173 'विदेह' ३८ म अंक १५ जुलाइ २००९ (वर्ष २ मास १९ अंक ३८) वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own scriptRoman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi एहि अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. कथा-सुभाषचन्द्र यादव-हमर गाम २.२. प्रत्यावर्तन - आठम खेप- कुसुम ठाकुर २.३. अनमोल झा- कथा- प्राथमिकता २.४ सुशान्त झा- रिपोर्ताज २.५ नवेन्दु कुमार झा- रिपोर्ताज २.६. कथा-मनस्तापकुमार मनोज कश्यप २.७.चन्द्रेश- पोथी समीक्षा २.८.जितेन्द्र झा -रिपोर्ताज ३. पद्य ३.१. राजकमल चौधरीक दूटा अप्रकाशित पद्य ३.२. जीवकान्तक टटका पद्य ३.३. आशीष अनचिन्हार ३.४.पंकज पराशर- जानि नहि किएक ३.५.सुबोध ठाकुर- सनेश ३.६.निशाप्रभा झा (संकलन) ३.७.रूपा धीरू ३.८. ज्योति-बरसातक दृश्य ४. मिथिला कला-संगीत-तूलिकाक चित्रकला ५. गद्य-पद्य भारती -१. मूल उपन्यास-कोंकणी-लेखक-तुकाराम रामा शेट, हिन्दी अनुवाद-डॉ. शंभु कुमार सिंह, श्री सेबी फर्नांडीस, मैथिली अनुवाद-डॉ. शंभु कुमार सिंह २.मूल तेलुगु पद्य- अन्नावरन देवेन्दर-अंग्रेजी अनुवाद- पी.जयलक्ष्मी आ मैथिली अनुवाद-गजेन्द्र ठाकुर ६. बालानां कृते-१.देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स); आ २. मध्य-प्रदेश यात्रा आ देवीजी- ज्योति ७. भाषापाक रचना-लेखन - पञ्जी डाटाबेस (आगाँ), [मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] 8. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS (Festivals of Mithila date-list) 8.1.Original poem in Maithili by Ramlochan Thakur Translated into English by Gajendra Thakur 8.2.THE COMET- English translation of Gajendra Thakur's Maithili NovelSahasrabadhani translated by Jyoti. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह आर.एस.एस.फीड। "विदेह" ई-पत्रिका ई-पत्रसँ प्राप्त करू। अपन मित्रकेँ विदेहक विषयमे सूचित करू। ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मेhttp://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। १. संपादकीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा ६ जुलाइ २००९ केँ प्रस्तुत भारतीय बजट २००८-०९ मे आर्थिक विकास दर ६.७ प्रतिशत रहल होएबाक सम्भावना व्यक्त कएल गेल अछि। एहि बेर करदाता लेल बेसिक छूट एक लाख ५० हजार टाका सँ बढ़ाकऽ एक लाख ६० हजार कएल गेल अछि। आयकर पर दस प्रतिशत सरचार्ज हटा लेल गेल अछि। सरकार नोट छापिकऽ निवेश करत। रोजगार गारंटी योजनामे विस्तार कएल जएत, २५ किलो अनाज तीन टाका प्रति किलोक दरपर उपलब्ध कराओल जएत। किसान आ लघु उद्योगकेँ सस्ता कर्ज भेटत। निर्यात दबावमे रहने अर्थव्यवस्थामे सुस्ती अछि। खाद आ डीजल पर राहत देल जएत। प्रत्येक राज्यमे एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करबाक योजना अछि। नव आई.आई.टी. आ एनआईटी लेल ४५० करोड़ टाका खर्च करबाक योजना अछि। आयमे कृषिक हिस्सा जे १९४७ मे ५६ प्रतिशत छल से आइ १८ प्रतिशत भऽ गेल अछि। बजटक आर मुख्य विशेषता एहि प्रकारेँ अछि:-लॉ फर्मपर सर्विस टैक्स, आयकर छूटक सीमा महिला लेल भा.रु. १,९०,०००/- आ वरिष्ठ नागरिक लेल भा.रु.२,४०,०००/- कएल गेल, ग्रामीण सड़कक लेल १२,००० करोड़ रु. आबंटित, हृदय रोग सम्बन्धी दवाइ सस्ता हएत, बायो-डीजलपर कस्टम ड्यूटी घटत आ सोना-चानीपर बढ़त, कॉमनवेल्थ गेम लेल १६,३०० करोड़ रु. देल गेल, राष्ट्रीय गंगा प्रोजेक्ट लेल ५६२ करोड़ रु. आबंटित, यू.आइ.डी.(यूनीक आइडेन्टिफिकेशन प्रोजेक्ट) नंदन नीलेकनीक अध्यक्षतामे शुरू कएल जएत, अप्रैल २०१० सँ गुड्स आ सर्विसेज टैक्स प्रारम्भ आ पुनः ९% आर्थिक विकास दर प्राप्त कएल जएत। नेपालमे सेहो वित्तमंत्री सुरेन्द्र पाण्डेय १३ जुलाई २००९ केँ प्रस्तुत अपन बजट(२००९-१०, वि.सं.२०६६-६७) मे किसान लेल ५००० लाख ने.रु. सब्सिडी लेल देलन्हि। मैथिली, भोजपुरी, थारू, लापचा, लिम्बू आ धीमाल भाषायी क्षेत्रमे कला-गामक विकास करबाक योजना अछि। २५०० लाख ने.रु. जनकपुर, राजबिराज, हुमला, मुगु, कालीकोट आ डोलपा हवाइ अड्डाक विकासार्थ देल गेल अछि। नव संविधानक ड्राफ्ट तैयार करबामे सभक सहयोग लेबाक आ शान्ति प्रक्रिया आगू बढ़ेबाक संकल्प सेहो व्यक्त कएल गेल। बिराटनगर रिंग रोड आ जनकपुर परिक्रमा (रिंग रोड) सड़ककेँ नीक बनाओल जएत। जनकपुरमे राजश्री जनक विश्वविद्यालयक स्थापना कएल जएत। धालकेबार-जनकपुर रोड अगिला वित्त वर्षधरि पूर्ण कऽ लेल जएत। डोम, मुसहर, चमार, दुसाध, खतबे आ गरीब मुस्लिम लेल सिरहा, सप्तरी आ कपिलवस्तु जिलामे एक-एक हजार घर (पूरा ३००० घर) बनाओल जएत। दलित आ गरीब मुसलमानक अठमा पास बालिका लेल (परसा, बारा, रौतहट, सरलाही, महोत्तरी, धनुषा, सिरहा आ सप्तरी जिलामे) स्कॉलरशिप देल जएत जाहिसँ ओ अपन पएरपर ठाढ़ भऽ सकथि। जाहि कोनो तकनीकी इंस्टीट्यूटमे ओ नामांकन लेमए चाहतीह ओहिमे हुनकर एडमिशन कम्पलशरी रूपेँ लेल जएतन्हि। उत्तर दक्षिण हाइवे (कोशी, कंकाली आ गंडकी कोरीडोर)क निर्माण कएल जएत। सिरहा, सप्तरी, उदयपुर आ सुनसरीमे कृषिक विकासक संग शिवालिक आ चूड़ पर्वत श्रृंखलाक संरक्षणपर ध्यान देल जएत। मैथिली भाषा, साहित्य आ संस्कृतिक विकासक लेल काज केनिहारकेँ पुरस्कृत करबाक लेल एक करोड़ ने.रु.क योगसँ महाकवि विद्यापति पुरस्कार गुथीक स्थापना कएल गेल अछि। संगहि "विदेह" केँ एखन धरि (१ जनवरी २००८ सँ १४ जुलाई २००९) ८१ देशक ८४८ ठामसँ २५,५८२ गोटे द्वारा विभिन्न आइ.एस.पी.सँ १,८५,३२५ बेर देखल गेल अछि (गूगल एनेलेटिक्स डाटा)- धन्यवाद पाठकगण। अपनेक रचना आ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे। गजेन्द्र ठाकुर नई दिल्ली। फोन-09911382078 ggajendra@videha.co.in ggajendra@yahoo.co.in २. गद्य २.१. कथा-सुभाषचन्द्र यादव-हमर गाम २.२. प्रत्यावर्तन - आठम खेप- कुसुम ठाकुर २.३. अनमोल झा- कथा- प्राथमिकता २.४ सुशान्त झा- रिपोर्ताज २.५ नवेन्दु कुमार झा- रिपोर्ताज २.६. कथा-मनस्तापकुमार मनोज कश्यप २.७.चन्द्रेश- पोथी समीक्षा २.८.जितेन्द्र झा -रिपोर्ताज सुभाषचन्द्र यादव- चित्र श्री सुभाषचन्द्र यादव छायाकार: श्री साकेतानन्द सुभाष चन्द्र यादव, कथाकार, समीक्षक एवं अनुवादक, जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल। आरम्भिक शिक्षा दीवानगंज एवं सुपौलमे। पटना कॉलेज, पटनासँ बी.ए.। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्लीसँ हिन्दीमे एम.ए. तथा पी.एह.डी.। १९८२ सँ अध्यापन। सम्प्रति: अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, पश्चिमी परिसर, सहरसा, बिहार। मैथिली, हिन्दी, बंगला, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, स्पेनिश एवं फ्रेंच भाषाक ज्ञान। प्रकाशन: घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित। भूतपूर्व सदस्य: साहित्य अकादमी परामर्श मंडल, मैथिली अकादमी कार्य-समिति, बिहार सरकारक सांस्कृतिक नीति-निर्धारण समिति। हमर गाम बसंत रितु बीत गेल अछि । गरमी धबल जाइत छै । लेकिन भोरमे आ साँझमे शीतल आ सोहाओन बसात मंद-मंद चलैत रहैत छै तऽ लगैत छै बसंत अखन गेल नहि अछि, विदा होइत-होइत अपन झलक देखा रहल अछि । एकटा एहने साँझ केँ हम गाम जा रहल छी । सुरूज एखन डूबल नहि छै । बुझाइत छै आध कोस जाइत-जाइत छिप जेतै । अखनुका रौदमे धाह नहि छै । सुरूज इजोतक विराट पिण्ड भरि लगैत छै, तापक प्रचंडतासँ रहित । हमर गाम सुपौलसँ डेढ़ कोस पच्छिम कोसी बान्हक भीतर अछि । आरि-धूर, बालु आ धार टपय पड़ैत छैक; तइँ हमर गाम धरि कोनो सवारी नहि जाइत अछि । पाँव-पैदल । दोसर कोनो उपाय नहि । हिस्सक छूटि गेलासँ आब गाम जायब अबूह बुझाइत अछि । कोनो टंटा ठाढ़ भऽगेल तखने हम जाइत छी । नहि तऽ बाल-बच्चा जाइत अछि, पत्नी जाइ छथि । आइ दू सालक बाद हम जा रहल छी । दू बर्ख पहिनो जमीनक ओझरी रहय आ आइ फेर वैह स्थिति अछि । गामक झंझट कहियो खतम नहि होइत अछि । हेबो नहि करत । सभ दिन किछु ने किछु लागले रहत। आइ क्यो जमीन धकिया लेलक तऽ काल्हि क्यो खढ़ काटि लेलक, परसू क्यो धान घेरि लेलक । एहि सभसँ हम कहियो पार नहि पाबि सकब । आइ धरि क्यो नहि पाबि सकल अछि । ई संसार एहिना चलैत आबि रहल छै । एहिना चलैत रहत । स्वार्थक क्षुद्रतामे डूबल । नाना प्रकारक छल-प्रपंच करैत, कखनो हँसैत, कखनो कनैत। अनन्त विस्तारमे पसरल सूर्यक प्रकाशमे भासमान होइत ई पृथ्वी अपन अनेकरूपता सँ हमर चित्तकेँ आकृष्ट करैत अछि । ग्राम्य दृश्यावलीक सुन्दरता हमर आत्मा केँ मुदित करैत अछि । किन्तु थोड़बे कालक लेल । मन भटकि कऽ अस्तप्राय सूर्य दिस चल जाइत अछि । गामक झमेलमे ओझराय लगैत अछि । कोसीक पुबरिया बान्ह आबि गेल । बान्ह जे अपना भीतर लाखक लाख लोककेँ घेरि कऽ अहुँछिया कटबैत अछि । बान्ह पर एक पल ठाढ़ भऽ कऽ हम पच्छिम भर नजरि खिरबैत छी । दूर-दूर तक कोनो बस्ती नहि । कोनो गाछ नहि । खाली माल-जालक खूरसँ उड़ैत धूरा । बान्ह पर सँ हमर गाम नहि देखाइत अछि । गामक काली मंदिर देखाइत अछि । मंदिर आइ डेढ़-दू सय बर्ष सँ स्थिर अछि । अस्थिर अछि बान्ह परसँ मंदिर धरिक रस्ता । कोसी कोनो चीजकेँ थिर नहि रहय दैत छै । रस्ता-पेरा, आरि-धूर, खेत-पथार, घर-दुआर, लोक-वेद डगराक बैगन जकाँ गड़कैत रहैत अछि । बान्ह पर पहुँचिते चिंता होइत अछि। कोन बाटे-जायब ? घाट कोन ठाम छै? नाह चलिते छै कि बंद भऽ गेलै ? बन्द भऽ गेलै तऽ कोन ठाम पार होयब ? रस्ता हियासैत छी । दूर दू गोटय जा रहल छै । ओ दुनू निश्चिते धारक ओहि पार जायत । धारक एहि पार कोनो बस्ती नहि छै । हम ओहि दुनूक अनुगमन करय लगैत छी । चालि तेज भऽ गेल अछि । ध्यान झलफलाइत साँझ पर अछि । धार लग पहुँचि कऽ ओ दुनू अढ़ ताकि लेलक अछि । नाह नहि छै । दू-तीन टा भैंस अखने टपि कऽ ओहि पार पहुँचल छै । पानि देखि कऽ हम अटकर लगा रहल छी जे कपड़ा खोलय पड़त कि नहि । 'कपड़ा-तपड़ा खोलह ।'- बगलसँ आबि कऽ सिबननन कहैत अछि आ एकटा पुरान मैल तौलिया हमरा दिस बढ़बैत अछि । अपन धोती ओ तेना कऽ समेटि लैत अछि जे बुझाइत छै जेना ओ बुट्टा पहिरने हो । जेना-जेना पानि बढ़ैत छै, तेना-तेना हम तौलिया ऊपर उठौने जाइत छी । सिबननन आगू अछि तइँ हम नि:संकोच तौलिया उठा कऽ नांगट भऽ जाइत छी । आब कने और आगू जा कऽ सटले-सटल तीन टा गाम छै – नरहैया, कदमटोल आ तकर पच्छिम हमर गाम मेनाही । हमरा पियास लागि गेल अछि आ हम ककरो ओहिठाम पानि पीबि लेबऽ चाहैत छी । मुदा सिबननन कहैत अछि- 'चलह, रामसरन ओतऽ पिबिहह । ' पता नहि कोन बात छै । रामसरन कनेक सुभ्यस्त अछि । कहियो सरपंच रहय । मुदा ओकर नाम सुनितहि हमरा पन्द्रह मन धान मोन पड़ि जाइत अछि जे ओकर पिता हमर पितासँ कर्ज लेने रहय आ कहियो घुरेलक नहि । सिबननन एहि ठामसँ फुटि जायत; उत्तर चल जायत, जतय पछिला साल उपटि कऽ बसल अछि । मेनाहीक लोक कटनियाक कारणे चारि ठाम छिड़िया गेल छै । सिबनन अपने दहियारी करैत अछि आ धीया-पूता खेती करैत छै; दिल्ली-पंजाब कमाइत छै । सिबननन हमर किछु खेत बटिया करैत अछि । ओही मे सँ एकटा कोलाक गहूम कमल घेरि लेने छै । तीस साल पहिने ई कोला हमरा बदलेन मे भेटल रहय । कमलक आधा हिस्सेदार बासदेव ई बदलेन कयने रहय । कमलकेँ दोसर ठाम हिस्सा दऽ देल गेल रहैक, जे अखन धारमे छै । हमर बला कोला उपजैत छै, तइँ ओकरा लोभ भऽ गेल छैक । 'काल्हि गहूम काटि लएह ।'- ई कहैत हम सिबननन केँ विदा करैत छी। मोनमे फसादक भय अछि।अनेक प्रकारक आशंका अछि । मुदा गहूम तऽ खेतमे ठाढ़ नहि रहत । ओकरा तऽ कटनाइए छैक । चाहे क्यो लिअय । पाही आदमीक जमीनकेँ लोक मसोमातक जमीन बुझैत अछि । रघुनीक दुआर पर थ्रेसर चलि रहल छैक । रघुनी अपने मरि गेल । धीया-पूता छैक । दू टा बेटा दिल्ली मे छैक । तेसर जे गहूम तैयार कऽ रहल अछि, तकर नाम छिऐक नट्टा । नट्टा हमरा बैसय कहैत अछि । घरक एक कात दू टा चौकी लागल छै । चौकी पर मैल खट-खट भोटिया बिछाओल छै । चौकी सँ सटले दच्छिन गाय, भैंस, बकरी सब रहैत छै । नाकमे निरंतर गोबर आ गोंतक दुर्गन्ध अबैत रहैत अछि । कोसिकन्हाक अधिकांश लोक एहिना रहैत अछि । जानवरक संग । जानवरक समान । जानवरक हालतमे। हम ओहि मैल बिछौन पर आ दुर्गन्ध मे कनेक काल बैसल रहैत छी । थ्रेसर सँ उड़ैत गरदा आ भूसी भौक मारि कऽ हमरा दिस आबि रहल अछि । सोचैत छी ता कमलसँ गप कऽ ली । उठि कऽ कमल कतऽ चल जाइत छी । कमल अड़ल अछि । आधा गहूम कटबा कऽ ओ अपना ओतय लऽ आनत । हम क्षुब्ध भेल उठि कऽ नथुनी मुखिया ओहिठाम चल अबैत छी । नथुनिओ हमर बटेदार अछि । नौ कट्ठा मे तीन सेर मेथी हिस्सा दैत अछि । नथुनी अपन बेटीक खिस्सा सुनबैत अछि । एक मास पहिने कोना पाँच हजार कर्ज लऽ कऽ ओकर विवाह कयलक । दिल्लीमे दू मास रिक्शा चला कऽ कोना ओ कर्ज सधाओत । फेर ओ अचानक पुछैत अछि – 'खाना खेलहक?' 'न' । - हम कहैत छिऐ । 'कतऽ खेबहक ?' 'कतहु तऽ खेबे करबै ।' ओ बेटी कें हाक दऽ कऽ हमर खाना बनबऽ कहैत छै । गाममे हमरा घर नहि अछि । अड़सठक बाढ़िमे घर जे कटल से फेर बनि नहि सकल । सभ बेर गाम अयला पर ई समस्या रहैत अछि जे कतऽ खायब, कतय रहब । भोजन करबैत काल नथुनी आश्वस्त करैत अछि जे ओ हमरा खातिर मछबाहि करत । अपन छोट भाइ धुथराकेँ ओ चिड़ै बझाबऽ कहैत छै । हम माछ आ चिड़ैक सुखद कल्पनामे डूबल सुतबाक चेष्टा करैत छी । निन्न नहि भऽ रहल् अछि । निन्न पर कल्हुका चिंता सवार अछि । गहूम जँ कमल लऽ गेल तऽ भारी बेइज्जती – जाइत-जाइत सिबननन बाजल रहय । हमर देयाद बैजनाथ, कमल पर सन-सन कऽ रहल अछि । धन आ स्त्री संसारक सर्वोपरि सुख अछि । लोक एहि दुनूक पाछू बेहाल रहैत अछि । धन आ स्त्रीक तृष्णा कहियो शांत नहि होइत छै । आदमी तइयो एहि मृगतृष्णाक फेरमे पडि. कऽ भटकैत अछि आ दुख उठबैत रहैत अछि । हम अवधारि लैत छी जे दंगा-फसाद नहि करबाक अछि । कमल गहूम लऽ जायत तऽ लऽ जाउक । भोरमे निन्न टुटिते मोन पड़ैत अछि जे गहूम कटैत हएत । मुँह-हाथ धो कऽ खेत दिस जाइत छी । गहूम कटि रहल छै । कमल पहिनहि आबि जनकेँ कहि गेल छै जे गहूम ओकरे ओहिठाम जेतैक । जन सभ असमंजसमे अछि । हम कहैत छिऐक गहूम सिबननन ओतय जेतैक । बोझ उठबाक घड़ी संघर्षक घड़ी होयत। हम घूरि कऽ टोल पर चल आयल छी । चाह पीबाक लेल रघुनाथकेँ तकैत छी । रघुनाथ दूधक जोगाड़मे गेल अछि । दूध आनत तखन चाह बनाओत । सिबननन अबैत अछि । ओ बहुत आशंकित आ बेचैन अछि। हमरा कमलसँ गप्प करय कहैत अछि । हम कमल आ ओकर दुनू बेटाकेँ बुझबैत छिऐ जे बकवाद आ दंगा-फसाद कयला सँ कोनो फायदा नहि छै । जाधरि फैसला नहि भऽ जायत, ताधरि गहूम तैयार नहि हएत । रघुनाथ दूध लऽ कऽ कमले ओतय चल आयल अछि । ओत्तहि चाह बनैत छै आ कपक अभावमे हम सभ बेराबेरी चाह पीबैत छी । चाह खतम होइते कमल उठि कऽ खेत दिस विदा होइत अछि । हमहूँ विदा होइत छी । हम सभ चाह पीबिते रही, तखने चारि-पाँच टा बोझ सिबननन अपना ओतय पठबा देने रहै । किछु और कने दूर पर जा रहल छै । कमल ई सब देखि क्रुद्ध भऽ जाइत अछि । मुदा आब तऽ खेल खतम भऽ गेल छै । हम जहिया कहियो गाम अबैत छी तऽ चाहैत छी धारमे नहाइ । हेलबाक मौका गामे मे भेटैत अछि । मेनाहीक पूब आ पच्छिम दुनू कात कोसी बहैत छै । पच्छिम कतका धारक पसार बहुत छै । पच्छिम, उत्तर दच्छिन जेम्हरे तकैत छी, तेम्हरे बालु आ धार । दूर-दूर धरि खाली दोखरा बालु जाहिमे पचासो बरखसँ किछु नहि उपजैत छै । मेनाही, परियाही आ भवानीपुर-एहि तीनू गामक लोक तबाह भऽ गेल अछि । पीढ़ी दर पीढ़ी हजारक हजार लोक कोसीक बालु फँकैत मेटा जाइत अछि । हाँजक हाँज सिल्ली पानि पर बैसल छै । पच्चीस-तीस टा लालसर भित्ता पर टहलि रहल छै । आब चिड़ै कम अबैंत छै । बहुत पहिने जहिया झौआ, कास आ पटेरक जंगल रहै, तहिया अनेक तरहक जल आ थल-चिड़ै अबैत रहै । पूर्णियाक शिकारी चिड़ै बझबैत रहै आ सुपौलमे बेचैत रहै । आब झौआ उकनि गेल छै आ कास-पटेर उकनल जा रहल छै । पहिने लोक झौआ, कास, पटेर बेचि कऽ किछु कमा लैत छल । जंगलमे झुंडक झुंड गाय-महींस पोसि कऽ जीविका चलबैत छल । खढ़िया, हरिन, माछ, काछु आ डोका मारि कऽ खाइत छल । आब सभ किछु खतम भऽ गेल छै आ जीबाक साधन दुर्लभ भऽ गेल छै। धारक बीचमे छीट पर एकटा मछवाह पड़ल अछि । बगलमे जाल आ डेली राखल छैक । हम हेलि कऽ छीट पर जाइत छी । फेकुआ अछि । नथुनी मुखियाक भाइ । डेलीमे पाव भरि रेवा छै । तीन घंटाक उपार्जन । समुद्रक कछेरमे जेना लोक पड़ल रहैत अछि, हम तहिना बालु पर पड़ि रहैत छी । एहि दुपहरियोमे धार कातक हवा ठंढ़ा छै । कोसीक पानि ठंडा छै । कनिको काल पानि मे रहला सँ जाड़ हुअय लगैत छै । दूर एक आदमी असकरे डेंगी लऽ कऽ मछबाहि कऽ रहल छै । और कतहु क्यो नहि छै । धार आ बालुक निर्जन विस्तार । कोसिकन्हाक लोक साहस आ धैर्यपूर्वक कोसीक प्रचंडताक मोकाबिला करैत अछि आ अपन प्राण-रक्षामे लागल रहैत अछि । कोसीक उत्पात सहैत-सहैत ओ सभ पितमरू भऽ गेल अछि आ सब तरहक दुख सहबाक अभ्यस्त भऽ गेल अछि । बेरियाँ मे हम सत्तो ओहिठाम चल अबैत छी । सत्तो हमर पाँच कट्ठा खेत करैत अछि । खेतमे दस बोझ गहूम भेल छैक जे तैयार करत । थ्रेसर अनलक अछि । सत्तोक माय अपन दुखनामा सुनबैत अछि । इलाजक अभावमे मरल बेटाक सोगमे ओ कनैत अछि । आब जे एकटा बेटा-पुतहु छैक तकर अभेलाक कथा सुनबैत अछि । दुख हम नहि बँटबैक, तइयो सुनबैत चल जाइत अछि । ओकर कथा के सुनत ? ककरो छुट्टी नहि छैक । तइँ हमरा सुनबैत रहैत अछि । सॉझ मे हम पंचैतीक ओरियान करैत छी । पंचक बुझेलो पर कमल तैयार नहि होइत अछि । फैसला होइत छै-ई खेत ओ लऽ लेत, बदलामे दोसर खेत लिखि देत। बैजनाथ कहैत छै जाधरि कमल लिखत नहि, ताधरि ई खेत छोड़बाक काज नहि छै। बैजनाथ खेत हथियाबऽ चाहैत अछि । जँ हम कहि दिऐक तँ ओ लाठीक जोरसँ खेत खाइत रहत । खेत पर कमलकेँ नहि चढ़य देत । एहि बात लेल ओ अनेक तरहेँ हमरा पर दवाब दऽ रहल अछि । कहैत अछि-तोहर पच्छ लेबाक कारणे कमल हमरा मरबेबाक लेल एकटा पिस्तौल बलाकेँ ठीक केने रहय । सत्तोक बकरी मरि गेल छैक । भोरमे निन्न टुटिते ओकर धरवालीक आवाज कानमे पड़ैत अछि । ओ सासुसँ पूछि रहल छै – बकरी कोना मरि गेलै ? ओकर सासु किछु बजैत नहि छै । चुपचाप बकरी लग जाइत छै । दुख आ आश्चर्य सँ बकरी कें देखैत रहैत छै । बकरी मुँह रगड़ि कऽ मरल छै । सत्तोक माय हमरा सुनाकऽ कहैत अछि-घुरघुरा काटि लेलकै की ! हम जाहि चौकी पर सूतल रही, बकरी ओकरे पौवामे बान्हल रहै । सत्तोक घरवाली ओकर गराक डोरी खोलि देने छै आ ऑगनमे जा कऽ सासु पर भनभना रहल छै-हद्दो घड़ी सरापैत रहै मरियो ने जाइत छैक ! सासु हमरा कहैत अछि-बहुत दिन पहिनहि बलि गछने रहै । कैक बेर पाठी भेलैक आ सब बेर बेचने गेलैक । अखनधरि चढ़ौलकै नहि । धुरि कऽ अबैत छी तऽ पता लगैत अछि बकरी डोमरा लऽ गेल छै । खाएत । सभ चीज पर मृत्युक छाया पसरल छै । पठरू माय लेल औनाय रहल छै। एम्हर सँ ओम्हर भेमिआइत दौड़ि रहल छै । दूइए-चारि दिन पहिने खढ़ धेने छै । सत्तो दुपहर मे दौन शुरू करैत अछि । पहिने अपन बोझ धरबैत अछि । आगू मे ओकरे बोझ राखल छैक। सत्तोक बेटी परमिलिया बोझ उठा-उठा थ्रेसर लग दैत छै । परमिलिया सतरह-अठारह सालक युवती अछि । स्वस्थ-सुगठित शरीर । ओकर जोबनक उभार पुरूष-सम्पर्कक साक्षी छै । ओ अखन सासुर नहि बसैत अछि । सूर्यास्त भऽ गेलाक बाद खुरपी-छिट्टा लऽ कऽ घास लेल जाइत अछि । संध्या-अभिसार । भोर मे अकचकाइत उठैत छी । क्यो आधा गिलास पानि ढ़ारि चानि थपथपा रहल अछि । आइ जूड़शीतल छै । सात-आठ बजे धरि चानि पर पानि पड़ैत रहैत अछि । ढ़लाय अपन छागर तकने फिरैत अछि । राति मे क्यो चोरा लेलकै । सोचने रहय बेचि कऽ कर्जा सधाओत । आब हताश भऽ गेल अछि । आइ धार मे मेला जकाँ लागल छै । लोक सभ मालजाल धो रहल अछि । छौड़ा सभ धारमे उमकैत अछि आ हो-हल्ला कऽ रहल अछि। गाम मे आब हमरा कोनो काज नहि अछि । साढ़े तीन मन गहूम जे हिस्सा भेल अछि तकरा सुपौल लऽ जेबाक ब्योंत केनाइ अछि । साइकिल भेटितय तऽ डोमा दू खेप मे पहुँचा दैत । ने साइकिल भेटैत अछि, ने माथ पर लऽ जायवला कोनो आदमी। गहूम पितम्बर लग छोड़ि दैत छिऐ । पाँच-सात दिनमे ओकर गाड़ी सुपौल जेतै । दुपहर मे नट्टा परबाक माउँस बनबैत अछि । माउँस सुकन राम ओहिठाम बनैत छै आ भात नट्टा ओहिठाम । नट्टा बजा कऽ लऽ जाइत अछि । पीढ़ा सुकनक धाप पर लागल छै। हमरा भीतर छूआछूतक कोनो भावना नहि अछि । लेकिन आइ अचानक गाममे सुकन रामक ओहिठाम खाइत पता नहि कोना पूर्व-संस्कार जाग्रत भऽ गेल अछि आ कनेक काल धरि विचित्र प्रकारक संकोचक अनुभव करैत रहैत छी । फेर संकोचसँ उबरैत बजैत छी – सुकन भाय! आइ तोरा जाति बना लेलिअह । सुकन कहैत अछि जे आब ओ माल-जाल नहि खालैत अछि । बादमे एक गोटय हँसीमे कहैत अछि- तोरा सभ भठि गेल छह । तोरा सभकेँ जातिसँ बारि देबाक चाही । कोसी सभटा भेदभावकेँ पाटि देने छै। डोम, चमार, मुसहर, दुसाध, तेली, यादव सब एके कल सँ पानि भरैत अछि । एके पटिया पर बैसैत अछि । आब सूर्यास्त भऽ जायत । हम गामसँ विदा होइत छी । संगमे नट्टा आ गनेस अछि । एकटा साइकिल पर थोड़े-थोड़े गहूम लादने ओ दुनू पुनर्वास जा रहल अछि । गामक विकट जीवन पाछू छूटि रहल अछि । संग जा रहल अछि अनेक तरहक स्मृति । ई स्मृति हमर अस्तित्वक अंश बनि जायत आ जीवनमे अनेक रूप-रंगमे प्रकट होइत रहत । उपन्यास -कुसुम ठाकुर,सामाजिक कार्यमे (स्त्री-बच्चासँ विशेष) , फोटोग्राफी आ नाटकमे रुचि । अन्तर्जाल पता:-http://sansmaran-kusum.blogspot.com/ प्रत्यावर्तन - (आठम खेप) १४ १३ जून १९८५ के भारतीय नृत्य कला मन्दिर मे "मिस्टर नीलो काका" कs सफल मंचन के पश्चात् प्रति वर्ष अंतर्राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता मे मिथिलाक्षर आ "श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर" जी कs नाटक सब बेर पुरस्कार लैत रहलैन्ह आ मैथिली दर्शक आ नाट्य प्रेमी के सब बेर एक टा नव सामाजिक विषय पर नाटकक नीक प्रस्तुति देखय के लेल भेँटैत रहलैन्ह। १९८६ मे अंतर्राष्ट्रीय नाट्य प्रतियोगिता के लेल जहिया निमंत्रण आयल छलैक ओहि समय "श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर"जी के लिखल नाटक सब मंचित भs चुकल छलैन्ह मुदा नव नाटक केर नाम ओ सोचि कs रखने रहथि। जहिया निमंत्रण आयल छलैक ओकर बाद कलाकार सब के एकटा बैठक भेलैक आ ओहि मे नाटक जे अन्तराष्ट्रीय समारोह मे जएबाक छलैक ओकर नाम बतायल गेलैक। नाटक केर नाम "लौंगिया मिरचाइ " सुनतहि कलाकार सब बड खुश भेलाह मुदा जखैन्ह इ सुनालाह जे मात्र नाम टा लिखल छैक तs पहिने त किछु कलाकार मायुस भेलाह मुदा सब बेर नाटक मे ओहिना होइत छलैक आ ता धरि कलाकार सब श्री लल्लन जी के प्रतिभा सँ परिचित भs गेल छलाह। कलाकार सब केर बैठकी के बाद ओहि दिन राति मे बैसि कs पात्र आ "पहिल दृश्य" लिखि देलाह आ हमरा ओ कैयेक बेर सुनय परल। ओकर बाद रबि दिन सs रिहर्सल सेहो शुरू भs गेलैक। एक दृश्यक रिहर्सल कतेक दिन होयतैक। एक दिन साँझ मे देखलियैन्ह रिहर्सल स जल्दि आबि गेलाह आ आबिते कहलाह "आजु हम लिखय के मूड मे छी आ एक दृश्यक रिहर्सल कतेक दिन होयत। अहाँ सब खेलाक बाद सुति रहु आ हमरा लेल चाय बना कs राखि दिय हमरा आजु नाटक पूरा करबाक अछि"। इ सुनतहि हम कहलियैन्ह हम सुति जायब ता अहाँक संवाद सब के सुनत। हम नहि सुतब अहाँ चिंता जुनि करू हम चाय बना बना कs अहाँके दैत रहब। राति मे बच्चा सब खेलाक बाद सुति रहलाह हम चाय बना कs राखि देलियैन्ह आ बैसि कs किछु समय हुनक संवाद सब सुनलियैन्ह मुदा किछु समय बाद नीँद आबय लागल तs सुति रहालौंह। अचानक नीँद खुजल तs देखलियैन्ह लिखिए रहल छलाह ओहि समय ठीक ४:३० होइत छलैक। हुनका लग गेलहुँ तs कहलाह आब खतमे पर छैक एक बेर चाय पिया दिय। हम उठि कs चाय बनेलहुँ आ चाय दुनु गोटे चाय पिलहुँ ५:३० बजे तक "लौंगिया मिरचाइ" नाटक पूरा छलैक। इ नाटक सेहो कैयाक टा पुरस्कार पौलक। "मिस्टर नीलो काका" के बाद जे नाटक सबस बेसी लोकप्रिय आ चर्चित भेलैक ओ छैक बकलेल। २९-४-बकलेल के अन्तराष्ट्रीय मैथिली नाट्य प्रतियोगिता के लेल कलाकार भवन एहि सिनेमा मेक मंचन भेल। एहि नाटक के सर्वोत्तम नाटक, सर्वोत्तम आलेख , सर्वोत्तम निर्देशक, सर्वोत्तम बालकलाकार, सर्वोत्तम प्रकाश परिकल्पना आ सर्वोत्तम मंच सज्ज्या के पुरस्कार भेटलैक आ नाट्य प्रतियोगिताक निर्णायक मंडलक अध्यक्ष आ फ़िल्म निर्देशक " श्री प्रकाश झा" मंच पर पुरस्कार दैत समय "श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर जी" कs प्रशंसा करैत पता आ फ़ोन नम्बर माँगि लेलाह। बकलेल नाटक केर किछु मास बाद अचानक एक दिन प्रकाश जी के फ़ोन अयलैन्ह आ फ़ोन पर कहलथिन्ह जे ओ एकटा फिचरेट फिल्म बना रहल छथिन्ह आ ओहि फिल्म मे मुख्य भूमिका करबा के छैन्ह, आ जल्दी दू तीन दिन के लेल पटना आबय परतैंह। ऑफिस सs छुट्टी लs पटना गेलाह आ दू तीन दिन के बाद आपस आबि गेलाहआपस अयला के बाद अपन ऑफिस स छुट्टी ल आ दू कलाकार के अयबाक लेल कहि चलि गेलाह। प्रकाश जी हुनका अपन कलाकारक चुनाव मे सेहो रहबाक लेल कहने रहथि। कलाकारक चुनाव सs शूटिंग धरि करीब डेढ़ मास लागि गेलैक। शूटिंग बेतिया लग गाम मे भेल छलैक आ किछु बम्बई मे ।सिनेमाक नाम छलैक " कथा माधोपुर की " ई सिनेमा पंचायती राज पर बनायल गेल छैक। (अगिला अंकमे) अनमोल झा (१९७०- )-गाम नरुआर, जिला मधुबनी। एक दर्जनसँ बेशी कथा, साठिसँ बेशी लघुकथा, तीन दर्जनसँ बेशी कविता, किछु गीत, बाल गीत आ रिपोर्ताज आदि विभिन्न पत्रिका, स्मारिका आ विभिन्न संग्रह यथा- “कथा-दिशा”-महाविशेषांक, “श्वेतपत्र”, आ “एक्कैसम शताब्दीक घोषणापत्र” (दुनू संग्रह कथागोष्ठीमे पठित कथाक संग्रह), “प्रभात”-अंक २ (विराटनगरसँ प्रकाशित कथा विशेषांक) आदिमे संग्रहित। प्राथमिकता -बौआक मूड़नमे कतेक खर्च भेल हेतउ बुच्ची। -तोरा सऽ कोन लाथ माय, यैह बीस-पच्चीस हजारक आस-पास। -की कहले! बीस-पच्चीस हजार। -हँ, ओहिमे भोज-भात, कपड़ा-लत्ता,लेआओन-हकार सबटा ने भेलै। -अएँ गइ, एते पाइ छलनि ओझाक हाथपर। -नै सब पाइ तऽ नै छलनि हाथपर, किछु एम्हर-ओम्हर, पैंच उधार सेहो भेलै। -चल भगवतीक दया सऽ काज नीक जकाँ पार लागि गेलउ, जस देलकउ समाज आर की चाही। अच्छा कह तऽ बौआक सब भेकसीन (सूइ) सब पड़लै की नै। -हँ गय पड़लै। मात्र दू-तीन टा बेसी दामी बला पन्द्रह सै, दु-हजार बला सब बाँकी छैक से दिया देबै बादमे। -छिः छिः छिः। तोरा बेटाक भेकसीन बाँकी छउ देनाइ आ तू भोज केले हे। कोन मनुक्ख भेलेँ तू...!! सुशान्त झा मैथिली भाषा- संस्कृति के रक्षाक लेल एकटा संस्था जरुरी अछि यूट्यूव पर भटकि रहल छलहूं। नौकरी के व्यस्तता के वजह सं एतेक फुरसति नहि भेटति अछि जे यूट्यूब पर अपन मनपसंद गीत सुनि सकी। कोशिश रहैत अछि जे फुरसति भेटय त मैथिली गीत सुनी। मैथिली गीत जे सब यूट्यूब पर उपलब्ध अछि ओहि में बेसीतर बियाहक गीत आ भक्ति गीत सब अछि। मैथिली के विराट संसार में जे छिडियाल लोकगीत सब अछि तकरा सब के एकठाम पौनाई मुश्किल अछि। दोसर बात ई जे सब गीत के रिर्काडिंग सेहो नहि भेल छैक, भेलो छैक त ओकरा संकलन के काज बड्ड कठिन। गीत सब सुनिक मन नास्टेल्जिक भ गेल...कमला-बलान के धार आ राजनगर के मंदिर यादि आबय लागल। गजेंद्रजी के फोन केलियन्हि। हम जानय चाहै छलहुं जे की समस्त लोकप्रिय मैथिली गीत के वेबसाईट पर डालल जा सकैत छौ की। लेकिन पता चलल जे अहि में कापीराईट के संकट छैक। एखन अगर कियो मैथिली गीत संगती सुनय चाहैत अछि त किछ वेबसाईट पर 10-20 टा गीत छैक या नहि त यूट्यूब पर ओकरा गीत खंगालय पड़तै। हम ई खोजै छलहु जे कोनो एकटा वेबसाईट होइत जतय दिल्ली बंबई स ल क अमेरिका तक में रहय बला मैथिल अपन भाषा में गीतसंगीत के आनॆंद ल सकितथि। दुनिया जहि हिसाब स बदलि रहल अछि ओहि में अंग्रेजी आ हिंदी के भाषाई साम्राज्यवाद स बचनाई बड्ड मुश्किल बुझना जाईत अछि। लेकिन अगर सतर्कता स नब तकनीक के उपयोग कयल जे त मैथिली गीतसंगीत के विराट संसार के मैथिल भाषी तक आसानी स पहुंचायल जाय सकैछ। मैथिली लोकगीत, नाटक, लोककथा आ आख्यान हमर बडड् पैघ धरोहर अछि। आ एकर सॆयोजन के जरुरत छैक। अगर अहि स हम सब आम मैथिल के जोड़ सकी त एखनो बडड् उम्मीद अछि। लेकिन अहिलेल हमरा सबके मैथिली के सब रुप के दिल खोलि क अपनाबय पड़त अ पंचकोसी के ग्रंथि स बाहर आब पडत। अहि मुद्दा पर हम पहिनौ लिखि चुकल छी। दोसर बात जे आब बला जमाना आडियो विजुअल के छैक। पूरा दुनिया में लोक पढ़ै में दुर्भाग्यजनक रुप सं रुचि घटि रहल छैक। लोक आडियो आ विजुअल बेसी देखय चाहैत अछि। ई आब बला जमाना में आर बढ़त। अहि स इंकार नै। एखनो जे मैथिल कहिय़ो अपन जिनगी में एकटा मैथिली पोथी नै पढ़लन्हि ओ मैथिली के गीत सुनि क विभोर भय जाय छथि। आवश्यकता अहि बात के अछि हम सब कोन प्रकारे अहि विशाल समुदाय के अपन संस्कृति के अहि मजबूत उपकरण स जोड़ि क राखी। छिटपुट स्तर पर मैथिली में गीत संगती के कैसेट बनैत अछि, फिल्मों बनि रहल अछि आ आब एकटा टीवी चैनल के सेहो सुनगुनी अछि। लेकिन एकर कोनो संस्थागत प्रयास नहि भ रहल अछि। संविधान में भाषा के स्थान भेट गेलाके बादो हम सब सरकार स बड्ड उम्मीद नहि क सकैत छी। लेकिन अगर अहि दिशा में कोनो गैरसरकारी प्रयास इमानदारी स कयल जाई त एखनों बहुत काज कयल जा सकैत अछि। अहि दिशा में गजेंद्रजी के प्रयास वास्तव में स्तुत्य छन्हि जे बुहत मेहनत क क अहि दिशा में काज क रहल छथि। मैथिल बुद्धीजीवी सबके अहि पर विचार करय के चाहियनि आ कोनो तरीका खोजय के चाहियनि। अहि में बाद में सरकारी अनुदान आ विदेशी अनुदान स ल क वैयक्तिक अनुदान के कमी नहि रहत-ई हमर दृढ़ निश्चय अछि। कोनो ट्रस्ट या सोसाईटी के अधीन अगर ई काज कयल जाय आ नया विचार सामने आबय त ओ स्वागतयोग्य कदम होयत। नवेन्दु कुमार झा, आकस्मिक समाचारवाचक सह अनुवादक, मैथिली संवाद, आकाशवाणी, पटना १.रेलवेक श्वेत पत्रकेँ लऽ कऽ चलि रहल अछि वाक् युद्ध संसदमे प्रस्तुत वर्ष २००९-१० क रेल बजटमे भने बिहारक उपेक्षा कयल गेल हो मुदा बिहारक नेताकेँ जेना एकर चिन्ता नहि अछि। परञ्च रेलवे मंत्री ममता बनर्जी द्वारा रेलवेक स्थितिपर श्वेतपत्र जारी करबाक घोषणाक बाद बिहार दू टा पूर्व राजनीतिक मित्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आ पूर्व मुख्यमंत्री आ पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद एक दोसरापर हमला कऽ रहल छथि। एक दिस रेल बजटमे बिहारक उपेक्षाकेँ लऽ कऽ कांग्रेसकेँ छोड़ि आन दल आ संगठन केन्द्र सरकारकेँ अपन निशाना बना रहल अछि तँ दोसर दिस मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रेल मंत्री ममता बनर्जीक प्रशंसा कऽ हुनका द्वारा रेलवेक स्थितिपर श्वेत-पत्र जारी करबाक घोषणाक समर्थनमे ठाढ़ भेल छथि। बिहारक चुनावी राजनीतिमे पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसादकेँ जमीन धड़ा देलाक बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार श्वेत-पत्रक माध्यमसँ पूर्व रेल मंत्रीकेँ प्रदेशक राजनीतिसँ बेदखल करबाक प्रयासमे लागल छथि। वर्तमान वित्तीय वर्षक रेल बजटमे बिहारकेँ कतिया देबाकेँ मुद्दा बनेबाक बजाय श्वेत-पत्र जारी करबाक लेल सभ दिन बयानबाजी भऽ रहल अछि। ई विडम्बना कहल जा सकैत अछि जे रेलक मामिलामे पछुआयल बिहारकेँ एहि बेरुका बजटमे नव घोषणाक मात्र लॉलीपॉप थमा देल गेल। कोनो नव परियोजना एहि बेर बिहारक हिस्सामे नहि आयल। पूर्व रेल मंत्री द्वारा रेलवे घोषित परियोजना सभपर रेल मंत्रीक रवैय्या उदासीन रहल तथापि ई मुद्दा श्वेतपत्रक आगाँ गौण भऽ गेल अछि। रेलमंत्री द्वारा रेलवेक स्थितिपर श्वेतपत्र जारी करबाक घोषणाक बाद नीतीश कुमार जाहि तरहेँ सक्रिय छथि, ओहिसँ लगैत अछि जे ओ पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसादकेँ प्रदेशक राजनीतिसँ उखाड़ऽ चाहैत छथि। श्री कुमारक अनुसार वर्तमान रेल बजटमे पूर्व रेलमंत्री द्वारा रेलवेकेँ लाभ देखेबाक जे हवाइ-चित्र प्रस्तुत कऽ जे बाजीगिरी पूर्व रेलमंत्री कयने छलाह, ओकर पोल खूजि गेल अछि। एहिसँ आँकड़ाक जे खेल खेलल गेल छल से सोझाँ आबि गेल अछि। ज्योँ पुरान मित्र हमलापर हमला कऽ रहल होथि तँ भला पूर्व रेलमंत्री कोना चुप बैसि सकैत छथि। पूर्व रेलमंत्री लालूप्रसाद रेलवेक स्थितिपर श्वेतपत्र जारी करबाक घोषणाकेँ एकटा चुनौतीक रूपमे स्वीकार कयलनि अछि आ सात दिनक भीतर श्वेतपत्र जारी करबाक चुनौती रेलमंत्रीकेँ देलनि अछि। श्री प्रसादक अनुसार रेलवेक भेल लाभ पूर्वक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकारक उपलब्धि छल मुदा कुण्ठासँ ग्रसित भऽ वर्तमान सप्रग सरकारक रेलमंत्री एहिपर आँगुर उठा रहल छथि। कहल जाइत अछि जे दुश्मनक दुश्मन दोस्त होइत अछि आ एहि तर्जपर ममता बनर्जी द्वारा लालू प्रसादपर अपरोक्ष हमला कयलाक बाद नीतीश कुमार श्री प्रसादकेँ अपन निशाना बना रहल छथि। रेलवेक बहन्ने दुनु पुरान मित्रक भऽ रहल वाक् युद्धमे बिहारक हक मारल जा रहल अछि, एकर सुधि लेबाक फुर्सत ककरो नहि अछि। २.ममताक रेल बिहारमे भेल डिरेल्ड लगातार तेरह बरख धरि रेलवेक लेल विशेष महत्व राखयबला बिहार एहि बेरुका रेल बजटमे कतिया गेल। गोटेक डेढ़ दशक धरि जार्ज, नीतीश, रामविलास आ लालू जाहि तरहेँ रेल बजटमे बिहारमे सरपट रेल दौड़बैत छलाह, ओहिसँ बिहारक जनताकेँ अहू बेर पैघ आशा छल। मुदा रेलमंत्री ममता बनर्जीक रेल बजट पूरा देशमे सरपट दौड़त बिहारमे डिरेल्ड भऽ गेल। पूर्वक बिहारी रेलमंत्रीसँ नाराज ममता दीदी बिहारकेँ मात्र लालीपाप थमा श्वेतपत्र जारी करबा तेहन शगूफा छोड़लनि अछि जे बिहारक नेताकेँ अपन हकक याद बिसरा गेल अछि आ ओ श्वेतपत्रक बहन्ने एक दोसराकेँ नीचाँ देखबऽ मे लागल छथि। वर्ष २००९-१०क रेल बजटमे मिथिलांचल तँ जेना रेलवेक नक्शासँ गायब बुझा रहल अछि। रेलवे नव-घोषणाक प्रतीक्षा कऽ रहल मिथिलावासीकेँ ममता दीदी जेना बिसरि गेलनि। बजटमे बिहारक लेल कयल गेल आधा दर्जन घोषणामे सँ मिथिलांचलक हिस्सामे सीतामढ़ीसँ बैरगनियाक मध्य रेल-लाइनक दोहरीकरण आयल अछि। राजधानी पटना विश्वस्तरीय स्टेशन बनेबाक सूचीसँ गायब अछि, ओना रेलवेक अधिकारी एहिसँ मना कऽ रहल छथि, ओतहि दू टा नव ट्रेन पटनासँ राँचीक मध्य एकटा जन-शताब्दी आ झाझासँ पटनाक मध्य सवारी गाड़ीक संगहि गया आ जमालपुरक मध्य सवारी गाड़ीक घोषणा एहि रेल बजटमे कयल गेल अछि। आन नव घोषणामे पटना-सिकन्दराबाद आ पटना-पुणे ट्रेनक परिचालन प्रतिदिन, बाबूधाम-मोतीहारी एक्सप्रेसक विस्तार मुजफ्फरपुर धरि आ मुजफ्फरपुरक रास्ता राजधानी ट्रेनक परिचालनक घोषणा कयल गेल अछि। ममता दीदी नव नन स्टॉप ट्रेनसँ पटनाकेँ वंचित कऽ रेल मंत्री अपन मंशा स्पष्ट कऽ देलनि। एहि वर्ष चलयवाला १४ टा नव नन स्टॉप ट्रेनमे सँ कोनो ट्रेन पटनासँ नहि खूजत मुदा पटनावासी पटना जंक्शन भऽ कऽ जायबाला एहि ट्रेनकेँ टाटा-बाय-बाय कहि सकैत छथि। ३.चेतना समितिक आम सभामे नव पदाधिकारीक भेल चुनाव मिथिलांचलक प्रतिनिधि सामाजिक संस्था चेतना समिति पटनाक सम्पन्न भेल वार्षिक आम सभामे वर्ष २००९-११क लेल नव पदाधिकारीक चुनाव कयल गेल। सम्पन्न चुनावमे उपाध्यक्षकेँ छोड़ि आन पदाधिकारी निर्विरोध चुनल गेलाह। समितिक निर्वर्तमान अध्यक्ष विजय कुमार मिश्र पुनः अध्यक्ष बनलाह तँ सचिव पदपर विवेकानन्द ठाकुर निर्वाचित भेलाह अछि। उपाध्यक्षक तीन पदक लेल भेल मतदानमे प्रेमकान्त झा, प्रमीला झा आ पुरुषोत्तम झा निर्वाचित घोषित भेलाह अछि। मधुकान्त झा, सत्यनारायण मेहता आ प्राणमोहन मिश्र संयुक्त सचिव, योगेन्द्र नारायण मल्लिक कोषाध्यक्ष, जगत नारायण चौधरी, संगठन सचिव आ सुरेन्द्र नारायण यादवकेँ प्रचार सचिव बनाओल गेल अछि। कुमार मनोज कश्यप जन्म मधुबनी जिलांतर्गत सलेमपुर गाम मे। बाल्य काले सँ लेखन मे आभरुचि। कैक गोट रचना आकाशवानी सँ प्रसारित आ विभिन्न पत्र-पत्रिका मे प्रकाशित। सम्प्रति केंद्रीय सचिवालय मे अनुभाग आधकारी पद पर पदस्थापित। मनस्ताप आजिर भऽ गेल छल मोन फाईल निबटबैत-निबटबैत। मोन के कने हल्लुक करबा लेल कुर्सी सँ उठि अपन चैम्बर सँ बाहर निकलले रहि कि ऑफिसक पाछु ओहि कोन मे किछु देखि कऽ ठमकि गेलंहु। देखैत छी हमर अर्दली रामनिवास ककरो सँ मंद स्वर कनफुसकी करैत़़ किछु बुझबैत़़ ओ व्यक्त्ति अपन जेब सँ एकटा नोट निकाललक़़ रामनिवास ओ नोट ओहिना पैंटक जेब मे राखि लेलक़़ फेर ओहि व्यक्ति के आश्वस्त कऽ रामनिवास पाछु मुड़ल। अप्रत्याशित रुप सँ हमरा सामने देखि रामनिवास सकपका गेल़़ हवांस उड़ऽ लगलै़ चेहरा पीयर पड़ऽ लगलै़ पैर काँपऽ लगलै। चोट्टहि हमरा पैर पर खसि कऽ कानऽ लागल़़''हाकिम! बड़ पैघ गलती भऽ गेल हमरा सँ हमरा एहि बेर माँफ कऽ दियऽ हम कान पकरैत छी़ ।'' हमर तामस टीक तक चढ़ल जा रहल छल़़ हमर अर्दली आ घूस़़ ओकर की छैक?बदनामी तऽ हमर हैत। केयो कहैत तऽ बाद मे पतियबितौं आइ तऽ चोर सेन्हे पर धड़ा गेल। लोकक भीड़ बढ़ले जा रहल छलै़ ज़ते मुँह, तते तरहक बात। कनिये कालक बाद डी०एस०पी० अपने आबि रामनिवास के पकड़ि कऽ लऽ गेलाह। रामनिवास कनैत पुलिसक संग जा रहल छल़़ हमरा मोन के उसास भेटल़़ ठोर सँ कठोर सजा भेटक चाहि एहन भ्रष्टाचारी के़। दिन बीतल़़ समय बीतल़़ हमहुँ तबदला पर दोसर शहर मे आबि गेलंहु। एक दिन विभागीय मंत्री के औफिस सँ फोन आयल - मंत्रीजी भेंट करऽ चाहि रहल छथि। मंत्रीजीक आदेश भेलनि जे पुरनका ऑफिसक ठेकेदार धर्मपाल एण्ड संस के सभ बकाया बील बैक डेट मे पास कऽ दियौ। डेड लाईऩ तीन दिन के भीतर भुगतान भऽ जेबाक चाही। अनमनस्क मोन सँ हम पुरना बील सभ मँगा होटलक कक्ष मे बैसल पास कऽ रहल छी़ आन ऊपाईये की़ ऩोकरक लेल तऽ मालिकक आदेश सिरोधार्य। नोकरी करक अछि तऽ उचित-अनुचित सभटा करहि परत़़ हंसि कऽ की कानि कऽ । बील की छलैक सभटा झूठ़़ बिना काज करबायल़़ आब परमेश्वरे टा रक्षक सैह सुमीरि दस्तखत केने जा रहल छी झूठक पुलिंदा पर। जखन एतऽ आयले छी तऽ पुरनका मित्र सभ सँ भेंट-घाँट नहि केनाई सेहो कोनादन होयत । दोसर, मोनक भड़ास निकलि जाय तऽ मोनो हल्लुक होईत छैक । सैह सोचि पैर अकस्मात जिला जज के आवास दिस बढ़ि गेल। जिला जज कर्णजी हमर नीक मित्र मे सँ छलाह। बेचारे बड़ सहृदय लोक। जखन एहि ठाम पोस्टिंग रहय तखन एको दिन भेंट नहि भेला पर तुरत फोन आबि जाय जे निके छी कि नहि। चाय-स्नैक्स के बीच मे चर्चाक मध्य हमरा मोन पड़ि गेल रामनिवास़़ मोन कि पड़ल कर्णजी के कनियाँ मोन पाड़लनि । छगुंता भेल जे रामनिवास एखनो धरि जेले मे आछ। कर्णजी हमरा तजबीज करैत बजलाह- ''सजा तऽ अपराध सँ बेसी भईये गेलैक मुदा हम जमानति एहि द्वारे नहि देलियै जे ओकरा आहाँ स्वयं पक़डने रहि।'' हम हुनका सँ जमानतिक आग्रह कऽ लौटि फेर पुरना बील मे ओझरा गेलंहु। दोसर दिन बील सँ मगजमारी के बीच बाहर किछु आहट बुझना गेल़़ मुड़ी उठौलंहु़ आगाँ मे रामनिवास दुनू प्राणी कऽल जोड़ने ठाढ़ छल। केयो किछु नहि बाजल़़ दुनूक आँखि सँ आवरल नोर बहल जा रहल छलैक। हमरो मोन द्रवित भऽ गेल़़ अंतरात्मा कान उमेठलक़़ ''बीस रुपया लेल़़ सेहो काज जल्दी करा देबाक लेल ज़ँ सजा पाँच मासक जेल छैक; तऽ बिनु काज करेनहि ठेकेदार के गरीबक लाखो रुपया पेयमेंट कऽ देबाक घोर अपराधक सजा कि हेबाक चाहि? उम्र कैद वा फाँसी वा ओहु सँ किछु बेसी़?'' रामनिवास दुनू प्राणिक आँखि सँ दहो-बहो बहैत नोर साईत हमरा सँ यैह मूक प्रश्न कऽ रहल छल। आई हम अपराधी रुप मे ठाढ़ छी ओकरा दुनूक समक्ष बौक बनल। चन्द्रेश संवेनशील मोनकेँ छुबैत हुगली ऊपर बहैत गंगा रामभरोस कापडि भ्रमरक ३२ गोट कथाक संग्रह थिक हुगली ऊपर बहैत गंगा । एहि संग्रहक नामक अन्तिम कथा थिक । हीरा आ सोना बाईक माध्यमे कथाकार नारी मोनक संवेदनाकेँ उभारिक भविष्यक सृजन दिस डेग उठाओल अछि । ई सत्य थिक जे नारीक देहक अवयवकेँ कामुक पुरुष अपन धन–सम्पत्ति बुझि ओएह व्यवहार करैत अछि जे नारीक मोनकेँ दुःख ओ पीडामे भरिक कुण्ठित करैत अछि । नारी मात्र देह नहि थिक । नारी आ पुरुषक साहचर्य अबस्से सृष्टिक निरन्तरता थिक । एकर अर्थ ई नहि जे नारीक देहकेँ खेलौना बूझिक खेलायल जाय । ओकर अंग–प्रत्यंगकेँ तोडि–मरोडि अर्थात् अत्याचार क प्रेम ओ विश्वासके तोडल जाय । ई सत्य अछि जे आजुक भौतिकबादी युगमे धनक अतिशय लिप्सा अबस्से मानवीय मूल्यबोधकेँ गिडने जा रहल अछि । जेँ कि मानवीय चेतना आ मनुष्यता कुण्ठित क देल गेल अछि तेँ अनैतिकताक अढमे छिडहरा खेलाओल जाइत अछि । धन–मदक एंठी पर नग्न कामुकताक ताण्डव मचल अछि । दैहिक जरुरतिसँ बेसिए काम क्रीडामे भोग आ लिप्सा नयन रंजन भ गेल अछि । तेँ विभिन्न मुद्रा अख्तियार क आवेग आ उच्छ्छासमे अमानवीयताक – क्रूर आ पैशाचिक रुपक दिग्दर्शन होइत अछि । लाचार मे विचार कतय ? फलतः वासनाक भ्रमजालमे ओझरा क नैतिकता ओ मर्यादाकेँ अतिक्रमण क कुत्सित मानसिकताक – क्रूर रुप झलकि अबैत अछि । एहि शीर्षक कथामे हीरा असन्तोष आ खौंझीकेँ मेटयबाक लेल सोनाबाइक ओहिठाम अबैत अछि । ओकर एकमात्र उद्देश्य रहैत छैक जे मोनकेँ बहटारि लेब । सोनाबाइ अपन पेशामे कतहु कोनो कोताही नै करैत अछि । ओ आवेशक स्नेहिल स्वरमे लगीच अयबाक आमंत्रण अपन परिधान खोलि क दैत अछि । हीराकेँ ठकमुहरी लागि जाइत छैक । ओकर हृदयमे नारीक प्रति सम्मान– भाव जागि जाइत छैक । ओकर मनोभावमे स्त्री संवेदना अस्मिताक पर्याय बनि उभरि अबैत छैक । सोनाकेँ हडबडी छैक जे एकटा ग्राहकसँ निपटत तँ दोसरक आश ? ओ बजैत अछि जे आउ ने,आनो ग्राहक खोज पडत ने (१४४) । हीरा हारल जुआडी सन मनोव्यथा की कहि दैत अछि जे सोनाक आँखि चमकि उठैत अछि । ओकर सबल मानवीय संवेदना उभरि अबैत छैक – हम आइ पहिल बेर कोनो सुच्चा मनुक्खक दर्शन कयलहुँ अछि (१४६) । परिणतिमे दुनूक सुरक्षा भावमे अपनत्वबोध जागि जाइत छैक । तात्पर्य जे दैहिक भोगसँ बेसी–मोनक राग जे हल्लुको आँच पर बरकैत रहैत छैक वा बेसिए आँच पर किएक ने, मुदा दुनू स्थितिमे अनुशासित रहैत छैक । यैह कारण थिक जे जीवनकेँ गति आ उष्मा देबामे स्त्री–पुरुषक साहचर्य दोसरक पूरक बनैत अछि । आजुक समाजमे अमानवीयताक यैह स्थिति अछि जे स्त्रीकेँ चीरीचोँत क अपन पुरुषत्व देखयबाक दम्भ भरैत अछि ततय सोना आ हीराक बीचक घटित घटना कनेक अविश्वसनीयताकेँ पनुगबैत अछि । जतय सोनाक संग भेल अत्याचार स्वतः उघरैत व्यथा–कथा कहैत अछि ततय ई पंक्ति–सोना आन बाइ जकाँ तोडल–मचोडल नहि गेलि रहय, बाँचल छलीह (१४४) सेहो अविश्वसनीय बुझाइत अछि । शिल्पक दृष्टिएँ अवस्से ई कथा कनेक कमजोर अछि, मुदा कथ्यक दृष्टिएँ रक्त आ स्नेहसँ जे अपनत्व बोध जगाओल गेल अछि से अबस्से मनुष्यक मनुष्यताक स्वाद चीखबैत अछि । आब ई प्रश्न उठब स्वाभाविके जे मनुष्यक मनुष्यताकेँ अमानवीय बनयबाक दोषी के ? की जन समाज ? समाज तँ लोकेक थिक । ई सत्य अछि जे आइयो हीरा सन गनल–गूंथल लोक अछि । तथापि कामोत्तेजक भाव–भंगिमा नेने दैहिक जरुरति बुझि वा फैशनपरस्त भ कुटिल पुरुषक अहं अबस्से स्त्रीकेँ भोगक सामग्री बुझि पबैत अछि जे मोनक तुष्टि हेतु कुविचारेँ पाश्विक आचरण करैत अछि । जं हीरा आ सोना बाइसन एक दोसरक प्रति समर्पण आ निष्ठा–भावमे राग उभरय तँ निश्चिते अनैतिकताक अढमे होयत विकृतिक विषाक्त चद्दरि फाटत आ असली छवि जगजियार होयत । एतेक तँ निश्चिते जे विश्वास आ हार्दिकतामे स्त्री–पुरुषक आकर्षण अबस्से जीवन–सत्यक अढमे मानवीय आकांक्षाक पूर्तिमे सबल ओ सहायक सिद्ध होयत । हीरा आ सोनाक हृदयमे वास्तविक प्रेम–भाव की अंकुरित होइत अछि जे सहजता ओ सरलतामे आन्तरिक जटिलताकेँ आरो सघन बनबैत अछि । नारी पूरक बनैत अछि । जेंकि अभिजातीय संस्कृतिक विरोध स्वरुप सामाजिक अस्मिताक व्यापक बोध अर्थात् स्त्री पुरुषक सहज आकर्षणमे आत्मिक स्वर उभरिक आत्मस्फुलिंग छिटकबैत अछि तेँ दुनूक संघर्षमे सामाजिक जीवनक यथार्थ झलकि उठैत अछि । आधुनिक चकचोन्हीमे अन्हरायलि भगजोगनी कथामे रेखाक भोगबादी लिप्सा ततेक आगाँ बढि जाइत अछि जे अपन बसल–बसाओल घर उजारबासँ बाज नहि अबैत अछि । ओ बिसरि जाइत अछि जे अर्थलिप्सा सम्बन्धकेँ गीडि जाइत अछि । फल भेटैत छैक जे जखन जीवनक बोध होयत छैक तँ गत कर्मक तर्पण करैत अछि । ओ भ्रमजालमे जे अहुरिया कटैत छल से तोडि फेकैत अछि । यौन रुपमे उन्मत्त प्रेम आ घृणाक ढहैत देबालक बीच समाज आ सत्यसँ जे साक्षात् कराओल गेल अछि से अबस्से वैयक्तिक चेतनाकेँ धार दैत दाम्पत्य जीवनकेँ सफल बनबैत अछि । एहिमे प्रेम आ यौन सम्वन्धी गेंठकेँ फोलैत कथाकार उपसंस्कृति पर जमिक प्रहार कयल अछि । ई सत्य थिक जे दैहिक भूख लोककेँ कामुकतामे जकडि अबस्से देह मैथुनकेँ प्रश्रय दैत अछि । एतेक दूर धरि जे आवेगमे मनोविकार अपन ठोस रुप तत्क्षण प्रभाव जनबैत अछि । मुदा, काम–भावक भूख सम्वन्धकेँ स्थायित्व नहि प्रदान करैत अछि तेँ असन्तोष पनुगैत अछि । सामाजिक दायित्व बोधक ई कथा थिक । ॅअन्हारमे भोतिआयल एकटा सिपाही गणेशक संस्मरण थिक । ई संस्मरणात्मक रिपोर्ताज थिक । कारण गणेशक संस्मरण उपस्थापितक ओकरे गुण–गौरवकेँ परोसल गेल अछि । तें कथा–सूत्रक निर्माण तेना भऽकऽ नहि भेल अछि जेना कि पात्रक परिप्रेक्ष्यमे घटना आ स्थितिक विवरणात्मक प्रस्तुति भेल अछि । साम्यबादी विचारधाराकेँ लऽकऽ कामरेड कथाक सृष्टि भेल अछि– गरीब गरीब सभ एक हो । अर्थात् धनी–गरीबक बीच जे असमानताक खधिया अछि से आरो चकरगर भेल जाइत अछि तकरे भरबाक भरपूर प्रयासमे ई कथा सृजित भेल अछि । सुपत–कुपत आब हमहु सब कहबै (३७) । आत्मचेतना जगयबाक उद्देश्येँ ई कथा सृजित भेल अछि । पाइक आगाँ बेइज्जति आ गारि कथीक एहि पृष्ठभूमि पर उडान-कथा सृजित भेल अछि । कतार दिस उडान भरबाक लोभेँ आ ढेर पाइ अर्जित करबाक सपना संजोगने रजिन्दर कापरकेँ पहिलु एजेन्ट दस हजार टाका, दोसर अस्सी हजार आ तेसर खेप पन्चान्वे हजारक कर्जा पर लेल टाका बोहाइत छैक । ओ ठकाइत अछि तैयो ओकरा उडान भरबाक आशा छैक । ओ हृदयक कोनो कोनमे दमित इच्छाकेँ संयोगने रहैत अछि जे कोना उडान भरी । जहिना धनक लेल जेबाक हाहुती तहिना एजेन्टकेँ चाही लाभ । माने ई उडान की, दस हजारसँ पच्चीस हजार धरिक चोखे नफा । तात्पर्य जे दुनू गर भिडौने । तेँ बेर बेर ठकाइतो लोक पुनि ठकाइत अछि । एहिमे पाखण्डी चरित्रक पर्दाफाशक संग केवल जीवन जीनाइयेक मात्र लुतुक नहि होयबाक प्रत्युत जीवन मूल्यबोधक लेल जीवाक ओकालति संकेत मात्रमे कयल गेल अछि । जय मधेशमे एक मधेश, एक प्रदेश लऽकऽ आन्दोलन अछि । मधेशी आ पहाडीक बीचक खधिया समानतामे पटि जाय । अयोधी मास्टरके जीवन कोहुनाक मास्टरीमे खेपायल आ एकमात्र बेटा अशोक केँ नोकरी नहि भेटब । तात्पर्य जे अपेक्षित योग्यता अछैतो व्यवस्थे तेहन वनल छैक जे मधेशकेँ के पूछओ ? तेँ आन्दोलनी जुलुसमे ओकर बुढायल देहक जोश की हिलोर मारय लगलैक जे ओहो कूदि पडल । ओकर अस्मिता की जागि उठलैक जे मधेशक लेल ओ किछुओ क सकैत अछि । राष्ट्रियताक परिप्रेक्ष्यमे अपन विचार, भावना आ समयके सत्य केँ उद्भासित कयल गेल अछि । जखन लोकक अस्मिता पर चोट लगैत छैक तँ ओकर मोन कचोटय की लगैत छैक जे स्वतंत्रताक हनन मंजूर नहि होइत छैक । मधेशी होयबा पर जे गौरवबोध होइत छैक से जखन एके देशमे विषमताक बोध होइत छैक तँ पीडाइत मोनमे आक्रोश पनुगैत छैक । एहिमे मानवीय जीवनक संवेदना झलकि उठैत अछि । गहनतम प्रश्नानुकूलतामे भहरैत नेओक जोड कथाक सृस्टि भेल अछि । एहिमे निरसन बाबूक पुत्री सरोजाक दुःस्थितिमे अन्त ओ रानीक संग छलाइत जीवनके कथाकार ओकर मार्मिक पीडाके उभारिक सामाजिक परिवर्तन दिस ध्यान आकृष्ट कराओल अछि । एतेक दूर धरि जे एकर जिम्मेवार के ? स्त्रीक त्रासक मार्मिक उद्घाटनक फलस्वरुप ई कथा फोकिला मानसिकताक दम्भकेँ आरो उघार करैत अछि । ओढल अभिभावकत्वक नीतिकेँ सरेआम चौबटिया पर नग्न क मानवीय जीवनक अनुभवसँ सम्पृक्त क निजी संवेदनाकेँ सार्वभौमिक बना देल गेल अछि । एहि प्रकारेँ एक दिस हृदयहीनता आ मूल्यहीनताकेँ देखार कयल गेल अछि तँ दोसर दिस परिवर्तनक सुगबुगीमे मानवीय सोच आ संवेदनाकें आजुक परिस्थितमे ठोस दृष्टि द अमानवीयताक खोलकें चीटीचोंत करबाक सनेस बिलहल अछि । अन्ततः मे किसुनमाक ऊहमपोहक स्थितिमे जतय पत्नी उत्तीमपुरवालीक प्रति अनुराग–भाव अछि से पंजाबमे कमाइत मनसूबा पोसने घर अबैत अछि तँ एकटा नेना? मासक फरक । आन बापक बच्चा अर्थात् अनकर जनमल बेटा । रहि रहिक ओकर हृदयकेँ ई बात टीसैत की छैक जे सभटा मनोरथ भग्न भ जाइत छैक आ अन्तिम परिणतिमे नेनाक मूडी छपाक् क दैत अछि । निर्दोष आ अबोध बच्चाक हत्या । ई सत्य थिक जे निशंस हत्याक फलस्वरुप हृदय भावमे परिवर्तन आयब स्वाभाविक थिक । मुदा, अबोध वच्चाक हत्या ? तकर परिनति ? कथा जाहि विन्दु पर आबिक छोडि देल गेल अछि से आगाँक अपेक्षा रखैत अछि । तैयो, एकटा प्रश्न पनुगबैत सोचबाक लेल वाध्य करैत अछि । अमरलत्ती कथामे रेखाक माध्यमे ओकर बहसलि उद्दाम छविक वीभत्स रुप देखार कयल गेल अछि । ओ अमरलती बनि चतरैत की अछि जे सहारा बनैत आनक बसल–बसाओल घरकेँ उजारि–पुजारि दैत अछि । अपन बनल घर तँ उपटाइये दैत अछि जे आनोक घरमे वास क ओकर सोनहल दुनियामे आगि पजारि दैत अछि । एहिमे रमेशक कामलोलुपताक रेखाक काम–भाव जाग्रत भ मायाजाल की पसारैत अछि जे आरो अहिमे ओझराइत जाइत अछि । एहि प्रकारें वासनाकेँ उभारिक पुरुष आ स्त्री वर्गक कुत्सित मानसिकताकें देखार कयल गेल अछि । सामाजिक कुव्यवस्था ओ एहिसं उपजल मानवीय व्यथाकें अवस्से कथाकार उभारल अछि । सम्बन्धक पीडामे आशाक हृदयमे बरकैत हृदयक उफान जे प्रेमक उपजामे मानसिक पीडा प्रतिफलित अछि तकर सशक्त चित्रण भेल अछि । प्रेम कहि–सुनिक नहि होइत छैक आ ने कीनल बेसाहल जाइत छैक । जखन दूटा हृदय मिलैत छैक वा मोन मिलानी भ जाइत छैक तँ बाटमे केहनो रोडा अटकाओल किएक ने जाउक तैयो दुनू–प्रेमी –प्रेमिका हँसैत–कनैत, संघर्ष पथ पर टकराइतो, खसितो–उठितो पार–घाट उतरिए जाइत छैक । सैह स्थिति आशा ओ संदीपक मोन–मिलानीमे भेलैक । फल भेटलैक जे आशाक माय–बापक हृदयमे उठैत विरक्ति भाव सम्बन्ध–सूत्रकें खण्डित क देलकैक । आ आशा प्रेमक पणिामसँ उपजल मानसिक पीडाकेँ सहबाक क्षमता अपनामे विकसित करबाक प्रयास क रहलीह अछि (१३८) । सामाजिक यथार्थक रुप झलकाक कथाकार सामाजिक व्यवस्थाकेँ उघेसिक आत्मीयता ढंगसं लोकजीवनक चित्र उभारबाक प्रयास कयल अछि । बालमोनक सुलभ चंचलता ओ नेनपनक निश्चछलताकेँ स्मरण करैत नरेशक मोनमे स्मृतिक तरंग की प्रवहित भ अबैत छैक जे होयत छैक जे हमही किए ने अपनाकेँ नेना बनाली (१४२) । फ्लैश बैक कथाक माध्यमे कथाकार बालपनक अढमे निडरता, निश्च्छलता आ सौहार्द्र भावमे वचपनक प्रेमक अनुभूति जगाओल अछि तँ उमेरक चारिम प्रहरक पनुगैत भय, सुरक्षा, षडयन्त्र, सामाजिक विद्रूपता आदिसँ अपनाकें बँचबा–बचयबाक प्रयासकेँ रेखाङ्कित करबाक । ई सत्य थिक जे नेनपनक बिताओल क्षणक मधुर स्मृतिमे लोकजीवन चाहैये, मुदा संघर्षमे सेहो जीवनकेँ फूट आनन्द अबैत अछि । सामाजिक व्यक्तित्वक दोगला मुंह अर्थात् सभ्य समाजक अंग बनबाक लेल लोक जे छल–क्षुद्रमक खोल ओढने रहैत अछि । से अवस्से मानसिक बुद्धिकें कुण्ठित करैत अछि, सामाजिक समरसताकें खण्डित करैत अछि । नेपालीय मैथिली कथा–साहित्यमे निस्सन्देह कथाकार भ्रमरक कथामे जीवनक राग अछि आ अछि नव युगक नारीक प्रति विशेष श्रद्धा–भाव । तेँ हिनक बेसिए कथामे नारी जीवनक संघर्ष अछि । युग यथार्थक त्रासदी जे सामाजिक विडम्बनामे उपजैत अछि आ एकर कारक थिक सामाजिक व्यवस्था । तेँ कथाकारक छटपटाइत मोन मे अबला नारीक चीख अछि आ परिवेशक दंशमे पीडाइत मानसिक व्यथा–कथा । देह–भोगमे टीसैत दर्द उभरि की अबैत अछि जे सामाजिक सत्यकेँ देखार करैत यथातथ्यक मोनक पीडाकेँ उगलि दैत अछि । टूटैत सम्बन्ध, छुटैत लोक, अर्थ लिप्साक मोह ओ दैहिक भोगमे पीडाइत कामुकता आ रोटीक समस्या नेने कथाकारक मोनमे कतेको प्रश्न छटपटी मचौने अछि तकरे सार्थक अभिव्यक्ति द सहज ओ सरल भाषा मे पाठकक सोझाँ परोसि देलनि अछि । कोनो सभ्यता–संस्कृतिकेँ गतिशील बनाक राखब समाजक लोक दायित्व थिक । से ताधरि जाधरि ओ सामाजिक जीवनमे सार्थक भूमिका निमाहय । ई नहि जे सडल गलल परम्पराकेँ उघने व्यवस्थाक तरमे पीसाइत जीवनसँ कटल व्यवस्थाकेँ सत्य मानि फोकिला मानसिकताकेँ उघैत रही । जे सभ्यता संस्कृति जीवनमे नहि उतरि सकय तकर परित्याग करब उचित–विहित थिक । ओ जीवनक अर्थक खोजमे प्रेमक आसरा लैत समयक परिवर्तनकेँ युगक अनुकूलेँ टांकिक नव समाज बनयबाक आकांक्षा रखैत छथि । तें कथाकार सामाजिक विसंगतिसं उत्पन्न विषमता ओ आर्थिक स्थितिक संग सांस्कृतिक आयाम पर जमिक विमर्श करबाक लेल प्रश्नकेँ पनुगबैत छथि । एहिमे हिनक परिवर्तनकारी सोच अबस्से उत्प्रेरक बनि नव सामाजिक मूल्यबोधक संवाहक बनैत अछि । हिनक लेखनी अबस्से शोषित–पीडितक अस्मिता–अधिकारक बात उठबैत अछि । ओ दबल–कुचलल लोकक पक्षमे भ जाय । ई सत्य अछि जे हिनक प्रेममूलक धारणामे वासना जन्य उभार कनेक बेसिए उभरि आयल अछि से सत्ते कामुक पुरुषक दम्भोचित उपजा थिक । किएक तँ पुरुषक पौरुषत्व वासनामे विशेषे केन्द्रित भ आयल अछि । कथाकारक बेचैन मोनमे समतामूलक ओ प्रेममूलक धारा रसप्लावित अछि तेँ अभावजन्य पीडामे पीडाइत शोषित वर्गक समस्या उभरि आयल अछि । स्त्री वर्गक प्रति जहिना पुरुष वर्गक दम्भ, क्रूर मानसिकता ओ व्यवस्थाकेँ उजागर करैत अछि तहिना सम–सामयिक प्रश्नक झडीमे रोटीक औकाति देखबैत अछि । एहि प्रकारेँ कथाकारक हृदयके व्यथासँ उपजैत अकूलाइत मोनक छटपटाहटिमे सुखाइत प्रेम भावनाकेँ खींचबाक आकांक्षा अछि तँ मूल्यहीनताबोधक प्रति तिक्ख आक्रोश । जीवनक व्यावहारिकता सँ सामाजिक मुद्दाकेँ उठबैत छथि । हँ, प्रश्नक झडीमे किछुक समाहार करैत छथि तँ यथातथ्य उपस्थापन सेहो । ओना, कथाक मूल स्वर हस्तक्षेप करिते अछि । ईहो सत्य अछि जे नारी अनुभूतिक रिक्त क्षणमे कथाकारकेँ रहि–रहिक� नारीक मानसिकताक भूख दैहिक काम–क्रीडामे ओझरा जाइत अछि । मुदा, ईहो सत्य थिक नारीक अन्तरमोनमे पैसिक जे मानसिक विकारकेँ स्वच्छ करबाक प्रयास भेल अछि से मात्र कामुकतामे नहि भऽकऽ सामाजिक मूल्यबोधक संवाहक बनिक उभरि अबैत अछि । उपसंस्कृतिक प्रति हिनक हृदयमे खोंझी आ असंतोष भाव अछि तं सामाजिक नैतिकता आ धार्मिकताक अढमे छिडहरा खेलाइत साम्राज्यवादी संस्कृति प्रति विद्रोह भाव मुखरित भेल अछि । मुदा, इहो देखल जाइत अछि जे भ्रमरक कथाकार कथा साहित्यमे जतेक कथ्यक प्रति सजग रहि पबैत अछि ततेक शिल्पक प्रति नहि । शैलिक दृष्टिएँ अवस्से हिनक कथाकार सजग नहि रहि पबैत अछि जे कथा–सौन्दर्यकेँ बाधित करैत अछि । तें की ? भ्रमरक अनुभववादी दृष्टि सतत चौकन्न रहैत अछि जे अपन गाम–घर, अडोसिया–पडोसियाक देखल भोगल यथार्थक चिक्कन–चुनमुन चित्रण करैत अछि । हिनकामे कहबाक क्षमता अछि जे शिल्पक विकासमे आरो सौन्दर्य आनि निखरत । जेँकि कथाकार भ्रमरक चौकन्न दृष्टि समाजक प्रति सजग अछि । तेँ जीवन मूल्यक संवाहक बनैत ओ ओहि पात्रक सृष्टि करैत छथि जे समाजमे आइयो निरीह अछि । खासक नारी पात्र हिनक संवेदनशील मोनकेँ छुबैत अछि । ओ नारीक अधिकार ओ चेतनाबोधक पक्षधर छथि । ओ कखनो नारीक पक्षमे छाती तानिक ठाढ होइत छथि । मुदा, उपसंस्कृतिमे घेरायल नारीक वीभत्स छवि अबस्से हिनक हृदयकें पीडित–सीदित करेत अछि । ओ कोनो परिस्थितिमे स्वाभाविक यथार्थक तहकें फोलिते छथि । तेँ शोषणक विरोधमे झंडा उठबिते छथि । हिनक संवेदनशील मोनमे जीवनक प्रति रागात्मक बोध अछि । हं, हिनक कथाकार यथातथ्यकेँ हू–बहू प्रस्तुति क दैत अछि से कैक स्तर पर । तें पात्रक चरित्र तेना भऽकऽ ठाढ नहि भऽ पबैत अछि जे होयबाक चाही । जाहि ठाम हिनक पात्रक चरित्र–चित्रण सजीव भऽ उठल अछि ताहि ठाम कथाक सौन्दर्य अपन अपूर्व छवि–छटा लऽ मुखरित भेल अछि । नेपालीय मैथिली कथा साहित्यमे भ्रमरक कथा मात्रात्यक ओ गुणात्मक दुनू दृष्टिएँ अपन प्रभाव छोडैत एकदिस जँ कथा–साहित्यक भण्डारकेँ भरैत अछि तँ दोसर दिस कथा दृष्टिमे मूल्यबोधक संवाहक बनैत अछि । तेँ मानवीय मूल्य बोधक जीवन–दृष्टि नेने भ्रमरक कथा सामाजिक परिवर्तनमे अपन औकाति सिद्ध करबे करत आ भविष्यमे ऐतिहासिक मूल्यक वस्तु बनबे करत से आशा ओ विश्वास जगबिते अछि । ई संग्रह छपाइ–सफाइक दृष्टिएँ देखनुक आ मनमोहक रहल अछि खासकऽ पोथीक आवरण विशेष आकर्षित करैत अछि । मनमीत कुटीर/राजपूत कालोनी मौलागंज/दरभंगा–८४६०४ बिहार/भारत! आशाक किरण जितेन्द्र झा मैथिलीभाषा धिरे धिरे आब विद्युतीय संचारमाध्यममे स्थान बना रहल अछि । दिल्लीसं सौभाग्य मिथिला नामक एकटा टेलिभिजन संचालन भेल अछि । इ सम्पुर्ण मैथिली टेलिभिजन रहल कहल गेल अछि । ई मनोरंजनात्मक टेलिभिजन अछि जाहिमे गीत नाद आ टेली श्रृंखला प्रसारणके प्रमुखता देल जारहल अछि । इ निश्चित जे जनसंख्याक अनुपातमे इ समुदायके अपन संचारमाध्यम नहि अछि। भारत आ नेपालक सीमामे बांटल प्रतीकात्मक मिथिला एखनो आन भाषाक माध्यमसं सुसूचित हएबाक बाध्यतासं मुक्त नहि भ' सकल अछि । ओना नेपालक किछु एफ़ एम आ नेपाली / भारतीय च्यानलसभसं मैथिली भाषाक माध्यमसं समाचार आ मनोरंजनक सामग्री एहि क्षेत्रमे पंहुच रहल अछि । टेलिभिजनमे मैथिलीके स्थापित करबाक प्रयास दिल्लीसं भेल । दिल्लीस संचालित नेपाल वन टेलिभिजनके मधेश स्पेशल कार्यक्रमसं मैथिली भाषामे समाचार आ गीतनाद प्रसारण भ' रहल अछि । दिल्लीसं प्रसारित नेपाल वनमे लगभग दु सालसं बेशी भ'गेल अछि एहि कार्यक्रमके । पहिने एक घण्टाक कार्यक्रममे मैथिलीमे समाचार,अन्तर्वार्ता आ मैथिली भोजपुरी गीत प्रसारण होइत छल आब वएह समयमे भोजपुरी आ थारुके सेहो सन्हिया देल गेल अछि । तहिना दिल्लीसं संचालित भोजपुरी भाषाक टेलिभिजनमे मैथिलीके किछु मिनेट भेट जाइत अछि । दिल्लीसं प्रसारित हमार आ महुवा टेलिभिजन मैथिलीमे कखनो किछु मैथिलीमे सामग्री देल करैत अछि । सहारा समयसेहो किछु दिन मैथिली भाषामे साप्ताहिक कार्यक्रम प्रस्तुत कएलक मुदा ओ निरन्तरता नहि पाबि सकल । मैथिली भाषा भारतक अष्टम अनुसूचिमे पडलाक बादो सरकारी संचार माध्यममे अपन स्थान नहि बना सकल अछि । दोसर दिश नेपालमे भारतसं संचालित नेपाल वन मैथिली भाषाक माध्यमसं मैथिली भाषीमे अपन अलग स्थान बनालेने अछि । नेपालक सरकारी टेलिभिजन नेपाल टेलिभिजनमे एखनो उपेक्षित अछि मैथिली। नेपालमे सभसं बेशी बाजल जाएबला दोसर भाषा मैथिलीमे निजी टेलिभिजनसभ किछु रुचि देखौलक अछि । काठमाण्डूसं प्रसारित सगरमाथा टेलिभिजन सांझमे लगभग 15 मिनटके समाचार प्रसारण करैत अछि त बिरगंजसं प्रसारित तराई टेलिभिजन सेहो मैथिलीमे मनोरंजनात्मक आ सूचनामुलक कार्यक्रम प्रसारण करैत अछि । नेपाल टेलिभिजनके मेट्रो टेलिभिजनमे साप्ताहिक मैथिली कार्यक्रम किछु एपिसोड चलल छल मुदा ओ निरन्तरता नहि पाबि सकल । मैथिली भाषाके प्रतिनिधित्व कएनिहार सशक्त संचार माध्यमके एखनो नितान्त अभाव अछि । सूचना प्रविधिक एहि युगमे मैथिलीके अपन अस्तित्व बचएबामे संचारमाध्यम सहायक भ' सकैया एहिमे किनको शंका नहि हएबाक चाही । जा धरि सशक्त संचार माध्यम मैथिलीके नइ भेट्त ता धरि इ कल्पना मात्र रहत जे मैथिलीक सुनिश्चित भविष्य अछि । अपार सम्भावनाक बादो संचारमे मैथिलीक सिकुडल काया कहिया पुष्ट हएत से कहब अनुमानो लगाएब कठिन । ३. पद्य ३.१. राजकमल चौधरीक दूटा अप्रकाशित पद्य ३.२. जीवकान्तक टटका पद्य ३.३. आशीष अनचिन्हार ३.४.पंकज पराशर- जानि नहि किएक ३.५.सुबोध ठाकुर- सनेश ३.६.निशाप्रभा झा (संकलन) ३.७.रूपा धीरू ३.८. ज्योति-बरसातक दृश्य राजकमल चौधरीक दूटा अप्रकाशित पद्य (सौजन्य डॉ. देवशंकर नवीन) १.बही-खाता एहि खाता पर हम घसैत छी संसारक सभटा हिसाब एहि खाता पर हम सदिखन घसैत छी अपना कर्मक-अपकर्मक कारी किताब! जे किछु कयने छी पाप-धर्म जे किछु बुझने छी जीवन-रहस्य आ प्राण-मर्म जे किछु बुझने छी प्राण-मर्म जे किछु कयने छी पाप-धर्म सभटा अंकित अछि एहि लाल बहीमे एहि लाल बहीमे सभटा इच्छा, समग्र वासना जे जतबा अछि जकरासँ लेन-देन जे रखने छी हेम-नेम सभ दर्ज भेल अछि सभ दर्ज भेल अछि एहि लाल बहीमे एहि लाल बहीमे सभटा इच्छा समग्र वासना जे जतबा अछि जकरासँ लेन देन जे रखने अछि हेम-क्षेम सभ दर्ज भेल अछि सभ दर्ज भेल अछि एहि लाल बहीमे ककरासँ की लेने छी हम सदिखन स्नेह-दया, माया-ममता, घृणा-क्रोध ककरा की करबाक अछि ऋणक शोध एतबा दिनमे ककरापर कतबा कर्ज भेल अछि सभ दर्ज भेल अछि एहि लाल बहीमे कविता लिखबाक केर ई लाल-बही थिक हम्मर जीवन-खाता हमर सभटा अपराध, ज्ञान, अनुभव मोह-लोभ-संताप पराभव इच्छा-अभिलाषासँ लीपल-पोतल अछि एक्कर सभटा पाता ई हम्मर लालबही थिक जीवन-खाता जीवन-खाता २.एकटा प्रेम-कविता कतेक राति बितला पर फूल पात तितला पर मुदा इजोरिया उगबासँ कतेक पहिनें एकटा म्लान-मुख स्त्री, अनचिन्हार हमरा हृदयमे किंवा अपन आँखिमे किंवा अथाह समुद्र जकाँ पसरल अकाशमे ताकि रहल अछि अप्पन अतीत ताकि रहल अछि कहियो कतेक दिन पहिनें केकरोसँ सूनल कोनो गीत ताकि रहल अछि अप्पन अतीत एकटा म्लान-मुख स्त्री अनचिन्हार बहुत राति बितलापर फूल-पात तितला पर मुदा हमरा निन्न आबि जाइत अछि आ काँच सपना मे बसन्त बहार नहि जीवकान्त: एक अनौपचारिक प्रोफाइल। १९९९ मे साहित्य अकादमी पुरस्कारक लेल मंचपर।जीवकान्त- पूर्ण नाम- जीवकान्त झा पिता-गुणानन्द झा, माता-महेश्वरी देवी, जन्म तिथि-२५.०७.१९३६ स्थान अभुआढ़, जिला-सुपौल शिक्षा-मैट्रिक (१९५५ उ.वि.डेवढ़), आइ.एस.सी. (१९५७ आर.के.कॉलेज, मधुबनी), बी.ए. (१९६४ बिहार वि.वि.स्वतंत्र छात्र), डिप.इन.एड.(१९६९ मिथिला वि.वि.) नौकरी-उच्च विद्यालयमे सहायक शिक्षक। विज्ञान शिक्षक (उ.वि.खजौली १९५७-८१), हिन्दी शिक्षक (उ.वि.डेओढ़ एवं उ.वि.पोखराम १९८१-९८) पहिल रचना-इजोड़िया आ टिटही (कविता, जनवरी १९६५ मिथिला मिहिर) पहिल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उपन्यास १९६८) नवीनतम पोथी-खिखिरक बीअरि (२००७ बाल पद्य कथा), अठन्नी खसलइ वनमे (पद्य-कथा संग्रह) आ पंजरि प्रेम प्रकासिया (जीवन-वृत्तक अंश) प्रेसमे पुरस्कार-साहित्य अकादेमी (दिल्ली १९९८), किरण सम्मान (१९९८), वैदेही सम्मान (१९८५) प्रकाशित पोथी- कविता संग्रह: नाचू हे पृथ्वी (७१), धार नहि होइछ मुक्त (९१), तकैत अछि चिड़ै (९५), खाँड़ो (१९९६), पानिमे जोगने अछि बस्ती (९८), फुनगी नीलाकाशमे (२०००), गाछ झूल-झूल (२००४), छाह सोहाओन (२००६), खिखिरिक बीअरि (२००७) कथा-संग्रह: एकसरि ठाढ़ि कदम तर रे (७२), सूर्य गलि रहल अछि (७५), वस्तु (८३), करमी झील (९८) उपन्यास: दू कुहेसक बाट(६८), पनिपत(७७), नहि, कतहु नहि (७६), पीयर गुलाब छल (७१), अगिनबान (८१) हिन्दी अनुवाद- निशान्त की चिड़िया (हिन्दी अनुवाद-तकैत अछि चिड़ै, साहित्य अकादमी, दिल्ली २००३) वनदेवी वनवासिनी स्त्री जंगलमे भोजन तकबा लेल बौआइत अछि झाँखुरमे पकड़ए चाहैए बटेर बिछैए जंगली करैल आ खम्हारु थोड़ेक जारनिक काठ जमा करैए क्यो चिमनी ईंट भट्ठापर पजेबा उघैए आ बोनि कमाइए चुल्हि जरैत छैक बहुत नियारसँ मुदा मिझाइत छैक पट दए हाथ धरबा लेल कम मर्द उपलब्ध छैक शहर दिस गेल जुआन नहि घुरलैए रिक्शा घिचबाक बोरा उतारबाक जानमारू काजमे बहुत पसेनाकेँ थोड़ कैंचा भेटैत छैक वनवासिनी स्त्री सेहो छोड़ने जाइए वन शहरमे सड़कपर राति कटबा लेल आ दिनमे हवेलीमे झाड़ू-पोछा देबा लेल... शहर ओकरा चिबा कए सुआ दैत छैक ओकर खून चाटि कए नेहाल होइत छैक शहरक मोटरमे तेल जकाँ जरैत अछि वनवासीजन शहरक आकाशमे ओ डीजिलक धुआँ जकाँ बिलाइत अछि बाघक प्रजाति उपटैत छैक तँ चिन्ता घेरैत अछि जनमानसकेँ अंडमानसँ लोहरदग्गा धरि आ उजानक मुसहरीसँ नट्टिन सभक सिड़की धरि उपटैत अछि वनवासी स्त्री-पुरुष अगबे बसात रोदना करैए सुतली रातिमे पहाड़मे गन्हाइत धार नोर बनि टघरैत अछि बबुआन सभक करेज दिल्लीसँ चतरा धरि पथर-कोइलाक खण्ड जकाँ सर्द अछि (३०.०६.२००९) आशीष अनचिन्हार गजल १३ मछगिद्ध जँ माछ छोड़ि दिअए त डर मानबाक चाही लोक जँ नेता भए जाए त डर मानबाक चाही रंडी खाली देहे टा बेचैत छैक अभिमान नाहि मनुख अस्वभिमानी हुअए त डर मानबाक चाही अछि विदित शेर नहि खाएत घास भुखलों उत्तर वीर अहिंसक बनए त डर मानबाक चाही माएक रक्षा करैत जे मरथि सएह विजेता माए बेचि जँ रण जितए त डर मानबाक चाही सम्मानक रक्षा करब उद्येश्य अछि गजल केर जँ उद्येश्य बिझाए त डर मानबाक चाही गजल १४ मालक खातिर माल-जाल बनल लोक देखाँउसक खातिर कंगाल बनल लोक भूखक दर्द होइत छैक इजोतो सँ तेज पेटक खातिर दलाल बनल लोक वृत टूटल मिलल समानान्तर रेखा बिनु कागजीक प्रकाल बनल लोक सत्य-सत्य ने रहल ने रहल फूसि- फूसि अपनेक लेल अपने जंजाल बनल लोक सुस्जित आनन चानन ललाट नुनिआएल देबाल बनल लोक गजल १५ गप्प जखन बिआहक चलल हेतैक गरीबक बेटी बड्ड कानल हेतैक गोली लागल देह दसो दिशा मे कुशलक खोंइछ कत्तौ बान्हल हेतैक डेग-डेग पर निद्रा देवीक प्रसार केना कहू केओ जागल हेतैक सड़ि गेलैक एहि पोखरिक पानि जुग-जुगान्तर सँ नहि उराहल हेतैक विश्वास करु समान कम नहि देत बाटे मे बाट भजारल हेतैक गजल १६ जल-थल बसात लेल युद्ध छोट-छीन बात लेल युद्ध आदर्श बनाम आदर्शवादी बुद्ध-गान्धीक गात लेल युद्ध जर-जमीन-जोरु एतबा नहि होटलक फेकल पात लेल युद्ध नून नहि चटबए पड़तैक बेटी के सोइरी सँ पहिनेहे गर्भपात लेल युद्ध तकनीकी जुगक व्यस्तम व्यवस्था साँझ होइते प्रात लेल युद्ध जँहा देखलहुँ घर तहीं धर खसा लेलहुँ असगरे मे अपन जिनगी बसा लेलहुँ लोक फेकैत रहल पाथर पर पाथर तकरे बीछि एकटा घर बना लेलहुँ झोल लागल देबाल पर टाँगल उदासी अहाँक हँसी टाँगि ऒकरा सजा लेलहुँ मोन मे धाह , करेज मे भूर ,देह साबुत अपन भावना के दरबार मे नाचा लेलहुँ (अगिला अंकमे जारी) पंकज पराशर जानि नहि किएक मोन मे नुकबैत छी आँखि मे नुकबैत छी बूझए नहि दुनिया एहि सतर्कता सँ व्याकुल दौड़ैत रहैत छी अपस्याँत अहाँक छायाक भय सँ अहर्निश! सुबोध ठाकुर- गाम हैंठी-बाली, मधुबनी सनेश जो रे पवन तू ओहि दूर देश पिआ बसए जाहि देश छी हम व्याकुल आतुर हद तक प्यासल छी हम अन्तर घट तक जा कऽ दए आ हुनका ई सनेस जो रे पवन तू सावनक रास भरल महीना कटए विरान हुनका बिना सहि नहि सकब हम ई कलेश जो रे पवन तू ओही दूर देश पिआ बसए जाहि देश आँखि कजराएल हमर मेघक संग हेराएल मनपर खसल बज्जर रसक मात्रा बाँचल नहि शेष जा कऽ दए आ हुनका ई सनेस कटत केना राति अन्हरिया ऊपरसँ जे चमकए बिजुरिया मनक बढ़ल जाए कलेश जा कऽ दए आ हुनका ई सनेश पसरल अछि रंग रभसक बहार सगरो मुदा हमरा लेल पसरल अन्हार सगरो एनामे जे छोड़तथि रणभूमि सखी सहेली उल्हन देत विशेष दए कऽ तू आ पिआ केँ ई सनेश जो रे पवन तू ओहि दूर देश पिआ बसए जाहि देश। निशाप्रभा झा (संकलन) भगवती गीत तारा नाम तोहार तारा नाम तोहार हे जननी काली करथि पुकार सतयुग कलयुग दुइ प्रति हारल तीनू भुवन तोहार हे जननी तारा नाम तोहार। अष्ट भुजा लए सिंह पर चढ़ली देखइत सकल संसार हे जननी, तारा नाम तोहार। सुर-नर मुनि सभ ध्यान धरतु हे गले बैजन्ती माल हे जननी तारा नाम तोहार। तारा नाम तोहार हे जननी, तारा नाम तोहार। (अगिला अंकमे)। प्रसव–पीड़ा रूपा धीरू प्रसव–पीड़ासँ छटपटाइत ओ अइ कोलासँ ओइ कोला करैत बोदरि छलि पसेनासँ, किछु कालक पश्चात चौरीमे हलचल भेलैक आ प्रसन्नताक लहरि पसरि गेलैक ओकर बाप हाथमे राखल बहिंगाकेँ खुशीसँ उछालि फेकलक दूर कऽ ओ बड़ पोरगर नेनाकेँ जन्म देने छलि । ओ बड़ प्रसन्न छल ई सोचि जे काल्हि ई हम्मर बाँहि पूरत, पँचपज्जी बोझ उठएबाक सामर्थ राखत, तखन फागुनेमे बेसाह लगबाक डर नहि रहत प्रात भने गिरहतक खरिहानमे बोनि लेबाक लेल बड़ हुलसगर मोनसँ पहुँचल ओ हुनकर दलानपर बड़कीटा मोटर चमचमाइत छलनि पता चललै जे गिरहतक पुतौहुकेँ सातम महिना छियनि दड़िभंगा जा रहल छथि दुस्साहस कऽ ओ अपन बुधनी, आ गिरहतक पुतौहुक तुलना कएलक आ बहिंगा ठामे गाड़ि देलक बोझपर ओ गिरहतके नेहोरा करऽ लागल— “मालिक परसौतीक लेल दालि–चाउर बड़ जरूरी छै कने, बोनि ........” “की बजलेँ ?” ओ गरजि उठलाह— “सार नहितन जतराक बेरमे तोँ ..... अपने भनसिया जकाँ बूझैत छिहीक ?” ज्योति बरसातक दृश्य सड़क बरसातक पानि स तरल जाहि पर गाड़ी तेजीसऽ बढ़ल एक सनसनीक आवाज छल पहिया सऽ कादोक फुहार निकलल पदयात्री मोनेमोन खौंझाइत एक तऽ गुप्प अन्हरिया राति दोसर होयत घनघोर बरसाति ताहिपर कादो छलय छितराति दिवस सेहो अन्हारे हरदम घर बैसक बड्ड बढ़िया मौसम एकरसता मिटाबक ताकू मरहम सुगन्धित ओराहल मकई गरम कियौ बैसल छैथ ताश पसारिकऽ कियो निकालैत उपन्यास संदूकसऽ कियो बैसली कुरूसिया पकड़िक कियो लगली गीतनाद सीखऽ बच्चा सबहक हालत सबसऽ गड़बड़ खेलायक समयमे लागैत जेलसन घर पढ़िकऽ मोन बहलाबक सलाह पर सबटा मेघ घरेमे बरसल १. मूल उपन्यास-कोंकणी-लेखक-तुकाराम रामा शेट, हिन्दी अनुवाद-डॉ. शंभु कुमार सिंह, श्री सेबी फर्नांडीस, मैथिली अनुवाद-डॉ. शंभु कुमार सिंह २.मूल तेलुगु पद्य-अन्नावरन देवेन्दर-अंग्रेजी अनुवाद- पी.जयलक्ष्मी आ मैथिली अनुवाद-गजेन्द्र ठाकुर १. मूल उपन्यास-कोंकणी-लेखक-तुकाराम रामा शेट, हिन्दी अनुवाद-डॉ. शंभु कुमार सिंह, श्री सेबी फर्नांडीस, मैथिली अनुवाद-डॉ. शंभु कुमार सिंह मूल उपन्यास : कोंकणी लेखक : तुकाराम रामा शेट हिन्दी अनुवाद : डॉ. शंभु कुमार सिंह, श्री सेबी फर्नांडीस. मैथिली अनुवाद : डॉ. शंभु कुमार सिंह श्री तुकाराम रामा शेट (जन्म 1952) कोंकणी भाषामे ‘एक जुवो जिएता’—नाटक, ‘पर्यावरण गीतम’, ‘धर्तोरेचो स्पर्श’—लघु कथा, ‘मनमळब’—काव्य संग्रह केर रचनाक संगहि कैकटा पुस्तकक अनुवाद,संपादन आ प्रकाशनक काज कए प्रतिष्ठित साहित्यकारक रूपमे ख्याति अर्जित कएने छथि। प्रस्तुत कोंकणी उपन्यास—‘पाखलो’ पर हिनका वर्ष 1978 मे ‘गोवा कला अकादमी साहित्यिक पुरस्कार’ भेटि चुकल छनि। डॉ शंभु कुमार सिंह जन्म: 18 अप्रील 1965 सहरसा जिलाक महिषी प्रखंडक लहुआर गाममे। आरंभिक शिक्षा, गामहिसँ,आइ.ए., बी.ए. (मैथिली सम्मान) एम.ए. मैथिली (स्वर्णपदक प्राप्त) तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। BET [बिहार पात्रता परीक्षा (NET क समतुल्य) व्याख्याता हेतु उत्तीर्ण, 1995] “मैथिली नाटकक सामाजिक विवर्त्तन” विषय पर पी-एच.डी. वर्ष 2008, तिलका माँ. भा.विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। मैथिलीक कतोक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे कविता,कथा, निबंध आदि समय-समय पर प्रकाशित। वर्तमानमे शैक्षिक सलाहकार (मैथिली) राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर-6 मे कार्यरत। सेबी फर्नांडीस पाखलो आइ रबि छैक। हमर निन्न कने देर सँ खुजल। हम अपन कम्मल सुलूकेँ ओढ़ा देलियैक। ओछाओन पर पड़ल-पड़ल हमर नजरि देवाल पर गेल। गोविन्द अपना संगहि भगवानक फोटो ल’ गेल छल। उज्जर रंगक देवाल पर आब कोनो फोटो नहि रहैक। ओ एकदम सुन्न बुझाइक। हम ओछाओन पर बैसले-बैसल सोचैत रही। गोविन्द नोकरी करबाक लेल पणजी शहरमे छल। बाबूजीक मुइलाक पश्चात् ओ अपन मायकेँ अपना संगहि पणजी ल’ आएल छल। हम दुनू गोटे एहि तम्बू मे रहैत रही। हम आ हमर भगिनी। हम उठलहुँ, खिड़की खोललहुँ आ दरबाजा खोलहि वला रही कि एतबहिमे आलेक्सक आवाज सुनलहुँ। “यौ पाखलो ! एखन धरि सुतलहि छी? पाखलो... यौ पाखलो.....” बिना किछु बाजनहि हम दरबाजा खोलि देलियैक। हम दरबाजा बन्न केलहुँ आ एकटा बासन ल’ कए लगीचक होटल जयबाक लेल ओकरा पाछू-पाछू चुपचाप चलि देलहुँ। आलेक्स हमर नेनपनक मीत थिक। हमरा सभमे एखनहुँ घनिष्ठता अछि। एक्कहि ठाम काज करैत छी। ओहो ड्राइवर आ हमहूँ। एक्कहि कम्पनीमे नोकरी करैत छी आ एक्कहि रंगक ट्रक चलबैत छी। हमरा गुमसुम चलैत देखि ओ बाजल... औ जी ! कोन सोचमे डूबल छी? किछुओ तँ नहि, हम अचकचा कए कहलहुँ। किछु किऐक नहि? जँ अहाँक बियाह भ’ जाय तँ भगिनीकेँ देख’ वाली क्यो तँ भ’ जेतीह? एहि बात पर हँसितहि हम पूछि देलियैक... हमरा के अपन बेटी देत? ई बात सुनितहि ओ जोर-जोरसँ हँस’ लागल। ऐं यौ आलेक्स, अहाँक पासपोर्ट बनि गेल की? ओकर हँसी रोकबाक लेल आ किछु आर बाजबाक लेल हम ओकरा सँ पूछलहुँ। हँ... आलेक्स बाजल। तखन दुबई कहिया जाएब? हम पुछलियनि। अगिला सप्ताह, प्रार्थनोत्सव केर बाद। प्रार्थनोत्सव केर बाद? हाँ बरु वैह दिन। वैह दिन किऐक? उत्सवक बाद चलि जाएब...। नहि, असलमे ओहि दिन हमर मीत जा रहल अछि एहि लेल हम ओकरहि संगे जा चाहैत छी। तखन तँ अहाँकेँ हमरा कम्पनीक नोकरी छोड़’ पड़त। जाय दिअ एहन भिखमंगा नोकरी केँ? ओहुना हमरा सन लोक भारतमे रहि कए पाइ अर्जित क’सकैत अछि की? ओतए मजूरीयो तँ बेसी छैक? तखन अहाँक विदेश जायब एकदम पक्का, की ने? हँ...। विदेश जुनि जाउ, पछिला किछु दिनसँ आलेक्स हमरा यैह कहैत छल। हमरा बाटमे अड़ँगा जुनि लगाउ, हम हुनका चेतबैत कहलियनि आ चुपचाप बाट चलए लागलहुँ। जखन गोविन्दजी गाम छोड़ि पणजी शहर रहबाक लेल गेल छलाह तखनहुँ हमरा बड़ खराप लागल छल। मुदा आब तँ आलेक्स अपन गाम आ देश छोड़ि परदेस जाइत छल, आइ हमरा कनेको खराप नहि लागि रहल अछि। हम दुनू गोटे होटल पहुँचलहुँ। भीतर जयतहि सभ क्यो हमरा घूरि-घूरि कए देखय लागल। बुझाइत अछि जे ओकरा सबहिक नजरि हमर कैल टनटन केश आ कैल रोइयाँ पर चलि गेल हो, ओ मोनहि-मोन सोचलक। हमर कूर आँखि, उज्जर चाम आ गसगर देह... पाखलो, अहाँक बासनमे दूध ध’ दी वा चाह? होटलवला पूछलक। हम भरि बासन चाह ल’ लेलहुँ। दू टा बड़का पाँवरोटी आ एकटा कांकण (छोट पाँवरोटी) लेलहुँ। आलेक्स अपन मीतक संग दुबई जाइवला बात करैत रहल। ओकर मीत ओतएसँ ओकरा लेल कोनो विदेशी समान लएबा लेल कहैत रहैक। विदेश जयबासँ संबंधित बात करएवला आलेक्सकेँ छोड़ि हम अपना घरक बाट लेलहुँ। पड़ोसक रुक्मिणी मौसी हमरा घर आयल छलीह। ओ सुलूकेँ उठा कए मुँह धोबाक लेल कहलथि। हमहुँ अपन मुँह धो लेलहुँ। दू टा कपमे चाह ढ़ारलहुँ आ रूक्मिणी मौसीकेँ चाह पीबाक लेल कहलियनि। औ बाउ! हम एकनहि घरसँ चाह पीबि कए आएल छी, आ ओहुना की हम होटलक चाह पीबैत छी?रूक्मिणी मौसीक एहि जबाब पर हम चुप रहि गेलहुँ। ताधरि हम सुलूक मोन बहटारि नेने छलहुँ। ओ थपड़ी पाड़ैत हमरा लग आयलि आ पूछ’ लागल... मामा आइ रबि छियैक ने? आइ तँ अहाँ काज पर नहि जाएब? हम हँ, कहि अपन माथ डोलौलहुँ। मौसी आइ अहाँ हमरा अपना ओहिठाम नहि ल’ जाएब। आइ हम एतहि रहब...मामा लग। ओ मौसीसँ बाजलि। हँ दाइ.... हम ओना अहाँकेँ किएक ल’ जाएब? हम आ सुलू चाह पीबतहि छलहुँ तावत रुक्मिणी मौसी बरतन-बासन धोब’ चलि गेलीह। सुलूक बाबूजी ओकरा सम्हारबाक लेल तैयार नहि रहथि। ओहि समय ओ केवल डेढ़ बरखक छलीह। नीक जकाँ बाजियो नहि होइक। केवल दूई चारि शब्दहि बाजि सकैत छलीह। आब तँ ओ साढ़े तीन बरखक भ’ गेल अछि, मुदा देखबामे पाँच-साढ़े पाँच बरखक बुझाइत छलीह। गोर-नार चेहरा। हम ओकरा माथ पर हाथ फेरलहुँ। मोम-सन नरम केश आ कूर आँखि। हम ओकरा आँखिमे देखलहुँ, ओहो हमरा आँखिमे देखलक। एक दोसराक आँखिमे हमरा सभक छवि समा गेल। ऐहन बुझाइत छल जेना ओ हमरा सँ किछु पुछ’ चाहैत अछि। हमरहुँ आँखिमे एकटा चमक सन आबि गेल। एहन बुझाइत छल जेना ओ पूछए चाहैत छलीह, "अहाँक आँखिसँ हमर कोनो पुरान संबंध अछि ?" हमर नजरि ओकरा कैल केश पर गेल। ने जानि किएक ओकर गोर-नार चाम, कैल केश आ कूर आँखि देखि हमरा एहन प्रतीत होमए लागल जेना पूरा आकाश मेघसँ आच्छादित भ’ गेल होअए, ठीक तहिना हमर मोन अतीतक स्मरणसँ भरि गेल...। एतबहिमे रुक्मिणी मौसी घरक काज पूरा क’ कए अपन घर जाहि पर रहथि कि हम सुलूकेँ हुनका संगहि जयबाक लेल कहलियनि। हम नहि जायब, सुलू अपन माथ डोला कए जबाब देलक। नहि, नहि हमरा काज पर जयबाक अछि, अहाँ मौसीक संग चलि जाउ। दूपहरमे हम जल्दीए आबि जाएब आ अहाँकेँ ल’ आएब, एतबा कहि हम सुलूकेँ समझएबाक प्रयास कएलहुँ। सुलू कानय लागलीह। मुदा पछाति जा कए ओ मौसीक संगे जयबाक लेल तैयार भ’ गेलीह। रुक्मिणी मौसी सुलूकेँ ल’ कए चलि गेलीह। हम दरबाजा बन्न क’ लेलहुँ। हमरा दिमागमे आयल सभटा पुरान स्मृति एकटा भयंकर गरज केर संगहि बिखरि गेल। बुझू हम अपना आपकेँ पूर्ण रुपेण ओकरहिंमे ताक’ लागलहुँ.... अपन पहिचानक खोज करय लागलहुँ...। गोविन्दक दादी द्वारा कहल गेल खिस्सा एखन धरि पाखलो केँ स्मरण छलनि। शाली आ सोनू दुनू भाय-बहिन रहथि। गामक एकटा छोर पर हुनक घास-फूसक घर छलनि आ अपन किछु खेती-बारी सेहो रहनि। ओ अपनहुँ खेती-बारी करैत छल आ दोसरोक खेतमे काज करबाक लेल चलि जाइत छल। एकर अतिरिक्त ओ गरमीमे मजूरीयोक काज करैत छल। एकदिन शाली लकड़ी काटबाक लेल जंगल गेलीह। कुमारि शालीक संग तीन टा आर स्त्री लोकनि छलीह। सभ दिनक भाँति ओ सभ लकड़ी काटि कए ओकर बोझ सेहो बना लेलथि, तखनहि ओकरा सभकेँ सीटी केर आवाज सुनबामे अयलनि। ओ चारू गोटे डरि गेलीह। ताहि दिन पाखलो (फिरंगी) जंगलमे शिकार करबाक लेल अबैत छलाह, ओ एहन सुनने छलीह। फिरंगी केर हो-हल्ला आ स्त्रीगण पर कयल गेल अत्याचारसँ ओ परिचित छलीह। ओहि सीटीक आवाज सुनि ओकर तँ जेना होशे-हवास गुम भ’ गेल। ओ बहुत घबरा गेलीह। तावत हाथमे बंदूक नेने तीनटा फिरंगी ओतए पहुँचि गेल। बाघक समक्ष आबि गेलाक पश्चात् जेना आन जानवर लंक ल’ लैत अछि ठीक ओहिना ओ सभ लकड़ीक बोझ छोड़ि भागल। तीनो फिरंगी ओकरा सभक पीछा करय लागल। अपन जान बचयबाक लेल भाग’ वाली शाली गिरैत-पड़ैत बहुत थाकि गेल छलीह। आब आर बेसी गतिएँ दौड़ सकब ओकरा बुता केर बात नहि रहि गेल छल। ओ पाछू ताकलक, तँ देखलक जे एकटा फिरंगी अपन कन्हा पर बंदूक आ छाती पर एकटा तमगा लगौने ओकरहि पाछू दौड़ल आबि रहल छल। ओहि फिरंगीकेँ देखि शाली अपन जान बचएबाक लेल अपन अंतिम शक्ति लगा कए दौड़लीह। ओ सभटा स्त्रीगणकेँ पाछू छोड़ि आर जी-जानसँ दौड़’ लागलीह। बहुत बेसी थकान हेबाक कारणेँ आब ओ थाकि कए चकनाचूर भ’ गेल छलीह, जोर-जोरसँ उपर नीचाँ होमए बला ओकर छाती आब फाटि कए बाहर निकलि जाएत, ओकरा एहने बुझाब' लागलैक। ओकर दौड़बाक गति मंद होम’ लागलैक आ एतबहिमे ओ फिरंगी ओकरा लगीच पहुँचि गेल। लगीचक आन-आन स्त्रीगणकेँ छोड़ि ओ फिरंगी शालिएक दिस बढ़ल आ अंततः ओ शालीकेँ अपन बाँहिमे जकड़ि लेलक। एतबहिमे पाछूओक दू टा फिरंगी ओतए पहुँचि गेल। ओहो सभ शालीक दिस अपन हाथ बढ़ौलक, मुदा ओ फिरंगी ओहि दुनू फिरंगीकेँ पुर्तगाली भाषामे किछु कहलक। ई सुनि ओ दुनू पाछू हटल आ आगू भागए वाली स्त्री सभक पीछा करए लागल। फिरंगीक बाँहिमे शालीक साँस फूल’ लागलैक आ ओकर वाक् सेहो बन्न भ’ गेलैक। ओहि फिरंगीक देहमे शैतान आबि गेल छलैक। क्रमशः २.मूल तेलुगु पद्य- अन्नावरन देवेन्दर-अंग्रेजी अनुवाद- पी.जयलक्ष्मी आ मैथिली अनुवाद-गजेन्द्र ठाकुर कवि अन्नावरम् देवेन्दर आन्ध्र प्रदेशक करीमनगर जिलासँ छथि आ तेलुगु भाषाक तेलंगाना बोलीमे तेलंगाना राज्यक संवेदना आ संस्कृति आ ओकर अलग राज्यक लेल संघर्षकेँ स्वर दैत छथि। हुनकर छह टा कविताक संग्रह छपल छन्हि। महात्मा जोतिबा फुले फेलोशिप २००१, रंजनी कुन्दुरती कविता पुरस्कारम् २००६, डॉ. मलयश्री साहिति पुरस्कारम् २००६, रांगिनेनी येनम्मा साहित्य पुरस्कारम् २००७ पुरस्कारसँ सम्मानित। ओ जिला परिषद, करीमनगरक पंचायती राज विभागमे सीनियर असिस्टेन्ट छथि। पी.जयलक्ष्मी, ओस्मानिया विश्वविद्यालयक , निजाम कॉलेज हैदराबादमे अंग्रेजी विभागमे एसोसिएट प्रोफेसर छथि। विगत ३० बरखसँ अंग्रेजीक अध्यापन। हुनकर विशेषज्ञता अंग्रेजीमे भारतीय कविता, अनुवाद आ अनुवादशास्त्र अछि।२००३ मे भार्गवी रावक संग मिलि कऽ शीला सुभद्रा देवीक सितम्बर ११ आ ओकर परिणामपर तेलुगु काव्यक अंग्रेजीमे वार अ हर्ट्स रैवेज नामसँ अनुवाद। २००७ मे गोपीक ननीलू केर अंग्रेजी अनुवाद। स्प्रिन्ग नामसँ अन्नावरम् देवेन्दरक कविताक अंग्रेजी अनुवाद प्रेसमे अछि। (तेलुगु कविता: तेलुगुसँ अंग्रेजी पी.जयलक्ष्मी द्वारा, अंग्रेजीसँ मैथिली गजेन्द्र ठाकुर द्वारा) पानि अछि , मात्र आँखिक नोर ठोप, ठोपे टा मे टपटप खसैत पानि ठोपे-ठोपे, हम नहि कऽ सकैत छी वर्णित, पानि नहि बहैत अछि निरावरोध, सुबर्ना नहि अछि भरैत कखनो। कलसँ भनसाघर धरि, भनसाघरसँ सोझाँक बारी धरि भागैत एतएसँ ओत्तऽ एम्हर-ओम्हर करघाक नमरैत ताग सन वस्त्रक संरचना सन एक्के घुमानमे हम जाइ छी घूमि। कनैत बाल, पानि भरबाक अछि काल दूधक झोँक आ हमर रजस्वला एकान्त हुँह ! सभटा एक्के बेर ! पानि मात्र सप्ताहमे दू दिन, छौँकी आ झगड़ा कलपर तैयो छी हम सभ स्त्री जे रहैत छी मिलि कऽ बेकाल मे दैत प्राणोक उत्सर्ग। ई सभटा झंझवात पानिये टा लेल नहि कहि सकैत छी अहाँकेँ अपन पानिक समस्या- सम्पूर्ण भोर खतम होइत अछि एहि १५ मिनटक कार्यक लेल कनेक काल भातक बिनु बिसरियो सकैत छी मुदा बिनु पानिक जीवन चलत? एकत्रित भेल जे नहि अछि हमर बेटोक लेल पर्याप्त ताहि लेल, रस्सा भरि नमगर पाँति। के अकानैत अछि संघर्ष? घर भरल लोक गाछ जेकाँ ठाढ़ आकि कुरसी जेकाँ बैसल तमसाइत हमरापर जे हम छी पछुआएल दौगैत छी बिनु लक्ष्यक। मुदा नहि हिलबैत छथि आँगुरो हमरा सहायतार्थ हमर हाथ ओहि बोरिंगकेँ ठीक करैत भेल जे चोटिल। ओहि पम्पकेँ पीटैत निकलैत अछि मात्र छुच्छ ध्वनि हमर प्राण बहार भऽ जाइत अछि ओतए काज करैत कर्र कर्र कर्र कर्र हमर बाँहिक दर्द आ छातीक पीड़ा पाताल धरि पानि बिला जाइत अछि कतहु गहींर नीचाँ मुदा तैयो नहि बकसैत जे हम काज करैत छी खतम करबाक लेल चम्मच भरि पानिक बुन्द सेहो गन्हाइत। कान्ह भेल भोथ ठेला परल सुवर्णा उघैत ब्लाउज फाटल एकटा अल्प जीवनक बाद हमरामे नहि अछि एकर जोड़-तोड़ करबाक सक्क हम की कऽ सकैत छी बहिन? पानिक चरचे मात्र मृत्युक डरकेँ अछि खोंचारैत पानि अछि, आँखिक नोर मात्र... “नीलान्टे कन्नीले...” मनकम्मा थोटा लेबर अड्डासँ बालानां कृते- 1.देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स); 2. मध्य-प्रदेश यात्रा आ देवीजी- ज्योति झा चौधरी 1.देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स) देवांशु वत्स, जन्म- तुलापट्टी, सुपौल। मास कम्युनिकेशनमे एम.ए., हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्र्रिकामे कथा, लघुकथा, विज्ञान-कथा, चित्र-कथा, कार्टून, चित्र-प्रहेलिका इत्यादिक प्रकाशन। विशेष: गुजरात राज्य शाला पाठ्य-पुस्तक मंडल द्वारा आठम कक्षाक लेल विज्ञान कथा “जंग” प्रकाशित (2004 ई.) नताशा: मैथिलीक पहिल-चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स) नीचाँक दुनू कार्टूनकेँ क्लिक करू आ पढ़ू) नताशा चौदह नताशा पन्द्रह 2. मध्य प्रदेश यात्रा- ज्योति चौदहम दिन 5 जनवरी 1992 रविदिन आइ हमर सबहक पूरा दिन यात्रामे बीतल। रस्ता भरि हमसब अपन पुरान बातके मोन पाड़ैत रही। पूरा बॉगी हमरा सबलेल आरक्षित छल। लेकिन हमसब एक कम्पार्टमेट के इर्द गिर्द जमा रहै छलहुँ। पता नहिं फेर एहेन अवसर कहिया आयत। फेर विदाई के गीत गाबैत-गाबैत एक गोटै कानऽ लागल तऽ सब कियो भावुक भऽ गेल। अहि बीच एकटा बढ़िया घटना भेल। हमर सबहक हल्ला गुल्ला सुनिकऽ एक गोटय श्रीमान उधम सिंह जे एडवेञ्चर क्लब के प्रेसिडेण्ट छलैथ आ टिस्को द्वारा आमंत्रित भेलाक कारण टाटा जा रहल छलैथ सेहो अपन बॉगी छोड़ि हमर सबलग आबि गेला।ओ हमरा सब बीचम आर बच्चा बनि गेल छलैथ आर हमरा सबके आर मज़ा आबि रहल छल। रातिके 10ः15 बजे हमसब विलासपुर स्टेशन पहुँचलहुँ।चुंकि गाड़ी तीन घण्टा विलम्ब छल तैं नागपुर पैसेन्जर छुटि चुकल छल।आब हमसब बॉम्बे हावड़ाक प्रतीक्षामे छलहुँ। देवीजी : ज्योति देवीजी देवीजी खेल प्रतियोगिता बरसातक समयमे जहिया बरसात नहिं भेल रहैत अछि तहियाकेसमय बड्ड सुहावन होयत अछि। ताहि द्वारे देवीजी प्रधानाचार्य के सहमति सऽवार्षिक खेल प्रतियोगिता अहि समयमे राखैके विचार बनौली। मौसमक जानकारीपाबि किछु उचित दिन के खेल दिवस घोषित कएल गेल।सब बच्चा सब जेपहिनेहे सऽ जुटल छल तैयारीमे से आर जोर-सोर सऽ भीड़ गेलैथ।खेल शिक्षक-शिक्षिका सेहो व्यस्त छलैथ। देवीजी प्रतियोगिताक तथा ईनामक व्यवस्थामे जुटलछलैथ। हुन्कर सहयोगसऽ दौड़ , बाधा दौड़ , हाई जम्प, लांग जम्प, तैराकी,डाइविंग, बास्केट बॉल, बॉलीबॉल, बैडमिण्टन, टेबल टेनिस, हॉकी, फुटबॉल,थ्रो-बॉल, कबड्डी, खो-खो आदि खेलक प्रतियोगिता आयोजित भेल। सबलग सुनिश्चित कार्यक्रमक जानकारी दैत काल देवीजीखेलकूदक महत्व बताबऽ लगली। देवीजी कहलखिन जे खेलकूद के लेल तेजदिमाग आ शारीरिक हरकत पर नियंत्रणके आवश्यकता होयत अछि।कोनो खेलकनियम के अनुशासनमे रहि जीत भाव सऽ उत्प्रेरित भऽ पूरा समूह स तालमेलबनाबैत अपन शारीरिक गतिविधि पर नियंत्रण राखैत खेल प्रतियोगितामेभागलेनाई बड्ड आसान नहि होयत अछि। अहिलेल स्वस्थ शरीर, लगातारशारीरिक श्रम करैके क्षमता तथा अभ्यास बहुत जरूरी होयत अछि।ताहिदृष्टिकोणसऽ खेल मे सफल भेनाई पढ़ाई लिखाई सऽ बेसी मुश्किल छै। जॅं पढ़ाईएकबेर केने छी तऽ जल्दी बिसरत नहिं लेकिन खेल मात्र दिमागेमे याद रहनेनहिं होयत छै। लगातार अभ्यास के बिना कोनो उच्च स्तरीय खेलमे सफलभेनाई असंभव होएत अछि। देवीजी बालिका सबके प्रोत्साहित करैत कहलखिन जे बिहारकेबालिका सब सेहो खेलजगतमे बहुत उन्नति केने छथि।हालेमे बिहारक बालिकाकसमूह जूनियर नैशनल थ्रो बॉल प्रतियोगितामे, जे कि मुम्बई मे आयोजित छल,मध्यप्रदेशके पराजित कऽ राष्ट्रीय स्तर पर तेसर स्थान प्राप्त केलक। अहि टीममेश्वेता राय, नेहा रानी, सुमेधा तथा प्रियंका दयाल विशेष रूप सऽ नीक प्रदर्शनकेलैथ। देवीजी अहि बातक सम्भावना व्यक्त केलखिन जे भविष्यमे बिहार क्रिकेटएशोसियेशन सऽ आयोजित अण्डर १३, अण्डर १५ आदि क्रिकेट मैचमे अपनविद्यालयसऽ उपर्युक्त छात्रके अवसर देल जायत तथा अहिसब खेल प्रतियोगिताकबाद इनडोर खेल जेनाकि कैरम सतरंज इत्यादिक प्रतियोगिता सेहो आयोजितकैल जायत। तदोपरान्त, निश्चित कार्यक्रमानुसार सब प्रतियोगिताक आयोजनभेल आ कखनो नीक आ कखनो कनिक भांगठ के संग सब पूरा भेल ।ग्रामवासी सब खूब भीड़ लगाकऽ देखऽ एलैथ जाहि सऽ बच्चा सबके खूबहिम्मत बढ़ल। अन्तमे जीतैबला बच्चासबके पुरस्कार सेहो भेटल। गामक लोकसब विद्यालयमे बच्चासबहक सर्वांगिक विकासलेल होयत विविध प्रयास सऽ बहुतप्रसन्न छलैथ। प्रधानाध्यापक, देवीजी आ पाठशालाक अन्य कर्मचारी लेल सबसऽपैघ पुरस्कार यैह छल। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवाफोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara orPhonetic-Roman.) Language: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) इंग्लिश-मैथिली कोष/ मैथिली-इंग्लिश कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वाराggajendra@videha.com पर पठाऊ। विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.पञ्जी डाटाबेस आ २.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली १.पञ्जी डाटाबेस-(डिजिटल इमेजिंग / मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण/ संकलन/ सम्पादन-पञ्जीकार विद्यानन्द झा, नागेन्द्र कुमार झा एवं गजेन्द्र ठाकुरद्वारा) जय गणेशाय नम: जय गणेशाय नम: जय गणेशाय नम: (1) अथ पत्र पत्र्जी लिखते: अथ सरिसब ग्राम: देवादित्य रत्नाकरापत्य-छादन।। प्रज्ञाकरापत्य-बनौली नम समेत।। नितिकर सन्तति केशवापत्यदनाद-गंगेश्वरा पत्य गौरि शौरि कुलपति-बधवास।। महिपाणि सन्तति-खांगुड़ गयड़ा समेत।। ग्रहेश्वरापत्य-जोंकी।। गणेश्वरापत्य-सकुरी।। सोने सन्तति-कटमा ओ सकुरी।। भवादित्यपत्य-सतैढ़।। रघुनाथापत्य-उल्लू।। कौशिक-उल्लू।। गिरीश्वरापत्य-सतैढ़।। वास्तु सुत ऋषि-सतैढ़ सम्प्रति-फरकीया शिवादित्यापत्य-रतवाल मतहनी।। हरादित्यापत्य-बलिवास श्री करापत्य-ननौरे।। शुचिकरापत्य-जगन्नाथपूर हल्लैश्वर-रूद्रपुर पैकटोल।। केशब बागे बसुन्धर-नरघोघ रामदेवापत्य-सिंडोआ।। कामदेवापत्य-डीगरी गढपाणि सन्तति-गौर वोड़ा।। अथ नजिबाक ग्राम भासे सन्तति वलिया रातु-दिगउन्ध।। कान्ह सन्तति गोविन्द-भड़ाम।। सोम सन्तति-नाहस।। सुपन वासू-देउथि।। नारायण पुराई-ब्रह्मपुर।। मिश्र रामापत्य-अचौढ़ी।। शुचिकरा पत्य- बलिया ब्रह्मपुर।। छीतू पारू-पीलखा।। शिवाई-महूलिया जहरौली।। ईश्वर नारू-नोहड़।। श्री धरापत्य-दिमन्दरा-एते जजिवाल ग्राम-अय खण्डबल ग्राम ठ. हराई सन्तति-भखराइन।। सोमेश्वरापत्य-बुलवन कधुवा समेत।। ठ. अनन्त हरि-लखनौर।। भोगीश्वरापत्य गोपाल सन्तति-बथई-हरड़ी।। गढाघरापत्य-पौराम।। रत्नाकरापत्य-हलधर तेतरिया हरडी खण्डबसा ।। ठ. दूबे सन्तति भौर।। लाखूमशहिमति-बेहद यमुगाम।। योगीश्वरापत्य-सोन्दपुर सरपरब कुरहनी वासी द्वीट खण्डबला।। शुभद्रत्तापत्य-देशुआल।। झाझू सन्तति-रैयाक गुरदी सोनकहमेरी।। वास्तु, वागू, हिरू-देउरी गोपालापत्य-गढ़।। देने सन्तति-चनुआरी।। पक्षधरपल-तेतरिया।। दिनकरापत्य-पोंसक, बथदी बिहारी-उभय गोरादी-साधु सन्रति-बथयी।। लक्ष्मीपति सन्तति-खरसा गणेशवरापत्य-गणेश्वरापत्य-गुलदी।। हल्लेश्वरापत्य बेलारी।। जीवेश्वरापत्य-अलय।। (2) ''अ'' सोमकंठ-सरपरब।। रबि सन्तति-गौर ब्रह्मपुर।। जयकर सन्तति-सजनी।। भासे-डीह।। देवेश्वरापत्य-देशुआल।। पक्षीश्वरापत्य-यमुगाम।। गिरीश्वरा-मत्य-देशुआल विन्ध्येश्वरापत्य-वैकुण्ठपुर।। शितिकंठ सन्तति-खुट्टी ।। रत्ननेश्वरापसगुलदी।। अथ गंगोलीग्राम-महामहो सुपट सन्तति-गोम कटमा।। होरे सन्तति-बिसपी।। हारू सन्तति- देशुआल।। हरि सन्तति-डुमरा।। दिवाकरापत्य-दिगउन्ध।। गौरीश्वर सन्तति जगनाथापत्य-धर्मपुर।। कुमर-गंगोली वासी।। कमलपाणि-वैगनी, वड़ग्राम।। डालू सन्तति-सकुरी।। गयन सन्तति-खरसौनी ।। एते गंगोली ग्राम।। अपथपबौली ग्राम-रवि सन्तति-बिरौलि।। उदयकरसन्तति-सपता देशुआल।। महिपति सन्तति-कोशीपार डुमराही।। हरियाणि सन्तति-गोधनपुर लक्ष्मीदत्तापत्य-गोनोली।। नारू सन्तति भतौनी डहुआ।। रूद सन्तति-बछौनी।। रूद सुत पाठक भीम-भीरडोआ।। जागू सन्तति-रयपुरा।। विशो सन्तति-चणौर।। बासु गौरि सन्तति-महरैल।। केशव गोविन्दापत्य-राजे।। दामोदरापत्य-राजे शिवदत्तापत्य-बढि़याम।। गोगे सन्तति-सहुड़ी।। यशोधरापत्य-मेयाम।। दामू सन्तति-अम्मा।। पुण्याकरपत्य: पैकटोल पनिहथ उँदयी सन्तति-धेनु।। मधुकर रत्नाकर प्रभा कर विभाकरापत्य जगति।। एते पर्वपल्लीग्राम।। अथ सोदपुर ग्राम-ग्रहेश्वरापत्य-धउल।। रूद्रेश्वरापत्य-विरपुर।। धीरेश्वरापत्य सुन्दर विश्वेखरापत्य भवे माधव-हसौली।। रामापत्य-रमौली।। बाटू-बड़साम।। रूचि बासुदेव-कुसौली।। यटाधरापत्य-पचही।। गयनापत्य: रोहाड़:’बहेड़ा।। रति हरि-टाटी।। बास्तु सन्तति-तेतरिहार।। रूपे सन्तति-सिमखाड़।। बसाउनापत्य-कन्हौली।। कामेश्वर सुरेश्वर राम।। (3) नाथापत्य-भौआल।। कान्हापत्य-सुखेत।। त्रिपुरे-अकडीहा।। रतिनाथापत्य डालू-कटका।। बाटू सुत हलधर श्रीधर-केउँटगामा।। सुधाकरा पत्य-गौर।। म. म. उ. श्विनाथपत्य-दिगउथ।। म. म. उ. भवनाथ प्र. अयाचीसुत म.म.उ. शंकर महो महादेव महो मासे महोदारो सन्तति सरिसन अपरा भवनाथ प्र. अचाचीसुत शम्भुनाथ रूद्रनाथापत्य- बालि।। महामहो देवनाथापत्य-दिगउन्ध।। महो रघुनाथापत्य-रैयाम।। जोर सन्तति-विठौली मिसरौली गोपीनाथापत्य- मानी, जगौर।। म. म. उ. जीवश्वर सुत गणपति हरिपति-महिया।। लोकनाथापत्य-माझियाम खोरि। हरदत्त काधदापत्य शहड़ सुहथरि।। देवे सन्तति-महिया।। एते सोदरपुर ग्राम।। अथ गंगोरग्राम—बीनू वासू कुरूम भौआल केशवापत्य-अहियारी-पोनद।। सनाथ सन्तति-विरनी वासी।। भोरे सन्तति महिन्द्र पुर।। विठू कादि बेकक।। अय पल्ली ग्राम-हलधर सन्तति-बनाइनि।। महामहो उँमापति समौलि,वारी, जरहरिया।। रूपनाथ सन्तति गिरपति-समौलि’ पशुपति-समौलि।। महाप्रबंधक।। रघुनाथापत्य: दड़मपुरा नरहरि, रघुपति सन्तति-समौलि।। देवधरापत्य- कछरा, देउरी।। गांगु सन्तति-दोउरी।। दिवाकरापत्य-देउरी,सकुरी, मोहरी-कटैया।। घोटक रवि सन्तति-कटैया।। ग्रहेश्वरापत्य: कछरा।। रामकरापत्य-भालय।। नितिवरापत्य-राजोसतिश्वरापत्य-सिम्भुनाम।। कान्हापत्य-पड़ौलि।। विरममिश्रापत्य-ततैल।। रामदत्त सुत केशव सन्तति-कान्ह-हाटी।। महाई सन्तति-फूलदाहा माधवापत्य-दिवड़ा।। इबे सन्तति-बेहरा।। नरसिंहापत्य हरिपुर।। मुरारी सन्तति-मुराजपुर।। भोगीश्वर राजेश्वरापत्य पुरे सन्तति-अलयी।। वंशधरापत्य-अलय।। गोविन्दा पत्य-रैयम।। कीसे सन्तति राम सन्तति वाटू सन्तति-नंगवाल।। प्रभाकरापत्य-पर्जुआरि।। हिताई सन्तति-विस्याक्षापत्य नकेसुता-बैकुंठपुर।। हारू सन्तति-नैकंधा।। कविराज (4) ''आ'' सन्तति-मछैटा।। सिंहेश्वरापत्य-ननौर।। मित्रकरापत्य-ननौर-राजखंड,पाली।। जयकरापत्य-कुसमाल, पिण्डारूछ, बारहता, रताहास पाली कछरा।। माधवा।। पत्य गौरीश्वरापत्य अहियारी, टूपाभारी।। गणपति, गांगु सन्तति-अहियारी।। यशु, डगरू सन्तति-कुरूम।। बागू सन्तति-रोहाल, कटैया।। गोविन्दा पत्य हचलू सुत दिवाकरा पत्य-सुदई, षनिहथ।। होराइ सन्तति-अडि़यारी।। रूद्रेश्वरा पत्य-भड़गामा। बाटू सन्तति-सन्दलाही, पाली पाली, विशानन्द पत्य-ब्रह्मपुर।। थेतनि सन्तति-जलकौर पाली।। चन्दौत पाली दुर्गादित्य पत्य-महिषी।। देवादित्यपत्य-बिहार, महिषी समेत।। रतनू प्रoरत्नादित्य पत्य-महिषी।। रत्नाकरापत्य-यशारी।। ततो धोधनि सन्तति-यशरि।। विशो, श्रीकर, शुचिकरापत्य-पुरोठी।। जीवे सन्तति-मोनि।। बादन सन्तती आसी।। सुधाधरापत्य मांगुसन्तति-मोनी।। भवदत्तापत्य-पुरोही।। (100/05) शुभंकरा पत्य- जमदौली।। पौथू सन्तति-परसौनी, जरहटिया, सकुरी।। कुसमाकर सन्तति-जमदौली।। यटाघरा पत्य-सकुरी।। श्रीवधर, वंशीधरापत्य-सकुरी।। बुद्धिधरा पत्य-ततैल।। कान्हापत्य-अलय, सकुरी।। इनसन्तति सकुरी।। मुरारी सन्तति रामापत्य-महिन्द्रवाड़।। विशो सन्तति रूद्रेश्वरापत्य-कोलहट्टा।। गणेश्वर नन्दीश्वरापत्य-महिन्द्रवाड़।। गोविन्दायत्य= हरिपुर।। विरेश्वर नरसिंहापत्य-रादी श्रीधरापत्य बेलउँच राढ़ी।। गुणीश्वरापत्य-कोइलखा।। ग्रहेश्वरापत्य चहुँटा।। शोपालापत्य-समैया।। हरिपाणि सन्तति-समैया।। बाछे सन्तति होरेश्वर मतिश्वर मंगरौनी।। बाटू सन्तति-कटउना।। जसू, शतू सन्तति-सकुरी।। गणपति सन्तति भगवसन्तति-पचाढ़ी।। गुणाकरापत्य-बरेहता सोन्दवाड़।। पुरादित्या पत्य-मृगस्थली एते पल्ली ग्राम (5) हरड़ी।। धनेश्वर-मझियाम, कनईल, लोहना समेत।। लाखू सन्तति-कनइल।। चाण सन्तति रतिश्वर-छामू।। रामकर कृष्णाकर-थुगाम वासी।। भोगे सन्तति शंकर गुदे-दिवड़ा।। इबे-जरहरिया।। देवे सन्तति-रहड़ा।। गोढ़े-रहड़ा।। गोन्दन चाण- पुरोहित गोपाल सन्तति मारू-वरूआड़ सुपे संखवाड।। श्रीकर-पेकटोल।। गौरीश्व-रतेकुना।। मिश्र भगव-पुरामनिहरा।। चक्रेश्वर सन्तति-दहुड़ा करूहरा। देहरि-ततैल।। सोम-ततैल।। सान्हि सन्तति- गोधनपुर।। देवे सन्तति-कादिकापूर। (ताई-तत्रेव ।। ।। गोना सकराढ़ी-थितिकरापत्य-आडू.गावासी-मझियाम समेत।। बुधौरा सकरादी, दूबा-सकरादी अन्हार बरगामा समेत।। एके सेकराढ़ी ग्राम।। अथ दरिहरा ग्राम-त्रिपुरारि सन्तति-सिंहाश्रम।। हरिकर बुद्धिकर रूपनादि विजनपुर।। यशस्पति सन्तति गणपति भड़ैली।। गुणपति सन्तति-पठोङगी)।। विद्यापति-पुडरीक-मछदी। केशव-अमरावती। शिरू-कुरूम सोने सन्तति भौजाल।। शिव-यमुगाम।। गुणाकर पद्मकर मधुकरपट्टो। प्रज्ञाकरापत्य-कुसुमाक-वड़गाम।। मित्रकरापत्य-जरहिटआ।। प्रसाद गौरीश्वरापत्य-भरउड़ा सन्हवा समेत।। दिवाकरापत्य-अलई।। दिनकरापत्य सोनतौला।। रतिशर्म्मावस-सकुरी।। भवशर्म्मापत्य-ब्रह्मपुर।। यटाधर-ब्रह्मपुर।। शशिधरापत्य-पनिहारी।। बागू गांगू तरहट।। गोविन्द-कान्ह-पचही।। नारू-यशराजपुर।। बाटू-ब्रह्मपुर।। इन्द्रपति हरिनगर आग्नेय।। झोंटपाली दरिहरा सिमसिम कोइलख विश्वनाथापत्य महिसान कोइलख समेत।। विधुपति-तत्रैव।। होरे उराढ़ वासी।। गांगू-कछरा।। रघुपति सेघ कठरा।। कान्ह-कटैया जादू सरहरावासी कृष्णपति गुणीश्वर: फूलमति।। सुन्दर गांगू-तंत्रैव।। मतीश्वरापत्य-सुन्दरअलई समेत।। सुरपति-गोलहरी, अलय समेत।। गिरीश्वरापत्य-उडिसम।। पण्डोलि दरिहरा-हरिकर सन्तति सिहौली।। शंकरपरनामक गोदे-नवहथ।। कान्हा पत्य-नवहथ। आसो-चिलकौरि।। भाइ सन्तति-ततैल, तेतरिया, सिमरि।। (6) ''उ'' कनसम।। गोढि़ सन्तति-बढि़याम। सुपन सन्तति-गांगू मिट्टी।। विशो-तत्रैव।। हिक सावे-दीघीया।। धीरेश्वर सन्तति-तारडीह, जलकौर-दरिहोश। मिश्र कान्हापत्य-मतउना।। गंगेश्वर सन्तति मिश्र दुर्गादित्यापत्य-चडुआल।। देवधरापत्य।। अग्निहोत्रिक महामहोहरि सन्तति-नेतवाड़।। नारू सुत रूचि-महुआल।। विभाकरापत्य-सिंधिया।। प्रभाकर सुत जुधे-पटसा।। नोने-जगवाल।। नारू सुत बाटू प्रभृति-अन्दोली।। गोढि़ सन्तति-धनकौलि मिश्र हरि सुत चण्डेश्वर-चंडगामा।। नारायण-उने।। मिश्र मतिकर-बघोली।। धामू सन्तति-पोजारी।। शूलपाणि-रतौली नीलकंठ-पोखरिया रूपन-रतौली।। खांतर-बड़गाम।। बासू सन्तति-बाली मुनिप्रo विरश्वरापत्य दिवाकर-राजनपूरा।। रविकर-छत्रनछ राजनपुरा,सीसब समेत।। गुणाकर सिढि़बाला।। प्रसिढि़वाल।। हरिकर-जरहरिया,ततैल समेत।। ब्रह्मेश्वरापत्य रत्नाकरापत्य-पंत्र्चारी।। विश्वरूपसन्तति-पनिहारी।। शूलपाणिभ्राता नीलकंठ-बोथरिया।। रूपन सुत भोग गिरी-रतोली।। यवेश्वर-जरहरिया-ब्रहमेश्वर तत्रैव।। एते दरिहरा ग्राम।। अपथ माण्डर ग्राम-गढ़ माण्डर कामेश्वरापत्य-बथया।। महत्तक जोर सन्तति-बघांत।। सुइ भवादित्पत्य-कनैल, मुठौली समेत।। दिवाकरापत्य- जोंकी,मढि झमना।। हरदत्त सन्तति-खनतिया।। गुणाकर, जयकर-खनतिया।। माधवापत्य-अरडिया।। रति, डालू-भौआल, दोलमानपुर।। बेगुडीहा।। खांतू। ठाकुर, सरवाई, केउट्रै सन्तति-भौआल।। गदाई-दोलमानपुर-केशवापत्य-असमौ।। कानहापत्य-आसमा।। सूपे, विभू-कटमा विभू,भानुकर पिलरवा।। कविराज शुभंकरापत्य-कटमा।। वागीश्वरापत्य-महिषी, गांगे।। रूपधरा पत्य=मङत्र्रौनी।। रविदत्तापत्य विशो-देउरी।। (7) हरिकर-विजहरा।। खांत-जरहरिया।। हरि-मङरौना।। होरे-केउँट गामा।। सुधाकर-वारी।। शुभंकर-सकुरी।। पशुपति सन्तति गुणपति-ओकी।। (18/09) (18/09) शिवपति इन्द्रपति-रजौर। कृष्णपति-पतौनी।। रघुपति-(18/03) जगौरा।। प्रजापति-अमरावती।। छीतर- जगौर।। आड़नि सन्तति कुलपति कटैया।। नरपति-दहुला।। रविपति-कटका।। महादेव-सिर खडि़या (श्रीखंड)।। रतिपति-(18/03)-सिहौलि)। दूबे-दुबौली।। पौखू-बिठुआला।। धनपत्या- सरहद।। विधूपति-पतनुका।। सुरपति, रतन-कनखम।। सोम-बेहद।। भवे, महेश-कटैया।। गुणीश्वर-कटाई।। पीताम्बरा पत्य-कटाई, जमुआल।। देवनाथा पत्य मिश्र नन्दी सन्तति-बेहटा।। जीवेश्वरापत्य-ओंराम।। सिंगाई-ननौरा।। दुगाई-तेतरिहार।। नगाई-कोइलख।। बागीश्वरापत्य-सकुरी।। रूचिकराव शीरू-जरहरिया, मकुरी।। लक्षमीकांतापत्य-त्रिपुरौली।। हरिकान्तापत्य दहिला।। उमाकन्ता पत्य ब्रहम्पुर सुगन्ध सन्तति-कनसी।। महेश्वरापत्य मझौली।। गुणे मिश्रापत्य-थुबे, खरका ।। सोरि मिश्रापत्य-ब्रहमपुर।। गयन मिश्रा पत्य, वीरमिश्रापत्य-वारी सकुरी।। हरिशर्म्मापत्य सुधाकरादि-मृगस्थली थेछ मिश्रापत्य-अन्दौली।। सुरेश्वरापत्य। ग्रहेश्वरापत्य-कटउना।।हरि मिश्रापत्य-कटउना।। ऋषि मिश्रापत्य-बेलउँजा।। यति मिश्रापत्य-कटउना ।। कीर्तू मिश्राद मतीश्वरापत्य-गोआरी।। गिरीश्वरा पख-मिश्ररौली।। हरे मिश्रापत्य-खपरा ।। बाछेमिआपत्य-हरखौली।। हेलन, नरदेव-लेखद्विया।। शिवाई सन्तति-वलियास, धयपुरा।। सर्वानन्द-दलवय, सकुरी।। दलवय स्थित-असगन्धी।। चन्द्रकरापल-कोवड़ा।। कुलधर, रामकरापत्य-दिपेती, बेतावड़ी।। चोचू मोचू-पीहारपुर गोआरी समेत गोपाल सज्जन-ब्रह्मपुर, जगतपुर।। मित्रकरापत्य,रूपनापत्य-महिषी, सकुड़ी ।। सुथवय सन्तति-अपोरवारि, जहरौली।। रतिधरशुमे-कनपोरवरितरौनी।। हरि सन्तति-निकासी, यमुगाम।। एते माण्डर ग्राम:।। (8) ''ऊ'' अथ बलियास ग्राम:।। भिखे, चुन्नी, नितिकारपत्य-चुझनी।। दूबे सकुरी।। सुरानन्द-बैकक वासी।। रति सन्तति-खड़का।। शिवादित्या पत्य मुराजपुर, ओगही, यमुथरि।। शुभंकरापत्य-ततैल, कमरौली ।। नन्दी सन्तति-भौआल, अलय, सतलखा।। सुधाकरापत्य-जरहरिमा।। राम शझपित्य-जादू धरौरा।। केशव-यमसम।। शक्ति श्रीधर-सकुरी महिन्द्रपुर समेत।। मद्दु सन्तति नारायण सिमरी, जालय, खड़का।। महन्थ सन्ततिमाड़र शिरू सन्तति-बिशाढ़ी।। रूद्रादित्यापत्य-विठौली।। रूचि सन्तति उदयकरापत्य-नरसाम।। एते वलियास ग्राम:।। अथ सतलखा ग्राम: गुणाकर-डोक्हरवासी।। विभू सन्तति भाष्करापत्य-सतौलि।। दिवाकरापत्य-सतौलि।। चन्द्रेश्वरापत्य-कञ्जोली।। शंकरापत्य-सतलरवा लोहरा पत्य, नन्दीश्वरापत्य, यवेश्वरापत्य-कछरा।। अथ एकहरा ग्राम:-श्रीकर-तोड़नय।। जाटू सन्तति-सरहद।। शुभेसन्तति-मैनी।। सोने सन्तति-मण्डनपुरा लक्षमीकरापत्य-संग्राम।। रूद सन्तति-आसी।। धाम-नरौंध, जमालपुर।। गढकू-कसरउढ़।। बाटू-सिंधाड़ी।। थिते-खड़का ।। मिते-कन्हौली।। गणपति पतउना।। जाने-ओड़ा।। कोचे-रूचौलि।। शुचिकरापत्य- मुराजपुर।। चित्रेश्वरपत्य-नरौंछ।। एते एकहरा ग्राम।। अथ विल्वपंचक (बेलउँच) ग्राम: धर्मादित्यापत्य-सिसौनी ।। रामदत्त हरदत्त, नोना दित्या सन्तति- रतिपाड़।। शुधे सन्तति-सुदई।। शिरू-द्वारम।। गयादित्यापत्य-ओगही।। महादित्य कर्म्मपुर बछौनी समेत।। जीवादित्य-उजान।। रूद्रादित्य-दीप सुदई।। सर्वादित-तडि़याड़ी।। देवादित्य-ब्रह्मपुर।। स्त्नादित्य-काको।। मिचादित्यापत्य नारू-काको वासू-देड़ारिया प्राणादित्य पस हरि, गयन-कन्होली।। शुपे-कोलहट्टा।। रूकमादित्य-ओझौली।। केउँदू-सकुरी।। महथू-सकुरी।। चौबे सन्तति-सतलखा।। (9) अथ हरिअम ग्राम-लाखू सन्तति-रखवारी।। केशव-दामू-मंगरौना।। (25/07) मांगू-नरसिंह-शिवां।। (18/09)-हारू शिवा।। (27/05) नरहरिसन्तति-वलिराजपुर चाण दिनू-कटमा।। परमू लाखू-आहिल।। रति गुणे-कटमा।। माधव सुत सन्तति-भच्छी।। एते हरिअम मूलग्रामा।। अथ टंकवासटाम् कविराज लक्ष्मीपाणि-नीमा।। सुरेश्वरापत्य,दामोदरापत्य-पटनिया गंगोली।। रवि शर्मा खंग लक्ष्मी शर्म्भा-ब्रहमपुर।। पतरू, शीरू-पटनियाँ पोखरौनी भौर, सकुरी।। जागे सन्तति-रतनपुरा।। महाई सन्तति-परिहार।। देवदत्तापत्य-पीलखवाड़।। रविदत्तापत्य-बहेड़ा।। पाँखूसन्तति-सिरखंडिया (श्रीखंड)।। सुषन, मारू सन्तति-नरधोध।। हराई, शुचिकर, प्रीतकरापत्य-अकुसी।। हरिप्रह्म- पोराम।। दामोदरपत्य-बेहरा।। उँमापति सन्तति-ततैल।। एते तंकवाल ग्रामा:।। अथ घोसोतग्राम: रतिकान्ह-पचही।। रूचिकरापत्य-नगवाड़।। रूद सन्तति-यमुथरि।। रूद सन्तति-गन्धराइनि।। गणपति सन्तति-घनिसमा।। कृष्णपति सन्तति-खगरी।। पृथ्वीघरापत्य-सकुरी।। रूद्र चन्द्र-डीह।। एते घोसोत ग्रामा:।। अथ करम्बह्म ग्राम इन्द्रनाथा पत्य कोई लख।। शोरिनाथापत्य-दीघही।। रामशर्म्मापत्य-ब्रह्मपुर।। रतिकरापत्य-मझियामा बुदि़करैव।। बुद्धिकरापत्य सन्तति कान्हापत्य ककरौड़।। हचलू सन्तति-कनपोखरि।। गणेश्वरापत्य-केडरहम।। लान्ही सन्तति-गोढि़-सैतालवासी।। सदु-रूचि सन्तति हरदत्तापत्य-घनकौलि।। नितिपत्य-बछांत।। नोने सन्तति-वेला।। लान्हि सन्तति मुरदी।। सादू सन्तति-ककरौड़।। मांगू सन्तति-सोन, कोलखू, मघेता समेत।। मधुकरापत्य-दोलमानपुर।। सदुoगिरीश्वर सन्तति नरसिंह नडुआर।। श्रीवत्स सन्तति-बेहट।। सदुoकेशव-सिरखंडि़या (श्रीखंड)।। वराह सन्तति-तरौनी।। रामावत्य-तरौनी।। कान्ह, श्रीधर-तरौनी।। रघुदत्त रूचिदत्त-रूचौलि।। सदुपाध्याय (10) ''इ'' माधवापत्य-मझौरा।। सदु. रामापत्य-झंझारपुर।। गुणीश्वरापत्य-झंझारपुर।। सदुo भवेशवरापत्य-अनलपुर।। हरिवंशापत्य-मुजौनिया।। शिववंशापत्य-रोहाड़।। धूर्त्तराज म.म.उ. गोनू सन्तति-पिण्डोखडि़।। एते करम्बहा ग्राम:।। अथ बूधवाल ग्राम:।। रविकरापत्य-खड़रख सुरसर समेत ।। सुपे सन्तति-ब्रहमपुर।। राम चाण-मझियाम।। ढोढ़े-बेलसाम।। उगरू-सतलखा।। कान्हापत्य-वेलसाम।। दूबे, हरिकर-हरिना।। दामोदर-सकुरी।। राम दिनू-सुन्दरवाल।। गंगादित्य विकम-सेतरी।। सदुoभानुसुत गणेश्वरापत्य-परिणाम।। गुणीश्वरापत्य उजान।। कोने-पीलखा।। गंगेश्वर-मलिछाम।। रूचिकर रतिकर-गंगौरा।। महेश्वर-फरहरा।। गौरीश्वर-मदिनपुर।। विशो सुधाकर-डुमरी।। सूर्यकर सन्तति-सिडरी।। ग्रहेश्वर-महिषी।। भोगीश्वर-चिलकौलि।। बासू-बोधाराम।। उदयकर-आड़ी।। पौथे धरमू-मुठौली।। कान्हापत्य-बुधवाल।। जगन्नाथापत्य-सिंधिया।। एते वुधवाल ग्राम।। अथ सकौना ग्राम-वाटन सन्तति- सिंधिया।। हरिश्वरपत्य-दिवड़ा।। सोमेश्वरापत्य-बघांत।। बाबू सन्तति- डीहा।। रति’ गोपाल दिनपति-तरौनी।। रूद सन्तति-जगन्नाथपुर।। गुणे-महिपति-सरिरम।। शुचिनाथपत्य परसा।। गुणे भासे-ततैल।। एते सकौना ग्राम: अथ निसउँत ग्राम:- पण्डित सुपाई सन्तति-तरौनी तरौनी।। रघुपति-पतउना।। जीउँसर सन्तति-कुआ।। इतितिसॉं अथफनन्दह ग्राम: श्रीकरापत्य-बथैया।। कुसुमाकर, मधुकर,किठो सन्तति, विठो ब्रहनपुर।। हाठू-चाण।। बसौनी-ब्रह्मपुर ।। सुखानन्द गुणे-सिसौनी गांगू-सकुरी।। सदुo गोंढि़-खनाम।। मतीश्वर, पौखू-चोपता।। शंकर-खयरा।। महेश्वर-डीहा सोम गोम माधव केशव-भटगामा।। विरेश्वरापत्य सिंहवाड़, सिन्हुवार।। लक्ष्मी सेवे-सकुरी।। भवाईरूद-वोरवाड़ी, भटुआल, दरिहरा, सिमरवाड़, मुजौना समेत।। एतेफनन्दह राम:।। (11) अथ अलय ग्राम।। बाढ़ अप्रलय, उसरौली, बोड़वाड़ी, सुसैला,गोधोखीच।। शंकरापत्य-गोधनपुर सिंधिया समेत।। श्रीकरापत्य-उजरा।। हेतू सन्तति-सुखेत मिश्र (मिमांशक) हरि देवधरापत्य-सिंघिया।। बासू सन्तति: जरहरिया बाढ़ वासी। रविशर्म्म-जरहरिया।। धारू सन्तति-बेहट।। शिरू-धमडिहा, कादिपूरा गोविन्द सन्तति-बेहद।। म.म.उ. गदाघर-उमरौली।। परभू वुद्धिकर-बैगनी।। रत्नधर सन्तति भवदत्त-भटपूरा।। शिवदत्त-अजन्ता।। मिश्रा (मिमांशक) सुधाधरपत्य उसरौली।। लक्ष्मीधरापत्य हलधर सन्तति-यमुगाम।। शशिधर, रघु, जाटू-अलयी।। यवेश्वर-अलयी।। गंगाधरापत्य-यमुगाम।। मिश्र (मिमांशक) लाखू भूड़ी गणेश्वर-परमगढ़।। सिधू-वाड़ेवन।। दोदण्ड अलयी लोआमवासी।। जसाई-डीहा।। रूद-खड़हर।। रमाई-राजे सीत विश्वेश्वर मतिश्वर-उसरौली।। वेद सन्तति-मलंगिया नान्यपुर अलई, सिमरी, रोहुआसमेत गंगुआल बाथ राजपुर वासी।। कितिधरापत्य-सकुरी जयकरापत्य-कड़रायिनि।। सुधाकरापत्य कड़रायिनि, मुराजपुर।। गोनन-कटमा ढ़ीगंगोली बेकक समेत। कोठों कटमा।। साठू विशादी दोलमानपूर।। रूद-गंगोली।। कुशल गुणिया-भटगामानालय समेत एते बभनियाम ग्राम:।। अथ खौआल ग्राम: श्रीकरापत्य-महनौरा।। रतिकर सुधाकरापत्य-महुआ।। चन्द्रकरापत्य: महुआ।। रूचिकरापत्य-महुआ मतिन्द्रपुर।। स्थितिकरापत्य: महिन्द्रा दिवाकरापत्य-कोवोली।। हरिकरापत्य-महुआ।। आदावन-परसौनी।। (बाछे दोढ़े सन्तति-रोहुआ।। वेणी सन्तति: रोहुआ।। उँमापति) (16/07) सन्तति-नाहस ।। विश्वनाथापत्य आहिल।। बुद्धिनाथ रूचिनाथापत्य-खड़ीक।। रघुनाथापत्य-द्वारम।। विष्णु सन्तति: द्वारम।। नोने जगन्नाथापत्य-वुसवन।। राम मुरारी शुक सन्तति-पण्डोली।। (12) ''ई'' बाटू सन्तति-ब्रह्ममपुर तिरहर मौडु।। साधुकरापत्य-दडि़मा।। हरानन्द,सन्तति-अहियारी।। भवादित्यापत्य-नाहस देशुआल।। पॉंखू-बेहटा।। भवे सन्तति धर्मकरापत्य-देशुआल।। डालू सन्तति-दडि़मा।। दामोदरा पत्य-तरहट बह्ममपुर।। राजनापत्य-यगुआल।। प्रितिकरापत्य-पचाडीह (पचाढ़ी।। पतौना खौआल दिवाकरापत्य-घुघुआ।। भवादित्यापत्य-ककरौड़ खंगरैढा समेत।। बैद्यनाथ प्रजाकारक रघुनाथा कामदेव-मौनी,परसौनी।। गोपालापत्य कृष्णापत्य-कुमरि, खेलई।। शशिधरापत्य नरसिंहापत्य-बोड़वाड़ी कोकडीह, छतौनिया।। दामोदरापत्य-कोकडीह।। नयादित्यापत्य-बेजौली।। द्वारि सन्तति जयादित्यापत्य = सुखेत,सर्वसीमा।। शुचिकरापत्य-दिगउन्ध।। आड़ू सन्तति रघुनाथापत्य-मुराजपुर ब्रह्मपुर।। जीवेश्वरापत्य-दिगुम्ध।। भवेसन्तति-मिट्टी, सतैढ़,बेहट।। दूबे-सन्तति-ब्रह्मपुर।। हेलु सन्तति-सतैढ़ रविकर सन्तति तत्रैव।। प्रसाद मधुकर सन्तति बेहटा।। दिवाकरापत्य पिथनपुरा।। गंगेश्वरापत्य-कुरमा, लोहपुर।। लम्बोदर सन्तति-कुरमा।। नाइ सन्तति-पिथनपूरा।। राजपण्डित सह कुरूमा।। रामकर सन्तति मिट्ठी खंगरैठा, गनाम।। आङत्रनि सन्तति-सौराठ।। मति गहाई, केउँदू सन्तति-सिम्वरवाड़।। एते खौआल ग्राम:।। अथ संकराढी ग्राम:-महामहोकारू सन्तति भगद्धर गोविन्द सकुरी।। प्रितिकर-कादिगामा।। शुभे सन्तति-अलय महामहो हरिहरापत्य-सुन्दरौ गोपालपुर।। जयादित्यापत्य-मलुनी सरावय।। परमेश्वर-नेयाम।। सदु सुपे-हरड़ी।। रामधरापत्य-अलय।। हरिशर्म्म सन्तति-सिधलमुरहदी।। रेकोरा संकख्न्दी-होरे-चांड़ो-परहट।। सोम-गोम-शक्रिरायपुर।। हरिश्वर-सकराढ़ी वासी।। जीवेश्वरापत्य-बेला आधगाउ।। गयन द्वारिकादि।। (13) नोने विभू सिंधिया-गढ़ बेलउँच-सुपन अकुनौली।। कौशिक-कुसौली।। लक्षमीपाणि-सुशारी।। पाँवू-देयरही।। एते बेलउँचग्राम:।। अथ नरउनग्राम: बेलमोहन नरउन यटाधरापत्य-मदनपुर।। रातूसन्तति-करियन।। गर्व्वेश्वरापत्य: सिंधिया।। डालू सन्तति रूचिकर: मलिछाम।। चन्द्रकर टुने सन्तति-सुल्हनी।। विशोसन्तति-त्रिपुरौली।। हेलूसन्तति भखरौली।। दिवाकरा पत्य: सुरसर, कवयी।। दिनकरापत्य-पुडे।। खांतू कोने-वत्सवाल।। शक्रिरायपुर नाउन-दामोदरापत्य-जरहरिया। मुरारी=तेघरा।। योगीश्वरापत्य-ओझोलि कसियाम।। जगद्धरापत्य-वोडि़याल।। चक्रेश्वरापत्य-शक्रिरायपुर।। नोने सन्तति-मलंगिया, करहिया, पंचरूखी।। होरे सन्तति नयूगामा।। कामेश्वरापत्य चकौती भवेश्वरापत्य नयगामा भरवरौलीसमेत नयगामा भरवरौलीसमेत ।। एते नरउन शाम।। ।।अथ परिचोन ग्राम :- मधुकरापत्य = तरौनी झौआ, पद्मपुर ।। शिवपति, गुणेश्वरपरा पौनी, सकिथाल।। देहरिसन्रति = कनौती तरौनी भवेश्वरा (14 से) मैलाम।। जौन सन्तति-आहिल।। यशु आदितू डीहाआहिल।। वावू पाठकादि-भैलाम, कटउना विसपी समेत।। कामेश्वरापत्य पौनी, सकियाल।। देहरिसन्तति-कनौती, तरौनी, लान्हूसन्तति-उल्लू।। जगन्नाथापत्य हरदत्त-खड़का, वगड़ा बयना समेत।। आङनिसुत पदमादित्यापत्य-मंगनी, सिरखडि़या, महालठी, लोही, चकरहट, कर्नमान तनकी समेत।। हरिनाथापत्य मखनाहा, कत्र्जोली।। चण्डेश्वरापत्य हरिवंश सुत रत्नाकरायपत्य-बथैया ।। चक्रेश्वर-कुरमा।। बाटू सन्तति-चक्रहृदा, सिड़ली बासी।। विरपुर पनिचोभ-रातू सन्तति-सुन्दरवाल।। हारू सन्तति करियन।। वास्तु सन्तति-मिट्टी।। महेश्वरापत्य-देशुआल।। दिनकर मधुकरापत्य-जरहरिया ।। रामेश्वरसन्तति चन्द्रकरापत्य-अलदाश।। विर सन्तति केशवापत्य-भरौर, शहजादपुर, वलिया समेत।। वासुदेव सन्तति ददरी।। सोनेसन्तति-ब्रहमौलि।। धराई सन्तति-अमरावती-रातू सन्तति-करहिया, उसरौली आदित्यडीह।। हरिश्वरापत्य-डीहा।। सोमेश्वर-बधांतडीह।। रधु: रामपुर डीटा रवि गोपाल-तरौनी।। हरिशर्म्मापत्य-महुआ।। बाटनापत्य-तरौनी, बैगनी।। रूचिशर्म्मा-जगन्नाथ, भटिरभ।। शुचिनाथापत्य-ततैल ।। शशिधर-ब्रह्मपुर नेहरा,भवनाथापत्य पुरसौली।। देवादित्यापत्य-पुरूषौली।। ऐते पनिचोभ ग्राम:।। अथ कुजौली ग्राम:-गोपाल सन्तति-हरिश यशोधर-बेहटा।। सुपन, नाँथू , पौथू लक्ष्मीकर-भरवरौली।। जीवे, जोर-मलंगिया।। मेधाकर-वनकुजौली।। रातू सिम्मुनाम कन्धराइन।। सुरपति।। वड़साम ।। गणपति-दिगउन्ध।। लक्ष्मीपति-महिन्द्रवाड़।। चण्डेश्वरहरि-दिगउन्द साने-लोड़ाम, महोखरि।। विष्णुकर-परसौनी।। रूपन-कन्धरानि।। सोम-लोआम।। राजूसन्तति सुधाकर-सरावय।। लक्ष्मीकर सुत प्रज्ञाकर अमृतकर-वेजौली। देवादित्य-दिशौडि़।। चन्द्रकरापत्य-खयरा।। प्रितिकर-बेलहवाड़।। वेदग्डीह कुजौली।। विरेश्वर-रूदनिग्राम।। भव बैकक, मल्दडीहा।। परान्त सन्तति-नेत्राम।। ऐते कुजौली।। (14) ''14'' अथ गोत्र पत्र्जी लिखयते।।:-शाण्डिल्ये दिर्धोष: सरिसब, महुआ,पर्वपल्ली (पबौली) खण्डबला, गंगोली, यमुगाम, करियन, मोहरि,संझुआल, भडार:।। पण्डोली जजिवाल, दहिमत, तिलई, माहव.सिम्मुनाम सिहांश्रम, ससारव: (सोदरपुर) स्तलित कड़रिया, अल्लारि,होईया, समेत तल्हनपुर, परिसरा, परसंडा, वीरनाम, उत्तमपु कोदरिया,धतिमन, बरेबा मधवाल, गंगोरश्रय, भटौरा, बुधौरा ब्रह्मपुरा कोइयार,केरहिवार, गंगुआलश्च, धोसियाम, छतौनी, मिगुआल ननौती,तपनपुरश्रवा।। इति शाणि अथ वत्स गोत्र:-पल्ली (पाली) हरिअम्ब,तिसुरी, राउढ़ टंकबाल धुसौत, जजुआल, पहद्दी जल्लकी (जालय) मन्दवाल, कोइयार, केरहिवार, ननौर, उढ़ार प्रथि करमहाबुधवाल, भड़ार लाही, सोइनि सकौना, फनन्दह, मोहरी, बढ़वाल तिसउँत वरूआली पण्डोलि, बहेरादी, बरैवा, भण्डारिसम, बभनियाम, उचित, तपनपुरा,बिढुका नरवाल, चित्रपल्ली, जरहरिया, रतवाल, ब्रह्मपुरा सरौनी।। एते वत्स गोत्र अथ काशयप गाम दानशौर्य्य प्रतापैश्र्च प्रसिद्धा यत्र पार्थिवा: ओइनिसा सर्वत: श्रेष्ठा स्वस्व धर्म प्रवर्तिका:।। ओइनि, खौआला संकराढ़ी, जगति, दरिहरा, माण्डर बलियास, पचाउट, कटाई, सतलखा पण्डुआ, मानिछा मेरन्दी मडुआल: सकल पकलिया बुधवाल, पिमूया मौरि जनक भूतहरी महा काशयपे छादनश्च, थरिया, दोस्ती, मरेहा,कुसुमालंच, नरवाल, नगुरदहश्रप ।। एते काश्यप गोत्रा:।। (15) अथ पराशरं गोत्र:-नरउन सुरगन सकुरी सुइरी पिहवाल, नदाम महेशरि सकरहोनश्र्च सोइनि तिलै करेवाचापि।। एतेपराशरगोत्र अथ कात्यायन गोत्र: कुजौली, ननौत, जल्लकी, वतिगामश्र्च।। एते कात्यायन गोत्रा:।। अथ सावर्ण गोत्र: सोन्दपुर, पनिचोभ करेवा नन्दोर मेरन्दी।। अथ अलाम्वुकाक्ष गोत्र: वक्ष्याम्प्रलाम्बुकाक्ष कटाई, ब्रह्मपुरा चापि। ।। अथ कौशिक गोत्रे-निखूति अथ कृष्णात्रयगोत्र: लोहना बुसवन सान्द्र पोदोनी चo।। अथ गौतम गोत्र:-ब्रह्मपुरा उत्तिमपुर कोइयारं चापि गौतमो।। अथ भारद्वाज गोत्र: एकहरा बेलउँच (विल्वपंचक) देयामश्रापि कलिगाम भूतहरी गोढ़ार गोधोलिचा।। एते भारद्वाज गोत्रा अथ मोदगप्यै गोत्र: मौदगल्यै एतवालो मालिछस्तथा दीर्घोषोपि काप्य जल्पकी तत्र वर्त्तते।। एते मोद्गगल्यौ गोत्रा।। अथ वशिष्ठ गोत्र: कौशिल्ये पुनश्च कोथुआ विष्णुवृद्धि वाल।। एते वशिष्ठ गोत्रा:।। अथ कौण्डिल्य गोत्र: एकहटयूविशल्यु पाउन स्पी गोत्राश्र्च।। एते कौण्डिल्यगोत्र।। अथ परसातंडी गोत्र-केटाई।। 16 ''ऐ'' 17 विशद कुसुम तुष्टा पुण्डरी कोप विष्टा धवल वसन वेषा मालतीवद्ध केशा।। शशिधर कर वर्णा शुभ्रजातुङत्रवस्था जयतिजीतसमस्ता भारती वेणु हस्ता।। सरस्वती महामायै विद्याकमल लोचिनी। विश्वरूप विशालाक्षि विद्यान्देहि परमेश्वरी।। एकदन्त महावुद्धिः सर्वाज्ञोगणनायक: सर्वसिद्धि करोदेवों गौरीपुत्र विनायक: गंगोली सै बीजी गंगाधर: ए सुतो वीर (05/04) नारायणों। तत्र नारायणसुत: (181/02) शूलपाणि। ए सुतो हाले शॉंईकौ।। थरिया सैकान्ह दौ।। खण्डबला ग्रामोपार्यक:।। साइँक: शकर्कणा परनामा ए सुता भद्रेश्वर दामोदर (05/06) बैकुण्ठ नीलकंठ श्रीकंठ ध्यानकंठा ।। तत्र (09/01/) दामोदर एकमावासी बैकुण्ठ सन्तति पाठक वासी।। नीलकंठ संतति संसारगुरदी वासी।। श्रीकंठ संतति गुरदी, हरड़ी सरपरब, मौर वासिन्य:।। श्रीकंठसुता श्यामकंठ हरिकंठ नित्यानन्द गंगेश्वर देवानन्दहरदत्त हरिकेशा: तत्रायो पत्र्चज्येष्ठ सकराढ़ी सै डालू सुत दौपतौनाखौआल सै गणपति द्दौणा अन्यो पतऔना खौआल सै गणपति दौ।। तत्र गंगेश्वर सुता हल्लेश्वर चक्रेश्वर पक्षीश्वरा: सै सुत दौ सै द्दौणा हल्लेश्वरो गुरदीवासी।। चक्रेश्वरौ हड़री वासी।। ए सुतो पद्मनाम:।। डीहभण्डारिसम सै शौरि दौ।। तत्र पद्मनाम सुतो पुरूषोत्तम: गढ़बेउँच सै अभिनन्द दौ।। 18 पुरूषोत्तम सुतो ज्ञानपति: माउँबेहट सै हरिकर सुत बाटू दो।। ज्ञानपति सुतो उँमापति सुरपति एकमा बलियास सै आङनिसुत बाढ़ दौ।। एकमा वलियाससैबीजी धरणीधर। ए सुता पद्मनाम श्री निधि श्री नाथाः।। (15/04) पदमनाम सुतो शुक्ल हरिवंश (08/07) हरि शर्म्मणौ बरेबा सै पुरूषोत्तम दौ शुकलहरिवंश सुतो आङनि जगन्नाथौ बाढ़ अपलय सै वर्द्धमान दौ।। सुतो बाढ़ूक: महुआ सै जगन्नाथ दौ।। बाढू सुता बरूआली सै देहरि दौ वरूआली मराढ़ सै बीजी दिवाकर: ए सुतो बाछ श्रीहर्ष:।। श्री हर्ष सन्तति मराढ़वासी बाछ सन्तति बरूआली वासी।। बाछ सुतो।। ‘'आवस्थिक’’ चन्द्रकर रत्नाकर (121/05) मधुकर साधुकर विरेश्वर धीरेश्वर गिरीश्वरा: धनौज सै जनार्दन दौ।। साधुकर सुतो धाम: पनिहारी दरिहरा सै गंगेश्वर दौ गंगेश्वर दौ।। अपरौ देहरि: पनिचोभ सै विध्नेश्वर दौ।। सुता दरिहरा सै गंगेश्वर दौ।। ठ. सुरपति सुता दूबे ला (27) (34/08) महिपतिय: मंगरौनी माण्डर सै पीताम्बर सुत दामू दौ माण्डर सै वीजी त्रिनयनभट्ट: ए सुतो आदिभट्ट: ए सुतो उदयभट्ट: ए सुतो विजयभट्ट ए सुतो सुलोचनभट (सुनयनभट्ट) ए सुतो भट्ट ए सुतो धर्मजटीमिश्र ए सुतो धाराजटी मिश्र ए सुतोब्रह्मजरी मिश्र ए सुतो त्रिपुरजटी मिश्र ए सुत विघुजटी मिश्र ए सुतो अजयसिंह: ए सुतो विजयसिंह: ए सुतो ए सुतो आदिवराह: ए सुतो महोवराह: ए सुतो दुर्योधन सिंह: ए सुतो सोढ़र जयसिंहर्काचार्यास्त्र महास्त्र विद्या पारङगत महामहोपाध्याय: नरसिंह:।। 19 तर्काचायस्त्रि महास्त्र विद्या पारङगत महामहोपाध्याय (10/06) नरसिंह सुता महामहो निधि (07/01)।। सुता महामहो (07/01) निधि शिलपाणि (16/01)।। कुलधरा:।। महामहो निधि सुतो श्री कुमार पाठक वासी कुलधरं कोड़रावासी शिलपाणि मङगरौनीवासी ए सुतो महोविभाकर: जजिवाल मातृक:।। ए सुता नारायण चन्द्रकर विश्वेश्वरा: करिअन सै धर्माधिकरणीक महा महोपाध्याय भरथ दौ।। महामहोपाध्याय नारायण सुता महामहोपाध्याय देवशर्म्म हेलन जगतपुर नर देवा: म.म. उ. आदय: परली पाली सै जयशर्म्म दो अन्यो केउँटी राउढ़ सै धराई दौ।। महामहोउपाō देवशर्म्म सुता महामहो जगन्नाथ महांमहोउ. देवनाथ मिश्र (16/08) नन्दी मिश्र (18/09) गुणे मिश्र स्थितकरा:आद्यो पोखरौनी टंकवाल सै नरसिंह दौ अपरौ छादन सरिसब सै देवादित्य दौ अन्यौ भण्डारिसम सै रूचिकर दौ।। महामहोउ जगन्नाथ सुता सदुपाध्याय (19/05) अमतू सदुपाध्याय (09/06) विशो महामहोपाध्याय बटेशा (18/02) गढ़निखूति सै महामहत्तक विद्याधर दौ मेरन्दी सै श्रीधर द्दौणा।। अपरौ पीताम्बर: चक्रहद पनिचोभ सै चन्द्रकर दौ।। पीताम्बर सुतो दामू प्रo दामोदर: बेलउँच सै तीर्थङकर दौ भरेहास सै विश्वनाथ द्दौणा (44/02) दामू सुता बाढ़ अपलय सै महामहोपाध्याय रामेश्वर दौ: बाढ़ अप्रलयसै वीजी पंडित गंगा ए सुतो भरत: ए सुता सीते पदूमवर्द्धमान हाउँका:।। पदूम सुतो कमलपाणि। ए सुता रतनेश्वर वत्सेश्वर यवेश्वर देवेश्वरा: खौआल सै नयपाणि दौ एकहरी सै सोने द्दौणा वत्सेश्वर सुतो (57/08) वीरेश्वर महामहोपाध्याय रामेश्वरौ आद्य: भाण्डरसै श्यामकंठ दौ अन्यो ततैल पण्डुआ सै महामहो दिवाकर दौ सोनकरियाम करमहा सै हरिकेश द्दौणा।। (20) महामहोपाध्याय (60/02) रामेश्वर सुता महो (18/01) ग्रहेश्वर महो लक्ष्मीघर (53/07) महो गंगाधरा: (163/03) मताउन दरिहरा सै रति दो।।: मताओन दरिहरा सै वीजीश्रीकर: ए सुतो गंगेश्वर विश्वेश्वरों।। गंगेश्वर सुता विन्ध्येश्वर यटेश्वर यवेश्वर परनामक सर्वेश्वर पशुपति धर्मेश्वर गिरीश्वर गौरीश्वरा: टकवालमातृक: गिरीश्वर सुतो देवादित्य दुर्गा दित्यों अलय सै रति दौ।। देवादित्य सुतो महो रति बिजूकौ: सरिसब सै भवदेव दौ।। महोरति सुता ठकुराइनि लरिवमा देयीका:।। कोइयार सै भवशर्म्म दौ।। ठक्कुर दुबे प्रo श्रीपतिसुता ठ. (15/09) हरपति ठ. (84/04) नरपति ठ. चन्द्रपति प्रo चाण: प्र. चाण: सोन करियाम करमहा सै श्रीधर दौ सोन करियाम करमाहासै बीजी महामहोपाध्याय वंशधर: ए सुता महामहोहरिब्रहम महामहोहरिकेश म. म. धूर्त्तराज गोनूका: सकुरी सै महामहो देयी दौ।। महामहो हरिकेश सुतो (12/04) गोविन्द नोने को खण्डबला सै नित्यानन्द दौ।। अपरौ (11/02) लक्ष्मीपति लक्ष्मीकंठो कुजौली सै बाछे दौ।। अपरै लान्हि रूचिकर हरिवंशा: लखनौर सकराढ़ी सै पनिहथ दोंदे दौ।। रूचिकर सुतो हरदत्त नितिकरौ खण्डबलासै विश्वनाथ दौ।। अपरो गिरीश्वर: मनझीसै ज्ञातनाम सीत दौ।। गिरीश्वर सुता गंगेश्वर भवेश्वर देवेश्वरा: (33/06) लखनौर सकराढ़ी सै सर्वेश्वर दौ।। (603/06) गंगेश्वर सुता (21/08) नरसिंह श्रीवत्स केशवा: (26/09) (31/01) बेलासकo जीवेश्वर दौ अपरै (20/08) वाराह श्रीधर माधव (29/03) (35/03) रामा: पतौना खौआल सै आदू दौ।। पतऔना खौआल सै वीजी महामहोपाध्याय प्रजापति सुतो महो वाचस्पति महो उँमापति।। (127/05) वाचस्पति सुतो गणपति।। (21) धनौज सै त्रिपुरारि दौ।। गणपति सुता शशिधर (21/04) लक्ष्मीधर सुरानन्द धर्मधिकरणिक महामहोपाध्याय (03/05) हरिशर्म्मणा:।। शशिधरसुतो गदाधर: मड़ार सै रविदौ ।। अपरौ महिघर पृथ्वीघरौ गंगोली सै देवरूपदौ।। अपरै जयकर शिरू गोनू गंगाधरा: सै प्रियंकर दौ।। गदाधर सुतो महामहो नयपाणि महो हरिपाणि महुआएं भीखम दौ।। महो हरिपाणि सुतो लक्ष्मीपाणि रतनपाणि उदनपुर जजिवाल सै शान्तिकर दौ।। अपरौ महिपाणि जयपाणि गंगोली सै मातृक:।। महामहो रत्नपाणि सुता महो हरादित्य महामहो भवादित्य (13/0/0) भवादित्य महामहो न्यादित्य महामहो धरादित्या गंगोली सै वंशधर दौ।। अपेरे जयादित्य महामहो (191/09) दैवादित्य महो गंगादित्या मिगुआल सै चन्द्रकर दौ।। महामहो जयादित्य सुता लक्ष्मीकर शुचिकर आचार्य उदयकरा: बनाइनि पाली सै भोगीश्वर दौ (20/01) शुचिकर सुता छीतू (71/06) बीकू आङूका: भुतहरी निखूति सै सुत दौ दिघोय सै पति द्दौणा।। आङ्त्र सुता महथौर अप्रलया गयशर्म्म दौ: महथोरे अप्रलया बीजी बाढ़न: ए सुतो विश्वनाथ: ए सुतौ गयशर्म्म गुणाकरौ भिगुआल सै विरेश्वर दौ।। गयशर्म्मा सुतोकारू वेदूकौ सकराढ़ी मात्रकौ।। श्रीधरसुतो (30/10) रतिध (53/106) महिधेरो नाउन सै मुरारि दौ: शक्रिरायपुर नरउनसै बीजी मनोधर: ए सुतो बलभद्र: ए सुतो पनाईत भद्रेश्वर: केउँटी सउढ़सै हरिहर दौ।। ए सुतो (10/01) रामेश्वर नन्दीश्वरौ अलयसै देवपति दौ।। नन्दीश्वर सुतो गौरीश्वर गोविन्दो करूआनी सकराढ़ीया सै रतिकर दौ: करूआनी सकराढ़ी सै बीजी हरदत्त: ए सुतो श्रीकरदशर: (13/04) मनोरथा: (22) दशरथ सुता बलिदेव (8/05) राम नरसिंहा।। पचहीवासी नरसिहं सुतो शूलपाणि: सिंहाश्रम सैजाई दौ।। ए सुतो पद्मपाणि महामहोपाध्याय कारूकौ आद्य: सुरगण सै गोवर्द्धन दौ।। अन्यो कोइयार सैदल्हन दौ।। महामहोपाध्याय कारू सुतोमहो गोविन्दमहो प्रितिकरमहो महो जगद्धरमहो (14/07) हरिहरा: करही सै हरिवंश दौ।। महोप्रितिकर सुतो लक्ष्मीकर मधुकरौ सरिसब सैमहो हरादित्य दौ।। सरिसबसै बीजी रत्नपाणि ए सुतो चक्रपाणि दीधीसै भीम दौ।। ए सुता श्रीवत्स हल्लेश्वर वसुन्धर रामदेवकाम देवा: चक्रहद पनिचोभ सै छितिशर्म्मदौ।। श्री वत्स सुता महो (11/02) देवादित्य महो (14/07) जयादित्य महो हरादित्या: मन्दवाल जल्लकी सै उद्योतकर दौ।। अपरौ शिवादित्य: जलकौर पालीसै श्रीवत्स दौ महो हरादित्य सुता नान्यपुर सौआल सै बाछ दौ (03/0) म. म. धर्माधिकर्राणक हरिशर्म्म सुता राछे बाछे नोने गडूर (02/ 40/0) जयशर्म्मणा: नान्यपुर कासिन्य: तत्राद्यो गढ़ हृकहरी सै धनरजय दौ।। अपरौ मङार सै पीथो मागिनेयः बाछे (14/01) बाछे सुता जयदेव कापनि मधवा गंगोली सै भीम सुत शाकल्य दौ धोसियाम सै धाम दौणा अपरौ धाम: अहपूर करमहा सै नारायण सुत हिंगू दौ।। गौरीश्वर सुतो दामोदर मुरारि: टकबाल सैरूद दौ: टंकबाल सै बीजी हरियाणि: ए सुतो शंखपाणि: कीर्तिपाणि: पिहवाल सै झालोदो ।। गंखपाणि: नीमावासी।। कीर्तिपाणि सुतो गोविन्द शूलपाणि: गोविन्द पोखरौनीवासी।। ए सुतो नरसिंह: परिसरा सै उँमापति दौ।। ए सुतो वत्सेश्वर: बेला सकराढ़ी सैराउल मासो दौ।। अपरौशुक्ल (17/06) भिखारीक: गंगोली सै रतिदेव दौ ।। अपरै हरिहर मुरारी अनन्त दमोदर श्रीनाथा।। (23) तेरहोत सकराढ़ी सै रामेश्वर दौ (03/09) वत्सेश्वर सुतो रूद: नान्यपुरखौआल सै होरिल दौ (03/05) गड़ूर सुतो धर्माधिकरणीक म.म. होरिल: विठुआल सै रैधर सुत मनोधर दौ।। ए सुतो धीरेश्वर: सुइरी सै धर्माध्यक्षक देवे दौ।। अपरौ विन्ध्येश्वर: ।। रूद सुता खझौली बेलउच सै कीर्तिशर्म्म दौ।। अथ ठोम टेकारी ग्राम तत्र चतुर्वेदाध्यायी कामदेवो बीजी।। ए सुतापाज्ञिक परशुराम दिक्षीत सोमत्रिपाठी कृष्ण।। कलिगामौ पार्यक परशुराम सुतोश्रीधर बलभद्रो त्रिपाटीसै कुमर दौ बलभद्र सुता शारङ्त्र बनमाली उद्योतकरा: महुआ सै अग्निहोत्रिक धनञ्ज्य दौ।। शारङ्त्र सुतो राम वामनौ।। वामन कांचगाम वासी।। महामहोपाध्याय राम विल्वपंचक (बेलउँच) वासी। ए सुतो संतोष परितोषौ।। (151/01) सन्तोष सन्तति दक्षिण पाटकवासी चाक ग्राम सन्ति।। परितोष सुतो हरिहर नारायणो दुखनौरीसकराढ़ी सै बनमाली सुत हरानन्द दौ।। अन्त्यौ दरिहरा सै मातृक:।। नारायण सुतो देवे (3/0) भवे कौ एकहरा वासिन्यो।। हरिहर सुतो कुश लवौ सकoनित्यानन्द दौ लभस्त बड़यि नाम्ना प्रसिद्ध गढ़ वासी।। कुश सुतो शिवदाश कीर्तिशर्म्मणौ सकराढ़ी सै लक्ष्मीपाणि दौ।। कीर्तिशर्म्मसुता बलाइनि पाली सै भोगीश्वर दौ मुरारी सुता (62/02) सुता बागे गोगे मांगुका: तेरहोत सकराढ़ी सै जाई दौ।। तेरहोत सकराढ़ीसै बीजी गंगादित्य एसुतो भवादित्य एसुतो जाई माने कौ गंगोली सै पणिडत केशव दौ।। (24) ''4'' जाई सुतो हारू गोनूकौ कुजौली सै राजू दौ।। कुजौली सै बीजी दान्तिय पुत्र पौत्रादय इन्द्र चन्द्र रूद्र तारापति दिनकर पहकरा।। दिनकर सुता कर्ण वासुदेव गंगाधर नरदेव मूलदेव।। कर्ण सुता हरिहर हरिब्रह्म शान्तिब्रह्म शूलपाणि नरसिंह शिवब्रह्माणा:।। शिवब्रह्म सुता (17/08) शुभंकर जयकर लक्ष्मीकर नोने मेधाकर गुणाकरा: मोखरि सै मधुमन दौ सकुरी सै महामहो उ. देयी दौ।। मेधाकर सुतो जानूक: वनगांववासी बलाइनि वासी पासी सै देल्हन दौ।। ए सुतो भीम नन्दीश्वरौ पकलिया सै कान्ह दौ।। नन्दीश्वर सुतो (26/09) रूप पचटन पण्डुआ सै मुरारी दौ अपरौ शिव: कपसिया मातृक: शिव सुतो राजूक: कुरिसमा सकराढ़ी सै श्यामकंठ दौ।। राजू सुता सुधाकर अमृतकर (123/07) सोमकर विधुकर चन्द्रकर शशिकरा: तत्राद्योरेकौरा गंगोली सै पण्डित केशव दौ।। सोइनि सै शंकरदाश द्दौणा।। ठ. (73/05) चन्द्रपति सुता महामहो महादेवा परनामक येध महामहो भगीरथा: परनामक मेध महामहो दामोदर (32/07) म.म. महेशा (30/05) रेकौरा सकराढ़ी सै वीर सुत रूद दौ: रेकौरा सकराढ़ी सै बीजी कपिलानन्द ए सुतो जयपाणि ए सुतो ब्रह्मेश्वर: बरैवा सै त्रिलोचन दौ।। ए सुतो गोवर्द्धन नान्यपुर अलय सै हरिपाणि दी ।। ए सुतोबन्धु वर्द्धन: टूनी नाम्नारख्यात: नरधोध टकबाल सै बनमाली दौ।। ए सुता बाटू गोविन्द माधना चन्दौत पाली सै गंगाधर दौ।। अथ पल्ली ग्राम बीजी कपिलदेव: ए सुतो सोमदेव ए सुतो वासुदेव: ए सुतोआदिदेव: ए सुतोराउल भृगुक: एतस्यपत्नी।। त्रयम एकस्य सुतो अभिमन्यु (06/07) (21/04) पुरूषोत्तमौ (25) अपरा सुतो ब्रहमेश्वर महेश्वरौ।। अपरा सुता शंकरदेव बलदेव वरदेव वासुदेवा: मछैटा ग्रामोपार्यका:।। महेश्वरसुता किर्तू गुणाकर दिवाकर गर्वेश्वरा।। किर्त सुता नाइ साइ शिव छीतर नोनेका: सकराढ़ी सै नरसिंह दौ।। नादू सुतो चन्द्रकर:चन्द्रोतगामो पार्यक:।। ए सुता महो (19/86) प्रितिकर महामहो शुचिकर आचार्य लक्ष्मीकर महो गुणाकरा: तत्रादयास्मय डीह दरिहरा सै अभिमन्यु दौ।। अन्त्यौ खौआल सै हरिपाणि दौ।। महामहे। गुंचिकर सुतो महोगंगाधर गणपति: आद्यो गंगोर सै रजदेव दौ अन्यो नहरासै गांगू दौ।। महो गंगाधर सुतो महो (10/04) हलधर धर्माधिकरणिक म.म. (23/0/10) नरसिंह।। महामहो (20/01) बाछे का: तत्राद्यो मताओन दरिहरा सै शूलपाणि दौ अन्यो गोरा जजिवाल सै शिवदत्त दौ।। गोविन्द सुता (135/09) होरे चांड़ो सोम हरिश्वर (30/01) हरिश्वर गोमा: गढ़ खण्डबला सै कामेश्वर दौ (01/05) बैकुण्ठ सुतो गंगेश्वर (06/09) भोगीश्वरौ गढ़ वासिन्यो।। गंगेश्वर सुता सिद्धेश्वर सोमेश्वर रतनेश्वर नोने देवके तत्रादयाश्चत्वारों नरवाल मात्रक: अन्यो हरिअम मातृक: ।। सिद्धेश्वर सुता गढ़वय भगव शिवशर्म्म विष्णुसर्म्मणा: नीमाटक. रत्नपाणिदौ।।भगव सुतो कामेश्वर गढ़अलय सै देवशर्म्म दौ।। (28/04) कामेश्वर सुता फनन्दहसै गंगेश्वर दौ: अवहिखण्ड भण्डारिसम सै बीजी कुसुमादित्य: ए सुतो श्रीधर कलपाणि:।। श्रीधर सुता।। (26) ''5'' एकादाश: तत्रेक: मैनी वासी।। अपरौ वशिष्ठ: सुरगन सै सर्वाज ओङ्त्र दौ।। अपरौ ओहरी करहीवासी अपरौ रैधर: ए युतो गंगाधर: फनन्दह वासी।। ए सुतो लरवाई शशिधरौ।। महो लखाई सुता रत्नेश्वर (18/06) भवेश्वर: ज्ञानेश्वरा: बुजौली सै मेधाकर दौ।। अपरौ हल्लेश्वर बिरेश्वरौ मेंरन्दी सै हृषिकेश दौ हल्लेश्वर सुता गंगेश्वर घनेश्वर रामेश्वरा: तेरहोत सकराही सै कुलेश्वर सुत भवनेश्वर दो सकुरी सै महो नयपाणि द्दौणा।। (20/05) गंगेश्वर सुता सुपरानी बंगोनी सै सुपर दौ (01/04) वी सुता देवधर मासो मुरारि गांगु शिवदेवा:।। देवधरसुता आदिदेव (34/07) विश्वरूप पुरूषोत्तम: आदिदेव सुतो (07/02) विकर्ण वसुन्धरौ।। तत्र बसुन्धर सुतो देवपाणि:दरिहरा सै मांगु दौ।। ए सुता शारङ्त्रपाणि श्रीपाणि शूलपाणि वंशीधर धराधर हलधरा: तत्राद्यास्त्रय बलहि।। टंकवाल सै वृहस्पति दौ।। मित्रवंश भागिनेयो।। धराधर सुतो देवादित्य: देवहार सरौनीसै देवनाम दौ।। लोहरा ग्रामोपार्यक ए सुतो शुज महामहोपाध्याय सुपरौ रवौआल सै हरिपाणि दौ।। महामहोपाध्याय सुपर सुतो तत्र (09/02) सोम गोमों बभनियाम सै भीखम दौ।। अपरै साबै वीर (20/02) धीर परम चांड़ौका बलहिट सै रतिकर दौ ।। अपरौ गौरीश्वर: बलहिट सै (आनयादि सात्र) चांड़ो सुता वीर नन्दी गुणेका: (40/06) (45/03) उचति सै अन्दू सुत हटवय दौ (27) उचित भण्डारिसमसै बीजी महिपाणि ए सुतो धर्मपाणि लखाईकौ:।। लरवाईक: सोहरावासी धर्मपाणि उचति वासी।। ए सुतो पद्मपाणि नरउन सै प्रियंकरदौ ए सुतो पुरूषोत्तम सरिसबसै कामदेव दौ।। ए सुतो अन्इ नोने कौ मालिछ सै लक्ष्मीकंठ सुत देवकंठ दौ।। अन्दू सुतो (23/04) थानू हटवयकौ।। आद्यो: गोरा जीजवाल सै श्रीपति दौ।। अन्त्यो गुलदी खण्डबला सै रत्नाकर दौ।। हटवय सुत (25/02) माधव दामोदर श्रीधर (28/07) हलधर केशवा: कुजौली सै शशिकर प्रo शंकर सुत रधु दौ दहिमत हरिहर द्दौणा (43/06) वीर सुता रूद्र (30/03) राजू सोने का: वभनियामसै गोनन सुत किहो दौ: वभनियामसै बीजी हरिशर्म्म ए सुतो झालोक: महजौली मात्रिक: एक सुता शुभंकर जयकर प्रियंकर चोथेका (75/04) शुभंकर सुतो बाछे क: जगति सै महानिधि दौ।। ए सुतो रामब्रह्म कृष्ण ब्रहनौ।। रामब्रहम सुता भीम जाई जवे कांगूका: सुइरी सै कान्ह दौ।। जायी सुता गोर जयपति (22/10) गणपतिय:।। गोर सुतो वीर (14/06) गोननो कोड़रा माण्डरसै रत्नेश्वर दौ अन्यो यमुगाम सै हरिहर दौ।। गोनन सुता (27/07) (92/09) महिपति किठो ऐंठोका: महवालसै दिवाकर दौ: महवालसै बीजी माहवमपत्या: पत्ना ए सुतो प्रभाकर ए सुतो बनमालीक: ए सुता ओहरि ढेहरि चक्रधरा:।। ओहरिप्रoरत्नाकर सुतो दिवाकर जीवाकौ हथियन सकुरी सै देवपति दौ।। किठो। सुता खण्डवला सै रविकर दौ (05/06'') भोगीखर सुता नारायण रत्नाक दिवाकर (22/01) भवशर्म्म गढ़ाधरा: नीमाटंक सउँथपाणि दौ।। रत्नाकर सुतो पक्षधर: कुर्रसमासकo राजू दौ।। (28) ''6'' पक्षधर सुतो हलधर यशोधरौ दरिहरा सै रतनाकर दौ।। यशोधर विस्फी सै सुतो रविकर पनिचोभ सै कोन दौ।। रविकर सुतो रूद्र श्रीकरौ गढ़ विस्फी सै शंकर दौ।। सुलारूद्र श्री करौ गढ़ विस्फी सै शंकर दौ बाढ़ विस्फी सै बीजी विष्णु शर्म्मा: ए सुतो हरादित्य ए सुतो कर्मादित्य:।। ए सुतो शान्ति विग्राहिक देवादित्य राजवल्लभ भवादिलो।। यदि विग्रहदेवादित्य सुता पाएधारिक वीरेश्वर व्यक्तिव नैवाधिक (64/05) धीरेश्वर अप्रक्रयमहासमन्धिपति महामहत्तक गणेश्वर भाण्डागरिक यटेश्वर स्थानाकारि: हरदत्त सुंद्राहआक लक्ष्मीदत्त शुभ दत्ता: तत्र पाण्डका वीरेश्वर अप्रक्रय गणेश्वर राजवल्लभ शुभदत्ता: नान्यपुर त्रिपाली सै कामेश्वर दौ।। अपरौवर्तित धीरेश्वर अनुक्रमांक जनेश्वरों महपौरवासी माधवमभागिनेयो हरदत्त लक्ष्मीदत्त: मह यौर वासी यमुगाम सै काटिर्य माने दौ।। हरदत्त सुतो मुरारीदत्त: बहेराढ़ी सै लड़ावन दौ।। अपरौ उँमापति दत वरूआली मातृक ।। अपरौ शंकरदत्त अलय सै देवे दौ।। अपरौ महत्तक होराइक: गढ़ बेल्उँच सै शंकरदत्त दो।। शंकरदत्त सुता नरवाल सै दिवाकर दौ।। रूद सुतो वेणीक: बहेराढ़ीसै नरहरिसुत विश्वम्भर दौ (04/09) अभिमन्यु सुता विकर्ण वरूरूचि सागर पीताम्परा: भझौली सकराढ़ी सै दशरथ दौ।। वररूचिसुता देल्हण सोल्हण तिमे मुरारिय: देलहनो (09/07) वलाइनि वसी सोल्हनों मछाँटा वासी तिमे जलकोंर वासी मुरारी बहेराढ़ीवादी ए सुतो देवपाणि चन्द्रपति।। देवपाणिसुतो हारिल देहरि: आद्य: सुरगनसै गोवर्द्धन दौ।। (29) अन्यो भिन्न मातृक:।। होरिल सुता लक्ष्मीकंठ जयकंठ शितिकंठ सोखे (09/04) लड़ावन श्यामकंठ हेलना: तत्राद्यो सरिसब सै कामदेव सुत कानह दौ अन्यो खैआल सै बाछे दौ।। जयकंठ सुतोस्थानान्तरिक रति: पवौली सै वीर दौ (05/04) विकर्ण सुतो गणपति वाचस्पति।। वाचस्पति पबौली गामोपार्यक: ए सुतौ हरदत्त।। बापरौ आद्य सुरगन सै गोवर्द्धन दौ अन्य पंच जेठोरी सकरदीसै ऐलौदो।। हरदत्त सुता वीर देवे श्रीदत्ता: वीर सुतो महो (14/03) गंगाधरभन्द. हरिदाशदौ।। जलवंयापट्ट राजवासी दामोदरो बीजी ए सुतो माधव बान्ध्वौ।। माधव सन्तति भन्दवालवासी ए सुतो जानु श्रुतिपरम त्रिलोचन:।। जानू सुता अमिनन्द दाजू अच्युत मूधरा:।। दाजू सुतो हरिदाश:।। हरिदाश सुता सै दौ।। स्थान्तरिक ठरति सुतो ठ. वासुकी: गढ़ निखूति सै यगद्धर दौ।। निखूति सै बीजी त्रिपाठी रूद्र: ए सुता महामहत्तक सुरेश्वर रतनेश्वर नोने देवेका: सरौनीमातृक: सरौनी मातृक:।। महामहत्तक सुरेश्वरसुता शान्ति विग्रहिक हरिहर विद्याधर देवधरा: डीह राउढ़ सै छीतर दौ।। महामहत्तक विधाधर सुता जगद्धर नोने प्रo रत्नधर देवधरा बुधौरा सकराढ़ी सै गणपति दौ।। छतौनी सै माधव द्दौणा।। महामहत्तक जगद्धरसुतो लक्ष्मी शर्म्म कीर्तिशर्म्मणों सिंहाश्रम सै रत्नेश्वर दौ दुवादए पार पुर सकराढ़ी सै अनन्त द्दौणा।। ठ. वासुकी सुता गोविन्द नरहरि (11/0/10) जनार्दना: तल्हनपुर सै रत्नाकर दौ : तल्हनपुर सै बीजी विष्णु शर्म्मा: ए सुता शुक्ल ज्ञान रत्नेश्वर दामोदरा: तत्र दामोदर सुतो लोरिक: बेलासकराढ़ी सै मासो दौ।। ए सुतो चन्द्रकर धर्मकरौ कुजौली सै विकर्ण दौ।। चन्द्रकर सुतो लगशर्म्म रत्नाकरौ डीह दरिहरासै लक्ष्मेश्वर दौ।। रत्नाकर सुता पोखराम बसहासै राम सुत देवे दौ।। सुइरीसै कीर्तिदाश द्दौणा।। ठ. (25/02) नरहरि सुता विश्वम्भर (30/04) विरखू (25/04) गदाधरा: गढ़ माण्डर सै नागे दौ (30) ''7'' (02/01) महामहो निधिसुतो श्री कुमार पाठक वासी गंगोभीर सै चन्द्रकर दौ।। ए सुतो इबे (26/02) चौबेकौ टकबाल सै रत्नपाणि दिशि मित्रानन्द दौ।। (09/05) इबे सुतो घृतिकर: केउँटराम पण्डोली सै रूद दौ।। ए सुतो रविकर: अलय सै गोविनद दौ।। एक सुतो गुणीश्वर (11/06) प्रo कोने बागेकौ तिसउँत सै जगद्धर सुत नारायण दौ निम्सै दुर्गादाश दौहित्र दौ।। बागे सुतो रातूक: गढ़ यमुगाम सै जीवेश्वर दौ गढ़ यमुगाम सै बीजी श्रीकर: ए सुतो हरिकर: ए सुतो जीवेश्वर: सकराढ़ीसै पदमपाणि दौ।। जीवेश्वर सुतो आङनि: माङनि: अथरी दरिहरा सै नरसिंह दौ: दरिहरा सै बीजी कमल पाणि: ए सुता देवधर धरणीधर माहव (कनिष्ठा) अपरौ (14/07) चिन्तामणि: (15/07) देवधर सुतो कुसुम (11/03) रेचन्द्रो कुसुमे सुता सागर पुराई सीधू का: ।। सागर सुतो पाई दामोदरौ।। दाम्मोदर सुतो बसाईक: ए सुतो राम: ए सुतो नरसिंह।। नरसिंह।। सुता दिधो सै कर्मादित्य दौ।। ठ. विश्वम्भर सुतो नाथू (70/02) बाटू कौ (52/0/10) खौआल सै विकू सुत रघुपति दौ (03/06) विकू सुतो रघुपति: गंगोर सै भोरे दौ: गंगोर सै बीजी शाश्वत: ए सुतो दामोदर: ए सुता रघु माधव चन्द्रधरा: छतौनी सै श्रृंगार दौ।। चन्द्रधर सुतो विनू विदू कौ पण्डुआ सै राम दौ।। (19/04) विदू सुता विश्वनाथ (16/09) श्री नाथ जगन्नाथ देवनाथा: सतलखा सै महिधर दौ।। श्री नाथ सुतो गुणीनाथ: राढ़ी कोइयार सै शान्ति दौ ए सुतो भोरेक: शीशे पालीसै ऐलौदौ।। भोरे सुता (17/01) शिवनाथ भवनाथ देवनाथा: छतौनी वासी सठवाल सै देवशर्म्मदिशि कुसुमाकर दौ छतौनी सै परमेश्वर द्वौणा (23/01) रघुपति सुतोहरिपति: (25/04) नरउन सै कोने दो नरउनसँ बीजी महामहोपाध्याय महिधर: ए सुता श्री धर मनोबर लक्ष्मीधरा:।। श्रीधर सुतो उदयकर प्रियंकरौ प्रियंकरें।। कुमुदी मातृको।। अपरो त्रिलोचन:।। उदयकर सुता रतनाकर पुण्याकर रूचिकरा: लखनौर सक मातृ: रतनाकर सुता पदमाकर मक्रिकर। (31) शुचिकर कीर्तिकरा: मक्रिकर सुतो जयशर्म्म हरिशर्म्माणौ।। बत्सवाल वासिन्यो।। बुधौरा सकरादी सै प्रितिकर दौ।। (11/06) हरिशर्म्म सुतो प्रितिशर्म्म: पचही जजिवाल सै लक्ष्मीश्वर दौ जजिवाल सै बीजी दण्डपाणि: ए सुतो रत्नपाणिहर्षपाणि:।। रतनपाणि सुता शूलपाणि गोवर्द्धन महेश्वर शीरू शारङ्त्र:।। शूलपाणि सन्तति पतखौरि वासी।। (09/01) गोवर्द्धनो गोरा वासी।। महेश्वर सुतो उग्रेश्वर: पचही वासी।। ए सुता (17/03) गौरीश्वर शुक्ल कान्ह सुरेश्वर सोमेश्वरा:।। कान्ह सुतो लक्ष्मीश्वर हरिश्वरौ: सरौनी सै सर्वानन्द दौ।। लक्ष्मीश्वर सुतो पदमपाणि: पचही सकराढ़ी सै कारूदौ।। तिसउँत सै विश्वम्भर द्दौणा।। प्रितिशर्म्म सुतो डालू (08/02) कोने कौ करमहा सै नोने दौ।। (02/06) नोने सुता कीर्तिशर्म्म (143/06) रामशर्म्म मांगू का: आद्दय: मेरन्दी सै कुसुमाकर दौ।। अन्यो सुरगन सै विरेश्वर दौ।। मेरन्दी सै बीजी जनार्दन: ए सुतौ बैकुण्ठ हृषिकेशौ।। हृषिकेश सुता मानू पुण्याकर दिवाकर गुणाकरा: परस्पर भिन्न मातृका:।। पुण्याकर सुता दहिभत सै कान्ह दौ (14/05) कोन सुतो उदयकर (23/06) श्री करौ वलियासै भीखे दौ।। (01/02) शुक्ल हरिवंश सुता (09/03) सुता रतिकर सोमकर लक्ष्मीकर (10/05) साधुकर दिवाकर शुंभकरा: आद्य सिधौली सै सुरेश्वर दौ।। अपरैत्रय हडूरी खण्डबला सै चक्रेश्वर दौ।। अन्त्यो गढ़ बेलउँच सै चणाई दौ।। दिवाकर सुतो भिरवेक: तिसउँत सँग्रहेश्वर दौ तिसउँत सै बीजी विश्वम्भर: ए सुता हरिहर हल्लेश्वर (14/05) नारायण (10/05) पद्मनाम गोधन जीवन दिवाकरा: आद्दय सरिसब सै रामदौ।। अन्यौ करनैठा सकराढ़ी सै रत्नपाणि दौ।। हरिहर सुतो डालूक: विस्की सै मधुकर दौ।। डालू सुतो ग्रहेश्वर: माण्डर सै चन्द्रकर दौ।। ग्रहेश्वर सुतो मोतीक: (32) ''8'' माण्डर सै नारायण दौ।। (11/03) भिखे सुता रूद्रपुर सरिसब सै वीर सुत महादेव दौ वरूआली सै रामेश्वर द्दौणा।। एवम ठ. महादेवादि मातृक चक्रम।। महामहोपाध्याय ठ. भगीरथा परनामक मेघ सुतोमहामहोपाध्याय ठ. रामभद्र: नाउन सै रतिपति शुत शोरे दौ (08/04) डालू सुता मधुकर (27/02) चन्द्रकर (24/07) दिवाकरा: मड़ार सै सोम सुत यरेश्वर दौ।। पचदही सिंहाश्रम सै धाम द्दौणा।। मधुकर सुतो रूचिकर विश्वेश्वरौ (56/07) करहिया पनिचोभ सै सोंसे दौ।। करहिया पनिचोभ सै बीजी चण्डेश्वर: ए सुतो भिखेक: ए सुतो गोंढि: केउँटराम पण्डौली सै ग्रहेश्वर दौ तल्हनपुर सै महादेव द्दौणा।। गोंदि सुतो सोंसेक: सुइरी सै गुणकर सुत मधुकर दौ।। सोंसे सुतो प्रितिकर हारू कौ बेला सकo जीवेश्वर दौ (03/01) रामौ बलहि टंकवाल मातृक: ए सुतौ मधुकर चांड़ौ।। (24/08) मधुकरसुतौ (59/04) राउल मासौ कौ बेलावासी पचही जजिवाल सै महेश्वर दौ।। राहुल मासौ सुता त्रिलोचन कृष्ण नारायणा: कोइयार सै हरिश्वर दौ।। त्रिलोचन सुता हरदत्त पुरोहित गोपाल साधुकरा: बुधौरा सै बुधौरासँ भोजू दौ।। हरदत्त सुतो चाण गोननो पनिचोभ सै सह देव दौ।। पनिचोभ सै बीजी मधुमन: ए सुताधूर्ज्जटि वाचस्पति वृहस्पति भोजदेवा:।। तत्र धूर्ज्जटि सन्तति तल्लिस्माग्रामोपार्यक:।। (10/02) वाचस्पति सन्तति वीरपुर ग्रामौं पार्यक:।। वृहस्पतिसन्तति यमुनाग्रामौपार्यक:।। भोजदेव सन्तति चक्रहृद वासी।। हरदत्त करहिया पद्मपुर वासी।। ए सुता छितिशर्म्मवशिष्ठदेवशर्म्मणा:।। वशिष्ठौ हड़हृद वासी।। ए सुतो रवि शर्म्म: ए सुतो महादेव ए सुता सहदेव श्रीदेव आदिदेवा:।। सहदेवसुता सान्हि देहरि आङूका: सै दौ।। गोनन सुतो जीवेश्वर धारेश्वरौ बरूआली सै चान्द दौ।। जीवेश्वरसुतो गिरीश्वर: (33) खण्डबला सै जाई दौ (07/05) दामोदर सुतो महो दधि: पाली मातृक:। ए सुतौ विश्वनाथ गोननौ।। विश्वनाथ सुतो जगन्नाथ शिवनाथौ कुजौली सै गोनन दौ अपरौ होरेक: दरिहरा सै विश्वरूप दौ।। होरे सुतो जाई भवनाथौ।। गम्भीर होरा वासियों ।। जाई सुता मातिछ सै देहरि दौ।। मालिछ सै बीजी वत्सेश्वर: ए सुतौ हललैश्वर दण्डिका: सुरगन मातृक:।। ए सुतो पुरूषोत्तम प्रo देहरि: खण्डबला सै कापनि माधव दौ।। देहरि सुतो करूणाकर: थुरी जालय सै धाम दौ।। (55/04) रूचिकर सुतो रतिपति: टकवाल सै शिरू दौ टकबाल सै बीजी हरिकंठ: ए सुतौ लक्ष्मीकंठ: पण्डुआ सै शंकर दौ।। ए सुतो बाढूक: देउरी सै श्रीनाथ दौ।। ए सुतौ माधव (25/06) केशवौ नरवाल सै यशुदौ भन्दवाल परिसरा सै कृष्ण शर्म्म द्दौणा।। बृहद ब्रहनपुरा सै विष्णुकरकरत्तुत: माधव सुतो शिरू मांगु कौ जलकौर दरिहरासै अन्इ सुत सोंदू दौ गाउल करमहा सै पागु छौणा शिरू सुता (24/08) रूद रति विश्वेश्वरा: माण्डर सै सुधाकर दौ।। (02/05) सदुपाध्याय (27/03) विशोसुतौ (28/05) हरिकर सुधाकरौ पालीसै हलधर दौ (06/08) देल्हन सुतो गंगादत्त हल्लेश्वरौ विलय सै हरि दौ।। गंगादत्त सुता धारेश्वर शंकर भोगीश्वर यवेश्वर (12/01) मोतीश्वरा: सिंहाश्रम सै महोदधि पौत्र देहरि सुत गदाधर दौ।। धारेश्वर सुतो धीरेश्वर: दरिहरासै देव सन्तति देवेश्वर दौ।। ए सुता हलधर देवधर लक्ष्मीधर (14/02) श्रीधरा: जगति सै धारेश्वर दौ: जगति सै बीजी जयकर ए सुतो सगर: ए सुता जलसेन त्रिलोचन अरविन्दा।। जलसेन सुता मधुकर गोधन श्रीकर देल्हन जीवधरा:।। गोधन सुतो सिद्धेश्वर गंगेश्वरौ।। सिद्धेश्वर सुता कृष्ण धारेश्वर रूद्रेश्वरा: जगति वासन्य:।। धारेश्वर सुतो बोधी कोने को केउँटी एडढ़ सै हरिहर दौ (34) ''9'' केउँटी राउढ़ सै बीजी मसबास बासूक: ए सुतो सिंगारूक: ए सुतोवाराह: ।। ए सुता श्री वत्स जगद्धर श्रीधरा: ।।श्रीधर सुता विद्याद्यर लक्ष्मीधर शशिधर महिधर हरिहरा: सिंहाश्रम सैगंगादित्य दौ।। हरिहर सुता धोसियाम सै रतिनन्दन दौ।। हलधर सुतो (42/01) सौसेक: सुपटानी गंगोली सै गोम दौ (05/07) गोम सुतो जीवेक: एकमा वलियास सै रतिकर दौ (08/07) रतिकर सुता दिद्यो सै सान्हू दौ।। (19/02) सुधाकर सुता मनोरथ (36/08) हरि कान्ह (28/01) सोमा बहेराढ़ी सै रवि दौ (07/01) लड़ावन सुतो राम सुपनो रूद्रपुर सरिसब सै वीर दौ।। राम सुतो (27/01) त्रिपुर रवि: डीह दरिहरासै विश्वम्भर दौ पिहवाल सै लक्ष्मीपति दौहित्र दे (19/08) रवि सुतो पुरेक: माण्ड सै विभू दौ (07/01) अपरा दूबे सुता गुणाकर शान्तिकरणीक (22/07) पौखू मित्रकरा: मघेटा पालीसै श्री कंठ दौ।। अपरौ सुपेक: घुसौत सै राम सुपे सुतो विभूक: दिघोय सै जगन्नाथपुर वासी सुरेश्वर दौ।। (10/10) विभू सुतो गोरा जजिवाल सै भवदत्त दौ (08/03) गोवर्द्धन सुतो कापनि प्रoब्राह्मण: भण्डारिसम सै श्याम कंठ दौ कोधुआ सै गोविन्द द्दौणा।। कापनि सुता भवदत्त गंगादत्त जयदत्ता: सकराढ़ी सै शारङ्ग दौ।। मांडूल प्रo भवदत्त सुता दूबा सकरा लभशर्म्म दौ।। श्री कर सुता जनक बैकुण्ठ धारेश्वरा:।। जनक सुतो ऐलो बीठूकौ बरैबा सै कान्ह दौ।। ऐलो सुता आदिदेव जीवधर वंकेश्वरा: जी सुताअनन्त रवि सुपेका इबावासिन्या: चण्डी बेहद हरिअमसै विद्यानिधि उक्त महि निधि दौ।। रवि सुता शुचिकर गुणाकर शुभंकर लभशर्म्मणा: बलहिटिसै शिवादित लभशर्म्म सुतो रामशर्म्म: गढ़ बेलo लक्ष्मीपाणि सुत पौचू दौ।। एवम् रतिपति मातृक चंक्र।। रतिपति सुता (48/05) गोरे होरे बासू यशुका: बहेराढ़ी सै जनार्दन।। (35) सुत गणपति दौ (07/08) (32/08) जनार्दन सुतो गणपति: शक्रिरायपुर नरउन सै हरिश्वर दौ (03/08) रामेश्वर सुतो योगीश्वर चक्रेश्वरों (64/03) विरपुर पनिचोभ सै रत्नेश्वर दौ (08/08) वाचस्पति सुतो हरिशर्म्म ए सुतो (18/03) देवशर्म्म ए सुतो थानूक: ए सुतौ गौरीश्वर ए सुतौ महेश्वर वीरपुर वासी ए सुतो कामेश्वर: ए सुतौरत्ने ततैल पण्डुआ सै गुणाकर दौ।। ए सुतौ विश्वनाथ (17/04) विकू कौ तत्रादयो रेकौरा गंगोली सै जाटू दौ अन्यौ तल्हनपुर सै लौरिक दौ।। अपरा सुता करूआनी सकराठी सै जगद्धर दौ सरिसब सै राम द्दौणा।। भन्दवाल जल्लकी सै उद्योत करमतुत योगीश्वर सुतो हरिशऽवर: चन्दौत पाली सै हलधर दौ (05/04) महो हलधर सुतो (12/0) प्राणधर: एकमा वलियास सै साधुकर दौ (08/07) (21/08) साधुकर सुतो मित्रकर (16/03) चण्डेश्वरौ तिसउँत सै पण्डित सुपाई दौ (08/09) नारायण सुतो पण्डित सुपाईक: पतऔना खौआ गदाधर दौ।। ए सुता भड़ार सै श्रीनिवास दौ।। हरिश्वर (25/05) सुता चान्दोवलियास सै शिवादित्य दौ।। चान्दो बलियास सै बीजी पुरूषोत्तम: ए सुतामहादेव जयदे महेश्वरा:।। जयदेव सुतो सुधानिधि एसुतौ महानिधि ए सुतो जयनिधि रत्नपुर तिलयली सै हरिहर दौ।। जयनिधि सुता अभयनिधि राजनिधि सुता लक्ष्मीकरा:।। तत्राद्यो बभनियाम सै राम दौ।। सुपर कोयली सै रवि भागिनेयो।। अन्यौ महुआ मातृकौ।। अभयनिधि सुता रत्नेश्वर रामेश्वर परमेश्वरा: गंगो देवरूप दौ।। रत्नेश्वर सुता सूर्यकर देवदत्त गौरीश्वर शंकर गदाधरा: तत्राद्यो दिनारी सरीसव सै राम दो।। अपरै बभिनियाम सै नितिकर दौ।। सूर्यकरसुता (44/06) रूचिकर शिव (13/02) गंगादित्य महो (28/03) हरादित्य कान्ह प्रoकामेश्वरा: मछैटा पाली सै गणेश्वर दौ शोधवाल गंगोली सै गंगेश्वर द्दौणा।। शिवादित्य सुता होरे पुराई धारू भवाई दुर्गादित्या।। (36) ''10'' धोसियाम सै जगन्नाथ सुता श्रीरंग दौ लाही सै श्रीधर दौणा (49/07) गणपति सुता रविकर अमरू कमलू का: बेलउँच सै महादित्य दौ (04/07) शिवदाशु सुतो दुर्गादित्य बo (14/05) तीथुकरौ डीह दरिहरा सै विकर्ण सुत नन्दन दौ सुरगन सै राय हरिकेश द्दौणा दुर्गादित्य सुतो धरादित्य कपिलेश्वरौ कुजौली सै रूचिकर दौ सरिसब सै वीर द्दौणा धरादित्य सुता एकादश महो (16/05) धर्मादित्य महो (30/09) जयादित्य महो (22/06) गयादित्य महो महादित्य महो जीवादित्य (19/06) (25/05) महो रूद्रादित्य ।।25/05।। पद्मपुर पकलिया सै सीधू सुत बाछे दौ चिलकौर दरिo भव द्दौणा अपरे सुता रत्ना दित्य महो मित्रादित्य महो (20/02) महो प्राणादित्या: (33/10/0) भरेहा सै गणपति दौ सोहन जल्लकी सै लमशर्म्म छौणा अपरौ रूक्मादित्य परनामक बाटू प्रo (35/02) लाला लहरा गंगोली सै बारू दौ।। महो महादित्य सुता विश्वनाथ (50/02) इबे (66/02) मोखे चौबे का: माण्डर सै गोपाल दौ (02/01) अपरा नरसिंह सुतो चोथू मोथू कौ ।। चौथू सुतो देहरि: जजिबालभातृक: ए सुतो देवदाश रामपति:।। देवदाश सुतो रत्नेश्वर ए सुतो सुथन सबवई कौ नान्यपुर अलय सै पौखू भागिनेयो ।। सुथन सुतो गणेश्वर नर देवौ सै दौ।। नरदेव सुतो सज्जन गोपालौ अलयसै शूलपाणि दौ।। गोपाल सुतो हरिहर नरसिंहो सरपरब खण्डबला सै होरे सुत परमेश्वर दौ बलहा बलियास सै महादेव द्दौणा।। एवम् शोरे मातृक चक्रं।। शोरे सुता वुधवाल सै कान्ह दौ।। बुधवालसै बीजी बासुदेव: ए सुतो विभाकरप्रभाकरौ।। प्रभाकर सुतो धारेश्वर: हरिपुर वासी. ए सुता धर्मेश्वरबामन सोमा: गंगोली सै गणपति दौ बामनसुता पुराश कौशल इबे हिरू का: सुइरी सै प्रतिहस्त प्रज्ञाकर दौ।। पुराश सुता मधुकर सूर्यकर (38/08) उदयकरा: खौआल सै रत्नपाणि दौ।। (37) मधुकरसुतो सटुपाध्यायमानूक: एकमा खण्डबला सै सुपे दौ (09/01) अपरा विश्वनाथ सुतो सुपे गांगुकोदक्षिण खण्ड कटाई सै भीम दौ।। सुपे सुता जाटू मतिहार (20/07) (20/91) शतु लाखूका: करमहा सै लक्ष्मीपति दौ।। (02/06) लक्षमीपति सुता सरिसब सै देवादित्य दौ (03/02) देवादित्य सुता (12/07) सुता खौआल सै नोने दौ (03/05) (33/04) नोने सुत: (16/05) कान्ह: गंगोर सै शाकल्लयदौ।। सदुपाध्याय (191/03) भानू सुता (45/06) गणेश्वर परियाणव (22/07) गुणीश्वर महो गंगेश्वर (35/01) रूचिकर: (43/04) रतिकरा: एकमा वलियास सै भीखे दौ (08/01) उपरा भीखे सुता चिन्तामणि दिनमणि (19/09) हिरमणि धरार्माणय: त्रिलाठी धुसौत सै त्रिलोचन दौ।। त्रिलाठी धुसौत सै बीजी नरसिंह: ए सुतो केश्व: ए सुता लक्ष्मीकंठ श्यामकंठ सुपटा: छतौनीसै विभू दौ।। लक्ष्मीकंठ सुता चन्द्रकर भवेश्वर वसन्ता: आद्यो गोधोली सै श्रीधर भागिनेयो।। अन्योदहिमत सै राम दौ।। भवेश्वर सुतो त्रिलोचन: दरि गौढि दौ त्रिलोचन सुता नाउन सै हरिशर्म्म दौ (08/01/) जजिoलक्ष्मीश्वर द्दौणा।। महो गंगेश्वर सुतो हेलूक गढ़ माण्डर सै जीवेश्वर दौ (07/02) कोनेप्रo गुणीश्वर सुतो जीनेश्वर: पवौली सै पुराश दै (07/03) वापट सुता यशोधर जगद्धर (17/05) हलधरा: कुसमाल सै मणिधर दौ।। अपरै उदयकर गुणाकर पद्मकरा: फनन्दह सै लखाईभ्रातृ शशिधर दौ।। यशोधरा सुतो प्रितिकर पुराशो: नीमाटकबाल सै जगन्नाथ सुत भवनाथ दौ कुजौली सै पहकर द्दौणा वसुआल सै भवदाशकस्तुत: पुराश सुतो देवशर्म्म तिसउँत सै खुशे दौ।। अपरौ मोहन दामूकौ एकमा पलियास सै आनन्दकर दौ भेरहा सै लड़ावन छौणा अपरौ वीठू पुण्याकरौ सकराढ़ी सै हरपति दौ।। जीवेश्वर सुता टकबाल सै गोपाल दौ।। अपरा जीवेश्वर सुतो सोंसेक: बुधवालसै (59/07) मानू दौ।। जसानन्दटकबाल सै बीजी: (38) पाँखूक: ए सुतो श्री निवास: ए सुतो हरिहर: उदनपुरत्रजिवाल सै आवस्थिक माने दौ।। ए सुतो बाछेक: गढ़ यमुगाम सै हरिकर दौ।। सुतो गोपाल: मिगुआल सै जाटू सुत मितूदौ सोइनि सै शंकरदाश छौणा एकान्तिक गोपाल सुता (46/04) नारायण हरि बासुदेवा: नरवाल सै दिवाकरपौत्र मणिकरसुत होरे दौ भिखौनी कलिगाम सै कमलपाणि द्दौणा अपरौ सुपेक: हड़री खण्डबला सै गोनन्द द्दौणा तेलू सुतो कान्ह: दरिहरा सै पद्मकर दौ (07/04) रेचन्द्र सुतो योगु मन्डनौ ।। योगू सुता आर्तिधर मनोधर चतुर्भूजा।। चतुर्भुज सुता पुराक मसवास देवधरा: पालीसै श्रीपाणि दौ।। पराक श्रीपत्या: परनामा सुतो यशस्पति सिंहाश्रम सै मनोधर दौ ए सुतो महामहो रतिपति महो रामपति महो (12/0/01) जानपतिय: ।। गोधूलि अलय सै शंखपाणि दौ।। ब्रह्मपुरादिधोय सै सोम छौणा।। महामहो रतियति सुता महामहो सुरपति महामहो इन्द्रपति महामहो महो धृतिपतिय: जानी मराड़ सै लोचन प्रo चन्द्रकर दौ पिहवाल सै सीधू दौहित्र दौ।। महामहो सुरपति सुता महो किर्तिशर्म्म महो प्रितिशर्म्ममहो हरिशर्म्ममिश्र मित्रशर्म्मणा: आद्यो महुआ सै छीतू दौ दरिहरा सै गंगेश्वर द्दौणा अन्यो करही भण्डारिसम सै देकवंश सुतनयवंश दौ।। महामहो प्रितिशर्मा सुता रविकर गांगु दिवाकरा: तत्राद्यो यमुगाम सै जीवेश्वर दौ।। अन्यो वति गाम सै इशर वाट सुत जादू दौ।। रविकर सुता शुभंकर (34/05) गुणाकर प्रजाकर (24/09) कुसुमाकर पद्माकरा: नदाम सै महादेव सुत सुधाकर दौ इबा. सक. मतिदेव द्दौणा (38/01) पद्मकर सुतो बाटू प्रo हरीक: (73/07) तल्हनपुर सै गढवय दौ (07/08) शुक्ल जान सुतो महादेव: चाण्डी टकवाल सै सोम दौ।। महादेव सुता सोमदेव नरदेव गंगदेवा: कुजौली सै मनोरथ दौ।। सोमदेव सुतो चण्डेश्वर बर्द्धमानौ।। चण्डेश्वर सुतो यवेश्वर (39) (21/09) वीरेश्वरौ: जालय सै श्रीपति दौ।। यवेश्वर सुतो गढ़वयक: महियानी सै तारापति दौ।। गढ़वय सुता हरिरवि रतना: पाली सै छिताई दौ (09/07) मोतीश्वर सुतो रत्नाकर: दरिo कान्ह दौ।। ए सुतो छिताई हिताई कौ (43/02) को सिम्भुनामकरमहा सै शंकर दौ।। छिताई सुतो प्रभाकर: पदमपुर पकलिया सै बाछेदौ।। पद्मपुर पकलिया सै बीजी बासुदेव: ए सुता महादेव गंगदेव रामदेव कामदेवा:।। रामदेव सुतो शितिकंठ श्यामकंठौ।। शितिकंठौ सुतो सिधूक: यमुगाम मातृक: ए सुतो गणपति बाछे कौ।। अपेरो गिरीश्वर: पाली सुइरी सै अभिनन्द दौ।। बाछे सुता भाइ मासे चन्द्रकरा: चिलकौर सै भव दौ।। माउँबेहट सै कान्ह द्दौणा कान्ह सुता हरि शिव शंकरा: उदनपुर जजिवाल सै गुणे दौ।। उदनपुर जजिवाल सै बीजी आवस्थिक मानेक: ए सुता शिनिकंठ रति कंठ मुयर कंठ होख कंठ अनन्त कंठ मणि कंठा: तत्राद्यो मझौरा सकाढ़ी सै दौ।। अपरै बरेबा सै शंकर दौ।। शितिकंठ सुता धीर वीर भासे गोपाल हरिहरा: तेरहोत सै नारायण दौ।। देयाम सै प्रजाकर पौत्र श्री कर सुत हरिकर दौ।। अन्त्यौ के धौनी टकबाल सै गुणकर भागिनेयो: गोपाल सुतो कान्ह: वनाइनि पाली सै धीरेश्वर दौ।। ए सुता गोविन्द (20/09) नारू पुराई रामा: तत्राद्यो जगति सै गणपति दौ।। अन्त्यो करूआनी सकराढी सै नाइ दौ ।। बेलमोहन नरउन सै तपक सुत कार्य गंगादाश द्दौणा. पुराई सुतो बैजू शंकरों (38/04) उचति सै हखय दौ।। अपरौडालूक: झोंट पाली दरिहरा सै रविदत्त द्दौणा (11/05) जानपति झोंटपालीवासी ए सुता महो शिवपति कृष्णपति वासुदेवा: हरिअमसै छीतू दौ।। हरिअम्ब सै बीजी दीक्षित झाँउँक: ए सुतौयाज्ञिक त्रिलोचन: एसुतौ विद्यानिधि देवनिधि।। देवनिधि सुतो विद्याधर छीतू प्रसिद्ध नामा: खण्डबला सै नीलकंठ दौ।। सुता हरिहर (16/08) माधव गोविन्दा सुइरी सै बहलचन्दौ।। (40) ''12'' सुइरी सै बीजी शेखर ए सुता रत्नपाणि वासुदेव लखपतिय:।। वासुदेव सुतो शंकर:।। ए सुता अमोध कुमार शारङ्त्रपाणिय: शारङ्त्र पाणि सुतौ गौर बहल चन्द्रो बहल चन्द्र सुता सै दौ।। शिवपति सुता डालू विशो होरे हरदत्त जाटू का: आद्या छादन सरिसब सै गयन दौ।। अपरौगंगौर सै बराहनाथ दौहित्रदौ होरे सुतो रविदत्त: गाउल करमहा सै श्रीदेव दौ।। रविदत्त सुता गांगु कान्ह गोपाला: कोइयार सैहारू दौ।। अपरा सुता करमहा सै आङनि दौ (02/06) गौरी सुतो अमाँइका: नान्यपुर खौआल सै जगदेव दौ।। ए सुतो आङनि बलहिर सै देवकंठ दौ।। ए सुतो हारू क: धोसिवाम सै पराशर दौ।। कलिगाम सै दिवाकर छौंणा (38/02) डालू सुता गौरी गुणे ग्रहेश्वरा परनामक अमांइ का: बरूआली सै रूचिकर दौ (01/05) चन्द्रकर सुतो विश्वनाथ: कन्जुग्राम सकराढ़ी सै जगन्नाथ दौ गोविन्द वन पनिचोभ सै नन्दन सुत गंगेश्वर छौणा। विश्वनाथ सुतो रविकर: (25/08) सेरी सिंहाश्रमसैभव दौ।। ए सुतो रूचिकर: दहिमत सै राम सुत इबे दौ भण्डारिसम सै हरिहर द्दौणा रूचिकर सुता सरिसब सै नाने दौ अपरौ देवादित्य सुतो करूणाकर: करूआनी सकराढि सै मo मo उo कारू दौ।। करूणाकर सुतो रत्नाकर प्रज्ञाकरौं दहुला सै श्रीहर्ष दौ।। रत्नाकर सुतो हरिकर: कटाई सैभीभ दौ।। हरिकर सुतो नाने क: सरौनी सै श्रीकर दौ।। नोने सुतो भ्वादित्य पुरादित्यौ जालयभ सै राम दौ।। जल्लकी (जालप) सै बीजी बान्धन: एसुता खड़गधर चक्रधर शंखधरा जीवधरा: एतै मातृक कृष्ण:।। खड़गधर सुता विद्याधर कीर्तिघर गंगाधरा: मेरन्दी मातृक विधाधर सुतो हरिहर रूचिकरौ विजनपुर दरिo सै वेद दौ।। हरिहर सुतो श्रीपति: ए सुतो विश्वेश्वर: मरियानी सै तारापति दौ।। ए सुतो भवेश्वर रामेश्वरौ वरूआली माण्डर सै मo मo उo शंकर दौ।। मo मo उo रामेश्वर सुता महामहत्तक गणपति महामहत्तक रतिधरसदुपाo महिधरा: आद्या पवौली सै महिपाणि सुत यूवे दौ अन्त्यो सकo धृतिकर दौ।। गुणे सुता अफेल लाखन रविय: पाली सै हलधर दौ।। (10/04) अपरौ महो हलधर सुतो।। (41) मुरारी एकहरा सै दिवाकर दौ (04/06) देवे सुतो रत्नेश्वर: मझौरा सकराढ़ी सै श्रीकंठ सुत नीलकंठ दौ पवौली सै वाचस्पति द्दौणा अपरेसुता सोम धर्ममित्रेश्वरा यशिया सै निलोचन दौ महुआ सै बर्द्धमान दौणा।। रत्नेश्वरसुता दिवाकर रूचिकर (227/07) शुचिकर मतिकर मिश्र हरिकरा: मड़ार सै श्री हर्ष दौ।। दिवाकर सुतो स्थानान्तरिक सुधाकर रतिकरौ तिलय सै बराह सुत देवशर्म्म दौ भण्डारिसम सै धारेश्वर द्वौणा। अपरा सुता तेरहोत सकराढ़ी सै कुलेश्वर सुत भवेश्वर दौ सकुरी सै लक्ष्मी द्दौणा मुरारी सुतो पौखूक: तेरहोत सकराढ़ी सै गाजो दौ (03/09) मनोरथ सुता वनमाली वशिष्ठ गोविन्द शुभंकरा: अपरौ शकर्षण शुभंकर सुता भागीरथ दिवाकर रत्नपति नाईका: तेरहोत वासिन्य:।। सिंहाश्रम सैविद्यापति छौणा भागीरथ सुतो कुलेश्वर: ए सुता रामेश्वर योगीश्वर भवेश्वर परमेश्वरा: रामेश्वर सुतो जीवधर रतिधरौ महुआ सै महादेव दौ।। जीवधर सुतो गाजोक: केउँटी तिलय सै रवलय लक्ष्मीकर दौ।। ढ़ोढवाल पवलसै नयदेव दौणा।। गाजो सुतो गणपति: अलय सै यशोधरदौ अलय सै बीजी धरनीधर: धाउन प्रसिद्धनामा।। ए सुता मनोरथककत्र्जकअमॉइका:।। मनोरथ सुता प्रितिकर श्रीधर वावन रामा: वावन सुतो शंखधर पुरूषेत्तिमो।। गोधूलि वासिन्यों पुरूषोत्तम सुतो भोगीश्वर: पद्मपुर पकलियासै राम दौ।। ए सुतो यशोधर देवधरौ करूआनी सकराढ़ी सै मo मo उo कारू दौ करही सै नमवंश दौणा यशोधरा सुतोसाठूक. नाउन सै महिधर दौ अपरा सुता खौआल सै रूद्रिपाणि सुतखांजो दौ खण्डबला सै होरे द्दौणा।। पौखूसुता गणेश्वर नन्दीश्वर वीर गोविन्द हरिश्वर: पतऔना खौआल सै नरसिंह दौ (03/04) भवादित्य सुतो रति: वभनियाम सै यवे दौ।। रति सुतो डालूक: सरौनी सै हाउँन दौ।। डालू सुतो शशिधर नरसिंहों तत्राद्यो नगवाड़ धोसोत सै रति दौ (42) ''13'' अन्त्योभण्डारिसम सै सिरटि दौ।। नरसिंह सुतो नारायण दामोदरौ मुगे नी दिथोय सै कुमर सुत साठू दौ मूलहरी सै वल्लभदाश दौणा।। गोविन्द सुता होरे नोने भरैवा चान्दो बलियास सै धारू दौ (10/10) गंगादित्य सुता भबाई मंगलधरा परनामा।। भवाईं मिश्र, शिवादित्य दत्तकपुत्र: यमुगाम सै दिनकर दौ अन्त्यो धोसियाम सै श्रीरंकदौ मंगलधर सुतो धारूक: फनन्दह सै परान सुत रूद दौ यमुगाम सै चतुर्भुज द्दौणा धारू सुतो चाको रत्नपाणि: कुरहरि करमहा सै धनेश्वर दौ।। गाउल करमहा सै बीजी मुरारी।। एसुता जगद्धर हेमधर मनोधरा:।। हेमधर सुतो महिधर ए सुतो हरिहर ए सुतो रतिदेव जगदेव श्री देव वासुदेवा: तत्राद्यो पनिहारी दरिहरा सै कविराज मिसरदौ।। अन्त शक्रिरायपुर नाउन सै बलभद्र दौ।। श्रीदेव सुतो चण्डेश्वर विश्वैश्वरौ।। चण्डीश्वर सुता प्राणेश्वर नन्दीश्वर महेश्वर रामेश्वरा: कुरहरिवासियों योग बेहद कुसमाल गोविन्द दौ।। रामेश्वर सुता। गिरीश्वर धनेश्वर मतिश्वर देवेश्वरा: यमुगाम सै बासुदेव दौ धनेश्वर सुतो गुणीश्वर: बेलमोहन नाउन सै नारायण दौ।। कीर्तिकर सुतो भीखन धाने कौ।। भीखनप्रo रत्नेश्वर सुता प्रान्धन डगरू दर्व्वेश्वरा: नान्यपुर विस्फी सै गुणे दौ।। दर्व्वेश्वर सुतो पीताम्बर: गोविन्दवन पनिचोभ लखन सुत लक्ष्मीकर दौ।। ए सुतो भिखेक: मालिछ मातृक: ।। ए सुतो नारायण गोविन्दो उपमन्यु गोत्रे गढ़ एकहरी सै हरिहर दौ। कर्वाचित्रा गुरू भद्रेश्वर दौणा।। नारायण सुतो लक्ष्मीपति: मन्दवाल परिसरा सै नयशर्म्म द्दौ।। एवम् ठ. रामभद्र मातृक चक्रं।। (43) अपरा ठ. महामहोपाध्याय ठ. भगीरथ प्रo मेघ सुतो सुतो ठ. (100/09) कृष्णानन्द: खौआल सैनन्दन सुत जगन्नाथ दौ।। (03/06) अपरा बाछे सुतो आङनि: पबौली सै वाचस्पतिदे आङनि प्रo रत्नाकर सुता दिवाकर गदाधर धृतिकरा: केउँटी एउढ़ सै हरिहर दौणा अपरौ लक्ष्मीकर: महुआ सै सिद्धेश्वरा परनामक दौ।। लक्ष्मीकर सुतो नितिकर रूचिकरौ पनिचोभ सै हरिवंश दौ।। छितिशर्म्म सुतो बैकुण्ठ हृषिकेशो:।। हृषिकेश सुतौ वृरिवंश माने कौ।। हरिवंश सुता दिवाकर रत्नाकर चन्द्रकर सूर्यकरा: बलठिरसै श्यामकंठ दौ।। नितिकर सुतो साधुकर: सरौनीसैनाइ सुत भद्रेश्वर महो (19/04) साधुकर सुतो महो (14/02) सुधाकर: तिसउँत सै शुचिकर दौ।। (08/09) हल्लेश्वर सुतोबाभन: महुआ सै बासुदेव दौ।। ए सुतौ गणपति तरूणी वरूआरी माण्डर सै विधू दौ।। गणपति सुता रघुपति रामपतिनन्दीश्वरा: भरेहा सै देवे दौ।। रघुपति सुतो बाछे शुचिकरौ सकराढ़ी सै महामहोपाध्याय हरिहर दौ (03/02) महामहोपाध्याय (128/04) हरिहर सुता सदुपाध्याय (23/04) नाइ सदुपाध्याय भादू सदुपाध्याय (30/01) सुपे सदुपाध्याय चांडोका: सरिसब सै जयादित्य दौ (03/04) महामहोजयादित सुतो (02/04) दामूक: देवहार सरैनि सै सर्वानन्द दौ।। कल्पित् व्रहमानन्द दौ ।। शुचिकर सुता विहनगर दरिहरा सै भोगीश्वर दौ।। (11/03) मण्डन सुतो ऐलौक: भदुआ भदुआल वासी ए सुता जुहे पइम अनन्ता:।। पइम सुता भवशर्म्म उदयशर्म्म जयशर्म्म विष्णु शमर्मणा तत्र सोम शर्म्म सन्तति बिहनगर वासी।। सोमशर्म्म सुता बासुदेव जयदेव कामदेव यशोदेवा: गंगोली सै पुरूषोत्तम दौ।। बासुदेव सुतो चण्डेश्वर रातू कौ पण्डोली वासी जल्लकी सै।। (44) ''14'' शिवादित्य दौ।। सेतू सुतो भोगीश्वर: कंत्र्जोली मातृक।। भोगीश्वर सुता करमहा सै हरदत्त दौ।। हरदत्त सुतो लक्ष्मीकर हरिकरौ दहुला सै श्रीहर्ष सुत भवदत्त दौ (14/05) (24/05) महो सुधाकर सुतो बुद्धिकर: पाली सै केशव दौ (09/08) श्रीधर सुतो रामदत्त: गढ़ माण्डर सै सुपे दौ दिघोय सै सुरेश्वर द्दौणा रामदत्त।। सुता केशव (21/02) माधव नरसिहं मुरारिय: (20/09) पबौली सै बागे दौ (07/03) महो गंगाधर सुता पराउँ जीवे परवाईका: दरिo श्यामकंठ दौ।। पराउँसुतो बागे क. गढ़ निखूति सै जगद्धर दौ (07/07) सिंहाश्रम सै रत्नेश्वर द्दौणा बागे सुतो धराधर महिधरौ (19/07) बुधौरा सकराढ़ी सै प्रितिकर दौ।। केशव सुतो सदुपाध्याय गोदेक: नरउन सै कोने दौ (08/07) अपरा कोने सुता सकoजीवेश्वर दौ (08/10/0) खण्डबला सै जाई द्दौणा।। महामहोपाध्याय (42/07) बुद्धिकर सुता (29/06) (126/05) वृद्धिकर कृष्णकरे नन्दना: बभनिo रूचिकर दौ (06/06) वीर सुता भगव कुमार शीत कान्हा तत्राद्यास्त्रय पण्डोलि दरिहरा सै बाभन दौ अन्त्यो डीहंदरिहरा सै लक्ष्मेश्वर द्दौणा।। कुमर सुतो वसुकंठ: सकo गिरीश्वर दौ।। वासुकंठ सुता रूचिकर रामकर सुधाकर मित्रकरा दरिo वृद्धादित्य दौ (07/04) चिन्तामणि सुतो अभिमन्यु विकर्णो।। अभिमन्यु सुतो दिवाकर (303/05) गुणाकरौ दिवाकर सुतो वाचस्पति जन्मेजमो भोरवरिसै प्रज्ञाकर दौ।। जन्मेजय सुता महा महोपाo हरिदेव शितिकंठ श्याम कंठ लक्ष्मीकंठ नीलकंठा: अपरौ देवादित्य गिरीश्वरौ।। महामहोउपाo हरदेवसुता यवेश्वर विश्वम्भर लक्ष्मेश्वरा रादी कोइयार सै सिंधुनाथ देल्हन दौ।। अपरौ लक्ष्मीपाणि (45) रत्नपाणि सबौर माठक:।। पाली सैगंगादित्य दौ।। विश्वम्भर सुतो लौरिक वृद्धादित्य शिवादित्यकोचे का (26/09) ।। तत्राद्यास्त्रय रामपुर नरवाल सै सीनू सुत लक्ष्मीपतिदौ नरसिंह द्दौणा सुति श्रीधर पत्र्जी।। सीरदौ उति मंगलधर पत्र्जी।। अन्त्यो माहव जल्लकी सै रविभातृ योगेश्वर दौ।। लौरिक वृद्धादित्य सुतो नारू (28/04) डालू कौ बुधवाल सै मधुकर दौ खण्डबला सै सुपै द्दौणा।। अपरा सुता गोधुलि अलय सै साठ दौ।। (13/08) साढू सुतौ (21/06) नारायण (32/08) हरिकौ बलहा वलियास सै रामशर्म्म दौ (01/02) श्री नाथ सुत जयशर्म्म सुतो रामशर्म्म:।। रामशर्म्म सुता जाटू दूबे (37/06) (30/07) माधव बाटू का: टकबाल सै रत्नधर दौ।। (36/03) रूचिकर सुता शुभंकर हरिकर शंकरा: जगति सै केशव दौ।। धोधि सुतो गणपति नन्दी कौ तत्राद्य: गंगोली मातृक अन्त्यो राउढ़ मातृक:।। नन्दी सुता शिरू नारू (27/07) वाचू मांगुका: नेयाम सुरगन सै सुरेश्वर दौ।। शिरू सुतो माधव केशवौ मण्डारिसमसै धृतिकर द्दौणा।। केशव सुता गढ़ खण्डबला सै अनन्त सुत सुपन दौ फनन्दह सै भवाई द्दौणा एवंनन्दन मातृक चक्र।। नन्दन सुता जगन्नाथ देवनाथ (136/03) हौरिला (112/02) सोदरपुर सै रातु सुत राम दौ।। सिंहाश्रम सै बीजी महामहोपाध्याय हलायुधर ए सुतौ महो दधिए।। सुतो महो जाइक: ए सुतो महो महिधर ए सुतो गांगुक: ए सुतो वागीश्वर ए सुतो रत्नेश्वर रमेश्वरौ नगुरदह सै विसव दौ।। रत्नेश्वर सुतो महामहोपाध्याय हल्लेश्वर महामहोपाध्याय (18/09) सुरेश्वर महामहोपाध्याय (21/01) जीवेश्वरा: पारपुरसकराढ़ी सै अनन्त दौहित्री जयदेवीयुत्रा: सोदरपुर गामौ पचिका:।। महामहोपाध्याय हल्लैश्वर सुतो राजू हलधरौ गढ़ बेलउँच सै (28/07) (46) ''15'' हल्लैश्वर दौ (04/05) सन्तोष सुतो लक्ष्मीपाणि: पाली सै विकर्ण दौ।। ए सुता हल्लैश्वर पॉचू नीलकंठ देवकंठा पड़ारियॉं सै हासरू भवादित्य सुत केशव दौ हल्लैश्वर सुता बरैबा सँजयशर्म्म दौ सकराढ़ी सै धरानन्द द्दौणा।। (221/05) राजू सुता सदुपाध्यायभोगीश्वर योगेश्वर (03/03) महेश्वरा: गढ़ निखूति सै नाने प्रसिद्ध रत्नधर दौ अन्त्यो सकराढ़ी सै जीवधन द्दौणा तिलई सै लक्ष्मीकर द्दौणा नोने प्रo रत्नधरसुता बहेराढ़ी सै ठ. जयकंठ द्दौणा (07/02) पबौली सै वीर द्दौणा सदुपाध्याय भोगीश्वर सुता महामहो (21/07) ग्रहेश्वर रूदेश्वर हिरेश्वर (40/07) धीरेश्वर विश्वेश्वरा: (19/08) इबा सकराढ़ी सै विभू दौ।। बैकुण्ठ सुतो श्रीवत्स: ए सुतौ सोमेश्वर ए सुतौ जागेश्वर देवेश्वरौ देवेश्वर।। देवेश्वर सुतो विरेश्वर: छतौनी सै माधव दौ।। वीरेश्वर सुता धीरेश्वर रजेश्वर यटेश्वरा: वभनियाम सै राम दौ।। रजेश्वर सुतौ वासुदेव विभूकौ छादन सरिसब सै शिवादित्य दौ विभू सुतर बुधवाल सै हिरू दौ रेकौरा गंगोली सै मण्डन द्दौणा।। मण्डुआ सै नित्यानन्दकरतुतल सदुपाध्याय विश्वेश्वर सुतौ रातूक: पण्डौली दरिहरा सै मुनिदौ (07/04) अपरा देवधर पण्डौलीवासी ए सुतौ उदयकर गौढि़जल्लकी सै खड़गधर दौ।। गोढि़ सुतो वाभन: विठुवाल वासी भण्डारिसम सै जगाई दौ।। ए सुता सप्त: धृतिकर गुणाकर सोमेश्वर रत्नाकर भीमेश्वर गुणेश्वर रज्जेश्वरा: तत्राद्यो गंगोर सै नारायणा दौ।। अपरै सुसैला खलय सै बलभद्रदौ सोमेश्वर सुता वत्सेश्वर सिद्धेश्वर (21/03) (22/04) वीरेश्वर जीवेश्वरा: तत्राद्यास्त्रय अहपुर करमहा सै रूचिकर दौ अन्त्यो तपनपुर पाली सै नरसिंह दौ।। (47) वीरेश्वर सुतौ मुनिर्नाम्ना (19/01) विदित: ए सुता दिवाकर (21/09) रविकर मित्रकरा: (56/05) बभनियाम सै गोनन दौ (06/07) महवाल सै दिवाकर द्दौणा।। अपरौ हरिकर: तल्हनपुर सै लमशर्म्म दौ (07/09) लभशर्म्मा सुता चोटवाल सकराढी सै गोविनद दौ।। चोटवाल सकराढ़ी सै बीजी सिद्धेश्वर: ए सुतौ धृतिवर्द्धन त्रिलोचन प्रo नामा: ए सुतौ हरदत्त: ।। ए सुता महादेव शिवदेव सिद्धेश्वरा:।। महादेव सुतौ व्यास बासुदेवौ: बासुदेव सुतो कुसुमाकर: बहेराढ़ी सै जयकंठ दौ।। अपरौ कान्ह: अपरा नीमाटकबाल सै रत्नेश्वर दौ।। ए सुता गोविन्द माधवजगन्नाथा: यमुगामसै हरदत्त दौ।। गोविन्द सुता सुरगनसै दुर्गादत्तदौ रात सुता (135/06) (48/07) (135/02) भवे माधव रामा बेलउँच सै धर्मादित्य दौ।। (10/03) (72/10) धर्मादित्य सुतो रतिकर वागूकौ खौआल सै उँमापति दौ (11/02) कान्ह सुतो नरसिंह: सुइरी सै धर्माध्यक्षक देवे दौ।। अपरौ (20/0/10) डालूक: सरौनी सै धर्माध्यक्षक गढ़ाउन दौ।। नरसिंह सुतौ धर्माध्यक्षक लभशर्म्म: गोधेलि अलय सै भोगीश्वर दौ।। लभशर्म्म सुता पनिहत नोने उँमापतिय:गोधोलि खलप सै देवेस्मैव दौ।। तैनेवदत्तक:।। अन्त्यो केथौनी टकबाल सै जगद्धर सुत कान्ह दौ।। उँमापति सुतो (25/03) रमापति केउँटराम पण्डोली सै दामोदर दौ।। ब्रहमपुरा सै पृथ्वीधर द्दौणा (27/04) राम सुता हरिअम सै नोने सुत दिनू दौ (12/0/10) (41/09) माधव सुतौ (18/08) माई नाई कौ पंचवक विस्फी सै असाउँन दौ।। नाई सुतो धारूक: गंगोर सै अनिरूद्ध दौ (07/07) विश्वनाथ सुता लक्ष्मीनाथ शशिनाथ हरिनाथ भवनाथ जगन्नाथा: पाली सै ऐलो दौ।। शशिनाथसुतो अनिरूद्ध नोने कौ फनन्दह सै लखाई दौ।। (48) ''16'' अनिरूद्ध सुतो लोकेक सै सुत दौ सै द्दौणा।। धारू सुतो नोनेक: माण्डर सै कीर्तिधर दौ (02/02) अपर शिलपाणि सुतो शुभंकर: ए सुतौ रत्नाकर ए सुतौ चांड़ो कीर्तिधरौ नरवालसै नयधर दौ।। कीर्तिधरसुता श्रीधर पृथ्वीधर प्राणधर मुक्रिधर धर्मधरा: पनिचोभसै हरिहर दौ (25/08) नोने सुता दिनू (26/04) रति मति गुणैका: (46/04) एकमा वलियाससै नितिकर दौ (10/05) मित्रकर सुतोनितिकर: ए सुतौ (306/01) चन्द्रक्रर विभाकरौ (35/08) पालीसै भगवं दौ।। गणपति सुतौ भगव: दुबासै शुचिकर द्दौणा।। भगव सुता सिम्मुनाम करमहासै चारूदत्त दौ।। शाण्डिल्य गोत्रे करमह सै बीजी सुरेश्वर: ए सुतो भूषण: ए सुतो अमोथ: ए सुतो गुणदेव: ए सुतौ देहरि: ए सुता महार्णव कारक मo मo उo नारायणा मुरारी खेते का महार्णव कारक महामर्होपाध्याय नारायण सुतो हिंगूक:।। अहपुर वासी मुरारी सुतोश्रीधर ए सुतो वंशधर ए सुतौ हरदत्त: ए सुता वरदत्त चारूदत्त भवदत्ता: तत्राद पा भिन्न अन्त्यो जगतिसै धारेश्वर दौ।। चारूदत्त सुता जयदत्त त्रिलाठी घुसौतसै देवदत्त दौ (11/04) सुपर सुतो देवदत्त खण्डबलासै विश्वनाथ द्दौणा।। कटाईसै भीम द्दौणा (20/10) कटाईसै भीम द्दौणा मिश्र (20/09) दिनू सुता रामकर (72/0) हलधर दामोदरा: (57/03) माण्डरसै लगाई दौ (02/04) नन्दीश्वर सुतौ जीवेश्वर वागीश्वरौ तियुरी सैगंगेश्वर दौ पदूमनामति वासी ए सुतौ लक्ष्मीपति: विस्फीसै मधुकर दौ।। ए सुतो भवेश्वर: खनौरी सकराढ़ीसै धर्माध्यपक्षक सर्वानन्द द्दौणा।। ए सुता गंगेश्वर जगद्धर शिवशम्मा सुरगनसॅ चाकौ दौ।। (49) गंगोर सै साबे द्दौणा।। गंगेश्वर सुतो गिरीश्वर नरसिंहो बेला सकराढ़ी सै हरदत्त दौ पनिचोभ सै महादेव द्दौणा।। (58/07) बागेश्वर सुता दूबे नगाई हिराई का: कुजौली सै राजू दौ (04/05) गंगोली सै केशव द्दौणा।। नगाई सुता श्रीदत्त चाको नरसिंह विश्वम्भरा: दिनारी सरिसब सै चाको दौ।। दिनारी सरिसब सै बीजी जनार्दन।। जनार्दन सुतो माने देवे कौ।। माने सुतो प्राणधर: प्राणधर सुता चांड़ो जीवे दिने भिखे बिठूका: दहुला सै ब्रहमेश्वर दौ चांड़ो सुता रूद (23/01) जगन्नाथ भवेश्वरा: मघेटा पाली सै महेश्वर दौ।। एवं जगन्नाथ मातृक का चक्र।। जगन्नाथ सुतो (155/09) हरिकेश लक्ष्मीपति विरपुर पनिचोभ सै शम्भू दौ (10/03) विश्वनाथ सुतो (41/05) राम: माण्डरसै कापनि माधवदौ।। राम सुतो बाटूक: पबौली सै मेढू दौ (11/07) हलधर सुता राम हेढ़मेढ़ का: डीह दरिहरा सै हरिहर मेढ सुता दो पोखरौ टकबाल सै शुक्ल भिखारी दौ (03/09) शुक्ल भिखारी सुतो चिलकौर दरिहरा सै गांगु दौ भानुर सरौनी सै हरिवंश द्दौणा।। बाढ़ सुता रातू (140/04) हारू महेश्वर बागू फलहारी (27/08) दिनकर मधुकरा:।। तत्र द्यो: पंच पत्उना खौआल सै राम दौ अन्त्यो गढ़ विस्फीसैमहत्तक होराई दौ।। माहब बरेबा सै रूद द्दौणा।। सिद्धेश्वर सुतो राम चाको कौ पिहवाल सै रूद दौ अलय सै रूद द्दौणा।। राम सुतो गोपाल मुरारि: कोइयार सै गुणाकर दौ।। कोइयार सै बीजी शूलपाणि: ए सुतो सिधूक: ए सुता देल्हन विश्वनाथ श्रीनाथा: सिंहाश्रम सै विद्यापति दौ।। देल्हन सुतो जीवधर: ए सुतौ पृथ्वीधर ए सुतो गुणाकर: ए सुल हरिसिंहपुर निखूति सै जीवेश्वर सुत गोंढि दौ।। बागू सुता खांतू (40/10) छीतर मितू (26/05) गोविन्द (26/05) बाछ लाखू का: (30/01) तत्रादया पंच चान्दो वलियास सै होरे दौ गंगोर सै विश्वनाथ:।। (50) ''17'' (07/08) शिवनाथ सुतो पद्मनाथ: टकबाल सै सोनमनि दौ. चाउँटी टकबाल सै बीजी रत्नेश्वर: ए सुतो गणेश्वर: ए सुतो रत्नाकर प्रभाकर धर्मकर सूर्यकरा:।। रत्नाकर सुतो सोनमनि: दोहाइन विस्फी सै अरविन्द दौ।। सोनमनि सुतौ नरसिंह हरिसिंहो अलारि दिधोय सै श्रीधर दौ।। खांतू सुता (84/07) डालू महो सुपे महिधर पॉंखू शम्मू का: जजिवाल सै रतिकर दौ (08/03) (37/06) गौरीश्वर सुतौ आवस्थिक सिद्धेश्वर विन्ध्यैश्वरो माड़र सै वाहन दौ।। आलपिक सिद्धेश्वर सुता गयन घनेश नोने कोचे इन्द्रेका: पकलिया सै नयदेव दौ।। इन्द्र सुतो सोम भवेकौ बसुआली सै छीतर दौ।। सोम सुता (36/02) गोपाल नारू भगव (31/05) दामूका: मण्डारिसम सै साठू दौ।। अपरौ रतिकर मांगुकौ पण्डौली सै लक्ष्मीकर दौ रतिकर सुतो मति हरि: करहिया पनिचोभ सै प्रितिकर दौ (08/05) प्रितिकर सुता थरिया सै आनू दौ।। थरिया सै: ए सुतौ होरेक: दिघोय मातृक:।। होरे सुता रविनाथ जगन्नाथ नयनाथ शिक्रनाथ लक्ष्मीनाथा बुजौलीता सै वर्द्धमान दौ।। रविनाथसुता आनू गोपाल वुद्धिकरा: फेनहथ गंगोली सै होरे भागिनेय: आनू सुता आदू नादू बासू गांगू का: खजूरी पानिचोभ सै रघुपतिसुत रताई दौ करहिया वासी बुजौली सै त्रिपुरे द्दौणा शम्भू सुतो चिकूक: बुजौली सै जोर दौ (04/02) शुभंकर सुतो गोंढि पण्डोली सै रूद्रभागिनेय: ए सुतौ महिपति वानू कौ विनती सै पराक् अच्युत दौ।। बानू सुतो मानेक: निसूरी सै भवेश्वर दौ।। माने सुतो गोपाल: टकबाल सै गुणाकर दौ शिलपाणि केथौनीवासी।। ए सुतो जगदेव वरदेवौ बुधौरा सै मणिकंठ दौ।। वरदेव सुतो गुणाकर: इबासै शिवशर्म्म दौ।। गुणाकर सुता।। (51) जजिo भवदत्त दौ।। सकराढ़ी सै लभशर्म्म द्दौणा गोपाल सुतो (22/08) (23/03) श्री वर्द्धनौ वंशवर्द्धन दूबा सकराढ़ी सै विम दौ (15/06) बुधवाल सै हिरू द्दौणा।। वंशवर्द्धन सुतो (35/09) (72/05) जीवे जोरो गढ़माण्डर सै बागे दौ (07/03) यमुगाम सै जीवेश्वर द्दौणा (72/05) जोर सुतो (153/08) गोविन्द: माण्डर सै शिवपति दौ (02/05) महामहोपाध्याय (20/01/0) मटेश सुता सदुo महो पशुपति महो रघुपति (23/06) महो आङनि महो (31/08) रतिपतिय: पनिचोभ सै जीवेश्वर दौ (10/02) देवशर्म्म सुतो ब्रहमशर्म्म ए सुतो जयशर्म्मा सिंहाश्रम सै विधापति दौ मन्दबाल सै विरदोहिब द्दौणा।। जयशर्म्म सुतो जगद्धर रतिधरौ करमहा सै खेते दौ।। कलिया सै वीर द्दौणा।। अपरौ रामकर: दरिहरा सै जनमेजय दौ।। जगद्धर सुतौ जीवेश्वर भवेश्वरौ सरिसब सै गयपाणि सुत हल्लैश्वर दौ।। जीवेश्वर सुता (241/01/27/04) मधुकर नोने नाथै का: ब्रह्मपुरा दिधोय सै मुझे सुत मासौ दौ पनिचोभ सै नयदेव द्दौणा अपरौ रातूक: कटाई सौ भीम दौ।। कटाई सै बीजी वाचस्पति: ए सुतौ देवपाणि ऐलपाणि।। ऐलपाणि सुतौ मौरीक: मौरी सुतो वीर: वीर सुता हरि पुरूषोत्तम श्रीपतिय:।। श्रीपति सुतो गंगाधर:।। गंगाधर सुतो कवि केशरी महामहोपाध्यायभीम: निखूति सै सुरेश्वर दौ।। भीम सुतो देवेश्वर: निखूति सै रतिकर दौ।। सदुo महो पशुपति सुतो (26/04) तत्र कृष्णपति: अलय सै महामहोपाध्याय रामेश्वर दौ दरिहरासै रति द्दौणा अपरा पशुपति सुतो महो गुणपति महो शिवपति महो (20/07) इन्द्रपतिय: सोदरपुर सै महामहोपाठ विश्वनाथ दौ।। (15/09) महामहोपाध्याय सुरेश्वर सुतौ महामहोपासरबए महामहोपाo विश्वनाथौ आद्यो हथिबन सकरी सै देवपति दौ अन्त्यो वलियास सै धर्मनिधि सुत हरिनिधिदौ अलयसँ द्दौणा मo मoउo विश्वनाथ सुतौ रामनाथ रतिनाथौ खौआल सै दामोदर सुत दिवाकर (22/01/0) (23/09) (19/01) (52) दौ महवाल सै देहरि द्दौणा।। महो शिवपति (48/05) सुतौ यग्यपति (32/07) अलय सै बुद्धिधर प्रo वुधेदौ।। (02/01/11) महोग्रहेश्वर सुता धर्माधिकरणिक महोमहोपाध्याय गदाघर (42/06) प्रo रातु रत्नघर वुद्धिकर प्रo वुधे सुद बेलउँच सै धरादित्य दौ (10/03) भरेहा सै गणपति द्दौणा (21/01) वुद्धिधर प्रo वुधे सुता रधु कान्ह गणपतिय: गंगोली सै शिरू दौ (01/04) अपरा शूलपाणि सुत शंखद कमलपाणि शारड़पाणिय: कुमर वासिन्य: पालीसै जयपाणि दौ।। कमलपाणि सुतौ रामदेव लक्ष्मीकरौ।। लक्ष्मीकर सुतौ डालूक: बेलउँच सै अभिनन्द दे डालू सुतौ शिरूक: सकुरी सै धृतिपाणि दौ सकुरीसै बीजी मo मo प्राo देयीक: ए सुतो हरदत्त लक्ष्मीपाणि।। लक्ष्मीपाणि सुतो गंगापाणि।। गंगापाणि धर्मपाणि।। ए सुतो धृतिपाणि रत्नपाणि जालयसै दाश दौ।। धृतिपाणि सुता थूवनिसैधाम दौ।। शिरू सुता महिधर हलधर रामधरा: फनन्दह नरसिहं दौ (05/02) रत्नेश्वर सुतौ भीम (20/06) गुणे कौ तत्रादयो जगतिसै सिधू दौ अन्त्यो गंगोर सै वाराह द्दौणा।। भीम सुतो नरसिहं किठौकौ मध्विल सै देहरिदौ।। नरसिंह सुता श्रीकर कुसुमाकर मुधकरा: करमौली गंगोली सै पण्डित करण सुत साधुकर दौ सै द्दौणा एवं ठ. कृष्णानन्द मातृक चक्र अपए म. म. उपा ठ. रामभद्र सुता ठ.हरिदेव महामहो ठ. (105/04) रामदेव महामहो ठ रतिदेव महामहो ठ. कृष्णदेव महामहो ठ लक्ष्मीदेवा हरिउम सै मणि सुत जगन्नाथ दौ (16/01) मौई सुतौ (25/07) गांगु हारू कौ सिसै सकo महेश्वर दौ।। हारू सुता बासुदेव हलधर श्रीधर शिरू का: (शिरकता) माण्डर सै गुणे सुत गयन दौ (02/04) अपरा गुणेसुतौ गयन शोरेकौ पोरवरौनीटक बo (14/09) (53) दामोदर दौ।। मिश्र (20/06) गयन सुतौ होरे बाछेकौ हरिसिंहपुर निखूतिसै गोंढि़ सुत महिधर दौ गंगुआलसै गौरीपति द्दौणा (39/08) शिरू सुतो (55/07) नारायण शिवौ वलिया रूचि दौ।। चण्डेवश्वर सुतो हरानन्द: टकoजीवे दौ हरानन्द सुतो (49/05) सुरानन्द रूचि टकo शिरी दौ।। रूचि सुता धर्मादित्य महादिल (63/04) रत्नदित्या: नरउन सै तपन सुत यटाधर दौ विस्फी सै रविशर्म्म द्दौणा (48/01) शिव सुता महो मणि (56/02) पोखू (32/07) गयणा: खौआलसै विभाकर दौ (14/05) अपरा साधुकर सुतो श्रीकर (31/06) शुचिकरौ करमहा सै नोनेसुत रामशर्म्म दौ पकलिया सै मासौ द्दौणा (75/09) श्रीकर सुतो रामकर विभाकरौ गंगोर सै केशव सुत नोने दौ (07/09) अपरा विदू सुतो हरिनाथ: पालीसै हिंगू दौ।। हरिनाथ सुतो गौरीनाथ: सकo पदमपाणि दौ।। गौरीना सुतो शक्रिनाथ: भणुरिसमसै लखाई दौ शक्रिनाथ सुतो केशवनाथ: जगती सै वर्द्धन दौ।। केशवनाथ सुता नोने सुभाकर शुभकर रतिकरा: पालीसै दुर्गादित्य दौ (05/02) प्रितिकर सुतो पद्मकर ए सुतौ दुर्गादित्य त्वदौरसै रत्ननेश्वर दौ।। ए सुतो धरादित्य: (28/02) वलियास सै रामशर्म्म दौ टकo वत्सेश्वर द्दौणा नोने सुता खौआल सै शुचिकर सुत हेलू दौ करमहा सै गौरी द्दौणा विभाकर (54/01) त्वदौरसै रत्नेश्वर दौ।। ए सुतौ धरादित्य: (28/02) वलियास सै रामशर्म्म दौ टकoवत्सेश्वर द्दौणा नोने सुता खौआल सै शुचिकर सुत हेलू दौ करमहा सै गौरी द्दौणा विभाकर (54/01) सुता (81/04) शंकर मित्रकर (20/09) रविकर: (96/05) बहेराढ़ी सै ढोंढ़े दौ (09/04) अपरा रवि सुतो गांगुक: बेला सकराढ़ी सै भोगीश्वरसुत चक्रेश्वर दौ मनपुरसैरेधर द्दौणा गांगूक (228/06) गाद सुतो धाम ढ़ोंढ़े कौ चुन्नी वलियास सै दिनमणि दौ (11/03) दिनमणि सुतो रत्नाकर: टकo शुचिकरसुत थेघ दौ सकराढ़ी सै नयपति द्दौणा ढ़ोंढ़े सुता पिलखा माण्डर (39/02) विभूसुत मानुकर दौ (09/06) विमु सुतो मानुकर: गंगोली सै जीवेश्वर दौ मानुकर सुतो (53/06) वृद्धिका शुभंकरौ सकौना सै गोपालसुत गौरीपति दौ।। हरिहरसुतो गोपाल सुतो नन्दीय (24/01) गोरीपति सरिसबसै धरणीधर दौ।। गौरीपति सुता दिघोय सै जादू द्दौणा एवं मणि मातृक चक्रं।। मिश्र मणि सुता जानू मुकुन्द जगन्नाथ उँमापतिय: सोदरपुर सै श्रीधर दौ।। (54) ''19'' (18/10/0) रतिनाथ (24/04) सुतो डालू बाटू कौ दरिहरा सै विरेश्वर सुत मूनी दौ (16/01) तल्हनपुर सै लशर्म्मक द्दौणा (31/07) वाटू सुतौ (128/04) हलधर श्री धरौ माण्डर सै सुधाकरसुत होरे दो (09/03) सुधाकर सुता होरे (95/06) (48/07) शोरे नाई शिरूका: करमहा सै गंगेश्वर दौ (02/08) खौआल सै आंगू द्दौणा।। होरे सुतो रत्नपाणि देवपाणि नरउन सै खातू दौ (08/02) डालू खांतू (30/04) रतिकरौ सकo जीवेश्वरदौ खण्डo जाई द्दौणा खांतू सुतो सुपन शुचिकरौ (49/08) (27/06) माण्डर सै बागेदौ (07/03) यमुगाम सै जीवेश्वर द्दौणा।। श्रीधर सुतो वेणी (59/09) अन्दूकौ वुधवाल सै शिरूदौ।। सदुपाध्याय मानूकर सुता महेश्वर (491/01) गौरीश्वर (36/06) विश्वेश्वरा: दरिहरा सै प्रितिशर्म्म दौ (11/07) यमुगाम सै जीवेश्वर द्दौणा (26/07) महेश्वर सुतो शिरू (25/06) पोखूको माण्डरसै अमतू सुत रविदत्त दौ (02/05) सदुपाध्याय अमन्त सुता रविदत्त (91/01) वासुदेव हरिदत्ता: खण्डबला सै देहरि दौ।। रविदत्त सुता टकबाल सै बाटु दौ (09/04) नरवालसै यशु दौहित्र (27/09) शिरू सुता (35/09) लाखू (56/05) सीथू ( 30/04) मानेका: बेलउँच सै जीवादित्य सुत जोर दौ (10/03) महो जिवादित्य सुता जोर मदन (83/08) दिनकर हरिकरा: बुधवालसै शुभंकर दौ विस्फी सै कीर्तिधर द्दौणा।। जोर सुतो कोने (252/01/) श्रीपति पवौली सै देवधर दौ (141/04) महिधर सुतो देवधर: सफo नयपति द्दौणा देवधर सुता वलियास सै भिखे सुत हिरम दौ (11/03) जालय सै द्दौणा।। एवं जगन्नाथ प्रo जागे मातृक चक्रं (61/02) जगन्नाथ सुतो रामदेव कामदेवौ सोदरपुर सै बागे सुत सुपे दौ (15/04) विश्वेश्वर सुतो यटाधर: खौआल भूले दौ। (03/05) (84/05) देवादित्य सुतो पौखूक: ए सुतो भूलेक: खण्डबला सै शिवनाथ दौ।। भूले सुता पइम (21/01/0) राम केउटू का कुजौली सै राजू दौ।। गंगो सै केशव दौहित्र यटाधर सुतो बागेक: धोसोत सै रतिकान्त सुत कीर्तिकर दौ।। धोसोतसै बीजी महामहोपाध्याय वासुदेव: ए सुतौ दिवाकर ए सुतो खेइक: ए सुतो हे ए सुतौ (23/08) रूचिकर प्रज्ञाकरौ।। प्रजाकर सुतौ (29/04) विस्फी सै धारेश्वर दौ।। ए सुतौ रतिकान्त सुपनौ माण्डरसै सुत हरदत्त केउँटासमसै माने द्दौणा।। (55) रतिकान्त सुतो (25/07) गुणाकर कीर्तिकरौ खौआल सै शुचिकर दौ (03/06) (26/04) शुचिकर सुतौ नोने यवे कौ करमहा सै नितिकर दौ।। कीर्तिकरसुतौ इबे चौ को सुपरानी गंगोली सै होरे दौ (05/07) धीर सुतो होरेक: वलिo अशोमनि दौ।। होरे सुता पनिचोभ सै जीवेश्वर दौ (18/05) ब्रहमपुरा दिघोय सै मासौ (76/01) बागे सुतो सुपेक: पानिoग्रहेश्वर दौ (17/06) महेश्वर सुता हरिश्वर ग्रहेश्वर शिवा माण्डर सै वागेश्वरसुत रूचिकर दौ पचटो जजिबाल सै भव द्दौणा (66/02) ग्रहेश्वर सुता (44/06) अन्टू पुरखू रति मण्डना: सरिसब सै गणेश्वर दौ।। (14/08) दामू सुता रामेश्वर माने (29/05) सोनेका: वरूआली सै सोखे दौ (27/03) माने सुतो ग्रहेश्वर (38/07) (41/06) ब्रहमपुरा ढरिहरा सै भवशर्म्भ द्दौणा गणेश्वर सुता विरेश्वर यरेश्वर बटेश्वरा (98/08) खनाम फनन्दह सै मुरारि दौ (05/03) गंगेश्वर सुतो देवधर सकरा श्रीपति दौ।। ए सुतौ पुराई बलहावलियास सै रपाजो द्दौणा पुराई सुता दामू गयन बनू रेणुरधुका: (237/0341/03) पण्डौलि दरिहरा सै धुतिकर सुत नाइ दौ दिघोसै साठ सुपे मातृक चक्रं।। सुपे सुता गाइ (74/05) राधव होरिल (66/03) वावू चिकू मतिय: रजौए माण्डर सै दुखाडि सुत रतिकर दौ (18/09) इन्द्रपति सुतौ वाचस्यति दुखाडि़ प्रसिद्ध नामा तरौनी करमहा सै वाराह दौ वाराह सुतो रवि देवे कौ खण्डबला सै ज्ञानपति दौ वलियास सै बाढ़ द्दौणा (29/08) दुखडि़सुत (223/06) (73/01) शंकर मधुकर रतिकर मतिकरा: पाली सै रविनाथ दौ (14/03) (75/09) मुरारी सुतो रविनाथ: नरउन सै कोने दौ (14/05) सकराढ़ी सै जीवेश्वर दौहित्र दौ रविनाथ सुता खौआल सै रविनाथ दौ (16/06) डालू सुतो बांतर: ए सुतौ विश्वनाथ सरिसब सै पिथाई द्दौणा विश्वनाथ सुतौ माधवनाथ (21/04) रघुनाथों खण्डबला सै भवेश्वर द्दौणा माधव (24/02) माधव सुतौ रविनाथ: सुपरानी गंगोली सै धीर सुत पौखू दौ जालय सै होरे द्दौणा रविनाथ सुतौ (21/02) (56) ''20'' शंकरनाथ पाली सै यशु दौ (05/05) मo मo बाछे सुता (21/05) रवि यशु वासूका एकमा खण्डबला सै हरिनाथ दौ।। यशु सुतो (36/08) सुरथ: सुरगन सै विरेश्वर दौ नरउन सै गणपति दौ रतिकर सुता शिरू रूचि मुरारी कृष्णा: बेलउँच सै नोने दौ (10/04) मित्रादित्य सुता (21/07) मित्रादित्य सुता नारू (71/05) गोपी नोने चक्रपाणिय: (51/03) अहपुरकरमहा सै शुभंशर सुत मधुकर दौ लक्ष्मीकर सुत शुभंकर सुतो मधुकर: नीo भीमदौ।। मधुकर सुतो आदित्य: वलियास सै देवानन्द सुत यशानन्द दौ अलय सै बागे द्दौणा नोने सुता श्री कुमार (159/04) (70/06) बसावन विलाश हिरइ (24/10) बेगम भानुकरौ वदिo पवौली सै देवदत्त दौ।। जगद्धर सुतो दिवाकर ए सुते सुपन: अलय सै भव दौ।। सुपन सुता (34/06) श्रीदत्त लक्ष्मीदत्त हरदत्त हेवदत्ता: एकहरा सै धामसुत गणपति दौ सकo हरिहर द्दौणा।। देवदत्त सुतो (21/0) (40/09) गोगेक: फनन्द विश्वनाथ दौ (18/06) गुणे सुतो मोरीक: खण्डबला सै धीर दौ मोरि सुता विश्वनाथ हरिनाथ (76/07) शिवनाथा: माण्डर सै गयन दौ (19/06) अपरागयन सुता (51/04) वीर सुरसर (22/02) गिरीश्वरा: (27/05) तिसउँत सै गयन सुत नरसिंह दौ दरिहरा सै मुनि द्दौणा विश्वनाथ सुतो शुचिनाथ: (84/06) एकमा खण्डबला सै मतिश्वर सुत शिवू दौ (11/01) थरिया सै रविनाथ द्दौणा।। एवं 6. हरिदेवादि मातृकचक्रं।। अपरा मo मo उo ठo भवदेव मo मo उपाo रामभद्र सुता मoमo उo ठo मधुसूदन उo ठo कामदेवा: खौआल सै श्रीधर दौहित्र दौ (19/08) मित्रकर (34/02) सुतो श्रीधर: कटमाहरिअम सै दिनू दौ (16/07) अपरा दिनू सुतो अमरूकमलूकौ ब्रहमपुरा जजिवाल सै कुश दौ (12/07) (25/08) नारू सुतो कुश: खौआल सै विश्वनाथ दौ (20/01/) खण्डबला सै भवेश्वर द्दौणा।। कुश सुतो देहरि: कनसम मण्डर सै सुरपति दौ (18/02) अपरा म. म. उपाo बटेश सुतो (22/04) पक्षधर सुरपति खण्डबला सै लोहर दौ सुरपतिसु (25/01) सुरपतित सु (28/21) (33/02) भवे सोम रत्नेश्वर महेश्वरा: एकमा खण्डबला सै राजू दौ (11/02) रातू सुतो राजूक: दहनो सै धएई दौ (44/08) (22/09) राजू सुतो शान्हीक: सकराढ़ी सै श्रीधर सुत शिरू दौ।। (57) एवं श्रीधर मात्रिक चक्रं।। श्रीधर सुतौ ज्योतिविर्वद (79/04) डीङर: महिया सोदरपुर सै महिपति दौ (15/09) जीवेश्वर सुतौ गणपति (24/84) हेरदत्तो बलिया सै रतिकर दौ।। गणपति सुते वर्दन कान्हो विस्फी सै लड़ावन दौ।। (49/01) वर्द्धन सुतौ हरिनाथ लोकनाथो (57/05) माण्डर सै छीतू सुत भवदत्त दौ (22/07) पौखू सुत छीतू सुतौ हरदत्त भवदत्तो अलय सै राम: (26/07) भवदत्त सुतौ केशव पबौलि सै गोढि दौ।। (23/10) हरिनाथ सुतौ नोनेक: दरिहरा सै राम दौ (15/09) वत्सेश्वर सुतौ एम: सकुरी सै देवपति दौ।। राम सुता पनिचोभ सै समढ़ सुत गोविन्द दौ (89/01) नो सुता सुपनदाशे (81/03) पशुपतिय: पाली सै विशो दौ (41/09) पुरूषौत्तम सुतौ आशा एमौ।। राम सुतो त्रिभुवन: ए सुतौ आदिदेव: ए सुतौ राजूक: ए सुतौ नारायण: ए सुतौ पराउँक: सकराढ़ी सै ब्रहमेश्वर दौ।। पराउँ सुता देवे (23/11) नाहू हचलूका (31/01) नाउन सै दिवाकर दौ।। नाउ सुनौ वागूक: सरिसब सै चण्डेश्वर पाली सै महेश्वर द्दौणा।। बागू सुतौ रूद्र विशौकौ माण्डर सै सुरपति दौ (20/0/0) खण्डबला सै राजू द्दौणा।। विशो सुता रति (63/04) गुणे जाने (82/02) महाई साउलेका सोदरपुर सै भद्रेश्वर दौ (15/04) (30/02) ग्रहेश्वर सुता (57/01) नन्दीश्वर भद्रेश्वर राम (39/09) कान्हु का: नाउन सै डालू दौ (10/02) सकराढी सै जीवेश्वर द्दौणा।। भद्रेश्वर सुतौ गोनन (33/1/) सोहनो गाउल करमरा सै गणवर्क जगद्धरसुत गयनसुतौ (300/11) गोरीपति सुरगन सै विरेश्वर दौ।। ए सुतौ बाइक: सुरगन सै गौरीदों।। बाइ सुता (39/1/0) रतिपति लक्ष्मीपति महिपति गणपतिय: तल्हपुरह वीर दौ।। (210/01) वीर सुतौ (24/09) गोविन्द: वभनियाम सै वीर दौ दरिoबाभन द्दौणा गणपति सुता डालू सुपनरूपना: (29/06) सकुरी गंगोली सै शोरे सुत राम दौ माण्डरहरिक एवं पशुपति मात्रिक चक्रं।। पशुपति सुतौ चिकू क: खौआल सै कमलू दौ (19/09) (28/09) राम सुता बाटू मति गहराई का: (31/05) फनन्द सै गौरी दो (20/06) माण्डर सै गयन द्दौणा (58/0) मतिसु अमरू कमलू वेद लाखू का: (25/05) (84/01) (58) ''21'' बाढ़ अलय सै वुद्धिधर प्रo वुधे दौ (8/02) वुधे सुता डीह दरिo नौरी पौत्र छीतू सुत गौरी दौ छीतर सुतौ गौरीक: सोदरपुर सै विश्वनाथ दौ।। गौरी सुतौ राजू गिरीक: सकुरी सै यशु सुत लोचन सुत नारू दौ।। कमलू सुतौ परान रूपनौ पाली सै महाई दौ (14/03) केशव सुतों सदुपाध्याय गोढक: नरo कोने दौ पलिर्णभिखे द्दौणा सदुपाध्याय गोढ़े सुता (32/05) कान्ह लाखू (39/09) महाई का: खौआल सै रघुनाथ दौ (20/11) रघुनाथ सुता (33/05) धारू सोंसे विदूका: गंगोली सै केशव दौ महाई सुतौ जीवे चान्दो खोआल सै गोविन्द दौ (03/01) लक्ष्मीधर सुतौ कवि किठो प्रoकृष्णपति।। कवि कृष्णपति सुतौ भगव: सरिo इन्द्र दौ।। भगव सुतौ (32/09) (22/01) नारायण गोविन्दो पाली सै रवि दौ (20/0) (47/08) रवि सुतो हेलूक: बलियास सै सूर्यदर दौ (10/09) मछेटा सै गणेश्वर द्दौणा।। गोविन्द सुतों (52/09) रवि होरेकौ अलय सै श्रीकर दौ (15/03) (39/09) नारायण सुतों श्रीकर शुभंकरौ (39/07) सोदरoभोगीश्वर दौ (15/04) सकराढी सै विभूओं श्रीकर सुता बेलउँच सै मित्रादित्य दौ (120/02) अपरा मित्रादित्य सुतो (101/105) वासुदेव केशवौ (34/03) सकराढ़ी सै राजा दौ।। एवम् मधुसूदन मात्रिचक्रं।। ठ. हरिदेव सुतो ठ. रघुपति: नहुआर करमहा सै केशव दौ (02/08) नरसिंह सुतो रतिकान्त: एकमा वलियास सै शिवादित्य दौ (10/05) साधुकर सुतौ (28/02) जीवेश्वर: ए सुतौ शिवादित्य: पालीसै दिवाकर दौ (33/08) शिवादित्य सुता टकबाल सै लाखू दौ।। रतिकान्तैं सुतौ श्री कान्त: दरिहरा सै रविकर दौ (16/011) रविकर सुतौ (32/04) बुद्धिकर गंगोर सै नोने दो (19/07) खौआल सै हेलू द्दौणा (128/04) श्री कान्त सुता (75/05) महाई कृष्णपति महो (72/08) हरपति महो (66/03) उँमापति महो जानपतिय: खौआल सै गोविन्द दौ (59) (21/05) अपरा गोविन्द सुतौ (32/02) हरि (62/07) गुणेकौ खण्डबला सै नरहरि दौ (06/09) दिवाकर सुतौ साढूक:।। साढ़ सुतौ गोपाल:।। गोपाल सुतौ नरहरि श्रीहरि दरिहरा सै शिवादित्य दौ।। नरहरि सुतो (69/04) गंगाहरि: नाउन सै डालू सुत चन्द्रकर दौ माण्डर सै विगो द्दौणा (87/04) कृष्णपति सुता रतिपति श्रीपति (89/04) रघुपतिय: जजिवाल सै सोम दौ (12/07) गोविन्द सुतौ दामू सुयनो दरिहरा सै माइ दौ (25/02) दामू प्रo दामोदर सुतोसोम: हरिअम सै हारू दौ (181/01) माण्डर सै गयन द्दौणा सोम सुता (84/09) (73/06) रूद रवि रामा: सरहद माण्डर सै धनपति दौ (20/001) (39/06) पक्षधर सुता धनपति (33/08) विद्युपति शुभपतिय: पनिचोभ सै मधुकर सुत हरिकर दौ मधुकर सुत हरिकर सुतों श्रीकर: गंगोली सै पौखू दो।। धनपति सुतौ विष्णुपति (62/05) हरिपति तिसूरी सै ग्रहेश्वर सुत सीधू दौ जमुनी जामवाल सै गोपाल द्दौणा एवं रतिपति मात्रिक चक्रं।। रतिपति सुतौ (108/08) मुरारीकेशवो माण्डर सै शुचि दे (09/05) शान्तिकरणीक (21/02) पौखू सुत रतिकर सुतौ डालूक: केउँट राम सै रूद दौ।। डालू सुता (30/09) (47/04) सवाई गदाइ हिराई का: सोदापुर सै गणपति दौ (21/01) विस्फी सै लड़ावन द्दौणा।। गढ़ाई सुता (38/04) दिनकर नन्दन विदूका: कुजौली सै श्री वर्द्धन दौ (18/0111) श्री वर्द्धन सुतौ हरिहर: खौआल सै विश्वनाथ दौ पिढ़ सुतौं शुचिकर (70/04) रघुनाथौ खण्डबला सै सान्ही दौ (20/0111) सान्ही सुतौ (40/09) उधे प्रo उद्धव नोने प्रश्नारायणों सकo शिदू सुत देवे दौ थरिo सानू द्दौणा शुचिकरा विश्वनाथ भवनाथो बभनियामसै होरे दौ (06/06) गणिपतिसुत जयादित्यसुतौ साधुकर: ए सुतौ रतनाकर छादनसँ तत्तव चिनतामणि कारक (60) ''22'' जगदगुरू गंगेश दौ।। रत्नाकर सुतौ ग्रहेश्वर: खण्डबला सै ठ. सुपन दौ।। ग्रहेश्वर सुतौ नोने होरे कौ सकराढ़ी सै भिक्रि सुत भिक्रिसुत शिरूदौ गंगुआल सै शिवाई द्दौहित्रदा (34/06) होरि सुतौ मेधवती: कटौना माण्डरसै जगति दौ (20/07) मिश्र सुरसर सुता ग्रहेश्वर हरि (39/06) (41/05) ऋषि यति कीरतू (35/08) मतिश्वरा: कुजौली सै राजू दौ (41/05) गंगोली सै पण्डित केशव द्दौणा (49/09) यति युवा करमाहा सै वुद्धिकर सुत लान्हि दौ दरिहरा सै जगन्नाथ द्दौणा केशव मात्रिक चक्रं।। केशव सुता रतौली दरिहरासै यशु सुत वाचस्यति दौ (15/09) सिद्धेश्वर सुता (30/06) सुपन रूपन ईश्वरा: करमहा सै रघु दौ (26/03) रूपन सुतौ भोगेश्वर प्रo भोगे गिरीश्वर प्रo (25/06) गिरीकौ पालीसै रामदत्त दौ (14/02) पबौली सै बागे द्दौणा भोगे सुता ब.(5/11) (30/08) गोशे शिव (37/08) शिव ओहरि मनसुखा: (55/06) हारी सोदरपुर सै वाराह दौ (51/02) अपरा राजू सुत योगेश्वर सुतौ बाराह: कञ्जोलीसै धीरकंठ दौ।। वाराह सुतौ (28/08) रति हरि वलियास सै इबे सुत श्रीधर दौ पाली सै देवशर्म्म द्दौणा मनसुख सुता पौखू यशु सुधी कान्हा: (65/04) उजान बुधवाल सै देवे दौ (11/03) (3/02) गुणीश्वर सुतो हरि देवे कौ एकहरा सै थानू दौ (13/02) रूचिकर सुतौ लक्ष्मीकर (28/05) आनन्दकरौ करमहा सै महिपति दौ।। आनन्दकर सुतौ धानूक: गंगोली सै रामकर दौ।। यानू (26/06) (25/01) सुता थीत दिनेका: (371/05) दरिहरा सै प्रिति शर्म्म दौ (11/07) यमुगाम सै जीवेश्वर द्दौणा।। देवे सुतौ सोम (38/04) नोनेकौ ओगही बेलउँचसै गयादित्य दौ (10/03) महो गयादित्य सुता रघुपति रतिपति कृष्णपतिय: (29/08) भरेहा सै गुणपतिसुत केशव दौ सरगनसै देवनाथ द्दौणा एवम् यशु मात्रिकचक्र।। यशु सुतौ वाचस्यपति लाखू कौ सोदरपुरसै गदाधर दौ (18/01) मo मoउपाo विश्वनाथ सुता मo मo उपाo रघुनाथ मo मo उपाo (27/07) रघुनाथ मo मo उपाo लक्ष्मीनाथा नरउनसै प्रितिशर्म्म दौ करo नोने द्दौणा मo मo उपाo रविनाथ सुता मo मo उपाo (43/01) जीवनाथ मoमo उपाo पाठ भवनाथ परनामक अयाचीइबे महामहोपाo देवनाथा: भाण्डर (61) मo मo उo बटेश दौ (8/02) पनिचोभ सै जीवेश्वर द्दौणा मo मo उपाo(39/07) भवनाथा परनामक अयाची दूबे सुता मo मo पाo शंकर महो (43/03) महादेव महोमासे महो दाशिका: (61/05) खौआल सै रघुपति दौ (07/09) सुतो इबे (35/07) दूबे शुभकौ (30/07) पनिo बाद दौ (17/06) खौआल सै राम द्दौणा मo मo उपाo (89/05) शंकर सुता महो गढाधा महो (37/09) गोविन्द महो हरखूका: कुजौली सै सुपन दौ (18/01) वंशवर्द्धन सुता यशोधर (36/01) (43/03) सुपन रविकर लक्ष्मीकरा: (35/01) जालय (जल्लकी) सै मo मo उपाo रामेश्वर दौ (12/010) सकराढ़ी सै धृतिकर द्दौणा सुपन (30/05) सुतनसुता नाथू पौथू सांथू का: उपति सै कानह दौ (06/02) थानू सुता होरे कान्ह गोपाला: पफलिया सै बाछे दौ।। कान्ह सुता गंगोली सै गंग देव सुत भवाई दौ नाउन सै चक्रेश्वर द्दौणा महामहो गदाधर सुता उँमापति धनपति भूवन (51/01) (166/07) भूवन ध्रूवानन्द भूवदानन्दा: विजनपुर दरिहरा सै नरपति दौ (06) महो धृतिपति सुतौ (25/09) भवशर्म्मा गोविन्द शर्म्मणौ तिसउँत सै नोने दौ भवशर्म्म (25/09) सुतौ वर्द्धमान यटाधरौ खण्डबला सै सोम दौ।। बर्द्धमान सुतौ खांतू विभूकौ फनन्दह सै नरसिहं दौ (18/07) गंगोली सै साधुकर दैहित्र दौ खांतूसुता घनपति (47/06) कुलपति नरपति (76/05) चन्द्रपतिय: कुजौली सै सोमकर दौ (04/05) सोमकर सुतो मांगुक: सरिसब सै श्रीकर दौ।। नरपति सुतो मुथे (112/102) जनादिनों घुसौत सै हरि दौ (19/01/) रूचिकर सुतो शिवाईक: शिवदि सुतौ दामोदर: माण्डर सै हरदत्त दौ (19/0) केउँटराम सै माने द्दौणा दामोदर सुतौ हरिअलूक: करमहा सै मधुकर दौ वलियास सै जसानन्द द्दौणा हरिसुता सकo लाखू सुत श्री कर दौ भिगुआ सै माधव द्दौणा एवं वाचस्पति मात्रिक चक्रं।। वाचस्यति सुता महियासोदरपुर सै परान दौ (21/02) हरिनाथ सुतो रूचिनाथ कीर्तिनाथो (31/05) कुoवंशवर्द्धन दौ (23/03) जलाय सै रामेश्वर द्दौणा रूचिनाक सुतो गोढेक: पालीसै गांगु दौ (21/05) देवेसुतो माधव: सकo सइ दौ।। माधवसुतौ।। (62) गांगूक: माण्डर सै नन्दीश्वर सुत वागीश्वर दौ खण्डबला सै गौढि द्दौणा गांगुसुतरति:सरिसक सै रूद दौ (71/04) रूद सुता सकराढ़ी सै जाई दौ (04/01) कुजौली सै राजू द्दौणा एवं गोढि़ मात्रिक चक्रं बo (20/05) गोढि़ सुतौ परानहृषिकेशों टकबाल सै रामकर सुत बाछे दौ नरधोध टकबाल सै बीजी शुचिकर: शुचिकर सुतौ थेद्य:।। रोध सुतौ प्रितिकर दामोदरो (64/08) कञ्जग्राम सकराढ़ी सै नरपति दौ।। प्रितिकर सुतौ रतिकर लाखू कौ खौआल सै महामहो देवादित्य सुत जीवे दौ सुरगन सै गंगाधर द्दौणा।। रतिकर (46/07) रतिकर सुता रामकर रविकर ढोंढेका सकराढ़ी सै भीम दौ (14/07) सदुण नाइ सुतौ भीम (64/06) सुरेश्वरो नरउन सै गंगापाश दौ भीम सुतो गंगेश्वर रतीश्वरौ अलय सै मo मoउपाo रामेश्वर दौ (02/10) दरिहरा सै एति द्दौणा।। रामकर सुतौ बाछेक: नरउन सै श्रीकर दौ।। (08/07) (43/07) श्रीकर सुतो दूमे पर उकौ माण्डर सै महो रघुपति दौ (18/03) महो रघुपति सुता (57/09) (26/07) जानेपति विभापति प्रज्ञापतिय: सोदापुर सै महामहोपाध्याय सरबए सुत खौतू दौ खौआल सै कृष्णपति द्दौणा एवं बाछे मात्रिक चक्रं।। बाछे सुता दरिहरा सै सोने सुत सौरि दौ (11/06) महामहो कीर्तिशर्म्म सुतौ केशव शिवौ बहेराढ़ी सै लड़ावन सुत सुपन दौ पबौली सै रूद द्दौणा केशव सुता बागे सोने कोने (38/02) ऋषय: पनिचोभ सै सोंसे दौ (08/05) सफराढी सै जीवेश्वर दौहित्र दौ।। सोने सुता सिरू (35/02) (50/06) कारू चन्द्र मोरि सौरिका: सोदरपुर सै रामनाथ दौ (18/10) (30/07) रामनाथ सुता वलियान सै भिखि सुत हिरमणि दो जल्लकी सै भवेश द्दौणा सोरि सुतो (32/010) (81/09) दाशे दिनेकौ पालीसै रत्नपाणि दौ (05/04) (59/0) नरसिहं सुता श्रीधर गुणीश्वर गोपाला: (31/06) एकहरा सै रूचिकर दौ गोयाल सुतौ रत्नपाणि (63) रूद्रपाणि माण्डर सै मिश्र गरान सुत वीर दौ राउढ़ सै श्रीमाथ द्दौणा (24) रत्नपाणिसुता महाई (50/05) विक्रम (55/03) (53/01) राम का: खौआल सै श्रीकर दौ (19/04) गंगोर सै नोने द्दौणा रापरान मात्रिक्रचकं परान सुतौ (96/09) अर्जुन कामदेवौ खडीक खौआल सै कुश सुत वेणी दौ (20/11) (48/08) माधवसुतौ रूचिनाथ: धुसौत सै धृतिकर सुत हरिकर दौ सरिसब सै सुधाकर द्दौणा रूचिनाथ सुता (56/10) लव कुश शिव (52/02) गौरी (35/09) केशवा पाली सै हरिकर दौ (10/05) प्राणधर सुता हरिकर सुधाकर (34/02) शुभकरा दरिहरा सै (63/05) रूद्र दौ (195/0) हरिकर सुतौ गुणाकर (29/0) (58/07) जोरो खौआल सै साधुकर दौ (19/02) करमहा सै रामशर्म्म द्दौणा कुश सुतो वेणीक: सोदरपुर सै शिव दौ (19/01) डालू सुता शिव अफैल (42/08) (74/04) लाखू गाइका: (26/01) माण्डर सै आङनि दौ (18/03) (27/09) आङनि सुतौ नरपति (40/07) (32/05) रविपति करमहा सै गंगेश्वर दौ (02/08) खौआलसै आडू द्दौणा शिव सुतौ उघोरणकाशी (51/03) सतलखा सै भाष्कर दौ सतलखा सै बीजी मतिकर: ए सुतौ सिधूक: ख सुतौ रत्नाकर: वुधवाल सै मधुकर दौ (11/01) खण्डबला सै ठ. सुपे द्दौणा रत्नाकर सुता (24/05) हरिकर भाष्कर दिवाकर (39/09) (26/05) (33/09) चन्द्रकर सकरा: बेलउँच सै धरादित्य दौ (10/04) भरेहासै गणपति द्दौणा भाष्कर सुतो थेध: वुधवाल सै शुभंकर सुत दामोदर दौ वलियासै नितिकर द्दौणा एवं वेणी मात्रिक चक्रं।। वेणी सुतौ पीताम्बर: टकबाल सै रूद सुत गांगु दौ (09/06) रूद सुतौ गांगुक: तल्हनपुर सै जोर दौ गोविन्द सुतौ जोर: माण्डर सै अमतू सुत हरदत्त दौ फनन्दह सै शोरे द्दौणा गांगु सुतो नन्दीपति बेलoहरिहर दौ (20/04) हिरइ सुतौ (65/06) (64) हरिहर मधुसरवाइ (50/02) (145/03) राम का: पबौलि सै शिवदत्त दौ (20/05) देवदत्त (35/07) सुतौ सदुपाध्याय शिवदत्त भवदत्तौ: माण्डर सै गयन दौ (20/06) तिसुरी सै नरसिंह द्दौणा सदुपाध्याय (30/08) शिवदत्त सुता जालय सै महामहक महिधर दौ (12/01) महामह कमहिधर सुता सोम (56/09) भोगा जीवेका: यमुगाम सै गनाई दौ।। हरिहर सुतावर्दन ठकरू भमरूक सकरादी से देवे दो (08/05) चांड़ो सुतौ गुणीश्वर: गंगोली सै बराह दौ।। ए सुतौ रतीश्र (39/10) मतीश्वरौ गंगोली सै माने द्दौ।। रतीश्वर सुता (34/09) (62/06) लाखू भोगे देमे गोढ़े का: (3/06) खण्डबला सै मतिश्वर सुत सिधूदौ थरिया सै रविनाथ द्दौणा देवे सुता (63/06) (71/04) (61/09) नागे शिव महाईका: सोदरपुर सै शुभदत्त (21/01) हरदत्त सुतौ माधवदत्त: सकराढ़ी सै सैकुली दौ माधवदत्त सुतौ शुभदत्त: फरमहा सै मांगु दौ।। शुभदत्त सुता शिरू देवे (85/07) (47/08) सोमा: सतलखा सै सिधु सुत रत्नाकर दौ (24/07) अपरा रत्नाकर सुता पालीसै दुर्गादित्य दौ (19/07) वलियास सै रामशर्म्म द्दौणा एवम् ठ. रघुपति मात्रिक चक्रं।। ठ. रघुपति सुतो धराधर लक्ष्मीधरौ चुड़े नरउन सै वावू दौ (08/03) दिवाकर सुतौ दिनकर: टकबाल सै प्रितिकर दौ (23/03) खौआल सै जीवेश्वर द्दौणा दिनकर सुता (67/04) (60/04) (76/04) (36/05) (56/01) शंकर परभू वीर गिरू का: तत्राद्यास्त्रय दरिहरा सै कुसुमाकर दौ अन्यो प्रथमापरौक्षे दरिहरासै कुसुमाकर सुत मितू दौ (11/08) (48/04) कुसुमाकर सुता रूचि मितू सिधू अन्दूका: कनन्दहसै सोरि सुत गोविन्द दौ माण्डरसै वागीश्वर द्दौणा मित सुता नाथु पौथू महनू मानूका: पनिचोभ सै मधुकर दौ (18/05) मधुकर सुता वलियास सै रूचिकर सुत कुसुमाकर दौ एकहरा सै शुक्ल दौहित्र दौ।। अपरा (141/05) ठ. रघुपति सुता (69/03) सुता बुधवाल सै परान सुत नारायण दौ वलियास सै श्री राम द्दौणा (65) एवम् गिरू मातृक चक्रं।। गिरू सुतौ सदुपाध्याय जीवनाथ: माण्डर सै (25) बसाउन दौ (20/0/1) सुरपति सुतौ गुणीश्वर: पनिचोभ सै हरिकर दौ (22/05) गंगोली सै पौखू द्दौणा गुणीश्वर सुता (65/06) राम बसाउन (32/01) पदूमदिनू का: (66/08) भराम जजिo दाम दौ (22/03) दामू सुतौ (39/05) पागुक: उचति सै माधव दौ (06/01) माधव सुतौ (68/02) शुचिकर: खौआल सै शुभे दौ (107/01) बसाउन सुतौ (93/06) रूचिनाथ गोपीनाथौ (132/06) सरिसब सै परान दौ (20/05) विरेश्वर सुतौ परान: खौआल सै हरिपति दौ (07/09) (36/01) हरिपति सुतौ (47/05) कउरे क: सोदरपुर सै विश्वेश्वर दौ (15/06) दरिo मुनि द्दौणा परान सुता बहेराढ़ी सै गदाधरदौ (07/10) (35/07) ठ. गदाधर सुतौ चाण: सुदई बेलo सदादित्य दौ (10/03) रूद्रादित्य सुतो होरेक: नरउन सै हरिश्वर दौ (10/06) हरिश्वर सुता गंदाधर जगद्धर प्रo मुशे देवधर विस्फी सै हरदत्त होराई दौ निखूतिसै महिधर द्दौणा एवम् जीवनाथ मत्रिचक्र सदुपाध्यायजीवनाथ सुता रामचन्द्रा परनामक वावू महिनाथ (84/06) (85/04) रामभद्र (113/08) (156/03) अनिरूद्दा: हरिअम सै भवदत्त दौ (18/08) गांगु सुतौ केशव: (27/05) खौआल सै विश्वनाथ दौ।। केशव सुता मांगु (31/08) (27/08) नरहरिसिंहा: ब्रहमपुरजवाल सै नारू दौ (20/09) नारू सुता बरूआरी सै रविकर दौ (121/06) रविकर सुतौ सुधाकर: खण्डo जाई दौ (09/02) मालिछ सै देहरि द्दौणा मांगुसुता पूरखू गोपाला: दरिहरा सै बासू द्दौणा (23/05) भवशर्म्मसुतो बागूक: हरिo रति दौ।। वागू सुतौ बासूक: सोदरo मo मo रविनाथ दौ (22/01) माo मo मo बटेश वासू सुतो गढ़ धुसौतसै रतिकर सुत कुलपति दौ बलियासै मधुकर द्दौणा हरखू सुतौ भवदत्त: एकo बसापन दौ (22/08) मिते सुता केशव (76/06) महादे माधव लव कुश रतन् का: सतलखा सै रतनाकर दौ भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली मैथिलीक मानक लेखन-शैली
1. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली आऽ 2.मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली 1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली
मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन
१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओलोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोकबेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोटसन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽकऽ पवर्गधरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽकऽ ज्ञधरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।
२.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आनठाम खालि ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्दसभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।
३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहिसभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।
४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएवला शब्दसभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, याबत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।
५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्दसभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारूसहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।
६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।
७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।
८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क)क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमेसँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख)पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग)स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ)वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ)क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च)क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।
९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटिकऽ दोसरठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु(माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्दसभमे ई नियम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।
१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्दसभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषासम्बन्धी नियमअनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरणसम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्षसभकेँ समेटिकऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनिकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽवला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषीपर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़िरहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषतासभ कुण्ठित नहि होइक, ताहूदिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। हमसभ हुनक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ चलबाक प्रयास कएलहुँ अछि। पोथीक वर्णविन्यास कक्षा ९ क पोथीसँ किछु मात्रामे भिन्न अछि। निरन्तर अध्ययन, अनुसन्धान आ विश्लेषणक कारणे ई सुधारात्मक भिन्नता आएल अछि। भविष्यमे आनहु पोथीकेँ परिमार्जित करैत मैथिली पाठ्यपुस्तकक वर्णविन्यासमे पूर्णरूपेण एकरूपता अनबाक हमरासभक प्रयत्न रहत।
कक्षा १० मैथिली लेखन तथा परिमार्जन महेन्द्र मलंगिया/ धीरेन्द्र प्रेमर्षि संयोजन- गणेशप्रसाद भट्टराई प्रकाशक शिक्षा तथा खेलकूद मन्त्रालय, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र,सानोठिमी, भक्तपुर सर्वाधिकार पाठ्यक्रम विकास केन्द्र एवं जनक शिक्षा सामग्री केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुर। पहिल संस्करण २०५८ बैशाख (२००२ ई.) योगदान: शिवप्रसाद सत्याल, जगन्नाथ अवा, गोरखबहादुर सिंह, गणेशप्रसाद भट्टराई, डा. रामावतार यादव, डा. राजेन्द्र विमल, डा. रामदयाल राकेश, धर्मेन्द्र विह्वल, रूपा धीरू, नीरज कर्ण, रमेश रञ्जन भाषा सम्पादन- नीरज कर्ण, रूपा झा 2. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर,तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन,अखनि,एखेन,अखनी ठिमा,ठिना,ठमा जेकर, तेकर तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय:भ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत:जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।
6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:-हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
20. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
21.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६ VIDEHA FOR NON-RESIDENT MAITHILS 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1.Original poem in Maithili by Ramlochan Thakur Translated into English by Gajendra Thakur 8.2.THE COMET- English translation of Gajendra Thakur's Maithili Novel Sahasrabadhani translated by Jyoti. DATE-LIST (year- 2009-10) (१४१७ साल) Marriage Days: Nov.2009- 19, 22, 23, 27 May 2010- 28, 30 June 2010- 2, 3, 6, 7, 9, 13, 17, 18, 20, 21,23, 24, 25, 27, 28, 30 July 2010- 1, 8, 9, 14 Upanayana Days: June 2010- 21,22 Dviragaman Din: November 2009- 18, 19, 23, 27, 29 December 2009- 2, 4, 6 Feb 2010- 15, 18, 19, 21, 22, 24, 25 March 2010- 1, 4, 5 Mundan Din: November 2009- 18, 19, 23 December 2009- 3 Jan 2010- 18, 22 Feb 2010- 3, 15, 25, 26 March 2010- 3, 5 June 2010- 2, 21 July 2010- 1 FESTIVALS OF MITHILA Mauna Panchami-12 July Madhushravani-24 July Nag Panchami-26 Jul Raksha Bandhan-5 Aug Krishnastami-13-14 Aug Kushi Amavasya- 20 August Hartalika Teej- 23 Aug ChauthChandra-23 Aug Karma Dharma Ekadashi-31 August Indra Pooja Aarambh- 1 September Anant Caturdashi- 3 Sep Pitri Paksha begins- 5 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-11 Sep Matri Navami- 13 Sep Vishwakarma Pooja-17Sep Kalashsthapan-19 Sep Belnauti- 24 September Mahastami- 26 Sep Maha Navami - 27 September Vijaya Dashami- 28 September Kojagara- 3 Oct Dhanteras- 15 Oct Chaturdashi-27 Oct Diyabati/Deepavali/Shyama Pooja-17 Oct Annakoota/ Govardhana Pooja-18 Oct Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja-20 Oct Chhathi- -24 Oct Akshyay Navami- 27 Oct Devotthan Ekadashi- 29 Oct Kartik Poornima/ Sama Bisarjan- 2 Nov Somvari Amavasya Vrata-16 Nov Vivaha Panchami- 21 Nov Ravi vrat arambh-22 Nov Navanna Parvana-25 Nov Naraknivaran chaturdashi-13 Jan Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 20 Jan Mahashivaratri-12 Feb Fagua-28 Feb Holi-1 Mar Ram Navami-24 March Mesha Sankranti-Satuani-14 April Jurishital-15 April Ravi Brat Ant-25 April Akshaya Tritiya-16 May Janaki Navami- 22 May Vat Savitri-barasait-12 June Ganga Dashhara-21 June Hari Sayan Ekadashi- 21 Jul Guru Poornima-25 Jul Original poem in Maithili by Ramlochan Thakur Translated into English by Gajendra Thakur You and I Creation Anyone whatever be Itihashanta, Gita or Gitanjali Is not without purpose The creator is not impartial The only difference That what I hold You do not Purposeful false talk Yudhishthir does Cheats teacher You know too But do not hold Calling him out as Dharmaraja, the uprighteous But not I. The Comet English Translation of Gajendra Thakur's Maithili Novel Sahasrabadhani translated into English by Smt. Jyoti Jha Chaudhary Mother had hidden her sons inside the house. Once, Nand took Aaruni to the pillars of the bridge in the river by a steamer. Nand said, “see the pillar in construction of which many labours fell into the river, around hundred people or even more. Families of only a few dead workers could get compensation. Other names were not listed nor did anyone try to find those. In spite of that all engineers are still associated with the contractor. Aaruni suddenly came out of those past memories. He got off the bus and revised the list of dead workers printed on the pillar. Names of a few people were listed there; perhaps people who couldn’t get compensation were not named in that list. Aaruni and Aazam Saheb caught the bus without delay when bus was to restart. He asked again, “you say that you live in a rental house in Patna”. “Yes, I went to the village for funeral of my father, mother will not be comfortable in that house after death of father. So she stayed in the village. Now I will search a new house in Patna. I however work in Calcutta.” “Oh! After working for thirty years in P.W.D. he couldn’t make a single house. People did many things. I had started living with principles of your father after 1981. The houses I have made those are double storied for namesake only. There is one unfinished rooms in each of my houses. What had the government given to your father? He never worked to get fame. Everyone was wishing to go to works division but he always liked to go to non-works division.” Then he asked Aaruni, “What do you do?” “Father, mother and brother were living in Patna. I am in Intelligence Department in Calcutta. Sometimes I remain in uniform and sometimes I am not allowed to use that.” “Visit me in Patna as well as in Darbhanga. Bring your mother. My wife will be very happy to see you. Nehal is in Patna nowadays.” Then he got off the bus in Patna Harding Park Bus Stand by giving his both residential addresses with his hands having affectionate touch. Aaruni used to be happy by seeing Hording while coming from out of Patna. But after death of his father he lost his affection for this city and he will have to struggle to live in this city from now. Why such incidents were happening around him in sequence? How co-incidentally did Aazam Saheb meet him on that day? Why he did not meet him in last fifteen years? What does His grace wants from him? He caught a rickshaw to go to his home. He restarted thinking. Father had once stomach pain at 2 o’clock in the night after eating jack fruit. He was too nervous to get the idea to ask Shravanji, his neighbour for help to call a doctor. Actually he had the idea but he never had talked to him before so he couldn’t dare to ask for help in need on that day. Mother knocked the doors of neighbours and kept on crying. One of the neighbours called the doctor then father’s life was saved. Mother was cursing as well as saying “people say not to cry because you have a five years old son and you all.....worthless, you will pay for everything, I will die.” Sister was studying in college. She had to go on feet. The school of Aaruni and his brother was situated little bit further to the college. Sister said to both of them to go with her. They even went one day but both brothers kept on going fastly without talking to each other and they were trying not to be recognised by other boys as brothers of her. Now he thinks that what was wrong if people could have recognised them as brothers of her. It was his personality disorder. When he grew up he started complaining about his parent’s over protective nature to him. According to him his parents tried to protect them from the evils of outside world. They didn’t allow him to talk to neighbours and didn’t make him bold enough to make friends. His parents such restrictions made him nostalgic and shy. He used to dream about his parents fights and get up because of fear. Aaruni had many fights with his elder brother and sister. But once he cried and shouted a lot after witnessing quarrel between mother and father. Before that incident he had a conflict with his siblings and he was not talking to them. Every time, his elders were starting talk with him. But after that incident he cried and initiated talking to his sister and after they never fought. Brother was having very short age gap so he often had quarrels with him but with his sister that was reduced a lot. For all those problems mother blamed his father. Mother never stopped him talking to neighbours, known people and relatives. It was father’s fault only. Aaruni once wanted to buy Globe. The demand was postponed many times by saying that it would be bought next time. Aaruni stopped studying. Then he got the globe. Sister still says that during the process of fulfilling his desire to buy a globe Aauni lost his interest in studies. His rank in class fell down and father started finding Tantrik to cure that. He even found one Tantrik. They lived in village for quite a long period. There was an accountant babu in the Ganga Bridge Colony. He informed his father that he did not accept bribe but his wife did so. After that all of them were sent to village. After that all of them were sent to village. Salary was stopped for some period after transfer in all Bihar government jobs. So Nand sent his family to village after each transfer. One letter from Nand reached village addressing mother. Aaruni read that. It was written to his mother to return the money if she had taken the bribe. He had called the vigilance for clarification so if money would be found at home in raid then it would defame his name. In such a stressful period Aaruni tried to forget all tension when he was in school. He had worn the artificial laughter in his face. He made that his habit. He started admiring his family. People were already praising Nand’s honesty. Aaruni was not intended to disclose the peaceless environment of his house as he thought people would laugh at that. He kept on surviving in the endangered reputation of honesty of his family. The habit of thinking and lack of confidence in decision making were associated with him in such a way that his all activities were affected either it was getting to sleep or reading and writing. He had just finished half yearly examination of class ten. He solved one question of Commerce but that was wrong. Then he tried twice and then thrice. He knew answers to all questions but he was stuck to the first question. He concealed the copy under his shirt. And when he came out to drink water he came direct to house. He often lost in thought while studying. He spent an hour in one page in such situation. He went to the zoo once. Some relatives met him there. They were very hi-fi people. However they did not say anything but their look and behaviour made Aaruni feeling inferior. He disappeared himself in crowd and returned home. He didn’t have money in his pocket so he walked. On the other hand everyone was wondering where he had gone. When everyone reached home then he accepted their guess that he was really lost. He didn’t reveal the truth to anyone. All whom he met asked him if he was son of him and then praised his father by calling him Godlike person. His father had to make payslip to withdraw salary in his office. Once, Aaruni got the job of getting payslip. The clerk requested staff to make his father’s play slip without taking money. Colleagues as well as contractors were not happy with his father. The colleagues had problem that he was neither earning bribes himself nor was he giving others the chance to do so. Once, when all went village after transfer, the elder brother, who used to steal good plants from others to plant in own garden, had turned very timid and became one of those boys sitting on the back seat in the classroom within a year. That was unusually longer stay in the village after a transfer. Later on, a candidate of the Chief Minster’s post came to ask for vote then his uncle met that leader and requested for transfer of his father from works to non-works job for sake of children. The leader assured that if he would win he would do that. He said that he got many requests for transfer to works but that one first case where someone was asking for non-works job. Fortunately that leader won the election and elected to be the Chief Minister. He did one favour to us after taking oath that he transferred Aaruni’s father to non-works job. Nand’s family came to the town again. Once, when they were living in village, a friend of brother of Aaruni said something on some other context. According to that guy his mother’s behaviour was very aggressive and she was habituated to quarrel at the time of eating. But he had seen someone more aggressive than her on that day. Aaruni was witnessing the quarrels resulting from financial crisis. He still becomes stressed when he recalls those two incidents. One was the month of deduction of income tax i.e. March. This incident repeats every year. But the tax increased enough to deduct all of salary of March in that year. Mother said that how all would get food. All would have to beg. But Nand sent a postcard to one of his nephews in the village and he dropped Rs. 800 to his door then she came out of fear of insecurity. Aaruni is still thrilled whenever he sees someone begging. Other incident was an accident that occurred in front of his house after which his brother had stopped eating and started crying that resulted in his red eyes. When Nand tried to console him then he asked that what would happen to all of them if Nand died. Father, calculated insurance benefit, G.P.F., gratuity and told him that they would get Rs. 99,000 immediately. Father kept on informing the elder son for an hour. Once Aaruni’s uncle (husband of sister of his father) visited him. All still felt much secured when someone visited them. Since Aaruni was brother-in-law of that person so japing was also included in their conversation. He said that there was a B.D.O. sahib in Jhanjharpur who was as honest as Nand. His father was fisherman. He suffered a lot to survive and become an officer. But he also had only a cot in the name of possession like Nand had at his home. He also said to Nand that why he had become an officer. He should have stayed in the village to eat fish and rice on his cot. He could have found the business of fishery more profitable. After marriage of Aaruni’s sister his brother-in-law often visited his house. Aaruni’s parents started quarrelling as soon as their son-in-law was seen because of lack of proper arrangements at home. Father started his mission to punish the culprits accepting bribes after transfer. And when he lost his faith in system of the Government then he went to a tantrik. The conflicts between parents were increased. Once Aaruni had big argument with his father and he started crying by hugging his two siblings. The quarrel between siblings vanished thereafter. Aaruni reached home murmuring with confusion. He had gone out to search a rental house between 2-3 pm and returned in the evening. He was coming home from the school one day. He was not feeling well while returning home. He was coming from school. Everyone was talking about possibility of happening of something impossible. Aaruni with his brother was reading in class seven, together. But since his elder brother was suffering from stomach ache on that day so he took leave from school after recession. Whenever he saw pupils laughing in the school he remembered the condition of his home. He was jealous of those children’s luck. Sometimes he wished that they should have same family condition as his. But he always pretended to be happy. He was scared of his parents’ quarrel at home. He often felt that such conditions would never leave him. He could neither discuss about that nor could he reveal his inner grief to anyone. He was too shy to call anyone for help in need. Mother was very honest to call him timid, coward etc. Outing in evening, visiting fair of Durga Puja , those things were far away from life. There was an earthquake in that area. Everyone came out of house by breaking the grill but Aaruni was resting on his bed. Some reason behind that was laziness and rest because of suicidal thought. He thought that there would be no harm if house would be broken and fallen down on him as he would get rid of his entire problem when he would die. When he reached near his house he was in panic worrying about his father’s wellness. He asked his mother and sister that how his father was. When everyone started consoling him he became more irritated. He cried loudly, “Is father dead? Where is his dead body?“ Then his sister replied, “No, nothing happened to him. Your friend, his younger brother, his father and the rickshaw driver all were going in the rickshaw. That poor rickshaw driver had just brought his newly wedded wife home. Four of them died on spot when a truck hit them. Aaruni stopped crying. The misfortune had knocked other’s door that time. However, one of the dead persons had been his class mate for last eighteen months and they were going to school together daily. He was ringing door bell every morning and that boy was coming downstairs to accompany him to the school. He recalled that he as usual rang the call bell yesterday too and his sister who was wearing spectacles and was very high tempered informed Aaruni that her brother was coming and she also complained that he was pushing the bell for very long time and repeatedly. He recalled that he as usual rang the call bell yesterday too and his sister who was wearing spectacles and was very high tempered informed Aaruni that her brother was coming and she also complained that he was pushing the bell for very long time and repeatedly. Aaruni waited for him yesterday but he clarified the fact that he would not ring the bell from the next day so if the boy wanted his company then he had to come before he left. Since, he hadn’t come on that day so he went to school without ringing the bell. It was the first time in past eighteen months when Aaruni had not rang the bell and he missed the school. Aaruni was frightened if that boy had told his family about his idea of not ringing the bell from the next time at the time of going to school. Then he thought that the boy might have some other work. After all he was going with in father and younger brother. In that way Aaruni was not sad but worried. To hide his thoughts he was standing calm with a mask of grief on his face. He only had the idea of not going to school with that boy from the next day. Let him go alone. But he had proven that he wouldn’t go school alone. The eyes of mother of Aaruni were filled up with tears but Aaruni was happy as his fear of father’s death was falsified. As soon as they got new rental house both brothers shifted their house and brought their mother from the village. Aaruni joined his job. “No, there is nothing like that, we have to do this as a part of our duty.” “But, don’t you think you all have turned very rude this time?” “There is no question of being rude. We take action on the basis of some reliable information.” “Suppose I have enmity with someone and he uses your help to fulfil his personal enmity and selfishness.” “Do you suspect any particular person?” “No, I was just giving an example.” “No, we don’t take action on the basis of any information. First we investigate that information then we get permission to search.” “Will I ever be resuming my respect even if you will certify me faultless after this incident?” “Will I ever be resuming my respect even if you will certify me faultless after this incident?” “We will have to sit idle in this way. Well, your statement is also logical. If someone has done this out of envy then we will do needful work against him too.” “What action will you take against him? Action is already taken on me. All byres are broken. We are so old in this business. We have been working in this business for last three generations. If possible then prefer clandestine removal. Who will believe that you didn’t get any thing after raiding all sheds?” He was not wrong. That businessman of plywood was known for his class one work, but the information Aaruni got was just opposite. Anyways, that raid was in vain. Teams from factory, house, and dealers’ offices – all returned barehanded. The company was famous. Officers were scared and they had opted Aaruni for this job considering his personal reputation. Phone calls from the headquarter started coming to Aaruni one after one. Morning arrived while finishing raids. He had to submit report till 10 am. The owner of the factory had also expressed his anger to Aaruni. The company named Swarnaply had approach to Delhi too. Being tired of such situations Aaruni reached home in the morning. He switched off the mobile phone and tried to sleep after setting the alarm clock for 9 o’clock. The raid had been going on from yesterday. How can this happen? Why couldn’t any thing for clandestine removal found anywhere? Was that plan leaked before action? But that case was only known to the director of vigilance apart from Aaruni. He was thinking those things on the bed. He couldn’t sleep but alarm rang. It seemed that everyone was waiting for him. Many people told him that intelligence information of such cases had been received by them too but they never tried to do that job as proving clandestine removal case was very tough in such situations. Gossips started that he was trying to be hero and finally would come out with a transfer order from the director’s room. Aaruni entered the director’s room and asked for more time straight away. He diverted the topic and didn’t disclose his plan. He didn’t want to take any chance that time. Aaruni started working away from the factory of Swarnaply and its dealers. He read all documents very carefully. He also noted something on paper. Then according to his plan he started from Kolkata to Patna and then from Patna to Arariya. He didn’t chew beetle leaves and he liked to have tea only at home. He didn’t chew beetle leaves and he liked to have tea only at home. But if he had to collect information from people then it was impossible to success without going to tea and paan shop. So he started chewing paan and sipping tea. And the pan with gulkand of Babul dada’s shop was tasty too. In return Babul dada had given him list of all plywood factories in that area. But the wrecked condition of roads was dependent on God’s grace. Aaruni managed to go through the path filled with dust and dirt to one factory that was supplying materials to the Swarnaply. The security guard at the gate said that the owner visited other factory. In that way Aaruni knew that there were two factories. Aaruni reached another factory after a tiring journey where one Marwari guy was manager. “Where are you coming from?” “I am coming from Patna but don’t know how I will return.” “Oh yes, one person assassinated a leader by firing gun. However, the leader was in jail but he came out of Purniya Jail to have a tour against the law. What can the jailor do? A jailor hadn’t allowed a prisoner to go out for a walk last month then the jailor was shot to death in the Bhatta bazaar. And this time the new jailer who gave permission to the prisoner to go out is suspended from his job. Curfew is announced in the town after that death. Stay with me. I am living in my guest house. My family is in Silliguri. I am not married yet. I have to go to Calcutta in the morning next day. I will go to Silliguri by my own vehicle so I will change my root while going there to drop you at Purniya bus stop. Aaruni liked the fact that the youth was a chatty person. He had long chatting with him in the night at the guesthouse. The subduing workers of the leader were collecting subscription forcibly. “There will be loss without applying clandestine in such situation. Yes, it is unavoidable. Such leaders are responsible for this. What can businessmen do? “ Then the Marwari guy named Naval had looked at Aaruni cunningly. Aaruni thought where that guy had some suspicion on him. Aaruni thought that guy had some suspicion on him. “No we have the principle of not going for clandestine. Some adjustments are needed to be done for this.” Aaruni remembered how the owner of the Swarnaply said that he would like to go for clandestine removal. Then how do they work? However that factory in Arariya was doing factory work of Swarnaply and all federal duties of that factory were handled by the Swarnaply. Even if he considered clandestine that was not useful as tax was paid by the Swarnaply. Meanwhile, phone rang. Since ring sounded long so there was no doubt that it was an STD call. Suddenly that boy became silent by looking at Aaruni after receiving the call. The cook who was addressed as Jha by Naval announced that food was ready. Aaruni and Naval had formal conversation. Both slept afterwards. As per he agreed that boy dropped Aaruni at Purniya bus stop in the morning. Aaruni asked Naval before getting off, “There is an office of Swarnaply in Calcutta. Are you going there?” He laughed. “You are in vigilance. The STD call I received yesterday was from Calcutta office. Someone from your department had revealed them about your Arariya trip. Look, I told you that I only do adjustment. What benefit do I get from that? I am not a tax payee. Yes, I get job because of that. And some provisions for petty expenses, leaders, departments etc are fulfilled from it. That’s all.” The boy left after saying that. When Aaruni reached Patna office everyone knew that Aaruni toured that factory at the cost of government for which tax was exempted by the government. Aaruni returned to Calcutta after meeting the director in Patna. He kept on searching police stations to find whether any recorded case was present against the Swarnaply or any of its employees. But the Swarnaply had very well established goodwill there from the beginning. Now Sankarshan was inafixed. The company was hiding its tax liability worth crores of rupees by manipulating input output ratio but there was no proof. Aaruni left his phone number at those police stations and instructed them to inform him if any case against the Swarnaply or its employe was found. He denied to submit closure report to his local director and said that he was still watching in case some information was fetched. He denied to submit closure report to his local director and said that he was still watching in case some information would be fetched. Six months later: There was STD ring in the morning. “I am calling from the Calcutta Salt Lake police station. Some has filed a case that he was robbed of his suitcase containing some cash and cheques by the auto rickshaw driver when he was returning from the Swarnaply office after receiving the payment.” “How much cash and what value of cheques?” “1 lakh and 79 thousands of Cash and cheques worth 1 lakh and 83 thousands of Rupees. Perhaps he has some insurance for cash so he filed F.I.R. Cheques can be stopped.” Aaruni with his team made a raid on that person’s house whose money was stolen by the auto driver. He received a diary during the raid. He called the Patna office next and requested for the newest returns of removal of factory in Arariya to be availed to him. The person on whose house raid was made brought to his office. He came to know on the way that the person was brother-in-law of Naval. Apart from being the accountant of factory of Arariya he was a liaison officer of the Swarnaply Company and the factory in Arariya. Now all facts were crystal clear. The diary retrieved had columns of cash and cheques. Details were present with dates. The cheque total was reconciled with clearance of the factory of Arariya and it was also proved that almost half payment of all transactions of the Swarnaply was paid in cash details of which were neither present in the books of the Swarnaply nor were those recorded in the books of the factory at Arariya. Swarnaply was paying tax for only cheque payments which was around half of the real transaction. Sankarshan had submitted that report to the local director. The crime of the accountant was bail-able so the court released him on bail. “Tell me about Naval. He is a good person. But he didn’t tell me anything.” “He died in a road accident occurred or might me created intentionally while he was going to Silliguri from Arariya. I with my son-in-law will go directly to him after finishing here.” One person who had come to receive the accountant informed excitedly. The son-in-law said, “You must agree that you got this opportunity only because of my foolishness. If I would have not been greedy for retrieving cash through insurance claim then this couldn’t happen. The director ordered for action against the Swarnaply. The show-cause notice was also removed from the scandal of tax theft of crores of rupees by the Swarnaply. Aaruni was worried. “Naval was right. He was only doing adjustment. The real theft was done by someone else. He was only a mediator. Even I feel to be a medium for Aaruni’s death.” With the success in profession Aaruni’s success in job was also starts. Whether he would be a cause other’s problem or not he would never be defeated like his father. He recalled his past time to time. “I say, do you listen to me. Our daughter is growing up. You have not done anything for your sons. Our house is also not possessed. Where will we live after retirement?” “I say, do you listen to me. Our daughter is growing up. You have not done anything for your sons. Our house is also not possessed. Where will we live after retirement?” “Don’t bother about daughter. Groom’s family will approach us. They are getting more facilities than what we got. Now putting effort in studies is up to them. We will live in the village after retirement. We won’t come to town in our next seven births.” “If any relatives come we won’t have enough arrangement to welcome them.” “Why do we need special arrangement? Just add some more rice in boiling water.” Aaruni brought up by hearing such conversation. Once, one relative visited the hospital to see father. He was also talking in the same manner. “What you did with your body? You didn’t even feel emotion for these kids. Where do they study? You didn’t have any facility nor did you have any responsibility. You have spoiled your life as well as theirs. Meanwhile, they were interrupted. His wife informed him that there is a phone call for him on hold. “Aaruni, a big politics is going on in the office. Conspiracy is being plotted against you. It’s my job to alarm you. But you don’t show any reaction.” “What happened? Should I be scared like my father? To be a saint after being frustrated of a few defeats or to abolish the culprits- what would you have opted out of these two options. “Don’t bother”, Aaruni said this with a chuckle and hanged up the phone. One lobby of office was following Aaruni. Aaruni was under pressure after transfer. Some people had complained baselessly against him. One office named Shashak was master mind behind that. His favoured staffs were not posted according to his suggestions so he was intended to stop Aaruni’s promotion. Aaruni’s phone connection was dead for some days during that period. Afterwards some calls to Abu Dhabi and Dubai were made from that phone. However, to make an ISD call from a government connection one had to take permission. One of the Administrative persons in Aaruni’s office had availed that facility to Aaruni’s connection by applying in writing without informing Aaruni. He said to the vigilance investigators that since Aaruni was senior to him he had to obey his verbal orders many times. So he had applied for ISD facility to Aaruni following his verbal order. The mafia has induced him and that Administrative officer also got himself trapped into it. A fax came on Monday and Aaruni was transferred. “Represent against this order”, the same familiar voice of Manindra. “Why are you involved in these matters? Everything will be fine”, Aaruni said. A party was held in Shashank’s house. “Mr. Aaruni didn’t even represent for this. He left being relieved. It was like he had surrendered.” “Promotion will be stopped for next ten year. Seniority will be lost. His name was defamed in addition. He was caught for talking to the smugglers of Dubai.” Aaruni recalled his father’s transfer, struggle for honesty, failure in struggle and involving himself in tantra and worship afterwards; then he lost interest in home, office and all worldly possessions. The lines of worries are drawn on the face of Aaruni. But that couldn’t stay longer. He had changed his defeat into his victory many times whether it was job or business. “Hey! Manindra! No phone calls for a long time! You people have forgotten me after my transfer out of state.” “Why me only, every one had forgotten you here.” “What do you think? I forgot everything. Do you remember? When I have opted Arts subject against father’s will. I threw all books of science into the pond at 11 o’clock in the night. I had not even left any residue for those books. And when I got first division marks in Arts then I visited village. Before that I missed many marriages, deaths and births. But I didn’t go there.” “Hey! Brother! You remember everything. I thought you were also turned like uncle. These people don’t deserve pity. Just teach them lesson. Now I have faith that something will happen.” “Again the same thing! If you have not changed then how can I. I had left you free for some days. Now listen. Do what I tell you to do. Don’t speak a lot. You know very well that my phone was dead for the period when ISD calls were made from the phone. A complaint was also made to the telephone department for that from home. But that was made on phone. No evidence of written document or receipt is available. Just find out whether the telephone department has records of such complaints or not.” Manidra informed that the telephone department restarted giving complaint number from one after one month. So that didn’t work. “Well, then try to find out what numbers and who were called from my number. And what are the phone numbers where call had been made from that foreigner’s number.” “Yes, I just missed this fact.” Now when Manindra brought list of telephone numbers, all were numbers of the telephone booths. No call was made to Aaruni’s phone. At the time of hearing of vigilance when Aaruni explained those facts then Shashank was shocked. It was good for him as Shashank’s men were in touch with those booth owners otherwise all of them as well as Shanshank would be trapped. So Aaruni was released from the enquiry. “Buddy, this is Manindra. Nothing happened to them.” “I am transferred to Delhi. I will see. Just relax.” “I became relaxed when you recalled past that day. You had to take revenge of insult of Kaka (uncle). Faces are changed. Situation is the same.” Aaruni was posted to the information technology department of vigilance in Delhi. The department was known as Shunting posting department. Even being released from the enquiry of vigilance, Aaruni opted for that department. That showed that he was tired. He will be sitting at the corner for next five years. Shashank’s group was very happy. On the other hand, Aaruni restarted his science that he had left in college. He was engaged with computer and its specialists for whole day. They had also seen such staff after a long time who was engaged in work so dedicatedly. Other people were merely completing their terms. However, that department was very sensitive. Now, Aaruni was very friendly with his colleagues. All applications were being forwarded in time. New equipments were installed in the office. Earlier, officers were intended to pass the office hours and rush out of office. They were not even fulfilling the necessary necessities of the office. One phone was installed in the office to practice anti-corruption. It had facility to record telephone calls of smugglers. Time passed like that for some days. “Manindra! No phone calls from you”. “I am relaxed now”. “Yes, it is time now. Do one thing. Publish the news of relation between Shashank and the smugglers in the news paper. Everything is ready for next.” No sooner the news was published, the public relation officer of the Minister, who had work of informing the minister about news by submitting the clippings of the news had submitted the clipping of that news to the Minister. Time was not good so there were many charges on the area Minister; session of the parliament was going on those days so the Minister didn’t take any chance. He ordered for the enquiry on the issue. The case came to the vigilance department. There was an interim meeting for that in which the department of information technicians were also invited. Date of appointment was fixed. Aaruni attended the meeting as a member of vigilance committee. In most of the cases the department usually gives no objection certificate. “No charge on Shashank is proved. Aaruni, your department was availed with Telephone Taping equipment. But in our office, even a fax machine is installed after six months of purchase. Then this machine must be kept uninstalled or any conversation is recorded.” “Sir, this machine was brought on the 1st of this month and its use was started on the same date. The name of the smugglers involved in this case calls of whom were permitted to be recorded by me is given to you. Shashank had first conversation with some of them for a negligible length of time- two conversations each for only half a minute. The second dialogue was at 9 p.m. and the call goes to our staff after that conversation for only half a minute.” “What is date of this?” “Fifth” “There was a raid on the sixth and nothing was found on that day. Give me details of these phone calls, Aaruni.” “Shashank says on first conversation to come to his house at eight o’clock and meet him. It was important talk. In the second call he is angry and says that it is night o’clock and he has not yet come. There is a reply from the smuggler in this call that he is on the gate of Shashank’s house.” “What is the third conversation?” “The third call is made by the smuggler to the office staff. He orders to come to the office and he is also coming there. There is nothing more. No evidence could be found for this so if you allow me I can give no objection certificate.” “Aaruni! What are you saying? Your department had not done anything so useful until today. You have discovered all links. Shashank says to meet him. The smuggler says that he is at the gate. Why does the employee go to the office so late? Shashank leaked the plan of raid and the employee removed all evidences. My staff returned empty handed when they made raid next morning. Now make one more call. Shashank’s number was not taped so according to law the sound in tape should match with his sample voice. When he picks the phone up just say wrong number and hang up.” “As you wish.” The procedure was rendered immediately. “This is open and shut case.” The chief of the vigilance committee informed the fact to the director. The director called Shashank and gave him two options, “Shashank! After these evidences you have only two options. You have to take compulsory retirement or the enquiry will be carried on.” Shashank went for compulsory retirement. He left the department. “Brother Manindra! No phone calls from you.” “Brother I am relaxed from that day when I found that you remember everything of your childhood. There is no difference between you and Kaka. Only your ways are different. To make you to go for this way of victory I had prompted you many times. Do you remember that? But when you started telling me everything of your childhood I became relaxed from then only.” “The progress graph of his study was fluctuating with his father. But he retreated to get success. Such incident happened even when he was in job. An accident occurred after a government tour. He stood on his feet after staying 15 days in ventilator and one year on support. He defeated the death. But when he returned office after one and half a year then no one believed. He had same familiar smile on his face. People said that the accident was not by chance but it was planned. Because it happened just after the accident of Naval. VIDEHA MAITHILI SANSKRIT TUTOR- XXIII संस्कृत शिक्षा च मैथिली शिक्षा च- २३ (मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत् - हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्) -गजेन्द्र ठक्कुरः (आगाँ) ENGLISH संस्कृतम् मैथिली Have you finished your household chores? गृहकार्यं समाप्तं किम्? घरक काज खतम कऽ लेलहुँ? Yes, almost finished. आम्, समाप्तप्रायम्। हँ, प्रायः खतमे अछि। Where were you for last two three days? गतानि द्वित्राणि दिनानि कुत्र आसीत् भवती? अहाँ दू-तीन दिनसँ कत्तऽ छलहुँ? I had gone to my mother’s place. अहं मातृगृहं गतवती। हम अपन नैहर गेल रही। Did you meet Shyamala recently? एषु दिनेषु श्यामलया मिलितवती किम्? श्यामलासँ अहाँक भेट हाल-फिलहालमे अछि? I’ve had a lot of work since morning. मम प्रातः आरभ्य बहु कार्याणि। हमरा भोरेसँ बहुत कार्य रहै-ए। Again today the maid-servant didn’t come. कर्मकरी अद्य पुनः न आगतवती। काज करएबाली आइ फेर नै आएल। Guests will come tomorrow. अतिथयः श्वः आगमिष्यन्ति। पाहुन सभ काल्हि आबि रहल छथि। Shall we go to the vegetable market today? अद्य शाकविपणिं गच्छामः किम्? आइ तरकारी बजार चली की? I don’t have time today let’s go tomorrow. अद्य मम समयः नास्ति भोः श्वः गमिष्यामः। हमरा आइ समय नहि अछि, हमरा सभ काल्हि चलब। Next month we will buy a washing machine. अग्रिम-मासे वयं वस्त्रप्रक्षालनयन्त्रं क्रेष्यामः। अगिला मास हम सभ एकटा वाशिंग मशीन कीनब। A new departmental store has opened nearby. समीपे एकः नूतनः सर्ववस्तु-आपणः उद्धाटितः अस्ति। एकटा नव डिपार्टमेन्टल स्टोर बगलेमे खुजल अछि। I heard that Rama’s daughter’s marriage is fixed. रमायाः पुत्र्याः विवाहः निश्चितः इति श्रुतवती। हमरा सुबामे आएल अछि जे रमाक बेटीक बियाह ठीक भऽ गेलै। From today there is a sale of glass wares in that shop. अद्य आरभ्य तस्मिन् आपणे काचपात्राणां न्यूनमूल्येन विक्रयणम् अस्ति। आइसँ ओहि दोकानमे शीसाक समानक बिक्री शुरू छै। Would you lend me some sugar? किञ्चित् शर्करां ददाति किम्? कनी चिन्नी देब? Would you tell me it’s recipe? एतस्य पाककृतिं मां वदति किम्? हमरा एकरा बनेबाक ढ़ंग बताएब? Come, let’s go to the temple. आगच्छतु, देवालयः गच्छामः। आऊ, हम सभ मन्दिर चली। त्रयोविंशतितमः पाठः भीमः दुर्योधनस्य अपेक्षया बलवान्। राकेशस्य अपेक्षया नवीनः बलवान्। अनीतायाः अपेक्षया तेजस्वनी उन्नता। पाकिस्थानस्य अपेक्षया भारतम् विशालम्। कावेर्याः अपेक्षया गङ्गा दीर्घा। शख्याः अपेक्षया लया सुन्दरी। सीताया अपेक्षया मालती सुन्दरी। उन्नता गुणी चतुरः ज्येष्ठः सुन्दरी सहनशीला अलसः वीरः दीर्घा विशालम् वयम् पूर्वतन् पाठे अपेक्षया इत्यंशम् ज्ञातवन्तः। इदानीम् अस्मिन् विषये एव पुनः किंचित् अभ्यासं कुर्मः। इदानीम् भवन्तः अपेक्षया उपयुज्य वाक्यानि वदन्तु। वदन्ति वा ? अहम् इदानीम् किमपि श्रावयामि। भवन्तः श्रुणवन्तु। गीतम् मधुरम् अस्ति खलु। रघुवंशम् उत्तमम् काव्यम् खलु। कालिदासः श्रेष्ठः कविः खलु। आम् कालिदास श्रेष्ठ खलु। रामायणम् आदि काव्यम् खलु। पुष्पम् सुन्दरम् अस्ति खलु। भवन्तः खलु योजयित्वा वदन्तु। अद्य शैत्यम् अधिकम् अस्ति खलु। भोजन उत्तमम् अस्ति खलु। परीक्षा सन्निहिता खलु। माता कुशलिनी खलु। पिता वित्तकोषे कार्यम् करोति खलु। अनुजः विदेशम् गतवान् खलु। -अत्र एव गणद्वयम् कुर्मः। भवत्यः एकम् वाक्यम् वदन्तु। भवन्तः खलु योजयित्वा तदैव वाक्यम् पुनः उच्चारयन्तु। अनन्तरम् भवन्तः एकम् वाक्यम् वदन्तु-भवत्यः खलु योजयित्वा पुनः उच्चारयन्तु। आरम्भः कुर्मः।भवान् आगमिष्यति खलु। कुक्कुरः भौ भौ भौ इति भषति। कुक्कुरः किम् करोति। कुक्कुरः गृहस्य रक्षणम् करोति। व्याघ्रः वने भवति। व्याघ्र गर्जयति। व्याघ्रः मृगम् मारयति। गजः स्थूलः अस्ति। गजः वस्तु नयति। गजः ब्रिम्भति? मार्जालः म्यों वदति। मार्जालः किम् पिबति। मार्जालः दुग्धम् पिबति। मार्जालः मूषकम् खादति। धेनुः अम्बा वदति। धेनुः किम् ददाति। धेनुः दुग्धम् ददाति। धेनुः किम् खादति। धेनुः तृणम् खादति। अश्वः धावति। अश्वः कथम् धावति। अश्वः शीघ्रम् धावति। अश्वः हेसते? इदानीम् केशाञ्चित् पक्षिणाम् नाम् अपि जानीमः। काकः रटति। काकः कथम् रटति। काकः का का का इति रटति। शुकः सुन्दरः अस्ति- खलु। शुकस्य वर्णः कः। शुकस्य वर्णः हरितः। हंसः जले संचरति। हंसः जले संचरति। चटकः चिल्लति। सिंहः गर्जति। व्याघ्रः गर्जति। हंसः जले संचरति। गजः ब्रिम्हति। वृषभः नर्दति। अश्वः हेसते। मार्जालः वदति। कुक्कुरः भषति। काकः रटति। चटकः चिल्लति। काकः रटति का का धेनुः वदति अम्बा विडालः वदति कथम् म्यां चटकः वदति कथम् चिं चि कुक्कुरः भषति कथम् भौं भौं बे (भे)गः करति कथम् बै बै अजः वदति कथम् मैं मैं सर्पः करति कथम् भुस् मुस् पिकः कूजति कथम् पो पे सुभाषितम् सुलभाः पुरुषाः लोके सततं प्रियवादिनः। अप्रियस्यय च पर्थ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभः॥ इदानीम् यत् सुभाषितम् श्रुतवन्तः तस्य तात्पर्यम् एवम् अस्ति। लोके प्रिय वाक्यानि वक्तुम् सर्वे उत्सहन्तु एव। तथैव श्रोतुम् अपि बहुजनाः सज्जाः भवन्ति। अप्रियम् किन्तु हितकरम् तादृश वचनानि केचनेव वदन्ति। तथैव तानि वचनानि श्रोतुम् केचन् एव उत्सहसन्तु। अतः एव लोके अप्रियस्य पथ्यस्य वचनस्य श्रोता वक्ता द्वौ अपुइ दुर्लभम्। कथा महाराजस्य विक्रमादित्यस्य औदार्यम् प्रसिद्धमेव। विक्रमादित्यः परम् उदारः प्रजारंजकः च आसीत्। सः प्रजानाम् कष्ट परिहारार्थम् सर्वत्र सदा सञ्चारम् करोति स्म। एकदा अश्वारोही विक्रमादित्यः अरण्यमार्गे एकाकी एव गच्छन् आसीत्। संध्याकालः सन्निहतः इति शीघ्रम् वनात् बहिः गच्छामि-इति चिन्तयन् आसीत्। तावता एव दूरे कश्याश्चित् गोहोर आक्रन्दनम् श्रुतम्। ताम् दिशाम् अनुश्रित्य एव विक्रमादित्यः तत्र गतवान्। तदा वर्षाकालः आसीत्। अतः नदीषु प्रवाहः आसीत्। भूमिः सर्वथा पंकिला आसीत्। सर्वे गर्ताः अपि जलेन् पूर्णाः आसन्। एतादृशे कश्मिंश्चित् मलिन् गर्ते काचित् गौं पतित्वा आक्रन्दति स्म।एतद् दृष्टवा महाराजः गौः रक्षनार्थम् स्वयमेव पंकम् अवतीर्णवान्। किन्तु स्वोपि पंके निमग्नः इव अभवत्। रात्रिः इत्यत् एकाकी एव धेनुम् रक्षितुम् सह न शक्तवान्। धेनुः अपि प्राण भीत्या उच्चैः आक्रन्दति स्म। तत् श्रुत्वा कश्चन् सिंहः तत्र आगतः। सः गाम् खादितुम् इष्टवान् च। तदा तत्र विद्यमानः अश्वः सिंहम् दृष्ट्वा पलायनम् कृतवान्। इदानीम् एकाकी महाराजः गाम् रक्षितुम् इच्छति, किन्तु सिंहः गाम् खादितुम् इच्छति। अतः महाराजः सिंहस्य भय जननार्थम् स्वस्य कोषात् खड्गम् स्वीकृतवान्। यदा यदा सिंहः गाम् खादितुम् आगच्छति तदा तदा एषः महाराजः खड्गम् दर्शयन् तम् सिंहम् भाययति स्म। गर्तस्य समीपे एकः वटः वृक्षः आसीत्। ततस्थितः कश्चन् शुकः एत सर्वम् पश्यन् आसीत्। सः महाराजम् उक्तवान्- भोः राजन्। अस्याः गोः मरणम् सन्निहितम् अस्ति। भवान् एताम् सिंहात् रक्षति चेत् अपि किमपि प्रयोजनम् नास्ति। यतः पंके पतिता धेनुः प्रातःकालात् पूर्वमेव निमज्जयति। वृथा भवतः प्राणम् त्यागम् करोति। अतः भवान् व्यर्थम् कार्यम् त्यजतु। इदानीम् सिंहः एकः एव अस्ति। घण्टाभ्यन्तरे सिंही अपि अत्र आगच्छति। किंचित् कालानन्तरम् अन्य क्रूर जन्तवः अपि आगच्छन्ति। अतः व्यर्थकार्यम् परित्यजतु। भवतः प्राण रक्षणार्थम् अस्य वृक्षस्य उपरि उपविशतु। इति। शुकस्य वचनम् श्रुत्वा महाराजः उक्तवान्- भो शुका। मद् विषये तव प्रीतिम् ज्ञात्वा संतुष्टः अहम्। किन्तु अनीति मार्गम् भवान् न उपदिशतु। यतः स्वस्य प्राण रक्षणार्थम् क्रीमि कीटादयः अपि यतन्ते। किन्तु यः अन्येषाम् रक्षणार्थम् जीवति सः एव धन्यः। मम् प्रयत्नेन् लाभः भवति वा न वा अहम् न जानामि। किन्तु गोः रक्षणम् मम् कर्तव्यम् – मम् प्राणान् परिकृत्यवा अहम् एताम् धेनुम् रक्षामि एव। इति उक्तवान्।ततः राजा प्रातःकाल पर्यन्तम् अपि गोः रक्षणम् कृतवान्। प्रातः काले सिंहरूपेण स्थितः देवेन्द्रः स्वस्य रूपम् प्राकट्यत्। गोरूपेण स्थिता भूदेवी शुकरूपेण स्थितः धर्मः चापि स्व स्वरूपम् प्रकटतिवन्तः। ते सर्वेपि विक्रमस्य त्याग शौर्यम् च श्लाघित्वा तम् अभिनन्दितवन्तः। एवम् विक्रमस्य औदार्यम् लोकोत्तरम् आसीत्। १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download, ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads, ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाऊ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित : http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA"IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. 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e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com विदेह: सदेह: 1: तिरहुता : देवनागरी "विदेह" क २५म अंक १ जनवरी २००९, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिकाक पहिल २५ अंकक चुनल रचना सम्मिलित। विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/ विदेह: वर्ष:2, मास:13, अंक:25 (विदेह:सदेह:1) सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुर (1971- ) छिड़िआयल निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) ,पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण),महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक (खण्ड 1 सँ7 ) नामसँ। हिनकर कथा-संग्रह(गल्प-गुच्छ) क अनुवाद संस्कृतमे आ उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) क अनुवाद संस्कृत आ अंग्रेजी(द कॉमेट नामसँ)मे कएल गेल अछि। मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली शब्दकोश आ पञ्जी-प्रबन्धक सम्मिलित रूपेँ लेखन-शोध-सम्पादन-आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण। अंतर्जाललेल तिरहुता यूनीकोडक विकासमे योगदान आ मैथिलीभाषामे अंतर्जाल आ संगणकक शब्दावलीक विकास। ई-पत्र संकेत- ggajendra@gmail.com सहायक सम्पादक: श्रीमती रश्मि रेखा सिन्हा श्रीमति रश्मि रेखा सिन्हा (1962- ), पिता श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिन्हा, पति श्री दीपक कुमार। श्रीमति रश्मि रेखा सिन्हा इतिहास आ राजनीतिशास्त्रमे स्नातकोत्तर उपाधिक संग नालन्दा आ बौधधर्मपर पी.एच.डी.प्राप्त कएने छथि आ लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर आलेख-प्रबन्ध सेहो लिखने छथि।सम्प्रति “विदेह” ई-पत्रिका(http://www.videha.co.in/ ) क सहायक सम्पादक छथि। मुख्य पृष्ठ डिजाइन: विदेह:सदेह:1 ज्योति झा चौधरी ज्योति (1978- ) जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी ; आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी); निवास स्थान- लन्दन, यू.के.; पिता- श्री शुभंकर झा, ज़मशेदपुर; माता- श्रीमती सुधा झा, शिवीपट्टी।ज्योतिकेँ www.poetry.comसँ संपादकक चॉयस अवार्ड (अंग्रेजी पद्यक हेतु) ज्योतिकेँ भेटल छन्हि। हुनकर अंग्रेजी पद्य किछु दिन धरि www.poetrysoup.com केर मुख्य पृष्ठ पर सेहो रहल अछि। विदेह ई-पत्रिकाक साइटक डिजाइन मधूलिका चौधरी (बी.टेक, कम्प्यूटर साइंस), रश्मि प्रिया (बी.टेक, कम्प्यूटर साइंस) आ प्रीति झा ठाकुर द्वारा। (विदेह ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ http://www.videha.co.in/ पर ई-प्रकाशित होइत अछि आ एकर सभटा पुरान अंक मिथिलाक्षर, देवनागरी आ ब्रेल वर्सनमे साइटक आर्काइवमे डाउनलोड लेल उपलब्ध रहैत अछि। विदेह ई-पत्रिका सदेह:1 अंक ई-पत्रिकाक पहिल 25 अंकक चुनल रचनाक संग पुस्तकाकार प्रकाशित कएल जा रहल अछि। विदेह:सदेह:2 जनवरी 2010 मे आएत ई-पत्रिकाक26 सँ 50म अंकक चुनल रचनाक संग।) Tirhuta : 244 pages (A4 big magazine size) विदेह: सदेह: 1: तिरहुता : मूल्य भा.रु.200/- Devanagari 244 pages (A4 big magazine size) विदेह: सदेह: 1: : देवनागरी : मूल्य भा. रु. 100/- (add courier charges Rs.20/-per copy for Delhi/NCR and Rs.30/- per copy for outside Delhi) BOTH VERSIONS ARE AVAILABLE FOR PDF DOWNLOAD AT https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/ (send M.O./DD/Cheque in favour of AJAY ARTS payable at DELHI.) DISTRIBUTORS: AJAY ARTS, 4393/4A, Ist Floor,Ansari Road,DARYAGANJ. Delhi-110002 Ph.011-23288341, 09968170107 Website:http://www.shruti-publication.com e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com "मिथिला दर्शन" मैथिली द्विमासिक पत्रिका अपन सब्सक्रिप्शन (भा.रु.288/- दू साल माने 12 अंक लेल भारतमे आ ONE YEAR-(6 issues)-in Nepal INR 900/-, OVERSEAS- $25; TWO YEAR(12 issues)- in Nepal INR Rs.1800/-, Overseas- US $50) "मिथिला दर्शन"केँ देय डी.डी. द्वारा Mithila Darshan, A - 132, Lake Gardens, Kolkata - 700 045 पतापर पठाऊ। डी.डी.क संग पत्र पठाऊ जाहिमे अपन पूर्ण पता, टेलीफोन नं. आ ई-मेल संकेत अवश्य लिखू। प्रधान सम्पादक- नचिकेता। कार्यकारी सम्पादक- रामलोचन ठाकुर। प्रतिष्ठाता सम्पादक- प्रोफेसर प्रबोध नारायण सिंह आ डॉ. अणिमा सिंह। Coming Soon: http://www.mithiladarshan.com/ (विज्ञापन) अंतिका प्रकाशन की नवीनतम पुस्तक सजिल्द
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आलोचना
इतिहास : संयोग और सार्थकता : सुरेन्द्र चौधरी संपादक : उदयशंकर
हिंदी कहानी : रचना और परिस्थिति : सुरेन्द्र चौधरी संपादक : उदयशंकर
साधारण की प्रतिज्ञा : अंधेरे से साक्षात्कार : सुरेन्द्र चौधरी संपादक : उदयशंकर
बादल सरकार : जीवन और रंगमंच : अशोक भौमिक
बालकृष्ण भट्ïट और आधुनिक हिंदी आलोचना का आरंभ : अभिषेक रौशन
सामाजिक चिंतन
किसान और किसानी : अनिल चमडिय़ा
शिक्षक की डायरी : योगेन्द्र
उपन्यास
माइक्रोस्कोप : राजेन्द्र कुमार कनौजिया पृथ्वीपुत्र : ललित अनुवाद : महाप्रकाश मोड़ पर : धूमकेतु अनुवाद : स्वर्णा मोलारूज़ : पियैर ला मूर अनुवाद : सुनीता जैन
कहानी-संग्रह
धूँधली यादें और सिसकते ज़ख्म : निसार अहमद जगधर की प्रेम कथा : हरिओम अंतिका, मैथिली त्रैमासिक,सम्पादक- अनलकांत अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4,शालीमारगार्डन,एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023, आजीवन सदस्यता शुल्क भा.रु.2100/-चेक/ ड्राफ्ट द्वारा “अंतिका प्रकाशन” क नाम सँ पठाऊ। दिल्लीक बाहरक चेक मे भा.रु. 30/- अतिरिक्त जोड़ू। बया, हिन्दी छमाही पत्रिका,सम्पादक- गौरीनाथ संपर्क- अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4,शालीमारगार्डन,एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023, आजीवन सदस्यता शुल्क रु.5000/- चेक/ ड्राफ्ट/ मनीआर्डर द्वारा “ अंतिका प्रकाशन” के नाम भेजें। दिल्ली से बाहर के चेक में 30 रुपया अतिरिक्त जोड़ें। पुस्तक मंगवाने के लिए मनीआर्डर/ चेक/ ड्राफ्ट अंतिका प्रकाशन के नाम से भेजें। दिल्ली से बाहर के एट पार बैंकिंग (at par banking) चेक के अलावा अन्य चेक एक हजार से कम का न भेजें। रु.200/- से ज्यादा की पुस्तकों पर डाक खर्च हमारा वहन करेंगे। रु.300/- से रु.500/- तक की पुस्तकों पर 10% की छूट, रु.500/- से ऊपर रु.1000/- तक 15%और उससे ज्यादा की किताबों पर 20%की छूट व्यक्तिगत खरीद पर दी जाएगी । एक साथ हिन्दी, मैथिली में सक्रिय आपका प्रकाशन
अंतिका प्रकाशन सी-56/यूजीएफ-4, शालीमार गार्डन,एकसटेंशन-II गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.) फोन : 0120-6475212 मोबाइल नं.9868380797, 9891245023 ई-मेल: antika1999@yahoo.co.in, antika.prakashan@antika-prakashan.com http://www.antika-prakashan.com (विज्ञापन) श्रुति प्रकाशनसँ १.पंचदेवोपासना-भूमि मिथिला- मौन २.मैथिली भाषा-साहित्य (२०म शताब्दी)- प्रेमशंकर सिंह ३.गुंजन जीक राधा (गद्य-पद्य-ब्रजबुली मिश्रित)- गंगेश गुंजन ४.बनैत-बिगड़ैत (कथा-गल्प संग्रह)-सुभाषचन्द्र यादव ५.कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर ६.विलम्बित कइक युगमे निबद्ध (पद्य-संग्रह)- पंकज पराशर ७.हम पुछैत छी (पद्य-संग्रह)- विनीत उत्पल ८. नो एण्ट्री: मा प्रविश- डॉ. उदय नारायण सिंह “नचिकेता”प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (ISBN NO.978-81-907729-0-7 मूल्य रु.१२५/- यू.एस. डॉलर ४०) आ पेपरबैक (ISBN No.978-81-907729-1-4 मूल्य रु. ७५/- यूएस.डॉलर २५/-) ९/१०/११ 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर१.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-1 ३.पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा । १२.विभारानीक दू टा नाटक: "भाग रौ" आ "बलचन्दा" १३. विदेह:सदेह:१: देवनागरी आ मिथिला़क्षर संस्करण:Tirhuta : 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1:तिरहुता : मूल्य भा.रु.200/- Devanagari 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1: : देवनागरी : मूल्य भा. रु.100/- श्रुति प्रकाशन, DISTRIBUTORS: AJAI ARTS, 4393/4A, Ist Floor,AnsariRoad,DARYAGANJ. Delhi-110002 Ph.011-23288341, 09968170107.Website: http://www.shruti-publication.com e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com (विज्ञापन) २. संदेश १.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत। २.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी। ३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत। ४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि। ५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह| ६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। १०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। १२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। १४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब। १५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी। १६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक एहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल। १७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००८-०९. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह (पाक्षिक) संपादक- गजेन्द्र ठाकुर। सहायक सम्पादक: श्रीमती रश्मि रेखा सिन्हा। एतय प्रकाशित रचना सभक कॉपीराइट लेखक लोकनिक लगमे रहतन्हि, मात्र एकर प्रथम प्रकाशनक/ आर्काइवक/ अंग्रेजी-संस्कृत अनुवादक ई-प्रकाशन/ आर्काइवक अधिकार एहि ई पत्रिकाकेँ छैक। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण 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(¢ a. » i | we 3 ¥ —S = i J?) Le J किये ar oy fea ? ey | |i : नताशा मम गण _— Se lo2= ) Onmiga Brae me : 7 BE Es visit : www.devanshuvatsa.com E-mail - devanshuvatsa@gmail.com 3 कोनो बदमाशी | | नहि नताशा, vet Pp | / हम एक हफ्ताक .आ' gg दिनक बाद : /.. dap a की ?| Lao नहि अछि... & aa आगरा जा. | हिनकर परीक्षाक रिजल्ट __ Wor —vi ei, रहल Bt आबि रहल अछि !!! LY कि = ae
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