180 181 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ८० म अंक १५ अप्रैल २०११ (वर्ष ४ मास ४० अंक ८०) वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own script Roman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.सुजीत कुमार झा- नेपालमे राष्ट्रिय जनगणना मैथिलीकेँ स्थान दियावकेँ विशेष संकल्प २.२. गजेन्द्र ठाकुर- स॒हस्र॑ शीर्षा॒ २.३.बिपिन कुमार झा, ग्रन्थ समीक्षा- 'महाराज महेश ठाकुर ओ कंकाली भगवती' २.४.सन्तोष कुमार मिश्र- एकटा पत्र ३. पद्य ३.१.डॉ. शेफालिका वर्मा-१. बीतल इतिहास २. पाथर ३.२..गजेन्द्र ठाकुर- हाइकू ३.३.ज्योति सुनीत चौधरी -फेर आयल वसन्त ३.४.नन्दविलास राय- किछु पद्य ३.५.नवीन कुमार आशा- किया ने पावी तोहर टोन ३.६.किशन कारीगर- किछु त हम करब ३.७.विवेकानन्द झा- हाइकू ४. मिथिला कला-संगीत- १.अनुपमा प्रियदर्शिनी २.श्वेता झा चौधरी ३.ज्योति सुनीत चौधरी ४.श्वेता झा (सिंगापुर) . भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] .VIDEHA FOR NON RESIDENTS .1.Original Poem in Maithili by Kalikant Jha "Buch" Translated into English by Jyoti Jha Chaudhary विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक विदेह आर.एस.एस.फीड। "विदेह" ई-पत्रिका ई-पत्रसँ प्राप्त करू। अपन मित्रकेँ विदेहक विषयमे सूचित करू। ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups मैथिली देवनागरी वा मिथिलाक्षरमे नहि देखि/ लिखि पाबि रहल छी, (cannot see/write Maithili in Devanagari/ Mithilakshara follow links below or contact at ggajendra@videha.com) तँ एहि हेतु नीचाँक लिंक सभ पर जाऊ। संगहि विदेहक स्तंभ मैथिली भाषापाक/ रचना लेखनक नव-पुरान अंक पढ़ू। http://devanaagarii.net/ http://kaulonline.com/uninagari/ (एतए बॉक्समे ऑनलाइन देवनागरी टाइप करू, बॉक्ससँ कॉपी करू आ वर्ड डॉक्युमेन्टमे पेस्ट कए वर्ड फाइलकेँ सेव करू। विशेष जानकारीक लेल ggajendra@videha.com पर सम्पर्क करू।)(Use Firefox 4.0 (from WWW.MOZILLA.COM )/ Opera/ Safari/ Internet Explorer 8.0/ Flock 2.0/ Google Chrome for best view of 'Videha' Maithili e-journal at http://www.videha.co.in/ .) Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Book/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ (उच्चारण, बड़ सुख सार आ दूर्वाक्षत मंत्र सहित) डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाऊ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक मटम पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू। गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज' मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण" विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाऊ। "मैथिल आर मिथिला" (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) पर जाऊ। संपादकीय विदेशी निवेशसँ मैथिलीपर अप्रत्यक्ष प्रभाव: मैथिलीपर विदेशी निवेशक अप्रत्यक्ष प्रभावक रूपमे मैथिली बाजैबलाक संख्याक घटोत्तरी आ मैथिलीक शब्दावलीक ह्रासकेँ राखल जाइत अछि। ओना ई सभ भारत आ नेपालमे पैघ नग्रक अनियन्त्रित विकास आ छोट नग्रक बिना अपन आर्थिक आधारक मात्र जमीनक खरीद-बिक्रीक कारणसँ विस्तारक कारण बेसी भेल अछि। मैथिली भाषीक एके खाढ़ीमे जतेक पड़ाइन भेल अछि से आन वर्गमे तीन-चारि खाढ़ीमे भेल (जेना तमिल वा बांग्लाभाषीकेँ लऽ सकै छी।)। मुदा आनो भाषा-भाषीमे विदेश पड़ाइनसँ भाषाक लोप भेल अछि मुदा संस्कृतिक लोप नै तँ आन वर्गमे भेल अछि आ ने मैथिलीभाषी वर्गमे। मैथिली भाषीकेँ लऽ कऽ दिल्लीमे ई कहबी भऽ गेल अछि जे आन वर्ग पाँच साल दिल्लीमे रहलापर पंजाबी बाजऽ लगै छथि आ हुनकर घरक स्त्रीगण करवा-चौथ करऽ लगै छथि मुदा मैथिलीभाषी नै तँ पंजाबी सिखै छथि आ ने हुनकर घरक स्त्रीगण करवा-चौथ करै छथि। हँ जखन अहाँ पत्नीसँ मैथिलीमे नै बजबै आ बच्चाकेँ गामक दर्शनो नै करऽ देबै तँ ओ मैथिली बाजब छोड़बे करत। विदेशी निवेश जाइ तरहेँ हिन्दी आ अंग्रेजी कार्टून चैनलमे भेल अछि, ओइसँ मैथिलीटा नै पंजाबीपर सेहो संकट आबि गेल अछि। मुदा ई एकटा फेज छिऐ, आ ई फेज बीस बर्खमे खतम भऽ जाएत। जे परिवार ऐ बीस बर्खमे मैथिली बाजब छोड़ि देताह हुनका हम मैथिली दिस सोझ रूपमे नै घुरा सकब। मुदा सांस्कृतिक सन्निकटताक कारणसँ मैथिलीक परियोजना, अनुवाद, ऒडियो-वीडियो आ संचार परियोजनाकेँ ओ समर्थन करबे करताह, तकरा सम्मान देबे करताह। आ ई अप्रत्यक्ष रूपमे मैथिली लेल वरदान सिद्ध हएत। आ एकटा पुनर्जागरणक काल अखन चलि रहल अछि तकर पुनरावृत्ति बीस बर्ख बाद हएत। मैथिली युद्धसँ बहार भऽ जीवित निकलत आ सुदृढ़ हएत। ( विदेह ई पत्रिकाकेँ ५ जुलाइ २००४ सँ एखन धरि १०९ देशक १,७४९ ठामसँ ५८, ९५६ गोटे द्वारा विभिन्न आइ.एस.पी. सँ २,९८,७९१ बेर देखल गेल अछि; धन्यवाद पाठकगण। - गूगल एनेलेटिक्स डेटा। ) २. गद्य २.१.सुजीत कुमार झा- नेपालमे राष्ट्रिय जनगणना मैथिलीकेँ स्थान दियावकेँ विशेष संकल्प २.२. गजेन्द्र ठाकुर- स॒हस्र॑ शीर्षा॒ २.३.बिपिन कुमार झा, ग्रन्थ समीक्षा- 'महाराज महेश ठाकुर ओ कंकाली भगवती' २.४.सन्तोष कुमार मिश्र- एकटा पत्र सुजीत कुमार झा नेपालमे राष्ट्रिय जनगणना मैथिलीकेँ स्थान दियावकेँ विशेष संकल्प नेपालमे राष्ट्रिय जनगणना २०६८ शुरु करयकेँ तैयारी चलि रहल समयमे जनकपुरक युवा क्लबसभ नेपालक मिथिलाञ्चल क्षेत्रमे विशेष अभियान शुरु कएलक अछि । ओ अभियान तहत मातृभाषामे कोना मैथिल सँ मैथिली लिखावय ताहिकेँ लेल प्रयत्न करत । रामानन्द युवा क्लबक अध्यक्ष दिपेन्द्र कुमार ठाकुरक अनुसार ठाम–ठाम गोष्ठी, सभा, सडक नाटक कएल जाएत । संगहि मैथिलीकेँ विरोध करयबलाकेँ प्रतिकार सेहो कएल जाएत ओ कहलन्हि । मैथिलीक लेल संकल्प जनगणनाक क्रममे मैथिलीकेँ विशेष अभियान चलावयकेँ जनकपुरमे आयोजित एक कार्यक्रममे संकल्प लेल गेल अछि । रामानन्द युवा क्लब जनकपुरद्वारा आयोजित एक कार्यक्रममे मिथिला नाट्य कला परिषद, अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा कमिटी, मिथिला राज्य संघर्ष समिति, महावीर युवा कमिटी, राम युवा कमिटी, गणेश युवा कमिटी, महावीर नव युवा कमिटी सहितक कमिटीसभक प्रतिनिधि एवं मैथिली साहित्यकारसभक सहभागिता छल । बैसारक सहभागी एवं मिथिला नाट्य कला परिषदक अध्यक्ष सुनिल मल्लिक कहलन्हि –‘मैथिली संस्था एवं प्रेमीसभकेँ अखने जागयकेँ समय अछि, जनगणनामे चुक भेल तऽ बादमे पछतावा बाहेक किछ नहि रहि जाएत ।’ अहि दुआरे विशेष सर्तकता अपनाओल जा रहल अछि ओ कहलन्हि । मैथिलीक बाधक जनगणनामे मैथिलीक बाधक सेहो देखाएल लागल अछि । नेपालक मधेशवादी दलसभ हिन्दी भाषाकेँ पक्षधर भेलाक कारण ओ सभ हिन्दी भाषामे जनगणना नहि लिखा दिए ताहिकेँ डर मैथिली आन्दोलनी संस्थासभकेँ रहल अछि । एखन जाहि रुप सँ सक्रियता देखाओल जा रहल अछि ओकर प्रमुख कारण ओहे रहल राम युवा कमिटीक अध्यक्ष सोहन ठाकुर कहलन्हि । अहि सँ पूर्व भेल जनगणनामे मैथिलीक स्थानपर नेपाल सदभावना पार्टी हिन्दी बहुतो गोटे सँ लिखवा देने छल । फेर सँ हिन्दी लिखावयकेँ प्रयत्न शुरु कएने अछि । सदभावना पार्टीक नेतासभ विभिन्न स्थानपर हिन्दीकेँ वकालत शुरु कऽ देने अछि । रामानन्द युवा क्लबक अध्यक्ष दिपेन्द्र कुमार ठाकुर कहलन्हि –‘जे जतेक करौक हमसभ मैथिलीक मामिलामे एक जुट छी, कियो कतबो चिचियाएत मैथिलक एकता बनल रहत ।’ जनगणनामे मातृभाषाक महत्व कोन भाषाभाषीकेँ संख्या कतेक अछि एकर गिन्ती जनगणने करैत अछि । भाषाभाषीकेँ संख्या बेसी रहत तऽ ओकरा सरकारी सुविधा सेहो बेसी भेटैत अछि । अहिकेँ लेल सभ मातृभाषीबीच प्रतिस्पर्धा रहैत अछि । नेपालमे दोसर सभ सँ बेसी बाजयबला भाषा मैथिली अछि । इ स्थान एकरा फेर सँ प्राप्त भेल तऽ हरेक स्थानपर एकर महत्व बढत । आब तऽ हरेक निकायमे मैथिली बाजयबलाकेँ रोजगारी भेटत । फेर इ तखने भेट सकैत अछि जखन मैथिली भाषीक संख्या बेसी रहत । अगिलका जनगणनामे मैथिलीभाषीक संख्या १२ प्रतिशत रहल छल । अहिबेर २० प्रतिशतधरि होवयकेँ सम्भावना रहल अछि ।
ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर स॒हस्र॑ शीर्षा॒ मणिरत्नम लेल, जिनकर हिन्दुस्तानी हमरा अपन पिताक स्मरण करबैत अछि। उपन्यास स॒हस्र॑ शीर्षा॒ हजार माथ, हजार मुँह, हजार तरहक गप-खिस्सा, सत्य आ …| (सहस्रशीर्षा पुरुष: सहस्राक्ष:सहस्रपात्। सभूमिग्वंसर्वतस्पृत्वात्यतिष्ठद्दशांगुलम्॥...) … पद्भ्यांशूद्रो अजायत|| ..पद्भ्यां भूमिर्दिशः ...|| पहिल कल्लोल गढ़ नारिकेल- महिसबाड़ ब्राह्मणक गाम चारू कात गाछ-बृच्छ, पोखरि। गाममे एक..दू..तीन आ एकटा आर, चारि टा पोखरि। ओना तँ तीन टा आर पोखरि अछि। एकटा उत्तरबरिया पोखरिक उत्तरभर बड़का डकही पोखरि। लोक बजै छथि जे कोनो डकैत एक्के रातिमे खुनने रहए ई पोखरि। मुदा तकर प्रमाण पुछने यैह पता लागत जे आन तँ कोनो प्रमाण नहि मुदा खुनैत-खुनैत भोर भऽ गेल रहै आ तइ कारणसँ ओ डकैत पोखरिमे जाइठ नै गारि सकल रहए। हड़बड़ीमे ओहि डकैतक, डकैत की राक्षस कहू, एक पएरक पनही सेहो छुटि गेलै पोखरिक कातमे। बड्ड दिन धरि पोखरिक कातेमे रहै मुदा फेर बाढ़िमे ओहो बहि गेल। से जे एकटा प्रमाण रहए सेहो नै बचल। गामसँ दूर अछि से छठिक पाबनिसँ कोनो सम्बन्ध आइ धरि एहि पोखरिक नहि स्थापित भऽ सकल अछि। हँ उपनयन बिध-बाधमे धरि एकर उपयोग होइतहि अछि। किसिम-किसिमक माँछ रहै छै एहि पोखरिमे। माँछक कोनो कमी नहि। कहियो डकही पोखरिमे जीरा देबाक खगताक अनुभव नहि कएल गेल। सालना मछहरि होइत अछि आ सभ टोलक लोककेँ-दछिनबाइ टोलकेँ छोड़ि कऽ– सभ दिन अपन-अपन टोलक माँछक हिस्सा देल जाइत छै। दछिनबरिया पोखरिक दक्षिणमे अछि बुचिया पोखरि। गामसँ दुरगर अछि मुदा जाठि छै बीचोबीच। काठक एहि जाठिकेँ गारबा काल पीअर बच्चाक, आइक जमीन्दार, अति वृद्ध प्रपितामह एकटा बड्ड पैघ आयोजन कएने छलाह। बस्तीसँ दुरगर आ खेतक बीचमे रहबाक कारणसँ एतहु लोक सभ स्नानक लेल कम्मे-सम अबैत छथि। मछहरि सेहो होइत अछि मुदा से मात्र एहि दछिनबरिया टोलक लेल। एहि पोखरिक एकटा आर विशेषता अछि। जखन दुर्गापूजाक दिनमे दुर्गाजी फेरसँ नैहरसँ सासुर दसम दिन जकरा जतरा सेहो कहल जाइत अछि, बिदा होइत छथि तँ हुनकर मूर्तिक भसान अही पोखरिमे होइत अछि। पुरुखपात्र तँ नहि, हँ महिला लोकनि दुर्गाजीक भसानपर हबोढ़कार भऽ कनैत छथि। दुर्गाजी एहि टोलकेँ के पूछए, एहि गामेमे नहि बनै छथि। ओ बनै छथि पड़ोसक गढ़ टोलीमे। एहि गामक लोक तँ अगत्ती सभ। खष्ठी दिन धरि दुर्गाजीकेँ झाँपि कऽ राखल जाइत अछि, मात्र मूर्तिकार हुनका उघारि कऽ देखि सकैए, कारण ओ नहि देखत तँ फेर दुर्गाजी बनतीह कोना। आन कियो देखत तँ आन्हर भऽ जएत। हँ, खष्ठी दिन बेलनोतीक बाद मूर्तिक अनावरण बाद हुनकर दर्शन लोक कऽ सकैए। आ ओही दिनसँ मेला सेहो लगैत अछि। एहि गाममे दुर्गा बनतीह तँ कतेक लोक खष्ठीक पहिनहिये आन्हर भऽ जएत। आ पड़ोसक गाम कम अगत्ती अछि। मुदा पूजाक नामपर देखू सभ सञ्च-मञ्च भऽ जाइत अछि। नाममे टोल लागल छैक- गढ़ टोल मुदा अछि गाम। अही गाम जेकाँ महीसबार ब्राह्मणक गाम। अगतपनामे हम आगू आकि हम- एकर तँ बुझु प्रतियोगिता होइत रहैत छैक दुनू गामक मध्य। गढ़ टोलाक गाम दऽ कऽ जाऊ तँ ओहि गामक बान्हक क्लातक दलानपर बैसल छौड़ा सभ किछु ने किछु सुनेबे टा करत। मुदा एहि गामक फसादी प्रकृतिक छौड़ा सभ अरबधि कऽ ओहि गाम बाटे जएबे टा करत। हँ, सध-बध सभ अही बुचिया पोखरिक बाटे गेनाइ श्रेयस्कर बुझैत अछि, भने कनी हटि कऽ रस्ता छै। तेँ की। गाममे एकटा आर पोखरि होइत छल। मुदा गामक पूबमे कमला आ बलान एहि दुनू धारकेँ नियन्त्रित करबा लेल दू टा बान्ह बान्हल गेल। गामसँ सटल पूब दिस उत्तर-दक्षिण दिशामे एकटा छहर, फेर छथि कमला महरानी, फेर कमला महारानीक भाइ बलान धार आ तखन जा कऽ फेर ओहिसँ पूब उत्तर-दक्षिण दिशामे दोसर छहर। अही दुनू बान्हक बीचमे दोसर छहर अछि बल्ली पोखरि। एहि विशाल पोखरिक सटले रहए एकटा फुटबॉल क्रीडाक्षेत्र- विशाल रमना। किछु तँ बालू जमा भेने आ किछु जमीन्दारक करतब सँ ई पोखरि आ रमना पीअर बाबूक चकबन्दी बला खेतमे चलि गेल। सरकार सेहो ओहि बीचमे नहि जानि कोन कारणसँ चकबन्दीपर जोर देने रहए। सुरुजू भाइक गोबरसँ सीटल खेत सेहो चकबन्दीमे पीअर बच्चाक खेतमे मिलि गेल छल। दुनू छहरक बीच महिसबार सभक मालक लेल बौआचौड़ी अछि। महिसबार एतए अबैत छथि, खेलाइत छथि आ कमलामे हेलैत छथि। कखनो अपना-अपनीकेँ कमलाक धारमे बिना प्रतिरोधक ओ सभ बहए दैत छथि तँ कखनो धारक प्रवाहक उनटा हेलैत छथि। दुनू बान्हक बीच गुअरटोली। पहिने ई गामक टोल छल मुदा आब एतुक्का मतदाता सूची झंझारपुर बजारमे चलि गेल छै। गामक स्कूलपर वोटक बूथ रहने पहिने, बहुत पहिने, एकरा सभकेँ वोट नहि देमए दैत रहए। आब तकर उल्टा छै। बौआ चौरीक ई स्नातक सभ- आब कियो दिल्ली-बम्मै मे तँ कियो सउदियामे छथि। कियो सेक्युरिटी गार्ड छथि तँ कियो सेक्युरिटी गार्डक कम्पनी खोलि लेने छथि। गामक आमक गाछी सभ, कैक टा। बड़का कलम। खढ़ोरिक नवगछली। भोरहा कातक कलम। पोखरिक महार सभपर गाछी। खढ़ोरिमे खेत रहए। मुदा एक गोटे जे नवगछली लगेलन्हि से छाह भेने दोसर खेतमे धानक खेती दबि गेल। से ओहो कने चौक-चौराहापर अनट-बनट बजैत आमक गाछी लगा देलन्हि। एक टा जमबोनी सेहो अछि। नमगर-नमगर गाछ सभ। पीपरक गाछ सभ डिहबारक स्थानसँ लऽ कऽ स्कूलक प्रांगण धरि एत्तऽ ओत्तऽ पसरल अछि। पीपर गाछक जड़ि एत्तऽ आ शिरा सभ दहोदिस। बान्ह सभक कातमे बोनसुपारीक गाछ, साहर दातमनिक झोँझ, बँसबिट्टी आ मारिते रास फूल आ काँट सभ। लजबिज्जी तँ सभ कलममे। चाकर आमक गाछपर रखबार सभ ओछैन कऽ सुति रहैत छथि। वरक गाछ मुदा एक्केटा, पीचक कातमे मीआँटोली लग। खेत पथार सेहो कैक तरहक। दुनू बान्हक बीचक खेतकेँ आब सभ ओइ पार बला खेत कहए जाइत छथि। बलुआही खेत। परोर, तारबूज, फुइट, अल्हुआक खेती, सभसँ सस्त खेत जे किनबाक हुअए तँ एतए आऊ। मुदा बाढ़िक बाद खेतक आरिक मूह-कान बदलल भेटत। कोनो साल बाढ़िक बाद खेतक रकबा घटि जाए तँ अराड़ि नहि ठाढ़ कऽ लेब। अगिला बाढ़िमे भऽ सकैए कमला महारानी ओकर रखबा बढ़ा सकै छथि। खेती ओना तँ धानोक होइत छै। मुदा से सुतारपर छै। कोनो बर्ख तीन बेर रोपलोपर बेर-बेर बाढ़िमे दहा जएत तँ कोनो साल कमला महारानी खेतमे ततेक पाँक भरि देतीह जे जतेक मोनक कट्ठा मोनमे सोचब ताहिसँ बेशी उपजत। कनेक महग खेत किनबाक हुअए तँ मोड़ बला आ गम्हारिक गाछ लग बला खेत कीनू। एतए लोक खेतीसँ बेशी बसोबास लेल जमीन कीनि रहल छथि। डकही पोखरि बला खेतकेँ बढ़मोतर कहल जाइत अछि। पहिने ब्रह्मोत्तर रूपमे किनको मँगनीमे राजा द्वारा भेटल होएतन्हि। पहिने सुनैए छियै नीक खेती रहए मुदा आइ काल्हि पानि भरल रहै छै। इलाकामे जे छिटुआ धानक खेती होइत अछि से अही बाधमे। बड़का कोला, धूरपर, भोरहा आ पुर्णाहा बाधक अतिरिक्त आइ काल्हि किछु गोटे छहरक ढलानपर सेहो खेती-बारी शुरु कऽ देने छथि, सीढ़ी बना कऽ खेती केनिहारक संख्या भूगोलक पोथीमे भने पहाड़पर मात्र देखौने होथि। महीसक मरलापर कन्नारोहटक स्वर आ जादूटोना, ककरो दरबज्जापर पूजल फूल रातिमे फेकब। आब लोको मुदा बूझि गेल अछि जे ई कोनो छौड़ाक किरदानी अछि। कृषि-मत्स्य-पशुपालन आधारित महिसबार ब्राह्मण बहुल एहि गामक चारूकात पढ़ल लिखल (मुदा एकटा चोरक टोल सेहो अछि ओतए), ततेक नहि पढ़ल लिखल आ मुहदुब्बर गाम सभ अछि। पड़ोसक चोर सभक हिम्मत नहि छन्हि जे एहि गाममे कोनो जातिक घरमे चोरि कऽ लेथि। एहि गाममे जे बियाह भऽ गेल तँ सभटा फसादी जमीनक निपटार भऽ जाइत अछि, लोक समंगर भऽ जाइत अछि। एतएसँ हसेरी दूर-दूर धरि जाइत अछि। कुटुमक जमीनक झगड़ाक निपटारासँ लऽ कऽ वोट लुटबा धरि हसेरी बहराइत अछि। जमीन एहि गाममे पचीस हजारक कट्ठा अछि, वैह जमीन पड़ोसक गाममे दस हजार रुपैये कट्ठा। उँचगर जमीन गाममे सस्त कारण बर्खाक पानिसँ पटौनी नहि भऽ सकैए उत्थर जमीनक। मुदा बान्ह बनलाक बाद बनराहा गाम सभक जमीन सभ सेहो महग भऽ गेल अछि। पहिने घटक अबैत रहए तँ एहि गामक लड़कापर जे दस कट्ठा आ बनराहा गमक लड़कापर एक बीघा हिस्सा देखै छल तैयो अही गाममे कुटमैती करैत छल। कारण बनराहा गाममे दसो बीघा खेत हिस्सा रहने गुजर कठिन छलै। मुदा आब ओकर सभक भाग्य खुजि गेल छै। जखन बाढ़ि अबै छै तँ ओकर सभक खेतक पटौनी भऽ जाइ छै। बनराहा.. बुझलहुँ नहि, ओहि गाम सभक गाछीमे बानर सभ भरल छै आ लोको सभ बानरे सन पीअर कपीश। कपीश ! आ मास्टरी पहिने कियो करै नहि से सभटा बनराहा सभ मास्टर भऽ गेलै। आ आब मास्टरक दरमाहा देखू। सभटा बनराहा धोआ धोती पहिरि जे निकलैए तँ देहे जरि जाइ छै एहि गौँआक। धरि दुर्गापूजा एहि गाममे नहि शुरू भेल। मुहदुबरा गाममे सेहो शुरू भऽ गेल मुदा एत्तऽ। चाहबै तँ किएक नहि होयत। रामलीला एक महिना केलहुँ हम सभ आकि नहि। धू, बान्ह लगहीसँ घिना गेल। भने नहि होइए दुर्गा पूजा। एक तँ धी बेटीकेँ लियाउन करेबाक झमेला रहत आ जे मेलपेँचसँ रहै जाइ छी सेहो पार्टी-पोलिटिक्स खतम कऽ देत। गाम अछि महिसबार ब्राह्मणक गाम। ब्राह्मणमे इन्द्रकान्त मिश्र, रमण किशोर झा आ अरुण झा। सुखराती दिन जे हूड़ा-हूड़ीक खेल जे एहि महिसबाड़ ब्राह्मण सभक देखब तँ पोलोक खेलमे कोनो रुचि नहि रहत। समियाक डोमसँ कीनल सुग्गरकेँ भाँग पीबि मातल महीस द्वारा हूड़ा लेब। चरबाह जे महीसक पहुलाठ पकड़ि कलाकारीसँ बैसल रहैत छथि सेहो अद्भुते। गाममे आनो जाति अछि। दुनू बान्हक बीचमे उचका भीरपर गुअरटोली तँ अछिये। बाढ़ियो मे ओ टोल नहि डुमैत अछि। नाहसँ आबाजाही होइए। कमलाक नाह खेबाह मलाह नहि राउतजी छथि। गामक लोकसँ तकर बदलामे अन्न लैत छथि। अनगौँआसँ हँ धार पार करेबाक बदला पाइ लैत छथि। कुञ्जड़ा टोलीमे मोहम्मद शमशूल। पीचपरक मिआँटोली बगलक गामक वोटर लिस्टमे अपन नाम अंकित करा लेने अछि। ओतहि डोमक चारिटा घर सेहो अछि। बगलक गामक वोटर लिस्टमे नाम अंकित करा लेबाक कारण कारण वैह जाहि कारणसँ गुअरटोली आब एहि गामक वोटरलिस्टमे नहि अछि। मुदा वोटरलिस्ट सँ गाम थोड़बेक बनै छै। ईहो दुनू टोल अही गामक सीमानमे अबैत अछि। डोमक काज पाबनि-तिहारमे तँ होइते अछि। पेटार बनेबासँ सूप, बीअनि सभ किछु बनेबामे डोमक काज आ पाहुन परख लेल आ बरियाती लेल जे खस्सी काटल जएत ताहि लेल मिआँटोलीक काज। खस्सीक मूड़ा दुर्गापूजाक बलिमे कमिटी लऽ लैत अछि। मिआँ जे खस्सी काटैत अछि से हलाल कऽ कऽ। गरदनि अदहा लटकले रहैत छै, मुदा बना सोना कऽ गरदनि लऽ जाइये आ खलरा सेहो। तखन महिसबार ब्राह्मणमे सँ जे हनुमानजी मन्दिरपर भजन आ अष्टजाम करैत छथि से ओही खलरासँ बनल ढोलक किनैत छथि। फेर धनुख टोली। भगवानदत्त मंडल आ अधिकलाल मंडल-धानुक। पहिने यैह लोकनि भार उघैत रहथि मुदा पछाति दुसधटोलीक लोक सेहो भार उघए लागल छथि। खेती करब धनुकटोली आ दुसधटोलीक पुरान पेशा अछि। हँ पहिने ई सभ मात्र बोनिपर काज करैत रहथि आब बटाइपर करैत छथि। कोनो झगड़ा-झाँटी भेलापर महिसबार ब्राह्मणक चानि कारी खापड़िसँ तोड़ैत एहि दुनु टोलक महिलाकेँ अहाँ सालक कोनो एहन मास नहि अछि जाहिमे नहि देखि सकै छी। बकरी पोसब आ दुर्गापूजामे छागर बलिक लेल बेचब एहि दुनू टोलक पशुपालनमे अहाँ गानि सकै छी। एक-एकटा बरद सेहो कियो राखए लागल छथि आ पार लगा कऽ तकर उपयोग जोड़ा बरदसँ खेती करबामे करैत छथि। तीन टा घरक रहलोपर धोबियाटोली एकटा टोल बनि गेल अछि। झंझारपुर धरिक मारवाड़ीक कपड़ा एतए साफ कएल जाइत अछि। महिसबार ब्राह्मण सभ जे बरियातीमे बेलबटम झाड़ि कऽ सीटि-साटिकऽ निकलैत छथि से कोनो अपन कपड़ा पहिरि कऽ। वैह मँगनिया कपड़ा, महगौआ मारवाड़ी सभक। मारवाड़ी सभक ई कपड़ा रजक भाइ दू दिन लेल भाड़ापर हिनका सभकेँ दैत छथिन्ह। कोरैल, बुधन आ डोमी साफी, धोबि। डोमी साफी आब डोमी दास छथि, कारण कबीरपंथी जोतै छथि। नौआटोली सेहो तीन घरक। जयराम ठाकुर, लक्ष्मी ठाकुर आ माले ठाकुर, हजाम। बड़ बजन्ता सभ। कमाइलक लिस्ट लऽ कऽ तगेदा करैत छथि। दुर्गापूजामे जे बाहरी लोक अबैत छथि से कमाइल बिना देने घुरि नहि पबैत छथि। पहिने हप्तामे एक बेर दलाने-दलाने केश कटबा लऽ जाइत रहथि मुदा आब जिनका केश कटेबाक छन्हि से आबथु हमर दुअरा। हँ बर-बरियाती जएबाक होएत तँ से सालमे अकाध बेर टोल सभक दलानपर चलि जेताह। मुदा सेहो एके ठाम। जिनका कटेबाक हेतन्हि पंक्तिबद्ध भऽ बैसथु। ई नहि जे क्यो अखन आबि रहल छी तँ क्यो तखन आबि रहल छी। आब सभ घरसँ एक-एक गोटे झंझारपुरमे सेहो सैलून खोलि लेने छथि। सैलून कोन एकटा प्लास्टिक पटरी कातमे ठाढ़ कऽ देने जाइ छै? नहरनीक प्रयोग तँ बन्ने भऽ गेल अछि। नह अपना-अपनीकऽ काटै जाऊ। छुतकामे बौआसीनक आँगुर कनियाँ आबि कऽ काटि देत, बस। आ पिजेलहा अस्तूरासँ दाढ़ी काटब। खून खसि रहल अछि से कोनो हम छह मारि देने छी। फोँसरी रहए। नञि बाबू, टोपाजबला अस्तूरा झंझारपुरक सैलून लेल छै। फेर एकटा आर टोल अछि। चर्मकार, मुखदेव राम आ कपिलदेव राम । पहिने गामसँ बाहर रहए, बसबिट्टीक बाद। मुदा आब तँ सभ बाँस काटि कऽ खतम कऽ देने अछि आ लोकक बसोबास बढ़ैत-बढ़ैत एहि चर्मकारक टोल धरि आबि गेल अछि घरहट आ ईँटा पजेबा सभ अगल-बगलमे खसिते रहैत अछि। ढोलहो देबासँ लऽ कऽ धोल-पिपही बजेबा धरिमे हिनकर सभक सहयोग अपेक्षित। माल मरलाक बाद जाधरि ई सभ उठाकऽ नहि लऽ जाइत छथि लोकक घरमे छुतका लागले रहैत अछि। जोगिन्दर ठाकुर गढ़ नारिकेल गामक कमारसारिक बड़ही कमारमे सभसँ प्रतिष्ठित परिवार। माइनजन मुदा जखन अबै छथि तखन लगैए जे जोगिन्दर बाबूक सरस्वती मन्द पड़ि जाइ छन्हि आ नीक आ अनर्गल दुनू गपपर खाली हँ निकलै छन्हि। जोगिन्दरकेँ तीनटा सन्तान- बिहारी, अर्जुन आ शिवनाराएण। काठक व्यावसायमे लागल छथि सभ गोटे मुदा बिहारी संगमे लोहाक काज सेहो करि छथि आ अर्जुन साइकिल मिस्त्री सेहो बनि गेल छथि आ रिक्शा साइकिलक छोट-मोट भङठीसँ लऽ कऽ पेन्चर साटब धरि सभ काज करै छथि। बच्चा सभक लेल क्रिकेटक ओधिक गेन्दसँ लऽ कऽ लोहाक तारकेँ नीचाँमे मोड़ि लकड़ीक पहियाकेँ गुड़काबए बला खेल आ कतेक आर खेलाक इजाद केने छथि शिवनाराएण। से लोक कहितो अछि- देखियौ, पढ़ला लिखलासँ नोकरीये टा भेटै छै से धारणा बदलू। देखियौ शिवनाराएणकेँ। की-की फुराइत रहै छै, कुकाठसँ की-की बना लैए । मुदा बिहारीक हाथक ईलम ककरोमे नै, आराकाट , सोझकटाइ , खड़ाकाट , फेँटकटाइ सभमे शिव नाराएणसँ आगाँ। शिवनाराएण आविष्कार करैए आ तकर बाद ओकर देखा-देखी वएह बौस्तु बिहारी ओकरासँ नीक बना लैए। आब गाममे कोनो बौस्तुक कॉपीराइट आविष्कारककेँ थोड़बेक भेटतैक। पथरौटी लकड़ीपर शिवनाराएणक आरी, बसुला मुरुछि जाइ छै मुदा बिहारी नै जानि कोना सम्हारि लैत अछि। टोनाह लकड़ीसँ सेहो किछु ने किछु बाना कऽ मेला ठेलामे बेचि अबैत छथि। तकथा चिरबाक लेल नम्हर आरी सोझाँमे नहि रहने छोटको आरिसँ चीरि दैत छथि। लकड़ीक कामिल भागकेँ असरासँ अलग करबामे बिहारीक जोड़ नहि। पटवा-मोट सूतक बनल अँचरी भगवतीकेँ खोइँछ देबाक लेल जगदीश माइलकेँ ताकल जाइत छन्हि, पटमीनी बड्ड काजुल। भोला पंडित कुम्हार, माटिक कोहा सभसँ लऽ कऽ बच्चा सभक लेल चिड़ै चुनमुनी सभ धरि बनेबाक इन्तजाम छन्हि। मटिकममे कोनो जोड़ नहि। सत्यनारायण यादव, राउतजी आ गुआरसँ आब यादव। दुग्धक व्यापारसँ खेतीबारी आ गामक सड़कक माँटि भराई, सभ काज हाथमे छन्हि। बासू चौपाल, खतबे, भार उघैत रहथि, माँछ सेहो उघै छथि आ बेचैयो लागल छथि। चलित्तर साहु आ लड्डूलाल साहु हलुआइ, दुर्गापूजामे दोकान लगबै छथि। काज उद्यममे सब्जी-तरकारी बनेबाक ठीका-पट्टा सेहो लेमए लागल छथि। शिवनारायण महतो, सूरी। लछमी दास, ततमा। लाल कुमार राय, कुर्मी। भोला पासवान आ मुकेश पासवान- दुसाध। सत्यनारायण कामत; किओट, दरभंगा महाराजक कामतपर रहैत छलाह। रामदेव भंडारी। किओटक प्रकार भंडारी जे दरभंगा महाराजक भनसाघर सम्हारैत छलाह। कपिलेश्वर राउत आ रामावतार राउत, बरइ पानक खानदानी पेशा। डोममे बौधा मल्लिक। कोइर, दुखन महतो। भुमिहार, राधामोहन राय। सोनार, अशोक ठाकुर। तेली, रामचन्द्र साव, बौकू साव आ कारी साव। मलाह जीबछ मुखिया। डकही पोखरिमे सालमे एक बेर मछहरि-पन्द्रह दिनसँ मास दिन धरि मलाह एहिमे महाजाल खसबैत छथि। मलाहक टोल जुमि अबैए। पोखरिक कातमे मास दिन लेल मलाहक गाम बसि जाइत अछि। पहिने तँ मास भरिसँ ऊपर ई सालाना मछहरि चलैत रहए मुदा आब घीच तीर कऽ बीस दिन। फेर मलाहक सरदार घोषणा करैत छथि- जे आब माँछ शेष भऽ गेल। आब जे मारब तँ महाजालमे तँ एको टा बड़का माँछ नहि आओत। भौरी जालसँ मारब तँ सभटा छोटका माँछ मरि जएत आ अगिला साल तखन जीरा देमए पड़त। ओहि पन्द्रह-बीस दिनमे गाममे उत्सवक वातावरण रहैत अछि। अही बहन्ने पोखरिक साफ-सफाई सेहो भऽ जाइत अछि। भोरे चारि बजे सँ दुपहरिया धरि माँछ मारल जाइत अछि । आ फेर बेरू पहर धरि सभ टोलक लोककेँ-दछिनबाइ टोलकेँ छोड़ि कऽ- अपन-अपन टोलक हिस्सा दऽ देल जाइत छै। सभ अपन-अपन हिस्सा लऽ गामपर अबैत छथि। ओतए टोलक सभ परिवार अपन-अपन हिस्सा बाँटि लैत छथि। टोलक माँछक कतेक कूड़ी लागत, एहि विषयपर कहियो काल विवाद सेहो भऽ जाइत अछि। जिबैत भने मसोमात काकीसँ टोका-बज्जी नहि होइन्हि। मरबा काल बेटीकेँ हिस्सामे सँ किछु देबाक मसोमातक इच्छाकेँ कंठ मचोड़ि देने होथि। आ बेचारी मसोमातक मुइल शरीरक औँठा स्टाम्प पेपरपर लगबेने होथि। हुनकर स्मरण आन काल भने नहि अबैत होइन्हि मुदा डकही पोखरिक हिस्सा लेबा काल सभकेँ अपन-अपन मसोमात काकी मोन पड़िये जाइत छन्हि। एहिपर विरोध व्यक्त सेहो होइत अछि आ पहलमान जिनका सभ प्रेमसँ खलिफ्फा सेहो कहैत छन्हि, केँ छोड़ि किनको एहि प्रकारक हिस्सा नहि भेटैत छन्हि- भने खलिफ्फाक अँगनाक ओ मसोमात बीस बर्ख पहिनहिये मरि गेल होथि। डकही पोखरिक एकटा आर विशेषता अछि। एहिमे माँछ, काछु सभ स्वयम बढ़ैत अछि। पोखरिक कातमे मलकोका सभ अनेरुआ, मारते रास लीढ़ केचुलीलीक प्रकार। कातमे भेंट-कन्द महिसबार बच्चा सभक भोजन। मुसहर बिचकुन सदाय। डकही पोखरिक सटल गड़खै सभ, थलथल करैत दलदली भूमि सेहो। ओहिमे बिसाँढ़ कोरि-कोरि कऽ मुसहर सभ खाइत छथि। १९६७ ई.क अकालमे जखन सभटा पोखरि, गड़खै सुखा गेल ई डकही पोखरि मुदा नहि सुखाएल। प्रधानमंत्री आएल रहथि तँ हुनका देखेने रहन्हि सभ जे कोना एतएसँ बिसाँढ़ कोड़ि कऽ मुसहर सभ खाइत छथि। गढ़ नारिकेल गामक एहि सभटा जातिक ई मुँहपुरुख सभ। दोसर कल्लोल किशनगढ़मे बसि गेल गढ़ नारिकेल किशनगढ़ गाम। दिल्लीक पौश एरिया वसन्तकुँजक बगलमे। पाइबला सभ सेक्टरमे रहै छथि आ गरीब सभ किशनगढ़ आ मसूदपुरमे। सेक्टरमे ओतुक्का लोक सभ कम्युनिटी हॉलमे खैराती हॉस्पीटल खोलने छथि। सेक्टरक पता देलापर फीस देमए पड़ैत अछि। गामक पतापर फीस तँ नहिए देमए पड़ै छै, दबाइयो मँगनीमे भेटै छै। बगलमे मॉल अछि। दू तरहक। एकटा सामान्य लोक लेल। आ दोसर डी.एल.एफ.क इम्पोरिया, वसन्तकुँजक नेल्सन मंडेला मार्गपर। असमानताक आ अपार्थेइडक विरुद्ध संघर्ष करएबला नेल्सन मंडेला। मुदा हुनकर नामपर बनल एहि मार्गपर बनल एहि इम्पोरिया मॉलमे लाख रुपैयासँ कममे कोनो समान भेटब असंभव। सभसँ सस्त अछि लाख रुपैयाक लेडीज पर्स। बंगलोरक कस्तूरबा गाँधी मार्गपर शराबक फैक्ट्री आ महात्मा गाँधी मार्गपर बीयर बार सभ। गाइड लोक सभकेँ कहैत अछि- वर शराब बनबैत अछि आ कनिया बेचैत अछि कारण महात्मा गाँधी मर्ग स्थित ओहि बीयर बार सभमे शराबक बिक्री होइत अछि। तेहने सन कथा अछि नेल्सन मंडेला रोडक। मुदा समाजवाद अछि एतए। से पाइ अछि तँ सेक्टरमे रहू आ नहि अछि तँ गाममे, दुनु सटले-सटल। जमीनक दलाल एतुक्का सभसँ पाइबला लोक अछि। अपन बिजनेस कार्ड छपबैए ई सभ- रिअल एस्टेट एजेन्ट कऽ कऽ। बगलमे मेहरौली गाम सेहो अछि। माछ मुदा किशनगढ़ आ मेहरौली दुनू ठाम भेटत। दिल्लीक लोक माँछ कम खाइत अछि। अपने दिसुका लोक एकरा सभकेँ माँछ खेनाइ सिखेने छै। आ अही बसन्तकुंज, मेहरौली आ किशनगढ़मे गढ़ नारिकेलक बहुत रास परिवार आबि गेल अछि। ब्राह्मणमे इन्द्रकान्त मिश्रक बेटा उपेन्द्र बसन्तकुञ्जमे रहै छथि। कुञ्जड़ा टोलीक मोहम्मद शमशूलक बेटा इकबाल मेहरौलीमे अछि। धनुख टोलीक भगवानदत्त मंडलक बेटा राजा किशनगढ़मे अछि। धानुक अधिकलाल मंडलक बेटा सुखीलाल डॉक्टर छथिन्ह, रहै छथि बसन्तकुञ्जमे, काज करै छथि दू-तीनटा हॉस्पीटलमे, जेना बत्रा हॉस्पीटल, फोर्टिस, रॉकलैण्ड आ अपोलोमे। मुदा सप्ताहमे एक दिन सोसाइटीक खैराती हॉस्पीटलमे मुफ्त इलाज करै छथि। धोबियाटोलीक डोमी साफीक बेटा ललन बसन्तकुँजमे ठेलापर कपड़ामे लोहा दैत अछि। ओकर कनियाँ बुधनी सेहो घरे-घर कपड़ा बटोरि आनैत अछि आ तकरा लोहा कऽ घरे घर दऽ अबैत अछि। ई सभ मुदा रहै जाइए बसन्तकुँजेमे। ककरो दूटा गैराज किरायापर लऽ लेने अछि, एकटा मे काज करै जाइए आ दोसरामे रहै जाइए। नौआटोलीक जयराम ठाकुरक माझिल बेटा बसन्त बसन्तकुञ्जक एकटा सेक्टरक सोझाँ गाछक तरमे सैलून खोलि लेने अछि। एकटा कुर्सी लगा देने अछि आ एकटा अएना लटका देने अछि। सोझाँक बजारमे केश कटाइ पचास टका लेत तँ मुक्ताकाशक ई सैलून पन्द्रह टाकामे केश काटि देत। रहैए मुदा किशनगढ़मे। बीचमे पुलिस तंग केने रहै तँ तीन मास गामसँ घुरि आएल छल। आब मुदा पुलिससँ सेटिंग कऽ लेने अछि। चर्मकार मुखदेव रामक बेटा उमेश सेहो ओही मुक्ताकाश सैलूनक बगलमे अपन असला-खसला खसा लेने अछि, रहैए मुदा किशनगढ़मे। । चप्पल, जुत्ताक मरोम्मतिक अलाबे तालाक डुप्लीकेट चाभी बनेबाक हुनर सेहो सीखि लेने अछि। कुञ्जी अछि तँ ओकर डुप्लीकेट पन्द्रह टाकामे। कुञ्जी हेरा गेल अछि तँ तकर डुप्लीकेट सए टाकामे। आ जे घर लऽ जएबन्हि तँ तकर फीस दू सए टाका अतिरिक्त। बड़ही कमार टोलक जोगिन्दर ठाकुरक बेटा नमोनारायण अंसल बिल्डर्समे नोकरी करै छथि। किशनगढ़मे मकान कीनि लेने छथि। मुदा ओतुक्का वातावरण देखि दुखी रहै छथि कारण ओतुक्का वातावरण गामोसँ बत्तर छै। जोगारमे छथि जे कतहु अपार्टमेन्टमे जगह भेटि जाए। आ से कनेक दुरगरो जेना गाजियाबाद धरि जएबाक लेल तैयार छथि। पटवाटोलीक जगदीश माइलक बेटा महेश गामेमे रहै छन्हि। भोला पंडित कुम्हारक बेटा नवीन मेहरौलीमे जैन मन्दिरक सोझाँ अपन कलाकृतिक प्रदर्शन केने छथि। बगले रहै छथि, मेहरौलीक दूधवाली गलीमे। सत्यनारायण यादवक बेटा बिपिन बसन्तकुञ्जक फ्लैटमे रहै छथि। रेलबीक ठिकेदारीमे खूब कमेने छथि। बासू चौपालक बेटा सुरेन्द्र गामेमे छथि। चलित्तर साहक बेटा सुरेश कुतुब मीनारक सोझाँ चलित हलुआइ दोकान खोलने छथि आ मेहरौलीमे रहै छथि। सूरी शिवनारायण महतोक बेटा प्रशान्त डी.एल.फ. इम्पोरियामे काज करै छथि आ अपन दोकान खोलबाक मन्सूबा रखने छथि। रहै छथि किशनगढ़मे। लछमी दास, ततमाक बेटा रामप्रवेश गामेमे छन्हि। कुर्मी लाल कुमार रायक बेटा सुमन अफसर छथिन्ह आ बसन्तकुञ्जक क्वार्टरमे रहै छथि। मुकेश पासवानक बेटी मालती आ जमाए मथुरानन्द बसन्तकुञ्ज लग फार्म हाउस लेने छथि आ ओतहि रहै जाइ छथि। मथुरानन्द मैथिलीक नीक लेखक छथि आ बसन्तकुञ्जक डी.पी.एस.स्कूलक प्रिंसिपल छथि। मालती बैंक अधिकारी छथि। सत्यनारायण कामतक बेटा मदन किशनगढ़मे रहै छथि आ बसन्तकुञ्जक बिगबजार मॉलमे सेक्युरिटी गार्ड छथि। रामदेव भंडारीक बेटा श्यामानन्द बिगबजार मॉलक के.एफ.सी.क चिकन एक्सपर्ट छथि। रहै छथि किशनगढ़मे । बरइ कपिलेश्वर राउतक बेटा पालन पानक गुमटी खोलि लेने छथि, मुक्ताकाश सैलूनक बगलमे। बिहारक लोकक पान खेबाक आवश्यकताक पूर्तिक लेल। रहै छथि किशनगढ़मे । डोमटोलीक बौधा मल्लिकक बेटा श्रीमन्त सेक्टरक मेन्टेनेन्सक ठेका लेने छथि। हुनका लग दू सए गोटे छन्हि जे सभ क्वार्टरक कूड़ा सभ दिन भोरमे उठेबाक संग रोड आ पार्किगक भोरे-भोर सफाइ करै छथि। एहिमेसँ किछु गोटे, विशेष कऽ नेपालक, भोरे-भोर लोकक कारक शीसा महिनबारी दू सए टाका पोछै छथि आ अखबारक हॉकर बनल छथि। रहै छथि किशनगढ़मे मुदा अपन मकानमे। कोइर दुखन महतोक बेटा लखन ठेलापर तरकारी बेचै छथि आ रहै छथि किशनगढ़मे। भुमिहार, राधामोहन रायक बेटा बसन्तकुञ्जमे रहै छथि। कन्सल्टेन्ट छथि, डोनेशन बला मेडिकल-इन्जीनियरिंग कॉलेज सभक। सोनार, अशोक ठाकुरक बेटा महानन्द सोनाचानीक दोकानमे कारीगर छथि आ रहै छथि किशनगढ़मे । तेली, रामचन्द्र सावक बेटा मोहन फैक्ट्रीमे काज करै छथि, गुड़गाँवमे आ रहै छथि किशनगढ़मे । मलाह जीबछ मुखियाक बेटा रवीन्द्र किशनगढ़मे माँछ बेचै छथि आ रहितो छथि किशनगढ़मे । मुसहर बिचकुन सदायक बेटा रघुवीर ड्राइवरी सीखि लेने अछि। बसन्तकुञ्जक एकटा व्यवसायीक ओहिठाम ड्राइवरी करैए आ रहैत अछि किशनगढ़मे । बसन्तकुंज, मेहरौली आ किशनगढ़ आब गढ़ नारिकेल गामक एकटा छोट-छीन रूप बुझना जाइत अछि। तेसर कल्लोल.....(आगाँ) ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बिपिन कुमार झा, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई ग्रन्थ समीक्षा- 'महाराज महेश ठाकुर ओ कंकाली भगवती' {ग्रन्थसमीक्षक Bipin Jha, CISTS, IIT, Bombay में संगणकीय भाषाविज्ञन में शोध कय रहल छथि| इलाहावाद वि.वि. ओ जे.एन.यू. मे अध्यवसायरत रहैत मैथिली आ संस्कृति संवर्द्धन हेतु निरन्तर प्रयत्नशील रहल छथि| कोनो टिप्पणी kumarvipin.jha@gmail.com पर सादर आमन्त्रित अछि|} ग्रन्थक परिचय एवं विभाग- शीर्षक- 'महाराज महेश ठाकुर ओ कंकाली भगवती' लेखक- डा० शान्ति सिंह ठाकुर प्रकाशक- कंकाली संघ राजग्राम प्रकाशन वर्ष- २०१० विभाग- आशीर्वचन- श्री जगदीश मिश्र सम्मति- डा० किशोरनाथ झा पोथीक प्रसंग- लेखक स्वयं १. महाराज महेश ठाकुर ो हुनक गाम २. म.म. महेश ठाकुर क पारिवारिक ो शैक्षिक परुष्टभूमि ३. महेश ठाकुरक जीवन सं सम्बद्ध तथ्य ४. राज्यप्राप्तिक ेवं कंकाली भगवतीक ाविर्भाव ५. कंकाली माहात्म्य ६. राजग्रामस्थित कंकाली परिसर परिशिष्ट दरिभंगास्थ महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह स्मारक महाविद्यालयीय मैथिली समाराधनतत्पर खण्डवलाकुलसमुद्भूत डा० श्री शान्तिनाथ सिंह ठाकुर द्वारा निबद्धग्रन्थ अछि -'महाराज महेश्वर सिंह ओ कंकालीभगवती| ई ग्रन्थ वर्ष २०१० में कंकाली संघ राजग्राम द्वारा प्रकाशित एकटा ऐतिहासिक ग्रन्थ अछि जे स्वरूपतः त& 'भौर' ग्राम आ मैथिल राजवंश केर गौरवमयी आभाक परिचय दैत अछि प्रच्छन्नरूप स ई ग्रन्थ आस्था ओ तर्क केर मंजुल प्रयोगक दर्शन करवैत प्रातःकालीन भगवान भाष्कर समान मिथिलाराजवंश केर सांस्कृतिक स्वर्णिम युगक केर दर्शन करवैत नीतिशतक केर पद्य 'कालक्रमेण जगतः परिवर्तमाना...'' के चरितार्थ करवैत प्रत्यक्षानुलम्बी, इतरप्रमाणविस्मरुत मूल्यविहीन आधुनिक समाज सँऽ अस्ताचलरूपिणी संस्करुति कें नवजीवन प्रदान करवाक हेतु अनुनय करैत बुझना जाइत अछि जे चीत्कार कय ई कहि रहल अछि जे हे मनुज स्मरण करू ओहि कीर्तिस्तम्भ के जेकर समक्ष भारतवर्षक राष्ट्राधीश सेहो नतमस्तक रहल अछि, आगू बढाउ ओहि गरिमा के मिथिला के इतिहास लिखत | ई त ध्रुव सत्य अछि जे एक दिन सभकिछु काल केर गाल मे विलीन भय जायत | एहि भौतिक जगत मे कोनो वस्तु संस्था अथवा कोनो समाज शाश्वत नहिं कहल जा सकैत अछि। ओ डायनासोर हो अथवा हडप्पा, मेसोपोटामिया अथवा कोनो लुप्तप्राय सम्प्रदाय सभ एक न एक दिन कालक गाल मे विलीन भय जायत ई ध्रुव सत्य अछि। एहि प्रसंग मे यक्ष-युधिष्ठिर संवाद समीचीन प्रतीत होइत अछि- यक्ष-युधिष्ठिर सम्वाद मे कहल गेल अछि जे- प्रतिदिन जीव मृत्यु कॆं प्राप्त करैत अछि मुदा ओतहि अन्य लोक ई बुझितो एतहि रहबाक इच्छा करैत अछि। एहि सँऽ आश्चर्य की भय सकैत छैक? समीक्षा केर संकल्प, उद्देश्य आ विषयवस्तु- संकल्प- सतत अध्यवसायरत रहबाक क्रम में यदि कोनो नीक ग्रन्थ अनायास सुलभ भय जाय त& आनन्द स्वाभाविक छैक तहू में एहेन ग्रन्थ जे आस्था केर समक्ष तर्क के अथवा तर्कक समक्ष आस्था केर अवहेलना नहिं करैत हो| एहि ग्रन्थक प्रसंगशः उद्धरण, समुचित सन्दर्भ आदि एकर विश्वसनीयता केर प्रमाण अछि| ई सभ किछु कारण छल जे एहि ग्रन्थ दिस विशेष रुचि भेल| उद्देश्य- काव्यप्रकाश में कहल गेल अछि प्रयोजनमनुद्दिश्य मन्दो&पि न प्रवर्तते अस्तु समीक्षा केर उद्देश्य लिखब उचित बुझनाजाइत अछि- एकटा अभिनव ओ विश्वसनीय स्रोत केर जानकारी अधेyता केर समक्ष प्रस्तुत करब| आ संगहि अपन किछु मूल भूत प्रश्न केर उत्तर प्राप्त करबाक प्रयास[1]| विषयवस्तु- एहि समीक्षा में जेकर अंगीकार कयल जा रहल अछि ओ विषय वस्तु अछि- १.ग्रन्थक विभागश: संक्षिप्त परिचय २. ग्रन्थक वैशिष्ट्य २.१ ास्थागत - २.२ तर्कगत (शोध) - ३. ग्रन्थक न्यूनता ३.१ ास्थागत - ३.२ तर्कगत (शोध) - ४. ग्रन्थक ुपादेयता व्यावहारिक रूप में अन्य विविध पक्ष ५. दोषपरिहाराथ सम्भव ुपाय ा ौकित्यविमर्श| शुभमस्तु [1] श्रोत्रिय समाजक आरम्भ के कयलथि? ई समाज कियाक अस्तित्व मे आयल? एकर संस्कृति की अछि? एकर विधि व्यवहार आदि शास्त्रसम्मत अछि अथवा मात्र परम्परा केर निर्वहण अभिप्राय रहि गेल? यदि शास्त्रसम्मत अछि तऽ कोन ग्रन्थ मे एकर चर्चा अछि? ओहि ग्रन्थ केर प्रामाणिकता निर्विवाद अछि अथवा नहिं? जाति, कुल, पाँजि, मूल, गोत्र की थीक? एकर की औचित्य छल? यदि औचित्य छल तऽ आब एकर अनौचित्य कोना निर्धारित भेल जा रहल अछि? श्रोत्रिय समाज सँ सन्दर्भित उक्त चर्चित किछु एहेन मूलभूत प्रश्न अछि जे आवश्यक अछि एहि समाजक Documentation हेतु।’सारस्वत-निकेतनम्’ जे कि संस्कृत आ अपन संस्कृतिक अभ्युत्थान हेतु सतत् समर्पित अछि, अपन श्रोत्रिय समाज सन्दर्भित मूल स्रोतक आ एकर अक्षुण्ण संस्कृति केर विविध पक्षक Documentation करय जा रहल अछि। एहि कार्य मे अपनें सभ सँऽ विशेषकर एहि समाजक इतिहासक ज्ञाता बुजुर्ग आ सक्रिय युवा कें सहयोगक सर्वथा अपेक्षा अछि। यदि उक्त सन्दर्भ मे कोनो जानकारी उपलब्ध करा (kumarvipin.jha@gmail.com) सकी तऽ एहि विशाल यज्ञ मे एकटा आहूति सदृश होयत। ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। सन्तोष कुमार मिश्र एकटा पत्र ज्योतीकें चिट्ठी काठमाण्डू २१–२–२०११ प्रिय ज्योती, हम खुशीसँ आनन्दमय जीवन वितारहल छी । हँ, ई सच्च आ अवश्य समाजिक रुपे ठिक बात नइ छैक जे अहाँ हमरा लग नइ छी मुदा ई सुनि अहाँ आश्र्यचकित भऽजाएब जे हमर रक्तचापके अवस्था ठिक भऽगेल अछि । डाक्टरबाबु कहै छलाह जे अहिना परहेज कऽकऽ जँ रहब त बेशी दिन जीयब । अहाँके बुझल अछि, जे आइकाल्हि हम अफिस समयेपर पहुँच जाइछी । कोनो प्रकारक तनाब सेहो नहि रहैय । हाकिम कें त कि छैक, सहि समय पर सहि काज भऽजाय, बस, आओर कि ? आ हम अखन अहिमे सक्षम सेहो छी । काल्हि हाकिमसाहेब कहैत छलाह जे हमरामे एकटा परिवर्तण महसुश भऽरहल छैन्हि । हमर बनाओल रिर्पोटमे गल्ती त रैहते नइ छैक । आब ककरो पर कोनो प्रकारक आश नहि रहवाक कारण लगभग सबहे काज सहि समयपर ठिक–ठिक तरिकासँ हम अपने कऽ लैछी । अपना जते पाइ चाहि ताहिस बेशी कमालैछी । ते किछु बचत सेहो भऽजाइय आ घर एकटा होटल भऽगेल अछि तकर अनुभूति सेहो नइ होइय । घरमे अपन बाहेक आन कमे रहैय ते उधारक आश नहि रहैय । कनिञा, स्त्री आ घरवाली शब्दक अर्थ जे नहि बुझैत हुवे ओ कहियो नहि ओकर लायक भऽसकैय । वाथरुमसँ लऽकऽ भन्साघर धरि हम अपने करैछी मुदा सबहेकाज समय पर भऽजाइछैक । आ, अखन दिन २८ घन्टाक सेहो नहि होइछैक । एकटा आओर आश्र्यक बात सुनबैछी अहाँके; हम कपड़ा पर आइरण सेहो बड़ निकसँ कऽलैछी । शुरुवातके दू–दूटा क्रिच बनिजाइछल मुदा एखन एकदम फिट । डाक्टर जेहने कहैछलाह, ओहने भोजन बनालैछी । एकटा शल्लाह त अहाँके सेहो देबऽचाहब, कृप्या अहाँ सेहो तरकारीमे मिरचाइ आ नोन बेशी नहि खाउ, ई नोक्सानटा मात्र करैछ । हमरा साँझक समयमे पढ़के समय सेहो भेट जाइए तें हम फेरसँ कोचिङ्गमे पढ़ाबऽ सेहो लगलिए । हमर पढ़ाबऽके तरिका तऽ अहाँके बुझले अछि; कमेन्टके कोनो चान्स नहि । आ, आब आओर निक किए त एखन हमरा मेन्टल आ सेन्टिमेन्टल टर्चर नहि रहैए । हम खुश छि, मुदा आओर विषेश खुशीक आवश्यक्ता अछि । किछु हुए लोक कहैछ –बिना घरनि घरे नहि । बिषेश कि, बुद्धिमानकें लेल इशारा काफि होइछ । सदैब अहाँक प्रतिक्षामे, मात्र अहाँके सन्तोष ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.डॉ. शेफालिका वर्मा-१. बीतल इतिहास २. पाथर ३.२.गजेन्द्र ठाकुर- हाइकू ३.३.ज्योति सुनीत चौधरी -फेर आयल वसन्त ३.४.नन्दविलास राय- किछु पद्य ३.५.नवीन कुमार आशा- किया ने पावी तोहर टोन ३.६.किशन कारीगर- किछु त हम करब ३.७.विवेकानन्द झा- हाइकू डॉ. शेफालिका वर्मा १ बीतल इतिहास हम पलक पाँखिमे पोसि रहल छी बीतल युगक नीरव इतिहास ! नयन पथसँ साँसमे मिली सिखी चुनैत जलजात रहल 'आह' सँ निकलि 'चाह' मे खिली टूटल आस पारिजात रहल ! चंचल सपना पुलक भरल ई स्पन्दन चिर व्यथाक सुधिसँ सुरभित स्नेह घुलल आखर तितल हमर कथाक ! नयनमे अनगिन चुम्बन सजग स्मित रहल उन्मद सांसमे सुरभि वेदनाक क्षण चातकी सन तकैत प्रिये-पद!! आइ तँ सभ साँसमे भरल मरण त्योहारक निस्सीम जय मौनमे प्राणक तार टूटल निसाँस भेल पिआसमे लय! गहन तम - सिन्धुमे उमड़ल अधरपर अंगारक हास बीतल युगक नीरव इतिहास !!....... २ पाथर हम देखने छलौं अहाँ केँ प्रज्ञा सँ आलोकित स्नेह सँ परिपूरित आत्ममुग्ध स्वयममे हेरायल अपनामे डूबल अहाँक ओ निर्लिप्त दृष्टि जेना कोनो सुरुज उगि रहल हो जेना इजोरिया बरकि बरकि चुबि रहल हो ! कतेको कमल दल विहुँसि गेल नील आकासक स्वप्न देखैत हेरायल भोतिआयल ... हम डूबि गेल छलौं अपनाकेँ निस्सहाय पाबि रहल छलौं .... ओहि इजोरियाक जलधारसँ उबरबा लेल वेगसँ बहैत प्रवाहसँ अपनाकेँ समेटि नहि पाबि रहल छलौं हम प्रवाहमे , किनार दूर भागल जा रहल छल एकटा मृत्युक बाटपर ठाढ़ व्यक्तिक अंतिम इच्छा हमर जीवन भऽ गेल छल एकटा बिरड़ो उठल रेत आ बाउलक मध्य नदीमे हमरा पाथर बना देलक आ आइ हम पाथर बनि गेल छी............ ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर हाइकू १ हरित-कञ्च लाल-उज्जर ठोप हृदै संगोर २ मरुद्यान नै जलोदीपमे द्वीप बालु नै पानि ३ ओ नील मेघ, समुद्र पृथ्वी छोड़ि भेल अकासी ४ पात आ चिड़ै एक दोसरा सन स्किन कलर ५ अकासी जल पानिक अकासमे रस्ता चीरैए ६ ई हिमपात हिम सन अकास आ धरा गाछ ७ सूर्यक पूब आशाक छै किरण मुदा रक्ताभ ८ प्रकृति पानि हहारोहक बाद शांत प्रशांत ९ व्याकुल चिड़ै ठूठ गाछ सुखौंत छै हतप्रभ १० प्रकृति नृत्य प्रकृति संग जीब प्रकृति भऽ कऽ ११ प्रकृति प्रेम प्रकृति संग जीब प्रकृति भऽ कऽ ११ अलैचढ़ल उत्साह हमर जे देखी दोहारा १२ अमरलत्ती पनिसोखा जकाँ की छूत अकास १३ कजराएब अकासक ऐ गाछ, मेघक संग १४ देव डघर अकाससँ उतरि पृथ्वी अबैत १५ धुरिया साओन फेर भदबरिया रेत पयोधि १६ कचौआबध मनोरथ गामक जबका मारल १७ गाछ बृच्छ आ चिड़ै चुनमुनीक बीच खेबै छी ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ज्योति सुनीत चौधरी फेर आयल वसन्त
उठलहुँ अलार्मक आवाजपर भोरक आभास समय देखलापर आलससँ भरल भिनसरक सर्दी मुदा आब कम भऽ रहल छल
सामान्य भऽ बाहर तकलहुँ लागल बेसी इजोत सन तुरत पर्दा कात केलहुँ देखै लेल प्रकृतिक परिवर्तन
खिड़की खोलक समय फेर वसन्त तरंगित झूलैत बसातमे रंगक छिट्टा मारल सबतरि देखार भेल गाछ आ पातमे
किछु गरमायल सूर्यक प्रकाश घनक छाया छँटल आकाशसँ बाहर भागा दौगी करैत लुक्खी खिहारलहुँ अपन फुलबाड़ीसँ। ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। नन्दविलास राय किछु पद्य (1) विद्यार्जन कएला उपरान्त केलनि चरित्र िनर्माण माए-बाबूकेँ सेवा कए कऽ भेलाह नैतिकवान सत्य आओर अहिंसाकेँ जे सभकेँ दे छथि ज्ञान बुझू ओइ मनुक्खकेँ छथि पैघ विद्वान। (2) जिनगी विताबैत छथि सादा मुदा छन्हि पैघ विचार ऊँच-नीच, अमीर-गरीबसँ करै छथि समान बेबहार अपन विद्वतापर जिनका कनेको नै गुमान बुझू ओइ मनुक्खकेँ छथि पैघ विद्वान। (3) परउपकारक भावना राखि दै छथि सभकेँ शिक्षा दीक्षा दै छथि धने बुझि कऽ नै छन्हि धनक इच्छा आनक जे कल्याणक खातिर सहै छथि नोकसान बुझू ओइ मनुक्खकेँ छथि पैघ विद्वान। (4) सभ जीवपर दया करै छथि अधलाह काज करैसँ डरै छथि हाथ जोड़ि अपनासँ पैघकेँ करैत छथि जे प्रणाम बुझू ओइ मनुक्खकेँ छथि पैघ विद्वान। (5) सभकेँ समैपर अबै छथि काज जिनका लेल नै छथि कोइ आन राक्षससँ बनि जाइ छथि मनुक्ख एहेन जे दै छथि ज्ञान बुझू ओइ मनुक्खकेँ छथि पैघ विद्वान। (6) काजकेँ पूजा बुझि करैत नै छथि आराम मदैत करैले सदिखन हाजिर की भोर की साँझ छोट पैघ जीव सभमे जिनका सुझै छन्हि भगवान बुझू ओइ मनुक्खकेँ सभसँ पैघ विद्वान। ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। नवीन कुमार आशा किया ने पावी तोहर टोन ..................................................... चोरी चोरी देखि तोरा नही भावे दोसर मोरा देखि तोरा ओही पल पाओल अपनाक धन्य चोरी............................../ सदिखन देखि घरक आगू हरदम करि तोहर पाछु पर नहि पावी तोहर संग भई गलो हम तंग चोरी.................................../ तोहर धयान मोन स निकाली करे लगलो हम पढाई कखनो कखनो याद आवे तोर ओहि पल निकले नोर चोरी ...................................../ मेट्रो मे जखन देखल तोरा फेर आयल माथ मे फेरा चाहलो गप करि दू टुक पर देखती रहलो टुक टुक मोनक गप रोकती न बने नै तोरा टोकती बने चोरी चोरी .............................../ जिनाई भेल आछि दूभर पाबू केना तोरा गे सदिखन सोची तोरा की तू बनवी मोरा चोरी चोरी......................../ चोरी चोरी खिचल तस्वीर ओकरे बुझल अपन तकदीर फेर सोचे मोन किया ने पावी तोहर टोन चोरी चोरी देखि तोरा नहि.............................../ ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। किशन कारीगर किछु त हम करब अवस्था भेल हमर आब बेसी टूघैर टूघैर हम चलब अहाँ आगू आगू हम पाछू पाछू मुदा अपना माटि पानि लेल किछु त हम करब
नुनु बौआ अहाँ आऊ बुचि दाय अहूँ आऊ दुनू गोटे मिली जल्दी सँ मैथिली में किछु खिस्सा सुनाऊ
नान्ही टा में बजलौहं एखनो बाजू मातृभाषा में बाजू अहाँ निधोख कनि अहाँ बाजू कनेक हम बाजब नहि बाजब त कोना बुझहत लोक
परदेश जायत मातर किछु लोग बिसैर जायत छित मातृभाषा कें अहिं बिसैर जायब त आजुक नेना कोना बुझहत कहें मीठगर स्वाद होयत अछि मातृभाषा कें
अप्पन माटि पानि अप्पन भाषा संस्कृति पूर्वज के दए गेल एकटा अनमोल धरोहर एही धरोहर के हम बंचा के राखब अपना माटी पानि लेल किछु त हम करब
कोना होयत अप्पन माटिक आर्थिक विकास सभ मिली एकटा बैसार करू कनेक सोचू सभहक अछि एकटा इ दायित्व किछु बिचार हम कहब किछु त अहूँ कहू
हमरा अहाँक किछु कर्तब्य बनैत अछि एही परम कर्तब्य सँ मुहँ नहि मोडू स्नेह रखू हृदय में सभ के गला लगाऊ अपना माटी पानि सँ लोक के जोडू
समाजक लोक अपने में फुट्बैल करैत छथि मनसुख देशी त धनसुख परदेशी एक्के समाज में रहि ऐना जुनि करू एकजुट हेबाक प्रयास आओर बेसी करू
एक भए एक दोसरक दुःख दर्द बुझहब अनको लेल किएक ने कतेको दुःख सहब आई एकटा एहने समाजक निर्माण करब जीबैत जिनगी किछु त हम करब
हाम्रो अछि एकटा सेहनता एक ठाम बैसी सभ लोक अपन भाषा में बाजब औरदा अछि आब कम मुदा जीबैत जिनगी अपना माटी पानि लेल किछु त हम करब ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विवेकानन्द झा हाइकू १ पसरल छै हरियर धरती तक आकास २ धरती पर नभ लाठी टेकल इंद्रधनुषी ३ चिडैँ पाँखि सँ तौलि रहल अछि देस दुनिया ४ चित्रलिपि ई प्रकृतिकुमारिक मानू न मानू ५ दुर्लभ दृश्य असम्भव एतय गाम भऽ आबि ६ जलक बॊझ सँऽ लकदक देखू कृषक-नेह ७ उच्छवास ई प्रेमीयुगल केर धवल प्रीतिकर ८ उच्छवास ई प्रेमीयुगल केर धवलप्रीति ९ प्रेमप्रवाह लजधि से छानल ई नभचारी १० जनादेश ई वाष्पकणक थिक मंगलकारी ऐ रचनापर अपन मतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत १. अनुपमा प्रियदर्शिनी २.श्वेता झा चौधरी ३.ज्योति सुनीत चौधरी ४.श्वेता झा (सिंगापुर) १. अनुपमा प्रियदर्शिनी, पति डॉ. रतन कर्ण, गाम- उजान (बड़कागाम), पो. लोहना रोड, जिला दरभंगा। सम्प्रति लोजियाना (संयुक्त राज्य अमेरिकामे), शिक्षा- एम.एस.सी. (जंतु विज्ञान), ल.ना. मिथिला वि.वि., दरभंगा; बी.एस.सी. बी.आर. अम्बेडकर वि.वि. मुजफ्फरपुरसँ, हॉबी, मिथिला चित्रकला, कमप्यूटराइज्ड चित्रकला, ललित कला। उपलब्धि: अखिल भारतीय कला आ दस्तकारी प्रतियोगिताक पुरस्कार 1995 मे; संस्कार भारती भाव नृत्य प्रतियोगिता 1989 मे सहभागी। २ श्वेता झा चौधरी गाम सरिसव-पाही, ललित कला आ गृहविज्ञानमे स्नातक। मिथिला चित्रकलामे सर्टिफिकेट कोर्स। कला प्रदर्शिनी: एक्स.एल.आर.आइ., जमशेदपुरक सांस्कृतिक कार्यक्रम, ग्राम-श्री मेला जमशेदपुर, कला मन्दिर जमशेदपुर ( एक्जीवीशन आ वर्कशॉप)। कला सम्बन्धी कार्य: एन.आइ.टी. जमशेदपुरमे कला प्रतियोगितामे निर्णायकक रूपमे सहभागिता, २००२-०७ धरि बसेरा, जमशेदपुरमे कला-शिक्षक (मिथिला चित्रकला), वूमेन कॉलेज पुस्तकालय आ हॉटेल बूलेवार्ड लेल वाल-पेंटिंग। प्रतिष्ठित स्पॉन्सर: कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स, टिस्को; टी.एस.आर.डी.एस, टिस्को; ए.आइ.ए.डी.ए., स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, जमशेदपुर; विभिन्न व्यक्ति, हॉटेल, संगठन आ व्यक्तिगत कला संग्राहक। हॉबी: मिथिला चित्रकला, ललित कला, संगीत आ भानस-भात। २. ज्योति सुनीत चौधरी जन्म तिथि -३० दिसम्बर १९७८; जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी ; शिक्षा- स्वामी विवेकानन्द मिडिल स्कूल़ टिस्को साकची गर्ल्स हाई स्कूल़, मिसेज के एम पी एम इन्टर कालेज़, इन्दिरा गान्धी ओपन यूनिवर्सिटी, आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी); निवास स्थान- लन्दन, यू.के.; पिता- श्री शुभंकर झा, ज़मशेदपुर; माता- श्रीमती सुधा झा, शिवीपट्टी। ज्योतिकेँwww.poetry.comसँ संपादकक चॉयस अवार्ड (अंग्रेजी पद्यक हेतु) भेटल छन्हि। हुनकर अंग्रेजी पद्य किछु दिन धरि www.poetrysoup.com केर मुख्य पृष्ठ पर सेहो रहल अछि। ज्योति मिथिला चित्रकलामे सेहो पारंगत छथि आ हिनकर मिथिला चित्रकलाक प्रदर्शनी ईलिंग आर्ट ग्रुप केर अंतर्गत ईलिंग ब्रॊडवे, लंडनमे प्रदर्शित कएल गेल अछि। कविता संग्रह ’अर्चिस्’ प्रकाशित। ३.श्वेता झा (सिंगापुर) विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma 8.2.Original Poem in Maithili by Kalikant Jha "Buch" Translated into English by Jyoti Jha Chaudhary Original Poem in Maithili by Kalikant Jha "Buch" Translated into English by Jyoti Jha Chaudhary Kalikant Jha "Buch" 1934-2009, Birth place- village Karian, District- Samastipur (Karian is birth place of famous Indian Nyaiyyayik philosopher Udayanacharya), Father Late Pt. Rajkishor Jha was first headmaster of village middle school. Mother Late Kala Devi was housewife. After completing Intermediate education started job block office of Govt. of Bihar.published in Mithila Mihir, Mati-pani, Bhakha, and Maithili Akademi magazine. Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor's choice award from www.poetry.comand her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London. Oh Ghurana! I am telling you the truth, you hear, dear Ghurana I am the Vidyapati and you are the Ugana I showered you with water a lot But you are still thirsty I fed you juices a lot But you are still grumpy How can this change, you will remain the same I am the Vidyapati and you are the Ugana After walking here and there today I am tired now Bring down the chowki I am coming now Press my body, apply the double force I am the Vidyapati and you are the Ugana The mistress had chased you out Unreasonably I am also sad about She abused you The crow of the courtyard, wants to be pet I am the Vidyapati and you are the Ugana Buch had also seen Your attitude yesterday You showed your anger At me too Look into mirror your big cheek I am the Vidyapati and you are the Ugana Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.) Output: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) English to Maithili Maithili to English इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड़ / बड़ी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढ़इन बढ़न्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय Festivals of Mithila DATE-LIST (year- 2010-11) (१४१८ साल) Marriage Days: Nov.2010- 19 Dec.2010- 3,8 January 2011- 17, 21, 23, 24, 26, 27, 28 31 Feb.2011- 3, 4, 7, 9, 18, 20, 24, 25, 27, 28 March 2011- 2, 7 May 2011- 11, 12, 13, 18, 19, 20, 22, 23, 29, 30 June 2011- 1, 2, 3, 8, 9, 10, 12, 13, 19, 20, 26, 29 Upanayana Days: February 2011- 8 March 2011- 7 May 2011- 12, 13 June 2011- 6, 12 Dviragaman Din: November 2010- 19, 22, 25, 26 December 2010- 6, 8, 9, 10, 12 February 2011- 20, 21 March 2011- 6, 7, 9, 13 April 2011- 17, 18, 22 May 2011- 5, 6, 8, 13 Mundan Din: November 2010- 24, 26 December 2010- 10, 17 February 2011- 4, 16, 21 March 2011- 7, 9 April 2011- 22 May 2011- 6, 9, 19 June 2011- 3, 6, 10, 20 FESTIVALS OF MITHILA Mauna Panchami-31 July Somavati Amavasya Vrat- 1 August Madhushravani-12 August Nag Panchami- 14 August Raksha Bandhan- 24 Aug Krishnastami- 01 September Kushi Amavasya- 08 September Hartalika Teej- 11 September ChauthChandra-11 September Vishwakarma Pooja- 17 September Karma Dharma Ekadashi-19 September Indra Pooja Aarambh- 20 September Anant Caturdashi- 22 Sep Agastyarghadaan- 23 Sep Pitri Paksha begins- 24 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-30 Sep Matri Navami- 02 October Kalashsthapan- 08 October Belnauti- 13 October Patrika Pravesh- 14 October Mahastami- 15 October Maha Navami - 16-17 October Vijaya Dashami- 18 October Kojagara- 22 Oct Dhanteras- 3 November Diyabati, shyama pooja- 5 November Annakoota/ Govardhana Pooja-07 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja-08 November Chhathi- -12 November Akshyay Navami- 15 November Devotthan Ekadashi- 17 November Kartik Poornima/ Sama Bisarjan- 21 Nov Shaa. ravivratarambh- 21 November Navanna parvan- 24 -26 November Vivaha Panchmi- 10 December Naraknivaran chaturdashi- 01 February Makara/ Teela Sankranti-15 Jan Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 08 Februaqry Achla Saptmi- 10 February Mahashivaratri-03 March Holikadahan-Fagua-19 March Holi-20 Mar Varuni Yoga- 31 March va.navaratrarambh- 4 April vaa. Chhathi vrata- 9 April Ram Navami- 12 April Mesha Sankranti-Satuani-14 April Jurishital-15 April Somavati Amavasya Vrata- 02 May Ravi Brat Ant- 08 May Akshaya Tritiya-06 May Janaki Navami- 12 May Vat Savitri-barasait- 01 June Ganga Dashhara-11 June Jagannath Rath Yatra- 3 July Hari Sayan Ekadashi- 11 Jul Aashadhi Guru Poornima-15 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाऊ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha VIDEHA केर सदस्यता लिअ Top of Form Bottom of Form ईमेल : एहि समूहपर जाऊ २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ Top of Form Subscribe to VIDEHA Powered by us.groups.yahoo.com Bottom of Form २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २५. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइट http://www.shruti-publication.com/ पर । महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे। कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७ Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding: Language:Maithili ६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india) (add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)
For Libraries and overseas buyers $40 US (including postage)
The book is AVAILABLE FOR PDF DOWNLOAD AT
https://sites.google.com/a/videha.com/videha/
http://videha123.wordpress.com/
Details for purchase available at print-version publishers's site website: http://www.shruti-publication.com/ or you may write to e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com विदेह: सदेह : १: २: ३: ४ तिरहुता : देवनागरी "विदेह" क, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। विदेह:सदेह:१: २: ३: ४ सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com २. संदेश- [ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ] १.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत। २.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी। ३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत। ४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन। ५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी। ६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। १०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। १२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। १४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी। १५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी। १६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिंट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे। मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)... अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग। १७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल। १८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई। १९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत। २०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ। २१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ। २२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य। २३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई। २४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि। २५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर) २६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक। २७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत। २८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी। २९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना। ३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी। ३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि। ३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई। ३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई। ३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई। ३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक। ३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ। ३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम। ३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना। ३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ। ४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल। ४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई। ४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य। ४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना। ४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि। ४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक। ४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत। ४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि। ४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रशंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत। ४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना। ५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना। ५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना। ५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल। ५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना। ५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। ५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना। ५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल। ५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई। ५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि। ५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी। ६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि। ६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब। ६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी। ६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही। ६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय। ६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना। ६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय। ६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह। ६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना । ६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ। ७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक) ७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि। ७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि। ७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि। ७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना। ७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि। ७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि। ७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि। ७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल। ७९. श्री हीरेन्द्र कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-११. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति सुनीत चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ एहिमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-11 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ८० म अंक १५ अप्रैल २०११ (वर्ष ४ मास ४० अंक ८०)http://www.videha.co.in/ मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ८० म अंक १५ अप्रैल २०११ (वर्ष ४ मास ४० अंक ८०)http://www.videha.co.in/ मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA
2. ll .| न 4 » y a | ‘ \ J कै “en a pre ONG if pate aes eS उऊ = J a d) RP
F _— \ x के eS yk लि भा : os A 3 a | (Km | \\ A A ; a ‘ a ; = i as ’ थे का + : a 7 i ‘| ; J m 4 \ i q *~ = be ) LJ ail #
(सराहा पर ade ih) | 4 =< सीताजीके गामके —— ete हम छी मिथिलाधामके aed) ee eX az. ves od
“हि $$ i" ट्रेन ge a * डे क९ ढक गे VT, +: te 7 (Os asthe oh ही iS राज / A ENS Cc. हि 5 कै) Yo, Ma. Sst . ane a= 4 i जज ei By, Send oe चर, नि og =p अल Te ae foe ig he S)\ ZAR sre a, So S ibs कर) ne y j é = » Aas | ia 6) cease Me pit: ya ANS Onn! Sy ~< Z ‘ . 3 , Ss > aN © 4 ; Uy Lh. \ | Dry ry 4 है hg | 3 B | Ci & x i ee bet ce ole j 2% = yy 6 ay SP Oe Pale hy oe =k, ow ‘ ie ABN OY cas 2s a BS सर &। a ve गिर ole x Ae tata” oN AN acy के: a Sen en BD) के Ne ee . yy | a DY.) Cie ao Teas ae t x 4 ३ इज ike oe pe p 2} Ls oe "> see 4 a 4 Pit é न x ला 5 हा Mf 7 V3 » दे है , pes Te bod ake Ass bi } ) ae gy, can WY La ६ ८ न Rs fee GF 25 SS A i ion [|| 28 SNE WAST थी VS a \ eo बट Lf . दा © @ मी ८५९ “axl ews y KN y ae eS oS St KEN S S 23N NS) दी जि ( Pi Nyro )
है ....... q is" 3 a: a 6g J 4 4 pia BE है [पे “ eal “oF wi ha से ey टू Zo 4 te ¥ = i & उन oh fhe ।
™ a + mee ei