402 403 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ८९ म अंक ०१ सितम्बर २०११ (वर्ष ४ मास ४५ अंक ८९) वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own script Roman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.जितेन्द्र झा, जनकपुर- विमलक गजल आ सुजितक कथा २.२.१. जगदीश प्रसाद मण्डलक चारि गोट विहनि कथ २.बेचन ठाकुरक दू टा विहनि कथा २.३.दुर्गानन्द मण्डल-स्वतंत्रता दिवसक अवसरपर किछु स्वतंत्र भरास २.४.नवेंदु कुमार झा-कोसीक प्रलयक तीन बर्ख/ भंगिमक चुनाव सम्पन्न, कुणाल अध्यक्ष्य आ जयदेव सचिव निर्वाचित/ प्रदेश मे लागु भेल सेवाक अधिकार कानून २.५.बिपिन झा-श्रोत्रिय समाजमे रक्तबीजक जन्म २.६.राजदेव मण्डल-उपन्यास- हमर टोल- गतांशसँ आगाँ… २.७.शांतिलक्ष्मी चौधरी- मैथिल नारि केर समस्याक समाधान २.८.रवि भूषण पाठक- कथा-बोधिसत्व ३. पद्य ३.१.१.शांतिलक्ष्मी चौधरी २–मनोज झा मुक्ति ३उमेश पासवान४ डॉ. शेफालिका वर्मा ३.२.१.जगदीश प्रसाद मण्डल २.दुर्गानन्द मण्डल ३.३.१.राजदेव मण्डल २रामकृष्ण मण्डल ‘छोटू’ ३.४.१. शिवकुमार झा ‘टिल्लू’ २.रवि मिश्र “भारद्वाज” ३.५.१. जगदीश चन्द्र ’अनिल’ २. सद्रे आलम गौहर ३सत्यनारायण झा ३.६.१रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार २जवाहर लाल कश्यप३रामविलास साहु ३.७.१.डॉ॰ शशिधर कुमर २ आनंद कुमार झा ३नवीन कुमार "आशा" ४.प्रभात राय भट्ट ३.८.आशीष अनचिन्हार- गजल/ रुबाइ/ कता ४. मिथिला कला-संगीत- १.ज्योति सुनीत चौधरी २.श्वेता झा (सिंगापुर) ३.गुंजन कर्ण ५. गद्य-पद्य भारती: रवि भूषण पाठक निरालाःदेहविदेह -४ (निराला हिन्दीसँ मैथिलीमे) ६. बालानां कृते-१. प्रकाश प्रेम २दमन कुमार झा ७. भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.2.1.Episodes Of The Life - ("Kist-Kist Jeevan" by Smt. shefalika Varma translated into English by Smt. Jyoti Jha Chaudhary ) 2.Original Poem in Maithili by Kalikant Jha "Buch" Translated into English by Jyoti Jha Chaudhary विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक विदेह आर.एस.एस.फीड। "विदेह" ई-पत्रिका ई-पत्रसँ प्राप्त करू। अपन मित्रकेँ विदेहक विषयमे सूचित करू। ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ Videha Radio मैथिली देवनागरी वा मिथिलाक्षरमे नहि देखि/ लिखि पाबि रहल छी, (cannot see/write Maithili in Devanagari/ Mithilakshara follow links below or contact at ggajendra@videha.com) तँ एहि हेतु नीचाँक लिंक सभ पर जाऊ। संगहि विदेहक स्तंभ मैथिली भाषापाक/ रचना लेखनक नव-पुरान अंक पढ़ू। http://devanaagarii.net/ http://kaulonline.com/uninagari/ (एतए बॉक्समे ऑनलाइन देवनागरी टाइप करू, बॉक्ससँ कॉपी करू आ वर्ड डॉक्युमेन्टमे पेस्ट कए वर्ड फाइलकेँ सेव करू। विशेष जानकारीक लेल ggajendra@videha.com पर सम्पर्क करू।)(Use Firefox 4.0 (from WWW.MOZILLA.COM )/ Opera/ Safari/ Internet Explorer 8.0/ Flock 2.0/ Google Chrome for best view of 'Videha' Maithili e-journal at http://www.videha.co.in/ .) Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Book/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ (उच्चारण, बड़ सुख सार आ दूर्वाक्षत मंत्र सहित) डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाऊ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू। गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज' मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण" विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाऊ। "मैथिल आर मिथिला" (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) पर जाऊ। १. संपादकीय डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर (१८९१-१९५६)- गजेन्द्र ठाकुर १ महाराष्ट्रक एकटा नग्र रत्नागिरी। ओइ नग्र लग एकटा गाम अम्बावडे। ओइ गामसँ रामजी सपकाळक एकटा परिवार छल, भारतीय सेनामे एकटा स्कूलमे ओ हेडमास्टर रहथि। गौरांगी नीलाक्षी आ भीमा हुनकर पत्नी छलखिन्ह। हुनकर चौदहम सन्तान १४ अप्रैल १८९१ ई. केँ भीमाक कोखिसँ भेल आ तकर नाम भीम राखल गेल, तखन रामजी महूमे पदस्थापित रहथि। १८९४ ई. मे रामजी सेवानिवृत्त भऽ । भीम जखन ६ बर्खक रहथि तखने हुनकर मायक देहान्त भऽ गेलन्हि आ तकर बाद हुनकर पालन हुनकर अपंग दीदी केलखिन्ह। पिता फेरसँ विवाह केलखिन्हि आ नोकरी लेल गोरेगाँव चलि गेलाह। २ रामजी सपकाल अस्पृश्य महार जातिक रहथि। ओ कबीरक दोहा सुना कऽ भीमकेँ भोरे-भोर पढ़ैले उठा दै छलाह। सेवानिवृत्तिक बाद जखन ओ काप-दपोली १८९४ ई.मे एलाह तखन डपोली नगरपालिका शिक्षा विभाग अपन स्कूलमे अस्पृश्यक नामांकन नै लेबाक निर्णय कऽ लेलक। अखन धरि अस्पृश्यक बच्चाक नामांकन ओइ स्कूल सभमे होइ छलै। तखन रामजी मुम्बइ आ फेर सतारा चलि गेलाह। भीमक प्रारम्भिक शिक्षा सतारामे भेलन्हि। कोनो नौआ भीमक केश नै काटै छल से भीमक बहिन हुनकर केश काटै छलीह। स्कूलमे हुनकासँ सटि कऽ कियो नै बैसै छल। कटही गाड़ीबला हुनका तै शर्तपर बैसबै छल जे गाड़ी भीम चलेताह आ ओ आरामसँ बैसत। पानि पीबाक संकट, जलाशय हुनका लेल नै? हम विद्या प्राप्त करब, तखन ई सभ भेटत। संकल्प लेलन्हि भीम। ओतै विद्यालयमे पेंडसे आ आम्बेडकर ई दूटा शिक्षक रहथि। एक दिन भीम अपनाकेँ भिजा लेलन्हि जे स्कूलमे नै पढ़ऽ पड़ए। मुदा पेंडसे हुनका अपन घर पठेलन्हि आ हुनका धरिया पहिर कऽ स्कूलमे पढ़ाइ करऽ पड़लन्हि। आम्बेडकरक परम प्रिय शिष्य बनि गेलाह भीम। आम्बेडकर ब्राह्मण रहथि। एक दिनुका गप अछि। भीम खेनाइ नै आनने रहथि, असगरे भुखले पेटे एकटा गाछक छाह तर ओ बैसल रहथि। पुछलन्हि आम्बेडकर, भीम एना असगरे किए बैसल छी। भीम कहलन्हि जे आइ हम खेनाइ नै आनने छी। कहलन्हि आम्बेडकर, तँ की भेल, चलू आइ दुनू गुरु चेला रोटी तरकारी संगे खाइ छी। भीमक प्रति एहेन नीक आचरण आइ धरि कियो नै केने छल। भीम प्रसन्न भऽ गेलाह। कहलन्हि आम्बेडकर- भीम, हम अहाँकेँ अपन कुलनाम दै छी, आब अहाँ आम्बेडकर कहाएब। ३ रामजी मुम्बइ आबि गेलाह। एलफिंस्टन स्कूलमे ओ भर्ती भेलाह। १९०७मे स्कूलक शिक्षा ओ पूर्ण केलन्हि। केलुस्कर हुनका “बुद्धचरितम्” उपहारमे देलन्हि। भीमकेँ स्कूलमे संस्कृत पढ़बाक बड्ड इच्छा रहन्हि मुदा तकर अनुमति नै छल। जखन भीम १७ बर्खक रहथि तखन ९ बर्खक रमासँ हुनकर बियाह भेलन्हि। केलुस्कर महोदयक प्रयाससँ बड़ोदा नरेशक छात्रवृत्ति भीमकेँ प्राप्त भेलन्हि आ ओ १९१२ ई.मे बी.ए. पास भऽ गेलाह। बड़ोदा सरकार हुनका लेफ्टिनेन्ट पदपर तैनात केलक। मुदा तकर बाद पिताक मोन खराप भऽ गेलनि, भीम पितासँ भेँट करबाले एलाह, पिता प्रसन्न रहथि। पिता अपन प्रसन्नताक संगे प्रयाण केलन्हि, मृत्युक लीला, भीम जोर-जोरसँ कानथि। ४ बड़ोदा नरेशक छात्रवृत्तिसँ भीम १९१३ ई. मे अध्ययन लेल न्यूयार्क बिदा भेलाह। कोलम्बिया विश्वविद्यालय हुनकर प्रबन्ध स्वीकृत केलक आ हुनका “डॉक्टर ऑफ फिलोसोफी” उपाधि देलक। घुरलाह भीम। हुनकर सत्कार कएल जाए, भव्य सत्कार। सभ हित-सम्बन्धी विचारलन्हि। मुदा ओ नै स्वीकार केलन्हि अपन सत्कार। हमर सत्कारपर होमएबला खर्चासँ छात्रवृत्ति दियौ, वंचितकेँ पढ़ाउ। बड़ोदा नरेश हुनका बड़ोदा बजेलन्हि। हुनकर अवास-भोजनक व्यवस्था लेल कहलन्हि। मुदा कोनो भोजनालय वा धर्मशाला हुनका रखबा लेल तैयार नै भेल। एकटा पारसी भोजनालय किछु दिन हुनका रखलक मुदा फेर ओतैसँ हुनका निकालि देल गेल। एकटा गाछतर ओ कानए लगलाह। शिक्षा प्राप्त करब तँ हमर दोष दूर हएत, से सोचने रही। मुदा आब तँ हम शिक्षा प्राप्त केने छी, आब किए ई यातना देल जा रहल अछि हमरा। प्रण करै छी हम जे ऐ व्यवस्थाकेँ तोड़ि देब, ओकर जड़िपर प्रहार करब। ५ भीम घुरि एलाह मुम्बइ। ओ शिडेनहम महाविद्यालयमे प्राध्यापक बनि गेलाह। कोल्हापुरक छत्रपति साहू महराज उपेक्षित लोकक उद्धार लेल कटिबद्ध छलाह। भीम ओतए गेलाह, घोषणा केलन्हि माणग्राममे साहू महराज, हे उपेक्षित जन आबि गेल छथि अहाँ सभक उद्धारक- डॉ आम्बेडकर। मुदा एकटा आर आघात, पुत्र गंगाधरक मृत्युसँ पत्नी रमा खिन्न रहए लगलीह। यशवन्तक पालन ओ करैत रहलीह, पति बड्ड कम समए घरमे दै छलखिन्ह मुदा ओ सभटा सहैत रहलीह। ६ फेर अध्यापनपद छोड़ि ओ “इकोनोमिक एण्ड पोलिटिकल सायंस” नाम्ना लंडन स्थित संस्थामे “द प्रॉब्लेम ऑफ रुपी” पर प्रबन्ध देलन्हि। मुदा हुनका क्रान्तिकारी मानल गेल, से ओ संस्थाक मोनमाफिक संशोधित प्रबन्ध प्रस्तुत केलन्हि आ “डॉक्टर ऑफ सायंस” भऽ घुरलाह। विधिक अध्ययन केलाक बाद ओ न्यायालय सेहो जाइ छलाह। २० जुलाइ १९२४ ई. केँ ओ “बहिष्कृत हितकारिणी सभा” नामसँ एकटा संस्था बनेलन्हि। कारण हुनकर विश्वास चलनि जे अपन समस्याक समाधान अपने करए पड़त, आन से नै कऽ सकत। २० मार्च १९२७ ई. महाडमे जनान्दोलनक नेतृत्व कऽ “चवदार तळ” जलाशयसँ सभ पानि पीलन्हि। तकर बाद “बहिष्कृत भारत” मासिक द्वारा विचार प्रसारित केलन्हि। २ मार्च १९३० नाशिक राममन्दिरमे प्रवेशक प्रयासक जनान्दोलनक न्रेतृत्व, मुदा पुरहित द्वार बन्द कऽ लेलक, तखन सभ राम आ लक्ष्मण कुण्डमे स्नान कऽ घुरि गेलाह। मुदा १९३३ ई मे मुम्बइ प्रान्तमे सभ उपेक्षितक मन्दिर प्रवेशक विधान पास भेल। ७ १९२७ ई. मे अपन शिक्षक आम्बेडकरसँ हुनकर भेँट भेलन्हि। हुनकर चिट्ठी भीम स्नेहसँ रखने छलाह। गुरु-शिष्य भाव विह्वल भऽ गेलाह। साइमन कमीशनक समितिमे भीमक चयन भेल, वयस्क मतदानक अनुशंसा भीमक कएल छन्हि। लंडनमे “राउण्ड टेबल कान्फ्रेन्स”मे तीन बेर भाग लऽ कऽ दलितक समस्या उठेलन्हि ओ। मुदा फेर आघात। पत्नी रमाक मृत्य। १५ अप्रैल १९४८ ई. केँ शारदा-कबीर नाम्ना ब्राह्मण चिकित्सिकासँ विवाह केलन्हि। समए कम अछि। संघर्ष निष्फल भऽ रहल अछि। हिन्दू, अस्पृश्य हिन्दू! नै। हम असफल नै हएब। धर्मान्तर। केलुस्करक देल बुद्धचरितम् सम्बल बनत। १४ अक्टूबर १९५६ ई., दशमी, नागपुर ९ बजी भोरसँ ११ बजे धरि, गोरखपुरक महास्थाविर चन्द्रमणि धर्मान्तर करेताह, बौद्ध धर्ममे। ओ, हुनकर दोसर ब्राह्मण पत्नी सविता आ लाखक लाख लोक बौद्ध बनि गेलाह। बुद्धक पद धूलि माथपर लगा तीनबेर वन्दन केलन्हि। ८ स्वतंत्र भारतक विधि मंत्री बनलाह बाबासाहेब आम्बेडकर। संस्कृतक पैघ प्रेमी। संस्कृतमे सम्भाषण करै छलाह (आज, हिन्दी पत्रिका सितम्बर १५, १९४९ अंक; द लीडर, इलाहाबाद, १३ सितम्बर, १९४९)। ऑल इण्डिया सेड्यूल कास्ट फेडेरेशनमे संस्कृत राजभाषा हुअए, ई प्रस्ताव बाबासाहेब राखलन्हि मुदा युवा बी.पी. मौर्य आदिक विरोध भेल आ प्रस्ताव आपस भऽ गेल। लाखक लाख पोथी हुनकर निजी पुस्तकालयमे छलन्हि, सभटा पोथी ओ मुम्बइक सिद्धार्थ महाविद्यालयकेँ दऽ देलन्हि। पैघ भेलाक उपरान्तो ओ अपन सामाजसँ अपन लोकसँ दूर नै गेलाह। ६ दिसम्बर १९५६ ई.केँ ओ निर्वाण प्राप्त केलन्हि। [बीतल आध राति, बुद्ध बजाए सभ शिष्यकेँ, देल प्रातिमोक्षक उपदेश, कोनो शंका होए तँ पूछू आइ ।
अनिरुद्ध कहल नहि अछि शंका आर्य सत्यमे ककरो। बुद्ध तखन ध्यान कऽ एकसँ चारिम तहमे पहुँचि, प्राप्त कएल शान्ति।
भेल ई महापरिनिर्वाण ! मल्ल सभ आबि उठेलक बुद्धकेँ स्वर्णक शव-शिविकामे, नागद्वारसँ बाहर भए कएलन्हि पार हिरण्यवती धार, मुदा शवकेँ चन्दनसँ सजाए, जखन लगाओल आगि, नहि उठल चिन्गारि ।
शिष्य काश्यप छल बिच मार्ग, ओकरा अबिते लागल चितामे आगि !
मल्ल लोकनि बीछि अस्थि धऽ स्वर्णकलशमे, आनल नगर मध्य, बादमे कए भवन पूजाक निर्माण, कएल अस्थिकलश ओतए विराजमान।
फेर सात देशक दूत, आबि मँगलक बुद्धक अस्थि, मुदा मल्लगण कएल अस्वीकार, तँ बजड़ल युद्ध-युद्ध ।
सभ आबि घेरल कुशीनगर, मुदा द्रोण ब्राह्मण बुझाओल दुनू पक्ष।
बाँटि अस्थिकेँ आठ भाग, द्रोण लेलक ओ घट आ गण पिसल छाउर बुद्धक ।
सभ घुरलाह अपन देश आब।
अस्थि कलश छाउर पर बनाए स्तूप, करए गेलाह पूजा अर्चना जाए, दसटा स्तूप बनि भेल ठाढ़, जतए अखण्ड ज्योति आ घण्टाक होए निनाद।
फेर राजगृहसँ आएल पाँच सए भिक्षु, आनन्दकेँ देल गेल ई काज, बुद्धक सभ शिक्षाकेँ कहि सुनाऊ, होएत ई सभ समग्र आब।
हम ई छलहुँ सुनने एहि तरहेँ, कएल सम्पूर्ण वर्णन नीके।
कालान्तरमे अशोक स्तूपसँ लए धातु कए कए कऽ सए विभाग, बनाओल कएक सए स्तूप, श्रद्धाक प्रतीक।
जहिया धरि अछि जन्म, अछि दुख, पुनर्जन्मसँ मुक्ति अछि मात्र सुख, तकर मार्ग देखाओल जे महामुनि, शाक्यमुनि सन दोसर के अछि शुद्ध।
असञ्जाति मनक ई सम्बल, देलहुँ अहाँ हे बुद्ध हे बुद्ध हे बुद्ध ।]( असञ्जाति मन - गजेन्द्र ठाकुर) २ प्रो. रामशरण शर्माक मृत्यु:- प्रो. रामशरण शर्मा ०१ सितम्बर १९२० बरौनी (बिहार) मे जन्म , मृत्यु २१ अगस्त २०११ पटनामे। १५ देशी-विदेशी भाषामे ११५ सँ बेशी किताब प्रकाशित; पहिल किताब "विश्व इतिहास की भूमिका (दू खंडमे) १९४९ मे प्रकाशित; अंतिम पुस्तक "इकोनामिक हिस्ट्री आफ अर्ली इंडिया"; भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषदक संस्थापक अध्यक्ष; जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप, यूजीसी नेशनल फेलोशिप आ वीके राजवाड़े लाइफटाइम अवार्ड। ३ साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार २०११ मैथिली लेल ले.क. मायानाथ झा केँ हुनकर लोककथा संग्रह "जकर नारी चतुर होइ" लेल देल गेल अछि। डॉ.भगवानजी चौधरी, प्रो. चन्द्रधर झा आ डॉ. इन्द्रकान्त झा जूरी रहथि, जूरीमे सं दू गोटे मैथिली साहित्य लेल अज्ञात नाम रहथि, से विवाद उठल जे जूरी लोकनि साहित्य अकादेमी मैथिली परामर्शदाता समितिक अध्यक्ष श्री विद्यानाथ झा "विदितक " रबर स्टाम्प रहथि । २०११ क विदेह साहित्य अकादेमी समानान्तर बाल साहित्य पुरस्कार सेहो ले.क. मायानाथ झाकेँ "जकर नारी चतुर होइ" लेल देल गेल छल। ई घोषणा साहित्य अकादेमीक मैथिली विभाग लेल ओतेक असहज निर्णय नै छल। साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक ब्राह्मणवादी चेहराक असल परीक्षा हएत जखन ओकर मूल पुरस्कारक घोषणा हएत। २०११ क विदेह साहित्य अकादेमी समानान्तर मूल साहित्य पुरस्कार श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जी केँ मैथिलीक आइ धरिक सर्वश्रेष्ठ कथा संग्रह “गामक जिनगी” लेल देल गेल छन्हि। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य, दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे सर्वोच्च सम्मान) नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010) श्री राम दयाल राकेश (1999) श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994) नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता स्व. सुन्दर झा शास्त्री नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ साहित्य अकादेमी फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली) १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि। २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- ) - मैथिली साहित्य लेल। साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):- २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।) २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।) पं. श्री उमारमण मिश्र साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली १९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन) १९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य) १९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास) १९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य) १९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य) १९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास) १९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण) १९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य) १९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना) १९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य) १९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य) १९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास) १९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य) १९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास) १९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास) १९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य) १९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा) १९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध) १९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा) १९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास) १९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य) १९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा) १९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी) १९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध) १९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा) १९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा) १९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य) १९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह) १९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य) १९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य) १९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा) २०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य) २००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य) २००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य) २००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा) २००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य) २००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य) २००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा) २००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा) २००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा) २००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह) २०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास) साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार १९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी) १९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी) १९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू) १९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला) १९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू) १९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़) १९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला) १९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला) २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी) २००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी) २००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू) २००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया) २००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी) २००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी) २००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला) २००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली) २००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू) २००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी- सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी) २०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी) साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार २०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल" लेल २०११- ले.क. मायानाथ झा "जकर नारी चतुर होइ" लेल प्रबोध सम्मान प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- ) प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- ) प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- ) प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- ) प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- ) प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- ) प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- ) प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- ) यात्री-चेतना पुरस्कार २००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा; २००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा; २००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया; २००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा; २००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना; २००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी; २००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी; २००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी; २००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा २०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान २००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झा (कविता संग्रह “एना त नहि जे”) २००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता” (नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश) २०१० ई.- श्री महाप्रकाश (कविता संग्रह “संग समय के”) भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल। भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मा नदीक माझी, बांग्ला- माणिक वन्दोपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com http://www.maithililekhaksangh.com/2010/07/blog-post_3709.html २. गद्य २.१.जितेन्द्र झा, जनकपुर- विमलक गजल आ सुजितक कथा २.२.१. जगदीश प्रसाद मण्डलक चारि गोट विहनि कथ २.बेचन ठाकुरक दू टा विहनि कथा २.३.दुर्गानन्द मण्डल-स्वतंत्रता दिवसक अवसरपर किछु स्वतंत्र भरास २.४.नवेंदु कुमार झा-कोसीक प्रलयक तीन बर्ख/ भंगिमक चुनाव सम्पन्न, कुणाल अध्यक्ष्य आ जयदेव सचिव निर्वाचित/ प्रदेश मे लागु भेल सेवाक अधिकार कानून २.५.बिपिन झा-श्रोत्रिय समाजमे रक्तबीजक जन्म २.६.राजदेव मण्डल-उपन्यास- हमर टोल- गतांशसँ आगाँ… २.७.शांतिलक्ष्मी चौधरी- मैथिल नारि केर समस्याक समाधान २.८.रवि भूषण पाठक- कथा-बोधिसत्व जितेन्द्र झा, जनकपुर विमलक गजल आ सुजितक कथा साहित्यकार डा. राजेन्द्र विमलक मैथिली गजल संग्रह सूर्यास्तस“ पहिने भादव १० गते शनिदिन राजधानी काठमाण्डूमे आयोजित एक कार्यक्रममे विमोचित भेल । राष्ट्रकवि माधव घिमिरे गजल संग्रह विमोचन कएने रहथि । विमलके सिद्धहस्त साहित्यकार कहैत ओ हुनक लेखनीक प्रशंसा कएने रहथि । विमलक एहि नव कृतिमे एक सयटा गजल संग्रह कएल गेल अछि । संगीत तथा नाट्य प्रज्ञाप्रतिष्ठानक प्राज्ञ रमेशरञ्जन झा, प्राज्ञ बुद्धि राना, रोचक घिमिरे, प्रहलाद पोखरेल, प्रा. परमेश्वर कापडी, धीरेन्द्र प्रेमषि सहितके साहित्यकार विमलक कृति सम्बन्धमे मन्तव्य व्यक्त कएने रहथि । गजल संग्रहक प्रकाशक पृथु प्रकाशन जनकपुधाम अछि । विमल २०६६ सालक जगदम्बाश्री पुरस्कारसं सम्मानित भेल छथि । दोसर दिस सञ्चारकर्मी सुजित कुमार झाक कथा संग्रह चिडै भादव १३ गते जनकपुरमे आयोजित एक कार्यक्रममे विमोचित भेल । ७८ पृष्ठको कथा संग्रहमे ११ टा कथा समेटल गेल अछि । साहित्यकार रोशन जनकपुरी, अबधेश पोखरेल, श्यामसुन्दर शशि, अशोक दत्त, सहितके व्यक्ति कथा संग्रहके प्रशंसा कएने रहथि । रामानन्द युवा क्लब मैथिली भाषामे एहिसं पहिने सेहो विभिन्न पोथी प्रकाशन क चुकल अछि । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. जगदीश प्रसाद मण्डलक चारि गोट विहनि कथ २. बेचन ठाकुरक दू टा विहनि कथा १ जगदीश प्रसाद मण्डलक चारि गोट विहनि कथा- शिवजीक डाक-बाक् चौदहो भुवन भ्रमणमे काग-भुशुंडी बौराएल रहथि कि तइ बीच शिवजीक संग गुरूओजी पहुँचलथि। सज्जा सजल शव जकाँ काग-भुशुंडी, ने गुरूएजी आ ने शिवजीए दिस तकलनि। मणिक जोहमे अपने समुद्रमे डूबकी लगबैत। दलदल पानि सदृश्य गुरूजी, तॅँए कोनो आनि-पीड़ा नै भेलनि। मुदा पाछु पिछड़ैत काग-भुशंुडीकेँ देख शिवजीक क्रोध सीमा तोड़ि बहरा गेलनि। जहिना हुकड़ैत ढेनुआर गाए चुकड़ैत बच्चाकेँ देख मलकार (पोसिनिहार) जँ नै दुहै तँ कि गाए कोकणि नै जाएत। के दोखी? शिवजीक बाक-डाक नै। काग-भुशुंडीक लेल धैन-सन। चाँकि नै देख काग-भुशुंडीकेँ शिवजी कहलखिन- “जा रे अभगला, अजेगरोक कान कटलह।” सोग आने दिन जकाँ तड़गरे प्रोफेसर लीलाधरक नीक टुटलनि। जना आन दिन नीन टुटिते ओछाइन छोड़ि टहलए विदा भऽ जाइ छलाह से आइ नै भेलनि। ओछाइन छोड़ैसँ पहिने मनमे उठि गेलनि एक्कैसम मार्च। पचास बर्ख पूरि एकावनममे प्रवेश कऽ रहल छी। प्रश्न उठलनि जिनगीक पचास बर्ख। जँ सइये बर्खक अधार बनबै छी तैयो अधा टपि गेलौं। मुदा से केना हएत? जिनगी तँ विभाजित अछि। तँए एकक बाद दोसरमे प्रवेश आ पैछलाक नीक-अधलाक समीक्षा। मुदा हिसाबे उकड़ूमे पड़ि गेल अछि। सए बर्ख जीबे करब तेकर कोनो गारंटी अछि..। तखन अधा केना मानब। लगले नजरि नोकरी दिस बढ़लनि। जइ दिन नोकरी शुरू केने रही तइ दिन बतीस बर्खक जोड़ने रही। गुन भेल जे तीन बर्ख बढ़ि गेल। पेइतीस बर्खक नोकरी भऽ गेल जइमे पच्चीस बर्ख पूरि गेल अछि। दसे बर्खक बचल अछि। अहू पच्चीस बर्खमे आठ बर्ख ओझे-गुनी खेलक सत्तरह बर्खक नोकरीकेँ नोकरी बुझलौं, जखन कओलेज सरकारी भेल। एकाएक बीस गुना जिनगीमे उछाल आएल। साठि हजारक नोकरी कोनो मामूली छी, जइठाम अखनो कते पेटेपर खटैए। मुदा जहिना तीआरि जालक ओझरी जे छोड़बै दुआरे लोक पूँजिओ गमा फेकिये दैत अछि। मुदा से तँ लीलाधरकेँ नै भऽ पाइब रहलनिए। जत्ते छोड़बए चाहथि तते अमती काँट जकाँ धोतीमे ओझराइते जाइत छलनि। तखने पत्नी ओछाइन छोड़ि, कपड़ासँ पौछैत मुँह, एेनामे देख, कटोरिया धोंधि नेने फुदकैत विजयक खुशीसँ मुस्की दैत लीलाधरक ओछाइन लग पहुँच मुँह दिस तकलनि। टक-टक आँखि तकैत लीलाधर पत्नीकेँ नै देखलनि। मनुष्य कि चिड़ै आकि कौछ छी जे अंडा दऽ पड़ा जाए। पड़ाएल कि पड़ाओल गेल एे प्रश्नमे लीलाधर ओझराएल। टकटकी देख पत्नी डरि गेलीह। मुदा तैयो अपन अर्ज निमाहैत बजली- “कथीक सोग...?” प्रो. लीलाधर- “किछु ने?” जिनगीक सोग। मरैइयो बेर तक पत्नी सिरे चढ़ि खेती, काल्हि धरि केलौं? यएह ने जे तते हित-अपेछित बना लेलौं जे सालक दस प्रतिशत कमाइ भोज-भातमे चलि जाइए। तइपर अपनो सभ दिन अनके खेबै, से केहेन हएत। मुदा सभ दिन जँ भोजे खेबै तँ विद्यापति हिसाव (अधा जनम हम नीन गमाओल)केँ कि करब। ने किछुओ पाइ जमा कऽ राखि सकलौं आ जेहो केलौं ओ दस बर्ख बादे भेटत। कि तीनू बच्चाक आगूक शिक्षा दऽ पाएब। पनचैती परसूसँ सौंसे गाम यएह चरचा जे ई पनचैती केना हएत। एक दिस सोनेलाल बाबा आ दाेसर दिस विधायक जीक प्रतिनिधि। तहूमे खासे मसियौत सेहो छियनि। विधायकजी भिन्ने गजुआइत जे एक जाइतिक वोट प्रभावित हएत। मुदा अपनो आदमी तँ किछु नै कहत सेहो बात तँ नै। नीक हएत अस्पताल धऽ ली। भेँट करए सभ एबे करत, ओतइ सँ फरिया देब। सोनेलाल बाबाक दियाद-वाद, जाति-समाज इन्दिरा अावासक भाँजमे। तँए या तँ गबदी मािर देत या तँ सोझा एबे ने करत। पुतोहूक दुआरे बेटोसँ मिलान नहिये जकाँ। मुदा बिना फड़िओने तँ टूटल गाड़ीक पहिया जकाँ गेबे करत। ‘काँकोड़-रोटी।’ चेहरासँ सोनेलाल बाबा अस्सी बर्खक बुझि पड़ै छथि मुदा छथि छियासठिये बर्खक। जरल मनमे आगि उठलनि। तीन साल पहिने इन्दिरा आवास वएह प्रतिनिधि विधायक जीक सोझमे गछलखिन। सोनेलाल बाबा तही दिनसँ बौआइ छथि। मुदा अखन धरि नै भेटलनि। बेचाराक मनक धधड़ा ओइ दिन भभकि उठल जइ दिन सोनेलाल बाबा पुछलखिन- “नेताजी, दौगैत-दौगैत टाँग टुटि गेल। आबो कहू?” प्रतिनिधि- “आइक युगमे बिना खुऔने-पीऔने काज चलै छै?” सोनेलाल बाबा- “ई बात ओइ दिन किअए ने कहलौं जइ दिन हमरो हाथमे भोट छल।” “अखन एते छुट्टी नइए, दोसर दिन बात करब।” पगलाएल सोनेलाल बाबा कि केलनि से अपनो नै बुझलखिन। कचोट आजादीक चौसठिम वर्षगाँठ मनबए खुशीक समुद्रमे आबाल-वृद्ध डूबल। चौदह अगस्तक निसभेर राति। अचानक पत्नीक छातीमे टनक उठलनि। दू बजैत। बारहे बजे रातिसँ जहाँ-तहाँ रबासि-फटाका फुटैत। अधिक धिया-पुता भेने बेसीकाल घरवाली खन-खनाएले रहै छथि। अपनो अभ्यस्त भऽ गेल छी। जइसँ ने डाॅक्टर ओइठाम जाइमे अबूह लगैए आ ने लसुन-तेला बना मािलस करैमे। घरक अनिवार्य खर्चमे दवाइयो-दारू आबि गेल अछि। तँए कखनो मनमे चिन्ता-फिकिर नहिये जकाँ रहैए। एक तँ सौन-भादबक अन्हार, तइपर मेघडम्बर जकाँ मेघौन। एत्ती रातिमे की करब? ने गाममे डाक्टर छथि जे लालटेनो हाथे बजा अनबनि, थाल-खिचारक रस्ता, चारि किलोमीटरपर डाॅक्टरक घर। जहिना कोनो फनिगा मकड़जालमे फँसि छटपटाइत तहिना मन छटपटाए लगल। मन पड़ल दुनू प्राणीक जिनगी। समाजमे अपना सन कते जोड़ा अछि जे दोहरा कऽ सिनूर भरने हएत। जीता-जिनगी विश्वासघाती नै बनब। जे बनि पड़त तइमे पाछू नै हटब। उत्साह जगल। घरक जते टँगर रही सेवामे जुटि गेलौं। कियो तेलक मालिस तँ कियो सुखले ऐँठुआ ससार करए लगलनि। अपने रिक्सा भजियबए विदा भेलौं। मझिली बेटी माएक आंगुर फोड़ि-फोड़ि रोग जाँचए लगलि। जहिना थर्मामीटर लगा डाॅक्टर बोखारक जाँच करैत तहिना ने मलकारो मालक पाउज गनि रोगक जाँच करैए। तीन बजे भोरमे रिक्सा नेने पहुँचलौं। माएकेँ उठा बेटा-बेटी रिक्सापर चढ़ौलक। जेठका बेटाकेँ संग केने डॉक्टर ओइठाम विदा होइत तेसर बेटाकेँ कहलिऐ- “बौआ दिनेश, माल-जालक तकतान करब।” गामेक मिड्ल स्कूलक पाँचमा क्लाशमे पढ़ैत दिनेश। फस्ट करैए। शिक्षककेँ जहिना गुरूक आदर करैए तहिना अपनो दुनू बेकतीक लेल श्रवणे-कुमार छी। साढ़े एगारह बजे घुमि कऽ एलौं। एक तँ रौद तइपर कठगुमारी। पियासे मन तबधल। दरबज्जापर रिक्सा देखिते देनेश लोटामे पानि नेने पहुँचल। लोटाक पानि देख हृदए उमड़ि गेल। अनायास मुँहसँ निकलल- “बौआ, इस्कूल...।” अखन धरि दिनेश बिसरि गेल छल पनरह अगस्त, स्वतंत्रता दिवस। बिसरि गेल छल झंडाक संग मिल चलब, बिसरि गेल छल नव वर्षक उपहार। दिनेश बाजल- “नै। केना जेतौं।” मनमे असहनीय कचोट भेल। मुदा बात बहलबैत बजलौं- “बौआ, एहेन फेड़ा जिनगीमे कहियो ने भेल छल। मुदा सभ शुभ-शुभ सम्पन्न भेल।” २ बेचन ठाकुर विहनि कथा- चल आइये आश्चर्यचकित भऽ राम बाजल- “रहीम भाय, एक्को महीना मुंबइ एना नै भेल आकि फेर गाम जाइ छेँ। की कारण छै?” रहीम हँसि कऽ बजला- “राम भाय, नाझलुहु। गाममे एलेक्शन हइ न। जोगी मुखिया गामपर खूद आबि कहि गेल ह, बाहरबलाकेँ भोँट खसाबै लऽ गाम एबाक लेल अबै-जाइक भाड़ा आ दारू फ्री।” कनीकाल गुम्म भऽ आ किछु सोचि कऽ राम बाजल- “भाय, हमरा मुंबइ एना एक सप्ताह भेल। ई बात हमरा नै बुझल छल। जौं ई बात छै तँ चलह आइये।” डाक डकोबलि मुस्की दैत मुखियाजी- “की हौ फेकन भैया। काल्हि नोमिनेशनमे चलैक छै।” ऐपर खीसिया कऽ फेकन बाजल- “कोन सपेत-के यौ?” आश्चर्यमे पड़ि मुखियाजी बाजला- “बिसरि गेलहक। काल्हि साँझमे जे पोलीथिन लेल दूटा नमरी देने रहियह।” ऐपर मुस्का कऽ फेकन जबाक देलक- “से तँ मने अछि मुदा लुटनबाबूकेँ कोना बिसरि जेबै जे आइ भोरे भोर नोमीनेशनमे जाइ लेल आ खाइ-पीये लेल पाँच सए टाका अपने दऽ गेला। हुनकामे मार्शलक व्यवस्था सेहो छै।” ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। दुर्गानन्द मण्डल स्वतंत्रता दिवसक अवसरपर किछु स्वतंत्र भरास- आइ भारतीय स्वतंत्राक 65म वर्षगाॅठ मना रहल छथि। अनेरे प्रसन्न! सरकारी किंवा गैर सरकारी कार्यालय आजुक दिन स्वतंत्रता दिवसक रूपमे मना रहल अछि। विद्यालय सभमे सरकारी चिट्ठी पठा देल गेल जे फी विद्यालयक एक गोट मासाएब अमुख महादलित टोलमे झंडा फहराबथि, अन्यथा दण्डक भागीक हेता। कहक लेल सभ किछु अनसोहाते बुझना जाइत अछि। कि खादीक नम्हर कुर्ता, ठेहुनसँ निच्चा धरि, माथपर गाॅधी टोपी, डॉरमे खदीक धोती पहिर राष्ट्रधव्जक समक्ष सभटा झुट्ठठे भाषण देल जा रहल अछि। सुनैत-सुनैत देहमे आगि लागि जाइत अछि। मोन कोना ने कोनादन करए लगैत अछि। झुट्ठा लोक सबहक झुट्ठ भाषण सुनैत-सुनैत पचास बर्खक भऽ गेलौं मुदा झुट्ठे बाजि अपने सन आनो जनकेँ परतारब कते अधलाह बात भेल! जँ हार-मौसक देह अछि तँ कनियो लाज हेबाक चाही, कि बाजि रहल छी, कि कऽ रहल छी? कि सभ दिन झुट्ठे बाजि भारतक स्वतंत्रताकेँ अक्षुन्न राखि सकै छी? ई हमरा लोकनिक बीच एकटा यक्ष प्रश्नक सदृश्य राखल अछि। चारू कात देश भक्ति गीत बाजि रहल अछि। गीत सुनैत-सुनैत खुन खौलए लगैत अछि, ऐ सफेद पोस झुट्ठा सभकेँ देख कऽ जे समस्त भारतीय भाय-बहिन, माइ लोकनिकेँ सालो-सालसँ ठकैत आएल अछि। राष्ट्रधव्जक सामने बाजब किछु आ करब किछु, हिनका सभक जन्म सिद्ध अधिकार भऽ गेल अछि। धिक्कार अछि एहेन भारतीय आेइ सन्तान सभकेँ जे भारत माताक संग झुठक बेपार करैत अछि। सवाल ई उठैत अछि, देशमे जखन चारूकात भ्रष्टाचार, बेबिचार, हत्या, बालात्कार, अपहरणक बेपार भऽ रहल अछि, तखन भारतीय कोन रूपेँ स्वतंत्र छथि? देशक शीर्षस्थ नेता लोकनिक करतुत प्रात होइते अखबारमे पढ़बामे अबैत अछि। भारतीय संविधानक ऊँचसँ ऊँच पदपर आसीन मत्रीगण क्यो बेदाग नै छथि। सबहक चद्दैरमे दाग लागल छन्हि। एकटा जहलसँ बहराइ छथि, तँ दोसर जेबाक लेल ततबाए आतुर! कथी खातीर? देशक रक्षा खातीर? कखनो नै। अपितु ई आरो स्पष्ट भऽ जाइत अछि, जे अहाँ कतेक पघि भीतरघाती छी। आइ खगता अछि ऐ बातक जे अपना-अपना भीतर झाँकि कऽ देखू जे अहाँ गॉधी, नेहरू, लोहिया, जे.पी.क भारतक कि दुदर्शा केलिऐ? कि अही कुकर्मक िनर्वहनक लेल अहाँक भारतीय राजनीतिक क्षितिजपर बैसाओल गेल? आइ जँ कियो सही आबाज उठबै छथि तँ ओकर ओधि उखारि अहाँ अपनाकेँ सुरक्षित राखए चाही छी। मुदा आब ओ दिन दुर नै जे अहाँ कखनो नाङट भऽ सकै छी आ अरबो-अरब भारतीय अहाँकेँ नाङटे-उघारे टी.भी.क पर्दापर देखत। तँए समए पूर्व चेतू हे मानव चेतू। अन्यथा ने िसर्फ भारतीय वल्कि अरबो-अरब जनसंख्या अहाँकेँ धुर छी! धुर छी! करत। कतेक दुखक बात अछि जे अहाँ सन सपूत भारत माताकेँ खोइछ खाली कऽ सभटा धन नुकाए कऽ आनठाम रखने छी। मुदा से ककराले? अपनेकेँ बूझक चाही जे ओ धन किसान-मदूरक खुन-पसेनाक कमाइ छी। ओ धन अहाँकेँ पचि नै सकैए। ओहि धनसँ ने तँ अहाँ अपन श्राध कऽ सकब आ ने बेटा-बेटीक वियाह। तखन ओ धन भोगत के? ऐठाम आप्त चिंतनक खगता अछि। सोचू, कने विचारू, कोन तरहक कुकर्म आ केकरा लेल करै छी। जागू, जागू हे भारतक सपूत अखनो जागू। भारतक अखण्डता आ एकता लेल जागू। भारत सबहक माता थिकीह। माताकेँ सद्विचारसँ सजाउ। आउ, अपन तियाग, निष्ठा, लोभ, मोह, अहंकारकेँ तियागि भारतकेँ माता बुझि अपन खून-पसीना स्वच्छ वुद्धि विवेकसँ माताकेँ बचाउ। बचाउ अपन मानवताकेँ, नैतिकताकेँ आदि सनातन धर्मकेँ आ राजनीतिकेँ। देशमे जरूर प्रजातंत्रक शासन अछि। किन्तु सबहक आत्मामे रावणक शासन। तँए, आइ पन्द्रह अगस्तक अवसरपर आबि ओइ रावणकेँ खतम कऽ देबाक सप्पत खाउ। सप्पत खाउ जे अपन भारतकेँ रामराज्य बना अपने राम कहाउ। धन्यवाद..., ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। नवेंदु कुमार झा- रिपोर्ताज कोसीक प्रलयक तीन वर्ष
कोसीक प्रलयक तीन वर्ष अठारह अगस्त के पूरा भऽ गेल। तीन वर्ष पहिने जखन कोसीक प्रचण्ड बेग में मिथिलांचलक एकटा भाग कोसी में विलीन भऽ गेल छल तऽ सरकारी आ गैर सरकारी संस्था सभ एहि तरहे मेहरबान छल जे लोक सभ आशा बनल जे बर्बाद भेल क्षेत्र फेर से आबाद होएत। आ किछु हद धरि रास्ता पर सेहो आएल अछि। लोक जीवन फेर सँ पटरी पर आबि रहल अछि मुदा सरकारी व्यवस्थाक काहिलि मे कोनो परिवर्तन नहि देखल जा रहल अछि। कोसीक त्रासदीक बाढ़ बिकहार सरकार पैद्य-पैद्य घोषणा कएलक। ओहि मेे किछु जमीन पर उतरल तऽ किछु पटना सँ प्रभावित क्षेत्र धरि पहूचाए सँ पहिने आकाश मे उड़ि गेल। कोसी मे समा गेल एकर चिन्ता नहितऽ पीड़ित कएलनि आ नहि सरकार। एहि क्रम मे ‘कोसी जांच आयोग‘ सेहो अस्तित्व मे आएला कोसी के घाट मे भसियाएल क्षेत्रक जका इहो आयोग जेना भसिया गेल अछि। न्यायमूर्ति राजेश कलियाक अध्यक्षता बाला एक सदस्यीय आयोग गोटेक छत्तीस भासक अपन कार्यकाल मेे एकहूटा अंतरिम रिपोर्ट नहि देलक तऽ भला अंतिम रिपोर्टक चर्चा करब बेवकूफी होएत। उत्तर बिहारक बाढ़ि बिहारक बाबू आ अभियंता सभ लेल सोनाक अण्डा देबऽ बाला मुर्गी अछि। प्रति वर्ष बाढ़ि सँ, बचाव, बाढ़ि राहत आ बाढ़िक बाद पुनर्वास आ मरम्मतिक नाम पर सरकारक खजाना बाढ़िक पानि जका बहि जाइत अछि। एहि तरहे कोसी जांच आयोग बाबू आ कर्मचारीक लेल आराम गाह बनि गेल अछि भेटल। जनतबक अनुसार आयोगक सर्वसर्वा न्याायमूर्ति बालिया छत्तीस मासक एहि कार्यकाल मे छतीसो बेर कार्यालय नहि अएलाह अछि मुदा आधुनिक सुविधा सँ युक्त कार्यालय मे अपन हाजिरी लगबऽ बाबू आ कर्मचारी जरूर अबैत छथि। किएक तऽ ई कार्यालय मनोरंजन केन्द्र बनि गेल अछि। कार्यालय कम्प्यूटर से कोसी क्षेत्रक भविष्य संबंध मे भने एको पन्ना बहि निकलल हो मुदा एहि काम तैनात कर्मचारी के ई कम्प्यूटर तास आ आन खेलक सुविधा बिना रूकावट उपलब्ध करा रहल अछि। जखन भला सरकार आयोगक गठित एकरा सभ सुविधा उपलब्ध करा अपन काज समाप्त बुझि लेलक अछि तऽ भला कर्मचारी सभक कोन दोष? ज्यो जनता सरकारक राहत, बचाव आ जांच आयोगक गठन सँ संतुष्ट अछि तऽ भला सरकार रिपोर्टक प्रति किएक सक्रिय होयत। कोसीक जनता कोसीक बाढ़ि मे अपन जमा-पूंजी बहबऽ लेल मजबूर अछि आ सरकार कोसीक त्रासदीक जांचक लेल सरकारी खजाना के बहा अपन दायित्व समाप्त बुझि रहल अछि। भंगिमाक चुनाव सम्पन्न, कुणाल अध्यक्ष्य आ जयदेव सचिव निर्वाचित
मैथिली नाट्य संस्था ‘भंगिमाक‘ आम सभाक बैसार पटनामे वरिष्ठ रंगकर्मी कुणालक अध्यक्षतामे सम्पन्न भेल। एहि बैसारमे संस्थानक नव कार्यकारिणीक चुनाव कराओल गेल। निर्वाची पदाधिकारी वरिष्ठ मैथिल समाजसेवी प्रेमकांत झा सर्वसम्मति सँ वरिष्ठ रंगकर्मी कुणालकेँ अध्यक्ष, मोद नारायण झाकेँ उपाध्यक्ष, जयदेव मिश्रकेँ सचिव, उमाकांत झाकेँ कोषाध्यक्ष, मुकुल कुमारकेँ संयुक्त सचिव आ नवेन्दु कुमार झाकेँ संगठन सह प्रचार सचिव निर्वाचित घोषित कएलनि। एहिसँ पहिने बैसारमे अपन विचार रखैत रंगकर्मी आ सामाजिक कार्यकर्ता सभ प्रदेशमे मैथिली रंगकर्मक गतिविधिमे तेजी आनब आ संस्थाकेँ मजगूत करबापर जोर देलनि। बैसारमे कुमार गगन, ब्रहनानन्द झा, लक्ष्मी रमण मिश्र, कमल मोहन चुन्न, रितू कर्ण, प्रियंका सहित कतेको मैथिली रंगकर्मी उपस्थित छलाह। प्रदेश मे लागु भेल सेवाक अधिकार कानून स्वतंत्रता दिवसक अवसर पर बिहार सरकार एतिहासिक डेग उठबैत भ्रष्टाचारक सफायाक लेल प्रदेश मे सेवाक अधिकार कानून लागू कऽ देलक। पंद्रह अगस्त सँ लागु भेल भेटि कानून सँ आब जनता के तय समय सीमाक भीतर सरकारी सेवा भेटि सकत। बिहान विधान मंडल पछिला दो मई के एहि कानून के पास कएने छल। सेवाक अधिकार कानून लागु करए बाला बिहार देशक पहिला प्रदेश अछि तीन चरण मे लागु कएल जायबाला एहि कानूनक पहिल चरण मे दस विभागक पचासटा सेवा के एकरा दायरा मे राखल गे अछि आबए बाला समय मे आन सेवा के सेहो एहि कानूनक दायरा मे अनबाक योजना अछि। तय समय सीमा मे काज नहि भेला पर सरकारी कर्मी पर दो सौ पचास टाका प्रति दिनक आर्थिक दण्डक प्रावधान सेहो कएल गेल अछि। एहि कानूनक दोसर चरण मे एहि सेवाके आन लाइन कऽ देल जाएता कोनो व्यक्ति अपन घर बैसल आवश्यक सेवाक लेल आन लाइन आवेदन कऽ सकताह आ तेसर चरण मे जनता द्वारा देल गेल आवेदनक निपटारा कऽ हुनका घर पर सेवा उपलब्ध करादेल जाएत। ई व्यवस्था अगिला वर्ष छब्बीस जनवरी सँ प्रारंभ होएत। एकर अंतर्गत तत्काल सेवा सेहो प्रारंभ कएल जाएत आ पूरा व्यवस्थाक क आन लाईन मॉनिटरिंगक व्यवस्था सेहो कएल गेल अछि। एहि कानूनक सफल कार्यान्वयनक लेल सभ जिला मे एक-एकटा आईटी प्रबंधक, आआइटी सहायक तथा प्रखण्ड सभ मे एक-एकटा अटेनडेन्टक तैनाती कएल गेल अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बिपिन झा [एहि लेख केर लेखक बिपिन कुमार झा (Senior Research Fellow), IIT मुम्बई मे संगणकीय भाषाविज्ञान (संस्कृत) क्षेत्र मे शोध (Ph. D.) कऽ रहल छथि। ] श्रोत्रिय समाजमे रक्तबीजक जन्म [एहि लेख केर लेखक बिपिन कुमार झा (Senior Research Fellow), IIT मुम्बई मे संगणकीय भाषाविज्ञान (संस्कृत) क्षेत्र मे शोध (Ph. D.) कऽ रहल छथि। ई लेख हिनक वैयक्तिक विचार छन्हि जाहि पर टिप्पणी सादर आमेन्त्रित अछि- kumarvipin.jha@gmail.com ] श्रोत्रिय समाज कर्तव्यपरायणता, शुचिता आदि केर कारण विशेषरूप स मिथिला में सर्वथा आदरणीय एवं सिरमौर रहल अछि। किछु घर सँऽ प्रारंभ ई समाज यद्यपि आइयो उँगरी पर गिनल परिबार केर समूह अछि किन्तु ई समाज आनुपातिक दृष्टि स जतेक भारतीय ज्ञानपरम्परा के उत्कर्ष में योगदान देलक ओ अनुपमे अछि। संगहि ई समाज व्यावहारिक रूप सँ अपन शुचिता कायमे रखलक। काल सभ स पैघ होइत अछि। समाज केर निर्माण आ नाश दूनू ओहि समाजक सदस्ये द्वारा होइत छैक। जे समाज अखनहु आधुनिक आ वैश्विक धरातल सँऽ आ स्वयं के वैश्विक गतिविधि सँ समाजक उत्थान कय राष्ट्र केर उत्थान केर दिशा में अग्रसर रहल अछि ओतहि किछु अनचिनहार कारणवश ओ समाज अपन अस्तित्व मेटेबाक हेतु कटिबद्ध जकां बुझना जाइत अछि। हमेर एहि लेखन केर औचित्य ई अछि जे समाज के कोना बचायल जाय एहि पर लोकक ध्यानाकर्षित करब। ई एहेन समाज अछि जतय अखनहु बहुत रास कुरीति अन्य समाज सँ उधारी नहि लेल गेल अछि। मुदा समेसामेयिक परिप्रेक्ष्य में आनुपातिक दृष्टि सँऽ पारिवारिक विखण्डन आ अशान्ति एहि समाज में रक्तबीज तुल्य प्रसरित अछि!! कियाक??? कदाचित ई प्रश्न बुजुर्ग आ युवावर्ग दुनू कें कटूक्ति लगतन्हि मुदा समाजक उत्कर्ष हेतु दुनू के ध्यान देनाई आत्यावश्यक छन्हि। विवाह केर प्राचीन स्वरूप सामान्य रूप स 'पूर्वनियोजित ' छल कालान्तर में ई दूटा भय गेल 'पूर्वनियोजित' आ 'स्वैच्छिक’। समेस्या वाइरस जका दुनू में प्रवेश कय गेल अछि। कारण अछि मेहत्त्वाकांक्षा, संवादहीनता, संवेदनहीनता आ नैतिकता केर पतन आदि। १. स्वेच्छाचारिता- ई कोनो युवा/युवती द्वारा कियाक कयल जाइत अछि ई प्रश्न कठिन मुदा उत्तर सरल अछि- मेहत्त्वाकांक्षा, सामाजिकचेतना केर अभाव, संवेदनहीनता, आत्मेसुखक वरीयता, नैतिकता केर ह्रास। स्वेच्छाचारिता उचित अथवा अनुचित? जाहि समाज रूपी वृक्ष के हमेर पूर्वज संस्कार रूपी जल स अभिसिंचित कयलथि ओकरा अक्षुण्ण रखबाक हेतु ई अवश्य घातक अछि। मुदा जे व्यक्ति एहि तथाकथित संकुचित विचार सं ऊपर उठि चुकल छथि हुनका हेतु उचित। कियाक त ओहि सर्वोच्च स्तर पर नहि त कोनो विवाह रूपी संस्था के आवश्यकता छैक न देश काल पात्र के बन्धन। समेस्या कतय अछि? समेस्या अछि वैचारिक संकरता में। कोनो एक पक्ष स्वीकार करबाक चाही। सुर्सुर-मुरमुर दुनू त उचित नहि। यदि हमे एतेक तथाकथित सभ्य आ शिक्षित भय गेलहुं कि समाजक संस्कार संकीर्ण लगैत अछि त पूर्णतः पाश्चात्य विचार केर अनुगमेन करब उचित। एतय हमे बुजुर्ग के पूछय चाहैत छियन्हि जे सामान्यतया स्त्री के सन्दर्भ में अपन सामाजिक विवशता के दुहाई आ पुरुष के विषय में उदारवादी प्रवृत्ति कियाक?? एकदीस सोलहमे सदी दोसर दीस बाइसमे सदी कियाक? २. पूर्वनियोजित विवाह- सामान्यतया एहेन देखल जा रहल अछि जे पूर्वनियोजित विवाह पर सेहो प्रश्नचिह्न लागि जाइत अछि जेकर परिणति होइत अछि विच्छेद, विच्छेदक स्थिति अथवा आजन्मे केर लेल पश्चात्ताप आ समाज सँ शिकायत। कारण- बुजुर्ग द्वारा अपन सन्तान के व्यावहारिकतया नैतिकता ओकर पसन्द नापसन्द के प्रति अनवधानता।, वाल्यावस्था स बच्चा के समाज स दूर राखब।, नैतिकता केर व्यावहारिक प्रयोग नहिं होयब।, मेहत्त्वाकांक्षा आ वस्तुस्थिति में असामंजस्य होयब।, अनावश्यक प्रदर्शन अर्थात् बाह्याडम्बर।, अपन सामाजिक स्थिति के भावी दम्पति पर प्रक्षेपण।, समाज स दूर रहब फलतः समाजक मेहत्व के नहि बुझब अस्तु शारीरिक/आर्थिक/मेहत्वाकांक्षीय कारक के मेहत्व देब।, अपन पक्ष में रखबा में संकोच।, अपन अन्तर्मेनक अपेक्षा तथाकथित सभ्य समाजक गप्प सुनब।, दम्पतिक आपसी सम्बन्ध में अन्य/परिवारक हस्तक्षेप करब।, संवेदनशून्यता केर परिचय। ई लेख यद्यपि कोनो परिवर्तन नहिं आनत मुदा सूतल समाज के एकटा अलार्मे अवश्य देत ।जे ई अलार्मे सुनि उठब त ठीक नहि उठब त कोनो बात नहिं आठ बजे त उठबे करब। तावत धरि बहुत देरी भय चुकल रहत। (आलेखमेे देल विचार लेखकक निजी विचार छन्हि।- सम्पादक) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। राजदेव मण्डल हमर टोल उपन्यास गतांशसँ आगू.... गतांश आगाँ... ‘ठक-ठक-ठक’ गाछ कटि रहल छै। झमटगर आमक गाछ। कटबा रहल छै- झटकलाल मड़र। कुरहैड़क चोटसँ डारि-पात थर-थर काँपि रहल अछि। चिड़ई-चुनमुनी फड़फड़ा कऽ उड़ि रहल छै। जार-जार कानैत जेना कहि रहल छै-गाछ। “हौ, हमरा नै काटह। हमर कोनो दोख नै। हम तँ तोहर सहायक छीयह। मीठ-मीठ फल, पवित्तर हवा, शीतल छाँह दैतै रहए छी। बरखा बूनीमे हमर सहयोग देखते छी। तैयो हमर जान लऽ रहल छी। आह... हमरा बहैत खूनकेँ कियो नै देख रहल अछि- हौ......।” जल्लाद जकाँ दू गोटे चला रहल अछि-कुरहैड़। गाँजाक निसाँसँ दुनू आँखि लाल। घामसँ नहाएल। चाहै छै- जलदीसँ जल्दी गाछकेँ गिरा दी। मौतक निन्न सुता दी। किछु दूर हटि कऽ झटकलाल मड़र ठाढ़ अछि। जल्दी गाछ कटबाक आग्रह कऽ रहल छै। जेना गाछ नै कोनो भरिगर बोझ ओकरहि कपारपर लाधल छै। झटकलाल मड़रक छोटका बेटा अजय जेना गाछक करूण क्रन्दन सुनि लेलक। ओकरा पाएरमे तेजी आबि गेलै। “बाबूजी! आमक गाछ किएक कटबा रहल छिऐ?” झटकलाल मड़र घुरि कऽ देखलक आ कने गम्भीर होइत बजल- “ई अपन गाछ नै छी अजय। ऐपर जीबू बाबूक अधिकार छन्हि।” “जीबू बाबूकेँ?” “हँ, हुनके दक्षिणामे देल गेल छै। बरिसोपूर्व ताेहर दादाजी केँ श्राद्ध-कर्ममे आत्माक शांति आ मुक्तिक लेल। दान-दक्षिणामे देलाक बादसँ हम सिरिफ रखबारि करै छिऐ।” अजयक व्यंग्यसँ भरल स्वर निकललै- “आ आम पकलापर अहाँ घर पहुँचा दैत छिऐ- वाह..।” “हँ हौ। ब्राह्मण देवता छथि। हमरा ईमानदारीपर गाछ छोड़ने अछि। हुनके सबहक हाथमे तँ मुक्ति छै। ओ जँ हमरापर विश्वास करै छथि तँ हमरो कर्तव्य निमाहए पड़तै किने...।” “अहाँ बताह भऽ गेल छी बाबूजी। हम गाछ नै काटय देब।” “फेर, अहाँ पढ़ि-लिख कऽ की बजै छी। आगिसँ खेल करए चाहै छी। सराप दऽ देत तँ अगिला जनम तक पड़ि जाएत। जिनगीकेँ सफल करबाक लेल बहुत बात सहए पड़ै छै।” “गाछ केकरो। रखबारि कोइ आर करए। डरे फल दोसरठाम पहुँच जाए। अहाँ डेराएल छी। आन्हर छी।” झटकलाल मड़र तमसा गेल। “दू अछर अँग्रेजी पढ़ि लेलहक तँ हमरा आन्हर बुझै छहक। पात्रकेँ देल दान छिऐ। तेकरा हम बैमानी कऽ ली। अधरमी कहीं कऽ।” नै सुनने छहक- ‘जो जस करहि सो तस फल चाखा।’ “हँ, हँ बुझलौं। गाछक सेवा अहाँ करै छी। फलक रखबारि अहाँ करै छी। ओ फल खाइत अछि- जीबू झा। ई छिऐ कर्मक फल।” “हमरा फलक चिन्ता नै अछि। असलमे गाछ हमर नै छी। हुनका लकड़ीक जरूरत छन्हि। अपन गाछ कटबा कऽ लऽ जा रहल छथि। दान-दक्षिणामे देल गेल छन्हि तेकरा हम केना रोकि देबनि। एहन जुलुम हमरा बुत्ते नै हएत।” “बाबूजी, जुलुम तँ अहाँसँ भऽ रहल अछि। जीअत गाछकेँ काटनाइ पाप करम छिऐ। अपराध छी। पर्यावरण दूषित भऽ रहल छै। गाछ-बिरिछक अभावसँ प्रदूषण फैल रहल छै। अहाँ गन्दगी फैलाबैमे मदति कऽ रहल छिऐ।” “हम गन्दगी फैला रहल छिऐ की? अधरमी जकाँ बात तू करै छहक। पाप-पुण्यक गियान नै छह तोरा। तोरे सन लोकक संख्या जँ धरतीपर बढ़ि जेतै तँ ई धरती थरथर काँपए लगतै।” अजय अपन केश नोचैत धुनधुना कऽ बजल- “भैंसक आगाँ बीन बजेलासँ की फैदा। किन्तु गाछ तँ नै काटए देबनि।” फानि कऽ आगू गेल आ लपकि कऽ कुरहैड़ पकड़ैत बजल- “रूकि जा। गाछ नै काटि सकै छह।” कनेक दूरपर धर्मानन्द बाबू आ ढोढ़ाइ गुरूजी दुनू गोटेसँ गप्प कऽ रहल अछि। झटकलाल मड़र जोरसँ शोर पाड़ैत अछि- “यौ धर्मानन्द बाबू सभ गोटे एम्हर आउ। देखियौ हमर बेटा पागल जकाँ करैए। गाछ नै काटए दइए। कहू जे जीबूबाबूकेँ की जबाब देबनि। कोनो तरहेँ एकरा ऐठामसँ हटाउ।” धर्मानन्द लग आबैत बजल- “जीबूबाबू तँ हमरे दुआरिपर छथि। हमरे टाएर गाड़ीसँ हुनकर लकड़ी जेतै। बहलमानक खोजमे आएल छलौं। घोंचाय तँ गाड़ी चलबैमे माहिर छै। ओकरे ताकि रहल छी।” फेर फुसफुसाइत स्वरमे आगू बजल- “अहाँ तँ जानिते छिऐ मड़र। टाएरगाड़ी तँ घोंचायकेँ नाओंसँ उठल छलै। ऑफिसमे ओकरे नाम दरज छै। ओइ दिन- हम तँ चलाकीसँ आनि लेलौं। संदेह होइत अछि आब। कहीं बुझि जाएत तँ गाड़ी घेर लेत।” झटकलाल मुड़ी झुलबैत कहलकै- “धुर, ओकरा केना मालूम पड़तै। मुरूख-चपाट छै। एम्हर जीबूबाबू अपना सबहक संग छथि। किछो नै हेतै। लेकिन पहिले हमरा ऐ झंझटसँ निकालू। अजयकेँ ऐठामसँ ठेल-ठालि कऽ हटाउ।” ढोंढ़ाय गुरूजीकेँ संगे आओर दू गोटे आबि गेल। झटकलाल मड़रक इशारा पाबि सभ गोटे एक्केबेर अजयकेँ पकड़ि लेलक। घिंचैत-ठेलियबैत ओइठामसँ दूर लऽ जेाक प्रयास करए लगल। “अइठामसँ चलह। तूँ पढ़ूआ बाबू छहक। तोरा समाजक सभ गप्प नै बूझल छह। जीबूबाबू साधारण लोक नै छथि। पैघ पैरवीबला बेकती छथि। हमरा सभकेँ कतेक बेर नीक-अधलामे बचौने छथि।” अजय ओइठामसँ घुस कऽ नै चाहैत छै। विरोध कऽ रहल छै। ओकरा सबहक बन्धनमे छटपटा रहल अछि। किन्तु बन्धन ढील पड़ै तब ने। “कहै छी हम। हमरा छोड़ि दिअ। नै तँ बड्ड खराब बात भऽ जाएत। पाछू हमरा दोख नै देब।” झटकलाल मड़र ठेलैत कहलक- “चहल अजय चलह। काज नै रोकहक। सुनह- धरम करैत जँ हुए हािन, तैयो नै छोड़ी धरमक बानि।” अजय जालमे फँसल चिड़ै जकाँ फरफरा रहल अछि। जाल तोड़बाक बारम्बार प्रयास कऽ रहल अछि। असोथकित भेलापर देह थिर भऽ गेल। मुदा बुइध तेजीसँ दौड़ए लगल। घर-दुआरि-गाम-शहर-राज्य-देश आओर आगू दिस.....। /////////////////////////////////////// जारी........................................ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। शांतिलक्ष्मी चौधरी (शांति), पिता: श्री श्यामानन्द झा, ग्राम+पोस्ट: गोविन्दपुर, भाया: प्रतापगंज, जिला: सुपौल। मैथिल नारि केर समस्याक समाधान मैथिल नारि केर समस्याक समाधान तकै कालमे ई दूनू महत्वपूर्ण काज संगहि-संग कोना होमय, मैथिलक सनातनी सभ्यता, संस्कृतिक आ विश्वासक रक्षा आ आधुनिक उपयोगी मूल्यक समावेश। विधवा-विवाहक लेल मानसिक परिवर्तन जरूरी छैक, खास कऽ कऽ आइ-काल्हि जखन की परिवार छोट भऽ रहल छैक, जीवन-यात्रामे पाइक अहम महत्व छैक आ पाइ-कौड़ी एकत्रित करैमे भतेरो दिक्कतक सामना छैक, नीक आ सुखमय जीवन जीअएमे मानवीय मूल्यक प्रति लोकक श्रद्धा कम भऽ रहल छैक, भाइ-बहीन, चचा-चाची आ एतए तक कि माय-बाबूसँ आत्मीय संबंध सेहो घटि रहल छैक, लोकमे भगवानक प्रति विश्वास आ डर कम भऽ रहल छैक, सनातनी सभ्यता, संस्कृतिक आ विश्वासक रक्षा लोकक द्वितीयक लक्ष्य छैक आ विलासी-सुखमय जीवन जीनाइ प्राथमिक लक्ष्य भऽ गेलैकहेँ...तखन तँ पहाड़ सन जिनगी लऽ कऽ बाल-विधवा बेचारीक जीनाइ बड्ड मुश्किल छैक। संयुक्त पलिवार तेँ आब छैक नै, बड़का बेटा कलकत्ता, छोटका चेन्नै आ मझिला बनारसमे अपन अपन बाल-बच्चा केँ लऽ कऽ एकटा वा दू टा कोठलीक घरमे कोहुना कऽ रहैत छथि। बाल-विधवा बेचारी जँ सासुरमे रह्ती तैयो वा नैहरमे रहती तैयो पलिवारमे लोकक कमी छैक। जे संजुक्त पलिवार काल्हि तक अपन दुखिता धीया-पूताकेँ मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, आर्थिक आ मनोरंजनात्मक बल दैत रहैक ओ आब अपनहि अस्तित्वक अंतिम साँस लऽ रहल छैक। तखन एकटा बाल-विधवा बेचारी अस्करे भूत जकाँ गाममे कोना रहतीह। एक तँ मानसिक असकरू आपनक स्थिती आ दोसर जे जँ हुनका देहमे कनिओटा सुखायल यौवन-रस बचल छैक तँ बड़का-बड़का ठोप वाला भुखायल गिद्ध सभ हुनकापर लक्क लगोने रहैत छथि। स्त्रित्व तँ आब अपनो घरमे असुरक्षित छैक तँ सर-संबंधिक गप्पे छोड़ू। तेँ विधवा-विवाह आइ बेसी प्रासांगिक छैक। मुदा प्रश्न छैक जे आब सनातनी मैथिलक सभ्यता, संस्कृतिक आ विश्वासक रक्षा कोना हेतैक। मैथिल समाजमे नारीक जे जगह छैक ओइमे परिवर्तनसँ मैथिल समाज कोना समावेश करतैक। कियो ककरो ’हाफ-ब्रदर’(अर्ध-भाइ) होएतैक, कियो ’हाफ-सिस्टर’ (आधा-बहीन), कियो ककरो पहिलका दिअर-भौज हैतैक तँ कियो ककरो पहिलका ननद-ननदोइस। एखन तक मैथिल समाजमे ऐ सभ संबंध केर की रूप हैतैक आ हिनका बीच केहेन हेम-क्षेम रहतैक से स्पष्ट नै छैक। ऐ संबंध निर्धारण केर आवश्यकता एतए सेहो बुझना जाइत छैक। पुनः आइ जे मैथिल समाज ई विश्वासक दावा करैत छैक जे पति-पत्नीक सम्बन्ध जन्म-जन्मान्तरक, सीता-सावित्रीक उपाख्यान केर समजोर नय, मैथिलक घर-घरमे पुजिता गौरीक आदर्श-वाक्य वर होइहो तँ शंभू नै तँ रहों कुमारी, तकरो विकल्पमे तार्किक आदर्श-विचारक स्थापना करए पड़तैक। तखन मैथिल समाजक समक्ष अपन पुरातनी सभ्यता-संस्कृतिसँ विलगावक प्रश्न सेहो ठाढ़ भऽ सकैत छैक। हमरा बुझनासँ मैथिल समाज लग एकटा आओर रस्ता छैक जे अपन बाल-बच्चाक वियाह बचपनमे नै करी, ओकरा पढ़ा-लिखा कऽ बेसीसँ बेसी समय दिऐक। व्यस्क भेला उत्तर वियाहसँ जतए हुनका अपन शैक्षिक आ आर्थिक स्वावलम्बनक अवसर भेटतैक ओतै अपन मनोनुकूल वियाह करै मे सेहो मददि भेटतैक। व्यस्क वियाहसँ बाल-विधवा सनक दारूण समस्यासँ मैथिल समाजकेँ नै गुजरे पड़तैक किएक तँ व्यस्क विधवाक समस्यासँ ई बेशी कष्टप्रद छैक। विधवा-वियाह तेँ एखनो कमो-बेस सभ समाजमे होइतै छै, मैथिल समाज ऐ सँ अछूत नै छैक। मुदा ई वियाह एकटा "good marriage" (आदर्श विवाह) केर रूपमे नैय भऽ कऽ एकटा "bad marriage" (खराप विवाह) केर रूपमे होइत छैक। ऐपर बेसी हंगामा नै करियौक। जे होइत छैक से होमए दियौक। आब केवल ई तय करियौक जे आधुनिक जीवन आ सनातनी जीवनकेँ देश, काल, पात्रक अनुकूल कोना जीअल जाय। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। रवि भूषण पाठक कथा-बोधिसत्व ट्रेन तऽ धीरे -धीरे रूकलइ ,मुदा भुटटु झा औंघायल छलाह ,लागलेन माथ मे चोट ।माथ हँसोथि देख‘ लागला ,केओ देखलक तऽ नइ ?ई देखि के कि सब सूतल छलइ ,निश्चिंत भेलाह ।कुलिया सँ झगड़ि के सीट नेने छलाह ,खिड़की लग वला सीट । दूरक यात्रा मे ऐ सीट क दाम पचास टका बेशी छलइ ,मुदा भुटटु झा किएक देथिन पैसा ,ओ कहलखिन हमरा संग मे टिकट छैक ,हम पैसा नइ देबओ ।कुलिया हिनकर कालर धऽ लेलकइ ,ईहो ओकर माथा वला केश बकुट्टा सँ पकड़ि लेलखिन ,तखन यात्रीगण आ प्लेटफार्म पर ठाढ़ सिपाही बीचबचाव केलकइ आ भुट्टु झा के कोनो आश्चर्य नइ भेलेन ,जखन ओ सिपाही ओमहर जाके कुलिया सब संगे हंसि हंसि के बात कर‘ लागल ,ई दुनिया एहने छइ सौंसे क सौंसे कि करियन आ कि दिल्ली ।झोरा सँ घड़ी निकालला ,पाँच बाजइ मे दस मिनट बाँकी छलइ ।कोनो ठीक ठाक स्टेशन छलइ ,नाम देखइ ले मूड़ी बाहर केला ,कोनो बोर्ड नइ मिललेन्ह ,गेट दिसि आबि के देखऽ लागला ,एकटा चाय वला देखेलेन,हिंदी मे पूछलखिन तऽ बतेलकेन कि ई जौनपुर जंक्शन छियइ ।जौनपुर सुनिते हुनका लागलेन जे ऐ गामक नाम त‘ सुनने छियइ ,यादि करऽ लागला काकी ,भौजी क नैहर आ बहिन ,दीदी क सासुरक नाम । भीड़हा ,बलहा ,बल्लीपुर ,मुस्लिमपुर ,बहेड़ी ,मालीपुर ,एघु ,शासन ,रमभदरा पुर ,कापनि ,बलिया ...............मसानखोन आ आरो कतेको नाम ।धीरे धीरे ईहो नाम सब सठऽ लागलइ ,यादिए नइ पड़लेन्ह कि ई जौनपुर क नाम कहिया सुनने छलियइ आ ऐ ठामक के सऽर सम्बन्धी या मित्र दोस्त अछि ।भुट्टु झा हाफी कर‘ लागला ,फेर एमहर ओमहर देखि तमाकू निकालला ,चुनौटी खोजइ काल मे हुनकर हाथ पोलीथीन सँ टकरा गेलइ ,भुटटु झा निश्चिंत भेला ,हुनकर सर्टिफिकेट सुरक्षित अछि ।मैथिली सँ स्नातकोत्तर ,प्रथम श्रेणी ,विश्वविद्यालय मे दोसर स्थान ।पहिल स्थान बलवन्त झा क पुत्री कें ।पहिल स्थानक रिजल्ट लगभग निकलले छलइ ,बलवन्त बाबू विभागाध्यक्ष छलखिन आ बेटी क‘ लेल स्पेशली नोट्स बनेने छलखिन ,मुदा परीक्षा क बाद सिचुएशन बदलि गेलइ ,काँपी विश्वविद्यालय सँ बाहर चलि गेलइ ,बहुतो विद्यार्थी फेल भऽ गेला या पचपन प्रतिशन नइ आनि सकला ।मुदा प्रोफेसर साहेबक पैरवी दोसरो ठाम चलल आ गार्गी प्रथम मे प्रथम भेलीह ।आश्चर्य भेलइ जे भुट्टु कोना दोसर स्थान आनला ।ओइ प्रसंग क चर्चा कने नून तेल लगा के हास्टल सँ ल‘ के विश्वविद्यालयक कर्मचारी वर्ग तक मे फैल गेलइ ,सब कहैत छलाह कि बलवंत बाबू अपना बेटी क टॉप करेलखिन आ होमय वला जमाय के लग सटेलखिन ,मुदा ई बात सब बेशी दिन नइ चललइ । गार्गी पी0एच0डी0 सेहो केलखिन आ बापे संग नियुक्त भऽ गेलीह ।बात बहुत लम्बा छैक ,भुटटु झा की सब यादि करताह ,तमाकूल चूना ठोर मे दबा सूतबा क प्रयास करऽ लागला ,मुदा सरबा नीन्न बिसरियो के कथी ले आयत ।एगो मच्छड़ माथे पर काटि लेलकेन आ जाबत ओइ दर्द सँ मुक्त हेता ,ताबत केओ उपरे सँ पादि देलकइ ।के हेतइ गौतमानन्द आ भुटकुन छथि ? पता नइ के ? भुट्टु झा हँसऽ लागला ,ठाढ़ भऽ के बर्थ पर देखलखिन दूनू एक दोसर के गोरथारी मे सूतल ,गौतमानंद क पैर भुटकुन के माथ लग रहइ आ भुटकुन अपन पैर के गौतमानंदक करेज मे सटेने रहइ ।ई दृश्य कोनो नया नइ छलइ दिल्ली मे गामक बारह टा पुरूष एके रूम मे रहैत छलाह ।बारह सौ किराया छलइ ,कोना के एक दू टा आदमी देतइ ,सब मिलि के रहऽ लागला ।जमीन पर सूजनी बिछा के सब लोकनि राति मे सनपट्ट भऽ जाइत छला । केओ रिक्शा चलेनहार ,केओ सेठ के हवेली मे गेटकीपर ,केओ दुकान मे दूहजारी सेल्समेनक काम,केओ घूमि घूमि के खाना बनेने घुरइ ।सब एके ठाम रहइ ने जाति ने गुटबाजी ।कखनो बाभन खाना बनबइ तऽ कखनो दुसाध ,आ प्रशंसा केवल नीक खाना के होइत छलइ ,जाति दिसि तऽ ध्याने नइ जाइत छलइ ,जकरा जे मून हो कर,जे पहिरबे पहिर ,जे बाजबे बाज ।भुटटु अइ स्वतंत्रता के बिसरऽ नइ चाहैत छथिन ।गौतमानंद आ भुटकुन के ओ फेर सँ देखैत छथिन आ हुनका लागैत छन्हि कि जे बात ऐ ठाम अप्रासंगिक छैक ,सएह गाम मे हिमालय जँका ठाढ़ भऽ जाइत छैक । ’हिमालय‘शब्द दिमाग मे आबिते भुट्टु के कवि विद्यापति आ यात्री यादि आबैत छनि ,ओ स्पष्ट रूपे मानैत छथिन कि अइ दूनू कवि के रचना के आसपास मैथिली मे केओ नइ अछि । हुनकर ई मान्यता कतेको ठाम विवाद केने छैक ,तैयो ओ पूर्ववत छथि ।आब हुनका यादि पड़लेन कि जौनपुर सँ हुनकर की सम्बन्ध अछि? मिथिला क‘ राजा हुसैनशाही राजा सँ हारल छलाह आ कवि विद्यापति जौनपुर आयल छला ।भुट्टु झा फेर सोचऽ लागला कि मिथिला क‘ हजारो प्रोफेसर ,डॉक्टर ,इंजीनियर डेली दिल्ली ,पटना ,लखनउ ,लंदन घूमैत अछि ,लेकिन ओकरा मून मे किएक ने ओहन मौलिक विचार आबइ छैक ,जे कवि विद्यापति के जौनपुर मे एलेन ।मुदा जौनपुर आ विद्यापति के सोचि के की करताह भुट्टु झा ।प्रोफेसरी क नौकरी हिंदुस्तान मे शत प्रतिशत आरक्षित छैक । ई नौकरी प्राप्त करबा क‘ लेल प्रोफेसरक शुक्राणु वा अंडाणु सँ जनमनइ एकमात्र योग्यता छैक । भुट्टु झा के यादि एलेन कि बाबू हरिमोहन झा आ सुमन जी क सुपुत्र सेहो त प्रोफेसरे छथि ,फेर ओ अपने सोच पर राम राम करए लागला । हुनका लागलेन कि ई उदाहरण ठीक नइ अछि ।फेर तमाकू क डिब्बा खोजऽ लागला ,झोरा मे हाथ फेर सर्टिफिकेट सँ टकरा गेलइ ,आब तमाकुओ खेबा क मून उतरि गेलेन ।गार्ड हरियरका झंडी दिय‘ लागलइ ,ओहो निश्चिंत भेला ।झूठे मून व्याकूल अछि ,अनावश्यक चीज सब दिसि ध्यान लऽ जेबा क कोन फायदा ।उठऽ हओ भुटकुन ,उठऽ गौतमानंद ,आब त‘ दू घंटा मे बनारसो आबि जेतइ ,मुदा ओ दूनू बिना कोनो हरकत केने ओनाही सूतल रहलाा । भुट्टु झा सेहो सूति रहलाह ।ट्रेन धीरे धीरे बढ़ऽ लागल ।भुटटु झा के लागलेन कि ओ गाम पहुँचि गेल छलाह ,हुनका दलान पर अजीत झा बैसल रहए ,आ कोनो बात पर हुनकर गरदनि पकड़ि लेलकइ ।ओ कतबो प्रयास करथि ,गरदनि नइ छोड़ा पेलाह ,दलान पर बैसल किछु आर आदमी आबि के हिनकर गरदनि छोड़ब’ लागल ,मुदा ओ जत्ते छेाड़ाबथि ,अजीत क हाथ ओतबे मजबूत होइत गेलइ ।भुट्टु झा घिघियाब‘ लागला ,आब जान बचबा के कोनो संभावना नइ ।बचा........बू ...अओ ...लोक सब.......।जखन नीन टूटलेन त‘ गौतमानंद आ भुटकुन हुनका जगबैत आ हाथ पकड़़ने छलाह । की भेल भाइ?अहाँ सपना मे छलहुँ । कोनो खास नइ ,ओहिना....... भुट्टु झा फेर गामके नीक जँका यादि कर‘ लागला ।विभिन्न जातिए नइ मूल गोत्र गुट टोल आ रूचिक असंख्य कोटि मे बँटल मैथिल समाज ।सच के सच कहबा के लेल तैयार नइ ,जे बड़ प्रगतिशील से सच के अठारह आवरण मे सामने आनता।अजीत ,फूलो ,दिगम्बर सब त‘ लंठे लंठ अछि ,अकेले भुट्टु ककरा ककरा सँ लड़ता ,आ रिक्शा चलबइ वला आ राति के पहरेदारी करएवला भुट्टु के लोक जुत्ता सँ नइ मारतइ त‘ कि करतइ ,ओकरा तर्क आ विवेकक बात करबा क अधिकार के देलकइ?ओ की जान‘ गेलइ सोसाइटी आ पोलिटिक्स ,आ कविता आ उपन्यास के ऐ मैथिल समाज के की जरूरत? आब भुट्टु झा राखने रहथु अपन सर्टिफिकेट के माथ पर टाँगने ।दुनिया एहिना चलि रहल छैक ,जकरा चलबा के हो से चलइ चलू आ नइ त‘ ओहिना उंगरी करैत रहू यत्र तत्र सर्वत्र............. भुट्टु झा चाय पीलथि ,दू दू बेर तमाकू खेलथि ,एक बेर भुटकुन गरदनि के मटरो तोड़लकइ ,मुदा हुनकर चेहरा झुलसि गेलइ ,दसे मिनट मे लागलइ जे कोनो बड़का बीमारी हुनका दाबि देलकइ ।गामक भावी संघर्ष हुनका डराबऽ लागल ।अजीत झा ,फूलो झा ,दिगम्बर मिश्रक सौंझका दारूपीबा मंडली क विभिन्न रूप हुनका सामने आब‘ लागल ।पूजा क बहाने चंदा माँगबा क मासिक उपक्रम ,आ हिन्दू धर्म भरि साल व्यस्त बनेने रहबा क अवसर दैत रहल । ककरा ककरा सँ लड़ताह भुट्टु झा , के समर्थन मे आयत ,बेशी सँ बेशी केस करबा के ,गवाह बनबा के भरोसा । आ अहाँ शामिल भऽ जाउ हुनकर गेंग मे । गाड़ी स्पीड पकड़ि लेलकइ ,मौसम सेहो ठंडा गेलइ ,हवा बहिते झींसी पड़ऽ लागलइ ,भुट्टु झा के नीन लागि गेलेन ,भुटकुन माथ आ गौतमानंद पैर रगड़ऽ लागलइ ,भुट्टु झा फेर सपना देखऽ लागला ,मुदा अइ बेरि एकटा मुस्कुराहट हुनका ठोर पर छलइ ।अजीत भाला ल‘ के आ फूलो लाठी लेने हुनका तरफ दौड़लेन ,दिगम्बर सेहो कत्ता लेने छलइ ।मुदा ओ आब अकेले नइ छलखिन ,गामक सब सोलकन अपन हाँसू ,खुरपी ,कोदारि लेने ओकरा दिस बढ़ल ।भुट्टु झा स्पष्ट देखलखिन ,ओ कोनो साधारण सोलकन नइ छलइ ,ओ सब बुद्ध क विभिन्न अवतार छलाह ,कोनो बोधिसत्व ,कोनो अवलोकितेश्वर आ कोनो................।भुट्टु झा क मुस्कुराहट आर गहिर होइत गेलइ ।हुनकर ठोर देखिते भुटकुन आ गौतमानन्द सेहो मुस्कुरा उठला..................। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.१.शांतिलक्ष्मी चौधरी २–मनोज झा मुक्ति ३उमेश पासवान४ डॉ. शेफालिका वर्मा ३.२.१.जगदीश प्रसाद मण्डल २.दुर्गानन्द मण्डल ३.३.१.राजदेव मण्डल २रामकृष्ण मण्डल ‘छोटू’ ३.४.१. शिवकुमार झा ‘टिल्लू’ २.रवि मिश्र “भारद्वाज” ३.५.१. जगदीश चन्द्र ’अनिल’ २. सद्रे आलम गौहर ३सत्यनारायण झा ३.६.१रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार २जवाहर लाल कश्यप३रामविलास साहु ३.७.१.डॉ॰ शशिधर कुमर २ आनंद कुमार झा ३नवीन कुमार "आशा" ४.प्रभात राय भट्ट ३.८.आशीष अनचिन्हार- गजल/ रुबाइ/ कता १.शांतिलक्ष्मी चौधरी २–मनोज झा मुक्ति ३उमेश पासवान४ डॉ. शेफालिका वर्मा १. शांतिलक्ष्मी चौधरी (शांति), पिता: श्री श्यामानन्द झा, ग्राम+पोस्ट: गोविन्दपुर, भाया: प्रतापगंज, जिला: सुपौल। १ चुट्टीकट्टा अगिमुत्ताक डर कम चुट्टीकट्टाक हारि मानी अगिमुत्ता जँ खिसियावै ओ वार करय अगाति सँ मुँह खोखरै, दाँत देखावै, हबकै, कार-बान्है देखाती सँ, जँ छी सम्हरल तँ- अगिमुत्ताक डर कम चुट्टीकट्टाक हारि मानी। चुट्टीकट्टा जँ खिसियावै ओ वार करय पिछाति सँ हूर मारै, माथ फारै, घोपै गुपती जँ, पिठाती सँ, कतबो छी सम्हरल तँ- चुट्टीकट्टाक डर बर चुट्टीकट्टाक हारि मानी. २ भाड़ाक घर
दिल्ली शहरमे छै जकर अपन घर रे भाइ ओइ घर मालिकक तेवर कहल नै जाइ थोड़े गोटय छथि बसंतक सिहरैत पवन-गण बचल-जन जड़ैत जेठक दुपहरी पहर रे भाय दिल्ली शहरमे.......
"पैसा पाँच धरि लेब, बिजली-पानी अलग हएत, गेस्ट-वेस्ट एकदम नै, एगरीमेंट के बनैत?" चुप-चाप गच्छि ले हुनकर सभ कहल रे भाइ दिल्ली शहरमे.......
’बूरल लोक’ तँ बुझू हिनका एकदमे बरदास्त नै, सरकारी नौकरी जँ तखन, गारेन्टरक बहस नै" ओकिल, पुलीसपर छन्हि तिछन नजर रे भाइ! दिल्ली शहर मे.......
"झारू नै देलौं, ओतए पोछा नै केलौं देखू सीढ़ीक बगल ओ, गंदा कते केलौं" छुबि छुबि देखतौ फरसक हर पथर रे भाइ दिल्ली शहरमे.......
"उठै छी बर देरी, कनी सबेरे उठि जाउ सप्लाइ जखन आबै, तखने झटपट नहाउ" उचितो गप्पमे घोरतौ बिच्छा लहर रे भाइ दिल्ली शहरमे.......
"मिलनिहार कम करू, जन एतै नै लाउ, रातिक दस बाजै जँ, तँ बस सीधे घुमाउ" छने-छन देखैतौ घर खाली के डर रे भाइ! दिल्ली शहरमे.......
"पछिला महीना पानिक मीटर बर उठेलौं", "यौ ऐ महीना गेस्ट एतेक किए अड़ेलौं", बेर-बेर देतौ बस एहने एहन उलहन रे भाइ! दिल्ली शहरमे.......
जँ कहियो घर खालीक ओडर दय देलकौ, बहैत बड़दक अड़ूआरिमे पेनाठ कय देलकौ, देखै धुँऐन-मुँह, सतति गप्प धीपल जहर रे भाइ! दिल्ली शहरमे.......
"कम पैसा दैत छी, छोड़ब ऐठाम किएक, मन सँ जँ खोजब, घर भेटत नै किएक" अटरपैंचिये ढाहतौ अदभूत कहर रे भाइ! दिल्ली शहरमे...... ३ ओन-लाइन बदतमिजी
भैया यौ, किओ कहियौन हिनका नंगटपनीक धन्धा छोड़ि दिअ धी-बहिनक संग अबरपनीक धन्धा छोड़ि दिअ भैया यौ...
देखते देरी ओन-लाइन मधुक पाछु माछिक लाइन ई लाइन-वाइनक धन्धा छोड़ि दिअ भैया यौ..
देखते देखते पाँच, छौ, सात! भरल स्क्रीन देखब की आब ई बलजोड़ी चैटिंगक धन्धा छोड़ि दिअ भैया यौ...
’हाय!’ ..’हाय डियर!’ सँ तुरते बाद ’आइ मिस यू!’ कहि बढ़ेता बात ई मिस-विस केर धन्धा छोड़ि दिअ भैया यौ...
जँ कनिओटा रिसपांस केलिऐ हाथ छोड़ि पहुचा पकड़ेलिऐ ई पहुँचा पकड़ैक धन्धा छोड़ि दिअ भैया यौ...
तेसर पोस्ट ’कतेक जल्दी...हम...!’ शेष बात बुझु तहन अपने दम ई बुझोअल बुझेबाक धन्धा छोड़ि दिअ भैया यौ...
जँ निर्लज्जकेँ लेसन पियेलिऐ मेरिड-अनमेरिडक प्रश्न पुछबेलिऐ तखनो तँ निर्लज्जइ धन्धा छोड़ि दिअ भैया यौ...
तामसमे कहि ’प्रोफाइल देखू’ रहू ओफ-लाइन, तँ ’सेफ़’ रहू अपनहि ओन-लाइनक धन्धा छोड़ि दिअ भैया यौ...
की मनीष, की राजेश एक्के रूप गन्हायले भेष आबो गन्हकीड़ीक धन्धा छोड़ि दिअ भैया यौ... २ –मनोज झा मुक्ति पसरल अत्याचार
मेटा रहल अस्तित्व मनुख्खक बँचतै कोना ? पसरल अत्याचार आब ई हटतै कोना !
सम्बन्ध अखन व्यापार भऽगेल जत्रतत्र आब, पुत्र–पिताके स्नेह भाव आब जुड़तै कोना ?
संस्कृति ओ संस्कार सब छोड़ि रहल अछि, अपन पहिचानक रक्षा आब होएतै कोना ?
नेतासब कऽ रहल दलाली, स्वार्थमें अपना, देश, समाजक लाजक रक्षा होएतै कोना ?
जातिपाति आ नोटक बलपर भोंट खसैय, देशभक्त, समाजिक नेता जनमतै कोना ?
कर्मचारी सब लुटि रहल अछि दिन दहाड़े, गरीब जनताके काज आब सुतरतै कोना ?
व्यापारी व्यस्त मिलावट आ कालाबाजारीमे, सुपथ मूल्यमे स्वस्थ पदार्थ आब भेटतै कोना ?
प्रहरी प्रशासन ताकमे बैसल घुसक खातीर, चोरी–चकारी देश,समाजसँ हटतै कोना ?
पत्रकार दलाल बनल, चाहक कपपर बिकय, निमुखा जनताक आवाज बाहर अओतै कोना ?
साहित्यकार चाटुकार बनल, सबके पदे चाही, नीक साहित्यक रचना पाठक पढतै कोना ?
युवा, विद्यार्थी, बुद्धिजीबी सब चुप्पे बैसल, सोंचियौ, देशक विकास कि होएतै अहिना ?
चुप्पी तोडू, सब संग मिलि लडू देशक खातिर, नहि त देशक अस्तित्व आब बँचतै कोना ? ३ उमेश पासवान रचनाकार- श्री उमेश पासवान, गाम- औरहा, पंचायत- उत्तरी बनगामा, भाया- नरहिया, थाना- लौकही, जिला- मधुबनी। पहिल विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी मैथिली कवि सम्मेलनक उपलब्धि छथि कवि श्री उमेश पासवान जी। प्रस्तुत अछि हिनकर कविता। पोसिया हम खोजै छी अहींकेँ यौ कने अगारी आउ लऽ कऽ ओ मोटरी जे लेने छी अहाँ पोसिया बरोबरि कऽ जइमे बन्हनै छी हमर अधिकार हमरा सोझाँमे खोलू आबो सभ गिरह आझरा कऽ नै रखू माइक बोली मैथिल भाषा नै कसू आबो अप्पन सोल्हनीबला रसा आब नै सुनब हम अपनेक बनाओल अपन हितक खिस्सा दुधक दाँत टुटि गेल अछि ज्ञानक इजोतसँ आँखि हमर खुइल गेल अछि दऽ िदअ हमर हिस्सा हम खोजै छी अहींकेँ यौ कनेक अगारी आउ लऽ कऽ उ मोटरी आउ जे लेने छी अहाँ पोसिया। साहित्यक दलिदर साहित्यक दलिदर कतेक जुलुम करैत अछि हमरापर कियो तँ बाजू कियो तँ हमरा दिससँ अबाज उठाउ खिंच देने अछि ओ लक्ष्मण रेखा बाँटि कऽ एक भागमे बन्न कऽ देने अछि सभ रास्ता-द्वार हरैप लेने अछि ओ हमर हक जातिक नाओंपर करैए तिरस्कार दु:ख हमर ओ कोना कऽ बूझत केकरासँ कही अपन दिलक हाल वर्षोसँ देख रहल छी हिनक यएह रंग-ताल मंगै नै छी किछो हम हिनकासँ बस चाही मात्र हमर अधिकार साहित्यक दलिदर कतेक जुलुम करैत अछि हमरापर। ४ डॉ. शेफालिका वर्मा अहांक हास अहाँक हास हम सुनलों अविकल निर्झर झाहरैत झर झर श्वेत स्फटिक मुक्ता माला निश्छल शिशु सन रजत हास ! सिगरहार क फूल छोट छिन्न सुन्नर सुन्नर झहरैत जेना देवताक वरदान सन नेनाक मुस्कान सन !! अहांक ई हंसी जेना लक्स क पौडर छिरिया गेल चारु क़ात उज्जर उज्जर निर्मल निर्मल कत भेटत एहि यांत्रिक युग में चाह्कैत चुह्कैत प्रकृत हंसी .? अधरों बनि गेल मशीन कौखन कोन कांटा कत जायत मुंह्क ठोर सिकुडत सकुचाय्त तखन बनैत अछ एक टा हंसी जकर नाम थीक फोरमेलिटी ? मेल धेल नुआ में लेप्ट्ल सेप्टल ग्न्हैत गन्हायित आबैछ घर नौडी तेहने आजुक युग मे ठोर पर नचैत अछ एकटा बाईस तेबाईस हंसी छौडी ............................................. ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.जगदीश प्रसाद मण्डल २.दुर्गानन्द मण्डल १. जगदीश प्रसाद मण्डल कविता डभिआएल डगर नित नित्यानन िननाएले निकलए देखए दुनियाँक दीन-दशा। मधुआएल मन कड़ुआएल आँखिये झलफलाइत देखए दशा-दिशा। कोनो बाट एकपेरिया कहबए खुड़ुपेरिया कहबए दोसर। जोहैत सदए जेर जइ बनैत बाट नव तेसर। भोरहरबा अन्हार रहने नीनपनी देलकनि पछाड़ि। राड़ी-डबहाड़िक बीच पड़िते हाथ-पएर देलकनि गछाड़ि। ओझरी सोझरबैमे नित्यानन भेलाह वेदम। हारि नै थकान थकिते अबए लगलनि हिया दम-दम। विह्वल भऽ आर्त्त राड़ी बिजकि बाजल कानि-कलपि। संग मिल सभ दिन रहलौं लेलकनि बाँहि लपकि। फूल फुलाइत जहिना सबतरि तहिना ने फुलाइ छी पूरि संग रौद-बसातमे संगे-संग उड़ियाइ छी। एक चढ़ए देव सिर ऊपर दोसर चढ़ए महा-अकास। बाॅकी सभ गैल-पैच ससरि-ससरि पहुँचए पताल। लज्जैत बिनु लज्जतिक जिनगी ओहने बिनु परनक प्रतिष्ठा जेहने। रस पाबि हरियाइत जहिना नि:रस होइत सुखाइत तहिना। मधुरस रिसै विवेक वृक्ष सिरजै सदि जे लज्जैत। लज्जैत हीन जीवन ओहिना गैचिया पाताल धड़ैत जहिना। लज्जैत तँ शोभा जिनगीक सैजते होइत आभूषित। तीत-मीठ भेद बिनु बुझि हँसि-हँसि होइत विभूषित। लज्जतिक लत्ती अमर सड़ितो-मरितो सिरजै शक्ति। तर-उपर रसा-रसा लगए करए सदति भक्ति। जिनगीक पद्धति रंग-विरंगक नीक-बेजाए बेड़ाएत केना। पूबसँ उत्तर धरि मिल समाज चलल जेना। धब्बा रंग-रंगक धबैत धब्बा दोस्ती कऽ संग धेलक। उकनि सिर चढ़ा गाछ रीति-नीति सभ गमौलक। सुखि पात पतझड़ पाबि पथार पसरि धरतीपर। नग्न–बेनग्न बनि वृक्ष नोर ढड़कए करनीपर। दर्शनक सभ महिमा गाबए जहिना देश तहिना विदेश। दिशा विहीन भऽ भऽ कोन गीत गाओत सु-देश। धन जीवन कि जीवन धन पैस गंगा देखए पड़त। अपना ले अपने आँखिये गंगाजल पीबए पड़त। बिदुषी कि ऋृषिका बनि पुरबा पीब फुफुआएब। धुन गुणक संग नाचि नर्तक बनि ठिठिआएब। मति-विमति पबिते पाबि दिशांसक खुमारि चढ़ैत। ढड़कि-ढड़कि ढाल ढल हँसि-हँसि वसन्त गबैत। कविता नव पथक अनुकूल पथिककेँ सही सवारी कुपथ-पथ चाही। तहिना खुशी खुदखुदबे-ले मुस्की सजल शब्द कविता चाही। उपयोगी नव-नव वस्तुक जोड़ि-जाड़ि छिहलैत डगर चाही। हराएल रसिक प्रेमी-ले बेराएल भाव कविता चाही। बेराएल भाव तहिये सजैत जहिये भेटैत छिड़ियाएल भंडार। चुनि-चुनि चुनिया चुनैबतहि नुकाएल पबैत शब्द-सार। गढ़ैत सदति चमचमाइत शब्द सृजए अलंकार ओ छंद। जाहे कतबो केहनो हवा सिहकै चलिते रहैत मुस्काइत मन्द। मन्थर गतिये चलि मोहनि परखए सदए दुध ओ पानि। सिर ऊपर आकि नीच-मध्य देख पकड़ि सम्हारि-वाणि। २ दुर्गानन्द मण्डल कविता- हम हिन्दुस्तानी छी हम हिप्दुस्तानी छी नै ककरोसँ डरै छी देश-िवदेशक बात करै छी अपने देशपर मरै छी। कथा पूर्वजक नै पुछू ओ सभ छथि सभसँ महान खेती-बाड़ी जिनकर धंधा जिनकासँ निखरल हिन्दुस्तान।। हमर रक्षक हमर भक्षक हमरेसँ करै छथि आश कवि बनू वा कलाम बनू पूर्ण करू अभिलाषा। बूढ़क सहारा बनि हम देशक रखबाला बनि हम नाओं हमर जेना दिवाकर जगमे एहन काम करी।। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.राजदेव मण्डल २रामकृष्ण मण्डल ‘छोटू’ १ राजदेव मण्डल राजदेव मण्डल कविता हेलवार घुच्ची भरि पानिमे कऽ रहल छी खेलवार कखनो एेपार कखनो ओइपार बनए चाहै छी असली हेलवार संकटमे करए पड़त धार-पार धारक पेट हो अगम-अपार जखैन छुरी फनकै रहि-रहि धारा सनकै देख कऽ डरे मन झनकै ठमकल बटोहीकेँ माथ ठनकै तखैन जँ करब पार तब ने बनब हम असली हेलवार। कलीक प्रश्न कली पूछैत अछि कलीसँ एतेक दुखित किएक छी भेल गुन-गुन गान सुनबैत छल हरपल ओ भ्रमर कतए गेल सुनू-सुन गप्प गुन दुख आएल तँ सुख चलि गेल हमरा छल हृदैक मेल ओकरा लेल धुरखेल अहूँक समए आएत एहेन तँ जानब भ्रमरक खेल। २ रामकृष्ण मण्डल ‘छोटू’ रूसनी गै रूसनी, एना नै कर लोक मारैए ताना गै बाहर घूमनाइ मोसकिल भेल बदलि गेल जमाना गै डाॅर हिला कऽ चलै छेँ गाबैत नवका गाना गै कपड़ा केर थाह नै आधा देह उघारे गै गै रूसनी एना नै कर बदलि गेल जमाना गै ठोरक लिपिस्टिक, केशमे गजरा मुँहपर पाउडर आँखिक कजरा नै छै एकर कोना मोल तोरा देख कऽ ठहाका मारैत चूटकी लइए पूरा टोल। छोड़ि दही ई झेल-झमेला पढ़बीही तँ पढ़ैबो करबौ काओलेजमे नाओं लिखेबौ गै सरकारसँ दिएबौ टाका पैसा साथे साइकिल दिएबौ गै तइसँ बेसी और चाहमे स्कूल ड्रेस सेहो दिएबौ गै माइ-बापक इज्जत बढ़तौ जीवन तोहर सुधरतौ गै गै रूसनी एना नै कर लोक मारैए ताना गै बाहर घूमनाइ मोसकिल भेल बदलि गेल जमाना गै। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. शिवकुमार झा ‘टिल्लू’ २.रवि मिश्र “भारद्वाज” १ शिवकुमार झा ‘टिल्लू’ कविता कविक कामना पूत बढ़बैछ वंशक मान मुदा पिपरौलिया बाबासँ मंगलनि पोतीक रूपमे सुकन्या अचा अपर्णा वा भव्या कवि बनि गेला पितामह सफल भेल कबुला-पाती भगवत कृपा देख- खुशीसँ फुललनि जीर्ण छाती जेठका जीवन झखरैत पाषाण वियाहक भेल सोलहम बरख एखन धरि- नि: संतान दोसर निष्कपट बुड़िवक परंच पितृसेवक अविराम करची सन लकलक काया रंग धन इव श्याम घनश्याम कनियाँ कोरमे सद्य: अएली वैदेही बनि कन्या कविक उपवन भेल धन्या मुदा! साक्षीक पिताक स्थान जेठकेकेँ भेटत श्यामकेँ जौं छन्हि बाप कहएबाक सख आश वा दीर्घ पियास दोसर वेटीक लेल राखथु एकादशी उपास यएह भेल कवि गेला स्वर्ग भेटलनि मुक्ति भेलनि अपवर्ग साक्षीक माताक कोरमे फेर बेटी बनि अएली भारती विचित्र अन्हेर प्रकृतिक फेर अङने अङने अड़ए लागल गप्प हड़बिड़रो बरसए लागल कनफुसकीक झॉट अपने हाथसँ कविजी रोपलनि बबूरक काँट बड़की काकी दिअ लगलनि तान नै छलनि हुनका संसारक ज्ञान कबुलामे किएक मंगलनि बेटी हम जौं हुनका स्थानपर रहितियनि तँ जनमितहि दाबि देतौं ऐ राक्षसनीक घेंट बेटीक लेल प्रार्थना! आश्चर्य केहन कविक कामना एकबेर आर अन्हेर भावदक अन्हरियाक फेर स्तब्ध छथि सभ केओ देख कवि कुलक दशा आङनक बहुआसिन सभ टोलक अनन्या कपार पिटए लगलथिन छोटको पुतोहुक कोरमे जनमलि... कन्या हा भगवान महात्माक यएह मान मङने देलियनि तीन पुष्प माल लागल फोटोमे कवि छथि मुग्ध तल्लीन जेना कहि रहल होथि के रखलक जहानक मान? के बढ़ेलक कुलक सम्मान? के बचेलक वंश सीता अहिल्या सावित्री वा रावण कौरव कंस? २ रवि मिश्र “भारद्वाज”, पिता श्री पशुपति मिश्र, गाम- ननौर, जिला- मधुबनी। मतदान लिअ मतदान फेर आबि गेल सफेद पोशाकमे किछु भेड़ आबि गेल बड़ा दुविधामे छी भैया किनका चुनू नेता की भरोसा जितबाक बाद हमर विकासक फण्ड खेता कतेक निर्लज्ज अछि किछु नेता आबि गेल फेर चमकेने कुर्ता आबि गेल माँगऽ भीखमे फेर भोट यौ झोलीमे तँ नै कोनो भेद यौ मुदा छै बड़का टा छेद यौ विनती अछि अहाँसँ भैया नै करू गलती ऐबेर दियौ वोट कर्मठ नेता केर अहाँक गलती केर कारण की अन्ना फेर अनसन करतै अही उमेरमे भूखे मरतै ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. जगदीश चन्द्र ’अनिल’ २. सद्रे आलम गौहर ३सत्यनारायण झा १ जगदीश चन्द्र ’अनिल’ जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’
गजल 1
पूजैछी हम भगवान कें मकइ,गहूम आ धान कें।
हम बूझैछी काशी-मथुरा खेत आर खरिहान कें।
गुन-धुन मे छी, ककरा ताकू कौआ कें कि कान कें।
अपनहि करनी केर फल भेटल दोष देलहुं आसमान कें।
बिसरि गेलहुं सम्मानक सभ सुख नहि बिसरल अपमान कें।
ठकुआ-केरा लय देखी हम एखनहुं चौठी-चान कें।
2
जे सोचैत छी से बजबाक समय आएल अछि जे बजैत छी से करबाक समय आएल अछि।
धूर तरक गप्प सड़क पर ल’ चलू एखन त एक पांतमे बढ़बाक समय आएल अछि।
पाग डोपटा छोड़ि एखन बान्हू मुरेठा एखन देश-कोस ले’ लड़बाक समय आएल अछि।
ई देश थिक ककर आ के देश केर छथि छै देश-प्रेम ककरा बुझबाक समय आएल अछि।
आब जे हेतै, से हेतै, नीके हेतै जे मंगैत छी से छिनबाक समय आएल अछि।
२ सद्रे आलम गौहर गजल १ जे घुसखोरी भागत बहुत नीक लागत
लगेने रहू एहिना अन्ना जी तागत
जे सभ आगू अउता करै छिअनि स्वागत
ईमनदार नेता के बूझू नियामत
सफलता जँ पायब त' विश्वास जागत
समर्थन दियो एहिमे नहि कानो लागत
भष्टाचार क'देत भारत के गारत
देशवासी बढ़बियौन अन्नाजीक तागत २ अना हजारेसँ अनसन तोड़बाक अनुरोध
अनशन तोड़ि दियौ अन्ना जी जीत अहाँ के भइए गेल
सत्ता के गलियारा दहलल पक्ष विपक्ष नतमस्तक भेल
सत्य अहिँसा पर डटल छी डोला सकल नहि अहाँ के जेल
असफल अहाँ कय देलिएक भ्रष्टाचारी सभक खेल
भारत के बच्चा बच्चा सभ देखियो आई अहीँके भेल ३ मैथिल सभकेँ ईद मुबारक दिन आयल अछि ई उदगारक मैथिल सब के ईद मुबारक
दान धरम के ई त्योहार छोट बड़ सब के भेटै प्यार हमर अहाँक प्यार मोहब्बत कुरान आ गीताक अछि सार
मानवता के इएह उद्धारक मैथिल सब केँ ईद मुबारक
हिँदू मुस्लिम बाद मे छी हम सब सँ पहिने मैथिल छी हम
दूनूँ मिलि कयँ साबित कय देब नहि दुबरि ककरो सँ छी हम
संघर्ष केँ होयत क्षमता मारक मैथिल सब केँ ईद मुबारक ३ सत्यनारायण झा ठुठ पीपर: ठाढ़ अछि ,पत्र विहीन , एकोटा ठाइढ़ नहि ,पात नहि , फूल टुस्साक त कोनो कथे नहि, याद करैत अछि अपन पछिला जिनगी , मुदा कहाँ याद अवैत छैक ? सोचबाक शक्ति त लोप भ’ गेल छैक , पुछबो केकरा करतैक ,? असगरे चौर मे ,बिना बाटक जगह पर , कहुना क’ ठाढ़ अछि | कान एखनो खराब नहि छैक , सुनैत अछि लोकक हँसी, सुनैत छैक लोकक ठटटा, जे ओकरा देखैत छैक ,कंटेरिये मुस्काइत छैक एहन सन जे बुझह आब , केहन बूरि बनलाह , तोरे शीतल छाँह मे सभ आनंद केलक , मुदा आब कियो तोरा दिस तकैत छह? तोरे जइर मे बैसैत छल’ , थाकल, प्यासल, रौदायल,सभ तोरे छाह मे आराम करैत छलौंह , पहिने तोहू कतेक बलिष्ट छलाह ,सुन्दर ,कांतिमय काया | जरि बलिष्ट ,कतेक ठाइढ़ ,ठाइढ़ मे सुन्दर ,कमनीय सुललित पात | दुरे सं लगइक जे कतेक नीक पीपरक गाछ अछि | सन सनाइत,हनहनाइत ,कतेक बिहारि के देखने , तखनो असगरे ठाढ़ ,मुदा समुद्रक लहरि जकाँ, कनकन,-सनसन करैत , लगैक समय सं आगू बढ़बाक पराक्रम फूल पात सभ लहलह करइत, लोकक भीड़ ,कियो पायर पर खसइत , कियो हाथ जोड़ने ठाढ़ ,सभ नतमस्तक | मुदा आब तू कतयछह ? विरान स्थान मे , ठुठ गाछ लग जाकय की हेतैक |जरि सुखा गेल छैक | ठाइढ त’सभटा काइट लेलकै | बिचला भाग कोकना गेल छैक ,केखन खसतै तेकर ठेकान नहि अनका शीतल वायु देबय बाला,अपने रौद मे ठाढ़, ठुठ ,कोकनल | ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार २जवाहर लाल कश्यप ३रामविलास साहु १ रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार, रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ , (मैथिलीक भिखारी ठाकुरक नामसँ प्रसिद्ध मैथिलीक पहिल जनकवि रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’क किछु गीत आ झारु प्रस्तुत अछि।-सम्पादक) प्रार्थना हे जगतकेँ पालक श्रृजक, हे दुनियाँ केर संघारी। अहाँसँ हमर अतबे प्रार्थणा, हम बनि सत् व्रतधारी।। बहुत कऽ देलिऐ पहिले अहाँ, कनिये हमरो दियऽ ज्ञान। काम करए एहन हमर तन, जगमे होइ सबहक कल्याण।। करू िनर्देशित हमरा तनकेँ, काम करए जनहितकारी। रहए अटल सत् पथपर हरदम, करए नै विचलित दुख भारी।। सुखमे हम नै होइ मतबाला, हुअए नै हमरा दुखक गम। दिल भरल रहए सेवा भावसँ, जत्ते करी तत्ते लगए कम।। मिट जाए अज्ञान अंधेरा, दीप जलए दिलमे सुज्ञान। ब्यापए ने हमरा कुरिती, पैदा केलक जकड़ा अज्ञान।। होइ छै जगमे की मानवता, नैतिकताक दिअ ज्ञान। दया प्रेमक बना कऽ सागर, नित्य करब जग संग स्नान।। करू कृपा जगपर अव्यक्ता, मेटा दिऔ दुनियाँक रोग। जाइत धरमसँ मुक्त होइ मानव, लोकक भीतर बसल होइ लोक। मितए मूलसँ सभक गरिबी, रहए नै भुखल कियो इंशान।। होइ उत्थान दबल कुचललकेँ, कुछ प्रकाशु एहन ज्ञान। हे िनर्देशक सारे जगतकेँ, कुछ िनर्देसु एहन काम। धरतीपर जे अमर करा दै, उचा कऽ दै जगमे नाम।। २ जवाहर लाल कश्यप (१९८१- ), पिता श्री- हेमनारायण मिश्र , गाम फुलकाही- दरभंगा। अन्नाकेँ समर्पित १ ओ चलल पुरनके चालि विसरि गेल कि भेल छल हाल छण मे धुसर भ गेल सब जे पी देलथि एक हुंकार २ अहाँ सम्भरि जाउ इतिहास स्वयं दुहरा रहल अन्ना एक और जे पी बनि सासन के नींव हिला रहल ३ एक आन्हर ध्रितराष्ट्र सदिखन पुत्र-मोह मे फसल रहल चारुकात मचल महाभारत मृत्यु ताण्डव करैत रहल दोसर हम्मर मोहनजी जे मन के नहि मोहि सकल गद्दी-मोह मे फसि सुधि-बुधि अप्पन खो चुकल भ्रष्टाचारक राज्य भेल ओ चैन स सुतल रहल ३ रामविलास साहु कविता- अरमान दू पाटनक बीच सभ पीसाइ समान सभ अरमान-आंसू संगे बहि गेल तेजाबी बरखा संग नुनगर पानिमे विशाल समुद्रमे विलिन जिनगीक गाड़ी डूबि गेल सभ अरमान-आंसू संगे बहि गेल जन्मक उद्देश्य नै रहल कोनो ठेकान रूकब कतए नै कोनो मकान सोचै छलौ- दुनियाँमे करब पैघ-पैघ काज मानव-दानवक बीच पिसाइत-पिसाइत भऽ गेलौं बेकाम राख समान दुख-सुख दू पाटनक बीच जिनगी नित्य पिसाइत भूलि गेलौं अपन उद्देश्य नै कए सकलाैं कोनो नाम निशान जिनगीक गाड़ी रूकि गेल दू पाटनक बीच सभ अरमान आंसू संगे बहि गेल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.डॉ॰ शशिधर कुमर २ आनंद कुमार झा ३नवीन कुमार "आशा" ४.प्रभात राय भट्ट १. डॉ॰ शशिधर कुमर, एम॰डी॰(आयु॰) – कायचिकित्सा, कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टर, निगडी – प्राधिकरण, पूणा (महाराष्ट्र) - ४११०४४ १ बरसातक एक राति असित अन्हार डेराओनि राति । झमकि झमकि बरिसय बरसात ।। अछि अस्त सूर्य आ धुमिल चान । घूमय नभ मे चहुदिशि जलधर । करय गरजि गरजि कऽ मेघ नाद । रहि रहि चमकए चपला चञ्चल । बहए सुरभित शीतल रम्य बसात । झमकि झमकि बरिसय बरसात ।। प्रेमीक विछोह, प्रेमिकाक क्षोभ । मयूरक खुशी अह्वलादित नर्तन । गर्मी सँ त्रस्त – पाओल राहत । करय जीव पावसक अभिनन्दन । पाओल राहत सभ कृषक समाज । झमकि झमकि बरिसय बरसात ।। उमड़ल पोखड़ि, नदी, ताल,सड़सि । हर्षित ओ जन्तु जे जल सञ्चारी । करए दादुर, जोंक, साँप, सहसह । पसरल सौंसे धरती पर चाली । बहए माटि – पानि दुहु एक साथ । झमकि झमकि बरिसय बरसात ।। पावस राति - ई कारी घोर । पुरिबा – पछबा से बड़ जोड़ । भेल भोर, पर रौद मलीन । सूर्य जेना निज शक्ति विहीन । कहुँ – कहुँ हंसक उनमुक्त पसार । झमकि झमकि बरिसय बरसात ।। २ नभ श्याम, धरा श्याम, सभ श्यामल श्यामल आयल साओन मास सोहाओन, कि चलु सखी , चऽलू ने सखी । लागय आजु धरा मनभाओन, कि चलु सखी , चऽलू ने सखी ।। छल छल बहइ’छ श्यामा सरिता । भेल मलिन मुख देखि ई सविता । बहु विधि सजल धजल वृंदावन, कि चलु सखी , चऽलू ने सखी । आयल साओन मास सोहाओन, कि चलु सखी , चऽलू ने सखी । मन्द पवन सखी वसन हिलावय । मन मानस मोर मदन जगावय । बाजय छमकि छमकि पायलिया, कि चलु सखी , चऽलू ने सखी । लागय आजु धरा मनभाओन, कि चलु सखी , चऽलू ने सखी ।। सभ सखि मीलि चलू रास रचायब । कदमक डाड़ि मे हिरला लगायब । बजओता माधव मधुर मुरलिया, कि चलु सखी , चऽलू ने सखी । आयल साओन मास सोहाओन, कि चलु सखी , चऽलू ने सखी ।। ३ आयल साओन मास सोहाओन नभ श्याम, धरा श्याम, सभ श्यामल श्यामल । आइ लगइ’छ प्रकृति श्याम रंग मे रँगल । सुनि मुरलीक तान । एलीह राधा ओहि ठाम । प्रीति सरिता मे डूबि, भेलीह राधहु श्यामल । आइ लगइ’छ प्रकृति श्याम रंग मे रँगल । श्याम श्यामक शरीर । श्याम यमुनाक नीर । पहीरि साँझक कलेवर , भेलीह वसुधहु श्यामल । आइ लगइ’छ प्रकृति श्याम रंग मे रँगल । छवि सुन्नर सहज । मूँह रक्तिम जलज । रक्त कंज बीच खिलल युगल श्यामल कमल । आइ लगइ’छ प्रकृति श्याम रंग मे रँगल । श्याम अलकक कुञ्ज । जेना भ्रमरक हो पुञ्ज । भासि राहु कोर, चान सेहो श्यामल श्यामल । आइ लगइ’छ प्रकृति श्याम रंग मे रँगल । घीरि आयल पयोद । देखू नचइ’छ कामोद । छूबि श्याम, श्याम, श्याम भेल अनिलहु श्यामल । नभ श्याम, धरा श्याम, सभ श्यामल श्यामल । २ आनंद कुमार झा हमरा भेटल एक टा चिट्ठी, किछु नुनगर किछु छल खटमिट्ठी, छल लिखल दू-दू हाथ तूँ कऽ ले, अपन ताकत आजमाइस तूँ कऽ ले।
पहिले हम मोनमे मुसकेलौं, चौबीस घंटा बाद हम गेलौं, सोचलौं संगी सभ की जाएत, हमरा देखते ओकर भूत पड़ायत,
कदम पड़ैत ओ चोर नुकाएल, देलौं लात बिलसँ बहरायल, जाइत देरी ओ छोड़लक फोंफ, झट धेलौं हम ओकर झोंट।
बाप बाप कऽ केलक चित्कार, सुनू सुनू मिथिला दरबार, पएर पड़ै छी सभ गोटे कऽ, सभ सुनू ई करुण पुकार।
चेला ओकर खूब मुसकायल, मारिक डरे गुरु पड़ायल, गुरुजी लागल गरियाबऽ कनही पिल्ली जेना चिचियाबए,
भागिते ओकर ढेका खुजल, लागै जेना कुनो बिलाड़ि भीजल, मुँह धऽ ओकरा खूब थोपड़ेलौं, मिथिलाक हम मान बढ़ेलौं।
मिथिलाक ई नाम डुबेलक, झूठे-मुठे घाम चुएलक, कहलक हम छी बड्ड प्रतापी, लेकिन अछि ई खल संतापी।
अपनाकेँ बुझए लाल बुझक्कर, एकरासँ ज्ञानी अछि खच्चर,(जानवर) कौआ सन हरदम चिचियाय, गीदर सन सौंसे हुलकाय।
बागर जकाँ मुह लगै छै, चुहरमल सन काज करै छै, गिरगिट सन ओ रंग बदललक, मैथिलक ओ पाग खसेलक।
कहलक हम छी मैथिल महान, लेकिन अछि छांटल शैतान, आनंदक सभ सुनु ई वाणी, नादिमे धऽ बनेलिऐ सानी।
आनंदसँ भागी के कते पड़ायत, त्रिभुवनोंमे बाट ने पायत, जेना जयंत गेल पुनि राम शरण, ओहो आयत पुनि हमर शरण।
(ई रचना कुनो व्यक्ति विशेषक लेल नै अछि, ई मात्र हृदयसँ निकलल एक टा उद्गार मात्र अछि। एकरा पढ़ी एवं पढ़ि कऽ खूब आनंद उठाबी।) ३ नवीन कुमार "आशा" बाबा धामक रस्तामे किछु कविता लिखाइत अछि १ बाबाक दरबारमे लगेलौं अपन अरजी, कहल बाबाकेँ सुनू यौ बाबा आस लगने आयल छी.. स्वीकार करु पुत्रक अरजी हरु ओकर सभ व्याधि.. बाबासँ हएत भेँट ..गप करब भरि पेट .. बस किछु दूर छी बाबासँ, मुदा नै अछि चित स्थिर.. कहै अछि करुणापूर्वक नवीन पूरा करियौ बाबा ओकर आस.. बोले बम बाबा केहेन तोहर लीला अदभुत् तोहर खेल.. एक बेर हमरो दर्शन दए आस लगौने आएल छी... बोल बम… २ जँ अपनाकेँ देखब हेय आँखि सँ .. नै पायब किनको सम्मान जँ अपन मान अपने नै राखब कहियो नै पाबि सकब सम्मान.... अपन पहचान अपने बनाउ फेर माए बापक मान बढाउ कष्ट अछि मुदा हँसै छी नै लागनि माए बाबूकेँ बौआ अछि हमर दुखी... आशाक ई अछि अनुभव दुख जँ होयत ओइमे भेटत सुखक अंश, की हमर ई गप अछि गलत... हँसै छी दुख भगाबै लेल.. भगवान आशा अछि अहाँ सहारा देब.... कखनो-कखनो एहेन लगै अछि.. अंदर अंदर मोन कनै अछि देखल जे हम सपना कि ओ बनि पाओत आशाक अपना..... राति हो वा दिन बस एकटा बातक राखह ध्यान जावे छह तोरा मे पराण तावे राखह माता पिताक ध्यान.. ३ की लिखू नै मोन करै अछि तखनो जँ अपने जिद करै छी तँ अपनेकेँ प्रणाम करै छी। ४ अविस्मरणीय
कोना कँ करि हुनक बखान जिनक जीचन में अमूल्य योगदान हुनक रहे सदिखन ध्यान जीचन मे हुनक अलग स्थान दूर रहियो के पास छथि एहसास छथि आ हृदय पास छथि जखन छलौ हम टुगर नै देलक जखन कियो संग तखन देलथि ओ आसरा कोना ओकरा बिसरी जाए जँ ओ ने देतथि संग कि पबितो इ सम्मान ? एहसास छथि आ हृदय पास छथि जखन लोक करे अपमान ओहि ठाम हुनका सँ पाबि मान कोना हुनक कर्ज तोड़ब जिनक हम छीक सदिखन ऋणी एहसास छथि आ हृदय पास छथि जखन हम करे छलौ विलाप कानै लेल दएलथि कनहा जखन नहि छल ककरो सँ आस
ओ बनलथि हमर प्रकाष जा धरि रहत इ प्राण नहि बिसरब हुनका आ सदिखन रहत हुनक ध्यान कोना करू हुनक बखान जिनक अछि हृदय मे सम्मान एहसास छथि आ ........................ (मिन्न पी. एस. सिंह. ठाकुर आ भाई श्री मनीष बौआ भाई केँ समर्पित)
४. प्रभात राय भट्ट १ चलैतछी डगैर पैर चलैतछी डगैर पैर शुद्ध मन वचन कर्म सं गबैतछी गीत हम अपन ईमान धर्म सं वैदेहीक जन्मभूमि राजर्षि जनक के गाम मिथिलाक हम वासी वास हमर जनकपुरधाम जग में सुन्दर अछि इ नाम जय जय जय मिथिलाधाम मिथिलाक जन जन मैथिल मथिली हमर भाषा पुनह पुनह जन्म ली मिथिलेमें इ हमर अभिलाषा उत्तर हिमगिरी हिमालय दक्षिण पावन पतित गंगा कोशी गंडक जनकपुर चाहे बसु दरभंगा इ समस्त भूमि अछि मिथिला जय जय जय मिथिलाधाम दया धर्म हृदय में राखी मिथिलाक जन जन मैथिल सौहार्द्य वातावरण सृजन करी मिथिलाक जन जन मैथिल जातपातक भेदभाव सं दूर रही मिथिलाक मैथिल हिन्दू करैय मुस्लिमके सलाम मुस्लिम हिन्दुकें प्रणाम डोम घर दहिचुरा खेलैथ पाहून राम जय जय जय मिथिलाधाम २ हम नै ज्याब आब मेला अकेला यौ पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला मेलामें देखलौं पिया बड बड अजगुत खेला आदमी पैर आदमी रहे ठेलमठेल बिचमें छौडा सभ करैत धुरमखेल यौ पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला २ दरुपिबा सभ केलक बड़ा हुलदंगा केलक हमरा छेड़खानी लुचालाफंगा कियो मारैय टिहकारी कियो मारैय पिहकारी मटकी माईर माईर बोलाबे हमरा छौडाछेबारी यौ पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला २ प्रेमी मग्न भेल गाबैत रहे पिया मल्हार चोरबा लक भागल ओकर गिरमल्हार कान ककरो चिरल नाक रहे फारल चाई चंडाल गहना लक सभटा भागल यौ पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला २ गंजा भांग पिने बुढ्बो अपने मोन मतंग बड बड लीला भेल कनिया बहुरियाक संग छौडा सभ केलक पिया हमरो बड तंग आँखी सं देख्लौ पिया ई सभटा खेला यौ पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला ३ हैंस दिय कनियाँ हैंस दिय हैंस दिय कने हैंस दिय कनियाँ देखू लौनेछी कनियाँ अहांलेल पैरक पैजनिया महफा में बैठ चलू कनिया आई हमरा अंगना अहांके अईन्देव सजनी हम जयपुर के कंगना कान दुनु सोन हम अहांके देव रे झुलनियाँ नाकमें देव रे सजनी सानिया कट नथुनिया छम छम बाजैय गोरी अहांक पैरक पैजनिया लाखोमें एक अहां छि हमर सुनरी दुल्हनिया खन खन खन्कैय अहांक हाथक चुरी कंगना चलू चलू चलू कनियाँ यए आई हमरा अंगना मोती जडल लहँगा पैर लाले लाल चुनरिया लागैछी अहां धनि पूर्णिमाके चाँद सन दुतिया हैंस दिय हैंस दिय कने हैंस दिय कनियाँ देखू लौनेछी कनियाँ अहांलेल पैरक पैजनिया अहाँ लेल मोन हमर कटैय दिन राईत अहुरिया माईनजाऊ बात गोरी कहैय प्रभात जनकपुरिया ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार गजल/ रुबाइ/ कता गजल 1 मालक खातिर तँ माल-जाल बनल लोक देखाँउसक खातिर कंगाल बनल लोक भूखक दर्द होइत छैक प्रकाशोसँ तेज देखू पेटक खातिर दलाल बनल लोक वृत तँ टूटल मिलल समानांतर रेखा देखू बिनु कागजीक प्रकाल बनल लोक सत्त-सत्त ने रहल ने रहल फूसि-फूसि अपने लेल अपने जंजाल बनल लोक उपरसँ गंगा घाट भीतर मोकामा घाट एतए नुनिआएल देबाल बनल लोक **** वर्ण---------16***** 2 चुप्प रहत मनुख गिद्दर भुकबे करतैक निर्जीव तुलसी चौरा कुकुर मुतबे करतैक जँ केकरो वीरता सीमित रहि जाए गप्प धरि तँ दुश्मनक लात छाती पर पड़बे करतैक विद्रोह आ अधिकारके अधलाह बुझनिहार आइ ने काल्हि अपटी खेतमे मरबे करतैक बसात पर बसात दैत रहू क्रांतिक आगिके नहुँए-नहुँ सही कहिओ तँ जरबे करतैक लिखैत रहिऔ विद्रोहक गजल अनचिन्हार कहिओ केओ ने केओ एकरा पढ़बे करतैक **** वर्ण---------18******* 3 एहि लाइलाज बेमारीक की हाल हेतै स्वेछाचारी-चारणीक की दलालहेतै हरेक समय बितैए दुख आ दर्दमे गरीब लेल नव पुरान की साल हेतै नौकरी उड़िआ गेलै बालु जकाँ देशसँ आब किएक केओ काजमे बहाल हेतै अहुरिआ कटैत लोक डूबल नोरमे ओ तँ नोरे पीबि मँगनी मे हलाल हेतै धैरज धरु प्रतीक्षा करु अनचिन्हार मरब तँ नीक जिनगी तँ जंजाल हेतै **** वर्ण---------15******** 4 मछगिद्ध जँ माछ छोड़ए तँ डर मानबाक चाही लोक जँ नेता भए जिबए तँ डर मानबाक चाही बेसबा खाली देहे टा बेचैत छैक अभिमान नहि लोक अस्वभिमानी हुअए तँ डर मानबाक चाही सभके छै बूझल शेर केखनो नहि खाएत घास जँ बीर अँहिंसक बनए तँ डर मानबाक चाही सीमा केर रक्षा करैत जे मरथि सएह बिजेता माए बेचि जँ रण जितए तँ डर मानबाक चाही सम्मानक रक्षा करब उद्येश्य अछि गजल केर जँ ओकर उद्येश्य छुटए तँ डर मानबाक चाही **** वर्ण---------19******* 5 एहि रुपें सभमे करार हेतै खाए लेल मनुखे जोगार हेतै मीडिआ तँ बनि गेलै पोर्नोग्राफी आब सएमे सए फिराड़ हेतै बयससँ पहिने बच्चा जबान पंचमे बर्खे रति झमार हेतै संबंध जरि रहल सभ ठाम परिवार गूँहक भराड़ हेतै चेतह अनचिन्हार रुकि जाह छनेमे आदमी बेस्महार हेतै **** वर्ण---------12****** 6 कागतक नाह चलि रहल सुखाएल धारमे ओ तँ घरमुरिआ दैए इजोरिआक अन्हारमे नाङट समय नाङट आदमी आ नाङट व्याख्या राधा भेटतीह गली-गली कान्ह हरेक छिनारमे छद्म भेषे रहितहि तँ एहन सन गप्प नहि मोश्किल छैक फर्क केनाइ मनुख आ हुराड़मे बजैत लोकके सुनबाक फुर्सति कहाँ भेटतै एहिठाम सभ लागल अछि आत्म-अभिसारमे किछुओ कहब खतरनाक बुझाइए एतए एकौटा अपन लोक कहाँ एते अनचिन्हारमे **** वर्ण---------18****** 7 मनुख पर भुकैए कुकूर खजानाके चोरबैए कुकूर की मनु की आदम की छै हौआ नियम बना तोड़ैए कुकूर लक्ष्य नै बाटे-बाट पसरल बेमतलब दौड़ैए कुकूर आगि-पानि-बसात बेकाजक रंग-महलमे रहैए कुकूर पदितो जाइ पड़ाइतो जाइ कुकूरेके हबकैए कुकूर **** वर्ण---------11******* 8 आबो परबोध करु अपने विरोध करु लोक तँ बढ़त आगाँ अहाँ अवरोध करु धनी बनि जाए धनी एहने तँ शोध करु बहर नै गजल नै इ आबो तँ बोध करु आएत अनचिन्हार अहाँ अनुरोध करु **** वर्ण---------8******** 9 भेष हुनक भगवान सन काज हुनक सइतान सन बेटा बलाके तँ पंडित बुझू बेटी बला तँ जजमान सन मँहगाइ बढ़ल छै तेना ने कोबरो तँ झूरझमान सन देहे जिंदा,भावना मरि गेलै जग लगैए समसान सन नहि बनत केओ राम मुदा सेवक चाही हनुमान सन **** वर्ण---------11******** 10 इ दुराचार अँहिक खूरक प्रतापे इ भ्रष्टाचार अँहिक खूरक प्रतापे देखू लोक पढ़ैए जान अरोपि कए मुदा बेकार अँहिक खूरक प्रतापे जनबल,धनबल, आरो बल-बल इ सरकार अँहिक खूरक प्रतापे इद्दुत-विद्दुत सभटा फेल की कहू भेल अन्हार अँहिक खूरक प्रतापे हाथ मिलाउ, छाती लगाउ तैओ सभ अनचिन्हार अँहिक खूरक प्रतापे **** वर्ण---------14****** 11 मूसक आखर बिलाइक नाम गाएक नोर तँ कसाइक नाम हुनका नै हुनकर धोधि देखू घीअक सुगंधि मलाइक नाम किएक शिक्षकके सम्मान हेतै बापक कर्जा तँ पढ़ाइक नाम आरि मने गारि, गारि मने मारि खेतक उपजा बटाइक नाम एहनो होइ छै कहिओ-कहिओ पानिक प्रेम तँ सलाइक नाम **** वर्ण---------12****** 12 जीबनमेँ सभकेँ एनाहिते घाम चलैए केखनो अराम तँ केखनो हराम चलैए अधरतिआमे देखबै केखनो अनचोके चुड़ैले जकाँ तँ उन्टा हमर गाम चलैए आब तँ तरबा बचि जाइत छै सदिखन बाट पर सदिखन जुत्ता-खराम चलैए रामक आदर्श तँ मरि गेल हुनके संगे बुझू आब तँ खाली हुनक नाम चलैए चिन्हार तँ बिलमि जाइए चिन्हारक संग देखू अनचिन्हार मुदा अविराम चलैए **** वर्ण---------16****** 13 गोली सँ तँ डेराएल अछि मनुखसँ सइतान धरि जानवर तँ जानवर भगवत्तीसँ भगवान धरि नीकक लेल सोहर तँ खरापक लेल समदाउन गाबिए रहल गबैआ सोइरीसँ असमसान धरि इ समालोचना केकरा कहैछ छन्हि किनको बूझल पढ़ू, अछि सगरो पसरल निन्दासँ गुणगान धरि राम नामक लूटि थिक लूटि सकी तँ लूटू सदिखन लूटि रहल छथि दक्षिणा पंडितसँ जजमान धरि सदिखन पसरि रहल पसाही सगरो कोने-कोन घृणा-द्वेष-तामस क्रिसमस-होलीसँ रमजान धरि **** वर्ण---------20******* 14 देह केराक थंब सन गोर-नार लगैए अड़हूलक फूल सन भकरार लगैए नोर अँहाक तँ बेली-चमेली,गेंदा-गुलाब मुदा हँसी तँ अँहाक सिंगरहार लगैए मरनाइ तँ एकै होइ छै सभहँक लेल लहासे सन तँ कटल कचनार लगैए सीसोक सीस कटल,चऽहुक चऽहु टुटल आमक नव पल्लव तँ अंगार लगैए आम-जाम,कुम्हर-कदीमा,लताम-सरीफा आब तँ जकरे देखू अनचिन्हार लगैए **** वर्ण---------16******* 15 मोन पड़ैए केओ अनचिन्हार सन साइत कहीं इएह ने हो प्यार सन जे नै कमा सकए टका बेसीसँ बेसी लोक तँ ओकरे बुझै छै बेकार सन समय कहाँ कहिओ खराप भेलैए कमजोरके लगिते छै अन्हार सन किछु तँ देखाएल चोके-अनचोकेमे चोरे तँ बुझाइए पहरेदार सन संग रहबै-छोड़बै तँ फरक देखू बालु जकाँ समस्या पहाड़ सन **** वर्ण---------14******* 16 जीबनमे दर्दक सनेश शेष कुशल अछि हम नहि कहब विशेष शेष कुशल अछि अन्हरे सरकार तँ चला रहल राज-काज की कहू, छै बौकक इ देश शेष कुशल अछि देहे टा बदलैए आत्मा नहि सूनि लिअ अहाँ एहने सरकारक भेष शेष कुशल अछि मुक्का आ थापड़क उपयोगके करत आब खाली आँखिए लाल-टरेस शेष कुशल अछि गजल कहब एतेक सोंझ नै अनचिन्हार हम तँ आब चलै छी बेस शेष कुशल अछि **** वर्ण---------17******* 17 अँहा तँ असगरेंमे कानब मोन पाड़ि कए करेजक बाकसके घाँटब मोन पाड़ि कए आइ भने विछोह नीक लागि रहल अँहाके काल्हि अहुरिआ काटि ताकब मोन पाड़ि कए मिझरा गेलैक नीक-बेजाए दोगलपनीसँ कहिओ एकरा अँहा छाँटब मोन पाड़ि कए अँहा जते नुका सकब नुका लिअ भरिपोख फेर तँ अँही एकरा बाँटब मोन पाड़ि कए आइ जते फाड़बाक हुअए फाड़ि दिऔ अहाँ मुदा फेर तँ इ अहीँ साटब मोन पाड़ि कए **** वर्ण---------17******* 18 जँ प्रेम अछि तँ कहनहि नीक शीतल आगिमे जरनहि नीक घोघक रहस्य तँ एना बुझिऔ झरकल मुँह झपनहि नीक लोक जहर दैए मुस्किया कए आब तँ हँसीसँ डरनहि नीक दबाइ देबै तँ बढ़बे करत प्रेमक दर्दके सहनहि नीक आब जँ भेटत दुख अहूँ लग तखन संसार छोड़नहि नीक **** वर्ण---------12******* 19 बाजू चोर आ चुहारक लेल ताला की अँही कहू बेइमान लेल केबाला की लोक डुबैत अछि भाव आ अभावमे कहू डुबबाक लेल नदी आ नाला की लोक तँ खुश होइए तेल मालिशसँ एहि रोगीक लेल दबाइ वा आला की फूसे घर पर होइए दैवी प्रकोप इल्डिंग-बिल्डिंग लेल ठनका-पाला की इज्जत सुकाजसँ भेटै छै संसारमे एहि लेल बासन-सिंहासन-माला की **** वर्ण---------14******* 20 आइ-काल्हि भाँड़े आ की भड़ुएक तँ चलती छैक आइ-काल्हि चोरे की पहरुएक तँ चलती छैक होइत रहल निपत्ता फल आ फूल बगैचासँ सुखाएल सन जड़ि मालिएक तँ चलती छैक चिचिआ कए जगबैत छल लोकके सदिखन गोली खेलक ओ निशबद्दीएक तँ चलती छैक घोघके घोघ नै ओकरा आब दोसरे चीज बुझू साँझ-राति धंधामे बहुरिएक तँ चलती छैक कलम लेने ठाढ़ अनचिन्हार चौबटिआ पर कुबाट देखबैत कुमार्गिएक तँ चलती छैक **** वर्ण---------18******* 21 कहू, इ की केलहुँ बैसले-बैसल अँहा आगि तँ लगेलहुँ बैसले-बैसल अँहा रोड़ी कहींक इँटा-बालु सीमेंट कहींक महल बनेलहुँ बैसले-बैसल अँहा इन्द्र की करताह परतर अँहा संग तंत्र जन्मा देलहुँ बैसले-बैसल अँहा अगस्तस्य तँ पीने छलाह एकटा नदी समुद्रो पी गेलहुँ बैसले-बैसल अँहा लाठी-भाला लेने बैसल छल ओ खेतमे साँढ़ ढ़ुका देलहुँ बैसले-बैसल अँहा **** वर्ण---------15******* 22 बाट अन्हारमे डूबल केकरा बजाउ जगैत लोक तँ सूतल केकरा बजाउ लेलहुँ हम सप्पत रहब एकै संग ओ तँ मोड़ पर छूटल केकरा बजाउ राम ठकाएल तँ अल्ला छथि बौआएल मंदिर-मस्जिद टूटल केकरा बजाउ दुनियाँ घालमेलक दुनियाँ भ्रमजाल सीसी-छौंड़ी-पाइ घूमल केकरा बजाउ चाहै छलहुँ आबथि हमर करेजमे मुदा इ किस्मते रूसल केकरा बजाउ **** वर्ण---------15******* 23 गजल सुख जिनगीक गजल दर्द जिनगीक रहए ठाढ़ अविचल गजल मर्द जिनगीक अँहा हिमालयक भाए छी वा कैलाशक जन्मल बनि गेल आगिक गोला गजल सर्द जिनगीक देखएमे तँ हेतैक लाजोके लाज तेहने सन देखाएत अंग-अंग गजल बेपर्द जिनगीक अनचिन्हार साकी दए रहल गजलक हाला बनल छैक दबाइ गजल बेदर्द जिनगीक इ तँ साफ करबे करत कोने-कोनमे जा कए देखू कोना पसरल छै गजल गर्द जिनगीक **** वर्ण---------18******* 24 किछु दूर चलब हमहूँ जँ संग दए सकी रंगि देब हम तँ रंगमे जँ रंग दए सकी अन्हारोमे चलब हम बिनु ठोकर खएने हमरा चलबाक जँ कनिको ढ़ंग दए सकी कहबै जँ चार पर तँ चढ़बै पहाड़ पर किच्छो ने असंभव जँ कने उमंग दए सकी हेताह कोने-कोन मे नुकाएल कतेको राम मरत इ रावण जँ धनुष-भंग दए सकी हमहूँ रहि सकै छी सभसँ दूर सदिखन जँ अपने जकाँ भावना अपंग दए सकी **** वर्ण---------17******* 25 हँसैत जिनगी कना बैसल छी मोनमे केकरो बसा बैसल छी नहि होइक अन्हार कोबरमे तँ तँए करेज जरा बैसल छी उराहल पानिसँ कब्ज होइए गंगो-जलके सड़ा बैसल छी भेटबे टा करत केओ ने केओ उम्मीदे पर तँ जिया बैसल छी करोटक तँ परिवर्तन नाम जखन की आत्मे सुता बैसल छी **** वर्ण---------12******* 26 अपन आँखिमे बसा लिअ हमरा अपन श्वासमे नुका लिअ हमरा जहाँ मरितो जीबाक आस रहए ओहने ठाम तँ बजा लिअ हमरा हाथ सटेलासँ मोन केना भरतै अहाँ करेजसँ सटा लिअ हमरा भरि जिनगी बौआइते रहलहुँ अपने संग तँ बैसा लिअ हमरा जाइ छी मुदा जेबाक मोन नै अछि कोनो सप्पतसँ घुरा लिअ हमरा **** वर्ण---------13******* 27 इजोतक दर्द अन्हारसँ पुछिऔ धारक दर्द तँ किनारसँ पुछिऔ नहि काटल गेल हएब जड़िसँ काठक दर्द तँ कमारसँ पुछिऔ समदाउनो तँ निर्गुने बुझाएल कञिआक दर्द कहारसँ पुछिऔ खेतक हरिअरी तँ नीक लगैए इ अनाजक दर्द धारसँ पुछिऔ करबै की हाथ आ गरा मिला कए इ दर्द तँ अनचिन्हारसँ पुछिऔ **** वर्ण---------13******* 28 (क) केकनैए हमरा लेल केहँसैए हमरा लेल सपनामे एबै आस नै केसुतैए हमरा लेल जँ हम चलिए जाएब केरहैए हमरा लेल छोड़ि दिअ सुतले अहाँ केउठैए हमरा लेल अनचिन्हार नाम-गाम केअबैए हमरा लेल **** वर्ण---------9******* (ख) केकनैत अछि एहिठाम हमरा लेल केहँसैत अछि एहिठाम हमरा लेल हुनकर सपनामे एबै विश्वास नहि केसुतैत अछि एहिठाम हमरा लेल उठनाइ खराप नहि मुदा अहूँ सोचू केसुतैत अछि एहिठाम हमरा लेल बसातक संग आबि गेल मनुख-गर्दा केउड़ैत अछि एहिठाम हमरा लेल अनचिन्हार नाम गामो तँ अनचिन्हार केअबैत अछि एहिठाम हमरा लेल **** वर्ण---------15******* 29 हमरा मोनमे बैसल मात्र अदना साँप इ बाहर सह-सह करैत पदना साँप लगबैत रहलहुँ भएट आ सूचना तंत्र देखू बढ़ैत रहल महँगी-विपदा साँप इ बिकनीक डिजाइन छैक की सुन्दरीक देखिऔ छातीमे लेपटाएल तगमा साँप हम तँ मनुसँ जन्मल रही की आदमसँ बाजत किएक इ सेकुलर-भगवा साँप बुझाएत नै रहत पातेमे मिझराएल सुनू एनाहिते तँ डसैत छै सुगबा साँप अनचिन्हार रहत वा चिन्हार की करबै समय पर सभ बनै अजगरबा साँप **** वर्ण---------16******* 30 एहने अहाँक प्रेम छल पछाति जानल हम खाली मूहँक तँ छेमछल पछाति जानल हम आगि लागल छै घर मे चिन्ताक गप्प नहि कोनो कारण अपने टेम छल पछाति जानल हम सड़ैत देखलिऐक किच्छोके कादो मे सदिखन अपने घरक हेम छल पछाति जानल हम कोंढ़ीके सुँघलकै आ बजरखसुआ चलि गेलै दाइ ओ नकली भेम छल पछाति जानल हम कानून तँ बनै छै आ टूटै छै बेर-बेर देशमे लोके लेल नेम-टेम छल पछाति जानल हम **** वर्ण---------18******* 31 माटि-पानि-बसात लेल युद्ध देखू छोटको बात लेल युद्ध आदर्श बनाम आदर्शवादी बुद्ध-गाँधीक गात लेल युद्ध जर-जमीन-जोरु एतबा नै देखू फेकल पात लेल युद्ध नून नै चटबए पड़तै बेटीके आब तँ गर्भपात लेल युद्ध तकनीकी जुगक इ व्यवस्था साँझ होइते प्रात लेल युद्ध **** वर्ण---------11******* 32 पतालमे जा अकास नपैत छी डिबिआ मिझा प्रकाश तकैत छी कागतमे लिखल कागती प्लान घोटालासँ विकास करबैत छी पानि सड़ि गन्हाइते रहलैक आरिए बान्हि पानि बहबैत छी बुड़िबक देवी कुरथी अक्षत हम एहने विकास करैत छी चिन्हार नहि अनचिन्हारे नीक तँए तँ परिचय नुकबैत छी **** वर्ण---------12******* 33 गुंगुआइत बसात चुप्प रहू पदुराइत बसात चुप्प रहू चारु दिस तँ पसरि गेल धुँआ हे पझाइत बसात चुप्प रहू अहाँक कुंठा जड़ि जमेने अछि किकिआइत बसात चुप्प रहू अहूँ पर हँसत केओ-कहिओ ठिठिआइत बसात चुप्प रहू जे भेटत अनचिन्हारे भेटत चिचिआइत बसात चुप्प रहू **** वर्ण---------12******* 34 अहूँ तँ पड़ाएल छलहुँ हमहूँ तँ पड़ाएल छलहुँ अहूँ घबराएल छलहुँ हमहूँ घबराएल छलहुँ शायद एहने भेंट लिखल छल कपारमे सदिखन अहूँ तँ लजाएल छलहुँ हमहूँ तँ लजाएल छलहुँ रुकलाहा जिनगीक लेल सौरी बेर-बेर सौरी सजनी अहूँ उबिआएल छलहुँ हमहूँ उबिआएल छलहुँ शेर तँ चल गेल आब ताल देनहे की हएत कहिऔ अहूँ सुटिआएल छलहुँ हमहूँ सुटिआएल छलहुँ रहि गेलहुँ अनचिन्हार करेज सटेलाक पछातिओ अहूँ अगुताएल छलहुँ हमहूँ अगुताएल छलहुँ **** वर्ण---------21******* 35 प्रकृति जँ दुश्मन बनए तँ ओकरा रोकब कठिन काँटी जँ छाती पर रहए तँ ओकरा ठोकब कठिन लक्ष्य जँ नहि रहत आँखिक सीमान पर सदिखन जोर लगेलाक पछातिओ ओकरा लोकब कठिन संसारमे पापक घैलके एहने गति छै से मानै छी जँ नै रहबै सत्यक संग तँ ओकरा फोड़ब कठिन आब जँ अहाँ चाही तँ एकरा कोनो नाम दए सकै छी केकरो करेज सँ निकलल गप्पके तोड़ब कठिन बौआइत रहू मसाने गाछिए-बिरछिए सदिखन जँ अहाँ नहि बनब भूत तँ ओकरा टोकब कठिन **** वर्ण---------20******* 36 बनतै कतेक बहन्ना देखबाक चाही ओ बनतै कतेक सन्ना देखबाक चाही आब तँ भेल नूनो-सोहारी पर आफद सुनू फटकी कतेक चन्ना देखबाक चाही थपड़ी तँ अदौसँ बजिते आएल अछि लुटतैके कतेक टन्ना देखबाक चाही घरक बोझ छिड़िआ रहल सदिखन कोम्हर हेड़ा गेल जुन्ना देखबाक चाही खेतोके पता नहि की भए गेलैक अछि खादोक बाद मरहन्ना देखबाक चाही **** वर्ण---------15******* 37 बटोही केहन छैक बाट पर चलि कए देखिऔक पिआसलक पिआस घाट पर चलि कए देखिऔक घर मे घोंघाउज केने कोनो लाभ नहि भेटत आब सस्ती-महँग केहन हाट पर चलि कए देखिऔक कमजोर वस्तुक मर्म ओना नहि बुझाएत अहाँके कने दिबाड़ लागल टाट पर चलि कए देखिऔक बुझिए जेबै कुसिआर आ सिठ्ठी केर संबंध अहाँ तँ कनेक कोल्हुआरक राट पर चलि कए देखिऔक नै रहत कनियों मोल अहाँक गुण केर दुनियाँमे अहाँ बिनु पैकिंग के हाट पर चलि कए देखिऔक **** वर्ण---------20******* 38 एक बेर फेर हँसिऔ कनेक ओही नजरिसँ देखिऔ कनेक बाजब प्रेम लेल जरुरी नहि आँखि झुका चुप्प रहिऔ कनेक हम आबि गेलहुँ अहींक लेल हमरो लेल तँ चलिऔ कनेक प्रेमक भाषा अहींके अछि पता आब हमरो बुझबिऔ कनेक नहि रहत केओ अनचिन्हार हाथ बढ़ा कए देखिऔ कनेक **** वर्ण---------12******* 39 अपनेसँ आगि लगबैत छी मिझबैत छी अपनेसँ पीबि खसैत छी आ सम्हरैत छी आँखिमे भरल छै नोरक धन लकथक अपनेसँ जमा करैत छी आ लुटबैत छी शांत इजोरिआमे अशांत करेज हमर अपनेसँ हकार दैत छी आ नोंत पुरैत छी टूटल करेजके तँ आरो टुटबाक इच्छा अपने करेज तोड़ैत छी आ कुहरैत छी केबूझत हमर दुख आ दर्द एहिठाम चिन्हार रहितहुँ अनचिन्हार रहैत छी **** वर्ण---------16******* 40 पिपरक पात जँका तँ डोलैत लोक सिम्मरिक रुइ जँका तँ उड़ैत लोक देखू सृष्टि तँ बनि गेल भुतहा गाछ भोर-साँझ ओझाके सहैत लोक नोर तँ मानल गेल गंगा-जल जँका देखू नोरेसँ जिनगी धोबैत लोक सीसा तँ मासे-मास टूटै लोहा बर्खमे मुदा खने-खन भेटत टूटैत लोक देव-दानवक डर तँ मानलो जाए अपने डरें छुल-छुल मुतैत लोक **** वर्ण---------14******* 41 देखिऔ तँ केना भेलैक गाछके कात भेने चिड़ैआ बाजब छोड़ि देलक परात भेने अहाँक दरस-परस बड्ड महँग अछि सटि जैतहुँ अहाँक देह मे बसात भेने आशो राखी तँ कनेक नीके जकाँ राखी भाइ दालिए आ तीमन ने बचै छैक भात भेने सभँहक घरमे एकटा अगत्ती जन्मए सरकारक निन्न टुटै छै खुरफात भेने लागि गेलै भरना सभँहक भाग-सोहाग आब की हेतै आगि लग सप्पत-सात भेने **** वर्ण---------16******* 42 भोज ने भात हर-हर गीत की करु आब लागल भूख कहू मीत की करु जिनगी अजगुत आदमी तँ विचित्र केखनो घृणा तँ केखनो प्रीत की करु प्रेम बदलि रहल समयोंसँ बेसी केखनो आगि तँ केखनो सीत की करु मनुख के पहिचानब बड्ड कठिन केखनो बिग्घा केखनो बीत की करु मिलेलहुँ गरासँ गरा तैऔ हमरा भेटल दुश्मन नै मनमीत की करु **** वर्ण---------14******* 43 एकटा चान हमरा लग रातिमे अबैए देखू वएह कागत पर पाँतिमे अबैए जीबाक लेल जी सकै छी अहाँक बिनु मुदा देखू नोर बेर-बेर आँखिमे अबैए आँखिसँ बेसी सपना नहि देखबाक चाही फुनगीक आसमे बैसल माटिमे अबैए पिजाएल लाठी किएक केकरा लेल कहू अपने खु्ट्टाक बड़द जजातिमे अबैए किएक केकरो घरबालीके कहबै हड़ाशंखिनी अपने लोकक गनती हड़ाहिमे अबैए **** वर्ण---------16******* 44 गीतक आखर-आखर धारके मोन छैक रीतक आखर-आखर धारके मोन छैक लोक अपनेसँ विश्वासघात करैए मात्र प्रीतक आखर-आखर धारके मोन छैक हारि गेलासँ लाभे-लाभ हेबाक अवसर जीतक आखर-आखर धारके मोन छैक नहि देखबिऔक डर आगिक धाह केर सीतक आखर-आखर धारके मोन छैक कट्ठा-बिग्घाक उपजा लोक तँ नहि बूझत बीतक आखर-आखर धारके मोन छैक **** वर्ण---------16******* 45 लोहछल मोनक खुरफात थिक संबंध असली हाथीक नकली दाँत थिक संबंध कोना बचतै आयोगक गठन करू अहाँ काटल गाछक नवका पात थिक संबंध केकरोसँ दोस्ती तोड़ब ओतेक सहज नै करेजमे तँ अंगदक लात थिक सबंध हटा लिअ अपन मुँहसँ मास्क तुरंत इ शुद्ध प्राणरक्षक बसात थिक सबंध बिनु बजने बैसल रहू आ तमाशा देखू बैसल बुढ़िआक शह-मात थिक सबंध **** वर्ण---------16******* 46 साओन-भादवमे तँ सुखा गेल धार एक ठोप पानि लेल बिका गेल धार पानिसँ बाढ़ि छै की बाढ़िसँ पानि देखू अपने पानिसँ दहा गेल धार कोना बचतै पिआसल ठोर आ कंठ घैलके तँ देखि कए नुका गेल धार गप्प तँ चललै बिजली आ बान्ह पर देखू सुनिते-सुनैत डेरा गेल धार कछेर पर तँ होइ छलै रसलिल्ला देखू तँ अनचोकेमे जुआ गेल धार **** वर्ण---------14******* 47 पूछए लागल पात नुका कए रातिमे बूझए लागल पात नुका कए रातिमे हम तँ बेशर्मीक हद टपि गेलहुँ हूथए लागल पात नुका कए रातिमे नै छै पाइ जे कराओत इलाज दर्दक कूथए लागल पात नुका कए रातिमे सुआद तँ लगलैक खाली शोणित केर चुसए लागल पात नुका कए रातिमे अनचिन्हार स्पर्शक रहस्य बुझलहुँ छूबए लागल पात नुका कए रातिमे **** वर्ण---------15******* 48 इजोत लेल अन्हेर नगरी जाइत लोक सपनेमे तँ सपनाक भात खाइत लोक खेत तँ आब पटाओल जाइछ शोणितसँ पानि महँक तेले जकाँ तँ छताइत लोक जकरा जतेक भेटैक सएह बड़ अगत्ती खएलाक पछातिओ तँ गुंगुआइत लोक छोड़लकै डनिञाँ तेहन ने अगिनबान मोनेमे पजरि मोनेमे पझाइत लोक बसातक कमी तँ छैक गामोक बगैचामे आक्सीजनेक बोतलमे तँ औनाइत लोक **** वर्ण---------16******* 49 सभहँक ठोर पर बस अहिंक नाम आब तँ चारु पहर बस अहिंक नाम इ संसार तँ मरैए अहाँक रुपे देखि सुन्दरताक जहर बस अहिंक नाम आब तँ किछु नहि बचल हमरा लग तँए सगरो उमर बस अहिंक नाम देखू मोनक उत्फाल करेजक बिहाड़ि आब आँखिक भमर बस अहिंक नाम नीके तँ लगैए इ दुखक गाम हमरा आब सुखक नगर बस अहिंक नाम **** वर्ण---------15******* 50 अपने रुकि गेलहुँ अनका रोकबाक चक्करमे अपने टुटि गेलहुँ अनका तोड़बाक चक्करमे एकरा हम नसीब कहू की दूनू गोटाकमिलान अपने फुटि गेलहुँ अनका फोड़बाक चक्करमे करेजक एहन उत्फाल नै बुझल छल हमरा अपने जुड़ि गेलहुँ अनका जोड़बाक चक्करमे एतेक गहींर हेतैक खाधि खत्ता थाह नहि छल अपने लुटि गेलहुँ अनका लोढ़बाक चक्करमे शिखर पर पहुँचिते लोक बनैए अनचिन्हार अपने छुटि गेलहुँ अनका छोड़बाक चक्करमे **** वर्ण---------19******* 51 हम कीनल खुशी पर नाचू कतेक हम लोहाक कंठसँ बाजू कतेक रहस्य बेपारक बुझबै नहुँ-नहुँ कमजोर हाथमे तँ तराजू कतेक आधुनिको नै उत्तर-आधुनिक जुग भावनाकेँ बेचैत लोक चालू कतेक ने माए ने बाप ने तँ भाए ने बहीनि इ सार-सरहोजि-सारि-साढ़ू कतेक मनुख तँ बनि जाइए अनचिन्हार इ जानबरक रूप चिन्हाबू कतेक **** वर्ण---------14******* 52 कथा जखन बिआहक लागल हेतैक गरीबक बेटी तँ बड्ड कानल हेतैक गोली लागल देह भेटत दसो दिशामे कुशलक खोंइछ तँ कतौ बान्हल हेतैक डेगे-डेग निद्रा देवीक प्रचार-प्रसार आब केना कहू जे केओ जागल हेतैक सड़ि गेलै एहि पोखरिक सुन्दर पानि जुग-जुगान्तरसँ नहि उड़ाहल हेतैक विश्वास करु समान कम नहि भेटत देखिऔ बाटेमे बाट भजारल हेतैक **** वर्ण---------15******* 53 कोनो सोहके केखनो नहि बिसारि राखब मोनक गाछ केखनो नहि झखारि राखब अबिते हएत मारिते रास कनैत आँखि अहाँ थोड़ेक हँसी संगमे सम्हारि राखब बहिते-बहैत बन्हा जाएब अहाँ बान्हसँ संगमे हरदम कनिकबो जुआरि राखब अबैत रहलाह नव-नव बिक्रमादित्य कन्हासँ कहिआ इ बैताल उतारि राखब नै कानू अबिते हएत रिलीफ लेने नेता घर-दुआरि बना आँगन बहारि राखब **** वर्ण---------16******* 54 बेमार छी मुदा बेमार नहि लगैत छी दबाइ खाइ से कहिओ नहि चाहैत छी हमरा अँहा नीक लगै छी सभ दिनसँ मुदा प्रेम अछि से कहि नहि पबैत छी विसर्जन बला मुरती छी हम धारमे भसा देल गेलहुँ मुदा नहि डुबैत छी सभ दिन हमरा लेल मधुश्रावनिए टेमी दगेलाक बादो नहि कुहरैत छी एकरा तँ प्रेम कहिऔ की स्वार्थ कहिऔ आब तँ हुनके इसारा पर चलैत छी **** वर्ण---------15******* 55 बाट टूटैत रहलैक हर समय लक्ष्य छूटैत रहलैक हर समय भाइ बाढ़ि-भूकंप आबै की नै आबै बान्ह टूटैत रहलैक हर समय समय सतयुग होइ की कलयुग ओ तँ लुटैत रहलैक हर समय भाइ धर्मक युद्ध होइ की अधर्मक सेना कटैत रहलैक हर समय बेसी तेज दौगने नै भेटत पदक ओ तँ खसैत रहलैक हर समय **** वर्ण---------14******* 56 बाउ किछु विरोधाभास तँ विचित्रे बुझाइत छैक देखू पेटक आगि तँ पानिसँ नहि मिझाइत छैक राम नाम तँ सत्त थिक मुदा श्मसाने धरि किएक लोक रामसँ बेसी रावणें लेल घुरिआइत छैक बम-गोली चलए लगलैक एना भए कए आब देखू फटक्को छुटला पर लोक चकुआइत छैक आब लोक छल-छद्म करए लगलै खुल्लमखुल्ला शांति-महल पर युद्ध पताका फहराइत छैक जले जिनगी थिक भेटत हरेक पोथीमे लिखल बाढ़िमे तँए चारु दिस जिनगीए देखाइत छैक **** वर्ण---------19******* 57 जँ देशमे आरो अन्ना हेतै तँ इ भ्रष्टाचार सुन्ना हेतै या तँ पुलिस या सरकार दुन्नू दलालक मुन्ना हेतै सत्य तँ निकलबे करतै बान्हल कतबो जुन्ना हेतै लिखेतै इतिहास खूनसँ गजल हमर पन्ना हेतै जे बदलतै अधलाहकेँ ओ अकासमे चन्ना हेतै **** वर्ण---------10******* सोलह अगस्त 2011सँ महात्मा गाँधीक दोसर रूप अन्ना हजारे द्वारा कएल गेल भ्रष्टाचार विरोधी अनशनकेँ समर्थनमे लिखल गेल। 58 हमर मोन नहि भरैए मिलनक बेरमे इ तँ अनचिन्हार बुझैए मिलनक बेरमे जेहने विरह हो तेहने सिनेह सदिखन अनचिन्हार मोन पड़ैए मिलनक बेरमे इ जे देखै छी हमर देहक भाषा- अभिलाषा आब अनचिन्हार कहैए मिलनक बेरमे आब भगवानो जनैत छथिन्ह मोनक बात देखू अनचिन्हार अबैए मिलनक बेरमे हुनक रीत हुनकर प्रीत हुनकर गीत आब अनचिन्हार लगैए मिलनक बेरमे **** वर्ण---------19******* 59 अहाँ गप्प हमरा संग एहिना करैत रहू आ एहिना मोन हमर अहाँ जुड़बैत रहू ने तँ मोन भरतै ने करेज भरतै केकरो हम अँहाके छूब अहाँ हमरा छूबैत रहू चलू दोस्त नहि दुश्मने बनि जाउ हमर आ करेजसँ करेज भिरा अहाँ लड़ैत रहू बरसतै अमरित केर बरखा करेजमे बस खाली अहाँ कनडेरिए तँ देखैत रहू अनचिन्हार लिखत प्रेमक पाँति गजलमे करेज पर हाथ राखि एकरा पढ़ैत रहू **** वर्ण---------17******* 60 सोना भेटत सस्ता महँग चाउर देखब एक दिन लोक एहिना तँ लूटत हबाउर देखब एक दिन देशमे लोकसभा-विधानसभा बनि गेल शोकसभा भूखल जनता तँ देतै धमाउर देखब एक दिन हुनकर धोधिए देखि तँ मेटा गेल आब भूख हमर अहूँ तँ एहिना करब चराउर देखब एक दिन एकौ बेर देखि लेत हमरा अहाँके संग मे सजनी तँ लोक जरत आ बनत छाउर देखब एक दिन नोरक खिच्चरि दर्दक तिलबा आ कष्टक चुड़लाइ एहिना अनचिन्हारक जड़ाउर देखब एक दिन **** वर्ण---------20******* 61 आब दर्दक गीत गबैए अनचिन्हार टूटल करेजके जोड़ैए अनचिन्हार नै होइए भेंट-घाँट हुनकासँ केखनो सपनेमे तँ देह छूबैए अनचिन्हार जखने सटलै ठोरसँ ठोर तखनेसँ प्रेम संसारमे घुमैए अनचिन्हार जहिआसँ हुनका देखलक अझक्केमे सपनेमे करोट फेरैए अनचिन्हार जते मँहगाइ छै तते आमदनी नहि दलाल लग बेटा बेचैए अनचिन्हार **** वर्ण---------15******* 62 भाइ छोट्टे सन डिबिआ बारि दिऔ अहाँ अन्हारक जड़ि उखाड़ि दिऔ जँ काज नहि हुअए सोंझ ढ़गे तँ सौंसे भाभट अपन पसारि दिऔ भुतिआ गेलै मनुखताइ मोनसँ कुशलक खढ़ी कने उचारि दिऔ अनचिन्हारक मोन भीजल काठ कने प्रेमक आगि तँ पजारि दिऔ नीक काजके जे रोकत संसारमे कने डाँड़ ओकर तँ ससारि दिऔ **** वर्ण---------13******* 63 जादू-मंतर मारि देलकै ओ जाइत-जाइत मोन केकरो हरि लेलकै ओ जाइत-जाइत जकरा अबिते भोर आबि गेलै ठोर पर आँखिमे साँझ आनि देलकै ओ जाइत-जाइत हाथ थरथराइत छलैक फूलों तोड़बासँ कोमल मोन तोड़ि देलकै ओ जाइत-जाइत उखरल छलैक सुलबाइ मुदा तैओ देखू आँकर-लोहा पचा लेलकै ओ जाइत-जाइत अनचिन्हारक ठोर सटलै अनचिन्हारसँ मुदा मुँह तँ घुमा लेलकै ओ जाइत-जाइत **** वर्ण---------17******* 65 ने केकरो हीत ने तँ मुद्दैआ छी हम अपने विरुद्धक लड़बैआ छी हम हमर टूटल पाँखि देखि हँसू नहि फाटल अकासक तँ चिड़ैआ छी हम आरि लेल मारि करब नीको-बेजाओ प्रेम-घृणाक तँ नीक गबैआ छी हम इ जरुरी नहि जे जश भेटबे करत नोंत देनिहार तँ घरबैआ छी हम सम्मानक हमर नै तँ केकर हेतैक ने सेर ने सवा-सेर अढ़ैआ छी हम **** वर्ण---------14******* 65 शब्दक बरखासँ जरैत छी किएक प्रेमक चरचासँ डरैत छी किएक हमर गजल कोनो लाल रंग नहि एना साँढ़ जकाँ भरतैक छी किएक हम अँहाक दुश्मन छी सभदिनुका एहन फूसि अहाँ बजैत छी किएक कहू ने जे इ थन महँक दूध चाही इ पड़रु जकाँ चुकरैत छी किएक बिना कनने ओहो नै दूध पिआएत तखन चुपचाप रहैत छी किएक **** वर्ण---------14******* 66 कोम्हरसँ अएलै एहन फसादी रे जान रे जान की लगलै बड़का पसाही रे जान ओ जे मोटेलै बलू से कोना मोटेलै रे जान खेने हेतै सभटा धन सरकारी रे जान ओ तँ काजो करैए उपरसँ लातो खाइए होइए एहने बुड़िबक बिहारी रे जान पघिलैए जे लोहे जकाँ जमैए मोमे जकाँ रे जान की कहबै ओहए सुतारी रे जान हेतै कोना समाधान हड़तालेसँ रे जान रे जान की तोड़बै कोना इ दिहाड़ी रे जान **** वर्ण---------16******* 67 जहाँ देखलहुँ घर तहीँ धड़ खसा लेलहुँ अँसगरेंमे तँ अपन जिनगी बसा लेलहुँ लोक तँ फेकैत रहल पाथर पर पाथर तकरे बीझि-बीझि एकटा घर बना लेलहुँ झोल लागल देबाल पर टाँगल छै उदासी अँहाक हँसी टाँगि हम ओकरा सजा लेलहुँ मोनमे भूर छातीमे धाह मुदा देह साबुत अपन भावनाके दरबारमे नचा लेलहुँ देखू संसार तँ छोड़ि देलक हमरा कातेमे हम अपन देहके अपनेसँ भसा लेलहुँ . **** वर्ण---------17******* 68 इ गप्प जखन जड़िआ जाइत छैक मोन तँ अनेरे भरिआ जाइत छैक कण-कण जुड़ल पाथर बनि गेल भिन्न भेने उड़िआ जाइत छैक कतबो कटतै मोनक जड़ि केओ अहाँक सोहसँ हरिआ जाइत छैक अपनोके अनचिन्हार बना देलासँ अनठीओ आबि गरिआ जाइत छैक लोक जखन अबैए आमने-सामने तखने तँ बात फरिआ जाइत छैक **** वर्ण---------14******* 69 आरे तिरपित पारे तिरपित कनही कूकूर माँड़े तिरपित बैसि रहल इ सरकार चुना देशक जनता ठाढ़े तिरपित मनबैए मधुमास धनिकबा हमर भाग अखाढ़े तिरपित देखू उठौना लागल दूनू साँझ इ बाछी मुदा लथारे तिरपित कतबो झपबै नँगटिनियाँके निर्लज्जी मुदा उघाड़े तिरपित **** वर्ण---------12******* 70 अंगूर खट्टा लताम थुर्री जामुन लाल इ गाछो तँ मचा रहल बड़का बबाल अखबारी विकास आ इ जनता उदास आब तँ इ बहिरा नाचए अपने ताल देखू पाँच बरख पर सुरुज उगैए रहैए बाँकी समय तँ बदरी-बिकाल एतए लागल हाट अछि गमला केर आब तँ एतए फूल तकैए कादो-थाल देखू अनचिन्हार तँ अनचिन्हारे अछि आब चिन्हारो बनल अछि बड़का काल **** वर्ण---------15******* 71 इ तबीयत ठीक रहत जँ इ रैयत ठीक रहत खल-खल हँसती धरती जँ इ नीयत ठीक रहत हेतैक नीक देशक जँ इ जेठरैयत ठीक रहत बेकूफ बेटा टके काबिल जँ इ किस्मत ठीक रहत हेबे करतैक समाधान जँ सिकायत ठीक रहत **** वर्ण---------10******* 72 चीजे जखन बेकार छैक कमार की करतै एतए लोहार की करतै सोनार की करतै लोक जखन फँसि जाइए अपनहि जालमे तखन छिपार की करतै देखार की करतै बाउ जतए धन के घाँटी बजैत हो ओतए इ लचार की करतै आ इ पिआर की करतै खेत तँ छैक मुदा खेतिहर नहि एहिठाम आब तँ इ बाढ़ि की करतै सुखाड़ की करतै जखन बढ़ि जाए टीस तँ आशीष लग आउ इ चिन्हार की करतै अनचिन्हार की करतै **** वर्ण---------17******* 73 शराबके खराप नहि मानू सदिखन एकरा कञियें जकाँ तँ जानू सदिखन भाइ बेसी पीब तँ मोन भरि जाएत मीत अहाँ थोड़बे-थोड़ आनू सदिखन स्वर्गक सुख भेटतै जँ देखबै एम्हरो आरती छोड़ि लबनी दफानू सदिखन इ दुखक पहाड़ तँ बड़की टा हौ भाइ संगमे तँ बोतल राखि फानू सदिखन भरल छैक निशा हुनकर जौबनमे पिबै छी कनियें मुदा बेकाबू सदिखन **** वर्ण---------15******* 74 रचना कतेक टका लगतै सपना किनबाक लेल कहू जूटल घर सरदर अँगना किनबाक लेल हम तँ मुक्त छी इ लिखनाइ-पढ़नाइ-बुझनाइसँ रचना कतेक टका लगतै रचना किनबाक लेल सत्त मानू हम काज करै छी लोकतंत्रक पद्धतिए रचना कतेक टका लगतै पटना किनबाक लेल हमरा देशमे पत्रकारिता गुलाम छै टी.आर.पीक रचना कतेक टका लगतै घटना किनबाक लेल देखू आब तँ भगवानो पड़ल छथि भक्तक फेरमे रचना कतेक टका लगतै विधना किनबाक लेल **** वर्ण---------20******* 75 कहिओ सम कहिओ विषम कहिओ बेसी तँ कहिओ कम
होइत रहलै अकाल मृत्यु कहिओ गोली तँ कहिओ बम
खेलाइत रहलै देह पर कहिओ देवी तँ कहिओ जम
निकलि रहल हरेक दिन कहिओ टका तँ कहिओ दम
ठकि रहल अनचिन्हारके कहिओ अहाँ तँ कहिओ हम **** वर्ण---------11******* 76 देश चुल्हामे गेल संसदमे हल्ला मचि रहल कानून की भेल संसदमे हल्ला मचि रहल
अकाल, बाढ़ि, भूकंप इ सभ आबि चल गलैक नेताक भत्ता लेल संसदमे हल्ला मचि रहल
घोटाला पर घोटाला बैसल कमीशन जाँचक कमीशनक लेल संसदमे हल्ला मचि रहल
टूटि गेलै सपना आ मेटा गेलै आजादीक अर्थ इ दलालक खेल संसदमे हल्ला मचि रहल
एकैटा लाश तँ भेटल बाट पर अनचिन्हार ओकर जाति लेल संसदमे हल्ला मचि रहल **** वर्ण---------18******* सोलह अगस्त 2011सँ महात्मा गाँधीक दोसर रूप अन्ना हजारे द्वारा कएल गेल भ्रष्टाचार विरोधी अनशनकेँ समर्थनमे लिखल गेल। 77 यथा एन्नी तथा ओन्नी एन्नी-ओन्नी तथैव च यथा माए तथा बाप मुन्ना-मुन्नी तथैव च हमर करेज जरैए अहाँ गीत लिखै छी यथा ओ तथा अच्छर पन्ना-पन्नी तथैव च
देखहक इ बोंगहक पोता कोना करै हइ यथा मुल्ला तथा हम सुन्ना-सुन्नी तथैव च
देवतो तँ जड़ि पकड़ै हइ बचले रहू यथा मौगी तथा भूत ओझा-गुन्नी तथैव च
बान्हि भँइ दूरा पर लेबै ढ़ौआ पर ढ़ौआ यथा हम तथा तों, आ बन्ना-बन्नी तथैव च बचिअह अनचिन्हार भाइ एहि गाममे यथा साँप तथा ओ जहर चिन्नी तथैव च **** वर्ण---------16******* 78 जँ सटतै ठोर अनचिन्हारसँ तँ बुझिऔ होली छैक सदिखन बाजए केओ प्यारसँ तँ बुझिऔ होली छैक बेसी टोइया-टापर देब नीक नै भाइ सदिखन अहाँ निकलि जाएब अन्हारसँ तँ बुझिऔ होली छैक देखू केहन-केहन गर्मी मगजमे रहै छैक बंधु मनुख जँ बचि जाए गुमारसँ तँ बुझिऔ होली छैक जहाँ कनही गाएक भिन्ने बथान तहाँ सुन्न-मसान काज होइ सभहँक विचारसँ तँ बुझिऔ होली छैक की दुख होइ छै चतुर्थीक राति मे नहि बुझि सकबै सुनू जँ हँसी आबए कहार सँ तँ बुझिऔ होली छैक **** वर्ण---------20******* रुबाइ 1 हिम्मति रखने काज सदा बनि जाएत देह तँ जरत नाम मुदा रहि जाएत इ जे देखा रहल समस्या केर पहाड़ ठानि लेब तँ रुइ जकाँ उड़ि जाएत 2 भेटत खुशी केकरो देखलाक बाद केकरो ठोरसँ नाम सुनलाक बाद कहबामे लागत बरु एकै-दू छन मजा भेटत आइ लव यू कहलाक बाद 3 अपन बाँहिमे अहाँके गछारि लेब हम नजरिसँ करेजमे उतारि लेब हम एक बेर हँ तँ कहि कए देखिऔ सगरो बाट पर आँचर पसारि देब हम 4 ठोरसँ ठोर सटतै तँ गीत जनमत आँखिसँ आँखि मिलतै तँ प्रीत जनमत दुश्मनीमे जिनगी केखनो नहि बिताउ हाथमे हाथ देबै तँ मीत जनमत 5 इ जे अहाँक मूँह अछि गुलाब सन आ आँखि जे लगैए शराब सन सगरो दुनियाँ बताह भेल देखि कए मोन हमरो लगैए बताह सन 6 हमरा जीवन मे अहीं केर खगता अहाँ बिना पड़लै करेज हमर परता खेलाइत रहू अहाँ हमरा मोन मे बनू अहाँ देवी हम बनब भगता 7 हमरा ठोरक पिआस भेल छी अहाँ हमरा मोनक हुलास भेल छी अहाँ हम बिसरि ने पाएब अहाँ के कहिओ टूटल करेजक विश्वास भेल छी अहाँ 8 ओ मोन पड़ै छथि तँ निन्न ने अबैए देह होइए सुन्न नीको ने लगैए चाहै छी हम जे ओ हमरे लग रहथि ओ तँ ओ हुनक इयादो ने अबैए 9 हुनका सँ दूर करबा पर बिर्त लोक अकास मे भूर करबा पर बिर्त लोक हमही मरब हुनकर प्रेम मे या तँ अपटी खेत मे मरबा पर बिर्त लोक 10 एकटा हाथ बढ़लै हमरा दिस एकटा डेग उठलै हमरा दिस एतेक बड़का गप्प कोना कहू एकटा नजरि उठलै हमरा दिस 11 रूपक रौद सँ जौबन पघलि जाएत अहाँक श्वास सँ बसातो गमकि जाएत अहाँक चलब करबैए मारि सगरो ठमकब तँ मोन कने सम्हरि जाएत 12 जहिआ हमर पिआर के जानब अहाँ तहिआ ओकर तागति मानब अहाँ आइ भने बिता लेब राति सूति कए काल्हि सँ आँगुर पर दिन गानब अहाँ 13 सपना जखन केकरो टूटि जाइत छैक मोनक बात मोने मे रहि जाइत छैक विश्वास सँ बड़का धोखा कोनो ने टूटल करेज इ बात कहि जाइत छैक 14 हुनका देखने उमकैए मोन हमर संग मे रहने रभसैए मोन हमर ओ जखन अबै छथि हमरा सोझाँ मे सभटा झंझटि बिसरैए मोन हमर 15 माटि मे पानि मे आगि आ बसात मे दिन मे राति मे साँझ आ परात मे देखाइ छी अहीं खाली चारु दिस केहन तागति अछि अहाँक इयाद मे 16 कहब कतेक बात अहाँ सँ हम सजनी चलब कने दूर अहाँ संग हम सजनी जँ पकड़बै अपन हाथ सँ हाथ हमर जीबैत रहब बहुत दिन धरि हम सजनी 17 बहुत बात रहि गेल घोलफच्चका मे साँप-मगरमच्छ घूमि रहल चभच्चा मे अहिंसा होइए सभ सँ नीक बुझलहुँ राम-रज्यक कल्पना उठैए लुच्चा मे 18 देह मोन एकै मिलन के बेर मे रूप-रंग एकै मिलन के बेर मे अहाँ भने चल जाउ दूर हमरा सँ प्रेमक दर्द एकै मिलन के बेर मे 19 हुनका जँ देखितहुँ तरि जइतहुँ हम ओकरा पछाति बरु मरि जइतहुँ हम अहाँ केर आँखिक निशा एहन नीक जँ पीबितहुँ तँ सम्हरि जइतहुँ हम 20 हुनका अबिते मोन हमर हरिआ गेल आँखिक बात मोन मे फरिआ गेल ओ केलथि केहन जादू हमरा पर हुनक इयाद अबिते मोन भरिआ गेल 21 हुनका लेल रूप सजा लेबाक चाही आइ जबानी के लुटा देबाक चाही काज नहि इजोत के हमरा-हुनका लग इजोत लेल घोघ उठा लेबाक चाही 22 जँ खोट ने रहतै सरकारक नेत मे अनाज उपजबे करतै हमरो खेत मे पसारए ने पड़तै हाथ दोसर ठाम रहतै किछु कोठी आ किछु पेट मे 23 चाम जँ अहाँक चाम सँ भीरि जेतै बूझू मरलो मुरदा जीबि जेतै इ प्रेमक आगि बड्ड कड़गर आगि बूझू पाकलो बाँस लीबि जेतै 24 जखन हुनकर घोघ उठेलहुँ सच मानू आँखिक निशा सँ मतेलहुँ सच मानू हुनक रूप भमर जाल लगैए हमरा तैओ हुनके सँ नेह लगेलहुँ सच मानू 25 एहि पार हम ओहि पार अहाँ बैसल छी मुदा एक दोसराक करेज मे पैसल छी जहाँ धरि देखी अहीँ देखाइ छी हमरा देखू हमरो दिस एना अहाँ किएक रूसल छी 26 कते दिन जिबैत रहब उधार के जिन्दगी जिबैत रहू सदिखन पिआर के जिन्दगी ने काज आएत समय पर ई धन-बीत बिका जाएत पाइ-पाइ मे हजार के जिन्दगी 27 रूप देखा बताह बना देलक छौंड़ी सूतल मोन के जगा देलक छौंड़ी की कहू छल ओ केहन हरजाइ अचके मे हमरा कना देलक छौंड़ी 28 अपन करेज अपने सँ डाहि लेब हम प्रेमक महल अपने सँ ढ़ाहि लेब हम अहाँ जा सकै छी हमरा जिनगी सँ असगरे कत्तौ जिनगी काटि लेब हम 29 इ जे अहाँक मूँह अछि गुलाब सन आ आँखि लगैए अहाँक शराब सन सगरो दुनियाँ बताह भेल देखि कए मोन हमरो होइत रहैए खराब सन 30 नोर बनि आँखि मे आबि जाउ गीत बनि ठोर पर गाबि जाउ बढ़ि गेल दूरी संगो रहैत के कतेक दूर प्रेम सँ नापि जाउ 31 हुनका देखिते बजा गेल आइ लव यू मोन करेज पर लिखा गेल आइ लव यू आब एकरा प्रेम कहू की बतहपनी सुतली राति मे बजा गेल आइ लव यू 32 प्रेम मे खून सुखा नोर बनि जाएत हुनक ठोरक हँसी भोर बनि जाएत चिन्हार मरबे करत हुनका देखि-देखि अनचिन्हार जीबि चितचोर बनि जाएत कता 1 जकर अगैंठीमोड़ एतेक सुन्दर तकर देहक हिलकोर केहन हेतैक जकर आँखिक नोर एतेक सुन्दर तकर हँसी भरल ठोर केहन हेतैक 2 देखिते हुनका करेजक गाछ मजरि गेल प्रेम गमकए लागल पहिल गोपी जकाँ लगबिते चोभा गिनगी हमर सम्हरि गेल बनि गेलहुँ हम कृष्ण अहाँ गोपी जकाँ विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत १.ज्योति सुनीत चौधरी २.श्वेता झा (सिंगापुर) ३.गुंजन कर्ण १. ज्योति सुनीत चौधरी जन्म तिथि -३० दिसम्बर १९७८; जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी ; शिक्षा- स्वामी विवेकानन्द मिडिल स्कूल़ टिस्को साकची गर्ल्स हाई स्कूल़, मिसेज के एम पी एम इन्टर कालेज़, इन्दिरा गान्धी ओपन यूनिवर्सिटी, आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी); निवास स्थान- लन्दन, यू.के.; पिता- श्री शुभंकर झा, ज़मशेदपुर; माता- श्रीमती सुधा झा, शिवीपट्टी। ज्योतिकेँwww.poetry.comसँ संपादकक चॉयस अवार्ड (अंग्रेजी पद्यक हेतु) भेटल छन्हि। हुनकर अंग्रेजी पद्य किछु दिन धरि www.poetrysoup.com केर मुख्य पृष्ठ पर सेहो रहल अछि। ज्योति मिथिला चित्रकलामे सेहो पारंगत छथि आ हिनकर मिथिला चित्रकलाक प्रदर्शनी ईलिंग आर्ट ग्रुप केर अंतर्गत ईलिंग ब्रॊडवे, लंडनमे प्रदर्शित कएल गेल अछि। कविता संग्रह ’अर्चिस्’ प्रकाशित। २.श्वेता झा (सिंगापुर) ३.गुंजन कर्ण राँटी मधुबनी, सम्प्रति यू.के.मे रहै छथि। www.madhubaniarts.co.uk पर हुनकर कलाकृति देखि सकै छी। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३. रवि भूषण पाठक निरालाःदेहविदेह -४ (निराला हिन्दीसँ मैथिलीमे) छाड़ल कारी कारी बादर एला नइ वीर जवाहर लाल केहन केहन नाचए अधसर नइ एला वीर जवाहर लाल चमकल बिजुरी फन पसारि के नइ एला वीर जवाहर लाल सोझ करू उलटल माथ के ससरैत फूफू करए माथ पर नइ एला वीर जवाहर लाल पूरबा अलगे फूफकारइ छइ प्रतिक्षण विष बकुटि बरसाबइ छुपल कोन गुफा मे हम सब नइ एला वीर जवाहर लाल मंहगाई के बाढ़ि बढ़ल अछि सबके संचित निधि लुटल अछि भुक्खल नॉंगर ठाढ़ लजाबथि नइ एला वीर जवाहर लाल कोना बचउँ बिन भाला लाठी बहल भसल सभ मित्र मंडली राह देखइ छी ,किछु नइ बुझइ छी नइ एला वीर जवाहर लाल ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते बालानां कृते १. प्रकाश प्रेम २दमन कुमार झा १ प्रकाश प्रेमी ,जनकपुर बौवा करबा की ?
उचझष्मगपजबलब२नmबष्।िअयm देशक हाल बेहाल छै बौवा करबा की ? नेता बनल बैमान बौवा करबा की ? जीत पठाओल बौवा जकरा संसदमे वाएह बनल गद्दार बौवा करबा की ? देशक हाल बेहाल छै बौवा करबा की ? नङ्गरी सुटका बैसल सभासद संसदमे बनि बडका बुधियार बौवा करबा की ? कएने छै अगोरिया एखनो पद्देके लेल बेच अपन ईमान बौवा करबा की ? देशक हाल बेहाल छै बौवा करबा की ?
लेस रहल छै जाति धरम आ भाषा भेषक कोने कोन पसाही बौवा करबा की ? कना रहल छै जनता के हक्कन लगा द्वन्द अगराही बौवा करबा की ? देशक हाल बेहाल छै बौवा करबा की ? जरा रहल छै स्वार्थक खातिर टोल टोल आ गाम बौवा करबा की ? नै छै धधकैत देशक चिन्ता छै कुर्सी पर ध्यान बौवा करबा की ? देशक हाल बेहाल छै बौवा करबा की ?
रक्तमय धर्तीक चितकार कोनाक सुुुुनत के मुनि बैसल सब कान बौवा करबा की ? सिंचल जकरा सोनित भैर भैर सएह बनल आइ आन बौवा करबा की ? देशक हाल बेहाल छै बौवा करबा की ? बन्दी बना अधिकार जे बैसल नेता शिर्ष महान बौवा करबा की ? खोलि कोना स्वतन्त्रता बांटत बटनाहर सैतान बौवा करबा की ? देशक हाल बेहाल छै बौवा करबा की ? कहि रहल छै बुत्ता छ त ला अधिकार शासन हमर पुस्तैनि तु करबा की ? मोछ पिजा उठोने मmण्डा जिद्दक लेल लरबा लेल ललकारै बौव करबा की ? लरबा लेल ललकारै बौव करबा की ? देशक हाल बेहाल छै बौवा करबा की ?
२ दमन कुमार झा हीरा - मोती ................................................ अमन आ चमन दुनू मित्र छल .पहलवान छल .दुनू खूब शक्तिशाली छल.मुदा ओ अपन बलक प्रयोग नीक काज करवा मे नहि अपितु चोरी - डकैती करवा मे करैत छल . एक दिन दुनू चोरि करवाक निमित्ते घर सं बहराएल .अन्हरिया राति छल .हवा जोर जोर सं बहि रहल छल .झिंगुरक झंकार वातावरण कें डराओन बनने छल .ई दुनू दबले पैरे जा रहल छल .जखन किछु दूर गेल तं गप करवाक आवाज सुनाई देलकै .एकरा दुनू कें कान ठाढ़ भेलै.ई दुनू ओन्हरे बिदा भेल .किछु दूर गेल तं आवाज आर स्पष्ट भेलै .दुनू यात्री अपना मे गप क रहल छल .डर नहि हो ,तें जोर जोर सं बाजि रहल छल.पहिल बाजल -- रे भाइ , हमरा लग एहन मूल्यवान हीरा अछि जे मरै काल तक रखने रहब .एहि पर दोसर बाजल -- रे भाइ , हमरा लग एहन मोती अछि जे राजा - महाराजा लग नहि छनि .ओ मोती हरदम हम अपने लग जोगा क रखने रहैत छी . दुनूक गप सुनि चोर सभ खूब प्रसन्न भेल .गामक सुनसान जगह पर अबिते दुनू कें पाछू सं चक्कू सटा देलकै .अमन जोर सं बाजल -- सावधान ...? दुनू यात्री अवाक. पुनः गरजि क बाजल - तोरा सभ लग जतेक हीरा -मोती छओ निकल .......नहि तं एतहि खतम क देबौ .ओही मे सं एकटा बाजल -हमरा सभ लग किछु नहि अछि.ताहि पर दोसर चोर चमन गरजि उठल--चुप ...एखन हीरा -मोतीक गप करै छलें .......निकल जल्दी .नहि तं जान मारि देबौ .दुनू कलपति बाजल -- हम सभ ओहिना गप करै छलहुं .डर नहि हुअय तें जोर सं बजैत छलहुं .हमरा सभ कें नहि मारू .......हमरा सभ लग किछु नहि अछि . चुप्प ....... चोर जोर सं बाजल .ओमहर दऽ कऽ घोड़सवार जा रहल छल .ओकरा संदेह भेलै .ओ घोड़ा पर सं उतरि हाथ मे लाठी लऽ ओम्हरे बिदा भेल .जाबे-जाबे चोर किछु करय ता घोड़सवार दुनू कें एहन लाठी मारलक जे दुनू अचेत भ गेल आ हाथ सं चक्कू खसि पडलइ .आब तीनू मिलि क दुनू चोर कें पकड़ि लेलक .घोड़सवार दुनू कें बान्हिक घोड़ा संग दोडबैत ल जाय चाहैत छल .मुदा ई दुनू घोड़सवार कें धन्यबाद दैत बाजल --एकरा दुनू कें छोडि दियौ .हम माफ़ केलियै. एकरा हीरा -मोती चाहियइ ने .....दऽ देबइ .घोड़सवार चौकल -अहाँ ई की करैत छी..?अतेक अमूल्य चीज ओकरा दैत छीयै. हं... मुदा एक शर्त पर-- ओ बाजल. ओकरा ई दुनू चीज हरदम संग मे रख पड़तै. दुनू चोर मुड़ी झुलेलक .पहिल बाजल ---हमरा लग सत्य रूपी हीरा अछि .तं दोसर बाजल --हमरा लग प्रेम रूपी मोती अछि .जं हमरालोकनि एकरा दुनू चीज दऽ देबइ तं दुनियाँक सभ काज क सकैत अछि .सुखी आ खुशी सं रहि सकैत अछि .अपन शक्तिक उपयोग नीक काज लेल क सकैत अछि .सत- पथ पर चलि विजय भ सकैत अछि . दुनू चोर ई बात सुनि दुनुक पैर पर खसि पडल ................किछु दिन बाद अमन आ चमन अपन मेहनतक बल पर ,सत्य -अहिंसाक मार्ग पर चलि क ,सुख चैन सं जीवन बितबैत ,गामक प्रतिष्टित लोक मे गनल जाय लगलाह। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma 1. Episodes Of The Life - ("Kist-Kist Jeevan" by Smt. shefalika Varma translated into English by Smt. Jyoti Jha Chaudhary ) 2.Original Poem in Maithili by Kalikant Jha "Buch" Translated into English by Jyoti Jha Chaudhary १ Episodes Of The Life - ("Kist-Kist Jeevan" by Smt. shefalika Varma translated into English by Smt. Jyoti Jha Chaudhary ) Shefalika Verma has written two outstanding books in Maithili; one a book of poems titled “BHAVANJALI”, and the other, a book of short stories titled “YAYAVARI”. Her Maithili Books have been translated into many languages including Hindi, English, Oriya, Gujarati, Dogri and others. She is frequently invited to the India Poetry Recital Festivals as her fans and friends are important people.
Translator:Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor's choice award from www.poetry.comand her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London."ARCHIS"- COLLECTION OF MAITHILI HAIKUS AND POEMS. Episodes Of The Life : My husband Lallan Kumar Verma, who was also a senior advocate in Patna High Court, he left this world, whatever is the spiritual reason, but the mismanagement of the Indira Gandhi Institute of Cardiology is responsible for that. Nobody can stop the death made by God but can the condition of the emergency department of a hospital be so bad? Is this system correct- rusted equipments, departments lacking life-saving medicines, empty cylinders of oxygen, broken electric shak, are doctors so heartless? To run their private nursing homes the institutes like Cardiology can be neglected so badly? There are only those machines left that turn the present into the past – and nothing else, nothing else, I hate doctors. If doctors start treatment immediately and patients don’t survive at last after their full efforts then we can console ourselves that the doctors tried their best but the God was not in favour. And the papers started turning in front of my eyes- his poems, the letters from Kedarji, Neeraja, Manoranjanji- everything was irritating my eyes like hot chilli, there was no tear in my eyes only the inflammation- inflammation of fire, inflamation of chilli. Respected Didiji ! Saadar Naman, We are very distressed to know the sudden death of respected Vermaji. We can only try to understand how deeply hurtful this situation is for you. Thinking about the anguish of the sudden end of the company of a talented and favouring life partner itself fills the heart with stress. This is the peculiarity of this world. This always moves, keeps changing, who was present now they are no more and who are present now will die in future. You know this reality more than I know. Please don’t lose your patience. Your sons, daughters and other kids need your blessings and company. Try to console your heart by seeing the image of Vermaji in the face of your sons. It seems that I can perceive the floating emptiness on your ever smling face from here. May God give you energy and patience to tolerate this agony. With the wish that your surrounding and friends could help you in overcoming the grief of Vermaji’s demise I pray the almighty God to give divine peace to the great soul of Vermaji. Your Younger Brother(like) Kedar Nath Sharma The Department of Sanskrit 24-12-2001 २ Kalikant Jha "Buch" 1934-2009, Birth place- village Karian, District- Samastipur (Karian is birth place of famous Indian Nyaiyyayik philosopher Udayanacharya), Father Late Pt. Rajkishor Jha was first headmaster of village middle school. Mother Late Kala Devi was housewife. After completing Intermediate education started job block office of Govt. of Bihar.published in Mithila Mihir, Mati-pani, Bhakha, and Maithili Akademi magazine. Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor's choice award from www.poetry.comand her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London. The Separated Radha Shyam, It’s bad to have love for other, So forget me, forget me, oh dear! If you save the beauty in your heart considering diya Enlighten it with the thread of affection and oil of love Your life will be burned to vanish So forget me, forget me, oh dear! I am the first star of the evening in the Madhuban You establish your palace in Dwarika forever Inexplicable rumours are spread all over So forget me, forget me, oh dear! I am an exceptional mate for purely raas A beloved Gopika of the cogent secrecy Lost my interest for the bank of the river easily So forget me, forget me, oh dear! Dive into your mind and fill up some sea water Keep the sympathy in the palace of ice I will be there as a heat sensed inside So forget me, forget me, oh dear! _____________________________________________ Tedium The world is temporary and filled with the mounts of sorrows The spring of tears is overflowing with roar How can I save others I am sinking myself How will I please others I am dripping as a coral jasmine (flower) In the clutter of the God the ocean of this world is contaminated The spring of tears is overflowing with roar I am shivering like a deer Hiding my body with limited cloth (jhankhur) Watching the ultimate destiny of this world I am measuring today’s life How will I cross my life whereas enemies are at each step The spring of tears is overflowing with roar In the insensitive world of separation The hard heart of day is burnt The night is dressed as a saint The fire is set under veil Where are the kahar carrying the body of the lifetime separation to The spring of tears is overflowing with roar (special note: this poem is written by the poet in 1990 when poet’s beloved wife passed away expressing grief of separation) Send your comments to ggajendra@videha.com Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.) Output: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) English to Maithili Maithili to English इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड़ / बड़ी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढ़इन बढ़न्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय Festivals of Mithila DATE-LIST (year- 2011-12) (१४१९ साल) Marriage Days: Nov.2011- 20,21,23,25,27,30 Dec.2011- 1,5,9 January 2012- 18,19,20,23,25,27,29 Feb.2012- 2,3,8,9,10,16,17,19,23,24,29 March 2012- 1,8,9,12 April 2012- 15,16,18,25,26 June 2012- 8,13,24,25,28,29 Upanayana Days: February 2012- 2,3,24,26 March 2012- 4 April 2012- 1,2,26 June 2012- 22 Dviragaman Din: November 2011- 27,30 December 2011- 1,2,5,7,9,12 February 2012- 22,23,24,26,27,29 March 2012- 1,2,4,5,9,11,12 April 2012- 23,25,26,29 May 2012- 2,3,4,6,7 Mundan Din: December 2011- 1,5 January 201225,26,30 March 2012- 12 April 2012- 26 May 2012- 23,25,31 June 2012- 8,21,22,29 FESTIVALS OF MITHILA Mauna Panchami-20 July Madhushravani- 2 August Nag Panchami- 4 August Raksha Bandhan- 13 Aug Krishnastami- 21 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 29 August Hartalika Teej- 31 August ChauthChandra-1 September Karma Dharma Ekadashi-8 September Indra Pooja Aarambh- 9 September Anant Caturdashi- 11 Sep Agastyarghadaan- 12 Sep Pitri Paksha begins- 13 Sep Mahalaya Aarambh- 13 September Vishwakarma Pooja- 17 September Jimootavahan Vrata/ Jitia-20 September Matri Navami- 21September Kalashsthapan- 28 September Belnauti- 2 October Patrika Pravesh- 3 October Mahastami- 4 October Maha Navami - 5 October Vijaya Dashami- 6 October Kojagara- 11 Oct Dhanteras- 24 October Diyabati, shyama pooja-26 October Annakoota/ Govardhana Pooja-27 October Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja-28 October Chhathi-kharna -31 October Chhathi- sayankalik arghya - 1 November Devotthan Ekadashi- 17 November Sama poojarambh- 2 November Kartik Poornima/ Sama Bisarjan- 10 Nov ravivratarambh- 27 November Navanna parvan- 29 November Vivaha Panchmi- 29 November Makara/ Teela Sankranti-15 Jan Naraknivaran chaturdashi- 21 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 28 January Achla Saptmi- 30 January Mahashivaratri-20 February Holikadahan-Fagua-7 March Holi-9 Mar Varuni Yoga-20 March Chaiti navaratrarambh- 23 March Chaiti Chhathi vrata-29 March Ram Navami- 1 April Mesha Sankranti-Satuani-13 April Jurishital-14 April Akshaya Tritiya-24 April Ravi Brat Ant- 29 April Janaki Navami- 30 April Vat Savitri-barasait- 20 May Ganga Dashhara-30 May Somavati Amavasya Vrata- 18 June Jagannath Rath Yatra- 21 June Hari Sayan Ekadashi- 30 June Aashadhi Guru Poornima-3 Jul 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma Original Poem in Maithili by Kalikant Jha "Buch" Translated into English by Jyoti Jha Chaudhary Kalikant Jha "Buch" 1934-2009, Birth place- village Karian, District- Samastipur (Karian is birth place of famous Indian Nyaiyyayik philosopher Udayanacharya), Father Late Pt. Rajkishor Jha was first headmaster of village middle school. Mother Late Kala Devi was housewife. After completing Intermediate education started job block office of Govt. of Bihar.published in Mithila Mihir, Mati-pani, Bhakha, and Maithili Akademi magazine. Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor's choice award from www.poetry.comand her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London. Kavi Kokil Vidyapati Because of whom our native language got a life That world-renowned nightingale poet’s name is Vidyapati A new hope in the Mithilanchal Our language is spread in each house Kind emotions and colourful thoughts Stability in mind and woman in the vision Created the God Shiva under the veil That world-renowned nightingale poet’s name is Vidyapati The shade of yoga in the bed of enjoyment The illusion of personality is immeasurable The triveni is immerged in the belly The shrine resides with the beauty The sun of creation shined in the kaalratri of rituals That world-renowned nightingale poet’s name is Vidyapati Face is like spring, bhado (rainy season) in eyes The flow is pure, bank is muddy Like leaves of lotus in the water Like flow of nectar in the desert Singing the song for Radha but keeping Madhav in the mind That world-renowned nightingale poet’s name is Vidyapati Vidyapati nagaram is blessed With Visfisut, Truth, Shiva and Virtue Remnant after being burnt out Mahesh is immortal after death The entrance is adorned with gold but inside is crematorium That world-renowned nightingale poet’s name is Vidyapati Send your comments to ggajendra@videha.com VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाऊ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha VIDEHA केर सदस्यता लिअ Top of Form Bottom of Form ईमेल : एहि समूहपर जाऊ २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ Top of Form Subscribe to VIDEHA Powered by us.groups.yahoo.com Bottom of Form २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २५. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइट http://www.shruti-publication.com/ पर । महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे। कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७ Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding: Language:Maithili ६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india) (add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)
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Details for purchase available at print-version publishers's site website: http://www.shruti-publication.com/ or you may write to e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com विदेह: सदेह : १: २: ३: ४ तिरहुता : देवनागरी "विदेह" क, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। विदेह:सदेह:१: २: ३: ४ सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com २. संदेश- [ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ] १.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत। २.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी। ३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत। ४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन। ५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी। ६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। १०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। १२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। १४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी। १५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी। १६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिंट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे। मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)... अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग। १७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल। १८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई। १९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत। २०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ। २१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ। २२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य। २३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई। २४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि। २५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर) २६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक। २७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत। २८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी। २९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना। ३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी। ३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि। ३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई। ३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई। ३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई। ३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक। ३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ। ३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम। ३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना। ३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ। ४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल। ४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई। ४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य। ४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना। ४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि। ४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक। ४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत। ४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि। ४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रशंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत। ४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना। ५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना। ५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना। ५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल। ५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना। ५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक अनेक धन्यवाद; कतेक बरखसँ हम नेयारैत छलहुँ जे सभ पैघ शहरमे मैथिली लाइब्रेरीक स्थापना होअए, अहाँ ओकरा वेबपर कऽ रहल छी, अनेक धन्यवाद। ५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना। ५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल। ५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई। ५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि। ५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी। ६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि। ६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब। ६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी। ६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही। ६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय। ६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना। ६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय। ६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह। ६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना । ६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ। ७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक) ७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि। ७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि। ७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि। ७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना। ७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि। ७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि। ७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि। ७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल। ७९. श्री हीरेन्द्र कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-११. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति सुनीत चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ एहिमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-11 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ८९ म अंक ०१ सितम्बर २०११ (वर्ष ४ मास ४५ अंक ८९)http://www.videha.co.in/ मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई 'विदेह' ८९ म अंक ०१ सितम्बर २०११ (वर्ष ४ मास ४५ अंक ८९)http://www.videha.co.in/ मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA
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