VIDEHA — Issue 98 / अंक ९८

Publication: VIDEHA · Issue: 98
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332 331 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ९८ म अंक १५ जनवरी २०१२ (वर्ष ५ मास ४९ अंक ९८) वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine   नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own script Roman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.नवेंदु कुमार झा- बिहार सहित पांच प्रदेशकेँ अन्नक खरीद बढ़ैबाक निर्देश/ 21 फरवरी सॅ प्रारंभ होयत विधान मंडलक बजट सत्र/  मुख्यमंत्रीक स्वागतक तैयारी कऽ रहल छथि रांटी गामवासी/  बढ़ि रहल अछि बालिका शिक्षाक दर/ बिहार मे सभ वर्ष मनाओल जायत भूकम्प आ बाढ़ि सुरक्षा सप्ताह/ सम्पन्न भेल विद्यालयक स्थापना दिवस/ २.२.चन्द्रकिशोर, समयक साक्षी सुजीतक रिपोर्टर डायरी २.३.जवाहरलाल कश्यप-विहनि कथा- गिद्ध २.४.जगदानन्द झा 'मनु' -चोनहा - (धारावाहिक मैथिली कथा) २.५.जितेन्द्र झा -नेपाली आ मैथिली भाषाक दूटा साहित्यिक कृति विमोचित २.६.उमेश मण्डल- विदेह साहित्य उत्सव २०१२/ वि‍देह सम्‍मान समारोह २.७.रामभरोस कापड़ि भ्रमर- प्राज्ञ भ्रमर साझा पुरस्कारसं सम्मानित २.८.मैथिलीक अग्निकवि श्री रामलोचन ठाकुरक साक्षात्कार जे कोकिल मंचक श्री नबोनारायन मिश्र जी द्वारा लेल गेल ३. पद्य ३.१.कामिनी कामायनी-यशोधरा ३.२.१.ओमप्रकाश झा- किछु गजल २.रूबी झा ३.३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ २.धीरेन्द्र प्रेमर्षि ३.निक्की प्रियदर्शिनी- दूटा कविता ४.जगदानंद झा 'मनु' -गीत-गजल ३.४.१.विनीत उत्पल २. पंकज कुमार झा पंकज कुमार झा ३.५.गणेश कुमार झा "बावरा" ३.६.१.निशांत  झा २.किशन कारीगर ३.७.१.डॉ॰ शशिधर कुमर २.नवीन कुमार "आशा" ३.८.नवीन ठाकुर ४. मिथिला कला-संगीत१.वनीता कुमारी २.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) ३. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी) ५. गद्य-पद्य भारती: श्री काशीनाथ सिंह “रेहनपर रग्घू”- (हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद श्री विनीत उत्पल) असगर वजाहत- हम हिन्दू छी हिन्दी कथाक मैथिली रूपान्तरण विनीत उत्पल द्वारा- ६.बालानां कृते-डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” - उड़ि ने सकी पर चिड़ै छी हम (भाग -‍१) ७. भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक विदेह आर.एस.एस.फीड। "विदेह" ई-पत्रिका ई-पत्रसँ प्राप्त करू। अपन मित्रकेँ विदेहक विषयमे सूचित करू। ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a  Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add  बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ Videha Radio मैथिली देवनागरी वा मिथिलाक्षरमे नहि देखि/ लिखि पाबि रहल छी, (cannot see/write Maithili in Devanagari/ Mithilakshara follow links below or contact at ggajendra@videha.com) तँ एहि हेतु नीचाँक लिंक सभ पर जाऊ। संगहि विदेहक स्तंभ मैथिली भाषापाक/ रचना लेखनक नव-पुरान अंक पढ़ू। http://devanaagarii.net/ http://kaulonline.com/uninagari/  (एतए बॉक्समे ऑनलाइन देवनागरी टाइप करू, बॉक्ससँ कॉपी करू आ वर्ड डॉक्युमेन्टमे पेस्ट कए वर्ड फाइलकेँ सेव करू। विशेष जानकारीक लेल ggajendra@videha.com पर सम्पर्क करू।)(Use Firefox 4.0 (from WWW.MOZILLA.COM )/ Opera/ Safari/ Internet Explorer 8.0/ Flock 2.0/ Google Chrome for best view of 'Videha' Maithili e-journal at http://www.videha.co.in/ .) Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Book/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ (उच्चारण, बड़ सुख सार आ दूर्वाक्षत मंत्र सहित) डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाऊ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू। गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज' मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण" विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाऊ। "मैथिल आर मिथिला" (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) पर जाऊ। ऐ बेर मूल पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ? श्री राजदेव मण्डलक “अम्बरा” (कविता-संग्रह)  13.28% श्री बेचन ठाकुरक “बेटीक अपमान आ छीनरदेवी”(दूटा नाटक)  9.38% श्रीमती आशा मिश्रक “उचाट” (उपन्यास)  6.25% श्रीमती पन्ना झाक “अनुभूति” (कथा संग्रह)  6.25% श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”क “नो एण्ट्री:मा प्रविश (नाटक)  6.25% श्री सुभाष चन्द्र यादवक “बनैत बिगड़ैत” (कथा-संग्रह)  6.25% श्रीमती वीणा कर्ण- भावनाक अस्थिपंजर (कविता संग्रह)  6.25% श्रीमती शेफालिका वर्माक “किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा)  7.03% श्रीमती विभा रानीक “भाग रौ आ बलचन्दा” (दूटा नाटक)  6.25% श्री महाप्रकाश-संग समय के (कविता संग्रह)  6.25% श्री तारानन्द वियोगी- प्रलय रहस्य (कविता-संग्रह)  6.25% श्री महेन्द्र मलंगियाक “छुतहा घैल” (नाटक)  6.64% श्रीमती नीता झाक “देश-काल” (कथा-संग्रह)  6.64% श्री सियाराम झा "सरस"क थोड़े आगि थोड़े पानि (गजल संग्रह)  7.03% Other:  0% ऐ बेर बाल साहित्य पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ? श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जीक “तरेगन”(बाल-प्रेरक कथा संग्रह)  57.89% श्री जीवकांत - खिखिरक बिअरि  23.68% श्री मुरलीधर झाक “पिलपिलहा गाछ  18.42% ऐ बेर युवा पुरस्कार(२०१२)[साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन कोन लेखक उपयुक्त छथि ? श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह)  25.71% श्री विनीत उत्पलक “हम पुछैत छी” (कविता संग्रह)  7.14% श्रीमती कामिनीक “समयसँ सम्वाद करैत”, (कविता संग्रह)  7.14% श्री प्रवीण काश्यपक “विषदन्ती वरमाल कालक रति” (कविता संग्रह)  7.14% श्री आशीष अनचिन्हारक "अनचिन्हार आखर"(गजल संग्रह)  15.71% श्री अरुणाभ सौरभक “एतबे टा नहि” (कविता संग्रह)  7.14% श्री दिलीप कुमार झा "लूटन"क जगले रहबै (कविता संग्रह)  8.57% श्री आदि यायावरक “भोथर पेंसिलसँ लिखल” (कथा संग्रह)  7.14% श्री उमेश मण्डलक “निश्तुकी” (कविता संग्रह)  12.86% Other:  1.43% ऐ बेर अनुवाद पुरस्कार (२०१३) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे के उपयुक्त छथि? श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर)  32.26% श्री महेन्द्र नारायण राम "कार्मेलीन" (कोंकणी उपन्यास श्री दामोदर मावजो)  12.9% श्री देवेन्द्र झा "अनुभव"(बांग्ला उपन्यास श्री दिव्येन्दु पालित)  14.52% श्रीमती मेनका मल्लिक "देश आ अन्य कविता सभ" (नेपालीक अनुवाद मूल- रेमिका थापा)  12.9% श्री कृष्ण कुमार कश्यप आ श्रीमती शशिबाला- मैथिली गीतगोविन्द ( जयदेव संस्कृत)  12.9% श्री रामनारायण सिंह "मलाहिन" (श्री तकषी शिवशंकर पिल्लैक मलयाली उपन्यास)  14.52% फेलो पुरस्कार-समग्र योगदान २०१२-१३ : समानान्तर साहित्य अकादेमी, दिल्ली श्री राजनन्दन लाल दास  52.38% श्री डॉ. अमरेन्द्र  21.43% श्री चन्द्रभानु सिंह  26.19% Other:  0% १. संपादकीय विदेह साहित्य उत्सव २०१२ आ विदेह साहित्य सम्मान समारोह १४ जनवरी २०१२ केँ सम्पन्न भेल। विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार देल गेल आ कवि सम्मेलन सम्पन्न भेल। लोकक स्वतः-स्फूर्त सहयोग आ सहभागिता विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलनक सफलताक रूपमे मोन राखल जाएत। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) विदेह सम्मान -मैथिली नाटक/ संगीत/ कला/ मूर्तिकला/ फिल्मक समानान्तर दुनियाँक अभिलेखन आ सम्मान सेहो हएत विदेह सम्मानक घोषणा द्वारा -ई घोषणा दिसम्बरक अन्त वा जनवरी २०१२ मे हएत -मैथिली नाटक/ संगीत/ कला/ मूर्तिकला/ फिल्मक समानान्तर दुनियाँक अभिलेखन आ सम्मान कएल जाएत -विदेह नाट्य उत्सव २०१२ क अवसरपर प्रदान कएल जाएत ई सम्मान। विदेह सम्मान -अगस्त २०११ सँ सभ मास "ऐ मासक सभसँ नीक समदिया" सम्मानक घोषणा कएल जा रहल अछि -समदिया- पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा।   - द्वारा "ऐ मासक सभसँ नीक समदिया"क घोषणा सभ मास भऽ रहल अछि - सालक अन्तमे "सर्वश्रेष्ठ मैथिली पत्रकारिता" लेल ऐ १२  टा देल सम्मानमे सँ सर्वश्रेष्ठकेँ "विदेह पत्रकारिता सम्मान" देल जाएत। -अगस्त २०१२ मे हएत  "विदेह पत्रकारिता सम्मान"क घोषणा। विदेह सम्मान समदिया- पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल।विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा। अपन इलाकाक कोनो समाचार ऐ अन्तर्जाल (http://esamaad.blogspot.com/)पर देबा लेल , समाचार poonamberma@gmail.com वा priyanka.rachna.jha@gmail.com पर पठाउ वा एतए http://www.facebook.com/groups/samadiya/ फेसबुकपर राखू।" नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान) नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010) श्री राम दयाल राकेश (1999) श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994) नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता स्व. सुन्दर झा शास्त्री नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली) १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि। २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- ) - मैथिली साहित्य लेल। साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):- २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।) २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।) पं. श्री उमारमण मिश्र साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली १९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन) १९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य) १९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास) १९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य) १९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य) १९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास) १९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण) १९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य) १९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना) १९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य) १९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य) १९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास) १९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य) १९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास) १९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास) १९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य) १९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा) १९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध) १९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा) १९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास) १९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य) १९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा) १९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी) १९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध) १९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा) १९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा) १९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य) १९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह) १९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य) १९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य) १९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा) २०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य) २००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य) २००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य) २००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा) २००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य) २००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य) २००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा) २००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा) २००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा) २००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह) २०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास) साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार १९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी) १९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी) १९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू) १९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला) १९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू) १९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़) १९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला) १९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला) २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी) २००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी) २००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू) २००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया) २००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी) २००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी) २००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला) २००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली) २००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू) २००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी) २०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी) साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार २०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल २०११- ले.क. मायानाथ झा "जकर नारी चतुर होइ" लेल प्रबोध सम्मान प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- ) प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- ) प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- ) प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- ) प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- ) प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- ) प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- ) प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- ) प्रबोध सम्मान 2012- श्री चन्द्रभानु सिंह (1922- ) आ श्री रामलोचन ठाकुर (1949- ) यात्री-चेतना पुरस्कार २००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा; २००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा; २००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया; २००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा; २००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना; २००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी; २००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी; २००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी; २००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा २०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा २०११ ई.-  डॉ. राम भरोस कापड़ि भ्रमर (जनकपुर) भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल। भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।  रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। विदेह सम्मान विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान १.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ २०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल) २०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल) २.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ २०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह) २०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह) २०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक) २०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद) अनचिन्हार आखर ( http://anchinharakharkolkata.blogspot.com ) द्वारा प्रायोजित "गजल कमला-कोसी-बगमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2011 लेल ओस्ताद सदरे आलम गौहर जीकेँ प्रदान कएल गेलैन्ह। एहि बेरुक मुख्यचयनकर्ता ओस्ताद सियाराम झा"सरस" छलखिन्ह।.. ( विदेह ई पत्रिकाकेँ ५ जुलाइ २००४ सँ अखन धरि ११६ देशक १,५०२ ठामसँ ७२,०४३ गोटे द्वारा ३५,४५२ विभिन्न आइ.एस.पी. सँ ३,३६,७०७ बेर देखल गेल अछि; धन्यवाद पाठकगण। - गूगल एनेलेटिक्स डेटा। ) गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com http://www.maithililekhaksangh.com/2010/07/blog-post_3709.html २. गद्य २.१.नवेंदु कुमार झा- बिहार सहित पांच प्रदेशकेँ अन्नक खरीद बढ़ैबाक निर्देश/ 21 फरवरी सॅ प्रारंभ होयत विधान मंडलक बजट सत्र/  मुख्यमंत्रीक स्वागतक तैयारी कऽ रहल छथि रांटी गामवासी/  बढ़ि रहल अछि बालिका शिक्षाक दर/ बिहार मे सभ वर्ष मनाओल जायत भूकम्प आ बाढ़ि सुरक्षा सप्ताह/ सम्पन्न भेल विद्यालयक स्थापना दिवस/ २.२.चन्द्रकिशोर, समयक साक्षी सुजीतक रिपोर्टर डायरी २.३.जवाहरलाल कश्यप-विहनि कथा- गिद्ध २.४.जगदानन्द झा 'मनु' -चोनहा - (धारावाहिक मैथिली कथा) २.५.जितेन्द्र झा -नेपाली आ मैथिली भाषाक दूटा साहित्यिक कृति विमोचित २.६.उमेश मण्डल- विदेह साहित्य उत्सव २०१२/ वि‍देह सम्‍मान समारोह २.७.रामभरोस कापड़ि भ्रमर- प्राज्ञ भ्रमर साझा पुरस्कारसं सम्मानित २.८.मैथिलीक अग्निकवि श्री रामलोचन ठाकुरक साक्षात्कार जे कोकिल मंचक श्री नबोनारायन मिश्र जी द्वारा लेल गेल नवेंदु कुमार झा- बिहार सहित पांच प्रदेशकेँ अन्नक खरीद बढ़ैबाक निर्देश/ 21 फरवरी सॅ प्रारंभ होयत विधान मंडलक बजट सत्र/  मुख्यमंत्रीक स्वागतक तैयारी कऽ रहल छथि रांटी गामवासी/  बढ़ि रहल अछि बालिका शिक्षाक दर/ बिहार मे सभ वर्ष मनाओल जायत भूकम्प आ बाढ़ि सुरक्षा सप्ताह/ सम्पन्न भेल विद्यालयक स्थापना दिवस/ बिहार सहित पांच प्रदेशकेँ अन्नक खरीद बढ़ैबाक निर्देश अन्नक मामिला मे पिछड़ल प्रदेश सभकेँ केन्द द्वारा निर्देश देल गेल अछि। ओ खाय वाला अन्नक खरीद बढ़ैबाक लेल कार्य योजना बना लैथि जइसॅ प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानूनकेँ देश भरि मे नीक ढंग सॅ लागू कयल जा सकय। ई विशेष निर्देश बिहार सहित पश्चिम बंगाल आ झारखंडक संग पांच प्रदेशकेँ देल गेल अछि। खाद्य मंत्रालय प्रस्तावित कानूनकेँ लागू करबाक लेल खाद्यन्न केँ उपलब्ध होएबाक शंका केँ दूर करबाक लेल गहूम आ चाउरक खरीद बढ़ाबऽ पर ध्यान केन्द्रित करबाक निर्णय लेलक अछि। ऐ योजनाक अंतर्गत प्रति वर्ष 6.1 करोड़ टन अन्न क आवश्यकताक अनुमान अछि। केन्द्रीय खाद्य मंत्री पी.सी. थॉमस बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, जम्मू कश्मीर आ असम केँ चिट्ठी लिखि कहलनि अछि जे ओ अन्नक उपज बढ़ैबाक कार्य योजना बनेबाक संगहि खाद्यन्नक खरीदक स्थिति मे सेहो सुधार करथि। देश 63.5 प्रतिशत आबादी केँ सस्त अन्नक कानूनी अधिकार देबऽ वाला ऐ योजना केँ लागू करबाक जिम्मेवारी खाद्य मंत्रालयक होयत। प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक संसदक शीतकालीन सत्र मे लोक सभा मे प्रस्तुत कयल गेल छल जे एखन संसदक स्थायी समितिक सोझाँ अछि। सरकारक ऐ विधेयक केँ बजट सत्र मे पारित करेबाक आ एक जुलाई सॅ लागू करबाक लक्ष्य रखलक अछि। खाद्य मंत्री पांचों प्रदेशकेँ लिखल चिट्ठी मे कहलनि अछि जे एहन प्रदेश सभ केँ विकेन्द्रीकृत असूली प्रणाली केँ अपनैबाक चाही। ऐ प्रणालीक अंतर्गत राज्य सरकार अपन स्वयंक एजेन्सीक माध्यम सॅ अन्नक खरीद करैत अछि मुदा खर्च केन्द्र सरकार वहन करैत अछि। ओ कहलनि अछि जे प्रदेश मे जतेक संभावना अछि ओकर मोकाबला धानक खरीद उत्साहवर्द्धक नै अछि। राज्य पहिनहि सॅ विकेन्द्रीकृत खरीद प्रणालीक अंतर्गत अछि तें ई महत्वपूर्ण अछि जे अन्नक खरीदक लेल सभ आवश्यक उपाय कयल जयबाक चाही। 21 फरवरी सॅ प्रारंभ होयत विधान मंडलक बजट सत्र बिहार विधान मंडलक बजट सत्र 21 फरवरी सॅ प्रारंभ होयत। चारि अप्रील धरि चलय वाला ऐ बजट सत्र मे सदनक 29 बैसक होयत। ई सत्र पैघ होयत आ ऐ मे सदस्य सभकेँ अपन बात रखबाक बेसी अवसर भेटत। ऐपर मंत्री परिषद्क बैसक मे निर्णय होयबाक संभावना अछि। सत्रक दरमियान वर्ष 2012-13क सम्पूर्ण बजट पारित कयल जायत। सूत्रक अनुसार कृषि कैबिनेट केँ अंतिम रूप देबा सॅ पहिने सदन मे चर्चा होयत। ऐसॅ पहिने 2 फरवरी केँ किसान समागम होयत जइ मे प्रदेश भरिक किसान सभ सॅ राय लेल जायत। बजट सत्र मे कृषि क्षेत्रक समस्या आ ओकर समाधानक लेल पक्ष आ विपक्षक सदस्य समग्र रूप सॅ अपन बात सदन मे रखताह। प्रदेश मे बिजलीक संकटक समाधानक लेल सौर ऊर्जा सॅ निजी नलकूप सभकेँ चालू करबाक प्रयास पर सेहो चर्चा होयत। विधान मंडलक बजट सत्र हंगामेदार होयबाक सेहो संभावना अछि। विपक्ष प्रदेशक कानून व्यवस्था सहित बिना बिजली कृषि क्षेत्रक विकासक समस्याक अलाबा धानक न्यूनतम समर्थन मूल्य नै भेटऽ पर सरकार केँ घेरबाक प्रयास करत। मुख्यमंत्रीक स्वागतक तैयारी कऽ रहल छथि रांटी गामवासी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपन सेवा यात्राक पहिल चरणक समाप्ति मिथिलांचलक हृदय स्थली मधुबनीक यात्राक संगहि होयत। श्री कुमार 16 सॅ 19 जनवरी धरि चारि दिनक सेवा यात्रा पर मधुबनी जिला मे रहताह। ऐ क्रम मे ओ मिथिला चित्रकलाक लेल विश्व प्रसिद्ध मधुबनी जिलाक रांटी गामक यात्रा करताह। ऐ दरमियान मुख्यमंत्री जिलाक विभिन्न क्षेत्रक यात्राक विकास योजनाक समीक्षा, जनता दरबार मे जनता सॅ भेट करबाक संगहि कतेको विकास योजनाक उद्घाटन आ शिलान्यास सेहो करताह। नीतीश कुमार रांटी गाम मे मिथिला चित्रकलाक विश्व प्रसिद्ध कलाकार 90 वर्षीय महासुन्दरी देवीक घर जा हुनका सॅ भेट करताह। मुख्यमंत्रीक रांटी गाम अयबाक समाद भेटलाक बाद सम्पूर्ण गामक लोक उत्साहित छथि। भेटल जनतबक अनुसार श्री कुमार 17 जनवरी केँ रांटी पहुँचताह। स्थानीय प्रशासन द्वारा महासुन्दरी देवी केँ मुख्यमंत्रीक आगमनक सूचना देलाक बाद ओ मुख्यमंत्री मैथिल परम्पराक अनुसार स्वागतक तैयारी कऽ रहल छथि। भेटल जनतबक अनुसार मिथिला चित्रकलाक प्रसिद्ध कलाकार हुनक स्वागत मे नास्ताक वास्ते मिथिलाक पारम्परिक भोजन दही चुड़ाक व्यवस्था कऽ रहल छथि हुनक विदाइ धोती, कुर्ता आ पाग दऽ करबाक योजना अछि। महासुन्दरी देवीक पुत्र बी.के. दास जनतब देलनि अछि जे रांटी गाम मिथिला चित्रकला आ सिक्की कलाक लेल विश्व प्रसिद्ध अछि मुदा गाम मे सड़क सुविधा नै अछि। ऐ गामक कलाकार केँ उचित बजार उपलब्ध करायब आ गाम मे सड़क सुविधा उपलब्ध करैबाक आग्रह मुख्यमंत्री सॅ कयल जायत। बढ़ि रहल अछि बालिका शिक्षाक दर प्रदेश मे बालिका शिक्षाकेँ प्रोत्साहित करबाक लेल नीतीश सरकारक पोशाक आ साइकिल योजनाक असरि आब सोझाँ आबि रहल अछि। सरकारक प्रयासक कारण बिहार मे विद्यालय जाय वाला छात्राक संख्या बढ़ल अछि। मैट्रिक आ इन्टरमीडिएटक परीक्षा मे सम्मिलित होमय वाला छात्राक संख्या बढ़ल अछि। वर्ष 2011क मैट्रिक परीक्षा मे कुल 9,31993 परीक्षार्थी सम्मिलित भेल छलाह जइ मे 399470 छात्रा छलीह। वर्ष 2012क मैट्रिक परीक्षाक लेल 1134720 परीक्षार्थी पंजीयन करौलनि अछि जइ मे 502361 छात्रा आ 632359 छात्र छथि। ऐ तरहेँ वर्ष 2011क इंटरमीडिएटक परीक्षा मे कुल 701851 परीक्षार्थी सम्मिलित भेल छलाह जइ मे 283564 छात्रा छलीह। वर्ष 2012क इंटरमीडिएटक परीक्षाक लेल 807726 परीक्षार्थी पंजीयन करौलनि अछि जइ मे 325790 छात्रा आ 481936 छात्र छथि। वर्ष 2011क मैट्रिक परीक्षा मे 532523 आ इंटरमीडिएटक परीक्षा मे 4180287 छात्र सम्मिलित भेल छलाह। एहि मध्य सत्र 2011-12 क मैट्रिक परीक्षाक तैयारी मे बिहार विद्यालय परीक्षा समिति लागि गेल अछि। एहि वर्षक मैट्रिक परीक्षाक लेल 20 जनवरी सॅ फार्म भरबाक काज प्रारंभ होयत आ 30 जनवरी केँ समाप्त भऽ जायत। मैट्रिकक परीक्षा 22 फरवरी सॅ प्रारंभ होयत। बिहार मे सभ वर्ष मनाओल जायत भूकम्प आ बाढ़ि सुरक्षा सप्ताह

बिहार मे आब सभ वर्ष भूकम्प आ बाढ़ि सुरक्षा सप्ताह मनाओल जायत। मुख्यमंत्री नीतीश कुमारक निर्देश पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार ई निर्णय लेलक अछि। 15 जनवरी सॅ भूकम्प सुरक्षा सप्ताह आ जूनक पहिल सप्ताह मे बाढ़ि सुरक्षा सप्ताह आयोजित कयल जायत। भूकम्प सुरक्षा सप्ताहक अंतर्गत 15 जनवरी सॅ प्रदेशक विद्यालय, महाविद्यालय, थाना, पंचायत प्रखंड आ जिला मुख्यालय सभ मे कार्यक्रम आयोजित कऽ ऐ माध्यम सॅ जनता केँ भूकम्प सॅ सुरक्षाक उपायक जनतब देल जायत। उल्लेखनीय अछि जे बिहार मे 15 जनवरी 1934 मे विनाश करय वाला भूकम्प आयल छल जइ मे पैघ तबाही भेल छल। ओइ भूकम्प मे मिथिलांचल क कोसी क्षेत्र सॅ जोड़य वाला कोसी पर बनल निर्मली भपटियाही रेल लाइन ध्वस्त भऽ गेल छल आ मिथिलांचल दू भाग मे बटि गेल छल। केन्द्र मे अटल बिहारी वाजपेयीक शासन काल मे ऐ रेल लाइन केँ चालू करबाक लेल कोसी महासेतुक शिलान्यास कयल गेल छल जे आब बनि कऽ तैयार अछि आ 6 फरवरी केँ एकर उद्घाटन केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री सी.पी. जोशी करताह। सम्पन्न भेल विद्यालयक स्थापना दिवस (मधुबनी) बच्चा दाई उच्च विद्यालय ननौर मधुबनीक चालीसम स्थापना दिवस सह स्वामी विवेकानन्द जयंती हर्षक संग मनाओल गेल। ऐ अवसर पर उपस्थित विद्वतजन विद्यालयक उपलब्धिक चर्चा करैत स्वामी विवेकानन्द केँ स्मरण करैत छात्र युवा सभक आह्वान कयलनि जे ओ स्वामी जीक आदर्श अनुसरण कऽ अपन बाट पर आगाँ बढ़ि अपन विद्यालय आ मातृभूमिक नाम करथि। कार्यक्रमक अध्यक्षता विद्यालयक प्रधानाचार्य भगवान झा कहलनि जखन कि कवि गंगाधर हर्ष मुख्य अतिथिक रूपमे अपन विचार रखलनि। ऐ अवसर पर विद्यालयक छात्र-छात्राक मध्य प्रतियोगिता आयोजित कयल गेल आ ऐमे विजय भेल प्रतिभागी केँ परस्कृत सेहो कयल गेल। कार्यक्रमक संचालन आकाशवाणी पटनाक मैथिली कंपेयर अखिलेश कुमार झा कयलनि। समारोह मे प्रदीप पुष्प आ कवि गंगाधर हर्षक काव्य पाठ सेहो भेल। कार्यक्रम मे प्रो. जयनंद मिश्र, प्रो. बासुकीनाथ झा, हरिनारायण मंडल, सरोजानंद ठाकुर, आकाशवाणी दरभंगा संवाददाता मणिकान्त झा आ कृष्ण मोहन सहित कतेको विद्वान उपस्थित भऽ अपन उद्बोधनक माध्यम सॅ छात्र-छात्रा सभक मार्गदर्शन कयलनि। धन्यवाद ज्ञापन नागेश्वर झा कयलनि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। चन्द्रकिशोर, वरिष्ठ पत्रकार, वीरगंज, नेपाल समयक साक्षी सुजीतक रिपोर्टर डायरी

नेपालीय मिथिला क्षेत्रक सक्रिय एवं सशक्त पत्रकार सुजीत कुमार झाक कथा संग्रह ‘चिड़ै’ किछु मास पहिने पढने छलहुँ । एहि बीच में हुनकर पत्रकारिता सँ जुड़ल पुस्तक रिपोर्टर डायरी सेहो प्राप्त भेल । । एहिमे दूटा प्रक्रिया देखाई पड़ैया । पहिल सुजीतजी साहित्य आ पत्रकारिता दूनु मोर्चा पर ओतवे समर्पित आ सक्रिय देखाई पडैÞत छथि । हुनकामे पत्रकारिता आ साहित्य दूनुक प्रति स्वभाविक आकर्षण छन्हि, ओ दूनु क्षेत्रमे समान एवं सहज रुपमे आगा बढि रहल छथि । इएह हुनक विशेषता छन्हि । बहुत कम लोक दूनु क्षेत्रमे समान रुप सँ न्याय करबाक स्थिति मे रहैत अछि । सुजीत जीक इएह विशेषता हुनका समकालिन आओर संगी सभ सँ फरक व्यक्तित्व दैत छन्हि । दोसर मैथिलीमे पुस्तक प्रकाशनक क्रम बढि रहल सेहो देखबैया । सुजीतजी जनकपुरक प्रतिष्ठित पत्रिका ‘मिथिला डटकम’क सम्पादक छथि । पत्रकारितामे अखवार सँ लऽ कऽ रेडियो आ टेलिभिजनमे पर्यन्त एकसंग क्रियाशील रहैत छथि । ई पुस्तक हुनकर ‘रिपोर्टर डायरी’ नाम सँ प्रकाशित स्तम्भ लेखन आ किछु फुटकर आलेख सभक संग्रह अछि । ओ स्तम्भकार के रुपमे सेहो परिचय बनौने छथि । ई निक गप्प छैक कि एकटा पत्रकार सम सामयिक विषय पर अप्पन अभिमत सेहो रखैत अछि । रिपोटिङ्ग सँ कनिक फरक स्तम्भ लेखनक शिल्प अछि । जे समसामयिक घटनाक तथ्य सँ परिचित नहि रहता से सटिक टिप्पणी सेहो नहि कऽ सकैत छथि । अपन परिवेशक बारेमे जिनका बढिया सँ बुझल छन्हि, ओहिमे रुचि छन्हि, सएह स्तम्भ मार्फत टिप्पणी कऽ सकैत छथि । सुजीतजीक नाम सँ ई विशेषता सेहो जुडि गेल अछि । हिनकर ‘रिपोर्टर डायरी’ क संकलन मे स्तम्भ लेख, राष्ट्रीय पत्रिका मे बहराएल आलेखसभ आ सम्पूर्ण मे सामयिक टिप्पणी – रिपोर्ताज आ विश्लेषणक संग्रहक रुप में देखल जा सकैया । ‘मिथिला डटकम’ मैथिली दैनिक पत्रिकामे पत्रिकाके कलेवर अनुसार एहि स्तम्भक लेल निर्धारित स्थानक परिधि मे रहि कऽ अपन बात कहय पडैत छैक, मुदा ओतबे स्थान मे अपन बात सटिक सँ कहि सकब सुजीत जीक लेखकीय सामथ्र्य देखबैत अछि । कालगणना मे दिनक पुनरावृति होइत रहैत अछि, घटना सभ दोहराइत रहैत छैक, मुदा विषयक नव तरिका सँ उठान करब, संग संगे साथी भाइ सभक चर्चा सेहो करब आ लोक के अपन बात सुना देब, ई रिपोर्टर डायरीक विशेषता अछि । लेखक स्वयं सक्रिय पत्रकार छथि, सम्पादक छथि, सदिखन सूचनाकेँ बाढी मे डुबल रहैत छथि, एहि सभमे सँ स्तम्भक लेल विषयवस्तुक छनोट करब, ओकरा पाठकीय रुप देब, ई कम चुनौतीपूर्ण काज नहि छैक । ताहि लऽ कऽ ‘रिपोर्टर डायरी’ एकटा बढिया प्रयास मानल जा सकैया । तथ्य सभक पोखरी मे सँ विषयक छनौट करब आ सूचना सभक सार्थक प्रस्तुति करबाक जिम्मेवारी – ई एकटा नयाँ जिम्मेवारी आ भूमिकामे सुजीत जीक सफलता सेहो देखबैया । तथ्य सभक सही तरिका सँ आ सही परिप्रेक्ष्य मे प्रस्तुत करवाक खुबी सेहो देखल जा सकैया । जर्मन समाज शास्त्री मैक्स वेबर एकटा पैघ परामर्श देने छथि । हुनका सँ पुछल गेल छलैक, ‘कि कोनो मनुष्यक लेखन मूल्य निरपेक्ष भऽ सकैया ?’ ओ बजला, ‘मनुष्य होएवाक अर्थे अछि कि मूल्य मान्यता सँ बान्हल रहब, हमसभ कहियो धरि मूल्य मान्यता सँ अलग नहि रहि सकैत छी ।’ मुदा हमसभ अपन मूल्यक प्रति सचेत रहब, तकरा लेल परिस्थितिक प्रष्टता सँ बुझब आ तथ्यक विकृत नहि होबए देब से चेष्टा तऽ कऽ सकैत छी ।’ रिपोर्टर डायरी बेवरक मान्यताक कसौटी पर सेहो देखय पडत । संस्कृत मे एकटा पंक्ति छैक, ‘कस्मै देवाय हविषा विधेम’ ई हवि, ई आहुति हम कोन देवताक अर्पित करु ? यानि हमर देवता कोन छथि ? एहि प्रश्नक जवाव महात्मा गान्धीक सूत्र सँ खोजल जा सकैया अर्थात ओ सदिखन अन्तिम मनुष्य (द लास्ट पर्सन)क बात कएलथि । ओ कहलन्हि, ‘जहिया कहियो अहाँ संशय मे पड़ी तऽ ओही समयमे एकटा उपाय करु, गरीब सँ गरीब मनुष्यक चेहरा मोन पारु जकरा कहियो अहाँ देखने होइ आ अपने आप सँ प्रश्न पुछु कि जे कदम अहाँ उठाबय चाहैत छी ओही आदमीकेँ की लाभ पहँुचतै ? ओहि सँ ओकरा की भेटतैक ? एहि सँ ओकर जीवन आ भाग्यमे कोन सहायता भेटतैक ? अहाँ देखब की अहाँक संशय दुर भऽ जाएत ।’ अर्थात कोनो स्तम्भकारक प्रथम दायित्व ‘आम पाठक’ क प्रति छैक । अहाँक लेखन सँ आम पाठककेँ की फाइदा पहुँचलै ? आम लोककेँ सरोकारक विषय समेटलै की नहि ? अहाँ ककरा स्तुतिमे लिखि रहल छी ? सुजीत जीक लेखन कार्य सेहो, आम पाठककेँ सरोकार केन्द्रित बुझना जाइछ । कुशल पत्रकारक पहिचान इएह छैक की ओ ‘समाचार सूंघा’ हुए । अंग्रेजी मे एकरा कहल जाइत छैक – ‘तय जबखभ ब लयकभ ायच तजभ लभधक’ पत्रकारकेँ समाचार सूंघा होएबाक चाही । पत्रकार जनैया ओकर पाठककेँ की सरोकार छैक, ओकरा कोन तरहे प्रस्तुत कएल जा सकैया ? सुजीतजी मिथिला डट कमक पाठक क स्वाद बुझैत छथि तएँ सरल भाषामे टिप्पणी सभ करैत छथि । एहि मे गम्भीर विषय सभ सेहो जुडल रहैत छैक, मुदा बडा रसगर अन्दाज मे । साहित्यिक धरातल सँ पत्रकारिता क्षेत्रमे नव उचाई प्राप्त कऽ रहल सुजीतजीक लेल साहित्यिक रचना हिनकर लेखकीय कौशलक चमत्कृत कऽ दैया कखनो काल । रिपोर्टर डायरी जनकपुरक मिठगर आम अछि, स्वदगर माछ अछि, ग्रहण योग्य पाग अछि, निकगर पावनि तिहार अछि, पुरान मुदा आकर्षक जनकपुरक रेल अछि, सजा कऽ रखयबला न्योतक पत्र अछि, ई कहब अतिसयोक्ति नहि । एकर पन्ना–पन्नामे पछिलका तीन÷चारि वर्षक जनकपुरक टटका इतिहास छिरियाएल अछि, जनकपुरक नवका इतिहास सजाओल भार अछि ई पुस्तक । सुजीतजीक उचाई ग्रहण करैत व्यक्तित्वके स्वीकार करही टा पडत, नवतुरिया जमातक रुपमे मात्रेटा मूल्यांकन करब कथमपि न्याय नहि । एकटा लोकप्रिय मैथिली दैनिक पत्रिकाकेँ नम्हर समय सँ सम्पादन कऽ कऽ आ ओ पत्रिकाक लोकप्रिय बनावि अपन सफलताक सामथ्र्य रेखा खिंच चुकल छथि आ स्तम्भ लेखन कऽ कऽ सेहो कीर्तिमान स्थापना कएलन्हि तएँ सुजीतजीक पत्रकारिताक चिडै फुनगी पर चढि रहल अछि । मैथिली दैनिक पत्र निकालब कम कठिन नहि । प्रायः मैथिली पत्र पत्रिका बसिया निकलैया ओहन परिप्रेक्ष्यमे एक भिनसरे जनकपुर बासीक हाथ–हाथ मे पहुँचब आ चाहक चुस्कीकँे संगे मैथिली पत्रिकाक आनन्द ग्रहण करेबाक चलन चलाबयकेँ पाछुक संघर्ष बुझब कम कठिन नहि । एकटा दोसर सन्दर्भ मे अकबर इलाहावादी कहने छथि – नही शेख साहिब की वह आदत वजू की और मुनाजाते सहर की मगर वो चाय पीकर हस्बेदस्तुर तिलावत करते है वह ‘पाएनियर’ की अर्थात पत्रिका पढबाक सौख एतेक बढि गेल अछि कि बुजुर्ग लोकसभ सेहो प्रातः कालमे भजन – पूजा छोडि कऽ अखवारक पाठ करैत छथि, जनकपुरक सन्दर्भमे अकवर इलाहावादीक काव्योक्ति कनि सुधार कऽ कऽ कहल जाय तऽ, जानकी मन्दिरक दर्शन कऽ कऽ लौटनिहार जनक चौकक पत्रिका दोकानमे एक बेर पहुँचबेटा करैत छथि, वा घर पहँुचि कऽ मिथिला डटकम खोजैत छथि । ई कहल जा सकैया पछिलका समयमे जनकपुरमे मैथिली अखवार पढव रुचि विस्तार भऽ रहल छैक । मिथिला डटकम मे ‘रिपोर्टर डायरी’ आ ‘विगुल’ स्तम्भ तहत ई संकलनक बहुत रास सामग्री प्रस्तुत भऽ चुकल अछि । संचारमाध्यमक समाजक प्रति की दायित्व छैक ? संचारमाध्यमक कर्तव्यक सम्बन्ध मे पहिल प्रश्न ई पुछल जाइत छैक की मिडियाक कर्तव्य केवल जनमतक प्रकाशन÷प्रसारण अछि की जनमतक मार्गदर्शन ? साँच पुछल जाए तऽ संचारमाध्यमक तीन प्रधान कर्तव्य अछि – पहिला तऽ जनमतकँे प्रदर्शित करब, दोसर जनमत तैयार करब, तेसर जनमतक मार्गदर्शन करब । मिडियाक काज इतिहासकेँ बतवैत चलब सेहो अछि । छोट–छोट बात सभ सेहो इतिहास बनवैया । स्वयं जनतामे, जनप्रतिनिधि सभमे, आ सरकारी संस्थासभमे घुसल बिसंगति सभक विरुद्ध जनमत तैयार कएनाई सेहो मिडियाक कर्तव्य अछि । मानहानिक कानून सँ बँचि कऽ जहाँधरि अभिव्यक्त कएनाइ सम्भव भऽ सकैया पत्रकारकेँ जएबाक चाही । सरकार आ मिडिया दूनुक काज जन–रंजन, राष्ट्र निर्माण, विश्व कल्याण अछि । लोकतन्त्रक पृष्ठभूमिमे जे दायित्व सरकारक छैक वएह प्रेसोकेँ छैक । प्रेसकेँ इहो कारण सरकार सँ बेसी जिम्मेवारी भऽ सकैया की सरकार तऽ बदलैत रहैत छैक, मुदा पे्रस तऽ निरन्तर सक्रिय रहैया । जेहन जनता होइत छैक तेहने सरकार बनैत छैक । ई सच्चाई प्रेस पर सेहो चरितार्थ होइया, किएक कि नागरिकक नैतिक एवं मानसिक स्तरक अनुरुपहि ओहि देशक प्रेस रहैत अछि । मुदा ई बात ओहि देश मे पाओल जाइया जतय केँ व्यक्तिगत स्वतन्त्रताक आधार पर लोकतन्त्र स्थापित अछि । जतय राजनीति वा अर्थनीति नियोजित रहैत अछि, ओतय सरकार वा समाचार पत्र सेहो पूर्व नियोजित चलैत अछि । सार्वजनिक विषय पर सार्वजनिक रुप सँ चर्चा करए लेल प्रत्येक नागरिककेँ अवसर भेटबाक चाही । ई चर्चा मात्र एकहि माध्यमकेँ द्वारा निर्भिकता पूर्वक भऽ सकैया ओ अछि संचारमाध्यम । ताहि लेल तऽ कहल गेल अछि कि संचारमाध्यमक स्वतन्त्रता केवल पत्रकारिता सँ जुडल लोकक लेल मात्रेटा सरोकारक विषय नहि छैक । अपन विचार प्रकट करबाक स्वतन्त्रता कोनो व्यक्तिक स्वतन्त्रता सँ जुडल विषय छैक । प्रत्येक व्यक्तिक संचार माध्यममे अपन मत प्रकाशित– प्रसारित करवाक स्वतन्त्रता होएबाक चाही मुदा ई अधिकार पूर्णतया निरपेक्ष नहि छैक । वास्तवमे सभ अधिकार सापेक्ष होइत छैक आ ओकरा प्राप्तिक लेल कतेको मर्यादा सभक पालना करय पडैत छैक । रिपोर्टर डायरी लिखनीहार सदैव अप्पन मर्यादाक लक्ष्मण रेखा बीच रहि कऽ कलम चलौने छथि । पत्रकारक लेल विश्वसनीयता सभ सँ पैघ पूँजी छैक । कोन बात कोन पत्रकार कहलकै, ई सभ सँ बेसी महत्व रखैत अछि । विश्वसनियता कोनो लौटरी जकाँ नही प्राप्त भऽ जाइत छैक । ई रातारात होवयबाला चीजो नहि छैक । एकटा नम्हर समयमे पत्रकार विशेषक सम्बन्धमे एकटा छवि जनमानस मे उभरैत छैक तकरा लेल पत्रकारकेँ तऽ बहुत नम्हर परीक्षा सँ बहराय पडैत छैक । तखन जा कऽ विश्वसनियता प्राप्त होइत छैक । जे पत्रकार तथ्यक पाछु रहैया, विभिन्न तथ्य सभक आलोक मे सत्यक खोजी करैया आ ओकरा जनताके बीचमे प्रस्तुत करैया सएह पत्रकार जनताक अभिन्न मित्र कहबैया । ‘लोकमित्र’ पत्रकार बनवाक लेल जनताक मन जीतय पडैत छैक । ई काज पूर्वाग्रही आ स्वार्थी लेखन सँ सम्भव नही छैक । एडी उठा कऽ कोनो नम्हर बनक कोशिश करे तऽ ओ टिकाउ नहि होइत छैक । दुनिया बहुत छोट छिन भऽ गेल छैक । अहाँके हातमे जौं कलम अछि तऽ जनताक हात मे मूल्यांकन करबाक स्वतन्त्रता छैक, मूल्यांकन करबाक अधिकारकेँ अहाँ हरण नहि कऽ सकैत छी । संकलित विषयवस्तुसभमे बहुत रास जनकपुर आ पासपडोसमे केन्द्रित अछि । एकर वावजुद एहि आलेखसभ मे जाहि विषयवस्तुक चर्च कएल गेल अछि, ओहिमे किछु राष्ट्रिय अछि । जनकपुरमे उठि रहल लोक हिलोरक कम्पनक रेखाचित्र अछि, रिपोर्टर डायरी । एखनुका समयमे पत्रकार विशेष अप्पना क्षेत्रमे काज करैत–करैत, जौं ओकरा मे जिज्ञासु भाव छैक, विश्लेषण करवाक क्षमता छैक, समयकेँ चिन्हि सकैया तखन ओ अप्पना क्षेत्र विशेषक मामिलामे दक्षता सेहो प्राप्त करैया । एहन अवस्थामे एकटा निक रिपोर्टर आ सम्पादक अप्पन रुचीक विषयमे निपुणता प्राप्त करैया, जकर उपयोग पुस्तक लेखनमे सेहो करैया । एहि प्रवृतिक पदयात्री एखन सुजीतजी देखल गेला । रिपोर्टर डायरी प्रकाशन सँ जनकपुर आ मैथिली पत्रकारितामे एकटा नयाँ इतिहास जुड़त । लेखकक निजत्व देखय बला बहुत रास प्रसंगक बीच विभिन्न क्षेत्रक आ स्तरक लोकक मनोभाव पढल जा सकैया । एकटा पत्रकारकेँ कोन तरहे घटना सभ प्रभावित करैत छैक, से देखल जा सकैया । ‘महासंघक चुनाव आ सुनधाराक आनन्द’ शीर्षक लेखमे पत्रकारिता आ एकर संगठनमे पनपैत विसंगति सभक प्रति कठाक्ष करैत ओ लिखैत छथि, ‘काश हमहुँ सभ दारु पिवैत रहितहुँ, तऽ कतेक पिबतहुँ कतेक पिवतहुँ ............... ’ किए एतेक महंग भऽ रहल अछि पत्रकारक चुनाव ? सभ्य समाजक कल्पना करयवला कलमजीविसभ स्वयं विकृति बढावयमे तऽ नहि लागल अछि । ई संग्रह ओही समयमे प्रकाशित भऽ रहल अछि जखन मिथिला पैघ संक्रमण सँ गुजरि रहल अछि । कतेको समय एहन देखल गेल जखन राजनीतिक दल, नागरिक समाज, गैससकर्मी, मिडिया आ राष्ट्रसेवक वर्गक भूमिका पर आओर पक्ष द्वारा अांगुर ठाढ़ कएल गेल । सभ क्षेत्र मे अप्पन भूमिका आ महत्व पर मन्थन होएबाक चाहि उपदेश आएल । सुजीतजी वार्तमानक जनकपुरिया पत्रकारिता मादे नेपालीय पत्रकारिताक विसंगति सभकेँ पूर्ण इमान्दारीक संग चित्रित कएने छथि, एहि सँ हुनकर उठान कएल गेल विषयवस्तुक विश्वसनियता बढाओत । केवल उपदेश देल सामग्री लोक नहि रुचिवैया, जौं अपना सँ जुडल आलोचना स्वयं कएल जाइया तखन लोकविश्वास बढैत छैक । सल्लाह आवि सकैया, एहन लिखबाक चाहि, एहन रहितै तऽ नीक, ई छुटि गेल, संकलन बहरयवाक समय नहि भेल छलैक आदि । किछु लोक कहि सकैत छथि, एहि मे कोनो नव विषयवस्तु नहि छैक जे संकलन रुप मे निकालल जाय । मुदा हम जोड सँ कहब, सुजीतजी निक कऽ रहल छथि, निक कएलाह, जनकपुरिया पत्रिकारिताक एहि सँ निक खुराक भेटतै, मैथिली पत्रकारितामे नव इतिहास जुटतै । जखन किछु काज हेतै, तखन नहि विमर्श हेतैक, लेखा जोखा हेतैक, प्रभाव आ परिणामक आकलन कएल जेतैक । सु्जीतजी एकटा लकिर खिचलाह अछि, एहि सँ पैघ खिचि कऽ आगु बढी से नीक कि ‘ई – ओ’ कहि–कहि आत्मरति कएल जाए से निक । अहि प्रयासक बाद ऐहन प्रयासक क्रम बढे, निक समालोचना आवय से आवश्यक अछि, एहि सँ मैथिली आ पत्रकारिता दूनुकेँ लाभ पहुँचतै । किछु मामिला मे सुजीतजी आगा बढि गेला । नेपालमे नम्हर समय धरि मैथिली दैनिक पत्रक सम्पादन करबाक इतिहास बनौलन्हि । मिडिया सँ सम्बद्ध पुस्तक बहरौलन्हि । बहुत खुब । जनकपुर नगरक अप्पन विशिष्ट पहिचान छैक । एहि ठामक पत्रकारिताक अप्पन ऐतिहासिकता छैक, एहि ठामक पत्रकारितामे प्रतिष्पर्धा सेहो बेसिगर छैक, एहि सभक बीच अप्पन मौलिक व्यक्तित्व आर्जन करब कम कठिन नहि । सुजीतजी निक दिशामे बढि रहल छथि, हिनकर पत्रकारिताक भविष्य सुदीर्घ छन्हि । आनो ठामक पत्रकारसभकेँ सेहो एहि मार्ग पर चलबाक लेल प्रेरित करतैक से हमर विश्वास अछि । पत्रकारिता जनभावनाक अभिव्यक्ति, सद्भावक उद्भूति आ नैतिकताक पीठिका अछि । संस्कृति, सभ्यता आ स्वतन्त्रताक वाणीक संगहि ई जीवन मे अभूतपूर्व क्रान्तिक अग्रदुतिका सेहो छैक । एखन मिथिला मे प्रतिवद्ध आ जिम्मेवार पत्रकारिताक आवश्यकता अछि । एहि पुस्तकक बहाने जवावदेह पत्रकारिता पर बहस चलैक आ जनकपुर परिवृतक सरोकारसभ पर खुला एवं स्वस्थ विमर्श भऽ सकैया, एहि मे ई पुस्तकक प्रकाशनक सफलता अछि । अन्ततः हम इएह कहब , ‘सुजीतजीक पत्रकारिता आओर विश्वसनीय हुएँ आ प्रसिद्धिक फुनगी पर चढैत चलि जाइक । ’ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जवाहरलाल कश्यप- विहनि कथा गिद्ध बात बहुत छॊट छलै, ढॊराई कॆ महीस भीमनाथ बाबु कॆ जजात चरि गॆलै/ मुदा छॊट बात छॊट नहि रहि गॆलै भीमनाथ बाबु क्रॊध मॆ ढॊराई कॆ मारि बैसलखिन्ह / हुनकर खायल‍‍‍‍‍‍ पील मजबुत शरीरक एक मुक्का कमजॊर ढॊराई नहि सहि सकल आ मरि गॆल / खॆतक आरि पर ऒकर लाश राखल अछि आ समग्र समाज मॆ हल्ला भ गॆल/ समाज मॆ बहुत लॊक दुखी छल मुदा बहुत गिद्ध अप्पन अप्पन हिस्सा लॆल जॊर घटाव क रहल छल / हरिस्चन्द्र झा अप्पन हिस्सा ल कॊर्ट मॆ झुठ गवाही दॆबय लॆल तैयार छल /महावीर यादव जॆ एरिया कॆ दादा छल अप्पन हिस्सा ल ढॊराई कॆ घरक लॊक पर प्रॆसर बनबय लॆल तैयार छल जॆ कॆश नहि कर / मुखियाजी अप्पन हिस्सा ल पन्चायत मॆ कॆश कॆ रफा दफा करय लॆल तैयार छथि / दरॊगा रामप्रसाद बाबु अप्पन हिस्सा ल कॆश कमजॊर करय लॆल तैयार अछि / डाक्टर लक्छमी अप्पन हिस्सा ल पॊश्टमार्टम मॆ हॆराफॆरी करय लॆल तैयार अछि / वकील मॊहन बाबु अप्पन हिस्सा ल कॊर्ट मॆ दाव पॆन्च दॆखवय लॆल तैयार अछि / महामहिम जज महादॆव बाबु अप्पन हिस्सा ल भीमनाथ बाबु कॆ बचाबय लॆल तैयार छथि/ और बहुत रास गिद्ध अप्पन अप्पन हिस्सा लॆल जॊर तॊर क रहल छथि/ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदानन्द झा 'मनु' चोनहा (धारावाहिक मैथिली कथा ) एक गोट एहन स्वाभिमानी किशोरक मर्म कथा,जए अपन माय-बाप कए कनिक लापरवाही कए कारण घोर अन्हार एवं अपार दर्दक दुनियाँ में चली गेल | मुदा अपन सहाश व् कुषार्ग वुधि कए द्वारा ओ ओहि घोर अन्हार एवं दर्दक छाया सँ बाहर निकैल,एक सुखद एवं प्रकाशमान जिवन में चरण बधेलक | ******************************************************************** भाग १ ऋतू राज वशंत कए महिना नहि जाड ,नहि गर्मी,चारुकात बाड़ी-झाड़ी फूल सँ लदल | सेरसों कए पियर-पियर फूल सँ खिलाएल खेत,जेना कोनो  चतुर  कलाकार कए द्वारा बनायल गेल अनुपम कलाकृतिक सुन्नर नमूना हुए | गृहस्थक खेत-खडिहान गहुमक बोझ सँ भरल,मानु साक्षात् लक्ष्मी हँसि रहल छथि | आँगन में रौद लगाबैक हेतु गहुमक बोझ खोइल-खोइल कs पसारल | भोरक मन-मोहक रौद,ताहि ऊपर छितरल | ओहि पर घरक स्त्रीगन एवं धिया-पुता सब विराजित अमृतमय रौदक आनन्द लैत,प्राकृतिक अमृत लुटैत | ओहि  पसरल गहुमक डाँट पर करीब दस वर्षक मांशुम संजय अपन दुनु हाथे मांथ कैस कs  पकरने असहाय माथक पीरा सँ कराहैत छटपटायत | ओहि असहाय दर्द पर सँ ओकर माय रैह-रैह कs कहैत - "जलखै कयले नs,कतेक बेड भs गेलौ |" असहाय माथक दर्दक पीरा, कष्ट ओय पर सँ मायक रैह-रैह कs जलखैक आग्रहक कान में आबैत शव्द | संजय  कए इ शव्द सुनी आओर बेसी माथ पीरा सँ  फटय लगै | मुदा माय कए धनसन | हुनका जेना संजयक असहाय पिराक कोनो अनुमाने नहि | ओकर कष्ट पर किनको ध्यान नहि, किएक तs इ ओकर नित्यक कथा रहैक | जेना-जेना सूर्यक तेज बरहल जाई तेना-तेना ओकर माथ आओर अधिक पीरा सँ फाटल जाए,ओकर छटपतेनाइक  गति में वृद्धि भेल जाई | कखनो ओकर बाबी कए नहि देखल जाएन तs एक चुरुक करुतेल माथ में होंसैत देथिन,ओई सँ ओकर माथक पीरा में तs कोनो अंतर नहि होय मुदा दुनु आँखिक कोर सँ नोरक धार बहए लगैक | सायद दर्द एवं पिराक अधिकता सँ अथवा बाबिक हाथक स्नेह स्पर्श सँ | दाँत सँ अपन ठोर कए कटैत जेना दर्द कए अंदर समेटक कोशिस में असफल, सबके रहितो अनाथ, स्नेहक आ दुलारक अनाथ | जानलेबा दर्द, इ आई-काईल्ह ओकरा सब साल होई छैक | जए कहबै भैर दिन,भैर राइत सेहो नहि | भोरे रौदक तीब्रता कए संग-संग ओकर माथक   दर्द बढल जाई छै ,आ दुफहडिया कए बारह-एक बजे बाद जेना-जेना रौदक तेज कमल जाई छै तेना तेना ओकर दर्द कम भेल जाई छै | बेर खसैत-खसैत एकदम ठिक,फेर अगिला दिन | इ ओकर नित्यक क्रम,मुदा घर में कियोक कान-बाट दैबला नहि | उलटे कियो कहैत - "हूँ पढैक दुवारे बहाना करैए |" कियो कहैत - "काज करै दुवारे बहाना करैए |" एनाहियों अपन मिथिलाक कनिआँ-दाई सब कए झगडा-निंदा पर बेसी ध्यान रहैत छैन, अपन बाल-बच्चा पर कम | पित्ता कए बाहर कमेनाइये सँ फुरसैत नहि,जए कतौ दखेथिन कि चेक करेथिन | फुरसैत कएकरा लग रहै छैक,ओहेन उईक्त रहबाक चाहि, धिया-पुता सँ स्नेह रहबा चाहि, अपन बच्चाक प्रति अपन कर्तव्य कए समझबा चाहि | खाली मारने-पीटने,खिसियोने बुझु अपन कर्तव्य कए इत्तीश्री भs गेल सए नहि  | संजय कए ओहि कष्टकारी पीरा एवं दर्द कए सहैत दू वर्ष आओर व्यतीत भs गेल | दर्द कए अधिकता आ भयंकरता में दिनों-दिन वृधिये होएत रहलैक | परन्च ओकर बाबिक एक  चुरुक करुतेल कए आलावा कोनो आन उपचार नहि | संजय कए पिता पापी पेट भरै-लेल महानगर दिल्ली प्रवास कs लेला | किछ महिना बाद अपन छोट भाई अर्थात संजय कए पित्ती कए समाद देलखिन -"हमर स्त्री व् धिया-पुता कए नेने आऊ |" संजय    कए बाल मोन बहुत प्रशन्न भेलैक | एक अपन बाबूजी लग जाएब दोसर दिल्ली,ओहू सब सँ बेसी खुसी रेल पर बैसक | ओहि सँ पाहिले कहियो रेल देखनेहों नहि | अपन दू वर्षीय छोट भाई कए कोरा में नेने आ समतुरिये माँझील 'अजुज' कए संग लेने भैर गाम खुसी सँ सबके नोतैत -''हम दिल्ली जाएब,हम दिल्ली जाएब |" ओ शुभ दिन आएल,संजय तिनु भाँई,माय,पित्ती संगे दिल्ली आएल | नव लोक,नव जगह संजय कए बर नीक लगलैक | सबकए सब अपन-अपन में व्यस्त भs गेल | संजय कए पिता अपन नोकरी में माय घर आँगन कए काज में | संजय दुनु भाँई कए स्कुल में नाम लिखा गेलैक | दिल्लीक गर्मी में संजय कए माथक पीरा आओर बेसिए वृहद् रूप लय लेलकैक  | जतए गाम में वर्ष में एक बेर कष्टदायक पीरा होए छलैक एहिठाम  वर्ष में दू बेर होबए लगलै छ: छ: महिना पर | फरबरी-मार्च महिना में जार ख़त्म भेला पर गर्मीक आगमनक संगे, आ अक्तुबर-नवम्बर में गर्मी ख़त्म भेला बाद जाड़क आगमन कए संगे | एहिठाम एलाक दोसरे वर्ष में एहन भय गेलैक जए संजय कए घर सँ बाहर रौद में निकलैत डर लगैक | डर कि, रौद में जायते देरी माथ दर्द सँ फाटअ लगै | ओकर व्याकुलता व् व्यग्रता देखि माय-बाबु पुछथिन - "कि होयछौ? मोन ठिक  छौ?" "बहुत जोर सँ माथ दुखाइये |" संजय एतबे कही कs रही जए | माथ  दर्दक कोनो समान्य गोटी दय दएलौंह, तत्यकाल दर्द ठिक भय जए | संजय कए अपना बुईझ परैक जेना दर्द रूपी आइग में पैन पैर गेलै | मुदा दू-तिन दिन बाद ओहिना पहिलका क्रम शुरू, जए-जए रौद बरहल जाई तं-तं ओकर माथक दर्द बरहल जाई | संजय कए अत्यधिक पीरा एवं कष्ट सँ दुखी देख ओकर बाबूजी कैह्तथिन- "काइल्ह चैल जाइहें, काका सँ दबाई लs लिंहें |' ओकर  काका एकटा डाक्टर लग कम्पोंडरी करै छलखिन | तैं किएक अपने लय कs कोनो डाक्टर लग जाईतथिन, जए इ लगातार एतेक वर्ष सँ किएक माथक दर्द हैत छैक, कि कमी छैक,कि दिक्कत छैक, मुदा नहि;कि मायए कतौ सँ देखा ऐबतथिन मुदा नहि | संजय अपन अनुज कए हाथ पकैर दुनु भाँई चैल जाएत काका लग | काका सेहो दुनु बच्चा कए देख बड खुस, बिस्कुट टॉफी किन कs दय देथिन, एक दू रुपया नगदो दय देथिन, वस बाल-मोन ताहि में खुस | संजय अपने तs काका सँ किछु कहियो नहि सकैन, अनुजे काका सँ कहैन- "काकायौ, भाईजी कए माथ बड दुखाईत रहैत छैन्ह |" "हाँ,किएक "- माथ छुबैत काका कहथिन | माथ ऐ दुवारे छुबथिन कि बुखार-तुखार नहि होय,मुदा बुखार नहि रहै | "कहिया सँ "- काका "सब दिन दुखाईत रहैए,बड तेज | भोरे जतेक रौद तेज भेल जाई छै ओतेक बेसी दुखाईये |"- एही बेर संजय अपने बाजल,धिया-पुता ऐ सँ बेसी कि कहतै | ओनाहूँ  संजय बाजै में बर कम खास कs बाप-पित्ती सँ तs आओर कम | लाजे वुझु या धाखे अथबा दरो कैह सकै छी | घर-अँगनाक वातावरण  कए असर धिया-पुताक मस्तिश्य पर पैरे जाएत छैक | "बस" ! - काका अपने कोनो डिब्बा सँएक मुठ्ठी गोटी निकाइल कs दय देथिन | दू-तिन दिन दबाई खेला सँ दर्द बिलकुल ठिक | जतए आन-आन वर्ष  दू-अडहाई महिना दर्द रूपी राक्षशक सामना करए परै,ओतए ऐ बेर दस-पन्द्रह दिन कए तकलीफ कए बादे, दबाई खेने ठिक भय गेलै | समय एलै-गेलै | फेर अगिला साल ओहे खिस्सा | पाहिले सँ बेसी बिकराल रुपे संजयक माथक दर्द शुरू ; मुदा किनको कोनो ध्यान नहि | फेर ओ अपन बाबूजी कए कहला उपरांत काका सँ दबाई लय अनलक | दू-चाईर दिन खेला वाद दर्द ठिक | आब तs इहे नियम भs गेलै | समाय आबै- जाई, संजयो  कए असहाय, अपार पीरा लय कs माथक दर्द आबै,गोटी खए ठिक भs जाई | दिल्ली एला सेहो तिन वर्ष भs गेलै मुदा ओकर माथ दर्दक कोनो स्थाई इलाज नहि | स्कुल में संजय पढाई में बड तेज, आब ओ वर्ग सात पास कय कs वर्ग आठ में प्रवेश केलक | पाँचमी सँ लगातार सब साल अपन वर्ग में पहिल या दोसर स्थान आने | ओकर अध्यापको सब ओकर खूब प्रसंशा करथिन | मुदा ओ कहियो स्कूलक खेल-कूद में भाग नहि लए,किएक तs स्कुल में अक्सर सब बेट-बाल खेलाई, मुदा ओकरा बेट-बाल कए खेल में बाल सुझबे नहि करै | तैं ओ कि खलेतै? कि बाल पकरतै ? ओकर खेलाई कए स्तर निम्न भs जाई तैं ओ खेलेबे नहि करे | मुदा इ बात ओ नहि बुईझ पेलक या नहि अनुभब कs सकल जए ओकरा बहुत कम देखाई दै छैक | सब तs केहन बढियाँ खेलाई छै तs ओहे किएक नहि खेलए ? या  ओकरा नहि बाल देखाई दै छै तs किएक नहि? अनुभवों कोना हेतैक, इ बात माय-बाप या गारजनक अनुभब करै बला छै  नहि कि बच्चा कए, अगर बच्चा कए एतेक ज्ञान व् अनुभव भय गेलैक तs बच्चा,बच्चा किएक कहेलक | एहि वर्ष जहिया सँ संजय वर्ग आठ में प्रवेश कएलक तहिया सँ तs ओकर आँखि दिन पर दिन आओर बेसिए कमजोर होबए लगलैयए | स्कुल में ओ सब सँ अगिला बेंच पर बैसैत छल मुदा आई आबई में किछु बिलम्ब भs गेलै तैं दोसर पंक्ति कए बेंच पर बैसअ परलै, मुदा ओहि ठाम सँ ओकरा ब्लैक बोर्ड पर लिखलाहा देखेबे नहि करै |   ओ अपन अध्यापक द्वारा देल गेल किछो सवाल नहि कs पेलक | आई ओकरा अपना अनुभब भेलै जए ओकर आँखि कमजोर छै, कमजोर नहि बड्ड कमजोर छै | ओ अनुभव केलक जए आन-आन बच्चा पाँचम-छ्थम पंक्ति कए बैंच सँ बैसल सवाल कs रहल अछि मुदा ओकरा दोसरे पंक्ति सँ ब्लैक बोर्ड नहि देखा रहल छै | आई ओकरा ज्ञात भेलै जए ओकरा क्रिकेट कए बाल किएक नहि देखाई दय छै | आई ओ अनुभव केलक जए ओ बस पर किएक नहि चैढ सकै छै | किएक तs ओकरा बसक नम्बरे नहि सुझै | आई ओकरा अनुभव भेलै जए एहि साल वर्ग सात में पिछुलका साल सँ कम नम्बर किएक एलेक | इहे सब सोचैत-सोचैत ओकर मस्तिश्य में बिचारक मंथन होएत रहै | कखन घंटी खतम भेलै,कखन मास्टर साब चैल गेलखिन संजय कए किछो ज्ञात नहि |ओकर ध्यान तs तखन खुजलै जखन कि टिफिन कए घंटी बजलैह | सोचैत-सोचैत ओकर माथो बड्ड जोर-जोर सँ दुखे लगलै | दर्द कए अधिकता सँ ओकर दुनु आँखि सँ नोर कए धार बहए लगलै | कोनो-ना ओ अपना कए सम्हारैत मास्टर साब सँ छुट्टी लय कs घर चैल आएल | घर अबिते स्कुल बैग एक कात फेक चौकी पर मुह नुका कs सुइत रहल, कखन ओ निन्द पैर गेल ओकरा कोनो ज्ञान नहि | घर में कियोक नहि | बारह बजे माय कतौ सँ गप्प-सप्प कय कs एली तs संजय कए सुतल देखलि, निन्द सँ उठेलिह, ताबत ओकर दर्द आ मोन दुनु स्थीर भs गेल रहै, खेलक-पिलक, दिन बितगेलै | साँझ खन पढै  लेल बैसल तs आई ओ अनुभब केलक जए  किताब पर ओ एतेक झुकि कs किएक पढैये | जतय कि आन-आन बच्चा  सब पलता माइर एकदम सोझ बैस कs पैढ़ रहल अछि | आब ओ पढत कि, ओकर मस्तिश्य किछ दोसरे सोचै में लागल छैक | आई ओकरा ज्ञात भs गेलै कि ओकर आँखि कमजोर छैक | आब ओ करत तs करत कि ? गुन-धुन, गुन-धुन करैत समाय व्यतीत केलक | अगिला भिनसार संजय सब दिन जेकाँ सुति कs उठल | रैब दिन रहै, स्कुल बन्दे, बच्चा सब टेलीविजन देखै में लाइग गेल, संजय सेहो टेलीविजन देखय लागल | ओकरा बहुत लग सँ टी वि देखैक आदत छलै | इ ओकर मजबुरी रहैक, किएक तs दूर सँ ओकरा टी वि नहि देखाई | मुदा बच्चाक ज्ञान ओ अपने एही बात कए नहि बुझै आ आगुवए सँ टीवि देखए | माय-बाबु एहि बात कए किएक नहि ध्यान देथिन से तs आब ओहे सब जाँनथि | टी वि देखै काल में, किछु छन बाद अनुज आबि संजय कए आगु बैस रहलै | सायद संजय कए नीक सँ सुझहैत रहितै तs अपने पाछु बैस रहिते | मुदा  ओ बिवश छल, ओकरा पाछु भेला सँ टीवी सुझवे नहि करतै, तैं ओ अनुज सँ पछु होई लेल कहलकै | ओहो बच्चा, बच्चाक जिद्द नहि पाछु भेल दुनु बच्चा में झगडा भs गेलैक, एतवा में माय संजय कए कान ऐंठ कs एक चटकन मारैत कहलखिन्ह - "इ चोनहा कहिं कए हरदम झगरे करैत रहत, छोट भाई छै आगुए बैस रहलै तs कि भय गेलै | पछुए भ जो |" आब तs संजय कए दुनु आँखि सँ नोरक गंगा-यमुना बहए लगलै | ओकर कान मायक कोनो शव्द नहि सुनलकै,खाली ओकर कान में बेर-बेर "चोनहा"  शव्द गुजय लगलै | आ इ चोनहा ओकर प्राचीन नाम छैक, जखन-जखन ओकरा अपन मायक क्रोधक सामना करय परैक तखन-तखन ओकरा इ चोनहा शव्द सँ विभूषित कएल जाई | आन दिन कोनो बात नहि किएक तs ओ चोनहा शव्द सँ अनभिग्य छल  मुदा आई ओकरा चोनहा शव्दक ज्ञान भs गेल रहै, ओकरा कम सुझै छै तकर ज्ञान भs गेल रहै | ताहि लय कs इ चोनहा शव्द ओकर ह्रदय में शीसा जकाँ भोकए लगलै | मायो ओकरा चोनहा कोनो करणे कहथिन्ह किएक तs आँखि कए अधिक कमजोर भेला कारणे संजय कए कोनो वस्तु कए देखैक हेतु, आँखि पर बेसि जोड़ देवय परैक ताहि अवस्था में ओकर आँखि कए दुनु पपनी सिकुरि कs अधिक समीप भs जाई | इ बात ओकर माय देखथिन्ह आ ताहि करणे ओकरा चोनहा नाम सँ अलंकृत कय देलखिन्ह | मुदा ओ इना अपन आँखि कए किएक करैयए, एही बात पर किएक ध्यान देथिन ? जखन माये कए अपन बच्चाक प्रति इ जिम्मेवारी तs आनक कि बात, जखन मलिए अपन लगाएल गाछ कए उखारत तs ओहि गाछक भविष्य कतय रहतै | -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- आँगाक भाग -अगिला अंक में | पढनाई नहि विसरि,  संजय घोर कष्टकारी माथक दर्द सँ कोना छुटकारा पेलक? ओकर आँखिक कमजोरिक कि भेलै ? एक मांसुम किशोर, एक अनचिन्हार शहर में कोना,सफलता पेलक, व असफलताक गुमनामी कए अन्हार में हरा गेल ? ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जितेन्द्र झा -नेपाली आ मैथिली भाषाक दूटा साहित्यिक कृति विमोचित

एक्कहि मञ्चपर नेपाली आ मैथिली भाषाक दूटा साहित्यिक कृति विमोचित भेल अछि । राजधानी काठमाण्डूमे पुस २३ गते आयोजित एकटा कार्यक्रममे रमेश उप्रेतीक बहुलानन्द उपन्यास आ श्यामशेखर झा कमलक मेघशतक खण्डकाव्यके विमोचन कएल गेल । विमोचन कार्यक्रम आन कार्यक्रमस“ बिलकुल भिन्न छल । पोथीक लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार, चर्चित नेता, मन्त्रीस“ करएबाक चलनके तोडैत देवकुमारी उप्रेती आ पार्वती देवी पोथीक लोकार्पण कएने छलीह । ई दुनूगोटे पोथीक स्रष्टाद्वयके माय छथिन्ह । नेपाली भाषामे लिखल बहुलानन्द उपन्यासमे नेपालक वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक मुद्दाके विषयवस्तु बनाओल गेल अछि । मैथिली भाषामे लिखल मेघशतक लघुकाव्यमे कवि मेघके माध्यमस“ अपन प्रियसीके सन्देश पठओने छथि । कार्यक्रमके आयोजक संस्था छल नेपाली मैथिली साहित्य संगम । आयोजक संस्था भाषिक समागमके शुरुवात कएलक अछि से कहैत वक्तासभ प्रशंसा कएने रहथि । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक उपकुलपति गंगा उप्रेती नेपाल बहुजातीय, बहुभाषी आ बहुसांस्कृतिक देश रहल कहैत एकर बहुलताभितर एकता खोजबाक प्रयास करबापर जोड देलनि । नया नेपालमे हरेक भाषाभाषीके एक दोसराके अस्तित्व स्वीकारबाक चाही, दुनू कृतिक संयोजनस“ देखाओल गेल भाषिक पहिचानस“ राजनीतिक दलके पाठ सिखबाक ओ सल्लाह देलनि । ‘अन्य भाषाभाषीसेहो ज“ एकर देखासिखी करए त आपसी एकता मजबुत हएत’ उपकुलपति उप्रेतीक कहब छलनि । मेघशतकके रचनाकार श्यामशेखर झा कमल कहलनि–नेपाली मैथिली साहित्य संगम राजधानी आ राजधानी बाहर रचना होबऽबला साहित्यके जोडबाक प्रयास करत । उपन्यासकार रमेश उप्रेती नेपाली मैथिली साहित्य संगमक मञ्चस“ भाषिक रुपमे एक दोसराके अस्तित्व स्वीकारबाक काज भेल कहलनि । भाषिक विविधताके फायदा नेतासभ उठारहल कहैत ओ आपत्ति जनओलनि । ‘नेपाली आ मैथिली दुनू भाषाके अपन रक्षाके लेल एकजुट होएब आवश्यक अछि’ एमाले नेता रामचन्द्र झा कहलनि ।

कार्यक्रममे वक्तासभ विमोचित कृतिक विभिन्न पक्षपर चर्चा कएने छलथि । रमेश उप्रेती अपन बहुलानन्द उपन्यासमे एकटा अघोरीके केन्द्र बनाकऽ समाजिक, राजनीतिक दुष्प्रवृति उजागर करबाक प्रयास कएने छथि । पशुपति क्षेत्रमे रहनिहार अघोरी योगीक मु“हस“ उप्रेती कटुसत्यके उद्घाटित कएने छथि । अघोरी नेपालमे वि.स. २००७ सालके बाद भेल राजनीतिक परिवर्तनके लेखाजोखा कएने अछि । सशस्त्र द्वन्द्वमे मारल गेल १३ हजार नेपाली नागरिकके मृत्युक हिसाब मंगनिहार अघोरी प्रमुख राजनीतिक दलके कठघेरामे ठाढ कऽ दैत अछि । मेघशतक कालिदासक मेघदूतस“ प्रभावित अछि । कवि अपन विरह मेघके सुनौने छथि, मेघ समदिया बनल अछि । ज“ किछु शास्त्रीय आधारके छोडि देल जाए त मेघशतक उत्कृष्ट रचनामे गनल जाएत प्राज्ञ रामभरोस कापडिक कहब छलनि । छन्दोबद्ध मेघशतक छन्दके पाबन्दमे पडि सीमित भेल नेता रामचन्द्र झाक विश्लेषण रहनि । मेघशतकस“ नेपालीय मैथिली साहित्यक श्री वृद्धिमे योगदान भेल वक्तासभ कहने छलथि । २. मेघशतकस“ तीनगोट कविता हे मेघ बनब कि दूत हमर ? श्यामशेखर झा कमल सन्देश हमर नहि रत्ती भरि, बिरह ज्वर भेल विषम–सरि । नहि शब्द फुरय संदेश दिअ, अविरल बहय ई नोर दिअ । वाष्पीकृत भऽ ई नोर उडय, भऽ जाय समागम एकरास“ । अवरोध हमर, अनुरोध हमर, भऽ जाय समाहित ई अहा“स“ । ई भार उठा कऽ कृपा करब, स्नेह सहित एकरा धारब । एकरा बुझू स्नेहक गङ्गाजल, करबद्ध हम, अनुरोध हमर ।। हे मेघ बनब कि दूत हमर ? प्रियतम प्यारी लग गीत हमर, प“हुचादेव, की फेर जाएब बिसरि ? प“हुचादेव, की फेर जाएब बिसरि

जागू मैथिल हे मैथिल ! मिथिला जागू शिथिल अहा“ नहि रहू बनल । गौरव अतीतपर अहा“ करु, सपना मिथिलाके करु सफल । मैथिल संस्कृति, मैथिली भाषा, अपन सब किछु अपन आशा । अपन संस्कृति पर गर्वकरु, अपन तऽ करु अहा“ परिभाषा । अपना बारेमे ज्ञान करु, ध्यान धरु अपना उपर । मृत अछि, ओ नहि जीवित, अपन स्मृतिमे नहि जकर । हे मेघ बनब कि दूत हमर ? प्रियतम प्यारी लग गीत हमर, प“हुचादेव, की फेर जाएब बिसरि ? प“हुचादेव, की फेर जाएब बिसरि

ओ सब मैथिली भाषी छथि

मिथिलामे जे सब भूमिपुत्र, ओ सब मैथिल छथि मिथिलास“ । समुदाय कोनो वा जाति पा“त, नहि फरक परत किछु कहलास“ । मिथिलामे जे सब जन्म लेलन्हि, अथवा मिथिलाके बासी छथि । ओ सब मैथिली भाषी छथि । अपनामे नहि कोनो भेद करु, विभेद करु नहि वर्ग उपर । सबस“ पहिने हम मैथिल छी, मैथिली, मिथिला अपन जकर ।। हे मेघ बनब कि दूत हमर ? प्रियतम प्यारी लग गीत हमर, प“हुचादेव, की फेर जाएब बिसरि ? प“हुचादेव, की फेर जाएब बिसरि ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। उमेश मण्डल विदेह साहित्य उत्सव २०१२/ वि‍देह सम्‍मान समारोह (वि‍देह सम्‍पादकक समानान्‍तर साहि‍त्‍य अकादेमी- मैथि‍ली पुरस्‍कार) सह काव्‍य गोष्‍ठी दि‍नांक- 14 जनवरी 2012 (शनि‍दि‍न) समए- 11: 30 बजे (पूर्वाहन) सँ 5: 50 बजे साँझ धरि‍ स्‍थान- अशर्फी दास साहु समाज इण्‍टर महि‍ला महावि‍द्यालय, अम्‍बेदकर चौक वार्ड नं. 07, ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल। आयोजक- स्‍थानीय साहि‍त्‍य प्रेमी संयोजक- उमेश मण्‍डल उद्घाटन सह दीप प्रज्‍वलन- द्वय प्रो. राजकुमार मण्‍डल (अवकाश प्राप्‍त प्रोफेसर, हि‍न्‍दी वि‍भाग, ि‍नर्मली महावि‍द्यालय ि‍नर्मली) आ डॉ. भीमनाथ झा सम्‍मान समारोहक अध्‍यक्ष डॉ. भीमनाथ झा (अवकाश प्राप्‍त प्रोफेसर, वि‍श्ववि‍द्यालय मैथि‍ली ि‍वभाग, ल. ना. मि‍. वि‍श्ववि‍द्यालय- दरभंगा।) सम्‍मान समारोहक मंच संचालन- द्वय प्रो. शि‍वकुमार प्रसाद (प्राध्‍यापक हि‍न्‍दी वि‍भाग ि‍नर्मली महावि‍द्यालय ि‍नर्मली) श्री संजीव कुमार ‘शमा’ स्‍वागत गीत- श्री रामसेवक ठाकुर, श्री रामदेवप्रसाद मण्‍डल झारूदार आ श्री राधाकान्‍त मण्‍डल स्‍वागत कवि‍ता- श्री रामवि‍लास साहु स्‍वागत भाषण- प्रो. कपि‍लेश्वर साहु सम्‍मानि‍त अति‍थि‍- 1. ले. क. मयानाथ झा- (गाम- भराम, पोस्‍ट कोठि‍या, जि‍ला- मधुबनी) “जेकर नारी चतुर होइ” पोथी लेल समानान्‍तर साहि‍त्‍य अकादेमी मैथि‍लीक बाल साहि‍त्‍य पुरस्‍कार- 2011 2. श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल (गाम, पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी) “गामक जि‍नगी” कथा संग्रह लेल समानान्‍तर साहि‍त्‍य अकादेमी- मैथि‍लीक मूल पुरस्‍कार- 2011 3. श्री आनन्‍द कुमार झा (गाम- मेंहथ, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी) “कलह” नाटक लेल समानान्‍तर साहि‍त्‍य अकादेमी- मैथि‍लीक युवा पुरस्‍कार- 2011 नव वस्‍त्रक संग प्रस्‍शती पत्र आ वि‍देह सम्‍मानक प्रतीक चि‍न्‍ह प्रदान कएल गेल। सम्‍मानि‍त कएल गेलन्‍हि‍- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलकेँ- डॉ. भीमनाथ झा, प्रो. राजकुमार मण्‍डल ले. क. मयानाथ झाकेँ श्री राजदेव मण्‍डल, प्रो. राजकुमार मण्‍डल श्री आनन्‍द कुमार झाकेँ श्री बेचन ठाकुर, प्रो. राजकुमार मण्‍डल वि‍शि‍ष्‍ठ अति‍थि‍- श्री रामजी प्रसाद मण्‍डल (अवकाश प्राप्‍त पुस्‍तकालयाध्‍यक्ष ि‍नर्मली महावि‍द्यालय ि‍नर्मली, सुपौल।) प्रो. जय प्रकाश साहु (अध्‍यक्ष इति‍हास वि‍भाग ि‍नर्मली महावि‍द्यालय ि‍नर्मली) श्री हरि‍नारायण कामत (अवकाश प्राप्‍त शि‍क्षक, ि‍नर्मली) श्री कृष्‍ण राम अवकाश प्राप्‍त शि‍क्षक, छजना, मधुबनी।) श्री मनोज कुमार साह (प्राचार्य, अशर्फी दास साहु समाज इण्‍टर महि‍ला महावि‍द्यालय ि‍नर्मली।) श्री शि‍वकुमार मि‍श्र (गाम- बेरमा, मधुबनी।) साहिि‍‍त्‍यक वि‍शि‍ष्‍ठ अति‍थि- श्री राजदेव मण्‍डल (एक्केसम सदीक पहि‍ल दसकक सर्वश्रेष्‍ठ कवि‍, गाम- मुसहरनि‍याँ जि‍ला- मधुबनी।) श्री बेचन ठाकुर (प्रसि‍द्ध नाटककार, गाम-चनौरागंज, मधुबनी।) दोसर सत्र (काव्‍य पाठ) अध्‍यक्ष- प्रो. राजकुमार मण्‍डल (अवकाश प्राप्‍त प्रोफेसर, हि‍न्‍दी वि‍भाग, ि‍नर्मली महावि‍द्यालय ि‍नर्मली) मंच संचालक द्वय- प्रो. रमेश कुमार मण्‍डल प्राध्‍यापक, अशर्फी दास साहु समाज इण्‍टर महि‍ला महावि‍द्यालय, अम्‍बेदकर चौक वार्ड नं. 07, ि‍नर्मली। आ श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल शि‍क्षक, उच्‍च वि‍द्यालय- वनगामा, मधुबनी। काव्‍य गोष्‍ठीमे लगभग 3 दर्जन नूतन कवि‍ताक पाठ भेल। अति‍थि‍- 1.  प्रो. रमेश कुमार मण्‍डल 2.  प्रो. हेमनारायण साहु 3.  प्रो. कपि‍लेश्वर साहु 4.  प्रो. उपेन्‍द्र नारायण अनुपम 5.  श्रीमती कामि‍नी कुमारी प्रसाद 6.  श्रीमती उषा कुमारी 7.  प्रो. सुशील कुमार साहु 8.  श्री कृष्‍ण कुमार साह 9.  श्री राघब झा 10.  श्री युगेश्वर प्रसाद साह 11.  श्री लक्ष्‍मण प्रसाद गुप्‍ता 12.  श्री रामवि‍लास साहु 13.  श्री भोला प्रसाद यादव 14.  श्री वि‍रेन्‍द्र कुमार वि‍मल 15.  श्री राम प्रवेश मण्‍डल 16.  श्री गुलाब चन्‍द्र यादव 17.  श्री वि‍ष्‍णु कुमार गुप्‍ता 18.  श्री राधाकान्‍त मण्‍डल 19.  श्री मनोज कुमार राधे 20.  श्री वि‍नोद कुमार वि‍कल 21.  श्री सी. एन. मण्‍डल 22.  श्री सुरेश महतो 23.  श्री गोवि‍न्‍दाचार्य 24.  श्री अशोक साह 25.  श्री पंकज कुमार प्रभाकर 26.  श्री युगल कि‍शोर शर्मा 27.  श्री मुकेश कुमार 28.  श्री दि‍नेश कुमार 29.  श्री उमेश प्रसाद नायक 30.  श्री रौशन कुमार गुप्‍ता 31.  श्री दुर्गानंद मण्‍डल 32.  श्री संजय कुमार मण्‍डल 33.  श्री अखि‍लेश कुमार मण्‍डल 34.  श्री मदन प्रसाद 35.  श्री संजीव कुमार समा 36.  श्री श्रीमोहन ठाकुर 37.  श्री उमेश पासवान 38.  श्री रामकृष्‍ण मण्‍डल छोटू 39.  श्री खड़ानंद यादव 40.  श्री नंद वि‍लास राय 41.  श्री रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ 42.  सुधीर कुमार ‘सुमन’ श्री नारायण झा लगभग 3 दर्जनसँ ऊपर काव्‍यक पाठ भेल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। रामभरोस कापड़ि भ्रमर प्राज्ञ भ्रमर साझा पुरस्कारसं सम्मानित नेपालक सभस पैघ प्रकाशन संस्था साझा प्रकाशन आइ एक भव्य समारोहमे २०६७ सालक साझा पुरस्कारसभ वितरण कएलक अछि । वरिष्ट साहित्यकार एवं प्राज्ञ रामभरोस कापडि भ्रमरके उक्त अवसरमे साझा लोक संस्कृति पुरस्कारसं सम्मानित कएल गेलनि । साझा प्रकाशनसं प्रथम बेर प्रारंभ कएल गेल ई पुरस्कार पाबबला ओं प्रथम साहित्यकार छथि । पुरस्कार पाबबला अन्य स्रष्टासभमे साझा पुरस्कार पाबबला दबसु क्षेत्री, साझा लोक साहित्य पुरस्कार पाबबला कृष्णराज सर्वहारी,साझा वाल साहित्य पुरस्कार पाबबला विजय चालिसे लगायत गरिमा सम्मान पाबबला सभ सेहो छथि । उक्त पुरस्कारसभ नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक उपकुलपति गंगा प्रसाद उप्रेतीे प्रदान कएलनि । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। मैथिलीक अग्निकवि श्री रामलोचन ठाकुरसँ साक्षात्कार जे कोकिल मंचक श्री नबोनारायण मिश्र जी द्वारा लेल  गेल अछि। ई साक्षात्कार हुनकासँ विदेह द्वारा हुनका समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार देल जएबाक अवसर पर लेल गेल छल।

प्रश्न--  अपने कलकत्ता कहिआ अएलहुँ? उत्तर---१९६३ ई.मे।

प्रश्न:--  मिथिला मैथिलीसँ कोना जुड़लहुँ? उत्तर-- सुखदेव ठाकुर संगे मिथिला-संघमे अएलाक पश्चात।

प्रश्न-- अपनेक मैथिली साहित्य, आंदोलन आ रंगमंचमे सभठाम सक्रिय भूमिका रहल अछि, हम चाहब जे क्रमशः कोन बिन्दुसँ प्रारंभ करैत एखन धरिक जे क्रिया-कलाप अछि ताहि पर अपन विशद जानकारी देबाक कृपा कएल जाए। उत्तर-- रंगमंच आ आंदोलनक पश्चाते साहित्यसँ जुड़लहुँ। १९७६मे रंगमंच जखन टूटि सन गेलै तकर पश्चाते लेखनमे पूर्णतः सक्रिय भेलहुँ।

प्रश्न-- प्रथम आंदोलन कहिआ भेल रहै जाहिसँ अपनेक सहभागिता दर्ज भेल। उत्तर---१९७१मे प्रथम आ अंतिम १९८०मे। ९ दिसम्बर १९८०केँ मैथिली मुक्ति मोर्चाक नेतृत्वमे पटनामे विराट प्रदर्शन भेल छल जकर संयोजक हम छलहुँ आ मैथिली आंदोलनक इतिहासमे पहिल बेर मैथिल संतानक शोणितसँ पटनाक राजपथ रंगाएल छल।

प्रश्न-- आंदोलनक प्रेरणा किनकासँ भेटल? उत्तर-- प्रथम बाबू भोलालाल दास आ दोसर किरणजी।

प्रश्न-- रंगमंचक हेतु पूर्णतः रंगमंचसँ जुड़ल पत्रिका, नाटकक अनुवाद आ अभिनयमे अपनेक योगदानक आइओ चर्चा अछि, एहिमे आइ किनकर नाम लेबए चाहब। उत्तर---मुख्यतः प्रबीर मुखर्जी जे हमरा लोकनिक निर्देशक छलाह। ओ प्रत्येक नाटकमे हीरोकेँ पार्ट हमरे दैत छलाह। हीरोक पार्ट लेल बहुतो प्रयत्नशील छलाह मुदा हुनकर कहब छलन्हि जे जकरा हम उपयुक्त बुझैत छी से मात्र अहीँटा छी। जे समकालीन लेल इर्खाक कारण सेहो छल।

प्रश्न-- मैथिली साहित्यिक हेतु लेखन, पोथी-प्रकाशन, संपादन आ संग-संपादन बेस अर्चित-चर्चित आइओ अछि, ताहि संदर्भमे अपनेक की कहब अछि। उत्तर--- पाँचम किलाससँ लिखनाइ प्रारंभ केलहुँ मुदा विधिवत् मिथिला-संघमे अएलाक पश्चात मिथिला-दर्शनसँ जुड़लहुँ। हमर प्रथम पोथी "इतिहासहंता" छपल छल जकर विमोचन यात्रीजी कएने छलाह।

प्रश्न-- संपादनमे कहिआसँ सक्रिय भेलहुँ। उत्तर---"अग्निपत्र" १९७३ ई.मे जाहिमे डा. विरेन्द्र मल्लिक आ सुकान्त सोम संग छलाह।

प्रश्न-- कतेक अंक छपलैक ? उत्तर---कुल सातटा अंक।

प्रश्न-- पुनः दोसर कहिआ ? उत्तर---१९७६ इ.मे एकसरे पुनः प्रारंभ कएलहुँ जकर पाँचटा अंक तत्पश्चात १९८० इ.मे फेर एकटा अंक बहार भेल। जकर संपादनमे बीरेन्द्र मल्लिक आ सुकान्त सोम संग छलाह। मैथिली रंगमंचक मुखपत्र "रंगमंच" तकर संपादन १९७४ इ.मे,१९७५ इ.मे "सुल्फा" नामसँ हस्तलिखित पत्रिका निकालहुँ। मइ १९८१ इ.मे "देसकोस" जकर संपादकमे नाम छल विनोद कुमार झाक मुदा संपादन हमही करैत छलहुँ।

प्रश्न-- देसकोस कतेक अंक धरि छपलैक ? उत्तर-- तीन अंक धरि।

प्रश्न फेर ? उत्तर-- अक्टूबर १९८१ इ.मे "देसिल बयना"क संपादकमे नाम छलन्हि जनार्दन झाक मुदा संपादन हमही करैत छलिऐक।

प्रश्न-- कतेक अंकमे कोन रूपमे यथा मासिक,त्रैमासिक? उत्तर-- एकर १३ अंक मासिक पत्रिकाक रूपमे छपलैक। रजस्ट्रेेशनक क्रममे "देसकोस"क नामे डिक्लेरेशन भेटलाक पश्चात ६ अंक धरि देसकोसक नामें प्रकाशित भेल। "मैथिली दर्शन"क पुनः प्रकाशन जनवरी २००५सँ मार्च २००६ धरि त्रैमासिक रूपे भेल जकर संपादन कएलहुँ।

प्रश्न-- सेवानिवृति भेलाक पश्चात साहित्य लेल पूर्ण समय भेटल तकर सदुपयोग कोना कएल अछि ? उत्तर-- तकरे परिणाम अछि जे संप्रति मिथिला दर्शनकेँ कार्यकारी संपादकक रूपमे कार्यरत छी जकर इ दोसर पर्याय मइ २००८सँ अद्यावद्यि चलि रहल अछि।

प्रश्न-- १५ आब हम पोथी रूपे प्रकाशनक जानकारी चाहब। उत्तर---संपादन------- १) आजुक कविता २) युगप्रवर्तक कवीश्वर चन्दा झा ३) कविपति विद्यापति मतिमान

पोथी-------- कविता १) इतिहासहंता (१९७७) २) माटि-पानिक गीत (१९८५) ३) देशक नाम छलै सोन चिड़ैया (१९८६) ४) अपूर्वा (१९९६) ५) लाख प्रश्न अनुत्तरित (२००३)

हास्य-व्यंग------ १) बेताल कथा लोककथा---- १) मैथिली लोककथा (१९८३) पुणर्मुद्रण—२००६

निबंध----- १) स्मृतिक धोखरल रंग (२००४) २) आँखि मुनने आँखि खोलने (२००६)

अनुवाद------ १) प्रतिध्वनि ( काव्य--१९८२) २) जा सकै छी किन्तु कियै जाउ (काव्य--१९९९-- भाषा-भारती सम्मानसँ सम्मानित) ३) फाँस (नाटक---१९९७) ४) जादूगर ( नाटक--१९८२) ५) रिहर्सल (नाटक---२००४) ६) चारि पहर ( नाटक--मंचित---अप्रकाशित) ७) किशुन जी विशुन जी ( नाटक--मंचित---अप्रकाशित) ८) बाह रे बच्चा राम ( नाटक--मंचित---अप्रकाशित)

उपन्यास----- १) पद्मा नदीक माँझी (२००९) २) नन्दितनरके ( अंतिकामे २००९, पोथी-२०११--मैथिलीमे) नन्दितनरके ( बया---२००९,पोथी २०१०-हिंदी मे)

प्रश्न-- एकर अतिरिक्तो अनय-अन्य नामसँ कोना लिखलहुँ ? उत्तर---पत्रिका चलएबाक क्रममे रचनाक अभाव भेने अन्यान्य नामसँ लिखलहुँ।लेखनमे रामलोचन ठाकुरक अतिरिक्त कुमारेश काश्यप, अग्रदूत,मुजतबा अली आदि नामे विभिन्न पत्र-पत्रिकामे बहुत रास कविता, निबंध आदि छिड़िआएल अछि।

प्रश्न-- मैथिली साहित्यमे किनकासँ प्रभावित भेलहुँ ? उत्तर---सर्व प्रथम विद्यापति तत्पश्चात किरण आ यात्री।

प्रश्न-- बहुचर्चित साहित्यिक संस्था "संपर्क" जकर अपने संयोजक छी ताहि प्रसंग अपन मंत्व्य। उत्तर-- २३,२४ आ २५ मई १९८१केँ मुक्तिमोर्चा दरिभंगामे अधिवेशन भेलैक आ आंदोलनकेँ माटिसँ जोड़बाक प्रयासेँ १५ सदस्यीय समीति बना एकरा दरिभंगामे छोड़ि देल गेल। एम्हर देसकोस सेहो नव बाट दिस तकैत छल फलतः हम जनार्दन झा, महेश्वर झा, निरसन लाभ, आ रामाधार मिश्रक सहयोगेँ "देसिल बयना" चलाओल मुदा ओहो दीर्घजीवी नहि भए सकल।"देसकोस"मे सहयोगी छलाह विनोद कुमार झा, सत्यनारायण झा,कुणाल, आदित्यनाथ झा आदि।कलकत्ताक स्थिति क्रमशः एहन भए गेल छलैक जे उल्लेखनीय कोनो कार्यक्रम नहि तैं भेँट-घाँट सेहो दुर्लभ। एहने स्थितिमे संपर्कक स्थापना भेल जाहिसँ मासमे एकहु दिन (मासक दोसर रवि) मैथिली-प्रेमी लोकनि बैसथि आ कुशल-समाचारक आदान-प्रदानक संगहि-संग मिथिला-मैथिलीक चर्च हो।पश्चात एहिमे रचनापाठक प्रक्रिया सेहो प्रारंभ भेल जाहिमे स्वरचित नव रचना पाठक प्रावधान कएल गेल आ ओइ रचनापर विचार-विमर्श सेहो होइछ। प्रकाशनक असुविधाक कारणे नव रचनाकारकेँ प्रोत्साहित केनाइ एकर प्रधान उद्येश्य छैक। सफलता आ असफलताक बात रचनाकारे कहता, तखन ई जे एक नव प्रयोग थिक तकरा अस्वीकार नहि कएल जा सकैए। ओना हमर एहि प्रयोग चरम राँचीमे देखाइत अछि जतए ई संपर्क नामक संस्था कलकत्ताक बाद शुरु भेल मुदा रचनापाठक संगे-संग पोथीकेर प्रकाशन सेहो केलक। एकर विशेषता छैक जे एकर केओ स्थायी अध्यक्ष वा सचिव नहि छथि। प्रति बैसारक अध्यक्ष मनोनीत होइत छथि जे सभाक संचालन करैत छथि।

प्रश्न-- अपनेक संपूर्ण सफलताक श्रेय ककर ? जकर प्रत्यक्ष वा अप्रत्यक्ष रूपें प्रभाव पड़ल। उत्तर---हम जे किछु कएलहुँ वा कए रहल छी तकर श्रेय कलकत्ताकेँ छैक जे वास्तवमे मैथिलक हेतु तीर्थस्थान थिक। पोथी-पत्रिकाक प्रकाशन हो वा आंदोलन वा रंगमंच सभ क्षेत्रमे कलकत्ताक योगदान अविस्मरणीय। नाट्य विषयक आ काव्य विषयक पत्रिका कलकत्तहिसँ सर्वप्रथम प्रकाशित भेल अछि आ जँ सत्य कही तँ----- नाट्य मंचक शुभारंभ सेहो एतहिसँ भेल अछि। वर्णरत्नाकर, पदावली एवं चर्यापद जँ कलकत्ता नहि छपने रहैत तँ हमरा लोकनिकेँ से चेत-सामर्थय कहाँ अछि?

प्रश्न-- अपन विभूति जिनका प्रति असीम श्रद्धा हो आ नव-पीढ़ीकेँ सेहो स्मरण रखबाक वास्ते अपन संदेशमे की कहए चाहबैक ? उत्तर--- हम मैट्रिक पास केला उपरान्त कलकत्ता आएल रही। १९६९ इ.मे सरकारी नौकरी भेटलाक पश्चात रात्रिकालीन कौलेजमे नामांकन करबौने रही आ मैथिली रखने रही। हमरा बूझल छल जे मैथिलीक विद्यार्थी नहि होइत छैक भविष्यहुँमे होएबाक संभावना नहि तथापि मैथिली विभूति ब्रजमोहन बाबूक प्रति ई श्रद्धांजलि, आत्मतुष्टियेक लेल कएक नहि हो, छल। जँ प्रातःस्मर्णीय ब्रजमोहन ठाकुरक प्रयासेँ आ आशुतोष बाबूक सदासयतासँ कलकत्ता विश्ववद्यालयकेँ द्वारा मैथिलीकेँ मान्यता प्राप्त नहि भेल रहितैक तँ आइ मैथिली संविधान धरि जा पबैत ताहूमे संदेह। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.कामिनी कामायनी-यशोधरा ३.२.१.ओमप्रकाश झा- किछु गजल २.रूबी झा ३.३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ २.धीरेन्द्र प्रेमर्षि ३.निक्की प्रियदर्शिनी- दूटा कविता ४.जगदानंद झा 'मनु' -गीत-गजल ३.४.१.विनीत उत्पल २. पंकज कुमार झा ३.५.गणेश कुमार झा "बावरा" ३.६.१.निशांत  झा २.किशन कारीगर ३.७.१.डॉ॰ शशिधर कुमर २.नवीन कुमार "आशा" ३.८.नवीन ठाकुर कामिनी कामायनी 2011 दिसंबर मास मे महात्मा बुद्व के महासंबोधि प्राप्ति के 2600 बरख भेलोपरांत ’हम हुनक अद्र्धांगिनी के मोन पाङैत ई काव्य कुसुम हुनक चरण कमलेषु मे समर्पित कय रहल छी । .. यशोधरा मुरूछा टूटै .. लोक कहै छल धीरज धरू पटरानी सून ऑखि सॅ भवन निहारैत फेर खसैथ महारानी । टिकुली भाल सॅ खसल भिन्न भ’ लट सबटा छिङियायल । अस्त व्यस्त सब असन वसन छल गाल प नोर सुखायल । पङल पलंग प’ चित्त बेसुद्व संगी चेरी सब हिचुकैत ठाढ। ऑखि खुजैन्ह त’ हेरैत चहुॅ दिस आखीर कोना खुजलै केवाङ। दिप .दिप . दिप. दिप दीप जरै छल अहिना आधी रतिया । ज्वार उठाबैत मोन पङैत छल रहि रहि बीतल बतिया । रंग महल के लाल सोनहरा लिखल सब दरवाजा । मुदा नै कत्तौ बाजि रहल छल दुंदुभि वा बाजा । सोइरी गृह मे पङल किशोरी बनल हलाल के बकरी । बैरीन नींद ऑखि मे पैसल लुटा गेल सब गठरी । नाथ निकसि क’ द्वार फोलल त’ जोत किएक नै मिझायल । कत्तो कोनो खट खूट होयतै ऑखि हमर खूजि जैतै । हम कलंकिनी पङल रहि गेलहु सुख सॅ सुतल ओछावन । भटकै लै ओ विदा भ’ गेला दुर्गम जंगम वन कानन । कोना जीयब अहि सून भवन मे हिय हम्मर कॉपैत अछि । मुईला प सब के डाहै छै जीबतै हम डहि जाय छी । हॅसै छलथि उद्यान मे कहियो कखनो एको पल ल्ोल । तृप्त होय छल मन मंदिर हरियर भाव जगै छल । मुखारविन्द प’ छिटकल हुनकर कारी कारी कुंतल । हुलसि हवा सॅ गप्प करै छल झूमि झूमि क’ चंचल । ई दुधमूहॉ बालक लग मे काल बनि जनु आयल । क्षण मात्र मे भवन त्यागि क’ सब वैभव के बिसरायल । नामकरण ओ अपने कयला बिनु पंडित बिन ज्ञानी । पिता के प्रेम कतय सौं पाओत ई निरदोष परानी । कोना क’ झूलत बॉहि जनक के कोरा कॉख लै’ तरसत । चान सन अहि नेना के देखि मुख मंडल केकर हरषत । फेर कहथि अहि नेना के दोष की भस्म भेल ओ हमर कपार । देखि क’ धधरा विरहिणीके थमि जायत छै बहैत बयार । रचलन्हि कोन विधाता हमरा चिकनी माटि गढि गढि । जानै किएक कहै छल सब कियो लछमी हमरा बढि बढि । तजि गेला एकांत भवन मे त्रुटि हमरो किछु हेतै । निशारात्रि मे सिंहद्वार सॅ अकारण किए कियो जेत्तै । अपना मे एतेक डूबल छथि सोचि नै सकला हम्मर । कोना गिन गिन हम दिवस गमायब मुॅह हेरब हम कक्कर । अजगूत रूप धरि देलन्हि विधाता ओही मानुष के तन मे। मन मे छल वैराग्य समाओल रहितथि कोना भवन में । लहठी कंगन पाजेब बिछिया हार नवलखा हीरा । कर्णफूल नकबेसर .. ड़ढकस औंठी .. नथुनी .. सीथिया. .। तजली सब सिंगार की काजरि बास ने ऑखि लेलक। अटोर पटोर सतरंगी चुनरिया अगिन के संपत्ति बनि गेल । पीत वस्त्र एक धारण कयलन्हि जोगिन रूप बनाओल । कठोर व्रत दिन बन्हल छल राग मोह सब भागल । ओ संन्यासी महल के बाहरि हम जोगिनिया भीतर । एकसंझा जे अन्न उसीनल उदरपूर्ति के लायक । देखि फूलकुमरि के दुर्गति जनक भाय सब आयल । नहि गेली मुदा छोङि डीह कतबो कियो समझाओल । ओ सुन्नरि सर्वांग एखनि धरि रूपक छलीह बखारी। दूर लग के राजा कतेको पठबए लागल पुछारी । रानी मुदा सज्ञानी एतेक मन सॅ कखनो नहिं हारल । करि बहाना जतन जतन सॅ सब के लग सॅ टारल । आब हमर जीवन वसंत सब हुनके संग रमल अछि । जाहि मार्ग प’ नाथ चलै छथि मन हमरो संग चलल अछि । वृद्व शूद्वोधन देखि दृश्य सब नोचथि अप्पन माथा । आर कतेक दुख देखय लेल रखने जीवित विधाता । तजला प्राण हवेली के’ बाहरि जाकए एकरा । ओ तजली सब वैभव अन्नधन भ’ घर मे एकसरहा । रोज सुरूज के जल चढा’ क’ मीनती मने मन करलन्हि । वन वन में जे फिरि रहल छथि हुनकर पीर सब हरबैन्ह । तेज घाम मे बूलैत टहलैत हेता भुक्खल पियासल । गरा सॅ नीचा पानि नै उतरैन्ह लागै सब किछु डाहल । सूुन भवन चमगादङि बाजै दीप मिझल दीपदानी । दिवस कतेको पट नहि खोलथि विरह मे रमल दीवानी । आब सखी ई कारी बादरि ंमोन मे आगि पजारै । उमङि घुमङि चहुॅठाम सॅ बुलि क’ हमरे छत चित्कारै । बरसि बरसि सब दिस डूबा देल दादूर झिंगुर बाजै । राति राति भर जागल चिल्का सेहो पीर बढाबै । पानि बूनी मे भींज भींज क’ हेता कोना सौभाग्य हमर । कोमल काया पान फूल सन छल न्ौ रौद बसात जोगर। सुून भयौन जंगल मे हुनका भानस के करि देतैन्ह। जौं संग हमरा नेने रहितथि ई दुख हम हरिलैतियैन्ह । कहै लोक सब छह बरख धरि पता नहि कोनो ठेकाना। कत्त कत्त नै दूत पठाबैथ हारल सन महाराना । जतय कखनो चर्च हो हुनकर सखी सब दोैग पङै फुरती सॅ । कान सुनै किछु हुनक खिस्सा दृग बहै मस्त ी सॅ । अहि जनम की नाथ फेर सॅ दर्शन पायत ई दासी । सोचि सोचि ओही परम पुरूष के नीत दिन रहैन्ह उदासी । हाथ के रेखा रहि रहि देखैथ बजबैथ पंडित ध्यानी । कि गुनल अछि करम मे हमरा कहियौ पोथी बखानी । पतरा पोथा ल’ सब चुप छल ई होनी त’ होनी छल । कोना क’ रोकि देता महाराज कतबो करितथि छल वा’ बल । बाट घाट सॅ आनि पकङि सेवक जन साधु लाबै । जंतर मंतर जादू टोना सबहक नियम बताबै । ओझा गुनी दिन गुनै छल दिसा दिस उच्चारै । कतेक दिवस धरि खेल चलल ई किछु नै घाट उतारै । माईट आनै श्मशान सॅ प्राण प्रिय सब चेरी । छिटै कियो बाट गंगा जल शंख बजाबै ढेरी । ंमुदा लिखल के मेटा सकल कियो ओ पकिया रंग सियाही । निष्क्रिय शासक बैस रहल छल देखैत अपन तबाही । कपिलवस्तु के धुरि कनै छल फफकि फफकि क’ हरदम । तीरथ बनै भलै भविष्य मे एखनि त’ शोक सॅ सकदम । मूॅह सॅ वाक निकसबा खातिर तरसैत रहि जाए गरै मे । हॅसी राज्य सॅ दूर पङा गेल छोङि व्यथा नगरे में। एला जखन प्रिय ज्ञानी भ’ क’ छह बरखक’ अन्तर प’। महल अटरिया उमकए लगलै नैन टिकल सुन्नर जोगी पर । शुक़ . पिक़ . . शुभ बोली बाजल उङल चलल लग आयल । ंमाल जालसब दौगि दौगि क’ अप्पन नेह देखायल । सखी समेत विमाता आयल छोङि क’ अपन धूनि । बांधव जन के घेर मे बैसल मुस्कैत छल नव मुनि । मात्र क्षण मे बिजुरि चमैक गेल बंद ऑखि के आगॉ। महाभाग प्रिय कांत आयल छथि मन बाजल भ’ बाजा । बलजोरि मन रोकि उठल छली बेलगाम सब घोङा । एना किए उताहुल भेलौं अपने औता ओ सोझॉ । सपन देखल भोर पहर ओ देसदेस बूलै छथि । आगॉ पाछॉ टाढ जनि सब उपदेश गुरू के सुनै छथि । ऑखि सॅ देखता संन्यासिन के झूलसल झरकल काया । उठै किंस्यात मन मे कनिको अहि अधम लेल माया । एला नाथ त’ ध्यान मे बैसल मुस्कैत छली महाजोगिन । परम दृष्टि सॅ शाक्य हेरलखिन्ह इहो रूप केहेन कय लन्हि । नजरि खूजल त’ चित्त शांत छल नै कोनो अवसाद छूपल । नहि छल कोनो राग द्वेष नहिं ऑखि मे कोनो भाव बेकल । कत्तेक ओज ओहि मुख मंडल पर सहस्त्रों सूरज जेना एके ठाम । स्थिर ऑखि .. चुप .. .मौन बैसल जीवन मात्र विराम विराम । क्षण मात्र मे प्रजा उठि क’ ओहि मार्ग प’ चलै लै बेकल। भाय भतीजा . . मातु .. भार्या सब नतमस्तक भ’ दीक्षा लेलक’। भिक्खुनी बनल चलल यशोधरा मुनि के पाछॉ पाछॉ । मन त’ पहिने त्यागि चुकल सब तन के आब की बाधा । जीवन के चरम उद्देश्य बूझि बंधन मे किए रहै प्राणी । छाया बनि क’ मनुक्ख रहै छै आगॉ चलै पिहानी। ठाम ठाममे बुलि बुलि क’ देखल दूखक जीवन । कोना नोर सॅ नोर बहै छै सुनि मुख कष्टक वर्णन । बौद्व विहार शरण स्थली भेल ध्यान .. चिंतन. . . उपवास मनन के । तजि पोथी वेद उपनिषद .. . . मानव के सहज सरल जीवन के । कष्ट भरल अहि संसार सॅ पार उबारय के बेङा । साधन सामथ्र्यहीन स्त्री के नेत्री भेलीह यशोधरा । सबहक लहकैत दग्ध हृदय पर शाश्वत सत्य के लेप लगा । शांत कयल जखन महाभिक्खुनि ऑखि फाङि क’ लोक हेरल । अलख जगौने जखन चलै छल महादेवी संग जन्नी जाति । दृश्य निहारि क’ भरि जायत छल जङ चेतन के छाति ऑखि । माटि के कण कण सटि क’ महासुन्नरि के तरबा सॅ कहै सखी हमरा नहि तजबै हम गहने छी कहिया सॅ । हमरो ई अभिलाष छल की बुद्व के रूपमति रानी। चलै राह पर जनम सुफल करि जन .जन के कल्याण करैथ। आस पङोस के राज मे पहुॅचल विद्युत तरंग सन यशुके गान राजकुवॅरि किछु पछोङ धेलन्हि राजागण लेल बुद्व के नाम । सही अर्थ मे ई सहचरि छल बुद्व एहेन परतापी के जौं ओ छल हेता ब्रह्य त’ ई साक्षात ब्रह्यानी छल प्हिल बेर इतिहास मे नारि राज तजि संन्यास चुनल । दीन दुखी शोषित प्रताङित लेल अपन दृष्टि फोलल । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.ओमप्रकाश झा- किछु गजल २.रूबी झा १. ओमप्रकाश झा गजल १ गजल कखनो छूबि दियौ हमरो फुलवारीक फूल बूझि क'। किया केने छी यै कात हमरा करेजक शूल बूझि क'। हमरा सँ नीक झूलनियाँ, जे बनल अहाँक सिहन्ता, हमरो दिस फेरू नजरि झूलनियाँक झूल बूझि क'। अहाँक नैनक मस्ती बनल प्रेमक पोथी सब लेल, हमहुँ पढब प्रेम-पाठ अहाँ सँ इसकूल बूझि क'। बहत प्रेमक पवित्र धार, करेज बनत संगम, प्रेम छै पूजा, नै छोडू एकरा जिनगीक भूल बूझि क'। प्रेमक घर अहाँक अछि किया फूजल केवाडी बिना, ठोकि लियौ "ओम"क प्रेम ओहि केवाडीक चूल बूझि क'। २ गजल जिनगीक गीत अहाँ सदिखन गाबैत रहू। एहिना इ राग अहाँ अपन सुनाबैत रहू। ककरो कहै सँ कहाँ सरगम रूकै कखनो, कहियो कियो सुनबे करत बजाबैत रहू। खनकैत पायल रातिक तडपाबै हमरा, हम मोन मारि कते दिन धरि दाबैत रहू। हमरा कहै छथि जे फुरसति नै भेंटल यौ, घर नै, अहाँ कखनो सपनहुँ आबैत रहू। सुनियौ कहै इ करेजक दहकै भाव कनी, कखनो त' नैन सँ देखि हिय जुराबैत रहू। ------------- वर्ण १७ --------------- ३ गजल करेज मे काढल छै अहाँक छवि, नै मेटैत कखनो। मोन मे बन्न अहाँक प्रेम कियो कोना चोरैत कखनो। अहाँ खुश रहू यैह छै आब हमर दर्दक इलाज, इ दर्द फुरसति मे हमर करेज सुनैत कखनो। असगर बैसल अहाँक यादि मे हम हँसि लैत छी, हँसीक राज भेंटला सँ हमर मोन बतैत कखनो। मोन मे बसल अहाँक छवि नै भीजै, तैं नै कानैत छी, मुदा रोकी कते, अहाँक यादि हमरा कनैत कखनो। एक बेर कहि दितिये अहाँ हमरे लेल बनल छी, गीत प्रेमक "ओम"क मोन हँसि गुनगुनैत कखनो। --------- सरल वार्णिक बहर वर्ण २० ---------- ४ गजल आबि गेलै बहुत मस्ती थोड़बे पीबि कऽ। आब डोलै सगर बस्ती थोड़बे पीबि कऽ। जे करी, की करत थौआ भेल छै लोकक, खूब हेतै जबरदस्ती थोड़बे पीबि कऽ। चोरबा केँ चलल डंटा, साधु बैसै चुप, हैत आगू मटर-गश्ती थोड़बे पीबि कऽ। बाजबै जे मुँहक छै, चाहे कहू मातल, की कहू छै मुँहक सस्ती थोड़बे पीबि कऽ। आब नेता बनि खजाना लूटबै देशक, "ओम" केँ की बढल हस्ती थोड़बे पीबि कऽ। ------------- वर्ण १५ ---------------- वर्ण क्रम I U I I U U U I I I U I I U U ५ गजल केहन मीठ विरह मे झोरि गेलौं अहाँ हमरा। नोरक झोर अनन्त छै बोरि गेलौं अहाँ हमरा। नीक कहै छल सभ ठाँ, फूल भेंटै छलै सगरो, आब कहै हम वहशी, घोरि गेलौं अहाँ हमरा। लोक बजै छल हमरा प्रेम मे जोडि देल अहाँ, टूटल टाट बनल छी, तोडि गेलौं अहाँ हमरा। देल करेज अपन सौंसे अहाँ केर हाथ प्रिये, सौंस करेजक टुकडी छोडि गेलौं अहाँ हमरा। "ओम"क मोन बुझलकै नै, बनेलौं अहाँ घिरनी, नाच करी बनि घिरनी, गोडि गेलौं अहाँ हमरा। ------------------ वर्ण १८ ---------------- २ रूबी झा , ग्राम पोस्ट -समसा[मंसूर चक ], जिला -बेगुसराय [बिहार ], सम्प्रति:-गांधीनगर  [अहमदाबाद ] [गुजरात ] १ मैथिलक बेटी छी तँ हम मैथिल के बेटी , हमर छैक ई बड़ भाग , भाग सं बढ़ि कऽ हमर अछि दुर्भाग्य ,

हमर बाप छथि अतिशय निर्धन , नै छनि खेत पथार नै सोना आ धन ,

निर्धन बापक सुन्नर कन्या , कोना करता दान बेटीक, बेटबेचबा अछि दुनिया ,

ई कियो नै सोचथि जखन एती दहेजुआ बेटी , करती बिग्रह जीबन मरण कऽ देती ,

अपन बापक किनल बसहा बड़द पर करती अधिकार , आँखिसँ नोरक तखन बहतनि धार,

निर्धन घर जुनि धीया जनम देब भगवान ,  नै अछि ऐ जगमे बेटी केर कोनो मान, 

नै अछि तँ हएत अहूँ घर मे एक दिन बेटी , सुनु यौ मैथिल आबहु तँ चेती ...!! २ उदेश कतेक कहू हम मोनक कलेश , जहिया सँ गेलाह प्रियतम परदेश ,

किओ नै दै अछि हुनक उदेश , बाट जोहैत जीबन हमर भेल शेष ,

नोर सुखाइल करेज भेल पाथर, कतेक लिखब हम फुरै नै आखर ,

सिनुर टिकुली सेहो भेल झाम, आंखि केर काजर बहि गेल कोन ठाम ,

नै अछि सोह कोनो केहन भेलहुँ बताह, हमर दुखःक नै अछि कोनो थाह ,

मनक मनोरथ मोनहि रहि गेल , सपनेहुँ नै प्रियतम केर दरसन भेल , ३ गर्भ मे बेटी तोहर कोइख मे तँ अछि दुनिया हमर गै माँ , तूँ नै करबें तँ करतै के हमरा पर दया हमर गै माँ ,

हम तँ तोरे छी छांह , राखऽ दे ऐ जगमे पाँव , अछि मनमे लालसा बहुत देखी दुनिया केर रंग , रहब तोरे हम संग ,करबइन किनको नै तंग ,

निर्मोही छथि दाइ, बाबा आ बाप , कतेक केलो बिना कतेक केलौं बिलाप ,

नै अछि कोनो ऐ जगमे हमर सहारा हे गै माँ , तू नै करबें तँ करतै के हमरा पर दया हे गै माँ ,

जहिया पढ़ब, लिखब पोथी भाइए केँ पढ़ि लेब , छोड़ल भैयाक ऐँठ खाय हम जीबन जीबि लेब ,

खुजऽ दे तँ हमर आँखि एक बेर हे गै माँ , करब उजागर नाम हम पुरखाक, हएत नै देर हे गै माँ ,

कनी सोचही चिंतित भऽ हेतै जौँ केवल बेटा , लेती नै जनम बेटी तँ ई बेटा कतए सँ एता , ४ माँ केर ममता माँ केर ममता होइ अछि जेना सागर , कखनो नै खाली होइ अछि ई गागर ,

फूसियो जँ कखनो हम रुसि जाइत छी, आबि--आबिदेखू कोना हमरा मनाबथि सदिखन हमर ओ तँ हिम्मत बढ़ाबथि , बाटकेँ सदिखन दूर करती अँधियारा , माँ लेल बच्चा होइ अछि बड़ प्यारा ,

सत्य क मार्ग ओ तँ सदिखन देखाबथि, राइत मे जखन हमरा नीन नै आबए , लोरी बैस कऽ सगरो राइत ओ सुनाबथि ,

जखन- जखन भयस हम घबराबी, हाथ मे आँचल हुनके तँ हम पाबी ,

माँ तँ होइत अछि सभ गुण केर आगर, माँ केर ममता होइ अछि जेना सागर , ५ ''दहेजक कहर''

कतेक कहू,कहिआ हेतै खतम ई दहेज कहर, किनको आइग लगेनाइ किनको देनाइ जहर,

बृदध् होइते सासु जी किए ई बिसरि जाइ छथि एहसास, काल्हि ओहो छलथि कनियाँ आइ बनल छथि सास,

ननइद नै ई सोचलन्हि जेहने ओ छथि अपन माँ केर प्यारी , हुनक घर जे एली भाउज सेहो छथि अपन माँ के दुलारी ,

ऐ बातकेँ कहिया बुझथिन ऐ बातक तँ कननाइ अछि , आइ जे भाऊज पर होइ छनि काल्हि हुनको पर होनाइ अछि ,

सात फेरा लेलैन जे हमरा संग प्रेमक नगरी बसओलनि , देवता बुझि कऽ जिनका लग एलहुँ सेहो कसाइ भऽ गेलनि, ६ ''आब अइ देश मे''

आब देखू ऐ देशमे , लाल कम लाला बेसी अछि , काम कम घोटाला बेसी अछि , आब देखू ऐ देश मे ........!

सामान अछि बड़ कम, महंगाइ बेसी अछि , आब देखू ऐ देशमे ........!

नोकरी अछि बड़ कम , बेरोजगारी कतेक बेसी अछि , आब देखू ऐ देशमे ........!

ईमान कतेक कम अछि , खरीदारी कतेक बेसी अछि , आब देखू ऐ देशमे ........!

सेवा अछि बड़ कम , स्वार्थ कतेक बेसी अछि , आब देखू ऐ देशमे ........!

शब्द अछि बड़ कम , शब्दार्थ कतेक बेसी अछि , आब देखू ऐ देशमे ........! ७ ''बिरह गीत '' कोन अगुन अपराध हरी जी के , केलियनि हे ऊधो ........!

जौँ हम रहितौं बनक मयुरनी , कृष्ण करथि शृंगार मुकुट बिच , शोभितहुँ हे ऊधो ........!

जौँ हम रहितौं बैजंत्रीक माला , कृष्ण पहिरथि हार ह्रदय बिच रहितहुँ , हे ऊधो .........!

जौँ हम रहितौं बाँसक बाँसुरी , कृष्ण करथि स्वर गान मधुर स्वर , बजतौँ हे ऊधो .......!

जौँ हम रहितौँ जलक मछली , कृष्ण करथि स्नान चरण हम, छूबितौँ हे ऊधो ....!

कोन अगुन अपराध हरी जी के , केलियनि हे ऊधो .......!! ८ ''प्रेम गीत '' हे यौ प्रियतम आँचर छोइड़ दिअ भेल प्रात आँगन हम जाएब कोना , हे यै सुंदरी आँचर छोड़ब कोना , अहाँ जाएब आँगन हम रहब कोना ,

अछि लाजक बात बताएब कोना ,हम माइक सन्मुख जाएब कोना , हे यौ प्रियतम आँचर छोइड़ दिअ भेल प्रात आँगन हम जाएब कोना . ९ अखिआश सुगंध सुमनक जेना गमकि उठैत अछि , प्रेम हुनक ओहिना मन मे कसकि उठैत अछि ,

बात कहबाक जे छल से कहलो ने जाइ, प्रीतम अहाँ बिनु हमरा रहलो ने जाइ ,

अखिआश अहाँक बैसल भोर सँ , देखियौ तँ कोना साँझ भए गेल , चिक्कश सनैत छलौं सेहो घोर भए गेल ,

पहिलुक ओ रंग रभस बिसरल नै जाइत अछि , जखन ई सोची तँ नयन बर्बसे झुकि जाइत अछि ,

कखनो बुझाइत अछि आगम अहाँक , भागी-भागी देखि मुँह दर्पण मे जा कऽ ,

सजी धजी कऽ जखन चौकैठ लग गेल छी, धुर जाउ की भेल ऐ बातसँ हँसी कऽ गेल अछि , १० कतेक नीक छल ओ कतेक नीक छल ओ , हंसनाइ ओ खेल ओ मुस्कान ,

रहैत छलहुँ ऐ जगसँ दूर, सभटा गमसँ अनजान,

नै तँ कोनो दुःख छल नै छल कोनो सपना , भावुक नै होइत छलौं के अछि आन के अपना ,

खेलामे होइत छलै कखनो हारि,  कखनो तँ होइत छलय जीत ,

कखनो होइत छलै झगरा झांटी, कखनो गबैत छलौं हम गीत ,

थोड़बा छल लड़ाइ थोड़बा छल रंग ,  कतेक सुहावन छलै सखी सहेली केर संग ,

ओ गुड्डा गुड्रियाक कतेक नीक छल खेल , ओइ आम गाछीक अपन संगी सभसँ मेल ,

तखन कतेक करैत छलौं माँ बाबु जी केँ हरान, कतेक नीक छल हंसनाइ आ ओ मुस्कान , सदिखन रहैत छलौं सभ गम सँ अनजान . ११ पर्वत सन दरद कोलाहल अछि सागर एहेन , लहर एहेन अछि भरल द्वन्द्व,

पर्वत एहन दर्द भरल अछि , आ ढेपा एहेन अछि आनंद ,

जिनगी क ई रस देखू तँ , कतेक लगैत नुनगर अछि ,

जीत जाइ अछि दुःख दर्द सभ, एसकर सुखे टा हारल अछि ,

फूल सरीखा मांछक ऊपर , बिछायल अछि काँटक फंद,

पर्वत एहेन दर्द भरल अछि , आ ढेपा एहेन अछि आनंद ,

जतबे ताकी हम शीतलता , ओतबे लहरल आगि भेटाए,

प्यास तँ चुप चाप भेल अछि , मौनक मदिरा हम पीलहुँ,

संपन्न भऽ गेल सभटा गीत , शेष बाँचल अछि व्यथा केर छंद ,

पर्वत एहन दुःख भरल अछि , आ ढेपा एहेन अछि आनंद , १२ ''प्रियतम सरस'' हे यौ प्रियतम सरस अहाँ आएब कहिया , हमर मोनक आशा पुराएब कहिया , नीक लागए नै आब माँ बाबुक दुलार , अहाँ अपन प्रेमक ज्योति जरायब कहिया , हे यौ प्रियतम सरस ........................! बड़ देखलौं बम्बई आ दिल्ली शहर , मधुबनी दैरभंगा घुमाएब कहिया , हे प्रियतम सरस .............................! नीक लागए नै दालि भात आ माँछ मांगुर , अहाँ गरम जिलेबी खूआयब कहिया , हे यौ प्रियतम सरस ........................! बनी बैसल छी ओतै कुमदनीक फूल , मोनक उपवन मे बेली फुलायब कहिया , हे यौ प्रियतम सरस .........................! बनि बैसल छी कहिया सँ नवकी दुलिहीन, अहाँ नैहरसँ हमरा लऽ जाएब कहिया , हे यो प्रियतम सरस ..........................! १३ स्वप्न देखी अहाँ छी जेना दुतिया केर चान, अहाँ पूनम के चान बनि आएब कहिया, हे यौ प्रियतम ..................................! बिसरल नै होइत अछि अहांक मुस्कुराइत छवि , अहाँ अपना संगे हमरो हंसायेब कहिया , हे यौ प्रियतम ...................................! नीक लागए नै अहाँ बिनु कोनो शृंगार, हाथ अपने अहाँ सिन्नुर लगाएब कहिया , हे यौ प्रियतम ...................................! अनेरो खनकै अछि चुड़ी कंगन , हमर हाथ केर कंगन खनकाएब कहिया , हे यौ प्रियतम ....................................! देखू प्यासे तँ गेल हमर अधरों सुखाइ, अपन अधरसँ अमृत पिआएब कहिया , हे यौ प्रियतम सरस ...........................! पत्र लिखैत-लिखैत हमर हाथो पिरायल, हमर दर्दक दाम अहाँ चुकाएब कहिया , हे यौ प्रियतम सरस अहाँ आएब कहिया !! ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ २.धीरेन्द्र प्रेमर्षि ३.निक्की प्रियदर्शिनी- दूटा कविता ४.जगदानंद झा 'मनु' -गीत-गजल १

जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ गजल १   जिनगी कें अखबार बनौने बैसल छी हम घरकें बाजार बनौने बैसल छी ।

श्रद्धा, ममता, स्नेह, प्रेम, आनंद पूज्य थिक हम सबकें ऐंठार बनौने बैसल छी ।

सोझां केर संसारकें माया मानी हम हम मायाकें संसार बनौने बैसल छी ।

गांधी दुनिया जितलनि सत्य, अहिंसासं प्रेम कें हम व्यापार बनौने बैसल छी ।

ब्याह थीक दू अंतरात्मा केर मिलन हम जातिक ओहार लगौने बैसल छी ।

शिक्षा मैया हरती सब दुख जीवन केर हम मूर्तिक अंबार लगौने बैसल छी । नियम बहुत अछि भष्टाचारसं लडबा लए हम सबकें लाचार बनौने बैसल छी ।

भूख अशिक्षा आओर अन्हार अछि मिथिलामे गर्म बहुत ब्याहक बजार अछि मिथिलामे ।

गाम कते अछि बिला गेल कोसीक धारमे अनगिनती सूखल इनार अछि मिथिलामे ।

जाति,पांजि, कुल, शील, मूल आ गोत्र,गाम तिलक-दहेजहु के विचार अछि मिथिलामे ।

पेट भरैले’ लोक हजारो भागल दिल्ली सय बीमार आ एक अनार अछि मिथिलामे ।

पोल गडायल गाम-गाममे कानि रहल अछि बिनु बिजली गरमी,गुमार अछि मिथिलामे ।

खेबा ले’ एखनहुं अल्हुआ,मडुआ,बिसांढ सुतबाले’ एखनहुं पुआर अछि मिथिलामे ।

कोन कृष्ण कहिया अओता से के जानय दुख केर गोवर्द्धन पहाड अछि मिथिलामे ।

२. धीरेन्द्र प्रेमर्षि गजल देखू कतबा तील बहै छी, नइ जाउ हम्मर काँतिमे खिच्चड़िमे कने घीओ चाही, आब तिला-सकराँतिमे जइ तिलाठकेँ तपैत गिरहतनी देह अहाँसुन सेदै छी ओहो छियै हमहीँ जनमओने घाम सिँचिकऽ माटिमे हँ यौ मालिक खूब जनै छी, शासनके तरजू की होइ! भँटा-मुरइसन हमरासुनके अहीँ बँटलियै जातिमे धरम नामके अफिम सुँघाकऽ परदादा-परनानाकेँ छी धपाएल अहाँ करऽ उगाही परपोता-परनातिमे ई नइ बुझबै पहिनहिसन सभ दँतखिसठीमे ठाढ़ अछि अप्पन अधिकारक लेल सभक्यो मिलिकऽ बैसल पाँतिमे २०६२/१०/०१, तिला-सकराँति ३. निक्की प्रियदर्शिनी- दूटा कविता मन्तव्य

व्यापार आ शिकार असगर करी, आदर आ उपकार सभक करी, प्रेम आ कल्पना मनसं करी, कपट आ छल कखनो नहि करी, कष्ट आ दुःख मे संयम सं रही, खेत आ खरिहान मे काते-कात चली, विचार आ खण्डन अवश्य प्रकट करी।

समाजक प्रश्न ?

समाजक प्रश्न स्त्रीक कतेक सीमा ? आब त’ भेल आब कतेक आगां ? की आब बना देबैक अमेरिका आ इग्लैण्ड ?

मुदा कहां बदलल अछि मानसिकता ? स्त्री कें देखक, व्यवहार करएक, अहां स्त्री छी ई एहसास सदिखन, कहां बदलल अछि।

देखला सं की होइत अछि ?

आ देखला सं की भ’ जाइत अछि ? एकर अतिरिक्त, उचित व्यवहार, उचित स्थान, कहां देल गेल अछि ?

जरूरत बुझि पड़ैत अछि ? समान अधिकार, समान महत्व आ समान प्रेमक, कतए ? समाज मे कागज पर नहि। ४. जगदानंद झा 'मनु', -गीत-गजल पिता- श्री राज कुमार झा, जन्म स्थान आ पैत्रिक गाम : हरिपुर डिहटोल ,जिला  मधुबनी, शिक्षा :प्राथमिक -ग्राम  हरिपुर डिहटोल मे, माध्यमिक आ उच्च माध्यमिक -सी बी एस ई, दिल्ली, स्नातक -देशबंधु कालेज ,दिल्ली बिश्वविद्यालय गजल-१ प्रियतम अहाँ  कए याद में जिनाई भेल मुस्किल जीवैत त हम छीये नहि मरनाई  भेल   मुस्किल किना सुनाऊ हाल करेजाक खंड कै हजार भेल सब में अहाँक नां लिखल पढनाई भेल मुस्किल लाख समझेलौंह मोन के  ई बनल अछि पागल आबि अँहि समझा दिय समझेनाई भेल मुस्किल केखनो-केखनो सोची पाहिले त हाल इना नै छल जखन सँ भेटलौं अहाँ सँ रहनाई भेल मुस्किल हमर मोनक मंदिर में मूरत अहीं कए अछि बिना ओकर पूजा कए 'मनु' जिनाई भेल मुस्किल ***जगदानंद झा 'मनु' --------------------------------------------------- गजल-२ जखन-जखन सोचब हमरा अपने में अहाँ पायब हमरा हमर शव्द गीत बैन कान में कचोटे तं अहाँ सोचब हमरा हम दूर छी त कोनो बात नहि मोन में अपन पायब हमरा दू काया एक प्राण छी हम दुनु भेतब त अहाँ बुझब हमरा अहाँ कहलौं जे हम अहाँ के छी मरला बादो निभायब हमरा ***जगदानंद झा 'मनु' ----------------------------------------- गजल-३ छुइप-छुइप क हम अहाँ कए  छवि निंघारै  छी एक अहाँ छी कि नहि हमरा करेजा सँ लगबै छी एक दिन पूरा होयत हमरो करेजक कामना अहुँ कि याद करब की ककरा सँ नेह लगाबै छी एक दिन ओहो एतै जहिया हमर स्नेहिया एबै तखन अँहि के निंघारब एखन छबि निंघारै छी नहि मिलन कए ओ घडी आब अहाँ रोकल करू ओ मधुर घडी जल्दी आबे हम इंतजार करै छी हमर जे चाहत अछि से सुनायब  हम जरुर नै रोकने अहाँ हमरा आब कहै सँ रोकी सकै छी ***जगदानंद झा 'मनु' ------------------------------------------------------- गीत -४ ( आलु कोबी मिरचाई यै, कि लेबै यै  दाय यै / दाय यै  )-२ कोयलख कए आलु,राँची कए मिरचाई यै बाबा करता बड ,बड़ाई यै / बड़ाई यै आलु कोबी - - - - -   - -दाय यै नहि लेब तs कनी देखियो लियौ देखए कए नहि कोनो पाई यै / पाई यै आलु कोबी - - - - - - - - दाय यै दरभंगा सँ अन्लौंह  विलेतिया ई कोबी खाय कs तs कनियाँ बिसरती जिलेबी कोयलख कए आलु ई चालु बनेतै धिया-पुता कए बड ई सुहेतै राँची सँ अन्लौंह मिरचाई यै कि लेबै यै दाय यै / दाय यै ( आलु कोबी मिरचाई यै, कि लेबै यै  दाय यै / दाय यै  )-२ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.विनीत उत्पल २. पंकज कुमार झा १. विनीत उत्पल बेटी साइठ साल बाद कोशी माय बदलने छलि अप्पन धार सौ बरख सं एकहि बाट सँ बहैत तंग भऽ गेल छलि समाजक मूल्य/ वितृष्णा सं भरि गेल छलि आ अपन सभटा रौद्र रूप देखा देली लोक के बता देलैन/ जे ओ जौँ नहि सुधरत तँ तहस-नहस कऽ देती मुदा आन माय कहिया बदलत अप्पन सोच आ विचार कहिया ओ देखाओत अप्पन रौद्र रूप कहिया विचलित हेती देखि कऽ समाजक रूप कहिया कम करती बेटी आ बेटा मे फरक बेटाक जन्म पर बाजत अछि थारी बेटी भेला पर सूखत अछि लाली सरकार चलाबैत अछि लाडली योजना बेटी होएत तँ करत माय जितिया कोना बेटाक लेल मारि देल जाय अछि बेटी केँ बेटी भेल तेँ अभागिन कहल जाइत अछि मायक बेटा भेला पर ओ मानल जाइत अछि सौंसे ब्लैंक चेक कहियो कियो देखने अछि बहूक करेज अइ देश मे आरुषि मरल जेसिका लालक हत्या कियो नहि केलक भैंसक दाम पर बिकायल कमला रोज मरैए रिंकी आर विमला नहि बदलल हमर समाजक धार एखनो अछि बेटी भार अइ लोकतंत्रमे चलैत वएह कानून अछि जइ मे बलात्कारीकेँ कोनो सजा नहि अछि अपराधक निअम होइत अछि जे अपराधी मुंह नुकायल होइत अछि मुदा बलात्कारक निअमक परिभाषा अलगे अछि पीड़िताक मुंह नुकाअल होइत अछि आ बलात्कारी सीना तानि कऽ रहैत अछि बलात्कारक होइए पैघ परिभाषा मुदा पीड़ितक नहि होइए कोनो भाषा हे हे मंगरौनी बाली दिल्ली एहन शहर मे आब कोठाक गप पुरान भेल, कॉल गर्लक कंसेप्ट जवान भेल मुन्नी केँ लोक करैत अछि बदनाम उछलैत-कूदैत शीला भऽ जाइत अछि जवान एक बेटीक विशेषण अछि निरासी, धोंछी आदि जखैन निकलैत सड़क पर शारीरिक भौगोलिक स्थितिक नापजोख रहैए जारी सुधैर जाउ, सुधैर जाउ, हे यौ देशवासी एहन पाप कऽ बनब बेटीक नासी नहि भेटत मोक्ष जौं बसब काशी हमर संवेदना खत्म भऽ रहल अछि भावनाक कछमछी आब शोनितमे नहि बहैत अछि सभटा आक्रामकता आ जज्बा यमुनाक धार मे बहि गेल अछि जे बचल छल ओ भीत मे मिल गेल अछि तँए तँ कहैत छी बेटी बचाउ, धरती बचाउ। २ पंकज कुमार झा भाई रे अना नै परो भाई रे अना नै परो, दहेज़ मुक्त मिथिला चाही त, दहेज़ मुक्त मैथिल बैन जो, भाई रे अना............... जों ललचेवे टका तू लेवे, जिनगी बनी जेतौ पनिसोह, अपनों कनवे कनियो कनतौ, ताई अंतरात्मा के नै जरो, भाई रे अना............. कनिया स वियाह कर मनियास नई, मनिया नाचेताऊ कनिया साजेताऊ, मनिया के मोह स अपना आप के बचो, कनिया के स्नेह में तोउ डूबी जो , भाई रे अना............. जिनगी रहलौ त पाई बड कमेवे,अपनों उरेबे हमरो बजेबे, जाऊ कियो कहतु ससुर वाला पाई छैन,तखन कहइ ककरा मुह देखेबे, अखनो छऊ मोका आब त सुधईर जो, कलर के ठार कर गीत गुण गुणों, भाई रे अना............ बाबु के मोन छैन लाथ नई ई करइ, एक गलती स जिनगी नई ई सरेइ, तोहर जिनगी छऊ तू बाबू के बूझो, उज्वल भविष्य के अपने नई सुतो, भाई रे अना नै परो, दहेज़ मुक्त मिथिला चाही त, दहेज़ मुक्त मैथिल बैन जो, भाई रे अना............... ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गणेश कुमार झा "बावरा" १ "बड़का काका" बड़का काका छलाह नामी- गामी मुदा   छलाह    बड्ड      कंजूस, चारिटा छलैन्ह बेटा हुनका मुदा नै छलैन्ह एकटा सपूत | जखन हुनक धड़ खसलैन बेटा सब लेलकनी बटुआ छीन, जकरा लेल पेट काईट जमा केलनि वाएह सब केलकनी हुनका भिन्न | बड़का काका ओछाइन पर पड़ल गुन्ह-गिन्जन  भेला अपन देख इ दशा अपना भाग्य पर कनैत छलाह | जखन मृत्यु काल समीप छलैन्ह वाक् -नाड़ी सब बंद छलैन्ह बेटा सब देलकनी बेतरनी कराए पुतौहू सब झौहट पारि कानै लगलनी नाती -पोता सब देलकनी धार कात पहुँचाए | बड़का काका के बड्ड भाग्य- जीवैत नै लगौलनी कहियो तेल मुदा मुइला उपरांत लगलनी सौंसे देह घृत, औछाइन पड़ला त पानि नै भेट्लनी मुदा मुइला उपरांत गंगा -स्नान , जीवैत कहियो गाएक दूध नै पिला मुदा मुइला उपरांत वैदिक श्राद्ध, जीवैत नै भड़ी पेट खेला भात मुदा मुइला उपरांत गामक भोज | बड़का काका केलनि आकाशवाणी -- जूनि करू एहन व्यव्हार जीवल में देलहूँ औंघराए कात मुइला उपरांत लुटाबई छी खोलि दुनु हाथ ........!!!!!!!!!!! २ " विरह" छोडि आहाँ गेलंहूँ हमरा एसगरी अहि वन में मनक बात कहब केकरा कें पतियाएत व्यथा हमर... चहुँ दिश रंग- बिरंगक आ सुगंधक अछि फुल खिलाएल मुदा एहि बिच में हम छी मुर्झाएल... वन बबुरक गाछ सँ अछि भरल हर एक डेग पर अछि काँट चुभैत किछु चंदनक गाछ सेहो अछि जेँ अपन महक सँ मन-मुग्ध करैत अछि मुदा क्षणिक !!! हमर मनक घोडा त' बबुरक काँट पर दौडैत आँहाक स्मृति में हेराए जाइत अछि.... जखन सागरक लहर सँ उठल सर्द पवन हमरा तन के छुबैत अछि त' बुझि पडैत अछि जेना आँहाक कोमल हाथ स्पर्श करैत हुअए मुदा, की सपनो सच होइत अछि ..??? कियाक छोडि गेलंहूँ हमरा एसगरी आहाँ के त' बुझल छल कतेक आहाँ सँ स्नेह अछि हमरा आहाँ बिनु एक पल जिनाई कठीन ई त दिवस भ' गेल गेला' की आहांक स्मृति में हम नहि छी ..??? की आहांक ह्रदय हमरा बिनु नहि कपैत अछि ...??? शायद ! आहाँ निसहाय होएब नित्य फुला मुर्झाईत होएब हमरे जेना अहुँ शोनितक घूँट पिबैत होएब "बिनु पानी माछ" जेना तरपैत होएब विरहाक आगि में भुस्सा जेना नहु-नहु जरैत होएब..... आब बड भेल बड सह्लों विरहाक दर्द आउ आब नव वर्ष में मिल क करी प्रेम सुधाक रसपान....... ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.निशांत  झा २.किशन कारीगर १ निशांत  झा, माँ  श्रीमती मंदाकिनी देवी (प्रधानाध्यापिका म. वि.) (साहित्याचार्य), पिता श्री प्रद्युम्न नाथ झा (समाजसेवी), घर सिंगियौन, प्रखंड राजनगर, जिला मधुबनी, प्रादुर्भाव माँ  के गर्भ में साँस लैत  हम खुश छी  बहुते   हमर  आस्तित्व आएब  गेल अछि बस प्रादुर्भाव भेनाय  बाकी अछि . 

हम  माँ के  कोखे  स   इ दुनिया के देख पबैत छी.  लेकिन  माँ - बाबूजी के गुप नय बुईझ पबैत छी .  माँ हमर  सहमल  सन  रहइत अछि  और बाबुजी खामोश,  बस एक गो  प्रश्न उठइत अछि दुनु  के बीच कि परीक्षण के  परिणाम की होयत ?  आय  बाबुजी  काग़जत  के  एकटा पुर्रजी  अनलैथ  और माँ के  आँइख में चिंता के बदरी अछि   .  मैं देख रही हूँ कि माँ बेसाख्ता रो रही है  सब बेर कुनू   बात पर मना क रहल छैथ  .  लेकिन  बाबुजी छैथ   कि अपने  बात पर अड़ल  चैथ  माँ के कतौ  जैके  लेल ठाढ़ छैथ   अहू बेर   परीक्षण में कन्या - भ्रूण आइब गेल छल ते  बाबुजी  हमर  मृत्यु  पर हस्ताक्षर क देलखिन . 

हम  गर्भ में बैसल  बिनती क रहल छी   कि -  बाबुजी हम अहिनके  बीज छी  की हमरा   इ  दुनिया में नय आबे देब?  अपने  बीज के  नष्ट क क हमरा  मैर   जे देब ?  माँ ! हम  त तोहरे   प्रतिरूप छी ,  तोहरे  संरचना छी  , त्तोहरे  सृष्टि छी  माँ ! हमरा  जन्म दे , हे माँ ! हमरा  जन्म दे ,  हम दुनिया में आबी  चाहइत छी   कन्या छी ताहि दुआरे   अपन धर्म निबाह चाहइत छी   .  यदि इ धरती पर कन्या नय  रहि जायत  त इ सब्त  सृष्टि तहस - नहस भ जायत .  हे स्वार्थी मानव ! कानी सोचु ,  तु हमर शक्ति के  जान  हम ही इ सृष्टि के  रचयिता छी   इ  सत्य के  त पहचान. (निशान्त जीक ई रचना नै छियन्हि, ई http://geet7553.blogspot.in/2010/05/blog-post_14.html सँ चोराएल गेल अछि। आगाँसँ हुनकर रचना विदेहमे नै देल जाएत। २ किशन कारीगर पुरस्कार लऽ के नाचू केकरो स चिन्हा परिचे अछि कारीगर नहि यौ सरकार तऽ अहिं कहू की हम करू त आउ हमरे स चिन्हा परिचे कए लियअ आ पुरस्कार लऽ के नाचू। अपने कुटुम बैसल छथि अकेडमी आ चयन बोर्ड मे लिख्खा परही करबाक कोन काज तिकड़मबाजी कए लगबै छी पुरस्कारक भाँज। हिनके कृपा स भेटल पुरस्कार खुशी स लागल बोखार कविता कहानी तऽ तेरहे बाईस मुदा पुरस्कार लेल लगेलहुँ खूम जोगार। अहाँ जे लिखलहुँ कारीगर ओ लागल बड्ड नूनगर मुदा बिनमतलबो हम जे लिखलियै ओ लागल बड्ड चहटगर। बिनमतलब के कथा साहित्य पर अकेडमी सँ एक दिन आयल हकार कुटुम बैसले रहथि ओहि ठाम टटके भेटल पुरस्कार। आन कतबो नीक किएक ने लिखलक मुदा ओकरा ने कहियो आएत हकार नहि छै ओकरा कोनो चिन्हा परिचे पिछलगुआ टा के जल्दी भेटत पुरस्कार। पुरस्कारक बदरबाँट भऽ रहल अछि जाति वर्गक नाम पर लेखक के बाँटू जूनि पछुआउ पिछलगुआ सभ आउ आगू अहाँ पुरस्कार लऽ के खूम नाचू। साहित्यक मठाधीश सभ शुरू केलैन पुरस्कार यथार्थवादी चितंक आ लिखनिहार हुनका लेल भऽ गेलैथ बेकार। एक्को मिनट देरी नहि अहाँ करू हुनके गुणगान कए कथा अहाँ बाचू नहि तऽ जिनगी भरि पाछुए रहि जाएब पुरस्कारक जोगार मे जीजान स लागू। अहि दुआरे पछुआले रहि गेल कारीगर कहियो ने केलक केकरो आगू-पाछू देखैत छियै आब हम दोसर पुरस्कार दुआरे जोगार लगा करैत छी हुनकर आगू-पाछू। बेस त बड्ड बढ़िया हम शुभकामना दैत छी दोसर पुरस्कार अहाँ के जल्दीए भेट जाए जल्दी जोगार मे अहाँ लागू अहाँ पुरस्कार लऽ के खूम नाचू। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.डॉ॰ शशिधर कुमर २.नवीन कुमार "आशा" १. डॉ॰ शशिधर कुमर, एम॰डी॰(आयु॰) – कायचिकित्सा, कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टर, निगडी – प्राधिकरण, पूणा (महाराष्ट्र) – ४११०४४ बाबा विद्यापतिक कथन रौ  मैथिल ! मैथिली  तोँ  बाज । केहेन  चिन्ता ? कथी केर लाज ? हमहूँ  संस्कृतक  पण्डित, पर मैथिली  हम्मर माथक पाग ।। मीठ  गीत, बहुते तोँ  सुनलह, आइ सुनह मोर बोल कटाह । रोष ने  करिहऽ हमरा पर, जँ हमर बोल,  लागह अधलाह । हमरो समय, बहुत पोंगा सभ, बहुतहि थू – थू  कएने छल । मिथिलाभाषा लिखय छलहुँ तेँ, हमरा, सभ धकिअओने छल । मिथिलाभाषा जेँ लिखलहुँ, तेँ तोँ सभ आइ करय छह याद । हमहूँ  संस्कृतक पण्डित, पर मैथिली  हम्मर माथक पाग ।। हे मैथिल ! किछु ज्ञान सुनह, हमर बात,  किछु कान धरह । अनका  सञो  हमरा नञि  द्वेष, पर निज भाषा  किए  कलेश । पढ़ह – लिखह, जे मोन होअह, पर निज भाषा  जुनि बिसरह । अनका लग भले किछु डाकह, अपना   मे    मैथिली    बाजह । धिया – पुता केँ हीन ग्रस्त भऽ, वा मद मे जुनि देखबह लाथ । हमहूँ   संस्कृतक   पण्डित,  पर   मैथिली  हम्मर  माथक  पाग ।। बाजह  सदिखन, सुनह मैथिली, गुनह   मैथिली,  रटह मैथिली । रचह  मैथिली,  लीखह  मैथिली, कीनि कऽ पोथी पढ़ह मैथिली । सृजन मैथिली, च्यवन मैथिली, नाचह मैथिली, गाबह मैथिली । बाट   मैथिली,    घाट    मैथिली, घर- बाहर, सभ ठाम मैथिली । तजि निज भाषा, कुकुरक गति हो, नञि घर केर, नञि धोबी घाट । हमहूँ  संस्कृतक  पण्डित,  पर   मैथिली  हम्मर  माथक  पाग ।। २ नवीन कुमार "आशा" हिंगलू भाइ यौ टिंगलू भाइ हिंगलू भाइ यौ टिंगलू भाइ जुनि अहाँ तोड़ू तुराइ जँ अहाँ तोड़ब तुराइ रातिमे खायब खूब पिटाइ जुनि रहू अहाँ खाटपर नै तँ काल्हि रहब टाटपर आब सुनू यौ भाइ सुनू यौ भाइ जे अछि टाटक बत्ती नै बनबै जाउ देहक पहचान आइ दुपहरिया रहि रहरिया ओतए आबै अहाँक अबाज पहुँचलौं जखन हम अहाँक डेरा तखन आएल माथमे फेरा फेर बुझल हम घरक रीत अहाँ करी सभटा काज भौजी खाली करथि साज तँए कही यौ टिगलू भैया जल्दी-जल्दी खेनाइ पकाउ जँ अहाँ पकायब नीक खेनाइ रातिमे भौजी दैथि रस मलाइ आ जँ अगर तानब तुराइ फेर खायब खूब पिटाइ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। नवीन ठाकुर १ गज़ल (प्रेम रस )  1. अछि पियासल मोन तँ पिबैत चलि जाउ........२  गुण प्रीतम क बाट गबैत चलि जाउ !!२ मोनक बेगरता अछि , प्यासल अछि कंठ  घुट- घुट नै जिबू एना बनू नै चंठ ........२  अछि ललसा जे मोनक कहैत चलि जाउ !!२ गुण प्रीतम क बाटे गबैत चलि जाउ !!३ मानलौं जे पीने हएब बहुतो जहाँ क  प्यासल अछि मोन जे तैयो अहाँ क.......२  अछि प्रेमक ई धारा बहैत चलि जाउ !!२ गुण प्रीतम क बाटे गबैत चलि जाउ !!३ ससरल ने कंठ सँ एहन कोन पिबै छी  पिबते उतरि गेल , तेहन की पिबै छी........२  लिअ चस्का ई प्रेम क डूबैत चलि जाउ !!२ गुण प्रीतम क बाटे गबैत चलि जाउ !! अछि पियासल मोन तँ पिबैत चलि जाउ........२  गुण प्रीतम क बाटे गबैत चलि जाउ !! ५ २ . मैथिली गीत --

सुनिते बोली अहाँ क इजोर भऽ गेलै...............(मुखरा ) एला पाहून हमर सौंसे शोर भऽ गेलै ..एला पाहून हमर सौंसे ......!२

कुचरैत छल कौवा आइ -बड जोर सँ..................(अंतरा ) एता जे कियो ई आस छल भोर सं......! २  देखते मुखड़ा .... हो देखते मुखरा अंहक मोन बेभोर भऽ गेलै ....! २ एला पाहून हमर सौंसे.......................

अंगना दुआरि नीप, रखलहुँ सकाले तरुवा - तरकारी अछि सभटा तरैले ! २ कने दही ला ...हे हे ... कने दही ला किए अनघोल भऽ गेलै ......!२ ...एला पाहून हमर .........

कनिया - पुत्रा सभ हुल्की मारैए टाटक दोग दऽ कऽ चुटकी मारैए ! २  किए जाईते ..... हो किए जाईते हमर मोन केँ चितचोर लऽ गेलै  एला पाहून हमर सौंसे शोर भऽ गेलै ......

सुनिते बोली अहाँ क इजोर भऽ गेलै...............(मुखरा ) एला पाहून हमर सौंसे शोर भऽ गेलै ..एला पाहून हमर सौंसे ......! एला पाहून हमर सौंसे शोर भऽ गेलै ......! ३ ३ मैथिली गीत - केलहुं कतबो जतन तैयो धेलक नै दम , कनियो निर्लज्जा के नै एलई शर्म —-, !! आब त अपनों मोन घिच - पिच करैया .. सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया …………….!! कैहता किछ कियो लैगता बड आइन ओकरा घर फेर हम पिबतौं नै पैन आब त गढ़ियो स आत्मा जुराईया सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया……………..!! नै जानी  दुनिया  नै जानी संसार हमरा त धेलक जे अलगे बोखार बुझी जहरों के अमृत पिबैया सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया……………..!! बुझितुं जे छीन लेत कियो चोरी में धरित्हूँ जियरा बंद क तिजोरी में जेना हाथो -पैर आब नै सुझैया सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया……………..!! पकरै छि मोन के जुन्ना लगाम स ससरैया तैयो जे जियरा दालान स देखि आत्मा  हमर खहरैया सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया …………….!! केलहुं कतबो जतन तैयो धेलक नै दम , कनियो निर्लज्जा के नै एलई शर्म —-, !! आब त अपनों मोन घिच - पिच करैया .. सबटा प्रेमे के भाषा बुझाईया …………….!! ३ ४ अनुकम्पा - ईश्वर दैया सब्कुछी हमरा ,त  हमरो किछु  देनाय सिख्बाके !! अपन हित त पशुओ जिबैया,अनकर हित जिनाय सिख्बाके !! हवा ,प्रकाश, धरती, दैया,भैर दैया मेघ समूचा खेत में पानी ! जदी बदला में हम किछु नै देलिए ,त  ई भेल बरका बैमानी ! एही स जे हम दुःख भोगैछी , दुःख के दूर भगेनाय सिख्बाके ! ईश्वर  दैया  सब्कुछी हमरा ,त  हाम्रो किछु देनाय सिख्बाके ! ! जरैत  धरा  पर  चलैत पथिक के, गाछो  दैया सब्दीन छाया  ! अपन  फल  अपने नै  खा क , सब जिव  के  जुरबैया काया ! प्रभु के पहिने भोग अर्पण क, पश्चात अपने भोजन करबाके  ! ईश्वर दैया सब्कुछी हमरा , त हमरो किछु देनाय सिख्बाके  !! अनपढ़ के बिन दान पढाबू ,भूखल प्यासल के भोजन कराबू ! बुढ- पुरान, समाज के सेवा , मात,पिता, गुरु आज्ञा स्विकारू ! जे किछु भेटल अछि ईश्वर स , हमरा ओ बाँटनाय सिख्बाके ! ईश्वर  दैया  सब्कुछी हमरा ,त  हाम्रो किछु देनाय सिख्बाके ! ! मानव तन अति दुर्लभ अछि भेटब ,एकरा मैल रहित  बनाबू ! गमक पसारू फुल सन संउसे ,ज्वलित दीप स अन्हार मेटाबू ! धन्य भाग एही मानव तन के ,आब  नै मौका  फेर चुकबाके ! ईश्वर  दैया  सब्कुछी हमरा ,त  हाम्रो किछु देनाय सिख्बाके ! ! अपन हित त पशुओ जिबैया,अनकर हित जिनाय सिख्बाके ! ! ५ अस्तित्व - हम नै हमर नै इ तन अछि ककरो अनकर देल ! जे कुछी अपना संग अछि सबटा अछि अनकर देल देब बला देलक ओहो, देलक अपना शान स हमर अछि ई लेब बला कही उठल अभिमान स मोनक बात सुन वला मोन ककरो अनकर देल हम नै हमर नै इ तन अछि ककरो अनकर देल ! जे संग अछि एखन तक ,ओ सैदख्न रैह सकैया नै कखन बिछुइर जायत लग स ई कियो जनैया नै जिनगी के उपजल मधुबन अछि ककरो अनकर देल हम नै हमर नै इ तन अछि ककरो अनकर देल ! जग के सेवा खोज अपन प्रीत ओकरे स करू जिनगी के गूढ़ अछि, बिन बुझने कस्ट नै करू साधना के राह में साधन अछि अनकर देल हम नै हमर नै इ तन अछि ककरो अनकर देल ! ६ वियोग - केलहुं कतेको प्रयत्न,किया सुनैया नै राइत बीतल मुदा निन किया अबैया नै कनैया रैत – रैत भैर मोन हमर धैर आइंख स नोर बहैया नै ! सोचै छि सब्दीन आई सुतब चैन स ओईढ चदैर आई एरी तक तैंन क पैर पसारे छि जखने पूरा फाटल चदैर पैर तक पुरैया नै ! देख अचंभित छि हम अपने आप के दोख अनकर कहू की अपन कपार के टूटल भरोसा जे छल आन पर आब त अपनों पर भरोसा होइया नै ! मन्ल्हूँ छल हमरो ख़ुशी ओकरे ख़ुशी में मुदा हमरो त हंसी छल ओकरे हंसी में प्रेम केलहुं दिल के मज़बूरी पर मुदा प्रेम कहियो मजबूर भेलैया नै ! ७ .जाढ़ ( एगो अनुभूति ) आयल सिहरैत सिस्कैत सुग्बुगैत कुन कोण स ! नै जानी आयल कहिया अन्हरिया आ  इजोर स ! केलक गुदगुदी एना याद परल  पिछला शाल ! कोण भोज खेने रही याह ठंडी में ओढ़ने दुशाल ! पितमर काका के भोज पोरका भेल रहा अनमोल ! उझैल देलकैन पैन कियो पोनतर मैचगेल अनघोल ! ठिठुरैत छल पैर हाथ , मिल करैत छल सब घुर ! घुर तर बैस क , सब   गनैत  छल  गामक  बुढ कतेक छोऊ बुढ गाममे  जग्तोऊ कतेक  भोज ! फलना के बरखी के आब गणले छऊ दिन सोझ ! भोरका पहर में कहियो ओछेन नै छोरल जाएत छल ! मारने रहित्हूँ गबदी चाहे कतबो बाबु डिरियात छल ! स्कुल जेबाक लेल सब्दीन मैरतहूँ बहाना ! बाबु के डरे माँ लग पसारैत छलहूँ घाना ! जाढ़क महिना में भरल सबहक घर बखारी ! भोरे क खाऊ सब्दीन भात-अलुकोबी तरकारी ! ओना त सब दिन हमरा जार बढ होयत छल ! मुदा तिला –सकरैत दिन चुरलाई पर भर छल ! ससरैत-भोरहरबा में मुस्की मारैत निकेल गेल ! फगुवा के अबिते ने जानी कत फेर ससैर गेल ! जाहिठाम स आयल, ओहिठाम फेर चैल गेल ! अबैतछि अगला साल कैह याद अपन छोइर गेल ! ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत १.ज्योति सुनीत चौधरी २. राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) ३. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी) १. ज्योति सुनीत चौधरी जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी। ज्योति मिथिला चित्रकलामे सेहो पारंगत छथि आ हिनकर मिथिला चित्रकलाक प्रदर्शनी ईलिंग आर्ट ग्रुप केर अंतर्गत ईलिंग ब्रॊडवे, लंडनमे प्रदर्शित कएल गेल अछि। कविता संग्रह ’अर्चिस्’ प्रकाशित। ज्योति सम्प्रति लन्दनमे रहै छथि। २ राजनाथ मिश्र चित्रमय मिथिला स्लाइड शो चित्रमय मिथिला (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) ३. उमेश मण्डल मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव जन्तु/ मिथिलाक जिनगी  (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण ४.“रेहनपर रग्घू”- श्री काशीनाथ सिंह (हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद श्री विनीत उत्पल) ५.असगर वजाहत- हम हिन्दू छी हिन्दी कथाक मैथिली रूपान्तरण विनीत उत्पल द्वारा- ४. “रेहनपर रग्घू”- श्री काशीनाथ सिंह (हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद श्री विनीत उत्पल) श्री काशीनाथ सिंह: जन्म:०१ जनवरी १९३७, कथा संग्रह: कहनी उपखान , उपन्यास- अपना मोर्चा , काशी का अस्सी,  रेहन पर रग्घू । संस्मरण:  घर का जोगी जोगड़ा , याद हो कि न याद हो , नाटक: घोआस विनीत उत्पल:विनीत उत्पल (जन्म: 7 अप्रैल, 1978, ननिहाल पूर्णिया जिलाक सुखसेना गाममे)। पैत्रिक घर: आनंदपुरा, मधेपुरा। प्रारंभिक शिक्षा मुंगेर जिला अंतर्गत रणग्राम आ तारापुरमे। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर सँ गणित विषय मे बी.एस.सी. (आनर्स), मारवाड़ी कॉलेज, भागलपुर। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली क हिंदी विभाग सँ जनसंचार आ रचनात्मक लेखन मे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली सँ अंग्रेजी पत्रकारिता मे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार सँ जनसंचार मे मास्टर डिग्री। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली क नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कानफ्लीक्ट रिजोल्यूलशन क पहिल बैचक छात्र आ सर्टिफिकेट प्राप्त। भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली सँ फ्रेंच भाषाक शिक्षा। छात्र जीवनमे रोट्रेक्ट क्लब, भागलपुर (रोटरी इंटरनेशनलक युवा शाखा) सँ जुड़ल, कएकटा संबद्ध पत्र-पत्रिकाक संपादन। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्लीक हिन्दी विभागमे अध्ययनक दौरान 'हमारी पहचान" नामक पाक्षिक समाचार पत्रक संपादक मंडलक सदस्य। दिल्लीसँ प्रकाशित कएकटा राष्ट्रीय अंग्रेजी समाचार पत्रमे ग्रामीण विकासक खबरिक विश्लेषण, हिन्दीक प्रचार-प्रसारमे केंद्रीय वित्त मंत्रालयकेँ योगदानक अलावा गुजरात दंगामे अंग्रेजी आ गुजराती मीडियाक भूमिकापर लघुशोध। हिन्दी, मैथिली, अंग्रेजी भाषामे विपुल लेखन आ सुनीता नारायण, शशि थरूर, महेश रंगराजन आदिक लेख सभक अंग्रेजीसँ हिन्दीमे अनुवाद। वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन द्वारा संपादित 'लोकतंत्र का नया लोक" मे उपलब्ध द्वैपायन भट्टाचार्य, जी.कोटेश्वर प्रसाद आ नलिनी रंजन मोहंतीक अंग्रेजी लेख सभक अनुवाद आ पुनर्लेखन। अनियमितकालीन कला पत्रिका 'कैनवास" मे समन्वय संपादक।मैथिली कविता संग्रह 'हम पुछैत छी" प्रकाशित। साहित्य अकादमी सँ पुरस्कृत हिन्दीक वरिष्ठ कथाकार उदयप्रकाशक दीर्घ-कथा/ उपन्यास 'मोहनदास" क मैथिली अनुवाद।पत्रकार, लेखक, कवि आ अनुवादक विनीत उत्पल, दैनिक भास्कर, दिल्ली प्रेस, हिन्दुस्तान, देशबंधुमे पत्रकारिताक बाद आइ-काल्हि राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्लीमे वरिष्ठ उपसंपादकक पदपर कार्यरत छथि। रेहनपर रग्घू (पछिला अंकसँ आगाँ) एहेन मुसीबतमे रघुनाथकेँ किओ आन नै हुनकर अप्पन बेटे धऽ देने छल। बेटोमे संजय! संजय टा! आ ई नम्हर खिस्सा अछि- राँचीसँ कैलिफोर्निया धरि पसरल। संजय प्रेम केने छल सोनलसँ! ई प्रेम कोनो चौौबटियापर घुमैत लफुआ छौड़ाक अनगढ़ प्रेम नै छलै, ऐमे गुणा-भाग सेहो रहै आ जोड़-घटा सेहो! जतेक गहींर छल ततबे व्यापक। संजयक सोनल प्रोफेसर सक्सेनाक बेटी छल। सदिखन प्रथम श्रेणी, व्याख्याताक योग्यता परीक्षा पास आ दर्शनशास्त्रसँ पी.एच.डी.। नौकरी तँ पक्का छल, बनारसक विश्वविद्यालयमे, जतय ओकर माय कुलपति छल, मुदा ओइमे अखन देरी छलै, तखनि धरि बियाहक बाट तकबाक छल! बियाहमे बाधा भऽ रहल छल, ओकर ठोढ़सँ बाहर आएल दाँत आ सटल नाक जकर क्षतिपूर्ति ओ अप्पन सर्टिफिकेटसँ करैत छल। छूटल-बढ़ल कसरि पूरा कऽ रहल छल सक्सेनाक पसारल ई फूस कि हुनका एकटा एहेन कलामी सॉफ्टवेअर अभियन्ताक आवश्यकता छन्हि जे अमेरिकाक एकटा बहुराष्ट्रीय कम्पनीक तीन बर्खक कान्ट्रेक्टपर कैलीफोर्निया जा सकए। ऐ आवश्यकताक अनुभव सम्पूर्ण इन्स्टीट्यूट बुझैत छल। संजय अन्तिम परीक्षा दऽ देने छल, रिजल्टक घोषणा बाकी छल! एम्हर कतेक बेर माँ-बापक संदेश आएल छल जे आबू, लड़कीकेँ देखि लियौ। लड़कीकेँ की देखब, ओ तँ देखले छल! रघुनाथ जइ कॉलेजमे पढ़बैत छल, पूर्व विधायकक बेटी तकर मैनेजर छल। गोर, नमछुरुक, सुन्नर आ आकर्षक। एम.ए.। नीक गृहणी। मैनेजर पुरान जमानाक जमीन्दार, अथाह सम्पत्तिक मालिक। रघुनाथक कोनो हैसियत नै छलै ओकर आगू। नहिये नीक सन घर दुआर, नहिये जमीन-जत्था। आठ बिगहा खेत आ हरक जोत। नेनपन आ युवावस्था बड्ड तंगीमे बितलै। बच्चा सभकेँ पढ़ेलक तँ खेतकेँ बन्हकी लगा कऽ आ कॉलेजसँ ऋण लऽ कऽ। स्पष्ट छल, मैनेजर “सॉफ्टवेअर अभियन्ता” केँ देखने छल, अप्पन कॉलेजक मास्टर रघुनाथकेँ नै। ई सम्बन्ध रघुनाथक लेल सपनासँ आगूक चीज छल । फाएदे-फाएदा छल ऐसँ! जिलामे पहिचान आ प्रतिष्ठा जे भेटतिऐ, से अलग। ओ कीसँ की भेल जा रहल छल। तँ गाम आबैसँ पहिने सक्सेना सर सँ बिदा लै लेल गेल छल संजय। एकरा अहिनो कहि सकैत छी जे ओकरा सक्सेना सर डिनरपर बजेने छल। गर्मीक साँझ। अप्पन लॉनमे सक्सेना बेंतक कुर्सीपर चुपचाप बैसल छल। माली गमलामे पाइन दऽ रहल छल। बंगलाक भीतरक बत्ती जड़ि रहल छल। कोनो कोठलीसँ संगीतक धुन आबि रहल छल। अवकाश प्राप्तिक करीब, हृदयक मरीज प्रो. सक्सेना संजयक एबासँ अनजान चुपचाप बैसल छला आ आगू देखि रहल छला। बड़ी कालक बाद ओ पुछलक, “कोन इन्स्ट्रूमेन्ट अछि”। संजय बिना बुझने माथ हिलेलक। “आ राग? कोन राग अछि?” संजय निरुत्तर, फेर माथ हिलेलक। ओ ससरि गेल आ ऊँच अबाजमे बजेलक- “सोनू”। जीन्सक पेंट आ टी-शर्टमे कूदैत सोनू आएल- “हँ पापा”। संजय ठाढ़ भऽ गेल। सक्सेना मुस्की देलक, पहिने संजयकेँ देखलक, फेर सोनलकेँ। सोनल सेहो मुस्की देलक। संजय सोनलसँ भेँट तँ कते बेर केने छल मुदा देखने पहिलुके बेर छल। ओकरा लगलै जे कोनो छौड़ीकेँ टुकड़ीमे नै “सम्पूर्णता”मे देखबाक चाही। कतेक फर्क पड़ि जाइत छै। संगे संग छौड़ी आ कनियाँकेँ एक तरहेँ नै देखबाक चाही। रूप-रंग, ढीब-ढाब, मान-मनौअलि छौड़ीमे देखल जाइत अछि, कनियाँमे नै! ई सभटा पुरान धारणा अछि, हमर पापा-मम्मीक जमानाक, हमर नै। सक्सेना गुम्मी तोड़लक- “ई अछि सोनम, जइमे हमर प्राण बसैत अछि। सितार, सरोद, संतूर माने सोनल। सोनल माने संगीत। चीपनेस एकरा पसिन्न नै। फिल्मी गीतकेँ ई गीत नै मानैत अछि। किएक तँ ई अपने कथक नृत्यांगना रहल अछि। तँ की खुआ रहल छी हमरा सभकेँ आइ?” “ओ तँ तखने पता लागत जखन खाएब।” सोनल लजा कऽ भागि गेल। “बैसू संजय।” ई कहैत सक्सेना सेहो मूड़ी झुका कऽ बैसि गेल। किछु सोचैत। टूटल स्वरमे बाजल- “कोना रहब एकर बिना, रहब कोना से नै बुझि पड़ैत अछि। ई चौदहे बर्खक छल जखन एकर माय गुजरि गेलै।” तकर बाद ओकर आँखिसँ नोर खसऽ लगलै- “तीन चारि बरखसँ लगातार आबैत रहल अछि लड़का। एकसँ एक। (जारी….) ५. असगर वजाहत- हम हिन्दू छी हिन्दी कथाक मैथिली रूपान्तरण विनीत उत्पल द्वारा हम हिन्दू छी एहेन कन्नारोहट जे मुर्दो कब्रमे ठाढ़ भऽ जाए। लागल जे अबाज सोझे कान लगसँ आएल अछि। ओइ स्थितिमे.. हम कूदि कऽ बिछौनपर बैसि गेलौं, अकासमे अखनो तरेगन छल.. किंशाइत रातिक तीन बाजल हएत। अब्बोजान उठि कऽ बैसि गेला। कन्नारोहट फेरसँ सुनाइ पड़ल। सैफ अपन अखड़ा खाटपर पड़ल चिकड़ि रहल छल। अंगनामे एक दिससँ सभक खाट लागल छलै। 'लाहौलविलाकुव्वत. . .' अब्बाजान लाहौल पढ़लन्हि 'खुदा नै जानि ई किए सुतलेमे चित्कार करऽ लगैए।' अम्मा बजली। “अम्मा एकरा राति भरि छौड़ा सभ डरबैत रहै छै. . .” हम कहलिऐ। “ओइ सरधुआ सभकेँ सेहो चेन नै पड़ै छै. . .लोक सभक जान आफदमे छै आ ओकरा सभकेँ बदमाशी सुझाइ छै”- अम्मा बजली। सफिया चद्दरिसँ मुँह बहार कऽ बाजलि- “एकरा कहू छतपर सुतल करए।” सैफ अखन धरि नै जागल छल। हम ओकर पलंग लग गेलौं आ झुकि कऽ देखलौं जे ओकर मुँहपर घाम छलै। साँस खूब चलि रहल छलै आ देह थरथरा रहल छलै। केस घामसँ भीजल छलै आ किछु केस माथपर सटि गेल छलै। हम सैफकेँ देखैत रहलौं आ ओइ छौड़ा सभक प्रति मोनमे तामस घुरमैत रहल जे ओकरा डराबै छलै। तखन दंगा एहेन नै होइत छल जेहेन आइ काल्हि होइए। दंगाक पाछाँ नुकाएल दर्शन, ईलम, काजक पद्धति आ गतिमे ढेर रास  बदलेन आएल अछि। आइसँ पच्चीस-तीस साल पहिने नहिये लोककेँ जिबिते भकसी झोका कऽ मारल जाइ छलै आ नहिये सौंसे टोल-मोहल्लाकेँ सुनसान कएल जाइत छलै। ओइ जमानामे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री आ मुख्यमंत्रीक आशीर्वाद सेहो दंगा करैबलाकेँ नै भेटै छलै। ई काज छोट-मोट स्थानीय नेता अपन स्थानीय आ क्षुद्र स्वार्थ पूरा करै लेल करै छला। व्यापारिक प्रतिद्वंद्व, जमीनपर कब्जा करैले, चुंगीक चुनावमे हिंदू वा मुस्लिम वोट समटैले इत्यादि उद्देश्य भेल करै छल। आब तँ दिल्ली दरबारपर कब्जा करबाक ई  साधन बनि गेल अछि। सांप्रदायिक दंगा। संसारक सभसँ पैघ लोकतंत्रक मुँहमे जाबी वएह पहिरा सकैए जे सांप्रदायिक हिंसा आ घृणापर शोनितक धार बहा सकए। सैफकेँ जगाएल गेल। ओ बकरीक असहाय बच्चा सन चारू दिस ऐ तरहे देखि रहल छल जेना माँकेँ ताकि रहल हुअए। अब्बाजानक बेमात्रे भाइक सभसँ छोट सन्तान सैफुद्दीन प्रसिद्ध सैफ जखन अपन घरक सभ लोककेँ चारू दिस घेरने देखलक तँ ओ अकबका कऽ ठाढ़ भऽ गेल। सैफक अब्बा कौसर चचाक मरबाक खबरि लेने कोनमे कटल ओ पोस्टकार्ड हमरा अखनो नीक जकाँ मोन अछि। गामक लोक सभ चिट्ठीमे कौसर चचाक मरबाके टाक खबरि नै देने छला संगमे ईहो लिखने छला जे हुनकर सभसँ छोट सन्तान सैफ आब ऐ दुनियामे असगर रहि गेल अछि। सैफक पैघ भाइ ओकरा अपना संग बम्बै नै लऽ गेल। ओ साफे कहि देलन्हि जे सैफ लेल ओ किछु नै कऽ सकै छथि। आब अब्बाजानक अलाबे ओकर ऐ दुनियामे कियो नै छै। कोन कटल पोस्ट कार्ड पकड़ि अब्बाजान बहुत काल धरि चुपचाप बैसल रहथि। अम्मांसँ कएक बेर झगड़ा केलाक बाद अब्बाजान पैतृक गाम धनवाखेड़ा गेलथि आ बचल जमीन बेचि, सैफकेँ संग लऽ घुरलथि। सैफकेँ देखि हमरा सभकें हँसी आएल रहए। कोनो देहाती बच्चाकेँ देखि अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटीक स्कूलमे पढ़ैवाली सफियाक आर की प्रतिक्रिया भऽ सकैए, पहिले दिन ई बुझा गेल जे सैफ खाली देहातिये नै वरन् अर्द्ध-बताहसन सोझ वा मूर्ख छल। हम सभ ओकरा कबदाबैत आ फुचियाबैत रहै छलिऐ। एकर एकटा फाएदा सैफकेँ एना भेलै जे अब्बाजान आ अम्मांक हृदय ओ जीति लेलक। सैफ खूब मेहनति करए। काजसँ ओ देह नै नुकाबए। अम्मांकेँ ओकर ई व्यवहार खूब पसिन्न पड़ै। जँ दूटा रोटी बेसी खाइए तँ की? काज तँ सेहो देह झारि कऽ करैए। सालक साल बितैत गेलै आ सैफ हमर सभक जिनगीक अंग बनि गेल। हम सभ ओकरा संग सामान्य होइत गेलौं। आब मोहल्लाक कोनो बच्चा जँ ओकरा बताह कहि दै तँ हम ओकर मुँह नोंचि लै छलिऐ। हमर भाइ अछि ई, एकरा तूँ बताह कोना कहै छेँ? मुदा घरक भीतर सैफक की स्थिति रहै से हमरे सभ टाकेँ बुझल छल। नग्रमे दंगा ओहिने शुरू भेल छल जेना भेल करै छल, माने मस्जिदसँ ककरो एकटा पोटरी भेटलै, जइमे कोनो प्रकारक माउस छलै आ माउसकेँ बिन देखने ई मानि लेल गेल छलै जे किएक तँ ई माउस मस्जिदमे फेकल गेल छल तेँ ई सुग्गरक माउस हेबे टा करत। तकर बदलामे मुगल टोलमे गाय काटि देल गेल आ दंगा शुरू भऽ गेल। किछु दोकान जड़ि गेल मुदा बेसीकेँ लुटल गेल।छूरी-चक्कूक ढेर रास घटनामे मोटा-मोटी सात-आठ गोटे मुइलाह आ प्रशासन एतेक संवेदनशील छल जे कर्फ्यू लगा देल गेल। आइ-काल्हिबला बात नै छल जखन हजारक हजार लोकक मुइलाक बादो मुख्यमंत्री मोंछपर ताव दैत घुमैत छथि आ कहैत छथि जे, जे किछु भेल ठीक भेल। दंगा किएक तँ लगपासक गामोमे पसरि गेल छल तै दुआरे कर्फ्यू बढ़ा देल गेल छल। मुगलपुरा मुसलमानक सभसँ पैघ मोहल्ला छल से ओतऽ कर्फ्यूक प्रभाव छल आ जिहाद सन वातावरण सेहो बनि गेल छल। मोहल्लामे तँ गली-कूची होइते छै मुदा कएकटा दंगाक बाद ई अनुभव कएल गेल जे घरक भीतरसँ सेहो रस्ता हेबाक चाही। माने आप्तकालक व्यवस्था। से घरक भीतरसँ, छतक ऊपरसँ देबार फांगैत किछु एहेनो रस्ता बनि गेल छलै जे कियो जँ ओइ रस्ताकेँ चिन्हैत होइक तँ मोहल्लाक एक कोनसँ दोसर कोन धरि निधोके जा सकैत छल। मोहल्लाक तैयारी युद्धक लेल कएल तैयारीक बरोबरि छल। सभ सोचने रहथि जे कर्फ्यू जँ मासो भरि धरि जाइए तैयो जरूरतिक सभटा समान  मोहल्लेमे भेटि जाए। दंगा मोहल्लाक छौड़ा सभक लेल एकटा विचित्र सन उत्साह देखेबाक मौसम भेल करै छल। थम्हू ने, हम सभ तँ हिन्दू सभकेँ धूरा चटा देबै.. की बुझै जाइए ई धोतीक फाँड़ बान्हैबला सभ.. छोड़ू डरपोक होइ जाइए ई सभ। .. एक मुसलमान दस हिन्दूपर भारी पड़त…हँसि कऽ लेने छी पाकिस्तान, लड़ि कऽ लेब हिन्दुस्तान..एहने सन वातावरण बनि जाइ छल। मुदा मोहल्लासँ निकलैमे सभक जान जाइ छलै। पी.ए.सी.क चौकी दुनू दिस छलै। पी.ए.सी.क बूट आ ओकर राइफलक बटक मारि कतेको गोटेकेँ मोने छलै, तँए बकथोथी धरि तँ ठीक मुदा ओइसँ आगाँ…. संकटसँ एकता अबै छै, एकता, अनुशासन आ व्यावहारिकता। सभ घरसँ एकटा छौड़ा पहरापर रहत। हमर घरमे हमरा अलाबे, ओइ जमानामे हमरा छौड़ा नै मानल जा सकै छल कारण हम पच्चीस बर्खसँ ऊपर भऽ गेल रही, छौड़ा तँ सैफे छल, तेँ ओकरा रतुका पहरापर रहऽ पड़ै छलै। रातुक पहरा छातपर भेल करै छलै। किएक तँ मुगलपुरा नग्रक सभसँ उपरका भागमे छल तेँ छातपरसँ सम्पूर्ण नग्र देखाइ दैत छल। मोहल्लाक छौड़ा सभक संग सैफ पहरापर जाइ छल। ई हमरा, अब्बाजान, अम्मां आ साफिया- सभक लेल नीक छल। जँ हमर घरमे सैफ नै रहितए तँ हमरे रातिमे बौआए पड़ितै। सैफकेँ पहरापर जेबाक कारणसँ किछु सुविधा देल गेल छलै, जेना आठ बजे धरि ओकरा सूतऽ देल जाइ छलै। ओकरासँ बाढ़नि नै दिआएल जाइ छल, आब घर बहारबाक काज सफियाकेँ दऽ देल गेल छलै, जे ऐ काजकेँ एक्को रत्ती पसिन्न नै करैत छलि। कहियो काल हमहूँ रातिमेमे छतपर चलि जाइत रही, लाठी-डण्टा, ठुहरी आ ईँटाक ढेर एम्हर-ओम्हर लगाओल गेल छल। दू-चारिटा छौड़ा लग देशी कट्टा, आ बेसी गोटे लग चक्कू छल। (जारी....) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” - दक्षिणी ध्रुव पर मनुक्खक पएरक सए वर्ष अर्थात्- खिस्सा अण्टार्कटिका केर उड़ि ने सकी पर चिड़ै छी हम (भाग -‍१) किछु दिन पहिने गाम गेल रही । साँझ खन धिया पुता सभ घेर लेलक । सभहक एक्कहिटा जिद्द जे खिस्सा सुनाउ । हम कहल – हमरा किस्सा तिस्सा नञि आबैत अछि । जो दादी सँ सुन गऽ । प्रिया – नञि यौ अहाँ झूठ बजैत छी । हम अहाँक खिस्सा सभ पढ़ने रही विदेह मे । ई सुनितहि बाकी धिया – पुता सेहो जोर सँ चिचिआए उठल – हमहूँ पढ़ने रही । बड्ड नीक लागल छल । हम – ओ तऽ इण्टरनेट पर आबै छै, तोँ सभ कोना पढ़लह । नन्दू बाजल – हमरा सभ केँ इस्कूल मे कम्प्यूटर देलकैए । मास्टर साहेब देखओलन्हि अहाँक लिखल खिस्सा आ पढ़ि कऽ सेहो सुनओलन्हि । विकास – हाँ यौ, हऽम एक जनवरी कऽ पटना मे मामा लग रही । हुनिका लऽग मे लैपटॉप छन्हि, ओत्तहि अहाँक लीखल खिस्सा पढ़लहुँ , बहुत नीक लागल । सोनी – हाँ चित्र सभ सेहो बहुते नीक रहए । एतबहि मे बब्बन सेहो तपाक सँ बाजि उठल – हाँ हमरा ओहने खिस्सा सुनइ के हए । हमनी के परी आर केर खिस्सा नञि सुनै के हए । हम – तऽ अहीं सभ बताउ - आइ की कएल जाए ? कतऽ चलल जाए ? कोन खिस्सा सुनाओल जाए ? बब्बन – हमनी के जे अहाँ सुनेबै से सुनबै । प्रिया – हाँ, अहाँ अपने मोन सँ किछु सुनाउ ने । जएह अहाँ केँ नीक लागए सएह सुनाउ । हम – तऽ चलू आइ किछु एहेन चिड़ै सभक बारे मे सुनबैत छी जे चिड़ै रहितो चिड़ै नञि आ चिड़ै सनि नहिञो लगैत चिड़ैअहि थिक । नन्दू – माने ? सोनी – बुझौअलि नञि बुझाऊ, साफ – साफ कहू ने ! प्रिया – हाँ, खिस्सा सुनबाक अछि बुझौअलि नञि । हम – अरे, धैर्य राखू ! कहै छी सभटा । आइ हम सभ ओहि चिड़ै सभक खिस्सा सुनए जा रहल छी जे उड़ि नञि सकैत अछि – तेँ पहिल नजरि मे ओ सभ चिड़ै नञि बुझि पड़ैत अछि । सोनी – मतलब की चिड़ै रहितहु ओ चिड़ै नहि । हम – एकदम सही । पर ओकर सभक पुरखा लोकनि उड़ैत छलाह । वातावरणक प्रभाव आ आवश्यकता केर अनुसार धीरे – धीरे ओ सभ उड़नाइ छोड़ि देलन्हि आ तेँ आब ओ सभ नञि उड़ि सकैत छथि । नन्दू – मतलब कि, चिड़ै सनि नहिञो लगैत, चिड़ैअहि छथि । बब्बन – (कने दिमाग पर जोर दैत बाजल)  – ........वा....ता...व...रणक.........प्रभाव ? नञि बुझली हम । हम – ठीक छै, एना बुझह । हम सभ गोटे मिथिला मे रहैत छी, तेँ मैथिल छी । हमर सभ गोटाक मातृभाषा मैथिली थिक । छै ने ? बब्बन – हाँ से तऽ छै । हम – हम सभ गोटे मैथिली बजैत छी पर तइयो बजबा मे थोड़ेक – थोड़ेक अन्तर थिक । जे पच्छिमी मिथिला मे रहैत छथि तनिका मैथिली मे भोजपूरीक किछु बेशिअहि शब्द मिलल रहैत अछि , तनिकर बजबाक अन्दाज सेहो कने कड़गर रहैत अछि । तहिना जे दक्षिण मिथिला मे रहैत छथि तनिका मे बाङ्गला, उड़िया आ सन्थाली आदि भाषाक कतिपय शब्द सभ मिलल रहैत अछि । जे केन्द्रिय मिथिला (बीच केर मिथिला) मे रहैत छथि तनिकर चारू कात मैथिलीए भाषा – भाषी छथि तेँ हुनिकर मैथिली मे आन भाषाक मिलावट अपेक्षाकृत बहुत कम रहैत अछि । नन्दू - मतलब कि, जे मैथिली भाषा – भाषी मिथिलाक सीमा भाग मे रहैत छथि हुनिकर भाषा मे आन भाषा सभक कारणेँ किछु आनो शब्द वा गुण आबि जाइत अछि जे मूलतः ओहि भाषा केर शब्द वा गुण नहि थिक । हम – एकदम सही । ई भेल सीमापरक मैथिली भाषा पर ओतुक्का वातावरणक प्रभाव । बब्बन – हूँ ऽऽऽ । नम्हर साँस लैत गम्भीरता सँ बाजल । हम – पर एहि तरहक वातावरणक प्रभाव सँ की भाषा बदलि जाइत छै ? नञि ने ? तहिना किछु चिड़ै सभ उड़नाइ बिसरि गेल अछि - पर ओकर पंख एखनो छै । किछु चिड़ै सभक पंख उड़बाक जगह वातावरणक माँग केर अनुरूप पानि मे हेलबाक काज अबैत अछि – पर मूलतः ओ पंखहि थिक । तेँ ओकरा सभ केँ चिड़ै नञि मानब मूर्खता अछि । बब्बन – हँ हमरो बगल मे कुछ लोक सभ कहय छलथिन जे रौआ के भाषा बज्जिका हए ?  पर बाबूजी कहै छथिन कि हमनी के भाषा मैथिलीए हए । बस बजै मे दड़िभंगा सँ कनेक अन्तर हए । हम – हँ सही कहय छथि अहाँक बाबूजी । मिथिला, विदेह, वज्जी, बज्जी, तिरहुत आ तिरभुक्ति एक्कहि भू – भाग केर पर्यायी नाँव अछि । तेँ मैथिली, बज्जिका आ तिरहुतिया सेहो एक्कहि भाषा केर नाँव भेल, अलग – अलग भाषा केर नञि । प्राचीन काल मे एकरा “मिथिला भाषा” कहल जाइत छल । बब्बन – हँ अब बुझली । सोनी – मतलब कि मैथिलिअहि केर दोसर नाँव बज्जिका आ तिरहुतिया अछि । कने - मोने जे अन्तर अछि से ओतुक्का वातावरणक असरि थिक । एहि छोट – मोट अन्तर केर आधार पर एकरा सभ केँ अलग अलग भाषा माननाइ ओहने मूर्खता भेल जेना कि एहि विशिष्ट चिड़ै सभ केँ चिड़ै नञि माननाइ । हम – हँ , एकदम सौ प्रतिशत सही बुझलहुँ अहाँ । खैर हम सभ मुख्य खिस्सा पर चली । प्रिया – हँ । हम – शुतुर्मुर्गक नाँव सुनने छह की ? सब धिया – पुता एक्कहि संग बाजि उठल – हँ । अफ्रिका मे होइत छै । बब्बन – हँ , सहाराक मरूस्थल मे होइ हए । हम – बेस । पर सहारा मरूभूमिक अतिरिक्त अफ्रिका महादेशक आनहु भाग – जेना कि सवाना घासभूमि आ दक्षिण अफ्रिकाक कालाहारी मरूभूमि – आदि स्थान सभ मे ओ भैटैत अछि । शुतुर्मुर्ग केँ अंग्रेजी मे  ऑस्ट्रिच (Ostrich) कहल जाइत छै । धरती पर एखन पाओल जाएवला चिड़ै सभ मे ई सभ सँ पैघ आ भाड़ी होइत अछि । एक पुर्ण वयस्क पुरुख शुतुर्मुर्गक लम्बाई प्रायः 1.7 सँ  2 मीटर ( 5 फीट 7 इंच सँ  6 फीट  7 इंच) धरि, जखन कि पुर्ण वयस्क स्त्री शुतुर्मुर्गक लम्बाई 1.8 सँ  2.75 मीटर ( 6 सँ  9 फिट)  धरि भऽ सकैत अछि । साधारणतः एकर ओजन 60 कि॰ ग्रा॰ सँ  130 कि॰ ग्रा॰ धरि होइत अछि पर कखनो – कखनो 157 कि॰ ग्रा॰ धरि सेहो देखल गेल अछि । एकर टाँग आ गर्दनि नाम – नाम, धऽर भाग पैघ आ भारी पर मूरी बहुत छोट होइत अछि । जमीन सँ मूरी धरिक एकर उँचाई करीब 2  मीटर (6.6 फीट) तक होइत अछि ।  मूरीक आकार छोट रहितहु आँखि बहुत पैघ – पैघ होइत अछि । एकर आँखिक आकार समस्त रीढ़युक्त प्राणी (Vertebrates; जाहि प्राणी सभ मे रीढ़क हड्डी या ओकर समान कोनो संरचना होइत अछि) सभ मे सभसँ पैघ होइत अछि – एकर आँखिक व्यास  (diameter) लगभग 50 मिली मीटर आर्थात्  2 इंच धरि होइत अछि । बहुतहि तीक्ष्ण देखबाक आ सुँघबाक शक्तिक कारण ओ दूरहि सँ अपन दुश्मन प्राणी सभक आहटि बूझि सकैत अछि आ सचेत भऽ सकैत अछि । पवन – अपना सभ मैथिल जेकाँ नञि, कि लऽग मे बैसलो दुश्मन केँ नञि चीन्हि सकी । अपन घऽर धू – धू कऽ जड़ैत रहय आ दोसराक संग बैसि कऽ थोपड़ी बजबैत रही । हम -  हूँऽऽ । बड्ड फुराए छऽ तोरो । खैर, जीव विज्ञान वा प्राणीशास्त्रक (Life Science / Biology / Zoology)   भाषा मे एकर नाँव स्ट्रुथिओ कैमेलस् (Struthio camelus)  थिक । नन्दू – कैमेल माने ऊँट । हम – हाँ, कैमेल माने ऊँट । ऊँटहि सन शुतुर्मुर्गक पीठ पर सेहो कुब्बर होइत अछि आ रहितो अछि ऊँटहि जेना मरूस्थलहि मे - तेँ कैमेलस् । एकर पएरक हड्डी आ मांसपेशी बहुत मजबूत होइत अछि आ तेँ विपत्तिक समय मे ओ 70 कि॰ मि॰ प्रति घण्टाक गति सँ प्रायः आधा घण्टा धरि दौड़ि सकैत अछि । ओ सभ झुण्ड मे रहैत अछि जकर नेतृत्व कोनो ने कोनो पुरुख शुतुर्मुर्ग करैत अछि । एक झुण्डक सभ स्त्री सदस्य लोकनि माटिक तऽर मे बनल एक्कहि घोसला मे अण्डा दैत छथि । आ ई अण्डा सभ देखै मे भलेहि हमरा सब केँ एकरँगाह लागय पर सभ स्त्री शुतुर्मुर्ग अपन अपन अण्डा केँ चीन्हि सकैत छथि - छै ने आश्चर्यक गप्प ! आ एतबहि नञि स्त्री शुतुर्मुर्गक एक अण्डाक व्यास (diameter) 30 सँ  60 सेण्टी मीटर ( 12 सँ  24 इंच) धरि भऽ सकैत अछि । बब्बन – अरे ! ई तऽ फूटबॉल सऽ सेहो पैघ होइ हए । हम – हाँ । शुतुर्मुर्गक अण्डा संसार मे सभसँ पैघ होइत अछि ।  शुतुर्मुर्ग  ओना तऽ शाकाहारी होइत अछि पर भोजनक अभाव मे छोट – मोट कीड़ा मकोड़ा खा कऽ सेहो गुजर करैत अछि । माँसु, चमड़ा आ पंखक लेल पिछला 200 वर्ष मे एकर अत्यधिक शिकार होयबाक कारणेँ आइ ई विलुप्त होयबाक स्थिति मे आबि गेल अछि आ सम्प्रति संरक्षित वन्य प्राणी अछि । प्रिया – ई तऽ बहुत दुखक गप्प थिक । हम – हाँ से तऽ छै । शुतुर्मुर्गक बाद उँचाई मे दुनिञाक सभसँ पैघ चिड़ै अछि – एमू (Emu) । एकर अधिकतम् ऊँचाई 1.5  सँ 1.9 मीटर (5 फीट सँ  6 फीट  3 इंच धरि) होइत अछि । ओ ऑस्ट्रेलिया केर मूल निवासी अछि आ ओतहि पाओल जाइत अछि । ओकर जैववैज्ञानिक नाँव थिक ड्रोमैअस नॉवीहॉल्लैण्डी (Dromaius novaehollandiae) । एमू प्रायः समस्त ऑस्ट्रेलिया मे विचरण करैछ । आ ताहि कारणेँ ...................... ................... आ ताहि कारणेँ ओ ऑस्ट्रेलिया केर राष्ट्रिय चिड़ै थिक – विकास बीच्चहि मे बाजि उठल । हम – अरे वाह अहाँ केँ तऽ बूझल अछि । विकास – हाँ G.K. केर किताब मे पढ़ने छलियै । हम - एमू ओना तऽ शाकाहरी होइत अछि पर विपत्तिक समय मे सर्वाहारी (Omnivorous)  भऽ जाइत अछि आ अपन भूख मेटाबय लेल चमगादर आ छोट – छोट कीड़ा मकोड़ा केँ सेहो खा जाइत अछि । एकर पएर बहुत मजबूत आ तीनू औंठाक नऽह तिक्ष्ण नोक वाला भाला सन चांगुर (पञ्जा) मे परिवर्तित भऽ गेल अछि । ई चांगुर एतेक मजबूत होइत अछि कि लोहाक ताड़क सामान्य छहड़देवाली केँ तोड़ि सकैत अछि आ शिकारी शत्रु सभ सँ अपन रक्षा करबाक हेतु प्रयुक्त होइछ । सोनी – ई तऽ शुतुर्मुर्गे जेकाँ अछि । हम – हाँ किछु – किछु पर ओहि सँ अलग विशेषता सेहो रखैत अछि । जेना कि जरूरत पड़ला पर ओ पानि मे हेल सकैत अछि । एमू राति मे लगातार नञि सूति सकैत अछि । ओ ओना तऽ करीब  7  घण्टा सुतैत अछि पर हरेक 90-120 मिनट पर किछु खएबाक लेल वा मल विसर्जनक लेल उठैत अछि । एहि प्रकारेँ एक राति मे ओ निन्न सँ चारि सँ छौ बेर उठैत अछि । शुतुर्मुर्ग बेशी समय झुण्ड मे रहैत अछि आ यथासम्भव मनुक्ख सँ दूर रहए चाहैत अछि जखन कि एमू बेशी समय एकसरि रहैत अछि पर ओकरा मनुक्खक  उपस्थिति सँ परहेज नञि छै ।  उनटहि ओ उत्सुकतावश मनुक्खक घऽरक नजदीक सेहो अबैत अछि आ मनुक्ख तथा आन जीवक चेष्टा वा नकल सेहो करैत अछि । प्रिया – तखन तऽ ओहो एहि मामिला मे नकलची बानर आ सुग्गा सनि भेल । हम – एकदम्महि की । स्त्री एमू बहुत बेर दोसर एमू केर घोसला मे अपन अण्डा दैत अछि । एहि तरहक घटना केँ जीवविज्ञान मे पोषक परजीविता (Brood parasitism) कहल जाइत अछि । पवन – यौ एहने काज कोयली सेहो करैत अछि । ओ कौआ केर घोसला मे चुपचाप अण्डा दैत अछि आ अपने भागि जाइत अछि । कौअहि कोयलियोक अण्डाक केँ अप्पन अण्डा बुझि देख - रेख करैत रहैत अछि । हम – ठीक बुझल अछि पवन बाबू । बस थोड़ेक अन्तर छै, कौआ आ कोयली दूनू अलग अलग तरहक चिड़ै अछि पर एहि ठाम एक एमू दोसर एमूक घोसला मे अण्डा दैत अछि । एमू केर सम्पुर्ण आयु 10 सँ 20 वर्षक होइत छैक । 1788  ई॰ मे जखन यूरोपवासी पहिल बेर ऑस्ट्रेलिया मे बसय गेलाह तऽ ओ खएबाक लेल एमू केर मांसु आ डिबिया जड़यबाक लेल एमू केर चर्बी प्रयोग करैत छलाह । एखनहु बहुत जगह मुर्गी आ बत्तख जेकाँ मांसु, चमड़ा आ चर्बी केर लेल एकरा पोषल जाइत अछि । विकास – ई तऽ पटना केर चिड़ियाखाना मे सेहो छै । ओतऽ एहने सनि एकटा आओरो चिड़ै छै जकर माथ पर कलगी रहैत छै गर्दनि नीला रंगक रहैत छै आ गर्दनि केर आगाँ भाग मे लाल रंगक भालरि लटकैत रहैत छै । प्रिया – से कोन ? विकास – ओकर नाम छै ........... क् ........ क् ...... केशो...... अरे याद नञि आबि रहल अछि ठीक सऽ । पर ओहो ऑस्ट्रेलिया केर मूल निवासी अछि । हम – विकास सही कहि रहल अछि । चलू नाँव हऽम बताए दैत छी । ओकर नाँव अछि कैसोवरी (Cassowary) । ई उत्तरपुर्वी ऑस्ट्रेलिया, न्यु गिनी (New Guinea) आ आस पड़ोसक द्वीप सभक आर्द्र वर्षावन (Humid Rainforest) केर मूल निवासी अछि । सम्प्रति एकर तीनि टा जाति जिबैत अछि – दक्षिणी कैसोवरी / कैजुएरिअस् कैजुएरिअस् (Casuarius casuarius), उत्तरी कैसोवरी / कैजुएरिअस् अनअपेण्डिकुलेटस् (Casuarius unappendiculatus) आ वामन या छोटका कैसोवरी / कैजुएरिअस् बेन्नेट्टाई (Casuarius bennetti) । एहि मे सँ दक्षिणी कैसोवरी विश्वक सभसँ भारी चिड़ै (शुतुर्मुर्गक बाद) आ ऊँचाई मे तेसर सभसँ पैघ चिड़ै (शुतुर्मुर्ग आ एमूक बाद) अछि ।  एकर कलगी केँ कैस्क्यू (Casque) कहल जाइत छै, जे कि सम्भवतः अवाज ग्रहण (sound reception & acoustic communication) करबाक काज करैत अछि ।  ओना तऽ ई सर्वभक्षी (Omnivorous) अछि पर विशेष रूप  सञो फलभक्षी (Frugivorous) अछि । जखन गाछ सँ फऽल पाकि कऽ खसए लागैत अछि तऽ हरेक कैसोवरी एक - एक टा गाछ चुनि कऽ ओकरा नीचा मे बैसि जाइत अछि आ खसल फऽल सभ खा कऽ गुजर करैत अछि । सेब आ केरा सन पैघ फऽल सभ केँ सेहो बीया सहिते सौंसे भकसि जाइत अछि । फऽल खसब समाप्त भेला पर ओतय सञो आन गाछक नीचा या अनतऽ चलि जाइत अछि । नवजात कैसोवरी मैलछौंह रंगक आ भूरा रंगक धारीयुक्त (brown-striped) होइत अछि ।  एकर आयु प्रायः 40 सँ 50 वर्षक मानल जाइत अछि । एकर माँसु सीझबा मे आ पचबा मे बहुत कठिन होइछ, तेँ प्रायः उपयोग नञि कयल जाइत अछि । बब्बन – यौ, ईहो पानि मे हेलि सकय हए की ? हम – बेस पूछल बब्बनजी अपने । ई पानि मे हेलए मे माहिर अछि – हेलि कऽ पैघ – पैघ नदी केँ पार कऽ सकैत अछि आ समुद्रहु मे आराम सँ हेलि सकैत अछि । एतबहि नञि घनगर जंगल – झाड़ मे सेहो करीब 50 कि॰ मी॰ प्रति घण्टा केर गति सँ दौड़ि सकैत अछि आ 1.5 मीटर ( करीब 5 फीट) धरि कूदि सकैत अछि वा छड़पि (jump) सकैत अछि । बब्बन – बेज्जोर । सोनी – एकर बाद आब कक्कर बारी छै ? पवन – तोहर । ...................ई सुनितहि सभ धिया – पुता भभा कऽ हँसि पड़ल । हम – सुनह आब राति बहुत भऽ गेल छैक तेँ अजुका खिस्सा आइ बीचहि मे रोकैत छी । काल्हि खन साँझ मे आगा कहबह । सोनी – नञि आइए पूरा करए पड़त । हम – हमरा कोनो दिक्कति नञि पर अहाँ सभक माए – बाबू अहाँ सभ केँ डँटताह । ओना सूतब सेहो जरूरी थिक शरीरक लेल । जँ भरि राति खिस्से सुनैत रहब तऽ सूतब कखन ? आ से नञि तऽ काल्हि भोरे फेर इस्कूल कोना जायब ? प्रिया – ठीके कहय छी अहाँ । हम सभ जाइत छी । सोनी – पर हम सभ अहाँ केँ छोड़ब नञि, काल्हि पूरा करइए टा पड़त खिस्सा । हम – जरूर । (खिस्सा केर शेष भाग अगिला अंक मे) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet   -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.) Output: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) English to Maithili Maithili to English इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष  प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक  उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि

अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ ,  हटा क’ नहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६

  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/  कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड़ / बड़ी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍  ... समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍। जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍ चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि‍ बढ़इन बढ़न्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍ १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍ १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍ १८३. लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बि‍तौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/ करेलखिन्ह/ करेलखि‍न १८९. करएलन्हि/ करेलनि‍ १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍ २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍ २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि‍/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय Festivals of Mithila DATE-LIST (year- 2011-12) (१४१९ साल) Marriage Days: Nov.2011- 20,21,23,25,27,30 Dec.2011- 1,5,9 January 2012- 18,19,20,23,25,27,29 Feb.2012- 2,3,8,9,10,16,17,19,23,24,29 March 2012- 1,8,9,12 April 2012- 15,16,18,25,26 June 2012- 8,13,24,25,28,29 Upanayana Days: February 2012- 2,3,24,26 March 2012- 4 April 2012- 1,2,26 June 2012- 22 Dviragaman Din: November 2011- 27,30 December 2011- 1,2,5,7,9,12 February 2012- 22,23,24,26,27,29 March 2012- 1,2,4,5,9,11,12 April 2012- 23,25,26,29 May 2012- 2,3,4,6,7 Mundan Din: December 2011- 1,5 January 201225,26,30 March 2012- 12 April 2012- 26 May 2012- 23,25,31 June 2012- 8,21,22,29 FESTIVALS OF MITHILA Mauna Panchami-20 July Madhushravani- 2 August Nag Panchami- 4 August Raksha Bandhan- 13 Aug Krishnastami- 21 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 29 August Hartalika Teej- 31 August ChauthChandra-1 September Karma Dharma Ekadashi-8 September Indra Pooja Aarambh- 9 September Anant Caturdashi- 11 Sep Agastyarghadaan- 12 Sep Pitri Paksha begins- 13 Sep Mahalaya Aarambh- 13 September Vishwakarma Pooja- 17 September Jimootavahan Vrata/ Jitia-20 September Matri Navami- 21September Kalashsthapan- 28 September Belnauti- 2 October Patrika Pravesh- 3 October Mahastami- 4 October Maha Navami - 5 October Vijaya Dashami- 6 October Kojagara- 11 Oct Dhanteras- 24 October Diyabati, shyama pooja-26 October Annakoota/ Govardhana Pooja-27  October Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja-28 October Chhathi-kharna -31 October Chhathi- sayankalik arghya - 1 November Devotthan Ekadashi- 17 November Sama poojarambh- 2 November Kartik Poornima/ Sama Bisarjan- 10 Nov ravivratarambh- 27 November Navanna parvan- 29 November Vivaha Panchmi- 29 November Makara/ Teela Sankranti-15 Jan Naraknivaran chaturdashi- 21 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 28 January Achla Saptmi- 30 January Mahashivaratri-20 February Holikadahan-Fagua-7 March Holi-9 Mar Varuni Yoga-20 March Chaiti  navaratrarambh- 23 March Chaiti Chhathi vrata-29 March Ram Navami- 1 April Mesha Sankranti-Satuani-13 April Jurishital-14 April Akshaya Tritiya-24 April Ravi Brat Ant- 29 April Janaki Navami- 30 April Vat Savitri-barasait- 20 May Ganga Dashhara-30 May Somavati Amavasya Vrata- 18 June Jagannath Rath Yatra- 21 June Hari Sayan Ekadashi- 30 June Aashadhi Guru Poornima-3 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाऊ। ६.विदेह मैथिली क्विज  :  http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ"  : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स  : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI  FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha VIDEHA केर सदस्यता लिअ Top of Form Bottom of Form ईमेल : एहि समूहपर जाऊ २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ Top of Form Subscribe to VIDEHA Powered by us.groups.yahoo.com Bottom of Form २३.गजेन्द्र ठाकुर इ‍डेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक  निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइट http://www.shruti-publication.com/ पर । महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे। कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७ Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding: Language:Maithili ६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india) (add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)

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Details for purchase available at print-version publishers's site website: http://www.shruti-publication.com/ or you may write to e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com विदेह: सदेह : १: २: ३: ४ तिरहुता : देवनागरी "विदेह" क, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। विदेह:सदेह:१: २: ३: ४ सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com  or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com २. संदेश- [ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ] १.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत। २.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी। ३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत। ४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन। ५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन  भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी। ६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। १०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। १२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। १४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी। १५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी। १६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रिं‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे।  मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण-  श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)...   अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग। १७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल। १८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई। १९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत। २०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ। २१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ। २२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य। २३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई। २४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि। २५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर) २६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक। २७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत। २८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी। २९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना। ३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी। ३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि। ३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई। ३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई। ३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई। ३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक। ३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ। ३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम। ३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना। ३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ। ४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल। ४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई। ४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य। ४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना। ४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि। ४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक। ४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत। ४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि। ४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रश‍ंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत। ४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना। ५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना। ५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना। ५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल। ५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना। ५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक अनेक धन्यवाद; कतेक बरखसँ हम नेयारैत छलहुँ जे सभ पैघ शहरमे मैथिली लाइब्रेरीक स्थापना होअए, अहाँ ओकरा वेबपर कऽ रहल छी, अनेक धन्यवाद। ५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना। ५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल। ५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई। ५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि। ५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी। ६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि। ६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब। ६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी। ६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही। ६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय। ६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना। ६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय। ६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह। ६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना । ६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ। ७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक) ७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि। ७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि। ७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मे  समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि। ७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना। ७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि। ७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि। ७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि। ७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल। ७९. श्री हीरेन्द्र कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: वनीता कुमारी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ एहिमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-12 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ९८ म अंक १५ जनवरी २०१२ (वर्ष ५ मास ४९ अंक ९८) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ९८ म अंक १५ जनवरी २०१२ (वर्ष ५ मास ४९ अंक ९८) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA

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