VIDEHA — Issue 100 / अंक १००

Publication: VIDEHA · Issue: 100
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504 505 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १०० म अंक १५ फरबरी २०१२ (वर्ष ५ मास ५० अंक १००) वि  दे  ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine   नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own script Roman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi २०म विश्व पुस्तक मेला २०१२, प्रगति मैदान, नव दिल्ली २१म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी (अवसर बीसम नव दिल्ली विश्व पुस्तक मेला २०१२ जखन भारतीय सिनेमाक सए बर्ख, दिल्लीक राजधानी रूपमे सए बर्ख आ रवीन्द्रनाथ टैगोरक १५०म जयन्ती संगे पड़ि रहल अछि, एकर आयोजक रहैत अछि नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत, सौजन्य अंतिका प्रकाशन) २५ फरबरी २०१२ सँ ०४ मार्च २०१२,प्रतिदिन भोर ११ बजेसँ ८ बजे राति धरि, स्थान- अंतिका प्रकाशन , स्टाल 80-81, हॉल 11, प्रगति मैदान,२०म विश्व पुस्तक मेला 2012 नव दिल्ली। ई विश्व पुस्तक मेला दू सालमे एक बेर होइत अछि आ ४० साल पहिने १९७२ ई. मे एकर पहिल आयोजन भेल छल। http://www.antikaprakashan.com/ (अंतिका प्रकाशनक साइट- मैथिली प्रकाशक) http://www.shruti-publication.com (श्रुति प्रकाशनक साइट- मैथिली प्रकाशक) http://esamaad.blogspot.in/2012/02/blog-post_25.html (समदिया, पहिल मैथिली न्यूज पोर्टल २००४ ई.सँ) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश विदेहक अंक १०० २. गद्य २.१.अरुण कुमार सिंह- तीन दिवसीय कार्यशालाक आयोजन २.२.आशीष अनचिन्हार- २टा विहनि कथा २.३.राजेन्‍द्र कुमार प्रधान-२१म शताब्दीक पहिल दशकक मैथिली उपन्यासमे राजनीतिक चेतना- राजेन्‍द्र कुमार प्रधान २.४.जगदानन्द झा 'मनु' -चोनहा - (धारावाहिक मैथिली कथा) २.५.१.कुमार मनोज कश्यप- सीमान (विहनि कथा) २.अमित मिश्र- कथा -प्रेम नै जहर छै ३.जगदानंद झा 'मनु'-मिथिलामे जाति-पाति २.६.सुमित आनन्द- त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन २.७.राजदेव मण्‍डलक-उपन्‍यास- हमर टोल- गतांशसँ आगाँ २.८.अतुलेश्वर- गाम मे नहि फागु आ नहि भोरक पराती ३. पद्य ३.१.कामिनी कामायनी-शकुनतला ३.२.१.ओमप्रकाश झा- किछु गजल २.प्रभात राय भट्ट ३.शान्तिलक्ष्मी चौधरी ३.३.१. जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ २.वनीता कुमारी ३.अमित मिश्र- गजल-कविता ४.आनन्द झा -गीत- गै माए ५.जगदानंद झा 'मनु' कविता –सभसँ आगु आगु छी ३.४.१.आशीष अनचिन्हार-दीर्घ कविता-सोझ बाट पर चलैत-चलैत २.नवीन ठाकुर-कालदिशा- ३.५.१.जगदीश प्रसाद मण्‍डल २.अनिल मल्लिक- गीत-गजल ३.६.१.निशान्त झा २.सत्यनारायण झा ३.जवाहर लाल कश्यप ३.७.१.डॉ॰ शशिधर कुमर २.नवीन कुमार "आशा" ३.८.मुन्नाजी- १७ टा गजल ४. मिथिला कला-संगीत१.वनीता कुमारी २.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) ३. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी) ५.बालानां कृते-डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”- अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा दिवस-(21 फरबरीक अवसरि पर विशेष) ६. भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] ८. भारोपीयभाषासन्दर्भे ध्वनिविमर्शः-विद्यावाचस्पति डा. सदानन्द झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक विदेह आर.एस.एस.फीड। "विदेह" ई-पत्रिका ई-पत्रसँ प्राप्त करू। अपन मित्रकेँ विदेहक विषयमे सूचित करू। ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a  Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add  बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ Videha Radio मैथिली देवनागरी वा मिथिलाक्षरमे नहि देखि/ लिखि पाबि रहल छी, (cannot see/write Maithili in Devanagari/ Mithilakshara follow links below or contact at ggajendra@videha.com) तँ एहि हेतु नीचाँक लिंक सभ पर जाऊ। संगहि विदेहक स्तंभ मैथिली भाषापाक/ रचना लेखनक नव-पुरान अंक पढ़ू। http://devanaagarii.net/ http://kaulonline.com/uninagari/  (एतए बॉक्समे ऑनलाइन देवनागरी टाइप करू, बॉक्ससँ कॉपी करू आ वर्ड डॉक्युमेन्टमे पेस्ट कए वर्ड फाइलकेँ सेव करू। विशेष जानकारीक लेल ggajendra@videha.com पर सम्पर्क करू।)(Use Firefox 4.0 (from WWW.MOZILLA.COM )/ Opera/ Safari/ Internet Explorer 8.0/ Flock 2.0/ Google Chrome for best view of 'Videha' Maithili e-journal at http://www.videha.co.in/ .) Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Book/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ (उच्चारण, बड़ सुख सार आ दूर्वाक्षत मंत्र सहित) डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाऊ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू। गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज' मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण" विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाऊ। "मैथिल आर मिथिला" (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) पर जाऊ। ऐ बेर मूल पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ? श्री राजदेव मण्डलक “अम्बरा” (कविता-संग्रह)  13.28% श्री बेचन ठाकुरक “बेटीक अपमान आ छीनरदेवी”(दूटा नाटक)  9.59% श्रीमती आशा मिश्रक “उचाट” (उपन्यास)  6.27% श्रीमती पन्ना झाक “अनुभूति” (कथा संग्रह)  5.9% श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”क “नो एण्ट्री:मा प्रविश (नाटक)  5.9% श्री सुभाष चन्द्र यादवक “बनैत बिगड़ैत” (कथा-संग्रह)  5.9% श्रीमती वीणा कर्ण- भावनाक अस्थिपंजर (कविता संग्रह)  5.9% श्रीमती शेफालिका वर्माक “किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा)  7.38% श्रीमती विभा रानीक “भाग रौ आ बलचन्दा” (दूटा नाटक)  6.64% श्री महाप्रकाश-संग समय के (कविता संग्रह)  5.9% श्री तारानन्द वियोगी- प्रलय रहस्य (कविता-संग्रह)  5.9% श्री महेन्द्र मलंगियाक “छुतहा घैल” (नाटक)  7.01% श्रीमती नीता झाक “देश-काल” (कथा-संग्रह)  6.64% श्री सियाराम झा "सरस"क थोड़े आगि थोड़े पानि (गजल संग्रह)  7.38% Other:  0.37% ऐ बेर बाल साहित्य पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ? श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जीक “तरेगन”(बाल-प्रेरक कथा संग्रह)  54.35% श्री जीवकांत - खिखिरक बिअरि  26.09% श्री मुरलीधर झाक “पिलपिलहा गाछ  17.39% Other:  2.17% ऐ बेर युवा पुरस्कार(२०१२)[साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन कोन लेखक उपयुक्त छथि ? श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह)  25.64% श्री विनीत उत्पलक “हम पुछैत छी” (कविता संग्रह)  7.69% श्रीमती कामिनीक “समयसँ सम्वाद करैत”, (कविता संग्रह)  6.41% श्री प्रवीण काश्यपक “विषदन्ती वरमाल कालक रति” (कविता संग्रह)  6.41% श्री आशीष अनचिन्हारक "अनचिन्हार आखर"(गजल संग्रह)  17.95% श्री अरुणाभ सौरभक “एतबे टा नहि” (कविता संग्रह)  6.41% श्री दिलीप कुमार झा "लूटन"क जगले रहबै (कविता संग्रह)  7.69% श्री आदि यायावरक “भोथर पेंसिलसँ लिखल” (कथा संग्रह)  6.41% श्री उमेश मण्डलक “निश्तुकी” (कविता संग्रह)  12.82% Other:  2.56% ऐ बेर अनुवाद पुरस्कार (२०१३) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे के उपयुक्त छथि? श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर)  34.33% श्री महेन्द्र नारायण राम "कार्मेलीन" (कोंकणी उपन्यास श्री दामोदर मावजो)  11.94% श्री देवेन्द्र झा "अनुभव"(बांग्ला उपन्यास श्री दिव्येन्दु पालित)  14.93% श्रीमती मेनका मल्लिक "देश आ अन्य कविता सभ" (नेपालीक अनुवाद मूल- रेमिका थापा)  11.94% श्री कृष्ण कुमार कश्यप आ श्रीमती शशिबाला- मैथिली गीतगोविन्द ( जयदेव संस्कृत)  11.94% श्री रामनारायण सिंह "मलाहिन" (श्री तकषी शिवशंकर पिल्लैक मलयाली उपन्यास)  13.43% Other:  1.49% फेलो पुरस्कार-समग्र योगदान २०१२-१३ : समानान्तर साहित्य अकादेमी, दिल्ली श्री राजनन्दन लाल दास  55.32% श्री डॉ. अमरेन्द्र  19.15% श्री चन्द्रभानु सिंह  23.4% Other:  2.13% १. संपादकीय विदेहक सएम अंक ( सम्पादकीय उमेश मण्डल, सह-सम्पादक, बेरमा, तमुि‍रया, मधुबनी।) १ मैथि‍लीमे ई-पत्रकारि‍ता- उमेश मंडल ई-पत्रकारि‍ताक प्रारम्‍भ भेने लेखक ओ पाठक वर्गमे काफी वृद्धि‍ देखल जाइत अछि‍। एकर अनेक कारणमे महत्‍वपूर्ण अछि भौगोलि‍क दूरीक अंत। जइसँ वि‍श्वमे पसरल मैथि‍ली भाषी, साहि‍त्‍य प्रेमी सभ सोझा एलाह। ऐठाम अपन वि‍चार व्‍यक्‍त करबाक पूर्ण स्‍वतंत्रा लेखको आ पाठकोकेँ भेटैत छन्‍हि‍। रचनापर त्‍वरि‍त टि‍प्‍पणी-समीक्षा-समालोचनाक सुवि‍धा सेहो इन्‍टरनेटपर अछि‍। इन्टरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थितिक रूपमे विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" ५ जुलाइ २००४ सँ http://gajendrathakur.blogspot.com/ लिंकपर उपलब्ध अछि। ओना याहू जियोसिटीजपर २००० ईं.सँ ई साइट रहए, जे याहू द्वारा जियोसिटीज बन्द कऽ देलाक बाद आब उपलब्ध नै अछि। मैथिली ई-पत्रकारिताक आरम्भक श्रेय विदेहकेँ छै आ तँए एकर नाओं अछि‍ ‘वि‍देह प्रथम मैथि‍ली पाक्षि‍क ई-पत्रि‍का’ वर्तमानमे ९९म अंक ई-प्रकाशि‍त अछि‍। १५ फरवरी २०१२केँ १००म अंक ई-प्रकाशि‍त होएत। गूगल एनेलेटिक्स डेटा केर मोताबि‍क ‘विदेह ई पत्रिका’केँ ५ जुलाइ २००४ई.सँ अखन धरि ११६ देशक १,५०२ ठामसँ ७२,०४३ गोटे द्वारा ३५,४५२ विभिन्न आइ.एस.पी. सँ ३,३६,७०७ बेर देखल गेल अछि। विदेह मैथिली पोथी डाउनलोड  http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi पर उपलब्ध अछि। लगभग २०० सँ बेशी मैथिली पोथी देवनागरी, तिरहुता आ ब्रेल तीनू लिपिमे जे पी.डी.एफ. फाइलमे फ्री डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि अनेक रचनाकारक अलाबे जगदीश प्रसाद मंडलक 2टा कथा संग्रह, 2टा एकांकी संग्रह, 3टा नाटक, 2टा कवि‍ता संग्रह, पाँचटा उपन्‍यासक सेहो उपलब्‍ध अछि‍। एकर अतिरिक्त ११००० सँ बेशी, तिरहुतामे लिखल, ५०० बर्ख पुरान तालपत्र, विदेह द्वारा स्कैन कऽ ओकर देवनागरी लिप्यंतरणक संग ऐ साइटपर डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि। सरकारी आ गएर सरकारी संस्था सभ द्वारा अखन धरि कएल समस्त प्रयाससँ ई लगभग १०० गुणा बेसी अछि। ऐ समस्त कार्यमे लगभग १०,००० घण्टाक श्रम लगाओल गेल अछि आ एतए तिरहुता, ब्रेल आ अन्‍तर्राष्‍टीय फोनेटिक अल्‍फाबेट (आइ्. पी. ए) सिखबाक सेहो बेबस्‍था कएल गेल छै आ तइ संबंधी पोथी जे श्री गजेन्‍द्र ठाकुर द्वारा ि‍लखित अछि‍ ओ फ्री डोनलोड लेल सेहो उपलब्‍ध अछि। विदेह मैथिली ऑडियो संकलन http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio, एतए विविध विधाक ऑडियो जेना कथा, कवि‍ता, गजल, हाइकू, टनका, हैबून, हैगा इत्‍यादि‍, देल गेल अछि। ऐठामक मुख्य आकर्षण अछि ५० घण्टाक ऑडियो संकलन जे मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीत जे मैथिलीकेँ जाति आधारित भाषा हेबाक अवधारणापर मारक प्रहार सिद्ध कए रहल अछि। मैथिली वीडियोक संकलन http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video, एतए नाटक, सेमीनार, वर्षकृत्य, रसनचौकी, सामा-चकेबा, कवि-सम्मेलन, विदेहक नाट्य आ साहित्य उत्सवक वीडियो, मिथिलाक खोज, गीत-ंसंगीत, मैथिली वीडियो, वोकल आर्काइव, सगर राति दीप जरए, साक्षात्कार, विद्यापति पर्व, मैथिली गजल आदिक वीडियो उपलब्ध अछि। ऐठामक मुख्य आकर्षण अछि, मिथिलाक सभ जाति आ धर्मक संस्कार, लोकगीत आ व्यवहार गीतक वीडियो, आ पहिल बेर विदेहक सौजन्यसँ सतमा कक्षाक दीक्षा भारतीक गाओल ‘गोविन्ददास’क गीत। ऐमे लगभग ५००० घण्टाक मेहनति विदेहक सदस्यगण द्वारा लगाओल गेल अछि। विदेह मिथिला चित्रकला/आधुनिक चित्रकला आ चित्र- http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ लिंकपर उपलब्ध अछि ‘मिथिला चित्रकला, आधुनिक चित्रकला, रंगमंच, चौबटिया-सड़क नाटक सहित कएक हजारसँ ऊपर फोटो अछि जइमे २०० सँ ऊपर ि‍मथि‍लाक वनस्पति, १०० सँ ऊपर मि‍थि‍लाक जीव-जन्तु आ १०० सँ ऊपर मिथिलाक जनजीवनक किसानी आ कारीगरी संस्कृतिक फोटो सेहो अछि‍ जइमे ५००० घण्टाक मेहनति वि‍देह सदस्यगण द्वारा लगाओल गेल अछि। विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ पर मैथिलीक सभ वेबसाइटक विवरण सहजताक लेल उपलब्ध अछि। विदेह द्वारा मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित कए http://madhubani-art.blogspot.com/ साइटपर राखल गेल अछि। एतए सत्तरि‍टा पोस्ट अछि जकरा माध्यमसँ मैथिलीक श्रेष्ठ साहित्य विश्वक समक्ष राखल गेल अछि। ऐ अनुवादमे लगभग ७०० घण्टासँ बेसी समैक श्रम खर्च कएल गेल अछि। विदेह:सदेह- पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ ई मैथि‍ली भाषाक मि‍थि‍लाक्षरमे सज्‍जि‍त पहि‍ल वेबसाइट अछि‍। विदेह:ब्रेल- मैथिली ब्रेलमे : पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ पर मैथिलीक पहिल साइट अछि जे क्रमश: मिथिलाक्षर आ ब्रेलमे अछि जेकारा स्‍पेशल स्‍क्रीन टच माॅनि‍टरसँ संबंधि‍त आदमी पढ़ि‍ सकै छथि‍ तहि‍ना स्‍पेशल प्रि‍ंटरसँ प्रि‍ंट सेहो नि‍कालि‍ सकै छथि‍। जइ दुनूमे लगभग हजार-हजार (१०००-१०००) घण्टाक मेहनति लागल अछि। नेना भुटका साइट मैथिलीमे बच्चा सबहक लेल एक मात्र साइट अछि जे संगीतज्ञ माँगनि खबासक नामपर- http://mangan-khabas.blogspot.com/ राखल गेल अछि। बाल साहि‍त्‍य जेना बाल कथा, प्रेरक कथा, बाल कवि‍ता आदि‍ समस्‍त बाल साहि‍त्‍यकेँ आधुनि‍क-वैज्ञानि‍क दृष्‍टकोणसँ लि‍खल श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डलक १२५ गोट प्रेरक कथाक अलाबे वि‍भि‍न्न लेखक केर साहि‍त्‍य ऐपर सहजताक संग उपलब्‍ध अछि‍ जेकरा वि‍श्वमे पसरल नेना, बढ़ैत नेना आ कि‍शोरक लेल फ्री डॉनलोड हेतु उपलब्‍ध अछि‍। विदेह रेडियो: मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट- ऐठामसँ मैथि‍लीमे गीत-संगीत, कथा-कवि‍ता, गजल-हाइकू, टनका-हैबूनक संग अनेक परि‍चर्चा प्रसारि‍त कएल जाइत अछि‍। साइटक नाओं अछि‍- http://videha123radio.wordpress.com/ विदेहक फेसबुक चौबटिया- http://www.facebook.com/groups/videha/ ऐ चौबटि‍यापर ७७००सँ बेसी मैथिली भाषी सदस्य द्वारा गत एक सालमे १०,००० पोस्ट आ ११०० सँ बेसी फोटो पोस्ट कएल गेल अछि। प्रति‍दि‍न १५० टासँ ऊपर कॉमेट पोस्‍ट सभपर अबैए जइमे मि‍थि‍ला-मैथि‍ली वि‍कासपर स्‍वस्‍थ्‍य परि‍चर्चा होइए। विदेह मैथिली नाट्य उत्सव- मैथिली रंगमंचकेँ वैश्विक स्तर प्रदान केलक अछि जे श्री बेचन ठाकुरजी द्वारा http://maithili-drama.blogspot.com/ पर उपलब्ध अछि। एतए मैथिली आ अंग्रेजीमे मैथिली रंगमंचक चित्र-आ वीडियोक माध्यमसँ विस्तारसँ वर्णन १७५ पोस्टमे देलगेल अछि, ई मैथिलीक अखन धरिक  “स्लैपस्टिक ह्यूमर” बला रंगमंचक विरुद्ध विदेह मैथिली समानान्तर रंगमंचक प्रारम्भ केलक अछि। लगभग २००० घण्टाक मेहनति ऐ वेबसाइटपर अखन धरि भऽ चुकल अछि। एतए मिथिलाक गम-गाममे होइत मैथिली रंगमंचक अतिरिक्त, कोलकाता, जनकपुर, राजबिराज, पटना, दिल्ली आदिक रंगमंचक विवरण सेहो उपलब्ध अछि। समदिया- http://esamaad.blogspot.com/ पर पूनम मण्डल आ प्रियंका झा द्वारा २००४ ई.मे शुरू भेल, साहित्यिक पत्रकारिताक लीकसँ हटि कऽ न्यूज पोर्टलक वा ई-पेपरक रूपमे मैथिली पत्रकारिताकेँ एतएसँ प्रारम्भ भेल। अखन धरि ५२५ सँ बेसी पोस्ट ऐठाम भेल अछि। सर्वश्रेष्ठ न्यूजकेँ मासक समदिया पुरस्कार देल जाइत अछि। अगस्‍त २०१२मे सर्वश्रेष्‍ठ मैथि‍ली पत्रकारकेँ ‘विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान’सँ सम्मानित करबाक घोषणा अछि‍ जे आब साले-साल सेहो देल जाएत। ऐ वेबसाइटपर अखन धरि ५५०० घण्टाक मेहनति पूनम मण्डल आ प्रियंका झा टाइपसँ लऽ कऽ समाचार अपलोड करबाक कार्यमे कऽ चुकल छथि आ ई साइट श्री रामभरोस कापड़ि भ्रमरक सीरियल चोरिक भण्डाफोड़क अतिरिक्त ढेर रास उद्घाटन कऽ साहसिक सोद्देश्य मैथिली पत्रकारिताक परिचए दऽ चुकल अछि। मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ श्री गजेन्द्र ठाकुर, श्री बेचन ठाकुर, श्री विनीत उत्पल, श्री सुनील कुमार झा आ श्री आशीष अनचिन्हार द्वारा संचालित साइट अछि, ऐपर मैथिली, अंगिका, वज्जिका आ सुरजापुरीक पूर्ण विवरण उपलब्ध अछि। एतए अखन पचाससँ ऊपर पोस्ट उपलब्ध अछि। अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ एेपर ४८१टा गजल, २२टा कता, बन्द, नात, १२४टा रुबाइ, ७०टा करीब आलेखक अलाबे शेरो-शाइरीसँ संबंधित विडियो सेहो उपलब्‍ध अछि‍। मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ऐ वेबसाइट मैथिलीक साहित्यिक पत्रकारिताक प्रतिमान प्रस्तुत करैत अछि। मैथिली हाइकू (प्राकृत दृश्‍यपर ५/७/५) टनका (प्राकृत दृश्‍यपर ५/७/५/७/७) हैबून (प्राकृत दृश्‍यपर गद्यक एक-दू या तीन अनुच्‍छेदक अंतमे ओतबे हाइकू या टनका) हैगा (तत् संबंधी चि‍त्र), शेनर्यू आदिक थ्योरी आ प्रैक्टिस सभ एतए भेट जाएत। मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/- ऐ वेबसाइटपर मैथिलीक अन्तर्जालपर मानकीकृत स्वरूप नेपाल आ भारतक मैथिली भाषाशास्त्री लोकनिक मतक अनुसार। मैथिलीक साहित्यिक पत्रकारिताक प्रतिमान प्रस्तुत करैत अछि। नि‍ष्‍कर्षत: ऐ ई-पत्रकारितामे साहित्यिक आ राजनैतिक दुनू पत्रकारिता शामिल अछि जतए, दृश्य आ श्रव्य माध्यमक प्रचुर प्रयोग कएल गेल अछि। २ ि‍नर्मली, सुपौल, (बि‍हार)- मि‍िथलांचलक प्राथमि‍क आ मध्‍य वि‍द्यालयी शि‍क्षाक माध्‍यम् मैथि‍ली हेतु ‘वि‍देह’ वि‍चार गोष्‍ठी श्री राहुल कुमार जीक संयोजकत्‍वमे स्‍थानीय अशर्फी दास साहु समाज इण्‍टर महि‍ला कॉलेज परि‍सरमे दुपहर 2 बजेसँ कएल गेल जेकर अध्‍यक्षता केलनि‍- उपन्‍यासकार श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, दीप प्रज्‍वलन सह गोष्‍ठीक उद्घाटन केलनि‍ ि‍नर्मली महावि‍द्यालयक इति‍हास वि‍भागक वरीय व्‍याख्‍याता प्रो. जयप्रकाश साह, संचालन प्रो. हेम नारायण साह। प्रो. कपि‍लेश्वर साह, मरौना केर पूर्व जि‍ला पार्षद श्रीमती आशा देवी, अधि‍वक्‍ता रामलखन यादव, कवि‍ श्री राजदेव मण्‍डल, अधि‍वक्‍ता वीरेन्‍द्र कुमार ‘वि‍मल’ वि‍शि‍ष्‍ठ अति‍थि‍ रहथि‍। ऐ अवसरपर उपस्‍थि‍त छलाह ि‍नर्मली महावि‍द्यालय ि‍नर्मलीक मैथि‍ली वि‍भागक वरीय व्‍याख्‍याता  प्रो. श्रीमोहन झा, प्रो. मुकुल कुमार वर्मा, श्री वि‍नय कुमार रूद्र, अधि‍वक्‍ता भोला प्रसाद यादव, अवकाश प्राप्‍त शि‍क्षक श्रीकृष्‍ण राम, ि‍नर्मली महावि‍द्यालय केर हि‍न्‍दी वि‍भागक वरीय व्‍याख्‍याता डॉ. शि‍वकुमार प्रसाद, प्रो. उपेन्‍द्र   अनुपम, साहि‍त्‍यकार नन्‍द वि‍लास राय, मध्‍य वि‍द्यालय ि‍नर्मलीक प्रधानाध्‍यापक सत्‍य नारायण कामति‍, शि‍क्षक रामावतार साहु, शि‍क्षक अहमद कमाल मंजूर, मध्‍य वि‍द्यालय ि‍नर्मलीक सहायक शि‍क्षक जवाहर लाल गुप्‍ता, प्रो. सुशील कुमार, गणि‍त वि‍भागक व्‍याख्‍याता प्रो. दुर्गालाल साहु, इण्‍टर महि‍ला कॉलेजक प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार साह, भौति‍की वि‍भागक प्रो. लालबाबू साह, रामप्रकाश सि‍ंह, जि‍तेन्‍द्र प्रसाद यादव, चुन्नीलाल साह, मदन प्रसाद साह, वि‍ष्‍णुदेव कुमार मंडल, वि‍नोद कुमार साह, मुकुल साह, डीलर यदुराम, पुनि‍त लाल साहु, देवराम साह, वीरेन्‍द्र ठाकुर, चन्‍द्रशेखर मंडल जलेश्वर प्रसाद साहु आदि‍। सर्वसम्‍मति‍सँ ि‍नर्णय भेल माननीय मुख्‍यमंत्री श्री नीतीश कुमार जीकेँ जे कोसी महासेतुक उद्घाटन लेल 08 फरवरी 2012केँ ि‍नर्मली आबि‍ रहलाहेँ ओही अवसरपर उपरोक्‍त वि‍षय-वस्‍तुक स्‍मार पत्र प्रदान कएल जाए जइमे अधि‍क-सँ-अधि‍क लोकक हस्‍ताक्षर रहए। तै अनुसार स्मार-पत्र देल गेल http://esamaad.blogspot.in/2012/02/blog-post_08.html [-जयकांत मिश्रक याचिका (CWJC No. 7505/98) पर बिहार सरकार हाई कोर्टमे सेहो हारल छल -मुदा बिहार सरकार सुप्रीम कोर्टमे केने छल अपील (Civli Appeal No. (s)7266 of 2004, न्यायमूर्ति बी.सुदर्शन रेड्डी आ सुरिन्दर सिंह निज्झर ३० सितम्बर २०१० केँ सुनवाइ केलन्हि आ अपन निर्णयमे बिहार सरकारक अपील ठोकरा देलक। -बिहार आ झारखण्डक भागमे [बिहारक सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, वैशाली (हाजीपुर), मुंगेर, बाँका,  भागलपुर, मुजफ्फरपुर, मोतीहारी, किशनगंज, आ कटिहार जिला आ रिटक समय १९९८ ई. मे बिहार मुदा आब झारखण्डक देवघर, गोड्डा आ साहेबगंज जिला]  मैथिली अलग भाषा रूपमे बाजल जाइत अछि। जँ वर्गमे कमसँ कम १०टा छात्र आ स्कूलमे ४० टा   छात्र मैथिली माध्यमसँ शिक्षा प्राप्त करऽ चाहताह तँ सरकारकेँ से व्यवस्था करए पड़तैक।] [बिहार मे मिथिलांचल क्षेत्रमे प्राथमिक आ मध्य विद्यालयी शिक्षाक माध्यम मैथिली करबा लेल बिहार सरकारपर द्वाब बनेबा लेल ३ फरबरी २०१२ केँ विदेह द्वारा विचार गोष्ठीक आयोजन कएल जा रहल अछि आ संगमे हस्ताक्षर अभियान सेहो शुरू कएल जाएत, आ ८ फरबरी २०१२ केँ मुख्यमंत्री नीतिश कुमारकेँ ज्ञापन देल जाएत। श्री राहुल कुमार आ श्री अमरेन्द्र कुमार साहक संयोजकत्वमे विदेह विचार गोष्ठी  ३ फरबरी २०१२ केँ २ बजे अपराह्णसँ अशर्फी दास साहू समाज इण्टर महिला महाविद्यालय, निर्मली (जिला सुपौल) मे आयोजित हएत। सुप्रीम कोर्ट सेहो बिहार सरकारक अपीलकेँ खारिज कऽ देने अछि आ कोनो बाधा नै बचल अछि (http://esamaad.blogspot.in/2011/11/blog-post_14.html ) बिहारक मुख्यमंत्रीकेँ १४ अक्टूबर २०११केँ श्री जगदीश प्रसाद मण्डल आ श्री राजदेव मण्डलक ६ टा पोथी देल गेल छलन्हि आ ई मुद्दा उठाओल गेल छल (http://esamaad.blogspot.in/2011/10/blog-post_15.html)] [Indian Constitution has given special importance to primary education through the mother tongue. Article 350(A) of the Constitution spells out: "It shall be the endeavour of every State and of every local authority within the state to provide adequate facilities for instruction in the mother tongue at the primary stage of education to, children belonging to linguistic minority groups; and the President may issue such directions to any State as he considers necessary or proper for securing the provision of such facilities."] ३ नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ अभि‍नय- मुख्य अभिनय , सुश्री शि‍ल्‍पी कुमारी, उम्र- 17 पि‍ता श्री लक्ष्‍मण झा श्री शोभा कान्‍त महतो, उम्र- 15 पि‍ता- श्री रामअवतार महतो, हास्‍य-अभिनय सुश्री प्रि‍यंका कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री वैद्यनाथ साह श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पि‍ता- स्‍व. भरत ठाकुर नृत्‍य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री हरेराम यादव श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पि‍ता- नागेश्वर कामत चि‍त्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पि‍ता- श्री मोती मण्‍डल संगीत (हारमोनियम) श्री परमानन्‍द ठाकुर, उम्र- 30, पि‍ता- श्री नथुनी ठाकुर संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पि‍ता- स्‍व. चि‍ल्‍टू राउत संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पि‍ता- स्‍व. सरजुग राम शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडि‍त, उम्र- 45, पि‍ता- अशर्फी पंडि‍त काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा ( सम्पादकीय उमेश मण्डल, सह-सम्पादक, बेरमा, तमुि‍रया, मधुबनी।) गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com http://www.maithililekhaksangh.com/2010/07/blog-post_3709.html २. गद्य २.१.अरुण कुमार सिंह- तीन दिवसीय कार्यशालाक आयोजन २.२.आशीष अनचिन्हार- २टा विहनि कथा २.३.राजेन्‍द्र कुमार प्रधान-२१म शताब्दीक पहिल दशकक मैथिली उपन्यासमे राजनीतिक चेतना- राजेन्‍द्र कुमार प्रधान २.४.जगदानन्द झा 'मनु' -चोनहा - (धारावाहिक मैथिली कथा) २.५.१.कुमार मनोज कश्यप- सीमान (विहनि कथा) २.अमित मिश्र- कथा -प्रेम नै जहर छै ३.जगदानंद झा 'मनु'-मिथिलामे जाति-पाति २.६.सुमित आनन्द- त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन २.७.राजदेव मण्‍डलक-उपन्‍यास- हमर टोल- गतांशसँ आगाँ २.८.अतुलेश्वर- गाम मे नहि फागु आ नहि भोरक पराती अरुण कुमार सिंह तीन दिवसीय कार्यशालाक आयोजन विगत 19 सँ 21 सितम्बर 2011धरि ‘भारतीय भाषाक भाषा वैज्ञानिक सांख्यिकी संकाय’( एल.डी.सी.आई.एल.), भारतीय भाषा संस्थान मैसूर-6 द्वारा तीन दिवसीय कार्यशालाक आयोजन कएल गेल। मैथिली, हिन्दी, उर्दू विषयक ‘पार्टस आफ स्पीच’ सँ संबंधित कार्यशालाक विषय छल ‘लेक्चर कम वर्कशाप आन पी. ओ. एस.-मार्फ: उर्दू, हिन्दी एण्ड मैथिली’। एहि कार्यशालामे उक्त विषयक विशेषज्ञक रूपमे छओ गोटए व्याख्यान देलन्हि। एतय ध्यातव्य अछि जे मैथिली भाषाक लेल नेचूरल लेंग्वेज प्रोसेसिंगक क्षेत्रमे पहिल बेर मैथिलीक पार्टस आफ स्पीच एवं ओकर एट्रीव्यूटस (विशेषता) पर विस्तारसँ चर्चा कएल गेल। एल.डी.सी.आई.एल.क दिससँ मैथिलीक लेल पार्टस आफ स्पीच एवं ओकर एट्रीव्यूटस पर डा. अरूण कुमार सिंह एवं एल.डी.सी.आई.एल.टीम द्वारा बनाओल मैथिली टेग सेट पर मैथिली भाषा वैज्ञानिक डा. गिरीश नाथ झा (जे.एन.यू.), डा संजीब चौधरी (बीट्स पिलानी,राजस्थान), डा. कमल चौधरी(आई. आई. टी.रोपर,पंजाब) एवं डा. अनिल ठाकुर(बी.एच.यू.,बनारस)क संग सम्पूर्ण एल.डी.सी.आई.एल. परियोजनाक विषय प्रतिनिधिक संग-संग मैथिलीक विषय प्रतिनिधि डा. अरूण कुमार सिंह, दिनेश मिश्र एवं अतुलेश्वर झा परिचर्चामे भाग लेलन्हि । विगत 12 एवं 13 दिसम्बर 2011केँ ‘भारतीय भाषाक भाषा वैज्ञानिक सांख्यिकी संकाय’ भारतीय भाषा संस्थान मैसूरक तत्त्वधानमे राष्ट्रीय संगोष्ठीक आयोजन कएल गेल जकर विषय छल ‘पार्टस आफ स्पीच एनोटेशन फार इण्डियन लेंग्वेजस: इसू एण्ड प्रोस्पेक्टीभस’। जाहिमे डा. पी. पी. गिरिधर,ए. डी. आई., भारतीय भाषा संस्थानक अध्यक्षतामे आयोजित एहि राष्ट्रीय संगोष्ठीमे सर्वप्रथम स्वागत भाषण डा. एल. रामामूर्त्ति(प्रोजेक्ट डाइरेक्टर,  एल.डी.सी.आई.एल.)क द्वारा कएल गेल। पछाति बीज भाषण डा. गिरिश नाथ झा (जे.एन.यू.) देलनि। देशक विभिन्न भागसँ बीसगोट विद्वान एहि सेमिनारमे अपन आलेखक पाठ कएलन्हि। एहि अवसर पर डा. अरूण कुमार सिंह ‘टूवार्डस मैथिली पार्टस आफ स्पीच टेगिंग’विषय पर आलेख पढलन्हि। विगत 22 दिसम्बर 2011केँ राष्ट्रीय अनुवाद मिशन द्वारा ‘भाषा-दिवस’क रूपमे मैथिली,बोडो, संथाली एवं डोगरीक संवैधानिक मान्यता प्राप्त करबाक विशिष्ट दिवसक अवसर पर एकगोट कार्यक्रम भारतीय भाषा संस्थान मैसूरक प्रीभ्यू थियेटरमे दुई सत्रमे आयोजित कएल गेल। एकर पहिल सत्र शैक्षिक सत्र छल जकर अध्यक्षता भारतीय भाषा संस्थानक कार्यवाही निदेशक डा.के.कफो कएलन्हि, मुख्य अतिथिक रूपमे निवर्त्तमान निदेशक डा. सचदेवा उपस्थित छलाह।  उपर्युक्त भाषा प्रतिनिधिक रूपमे डोगरीक डा. बीणा गुप्ता, बोडोक डा. अनिल बोडो ओ संथालीक डा. के. सी. टूडू आएल छलाह। मैथिलीक अतिथिक रूपमे डा. श्रुतिधारी सिंहकेँ अएबाक छलन्हि मुदा फ्लाइटक केन्सिलेशनक कारणेँ नहि आबि सकलाह।मंच संचालनक काज डा. अजीत मिश्र, स्वागत भाषण पवन चौधरी एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. नरजरी कएलन्हि। मंचासीन विद्वान द्वारा अपन-अपन भाषाक विशेषता एवं कठिनाईक चर्चा कएल गेल। डा. सचदेवा एवं डा. कफो अपन-अपन विद्वतापूर्ण विचारमे भाषाक सर्वांगिण विकास पर चर्चा कएलन्हि। दोसर सत्रमे सांस्कृतिक कार्यक्रमक अवसर पर मैथिली, बोडो, संथाली, डोगरी एवं किछु दोसरो भाषा- भाषी अपन-अपन भाषामे कविता, गीत,गजल,लधुकहानी आदिक पाठ कएलन्हि। एहि अवसर पर डा. अजित मिश्र ‘गोसाउनिक गीत’ गावि मैथिलीक कल्याणक कामना कएलन्हि तँ डा. अरूण कुमार सिंह मैथिलीकेँ उचित विस्तार नहि भेटल अछि तकरा आधार बना ‘भारतीय भाषाक हम बेटी मैथिली’ कविताक पाठ कएलन्हि।आन-आन भाषा-भाषीक संग दिनेश मिश्र सेहो मैथिली कविताक पाठ कएलनि। ज्ञातव्य हो जे भारतीय भाषा संस्थान मैसूरमे भाषा दिवस मनएबाक स्वथ्य परंपराक श्रीगणेश करबाक सम्पूर्ण श्रेय ‘राष्ट्रीय अनुवाद मिशन’क प्रोजेक्ट डाइरेक्टर डा. अदिति मुखर्जीकेँ जाइत छन्हि किऐकतँ हुनकहि संरक्षणमे भाषा दिवस कार्यक्रम संभव भए सकल। विगत 16 सँ 19 दिसम्बर 2011धरि ‘नवम् इन्टरनेशनल कांफ्रेंस आन नेचूरल लेंग्वेज प्रोसेसिंग’(आइकान-2011), अन्ना विश्वविद्यालय, चैन्नईमे आयोजित कएल गेल। ‘भारतीय भाषाक भाषा वैज्ञानिक सांख्यिकी संकाय’ भारतीय भाषा संस्थान मैसूरक दिससँ मैथिली भाषाक सहभागीक रूपमे डा. अरूण कुमार सिंह गेल छलाह। विगत 07 सँ 16 जनवरी 2012धरि ‘भारतीय भाषाक भाषा वैज्ञानिक सांख्यिकी संकाय’( एल.डी.सी.आई.एल.), भारतीय भाषा संस्थान मैसूर आओर ‘भाषा विज्ञान विभाग’, काशी हिन्दु विश्वविद्यालयक संयुक्त तत्वाधानमे दस दिवसीय ‘ओरिएनटेशन कम ट्रेनिंग प्रोग्राम(कार्यशाला) आन नेचूरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग’ मैथिली एवं हिन्दी भाषाक आयोजन भेल। काशी हिन्दु विश्वविद्यालयक कला सेकायक एनी बेसेन्ट सभागारमे नेचूरल लैंग्वेज प्रोसेसिंगक प्रशिक्षण कार्यशालाक उद्धाटन समारोहक मुख्य अतिथि डा. रवि भूषण मिश्रा,विभागाध्यक्ष संगणक अभियंत्रिकी, प्राद्यौगिकी संस्थान, काशी हिन्दु विश्वविद्यालय छलाह आओर संयोजक डा. अनिल ठाकुर प्रवक्ता, भाषा विज्ञान विभाग, काशी हिन्दु विश्वविद्यालय छलाह। उद्‍घाटन समारोहक अध्यक्षता प्रो. कमल शील, कला संकायाध्यक्ष, काशी हिन्दु विश्वविद्यालय द्वारा कएल गेल। धन्यवाद ज्ञापन डा. संयुक्ता घोष, प्रवक्ता, भाषा विज्ञान विभाग, काशी हिन्दु विश्वविद्यालय कएलन्हि। एहि कार्यशालाक मुख्य उद्देश्य भाषा विज्ञानक उभरैत अनप्रयुक्त क्षेत्र, भाषा प्रौद्योगिकी क्षेत्रमे विद्यार्थी एवं शोधार्थीकेँ प्रशिक्षित करब अछि। कार्यशालामे देशक दोसर संस्थानसँ लगभग 15 शोधार्थी सहित काशी हिन्दु विश्वविद्यालयक भाषाविज्ञान संगणक अभियंत्रिकी एवं आन-आन भाषाविभागक 15 शोधार्थी एवं विद्यार्थी सम्मिलित कएल गेलाह। प्रशिक्षण देब’ बलामे डा. अनिल कुमार सिंह, डा. संयुक्ता घोष, प्रो.(डा.) रामबक्स मिश्रा, डा. अनिल ठाकुर, डा.रवि भूषण मिश्रा, डा. जितेन्द्र कुमार सिंह, डा. अरूण कुमार सिंह, अरूणधति, डा. सत्येन्द्र अवस्थी, अतुलेश्वर झा,अदितिदेव शर्मा एवं राजेश आदि कार्यशालामे उपस्थित शोधार्थी एवं विद्यार्थीकेँ नेचूरल लेंग्वेज प्रोसेसिंगक सब भागसँ अवगत करबैत कोना काज कएल जाइछ तकरा वाचिक एवं प्रायोगिक रूपमे बुझाओल गेल। ज्ञातव्य अछि जे मैथिली भाषाकेँ एहि तरहक कार्यशालामे सहभागिताक अवसर बहुत कम प्राप्त होइत रहलैक अछि, तेँ एहन-एहन कार्यशालासँ मैथिली भाषा ओ ओकर अध्यवसायीकेँ बहुतो लाभ होएबाक सम्भावना बनैत अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार विहनि कथा 1 लक्ष्मी परिछन-----------भगवती गीत---------हास-परिहासक गीत। बच्चा सभ अनेरो औना रहल छल। दरवज्जा पर धमगज्जर मचल। तुमुल हास-ध्वनि। नाना प्रकारक गप्प-सरक्का। बरक बाप कन्याक बापसँ कहलथिन्ह----" आह बूझि लिअ समधि जे हमरा घरमे लक्ष्मी देलहुँ अहाँ----। कन्याक बाप कहलखिन्ह " हँ से तँ ठीके" आ कहिते आँखि झुकि गेलन्हि आ मोने-मोन बजलथि--" एखन तँ लाखक-लाख टका संगमे अनलीहए ने लक्ष्मी तँ बुझेबे करतीह। जखन खत्म भए जाएत तखन इएह लक्ष्मी कुलच्छनी बनि जाएत।"------ 2 अंतर किछु बर्खक पछाति मैरिज सेरेमनीक शुभ अर्धनिशाभाग रातिमे बर अपन कनियाँसँ पुछलखिन्ह----- कहू तँ हमर सासुर आ अहाँक सासुरमे की अंतर भेटल ? कनियाँ औंघाएल मुदा चोटाएल स्वरे कहलखिन्ह------"इएह जे अहाँ अपन सासुरमे मालिक रहैत छी आ हम अपन सासुरमे बहिकिरनी" इ दूनू विहनि कथा मुन्ना जहीकेँ समर्पित छन्हि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। राजेन्‍द्र कुमार प्रधान जन्‍म- 03/09/1970 पि‍ता स्‍व. बैद्यनाथ प्रधान गाम- मरूकि‍या, पोस्‍ट अन्‍धड़ाठाढ़ी, जि‍ला-मधुबनी। पि‍न- 847401 योग्‍यता- एम.ए. पटना वि‍श्ववि‍द्यालय, पटना शोधरत्त (पीएच.डी) ल.ना.मि‍.वि‍.वि‍. दरभंगा, अन्‍य योग्‍यता- संगीत गायणमे जेड.एल. कम्‍युनि‍केशन द्वारा आयोजि‍त ऑल बि‍हार फि‍ल्‍म संगीत प्रति‍योगि‍तामे प्रथम स्‍थान प्राप्‍त। रि‍सर्च स्‍कॉलर, ललि‍त नारायण मि‍थि‍ला वि‍श्ववि‍द्यालय- दरभंगा। २१म शताब्दीक पहिल दशकक मैथिली उपन्यासमे राजनीतिक चेतना- राजेन्‍द्र कुमार प्रधान उपरोक्‍त शीर्षक 21म शताब्‍दीक पहि‍ल दशकक उपन्‍यासमे राजनीति‍क चेतना- कोनाे सामाजि‍क उपन्‍यासमे प्रस्‍तुत वि‍षय-वस्‍तुक हएब प्राय: स्‍वभावि‍क अछि‍। उपन्‍यास एक एहन वि‍धा थि‍क जइमे सम्‍पूर्ण जि‍नगीक वर्णन रहैत छैक। जि‍नगीक एकटा अहम अंग राजनीति‍ होइछ। जाहि‍सँ उपन्‍यासमे मोड़ आनल जाइत अछि‍ आ दि‍शाकेँ बदलि‍ दैत छैक। व्‍यक्‍ति‍ भलहि‍ं व्‍यक्‍ति‍गत स्‍थि‍ति‍केँ द्योतक हुअए मुदा जि‍नगी एकटा एहन वि‍शाल परि‍क्षेत्रक नाओं थि‍क जे समाजक बीच पसरि‍ जाइत अछि‍। मनुख जखने समाजसँ जुड़त तँ ओइमे राजनीति‍ स्‍वत: एक अंग बनि‍ जाएब स्‍वभावि‍क अछि‍। पहि‍ल दशकमे प्रकाशि‍त उपन्‍यास तँ बहुतो होएत मुदा हम जेतबा पढ़ि‍ वा देखि‍ सकल छी मात्र तेकरे वर्णन एे आलेखमे कऽ रहलौं अछि‍। जगदीश प्रसाद मण्डल- जीक उपन्यासकेँ मैथिली साहित्यमे सार्थक राजनैतिक चेतना जगेबाक प्रारम्भक रूपमे देखि सकै छी, मौलाइल गाछक फूल उपन्‍यासमे राजनीति‍क चेतना ओत-प्रोत अछि‍। जाहि‍मे ग्रामीण जीवनमे पसरल समस्‍याक यर्थाथ चि‍त्रण केलनि‍ अछि‍। प्रस्‍तुत उपन्‍यासमे सुबुध नामक एकटा पात्र जे शि‍क्षक छथि‍ ओ अध्‍यापन कार्यमे लागल रहैत छलाह। गाम-समाजक चि‍न्‍तासँ मुक्‍त छलाह। जखन रमाकान्‍त बाबू मद्राससँ घुरि‍ अपन गाम एलाह आ हुनकामे ई चेतना भेलनि‍ जे अनेरे जमीन हम कि‍अए रखने छी तखन अपन 2 सए बीघा जमीन समुच्‍चा ग्रामीणमे बाॅटि‍ समाजकेँ परि‍वार रूपमे देखए केर नजरि‍क पता शि‍खक सुबुधकेँ लगलनि‍ तखन हुनकामे सेहो चेतना एलनि‍ आ अपन नौकरीसँ ति‍याग पत्र द’ पुन: आपस आबि‍ जाइ छथि‍।  गाम-समाजक बीच ऐबाक लक्षण एकटा राजनीति‍क चेतनाक अपूर्व कृति‍मान उपस्‍थि‍त करैत अछि‍। तहि‍ना जिनगीक जीत उपन्‍यामे समाज दशा-दि‍शाक यर्थाथ चि‍त्रण करैत अर्थनीति‍ केर मूल रहस्‍यकेँ उद्घाटि‍त करबाक जे प्रयास मंडलजी केलनि‍ अछि‍ ओ एक अद्भुत राजनीति‍क प्रमाण उपलब्‍ध करबैत अछि‍। जगदीश प्रसाद मंडलक अगि‍ला उपन्‍यास उत्थान-पतन एहि‍ उपन्‍यासक माध्‍यमे सामंती सोचकबला समाज आ समाजि‍क सोचक समाज बीच आधुनि‍क वैज्ञानि‍क समन्‍वयवादी सोचक यर्थाथ चि‍त्रण तेहन मार्मिक आ इमानदारीसँ मंडलजी केलनि‍ अछि‍ जे एक तेहन राजनीति‍क चेतनाक संवाहक बनैए जे प्रत्‍येक मनुखकेँ उत्‍थान आ पतनक मार्ग दर्शन रूपमे सि‍द्ध करैत अछि‍। ‘जीबन-मरन’ उपन्‍यासक लेखक जगदीश प्रसाद मंडल जी छथि‍- एहि‍ उपन्‍यासक मूल पात्र छथि‍ रघुनंदन। रघुनंदनक मृत्‍यु जइ दि‍न भेलनि‍ ओही दि‍नसँ उपन्‍यासक प्रारम्‍भ होइत अछि‍। मि‍थि‍लाक समस्‍यामे बाढ़ि‍, रौदी आदि‍ प्राकृतक समस्‍या केर अलाबे आर बहुत रास समस्‍या छैक जे मानव द्वारा अक्‍ति‍यार क’ समाजकेँ जकरने छैक। प्रस्‍तुत वि‍षय केर चि‍त्रण ताहि‍ रूपे मंडलजी अपन जीबन-मरन उपन्‍यासमे केलनि‍ अछि‍ जे एक खास राजनीति‍क चेतनाक जन्‍म दैत अछि‍। हि‍नक अगि‍ला उपन्‍यास अछि‍ ‘जीवन-संघर्ष’ अध्‍यात्‍मक मूल उद्देश्‍य थि‍क मानव-मानवक बीच अगाध प्रेमक जन्‍म देनाइ जइसँ सभ कि‍यो सहमत छी। प्रस्‍तुत उपन्‍यास जीवन-संघर्ष केर माध्‍यमसँ मंडलजी सम्‍प्रदाय आ धर्म कोना व्‍यक्‍ति‍सँ समाज धरि‍केँ तोड़ैए आ कोना लोक अपनाकेँ महामानवक वाटपर चलि‍ सकैए ताहि‍ परि‍पेक्ष्‍यमे चि‍त्रण भेल अछि‍ ओ एक अद्भुत राजनीति‍क चेतनाक द्योतक अछि‍। नि‍ष्‍कर्षत: ऐ सभ उपन्यासमे जीवन आ राजनैतिक चेतना समाहित अछि। लोकक कार्यक प्रति मण्डल जीक विश्वास जिनगीक प्रति विश्वास बिनु राजनैतिक चेतनाक सम्भव नै। श्री गजेन्द्र ठाकुर जीक उपन्यास- सहस्रबाढ़नि ढेर रास रजनैतिक आ ब्यूरियोक्रेटिक उथाल-पुथलक गबाह अछि, तँ हुनकर सहस्रशीर्षा दलित गबैय्या मोहनक भारतक स्वतंत्रतासँ सूचनाक अधिकार धरि गीतक माध्यमसँ राजनैतिक चेतना पसारबाक अद्भुत सफल प्रयास अछि, तँ एकर बीचमे सन्हिआएल गामक आ बाढ़िक राजनीति गामसँ दिल्ली धरि पसरल अछि। राजदेव मण्डल जीक ‘हमर टोल’ धारावाहिक रूपेँ विदेहमे ई-प्रकाशित भऽ रहल अछि आ ई मैथिलीक सभसँ बेसी पठित उपन्यासक रूपमे उभरि रहल अछि। ओना तँ ई उपन्यास अखन छपिये रहल अछि मुदा घृणा आ प्रेम दुनूसँ सराबोर राजनैतिक घटनाक्रमक लेखक द्वारा जे प्रस्तुतीकरण भऽ रहल अछि से अतुलनीय अछि। केदारनाथ चौधरी- जीक चमेलीरानी आ एकर सेक्वेल माहुर  वर्तमान राजनैतिक स्थितिक सुन्दर प्रस्तुतिकरण अछि आ अपराधीक राजनीतिमे प्रवेशक सुन्दर विवरण अछि, जतए पाठक चमेलीरानीसँ प्रेम करए लगैए आ ओकर अपराधकेँ स्वीकृति करबा लेल विवश भऽ जाइए। आशा मिश्रक- उचाट आ अशोक कुमार ठाकुरक निशांत आ वसुधाक संसार सेहो ठाम-ठीम एकर विवरण करैत अछि। श्याम चन्द्रक "रूपा दीदी" लेखकक कलाक प्रति उदासीनतासँ ओतेक निस्सन प्रभाव उत्पन्न नै करैए मुदा विषय-वस्तुक दृष्टिए ई राजनैतिक चेतनाकेँ आधार लऽ लिखल गेल अछि। साकेतानन्दक सर्वस्वान्त बाढ़ि आ राहतक राजनीतिक डोक्यूमेन्ट्री फिक्शन अछि। अनिलचन्द्र ठाकुरक “आब मानि जाउ” उपन्यासमे एक एहन युवतीक संघर्ष-गाथा अंकित अछि जे अपन लगनसँ जीवन बदलैत अछि। असंख्य गामक ई कथा कुलीनताक अधःपतनक कथा, संस्कार विहीनताक उद्घाटन आ भविष्यक पीढ़ीकेँ बचएबाक चेतौनी छी। वीणा ठाकुरक ‘भारती’ उपन्‍यासमे सेहो राजनीति‍क चेतना झलकैत अछि‍। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदानन्द झा 'मनु' चोनहा (धारावाहिक मैथिली कथा ) चोनहा एक गोट एहन स्वाभिमानी किशोरक मर्म कथा,जए अपन माय-बाप कए कनिक लापरवाही कए कारण घोर अन्हार एवं अपार दर्दक दुनियाँ मे चलि गेल | मुदा अपन सहाश व् कुषार्ग वुधि कए द्वारा ओ ओहि घोर अन्हार एवं दर्दक छाया सँ बाहर निकलि,एक सुखद एवं प्रकाशमान जिवन मे चरण बधेलक | पहिल दु भाग मे अपने पढलौंह - कोना मासूम किशोर संजय कए असहाय माथक पीरा सँ नित्य सामना करय परैक | सब कए सब होएतो ओ निदान्त एसगर, कियोक ओकर इलाज अथवा कष्ट निवारण हेतु प्रयास नहि कएलथि | गाम सँ दिल्ली आएल मुदा सब कए सब  ओनाहि, दिल्लीक गर्मी सँ पीरा मे आओर वृद्धि, अपार कष्ट, मुदा सब किछ असगर सहैक लेल बाध्य | अंत मे ओकरा स्वं एही बताक ज्ञान भेलैक जए ओकर आँखि बहुत कमजोर  छैक परञ्च  ओकर सहायता करै कए जगह ओकरा कोना 'चोनहा' नाम सँ अलंकृत कएल गेलैक | कोना एक गोट  मसुम बच्चा  डॉक्टर सँ चश्मक नम्बर आनि अपन बाबुजी  कए देलक, ओकर बादो चश्मा नहि बनि पएलै | अनायास  एक दिन चश्मा दुकान देखला बाद ओ कोना स्वं चश्मा बनाबैक निश्चय  केलक | कोना ओ वर्तमानक सुख व् सोख कए मारि कs एक-एक पाई चश्मा बास्ते जमा करै लागल |  आब आँगा ---- ****************************** भाग-३ सब मिला कs डेढ़ सय रुपैया जमा करै मे संजय कए  पाञ्च महिना लागि गेलै | नम्बर लेलाक एक डेढ़  महिना बाद सँ ओकर मोन मे पाई जमा करैक बात एलै | कुल मिला कs चश्मक नम्बर अनला छ महिना भs गेलै | मुदा संजय लग एखन तक मात्र  डेढ़ सय रुपैया जमा भेलै | ओकर लक्ष्य त दु सय रुपैयाक रहै, मुदा आगुक पचास रुपैयाक बास्ते पता नै कतेक समय आरो लगै | ताँइ ओ निश्चय कएलक जए एतबे सँ दुकान जए, कम भेलै तs आगु देखल जेतै | अगिला दिन संजय स्कूलक तिफिने मे, स्कुल सँ लालकिला कए बस पकैर कs चाँदनी चौक चश्मा दुकान कए हेतु बीदा भेल | पाञ्च महिना पहिले आएल छल, ताहि कारण किछु दिक्कत सेहो भेलै मुदा पहुँच गेल | जाहिखन दुकानदार कए चश्माक नम्बर बला पुर्जा देलकै तs दुकानदार देखते बाजल  - "इ तs बड्ड पुरान नम्बर अछी, डॉक्टर सँ नबका पुर्जा बनबा कs लय आबु, किएक त नम्बर बढ़ैत रहैत छैक आ छह महिना तs बहुत बेसी समाय भेलैक |" दुबारा पुर्जा बनाबै  कए निश्चय करैत संजय दुखी मोने   ओहिठाम सँ चलि आएल | आई प्रथमे कएतौ  बाहर असगरे निकलल रहए, असुबिधो भेलैक | सब सँ बेसी ओकरा बसक नम्बरे नहि सुझाई तैं रैह-रैह कs सब सँ पुछअ  परै, कोनोना घर तक सकुशल आएल | पुनः भोरे-भोर संजय पाहिले जकाँ, रोट्री क्लब संचालित आँखिक अस्पताल त्रिलोकपुरी तिन ब्लोक पहुँचल | तिन दिनक हरानी कए बाद चश्माक नव नम्बर भेटलैक, मुदा जए छह महिना पाहिले माइनस तिन रहैक से आब ठामे दुगुन्ना माइनस छह भs गेलैक | छह महिना मे एतेक नम्बर बढ़नाइ एही बताक अंदाजा लगाएल जा सकै छै जए ओकर आँखि कतेक बेसि खराब रहैक वा कतेक बेसि गति सँ खराप भय रहल छैक | डॉक्टर तs संजय कए एही बात सँ पहिले अबगत करा देने रहथि आ चश्मा तुरँत बनाबैक हिदायत से देने रहथि | मुदा  बिधि कए जए मन्जुर | अगर  आबो अपने नहि सचेत होयते तs आगुक छह महिना मे आन्हरे भs जाएत | संजय कए आब बरहल नम्बर कए जानि बर चिंता होबए   लगलै | अगिला दिन ओ स्कुलो किएक जाएत, किताबक झोरा लेन्हें सोझें चाँदनी चौक चश्माक दुकान पर पहुँचल | चश्माक नव नम्बरक पुर्जा दुकानदार कए देलक | ओकर आँखिक एतेक नम्बर देखि  दुकानदार आश्चर्य सँ - "हाँ एतेक बेसि नम्बर, अहींक छी की ? " "हाँ" - संजय धीरे सँ बाजल | दुकानदार - "किएक एहि सँ पाहिले नहि देखेने रहि की ? इ त साफ-साफ लापरबाहि कए लक्षण थिक - - - माँ बाबुजी नहि छथि की ? ओ हो भगवान एहेन ककरो- - -" "नै-नै एहन कोनो बात नहि "- दुकानदारक  बात बिचे मे रोकैत संजय बाजल | दुकानदार सेहो अपन बात कए विराम दैत, अलग-अलग डिजाईन कए फ्रेम निकालि-निकालि कs देखाबय  लागल आ संगे-संगे ओकर दाम सेहो बताबय लागल | फ्रेम सब पर एक नजैर दैत संजय बाजल - "हम बिद्यार्थी छी आ  हमरा लग कुल डेढ़ सय रुपैया अछी, एही दाम मे कोनो मजबूत आ टिकाऊ फ्रेम देखाबु |" "ठिक छै " - कहैत, दुकानदार सेफ कए एक कोना सँ एकटा साधारण परञ्च मजबूत फ्रेम निकालि कs दैत बाजल - "इ लिय अहाँ  एहेन बच्चा लेल इ बहुत उचित छै, मजबूत टिकाऊ आ दामो मात्र पछ्तरे रुपैया, पचास रुपैया कए सीसा अर्थात कुल सबा  सय रुपैया लागत |" "ठिक छै एकरे बना दिय |"- संजय खुसि सँ बाजल, किएक तs ओकरा अंदेसा छलैक रुपैया कम होएत, आ कतय पचीस रुपैया बैंचे गेलैक | दुकानदार - "ठीक छै तs पाई जमा कय दियोउ, काइल्ह आबि कs चश्मा लय जायब |" संजय दुकानदार कए एक सय पचीस रुपैया देलाबाद बिल लय ओहिठाम सँ बिदा भs गेल | बिल पर देखलक दुकानक नाम 'लक्ष्मी आप्टिकल' लिखल रहैक | साइन-बोर्ड पर लिखल नाम तs ओकरा सुझले नहि रहै | बस पकैर घर आएल | आई ओकर मोन किछ शांत रहैक | घर पर इ बात सब केकरो लग नहि बाजल | ओकर मोन मे तs हलचल मचल रहैक कखन भोर होई आ जल्दी-जल्दी चश्मा आने  | भोरे संजय उठी सब दिन जेकाँ नहा-सुना कs स्कुल गेल | स्कुल कए छुट्टी भेला बाद, सोझे स्कूले सँ लालकिला कए बस पकैर कs  चश्मा लेल चाँदनी चौक  बिदा भs गेल | चश्मा दुकान पहुँचल, ओकर चश्मा बनि चुकल छलै | चश्मा देखला बाद दुकानदार कए कहलाउत्तर लगाओ कs देखलक | इ की चश्मा लगेला सँ ओकरा एक नव दुनियाँक दर्शन भेलैक | सब किछु नव-नव | ओ सामने रोडक ओई पारक दुकान सब, दुकान कए भीतर राखल समान सब, दुकान सबहक साईन-बोर्ड  पर लिखल अक्षर सब एकदम साफ-साफ बिलकुल स्पस्ट देखा रहल छलैक | एके मिनट मे आई ओकरा ज्ञात भेलैक जए इ महानगर कतेक सुन्नर छैक, जए की आई सँ पहिले कहियो नहि देखने छलै | लगले ओ अपन  आँखि सँ चश्मा निकालि कs खोल मे रखैत जेबी मे राखि लेलक | किएक तs बिना चश्माक आ चश्मा पहिरलाक बादक दुनियाँ कए सन्तुलन करै मे किछु तs समाय लगतै | चश्मा पहिरला बाद सबटा नव-नव लगै, जए-जए बस्तु सब देखाई से-से सब कहियो ओ अनुभबो नहि केने | एही दुरी कए भरै मे तs किछ समय, एक दु दिन तs लगबे करतै | दोसर, दुकान तक बिना चश्मा कए आएल छल आब पहिर कs नव दुनियाँ संगे जए मे असुबिधा छलै | दुकान सँ बाहर निकैल बिना चश्मेक बस स्टेंड तक आयल | आब कोन बस पर चढ़े ? की ओकरा चश्माक यादि एलेक, चश्मा निकालि कs लगेलक, की ओकर आश्चर्यक सीमा नै रहलैक जतए बिना चश्मा कए  सामने ठार बसक नम्बरों नै सुझै छलैक ततए चश्मा पहिर कs समूचा रोड पर जतेक बस गाड़ी रहैक सबहक नम्बर पैढ़ सकै छल | ओकर मोन इ नव बस्तु सब देखक आनन्दबिभोर भय गेलैक |  पाँछा घुमि कs देखलक त सामने छाती तन्ने ठार, विशालकाय लाल पाथर सँ निर्मित सुन्नर लालकिला देखलक, लालकिला कए सुन्नरता एवं मनमोहकता देखकय ओ मन्त्रमुग्ध  रहि गेल | किएक त पहिले बिना चश्मा कए  त खाली लाल-लाल धुंद जकाँ किछु छैक सेहटा देखाई दै | असली लालकिला त आई चश्मा पहिरलाबाद देखलक | ताबत सामने दूर सँ ओ देखलक, ओकर बस आबि रहल छै, मुदा चश्मा पहिरबाक आदत नहि रहबा कए कारण चलै मे असुबिधा  होई तैं फेर सँ चश्मा खोलि जेबी मे रखलक आ बस पर बैसल |   बस पर बैसला बाद फेर सँ चश्मा निकालि, एकबेर लगाबे एकबेर निकाले अन्त मे चश्मा निकालि खोल मे दय, बस्ता मे राखि लेलक ताबत मे बस सेहो चलय लगलै | बस चैल रहल छलैक, आ संजय कए मोन मे सोचक भंवर उठय लगलै - "एही सबा सय रुपैयाक चश्मा कए अभाबे हमरा  एतेक कष्टक सामना करय परल  | नहि  खला सकै छलौंह , नहि बस पर चैढ़  सकैत छलौंह , नहि ब्लैक बोर्ड पर लिखल हिसाब देख सकैत छलौंह, नहि  नीक जँका किताब पैढ़ सकै छलौंह , नहि टी वि देख सकै छलौंह  | पढ़ाईयो मे दिन-दिन पिछरल जा रहल छलौंह  |  मुदा माँ बाबुजी एही बात पर कोनो ध्यान नहि देलनि  | एक बेर तs चश्माक  नम्बरों आनि कय  देलियैंह मुदा धन-सन कोनो कान-बाट नहि | कोना- कोना कुन-कुन हिसाबे अपने एक -एकटा पाई जोरि कs पाञ्च  महिना मे इ रुपैया जमा केलहुँ |" बिचारक मंथन मे डुबल कोना समय बीत गेलै, कोना बस अपन गंतब्य स्थान तक आबि गेलैक, संजय कए किछु ज्ञात नहि ओ तs अपन ध्यान मे डुबल रहे, जखन  सब बस सँ  उतैर गेलैक तखन ओकर ध्याकं खुजलै आ ओ बस सँ उतरल | बस सँ उतरला बाद, पएरे चलैत ओकर मोन एक बेर फेर सँ नव समस्या मे ओझरए लगलै - "चश्मा त लय अनलौं, आब घर मे की कहबै? कतए सँ चश्मा अनलौं? रुपैया कतए सँ अनलौं? कए बना देलक ? " आन-आन सबाल-जबाब सब ओकरा मोन मे अबै जाई | रस्ता ख़त्म घर आबि गेलै | खेलक-पिलक मुदा ओकर मोन त एही प्रश्नक उत्तर खोजै मे लागल रहैक की -"घर मे चश्मा की कहि कs देखएबै ?" समय बितलैक, साँझ परलै संजय सेहो   नव मोर्चा सम्भालैक किछु उपाय सोचलक | संजय कए बाबुजी सेहो  ड्यूटी सँ एलाह, नितकर्म सँ निवृत भेलाबाद माँझ आँगन मे खाट पर बैसलाह | संजयक  माय व् छोट दुनु भाई हुनके चारुकात बैसल | संजय सेहो अपन जेबी मे चश्मा रखने ओहिठाम बैसल, मुदा बाहर निकालि कs देखेतै से हिम्मत कए अभाब | आन-आन गप सब होइत रहैक, ताहि बिचमे संजय बहुत आत्ममंथन व आत्मदृढ़ता कए बाद अपन सम्पूर्ण सहास कए जुटाबैत जेबी सँ चश्मा निकालि बाबुजी कए देलकैन्ह  | बाबुजी चश्मा कए हाथ मे लैत -"की छैक " "चश्मा" संजय धिरे सँ माथ झुकोने बाजल, आगु अपन सेफ कए गरदैन सँ निचा घोंटैट बाजल - "आइ फेर सँ स्कुल मे डॉक्टर आएल  रहैक, हमर चश्मा नै बनल ताहि कारण बहुत बाजल, कहलक पहिले सँ दुगुना बेसि आँखि  खराब भय  गेलैए, अंत मे ओहे डॉक्टर अपने लग सँ चश्मा देलक |" इ बात ओ एतेक फटाफट बाजल जेना कियो गोटा ड्रामा मे रटल- राटायल शब्द फटाफट बाजि जाइये | हलाँकि ओ उपरोक्त सब बात फुसिए बाजल, किएक त बच्चाक मोन अपने ओतेक कस्ट सहि चश्मा बनबेलक मुदा ओकरा सामने आनै  लेल  किछु नै किछु तs कहैए परतैक |    झूठो बाजि कs अपन आँखिक रक्षा केलक | जए काज ओकर माय-बाबु कए करए चाहियैंह से काज ओ मासुम बच्चा अपने कएलक मुदा इ कोनो एतेक भारी झूठ नहि भेलै जए पकरल नहि जए | चश्माक खोल पर साफ-साफ दुकानक नाम पत्ता लिखल रहैक, लक्ष्मी ओप्टिकल, दुकान नम्बर फलाँ-फलाँ - - - चाँदनी चौक दिल्ली छह | आ इ कियो एक गोट सामान्य बुद्धिक व्यक्ति जनै छै जए एक निजी दुकान मंगनिमे चश्माक वितरण किएक करतैक, कोनो सरकारी या धर्मार्थ संस्थाक नाम होएतैक तs कनि बिस्बासो कएल जा सकै छलैक | मुदा एहिठाम एहन कोनो बात नहि | दोसर चश्मा बनेनाइ कोनो चुटकी कए काज तs नहि छैक ? नम्बरक सीसा कए काटि-छाँटि कs,घैन्स कs फ्रेम कए मुताबिक बनेनाइ,जए की एक गोट वर्क-शॉप मे भय  सकैत छैक, नै  की कोनो डॉक्टरक जेबी मे | परञ्च बाबुजी कए संजयक बात पर बिश्बास भय गेलैन | सैदखन पहिरै कए निर्देश दैत, बस ! आगू कोनो बात-चित नहि | कनिकाल लेल मानि लेल जए, छह महिना पहिले जखन संजय हुनका हाथ मे चश्मा कए नम्बर दएने रहैन तखन ओ कोनो कारने चश्मा नहि बना पएलनि, मुदा आबो त सामने देख रहल छथिन जए कतेक मोटक सीसा कए चश्मा ओकर आँखिक  उपर छै | आबो त अपन पहिलुक गलती सुधारि सकै छलैथ | कतौ कनि निक डॉक्टर सँ ओकर आँखिक इलाज करा सकै छलैथ | दिल्ली मे त एक सँ एक पैघ-पैघ अस्पतालक लाइन लागल छैक | कतय धिया-पुता कए आँखि मे एकटा कीड़ा पैर जाएत छैक त  ओकर माय-बाप कए आत्मा तर्पय लगै छैक, आ कतय एक गोट माय-बाप कए बच्चाक आँखिक ऊपर माइनस छह कए चश्मा लागि गेलै आ धन-सन | आब संजय सैदखन आँखि सँ चश्मा लगोने रहे, स्कुल, हाट-बाजार,रस्ता-घाट कतोउ बिना चश्माक नहि जए | पहिले दु-चारि दिन किछु असुबिधो भेलैक, मुदा  बाद मे अभ्यास भय गेला पश्चात सब ठिक | चौबीस घंटा मे जेतबे काल राति मे सुतल तत्बेकाल  ओकर आँखि सँ चश्मा निकलै, कहियो क त चश्मे पहिरने सुतियो रहे | संजय कए चश्मा लेला पुरे दु वर्ष भय गेलैक, आ आइये ओकर दसम वर्गक परीक्षा परिणाम घोषित भेलैक ओ नीक अंक सँ पास केलक | परीक्षा परिणाम जनलाबाद ओकर मोन रिजल्टक चिंता सँ किछु हल्लुक भेलैक,किछु शांति सँ बैसल रहए की ओकर मोन रूपी घोरा, जीवनक सात-आठ वर्ष पाछु चैल गेलैक | कोना- कोना ओकरा कष्टकारी माथ दर्द होई, कोना गाम पर माथ दर्द सँ अँगना मे ओंघडिया मारए आ कियो ओकरा देखनाहर नहि | दिल्ली आएल मुदा दिल्लीयो मे  इ जानलेबा असहाय  माथ दर्द कोनो कम नहि, दिन सँ दिन बेसिए परेसान केलकै | कि एकाएक ओकर  मानसपटल पर कतौ सँ अबाज एलै - " ई की  बहुतो दिन सँ तs माथ दुखेबे नहि केलक, कहिया सँ, दु वर्ष सँ, हाँ -हाँ दुवे वर्ष सँ, जहिया सँ चश्मा लेलौंह तहिये सँ, हाँ-हाँ जखन सँ चश्मा पहिरब सुरु कएलौंह तखने सँ इ असहाय जानलेबा माथ दर्द ठिक अछी | इ दु वर्ष मे एको बेर माथ दर्द नहि भेल | त कि जए एतेक असहाय माथ दर्द सात-आठ वर्ष वा ओहु सँ पहिले सँ होई छल से आँखिक कमजोरिक कारने, हाँ ! शायद -- शायद कि पक्का - -  पक्का  हाँ ! आँखिक कमजोरिक कारने ओतेक माथ दर्द होएत छल |" जान लेबा माथ दर्द ओकर सुमरण मात्र सँ सनजय  कए समुचा देह मे कपकपी भय गेलै | जेना-जेना आँखिक कमजोरी बढ़ल जए तेना-तेना ओकर माथक दर्द बिकराल रूप धारण केने गेल रहै | मुदा कियो कोनो डॉक्टर सँ देखाबय बला नहि | इ बात सब सुमैरते ओकर दुनु आँखि सँ नोरक धारा बहए लगलैक | मुदा तैयो ओकर सोचक बिराम नहि होई छैक, ओकर बिचार रूपी घोरा लगातार अपन पथ पर सरपट दौर रहल छैक - "आह ! अगर सात-आठ वर्ष पहिले, कम सँ कम दिल्लीयो एला बाद कोनो नीक डॉक्टर सँ हमर माथ दर्दक इलाज भेल रहिते, त किएक ओ ओतेक कष्ट व् पीड़ा सहय  परितए, आ किएक आई एतेक मोट सिसाक चश्मा आँखि पर पहिरए परितए, जएकर बिना कि एक तरहे आन्हरे छी | इ कएकर  दोष ? हमर ? हमर समाज कए ? हमर माय-बाप कए ? कि हमर कपार कए ? यदि एतबो पर हम अपने नहि सचेत भेल रहितौं त आई दसवी पास करै कए जगह एक भयंकर अन्हारक दुनियाँ मे विलीन भय गेल रहितौ |" संजय  कए विचारक घोरा बिराम लेलकै कि नहि ? मुदा समाज कए सामने एकटा यक्ष प्रश्न छोरि गेलैक- माय-बाप कए कर्तव्य अपन संतानक प्रति की हेबा चाहि ? भोजन,कपड़ा-लत्ता - - -की आगुओ किछ ? आगु की -की  ? ? ?- - - ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.कुमार मनोज कश्यप- सीमान (विहनि कथा) २.अमित मिश्र- कथा -प्रेम नै जहर छै ३.जगदानंद झा 'मनु'-मिथिलामे जाति-पाति १ कुमार मनोज कश्यप सीमान (विहनि कथा) भीड़ सेहो अपना सभ दिसक पैसेंजर ट्रेन मे नहिं हुअय  से अन्सोहांत सन लागत. आईयो ट्रेन मे कसम-कस्सा भीड़ छलई....मोटरा मोटरी से अलगे. जे कहुना  भीतर  ट्रेनक डिब्बा मे  पैसबा मे सफल भ'  गेल छल ओ एहि मनसा मे जेना पूरा ट्रेन ओकरे साम्राज्य हुअय आ आन केयो भीतर नहिं पैस'  पाबय. आ जे बाहर से भीतर कहुना पैसबा लेल रडधुम्मस केने. मुदा ट्रेन के एहि सभ सौं कोन दरकार.....ओ त'  नियत स्टेशन सभ पर रूकैत सीटी बजबैत सरपट भागल जा रहल छल. भीतर खिड़की लग बैसल एकटा तीस- पैंतीस  सालक युवक बाहरक एक एक टा दृश्य देखि-देखि क' विभोर भ' रहल छल. एक एक टा दृश्य   जेना ओकर आह्लाद   के पाँखि लगा देने हो. बाबू ओम्हर देखियौ ओ गाछ-बृक्ष कोना सरपट पडायल जा रहल छै......हे ओम्हर देखियौ भैंस पर ओ छौंड़ा कोना निचैन सुतल छै आ भैंस चरि रहल छै ……......हे ओम्हर देखियौ ओई कात मे आसमान टुटि क' कोना धरती पर खसल छै .  हे ओम्हर देखियौ ....    घसबाहिन सभ माथ पर छिट्टा लेने  कोना    एक पतियानी सँ ठाढ़ छै.... ओम्हर देखियौ  खेत मे फसिल कोना ओंघरा रहल छई. ….!!!  ओकर कात मे बैसल ओकर पिता ओकर सभ बात पर मुस्किया क' देखथि आ ओकर पीठ थप-थपा क' ओकर उत्साहवर्धन    करथि. ट्रेन मे बैसल किवां ठाढ़ो लोक ओकरा देखि-देखि मुस्किया रहल छल. भीडक धक्का-मुक्की कम भ' गेल छलै . मुदा सामने के सीट पर बैसल मिसरजी के असहाज भेल जा रहल छलनि. बड़ी काल धरी ओ अपन पोथी मे अपन खीझ नुकबैत रहलाह. जखन ओही युवक के कुतूहल आर बढ़ले जा रहल छलई त' हुनका अपन मोनक भड़ास रोकब कठिन भ' गेलनि - 'आहां हिनकर ईलाज कोनो नीक डाक्टर स' कियैक ने करबैत छियनि ? समुचित ईलाज भेला स' ई अवश्ये निके भ' जेता.' ' हम हिनकर ईलाजे करा क' दिल्ली स' घर घुमल छी.' 'तईयो......!!?' 'दरअसल हिनका नव आंखि जे भेटलनि हैं तैं देखि-देखि क'  विभोर भ' रहल छथि.' मिसरजी के हलक सुख' लगलनि. जल्दी-जल्दी सेप घोंट' लगला. मुंह स' एको शब्द नहिं बहरेलनि. अपराध-बोध स' मुंह नुकबैत फेर स' पोथी के पन्ना पलट' लगला. *** २ अमित मिश्र , गाम-करियन, जिला -समस्तीपुर कथा      *** प्रेम नै जहर छै *** एकटा गाम | मननपुर | भोरक समय | गामक बीच दुर्गा मंदिर सँ उठैत नारी स्वर , गीतक एहन प्रवाह लगे छल जे स्वयं सरस्वती कमलक आसन पर बैस अपन हाथक वीणा संग मधुर भजन गाबि रहल छथिन | यैह भजन " जय जय भैरबी .........." सँ ऐ गामक मनुष्य आ अपन अंखि खोलै छथि | आब फरिच्छ भs गेल छै | किसान अपन बरदक संग खेत दिश चललाह |बरदक घेट मे बान्हल घंटी , ओही मधु भरल स्वर संग ताल -में ताल मिलायवाक भरिसक कोशिश कs रहल छै | भोर सात बजे एहि गाम सँ ओही नारी के पहिल भेंट होई छै | किरण , जी हाँ ,किरण नाम छै ओकर | सोलह -सत्रह वर्ष के घेट लगेने , मानु कोनो आधा खिलल गुलाबक कली | यौवनक चिन्ह आब उजागर होबs लागल छै | सुन्दरताक चलैत-फिरैत दोकान । ककरो सँ कोनो उपमा नै अनुपम । एकदम मासुम मुँह ,समाजक रीति-रिवाज सँ अंजान ।गाम मे सबहक चहेती ।कोनो काज एहन नै जे ओ नै क' सकैए ।सब काज मे पारंगत ,किरण ।

" किरण ,गै किरण ,कतS चल गेलही ,स्कुलक देर भs रहल छौ ", सुलोचना टिफिन बन्न करैत किरण कए सोर केलखिन ।

" आबै छियौ ,बस दू मिनट ", कहैत किरण घर सँ बहरायल ।कनेक काल ठमकि ठोर पर मुस्की नचबैत बाजल ," माँ आइ कने देर सँ एबौ ,आइ ने हमर सहेली पिंकी कए जनमदिन छै ," आ इ कहैत साइकिल लs स्कूल दिश चल देलक ।

स्कूल मे एकटा लड़का छलैए ,राकेश, पढ़ै-लिखै मे गोबरक चोत ,मुदा पाइबाला बापक एकलौता बेटा ,से पाइ कए गरमी जरूर छलैए ।सब साल मास्टर कए दु टा हजरीया दs दै आ वर्ग मे प्रथम कs जाए ।एक नम्मर कए उचक्का ।ओ जखन-तखन किरण कए देखैत रहैए ।आब किरण गरीब घरक सुधरल बेटी ,ओ की जानS गेलै ,जे कनखी कए अर्थ की होइ छै ।जहिना आन सब छात्र-छात्रा राकेशक किनल चाँकलेट ,मलाइबर्फ ,बिस्कुट आदि अनेको चिज सब खाइ छल ओहिना किरणो बिना छल-प्रपंच कए राकेशक संग रहै छल ।इम्हर किछ दिन सँ राकेश मंहगा सँ मंहगा आ सुन्नर सँ सुन्नर चिज-बित सब आनि कs किरण कए  चुप्पे-चाप दै छलै ।जै अवस्था मे एखन किरण छल ओहि मे विपरीत लिंगक प्रति आकर्षण भेनाइ स्वभाविक छै ,आ जौँ पैसा कए गमक लागि जाए तs फेर बाते कोन छै । इएह कारण छै जे राकेशक संग आब नीक लागS लागलै । राकेशक जादु एहन चलले जै मे फँसि पढ़ाइ-लिखाइ सब पाछु छुटि गेलै आ मस्ती हावी भ' गेलै । ऐ आकर्षण कए नाम देलक "प्रेम" । प्रेम ,जाहि शब्दक एखन धरि कोनो उपयुक्त परिभाषा नै भेटल । प्रेम ,जकरा बेरे मे जतेक लिखब ततेक कम ।प्रेम ,शायरक तुकबंदी ,दिल कए मिलन ।प्रेम , जे मौत सँ लड़बाक साहस दै छै । लैला-मजनु बाला प्रेम भेल छलै अकी किछु और जानी नै ।

" आउ ,आउ , आइ बड़ देर कs देलियै ," किरण कए आबैत देख राकेश बाजल । " हाँ ,की करब साइकिल पंगचर भ' गेल छल " किरण जबाब देलक । राकेश मक्खन लगाबैत बाजल ," आहा , हम्मर जान कए आइ बुलैत आबS पड़लै . . . काल्हि चलब नवका स्कुटी किन देब . . . तखन नै ने कोनो दिक्कत ।" किरण मुस्कुराइत बाजल ," दुर जाउ ,स्कुटी पर चढ़बै त' गामक लोग की कहतै । कहतै जे छौड़ी बहैस गेलै ।"

" लोग किछु कहैए कहS दियौ ,अहाँ बताबू वेलेंटाइन डे अबि गेल छै गीफ्ट की लेबै ," राकेश एक्के साँस मे बाजल । " हम किछु नै लेब ,जखन प्रेम केलौ आ बियाह करबे करब तखन अहाँक सब किछ अपने आप हम्मर भ' जेतै ," किरण विश्वास के साथ बाजल ।

कनेक काल मौन ब्रत कए पालन केला कए बाद राकेश किरणक हाथ पकरैत बाजल ," किरण ,हम चाहै छी ऐ बेर वेलेंटाइन डे पर दरभंगा घुमै लेल चलब । जौं अहाँ कहब त' एखने होटल बुक करबा दै छी " फेर कने और लग आबि बाजनाइ शुरू केलक ." ओतS खुब मस्ती करब ,फिलम देखब आ राज मैदान मे पिकनिक मनायब आओर बहुतो रास गप्प करब ।"

किरण अपन हाथ छोड़बैत बाजल ," नै नै हम असगर अहाँ संग दरभंगा नै जायब । माँ हम्मर टाँग तोड़ि देत , अहाँ जायब त' जाउ हम एतै ठिक छी ।"

" हे . . .हे . . . हे . . . हे . . . एना जुनी बाजु " राकेश किरण कए पँजियाबैत बाजल ," हम अहाँ होइ बाला घरबाला छी आ पति संग घुमै मे कोन हर्ज छै , मात्र एक्के दिन कए त' बात छै , अहाँ कोनो बहाना बना लेब ।"

जेना-तेना क' राकेश अप्पन बात मना लेलक ।तय दिन किरण आ राकेश शिवाजीनगर सँ बस पकैड़ दरभंगा दिश चल देलक । भरि रस्ता प्यार-मोहब्बत कए बात बतियाइत रहल । दरभंगा आबि राज किला देखलक ,श्यामा मंदिर ,मनोकामना मंदिर मे पुजा केलक , टावर चौक सँ शाँपिँग केला कए बाद साँझ होटल मे आयल ।

आब एक कमरा ,एक बेड ,दु जन ।बड़ मुश्किल घड़ी छलै । राकेश कहलक ."आउ कने सुस्ता लै छी ,काल्हि भोरे एहि ठाम सँ विदा हएब ।" किरण प्यार कए कारी पट्टी सँ अपन आँखि बान्हि लेने छलै ।बिना किछु बाजने ओ सब करैत गेल जे राकेश चाहै छलै ।जौं कखनो बिरोधो करै त' प्रेमक दुहाई दs राकेश मना लै छलैए ।और अन्ततः ओ भेलै जे नै हेबाक चाही ।प्रेमक मायाजाल मे फसल प्रेमक मंत्र सँ वशिभुत कएल किरण किछु नै बाजल .शायद अप्पन प्रेम पर हद सँ बेसी विश्वास छलै । भोरे नीन खुजलै तs अपना आप कए असगर देखलक । कनेक काल प्रतिक्षा केलक मुदा राकेशक कोनो अता-पता नै छलै । काउन्टर पर सँ पता चललै जे राकेश तs तीन बजे भोरे चल गेल छलै ।

आब बुझु किरण पर बिपत्ती कए पहाड़ टुटि पड़लै । बिभिन्न तरहक बात मोन मे आबै ।माँ कए की कहब .आगु जीवन कोना काटब ,लोग की कहतै ।सोचैत-सोचैत मोन घोर भs गेलै । गाम दिश जायबाक लेल डेगे नै उठै । कतS जायब ,की करब । चलैत-फिरैत लहाश भs गेल छलै किरण । भीड़-भाड़ मे रहितो एकदम तन्हा ।मनक तुफान रूकबे नै करै । बेकार , जीवन बेकार भs गेलै ।सबटा सोचल सपना क्षण मे टुटि गेलै । सोचै ,माँ कए अफसर बनि कs के देखेते , भगबती कए गीत के गेतै ।

एतेक दिन दुर्गा माँ कए पुजा केलौ... तकर इनाम इ भेटल ।....सब झुठ छै ,... देवी-देवता सब बकबास छै ..... गरीबक साथ कोनो देवी-देवता नै दै छै ।...... सब कहै छै ,. प्रेम बड़ नीक शब्द छै ,..........प्रेम सँ पत्थर दिल मोम भs जाइ छै ,.....मुदा नै....... ,प्रेम तs जहर छै ,जहर ... जै सँ केवल मौत भेटै छै ,मौत कए सिवा किछु और नै ,मौत . . . मृत्यु . . . .मौत . . .जहर . . . । हम जानि-बुझी कs इ जहर पिलौँ ।........ हम अपवित्र छी , हम कुलक्षणी छी ......., हम धरती परक बोझ छी ......हमरा जीबाक कोनो अधिकार नै । हमरा सन के लेल ऐ दुनिया मे कोनो जगह नै । ............हम माँ-बाप कए इज्जत और निलाम नै करब ।......हम मरि जायब , ककरो किछु खबर नै हेतै । ......हम अप्पन बलिदान करब ।अनेको रास बात सँ माँथ लागै फाटि जेतै । ओ एक दिश दौड़ल ,किम्हर .से ओकरो नै पता , ओ कतS जा रहल छै ....., नै जानी । ....दोड़ैत-दौड़ैत भीड़ मे कत्तो चल गेलै । अप्पन अन्जान मंजील दिश ।

भोरे आखबारक मुख्य पृष्ट पर मोट-मोट अक्षर मे लिखल छल " सोलह-सतरह साल कए एकटा गोर-नार युवती रेलवे पटरी पर दू टुकड़ी मे भेटल ।नाम-गाम कए पता नै चलल अछि । पोस्टमार्टम कए लेल लाश भेज देल गेलै यै । अंतिम दाह-संस्कार पुलिसक निगरानी मे होयत . . . । । ३ जगदानंद झा 'मनु' मिथिलामे जाति-पाति ई मात्र विडंबना कहु वा कोनो अभिशाप, जे  राजनैतिक  आजादी भेटलाक ६५ वर्ष बादो हम मिथिलाबासी अपन सोचकेँ जाति-पातिसँ ऊपर नै उठा पाबि रहल छी | मात्र  राजनैतिक  आजादी ऐ कारणे जे राजनैतिक रूपसँ हम स्वतन्त्र छी परञ्च आर्थिक रूप सँ हम एखनो पराधीन छी | आर्थिक पराधीनता | अर्थात हम अपन इच्छानुसार खर्च नहि कय सकै  छी, मने धनक अभाब | हमर मोन होइए अपन बच्चा कए कॉन्वेंट स्कूल मे पढाबी मुदा नहि पढ़ा सकै छी, इ थिक आर्थिक पराधीनता | हमर मोन होइए नीक मकान मे रही मुदा नहि किन सकै छी, इ थिक आर्थिक पराधीनता | हमर मोन होइए हमरो लग मोटर साईकिल, कार हुए, हमरो कनियाँ-बच्चा नीक कपड़ा पहिरथि मुदा नहि,   इ थिक आर्थिक पराधीनता | स्वाधीनता कए ६५ वर्ष बादो आर्थिक पराधीनता किएक ? की हमरा लग बिद्या कम अछि ? की हम कोनो राजनेता नहि बनेलहुँ  ? की हम प्राकृतिक रूपेण उपेक्षित छी ? उपरोक्त सब बात गलती अछि | विद्या मे हम केकरो सँ कम नहि छी | राजनीती कए खेती अपने खेत मे होइए | प्राकृतिक कृपा अपन धरती पर पूर्ण रूपेण अछि | तखन किएक ? किएक हम स्वाधीनता कए ६५ वर्ष बादो, आर्थिक पराधीनताक जीबन जिबैक लेल बेबस छी | एखनो बच्चा  कए चोकलेट नहि आनि हम कहैत छीयै, दाँत खराप भय जेतौ | कमी चोकलेट मे नहि, कमी हमर जेबी मे अछि | आ इ आर्थिक पराधीनताक एक मात्र कारन अछि, हम  मिथिला बासिक सोचब तरीका | आजुक युग मे जहिखन मनुख चान-तारा पर अपन पैर राखि चुकल अछि, हम मिथिला बासी एखन तक जाति-पाति कए सोचि सँ ऊपर उठै हेतु तैयार नहि छी | बाभन-सोलकन्ह कए नाम पर बिबाद | अगरा-पिछरा कए नाम पर बिबाद | ऊँच-नीच कए नाम पर बिबाद | कोनो काज कए लय क आगु बढ़ू, जेकरा नापसन्द भेल, जाति-पाति कए नाम पर बबाल खड़ा कय देत | आ इ कोनो अशिक्षित नहि बहुत पढ़ल-लिखल वर्गों सँ नहि दूर भय रहल अछि | शिक्षित माननीयव्यक्ति सब चाहे कोनो जातिक हुअए, अपन-अपन जाति कए झंडा लय कऽ आगु आबि जाइत  छथि | यदि हम स्वयं व अपन मिथिला समाज कए विकसित व विकासशील देखए चाहै छी त जाति-पाति कए झंझट सँ  निकलि क एक जुट भय आगु बढ़य परत | एक संगे चलै मे मतभेद स्वभाबिक छै आ ओकरा दुर केनाई निदान्त आबश्यक छै | मुदा ओई मतभेद मे जाति कए बिच मे नहि आनि क व्यक्तिगत आलोचना, समालोचना करबाचाहि | की कोनो गोट सफल व्यक्ति कए ओकर जाति कए नाम सँ जानल जाई छै ? नै, त सफलता कए सीढ़ी पर चलै लेल जाति-पातिक सहारा किएक | इ जाति-पातिक रस्ता किछु  मुठी भरि राजनेताक चालि छैन | हुनकर बात मानि त हम सब अपन विकास छोरि जाति-पाति मे लरैत रहि आ ओ दुस्त राज करैत हमरा सब कए सोधैत रहत  | ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। सुमित आनन्द त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन मिथिला आ मैथिलीक विकास क्यो रोकि नहि सकैत अछि। आवश्यकता अछि मिलि कए कार्य करबाक। जे मिथिला क्षेत्रमे रहैत छथि सभ मैथिल थिकाह। ई गप्प दिनांक 10-02-2012 के यू. जी. सी. प्रायोजित राष्ट्रीय सेमिनारक उद््घाटन करैत विधान परिषद्् अध्यक्ष पं. ताराकान्त झा बजलाह। अपन अध्यक्षीय भाषणमे ल.ना. मिथिला विश्वविद्यालय केर माननीय कुलपति डॉ. एस. पी. सिंह कहलनि जे ‘‘ एकैसम शताब्दीक पहिल दशकमे मैथिलीक स्थिति आ अपेक्षा विषयपर केंन्द्रित ई सेमिनार मैथिलीक विकासमे मीलक पाथर सिद्ध होयत। प्रति कुलपति डॉ. ध्रुव कुमार मैथिली भाषा एवं संस्कृतिक प्रशंसामे कहलनि जे एतयकेर लोक बहुत उदार होइत अछि। पूर्व विधान पार्षद डॉ. दिलीप कुमार चौधरी जोर दैत कहलनि जे मैथिली अनिवार्य विषय होअए आ बच्चासभक संग संवाद मैथिली माध्यमे होयबाक चाही। विशिष्ट अतिथि डॉ. वीणा ठाकुर कहलनि जे साहित्य एवं समाजक कल्याणक हेतु भाषा एवं साहित्यकँे बचायब आवश्यक अछि। मैथिलीक वरीष्ठ साहित्यकार डॉ. भीमनाथ झा कहलनि जे मैथिली साहित्यक प्रति उदासीनता जगजाहिर अछि। भाषणमे बहुत किछु कहल जाइत अछि मुदा प्रयोगमे नहि अबैत अछि। आइ.आइ.टी. मद्रासक अंग्रेजीक प्रोफेसर डॉ. श्रीश चौधरी सेहो अपन मंतव्य देलनि। कार्यक्रमक शुभारम्भ शिल्पा,निशा एवं भावनाक द्वारा ‘जय जय भैरवि’ गायनसँ भेल। स्वागत भाषण प्रधानाचार्य डॉ. आर. के. मिश्र कयलनि आ कार्यक्रमक रूपरेखा सेमिनारक सचिव डॉ. अशोक कुमार मेहता कयलनि। उद्घाटन सत्रक समाप्ति डॉ. दमन कुमार झाक घन्यवादज्ञापनसँ भेल। एहि कार्यक्रममे तीनू दिन मिलाय चारिगोट अकादमिक सत्र चलल जाहिमे प्रमुख वक्ता लोकनि छलाह-डॉ. महेन्द्र झा-सहरसा, डॉ. केष्कर ठाकुर-भागलपुर, डॉ. ललितेश मिश्र-मधेपुरा, डॉ. फूलो पासवान- मधुबनी, डॉ. देवेन्द्र झा-मुजफफ्रपृुर, डॉ. कमला चौधरी- मुजफफरपुर, डॉ. रमण झा- दरभंगा, डॉ. विभूति चन्द्र झा- दरभंगा, डॉ. वासुकी नाथ झा- पटना, डॉ. नीता झा-दरभंगा, डॉ. सत्यनारायण मेहता-पटना, डॉ. राजाराम प्रसाद- सहरसा, एवं डॉ. दमन कुमार झा, मधुबनी। एकर अतिरिक्त अनेक विश्वविद्यालयसँ आयल लगभग चारि दर्जनसँ अधिक शिक्षक, जे.आर.एफ.,एवं छात्र-छात्रा लोकनि एहि राष्ट्रीय पावनिमे अपन-अपन शोधपत्रक संग विचार रखलनि जाहिमे वि. मै. विभागक छात्र-छात्रा लोकनि सेहो छलथि। विचार व्यक्त कयनिहारमे छलाह- सोनू कुमार झा, शीतल कुमारी, सोनी कुमारी, पुड्ढलता झा, अरुणा चौधरी-पटना, डॉ. शिव प्रसाद यादब-भागलपुर, बिष्णु प्रसाद मंडल, अमृता चौधरी, अर्चना कुमारी, राधा कुमारी, राम नरेश राय, निक्की प्रियदर्शिनी-भागलपुर,भाग्य नारायण झा-मधेपुरा,सुरेन्द्र भारद्वाज, श्यामानन्द शाण्डिल्य एवं अन्य। समापन सत्रक अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. आर. के. मिश्र कयलनि तथा विशिष्ट अतिथि ल.ना.मि.वि. केर कुलानुशासक डॉ. टी. एन. झा, क्रीडा पदाधिकारी डॉ. अजयनाथ झा छलाह। संचालन डॉ. अरुण कुमार सिंह कयलनि तथा धन्यवाद ज्ञापन एवं समदाउन गायन डॉ. अशोक कुमार मेहता द्वारा भावविह््वलताक संग कय संगोष्ठीक समापन भेल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। राजदेव मण्‍डलक उपन्‍यास हमर टोल गतांशसँ आगाँ... राति‍ जमुन भारी सन लगै छै। खट-खट अन्‍हार छै। एते लोक कतए जाइ छै हौ? गोपी मड़रक दुआरि‍पर बहुते टोलबैया जमा छै। ठाढ़ भेलहा सभ गप-सप कऽ रहल छै आ बैसलाहा सभ फुसराहटि‍। लोकक बीचमे गोपी मड़रक जेठका बेटा मनमा बैसल छै। बैसल नै छै बल्‍कि‍ अधहा सुनल आ अधहा जगल दै। जेना नि‍शाँमे मातल हुअए। ओंघराए कऽ खसै ले करैत छै कि‍न्‍तु ओकर जुआन स्‍त्री पाछूसँ सम्‍हारने छै। ओकरा स्‍त्रीकेँ अपना देहक कोनो सोह-सुरता नै छै। फाटल वस्‍त्र रहलाक कारणे ओकर छाती कनेक उघाड़ छै। सबहक नजरि‍ पहि‍ने ओहि‍ उघड़ल अंगसँ टकरा जाइ छै। आगूमे दू-तीन हाथ जगह खाली छै। जइठाम जरैत लालटेनक इजोत आ कुदैत-फानैत कीड़ा-फति‍ंगा। नीमक छोट-छोट ठज्ञढ़ि‍ आ पात राखल छै। खेलावन भगत अपना चेला-चपाटीक संगे झाड़-ॅफूंकमे लागल अछि‍। गरजि‍ कऽ मंत्र जाप करैत नीमक ठाढ़ि‍सँ बीखकेँ झाड़ि‍ रहल अछि‍। “एगारह हाथ काय चल बरहम दोहाय चल सातो पुरा नाग चल हरो-हरो बि‍संभरो दोहाय बि‍सहारा माताक छि‍अ।” गोपी मड़र अखने भुटाय वैद्यकेँ सोर पाड़ए गेलै। ओकर छोटका बेटा घनमा नीमक ठाढ़ि‍-डारि‍ आ लगपाँचेक मॉंटि‍ लाबैक लेल गेल छै। लोग आपसी फुसराहटि‍ कऽ रहल अछि‍। पाछूसँ केकरो जोरगर स्‍वर आएल- “की भेल छलै हौ?” “दुनू परानी सुतल छलै। नि‍न्न टूटलापर चि‍चि‍या कऽ कहलकै- हमरा कि‍छु काटि‍ लेलकौ। दौग कऽ आबैह जा।” “हँ, सुनैत छि‍ऐ जे परि‍वारमे कमाउ पुत वएह टा छै।” “खेतपर सँ थाकल-ठेहि‍आएल। खेलाक बाद सुति‍ रहलै। खाट, चौकी तँ घरमे नै छै। सि‍मसल जमीनपर सुतै छलै। साँप काटि‍ लेने हेतै।” “हँ हौ, घरक दशा नै देखैत छहक। एक दि‍स कूड़ा-करकटक ढेरी तँ एकदि‍स जंगल-झाड़। कतौ साफ-सुथरा देखै छहक। एनामे मनुख रहतै।” “भुटाय वैद्य की कहै छै हौ?” “कहै छै- असगुन भऽ गेलौ। सुनै छी ने नढ़ि‍या भूकि‍ रहल छौ। जान लेबा बेमारी छौ एकरा।” ई सुनि‍ मनमाक स्‍त्री जोर-जोरसँ कानय लगली। “फटृट चुप, कुलछनी। बाप-बाप चि‍चि‍या रहल छेँ। सतबरती रहि‍तें तँ एना हेबे नै करि‍तौ।” गोपी मड़रकेँ ठोर सुखि‍ गेल छै। आँखि‍मे लोर नै छै तैयो गमछासँ पोछि‍ रहल अछि‍। मनमाक स्‍त्री ठोह पाड़ि‍ कऽ कानि‍ रहल छै। गोपी मड़रक छोटका बेटा घनमाकेँ आब दुख बरदाइशसँ बाहर भऽ रहल छै। ओ चि‍चि‍या कऽ कहै छै- “हौ भैयाकेँ कहुना बचा दहक हौ सर-समाज।” मनमाक हालति नि‍रन्‍तर बेसी खराब भेल जा रहल छै। आब ऊ घररए लगलै। “नै बचतै शाइत आब।”‍ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अतुलेश्वर गाम मे नहि फागु आ नहि भोरक पराती मामाजी हमर लगभग 90 वर्षक भ गेल छथि आ हुनकासँ भेंट लगभग एक दशकक बाद भेल छल। कारण मामाजी असर्मथताक कारण आब गाम नहि जा पबैत छथि ओ काशीमे रहि रहल छथि। एहि बेर काशी यात्राक क्रममे मामाजीसँ भेंट भेल, प्रणाम पातिक बाद घरक कुशल क्षेम, काजक विषयमे आ बहुत किछु पुछलनि किन्तु सभसँ बेशी पुछैत छलाह गामक विषयमे। मामाजी काशीमे निश्चित छथि मुदा हुनक आत्मा गाममे छनि। गामक घर, गामक लोक, गामक गाछी बिरछी आदि हुनक स्वप्नमे अबैत छनि। ओना सभक इच्छा रहैत छैक जे जीवन अन्तिम समयमे तीर्थ करी मुदा मामाजीक इच्छा छनि गाम देखि आ गामक लोकसँ भेट करी आ ई इच्छा ओ हमरा बेर-बेर गप्पक क्रममे कहैत छलाह । हमरासँ हुनका एतबहि आग्रह रहैत छलनि जे गप्प गामक कहु प्रदेशक नहि । कारण गाममे परिवर्तन भ रहल छैक कहाँदन बड़का राजपथ बनि गेलैक आब गाम जायब दुस्कर नहि।  मामाजी जे गाम देखने छलाह ओ बहुत पिछड़ल। मुदा हम मामाजीक एहि भावावेशकें देखैत कहलियनि मामाजी अहाँ जे गाम ताकि रहल छी जे गामक स्मृति अहाँ रखने छी से गाम आब नहि छैक गाम बदलि गेल छैक सभ किछु गाममे ओहिना भ गेल छैक जहिना शहरमे । आब गामो मे सभ किछु बिकायत छैक ,आब ओ गाम नहि ओ तँ एकटा बाजार अछी जतए  शहर लोक अपन गाम तकबाक लेल अबैत अछी ओ लोकनि गाममे अपन जीवन तकैत छथि मुदा गाममे हुनका संग ग्राहक जेकाँ व्यवहार कयल जाइत अछी जहिना भारतक संस्कृति देखबाक लेल आयल विदेशीक संग भारतीय लोकनि करैत छथि ओहि प्रकारें कतहु संवेदना नहि कतहु भावनाक भाव नहि। आ हमर ई गप्प सुनि मामाजीक आँखि  नोरसँ भड़ि जाइत छनि मुदा हम सत्य कें कतेक नुका नहि सकैत छलहुँ। आ ओकर पश्‍चात  मामाजी गामक खिस्सा हमरा सुनबय लगैत छथि । हुनका लग परतंत्र भारतक गामक खिस्सा छल तँ स्वतंत्र भारतक गामक खिस्सा ,बाढ़ि आ रौदीक खिस्सा छल तँ हरित क्रांतिक , गामक लोकक खिस्सा छल तँ गामक जीवनक सेहो मुदा मामाजी क कहल प्रत्येक गप्प हमरा आब खिस्सा लागि रहल छल। कारण जखनि गाम जाइत छी तं  अपन हेरायल गामकें ताकैत छी मुदा गाम नहि भेटैत अछी ओ गाम जे पिताक उपन्यास , कथा आ कविताक गाम छल । विदेश्वर बाबा मंदिरक घंटी , दादीमाँ क पराती ।, ओना हमरा हुनक कहल गामक ओ यथार्थ आब खिस्सा लागि रहल छल कारण मामाजी अनुसार गाममे सभ कियो एक दोसराक लेल जीबैत छल मात्र अपने टा लेल नहि । ककरो सुख वा दुखकें अपन बुझैत छल, ककरो समांगक लेल खोजय नहि पड़ैत छलैक सभ कियो सभक समांग छलैक । सभक बच्चा काशी , इलाहाबाद ,दरभंगा आ पटनामे पढ़ैत छल मुदा सभक अभिभावक गामक एक गोटें होइत छलाह सभ बच्चा अपन खगता ,अपन आकांक्षा ओहि गामक अभिभावकसँ ओहि प्रदेशमे कहैत छलाह आ एकर अर्थ गामक संबंध प्रदेश धरि ओहिना छल ई एकर प्रमाण छल। हमरा हुनक गामक प्रति एहि अगाध विशेषता सुनि रहल नहि गेल आ हम मामाजी सँ पूछी बेसैत छीयन्हि - मामाजी अहाँ जे गामक गप्प कहैत छी ओ गाम हम सभ नहि देखि रहल  छीयैक हम सभ जे गाम देखि रहल छी ओ हमरा शहरक संस्कारसँ लिप्त भेटैत अछी आ अहाँ सँ सुनल गाम तँ आब खिस्सा भ सकैत अछी यथार्थ नहि । कारण जहिना शहरमे ककरो एक दोसरा सँ कोनो सम्पर्क नहि उएह स्थिति गाम मे अछी आ गाम सभ्य रहल अछी , गाममे रहनिहार लोक कहैत छथि। कारण हुनका लोकनिक कहब अछी जे पहिने गामक लोक अनेरे घुर लग बैसि समय बर्बाद करैत छलाह आब देखियो सभ अपना मे मस्त अछी घुर कि बरंबडा पर एकठाम बैसल लोककें नहि देखि सकैत छी । मामाजी गामक अल्हुआ , मड़ुआ आ नवका अगहनी चाउरक भुझल भुझाक स्वाद मोन पाड़ि रहल छलाह आ हम हुनका गामक सिंघारा , चाउमीन आ चाटक स्वाद कहि रहल छलयन्हि । मामाजी कुँवरसिंह थानक कीर्त्तन मोन पाड़ि रहल छलाह आ हम हुनका नवका भजनक गप्प कहि रहल छलयन्हि , मामाजी पैटघाट चौकक यात्रा दिनक खिस्सा कहि रहल छलाह आ हम हुनका सभ बेर मारि भ जाइत अछी झिलहौरक लेल पानि कत जेना –तेना दुर्गाजीक प्रतिमा भसि जाइत अछी । आ हमरा लागल मामाजीकेँ हमर एहि गप्प पर मोन नहि मानि रहल छनि आ अन्तमे कहैत छथि छोटु ई कोना भ सकैत छैक कारण गामक अर्थ गामक गीत, प्रीत आ रीति होइत छैक । कि सभटा बिला गेल गामसँ । आ हम कि कहि सकैत छलयन्हि जे मामाजी आब नहि तँ गामक गीत , प्रीति आ रीति सभटा अहाँक सुनाओल गामक खिस्सा जेकाँ ओहो सभ आब एकटा अतीतक खिस्सा भ गेल छैक। नहि फागु छैक आ नहि भोरक पराती। अन्त मे पाठक लोकनि ई मात्र हमर मामाजी क स्वप्नक गामक खिस्सा नहि , ई प्रत्येक मिथिलाक गामक खिस्सा छी। कि हम असत्य कहि रहल छी कारण सभ गोटाकें गाम हमरे जेकां भेटत।हमर मामाजीक गाम आब नहि भेटत । कियाक ?  ई एकटा सोचनीय प्रश्न अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.कामिनी कामायनी-शकुनतला ३.२.१.ओमप्रकाश झा- किछु गजल २.प्रभात राय भट्ट ३.शान्तिलक्ष्मी चौधरी ३.३.१. जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ २.वनीता कुमारी ३.अमित मिश्र- गजल -कविता ४.आनन्द झा -गीत- गै माए ५.जगदानंद झा 'मनु' कविता –सभसँ आगु आगु छी ३.४.१.आशीष अनचिन्हार-दीर्घ कविता-सोझ बाट पर चलैत-चलैत २.नवीन ठाकुर-कालदिशा- ३.५.१.जगदीश प्रसाद मण्‍डल २.अनिल मल्लिक- गीत-गजल ३.६.१.निशान्त झा २.सत्यनारायण झा ३.जवाहर लाल कश्यप ३.७.१.डॉ॰ शशिधर कुमर २.नवीन कुमार "आशा" ३.८.मुन्नाजी- १७ टा गजल कामिनी कामायनी शकुनतला सिनेह सॅ सींचल . .. ड़ूमरिक फूल. . . . स्वप्नमय जीनगी के. . . छाहरि मे टहलैत. . . गुनैत. . . मृग शावकक पाछॉ दौगैत .. . . . .ठिठकैत. . . कलि कलि. . .कुसुम .कुसुम के अपन सिनेहक ताग सॅ गॉथैत. . . बांधैत. . . . सजाबैत. . .संभारैत. . .औचक एक दिन. . . . . अनचिन्हार सन. . . . धून लागल जाङक मास सब किछु झलफल. . . कत्तौ किछु नै स्पष्ट. . . . आ’ ओहि अस्पष्ट सन. . नदी के तल पृष्ट मे एक गोट मनोहर. . . बलिष्ट . .. आहृलादकारी. . . जोद्वा. क’ बिंब. . . .उभरि .. . . .. वेगवान वायु क’ संपर्क सॅ. . . असंख्य पतिबिंब मे परिवर्तित होईत. . . क्षणांश .. . मे तिरोहित भ’ उठल.. . .मुदा ओ एक क्षण . . . . .कएक दिन . . . मास. . . धरि. . . मुस्कैत. . .पैघ .पैघ मादक ऑखि सॅ .. .. . प्रेमक हकार. . पठबैत. . . पकृति पुरूष.क’ ताक झॉक . . ऋषिकन्या के बेकल करैत .. . . ऑखि ऊपर उठाक’ . . . .रहस्यक अवलोकन करय लेल. . . . . चहु दिस हेरैत. . .कमलाक्षी .... . . ..सन्न. . . . । अपन सोझा ठाढ .. . विशाल चुंबकक़ . .पभाव सॅ . .. धकधक करैत हिय के संभारब मे असमर्थ. . .. माथक अवगुंठन. . .कनि नीचा तीरैत. . . .पफुल्लित ... . सरोरूद .. . .मुखमंडल के झॅपबा के कम मे उठेलक हाथ . ।.. झट सॅ ओहि मृणालसन. . . हाथ के थामए लेल . ... .बढि गेल छल उष्ण .. .शोणित सॅ पवाहित . . मजगुत .. पौरूष हाथ .. . धङफङी मे नजरि स ॅनजरि मिललै. . . आ’ बिजुरि चमैक .. .ठनका सन खसि पङल रहै माथ । . . ई साक्षात. . . स्वर्गक अपसरा. . . जौं होईत हमर सहचरा. . . अनेकानेक द्वन्द्व क’ शिकार मे .. . फिरीशान . .फिरीशान . .. ओहि सुन मसान . ..घाटक .. .कात मे. . . प्रेमक पथम वल्लरि जनिमते .. . पफुल्लित भ’ उठल . .. तीर तरकस कामदेवक .. . खेल खेलाङी विधाता . .. लेखनहार सेहो स्वयं । ई ज्वर. . .बढैत. . . .चढैत .. . .दिमाग के करय लै गस्त .. . कएल अपन सबटा अजगुत. . .पॉख़ि . .पशस्त. .। स्वछंद विचरैत आगि .. . खिच्चा पकृति .. .के. ..करबा लेल तबाहि जोहि रहल छल बाट. . . आगंतुकक ठाठ. . .. छल सॅ भरल . . .अपन सिनेहक’ पथम निशान. . . .. सौपैत स्वर्ण मुद्रिका. . . .. यश. . . कीर्ति. . . सुनामक़ . .ध्वजा फहराबैत. . . . फेर अयबाक बोल भरोस दैत. . . . कएक दिवसक अन्तराल . . . .गाछ तर . . . बान्हल .. . अश्व प’. . . . आरोही. . .ओहि . . . घन घोर जंगल मे जाईत रहला. . . . जखन दूर धरि. . . ओकर पीठ हेरैत. . . .निहारैत .. . कुमुदनी. . . . पीपनी खसेनाय बिसरि गेल अपन .. . .। ई सब एतेक शीघ. . . . अनायास .. . कोना भ’ गेल .. . .षङयंत पकृति केर. ..। . ओ कोमल स्पर्श. . . . पानि मे ऊब डूब .. करैत. . एकटा. . . रस लोलुप भमर .. दोसर कॉच कली. . . . . अहि ज्वर भाटा मे डूबए लेल मात कलि. . . उङि चलल . .. रसपान करि. . .सुआरथी जीव .. . अपन देश .. . अपन गली. . .। ऑखि मे चमकैत .. .अतीतक’ मोहकता .. . . ओ सुन्नर चितवन. . . ओ मादक चपलता .. . . ठिठकल सन घर मे. . . .बिसरल सन रस्ता. . . । सखि बृन्द बेहाल .. .देखि कुसुम गुमसुम .. . हेरायल हेरायल चालि .. . . क्षण मात लेल. . .जे नहि कहियो स्थिर. . विदयुतलता. . . आखर सॅ पहिने हॅसी निकसै ठोर सॅ. . . नव तरू. सन. . ड़ोलैत ओ भामिनी .. . आय हठात .. . किएक . . .एना गुम .. . . फराक .फराक बैसल .. . एसगर ताकि रहल अछि उदास. . . . गुलाबक खिलल फूल प’ .. . म्ॉडराति . . . गुनगुनाति .. . चमकैत कृष्ण वर्णी छलिया .. . के बेतहास .. . । छिटकल छिटकल सब सॅ. . . नहि जायत अछि संगे नहाय .. . . नदी. . . वा फूल लोढय .. . फूलवारि .. . सदिखन ऑखि मे नोर .. . भेल भाव विभोर. . . मुसैक उठैत अछि कोने.ा पहर. . . तोङैत डारि. . .दोसरे क्षण. . . घरक पछुआति . ..मालिनी केर .. . जलधार मे फूलके खोंटि . .खोंटि क’ करैत पवाहित .. . हेरैत अछि . . .शांत .. .नील. . .आसमान .. . हिमालयक कोरा मे .. .पकृतिक झोरा सॅ. . निकासैत अछि पुष्पदल .. . भ’ भ’ क विहृवल. . . . कखनो क’ विहुॅसि क’ बजैत अछि स्वगत. . . ई वियोग घङी. . .अपनहु के .. . केहेन लागैत होयत कांत. .. एक प्राण आ दू काया . .. के रचल ई माया .. . । एतेक दिवस बीत रहल .. .. लेलथि कत्त. . .खोज खबरि. . .। हे नदी . .. . माते . . . साक्षी अहीं. . . . ओही गंधर्व परिणय के. . . एतेक विलंब तखन किएक भेल .. . बहै छन्हि .. . दूनू ऑखि हर हर. . . . सोझा राखल. . . समिधा के जारैन. . . तोङैत अनेरे. . .बनाबैत. . बाढनि .. . . कखनो बैसल कखनो ठाढ .. . तखने याचक आयल द्वार. . . . देखि घरक फूजल केवाङ. . . पाषाणी. . . मुस्कैत .. . छवि के निहारैत. . . चलला भिक्षुक़ .. चुट्टा झमकारैत .. . एहेन ओहेन नै ओ. . .ऋषि दुर्वासा. . . जिनक शब्द मात छल गङा.सा .. . . कि बिसरि जाए ओ जिनक यादि मे छै डूबल. . टटा रहल छी हम कएक सांझक भूखल .. . . दौगल सखी. . . .ई की कहल हे भिखारी . .. . नहि अछि सुध मे हम्मर कुमारि. . . . मुदा ताबैत .. .ओ वाक मुॅह सॅ निकसि. गेल .. . उध्र्वगामी हाथ .. .क्षण मात लेल ठहरि गेल. . ई की केलन्हि . . . विधाता हम्मर कंठ स्वर सॅ. . . कोना बॉचव आब हम अहि कलंक सॅ. . कमंडल सॅ चुरू भरि जल ल’ क’ फेंकलन्हि सकुन प’ अभिमंत्रित करि क’ इतिहास. क पन्ना प’ रहब अहॉ छापल .. पतापी पुतक जननी कहायब. .. . एखन त’ भोगय पङत हम्मर सराप .. . . किछु बॉचल अछि अहू के ओही जनमक पाप ..। सखी सब तखन. . . विलखिक .. . आशम मे दौगल. . . देशाटन सॅ आयल कण्व सॅ कहल छल .. . “हे तात .. . अपनेक . . .परोक्षक .. खिस्सा. . . सकल आशम के बिलटा रहल अछि .. . . गुमसुम .. .सूकू केर. . .प्राण आब बचाऊ. . . आ’ दुर्वासा क’ सराप सॅ एकरा हटाऊ । चहुॅ दिस अंधार भ’ चमकैत बिजुरि संग .. .उल्कापात भेल होय. . .सून .. . . चान्ह आबि गेलन्हि .. . . धम्म सॅ कुशासन प बैसि माथ हाथ. धेने ऋषि .. . कर्णकुटीर मे .. . ई केहेन पलयंकारी .. ..संदेश .. . सौर मंडल मे .. . चक .चक करैत चन्दम ासन मुखवाली शकुन के .. . अम्लान पंकजक ई हाल. . . जेना मुठ्ठी भरि छौर रगङि देने होय कियो .. . विरहाकुल. . .विवस पिता. . के. . सहजहीं मे देखाय पङि गेलन्हि . .. भविष्यत शेष .. . . आगामी संकट सॅ सहमि क’कानि .. . .वा .. .दूरस्थ भवितव्य सॅ .. .मुदित मुस्काबी . . नहि जानि पओला . . ऋषि विशेष. . . . .। सखा मीत गण आबि सूझेलकैन्ह बाट .. . हतोत्साह किएक गुरूवर .. . . . अहू नदी के . . . अवस्स हेतय कोनो नै कोनो घाट. .. . बाल्यकाल मे पिता आ’ यौवन मे पति भवन .. . आब हम सब आन .. . .ओ अप्पन .. . . चलैत चलूू करए लेल उपाय .. . . करब नै ताधरि विराम .. . विदा करब .. . सजा धजा क’ .. . पुष्पक महफा . .. तरू वल्लरिक झालरि . .. शीघ गमन करैत .. .सखा बंधु .. . कुल गौरवक परिचय दैत .. . षोङषोमंत्रोपचार सॅ देवी के पूजन अर्चन करैत. . . स्नेहिल .. सकुन के स ंग चलबा लेल उताहुल भेला त’ .. . . मुदा आगॉ पाछॉ. . . जङि. चेतनक हाल विचित .. . श्यामा. . . कजरी .. . धनि .. . चतुरंगि .. .गोला .. गौ . . . बाछा .. बाछी. . .रंभैत. . .रंभैत. . . ध लेलक़ . .पछोर .. . आन पशु पाखी .. . मेष .. . वृषभ .. . मृग .. . तोता .. .मैना .. . सकुन पाखीक’ झूण्ड .. . संरक्षित भेल छल जेकर सानिध्य मे . . . शिशु सकुन. . . खंजन. . . कचबचिया .. . सूझै नै किछु .. .देखाय नै पङै बटिया .. . बिलखैत .. .बिसुरैत .. . छाती पीटैत .. .दाय . .. पितियानि .. पीसी माय .. . .सखी सम्पदाय .. . . कोढ फाटय वला बिछोह सुनि .. . गाछ बिरीछक जङि डोलायमान .. . अपन लता गुल्म सॅ .. . डारि नीचा करि .. . छेकए लगलै. . .महाभागक बाट .. .क़ि . . .सून करि क’ अहि आशमके. . . .कतए नेने जाय छी सौभाग्य. . पाछॉ मुङि तकने छलहि .. . . मृगनैनी अश्रुपूरित ऑखि सॅ. . . . . छुटि रहल अछि .. . ई माटि .. . ई पानि. . . ई गाम .. .ई धाम .. . ई लोकवेद .. ई पशु पखेरू. . . ई सखी समाज़ . . कतए सुनब. . .ई स्वर. . .ई साज .. . . फटि रहल छलन्हि. . .हुनको हिय .. . अहि विदागरी क’ मर्मान्तक कष्ट सॅ. . . कानि रहल छलीह. . .असंख्य नोर .. थमि गेलन्हि पएर .. .कएक क्षणक लेल. . मुदा मचबए लगला .. .पुरूखगण सोर .. . . आ’ नहुॅ नहुॅ करितो. . . अङियातए आयल लोक .. . आपस भेल. . .हृदय मे भरि क’ शोक .. . कतेक सून ई आशम . ..जतए कल कल बहैत. . . धार सन. . . सबहक़ . दुख सुख़ . .क’ चिठ्ठा लिखैत. . . हॅसैत. . गलबहियॉ दैत. . .ऑखिक तारा .. .सकुन .. . नैहर तजि .. .आय सासुर चलि जाय रहल छली. . . दूर देश. . .जतय कियो अप्पन नै. . .मात . .नेहक पतीक पति. . .आ’ हुनक प्रारब्ध .. . .। मुदा दौगल चलल भाग्य. . हुनका सॅ पहिने.. . .. आ’ रचल सब टा. . कुचक. . . .बिन ककरो कहने .. . दोख काल. . ओही माछ के देल. . . आंगुर मे गस्सल मुद्रिका जे गीड लेल .. . तखन अहि प्रेमक मात एक जीबैत निशानी. . . श्वॉस लैत गर्भ मे. . . .एक कोमल सन प्राणी. . . . । एतय राजा के गौरव फराक़ . . . बहराय धाखे नै किनको मुॅह सॅ वाक़ . . ऋषि के निवेदन प’ तमैक ओ उठल छल. . . के. . . ई. .. .दुष्पचार लेल. . .खिस्सा गढैत अछि . . जौं हमरे अछि ई गर्भस्थ . प्राणी. . . हेतै . .त’ अवस्स कोनो हमरो निशानी. . . चेन्हासि. . . चिहॅुकि .. कुंतल .. . आंगुर निहारै छथि. . . नहिं बॉचल अछि .. .आब कोनो पमाण .. . देखल नहिं प्रिया के तिरछियो नजरि सॅ तिरस्कार कयल सबके वचन सॅ एकांतके भावुक .. .रसिक ई सखा. . . . समस्त जन के सोझॉ बनल बघनखा .. . . सहस्तों नौह सॅ मुॅह नोईच रहल अछि. . . असंख्य खापङिक’ कारिख़ . .हमरा मुॅह प’ पोईत रहल अछि. . . बहैत बरसाती नदी बनल धार दार नोर .. . केहेन मिथ्या. . .. . . कपट .. . छल. . .कत्तेक फुईस ई सोर .. . . . दुनु हाथ सॅ पोछैत अप्पन नोर. . . . . देखैत अछि .. .उचुकिक’ राजा के झॉकि .. . दया .. . प्रेम. . विह्वलता तुरंते छटि गेल. . . आ’ खंजन नयन मे .. . .विद्रोहक लुत्त्ती .. .भडकि गेल. . . . विश्वामित आ’ मेनका के शोणित फन फन करैत .. . करय लागल किल्लोल. . . हन हन रणचंडी .. सन .. . हुंकारय लेल. . . भरल दरबार प’ नजरि एकटा फेरैत. . . क्रोध सॅ कॉपैत .. . महाराज के हेरैत .. . . जोर .जोर आबैत जाईत श्वॉस के रोकैत. .. उठौने छल अप्पन दहिन हाथक आंगुर. . . करैत सिंहासनदिस ईसारा .. . कनि काल लेल सभासद की. . . बहैत बयार धरि चुप्प. . कोटि कोटि ऑखि उठल एक संग़ . फडकि रहल छल हुनक बाम अंग़ . एतेक पैघ छल. . . भेलै नहि आस्था आ’ विश्वासक जीत. . आ’ अछि कनियो नहि ई पाखंडी भयभीत. . . कनि काल . बिलमैत. . .कहल विचारि. . . हमनै कत्तौ सॅ . . .कनियो अबला नारि .. . करमक गति स्वीकार अछि हमरा. . . मुदा जाय छी हम सब सॅ आब कटि क . . नै भिक्षा हमर जीवन के संभारत. . . नै ककरो निठुरता जीवन के उजाडत. . . अपने की त्यागब .. हमहीं अहॉ के तजै छी .. आ जाईत जा. ईत ई भाषा भखैत छी. . . . जे ढोंग परिणय. . .के करि क’ जरौलक चिता प’ .. . .नहि . करथिन्ह माफ ओकरा कहियो विधाता .. . तडपतै. . .माछ सन रौंद सॅ धिपल बौल मे.. सिनेहक छॉह लेल ओ रेगिस्तान मे भटकतै .. .

चपल वेग सॅ ओ चंचल चलल छल .. . हिय मे कत्तेको के हूक सन उठल छल. . ई लचकैत कॉच करची सन काया .. . ई जननी के ताप . .. . कि अदृष्टक’ माया. . .. मानस पिता नोर ढर ढर बहौला . .. मुदा मानिनी अपन पण सॅ हटल नै .. . अनचिन्हार बाट प’ उठल जे पग छल .. . ओ साहस. . .निश्चय ..... . . कर्मठता सॅ भरल छल. . . . बनल नै बिरिहिन . नै .. .. साधु संन्यासिन . . जनम द’ कुम्मर के रहल जंगल वासिन .. . सिंहासन . ..त नहि छल . ..परंच खटिया .. .पटिया .. . बैसि राजरानी ओ अडा जमौलक़ . . हुनक रूप आ’ गुण सॅ वशीभूत. . .सिनेहक भरल पात ल’ लोक दौगल. . पिता के सिखाओल ओ धर्मगत वाणी. . . ओ क्षात कर्मक सुृदृढ रस्ता .. . . . . अघोषित . ओ रानी .. . बसल सबहक हिय मे आ’ कण कण के आदर सॅ पुष्पित . ओ जीवन. . . गूॅजल जखन ओत्त पथम किलकारी. . . .त’ हर्षित विधाता .. . पफुल्लित नर नारि. . . बजौलक बधैया के ढोलक .. .मॅजीरा. . . संगहि बजौलक .. .लोटा . ..आ’ थारी .. . . इएह आब संगी. . . .नाता मीत. . .गोतिया. . . हिनके सानिध्य मे पलैत बाल शासक़ . . . गोर. . .भुर्राक़ . .पुष्ट ओ बालक़ . . स्फूर्ति. . ..अजब. . .तेज सॅ ओ भरल छल. . . . करैत मल्ल जुद्व . . . .संगी बनवासी नेना संग़ . . सबके करैत क्षण मे चीत्त ओ चलैत छल .. . . सूतल सिंह शावक के दुलारैत मलारैत. . . उठल शावकक संग दौड लगबैत रहैत छल. . . गिनती सिखल. . .सिंहनी के दॉत गिन गिन. . . मतारी के सुनबै. . .निरदोष बालक़ . . नै अश्व के .. . . सेर के आब नाथब .. . आ’ माता हुलसि क’ गरा सॅ लगाबैत .. . पठाबैथ फेर सॅ युद्व के गुर सीखा क’ .. . कोना सैन्य .. . बढत .. . न्याय करब त’ कोना .. . केहेन कूटनीति सॅ .. . रिपु हेते पराजित . .. पाठ पढि जननी सॅ आबैथ. . .. संहतिया प’ आजमाबैत . .. . वनवासी गरब सॅ निहारैत. . . . रानी के पूत . . .सिंह के पछाडैत. . . . चट्टान् ासन महिषि. ठाढ पाछॉ. . . नै चिन्ता फिकिर . . . . .नै भयगस्त काया . .. विचार मे घोरैत. . ..अमिय के पियाला .. . आ’ काया मे ढारैत पौष्टिक निवाला. . . . भरत नाम्नी ओ जे राज बनल छल. . . ओ शकुन के जीवन के धन धन कयल छल. . .. . . .. . .. .खिस्सा बाद के जे रहल होय. . . रहल अनभिज्ञ .. सत्य सॅ जग सदिखन. . . राखि देने छल. .दोष हरय लेल .पुरूषस्य चलित्तर के .. . . दुर्वासा. . .वा .. .माछक’ गप .. . . सुनल हेता .. . राज़ा. .भरतक डंका. . अजस्त. . . . . . . .बल. . . .शौर्यक .. . .साहस के खिस्सा जानै कएक सहस्त. . . . एतेक . टा सामाज्य. . मुदा. . कत्तो नहि उत्तराधिकारि .. . ऊपर सॅ आसन्न वृधावस्था. . .. चिंता नीत बढाबै. . .छल .. . मंति .परिषदक सलाह मानि .. . ओही जंगल दिस कूच केलथि. . .लिखल. .जतए .. पात .. पात. .प’ वीर. . . राजकुवरक नाम. . . . . देखल जे आनंदकारी .. .रूप. . .गुण . ..सॅ भरल देह. . . मात .. . पिता के नाम सुनि .. .क़ रेज औचक धडकि गेल. . . आंखिक सोझा .. .व्यतीत .. .करय लागल किल्लोल. . . ओ पाखीक गीत. . . .पकृति. . .ओ कुंतल . .हास्य स्मित .. . बरखों पहिनुका सूखल घाव. ...मे . .. टीस मारल असंख्य .. . . ई. . .की कयल. . विधाता .. . राखि .. .हमरे कान्ह प’ तीर. . . हमरे. . .. तनुज .. .हमर अंश ई. . . आय ठाढ़ . .कत्तेक गंभीर .. . . मात. . .शकुन. . . चेन्ह सकैत अछि. . .हमर पवित . .. सिन्ोह. . . बौआबैत .. .अतीत मे.. .. . . चलला .. . .बालकक पाछॉ .. . भयौन वन .पदेश . . .. वर्जित . ..जतय .. .भास्करक पवेश .. . दहाडैत .. .चहुॅदिस .. . भौल .. .हाथी. . . बब्बर सेर. . . . ओकरे संग दौगैत बाल्य भरत .. . .धेने सम्राटक हाथ .. . .. . . पदमासन मे बैसल . . .साधना लीन. . . लग मे होईत सोर .. औंचक मे देलि ऑखि फोलि. . . पत्यक्ष ठाढ . ..क’ल’ जोडने शासक .. पुतक पाछॉ. . . ऑखि मे भरल. . प्रायश्चितक भाव .. . पाकल केश .. . झूकल छाती .. .आगॉ के दू दॉत टूटल. . . मन मे कनियो कोनो भाव नै उपजल. . . ओ ओहिना स्थिर. . . . माता के हाथक ईसारा .. . .दैत कुसासन .. . भरतक संग . . .गहण कयल. . .नृपनंदन. . . चकित .भाव सॅ नहि हेर सकला. ..चहुकात .. . सकुन के मुख मंडल . . . एकदम सपाट. . . काल .. दुबकि क’ लागल छल कोनटा .. . ई सबल नारि . . .फाटत की नहि प्रियतम . .समक्ष .. त्रिया चरितक अ’ड मे खेलत खेल कोनटा. . . . कनतै .. .खींझतै. . . .छिडियेतै. . . .तिरस्कार .. . आरोप .. .पत्यारोप. . . . मुदा . . .नहिं किछु एहेन सन .. . अकूत. .धैर्य. . . .सहज स्वर .. .कनियो नहि तिक्त. . . कनियो नहिं लोहछल. . . स्वर फूटल छल सहज सुमंगल. . . . चिन्ह गेलौ. . राजन. . .हम अपन सिनेहक बंधन. . . नहि चाही हमरा कोनो चेन्हासी .. नहि राज मुद्रिका. . .नहि कोनो कंगन. . . . पथम प्रेम के उपजल फसिल. . अछि उपस्थित अहीं के समीप. . . बॉहू .. ...बल. . ..बुद्वि मे अहूॅ सॅ बीस. . कहि रहल अछि लोक चहू दिस. .. स्वीकार्य होयत त’ अपने के सौभाग्य .. . ओकरो गौरव .. .पिता के हाथ. . . रहतै माथ .. . त’ दिग्दिगंत. . . हेतै स्तुति .. .बजतै .. .घडीघंट भेल समाप्त. . .उत्तरदायित्व हमर .. . भावी सम्राट के गढब के. . .पोषब के. ।. .गहण करू हमर नमन. . . हम आ ब परम स्वतंत. . . स्नेहसिक्त हाथ भरत प’ फेरौलीह. . आ’ राजा के चरण मे माथ झूकाक’ पस्थान अपन मातृकुल लै भेली . .. .। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.ओमप्रकाश झा- किछु गजल २.प्रभात राय भट्ट ३.शान्तिलक्ष्मी चौधरी १. ओमप्रकाश झा गजल चढल फागुन हमर मोन बड्ड मस्त भेल छै। पिया बूझै किया नै संकेत केहन बकलेल छै। रस सँ भरल ठोर हुनकर करै ए बेकल, तइयो हम छी पियासल जिनगी लागै जेल छै। कोयली मधुर गीत सुना दग्ध केलक करेज, निर्मोही हमर प्रेम निवेदन केँ बूझै खेल छै। मद चुबै आमक मज्जर सँ निशाँ चढै हमरा, रोकू जुनि इ कहि जे नै हमर अहाँक मेल छै। प्रेमक रंग अबीर सँ भरलौं हम पिचकारी, छूटत नै इ रंग, ऐ मे करेजक रंग देल छै। सरल वार्णिक बहर वर्ण १८ फागुनक अवसर पर विशेष प्रस्तुति। गजल अन्हारक की सुख बुझथिन इ इजोतक गाम मे सदिखन रहै वाला। दुखे केँ सुख बना लेलक करेजक घातक दुख चुपे सहै वाला। जमानाक नजरिक खिस्सा बनल ए आब तऽ करेज हमर सुनू यौ, हुनकर नजरि कहाँ देखलक हमर करेजक इ शोणित बहै वाला। कहै छै लाजक नुआ मे मुँह नुकौने रहल दुनियाक डर सँ अपन, इ रीत अछि दुनियाक, तऽ एतऽ किछ सँ किछ कहबे करतै कहै वाला। करू नै प्रकट अपन सिनेह मोनक, यैह हमरा ओ कहैत रहल, किया हम राखब उठा केँ समाजक जर्जर रिवाज इ ढहै वाला। अहाँ डेग अपन उठेबे करब कहियो हमर मोनक दुआरि दिसक, बहुत "ओम"क बहल नोर, दुखक गरम धार मे गाम इ दहै वाला। मफाईलुन (ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ) ५ बेर प्रत्येक पाँति मे। गजल अहाँ केँ हमर इ करेज बिसरत कोना। छवि बसल मोन मे आब झहरत कोना। हवा सेहो सुगंधक लेल तऽ जरूरी, बिन हवा फूलक सुगंध पसरत कोना। अहीं टा नै, इ दुनिया छै पियासल यौ, बिन बजेने इ चान घर उतरत कोना। जवानी होइ ए नाव बिन पतवारक, कहू पतवारक बिना इ सम्हरत कोना। हमर मोन ककरो लेल पजरै नै ए, बनल छै पाथर करेज पजरत कोना। मफाईलुन (ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ) ३ बेर प्रत्येक पाँति मे। गजल चलल बाण एहन इ नैनक अहाँक, मरलौं हम। सुनगल इ करेज हमर सिनेह सँ बस जरलौं हम। भिडत आबि हमरा सँ, औकाति ककरो कहाँ छै, जखन-जखन लडलौं, हरदम अपने सँ लडलौं हम। हम उजडल बस्ती बनल छी अहाँक इ सिनेह सँ, सिनेहक नगर मे सदिखन बसि-बसि उजडलौं हम। हम तँ देखबै छी अपन जोर मुँहदुब्बरे पर, कियो जँ कमजोर छल, पीचि कऽ बहुत अकडलौं हम। अहाँ डरि-डरि कऽ देखलौं जाहि धार दिस सुनि लिअ, सब दिन उफनल एहने धार मे उतरलौं हम। फऊलुन (ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ)--- ५ बेर प्रत्येक पाँति मे। गजल मधुर साँझक इ बाट तकैत कहुना कऽ जिनगी बीतैत रहल हमर। पहिल निन्नक बनि कऽ सपना सदिखन इ आस टा टूटैत रहल हमर। कछेरक नाव कोनो हमर हिस्सा मे कहाँ रहल कहियो कखनो, सदिखन इ नाव जिनगीक अपने मँझधार मे डूबैत रहल हमर। करेज हमर छलै झाँपल बरफ सँ, कियो कहाँ देखलक अंगोरा, इ बासी रीत दुनियाक बुझि कऽ करेज नहुँ नहुँ सुनगैत रहल हमर। रहै ए चान आकाश, कखनो उतरल कहाँ आंगन हमर देखू, जखन देखलक छाहरि, चान मोन तँ ओकरे बूझैत रहल हमर। अहाँ कहने छलौं जिनगीक निर्दय बाट मे संग रहब हमर यौ, अहाँक गप हम बिसरलहुँ नहि, मोन रहि रहि ओ छूबैत रहल हमर। मफाईलुन (ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ) - ५ बेर प्रत्येक पाँति मे। २ प्रभात राय भट्ट गीत:-विरह आबू हमरा लग आबू पिया निरमोहिया //   मुखड़ा सेनुरक लाज रखु हमर पिया सिनेहिया//२ कतय गेलहुं हमर प्रीतम चितचोर अहाँक इआदे नैना बरसैय  मोर जिब नै सकब अहाँ बिनु हम सजना घुईर चली आबू पिया अपन अंगना आबू हमरा लग आबू पिया निरमोहिया // सेनुरक लाज रखु हमर पिया सिनेहिया//२ पल पल हम मरि मरि जिबैतछी घुइट घुइट आइंखक नोर पिबैतछी घुईर आबू सुनिक हमर वेदनाक स्वर करजोरी विनती करैतछी पिया परमेश्वर आबू हमरा लग आबू पिया निरमोहिया // सेनुरक लाज रखु हमर पिया सिनेहिया//२ अहिं हमर मथुरा काशी मका मदीना अहाँ बिनु नहीं अछी हमरा जिनगी जीना चिर निंद्रा सं जागी आबू कलक मुह सं भागी समसान सं उठी आबू कब्रस्तान सं निकली आबू आबू हमरा लग आबू पिया निरमोहिया // सेनुरक लाज रखु हमर पिया सिनेहिया//२ आस नहि तोडू पिया साँस रहिगेल बड़ कम जौं कनियो देर करब निकली जाएत हमर दम निकली जाएत हमर दम....................२ पिया ...........पिया ........मोर पिया.....२ आबू हमरा लग आबू पिया निरमोहिया // सेनुरक लाज रखु हमर पिया सिनेहिया//२ रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट 2. गजल अहाँ सं हम प्रगाढ़ प्रेम करैत  छी अहाँ किएक इ अपराध बुझैत छी जिन्गी अछी हमर अहींक नाम धनी हमरा किएक बदनाम बुझैत छी हमर आँखी अहांके  दुलार  करैय नैन किएक हमरा सं झुकबैत छी अछी मोनक मिलन प्रेमक संगम अहाँ किएक प्रेम इन्कार करैत छी हम छोड़ी देलहुं सब काज सजनी बस अहींक नाम लिखैत रहैत छी बिसारि देलहुं हम अलाह ईश्वर प्रेम केर हम  इबादत करैत छी प्रेम छै पूजा,छै प्रेम सच्चा समर्पण अहिं कें हम अपन जिन्गी बुझैत छी ................वर्ण -१४................... ३. शान्तिलक्ष्मी चौधरी गजल १ सोचै छी हम एकबेर बनि जैतिहौं जँ फेर सँ नेनाभुटका बच्चा टहैलि आबितिहौं बाड़ि-झाड़ि, खादि-खन्नर, पोखरि, डाबर, चभच्चा खेलैबतिहौं नरकैटक बन्दुक, बजैबितौं केरापातक पिपही, घसि-घसि बनैबतिहौ सीटी-बाजा, उखारि ओंकरल आमक बिच्चा उछैलितौं, फाँनितौं, घुमितिहौं घुमरि, खेलैबितिहौं करियाझुम्मरि करितौं हो-हो, बनितौं मरूआक ढ़ेरी, उरैबितौं थालक फुरकुच्चा चढ़ितिहौं जँ आम, लताम, जामुनक गाछ, झुलितिहौ डारिक झुल्ला कुतैरतिहौं टिकुला आ फुल्ली-बाति फर, मारितिहौं कच्चा पर कच्चा घिचितिहौं झोटा-चोटी,, घोलैटितौं भुइयाँ, कनितिहौ हकपुत्तर साँझ-बाति जँ घुरि अबितिहौं अँगना, मारिते माय, बौसतिहै चच्चा मनक सेहन्ता मुदा घुमरि-घुमरि रहि जाइ ये मोनेक भीतर सभटा भs गेल आब ई दुःसपना, जेँ चढ़ल ई यौवन अधखिच्चा "शांतिलक्ष्मी" शहर-गाम मे देखय बस एक्के रंगक रंगल छीछ्छा छेटगर होइते पाछु पड़ि जाइ छै टोलक बूरल लफुआ लुच्चा ........ वर्ण २५........ गजल २ ओ मुनसा हाथ मे भरल लबलब लबनी लेनै बैसल छै पसीखाना मे खोंता मे मुँहबेनै बैसल बगराक बच्चा कोनाकेँ छै आस लगैने दाना मे मौगी जे भिनसरबे गेलय घुरि एखन धरि नै एलय देखै चिलका केँ नै जानि काजक कत्तै जपाल पड़ल छै जीमीदार घरक जपलखाना मे हेबै मड़रक मेटिया आ रोटीक दौरी चोरेलकै राति मौगीक सतबेटा सभकियो लपड़ावैत थपरावैत घिचकेँ लs जाइत छै गामक थाना मे भागक राजा निसाँ मे उठलै टग्गैत, झुकैत, ऐठैत, अकरैत, खखसैत कंठ फँसल सुलय भाष केँ जोड़ै छै आँखिक तीर तरुआरि बला गाना मे मौगीक सौतीन, नै जानि के छीयै अइ सलीम केर खुआबक अनारकली संग जकरा लै मस्त पड़ल छै रस्ता कातक रातिक पसरल पैखाना मे " शांतिलक्ष्मी"यो केँ नियमक आड़ि तोड़ि मस्ती लुटब बुझाइत छै बड़ सस्त बड़ा कठिन छै यौ मुदा संयम मे बसनाय, रहनाय अपन सीमाना मे ....... वर्ण २८........ गजल ३ कोबी, टमाटर, भट्टा, ये लय आर जाय जैइबै मिरचाय ये लहसुन हरदि उहो छै, ये सुनय आर जाय छीयै माय ये ये गिरहतनी लय जैइबै त बाजु सुभिते मे दै देब आइ चिजो भेटत एकलम्बर, एक्को चिज नै भेटत अधलाय ये कोबी टमाटर धानक तीन खुटे, भट्टा मिरचाय फाँटि कय अल्लु चलु बरोबरि, मुदा हरदीक लागत नकत पाय ये हे गिरहतनी फाs लत तै लइये लेबय की करी दाम कम आढ़त जेइबै पता चलत कोना आगि फेकय मँहगाय ये हे माय कटहर नै किनलियै ओतहे चालीस के रहै किल्लो अहाँसीन सेहो एक-दुइ किनै पुज्जी कोना दितिहै फँसाय ये " शांतिलक्ष्मी" सोचय काल्हि चाहा-चिड़ै जकाँ भल्हों होइ अलोपित कुजरनीक बोली आइ गामक छीये बड़ अनुप मिठाय ये ....... वर्ण २३......... ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ २.वनीता कुमारी ३.अमित मिश्र- गजल -कविता ४.आनन्द झा -गीत- गै माए ५.जगदानंद झा 'मनु' कविता –सभसँ आगु आगु छी १

जगदीश चन्द्र ठाकुर ’अनिल’ गजल १

पढबाक मोन होइए, लिखबाक मोन होइए किछु ने किछु सदिखन सिखबाक मोन होइए ।

अन्हड जे रातिखन एलै, सब गाछ डोलि गेलै टिकुला कतेक खसलै, बिछबाक मोन होइए ।

सासुर इनार होइए आ डोल थिकहुं हमहूं किछु ने किछु एखनहुं झिकबाक मोन होइए ।

अहां आबि जे रहल छी, सुनिक’ बताह भेलहुं गोबरसं आइ आंगन निपबाक मोन होइए ।

दुइ ठोर थीक अथवा तिलकोर केर तडुआ होइत अछि लाज लेकिन चिखबाक मोन होइए ।

कोनो ऑफिसक चक्कर लगब’ ने पडै ककरो ई बीया विचार-क्रान्तिक छिटबाक मोन होइए ।

आजादीक लेल एखनहुं संघर्ष अछि जरूरी व्यर्थ गेल सब मांगब, छिनबाक मोन होइए ।

गजल २

जै खातिर मारा-मारी अछि भात-दालि-तरकारी अछि ।

छात्र गरीबक धीया-पूता विद्यालय सरकारी अछि ।

ई जे उल्लू देखि रहल छी लक्ष्मी मैयाक सबारी अछि ।

सदाचारके शिक्षा सबठां सबठां चोरबजारी अछि ।

भोज करत रसगुल्लाके बडका ई भ्रष्टाचारी अछि ।

घूस, दहेजक चस्का बूझू छूआछूतक बीमारी अछि ।

देश द्रौपदी, हम भीष्म छी हमरहुँ ई लाचारी अछि ।

२ वनीता कुमारी प्रजातंत्रक पुनर्निमाण प्रजातंत्र पर विचारविमर्श के भष्ट आ के आदर्श राजनीति मे आनी सदाचार मिटाबी सबतरहक भष्टाचार जागरूक रहय सब जनता व्यर्थ नहिं होय ककरो नागरिकता होय परीक्षा राजनेता के योग्यताक तखने भेटय आज्ञा चुनाव लड़बाक वैह नागरिक क सकय मतदान जकरा होय अधिकारक पूर्ण ज्ञान साक्षरताक प्रसार जहिना आवश्यक अनिवार्य जानकारी तहिना लोकतंत्रक किछु आधारभूत पाठ्यक्रम के ईच्छा ताहिमे होय बढ़िया परीक्षा बिना उत्तीर्ण भेने नहिं सम्भव चुनावक उम्मीदवार आ मतदाताक पद

३ अमित मिश्र गजल -कविता १ गजल जीवन मे जौँ नै रहबै कने सामने रहू , जा धरि चलै छै साँस हम्मर सामने रहू ,

केहनो हो मौसम फुल गमक नै छोड़ै छै , प्रेमक गाछ कए फुल छी गमकौने रहू ,

लोग कतबो दुषित करै छै पर्यावरण , सुर्य-चान उगबे करतै समझने रहू ,

जौँ हटि जायब प्रियतम अहाँ सामने सँ , हमरा संग सिनेह हारत , जीतौने रहू ,

ऐ वालेंटाइन देखा दियौ प्रेमक तागत ,

नभ सँ भू धरि प्रेम जाम छलकौने रहू

काँट इ जमाना छै सिनेह गुलाबक फुल , "अमित " नदी कए दुनू कात सम्हारने रहू . . . । । २ होली क एक गजल

चढ़लै फगुआ सुनि लिअ , मस्ती चढ़ल छै जानि लिअ ,

जोगीरा संग झुमै जाउ यौ , मौसम सँ खुशी छानि लिअ ,

रोक-टोक नै सब पिने छै , झुमु-नाचु छाती तानि लिअ ,

लाल पियर गुलाबी कारी , सब रंगक गड्ढा खुनि लिअ ,

अबिरक खुशबू गमकै , रंगक चादर तानि लिअ ,

रामा छै सासुर मे बैसल , सारि कने रंग मानि लिअ ,

अबिर द' क' गोर लागै छी , माथ हम्मर ,हाथ आनि लिअ . . ३ *** गजल ***

चाँन देखलौ त' सितारा की देखब , अन्हारक रूप दोबारा की देखब ,

प्रेमक सागर मे बड़ मोन लागै , डुब' चाहै छी त' किनारा की देखब ,

एहि ठामक मिठाई सँ बेसी मिठ , रूपक छाली सिंगहारा की देखब ,

अपने आप राति रंगीन भ' जाए , फेर बोतलक ईशारा की देखब ,

मेघक डरे चान नै बहरायल , ओ नै औता त' नजारा की देखब ,

जखन यादिक सहारे जी सकै छी , तखन चानक सहारा की देखब . . . । । ४ कविता मखानक पात

जहिना मखानक पात नया मे काँट सँ भरल होइ छै , आ पुरान भेला पर कोमल भ' जाइ छै , एकटा छोट बच्चा एक्के हाथे मसैल सकै छै . ओहिना मनुष्यक जीवन होइ छै ,

जखन धरि जुआनी तखन धरि बड़ बलगर , जखने देह खसल आँखि धसल दाँत बाहर , बस लाति-मुक्का सँ स्वागत शुरू भ' जाइ छै ,

जुआनी मे जे पाँच-पाँच सेर दुध पिबै छल , आब आधा कप चाह गारिक बिस्कुट संग भेटै छै , जीवन भरि जे अपन कपड़ा नै खिचलक , पुतहु कए साड़ी चुप-चाप खिच' लागै छै , जकर चरणक धुल इलाका कए लोग माथ लगबै छल , अपन बेटा कए चरण पकड़ै लए विवश भ' जाइ छै ,

ताहि पर जै कोनो बिमारी भ' जाइ , सोचू जौँ लकवा मारि जाइ , त' केहन हाल हेतै , सच मे मनुष्यक जीवन मखानक पात छै , ५ कविता - हरियर गाछ

 बाबा हरियर गाछ होइ छै , हुनक बेटा डाढ़ि-पात होइ छै , सुरूजक रौद सब पर पड़ै छै , फल-फुल पोता-पोती होइ छै , तैयो हरियर गाछ काटै छी , अपने हाथे बाबा कए मारै छी , गाछ काटि प्राणवायु कम करै छी , मौसम कए मारि अपने सहै छी , बेटा-पोता लए मौत लिखै छी , समाजक नाश अपने करै छी , " अमित " किय हरियर गाछ काटै छी . . . । ।

४ आनन्द झा गीत गै माए गै माए कोरामे उठा ले हमरा, ह्रदयसँ लगा ले आएल छी तोरा शरणमे चरणसँ लगा ले गै माए........................................................ हमहूँ तोरे सखा छी,  भटकि हम गेल छी माया आ लोभमे, सहटि हम गेल छी गै माए आँचरमे नुका ले हमरा नयनमे समा ले गै माए............................................................ माँ नै कुमाता होइ छै, हमहीं कपूत छी हमरा बिसर नै एना, हमहूँ तोरे पूत छी गै माए दया तों देखा दे हमरा डुबैसँ बचा ले गै माए............................................................ दस हाथ बाली मैया , कते के बचेलौं हमरा बेरमे जननी नजरि फेर लेलौं गै माए एक बेर फेर अपना करेजासँ लगा ले गै माए......................................................... डेगे डेगे दुनियां हमरा, ठोकर मारैए आँखिसँ नोर झहरए, रोकलो नै जाइए गै माए टुटल आनंदक तों आस फेर बन्हा दे गै माए........................................................ ५ जगदानंद झा 'मनु' कविता – सभसँ आगु आगु छी के कहैत अछि निर्धन छी हम थाकल हारल मारल छी हम छी मैथिलपुत्र दुनियाँ मे सभ सँ आगु-आगु छी देखू श्रृष्टिक   संगे देलौंह विदेह, जनक, जानकी हम आर्यभट्ट, चाणक्य दोसर नहि, बनेलौंह हम पहिल कवी श्रृष्टिक वाल्मीकि बनौलक के कालिदासक कल-कल वाणी छोड़ि मिथिला दोसर देलक के विद्यापति आ मंडन मिश्र सँ छिपल नहि ई विश्व अछि दरभंगा महाराजक नाम भारतवर्ष मे  बिख्यात अछि राष्ट्रकविक उपाधि भेटल जिनका मैथिलीशरण  मिथलेक छथि दिनकरकेँ जनै छथि सब यात्री छुपल नहि छथि कुवर सिंह आ मंगल पाण्डे फिरंगीक सिर झुकौने छथि गाँधीजी  असहयोग आन्दोलन एहिठाम सँ केने छथि देशक प्रथम राष्ट्रपति भेटल मिथिलाक पानिक शुद्धि सँ दिल्लीकेँ बसेलक कहू ए.एन.झाक बुद्धि सँ आई.आई.टी.मे अधिकार केकर अछि मेडिकल हमरे अन्दर अछि विश्वास नहि हुअए तँ आंकड़ा देखू सभटा आई.ए.एस हमरे अछि | ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.आशीष अनचिन्हार-दीर्घ कविता-सोझ बाट पर चलैत-चलैत २.नवीन ठाकुर-काल-दिशा १ आशीष अनचिन्हार दीर्घ कविता सोझ बाट पर चलैत-चलैत 1 सोझ बाट पर चलैत-चलैत पहुँचि जाइत छी अक्का दारूण बनमे अनचिन्हार लक्ष्यक संग नहि भेटैत अछी अपेक्षित लक्ष्य बी.बी.सी सुनला उतरो प्रतियोगिता किरण पठलों सन्ता नहि भए पबैत छी कोनो सरकारी चपरासी मानलहुँ कननाइ कोनो समस्याक समाधान नहि मुदा हँसनाइए कोन समस्याक समाधान छैक ? मजबूरीमे बौक जकाँ चुप्प रहनाइ नियति बनि गेल छैक लोकक टाट खरहीक हो की सीसाक ओ मात्र टाटे होइए ओकर काजे छैक सीमा निर्धारण इ गप्प भिन्न जे सीसाक आर-पार देखाएत इहो गप्प भिन्न जे टाटकेँ काटि हाथ मिला सकैत छी मुदा भावनाक आदान-प्रदान केनाइ ओतबए संभव छैक जतेक की बड़दक दूधसँ खीर बनेनाइ देहक हाड़-पाँजर फाटि रहल बाँसक गीरह जेना पाकल बाँस भने नहि होइ मुदा काँचो नहि छी बेछील्ले बाँस करए बला बेसी अछी बाँसक अनुपातमे लोक गनगुआरि वा सहस्त्रबाहु हुअए की नहि हुअए मुदा काज सुतारबाक लेल हजार-हजार टा हाथ-पएर भए जाइत छैक आ हरेकक आँगुरमे बान्हल रहैत छैक स्वचालित पिस्तौल आ गोली लोक छाती पर नहि पीठ पर खाइए सोझ बाट पर चलैत-चलैत 2 सोझ बाट पर चलबासँ पहिने कए लिअ अपन टाँगकेँ टेढ़ कारण सोझ टाँगे सोझ बाट पर चलब केखनो नीक नहि ठीक नहि आ अहाँ जखन देखिए रहल छीऐक जे नेङरा सभ दौड़मे प्रथम स्थान लेलकै तखन हमर सलाह पर आपत्तिक कोनो प्रश्ने नहि सभ लोक बामने टा बनबाक जोगारमे उगह चान की लपकह पूआ केर जाप करैत हरेक मनुख जोहि रहल अछी बाट अर्ध-सत्यक अधभूखल रहबासँ बेसी दुखदायी अछी अधनङनटे रहब दूभि खेनिहार बकरी भोगि रहल अछी जाबी आ शेर खा रहल जिंदा मासु अधपहरा आ अधकपारीक संयोगसँ जन्मल छी हम अर्धमनुख क्षणिक शांति लेल दीर्घ आशांतिक निर्माण करब एहिसँ बड़का छल कोनो नहि भेड़िया-धसाना होइत संसदमे पूर्वज आ वंशज इएह दूनू देखाएत आम कार्यकर्ता आब नहि बनि पाओत कोनो मंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति टुटलो हथिसार नौ घरक साङह होइत छैक हमरा नहि संदेह एहि पर संदेह तँ अछी हाथीक बल पर जे आब एक बेरमे एक टन खाओ लेला पर एकै मिनटमे हकमि जाइत अछी ओना हकमैए तँ कूकूरो मुदा इ ओकर जन्मजात गुण छैक आ बड़दक ? खटनाइ सएह ने चलू सहमत छी हम अहाँक गप्पसँ सोझ बाट पर चलैत-चलैत 3 सोझ बाट पर चलैत-चलैत अहाँ इ नहि बुझि सकैत छीऐक जे छोट-छोट गप्प पैघ कोना भए जाइत छैक अहाँ इहो नहि बुझि रहल छीऐक जे एक किलो तूर कोना बदलि जाइत छैक पहाड़क रुपेँ सोझ बाट पर चलैत-चलैत अहाँ इहो नहि बुझि पबैत छीऐक जे कोना लाशक नाम पर बैंक-बेलैंस बढ़ि जाइत छैक जीति जाइत छैक नेता कोना लाखक-लाख भोटसँ अहाँकेँ इहो नहि बूझल हएत जे मनुखक आत्मा मरलैए नहि मारल गेलैए बम आ गोलीक सहारासँ लोकसँ धूनि नहि फटि पबैत छैक मुदा लोककेँ छाती महँक दूध फाड़ए अबैत छैक येन-केन-प्रकारेण अम्मत घोरि कए एहन परिस्थितिमे जखन की धनिकक बच्चा बड्ड जल्दी जबान होइत छैक कामशास्त्र आ कोक शास्त्रक कतेक महत्व छैक से नहि बूझि पेबैक प्रतिघंटामे कतेक बच्चा होइत छैक तकर आकँड़ा लेब अहाँक लेल असंभव नहि मुदा प्रति सेकेण्डमे कतेक कंडोम बिकाइत छैक तकर थाह अहाँकेँ नहि लागत अहाँकेँ इहो थाह नहि लागत जे खाली समयकेँ कटबाक लेल कतेक युवा कतेक मिनटमे कतेक बेर वीर्यपात करैत छैक कतेक अभिसारिका अभिसार करैत छथि गुरुजनसँ चोरा कए एकरो थाह नहि लागत अहाँकेँ सोझ बाट पर चलैत-चलैत 4 सोझ बाट पर चलैत-चलैत छटपटाइत अछी कटल मुर्गी जकाँ जखन ओकरा बुझाइत छैक जे हम कोनो राकसक फेरमे छी छटपटाइत-छटपटाइत ओ दैए चकभाउर मोने-मोन जपैए सावित्री मंत्र पढ़ैए हनुमान चलीसा मुदा काज नहि अबैत छैक इ सभ आ बेहोस भए जाइत छैक अंतमे भोरक पहिल पहरमे निन्न खुलला पर मोन पड़ैत छैक जे पीने छलहुँ शराब भ्रमक भरिपोख आ निकलि पड़ल छलहुँ बजारमे उत्तर आधुनिकता आ भूमंडलीकरणक संग ग्लोबल विलेजक निर्माण करबाक लेल इ सभ मोन पड़ैत छैक सोझ बाट पर चलैत-चलैत 5 सुतबाक लेल नहि जगबाक लेल खाइत छी निन्नक गोली आ जखन जगले-जागल देखैत छी जे वास्तवमे कोनो अंतर नहि होइत छैक सरकारक कागती विकास आ साहित्यकारक कागती प्रगतिशीलतामे तखन हमर पएर तरसँ बिला जाइत अछी रमणगर सोझ बाट मायावी राक्षस जकाँ आ खसैत छी हम यथार्थक पतालमे छद्मक घोघ तर मनुख कतेक सुन्नरि होइत छैक एकर आकलन कोनो सौंदर्यशास्त्री नहि कए पौताह मुदा कतेक करूप होइत छैक मनुख छद्मक आवरणमे तकर निर्धारण जानवर तुरंत कए देत सोझ बाट पर चलैत-चलैत 6 सोझ बाट पर बनल एकटा घरक हरेक कोड़ो-बातीमे लटकल छैक बादुर सन्हिआएल छैक करैत घरमे राखल दाना-दाना पर लिखल छैक प्रेतक नाम दाना-दानामे छैक शोणितक सुआद ओहि घरमे बसैत छैक डाइन जे डनिपन सिखबाक लेल दए देलकै बलि अपन पूत-भतार देआद सर-समांगकेँ हरेक अधरतिआमे नङटे नचैत अछी डनियाँ हरेक राग-रागिनीक लय ओ ताल पर केखनो ओ गाबए लगैत अछी प्रखर सेक्युलर राग तँ केखनो अंधराष्ट्रवाद रागिनी आ नचबाक लेल बाध्य कइए दैत छैक ओ सभ भूत-प्रेत-बैतालकेँ एहि राग-रागिनीक लय-ताल पर नहि समता कए सकताह नटराज एहि नाचसँ अपन नाचकेँ उचित छन्हि हुनका जे ओ छोड़ि देथु अपन पदवी नटराजक सोझ बाट पर चलैत-चलैत 7 बाट आ बाट नहि रहल भने ओ सोझ हुअए की टेढ़ बनि गेलैक ओ राजगद्दी बटोहिओ आब बटोही नहि रहल भने ओ अहदी हुअए की कमासुत बनि गेल ओ राजा प्रजा नहि छैक एहि सोझ बाटक नगरीमे सभहँक पोनमे छैक लस्सा लागल जाहिमे सटल छैक कुर्सी मुदा एकटा गप्प बुझबै हरेक कुर्सीमे पोसा रहल छैक धामन साँप बस देरी छैक मात्र गुदा मार्ग द्वारा मगजमे घुसबाक जे काज गहुमन आ नाग नहि कए सकल से इ बिखहीन धामन देखाओत ओना बिखहीन हुअए की बिखाह साँप अंततः साँपे होइत छैक से हमरा बुझा रहल अछी सोझ बाट पर चलैत-चलैत २ नवीन ठाकुर -: काल-दिशा :-

समयक मूल्य हम बहुत चुकेलहूँ तैयो समय नै भेटल हमरा,

एखनो समय सँ लैर रहल छी .../२/ अपनों सँ अल्गेलक हमरा ! दियादी फैंटी में बैंटि रहल छी ...., ततेक मोन भट्केल्क हमरा ,

समयक मूल्य हम बहुत चुकेलहूँ तैयो समय नै भेटल हमरा,

मोन मसोरने हांफी रहल छी ...../२/ भैर जिनगी दौरेलक हमरा , की पेलहूँ हम की छुटल अछी ...., सब्किछ ई बिसरेलक हमरा !

समयक मूल्य हम बहुत चुकेलहूँ तैयो समय नै भेटल हमरा,

भेलहुँ ज्ञानी समय अनुरूपे....../२/  तेहन पाठ पढेलक हमरा , भैर दुनियां के ज्ञान बंटई छी ....., अपना सँ पिटबेलक हमरा ! 

समयक मूल्य हम बहुत चुकेलहूँ तैयो समय नै भेटल हमरा,

अंत काल समय फेर भेटल....../२/  काया साथ नै देलक हमरा , जै काया लेल समय गवेलहूँ....., समय साथ छोरबेलक हमरा !

समयक मूल्य हम बहुत चुकेलहूँ तैयो समय नै भेटल हमरा, ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.जगदीश प्रसाद मण्‍डल २.अनिल मल्लिक- गीत-गजल १ जगदीश प्रसाद मण्‍डलक नौटा कवि‍ता- घोड़ मन (भाग- 1) घोड़ मन घोड़छान तोड़ि‍ चौदहो लोक भरमए लगल। सातो-सोपान पताल टपि‍ सातो अकास उड़ए लगल। समए संग जहि‍ना बि‍लगैए मि‍सरी-मक्‍खन ओ ि‍नर्मल जल हंसा उड़ि‍ परमहंसा बनि‍-बनि‍ तहि‍ना उड़ैत मन देह-स्‍थल। स्‍थूल-सूक्ष्‍म बॅटि‍-बॅटि‍ जहि‍ना दृश्‍य-भाव कहबैए। एक्के आँखि‍ये दुनू देखै छी। अचेत मन भरमैए। नि‍कलि‍ देह धारण करैए आत्‍म-परमात्‍म दर्शन पबैए। पबि‍ते दर्शन मगन भऽ भऽ सूर-तान, वीणा धड़ैए। मथि‍ते मथानी जहि‍ना घी-पानि‍ बि‍लगए लगैए। जले बीच दुनू समाएल उठि‍ एक सि‍र चढ़ए लगैए। लोहि‍या चढ़ल आगि‍ बीच जहि‍ना मक्‍खन नचए लगैए। काह-कूह फेकि‍-फेकि‍ पेनी बीच बैस जमैए। घोड़ मन (भाग-2) गोबर घोड़ाइते पानि‍ जहि‍ना गोबराह रूप धारण करैए गोबरेक गंध पसारि‍-पसारि‍ गोबरछत्ता बनि‍-बनि‍ छि‍ति‍राइए। सुवि‍चार कुवि‍चारो तहि‍ना छने-छन छीन होइत चलैए। गि‍रगि‍ट रंग पकड़ि‍-पकड़ि‍ गि‍रगि‍टि‍या चालि‍ चलए लगैए। गि‍रगि‍टि‍या मनुक्‍खो तहि‍ना दि‍न-राति‍ बदलैत चलैए गीरगि‍टेक जहर सि‍रजि‍-सि‍रजि‍ बीख उगलैत चलैए। भेद-कुभेद मर्म बि‍नु बुझने देखा-देखी ओढ़ैत चलैए ओढ़ि‍-ओढ़ि‍ ओझरा-पोझरा डुबकुनि‍या काटि‍ मरैए। गाछक उपर डारि‍ बीच जहि‍ना बॉझी अपन बास करैए झड़मनुखो मनुख बीच तहि‍ना उपरे-उपर चालि‍ मारैए। सात समुद्र बीच मनुख दसो दि‍शाक दर्शन पबैए चीन्‍हि‍-पहचीन्‍हि‍ केने बि‍ना जि‍नगीक बाट पकड़ैए। घोड़ मन (भाग-3) प्रकृतोक तँ प्रकृत गजब छै सुगंध-कुगंध फूल खि‍लबैए। सु-पारखी सुरखि‍-परखि‍ कु-पारखी दि‍न-राति‍ मरैए। परखि‍नि‍हारो परखि‍ कहाँ परखि‍-परखि‍ बि‍लगा चलैत धार-मझधार बीच पि‍छड़ि‍-पि‍छड़ि‍ नहि‍ये खसैत। बेबस मन बहटि‍-बहटि‍ सीरा-भट्ठा बि‍सरए लगैत जान बॅचबैक धरानी कोनो लपकि‍-लपकि‍ पकड़ए चाहैत। सत्ताक भत्ता छि‍ड़ि‍आएल छै फानी, फनकी बनि‍ लागल छै। चि‍ड़चि‍ड़ीक फड़ जकाँ चूभि पएर टीको‍ नोछड़ै छै। बि‍नु पाँखि‍क हंसा जहि‍ना तीनू लोक वि‍चरण करैए। दि‍न-राति‍क भेद बूझि‍-बूझि‍ अज्ञान-ज्ञान-सज्ञान बनैए। घोड़ मन (भाग-4) आँखि‍ मि‍चौनी पाश बैस ब्रह्म-जीव माया खेलैए। समए पाबि‍ तहि‍ना ने अज्ञानो-सज्ञानक चालि‍ चलैए। होइत आएल आदि‍येसँ अज्ञान-ज्ञान बीच संघर्ष ताधरि‍ चलि‍ते रहत जाधरि‍ अन्‍हार इजोत बनत। पछुआ छोड़ सम्‍हारि‍-सम्‍हारि‍ अगि‍ला पकड़ैत चलू। अतीत केर स्‍मृति‍ बना समद्रष्‍टा बनैत चलू। एक छोड़क बाट देखि‍ भूत-वर्तमान देखैत चलू। भवि‍ष्‍य तँ भवि‍ष्‍ये छी भवि‍ष्‍य-वर्तमान बनबैत चलू। डेंगी नाह जहि‍ना यात्री धार पार करैए। डगमगाइत देह मड़मड़ाइत मन जीवन धाम पहुँचैए। अलकक चान अबि‍ते गाम चमकए लगलै ताकि‍ तरेगन बि‍छए लगलै। ज्‍योति‍ मि‍ला परखि‍-परखि‍ अकास सि‍र सजबए लगलै। रंग-बंरंगक तारा सजल छै लग-पासक संग सेहो हटल छै। कोणे-काणी सजि‍-धजि‍ मोती-कंचन माला बनल छै। धूप-छाँहक पाश पाबि‍-पाबि‍ नब-पुराणक भेद मि‍टल छै। धाम ज्ञानक चोला पहि‍रि‍-पहि‍रि‍ शब्‍द–शब्‍दक जाल पसरल छै। मुर्ति जखन कागज उतड़ि‍ रूप भगवान धारण करै छै। झड़ि‍-झड़ि‍ झहड़ि‍ असल नकल रूप धड़ए लगै छै। जहि‍ना कार्बन काॅपी होइ छै नकल कार्बन चढ़ए लगै छै। तहि‍ना अरूप सरूप संग चुट्टी चालि‍ चलए लगै छै। जहि‍ना मुसक चालि‍ पकड़ि‍ मुसरी सेहो घुसकए लगै छै। जाल-महजाल पकड़ि‍-पकड़ि‍ पकड़ि‍ सुत कॉटए लगै छै। आदि‍क दुहाइ लगा-लगा आधि‍-व्‍याधि‍ सि‍रजए लगै छै मकड़-जालक रूप गढ़ि‍-गढ़ि‍ अपने चालि‍ये फँसए लगै छै। अकलक चान हाॅसू पकड़ि‍ खल-खल सतमी पार करै छै। अट्टहास अष्‍टमी केर पबि‍ते नब-रंग नवमी कहबै छै। पबि‍ते नौमीक चान अकलक पूवो दि‍स ससरए लगै छै। पुवोक परताप पकड़ि‍-पकड़ि‍ पूर-चान कहबए लगै छै। एक चान यमुना उतड़ि‍ महल ताज देखए लगै छै। दोसर चान पून्‍यात्‍मा बनि‍ आत्‍म लोक बि‍चड़ए लगै छै। डेग-डेग दर्शन पबैत, डेगे-डेग ससरए लगै छै। उड़ि‍ अकास धरती पकड़ि‍ चान-सूर्ज कहबए लगै छै। प्रीत-रीति‍ पकड़ि‍-पकड़ि‍ अपन-अपन बेथा गबै छै राग-रागि‍नि‍ राग भरि‍-भरि‍ प्रेमाश्रु धार बहबै छै। जमुनाक जल बनि‍-बनि‍ नीर सरस्‍वती चढ़बै छै। गाड़ा-जोड़ी करैत दुनू गंगा बाट बनै छै। तीनू मि‍लि‍ तिरवेणी कहबए सूर-तान-राग भरै छै। आलाप-परलाप भरैत-करैत परि‍याण परि‍याग करै छै। गीत भाेरे कने जगा देब, भोरे कने जगा देब, भाय यौ भोरे कने जगा देब। जुग-जुगसँ मोटका नीन धेलक सि‍रमा तरक सभ कि‍छु लेलक। आबो कने जगा देब, भाय याै आबो कने जगा देब। इन्‍दि‍रा अवासमे नाओं लि‍खेतै सि‍मटी-ईटा केर घरो बनतै। झाँटक झटकी कि‍छु ने करतै भोरहरबे कने जगा देब भाय यौ भोरहरबे कने जगा देब। सात कोस पएरे जए पड़तै ब्‍लौकेमे शि‍वि‍र लगतै, ओतै नाओं लि‍खेतै, भाय यौ, भोरे कने जगा देब...। प्रेमी पि‍या प्रेमी पि‍या, हे प्रेमी पि‍या पीरि‍ति‍या जोगा-जोगा, हृदए रखि‍यौ जीया हे यौ प्रेमी पि‍या.... तड़सि‍-तड़सि‍ मन तड़पि‍ रहल अछि‍ आस लगा बाट खोजि‍ रहल अछि‍ नजरि‍ उठा आबो कने, ताकि‍ तकि‍यो हि‍या हे यौ प्रेमी पि‍या.... चीन्‍ह–पहचीन्‍ह सभ, सेहो उड़ि‍या गेल हवा केर झोंक पाबि‍, सभ छि‍ड़ि‍या गेल आबो कने नजरि‍ उठा, दि‍अ हमरो जीया हे यौ प्रेमी पि‍या.... सभ दि‍न संगे मि‍लि‍ दुनू रहलौं, सुख-दुख सेहो संगे मि‍लि‍ कटलौं। छाती खोलि‍ सहेजि‍-सहेजि‍, दि‍ल दि‍लेरि‍ घड़ू पीरि‍ति‍या हे यौ प्रेमी पि‍या...। शील द्रवि‍त होइत पानि‍ जहि‍ना सुख-शील रूप धड़ैए। तहि‍ना ने गाछो-बि‍रीछ फल जीवन, मृत्‍यु सुख बॅटैए। जे सृष्‍टि‍ सि‍रजए वन-सागर सएह ने सि‍रजैत वन-मनुख। बनि‍ मनुष्‍य बनबास करए जौं पबैत राम गुण, शील मनुख। लस्‍सा-दूध नाम धड़ए एक दोसर सागर-सरोवर कहबै छै। लहू कहि‍-कहि‍ जीव धड़ए वनमानुख खून मनुष्‍य कहबै छै। सुखा खून अपन अस्‍ति‍त्‍व शील-सि‍रजक कहबैए। शीले तँ रूप सु-भावक बढ़ि‍ रूप गुण पबैए। पबि‍ते गुण भव-सागरमे गुणी बनि‍ गुण खि‍ंचैए। छाती लगा बान्‍हि‍ बाँस रस्‍सीक संग सटैए। शील जखन गुण बनैए मनुख गुण खि‍ंचए लगैए गुणी बनि गुदगुदबैत मन जीवन सुख संचार करैए। कखनो रस्‍सा-कस्‍सी करैत कखनो ढील-ढाल चलैए। शीतल-समीर पाबि‍ कखनो संगे-संग वि‍श्राम करैए। दि‍न-राति‍क बीच समीर कुरूक्षेत्र कहबए लगैए। उनटि‍-पुनटि‍, ओंघरा-पोंघरा रणभूमि‍ सि‍रजए लगैए। जे फल पाबि‍ राम बनबौलनि‍ समुद्र बीच सघन पुल। तहि‍येसँ उड़ए लगलनि‍ रस्‍ता-बाटक मि‍झि‍राएल धूल। सएह फल पाबि‍ रचलनि‍ कृष्‍ण भारतसँ बनैत महाभारत। हि‍मालयसँ समुद्र आ समुद्रसँ कैलाश महादेव वएह थि‍क हमर भारत। भरत बनि‍ भ्रमैत भॅबर चरण-सि‍र धड़ैत जहि‍ना सएह चरण सुरसरि‍ सि‍रजि‍ शि‍व-कैलाश समाएल जहि‍ना। पी-घैल पाथर जहि‍ना पाथर वर्फ कहबए लगै छै। सि‍रजि‍ शील शीला बनि‍-बनि‍ शीला पत्‍थर कहबए लगैए। नब रूप सि‍रजि‍-सि‍रजि‍ जल रूप धारण करैए। बनि‍ जल-कण उड़ि‍ उकास हवा संग झुमैत चलैए। प्रेमी-प्रेमि‍का बीच दुनू अश्रु-कण बि‍लहैत चलैए। वएह कण-कणाइत बढ़ि‍ ओस बनि‍ धरती सि‍ंचैए। धरि‍ते धड़ा-धरती कन्‍हुआ हाथ दुनू छाती सटबैए। मि‍लि‍ दुनू सि‍ंगार सजि‍ वसुदेव रूप धारण करैए।‍ बनि‍ वसुन्‍धरा बनि‍ बसुदेव धार-धाराक धारण धड़ैत। पबि‍ते जल जलधार बीच राइ-पहाड़ रूप सजबए लगैत। बीच-बीच बाट-घाट बनि‍ रूप श्रृंगार सजबए लगैए। एक घाट दोसर नदी बनि‍ झील, सरोवर सागर सि‍रजैए। झि‍लहोरि‍ झील खेलाइत रश्‍मि‍ आकर्षित-आकर्षण करैए। प्रेमास्‍पद पबि‍ते पाबि‍ प्रेम-प्रेमी कहबए लगैए। पाबि‍ प्रेमी प्रेमी जखन सागर गंगा मि‍लए चाहैए। बॉसक पुल बना समुद्र गंगा-सागर स्‍नान करैए। वएह पवि‍त्र जल सागर कंद पहाड़ बनैए। बैस कंदरा जोगी-जती भगवत-भजन करैए। जहि‍ना भूखल पेट मांगए तहि‍ना ने मनो मंगै छै। भोज्‍यक तृष्‍णा दुनूक बीच भजन-भोजन कहबैत चलैए। बनि‍ शीला समुद्र बीच पहाड़ बनि‍-बनि‍ ठाढ़ होइए शि‍कारी पहाड़ घूमि‍-घूमि‍ मन-माफि‍त शि‍कार करैए। सभ दि‍नसँ होइत आएल देव-दानवक बीच रग्‍गड़ रगड़ि‍-रगड़ि‍ रगड़ैत चलि‍ मुंडे-मुंड पसरल झग्‍गर। झग्‍गड़ दू दि‍स चलै छै एक-रगड़ि‍ सुरधाम बढ़ै छै। तँ दोसर धरती धारण करै छै। स्‍वर्ग-नर्कक वि‍चमानि‍ कऽ अकास-सँ-धती खसबै छै। रंग-वि‍रंगक सृजि‍त कऽ दि‍शा-हीन बनबए लगै छै। उपदेशक तँ सभ बनैए अपना ले की सभ सोचैए। असार-सार संसार बूझि‍-बूझि‍ शील-धरम कहाँ बूझैए। जि‍नगीक शील धर्म छी एक दि‍न धारण करए पड़त। राम-नाम सत् छी अंति‍म दि‍न कहए पड़त। २ अनिल मल्लिक गीत-गजल १ गीत एकटा काल खण्ड, एतही जिलौं हम यथार्थ'क हलाहल, एतही पिलौं हम मेटायल तृष्णा, यश मान धन के ओह! क्षुधा कहाँ मेटायल, हमर मन के यतs चिक्कन रस्ता, बातानुकुलित अट्टालिका, गतिशिल सभकिछ ओतs खरँजा, खपडा, कडगर धुपमे ठाड ताड'क गाछ, आर नै किछ शर्द सीसा, उच्छ्वाश'क भाफ सियाही, आँगुर अछि कलम अहिना महिशारी सॉ मेलबॉर्न यात्रा, लिखैत मेटबैत छी हम दिग्भ्रमित उदिग्न मन नै अछि, आब स्पष्ट अछि, करब कि एहन करब, मातृ ऋण सँ उऋण भs जायब, बेसी हम कहब कि बिरक्त भs आयल छलहुँ, भेटल दुनियाँ रंग बिरंगी पयलहुँ एतही हुनको, पग पग साथ दैत जिबन संगी चुपचाप देखैत रहैत छलैथ, असगरे अपना सँ लडैत हमरा कि भेलै नै जानि, कखैन ओ अओलैथ, देलैथ कन्हा'क सहारा अश्रुपुरित, बाजि उठलैथ धीरे सँ, आब चलू केओ यतय रहय त रहौ पलैट क हम देखलहुँ हुनका, चमैक उठल बच्चा जाकाँ आँखि.. ओहो ! मेघाच्छादित भादब मास, घुप्प अन्हार, जेना भेल अचानक प्रकाश चहुँओर हजारो चिडै के एकसाथ चिडबिड चिडबिड,जेना भs रहल होई नव जिबन भोर बहुत भेल, पियब नै ई चमकैत हलाहल, आब पियब अमृत प्याला मन मलङ्ग अछि, चललहुँ हम सभ, बजा रहल प्रेम'क मधुशाला २ गजल जखनसँ खसल, आँचर देखलहुँ हम मोन पर धरल, पाथर पयलहुँ हम भूख सँ बिलखैत, कोरामे नवजात छलै नयन मे साओन, भादव देखलहुँ हम जिन्दा लहाश सभ'क, आँखि चमकैत छलै मनुख'क भेष मे राक्षस देखलहुँ हम बुझू जेना घेरने, दुस्साशन के भिड छलै पाण्डव भेल जेना,  आन्हर देखलहुँ हम तखने दुध, नूआ लेने, आयल एगो बच्चा ओकरे कृष्ण, युग  द्वापर बुझलहुँ हम !! ३ गजल मय मयखाना, साकी प्याला, केओ हमरा सन पिबै बाला टुकडी टुकडी भेल जीबन के, हमरा सन जीबै बाला

चन्द्रमुखी आम्रपाली हटलै, पाकिट मे जे पाई घटल पारो के अर्पण ने हम देखलौं, नित दर्पण देखै बाला

निशा छटल, निसाँ टुटल, पयलौ घर नै कोठरी छल पारो छल नव राह पकडने, हारलौ हम जितै बाला

अर्थ'क अर्थ नै बुझलौं ,अनर्थ हेतै कहाँ बुझल छल सगरो जीनगी बीक रहल अछि, मारी करै कीनै बाला

छद्म छुअन स हर्षित तन आत्मा'क स्पर्श बुझल'क नै टोकिएै त हमही बौरायल कहाँ केओ अछि मानै बाला

रंग रभस के भरम मे, छै जे जुआनी उजडि रहल जीबन रंग लूटि रहल, नित नव रंग'क मधुशाला ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.निशान्त झा २.सत्यनारायण झा ३.जवाहर लाल कश्यप १ निशान्त झा जीवन डायरी क तीन पन्ना दू  पन्ना  ईश्वर  पहिनेसँ लिखने छथि  पहिला "जन्म"  आ अंतिम "मरण"  केवल बिचला   एक पन्ना  मात्र अपन  जकरा  हमरा  लिखनाइ अछि   आँखि मे नीक सपना लेने    टूटल  हौसला  पर बिना कनने  मेहनतक पतीक्षारत रही   रेत बालू क  बीज केनाइ अछि    करुणा प्रेम सँ  व्यथित केँ  व्याध हरनाइ  अछि  हरित वसुंधरा क   स्वर्णिम पल लेबक अछि   हाथ सँ हाथ  पाखुर सँ पाखुर  मिलल  बढ़िते  जयबाक अछि   लक्ष्य केँ पएबाक अछि   ढौर लिअ  हाथसँ   क्षितिज केँ ढौर दियौ अहाँ  पल पल केँ बान्हि कऽ   तिल्सिमी चादर बुइन दियौ अहाँ  धरा फेर अहांक अछि   आकाश फेर  अहाँक २ किछु  विचार “राम” पर

एक

राम! अहाँ भगवान नै छलौं   अहाँ तँ छलौं , प्रतीक मात्र आ रहब ! दीन-हीन जनक संबलक विश्वास कए ! ओइ  धर्म-मर्यादित आचरणक जकर  कारण सँ अहाँ  भोगलौं चौदह सालक वनवास आ उपहार भेटल अहांकेँ  सीता विछोहक 

राम! अहाँ भगवान नै छलौं   अहाँ तँ छलौं, प्रतीक मात्र  आ रहब  पुत्र धर्मक प्रजाक पालनहार सत्यनिष्ठ राजाक! के कहैत अछि अहाँ  भगवान छलौं अहाँ  तँ मनुखे  छलौं  तखने तँ   पूजने छलौं अहाँ  शिव केँ ! ई आर बात अछि  कि अहाँ  “आदर्श” छलौं  अहांक  कर्म  अहांकेँ हमरासँ ऊंच उठा देलक  अतेक ऊंच कि अहाँ  भगवान क समकक्ष भऽ गेलौं   पूजय जाइ  लगलौं  भगवान कहाए लगलौं  राम! अहाँ मनुखे किएक नै रहलौं!

दू 

राम! अहांक नाम लक्ष्मण या किछु  आर होइतए  तँ की  अहाँ  ओ  सभ नै करितौं  जे  अहाँ केलौं  !

तीन

राम! कखनो -कखनो  तँ लगैत अछि  अहाँ  भगवाने छलौं   मनुख नै   किएकि  जय  सीताक लेल  अहाँ  लंकाक नाश केलौं  हुनके ! हुनके अहाँ  तियागि देलौं  मनुख तँ एना नै कऽ सकैत अछि . ३ ई जमीन अछि  गामक गौर सँ देखु एकरा आ प्यारसँ निहारि लिअ  आराम सँ बैसु अतए  पल दू  पल बिता  लिअ   सुध कनी  लऽ लिअ अतए  पर एकटा हरियर  घावकेँ  की ई जमीन अछि गामक, हँ ई जमीन अछि गामक ......

कुल कुनबा आ कुटुमक अर्थ बेमानी भेल  दादा कक्का हरा गेल सभ बिसरि गेल   बड़की मैयाँ गाम भरिमे रिश्ताकेँ केहेन डोरमे छल बान्हल जातिक  भेद रिश्ताक तराजू छल साधल  याद अछि अखन तक धीमरकेँ इनारक  छाहक ..... कि ई जमीन अछि गामके ,  हँ ई जमीन अछि गामके ......

आपसक  संबंधक चौंतार पर बैसि कऽ छल सब छौरा  बहुते  रौब सँ किछु  ऐंठ कऽ छल नै पैसा बहुत आ नै अधिक सामान छल  पर हमर ओही  गाममे सभक बहुत सम्मान छल  मांगि कऽ  कपडा  बनल बरयातीक दादाक ... कि ई जमीन अछि गामक ,  हँ ई जमीन अछि गामक ......

गामकेँ  जखनसँ शहरमे आन जान भऽ गेल   गामक सभ मनुख आब खाना खाना भऽ गेल  सए बीघाक मालिक गामक  अपने तँ छल   पगारक चक्कर मे छेदी  शहर मे अछि हरा गेल  बात करय के अछि हमरा ओइ  दौरक ठरावक ... कि ई जमीन अछि गामक,  हँ ई जमीन अछि गामक...... २. सत्यनारायण झा पत्र लिखि रहल छी आखर हम ,प्रिये अहींक नाम गेल छलौ पूजा मे ,हम अपना गाम |१ गामक माटि छलै ,ओहिना गमकैत , फूल पात सभ गाछ मे ,छलै ओहिना झुलैत |२ छौड़ा सभ गाछ पर ,झूला झुलैत छल , सिनेह-प्रीतिक गीत सभ ,ओहिना गबैत छल |३ यारक दलान एखनो पूबे मुँहे छल , बाबाक आँगन ,सुन सान लगैत छल |४ एकोटा लोक नहि, एकोटा बेद  नहि , सांझे सं अंगना मे कुकुर भुकैत छल |५ की कहू हाल हम, भैया भउजी केर , बेटाक मारि सं, बेदम रहथि फेर |६ गामक हालात छैक एकदम खराब , टोले टोल भेटत आब बोतल शराब |७ नहि छलै ब्रह्मस्थान मे ओ पाकरिक गाछ , नहि छलै ओकरा आव, बरक गाछक साथ |८ महराजी पोखरिक छैक , आव  हालत बेहाल घाट सभ टुटल छैक ,रूप विकराल |९ आँगन मे आव ,एकटा हवा बहल छै , सभहक पुतौहु आव, रौदा तपैत छै |१० बाँध बोनक हाल एखनो हरियर लगैत छैक , घास काटय एखनो घसवहिनी भेटैत छैक |११ देखलौ आँगन मे, गबैत सामाक गीत , पोखरिक मोहार पर, भेटल छला मीत |१२ कहलनि भजार ,अहाँ काज कएल नीक , गाम आबि गेलौ से, भेलै बर ठीक |१३ की कहू हम आब, गामक कथा , लिखि नहि सकै छी, गामक व्यथा |१४ माफ करब अहाँ हम, घूमि नहि सकब , गामक हालात जावे, किछु नहि सुधरत |१५ मोन हुए त’ गाम, अहूँ आबि सकै छी , गामक सुधार मे, संग द’ सकैत छी |१६ ३ जवाहर लाल कश्यप छी धन्य हम, हम्मर मिथिला ई जन्जीर तोडि , स्वीकार करु सबल छलहुँ, अबल भेलहुँ सबल बनब संकल्प करु नव गीत लिखु ,नव बात कहु आ नवयुग के संधान करु जाअगु अहाँ हुंकार करु आ मंगल  दिश  प्रस्थान करु नहिं बात बनाउ, नहिं घात लगाउ पीठक पाछा अपमान करु सत्य कहु, सम्मान पाउ आ दोसर के सम्मान करु भागु नहिं नेता के पाछा नहिं करु भीखक अभिलाषा आत्मबल के संग लय डुनियाँ पर अहाँ राज करु ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.डॉ॰ शशिधर कुमर २.नवीन कुमार "आशा" १. डॉ॰ शशिधर कुमर, एम॰डी॰(आयु॰) – कायचिकित्सा, कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टर, निगडी – प्राधिकरण, पूणा (महाराष्ट्र) – ४११०४४ जयति जय श्री त्रिपुरारी केर (आगामी शिवराति पर विशेष) बम - बम भोलेनाथ, जयति - जय श्री त्रिपुरारी केर । त्रिलोचन, चन्द्रधारी केर ना ।। कर मे त्रिशूल आ डमरू विराजन्हि, जनिकर  अम्बर  छन्हि बघछाल । गरा मे  लटकनि  साँप  अहर्निश, संगहि  रुद्राक्षक   छन्हि   माल । शम्भू – गिरिजापति, जय नीलकण्ठ, जटाधारी  केर । गंगा मस्तकधारी केर ना ।। श्मशान मे राज जनिक छन्हि, भूत – प्रेत    केर     संग । कान मे कुण्डल, हाथ कमण्डल, सौंसे   देह  रमओने   भस्म । गौरीकान्त,  गिरीश, उमापति,  जय ऋतुध्वंशी केर । उगना मिथिलाविहारी केर ना ।। वास जनिक कैलाशक ऊपर, हिमगिरि  जनिक तपोवन । त्रिपुरासुर केँ मारि खसाओल, कएल   जलन्धर  भञ्जन । कार्तिक आओर गणेशक तात,  रुद्र - असुरारि केर । बसहा बरद सवारी केर ना ।। हिनक भक्त रावण छल रक्तप, तइयो  मान  ओकर राखल । कयल  तपस्या घोर भगीरथि, मनवाञ्छित फल ओ पाओल। भोला - भंगिया – शिव - शंकर;  भक्तक हितकारी जे । विष्णु - चरण पुजारी जे ना ।। बसन्तक आगमण पर भेल पुलकित दिग - दिगन्त, आ खीलि उठल हर अन्तरा१ । स्वागतहि  आगत  वसन्तक, सजि   रहल  ई  वसुन्धरा ।। कास केर तजि श्वेत  अभरण, पहीरि कुसुमक ललित पहिरन, कऽ  सकल  सिंगार   हर्षित, कर   प्रतिक्षा   वसुन्धरा । भेल पुलकित दिग दिगन्त, आ खीलि उठल हर अन्तरा ।। चानने   मलयक   सुवासित, सौरभेँ   पुष्पक    प्रभावित, करय गमगम, मुदित हर कण, हर  दिशा,  हर  अन्तरा२ । भेल पुलकित दिग दिगन्त, आ  खीलि उठल हर अन्तरा ।। हँसि रहल निमिलित कमलदल, मुद  मनेँ  अलिदलक  सञ्चर, मुदित, हर्षित, लसित कोकिल, गाबय   स्वागत  अन्तरा३ । भेल पुलकित दिग दिगन्त, आ खीलि उठल हर अन्तरा ।। अर्थ निर्देश :- १)      अन्तरा = कोण / कोणा – दोगा २)      अन्तरा =  दू (दिशाक) बीच मे स्थित (जगह या स्थान) ३)      अन्तरा = गीतक आखर (सामान्य शब्देँ) कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल । फूलहि निर्मित अंग अहँक अछि, गरि जायत कोनो शूल ।। मुँह अहँक जनु रक्त कमल । नील कमलदल नयन युगल । ग्रीवा मृणाल, जल अलक बनल अछि, अधर कुसुम अरहूल । कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल ।। आँचरे झाँपि गुलाबक थौका । श्वासक संग मलय केर झोंका । अपनहि रमणि,  रुचिर कुसुमादपि,  तोड़ब किए अहँ फूल ? कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल ।। पद पंकज अहँ केर कोमलतर । उपवन बीच भ्रमर कर सञ्चर । अहँ केँ  देखि  भ्रमर  लोभायल,  अयलहुँ,  कयलहुँ  भूल । कामिनी ! जुनि तोड़ू अहँ फूल ।। २ बसन्तक आगमण पर भेल पुलकित दिग - दिगन्त, आ खीलि उठल हर अन्तरा१ । स्वागतहि  आगत  वसन्तक, सजि   रहल  ई  वसुन्धरा ।। कास केर तजि श्वेत  अभरण, पहीरि कुसुमक ललित पहिरन, कऽ  सकल  सिंगार   हर्षित, कर   प्रतिक्षा   वसुन्धरा । भेल पुलकित दिग दिगन्त, आ खीलि उठल हर अन्तरा ।। चानने   मलयक   सुवासित, सौरभेँ   पुष्पक    प्रभावित, करय गमगम, मुदित हर कण, हर  दिशा,  हर  अन्तरा२ । भेल पुलकित दिग दिगन्त, आ  खीलि उठल हर अन्तरा ।। हँसि रहल निमिलित कमलदल, मुद  मनेँ  अलिदलक  सञ्चर, मुदित, हर्षित, लसित कोकिल, गाबय   स्वागत  अन्तरा३ । भेल पुलकित दिग दिगन्त, आ खीलि उठल हर अन्तरा ।। अर्थ निर्देश :- १)      अन्तरा = कोण / कोणा – दोगा २)      अन्तरा =  दू (दिशाक) बीच मे स्थित (जगह या स्थान) ३)      अन्तरा = गीतक आखर (सामान्य शब्देँ) २ नवीन कुमार "आशा" बेटी हमर अभिमान

अभिमान अछि बेटी मान अछि बेटी माता-पिताक प्राण अछि बेटी; जॅ नहि होयत किनको बेटी बुझि हुनक ङाढ़ गेल टुटि अभिमान अछि बेटी। मॉ के दुःख ओ बुझैत हृदय सॅ कठोर नै होयति बापक करेजक होय ओ प्राण; बेटा सॅ बढ़ि होय अछि बेटी के ज्ञान मान अछि बेटी माता-पिता के प्राण अछि बेटी। आजुक बेटी; बेटा सॅ बढ़ि के इ सगरे दुनिया जानैत अछि तहियो ने जानी पापी दुनिया के बेटी जन्मक सोच सतबैत अछि; अभिमान अछि बेटी मान अछि बेटी। ‘‘आषा’’ के गप्प पर दियो ध्यान अवष्य करू एकटा कन्या दान; जॅ करब कन्या दान तखन बाजव- ‘‘बेटी तु हमर अभिमान’’। अभिमान ---------- मान------------- माता-पिताक --------

(भगिनी सौम्या ‘‘गुनगुन’’ लेल) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। मुन्नाजी- १७ टा गजल 1 बनलै सरकारी किरानी जिनगी नेहाल भ' गेलै प्रूफ पढ़ि संपादक कहेबा लेल बेहाल भ' गेलै रंगकर्म केर ज्ञानक बिन पिटए डंका सगरो मैथिली रंगकर्म क्षेत्रक ओ बुझू दलाल भ' गेलै मारि अंघोरिया तकै प्रायोजक खरचा-पानि लेल मैथिली केर नाम बेचि बुझू जे मालो-माल भ' गेलै रंगोत्सवमे लागै सर्वभाषा रंगमंचनक भीड़ देखू जे अपन भाषाक नाटकक अकाल भ' गेलै आखर---19 2 धार एखन धरि तँ उफानपर अछी लोक ताका-ताकी करैत बान्हपर अछी नहि जानि किओ केखनो जाएत भसिया किओ कोठा पर किओ मचानपर अछी कोठो बलाकेँ तँ नै बकसथिन्ह कमला दूनू बगलीक बान्ह कटानपर अछी भोर होइते मचि गलै गरद-मिसान कोठा आ मड़इया दूनू भसानपर अछी आखर-15 3 आजुक युगक कथा पुराण सुनू जाहिसँ पेट भरए सएह गुनू नै करू देखाँउसे दूइर समय स्वंय कोनो समस्याक निदान चुनू जँ लागल पसाही अनका घरमे तकरा लेल अहाँ नै कपार धुनू घर तँ बचाउ सदिखन अप्पन मुदा तेँ दोसरा बेर नै आँखि मुनू आखर—13 4 माछ मँगैए आरक्षण गणतंत्रक लिहाजसँ माटि-पानि छोड़ि देलक आब चलैए जहाजसँ छोड़ि भरोसा जालकेर निकलै छलै ओ गाँजसँ एलेक्ट्रीक-मशीन आबि करैए बहार माँझसँ कनिक्के पानि पसीन नै निकलैत छी बैराजसँ बर्फक बीच जीबि आब खुश भ' गेलौ सुराजसँ ओतौ नेता भेल प्रविष्ट जुटै छी एक अवाजसँ मनुक्खो डरैत अछी सिंगी-माँगुर जाँबाजसँ आखर---18 5 फिकर जिनगीक भ' नै सकल तैँ आइ खाधिमे खसि गेलौं हम सुरता रखै छी आइयो अपन मुदा बेगरता नै बुझलौं हम गाछसँ खसै छल पहिने लोक आइ जमीनेपर खसलौं हम बुझि धारक कछेर अपनाकेँ नाव केर फेरा बढ़ा देलौं हम माँझ आँगनमे कतिआएल छी अपने चालिसँ बेरा गेलौं हम आखर---12 6 बिगड़लो रुपकेँ नकल करैए आब लोक नकलोकेँ यथार्थ संजोगि राखैए आब लोक दायित्व बुझैए मात्र अपन स्वार्थपूर्ति लेल अनकामे अपनाकेँ विलगा लैए आब लोक धुँआधार हँकैए गप्प लोक कल्पनाकेँ भावेँ यथार्थमे अपनाकेँ सुनगा लैए आब लोक जीबनक दशा-दिशा तय करैए मात्र स्वंय भाइ देखावामे स्यंवकेँ हेरा लैए आब लोक देखू पहिनेसँ आरक्षित भ'केँ जिबैए सभ मुदा बेर पड़ने देखार होइए आब लोक स्तरसँ उपर जीबाक भ' गेलैए परिपाटी पाइक फेरमे भ्रष्टाचारी भेलैए आब लोक आखर---17 7 नेताक फाँसमे फँसल ई भारत भाए-भैय्यारी जकाँ देखू छटपटा रहल माछ भरल अपियारी जकाँ लोक तँ कटैए घिसिऔर महँगाइसँ मारल भ' क' भावे मुदित मुदा स्वर निकलैछ फकसियारी जकाँ आर्थिक उदारीकरण कमाइ आब लाखमे होइछ मुदा वैश्विक परिस्थितिमे मोल लागए हजारी जकाँ बिहारक सिरखारी बदलि गेल सन लगैए आब श्रमिक घटलासँ कंपनी-मालिक लगै बिहारी जकाँ आइ धिया-पुता घुमैए प्रशिक्षित बेरोजगार भ' क' महँगाइमे आंशिक लाभ पाबि बुझैए दिहाड़ी जकाँ आखर---20 8 आइ सगरो समाज लागै दलाल छै पाइ लेल अपनोकेँ करै हलाल छै रखने रहै अछी मुट्ठीमे माटि नुका कहि क' सोना बेचबा लेल बेहाल छै आधुनिक दौड़मे अछी मातल सन आर्थिक उदारीकरणकेँ कमाल छै टल्हाकेँ किनैए सोना बुझि लोक सभ विदेशी ब्राण्ड-नाम पाबिए बेहाल छै खुलल पोल छलै दलालक जखने इंटरपोल धरि मचल बबाल छै तखन सरेण्डर करै तस्कर सभ कहै छै जे इ देशभक्तिक सबाल छै भरि लेलक अछी स्विस बैंकक खाता जोड़ि हाथ कहै गलतीकेँ मलाल छै आखर---14 9 कएल कोनो कुकृत्यसँ लोक नै आब ढ़ठाइए वएह कुकर्मी सभ-सभ ठाम आब ठठाइए लोक पबैए रोजगार तँ बुनैए नव समाज जत' जा कमाइए ओतुके भ' आब सठिआइए उघरल लोक सभकेँ छुट्टा भ' घुमैत देखब मुदा झँपलाहा लोक सभ लाजे आब ढ़ठिआइए नीक काज केनिहार सभ झँपले रहैत अछी नीच काज केनिहारक झंडा आब उधिआइए आखर---18 10 बुझाइ नै अछी बात जे कोन अभिप्राइ छै कटै अपनोकेँ पाछू ने कोनो सम्प्रदाइ छै गनै अछी पाइ केर सदिखन आँखि खोलि काजक बेरमे देखिऔ लागत औंघाइ छै मातल छै दिनोमे कैंचाक जोगारक लेल मंगनी बला काजकेँ पुछीऔ तँ खौंझाइ छै सटू किरानी बाबूसँ घूस केर गप्प लेल पाइ लैते अनर्गलो काज पूरा भ' जाइ छै संत रहै छै सभ उपरसँ देखलापर पकड़ेला पछातिये किओ चोर कहाइत छै आखर---16 11 ई दौड़ए नेतबा दिल्ली धरि जेना भैंसी दौड़ै मालक थरि खाँहिस तँ भरब जेबी छै दूनू छोड़ए ने कोनो कसरि बीत नापि क' हाथ गनाबए छै एकल नापिक नै असरि भरल पंचैती माथ झुकाबै ई जान बचाबै कोना ससरि बाँटै धरमकेँ दुनू मीलि क' कूटि-चालि तँ जाइछ घोसरि आखर---11 12 फाटैत छल जतए मेघ आ जमीन पहुँचल पहिने ओतहि अभागल बुझनुक बुझए सियार अपनाकेँ जा धरि छल टिकल नीलमे राँगल फँसि गेल अपनेसँ व्यूहमे बेचारा नै भेलै लाठी अपने ओकरा भाँजल जत' शेर राज करै छल पहिनेसँ बुधियार छल ओ पहिनेसँ माँजल सियार जा क' पढ़ौलक मंत्र जखन प्रजा शेरसँ छल पहिनेसँ साधल आखर---14 13 कसमकस सन जिनगी जीब कतेक दिन इ कहू खूनक घोंट पीब कतेक दिन भाइ जँ जीबाके अछी तँ जीबू एना देखू जेना जिबै छै माछ पानिक बिन 14 जे चुबै छै ठोर-आँखिसँ ओकरा ताड़ी बुझू जँ पीतै केओ संसारमे तँ बरबादी बुझू आब तँ एहने बिआहक परिपाटी बुझू लिव-इन-रिलेशन वाली घरवाली बुझू भाइ जेबीमे घुसल हाथक की महत्व छै तालसँ ताल मिलए तँ ओकरा ताली बुझू निराशा संग आशापर टिकल छै दुनियाँ जँ देखलहुँ भगजोगनी तँ दिवाली बुझू बहुतों अछी संसाधन देश-परदेशमे मुन्ना अछी निकम्मा तँ ओकरा मवाली बुझू आखर-----16 15 जुग बीति गलै लगबैत जोगारमे मुदा पता नै की लीखल छै कपारमे दिन बितेलौं दोस्तीए निमाहि हम तँ तैयो छल हत्यारा अपने भजारमे भाइ जे काटैए गरदनि सदिखन ओ माथा टेकैए मंदिर-मजारमे हे एना नै चलू हाथ छोड़ि बाटपर बहि जाएब कहियो उन्टा बयारमे जे बुझतै बितैत समय केर मोल मुन्ना ओकरे दिन बिततै बहारमे आखर-----14 16 आब कविता आ गीत नै गजल चाही अपहर्ता चाँगुरसँ सकुशल चाही ठोरक मुस्की बनल रखबाक लेल धन आ जन सभहँक सबल चाही जहिया धरि रहत पेट खाली सन गीत आ संगीत नै पेटक अमल चाही कते आश करू हुनकर मड़ैयाक आब अपन बनाओल महल चाही तकनीकी रुपें भ' रहल छी सबल तँए इ भ्रष्ट व्यवस्था बदलल चाही आखर-----14 17 इ लोक कहैत हो किच्छो मुदा एहन बात भेल छै जाहि नगरसँ गेल बिहारी ओ मसोमात भेल छै आएल सुबुद्धि अपन श्रमकेर बूझल महत्व आब तँ अपनो राज्यमे विकासक परात भेल छै देखू जकरा नामपर माँगल गेलै सुख-सुविधा देशमे ओ बेचारा तँ बहुत दिनसँ कात भेल छै बोनिहार बिन अछी डुबल कतेको कंपनी देशमे आब बुझू जे सभ अहंकारीकेँ पक्षाघात भेल छै दोसरक बलें रहैए ओ बहुत कुदैत-फनैत मुन्ना तँए साहित्यो ओकर बापक जिरात भेल छै आखर-----19 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत १ राजनाथ मिश्र चित्रमय मिथिला स्लाइड शो चित्रमय मिथिला (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) २. उमेश मण्डल मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव जन्तु/ मिथिलाक जिनगी  (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण बालानां कृते डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” – अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा दिवस (21 फरबरीक अवसरि पर विशेष) एक – आध महिना पहिनुक गप्प थिक । शीतलहरीक समय छल । साँझ खन दलान पर, लालटेमक ईजोत मे धिया – पुता सभ पढ़ि रहल छल । सोझाँ मे घूर पजड़ल रहै आ सभ बूढ़ – पुरान लोकनि घूर लग बैसल छलाह । रेडियो बाजि रहल छल, गप्प – सड़क्का चलि रहल छल । धिया – पुताक मोन सेहो पढ़बा पर कम्मे आ घूर लग बाजि रहल रेडियो आ चलि रहल गप – शप दिशि बेशी छल ।  एक तऽ शीतलहरी, दोसर रतुका भोजनक समय लगिचाएल आ तेसर सामने बजैत रेडियो आ गप्प सड़क्का – तखन तऽ स्वभाविकहि जे पढ़बा मे मोन कोना लगओ ? मोन मसोसि कऽ बैसल किताब दिशि ताकि रहल छल आ प्रतिक्षा मे छल जे कोनहुना समय बीतय आ खएबाक लेल जएबाक अनुमति भेटओ । एतबहि मे हम आङ्गन सँ दलान पर अयलहुँ । हमरा देखितहि धिया – पुता सभ केर मोन खुश । खुश होयबाक कारण ई जे आब ओकरो सभ केँ गप्प मारबाक संवैधानिक अधिकार भेटैत बुझि पड़लै । जे लोकनि घूर लऽग बैसल रहथि से बहुत पैघ, बहुत बुजुर्ग – तेँ पढ़ब छाड़ि हुनिका सभ सँ बतिअएबाक मतलब छल डाँट सुनब । हुनिका सभक आशय जे जा धरि अङ्गना जयबाक बिझो नञि भऽ जाय ता धरि किताब लऽ कऽ बैसल रहह । हमरा अबैत देखि कऽ सोनी  हमरा कुर्सी दैत बाजलि – यौ बैसू । – की पढ़ैत छी अहाँ सभ ? वस्तुस्थिति तऽ हमरा बुझाइए गेल छल तथापि हम पूछल । - यौ की पढ़ब ? रेडियो सुनि रहल छी – से तऽ अहूँ केँ बुझाइए गेल होयत । प्रिया धीरे सँ बाजलि । पढ़बा छाड़ि कऽ बतिआएब हमरो पसिन्न नञि पर बेमोन सँ किताब लऽ कऽ बैसबा सँ की लाभ ? इएह सोचैत हम पूछल – ई बात तऽ नीक नञि ? केओ किछु नञि बाजल आ चुपचाप हमरा दिशि ताकए लागल । हमरो बुझाएल जे एहि मे धिया – पुताक कोन दोष । नेनपन तऽ निर्दोष होइत अछि, ओकर अप्पन कोनो दिशा नञि होइत छैक, जे दिशा देखाओल जाइछ तकर अनुसरण करैछ । दोष ओहि वातावरणक थिक जाहि मे किछु लोकनि पढ़बाकेँ मात्र नित्य कर्म जेकाँ बुझैत छथि आ धिया – पुताक अध्ययन – अध्यापन केर प्रति एखनहु लापरवाह छथि । ई स्थिति कोनो एक ठामक नञि अपितु मिथिला मे एखनहु एखनहु स्थिति एहि दिशा मे बहुत असन्तोषप्रद अछि । अनायस मोन मे श्री अरविन्द कुमार “अक्कू”जीक गीतक दू पाँती याद आबि गेल सखी पिया केँ पत्र आइ हम,  कोना  कऽ लिखबै  हे ? ककरा  सँ  अ – आ – क – ख – ग – ङ  सिखबै  हे ? ............................................................... पाँचे बरष सँ फुलडाली लए, तोड़ब सिखलहुँ फूल अरहूल । जानी ने हम चिट्ठी - पत्री, छी बेटी  मिथिला  केर मूल । हलाकि आजुक स्थिति उपरोक्त गीतक पाँती सन नञि अछि, पर बेशी किछु एखनहु नञि बदलल अछि । आन ठामक धिया – पुता केर पढ़बाक व पढ़एबाक तरीका परिस्कृत भेल अछि, ओ सभ एहि क्षेत्र मे सजग भेल अछि, ओहि ठाम धिया – पुता नेनपनक आनन्द सेहो उठबैछ आ अपेक्षाकृत कम मेहनति कऽ कऽ नीक शैक्षणिक स्तर केँ सेहो प्राप्त करैछ । अपना सन्दर्भ मे बात एकदम उनटा । मैथिल धिया – पुता केर जे किछु उपलब्धि देखैत छी से अपेक्षाकृत बेशी मेहनति कऽ कऽ आ नेनपनक बलिदान कएलाक उपरान्त भेटैछ । विशिष्ट उपलब्धि – जेना कि आइ॰ ए॰ एस॰, आइ॰ पी॰ एस॰ आदि - केर सुची भलहि नम्हर हो पर मैथिल धिया – पुताक औसत उपलब्धि बहुत असन्तोषजनक अछि । या तऽ नेनपनक पाछाँ शिक्षा हेराए जाइत अछि या फेर शिक्षाक पाछाँ नेनपन, जखन कि आन ठामक धिया – पुता केँ दुहुक लाभ ओ सुख भेटैछ । आ गामक सन्दर्भ मे “धिया – पुता” कहाँ - एखनहु मात्र “पुता” । “धिया” केर पढ़ाई तऽ बहुशः एखनहु ओहिना अछि – हाँ चिट्ठी पढ़ि - जरूर लीखि आ पढ़ि सकैत छथि, पर ताहि सँ की ? एखनहु बहुधा स्थिति ओएह अछि, ओएह मानसिकता कि धिया – पुता किताब लऽ कऽ बैसल अछि, सामने फलतूक गप्प चलि रहल अछि, रेडियो बाजि रहल अछि ..........................। बियाह काल वर पक्ष पुछैत अछि कि कनिञा कते पढ़ल छथिन्ह तेँ नाँव लिखा देने छियै, पास तऽ भइए जेतै ......................... । एखनहु कते घण्टा किताब लऽ कऽ बैसल से देखल जाइत अछि, की पढ़लक से नञि । - यौ एकटा चीज पुछबाक अछि । सोनीक शब्द हमर मोनक विचार - प्रवाह केँ तोड़लक । - की ? पूछू । हम बजलहुँ । - ई “मातृभाषा दिवस” की होइत छै ? - अहाँ केँ के कहलक ? - नञि, रेडियो पर किछु बजैत छलै । - 21 फरवरी कऽ हर साल “अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा दिवस” (International Mother Language Day) केर रूप मे मनाओल जाइत अछि । - से किएक ? पवन बाजल । - अहाँ सभ केँ तऽ बुझलहि होयत कि जखन 15 अगस्त 1947 ई॰ कऽ जखन भारत स्वतन्त्र भेल तऽ भारत केर विभाजन भेल आ पाकिस्तान नामक देश बनल । - हाँ । से तऽ सभ केँ बुझल छै -  सोनी बाजलि । - ओहि समयक पाकिस्तानक दू टा भाग छल पच्छिमी पाकिस्तान यानि कि आजुक “पाकिस्तान” आ “पुरबी पाकिस्तान” अर्थात् आजुक “बाङ्गला देश” । - 21 मार्च 1948 ई॰ कऽ पाकिस्तानक तत्कालीन गवर्नर जनरल स्व॰ मोहम्मद अली जिन्ना जी आदेश देलन्हि कि सम्पुर्ण पाकिस्तान केर राजकाजक एकमात्र भाषा होयत “उर्दू” । - जेना कि अपना देश मे “हिन्दी” - पवन बाजल । - नञि पवन बाबू, अहाँक ई जानकारी गलत अछि । भारत एहि परिप्रेक्ष्य मे थोड़ेक उदार नीति अपनओलक । भारत केर आठम अनुसुची मे मान्यता प्राप्त हरेक भाषा राष्ट्रभाषा थिक आ नैतिक व संवैधानिक रूपेण समान अधिकार रखैछ । जा धरि “हिन्दी” केर लेल सम्पुर्ण भारतवर्ष मे समान रूप सँ सहमति नञि होइछ ता धरि  पूरा भारत मे “हिन्दी” आ “अंग्रेजी” राजकाजक भाषा रहत । संगहि - संग आठम अनुसुची मे शामिल आन भाषा सभ सेहो अपन – अपन क्षेत्र वा राज्यविशेष मे राजकाजक भाषा रहत । जेना कि बंगाल मे बंगाली, महाराष्ट्र मे मराठी आ ............. - ............... आ मिथिला मे मैथिली । पवन बिच्चहि मे लोकैत बाजल । - हाँ । तऽ स्व॰ जिन्ना जी केर आदेश सँ तत्कालीन पच्छिमी पाकिस्तानक लोक सभ केँ खुशी भेलन्हि किएक तऽ हुनिका लोकनि केँ उर्दू नीक जेकाँ अबैत छल । पर तत्कालीन पुरबी पाकिस्तानक लोक क्षुब्ध भऽ उठलाह कारण हुनिका लोकनि केँ “बाङ्गला” केर अतिरिक्त आन भाषा वा उर्दू नञि अबैत छलन्हि । - तऽ फेर की भेलै ? उत्सुकता भरल स्वरेँ प्रिया पुछलक । - फेर पुरबी पाकिस्तान मे एहि प्रस्तावक भयंकर विरोध भेल । पुरबी पाकिस्तानक राजधानी ढाका मे छात्र लोकनि शान्तिपुर्ण प्रदर्शन कएलन्हि आ बन्न आयोजित कयलन्हि । पर तत्कालीन पाकिस्तान सरकार एहि विरोधक यथासम्भव दमण कएलक । ‍21 फरबरी 1952 ई॰ केर दिन शान्तिपुर्ण प्रदर्शन कए रहल छात्र लोकनि पर गोली चलाओल गेल । बहुत लोकनि घायल भेलाह आ बहुतहु प्राण गमओलाह । प्राण गमओनिहार आन्दोलनकारी छात्र लोकनि मे प्रमुख छलाह स्व॰ अब्दुर्सलीम, स्व॰ रफ़ीक़ उद्दीन अहमद, स्व॰ अब्दुल बर्कत आ स्व॰ अब्दुल ज़ब्बार । - ई तऽ जलियाँबाला बाग जेकाँ काज भेल । पवन बाजल । - हाँ । बाङ्गला देशक स्वतन्त्तताक बाद ‍21 फरबरी 1952 ई॰ केर दिन दिवंगत भेल सभ गोटेक स्मरण चिन्हक रूप मे “ढाका विश्वविद्यालय” केर प्राङ्गन मे एक गोट स्मारकक निर्माण कराओल गेल, जकर नाँव थिक “शहीद मिनार” । चित्र ‍१ – ढाका विश्वविद्यालय परिसर स्थित “शहीद मिनार” (साभार सौजन्य – विकिपीडिया, पब्लिक डोमेन) - तऽ तहिये सँ “अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा दिवस” मनाओल जाय लागल । प्रिया बाजलि । - नञि । एतेक आसान नञि छल । बहुतहि संघर्ष चलल । 26 मार्च 1971 ई॰ कऽ पुरबी पाकिस्तान अपना आप केँ स्वतन्त्र घोषित कएलक पर पाकिस्तान सरकार केँ से मान्य नहि । अन्ततः 16 दिसम्बर 1971 ई॰ केर दिन युद्ध मे पुरबी पाकिस्तान द्वारा पच्छिमी पाकिस्तान पराभूत भेल ।  पुरबी पाकिस्तान स्वतन्त्र देश बनल जकर नाँव राखल गेल “बाङ्गला देश” । यद्यपि फरबरी 1974 ई॰ मे पकिस्तान  बाङ्गला देश केँ स्वतन्त्र देश मानलक तथापि 26 मार्च 1971 ई॰ केर दिन केँ “बाङ्गला देश” मे स्वाधीनता दिवस केर रूप मे मनाओल जाइत अछि । - हाँ 1971 ई॰ केर युद्धक चर्च हमर इतिहासक किताब मे अछि । विकास बाजल । - बहुत बाद मे ‍17 नवम्बर 1999 ई॰ कऽ यूनेस्को (UNESCO; United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) द्वारा 21 फरबरी केँ औपचारिक रूपेँ  “अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा दिवस” केर रूप मे घोषित कएल गेल ।  आ ताहि दिन सँ हरेक वर्ष 21 फरबरी केर दिन “अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा दिवस” दिवस केर रूप मे मनाओल जाइत अछि । एहि दिवस केँ मनएबाक मुख्य उद्देश्य भाषायी आ सांस्कृतिक वैविध्य केँ संरक्षण करब आ बहुभाषिता (multilingualism) केँ बढ़ायब थिक । चित्र ‍२ – ऑस्फील्ड पार्क, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया स्थित “अन्तर्राष्ट्रिय मातृभाषा दिवस स्मारक” (साभार सौजन्य – विकिपीडिया, पब्लिक डोमेन) - चलू, आइ बहुत नीक चीज बताओल अहाँ । प्रिया बाजलि । - हाँ, ओना तऽ हम सभ खाली किताब खोलि बैसल रही आ घूर तऽरऽक गप्प पिबैत रही । अहाँ केँ अयला सँ किछु नऽव सीखल । सोनी बाजलि । - तऽ आब रतुका भोजन केर लेल चली ? हम पूछल । - हँ ........ हँ .......... सभ धिया – पुता बाजल । आ हम सभ रतुका भोजनक लेल आङ्गन दिशि विदा भेलहुँ । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet   -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.) Output: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) English to Maithili Maithili to English इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष  प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक  उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि

अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ ,  हटा क’ नहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६

  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/  कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड़ / बड़ी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍  ... समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍। जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍ चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि‍ बढ़इन बढ़न्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍ १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍ १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍ १८३. लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बि‍तौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/ करेलखिन्ह/ करेलखि‍न १८९. करएलन्हि/ करेलनि‍ १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍ २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍ २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि‍/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय भारोपीयभाषासन्दर्भे ध्वनिविमर्शः विद्यावाचस्पति डा. सदानन्द झा व्याकरणविभागाध्यक्षः लगमा दरभंगा, बिहारः भारोपीयभाषाचिन्तनं साम्प्रतिकेयुगे नितरामपेक्षते। संगणकीयभाषाविज्ञानस्य कृते ध्वनिविवेचनं अतीवदुष्करम् इति सुविदितम्मेव। तत्र मूल भारोपीयध्वनिनां स्वरूप निर्धारणं कठिनं कार्यमस्ति। डा०सुनितिकुमारचटर्जी-डासुकुमारसेनमहाभागौ आङ्ग्ल-फ्रेंच-जर्मनप्रभृतिग्रन्थाधारेण ध्वनीनां संक्षिप्त स्वरूपं स्वस्वग्रन्थेषु प्रतिपादितवन्तौ। यद्यपि तन्न पूर्णतो निर्दुष्टं तथापि प्रशस्यतरम्। डा. भोलानाथ तिवारिमहाभागाः मूलभारोपीयध्वनीनां स्वरूपमेवमेवादिषुः- १.   स्वरः a.  मूलस्वराः i.   अतिह्रस्वः ii.   ह्रस्वः iii.   दीर्घः संयुक्तस्वराः २.   अन्तस्थाः ३.   व्यंजनानि a.  स्पर्शाः i.   कवर्गः ii.   तवर्गः iii.   पवर्गः b.  ऊष्माः उपरुक्तेषुभेदेष्वपि तत्र भेदप्रभेदाः परिगणितास्सन्ति। एषु मूलभारोपीयध्वनिषु अतिह्रस्व अँ इत्युदासीनोऽर्धमात्रिकस्वरोवर्तते। अस्योच्चारणमस्पष्टमेव भवति। अत एवायं ह्रस्वार्धस्वरोऽपि कथ्यते। यूरोपीय भाषास्वयं ’Schwa’ इति निगद्यते इति लिख्यते च। अन्तःस्थास्वरव्यञ्जनयोर्मध्ये तिष्ठन्ति। अत एषां नामान्वर्थम्। इमे  कदाचित् स्वरवत् कदाचित् व्यञ्जनवच्च प्रयुज्यन्ते। केचिदिमान् स्वरव्यंजनरूपत्वेन द्वादशधाऽऽमनन्ति। परन्तु नेदं रुचिरम्। तेषां मूलतो षोढात्वात्। प्रयोगे भवतु नाम द्वादशधात्वम्। एतेऽन्तस्थाऽर्धव्यंजन शब्देनाऽपि गद्यन्ते। एषां स्वरूपाणि स्वनन्तार्धस्वरप्रभृतिशब्दैर्व्यपदिश्यन्ते। व्यञ्जनेषु कवर्गस्य त्रयः प्रकाराः आसन्। तत्र “ क् ख ग घ इति प्रथमं प्रकारं सामान्यकवर्गं मन्यन्ते केचित्। केचन च तालुसाहाय्येनोच्चारितं क्य ख्य ग्य घ्य इति प्रथमं कवर्गं स्वीकुर्वन्ति मूलभारोपीयध्वनिषु ’ह्’ ध्वनेः सत्तायां विवदन्ते विद्वांसः। केचिन्न स्वीकुर्वन्ति। परे मन्यन्ते। अपरे घोषाघोषाभ्यां तस्य द्वैविध्यमामनन्ति। अन्ये च ’स’ ध्वनिमेवोष्माणां वदन्ति न तु हकारमपि। कतिपये पण्डिताः मूलभारोपीयध्वनिषु ख् ग् घ् त् थ् द् ध् झ् इत्यादीनां संघर्षिणा ध्वनीनामपि सत्तामंगी कुर्वन्ति। अँ, इँ इत्याद्यनुनासिक ध्वनीनाभावः एकाधिकमूलस्वराणां सहप्रयोगस्य विरहः सन्धिः संयुक्तव्यंजनसद्भावश्चेत्यादीनि मूलभारोपीयभाषायाः ध्वनिगतं वैशिष्ट्यं प्रमुख्यापयन्ति। अत्र विस्तारभयात् सर्वेषां विवरणं नोपस्थाप्य विरम्यते। ॥ शम् ॥ Festivals of Mithila DATE-LIST (year- 2011-12) (१४१९ साल) Marriage Days: Nov.2011- 20,21,23,25,27,30 Dec.2011- 1,5,9 January 2012- 18,19,20,23,25,27,29 Feb.2012- 2,3,8,9,10,16,17,19,23,24,29 March 2012- 1,8,9,12 April 2012- 15,16,18,25,26 June 2012- 8,13,24,25,28,29 Upanayana Days: February 2012- 2,3,24,26 March 2012- 4 April 2012- 1,2,26 June 2012- 22 Dviragaman Din: November 2011- 27,30 December 2011- 1,2,5,7,9,12 February 2012- 22,23,24,26,27,29 March 2012- 1,2,4,5,9,11,12 April 2012- 23,25,26,29 May 2012- 2,3,4,6,7 Mundan Din: December 2011- 1,5 January 201225,26,30 March 2012- 12 April 2012- 26 May 2012- 23,25,31 June 2012- 8,21,22,29 FESTIVALS OF MITHILA Mauna Panchami-20 July Madhushravani- 2 August Nag Panchami- 4 August Raksha Bandhan- 13 Aug Krishnastami- 21 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 29 August Hartalika Teej- 31 August ChauthChandra-1 September Karma Dharma Ekadashi-8 September Indra Pooja Aarambh- 9 September Anant Caturdashi- 11 Sep Agastyarghadaan- 12 Sep Pitri Paksha begins- 13 Sep Mahalaya Aarambh- 13 September Vishwakarma Pooja- 17 September Jimootavahan Vrata/ Jitia-20 September Matri Navami- 21September Kalashsthapan- 28 September Belnauti- 2 October Patrika Pravesh- 3 October Mahastami- 4 October Maha Navami - 5 October Vijaya Dashami- 6 October Kojagara- 11 Oct Dhanteras- 24 October Diyabati, shyama pooja-26 October Annakoota/ Govardhana Pooja-27  October Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja-28 October Chhathi-kharna -31 October Chhathi- sayankalik arghya - 1 November Devotthan Ekadashi- 17 November Sama poojarambh- 2 November Kartik Poornima/ Sama Bisarjan- 10 Nov ravivratarambh- 27 November Navanna parvan- 29 November Vivaha Panchmi- 29 November Makara/ Teela Sankranti-15 Jan Naraknivaran chaturdashi- 21 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 28 January Achla Saptmi- 30 January Mahashivaratri-20 February Holikadahan-Fagua-7 March Holi-9 Mar Varuni Yoga-20 March Chaiti  navaratrarambh- 23 March Chaiti Chhathi vrata-29 March Ram Navami- 1 April Mesha Sankranti-Satuani-13 April Jurishital-14 April Akshaya Tritiya-24 April Ravi Brat Ant- 29 April Janaki Navami- 30 April Vat Savitri-barasait- 20 May Ganga Dashhara-30 May Somavati Amavasya Vrata- 18 June Jagannath Rath Yatra- 21 June Hari Sayan Ekadashi- 30 June Aashadhi Guru Poornima-3 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाऊ। ६.विदेह मैथिली क्विज  :  http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ"  : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स  : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI  FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha VIDEHA केर सदस्यता लिअ Top of Form Bottom of Form ईमेल : एहि समूहपर जाऊ २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ Top of Form Subscribe to VIDEHA Powered by us.groups.yahoo.com Bottom of Form २३.गजेन्द्र ठाकुर इ‍डेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक  निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइट http://www.shruti-publication.com/ पर । महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे। कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७ Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding: Language:Maithili ६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india) (add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)

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Details for purchase available at print-version publishers's site website: http://www.shruti-publication.com/ or you may write to e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com विदेह: सदेह : १: २: ३: ४ तिरहुता : देवनागरी "विदेह" क, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। विदेह:सदेह:१: २: ३: ४ सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com  or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com २. संदेश- [ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ] १.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत। २.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी। ३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत। ४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन। ५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन  भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी। ६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। १०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। १२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। १४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी। १५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी। १६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रिं‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे।  मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण-  श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)...   अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग। १७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल। १८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई। १९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत। २०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ। २१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ। २२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य। २३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई। २४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि। २५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर) २६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक। २७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत। २८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी। २९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना। ३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी। ३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि। ३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई। ३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई। ३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई। ३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक। ३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ। ३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम। ३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना। ३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ। ४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल। ४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई। ४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य। ४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना। ४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि। ४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक। ४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत। ४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि। ४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रश‍ंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत। ४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना। ५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना। ५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना। ५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल। ५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना। ५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक अनेक धन्यवाद; कतेक बरखसँ हम नेयारैत छलहुँ जे सभ पैघ शहरमे मैथिली लाइब्रेरीक स्थापना होअए, अहाँ ओकरा वेबपर कऽ रहल छी, अनेक धन्यवाद। ५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना। ५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल। ५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई। ५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि। ५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी। ६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि। ६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब। ६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी। ६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही। ६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय। ६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना। ६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय। ६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह। ६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना । ६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ। ७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक) ७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि। ७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि। ७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मे  समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि। ७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना। ७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि। ७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि। ७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि। ७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल। ७९. श्री हीरेन्द्र कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: वनीता कुमारी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ एहिमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-12 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १०० म अंक १५ फरबरी २०१२ (वर्ष ५ मास ५० अंक १००) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' १०० म अंक १५ फरबरी २०१२ (वर्ष ५ मास ५० अंक १००) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA

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