768 767 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ९५ म अंक ०१ दिसम्बर २०११ (वर्ष ४ मास ४८ अंक ९५) वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own script Roman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.हम पुछैत छी : विदेह ई-पत्रिकाक सहायक सम्पादक मुन्नाजीक संग रामभरोस कापड़ि “भ्रमर”क बातचीत २.२.हम पुछैत छी- बृषेश चन्द्र लालजी सँ मुन्नाजी पुछैत छथि ढेर रास गप २.३. मुन्नाजीसँ रमेश रंजनक अन्तर्वार्ता २.४.श्री राजेन्द्र बिमलसँ हुनक रचना यात्रा मादेँ गप केलनि विहनि कथा रचनाकार श्री मुन्नाजी २.५.गजेन्द्र ठाकुर- उल्कामुख (आगाँ) २.६.१.सत्यनारायण झा- पलट २. जवाहर लाल कश्यप- अर्धसत्य २.७.ओमप्रकाश झा - कथा- डीहक जमीन २.८.१.मनोज झा मुक्ति- विद्यापति स्मृति समारोह वास्ते हमर दरभंगा यात्रा २. नरेन्द्र मिश्र ३.नवेंदु कुमार झा- मिथिला राज्यक विरोध मे उतरलाह डा॰ मिश्र/ पर्यटनक उद्योग पर सरकारक बढ़ल जोर विकसित होएत हलेश्वर पुनौरा आ पंथपाकर/ लोकायुक्तक मामिला मे सत्ता आ विपक्ष मे गतिरोध/ मनाओल गेल दरभंगा महाराजक जन्म दिवस/ प्रदेश मे खूजत पशु विश्वविद्यालय/ टाका नहि खर्च कएला पर बंद होएत आवंटन ४.प्रभात राय भट्ट- रोटी रोजीक खोजी ३. पद्य ३.१.१.गुलसारिका २. भावना नवीन ३.२.ओमप्रकाश झा ३.३.१. जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ २.मिहिर झा ३.जगदानंद झा 'मनु' ३.४.१.शिवशंकर सिंह ठाकुर २.अमित मोहन झा ३. रवि मिश्रा’भारद्वाज’ ३.५.१.अनिल मल्लिक २उमेश पासवान ३.जगदीश प्रसाद मण्डल ४. मुन्नाजी हाइकू ३.६.१. अन्जनी कुमार वर्मा २.रामबिलास साह ३.७.१.डॉ॰ शशिधर कुमर २ नवीन कुमार "आशा" ३.८.१.प्रभात राय भट्ट २. अमरेन्द्र कुमार मिश्र ४. मिथिला कला-संगीत-१.ज्योति सुनीत चौधरी २.श्वेता झा (सिंगापुर) ३.गुंजन कर्ण ४.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) ५. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी) ६.बालानां कृते-डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” ७. भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 9. VIDEHA MAITHILI SAMSKRIT EDUCATION बिपिन कुमार झा-संवादः(contd.) विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक विदेह आर.एस.एस.फीड। "विदेह" ई-पत्रिका ई-पत्रसँ प्राप्त करू। अपन मित्रकेँ विदेहक विषयमे सूचित करू। ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ Videha Radio मैथिली देवनागरी वा मिथिलाक्षरमे नहि देखि/ लिखि पाबि रहल छी, (cannot see/write Maithili in Devanagari/ Mithilakshara follow links below or contact at ggajendra@videha.com) तँ एहि हेतु नीचाँक लिंक सभ पर जाऊ। संगहि विदेहक स्तंभ मैथिली भाषापाक/ रचना लेखनक नव-पुरान अंक पढ़ू। http://devanaagarii.net/ http://kaulonline.com/uninagari/ (एतए बॉक्समे ऑनलाइन देवनागरी टाइप करू, बॉक्ससँ कॉपी करू आ वर्ड डॉक्युमेन्टमे पेस्ट कए वर्ड फाइलकेँ सेव करू। विशेष जानकारीक लेल ggajendra@videha.com पर सम्पर्क करू।)(Use Firefox 4.0 (from WWW.MOZILLA.COM )/ Opera/ Safari/ Internet Explorer 8.0/ Flock 2.0/ Google Chrome for best view of 'Videha' Maithili e-journal at http://www.videha.co.in/ .) Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Book/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ (उच्चारण, बड़ सुख सार आ दूर्वाक्षत मंत्र सहित) डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाऊ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू। गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज' मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण" विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाऊ। "मैथिल आर मिथिला" (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) पर जाऊ। १. संपादकीय १ विनीत उत्पलक सूचनाक अधिकारक अन्तर्गत मांगल सूचना १० सदस्यी साहित्य अकादेमीक मैथिली एडवाइजरी बोर्ड द्वारा मैथिलीकेँ खतम करबाक षडयंत्रक खुलासा केलक अछि। http://esamaad.blogspot.com/2011/11/vinit-utpals-rti-application-dated.html आ http://www.facebook.com/media/set/?set=oa.208811812530288&type=1 ऐ दुनू लिंकपर ई सूचना उपलब्ध अछि।श्री जगदीश प्रसाद मण्डल, श्री राजदेव मण्डल, श्री बेचन ठाकुर (क्रमसँ मैथिलीक सर्वश्रेष्ठ जीवित कथा-उपन्यासकार, कवि आ नाटककार), श्री उमेश पासवान, श्री उमेश मण्डल, श्री रामदेव प्रसाद मण्डल "झाड़ूदार", श्री दुर्गानन्द मण्डल आ श्री आनन्द कुमार झाकेँ कोनो असाइनमेन्ट नै? मुदा की मैथिली एडवाइजरी बोर्ड द्वारा मैथिलीकेँ खतम करबाक षडयंत्र मैथिलीकेँ मारि देत? नै, कारण? कारण जै तरहेँ श्री जगदीश प्रसाद मण्डल, श्री राजदेव मण्डल, श्री बेचन ठाकुर , श्री उमेश पासवान, श्री उमेश मण्डल, श्री रामदेव प्रसाद मण्डल "झाड़ूदार", श्री दुर्गानन्द मण्डल आ श्री आनन्द कुमार झा आ आन गोटे अपन तन-मन-धनसँ मैथिलीक जड़िकेँ अपन खून-पसीनासँ पटा रहल छथि..ई षडयंत्र- मैथिलीकेँ मारबाक- नै सफल हएत। ई भाषा जिबैत रहत। अविलम्ब एडवाइजरी कमेटीक सभ सदस्य अपन अपन असाइंमेंट वापस करथि / करबाबथि (अपन माने अपन , अपन परिवार / बच्चा / चेला चपाटी), नै तं हिनका सभ पर त्यागपत्र देबाक लेल दवाब बनाओल जाए, हिनकर सबहक घरक सोझां अष्टजान कएल जाए, राष्ट्रगीतक गाओल जाए, राष्ट्रगीतक अष्टजाम कएल जाए / मिथिला राज्य जं ऐ स्थिति मे बनत तं यएह दस परिवार मिथिला कें भूजि खा जाएत / मिथिला राज्य संघर्ष समिति सभ ऐ छद्म अनुवाद सभकें अपन सभामे जराबथि / तखने ओ सिद्ध का' सकता जे ओ मिथिला राज्य बनेता आकि मैथिली राज्य / सी. आइ. आइ. एल. सं सेहो (मैथिलीमे ) ग्रांट -इन ऐड आ अनुवादक सूची सूचनाक अधिकार तहत मंगबाओल जाएत / २ विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान २०१२-१३: ऐ बेर ई प्रक्रिया पछिला बेर जकाँ पुनः प्रारम्भ कएल जा रहल अछि। रचना आ रचनाकारपर अपन प्रतिक्रिया ggajendra@videha.com वा https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/207867575958045/ थ्रेडक कमेन्ट बॉक्समे दी से आग्रह। ई समस्त डिसकशन ३१ दिसम्बर २०११ धरि चलत। तकर बाद रचना/ रचनाकार शॉर्टलिस्ट कऽ कऽ वोटिंग १ जनवरी २०१२ सँ शुरू हएत। विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१२-१३ :ऐ लेल श्री राजनन्दन लाल दास, श्री डॉ. अमरेन्द्र आ श्रे चन्द्रभानु सिंहक नामक प्रस्ताव हम दऽ रहल छी। हिनकर सभक समग्र योगदानपर पाठकसँ टिप्पणीक संग कोनो आन नाम जे पाठक देबए चाहथि, आमंत्रित अछि। विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी मूल पुरस्कार -१२ : ऐ लेल श्री बेचन ठाकुरक “बेटीक अपमान आ छीनरदेवी”(दूटा नाटक), श्री राजदेव मण्डलक “अम्बरा” (कविता-संग्रह), श्रीमती शेफालिका वर्माक “किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा), श्रीमती आशा मिश्रक “उचाट” (उपन्यास), श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”क “नो एण्ट्री:मा प्रविश (नाटक), श्रीमती विभा रानीक “भाग रौ आ बलचन्दा” (दूटा नाटक), श्री सुभाष चन्द्र यादवक “बनैत बिगड़ैत” (कथा-संग्रह), श्रीमती पन्ना झाक “अनुभूति” (कथा संग्रह), संग समय के (कविता संग्रह)- महाप्रकाश, भावनाक अस्थिपंजर (कविता संग्रह)- वीणा कर्ण, तारानन्द वियोगी- प्रलय रहस्य (कविता-संग्रह) आ श्री महेन्द्र मलंगियाक “छुतहा घैल” (नाटक)क नामक प्रस्ताव हम दऽ रहल छी। हिनकर सभक पोथीपर पाठकसँ टिप्पणीक संग कोनो आन नाम जे पाठक देबए चाहथि, आमंत्रित अछि। ई पोथी सभ २००८, २००९ वा २०१० मे प्रकाशित हेबाक चाही। विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार -१२ : ऐ लेल हम श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जीक “तरेगन”(बाल-प्रेरक कथा संग्रह), जीवकांत - खिखिरक बिअरि आ मुरलीधर झाक “पिलपिलहा गाछ”क नामक प्रस्ताव हम दऽ रहल छी। हिनकर सभक पोथीपर पाठकसँ टिप्पणीक संग कोनो आन नाम जे पाठक देबए चाहथि, आमंत्रित अछि। ई पोथी सभ २००६सँ २०१० धरि प्रकाशित हेबाक चाही। विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार -१२ : ऐ लेल हम श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह), श्री विनीत उत्पलक “हम पुछैत छी” (कविता संग्रह), कामिनीक “समयसँ सम्वाद करैत”, (कविता संग्रह), आदि यायावरक “भोथर पेंसिलसँ लिखल” (कथा संग्रह),, श्री उमेश मण्डलक “निश्तुकी” (कविता संग्रह), श्री प्रवीण काश्यपक “विषदन्ती वरमाल कालक रति” (कविता संग्रह), श्री दिलीप कुमार झा "लूटन"क जगले रहबै (कविता संग्रह), श्री आशीष अनचिन्हारक "अनचिन्हार आखर"(गजल संग्रह) आ श्री अरुणाभ सौरभक “एतबे टा नहि” (कविता संग्रह)क नामक प्रस्ताव हम दऽ रहल छी। हिनकर सभक पोथीपर पाठकसँ टिप्पणीक संग कोनो आन नाम जे पाठक देबए चाहथि, आमंत्रित अछि। ई पोथी सभ २०११ धरि प्रकाशित हेबाक चाही।३१ दिसम्बर २०११ धरि प्रकाशित रचना अहाँ दऽ सकै छी, कारण ई डिसकशन ३१ दिसम्बर २०११ धरि चलत; तकर बाद रचना/ रचनाकार शॉर्टलिस्ट कऽ कऽ वोटिंग १ जनवरी २०१२ सँ शुरू हएत। विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार -१३ : ऐ लेल हम श्री नरेश कुमार विकल (ययाति,मराठी उपन्यासक अनुवाद मूल लेखक श्री विष्णु सखाराम खांडेकर), श्री महेन्द्र नारायण राम (कार्मेलीन,कोंकणी उपन्यासक अनुवाद मूल लेखक श्री दामोदर मावजो), श्री देवेन्द्र झा (बांग्ला उपन्यासक अनुवाद मूल लेखक श्री दिव्येन्दु पालित) आ श्रीमती मेनका मल्लिक (देश आ अन्य कविता सभ- रेमिका थापा, नेपाली), कृष्ण कुमार कश्यप आ शशिबाला- मैथिली गीतगोविन्द (जयदेव - संस्कृत) क नामक प्रस्ताव हम दऽ रहल छी। हिनकर सभक पोथीपर पाठकसँ टिप्पणीक संग कोनो आन नाम जे पाठक देबए चाहथि, आमंत्रित अछि। ई पोथी सभ २००९, २०१० वा २०११ मे प्रकाशित हेबाक चाही।३१ दिसम्बर २०११ धरि प्रकाशित रचना अहाँ दऽ सकै छी, कारण ई डिसकशन ३१ दिसम्बर २०११ धरि चलत; तकर बाद रचना/ रचनाकार शॉर्टलिस्ट कऽ कऽ वोटिंग १ जनवरी २०१२ सँ शुरू हएत। रचना आ रचनाकारपर अपन प्रतिक्रिया ggajendra@videha.com वा https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/207867575958045/ थ्रेडक कमेन्ट बॉक्समे दी से आग्रह। ई समस्त डिसकशन ३१ दिसम्बर २०११ धरि चलत। तकर बाद रचना/ रचनाकार शॉर्टलिस्ट कऽ कऽ वोटिंग १ जनवरी २०१२ सँ शुरू हएत। पूर्व पीठिका: विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान दिसम्बर मासमे कोलकाता, दरभंगा, झंझारपुर आ पटनामे देल जाएत, ऐमे प्रशस्ति-पत्र आ पदक देल जाएत। विस्तृत विवरण शीघ्र देल जाएत। ऐ बेरुका पुरस्कारक सूची:- विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) ऐमेसँ श्री रमानन्द रेणु जीक मृत्यु सम्मानक घोषणाक बाद भऽ गेलन्हि, तेँ हुनकर उत्तराधिकारीकेँ ई पदक आ प्रशस्ति-पत्र देल जाएत। [सूचना: १. कैथी आ मिथिलाक्षर दुनू लिपिकेँ यूनीवर्सल कैरेक्टर सेट (यूनीकोड) मे एनकोड करबाक अंशुमन पाण्डेय द्वारा देल आवेदन स्वीकृत भಽ गेल अछि। आब ई दुनू लिपिक यूनीकोड फॉन्ट बनेबाक क्रिया क्यूमे लागि गेल अछि आ जखन एकर सभक बेर एतै ऐ दुनू लिपिक आधारभूत फॉन्ट बनेबाक क्रिया शुरू भऽ जाएत। मिथिलाक्षरक आधारभूत फॉन्टक नाम तिरहुता रहत (जेना देवनागरीक आधारभूत फॉन्टक नाम मंगल आ बांग्लाक आधारभूत फॉन्टक नाम वृन्दा अछि)। मिथिलाक्षरक फॉन्ट लेल तेसर बेर संशोधित आवेदन देल गेल रहए, दोसर आ तेसर आवेदनमे विदेहक योगदानक विस्तृत चर्चा भेल अछि, यथा- [Figure 11: Excerpt from a Maithili e-journal published as PDF (from Videha 2011: 22; Videha: A fortnightly Maithili e-journal. Issue 80 (April 15, 2011), Gajendra Thakur [ed]. http://www.videha.co.in/ ."Gajendra Thakur of New Delhi graciously met with me and corresponded at length about Maithili, offered valuable specimens of Maithili manuscripts, printed books, and other records, and provided feedback regarding requirements for the encoding of Maithili in the UCS."-Anshuman Pandey.] । सूचना: २. गूगल मैथिली: गूगल लैंगुएज टूल- http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseProject अपन योगदान गूगल ट्रांसलेट लेल करू, आ कएल सम्पादन बदलबा काल कारण मे (अंग्रेजीमे) "बिहारी" नाम्ना कोनो भाषा नै हेबाक चर्चा करू। ऐ लिंकपर अनुवाद करू; गूगल एकाउंट सँ लॉग इन केलाक बाद । http://www.google.com/transconsole/giyl/chooseActivity?project=gws&langcode=bh ऐ लिंक http://www.google.co.in/language_tools?hl=en केँ मैथिलीक उपलब्धता लेल चेक करैत रहू। सूचना: ३.विकीपीडिया मैथिली: मीडियाविकीक २६०० संदेश अंग्रेजीसँ मैथिलीमे विदेहक सदस्यगण द्वारा अनूदित कऽ देल गेल अछि। आब http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai ऐ लिंकपर Group मे जा कऽ ड्रॉपडाउन मेनूसँ अ-अनूदित मैसेज अनूदित करू। जँ अहाँ विकीपीडियाक ट्रान्सलेटर नै छी तँ http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator ऐ लिंकपर मैथिलीमे ट्रान्सलेट करबाक अनुमतिक लेल अनुरोध दियौ, ऐ सँ पहिने ओतै ऊपरमे दहिना कात लॉग-इन (जँ खाता नै अछि तँ क्रिएट अकाउन्ट) कऽ आ प्रेफरेन्समे भाषा मैथिली लऽ अपन प्रयोक्ता खाताक लिंककेँ क्लिक कऽ अपन प्रयोक्ता खात पन्ना बनाउ। किछु कालमे अहाँकेँ ट्रान्सलेट करबाक अनुमति भेट जाएत। तकरा बाद अनुवाद प्रारम्भ करू। http://translatewiki.net/wiki/Project:Translator http://meta.wikimedia.org/wiki/Requests_for_new_languages/Wikipedia_Maithili http://translatewiki.net/wiki/Special:Translate?task=untranslated&group=core-mostused&limit=2000&language=mai http://incubator.wikimedia.org/wiki/Wp/mai http://translatewiki.net/wiki/MediaWiki:Mainpage/mai विदेहक तेसर अंक (१ फरबरी २००८)मे हम सूचित केने रही- “विकीपीडियापर मैथिलीपर लेख तँ छल मुदा मैथिलीमे लेख नहि छल,कारण मैथिलीक विकीपीडियाकेँ स्वीकृति नहि भेटल छल। हम बहुत दिनसँ एहिमे लागल रही आ सूचित करैत हर्षित छी जे २७.०१.२००८ केँ (मैथिली) भाषाकेँ विकी शुरू करबाक हेतु स्वीकृति भेटल छैक, मुदा एहि हेतु कमसँ कम पाँच गोटे, विभिन्न जगहसँ एकर एडिटरक रूपमे नियमित रूपेँ कार्य करथि तखने योजनाकेँ पूर्ण स्वीकृति भेटतैक।” आ आब जखन तीन सालसँ बेशी बीति गेल अछि आ मैथिली विकीपीडिया लेल प्रारम्भिक सभटा आवश्यकता पूर्ण कऽ लेल गेल अछि विकीपीडियाक “लैंगुएज कमेटी” आब बुझि गेल अछि जे मैथिली “बिहारी नामसँ बुझल जाएबला” भाषा नै अछि आ ऐ लेल अलग विकीपीडियाक जरूरत अछि। विकीपीडियाक गेरार्ड एम. लिखै छथि ( http://ultimategerardm.blogspot.com/2011/05/bihari-wikipedia-is-actually-written-in.html ) -“ई सूचना मैथिली आ मैथिलीक बिहारी भाषासमूहसँ सम्बन्धक विषयमे उमेश मंडल द्वारा देल गेल अछि- उमेश विकीपीडियापर मैथिलीक स्थानीयकरणक परियोजनामे काज कऽ रहल छथि, ...लैंगुएज कमेटी ई बुझबाक प्रयास कऽ रहल अछि जे की मैथिलीक स्थान बिहारी भाषा समूहक अन्तर्गत राखल जा सकैए ?..मुदा आब उमेश जीक उत्तरसँ पूर्ण स्पष्ट भऽ गेल अछि जे “नै”। ” रामविलास शर्माक लेख (मैथिली और हिन्दी, हिन्दी मासिक पाटल, सम्पादक रामदयाल पांडेय) जइमे मैथिलीकेँ हिन्दीक बोली बनेबाक प्रयास भेल छलै तकर विरोध यात्रीजी अपन हिन्दी लेख द्वारा केने छलाह , जखन हुनकर उमेर ४३ बर्ख छलन्हि (आर्यावर्त १४/ २१ फरबरी १९५४), जकर राजमोहन झा द्वारा कएल मैथिली अनुवाद आरम्भक दोसर अंकमे छपल छल। उमेश मंडलक ई सफल प्रयास ऐ अर्थेँ आर विशिष्टता प्राप्त केने अछि कारण हुनकर उमेर अखन मात्र ३० बर्ख छन्हि। जखन मैथिल सभ हैदराबाद, बंगलोर आ सिएटल धरि कम्प्यूटर साइंसक क्षेत्रमे रहि काज कऽ रहल छथि, ई विरोध वा करेक्शन हुनका लोकनि द्वारा नै वरन मिथिलाक सुदूर क्षेत्रमे रहनिहार ऐ मैथिली प्रेमी युवा द्वारा भेल से की देखबैत अछि? उमेश मंडल मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक लोकक कण्ठक गीतकेँ फील्डवर्क द्वारा ऑडियो आ वीडियोमे डिजिटलाइज सेहो कएने छथि जे विदेह आर्काइवमे उपलब्ध अछि। TIRHUTA UNICODE See the final UNICODE Mithilakshara Application (May 5, 2011) by Sh. Anshuman pandey http://std.dkuug.dk/JTC1/SC2/WG2/docs/n4035.pdf at Page 23 the Videha 80th issue (Tirhuta version) is attached"Figure 11: Excerpt from a Maithili e-journal published as PDF (from Videha 2011: 22" and at Page 12 Videha is included in References Videha: A fortnightly Maithili e-journal. Issue 80 (April 15, 2011), Gajendra Thakur [ed]. http://www.videha.co.in/. and role of Videha's editor is acknowledged on Page 12 "Gajendra Thakur of New Delhi graciously met with me and corresponded at length about Maithili, offered valuable specimens of Maithili manuscripts, printed books, and other records, and provided feedback regarding requirements for the encoding of Maithili in the UCS." ( विदेह ई पत्रिकाकेँ ५ जुलाइ २००४ सँ अखन धरि ११६ देशक १,९६२ ठामसँ ७०,३९८ गोटे द्वारा विभिन्न आइ.एस.पी. सँ ३,३१,७७९ बेर देखल गेल अछि; धन्यवाद पाठकगण। - गूगल एनेलेटिक्स डेटा। ) गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com http://www.maithililekhaksangh.com/2010/07/blog-post_3709.html २. गद्य २.१.हम पुछैत छी : विदेह ई-पत्रिकाक सहायक सम्पादक मुन्नाजीक संग रामभरोस कापड़ि “भ्रमर”क बातचीत २.२.हम पुछैत छी- बृषेश चन्द्र लालजी सँ मुन्नाजी पुछैत छथि ढेर रास गप २.३. मुन्नाजीसँ रमेश रंजनक अन्तर्वार्ता २.४.श्री राजेन्द्र बिमलसँ हुनक रचना यात्रा मादेँ गप केलनि विहनि कथा रचनाकार श्री मुन्नाजी २.५.गजेन्द्र ठाकुर- उल्कामुख (आगाँ) २.६.१.सत्यनारायण झा- पलट २. जवाहर लाल कश्यप- अर्धसत्य २.७.ओमप्रकाश झा - कथा- डीहक जमीन २.८.१.मनोज झा मुक्ति- विद्यापति स्मृति समारोह वास्ते हमर दरभंगा यात्रा २. नरेन्द्र मिश्र ३.नवेंदु कुमार झा- मिथिला राज्यक विरोध मे उतरलाह डा॰ मिश्र/ पर्यटनक उद्योग पर सरकारक बढ़ल जोर विकसित होएत हलेश्वर पुनौरा आ पंथपाकर/ लोकायुक्तक मामिला मे सत्ता आ विपक्ष मे गतिरोध/ मनाओल गेल दरभंगा महाराजक जन्म दिवस/ प्रदेश मे खूजत पशु विश्वविद्यालय/ टाका नहि खर्च कएला पर बंद होएत आवंटन ४.प्रभात राय भट्ट- रोटी रोजीक खोजी हम पुछैत छी : विदेह ई-पत्रिकाक सहायक सम्पादक मुन्नाजीक संग रामभरोस कापड़ि “भ्रमर”क बातचीतक अंश: मुन्नाजी: रामभरोस जी नमस्कार। रामभरोस कापड़ि “भ्रमर”: नमस्कार। मुन्नाजी: अपने अपन साहित्यिक यात्राक प्रारम्भिक परिदृश्यक विवेचनमे की कहए चाहब? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर”: मुन्नाजी, हम जाहि परिवारसँ आएल छी ओ धन-वीत्तमे समाजमे अग्रणी तँ छल, मुदा भाषा, साहित्यक ओतऽ नामोनिशान नै छलै। बाबूजी गाम विकास समितिक मुखिया, प्रधान पंच होइत रहलाह, क्षेत्रमे नीक प्रतिष्ठा, नाम छलनि। मुदा घरमे पत्र-पत्रिका, पुस्तक पढ़बाक माहौल नहि छलै। ताहुमे मैथिली! जखन हमरा दुनू भाइकेँ बघचौरासँ जनकपुरक हाई स्कूलमे शिक्षाक हेतु पठाओल गेल, तखन स्थिति बदललैक। हमरा पत्र-पत्रिका पढ़बाक लत लागल, रुचि बढ़ल आ तखन किछु लिखी से मनमे होबऽ लागल। हमर सम्पर्क डॉ. धीरेन्द्रसँ भेल जे रा.रा.कैम्पसमे मैथिली पढ़बैत छलाह। हुनका संगतिसँ लेखन दिश सक्रियता बढ़ल। ओना हम अपन पहिल कथा “इमानदार बालक” हिन्दीमे लिखने रही आ डॉ. धीरेन्द्रकेँ देखौने रहियनि। ओ तत्काल हमरा अपन भाषा मैथिलीक प्रति आकर्षित करौलनि आ तकर अनुवाद कऽ लएबा लेल कहलनि। हम कथाक अनुवाद मैथिलीमे कऽ देलियनि, जकर शुद्धि करैत काल एक्को पंक्ति एहन नहि छल जाहिमे लाले लाल नहि लागल होइ। जखन उतारि कऽ देलियनि तँ हुनक चिट्ठीक संग मिहिरमे पठा देबाक लेल कहलनि जे कथा नेना भुटकाक चौपाड़िमे १९६४ ई. मे छपल। तहिया हमर उमेर १३ वर्षक छल। बस, तकरा बाद हमर साहित्यिक यात्रा जे चलल, आइ धरि निरन्तर जारी अछि। एखन धरि विभिन्न विधाक तीससँ ऊपर पुस्तक प्रकाशित भऽ चुकल अछि। मुन्नाजी: साहित्यक अतिरिक्त अहाँ आर कोन गतिविधिसँ जुड़ल रलौं अछि? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर”: हमर प्राथमिक झुकाउ साहित्ये दिश रहल। खूब लिखलौं- खूब आनन्दित भेलौं। दोसर हम पत्रकारितामे सेहो निरन्तर लागल छी। नेपालक पहिल मैथिली समाचारपत्र “गामघर साप्ताहिक”क विगत तीस वर्षसँ सम्पादन-प्रकाशन कऽ रहल छी। एहि विच “अर्चना”, “आंजुर” मासिक, द्वैमासिक, सेहो निकाललहुँ। एकर अतिरिक्त सामाजिकशोध संस्थामे सेहो सक्रिय रहलहुँ। मुन्नाजी: मैथिली साहित्यक परिधि छोट आ सीमित अछि। मुदा ऐ भाषाक रचनाकार सभ अपने कुकुर कटाउझ करैत पाओल जाइत छथि। ई समस्या किएक उत्पन्न होइत अछि आ एकर निदान की? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर”: मैथिली भाषा, साहित्यक क्षेत्रमे लाभक अवसर कम छैक। जे छै तकरा अपना दिश कोना हँसोथल जाए, एहि फिराकमे मित्रगण सभ लागल रहैत छथि। एक आर्थिक लाभक लोभ, दोसर अपन वर्चस्व कायम रखबाक लौल- दुनू कुकुर कटाउझक कारण मानल जा सकैछ। निदान कहब कठिन- ई स्वभाव, प्रकृति आ आचरणसँ सम्बद्ध छैक। धैर्य राखब मात्र एकर उपाय थिक। मुन्नाजी: देखल जाइत अछि जे सामान्यतः मैथिलीमे दू चारिटा रचना वा एक दुइ साल रचनाक पछाति एकटा पत्रिका निकालि ओ रचनाकार स्वयंकेँ सम्पादक घोषित कऽ दैत छथि। वास्तवमे सम्पादनक की मानदण्ड अछि आ ओइपर कतेक सम्पादक अटकल रहि पबैत छथि? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर”: ई-प्रश्न मोनकेँ गदगद कऽ देलक। साँच बात इहो छैक- एखन मैथिलीमे ई समस्या बड़ जोड़ पकड़ने अछि। दू चारिटा कथा, कविता लिखने, छपने अपनाकेँ साहित्यक सिरमौर बुझबाक भ्रम सभतार होइछ। दशकूंक लगानीकेँ छाउर बूझि मुँहक फुकसँ उड़िया देबाक भयावह आत्मरति भाव मैथिली लेखनक सहज परम्पराकेँ भ्रमित कऽ रहलैक अछि। सम्पादन स्वयंमे एकटा कला छै, विज्ञान छैक। एक-आध अंक बहार कऽ अपनाकेँ सम्पादक काह मठोमाठ बनने हमरा जनैत ताही प्रतिभाक हेतु नोक्शानीक बात छैक। सुधांशु शेखर चौधरी, डॉ. हंसराज, डॉ. भीमनाथ झा, बाबू साहेब चौधरी, कृष्णकान्त मिश्र, डॉ. सुधाकान्त मिश्र, डॉ. धीरेन्द्र, सम्प्रतिमे रामलोचन ठाकुर आदि किए सम्पादक कहौलनि! अहाँ मानदण्डपर अटकलक बात करै छी, पत्रिकाक कए गोट अंकपर ओ अटकल रहि पबैत छथि? मुन्नाजी: नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक प्राज्ञ भऽ प्रतिष्ठासँ केहन अनुभव कऽ रहल छी, ऐसँ जीवन आ लेखनमे केहन परिवर्तन आएल अछि, की जीवन आ लेखनमे ई सहायक भेल अछि? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर: निश्चय प्रज्ञा प्रतिष्ठानमे प्राज्ञ भऽ आएब हमर सपना रहए। कोनो साहित्यकारक हेतु ई सभसँ उच्च सम्मान छैक। हम नेपाल सरकारक एकरा लेल आभारी छी। एहिसँ हमर जीवन शैलीमे किछु परिवर्तन तँ भेबे कएल अछि। हम जनकपुरमे रहैत छलहुँ, आब काठमाण्डूमे रहऽ पड़ैत अछि। हम स्वतंत्र, खुशफैल रहऽ बला लोक, आब नियमित ऑफिस जाए पड़ैत अछि। मुदा स्वतंत्र आ आह्लादकारी काज तँ छैहे प्रतिष्ठानमे। लेखनमे कोनो फरक नै, बस बेसी जगजिआर भेल अछि। पत्रकारिता बस लेखनकेँ बाधित करैत छल। हम काठमाण्डू अएलाक तीन वर्षमे छः गोट पुस्तक प्रकाशित कऽ सकलहुँ आ दर्जनों निबन्ध, कथा, कविता, नाटक आदि। मुन्नाजी: नेपाली साहित्य मध्य मैथिली साहित्यक केहेन जुड़ाव छैक? आ दुनू भाषा मध्य कोन साहित्य बेशी समृद्ध अछि आ किएक? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर: नेपाली आ मैथिली अपन-अपन बाटपर चलैत अछि। एक राज्योपोषित रहलै, दोसर साहित्यकार पोषित। प्राचीन साहित्य मैथिलीक, लेखनमे समृद्ध नेपाली। मुन्नाजी: मैथिलीक सीमामे फाँट कएल (नेपाल आ भारत) साहित्यिक गतिविधिक तुलनात्मक परिदृश्ये कतुक्का साहित्यक केहेन दशा-दिशा देखा पड़ैए? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर: भारतीय साहित्यकार, ओतुक्का साहित्यिक प्रतिष्ठान, सरकारी वा गएर सरकारी एहि तरहक फाँट-बखरा कऽ कऽ रखने अछि। एम्हरका लोक साहित्य अकादमीक पत्रिका, पुरस्कार, लेखन, गोष्ठीमे सामेल नहि कएल जाइत छथिनेपालमे तेहन कोनो बन्देज नै छैक। प्रज्ञा प्रतिष्ठानक कार्यक्रममे हमहीं निरन्तर बजबैत छिऐन्हि, डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंहक “नेपालक मैथिली साहित्यक इतिहास” नेपालक अर्ध सरकारी प्रकाशन संस्था साझा प्रकाशन छपलक अछि। हँ, ओम्हरका साहित्यक लेखन परम्परा निरन्तर चलैत रहल- समृद्ध अछि। प्राचीनताक दृष्टिएँ, ऐतिहासिक उपलब्धिक दृष्टिएँ नेपाल ओम्हरसँ समृद्ध अछि। “वर्णरत्नाकर”, सिद्ध साहित्य, मल्ल काल, सभ मैथिली साहित्यक आधार थिकै- ज्कर स्रोत नेपाले अछि। मुन्नाजी: वर्तमानमे अपन गतिविधि कोन दिशामे जारी अछि? साहित्यिक-सांस्कृतिक कोनो अग्रिम योजना अछि? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर: एखन प्रज्ञामे लागल छी। देखू, साझा प्रकाशनमे अध्यक्ष भऽ कऽ तँ ओ मात्र नेपालीक पुस्तक छपैत छल, हम मैथिलीक शुरुवात कएलहुँ। एक बालपोथी “बगियाक गाछ”, दोसर “मैथिली साहित्यक इतिहास”। प्रज्ञामे पहिल बेर साधारण सदस्य भऽ आएल रही तँ पहिल बेर मैथिलीक पत्रिका बहार कएलहुँ “आंगन”। जे एहि बेर अएलाक बाद हमरे सम्पादनमे निरन्तर प्रकाशित अछि। एखनो बेसीसँ बेसी मैथिली दिश ध्यान दितो हमर विभाग “संस्कृति विभाग” सम्पूर्ण देशक हेतु देखैत अछि। तथापि जट जटिन, सलहेस, दीनाभद्रीक लोकगाथा, नृत्य संयोजन, संकलन, ऑडियो विडियोग्राफीक सुरक्षित कऽ देने छिऐक। हम ग्रन्थक रूपमे बहार करबाक नियारमे छी। मैथिलीमे एम्हर नाट्य क्षेत्रमे किछु नव संस्था, कलाकार सभ अपन प्रतिभा देखौलनि अछि, हम हुनका सभकेँ उचित मंच भेटौक ताहि दिश प्रयत्नरत छी। मुन्नाजी: साहित्य लेखक एवं सम्पादकक नव तूरकेँ की सनेस देबऽ चाहब? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर: जे लिखथि मोनसँ लिखथि। अपनेसँ अपन मूल्यांकन नहि करथि। अपन अग्रज साहित्यकारक सम्मान करथि। सम्पादक महज लौलसँ अथवा अपनाकेँ स्थापित देखएबा लेल नहि करथि। एहिसँ अपन पूर्वूक छविकेँ धुमिल भऽ जएबाक डर होइछ। मुन्नाजी: साहित्य मध्य साहित्यकारक राजनीतिक उठापटककेँ अहाँ कोन परिप्रेक्ष्यमे देखै छी? की साहित्यकारक लेल ऐ प्रकारक क्रियाकलाप उचित अछि? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर: हमरा लगैत अछि शुरुएक प्रश्नमे किछु बात आबि गेल अछि। साहित्यकारकेँ राजनीतिसँ दूरे रहने नीक। मुदा कतेको अवस्थामे ई सम्भव नहि बुझाइत छै। पटना आ दरभंगाक साहित्यिक मंचपर राजनीतिकर्मीक वर्चस्व एकर प्रमाण अछि। मुन्नाजी: शुरूहेसँ मैथिली भाषा पिछड़ल जातिक धरोहरि जकाँ रहल अछि। मुदा साहित्य मध्य (रचनाकारक रूपेँ) ओइ वर्गकेँ अवडेरि कऽ (कतिया कऽ) राखल गेल। की ऐसँ भाषाक हीनता आएल अछि? वा ई भाषा मृत्यु शय्या धरि पहुँचि गेल अछि। अहाँक नजरिये की कहब ऐपर? रामभरोस कापड़ि “भ्रमर: ई प्रश्न हमरा जनैत मैथिली भाषा, साहित्यक क्षेत्रमे सभसँ अहम अछि। मैथिली भाषाकेँ संस्कृत जकाँ “हम्मर भाषा” कहि विगत डेढ़-दू सय वर्षसँ अपन पोथी-पतरामे जाँति कऽ रखनिहार मुट्ठी भरि वर्ग नब्बे प्रतिशत बजनिहारकेँ एकरासँ दुरे रखबाक काज कएलनि। आब जखन ई जपाल भऽ गेल छन्हि तँ भाषाक विस्तारीकरणमे लागल छथि। एखनो मैथिलीक मंचपर नमूनाक हेतु किछु गोटे अभरताह, मुदा तकर पुछ कोन रूपेँ? साहित्यमे कतेक चर्च? गोलैसी कऽ कात करबाक, नीचाँ देखएबाक कोन प्रयत्न छुटल अछि? एहिमे कोन सन्देह जे जे वर्ग मात्र मैथिलीएटा बजैत अछि, तकर भाषा छीनि कऽ अहाँ महन्थ बनल छिऐ, आ अपने अंग्रेजी, हिन्दी, नेपाली बजैत समाजमे रोब दैत छिऐ। परिणाम तँ साफ छै,- एहि बेरका जनगणनामे नेपालमे मैथिलीक ठामपर मगही, बज्जिका लिखाओल गेलैए। किछु लाख तँ अबस्से बजनिहारक संख्या कम भेल हएतै। लिखौनिहारक साफ तर्क छलै, ई भाषा हमर अछिए नहि, ई तँ…। हमरा सन लोक एहिमे लागल छी, स्वयं हम एकर प्रतिपादमे किछु जिल्ला घुमलहुँ। मुदा हमरा सभकेँ अपवाद बुझैत अछि। आ जे नाटक एखनो धरि कएल जा रहल छैक, ताहिसँ मोन हमरो सभक दग्ध अछि औ मुन्नाजी! किएने मैथिलीक पुस्तक बिकाइए, पत्रिका बिकाइए? जे लेखक सएह पाठक! हमरा लगैत अछि- आब सम्हरबोक समय नहि अछि! ई भाषा मृत्यु धरि पहुँचि गेल अछि से हम नहि कहब, मुदा कए खाढ़ीमे विभक्त आ छिन्न-भिन्न धरि अवश्य भऽ गेल अछि। जकरा जोड़बाक ककरो ने रुचि छैक आने पलखति! तखन?! ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। हम पुछैत छी- बृषेश चन्द्र लालजी सँ मुन्नाजी पुछैत छथि ढेर रास गप १.अपने अपन साहित्यिक यात्रा मादेँ कही जे एकर शुरुआत कतऽसँ आ कोना भेल ? हम अपनाकेँ साहित्यकार नहि मानैत छी । कारण, हमरा ज्ञानेँ साहित्यकारक औसत पंक्तिमे ठाढ़ हुअएवास्ते भाषा आ साहित्यक औपचारिक नहि तँ किछु अनिवार्य अध्ययन अवश्य हएबाक चाही जे हमरामे नहि अछि । हँ, हमरा अपन मातृभाषामे लिखएमे मोन लगैत अछि । एकर कएटा कारण छैक —प्रथमतः, हमरा लगैत अछि जे हम मैथिलीमे सहजतासँ अपन अभिव्यक्ति कऽ सकैत छी आ एहिलेल कोनो अनुवादक अभ्यास नहि करए पड़ैत अछि । दोसर, हम जीवनभरि आत्मसम्मान, व्यक्तिक स्वतन्त्रता, सभक अपन खास परिचय सहितक सम्मानित विविधता आ बहुलवादी समाजक निर्माणहेतु लड़ैत अएलहुँ । मैथिलीमे लिखैत काल हमरा लगैछ जेना हम ओही लड़ाईकेँ आगाँ बढ़ारहल छी । तेसर, इहो जे लोक लिखैत अछि लोककेँ सुनाबए–बुझाबएलेल आ भाषा वएह प्रयोग कएल जाइत छैक जे एहि कार्यलेल सभसँ उपयुक्त होइक । ओना हम जहिआ आठ कक्षामे पढ़ैत रही, मैथिलीक कक्षादिस छात्र–छात्राक ठहक्का सुनि कऽ आकर्षित भेलहुँ । पं. सच्चिदानन्द झा मैथिली पढ़बथिन्ह । हुनक शिक्षणक शैली एतेक रोचक आ हँसीठट्ठाबला रहन्हि जे विद्यार्थीसभ सोझहिं आकर्षित भऽ जााइक । दोसर कक्षाक विद्यार्थीसभ सेहो आबिकए बैसि रहैक हुनकर गप्प सुनएलेल । हमरो बड्ड नीक लागल । रोचक, जानकारीमूलक, मनोरंजक आ सहजेँ बुझएमे आबएबला विषय के नहि चुनत ? हमहुँ मैथिली विषय लऽ लेलहुँ । ओ मिथिला मिहिरक चर्च बरोबरि करथिन्ह । हमर अग्रज गरिश चन्द्र लाल आ शिबेन्द्र लालजी मिथिला मिहिरक प्रेमी, तैँ हमरा ओतए मिथिला मिहिर नियमित अबैक । बस पढ़ए लगलहुँ । नेनाभुटका स्तम्भ हमरा बेस आकषर््िात कएलक आ इच्छा भेल जे हमहुँ लिखतहुँ । मुदा साहस नहि हुअए । कहुना कऽ बतहु मामापर एक गोट कथा लिखलहुँ आ डेराइत–डेराइत गुरुजीकेँ ( पं. सच्चिदानन्द झा) देलिअन्हि । ओ पढ़लखिन्ह, नीक लगलन्हि आ बड्ड खुश भेलाह । मैथिलीक कक्षामे हमर खूब प्रशंसा कएलन्हि आ ओ अपनेसँ मिथिला मिहिरमे पठा देलखिन्ह । एना, हमर पहिल रचना आईसँ ४३ वर्ष पहिने प्रकाशित भेल छल । लेखनक शुरुआत एतहिंसँ बुझू । तकरबाद हमर आत्मविश्वास बढ़ि गेल । हमरासभक स्कूलमे (श्री सरस्वती बहुउद्देश्यीय माध्यमिक विद्यालय, जनकपुर) प्रत्येक शुक्रदिन १ घण्टा सांस्कृतिक कार्यक्रम होइक । ओहिमे जरुर भाग लिऐक हमसभ । कहियो कविता तँ कहियो प्रहसन लऽ कऽ । हम आ परमेश्वर कापड़ि जे एखन मैथिली विभागक प्राध्यापक छथि जनकपुरमे, लेखनक काज करिऐक । हम खास कऽ हास्य–व्यङ्गक कविता प्रहसन तैयार करी । परमेश्वर बेसी रचनात्मक रहए । २. अहाँ एकटा राजनेता सेहो छी तँ कहू जे साहित्य आ राजनीति मध्य की समानता वा विषमता देखाइए ? बहुत मुश्किल प्रश्न अछि । एहिमादेँ हम कहियो सोचबे नहि कएलहुँ । हमरा लगैत अछि राजनीतिसँ साहित्य अलगो नहि भऽ सकैत अछि आ दुनू एकदम अलग सेहो अछि । वास्तवमे कही तँ ई सोचपर निर्भर करैत छैक । यदि साहित्य समाजक झरोखा अछि तँ ई राजनीतिसँ कोना पृथक रहि सकत ? राजनीति समाजक एकटा अङ्ग छैक ने ! फेर अहाँ झरोखासँ जे देखैत छी सएह अभिव्यक्त करैत छी । कोनो राजनैतिक उद्देश्यसँ परिचालित वा पूर्वाग्रही नहि छी तँ तखन निश्चय ओ रचनासभ राजनीतिक उद्देश्यसँ अलग भऽ जाइत छैक । ओना कही तँ हमरा जनिते समाजमे गुणात्मक परिवत्र्तनवास्ते यदि राजनीतिक उद्देश्योसँ अभिप्रेरित भऽ रचना रचित होइत अछि तँ ओ स्वागतयोग्य अछि । आखिर साहित्यमे प्रगतिशीलता एकरे ने कहतैक ! बहुतो महानुभावसभ निरन्तर घोषित करैत रहैत छथि जे हुनक साहित्य राजनीतिसँ अलग छनि मुदा तरेतर वएह पूर्वाग्रही रहैत छथि, कोनो स्वार्थसँ परिचालित रहैत छथि । एहन अवस्थामे साहित्यक स्वतन्त्रताप्रति बलात्कार होइत छैक । एहिसँ नीक जे ओ अपन राजनीतिक उद्देश्यकेँ घोषित करथि आ फेर रचैथ । एहिसँ आम जनताकेँ आ पाठककेँ मूल्याङ्कन करएमे आ रचनाक भीतरतक जाएमे सुगम हएतैक । ३. राजनीतिक रुपेँ अपनाकेँ कतेक सफल बुझैत छी वा राजनीतिमे अपनाकेँ कतऽ पबैत छी ? हम फेर कहब जे सफलताक सम्बन्धमे सेहो अपन–अपन दृष्टिकोण होइत छैक । बहुतो राजनीतिमे सफलताकेँ पद प्राप्तिसँ जोड़ि कऽ देखैत छथि । ताहि हिसाबेँ हम एहि क्षेत्रमे अपनाकेँ ओतेक सफल नहि बुझैत छी । हमरासभ जहिआ राजनीतिमे अएलहुँ तहिआ पदक बारेमे कोनो सोच नहि रहैत छलैक । हमसभ राजाशाहीक अन्त्य आ लोकतन्त्रकक स्थापनाक लेल राजनीतिमे कूदल रही । हमसभ राजनीति शब्दो नहि बुझिऐक । संघर्ष, बलिदान आ त्यागक मात्र गप्प–सप्प होइक । एहि क्षेत्रमे प्रवेशक अर्थ रहैक कखन मारल जाएब वा कखन पकड़ाकए जेलमे जाएब से अनिश्चित मुदा पूर्ण सम्भावनायुक्त । पूर्ण रुपसँ अनुशासित रहए पड़ैक । हमर शिक्षा सेहो नेपालेमे भेल । स्नातक आ स्नातकोत्तर हम जेलसँ कएलहुँ तैँ भारतमेक लोकतन्त्रक सियासी जोड़तोड़सँ सेहो परिचय नहि भेल । किछु मित्रसभ एहि मामिलामे अनुभवी छलाह तैँ जोड़तोड़मे हम सभ दिन पाछाँ रहलहुँ । बेसी परिवत्र्तनकामी आ मुहँफट भेलाक कारणेँ सेहो बहुतो सहए पड़ल । मुदा, हम सन्तुष्ट छी । लोकतन्त्रलेल लड़ल आ एखन नेपालमे लोकतन्त्र छैक । ज्ञानेन्द्रक समयमे लोकतन्त्रपर ग्रहण लागि गेल छलैक । हम प्रतिगमनक विरुद्ध सेहो वएह लगनसँ लड़लहुँ । हमरासभक कतेक मित्र काठमाण्डूक रत्नपार्कमे दिन देखारे हमरासभकेँ छोड़ि कऽ ज्ञानेन्द्रक (तत्कालिन राजा) कित्तामे चलि गेलाह मुदा हम कहिओ सम्झौता नहि करएबलामे समूहमे रहलहुँ । तैँ राजनीतिमे हमरा कहिओ हीन भावना वा पश्चाताप नहि भेल । हम जे कऽ रहल छी ताहिमे हमरा नीक लगैत अछि । तैँ करैत छी । एहि दृष्टिकोणेँ हम राजनीतिमे पूर्ण सफल छी । ४. प्रश्न ः लोकतन्त्रक हेतु संघर्षमे कतेक दिन जेल रहलहुँ । कतेक यातना भोगए पड़ल ? हम लोकतन्त्रक लडाईमे १७ बेर गिरपm्तार भेल छी । बहुतबेर दिन वा महीनामे जेलमे रहलहुँ । ५ बेर नाम अवधि तक किछु वर्षकलेल । लगभग ८ वर्ष जेलजीवन बिताबए पड़ल अछि । १९७३–१९९० धरि बेसी काल जेलमे बीतल । फेर ज्ञानेन्द्रक समयमे । ........ जेल जेलेसन होइत छैक । हरीसमे ठोकि दैक । चित्त सुतए पड़ल । करोट नहि फेर सकैत छी । किछु बजलिऐक कि सटकासँ मारि–मारि सोझ कऽ दैक । पेशाप लागल तँ लोटामे करु । उड़िस आ कीराक प्रकोप अलगे । भेँट नहि करए देत परिवार वा मित्रजनसँ । वर्षातमे चुअएबला घरमे कोंचि दैक । कतेक कहू । हमरा तँ जेलेसँ दू बेर हत्या करक योजना बनल । १९७५मे हमरा, बिमलेन्द्र निधि, महेन्द्र मिश्र आ रामप्रसाद गिरिकेँ काठमाण्डूक केन्द्रिय कारागारसँ मारकलेल निकालल गेल मुदा पता नहि फेर की भेलैक घुमाकए नखुजेलमे पहुँचा देल गेल । साँझमे गोकर्ण, ठगी सहित ४ गोटेक नखुक कातमे हत्या कऽ देलकैक । दोसर बेर हमरा, रामचन्द्र तिवारी, स्मृतिनारायण आ युवराज खातीकेँ जलेश्वर जेलसँ सिन्धुली लऽ जा कऽ मुदा हत्याकलेल पुलिसकेँ अनुकूलता नहि भेलैक । हत्यासँ पहिने भारतीय दैनिक आजमे समाचार छपि गेलैक आ फेर आन्दोलन लगले सफल सेहोभऽ गेलैक । सिन्धुलीसँ हमरासभकेँ रिहा कएल गेल । ........ बहुतोकेँ अहूसँ विकट–विकट यातना भोगए पड़ल छन्हि । ५. साहित्य लेखन आ राजनीति, पहिल शुरुआत अहाँकेँ कै सँ भेल आ दोसर दिस कोना उन्मुख भेलहुँ ? ओना सालक गणना करी ता लेखनक शुरुआत पहिने भेल । मुदा राजनीतिमे संलग्नता अपनेआप होइत गेलैक । वस्तुतः हाइस्कूलेसँ हम राजनीतिमे लागि गेलहुँ मुदा प्रत्यक्ष आ पूर्ण संलग्नता ३९ वर्ष पहिने भेल । हम काठमाण्डूक अमृत साइन्स कलेजमे छात्र यूनियनक चुनाव लड़ल रही । हम तहिआ नेपाली काँग्रेसक नेता बोधप्रसाद उपाध्याय, सरोजप्रसाद कोइराला आ महन्थ ठाकुरक निर्देशनमे काज करी । बादमे वीपी कोईराला, कृष्णप्रसाद भट्टराई, गिरिजाप्रसाद कोईराला, महेन्द्रनारायण निधि, महेश्वर प्रसाद सिंह आदिक प्रत्यक्ष सम्पर्क आ संगे काज कएलहुँ । लेखन निरन्तर चलैत रहल । हमर बहुतो रचना संग्रहित नहि अछि । वास्तवमे कही तँ हम एहिदिस ओतेक गम्भीर नहि रही । लिखी सुना दिएैक, हँसि ली मुदा प्रयोगक बाद ओकर संरक्षण नहि होइक । ई हमर जीवनक बहुत बड़का कमजोरी रहल । बहुत संगी एखन स्मरण करबैत छथि — स्कूलिया जीवनक रचनासभ, जेलक गीत, प्रहसन, व्यङ्ग आदि । हम वास्तवमे एकटा छोड़ि दोसरदिस उन्मुख नहि भेलौं । हमरा कनेको समय भेटैत अछि वा असगर रहैत छी तँ लिखए लगैत छी । बड्ड आनन्द अबैत अछि । हम पूर्णतः अपन आनन्दलेल लिखि लैत छी । हमर रचनासभक कहिओ कोनो उल्लेख्य समीक्षा नहि भेल । हम एहिलेल कहिओ प्रयत्नशील सेहो नहि रहलहुँ । हमरा बस आनन्द अबैत अछि । मुदा एकटा गप्प कहब, मैथिलीमे साहित्यकारलोकनि एको अहं के रोगसँ ग्रसित छथि । एकरा एकटा समूहक जातिक धरोहर बुझैत छथिन । अपनेसभमे समीक्षा करब, अपनेसभक चर्च करब, अपनेसभ पुरस्कार लऽ लेब — एकटा प्रवृति छैक । हम अपन आदतिसँ मजबूर छी मित्रगण क्रोधित भऽ जएताह । तैया,े हम एखनतक नहि बुझए सकलिएैक जे एहिसँ लाभमे के रहैत छथि ? साहित्यकेँ तँ पूरा हानि होइत छैक ने ! ई मानसिकता जे हटि जएतैक तँ मैथिलीक विकास अत्यन्त दु्रत गतिसँ होइतैक । नव पीढ़ीमे एहि मादेँ किछु परिवत्र्तन देखएमे आएल अछि । ..... कतेक बेर तँ इहो देखएमे अबैत अछि जे नव साहित्यकार किछु दिनतक एहन मानसिकतासँ मुक्त रहैत छथि मुदा जेनाजेना स्थापित होइत जाइत छथि वएह भायरससँ संक्रमित भऽ जाइत छथि । ६. अहाँँक पार्टीक मुख्य ध्येय की अछि ? ई पार्टी जनहितमे कतेक निकटतम देखाइए ? एखन हम तराई–मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीमे छी । हम एकर प्रथम ९ संस्थापक सदस्यमेसँ एक छी । हमर राजनीति नेपाली काँग्रेससँ प्रारम्भ भेल । लोकतन्त्रलेल लडैत अएलहुँ । दिर्घ संघर्षक बाद लोकतन्त्रक स्थापना सेहो भेलैक आ अभ्यास सेहो । मुदा हमसभ महशूस कएलिऐक जे लोकतन्त्र यदि समावेशी नहि अछि , विविधताक सम्मानमे विश्वास नहि करैत अछि तँ ओहन लोकतन्त्र किछु लोकक लोकतन्त्र भऽ जाइत छेक । एहिसँ पिछड़ल, विभेदमे पड़ल लोक आ समुदायक कल्याण सम्भव नहि छैक । नेपालमे मधेशीक प्रति राज्य प्रायोजित विभेद होइत आएल छैक । तराई–मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी एकर समाधान चाहैत अछि । संघीयताक अभ्यास सँ सभ प्रकारक विभेदक अन्त्य चाहैत अछि । हमर पार्टी संघीयतामे अपन क्षेत्रमे स्वशासन आ फेर केन्द्रमे सहशासनलेल प्रतिवद्ध अछि । हमरा लगैत अछि मधेशमे विभेद अन्त्य करक यएह एक गोट उपयुक्त उपाय छैक । ७. की अपन विचारक विस्तार वास्ते साहित्यक उपयोग करैत छी ? से हमरा नहि बुझल अछि भऽ सकैछ जे हमर लेखनमे एकर प्रभाव होइक मुदा हमर ध्येय से नहि रहैत अछि । हमरा जे लगैत अछि हम लिखए चाहैत छी । हम पहिनहिं कहलहुँ जे हम एकदम अपना सुखलेल लिखैत छी आ हमरा अपना जे महशूस भेल रहैत अछि लिखएमे आनन्द अबैत अछि । हमर कथा संग्रह माल्होमे बेसी कथा राजनीतिक आसपड़ोसक छैक । एकर कारण कएटा — १. हम राजनैतिक व्यक्तिसभक समुदायसभक पीड़ा उगलए चाहलहुँ, २. हमरा अही क्षेत्रक बेसी अनुभव अछि जे हम व्यक्त करए चाहलहुँ ३ं राजनीति सेहो समाजेक अङ्ग छैक एकरा अछूत किआ मानी । ...... हमर किछु कवितासभ गुणात्मक परिवत्र्तनवास्ते, समाजकेँ सचेत करकलेल राजनीतिक उद्देश्यसँ प्रेरित सेहो अछि । ई कोनो अपराध नहि थिकैक । मैथिलीमे सभ किछु रहौक सेहो चाहना रहैत अछि । तैँ कहिओ मैथिलीक डिस्को तैयार करैत छी तँ कहिओ अन्य किछु । कहिओ बालगीत आदि आदि । ई हमर अपन शौख अछि । हमरा नीक लगैत अछि । ८. नेपालमे मैथिली साहित्य आ अन्यान्य रानेताबीच अपनाकेँ कतऽ ठाढ पबैत छी ? हम पहिनहिं कहलहुँ जे हम अपनाकेँ साहित्यकार नहि बुझैत छी । साहित्यकार हुअएलेल किछु जानकारी आवशयक छैक । साहित्यकलेल प्रतिवद्ध रहब सेहो जरुरी मानैत छी हम । साहित्य जिविकोपार्जनक सहयोगी हएब आपत्तिजनक नहि मुदा साहित्यककेँ वा अपनासभक सन्दर्भमे कहू तँ मैथिलीप्रतिक अनुरागकेँ अपन नफाक हेतु दोकानदारीमे प्रयोग करब हम नीक नहि मानैत छी । बहुतोकेँ देखैत छिअनि जे ओ एना करैत छथि । साहित्यमे माफियाक निर्माण करएमे रुचि रखैत छथि । दोसर केओ उभरि ने जाओ ताहिसँ डेराएत छथि । लगैत छन्हि जे केओ दोसरो दोकान थापि लेत तँ हमर बिक्री कमि जाएत । ....... ठीक एहिना राजनीतिमे सेहो होइत छैक तैँ हम दुनू ठाम अपनाकेँ एकहि ठाम पबैत छी । हमरा अपन स्थानसँ पूरा संतुष्टि अछि । लेखन हम आत्मतुष्टिलेल करैत छी , कोनो दोसर आकांक्षा नहि अछि तैँ संतुष्ट छी । राजनीति अपन विचारलेल करैत छी जाहिसँ कहियो सम्झौता नहि कएलहुँ , तैँ संतुष्ट छी । ९. अपनेक एहि कथ्यसँ जे राजनीति आ साहित्य दुनू एकटा समूह विशेषमे बन्हल अछि , हमहुँ सहमत छी । अहाँ दुनूमे अपनाकेँ कतेक नफा÷नोक्सान होइत पबैत छी ? व्यक्तिगत नफा नोक्सानक सवाल नहि छैक । एहिसँ समाज आ साहित्य नोक्सानमे अछि । क्रान्तिकारिता अथवा प्रगतिशीलता जे कहिऔक, अपने मुहेँ मियाँ मिट्ठूसँ सम्भव नहि हएत । एहिलेल गुणात्मक परिवत्र्तनक निरन्तरता जरुरी छैक । क्रान्तिकारी वा प्रगतिशील वएह जे गुणात्मक परिवत्र्तनलेल प्रतिवद्ध होथि । राजनीति वा साहित्यकेँ समूह विशेषमे बान्हएमे जे जिममेवार होथि ओ समाज आ साहित्यक विकाशक बाटमे अवरोधक आ प्रतिगामी छथि । नव प्रतिभासभकेँ छेकक कार्य करैत छथि । १०. अहाँक पार्टी सत्तामे आबि जाएत तँ मैथिली साहित्यकेँ कतेक फायदा पहुँचा सकत ? तराई–मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी व्यक्ति–समुदायक परिचय, स्वाभिमान आ आत्मसम्मानक प्रतिष्ठापन चाहैत अछि । विविधताक सम्मान अर्थात् असली बहुलवादक समर्थक अछि ई पार्टी । कहिओ मैथिली नेपालमे राजभाषाक रुपमे सम्मानित छल । काठमाण्डू उपत्यकाक राजामहाराजा मैथिलीमे साहित्यिक रचना कऽ अपनाकेँ धन्य बुझैत छलाह । तेहन स्थिति छल । जौँ हमरासभक पार्टी प्रभावकारी ढंगसँ सत्तामे आओत तँ निश्चिते मैथिली भाषा आ साहित्यकेँ सम्मान भेटतैक । एखनो संविधानसभामे बहुतो मैथिलीमे शपथ ग्रहण कएलनि । अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलनक आयोजनमे हमर पार्टीक लोकसभक प्रत्यक्ष आ खुला सहभागिता छल । ..... राज्यक यदि सहयोग रहैक तँ भाषा आ साहित्यक प्रभाव बढैत छेक । छोट उदाहरण अछि — १९ वर्ष पहिने जखन हम जनकपुर नगरपालिकाक प्रमुख पदपर विजयी भेल रही तँ मैथिलीक सम्मान आ प्रतिष्ठा बढाबएलेल बहुत किछु कएल गेल रहैक । नगरपालिका अपन सभ प्रमुख अपील मैथिलीमे सेहो छापय । तिरहुत रनिंग शिल्ड प्रतियोगिताक आयोजन प्रारमभ भेल रहैक । प्रत्येक वर्ष मैथिलीमे गीत रचना, गायन, संगीत आदि विधापर नगरपालिका पुरस्कार दैक । रश्मि, सुनील मल्लिक, अशोक दत्त आदि एहिसँ नीक परिचय प्राप्त कएलनि । होरीसँ १५ दिन पहिनेसँ आयोजन आ प्रस्तुतिक क्रम जारी रहैत छलैक । ... तँ असर तँ पड़िते छैक ने । ११. एखन अपने बालकविता÷गीतपर बेसी ध्यान देने छिऐक ? हँ, एखन हमरा बालगीत आकर्षित कएने अछि । हमर मित्र परमेश्वर हमरा एम्हर घुमाबक बरोबरि प्रयत्न कएलाह अछि आ तकरे प्रभाव थीक । बालगीतक रचनामे वृद्धि हएबाक चाही । नेनभुटकाक गीतसभकेँ संगीतवद्ध सेहो करबाक चाही जाहिसँ बच्चासभकेँ ई नहि लगैक जे ओकर अपन मातृभाषामे एकर आभाव छैक । ..... हम एहि दिशामे प्रयत्नशील छी । हमरासभद्वारा सञ्चालित जानकी एफ.एम.क स्टूडियो नीक छैक । शिघ्र एकगोट बालगीतक एल्बम निकालक योजनापर काज भऽ रहल छैक । १२. एखनतक अपनेक कएगोट पोथी प्रकाशित भेल अछि ? ह्मर एकगोट छोटछिन कविता संग्रह आन्दोलन, वीपी कोइरालाक प्रसिद्ध उपन्यासिका मोदिआइन जे महाभारतपर मिथिलाञ्चलक परिवेशमे लिखल अछि तकर मैथिली रुपान्तरण, माल्हो कथा संग्रह, संघीयताक सम्बन्धमे स्वीस विद्वान डा.निकोल टपरविनक लेखसभक मैथिली अनुवाद — एतेक मैथिलीमे । ट्रेड यूनियनः एक परिचय, संघीय स्वशासनतिर नेपालीमे । सभ मिलाकए छ टा । धन्यवाद ! अपन बहुमूल्य समय दऽ उतारा देबएलेल । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। मुन्नाजीसँ रमेश रंजनक अन्तर्वार्ता १. अहाँक रचनात्मक प्रवृति कोना जागल ? पहिल बेर की लिखल, कि छपल ? हम लेखकसँ पहिने रंगकर्मी छलहुँ । मिनाप जनकपुरसँ संलग्नता छल । नाटक, ताहूमे अभिनयमे रमल रहै छलहँु । मिनापक वातावरण साहित्यिक सेहो छलै । डा. धीरेन्द्र, डा. विमल,महेन्द्र मलंगिया सन गुरुक सानिध्य भेंटल । मिनापक तात्कालीन अध्यक्ष योगेन्द्र साह नेपालीक अभिभावकत्व । ओहि कालखण्डमे श्यामसुन्दर शशि, धर्मेन्द्र झा, धीरेन्द्र प्रेमर्षि,सुनील मल्लिक सन समकालीन मीत्र रचना करऽ लागल छलाह । हुनका लोकनिक दवाबसँ हमहूँ किछु–किछु लीखऽ लगलहुँ । हमर पहिल रचना छल, कविता जकर शिर्षक छलै– कचोट, आ हमर पहिल कविते प्रकाशितो भेल छल जकर शिर्षक छलै–साकार । अइ कविताक नेपाली अनुवाद तात्कालीन नेपाल राजकीय प्रज्ञा–प्रतिष्ठानक पत्रिका समकालीन सहित्यमे प्रकाशित भेल छल । २. शुरुआतेसँ कथा लेखन केलहँु ? आओर कि सभ लिखलहँु अछि ? नइ, कथा तँ हम बहूत बादमे लीखऽ लगलहुँ । सगर राति दीप जरए साहित्कि क्षेत्रमे जागरण लाबि देने रहै । जर्वदस्त चर्चा भऽ रहल रहै । मुदा मैथिलीक केन्द्र जनकपुरमे आयोजन नइ भऽ सकल रहै । जनकपुरमे आयोजन लएबाक हेतु हमरा कथा लीखऽ पड़ल रहए । पन्द्रहम् समारोह पैटघाटमे हम कथा लीख कऽ सहभागी भेंलहुँ आ सोलहम समारोह जनकपुरमे हमरा संयोजकत्वमे सम्पन्न भेल । आओर विधामे लिखबाक बात छै तँ हम सभ ओहिठामक लोक छी जाहिठाम संख्यात्मक रुपें लिखनिहारक अभाव रहलै । तें आवश्यकता अनुसार लिखबाक विवशता सेहो रहल । ओना कविता, कथा, नाटक, उपन्यास, आलोचना, वृतचित्र, फिल्म आ टेलीसिरियलक लेखन सेहो कऽ रहल छी । ३. अहाँक कथा कथानक कि रहैछ, आ ओकर मूल ध्येय की रहैछ ? हमरा कथाक विषयवस्तुक लेल बौआए नइ पड़ैए । अपन परिवेश आ आहि भितरक द्वन्दके चिन्हित करै छी । ओकर सुख, दुःख, आन्नद, पीड़ा, संधर्षके भोक्ताक रुपमे अनुभूति करै छी । एकटा चेतना हमरा निर्देशित करैत अछि – ओ छै माक्र्सवादी सौन्दर्य चेतना । हमरा बुझने हमर साहित्यक ध्येय के आओर स्पष्टीकरण्क अवश्यकता नइ छै । ४. अहाँ अपन कथा लेखनक प्रारम्भिक दौरसँ अखन धरिक यात्रामे की परिवर्तन पबैत छी ? विचारक स्तरपर खास नइ । प्ररम्भमे आवेश छल– अनियन्त्रित आवेश, आब थोड़े नियन्त्रणमे अछि । कहन शैली पहिनेसँ थोड़े परिपक्व बूझारहल अछि । अर्थात शिल्प आ भाषाक स्तरपर थोड़े प््रभावशाली लेखन कऽ रहल छी, सन बुझाइए । ५. नेपाली आ मैथिली कथा साहित्य मध्य मैथिली कथा कतऽ अछि ? दुनूमे समानता आ भिन्नता की छै । जे भारतीय मैथिलीमे हिन्दीक आगू मैथिलीक अवस्था छै । नेपाली राज्य संरक्षित भाषा छै । राज्य अपार संभावना बनौलकै ओहि भाषामे तें संख्यात्मक आ गुणात्मक दुनू रुपें पर्याप्त लेखन भऽ रहल छै । मैथिलीमे सेहो समकालीन कथा साहित्यिक प्रतिनिधि कथा लेखन होइ छै, मुदा संख्या अत्यन्त न्यून छै । समानता आ भिन्नताक बात जहाँ तक छै तँ देश भितरक औपनिवेशिकताके भोगिरहल अछि मिथिलाक लोक । ओ समानता चाहैए, नागरिक अधिकार चाहैए, मुक्तिक छटपटी छै मैथिली साहित्यमे, नेपाली शासक वर्गक भाषा छै । मुदा नेपाली कथामे नेपालक प्रतिनिधि कथाक अभाव छै, जातीय कथाक संकीर्ण घेरासँ बाहर नइ निकलि सकल अछि । ६. अहाँ रंगकर्मसँ सेहो शुरुएसँ जुड़ल रहलहुँ अछि । कि कोनो नाटको लिखलहँु अछि ? अहाँक विचारमे लेखन आ रंगकर्ममे शुलभ आ सम्प्रेषनीय ककरा मानैत छी ? हँ, से तँ हम अपनो स्पष्ट कऽ चूकल छी । नाटक लिखलहुँ अछि । आधा दर्जनसँ बेसी मंचीय नाटक, ओतबे नुक्कड़ नाटक आ रेडियो नाटक सेहो खूबे लिखलहुँ अछि । हमर विचार कि ? सर्वमान्य विचार छै जे नाटक शुलभ आ सम्प्रेषानीय होइ छै । श्रव्य आ दृश्य गुणक कारण । ७.अहाँ अपन रंगकर्म मध्य अपनाके कतऽ मानै छी ? अहिमे मिनापक योगदान कत्ते मानै छी ? अपना विषयमे मूल्याङकन करब कठीन होइ छै । नाटक अहूना समूह कार्य छै । तें समूहक सफलता–विफलतामे व्यक्तिक सफलता–विफलता जुड़ल रहैत छैक । जँ मिनाप सफल छै तँ हमहूँ सफल छी । हमरा रंगकर्मक प्रारम्भमे हमर गाम परवाहा आ हमर रंग–यात्राके एतऽ धरि पहुँचाबऽमे सम्पूर्ण योगदान मिनापे के छै । ८. नेपाली रंगकर्मसँ मैथिली रंगकर्म स्तरीयताक मादे कत्तेक लग आ दूर अछि ? विश्व रंगमंचक प्रयोग आ प्रविधिसँ नेपाल परिचित भऽ रहल अछि । नेपालसँ हमर अर्थ अछि कोनो खास भाषा नइ सम्पूर्ण नेपाल । जकरामे जहिना व्यावसायिक दृष्टिकोण छै, तकरामे रंगमंचीय ज्ञानक विस्तार ताही रुपें भऽ रहल छै । समकालीन नेपालक रंगमंच मध्य मैथिली अत्यन्त सम्मानित अवस्थामे अछि । मुदा नेपालीक तुलनामे मैथिलीक रंग समूह कम छै । नेपालीमे सेहो स्थायी स्वरुपक समूह बहूत थोड़ छै । मुदा एम्यचोर थिएटर कएनिहारक संख्या बहूत छै । तखन मिनाप मात्रक प्रतिनिधित्वसँ गर्व कएल जा सकैए । ९. कहल जाइ छै महेन्द्र मलंगिया मिनापके गोड़सि लेने छलाहा । सभ रंगकर्मी हुनक पछलग्गू मात्र भऽ कऽ रहि गेल छल । हुनका गेलाक बाद अपने सभके विकसित होएबाक मौका भेटल अछि कि नइ ?( रामभरोस कापड़िक मिथिला दर्शनक लेख ) अपनेक प्रश्नपर हमरा ठहक्का लगएबाक मोन होइए । मुदा ई विचार अपने कत्तौसँ ग्रहण केलहुँ अछि तें बातके स्पष्ट करब उचित । ३२ वर्षक अइ संस्थाके एक गोट व्यक्ति कोना कव्जा कऽ सकैत अछि ? ई मिथ्या आ काल्पनिक सोच छै । कोनो एक गोटेक सृजनात्मक क्षमताक बलपर मात्र मिनाप ने तँ ई उपलब्धी प्राप्त केलकैए ने ऊँचाइ । महेन्द्र मलंगिया मिनापक सिर्जनात्मक नेतत्वकर्ता छलाह, छथि । समूहक मान्यता आ समूह संचालन विधिसँ संस्था निर्देशित होइ छै आ नेतृत्व सेहो । मलंगिया सर ओहिसँ फरक नइ छलाह । सामूहिक निणर््ाय आ व्यक्तिगत जिमेबारीक मान्यतासँ मिनाप संचालित होइत रहल अछि । स्वयं द्वारा निर्धारित अनुशासनके कियो तानाशाहक क्रुरता बुझै छै तँ बूझक लेल छोड़ि देल जाए । हुनका गेलाक बाद विकसित होएबाक बात छै तँ ओ एखनो गेल नइ छथि ओ भौतिक रुपमे थोड़े कम उपस्थित भऽ रहल छथि । मिनापक एक–एक गोटेक व्यक्तिगत सफलता उदाहरणीय छै । आ प्रत्येक व्यक्तिक सफलतामे मलंगियाजीक प्रेरक व्यक्तित्वक पैघ योगदान छै । १०.मिनापसँ एखन सरिपहुँ अहाँक अटूट जुड़ाब देखल जा रहल अछि, एखन धरि अहाँ मिनापके कि देलियै आ मिनाप अहाँके की देलक ? जरुर ! मिनाप हमरा सभकिछु देलक । व्यक्तिगत प्रगति आ सार्वजनिक जीवनमे सम्मानक अन्तर कारण मिनाप अछि । देशक नाट्य सङ्गीत क्षेत्रक सर्वोच्च संस्था नेपल सङ्गीत तथा नाट्य प्रज्ञा–प्रतिष्ठानक प्राज्ञ परिषद सदस्य आ नाट्य विभाग प्रमुखक नियूक्तीमे मिनापक सेहो मुख्य भूमिका छै । हम की देलियै तकर मूल्याँकन अन्य मीत्र लोकनि करथि । हँ, एतेक जरुर कहव जे अपना जीवनक सर्वाधिक उर्जाशील समय मिनापके देलियैक अछि । ११. अहाँ अपना अगिला पिढ़ी (बेटी प्रियंका ) के अहिसँ जोड़बाक कि ध्येय अछि ? कि मिनापक कलाकार मिनापसँ (यथा फिल्म अभिनय ) आगू जा सकल अछि ? ( अपनाके बाड़ि कऽ कहू ) ओकरो हमरे जकाँ रंगकर्म करबाक इच्छा भेलै, हम रोकलियै नइ बड़ु प्रोत्साहित कएलियै । समान्यतः ई कहल जाए जे हम रंगकर्मके नइ तँ अछूत कार्य मानलियै ने निकृष्ट तें नइ रोकलियै । मिनापक कलाकार मिनापसँ आगू ? ई कोना हतै ? मिनापक कोनो कलाकारक मिनापसँ आगूक ध्येय नइ छै । कलाक सम्पूर्ण साधना आ क्षमतमके मिनापक हेतु समर्पित करऽ चाहैए मिनापक कलाकार । मिनापसँ आगू अपने फिल्म दिश संकेत केलहुँ अछि, तँ ई मान्यता हम स्वयं नइ रखै छी । नाट्य अभिनयसँ पैघ फिल्म अभिनय नइ भऽ सकैए । चर्चा आ व्यावसायिक सफलता आगू जएबाक मापदण्ड नइ छियै । ओना फिल्मसँ परहेज नइ छै मिनापक कलाकारके । ओहो अभिनये छै । मिनापक अधिकांश कलाकार फिल्म क्षेत्रमे सेहो स्थापित अछि । मुदा मिनापक अधिकांश कलाकार फिल्मसँ बेसी नाटकके प्रथमिकता दैए । १२.मैथिली रंगकर्ममे तकनिकी सुलभताक कारण चूनौती आओर बढ़ि गेलैए ? रंगकर्मक भविष्य कि छै ? जतऽ चूनौती छै ओत्तै संभावना छै । तकनिकक सुलभता तँ छै, मुदा मैथिली रंगमञ्च ओहिसँ परिचित भऽ रहल अछि कि नइ ? समान्यतः मैथिली रंगकर्म मध्कालीन अवस्थामे अछि । भौतिक पूर्वधारक अभाव छैके । मिथिलाक मूल भूमिमे रंग गतिविधि शून्य छै । अप्रवासी रंगकर्म कृतिम स्वाँस आपूर्ति मात्र छै । तें पाठ आ मंच दुनूक तकनिकी वैशिष्ठ्यक निरन्तर अन्तरघुलन मैथिली रंगमञ्चक भविष्य निर्धारण करतै । १३. नेपालमे मैथिली सहित्यक भविष्य केहन देख रहल छियै, कत्ते दिन टिक पाओत ? भविष्य बेजाए नइ छै । भाषिक चेतनाक स्तर उठलैए । खतरो ओतबे बढ़लैए । मुदा समग्रतामे बहूत चिन्ताजनक अवस्था नइ छै । कत्ते दिन टिक पाओत ? एखन भविष्यवाण्ी नइ करी । ई मृत्यूक समय निर्धारण जकाँ भऽ जाइ छै । भाषाके मूर्त बनबै छै साहित्य कला तें ई मरब तँ स्वयंके मृत्यू छै एकर कल्पना नइ करी । १४. मैथिली साहित्यपर शुरुसँ जाति विशेषक बर्चस्व रहलै । आब झूण्डक–झूण्ड सक्रिय पिछड़ल समूदायक लोकक प्रवेशसँ एकर भविष्य केहन मानिरहल छी ? ई यर्थाथ छै । मिथिलाक सामाजिक संरचना सामन्ती रहलै । कर्मकाण्डीय लोकक बर्चस्व । संस्कृतक विरुद्ध आम लोकक भाषाके सिर्जनात्मक अभिव्यक्ति देबाक लेल मैथिलीक जन्म भेल छलै । मुदा संस्कृत पूनः अजगर जकाँ गछेर लेलकै । आम लोक अहि भाषासँ दूर होइत गेल । खाँटी मैथिली पिछड़ल वर्ग संगे छै । अधिकांश गाममे रहनिहार अहि वर्गक संग अभिव्यक्तिक हेतु दोसर भाषा नइ छै । संस्कारमे मैथिली छै । पूजा, पाठ, अनुष्ठान, गाथा सभमे मैथिली छै । कथित देव भाषाक प्रभावसँ बँचल अछि ओ समूदाय । तें सूच्चा मैथिल जँ मैथिलीके नेतृत्वमे आँगा अबैत अछि तँ अहिसँ आह्लादकारी आओर की हेतै । १५.कि मिनाप जाति–पाँतिक फाँट मध्य टीकल अछि ? कि ओहो कोनो द्वन्दक शिकार अछि ? नेपालमे अखन ई विषय प्रवेशे कएलकै अछि । समान्यतः ई वहशक विषय छै । वहश करब समस्याके निरुपण करब छियै । कानो गम्भिर द्वन्द नइ छै मिनापमे । १६.अन्तमे अपन पछिला आ नवका रचनाकार , रंगकर्मी कि कहऽ चाहब अहाँ ? कोनो खास नइ । बहूत किछु कहि चूकल छी, आब कहब आवश्यक नइ छै । अनेरो उपदेश नइ छाँटल जाए । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। नेपाली साहित्यक विज्ञ व्याख्याता (सेवा निवृत्त आ मैथिलीक प्रबुद्ध रचनाकार श्री राजेन्द्र बिमलसँ हुनक रचना यात्रा मादेँ गप केलनि विहनि कथा रचनाकार श्री मुन्नाजी। हम पुछैत छी: मुन्नाजीसँ राजेन्द्र बिमलक अन्तर्वार्ता मुन्नाजी: नमस्कार राजेन्द्र बिमलजी। राजेन्द्र बिमल: मान्यवर मुन्ना जी, जय मैथिली। मुन्नाजी:बिमलजी, अपनेक मातृभाषा मैथिली रहलाक पछातियो अपने नेपाली भाषा साहित्यमे उच्च अध्ययन आ अध्यापनमे अग्रसर रहलौं, एकर कोनो विशेष कारण? राजेन्द्र बिमल: मैथिली मातृभाषा रहलो संता “नेपाली भाषा – साहित्यक अध्ययन – अध्यापनमे जीवन समर्पित करबाक अन्तःप्रेरणा उद्भूत भेल दू गोट प्रमुख उद्दीपनसँ” – (क) प्राथमिक कक्षासँ “स्नातकोत्तर कक्षाधरि नेपाली (राष्ट्रभाषा) अध्येताक संख्या नेपालमे सर्वाधिक होएबाक कारणे “राष्ट्रीय स्तरधरी अपन परिचिति स्थापित करबाक अवसर अपेक्षाकृत सहज अनुभव करब। उल्लेखनीय थिक जे राष्ट्रभाषा नेपालीक अध्ययन नेपालमे प्रवेशिका कक्षाधरि अनिवार्य थिकै । मैथिलीक अध्ययन – अध्यापन नेपालक मात्र दू गोट महाविद्यालय धरि सीमित अछि आ ताहूमे विद्यार्थीक संख्या नगण्य भेल करैछ । नेपालमे मैथिली अध्ययन – अध्यापनक अवस्था भारतमे उर्दू अध्ययन अध्यापनक अवस्थासँ “सेहो ऋणात्मक अछि । (ख) मैथिली अध्ययन – अध्यापनमे अपन आधारभूत आर्थिक भविष्य नितान्त असुरक्षित अनुभव करब । मुन्नाजी:मैथिली साहित्य रचनाक शुरुआत कोना केलौं आ पहिल बेर की लिखि कतऽ छपलौं: राजेन्द्र बिमल: किछु साहित्यप्रेमी गुरुलोकनिक प्रेरणासँ “दसे वर्षक आयुसँ” किछु ने किछु जोरती जोरैत रहबाक लेल प्रेरित होइत रहलहुँ। मुदा, हमर यत्किञ्चित प्रतिभावल्लरीक जाहि स्तम्भकेँ पाबि पल्लवन पुष्पन भेल तिनक नाम थिक डा. धीरेन्द्र । अध्ययनकालसँ अध्यापनकालधरि प्रायः नित्य हुनकासँ भेंट होइत छल आ प्रत्येक भेंटमे ओ किछु नव लिखबाक लेल प्रेरित करैत छलाह। हमर पहिल मैथिली कथा “मुइल बच्चा” १९६२ (१) ई.क “मिथिला मिहिर”मे प्रकाशित भेल छल । मुन्नाजी: अहाँ नेपाली साहित्यक व्याख्याता रहलैं अछि। की अहाँ नेपालीमे सेहो रचना केलौं? ओकर नेपाली साहित्यकार वा पाठक मध्य कतेक महत्व भेटल? राजेन्द्र बिमल:प्रकाशन – सुविधाक दृष्टिए मैथिली साहित्य – संसार एक गोट विराट मरुस्थल थिक जाहिमे एकाध छोटछोट मरु – उद्यान प्रकट होइत अछि, विलुप्त भए जाइत अछि। जएह हरियर गाछ देखैत छी से निसर्गक चमत्कार बूझू । राजकीय संरक्षणसँ सिंचित नेपाली भाषा साहित्यक संसार हरियर कचोर अछि, उर्वर आ नित्य सम्बर्धनशील । तेँ नेपालीमे हमर दर्जनधरि पोथी प्रकाशित भए सकल । पाठकके संख्या बेसी थिकै । तँ छोटो छिन कथा प्रकाशित भेल नहि कि पत्रक पथार लागि जाइत अछि । मैथिलीक पाठक संख्या से हो कम (लगभग जतबे लेखक, ततबे पाठक) आ हुनकामे “रिस्पोन्स” करबाक प्रवृत्ति से हो तेहन जीवन्त नहि । नेपाली भाषा साहित्यमे योगदान हेतु देल जाएबला पुरस्कारमे सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार “जगदम्बा श्री” सँ सम्मानित होएब हमर सौभाग्य थिक । लगभग तीन दर्जन संस्थासँ सम्मानित/ पुरस्कृत भेल छी । मुन्नाजी:नेपाली आ मैथिली साहित्यक स्तरक आधारपर दुनूमे कतेक समता वा विषमता छै: राजेन्द्र बिमल: संख्यात्मक आ गुणात्मक दुनू दृष्टिए नेपाली साहित्यक अवस्था घनात्मक अछि । प्रभाववादी, प्रतीकवादी, विम्ववादी, घनत्ववादी, आस्तित्ववादी, उत्तरआधुनिकतावादी, विनिर्माणवादी, नारीवादी, उत्तरऔैपनिवेशिकतावादी प्रभृत अत्याधुनिक लेखनशैली आ विषयवस्तुसँ समृद्ध नेपाली साहित्य सरिपहुँ विश्व साहित्यसँ प्रतिस्पर्धा करबाक तैयारीमे अछि । १९६० क दशकसँ एखनधरि मैथिली साहित्यक विकासमे शिल्प वा कथ्यक दृष्टिए बहुत गतिशील विकासक्रम परिलक्षित नहि होइत अछि । विश्व साहित्यमे उठि रहल अनेक प्रवृत्ति लहरिक आरोह-अवरोह, आलोड़न – विलोड़नसँ अधिकांश लेखक आ पाठक अपरिचित जेकाँ लगैत छथि । मृत्तिका मोह वा “नास्टाल्जिया” कने बेसिए गछेरने अछि। मुन्नाजी:अपनेक मैथिलीमे टटका गजल संग्रह “सूर्यास्तसँ पहिने” प्रकाशित भेल अछि। एकर अतिरिक्त आर की सभ प्रकाशन लेल तैयार अछि। राजेन्द्र बिमल: मैथिलीमे लीखल अनेक पाण्डुलिपि प्रकाशनक बाट ताकि रहल अछि (क) लगभग पाँच गोट कथा संग्रह (ख) एक गोट उपन्यास (चान अहाँ उदास छी – १९६३ ई.) (ग) एक गोट गीत संग्रह (घ) एक गोट कविता संग्रह (ङ) एक गोट निबन्ध संग्रह (च) दू गोट आलोचना संग्रह (छ) एक गोट भाषा विज्ञानक पोथी (ज) एक गोट नाटक – संग्रह आदि (A comparative study of the Morphology of Maithili Nepali and Hindi Language) आदि । मुन्नाजी:मैथिली साहित्य मध्य वर्तमान समयमे गजलक की दशा अछि, एकर भविष्यक की दिशा देखाइछ? राजेन्द्र बिमल: गजल अत्यन्त लोकप्रिय विधा थिक । मैथिलीमे से हो खूब लीखल जा रहल अछि आ पढलो जा रहल अछि । बहुत गजलकार एकर व्याकरणसँ कम परिचित छथि । मुदा भविष्य उज्जवल छैक । मैथिली गजलमे अपन निजात्मकताक विकास शुभ संकेत थिक । मुन्नाजी:मैथिलीक प्रकाशित गजलक संगोर (कतेको गजल संग्रह) आ मायानन्द मिश्रक गजलकेँ गीतल कहि प्रकाश्यक मादेँ गजेन्द्र ठाकुर एकरा अस्तित्वहीन कहि अपन सम्पादकीय आलेख माध्यमे अवधारणा स्पष्ट केलनि।अहाँक ऐपर अपन स्वतंत्र विचार की अछि? राजेन्द्र बिमल: संगोर सभ नहि देखल अछि । आदरणीय मायाबाबूक गीतल (गीत-गजल) एक गोट प्रयोग थिक । हम कोनो सृजनकेँ निरर्थक नहि बूझैत छी आ लेखन स्वतंत्रतामे विश्वास रखैत छी । मुन्नाजी:नेपाल आ भारतक मैथिली रचनाकारक मध्य कखनो कऽ फाँट देखाओल जाइछ। ऐ फाँटकेँ भरबाक लेल अहाँक की विचार? राजेन्द्र बिमल: भाषा, साहित्य, संस्कृतिक कोनो राजनैतिक भूगोल नहि होइत छेक – जेना आकाशमे इन्द्रधनुष वा धरतीपर जलप्रवाहक कोनो सीमा स्तम्भसँ छेकल नहि जा सकैत अछि । हमर आकांक्षा रहल अछि जे सरकारी/ गैरसरकारी स्तरपर एहन साझा मञ्चक निर्माण हो जे मैथिली भाषा, साहित्यक सम्बर्धन हेतु मीलिजूलि कए नीति आ कार्यक्रमक निर्माण करए, तकरा कार्यान्वित करए । मैथिली आन्दोलनक हेतु सेहो एहन मंचक अपरिहार्यताक अनुभव करैत छी । भैयारी विभेद आ बँटबारा जातीय अस्मिताकेँ छाउर करबाक लेल शत्रुशक्तिक हेतु लंकादहनक मार्ग प्रशस्त कए दैत छैक । जमीन बँटि जाइत छैक, भाय – भायक हृदय नहि बटबाक चाही, ई बोध जगाएब इतिहासक वर्तमान कालखण्डक मैथिली सर्जक आ चेतनासम्पन्न मैथिलक हेतु नैतिक दायित्व थिक । मुन्नाजी: अपने रचनामे सक्रिय रहलहुँ अछि तखन प्रकाशित पोथी एते विलम्बे किएक आएल? सेवा निवृत्तिक पछाति पहिल संग्रहमे गजले संग्रहकेँ किए प्राथमिकता देलौं, एकर कोनो विशेष कारण? राजेन्द्र बिमल: जनकपुरमे रहि स्थानीय स्तरपर पोथी प्रकाशन करब असहज । टङ्कणक असुविधा, प्रेसक असुविधा (कतबो प्रूफ पढब, अशुद्धि जहिनाक तहिना) स्वयं से हो शारीरिक रुपैं एहि दिशामे बहुत सक्रिय रहबाक अवस्थामे नहि छलहुँ आ एखनहु नहि छी । तेँ ............... । “गजले” छपलहुँ, तकर कारण हमर प्रिय सहयोगी प्रो.परमेश्वर कापडिक जोर । मुन्नाजी: मैथिली साहित्यक रचना मादेँ अगिला पीढ़ीकेँ की सनेस देबऽ चाहब? राजेन्द्र बिमल: “कीर्तिलता” मे मैथिल कुलपुरुष, मंत्रदष्टा महाकवि विद्यापतिक एक गोट ऋचा थिकैन्हि, जकर अर्थ थिक जे कालक अखण्ड प्रवाहमे ओही जातिक कीर्तिक लता पसरैत अछि जे अक्षरक खम्भा दए अक्षरेक मचान बन्हैछ । एकर मर्म बूझि मिथिलाक भविष्णु सपूत–सुपुत्री लोकनि अथक अक्षर–साधनाद्वारा बारल अपन गौरवदीपक अमर आलोकसँ विभ्रान्त विश्वक हेतु मंगल–पथ सदैव उद्भासित करथि, से शुभ कामना । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर उल्कामुख (मैथिली नाटक) तेसर कल्लोल (आचार्य व्याघ्र एकटा शतरंजक घनक चारू कात घूमि रहल छथि। आचार्य सिंह दोसर शतरंजक घनक चारू कात घूमि रहल छथि।) आचार्य व्याघ्र: तत्वचिन्तामणिमे हमरा सभक चर्चा गंगेश केलन्हि मुदा आब लोक हमर सभक असल नाम सेहो बिसरि गेल। हमर सभक पोथी सेहो सुड्डाह भऽ गेल। आचार्य सिंह: मुदा अपना सभक तँ कोनो सरोकार अछिये नै, तखन? आचार्य व्याघ्र: हँ, आ मुइलाक बाद भूत राकशसँ नीक व्याघ्र आ सिंह कहेनाइ भेल ने। आचार्य सिंह: मुदा अपना सभक तँ कोनो सरोकार छलैहे नै, दर्शनक सिद्धान्तमे गंगेश द्वारा कएल चर्चा… आचार्य व्याघ्र: तहीसँ हमरा सभ अछोप भऽ गेलौं किने। आचार्य सिंह: मुदा ओ तँ आनो लोकक चर्च तत्वचिन्तामणिमे केने छथि। ओ सभ किए अछोप नै भेलाह… आचार्य व्याघ्र: कारण हुनका सभक नाम गंगेश लिखने रहथि। मुदा अपना सभक लेल ओ आचार्य सिंह आ आचार्य व्याघ्र मात्र लिखने छथि। से गंगेशक कविता बनि गेल उल्कामुख आ हम सभ बनि गेलौं व्याघ्र आ सिंह। गंगेशक बेटा वर्द्धमान गंगेशक विषयमे लिखलन्हि “सुकवि कैरव काननेन्दुः”। मुदा कियो खोजो केलकै चौपाड़िपर जे जँ गंगेश कवि रहथि तँ हुनकर कविता की भेल। आचार्य व्याघ्र आ आचार्य सिंहकेँ जँ गंगेश आदर देलन्हि तँ से पोथी सभ सेहो सुड्डाह भऽ गेल। आचार्य सिंह: कोन रहस्य छै ऐ मे। आचार्य व्याघ्र: असुरक्षा आचार्य सिंह। गंगेश केलक रक्षा हमर सभक तर्कक श्रीहर्षक आक्रमणसँ, आ बनेलक नव्य-न्याय। नबका शास्त्र, नबका न्यायशास्त्र। ओहो अजीबे भेल, पिताक मृत्युक पाँच साल बाद भेलै ओकर जन्म आ चर्मकारिणीसँ केलक विवाह। आ ओइ विवाहसँ जे पुत्र भेलै वर्धमान से फेर मिलेलक न्याय आ नव्य-न्यायकेँ। मुदा वर्द्धमान अपन पिताक कविताकेँ नै बिसरल। असुरक्षा आचार्य सिंह, चौपाड़ि मध्य बाहरक विद्यार्थीकेँ तत्वचिन्तामणिक प्रतिलिपि पक्षधर नै करऽ दै छलखिन्ह, ने सार-संक्षेप लिखऽ दै छलखिन्ह। चौपाड़िमे वर्द्धमानक बाद सभ कियो आचार्य व्याघ्र, आचार्य सिंह आ उल्कामुख सभकेँ काल्पनिक बना देलक। आचार्य सिंह: मुदा ऐसँ सर्जन कोना हएत आचार्य व्याघ्र। बिन सर्जनक चौपाड़िपर विद्यार्थी आत्म अभिव्यक्ति कोना करताह। योग्यता कोना बढ़त। पुरान इतिहास व्याघ्र, सिंह आ उल्कामुख बनि नै रहि जाएत? प्रतिबन्ध, प्रतिबन्ध..फेर ज्ञानक विस्तार कोना हएत।समाजक एक वर्ग दोसरसँ कटि जाएत… प्रतिबन्ध, प्रतिबन्ध..ऐ सँ स्नेह बढ़त वा निरपेक्षता बढ़त? जे अहाँकेँ करबाक हुअए करू, जे हमरा करबाक हएत हम करब..की समाजक यएह गति हएत? आचार्य व्याघ्र: आचार्य सिंह। की ऐ विस्मरणकेँ रोकबाक प्रयास नै हेबाक चाही? आचार्य सिंह: हेबाक चाही आचार्य व्याघ्र। कोनो चीजक विस्मरण तावत धरि सम्भव नै जाधरि ओकरा हम सभ बुझनाइ नै छोड़ि दिऐ। आचार्य व्याघ्र: बुझि कऽ मोन राखनाइ, ठीक कहलौं आचार्य सिंह। तँ चौपाड़िपर ई व्यवस्था भऽ रहल हएत जे बिनु बुझने पाठ विद्यार्थीकेँ यादि कराएल जाए जइसँ सभ बिसरि जाथि गंगेश आ वल्लभाकेँ। आचार्य सिंह: मुदा हम सभ संकेतक प्रयोग कऽ सकै छी। संकेतसँ स्मरण विस्मरण नै बनत। अपूर्ण रहत चौपाड़िक पाठ, आ अपूर्ण पाठक विस्मरण नै भऽ सकैए, विस्मरण होइए मात्र पूर्ण पाठ। आचार्य व्याघ्र: मुदा कोन संकेत आचार्य सिंह.. आचार्य सिंह: उल्कामुख… (आकाशवाणी होइए…. उल्कामुख..उल्कामुख…उल्कामुख…उल्कामुख…आचार्य व्याघ्र आ आचार्य सिंह वाम रंगशीर्ष दिश जाइ छथि। तावत आचार्य शरभ दूटा शिष्य- शिष्य खिखिर आ शिष्य शाही-क संग प्रवेश करै छथि आ रंगपीठ होइत दहिना मत्तवर्णीपर आबि जाइ छथि। दुनू शिष्य एकटा शतरंजक घन उठा कऽ अबै छथि। प्रकाश दहिना मत्तवर्णीपर केन्द्रित भऽ जाइत अछि।) आचार्य सरभ: ई गंगेश आ वल्लभाक विवाह… शतरंजक खाना सभ दैत्याकार बनि जाएत, सात सए सालमे जाति खतम भऽ जाएत..किछु करू…रोकू..विस्मरण…विस्मरण….शिष्य खिखिर, शिष्य शाही। शिष्य खिखिर: आचार्य सरभ, अपूर्ण पाठक विस्मरण नै भऽ सकैए, विस्मरण होइए मात्र पूर्ण पाठ। शिष्य शाही: आचार्य सिंह आ आचार्य व्याघ्रक शिक्षासँ निकलल अछि संकेत लिपि, संकेतसँ स्मरण विस्मरण नै बनत आचार्य सरभ। ओ पाठ अछि उल्कामुख.. आचार्य सरभ: की अछि ई उल्कामुख? शिष्य खिखिर, शिष्य शाही..की अछि ई उल्कामुख? बड्ड नाम सुनै छिऐ एकर। मुदा चौपाड़िपर कियो बताएत जे की छिऐ ई उल्कामुख.. शिष्य शाही: आचार्य सरभ, कोना देखब ई उल्कामुख। ई आचार्य सिंह आ आचार्य व्याघ्रक शिक्षाक प्रयोग अछि जे गंगेश आ वल्लभा केने छथि। जे अछि संकेत मात्र, संकेत जे अछि चारू कात, आ जे अछि कतौ नै। आचार्य सरभ: मुदा ओ संकेत, ओ उल्कामुख ऐ बँसबिट्टीकेँ पार केलक कोना शिष्य शाही। (शिष्य शाही शिष्य खिखिर दिश बकर-बकर तकैत अछि।) शिष्य खिखिर: आचार्य सरभ… खतम तँ कैये देलिऐ हम सभ.. आचार्य व्याघ्र आ आचार्य सिंहकेँ जँ गंगेश आदर देलन्हि तँ से पोथी सभ सेहो सुड्डाह भऽ गेल। गंगेशक कवित्वक चर्चा सुड्डाह भऽ गेल..तँ हुनकर कविता बनि गेल उल्कामुख..वल्लभा बना देलन्हि ओकरा उल्कामुख..आचार्य व्याघ्र, आचार्य सिंह आ गंगेश..ऐ तीनू नामक भय.. पुरान इतिहास व्याघ्र, सिंह आ उल्कामुख बनि गेल तँ हमहू सभ तँ सरभ, खिखिर आ शाही बनि गेलौं। सरभ तँ कल्पित भऽ गेल, शाही आ खिखिर सेहो खतम भेल जाइए.. प्रतिबन्ध, प्रतिबन्ध..फेर ज्ञानक विस्तार कोना हएत? आचार्य सरभ: हम कल्पना छी शिष्य खिखिर? शिष्य शाही: आचार्य, अहाँ कल्पना छी आ हम सभ कल्पना बनैबला छी।चौपाड़ि मध्य बाहरक विद्यार्थीकेँ तत्वचिन्तामणिक प्रतिलिपि पक्षधर नै करऽ दै छलखिन्ह, आब देखियौ चौपाड़िक दशा..बाहरक विद्यार्था तँ छोड़ू एतुक्को विधार्थीक एतए अभाव भऽ गेल अछि। आचार्य सरभ: हम कल्पना? आचार्य सरभ भूतकालक कल्पना आकि आचार्य सरभ भविष्यकालक अछि कल्पना..विस्मरण..दोसराकेँ विस्मरण सिखबैत स्वयं विस्मरित भऽ गेल अछि आचार्य सरभ। विस्मरण मंत्र..ई उल्कामुख बनि गेल अछि भय.. दोसराकेँ विस्मरण सिखबैत स्वयं विस्मरित भऽ जाइए लोक। (आकाशवाणी होइए…. उल्कामुख..उल्कामुख…उल्कामुख…उल्कामुख…आचार्य व्याघ्र आ आचार्य सिंह वाम रंगशीर्षपर प्रकाश एलापर साकांक्ष भऽ छथि। आचार्य शरभ, शिष्य खिखिर आ शिष्य शाही दहिना मत्तवर्णीपर अन्हार भेलासँ मात्र छाह बनि जाइ छथि। तीनू छाह शतरंजक घन उठा कऽ आगाँ बढ़ैत छथि।) आचार्य व्याघ्र: हम कल्पना? भूतकालक कल्पना आकि भविष्यकालक.. आचार्य सिंह: भूतकालक आचार्य व्याघ्र, भूतकालक। भविष्य तँ वल्लभक मृत्युक सात सए साल बाद आएत..अखन तँ अदहे बीतल अछि… भविष्यकालक तँ प्रतीक्षा अछि..मुदा तावत की की कल्पना बनि जाएत…की की बचल रहि जाएत। (सौंसे अन्धार पसरि जाइत अछि, अन्हारेमेसँ आचार्य सिंह आ आचार्य व्याघ्रक अबाज बहराइए।) आचार्य व्याघ्र: तखन कल्पने सही आचार्य सिंह। चलू वर्द्धमान, दीना, भदरी आ उदयन लग। वएह सभ कोनो गप बतेता। आचार्य सिंह: ई कोनो बेजाए गप नै हएत आचार्य व्याघ्र। षडयंत्रकेँ तँ तोड़ैए पड़त.. मुदा तावत की की बचल रहि जाएत सएह..। आचार्य व्याघ्र: से तँ देखिये रहल छी आचार्य सिंह। आचार्य सरभ आ हुनकर शिष्य शाही आ खिखिर, ओहो सभ चुप नै छथि, किछु ने किछु कइये रहल छथि। एकटा रटैबला मशीन बनि गेल अछि मिथिलाक विद्यार्थी। नव्य-न्याय बंगाल चलि गेल, तकर ककरो कोनो चिन्ता नै छन्हि..किए चलि गेल.. वल्लभा आ गंगेशकेँ खतम करैत करैत ओ सभ सेहो खतम भऽ रहल छथि। आचार्य सिंह: आचार्य व्याघ्र से तँ आरो खराप भेल..हे आबि गेलाथि वर्द्धमान, दीन, भदरी आ उदयन। (प्रकाश भऽ जाइत अछि आ मुख्य रंगमंच स्थलपर आचार्य सिंह, आचार्य व्याघ्र, उदयन, दीन, भदरी आ वर्द्धमान देखना जाइ छथि।) आचार्य सिंह: हम सभ एतए एकत्र भेल छी वर्द्धमान: कोनो अकाल.. उदयन: कोनो बाढ़ि.. आचार्य व्याघ्र: नै उदयन, बाढ़ि नै, नै वर्द्धमान अकाल नै.. आचार्य सिंह: वर्द्धमान सोचक अकाल छै, उदयन..क्षुद्रताक बाढ़ि आएल छै। दीना: कोनो बाहरी शत्रु.. भदरी: मनुक्ख आकि बनैया पशु.. आचार्य व्याघ्र: नै दीना, कोनो बाहरी शत्रु नै, भदरी कोनो बाहरी नै, ने कोनो मनुक्ख आ नहिये कोनो बनैया पशु.. आचार्य सिंह: सभ अपने लोक दीना-भदरी। कोनो बाहरी शत्रु नै..कोनो बनैया नै, सभ खुट्टे पड़हक.. उदयन:: जगन्नाथ मन्दिरमे उदयनक उद्घोष, जे जैँ हम तेँ तूँ पूजित होइ छह। बन्द केवार खुजि गेल। दीना-भदरी (सम्वेत स्वरमे): जड़िमे दुनू गोटे अड़ा देलिऐ शरीर आ दरकि गेलै देवार। आ बन्न केवार खुजि गेल। दीना: मुइल गाइक हड्डीमे फोटरा गिदर बनि नुका कऽ सलहेस दीना-भदरी आ बाघक कुश्ती देखथि। बाघक रान पकड़ि दू कात चीर कऽ फेकी हम दुनू भाँइ आ मुइल गाइक हड्डीसँ बहार भऽ फोटरा गीदर बनल सलहेस ओकरा जोड़ि देथि आ फेर । आचार्य सिंह: सभ सएह उपाय करू, कोना ओ गीदर फेकत आगि.. भदरी: मिथिलाक राजा मग्गहक हंशराज-वंशराजसँ नरुआरक पोखरि खुनबओलन्हि मुदा ओ जाइठ नै उठा सकल। हम दुनू भाँइ दछिनबरिया भीड़सँ जाइठ फेकलौं तँ ओ सोझे जाठिक लेल बनाएल खाधि- बॉली मे जा कऽ खसल। ई जाइठ अखनो दक्षिण दिस टेढ़ अछि। आचार्य सिंह: सभ सएह उपाय करू, कोना ओ गीदर फेकत आगिक गोला.. उदयन:: मन्त्रार्थमे महर्षि पतञ्जलिक वैज्ञानिक मन्तव्य “यच्छब्द आह तदस्माकं प्रमाणम्” माने जे शब्द आकि मंत्रक पद कहैत अछि सएह हमरा लेल प्रमाण अछि- एकर अर्थ बादमे वेदे प्रमाण अछि- सेहो हमरा नामसँ भविष्य पुराणमे नै जानि किए गलत रूपेँ दऽ देल गेल। अनकर देखल बौस्तुक स्मरण अनका कोना हेतै? आचार्य व्याघ्र: वएह स्मरण खतम कएल जा रहल छै.. स्मरण विस्मरण बनाएल जा रहल छै। दीना-भदरी (सम्वेत रूपेँ): धामी कहलक हमरा सभकेँ काज करैले अपना खेतमे। मारि कऽ जुमा कऽ फेकलौं हम सभ ओकरा धामिन लग। धामिन गेल खिसिया आ बजेलक अपन दोस फोटरा गीदरकेँ। फोटरा गीदर मारलक हमरा सभकेँ। मुदा जिऽत जिनगी पाबि कऽ ई उल्कामुख.. उदयन:: बुझलौं आचार्य व्याघ्र, बुझलौं। लोकगाथा बनबए पड़त, नाराशंसी जगबए पड़त। हमर आ गंगेशक ग्रन्थकेँ बिनु बुझने रटबाक मतलब भेल विस्मरण। वर्द्धमान: सुकविकैरवकाननेन्दुः गंगेश बनि जेताह उल्कामुख। आचार्य व्याघ्र: जेना हम सभ बनि गेल छी, व्याघ्र आ सिंह आचार्य सिंह। आचार्य सिंह: आ बना देने छी चौपाड़िक शिक्षककेँ आचार्य सरभ आ ओतुक्का विद्यार्थीकेँ खिखिर आ शाही। सभटा भऽ जाएत खतम? सर्वविनाश.. दीना: मुदा दौरीवाली हिरिया तमोलिन केलक तपस्या पतिक रूपमे प्राप्ति लेल.. भदरी: आ दौरीवाली जिरिया लोहारिन केलक तपस्या पतिक रूपमे प्राप्ति लेल.. दीना-भदरी (सम्वेत रूपेँ): मरलाक बादो। गंगामे पैसि बनेलौं पत्नी दुनूकेँ। मरलाक बादो। उदयन:: गंगेश केलक रक्षा हमर तर्कक श्रीहर्षक आक्रमणसँ, नव्य-न्याय। नबका शास्त्र, नबका न्यायशास्त्र। ओहो अजीबे भेल, पिताक मृत्युक पाँच साल बाद भेलै ओकर जन्म आ चर्मकारिणीसँ केलक विवाह। आ ओइ विवाहसँ जे पुत्र भेलै वर्धमान से फेर मिलेलक न्याय आ नव्य-न्यायकेँ। दीना-भदरी (सम्वेत रूपेँ): सत्यकामक सेहो तँ सएह हाल रहै। पिता के छलै ओकरा बुझले नै छलै, जबालाक पुत्रसत्यकाम, मुदा गौतम, मिथिलाक गौतम, हुनका सन गुरु भेटलै, वेदक अध्ययन केलन्हि। मरलाक बादो उदयन, नव आ पुरानक मेल आ विरोध होइए। वंशीधर बाभन आ बालारामक मेल भेल, लोक देवी गहील आ पौराणिक दुर्गा देवीक मेल भेल। उदयन:: मरलाक बादो दीना-भदरी। दीना-भदरी (सम्वेत रूपेँ): हँ उदयन। फोटरा गीदर बनल दोस…संग भेलाह सलहेस। मरलाक बादो… (अन्हार पसरि जाइत अछि, मुदा गपशप सुनबामे अबैत अछि, आचार्य सरभ आ शिष्य शाही आ खिखिरक गपशप।) आचार्य सरभ: शिष्य नढ़िया, शिष्य बिज्जी, मारू , मारू खिखिर आ शाहीकेँ मारू। विद्यामे क्षति कऽ रहल अछि ई दुनू। (मारि-पीटक शब्द आ खिखिर आ शाहीक आर्तनाद।) आचार्य सरभ: लगैए खिखिर आ शाही मरि गेल। शिष्य नढ़िया, शिष्य बिज्जी। आब पढ़ाइ शुरू करू। कोनो दिक्कत नै हएत आब। शिष्य नढ़िया: सभटा रटि लेलौं आचार्य सरभ। शिष्य बिज्जी: हमहूँ सभटा रटि लेलौं। आचार्य सरभ: ठीक छै, अहाँ सभ जाइ जाउ। (मंचपर प्रकाश आबि जाइत अछि, आ मात्र आचार्य सरभ मंचपर देखा पड़ै छथि।) आचार्य सरभ: ठीक छै, आब सभ ठीक छै, धधरा हम फेकैत छी, हम आचार्य सरभ। बनबऽ दियौ ओकरा सभकेँ उल्कामुख, धधरा तँ हमहू फेकैत छी । आब हमरा बाद बनत आचार्य, हमर दुनू शिष्य बनत आचार्य, आचार्य नढ़िया आ आचार्य बिज्जी। आइ धरि तँ आचार्यमे कियो ने कियो एकटा बचिये जाइ छल जे विस्मरणमे नै रहै छल, मुदा आब हएत पूर्ण विस्मरण। (तखने माइकसँ गीत आबऽ लगैए, आचार्च सरभ चारू कात ताकऽ लगै छथि…) एक मूड़ी तुलसी जल साजि के रखिहेँ गै मलहीनियाँ हमरा पानि सेब देवता अरैध के लबिहेँ गै एक मूड़ी तुलसी जल साजि के रखिहेँ गै मलहीनियाँऽ? हमरा गौरध्या सन अरैध के लबिहेँ गै एक मूड़ी तुलसी जल साजि के रखिहेँ गै मलहीनियाँ हमरा गहील सन देवता अरैध के लबिहेँ गै.....। ….. दुर-दुर छीया ए छीया, सरभक मुँहसँ धधरा निकलै जरै किछु नै किए? दुर-दुर छीया ए छीया, ….. (रुदन स्वरमे गीत अबैए, सरभ चौंकै छथि। स्वर कानऽ लगैए, आ आचार्य सरभ हँसऽ लगै छथि, हँसिते रहै छथि। सगरे अन्हार पसरि जाइए।आ जखन इजोत होइए तँ उदयन, दीना, भदरी आ वर्द्धमान मुख्य रंगमंचपर देखा पड़ै छथि।) उदयन:: आब पुरान नाम फेरसँ रखबाक परम्परा आएल छै। से हम उदयन। ई छथि दीना, ओ भदरी,ओ वर्द्धमान..…सुनै छिऐ नामक सेहो प्रभाव पड़ै छै। जे से… वर्द्धमान: धारक कातमे आ साँपबला घरमे निवास केनिहारकेँ चैन कतऽ उदयन? उदयन:: भातढाला पोखरि आ सागढाला पोखरि जाए पड़त तत्काल। दीना: जतए भीम भात आ साग रखैत रहथि? उदयन: हँ, आ सिमलवन सेहो। भदरी: सेमापुर जतए अर्जुन अपन अस्त्र-शस्त्र अज्ञातवास कालमे नुकेने रहथि? उदयन: हँ, एकटा आर युद्ध शुरू भऽ गेल अछि। वर्द्धमान: घृणाक तरहरिमे प्रेम, मुस्कीसँ जीतब घृणा आ ईर्ष्याकेँ घृणाक तरहरि खूनऽ दियौ ओहि तरहरिमे घृणाकेँ गारि देबै अपन प्रेमक शक्तिसँ उदयन:: हँसैत- मुस्कियाइत करबै आग्रह जे परिश्रम घृणाक तरहरि बनबऽमे लगौलक कहबै प्रेमक पोखरि काटऽ जाहिमे प्रेमक पानि बरखा मासमे भरि जाएत आ भरले रहत ततेक गहींर कऽ काटल रहत माटि ओइमे हेलत प्रेम हेलैत रहत आ बहि जाएत, डूमि जाएत घृणा आ ईर्ष्या डूमि जाएत आ बझा कऽ लऽ जएतै पनिडुब्बी ओकरा दीना: जावत हम रहब नै छूबि सकत क्यो प्रेमक सत्यक पुत्रकेँ कारण शक्तिसँ, ऊर्जासँ भरल अछि सत्यक पुत्र ओकर चारूकात स्थूल-प्रेमक गिलेबासँ ठाढ़ कएल घेराबा रहत नै करू चिन्ता। भदरी: आ जहिया हम नै रहब सीखि जाएब अहाँ सभ किछु हमर वियोग बना देत सक्कत, तीव्र आ कठोर सत्यक विरोधीक लेल ओहि घेराबाकेँ तोड़बाक प्रयास अहाँक स्थूल-प्रेमी मित्र सभ नै हेमऽ देथिन्ह सफल से हम रही वा नै रही प्रयाण थम्हत नै बतहपना बढ़त नै मारि देब तँ मारि दिअ मुदा मोन राखू हमरा संगे मरत आर बहुत रास वस्तु मुदा रहबे करत स्थूल-प्रेमी साधक सभ आ करत पहिल नृत्य हस्त संचालनसँ चतुरहस्त आनन्दसँ भरल मोन सत्य, झूठ आ तकर निर्णयक लेल सनगोहिक चामसँ छारल डफ-खजुरी लए डोरीक कम्पनसँ ध्वनि निकालत गुमकी, ओहि खजुरीक ध्वनि आ गुमकी, गुम..गुम..गुमकी... आ तखन दोसर नृत्य होएत प्रारम्भ शिखरहस्त पर्वतशिखरसन युद्धक आवाहन-प्रदर्शनक लेल घृणाक तरहरि खूनऽ दियौ मारि देत तँ मारऽ दिऔ मोन राखू मुदा हमरा संगे मरत आर बहुत रास वस्तु मुदा हमर वियोग बना देत सक्कत, तीव्र आ कठोर रक्तबीजी सत्यपुत्र सभकेँ दीना-भदरी (सम्वेत स्वरमे): बुढ़िया डाही संग अछि कमलक मृणाल, पुरैनि, कमलगट्टा, बिसाँढ़सँ भरल खेत ओ नहि छथि बुढ़िया डाही खेत जे छलै सनगर यौ से बनल प्रेमक कमलदह घृणाक विरुद्ध अछि हमर ई बुढ़िया डाही (वल्लभाक अबाज अबैए, सभ चौंकि कऽ देखऽ लगै छथि।) वल्लभाक अबाज: फेर वएह गप आत्मरक्षार्थ सत्यक विरोधमे चोरबा बाजल फेर सर्जनक सुख भेटत चोरिमे? दोसराक कृति अपना नाम केलासँ आकि दोसराक मेहनतिकेँ अपन नाम देलासँ दोसराक प्रतिभाकेँ दबा कऽ कुटीचालि कऽ आर भाँग पीबि घूर तर कऽ गोलैसी कोनाकेँ आँगुर काटब जे लिखब बन्न करत तोड़ि दियौ डाँर, काटि दियौ पएर आँखि निकालि लिअ धऽ दियौ रॉलरक नीचाँमे पिसीमाल उठा दियौ बड़का एलाहेँ सर्जनक सुख पएबाले (गंगेशक अबाज अबैए, सभ चौंकि कऽ देखऽ लगै छथि।) गंगेशक अबाज: तँ की हारि जाइ तँ की छोड़ि दिऐ इच्छा जीतत आकि जीतत ईर्ष्या संकल्प हमर जे ऐ धारकेँ मोड़ि देब मुदा किछु ईर्ष्या अछि सोझाँ अबैत ईर्ष्या जे हम धारकेँ नै मोड़ि पाबी बहैत रहए ओ ओहिना ओहिना किए ओहूसँ भयंकर बनि वल्लभाक अबाज: संकल्प जे हम केने छी इच्छा जे अछि हमर/ से हारि जाए आ जीति जाए द्वेष/ जीति जाए ईर्ष्या हा हारबो करी तेना भऽ कऽ जे लोक देखए!/ जमाना देखए!! तेना कऽ हारए संकल्प हमर/ इच्छा हमर गंगेशक अबाज: धारकेँ रोकि देबाक/ ठाढ़ भऽ जएबाक सोझाँ ओकर आ मोड़ि देबाक संकल्प ओहि भयंकर उदण्ड धारकेँ मुदा किछु आर ईर्ष्या अछि सोझाँ अबैत ओ द्वेष चाहैए जे हमर प्रयास/ धारकेँ मोड़बाक प्रयास वल्लभाक अबाज: मोड़लाक प्रयासक बाद भऽ जाए धार आर भयंकर पुरान लीखपर चलैत रहए भऽ आर अत्याचारी आ हम जाए हारि आ हारी तेना भऽ कऽ जे लोक राखए मोन मोन राखए जे कियो दुस्साहसी ठाढ़ भऽ गेल छल धारक सोझाँ तकर भेल ई भयंकर परिणाम जे लोक डरा कऽ नहि करए फेर दुस्साहस दुस्साहस ठाढ़ हेबाक उदण्ड-अत्याचारी धारक सोझाँमे लऽ ली हम पतनुकान/ आ से सुनि थरथरी पैसि जाए लोकक हृदयमे घृणाक विरुद्ध ठाढ़ हम बुढ़िया डाही। (अबाज शान्त भऽ जाइत अछि, फेरसँ सभ साकाक्ष भऽ जाइ छथि।) उदयन: मुदा हम हँसै छी हारि तँ जाएब हम मुदा हमर साधनासँ जे रक्तबीज खसत से एक-एकटा ठोपक बीआ बनि जाएत सहस्रबाढ़निक झोँटाबला घृणाक विरुद्ध ठाढ़ अछि हमर ई बुढ़िया डाही। दीना: कमलक मृणाल, पुरैनि, कमलगट्टा, बिसाँढ़सँ भरल खेत बनत खेत जे छलै सनगर यौ, जाहिमे घृणाक तरहरि खुनेलौं यौ घृणाक तरहरि खूनल ओइ खेतमे कमलक मृणाल, पुरैनि, कमलगट्टा, बिसाँढ़ अछि भरि गेल भदरी: मुदा प्रेमक कमल अछि फुला गेल। सहस्रबाढ़नि झोँटाबला बुढ़िया डाही केलक ई। वर्द्धमान: आ तखन फैसला हेतै आब जखन उनटि जाइए लोक उनटि जाइ छै बोल छने-छन बदलि जाइए बिचकाबैए ठोर बोलक मधुर वाणी बोली-वाणी बदलि जाइ छै बनि जाइए बिखाह गोबरझार दऽ चमकाबै छी स्मृतिकेँ घृणाक विरुद्ध ठाढ़ छलि तहियो हमर ई बुढ़िया डाही। उदयन: धारकेँ रोकबाक हिस्सक जकरा लागि गेल छै आ ओ सभ तकर विरुद्ध ठोकि कऽ ताल भऽ जाएत ठाढ़ आ डरा जाएत द्वेष स्मरण कऽ जे फेर रक्तबीजसँ निकलल एहि सहस्रबाढ़नि सभक रक्तबीज एकर सभक बीआक सन्तान फेर आर बढ़ि जाएत आक्रमणसँ कारण संकल्प अछि, इच्छा अछि ई सभ धारकेँ रोकबाक हिस्सक जकरा लागि गेल छै सभ सम्वेत स्वरमे: घृणाक विरुद्ध अछि जे जकरा बुढ़िया डाही अहाँ कहै छिऐ। घृणाक विरुद्ध अछि जे जकरा बुढ़िया डाही अहाँ कहै छिऐ। घृणाक विरुद्ध अछि जे जकरा बुढ़िया डाही अहाँ कहै छिऐ। घृणाक विरुद्ध अछि जे जकरा बुढ़िया डाही अहाँ कहै छिऐ। (आस्ते आस्ते अन्हार पसरि जाइए।) चारिम कल्लोल …(जारी) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.सत्यनारायण झा- पलट २. जवाहर लाल कश्यप- अर्धसत्य १ सत्यनारायण झा पलट बेटाक ब्याहक तैयारी मे लागल रही |पत्नीक संग बाजार सं डेरा पहुँचलौ |डेराक गेटक ताला खोलबाक प्रयास करय लगलौ |मोबाइल पर रिंग होमय लगलैक |ताला खोलब छोरि मोबाइलक स्क्रीन पर देखय लगैत छी |मन्नुक कॉल रहैन ||सोचय लगैत छी जे कतेक समयक बाद मन्नू फोन केलनि अछि |याद नहि परल जे एहि सं पहिने ओ कहिया फोन केने छलाह | पटना मे सासुर छनि |साल मे तीन चारि बेर अबैत जाइत रहैत छलाह मुदा कहियो कोनो संपर्क नहि केलनि ,अचानक फोन देखि भेल जे प्रायः धोखा सं नंबर डायल भ’ गेल हेतनि ,तै पुनः ताला खोलय लगलौ | जहिना रूम मे पायर रखैत छी की लैंड लाइन पर फोनक घंटी फेर घन घनाय लागल | हेलो ---? बाबूजी ,हम मन्नू गाँधी नगर सं बाजि रहल छी आ मन्नू जोर- जोर सं कानय लगलाह |हमरा भेल जे तीन चारि साल सं कोनो संपर्क नहि रखबाक कारणे पश्चातापे कना गेलनि अछि |आखिर हमहू त’ पितिये छियैन | हमरा मन्नू सं कतेक स्नेह छल |ओहो कतेक शांत स्वभावक लोक छलाह |कतेक सुकुमार छलाह |बाजब त’ एहन रहनि जेना मिश्री घोरि क’ पीने रहथि | मन्नू सं बहुत लगाव छल | मन्नुक ब्याह मन्नुक पिताश्री ठीक केलखीन्ह | ब्याह जेतय ठीक भेल रहैक ओ कोनो तरहे ने मन्नू लेल आ ने परिवार लेल उपयुक्त रहैक, तै हम ओहि ब्याहक समर्थन मे नहि रही |ब्याह त’ दु परिवारक कड़ी क’ जोरैत छैक मुदा एहि ब्याह सं परिवार टूटबाक ख़तरा रहैक |बाद मे सैह भेलैक | हमर इच्छा रहय मन्नू एहि ब्याह क’ रोकि देथि |मन्नू कोनो साधारण ब्यक्ति नहि छलाह |योग्य अभियंता छलाह |नीक आ बेजाय ओ बुझैत छलाह तथापि बियाहक लोभे ओ चुप भ’ अपन मौन स्वीकृत द’ देलखिन्ह | ओ नहि सोचलनि जे आखिर ‘हमरा नहि मे’ की निहितार्थ छैक | मन्नू सं जे आशा छल ओकर बिपरीति अपन रूप देखेलनि | मोन तृष्णा सं भरि गेल |मन्नुक ब्याह सं कात भ’ गेलौ | आब त’ ब्याहो क’ कइएक बरख भ’ गेलैक | मन्नू आ मन्नुक पिताश्री पलट सं संपर्क टूइ ट गेल |मोन बहुत खिन्न रहैत छल |मुदा धीरे धीरे सभटा बिसरि गेलौ आ हमहू अपन काज मे लागि गेलौ | प्रारम्भ मे पलट सेहो हमरा सं दूरी बढ़ा लेलनि मुदा जखन एहि ब्याहक कुपरिणाम धीरे –धीरे सामने आबय लगलनि तहन हुनका आँखि फुजलनि |आब बुझाय लगलनि जे भाई कियैक मना करैत रहथिन | आब कोन मुहें ओ हमरा सामने अओताह |लाजे दुरे रहैत छलाह | कइएक ठाम बजैत छलाह जे भाईक बात नहि मानि अनर्थ क’ लेलौ | एक –दु बेर फोनो केलाह मुदा हम अपना क’ दुरे रखलौ | कतेक स्नेह पलट सं छल | पलट हमरा सं दु बरखक छोट छलाह | पलट एके मासक छलाह त’ माय मरि गेलखिन्ह |हमरे माय पलट क’ पालि पोशि क’ ठाढ़ केलखिन्ह |पलट आ हमरा में कोनो अंतर नहि छल |पलटक पढाई लिखाई हमरा संगे भेलैक |एम्० कम० क’ पलट नीक प्रतिष्ठित शिक्षक बनि गेलाह |पलट सं अंतरंगता हमरा बच्चे सं छल |एके संग स्कूल जाइत छलौ |हर समय संग रहैत छलौ |पलटक उन्नति सं हमरा आत्म सुख भेटैत छल | मुदा मन्नुक ब्याह हमरा दुनूक बीच दूरी बढ़ा देलक | हमरा जेना पलट सं वितृष्णा भ’ गेल तै हम हटले रहैत छलौ |ओना पलट कहियो क’ अपन भौजी सं बात क’ लैत छलाह आ हमहू कहियो हिनका मना नहि करैत छलियैन | आखिर संबंधक डोरी त’ कतौ बान्हल रहैक जाहि सं हमरो आत्मसंतोष भेटैत छल |हिनके द्वारा पता चलइत छल पलट अपन पारिवारिक समस्या सं परेशान रहैत छलाह | मन्नू क’ कनैत देखि क्षण भरि त’ चुप रहलौ मुदा तत्क्षण कहलियैन ---मन्नू कियैक कनैत छी |जिनगी मे कतेक गलती होयत छैक |अहाँक’ पश्चाताप भेल ,बुझू सबटा गलती माफ भ’ गेल | हम हुनका बुझबैत रहलियनि आ ओ आओर जोर –जोर सं कनैत रहलाह |हम कहलियैन –मन्नू चुप भ’ जाउ | कहलनि ,चुप कोना भ’ जाउ| पापा आब एहि दुनिया मे नहि रहलाह |------------- जबरदस्त झटका लागल |पूरा शरीर थर थर काँपय लागल | पसीना देबय लागल |हृदय पर जेना बज्र खसि परल | की ?पलट आब दुनिया मे नहि छथि ?की भेलनि ?मात्र एतबे सुनलौ जे हार्ट अटैक भेलनि | अय सत्ते पलट चलि गेलाह |आब हुनका सं एहि जन्म मे भेट नहि होयत |मोनक बात मोने रहि गेल | पलट हमरा सं छोट छलाह ||हम जिबिते छी आ ओ एहि दुनिया सं चल गेलाह | ओ कहिया सं बीमार छलाह सेहो कहाँ बुझलियै |मोन क’ हम सम्हारि नहि सकलौ | लागल जेना आँखिक आगू अन्हार भ’ गेल |तत्क्षण पलटक चेहरा दिमाग मे घुमय लागल |पलटक चालि ढालि ,बाजब –भूकब सभटा चल चित्र जका आँखिक आगू घुमय लागल | भगबान की दय एहि संसार मे पलट क’ पठेलखिन्ह |ओ अपना जिनगी मे कतेक दुःख सहलनि ?हम आ ओ एक दोसर क’ पर्यायवाची छलौ |पलट हमर कतेक आत्मीय छलाह से पलट आई हमरा छोरि एहि दुनिया सं चलि गेलाह |दुखक अथाह सागर मे डूबि गेलौ |बेटा ब्याहक सभ अरमान हवा मे उधिया गेल | बिछावन पर एकाएक खसि परलौ |बेहोश भ’ गेलौ |घर मे सभ क’ डर भ’ गेलैक |कियो बुझि नहि सकलैक जे हम केकरा सं गप्प करैत छलौ | ‘हुनकर’ आवाज सुनि सभ धीया पुता अगल बगल सं दौरल | सभ पूछय लागल मुदा हमरा आँखि सं अविरल अश्रुपात भ’ रहल छल |मोन घूमि फिरि क’ पलटक चेहरा पर चल जाइत छल |जीवनक एक एक क्षण मानस पटल पर उभरय लागल |हृदयक गति असामान्य भ’ गेल छल |संज्ञा शून्य भ’ गेल रही |केकरो बातक जबाब नहि दैत छलियैक |एक टक सं शून्य मे तकैत रही |सभ क’ बुझा गेलैक जे कोनो पैघ दुर्घटना भेलैक अछि | सभ हमरा झकझोरि क’ पूछय लागल |की भेलैक ? बजइ कियैक नहि छी ?केकर फोन आयल अछि ?पत्नी जोर –जोर सं हमर देह पकरि पुछय लगलीह | एक क्षण क’ लेल तंद्रा टुटल |कनेक होश भेल ?देखलियइ घर मे सभ बिचलित अछि | हमरा आँखि सं नोर रुकबाक नाम नहि लैत छल आ ओही अबस्था मे मुँह सं एक शब्द निकलल जे, पलट आब एहि दुनिया मे नहि छथि |हमरा सं ई शब्द निकलिते पूरा घर निःशब्द भ’ गेल |सभ क’ जेना एके बेर काठ मारि देलकै |हमहू अपना क’ सम्हारि नहि सकलौ आ ओछावन पर बेहोश भ’ खसि परलौ |जखन होश भेल त’ देखैत छी ,हम एकटा अस्पतालक बेड पर परल छी |लग मे कियो नहि छल |शुन्य दिस एक टक सं ताकि रहल छी |मानस पटल पर पलट देखा रहल छथि आ देखा रहल अछि पलटक सम्पूर्ण ब्यक्तित्व |छत दीस तकैत तकैत नींद भ’गेल | नींद मे जेना कियो कहि रहल अछि –भाई अहाँ सुतल छी |हमरा दीस ताकू |लागल जेना नींद फुजि गेल | आगू मे पलट ठाढ़ छलाह |केस पैघ पैघ ,दाढ़ी बढल ,मैल खटखट ,फाटल चिटल कपड़ा पहीरने | हाथ मे एक मुठ्ठी बालु ,आ बालू सं चेन्ह पारैत ओ बिदा भ’ गेलाह | पाछू पाछू हमहूँ बिदा भेलौ | बहुत दुर गेलाक बाद जंगल आबि गेलैक | जंगल बहुत डरावना रहैक |बाघ ,सिंह प्रच्छन्न भ’ घूमि रहल छलैक |पलटक पाछू पाछू हमहू आगा बढैत गेलौ | आगू बहुत पैघ पहाड़ रहैक | पहाड़ पार केलाक बाद एकटा कन्दरा भेटलैक | कन्दरा बड पिच्छर रहैक |ओकर बाद एकटा पैघ नदी अयलै|नदी मे बहुत उफान रहैक | भसियाति भसियाति बहुत दुर गेलौ तेकर बाद पलट नदी मे डुबकी लगेलनि| हमहू हुनके पाछू पाछू डुबकी लगेलौ |कतेक कालक बाद एकटा मंदिर भेटल जेकर चारु दरबाजा फुजल रहैक |मंदिर खूब सजायल रहैक |चारु कात दीप जरैत रहैक |बीच मे स्वर्ण रचित दुटा आसन लागल रहैक |हम आ पलट ओहि घर मे एक कोन मे ठाढ़ भेलौ | तखने एकटा चमत्कार भेलैक |जगतनंदनी लक्ष्मी जी संग हमर मातेश्वरी ओहि आसन्न पर बैस रहलीह | मातेश्वरी क’ देखि हम त’ अबाक भ’ गेलौ |मातेश्वरी क’ देखि पलट बजलाह | मातेश्वरी हम अहाँक भेट करय आयल छी | मातेश्वरी टुकुर –टुकुर पलट दिस तकैत छलीह |मातेश्वरी अपना लग सं हमरा नहि हटाऊ | हमर जीबन आहाँ बिना शुन्य अछि | भाई क’ हम सेहो नेने आयल छी |ई कहि पलट जोर जोर सं कानय लगलाह | हमहू कानय लगलौ | सत्ते कानय लगलौ | कनैत हमर आँखि फुजि गेल |सामने पलटक निर्जीव शरीर परल छैक आ सभ लोक कानि रहल छैक | २ जवाहर लाल कश्यप अर्धसत्य ( एकटा युवक इंटरभ्यु देबय लेल आँफिस मे प्रवेश करैत अछि /अप्पन बायोडाटा आँफिस मे बैसल व्यक्ति के दैत छथि /) व्यक्ति ; बायोडाटा दिस देखैत अहॉके नाम ? युवक ; देवकीनन्दन / व्यक्ति ; केवल; देवकीनन्दन आओर कोनो सरनेम नहि? (ई कहि बायोडाटा पर नजर गडा दैत छथि) बायोडाटा मे पिताक नाम नहि अछि / केवल माता के नाम अछि देवकी ताहि कारण अहॉ देवकीनन्दन युवक ; जी हॉ. . व्यक्ति ; मुदा पिताक नाम आवश्यक अछि / युवक ; ईसामसीह केर् माता मरियम के सब जनैत् अछि./ क्रिश्णक नाम देवकीनन्दन तखन हम्मर किएक नहि? व्यक्ति ; ओ विशिष्ट व्यक्ति छथि / साधारण लेल पिताक नाम आवश्यक. . . युवक ; (बीच मे टोकैत) हमरा पता अछि हम भारत मे रहि रहल छी, आर्याव्रत मे नहि / व्यक्ति ; हम नहि बुझलहुँ अहॉ कि कहय चाहैत छी/ युवक ; आर्याव्रतक अर्थ आर्यजतिक लोक के रहय वाला स्थान /चाहे ओ स्त्री हो वा पुरुष /ओहि समय समाज मे दुनु के समान स्थान प्राप्त छल, दुनु मे कोनो भेद नहि छल / कालांतर मे पुरुषवादी मानसिकता हावी भेल आ मात्रिभुमि के नाम एकटा पुरुष भरत के नाम पर राखि देल गेल (बीच मे सॉस लेवय लेल रुकैत अछि) हमरा पता अछि अहि तरहे जवाव देवा के कारण हमरा ई नौकरी नहि भेट सकैत अछि /मुदा हम पूर्ण सत्य के स्थान पर अर्धसत्य के स्वीकार नहि क सकैत छी / ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ओमप्रकाश झा डीहक जमीन ट्रेन सकरी टीशन सँ फूजल आ पूब दिस घुसक' लागल। नरेश एकटा बोगी मे अपना सीट पर बैसल अपन गामक बात सब मोन पाडैत विचारमग्न भ' गेल। बहुत दिनक बाद ओ अपन गाम जा रहल छल। भरिसक १० बरखक बाद। ओ एखन भोपाल मे शिक्षा विभाग मे नौकरी करैत छल अधिकारीक पद पर। गाम जाय लेल चिकना टीशन उतरि क' जाय पडै छलै। सकरी तक बडी लाईनक ट्रेन चलैत अछि। ओतय सँ फेर छोटी लाईनक ट्रेन सँ। ओकरा बोगी मे पूरा लोक कोंचल छल। चारि पसिन्जरक सीट पर सात-आठ लोक बैसल छल। हो-हल्ला आओर गप-शप सँ पूरा डिब्बा मे कोलाहल जकाँ छलै। मुदा ओकर दिमाग मे अपन पुरनका दिन घुरिया लगलै। सबटा दृश्य चलचित्र जकाँ ओकर आँखिक आगाँ घूम' लगलै। ओ अपना केँ २० बरख पहिनुका स्कूल मे देख' लागल। बस्ता ल' के नित भोरे पाठशाला जेबाक दृश्य आगाँ मे नाच लगलै। ओकर पिता फेंकन मरड हरवाह छला आओर गाम मे भुटकुन बाबू ओतय खेतीक आ माल-जालक काज करै छला। किछ बटाई पर खेती सेहो करै छला। अपन जमीनक नाम पर पाँच कट्ठा खेतीक जमीन आ आठ धूरक घरारी छलैन्हि। हुनकर माय 'मरौनावाली' केर नाम सँ जानल जाईत छलीह। भरि दिन मरौनावाली भुटकुन बाबू ओतय घरेलू काज मे मदति करैत छलीह आ साँझे घर आबै छलीह। नरेश बच्चा छलाह आ भरि दिन एम्हर ओम्हर खेलाइत रहैत छलाह। एक दिन भुटकुन बाबू फेंकन केँ कहलखिन्ह जे नरेशवा भरि दिन टौआइत रहै छौ, कियाक नै ओकरा हमरा एहिठाम चरवाही मे पठा दैत छी। फेंकन बजलाह- "गिरहत, ई गप नै कहियौ, ओ एखन मात्र चारि बरख के छै। ओकरा अगिला बरख सँ स्कूल पठेबै।" भुटकुन बाबू व्यंग्य मे बजलाह- "तौं त' एतबे टा सँ हमरा एहिठाम चरवाही करै छलैं। तखन तोहर बाबू हरवाही करै छलखुन्ह, मोन छौ ने।" फेंकन कहलक- "जी ओ जमाना आब नै छै गिरहत। मरौनावाली एकदम जिद केने छै जे नरेशबा केँ स्कूल पठबियो। किछ दिन पहिने बिसेसर बाबू मास्टर साहब भेंटल छलाह। ओ कहलथि जे पढेनाई बड्ड जरूरी छै तैं नरेशबा केँ स्कूल पठाबहक।" भुटकुन बाबू- "जे तोहर इच्छा। हम त' तोरे दुआरे कहलियो। तोहर काज किछ हल्लुक भ' जइतो।" फेंकन- "गिरहत, हम जा धरि सकब, ता धरि अहाँ केँ काज करैत रहब।" अगिला साल नरेशक नाम स्कूल मे लिखाओल गेल। नरेश पढै मे नीक छलाह आ जल्दिये मास्टर सबहक प्रिय भ' गेलाह। दसवीं बोर्ड मे ओकरा अस्सी प्रतिशत अंक आयल। ओ काओलेज मे पढै लेल दरिभंगा चलि आयल आओर ट्यूशन पढा केँ अपन खर्च निकालैत पढ' लागल। ओम्हर गाम मे फेंकन आओर मरौनावाली भुटकुन बाबूक काज मे लागल रहल। नरेशक पढाई पूरा भेलै आ मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोगक इम्तिहान पास क' के शिक्षा विभाग मे नौकरी भेंटलै। नियुक्ति पत्र गामक पता पर आयल छल आओर सौंसे गाम अनघोल भ' गेल रहै। ओहि दिन नरेश अपना केँ आकाश मे उडैत पाओलक। भुटकुन बाबू जे आब वृद्ध भ' गेल छलाह ओहो नरेश केँ बजा के आशीर्वाद देलखिन्ह। मरौनावाली त' कानैत बेहाल छल जे बेटा आब नजरि सँ दूर भ' जायत। किछ दिनक बाद नरेशक बियाह भ' गेलै। किछ दिन कनियाँ गामे मे रहलैन्हि। फेर जयबाक जिद क' देलकै। नरेश कनियाँ केँ ल' के भोपाल चलि गेल। मरौनावाली ओहि दिन बड्ड कानल रहै। नरेश अपन माता पिता कैँ संगे रहै लेल बहुत आग्रह केलक, मुदा फेंकन साफ मना क' देलकै। ओकर कहनाई रहै जे पुरखाक डीह छोडि नै जायब। नरेश कहलक जे ई आठ धूर डीह अहाँ केँ एतेक प्रिय भ' गेल जे अपन एकलौता संतान संगे रहै लेल तैयार नै छी। ओतय नाना प्रकारक सुविधाक गप सेहो नरेश कहलकै, मुदा फेंकन अपन जिद पर अडल रहलाह। मरौनावाली कनी जिद केलखिन्ह, त' फेंकन खिसिया गेला आओर कहलखिन्ह जे अहाँ चलि जाउ, हम असगरे रहब। मरौनावाली धर्मसंकट मे पडि गेली आ अंत मे गामे मे रहै केँ निर्णय लेलथि। नरेश नियमित रूप सँ गाम पाई पठबैत रहै आओर फेंकन के हरबाही जबरदस्ती छोडा देलक। फेंकन साल दू साल पर नरेश लग जाइत रहै छलाह आओर नरेश काजक अधिकता आओर बच्चा सबहक पढाई दुआरे गाम कहियो नै आबैत छलाह। आब मोबाइलक जमाना मे नरेश फेंकन केँ मोबाइल सेहो कीन देने छलखिन्ह, जाहि सँ ओ सब नियमित रूप सँ सम्पर्क मे रह' लगलाह। एक दिन फेंकन मोबाइल सँ नरेश केँ फोन केलखिन्ह आ कहलखिन्ह- "बौउआ, अपन डीह सँ सटल भुटकुन बाबू केर दू कट्ठा जमीन परती पडल छै। ओ ओहि जमीन केँ बेच' चाहैत छैथ। हमरा कहलैथ जे तौं ओ जमीन कीनब' त' हम तोरा पच्चीसे हजार मे द' देब'। बौउआ ओहि जमीनक कीमत चालीस हजार सँ कम नै छै। नीक मौका छै। पाई पठा दितहक त' हम तोरे नाम सँ वा तोहर कनियाँक नाम सँ जमीन कीन दितिय'।" नरेश चोट्टे खिसिया गेल आ बाजल- "हमरा गाम सँ कोनो मतलब नै अछि। अहाँ बलौं जमीन कीन' चाहै छी। हम त' सोचै छी जे आठ धूरक डीह आ पाँच कट्ठा खेतीवाला जमीन बेची आओर गाम सँ पिण्ड छोडाबी।" फेंकन- "हमरा जीबैत ई काज नै हेतौ। पुरखाक जमीन बेचबाक बात तोहर मोन मे कोना केँ एलौ। तू ओहि गाम सँ पिण्ड छोडेबाक गप करै छ, जतय नेना मे खेलेलह, जतुक्का पानि पीबि केँ नमहर भेल', जतय तोहर बाप-दादा केर सारा छ। तू डीहक नबका जमीन नै कीन, मुदा पुरनका बेचै केँ गप नै कर।" अस्तु नबका घरारी कीनबाक गप एतहि खतम भ' गेल। एक दिन नरेशक बडकी बेटी सुनन्दा, जे चौथा मे पढै छल, नरेश केँ कहलक- "पापा, जेना हम अहाँ संगे रहै छी, अहूँ त' बच्चा मे बाबा संगे रहैत हैब।" नरेश- "हाँ, रहैत छलहुँ। सब रहैत अछि।" सुनन्दा- "अहाँ के सब गप मानैत हेता बाबा।" नरेश- "हाँ यथासम्भव मानैत छलाह।" सुनन्दा- "अहाँ बड्ड नीक छी पापा। हमर सब गप पूरा करै छी। हमहुँ नमहर भ' केँ अहाँक सब गप जरूर मानब।" ई कहैत ओ खेलाई लेल चलि गेल। ओकर अन्तिम वाक्य सुनि नरेश धक् रहि गेल। ओकरा अपन नेनपनक सब गप मोन पडय लागलै, जे कोना फेंकन फाटल धोती पहिरैत रहल, कोना मरौनावाली फाटल नुआ पहिरैत रहलीह, मुदा नरेशक पढाई मे कोनो बिथुत नै हुअ देलखिन्ह। एक बेर त' नरेश केँ फार्म आ किताब लेल पाँच सय टका भुटकुन बाबू सँ पैंच लेबा मे कोन कोन गप नै फेंकन केँ सुन' पडल छलै। नरेशक मोन मे विचारक तूफान उठि गेल। ओ घर सँ बाहर निकलि केँ घूम' लागल। घूमैत पार्क दिस चलि गेल। ओतय एकटा गाछ पर एकटा चिडै अपन बच्चा सब केँ चोंच मे दाना दैत छल। ओकर हृदय फाट' लागलै। पण्डितजी केर संस्कृतक कक्षा मोन पड' लागलै जाहि मे ओ "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसि" पर लगातार दू घन्टी पढबैत रहि गेल छलखिन्ह। ओ कक्षा नरेश केँ बड्ड नीक लागल रहै। कतेक दिन धरि ओ एहि श्लोकक पाठ करैत रहै छल। एहि विषय पर वाद विवाद प्रतियोगिता मे सेहो ओ नीक बाजल छल आओर जिला स्तर पर पुरस्कार सेहो भेंटल छलै। ओ एकटा निर्णय लेलक आओर डेरा आबि केँ कनियाँ सँ कहलक- "हमर अटैची तैयार क' दिय'। हम गाम जायब।" कनियाँ बाजलैथ- "इ की बाजै छी। ओतय एखन जा क' की करब? दस बरख सँ उपर भेल गाम गेला। के चिन्हत? बाबूजी सँ नित गप होयते अछि।" नरेश- "डीहक जमीन कीनै लेल जाइत छी।" कनियाँ- "इ कोन बतहपनी धेलक अहाँ केँ।" नरेश- "बताह त' एखन धरि छलहुँ। आब ठीक भ' गेलौं। जाहि मातृभूमि केर माटि-पानि सँ हमर देह पोसल अछि, जे मातृभूमि हमरा हमर पहचान देलक, ओकरा हम बिसरि गेल छलौं। माय-बाबूक आकांक्षा आ मनोरथ बिसरि गेल छलौं। एतय भोपाल मे सब सुविधा अछि, मुदा जे अपनैती हमरा गाम मे भेंटैत रहै तकर अभाव बुझाइत रहै ए। आब गाम साल मे एक बेर त' जरूर जायब।" कनियाँ कनी काल घमर्थन केलकैन्हि, मुदा हुनकर जिद आ दृढताक आगाँ चुप भ' गेलै। एकाएक नरेशक भक् टूटल। बगलक यात्री, जिनका सँ सकरी मे परिचय भेल रहैन्हि, हुनका हिलबैत कहैत रहै जे श्रीमान् चिकना आबि गेलै, कतेक सुतब, उतरू नै त' ट्रेन फूजि जैत। मुस्की मारैत नरेश बजलाह- "नै यौ, आब जागि गेल छी। एखन धरि सुतल छलहुँ।" इ कहैत ओ टीशन पर उतरि गेल आ गाम दिस चलि देलक। डेग जेना हल्लुक भ' गेल रहै आ तुरन्ते गाम पहुँचि गेल। फेंकन एकाएक नरेश केँ देखलक त' आश्चर्य भेलै आओर मरौनावाली भरि पाँज मे बेटा केँ पकडि कान' लागल। नरेश फेंकन के गोर लागि केँ कहलक- "बाबू, हम आबि गेलौं डीहक जमीन कीनबाक अछि ने।" साँझ मे दुनू बापूत भुटकुन बाबू लग गेलाह। भुटकुन बाबू नरेश केँ आशीर्वाद दैत कहलखिन्ह- "गाम केँ कोना बिसरि गेलहक?" नरेश- "नै बाबा, बिसरल नै छलौं, कतौ हरा गेल छलौं। आब आबि गेलौं। डीहक जमीन कीनै लेल।" भुटकुन बाबू हँसैत बजलाह- "चल काल्हिये रजिस्ट्री क' दैत छियो। पाई आगाँ पाँछा द' दिह'।" नरेश- "पाई आनने छी बाबा।" साँझ मे फेंकनक छोट दलान लोक सँ भरल छल। मरौनावाली रहि रहि के चाह बनाबैत छल। नरेशक गाम मे आओर ओकर घर मे जेना पावनि-तिहारक चुहचुही छलै। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.मनोज झा मुक्ति- विद्यापति स्मृति समारोह वास्ते हमर दरभंगा यात्रा २. नरेन्द्र मिश्र ३.नवेंदु कुमार झा- मिथिला राज्यक विरोध मे उतरलाह डा॰ मिश्र/ पर्यटनक उद्योग पर सरकारक बढ़ल जोर विकसित होएत हलेश्वर पुनौरा आ पंथपाकर/ लोकायुक्तक मामिला मे सत्ता आ विपक्ष मे गतिरोध/ मनाओल गेल दरभंगा महाराजक जन्म दिवस/ प्रदेश मे खूजत पशु विश्वविद्यालय/ टाका नहि खर्च कएला पर बंद होएत आवंटन ४.प्रभात राय भट्ट- रोटी रोजीक खोजी १ मनोज झा मुक्ति विद्यापति स्मृति समारोह वास्ते हमर दरभंगा यात्रा
एहिवेर विद्यापति स्मृति दिवसकलेल सरहद ओहिपारक यात्रा हमर आ हमर किछु मित्र सबहक पहिनहिसँ तय छल । जाहि अनुसारे पहिने विद्यापतिक जन्मस्थली मधुवनी जिल्लक विस्फी गाम हमर सबहक पहिल गन्तव्य छल । विस्फीमे त्रिदिवसीय विद्यापति स्मृति समारोहक आयोजना लगभग १० वर्षसँ होइत आएल अछि । ताँए हम आ हमर दूगोट मित्र महोत्तरी जिल्लाक पिपरा गामके दिनेश चौधरी आ शीतलाल साह) कार्तिक धवल एकादशीक दिन ३.०० बजे जलेश्वरसँ दूटा मोटर साइकलपर प्रस्थान केलहुँ । जलेश्वरमे अवस्थित रातो नदीक किनार होइत खुड़पेरिया बाटसँ हमसब सरहद ओहिपार भिट्ठागाम होइत हमसब आगा बढ़ैत गेलहुँ । सिमरी,कोरियाही,चरौत,साहरघाट होइत हमसब उच्चैठ भगवतिक स्थान अर्थात दूर्गास्थान पहुँचलहुँ । दूर्गास्थानमे विभिन्न विद्वान सभहक प्रतिमाके मोटर साइकलेपरसँ एकटा फोटो लैत हम सब आगा बढ़ैत गेलहुँ । आगा बढैत हमसब बेनिपट्टी पहुँचलहुँ । बेनिपट्टीक बीच बजारमे विद्यापतिक एकटा पुराने प्रतिमाक स्तम्भके सरिएवाक काज भऽरहल छल । बेनिपट्टीमे किछु जलखै कऽ आगा बढबाक विचारसँ हमसब अपन मोटरसाइकलकेँ किछुकालकलेल कात लगा बन्द केलहुँ । छपरियाक भुज्जा दोकानमे बैसि भुज्जा फँकलहुँ, पान खेलहुँ आ पुन ः हमर सबहक मोटर साइकल अपन गनतव्य दिस बढऽ लागल । संभवत ः ओ गाम अरेर छल, जतऽ एकटा बोर्ड टाँगल छल जाहिपर मूर्धन्य साहित्यकार, कवि ‘यात्री’ जीक उत्सव मनाओल जेबाक सूचना देलगेल छल । दूर्भाग्यक बात जे सम्मेलनक दिन ओहिसँ एकदिन पहिने बितिगेल छल । मनके मसोह्रैत हमसब आगा बढलहुँ । आगा बाटमे रहिका गाम आएल । रहिकामे अबिते मैथिलीक एकगोट योद्धा स्व.चुनचुन मिश्रके याद आवि गेल । चुनचुन मिश्रक ओ व्यवहार मोन पड़ल जे एकबेर हम आ अनुज जितेन्द्र झा रहिका गेल छलौं, हूनकासँ भेंट होइते भरिपाँज कऽ धरैत हमरा सबके कहलाह जे कियो मैथिली कर्मीके हम देखैत छी त हमर छाती फुलि जाइत अछि । ओ मैथिली प्रति एतेक समर्पित छलाह से हूनक एहि वाक्यसँ सहजहिं अनुमान लगाओल जा सकैया–‘मैथिलीक काज केओ कतौ करैत छथि त हमर कान्ह मजबुत करैत छथि ।’ मोनहिमोन मैथिली पुत्र चुनचुनके श्रद्धाञ्जली दैत हमसब आगा बढलहुँ । बेर लुकझुकाए लागल छल । हमसब जिरो माइल पहुँचिकऽ ओतऽसँ पश्चिम विस्फीक बाट धएलहुँ । अन्हार भऽगेल छल मुदा सडक नीक होएबाक कारने हमरा सबके कनिको कठिनाई नहि भेल । विस्फी थानाक बगलमे धज्बा बजारपर रुकि पान खेलहुँ आ विस्फीए गामक काठमाण्डूमे काज कएनिहार मित्र भरत शर्माके दोकानदारेक मोबाइल माँगिकऽ फोन कएलहुँ । बातचितक बाद तय भेल जे पहिने विस्फीक गोबराही टोल जाई जतऽ मित्रक घर छल । हमसब गोबराही टोल पहुँचलहुँ । सबगोटे बहुत प्रसन्न भेलाह । विस्फी गोबराही टोलक लगभग ४०/५० गोटे ३०/३५ वर्षसँ काठमाण्डूमे काठक काज करैत छथि । काठमाण्डूमे हूनका सबहक अपने मजलिस छन्हि । ओसब कलाप्रेमी छथि, काठमाण्डूक शान्तिनगरमे होरीक कार्यक्रम हुए वा भजन किर्तन ओसब तत्पर रहैत छथि । खानपिन करैत ९.०० बाजिगेल छल । हमसब चारिटा मोटर साइकलपर विद्यापतिक डीहपर जेवाकलेल प्रस्थान केलहुँ । जखन डीहपर पहुँचलहुँ त भाषण–भूषणक कार्यक्रम समाप्त भऽगेल छल आ विद्यापतिक जीवनपर आधारित विद्यापति फिल्म पर्दापर देखाओल जा रहल छल । आयोजकसँ जखन कार्यक्रमक सन्दर्भमे पुछल गेलनि त ओसब कहलाह जे प्रख्यात उद्घोषक एवं मैथिली एकादमीक अध्यक्ष कमलाकान्त जीक ग्रुपक प्रस्तुति आजुक राति तय छल, मुदा कालाकार सब नहि आबि सकलाक कारणे हूनक कार्यक्रम रद्द भऽगेलनि आ पर्दा चलाओल जा रहल अछि । काल्हि अर्थात धवल द्वादशीक रातिमे कवि गोष्ठी आ नाटकक कार्यक्रम अछि । हमसब किछुकाल विलमि ओतऽ स्मृति भवनमे रहल पुस्तकालयक आलमिराके देखऽ लगलहुँ, जतऽ एकौहुटा पुस्तक नहि छल । जिज्ञासा रखलापर जानकारी भेल जे पहिने लाखोसँ अधिक पुस्तक छल मुदा के,कहिया आ कतऽ लगेल से जानि नहि । फेरसँ पुस्तकालयक जोरजाममे लागल बात ओसब बतौलाह । रातिएमे पुन ः गोबराही टोल घुरि एलहुँ । प्रात भिने भोरे विद्यापतिक जन्म नगरी घुमबाक कार्यक्रम बनल । हमसब पैदल गाम घुरबाक विचारसँ १०÷१२ गोटे भिनसरे निकलहुँ । गामक सब चौरि चाँचर देखिकऽ छाती फटैत जकाँ लगैछल, कारन एहिबेरुका बाढ़िसँ विस्फी लगायत परोपट्टा ४०/५० कोस धरि एक्कहु कनमा धान नहि रहिगेल छल । खेतमे धानक झुर्राठ ठाढ़ छल मुदा बालिमें छुच्छे खँखड़ी । किसान सब खेत खालि करेबालेल माथ हँसोथैत छल । हमसब बाढ़िसँ क्षत–विक्षत विस्फी घुमिकऽ घर एलहुँ । पुन ः भोजन कऽ कमतौल स्टेशनसँ कनि दूरपर रहल अहिल्या स्थान आ गौतम मुनिक आश्रम, गौतम कुण्ड देखबाकलेल ३ टा मोटर साइकलपर ७ गोटे प्रस्थान केलहुँ । बाढ़िमे कमलाक लील देखैत अहिल्या स्थान पहुँचलहुँ जतऽ श्रीराम द्वारा गौतम मुनिक पत्नि अहिल्याके उद्धार कएलगेल छल । अहिल्या स्थानके जाहिरुपे विकास होएबाक चाही ओना नहि बुझि पड़ल । सरकारद्वारा स्थानक जमीनमे पावर हाउस बनाएब एवं स्थानीय वासीद्वारा सेहो स्थानक जमीन दख्खल करब स्थानके दयनीय अवस्था उजागर कऽरहल छल । मन्दिरके जर्जर अवस्था, अहिल्या कुण्डमे स्थानिय वासीद्वारा फैलाओल जाऽरहल गन्दगी कोनो यात्रीके मोन खिन्न कऽदेत । ओतऽसँ हमसब गौतम कुण्ड दिसि प्रस्थान केलहुँ । चारुकात बाढिसँ जलमग्न रहल भूमि आ बीचमे गौतम मुनिक आश्रम । बाढिक पानिक कारणे गौतम कुण्ड डुबले छल । गौतम कुण्डमे बनैत विशाल धर्मशाला एहि स्थानके सुन्दर भविष्य दिसि इशारा कऽ रहल छल । हमसब पुन ः घुरि एलहुँ विस्फीक गोबराही टोल । द्वादशीक रातिके कनि सबेरे हमसब डीह दिस प्रस्थान केलहुँ । ओतऽ कवि गोष्ठीक कार्यक्रम चालु छल । ताहिके बाद नाटकक कार्यक्रम शुरु भेल । एकटा कालाकार होएबाक नाते हमरो प्रस्तुति ओतऽ भेल । रातिमे विश्राम कऽ प्रात भिने अर्थात धवल त्रयोदसीक दिन भोरे मित्र दिनेश आ शीतलाल विशेष कारणवस नेपाल घुरि गेलाह । हम आ मित्र भरत एवं विजय दरिभंगाकलेल प्रस्थान केलहुँ । दरिभंगा स्टेशनके बगलमे रहल पैघ पोखरिक किनारपर अवस्थित एकटा काँलेजमे त्रिदिवसिय विद्यापति विभूति पर्व समारोहक आयोजना कएलगेल छल । पहिल दिन नेपालक दिसिसँ सुनिल यादव निर्देशित, राम भरोस कापडिक ‘जनचेतना’ नाटक छल, त्रयोदशीक दिन कवि गोष्ठी आ पूर्णिमाक दिन रंगारंग मैथिली कार्यक्रमक कार्यक्रम राखल गेल छल । त्रयोदशीक दिन होमयबला कवि गोष्ठीमे कविसब पहिनहिंसँ आमन्त्रित छलाह । हमहुँ अपन एकटा कविता वाचन करबाक वास्ते गेल छलहुँ । मुदा आमन्त्रित कवि नहि भेलाक कारणे मौका भेटब कठीन छल । मुदा आतऽ प्रख्यात कालाकार एवं उद्घोषक राम सेवक ठाकुर भेटलाह, हुनका सब बात कहिलियैन त ओ आयोजक के हमर परिचय दैत मौका देवाक आग्रह केलखिन्ह आ हमरो मौका देल गेल । कवि गोष्ठीमे मैथिलीक वरिष्ट–वरिष्ट साहित्यकार, कविजी सबसँ साक्षात्कार होयबाक मौका भेटल । ओहि राति कूल ४८ टा कवि लोकनि अपन–अपन रचना ओहि मञ्चपर प्रस्तुत कएने छलाह । मञ्चपर उद्घोषणक भार भेटल रहनि ‘जनकजी’के जे करमान लागल दर्शक÷श्रोताके लोटपोट कऽदेल्खिन्ह । रचना पाठ कएनिहार कवि–साहित्यकार सबमे बालेश्वर मिश्र, कौशलेश, परमानन्द प्रभाकर, बबलु कुमार, चन्द्रेश, हजरत हाफी मन्नान, रामकुमार, रामराजा मिश्र, उमेश कर्ण, दिलिप, विष्णुदेव झा, शम्भूनाथ मिश्र, शम्भूजी सौरभ, विद्याधर मिश्र, दिनेश, अशोक कुमार मेहता, विभूति आनन्द, बुचनू पासवान,, अशोक झा, शंकर देव, महेन्द्र नारायण राम, डा.जय प्रकाश चौधरी‘जनकजी’, मन्जर सुलेमान, चन्द्रमणि सिंह, शैलेन्द्रानन्द, गणेश झा, जयजय गोपाल, चन्द्रमोहन झा‘पड़वा’, बुद्धिनाथ झा बोकारो, डा.राजेन्द्र झा, डा.चन्द्रदेव झा, हरिश्चन्द्र झा‘हरित’, मनोज झा मुक्ति, सक्रु पासवान, दिलिप कुमार झा, टुनटुन झा, शम्भूकान्त झा, श्याम विहारी राय‘सरस’, शम्भूनाथ मिश्र, रमाजी, मणिकान्त झा, कश्यपजी, अमलेन्द्र शेखर पाठक, अशोक चंचल, धनिक मण्डल, विनय विश्ववन्धु, जय नारायण झा, गंगाप्रसाद झा, डा.आर.के. रमण, सन्तोष झा आ फूलचन्द्र झा‘प्रविण’ । दरभंगामे भेल विद्यापति विभूति पर्वकलेल सबसँ पैघ जँ कियो धन्यवादक पात्र छथि त वैजुकान्त चौधरी । कवि गोष्ठीक तुरत्तवाद मधुवनी ग्रुपक नाटक मञ्चन भेल । कविगोष्ठीक बाद हमसब दरिभंगाक लगेमे रहल गौंसाघाटपर भूतक आ भगताक मेला देखबाकलेल प्रस्थान कएलहुँ । २ नरेन्द्र मिश्र दुर्गापूजा-2011 केर अवसरपर मैथिली-नाटक मंचन भेल- अप्पन कर्मक फल स्थान- दुर्गापूजाक मेला परिसर बेरमा (उत्तरवारि पार) जिला- मधुबनी नाटककार- नरेन्द्र मिश्र िनर्देशक- माधव आनन्द आ नरेन्द्र मिश्र पात्र- कलाकार- पिताक नाओं- पता- 1. भिषन भायजी मंजल आलम मो. मुशलीम, बेरमा 2. कल्लू विजय झा श्री प्रेमचन्द्र झा बेरमा 3. शुकन टोनी झा स्व. मिथिलेश झा बेरमा 4. चाहबला धर्मेन्द्र मिश्र श्री सदानंद मिश्र बेरमा 5. कल्लू केर पत्नी धर्मेन्द्र मिश्र श्री सदानंद मिश्र बेरमा 6. शराब दोकानदार प्रमोद साहु श्री गणेश साहु बेरमा 7. समदिया विकाश ठाकुर श्री ब्रह्मदेव ठाकुर बेरमा 8. चाेर-1 प्रमोद साहु श्री गणेश साहु बेरमा 9. चोर-2 आशीष ठाकुर श्री ललन ठाकुर बेरमा 10. मुन-मुन काका विकाश ठाकुर श्री ब्रह्मदेव ठाकुर बेरमा 11. मास्टरजी माधव ठाकुर स्व. बेचन ठाकुर बेरमा सहयोगकर्त्ता- अमरेन्द्र मिश्र मधुकान्त झा ललन ठाकुर लक्ष्मीकान्त झा अंकित ठाकुर तबरेज आलम ओमप्रकाश मण्डल दीपक मण्डल शिवम मण्डल दिनेश मुखिया शंकर पासवान गुलशन अली राघव मिश्र ३ नवेंदु कुमार झा १ मिथिला राज्यक विरोध मे उतरलाह डा॰ मिश्र मिथिलांचल के सभ दिन खतरा मिथिला पुत्र सॅ रहल अछि। स्वातंत्राक 64 वर्ष मे आधा समय बिहारक नेतृत्व मिथिला पुत्रक हाथ मे रहल मुदा मिथिलांचलक दुर्गति आ विकास सभक सोझा अछि। मिथिलांचल मे राजनीति रोटी सेकबाला मैथिलांचलक राजनीतिज्ञ मिथिला हितक रक्षाक समय स्वयं मुद्रा मे आबि जाति छथि। उŸार प्रदेशक मुख्यमंत्री मायावतीक छोट प्रदेशक घोषणाक बाद बिहारक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छोट प्रदेशक समर्थनक बाद ई आशा जागल छल जे मिथिला पुत्र सभ एहि दिशा मे डेंग बढ़ौताह मुदा मिथिला आ मैथिलीक झण्डा उठैबाक ढाबा करएबाला नेता सभ राजनीतिक चुसनीक मजबूरी मे जाहित रहे अलग मिथिल राज्यक विरोध मे ठाढ़ भेला एहि सॅ हुनक राजनीतिक चरित्र सोझा आबि गेल अछि। मिथिलाक सभ सॅ पैघ हितैषी कहए बाला बिहारक पूर्व मुख्यमंत्री डा॰ जगन्नाथ मिश्र अपन मुख्य मंत्रित्वकाल मे मैथिलीक उपेक्षाक उर्दू के प्रदेशक द्वितीय भाषाक दर्जा देलनि। विकासक नाम पर मिथिलाक कोना ठगलनि से तऽ हुनक प्रतिनिधित्व बाला झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र के देखि कऽ सहजहि पता चलैत अछि। आ आब जिनगीक तेसर चरण मे बादो मिथिलाक विकासक परोक्ष एजेन्डा सॅ पाछा नहि हटि रहल छथि। एक दिस देश भरि मे छोट प्रदेशक लेल संघर्ष चलि रहल अछि आ मिथिला प्रदेशक लेल अनुकूल वातावरण बनैबाक समय आएल अछि तऽ डाक्टर मिश्र अलग मिथिला राज्यक विरोधक झण्डा उठा सŸााक आगा अपन माथ झुका लेलनि अछि। दरअसल हुनक नजरि राज्य सभाक चुनाव पर अछि। अगिला वर्ष्ज्ञ राज्य सभाक कतेको सीट बिहार सॅ खाली भऽ रहल अछि आ डा॰ मिश्र एहि उम्मीद मे नीतीश कुमार के खुश करबाक लेल अलग मिथिला राज्यक विरोध मे उतरि गेलाह अछि। डा॰ मिश्र भने कतबो नाक रगरथि जदयू आ भाजपाक गठबंधन मे हुनका राज्य सभा देखबाक अक्सर भेटत एकर आशा कम अछि। डॉ॰ मिश्र राजनीतिक शक्तिक केन्द्र बनलाक दरमियान तऽ मिथिलाक उद्वारक लेल कोनो प्रयास तऽ नहिए कएलनि आ आब जखन उचित अवसर बुझि पड़ैत अछि तऽ मिथिलाक जन आंकाक्षा के गला दबऽ मे लागि गेलाह अछि। दरअसल मिथिलाक ई दुर्भाग्य अछि जे प्रदेशक सŸाा के सब सॅ बैसी दिन नेतृत्व करबा अवसर मिथिला पुत्र सभके भेटल मुदा विकास नहि होएबाक सौभाग्य मिथिलांचल के भेटला मिथिला राज्य आन्दोलन मिथ्लिांचलक नेताक लेल ‘‘राजनीतिक पर्यटन’’ बनि गेल अछि। एहि सॅ पहिने भाजपा सॅ निष्काषित भेलाक बाद पण्डित ताराकांत झा सेहो मिथिला राज्य अभियान चलौने छलाह। एकर राजनीतिक लाभ सेहो हुनका भेटल। पंडित झाक भाजपा मे आपसी बाद हुनका उच्च सदनक सदस्य बनाओल गेल आ संवैधानिक पद सेहो देल गेल अछि। लगैत अछि जे पंडित झा एहि मात्र एहि मादे मिथिला राज्य अभियान चलौने छलाह। पद भेटैत मिथिला राज्य अभ्यिानक हवा निकलि गेल आ एक बेर फेर मिथ्लिावासी आ मिथिलांचल ठगल गेल। केन्द्र मे राजग सरकारक मंत्री पद सॅ हटैलाक बाद भाजपाक प्रदेश अध्यक्ष डॉ॰ सी.पी. ठाकुर सेहो मैथिलीक संविधानक अष्टम् अनुसूची मे देबाक लेल दरभंगा, पटना आ दिल्ली धरि फोटो खिलौलनि। मैथिलीक मांग पूरा भेल। डॉ॰ ठाकुरक चापलूस मंडली एकर खूब प्रचार मिथिलांचल मे कएलक जेना मात्र किछुए मासक हुनक प्रयास सॅ ई सफल भेला एकर लाभ चापलूस मंडली वाम विचारक मिथिला राज्यक मठाधीश के भेल आ ओ वामपंथी सॅ दक्षिणपंथी भऽ गेलाह। भाजपाक वर्तमान कार्यकारिणी मे ओ विराजमान छथि। खैर, एहि बेर सभ सॅ मुखर विरोध डॉ॰ सी.पी. ठाकुर दिस सॅ भेल अछि तऽ पंडित ताराकांत झा मौन छथि। आब सभ राजनीति नेताक मिथिला प्रति हुनक सोच सोझा आबि गेल अछि तऽ जनताक सेहो अपन संकल्प एहि मिथिला विरोधी नेता सभक सोझा आनए पड़त। नहि तऽ जगत जननी मां सीता, लोरिक सलहेस, दीना भद्री, मंडन आ विद्यापतिक धरती एहिन कुहरेत रहत। २ पर्यटनक उद्योग पर सरकारक बढ़ल जोर विकसित होएत हलेश्वर पुनौरा आ पंथपाकर
प्रदेश मे पर्यटनक संभावना के देखैत बिहार सरकार पूर्व राष्ट्रपति डा0 ए.पी.जे. अब्दुल कलामक सुझाव पर अमल करब प्रारंभ कऽ देलक अछि। सरकार पर्यटन उद्योग के बढ़ावा देबाक लेल कतेको योजना बनौलक अछि। सरकारक योजना जगत जननी मां सीता आ मर्यादा पुरुषोŸाम श्रीराम सॅ प्रदेश मे जुड़ल जगह सभक रामायण सर्किटक रूप मे विकसित करबाक अछि। एहि वास्ते सीतामढ़ीक पुनौर हलेश्वर स्थान, पंथपाकर, बक्सर जिलाक रामजानकी मठ आ आन प्रमुख स्थान के विकसित कऽ एहि ठाम पर्यटन के आकर्षित करबाक योजना बनाओल गेल अछि। दोसर दिस आई मुख्य मंत्री नीतीश कुमार बिहारशरीफ मे आयोजित एकटा राष्ट्रीय सेमिनार मे सूफी सर्किट बनैबाक घोषणा सेहो कएलनि अछि। रामायण सर्किटक अंतर्गत प्राचीन शास्त्र मे मर्यादा पुरुषोŸाम श्रीरामक बरियातिक बिहारक जाहि जाहि जगह होइत मिथिला नरेश राजा जनकक घर पर पहूंचत ओहि सभ जगह आ जगत जननी सीता सॅ सरोकार राखए बाला जगह सभके पर्यटनक दृष्टि सॅ विकसित कएल जायत। वाल्मीकि रामायण आ राम चरितमानस मे सीता स्वयंवरक बाद श्री रामक बरियातीक मनोरम वर्ण प्रस्तुत कएल गेल अछि। श्रीराम आ लक्ष्मण विश्वमित्रक संग अयोध्या सॅ हुनक आश्रम आयल छलाह। आ एहि ठाम सॅ विश्वामित्रक संग मिथिला नरेश द्वारा जगत जननीक विवाह वास्ते आयोजित स्वयंवर मे भाग लेने छलाह। श्रीराम एहि स्वयंवर मे शिवक धनुष तोड़ि जगत राजा जनकक संकल्प के साकार कएलनि आ राजा जनकक निमंत्रण पर अयोध्या सॅ राजा दशरथ श्रीरामक बरियाती लऽ मिथिला आएल छलाह। एहि क्रम मे प्रदेशक कतेको जगहक सॅ होइत मिथिला पहूचल छलाह। एहि मे सरयू गंगाक संगम छपरा से 8 किलोमीटर दूर सीधी, तारका वध करबाक स्थान चरित्रवन (बक्सर) गिरिव्रज (राजगीर) फतुहा, विशाला नगर (वैशाली) आदि श्री रामक बरियाती आ विश्वामित्रक संग शिक्षा ग्रहणक काल सॅ जुड़ल जगह अछि तऽ सीतामढ़ीक हलेश्वर स्थान जतए राजा जनक हर चलौने छलाह तऽ पुनौरा सीतामढ़ी मे माताक जन्म भेल छल। पंथपाकर सीतामढ़ी मे श्री रामक बरियाती रूकल छल। एहि मे दरभंगा जिलाक अहिल्या स्थान सेहो प्रमुख अछि जतए अहिल्याक उद्यार श्रीराम कएने छलाह। एहि ठाम गौतम ऋषिक आश्रम आ गौतम कुण्ड सेहो अछि। एहि सभ जगह के रामाण सर्किटक रूप मे विकसित कऽ प्रदेश मे पर्यटनक उद्योग के भजगूति देबाक सरकार कऽ रहल अछि। एहि दिशा मे सरकार डेग सेहो उठा देलक अछि। सीतामढ़ी हलेश्वर स्थान के विकसित करबाक लेल 47 लाख टाका आ बक्सरक रामजानकी मठ के विकसित करबाक लेल सेहो 52 लाख टाका जारी कऽ देल गेल अछि। ३ लोकायुक्तक मामिला मे सत्ता आ विपक्ष मे गतिरोध प्रदेश मे मजगूत लोकायुक्त बनैबाक लऽकऽ सरकार आ विपक्ष मे विरोधाभास सोझा आबि गेल अछि। एक दिस सरकारक प्रस्तावित विधेयक पर टीम अन्ना के विरोध पर सरकारक कड़गर प्रतिक्रिया आ दोसर दिस कॉग्रेस, भाकपा माले आ लोजपा सहित आन विपक्षी दलक एहि मामिला मे सरकार पर लगाओल जा रहल निशानाक मध्य एहि विधेयक पर आम जनता सॅ राय लेबाक समय सीमा आई समाप्त भऽ गेल। सरकार एहि विधेयक के बिहार विधान मंडलक शीतकालीन सत्रक दरमियान 7 दिसम्बर के प्रस्तुत करबाक लेल तैयार अछि। एहि विधेयक पर विचारक लेल 26 नवम्बर के सर्वदलीय बैसक सेहो आयोजित कएल गेल। आम लोक सॅ भेटल सुझाव आ सर्वदलीय बैसक मे आएल सुझाव पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदीक अध्यक्षता बाला मंत्री समूह विचार कऽ एहि विधेयक के अंतिम रूप देत। मुख्यमंत्री के एकर अंतर्गत आनए आ लोकायुक्त नियुक्ति मे सरकारक हस्तक्षेपक बिन्दु पर सामान्य रूपे सभ सॅ बेसी आपति उठि रहल अछि। ओना सरकार स्पष्ट कएलक अछि जे सभ मामिला पर विचार कऽ एकटा मजगूत लोकायुक्त विधेयक आनल जाएत। दोसर दिस, मुख्यमंत्री के लोकायुक्तक दायरा मे अनबाक विरोध कड़ैत पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर जगन्नाथ मिश्र सरकार के खुश करबाक प्रयास कएलनि अछि जाहि सॅ कि दिल्लीक रास्ता खूजि सकए।
४ मनाओल गेल दरभंगा महाराजक जन्म दिवस
महाराजा कामेश्वर सिंहक 105म जन्म दिवस पर दरभंगा मे समारोहपूर्वक मनाओल गेल। एहि अवसर पर प्रख्यात समाज शास्त्री आ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालयक पूर्व प्रोफेसर डाक्टर दीपंकर गुप्ता ‘‘कामेश्वर स्मृति व्याख्यान माला’’ मे अपन व्याख्यान प्रस्तुत कएलनि। समरोह मे बिहारक पूर्व पुलिस महानिदेशक डी.एन. गौतम विशिष्ट अतिथि छलाह जखन कि सामाजिक विज्ञान अध्ययन केन्द्र कोलकाताक प्रोफेसर डाक्टर पी.के. बोस अध्यक्षता कएलनि। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन द्वारा आयोजित एहि समारोहक जनतब दैत प्रबंधक ट्रस्टी डा0 हेतुकर झा जनौलनि जे एहि अवसर पर कामेश्वर सिंह बिहार हेरिटेज श्रृंखलाक अंतर्गत प्रकाशित पुस्तकक विमोचन सेहो कएल गेल। ५ प्रदेश मे खूजत पशु विश्वविद्यालय
प्रदेश मे वर्ष 2012 सॅ प्रारंभ होमए वाला आगिला पांच वर्षक लेल पशु आ मत्स्य संसाधन विभाग अपन रोड मैप तैयार कएल अछि। जाहि मे प्रदेश मे पशु विश्वविद्यालय, पशु मित्रक नियुक्ति आ कॉलेज खोलब प्राथमिकताक सूची मे अछि। पशु आ मत्स्य संसाधन विभाग सॅ भेटल जनतबक अनुसार प्रस्तावित पशु विश्वविद्यालयक अंतर्गत एकटा नव पशु महाविद्यालय, डेयरी महाविद्यालय आ मत्स्य महाविद्यालय खोलल जायत। विभाग पशु संसाधन, डेयरी आ एहि सॅ संबंधित आन क्षेत्रक विस्तृत पढ़ाई, आ शोध आदि पर 70,000 टाका अगिला पांच वर्ष मे खर्च करत। एकर अलावा प्रदेश सभ 8442 पंचायत मे पशु मित्रक बहाली होएत। पशु मित्रक चयनक बाद हुनका प्रशिक्षित कऽ अनुबंधक आधार पर नियुक्ति होएत। वर्ष 2012-13 मे 1720, वर्ष 2013-15 मे 1720 आ, वर्ष 2016-17 मे 1562 पशु मित्र के तकनीकि मदति उपलब्ध कराओल जाएत जाहि सॅ ओ किसान के मदति करबाक संगहि पशु चिकित्सालय आ प्रखंड स्तर पर पशु चिकित्सक के सहयोग करताह। विभागक रोड मैपक अनुसार दुग्ध उत्पादन समिति मे नीजि जन भागीदारी (पीपीपी) क आधार पर पशु चारा आ पाल्ट्र प्लांट प्रत्येक प्रखंड मे लगैबाक योजना अछि। पशु चारा आ पशुक प्रदेशक सभ अड़तीस जिला मे 3800 लाखक टाकाक खर्च सॅ आधुनिक पशु वद्यशाला सेहो खोलल जायत। पशु संस्थान के मजगूत कएल जायत प्रखंड पशु सेवा केन्द्र सभ 534 प्रखंड मे खोलल जायत जाहि पर 53400 लाख टाका खर्च होएत। ६ टाका नहि खर्च कएला पर बंद होएत आवंटन राष्ट्रीय कृषि विकास योजनाक नहि खर्च करयवाला चीनी मिल मालिक सभके विŸाीय वर्ष 2011-12क लेल टाका आवंटित नहि कएल जायत। वर्ष 2010-11क लेल एहि योजना मद सॅ आवंटित टाका मे सॅ बगहा चीनी मिल मे 35.97 लाख, नरकटियागंज मे 41.72 लाख, रीगा मे 90 लाख, लौरिया मे 65.53 लाख, मझौलिया मे 17 लाख, प्रतापुर मे 72.49 लाख, सुगौली मे 56.56 लाख, सिधवलिया मे 46 लाख आ गोपालपुर चीनी मिल मे 19.68 लाख टाका बाचल अछि।
४ प्रभात राय भट्ट रोटी रोजीक खोजी नेपालक मधेस प्रान्तमे महोतरी जिलाक धिरापुर गामक बर्ष ३० भोला एकटा निम्नबर्गीय परिवामे जन्म लेलक, हुनक माए बाबु बड मुस्किलसँ मेहनत मजदूरी कऽ भोलाक पालन-पोषण केलक, भोलाक माए-बाबु गरीब हेबाक कारण भोला प्रारम्भिको शिक्षासँ वन्चित रहल। जेन-तेन समय बितैत गेल आ समयानुसार भोला पैघ सेहो भऽ गेल ! समयक संग संग हुनक दाम्पत्य जीवनक शुभारम्भ सेहो भऽ गेलै, भरल जुवानीक अबस्थामे दाम्पत्य जीवनक रसास्वादन एवं आन्नदमे पूर्ण रूपेण डुबि गेलाह। ओ अपन आर्थिक स्थितिकेँ नजैर अंदाज करैत गेलाह मुदा बिना अर्थसँ जीवनक गाड़ी कतेक दिन चलि सकैए ! कनियाक सौख श्रींगारक सामिग्रीः भोजन भातक बेबस्था वृद्ध माए बाबुकेँ दबाइ दारू सभक अभाव चारू दिशसँ अखड़ऽ लगलै। तकर बाद भोलाकेँ अपन जिमेवारीक बोध भेलै। हुनका किछु नै सुझाइ जे की करू आ नै करू। राति दिन बेचारा भोला घरक लचरल बेबस्था देखि कऽ बड चिंतित रहऽ लागल ! एक दिन ओ अपन मिता सुरेश कापरकेँ अपन सभटा दु:ख सुनैलक ! सुरेश बड नीक सलाह देलकै-देखू मिता अइ नेपाल देशमे स्वरोजगारीक कोनो ब्यबस्था नै छै, पढलो लिखल मनुखकेँ नोकरी नै भेटै छैक तहन हम अहाँ कोन जोकरक छी! हम एकैटा सलाह देब, सउदी अरब चलि जाउ, ओइ ठाम बड़ पैसा भेटै छैक, अहाँक सभटा दु:ख दूर भऽ जाएत। सुरेशक गप सुनि कऽ भोलाकेँ माथमे चक्कर देबऽ लगलै !!मुदा किछु देरक बाद भोला सहमती जनौलक आ सुरेशसँ बिदा लैत घर तरफ प्रस्थान केलक! सुरेश घर पहुचैत बजैए- कनियाँ कतऽ गेली यै- हमरा बड़ जोरसँ भूख लागल अछि, किछु खाइले दिअ ने । कनियाँक कोनो जवाब नै एला उपरांत ओ भानस घरमे गेल। कनियाँकेँ देखलक। माथ हाथ धएने आ सिशैक सिशैक कऽ कानैत। अहां किए कनै छी यै अतराढंवाली? की भेल, किछु बाजब तब ने हम बुझबै! कनियाँ कहलकै....हम की बाजु आ बाजल बिनु रहलो नै जाइए, अहाँ जे कोनो काम धंधा नै करबै तहन ई चुल्हाचौका कोना चलत। एक पाउ चाबल छल जेकर मरसटका भात बना कऽ माए-बाबु आ बच्चा सभमे परसादी जकाँ बाँटि देलौं आ हम तँ उपबासो कऽ लेब मुदा अहाँकेँ तँ भूख बर्दास्त नै होइए तइसँ हमर छाती फटि रहल अछि मुदा अहाँकेँ तँ कोनो चिंता फिकिर रहबे ने करैए! तपेश्वर मालिक सेहो बड़ खिसिया कऽ द्वारपर सँ गेल। कहै छल जे ५०० टकाक हमर सूद ब्याज सहित २५००० भऽ गेल मुदा ई भोलबा अखन धरि देबऽ के नाम नै लैए। हे यै अतराढंवाली, अहां आब जुनि चिंता करू, हमरापर भरोसा रखू। सभ ठीक भऽ जेतै। ई किछु दिनक दु:ख थीक। एकटा कहाबत छै जे भगवानक घरमे देर छै मुदा अंधेर नै। अतराढंवालीक मोन अति प्रसन्न भेलै आ झटसं पुछि बैठैए- आइयौ रामपुकारक पापा- ई की बात अछि जे अहां एतेक पुरुषार्थ वाला गप करैत छी? की बजली यए अतराढंवाली एकर मतलब अहुं हमरा निकम्मे बुझैत छी? तँ कान खोलि कऽ सुनि लिअ। हम आब सउदी अरबिया जा रहल छी आ ढेर पैसा कमा कऽ अहां लेल भेजब! अतराढंवाली ई बात सुनिते घबरा गेल आ कहऽ लागल- की बज्लौं? कने फेरसं बाजु तँ। अहांकेँ जे मोनमे अबैए सएहे बाजि दैत छी। एहन बात आब बजैत नै होइब से कहि दै छी हम................ मोन तँ भोलाक सेहो उदास भऽ जाइए मुदा हिमत करि कऽ कनियाँकेँ समझाबक कोशिश करैए। देखियौ कनियाँ, हम जनैत छी जे हम कोनो काम धंधा नै करैत छी। तइयो अहां हमरासं खूब प्रेम करैत छी। आ हमहूँ अहां बिनु एकौ घडी नै रहि सकैत छी। ई सभटा जनैत बुझैत हम मजबूरी बस एहन निर्णय लेलहुं आ अइके अलाबा दुसर कोनो रस्तो नै अछि ! आखिर ई जीवन तँ प्रेम आ स्नेहसँ मात्र नै चलत। नै जीवनमे दुःख सुख भूख रोग शोक पीड़ा ब्यथा वेदना संवेदना प्रेम स्नेह विवाह बिदाई जीवन मृत्यु समाज सेवा घर परिवार इस्ट मित्र कर-कुटुंब नाता गोता मान सम्मान प्रतिष्ठा घर मकान, खेत खलिहान बगीचा मचान, सत्कार तिरिस्कार, मिलन बिछोड, ई सभटा जिनगीक अभिन्न अंग अछि, आ ई सभटाक जड़ि एकैटा थीक जेकर नाम अछि पैसा............तैँ हमरा परदेश जाहिटा पड़तै- अहां कनिको मोन मलाल नै करू सबहक प्रियतम पाहून परदेश खटै छैक ! हे-यौ रामपुकारक पापा। ई बात सुनि कऽ हमर छाती फटैए..तहन अहां बिनु हम कोना रहि सकै छी? नै नै, हमरा नै चाही पैसा कौड़ी महल मकान। हम नुने रोटी खेबै। सेहो नै भेटत तँ साग पात खायाकऽ जिनगी काटि लेब। कहैत भोलाकेँ भरि पांज पकड़ि कऽ सिशैक सिशैक नोर बहबैत कानऽ लागैए....मुदा भोला कुलदेवताकेँ सलामी राखैत माए-बाबुसं आशीर्वाद लैत घरसं प्रस्थान भऽ गेल.....................! रोजी रोटिक खोजी भाग २ भोला साउदी अरबक एकटा कंस्ट्रक्सन कम्पनीमे राइतक ११ बजे पहुंचल आ भिन्सरमे ७ बजे आफिसमे हाजिर भऽ गेल। कम्पनीक मैनेजर साहब भोलासं कबूलनामा कागजपर साइन करबौलक आ भोलाकेँ उक्त कबूलनामाक विवरण सुनौलक :- १.मासिक वेतन ५०० रियाल ड्यूटी ८ घण्टा २.करार अवधि ३ वर्ष ! भोला ई बात सुनि कऽ हतप्रभ भऽ गेल जेना मानू भोलाक माथपर बज्रपात गिर गेल। फेर भोला अपने आपकेँ सम्हारैत मैनेजर साहबसं कहलक- नेपालक मेनपावरक कबूलनामा अनुसार हमर पगार ६०० रियाल + खाना +२०० ओभर टाइम आ दू वर्षमे ३ मासक छुटीक सर्त भेल छल। मुदा मैनेजर भोलाक एकोटा बात नै सुनलक। तहन भोला कहलक हम सुखा ५०० मे काम नै करब। २०० खानामे खर्च भऽ जाएत। बचत ३०० रियाल ३०० रियालक नेपाली टाका ६०० हजार मात्र होइत अछि। तइ हेतु हमरा वापस भेज दिअ! मैनेजर भोलाक सामने साम दंड भेदक सूत्र अनुसरण करैत कड़ा रूपसं प्रस्तुत भेल। बेचारा भोला मैनेजरकेँ चंडाल रूप आ कड़ा चेताबनीक सामने निरीह बनि गेल आ काम करबा लेल तैयार भऽ गेल! भोला अपन भाग्यक साथ समझौता करैत कम्पनीक काजमे इमानदारी पुर्बक सरिक भऽ गेल, मुदा महिना लागैत पगार हाथमे आबिते भोला हिसाब किताबमे लागि जाइत छल। खाना नास्ताक खर्च निकालैत बाद मुस्किलसं ३०० रियाल बचैक। आब भोला घरक बारेमे सोचै लागल। ३०० रियालक सिर्फ ६००० नेपाली होइत अछि जाइसं घर परिवार चलत की रु.१००००० कर्जा सधत जेकर सिर्फ ब्याज ३०० हजार चलि रहल अछि। यएह बात सोचैत सोचैत प्रात: भऽ गेल। फेर बेचारा भोला अपन दैनिक काम काजमे तटस्थ रूपसं लागि जाए। यएह क्रम लगभग ५/६ महिना चलैत गेल। तेकर बाद भोला किछु टाका घर भेजलक, जइसं हुनक घर खर्च चलि रहल छल! १ साल बितला बाद भोलाक घरसं चिठ्ठी आएल। भोला उक्त चिठ्ठी पढ़ि कऽ मर्माहित भऽ गेल। चिठ्ठीमे लिखल रहैक- रामपुकारक बाबु घरक स्थिति बड़ नाजुक अबस्थासं गुजरि रहल अछि आ अहां जे कर्जा लऽ कऽ गेल छी ओकर ब्याज ३६०० हजार भऽ गेल। महाजन आएल छल। कहि कऽ गेल जे आब मूल धन रु. १३६००० भऽ गेल। ऐ बातपर ध्यान दिअ। भोला चिठ्ठी पढैत फेर घरक चिंतामे डुबि गेल। कर्जा कोना सधत? भोलाकेँ उदास देख हुनक संघतिया पुछि बैठल। आइयो मिता अहां एना सदिखन एतेक उदास किए रहैत छी यौ? भोलाक ध्यान भंग भेल आ संघतियाकेँ अपन सभटा दु:ख सुनौलक! संघतिया हाथमे खैनी मलैत कहलक- रुकू, कने ई खैनी खाय दिअ, तहन हम कुनु उपाय बताबै छी। खैनी ठोरमे धरैत झटसं एकटा गप भोलाकेँ सुनौलक। देखू हम जे कहैत छी से ध्यानसं सुनू। चुप-चाप हम आर अहां दुनु गोटे ई कम्पनी छोड़ि कऽ भागि चलू। कतौ दोसर ठाम जतए नीक कमाइ होइत होइक! मुदा भोलाकेँ संघतियाक गप कनियो निक नै लागल। भोला कहलक- देखू ई दोसरक देसमे भागि कऽ कतए जाएब। कहीं देहि नै भऽ गेल तहन के मदत करत आ दोसर ऐ देसक कानून बड़ कडा छैक। पकड़ा गेलापर जेलमे चक्की चलबऽ पड़त। तहन धोबीक कुत्ता नै घर नै घाटक। होइत अछि से बुझि लिअ। हम तँहि नै जाएब। अहाँ जाएब तँ जाउ ! भोला फेर अपन काम काजमे जुइट गेल आ भोलाक संघतिया मासिक १५०० पगारमे दोसर ठाम काम करै लागल। देखते देखते दुइ साल बित गेल ! भोलाक घरसं फेर एकटा चिठ्ठी आएल। भोला चिठ्ठी पढ़लक। चिठ्ठी पढ़ि कऽ खुसी होमय बजाय पुनः उदास भऽ गेल आ गंभीर सोचमे डुबि गेल। भोलाकेँ सभसँ बड़का परेशानी रहैक कर्जा, जे ओ साउदी आबऽ बेरमे लेने रहैक। भोला सोचलक जे एतबा न्यूनतम पगारमे कर्जा कोना सधत। अंतत: भोला कम्पनी छोड़ि भागऽक निर्णय लेलक! भोला कम्पनीसं भागि संघतियाक कम्पनीमे चलि गेल आ मासिक १५०० सय पर काज करै लागल। भोला ५ महिनामे रु १००००० टाका घर सेहो भेज देलक आ कनियासं फोन मार्फत गप केलक। कनियासं कहलक- ई एक लाख टाका महाजनक खतामे जमा कऽ दिअ। आ हुनका कहि दिअ जे ५ महिनाक बाद हम हुनकर सभटा पाइ चुकता कऽ देबै! आब भोला किछु प्रसन्न मुद्रामे रहै लागल आ अति प्रसन्नताक साथ सोचै लागल। लोक ठीक कहैत छै जे भगवानक घर देर छै मुदा अंधेर नै। आब हमरो बिपतिक घडी टड़ि रहल अछि मुदा बेचारा भोलाकेँ की पता जे भाग्य रेखा कियो नै देखने छैक। कखन की हेतै से मनुखक कल्पनासं बहुत दूरक चीज छैक। समयचक्र कखन कुन रूप लेत ई एकैटा परमात्मा जनैत छथि! बड़ मुस्किलसं भोलाक ठोरपर मुस्कान आएल छल मुदा दैबकेँ ई रास नै एलै। भोलाक जीवनमे तेज गतिसं एकटा बड़ भारी बज्रपातक आगमन भेलै। भोला अपन ड्यूटी खतम कऽ डेरा तरफ जाइके क्रममे रोड पार करैत समयमे भोलाक देहपर तेज गतिमे कालरुपी एकटा गाड़ी चढ़ि गेल। भोला जीवन आ मृत्युक बिच एक घण्टा लादैत रहल। अंतत: भोला अपन चेतना गुमा बैठल। ताइ समयमे उद्धार टोली आबि कऽ भोलाकेँ अस्पतालमे भरती कऽ देलक! ऐ दुखद घटनाक २० दिन बाद भोलाक घरमे खबड़ि गेल जे भोला आब ऐ दुनियामे नै रहि गेल। रोड एक्सीडेंटमे हुनक मृत्यु भऽ गेल। ई बात सुनैत बेचारी भोलाक कनिया मूर्छित पड़ि गेल आ गाम घरक महिला सब भोला कनियाक चूड़ी फोड़ि मांगक सिंदूर धोबि विधवा बनाबक काजमे एकमत भऽ गेल। तखने समाजसेवी एकटा महिला ऐ बातक घोर विरोध केलनि आ सब महिलाकेँ सम्झौलन- जा धरि कुनु ठोस पुष्टि नै भेटैए ताधरि रूकि जाउ। कहीं ई समाचार गलत होइक आ भोला जिन्दा होइक! गायत्री देवी जीक सुपुत्र प्रभात राय सेहो साउदी अरबमे रहथि ओ फोन सं सभटा बात सुनैलथि आ प्रभात राय अस्वासन देलथि जे अहां सभ हमर फ़ोनक प्रतीक्षामे रहू हम अखने वास्तविकता की अछि से कहै छी। प्रभात भोलाक घटना प्रति जानकारी हासिल करैमे लागि गेल! अस्पताल, पुलिस, एम्बुलेंस, ट्राफ्फिक सभ ठाम पता लगौलाक बाद प्रभातक मेहनत रंग लौलक। भोलाकेँ जिबिते अबस्थामे रियाद स्थित एकटा अस्पतालक कोमामे भरना भेल देखलक। प्रभात तुरत गाममे फोनसँ आँखि देखल पुख्ता जानकारी देलन्हि। ई बात सुनैत धिरापुर गाममे हर्सौल्लासक माहौल बनल आ गामक सबलोक प्रभातकेँ धन्यबाद दैत एकटा विनम्र अनुरोध केलथि। जते खर्चा लागतै हम सभ चंदा उठा कऽ देब मुदा भोलाक जान बचा दियौ! प्रभात अस्वासन देलथि, अहां सभ जुनि चिंता करी, हमरासं जते बनि पड़त हम जरुर करब। आब भोलाक उद्धार कार्यमे प्रभात दिन राति एक कऽ देलक। तीन मासक बाद भोला अर्धचेतन अबस्थामे आएल। फेर एक महिना उपचारक बाबजूदो किछु आंशिक सुधार मात्र भेल। एम्हर अस्प्तालक खर्च सेहो जीवन बीमाक हद पार कऽ गेल। प्रभातक प्रयासमे भोलाकेँ बैधानिक कम्पनी आ जीवन बीमा अस्पतालक खर्च चुकता केलाक बाद डिस्चार्ज भेल आ नेपाल पठाउल गेल! भोलाकेँ जिबिते अबस्थामे गाम आबक खबरि सुनि कऽ भोलाकेँ परिवार लगाइत समूचा गामक लोक एकबेर पुनः खुश भेल। २ दिनक बाद भोला अपन मातृभूमिमे पहुंचल आ सबहक प्रतीक्षाक घड़ी ख़त्म भेल! भोलाकेँ जीवित देखैला समूचा गामक लोक आबि गेल मुदा भोला ई सभ बातसं बहुत दूर जा चुकल रहैक। ओ ऐ काबिल नै रहैक जे किनकोसं मिलनक खुसी बाँटि सकए। भोलाकेँ अपंग आ अर्धचेतन अबस्था देख सभक मुहसं आह निकलि गेलै! भोलाक कनिया अपन सोहागरूपी पति परमेश्वरकेँ अपंगो अबस्थामे भेट गेलै तेँ खुसी जरुर भेलै मुदा किछु दिन बाद अतराढवालीक लेल ओकर सोहाग एकटा दीर्घकालीन बोझ बनि गेलै, ओइ बोझक भार उठेनाइ बड़ मुस्किल भऽ रहल छै, किए तेँ आजीवन अपंग आ अर्धपागल रही गेलाह !! ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.१.गुलसारिका २. भावना नवीन ३.२.ओमप्रकाश झा ३.३.१. जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ २.मिहिर झा ३.जगदानंद झा 'मनु' ३.४.१.शिवशंकर सिंह ठाकुर २.अमित मोहन झा ३. रवि मिश्रा’भारद्वाज’ ३.५.१.अनिल मल्लिक २उमेश पासवान ३.जगदीश प्रसाद मण्डल ४. मुन्नाजी हाइकू ३.६.१. अन्जनी कुमार वर्मा २.रामबिलास साह ३.७.१.डॉ॰ शशिधर कुमर २ नवीन कुमार "आशा" ३.८.१.प्रभात राय भट्ट २. अमरेन्द्र कुमार मिश्र १.गुलसारिका २. भावना नवीन १ गुलसारिका, भोपाल बांहि केर डारि सँ खसला पर जँ देह में खोंच लागियो जाए त संतोख अछि सम्हारबाक चेष्टा त कएलहुँ अहाँ भरिसक हमरे जकाँ अहिना कोनो युग में धरा उधियाएल होएतीह आ अम्बर हुनक डेन धरबाक चेष्टा मे हुनकहिं उपर ओंघरा गएल होएताह क्षितिज देखि त अहिना लगैये क्षितिज भ्रम नहिं अनुपम सत्य थिक किएक त क्षितजक पार कोनहुँ सत नहिं कोनहुँ असत नहि सृष्टि नहिं ब्रम्हांड नहिं अतः विध्वंसो नहिं तें हमर हे सनातन अधिष्ठाता तर्क छोड़ू तर्कक गाछ पर सिद्धांक फॉड़ पकै छै सेहो आस्था विश्वास आ प्रेमक पात झड़ि गेलाक बाद तें आब जखन हम प्रश्नशून्य छी त आँखिक आगू उत्तरोत्तर उत्तरक बाढि अछि भसिया ने जाई तें आँखि मुनने स्वयं मे लीन संकल्प दोहरबति छी ठाढि जे आब एकहु डेग आगाँ नहि एकहु डेग पाछाँ नहि अहीं त छी हमर पूर्णविराम २ जाहि वयस हमर बहिना फूल लोढ़ै छलीह केसक जुट्टी में हम तारा गुहलहुँ जाहि वयस हमर बहिना गौर पुजलनि हमहुँ अपन सीथ मे सेनुरक बान्ह बन्हलहुँ ओ ईनार सँ हम अकासगंगा सँ घैलक घैल भरलहुँ तैयो रौदीमे जेना पियास सुखा गेल आ आ साओनमे आँखिक धरनि चूबए लागल एहि बेरका जाड़ सोचने छी किछु आर हमर बहिना सुएटर बुनतीह हम दू जोड़ बाँहि आ एक जोड़ साँस बुनब २ भावना नवीन ग़ज़ल जिनगी एकटा दुखक गीत अछि, सदिखन गुनगुनाबय पडत दर्द बड्ड भारी अछि मुदा, एहि में हमरा मुस्कुराबय पडत !
बुझि रहल अछि दिया प्रेमक,बैढ़ रहल अछि अन्हार बड्ड ई नेहजोत आब हमरा लहूलुहान दिल सँ जराबय पडत !
रूसलों किएक अहीं बुझैत छी , हम तं एतबे जनैत छी रुसि गेलों जे अहाँ हमरा सं हमरे अहांके मनाबय पडत !!!
लाज रखवा लेल अपन प्रेमक तोडब हम सभ बंधन दिल नै खाली हमरा, बाजीयो जान केर लगाबै पडत !!!
उदास भ अहाँक अंगना से जे, हमरा उठि के जाय पडत अपन "भावना" के अर्थी अपनहि उठाबय पडत !!!! २ गजल
अहाँ सँ मिलवा लेल आयल छलों आबि बहुत पछ्तेलहूँ हम
सोचि दूरी एहि असगरपन कें ओहि राति बड देर धरि जागलों हम
पुरबैया केर झोंक जकां लोग कतेक आयल, कतेको सँ ओकतायलहूँ हम
जाहि सोच में ओ डूबल छलाह ओहि 'भावना' सँ घबरेलहूँ हम ... ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ओमप्रकाश झा गजल पता नै कोन आगि मे जरैत रहल करेज हमर। पानि नै खाली घीए टा चाहैत रहल करेज हमर। आनक मरल आत्मा केँ जीया केँ राखैक फेर मे फँसि, नहुँ-नहुँ सुनगैत मरैत रहल करेज हमर। एतेक मारि खेलक झूठ प्रेमक खेल मे जमाना सँ, कियो देखलक नै कुहरैत रहल करेज हमर। फेर कतौ नै कियो बम फोडि केँ अनाथ करै ककरो, सूर्योदय होइते धडकैत रहल करेज हमर। अपना केँ नित जीयाबै मे करेजक खून करैत छी, खसि-खसि केँ देखू सम्हरैत रहल करेज हमर। दुख आ सुख मे अंतर करै मे नै ओझरा केँ कखनो, नब गीत सदिखन गबैत रहल करेज हमर। ---------------- वर्ण २० ----------------------- गुरूदेव आशीष जी केँ सादर समर्पित। 2 आईना सदिखन हमरा सत्ते कहै छै। हमर रूप हमरे देखबैत रहै छै। चलि गेलौं त' बूझलौं अहाँ हमर नै छी, बनल विश्वासक किला एहीना ढहै छै। धार केँ कोन मतलब भूमिक दर्द सँ, जेम्हरे मोन भेल धार ओम्हरे बहै छै। देखू प्रेमक अकाल नै छै एहि गाम मे, उधारक प्रेमक बाढि सँ गाम दहै छै। ककरो मारबाक चोट सहि लेत "ओम", मुदा बूझै नै प्रेमक मारि कोना सहै छै। -------------- वर्ण १५ --------------- 3 गजल आइ-काल्हि सदिखन हम अपने सँ बतियाईत रहै छी। लोक कहै ए जे हम नाम अहींक बडबडाईत रहै छी। सब बैसार मे आब चर्चा कर' लागलौं अहींक नाम केर, सुनि केँ कहै छै सब जे निशाँ मे हम भसियाईत रहै छी। हमरा लागै ए निशाँ आब टूटि गेल छै पीबि लेला केँ बाद, सोझ रहै मे छलौं अपस्याँत, आब डगमगाईत रहै छी। एते बेर नाम लेलौं अहाँक हम, कहियो त' सुनने हैब, कोन कोनटा मे नुकेलौं अहीं केँ ताकैत बौआईत रहै छी। एक चुरू अपने हाथ सँ आबि केँ पीया दितिये जे "ओम" केँ, मरि जइतौं आराम सँ हम, जाहि लेल टौआईत रहै छी। ----------------------- वर्ण २२ ----------------------- 4 गजल नित पूछै छै किछ सवाल इ जिनगी। करै सदिखन नब ताल इ जिनगी। कखनो बनि दुखक घुप्प अन्हरिया, लागै मारि सँ फूलल गाल इ जिनगी। सुखक राग कखनो सुनाबै एना केँ, रंगल बनि कतेक लाल इ जिनगी। कहै जिनगी होइत छै जीबैक नाम, ककरो लेल होइ ए काल इ जिनगी। जिनगी केँ बूझै मे "ओम" ओझरायल, जतबा बूझलौं लागै जाल इ जिनगी। ------------- वर्ण १४ ------------- 5 गजल एकटा खिस्सा बनि जइते अहाँ संकेत जौं बुझितहुँ। हमही छलहुँ अहाँक मोन मे कखनो त' कहितहुँ। लोक-लाजक देबाल ठाढ छल हमरा अहाँ केँ बीच, एको बेर इशारा दितियै हम देबाल खसबितहुँ। अहाँक प्रेमक ठंढा आगि मे जरि केँ होइतौं शीतल, नहुँ-नहुँ भूसाक आगि बनि केँ किया आइ जरितहुँ। सब केँ फूल बाँटै मे कोना अपन जिनगी काँट केलौं, कोनो फूल नै छल हमर, काँटो त' अहाँ पठबितहुँ। जाइ काल रूकै लेल अहाँ "ओम" केँ आवाज नै देलियै, बहैत धार नै छलहुँ हम जे घुरि केँ नै अबितहुँ। ------------------ वर्ण २० --------------------- 6 गजल हमर नजरि मे पैसि केँ हमर नजरि बनि फडकि रहल छी। पोर-पोर मे अहीं समेलौं, सीना मे हमर अहीं धडकि रहल छी। विरह-विष सँ मोन पीडित छल, अहाँक प्रेमक अमृत भेंटल, प्रेम-सुधा सँ मोन नै भरै, जतबा पीबि ओतबा परकि रहल छी। हृदयक छल बाट सुखायल, जेकरा सिनेह अहाँक भीजायल, छन-छन भीजि प्रेमक बरखा मे, तखनो किया झरकि रहल छी। जिनगीक रौदी केँ अहीं भगेलौं, अहाँ प्रेम-मेघ केर छाहरि केलौं, भरल हमर आकाश प्रेम सँ, अहाँ छी बिजुरि तडकि रहल छी। भाव-शून्य "ओम"क छल जे अंतर, जिनगी मे आबि मारि केँ मंतर, अहीं बनलौं गजल कविता, बनि भाव मोन मे बरकि रहल छी। --------------------------- वर्ण २५ --------------------------- 7 गजल भेंटलै जखने नबका मीत पुरना केँ कोना छोडि देलक। जकरा सँ छल ठेहुँन-छाबा, हमर मोन के तोडि देलक। सपथक नै कोनो मालगुजारी, सपथक नै बही बनल, संग जीबै-मरैक सपथ खा केँ जीबतै डाबा फोडि देलक। ओकरा लग छै ढेरी चेहरा, हमरा लग बस एके छल, अपन भोरका मुँह पर नब मुँह साँझ मे जोडि देलक। जिनगी-खेत मे विश्वास-खाद द' प्रेमक बीया हम बुनल, धोखा केर कोदारि चला केँ देखू लागल खेती कोडि देलक। "ओम" प्रेमक घर बनेलक, ओकरा बिन छै सून पडल, बाट जे जाइ छल ओहि घर मे, कोनो जोगारे मोडि देलक। ---------------------- वर्ण २२ -------------------- 8 गजल कतौ छै रौदी प्रचंड, कतौ बरखा सँ हरान छै। कतौ छै फूजल मोन, कतौ बन्न पेटी मे प्राण छै। ककरो भेल अपच, कियो देखू भूखले मरल, कतौ छै होइत भोज, कतौ उजडल दोकान छै। एके कलम सँ लिखलक किया भाग्य नै विधाता, कतौ छै तृप्त हृदय, कतौ छूछे टा अरमान छै। कियो मुट्ठी मे समेटने कते इजोत छै बैसल, कतौ छै जे सून घर, कतौ भरल इ दलान छै। अचरज सँ देखै छै "ओम" लीला एहि दुनियाक, कतौ छै इ मौनी खाली, कतौ बखारी भरि धान छै। ------------------- वर्ण १८ ------------------ 9 गजल पिया जुनि करू बलजोरी, लोक की कहत। प्रेम करू मुदा चोरी-चोरी, लोक की कहत। तन्नुक शरीर मोरा यौवन उफनायल, चुप्पे बान्हू अहाँ प्रेम-डोरी, लोक की कहत। थमल नै डेग, अहाँ प्रेम-नोत पठाओल, हम आब बनलौं चकोरी, लोक की कहत। श्याम रंग मे अहाँक मोर अंग रंगायल, दीयाबाती मे खेललौं होरी, लोक की कहत। "ओम"क प्रिया इ आतुर मोन केँ बुझाओल, कतेक कहब कर जोडि, लोक की कहत। -------------- वर्ण १६ -------------- 10 गजल ओ हमरा बिसरि गेल जे गाबैत रहै छल हमर गीत। शहरक हवा लागि गेलै आब भेल शहरी हमर मीत। मोनक कोनटा मे नुकेलक नेनपनक सभ क्रीडा-खेल, खाइ छलै संगे पटुआ, ओकरा लागै मधुर हमर तीत। छल जुटल जकरा संग हृदय हमर, रहितो काया दू, हमरा हरबैथ आब, अपमान बूझैथ ओ हमर जीत। दोस्तीक सपथ खाइत नै छलै अघाइत ओ हमरा संग, भसकेलक घर दोस्तीक, द्वेषक बनि गेल हमर भीत। मीत घुरि आबू, एखनहुँ "ओम"क हृदय मे अहींक वास, फेर बहाबियो धार दोस्तीक, जे छल अहाँक हमर रीत। -------------------- वर्ण २२ --------------------- (हमर नेनपनक मीत केँ समर्पित, जे हमरा बिसरि गेला) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ २.मिहिर झा ३.जगदानंद झा 'मनु' १
जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ १ ई जे पोथी पतरा थीक सभटा कनियां-पुतरा थीक ।
परिजन-पुरजन, हीत-अपेक्षित जाल बहुत,एक मकरा थीक ।
दूर सं देखल नदी बुझायल लग जा देखल,डबरा थीक ।
फूलक माला बहुत पहिरलहुं कांटहु हमरहि बखरा थीक ।
धोती लाल, घुनेस माथ पर चलल कटैले, बकरा थीक ।
भोंट ने एकरा दिय’ एकहुटा इ तं चिन्हले लबरा थीक ।
करनी देखब मरनी बेरिया गारि ने थिक इ फकरा थीक ।
२
पहिने एकटा काज करू सभकें बांटू ,राज करू ।
सदनमे जा कऽ सूति रहै छी किछु तं बौआ लाज करू ।
अहांक पुरखा छथि विद्यापति हुनका पर तं नाज करू ।
जाति,धर्म सब जेल बनल अछि अपना कें आजाद करू ।
कहि गेलाह हरिमोहन बाबू शिक्षित अपन समाज करू ।
पचपनमे बचपन नहि आओत कतबो अहां रियाज करू ।
अपनहि माय-बहिन सन बूझू हमरा जुनि बरबाद करू ।
२ मिहिर झा बदरा घुमि घुमि आउ बदरा घुमि घुमि आउ हरियर हरियर दूबि क बिछौना अहां आबि भिजाउ बदरा घुमि घुमि आउ | देश अयला हमर सजना चंचल भेल हमर नयना और नहि तडपाउ बदरा घुमि घुमि आउ | पिया छथि हमर एखने आएल बरख से आगि अछि देह मे लागल आबि अहां मिझाउ बदरा घुमि घुमि आउ | ३ जगदानंद झा 'मनु', पिता- श्री राज कुमार झा, जन्म स्थान आ पैत्रिक गाम : हरिपुर डिहटोल ,जिला मधुबनी, शिक्षा :प्राथमिक -ग्राम हरिपुर डिहटोल मे, माध्यमिक आ उच्च माध्यमिक -सी बी एस ई, दिल्ली, स्नातक -देशबंधु कालेज ,दिल्ली बिश्वविद्यालय (१) मायक भूमि बजा रहल अछि जुनि हमरा जकरु महामाया, मायक भूमि बजा रहल अछि जाहि माटी कए देह बनल हमर,ओमाटी बजा रहल अछि रुन-झुन संगी-साथीक हमरा, याद बहुत शता रहल अछि काका-ककिक मधुर वोल ओजे,कानमें घंटी बजा रहल अछि जुनि हमरा जकरु महामाया, मायक भूमि बजा रहल अछि सोंधी-सोंधी मुरहीक खुशबु,गामक हमरा खीच रहल अछि कनियाँ-काकीक कडकड कचड़ी,मोन कए डोला रहल अछि लहलह झुमैत खेतक धान, शीश हिलाके बजा रहल अछि चौरचन, छैठक सनेसक स्वाद, हमरा कचोत रहल अछि हुक्का-लोलिक उक जे फेकल,सुमैर हमरा कना रहल अछि नै सैहसकै छी दुरी एते आब, ह्रदय-बांध टूट रहल अछि जुनि हमरा जकरु महामाया,मायक भूमि बजा रहल अछि -------------------------------------------------------------------- (२) कविता पाई आई पाई सँ प्यार खरीदल जाएत छैक सम्मान खरीदल जाएत छैक वस् ! जेबी में हेबाक चाहि पाई हमरा नहि चाहि ई पाईयक दुनियाँ हमरा नहि चाहि ई भाराकए दुनियाँ हम तs वसायव् अपन एक नव आशियाँ जाहिठाम प्यार कए अहमियत होई सम्मान कए पूजा होई जाहिठाम ठोड पर हँसी लावैक लेल ह्रदय सँ आह! नहि निकलै शब्द बजैक सँ पाहिले लाबा में नहि बदलै जाहिठाम अर्थ कए अर्थ समझल जाए सबके भीतर एक प्यारक आशियाँ बसायल जाई | ------------------------------------------ ३ एक दिन हमहूँ मरब एक दिन हमहूँ मरब दुनियाँ कए सुख-दुख छोइर कए निश्चिन्त हेवा हेतु देखै हेतु दुनियाँ में अपन प्रतिमिम्ब कए ख़ुशी होइए कए दुखी होइए एक दिन हमहूँ मरब देखै लेल समाज में हमर की स्थान छल देखै लेल किनका ह्रदय में हमर की स्थान छल एक दिन हमहूँ मरब करए लेल अपन पापक हिसाब हमर पाप सँ कए कुपित छल कए क्रोधित छल कए द्रविल-चिंतित छल कए खुसी छल कए दुखी-व्यथित छल एक दिन हमहूँ मरब परखै हेतु अपन ह्रदय अपन स्नेही-स्वजनक ह्रदय अपन मितक ह्रदय अपन अमितक ह्रदय ४ कविता पाई आई पाई सँ प्यार खरीदल जाएत छैक सम्मान खरीदल जाएत छैक वस् ! जेबी में हेबाक चाहि पाई हमरा नहि चाहि ई पाईयक दुनियाँ हमरा नहि चाहि ई भाराकए दुनियाँ हम तs वसायव् अपन एक नव आशियाँ जाहिठाम प्यार कए अहमियत होई सम्मान कए पूजा होई जाहिठाम ठोड पर हँसी लावैक लेल ह्रदय सँ आह! नहि निकलै शब्द बजैक सँ पाहिले लाबा में नहि बदलै जाहिठाम अर्थ कए अर्थ समझल जाए सबके भीतर एक प्यारक आशियाँ बसायल जाई | ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.शिवशंकर सिंह ठाकुर २.अमित मोहन झा ३. रवि मिश्रा’भारद्वाज’ १. शिवशंकर सिंह ठाकुर लगई छी अहाँ सोना जकां
चन्द्रमा सन चेहरा अहाँ के , चानन सन शीतल छाँव अहाँ के , निकलै छी अहाँ जोऊ कतोउ स , गम्कैत छी अहाँ फूल जकां ..................
रूण -झुन,रूण-झुन पायल बजै अछि , चंचल अहंक नैन लागैत अछि , देखि जिम्हर सं अहाँ जाई छी , ताकै छी अहाँ के हिरण जकां .........
जूड़ा बना क जे घर स निकलै छी, लागै छी अहाँ सोना जकां , अपन अदा स जे अहाँ देखै छी , चमकै छी अहाँ बिजुली जकां .........
राति इजोरिया नीक लगई अछि , लागै छी अहाँ चानी जकां , चोर नजरि स जे हमरा देखै छी, लागै छी अहाँ बादल जकां .............
"प्रेम अहाँ स हम करै छी" बाजू अहाँ कनी नीक जकां , जिनगी हमर हैत स्वर्ग स सुन्दर , राखब अहाँ के रानी जकां ........... २. अमित मोहन झा ग्राम- भंडारिसम(वाणेश्वरी स्थान), मनीगाछी, दरभंगा, बिहार, भारत। पहिलुक दिन हम यादि करई छी। पहिलुक दिन हम याद करई छी, नबकी भीर पर माछ मारई छी, पहिलुक दिन हम याद करई छी, ई पैनपीबी ओ पुरहित्ता, पोखईर मखानक बिढ़नी के छ्त्ता, मारल माछ उपइछ के खत्ता, जामुनक गाछ पर घोरणक छत्ता, आम लतामक की पुछई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। पापाजी कमाबईथ बड्ड थोड़, पर हुनकर इच्छा बड्ड ज़ोर, हमहू पढ़ही थोरबों थोर, सुइन सुइन हमर माथा घोर, हुनक प्रयास नहि बिसरी सकई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। नहि देखला जहन तनिको सुधार, मन मे सब क्यो केलइन विचार, स्कूल हमर बदलबाक चाही, प्राइवेट स्कूल सबहक उर माही, सब बुझलइथ आब सुधईर सकई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। भरि दिन गाछी मे बौएनाइ, नहि स्कूलक टास्क बनेनाइ, मित्रक संगे दिन बीतेनाइ, गामे गामे खूब छिछिएनाइ, यादि करैत ओ सिहरि उठई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। सिंगही बिल मे हाथ घुसेनाइ, सुग्गा पकरई शीशो पर चढ़नाई, ब्योंत लगा कांकोर बहरेनाइ, ओरहा बादामक बना के खेनाई, यादि करैत आब हम शरमाई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। कल्याणी के गुढ़ विचार, क्षुब्ध देखि हमर ई व्यवहार, ओ सदिखन केलैन प्रयास, बदलब हम हुनका छल भास, बड़की बहिन मे माँ के पबई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। बाबा हमर विद्वताक खान, ओ नहि छेला किछ से अनजान, तकला क्षण मे एक उपाय, पापा के कहलाइन समझाय, हिनका अहाँ ल जाउ अररिया, रन-बन घुमईथ भरि दुपहरिया, हाथ से कहीं ई निकलि नै जाय, ततत्काल ई करू उपाय, ओ वचन अखनों तक सुनई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। एकर छेलइन्ह पापा के भान, लय जाइथ संगे वाणेश्वरी स्थान, रास्ता भरे बुझाबईथ जाइथ, ई नहि करी ओमहर नहि जाइ, सब दृशतांटे यादि करई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। पापा संगे अररिया गेलौ, अपन आदत ओतहु नहि छोरलौ, पापा जेबी से पाई चोराय, रॉयल टाकीज़ सिनेमा देखय जाय, कॉमिक्सक ते खान बनेलौ, गलत राह पर किछ आर चललौ, पापाक बेबसी यादि करई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। स्कूल से कतेक बेर भगलौ, तुइत इमली तर समय बीतेलौ, पहिल विचारल नहि हम पढ्बइ, नगर नगर मे घुमबे करबई, अन्न्पूर्णा के गोल मिठाई, मित्रक सब संग तास खेलाई, यादि करैत हम खूब बिहूसई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। पापा अपनहि खेनाई बनाबईथ, घर-बजारक काज सरियाबईथ, ओजपूर्ण कविता ओ सुनाबईथ, हमर सुतल आत्मा के जगाबईथ, रोम रोम पापाक ऋणी पबई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। आंखि हमर तुरंत फुजि गेल, भेलहु जहन दसवीं मे फेल, माँ-पापाक आंखिक नोर, पिघलल हमर हृदय कठोर, प्रण केलौ आब करब ईजोर, चाहे सूरज बदलईथ छोर, ई बातक आइ गांठ बनहई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। लक्ष्य अखनि धरि अइछै दूर, प्रण अछि जे करबई ओ पूर, करईथ शारदे कृपा अपार, हमर लगाबईथ बेरा पार, हे माँ कल जोरि नमन करई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। माँ हमर जनमहि नहि देल, भाग्य विधाता सेहो भेल, छईथ दुर्गा के ओ अवतार, करय एली हमर उध्धार, माँ पापा लेल “अमित” लिखई छी, पहिलुक दिन हम यादि करई छी। ३ रवि मिश्रा’भारद्वाज’ ग्राम : ननौर जिला : मधुबनी
जिनगी की कहु एहेन अंजान बाट मे चलल जा रहल अछि भोर ठीक सों भेल नहि मुदा सांझ ढलल जा रहल अछि
मोजर त खूब लागल छल गाछ मे टुकला ठीक सों भेल नही मुदा मोजर झरल जा रहल अछि
कियो अन्न बिन तरपै अछि त कियो पानी बिन ककरो पानी भेटल नई मुदा ककरो गिलास मे मदिरा भरल जा रहल अछि
ककरो चूल्हा अन्न बिन बुझायल अछि महगा बेचे के चक्कर मे ककरो कोठी मे अन्न सरल जा रहल अछि
बाहारक लगाल आगी देखी सब कियो बुझायात के बुझायेत मोनक आगी जे बिन धधरे जरल जा रहल अछि
कियो मरि के जिब रहल अछि कियो जी के जेना मरल जा रहल अछि 2 'कलेश" करेजा मे धूसल एहेन कलेश पल मे बदैल गेल सुन्दर रुप आ भेश एहेन बज्र खसौलक विधाता तौर देलक जिनगी केर डोर ईजोतो मे सिर्फ अन्हार अछि संतोष धरब ककरा पर रोकने नै रुकै या आखिक नोर हे सखी पहिने आबि रांगल जिनगी केर रांगै छलौ करम हमर फूटल अपन सँ संग छूटल अहुँ किया फेरै छी मुँह कनेक खूशी देबय मे किया लागै या अबुह जी के जेना रोज मरै छी ककरा देखायब ई नोर रोज आँचर मे धरै छी ई नोर नै निकलैत अछी सिर्फ, अपन दुखमयी जिनगी आ दशा पर बल्कि किछू लोकक अवहेलना आ कुदशा पर शूभ काज सँ राखल जाय या हमरा दुर किछू लोकक मोन अछि कतेक क्रुर हे सखी हमहु अही जेना नारी छी मुदा भेद अछी सिर्फ अछि एतवा लोक कहैत अछी हमरा विधवा
३ 'गजल' जिनगी किया एना तंग लागै या रांगल त छी मुदा बेरंग लागै या बचपन बितेलौ रेत, मे जवानी खेत मे कोना कततै बुढापा ऐकता जंग लागै या जे दोस्त बनि दूस्मन भेल छल दूर बेचारा भेल लाचार आब त ऒहो संग लागै या मोजर नहि केलौ जकरा कहीयो भैल शक्ति क्षिन्न आब ऒहो दबंग लागै या ४ · 'गजल' जिनगी की कहु एहेन अंजान बाट मे चलल जा रहल अछि भोर ठीक सों भेल नहि मुदा सांझ ढलल जा रहल अछि
मोजर त खूब लागल छल गाछ मे टुकला ठीक सों भेल नही मुदा मोजर झरल जा रहल अछि
कियो अन्न बिन तरपै अछि त कियो पानी बिन ककरो पानी भेटल नई मुदा ककरो गिलास मे मदिरा भरल जा रहल अछि
ककरो चूल्हा अन्न बिन बुझायल अछि महगा बेचे के चक्कर मे ककरो कोठी मे अन्न सरल जा रहल अछि
बाहारक लगाल आगी देखी सब कियो बुझायात के बुझायेत मोनक आगी जे बिन धधरे जरल जा रहल अछि
कियो मरि के जिब रहल अछि कियो जी के जेना मरल जा रहल अछि ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. अनिल मल्लिक २उमेश पासवान ३.जगदीश प्रसाद मण्डल ४. मुन्नाजी हाइकू १ अनिल मल्लिक “स्वीकारोक्ति”
आखर आखर शब्द लिखै छी, शब्द अर्थ औ मर्म लिखै छी मात्र लिखै छी, मर्म ने बुझलहु, केलहु हम एहन कुकर्म लिखै छी आत्मा हमर कराही रहल अछी, पश्चाताप जेना डाही रहल अछी समधीयाना उजाडी कोठा भरलहु, भेल बडका अधर्म लिखै छी
पुत्र'क पिता छलहु, दम्भ भरल छल, डुबल लालच मे आकँठ लिखै छी बयश ढलल, बिष दन्त झरी गेल, देलहु जे दहेज'क डन्क लिखै छी पुत्रबधु छैथ माता सीया सन, साउस ससुर'क ध्यान रखै छैथ देखीकय हुनकर सेवा औ समर्पण, लज्जा सॉ भिजैत नयन लिखै छी
साउसो धीया छलैथ, ननैदो धीया छलिह, दहेज ने कोनो रीत लिखै छी सीया सन धीया, घर घर मिथिला मे, होई धीया के जीत लिखै छी 'बैष्णव जन....पीर पराई..' बिसरलहु, अपराधबोध दिन रैन लिखै छी अन्त समय निकट आबि रहल अछी मुदा, मोन मे नै अछी चैन लिखै छी
प्रेम लिखै छी, प्रित लिखै छी, कहियो बिरह'क गीत लिखै छी अपराध हमर क्षमा करु “माँ मिथिला”, हम ई धीया के जीत लिखै छी साँझ दुपहरिया भोर लिखै छी, सन्ताप'क नई कोनो छोर लिखै छी किन्हको ने होय येहन पिडा पछतावा, विन्ती हम कर-जोर लिखै छी
सुनी सभ ब्यथा “दद्दा” के अयलहु अछी, हुन'क मात्र बयान लिखै छी बर्ण बिन्याश मे छी हम अज्ञानी, गल्ती'क देब क्षमादान लिखै छी
कहय सुनय मे सहज लगै अछी मुदा, आब करु दृढ सँकल्प लिखै छी "आत्म-लोकपाल" देत मुक्ती ई तक्षक सॉ ,नै और कोनो बिकल्प लिखै छी
आखर… आखर… शब्द…! २ उमेश पासवान कविता- डेग डेगपर खतरा लोक लोककेँ जानसँ मारै छै दानव सन करै छै बेबहार कियो भऽ गेल बइमान कियो चाेर कियो दहेज लोभी कियो डाकू खॅखार विश्वास केकरापर के करत? अपनो अप्पनकेँ लऽ लइ छै जान मनुख-मनुखकेँ नै चीन्हि रहलैए मनुख चरित्र जानवर सन भऽ रहलैए डेगपर खतरा अछि ओना बुझाइए देखू आजुक मनुख बदलाव देखि गिद्धो सरमाइए। ३ जगदीश प्रसाद मण्डल जगदीश प्रसाद मण्डलक आधा दर्जन कविता....... धोबि घाट किनछरि धार धोबिघाट बनल छै बामी-दहिनी बीच पड़ल छै। ठेहुन पानिसँ भीत्ता महारक खाढ़ी-खाढ़ी रूप गढ़ल छै। अपना सीमा रोकि-रोकि घाट तिरछिया-तिरछिया धारा चलै छै। जहिना ले-ऊँच घाट मढ़ल तहिना ले-ऊँच ठाढ़ धोबि छै। एक ओरीकेँ पकड़ि-पकड़ि उनटा-उनटा पाट पटकै छै। रेहे-रेहे सटल मैल खाढ़-खाढ़ी पटकि झरै छै। तीन ताल पकड़िते पकड़ि चिन्ह-पहचिन्ह तीनू करै छै। दू पाटन बीच पड़ि-पड़ि रचल-बसल मैल संग छोड़ै छै। जुग-जुगसँ जकड़ि जकड़ल पटका-पाबि-पाबि संग छोड़ै छै। गुड़कि-गुड़कि गहे-गहे पानिक संग-संग सेहो बहै छै। सहस्रोसँ रचि-रचि बेबस्था कोने-सान्हिये पकड़ि लेने छै। उनटा-पुनटा देखि-देखि धोबि गरे-गर उनटा पटकै छै। दंगल बीच पहलवान जहिना लपैक बाँहि पकड़ै छै। छाती-पीठ सटा फेकै छै पाट धोबिया सीखै छै। एक धैर्य टूटि-टूटि दोसर बालिक शक्ति पबै छै। सात ताड़ बीच जहिना वीणा आनए पकड़ि महुराएल साँप छै। अपन मधुर स्वर-लहरीसँ नंगटे नाच नचबै छै। परखि देखि देखिते देखिनिहार अपन दिशा देखै छै। पबिते अनुकूल दिशा अपन मधुर-मधुर फल सभ चीखै छै। समए साक्ष्य शीशा सिरजि ऐनाक रूप धड़ै छै। पबिते रूप अपन ऐनामे समए-संग दौगए लगै छै। चल रे जीवन चल रे जीवन चलिते चल। संगी बनि तूँ संगे चल जौवन चल जुआनी चल जिनगानी संग मर्दगानी चल चिंतन संग दिलेरी चल। चल रे जीवन चलिते चल। यात्रीकेँ आराम कहाँ छै यात्रा पथ विश्राम कहाँ छै। ओर-छोर बिनु जहिना जिनगी तहिना ऐ दुनियाेँ केर छै। पकड़ि मन तूँ चलिते चल। चल रे जीवन चलिते चल। ग्रह नक्षत्र सभटा चलै छै सूर्य तरेगन सेहो चलै छै दोहरी बाट पकड़ि चान अन्हार-इजोतक बीच चलै छै। देखा-देखी चलिते चल। चल रे जीवन चलिते चल। बाटे-बाट छिड़ियाएल सुख छै संगे-संग बिटियाएल दुख छै। काँट-कुश लहलहा-लहलहा गंगा-यमुना धार बहै छै। परखि-परखि तूँ चलिते चल। चल रे जीवन चलिते चल। किछु दैतो चल किछु लैतो चल किछु कहितो चल किछु सुनितो चल किछु समेटतो चल किछु बटितो चल किछु रखितो चल किछु फेकितो चल बिचो-बीच तूँ चलिते चल। चल रे जीवन चलिते चल। समए संग चल ऋृतु संग चल गति संग चल मति संग चल। गति-मति संग चलिते चल। चल रे जीवन चलिते चल। गतिये संग लछमी चलै छै सरस्वती मतिये चलै छै। विश्वासक संग अशो चलै छै तही बीच जिनगीओ चलै छै। साहससँ संतोष साटि-साटि धीरज धारण करिते चल। चल रे जीवन चलिते चल। टूटए ने कहियो सूर-ताल हुअए ने कहियो जिनगी बेहाल। जहिये समटल जिनगी चलतै बनतै ने कहियो समए काल। बूझि देखि तूँ चलिते चल चल रे जीवन चलिते चल। की लऽ कऽ आएल एतए अछि? की लऽ कऽ जाइत अछि? सभ किछु एतए छोड़ि-छाड़ि जस-अजस लऽ पड़ाइत अछि। निखरि-निखरि कऽ चलिते चल। चल रे जीवन चलिते चल। सती-बेश्या सरिपहुँ कहए छी, कियो नै बसए दिअए चाहैए। मोख पकड़ि मुँह छेकि खूर-पूजैक आहूत करैए। बिनु खूर-पुजौने पकड़ि-पकड़ि दलदलमे भरमबैए। जाधरि दल-दल टपि नै पेबै गाछक झोंझ लसकौनेए। लसकैयाेक बिकराल वोन छै पसरल सगतरि धरतीपर। केना ससरि पाएब ओकरा अरूप-सरूप क्षण बदलै छै। नव-नव चालि नव रूप सजा कऽ धूप-छाँह बनि खेलै छै। जाधरि जड़िकेँ जानि नै पेबै नाओं-ठेकान केना बुझबै। बिनु नाओं-ठेकाने, केनए-केनए मड़िआएल आँखि चिन्ह पेबै। बिनु देखने चीन्हि केना पेबै चालि-चलैन आ किरदानी। बिनु गछाड़ने, डेग नै कहियो देत उठए अपन मन-मानी। जुग-जुगसँ छिछिया-छिछिया छुछका-छुछका छुछकौने अछि। राड़ी-डबहारी रोपि-रोपि राहीकेँ रगरगबैत अछि। जँ लग्गाक लागि लगा जाए चाहब ओइ पार। बीचे रूप बदलि-बदलि धरा खसाएल बीच धार। जखने निकसी बान्हि लग्गा हँसि लग्गा लग्गी बनत। लग्गा भरि जे छल हटल ससरि-ससरि लग आऔत। पाबि बान्ह जेना खढ़ आ बत्ती घर नाओं धड़बैत छै। तहिना सहेजते सज्या बसोबास बनबैत छै। बीत भरि ओ बाँसक छिप्पी उनटि टूटि सटैत छै। पड़िते बान्ह दुनू-सँ-दुनू नोकसी रूप धड़ैत छै। जखने पड़ैत जौड़क लटपटी प्रेमिकाकेँ दिअए इशारा। अजगुत रूप प्रेमी-प्रेमिकाक दुनूक-दुनू बनैत सहारा। लीला अगम बनल दुनूक अछि चाहैत करए सभ प्रेम। मुदा, की? ई थिक अनुचित हँसि दुनियाँसँ करी प्रेम। लग्गिये छी जौहरी करामाती कखनो तोड़ए गाछक डारि। कखनो नापए कुदि-कुदि खेते-खेत बनबैत आड़ि। कखनो धारमे नाउ दौगा धार पार करैत अछि। कखनो फल-फूल तोड़ि-तोड़ि भुखल पेट भरैत अछि। लग्गी बनि बनिते ओजार नचनी-नाच नचए लगैत। अपने हाथे खुआ-खुआ अकड़ि-सकड़ि चालि धड़बैत। हाथ-हथियार बनिते बनैत कनखिया देखबए उड़ियाइत सती। बिलगा-बिलगा, बुझा-बुझा आन नै, अपने हेती। पड़िते दृष्टि दहलि, ढुलकि गमे-गमे गुड़कए लगैत। पकड़ि डोर सिनेही सिनेह। स-हरि सिहरि सटए लगैत। कॅपैत करेज कुहरि कुकुआ गुन-गुन गुनाइत गीत तड़कि-तड़पि तन-तना प्रेमी मन झकसए लगैत। रेहे-रेहे सींच झकासी सीता शीत सिहरबए लगैत। चाक चढ़ल पानि-माटि जेना नव-नव वर्तन गढ़ैए। तहिना मन तनमे सुमति सोच सृजैए। सच्चे कहै छी, नै बसए दिअए चाहैए हमरा। झीक-झीक झोंट झटकि लीड़ी-बीड़ी सेहो करैए। नवकी कनियाँ बूझि-बूझि बेश्या-सती बनबैए। धर्मराजसँ यमराज बनि छतपति नाअों धड़बैए। केना बॅचि पाएत यौ भैया सत्-क सतीत्व हमर? केना जीब पाएब हम संसारक ई समर। मोख मारि बैसल बेश्या-ए ससरि केना सकब कहू। देखिते देखि, बुझिते बूझि की करब सेहो कहू। सत् बसाएब बेश्या कहाँ वृत्त-कुवृत्तिक खेल छी। हाथ-मुँहक किरदानी सभ देखि-देखि बकलेल छी। चहल-पहल किरदानी शब्दक नाकक नाथ बनबैत अछि। सुकुमार-सुकोमल नाक पाबि गाएक आत्मा नथैत अछि। पड़िते नाक पड़ि नथिया नर्तकीक रूप गढ़ैत अछि। काजर-चून लगा-लगा मारि ठहाका हँसैत अछि। काजर घर केना बास करब करए पड़त बुद्धिक स्नान केने बिना से केना पएबे तन-मन अन्तर धान। धाने-धन कहबै छै भैया केना ने मुँहो खोलब। मुदा, मुकरि-मुकरि कमड़जाल पानि-बरफ केना बुझब। अपनेपर हँसै छी ठक विद्या विद्यालयसँ नीकहा डिग्री किनलौं। शिक्षामित्रक उजैहियामे हमहूँ नोकरी पेलौं। लाखे रूपैयामे, दशो कट्ठा जमीन गमेलौं। गुरू दक्षिना देने बिना गुरूआइक भार उठेलौं। दिन-राति गुरूआइ करै छी मुँह भरल मधुरसँ। जे निकलत सएह मधुर सुनैत रहू असथिरसँ। आरो बात सुनबै छी अपनेपर हँसै छी। मात्रा घुसका-फुसका शब्द बनेलौं ठूठ डारि। अक्षर काटि ईंटा बनेलौं साहूल खसा देलौं डांरि। तीरछा-तीरछा चेन्ह लगा कोने कानी लेलौं नाओं। बाहरे-बाहर सोझ-साझ उठि-बनि गेलइ सौंसे गाओं। पुरने घरक ईंटा जोड़ि-जोड़ि नवका घर बनबै छी। अपनेपर हँसै छी। पुरनाकेँ पुराण कहि-कहि नवका चालि सिखबैत एलौं। धर्म सनातन कहि-कहि अर्थ-जाल फेकैत एलौं। इचना पोठी छानि-छानि डेली भरैत एलौं। गुबदी मारि बिहुँसि छी मन कनैत, हँसैत तन कठहँसी हँसि हँसै छी। अपनेपर हँसै छी। धन की? केकरा कहबै धन यौ भाय गाए-माए छी एक्के पूछि लियनु यशोदा माइ। बिनु धनक धनिक जहिना ताम-झाम देखबैए। देखि-देखि आँखि करूआए लाजे आँखि मुनै छी। अपनेपर हँसै छी। हेहरा गाछक फल खा-खा हेहरपन्नी सिखैत छी। दिन-राति हहरि-हहरि निचाँ ससरैत छी। उनटा मुँह आगू घुमा कल्याण-कल्याण रटैत छी। क्षणे-क्षण पले-पल रीत-नीति घटबैत छी। अपनेपर हँसैत छी। गालक सितार बना-बना राग-पुराणक श्वर चढ़ा। वेद-पुराण गबैत छी अपनेपर हँसैत छी। सासु सासु हमर बड़ अपखैतनी बेटी बना डेबने छथि। जहिना माइयक बेटी दुलारू तहिना बना रखने छथि। सोलहो आना काज अपनसिर गार्जन मानि रखने छथि। कोनो धैन-फिकिर नै हमरा बेटी बूझि बुझबै छथि। जँ कोनो गलती होइए अल्हरी नाओं सुनै छी मुदा लगले, तइखन घरक लछमी पात्र कहबै छी। पावर तँ पावर होइ छै बुझए पावर कुर्सी बैसनिहार। मनुखक पावर स्वयं मनुख छी जानए मनुख बनि जीनिहार। ओ दिन ओ दिन, ओ दिन छी, जइ दिन भयक प्रेमी देखलौं। ओ दिन, ओ दिन छी, जइ दिन भयसँ यारी केलौं, दर्शन पाबि भैयारी केलौं। माघ मास राति सतपहरा आशाक आश भैयारी देखलौं। ओ दिन, ओ दिन छी, संग सटल भैयारी देखलौं। जेकर सिर सोर बनि पानिक संग पताल पहुँचए। सिसैक-सिसैक, संग आशाक जिनगीक संग जीबैत चलए। संग मिलि हँसए, गबैत चलए संग-संग। राति-दिन सहन सृरजि कूदि-कूदि कुदैत संग। घर भैयारी, बाहर भैयारी संगी, मित्र-दोस्त कहबैत। प्रेमाश्रु संग ढुलकि-ढुलकि धरती बीच नाओं धड़बैत। सिर उसरगए मिलि संग वीर-शहीद कहबैए। मातृभूमि ओ पितृभूमि बीच सेवा कऽ जगबैए। बजिते एक देबाल घड़ी घरक घंटी घुनघुनाएल। पकड़ि कान गुनगुना-गुना रणभूमि-कर्मभुमि देखाएल। सातो घर सजल सेज देखते मन तड़पि उठल। दलदल करैत दलकीमे चिचिया-िचचिया चहकि उठल। अछि कठिन कर्मक परीक्षा मुदा, सफल नै हएब कठिन। विचार सहजि सुता समटि-समटि कएल एकठीन। बेंग सदृश्य कुदए लगैत तरजू कला समेटि धड़ब। कलाकारी छी, मोचना कठिन आङुरसँ पकड़ि धड़ब। जिनगी परीक्षाक ओ घड़ी जइ दिन जिनगी नाओं पड़ए। जागल-सुतल बीच दुनूक जागलनाथ काज धड़ए। पैघ काजक पैघ फल एक्के आँखिये दुनियाँ देखैत। कनाह कहू आकि समूह देखि-देखि लगैत समोह। साध सृरजि साधक सदति फूल वृक्ष सजबैए। सृरजि शक्ति, शक्ति संग सदति भक्ति करैए। ४. मुन्नाजी गजल बिगड़लो रूपक नकल करैए आब लोक नकलोकेँ यथार्थ संजोगि रखैए आब लोक दायित्व बुझैए मात्र अपन स्वार्थ पूर्ति लेल अनकासँ अपनाकेँ विलगा लैए आब लोक धुँआधार हँकैए गप्प लोक कल्पनाक भावेँ यथार्थमे अपनाकेँ सुनगा लैए आब लोक जीवनक दशा-दिशा तय करैए मात्र स्वयं देखाबामे स्वयंकेँ हँटा लैए आब लोक पहिनेसँ बेशी आरक्षित भऽ कऽ जीबैए सभ मुदा बेर पड़ने देखार होइए आब लोक स्तरसँ उठि कऽ जीबाक भऽ गेलैए परिपाटी पाइक फेरमे भ्रष्टाचारी भेल-ए आब लोक ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. अन्जनी कुमार वर्मा २.रामबिलास साहू १ अन्जनी कुमार वर्मा आत्मबल ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, संघर्ष मय जिनगी सं फराक रहब निक अछि अहि बिगड़ल समाज सं सुनसान जंगले निक अछि मुदा कतैक दिन धैर ? उचितक बात पर नहि क सकैछ धनुषाकार आत्मबल कें राखि देखू आत्म्बलक इतिहास धनुषाकारक बाद भ जाईछ जनजागरण क्रांतिक विकराल रूप क लैछ धारण जगविदित अछि क्रांति केर की की होईछ परिणाम रौद्र रूप धारण कय जखन लैछ तीर- कमान नहि अप्पन प्राण केर भय होइछ नहि दोसराक प्राणक मोह तखैन देह में आबी जैत अछि अभिमन्यु केर खून सोइच लिय हे पथभ्रष्ट जयद्रथ होयत कोन उपाय कतेक दिन धैर सहन करत दुखिया केर समुदाय लौह-भुजा आब फड़कि रहल अछि प्राण -प्राण लेल तड़पि रहल अछि क्रांतिक ज्वाला भड़कि रहल अछि आब सोचु अप्पन उपाय नहि मानत पीड़ित समुदाय क्रन्तिये ठीक अंत उपाय.......... बहैत बसात ,,,,,,,,,,,,,,,, प्रासाद बनि जाएत अछि निर्दोष पीड़ितक नोर सं गजराज मरी जाएत अछि नन्हकी चुट्टीक क्रोध सं शीर्ष पद पर बैस करैछ रावण सन हुंकार मुदा एकटा बानर जारि देने छल लंका.. बजा देने छल डंका... अरब लोकक भावना नहि बुझब त चल जायत सुख,सुविधा आ शांति...... परिभाषा ,,,,,,,,,,,,, आवेदन,अंतर्विक्षा आ अपव्यय सं थाकि गेल अछि मन बेकार बुढायत अछि उच्च शिक्षाक प्रमाणपत्र, आब सबके समेटि बंद क देलियेक अछि पेटी म पैसा,प्रतिष्ठा आ पैरवीक लेल शुरू क देलों अछि स्वरोजगार कुरता पैजामा आ बंडी पहिरी बन गेलोंहअछि..नेता..... २ रामबिलास साहू किछु टनका रामविलास साहु जीक टनका 52. सावन मास रिमझिम फुहार प्रेम बढ़ाबै प्रेमीकेँ ललचाबै गोरीकेँ तरसाबै। 53. मोनक बात की कहब सजनी समय नहि की भेजब सनेस दिल दर्दक क्लेश। 54. दिलक रोग नहि कोनो इलाज प्रेमक भूख नहि िमटै धनसँ नहि कोनो दवासँ। 55. चंचल मन िचत्त घबराइत मन डोलैत नयन सुखदाय प्रेमी कहै लजाय। 56. सोना कंगना पैर पयजनियँा नाचै अंगना घुरि घुरि ताकैत हमर सजनियँा। 57. फूलक डारि झुलि सनेश दैत देशवासीकेँ सदा प्रसन्न रहुँ देशक सेवा करू। 58. देशक सेवा मायक सेवा करू िजनगी भरि र्ध्मक पालन छै गरीबक कल्याण। 59. सुइत उठि माय-बाप गुरूकेँ छूऊ चरण िनत्य बन्दन करू कृपा करत देव। 60. पिढ़ िलखकऽ बनु ज्ञानीसँ दानी करू देशक िवकास कल्याणक रखू उँचा ितरंगा। 61. सभ अपन पराया नहि कोय सूरज चँाद सभकेँ समझैत एक समान हित। 62. राजा दुखित प्रजा सभ दुखित जोिगक दुख दुखिया सँ छै बेसी संसार अछि दु :खी। 63. सेवा करैत पथ पर चलैत आगू बढ़ैत झरना सन आगू संघर्ष सँ बढ़ैते। 64. खूनक दाग िछपाय नहि पावै पापक भार धरती नै उठाबै सत्य करै से होय। 65. प्रात:क जल पीबैत रहु िनत्य टटका फल खाऊ जीबैत धरि बनल रहु स्वस्थ। 66. रथक चक्का उलटि चलै बाट चाक् चलै छै ठामे ठाम नचैत दुनु करै दू काम। 67. बच्चा बेदरू खेलैत संगे खेल कखनु झगड़ा कखनु करै मेल पढ़ै छै पाठ एक। 68. िखलैत फूल देखैत भौंरा नाचै रस पिबैत राति बितबै संगै प्रेमक बात करै। 69. दिलक बात की कहब सजनी प्रेमक बँाध सभसँ मजबूत तोड़लौं सँ नै टुटै। 70. खूनक दाग सभसँ अछि पक्का मिटैत नहि कारी दागसँ भारी बड़ पैघ बीमारी। 71. सच्चा इंसान ज्ञान धर्म ईमान उच्च िवचारि मानवक श्रृंगार कार्य करै महान्। 72. सूर्य रौंद सँ धरती तैप तैप शुद्ध होयत सोना तपै आगिसँ धर्म सँ तपै लोक। 73. मोछक मान राखै छै घरवाली सेवक करै घरक रखवाली गाय छै हितकारी। 74. दुर्जन साधु नौकर बेईमान कपटी िमत्र ई तीनु छी शैतान क्षणमे लेत प्राण। 75. खाना खजाना जनाना पखाना केँ पर्दामे राखू जौं राखक बाहर िबख बािन जाएत। 76. प्रीत नै जानै ओछी जाित, नीन नै टुटल खाट प्यास नै धोबी घाट सभ कहै छै बात। 77. बैल खींचैत अछि काठक गाड़ी मनुख खींचै छै दुिनयाक गाड़ी की बनल लाचारी। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.डॉ॰ शशिधर कुमर २ नवीन कुमार "आशा" १. डॉ॰ शशिधर कुमर, एम॰डी॰(आयु॰) – कायचिकित्सा, कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टर, निगडी – प्राधिकरण, पूणा (महाराष्ट्र) – ४११०४४ किए हँसबै छऽ मिथिला केर नाम भैय्या ? (गीत) होइ छऽ मिथिला केर कण कण निलाम भैय्या । कोना तोँ सभ करै छऽ अराम भैय्या ?? धरती ई जनकक आइ आहत पड़ल छऽ । तोरहि सभ केर बाट तकै छऽ । कोना बैसल छऽ मूनि आँखि कान भैय्या ? कोना तोँ सभ करै छऽ अराम भैय्या ?? मिथिला केर माटि केर बोली लगै छऽ । खरिहानहि पैसि, दुष्ट गोली दगै छऽ । हृदय मैथिलीक भेलह लहु – लुहान भैय्या । कोना तोँ सभ करै छऽ अराम भैय्या ?? मिथिलाऽक नाँव बेचि गद्दी चढ़ै छऽ । पाछाँ सऽ एकरहि गर्दनि कटै छऽ । कतऽ गेलह तोऽहर ओ शान भैय्या ? कोना तोँ सभ करै छऽ अराम भैय्या ?? छीः छीः तोरा की लाजो ने होइ छऽ । कुक्कुर जेकाँ अँइठ पातो चटै छऽ । किए हँसबै छऽ मिथिलाक नाम भैय्या ? कोना तोँ सभ करै छऽ अराम भैय्या ?? ककरा दृष्टि मे नीक, के कह ? (कविता) तन सुन्नरि हम देखि रहल छी, मन सुन्नर - से कोना कहू । तन केर सुन्नरता घातक थिक, जँ सुन्नर मन केर बिना रहू ।। अहँ सुन्नरि छी, बड़ सुन्नरि छी, चर्चा पसरल सौंसे जग मे । पर सुन्नरता की थिक - के कह ? के एकरा फरिछाओत जग मे ?? नञि ठोस तरल वा गैस ई थिक, हो मानक परिभाषा जकरा । ककरा दृष्टि मे नीक के कह ? थिक कक्कर अभिलाषा ककरा ।। तन केर सुन्नरता चञ्चल थिक, मन केर सुन्नरता रहए थीर । मन सिन्धु समान अथाह, स्वच्छ, तन बरसाती धाराक नीर ।। तन भ्रामक थिक, तन नश्वर थिक, नहि प्रेमक थिक ओ परिचायक । नञि तऽ, श्रीकृष्णक की हस्ती , जे बनितथि ओ सभहक नायक ।। सुनइत छी लैला कारी छलि, कोयली कारी से जनितहि छी । आँखिक पुतरी होइत’छि कारी, गुन एकर विश्व भरि मनितहि छी ।। हो तन सुन्नर, हो मन सुन्नर, तऽ एहि सँ बढ़ि कऽ की होयत ? नहि चरम मेल दुहु केर सम्भव, जँ होयत, तऽ बढ़ि की होयत ?? की इएह कहाबैछ सुन्नरता ?? (कविता) तन गोर, नयन हिरणी सनि हो, हो अंग अंग मे चञ्चलता । दुहु ठोर पात तिलकोरहि सनि, पातर कटि मे हो लोचकता ।। हो पीनि पयोधर शिरिफल सनि, मुस्कान भरल हो मादकता । दाड़िम दाना सनि दाँत जकर, हो केश मे मेघक पाण्डरता ।। हर अलंकरण सज्जित तन पर, हर चालि - चलन मे अल्हरता । की एतबहि सँ ओ सुन्नर अछि ? की इएह कहाबैछ सुन्नरता ?? २.नवीन कुमार "आशा" मिथिलामे बसए प्राण संस्कारक होइ छी धनी सदिखन सबहक हृदय बसी प्रतिभाक होइ छी खान सभ ठाम छोड़ी अपन निशान चाहे रही कतबो असगर ओतौ बना ली एकटा समाज किछु-किछु अछि दुर्गुण तैयो लोक कहए निपुण। भोरे-भोर उठी नहाइ भगवानक सुमिरण हृदय बसाइ तखन करी एतऽ ग्रहण फेर करी ओतौ विचरण ठाढ़ रहै छी सदिखन सधने नै बूझब छी अकान जखन होइ छै गलत तखन खोली अपन जुबान जखन होइ अछि बड़ गुणगान तखन बाजी ठहरू श्रीमान बैसऽ काल मुँह राखी चुप आबऽ दैत छी पहिचान मिथिलाक छी हम वासी मैथिली अछि हमर भाषा माता-पिताक करी सम्मान। मिथिलाक अछि पहिचान धोती-कुर्ता पान-मखान कतबो रही दूर देश तखनो बसए मिथिलामे प्राण मिथिलामे प्राण बस आब आशा देत पहिचान घानेरामपुरमे अछि ओकर मकान अछि मुखसँ कनी कठोर पर राखए सबहक ओ मान संस्कारक होइ छी धनी (माँ मिथिलाकेँ समर्पित) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.प्रभात राय भट्ट २. अमरेन्द्र कुमार मिश्र १. प्रभात राय भट्ट दहेज मुक्त मिथिला बनाबू समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज // की जाने लोग कोना करैए एकरा परहेज //२ बेट्टा बनल अछि मालजाल बाप बनल पैकारी दहेजक आगिमे जड़ि रहल अछि बहु बेट्टी बेचारी समाजमे दहेजक रोग लागल अछि बड भारी जौं उपचार नहि करब तँ फैल जाएत महामारी समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज // की जाने लोग कोना करैए एकरा परहेज //२ बेट्टी जन्म लैते बाप माथ पएर हाथ धरैए बेट्टीक ब्याह कोना करब चिंतामे डुबल रहैए शिशु हत्या करैए कियो भ्रूण हत्या करैए आगि लागल दहेजक बेट्टी जड़ि मरि मरैए समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज // की जाने लोग कोना करैए एकरा परहेज //२ मैथिल ललना पढ़ि लिख भोगेलथि विद्द्वान मुदा दहेज छै अपराध ई किनको नहि ज्ञान मांगी दहेज किए करैतछी बेट्टी बहुक अपमान करू आदर्श ब्याह यौ ललना बढ़त अहांक शान समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज // की जाने लोग कोना करैए एकरा परहेज //२ उठू जगु मैथिल ललना बढ़ू आब आगू तिलक दहेजक विरुद्ध एक अभियान चलाबू मैथिली वैदेही जानकीक भ्रूण हत्यासं बचाबू उठू जगु मैथिल दहेज मुक्त मिथिला बनाबू समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज// की जाने लोग कोना करैए एकरा परहेज //२ २ अमरेन्द्र कुमार मिश्र पिताक नाओं- श्री विनोद मिश्र गाम- बेरमा भाया- तमुिरया जिला- मधुबनी (बिहार) कविता- नेता गामक नेता देशक नेता राज आ समाजक नेता होइत अछि कमजोर आ होशियार अप्पन नकली बात बना कऽ करैत अछि जनतासँ प्यार नेता मुर्ख हुअए वा गमार कहैत अपने-आप बुद्धियार चौक-चौराहा भाषण दऽ कऽ मचा रहल अछि भ्रष्टाचार गामक नेता................। ई नेताजी जुर्मक बेटा जनता सभकेँ लोभा लेता बान्ह-सड़कमे माल बनेताह मजदुरियोपर ई टेक्स लगेताह करताह हरदम अत्याचार जनता लग रखता खाली विचार गामक नेता..................। जखन आएत चुनावक बेर परचा आ भाषणक बेर गाम-टोल घुमि-फिर ओ जनताक आगू शिष नवेता लोभक रस जनताकेँ पियेता वैलेट पेपर हाथमे थम्हेता मकराक जालमे सभकेँ फॅसेता गामक नेता देशक नेता राज आ समाजक नेता। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत १.ज्योति सुनीत चौधरी २.श्वेता झा (सिंगापुर) ३.गुंजन कर्ण ४.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) ५. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी) १. ज्योति सुनीत चौधरी जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी। ज्योति मिथिला चित्रकलामे सेहो पारंगत छथि आ हिनकर मिथिला चित्रकलाक प्रदर्शनी ईलिंग आर्ट ग्रुप केर अंतर्गत ईलिंग ब्रॊडवे, लंडनमे प्रदर्शित कएल गेल अछि। कविता संग्रह ’अर्चिस्’ प्रकाशित। ज्योति सम्प्रति लन्दनमे रहै छथि। २.श्वेता झा (सिंगापुर) ३.गुंजन कर्ण राँटी मधुबनी, सम्प्रति यू.के.मे रहै छथि। www.madhubaniarts.co.uk पर हुनकर कलाकृति देखि सकै छी। ४ राजनाथ मिश्र चित्रमय मिथिला स्लाइड शो चित्रमय मिथिला (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) ५. उमेश मण्डल मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव जन्तु/ मिथिलाक जिनगी (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण बालानां कृते डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” एम॰डी॰(आयु॰) – कायचिकित्सा कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टर, निगडी – प्राधिकरण, पूणा (महाराष्ट्र) – ४११०४४, मातृ – भू वन्दना (बालगीत) सिता१ मधुरम्३, मधुरपि२ मधुरम्३, मधुरादपि मधु माएक भाषा । संस्कृत प्रिय, हिन्दी प्रियतर, दुहु सँ बढ़ि कऽ मिथिलाभाषा ।। धरती सुन्नर, भारत सुन्नर, पर सुन्नरतम मिथिलाबासा । जिनगी हो समर्पित एकरहि लए, अछि मात्र इएह टा अभिलाषा ।। मिट जाय भलहि, नञि हिय हारी, सम विषम, माए अहीं केर आशा । रहए ध्यान सतत् अहँ चरणहि मे, हो हरेक जन्म मिथिलाबासा ।। १ सिता = चिन्नी वा मिश्री २ मधुर / मधूर = मिठाई ३ मधुर = मीठ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma VIDEHA MAITHILI SAMSKRIT TUTOR बिपिन कुमार झा संवादः इहलोके मानवजीवने क्षणा आयान्ति यान्ति च। तत्र पुण्यास्ते क्षणाः यत्र भगवन्निर्देशनं श्रृण्वन् जनः किमपि महत्त्वमयङ्कार्यमारभते। अपि च समारब्धकर्मपरिसमाप्तये सपरिकरबन्धनमुद्यमञ्च करोति। केचित् सम्यक् एव उक्तवान् अस्ति- प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन..... इति। आशयः एवं यत् ते अधमजनास्सन्ति ये विघ्नभयात् कर्यारम्भस्यविषये एव न चिन्तयन्ति तत्रैव मध्यमजनाः ते सन्ति ये कार्यारम्भानन्तरं विघ्ने सति मध्ये एव तत्त्यजन्ति। ते एव उत्तमजनाः ये अनेकदा यद्यपि विघ्नाः समापतन्ति किन्तु ते पूर्णाहूतेः अनन्तरम् एव विरमन्ति। ते एव विजिताः भवन्ति इह प्रपञ्चपूर्णसंसारे। अस्तु अत्र एतदेव मे मतिः यत् सर्वदा विशेषसम्पत् स्यात्। अपि च शिवसङ्कल्पः स्यात्। विशेषसम्पत् इति पदस्याभिप्रायः विद्यते- यस्मिन् कर्मणि भवन्तः नियुक्ताः तत्र यत् किमपि अपेक्षितं स्यात् तेषाम् उपस्थितिरिति शम्। {प्रस्तोता - बिपिन कुमार झा, राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थाने (पुरीनगरे) साहित्यविभागे अध्यापकः (अनु.) अस्ति।} विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.) Output: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) English to Maithili Maithili to English इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड़ / बड़ी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढ़इन बढ़न्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय Festivals of Mithila DATE-LIST (year- 2011-12) (१४१९ साल) Marriage Days: Nov.2011- 20,21,23,25,27,30 Dec.2011- 1,5,9 January 2012- 18,19,20,23,25,27,29 Feb.2012- 2,3,8,9,10,16,17,19,23,24,29 March 2012- 1,8,9,12 April 2012- 15,16,18,25,26 June 2012- 8,13,24,25,28,29 Upanayana Days: February 2012- 2,3,24,26 March 2012- 4 April 2012- 1,2,26 June 2012- 22 Dviragaman Din: November 2011- 27,30 December 2011- 1,2,5,7,9,12 February 2012- 22,23,24,26,27,29 March 2012- 1,2,4,5,9,11,12 April 2012- 23,25,26,29 May 2012- 2,3,4,6,7 Mundan Din: December 2011- 1,5 January 201225,26,30 March 2012- 12 April 2012- 26 May 2012- 23,25,31 June 2012- 8,21,22,29 FESTIVALS OF MITHILA Mauna Panchami-20 July Madhushravani- 2 August Nag Panchami- 4 August Raksha Bandhan- 13 Aug Krishnastami- 21 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 29 August Hartalika Teej- 31 August ChauthChandra-1 September Karma Dharma Ekadashi-8 September Indra Pooja Aarambh- 9 September Anant Caturdashi- 11 Sep Agastyarghadaan- 12 Sep Pitri Paksha begins- 13 Sep Mahalaya Aarambh- 13 September Vishwakarma Pooja- 17 September Jimootavahan Vrata/ Jitia-20 September Matri Navami- 21September Kalashsthapan- 28 September Belnauti- 2 October Patrika Pravesh- 3 October Mahastami- 4 October Maha Navami - 5 October Vijaya Dashami- 6 October Kojagara- 11 Oct Dhanteras- 24 October Diyabati, shyama pooja-26 October Annakoota/ Govardhana Pooja-27 October Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja-28 October Chhathi-kharna -31 October Chhathi- sayankalik arghya - 1 November Devotthan Ekadashi- 17 November Sama poojarambh- 2 November Kartik Poornima/ Sama Bisarjan- 10 Nov ravivratarambh- 27 November Navanna parvan- 29 November Vivaha Panchmi- 29 November Makara/ Teela Sankranti-15 Jan Naraknivaran chaturdashi- 21 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 28 January Achla Saptmi- 30 January Mahashivaratri-20 February Holikadahan-Fagua-7 March Holi-9 Mar Varuni Yoga-20 March Chaiti navaratrarambh- 23 March Chaiti Chhathi vrata-29 March Ram Navami- 1 April Mesha Sankranti-Satuani-13 April Jurishital-14 April Akshaya Tritiya-24 April Ravi Brat Ant- 29 April Janaki Navami- 30 April Vat Savitri-barasait- 20 May Ganga Dashhara-30 May Somavati Amavasya Vrata- 18 June Jagannath Rath Yatra- 21 June Hari Sayan Ekadashi- 30 June Aashadhi Guru Poornima-3 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाऊ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha VIDEHA केर सदस्यता लिअ Top of Form Bottom of Form ईमेल : एहि समूहपर जाऊ २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ Top of Form Subscribe to VIDEHA Powered by us.groups.yahoo.com Bottom of Form २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइट http://www.shruti-publication.com/ पर । महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे। कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७ Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding: Language:Maithili ६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india) (add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)
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Details for purchase available at print-version publishers's site website: http://www.shruti-publication.com/ or you may write to e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com विदेह: सदेह : १: २: ३: ४ तिरहुता : देवनागरी "विदेह" क, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। विदेह:सदेह:१: २: ३: ४ सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com २. संदेश- [ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ] १.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत। २.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी। ३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत। ४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन। ५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी। ६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। १०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। १२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। १४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी। १५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी। १६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिंट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे। मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)... अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग। १७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल। १८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई। १९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत। २०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ। २१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ। २२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य। २३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई। २४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि। २५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर) २६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक। २७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत। २८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी। २९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना। ३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी। ३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि। ३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई। ३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई। ३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई। ३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक। ३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ। ३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम। ३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना। ३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ। ४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल। ४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई। ४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य। ४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना। ४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि। ४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक। ४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत। ४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि। ४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रशंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत। ४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना। ५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना। ५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना। ५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल। ५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना। ५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक अनेक धन्यवाद; कतेक बरखसँ हम नेयारैत छलहुँ जे सभ पैघ शहरमे मैथिली लाइब्रेरीक स्थापना होअए, अहाँ ओकरा वेबपर कऽ रहल छी, अनेक धन्यवाद। ५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना। ५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल। ५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई। ५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि। ५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी। ६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि। ६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब। ६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी। ६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही। ६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय। ६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना। ६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय। ६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह। ६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना । ६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ। ७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक) ७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि। ७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि। ७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि। ७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना। ७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि। ७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि। ७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि। ७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल। ७९. श्री हीरेन्द्र कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-११. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतय लेखकक नाम नहि अछि ततय संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति सुनीत चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ एहिमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-11 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु मैथिली आ मिथिलासँ संबंधित किछु मुख्य साइट:- आन लिंकक विषयमे सूचना ggajendra@videha.com केँ ई मेलसँ पठाबी। http://www.videha.co.in/ ("विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका) http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक प्रथम उपस्थिति/ मैथिलीक पहिल ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर, ५ जुलाइ २००४) http://www.videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html (इंटरनेटपर मैथिली भाषाक प्रथम उपस्थिति/ मैथिलीक पहिल ब्लॉग- मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर, ५ जुलाइ २००४) http://videha-aggregator.blogspot.com/ (मैथिली भाषा ब्लॉगक एग्रीगेटर) 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मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी गौरीशंकर, जमथरि, हैंठी बाली, मधुबनी बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर ताम्रलेख धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँ, नरसिंह अवतार धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँ, नरसिंह अवतार पूरणदेवी, पूर्णियाँ बिदेश्वर स्थान अभिलेख, मधुबनी अन्ध्राठाढी अभिलेख, मधुबनी बुद्ध अष्टधातु, सिसव बसंतपुर, बगहा 12 शताब्दी, कोइलख, मधुबनी अग्नि बिदेश्वर स्थान, मधुबनी बुद्ध, मुंगेर अहिल्या स्थान अन्ध्राठाढी, मधुबनी अशोक स्तंभ, बसाढ, वैशाली बुद्ध अवलोकितेश्वर तारा, भागलपुर बसाढ, वैशाली बुद्ध भूमिस्पर्श बुद्ध, ताम्र बुद्ध मस्तक, सुलतानगंज वैशाली मूर्त्ति चामुण्डा नाग-नागिनी, मुंगेर मुकुटधारी बुद्ध, अंतीचक, भागलपुर नाचैत गणेश, 10म शताब्दी, दरभंगा दरभंगा म्युजियम दरभंगा म्युजियम दुर्गा, कार्त्तिकेय 10म शताब्दी, भीट भगवानपुर, अन्ध्रा ठाढी गणेश बुद्ध गौतम बुद्ध, वैशाली हरिहर बुद्ध चिड़ैकेँ खुआबैत महिला, राजमहल लौरिया नन्दनगढ, अशोक स्तंभ लोमश सुदामा गुफा मुंगेर नागराज तीर्थंकर कुमारिल भटट फेकेलाह, नालन्दा विक्रमशिला विश्वविद्यालय, भागलपुर ठाढ बुद्ध पार्वती रामायण रामपुरवा वृषभ रामपुरवा बुद्धक अवशेष संकिसा सप्तमातृका सर्वतो भद्र मण्डल सूर्य सूर्य सूर्यक संगी सूर्य, मधुबनी आ भागलपुर मूर्त्ति मूर्त्ति मूर्त्ति, वैशाली उमा माहेश्वर, कल्याणसुन्दर वैशाली वृषभ शीर्ष वैशाली, शालभंजिका भागलपुर नाओक प्रकार विष्णु बुद्धा पाँखियुक्त्त महिला अहिल्या अष्टयोगिनी मन्दिर, सहरसा बनगंगा दरभंगा दरभंगा नगर, 1934 दरभंगा मेडिकल कॉलेज दुल्हदुल्हिन मन्दिर, जनकपुर श्री यंत्र गण्डीश्वर गंगासागर पोखरि, मधुबनी हनुमान मन्दिर, मधुबनी हरिहरस्थान मधुबनी हॉस्पीटल जनकपुर जानकी मन्दिर जानकी मन्दिर जानकी मन्दिर, सीतामढी जानकी मन्दिर, सीतामढी जिला स्वास्थ्य कार्यालय राजबिराज, नेपाल कलनेश्वर बाबा कपिलेश्वर कोषलेखाकार्यालय, राजबिराज, नेपाल मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा लक्ष्मीश्वर पैलेस, 1934 माध्यमिकविद्यालय , जनकपुर महेन्द्र चौक, जनकपुर जनकपुर मंडप मिथिला, 1988 भूकम्प पगलाबाबा धर्मशाला, जनकपुर, नेपाल पंडौल अहल्या मधुबनी बस स्टैंड राज हेड ऑफिस, 1934 राज हॉस्पीटल, दरभंगा, 1934 सौराठ सभा शिव मन्दिर, 1934 शिवशंकर सिनेमा, मधुबनी श्यामा मन्दिर विद्यापति मूर्त्ति, बिस्फी उग्रतारा, तारास्थान, महिषी, सहरसा विद्यापति स्मारक, बिस्फी विस्फी, उदना महादेव बिस्फी, विश्वेश्वरी भगवती अहल्या मन्दिर, अहियारी अशोक स्तंभ, वैशाली स्तूप अशोक स्तंभ, वैशाली बलिराजपुर किला पूर्वी गेट बलिराजपुर किला मीनार चण्डी स्थान, बिराटपुर, सहरसा गाँधी पोखरि, ढाका, मोतिहारी गाँधी विद्यालय, ढाका, मोतिहारी गिरिजा स्थान, मधुबनी हरिहर मन्दिर, सोनपुर जैन मन्दिर, भागलपुर जैन मन्दिर, वैशाली कमलादित्य स्थान कपिलेश्वर शिव मन्दिर लौरिया नन्दनगढ मदनेश्वर शिव मन्दिर मन्दार पर्वत, बाँका मोतिहारी सत्याग्रह स्मारक परमेश्वरी मन्दिर, ठाढी, मधुबनी रामजानकी मन्दिर, सीतामढी सत्याग्रह स्मारक, सीतामढी शांति स्तूप, वैशाली उच्चैठ भगवती उच्चैठ मन्दिर सिंघेश्वर स्थान, मधेपुरा सूर्यधाम, परसा उग्रतारा मन्दिर, महिषी, सहरसा वैशाली स्तूप विक्रमशिला विश्वविद्यालय, भागलपुर विराटपुर मन्दिर, मधेपुरा वृषभ शीर्ष, रामपुरवा सिंह शीर्ष, रामपुरवा शरभ, नेपाल पाँखियुक्त्त देवी, वैशाली बाबा बडेश्वर, देवना, बनगाँव वट वृक्ष, बनगाँव भगवान विष्णु, देवना, बनगाँव शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थान महिषी शास्त्रार्थ स्थल,तारास्थान महिषी तारास्थान महिषी माता तारा, तारास्थान महिषी उग्रतारा (खादर वाणी तारा) मूर्ति, महिषी वशिष्ठ मुनि, तारास्थान महिषी आवर्धित काली उच्चैठ बौद्धदेवी तारा वारी समस्तीपुर भगवती देकुली भगवती गिरिजा फुल्हर भगवती मृणमूर्ति गन्धबारि भगवती वारी समस्तीपुर भुवनेश्वरी कोर्थ देवीकाली कोर्थ गंगामूर्ति नगरडीह दरभंगा गोसाउनि मन्दिर कोर्थ हैहट्ट देवी हाबीडीह काली उच्चैठ महिषासुरमर्दिनी बहेरी दरभंगा महिषासुरमर्दिनी हाबीडीह महिषासुरमर्दिनी नाहर-भगवतीपुर उमा म्लेच्छमर्दिनी मिर्जापुर दरभंगा यमुना भैरव बलिया मधुबनी अष्टभुज गणेश,कोर्थ भैरव, भैरव-बलिया नटराज, तारालाही शिव-पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वरस्थान शिव-पार्वती मन्दिर, कपिलेश्वरस्थान शिव मन्दिर, सिंगिया, विस्पी उमामाहेश्वर, महादेवमठ उमामाहेश्वर, तिरहुत विष्णु, भवानीपुर विष्णु, भीठ भगवानपुर विष्णु, जयनगर विष्णु, लदहो विष्णु, साहो-पररी, हाबीडीह शेषशायी विष्णु, सवास, मुजफ्फरपुर वराह मूर्ति, तिलकेश्वरस्थान मिथिलाक्षर अभिलेख, विष्णु बुद्ध मूर्ति भगवती उच्चैठ, बेनीपट्टी भगवती वाणेश्वरी, भंडारीसम चामुण्डा मन्दिर, कटरा, मुजफ्फरपुर अष्टभुज गणेश, हाबीडीह अष्टभुज गणेश, कोर्थ गंगा, आन्ध्रा-ठाढ़ी महिषासुरमर्दिनी, दुर्गा म्लेच्छमर्दिनी मन्दिर, मिर्जापुर, दरभंगा नटराज राममन्दिर, अहिल्यास्थान सेहनी, वैशाली, विष्णु तिलक-यज्ञोपवीतधारी रूपनगर शिव मन्दिर सूर्य, देकुली सूर्य मूर्ति, डिलाही सूर्य मूर्ति, विष्णु, बरुआर उमामाहेश्वर यमुना, आन्ध्रा-ठाढ़ी सिमरौनागढ़ मूर्ति आदि काली, चैनपुर सहरसा चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर, संगमे आदिकालीन भव्य काली-मन्दिर सेहो एहि गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि। त्योथागढ़क स्वामी माध्वानन्द कौलाचार्य काली मन्दिर त्योथा गढ़ लग। पुरान गढ़। एकर पूबमे ब्रह्मपुराक बाबा हरिहरनाथ महादेव मन्दिर आ दक्षिणमे उच्चैठ भगवती छथि। त्योथागढ़क दसमुखी काली त्योथा गढ़ लग। पुरान गढ़। एकर पूबमे ब्रह्मपुराक बाबा हरिहरनाथ महादेव मन्दिर आ दक्षिणमे उच्चैठ भगवती छथि। कोइलख (मधुबनी) देवीक मन्दिर अकौर, बेनीपट्टी, भगवती दुर्गा, भगवतीपीठ अकौर, बेनीपट्टी, भगवती दुर्गा, भगवतीपीठ मिथिलाक खोज ई आलेख हमर दशकसँ ऊपरक मिथिलाक यात्राक उपरान्तक सूत्र-वृत्तान्त अछि आ एहिमे एहि सभ स्थानक स्थानीय निवासी आ गाइड सभक अकथनीय योगदान छन्हि । कखनो कालतँ भाड़ाक गाड़ीक ड्राइवर लोकनि सेहो नीक गाइड सिद्ध भेलाह ।-गजेन्द्र ठाकुर १.गौरी-शंकर स्थान- मधुबनी जिलाक जमथरि गाम आ हैंठी बाली गामक बीच ई स्थान गौरी आ शङ्करक सम्मिलित मूर्त्ति आ एहि पर मिथिलाक्षरमे लिखल पालवंशीय अभिलेखक कारणसँ विशेष रूपसँ उल्लेखनीय अछि। ई स्थल एकमात्र पुरातन स्थल अछि जे पूर्ण रूपसँ गामक उत्साही कार्यकर्त्ता लोकनिक सहयोगसँ पूर्ण रूपसँ विकसित अछि। शिवरात्रिमे एहि स्थलक चुहचुही देखबा योग्य रहैत अछि। बिदेश्वरस्थानसँ २-३ किलोमीटर उत्तर दिशामे ई स्थान अछि। २.भीठ-भगवानपुर अभिलेख- राजा नान्यदेवक पुत्र मल्लदेवसँ संबंधित अभिलेख एतए अछि। मधुबनी जिलाक मधेपुर थानामे ई स्थल अछि। ३.हुलासपट्टी- मधुबनी जिलाक फुलपरास थानाक जागेश्वर स्थान लग हुलासपट्टी गाम अछि। कारी पाथरक विष्णु भगवानक मूर्त्ति एतए अछि। ४.पिपराही-लौकहा थानाक पिपराही गाममे विष्णुक मूर्त्तिक चारू हाथ भग्न भए गेल अछि। ५.मधुबन- पिपराहीसँ १० किलोमीटर उत्तर नेपालक मधुबन गाममे चतुर्भुज विष्णुक मूर्त्ति अछि। ६.अंधरा-ठाढ़ीक स्थानीय वाचस्पति संग्रहालय- गौड़ गामक यक्षिणीक भव्य मूर्त्ति एतए राखल अछि। ७.कमलादित्य स्थान- अंधरा ठाढ़ी गामक लगमे कमलादित्य स्थानक विष्णु मंदिर कर्णाट राजा नान्यदेवक मंत्री श्रीधर दास द्वारा स्थापित भेल। ८.झंझारपुर अनुमण्डलक रखबारी गाममे वृक्षक नीचाँ राखल विष्णु मूर्त्ति, गांधारशैली मे बनाओल गेल अछि। ९.पजेबागढ़ वनही टोल- एतए एकटा बुद्ध मूर्त्ति भेटल छल, मुदा ओकर आब कोनो पता नहि अछि। ई स्थल सेहो रखबारी गाम लग अछि। १०.मुसहरनियां डीह- अंधरा ठाढ़ीसँ ३ किलोमीटर पश्चिम पस्टन गाम लग एकटा ऊंच डीह अछि।बुद्धकालीन एकजनियाँ कोठली, बौद्धकालीन मूर्त्ति, पाइ, बर्त्तनक टुकड़ी आ पजेबाक अवशेष एतए अछि। ११.भगीरथपुर- पण्डौल लग भगीरथपुर गाममे अभिलेख अछि जाहिसँ ओइनवार वंशक अंतिम दुनू शासक रामभद्रदेव आ लक्ष्मीनाथक प्रशासनक विषयमे सूचना भेटैत अछि। १२.अकौर- मधुबनीसँ २० किलोमीटर पश्चिम आ उत्तरमे अकौर गाममे एकटा ऊँच डीह अछि, जतए बौद्धकालक मूर्त्ति अछि। १३.बलिराजपुर किला- मधुबनी जिलाक बाबूबरही प्रखण्डसँ ५ किलोमीटर पूब बलिराजपुर गाम अछि। एकर दक्षिण दिशामे एकटा पुरान किलाक अवशेष अछि। किला चारि किलोमीटर नमगर आ एक किलोमीटर चाकर अछि। दस फीटक मोट देबालसँ ई घेरल अछि। १४.असुरगढ़ किला- मिथिलाक दोसर किला मधुबनी जिलाक पूब आ उत्तर सीमा पर तिलयुगा धारक कातमे महादेव मठ लग ५० एकड़मे पसरल अछि। १५.जयनगर किला- मिथिलाक तेसर किला अछि भारत नेपाल सीमा पर प्राचीन जयपुर आ वर्त्तमान जयनगर नगर लग। दरभंगा लग पंचोभ गामसँ प्राप्त ताम्र अभिलेख पर जयपुर केर वर्णन अछि। १६.नन्दनगढ़- बेतियासँ १२ मील पश्चिम-उत्तरमे ई किला अछि। तीन पंक्त्तिमे १५ टा ऊँच डीह अछि। १७.लौरिया-नन्दनगढ़- नन्दनगढ़सँ उत्तर स्थित अछि, एतए अशोक स्तंभ आ बौद्ध स्तूप अछि। १८.देकुलीगढ़- शिवहर जिलासँ तीन किलोमीटर पूब हाइवे केर कातमे दू टा किलाक अवशेष अछि। चारू दिशि खधाइ अछि। १९.कटरागढ़- मुजफ्फरपुरमे कटरा गाममे विशाल गढ़ अछि, देकुली गढ़ जेकाँ चारू कात खधाइ खुनल अछि। २०.नौलागढ़-बेगुसरायसँ २५ किलोमीटर उत्तर ३५० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि। २१.जयमंगलगढ़-बेगूसरायमे बरियारपुर थानामे काबर झीलक मध्य एकटा ऊँच डीह अछि। एतए ई गढ़ अछि। नाओकोठी (मझौल) गाम लग ई गढ़ अछि। २१ अ.मंगलगढ़- समस्तीपुर जिलामे दुधपुरा बजार लग देओढ गाम लग। २२.अलौलीगढ़-खगड़ियासँ १५ किलोमीटर उत्तर अलौली गाम लग १०० एकड़मे पसरल ई गढ़ अछि। २३.कीचकगढ़-पूर्णिया जिलामे डेंगरघाटसँ १० किलोमीटर उत्तर महानन्दा नदीक पूबमे ई गढ़ अछि। २४.बेनूगढ़-टेढ़गाछ थानामे कवल धारक कातमे ई गढ़ अछि। २५.वरिजनगढ़-बहादुरगंजसँ छह किलोमीटर दक्षिणमे लोनसवरी धारक कातमे ई गढ़ अछि। २६.गौतम तीर्थ- कमतौल स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पश्चिम ब्रह्मपुर गाम लग एकटा गौतम कुण्ड पुष्करिणी अछि। २७.हलावर्त्त- जनकपुरसँ ३५ किलोमीटर दक्षिण पश्चिममे सीतामढ़ी नगरमे हलवेश्वर शिव मन्दिर आ जानकी मन्दिर अछि। एतएसँ डेढ़ किलोमीटर पर पुण्डरीक क्षेत्रमे सीताकुण्ड अछि। हलावर्त्तमे जनक द्वार हर चलएबा काल सीता भेटलि छलीह। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी) आ जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) पर एतए मेला लगैत अछि। २८.फुलहर-मधुबनी जिलाक हरलाखी थानामे फुलहर गाममे जनकक पुष्पवाटिका छल जतए सीता फूल लोढ़ैत छलीह। २९.जनकपुर-बृहद् विष्णुपुराणमे मिथिलामाहात्म्यमे जनकपुर क्षेत्रक वर्णन अछि। सत्रहम शताब्दीमे संत सूर किशोरकेँ अयोध्यामे सरयू धारमे राम आ जानकीक दू टा भव्य मूर्त्ति भेटलन्हि, जकरा ओ जानकी मन्दिर, जनकपुरमे स्थापित कए देलन्हि। वर्त्तमान मन्दिरक स्थापना टीकमगढ़क महारानी द्वारा १९११ ई. मे भेल। नगरक चारूकात यमुनी, गेरुखा आ दुग्धवती धार अछि। राम नवमी (चैत्र शुक्ल नवमी),जानकी नवमी (वैशाख शुक्ल नवमी) आ विवाह पंचमी (अगहन शुक्ल पंचमी) पर एतए मेला लगैत अछि। ३०.धनुषा- जनकपुरसँ १५ किलोमीटर उत्तर धनुषा स्थानमे पीपरक गाछक नीचाँ एकटा धनुषाकार खण्ड पड़ल अछि। रामक तोड़ल ई धनुष अछि। एहिसँ पूब वाणगंगा धार बहैत अछि जे लक्ष्मण द्वारा वाणसँ उद्घाटित भेल छल। ३१.सुग्गा-जनकपुर लग जलेश्वर शिवधामक समीप सुग्गा ग्राममे शुकदेवजीक आश्रम अछि। शुकदेवजी जनकसँ शिक्षा लेबाक हेतु मिथिला आएल छलाह- एहि ठाम हुनकर ठहरेबाक व्यवस्था भेल छल। ३२.सिंहेश्वर- मधेपुरासँ ५ किलोमीटरपर गौरीपुर गाम लग सिंहेश्वर शिवधाम अछि। ३३.कपिलेश्वर-कपिल मुनि द्वार स्थापित महादेव मधुबनीसँ ६ किलोमीटर पश्चिममे अछि। ३४.कुशेश्वर- समस्तीपुरसँ उत्तर-पूब, लहेरियासरायसँ 60 किलोमीटर दक्षिण-पूब आ सहरसासँ २५ किलोमीटर पश्चिम ई एकटा प्रसिद्ध शिवस्थान अछि। एतए चिड़ै-अभ्यारण्य सेहो अछि जतए उज्जर आ कारी गैबर, लालसर, दिघौछ, मैल, नकटा, गैरी, गगन, सिल्ली, अधानी, हरिअल, चाहा, करन, रतबा चिड़ै सभ अनायासहि नवम्बरसँ मार्च धरि देखबामे आएत । ३५.सिमरदह-थलवारा स्टेशन लग शिवसिंह द्वारा बसाओल शिवसिंहपुर गाम लग ई शिवमन्दिर अछि। ३६.सोमनाथ- मधुबनी जिलाक सौराठ गाममे सभागाछी लग सोमदेव महादेव छथि। ३७.मदनेश्वर- मधुबनी जिलाक अंधरा ठाढ़ीसँ ४ किलोमीटर पूब मदनेश्वर शिव स्थान अछि। ३८.कुन्दग्राम:हाजीपुरसँ बत्तीस किलोमीटर उत्तर-पूर्वमे बसाध-वैशाली आ लगमे वासोकुण्ड लग गाम गढ़-टीलासँ २ कि.मी. उत्तर-पूर्व अछि कुन्दग्राम , जतए जैनक २४म तीर्थंकर महावीरक जन्म भेल छलन्हि। एतए बुद्धक छाउर, अभिषेक पुषकरणी (राजा अभिषेकसँ पूर्व एतए नहाइत रहथि), अशोक स्तम्भ आ संसद-भवन (राजा विशालक गढ़) अछि। ३९.चण्डेश्वर- झंझारपुरमे हरड़ी गाम लग चण्डेश्वर ठाकुर द्वारा स्थापित चण्डेश्वर शिवस्थान अछि। ४०.बिदेश्वर-मधुबनी जिलामे लोहनारोड स्टेशन लग स्थित शिवधामक स्थापना महाराज माधवसिंह कएलन्हि। ताहि युगक मिथिलाक्षरक अभिलेख सेहो एतए अछि। ४१.शिलानाथ- जयनगर लग कमला धारक कातमे शिलानाथ महादेव छथि। ४२.उग्रनाथ-मधुबनीसँ दक्षिण पण्डौल स्टेशन लग भवानीपुर गाममे उगना महादेवक शिवलिंग अछि। विद्यापतिकेँ प्यास लगलन्हि तँ उगनारूपी महादेव जटासँ गंगाजल निकालि जल पिएलखिन्ह। विद्यापतिक हठ कएला पर एहि स्थान पर उगना हुनका अपन असल शिवरूपक दर्शन देलखिन्ह। ४३.उच्चैठ छिन्नमस्तिका भगवती- कमतौल स्टेशनसँ १६ किलोमीटर पूर्वोत्तर उच्चैठमे कालिदास भगवतीक पूजा करैत छलाह। भगवतीक मौलिक मूर्त्ति मस्तक विहीन अछि। ४४.उग्रतारा- मण्डन मिश्रक जन्मभूमि महिषीमे मण्डनक गोसाउनि उग्रतारा छथि। ४५.भद्रकालिका- मधुबनी जिलाक कोइलख गाममे भद्रकालिका मंदिर अछि। ४६.चामुण्डा- मुजफ्फरपुर जिलामे कटरागढ़ लग लक्ष्मणा वा लखनदेइ धार लग दुर्गा द्वारा चण्ड-मुण्डक वध कएल गेल। ओहि स्थान पर ई मन्दिर अछि। ४७.परसा सूर्य मन्दिर- झंझारपुरमे सग्रामसँ पाँच किलोमीटर पूर्व परसा गाममे साढ़े चारि फीटक भव्य सूर्य मूर्त्ति भेटल अछि। ४८.बिसफी- मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी थानामे कमतौल रेलवे स्टेशनसँ ६ किलोमीटर पूब आ कपिलेश्वर स्थानसँ ४ किलोमीटर पश्चिम बिसफी गाम अछि। विद्यापतिक जन्म-स्थान ई गाम अछि। एतए विद्यापतिक स्मारक सेहो अछि। ४९.मंदार पर्वत-बांका स्थित स्थलमे मिथिलाक्षरक गुप्तवंशीय ७म् शताब्दीक अभिलेख अछि। समुद्र मंथनक हेतु मंदारक प्रयोग भेल छल। निकटमे बौंसीमे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक दूटा मूर्त्ति अछि, पैघ मूर्ति लाल पाथरक अछि तँ दोसर काँसाक जकर सोझाँ दूटा पदचिन्ह अछि। जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथक जन्म चम्पानगरमे आ निर्वाण एतहि भेल छलन्हि। ५०.विक्रमशिला-भागलपुरमे स्थित प्राचीन विश्वविद्यालय। भागलपुर जिलाक अंतीचक गाममे राजा धर्मपालक बनाओल बुद्ध विश्वविद्यालय अछि। १०८ व्याख्याता लेल रहबाक स्थान आ बाहरसँ पढ़ए बला लेल सेहो स्थान एतए निर्मित अछि ५१. मिथिलाक बीस टा सिद्ध पीठ- १.गिरिजास्थान(फुलहर, मधुबनी), २.दुर्गास्थान(उचैठ, मधुबनी), ३.रहेश्वरी (दोखर, मधुबनी), ४.भुवनेश्वरीस्थान(भगवतीपुर, मधुबनी), ५.भद्रकालिका(कोइलख, मधुबनी), ६.चमुण्डा स्थान(पचाही, मधुबनी), ७.सोनामाइ(जनकपुर, नेपाल), ८.योगनिद्रा(जनकपुर, नेपाल), ९.कालिका स्थान (जनकपुर स्थान), १०.राजेश्वरी देवी(जनकपुर, नेपाल), ११.छिनमस्ता देवी(उजान, मधुबनी), १२.बनदुर्गा(खररख, मधुबनी), १३.सिधेश्वरी देवी(सरिसव, मधुबनी), १४.देवी-स्थान (अंधरा ठाढ़ी, मधुबनी),१५.कंकाली देवी (भारत नेपाल सीमा आ रामबाग प्लेस, दरभंगा), १६.उग्रतारा (महिषी, सहरसा), १७.कात्यानी देवी(बदलाघाट, सहरसा), १८.पुरन देवी(पूर्णियाँ), १९.काली स्थान (दरभंगा), २०.जैमंगलास्थान(मुंगेर), ५२. जनकपुर परिक्रमाक १५ स्थल आ ओतुक्का मुख्य देवता १. हनुमाननगर- हनुमानजी, २.कल्याणेश्वर- शिवलिंग, ३.गिरिजा-स्थान- शक्ति, ४.मटिहानी- विष्णु मन्दिर, ५.जालेश्वर- शिवलिंग, ६.मनाई- माण्डव ऋषि, ७. श्रुव कुण्ड- ध्रुव मन्दिर, ८.कंचन वन- कोनो मन्दिर नञि मात्र मनोरम दृश्य, ९.पर्वत- पाँच टा पर्वत, १०.धनुषा- शिवधनुषक टुकड़ी, ११.सतोखड़ी- सप्तर्षिक सात टा कुण्ड, १२.हरुषाहा- विमलागंगा, १३. करुणा- कोनो मन्दिर नहि मात्र मनोरम दृश्य, १४. बिसौल- विश्वामित्र मन्दिर, १५.जनकपुर।“मिथिलायदयश्च मध्यंते रिपवो इति मिथिला नगरी” - मिथिला जतए शत्रुकेँ मथल जाइत अछि- पाणिनीक विवरण ।
५३. चैनपुर सहरसा- मिथिलाक एकमात्र नीलकंठ मन्दिर, संगमे आदिकालीन भव्य काली-मन्दिर सेहो एहि गाममे अछि। महाशिवरात्रि आ कालीपूजा बड़ धूमधामसँ चैनपुरमे होइत अछि। ५४.धरहरा, बनमनखी, पूर्णियाँमे नरसिंह अवतारक स्थान अछि, एकटा खोह जेकाँ पैघ पाया अछि जाहिमे जे किछु फेकबैक तँ बड़ी काल धरि गों-गोँ अबाज होइत रहत। ई स्थान आब नरसिंह भगवानक मूर्ति आ मन्दिरक कारणसँ बेश विकसित भए गेल अछि। ५५.नेऊरी: दरभंगाक बिरौल प्रखण्डसँ १३.किलोमीटर पश्चिममे एकटा गढ़ अछि जे लोरिकक मानल जाइत अछि। ५६.दरभंगा कैथोलिक चर्च: १८९१मे स्थापित ई चर्च १८९७ केर भूकम्पमे क्षतिग्रस्त भए गेल। एकरा होली रोजेरी चर्च सेहो कहल जाइत अछि। ५७.सेंट फांसिस ऑसिसी चर्च मुजफ्फरपुरमे अछि। ५८.भिखा सलामी मजार: गंगासागर पोखरि दरभंगाक महारपर ई मजार अछि। ५९.दरभंगा टावर मस्जिद इस्लाम मतावलम्बीक एकटा भव्य मस्जिद आ धार्मिक स्थल अछि। ६०. मकदूम बाबाक मजार:ललित नारायण मिथिला विश्ववविद्यालय आ कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगाक बीच स्थित ई मजार हिन्दू आ मुस्लिम मतावलम्बीक एकटा पावन स्थान अछि। ६१.चम्पानगर:भागलपुरक पश्चिममे, आब नगरसँ सटि गेल अछि। ई जैन लोकनिक एकटा पवित्रस्थल अछि, एतए महावीर तीनटा बस्सावास कएने रहथि। दू टा जैन मन्दिर एतए अछि, जे जैनक बारहम तीर्थंकर वासुपूज्य नाथकेँ समर्पित अछि। ६२.बसैटी अभिलेख- पूणियाँमे श्रीनगर लग मिथिलाक्षरक ई अभिलेख मिथिलाक पहिल महिला शासक रानी इद्रावतीक राज्यकालक वर्णन करैत अछि। एकर आधार पर मदनेश्वर मिश्र ’एक छलीह महारानी’ उपन्यास सेहो लिखने छथि। बाइसी-बसैटी, अररिया मिथिलाक्षर शिलालेख- रानी इन्द्रावती (१७८४-१८०२) जे फूड-फॉर-वर्क आ अन्य कल्याणकारी कार्यक प्रारम्भ कएलन्हि केर मिथिलाक्षर अभिलेख एतए एकटा मन्दिरक ऊपरमे ताम्र-पत्रपर कीलित अछि जे निम्न प्रकारसँ अछि:- बसैटी (अररिया) बिहार, शिव मन्दिरक मिथिलाक्षर शिलालेखक देवनागरी रूपान्तरण।
वंशे सभा समाने सुरगन बिदिते भू सूरस्यावतिर्ना। राजाभूतकृष्णदेवोनृपति समरसिंहा मिधस्यात्मजातः॥ यस्मिन् राज्याभिषेकं फलयितु मिवतद्भक्तितुष्टोमहेशः। कैलाशाद् भूगतेद्योप्यधिन सतितरा वैद्यनाथेन नाम्नाः॥ तस्य तनुजः सुकृतिनृपवरौ विश्वनाथ राजा भूत। विरनारायण राजस्तस्याप्यासीद् सुतस्य॥ नरनारायण राजो नरपति कुल मौलि भूषणम् पुनः। अर्थिनकल्पद्रूमदूव सुरगन वंसावतंसोत्भूत॥२॥ तस्मादि वैरिकुल सूदन रामचन्द्र नारायणो नरपतिस्तनयो वभूक। संमोदिता दश दिशो निज कीर्ति चन्द्र ज्योतिस्नेहाभिरार्थ निवहः सुरिवतश्चयेण॥३।। यद्दानवारि परिवर्द्धित वारि राशि सक्तान्त कीर्ति विमलेन्दु मरिचिकाभिः। प्रोद्योतिता दशदिशः सतनुज इन्द्रनारायणोस्य कुलभूषण राजराजः॥४॥ तेनच सत्कुल जाता तनया मनबोध शझणिः कृतिनः। परिणीता बन्धु यत्नैस्त्रिलोचननाद्रि पुत्रीव॥५॥ यस्या प्रतापतरणावुदितेऽपिचिते चिन्तारजविन्द वनमालभते विकासम सौहृदय हृदय मकरन्द च उद्येन तत्रैव यद् गुणगणा मधुपन्ति योगात्॥६॥ यज्ञेवर्देव गणो द्विजाति निवहः सस्तायनत्यादरैः। दर्दानैपूर्णः मनोरथोऽर्थपरन सन्तितिनिः सज्जना॥७॥ गर्ज्जद वैरि मदान्धवारण चपश्चञ्चःपेतापांकुरौ। र्वस्याः सर्वदृशेकृतागुण चमेर्मस्याश्च भूमीतने॥८॥ श्री श्री इन्दुमति सतीमतिमती देवी महाराज्ञिका जाता मैथिल माण्डराऽमिछकुलात् मोधोसरी जानयाः। दानै कल्पलता मधः कृतवती श्री विष्णु सेवा परा पातिव्रत्य परायणाच सततं गंगेर सम्पारणी॥९॥ शाकेन्दु नवचन्द्र शैलधरणी संलक्षित फाल्गुने मासि श्रेष्ठतरे सिताहनि शितेपक्षे द्वितीयायां तिथौ। भूदेवैर्वर वैदिकेर्म्मठमयं निर्भारय सच्चिनिमिः तत्रे सेन्दुमति सुरस्य विधित्र प्राण प्रतिष्ठाव्यधात्॥१०॥ सोदरपुर सम्भव राजानुकम्पापजिवनिकृतिनः। श्री शुभनायस्य कृतिर्मिदं विज्ञेक्षं सन्रन्तताम्॥११॥ भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभूमि रहल अछि। प्रस्तुत अछि मिथिला रत्नक एकटा छोट संग्रह। एहि संग्रहकेँ पूर्ण करबाक हेतु अपन बहुमूल्य संग्रहकेँ ggajendra@videha.com केँ पठाऊ। आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार, सम्बन्धित फोटोग्राफर आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। फोटो सभ पठएबाक लेल धन्यवाद पाठकगण। साभार। पूर्णतः अव्यवसायिक उद्देश्य आ मात्र एकेडमिक प्रयोग लेल। वैदिक जनक 'वैदेह राजा' ऋगवेदिक कालक नमी सप्याक नामसँ छलाह, यज्ञ करैत सदेह स्वर्ग गेलाह, ऋगवेदमे वर्णन अछि। ओ इन्द्रक संग देलन्हि असुर नमुचीक विरुद्ध आ ताहिमे इन्द्र हुनका बचओलन्हि।शतपथ ब्राह्मणक विदेघमाथव आ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छथि आ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ। माथवक पुरहित गौतम मित्रविन्द यज्ञक/ बलिक प्रारम्भ कएलन्हि आ पुनः एकर पुनःस्थापना भेल महाजनक-२ क समयमे याज्ञवल्क्य द्वारा। निमि गौतमक आश्रमक लग जयन्त आ मिथि -जिनका मिथिला नामसँ सेहो सोर कएल जाइत छन्हि, मिथिला नगरक निर्माण कएलन्हि। निमीक जयन्तपुर वर्तमान जनकपुरमे छल, मिथीक मिथिलानगरीक स्थान एखन धरि निर्धारित नहि भए सकल अछि, अनुमानित अछि जनकपुरक लग । ’सीरध्वज जनक’ सीताक पिता छथि आ एतयसँ मिथिलाक राजाक सुदृढ़ परम्परा देखबामे अबैत अछि। ’कृति जनक’ सीरध्वजक बादक 18म पुस्तमे भेल छलाह। कृति हिरण्यनाभक पुत्र छलाह आ जनक बहुलाश्वक पुत्र छलाह। याज्ञवलक्य हिरण्याभक शिष्य छलाह, हुनकासँ योगक शिक्षा लेने छलाह। कराल जनक द्वारा एकटा ब्राह्मण युवतीक शील-अपहरणक प्रयास भेल आ जनक राजवंश समाप्त भए गेल (संदर्भ अश्वघोष-बुद्धचरित आ कौटिल्य-अर्थशास्त्र)। वाल्मीकि सीतापति राम वैदेही सीता लव कुश विदेघमाथव शतपथ ब्राह्मणक विदेघमाथव आ पुराणक निमि दुनू गोटेक पुरोहित गौतम छथि से दुनू एके छथि आ एतएसँ विदेह राज्यक प्रारम्भ। वाजसनेयी याज्ञवल्क्य याज्ञवल्क्य मिथिलाक दार्शनिक राजा कृति जनकक दरबारमे छलाह। हुनकर माताक वा पिताक नाम सम्भवतः वाजसनी छलन्हि। ओना हुनकर पिता देवरातकेँ मानल जाइत छन्हि। याज्ञवल्क्य १. शुक्ल यजुरवेद, २. शतपथ ब्राह्मण, ३.बृहदारण्यक उपनिषद आ ४.याज्ञवल्क्य स्मृतिक दृष्टा/लेखक छथि। याज्ञवल्क्य पत्नी मैत्रेयी याज्ञवल्क्यक दू टा पत्नी छलथिन्ह पहिल कात्यायनी आ दोसर मैत्रेयी। मैत्रेयी ब्रह्मवादिनी छलीह। कात्यायनीसँ हुनका तीनटा पुत्र छलन्हि- चन्द्रकान्ता, महामेघ आ विजय। अंगराज कर्ण वैशेषिक दर्शन कणाद महावीर जैन 599-527 महावीर विदेहमे छह टा बस्सावास बितेलन्हि। गौतम बुद्ध BC 563-483 ओना तँ महावीर विदेहमे छह टा बस्सावास बितेलन्हि मुदा बुद्ध एकोटा नै मुदा मिथिलामे बौद्ध धर्मक प्रभाव पछाति बढ़ल। बुद्ध वैशाली नगरीमे आम्रपालीक उद्यानमे लिच्छवीगणकेँ सन्देश देने छलाह। चाणक्य BC 350-283 धर्म आ विधिक क्षेत्रमे कौटिल्यक अर्थशास्त्र आ याज्ञवल्क्य स्मृतिमे बड्ड समानता अछि जे चाणक्यक मिथिलावासी होयबाक प्रमाण अछि।
अर्थशास्त्रमे(१.६ विनयाधिकारिके प्रथमाधिकरणे षडोऽध्यायः इन्द्रियजये अरिषड्वर्गत्यागः) कराल जनकक पतनक सेहो चर्चा अछि।
तद्विरुद्धवृत्तिरवश्येन्द्रियश्चातुरन्तोऽपि राजा सद्यो विनश्यति- यथा दाण्डक्यो नाम भोजः कामाद् ब्राह्मण कन्यायमभिमन्यमानः सबन्धराष्ट्रो विननाश करालश्च वैदेहः,...। चन्द्रगुप्त मौर्य चाणक्यक शिष्य BC 340-293 आर्यभट्ट वैज्ञानिक 476-550 पञ्जीमे आर्यभट्टक विवरण- (२७) (३४/०८) महिपतिय: मंगरौनी माण्डैर सै पीताम्ब र सुत दामू दौ माण्ड्र सै वीजी त्रिनयनभट्ट: ए सुतो आर्यभट्ट: ए सुतो उदयभट्ट: ए सुतो विजयभट्ट ए सुतो सुलोचनभट (सुनयनभट्ट) ए सुतो भट्ट ए सुतो धर्मजटीमिश्र ए सुतो धाराजटी मिश्र ए सुतोब्रह्मजरी मिश्र ए सुतो त्रिपुरजटी मिश्र ए सुत विघुजटी मिश्र ए सुतो अजयसिंह: ए सुतो विजयसिंह: ए सुतो ए सुतो आदिवराह: ए सुतो महोवराह: ए सुतो दुर्योधन सिंह: ए सुतो सोढ़र जयसिंहर्काचार्यास्त्रस महास्त्र विद्या पारङगत महामहोपाध्या य: नरसिंह:।। सिद्ध सरहपाद 700-780 सरहपाद-“सिद्धिरत्थु मइ पढ़मे पढ़िअउ ,मण्ड पिबन्तोँ बिसरउ एमइउ”।मिथिलामे अक्षरारम्भ सिद्धिरस्तु जकर पूर्वमे सिद्धिरस्तु, गणेशजीक अंकुश आँजी, लिखल जाइत अछि। मिथिलामे ई धारणा जे माँड़ पिलासँ स्मरण शक्ति क्षीण होइत अछि; ई सरहपादक मिथिलावासी होएबाक प्रमाण अछि। आदि शंकराचार्य 788-820 मंडन मिश्रसँ शास्त्रार्थ म.म.गोनू झा 1050-1150 करमहे सोनकरियाम गोनू झाक वर्णन पञ्जीमे अछि- महामहोपाध्याय धूर्तराज गोनू। पञ्जीक अनुसार पीढ़ीक गणना कएलासँ गोनूक जन्म ( गोनूक सोनकरियाम करमहे-वत्समे २४म पीढ़ी चलि रहल अछि) आर्यभट्टक बाद (आर्यभट्टक माण्डर-काश्यपमे ३९ म पीढ़ी चलि रहल अछि) आ विद्यापतिक पहिने (विद्यापतिक विषएवार बिस्फी-काश्यपमे १४म पीढ़ी चलि रहल अछि) लगभग १०५० ई.मे सिद्ध होइत अछि। कारण एहि तरहेँ एक पीढ़ीकेँ ४० सँ गुणा केला सँ आर्यभट्टक जन्म लगभग ४७६ ई. आ विद्यापतिक जन्म लगभग १३५० ई. अबैत अछि जे इतिहाससम्मत अछि। कृष्णाराम आ हाथी सुबरन मिथिलाक यादव (गुआर) जातिक लोकदेवता कृष्णाराम अपन हाथी सुबरनपर सवार। वंशीधर ब्राह्मण छेछन महराज मिथिलाक डोम जातिक लोकदेवता दीना- भदरी मिथिलाक मुसहर जातिक लोकदेवता ज्योति पँजियार मोतीदाइ मिथिलाक रजक (धोबि) जातिक लोकदेवता राजा सलहेस मिथिलाक दूधवंशी (दुसाध) जातिक लोकदेवता दुलरा दयाल गोनू झाक गाम भरौड़ाक राजकुमार, "बहुरा गोढिन नटुआ दयाल" लोककथाक मलाह कथानायक। भरौड़ामे एखनो हिनकर गहबर छन्हि। कालिदास बोधि कायस्थ राधाकृष्ण आ करताराम मल्लिक मिथिलाक अमता घरेनक प्रारम्भिक गबैय्या महाराज नान्यदेव मिथिलाक कर्णाट वंशक 1097 ई. मे स्थापना। 1147 ई. मे मृत्यु। मल्लदेव मिथिलाक कर्णाट वंशक संस्थापक नान्यदेवक पुत्र। मिथिलाक गंधवरिया राजपूत मल्लदेवकेँ अपन बीजीपुरुष मानैत छथि। महाराज हरसिंहदेव मिथिलाक कर्णाट वंशक। ज्योतिरीश्वर ठाकुरक वर्ण-रत्नाकरमे हरसिंहदेव नायक आकि राजा छलाह। 1294 ई. मे जन्म आ 1307 ई. मे राजसिंहासन। घियासुद्दीन तुगलकसँ 1324-25 ई. मे हारिक बाद नेपाल पलायन। मिथिलाक पञ्जी-प्रबन्धक ब्राह्मण, कायस्थ आ क्षत्रिय मध्य आधिकारिक स्थापक, मैथिल ब्राह्मणक हेतु गुणाकर झा, कर्ण कायस्थक लेल शंकरदत्त, आ क्षत्रियक हेतु विजयदत्त एहि हेतु प्रथमतया नियुक्त्त भेलाह। हरसिंहदेवक प्रेरणासँ- आ ई हरसिंहदेव नान्यदेवक वंशज छलाह, जे नान्यदेव कार्णाट वंशक १००९ शाकेमे स्थापना केने रहथि- नन्दैद शुन्यं शशि शाक वर्षे (१०१९ शाके)... मिथिलाक पण्डित लोकनि शाके १२४८ तदनुसार १३२६ ई. मे पञ्जी-प्रबन्धक वर्तमान स्वरूपक प्रारम्भक निर्णय कएलन्हि। पुनः वर्तमान स्वरूपमे थोडे बुद्धि विलासी लोकनि मिथिलेश महाराज माधव सिंहसँ १७६० ई. मे आदेश करबाए पञ्जीकारसँ शाखा पुस्तकक प्रणयन करबओलन्हि। ओकर बाद पाँजिमे (कखनो काल वर्णित १६०० शाके माने १६७८ ई. वास्तवमे माधव सिंहक बादमे १८०० ई.क आसपास) श्रोत्रिय नामक एकटा नव ब्राह्मण उपजातिक मिथिलामे उत्पत्ति भेल। मंत्री गणेश्वर मिथिलाक कर्णाट वंशक नरेश हरसिंहदेवक मंत्री। सुगतिसोपानमे मिथिलाक सांवैधानिक इतिहासक वर्णन। बिहुला चम्पानगरक बिहुला। गांगो देवी मिथिलाक मलाह जातिक लोकदेवता। गांगोदेवीक भगता अखनो मिथिलाक मलाह लोकनिमे प्रचलित अछि। मीरां साहेब मिथिलाक मुस्लिम लोकनिक बीच प्रसिद्ध लोकगाथाक नायक। अमर बाबा मिथिलाक मलाह जातिक लोकदेवता। गरीबन बाबा मिथिलाक धोबि जातिक लोकदेवता। लालबन बाबा मिथिलाक चर्मकार जातिक लोकदेवता। मोरंगक मोतीसायर अयाची मिश्र पन्द्रहम शताब्दीक भवनाथ मिश्र बड पैघ नैय्यायिक छलाह आ कहियो ककरोसँ कोनो वस्तुक याचना नहि कएलन्हि, ताहि लेल सभ हुनका अयाची मिश्र कहए लगलन्हि। शंकर मिश्र "बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥" क वक्ता। पन्द्रहम शताब्दीमे भवनाथ मिश्रक घरमे मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे शंकर मिश्रक जन्म भेल।शंकर मिश्र महाराज भैरव सिंहक कनिष्ठ पुत्र राजा पुरुषोत्तमदेवक आश्रित छलाह। एकर वर्णन रसार्णव ग्रंथमे भेटैत अछि। शंकर मिश्र कवि, नाटककार, धर्मशास्त्री आ न्याय-वैशेषिकक व्याख्याकार रहथि।शंकर मिश्र ग्रंथावली- १.गौरी दिगम्बर प्रहसन २.कृष्ण विनोद नाटक ३.मनोभवपराभव नाटक४.रसार्णव५.दुर्गा-टीका६.वादिविनोद७.वैशेषिक सूत्र पर उपस्कार८.कुसुमांजलि पर आमोद९.खण्डनखण्ड-खाद्य टीका १०.छन्दोगाह्निकोद्धार ११.श्राद्ध प्रदीप १२.प्रायश्चित प्रदीप। पक्षधर मिश्र विद्यापतिक समकालीन जयदेव मिश्र, जे अपन अकाट्य तर्कक कारण पक्षधर मिश्रक नामसँ जानल गेलाह। महाराज शिव सिंह मिथिला नरेश विद्यापतिक आश्रयदाता ओइनवार वंशक महाराज शिव सिंह। उगना महादेव माहादेव विद्यापतिक अहिठाम गीत सुनबा लेल उगना नोकर बनि रहैत छलाह। महाकवि विद्यापति ठाकुर 1350-1450 मैथिली भाषाक आदि कवि। अनेक गद्यग्रन्थहुक प्रणेता । कालजयी पद रचनाक अमर कवि । कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पुरुष परीक्षा, गोरक्षविजय, लिखनावली आदि ग्रंथ समेत विपुल संख्यामे कालजयी मैथिली पदक रचयिता । शंकरदेव 1449-1569 लक्ष्मीनाथ गोसाई 1793-1872 कवि चन्दा झा 1831-1907 मूलनाम चन्द्रनाथ झा, ग्राम- पिण्डारुछ, दरभंगा। कवीश्वर, कविचन्द्र नामसँ विभूषित। ग्रिएर्सनकेँ मैथिलीक प्रसंगमे मुख्य सहायता केनिहार।
कृति- मिथिला भाषा रामायण, गीति-सुधा, महेशवाणी संग्रह, चन्द्र पदावली, लक्ष्मीश्वर विलास, अहिल्याचरित आऽ विद्यापति रचित संस्कृत पुरुष-परीक्षाक गद्य-पद्यमय अनुवाद। सर जी. ए. ग्रियर्सन मैथिली प्रेमी 1851-1941 महाकवि लालदास 1856-1921 हिनक जन्म खड़ौआ ग्राममे १८५६ ई. मे तथा मृत्यु १९२१ ई. मे भेलन्हि । हिनक अनेक रचना उपलब्ध होइत अछि, यथा—रमेश्वर चरित रामायाण,’ स्त्री शिक्षा,’ ’सावित्री-सत्यवान,’ ’चण्डी चरित,’ ’विरुदावली,’ ’दुर्गा सप्तशती,’ तन्त्रोक्त मिथिला माहात्म्य’ आदि । मैथिलीक अतिरिक्त ई संस्कृत, हिन्दी तथा फारसीक ज्ञाता छलाह । कविताक अतिरिक्त गद्यमे सेहो ई रचना कएल । रमेश्वर चरित रामायण हिनक सभसँ विशिष्ट ग्रन्थ अछि । राम-कथाक उल्लेखमे सीताक महिमाक महत्त्व दए मिथिला तथा मैथिलीक प्रति ई अपन श्रद्धा तथा भक्तिकेँ व्यक्त कएल अछि । म. म. परमेश्वर झा 1856-1924 जन्म 1856 ई. मे तरौनी ग्राम (दरभंगा) जिलामे भेल छलन्हि तथा निधन 1924 ई. मे । संस्कृत व्याकरणक ई दिग्गज विद्वान् छलाह तथा ‘वैयाकरण केशरी’ क उपाधिसँ विभूषित छलाह । मैथिली साहित्यमे अपन कृति ‘मिथिलातत्त्व विमर्श’ तथा ‘सीमंतिनी आख्यायिका’क कारणे महत्त्वपूर्ण स्थान रखैत छथि । ई महाराज रमेश्वर सिंहक दरवारमे राज-पंडितक पदपर अनेको वर्ष धरि सुप्रतिष्ठित छलाह । अवधबिहारी प्रसाद शाही 1859-1929 सर्वतंत्र स्वतंत्र बच्चा झा 1860-1921 मधुबनी जिलांतर्गत लवाणी(नवानी) गाममे हिनकर जन्म भेलन्हि।हिनक कृति सभ अछि। 1. सुलोचन-माधव चम्पू काव्य, 2.न्यायवार्त्तिक तात्पर्य व्याख्यान, 3.गूढ़ार्थ तत्त्वलोक(श्री मदभागवतगीता व्याख्याभूत मधुसूदनी टीका पर) 4.व्याप्तिपंचक टीका 5.अवच्छदकत्व निरुक्त्ति विवेचन 6.सव्यभिचार टिप्पण 7.सतप्रतिपक्ष टिप्पण 8.व्याप्तनुगन विवेचन 9.सिद्धांत लक्षण विवेक 10.व्युत्पत्तिवाद गूढार्थ तत्वालोक 11.शक्त्तिवाद टिप्पण 12.खण्डन-ख़ण्ड खाद्य टिप्पण 13. अद्वैत सिद्धि चन्द्रिका टिप्पण 14.कुकुकाञ्जलि प्रकाश टिप्पण। म. म. शशिनाथ झा 1860-1930 मुंशी रघुनन्दन दास 1860-1945 गाम-सखबार, ज़िला-मधुबनी। "मिथिला नाटक" आ "दूतांगद व्यायोग"क लेखक। डॉ. सर आशुतोष मुखर्जी मैथिली प्रेमी 1864-1924 मधुसूदन ओझा 1866-1939 म.म. मुरलीधर झा १८६८-१९२९ जन्म- गाम- भराम (जिला मधुबनी), अपन मातृक श्यामसीधपमे बसि गेलाह। काशीसँ १९०६ ई. मे ई "मिथिलामोद" नामक मासिक मैथिली पत्रिकाक प्रकाशन शुरु केलन्हि। हितोपदेश (अनुवाद), मैथिली व्याकरण, "अर्जुन तपस्या" (उपन्यास) प्रकाशित। मुकुन्द झा "बख्शी" 1869-1936 जन्म हरिपुर बख्शी टोल ग्राम (मधुबनी जिला) मे 1869 ई. मे भेल तथा हिनक निधन काशीमे 1937 ई. मे भेलन्हि । हिनक लिखल संस्कृत मे अनेक ग्रंथ अछि । मैथिलीमे हिनक महत्त्वपूर्ण कृति अछि ‘मिथिला भाषामय इतिहास’ । एकर अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक स्फुट निबन्ध सभ सेहो प्रकाशित भेल । मिथिलाक ऐतिहासिक वर्णन सभसँ पहिने हिनके प्रकाशित भेल । एहि इतिहासमे मिथिलाक सर्वतोमुखी परिचय प्रस्तुत कएल गेल अछि । डॉ. सर गंगानाथ झा 1871-1941 जन्म मधुबनी जिलाक सरिसब-पाही ग्राममे 1871 ई. मे भेल तथा निधन प्रयागमे 1941 ई. मे । ई अपना समयक संस्कृतक प्रकाण्ड विद्वान म. म. चित्रधर मिश्र, म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. शिवकुमार शास्त्नीसँ मीमांसा एवं दर्शनक अध्ययन कएलन्हि तथा दर्शनक विभित्र दुरूह ग्रंथक अङरेजीमे अनुवाद कए पाश्चात्य संसारक ध्यान आकृष्ट कएलन्हि । ई गवर्नमेन्ट संस्कृत कॉलेज बनारसमे 1917 सँ 1923 धरि प्रिसिपल छलाह तथा एलाहाबाद विश्वविद्यालयक 1923 सँ 1932 पर्यन्त कुलपति रहलाह । मैथिलीमे हिनक सम्पादित चन्दा झाक ‘महेशवाणी संग्रह’ तथा ‘गणनाथ-विन्ध्यनाथ पदावली’ प्रकाशित अछि । मैथिली साहित्य परिषद् द्वारा प्रकाशित हिनक ‘वेदान्त दीपक’ (दर्शन) विषयक अपूर्व ग्रंथ अछि । एहिसँ भिन्न हिनक निबंध सभ सामयिक मैथिली पत्न-पत्निकामे प्रकाशित अछि । अरविन्द घोष मैथिली प्रेमी 1872-1950 जनार्दन झा जनसीदन 1872-1951 रासबिहारी लालदास 1872-1940 "मिथिला दर्पण" क लेखक। रामचन्द्र मिश्र "चन्द्र" 1873-1937 मैथिल प्रभा महावैय्याकरणाचार्य पं दीनबन्धु झा 1878-1955 भवनाथ मिश्र 1879-1933 मैथिली शब्दकोष "मिथिला शब्द प्रकाश"क लेखक। कीर्त्यानन्द सिंह टंकनाथ चौधरी 1884-1928 भवप्रीतानन्द ओझा 1886-1970 कपिलेश्वर मिश्र 1887-1987 गाम सलेमपुर, थाना- उजियारपुर, जिला समस्तीपुर। “सीतादाइ” पुस्तक भंडारसँ प्रकाशित। बालकृष्ण मिश्र 1888-1948 सुनीति कुमार चटर्जी मैथिली प्रेमी 1890-1977 बलदेव मिश्र 1890-1975 हिनक जन्म सहरसा जिलाक वनगाँव ग्राममे 1890 ई. मे एवं निधन फरवरी, 1975मे भेलन्हि । प्रारम्भमे पं. गेनालाल चौधरीसँ ज्यौतिष पढ़ि ई काशीमे पं. सुधाकर द्विवेदीजीक शिष्य भेलाह । बहुत वर्ष धरि सरस्वती भवन (वाराणसी) मे हस्तलिखित विभागमे कार्य कएल । पश्चात् पटनाक काशीप्रसाद जयसवाल रिसर्च संस्थानमे अनेक प्राचीन तिब्बती हस्तलिपिकेँ देवनारीमे लिप्यन्तरित कएल। ’मिथिलामोद’ प्रकाशन एवं म.म. मुरलीधर झाक प्रोत्साहनसँ ज्यौतिषीजी १९१० ई.सँ ’मोद’मे लिखए लगलाह। हिनक प्रकाशित रचना अछि—’रामायण शिक्षा’, ’चन्दा झा’, ’संस्कृति’, ’भारत शिक्षा’, ’गप्प-सप्प विवेक’, ’समाज’ आदि । पण्डितजी यावत् धरि पटना रहलाह बराबरि ’मिहिर’मे लिखैत रहलाह । आचार्य रामलोचन शरण 1889-1971 सीतामढ़ीमे जन्म आ दरभंगामे मृत्यु। "मैथिली रामचरित मानस" सहित तुलसीदासक समस्त रचनाक मैथिलीमे लेखन। मिथिलाक्षरमे मैथिलीक प्रकाशनक प्रारम्भ केनिहार। प्रकाशन संस्था "पुस्तक भण्डार", लहेरियासराय, पटनाक संस्थापक। सीताराम झा 1891-1975 जन्म चौगामा ग्राममे १८९१ ई.मे तथा निधन १९७५ ई. मे भेलन्हि । संस्कृतमे ज्योतिष शास्त्रक अनेक रचनाक .अतिरिक्त मैथिलीमे हिनक ’अम्ब चरित’ (महाकाव्य), ’सूक्ति सुधा,’ लोक लक्षण,’ ’पढ़ुआचरित,’ ’पूर्वापर व्यवहार,’ उनटा बसात,’ ’अलंकार दर्पण’, ’भूकम्प वर्णन’, ’काव्य षट-रस’, ’मैथिली काव्योपवन’, आदि ग्रन्थ उपलब्ध अछि । हिनक गीताक मैथिली अनुवाद सेहो उपलब्ध अछि । मिथिला मोदक सम्पादन १९२० ई.सँ १९२७ ई. धरि ई कएल । ताराचरण झा 1892-1928 बद्रीनाथ झा 1893-1973 जन्म मधुबनी जिलाक सरिसव ग्राममे १८९३ ई. मे भेलन्हि तथा १९१४ ई. मे ई काशी लाभ कएलिन्ह । बहुत दिन धरि ई मुजफ्फरपुरक धर्म्म समाज संस्कृत कॉलेजमे साहित्यक अध्यापक छलाह । मैथिलीक विख्यात कवि लोकनि यथा सुमनजी, मधुपजी, मोहनजी आदि हिनक शिष्य छथिन्ह । संस्कृत साहित्यमे हिनक अनेक रचना अछि । जाहिमे राधा परिणय’ (महाकाव्य) क स्थान विशिष्ट अछि । मैथिलीमे हिनक ’एकावली परिणय’ (महाकाव्य) एक नवीन कीर्तिमान स्थापित कएलक। कोनो अलंकारक दृष्टान्त तकबाक हेतु ’एकावली परिणय’ पर्याप्त अछि । जीवनाथ राय 1893-1964 उमेश मिश्र 1895-1967 जन्म मधुबनी जिलाक गजहरा ग्राममे 1895 ई. मे भेल छलन्हि । ई एकहतरि वर्षक आयुमे १९६७ ई. मे प्रयागमे स्वर्गवासी भेलाह । ई अपन स्वनाम-धन्य पिता म. म. जयदेव मिश्र तथा म. म. डा. गंगानाथ झाक सान्निध्यमे विद्यार्जन कएल। १९२३ सँ १९५९ धरि मिश्रजी एलाहाबाद विश्वविद्यालयमे संस्कृतक प्राध्यापक छलाह । दरभंगा ’मिथिला शोध संस्थान’क निदेशक पदपर किछु समय कार्य कए १९६२ सँ ६५ धरि कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालयक कुलपति रहलाह ।म. म. मुरलीधर झासँ प्रभावित भए ’मिथिलामोद’मे ई लिखब प्रारम्भ कएलन्हि तथा अपन विविध प्रकारक रचनासँ मैथिलीक गद्यकेँ समृद्ध् कएलन्हि । मैथिलीमे हिनक प्रसिद्ध ग्रन्थ अछि—’कमला’ (शेक्सपीयरक ’टेम्पेस्ट’क भावानुवाद), ’नलोपाख्यान’, ‘मैथिली-संस्कृति’ तथा अनेक वर्णनात्मक एवं आलोचनात्मक निबन्ध; मनबोधक कृष्णजन्मक सम्पादन, विद्यापतिक कीर्तिलता, कीर्तिपताका, गोरक्ष विजय आदिक अनुवाद-सम्पादन सेहो कएल। बाबू धनुषधारी लाल दास 1895-1965 मैथिलीमे बिहारी कविक अनुवाद प्रकाशित। अमरनाथ झा 1897-1955 सरिसब पाहीटोल ग्राममे १८९७ ई. मे भेल । हिनक निधन पटनामे जखन ई बिहार लोक सेवा आयोगक अध्यक्ष छलाह, १९५५ मे भेलन्हि । ई एलाहाबाद विश्वविद्यालयक नओ वर्ष धरि कुलपति रहि पश्चात् हिन्दू विश्वविद्यालयक सेहो कुलपतिक पदकेँ सुशोभित कएलन्हि । ई अंगरेजीक प्रकाण्ड विद्वान् छलाह, ताहि संग हिन्दी, उर्दू, फारसी, संस्कृत, बङला एवं मैथिलीक सेहो अद्भुत विद्वान् छलाह ।मैथिलीमे हिनका द्वारा सम्पादित ‘हर्षनाथ काव्य ग्रन्थावली’ तथा ‘गोविन्ददासक श्रृग्ङारभजन’ महत्त्वपूर्ण अछि । एहिसँ भिन्न हिनक मैथिली साहित्य परिषदक अध्यक्षीय भाषण तथा अन्य लेख प्रकाशित अछि । भोलालाल दास 1897-1977 हिनक जन्म दरभंगा जिलाक कसरौर मे भेलन्हि । साहित्य सर्जनाक अतिरिक्त अपन संगठन क्षमता तथा मैथिली साहित्यक सर्वतोमुखी विकासक हेतु सतत तत्पर रहबाक कारणेँ भोला बाबू मैथिली संसारक एक स्तम्भक रूपमे रहलाह । हिनक निधन 1977 ई. मे भेल । मैथिलीक प्रचार-प्रसारमे ई अपन जीवन समपित कएने छलाह। पाठ्यक्रममे मैथिलीकेँ स्थान हो ताहि हेतु ई बीड़ा उठओलन्हि । विद्यालय स्तरक अनेक पोथीक निर्माण कएल । मैथिली साहित्य परिषदक ई संस्थापक मण्डलक सदस्य छलाह । 1931 सँ 1940 ई. पर्यन्त ओकर प्रधान मन्त्नी रहलाह । हिनक मन्त्नित्वकालमे ’भारती’ नामक मासिक पत्नक प्रकाशन भेल । एहिसँ पूर्व (१९२९-३१) कुशेश्वर कुमरजीक संग संयुक्त सम्पादनमे ’मिथिला’ नामक पत्न चलाओल । ई नवीन एवं प्रगतिशील विचारक लोक छलाह । ननव लेखककेँ प्रोत्साहित करब, शैलीमे एकरूपता आनब, नव प्रकाशनसँ मैथिलीक साहित्य भंडारक पूर्त्ति करब हिनक कर्त्तव्य बनि गेल छल । हिनक लिखल ‘मैथिली व्याकरण’ तथा हिनकहि द्वारा सम्पादित ‘गद्यकुसुमांजलि बहुत दिन धरि विद्यालयमे पढ़ाओल जाइत रहल । हिनक लिखल अनेक निबन्ध समालोचना, कविता, संस्मरण, जीवनी-साहित्य मैथिलीक पत्र-पत्निकामे छिड़िआएल अछि । कुमार गंगानन्द सिंह 1898-1971 जन्म—बनैली राजपरिवारमे 24-9-1898, मृत्यु:-श्रीनगर पूर्णिञा 17-1-1970 । भूतपूर्व शिक्षामंत्नी, बिहार एबं कुलपति, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ।रचना—अगिलही (अपूर्ण उपन्यास) तथा अनेक कथा एवं एकांकी । युगक अनुरूप सामाजिक कुरीति आदिकेँ आधार बनाए सुधारवादी दृष्टिएँ कथा सभहिक रचना । ब्रजमोहन ठाकुर 1899-1977 रामवृक्ष बेनीपुरी 1899-1967 भुवनेश्वर प्रसाद 1902- दरभंगा जिलाक बनौली गाम, निवास रायसाहेब पोखरि लहेरियासराय। सरस्वती स्कूल लहेरियासरायमे १९३०-१९६४ ई. धरि अध्यापन। मैथिलीमे "बाल रामायण” प्रकाशित। जयनारायण झा 'विनीत' 1902-1991 सुधाकर झा "शास्त्री" 1904-1974 दामोदर लाल दास विशारद 1904-1981 बबुआजी झा 'अज्ञात' 1904-1996 २००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। श्रीवल्लभ झा हाटी 1905-1940 रमानाथ झा 1906-1971 जन्म दरभंगा जिलाक उजान (धर्मपुर) ग्राममे 1906 ई. मे एवं हिनक निधन दरभंगामे १९७१ ई. मे भेलन्हि । 1930 ई. मे अङरेजीमे एम. ए. कएलाक बाद ई कतोक वर्ष धरि मधेपुर उच्च विद्यालयक प्रधानाध्यापक छलाह, तकरा बाद दरभग्ङा-राज-लाइब्रेरीक पुस्तकालयाध्यक्षक रूपमे 1936 सँ अन्तिम समय धरि रहलाह । 1952 सँ 62 चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे प्रो. झा अङरेजीक प्राध्यापक रूपेँ काजka पश्चात् ओही कॉलेजमे मैथिली विभागाध्यक्ष बनाओल गेलाह । 1965 मे रमानाथ बाबू साहित्य अकादमीक मैथिलीक प्रतिनिधि निर्वाचित भेलाह जाहि पद पर ओ जीवनक अन्त समय तक रहलाह । हिनक रचनाक क्षेत्न बहुत व्यापक छल । हिनक अनुसंधानात्मक निबंक दू गोट संग्रह ‘निबन्धमाला’ तथा ‘प्रबंध संग्रह’ प्रकाशित अछि । संकलित सम्पादित पुस्तक सभमे ‘मैथिली पद्य-संग्रह’, ‘मैथिली गद्य-संग्रह’, ‘प्राचीन गीत’, ‘कथा काव्य’, ‘नवीन गीत’, ‘कविता कुसुम’, ‘कथा संग्रह’ आदि अछि । ‘कथासरित्सागर’क आधार पर प्राञ्जल गद्य शैलीमे हिनक ‘उदयन-कथा’ तथा ‘बररुचि-कथा’ बेश ख्याति पओलक । व्याकरणक ‘मिथिला भाषा प्रकाश’, ‘अलक्ङारप्रवेश’ आदि अनेक ग्रन्थ प्रकाशित अछि । ‘मैथिली साहित्य पत्र’ त्नैमासिक पत्रिकाक संपादक। काशीकान्त मिश्र "मधुप" 1906-1987 १९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य) पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त मैथिलीक प्रशस्त कवि आ मैथिलीक प्रचार-प्रसारक समर्पित कार्यकर्ता ’झंकार’ कवितासँ क्रान्ति गीतक आह्वान कएलनि । प्रकृति प्रेमक विलक्षण कवि । ’घसल अठन्नी कविताक लेल कथ्य आ शिल्प-संवेदना—दुहू स्तर पर चरम लोकप्रियता भेटलनि। कांञ्चीनाथ झा "किरण" 1906-1988 जन्म स्थान-धर्मपुर,लोहना रोड, दरभंगा बिहार । मैथिली भाषा आंदोलनमे महत्वपूर्ण भूमिका। ’पराशर’ महाकाव्य लेल साहित्य अकादमी ओ ’कथा किरण’ लेल वैदेही पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चंद्रग्रहण (उपन्यास), वीर-प्रसून (बालकथा), जय जन्मभूमि (एकांकी), विजेता विद्यापति (नाटक), कथा-किरण (कथा-संग्रह), किरण-कवितावली, कतेक दिनक बाद (कविता-संग्रह), पराशर (महाकाव्य) ओ किरण-निबंधावली (निबंध-संग्रह) आदि।१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)पर मैथिली मे साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। श्यामानन्द झा 1906-1949 रमाकांत झा, नेपाल 1907-1971 ईशनाथ झा 1907-1965 बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन पद्धतिक काव्य-रचनाक विलक्षण संयोग हिनकर कवितामे भेटैत अछि । दलित वर्ग, शोषणक समस्या, स्वदेश प्रेमक यथार्थवादी रचनाक संग संग व्यक्तिनिष्ठ कल्पनाक अनेक विशिष्ट कविता मैथिलीमे लिखलनि । भुवनेश्वर सिंह 'भुवन' 1907-1944 अपन खाढ़ीक बहुमुखी प्रतिभाक कवि । प्राचीन आ नवीन रीतिक कविताक रचना विपुल संख्यामे कएलनि । ’भुवन भारती’ कविता संकलन प्रकाशनसँ मैथिली ओज आ नव चेतनाक शंख फुकलनि। हरिमोहन झा 1908-1984 हिनकर मैथिली कृति १९३३ मे “कन्यादान” (उपन्यास), १९४३ मे "द्विरागमन”(उपन्यास), १९४५ मे “प्रणम्य देवता” (कथा-संग्रह), १९४९ मे “रंगशाला”(कथा-संग्रह), १९६० मे “चर्चरी”(कथा-संग्रह) आऽ १९४८ ई. मे “खट्टर ककाक तरंग” (व्यंग्य) अछि। मृत्योपरांत १९८५मे (जीवन यात्रा, आत्मकथा)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। रामधारी सिंह 'दिनकर' मिथिला रत्न 1908-1974 माँगनि खबास 1908-1943 संगीतज्ञ पचगछियामे जन्म आ अल्प बएसमे मृत्यु। पचगछियाक रायबहादुर लक्ष्मीनारायण सिंहक शिष्य। सुभद्र झा 1909-2000 "फॉर्मेशन ऑफ मैथिली लैंगुएज"क लेखक। १९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। स्नेहलता 1909-1993 गाम- डरोड़ी, समस्तीपुर। पूर्ण नाम- कपिलदेव ठाकुर "स्नेहलता"। रामाश्रयी रसिक सम्प्रदायक संत। हिनकर रचित वैदेही विवाह संकीर्तन, विनय पदावली, शिववाणी, चेतावनी, झूला-संकीर्तन, सीतावतरण प्रबन्धकाव्य आ स्नेहशतक- दोहावली-कवित्त आदि मिथिलाक महिला वर्ग आ संकीर्तनकार लोकनिक कंठमे परिव्याप्त अछि आ लोकमंगलक अनुष्ठानमे व्यापक रूपेँ व्यवहृत अछि। हिनक "वैदेही विवाह" मिथिलाक कीर्तनिया नाट्य परम्पराकेँ लोकरुचिक अनुकूल बनौने अछि। कालीकान्त झा 1909- मूल गाम ढंगा (हरिपुर), मधुबनी। फेर मातृक बरदबट्टा,पो. उरलाहा, भाया- मदनपुर, जिला-पूर्णियामे बसि गेलाह। सतघरा (मधुबनी), मदनपुर आ काशीमे पाणिनी व्याकरणक अध्ययन। "हनुमान चरित"क लेखक। तंत्रनाथ झा 1909-1984 जन्म १९०९ ई मे दरभंगा जिलाक धर्मपुर ग्राममे भेलन्हि मुत्यु ४-५-’८४,चन्द्रधारी मिथिला कॉलेजमे अर्थशास्त्नक प्राध्यापक छलाह । अवकाश ग्रहण क काव्य साधनामे लागल रहलाह । महाकाव्य, मुक्तक, एकांकी सभ विधामे ई सिद्ध हस्त छलाह । हिनक ’कीचक वंध’ महाकाव्य अङरेजीक ‘ब्लैक्ङ भर्स’ (अमित्नाक्षर छन्द) म लिखल अछि । मैथिलीमे ’सौनेट’ एवं ब्लैक्ङ भर्स’क ई प्रथम प्रयोक्ता थिकाह । संस्कृत परम्परामे काव्य रचना करितहुँ पाश्चात्य शैलीक नवीनता हिनका रचनामे भेल । हिनक ’कीचक वध’ ओ ’कृष्ण चरित’ महाकाव्य—‘मङ्गल-पञ्चाशिका’ एवं ‘नमस्या’ मैथिली साहित्यमे अपन विशिष्ट स्थान रखैछ । तकर अतिरिक्त मुक्तक काव्यमे विषय वस्तुक व्यापकता एवं शिल्प शैलिक प्रचुरता अबैत अछि । एक दिश यदि प्राचीन ढंगक ईश्बर वन्दनाक रचना कएलन्हि तँ दोसर दिस ‘सौनेट’ (चतुर्दशपदी) ‘बैलेड’ आदि लिखबामे पूर्ण सफलता प्राप्त कएलन्हि ।‘कृष्ण चरित’ महाकाव्य पर हिनका 1979 ई क साहित्यक अकादमी पुरस्कार भेटलन्हि । 1980 ई. मे हिनका अभिनन्दन ग्रन्थसमर्पित कएल गेलन्हि । जीवनाथ झा 1910-1977 सुरेन्द्र झा 'सुमन' 1910-2002 जन्म: ग्राम : बल्लीपुर, जिला-समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: प्रतिपदा, अर्चना,साओन-भादव,अंकावली, अन्तर्नाद, पयस्विनी, उत्तरा आदि तीससँ अधिक मौलिक कविता-पुस्तक;पुरुष-परीक्षा, अनुगीतांजलि, ऋतु श्रृंगार तथा वर्णरत्नाकर, पारिजात-हरण, कृष्णजन्म, आनन्द-विजय आदि कतिपय ग्रन्थक अनुवाद-संपादन; ’मैथिली काव्य पर संस्कृतक प्रभाव’ नामक समीक्षा-ग्रंथ। ’पयस्विनी’ लेल १९७१ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार तथा ’उत्तरा’ पर १९१८ मे मैथिली अकादेमीक विद्यापति पुरस्कार प्राप्त । मैथिलीक प्रथम दैनिक पत्र ’स्वदेश’क लब्धप्रतिष्ठ सम्पादक।१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। २००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;यात्री-चेतना पुरस्कार। पं. रामचन्द्र झा 1910- गाम तरौनी। काशी मिथिला ग्रन्थमालाक सम्पादक। 'नागार्जुन' वैद्यनाथ मिश्र 'यात्री' 1911-1998 जन्म अपन मामागाम सतलखामे भेलन्हि, जे हुनकर गाम तरौनीक समीपहिमे अछि, जिला-दरभ्गा । मूल नाम: वैद्यनाथ मिश्र । हिन्दीमे नागार्जुन नामे प्रख्यात । प्रकाशित कृति: चित्रा, पत्रहीन नग्न गाछ (मैथिली कविता-संग्रह); पारो, बलचनमा, नवतुरिया (मैथिली उपन्यास); युगधारा, सतरंगे पंखोंवाली, प्यासी पथराई आंखें, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार हजार बाहो वाली, पुरानी जूतियो का कोरस, रत्नगर्भा, ऐसे भी हम क्या ! ऐसे भी तुम क्या ! (हिन्दी कविता-संग्रह); रतिनाथ की चाची, बलचनमा, नई पौध, बाबा बटेसरनाथ, वरुण के बेटे, दुखमोचन, कुम्भीपाक, अभिनन्दन, उग्रतारा, इमरतिया (हिन्दी उपन्यास); आसमान में चन्दा तैरे (कहानी संग्रह); भस्मांकुर (हिन्दी खण्ड काव्य); अन्नहीनम् क्रियाहीनम् (निबन्ध-संग्रह); गीत गोविन्द; मेघदूत; विद्यापति के गीत, विद्यापति की कहानियां (अनुवाद) । ’पत्रहीन नग्न गाछ’ लेल १९६८ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त । यायावरी जीवन । मैथिली प्रतिनिधिक रूपमे रूस भ्रमण । नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” ), हिन्दी आ मैथिली कवि, १९९४ ई.मे साहित्य अकादेमीक फेलो (भारत देशक सर्वोच्च साहित्यक पुरस्कार)। आरसीप्रसाद सिंह 1911-1996 जन्म: ग्राम-एरौत, जिला-समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: माटिक दीप, पूजाक फूल, सूर्यमुखी (कविता-संग्रह), मेघदूत (अनुवाद), आरसी, नन्ददास, संजीवनी (हिन्दी काव्य संग्रह)। ’सूर्यमुखी’ लेल १९८४ मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त । गुरु जयदेव मिश्र 1911-1991 शिष्य गंगानाथ झा यशोधर झा मिथिला वैभव, दर्शन मैथिली पोथीपर 1966 मे पहिल साहित्य अकादमी पुरस्कार मैथिली लेल प्राप्त। वैद्यनाथ मल्लिक 'विधु' 1912-1987 १९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य) लेल मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कार। भीम झा 1912- पूर्णिया जिलाक मदनपुर गामक। जन्म ५ नवम्बर १९१२ ई.। बनैलीक श्री श्यामानन्द सिंहक अध्यक्षतामे “नारायण संकीर्तन महामण्डली”क स्थापना। राधानाथ दास १९१२- उपेन्द्र ठाकुर 'मोहन' 1913-1980 जन्म १९१३ ई. मे दरभंगा जिलाक चतरिया ग्राममे भेलन्हि । मृत्यु २४-५-१९८० । संस्कृत शिक्षामे साहित्याचार्य ओ बड़ौदा राजक विद्वत्-परीक्षासँ ‘साहित्य-रत्न’क उपाधिसँ विभूषित भेलाह । दैनिक आर्यावर्तमे आदिअहिसँ, पश्चात् १९६० सँ मिथिला मिहिरक उप-सम्पादक एवं सह-सम्पादक रूपेँ कार्य करैत १९७७ मे सेवा निवृत भेलाह ।मोहनजी करीब पचास वर्ष साहित्य साधनामे लागल रहलाह । विजयानन्द, कुंजरंजन, सुदर्शन, पुण्डरीक, शास्त्नी, बामन आदि छद्म नामसँ पत्न-पत्निकामे विविध विषयपर हिनक लेख सभ प्रकाशित भेल अछि ।मोहन जीक ‘बाजि उठल मुरली’मे १०१ गोट कविताक संकलन अछि जाहिमे हिनक सुदीर्घ काव्य-आराधनाक विभित्र विचारधाराक ओ विभित्र अनुभूतिक सामग्री उपलब्ध अछि । एहि पुस्तकपर मोहन’जीकेँ १९७८ मे साहित्य अकादम् पुरस्कार भेटलन्हि। एहिसँ बहुत पूर्व हिनक ’फुलडाली’ नामक कविता संग्रह सेहो प्रकाशित भेल छल । जयनाथ मिश्र 1913-1985 श्रीकांत ठाकुर "विद्यालंकार" पञ्जीकार मोदानन्द झा 1914-1998 लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया। पिता-स्व. श्री भिखिया झा। गुरु- पञ्जीकार भिखिया झा। पूर्णिया जिलाक बनैली लगक शिवनगर गामक। जन्म २२ सितम्बर १९१४ ई.।सौराठमे अपन मौसा स्व. लूटनझा सँ पंजीशास्त्रक अध्ययन। १९४८-१९५१ ई. धरि दरभंगामे रहि आचार्य रमानाथ झाकेँ पाँजि पढ़ओलनि।शास्त्रार्थ परीक्षा- दरभंगा महाराज कुमार जीवेश्वर सिंहक यज्ञोपवीत संस्कारक अवसर पर महाराजाधिराज(दरभंगा) कामेश्वर सिंह द्वारा आयोजित परीक्षा-1937 ई. जाहिमे मौखिक परीक्षाक मुख्य परीक्षक म.म. डॉ. सर गंगानाथ झा छलाह। आनन्द झा 1914-1988 बाबू साहेब चौधरी 1916-1998 दरभंगा जिलाक दुलारपुर गामक। १९४३ ई. मे जीविकार्थ कलकत्ता अएलाह। नवम कक्षामे स्वराज्य आन्दोलनमे बाझि कए शिक्षाक इतिश्री। कलकत्तामे स्थानीत मैथिल संघमे प्रवेश। कलकक्तामे मैथिली आर्ट प्रेस. ९/१, खिलात घोष लेन, कलकत्ता-७००००६ सँ मैथिली-मिथिला आन्दोलनमे सक्रिय। “कुहेस” आ “चाणक्य” दूटा नाटक। १९७१-७९ धरि “मिथिला दर्शन” आ “मैथिली दर्शन” मैथिली मासिकक सम्पादन। लक्ष्मण झा 1916-2000 शुद्धदेव झा 'उत्पल' 1916- गोड्डा जिलाक अलखदत्त-महेनपुरक निवासी। जन्म १६ अक्टूबर १९१६ ई.। संगीत भाष्कर राजकुमार श्यामानन्द सिंह १९१६-१९९४ रामचरित्र पाण्डेय "अणु" १९१७-२०१० लक्ष्मीनाथ झा मिथिला चित्रकला 1917-1990 उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' 1917-2002 जन्म स्थान-हरिपुर वकशीटोल, मधुबनी, बिहार । १९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । साहित्य अकादेमीक अनुवाद पुरस्कार प्राप्त । प्रकाशित कृति: कुमार, दू पत्र (उपन्यास), विडंबना, भजना भजले (कथा-संग्रह), पतन संन्यासी, प्रतीक (काव्य), महाभारत (पहिल दू पर्व) आदि। मनमोहन झा 1918-2009 जन्म सरिसबमे, अश्रुकण, वीरभोग्या, मिथिलाक निशापुरमे।२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)पर मृत्योपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार। ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म' 1918-1986 जन्म स्थान-बहेड़ा, दरभंगा बिहार । १९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । उपन्यासकार, कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कोब्रागर्ल, कनकी, अर्द्धनारीश्वर, लोरिक विजय, नैका-बनिजारा, लवहरि-कुशहरि, राय रणपाल, आदिम गुलाम आदि उपन्यास ओ कंठहार (नाटक) आदि। पं. सहदेव झा १९१९- "मिथिला की धरोहर" पोथी प्रकाशित। स्वर्गीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद मंडल, राजनेता 1919-1982 जन्म २५ अगस्त १९१९, मृत्यु १३ अप्रैल १९८२ बुद्धिधारी सिंह रमाकर 1919-1991 जन्म मधुबनीमे 1919 ई. मे भेल । अपन पिता स्व. क्षेमधारी सिंहसँ विभित्र विषयक शिक्षा ग्रहण कएलन्हि । ई रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीक मैथिली विभागाध्यक्ष छलाह । जतएसँ अवकाश प्राप्त कएलन्हि । बाल्या-वस्थहिसँ ई कविकार्यमे लागल रहलाह अछि । संस्कृत तथा मैथिली दुनू भाषामे हिनक रचना प्रकाशित अछि । यथा—मैथिलीमे ‘प्रयास’ (कथा-संग्रह), ‘मधुमती’, ‘अमरबापू’ (कविता-संग्रह), ‘शरशय्या’ (खंड-काव्य) ‘स्मृति साहस्री’ (महाकाव्य) आदि । प्रो. रामशरण शर्मा १९२०-२०११ 1 सितम्बर 1920 बरौनी (बिहार) मे जन्म , मृत्यु 21 अगस्त 2011 पटनामे। 15 देशी-विदेशी भाषामे 115 से बेशी किताब प्रकाशित, पहिल किताब "विश्व इतिहास की भूमिका (दू खंडमे) 1949 मे प्रकाशित, अंतिम पुस्तक "इकोनामिक हिस्ट्री आफ अर्ली इंडिया", भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषदक संस्थापक अध्यक्ष, जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप, यूजीसी नेशनल फेलोशिप आ वीके राजवाड़े लाइफटाइम अवार्ड। आद्याचरण झा 1920- फणीश्वर नाथ 'रेणु' मिथिला रत्न 1921-1977 जयकान्त मिश्र, पुत्रीक संग आ' नेहरूक संग 1922-2009 चन्द्र भानु सिंह 1922- २००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। सुधांशु शेखर चौधरी 1922-1990 जन्म दरभंगाक मिश्रटोलामे 1922 ई. मे भेलन्हि तथा मृत्यु 1990 ई. मे भेलन्हि । किछु दिन विभिन्न जीविकामे रहि पश्चात् साहित्यकारक जीवन प्रारम्भ कएल । किछु दिन ‘बैदेही’क सम्पादन श्री सुमनजी एवं श्री कृष्णकान्त मिश्रजीक संग कएल तत्पश्चात् 1960 ई. सँ 1982 ई. धरि पटनामे ‘मिथिला मिहिर’’क सफल सम्पादन कएल ।हिनक दू गोट नाट्यकृति-‘भफाइत चाहक जिनगी’, लेटाइत आँचर’, तथा ‘पहिल साँझ’ हिनक नाटकक नीक व्यावहारिक अनुभवक परिचायक अछि ।छद्मनामसँ हिनक दू गोट उपन्यास मिहिर’ मे प्रकाशित भेल अछि । हिनक उपन्यास ई वतहा संसार’ जे मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित भेल आ जाहि पर 1980 क साहित्य अकादमीक पुरस्कार देल गेल । गोविन्द झा 1923- जन्मस्थान- इसहपुर, सरिसब पाही, मधुबनी, बिहार । सिद्ध कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार, भाषा वैज्ञानिक ओ अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार, साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कारसँ सम्मानित। बिहार सरकारसँ कामिल बुल्के पुरस्कार, ग्रियर्सन पुरस्कार आदिसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: उपन्यास, नाटक, कथा, कविता, भाषा विज्ञान आदि विभिन्न विधामे अड़तीस टा पोथी प्रकाशित । प्रकाशन: सामाक पौती,नेपाली साहित्यक इतिहास (अनु) आदि । १९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)पुस्तक लेल सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2006 सँ सम्मानित। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१० (समग्र योगदान लेल) योगानन्द झा 1923-1986 हिनक जन्म मधुबनी जिलाक कोइलख ग्राममे 1923 ई. मे भेलन्हि । मृत्यु 1986 मे भेलनि । अग्रेजीमे एम. ए. कएलाक पश्चात् ई किछु दिन चन्द्रधरी मिथिला कॉलेजमे प्राध्यापक रहलाह । बिहार प्रशासनिक सेवामे 1981 धरि विभिन्न पदपर कार्य कएल । तत्पश्चात्मैथिली अकादमीक निदेशक ’84 धरि ।योगानन्द झाजी मैथिली साहित्यमे अपन उपन्यास ‘भलमानुस’ एवं ‘पवित्ना’क हेतु ख्यात छथि । हिनक नाटक ‘मुनिक मतिभ्रम’ एवं कथा संग्रह ‘उड़ैत वंशी’ यथेष्ट प्रतिष्ठा प्राप्त कएने अछि । एकर अतिरिक्त ई महात्मा गान्धीक आत्मकथाक अनुवाद एवं ‘आमक जलखरी’ नामक एक कथा संग्रहक सम्पादन सेहो कएने छथि । रामकृष्ण झा 'किसुन' 1923-1970 आधुनिक धाराक विशिष्ट कवि, कथाकार, चिन्तक । प्रकाशित कृति: आत्मनेपद (कविता संग्रह), मैथिली नवकविता (सम्पादन)। मृतयुपरान्त ’किसुन रचनावली’ तीन खण्डमे प्रकाशित । उमानाथ झा 1923-2009 जन्म:-01-01-1923, मृत्यु 07-12-2009 महरैल, भधुबनी ।भूतपूर्व अङरेजी विभागाध्यक्ष एवं प्रति-कुलपति मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा । रचना:-रेखाचित्न, अतीत (कथा संग्रह); मैथिली नवीन साहित्य, इन्द्र धनुष, विद्यापति गीतशती (सम्पादन)।१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा) पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। ज़टाशंकर दास 1923-2006 प्रबोध नारायण सिंह 1924-2005 हिन्दी, संस्कृत, मैथिली, पाली एवं फारसीक विद्वान्। मिथिला, मैथिल एवं मैथिलीक ई अनन्य भक्त छथि । कलकत्ता रहि मिथिला दर्शन’, मैथिली कविता’, मैथिली रंगमंच’ आदि पत्निकाक प्रकाशनक माध्यमसँ श्री प्रबोधजी मैथिलीक जे सेवा कएल अछि तकर वर्णन थोड़मे सम्भव नहि । अनेक बङला कृतिक ई अनुवाद सेहो कएल अछि ।हिन्दीमे सेहो हिनक ‘कविता संग्रह’ प्रकाशित अछि ।कलकत्ता विश्वविद्यालयमे हिन्दीक पूर्व अध्यक्ष। २००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। मदनेश्वर मिश्र 1924-2004 अमोघ नारायण झा "अमोघ" 1924- मुरलीधर सिंह, ब्रजमोहन ठाकुर, शुभंकर झा, मदनेश्वर मिश्र 1924-2004, ललित नारायण मिश्र, देवनाथ राय मतिनाथ मिश्र मतंग 1924- आनन्द मिश्र 1924-2007 डॉ. जयमन्त मिश्र १९२५-२०१० जन्म १५-१०-१९२५ मृत्यु ०७-०९-२०१०, गाम-ढंगा-हरिपुर-मजरही। १९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली। चन्द्रनाथ मिश्र अमर 1925- जन्म: खोजपुर, मधुबनी । वरिष्ठ कवि, कथाकार-उपन्यासकार । हास्य-व्यंग्यक कवितामे बेजोड़। मैथिलीक लेल समर्पित व्यक्तित्व । पांच दर्जनसं बेसी कथा आ विदागरी, वीरकन्या (उपन्यास) जल समाधि (कथा संग्रह) प्रकाशित ।१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। एम. एल. एकेडमी, लहेरिरियासरायसं शिक्षकक रूपमे अवकाश प्राप्त। आशा दिशा, गुदगुदी, युगचक्र, उनटा पाल आदि कविता संग्रह प्रकाशित। १९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। चन्द्रनाथ मिश्र अमर २०१० मे मैथिली साहित्य लेल साहित्य अकादेमीक फेलो (भारत देशक सर्वोच्च साहित्यक पुरस्कार)। मुक्तिनाथ झा (1926-2009) शुभंकर झा 1926- डॉ. हरिवंश तरुण 1927-2009 जन्म 21 जून 1927 ई.। गाम- चकसलेम, पो.- पटोरी, जिला- समस्तीपुर। तीन दर्जन सँ बेशी हिन्दी पोथी जाहिमे काव्य-कथा-प्रबन्ध सम्मिलित अछि। दीनानाथ पाठक 'बन्धु' 1928-1962 बुचन भगत, संत 1928-1991 अनंत बिहारी लाल दास "इन्दु" 1928-2010 २००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। जगदानन्द झा 1928- दुर्गानाथ झा "श्रीश" हिनकर जन्म मधुबनी जिलाक विट्ठो गाममे १९२९ ई. मे भेलन्हि। हिन्दी आ मैथिलीमे एम.ए. आ बी.एड. केलाक बाद किछु दिन स्कूलमे अध्यापन, फेर मिल्लत कॉलेज, लहेरियासरायमे मैथिली आ हिन्दी विभागक अध्यक्ष। मैथिली भाषामे पहिल पी.एच. डी.। "श्रीश" जीक मैथिलीमे प्रकाशित रचना अछि- "मैथिली साहित्यक इतिहास", "भुवन भारती" (सम्पादन), "महामत्स्य ओ मनु" (कविता), "नाट्य कथा सार"(सम्पादन), "पुरुषार्थ"(पद्य नाटक) आ अनेक कविता, एकांकी आ आलोचनात्मक निबन्ध। राजकमल चौधरी 1929-1967 महिषी, सहरसा। रचना:- आदि कथा, आन्दोलन, पाथर फूल (उपन्यास), स्वरगंधा (कविता संग्रह), ललका पाग (कथा संग्रह), कथा पराग (कथा संग्रह सम्पादन)। हिन्दीमे अनेक उपन्यास, कविताक रचना, चौरङ्गी (बङला उपन्यासक हिन्दी रूपान्तर) अत्यन्त प्रसिद्ध। विश्वनाथ झा "विषपायी" 1929-2005 "राम सुयश सागर" (मैथिली रामायण) १९८० ई. मे प्रकाशित। २५ जनवरी २००५ केँ मृत्यु। जयधारी सिंह 1929-2007 समीक्षक, कवि । प्रकाशन: बौद्धगानमे तांत्रिक सिद्धांत, समीक्षा शास्त्रा अदि । रामकृष्ण कॉलेज, मधुबनीमै मैथिली विभागक पूर्व अध्यक्ष । शैलेन्द्र मोहन झा 1929-1994 १९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। विजयनाथ ठाकुर 1929-2008 सुन्दर झा "शास्त्री" 1930-1998 जनकपुर, नेपाल, युवावस्थाक जेलक दुर्लभ फोटो।नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक मानद सदस्यता- स्व. सुन्दर झा शास्त्री। रमेशचन्द्र वर्मा 1930- गणेश चंचल १९३०-२०११ गोपालजी झा 'गोपेश' 1931-2008 जन्म मधुबनी जिलाक मेहथ गाममे १९३१ ई.मे भेलन्हि।हिनकर रचित “सोन दाइक चिट्ठी”, “गुम भेल ठाढ़ छी”, “एलबम” “आब कहू मन केहन लगैए”, "मखानक पात" प्रकाशित भेल जाहिमे सोनदाइक चिट्ठी बेश लोकप्रिय भेल।२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। विवेकानन्द ठाकुर 1931- २००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। ताराकांत मिश्र 1931- ललित 1932-1983 जन्म स्थान बसैठ चानपुरा मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रकाशित कृति: प्रतिनिधि, (कथा संग्रह), पृथ्वी-पुत्र (उपन्यास) आदि। मुरारि मधुसूदन ठाकुर 1932- ताराशंकर बंदोपाध्यायक बंगला उपन्यास "आरोग्य निकेतन"क मैथिली अनुवाद लेल साहित्य अकादमीक अनुवाद पुरस्कार 1999 भेटल छन्हि। विद्यानारायण ठाकुर 1933- धूमकेतु 1932-2000 जन्म स्थान कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति : दू टा कथा संग्रह ओ एक टा उपन्यास । राजमोहन झा 1934- जन्म स्थान कुमरबाजितपुर, वैशाली, बिहार । प्रख्यात कथाकार ओ संपादक । आइ काल्हि परसू (कथा-संग्रह) लेल १९९६ मे साहित्य अकादेमीसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति : एक आदि एकांत, झूठ साँच, एकटा तेसर, अनुलग्नक, आइ काल्हि परसू (कथा संग्रह), गलतीनामा, भनहि विद्यापति, टीप्पणीत्यादि (आलोचना)। ’आरम्भ’ पत्रिकाक संपादन।प्रबोध सम्मान 2009 सँ सम्मानित। डॉ. धीरेन्द्र 1934-2004 जन्म स्थान लोहना, मधुबनी, बिहार । प्रसिद्ध कथाकार,उपन्यासकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: कुहेस आ किरण, पझाइत घूरक आगि, शतरूपा ओ मनु अपन मन्दिर (कथासंग्रह) हैंगरमे टाँगल कोट, काल्हि ओ आइ (कविता संग्रह) सहित कैक विधामे विभिन्न पोथी। रमेश नारायण १९३४- २०११ पूरा नाम- रमेश नारायण दास, जन्म १५ मार्च १९३४ केँ मधुबनीक बहेरा गाममे। पिता-श्री हरिवल्लभ लाल दास। शिक्षा मधेपुर, मधुबनी आ पटनामे। १९६१ ई.सँ १९९४ ई. धरि ए.एन. कॉलेज, पटनामे हिन्दी विभागमे अध्यापन। पाथरक नाव (मैथिली कथा संग्रह, १९७२) प्रकाशित। मृत्यु १२ जनवरी २०११ केँ पटनामे। जमाहिरलाल जवाहरलाल नेहरू जयकान्त मिश्र बैद्यनाथ चौधरी हरिमोहन झा, मायानन्द मिश्र, स्वरूप दास बाबू श्री सत्यनारायण सिंह आ राघवाचार्य बाबू श्री सत्यनारायण सिंह मायानन्द मिश्र 1934- हिनक जन्म १७ अगस्त १९३४ ई. केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलनि।भाङ्क लोटा, आगि मोम आ’ पाथर आओर चन्द्र-बिन्दु- हिनकर कथा संग्रह सभ छन्हि। बिहाड़ि पात पाथर , मंत्र-पुत्र ,खोता आ’ चिडै आ’ सूर्यास्त हिनकर उपन्यास सभ अछि॥ दिशांतर हिनकर कविता संग्रह अछि। एकर अतिरिक्त सोने की नैय्या माटी के लोग, प्रथमं शैल पुत्री च,मंत्रपुत्र, पुरोहित आ’ स्त्री-धन हिनकर हिन्दीक कृति अछि।१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रबोध सम्मान 2007सँ सम्मानित। हरिशंकर श्रीवास्तव "शलभ" 1934- सोमदेव 1934- उपन्यासकार ओ कवि । साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: चानोदाइ, होटल अनारकली (उपन्यास), काल ध्वनि (कविता संग्रह), चरैवेति (गीति नाट्य) सोम सतसइ (दोहा)।२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। २००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;यात्री-चेतना पुरस्कार, प्रबोध साहित्य सम्मान २०११। राजनन्दन लाल दास 1934- "कर्णामृतक"क सम्पादन। "चित्रा-विचित्रा" प्रकाशित। रमानन्द रेणु 1934-2011 जन्म स्थान उसमामठ, दरभंगा, बिहार । वरिष्ठ कवि, कथाकार ओ उपन्यासकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: कचोट, त्रिकोण, अंतहीन आकाश (कथा-संग्रह), दूधफूल (उपन्यास), अंतत:, ओकरे नाम (कविता-संग्रह)। २०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०११ (समग्र योगदान लेल) कालीकांत झा "बूच" 1934-2009 हिनक जन्म, महान दार्शनिक उदयनाचार्यक कर्मभूमि समस्तीपुर जिलाक करियन ग्राममे 1934 ई. मे भेलनि । पिता स्व. पंडित राजकिशोर झा गामक मध्य विद्यालयक प्रथम प्रधानाध्यापक छलाह । माता स्व. कला देवी गृहिणी छलीह । अंतरस्नातक समस्तीपुर काॅलेज, समस्तीपुरसँ कयलाक पश्चात् बिहार सरकारक प्रखंड कर्मचारीक रूपमे सेवा प्रारंभ कयलनि । बालहिं कालसँ कविता लेखनमे विषेश रूचि छल । मैथिली पत्रिका - मिथिला मिहिर, माटि - पानि, भाखा तथा मैथिली अकादमी पटना द्वारा प्रकाशित पत्रिकामे समय - समय पर हिनक रचना प्रकाशित होइत रहलनि । जीवनक विविध विधाकेँ अपन कविता एवं गीत प्रस्तुत कयलनि । साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा प्रकाशित मैथिली कथाक विकास (संपादक डाॅ बासुकीनाथ झा ) मे हास्य कथा कारक सूची मे डाॅ विद्यापति झा हिनक रचना ‘‘धर्म शास्त्राचार्यक उल्लेख कयलनि । मैथिली अकादमी पटना एवं मिथिला मिहिर द्वारा प्रशंसा पत्र भेजल जाइत छल ।श्रृंगाररस एवं हास्य रसक संग-संग विचार मूलक कविताक रचना सेहो कयलनि । डाॅ दुर्गानाथ झा श्रीश संकलित मैथिली साहित्यक इतिहासमे कविक रूपमे हिनक उल्लेख कएल गेल अछि । प्रकाशित कृति (मृत्योपरांत) : कलानिधि- कविता-संग्रह। श्याम चन्द्र 1934- उपन्यास "रूपा दीदी" प्रकाशित। गाम मलंगिया, जिला- मधुबनी। डोरीलाल शर्मा "श्रोत्रिय" १९३५- "मिथिला की पाण्डित्य परम्परा" पोथी प्रकाशित। तारानन्द तरुण १९३५-२०११ रामभद्र, धनुषा, नेपाल 1935- साहित्य तथा अन्यान्य क्षेत्रक कतोक सफल व्यक्तिसभ अपन प्रेरणास्रोत आ पथ-प्रदर्शक मानैत छथि । मैथिली साहित्य-क्षेत्रमे हिनक परिचयक मादे एतबाए कहब पर्याप्त होएत जे मैथिलीक मूर्द्धन्य साहित्यकार डा. धीरेन्द्र हिनका मैथिली साहित्यक सर्वश्रेष्ठ कथाकार मानैत छथि ।हिनक कथामे प्रतीकात्मकताक अदभुत प्रयोगहिटा नहि, अपितु एकटा आदर्श कथाक समस्त वैशिष्टसभविद्यमान रहैत अछि । कथाकारक अतिरिक्त ई उत्कृष्ट समालोचक, नाटककार आ कवि सेहो छथि । नेपालमे मैथिलीक पहिल मोनोड्रामा लिखबाक श्रेय सेहो हिनका जाइत छनि ।सामाजिक कुरीतिसभकँ कुशलतासँ चित्रण करबामे, चिन्तनीय बनएबामे आ मन-मस्तिष्कपर अमिट छाप छोड़बामे रामभद्र सिद्धहस्त छथि । धनुषा जिलाक कुर्था गाममे जनमल रामभद्रक पूर्ण नाम रामभद्र कर्ण छनि । अग्ङरेजी विषयक अवकाशप्राप्त शिक्षक रामभद्र व्याकरण, पाठयपुस्तक आ सहायक पुस्तकसभ लिखबाक काजमे निरन्तर सक्रिय छथि। केदारनाथ चौधरी 1936- जन्म 3 जनवरी 1936 ई नेहरा, जिला दरभंगामे। 1958 ई.मे अर्थशास्त्रमे स्नातकोत्तर, 1959 ई.मे लॉ। 1969 ई.मे कैलिफोर्निया वि.वि.सँ अर्थस्थास्त्र मे स्नातकोत्तर, 1971 ई.मे सानफ्रांसिस्को वि.वि.सँ एम.बी.ए., 1978मे भारत आगमन। 1981-86क बीच तेहरान आ प्रैंकफुर्तमे। फेर बम्बई, पुणे होइत 2000 सँ लहेरियासरायमे निवास। मैथिली फिल्म 'ममता गाबय गीत'क मदनमोहन दास आ उदयभानु सिंहक संग सह निर्माता। तीन टा उपन्यास 2004 मे चमेली रानी, 2006 मे करार, 2008 मे माहुर। जीवकांत 1936- नाम- जीवकान्त झा,पिता-गुणानन्द झा, माता-महेश्वरी देवी, जन्म-२५.०७.१९३६ अभुआढ़, जिला-सुपौल। नौकरी-विज्ञान शिक्षक (उ.वि.खजौली १९५७-८१), हिन्दी शिक्षक (उ.वि.डेओढ़ एवं उ.वि.पोखराम १९८१-९८)।पहिल रचना-इजोड़िया आ टिटही (कविता, जनवरी १९६५ मिथिला मिहिर)।पहिल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उपन्यास १९६८)।नूतन पोथी-खिखिरक बीअरि (२००७ बाल पद्य कथा), अठन्नी खसलइ वनमे (पद्य-कथा संग्रह) आ पंजरि प्रेम प्रकासिया (जीवन-वृत्तक अंश)।पुरस्कार-साहित्य अकादेमी 1998 तकै अछि चिड़ै, पद्य , किरण सम्मान (१९९८), वैदेही सम्मान (१९८५)।प्रकाशित पोथी- कविता संग्रह:नाचू हे पृथ्वी (७१), धार नहि होइछ मुक्त (९१), तकैत अछि चिड़ै (९५), खाँड़ो (१९९६), पानिमे जोगने अछि बस्ती (९८), फुनगी नीलाकाशमे (२०००), गाछ झूल-झूल (२००४), छाह सोहाओन (२००६), खिखिरिक बीअरि (२००७) कथा-संग्रह:एकसरि ठाढ़ि कदम तर रे (७२), सूर्य गलि रहल अछि (७५), वस्तु (८३), करमी झील (९८) उपन्यास:दू कुहेसक बाट(६८), पनिपत(७७), नहि, कतहु नहि (७६), पीयर गुलाब छल (७१), अगिनबान (८१) हिन्दी अनुवाद- निशान्त की चिड़िया (तकैत अछि चिड़ै, साहित्य अकादमी, दिल्ली २००३)। प्रबोध सम्मान 2010 सँ सम्मानित। देवकांत झा 1936- डॉ अमरेश पाठक 1936- हिनक जन्म सीतामढ़ी जिलाक अन्तर्गत सामारि ग्राममे १९३६ मे भेलन्हि । १९५७ मे पटना विश्वविद्यालयसँ मैथिलीक एम. ए. परीक्षामे प्रथम श्रेणीमे प्रथमस्थान पाओल । १९५७ सँ १९६० धरि रामकृष्ण महाविद्यालय, मधुबनीमे व्याख्याता रूपेँ तकरा बाद पटना विश्वविद्यालयमे व्याख्याता रूपमे कार्य करए लगलाह । पटना विश्वविद्यालयमे मैथिली विभागाध्यक्ष रूपेँ । मैथिली उपन्यासक आलोचनात्मक अध्ययन’ शोध प्रबन्धपर हिनका बिहार विश्व-विद्यालय द्वारा डि. लिट्क उपाधि भेटलन्हि । ई शोध प्रबन्ध पुस्तकाकार रूपेँ सेहो प्रकाशित भेल अछि बिहार राष्ट्रभाषा परिषदक विद्यापति ग्रन्थावलीक सम्पादक मण्डलक सदस्य । हिनक अन्य प्रकाशित रचना अछि ’निबन्ध संकलन’ । एकरा छोड़ि विभित्र पत्न-पत्निकामे हिनक कतेको निबन्ध प्रकाशित छन्हि । मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित कथा-संग्रहक इहो एक सम्पादक छथि । ई अधिकतर उच्च स्तरीय आलोचनात्मक निबन्ध लिखैत छथि । २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। बलराम 1936-2008 जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार । विशिष्ट कथाकार । प्रकाशित कृति : दकचल देबाल (कथा-संग्रह)। मैथिलीपुत्र प्रदीप 1936- ग्राम- कथवार, दरभंगा। प्रशिक्षित एम.ए., साहित्य रत्न, नवीन शास्त्री, पंचाग्नि साधक। हिनकर रचित "जगदम्ब अहीं अवलम्ब हमर" आ "सभक सुधि अहाँ लए छी हे अम्बे, हमरा किए बिसरै छी यै" मिथिलामे लेजेंड भए गेल अछि। रामदेव झा 1936- कथाकर, समीक्षक, अनुवादक, ग्रंथ सम्पादक । साहित्य अकादेमीक मूल एवं अनुवाद पुरस्कार प्राप्त कर्त्ता ल. ना. मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगाक मैथिली विभागक पूर्व प्राचार्य । प्रकाशन: पसिझैत पाथर, (अनु.) आदि । १९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। रवीन्द्र नाथ ठाकुर 1936- जन्म पूर्णिञा जिलाक धमदाहा ग्राममे 1936 ई. मे भेलन्हि । नेने अवस्थासँ गीत गएबामे एवं कविता लिखबामे विशेष रुचि । कोनो मंच पर ठाढ़ भेला पर ई सहजहि श्रीताकेँ आह्लादित करैत छथि । हिनक सात गोट मैथिलीक गीत संग्रह, एक मिनी महाकाव्य, एक प्रयोगधर्मी काव्य, एक उपन्यास, एक नाटक ‘एक राति’ एवं एक हिन्दी नाटक, प्रकाशित भेल छन्हि । बिनोद बिहारी वर्मा 1937-2003 मैथिल करण कायस्थक पाँजिक सर्वेक्षण, बलानक बोनिहार ओ पल्लवी तथा अन्य कथा (कथा संग्रह) ललन कुमार वर्मा 1937-2001 सहरसा जिलाक डुमरा गामक। पिता श्री सूर्यनारायण लाल दास। पेशासँ वकील ललनजी मैथिली लेल कतेको केस सरकारक विरुद्ध लड़लाह। वीरेन्द्र मल्लिक 1937- जन्म- 3 जनबरी 1937 ई. परसौनी, मधुबनीमे।कवि, सम्पादक, समीक्षक । आखर, अगनिपत्रक सम्पादन ।अग्नि-शिखा (कविता संग्रह)। कीर्तिनारायण मिश्र 1937- जन्म १७ जुलाई १९३७ ई. केँ ग्राम शोकहारा (बरौनी), जिला बेगूसरायमे भेलन्हि। हुनकर प्रकाशित कृति अछि सीमान्त,महानगर (दीर्घ कविता), हम स्तवन नहि लिखब, ध्वस्त होइत शांति स्तूप (एहि पोथीपर साहित्य अकादमी 1997 पुरस्कार), आदमीकेँ जोहैत (कविता संग्रह)। संस्मरण-अपन एकांतमे, स्मृति यात्रा, पत्रक दर्पणमे। सम्पादन- आखर मासिक पत्रिका, आधुनिक मैथिली साहित्य, '63, राजकमल जीवन आ साहित्य, '68, कथा-संकलन- काल कोठरी। आलोचना- अर्थांतर-2004 गौरीकांत चौधरीकांत 1937-2001 युगल किशोर मिश्र १९३८-२००७ प्रफुल्ल कुमार सिंह 'मौन' 1938- ग्राम+पोस्ट- हसनपुर, जिला-समस्तीपुर।मैथिलीमे १.नेपालक मैथिली साहित्यक इतिहास(विराटनगर,१९७२ई.), २.ब्रह्मग्राम(रिपोर्ताज दरभंगा १९७२ ई.), ३.’मैथिली’ त्रैमासिकक सम्पादन (विराटनगर,नेपाल १९७०-७३ई.), ४.मैथिलीक नेनागीत (पटना, १९८८ ई.), ५.नेपालक आधुनिक मैथिली साहित्य (पटना, १९९८ ई.), ६. प्रेमचन्द चयनित कथा, भाग- १ आऽ २ (अनुवाद), ७. वाल्मीकिक देशमे (महनार, २००५ ई.)।२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। महेश्वरनाथ मल्लिक 1938- परशुराम झा १९३८- गाम- मेंहथ (मधुबनी), कृति- डाइमेन्शन्स ऑफ पीस इन इन्गलिश ड्रामा,क्रिश्चियन पोएटिक ड्रामा। कुलानन्द मिश्र 1940-2000 जन्म पकड़ी कोठी, सीतामढ़ी, बिहार। सुविख्यात कवि,, संपादक, समालोचक। प्रकाशित कृति- तावत एतबे, भोरक प्रतीक्षामे (कविता संग्रह), भारतक भाषा सर्वेक्षण, पारो, राजकमल चौधरी की ग्यारह कहानियाँ (अनुवाद)। बिलट पासवान 'विहंगम' 1940- जन्म मधुबनी जिलाक एकहत्था ग्राममे १९४० ई. मे भेलन्हि। फजलुर रहमान हासमी 1940-2011 जन्म-पटना जिलाक बराह गाममे। वृत्ति अध्यापक। हिन्दी कविता संग्रह "रश्मि राशि" आ मैथिली कविता संग्रह "निर्मोही" प्रकाशित। १९९६मे अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दूसँ मैथिली अनुवादपर साहित्य अकादमीक मैथिली अनुवाद पुरस्कार। प्रभास कुमार चौधरी 1941-1998 गाम- पिंडारुछ, जिला- दरभंगा ।प्रख्यात कथाकार ओ उपन्यासकार । प्रभासक प्रकाशित कृति : कथा-प्रभास, प्रभासक कथा, नव घर उठय पुरान घर खसय, दिदवल (कथासंग्रह), अभिशप्त, युगपुरुष, हमरा लग रहब, नवारम्भ, राजा पोखरिमे कतेक मछरी (उपन्यास) । विभिन्न महत्वपूर्ण पत्रिकाक सम्पादन । त्रैमासिक कथा गोष्ठी 'सगर राति दीप जरय' केर प्रारम्भ।१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा) लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित । साकेतानन्द 1940- वरिष्ठ कथाकार, गणनायक (कथा-संग्रह) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित। प्रकाशित कृति: मैथिली कथा साहित्यमे 1962 स’ सक्रिय । गोडेक चालिस_पचास टा कथा, रिपोर्ताज. संस्मरण, यात्रा_विवरण मैथिलीमे प्रकाशित अधिकांश पत्र_पत्रिकामे छपल । पहिल मैथिली कथा “ग्लेसियर” 1962मे ‘मिथिलामिहिर’मे प्रकाशित । हिन्दियोमे दू दर्जन कथा आदि प्रकाशित । सन 99मे छपल पहिल कथा_संग्रह “गणनायक’ के ओही वर्ष ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार। पैघ बान्ध’ स’ अबैबला विपत्तिके रेखांकित करैत, पर्यावरण के कथा वस्तु बना क’ राजकमल प्रकाशन स’ प्रकाशित एवं अत्यंत चर्चित उपन्यास (‘डौकूमेंट्री फिक्शन’) “सर्वस्वांत” ।आकाशवाणीक राष्ट्रीय कार्यक्रममे प्रसारित दू टा उल्लेखनीय वृत्त रूपक_ ‘महानन्दा अभयारण्य’ पर आधारित “जंगल बोलता है” एवं झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रक ज्वलंत डाइनक समस्या पर आधारित वृत्तरूपक “ नैना जोगन “ चर्चित एवं प्रसिद्ध । रामावतार यादव, मैथिली भाषिकी, नेपाल 1942- देश-विदेशक भाषाविज्ञान जर्नलमे पचासो आलेखक द्वारा मैथिलीक विशिष्टताकेँ उजागर केनिहार। मैथिली ध्वनिशास्त्र 1984 ई. मे जर्मनीसँ आ मैथिलीक सन्दर्भ व्याकरण 1996 ई. मे बर्लिन आ न्यूयार्कसँ प्रकाशित। 2000 ई..मे लंदनसँ प्रकाशित भारतीय आर्यभाषा पुस्तक मे संकलित हिनकर मैथिली भाषा संबंधी आलेख विशेष उल्लेखनीय। नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानसँ पासाङ ल्हामु प्रज्ञा-पुरस्कारसँ सम्मानित। गंगेश गुंजन 1942- जन्म स्थान- पिलखबाड़, मधुबनी।श्री गंगेश गुंजन मैथिलीक प्रथम चौबटिया नाटक बुधिबधियाक लेखक छथि आ हिनका उचितवक्ता (कथा संग्रह) क लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल छन्हि। एकर अतिरिक्त्त मैथिलीमे हम एकटा मिथ्या परिचय, लोक सुनू (कविता संग्रह), अन्हार- इजोत (कथा संग्रह), पहिल लोक (उपन्यास), आइ भोर (नाटक)प्रकाशित। हिन्दीमे मिथिलांचल की लोक कथाएँ, मणिपद्मक नैका- बनिजाराक मैथिलीसँ हिन्दी अनुवाद आ शब्द तैयार है (कविता संग्रह)।१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)पुस्तक लेल सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रेमशंकर सिंह 1942- ग्राम+पोस्ट- जोगियारा, थाना- जाले, जिला- दरभंगा।मौलिक मैथिली: १.मैथिली नाटक ओ रंगमंच,मैथिली अकादमी, पटना, १९७८ २.मैथिली नाटक परिचय, मैथिली अकादमी, पटना, १९८१ ३.पुरुषार्थ ओ विद्यापति, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर, १९८६ ४.मिथिलाक विभूति जीवन झा, मैथिली अकादमी, पटना, १९८७५.नाट्यान्वाचय, शेखर प्रकाशन, पटना २००२ ६.आधुनिक मैथिली साहित्यमे हास्य-व्यंग्य, मैथिली अकादमी, पटना, २००४ ७.प्रपाणिका, कर्णगोष्ठी, कोलकाता २००५, ८.ईक्षण, ऋचा प्रकाशन भागलपुर २००८ ९.युगसंधिक प्रतिमान, ऋचा प्रकाशन, भागलपुर २००८ १०.चेतना समिति ओ नाट्यमंच, चेतना समिति, पटना २००८। २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा यात्री-चेतना पुरस्कार। मार्कण्डेय प्रवासी 1942-2010 जन्म ग्राम: गरुआर, जिला: समस्तीपुर । प्रकाशित कृति: अगस्त्यायिनी (महाकाव्य); एतदर्थ (कविता संग्रह), अक्षर चेतना (काव्य संग्रह)। अभियान, हम कालिदास (उपन्यास)। ’अगस्त्यायिनी’ लेल १९८१मे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त। देवेन्द्र झा १९४३- गाम- चानपुरा (मधुबनी), कृति- विद्यापतिक श्रृंगारिक पदक काव्यशास्त्रीय अध्ययन, लालदास, सुधाकर झा "शास्त्री", अनुभव, बदलि जाइछ घरे टा। डॉ. भीमनाथ झा 1945- जन्म:कोइलख, मधुबनी, बिहार । प्रखर कवि, समालोचक, प्राध्यापक । ’विविधा’निबन्ध पुस्तक लेल सन् १९९२मे सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँ सम्मानित । प्रकाशित कृति: त्रिधारा, वीणा, की फुरैए की नहि, नाम तँ थिक ओएह (कविता संकलन), परिचायिका, सीताराम झा, कवि चूड़ामणिक काव्य साधना, विविधा (निबंध, आलोचना),टावर चौकसँ आदि । महेन्द्र मलंगिया 1946- गाम- मलंगिया, जिला- मधुबनी । मैथिलीक सुपरिचित नाटककार, रंग निर्देशक एवं मैलोरंगक संस्थापक अध्यक्ष । लोक साहित्य पर गंभीर शोध आलेख । मैथिलीमे 13टा नाटक, 19टा एकांकी, 14टा नुक्कड़ आ 10टा रेडियो नाटक प्रकाशित आ आकाशवाणी सँ प्रसारित । सीनियर फेलोशिप (भारत सरकार), इंटरनेशनल थिएटर इंस्टिच्यूट (नेपाल), प्रबोध साहित्य सम्मान आदि सँ सम्मानित । संप्रति ज्योतिरीश्वर लिखित मैथिलीक प्रथम पुस्तक वर्णरत्नाकर पर शोध कार्य । श्री महेन्द्र मलगियाक जन्म २० जनबरी १९४६ मे मधुबनी जिलाक मलंगिया गाममे भेलन्हि। मलंगियाजी मैथिली हिन्दी, अंग्रेजी आ नेपाली भाषाक जानकार आ थियेटर शिक्षण, पटकथा लेखन आ तत्सम्बन्धी शोधक फ्रीलान्स शिक्षक छथि।२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;यात्री-चेतना पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2005 सँ सम्मानित। डॉ राम दयाल राकेश, सर्लाही, नेपाल 1942- मैथिली मातृभाषा, हिन्दीक प्राध्यापक आ नेपालीक लेखक ई तीनू भाषा ’राकेश’क व्यक्तित्वमे एना ने मिझराएल छैक जे कोनहुसँ हिनका भिन्न नहि कएल जा सकैत अछि । ई विशेषत: नेपालीमे लिखैत छथि, मुदा लेखनक विषय मूलत: मैथिलीए संस्कृति रहैत छनि । ओना मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे सेहो ई अनेक रचना कएने छथि ।नेपालक राजकीय-प्रज्ञा-प्रतिष्ठानक सदस्य ’राकेश’ दिल्ली विश्वविद्यालयसँ पीएचडी आ अमेरिकास्थित इण्डियाना यूनिभर्सिटीसँ पोस्ट डाक्टरल रिसर्च कएने छथि । डा. ’राकेश’क जन्म २५ जुलाइ १९४२ ई. कऽ सर्लाही जिलाक सिसौटियामे भेल छनि । नेपाली, मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजीमे मौलिक, सम्पादित आ अनूदित कऽ करीब दू दर्जन पोथी प्रकाशित , दर्जनभरि देशक भ्रमण सेहो कएने छथि । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता- श्री राम दयाल राकेश (1999)। उपेन्द्र दोषी 1943-2001 जन्म स्थान रामपुर-कोरिगामा, दरभंगा । कवि-कथाकार, गीत-गजलकार । प्रकाशित कृति: यंत्रणाक क्षणमे (कविता संग्रह)। हिन्दीमे अनेक पोथी प्रकाशित। ओड़ियासँ मैथिली अनुवाद हेतु मृत्युपरान्त साहित्य अकादेमीसँ पुरस्कृत। २००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। उदयचन्द्र झा "विनोद" 1943- जन्म 5 अप्रैल 1943 ई.। गाम- रहिका, मधुबनी । जन्म-ग्राम- दुलहा, मधुबनी । प्रकाशित कृति: संक्रान्ति, मौसम अयला पर, एहना स्थितिमे, भरि देह गौरा, एहि जनपदमे, दोहा तीन सय दू, कहलनि पत्नी, सहरजमीन, अपक्ष, प्रश्नवाचक (कविता-संग्रह), धूरी (सहयोगी कविता संग्रह); जाँत (कथा संग्रह), उदास गाछक वसंत (नाटक)। ’माटि पानि’क वरेण्य सम्पादक।२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। रेवती रमण लाल, जनकपुर 1943- मंत्रेश्वर झा 1944- जन्म ६ जनवरी १९४४ ई.ग्राम-लालगंज, जिला-मधुबनीमे। प्रकाशित कृति: खाधि, अन्चिनहार गाम, बहसल रातिक इजोत (कविता संग्रह); एक बटे दू (कथा संग्रह), ओझा लेखे गाम बताह (ललित निबन्ध)। मैथिली कथा संग्रहक हिन्दी अनुवाद “कुंडली” नामसँ प्रकाशित। दि फूल्स पैराडाइज (अंग्रेजीमे ललित निबन्ध)। २००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी यात्री-चेतना पुरस्कार। २००८- मंत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा) पर साहित्य अकादमी पुरस्कार। रत्नेश्वर मिश्र 1945- अनुवादक, निबंधकार । प्रकाशन: तमिल साहित्यक इतिहास,भवभूति (दुनू अनुवाद)। जगदीश प्रसाद मंडल 1947- गाम-बेरमा, तमुरिया, जिला-मधुबनी। एम.ए.।कथाकार (गामक जिनगी-कथा संग्रह आ तरेगण- बाल-प्रेरक लघुकथा संग्रह), नाटककार(मिथिलाक बेटी-नाटक), उपन्यासकार(मौलाइल गाछक फूल, जीवन संघर्ष, जीवन मरण, उत्थान-पतन, जिनगीक जीत- उपन्यास)। मार्क्सवादक गहन अध्ययन। हिनकर कथामे गामक लोकक जिजीविषाक वर्णन आ नव दृष्टिकोण दृष्टिगोचर होइत अछि। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) मोहनानन्द झा 1955- अभिराम दास मिथिलाक प्रसिद्ध भागवत वाचक। राज महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह 1858-1898 महाराजाधिराज रमेश्वर सिंह 1860-1929 महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह 1907-1962 सर हरगोविन्द मिश्र, अलीगढ़ आ कामेश्वर सिंह बिनोदानन्द झा 1895-1971 ललित नारायण मिश्र 1922-1975 कर्पूरी ठाकुर 1921-1988 रामविलास पासवान १९४६- जन्म ५ जुलाइ १९४६, गाम- शहरबन्नी, जिला खगड़िया। भारतीय राजनीतिज्ञ। राम लषण राम "रमण" भोगेन्द्र झा चतुरानन मिश्र प्रभात झा, राजनीतिज्ञ रमाकांत मिश्र रमानाथ मिश्र "मिहिर" गजेन्द्र नारायण चौधरी, पत्रकार 1929-2008 मोहन भारद्वाज 1943- गाम- नवानी, जिला- मधुबनी । मैथिलीक प्रखर समालोचक।२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;यात्री-चेतना पुरस्कार। प्रबोध सम्मान 2008 सँ सम्मानित। योगानन्द झा 1955- २००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। प्रकाशित कृति: लोकजीवन ओ लोक साहित्य (निबन्ध) 1986, परिणीता (कथाकव्यांश) 1987, फकीर मोहन सेनापति (अनुवाद) 2000, आलेख सञ्चयन (निबन्ध) 2002, बिहारक लोककथा (अनुवाद) 2003, स्नेहलता (विनिबन्ध) 2006, मैथिली पत्रकारिताकेँ सौ वर्ष (निबन्ध) 2006, गहबरगीत (निबन्ध) 2007, लोक-साहित्य ओ शब्द-सम्पदा (निबन्ध) 2007, मैथिलीक पारम्परिक जातीय व्यवसायक शब्दावली (शोघ-ग्रन्थ) 2009. हीरानन्द झा "शास्त्री" ,पत्रकार पद्म नारायण झा "विरंचि" 1941- जन्म- गाम खोजपुर, जिला-मधुबनीमे । मिथिला मिहिरक प्रशस्त स्तंभकार । 1977 केर जनता आन्दोलनमे अग्रणी भूमिका, पार्टीक मुखपत्र "जनता"क सम्पादक। बादमे लोक दल (ब) मे हेमवतीनन्दन बहुगुणाक राजनीतिक सलाहकार। दीनानाथ झा, पत्रकार नरेन्द्र झा, अर्थशास्त्र-पत्रकार स्व. दुर्गानाथ झा,पत्रकार 1946-2005 पत्रकार। पिता स्व.रमानाथ झा। प्रेमशंकर झा, पत्रकार सी.पी. झा, पत्रकार शरदिन्दु चौधरी, पत्रकार निशिकान्त ठाकुर, पत्रकार मणिकान्त ठाकुर, पत्रकार राधाकृष्ण चौधरी, इतिहासकार 1921-1985 विजयकान्त मिश्र इतिहासकार 1927-1994 डॉ. विजयकांत मिश्रक जन्म १० अगस्त १९२७ मंगरौनी गाम - जे नव्य न्याय आ तांत्रिक साधनाक जन्म-स्थली अछि- (जिला मधुबनी) मे भेलन्हि। ओ 1948 मे प्राचीन भारतीय इतिहास आ संस्कृति विषयमे एलाहाबाद विश्वविद्यालयसँ सनात्तकोत्तर उपाधि कएलाक बाद कतेक बरख धरि बिहार सरकार आ पटना विश्वद्यालयसँ सम्बद्ध रहलाह आ 1957 ई. सँ भारतीय पुरात्तत्व विभागमे काज कएलन्हि आ ओकर शिशुपालगढ़, कौशाम्बी, वैशाली, हस्तिनापुर, कुम्हरार, पाटलिपुत्र, करियन, सोनपुर, बिलावली, नालन्दा, राजगीर, चन्द्रवल्ली, आ हम्पी खुदाइमे विभिना भूमिकामे भाग लेलन्हि।हिनकर लिखल-सम्पादित पोथी सभमे अछि: 1.वैशाली,1950 2.कुम्हरार एक्सकेवेशंस: 1950-1957 3.पुरातत्व की दृष्टिमे वैशाली 4.नागेश भट्टाज पारिभाषेन्दुशेखर 5.मिथिला आर्ट एण्ड आर्किटेक्चर (सम्पादित) 6.कल्चरल हेरिटेज ऑफ मिथिला 7.श्रृंगार भजनावली- एक अध्ययन 8.क्षेत्र पुरातत्वविज्ञान- 9.पुरातत्व शब्दावली। द्विजेन्द्र नारायण झा, इतिहासकार सुरेश्वर झा, राजनीति विज्ञान २००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। कुमार तारानन्द सिंह, संगीतज्ञ संगीताचार्य रायबहादुर लक्ष्मीनारायण सिंह रामचतुर मल्लिक ध्रुपद संगीत 1905-1990 रामाश्रय झा 'रामरंग' अभिनव भातखण्डे 1928-2009 जन्म ११ अगस्त १९२८ ई. तदनुसारभाद्र कृष्णपक्ष एकादशी तिथिकेँ मधुबनी जिलान्तर्गत खजुरा नामक गाममे भेलन्हि। अभिनव गीतांजलि, हुनकर उच्चकोटिक शास्त्र रचना अछि।मिथिलावासी श्री रामरंग राग तीरभुक्त्ति, राग वैदेही भैरव, आऽ राग विद्यापति कल्याण केर रचना सेहो कएने छथि आऽ मैथिली भाषामे हिनकर खयाल ’रंजयति इति रागः’ केर अनुरूप अछि। अभयनारायण मल्लिक पंडित परमानन्द चौधरी, संगीतज्ञ मिथिलेश कुमार झा, तबला वादन हृदयनारायण झा भागीरथ लाल दास भारतक कएक देशमे राजदूत रहल छथि आ जी.ए.टी.टी. मे भारतक प्रतिनिधि सेहो छलाह। लक्ष्मीकान्त झा रिजर्व बैंक गवर्नर 1913-1988 एन. एन. झा डिप्लोमेट कामेन्द्रनाथ झा "अमल" 1938- जन्म- 4 जनवरी 1938, गाम कोइलख (मधुबनी)। ग्रिभांस (कथासंग्रह) प्रकाशित। भाग्यनारायण झा 1941- डॉ श्यामानन्द लाल दास रमाकांत राय "रमा" 1947 जन्म- भादो पूर्णिमा सम्वत् 2003, प्रथम रचना- बटुक, बाल मासिक प्रयाग, कथा विशेषांक द्वितीय भागमे 1964ई., प्रकाशित कृति-(क) तीनटा बाबाजी-(रूसीसँ मैथिलीमे मैथिलीमे टाल्स्टायक कथाक अनुवाद-1967ई.मे, (ख) फूलपात, कविता संग्रह 1978, (ग) भांगक गोला (2004 ई.मे), (घ) कटैत पाँखि : हँसैत आँखि , कथा संग्रह-2005, शीघ्र प्रकाश्य- कृष्णकान्त मिश्र (विनिबन्ध) साहित्य अकादेमी नई दिल्ली। प्राय: डेढ़ सए रचना (कथा-निबन्ध कविता) मैथिली हिन्दीक पत्र-पत्रिका, आकाशवाणी एवं दूरदर्शनसँ प्रकाशित/ प्रसारित। साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित कवि सम्मेलनक आयोजनक क्रममे रेलक चपेटमे पड़ि दहिना पएर छाबा धरि गमा विकलांग। सेवा निवृत अध्यापक (उच्च विद्यालय) सम्पर्क- श्री रमानिवास, मानाराय टोल पो. नरहन (समस्तीपुर)। महेन्द्र 1944-2009 जन्म मधुबनी जिलाक जमसम गाममे। प्रसिद्ध मैथिली गीतकार आ गायक। सुभाषचन्द्र यादव 1948- जन्म ०५ मार्च १९४८, मातृक दीवानगंज, सुपौलमे। पैतृक स्थान: बलबा-मेनाही, सुपौल।घरदेखिया (मैथिली कथा-संग्रह), मैथिली अकादमी, पटना, १९८३, हाली (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९८८, बीछल कथा (हरिमोहन झाक कथाक चयन एवं भूमिका), साहित्य अकादमी, नई दिल्ली, १९९९, बिहाड़ि आउ (बंगला सँ मैथिली अनुवाद), किसुन संकल्प लोक, सुपौल, १९९५, भारत-विभाजन और हिन्दी उपन्यास (हिन्दी आलोचना), बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, २००१, राजकमल चौधरी का सफर (हिन्दी जीवनी) सारांश प्रकाशन, नई दिल्ली, २००१, बनैत-बिगड़ैत (कथा-संग्रह) २००९। मैथिलीमे करीब सत्तरि टा कथा, तीस टा समीक्षा आ हिन्दी, बंगला तथा अंग्रेजी मे अनेक अनुवाद प्रकाशित। योगेन्द्र प्रसाद यादव, भाषिकी,सिरहा, नेपाल 1946- 1998 ई. मे जर्मनीसँ प्रकाशित इशुज इन मैथिली सिंटैक्स आ टॉपिक्स इन नेपालीज लिग्विस्टिक्स, रीडिंग्स इन मैथिली लंगुएज- लिटरेचर एण्ड कल्चर आ लेक्सीग्राफी इन नेपाल (सम्पादित) प्रकाशित। नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानमे भाषा-विभागक प्राज्ञ रहि कतोक महत्वपूर्ण कार्यक सम्पादन। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव। रमानन्द झा 'रमण' 1949- जन्म: 02 जनबरी 1949, शिक्षा-एम.ए., पीएच.डी., आजीविका-भारतीय रिजर्व बैंक, पटना (सेवा निवृत्त)। प्रकाशन: 1. नवीन मैथिली कविता,1982, 2. मैथिली नऽव कविता,1993, 3. मैथिली साहित्य ओ राजनीति, 1994, 4. अखियासल, 1995, 5. बेसाहल,2003, 6. भजारल, 2005., 7. निर्यात कैसे शुरू करें? हिन्दी- रिजर्व बैंक, पटनाक प्रकाशन सम्पादित 8. मैथिलीक आरम्भिक कथा, 1978 समीक्षा, 9. श्यामानन्द रचनावली, 1981, 10. जनार्दन झा जनसीदन कृत निर्दयीसासु (1914) आ पुनर्विवाह (1926), 1984, 11. चेतनाथझाकृत श्रीजगन्नाथपुरी यात्रा (1910), 1994, 12. तेजनाथ झाकृत सुरराजविजय नाटक (1919), 1994, 13. रासबिहारीलाल दासकृत सुमति (1918), 1996, 14. जीबछ मिश्रकृत रामेश्वर (1916), 1996, 15. भेटघॉंट (भेटवार्ता), 1998, 16. रूचय तँ सत्य ने तँ फूसि, 1998, 17. पुण्यानन्द झाकृत मिथिला दर्पण (1925), 2003, 18. यदुवर रचनावली (1888-1934) 2003, 19. श्रीवल्लभ झा (1905-1940) कृत विद्यापति विवरण, 2005, 20. मैथिली उपन्यासमे चित्रित समाज, 2003। अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान 2004-05 (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। रामलोचन ठाकुर 1949- श्री रामलचन ठाकुर, जन्म १८ मार्च १९४९ ई.पलिमोहन, मधुबनीमे। वरिष्ठ कवि, रंगकर्मी, सम्पादक, समीक्षक। भाषाई आन्दोलनमे सक्रिय भागीदारी। प्रकाशित कृति- इतिहासहन्ता, माटिपानिक गीत, देशक नाम छल सोन चिड़ैया, अपूर्वा (कविता संग्रह), बेताल कथा (व्यंग्य), मैथिली लोक कथा (लोककथा), प्रतिध्वनि (अनुदित कविता), जा सकै छी, किन्तु किए जाउ(अनुदित कविता), लाख प्रश्न अनुत्तरित (कविता), जादूगर (अनुवाद), स्मृतिक धोखरल रंग (संस्मरणात्मक निबन्ध), आंखि मुनने: आंखि खोलने (निबन्ध)। अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान 2003-04 (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्लासँ मैथिली अनुवाद, बांग्ला-उपन्यास - मानिक बंद्योपाध्याय) गंगा प्रसाद मंडल "अकेला", नेपाल 1944- पं सुन्दर झा शास्त्री राष्ट्रिय प्रतिभा पुरस्कारसँ सम्मानित। मिथिलांचलक किछु लोक कथा (संकलन आ सम्पादन) आ शिरीषक फूल (अनुवाद) प्रकाशित। महेन्द्रनारायण निधि, धनुषा, नेपाल परमेश्वर कापड़ि, धनुषा, नेपाल जयनारायण झा "जिज्ञासु", नेपाल सुरेश झा, नेपाल 1920-1995 रोहिणी रमण झा 1950- डॉ. कमलाकान्त भण्डारी 1952- विनोद बिहारी लाल 1953- जन्म स्थान पचही, मधुबनी, बिहार ।चर्चित कथाकार । सयसँ ऊपर कथा प्रकाशित । अरविन्द ठाकुर 1954- परती टूटि रहल अछि (कविता संग्रह), अन्हारक विरोधमे (कथा संग्रह) श्याम दरिहरे 1954- जन्म स्थान बरहा, बेनीपट्टी मधुबनी, बिहार । कवि, कथाकार । प्रकाशित कृति : सरिसोमे भूत (कथा संग्रह) अनूदित कृति : कनिप्रिया (धर्मवीर भारती) दिनेश कुमार झा अशोक कुमार ठाकुर जन्म 2 जनवरी 1944 ई.। गाम बड़ागाँव (पंडौल)। नागमंडल (नाटक-अनुवाद), निशांत, वसुधाक संसार (उपन्यास) प्रतापनारायण झा, नेपाल शीतल झा, नेपाल उग्रनारायण मिश्र "कनक" देवनारायण यादव, निदेशक मिथिला शोध संस्थान अमरजी, एस. एन. दास, गोविन्द झा, ब्रजेन्द्र त्रिपाठी डॉ. शम्भूनाथ चौधरी 1920-2008 इन्द्रकांत झा पंचानन मिश्र प्रोफेसर गुरमैता प्रोफेसर महेन्द्र 1947- जन्म: भेलाही, सुपौल, बिहार । प्रसिद्ध कवि, कथाकार, आलोचक । वृत्ति: भू.ना. विश्वविद्यालयक स्नातकोत्तर केन्द्र, सहरसामे मैथिली विभागाध्यक्ष। प्रकाशित कृति साहित्य अकादेमीसँ प्राकाशित मोनोग्राफ शैलेन्द्र मोहन झा । सहयोगी संकलन-संकल्प । ’राजकमल जयन्ती प्रसंगक संपादन। महेन्द्र नारायण सिंह "मगन" सूर्यकांत झा, जनकपुर स्व. चन्द्रकान्त मिश्र, आसी, दरभंगा स्व. महेन्द्र नारायण झा, बेलौंजा, मधुबनी स्व.राजकुमार मल्लिक, सोहराय (पोखरिभीड़ा), मधुबनी लक्ष्मीपति सिंह फूलचन्द्र मिश्र रमण किशोरनाथ झा गाम- विट्ठो, पो. सरिसवपाही, मधुबनी। "लोकवेद" पोथी प्रकाशित। सूर्यनारायण झा "सरस" पोथी "मैथिली श्री सीतारामचरितमानस" प्रकाशित। भूपेन्द्र नारायण मण्डल डॉ. अमरेन्द्र गोरेलाल मनीषी कुन्दन अमिताभ शंभु अगेही जन्म ८ जनवरी १९४१, प्रकाशित कृति:ओझराएल डीह (कथा-काव्य) १९९८, सतंजा (कथा संग्रह)१९९९, तेसरी बेरिआ (कथा काव्य)२००३, बज्जिका छंद विभास २००७ मेही दास धरहरा कोठी_बनमनखी_असली नाम_रामानुग्रहलाल दास_आश्रम_मायामोहल्ला, कुप्पाघाट, भागलपुर विन्ध्यवासिनी देवी मैथिली लोकगीत 1920-2006 कामेश्वरी देवी 1922- मधुबनी जिलाक नवानी गामक। जन्म १९२२ ई. मे अपन मातृक नाहरमे भेलनि। पति पं मदनमोहन झा। बरौनीवासी प्रसिद्ध तान्त्रिक पण्डित केशव मिश्र हिनक पिता छलथिन। "मिथिला संस्कार गीत" पोथी। कुसुमलता कर्ण अणिमा सिंह 1924- समीक्षिका, अनुवादिका, सम्पादिका । प्रकाशन: मैथिली लोकगीत, वसवेश्वर (अनु.) आदि। लेडी ब्रेबोर्न कॉलेज, कलकत्तामे पूर्व प्राध्यापिका। लिली रे 1933- जन्म:२६ जनवरी, १९३३,पिता:भीमनाथ मिश्र,पति:डॉ. एच.एन्.रे, दुर्गागंज, मैथिलीक विशिष्ट कथाकार एवं उपन्यासकार । मरीचिका उपन्यासपर साहित्य अकादेमीक १९८२ ई. मे पुरस्कार । मैथिलीमे लगभग दू सय कथा आ पाँच टा उपन्यास प्रकाशित । विपुल बाल साहित्यक सृजन। अनेक भारतीय भाषामे कथाक अनुवाद-प्रकाशित। पहिल प्रबोध सम्मान 2004 सँ सम्मानित। चित्रलेखा देवी 1935- मोहिनी झा 1937- डॉ. सावित्री झा कविता देवी 1942- प्रमिला झा शान्ति सुमन 1942- जन्म 15 सितम्बर 1942, कासिमपुर, सहरसा, बिहार, प्रकाशित कृति, “ओ प्रतीक्षित, परछाई टूटती, सुलगते पसीने, पसीने के रिश्त, मौसम हुआ कबीर, समय चेतावनी नहीं देता, तप रेहे कचनार, भीतर-भीतर आग, मेघ इन्द्रनील (मैथिली गीत संग्रह), शोध प्रबंध: मध्यवर्गीय चेतना और हिन्दी का आधुनिक काव्य, उपन्यास: जल झुका हिरन। सम्मान: साहित्य सेवा सम्मान, कवि रत्न सम्मान, महादेवी वर्मा सम्मान। अध्यापन कार्य। प्रभावती झा 1945-1999 स्व. इलारानी सिंह 1945-1993 इलारानी सिंह: जन्म 1 जुलाई, 1945, निधन : 13 जून, 1993, पिता : प्रो. प्रबोध नारायण सिंह सम्पादिका : मिथिला दर्शन, विशेष अध्ययन : मैथिली, हिन्दी, बंगला, अंग्रेजी, भाषा विज्ञान एवं लोक साहित्य । प्रकाशित कृति : सलोमा (आस्कर वाइल्डक फ्रेंच नाटकक अनुवाद 1965), प्रेम एक कविता (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विषवृक्ष (1968) बंगला नाटकक अनुवाद, विन्दंती (1972), स्वरचित: मैथिली कविता संग्रह (1973), हिन्दी संग्रह। उषाकिरण खान 1945- जन्म:२४ अक्टूबर १९४५,कथा एवं उपन्यास लेखनमे प्रख्यात । मैथिली तथा हिन्दी दूनू भाषाक चर्चित लेखिका ।प्रकाशित कृति:अनुंत्तरित प्रश्न, दूर्वाक्षत, हसीना मंज़िल, भामती (उपन्यास) । २०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास) लेल साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली। नीरजा रेणु 1945- जन्म: ११ अक्टूबर १९४५,नाम: कामाख्या देवी,उपनाम:नीरजा रेणु,जन्म स्थान:नवटोल,सरिसबपाही ।शिक्षा: बी.ए. (आनर्स) एम.ए., पी-एच.डी.,गृहिणी ।प्रकाशित रचना : ओसकण (कविता मि.मि., १९६०) लेखन पर पारिवारिक, सांस्कृतिक परिवेशक प्रभाव । मैथिली कथा धारा साहित्य अकादेमी नई दिल्लीसँ स्वातन्त्र्योत्तर मैथिली कथाक पन्द्रह टा प्रतिनिधि कथाक सम्पादन ।सृजन धार पियासल कथा संग्रह,आगत क्षण ले कविता संग्रह,ऋतम्भरा कथा संग्रह,प्रतिच्छवि हिन्दी कथा संग्रह,१९६० सँ आइधरि सएसँ अधिक कथा, कविता, शोधनिबन्ध, ललितनिबन्ध,आदि अनेक पत्र-पत्रिका तथा अभिनन्दनग्रन्थमे प्रकाशित ।मैथिलीक अतिरिक्त किछु रचना हिन्दी तथा अंग्रेजीमे सेहो।२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार। वीणा ठाकुर 1954- जन्म- भवानीपुर, पण्डौल (मधुबनी)। पिता श्री श्रीमोहन ठाकुर। प्रकाशित कृति: मैथिली रामकाव्यक परम्परा, इतिहास-दर्पण (समीक्षा), विद्यापतिक उत्स (समालोचना), भारती (उपन्यास) ज्ञानसुधा मिश्र भारतक उच्चतम न्यायालयक चारिम महिला न्यायाधीश आ पहिल मैथिलानी। जस्टिस मृदुला मिश्र वीणा कर्ण 1946- जन्म 3 नवम्बर 1946, गाम- पटोरी, पो.पंचगछिया, जिला- सहरसा। सदस्य, मैथिली साहित्य अकादेमी परामर्शदातृ समिति 1987-1993, सदस्य, भाषा परामर्शदातृ समिति (मैथिली), भारतीय ज्ञानपीठ। अवकाशप्राप्त विश्वविद्यालय आचार्य आ अध्यक्ष, मैथिली विभाग, पटना विश्वविद्यालय। प्रकाशित कृति- अर्गला, भावनाक अस्थिपंजर (मैथिली काव्य संग्रह), शंखनाद, तुभ्यमेव समर्पये, अनुबन्ध (हिन्दी काव्य संग्रह)। प्रकाश्य: सप्तपदी (मैथिली निबन्ध संग्रह), चारित्रिक पृष्ठभूमिमे मैथिलीक प्रसिद्ध उपन्यास, मैथिली-उपन्यासक कथा किछु कहैत अछि (मैथिली आलोचना); जिन्दगीनामा (हिन्दी काव्य संग्रह), क्रमशः (हिन्दी आलोचना)। शेफालिका वर्मा 1943- जन्म:९ अगस्त, १९४३,जन्म स्थान : बंगाली टोला, भागलपुर । शिक्षा:एम., पी-एच.डी. (पटना विश्वविद्यालय), ए. एन. कालेज, पटना मे हिन्दीक प्राध्यापिका पदसँ सेवानिवृत्त । नारी मनक ग्रन्थिकेँ खोलि:करुण रससँ भरल अधिकतर रचना। प्रकाशित रचना:झहरैत नोर, बिजुकैत ठोर; विप्रलब्धा (कविता संग्रह), स्मृति रेखा (संस्मरण संग्रह), एकटा आकाश (कथा संग्रह), यायावरी (यात्रा-वृत्तान्त), भावाञ्जलि (काव्य-प्रगीत) , किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा)। ठहरे हुए पल (हिन्दी) । २००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;यात्री-चेतना पुरस्कार। नीता झा 1953- जन्म : २१-०१-१९५३,व्यवसाय:प्राध्यापिका । लेखन पर समाजक परम्परा तथा आधुनिकताक संस्कार सँ होइत विसंगतिक प्रभाव।प्रकाशित कृति : फरिच्छ, कथा संग्रह १९८४, कथानवनीत १९९०,सामाजिक असन्तोष ओ मैथिली साहित्य शोध समीक्षा । सुशीला झा 1945- आशा मिश्र 1950- जन्म:६-७-१९५० ई.,प्रकाशित कथा मे मैथिकीक संग हिन्दी मे सेहो । सभसँ पैघ विजय मैथिली कथा संग्रह । डॉ. सुनीति झा प्रेमलता मिश्र 'प्रेम' 1948- जन्मस्थान:रहिका,माता:श्रीमती वृन्दा देवी,पिता:पं. दीनानाथ झा,शिक्षा:एम.ए., बी.एड.,प्रसिद्ध अभिनेत्री दू सयसँ बेशी नाटकमे भाग लेलनि ।भंगिमा (नाट्यमंच) क भूतपूर्व उपाध्यक्षा, पत्रिकाक सम्पादन, कथालेखन आदिमे कुशल । ’अरिपन’ आदि अनेक संस्था द्वारा पुरस्कृत-सम्मानित। डॉ. इन्दिरा झा 1957 मेनका मल्लिक 1966- शारदा सिन्हा मैथिली लोकगीत 1953- लालपरी देवी शकुंतला चौधरी राजेन्द्र प्रसाद सिंह, लिली रे, शशिकान्ता चौधरी, गोविन्द झा, शिवशंकर श्रीनिवास गोदावरी दत्ता, मिथिला चित्रकला उषा वर्मा 1948- कमला चौधरी 1953- कृति- मैथिलीक वेश-भूषा-प्रसाधन सम्बन्धी शब्दावली, प्रकाशनाधीन: बाटे बिलायल पानि (कथा संग्रह), पिया मधुमास (कविता संग्रह), आशापूर्णा देवीक बंगला लघु उपन्यास मन मंजूषाक मैथिली अनुवाद। मुजफ्फरपुरसँ प्रकाशित मैथिली साहित्यिक पत्रिका स्वातीक सम्पादन (१९८४-८५)। सीता देवी, मिथिला चित्रकला सरस्वती चौधरी, जनकपुर डॉ. अरुणा चौधरी विभा रानी 1959- मैथिली के 3 साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता लेखकक 4 गोट किताब "कन्यादान" (हरिमोहन झा), "राजा पोखरे में कितनी मछलियां" (प्रभास कुमार चाऊधरी), "बिल टेलर की डायरी" व "पटाक्षेप" (लिली रे) हिन्दीमे अनूदित छन्हि।2 गोट लोककथाक पुस्तक "मिथिला की लोक कथाएं" व "गोनू झा के किस्से"। मैथिली कथा संग्रह "खोहसँ निकसैत"। ज्योत्सना चन्द्रम 1963- जन्मतिथि: १५ दिसम्बर, १९६३,जन्मस्थान : मरूआरा, सिंधिया खुर्द, समस्तीपुर,पिता : श्री मार्कण्डेय प्रवासी,माता: श्रीमती सुशीला झा,अध्यापन ।सुपरिचित कवयित्री, कथाकार । प्रकाशित कृति: बोनसाई (कविता संग्रह), झिझिरकोना (कथासंग्रह)। सुस्मिता पाठक 1962- जन्म: सुपौल, बिहार । परिचिति कविता संग्रह प्रकाशित । कथावाचक, कथासंग्रह प्रकाशनाधीन । राजनीति शास्त्रमे एम.ए.। संगीत, पेंटिंगमे रुचि । मैथिलीक पोथी पत्रिका पर अनेक रेखाचित्र प्रकाशित । समकालीन जीवन, समय, आ तकर स्पंदनक कवयित्री । अनेक भाषामे रचनाक अनुवाद प्रकाशित। उर्मिला देवी, मिथिला चित्रकला यमुना देवी, मिथिला चित्रकला यशोदा देवी, मिथिला चित्रकला रमा झा, सम्पादक मिथिला दर्पण पन्ना झा सुधा कर्ण नूतन दास सम्पादिका, मिथिलांगन राधिका झा, अंग्रेजी लेखिका हुनकर अंग्रेजी उपन्यास "स्मेल" आ "लैन्टर्न्स ऑन देयर हॉर्न्स" आ अंग्रेजी लघु कथा संग्रह "द एलीफेन्ट एण्ड द मारुति" प्रकाशित अछि। उपन्यास "स्मेल" लेल हुनका "फ्रेन्च प्रिक्स गुएरलेन" पुरस्कार भेटल छन्हि आ ई पोथी सोलह भाषामे अनूदित भेल अछि। राधिका "एमहर्स्ट कॉलेज"सँ "एन्थ्रोपोलोजी" पढ़ने छथि आ "शिकागो विश्वविद्यालय"सँ राजनीति विज्ञानमे मास्टर्स डिग्री लेने छथि। ओ "हिन्दुस्तान टाइम्स" आ "बिजनेस वर्ल्ड"मे काज केने छथि आ संगमे "राजीव गांधी फाउन्डेशन, दिल्ली" मे सेहो, जतए ओ आतंकवादसँ पीड़ित बच्चा सभ लेल सम्पर्क कार्यक्रमक प्रारम्भ केने रहथि। आइ काल्हि ओ अपन पति आ बच्चीक संग टोक्योमे रहै छथि। स्वयंप्रभा झा 1970- युवा रचनाकार रूपा धीरू 1973- रूपा धीरू- जन्मस्थान-मयनाकडेरी, सप्तरी, श्रीमती पूनम झा आ श्री अरूणकुमार झाक पुत्री।स्थायी पता- अञ्चल- सगरमाथा, जिल्ला- सिरहा। प्रथम प्रकाशित रचना-कोइली कानए, माटिसँ सिनेह (कविता),भगता बेङक देश-भ्रमण (कनक दीक्षितक पुस्तकक धीरेन्द्र प्रेमर्षिसँग मैथिलीमे सहअनुवाद,सङ्गीतसम्बन्धी कृति- राष्ट्रियगान, भोर, नेहक वएन, चेतना, प्रियतम हमर कमौआ (पहिल मैथिली सीडी), प्रेम भेल तरघुस्कीमे, सुरक्षित मातृत्व गीतमाला, सुखक सनेस। सम्पादन-पल्लव, मैथिली साहित्यिक मासिक पत्रिका, सम्पादन-सहयोग,हमर मैथिली पोथी (कक्षा १, २, ३, ४ आ ५ आ कक्षा 9-10 क ऐच्छिक मैथिली विषय पाठ्यपुस्तकक भाषा सम्पादन)। रंजना झा, विद्यापति संगीत गायिका रश्मि दत्त, गायिका, जनकपुर कामिनी कामायनी मुन्नी झा युवा रचनाकार ज्योति सुनीत चौधरी जन्म तिथि -३० दिसम्बर १९७८; जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी ; शिक्षा- स्वामी विवेकानन्द मिडिल स्कूल़ टिस्को साकची गर्ल्स हाई स्कूल़, मिसेज के एम पी एम इन्टर कालेज़, इन्दिरा गान्धी ओपन यूनिवर्सिटी, आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी); निवास स्थान- लन्दन, यू.के.; पिता- श्री शुभंकर झा, ज़मशेदपुर; माता- श्रीमती सुधा झा, शिवीपट्टी। ज्योतिकेँwww.poetry.comसँ संपादकक चॉयस अवार्ड (अंग्रेजी पद्यक हेतु) भेटल छन्हि। हुनकर अंग्रेजी पद्य किछु दिन धरि www.poetrysoup.com केर मुख्य पृष्ठ पर सेहो रहल अछि। ज्योति मिथिला चित्रकलामे सेहो पारंगत छथि आ हिनकर मिथिला चित्रकलाक प्रदर्शनी ईलिंग आर्ट ग्रुप केर अंतर्गत ईलिंग ब्रॊडवे, लंडनमे प्रदर्शित कएल गेल अछि। कविता संग्रह ’अर्चिस्’ प्रकाशित। कामिनी 1978- युवा कवियित्री रुक्साना सिद्दीकी कल्पना मिश्र, मैथिली रंगमंच ज्योति झा, , मैथिली रंगमंच किरण झा, मैथिली रंगमंच प्रियंका झा, मैथिली रंगमंच ऋतु कर्ण, मैथिली रंगमंच ज्योति वत्स, रंगमंच नेहा वर्मा, रंगमंच सविता अनुप्रिया मृदुला प्रधान अरुण मिश्र, महिला बॉक्सिंग राखी दास, मिथिला चित्रकला बनारसी पंडित,मिथिला चित्रकला, धनुषा, नेपाल देवकला देवी कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल मदनकला कर्ण,मिथिला चित्रकला, नेपाल महासुन्दरी देवी,मिथिला चित्रकला निर्जला झा, मिथिला चित्रकला, नेपाल फुलो साह, मिथिला चित्रकला, महोत्तरी, नेपाल रजनी पल्लवी संगीता कुमारी, मैथिली फेडोरा प्रोजेक्ट विन्देश्वरी दास गौरी सेन सीमा झा वाणी मिश्र, कवियित्री १९५३-१९९६ कोइलख, मधुबनी। जन्मस्थान तिलाठी, नेपाल। मौसमी बनर्जी, कवियित्री शैल झा शान्ति देवी शशिबाला पिता श्री उग्र नारायण लाल, पति श्री उमेश कुमार कण्ठ (बिसहथ)। शिवा कश्यप आ कृष्ण कुमार कश्यपक सहयोगसँ "भारती विकास संस्था"क स्थापना। रचना: कृष्ण कुमार कश्यपक संग "मेघदूत" आ "गीत-गोविन्द"क मैथिली अनुवाद, माछ-भात, मिथिला चित्र-शिक्षा, भाग-१, मिथिला चित्र-कोर, भाग-३। मुन्नी कुमारी वर्मा प्रेरणा झा मिथिला लोक कला अंशुमाला मैथिली लोकगीत। श्वेता झा चौधरी, चित्रकार गाम सरिसव-पाही, ललित कला आ गृहविज्ञानमे स्नातक। मिथिला चित्रकलामे सर्टिफिकेट कोर्स।कला प्रदर्शिनी: एक्स.एल.आर.आइ., जमशेदपुरक सांस्कृतिक कार्यक्रम, ग्राम-श्री मेला जमशेदपुर, कला मन्दिर जमशेदपुर ( एक्जीवीशन आ वर्कशॉप)।कला सम्बन्धी कार्य: एन.आइ.टी. जमशेदपुरमे कला प्रतियोगितामे निर्णायकक रूपमे सहभागिता, २००२-०७ धरि बसेरा, जमशेदपुरमे कला-शिक्षक (मिथिला चित्रकला), वूमेन कॉलेज पुस्तकालय आ हॉटेल बूलेवार्ड लेल वाल-पेंटिंग।प्रतिष्ठित स्पॉन्सर: कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स, टिस्को; टी.एस.आर.डी.एस, टिस्को; ए.आइ.ए.डी.ए., स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, जमशेदपुर; विभिन्न व्यक्ति, हॉटेल, संगठन आ व्यक्तिगत कला संग्राहक। हॉबी: मिथिला चित्रकला, ललित कला, संगीत आ भानस-भात। श्वेता झा मिथिला चित्रकला, सम्प्रति सिंगापुरमे निवास। डॉ. जया वर्मा 1964- जन्म १६.०२.१९६४. एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास, दिल्ली वि.वि.। “महाकाव्य आ पुराणमे नारी” आ “जेन्डर स्टडीज”पर विशेष अध्ययन। श्रीमति शेफालिका वर्माक उपन्यास “नागफाँस”क अंग्रेजी अनुवाद (विदेह ई-पत्रिकामे धारावाहिक रूपे)। रानी झा ब्यूटी कुमारी मोती कर्ण मिथिला चित्रकला कल्पना मिश्र मुम्बइसँ प्रकाशित होइबला मैथिली पत्रिका "विदेह"क सम्पादक। तुनिशा प्रियम माँक नाम- स्व. निभा रानी, पिता- डॉ. रमेश कुमार राय, नाना- प्रो. शिवनाथ मंडार, विभागाध्यक्ष भूगोल, बलिराम भगत कॉलेज, समस्तीपुर। नानी- श्रीमति निरुपमा पटेल, प्रधानाध्यापिका, म.वि.गाँधीपार्क, समस्तीपुर। जन्मतिथि- २०-१०-१९९८ पैतृक गाम- मँझौलिया, प्रखण्ड- बोचहा, जिला मुजफ्फरपुर, मातृक- ग्राम-धोबियाही, पोस्ट- बहेड़ी, जिला-समस्तीपुर। छात्रा- कक्षा- सप्तम “अ”, डी.ए.वी. स्कूल, समस्तेपुर। आदर्श- नानाजी। आवास, आशियाना भवन, रोड नं.०२, आदर्शनगर, समस्तीपुर। निक्की प्रियदर्शिनी प्रज्ञा झा डॉ. नलिनी चौधरी नीलम चौधरी, कथक नृत्यांगना शान्तिलक्ष्मी चौधरी श्रीमति शांतिलक्ष्मी चौधरी, ग्राम गोविन्दपुर, जिला सुपौल निवासी आ राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय, सहरसा मे कार्यरत पुस्तकालयाध्यक्ष श्री श्यामानन्द झाक जेष्ठ सुपुत्री, आओर ग्राम महिषी (पुनर्वास आरापट्टी), जिला सहरसा निवासी आ दिल्ली स्कूल ऑफ इकानोमिक्स सँ जुड़ल अन्वेषक आ समाजशास्त्री श्री अक्षय कुमार चौधरीक अर्धांगिनी छथि। प्राणीशास्त्र सँ स्नातकोत्तर रहितो शिक्षाशास्त्रक स्नातक शिक्षार्थी आ एकटा समाजशास्त्री सँ सानिध्यक चलिते आम जीवनक सामाजिक बिषय-बौस्तु आ खास कऽ महिलाजन्य सामाजिक समस्या आ प्रघटनामे हिनक विशेष अभिरूचि स्वभाविक। इरा मल्लिक इरा मल्लिक, पिता स्व. शिवनन्दन मल्लिक, गाम- महिसारि, दरभंगा। पति श्री कमलेश कुमार, भरहुल्ली, दरभंगा। गुंजन कर्ण राँटी मधुबनी, सम्प्रति यू.के.मे रहै छथि। www.madhubaniarts.co.uk पर हुनकर कलाकृति देखि सकै छी। पूनम मंडल प्रियंका झाक संग मैथिली न्यूज पोर्टल "समदिया" www.esamaad.blogspot.com क संचालन । प्रियंका झा पूनम मंडलक संग मैथिली न्यूज पोर्टल "समदिया" www.esamaad.blogspot.com क संचालन । स्तुति नारायण डॉ. ललिता झा १९५१ जन्म पनिचोभ, दरभंगामे। "मैथिलीक भोजन सम्बन्धी शब्दावली" प्रकाशित"। आरती कुमारी १९६७- "मैथिली मुक्तक काव्यमे नारी" प्रकाशित। मीना झा अनुपमा प्रियदर्शिनी पति डॉ. रतन कर्ण, गाम- उजान (बड़कागाम), पो. लोहना रोड, जिला दरभंगा। सम्प्रति लोजियाना (संयुक्त राज्य अमेरिकामे), शिक्षा- एम.एस.सी. (जंतु विज्ञान), ल.ना. मिथिला वि.वि., दरभंगा; बी.एस.सी. बी.आर. अम्बेडकर वि.वि. मुजफ्फरपुरसँ, हॉबी, मिथिला चित्रकला, कमप्यूटराइज्ड चित्रकला, ललित कला। उपलब्धि: अखिल भारतीय कला आ दस्तकारी प्रतियोगिताक पुरस्कार 1995 मे; संस्कार भारती भाव नृत्य प्रतियोगिता 1989 मे सहभागी। आराधना मल्लिक मैथिली रंगमंच। शिखा मैथिली रंगमंच। प्रीति ठाकुर गाम- जगेली, भाया तारानगर, पूर्णियाँ। मैथिली बाल साहित्यमे "गोनू झा आ आन चित्र कथा २००८", "मैथिली चित्रकथा २००९" आ "मिथिलाक लोकदेवता २०१०" प्रकाशित। सारिका ठाकुर गुलसारिका नामसँ लेखन। भावना नवीन अनुपमा झा ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल, भारत। दयानाथ झा गाम नागदह, मधुबनी। मैथिली रंगमंडल मिथि-यात्रिक, कोलकाता। गंगा झा मैथिली रंगमंडल कोकिल मंच, कोलकाता। कोलकाता आ गाम पजुआरिडीह टोलमे मैथिली रंगमंच निर्देशन। कमलेश कुमार दास, रंगमंच कलाकार डॉ. सुधाकर चौधरी १९४६- जन्म १५ मार्च १९४६ ई.। प्रकाशित पोथी: काजर, तीन रंग तेरह चित्र (कथा संग्रह), पंडी जी छत्ता (प्रहसन), विप्लवी सुभाष (नाटक)। स्व. चुनचुन मिश्र, रहिका, मधुबनी। मिथिला राज्यक आन्दोलन कर्मी। सत्यनारायण लाल कर्ण मिथिला चित्रकला ले. कर्नल मायानाथ झा 1945- जन्म 1 अप्रैल 1945 ई.। गाम- भराम (मधुबनी)। जकर नारि चतुर होइ (मैथिली लोक कथा संग्रह) प्रकाशित। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) डॉ. राजीव कुमार वर्मा 1963- , डुमरा, सहरसा। जन्म २१.०७.१९६३, एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास, दिल्ली वि.वि.। कतेको अनुवाद खास कऽ श्रीमति शेफालिका वर्माक “बोल्डनेसक लहास”क “कोर्प्स ऑफ बोल्डनेस”-स्पैरो, मुम्बै द्वारा प्रकाशित आ श्रीमति शेफालिका वर्माक उपन्यास “नागफाँस”क अंग्रेजी अनुवाद (विदेह ई-पत्रिकामे धारावाहिक रूपे)। श्याम किशोर सिंह सचिन्द्रनाथ झा मिथिला लोक चित्रकला कृष्ण कुमार कश्यप 1949- जन्म १५ सितम्बर १९४९ ई.। पिता- कवि-उपन्यासकार स्व. इन्द्रनारायण लाल "सँवलिया"। जनबरी १९६५ ई. मे नेना सभ लेल "नाइट स्कूल", १९८१ ई. मे "कला आधारित जीवन आ शिक्षण पद्धति"क प्रवर्तन आ तकर कार्यान्वयन लेल शिवा कश्यप आ शशिबालाक सहयोगसँ "भारती विकास संस्था"क स्थापना। रचना: शशिबालाक संग "मेघदूत" आ "गीत-गोविन्द"क मैथिली अनुवाद, माछ-भात, मिथिला चित्र-शिक्षा, भाग-१, मिथिला चित्र-कोर, भाग-३। कालीनाथ ठाकुर ग्राम सर्वसीमा मुरलीधर, मैथिली फिल्म निर्देशक राजेन्द्र विमल, जनकपुर, नेपाल 1949- मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक प्राज्ञ विमल शिक्षाक हकमे विद्यावारिधि (पी.एच.डी.)क उपाधि प्राप्त कएने छथि।कम्मो लिखिकऽ यथेष्ट यश अरजनिहार डा. विमलक लेखनीक प्रशंसा मैथिलीक सङ्गसङ्ग नेपाली आ हिन्दी साहित्यमे सेहो होइत रहलनि अछि। त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गत रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे प्राध्यापन कएनिहार डा. विमलक पूर्ण नाम राजेन्द्र लाभ छियनि। हिनक जन्म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अछि। साहित्यकारक नव पीढ़ीकेँ निरन्तर उत्प्रेरित करबाक कारणे ई डा.धीरेन्द्रक बाद जनकपुर-परिसरक साहित्यिक गुरुक रूपमे स्थापित भऽ गेल छथि। नरेश कुमार विकल 1950- जन्म २७ जुलाइ १९५० भगवानपुर देसुआ (समस्तीपुर)। काव्य- अरिपन, महुआ मदन रस टपकय, बिन बाती दीप जरय। कथा-संग्रह- भरि गेल दर्दक इनार। उपन्यास- टहकैत टीस। नाटक- चोखगर खौंच। जनक किशोर लाल दास कृष्णचन्द्र झा "मयंक" लक्ष्मण झा "सागर" 1953- "उचरि बैसू कौआ" मैथिली कविता संग्रह प्रकाशित। रघुवीर मोची शारदानन्द दास "परिमल" शशिबोध मिश्र "शशि" 1946- सुरेन्द्रनाथ अमरनाथ १९७५ ई. मे "क्षणिका" लघुकथा संग्रह प्रकाशित। हास्य कथाकार। बच्चा ठाकुर बुद्धिनाथ मिश्र कुंज बिहारी, मैथिली गायक टोक्यो हासेगावा, निदेशक मिथिला म्यूजियम, निगाटा राजाराम सिंह राठौर, धनुषा वैद्यनाथ विमल 1955- डॉ वासुकीनाथ झा 1940- जितेन्द्र मिश्र "जीवन" वीरेन्द्र नारायण झा वीरेन्द्र झा 1956- वैकुण्ठ झा 1954- पिता-स्वर्गीय रामचन्द्र झा, जन्म-२४ - ०७ - १९५४ (ग्राम-भरवाड़ा, जिला-दरभंगा), शिक्षा-स्नात्कोत्तर (अर्थशास्त्र), पेशा- शिक्षक। मैथिली, हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा मे लगभग २०० गीतक रचना। गोनू झा पर आधारित नाटक ''हास्यशिरोमणि गोनू झा तथा अन्य कहानी" क लेखन। एकर अलावा हिन्दीमे लगभग १५ उपन्यास तथा कथाक लेखन। वैकुण्ठ झा विद्यानन्द झा 'पञ्जीकार' 1957- जन्म-09.04.1957,पण्डुआ, ततैल, ककरौड़(मधुबनी), रशाढ़य(पूर्णिया), शिवनगर (अररिया) आ सम्प्रति पूर्णिया। पिता लब्ध धौत पञ्जीशास्त्र मार्त्तण्ड पञ्जीकार मोदानन्द झा, शिवनगर, अररिया, पूर्णिया| पितामह-स्व. श्री भिखिया झा। पञ्जीशास्त्रक दस वर्ष धरि 1970 ई.सँ 1979 ई. धरि अध्ययन, 22 वर्षक बएससँ पञ्जी-प्रबंधक संवर्द्धन आ संरक्षणमे संलग्न। कृति- पञ्जी शाखा पुस्तकक लिप्यंतरण आ संवर्द्धन। महेन्द्र नारायण कर्ण डॉ. विश्वेश्वर मिश्र अर्जुन नारायण चौधरी नरेन्द्र महेन्द्र मिश्र, नेपाल कमल कांत झा 1943- महाप्रकाश 1946- जन्म: बनगांव, सहरसा, बिहार । वरिष्ट कवि ओ कथाकार। प्रकाशित कृति: कविता संभवा, संग समय के (कविता संग्रह)। कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान २०१० ई.- श्री महाप्रकाश (कविता संग्रह “संग समय के”)। छत्रानन्द सिंह झा 1946- अयोध्यानाथ चौधरी, धनुषा, नेपाल 1947- मूलत: कविक रूपमे परिचित छथि । नेपालक आधुनिक कविताक क्षेत्रमे हिनक नाम उल्लेखनीय अछि । श्री चौधरीक लेखनमे मानवीय संवेदनाक प्रतिबिम्ब पाओल जाइत अछि । कविताक संग कथा आ निबन्धमे सेहो ई कलम चलबैत छथि । फड़िछाएल लेखन हिनक विशेषता थिकनि ।धनुषा जिलाक दुहबी गामक रहनिहार श्री चौधरीक जन्म ६अक्टुबर १९४७कऽ भेल छनि । हिनक क्षितिजक ओहिपार नामसँ एक कविता-सग्ङप्रह प्रकाशित छनि । विद्यानाथ झा 'विदित' सियाराम झा "सरस" 1948- जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी बिहार । प्रसिद्ध गीतकार, बादमे कथा लेखन प्रारम्भ केलनि । प्रकाशित कृति आंजुर भरि सिंगरहार, शोणिताएल उगैत सूर्यक धम्मक (कथा संग्रह)। अग्निपुष्प 1948- जन्म: तरौनी, दरभंगा। मूलनाम : महेन्द्र झा । मैथिलीमे सहस्त्रबाहु कविता संग्रह प्रकाशित । मुक्ति प्रसंगक अनुवाद प्रकाशित । वामपंथी आन्दोलनमे सक्रिय। शिक्षा, सम्वाद आदि पत्रिकाक सम्पादन । वामपंथी विचारधाराक सशक्त कवि। मधुकांत झा 1949- डॉ. रामबरन यादव, नेपाल राष्ट्रपति जगदीश चन्द्र अनिल १९५०- मूल नाम जगदीश चन्द्र ठाकुर, जन्म: 27.11.1950,शंभुआर, मधुबनी । सेवा निवृत बैंक अधिकारी। मैथिलीमे प्रकाशित पोथी-1. तोरा अडनामे -गीत संग्रह-1978; 2. धारक ओइ पार-दीर्घ कविता-1999 हरेकृष्ण झा 1950- जन्म १० जुलाई १९५० ई. गाम- कोइलखमे। अभियंत्रणक अध्ययण छोड़ि मार्क्सवादी राजनीतिमे सक्रिय। अनेक कविता आ आलोचनात्मक निबन्ध प्रकाशित। अनुवाद एवं विकास विषयक शोध कार्यमे रुचि। स्वतंत्र लेखन। प्रकृति एवं जीवनक तादात्म्य बोधक अग्रणी कवि। "एना त’ नहि जे" (कविता संग्रह)।२००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झाकेँ कविता संग्रह “एना त नहि जे”लेल कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान। एस.एन.सत्यार्थी महेन्द्र हजारी गिरीश चन्द्र लाल वीनू भाइ उदय नारायण सिंह नचिकेता 1951- जन्म-१९५१ ई. कलकत्तामे।पहिल काव्य संग्रह ‘कवयो वदन्ति’। १९७१ ‘अमृतस्य पुत्राः’ (कविता संकलन) आऽ ‘नायकक नाम जीवन’ (नाटक)| १९७४ मे ‘एक छल राजा’/ ’नाटकक लेल’ (नाटक)। १९७६-७७ ‘प्रत्यावर्त्तन’/ ’रामलीला’(नाटक)। १९७८मे जनक आऽ अन्य एकांकी। १९८१ ‘अनुत्तरण’(कविता-संकलन)। १९८८ ‘प्रियंवदा’ (नाटिका)। १९९७-‘रवीन्द्रनाथक बाल-साहित्य’(अनुवाद)। १९९८ ‘अनुकृति’- आधुनिक मैथिली कविताक बंगलामे अनुवाद, संगहि बंगलामे दूटा कविता संकलन। १९९९ ‘अश्रु ओ परिहास’। २००२ ‘खाम खेयाली’। २००६मे ‘मध्यमपुरुष एकवचन’(कविता संग्रह। २००८ ई. मे नाटक "नो एण्ट्री: मा प्रविश" सम्पूर्ण रूपेँ "विदेह" ई- पत्रिकामे धारावाहिक रूपेँ ई-प्रकाशित भए एकटा कीर्तिमान बनेलक।२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”केँ नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश लेल कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान। डॉ. अशोक अविचल 1967- जन्म- ५ जनवरी १९६७, गाम- रहुआ संग्राम, जिला मधुबनी। मैथिली प्राध्यापक। रचना: एक बनू नेक बनू (लघु नाटक), मैथिली भाषा: सर्वेक्षण आ विश्लेषण, हमरा देशक भागमे (मैथिलीक प्रथम असंगत नाटक), सम्पादन: झारखण्डक सनेश, कचोट (नौ अंक), झारखण्ड वाणी (हिन्दी साप्ताहिक), सम्मान: अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलनमे सम्मान (२०००), परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी समिति सम्मान (२००८) रविकांत नीरज सत्यानन्द पाठक शिव कुमार नीरव विद्यानाथ झा योगीराज कुणाल 1951- राम भरोस कापड़ि भ्रमर, धनुषा, नेपाल 1951- जन्म-बघचौरा, जिला धनुषा (नेपाल)।बन्नकोठरी: औनाइत धुँआ (कविता संग्रह), नहि, आब नहि (दीर्घ कविता), तोरा संगे जएबौ रे कुजबा (कथा संग्रह, मैथिली अकादमी पटना, १९८४), मोमक पघलैत अधर (गीत, गजल संग्रह, १९८३), अप्पन अनचिन्हार (कविता संग्रह, १९९० ई.), रानी चन्द्रावती (नाटक), एकटा आओर बसन्त (नाटक), महिषासुर मुर्दाबाद एवं अन्य नाटक (नाटक संग्रह), अन्ततः (कथा-संग्रह), मैथिली संस्कृति बीच रमाउंदा (सांस्कृतिक निबन्ध सभक संग्रह), बिसरल-बिसरल सन (कविता-संग्रह), जनकपुर लोक चित्र (मिथिला पेंटिङ्गस), लोक नाट्य: जट-जटिन (अनुसन्धान)। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता- श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)। धीरेन्द्रनाथ मिश्र शिवेन्द्रलाल कर्ण, धनुषा, नेपाल 1951- लेखकसँ अधिक शिक्षकक रूपमे परिचित आ प्रतिष्ठित छथि । त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गतरा. रा. ब. कैम्पस, जनकपुर-धामक सह-प्राध्यापक श्री कर्णक ऐतिहासिक विषय-वस्तुपर लिखल कतोक लेख मैथिली, हिन्दी आ अग्ङरेजी भाषामे प्रकाशित अछि । स्वान्त-सुखाय ई कहियो कालकऽ कविता-कथा सेहो लिखि लैत छथि । हिनक लेखन ज्ञानवर्द्धक, जानकारीमूलक एवं सोझारएल रहैत अछि । देखलापर बुझना जाइत अछि जे ई हिनक गम्भीर अध्ययनक परिणति थिक ।सामाजिक तथा साहित्यिक सङ्घ-संस्थासभमे सेहो सक्रिय प्राध्यापक कर्णक जन्म धनुषा जिलाक देवडीहा गाममे २ जनवरी १९५१ ई. कऽ भेल छनि । ब्रह्मदेव लाल दास चण्डेश्वर खान गाम- पट्टीटोल, जिला मधुबनी। लघुकथा लेल चर्चित प्रशंसित। दयाकान्त झा गजेन्द्र नारायण सिंह, नेपाल पद्मश्री श्री गजेन्द्र नारायण सिंह गौरीशंकर राजहंस हरिकान्त झा इन्द्रनारायण झा कमलेश झा किशोरीकान्त मिश्र ललित कुमुद मनमोहन झा प्रवासी साहित्यालंकार सीताराम सिंह संगीतज्ञ। तुलानन्द मिश्र शैलेन्द्र कुमार झा 1952- जन्म स्थान हरिपुर, वकशी टोल, मधुबनी बिहार। प्रकाशित कृति: आरोह अवरोह, दशम खुट्टी (कथा संग्रह), इकोनोमिक हिस्ट्री ऑफ मिथिला (अंग्रेजी) । शिवशंकर श्रीनिवास 1953- जन्म स्थान लोहना मधुबनी, बिहार । चर्चित कथाकार ओ आलोचक । गीत ओ कविता सेहो कहियो काल लिखैत छथि । प्रकाशित कृति : त्रिकोण, अदहन, गाछ-पात, गामक लोक (कथा संग्रह)। अशोक 1953- जन्म स्थान लोहना, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, कवि ओ सम्पादक । प्रकाशित कृति : चक्रव्यूह (कविता संग्रह) त्रिकोण (सहयोगी कथा संग्रह), ओहि रातिक भोर (कथा-संग्रह), मातवर (कथा संग्रह)। विभूति आनन्द 1953- जन्म: शिवनगर, मधुबनी, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार, संपादक । प्रकाशित कृति टूटा उपन्यास टूटा समीक्षा, तीन टा कथ संग्रह, टूटा गीत-गजल संग्रह ओ चारिटा कथा-संग्रह प्रकाशित।२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार । केदार कानन 1959- जन्म स्थान सुपौल, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार ओ संपादक। प्रकाशित कृति : आकार लैत शब्द (कविता संग्रह), अनूदित कृति राजा राम मोहन राय, प्रायश्चित। सम्पादन संकल्प, भारती मंडन (पत्रिका)। डॉ. शशिनाथ झा 1954- गाम-दीप, जिला- मधुबनी। मैथिली, बांग्ला, नेवारी आ देवनागरी पांडुलिपिक विशेषज्ञ। साहित्य अकादमीक भाषा सम्मान 2007 क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल। धनुर्धर झा गाम- विशौल। "वाक्यार्थविवेचनम्" लेल श्रीवाणीयुवालंकरण पुरस्कार 2010 प्राप्त। शिवकान्त पाठक डॉ. योगेन्द्र पाठक "वियोगी" , वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा, वैज्ञानिक राजनन्द झा २००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। आद्यानाथ झा "नवीन" अमलतास 1956- डॉ. बैद्यनाथ चौधरी "बैजू" कमलधर दास "मैथिल कर्ण कायस्थक गोत्र, प्रवर, मूल आ वैवाहिक सम्बन्ध" पोथी प्रकाशित। यंत्रनाथ मिश्र दिगम्बर ठाकुर गणेश झा 1950- स्व. जनार्दन प्रसाद झा 'द्विज' हिन्दीक साहित्यकार। कन्दर्पनारायण लाल कर्ण कीर्तिनाथ झा 1955- शैलेन्द्र आनन्द 1955- कमलाकांत झा अध्यक्ष, मैथिली अकादमी, पटना रमण झा (1957- ) रचना: पश्चात्ताप (कथा-संग्रह)-1995, काव्य-वाटिका (कविता-संग्रह)- 1999, अलंकार-भास्कर (पूर्व-खण्ड) - 2002, अलंकार-भास्कर (अलंकार शास्त्र)- 2003, भिन्न-अभिन्न (समीक्षा)- 2008, संग सम्पादन: मैथिली (मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोध-पत्रिका) - 1996, सम्पादन: मैथिली (मिथिला विश्वविद्यालय, मैथिली विभागक शोध-पत्रिका)- 2007,2008 लल्लन प्रसाद ठाकुर 1951-1995 जन्म ५ फरबरी १९५१ मुंगेर मे श्रीमती सुभद्रा देवी आ श्री हीरानंद ठाकुरक द्वितीय बालक । हिनक ग्राम- समौल,जिला-मधुबनी। सिविल इंजीनियर, टाटा स्टीलमे चाकरी। प्रकाश झाक फ़िल्म "कथा माधोपुर की" मे मुख्य भुमिका। नाटककार आ मंच अभिनेता। हुनक लिखल किछु प्रसिद्ध मैथिली नाटक छन्हि :बडका साहेब,मिस्टर निलो काका, लोंगिया मिरचाई,बकलेल आदि वा अंत। डॉ. कमलानन्द झा लोकनाथ मिश्र डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी 1966- जन्म:5 मार्च 1966 ई. गनपतगंज, सुपौल। मैथिलीक प्राध्यापक। रक्षामंत्रीक पदक आ बिहार आ झारखण्ड सरकार द्वारा पुरस्कृत। झारखण्डक मैथिली आन्दोलनमे अग्रणी। जितेन्द्र जीत डॉ. श्रीपति सिंह १९४४- "उमंग-तरंग" कविता-संग्रह प्रकाशित। महेन्द्रनाथ झा यात्रा साहित्य "हमर इंग्लैंड यात्रा" प्रकाशित। डॉ. उमाकान्त मैथिली व्यंग्य-आलेखक पोथी "अपन बात" प्रकाशित। सुशील 1942- श्रीदेव मूल नाम- वागेश्वर झा। कथा-सँग्रह "हिलकोर", नाटक "लोहक कङना", गीत-प्रबन्ध "पुलोमा" प्रकाशित। सुकांत सोम 1950- जन्म दरभंगा जिलाक तरौनी गाममे 1950 ई. मे भेलन्हि । बी. ए. पास कए ई पटनाक दैनिक ‘जनशक्ति’क सहायक सम्पादक छलाह । फेर नव भारत टाइम्स, पटनामे।बाल्यवस्थासँ अपन पैतृक (पिता यात्नीजी) गुण कविता करबाक तथा कथा लिखबामे सेहो यश अर्जन कएलन्हि अछि । वर्त्तमान राजनीति सामाजिक विषयसँ सम्बद्ध व्यंग्यात्मक, सरल भाषामे लिखल नव कविता हिनक विशेषता छन्हि । गामघरक परिवेश तदनुकूल शब्द एवं बिम्ब रचनामे क्रमहि सिद्ध छथि । डॉ. देवकांत मिश्र 1952- पिता कविचूड्क्षामणि पं. काशीकांत मिश्र "मधुप", "बेनीपुर अनुमण्डलमे मैथिली" पोथी प्रकाशित। मुरलीधर झा 1955- कबिलपुर, दरभंगा। बाल कथा संग्रह "पिलपिलहा गाछ" (2010) प्रकाशित। डॉ. नित्यानन्द लाल दास पिता स्वर्गीय सूर्यनारायण दास। फारबिसगंज कॉलेज, फारबिसगंज सँ अंग्रेजी विभागाध्यक्ष पदसँ १९९८ मे अवकाशप्राप्त। डॉ. सुरेन्द्र झा "सुमन"क संयोजकत्वक कार्यकालमे "मैथिली परामर्शदातृ समिति" (साहित्य अकादेमी, दिल्ली)क सदस्य। मैथिली पत्रिका सभ जेना बटुक, प्रयाग; मिथिला मिहिर, पटना; स्वदेश, दरभंगा; पहुँच, पटना आ परती पलार, अररियामे रचना प्रकाशित। १९६७ ई. सँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे सक्रिय। प्रांतीय प्रतिनिधि २००४ धरि जिला सरसंघचालक। जे.पी.आन्दोलनमे लोकतंत्र सेनानी। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलामक अंग्रेजी पोथी "इग्नाइटेड माइण्ड्स"क मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा" नामसँ अनुवाद। साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार २०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास- (इग्नाइटेड माइण्ड्स- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी) लेल। राजनाथ मिश्र 1950- "अ बर्ड्स आइ व्यू ऑन मिथिला" प्रकाशित। विजयनाथ झा "अहींक लेल" (गीत-गजल संग्रह प्रकाशित)। ताराकान्त झा मैथिली भाषिकी (सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद) २००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। पशुपतिनाथ झा, महोत्तरी, नेपाल 1954- हिनक लेखन विवरणात्मक होइत अछि आ सम्बद्ध विषयमे नीकजकॉ जानकारी दैत अछि । विभिन्न पत्र-पत्रिकामे हिनक लेख-रचना बरोबरि देखबामे अबैत रहैछ ।रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे मैथिली विषयक प्राध्यापनमे संलग्न श्री झा मैथिलीसम्बन्धी सग्ङठनात्मक गतिविधिसँ सेहो जुड़ल छथि । मैथिली भाषाक लोपोन्मुख अवस्थामे रहल अपन लिपि तिरहुतामे विशेषज्ञता रखनिहार श्री झा एकर संरक्षण-सम्बर्द्धनक दिशामे सेहो क्रियाशील छथि ।प्रध्यापक झा मैथिली महाकाव्यमे रस निरूपण विषयपर विद्यावारिधि कएने छथि आ शिक्षा तथा कानून विषयमे सेहो स्नातक छथि । महोत्तरी जिलाक एकरहिया रहनिहार श्री झाक जन्म ४ दिसम्बर १९५४ कऽ भेलछनि ।चेन्नैमे मिथिला रत्नसँ सम्मानित। अनिलचन्द्र ठाकुर 1954-2009 जन्म 13 सितम्बर 1954 ई.केँ कटिहार जिलाक समेली गाममे भेलन्हि। 1982 ई.मे हिन्दी साहित्यमे स्नातकोत्तर केलाक बाद नवम्बर '93 सँ नवम्बर '94 धरि "सुबह" हस्तलिखित पत्रिकाक सम्पादन-प्रकाशन कएलन्हि आ कोशी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकमे अधिकारी रहथि। मैथिली, अंगिका, हिन्दी आ अंग्रेजीमे समानरूपेँ लेखन। मृत्युक पूर्व ब्रेन ट्यूमरसँ बीमार चलि रहल छलाह। प्रकाशित कृति: आब मानि जाउ(मैथिली उपन्यास)- पहिने भारती-मंडन पत्रिकामे प्रकाशित भेल, फेर मैलोरंग द्वारा पुस्तकाकार प्रकाशित भेल।; कच( अंगिकाक पहिल खण्ड काव्य,1975); एक और राम (हिन्दी नाटक,1981); एक घर सड़क पर (हिन्दी उपन्यास, 1982); द पपेट्स (अंग्रेजी उपन्यास, 1990); अनत कहाँ सुख पावै (हिन्दी कहानी संग्रह,2007)। आब मानि जाउ (मैथिली उपन्यास) - एहि उपन्यासमे एक एहन युवतीक संघर्ष-गाथा अंकित अछि जे अपन लगनसँ जीवन बदलैत अछि। असंख्य गामक ई कथा कुलीनताक अधःपतनक कथा, संस्कारविहीनताक उद्घाटन आ भविष्यक पीढ़ीकेँ बचएबाक चेतौनी छी। वृखेश चन्द्र लाल, नेपाल 1955- जन्म 29 मार्च 1955 ई. केँ भेलन्हि। पिताः स्व. उदितनारायण लाल,माताः श्रीमती भुवनेश्वरी देव। हिनकर छठिहारक नाम विश्वेश्वर छन्हि। मूलतः राजनीतिककर्मी । नेपालमे लोकतन्त्रलेल निरन्तर संघर्षक क्रममे १७ बेर गिरफ्तार । लगभग ८ वर्ष जेल ।सम्प्रति तराई–मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीक राष्ट«ीय उपाध्यक्ष । मैथिलीमे किछु कथा विभिन्न पत्रपत्रिकामे प्रकाशित । आन्दोलन कविता संग्रह आ बी.पीं कोइरालाक प्रसिद्ध लघु उपन्यास मोदिआइनक मैथिली रुपान्तरण तथा नेपालीमे संघीय शासनतिर नामक पुस्तक प्रकाशित । ओ विश्वेश्वर प्रसाद कोइरालाक प्रतिबद्ध राजनीति अनुयायी आ नेपालक प्रजातांत्रिक आन्दोलनक सक्रिय योद्धा छथि। नेपाली राजनीतिपर बरोबरि लिखैत रहैत छथि। नारायणजी 1956- जन्म: घोघरडीहा (मधुबनी)। मैथिली भाषा-साहित्यमे एम. ए., पी-एच. डी. कामेश्वर लता संस्कृत विद्यालय, घोघरडीहामे अध्यापन । प्रकाशित कृति: ’घरि घुरि रहल छी’ (काव्य-संग्रह)। भक्तीश्वर झा "सारथी" डॉ. श्री श्रीशंकर झा 1952- जगदीपनारायण "दीपक" राजदेव मंडल शिक्षा- एम.ए.द्वय, एल एल बी.,पता- ग्राम-मुसहरनियाँ, रतनसारा (निर्मली, मधुबनी)। प्रकाशित कृति- अम्बरा- (मैथिली- कविता संग्रह); हिन्दीमे राजदेव प्रियंकर नामसँ उपन्यास- जिन्दगी और नाव, पिजरें के पंछी, दरका हुआ दरपन। ललित कुमार झा १९६३- गाम- सिरसी, जिला- सीतामढ़ी। दुर्गेश कुमार चौधरी रंगमंच कुंदन कुमार रंगमंच दीपक नीलेश मैथिली रंगमंच। जितेन्द्र कुमार झा मैथिली रंगमंच शिवप्रसाद यादव हीरेन्द्र कुमार झा 1958- जन्म 30 अगस्त 1958,गाम- कोइलख (मधुबनी), पिता श्री कामेन्द्र नाथ झा। ट्रांसफर्मर (मैथिली कथा संग्रह) प्रकाशित। मानेश्वर मनुज 1958- जन्म गम्हरिया (मानपौर, मधुबनी)मे, 1978सँ 1992 धरि नौसेनामे विभिन्न जहाजपर कार्यरत, फेर यात्री रेलमे। सम्बन्ध (कथा संग्रह) प्रकाशित। नबोनाथ झा महेन्द्र नारायण राम 1958- सम्पादन-“नव ज्योति” पत्रिका, “लोकशक्ति” सामाजिक मुख-पत्रक। लोकवृत्त ताहूमे लोकगाथाक अध्येता। तारानन्द वियोगी 1966- महिषी, सहरसामे जन्म। पहिल पोथी अपन युद्धक साक्ष्य (गजल संग्रह) १९९१ मे प्रकाशित। अन्य पुस्तक हस्तक्षेप (कविता-संग्रह), अतिक्रमण (कथा-संग्रह), शिलालेख (लघुकथा संग्रह), कर्मधारय। राजकमल चौधरीक कथाकृति एकटा चंपाकली एकटा विषधर संकलन-सपादन। साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार २०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल" लेल। यात्री-चेतना पुरस्कार २०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी। भालचन्द्र झा ए.टी.डी., बी.ए., (अर्थशास्त्र), मुम्बईसँ थिएटर कलामे डिप्लोमा। मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आ हिन्दी थिएटरमे निदेशक। महाराष्ट्र राज्य उपाधि १९८६ आ १९९९ मे। आइ.एन.टी. केर लेल नाटक “सीता” क निर्देशन। “वासुदेव संगति” आइ.एन.टी.क लोक कलाक शोध आ प्रदर्शनसँ जुड़ल छथि आ नाट्यशालासँ जुड़ल छथि विकलांग बाल लेल थिएटरसँ। निम्न टी.वी. मीडियामे रचनात्मक निदेशक रूपेँ कार्य।लेखन-बीछल बेरायल मराठी एकांकी(अनुवाद), सिंहावलोकन (मराठी साहित्यक १५० वर्ष), आकाश (जी.टी.वी.क धारावाहिकक ३० एपीसोड), जीवन सन्ध्या( मराठी साप्ताहिक, डी.डी, मुम्बई), धनाजी नाना चौधरी (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( हिन्दी), आहट (हिन्दी), यात्रा ( मराठी सीरयल), मयूरपन्ख ( मराठी बाल-धारावाहिक), हेल्थकेअर इन २०० ए.डी.) (डी.डी.)।२००९ मे- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी- सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। कुमार शैलेन्द्र रमेश 1961- जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: समांग, समानांतर, दखल (कथा संग्रह), नागफेनी (गजल संग्रह), संगोर, समवेत स्वरक आगू, कोसी धारक सभ्यता, पाथर पर दूभि (काव्य संग्रह), प्रतिक्रिया (आलोचनात्मक निबंध)। मेघन प्रसाद 1961- प्रदीप बिहारी 1963- जन्म स्थान कन्हौली मल्लिक टोल, खजौली, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार, उपन्यासकार ओ रंगकर्मी । प्रकाशित कृति: गुमकी ओ बिहाड़ि, विसूवियस (उपन्यास), औतीह कमला जयतीह कमला, खण्ड-खण्ड जिनगी, सरोकार (कथा संग्रह)। २००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार । चन्द्रमोहन झा पर्वा अशोक दत्त, जनकपुर कृष्ण मोहन झा 1968- जन्म मधेपुरा जिलाक जीतपुर गाममे। “विजयदेव नारायण साही की काव्यानुभूति की बनावट” विषयपर जे.एन.यू. सँ एम.फिल आ ओतहिसँ “निर्मल वर्मा के कथा साहित्य में प्रेम की परिकल्पना” विषयपर पी.एच.डी.। हिन्दीमे एकटा कविता सँग्रह “समय को चीरकर” आ मैथिलीमे “एकटा हेरायल दुनिया” प्रकाशित। हिन्दी कविता लेल “कन्हैया स्मृति सम्मान”(1998) आ “हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार”(2003)। असम विश्वविद्यालय, सिल्चरक हिन्दी विभागमे अध्यापन। परमानन्द प्रभाकर रमेश रंजन, परवाहा, नेपाल 1966- परवाहा, नेपालमे जन्म । नेपालीय कथा-जगतक नवीन मुदा सम्मानित नाम । जनपक्षधर कथा-दृष्टि आ मोहक शिल्प । थोड़ लिखलनि, मुदा बेर-बेर चर्चित रहलाह । डॉ. सुरेन्द्र लाभ, नेपाल रोशन जनकपुरी, नेपाल डॉ. अरविन्द अक्कू 1957- अशोक झा 1957- कुमार पवन 1958 गाम मुरैठा। कथा संग्रह, कविता संग्रह आ व्यंग्य संग्रह शीघ्र प्रकाश्य। मैथिलीमे १९९० ई सँ विरल लेखन। २००८ ई. सँ दस सालक मौन भंगक बाद पुनः रचनाक दोसर पालीक प्रारम्भ। फूलचन्द्र झा "प्रवीण" 1961- गाम तुमौल दरभंगा, आयल नवल प्रभात, पांगल गाछक छाहरि, हमरा मोनक खजन चिड़ैया, बसंतक बजनिञा (कविता संग्रह), भूत होइत भविष्य़ (कथा संग्रह)। रणजीत कुमार सिंह देवशंकर नवीन 1962- ओ ना मा सी (गद्य-पद्य मिश्रित हिन्दी-मैथिलीक प्रारम्भिक सर्जना), चानन-काजर (मैथिली कविता संग्रह), आधुनिक (मैथिली) साहित्यक परिदृश्य, गीतिकाव्य के रूप में विद्यापति पदावली, राजकमल चौधरी का रचनाकर्म (आलोचना), जमाना बदल गया, सोना बाबू का यार, पहचान (हिन्दी कहानी), अभिधा (हिन्दी कविता-संग्रह), हाथी चलए बजार (कथा-संग्रह)। विद्यानन्द झा 1965- बुद्धपूर्णिमा, १९६५कें कैथिनियाँ, झंझारपुर मुधुबनीमे जन्म। पराती जकाँ (कविता संग्रह) प्रकाशित । मूलतः कवि, थोड़ कथा लिखलनि, जे अपन मार्मिक अभिव्यक्तिक कारण बेस चर्चित भेल । विडम्बनापूर्ण परिस्थितिक पाछू जिम्मेवार समाजार्थिक कारणक खोज हिनकर मूल सृजन प्रेरणा थिक । किशोर कुमार झा "सिक्किन" लाला पंडित, मिथिला मूर्तिकला राजेन्द्र पंडित, मिथिला मूर्तिकला बटोही झा, मिथिला चित्रकला उदितनारायण फिल्म गायक स्व. हेमकान्त झा, गायक रामबाबू झा, गायक राजकमल झा, अंग्रेजी लेखक, पत्रकार हिनकर अंग्रेजी उपन्यास "द ब्लू बेडस्प्रेड" , "इफ यू आर अफरेड ऑफ हाइट्स" आ "फायरप्रूफ" प्रकाशित छन्हि। "द ब्लू बेडस्प्रेड" (१९९९)पर हुनका "कॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज फॉर बेस्ट फर्स्ट बुक- यूरेशिया" भेटल छन्हि। राजकमल झा श्री मुनीश्वर झा आ श्रीमती रंजना झाक पुत्र छथि, "आइ.आइ.टी.खड़गपुर"सँ बी.टेक.छथि, आ आइ काल्हि दिल्लीमे रहै छथि, जतए ओ "इण्डियन एक्सप्रेस" मे एक्जीक्यूटिव एडिटर छथि। प्रकाश झा, फिल्म निर्देशक प्रकाश झा, मैथिली रंगमंच सुपरिचित रंगकर्मी। राष्ट्रीय स्तरक सांस्कृतिक संस्था सभक संग कार्यक अनुभव। शोध आलेख (लोकनाट्य एवं रंगमंच) आ कथा लेखन। राष्ट्रीय जूनियर फेलोशिप, भारत सरकार प्राप्त। राजधानी दिल्लीमे मैथिली लोक रंग महोत्सवक शुरुआत। मैथिली लोककला आ संस्कृतिक प्रलेखन आ विश्व फलकपर विस्तारक लेल प्रतिबद्ध। अपन कर्मठ संगीक संग मैलोरंगक संस्थापक, निदेशक। मैलोरंग पत्रिकाक सम्पादन। संप्रति राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्लीक रंगमंचीय शोध पत्रिका रंग-प्रसंगक सहयोगी संपादकक रूपमे कार्यरत। डॉ. धनाकर ठाकुर ताराकांत झा डॉ. नारायण कुमार झा रामेश्वर प्रेम नागेश्वर लाल कर्ण, तबला वादक केष्कर ठाकुर काश्यप कमल, रंगमंच मुकेश कुमार झा, रंगमंच मनीष झा फिल्म निर्देशक संजय झा फिल्म निर्माता कीर्ति आजाद क्रिकेट श्रीराम झा शतरंज अभिषेक झा गोल्फ कुमार मनीष अरविन्द 1964- मधुकर भारद्वाज बदरी नारायण बर्मा राजेन्द्र किशोर, नेपाल सुनील कुमार मल्लिक, गायक, जनकपुर, नेपाल 1968- मैथिलीक गायक-सग्ङीतकारक रूपमे प्रसिद्ध छथि । मैथिली भाषाक गीतसभमे मौलिक तथा सार्थक सग्ङीतक सृजनमे हिनक सक्रियता प्रशंसनीय छनि । सुनीलक गायन तथा सग्ङीतमे कैसेट एलबमसभ सेहो बाहर भेल अछि ।लेखनदिस हिनक सक्रियता परिमाणात्मक रूपमे कम रहितहुँ गुणात्मक दृष्टिएँ हृदयस्पर्शी मानल जाइत अछि ।पेशासँ विज्ञान-शिक्षक छथि । धीरेन्द्र प्रेमर्षि, सिरहा, नेपाल 1967- वि.सं.२०२४ साल भादब १८ गते सिरहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाममे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि।कान्तिपुरसँ हेल्लो मिथिला कार्यक्रम प्रस्तुत कर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक धीरेन्द्रक अबाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। “पल्लव” मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ “समाज” मैथिली सामाजिक पत्रिकाक सम्पादन। अमलेन्दु शेखर पाठक श्याम सुन्दर शशि, नेपाल श्याम सुन्दर शशि, जनकपुरधाम, नेपाल। पेशा-पत्रकारिता। शिक्षा: त्रिभुवन विश्वविद्यालयसँ,एम.ए. मैथिली, प्रथम श्रेणीमे प्रथम स्थान। मैथिलीक प्रायः सभ विधामे रचनारत। बहुत रास रचना विभिन्न पत्र-पत्रिकामे प्रकाशित। हिन्दी, नेपाली आऽ अंग्रेजी भाषामे सेहो रचनारत आऽ बहुतरास रचना प्रकाशित। सम्प्रति- कान्तिपुर प्रवासक अरब ब्यूरोमे कार्यरत। हिमांशु चौधरी, नेपाल पिता : स्वर्गीय कामेश्र्वर चौधरी,माताः श्रीमती चन्द्रावती चौधरी,जन्मः वि स २०२०/६/५ लहान, सिरहा,शिक्षाः स्नातकोत्तर(नेपाली),पेशाः पत्रकारिता (सम्प्रति : राष्ट्रिय समाचार समिति ),कृति : की भार सांठू ? (मैथिली कविता संग्रह ),विगत दू दशकसं नेपाली आ मैथिली लेखन तथा अभियानमे निरन्तर क्रियाशील आ विभिन्न संघ संस्थासं आबद्ध । सत्यनारायण मेहता भुवनेश्वर पाथेय राजेन्द्र झा, धनुषा अखिल आनन्द विनोद कुमार झा अशोक कुमार मेहता संजीव तमन्ना धर्मेन्द्र विह्वल, सिरहा, नेपाल 1967- रस्ता तकैत जिनगी, एक सृष्टि एक कविता, एक समयक बात, धुअनाएल आकृति सभ (मैथिली कविता संग्रह), भ्रमरका उत्कृष्ट नाटकहरु, गोनूझाका कथाहरु (मैथिलीसँ नेपाली अनुवाद), मैथिलीक कक्षा 1 सँ 5 आ बाल-साहित्य संदर्भक तीनटा पोथीक सह-लेखक। पत्रकारिताक मूल सिद्धांत (मैथिली, प्रेसमे), दलित रिपोर्टिंग मैनुअल (नेपाली, प्रेसमे)। भवप्रीतानन्द रघुनाथ मुखिया धीरेन्द्र कुमार झा गिरिजानन्दन सिंह प्रेमचन्द्र पंकज सच्चिदानन्द सच्चू अरुण कुमार कर्ण 1961- निमिष झा, नेपाल अनलकांत (गौरीनाथ) 1969- भारतीय भाषा परिषद, कोलकाताक युवा पुरस्कार (2009-10 ) मैथिली लेल प्राप्त। रमण कुमार सिंह 1969- आशुतोष झा नीरज कर्ण, धनुषा, नेपाल 1970- समाजशास्त्रक छात्र आ गणित तथा विज्ञानक शिक्षक छथि, मुदा मैथिली साहित्य आ संगठनक क्षेत्रमे सेहो निरन्तर सक्रिय छथि । भाषा, व्याकरण आदिक मेंही पक्षसभपर सेहो ई पूर्ण अधिकार रखैत छथि । जन्म धनुषा जिलाक कुर्था गाममे भेल छनि । विभिन्न पत्रपत्रिकामे हिनक कथा, कविता, लेख-रचनासभ मैथिली, नेपाली आ अग्ङरेजी भाषामे प्रकाशित होइत रहैत छनि । अनुवादक क्षेत्रमे सेहो हिनक नीक अधिकार छनि । उपेन्द्र भगत नागवंशी, नेपाल दमन कुमार झा 1969- एम.ए.पी.एच.डी. (मैथिली), प्रकाशन: मैथिली बाल साहित्य(शोध-ग्रंथ)-2002 आ नेबोक चाह (कथा संग्रह) 2009. सम्प्रति जे.एन.क~ओलेज मधुबनीमे व्याख्याता। श्रीधरम 1974- शंकरदेव झा अंशुमन पाण्डेय आनन्द कुमार झा 1977- जन्म स्थान: मेंहथ, झंझारपुर; पिता स्व. अभयकांत झा, माता श्रीमती इन्द्रकाली देवी, प्रकाशन- "धधाइत नवकी कनियाँक लहास", "हठात् परिवर्तन", "बदलैत समाज", "टाकाक मोल", "कलह" (पाँचू मैथिली नाटक) प्रकाशित। विदेह सम्पादकक समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) कमल मोहन चुन्नू कुमार राहुल अंशुमान सत्यकेतु शुभेन्दु शेखर वनदेवीपुत्र भवनाथ, नाटककार अमरेन्द्र यादव, नेपाल मिथिलेश कुमार झा 1970- पिता- श्री विश्वनाथ झा, जन्म-12-01-1970 केँ मनपौर(मातृक) मे पैतृक-ग्राम-जगति, पो*-बेनीपट्टी,जिला-मधुबनी, मिथिला, पिन*- 847223 शिक्षा :प्राथमिक धरि- गामहिक विद्यालय मे। मध्य विद्यालय धरि- मध्य विद्यालय, बेनीपट्टी सँ। माध्यमिक धरि- श्री लीलाधर उच्च विद्यालय,बेनीपट्टीसँ इतिहास-प्रतिष्ठाक संग स्नातक-कालिदास विद्यापति साइंस काँलेज उच्चैठ सँ, पत्रकारिता मे डिप्लोमा-पत्रकारिता महाविद्यालय(पत्राचार माध्यम) दिल्ली सँ, कम्प्युटर मे डी.टी.पी ओ बेसिक ज्ञान। रचना: हिन्दी ओ मैथिली मे कविता, गजल, बाल कविता, बाल कथा,साहित्यिक ओ गैर-साहित्यिक निबंध, ललित निबंध, साक्षात्कार, रिपोर्ताज, फीचर आदि। अनमोल झा 1970- गाम नरुआर, जिला मधुबनी। एक दर्जनसँ बेशी कथा, लगभग सए लघुकथा, तीन दर्जनसँ बेशी कविता, किछु गीत, बाल गीत आ रिपोर्ताज आदि विभिन्न पत्रिका, स्मारिका आ विभिन्न संग्रह यथा- “कथा-दिशा”-महाविशेषांक, “श्वेतपत्र”, आ “एक्कैसम शताब्दीक घोषणापत्र” (दुनू संग्रह कथागोष्ठीमे पठित कथाक संग्रह), “प्रभात”-अंक २ (विराटनगरसँ प्रकाशित कथा विशेषांक) आदिमे संग्रहित। मनोज मुक्ति, नेपाल सत्येन्द्र कुमार झा 1969- जन्म ०१.०१.१९६९ संकटमोचन नगर, मधुबनी। कवि, कथाकार, अभिनेता। पोथी- अहींकेँ कहै छी (लघु कथा संग्रह), मैथिली फिल्म पिरितिया, दुलरुआ बाबू आ श्यामा दर्शन आ सौभाग्य मिथिलाक सीरियल डॉ. टोप्पीवाला मे अभिनय। आकाशवाणीमे कार्यरत। अजित कुमार आजाद सुधीर कुमार झा 1970- अशोक सिंह तोमर चन्द्रेश राम सेवक सिंह संतोष मिश्र, नेपाल सतीश चन्द्र झा आशीष अनचिन्हार अभय लाल दास शहीद दुर्गानन्द झा, नेपाल सुन्दरम उदयनाथ झा "अशोक" कपिलेश्वर राउत कपिलेश्वर साहू अभय कुमार यादव, मैथिली रंगमंच डॉ. शम्भु कुमार सिंह जन्म: 18 अप्रील 1965 सहरसा जिलाक महिषी प्रखंडक लहुआर गाममे। आरंभिक शिक्षा, गामहिसँ, आइ.ए., बी.ए. (मैथिली सम्मान) एम.ए. मैथिली (स्वर्णपदक प्राप्त) तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। BET [बिहार पात्रता परीक्षा (NET क समतुल्य) व्याख्याता हेतु उत्तीर्ण, 1995] “मैथिली नाटकक सामाजिक विवर्त्तन” विषय पर पी-एच.डी. वर्ष 2008, तिलका माँ. भा.विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। मैथिलीक कतोक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे कविता, कथा, निबंध आदि समय-समय पर प्रकाशित। वर्तमानमे शैक्षिक सलाहकार (मैथिली) राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर-6 मे कार्यरत। बच्चा यादव 1958- जितेन्द्रनारायण झा कैलाश कुमार मिश्र कृष्णचन्द्र यादव, नेपाल नवलकिशोर प्रसाद श्रीवास्तव प्रेमकान्त चौधरी, पूर्वोत्तर मैथिल शिवकान्त ठाकुर शोभाकान्त झा उमाकान्त झा आ प्रियंका, मैथिली रंगमंच अनिल कुमार चौधरी 1962- देवीनाथ मिश्र फणीकान्त मिश्र पुरातत्वविद। श्यामानन्द ठाकुर नन्द कुमार मिश्र भुवन भूषण अशोक कुमार झा चन्द्र किशोर लाल, पत्रकार, नेपाल हरिकांत लाल दास, नेपाल शशिनाथ ठाकुर, नेपाल अशोक कुमार 1981- साधारण काष्ठकारक परिवारमे समस्तीपुर जिलाक मोखियारपुर सखलानी गाममे जनमल अशोक कुमार कहियो स्कूल नहि गेलाह। दिनमे पचास टाका कमेनिहार दिल्लीक एकटा गोल्फ क्लबक एहि कैडीकेँ 1994 ई. मे चोरिक मिथ्यारोप लगा कए गोल्फ कोर्ससँ बाहर कए देल गेल। वैह कैडी दस सालक भीतर भारतक नम्बर एक गोल्फर बनि गेल। डॉ. अजीत मिश्र जन्म स्थान- नबटोल(मात्रिक), पैत्रिक- ‘आदित्य वास’, पाहीटोल, सरिसब-पाही, मधुबनी। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दड़िभङ्गासँ स्नातकोत्तर(मैथिली) कएलाह बाद 1994 सँ 2006 धरि आकाशवाणी, दड़िभङ्गामे आकस्मिक मैथिली अन्तरवार्ताकार ओ समाचार-वाचक रुपमे कार्य। पछाति भारत सरकारक अन्तर्गत भारतीय भाषा संस्थान, मैसूरमे मैथिलीक प्रवेशक उपरान्त मैथिलीक पहिल प्रतिनिधिक रुपमे पूर्वी प्रादेशिक केन्द्र, भुवनेश्वरमे पाहुन प्राध्यापक भए 10 जूलाइ, 2006सँ कार्य प्रारम्भ। एतए लगातार तीन वर्ष धरि कार्य सम्पादनक बाद भारत सरकारक राष्ट्रीय ज्ञान आयोगक अनुशंसा पर राष्ट्रीय अनुवाद मिशनकेर गठनक उपरान्त मैथिलीक मुख्य शैक्षिक सलाहकारक रुपमे मइ, 2009सँ भारतीय भाषा केन्द्र, मैसूरमे कार्यरत। भवनाथ झा मुन्नाजी मुन्नाजी (उपनाम, एहि नामे मैथिलीमे लेखन), मूलनाम मनोज कुमार कर्ण, जन्म–27 जनवरी 1971 (हटाढ़ रूपौली, मधुबनी), शिक्षा–स्नातक प्रतिष्ठा, मैथिली साहित्य। वृत–अभिकर्त्ता, भारतीय जीवन बीमा निगम। पहिल लघुकथा–‘काँट’ भारती मण्डनमे 1995 पकाशित। पहिल कथा–कुकुर आ हम, ‘भरि रात भोर’मे 1997मे प्रकाशित। एखन धरि दर्जनो लघुकथा, कथा, क्षणिका आ लघुकथा सम्बन्धी किछु आलेख प्रकाशित। विशेषः- मुख्यतः मैथिली लघुकथाकेँ स्वतंत्र विधा रूपेँ स्थापित करवाक दिशामे संघर्षरत। विनीत उत्पल 1978- आनंदपुरा, मधेपुरा। प्रारंभिक शिक्षासँ इंटर धरि मुंगेर जिला अंतर्गत रणगांव आ तारापुरमे। तिलकामांझी भागलपुर, विश्वविद्यालयसँ गणितमे बीएससी (आनर्स)। गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालयसँ जनसंचारमे मास्टर डिग्री। भारतीय विद्या भवन, नई दिल्लीसँ अंगरेजी पत्रकारितामे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्लीसँ जनसंचार आ रचनात्मक लेखनमे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कनफ्लिक्ट रिजोल्यूशन, जामिया मिलिया इस्लामियाक पहिल बैचक छात्र भs सर्टिफिकेट प्राप्त। भारतीय विद्या भवनक फ्रेंच कोर्सक छात्र। आकाशवाणी भागलपुरसँ कविता पाठ, परिचर्चा आदि प्रसारित। देशक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे विभिन्न विषयपर स्वतंत्र लेखन। पत्रकारिता कैरियर- दैनिक भास्कर, इंदौर, रायपुर, दिल्ली प्रेस, दैनिक हिंदुस्तान, नई दिल्ली, फरीदाबाद, अकिंचन भारत, आगरा, देशबंधु, दिल्ली मे। एखन राष्ट्रीय सहारा, नोएडा मे वरिष्ट उपसंपादक। "हम पुछैत छी" कविता संग्रह प्रकाशित। उमेश मंडल प्रकाशित कृति: निश्तुकी- कविता संग्रह (2009)। रत्नेश्वर प्रसाद सिंह अनिल पतंग 1951- ओमप्रकाश भारती 1968- संजय कुन्दन 1969- चक्रधर ठाकुर 1978- मदन ठाकुर चर्चित रंगकर्मी, जनकपुरक चर्चित संस्था मिथिला नाट्यकला परिषदक संस्थापक । तीन दशकसँ बेसी समयसँ रंगक्षेत्रमे सक्रिय। करीब ३०–४० गोट मंचीय नाटकक सयो प्रस्तुति , २०–२५ गोट सड़क नाटकक हजारसँ बेसी प्रदर्शनमे अभिनय ।२० गोट टेली-सीरियल आ आधा दर्जन मैथिली फीचर फिल्ममे अभिनय । पुरस्कार: सप्तम अन्तर्राष्ट्रिय महोत्सवमे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता २०४९ वि.स., क्षेत्रीय प्रतिभा पुरस्कार (नेपाल सरकार) २०६३ वि.स.। बिन्देश्वर पाठक कुमार गगन, मैथिली रंगमंच श्रीकान्त मण्डल, मैथिली रंगमंच रवीन्द्र कुमार दास चित्रकला। रवीन्द्र लाल दास संजय कुमार चौधरी, मैथिली रंगमंच दुर्गानन्द मंडल अनिल कुमार मिश्र कुमार सौरभ कौशल किशोर मिश्र अमोद कुमार झा आशीष चमन आशीष चौधरी गाम-चरैया, अररिया। बेचन ठाकुर गाम: चनौरागंज, मधुबनी। प्रकाशित कृति: बेटीक अपमान आ छीनरदेवी (नाटक); एक दर्जनसँ बेशी नाटक प्रकाशनक प्रतीक्षामे। देवांशु वत्स जन्म- तुलापट्टी, सुपौल। मास कम्युनिकेशनमे एम.ए., हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्र्रिकामे कथा, लघुकथा, विज्ञान-कथा, चित्र-कथा, कार्टून, चित्र-प्रहेलिका इत्यादिक प्रकाशन। विशेष: गुजरात राज्य शाला पाठ्य-पुस्तक मंडल द्वारा आठम कक्षाक लेल विज्ञान कथा “जंग” प्रकाशित (2004 ई.), नताशा: मैथिलीक पहिल-चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स) प्रकाशित। शिव कुमार झा 1973- शिव कुमार झा ‘‘टिल्लू‘‘,पिताक नामः स्व. काली कान्त झा ‘‘बूच‘‘, माताक नामः स्व. चन्द्रकला देवी,जन्म तिथिः 11-12-1973,शिक्षाः स्नातक (प्रतिष्ठा),जन्म स्थानः मातृक- मालीपुर मोड़तर, जि. - बेगूसराय, मूलग्रामः ग्राम-पत्रालय - करियन, जिला - समस्तीपुर, पिन: 848101,संप्रतिः प्रबंधक, संग्रहण,जे. एम. ए. स्टोर्स लि.,मेन रोड, बिस्टुपुर जमशेदपुर - 831 001, अन्य गतिविधिः वर्ष 1996 सँ वर्ष 2002 धरि विद्यापति परिषद समस्तीपुरक सांस्कृतिक ,गतिवधि एवं मैथिलीक प्रचार-प्रसार हेतु डॉ. नरेश कुमार विकल आ श्री उदय नारायण चौधरी (राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक) क नेतृत्वमे संलग्न। प्रकाशित कृति: क्षणप्रभा-कविता-संग्रह, अंशु-समालोचना। गोविन्द पाठक 1973- गाम- करियन (समस्तीपुर), मातृक- जलसैन (अन्ध्रा-ठाढ़ी, मधुबनी)। दस बर्खसँ बेशीसँ हिन्दी आ मैथिली थियेटरमे सक्रिय। मैथिली दूरदर्शन सीरियल "नैन न तिरपित भेल" लेल अभिनय, स्टार प्लसक ग्रेट इण्डियन लाफ्टर चैलेंज-IV आ महुआ चैनलक हँसीक अखाड़ामे सहभागिता। सोनी टी.वी. आ दूरदर्शन इत्यादि लेल काज।सम्प्रति मुम्बइमे। विपिन कुमार झा मो. गुल हसन जयप्रकाश मंडल श्यामल सुमन राम बिलास साहू कृपानन्द झा अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद महाकान्त ठाकुर सरोज खिलाड़ी नेपालक पहिल मैथिली रेडियो नाटक संचालक विजय हरीश नबोनारायण मिश्र 1955- पिता-श्री गोबिन्द मिश्र, माता- श्रीमति अढ़ूला देवी। गाम- कुशमौल,पो.नागदह-बलाइन, भाया-अरेड़हाट, जिला-मधुबनी। मैथिली रंगमंचसँ सम्बद्ध "कोकिल मंच" संस्थाक माध्यमसँ। बचेश्वर झा, निर्मली धीरेन्द्र कुमार, निर्मली चन्द्रशेखर कामति 1959- मैथिली कवि। शिक्षा- एम.ए. (राजनीतिशास्त्र), पिता- स्व. योगेन्द्र कामति, गाम-पोस्ट- करियन, भाया- इलमास नगर, थाना- रोसड़ा, जिला- समस्तीपुर, बिहार। संप्रति-प्रखण्ड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी (बेनीपट्टी)। कुमार मनोज कश्यप जन्म मधुबनी जिलांतर्गत सलेमपुर गाम मे। बाल्य काले सँ लेखन मे आभरुचि। कैक गोट रचना आकाशवानी सँ प्रसारित आ विभिन्न पत्र-पत्रिका मे प्रकाशित। सम्प्रति केंद्रीय सचिवालय मे अनुभाग आधकारी पद पर पदस्थापित। सुजीत कुमार झा, नेपाल नन्द विलास राय खड़ानन्द यादव गिरीश चन्द्र सच्चिदानन्द सौरभ मनोज कुमार मंडल राधाकान्त मंडल विवेकानन्द झा प्रशान्त मिश्र ऋषि वशिष्ठ विनय भूषण राजेश रंजन, मैथिली फेडोरा प्रोजेक्ट सुधाकर झा, महोत्तरी , नेपाल सएसँ बेशी सड़क नाटकमे मंचन। जितमोहन झा बाबूजीक नाम: श्री बैद्यनाथ झा,ज्येष्ठभ्राता: श्री पिताम्बर झा (पिंटू),ग्राम/पोस्ट-बनगाँव, पूबाइ टोला (खौंआरे),जिला - सहरसा, (बिहार), पिन - ८५२२१२ कुमार किसलय प्रभात प्रभाकर राजेश मोहन झा 1981- उपनाम- गुंजन, जन्मस्थान- गाम+पत्रालय- करियन, जिला- समस्तीपुर, हास्य कविताक माध्यमसँ समाजक विगलित दशाक वर्णन। बाल साहित्यमे विशेष रुचि। किशन कारीगर वीरेन्द्र यादव आतिश कुमार मिश्र, नेपाल अकलेश कुमार मंडल जितेन्द्र झा, जनकपुर नवेन्दु कुमार झा, पत्रकार सुमित आनन्द १९९२- गाम- हटाढ़ रुपौली (मधुबनी)। नवनीत कुमार झा आशुतोष यादव अभिज्ञ मैथिली रंगमंच प्रवीण कश्यप मनीष कुमार झा पंकज प्रियांशु भारत भूषण झा इन्द्रभूषण कुमार प्रकाश प्रेमी रवि भूषण पाठक अरुणाभ सौरभ सम्पादक- नवतुरिया। सदरे आलम "गौहर" गाम-पुरसौलिया, भाया- जयनगर, जिला मधुबनी। मो. जाहिद हुसैन सिमरिया कुम्हिया, अररिया। हारुण रशीद "गाफिल" 1965- ककोड़वा बसंतपुर, अररिया। मो. जोहेब आलम अररिया। डॉ. नवल किशोर दास "नवल" डॉ. सुशील कुमार श्रीवास्तव सम्पादक कोशी-कात। डॉ. भुवन किशोर मिश्र "भुवनेश" मैथिली कथा संग्रह- गोबरछत्ता। पंकज कुमार झा पिता-श्री महेंद्र मोहन झा, माता-श्रीमती अम्बी देवी झा : माड़र, जितबारपुर, मधुबनी, पंकज जी एच.सी.एल.मे सोफ्टवेयर इंजिनीयर छथि। नागेन्द्र कर्ण, नेपाल रूपेश कुमार झा 'त्योंथ' ग्राम+पत्रालय-त्योंथा, भाया-खिरहर, थाना-बेनीपट्टी, जिला-मधुबनी, सम्प्रति कोलकातामे अध्यनरत, साहित्यिक गतिविधि मे सेहो सक्रिय, ढेर रचना पत्र-पत्रिकादिमे प्रकाशित। नवीन कुमार "आशा" 1987- पिता श्री गंगानाथ झा, माता श्रीमति विनीता झा। गाम- धानेरामपुर, पोस्ट- लोहना रोड, जिला- दरभंगा। सुबोध ठाकुर गाम-हैंठी बाली, जिला-मधुबनी, साहित्यक अतिरिक्त चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट प्रैक्टिशनर छथि। संजय कुमार मंडल गाम- गोधनपुर, मधुबनी। रामप्रवेश मंडल सुमन झा "सृजन" लक्ष्मी दास मिथिलेश मंडल रामाज्ञा शशिधर दिनेश कुमार मिश्र मिथिला प्रेमी। मिथिलाक मोटा-मोटी सभ धारपर किताब प्रकाशित। संजय झा सुल्तानगंज, भागलपुर। मोटोरोलाक सी.ई.ओ.। दिनकर कुमार डॉ. विनय विश्वबन्धु राम बहादुर रेणु मैथिली रंगमंचकर्मी। रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार, मैथिलीक भिखारी ठाकुरक नामसँ प्रसिद्ध मैथिलीक पहिल जनकवि रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’क किछु गीत आ झारु प्रस्तुत अछि। रामकृष्ण मंडल "छोटू" उमेश पासवान अतुलेश्वर झा शशिधर कुमार सुबोध झा १९६६- पिता श्री त्रिलोकनाथ झा। शिवशंकर सिंह ठाकुर अंजनी कुमार वर्मा "दाऊजी" बिनोद मिश्र डॉ. बिनोद मिश्र सम्प्रति आई आई टी रूडकी, उत्तराखंडमे अंग्रेजी पढ़बैत छथि आ हिनक रचनाb अंग्रेजी आ हिंदी मे प्रकाशित भेल छन्हि। अहि वर्ष हिनक कविता संग्रह Silent Steps and Other Poems प्रकाशित भेल छन्हि। एकर अतिरिक्त ई अंग्रेजीमे आलोचनाक क्षेत्रमे आठ टा पोथी संपादित केने छथि। हिनक पोथी Communication Skills for Engineers and Scientists बहुतो इंजीनियरिंग संस्थानमे पाठ्य पुस्तक रूपमे पढ़ाओल जाइत अछि। अक्षय कुमार चौधरी पिता राजनारायण चौधरी, ग्राम+पोस्ट: महिषी (पुनर्वास आरापट्टी), जिला: सहरसा. संप्रति दिल्ली स्कुल आफ इकोनोमिक्स मे अन्वेषक आ समाजशास्त्री छथि. हिनक "Dowary among the Maithil Brahmins: aspects of Change and contitunity" बिषय पर पी. एच. डी. आओर "Marriage among the Maithil Brahmins" बिषय पर एम. फ़ील. केर अन्वेषन काज छैन्हि. अन्य बिषय पर प्रकाशित आ अप्रकाशित सेमिनार पेपर के अतिरिक्त वर्ष २००९ मे जापानक क्यो़टो विश्वविद्यालय केर 1st Next Generation Glowal Workshop मे हिनका द्वारा प्रस्तुत कैल आ छपल लेख "Gender and Heterosexsual Relationship in Intimate and Public Sphere: Ethnography of Maithil Brahmin Community" विषय पर लिखल गेल अछि। जवाहर लाल कश्यप (१९८१- ) पिता श्री- हेमनारायण मिश्र , गाम फुलकाही- दरभंगा। आनन्द झा ओमप्रकाश झा डेओढ़, घोघरडीहा। अमित मोहन झा ग्राम-भंडारिसम (वाणेश्वरी स्थान), मनीगाछी, दरभंगा, बिहार, भारत। सुनील कुमार झा कैलाश कुमार कामत प्रवीण कुमार ठाकुर जन्म तिथि -31 दिसम्बर 1977; जन्म स्थान -कन्हौली , सकरी , मधुबनी ; शिक्षा- सूर्य नारायण हाई स्कूल - नरपतिनगर , बी . एस . सी - मेमोरिअल कॉलेज - दरभंगा , डिप्लोमा इन फैशन डिजाईन (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन डिजाईन - नयी दिल्ली ) , चित्रकला आओर फैशन पूर्वानुमानमे विशेष योग्यता, निवास स्थान- दिल्ली , इंडिया; पिता- श्री सत्य नारायण ठाकुर , सकरी - कन्हौली ; माता- श्रीमती मालती ठाकुर , सकरी - कन्हौली । वर्तमानमे अपन एक्सपोर्ट बिज़नस एस्थेट ) क नामसँ शुरुआत , पूर्वमे प्रोडक्ट डेवेलोप्मेंट आओर मर्चंटक रूपमे कार्यरत। अरविन्द रंजन दास कौशल कुमार मिहिर झा चन्द्रमणि गीतकार, गायक। विद्यापतिक अनेक पदक अंग्रेजी अनुवादक सम्पादन प्रकाशित। विकास झा रंजन प्रभात राय भट्ट पिता श्री गंगेश्वर राय, माता श्रीमती गायत्री देवी, गाम-धिरापुर, महोतरी, अस्थाइ बसोबास-जनकपुरधाम - नेपाल। अरुण कुमार सिंह जीबू कुमार झा पञ्जीकार कृष्णानन्द झा प्रेमचन्द्र मिश्र संजीव कुमार, मैथिली रंगमंच किशोर केशव, मैथिली रंगमंच संजीव कुमार शमा नवीन ठाकुर जगदानन्द झा मनु झा हेमन्त बापी सत्यनारायण झा अच्छेलाल शास्त्री राहुल राही रवि मिश्र अनिल मल्लिक वि दे ह विदेह Videha বিদেহ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ९५ म अंक ०१ दिसम्बर २०११ (वर्ष ४ मास ४८ अंक ९५)http://www.videha.co.in/ मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक 'विदेह' ९५ म अंक ०१ दिसम्बर २०११ (वर्ष ४ मास ४८ अंक ९५)http://www.videha.co.in/ मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA
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