँ राय नित्या नन्दौह।। 111/02 राय नित्या/नन्द् सुता पाली सॅ हरिजीव दौ।। 79/03 अपरा मणिनाय सुतो विश्विनाथ: सकराढ़ीसॅ रामभद्र दौ।। 46/0/।। करमहासँ
(182) (380) विद्यापति द्दौणा विश्व नाथ सुतो हरिजीव: नरउन सँ सदानन्दन दौ।। 81/05।। 182 पबौली सॅभरथी द्दौणा हरिजीव सुता माण्डुर सँ समापति दौ।। 05/02 घुसौतसँ सदनन्दर द्दौण काशीनाथ सुतो छत्रनाथ: जौकी सरिसब स लक्ष्मी दत्त दौ।। 09/09 लक्ष्मी्दत्त सुता माण्डार सँ शोभाकर दौ।। 114/09 पबौलीसँ गरीब द्दौणा 118/04 2601 उ. अच्यु8त सुतो वंशी गोयाल: एकहरासँ बाछ सुत तीर्थदत्त दौ।। 162/04 तीर्थदत्त सुतो भवदत्त मुशरी कौ सरिसब सँपॉथो दौ।। 0/07 हरिअमसँ यार द्दौणा ठ. वंशी गोयाल सुता करमहा सँ दुखभंजन सुत मित्रनाथ दौ।। 116/05 मित्रनाथ सुता सोदरपुरसँ विष्णु दत्त सुत ठेड.नि दौ।। 113/10 दरिहलसँ भवनाथ द्दौणा 181/04 ठ. देवकीनन्दुन सुता रघुनन्द न हरिनन्द न 193/08 गिरीनन्द1न श्रीनन्दुना 193/09 नरउन सँ लक्ष्मीसदत्त दौ।। 118/08 सोदरपुरसँ आँखी द्दौणा ठ. रघुनन्दीन सुतो चंचालयदु नन्दिनो 189/0 181/04 ठ. देवकीनन्द न सुता रघुनन्द न हरिनन्द1न 193/08 गिरीनन्द1न श्रीनन्द ना 193/09 नरउन सँ लक्ष्मीआदत्त दौ।। 118/08 सोदरपुरसँ आँखी द्दौणा ठ. रघुनन्दशन सुता चंचलयदु नन्द0नो।। घुसौत सँ त्हदिकेश दौ।। 177/06 हृषिकेश सुता सोदरपुर सँ रूचिपति दौ।। 104/05।। रूचिपति सुतो धनानन्दह: दरिहरा सँ भवनाथ दौ।। 113/10 पालीसँ मोदनाथ दौ।। 26011 ठ. चंचल सुतो ठक्क न 183/0 184/04 बाबाजी कौ हरिअमसँ तारानाथ दौ।1 119/08 बावू गिरिजानाथ सुता 290/08 तारानाथ भोला प्र. 213/06 तुत्पातनाथ नेना प्र. हरिनाथा: माण्ड9रसँ खगपति सुत बाचा दौ।। 109/07 सरिसबसँ गणेश द्दौणा मिश्र तारानाथ सुतो देवकीनाथ लंलींतनाथों 05/08 पबौली सँपॉं हलघर दौ 176/02 भैया सुता नारायणदत्त श्रीकृष्णथ प्र. हृदयमणि पॉं हलघरा: पण्डुदआ सँ पॉंअच्यु त दौ।। 65।। 04 घुसौत सँ छत्रपति द्दौणा (381) पॉंहलघर सुतो पॉ बवुअन प्र. छत्रघर पॉं उँमानन्द प्र. 287/03 जीवघरो दरितहरा सँ हृदयनाथ दौ।। 117/06 करमहा सँ श्यांम द्दौणा।1 182/07 ठ. ठक्क न।। अवनाथ सुतो धर्मनाथ कौशल्या नाथ प्र. 184/04 सीता नाथौ बुधवाल सँ दौन सुत जनार्दन दौ।। 126/0/ जनार्दन सुता माण्डमर सँ हनुमानदत्त दौ 174/0 हनुमानदत्त सुतो महो छेदीक: खण्ड0बला सँ बावू. गोविन्दस दत्त सुत वाबू गणेशदत्त सिंह दौ।। 174/0 दरिहरा सँ धननाथ द्दौणा ठ. धर्मनाथसुता आद्यानाथ इन्दुानाथ चन्द्र नाथ उदायनाथा महिषी पाली सँ अर्जून सुत एकनाथ दौ।। 126/0 अर्जून सुता एकनाथ सतीनाथ तेजनाथा दरिहासॅ उग्रानन्दा सुत लोकानन्दथ दौ।। 175/09 फेकू प्र. उग्रानन्दउ सुतो बावू लोकानन्दस: खण्डथबला सँ महाराज रूद्रसिंह 103/06 महाराज बहादूर छत्र सिंह सुतो विविधेत्यानदि महाराज बहादूर रूद्र सिंह बावू रतन सिंह प्र. तारादत्त सिंह पाली सँ दुल्लतह दौ।। 181/0/0 नरउन सँ काशीनाथ द्दौणा महाराज रूद्र सिंह सुता महाराजाधिराज महेश्व र सिंह 190 महाराज कुमार धर्मक कवितार बावू किशोर प्र. 185/08 गुणेश्व र सिंह बावू बनमाली सिंह प्र. नेत्रेश्वणर सिंह बावू सुन्दूर सिंह प्र. गोपीश्व्र सिंह फली सँ जगन्नांथ सुतगिरधारी दौ।। 117/02 गिरधारी सता सोदरपुर सँ श्री नाथ दौ।। 174/05 जीवेश्व र सुता ज्योन. भवनाथ श्याशमना 187/03 मटोश्रीनाथ बैया. शीभनाथा: पालीसँ देवकृष्णु दौ।। 117/05 खण्डाबला सँ देपकृष्ण/ द्दौणा श्री नाथ सुता ठीठर प्र. शक्रनाथ: 184/08
(183) (382) दरिहरा सँकेशव दौ।। 103/05 केशव सुती कन्हातईक: सुतो हेमनथ श्री नाथ आनन्द। बैद्धयनाथ सोदरपुर सँ छबनू दौ।। 182/07 हरिअमसँ नारायण द्दौणा दरिएसॅ हिरानन्दर द्दौणा वाबू लोकानन्द। सुता गोकुलानन्दर मथुरानन्दण मोक्षानन्दाा: 192/104 नरउन सँ मनभरन दौ।। 101/0 मनभरण सुतो बद्रीनाथ हर्षनाथी 281/08 पालीसँ आत्मानराम दौ।। 104/09 आत्माल राम सुता सुरगन सँ राजा श्री नारायण दौ।। 125/04 राजा श्री नारायण सुतो राजा राजेन्द्रम नारायण राजा महेन्द्र नारायणौ सोदरपुर सॅ जानकी दौ।1 116/0 वुघवाल सँ कलानाथ द्दोणा एकनाथ सुता खण्ड बला सँ बापू ठकुर पति सिंह दौ।। 116/02 बावू खेलापति सिंह सुता बावू ठकुरपति सिंह बावू चन्द्र पति सिंह बावू गंगापति सिंहा: करमहासँ पद्मापति सुत शीतल दौ।। 110/03 पद्मापति सुता गिरधारी माघव 204/07 शीतल रमापति प्र. 234/06 घुरना: दरिहरा सँ प्रतापनदत्त दौ।1 165/07 बुधवाल सँ चिलका द्दौणा शीतल सुता बेछड़ सँ पन्नी/ सुत भूषण दौ।। 147/01/11 पन्त्री् सुतो कृष्णचदत्त भूषणो करमहासँ रूद्र दौ।। 148/07 बे लउँच सँ भैया द्दौणा भूषण सुता हरिहर दत्त 255/02 कुमर 240/0/0 सुन्दँर सुधाकरा: 288/04 215/0/0 बुधवाल सँ दुल्लिह सुत कृष्णषपति दौ।।124/05 कृष्ण7पति सुता जजिवाल सँ सनफूल दौ।। 171/0/0 सनफूल सुता प्रेमनाथ: शोभनाथ खगनाथा: पण्डुृआ सँ कृष्णापति सुत मोहन दौ।। 121/07।। पॉंमोहन सुता सोदरपुर सँ दुखरण दौ।1 166/02 पालीसँ पाठक विश्वे1श्व7र बावू ठकुर पति सिंह सुतो बावू (गिरिश्द र सिंह सुरेखरेसिंह लेखेश्वणर सिंह) नरउन सँ छक्क न सुत विश्वबनाथ दौ।। 125/0/6 विश्वंनाथ सुतो
(383) रट्टन प्र. 284/08 उग्रनाथ: कुजौली सॅ कल्या णकर दौ।। 115/04 अपरा अमृत कर सुतो विद्याकर कल्या4ण करौ दरिहरा सं यगयनारायण दौ।। 118/05 यग्य।नारायण सुता 192/09 सुता देवनारायण 211/09 छर्टन प्र. 212/03 मित्रनारायण रघुवीर: 284/03 करमहा सँ म.म. लक्ष्मी/दत्त दौ।। 91/08 नरउन सँ कुलपति द्दौणा कल्या णकर सुतो कृष्ण कर: करमहा सँ टेकनाथ सुत जाल्पा।दत्त दौ।। 99/09 दरिहरा सँ चन्द्रा नन्द द्दौणा एवम् ठक्कुदर धर्मनाथ विवाह प्रकरणम् 183/02 5. कौशल्या0नाथ प्र. सीमानाथ सुता नरउन सँ यदुनाथ सुतर पुष्यानाथ दौ।। 125/05 ऋषि सुता नेना रघुवर ठेडानी बूचना माण्डसर सँ विष्णुयपति सुत चाण दौ।। 125/04 सुरगन सँ चिलका द्दौणा नेना सुतो यदुनाथ: खण्डयबला संठ. कन्हा2ई दौ।। 162/06 कर कृष्णणदत्त यदुनाथ सुता लक्ष्मी नाथ पुण्यथ नाथ सीता नाथा: 192/08 : गंगोरा वुधवाल सँ बागीश्व र दौ।। 120/07 वगीश्व्र सुता सोदरपुर सँ लूचाई दौ।। 101/02 लुचाई प्र. प्रेमनाथ सुतो द्वारिकानाथ भैया प्र. 201/03 ऋद्धिनाथो नरउन सँ गोपाल दौ।। 113/02 गोपाल सुता महिनाथ रघुवर घुरघुर वंशीनाथा: सकराढ़ीसँ झाउँ दौ।। 117/05 सोदरपुरसँ भवन द्दौणा पुण्यर नाथ सुता सोदरपुर सँ रामकृष्णर दौ।। 101/02 किशोर प्र. रतिदत्त सुता गौशाई फेकू।। 200/06 191/06 बचकना करमहा सँ योगानन्द दौ।। 05।। सकराढ़ी सॅ नकटू द्दौणा फेकू सुतो रामकृष्णथ जयकृष्णोंह खोआल सँ मोदनाथ दौ।। 177/03 सोदरपुर सँ हेमनाथ द्दौणा रामकृष्णष सुता नरउनसँ पशुपतिनाथ दौ।। 106/05 भोलानाथ सुता गोपाल बद्रीनाथ पशुपति नाथ तेजनाथा वलियाकरण
(184) (384) निधि दौ।। 122/04 हरिअम सँ मेघनाथ द्दौणा 184 पशुपतिनाथ सुतो देवनथ उक्करनो खण्ड बलासँ बावू जोन्प4ति सिंह दौ।। 115/09 बावू डोलपति सिंह सुता बावू तीर्थपति सिंह बावू कमलापति सिंह बावू 215/08 योगपति सिंह बावू दृगपति सिंह बावू अच्यु तपति सिंह पालीसँ जयकृष्णा दौ।। 115/0/11 पॉं रामकृष्णस सुतो श्री कृष्ण जयकृष्णोो कुजौली सॅकुलपति दौ।। 58/09 अलयसँ मही द्दौणा पॉंजयकृष्ण सु. योगकृष्णी: 290/06 सरिसब सँ गणेश दौ।। 109/03 वौआल संगोशॉई द्दौणा 182/07 उ. बाबा जी प्र. शशिनाथ सुतो रूद्र नाथ सिद्धिनाथौनस सँ तेजनाथ सुत मणिनाथ दौ।। 112/05 हेमनाथा प्र. गोपाल सुतो बावू मनहर 201/0/0 बावू चुम्मानो खण्डाबला सँ महाराजा धिराज माघव सिंह दौ।। 102/09 वलि. हरर्पत बावूचुम्म न सुतो रघुनन्द न 06/03/3.2 बनखंडी प्र. तेजनाथौ सोदरपुर सँ कृष्णहदत्त दौ।। 119/02 कृष्णघदत्त सुतो परमेश्व/रीदत्त: त्रिपुरौली सँ सरस्व.ती गुणानन्द दौ।। 117/09 सरस्व2ती गुणानन्द सुतो भोलानाथ 211/03 श्रीघरौ हरिअम सँ हरिनाथ दौ।। 113/07 सकराढ़ी सँ गरीब दौहित्र बनखंडी प्र. तेजनाथ सुतो मथुरानाथ 202/0/ मणिनाथौ सोदरपुर सँ शक्रनाथ दौ।। 183/0/ शक्रनाथ प्र. 195/06 प्र. ठीठर सुता फूच्चीा भंगी कारीका नरउन सं बौकू दौ।। 117/02 बौकू सुतो गोशॉइक:दरिहरा सँ देवीदत्त दौ।। 175/0/11 दुर्गादत्त सुतो देवीदत्त: पवौली सँ कलर दौ।।120/02 कलर सुतो नारायणदत्त: 277/05 वलियाससँ कल्या्ण दौ।। 103/0/ कल्याकण सुता सरिसव सँ सदा शिव दौ।। 09/02 सदाशिव सुतो 222/02 (385) घनश्या5म: करमहा सँ देवानन्दी दौ।। 91/05 दरिहरा सँ शिवाई द्दोणा 190/09 देवीदत्त सुता नरउन सँ बेधनाथ दौ।। 119/07 हरिनाथ सुतो मेघन सोदरपुर सँ महेश दौ।। 112/07 माण्डौर सँ परमानन्द द्दौणा मेघनाथ सुतो टेकनाथ: 193/02 करमहा सँ साहेब दौ।। 113/09 सोदरपुर सँ रत्नपति मणिनाथ सुता पबौली सँ तपसी दौ।। 179/02 घरमरन सुतो तपसीक: करमहा सँ केशव दौ।। 122/0 माण्डीर सँ कुलपति दौहिन दौ।। तपसी सुताहरिअम सँ योगी लाल दौ।। 123/04 योगीलाल सुतो कमलानाथ: माण्डदर सँ लोटनी दौ।। 76/07 साहिब सुतो लोटनीप्र कृष्णोनिधि बुधवाल सँ भैयन दौ।। 114/03 दरिहरा सँ घराघर द्दौणा त्पोहटनी प्र. कृष्णननिधि सुता खण्ड।बलासँ जयनाथ दौ।। जयनाथ सुतो श्या म नाथ: माण्ड र सँ काशीनाथ दौ।। 133/08 पबोलीसँ कविभोलन द्दौणा एवम् हक्कुशर बावाजी प्र. शशिनाथ बिना ठ. रूद्रनाथ सुता खौआल सँ पुण्यलनाथ सुत उँमानाथ दौ।। 180/02 पुण्य नाथ सुता प्रो उमानाथ भवनाथ अंग्रेजी निदान लक्ष्मीयनाथा: सो सँ म.म. जयनाथ दौ।। 123/04 नरउनसँ तेजनाथ द्दौणा उँमानाथ सुतो राम लक्षमनों हरिअम सँ दुर्गानाथ सुत पच्ची। दौ।। 104/10 म.म.वैया. मोहन सुतो अभयनाथ 217/08 सिद्धिनाथो सोदरपुरसँ देवकृष्ण दौ।। 174/04 माण्डैर सँ मनबोध द्दौणा महासिद्धि नाथ सुतो जनाद 2826 दुर्गानाथौ नरउन वावू जानकीनाथ दौ।। 123/05 दयानाथ सुतो बावू जानकीनाथ: खण्डदबला सँ महाराज माघव सिंह 100/03 करमहासँ लक्ष्मीसदत द्दौणा बावू जानकी नाथ सुता बद्रीनाथ नेना बच्चूम का माण्डथर सँ कुलपति दौ।। 07/0/0 पालीसँ घनान
(185) (386) दुर्गानाथ सुतो कुमुदनाथ प्र. पच्चीदक: नरउनसँ 185 विश्वपनाथ दौ।। 101/08 चित्रनाथ सुता रमानाथ बुद्धिनाथ मंघन विश्व.नाथा: दरिहरा सँ चिन्तासमणि दौ।। 175/0/ सोदरपुर सँ मनसुख द्दौणा विश्व नाथ सुतो चक्रनाथ: सोदरपुर सँ कन्हा्ई सुत तीर्थ मणि।। 119/05 धनानन्दन सुतो मघुपति दरिहरा सं रैया दौ।। 99/04 सुल्हुनी नरउन सँ महिपाणि द्दौणा मघुपति सुता चिन्ता मणि बच्चीा गोशाई कन्हातईका पालीसँ छोटकनि दौ।। 104/06 सोदरपुर सँ शतत्रीज्व द्दौणा कन्हा ई सुतो तीर्थ मणि: माण्डरर सँ हृदयनन्द1न दौ।। हरोगाहृदयनन्ददन सुता हरिअमसँ हरिनाथ दौ।। 113/07।। सकराढ़ी सँ गरीब द्दौणा तीर्थ मणि सुतो चुड़ामणि माण्डतर सँ ठेड.निदौणा।। 174/0/ सोदरपुर सँ भीरवन द्दौणा कुमुदनाथ प्र. पच्चीत सीतानाथ: वलियास सँ फुच्चीक प्र. मोदपति दौ।। 122/04 बच्चेन प्र. उग्रपति सुतो फूच्चीा प्र. मोदपति मार्कण्डेवय प्र. 245/04 पद्मापति सोदरपुरसँ कारी दौ।। 125/0/0 पाली सँ दुखिया दौहित्र दौ फूच्चीत प्र. मोदपति सुता कृष्णे/श्वदर कुशेश्व र सिंहश्व रा: खण्ड्बला सँ बाबू हरिश्वयर सिंह दौ।। 183/08 महाराज कुमार बावू किशोर सिंह: गुणेश्व र सिंह सुता बावू सुरेश्वहर सिंह बावू हरिश्व।र सिंह बावू ललितेश्वार सिंह बावू भवेश्ववर सिंह: सकराढ़ीसँ प्रान्नासथ सुत हृदयघर दौ।। 125/07 बूधवाल सँ विद्यामणि द्दौणा बावू हरिश्वहर सिंह सुता बावू नर्मदेश्वुर सिंह बावू तीर्थेश्व5र सिंह बावू रेवतीश्व्र सिंहा माण्ड र (387) सँ कुमर सिंह सुत श्यारम सिंह दौ।। 105/06 हरिनाथ सुतो बावू धीरनाथ: सुरगन सँ महाराज नरनारायण दौ।। 72/08 महोज्योरतिर्विद महाराजा कृष्णसदेव सुता रार गोविन्दु महाराज विश्वानाथ राए गोपाला: खौआल सँ ऐंठो सुत लक्ष्मीुपति दौ।। 79/08 सोदरपुरसँ मरहरि द्दौणा महाराज विश्वरनाथ सुता राए गुणाकर राए हरिसिंह महाराज विर नारायणा: बुधवाल सँ हरखू सुत रामदेव दौ माण्डार।। सँ कृष्णर द्दौणा महाराज वीर नारायण सुतो महाराज नरनारायण: राए गौरीकान्तर राए दर्प्पणनारायणा: सरिसब सँ चक्रपाणि सुत छोटकनि दौ।। नरउनसँ महिनाथ द्दौणा महाराज नर नारायण सुतो महाराज रामचन्द्रर नारायण महुआ खौआल सँ महिनाथ सुत चिन्तासमणि दौ।। 162/03 खण्डबबलासँ राम द्दौणा बावू घीर नाथ सुता कुमर सिंह रतन सिंह 240/06 मानीक सिंह 204/04 भूपसिंहा एकहरा सं गोरीकान्तम दौ।। 148/0/ यदुपति सुतो ब.01/02 रमाकान्तस: यिलकौर बुघवालसँ बाटन सुत लक्ष्मीनाथ दौ दरिहरा सँ चिन्तादमणि द्दौणा रमाकान्त सुता गौरीकान्तघ मतिकान्तक श्रीकान्ता रतिकान्तात: सोदरपुरसँ बाछा सुत कृष्णामनन्दह दौ।। 148/07 पॉं कृष्णाकनन्दक सुतो हरिकृष्णन पोगलो करमहा सँ रत्न पति सुत हरपति दौ।। खौआलसँ महिनाथ द्दौणा गौरी कान्र सुतो भवानीकान्तु: सरिसब सँ धरनी दौ।। 87/05 करमहासँ देवानन्दद द्दौणा कुमर सिंह सुता।। मोहन सिंह राम सिंह झलबा प्र. श्या म सिंह केशव सिंह: नरउनसँ सरस्व ती गुणानन्दह दौ।। 184/07 हरिअम सँ हरिनाथ द्दौणा श्याणम सिंह सुता।। रघुनन्दान 279/0/0 287/07 यदुनन्द्न नीलकंठ दिनबन्धुाका सोदरपुरसँ भिखन सुत गोपाल दौ।। 122/06
(186) (388) गोपाल सुता वुधवपाल सँ थेघी सुत परशमणि दौ।। 120/05 अपरा 186 परशमणि सुतो नन्दी श्वलर 206/04 विरेश्वसरौ सकराढ़ीसँ अमृतनाथ दौ।। 175/07 सोदरपुरसंजुड़ाउन द्दौणा एवम् ठ. रूद्रनाथ विवाह: ठ. सिद्धिनाथ सुता माण्डृर सँ बॉके सुत बलराम दौ।। 174/02 बॉके प्र. हेमकान्त सुतों बलभद्र 290/0 बलरामौ नरउन सँ घुरघुर दौ।। 184/07 घुरघुर सुता करमहा सँ गोपीनाथ दौ।1 162/08 गोपीनाथ सुतो कुमुदनाथ: खण्डरबलासँ चन्द्रदमणि दौ।। 75/08 पालीसँ मतिनाथ द्दौणा 287/08 बलराम सुता बसन्र विनोद नडुआर करमटासँ राजा बुद्धिनाथ सुत राजा टंकनाथ दौ।। 155/05 चतुर्भूज सुतो परमानन्दि कृष्णाँन दौ।। खण्ड बला सँ रामदेव दौ।। 155/0/ हरिअमसँ शोभनाथ द्दौणा परमानन्दण सतो उँमानन्दण: सोदरपुर सँ कुलपति दौ।1 99/0/ कुलपति सुता नरउनसँ सरस्वती लक्षमन दौ।। 102/02 करमहासँ रामचन्द्र द्दौणा उँमापति प्र. उमसूदे उँमापति सुतो महिपति शुभपति सोदरपुर सँ रघुराम दौ।। 153/0/0 सोददेव सुतो राम रघुरामो हरिअमा सँ वामनि दौ।। 106/04 पबौलीसँ डीडी.र द्दौणा रघुराम सुतो 334/06 धनपति हरिकृष्णोंव पाली सँ रघुपति दौ।। 107/05 पबौलीसँ नाथ द्दौणा महिपति 3/4/09 सुतो राजारामलोचना: आरखौलाल सँ भैया दौ।। 162/03 महेश सुता भैया ननू जीबा का: पबौली सँ जयदेव दौ।। 255/05 हरी अम सँ परान द्दौणा भैया सुता महिषी बुधवालसँ लोचन दौ।। 137/06 पाठक लोचन सुता बुला बटेश ननूका: दरिहरा सँ मनोहर सुत मति राम दौ।। 247/0/05 नन्द सुत मनोहर मतिरात कमलापति दुरबर खण्डरबलासं गोपीनाथ दौ।। मतिराम सुला मघुरापति तोता टेंगीका: एकहरा सँ घरणी दौ।। 159/02 माण्डारनसँ गंगेश द्दौणा राजा राम लोचन सुतो चन्द्र लोचन राजा दुर्गाप्रसादौ बलियाससँ धर्मपाद दौ।। 177/05 करमहा सँ हेमनरायण द्दौणा राजा दुर्गा प्रसाद सुतो राजा वुद्धिनाथ: पबौली सँ कन्हैसया दौ।। 164/0/ सुखाई सुता कन्है या रतिनाथ
(389) शशिनाथ योगनाथा: बुधवाल सँ कमलनयन दौ।। 138/04 पाठक कमलनयन सुतो तेजनाथ: 334/07 सोदरपुर सँ डोपाल दौ।। 154/02 सकराढ़ीसँ आनन्दा द्दौणा कन्हैाया सुतो श्रीकान्तथ विकान्ताध 233/03 दरिहरा सँ मानीक दौ।। 147/04 खण्डपबला सँ हरिनारायण द्दौणा राजा बुद्धिनाथ 286/09 सुतो राजा टंकनाथ: सरिसब सॅ मनभरन दौ।। 85/0/0 पौरवी सुता मनमरन चुम्म न कुंजन मंगना: भुरानपुरू खौआल सँ रत्नपणि सुत हृदयफूलदौ।। 94/02 किशाई सुता पॉ रामदेव महो रति देवयॉं अनन्ताि: सोदर व शुभाई दौ रतिपति सुत मुशाई सुतो शुभाइक: बेलउँच सँ दाशे दौ।। शुभाई 3/7/0 सुता एकहरा सॅ पुरखू सूत भवानी द्दौणा।। 159/0/ बुदावाल सँ गडूर दौशिष दौ पॉं रामदेव सुतो लक्ष्मीपघर: एकहरासँ सरस्वमती दौ।। 137/0/0 सरस्विती प्र. यशोधर सुतो मनोहर: कुजौलीसँ यदुनाथ दौ।। 84/09 रतिनाथ 329/07 सुतो यदुनाथ: जजिवाल सँ जूडि़रथ दौ।। यदुनाथ सुतो टमनीक: दरिहरासँ हरखू सूत रामचन्द्र दौ।। बेलउँचसँ गणपति दौहित्र दौ।। लक्ष्मीटघर सुतो एनपणि: सोदरपुर सँ हरपति दौ।। 96/02 अपरा हरपति सुतो बालकृष्ण। पुरन्दमरो एकहरासँ उँमापति दौ।। 80/03 शुभंकर सुतो उँमापति पबौलीसँ मधुसूदन दौ।। माण्डपर सँ म.म. अनिरूद्ध द्दौणा उँमापति सुतो दामोदर: सुरगनसँ राय रघुदेव दौ। 121/09 सोदरपुर सँ रामभद्र: रत्रनपाणि सुतो रामरूद्ध हृदयझुलो सोदरपुर सँ धरनी सुत रघुनाथ दौ।। 95/0 बावू सुता घरनी गंगाधरो हरिअमसँ रमापति दौ।। 56/02 पॉंखूसुता गोविन्दब चक्रपागि जयदेवा सोदरपुरसँ बाटू सुत शिरू दौ।। चक्रपाणि सुता मुरारी रमानन्द समापतिय: एकरादीसँ सुपे सुत बासुदेव दौ हरिअमसॅ वासुदेवको रमापति सुतो सदानन्दद: सुरगनसँ महारान समर सिंह सुत कृष्ण देव दौ।। 186/02 पखौआलसँ लक्ष्मी।पति द्दौणा 280/08 धरनीसुतो रघुनाथ: टकवालसँ हरिदेव दौ
(187) 157/07 हरिदेव सुता खौआल सँ बाबू सुत 187 बार्छान दौ सोदरपुरसँ यदुनाथ द्दौणा रघुनाथ सुता 332/02 रामेश्वूर मनसुख चल वलिय: हरिअम।। सँ विशो दौ।। 151/0/0 खोआलसँ चिन्ता2मणि द्दौणा हृदयफूल सुतो वंशी 129/10 नेनाको पबौली सँ मनसुख दौ।। 176/02 अलपसँ मही द्दौणा मनमरन सुता दरिहरॉर घनानन्द दौ।। 175/02 घनानन्द/ सुता 211/07 सुरगमन सॅ राय रूपनारायण दौ।। 162/0/11 राय रूपनारायण सुता सोदरपुर सँ श्याकम नाथ दौ।। 183/09।। श्यानमनाथ सुता करमहासँ छोटकीन दौ।। 116/03 छोटकनि सुतो मयानाथ: दरिहरा सँ विघू प्र. देवनाथ दौ।। 83/02 अपरा विघू प्र. देवनाथ सुता खण्डमबलाहौ गुणानन्दह दौ।। 123/09 करमहासँ भोरानाथ द्दौणा राजा टंकनाथ सुता कुमार कर्मनाथ कुमार रूद्र नाथ कुमार रोषनाथ नाहस खौआलसँ जानकीनाथ दौ।। 109/06 वेणीदत्त सुता तस्क र बवूआ पेचिल 277/02 वशमणि ज्योथ. गायादत्ता: खण्ड0बलासँ गोपीनाथ दौ।। 120/05 गोविन्द/सुतो गोपीनाथ: वलियाससँ विद्यानाथ दौ।। 67/05 सोदरपुरसँगोनू द्दौणा गोपीनाथ सुता कृष्णिदत्त नारायणदत्त: गिरिजदत्ता: दरिहरा सँ लक्ष्मीगनाथ दौ।। 73/02 लक्ष्मी्नाथ सुता दिघोसँ मथुरेश सुत रपौखी दौ।। 129/07 चतुर्भूज सुतो भैरवदत्त: वलियाससँ रामचन्द्रस दौ।। 178/02: जजिवाल सँ छिताई दौ।। भेरेवदत्त सुतो नरोत्तम अथुरेशो माण्डरर सँ महादेव दौ।। 84/ महादेव सुता घुसौत सँ हृगकेश दौ। 166/02 हरिहरासँ बूढ़ द्दौणा ठ. मथुरेश सुतो रपौखी शिवनन्दसनो करमहासँ जयकृष्ण दौ।। 111/04/ सोदापुर: सँ चतुर्भूज द्दौणा खोखी सुता लाल उदन 287/3 199/07 परशमणि हिराका करमहासँ मनू सुत गंगेश दौ।। 107/07 ननू प्र. नारायण सुतो गंगेश: दरिहरा सँ निताई दौ (391) 81/10 गोढ़ाई सुतो निताईक: सोदरपुरसॅ रामदेव दौ।। 89/07 खौआलसँ गुदि द्दौणा निताई सुता करमहासँ सदानन्दत दौ।। 79/07 खौआलसँ रामचन्द्र द्दौणा।। 231/07।। गंगेश सुता पण्डुसआसॅ पॉ पशुपति दौ।। 124/07।। बभनियाम सँ भगीरथ द्दौणा तस्क।र बवुआ सुतो जानकीनाथ श्री नाथो 195/09 खण्ड0बला सँ उग्रसिंह सुता कल्यातण सिंह नन्दीस सिंह चेत सिंह प्र. सर्वजीत सिंह : बलियास सँ भवेश सुत दुल्ल ह दौ।। 121/07 दुल्लसह सुता बनमाली किर्तिनाथ अमृतनाथा: करमहासँ भिरवारीसुत रूपदौ।। 48/07 बेलउँचसँ भैया द्दौणा जानकीनाथ सुता बैद्यनाथ 42/05 जगन्नारथ इन्द्र नाथ बद्रीनाथ केदारनाथा: बुधवाल सँ मन्ध न सुत गुदन दौ।। 125/0/11 मनीराम सुतो मनोरंजन: वलियाससँ लक्ष्मीा दौ।। 60/4 श्रीपति सुता डीमडीम लक्ष्मी देव त्रिरीश 54/06 218/07 अलयसँ गोपीनाथ दौ।। 59/08 सतलावाससँ शिरी दौहिम दौ।। लक्ष्मीकदेवसुतो कवि जीवन214/06 सरिसबसॅ नन्दसन दौ।। 145/05 पनिचोभसँ भवेश द्दौणा मनरंजन सुतो मन्धँन ननूको 3/6/08 सोदरपुरसँ भवन दौ।। 117/05।। अपरा भवनसुतो 307/102 चंचल: खौआलसँचेथडू दौ।। 71/04 चेतकर प्र. चेथड सुतो दुल्लेह: फनन्द0ह सॅ सर्वस्वोदाता (त्रय) म.म. रघुनाथ दौ।। 172/09 म.म. सर्वस्वरदाता रघुनाथ सुता म.म. जयकृष्णो दत्त प्र. विषणुदत्त म.म.पा. भवनि पिता. सौंदरपुरसँ बछाई सुत मोहन दौ।। 120/08 करमहासँ रघुनाथ द्दौणा मन्धतन सुतो—जयलाल गुदमो रैयाम सोदरपुर सँ छोटकिनमा दौ।। 183/08 पोगल सुतो चलबलि खगपति सिहौली माण्डलरसँ आनन्दस दौ।। 91/10 पुराखुसुतो नरोत्तम: सरिसबसँ भवनाथ दौ।। 77/08 करमहासँ केशव द्दौणा नरोत्तम सुतो यशोधर: सुरगन सँ राजा रूपनारायण पदाकिन हरिदेव दौ।। 72/08 खौ.भवनाथ द्दौणा
(188) (392) यशोधर सुतो रमानन्दद आनन्दौ अलय सँ बैद्दयनाथ दौ।। लोकनाथ सुत कामदेव सुतो बैद्दयनाथ: सोदरपुरसैशंकर दौ।। बैद्यनाथ सुतो देहरी: दरिहएसँ कानदेव सुत माघव दौ आनन्दय सुतो 219/02 घणेश्वथर: करमहासँ नारायण दौ।। 187/0/0 दरिहरासँ निताई द्दौणा चलबलि 192/05 सुतो छोटकिनमा बच्चूोकौ दरिहरासँ थेघुसुत मनोधरदौ।। 17:/10 म.म. मनोघर सुता बेलउँच सॅ भवनाथ दौ।। 167/02 जजिवाल सँ निताई द्दौण छोटकिनमा सुता गिरधारी 2/2/07 ब्रजविहारी सूच्चे2 कुंजीबिहारी अब्ध विहारीका: नरउन सँ भैया सुत इश्वररदत्त दौ।। 104/10 कविकृष्णच सुतो सुदर्शन: अलयसँ चिन्तानमणि सुत परमानन्दस दौ पवौली सँ गोयाल द्दौणा सुदर्शन सुतो 196/10 सुखनी म.म. भिरिक्यानकौ पुनन्द्ह सॅ पीताम्बीर सृत म.म. त्रिलोचन दौ।। 172/05 म.म. त्रिलोचन सुतो राघव भास्कदरों खौआल सॅ डी. सुत बधाई द्दौणा 227/0 पाली सॅ कमल द्दौणा म.म. भैया सुतो इश्वकरदत्त: बुधवाल सॅ शिवदत्त दौ।। 149/04 शिवदत्त सुता वलियास सँ दत्त राम दौ।। 135/07 दत्तराम सुता पनिपेठ सँ प्रद्यूम्न दौ।। 135/09 प्रद्यूम्नल सुता पण्डु आ सॅ पॉ हरिश्व्र दौ 121/06 सरिसबसँ लक्षमन द्दौणा इश्व7रदत्त सुतो गोविन्दल: करमह सँ छबनू सृत बलह दौ।। 173/02 अपरा छबनू 201/11 सुतो बालह: वलियाससँ बन्धुस दौ।। 171/03 शिरोमणि सुता बन्धुर हृषिकेश मदुपति महिपतिय: सोदरपुरसँ गंगारामदौ।। 149।04 गंगाराम सुता भैरव रमाकान्त गोपीकान्र 222/03 नरहरिय: फनदर सॅ म.म. रामभद्र दौ।। सकराढ़ीसँ श्री कान्र द्दौणा बन्धु सुतो चाणन सोदरपुरसॅ जुड़ासन दौ 81/05 गोपाल सुतो जुड़ाउन छबनूको 215/0 माण्ड्र सँ गतिराम दौ।। 51/0/11 सोदरपुरसँ बछाइ द्दौण जुड़ाउन सुता नरउन सँ प्राणपति दौ।1 123/07 घुसौतॉभगीरथ द्दौण बालह सुतो मोमिक: दरिहरा सँ रोहिणी दौ।। 140/07 रोहिणी सुतो गिदरू प्र. धर्मदत्त झॉउँकौ सोदरपुर सॅ रघुवीर द्दौणा 173/02 पुनन्द1हसॅ इशातनाथडे
(392) गुदन सुता सिमरवाड़ खौआल सँ मूतिनाप सुत अपूछ दौ।। 133/02 भूतिनाथ सुतो अपूछ: घुसौत सॅझौंदू दौ।। 121/06/ पण्डुशआ सँ बोध दोहिय दौ अपूछ सुतो शक्रिनाथ: बुधवाल सॅ दुर्गापति दौ।। 172/0 श्री पति सुतो दुर्गापति: सोदरपुर सँबन्धुत दौ।। 150/08 घनश्याुम सुतो बन्धुदक: पाली सॅ देवी दौ।। 64/08 पुरूषोत्तम सुतो देवीक: एकहरा सॅ बलभद्र दौ।। 42/04 पाली सँ बासुदेव द्दौणा देवी सुता पबौली सँ रमानन्द दौ।। 115/0 वलियास सं शंकर द्दौणा बन्धुब सुतो जीवन: 268/04 दरिहरा सँ माघव दौ।।157/09 माघव सुतो शिवनाथ: जजिवाल सँमेघाकर दौ।। 37/06 हरिपारि सुतोगोविन्दद नाथौ अलयसँ रघुसूत रात दौ कुजौली सँ नाथू द्दौणा गोविन्दत सुता पुरूषोत्तम गदाघर प्र. लोटाई प्र. महेशा: दरिहराह विशो सुत नाने दौ बेलउँच सँ सुवे द्दौणा लोटाई प्र. महेश सुतो बलदेव हरिदेवो माण्डशर सँ हरिकेश दौ।। बनमाली सुत कान्ह सुता गणपति दानकर।। हरिकेश महेश गंगाघरा: सकौनासँ रूददौ।। हरिकेश सुता पालीसँ मुरारि सुत ज्ञान दौ दरिहता सॅ लाखू द्दौणा हरिदेव खुतोमघुसूदन: खौआल सँ शिवपति दौ।। 114/02 पालीसँ गोविन्दस द्दौणा मधुसूदन सुतो हिरूमेघाकरो माण्डलरसॅ गोढ़ाई सुत बावू दौ।। 56/07 सरिसवसँसारा मेघाकर सुता नरउन सँ दामोद दौ।। 162/0/11 श्या म सुतो दामोदर: दरिहरा सँ रामचन्द्रस दौ।। 71/07 सरिसबसं बावू द्दौणा दामोदर सुता सँ पृरिदाश दौ।। 73/06 मति सुतो माघव: पबौली सॅरामदत्त दौ।। 36/07 रामदत्त सुता खौआलसँ अमरू दौ।। 79/07 पालीसॅ हरियाणि द्दौणा बुधवाल साघव सुतो
(189)(394) रामदाश: हिंत्रूक: सँघारू सुतउघेदौ 189 बहेरादीसँ रघुद्दौणा हिंगू सुतो हरियाश: सोदरपुरसँ छोटाई दौ।। 102/0/11 थालीसँ।। यदुनाथ द्दौणा हरिदाश सुता सोदरपुरसॅ शंकरसुत विरेश्वौर दौ।। 171/02 घनेश सुतो शंकर: सतलखासॅ बावू दौ।। शंकरसुतो विरेश्व्र:।। पाली सँ शिरू सुत रूद दौ वल्लियास सँजयदेव द्दौण विरेश्वथर सुतो गंगाराम: 232/03 टुखनी कौ दरिहरासँ बवूनी दौ।।154।।09 बवुनीसुता सोदरपुरसँ पागड़ दौ।। 149/05 बहेराढ़ी सँ वाचापति द्दौणा दुर्गापति सुतानन्द0लाल मुकुन्दद 216/06 जय 288/04 कृष्णाी: सकराढ़ी सँजयप्लव दौ।। 130/04 पबौलीसँ मचलद्दौणा एवम् सिद्धिनाथ:।। ठक्कुजर यदुनन्द न सुता लीलानन्दर बद्रीनाथ रमानन्दँ 191/02 191/03 शिवानन्दय अम्बिकानन्द गिरजा नन्दाय: कुजौली सँगोशॉई दौ।।177/0 गोशांइ सुता पाली सॅ पुरन्द र दौ।। 18/071 पुरन्दनर सुता सोदरपुर सँ छोटकू दौ। 119/051 छोटकू प्र. यगयनाथ सुतो 281/04 रघुवीर रघुनाथो: परनामक 215/06 सदनों करमहासँ नन्द1लाल दौ।। 115/05 महोदार समादत्त सुतो ब्रजलाल 193/06 नन्द0लालो सोदरपुरसॅ हृदय पनाथ दौ।। 10/0/11 खौआल सँ छबन द्दौणा नन्दरलाल सुतो श्या9मि बनलाना कन्हैृया लालो सोदरपुरसँ हृदयनाथ दौ।। 99/03 करमहा सँ म.म. सुबोध द्दौणा ठ. लीलानन्दह सुता डुमरा वुघवाल सँ पद्मनाथ सुत बालमुकुन।। दौ 175/03 अपरा जयनाथ सुतो मोहन: खण्डोबला सॅ बलभद्र सुत विषणुपति दौ।। 23/03 नरउन सँ पोराणिक मनबोध द्दौणा मोहन सुता पदनाथ मोतीप्र. मतिनाथ नकछेदीप्र. धर्मनाथा: खणडबला सँ बावू किर्ति सिंह दौ।। 108/06 बावू किर्ति सिंह सुत्तो बावू गिरधारी सिंह बावू दुर्गादत्त सिंहो नरउनसँ जहलीसुत दुखिया दौ।।
(395) ।। 125/04।। सोदरपुर सँ खौखी द्दौणा पद्मनाथ सुतो बालमुकुन्दउ प्र. नितिनाथ बनमाली प्र. लक्ष्मीूनाथौं सोदरपुर सँ मउज सुत हरिनाथ दौ।। 118/03 हरिनाथ 193/09 सुता बलियाससँ।। मणि सुत सोन दौ।। 126/103 सोन सुतो भैयोक: 204/01 खण्डरबला सँ रत्नेश्व।र सुत इन्द्रेनश्व र दौ।। 176/05।। दरिहरा संशोभाकर द्दौणा बालमुकुन्दस सुता सरिसक सँ शम्भु पति दौ।। 177/03 शम्भु7पति सुतो 01/09 रतिपति मधिपति 01/0/1 नरउन सँ महिनाथ दौ।। 84/07 महिनाथ सुता सोदरपुर संकुंजीबिहारी दौ।। 75/03।। नारायणदत सुतो कुजु बिहारीक: करमहा सॅनारायण दत्त दौ।। 94/08 नारायणदत्त सुता पबौली सँ लाला दौ।। 125/05 कृष्ण पति सुतोलाताक हरिअक सँ बसु देव सुत वाबू दौ।। 88/09।। बावू सुता सोदर पुर सॅलखाई दौ।। 113/05 सकराढ़ी संभर्जून द्दौणा लाला सुता वलियास सँ राम चाण दौ।। 157/03 राय चतुर्भूज ब. 1/0 सुतो बेदयनाथ: गंगौरा बूधवाल सँ पद्मापति दौ।। 95/05 पद्दापति सुता हसौली सोदर 0 बलभद्र दौ।। 130/07 फरहरा बुधवाल सॅ सुधाघर द्दौणा राय बैद्दयनाद सुतो चाण सोदर पीताम्बदर दौ।। 90/08 हरिअम सॅ हृषिकेश द्दौणा राय चाण सुना करमहासॅ सुत भवेश दौ।। 96/08 कुजौली सँकूवि गंगादश द्दौणा कुंजुबिहारी सुतो झत्पुहन बतहनो दरिहरासँ भवनाथ सुत चुम्म8न दौ।। 165/06 खण्डकबला सै उद्योग सिंह द्दौणा एवम् ठ. लालानन्दब विवाह:।। ठ. बद्रीनाथ सुता बुघवाल सॅ भैयो सुत नेनमति दौ।। 20/05 बघरण प्र. वत्से्श्वुर सुतो भैयो प्र. मोदमणि दरिहरा सॅ देवीदत्त दौ।। 185/0/।। देवीदत्तसुता सोदरपुर सँ चित्रघर दौ।। 120/07 करमहा सँ दुखभंजन द्दौणा भैयो सुता ब्रजमणि कृष्णण मणि नेन मणिका बलियास सँ नन्दी0 पति दौ।। 103/05।। रूद्रपति सुतो इन्द्रणपति।।
(190) (396) जागा प्र. यग्यवपति बुधवाल सँ कलानाथ दौ।। 106/07।। सोदरपुरसँ मुरलीधर द्दौणा इन्द्र्पति सुता गणपति बच्चेि प्र. नन्दीौपति गौरीपाते घनपति भूपनिय: खण्ड्बला सॅअनूपनाथ दौ।। 97/02 अनुपनाथ सुता हरिअम सँ रमानाथ दौ।। 125/02 सोदरपुर सँ अर्जून द्दौणा नन्दीसपति सुतोबबेजी प्र. श्रीमति 4 बौलीसँ राजा विजय गोविन्दा सिंह दौ।। 130/04 चन्द्र/पति सुतो रामेश्विर: पालीसँ पालीसँ घोंधे दौ।। 106/061 सोदरपुर सँ कृष्णा नन्दद द्दौणा रामेश्वशर सुतो रूद्रदत्त: करमहा सँ लोचन दौ।। 119/04 सेदरन पुर सँ महिपति द्दौणा रूद्रदत्त सुता भैया रपौखी यग्यशदत्त माण्ड्र सँ घनानन्द दौ।। 107/0/0 घनानन्दद सुता करमहा सँ रामेश्वयर दौ।। 91/06।। पुड़े नरउनसँ कमलाकान्रद्दों भैया सुतो राजा विजय गोविन्द सिंह पालीसं वंशीघर दौ।। 117/06 नरउन सँ रूद्रपति द्दौणा राजा विजय गोविन्दव सिंह सुता 200/08 हरिअमसँ बालहं दौ।। 76/05 सोदरपुर सॅभीवन द्दौणा नेन मनि सुता दहिरासॅ धोंधी दौ।। 175/09।। बाचा प्र. लीलानन्दस प्र. घोंघी जीवानन्दे प्र. चंचलौ बुघवाल सँ कोहन दौ।। 189/0/9 खण्डबलासँ म.कु. वादू किर्ति सिह द्दौणा प्र. चीरानन्द। सुतो गणानन्दह पूर्णानन्दो/ सोदरपुर सँ बहृजन दौ।। 174/06 ठीठर सुतो गिरधर प्र. चवुजन: पाली सॅ।। लक्ष्मी घर दौ।। 117/06 लक्ष्मी/घर सुता किर्तिघर जीवघर मोदघरा: सकराढ़ी सॅ नकटू दौ।। 111/10 पबौलीसँ नन्दी6पति द्दौणा बवूजन सुतो फेकन प्र. ठक्कढन: बुधवाल सँ गौशॉई दौ।। 120/0/11 केशव सुतो गोशांइझलहनो माण्ड्रसँ घनानन्दढ सुत कुलपति दौ।। 107/0/0 पालीसँ घनानन्दब द्दौणा गोशॉइ सुता खौआल संश्रीनाथ दौ।। 175/03 श्री नाथ सुता हरिअम सॅहलघर दौ।। 07/0/ हल्लीी प्र. हलघर सुता फणिघर लक्ष्मीरघर वैया चुन्नी प्र. श्रीघर ज्योि.कल्या ण घरा: पवौली सँ (397) भैरव दत्त दौ।। 179/0 सकराढ़ीसॅ दुल्लुह द्दौणा एवम् ठ. बद्रीनाथ प्रथम विवाह: अपराठ. बद्रीनाथ सुतो पंचानन्द9 मोक्षानन्दो बुघवालसॅ नेनमणि रचैव द्दौणा।। 190/06 दरिघोंघी।। 189/05 ठ. रमानन्दा सुतो दुर्गानन्दे: बुधवाल सँ नेनमणि स्यैवव दौ।। 90/06/ दरिहरासँ घोंघी द्दौणा ठ. दुर्गानन्द् सुता माण्डार सॅ मुकुन्द सुत उँमापतिदौ।। 112/04 कामेश्विर प्र. उँमापति सुता नरउनसॅ तेजनाथ सुत मणिनाथ दौ।। 185/03 पबौलीसॅ तपसी द्दौणा।। 189/05 ठ. शिवानन्दि सुतो रोहिणी नन्दनन प्र. श्या मानन्द1 भैरवौ पाली सँ विदेश्वहर दौ।। 126/0 विदेश्वनर सुतो पुण्यदनाथ: दरिहरा सँ बावू लोकानन्दु दौ।। 83/02 नरउन सँ मनमरन द्दौणा।। ठ. करोहिणी नन्दयन प्र. श्याँमानन्दश सुतो सिहौलि माण्ड झौटूहू सुत जगन्नादथ दौ।। 106/03 यदुनन्दुन सुतो झोंटहूक: वुधवाल सॅ गोशॉइ दौ 190/0/09 खौआल सॅश्री नाथ द्दोणा झोंटहू सुतो जगन्नादथ: सोदरपुरसॅ बचकन दौ।। 184/09 बचकन सुता दरिहरा सॅभीरकर दौ।। 91/08।। करमहा सॅ किशोर दौहित्र दौ।। जगन्ना।थ सुता खण्ड बलासॅं बावू आद्यादत्त सिंह दौ।। 189/0/0 वावू गिरधारी सुतो बावू हर्षधारी सिंह वावू तंत्र घारी सिंहो वुधवालसँ कृष्णंदत्त सुत बद्रीनाथ दौ।। 184/10 बद्रीनाथ सुता सरिसब सॅ गणपति दौ।। 104/0/ पॉ लक्ष्मीतपति सुतो घरमरण मोहनों दारे हरासँ म.म. बन्धु0 दौ।। 98/08 सोदरपुर सॅं घनश्यांम दौहिन दौ।। घरभरण सुतो गणपति हेमपति इरिअम सॅ म.म. शचल दौ।। 119/06 दरिहरानन्दश द्दौणा गणपति सुतो श्रीपति कंटू कौ पालीसॅ ठॅड.नि दौ।। 182/0/ (191) (398) ठेड.नि प्र. धर्मनाथ सुतो चण्डे9श्वोर प्र. 283/07 प्र. ललीतनाथ दुखरण प्र. 213/10 मणिनाथ पुरन्दिरा: 193/08 नरउन सॅ लक्ष्मी नाथ दौ।। 117/02 पालीसॅ जगन्नाुथ द्दौणा बाबू आद्यादत्त सिंह सुतो।। बावू बैद्यनाथ सिंह माण्ड/र सॅ बीकल दौ।। 112/02 हिराई सुतो शम्भुआनाथ थोथी प्र. भवानीदत्तो पबौलि सॅ चन्द्रबपति दौ।। 112/10।। करमहासँ दामोदर द्दौणा थो थीप्र. भवानीदत्त सुतो दुल्लतह 280/06 बालह मोहन गोविन्द। वैया. गिरधारी वैदिक गोशाडका: 197/04 करमहा सँ छोटी दौ।। 128/08 अपरा कृष्णोदेव सुता सदानन्दो रमानन्द9 उँमानन्दाह।। कुलौली सॅ गोपीनाथ दौ।। 98/03 सरिसब सँ गोपीनाथ द्दौणा सदानन्दर सुतो चतुर्भूज खौआल सँ सोंदू सुत रामचन्द्रग दौ सोदरपुरसँ कामदेव द्दौणा।। चतुर्भूज सुतो विघ्नेुश: माण्डचरसँ पद्मापति दौ।। 0 उघे सुत चिकू सुतो पद्दापति करमहासॅ थेंघ दौ।। पद्मापति सुता एकहरासॅ राघवसुत राजीव दौ।।128/02 राम सुवो राघव: सतलरवासॅ कुसयति दौ।। राघव सुतो राजीव खोआल सँ राम दौ।। राजीव सुतो हरे राम: बुधवाल सँ रूद सुत छाटाई दौ।।137/04 माण्ड रसॅ हरिसह विघ्नेिश सुतो छोटी रति कौ सरिसब सँ चन्द्रधपति दौ।। 179/0/0 चन्द्रदपति सुता दरिहरा सँ नारायण द्दौणा 180/06 अपरा छोटी सुता एकहरा सँ सदाशीद दौ।। 148/0/ भगीरथ सुतो सदाशिव: सकराढ़ी सँ जगदीश दौ।। 187/08 जगदीश 302/04 सुतो चिन्ताशमणि महादेवो कुजौलीसँ मंगाई दौ सकराढ़ी सं मथुरा द्दौणा सदाशिव सुता बुधवालसॅ फकीर दौ।। 163/02 सरिसब सँचतुर्भूज द्दौणा वैदिक गिरधारी सुतो विकल प्र. श्रीकृष्ण : सोदरपुर सँ रतिनाथ दौ।। 123/0/ रतिनाथ् सुतो खत्रनाथ:। दरिहरासँ गरीबानन्दप दौ।। 175/08 इरिअमल म.म.सचॉल द्दौणा बीकलप्र. श्री कृष्ण। सुता सूर्यमणि परमानन्दस वैया. श्याममानन्दम तुसानन्दा : खण्ड बलासँ महेश्वररसुत (399) श्री कृष्णम दौ।। 121/06 ठ. श्री कृष्णृ सुता नरउन सॅपुष्प नाथ सुत मुनि दौ।।113/08 करमहासॅ जलघंर द्दौणा 189/05।। ठ.अम्बिकानाद सुतो। आशानन्दस: हरिअम सॅ बघरण सुत मघुसूदन दौ।। 124/0 अपरा बघरण सुता ठक्करन मनमोहन 06/03/ उ.टी मधुसूदना सरिसबसॅ हर्खी दौ।। 109/03 गणेश।।2/2/0 सुतो हर्खीक: पालीसॅ जयानन्दा दौ।। 94/06 जयानन्द सुता बौघा नन्द। किशोरानन्दस सदानन्दाप 197/02 एकहरासॅ म.म. ववुरैय दौ।। 134/09 म.म. बकरैया सुतो।। दुलरेया 204/07 वैया. रामचन्द्रस म.म. 274/05 गंगेश जयकान्ता1: सोदरपुर सँ घीरेश्वोर दौ।। 121/0/ घीरेश्व र सुता दरिहरा सँ भिरवारी दौ।। 69/08 नारायण सुतो भिखारीक: सरिसब सॅ परशुराम दौ।1 122202 रउन सँ गौरीनाथ द्दौणा भिखारी सुतो ज्योो. तुलाकृष्णम: सोदरपुर सँ देवकृष्णर दौ।। 172/06 देवकृष्णख सुतो हृदय नन्दमन: बलियाससॅ भगीरथ दौ।। 94/09 गंगोलीसॅ लक्ष्मीगकांत द्दौणा हरर्वी सुतो अच्यु तानन्दद: घुसौत सॅ पॉ रूपनाथ दौ।। 126/04 ठ. महिघर सुता पॉंरूपनाथ।। पॉं तिलकेश्वतर पॉ मुनिका: 03/0/02 पण्डुूआ सँ पॉं मनसुख दौ।। 124/08।। पॉं मनसुख सुतो 210/08 पतिलभद्र त्व च्छीथ कौ बुधवाल सँ भैयन दौ।। 114/03 दरिहरा सँ घराघर द्दौणा पॉं 307/08 रूपनाथ सुतोपॉं प्रयाम्न प्र. मोदनाथ: खण्ड बला सँ मोहन सिंह दौ।। 177/05 मोहन सिंह सुतो किशोर सिंह मुकुन्दर सिंहो 197/08 पालीसँ फकीरसुतबाछ दौ।। 94/09 94/05 फकीर सुतोबाछ: मॉण्ड रसँ चेथड़ू दौ।। 174/09 करमहासँ शिवदत्त द्दौणा बाछ सुता चक्रपाणि गोधन हर्वमणिय: माण्ड रसँ वंशीघर दौ।। 107/07 भवदेव सुतो नरपति वंशीघरो हरिअम सँ हेतन सुत अभिरूद्ध दौ सोदरपुर सँ पुछरी द्दौणा सुताकरमहासँ उँमानन्दर दौ।। 186/06 सोदरपुरसँ रघुराम द्दौणा।। (192) (400) वैया. मघुसूदन सुता बुद्धिनाथ यशोनाथ जगयनाथप्र. महेश उमरू नाथ प्र. उमेशा: दरिाहरासँ चंचल दौ।। 190/06 चंचल सुता गोपीनन्दहन प्र.।। कृत्यामनन्द यटानन्दूँ भैरवानन्दि।: नरउन सँ जगन्नाजथ दौ।। 106/05 एकनाथ सुतो बैद्यनाथ जगन्नाणथो पाली सँ लक्ष्मीहदत्त दौ।। 107/09 142 माण्ड0रसॅ कुलयति द्दौणा जगन्नादथ सुता शोभनाथ भीमनाथ रेवतीनाथ खड्गनाथा नित्युनाथा: 204/02 खण्डडबला सँ महेश्व्र दौ। 112/06 माण्डथरसँ श्याामूंह।। 189/05 उ. गिरजानन्दक सुतो गंगानन्दय इन्द्र नन्दल मदनानुन्दाम दरिहरासँ मोक्षानन्दय दौ।। 183/02 मोक्षानन्द6 सुता करमहासॅ गोवर्द्धन दौ।।177/05 गोवर्द्धन सुता रेवतीनाथ दौ पदीनाथ ब्रजनाथ विन्य्142नाथा रामनाथी सादरपुर सँ बावूलाल दौ।। 188/02 अपरा चलबप्ति 196/03 सुतो बावू नाथ: हरिहरासँ शिवदत्त दौ।। 139/08 सरिसब सँ महादेव द्दौणा बावू नाथ सुता वावूलाल दुखरण हरिका: घुसौतसँ महिघर दौ।। 192/06 पण्डु2आ सँ पॉ मनसुख द्दौणा बावू लाल सुतो मुट्टी।। मुरारी हरिअम सँ लान्हाद दौ।। 74/09।। दुल्लह सुतो 274/07 तान्हााक: पण्डुअआसँ बौध दौ।। 121/09 सरिसबसँ चाण द्दौणा लान्हा। सुता बवुचन शंकर मद्ध सदाशिवा दरिहरासॅ विणुदत्त दौ।1 177/08 सरिसब सँ चाण द्दौणा उ. गंगानन्दक सुता नरउनसॅ सीतानाथ दौ।। 184/06 सीता साथ सुता।। हरिअम सँ जयदेव दौ।। 119/08 यदुनाथ सुता आनन्दा गोविन्द8 244/08 हरिदेव सुखदेव जय देवा: दरिहरा सँननू दौ।। 184/02 यग्यदनारायण सुतोविद्यानाथ: नरउनसँ लक्ष्मीजनाथ दौ।। 101/08 खण्डयबला सँ मणिनाथ द्दौणा विद्यानाथ सुतो ननूक: पालीसँ ठेडानिदौ।। 191/0 नरउन सँ लक्ष्मी।नाथ द्दौणा ननू सुतो घुरघुर प्र. तोषनाथ चंचलो 115/07 (401) सोदरपुरसँ जीवघर दौ।। 120/07।। जीवघर सुतो नेनाक: 213/08 हरिअमसॅ हर्षमणि दौ।। 123/03 सोदरपुर सँ भीखन द्दौणा 213/06 जयदेव सुता वलियास सँ देवपति सुत लेशपतिदं 190/0/ गणपति सुतो देवपति मनमोहनी बुधवाल सँ विद्यानाथ दौ।। 125/03 नरउनसँ लक्ष्मी0दत्त द्दौणा देवपति सुतो लोकपति 205/08 लेशपति नरउनसँ गदापाणि दौ।। 174/03 गदापणि सुता राधानाथ 214/0 सिद्धिनाथ रविनाथा: पाली सँ परिवया दौ।। 18106 खौआल सैबनी दौहित्र दौ लेशपति सुतो रघुनाथ शिवनाथौ करमहासॅ लान्हिसुत पीताम्बौर दौ।। 122/03 अपरा पीताम्बनर सुता दिगउन्ध सोदर पुर सँ प्रितिनाथ दौ।। 99/03 अपरा हृदयनाथ सुतो सदानन्दप: पालीसँ मोदनाथ दौ।। 113/0 दरिहरासँ सनफूल द्दौणा सदानन्द सुतो प्रितिनाथ नेना प्र. शिवनन्दानो करमहरसँ ब्रजलाल।। 189/07 ब्रज लाल सुतो मुनि बानूकी सोदरपुर सँ श्री नाथ दौ।। 83/10 दरिहरासॅ केशव द्दौणा प्रितिनाथ सुता बलभद्र राममद्र वीरभद्रा: पालीसँ श्री नाथ दौ।1 106/04 श्री नाथ सुतो 195/05 वावूनन्दँन प्र. बैद्दयनाथ: खण्ड1बला सॅ महाराज रूद्रसिंह दौ।। 183/07 महाराज रूद्र सिंह सुतो वावूजर्नादन: सिंह: 143 खौआलसँबनी दौ।1 124/02 नरउनसँ भवनाथ द्दौणा 182/05 उ. हरिनन्दहन सुता बुधवाल सँपरशमणि सुत गिरधारी दौ।। 120/0/ गिरधारी सुतो रघुनन्द न: खण्डबलासॅ साघु दौ।। 126/02/ बलियास सँ मणि द्दौणा 182/65 ठ. श्रीनन्ददन सुतो आनन्द महादेव 195/05 परमानन्दा : हरिअम सँ।। बावू लोकनाथ दौ।। 119/08 सोदरपुरसँ गिरधारी द्दौणा उ. आनन्दन सुतो दिव्या नन्दस काशीनाथो माण्डदर सॅ मन्नूँ दौ।। 106/07 206/06 मत्नू सुता खण्डदबला सँ 6. छक्कबन दौ
(193) (402) ।। 99/05 करमहा सॅ जात्पानदत्त द्दौणा ठ. दिव्याोनन्दन सुतो हरि माघव: 193 पालीसँ जगद्धर दौ।। 123/0/ सोदरपुर सॅ जयनाथ द्दौणा ठ. हरिमाघव सुतो नरउनसँ।। ब्रद्रीनाथ सुत बसभद्र दौ।। 185/02 टेकनाथ सुतो लोकनाथ: सोदरपुरसॅ भीखन दौ।। 90/06 भीखन सुतो महिपति चन्द्र पति माण्डुरसँ बटूकनाथ दौ।। 14/08 बटुकनाथ सुतो पॉ रघुनाथ: सरिसब सॅ हिरेश्वतर दौ।। 134/07 एकहरासॅ म.म. ज्योर. गुणीश्व र द्दौणा लोकनाथ सुतो बद्रीनाथ: हरिअमसँ हर्षमणि सुत बछरण दौ।। 24/0/ सोदरपुरसँ बचवुन द्दौणा बद्रीनाथ सुता बलदेव गोपाल बलभद्रा: खण्ड बला सँ तारानाथ दौ।। 181/03 उ. धर्मनाथ सुता महिनाथ झलहन प्र. लेखनाथ: 198/0/0 योगनाथा: घुसौत सॅ कलानाथ दौ।। 177/05 सकराढ़ी सँ गरीब दौरित्र दौ।। उ. झुलहन प्र. लेखनाथ सुतो तारानाथ: दरिहरासँ घननाथ दौ।। 126/0/ सोदरपुरसँ जयदत्त द्दौणा ठ. तारानाथ सुता रमानाथ कालीनाथ।। श्री नाथ पोषनाथा नरउनसँ गापाणि दौ।। 193/03 पालीसँ परिवया द्दौणा ठ. बलभद्र सुता पालीसॅ केदार नाथ दौ।। 191/0 पुरन्दजर सुतो केदार ऋद्धिनाथौ खण्डसबला सॅ उ. भगीरथ दौ।। 108/05 करमहासँ महेशदत्त द्दौणा केदार नाथ सुतो ऋषेौश्व र: सकरादीसँ हर्षनाथ दौ।। 117/05 बरजा सुतो बल्भमद्र प्र. बद्रीनाथ बैया. हर्षनाथो सोदरपुरसँ हरिनाथ दौ।। 190/0 अपरा हरिनाथ सुता खौआसँ हेमनाथ दौ।। 134/06 सरिसबसं हिरेश्वडर द्दौणा म.म. बैया. हर्षनाथ सुतो बैयाऋद्धिनाथ सिद्धिनाथो खण्डिबला सँ श्या्मनाथ सुत महेश्व र दौ।1 112/06 माण्डुरसँ श्या म् दौहित्र दौणा।।
(403) उ.काशीनाथ सुता खौआल सँ तीर्थनाथ दौ।1 175/03 झोटन प्र. काशीनाथ सुता वंश बिहारी गोपानाथ रघुनाथा: करमहा सँ मित्रनाथ दौ।। 116/05 मित्रनाथ सुता सोदरपुर सँ श्री नाथ दौ।। 183/10 दरिहरा सॅ केशव द्दौणा गोपीनाथ सुता लज्जा0नाथ तीर्थनाथ प्र. तिलकनाथ।। लेखनाथा: सोदरपुर सँ लक्ष्मीकदत्त दौ।। 113/10 लक्ष्मीनदत्त सुतो 246/8 हरेखीक: पालीसँ पखिया दौ।। 181/06 परिवया सुतो बिहारी लाल: खण्डमबला सँ केशवनाथ दौ।। 181/03 केशव प्र. मित्रनाथ सुतो गोपीनाथ: नरउन सँ गोकुल नाथ दौ।। 112/05 माण्ड3र सँ दुर्गादत्त द्दौणा तीर्थनाथ सुता सोदरपुर सँ रघुनन्द न दौ।। 104/09 दुल्ल5ह प्र. पुण्यागनन्द सुतो मन्ध न: नरउनसँ अमिराम दौ।। 99/02 घनानन्द सुतो अभिएम: हरिअमसँ दौ।। 82/0 खण्ड्बला सँ शिवराम द्दौणा अभिराम सुता दरिहरा सँ भवदत्त दौ।। 104/08 भवदत्त सुता करमहासँ फकीर दौ।। 111/0/ बलियास सँ जीवेश्व।र द्दौणा मन्ध न सुतो रघुनन्द0न: करमहा सँ बवूजन दौ।। 91/08 म.म. जगद्धर सुतो 210/07 धर्मदत्त बवूजन प्र. प्रभु दार्से दरिहरसँ।। किर्तिनाथ द्दौणा।। 103/03 पाली सँ लक्ष्मीमनाथ द्दौणा बबुजन सुता नरउन सँ चित्रनाथ दौ।। दरिहरा सँ चिन्ता मणि द्दौणा रघुनन्दमन सुता मयानन्दसन। देवकीनन्ददन महावीर मोती नन्दकना करमहासँ राधानाथ दौ।। 176/08 विश्वतनाथ सुतो राघानाथ शोभनाथौ खण्डदबलासँ सोन दौ।। 176/08 खौआल सॅबनी द्दौणा राधानाथ सुता खण्डाबला सँ महाराज सँ महेश्वर सिंह दौ।। 183/07 महाराज महेश्वरर सिंह सुतो समस्तेँघादि महाराजा।। धिराज लक्ष्मे।श्व7र सिंह विविधेत्या4दि मटराज रमेश्ववर सिंहौ कुजौलीसँ टीकानाथ दौ।1 177/09 टीकानाथ सुतो फकीर: नरउनसँ जीवन दौ।। (194) (404) 174/02 जीवपाणि प्र. जीवन सुता 276/07 योगनाथ 217/06 बजगदबन्धुे गोपीनाथ ब्रजनाथा: पाली सँ हेमनाथ दौ।। 106/04 सोदरणकाशी 145 उ. महादेव सुता मित्रानन्दज प्र. बद्रीना बलदवे प्र. बटूक नाथ लोचन प्र. शिवनाथा: माण्डरर सँ मन्नूस दौ।।193/0 खण्डनबलासँ ठ. मित्रानन्द सुतो अमरनाथ: पाली सॅमझगद्धर दौ।। 123/0/ सोदरपुरसँ जयनाथ द्दौणा ठ. बलदेव सुता करमहा सँ पूर्णा नन्दा दौ।। छोटा सुतो नित्या2नन्दम: माण्ड र सँ कन्हा ई दौ।। 116/0/2 नरउन सँ मित्रनाथा द्दौणा निसानन्दो प्र. घुरघुर सुतो पूर्णानन्दण शोमान्दोद सरिस. श्रीपति दौ।। 191/10 श्रीपति सुतो राशयति माण्डदर सँ खड़गी दौ।। 105/05 बगडू सुता जलघर जीवघर मौहना: 199/06 करमहासँ चन्द्रँ देव दौ।।104 दरिहरा सँ सोन द्दौणा जलघर सुता खड़गी गंगाघर श्रीघरा: खण्ड0ब्लारसॅ कोटीश्वदर दौ।। 176/02 पालीसं खूनी द्दौणा खड़गी सुतो भगीरथ: भोलानाथ दौ।। 184/10 वलियाससँ निधि द्दौणा पूर्वानन्द सुता सोदरपुर सॅवीरभद्ध दौ।।193/06 वीरभद्र सुतर सुभद्र नाथ विश्व नाथा वुधवाल सँ वाथा सुत गणीश्वधर दौ।। 177/02 दरिहरा सँ भगमरग द्दौणा ठ. लोचन प्र. शिवनाथ सुता माण्डारसॅ हरिला: 122/08 ववूजन सुतो अभयनाथ हर्षनाथौ खण्ड बला सँ बावू प्रजापति सिंह दौ।। 115/08 बावू प्रजापति सिंह सुतो बावू श्री पत्युर प नामक कन्हैवया रि नरउनसँ जहलीसुत ऋषि दौ।। 184/04 माण्डहर सँ चाज द्दौणा अभयनाथ सुतो हरिनाथ: सोदरपुर सॅ मनहर दौ।1 123/03 हरिअमसँ हर्षमणि द्दौणा हरिन।।
(905) 146 सुता पबौली सँ मोती नन्दरन दौ।1 182/09 हृदयमणि सुतो मोतीनन्दिन: माण्डार सँ भवनाथ दौ।। 114/0 पॉ भवनाथ सु पॉ 283/08 गोविन्दर पॉ 04/07 उमी शिवदत्त पॉ विघुदत्ता: सरिसव सॅश्यावमनथ दौ।। 83/09 पॉ घनश्याोम सुतो श्यानमनाथ: बलियास सॅ दुर्गानाथ दौ।। 69/08 हेमाडद द्दौणा श्या मनाथ सुतो अमृतनाथ: खौआल सँ धन प्र. रूद्रदत्त दौणा। 09/04 धन प्र. रूद्रदत्त सुता हरदत्त 278/0 जयदत्त नारायणदत्ता: 221/05 करमहासॅ उँमान 124/05 पण्डुनआसॅ हषापति द्दौणा 284/07 मोती नन्दनन सुता नरउनसँ वंशीनाथ दौ।1 184/07 वंशीनाथ सुतो मार्कण्डे्य 204 बलदेवो सोदरपुर सँवेद 176/04 हरिअम सँ बालह द्दौणा।। 193/09 उ. परमानन्द सुतो बैया. जीवानन्दँ कुलानन्दो् पालीसँ जगन्नासथ दौ।। 193/07 अपरा श्री नाथ सुताजग। कुमुदनाथ भेषनाथा: सोदरपुरसँ ठीठर प्र. शक्रनाथ दौ।। 184/08 अपराशक्रनाथ सुता नरउन सँ मित्रनाथ दौ।। 116/07 हरिअमसँ दुल्लाह द्दौणा ज: सुता खण्डपबलासँ बावू वंशघारी सिंह दौ।। 174/0/ बावू वंशघारी सिंह सुतो बावू ब्रजनन्द/न सिंह: माण्डर सँ खड़गी दौ।। 194/06 नरउनसँ नाथ द्दौणा बैया उ. जीवानन्द1 सुता पालीसँ जगद्धदर दौ।। 123/0/11 सोदरपुरर सँ जयनाथ द्दौणा अपरा ठ. जीवानन्द1 सुता सँसूर्यनाथ द्दौणा।। 188/02 श्रीनाथ सुता चन्द्र्नाथ सूर्यनाथ तारानाथा: सरिसबसँ जनार्दन दौ।। 124/06 पॉं कमलनपयन सुतो रोहिणीदत्त प्र. हिमरण घरण माण्डसरसँ हियन दौ।। 114/0 बुधवाल सँ भैयन द्दौणा पॉं घरमरण सुतो जनार्दन 314/012 बनमालीकौ बुधवाल सँ श्रीपति दौ।। 124/06 ठीठर प्र. श्रीपति सु।। द्वारिकानाथ: बेलउँचसँ रमन दौ।। 148/03 करमहासँ रूद्र द्दौणा जनार्दन सुतो लक्ष्मीतकांत 268/08 उँमाकान्तोम परि.वुघवालसँ नन्दसलाल दौ।। 189/04।। नन्द।ला
(195) (406) सुता बावूजी प्र.नरसिंह कन्टीर भूपी चितरूका खण्डदबला सँ बालह सुत श्या4म दौ।1 124/03 दुखमंजन सुतो बालह: करमहासँ धर्मेश्व र दौ।। 87/07 धर्मेश्वर सुतो रूपनाथ छोटकनि सकराढ़ी सँ बायुदेव दौ।। 182/08 कमला कान्त् सुतो 280/02 बायुदेव: हरिअमसँ परमानन्दँ सुतयदेवा दौ माजडर सँ दमाईं वासुदेव सुतो जीवनाथ: सोदरपुरसॅ गरीब दौ।। 130/05 बामनात योगीश्व र सुत गंगाघर सुतो गरीब: माण्ड रसँ कृष्णास नन्दअ दौ।।। गरीब सुता रत्ना5कर बावू 221/07 रोझना: नरउन सँ रघुदेव सुत महादेव दौ।। 122/0 माण्डतर सँ मणि द्दौणा बालह सुतो श्यासम नेननो 288/03 वलियास सँ राय वगिश दौ।। 112/0/ राय वागीश सुतो चिन्तायमणि पबौली सँ मित्रकर दौ।। 126/07 कमल सुतो मित्रकर कृष्णाेनन्दो हरिअमसँ सुत कृष्णाानंद दौ वलिवरतिनाथ द्दौणा मित्रकर सुतो काशीनाथ: माण्डदसँ महिपति दौ।1 62/07 सोदरपुरसँ बनमाली द्दौणा श्यारम सुतो 198/06 सुगाक: सतलखासँ मथुरानाथ दौ।। 171/0 रमापति सुतो।। मानीक चाणो, बुधवाल सँ सदानन्दु सुत बाली दौ सोदरपुरसॅ कुमर द्दौणा मानीक सुतो मथुरानाथ: करमहासँ परशुरामसुत भैयादौ।। 122/02 भैया सुता बलियाससँ भगीरथ दौ।। 119/09 गंगोत्री सँ लक्ष्मीभकांत द्दौणा नथुरानाथ सुतो नित्याुनन्दस: हरि अमसँ रमानाथ दौ।। 74/06 पति सुतो भैया खतलखा सँमहाई दौ।। 129/05 एकहरा सँमुकुन्द द्दौणा भैया सुता रमानाथ गोड.न कलानाथा राजा का: दरिहरासँ माढ़न दौ।। 146/07 माढ़न सुतो वर्शीघर किर्तिघरो सोदरपुरसँ धरनी दौ।। 149/08 माण्ड4र सँ वदनी द्दौणा रमानाथ सुताे भवानीदत्त: दरिहरा सँ रोहिणी सँ रोहिणी दौ।। 188/9 अपरा रोहिणी सुतो।। 148 मुशे प्र. शितला दत्त बाच कौ समौली पालीसॅ भवेशसुत जीवकर्णभिश्र (पॉंजि) दौ।। 24/04/ अपरा हरिकर सुतो बाढ़त: खौआल सँ शशिघर दौ।। (407) बाढ़नसुतो अमरूक: एकहरासँ भवेश्व र दौ।। 28/06 जालयसँ महिघ द्दौणा अमरू सुतो महाईक: माण्ड र सँ रति सुत मांग दौ पालीसँ रवि द्दौणा महाईसुता मधुरकविमाघव यद्दू मणिनाथा: 252/03 सरिसबसँ धूमी सुत बाढू दौ नभानियाम सँ बसाउन द्दौणा मधुर कवित माघव सुता कृष्णा देव हरिदेव शिवदेवा 326/06 सोदरपुर सँ गोपाल दौ।। 62/02 गोपाल सुता पालीसँ कानहसुत रूद्रपति दौ सोदरपुरसँ रघु द्दौणा कृष्ण देव सुत मुकुन्दद सुता यद्दू रामनाथ सुन्हुरा: दरिस्तदरॉ रूचि दौ।। सुन्दुर सुतो महेश भवेशों सोदरपुर सँ यदुनन्द्न सुत पीताम्बरर दौ।1 121/03 पाली सँ माघव द्दौणा भवेश सुतोजीवकर्ण: पबौलीसं बतभद्र।। सुत महेश दौ।। 55/05 बलभद्र सुतो महेश: दरिहरासं राम कृष्णे दौ।1 165/02 सोदरपुरसं कामदेव द्दौणा महेश सुता बेलउँचसँ घनश्यााम दौ।। 152/05 मुनि प्र. घनश्यादमदाश सुनो 299207 नन्दलन3 पालीसँ श्री नाथ स्रत श्री राम दौ।। 69/04 खण्ड1बला सँ गौरीनाथ द्दौणा जीवक सुतो रूद्रदत्त 336/3 भैरवदत्तो खौआलसँ धर्मईसुत कुने दौ।। 148/04 महिपति सुतो धर्माईक/ नरउनसॅ यदुनाथ दौ सोदरपुरसॅ विष्णुु द्दौणा धर्माई सुते कुने वदनो सोदरपुरसँ कुनाई सुत रघुनाथ दौ।। 175/0/ खौ. कमल द्दौणा कुनेसुता करमहासँ योगी सुत सदाय दौ।। 66/04/ श्री रामसुतो बावूक: गंगोली सँ लक्ष्मीतपति सुत भगीरथ दौ दरिहरा सँ मण्डान द्दौणा 336/05 बावूसुतो योगिक: माण्डरर सँ जगदानन्द सुत राम दौ खण्डनबला सँ अभिनन्दौन द्दौणा योगी सुतो सदायक: जजिवाल सँ यदुनाथ दौ अफेल सुत रमनी सूतो श्री राम ब्रह्मपुरक।। निधि दौ।। श्री राम सुतो यदुनाथ टकबाल सँ शिव दौ।। यदुनाथ सुताकरमटाऍं प्राणयति सुत दौ सरिसव सँ मणि द्दौणा सदाय सुता सकराढ़ी सँ दामोदर दे
(196) (408) जसाईसुत जादू सुतो बैद्यनाथ: सरिसवसॅ भीखू दौ।। बैद्दयनाथ सुतो दामोदर: पबौलीसँ गोदसुत रमापति दौ।। 82/06/ रमापति सुता वृधवाल सँ बैद्यनाथ दौ।। माण्डिरसँ बसाउन द्दौणा दामोदर सुता बेलउँच सँ रतिनाथ सुत गंगेश सुत मोहन दौ।1 टकवाल सँ परमानन्दद सुत कृष्णाउनन्दस द्दौणा। सूर्यनाथ सुता सोदरपुर सँ नेहनाथ दौ।। 192/05 चलबलि सुता 248/18 307/09 मोहन 307/09 कन्हाहई बच्चू9का नरउन सँ सुखनी दौ।। 188/04 सुखनी सुता धर्मदत्त चेता हंसदत्त हृदयदत्ता: खण्ड बला सै भरि नाथ दौ।। 121/08 करमहासँ देवानन्दत द्दौणा बच्चुत सुतो विश्वणनाथ आदिनाथौ पाली संभवानी।। दत्त सुत अर्जून दौ।। 181/08 भवानीदत्त 243/04 सुता फाल्गु नन 274/04 अर्जून लौटना 214/06 सोदरपुरसँ वहुड़ी सुत रत्नपति दौ।। 113/09 रत्नपति सुता वुघवाल सँ परमानन्द/ सुत राम दौ।। 173/07 दरिहरा सँ थेघु द्दौणा अर्जून सुता विद्यानिधि मत्रू लाला 269/05 सोदरपुर सँ भवन दौ।। 188/07 खौआलसँ चेथडू द्दौणा विश्वूनाथ बुतो खगनाथ मेहनाथौ घुसौत सँ तारापति दौ।1 121/06 तारापति सुता खौआल सँबछरण दौ।। 114/03 विष्णुपपति मुतो मदिनारायणे पालीसँ हरिनन्दसन दौ।। 120/06 सोदरपुर सँ चतुर्भूज द्दौणा मोहनारायण सुता दत्त प्र. मेरे वदत्त बदरण ननू 275/02 बवुरैयाका हरिअमसँ पद्दनाम दौ।। 140/04 मोहन सुतो हृदय राम: पबौली सं यदुनाथ सुत वीमाम्प र दौ वलियास सँ बन्दी4 द्दौणा हृदयराम सुतो पद्मनाम: सरिसब सँ मनहर दौ।। 71/0 मनहर सुता बुधवाल सँ ऋषि दौं पबौली सँ बावू द्दौणा पद्दनाम सुता सोदरपुर सँ देवकृष्ण दौ।। 166/0 देवकृष्ण सुता कुजौलीसँ जगन्नापथ दौ।।
(409) 112/04 पास पाली सँ यशोघर द्दौणा बछरण सुता नित्या नन्दँ मुश प्र. उग्रानन्द। इन्द्राणनन्दाा बहेराढ़ी सँ कमलपाणि दौ।। 167/02 बेलउँच सँविधानाथ द्दौणा नेहनाथ।। सुता पालीसँ रघुनन्दरन दौ।। 192/03 सदानन्द सुतो रघुनन्दउन : पण्डुसआ सॅ लक्ष्मी् दौ।। 192/07 पॉं लच्छी1 सुतो सुगाक: सरिसब सँ चन्द्रउमणि दौ।। 73/;5 चन्द्र्मणि सुतो हर्षमणि भूलना 262/08 पाली सँ उँमादत्त दौ।। 178।07 सरिसब सँ भोला द्दौणा रघुनन्द न सुता झपटी प्र. 2900/05 दिनानन्दब चुम्मे प्र. सुंचुन मदनानान्दार: माण्ड र।। ठीइर दौ।। 166/;/0 रामघन सुतो रघुनाथ ठीठरै 315/0/10 रामधन सुतो रघुनाथ ठीठरौ सोदरपुर सँ हरपित दौ।। 100/0/ बासुदेव सुता भेया हरपति थोथरी प्र. 242/08 प्र. रघुपतिय: नरउनसँ बन्धुब सुत भिखि दौ।। 139/06 खौआलसँ सोनी द्दौणा हरेपति सुतो जयपति 205/08 पण्डुरआसॅ योगी दौ।। 121/07 पॉं योगी सुतो दिनाजयनाथौ हरिअमसँ प्रान्ना2थ दौ।। 139/58 दरिहरा सँ शिवदत्त द्दौणा ठीठर सुता जय किशोर 285/0/0 ठक्कू8 प्र. नवलकिशोर दुर्गानन्दात: खण्डोबला सँ जीरक्खिन दौ।। 166/03 वैया. थोथी सुतो जीरक्खठन: करमहा सॅ कलानाथ दौ।। 122/03।। सरिसबसँ बलभद्र द्दौणा जीरखन सुता पालीसँ हिभरण दौ।। 181/08 देवनाथ सुतो हिभरण गोपालो सोदरपुरसँ नन्दी श्व र दौ।। 177/04 बलियाससॅहरिनाथ द्दौणा हिभरण सुतो बनुएक: रैयामसोदरपुरसँ बावूनाथ दौ।। 192/06 घुसौत सँ ठ. महिघर द्दौणा एवम् ठ. वैया. जीवानन्दर द्वितीयो विवाह:।। ठ. कुलानन्दत सुता करमहा संकन्टीदर दौ।। 194/10 राधानाथ सुतो कन्टीतर प्र. रेवतीनाथ: वलियाससँ घनपति दौ।। 190/01/।। घनपति सुता करमहा सॅ जाल्पाैदत्त दौ।। 99/09 दरिहरासँ चन्द्रा नन्द0 द्दौणा कन्टीुर सुता माण्डयरसँ रघुवर सुत फेकूदौ।। 107/03 पालीसँ हर्षनाथ हौहित्र दौ।।
(194) (410) उ. मोहन प्र. प्रेमनाथ सुता दरिहरासँकिर्तिनाथ दौ।।103/03 पालीसँ लक्ष्मी नाथ द्दौणा उ. धर्मनाथ सुता झलहन प्र. लेखनाथ यीगनाथा 198/0/0 घुसौत सॅ कलानाथ दौ।। 177/04 सकराढ़ी सँ गरीब द्दौणा उ. झलहन प्र. लेखनाथ सुतो तारानाथ: दरिहरासँ धननाथ दौ।। 79/0/ सोदरपुरसॅजयदत्त द्दौणा अपरा ठक्वु र।। झवहन प्र. लेखनाथ सुता हरिअमसँ बैया. मोहन सुत महो सिद्धिनाथ दौ।। 185/09 नरउनसँ वाश्जावनकीनाथ द्दौणा ठ. तारानाथ सुता रमानाथ कालीनाथ श्रीनाथ 198/07 शोभनाथा: 198/07 नरउनसँ गदापणि द्दौणा 193/03 पालीसँ परिवया द्दौणा उ. रमानाथ सुता माण्ड9र सँ थोथी सुत गौशाँई दौ।1 191/03 वैदिक गोशर सुता वुधवालसॅ विद्यामणि सुत चुम्ममन दौ।। 125/07 चुम्मईन सुता दरिहरा सँ गरीबानन्दी सुत चुम्मवन दौ।। 175/09 चुम्म न प्र. दुर्गानन्दस सुता वुधवाल सँजया।। नाथ दौ।। 175/03 दरिहरा सँ भलनाथ द्दौणा अपरा ठक्कुतर रमानाथ सुतो रघुनाथ ऋद्धिनाथो माण्डसरसॅ मोहन सुत बतहा दौ।। 194/05 मोहन सुता बतहा मेघाकर महिघर 280/03 प्र. बच्चेा का: पुघव्रत सँ दुल्लीस सुत शिरोमणि दौ।। 120/0/ शिरोमणि सुता प्या8रे माघव बचकना माण्ड र सँ प्रान्ना4थ दौ।। 213/0 पबौली सँ कवि भोलन द्दौणा बतहा सुतो इन्द्र नाथ चित्रनाथ खण्डरबलासँ देवराज सिंह द्दौणा 192/08 मुकुन्दद सिंह सुता देवराज सिंह बनमाली सिंह पालीसँ मथुरानाथ दौ।। 166/03 मथुरा नाथ सुता रज्जेह वाचा 209/02 तेजनाथ दुखवमोचन पाँगोपाला: पण्डुजआसँ पॉं मनसुख दौ।। 192/07।। वुघवाल सँ भैयन द्दौणा देवराज सिंह सुता जयराज सिंह ब्रजराज सिंह रघुराज सिंह गिराज सिंह विजय राज सिंह बमनियाम साँरूदी दौ।। 139/07 सोदरपुर महेशद दौ।। (411) 197/06 ठ. रघुनाथ सुता करमहासँ पुष्पीौ सुत छत्रनाथ दौ।। पुष्थीद सुतो छत्रनाथ घोघन प्र. चुम्ब नाथो नरउनसँगंगानाथ दौ।। 123/05 गंगानाथ फुद्देसुता कृष्णुजी प्र. 284/03 चेतनाथ विद्यानाथ ऋद्धिनाथ तिलक नाथ केशवनाथा 202/03 सोदरपुर सँ भूवन्थार दौ।। 123/06 माण्डथर सँ गोकुल द्दौणा छत्रनाथ सुता सोदरपुरसँ शिवानन्दर सुत कारी दौ।। 125/0 अपराकारी प्र. कृष्णादनन्द सुता चुम्मवना नन्दत दिनानन्दौ उग्रानन्दा2: खौआल सँ बालह सुत धर्मनाथ दौ।। 175/04 बुधवाल सँ परशमणि द्दौणा 197/06 उ. ऋद्धिनाथ सुतो पशुपतिनाथ: बैगनी अपय सँ राजा कालिकानन्दँ सिंह दौ।। 164/06।। अपरा राजा दुसार सिंह सुतो राजा रूद्रानन्दी सिंह: कुजौली कुलपति दौ।। 58/09 अलय सं महि द्दौणा राजा रूद्रानन्दर सिंह सुता कुमार केशवा नन्दँसिंह कुमार मोदानन्द0 सिंह राजा श्री नन्दणनसिंह: खण्डुबला सँ श्याँम दौ।। 195/06 अपरा श्याहमू सुतो जगद्धर: बेलउँच सॅ रमन दौ।1 148/03 करमहासँ रूद्र द्दौणा राजा श्री नन्दुन सिंह सुतो साहित्या सरोज राजा कमला नन्दज सिंह 242/03 राजा कालिका नार सिंहो सोदरपुर सॅमुरली दौ।। 177/07 घुसौतसँ राम द्दौणा राजा कालिका नन्दह सिंह सुता कुमार अमयानन्दस सिंह प्र. कुमार विजया नन्दम सिंह प्र. कुमार धनानन्दत सिंह प्र. कुमार दिव्यािनन्दस सिंह प्र. कुमार प्रमोदानन्द सिंह प्र. पबौली सॅनाथा सुत बुद्धि दौ।। 30/07 नाथा सुता विश्वानाथ भूलन मोती युद्धि बुद्धिका पण्डु आ सँ केदार सुत ठाकुरदत्त दौ।। 178/02 केदार सुतो ठाकुरदत्त: गंगोली सँ कुमाराम दौ।। 65/02।। कृपाराम सुता अलय सँ पुरन्दधर दौ।। 146/09 209/02
(198) (412) ।। माण्ड/र सँ रतियति द्दौणा ठाकुर दत्त सुता जजिवालसँ मनसुख दौ।1 145/06 माण्ड0र सँ गंगादत्त द्दौणा बुद्धि सुतो 278/03 खड्गनाथ रमानाथौ घुसौत सँ दुर्म्मिल दौ।। 151 127/05 दुर्म्मिल सुता फतुरी 214/0।0 किशोरी अपूछा: दरिहरासँ लक्षमन दौ।। 139/08 गोरीदत्त सुतो लक्षमन बवुएकौ सरिसब सँ प्रान्नािथ दौ।। 146/0/0 प्रान्ना थ सुता 199/07 हृदयनाथ पॉं बचकन बुद्धिनाथ अमृतनाथ जीवनाथ शिवनाथा बलिसास सँ नीलाम्बदर दौ।। 138/08 नीलम्बुर सुतो हिरण:।। पबौली सँ कलरघर दौ।। 130/05 दरिहरासँ कुसपति द्दौणा लक्षमन युतो योगनाथ: सरिसब सँ भवनाथ दौ।। 166/02 भवनाथ सुतो आदिनाथ: 2/0/05 पण्डुबआरूँ नन्दीौश्व2र सुत चाण दौ।1 सुतचाण दौ।।124/08 पॉं चाण सुतो विश्वंनाथ: 311/04 पबौली सँ जीवकणी सुतबवनू दौ।। 172/04 ज्यो . बवनू सुता हरिअम सँ यदुनन्द।न दौ।1 7।/06 युदनन्दमन सुतो 260/105 काशीनाथ: कुजौली सँ शमीसुत घनश्या म दौ।। 56/03 घनश्या म सुता दरिहरासँ भैरव दौ।। 114/08 पाली सँ लक्षू द्दौणा एवम् 6. ऋद्धिनाथ विवाह।। 151 197/03 उ. काली नाथ सुता करमहासँ हलघर सुत जनार्दन दौ।। 177/06 सोदरपुर सँ मुरली द्दौणा।। 197/04 उ. शोभनाथ सुता वुधवाल सँ नकछीदी दौ।1 189/0/ नकछेदी प्र. धर्मनाथ सुता बैद्यनाथ प्र. देवनाथ लेखनाथ बैजनाथ कजनाथ इन्दु5नाथा: पबौलीसँ बबुअन दौ।। 163/0/ पॉं बवुअन छत्रघर सुता दुर्गाघर रू चिघर शिवधरा: हरिअम सँ हर्षमणिसुत बछरण दौ।। 124/10 सोदरपुर सँ बचकन द्दौणा।। 193/05 उ. योगनाथ सुता हरिअम सँ मेघनाथ सुत श्या4मनाथ दौ।। 115/03 श्या1म नाथ सुतो रंगलाल नौबति लालौ दरिहरासँ यज्ञ नारायण 203/09 (413) ।। दौ।। 184/02 करमहा सँ लक्ष्मी दत्त द्दौणा अपरा ठ. योगनाथ सुता करमहा सँ महिपति सुत राजा रामलोचन दौ।। 186/0/0 वलियास सँ धर्मदत्त द्दौणा।। अपरा ठ. योगनाथ सुतो दुर्गानाथ: 199/403 वलियाससँ मणि दौ।। 120/07 सोदरपुर सँ विघ्ने श्वार द्दौणा।। अपरा ठ. अपरा ठ. योगनाथ सुता वुधवाल सँ दुल्लीेसुत हृदयमणि।। दौ।। 119/108 हृदयमणि सुतो जगमणि खण्ड बलासँ उग्रसिंह दौ।। 120/0 माण्ड र सँ हरेराम द्दौणा 411 अपरा ठ. योगनाथ सुता वैगतीआलय सँ हरिलाल सिंह सुत कलितनाथ सिंह दौ।1 164/0/ चौधरी मानीक नन्दयन सुतो बावू हरिलाल सिंह सोदरपुर सॅ गरी. सुत रोझन दौ।1 195/04 रोकन सुता दरिहरण बावू दौ।। कंगली सुत शंकर सुतो बावूक: टकबाल सॅ नारायण दौ।। बावू सुता खण्डाबला सँ वदन सुत ननू दौ पण्डु आ सँ गंगाराम द्दौणा बावू हरिलाल सिंह सुतो बावू कलित नाथ सिंह: खण्डदबला सँ कृष्णा राम दौ।। 166/03 सकराढ़ीसँ घाने द्दौणा बावू कलित नाथ सिंह सुतो बावू तीर्थ नन्दग सिंह: कुजौली सॅ एकनाथ दौ।। 131/03 323/08 अभिराम सुता म.म. बागीश कवि मधुरपति महो जानकीनाथ: जजिवाल सँ सदाय दौ।। 144/0/ सतलखा सँ पदूम द्दौणा महो जानकी नाथ सुता एकनाथ मोहन प्र. भैया हरिनाथ अवनाथा बलियाससॅ दुर्गानाथ दौ।1 69/08 पालीसँ हमाडद द्दौणा एकनाथ सुतो। पण्डुैआ सँ नन्दीलश्वुर सुत चाण् दौ।। 198/05 पबौलीसँ बवन् द्दौणा एवम् योगनाथ पंचम विवाह:।। ठ. लोकनाथ सुता मुराजपुर खौआल सँ हृदय फूल सुत नेना दौ।1 187/02 नेना सुतो तीर्थमणि एकहनरा सँ परशमणि दौ।1 134/09 तुला सुतो चाण्न2: करमहा सँ भिखारी दौ।1 148/02 भिखारी सुताखौआल
(199) (414) ।। सँ जय कृष्ण( दौ।। सोमदेव सुत रतिनाथ सुतो जयकृष्ण : सोदरपुर सँ सदाय दौ।। जय कृष्ण बासुदेव: वुधवाल सँ नारायण सुत गंगाध दौ दरिहरासँ रामनाथ चाणन सुतो पराशमणि वंशमणि 234/02 करमहासॅ चित्रघर दौ।। 132/04 पण्डुरआ सँ वंशीघर द्दौणा परशमणि सुता हर्षमणि बग्गी। नत्थूकका: खण्डिबला सॅ फकीर सुत थानू दौ।। 178/09 घुसौत सँ झोंटू द्दौणा।। 199/02/ उ. दुर्गानाथ सुता बमतियाम सॅ रूदी सुत सन्तौ लाल दौ।। 139/07 सन्त1लाल सुतो मनोहर: नाहर खौआल सॅ सुफल सुत युवराज दौ।1 109/05 बतहन सुतो बवनू को वेलउँच सॅ भवनाथ सुत छबन दौ।। 167/03 छबन सुतो जीवनाथ मेहनथो सरिसब सॅ भिखि दौ।। 166/02 करमहासँ उँमानाथ द्दौणा सुफल सुता युवराज देवराज शिवराजा खण्डिबला सँ छत्रमणि दौ।। 124/04 छत्रमणि सुतो चतुर्भूज: पाली सँ बछरू सुत उँमादत्त दौ।। 178/07 सरिसब सँ भोला द्दौणा युवराज सुतो घनश्याँम 243/08 बचनू प्र. कोमलकान्तोस हरिअमसँ खगदत्त दौ।। 9/16 277/04 खगदत्त सुतो टेकनाथ: दिघो सँ ठ. उदन दौ।। 187/0/10 उ. उदन सुता हरिहरा सॅवदन दौ।। 74/02 वदन सुता सरिसबसॅ प्रान्ना थ द्दौणा 198/ अपरा प्रान्नाुथ सुतो तिलकेश्व र: कुजौलीसँ जानकीनाथ दौ।। 99/08 वलियास सँ दुर्गानाथ द्दौणा अपराठ. दुर्गानाथ सुता जगन्नासथ प्र. महेशदत्त गिरजानाथ प्र. गणेशदत्त कृष्णअदत्त नारायणदत्त रामदत्त: करमहासॅ खेली दौ।। 124/06 बछरण सुता खेली सदाय भोली ज्यो्. विद्या झल्लूद किराका: खौआल सँ वेणीदत्त दौ।। 87/06 खण्डद. गोपीनाथ द्दौणा खेली सुता जीवानन्दर अनन्त/ घनानन्दस जगदीश प्र. नुलानन्द शोभानन्द् भवानन्दाद: खण्डसबलासॅ जीरक्ख न दौ।। 197/07 पालीसँ हिमरण द्दौणा। दुर्गाना द्वितीपाविक
(415) ठ. महेशदत्त सुता हरिअम सॅबालमुकुन्दव दौ।। (104/05) गंगादत्त सुतो महिनाथ शिवनाथौ (203/02) दरिहरा सँ हिरानन्दद दौ।। (9/07) बुधवाल सॅं हरि महिनाथ सुतो सेवानाथ: सोदरपुर संकृष्णादत्त दौ।। 184/06 नरउन सँ सरस्व7ती गुणानन्दा द्दौणा सेवानाथ प्रेमनाथ बालमुकुन्द वैया. महावीर मधुसूना नरउनसॅबद्रीनाथ दौ।। (85/0) बद्रीनाथ सुता विश्वननाथ रघुनन्दणन प्र. अर्क्कदनाथ (217/03) यदुनाथ प्र. शोभनाथा: माण्डनर सँ वैदिक जीषपति दौ।। (123/06) बैदिक जीवपति सुतो मनपति (217/05) अनलपति करमहा सँ रूद्रदेव सुत बच्ची। दौ।। (119/0)।। रूद्रदेव सुतो बच्ची7 दुखियाकौ दरिहरा सँ अनिरूद्ध दौ।। (103/05) खण्ड/बला सँ जीवनाथ द्दौणा बच्चीा सुता सकराढ़ी सॅगरीब सुत मोदी दौ।। (113/09) ।। मोदी सुता सदानन्द कन्हाणई बवूनीका हरिअमसँ।। नारायण सुत हरिनाथ दौ।1 (113/07) अपरा हरिनाथ सुता दरिहरा सँ कलाघर दौ।। (113/0/0) सोदरपुर सँ उँमानन्दप द्दौणा मिश्र बाल मुकुन्द सुता सोदरपुर सँ गंदाघर दौ।। (176/04)।। गदाघर सुता पालीसँ बावू कलानाथ दौ।। (104/09)।। सोदरपुर सँ झौटन द्दौणा ठ. अपरा ठ. महेशदत्त सुता माण्डथरसँ टेकपति दौ।। (113/05) जयपति सुतो टेकपति षबौलीसॅ राजा विजय गोविन्द. सिंह दौ।। (190/05) अपरा राजा विजय गोविन्द सिंह सुतो कुमरा।। विजय गोपाल सिंह कुमार विजय भूपाल सिंह बुधवाल सँ दुल्लीक सुत बाउन दौ।। (120/0/)11 बाउन प्र. चूड़ामणि सुतो भाईलाल: (206/06) भाईलाल: खौआलसँ हृदयफूल दौ।। (187/02)।। पबौली सँ मनसुख द्दौणा टेकपति सुता कुजौली सँ अमृतकर सुत मनमोहन दौ।। 115/05 मनमोहन सुतो बलदेव।। (218/03)
(200) (416) जय देवो प्र. तंत्रको खण्ड1बला सॅ म.कु. बावू बासुदेव सिंह दौ। (103/06) म.कु. बावू सिंह सुता माण्डोरसँ बेचन सुत हृदयदत्त दौ।। (106/03) पाली सँ हेमनाथ द्दौणा शा अपरा ठ. महेश दन्तब सुता सुरेश 280/05 नरेश भवेशा: दरिहरा सँ राधानाथ दौ।। 103/03 खगनाथ सुता शूल पाणि गदापाणि 202/06 खडगपाणि 201/06 यादव ठीठर देवकी नन्दम गरीबा नन्दाल: सोदरपुर सँ जयदत्त दौ।1 (126/02) खौआल सँ गोकुल द्दौणा यादव सुतो (278/0) राधानाथ: खण्डसबला सँ बावू खगपति सिंह दौ।1 115/09 बावू खग पत्युोपनामक घनपति सिंह (202/08) सुतो बावू मेषधारी सिंह बावू सुरघारी सिंह।। दरिहरा सँ अमयनाथ दौ।1 (88/08) हरिअम सँ धीर द्दौणा राथानाथ सुतो कामरत्नस रामरत्नोँ पबौलीसँ तपसी द्दौणा (185/04) हरिअमसँ योगी ताप दोहिन दौ।। (200/02) ठ. सुरेश सुता बुधवालसँ नकछेदी सुता कत्रजनाथ दौ।। (198/08) कत्रजनाथ सुता सोदरपुरसँ महेन्द्रस दौ।। (184/08) गोशाई सुतो। म.म. दर्शन कानन पंचानन देवेन्द्रु प्र. बालकृष्णँ महेन्द्रो करमहा सँ केशव सुत लान्हि दौ।। (122/0/) पबौली सँ धर्मानन्दद द्दौणा महेन्द्रद सुतो।। केदारनाथ: करमहासँ जयदित्सु दौ।। (189/07) श्यादमलाल सुतो जयादित्यह मोतीदत्तो खण्डेबलासँ सोन दौ।1 (176/08) खौआल सँ बनी द्दौणा जयादित्यल। ।।सुतो योगदत्त खण्डोबला सँ बावू नेत्रेश्व र सिंह दौ।1 (183/08) बावू वनमाली सिंह प्र. नेत्रेश्वगर सिंह सुतो बावू रघुनन्दनना (245/04) परनामक एकखेशवरसिंह बावू श्री नन्दान सिंहो कुजौली सँ टीका नाथ दौ।। (194/0) नरउनसँ जीवन द्दौणा एवम् ठक्कुखर सुरेश विवाह-।। (417) 154 ठ. नरेश सुता करमहा सँ चुम्ब0नाथ सुत बद्रीनाथ दौ।1 (198/0) घोघन प्र. चुम्ब1नाथ सुतो मुक्रिनाथ बद्रीनाथौ सोदरपुरसं शक्रनाथ सुत। कारी दौ।। (184/08) कारी सुतो गोविन्दब प्र. गंगानाथ आद्यानाथौ बलियास सॅ ठेडनि सुत बच्चे दौ।। (185/07) सोदरपुर सँ कारी दौहियद।। बद्रीथनाथ सुता सोदरपुर भैया सुत गोपीनाथ दौ।। (184/07) भैया प्र. ऋद्धिनाथ सुतो रेवतीनाथ गोपीनाथौ नरउनसँ दुरिवया सुत। बुद्धिकर दौ।। (125/06) बुद्धिकर सुतो मोहनाथ : खौआल सँ मोदनाथ दौ।। (177/03) अपरा बैया मोदनाथ सुतो खण्ड0बला सँ श्याधमनाथ दौ।। (106/0/0) अपरा श्या8म नाथ सुता नरउन सँ भवनाथ दौ।। (116/03) माण्ड र सँ रघुवीर द्दौणा गोपीनाथ सुता माण्ड्र सँ बच्चू सुतभोला दौ।। (93/06) लक्षमन सुतो बच्चूरक: अनलपुर करमहास खोलमापति दौ।। (104/02) सर्वज्ञान बाल कृष्णष सुतो रघुराम गंगोरामौ (220/04) सरिससब सँ लक्षमन दौ।1 रघुराम सुतो विष्णु्पति: पबौली सँ रतिपति सुत भगीरथ दौ।। करमहासँ लक्ष्मीखदेव द्दौणा विष्णु पति सुतो अच्युत पति दरिहरासँ लक्ष्मीपदेव दौ।। (19/100) चाण सुतो लक्ष्मीवदेव: करमहासँ विश्वतनाथ दौ।। लक्ष्मीुदेव सुतो नन्दलन: करमहासँ रघुनाथ सुत हरि नाथ दौ सोदरपुरसँ चक्रपाणि द्दौणा अच्युञतपति सुतो खोलमापति: सरिसब सँ भिखिया दौ।1 (85/0/0) कुजौली सँ धीर द्दौणा खोलमपति सुता दरिहरासँ पुण्यायनन्द/ दौ आँखी सुता उँमानन्दर पुण्यादनन्दज इन्द्रा नन्दास: खण्डयबलासँ मानीक दौ।। (180/08) लक्ष्मीलनाथ सुतो मानीक: करमहा सँ मघुसूदनसुत परमानन्द् दौ।। खौआल सँ घराघर द्दौणा मानी सुता करमहा सँ भवेश सुत छबन् दौ।। (188/08) छबनू (332/0/0) सुता बलियास सँ नयन सुतरायहे माड्गददौ
(201) (418) ।1 (112/0/11) करमहासँ वामदेव द्दौणा पुण्यादनन्द् सुतो बालानन्दा: सोदरपुरसँ नित्या1नन्द2 दौ।1 162/07 नित्यामनन्दण सुतो किर्तिनाथ: पालीसँ उँमाकान्तद दौ।। जयकृष्णन सुत रत्नााकर सुतो उँमाकान्तु: एकटरा सँ दामोदर दौ।। उँमाकान्त सुता खौआल सँ चिन्ता्मणि सुतस नेहाल दौ वुधवाल सँ पा. परशुएम द्दौणा।। बच्चकयू सुता यदुनन्दसन 215/05 भोला कन्टूाका हरिअम सँ हलघर सुत चुन्नीम दौ।1 (190/0/0) वैया. चुन्नीद प्र. श्रीघर सुता वैदिक बलदेव परशुराम बलभद्रा:।। सोदरपुरसँ थोथी सुत मुरली दौ।। 118/08 थोथी सुता घरनी घर (203/02) मुरलीघर वूटना: पाली सँ लक्ष्मीददेव सुत देवनाथ दौ।। (174/06) नरउन सँ हसनू द्दौणा मुरलीघर सुता वलियास सँ मणि सुत सोन दौ।। (190/02) खण्डनबला सँ ठ. इन्द्रेिश्वसर द्दौणा भोला सुता वुघवाल सँ मोहन सुत नकछेदी दौ।। (198/08) अपरा नकछेदी सुता दरिहरा सँ खड़गनाथ सुता खड़गपाणि दौ।1 (200/03) खड़गपाणि सुतो जगन्ना थ: (244/04) करमहासँ शंकरदत्त सुत विश्वीनथ दौ।। खण्ड6बला सँ सोन द्दौणा।। उ. गणेशदत्त सुतो शिशिर कुमार हरिअम सँ बालमुकुन्द। दौ।। (200/06) सोदरपुरसँ गदाघर दौहित्र दौ।। उ. शिशिर कुमार सुता माण्डकरसँ झोंटहू सुत जगन्नालथ दौ।1 191/07 खण्डदबलासँ बावू आद्यादत्त सिंह दौ।। उ. विष्णुुदत्त।। सुता करमहासँ लान्हि सुत नीलाम्ब1र दौ।1 (122/0/) महो नीत्वारम्बदर सुतो रणनाथ रूपनाथौ नरउन सँ मनहर सुत टुनी दौ।। (184/05)।। बावू मनहर सुता दामोदर छोटकू रघुवर गिरधर शिवनन्दुन टुनी प्र. रूचिनाथा सोदरपुर सँ छबन् सुत चित्रघर दौ।1 (120/07) करमहाठॅ दुखमंजन दौ।। (419) ।। टुनी प्र. रूचिनाथ सुतो खडग नाथ भीमनाथौ जमदौली पाली सं मथुरानाथ सुत रज्जेन दौ।। 197/09 रज्जेु सुता खण्ड बलासँराजा दौ।। (166/05) माण्डार सँ।। जमाहिर द्दौणा ।। उ. कृष्णरदत्त सुताअच्युसतप्र. प्रितिनाथ मन्नू् प्र. चेतनाथ हेमू प्र. नित्यवनाथ रेमूप्र. कपिलेश्व.रनाथा: नरउनसँ गंगानाथ सुत केशवनाथ दौ।। (198/02) केशव नाथ सुतो टंकनाथ वरदानन्दोव वरदानन्दोन (06/02/113) पाली सँ जयनाथ दौ।। (181/06) खगनथ सुतो जयनाथ: खौआल सँ श्रीनाथ दौ।। (190/0/0) श्रीनाथ सुतो विन्य्प नाथ: बुधशन सँ शिरोमणि दौ।। (197/07) माण्डथर सँ प्रान्नातथ द्दौणा जयनाथ सुतो सोदरपुर सँ धरिनाथ सुत ऐंठहू दौ।। (123/0) धरिनाथ सुता गोनू प्र. (276/06) फणिनाथ ऐंठहू प्र. शशिनाथ महो ठीठरू प्र. पुष्पानाथ लीलानाथा: नरउन सँ दुखिया दौ।। 125/05 सोदरपुर सँ ऑंखी द्दौणा।। ऐंठहू प्र. शशिनाथ सुता दरिहरा सँ गदापाणि दौ।1 (200/03) गदापाणि सुतो पद्दनाथ मेघनाथा प्र. (282/05) भूला पबौली सँ हृदयमणि दौ।। (195/0/) माण्डार सँ भवनाथ द्दौणा।। उ. अच्युीत प्र. प्रितिनाथ सुता करमहासँ विजयदत्त दौ।। 125203 विजयदत्त सुता नरउनसँ बंशीनाथ सुत बलदेव दौ।। (195/04) बलदेव सुता खण्ड2बलासँ बावू खगपति सिंह सुत बावू घनेश्वलर सिंह दौ।। (200/4) बावू खगपति सिंह सुता वावू घनेश्वँर सिंह बावू गणपति सिंह वावू।। (206/04) बावू (208/09) हर्षपति सिंह वावू गुणपति सिंह नरउनसँ मनमोहन दौ।1 184/04 ऋषि सुतो सनमोहन दिनबन्धुस प्र. फूद्दी कौ सोदरपुरसँ छबनू सुत गपॉखी दौ।। (119/0/0) हरिहरा सँ जीवनाथ द्दौणा मनमोहन सुतो शम्भुरनाथ प्र. शोभनाथ माण्ड र सँ खणपति सुत बाचा दौ।1 109/07 सरिसब सँ गणेशहं।।
(202) (420) वावू घनेश्व0र सिंह सुतो बावू उमरूपति सिंह हरिअम सँ योगीलाल सुत कमलानाथ दौ।। (185/04) कमला नाथ सुतो मुक्रिनाथ गोपीनाथौ सोदरपुरसँ 244/04 आद्यादत्त दौ।। (113/0/0) बम प्र. आद्यादत्त सुता गिरिजादत्त 289/0/0 हमेदत्त वूचन वंशीका: वुलवालसँ बछरण दौ।। (190/09) दरिहरासँ देवीदत्त द्दौणा एवम् प्र.प्रितिनाथ विनाह।। दि.न. 157 ठ. मन्नूा प्र. जनार्दन सुता दरिहरासँ माना सुत किर्तिनन्दान दौ।। (119/07)।। मोदानन्द/ सुतो 274/03 वावू फणिनन्दजन वावू फकीर प्र. लोका नन्दौ् खण्ड1बला सँ।। महाराज माघव सिंह दौ।। (108/06) पालीसँ मोदनाथ द्दौणा वावू फणिनन्द/न सुतो माना प्र. गुणानन्द( फूच्ची) प्र. रमानन्दोि नरउनसॅ एकनाथ दौ।। (192/02) पालीसँ लक्ष्मी दत्त द्दौणा।। माना प्र. गुणानन्द. सुतो (211/06) महेन्थ : प्र. किर्तिनन्दछन: सोदरपुर सँ लूचाई दौ।1 (184/07) नरउन सँ गोपाल द्दौणा महन्थ1 प्र. किर्तिनन्दछन सुता करमहा सँ फूदरी दौ।। (96/09) फकीरसुतो।। भेषदत्त दिनानन्दो माण्डिरसँ जलघर सँ जलघर दौ।। (194/05) खण्ड)बला सँ कोटीश्वतर द्दौणा भेषदत्त सुतो फूदरी प्र. हेमनाथ: दरिहरा सँ किशोरनाथ दौ।। (103/07) हरिनाथ।। सुतो किशोर नाथ लीलानाथौ खण्डनबला सँ उ. इशालाथ दौ।। (97/05) खौआल सँ जानकी नाथ द्दौणा किशोन नाथ सुता पालीसँ दुरिवया सुता आत्मा राम।। दौ।। (183/03) सुरगन सँ राजा श्री नारायण द्दौणा फूदरी सुता होरित महावीर जयवीरा: खण्डदबला सँ पॉं चन्द्रटमणि सुता कमलणि दौ।। (83/06) दरिहरासँ भिरबर द्दौणा उ. चेतनाथ सुता करमहा सँ लीलानन्दि दौ।1 176/03 जयनन्दिन सुतो परिचेता देवानन्द वैया. तुलानन्दोत खण्ड्बलासँ रघुपतिदौ।। (175/02) खौआलसँ।। धर्मनाथ द्दौणा बैया. तुसानन्द सुतो नागेन्द्र प्र. लीलानन्दड हरेन्दोौ माण्ड7र सँ भीला दौ।। (201/05) बुधवाल सँ नकछेदी द्दौणा लीलानन्दा सुता नरउनसँ।। श्याडम सुन्दार दौ।1 184/08 मथुरानाथ सुतो श्यालमसून्ददर: पवौलीसॅ तपसी दौ।। (185/04) हरि. योगीलाल द्दौणा श्यावमसुन्द सुता पालीसॅ वावू नन्दनन प्र. वैद्यनाथ दौ।। (421) ।। 193/07 बावू नन्द न प्र. बैद्यनाथ सुता ब्रजनन्दसन (290/02) लोकनाथ शम्भुवनाथा: खण्ड4बला सँ रधुनन्दून दौ।। (182/05) घुसौतसँ हृषिकेश द्दौणा।। लोकनाथ सुता सोदरपुर सँ प्रेमनाथ दौ।। (20/04) घरनीघर सुतो फकीर गोनड़ो करमहासँ गोविन्दौ दौ।1 (177/0/11) सोदरपुरसँ घीर द्दौणा।। फकीर सुतो प्रेमनाथ: करमहा सँ हलघर दौ।। (177/05) खण्ड बलासँ मोहन सिंह दौ द्दौणा।1 प्रेमनाथ सुतो दयानाथ जीवनाथौ घुसौतसँ राम।। ।। सुत मघुसूदन दौ।। (177/08) मघुसूदन सुता दामोदर वलभद्र मुनर प्र. अच्यु तानन्दाद: कुजौली सँ झडूवा सुत नत्थूद दौ।। (64/0/11) झडूलासुतो: नत्थूनक: खण्डुबलासँ मणिकृष्णड दौ।। (126/04) माण्डूर सँ इशानाथ द्दौणा नत्यूत सुता पालीसँ हिभरण दौ।1 (197/08) सोदरपुर सँ बावूनाथ द्दौणा।। उ. नारायणदत्त सुता मिहिर कुमार (203/03) महेन्द्र देवेन्द्रु सुरेन्द्रा।: हरिअम सँ शक्रिनाथ दौ।। (202/0/11) कमलानाथ सुतो शक्रिनाथ: सोदरपुरसूं कौशल्या नन्द्न दौ।। (125/0/।।) कौशल्याा नन्द।न प्र. दुलारनाथ सुता नीकानन्दक रमानन्दश दुर्गानन्दाु: करमहासँ गोपीनाथ दौ।। (186/03) खण्डरबला सँ चन्द्रदमणि शक्रिनाथ सुता।। खण्ड बलासँ बावू ललितेश्वगर सिंह दौ।। (185/09) बावू झोटहू प्र. ललिते सिंह सुता बावू तंत्रेश्विर सिंह बावू भवानी नन्दलन सिंह बावू मितरू।। सिंहा करमहा सँ भीमनाथ दौ।1 (180/06) ऋद्धिपति सुतो भीमनाथ: बेलउँच सँ बटूकी दौ।। 147/0/11 अपरा गंगाराम सुता भोलानाथ अभिराम मतिरामा।। (299/0) सोदरपुरसँ पुरू वोन्त1म दौ।। (150/08) हरिअम सँ शिवदेव द्दौणा भोलानाथ सुतो बटूकीक: पचही जजिवालसँ मद्ध सुत हिरू दौ।। लोटाई सुत हरिदेव।। सुतो मद्धक: खोआलसँ शिवपति दौ।। 114/02 पालीसँ गोविन्द। द्दौणा मद्धू सुतो हिरू मेघाकरो माण्डदर सँ गोढ़ाईसुत वावू दौ।। (56/07) सरिसव सँ ग्वा रा द्दौणा।। (203) ।। हिरू सुतो गोनन: हरिअम सँ पुरूषोत्तम दौ।। (147/08) सरिसबसँ मोहन द्दौणा बटुकी सुतो सरिसब सॅ हिरेश्व र दौ।1 (134/07) एकहारा सँ म.म. ज्यो. गुणीश्वडर द्दौणा।। भीमनाथ सुतो जीवेश्वर रूद्रनाथौ नरउन सँ टेकनाथ दौ।। (106/05) टेकनाथ सुता (211/109) हरिअम सँ शिवनाथ दौ।1 (200/02)।। शिवनाथ सुता सुरगनसँ।। राय राम नारायण दौ।1 (162/02)।। खौआलसँ देवकृष्ण0 द्दौणा।। 203/06।। उ. मिहिर कुमार सुता दरिहरा सँ हरिशंकर दौ।1 103/08 चित्रनाथसुता। बलभद्र (213/03) जयभद्र रामभद्र सुभद्रा: नरउन सँ सरस्वौती गुणानन्द् दौ।। (184/07) हरिअम सँ हरिनाथ द्दौणा जयभद्र सुतो जीव नाथ निधिनाथौ हरिअम सँ।। दामोदर दौ।। (101/0/)।1 मानीक सुतो गोशॉइक: माण्डार सँ दरोगा हृदयनन्दगन दौ।। (185/05) हरिअम सँ हरिनाथ द्दौणा गोशॉंइ सुतो दामोदर उगरी। (216/02) कौ माण्डर सँ कमलादत्त दौ।। (105/07) कमलादत्त सुता सोदरपुरसँ छबनू सुत किर्तिघर दौ।1 (111/07) दरिहरासँ वैदिक जीवनाथ दौहित्र दौ।। दामोदर सुतो मुक्रिनाथ पुलेकित प्र. (295/10) भवनाथौ खण्डदबलासँ उग्र सिंह सुत जगत सिंह दौ।। 120/02 वलियास सँ मणि दौहिन दौ।। निधिनाथ सुता शिवेशंकर प्र. (210/05) रूद्रनाथ हरिशंकर प्र. आद्यानाथ दयाशंकर रमा शंकर शम्भुजशंकरा: खण्डदबला सँ मणि दौहित्र दौ।। निधिनाथ सुता शिवशंकर प्र. रूद्रनाथ हरिशंकर प्र. आद्यानाथ दयाशंकर रमा शंकर शम्भूधशंकर विजयशंकर: खण्डबला सँ वावू खगपति सिंह सुत।। वावू हर्षपति सिंह दौ।। (202/09) वावू हर्षपति सिंह सुता हरिअमसं रंग्रलाल सुत पंचमणि दौ।। (198/0/0) रंगलाल सुतो पंचमणि।। बेचनो सुरगन सॅ राय रामनारायण दौ।1 (162/02) खौआलसँ देवकृष्णम द्दौणा पंचमणि सुता फतुरी नन्द न सिंहेश्वडरा: पवौलीसँ भैया सुत नारायण दत्त दौ।। (423) ।। (182/09) नारायणदत्त प्रभ्याकरे सुता माण्डार सँहियन सुतभवनाथ दौ।। (195/0/)।। सरिसव सँ श्या8मनाथ द्दौणा हरिशंकर सुतो मोहन: नरउनसँ जगन्नाणथ सुत।। नित्यदनाथ दौ।। (192/03) नित्यशनाथ सुतो समलियानन्दनन प्र. इन्द्रयनाथ हरिनाथौ खण्ड।बला सॅ बावू हितेन्द्रश सिंह दौ।। (189/0/0) ।। बावू दुर्गादत्त सिंह सुतो बावू हितेन्द्र सिंह बावू अमरेन्द्रश सिंह बावू उपेन्द्रंसिंह बावू जीवेन्द्रू सिंह बावू विजेन्द्रि सिंह: बुधवाल सँ परशमणिसुत गिरघारी दौ।। (193/09) खण्ड बलासँ साधु द्दौणा।। बावू हितेन्द्रि सिंह सुतो बावू जगदीश नन्दरन सिंह: माण्डंर सँ भूप सिंह सुत विष्णुा सिंह दौ।। (186/06) भूप सिंह सुता विष्णुी सिंह रूद्र सिंह ज्यो्. (211/03) गोविन्दह सिंह 283/0/0।। सोदरपुर सँ मिगुरी सँ मनसुख सुत कृष्णुदत्त दौ।1 (184/06) नरउन सँ सरस्वुती गुणानन्द1 द्दौणा।। विष्णु सिंह सुता सुरगन सँ राय देव।। नारायण सुत राय रूप नारायण दौ।। (187/03) राय रूपनारायण (216/08) सुतो सोनमनि प्र. कामनारायण वेदनारायणौ (278/10) खण्डरबला सँ रेवतीनाथ सुत श्या8मनाथ।। दौ।। (106/0/0) हरिअम सँ दुल्लयह द्दौणा।। उ. रामदत्त सुतो मदनदत्त रतनदत्तो करमहा सँ लान्हि सुत नीलाम्बनर दौ।1 (201/09) नरउन सँ टून्नीु।। प्र. रूचिनाथ द्दौणा।। (181/03) उ. कवि श्याटमनाथ सुतो महेश्व्र: नरउन सँ गोकुलनाथ दौ।। (112/05) माण्ड्र सँ दुर्गादत्त द्दौणा अपराकबि. उ. श्याशमनाथ।, सुता दरिहरा सँ सनफूल सूत किर्तिनाथ दौ।। (103/03) पालीसँ लक्ष्मीरनाथ द्दौणा उ. महेश्वणर सुता श्री कृष्ण बालकृष्णा हरेकृष्ण राधेकृष्णल केवल कृष्णद:।। माण्ड्र सँ अच्छोपति सुत श्या मू दौ।। (118/05) सोदरपुरसँ ठेड.नि द्दौणा श्री कृष्णृ सुता नरउन सँ पुष्प्नाथ सुत मुनी दौ।1 (113/08) करमहा सँ जलघर द्दौणा।।
(204) (424) अपरा ठ. श्री कृष्ण् सुता उँमाकान्तक चन्द्र कान्ता गंगाकान्ताण: वलियाससँ सोन सुत भैयो दौ।। (190/02) भैया सुता चण्डेकश्व र (212/05) रामेश्व र कृष्णेसशवर (286/08) महेश्व्र योगेश्व।रा: नरउनसँ दुरिवया सुत छक्क्न दौ।1 (125/06) सकराढ़ी सॅहृदयघर द्दौणा 211 अपरा ठ. श्रीकृष्णण सुता नरउनसँ बचकन सुत टेनी दौ।। (122/04) टेनी सुतो मघुसूदन रतिनाथौ सोदरपुर सँजीवघर दौ।1 (193/0/11) हरिअम सँ हर्षमणि द्दोणा 311 उ. उँमाकान्तो सुतो प्रितिनाथ योगनाथौ 205/05 पालीसँ नैविठक।। घरानाथ सुतवावू शण नाथ दौ।। (79/06) नैष्ठिक धरानाथ सुता वावू विन्य्ठ नाथ (01/0/) बावू गणनाथ म.म. डा. सरगगानाथ बावू 244/09 विजयनाथ बावू बैद्यनाथ:।1 खण्डउबलासँ महाराज कुमार वावू बासुदेव सिंह दौ।। (200/0/) माण्ड9र हृदयदत्त द्दौणा बावू गणनाथ सुतो शांतिनाथ (02/0 3.टी) शंकरजी प्र. आनन्दा नाथौ।। माण्डशर सँ विष्णुस सिंह दौ।। (204/05) सुरगनसँ राय रूपनारायण द्दौणा।। उ. प्रिति नाथ सुता करमहा केशव सुत रामनारायण दौ।। (183/06)।। गिरधारी सुता किशोर केशव (284/03) मघुसूदना सोदरपुर सँ मानीक सुत छोआ दौ।1 (190/06) छोटा सुता एकहरा सँ हुलरैया दौ।। 192/041 दुलरैया सुतो।1 हेमकान्त0: कुजौली सँ कुलपति दौ।1 58/09 अलयसंमही द्दौणा केशव सुता सत्य1नारायण रामनारायण लक्ष्मी9नारायण सोदरपुरसँ मनहर दौ।। (123/03) हरिअम सँ हर्षमणि द्दौणा रामनारायण सुता नरउनसँ मार्कण्डेाय दौ।। (195/04) मार्कण्डेहय दौ।1 (195/04) मार्कण्डेँय दौ।। (195/04) मार्कण्डेमय सुतो वीर: वुधवाल सँ पचकौड़ी दौ।। (186/0) ।1 अपरा परशमणि सुतो पचकौड़ी प्र. भूवनेश्व1र: सोदरपुर सँ कुलपति दौ।। 52/09 महो रमापति सुता भवेश हरपति बासुदेवा एकहरासँ जगन्नायथ सुत।1
(425) ।। सुत रामनाथ दौ बलियास सँ पराउँ द्दौणा भवेश सुतो मेघाकर: एकहरासँ रमापति दौ।। (94/05) खण्ड बला सँ जनार्दन द्दौणा मेघाकर सुतो हृदयनन्द न:।। दरिहरा सँ रैया दौ।1 (103/07) करमहा सँ भवेश द्दौण हृदयनन्दरन सुतो कुलपति घुसौत सॅ राम सुत कल्यातण सिंह दौ।। (100/07) अपरा राम सुतो कल्याहण सिंह: सोदरपुर सँ शुभंकर सुत मन्नू दौ।। (100/06) पालीसँ वियाघर द्दौणा कल्यााण सिंह सुतो मनसुखमानीको सकराढ़ी छत्रपति दौ।। 96/02 छत्रपति सुतो हिरेश्विर सोदरपुर सॅ घनश्यासम दौ।। (77/0) नरउन सँ भवेश द्दौणा कुलपति सुतो कृष्णयपति : (212/03) हरिअम सँ यार सुत वैया.मोहन दौ।। (185/09) सोदरपुरसँ देवकृष्णं द्दौणा।। पचकौड़ी प्र. भूवनेश्वसर सुतो राम: खण्ड बला सँ वावू गोविन्द0 सिंह बावू गणेशदत्त सिंह दौ।। दरिहरा सँ घननाथ द्दौणा (204/03) ठ. योगनाथ सुता पालीसँ भोलानाथ सुत अमरनाथ दौ।। (125/09) कणि नाथ सुतो भोलानाथ प्र. लोकानन्दु: खण्डमबलासँ बावू गिरिजादत्त सिंह दौ।। (174/0/)।। बावू गिरिजादत्त सिंह सुतो बावू यदुनन्दँन सिंह: माण्डवर सँ जलघर सुत खड़गी दौ।। 194/06 नरउनसँ भोलानाथ द्दौणा भोलानाथ सुता अमरनाथ महिनाथ सीतनाथा: नरउनसँ मथुरानाथ दौ।। (202/0/11) पबौली सँ तपसी द्दौणा अमरनाथ सुता विश्वथनाथ नाथ विजयनाथा: माड़रिवलिगास सँ लोकपति सुत ठकुरपति दौ।। (193/02) लोकतंत्र सुतो पुण्यथ पति ठकुरपति सोदरपुर सॅ महाहोरा योगमणि दौ।। (185/05) तीर्थ मणि सुतो योगमणि गोवर्द्धनों बुघवालसँ थेघीखुत परशमणि दौ।। (186/0/11) सकराढ़ीसॅ अमृत नाथ द्दौणा योग मणि सुतो टेकमणि करमहा सँ जाल्पायदत्त दौ।। 99/09।। दरिहरासँ चन्द्राो नन्दक द्दौणा ठकुर पति सुतो छत्रपति योखनप्र. केशीपति खण्ड9बला सँ दामोदर सिंह
(205) (426) ।। सुत गोपीनाथ सिंह दौ।। (120/03)।1 उ. दामोदर सिंह सुता वैया. गोपीनाथ सिंह रघुवीर सिंह प्र. पीणाकनाथ जयनाथ सिंह हरिनाथ सिंह विजय सिंह दिवानाथ सिंह।। तिसउँत सॅ जगन्नािथ सुत गिरधारी दौ।। (121/09)।1 सोदरपुर सॅ मोती द्दौणा वैया. गोपीनाथ सिंह सुतो रूचिनाथ सिंह: दरिहरासँ पुण्यहनाथ दौ।। (202/07) किशोरनाथ सुतो पुण्यानाथ: हरिअमसँ कन्हाौई सुत किशोर दौ।। 126/02 कन्हातई प्र. रतिनाथ सुतो किशोरनाथ खण्डोबलासँ खण्ड बलासँ ठ. रूपनाथ दौ (181/03) दरिहरासँ शौभाकर द्दौणा विशोरनाथ सुतो कालीचरण: माण्डनर सँ बेचन सुत कमलादत्त दौ।। (203/06)।1 सोदरपुरसँ किर्तिघर द्दौणा पुष्पखनाथ सुता कुजौली सँ बवुरेया सुत हरिनन्दान दौ।। (64/0/11) बवुरैया सुतो हरिनन्द न: करमहासँ जगन सुत धरानाथ दौ।। (166/09) घरानाथ सुता सरिसबसँ मोहन सुत प्रान्नाहथ दौ।। (198/03) बलियाससँ नीलम्बौर दौहित्र दौ।। हरिनन्दसन सुता जगौर माण्डरर सँ शोभन सुत भैये दौ।। (166/0/0)।। अपरा (126/05) इशान्नािथ सुतो शोभन मोदनो (255/09) सरिसब सँ रतिनाथ दौ।। 139/09।। रतिनाथ सुता बेचनप्र. प्रितिनाथ हृदयनाथ ननूका करमहा सँ दुरवन दौ।। 122/02।। खौआल सँ गुणाकर द्दौणा शोभन सुता दुलार भैये तूफानी कमलाकान्ताा: सोदरपुरसँ हरपति दौ।। 197/05 अपरा 312/09 हरपति सुता ननू रोहिणी शक्रिनाथा: वलियास सँ हरिनाथ दौ।। (120/0/4)।। खण्डयवला सँ फकीर द्दौणा भैये सुता तिसउँतसँ जगन्ना थ। सुत भैयो दौ।। (121/10/7) भैयो सुतो कमलनयन अपूछो सोदरपुर सॅबवूजन दौ।। (166/07) बवूजन सुतो सोमेश्वतर टुकखी को सकराढ़ीसँ घनश्यावम सुत पॉं (427) ।। 166/06 पॉं बाछ सुतो किर्तिनाथ: सरिसव सँ धर्मपति दौ।। (124/06) पण्डुौआ सँ पॉनन्दी श्वसर द्दौणा उ. चन्द्रेकान्त सुतो इशनाथ: पाली सँ साधु दौ।1 (118/02) लीलीघर सुतो साधुक: नरउनसॅ लक्ष्मीिदत्त दौ।। (125/03) माण्डघर सँ चाण द्दौणा 287/03 साधु सुता नरउनसँ टेनी दौ।। 204/03।। सोदरपुर संजीवघर द्दौणा उ. इशनाथ सुता करमहासँ ब्रजनाथ दौ।। (192/05) ब्रजनाथ सुतो मेघानाथ पष्ठी नाथों खण्डमबला सॅ बावू गणपति सिंह दौ।। (202/08)।। बावू गणपति सिंह सुता बावू दुर्गानन्दान सिंह बावूजानकीनन्देनसिंह (217/05) गोपीनन्द न सिंह देवी नन्दंन सिंह बावू: सरस्वुती नन्दजन सिंह। वलियाससँ मणिसुत कालिका दत्त दौ।। 120/07 कालिका दत्त सुता तिसउँतरसँजगन्नासथ सुत गिरधारी दौ।। (121/09) सोदरपुरसँ मोतीहँ।। उ. गंगाकान्ति सुता माण्डग सँ रघुवर सुत मन्नुद दौ।। (193/10)।। अपरा मन्नूु सुतो राधारमण: वुधवालसँ भाई लाल दौ।। (200/09) भाइलालसुता।। सोदरपुरसँ बछरण दौ।। 185/04 गोशाई सुतो बछरण: दरिहरासँ मानीक नन्द/न दौ।। 104/03।। मानीक नन्द8न सुता सोदरपुरसँ बन्धुल दौ।। (104/05) हरिअमसँ।। यार द्दौणा बेछरण सुता अलय सँ राजा लीलानन्दँ सिंह दौ।। (164/08) खौआलसँ बैया. हेमनाथ द्दौणा अपरा ठ. गंगाकान्तल सुतो सतिनाथ (206/03) राधानाथी (2/0/0)।। दरिहरासँभूवनाथसुत रामनाथ दौ।। (117/06) भूवनाथ सुतो रामनाथ: खण्ड2बलासँ मुकुन्द सिंह दौ।। (197/08) पालीसँमवुरानाथ द्दौणा रामनाथ सुता सोदरपुरसँ खगदत्त दौ।। (101/02)।। झिंगुर सुतो खगदत्त: दरिहरासँ रूद्रदत्त सुत शिवलाल दौ।। 111/05 कलिपति सुतो रूद्रदत्त: करमहासँ जगन्नामथ दौ।। (111/09) सोदरपुरसँ साहेब द्दौणा।
(206) (428) ।। रूद्रदत्त सुतो शिवलाल बच्चाू प्र. चण्डी1दत्तो खण्डदबला सँ ठ. दुर्गादत्त दौ।। (49/07) पालीसँ घनेश द्दौण शिवलाल सुतो चित्रपति दामोदरो एकहरासँ म.म. बृन्दादबन चन्द्र् दौ।। (134/09) म.म. बृन्दारवन चन्द्रर सुता खौआलसँ रत्ना्कर सुत ऑरवी दौ।। (126/08) करमहासँ शम्भु्नाथ द्दौणा खगदत्त।। सुतो गुदर सदनो पाली सँ पुरन्दतर दौ।। (181/07) ओइनिसॅ महाराज श्रीघरनारायण द्दौणा (206/08) ठ. सीतानाथ सुता वुधवालसँ नन्दीॅश्वीरसुत।। झमनेश्व।र दौ।। (186/0) नन्दीुश्व र सुता तेजेश्वर बैया. लोकेश्वीर गंगेश्वमर दुर्गेश्वतर परमेश्व6र अमनेश्वसरा: खण्डबला सँ कृष्णतदत्त दौ।। 187/07 कृष्ण्दत्त सुता।। रघुनन्दशन शिवनन्द।न देवकीनन्दन रविनन्द6न हरिनन्द्ना: (240/0) दरिहरा सँ बाचा दौ।। 177/08 बाचा सुतो विद्यानाथ: सोदरपुरसँ तुचानी दौ।। (132/04) ब. 161/0 अ. तुगानी।। सुतोआर्तिनाथ: बमनियाम सॅ रंजन दौ।। 139/03 रंजन सुता सकराढ़ी सँ बाछ दौ।। (206/0/)।। सरिसबसँ धमपिति द्दौणा झमनेश्व र सुता विन्य्जन नाथ विघ्ने।श्व0र इन्दे।श्वपरा: दरिहरासँ कालीदाश सुत लूचाई दौ।। (69/04) महादेव सुतो रघुराम: जजिवाल सँ मणिनाथ दौ।। रघुराम सुतो नरोत्तम: करमहासँ किशाई दौ।। (93/10) सरिसबसँ रघुनन्दसन द्दौणा नरोत्तम सुतो पुरूषोत्तम मुशनों 264 हारीपालीसँ मनहरसुत धरनी दौ।। (54/08)।। कांगवसुतो (265/04) बछाई मनोहरो सोछरपुरसँ।। हरिनाथ दौ।। (47/07) मनसुख सुतो माघव रत्नांकरो बेलउँचसँ दिवाकर सुत सुपे दौ माण्डथर सँ देवे द्दौणा माघव सुता श्री नाथ शिवनाथ 258/08 हरिनाथ 263/02।। रूपनाथा: बेलउँचसँ भवादित्यत सुत शौरि दौ कमनिक हरपति द्दौणा।। हरिनाथ सुतो प्रद्मूम्न। अनिरूदद्धो बेहायानी सँ रघुनाथ सुतश्री नाथ दौ सक. श्रीपति द्दौणा
(429) मनहर सुतो धरनी नारायणों कुजौली सॅयदुनन्दान दौ।। (169/05)।। पाली सँ कमल द्दौणा धरनी सुता सतलखासॅ देवकी दौ।। (138/03) नरउसँ भवदेव द्दौणा।। पुरूषोत्तम सुता देवीदत्त गौरीदत्त (334/06) शम्भु दत्त वैया. इश्व्रीदत्ता: 264/05 बभानियाम सँ छोके सुत बछरू दौ।। (172/03) छोके सुतो बछरू लक्ष्मी नाथौ विस्की्सॅ अच्यु4त।। सुत लक्षमन दौ।। (64/08) लक्षमन सुता घुसौत सॅजगदीश सुत मनोहर दौ।। (65/03)।। मनोहर सुतो लक्ष्मी पति शूलपाणि सकराढ़ी सँ रघुनन्दजन दौ।। 165/0/114।। पॉं रघुनन्दुन सुता जजिवाल सँ कान्हक दौ. बाहू सुत काशी सुता बासुदेव यशोघर कान्ह् प्र. कृष्णादनन्दास: वलियाससँ बिंदू दौ।। कान्हा सुता भगीरथ गंगाराम मनीरामा माण्डतर सँ ठकरूं सुत हरिहं दौ।। सोदरपुरसँ रूचि द्दौणा बछरू सुता भानी मानी बेचना दरिहरा सँ गोवर्द्धन सुत बदलूदौ।। (160/09)।। गोबर्द्धन सुतो एकाक्ष बदलूक: हरिअम सॅन्यणनसुत मदन दौ।। (167/08) मदन सुता खौआलसँ कान्हब सुत गोपीनाथ दौ।। (144/03) गोपीनाथ सुता यादव नहिनाथा।। पबौलीसँ धर्मूसुत कृष्ण पति दौ।। (134/03) कृष्ण्पति (208/04) सुतो घनीक: सकराढ़ीसॅ गोविन्दद सुत पद्मनाम दौ।। (144/07) बेलउँच सँ हेरिल द्दौणा बदलू सुता।। सोदरपुरसँ नीलकंठ सुत यदुपति दौ प्राणपति सुतो बनमालीक: खौआलसँ कान्ह दौ।। बनमाली सुता उँमानाथ काशी नाथ बैद्यनाथा पनिचोमहँ चिन्रामणि दौ।। काशीनाथ सुता नीलाम्ब।र नीलकंठ मवानन्दाी एकहरासँ नारायण सुत रामकृष्ण दौ।। दिघो सँ रघुनन्दतन द्दौणा नीलकंठ सुतो यदुपति।।
(207) (430) ।। भारवा (प्रद्मश्री) दरिहरा सँजगन्नानथ सुत श्या्म दौ।। (258/04) महिघर सुत बुधाई सुतो मांगनिरतनों परिसरासँ पदूम द्दौणा मांगनिसुतो रघु।। नन्दसन हृषिकेशो जालयसँ वेणी दौ।। हृषिकेश सुतो जगन्नामथ: सोदरपुरसँ घिर सुत नारायण दौ।। (122/0) पालीसँ हरियाणि द्दौणा जगन्नाोथ।। सुतो श्यारम: कुजौली सँ शुचि सुत गोपीनाथ दौ।। (161/0/0) गोपीनाथ (316/05) सुतो भवानीक: पनादह सँ भवाई सुत कृष्णा दौ दिधो सँ वसन्त0 द्दौणा।। श्या म सुता अलयसँ यदु नन्दसन सुत परमानन्दु दौ।। 141/06।1 वलियास सँ अच्युजत द्दौणा यदुपति सुता पाली सँ मुकुन्दद सुत सुन्द्र दौ।। (69/0/11) सुन्दसर सुता (227/0/) सोदरपुरसँ हरिराम सुत बैद्दयनाथ दौ।। (151/02)।। बुधवालसँ कृष्णा वैया. इश्व/रीदत्त सुतो काणिकादत्त: करमहासँ जगन।। सुत पुरूषोत्तम दौ।। 129/08 पुरूषोत्तम सुतो बौधन सुखैत खौआल सँ दयाराम दौ।। (169/04) अनी सुतो (254/02) महीक: करमहा सँ छोटाई सुत बछाई दौ।। 129/06।। मुकुन्दा सुतो हरिनन्दतन छोटाइकौ गढ़ माण्ड र सँ चाण सुत पुरूषोत्तम दौ बहेराढ़ी सँ यदुपति द्दौणा छोटाई सुतो बछाई क: वलियारन।। सँ यदुनाथ दौ।। 153/02।। पाली सँ हर पति द्दौणा बछाई सुतो मुरलीघर वंशीघरो खण्ड बलासँ गौरीनाथ सुत हरिदेव दौ।। (171/0) पालीसँ श्री कृष्णद द्दौणा।। महि सुतो दयाराम: बुधवालसँ नरोत्तम दौ।। (49/02)।। नोने सुतो वेणीक: सोदरपुर सँ हाउ दौ।। (29/03) करमहासँ माघव द्दौणा वेणी सुतो गोविन्द7:
(431) माण्ड3र सँ विश्वाम्भमर सुत पद्दनाम दौ।। सतलखासँ केशव द्दौणा गोविन्दस सुतो मघुसूदन: बेलउँच सँ हरदत्त बराउन दौ माण्डहर संथेघ दौ।। मधुसूदन सुता वश्नीक प्र. श्री कृष्णस रामकृष्णँ गोपाल 309/02 हरिकृष्णा : सतलरवा सँ पॉंचीसुत बसाउन दौ गंगोरसँ छनपति द्दौणा।। बवूनी प्र.।। श्री कृष्णर सुता जगाई रामनाथ महिनाथा: माण्डतरसं रामकृष्णि दौ।। (142/05) कुजौली सॅ लोकनाथ द्दौणा जगाई सुतो नरोत्तम सँ।। केशीसुत रमानन्दप दौ।। (207/07) कृष्णीपति प्र. केशी सुतो रमानन्दश: वलियास सँ वलियास सँ लक्ष्मीाकर दौ।। (167/0/0)।। ब्रह्मपुरा सॅ लक्ष्मीौदत्त द्दौणा रमानन्दश।। सुता पाली सँ पीताम्बिर सुत वामानि दौ बेलउँच सँ हरि सुत दामू द्दौणा नदौर सॅ विश्वीनाथ कस्तुनत:।। नरोत्तम सुतो देवकृष्णौ: सरिसबसँ कान्हद सुत भैरव दौ।। (121/04) कारूसुतो भैरवरामेश्वबरौ वलि. अच्युषत दौ।। (141/07)।। बुधवाल सँ जगन्ना्थ द्दौणा भैरव सुतो उँमानन्दर: सतलखा सँ मोहन दौ।। 133/04 मोहन सुतो रघुनाथ: अलय सँ रतिदेव सुत हरिदेव दौ एकहरा सैसुघापति द्दौणा दयाराम।। सुतो म.म.नेनन: (288/08) पालीसँ हेमकर दौ।। (130/02) विष्णु पतिसुताअनिरूद्ध चतुर्भूज गंगाघर बैजू का: पवौलीसँ भानू दत्त सुत।। चक्रपाणि दौ।। वलियाससँ गोरि द्दौणा बैजू प्र. बैद्दयनाथ सुता मनोहर रामकृष्णव रमानन्द हरिकृष्ण : सांदरव्हैरिकेशपर (167/0/0) वर्मनि यामन चतुर द्दौणा रामकृष्णद सुतो शूलपाणि (264/102) घराघरो सकराढ़ी सँ दशरथ सुत कृष्णा राम दौ।। (158/0)।। रूचि सुतो भगीरथ दशरथौ अलय।।
(208) (432) सँशिरू सुत अमरू दौ।। सक. मतिकर द्दौणा दशरथ सुता कृष्णाुराम गंगाराम सुकवि श्यारम रामा: पबौलिसँ शशि दौ।। 170/03।। खौआलसँ लक्ष्मी द्दौणा।। कृष्णाम राम सुतो छितरू प्र. (230/07) रत्न पति मित्रकरौ करमहासँ रामनाथ दौ।। 91/07।। शिवनाथ सुतो रामनाथ बैद्यनाथो सकराढ़ी सँ।। गोविन्दि सुत गादू दौ।। (41/03) यमुगाम सँ हरिकर द्दौणा रमानाथ सुता सकराढ़ी सॅ विश्वदनाथ दौ।। (59/04) विश्व नाथ सुतो रूपेनाथ: (299/07) अलयसँ गुदे सुत दामू दौ खौआल सँ रघुनन्दशन द्दौणा शूलपाणि सुता हेमकर बछरण पूरामा: दरिहरासँ गोवर्द्धन दौ।। (207/06) हरिअमसँ।। मदन द्दौणा हेमकर सुता दरिहरासँ नरे सुत धनी दौ।। (141/05) पॉंथू सुता हरखू रामनाथ भवनाथा: (228/0।) : टक. रघुदौ हरखू सुतो देवनाथ। रविनाथौ बुधवाल सँ बसाउन सुत उँमापति दौ।। सरिसबसँ धरणी द्दौणा रविनाथ सुतो रामकृष्णौ जयकृष्णो। फनन्दासँ रूचिसुत मुकुन्दुय दौ।। (143/03) दिघोसँ हरावू द्दौणा जयकृष्णद सुता हरे नौ (225/06) नीलकंठा एकहरासँ रघुपति दौ।।(145/0/) माण्डषर सँ गांगू द्दौणा नरे सुतो धनी मुरारी सोदरपुर सँ मांगूसूत महेश दौ।। (129/04)।। पनि. कवि द्दौणा धनी प्र. धनश्याकम सुता कुलानन्दस मैयनू रजनू वाचा का: सोदरपुरसँ यदुपति दौ।। (207/04) पाली। सँ सुन्दुर द्दौणा कालिकादत्त प्र. कालीदाशसुता मधुसूदन कन्टी र प्र. यशोदत्नपन्दंा लूचाई प्र. देवकी नन्दणना: हरिअमसँ रामेश्व र सुत भीखन दौ।। 108/02।। (433) (256/02) देवकृष्णमसुतो रामेश्वरर बौको दिघोसँ (215/07) भैरवदत्त दौ।। (187/08) माण्ड5र सँ महादेव द्दौणा रामेश्व र सुता संतोषमणि (216/07) टेड.न गोड.न भिरवन हृदय:।। नाथा: गंगोलीसँ कृपाराम दौ।। (198/10) न. (6/06) कृपाराम सुतो स्व:स्व 318/04 महावल पूरणो खौआल सँ गणपति दौ।। (148/09) गणपति सुतो गरीब (335/08) बभानियाम सँ धनी दौ।। (142/02)।। माण्डगर सॅ परमानन्द( प्र. परमाई द्दौणा।। भिरवन सुता दरिहरा सँ श्री दत्त सुत नन् दौ।। (195/0/0) रोहिणी।। सुतो श्रीदत्त: अलयसॅ गंगाघर दौ।। (63/0/) कृष्णा नन्दह सुतो भवदेव: दरिहरा सँ गोपीनाथ दौ।। (130/03) गोपी नाथ सुता (252/04) घुसौतसँ गोढ़ाई दौ।। (129/07)।। लक्ष्मीतनाथा परनामक ककरू सुतो गोढ़ाई कामदेव शिवदेव पशुपतिय: दरिहरासँ लाखू दौ।। (160/09) बेलउँचसँ मितू द्दौणा गोढ़ाई सुता नारायण (229/0) कृष्ण दाश।। कंगाईका बेलउँच सँ देवपति।। (65/06)।। देवपति सुता गणेश रतिदेव भवदेवा (307/07) खण्डँबला सँ घाने सुत मोहन दो पालीसँ रतिकर द्दौणा भवदेव सुतो गंगाघर:।। सोदरपुरसँ घराघर दौ।। (108/07) गोशॉइ दाश सुतो धर्मपति घराघरो करमहासॅ बावू दौ।। (72/09)।। लक्ष्मीुदेव प्र. लक्षमन सुता प्र. वावू गोपीनाथ रघुनाथ यदुनाथ प्रितिनाथ: सोदरपुरसॅ गुणे दौ।। (31/07) गुणे सुतो शंकर शूलपणि दरि. सोने सुत कुलपति दौ।। हरि. गुणे द्दौणा धरोघर सुता (317/09) हरिअमसँ चित्रामणि दौ।। (182/0)।। वलि. कामदेव द्दौणा।। गंगाघर सुता सरिसब सँ कुनाई दौ।। (138/06) भगीरथ सुतो घरनीघ कुनाई कौ सत. श्यासम दौ।। (142/02) श्याभम सुता एक. गोपी दौ।। (141/04)।1 सरिसबसँ विष्णु।पति द्दौणा।।
(209) (434) पॉंकुनाई सुतो विश्राम: (214/03): माण्ड र सॅ महिपति दौ।। (62/07)।। महिपति सुता पाली सँ भैरव दौ।। (165/06) भैरव सुता खौआल सँ महिपति दौ।। (148/04) नरउनसँ महोदव द्दौणा।। (209/09) गंगाघर सुता वलियारन सॅ रामेश्वौर दौ।। (135/06) रघुराम सुतो रामेश्व।र: बेलउँच सँ भवदेव दौ।। (94/0)।। ब्रहमोरपी पनि. रामदेव द्दौणा।। रामेश्वमर सुतो।। खड़गनारायण: पालीसँ घनश्या।म दौ।। (153/02)।। शंकर सुतोविदू रवि: सोदरपुरसँ जोरसुत शुचिपति दौ खौआल सँ इबे द्दौणा रवि सुतो रामकृष्ण:।। तल्हे0नपुरसँ गोपीनाथ दौ खौआलसॅ गोपीनाथ द्दौणा रामकृष्ण् सुतो श्री कृष्ण। घनश्या0मो सोदरपुरसँ रमानन्द दौ।। (67/07) बलि. माघव द्दौणा घनश्याघम।। सुता पण्डुरआ सँ पॉं भगीरथ द्दौणा।। (69/02) कनन्दृह सँ रामभद्र द्दौणा (317/06) श्रीदत्त सुतोनन्क: पबौलीसँ चन्द्र।पति दौ।। (176/0) चन्द्रदपति सुता दरिहरासँ गंगा।। सुत घनी दौ।। (158/09)।। गंग सुता अभिराम घनी बछरू का (260/09) अलय सँ बावू सुत मघु दौ।। (141/05) हरिहर सुता जगदीश हरिकृष्णक रामकृष्णद प्र. बावू जयाराम हिंगूका सोदरपुर सँ राघव दौ।। (61/06) राघव सुतो घीरूक: पालीसँ राम सुत जूड़ाउन दौ।। बलि. नोने द्दौणा रामकृष्ण( प्र. बावू सुतो मधुक:।। माण्डुर सँ मतिनाथ दौ।। 56/08।। सोदरपुर सँ खेदू द्दौणा मघु सुतो हरिजीव गोविन्दोव सक. विश्वाम्भुर दौ।। (131/08) विशवमभर सुता वुघवालासँ शुभंकरदौ।। (52/08) सोदरपुरसँ माघव द्दौणा घनीसुता (215/03) पालीसँ भवेश दौ।। (196/04) पबौली सँ महेश द्दौणा ननू सुता लाल फतुरी तुफानी का बुघवाल सॅ मोदी दौ।। (178/0)।। मोदी सुतो फकीर गिरधारी कौ बेलउँचसँचौ. प्रभाकर दौ।। (113/08) मनहर सुतो लाल घारू कौ माण्डिर सँ नरहरि सुतहाड़ी दौ कर श्रीपति द्दौणा (435) लालासुतो बन्धुकखगेश माघेव लोचना: पाली सँ कुमुदानन्दि दौ।। (134/03) कुजौली सॅ रमानन्दो द्दौणा को खगेश सुतो प्रभाकर साहेबो दरि. सदानन्दह सुत रघुपति दौ।। भवानीनाथ सुता सदानन्दौ सुता गोपाल रघुपति बैद्यनाथा: सोदरपुर सँ अनिरूद्ध दौ।। रघुपतिसुता एकहरा सॅ रामदेव सुत बछाई दौ।। (1228/0) दरिहरासँ कृष्णरदाश द्दौणा।। यौ प्रभाकर सुतोबाछ: वलियाससॅ पशुपति सुत विधानाथ दौ।। (167/05) सोदरपुर सँ गीनू द्दौणा लूचाई प्र. देवकीनन्दसन सुता गंगोली सँ विश्वहनाथ सुत हरिहरदत्त दौ।। अलव सँ आभी पौत्र वेदनाथ सुत आर्तिनाथ द्दौणा (1206/08) उ. राघानाथ सुता दरिहरासँ निधिनाथ सुत शिवशंकर दौ।। (203/08)।। शिवशंकर प्र. रूप्रनाथ सुतो गोपालशंकर मदनशंकरो नरउनलसँ ब्रजनाथ दौ।। सँ सुत द्दौणा।। (204/09)।। ठ. बालकृष्ण सुतो कमलाकान्तन: नरउनसँ मुनी दौ।। 113/08 करमहा सँ जलघर द्दौणा।। अपरा बालकृष्ण सुता पालीसँ पुरन्द्र दौ।। (193/08) खण्डकबला ।। ठ. भगीरथ द्दौणा ठ. कमलाकान्त सुता उनद्रकान्तन चित्रकान्त( (210/08) भिन्नौकान्ती शिवकान्ताक: (211/07) करमहासँ राघानाथ दौ।। (140/02) विश्व नाथ सुता हरिनाथ नेना।। (285/02)।। प्रेमनाथ (218/04) मुकुन्दक राघानाथा: पण्डुनआ सँ बलभद्र दौ।। (192/07) पाँ बेलभद्र सुता. (255/07) दिगउन्थक सोदरपुर सँ बोचू सुत परिवया दौ।। (98/04) चलमणि सुतो रमानन्द/।। बेचूकौ पालीसँ लक्ष्मी नारायण दौ।। (94/05)। दरिहरासँ घराघर द्दौणा बेचू सुता हरिनंद सुता परिवया कच्चूल वंशघर श्यादमनाथ (239/07) रूपनाथा: करमहा सँ भिरिव दौ।। (941/02) भिरिव सुतो भवानीदत्त: (376/03) सरिसब सँ रधुनाथ दौ।। (94/06)।। पॉं महिपति सुतो रघुनाथ: दरिहरा सँ छाटाई सुत पुछाई दॉं बेलउँचसँ जयकृष्ण0 द्दौणा। रघुनाथ सुता वलियाससँ काशीनाथ दौ।। 112/07 हरिअम सँ मोहन द्दौणा परिवया सुतो मानीकनन्दुन (214/07) मोदानन्द नो टकबालसँ बन्धु सुत।।
(210) (436) ।। बाछ दौ।। (145/0)।। बाछ सुतो (211/0) रविनाथ: सरिसव सँ रतिनाथ दौ।। (205/06) कर. दुखन द्दौणा राधानाथ सुता तेजनाथ शशिनाथ द्वारिकानाथ सोमनाथा:।। सिहौलि माण्ड।रसँ शम्भुानाथ सुत गोवर्द्धन दौ।। (188/02) धर्मेश्व:र सुतो कलाघर: सोदरपुरसँ पोगल दौ।। (188/10) अरापोगल सुता पालीसँ हेमाड.य दौ।। (69/09)।। नरउन सँ गोनोड द्दौणा कसाघर सुता शम्भुुनाथ इश्वनरीदत्त नन्दीशपतिय: हरिअम सॅ प्रान्नागथ दौ।। (139/08) दरिहरा सँ शिवदत्त द्दौणा।। शम्भुिनाथ सुतो गोवर्द्धन: जजिवाल सँ सनफूल दौ।। (183/08)।। पण्डुथआ सँ मोहन द्दौणा गोवर्द्धन सुतो श्रीकान्तग लक्ष्मीलकांतो (05/07) सरिसबसॅ आदिनाथ दौ।। (198/04) आदिनाथ सुता खौआलसँ वेणीदत्त दौ।। (187/06) खण्डआबला सँ गोपीनाथ द्दौणा ठ. इन्द्रा कान्त् सुता विनोदकान्र सुता विनोद प्रमोद कान्र।। अच्युसत कान्ताल: माण्ड रसँ दिनबन्धु् सुंतगोपीनाथ दौ।। (186/0/)।। दिनबन्धुा सुता गोपीनाथ घनानन्दा प्र. (275/02) रेवतीनाथ भोल प्र. यशोदानन्दा वेदाना।। नन्दा : करमहा सँ धर्म्म्दत्त सुत खगेश्व)र दौ।। (194/07) स.म. धर्मदत्त सुतो खगेशवर: गिरीश्वीरो सोदरपुरसँ गिरधारी दौ।। (119/02) वुलवालसँ परशमणि द्दौणा।। खगेश्व।र सुतो हरिहरगोविन्दो एकहरा सॅ दामोदर दौ।। (111/06) सोदरपुर सँ बचकन द्दौणा।। (210/07)।। उ. चित्रकान्त सुता पालीसँ खगनाथ सुत।। गोपीनाथ दौ।। (108/03) बच्थ)न प्र. खगनाथ सुता गोपीनाथ फणिनाथ नरिसा. (244/07) खण्ड)बला सँ ठ. श्री नन्दचन दौ।। (193/09)।। हरिअमसँ लोकनाथ द्दौणा गोपीनाथ।। सुता बैद्यनाथ अनन्त0 फनन्ता : माण्ड9रसँ रधुनन्द)न दौ।। (186/11) रघुनन्द्न सुता खण्डठबला (05/03/ उ.टी) सुता खण्डनबला सॅ जयनाथ दौ।। (177/03) खौआल सॅ मोदनाथ दौहित्र दौ।। अपरा ठ. चित्रकान्तण सुतो अनीलकान्तथ अभयकान्तो/ पालीसँ विकल सुत सुत रूपनाथ दौ।। (108/03)।। विकल प्र. हेमनाथ।। सुता पियूषनाथ (287/07) रूपनाथ पुष्पनाथा: नरउनसँ राधानाथ दौ।। (116/08) कन्दू प्र. राधानाथ सुतो यदुनाथ कत्रज्ना।थौ (244/03) खण्ड।बाल सॅ म.कु. बावू गुणेश्वसर सिंह द्दौणा।। (185/09) सकराढ़ीसॅ हृदयघर द्दौणा रूपनाथ सुता माण्ड)र सँ रूद्र सिंह सुत जयनन्द।न सिंह दौ।। (204/04) रूद्र सिंह सुतो जयनन्दान सिंह: हरिअमसॅ योगीलाल।। दौ।। (185/04) माण्ड0र सँ लोटनी द्दौणा जयनन्दयन सिंह जगतानन्द सिंह: करमहासँ मार्कण्डे8य दौ।। (117/0)।। महादेवसुता बलदेव कमलनयन मार्कण्डेतय का:।। बलियाससॅ रूद्रपति सुत इन्द्र/पति दौ।। (190/0)। खण्डवबला सँ अनूयनाथ द्दौणा मार्कण्डे।य सुतो भोलाक: नरउन सँ मनहर सुत गिरधर दौ।। (201/0।) गीरघर।। सुता करमहा सँ शीतल दौ।। (183/06) बेलउँचसँ भूषण द्दौणा (210/07)।। ठ. मित्रकान्तश सुता पालीसँ भोलानाथ सुत अमरनाथ दौ।। (205/08)।। वलियास सँ ठकुरपति द्दौणा (210/07)।। ठ. शिवकान्तर सुता दरिहरासॅ तारानन्द0 सुत भीमानन्दँ दौ।। (187/03) घनानन्दो सुता लक्ष्मीसनन्दॅन भीकानन्दत गिरजा नन्दाक:।। खण्डनबला सँ बावू रमापति सिंह दौ।। (115/08)।। खोआल सँ बनी द्दौणा गिरजानन्दन सुतो तारानन्दब अम्बिकानन्दों करमहासँ भेषदत्त दौ।। (202/06)।। दरि. किशोरनाथ द्दौणा।। तारानन्दस सुतो भीमानन्द। मेघानन्दोठ करमहा सँ चंचल दौ।। (125/03) नर उनसँ मुक्रिनाथ द्दौणा भीमानन्द सुतो खण्डकबला सँ हरिनाथ सिंह दौ।। (205/0/)।। हरिनाथ सिंह।। सुतो भक्रिनाथ सिंह मुक्रिनाथौ सिंह: माण्डसरसँ कृष्ण।दत्त सुत बॉके दौ।। (186/02) नरउनसँ घुरघर द्दौणा (1204/09)।। ठ. हरिकृष्णक सुता आद्याकान्तर दुर्गाकान्तन (241/0) क्षेमकान्ताघ: नरउन सँ बचकन सुत फतुरी दौ।। (122/05)। सकराढ़ी सँ जगमोहन द्दौणा ठ. आद्याकान्त् सुतो तेजनाथ देवनाथो करमहा सँ लान्हि सुत पीताम्ब5र दौ।।
(211) (438) ।। (122/03)।। बलियास सँ दामोदर द्दौणा (211/0)।। उ. तेजनाथ सुता पालीसँ मोतीनाथ दौ।। (125/09) डमरू नाथ सुतो मेघानाथ: माण्डनरसँ नुमानदत्त दौ।। (183/03)।। खण्डनबला सँ बावू गणेश दत्त सिंह द्दौणा मेघानाथ सुता मोतीनाथ (244/10) अभयनाथ झलानाथ हेडुम्बसनाथा: खण्डनबला सँ बावू ललितेश्व3र सिंह दौ। (203/08)।। करमहा सँ भीमनाथ द्दौणा मोती नाथ सुतो शचीनाथदिना नाथौ नरउन सू अभय नाथ सुत लीलानाथ दौ।। (184/07) भोला नाथ सुतो अभयनाथ:।। (123/02) करमहासॅ भवानीदत्त द्दौणा सरस्व ती अभयनाथ सुता पीणाक नाथ हृदयनाथ लीलानाथ यदुनाथा: (213/08) घुसौत सँ परशमणि दौ (126/05) परशमणि सुतो लूचे बलाकौ पण्डुथआ सँ बलभद्र दौ।। (210/08)।। सोदरपुर सँ परिवया द्दौणा सरस्वरती लीलानाथ सुतो बैद्यनाथ प्रेमनाथौ।। करमहासँ बचकन सुत बल्लो दौ।। (179/0)।। पबौली सँ मन्ध न द्दौणा।। (211/0)।। उ. देवनाथसुता दरिहरासॅ महन्थम सुत महेश दौ।। (202/05)।। महन्थ( प्र. किर्तिनन्द।न सुता महेश गणेश नरेश सुरेशा: नरउनसॅ नेत्रनाथ दौ।। (116/08) कुत्रज्नर प्र. तीर्थनाथ सुतों कृष्णशजी प्र. नेत्रनाथ: बुधवालसँ कंटू दौ।। (120/06) सोदरपुर सँ चित्रघर द्दौणा नेत्रनाथ सुतो शिवनाथ वीरेनाथौ हरिअम सँ ठीठर दौ।। (119/08) ठीठर सुता दरिहरासँ देवनारायण।। सुत श्री नारायण दौ।। (184/02)।। देवनारायण सुतो श्री नारायण सहदेवौ नरउन सँ टेकनाथ दौ।। (203/02)।। टेकनाथ सुता खौआल सँ।। देवकृष्णा दौ।। (162/0)।। नरउनसँ कलानिधि द्दौणा श्री नारायण सुता एक हरा सँ दामोदर दौ।। (111/06)।। सोदरपुरसँ बचकन द्दौणा।। महेश सुता करमहासँ चंचल सुत माघव दौ।। (125/03) माघव सुता नरउन सँ विद्यानाथ दौ।। (198/02)।। विद्दयनाथ सुता करमहासँ केशव दौ।। (119/06) सोदरपुरसँ मनहर द्दौणा।। (439) (211/0/0)।। उ. दुर्गाकान्तथ सुता जीवनाथ दिवानाथ मदनानन्दाम: ओहूकि सँ बावू खोजेन्द्र/ नारायण सुत बावू कुल प्र. श्री मन्र नारायण दौ घुसौत सँ 6. केशव द्दौणा ठ. जीवनाथ सुता फूलदाहा पालीसँ बवे सुत महानन्दर दौ नाहस खौआल सँ चौ. दशर: द्दौणा।। (211/0)।। ठ. क्षेमकान्ता सुता करमहा सँ दिगम्बरर सुत बसन्तण दौ।। (122/0)।। दिगम्बँर सुतो (279/07) बसन्तस प्र. ब्रजनन्दन: सकराढ़ी सँ दामोदर दौ।। (122/06)।। मनमोहन सुता (245/02) दामोदर गोपाल लीलानाथा: (04/08) करमहा सँ नन्द/लाल दौ।। (189/07)।। सोदरपुर सँ हृदयनाथ द्दौणा दामोदर सुतो पद्मनाथ: एकहरा सँ।। दामोदर दौ।। (111/06) सोदरपुरसँ बचकन द्दौणा बसन्ता सुता वलियारन सँ भैयो सुत रामेश्वरर दौ।। (204/0)।। रामेश्वदर सुता सोदरपुर सँ शिवनन्दरन दौ।। (193/05)।। शिवनन्द।न सुतो महावीर: पालीसँ श्री नाथ दौ।। (193/07)।। खण्डरबलासँ महाराज रूद्रसिंह द्दौणा अपरा ठ. श्रेमकान्त सुता उग्रनाथ (212/02) रघुनाथ (213/06) यदुनाथ।। शचीनाथा: पालीसँ झिंगुर सुत बद्रीनाथ दौ।। (128/0/)।। शक्रिनाथ सुता लक्ष्मी।नाथ झिंगुर ज्योा. (240/02) माघवा: सोदरपुरसँ गिरधारी दौ।। (188/03) ।। गिरधारी।। सुते भैयेक: बुधवाल सँ मनरंजन दौ।। (188/07) सोदरपुरसँ भवन द्दौणा।। झिंगुर सुतो बद्रीनाथ: पबौली सं नाथा सुत बुद्धि दौ।। (198/0/)।। घुसौतर दुर्म्मिषदू।। बद्रीनाथ सुता माण्डथर सँ श्रीपति सुतददू दौ।। (210/03)।। नन्दी।पति सुतो श्री पति: खण्डीबला सँ कृष्णा्राम सुत चुन्नी लाल दौ।। (166/03)।। चुन्नीरलाल सुता नाहरू। खोआल सँ बतहन दौ।। (199/04)।। बेलउँच सँ छबन द्दौणा श्रीपति सुतो यद्दू गोनू कौ सोदरपुर सँ (कन्होाली) बदन दौ।। (121/05)।। बदन सुता पण्डुीआ सँ।। लच्छील दौ।। (197/02)।। सरि्सबसँ चन्द्र।मणि द्दौणा यद्दू सुतो गीता सरिसबसँ कालीदत्त सुत गोपाल दौ।। (192/02)।। गणेश सुतो कालीदत्त: एकहरासँ।।
(212) (440) ।। बवुरैया दौ।। (192/03) सोदरपुर सँ घीरेश्वयर द्दौणा कालीदत्त सुतो गोपाल: बुधवालसँ हृदयमणि दौ।। (199/03)।। खण्ड बलासँ उग्रसिंह द्दौणा गोपाल सुतो फेकू बूचनौ।। 169।। माण्डणर सँ शोभन सुत भैये दौ।। (205/08)।। तिसउँत सॅ भैये द्दौणा।। (212/06)।। ठ. उग्रनाथ सुता नरउनसँ सोमनाथ दौ।। (211/02)।। कत्रज्ना थसुता।। सोमनाथ तंत्रनाथ विश्वानाथ मोदनाथा: सोदरपुरसँ लक्ष्मीबपति दौ।। (205/04)।। कृष्ण1पति सुतो लक्ष्मी।पति दरिहरासॅ बछरण दौ।। (184/02)।। बछरण।। प्र. मित्रनारायण सुता पालीसँ घरनीघर दौ।। (118/02) सोदरपुर सँ मउज द्दौणा लक्ष्मी पति सुतो गुदर: माण्ड।रसँ दामोदर दौ।। (107/0/0) रत्नपतिसुला।। दामोदर गिरघर बनमाली का: सोदरपुरसँ कुभ बिहारी दौ।। (190/08) कुत्रुबिहारी सुतो रोहिणीदत्त मुरारी करमहा सँ सुबोध दौ।। (99/03)।। दरिहरा सँ मनसुख द्दौणा दामोदर सुतो (281/05) रमानन्द : खण्ड(बला सँ बावू गणेशदत्त सिंह दौ।। (174/0)।। दरिहरा सँ घननाथ द्दौणा सोमनाथ सुता।। मणिनाथ हरिनाथ भद्रनाथ भवानी नाथ देवनाथा: मानी सोदरपुर सँ शास्त्रा र्थ मर्स्तिण्डथ मार्तण्डल उदयपुर: राजस्थाठन में एजपण्डित) मार्कण्डेाय सुत लोकेश्वोर दौ।। (77/08) बाछनि सुतो वामदेव: माण्डारसँ परमानन्दथ दौ।। (105/03)।। खण्डथबला सँ रामदेव द्दौणा वामदेव सुता गंगा बछरू (315/04) मंचिता: करमहासँ सदानन्दा दौ। (156/09)।। माण्डार सँ हरपति द्दौणा मंचित सुतो रघुनाथ: करमहा सँ नन्द दौ।। (91/09)।। म.म. नन्द। सुता. खौआल सँ लक्ष्मी पति दौ नरउन सँ कृष्ण: द्दौणा। रघुनाथ सुतो पिणाक पाणि शूलपाणि करमहा सँ महिघर दौ।। (110/03)।। सोदरपुरसँ बासुदेव द्दौणा पिणाकपाणि सुतो सदाशिव गणेशो पाली सँ दुर्गादत्त।। सुत मोहन दौ।। (106/08) मोहन सुतो भोल प्र. तुलाराम रूद्रनाथौ सारे. सोदर. रूद्रनाथ दौ।। (110/09)।। गंगाराम सुतो गुणानन्दल: हरिअमसँ अनन्त दौ।। (441) ।। (1192/08)।। अनन्तु सुतो (219/02) भिरिवक: सोदरपुर सॅ रघुनाथ दौ।। (94/06)।। रघुनाथ सुता घुसौत सँ सदानन्दु दौ।। (139/07)।। पबौली सँ भरथी द्दौणा गुणानन्द6 सुता। रंकनाथ दुल्ल ह प्र. गोपीनाथ रूद्रनाथा: माण्डदर सॅदशरथ दौ।। (92/06) सोदरपुर सॅं रतिपति द्दौणा रूद्रनाथ सुता दरिहरा सँ देवनाथ दौ खण्डग गुणम्मदद।। द्दौणा।। (187/04) खण्डदबला सँ गुणानन्दव द्दौणा गणेश सुतो मार्कण्डेमयक: हरिअमसँ योगी लाल दौ।। (185/04)।। माण्डडर सँ लोटनी द्दौणा।। मार्कण्डेसय सुता लोकेश्व।र।। अनन्तँ कन्टीलर वाचस्प7ति उँमापति गंगोपतियशमापतिय: दरिहरासँ खगपाणि दौ।। (120/06) करमहा सँ विश्वपनाथ द्दौणा लोकेश्वयर सुतो प्रोर्थ।। (M.A. PHS. D.CH.) विशेश्वकर प्र. भेखेश्व र: नरउनसँ तेजनाथ सुत कमलानाथ दौ।। (123/06)।। कमलानाथ सुता दुर्गानाथ दिनानाथ अमरनाथा: (06/0/0 उ.टी) सोदरपुर सँ ठीठर सुत ब्रजनाथ दौ बुधवाल सँ गोशॉई द्दौणा (212/06)।। ठ. रघुनाथ सुता हरिअम सँ मुक्रिनाथ दौ।। (193/0/) जयदेव सुता मुक्रिनाथ वेणी नाथ।। बुद्धिनाथ (05/3.2.) सिद्धिनाथ विन्य्(ुतनाथ वलियास सँ लेशपति दौ।। (193/04) करमहा सँ पीताम्बदर द्दौणा मुक्रिनाथ सुतो हेमनाथ: नरउन सँ सरस्विती।। यदुनाथ दौ।। (211/04) सरस्वदती यदुनाथ सुतो नित्यवनाथ रमानाथौ माण्डकर सँ फलहारी दौ।। (116/02) फलहारी सुता बददेव वासुदेव बच्चीण (170)।। हेमकृष्णान: खण्डलबला सँ रघुपति दौ।। 175/02।। खौआल सँ धर्मनाथ द्दौणा (204/09)।। ठ. राघेकृष्ण सुता वैया. दयाकान्त0 गौरीकान्तध (214/08) वैया. रमाकान्ताा:।। पालीसँ दुखरण दौ।। (191/0/11) दुखरण प्र. मणिनाथ सुता दरिहरा सॅ मनभरन दौ।। (177/02) सरिसब सँ घरापति द्दौणा वैया. ठ. दयाकान्तु सुता कृपाकान्त (213/0)
(213) (442) (213/09) शोभाकान्र काशीकान्तक श्रीकान्ता: वलियास सॅ लेशपति दौ।। (193/04) करमहा सँ पीताम्ब)र द्दौणा।। (213/10)।। ठ. कृपाकान्र सुता माण्डॅरसँ।। कमलापाथा दौ।। (107/03) कमलानाथ सुता खण्डीबला सॅ विजयनाथ सिंह दौ।। (205/0/) विजयनाथ सिंह सुतो मुनिनाथ सिंह: नरउनसँ शिवनन्दठन दौ।। (201/0)।। शिवनन्द न सुतो जगन्नाहथ: दरिहरा सॅबल मद्रदौ।। (203/04) बलभद्र सुतो कोशीनाथ: (217/0) सोदर पुर सँ गोपाल दौ।। (186/0)।। वुधवाल सँ।। सरशमणि द्दौणा अपरा ठ. कृपाकान्तस सुता नरउमसँ धर्मनाथ सुत नेत्री नाथ दौ।। (125/08) धर्मनाथ सुता चेतनाथ हरिनाथ प्र.।। किर्तिनाथ देवनाथ प्र. नेत्रीनाथ नित्यानाथ लीला नाथा: वलियास सँ ठेड.नी सुत बच्चेर दौ।। (185/07) सोदरपुर सँ काशी द्दौणा देवनाथ: प्र. नेत्री नाथ सुतो विनोद हरिअम सँ कुलनाथ सुत भरत दौ।। (182/07) भोला प्र. भोला प्र. तुलानाथ सुता लक्ष्मीँनाथ (283/04) राम प्र. डीहनाथ लक्षमन:।। प्र. डीम्मतनाथ भरथ: प्र. बलभद्रा: पबौली सँ नारायणदत्त दौ।। (204/01)।। माण्डरर सॅ भवनाथ द्दौणा भरत सुता नरउनसँ एकनाथ सुत: बैद्यनाथ थौ।। (192/02)।। बैद्दयनाथ सुता गुणनाथ (244/0) गणानाथ ब्रजनाथ जीवनाथ इन्द्रैनाथा: (245/01) सोदरपुरसँ नेना दौ।। (193/0)।। नेना सुतो भूवनेश्वजर:।। पालीसँ परिवया दौ।। (181/06)।। खौआल सँ बनी द्दौणा (213/0/) ठ. शोभाकान्ती सुता हरिअम सॅ भेरवघर सुत महावीर दौ।। (107/02)।। सुता महिघर सत्यकघर कमलाघर।: खण्डुबला सँ भैया दौ।। (162/05) खौआल सँ गोकुल द्दौणा महिघर सुतो भेरवघर: दरिहरासँ तिलानाथ दौ।। (165/0)।। खण्डसबला सँ भिखू द्दौणा भेरवघर सुतो महावीर कन्टीररौ खण्डरबला सँ चुम्म न सिंह दौ।। (197/09)।। चुम्म न सिंह सुतो दयानाथ सिंह: वलियाससँ टूर्म्मिल दौ। (443) (67/11)।। 177/06 इर्म्मिल सुता घनश्यामम कुमर गोशॉइका: जमहौली पाली सँ कमला दत्त दौ।। (178/08)।। खण्डमबला सँ थानू द्दौणा महावीर सुतो इन्दु घर विश्व्म्भ र।। खौआल सँ वैया. हरिनाथ सुत कृष्णणदेव दौ।। 164/09।। वैया. हरिनाथ सुतो कृष्णमदेव भोलाको सरिसबसँ कुरे सुत बतहा दौ।। (209/0) विश्राम सुतो ठकुरे करिये (240/09) कौ दरिहरासँ रोहिणी दौ।। (209/03)।। (336/04) रोहिणी सुता कुजौली सँ छोटकू दौ।। (57/05)।। सोदरपुर सँ कमलापति द्दौणा ठकुरे सुतो बतहा क: फनन्दीह सँ गुणीश्वरर सुत गोशॉई घरनाथ दौ।। (179/0) गोशॉंइ घरानाथ सुता खगनाथ (307/0)। भगतझोटी सरिबसब सँ महादेव सुत भोला दौ।। (178/07) एकहरा सॅ ज्यो3. हरिश्वोर द्दौणा बतहा सुता कार्तिक भूटकन बच्चाो का पालीसॅ भवानीदत्त सुत लोटन दौ।। (196/05)।। लोटन सुतो बैद्यनाथ: सँजीवन दौ।। (188/07) कवि जीवन सुतो बिनमा चित्रनाथौ (307/08) सोदरपुरसँ भवन दौ।। (188/07) खौ. चेथड द्दौणा कृष्णिदेव सुतो रूद्रनाथ काशी नाथौ दिगउन्धल सोदरपुर सँ नित्यावनन्द। दौ।। (210/0)।। मानीक नन्ददन सुतो विद्यानन्दा नित्या0नन्दोु नरउन सॅ।। बाना दौ।। (173/02)।। पण्डुाआसँ भैया द्दौणा नित्यािनन्द सुता जीबानन्दो बचनानन्दन शचना नन्द इन्द्रा नन्दण जयानन्दाभ: पालीसँ शक्रिनाथ दौ।। (212/07) सोदरपुरहँ गिरधारीछे।। (213/0)।। उ. काशीकान्ता सुता नरउन सॅनेत्रनाथ सुत वीर नाथ दौ।। (211/08) वीरनाथ सुता घुसौत सॅ फतुरीसुत विद्यानन्द् दौ।। (198/02)।। फतुरी सुता रमानन्द परमानन्द3 विद्दयानन्द तारानन्दाै: सिमर. खौआल सॅअनिरूद्ध दौ।। (133/05)।। जयभद्र सुतो अनिरूद्ध यदुनाथो पबौलीसॅ नाथा दौ।। (198/09)।। पण्डु/आ सँ ठाकुरदत्त द्दौणा अनिरूद्ध सुता गणेश हरिनन्दबन शिवनन्द।न श्री नन्द/ना: पालीसँ शक्रिनाथ दौ।। (112/07) सोदरपुर सॅ गिरधारी द्दौणा
(214) (444) ।। विद्यानन्द सुता कन्हौ ली सोदरपुर सँ पुरूषोत्तम सुतजयनन्द(न दौ।। (177/07)।। पुरूषोत्तम सुतो जयनन्दसन यदुनन्दानो करमहा सॅ विश्वतनाथ दौ।। (210/07) पण्डुुआ सॅ बलभद्र द्दौणा जयनन्द्न सुता अभिरमन गोपीरमन रोहिणीरमन रेवती रमना: मंगरौना हरिअम सँ भैरव सुत मुसहड़ दौ।। (73/03)।। चिलका सुतो (274/09) जीवन: खौआल सँ पद्मापति दौ।। (126/08)।। सरिसब सँ रघुनाथ द्दौणा जीवनाथ प्र. जीवन सुता योगनाथ ननू (261/0) (315/02) बावूनाथ केदार नाथ।: सोदरपुर सँ मोहन सुत धीरेश्वनर दौ।। (192/04) दरिहरा सँ भिखारी द्दौणा योगनाथ सुता भीखन भैरव भूलना: माण्ड्र सँ हियन दौ।। (114/0)।। अपरा पॉहियन सुतो यदुनाथ: एकहरा सँ म.म. गुणीश्वनर दौ।। (134/09)।। पण्डु।आ सँ पॉं धीरेश्वनर द्दौणा भैरव सुतो मुसहड़: माण्डसर सँ कलाघर सुत शम्भुस दौ।। (210/04)।। जजिवाल सॅ सनफूल द्दौणा मुसहड1 सुतो पूर: (293/08)।। नाहसं खौआल सँ युवराज दौ।। (199/06)।। हरिअम सँ खगदत्त द्दौणा।। (213/0) उ. श्री कान्तु सुतो इनद्रकान्त शेखर प्र. मुक्रिकान्तोा करमहा सँ लोकनाथ दौ।। (180/0)।। लोकनाथ प्र. सीमाराम सुता नरउन सँ बलदेव दौ।। (202/08) खण्डरबला सँ बावू घनेश्व0र सिंह द्दौणा।। (213/09)।। उ. गौरीकान्त सुता माण्डडर सँ रमानन्दो दौ।। (212/06) रमानन्दौ सुतो महावीर मोहनो नरउन सँ आदिनाथं दौ।। (119/06) हरिअमसँ लोकनाथ द्दौणा।। (213/09) वैया. उ. रमाकान्त सुता हरिअम सँ लक्ष्मीअनाथ दौ।। (213/06) लक्ष्मीौनाथ सुता रघुनाथ मथुरानाथ केदारनाथा: नरउनसँ राधानाथ दौ।। (193/03)।। राधानाथ सुतो बौक क: (276/08) पबौली सँ शीतल दौ।। (179/02) शीतलादत्त सुता पाली सँ बाउन सुत कलरू दौ।। (113/0)।। बाउन सुतो गोशॉई कलरूक: (445) ।। सोदरपुर सँ बन्धु सुत गुल्लीद दौ।। (104/05)।। बन्धु सुतो गुल्लीौक3 नरउन सॅ कुलपति दौ।। (100/0) बुधवाल सँ हरिश्व1र द्दौणा गुल्ली। सुता नरउन सँ। रूद्रपति दौ।। (117/09)।। सरस्व)ती रूद्रपति सुता हरिअम सँ यार दौ।। (104/05) माण्डरर सँ भवेश द्दौणा (गौशॉई कलरू सुतो फूद्दी प्र. बलभद्र: (280/06) दरिहरासँ यग्य नारायण दौ।। (192/09)।। नरउन सॅ लक्ष्मी नाथ द्दौणा अपरा गोशॉई कलरू सुतो लोकनाथ: खण्डरबला सॅजगत सिंह दौ।। (120/02)।। बलियास सँ मणि द्दौणा अपरा उ. रमाकान्तर सुता बुधवाल सँ सोन सुत जनार्दन दौ।। (183/02)।। माण्ड र सॅ हनुमान दत्त द्दौणा।। (204/09)।। उ. केवल (112/06) कृष्णर सुता धराकान्ता मघुकान्त मेघाकान्ता : (218/03) वलियास सॅ देवपति दौ।। (193/02)।। नरउनसँ गदापणि द्दौणा।। उ. धराकान्त0 सुता माण्ड.र सँ बच्चूि सुत यदुनन्द3न दौ।। (201/03) यदुनन्दौन।। सुतो देवनन्दतन: सोदरपुरसॅ म.म.उ. सदन दौ।। (189/06)।। म.म. ठ. सदन सुतो महो षष्ठी्नाथ वेणीनाथ महो गोप्रनाथ बैया. अर्कनाथा: दरिहरा सॅ धनानन्द6न दौ।। (211/07) खण्डीबलासॅ बावू रमापित सिंह द्दौणा उ. मधुकान्तस सुता विश्वदनाथ पुण्युनाथ (216/02) जयनाथ श्री नाथा: (217/04) (217/09) दरिहरा सॅ ननू सुत तोषनाथ दौ।। (192/0/0) घुरघुर प्र. तोषनाथ सुल।। खण्डधबलासूं बावू योगीपति सिंह दौ।। (184/102) बावू योगीपति सिंह सुतो बावू घरापति सिंह: सकराढ़ी सँ ब्रजमोहन दौ।। (122/07) ब्रजमोहन सुता रामलक्षमन भरत शत्रुघ्नार: नरउन।। सँ दुरिवया सुत बुद्धिकर दौ।। (201/04)।। खौआल सॅ मोदनाथ द्दौणा उ. विश्वबनाथ सुतो विजय नाथ विद्यानाथौ करमहासँ नरनाथ सुत गणेश दौ।। (178/04) गणेश।। सुता।। बेलउँचसॅ सुधाकर सुत मदन मोहन दौ।। (183/08) सुधाकर सुतो मदन मोहन: पण्डुॅआ सँ पॉंजीवेश्व र दौ।। (65/05) पॉंरामकृष्ण/ सुतो पॉजीवेश्वुर: पाली सॅमवत्नीुदत्त।
(215) (446) ।। सुत लोटन दौ।। (214/06) वलियाससॅ जीवन द्दौणा पाँ काशीनाथ: सोदरपुरक टकासॅ इशान्नालथ सुत गुदर दौ।। (188/0/0) छबनू सुतो बचनू क:।। वुधवाल सॅ नरपति दौ।। (172/0/0)।। नरपति सुतो रूद्रपति ब. 2।0। रूद्रपति दरिहरा सँ हरिजीव दौ।। (73/0/)।। हरिअमसॅ मोहन द्दौणा बबनू सूतो इशान्ना।थ: अलयसँ मही दौ।। (160/02) अपरा मही सुतो दरिहरासँ गंग सुत छनी दौ।। (209/09) घनी सुता सोदरपुर सँ दलपति दौ।। (147/02) दापपति सुतो किर्तिपाति सुखैत खौआलसँ।। जगाई सुत अनी दौ।। (207/106) करमहा सँ बछाई द्दौणा इशान्नातथ सुता दीनानाथ गुदर सोन मनोहर: (275/0) बलियास सॅ खुशिहाल सुत वाचा दौ।। ।। (135/0) बाचा (263/02) सुतो ब. 16/09 जयरामे बावूलालौ हरिअम सँ देवकृष्ण सुत रामेश्व र दौ।। (209/0)।। गंगोली सँकृपाराम द्दौणा गुदर सुता करमहासँ होरिल दौ।। (124/05) होरिल सुता चिन्ता मणि चाण विहार पॉंगुदर झपटीका सरि सबसँ तिलकेश्वौर दौ।। (199/08)।। तिलकेश्वतर सुतो लक्षेक्ष्वपर वलियास सँ बेचू।। सुत हेमनाथ दौ।। (130/03)।। हेमनाथ सुतो बवुएक: हरिअमसँ बौक दौ।। (209/0)।। बोक सुता सकराढ़ी सॅ दिनबन्धु/ दौ।। (129/06) करमहा सँजगन दौहित्र दौ।। मदनमोहन सुता पाली सँ रघुनन्द़न दौ।। (197/03)।। रघुनन्दँन सुता चुनप्रन एमी यद्दूका कुजौली सॅ हृदयनाथ सुत कृष्ण9लाल दौ।। (199/07)।। म.म. वागीशसुता।। (269/0) बाछ हेमनाथ घनी जयनाथ हृदयनाथा: सोदरपुरसँ गोनू दौ।। (168/02)।। उचतिसर पुरूषोत्तम द्दौणा हृदयनाथ सुतो खगनाथ बैया. कृष्णतलालौ वलियास।। सँ ब्रजनाथ दौ।। (140/02)।। घुसौत सँ ठ. उँमापति द्दौणा वैया. कृष्णतलाल सुता बेलउँच सँ छबन सुत नेहनाथ दौ।। (199/04) नेहनाथ सुतो मुशन प्र.।।
(447) ।। बैद्यनाथ: दिघो सँ ऑखी सुत हिरादौ।। (187/0/0)।। हिरा सुतो बाचाक: (218/05) करमहा सॅ चित्रघरसुतऋद्धि दौ।। (164/09) दरिहरा सॅबवनू द्दौणा।। (215/07)।। उ. पुण्य नाथ सुता विनोद प्र. (217/0) अभयनाथ प्रकाश ललना: हरिअम सॅ बृजबिहारी सुत गणेश दौ।। (203/05) उगरी सुतो कुंजीबिहारी बृज बिहारी कौ।। कुजौली सँ झडूला सुता आदिनाथ दौ।। (1164/0/)।। आदिनाथ प्र. तिलकेश्वहर सुतो चन्द्रालनन्द : बमानिपाम सँरूदी दौ।। (139/07)।। सोदरपुरसँ महेशदत्त द्दौणा।। बृज बिहारी सुतो घनेश्वनर गणेशौ सरिसब सँ पॉं जगद्धर सुत पॉभूवनेश्व रीदत्त दौ।। (73/05)।। पॉंननू सुतो पॉं जगद्धर: करमहासॅ गोरीक्ष्तध।। दौ।। (132/04)।। महो गौरीदत्त सुता सोदरपुर सँ उँमापति दौ।। (166/08)।। करमहा सँ जगन्ना थ द्दौणा पॉंजगद्धर सुतो पॉं भूवनेश्वररीदत्त भोला कौ।। पाली सँ कमलादत्त दौ।। (178/08)।। खण्डरबला सँथानू द्दौणा पॉं भूवनेश्वौरीदत्त सुता बुधकालसँ दुर्गापति सुत मुकुन्दँ दौ।। (189/04)।। मुकुन्दा सुता।। भूषी वूचन बूदा छोटकू का सरिसब सँ ठीठर दौ।। (177/09)।। पॉं चाण सुता ठीठर जयलाल ब्रजलाल मन्नू का वलियास सँ नाथ दौ।। (120/04)।। (334/06) नाथ सुतो गोकुल: बुधवाल सँ ब्रह्मदत्त सुत बछरू दौ।। (172/0/0) ब्रह्मपति सुतो (298/05) साहिब बछरू कौ कुजौली सँ गौरी नाथ सुत रामी दौ।। (56/03)।। माण्ड्र सँ बावू द्दौणा बछरू सुतो परशमणि रतनो खण्डाबला सँ बन्धुथ दौ।। (120/05)।। बन्धु् सुतो सिपाही दुर्गादत्त: पाली सँ अनू दौ।। (88/07)।। रामचन्द्र सुत गोपीनाथ सुतो वादूक: खौआलसँ रूचि दौ।। बावू सुतो अनू नारायणौ खोआल सँ भीखू सूत राम दौ सरिसवसँ कृष्णो द्दौणा रखौआल राम प्र. रामलाद सुता सरिसमसॅ जगन्नाूथ सुतक्षय दौ।। (263/04) करमहासँ लक्ष्मी पति द्दौ।
(216) ।। अनू सुतो बाछाक: सोदरपुरसँ दशावधान दौ।। रामकर सुत हरपति सुतो दशावधान दशरथो दरिहरा सॅ वामन सॅ वामन दौ।। दशावधानसुता।। दरिहरासँ रामकृष्णत सुत शुभंकर दौ घुसौत सँ कृष्णददेव द्दौणा ठीठर सुतो जगद्धर: दरिहरा सँ भवदत्त सुत कन्हादई दौ।। (73/0) सुबोधसुतो (267/07) भवदत्त: पॉ हिरा दौ।। (120/02)।। पॉं हिरा सुता वलियास सँ भगीरथ दौ।। (62/04) शिवपति सुत मेहन्त् सुतो मोहन: सोदरणभिखाई दौ।। मोहन सुतो भगीरथ मनीकों सोदरपुर सँ कृष्णाुनन्द दौ।। (173/04)।। कृष्णामनन्द। सुतो रेया पीताम्बसरौ पाली सँ चीकू सूत गोविन्दु दौ।। (71/03) सोदरपुरसँ बावू द्दौणा।। २.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली मैथिलीक मानक लेखन-शैली
1. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली आऽ 2.मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली 1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली
मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन
१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओलोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोकबेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोटसन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽकऽ पवर्गधरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽकऽ ज्ञधरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।
२.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आनठाम खालि ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्दसभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।
३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहिसभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।
४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएवला शब्दसभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, याबत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।
५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्दसभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारूसहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।
६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।
७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।
८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क)क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमेसँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख)पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग)स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ)वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ)क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च)क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।
९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटिकऽ दोसरठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु(माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्दसभमे ई नियम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।
१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्दसभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषासम्बन्धी नियमअनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरणसम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्षसभकेँ समेटिकऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनिकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽवला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषीपर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़िरहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषतासभ कुण्ठित नहि होइक, ताहूदिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। हमसभ हुनक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ चलबाक प्रयास कएलहुँ अछि। पोथीक वर्णविन्यास कक्षा ९ क पोथीसँ किछु मात्रामे भिन्न अछि। निरन्तर अध्ययन, अनुसन्धान आ विश्लेषणक कारणे ई सुधारात्मक भिन्नता आएल अछि। भविष्यमे आनहु पोथीकेँ परिमार्जित करैत मैथिली पाठ्यपुस्तकक वर्णविन्यासमे पूर्णरूपेण एकरूपता अनबाक हमरासभक प्रयत्न रहत।
कक्षा १० मैथिली लेखन तथा परिमार्जन महेन्द्र मलंगिया/ धीरेन्द्र प्रेमर्षि संयोजन- गणेशप्रसाद भट्टराई प्रकाशक शिक्षा तथा खेलकूद मन्त्रालय, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र,सानोठिमी, भक्तपुर सर्वाधिकार पाठ्यक्रम विकास केन्द्र एवं जनक शिक्षा सामग्री केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुर। पहिल संस्करण २०५८ बैशाख (२००२ ई.) योगदान: शिवप्रसाद सत्याल, जगन्नाथ अवा, गोरखबहादुर सिंह, गणेशप्रसाद भट्टराई, डा. रामावतार यादव, डा. राजेन्द्र विमल, डा. रामदयाल राकेश, धर्मेन्द्र विह्वल, रूपा धीरू, नीरज कर्ण, रमेश रञ्जन भाषा सम्पादन- नीरज कर्ण, रूपा झा 2. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर,तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन,अखनि,एखेन,अखनी ठिमा,ठिना,ठमा जेकर, तेकर तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय:भ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत:जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।
6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:-हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
20. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
21.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
आब 1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आऽ 2. मैथिली अकादमी, पटनाक मानक शैलीक अध्ययनक उपरान्त निम्न बिन्दु सभपर मनन कए निर्णय करू। ग्राह्य / अग्राह्य 1.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/ होएबाक 2. आ’/आऽ आ 3. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए 4. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल 5. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह 6. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’ 7. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करै बला/क’र’ बला 8. बला वला 9. आङ्ल आंग्ल 10. प्रायः प्रायह 11. दुःख दुख 12. चलि गेल चल गेल/चैल गेल 13. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन 14. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह 15. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि 16. चलैत/दैत चलति/दैति 17. एखनो अखनो 18. बढ़न्हि बढन्हि 19. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ 20. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ 21. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ 22. जे जे’/जेऽ 23. ना-नुकुर ना-नुकर 24. केलन्हि/कएलन्हि/कयलन्हि 25. तखन तँ तखनतँ 26. जा’ रहल/जाय रहल/जाए रहल 27. निकलय/निकलए लागल बहराय/बहराए लागल निकल’/बहरै लागल 28. ओतय/जतय जत’/ओत’/जतए/ओतए 29. की फूड़ल जे कि फूड़ल जे 30. जे जे’/जेऽ 31. कूदि/यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद 32. इहो/ओहो 33. हँसए/हँसय हँस’ 34. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/नौ वा दस 35. सासु-ससुर सास-ससुर 36. छह/सात छ/छः/सात 37. की की’/कीऽ(दीर्घीकारान्तमे वर्जित) 38. जबाब जवाब 39. करएताह/करयताह करेताह 40. दलान दिशि दलान दिश 41. गेलाह गएलाह/गयलाह 42. किछु आर किछु और 43. जाइत छल जाति छल/जैत छल 44. पहुँचि/भेटि जाइत छल पहुँच/भेट जाइत छल 45. जबान(युवा)/जवान(फौजी) 46. लय/लए क’/कऽ 47. ल’/लऽ कय/कए 48. एखन/अखने अखन/एखने 49. अहींकेँ अहीँकेँ 50. गहींर गहीँर 51. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए 52. जेकाँ जेँकाँ/जकाँ 53. तहिना तेहिना 54. एकर अकर 55. बहिनउ बहनोइ 56. बहिन बहिनि 57. बहिनि-बहिनोइ बहिन-बहनउ 58. नहि/नै 59. करबा’/करबाय/करबाए 60. त’/त ऽ तय/तए 61. भाय भै 62. भाँय 63. यावत जावत 64. माय मै 65. देन्हि/दएन्हि/दयन्हि दन्हि/दैन्हि 66. द’/द ऽ/दए 67. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) 68. तका’ कए तकाय तकाए 69. पैरे (on foot) पएरे 70. ताहुमे ताहूमे 71. पुत्रीक 72. बजा कय/ कए 73. बननाय 74. कोला 75. दिनुका दिनका 76. ततहिसँ 77. गरबओलन्हि गरबेलन्हि 78. बालु बालू 79. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) 80. जे जे’ 81. से/ के से’/के’ 82. एखुनका अखनुका 83. भुमिहार भूमिहार 84. सुगर सूगर 85. झठहाक झटहाक 86. छूबि 87. करइयो/ओ करैयो 88. पुबारि पुबाइ 89. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि 90. पएरे-पएरे पैरे-पैरे 91. खेलएबाक खेलेबाक 92. खेलाएबाक 93. लगा’ 94. होए- हो 95. बुझल बूझल 96. बूझल (संबोधन अर्थमे) 97. यैह यएह 98. तातिल 99. अयनाय- अयनाइ 100. निन्न- निन्द 101. बिनु बिन 102. जाए जाइ 103. जाइ(in different sense)-last word of sentence 104. छत पर आबि जाइ 105. ने 106. खेलाए (play) –खेलाइ 107. शिकाइत- शिकायत 108. ढप- ढ़प 109. पढ़- पढ 110. कनिए/ कनिये कनिञे 111. राकस- राकश 112. होए/ होय होइ 113. अउरदा- औरदा 114. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) 115. बुझएलन्हि/ बुझयलन्हि (understood himself) 116. चलि- चल 117. खधाइ- खधाय 118. मोन पाड़लखिन्ह मोन पारलखिन्ह 119. कैक- कएक- कइएक 120. लग ल’ग 121. जरेनाइ 122. जरओनाइ- जरएनाइ/जरयनाइ 123. होइत 124. गड़बेलन्हि/ गड़बओलन्हि 125. चिखैत- (to test)चिखइत 126. करइयो(willing to do) करैयो 127. जेकरा- जकरा 128. तकरा- तेकरा 129. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे 130. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/करबेलहुँ 131. हारिक (उच्चारण हाइरक) 132. ओजन वजन 133. आधे भाग/ आध-भागे 134. पिचा’/ पिचाय/पिचाए 135. नञ/ ने 136. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय 137. तखन ने (नञ) कहैत अछि। 138. कतेक गोटे/ कताक गोटे 139. कमाइ- धमाइ कमाई- धमाई 140. लग ल’ग 141. खेलाइ (for playing) 142. छथिन्ह छथिन 143. होइत होइ 144. क्यो कियो 145. केश (hair) 146. केस (court-case) 147. बननाइ/ बननाय/ बननाए 148. जरेनाइ 149. कुरसी कुर्सी 150. चरचा चर्चा 151. कर्म करम 152. डुबाबय/ डुमाबय 153. एखुनका/ अखुनका 154. लय (वाक्यक अतिम शब्द)- ल’ 155. कएलक केलक 156. गरमी गर्मी 157. बरदी वर्दी 158. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ 159. एनाइ-गेनाइ 160. तेनाने घेरलन्हि 161. नञ 162. डरो ड’रो 163. कतहु- कहीं 164. उमरिगर- उमरगर 165. भरिगर 166. धोल/धोअल धोएल 167. गप/गप्प 168. के के’ 169. दरबज्जा/ दरबजा 170. ठाम 171. धरि तक 172. घूरि लौटि 173. थोरबेक 174. बड्ड 175. तोँ/ तूँ 176. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) 177. तोँही/तोँहि 178. करबाइए करबाइये 179. एकेटा 180. करितथि करतथि 181. पहुँचि पहुँच 182. राखलन्हि रखलन्हि 183. लगलन्हि लागलन्हि 184. सुनि (उच्चारण सुइन) 185. अछि (उच्चारण अइछ) 186. एलथि गेलथि 187. बितओने बितेने 188. करबओलन्हि/ करेलखिन्ह 189. करएलन्हि 190. आकि कि 191. पहुँचि पहुँच 192. जराय/ जराए जरा’ (आगि लगा) 193. से से’ 194. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) 195. फेल फैल 196. फइल(spacious) फैल 197. होयतन्हि/ होएतन्हि हेतन्हि 198. हाथ मटिआयब/ हाथ मटियाबय 199. फेका फेंका 200. देखाए देखा’ 201. देखाय देखा’ 202. सत्तरि सत्तर 203. साहेब साहब 204.गेलैन्ह/ गेलन्हि 205.हेबाक/ होएबाक 206.केलो/ कएलो 207. किछु न किछु/ किछु ने किछु 208.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ 209. एलाक/ अएलाक 210. अः/ अह 211.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) 212.कनीक/ कनेक 213.सबहक/ सभक 214.मिलाऽ/ मिला 215.कऽ/ क 216.जाऽ/जा 217.आऽ/ आ 218.भऽ/भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक)219.निअम/ नियम 220.हेक्टेअर/ हेक्टेयर 221.पहिल अक्षर ढ/ बादक/बीचक ढ़ 222.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं 223.कहिं/कहीं 224.तँइ/ तइँ 225.नँइ/नइँ/ नञि 226.है/ हइ 227.छञि/ छै/ छैक/छइ 228.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ 229.आ (come)/ आऽ(conjunction) 230. आ (conjunction)/ आऽ(come) 231.कुनो/ कोनो VIDEHA MAITHILI SANSKRIT TUTOR- XXII संस्कृत शिक्षा च मैथिली शिक्षा च- २२ (मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत् - हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्) -गजेन्द्र ठाकुरः (आगाँ) ENGLISH संस्कृतम् मैथिली Has the Principal come? प्राचार्यः आगतः किम्? प्राचार्य एलाह की? This year the examination commences in March. अस्मिन् वर्षे परीक्षायाः आरम्भः मार्चमासे भविष्यति। एहि बरख परीक्षा मार्च मासमे होएत। See if the maths teacher is there. गणितस्य अध्यापकः अस्ति किम् इति पश्यतु। देखू तँ गणितक अध्यापक छथि की? Day after tomorrow will be a holiday. परश्वः विरामः भविष्यति। परसू छुट्टी हएत। How many students are there in your department? भवतः विभागे कति छात्राः सन्ति। अहाँक विभागमे कए टा छात्र छथि? There are 30 students in my department. मम विभागे त्रिंशत् छात्राः सन्ति। हमर विभागमे ३०टा छात्र छथि। What is your pay-scale? भवतः वेतनश्रेणी का? अहाँक वेतनश्रेणी की अछि? Did you read the newspaper? The Government has accepted our demands. वार्तापत्रं पठितवान् किम्? सर्वकारेण अस्माकम् अभियाचनाः अङ्गीकृताः। अखबार पढ़लहुँ की? सरकार हमरा सभक माँग सभ मानि लेलक। 30% bonus has been announced. त्रिंशत् प्रतिशतम् अधिवेतनम् उद्घोषितम् अस्ति। ३०% अधिवेतनक घोषणा भेल अछि। This rule will be implemented from the next-year. एतस्य नियमस्य अन्वयः अग्रिमवर्षतः भविष्यति। ई निअम अगिला बरखसँ लागू होएत। I am in-charge of the examination department. परीक्षा-विभागस्य उत्तरदायित्वं मम अस्ति। हमरा लग परीक्षा विभागक भार अछि। Who is the head of the sports department? क्रीडा-विभागस्य प्रमुखः कः अस्ति? क्रीड़ा विभागक प्रमुख के छथि? We have to organize a science workshop. विज्ञानकार्यशाला आयोजनीया अस्ति। हमरा सभकेँ विज्ञान कार्यशालाक आयोजन करबाक अछि। Our students got the first prize in the inter-school dance competition. आन्तर्शालेय-नृत्यस्पर्धायाम् अस्माकं छात्राः प्रथम-पुरस्कारं प्राप्तवन्तः। अन्तर-विद्यालय नृत्य प्रतियोगितामे हमरा सभक छात्रकेँ प्रथम पुरस्कार भेटलन्हि। Parent-teacher meeting will be on next Sunday. अग्रिमे रविवासरे पालक-शिक्षकमेलनं भविष्यति। अगिला रविकेँ अभिभावक-शिक्षक मीटिंग होएत। I will call his mother. एतस्य मातरम् आह्वयिष्यामि। हम ओकर माएकेँ बजेबए। I have given application for leave. अहं विरामस्य निवेदनपत्रं दत्त्वान् अस्मि। हम छुट्टीक आवेदन देने छी। He has taken a half-day leave today. सः अद्य अर्ध-दिनस्य विरामं स्वीकृतवान्। ओ आइ आध-दिनुका छुट्टी लेने अछि। Again today the clerk has not come. लिपिकारः अद्य न आगतवान् एव। आइ फेर क्लर्क नञि आएल। Do you have a class now? इदानीं भवतः कालांशः अस्ति किम्? आइ अहाँक वर्ग अछि की? No, I am free now. न, इदानीम् अहं कार्यरहितः अस्मि। नञि आइ हम बिना काजक छी। If you have any doubt please ask. संशयः अस्ति चेत् पृच्छतु। संशय अछि तँ पूछू। Have you understood? ज्ञातं किम्? बुझलहुँ की? Have you taken notes? टिप्पणीं लिखितवन्तः किम्? टिप्पणी लिखलहुँ की? It is enough for today. अद्य एतावदेव पर्याप्तम्? आइ लेल एतेक पर्याप्त अछि। Let us stop at the end of this paragraph. एतस्य अनुच्छेदस्य अन्ते समापयामः। एहि अनुच्छेदक अन्तमे हम सभ समाप्त करब। Please, say it once again. कृपया, पुनः एकवारं वदतु। कृपया एकरा एक बेर फेर कहू। Read this well before coming to class tomorrow. श्वः कक्ष्या-आगमनतः पूर्वम् एतत् पठित्वा आगच्छतु। काल्हि वर्ग अएबासँ पूर्व एकरा एक बेर नीक जकाँ पढ़ि लेब। I did not understand this. एतत् अहं न ज्ञातवान्। हम ई नहि बुझलहुँ। Hey! You study well, do not you? किं भोः सम्यक् पठति खलु? यौ, अहाँ तँ नीक जकाँ पढ़िते छी। You have not yet submitted your assignment. भवान् भवतः ’विशेषकार्यम्’ इतोऽपि न दत्तवान्। अहाँ अपन विशेषकार्य अखन धरि नहि जमा करेने छी। Have you prepared the question paper? प्रश्नपत्रिका सज्जीकृता किम्? अहाँ प्रश्नपत्रक तैयारी केलहुँ की? Yes, I have started. आम्, आरम्भं कृतवान् अस्मि। हँ, प्रारम्भ कएने छी। He has not answered a single question correctly. एषः एकम् अपि प्रश्नं सम्यक् न उत्तीर्णवान्। ओ एकोटा प्रश्नक ठीक उत्तर नहि देलक। Does anyone know the answer? कोऽपि उत्तरं जानाति किम्? ककरो एकर उत्तर बुझल अछि? Hey, what is the noise about? किं भोः कोलाहलः? की यौ, कथीक हल्ला अछि? The students these days! इदानीन्तन-च्छात्रास्तु! आइ काल्हिक विद्यार्थी! How is the result this year? एतस्य वर्षस्य फलितांशः कथम् अस्ति? एहि बरखक परिणाम केहन रहल? Better than last year’s. गतवर्षस्य अपेक्षया उत्तमम्। पछिला सालक अपेक्षा उत्तम। How did he get such high marks? सः कथम् एतावतः अङ्कान् प्राप्तवान्? ओ एतेक नीक अंक कोना प्राप्त कएलक। Examiner’s large heartedness. परीक्षकाणाम् औदार्यम्। परीक्षकक उदारतासँ। When does the summer vacation begin? ग्रीष्मविरामस्य आरम्भः कदा? गरमी-तातिल कहियासँ होएत? 35 people have come for the interview. साक्षात्कारार्थं पञ्चत्रिंशत् जनाः आगतवन्तः। ३५ गोटे साक्षात्कार लेल आएल छथि। सम्भाषणम् मम समीपे बहु धनम् अस्ति, किन्तु अहम् बहिः न प्रकटयामि। मम समीपे बहु धनम् अस्ति, किन्तु अहम् वित्तकोषे न स्थापयामि। मम समीपे बहु धनम् अस्ति, किन्तु अहम् अपव्ययम् न करोमि। मम समीपे बहु धनम् अस्ति, किन्तु अहम् वाहनं न क्रीणामि। मम समीपे बहु धनम् अस्ति, किन्तु अहम् अन्येनः न ददामि। विद्यालयः अस्ति किन्तु अहम् विद्यालय न गतवान्। परीक्षा समीपा अस्ति किन्तु पठनम् न समाप्तम्। अहम् पायसम् खादितुम् इष्टवती किन्तु अंबा न दत्तवती। श्रीमान् अन्तः आगच्छामि वा- आगच्छतु। एतत् किम् फलम्- स्वादुफल। एषा का- सा छुरिका। अहम् स्वादुफलस्य उपरि छुरिका पातयामि। निश्चयेन पातयामि-निश्चये पतति। न पतति। इदानीम् कः स्वादुफलस्य उपरि छुरिका पातयति। अहम् निश्चयेन पातयामि। सः प्रायशः न पातयति। एषः न पातयति। अहम् उक्तवान् किल- भवान् निश्चयेन न पातयति। अहम् निश्चयेन मंत्री भविष्यामि। अहम् निश्चयेन सत्कार्यं करोमि। अहम् निश्चयेन अकार्यं न करोमि। अहम् निश्चयेन भविष्ये संस्कृतं पाठयामि। अहम् निश्चयेन अद्य निद्रां करोमि। अद्य कक्षां प्रति वारुणि विलंबेन आगतवती। तस्य कारणम् वयं उहित्वा वदामः- प्रायशः उपयोगम् कर्तु वाक्यम् वदामः। प्रायशः चलनचित्रं गतवती आसीत्। प्रायशः मार्गे वाहनसम्मर्दः आसीत्। प्रायशः सा अस्वस्था आसीत्। अहम् ग्रंथालयम् गतवती आसम्- अतः अहम् विलंबेन आगतवती। प्रायशः अहम् श्वः देवालयं गमिष्यामि। प्रायशः भारतीयः शान्तिप्रियः। इदानीम् वयम् अन्यम् एकम् अभ्यासं कुर्मः। अहं कृष्णफलके चित्रलेखनस्य आरम्भम् करोमि। एकां-एकां लिखामि अथवा किञ्चित् वर्धयामि। तदा भवन्तः वाक्यानि वदन्ति। प्रायशः भवान् हंसस्य चित्रम् लिखति। पति-पत्ब्याः चित्रम् लिखति। निश्चयेन भवान् नौका चित्रम् लिखति। निश्चयेन भवान् मीनस्य चित्रम् लिखति। निश्चयेन भवान् फलस्य चित्रम् लिखति। निश्चयेन् भवान् पर्णस्य चित्रम् लिखति। एषः जीवने अग्रे कः भविष्यति- इति ऊहं कुर्वन्तु। वाक्यं वदन्तु। वाक्ये निश्चयेन अथवा प्रायशः द्वयोर्मध्ये एकं शब्दं योजयित्वा वाक्यं वदन्तु। सः निश्चयेन् चोरः भविष्यति। सः निश्चयेन् सैनिकः भविष्यति। सः निश्चयेन् वैद्यः भविष्यति। सः प्रायशः विमानचालकः भविष्यति। सः प्रायशः विदेश प्रयाणं करिष्यति। सः प्रायशः भोजनप्रियः/ मूर्खः। भवान् कः भविष्यति। अहं निश्चयेन् विद्यालयस्य संस्थापकः भविष्यामि। एतत् लघु पुस्तकम्। एतस्य पुस्तकस्य अपेक्षया एतत् पुस्तक वृहत् अस्ति। काकस्य अपेक्षया शुकः सुन्दरः अस्ति। एतस्याः वेण्याः अपेक्षया एतस्याः वेणी दीर्घा अस्ति। गिरिजायाः अपेक्षया सावित्री उन्नता अस्ति। एतस्य दण्डस्य अपेक्षया एषः दण्डः दीर्घः अस्ति। केरलस्य अपेक्षया कर्णाटकं वृहत् अस्ति। पाकिस्तानस्य अपेक्षया भारतदेशः वृहत् अस्ति। अजस्य अपेक्षया गजः स्थूलः अस्ति। मम घट्याः अपेक्षया वारुण्याः घटी सुन्दरी अस्ति। मम अपेक्षया लता उन्नता अस्ति। अर्जुनस्य अपेक्षया एकलव्यः उत्तमः धनुर्धरः। दुर्जनः सहवासोपेक्षया सज्जनः सहवासः उत्तमः। १-भोः निबन्धानाम् संग्रहः अस्ति वा। २-अस्ति। तत्र पश्यतु। १-एतस्य अपेक्षया वृहत् पुस्तकं नास्ति वा। २-किमर्थम्? १-विश्वविद्यालये निबन्ध स्पर्धा अस्ति। तदर्थम् अधिक विषयसंग्रहः करणीयः अस्ति। २-तथां। आगच्छतु, ददामि। १-एतत् पुस्तकं पश्यतु। तस्य अपेक्षया उत्तमम् अस्ति। १-उत्तमम्। मम सख्याः समीपे एतत् पुस्तकं नास्ति। तस्या अपेक्षया मम अधिक विषय संग्रहं कर्त्तुम शक्नोमि। २-यदि सा अन्यत् पुस्तकं प्राप्नोति तर्हि भवत्याः अपेक्षया अधिकं विषयसंग्रहं करोति। १-एवं वा। २-परन्तु अस्माकं ग्रंथालयस्य अपेक्षया उत्तमः ग्रंथालयः अन्यः नास्ति। अतः सा तत् प्राप्तुम् न शक्नोति। १-भवतु। अहम् इदानीम् गच्छामि। श्वः सर्वेषाम् अपेक्षया शीघ्रम् अत्रागत्य सर्वम् पठामि। सुभाषितम् जलबिन्दु निपातेन् क्रमशः पूर्ण्यते घटः। स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥ श्रुतस्य सुभाषितस्य अर्थः एवम् अस्ति। क्रमशः जलं पतति-नलिकातः। परन्तु पात्रम् अवश्यं पूर्णं भवति। यद्यपि बिन्दुशः पतति अल्पम् इति जनं न त्यजति। क्रमशः पात्रं पूर्णं भवति। एवमेव विद्यायाः संग्रहः अपि क्षणशः/ कणशः भवति- सः अग्रे पूर्णः भविष्यति। एवमेव धर्मकार्याणि अपि सः कुर्वन् गच्छतु जीवने अवश्यम्। धर्मनिष्ठः भवति। एवमेव विद्यायाः संपादनं-धनस्य संपादनम् अपि तथैव। कणशः धनसंपादनं करणीयम्। एक नानकं, नानक्-द्वयं, नानकत्रयं इति न त्यक्त्तव्यम्। सर्वम् अपि संग्रीहश्य संग्रीह्य सः अग्रे प्रभूतं धनं संपादिष्यति। एवं सुभाषितकारः वदति- विद्यायाः/ धनस्य/ धर्मस्य संपादनं क्रमशः भवति सः पूर्णः भवति। कथा कावेरी नद्याः तीरे एकं गुरुकुलम्। गुरुकुले वटवः (बालकाः) सन्ति। ते प्रतिदिनं नियमितं जीवनं कुर्वन्ति। प्रातः कालतः रात्रिपर्यन्तम् नियमितं जीवनम्। उत्तिष्ठन्ति, योगासनं आदि कुर्वन्ति, अध्ययनं कुर्वन्ति, एवं पवित्रं जीवनं तेषाम्। भिक्षाटनं तेषां कार्यम्। बहिः गच्छन्ति भिक्षां याचित्वा गृहम् आनयन्ति। मिलित्वा सर्वे खादन्ति। एवं गुरुकुलस्य नियमः (पद्धतिः)। एकदा सुन्दरः नाम् बालकः भिक्षाटनार्थं बहिः गच्छति। भिक्षाटनं कृत्वा सर्वं संगृह्य प्रत्यागच्छति। आगमन् समये मार्गे एकं शिलाखण्डं पश्यति। सुन्दरः शिलाखण्डः- नीलवर्णः-कंदुका आकारेण अस्ति- अतः तस्य कुतुहलं भवति। हस्तेन् गृह्णाति तस्य समीपे स्थापयति। क्रीडार्थं वा उपयोगं भवति- इति चिन्तयति। गुरुकुलम् आगच्छति। तस्य मित्राणि सन्ति। मित्रेभ्यः दर्शयति। बालकाः शिलाखण्डं गृहित्वा क्रीडन्ति। एवं प्रतिदिनं सायंकाले शिलाखण्डं गृहीत्वा क्रीडन्ति। एकदा गुरुः पश्यति शिलाखण्डम्। सः सुन्दरम् आहूय पृच्छति- हे सुन्दरा। एतं शिलाखण्डं भवान् प्राप्तवान्। परन्तु एतेन् शिलाखण्डेन् इतः परम् भवान् न क्रीडतु। अन्येन शिलाखण्डेन् क्रीडतु। एतम् शिलाखण्डं गृहीत्वा भवान् आपणं गच्छतु। एतस्य विक्रयेणं करोतु। इति वदति। गुरोः आज्ञा। सः सुन्दरः आपणं गच्छति- शाकापणं गच्छति, प्रथमतः शाकापणिकम् पृष्टवान्- भवान् एताम् शिलाखण्डं क्रीणाति वा। आपणिकः वदति। नाणकद्वयं ददामि। तदा सः बालकः गुरुं पृच्छामि इति प्रत्यागच्छति। गुरुः वदति- भोः, इदानीम् पुनः अन्यत्र विचारयतु, विक्रेयणात् पूर्वं माम् पुनः एकवारं पश्यतु। इति वदति। सः तथैव बालकः अन्यत्र गच्छति। सुन्दरः क्रीडनक विक्रेतुः समीपं गच्छति। सः तम् विचारयति- एतस्य मूल्यम् कियत् ददाति- सः वदति- अहं रूप्यकंद्वयं ददामि। तदा बालकः पुनः गुरोः समीपम् आगच्छति। तदा गुरुः पुनः वदति- इदानीम् भवान् नगरान्तरं गच्छतु। तत्र विचारयतु। सः बालकः नगरं गच्छति- तत्र आभरणस्य आपणं पश्यति, आभरण विक्रेतारं पृच्छति- एतस्य शिलाखण्डस्य मूल्यम् कियत्। अहम् एतम् शिलाखण्डं विक्रेतुम् इच्छामि। सः आपणिकः परीक्षाम् करोति- सूक्ष्मतया। सः वदति। भो बाला। एतस्य शिलाखण्डस्य मूल्यम् अमूल्यम् अस्ति। यदि अहं आपणे स्थितस्य सर्वस्य आभरणस्य विक्रयेणं करोमि तथापि एतस्य शिलाखण्डस्य मूल्यं न भवति। तावद् अस्ति एतस्य शिलाखण्डस्य मूल्यम्। यदि भवान् विक्रेतुम् इच्छति- मया आपणः त्यक्तव्यः भवति। तदा बालकः अमूल्यं शिलाखण्डं गृहीत्वा पुनः गुरोः समीपं गच्छति। गुरुः वदति- भवता शिलाखण्डस्य मूल्यं ज्ञातव्यं चेत्- रत्न परीक्षकेन् भवितव्यम्। तदाएव शिलाखण्डस्य वास्तविक मूल्यं किमिति ज्ञायते। इति गुरुः वदति। पुनः वदति- पश्यन्तु। जनानां समीपे अत्यमूल्यं वस्तु अस्ति- जीवननामकम्। परन्तु ते मूल्यं न जानन्ति- यदि सम्यक् मूल्यं ज्ञात्वा व्यावहारन्ति, तेषां जीवनम् अपि अत्यमूल्यं भवति। एवं गुरुः कथा द्वारा संदेशं ददाति। महत्त्वपूर्ण सूचना (१):महत्त्वपूर्ण सूचना: श्रीमान् नचिकेताजीक नाटक "नो एंट्री: मा प्रविश" केर 'विदेह' मे ई-प्रकाशित रूप देखि कए एकर प्रिंट रूपमे प्रकाशनक लेल 'विदेह' केर समक्ष "श्रुति प्रकाशन" केर प्रस्ताव आयल छल। श्री नचिकेता जी एकर प्रिंट रूप करबाक स्वीकृति दए देलन्हि। प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (ISBN NO.978-81-907729-0-7 मूल्य रु.१२५/- यू.एस. डॉलर ४०) आऽ पेपरबैक (ISBN No.978-81-907729-1-4 मूल्य रु. ७५/- यूएस.डॉलर २५/-) मे श्रुति प्रकाशन, १/७, द्वितीय तल, पटेल नगर (प.) नई दिल्ली-११०००८ द्वारा छापल गेल अछि। 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-15 e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com website: http://www.shruti-publication.com महत्त्वपूर्ण सूचना:(२). पञ्जी-प्रबन्ध विदेह डाटाबेस मिथिलाक्षरसँ देवनागरी पाण्डुलिपि लिप्यान्तरण- श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आऽ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत। पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- तीनू पोथीक संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा । महत्त्वपूर्ण सूचना:(३) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा' रहल गजेन्द्र ठाकुरक 'सहस्रबाढ़नि'(उपन्यास), 'गल्प-गुच्छ'(कथा संग्रह) , 'भालसरि' (पद्य संग्रह), 'बालानां कृते', 'एकाङ्की संग्रह', 'महाभारत' 'बुद्ध चरित' (महाकाव्य)आ 'यात्रा वृत्तांत' विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। - कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर महत्त्वपूर्ण सूचना (४): "विदेह" केर २५म अंक १ जनवरी २००९, ई-प्रकाशित तँ होएबे करत, संगमे एकर प्रिंट संस्करण सेहो निकलत जाहिमे पुरान २४ अंकक चुनल रचना सम्मिलित कएल जाएत। महत्त्वपूर्ण सूचना (५):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे। नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. अंतिका प्रकाशन की नवीनतम पुस्तकें सजिल्द
मीडिया, समाज, राजनीति और इतिहास
डिज़ास्टर : मीडिया एण्ड पॉलिटिक्स: पुण्य प्रसून वाजपेयी 2008 मूल्य रु. 200.00 राजनीति मेरी जान : पुण्य प्रसून वाजपेयी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.300.00 पालकालीन संस्कृति : मंजु कुमारी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 225.00 स्त्री : संघर्ष और सृजन : श्रीधरम प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.200.00 अथ निषाद कथा : भवदेव पाण्डेय प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु.180.00
उपन्यास
मोनालीसा हँस रही थी : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00
कहानी-संग्रह
रेल की बात : हरिमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.125.00 छछिया भर छाछ : महेश कटारे प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 कोहरे में कंदील : अवधेश प्रीत प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 180.00 कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00 बडक़ू चाचा : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 195.00 भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00
कविता-संग्रह
या : शैलेय प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 160.00 जीना चाहता हूँ : भोलानाथ कुशवाहा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 300.00 कब लौटेगा नदी के उस पार गया आदमी : भोलानाथ कुशवाहा प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 225.00 लाल रिब्बन का फुलबा : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु.190.00 लूओं के बेहाल दिनों में : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 195.00 फैंटेसी : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 190.00 दु:खमय अराकचक्र : श्याम चैतन्य प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 190.00 कुर्आन कविताएँ : मनोज कुमार श्रीवास्तव प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 150.00 मैथिली पोथी
विकास ओ अर्थतंत्र (विचार) : नरेन्द्र झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 250.00 संग समय के (कविता-संग्रह) : महाप्रकाश प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00 एक टा हेरायल दुनिया (कविता-संग्रह) : कृष्णमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 60.00 दकचल देबाल (कथा-संग्रह) : बलराम प्रकाशन वर्ष 2000 मूल्य रु. 40.00 सम्बन्ध (कथा-संग्रह) : मानेश्वर मनुज प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 165.00 पुस्तक मंगवाने के लिए मनीआर्डर/ चेक/ ड्राफ्ट अंतिका प्रकाशन के नाम से भेजें। दिल्ली से बाहर के एट पार बैंकिंग (at par banking) चेक के अलावा अन्य चेक एक हजार से कम का न भेजें। रु.200/- से ज्यादा की पुस्तकों पर डाक खर्च हमारा वहन करेंगे। रु.300/- से रु.500/- तक की पुस्तकों पर 10% की छूट, रु.500/- से ऊपर रु.1000/- तक 15% और उससे ज्यादा की किताबों पर 20% की छूट व्यक्तिगत खरीद पर दी जाएगी । अंतिका, मैथिली त्रैमासिक, सम्पादक- अनलकांत अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4, शालीमारगार्डन, एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023, आजीवन सदस्यता शुल्क भा.रु.2100/- चेक/ ड्राफ्ट द्वारा “अंतिका प्रकाशन” क नाम सँ पठाऊ। दिल्लीक बाहरक चेक मे भा.रु. 30/- अतिरिक्त जोड़ू। बया, हिन्दी छमाही पत्रिका, सम्पादक- गौरीनाथ संपर्क- अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4, शालीमारगार्डन, एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023, आजीवन सदस्यता शुल्क रु.5000/- चेक/ ड्राफ्ट/ मनीआर्डर द्वारा “ अंतिका प्रकाशन ” के नाम भेजें। दिल्ली से बाहर के चेक में 30 रुपया अतिरिक्त जोड़ें। पेपरबैक संस्करण
उपन्यास
मोनालीसा हँस रही थी : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.100.00
कहानी-संग्रह
रेल की बात : हरिमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 70.00 छछिया भर छाछ : महेश कटारे प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 कोहरे में कंदील : अवधेश प्रीत प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00 आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 90.00 कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00 भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 90.00
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आलोचना
इतिहास : संयोग और सार्थकता : सुरेन्द्र चौधरी संपादक : उदयशंकर
हिंदी कहानी : रचना और परिस्थिति : सुरेन्द्र चौधरी संपादक : उदयशंकर
साधारण की प्रतिज्ञा : अंधेरे से साक्षात्कार : सुरेन्द्र चौधरी संपादक : उदयशंकर
बादल सरकार : जीवन और रंगमंच : अशोक भौमिक
बालकृष्ण भट्ïट और आधुनिक हिंदी आलोचना का आरंभ : अभिषेक रौशन
सामाजिक चिंतन
किसान और किसानी : अनिल चमडिय़ा
शिक्षक की डायरी : योगेन्द्र
उपन्यास
माइक्रोस्कोप : राजेन्द्र कुमार कनौजिया पृथ्वीपुत्र : ललित अनुवाद : महाप्रकाश मोड़ पर : धूमकेतु अनुवाद : स्वर्णा मोलारूज़ : पियैर ला मूर अनुवाद : सुनीता जैन
कहानी-संग्रह
धूँधली यादें और सिसकते ज़ख्म : निसार अहमद जगधर की प्रेम कथा : हरिओम
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अंतिका प्रकाशन सी-56/यूजीएफ-4, शालीमार गार्डन, एकसटेंशन-II गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.) फोन : 0120-6475212 मोबाइल नं.9868380797, 9891245023 ई-मेल: antika1999@yahoo.co.in, antika.prakashan@antika-prakashan.com http://www.antika-prakashan.com (विज्ञापन) श्रुति प्रकाशनसँ १.पंचदेवोपासना-भूमि मिथिला- मौन २.मैथिली भाषा-साहित्य (२०म शताब्दी)- प्रेमशंकर सिंह ३.गुंजन जीक राधा (गद्य-पद्य-ब्रजबुली मिश्रित)- गंगेश गुंजन ४.बनैत-बिगड़ैत (कथा-गल्प संग्रह)-सुभाषचन्द्र यादव ५.कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आऽ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर ६.विलम्बित कइक युगमे निबद्ध (पद्य-संग्रह)- पंकज पराशर ७.हम पुछैत छी (पद्य-संग्रह)- विनीत उत्पल ८. नो एण्ट्री: मा प्रविश- डॉ. उदय नारायण सिंह “नचिकेता” ९/१०/११ 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-15 ३.पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आऽ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा । श्रुति प्रकाशन, रजिस्टर्ड ऑफिस: एच.१/३१, द्वितीय तल, सेक्टर-६३, नोएडा (यू.पी.), कॉरपोरेट सह संपर्क कार्यालय- १/७, द्वितीय तल, पूर्वी पटेल नगर, दिल्ली-११०००८. दूरभाष-(०११) २५८८९६५६-५७ फैक्स- (०११)२५८८९६५८ Website: http://www.shruti-publication.com e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com (विज्ञापन) संदेश १.श्री प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि। २.श्री डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह| ३.श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ४.श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बाधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ५.श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ६.श्री डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। ७.श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ८.श्री विजय ठाकुर, मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। ९. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका ’विदेह’ क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १०.श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका ’विदेह’ केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। ११.डॉ. श्री भीमनाथ झा- ’विदेह’ इन्टरनेट पर अछि तेँ ’विदेह’ नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब। १२.श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमर, जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत से विश्वास करी। १३. श्री राजनन्दन लालदास- ’विदेह’ ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक एहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल। १४. डॉ. श्री प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भ' गेल। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००८-०९. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ’ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आऽ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@yahoo.co.in आकि ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ’ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आऽ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक 1 आ’ 15 तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि।(c) 2008 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ' आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ' संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ' पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ' रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ०१ अप्रैल अ २००९ (वर्ष २ मास १६ अंक ३१) http://www.videha.co.in/ मानुषीमिह संस्कृताम्
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