308 309 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ११० म अंक १५ जुलाइ २०१२ (वर्ष ५ मास ५५ अंक ११०) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.राम भरोस कापडि भ्रमर- मैथिली लोक संस्कृति संगोष्ठी अन्तरगत लोकनायक सलहेसःचर्चा–परिचर्चा कार्यक्रम सम्पन्न २.२.अतुलेश्वर- लघुकथा- बसात २.३.आशीष अनचिन्हार- मैथिली गजलकार परिचय श्रृंखला २.४.डा. अरुण कुमार सिंह- उजड़ैत गाम : बसैत शहर? २.५.चंदन कुमार झा- मिथिला-मैथिली आंदोलन २.६.जगदानन्द झा 'मनु'- दूटा विहनि कथा ३. पद्य ३.१.किशन कारीगर ३.२.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” ३.३.जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल ३.४.अमित मिश्र ३.५.चंदन कुमार झा ३.६.जगदानन्द झा 'मनु' ४. मिथिला कला-संगीत १.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) २. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी) बालानां कृते-अमित मिश्र- बाल गजल भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. Join Videha googlegroups विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ मैथिली देवनागरी वा मिथिलाक्षरमे नहि देखि/ लिखि पाबि रहल छी, (cannot see/write Maithili in Devanagari/ Mithilakshara follow links below or contact at ggajendra@videha.com) तँ एहि हेतु नीचाँक लिंक सभ पर जाउ। संगहि विदेहक स्तंभ मैथिली भाषापाक/ रचना लेखनक नव-पुरान अंक पढ़ू। http://devanaagarii.net/ http://kaulonline.com/uninagari/ (एतए बॉक्समे ऑनलाइन देवनागरी टाइप करू, बॉक्ससँ कॉपी करू आ वर्ड डॉक्युमेन्टमे पेस्ट कए वर्ड फाइलकेँ सेव करू। विशेष जानकारीक लेल ggajendra@videha.com पर सम्पर्क करू।)(Use Firefox 4.0 (from WWW.MOZILLA.COM )/ Opera/ Safari/ Internet Explorer 8.0/ Flock 2.0/ Google Chrome for best view of 'Videha' Maithili e-journal at http://www.videha.co.in/ .) Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Book/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ (उच्चारण, बड़ सुख सार आ दूर्वाक्षत मंत्र सहित) डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू। गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज' मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण" विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। "मैथिल आर मिथिला" (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) पर जाउ। ऐ बेर मूल पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ? Thank you for voting! श्री राजदेव मण्डलक “अम्बरा” (कविता-संग्रह) 12.43% श्री बेचन ठाकुरक “बेटीक अपमान आ छीनरदेवी”(दूटा नाटक) 10.06% श्रीमती आशा मिश्रक “उचाट” (उपन्यास) 6.51% श्रीमती पन्ना झाक “अनुभूति” (कथा संग्रह) 4.73% श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”क “नो एण्ट्री:मा प्रविश (नाटक) 5.62% श्री सुभाष चन्द्र यादवक “बनैत बिगड़ैत” (कथा-संग्रह) 5.03% श्रीमती वीणा कर्ण- भावनाक अस्थिपंजर (कविता संग्रह) 5.62% श्रीमती शेफालिका वर्माक “किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा) 8.58% श्रीमती विभा रानीक “भाग रौ आ बलचन्दा” (दूटा नाटक) 7.1% श्री महाप्रकाश-संग समय के (कविता संग्रह) 5.62% श्री तारानन्द वियोगी- प्रलय रहस्य (कविता-संग्रह) 5.33% श्री महेन्द्र मलंगियाक “छुतहा घैल” (नाटक) 8.28% श्रीमती नीता झाक “देश-काल” (कथा-संग्रह) 5.92% श्री सियाराम झा "सरस"क थोड़े आगि थोड़े पानि (गजल संग्रह) 7.4% Other: 1.78% ऐ बेर युवा पुरस्कार(२०१२)[साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन कोन लेखक उपयुक्त छथि ? श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह) 28.38% श्री विनीत उत्पलक “हम पुछैत छी” (कविता संग्रह) 7.43% श्रीमती कामिनीक “समयसँ सम्वाद करैत”, (कविता संग्रह) 6.76% श्री प्रवीण काश्यपक “विषदन्ती वरमाल कालक रति” (कविता संग्रह) 4.73% श्री आशीष अनचिन्हारक "अनचिन्हार आखर"(गजल संग्रह) 18.92% श्री अरुणाभ सौरभक “एतबे टा नहि” (कविता संग्रह) 6.76% श्री दिलीप कुमार झा "लूटन"क जगले रहबै (कविता संग्रह) 8.11% श्री आदि यायावरक “भोथर पेंसिलसँ लिखल” (कथा संग्रह) 5.41% श्री उमेश मण्डलक “निश्तुकी” (कविता संग्रह) 12.16% Other: 1.35% ऐ बेर अनुवाद पुरस्कार (२०१३) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे के उपयुक्त छथि? Thank you for voting! श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर) 32.63% श्री महेन्द्र नारायण राम "कार्मेलीन" (कोंकणी उपन्यास श्री दामोदर मावजो) 13.68% श्री देवेन्द्र झा "अनुभव"(बांग्ला उपन्यास श्री दिव्येन्दु पालित) 12.63% श्रीमती मेनका मल्लिक "देश आ अन्य कविता सभ" (नेपालीक अनुवाद मूल- रेमिका थापा) 14.74% श्री कृष्ण कुमार कश्यप आ श्रीमती शशिबाला- मैथिली गीतगोविन्द ( जयदेव संस्कृत) 13.68% श्री रामनारायण सिंह "मलाहिन" (श्री तकषी शिवशंकर पिल्लैक मलयाली उपन्यास) 11.58% Other: 1.05% फेलो पुरस्कार-समग्र योगदान २०१२-१३ : समानान्तर साहित्य अकादेमी, दिल्ली Thank you for voting! श्री राजनन्दन लाल दास 53.85% श्री डॉ. अमरेन्द्र 25.64% श्री चन्द्रभानु सिंह 19.23% Other: 1.28% 1.संपादकीय १ भारतीय छन्द, अलंकार आ रस सिद्धान्त: छन्दकेँ किछु गोटे अज्ञानतावश रस आ अलंकारसँ अलग कऽ कए देखै छथि। जँ कोनो वीभत्स दृश्यक वर्णन कवि करत तँ की ओकरा वीभत्स रस अनबा लेल परिश्रम करए पड़तै आ की ऐ लेल ओकरा गएर छन्दोबद्ध रचना रचऽ पड़तै! की शब्दालंकार आ अर्थालंकार लेल कविकेँ गएर छन्दोबद्ध रचना करऽ पड़तै? की बिनु विस्तृत भाषायी शब्दावलीक शब्दालंकार वा अर्थालंकार उत्पन्न भऽ सकैए? की गजल, दोहा, रोला, कुण्डलिया बिनु व्याकरणक सम्भव छै? आ की छन्द आ बहरमे रहने रस आ अलंकारसँ कोनो रचना विहीन भऽ जाइ छै आ गएर छन्दोबद्ध रचना अलंकार आ रससँ स्वतः युक्त भऽ जाइ छै? की अभ्यासक महत्व नै छै आ अभ्यास आ मेहनति केनिहारमे प्रतिभा नै होइ छै? एकटा वाद्ययंत्र वादकसँ कियो पुछलन्हि जे ओ किए भोर साँझ अभ्यास करै छथि तँ हुनकर उत्तर रहन्हि- ऐ दुआरे हम भोरमे अभ्यास करै छी जे साँझमे गति ने कम भऽ जाए आ साँझमे ऐ दुआरे अभ्यास करै छी जे भोरमे ने गति कम भऽ जाए। मुदा संगमे ईहो सत्य अछि जे मात्र रस, अलंकार आ छन्दक आ अभ्यासे टा सँ कोनो रचना उत्कृष्ट नै भऽ जाएत, आ से रचनाकारक सामर्थ्यपर निर्भर करत, मुदा रचनाक उत्कृष्ट हेबाक प्रतिशतता बढ़ि जाएत कारण रस, अलंकार आ छन्दक अभ्यास सामर्थ्यवान आ प्रतिभाशाली बेसी नीक जेकाँ करैए, आ ओ जँ बे-बहर आजाद गजल वा अकविता लिखत तँ तकर उत्कृष्ट हेबाक सम्भावना सेहो बढ़ि जाएत। ओना मैथिलीक भिखारी ठाकुर रामप्रवेश मण्डल झारुदार सन प्रतिभाशालीकेँ रस, अलंकार आ छन्दक नैसर्गिक वरदान छन्हि से फराक गप। हुनकर समाज आ प्रकृतिसँ जुड़ल भावना अतुलनीय अछि आ तेँ ओ आड़िपर चलितो भावनामे बहि जाइ छथि। मुदा किछु सभ सुविधा सम्पन्न लोक बहर आ छन्दक अभ्यास ऐ लेल नै करै छथि कारण हुनका भावना बेशी अबै छन्हि, दोकानक सभसँ सस्त वौस्त हुनका लेला भावना बनि जाइए। आ जँ कविमे एतेक भावना छन्हि तँ मैथिली साहित्य जातीय प्रतिक्रियावादसँ भरल किए अछि? जँ रस, अलंकार आ छन्दसँ किनको दिक्कत छन्हि तँ अमित मिश्र आ चन्दन झा सन युवाक बाल गजल पढ़थु, आ बिसरि जाथु जे ओ बहरयुक्त छै। आ तखन ओकर तुलना सियाराम झा सरस आ जीवकान्तक बाल कवितासँ करथु। अमित मिश्र आ चन्दन झा क बाल गजल बड्ड आगाँ अछि, ई दुनू गोटे ई उत्कृष्ट रचना सभ छन्द आ बहरमे केने छथि आ ओ सभ रचना स्वतः उपयुक्त रस आ अलंकारमे हिनका सभक सामर्थ्यवान प्रतिभाक बदौलति भेल अछि, आ जँ ई संयोग अछि तँ भयंकर संयोग अछि। आ हम मैथिली बाल साहित्यक पद्य अही दिशामे आगाँ बढ़ैत देखऽ चाहब। शब्दोचारण आ कला निर्माणक बाद बोध्य बौस्तुक उत्पत्ति होइ छै। शब्द आ ध्वनि, रूप, रस, राग, छन्द, आ अलंकारसँ ओकर औचित्य सिद्ध होइत छै। एकटा उदाहरणसँ रस अलंकारक विवेचन एतए कएल जा रहल अछि। अलंकार सिद्धान्तक हिसाबसँ तोहर ठोर कविताक पाठ: भामह अलंकारकेँ समासोक्ति कहै छथि जे आनन्दक कारण बनैए। दण्डी आ उद्भट सेहो अलंकारक सिद्धान्तकेँ आगाँ बढ़बै छथि। अलंकारक मूल रूपसँ दू प्रकार अछि, शब्द आ अर्थ आधारित आ आगाँ सादृश्य-विरोध, तर्कन्याय, लोकन्याय, काव्यन्याय आ गूढ़ार्थ प्रतीति आधारपर। मम्मट ६१ प्रकारक अलंकारकेँ ७ भागमे बाँटै छथि, उपमा माने उदाहरण, रूपक माने कहबी, अप्रस्तुत माने अप्रत्यक्ष प्रशंसा, दीपक माने विभाजित अलंकरण, व्यतिरेक माने असमानता प्रदर्शन, विरोध आ समुच्चय माने संगबे। बातक चून लगाएब अप्रस्तुत, कऽथक सन लाल बुन्न कपोल, पानक ठोर आ सुन्नरिक ठोर, भोरक लाली सुन्नरिक ठोर सन, कुसियारक पाकल पोर सन सुन्नरिक ठोर ई सभ उपमा कवि द्वारा प्रयुक्त भेल अछि। मुदा कतऽ छह प्रेमक पुंगी हूक? मे सादृश्य-विरोध अछि। अहाँ बिनु व्याकुल वाटक माँझ मे रूपक प्रयुक्त भेल अछि। काव्यक भारतीय विचार: मोक्षक लेल कलाक अवधारणा, जेना नटराजक मुद्रा देखू। सृजन आ नाश दुनूक लय देखा पड़त। स्थायी भावक गाढ़ भऽ सीझि कऽ रस बनब- आ ऐ सन कतेक रसक सीता आ राम अनुभव केलन्हि (देखू वाल्मीकि रामायण)। कृष्ण भारतीय कर्मवादक शिक्षक छथि तँ संगमे रसिक सेहो। कलाक स्वाद लेल रस सिद्धांतक आवश्यकता भेल आ भरत नाट्यशास्त्र लिखलन्हि। अभिनवगुप्त आनन्दवर्धनक ध्यन्यालोकपर भाष्य लिखलन्हि। भामह ६अम शताब्दी, दण्डी सातम शताब्दी आ रुद्रट ९अम शताब्दी एकरा आगाँ बढ़ेलन्हि। रस सिद्धान्तक हिसाबसँ तोहर ठोर कविताक पाठ: रस सिद्धान्त:भरत:- नाटकक प्रभावसँ रस उत्पत्ति होइत अछि। नाटक कथी लेल? नाटक रसक अभिनय लेल आ संगे रसक उत्पत्ति लेल सेहो। रस कोना बहराइए? रस बहराइए कारण (विभाव), परिणाम (अनुभाव) आ संग लागल आन वस्तु (व्यभिचारी)सँ। स्थायीभाव गाढ़ भऽ सीझि कऽ रस बनैए, जकर स्वाद हम लऽ सकै छी।भट्ट लोलट:- स्थायीभाव कारण-परिणाम द्वारा गाढ़ भऽ रस बनैत अछि। अभिनेता-अभिनेत्री अनुसन्धान द्वारा आ कल्पना द्वारा रसक अनुभव करैत छथि। लोलट कविकेँ आ संगमे श्रोता-दर्शककेँ महत्व नै दै छथि। शौनक:- शौनक रसानुभूति लेल दर्शकक प्रदर्शनमे पैसि कऽ रस लेब आवश्यक बुझै छथि, घोड़ाक चित्रकेँ घोड़ा सन बूझि रस लेबा सन। भट्टनायक कहै छथि जे रसक प्रभाव दर्शकपर होइत अछि। कविक भाषाकेँ ओ भिन्न मानैत छथि। रससँ श्रोता-दर्शकक आत्मा, परमात्मासँ मेल करैए। रसक आनन्द अछि स्वरूपानन्द। आ ऐसँ होइत अछि आत्म-साक्षात्कार। रस सिद्धान्त श्रोता-दर्शक-पाठक पर आधारित अछि। ई श्रोता-दर्शक-पाठकपर जोर दैत अछि। बार्थेज संरचनावाद-उत्तर-संरचनावादक सन्दर्भमे लेखकक उद्देश्यसँ पाठकक मुक्तिक लेल लेखकक मृत्युकेँ आवश्यक मानै छथि- लेखकक मृत्यु माने लेखक रचनासँ अलग अछि आ पाठक अपना लेल अर्थ तकैत अछि। लगौलह बातक पाथर चून । आ सजौलह कऽथ कपोलक खून । विभाव अछि आ ऐ कारणसँ देखि कऽ लहरल हमर करेज अनुभाव माने परिणाम बहार होइत अछि। स्फोट सिद्धांत: भर्तृहरीक वाक्यपदीय कहैत अछि जे शब्द आकि वाक्यक अर्थ स्फोट द्वारा संवाहित अछि। वर्ण स्फोटसँ वर्ण, पद स्फोटसँ शब्द आ वाक्य स्फोटसँ वाक्यक निर्माण होइत अछि। कोनो ज्ञान बिनु शब्दक सम्बन्धक सम्भव नै अछि। ई भारतीय दर्शनक ज्ञान सिद्धान्तक एकटा भाग बनि गेल। अर्थक संप्रेषण अक्षर, शब्द आ वाक्यक उत्पत्ति बिन सम्भव अछि। स्फोट अछि शब्दब्रह्म आ से अछि सृजनक मूल कारण। अक्षर, शब्द आ वाक्य संग-संग नै रहैए। बाजल शब्दक फराक अक्षर अपनामे शब्दक अर्थ नै अछि, शब्द पूर्ण होएबा धरि एकर उत्पत्ति आ विनाश होइत रहै छै। स्फोटमे अर्थक संप्रेषण होइत अछि मुदा तखनो स्फोटमे प्राप्ति समए वा संचारक कालमे अक्षर, शब्द वा वाक्यक अस्तित्व नै भेल रहै छै। शब्दक पूर्णता धरि एक अक्षर आर नीक जकाँ क्रमसँ अर्थपूर्ण होइए आ वाक्य पूर्ण हेबा धरि शब्द क्रमसँ अर्थपूर्ण होइए।सांख्य, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा आ वेदान्त ई सभ दर्शन स्फोटकेँ नै मानैत अछि। ऐ सभ दर्शनक मानब अछि जे अक्षर आ ओकर ध्वनि अर्थकेँ नीक जेकाँ पूर्ण करैत अछि। फ्रांसक जैक्स डेरीडाक विखण्डन आ पसरबाक सिद्धान्त स्फोट सिद्धान्तक लग अछि। स्फोट सिद्धांतक आधारपर तोहर ठोर कविताक पाठ: आब उदयनक करियनक धरतीपर रहबाक अछैतो न्याय सिद्धान्तक स्फोट सिद्धान्तकेँ नै मानब कविक कविताकेँ नै अरघै छन्हि। मने मे रहल मनक सब बात कहि ओ अलभ्य चित चोर सँ सुन्नरिक ठोरक तुलना कऽ दै छथि। उदयनक गामक कवि बूच कहै छथि भऽ रहल वर्ण - वर्ण निःशेष, शब्द सँ प्रगटल नहि उद्य़ेश्य; एतए शब्दसँ नै मुदा स्फोटसँ अर्थक संप्रेषण कवि द्वारा तोहर ठोर आ ऐ संग्रहक आन कविता सभमे जाइ तरहेँ भेल अछि, से संसारक सभसँ लयात्मक आ मधुर भाषा मैथिली मे (यहूदी मेनुहिनक शब्दमे) विद्यापतिक बादक सभसँ लयात्मक कविक रूपमे बूचजी केँ प्रस्तुत करैत अछि आ मैथिली कविताकेँ ऐ रूपमे फेरसँ परिभाषित करैत अछि। तोहर ठोर कविताक सामान्य पाठ: पानक ठोर आ सुन्नरिक ठोर। सुन्नरि द्वारा बातक चून लगाएब आ कऽथक सन लाल बुन्न कपोल सजाएब। मुदा प्रेमक पुंगी कतए? भोरक लाली सुन्नरिक ठोर सन, बिनु सुन्नरि व्याकुल साँझ जेकाँ। बधिक जे बनत सुन्नरिक वर तँ हम बनब विखण्डित राहु। स्वर्गोमे सुधा कम्मे अछि, तहिना सुन्नरिक ठोर सेहो कतऽ पाबी। सकरी मिल महान बनत जे हम विश्वकर्मासँ विज्ञान सीखब। आ ओइ मिलसँ बहार होएत माधुर्य। कुसियारक पाकल पोर सन सुन्नरिक ठोर अछि। पुनर्जन्ममे सेहो धान आ चिष्टान्न बनि सुन्नरि हम अहाँक लग आएब। मुदबा एतबा बादो शब्दसँ उद्देश्य कहाँ प्रगट भेल। २ साहित्यमे लोक-तत्व: गाथा/ नृत्य/ नाटक लोकगाथा/ नृत्य/ संगीत आदिक ऐतिहासिक वर्णन मोहनजोदड़ो सभ्यतासँ प्राप्त कांस्य प्रतिमा नृत्यक मुद्राक संकेत दैत अछि, वर्तमान कथक नृत्यक ठाठ मुद्रा सदृश, दहिन हाथ ४५ डिग्रीक कोण बनेने आ वाम हाथ वाम छाबापर, संगहि वाम पएर किछु मोड़ने। ऋगवेदक शांखायन ब्राह्मणमे गीत, वाद्य आ नृत्य तीनूक संगे-संग प्रयोगक वर्णन अछि, ऐतरेय ब्राह्मणमे ऐ तीनूक गणना दैवी शिल्पमे अछि। ऋगवेद १०.७६.६ मे उषाक स्वर्णिम आभा कविकेँ सुसज्जित ऋषिक स्मरण करबैत छन्हि। ऋगवेदमे लोक नृत्यक (प्रान्चो अगाम नृतये) सेहो उल्लेख अछि। महाव्रत नाम्ना सोमयागमे दासी सभक (३-६ दासीक) सामूहिक नृत्यक वर्णन अछि। शांखायन १.११.५ मे वर्णन अछि जे विवाहमे ४-८ सुहागिनकेँ सुरा पियाओल जाइत छ्ल आ चतुर्वार नृत्य लेल प्रेरित कएल जाइत छल। वैदिक साहित्यमे विवाह विधिमे पत्नीक गायनक उल्लेख अछि। सीमन्तोन्नयन विधिमे पति वीणावादकसँ सोमदेवक वादयुक्त गान करबाक अनुरोध करैत छथि। अथर्ववेदमे वसा नाम्ना देवताक नृत्य ऋक्, साम आ गाथासँ सम्बन्धित होएबाक गप आएल अछि, सोमपानयुक्त ऐ नृत्यमे गन्धर्व सेहो होइत छलाह, से वर्णित अछि। अथर्ववेद १२.१.४१ मे गीत, वादन आ नृत्यक सामूहिक ध्वनिक वर्णन अछि। वैदिक कालमे साम संगीतक अलाबे गाथा आ नाराशंसी नाम्ना लौकिक गाथा-संगीतक सेहो प्रचलन छल। लोकगाथाक तत्व: भाषाक स्वरूप मौखिक रहबाक कारणसँ गतिशील अछि। काल निर्धारण सेहो अनुमानपर आधारित होइत अछि। -गाथा मेला, हाट बजार, विशिष्ट लोकक घर, सार्वजनिक स्थलपर होइत अछि - से जै जातिक लोकदेवता रहैत छथि तकर अतिरिक्त दोसरो जातिक श्रोता रहैत छथि। सर्जक आ श्रोताक प्रत्यक्ष संबंध रहैत अछि, श्रवण तत्वक कारण कथाक अनायास अलंकरण भेटैत अछि, मुदा सभटा साहित्यिक लक्षण जेना सर्ग, छन्दबद्ध, नाट्य-संधि आ वस्तु निर्देशक अभाव रहैत अछि। वस्तु संगठन सुगठित नहि रहैत अछि। गारिक प्रयोग आ मद्यपानक यत्र-तत्र वर्णन रहैत अछि। ग्रामीण व्यवस्थामे चोरक स्थान आ ओकर वर्णन, स्थानीय देवी-देवताक चरचा आ जातीय अस्मिताक प्रयोग होइत अछि। कथा-गायक आशु कवि होइत छथि- एकटा ढ़ाँचापर अपन हिसाबसँ ओ हेर-फेर कऽ गबैत छथि प्रारम्भमे ईश्वर, वन्दना आ बीच-बीचमे ईश्वरसँ क्षमायाचना, ई सभ गायन क्षमता स्थिर करबाक उद्देश्यसँ कएल जाइत अछि। घण्टासँ ऊपर गायनक बीचमे हुक्का-चिलम, मद्यपान, परिवेशक वर्णन होइत अछि गायनमे। लोरिक मनुआर श्रोताक सोझाँ कएल जाइत अछि मुदा सल्हेसक कथा आराध्य देवक समक्ष। दैवी शक्ति द्वारा युद्धमे नायकक सहायता होइत अछि। नायक सेहो गारिक प्रयोग करैत अछि। महाकाव्यक पात्रक नाम आ आन तत्वक ग्रहण जेना महाभारतक जुआ आदि प्रयोगमे आनल जाइत अछि। निष्कर्ष: सभ साहित्यिक विधा दू प्रकारक होइत अछि। लोकधर्मी आ नाट्यधर्मी, लोकधर्मी भेल ग्राम्य आ नाट्यधर्मी भेल शास्त्रीय उक्ति। ग्राम्य माने भेल कृत्रिमताक अवहेलना मुदा अज्ञानतावश किछु गोटे एकरा गाममे होइबला नाटक बुझै छथि। लोकधर्मीमे स्वभावक अभिनयमे प्रधानता रहैत अछि, लोकक क्रियाक प्रधानता रहैत अछि, सरल आंगिक प्रदर्शन होइत अछि, आ ऐ मे पात्रक से ओ स्त्री हुअए वा पुरुष, तकर संख्या बड्ड बेसी रहैत अछि। नाट्यधर्मीमे वाणी मोने-मोन, संकेतसँ, आकाशवाणी इत्यादि; नृत्यक समावेश, वाक्यमे विलक्षणता, रागबला संगीत, आ साधारण पात्रक अलाबे दिव्य पात्र सेहो रहै छथि। कोनो निर्जीव/ वा जन्तु सेहो संवाद करऽ लगैए, एक पात्रक डबल-ट्रिपल रोल, सुख दुखक आवेग संगीतक माध्यमसँ बढ़ाओल जाइत अछि। वैदिक आख्यान, जातक कथा, ऐशप फेबल्स, पंचतंत्र आ हितोपदेश आ संग-संग चलैत रहल लोकगाथा सभ। सभ ठाम अभिजात्य वर्गक कथाक संग लोकगाथा रहिते अछि। ३ विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कार रूपेँ प्रसिद्ध) - बाल साहित्य लेल विदेह सम्मान २०१२- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जी केँ हुनकर बाल-प्रेरक विहनि कथा संग्रह "तरेगन" लेल ई पुरस्कार देल जा रहल अछि। ई पुरस्कार विदेह नाट्य उत्सव २०१३ क समारोहमे देल जाएत। “तरेगन” केँ सभसँ बेशी वोट भेटलै। तीनटा पोथी १.जगदीश प्रसाद मण्डलक तरेगन, २. जीवकान्तक “खिखिरक बीअरि” आ ३.मुरलीधर झा क “पिलपिलहा गाछ” केँ विदेह www.videha.co.in पर भऽ रहल ऑनलाइन वोटिंगमे राखल गेल छल। विशेषज्ञक मतानुसार “पिलपिलहा गाछ”मे बहुत रास कथा अछि जकरा बाल कथा नै कहल जा सकैए, तइ दुआरे ऐ पोथीकेँ लिस्टसँ हटा देल गेल कारण ई पुरस्कार बाल साहित्य लेल अछि, ओनाहितो ऐ पोथीकेँ सभसँ कम वोट भेटल रहै। ऐ पोथी सभक अतिरिक्त आन पोथी सभपर विचार नै कएल गेल कारण ओ सभ पोथीक आकारक नै वरन् बुकलेटक आकारक छल। ४ साहित्य अकादेमीक टैगोर लिटरेचर अवार्ड २०११ मैथिली लेल श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ हुनकर लघुकथा संग्रह "गामक जिनगी" लेल देल गेल। कार्यक्रम कोच्चिमे १२ जून २०१२केँ भेल। मैथिली लेल विवादक अन्तक कोनो सम्भावना नै देखबामे आबि रहल अछि। ऐ पुरस्कारक ग्राउण्ड लिस्ट बनेबा लेल एकटा तथाकथित साहित्यकारकेँ चुनल गेल जे प्राप्त सूचनाक अनुसार जातिक आ संकीर्णताक आधारपर पोथीक नाम देलन्हि जाइमे नहिये नचिकेताक पोथी रहए, नहिये सुभाष चन्द्र यादवक आ नहिये जगदीश प्रसाद मण्डलक; संगहि ई ग्राउण्डलिस्ट बनौनिहार तथाकथित साहित्यकार विदेहक सहायक सम्पादक मुन्नाजीकेँ कहलन्हि जे जगदीश प्रसाद मण्डलकेँ ऐ जिनगीमे टैगोर साहित्य पुरस्कार नै देल जेतन्हि!। रेफरी जखन ७ टा पोथीक नाम पठेलन्हि तखन ओइमे चन्द्रनाथ मिश्र "अमर"क अतीत मंथन सेहो रहए जखन कि ओ पोथी निर्धारित अवधि २००७-२००९ मे छपले नै अछि, तँ की बिनु देखने पोथी अनुशंसित कएल गेल? ऐ तरहक ग्राउण्ड लिस्ट बनेनिहार आ बिनु पढ़ने पोथी अनुशंसित केनिहार रेफरीकेँ साहित्य अकादेमी चिन्हित करए, आ नाम सार्वजनिक कऽ स्थायी रूपसँ प्रतिबन्धित करए, से आग्रह; तखने मैथिलीक प्रतिष्ठा बाँचल रहि सकत। एतए ईहो तथ्य अछि जे साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक संयोजक श्री विद्यानाथ झा विदित अखन धरि ने पुरस्कार भेटबाक सूचने आ ने पुरस्कार लेल बधाइये श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजी केँ देलन्हि अछि जखनकि मण्डल जी पुरस्कार लऽ कऽ घुरि कऽ आबियो गेल छथि; संगहि टैगोर साहित्य पुरस्कार मैथिली लेल पहिल बेर श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जीकेँ देल जएबा सम्बन्धमे दरभंगा आकाशवाणी कोनो प्रकारक सूचना प्रसारित नै केलक आ दरभंगा, मधुबनी आदिक हिन्दी समाचार-पत्र सेहो ऐ सम्बन्धमे कोनो समाचार प्रकाशित नै केलक जखनकि देशक सभ राष्ट्रीय अंग्रेजी पत्र ( http://esamaad.blogspot.in/2012/06/tagore-literature-awards-national-media.html ) एकर सूचना बिनु कोनो अपवादक प्रकाशित केलक। साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक, आकाशवाणी दरभंगाक आ दरभंगा-मधुबनीक हिन्दी समाचार पत्रक पत्रकार लोकनिक संकीर्ण जातिवादी चेहरा नीक जेकाँ सोझाँ आबि गेल। मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि। साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक असली चेहरा तखन सोझाँ आओत जखन ऐ बर्खक मूल साहित्य अकादेमी पुरस्कारक घोषणा हएत। श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जीक "गामक जिनगी" मैथिली साहित्यक इतिहासक सर्वश्रेष्ठ लघु कथा संग्रह अछि। जगदीश प्रसाद मण्डल जीकेँ बधाइ। सूचना (स्रोत समदिया): टैगोर साहित्य पुरस्कार दक्षिण कोरियाक एम्बैसी (स्पॉन्सर सैमसंग इण्डिया लिमिटेड) क आग्रहपर साहित्य अकादेमी द्वारा शुरू कएल गेल अछि। टैगोर साहित्य पुरस्कार गुरुदेव रवीन्द्र नाथ ठाकुरक १५०म जयन्तीक उपलक्ष्यमे शुरू भेल छल। सभ साल ८ टा भाषा आ तीन सालमे साहित्य अकादेमी द्वारा मान्यता प्राप्त सभटा २४ भाषाकेँ ऐमे पुरस्कृत कएल जाइत अछि। मैथिली लेल ई पुरस्कार पहिल बेर देल जा रहल अछि। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुरक १५०म जयन्तीक उपलक्ष्यमे साहित्य अकादेमी आ सैमसंग इडिया (सैमसंग होप प्रोजेक्ट) द्वारा २००९ ई. मे स्थापित कएल गेल छल टैगोर साहित्य पुरस्कार। २४ भाषाक श्रेष्ठ पोथीकेँ तीन सालमे पुरस्कार (सभ साल आठ-आठ भाषाक सर्वश्रेष्ठ पोथीकेँ एक सालमे पुरस्कार) देल जाएत। पुरस्कारमे प्रत्येककेँ ९१ हजार टाका आ प्रशस्ति-पत्र देल जाइत अछि। चारिम साल पहिल सालक आठ भाषाक समूहक फेरसँ बेर आएत। टैगोर जयन्तीक लगाति अवसरपर ई पुरस्कार देल जाइत अछि।
टैगोर साहित्य पुरस्कार २००९ बांग्ला, गुजराती, हिन्दी, कन्नड, काश्मीरी, पंजाबी, तेलुगु आ बोडो भाषामे २००५ सँ २००७ मध्य प्रकाशित पोथीपर देल गेल। -बांग्ला (आलोक सरकार, अपापभूमि, कविता) -गुजराती ( भगवान दास पटेल, मारी लोकयात्रा) -हिन्दी (राजी सेठ, गमे हयात ने मारा, कथा संग्रह) -कन्नड (चन्द्रशेखर कांबर, शिकारा सूर्य, उपन्यास) -काश्मीरी (नसीम सफाइ, ना थसे ना आकास, कविता) -पंजाबी (जसवन्त सिंह कँवल, पुण्य दा चानन, आत्मकथा) -तेलुगु (कोवेला सुप्रसन्नाचार्य, अंतरंगम, निबन्ध) -बोडो (ब्रजेन्द्र कुमार ब्रह्मा, रैथाइ हाला, निबन्ध)
टैगोर साहित्य पुरस्कार २०१० असमी, डोगरी, मराठी, ओड़िया, राजस्थानी, संथाली, तमिल आ उर्दू भाषामे २००६ सँ २००८ मध्य प्रकाशित पोथीपर देल गेल।
-असमी (देवव्रत दास, निर्वाचित गल्प) -डोगरी (संतोष खजूरिया, बडलोनदियन बहारां) -मराठी (आर. जी. जाधव, निवादक समीक्षा) -ओड़िया (ब्रजनाथ रथ, सामान्य असामान्य) -राजस्थानी (विजय दान देथा, बातां री फुलवारी) -संथाली (सोमाइ किस्कू, नमालिया) -तमिल (एस. रामकृष्णन, यामम) -उर्दू (चन्दर भान खयाल, सुबह-ए-मश्रिक-की अजान)
टैगोर साहित्य पुरस्कार २०११ मैथिली, अंग्रेजी, कोंकणी, मलयालम, मणीपुरी, नेपाली आ सिंधी लेल २००७ सँ २००९ मध्य प्रकाशित पोथीपर देल गेल। संस्कृत लेल पुरस्कार नै देल जा सकल। -मैथिली (जगदीश प्रसाद मण्डल, "गामक जिनगी") -अंग्रेजी (अमिताव घोष, "सी ऑफ पॉपीज") -कोंकणी (शीला कोलाम्बकर, "गीरा") -मलयालम (अकितम अचुतम नम्बूदरी, "अंतिमहक्कलम") -मणीपुरी (एन. कुंजामोहन सिंह, "एना केंगे केनबा नट्टे") -नेपाली (इन्द्रमणि दरनाल, "कृष्णा-कृष्णा") -संस्कृत- -सिंधी (अर्जुन हसीद, "ना इएन ना") जगदीश प्रसाद मंडल, जन्म ५ जुलाइ १९४७। गाम-बेरमा, तमुरिया, जिला-मधुबनी। एम.ए.। कथाकार (दीर्घकथा संग्रह- शंभुदास; लघुकथा संग्रह १.गामक जिनगी, २. अर्द्धांगिनी..सरोजनी.. सुभद्रा.. भाइक सिनेह इत्यादि; आ तरेगन -बाल-प्रेरक विहनि कथा संग्रह); नाटककार (१.मिथिलाक बेटी, २.कम्प्रोमाइज, ३.झमेलिया वियाह आ ४.एकांकी-संचयन); उपन्यासकार(मौलाइल गाछक फूल, जीवन संघर्ष, जीवन मरण, उत्थान-पतन, जिनगीक जीत- उपन्यास) आ कवि (१.इन्द्रधनुषी अकास, २.गीतांजलि आ ३.राति-दिन। मार्क्सवादक गहन अध्ययन। हिनकर कथामे गामक लोकक जिजीविषाक वर्णन आ नव दृष्टिकोण दृष्टिगोचर होइत अछि। गामक जिनगी, लघुकथा संग्रह लेल विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११ मूल पुरस्कार, आ टैगोर साहित्य सम्मान २०११; आ बाल-प्रेरक विहनि कथा संग्रह "तरेगन" लेल बाल साहित्यक विदेह सम्मान २०१२ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कार रूपेँ प्रसिद्ध) प्राप्त।
( विदेह ई पत्रिकाकेँ ५ जुलाइ २००४ सँ अखन धरि ११८ देशक १,५९० ठामसँ ८०,७४५ गोटे द्वारा ४०,४१८ विभिन्न आइ.एस.पी. सँ ३,६१,००० बेर देखल गेल अछि; धन्यवाद पाठकगण। - गूगल एनेलेटिक्स डेटा। ) गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com http://www.maithililekhaksangh.com/2010/07/blog-post_3709.html २.गद्य २. गद्य २.१.राम भरोस कापडि भ्रमर- मैथिली लोक संस्कृति संगोष्ठी अन्तरगत लोकनायक सलहेसःचर्चा–परिचर्चा कार्यक्रम सम्पन्न २.२.अतुलेश्वर- लघुकथा- बसात २.३.आशीष अनचिन्हार- मैथिली गजलकार परिचय श्रृंखला २.४.डा. अरुण कुमार सिंह- उजड़ैत गाम : बसैत शहर? २.५.चंदन कुमार झा- मिथिला-मैथिली आंदोलन २.६.जगदानन्द झा 'मनु'- दूटा विहनि कथा राम भरोस कापडि भ्रमर मैथिली लोक संस्कृति संगोष्ठी अन्तरगत लोकनायक सलहेसःचर्चा–परिचर्चा कार्यक्रम सम्पन्न मिथिलाञ्चल नेपालक होइक वा भारतीय क्षेत्रक जं एक गोट लोकगाथाक महानायक ककरोे जीवन चरित्र बेसी लोकमुखी, जनजनबीच चर्चित, लोकप्रिय छैक त ओ थिके लोकनायक सलहेसक । सिराहा जिल्ला अन्तर्गत महिसौथामे जन्मल सलहेसक जीवन काफी आरोह–अवरोहसं भरल छैक । विभिन्न लोकगाथा गायकसभ कथानकक विभिन्न भेदके जनसमक्ष लाओल करैत अछि । तन्त्र मन्त्र आ सिद्धिक कथासभ एहिमो भरपूर देखल जाइछ । सुगा सलहेसक गुप्तचर होइछ जे मन्त्रीक रूपमे सेहो प्रतिष्ठित छैक । हाथीक नाउँ भौरानन्द राखल गेल छैक त स्वयं सलहेसके मानिक दहसं भँमरा बनाकए मालिनीसभ चोरा क ल जाइछ । सम्भवतः एहन प्रसङ्गसभ गाथा गायकसभक मुहसं थपैत आएल भ सकैछ । मुदा एकटा बातमे सब एकमत होइछ जे सलहेसक जन्म महिसौथा, राजा कुलेश्वरक दरबारमे पहरेदारी, चोरीक आरोप, जेलचलान आ अन्तमे मालिनीद्वारा मुक्ति ... । ओ देवताक रूपमे दुसाध जातिमे पूजित छथि । दलित उत्थानक निमित्त सयौं वर्षपूर्व सामन्तसँ (चुहड सामन्त !) लडि क अपने छुट्टे राज्यक स्थापना आ न्यायक लेल लोकप्रियताक चरममे पहुंचैत ‘देवता’क आस्पद प्राप्त क पूजित हएब स्वयं जयबद्र्धन सलहेसक जीवन गाथाक अत्यन्त रोचक पक्ष थिक । सलहेसगाथामे एक दिश प्रेम छैक त दोसर दिश तत्कालीन मिथिलाक्षेत्रमे उत्तरी आक्रमणकारीसभसं एकर रक्षाक चुनौती सेहो छैक । सामन्तसभसं समाजके जोगएबाक गहन जिम्मेबारी थिक त परनिर्भरतासं मुक्त भ अपन सैन्यशक्तिक विकास क अपन सत्ताक स्थापनाक गहन लक्ष्य सेहो । अदभूत पराक्रमी छलाह सलहेस । सब चुनौतीसभके सामना करैत अन्ततः अपन अभियानमे सफल भर महिसौथाके राजधानी बनौलनि । नेपाली भूमिक यी वीर लोकनायक, मुदा आइधरि शिष्ट साहित्यक संरक्षकसभद्वारा उपेक्षित रहैत आएल अछ् ि। किए एना भेल त , तकर एक्केटा कारण देखि पडैछ ,दुसाधसभक कुलदेवता प्रति किए अनावश्यक उत्सुकता ! अन्य जाति वा वर्गमे अस्तित्वे नहि रहल कविलोकनि, साहित्यकारसभक जथाभावी रचनासभ उत्खनन क क नयाँ–नयाँ इतिहास रचनिहारसभ सिराहा जिल्लाक चौहद्दीमे अजन सौर्यपूर्ण जीवन बितौनिहार महानायक सलहेस जानाजानी उपेक्षित कएल गेलाह आ परिणमतः आइ हुनका बारेमे लोककण्ठमे बाचल अबैत गाथासभ आ तकरा मञ्चमे प्रदर्शित करबला नाचसभ विलुप्त भ रहलैक अछि । इएह कठिन अवस्थाके ध्यानमे राखि सलहेसक जीवनवृत्तमे केन्द्रित भए एकटा बृहत् गोष्ठी करबाक विचार आइसं तेरह्र महिना पहिने आएल आ नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठानक संस्कृति विभाग अन्तर्गत एकरा सामेल कएल गेल । हम एकर कार्ययोजना बनबैत काल भारतीय मर्मज्ञ विद्वान्सभके एउटा पैनल बनौलहँुँ, जे सभ सलहेसक सन्दर्भमे निरन्तर लिखैत आबि रहल छथि । नेपालक किछु विद्वानसभकें सेहो आग्रह कएल । अन्ततः नेपाल आ भारतसं चारि चारि गोट कार्यपत्र तय भेल आ पत्राचार÷सम्पर्क कएल गेल । एकर कार्यक्रम स्थल लहान (सिराहा) राखल गेल, जत्तसं सलहेसक क्रिडाभूमिसभ लगेमे अवस्थित छैक । समय २०६९ साल बैशाख २० आ २१ गते राखल गेल । सब तैयारीपूर्ण भ गेलाक बाद बैशाख १८ गते जनकपुरमे दुखद घटना भेल, बम बिस्फोटमे तत्काल चारगोटेक आ बादमे एक गोटेक मिला पाँच गोटेक मृत्यु भ गेल । सबदिश शोकक लहरि, आक्रोश देखल गेल । बन्द, हडताल सुरू भेल । परिणामतः कार्यक्रम अन्तिम क्षणमे स्थगित कर पडलैक । फेर दोसर तिथि २०६९ साल असार ४, ५ गते राखल गेल । देहकें डाहैत गर्मीमे भारतीय एक दर्जन विद्वत् वर्ग आ नेपालक तर्पmसं सेहो एक दर्जन विद्वत् वर्गसभक समुपस्थितिमे उक्त गोष्ठी लहानमे दश बुँदे लहान घोषणापत्र जारी करैत सम्पन्न भेल अछि । एहिगोष्ठीमे अपन आर्थिक सहयोग द्वारा वी.पी. कोइराला भारत–नेपाल प्रतिष्ठान पैघ काज कएलक जकर प्रशंशा समस्त उपस्थित सहभागी लोकनि कएलनि । अखाढ ४ गते सूचना तथा सञ्चार मन्त्री राजकिशोर यादव उद्घाटन कएलनि । हुनक हाथसं नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान द्वारा प्रकाशित “आँगन” पत्रिकाक चारिम अंक सलहेस विशेषक आ रामभरोस कापडि ‘भ्रमर’क नवीनतम कृति ‘समय–सन्दर्भ’क विमोचन कएलनि । तहिना सलहेस लोकनाचकें मञ्चीय रूपमे जिवन्त राखमे सिराहाक शैनी पासवास आ सलहेस गायनकें अपन कण्ठमे बचा क रखनिहार मधुरी दासकें दोसल्ला आ प्रशंसा–पत्र पदान क सम्मान कएल गेल छल । कार्यक्रममे सभापतित्व करैत संयोजक ‘भ्रमर’ विषय–प्रवेशक क्रममे लोकनायक सलहेसक चित्र अंकित टिकट प्रकाशन करबाक आ चोहरबा चौकमे चूहड मलक प्रतिमा स्थापनाक माग कएलनि, जकरा मन्त्री यादव सहर्ष स्वीकार करैत नेपाल सरकारसं होबबला सम्पूर्ण सहयोग उपलब्ध करएबाक विश्वास सेहो दिऔलनि । कार्यक्रममे कार्यपत्र आ टिप्पणीसब अतिरिक्त संयोजक ‘भ्रमर’द्वारा विद्वत्सभक बीच चारिबुँदे अवधारणापत्र प्रस्तुत कएल गेल छल, जाहिमे व्यापक छलफल आ निष्कर्षक लेल चारिगोट समूह बनाओल गेल । जे ५ गते स्थलगत स्थलसभक भ्रमण क समापन बैठकमे विभिन्न सुझावसभकसंग प्रस्तुत कएने छल । स्थलगत भ्रमणमे सलहेस पूmलबारीक विचित्र रचना प्रक्रियासं अवगत भेलाह त सलहेस गाथामे निके महत्वक साथ आएल कमल दहमे कमल लोप भ क सेहो पर्यटकीय आकर्षण यथावत रहेल बात सब विद्वान्सभ महसुस कएने छलाह । गोष्ठी कम कार्यशाला गोष्ठीमे अन्तमे दश बुँदे लहान घोषणा–पत्र जारी कएल गेल छल । घोषणापत्रमे जिल्ला अथवा अन्य भागमे रहल सलहेस मन्दिर (गहबर) सलहेस फुलबारी, मानिक दह, पकडिया गढ, कमल दह, उत्तरवाहिनी, कमला आ नन्द महिरी सन स्थलसभक संरक्षण, सम्बद्र्धन करब जरुरी अछि । सलहेस गाथामे वर्णित स्थलसभ नेपालेमे अवस्थित भेल हएबाक कारणे एकर संरक्षण–सम्बद्र्धनक दायित्व सरकारक अछि । एहना स्थलसभक विकासक पहल हएबाक चाही ! स्थलसभक उत्खनन हएबाक चाही । सलहेस पूmलबारीके विश्वसम्पदा सूचीमे सूचीकृत कएल जाए्, एकरा सिमसार क्षेत्रक रूपमे मान्यता देल जाए सन सन् मांग कएअ गेल अछि । अन्य मागमे सलहेस प्रतिष्ठानक गठन हाए, सलहेस अंकित डाक टिकटक प्रकाशन होए्, सलहेस गाथासँग जोडल ठामसभकें सम्पर्क मार्ग बनाओल जाए्, सलहेस पूmलबारी निकट राजमार्गमे सलहेसक मूर्ति आ भव्यद्वारक निर्माण होए्, सलहेसकें राष्ट्रिय विभूति घोषित कएल जाए आ संग्रहालयक स्थापना हाए । सलहेस सम्बन्धी एना कय वैज्ञानिक ढंगसं गोष्ठीक आयोजन प्रथम सुरुवात भेल हएबाक बात बथबैत उपस्थित नेपाल–भारतक विद्वतजनसभ अनुसन्धानक अभाव रहलाक कारणें एकरा निरन्तरता देल जएबाक चाहीे । दूदिना गोष्ठीमे भारतसं डा. रमानन्द झा ‘रमण’, डा. वुचरु पासवान, डा. कमलकान्त झा, डा. भुवनेश्वर गुरमैता, चन्द्रेश, डा. मोहित ठाकुर, पंचानन मिश्र आदि छलाह त नेपालक दिशसं डा. रामदयाल राकेश, पुरातत्वविद् तारानन्द मिश्र, प्राज्ञ रमेशरञ्जन झा, पूर्व सांसद नथुनी सिंह दनुवार, डा. पशुपतिनाथ झा, प्रा. परमेश्वर कापडि, डा. रेवतीरमण लाल,गोपाल झा आदि विद्वानसभक सहभागिता छल । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अतुलेश्वर लघुकथा- बसात आइ झंझारपुर बजार मे बहुत दिनक बाद माधव झा भेटल छलाह। भेंट होइतहिँ ओ सुरु भए गेलाह अपन आन्तरिक गप्प बँटबामे। जेना-तेना छुटकारा भेटल आ हम अपनामे लगलहुँ। मुदा हुनक कहल बहुतो रास बात एखनहुँ घुरिया रहल अछि। बेरि-बेरि मोन पड़ि जाइछ माधव झाक व्यथा। माधव झाक बेटा विवेक मध्यम कोटिक छात्र छल, मुदा रहए मेहनतिआ आ तैँ ओकर आकांक्षा रहैक जे इंजीनियर बनी। माधव झा सेहो मध्यम आयक लोक, मुदा सन्तानक आकांक्षाकेँ पूरा करबाक लेल अपनाभरि प्रयास करैत रहनिहार। समाजमध्य बसात तेहन बहि रहल छैक जे जत-तत अर्थक काज। तैओ ओ अपना लेखें एहि प्रयास मे हरदम लागल रहैत छलाह जे जेना-तेना बेटाक आकांक्षा पूरा होइक। मोन पड़ैत अछि जखनि इंजीनियरिंग पढ़ाईक जाँच-परीक्षा परिणाम आयल रहैक आ हमहीँ हुनक पुत्रक रिजल्ट देखने रहिअनि, ओ परिणाम सूनि निराश भए गेल रहथि, कारण विवेकक पोजीशन बड्ड निम्न स्तरक छलैक। परिणामक हिसाबें ओकर एडमिशन कोनो नीक इंजीनियरिंग कॉलेजमे आ मनोनुकूल प्रभाग भेटबाक सम्भावना बहुत कम रहैक। हम कहने रहयनि जे- औ जी आइ-काल्हि सभ गोटा अपन सन्तानकेँ इंजीनियरे बनएबामे व्यस्त छथि, हमरा जनैत किछु दिनमे ओकर हाल ठीक नहि रहतैक। तैँ अपन पुत्रकेँ प्रतियोगिता परीक्षाक हेतु तैआर करु आ सम्प्रति कॉमर्स रखबाक हेतु कहिऔक। हमर गप्प सुनि माधवजी तँ सहमत भेलाह मुदा पुत्रक आकांक्षा ओ नहि तोड़य चाहैत छलाह। एहि बीच पुत्र सेहो दिल्लीसँ परीक्षा द घुमि आयल रहनि, कारण जे आब तँ एडमिशनक बेर भ गेल छलैक। ई कथा ओ माधव झा केँ सेहो कहलक, संगहि इहो जे काल्हि हम मुजफ्फरपुर जायब, जतए ओकरा कॉनसिलींग मे बजौने छैक। प्रातः ओ मुजफ्फरपुर गेल आ एम्हर चिन्तित माधवजीकेँ हम कहने रहियनि जे जखनि छात्र स्वयं एतेक उत्सुक अछि तँ ओहि उत्सुकताकेँ रोकब उचित नहि। किछु दिनक अभ्यन्तर पुनः झंझारपुर बजार मे भेटलाह। हमर जिज्ञासा पर ओ चिन्तित चित्तेँ चाहक दोकान दिस घीचैत कहलन्हि- गप्प कने माहूर भ गेल अछि आ ई गप्प ठाढ़े-ठाढ़ नहि कहि सकैत छी। दूगोट चाहक आग्रह करैत हम पूछलियनि जे कि बात छैक, अपने की कहैत छलहुँ? ओ अत्यन्त गम्भीर भ कहए लगलाह- की कहू! किछु नहि फुरा रहल अछि, एक दिस सन्तानक मोह आ दोसर दिस हमर आर्थिक स्थिति। पता नहि जे कोना दुनूक बीच सामंजस्य होएत। गप्पकेँ फरिछबैत कहलनि जे -काल्हि मुजफ्फरपुरसँ अएला पर खुशीपूर्वक कहलक जे कागज-पत्तरक कार्य भए गेल, हमर नामांकन उड़ीसाक एकटा इंजनियरिंग कॉलेज मे होएबाक अछि। हमसभ क्षण भरिक लेल सुन्दर सपना देखनहिँ छलहुँ कि ओकर अग्रिम पंक्ति झकझोड़िकेँ राखि देलक। ओकर कहब छलैक जे एहि लेल कम सँ कम पाँच लाख टाका चाही। पाँच लाख टाकाक गप्प सुनितहिँ लागल जेना हमर शरीरसँ सबटा खून सोखि लेल गेल हो, मोनमे तत्कालहि आएल जे ने राधाकेँ नओ मन घी होएतनि आ ने राधा नचतीह। आँखिक आगाँ अन्हार भए गेल छल, आगाँ कोनो इजोत देखबामे नहि आबि रहल छल। किंकर्त्तव्यविमुढ़क स्थिति छल। मुदा बेटाक ई शब्द सुनि जे आब बैंकसभ पढ़बाक हेतु कर्ज दैत छैक, किछु आशा जागल। हम व्यग्र भए पूछि बैसलिऐक जे – एहि हेतु हमरासभकेँ की करए पड़त? ओ सहज रूपेँ कहलक जे एहि हेतु जमीनक कागज बैंक मे जमानति रूपमे जमा करए पड़त। ई गप्प सुनि बाबूजी बजलाह कोना होएत, कारण जखन हमरा तीनू भायमे बँटवारा नहि भेल अछि तखन जमीनक कागज बैंक मे कोना जमा कएल जाए सकैछ। हमर मुँहसँ अनायास निकलि गेल जे ई तँ असम्भव अछि। आ विवेक ई गप्प सुनतहिं भनभनाइत ओतए सँ उठि चल गेल आ अपन माएसँ कहि बैसल- ‘लगैत अछि हमर कैरियर हिनके सभ जेकाँ एही खोनही मे सड़ि जाएत’ आ ई कहैत घरमे जाकेँ सूति रहल। हमर स्थिति विकट छल, ने ओहि पार ने एहि पार, बीच समुद्रमे डुबैत एकटा निरीह प्राणी, जकर जीवनक कोनो आस नहि। एतबा कहैत ओ किछु कालक हेतु रुकलाह, हम हुनका विभिन्न तरहेँ आशान्वित करैत अपन-अपन बाट धएल। माधवजीकेँ किछु अति आवश्यक कार्यवश गाम जाए पड़लनि, जतए भेंट भए गेलखिन एकटा मित्र। मित्रक ममियौतकेँ सेहो इंजीनियरिंग पढ़बाक लेल चुनाओ भेल छलनि आ ओहो हुनके सन समस्यामे पड़ि समाधान ताकल आ नामांकन कराओल। हुनकहि द्वारा ताकल समाधानक बाटेँ माधवजी सेहो पार उतरलाह आ बेटाक नामांकन कतेओ ढ़क-पेँचक बाद भोपाल मे भ गेलैक। पछाति अपन पेट काटि बेटाकेँ पढ़बैत रहलाह। कतेको दिनक बाद एकबेर फेर हुनकासँ झंझारपुरहिमे भेंट भेल ओ खूब प्रसन्नचित्त बुझएलाह। हमर भोज-भातक आग्रह पर अत्यन्त आह्लादित होइत तत्काल तैआर भए गेलाह, मुदा चाह-पान खाइत अपन-अपन घर दिस बिदा भए गेलहुँ। हुनकासँ हेँठ होइतहिँ नाचि उठल अपन छात्र-जीवन। सोचए लगलहुँ जे यदि हमरो सभक समय एतेक सहज रहितैक तँ आइ एम.ए. क केँ सूप महक भट्टा बनल नहि रहितहुँ। मुदा ओएह गप्प, आब सोचिए केँ की! परञ्च, भूततँ पाछाँ छोड़निहार नहि, तेँ पुन: स्मरण भए आएल अपन रोटी जोगाड़, आइ एहि ठाम तँ काल्हि ओहि ठाम, कोनहुना जीवनक गाड़ी घीचि रहल छलहुँ। इएह दौगा–दौगी मे पहुँचि गेल रही कर्नाटक। गामक सभ खुशी- अहा बेचारा बड्ड दिन सँ बौआ रहल छल, एहि बेर ओकर जोगड़क काज भेटलैक। मुदा जे भेटल, केहन भेटल ओ तँ हमहिंटा जनैत छलहुँ, मुदा किछु संतोषजनक तँ अवश्य छल। एतेक दूर अयलाक पश्चात गाम सँ सम्पर्क कमि गेल आ अपनाकेँ नव परिवेशमे घुला लेलहुँ। आइ कतेको सालसँ कर्नाटकमे रचल-बसल छी, मुदा गाम तँ गाम होइत छैक। किछु दिनक अवकाश पर गाम पहुँचल छलहुँ। गाम जाए झंझारपुर बजार नहि जायब ई सम्भव नहि। संयोग एहन जे झंझारपुर जाइतहिँ भेटि गेलाह माधवजी। कुशल क्षेम पूछैत कत छी, बहुत दिनक बाद भेटलहुँ, आदि प्रश्नक झड़ी लगा देलनि। हम कहलियन्हि जे एतेक प्रश्नक उत्तर ठाढ़े-ठाढ़ नहि द सकैत छी। ताहि पर ठहक्का मारैत बाजि उठलाह- अहाँ तँ हमर मूहक गप्प छीनि लेलहुँ आ ई कहैत हम दुनू गोटें चाहक दोकानमे पैसि गेलहुँ। चाहक चुसकीक सङ अपन कथा हुनका सुनबैत गाम सँ एतेक दूर, ताहि पर सँ निश्चितता नहि, ई गप्प–सप्प कहैत छियैन्ह। मुदा ओ आशाक पोटरी खोलैत कहलनि- भगवती सभ आशा पूर्ण करतीह। गप्प बढ़बैत हम विवेकक इंजीनियरिंग पढ़ाईक जिज्ञासु भेलहुँ, सङहि छुट्टीमे गाम अएबाक विषयमे पूछि बैसलिएनि। हमर गप्प सुनि ओ एकबेर हमर मूह दिस ताकि आकाश दिस ताकए लगलाह। जेठक मास, तैँ भगवान भास्कर अपन रौद्र रूपमे धरतीबासीकेँ अपन प्रतापेँ जरा रहल छलाह तैओ ओ हुनके दिस ताकि उठलाह। एकटा पैघ निसाँस लैत कहलनि- ‘हँ गाम आयल अछि लगभग आठ दस दिन भेल हेतैक।’ एकटा पैघ श्वास छोड़ैत कहि उठैत छथि- “मोनमे बहुत दिन सँ एकटा गप्प घुरिया रहल छल आ मोन होइत छल जे ककरो कहियौक, मुदा केओ ओहन विश्वस्त भेटिए नहि रहल छल, आइ संयोग सँ अहाँ भेंट भ गेलहुँ, होइत अछि जे ई गप्प अहाँकेँ कहि मोनकेँ हल्लुक करी।” हमर प्रतिक्रियाक प्रतीक्षा बिनु कएनहि ओ सुरु भए गेलाह– “जीवनक एहि यात्राक धारमे कतेक ठोकर लागत से नहि कहि। मोने मोन प्रसन्न छलहुँ जे हम अपन लक्ष्य पाबि गेलहुँ, जीवनमे नव किरिनक आशा देखए लगलहुँ, मुदा एकाएक सम्पूर्ण भविष्य मेघाच्छादित भए गेल।’’ ई कहैत दहो-बहो नोरमे डूबि गेलाह। बादमे बहुतो बुझौला पर ज्ञात भेल जे एक दिन सभ गोटा सङहि भोजन कए रहल छलाह। माधवजीक बाबूजी विवेकसँ पूछलखिन्ह जे ओतए कोना कि हौ। एहि पर ओ एकटा संक्षिप्त उत्तर देलक सभटा ठीके ठाक। आ बाबूजी वाह! वाह! कहए लगलाह। गप्प बढ़ैत गेल आ एही क्रममे विवेक एकटा एहन गप्प कहलकनि जे सभक मोन तीत अकत्त कए देलकनि। ओ कहलकनि जे ओतए सभ किछु तँ ठीक ठाक छैक मुदा हमरा ई कहैत लाज होइत अछि जे हमर पापा कोनो कार्य नहि करैत छथि आ नहि तँ कोनो पैघ व्यापारी छथि। ओकर कहब छलैक जे एतेक धरि हम पहुँचलहुँ अछि ओ तँ अपन विश्वाससँ, नहि तँ हमरहुँ पापा जेकाँ पाँच लाख टाकाक लेल पढ़बा आ नौकरी करबा सँ पहिने अपन सन्तानकेँ कर्जदार बनबए पड़ितए। आगाँ ओ दादाजीसँ कहि बैसल- अहाँ तँ बहुत पैघ पंडित छी तखनि ई कखनो अहसास नहि भेल जे अहाँ सँ कम पढ़ल-लिखल पंडित जागे झा अपन दुनू बेटाकेँ कत सँ कत पहुँचा देलन्हि, हमरा तँ अहाँक एहि बुद्धि पर हँसी लगैत अछि जे अहाँक बेटासभ हाथ-पैरक अछैतो लुल्ह-नांगर बनि बैसल रहि गेलाह, जाहिसँ सम्पूर्ण परिवार काहि काटि रहल अछि। माधवजी ओ हुनक बाबूजीकेँ किछु फुरिऐ नहि रहल छलनि, मुदा विवेक लेल धनि सन, ओ बुदबुदाइत रहल- कोन घरमे जन्म भ गेल, से नहि जानि। माधवजीकेँ शान्त करबामे ठीके बहुतो समय लागल, यद्यपि छगुन्तामे अपनहुँ पड़ल छलहुँ। पान हुनक हाथमे दैत मात्र एतबहि कहि सकलिएनि- माधवजी, ई नवका बसात छियैक, आ एहि बसातमे अपने जे संवेदना तकबैक ओ असम्भव। बुझियौ जे हमरा लोकनि एकटा चिड़ै छी जे अपन बच्चासभक लेल अपन सभ आकांक्षाकें आगि मे झोकि ओकर सभक आकांक्षा पूरा करैत रहू एहि आशामे जे एकटा नव बिहान अओतैक। ठीक ताही बेरमे हमर गाम जाय बाली गाड़ी खुजबाक लेल पुक्की मारि रहल छल आ हम हुनका सँ विदा लैत चलि पड़ैत छी आ रास्ता भरि अपस्याँत माधवजी हमर आगू मे नचैत रहैत छथि आ हम सोचए लगैत छी ई नवका बसात......! ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। आशीष अनचिन्हार मैथिली गजलकार परिचय श्रृंखला भाग-1 जीवन झा आधुनिक मैथिलीक पहिल गजलकार। परिचय----स्व.जीवन झा जन्म हरिपुर गाम ( प्रखंड-सरायरंजन, समस्तीपुर ) 1856 ई.मृत्यु काशीमे 1920 ई, प्रेमशंकर सिंह हिनकर जन्म आ मृत्यु 1848-1912 लिखै छथि, काशीराजक दानाध्यक्ष पदपर बहुत दिन रहथि, हिनक चारिटा नाटक सुन्दर संयोग, नर्मदा सट्टक, मैथिली सट्टक आ सामवती पुनर्जन्म।सामाजिक विषयपर मैथिली नाटक लिखबाक प्रारम्भ ईएह केलनि, संस्कृत परम्परा रखैत फारसीसँ प्रभावित हिनकर नाटक अछि, नाटकक बीचमे ई गीत-गजल दै छला। जन्मक कोनो तिथि नै अछि। हिनक मृत्यु इ.1912 केर बैशाख शुक्ल सप्तमीकेँ भेलन्हि। हिनक गजल प्रस्तुत अछि| प्रस्तुत गजल हिनक सुन्दर संयोग नाटकसँ लेल गेल अछि जे की 1905 इ. मे लिखल गेल छल। कविवर जीवन झाक नाटक सुन्दर संयोगसँ लेल मैथिलीक पहिल गजल सुन्दर संयोग चतुर्थ अंकमे लेखक स्वयं (गजल) कहि एकरा सम्बोधित कएने छथि। (गजल) आइ भरि मानि लिअऽ नाथ ने हट जोर करू। देहरी ठाढ़ि सखी हो न एखन कोर करू ॥१॥ हाय रे दैव! इ ककरासँ कहू क्यो न सुनै। सैह खिसिआइए जकरा कनेको सोर करू ॥२॥ लाथ मानै ने क्यो सभ लोक करैए हँसी। बाजऽ भूकऽ ले जँ कनेक जकर सोझ ओठ करू ॥३॥ जाइ एखन ने धनी एक कहल मोर करू। आन संगोर करू एहि ठाम भोर करू ॥४॥ ( मैथिली गजल शास्त्र आलेख भाग-९सँ साभार ) गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-2 आरसीप्रसाद सिंह मानलजाइत अछि जे जीवन झा केर बादमैथिलीमे आरसी प्रसाद सिंहगजल लिखला। हिनक जन्म इ 19अगस्त1911मे समस्तीपुरक "एरौत" नामकगाममे भेल। मैथिलीमे लिखबासँपहिने ई हिन्दीमे ख्यातिप्राप्त भए चुल छलाह। हिन्दीमेहिनक "कागजकी नाव,मधु-सन्देश,बसंतकोकिल,याद,अभेद,वर्षा-गीत,क्योंप्यार करता हूँ,मनारहा हूँ उन्हें,मौनरहने दो,उल्टीनगरी,स्वर्णकिरण,आरसी"" नन्ददास"आ"संजीवनी"नामककाव्य ग्रंथ अछि तँ मैथिलीमे"माटिकदीप "" पूजाकफूल "आ"सूर्यमुखी"काव्यग्रंथ अछि। इ.1984मे"सूर्यमुखीलेल हिनका मैथिली लेल साहित्यअकादेमी पुरस्कार भेटल। हिनकमृत्यु इ.15नवम्बर1996मेभेल। इहो जीवने झा जकाँ एक-दूटागजल लिखला। प्रस्तुत अछि हिनक"गुलाबीगजल "| गुलाबीगजल-आरसीप्रसादसिंह अहाँकआइ कोनो आने रंग देखइ छी बगएअपूर्व किछु विशेष ढंग देखइछी चमत्कारकहू, आइकोन भेलऽ छि जग मे कोनोविलक्षणे ऊर्जा-उमंगदेखइ छी बसातलागि कतहु की वसन्तक गेलऽिछ, फुललगुलाब जकाँ अंग-अंगदेखइ छी फराकेआन दिनसँ चालि मे अछि मस्ती मिजाजिदंग, कीबजैत जेँ मृंदग देखइ छी कमान-तीरचढ़ल, आओरकान धरि तानल नजरिपड़ैत ई घायल,विहंगदेखइ छी निसासवार भऽ जाइछ बिना किछु पीने अहाँकआँखिमे हम रंग भंग देखइ छी मयूरप्राण हमर पाँखि फुला कऽ नाचय बनलविऽजुलता घटाक संग देखइ छी।। लगैछरूप केहन लहलह करैत आजुक, जेनाकि फण बढ़ौने भुजंग देखइ छी उदारपयर पड़त अहाँक कोना एहि ठाँ विशालभाग्य मुदा,धऽरेतंग देखइ छी कतहुने जाउ,रहूभरि फागुन तेँ सोझे अनंगआगि लगो,हमअनंग देखइ छी ई गजल शिव कुमार झा जीक सौजन्यसँअछि जे की एकरा अनचिन्हार आखरपर दू साल पहिने प्रस्तुत केने रहथि। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-3 मायानंदमिश्र मैथिली गजलक चर्चित आ कुख्यात दूनू रूपमे स्थान। मायानंद मिश्रक ई कथन जे मैथिलीमे गजल नै लिखल जा सकैए, अनघोल मचेने रहए। मुदा मैथिली गजलक पहिल अरूजी मने गजल शास्त्रकारश्री गजेन्द्र ठाकुर मतें "मायानंद मिश्रक मात्र एतबा अभिमत रहन्हि जे वर्तमानमे मैथिलीमे बहरयुक्त गजल नै लिखल जा सकैए। तँए ओ स्वयं अपने गीतल नामसँ गजल रचना केलन्हि ( ऐठाम मोन राखू जे माया बाबू मैथिलीमे गजलकेँ नाम गीतल देने छलखिन्ह जे कि अस्वीकार्य छल ) मुदा आन-आन गजलकार सभ एकरा दोसर रूपमे लेलक आ परचारित केलक जे मायाबाबूक कथन थिक जे मैथिलीमे गजल लिखले नै जा सकैए। गजेन्द्रजी आगू लिखै छथि जे ई माया बाबूजँ ई कहबो केलखिन्ह जे मैथिलीमे गजल नै लिखल जा सकैए तँ ई कथन हुनकर सीमाक संग-संगओहि समय सभ गजलकारक सीमा छल।कारण ओहि समय एकौटा गजलकार मैथिलीमे बहरयुक्त गजल नै लीखि सकलाह आ माया बाबूक उक्तिकेँ सत्य करैत रहलाह।मुदा बाद मे इ. 2008मे अनचिन्हार आखरक आगमन होइते माया बाबूक सभ मत-अभिमत धवस्त भए गेल। हिनक जन्म 17अगस्त 1934 ई.केँ सुपौल जिलाक बनैनियाँ गाममे भेलनि।भाङ्क लोटा, आगिमोम आ’ पाथर आओर चन्द्र-बिन्दु-हिनकरकथा संग्रह सभ छन्हि। बिहाड़िपात पाथर , मंत्र-पुत्र,खोताआ’ चिडै आ’ सूर्यास्त हिनकर उपन्यास सभ अछि॥ दिशांतर हिनकर कविता संग्रह अछि। एकर अतिरिक्त सोने की नैय्या माटी के लोग,प्रथमंशैल पुत्री च,मंत्रपुत्र,पुरोहित आ’ स्त्री-धन हिनकर हिन्दीक कृति अछि।1988- हिनका(मंत्रपुत्र,उपन्यास)पर मैथिलीक साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित कए गेलन्हि। प्रबोध सम्मान 2007सँ सम्मानित। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-4 गंगेशगुंजन 1942 जन्मस्थान- पिलखबाड़,मधुबनी।श्रीगंगेश गुंजन मैथिलीक प्रथमचौबटिया नाटक बुधिबधियाकलेखक छथि आ हिनका उचितवक्ता(कथासंग्रह) कलेल साहित्य अकादमी पुरस्कारभेटल छन्हि। एकर अतिरिक्त्तमैथिलीमे हम एकटा मिथ्यापरिचय, लोकसुनू (कवितासंग्रह), अन्हार-इजोत (कथासंग्रह), पहिललोक (उपन्यास),आइ भोर (नाटक)दुखकदुपहरियामे (गजलसन किछु) प्रकाशित।हिन्दीमे मिथिलांचल की लोककथाएँ, मणिपद्मकनैका- बनिजाराकमैथिलीसँ हिन्दी अनुवाद आशब्द तैयार है (कवितासंग्रह)।१९९४-गंगेश गुंजन(उचितवक्ता,कथा)पुस्तकलेल सहित्य अकादेमी पुरस्कारसँसम्मानित । जहाँधरि गजलक गप्प छै तँ ई मैथिलीमे" गजलसन किछु " लिखलाआ ओहो मात्र दस-पनरहटा।हिनक पोथी " दुखकदुपहरियामे " एकरबानगी देखल जा सकैए। मैथिलीकपहिल अरूजी गजेन्द्र ठाकुरकमतें.......मायानन्दमिश्र “गीतल” कहि आ गंगेशगुंजन “गजल सन किछु मैथिलीमे”कहि जे गलत परम्पराकेँ जारीरखबाक निर्णय लेने छथि तकराबाद मुन्ना जी आ आशीष अनचिन्हारजँ बिना छन्द/ बहरकगजल लिखै छथि तँ एकरा हम मायानन्दमिश्र, गंगेशगुंजन आ लालकिलावादी अ-गजलकारलोकनिक दुष्प्रभावे बुझै छी। गजलकार परिचय श्रृंखला भाग-5 श्रीमती शेफालिका वर्मा जी मैथिलीक पहिल महिला गजलकार छथि। किछुए ( दसक भीतर ) गजल लिखने छथि। जन्म:९ अगस्त, १९४३,जन्म स्थान : बंगाली टोला, भागलपुर । शिक्षा:एम., पी-एच.डी. (पटना विश्वविद्यालय), ए. एन. कालेज, पटना मे हिन्दीक प्राध्यापिका पदसँ सेवानिवृत्त । नारी मनक ग्रन्थिकेँ खोलि:करुण रससँ भरल अधिकतर रचना। प्रकाशित रचना:झहरैत नोर, बिजुकैत ठोर; विप्रलब्धा (कविता संग्रह), स्मृति रेखा (संस्मरण संग्रह), एकटा आकाश (कथा संग्रह), यायावरी (यात्रा-वृत्तान्त), भावाञ्जलि (काव्य-प्रगीत) , किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा)। ठहरे हुए पल (हिन्दी) । २००४ ई.मे- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्माकेँ, पटना;यात्री-चेतना पुरस्कार भेटलन्हि। ऐ फोटोमे श्रीमती शेफालिका वर्मा जी बिहारक मुख्यमंत्री नीतीश कुमारसँ पुरस्कार ग्रहण करैत। गजलकार परिचय श्रृंखला भाग-6 हिनक एक-दूटा गजल अछि आ गजलक संबंधमे हिनक एक-दूटा लेख १९८४-८५केँ बीचमे प्रकाशित भेल। कथाकर, समीक्षक, अनुवादक, ग्रंथ सम्पादक । साहित्य अकादेमीक मूल एवं अनुवाद पुरस्कार प्राप्त कर्त्ता ल. ना. मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगाक मैथिली विभागक पूर्व प्राचार्य । प्रकाशन: पसिझैत पाथर, (अनु.) आदि । १९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)लेल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित ।१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू) लेल साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-7 प्रस्तुत अछि किछु एहन गजलकारक सूची जे कि छिटपुट गजल लिखला आ अन्यविधामे महारत हासिल केलाह। ई सूची शुरूसँ एल क' एखनधरिक अछि। संगे-संग भारत आ नेपाल दुन्नू मिला कए अछि। जँ ऐमे कोनो नाम छूटि गेल हुअए तँ ओ अहाँ सभ तुरंत सूचित करी से हमर आग्रह।ऐ सूचीकेँ आलवे बादमे एकटा आर एहने सूची आएत जाहिमे ओहन नव गजलकारक नाम रहत।--------- मुंशी रघुनंदन दास, यदयनाथ झा यदुवर, बाबू भुवनेश्वर सिंह भुवन, आनंद झा न्यायाचार्य, रमानंद रेणु, फूल चंद्र झा प्रवीण, वैकुण्ठ विदेह, शीतल झा, प्रेमचंद्र पंकज, प.नित्यानंद मिश्र, शारदानंद दास परिमल, तारानंद झा तरुण, रमाकांत राय रमा, महेन्द्र कुमार मिश्र, विनोदानंद, दिलीप कुमार झा दिवाना, वैद्यनाथ मिश्र बैजू, विलट पासवान विहंगम, सारस्वत, कर्ण संजय, अनिल चंद्र ठाकुर, श्याम सुन्दर शशि, अशोक दत्त, कमल मोहन चुन्नू, रोशन जनकपुरी, जियाउर रहमान जाफरी, धर्मेन्द्र विहवल्, सुरेन्द्र प्रभात, अतुल कुमार मिश्र, रमेश रंजन, कन्हैया लाल मिश्र, गोविन्द दहाल, चंद्रेश, चंद्रमणि झा, फजलुर रहमान हाशमी, रामलोचन ठाकुर, विनयविश्व बंधु, रामदेव भावुक, सोमदेव, रामचैतन्य धीरज, महेन्द्र, केदारनाथ लाभ, गोपाल जी झा गोपेश, नंद कुमार मिश्र,देवशंकर नवीन,मार्कण्डेय प्रवासी,अमरेन्द्र यादव। कुल 51टा बहुत रास नाम धीरेन्द्र प्रेमर्षि जी द्वारा संपादित गजल विशेषांक पर आधारित अछि। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-8 विभूति आनंद (जन्म-4/10/1955 ) हिनक गजल संग्रह " उठा रहल घोघ तिमिर " ( प्रकाशक-भारती संस्थान (पटना) ) बर्ख JUNE 1981मे आएल। आ ई मैथिलीक पहिल गजल संग्रह बनल। हिनक संबंधमे मैथिली गजलक पहिल पूर्णकालिक आलोचक आ समीक्षक श्री ओम प्रकाश जी कहै छथि.................. " हमरा हिसाबेँ काफियाक दोख पृष्ठ बीस, बाईस, चौबीस, पचीस, अट्ठाईस, उनतीस(संयुक्ताक्षर काफियाक नियमक दोख), बत्तीस आ सैंतीस मे सेहो अछि। एकर सबहक विस्तृत वर्णन देब हम अपेक्षित नै बूझि रहल छी, कियाक तँ इ हमर उद्देश्य कथमपि नै अछि। गजल संग्रहक सब गजलक विषय-वस्तु नीक अछि आ गजलकार अपन भावना नीक जकाँ प्रकट केने छथि। किछु गजलक काफिया आ रदीफक दोख जँ कात कऽ कऽ देखी, तँ इ गजल-संग्रह एकटा नीक गजल-संग्रह अछि। गजलकारक गजल कहबाक क्षमता सेहो नीक बुझाईत अछि। हमरा ई अचरज लागि रहल अछि जे ऐ संग्रहक बाद गजलकारक दोसर गजल-संग्रह किया नै आएल अछि। एकर कारण तँ गजलकारे केँ पता हेतैन्हि, मुदा अपन अनुभवक आधार पर हम कहऽ चाहै छी जे श्री विभूति आनन्द नीक गजल लिख सकैत छथि। जँ बहरक विचार नै करी, तँ २०१२ मे आएल श्री अरविन्द ठाकुरजीक गजल-संग्रह सँ करीब एकतीस बर्ख पहिने १९८१ मे लिखल गेल एहि संग्रहक गजल सब उम्दा कहल जा सकैत अछि। एकर कारण इ जे एहि संग्रहक गजल सब मे काफियाक नियम-पालनक प्रतिशत वर्तमान समयक संग्रह सब सँ बेसी अछि। कथ्यक मजबूती सेहो नीक कोटिक अछि। खाली कुहरल तुकमिलानी केने गजल नै कहल जा सकैत अछि, इ गप एहि संग्रह केँ पढलाक बाद एखुनका गजलकार सभ केँ सेहो बुझेतन्हि, इ आशा अछि। इहो एकटा अचरजक विषय अछि जे जखन मैथिली मे नीक गजल एतेक साल पहिनो कहल गेल छल, तखन एकर बाद गजलक विकास-यात्रा पचीस-तीस बर्ख धरि कतऽ आ किया ठमकि गेल। बीचक अवधि मे मैथिली गजलक विकासक धार मे बान्ह किया बनि गेल छल, इ विचारणीय गप अछि। ओना आब इ बान्ह टूटि रहल अछि आ आशाक नब जोति मे मैथिली गजलक घोघ उठि रहल अछि। " श्री आनंद जीक अन्य विवरण एना अछि----------- जन्म: शिवनगर, मधुबनी, बिहार। चर्चित कवि, कथाकार, संपादक । प्रकाशित कृति टूटा उपन्यास टूटा समीक्षा, तीन टा कथा संग्रह, टूटा गीत-गजल संग्रह ओ चारिटा कथा-संग्रह प्रकाशित।२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार । गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-9 स्व. कलानंद भट्ट गाम--- उछटी ( दरभंगा) जन्म----15 मइ 1941, मृत्य----5 अक्टूबर1994 प्रकाशित कृति---------- कान्ह पर लहास हमर( गजल संग्रह) अप्रकाशित पांडुलिपि--- हिलकोर ( रुबाइ संग्रह) गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-10 अनंत बिहारी लाल दास"इन्दु"1928-2010 प्रकाशित पोथी (मात्रगजलक दए रहल छी एहिकेँ अतिरिक्तोहिनक पोथी सभ छन्हि) 1) नवीन मैथिलीगजल-----शाइर अनन्तबिहारी लाल दस "इन्दु" 2) मधुर मैथिलीगजल------शाइर अनन्तबिहारी लाल दस "इन्दु" ( इन्दु जीक संग्रहकजानकारी हमरा सरस जी द्वाराभेटल अछि हलाकिं हुनको लग दूनूसंग्रह नै छन्हि) उपल्बधि---- 2007मे- अनन्तबिहारी लाल दास “इन्दु जीकेँ”(युद्ध आ योद्धा-अगमसिंह गिरि, नेपाली)लेलसाहित्य अकादेमी मैथिली अनुवादपुरस्कार प्राप्त भेलन्हि। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-11 रवीन्द्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र-महेन्द्र नामक चर्चित जोड़ीक ई रवीन्द्र छथि। हिनक एकटा गजल संग्रह छन्हि---लेखनी एक रंग अनेक ( पूर्वांचल प्रकाशन ( पटना ), वर्ख-१९८५.) हिनक अन्य विवरण एना अछि-- जन्म पूर्णिञा जिलाक धमदाहा ग्राममे 1936 ई. मे भेलन्हि । नेने अवस्थासँ गीत गएबामे एवं कविता लिखबामे विशेष रुचि । कोनो मंच पर ठाढ़ भेला पर ई सहजहि श्रीताकेँ आह्लादित करैत छथि । हिनक सात गोट मैथिलीक गीत संग्रह, एक मिनी महाकाव्य, एक प्रयोगधर्मी काव्य, एक उपन्यास, एक नाटक ‘एक राति’ एवं एक हिन्दी नाटक,आ उपरोक्त गजल संग्रह प्रकाशित भेल छन्हि । गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-12 सियारामझा "सरस" --10 JULY 1948,जन्म स्थान -मेंहथ, मधुबनी बिहार। गजल संग्रह--- 1) शोणिताएल पएरक निशान ( प्रकाशक-सरला प्रकाशन, मेहथ, प्रकाशन साल-1989) 2) लोकवेद आलालकिला ( संपादित) ( प्रकाशक---विद्यापति सेवा संस्थान, प्रकाशन साल-1990) 3) थोड़े आगि थोड़ पानि ( प्रकाशक---नवारम्भ, प्रकाशन साल-2008) विशेष------श्रीसरस जी अनचिन्हार आखर द्वाराप्रायोजित मैथिलीमे देल जाएबला गजल लेल पहिल सम्मान "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदासम्मान"क पहिल मुख्य चयनकर्ता छलाह जे किई. 2011मे शुरू भेल छल। हिनक अन्यविवरण एना अछि--- प्रसिद्ध गीतकार-गजलकार,बादमे कथा लेखन प्रारम्भकेलनि । अन्य प्रकाशित कृति---- आँजुर भरि सिंगरहार---कविता---१९८२, गीत रश्मि---गीत ( संपादन)--१९९४, नै भेटतौ खालिस्तान--गीत--१९९४, आखर-आखर गीत ---गीत--१९९९, चन्नाक पहाड़ ( अनूदित उपन्यास, साहित्य अकादेमीसँ प्रकाशित--१९९९), उगैतसूर्यक धम्मक (कथासंग्रह) आ उपरोक्तगजल संग्रह। गजलकार परिचय श्रृंखला भाग-13 तारानन्द वियोगी 12/5/1966 महिषी, सहरसामे जन्म। पहिल पोथी अपन युद्धक साक्ष्य (गजल संग्रह) १९९१ मे प्रकाशित। अन्य पुस्तक हस्तक्षेप (कविता-संग्रह), अतिक्रमण (कथा-संग्रह), शिलालेख (लघुकथा संग्रह), कर्मधारय( आलोचना )। राजकमल चौधरीक कथाकृति एकटा चंपाकली एकटा विषधर संकलन-सपादन। साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार २०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल" लेल। यात्री-चेतना पुरस्कार २०१० ई.मे सेहो प्राप्त भेलन्हि। " हालचाल " आ " संकल्प " नामक दूटा पत्रिकाक किछु अंकक संपादन। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-14 रमेश-1961 गजल संग्रह---नागफेनी---IPSITA PUBLICATION, 1990 ई सियाराम झा सरस जीक छोट भए छथिन्ह आ सरस-रमेश जोड़ीक रमेश छथि। जन्म स्थान मेंहथ, मधुबनी, बिहार। चर्चित कथाकार ओ कवि । प्रकाशित कृति: समांग, समानांतर, दखल (कथा संग्रह),संगोर, समवेत स्वरक आगू, कोसी धारक सभ्यता, पाथर पर दूभि (काव्य संग्रह), प्रतिक्रिया (आलोचनात्मक निबंध),आ उपरोक्त गजल संग्रह गजलकार परिचय श्रृंखला भाग-15 सुरेन्द्र नाथ प्रकाशित गजल संग्रह- गजल हमर हथियार थिक ( नवारम्भ प्रकाशन, साल 2008) जन्म-3-2-1951 प्रकाशित पोथी--- १) दृष्टिकोण ( आलोचना आ व्यंग) 2000मे प्रकाशित २) समय शिला ( कथा) 2008 ३) मंडन मिश्र मीमांसा, अद्वैत समागम ( संपादित) 2008 गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-16 राजेन्द्र विमल, जनकपुर, नेपाल प्रकाशित गजल संग्रह----सूर्यास्तसँ पहिने मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक प्राज्ञ विमल शिक्षाक हकमे विद्यावारिधि (पी.एच.डी.)क उपाधि प्राप्त कएने छथि।कम्मो लिखिकऽ यथेष्ट यश अरजनिहार डा. विमलक लेखनीक प्रशंसा मैथिलीक सङ्गसङ्ग नेपाली आ हिन्दी साहित्यमे सेहो होइत रहलनि अछि। त्रिभुवन विश्वविद्यालयअन्तर्गत रा.रा.ब. कैम्पस, जनकपुरधाममे प्राध्यापन कएनिहार डा. विमलक पूर्ण नाम राजेन्द्र लाभ छियनि। हिनक जन्म २६ जुलाई १९४९ ई. कऽ भेल अछि। साहित्यकारक नव पीढ़ीकेँ निरन्तर उत्प्रेरित करबाक कारणे ई डा.धीरेन्द्रक बाद जनकपुर-परिसरक साहित्यिक गुरुक रूपमे स्थापित भऽ गेल छथि। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-17 अरविन्द ठाकुर प्रकाशित गजल संग्रह---बहुरुपिया प्रदेश मे। ( नवारम्भ प्रकाशन, साल नवम्बर-2011) अन्य प्रकाशित कृति---- परती टूटि रहल अछि ( कविता), अन्हारक विरोधमे ( कथा) जन्म---14 February 1957, सुपौल गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-18 सुधांशु शेखर चौधरी 1922-1990 प्रकाशित गजल संग्रह- गजल ओ गीत ( किछु गीत छै ऐमे आ किछु गजल) जन्म दरभंगाक मिश्रटोलामे 1922 ई. मे भेलन्हि तथा मृत्यु 1990 ई. मे भेलन्हि । किछु दिन विभिन्न जीविकामे रहि पश्चात् साहित्यकारक जीवन प्रारम्भ कएल । किछु दिन ‘बैदेही’क सम्पादन श्री सुमनजी एवं श्री कृष्णकान्त मिश्रजीक संग कएल तत्पश्चात् 1960 ई. सँ 1982 ई. धरि पटनामे ‘मिथिला मिहिर’’क सफल सम्पादन कएल ।हिनक दू गोट नाट्यकृति-‘भफाइत चाहक जिनगी’, लेटाइत आँचर’, तथा ‘पहिल साँझ’ हिनक नाटकक नीक व्यावहारिक अनुभवक परिचायक अछि ।छद्मनामसँ हिनक दू गोट उपन्यास मिहिर’ मे प्रकाशित भेल अछि । हिनक उपन्यास ई वतहा संसार’ जे मैथिली अकादमी द्वारा प्रकाशित भेल आ जाहि पर 1980 क साहित्य अकादमीक पुरस्कार देल गेल । गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-19 जगदीश चन्द्र ठाकुर "अनिल" विशेष---- अनचिन्हार आखर द्वारा प्रयोजित मैथिली गजल लेल देल जाए बला " गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" लेल हिनका साल २०१२ लेल मुख्य चयन कर्ता बनाएल गेल अछि। मूल नाम जगदीश चन्द्र ठाकुर, जन्म: 27.11.1950,शंभुआर, मधुबनी । सेवा निवृत बैंक अधिकारी। मैथिलीमे प्रकाशित पोथी-1. तोरा अडनामे -गीत संग्रह-1978; 2. धारक ओइ पार-दीर्घ कविता-1999 संप्रति- धुरझार गजल लीखि रहल छथि। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-20 कालीकांत झा "बूच" 1934-2009 हिनक किछु गजल उपलब्ध अछि | हिनक जन्म, महान दार्शनिक उदयनाचार्यक कर्मभूमि समस्तीपुर जिलाक करियन ग्राममे 1934 ई. मे भेलनि । पिता स्व. पंडित राजकिशोर झा गामक मध्य विद्यालयक प्रथम प्रधानाध्यापक छलाह । माता स्व. कला देवी गृहिणी छलीह । अंतरस्नातक समस्तीपुर काॅलेज, समस्तीपुरसँ कयलाक पश्चात् बिहार सरकारक प्रखंड कर्मचारीक रूपमे सेवा प्रारंभ कयलनि । बालहिं कालसँ कविता लेखनमे विषेश रूचि छल । मैथिली पत्रिका - मिथिला मिहिर, माटि - पानि, भाखा तथा मैथिली अकादमी पटना द्वारा प्रकाशित पत्रिकामे समय - समय पर हिनक रचना प्रकाशित होइत रहलनि । जीवनक विविध विधाकेँ अपन कविता एवं गीत प्रस्तुत कयलनि । साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा प्रकाशित मैथिली कथाक विकास (संपादक डाॅ बासुकीनाथ झा ) मे हास्य कथा कारक सूची मे डाॅ विद्यापति झा हिनक रचना ‘‘धर्म शास्त्राचार्यक उल्लेख कयलनि । मैथिली अकादमी पटना एवं मिथिला मिहिर द्वारा प्रशंसा पत्र भेजल जाइत छल ।श्रृंगाररस एवं हास्य रसक संग-संग विचार मूलक कविताक रचना सेहो कयलनि । डाॅ दुर्गानाथ झा श्रीश संकलित मैथिली साहित्यक इतिहासमे कविक रूपमे हिनक उल्लेख कएल गेल अछि । प्रकाशित कृति (मृत्योपरांत) : कलानिधि- कविता-संग्रह। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-21 धीरेन्द्र प्रेमर्षि ई मैथिली गजलक पहिल वीर छथि जे अपन पत्रिकाक माध्यमे पहिल गजल विषेशांक निकालथि। व्यक्तिगत विवरण पूर्ण नामः धीरेन्द्र झा प्रचलित नामः धीरेन्द्र प्रेमर्षि जन्मस्थानः गोविन्दपुर, गा.वि.स. वार्ड नं.-१, बस्तीपुर, जिला- सिरहा, नेपाल जन्मथितिः वि.सं. २०२४, भादब १८ गते (३ सितम्बर १९६७) शिक्षाः स्नातक पिताक नामः पं. कृष्णलाल झा माताक नामः आनन्दीदेवी झा मूल वृत्तिः नेपाल सरकारक नोकरिहारा (कृषि विभागअन्तर्गत Plant Protection Officer) प्रकाशित साहित्यिक कृतिः समयलाई सलाम (नेपाली गजल-सङ्ग्रह) प्रकाशकः खेमलाल-हरिकला स्मृति समाज कल्याण प्रतिष्ठान, चितवनः २०६५ मलङ्गियाका मैथिली एकाङ्की (नेपालीमे अनूदित एकाङ्की-सङ्ग्रह), प्रकाशकः खेमलाल-हरिकला स्मृति समाज कल्याण प्रतिष्ठान, चितवनः २०६५ कर्मयोद्धा योगेन्द्र साह नेपाली (सम्पादन),प्रकाशकः मिथिला नाट्यकला परिषद, जनकपुरधामः २०६५ कोन सुर सजाबी ? (मैथिली गीत-सङ्ग्रह),प्रकाशकः नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानः २०६१ अगहन भगता बेङक देश-भ्रमण (कनक दीक्षितक चर्चित पोथीक मैथिली रूपा झाक सङ्ग सहअनुवाद), प्रकाशकः रातो बङ्गला किताब, पाटनढोका, ललितपुरः २०५९ आसिन मैथिली कविता-सङ्ग्रह, सं. (आठम शताब्दीसँ बीसम शताब्दीधरिक प्रतिनिधि मैथिली कविसभक कविताक सङ्कलन) प्रकाशकः नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानः २०५१ स्वप्नकथा चलिरहल अछि (नेपालीसँ मैथिलीमे अनूदित गोविन्द गिरी प्रेरणाक कविता-सङ्ग्रह), प्रकाशकः मैथिली विकास मञ्च, काठमाण्डूः २०५० फुच्चे सिस्नुपानी धीरेन्द्र प्रेमर्षि विशेष (नेपाली हास्यव्यङ्ग्य रचनासभक सङ्ग्रह),प्रकाशकः सिस्नुपानी नेपाल, सम्पादकः माणिकरत्न शाक्यः २०६२ शैक्षिक कृतिःखिस्सा-पिहानी (मैथिली लोककथासभ सङ्गृहीत बालसन्दर्भ पुस्तक), प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०६३ हमर मिथिला (मैथिली संस्कृतिसम्बन्धी लेखसभ सङ्गृहीत बालसन्दर्भ पुस्तक),प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०६३ मैथिल विभूतिसभ (मैथिल विभूतिसभक जीवनी सङ्गृहीत बालसन्दर्भ पुस्तक),प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०६३ हमर मैथिली पोथी (कक्षा १, २, ३, ४ आ ५ क ऐच्छिक मैथिली विषयक पाठ्यपुस्तक),प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०५४ सँ २०५८ धरि मैथिली (कक्षा ९ आ १० क ऐच्छिक मैथिली विषयक पाठ्यपुस्तक) प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०५७ आ २०५८ हिन्दी (कक्षा १० क ऐच्छिक हिन्दी विषयक पाठ्यपुस्तक) प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०५८ साङ्गीतिक कृतिः डेग (शान्तिक लेल युवा जागरण तथा सशक्तिकरणसम्बन्धी मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह) प्रकाशकः संस्कार मिथिला, गोविन्दपुर, सिरहाः २०६६ बैशाख भोर (सकारात्मक सोच तथा शान्ति–सद्भाव सम्बर्द्धनसम्बन्धी मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह) प्रकाशकः सम्झौता नेपाल, काठमाण्डू, २०६५ जेठ नेहक बएन (शान्ति तथा सद्भाव सम्बर्द्धनसम्बन्धी मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह) प्रकाशकः सम्झौता नेपाल, काठमाण्डू, २०६४ कार्तिक गाना-बजाना (विविध मनोरञ्जनात्मक मैथिली गीतक सङ्ग्रह) प्रकाशकः गंगा कैसेट, नयादिल्लीः २०६३ बैशाख भजन दिव्यानन्द (चट्याङ मास्टर रचित नेपाली भजनसभक सङ्गीत-निर्देशन एवं गायन) प्रकाशकः श्रीमती कान्ता गौतमः २०६१ आसिन वन-गीत (संरक्षणसम्बन्धी चेतनामूलक मैथिली आ भोजपुरी गीतसभक सङ्ग्रह) प्रकाशकः बाइसेप एसटी, काठमाण्डू, नेपालः २०६१ चेतना (सामाजिक परिवर्तनक दिस उन्मुख मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह) प्रकाशकः एक्सनएड नेपालक सहयोगमे संस्कार मिथिलाः २०६० अगहन Song of Light : प्रियतम हमर कमौआ (सार्थक गीति क्यासेट तथा पहिल मैथिली सीडी) प्रकाशकः म्यूजिक नेपालः २०५८, सीडीक प्रकाशकः म्यूजिक मिथिला प्रेम भेल तरघुस्कीमे (विविध मनोरञ्जक मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह, क्यासेट तथा सीडी) प्रकाशकः मास्टर क्यासेटः २०५८ सिस्नु 2000.COM (हास्यव्ङग्यात्मक क्यासेट) प्रकाशकः सिस्नुपानी नेपाल आ रीमा क्यासेटः २०५७ सिस्नुपानी (हास्यव्ङग्यात्मक क्यासेट) प्रकाशकः सिस्नुपानी नेपाल आ रीमा क्यासेटः २०५६ सिस्नुपानीले (उद्देश्यमूलक हास्यव्यङ्ग्यात्मक गीतसभक सङग्रह) प्रकाशकः सिस्नुपानी नेपाल, हास्यव्यङ्ग्य सदनः २०५५ सुरक्षित मातृत्व गीतमाला (सन्देशमूलक नेपाली, मैथिली, भोजपुरी गीतसभक सङग्रह) प्रकाशकः सुरक्षित मातृत्व नेटवर्क, नेपालः २०५५ सुखक सनेस (बालस्वास्थ्य तथा परिवार कल्याणसम्बन्धी मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह) प्रकाशकः सेभ द चिल्ड्रेन, यूएसएः २०५४ कलियुगी दुनिया (नेपालसँ बहराएल मैथिलीक पहिल गीति क्यासेट) प्रकाशकः सिम्फनिक रेकर्डिङ प्रा.लि.: २०४७ प्रकाशोन्मुख कृतिः सूत्रधार (मैथिली हाइकू-सङ्ग्रह) शब्द-सारथी (मैथिली गजलसङ्ग्रह) एमकीक जतरा (मैथिली गीत-सङ्ग्रह) साँपक पएर (मैथिली निबन्ध-सङ्कलन) ओ गीत कोन गाबए? (मैथिली कथा-सङ्ग्रह) सिनुराएल सुरूजदिस (मैथिली कवितासङ्ग्रह) नेताको मुसावतार (नेपाली हास्यव्यङ्ग्य-सङ्ग्रह) The मुड्की (संयुक्त नेपाली हास्यव्यङ्ग्यक सङ्ग्रह) श्यामप्रसादक निबन्ध (मैथिलीमे अनुवाद कएल गेल) मैथिली कथा-संसार (प्रतिनिधिमूलक कथासभक सङ्ग्रह) रचनात्मक कार्यानुभव तथा संलग्नताः रेडियो नेपाल, समाचार-वाचक तथा सम्पादक (मैथिली, नेपाली आ हिन्दी समाचार) अवधिः वि.सं. २०४९ पुससँ वि.सं. २०६१ चैत्र मसान्तधरि कान्तिपुर एफ.एम., मैथिली कार्यक्रम ‘हेल्लो मिथिला’ आ ३ अन्य, परिकल्पना तथा प्रस्तुति अवधिः वि.सं. २०५८ फागुनसँ वर्तमानधरि नेपाल एफ.एम., समावेशी लोकतन्त्रसम्बन्धी कार्यक्रम ‘आवाज’, संयोजन आ निर्देशन अवधिः वि.सं. २०६३ अखाढ़सँ वर्तमानधरि नेपाल 1 टेलिभिजन, नेपाली साहित्यिक कार्यक्रम ‘राम्रो कस्तो राम्रो’क प्रस्तुति अवधिः वि.सं. २०६४ साओनसँ एक सालधरि गोरखापत्र दैनिक, ‘नयाँ नेपाल’ परिशिष्टअन्तर्गत मैथिली खण्डक संस्थापक संयोजक अवधिः वि.सं. २०६४ आसिनसँ छओ मासधरि पल्लव, मैथिली साहित्यिक मासिक पत्रिका, सम्पादक तथा प्रकाशक अवधिः वि.सं. २०५० अखाढ़सँ वर्तमानधरि पल्लवमिथिला, दोसर मैथिली इन्टरनेट पत्रिका (साहित्यिक), सम्पादक तथा प्रकाशक अवधिः वि.सं. २०५९ माघ मैथिल समाज, सामाजिक तथा सांस्कृतिक त्रैमासिक, सम्पादक अवधिः वि.सं. २०५८ असोजदेखि वर्तमानधरि फित्कौली, नेपाली हास्यव्यङ्ग्यसम्बन्धी मासिक पत्रिका, संयुक्त सम्पादक अवधिः वि.सं. २०६२ अखाढ़सँ वर्तमानधरि कामना, नेपाली सिनेमासिक पत्रिका, सम्पादक अवधिः वि.सं. २०५३ चैत्रसँ २०५५ माघधरि ज्ञान-गङ्गा, साहित्य तथा विविध समसामयिक विषयसभक पत्रिका, संयुक्त सम्पादक अवधिः वि.सं. २०५९ बैशाखसँ वर्तमानधरि यती, स्वास्थ्य, यौन तथा परिवार कल्याणसम्बन्धी त्रैमासिक पत्रिका, कार्यकारी सम्पादक अवधिः वि.सं. २०५४ अगहनसँ २०५५ पुसधरि अन्य उल्लेख्य गतिविधिः नेपालक अधिकांश राष्ट्रीय अखबार तथा साहित्यिक पत्रपत्रिकामे नियमित रूपेँ कथा, कविता, गीत-गजल, हास्यव्यङ्ग्यसन साहित्यिक तथा अन्य समसामयिक लेखन। नेपाल, भारत, अमेरिका आ यूएइसँ प्रकाशित भेनिहार विभिन्न पत्रपत्रिका एवं नेट म्याग्जिनमे मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक एक हजारसँ बेसी लेख-रचना प्रकाशित। बीबीसी नेपाली सेवा आ अल इण्डिया रेडियोसहित अनेको पत्रपत्रिका, रेडियो तथा टेलिभिजन कार्यक्रममे साहित्यकार तथा भाषा अभियानी / संस्कृतिकर्मीक रूपमे अन्तर्वार्ता प्रसारित। कामना प्रकाशनक ‘नेपाल समाचारपत्र’ मे एक वर्षधरि सम्पादकीय पृष्ठक संयोजन। कान्तिपुर एफ.एम. मे हास्यव्यङ्ग्यसम्बन्धी नेपाली भाषाक साप्ताहिक कार्यक्रम ‘कुर्सीमाथि फर्सी’, एच.बी.सी. एफ.एम. मे साप्ताहिक मैथिली कार्यक्रम ‘चौबटिया’, मेट्रो एफ.एम. मे दैनिक विश्लेषणात्मक नेपाली कार्यक्रम ‘मन्थन’ क निर्देशन तथा सञ्चालन। स्वतन्त्र समाचार सेवाक insonline.net मे पहिल नेपाली अनलाइन श्रव्य समाचारक शुरुआत। ‘हिमालय टाइम्स’, साप्ताहिक ‘नेपाल’ ‘दृष्टि’, ‘बुधबार’, ‘हिमाल’ आदि पत्रिकामे स्तम्भ लेखन। ‘लेकाली सङ्गीत-यात्रा’ समेत अनेको महत्त्वपूर्ण पोथीक भाषा-सम्पादन एवं भूमिका लेखन। कथा, पटकथा, संवाद लेखन- मैथिली टेलिशृङ्खलाः ‘अन्हरजाली’, ‘आशीर्वाद’ आ ‘दूमहला’। नेपाली कथानक चलचित्र ‘दुलही’ क लेल कथाविचार तथा गीतलेखन। जङ्गल साहित्यिक गोष्ठीसमेत कतिपय साहित्यिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमक संयोजन। नेपाली टेलिशृङ्खला ‘आगन्तुक’, नेपाली टेलिशृङ्खला ‘गोनू झा’ मे गीत, सङ्गीत, गायन। नेपाल, भारत तथा कतारमे अनेको साहित्यिक / साङ्गीतिक समारोहमे सहभागी। पहिल मैथिली टेलिफिल्म ‘मिथिलाक व्यथा’, ऐतिहासिक मैथिली टेलिशृङ्खला ‘महाकवि विद्यापति’ तथा नेपाली टेलिशृङ्खला ‘मदनबहादुर-हरिबहादुर भाग २’ मे अभिनय। विकट हिमाली जिला हुम्लाक इतिहासमे पहिलबेर नाटक मञ्चन एवं अन्य विभिन्न स्थानपर नेपाली, मैथिली तथा हिन्दी भाषाक नाटकसभक निर्देशन, लेखन तथा मञ्चन। प्रज्ञा-प्रतिष्ठानक नृत्य-सङ्गीत समिति तथा लोकसाहित्य समितिक सदस्य रहि क्रियाशील। जगदम्बाश्री पुरस्कार (२०५८) तथा नेपाल प्रज्ञा-प्रतिष्ठानद्वारा आयोजित प्रथम मिथिला चित्रकला प्रतियोगितासहित कतोक कविता तथा गजल प्रतियोगितामे निर्णायकक भूमिका निर्वहन। संस्थागत आबद्धताः संस्थापक अध्यक्ष, कला-संस्कृति-सञ्चार संस्थाः संस्कार मिथिला संस्थापक अध्यक्ष तथा संरक्षक, मैथिली विकास मञ्च संस्थापक तथा उपाध्यक्ष, सिस्नुपानी नेपाल, हास्यव्यङ्ग्य सदन सदस्य-सचिव, फूलकुमारी महतो मैथिली सम्मान समिति, काठमाण्डू सदस्य-सचिव, वैद्यनाथ-सियादेवी मैथिली पुरस्कार प्रतिष्ठान, काठमाण्डू कार्यसमिति सदस्य, नेपाल मैथिल समाज, काठमाण्डू केन्द्रीय सदस्य, नेपाल साहित्यिक पत्रकार सङ्घ केन्द्रीय सदस्य, भाषिक अधिकार संयुक्त सङ्घर्ष समिति अन्य कतोक सङ्घ-संस्थामे आजीवन तथा मानार्थ सदस्य एवं सलाहकार पदक तथा सम्मानः राष्ट्रिय स्रष्टा सम्मान- २०६८ (प्रगतिशील तथा देशभक्त सांस्कृतिक मञ्च ) सशक्त सञ्चारकर्मी पत्रकारिता पुरस्कार- २०६८ (प्रेस काउन्सिल नेपाल ) जन-अभिनन्दन- २०६८ (सिरहा समाज सेवा, काठमाडौँ ) मिथिला दूत सम्मान- २०६७ (मैथिली सेवा समितिसहित दर्जनभरि संघ-संस्था, काठमाण्डू) मधुरिमा फूलकुमारी महतो सांस्कृतिक सम्मान- २०६५ (मधुरिमा कला केन्द्र, काठमाण्डू) लोकतान्त्रिक स्रष्टा सम्मान- २०६४ (अविरल साहित्य समाज, सिन्धुपाल्चोक) विद्या-वाचस्पति (D.Lit.)- ई. २००७ (विक्रमशिला विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार) मैथिली सङ्घर्षशील व्यक्तित्व सम्मान- २०६३ (मैथिली साहित्य परिषद्, लहान) साहित्य भास्कर- ई. २००६ (अखिल भारतीय भाषा-साहित्य सम्मेलन, भोपाल, म.प्र.) उत्कृष्ट सङ्गीतकार सम्मान- ई. २००६ (संस्कृति मिथिला, सहरसा, बिहार) जनअभिनन्दन- २०६२ (मैथिली सेवा समितिसहितक सङ्घ-संस्था, विराटनगर) मिथिलारत्न सम्मान- ई. २००५ (अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन, नयादिल्ली) वागेश्वरी सम्मान- २०६२ (वागेश्वरी सेवा समिति, राजविराज, सप्तरी) सलहेस महोत्सव सम्मान- २०६१ (सलहेस संरक्षण समिति, सिरहा) ‘माटी की गंध’ कथा पुरस्कार- ई. २००३ (अभिव्यक्ति प्रकाशन, शारजाह, यूएई) नवरङ्ग सम्मान- २०५७ (नवरङ्ग साहित्य प्रतिष्ठान, धरमपुर, झापा) भानु पदक- २०५४ (भानु कला केन्द्र, विराटनगर) विदेश-भ्रमणः भारत, चीन आ कतार। सम्पर्क पताः पोष्टहार्भेष्ट व्यवस्थापन निर्देशनालय, श्रीमहल, पुल्चोक, ललितपुर, नेपाल। फोन नं.: ९७७-१-५५३६९९४ / ९८४१२८०७३३ ईमेल- dhipre@yahoo.com आ dhipre@gmail.com नोट: पल्लवमिथिला मैथिलीक दोसर इंटरनेट पत्रिका अछि जखन की वास्तविकता ई थिक जे भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल आ अखनो ५ जुलाइ २००४ सँhttp://www.videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर अछि, मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ" विदेह " पड़लै। ई टिप्पणी मात्र इतिहास शुद्धता लेल अछि। मैथिलीक पहिलसँ लए क' एखन धरिक हरेक इंटरनेट पत्रिकाक नाम, यूआरएल, ओकर पहिल पोस्टक तारीख ऐ ठाम देखल जा सकैए---http://www.videha.co.in/feedback.htm जँ किनको लग 5/7/2004 सँ पहिनुक लिंक छन्हि तँ प्रस्तुत कएल जाए। ( ऐ फोटोमे धीरेन्द्र प्रेमर्षि, हुनक पत्नी रूपा झा आ हुनक दू गोट बालक।) विदेहक फेसबुक भर्सन http://www.facebook.com/groups/videha/ पर भेल टिप्पणी देल जा रहल अछि। ई इतिहास शुद्धता लेल नीक अछि। You, Ashutosh Mishra, Prabin Chaudhary Pratik, Rajeev Ranjan Mishra and12 others like this. Jan Anand Mishra Premarshiji ekta star bain chukal chhaith 6 hours ago via Mobile · Unlike · 1 Ashish Anchinhar आ हमर कोशिश रहल अछि जे स्टारक स्टार सभ सेहो ऐ फोटोमे आबथि से आबि गेल छथि।. 6 hours ago · Like · 4 Dhirendra Premarshi आशिषजी, धन्यवाद परिचय शृङ्खलामे हमरा रखबाक लेल। पल्लवमिथिलाक सन्दर्भमे हम पहिनहु कहने रही जे वर्ष २००३ जनवरीसँ शुरू भेल छल मुदा ओकरा हम निरन्तरता नहि दऽ सकलहुँ। तेँ ओइपर हमर कोनो दाबा नहि अछि। हँ ओहिमे वर्तमानधरि सेहो लिखाएल अछि जे सर्वथा गलत अछि। अइ बायोडाटामे कने सम्पादन जरूरी छलै से नहि भऽ पाएल अछि। ओना पल्लवमिथिलाकेँ भाषाविद डा रामावतार यादव सार्वजिनक कएने छलाह से समाचारो छपल छल। मुदा हमरा ओ कटिंग तकबामे सेहो भाङठ हएत। कारण हम व्यवस्थापनक मामलामे बड्ड कमजोर छी। 3 hours ago · Unlike · 3 Dhirendra Premarshi २०५९ माघे संक्रान्तिदेखि नेपालको मैथिली भाषाको पहिलो इन्टरनेट पत्रिका पल्लव www.pallavmithila.mainpage.net सुरु गरिएको छ। यो पत्रिका काठमाडौँस्थित मैथिली विकास मंचको तर्फबाट धीरेन्द्र प्रेमर्षीद्वारा सम्पादन तथा प्रकाशन गरिन्छ। यसमा मैथिली भाषामा विविध साहित्यिक सामग्री राखिएका छन्। हरेक महिना यसका सामग्रीहरू अद्यावधिक गरिन्छ। (सम्प्रति नेपालक सूचना आयोगक अध्यक्ष विनय कसजूद्वारा लिखित पुस्तकमे सेहो पल्लवके बात राखल गेल अछि। एकर जे लिंक छै से अस्थायी प्रकृतिक भेलाक कारणे आब नइ भेटैत अछि। डा कसजूक किताबक लिंक अइठाम दऽ रहल छी-http://www.kasajoo.com/itbook_vinaya.pdf) mainpage.net: The Leading Main Page Site on the Net www.mainpage.net 2 hours ago · Like · Ashish Anchinhar हम http://www.pallavmithila.mainpage.net/ आhttp://www.pallavmithila.net/ दुनू खोलबाक प्रयास केलौं मुदा नै खुजलhttp://pallav.blogsome.com/ खुजल आ ओ १७ मइ २००६ केर अछि आhttp://hellomithila.blogspot.com/सेहो खुजल जे ३ मइ २००६ केर अछि। भऽ सकैए ओ डोमेन नेम डिलीट भऽ गेल हुअए, मुदा जँ डिलीट भेल डेटा देखी तँ तै हिसाबे सेहो भालसरिक गाछ २००० ई.सँ yahoogeocities पर निरन्तर छल, मुदा याहू द्वारा geocities सर्विस बन्द भऽ गेलाक बाद ओहो डोमेन नेम बन्द भऽ गेल, आ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html आ http://www.videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html ५ जुलाइ २००४ सँ निरन्तर मैथिलीक सभसँ पुरान स्वरूपमे उपलब्ध अछि, नचिकेताक नाटक विदेहक आठम अंकसँ धारावाहिक प्रकाशित भेलै आ ओ जखन २००८ मे पोथी रूपमे एलै तखन इन्टरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ २००० ई. मे गजेन्द्र ठाकुर जी द्वारा कएल जेबाक चर्च ओतए छै। (लिंकhttp://sites.google.com/a/shruti-publication.com/shruti-publication/Home/NO_ENTRY_MA_PRAVISH.pdf?attredirects=0) अहाँक दुनू लिंक जे खुजि रहल अछि ओकर चर्च सेहो अंतिकाक इन्टरनेट पत्रिका विशेषांकमे गजेन्द्र ठाकुरजी केने छथि। ओना अहाँक देल सूचना महत्वपूर्ण अछि आ भालसरिक गाछक बाद दोसर इन्टरनेट पत्रिका पल्लवकेँ मानल जा सकैए। तदनुसार अहाँक बायोडाटामे सम्पादन कऽ रहल छी। mainpage.net: The Leading Main Page Site on the Net www.mainpage.net 32 minutes ago · Like · Dhirendra Premarshi अहाँ सही कहै छी आशिषजी। ई बात हम उपरका कमेंटमे सेहो लिखने छी। (एकर जे लिंक छै से अस्थायी प्रकृतिक भेलाक कारणे आब नइ भेटैत अछि।) ओना एकटा बात हम कहि दी जे हमर ई दावा नइ अछि मात्र जानकारीभरि अछि। आब जेँ कि ओकर प्रमाणो खतम भेल जा रहल छै तेँ भऽ सकैए जे हम ओ विवरणो हटा दी। 22 minutes ago · Unlike · 1 Ashish Anchinhar हँ मेनपेज डॉट नेट डोमेन नेम प्रायः खतम भऽ गेल छै, तकरा बाद कियो दोसर गोटे ओकरा लेने छथि प्रायः। तै दुआरे मेनपेज डॉट नेटक सब डोमेन पल्लव सेहो खतम भऽ गेल हेतै। तै हिसाबे सेहो भालसरिक गाछ आ आर किछु साइट जे याहूसिटीज केर अन्तर्गत २०००मे गजेन्द्र ठाकुर जी द्वारा शुरू भेल सेहो याहू द्वारा जियोसिटीज बन्द कऽ देलाक बाद खतम भऽ गेलै मुदा अखनो एकर सभ सँ पुरान लिंक ५ जुलाइ २००४ अखनो अछिये। ओइ हिसाबे सेहो भालसरिक गाछ पहिल आ पल्लव दोसर इन्टरनेट पत्रिका सिद्ध होइए आ तदनुसारे परिवर्तन/ सम्पादन कऽ देने छी.. सादर। about a minute ago · Like गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-22 विजय नाथ झा प्रकाशित गीत-गजल संग्रह---- अहींक लेल ( प्रकाशन साल 2008, प्रकाशक -शेखर प्रकाशन) पिता-प. रतिनाथ झा ( पूर्व विभागाध्यक्ष प्राच्य दर्शन विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) गाम---ग्रम-पोस्ट---तलपुरवा, बाँसी, सिद्यार्थनगर,( उत्तर प्रदेश) शिक्षा---विज्ञान स्नातक ( काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) वृति---पत्रकारिता आ स्वतंत्र लेखन, आर्यावर्तक संपादकीय विभागमे विविध सेवा, चुटकुलानंदक चिट्ठी केर लेखन, आकाशवाणी आ दूरदर्शन पटनामे कविता पाठ आ अन्यान्य तरहवक प्रसारण गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-23 राम भरोस कापड़ि भ्रमर, 1951 प्रकाशित गीत-गजल संग्रह----मोमक पघलैत अधर जन्म-बघचौरा, जिला धनुषा (नेपाल)।बन्नकोठरी: औनाइत धुँआ (कविता संग्रह), नहि, आब नहि (दीर्घ कविता), तोरा संगे जएबौ रे कुजबा (कथा संग्रह, मैथिली अकादमी पटना, १९८४), मोमक पघलैत अधर (गीत, गजल संग्रह, १९८३), अप्पन अनचिन्हार (कविता संग्रह, १९९० ई.), रानी चन्द्रावती (नाटक), एकटा आओर बसन्त (नाटक), महिषासुर मुर्दाबाद एवं अन्य नाटक (नाटक संग्रह), अन्ततः (कथा-संग्रह), मैथिली संस्कृति बीच रमाउंदा (सांस्कृतिक निबन्ध सभक संग्रह), बिसरल-बिसरल सन (कविता-संग्रह), जनकपुर लोक चित्र (मिथिला पेंटिङ्गस), लोक नाट्य: जट-जटिन (अनुसन्धान), घरमूहाँ ( उपन्यास)२०१२। नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता- श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010) गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-24 नरेश कुमार विकल जन्म 27 जुलाइ 1950 भगवानपुर देसुआ (समस्तीपुर) प्रकाशित कृति---- अरिपन, महुआ मदन रस टपकय, बिन बाती दीप जरय ( काव्य-) कथा-संग्रह- भरि गेल दर्दक इनार। उपन्यास- टहकैत टीस। नाटक- चोखगर खौंच। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-25 योगानंद हीरा ई पहिल गजलकार छथि जे मैथिलीमे पूर्ण रूपेण आ पहिल बेर अरबी बहरक पालन केलथि। मुदा एही कारणे मैथिली संपादक सभ हिनका कात कए देलकन्हि मूल नाम---योगानंद दास हीरा जन्म-30-1-1940 गाम--डुमरी, पत्रालय-गणपतगंज, थाना-राघोपुर, जिला सुपौल शिक्षा-- हिन्दी भाषामे मास्टर डिग्री लेखन---मैथिली आ हिन्दी दूनूमे प्रकाशित पोथी--- नीड़ की तलाश, भले आदमी की तलाश ( उपन्यासिका), सिमटती छाया ( कहानी संग्रह), एक अच्छा मैं ( एकांकी संग्रह), आज की कहानी ( नाटक)। सभ प्रकाशित पोथी हिन्दीमे। मैथिलीमे जल्दिये हिनक पोथी आएत। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-26 गजेन्द्र ठाकुर, पिता-स्वर्गीय कृपानन्द ठाकुर, माता-श्रीमती लक्ष्मी ठाकुर,जन्म-स्थान-भागलपुर 30 मार्च 1971 ई., मूल-गाम-मेंहथ, भाया-झंझारपुर,जिला-मधुबनी (बिहार)। शिक्षा: एम.बी.ए. (फाइनेन्स), सी.आइ.सी., सी.एल.डी., कोविद। विदेहक http://www.videha.co.in प्रधान संपादक सहित अनेको वेबसाइटक संचालक आ पथप्रदर्शक। प्रकाशित गजल संग्रह----धांगि बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ विशेष------ हिनक चारिटा मुख्य विशेषता अछि--- 1) ई मैथिलीक पहिल अरूजी छथि, आ 2) हिनका माध्यमे मात्र बारह सालमे कुल ३५०-४००टा नवलेखक आ कतिआएल लेखक सामने अएलाह। 3) अन्तर-महाविद्यालय क्रिकेट प्रतियोगितामे "मैन ऑफ द सीरीज" (1991), सम्प्रति अमेच्योर गोल्फर| 4)अंतर्जाल लेल तिरहुता आ कैथी यूनीकोडक विकासमे योगदान आ मैथिलीभाषामे अंतर्जाल आ संगणकक शब्दावलीक विकास, मैथिली विकीपीडियाक स्थापक। गूगल मैथिली ट्रान्सलेटमे योगदान आ शब्दकोषक वृहत संकलन ओ प्रकाशन। संस्कृत वीथी नाटकक निर्देशन आ ओइमे अभिनय। अन्य लेखन: प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग-१ सहस्रबाढ़नि (उपन्यास) सहस्राब्दीक चौपड़पर (पद्य संग्रह) गल्प-गुच्छ (विहनि आ लघु कथा संग्रह) संकर्षण (नाटक) त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन (दूटा गीत प्रबन्ध) बाल मण्डली/ किशोर जगत (बाल नाटक, कथा, कविता आदि) उल्कामुख (नाटक) सहस्रशीर्षा (उपन्यास) प्रबन्ध-निबन्ध-समालोचना भाग दू (कुरुक्षेत्रम अन्तर्मनक-२) धांगि बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छँ (गजल संग्रह) शब्दशास्त्रम (कथा संग्रह) जलोदीप (बाल-नाटक संग्रह) कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देवनागरी वर्सन KuruKshetramAntarmanak_GajendraThakur.pdf तिरहुता वर्सन KuruKshetramAntarmanak_GajendraThakur_Tirhuta.pdf ब्रेल वर्सन KuruKshetramAntarmanak_GajendraThakur_Braille.pdf सहस्रबाढ़नि_ब्रेल मैथिली (पी.डी.एफ.) सहस्रबाढ़नि_ब्रेल-मैथिली मिथिलाक इतिहास- भाग-२ (शीघ्र) जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी (शीघ्र) The Comet The_Science_of_Words On_the_dice-board_of_the_millennium A Survey of Maithili Literature- Vol.II- GAJENDRA THAKUR (soon) Learn Mithilakshar Script तिरहुता (मिथिलाक्षर) सीखू Learn_MithilakShara_GajendraThakur.pdf Learn Braille through Mithilakshar Script ब्रेल सीखू LearnBraille_through_Mithilakshara.pdf Learn International Phonetic Script through Mithilakshar Script अन्तर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला सीखू Learn_International_Phonetic_Alphabet_through_Mithilakshara.pdf सह-लेखन: गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा MAITHILI-ENGLISH DICTIONARIES Maithili_English_Dictionary_Vol.I.pdf MaithiliEnglishDictionary_Vol.II_GajendraThakur.pdf ENGLISH-MAITHILI DICTIONARIES VIDEHA ENGLISH MAITHILI DICTIONARY EnglishMaithiliDictionary_Vol.I_GajendraThakur.pdf जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध जीनोम मैपिंग (४५० ए.डी.सँ २००९ ए.डी.)--मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध (Click this link to download) http://www.box.net/shared/yx4b9r4kab (Click this link to download) OR right click the following link and save target as:- http://videha123.wordpress.com/files/2009/11/panji_crc1.pdf AND click this link to download some of the jpg images of palm-leaf manuscripts of Panji. http://www.esnips.com/web/videha AND CLICK EACH OF THE FOLLOWING 17 LINKS TO DOWNLOAD ALL THE 11000 JPG IMAGES IN 17 PDF FILES. पंजी (मूल मिथिलाक्षर ताड़पत्र) दूषण पंजी मोदानन्द झा शाखा पंजी मंडार- मरड़े कश्यप-प्राचीन प्राचीन पंजी (लेमीनेट कएल) उतेढ़ पंजी पनिचोभे बीरपुर दरभंगा राज आदेश उतेढ आदि छोटी झा पुस्तक निर्देशिका पत्र पंजी मूलग्राम पंजी मूलग्राम परगना हिसाबे पंजी मूल पंजी-२ मूल पंजी-३ मूल पंजी-४ मूल पंजी-५ मूल पंजी-६ मूल पंजी-७ गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-27 मु्न्ना जी प्रकाशित गजल संग्रह----माँझ आँगनमे कतिआएल छी। अन्य प्रकाशित पोथी----प्रतीक ( विहनि कथा ), हम पुछैत छी ( साक्षात्कार) शीघ्र प्रकाश्य पोथी---- भैया जी ( उपन्यास) आ एकटा हाइकू संग्रह हिनक अन्य विवरण एना अछि------मूलनाम- मनोज कुमार कर्ण, जन्म–27 जनवरी 1971 (हटाढ़ रूपौली, मधुबनी), शिक्षा–स्नातक प्रतिष्ठा, मैथिली साहित्य। वृत–अभिकर्त्ता, भारतीय जीवन बीमा निगम। पहिल विहनि कथा–‘काँट’ भारती मण्डनमे 1995 पकाशित। पहिल कथा–कुकुर आ हम, ‘भरि रात भोर’मे 1997मे प्रकाशित। एखन धरि दर्जनो विहनि कथा, लघु कथा, क्षणिका, गजल आ विहनि कथा सम्बन्धी आलेख प्रकाशित। मुख्यतः मैथिली विहनि कथाकेँ स्वतंत्र विधा रूपेँ स्थापित करबाक दिशामे संघर्षरत। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-28 शान्तिलक्ष्मी चौधरी ई श्रीमती शेफालिका वर्मा जीक बाद मैथिलीक दोसर महिला गजलकार छथि आ सभसँ पहिने अनचिन्हार आखर द्वारा हिनका गजल लिखबाक लेल प्रेरित कएल गेल। मने ई अनचिन्हार आखरक खोज थिकीह। श्रीमति शांतिलक्ष्मी चौधरी, ग्राम गोविन्दपुर, जिला सुपौल निवासी आ राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय, सहरसा मे कार्यरत पुस्तकालयाध्यक्ष श्री श्यामानन्द झाक जेष्ठ सुपुत्री, आओर ग्राम महिषी (पुनर्वास आरापट्टी), जिला सहरसा निवासी आ दिल्ली स्कूल ऑफ इकानोमिक्स सँ जुड़ल अन्वेषक आ समाजशास्त्री श्री अक्षय कुमार चौधरीक अर्धांगिनी छथि। प्राणीशास्त्र सँ स्नातकोत्तर रहितो शिक्षाशास्त्रक स्नातक शिक्षार्थी आ एकटा समाजशास्त्री सँ सानिध्यक चलिते आम जीवनक सामाजिक बिषय-बौस्तु आ खास कऽ महिलाजन्य सामाजिक समस्या आ प्रघटनामे हिनक विशेष अभिरूचि स्वभाविक। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-29 सदरे आलम "गौहर" विशेष---अनचिन्हार आखर द्वारा प्रयोजित मैथिली गजल लेल देल जाए बला " गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2011क विजेता छथि। धातव्य अछि जे ई ऐ सम्मानक पहिल विजेता छथि। गाम-पुरसौलिया, भाया- जयनगर, जिला मधुबनी। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-30 अनिल कुमार मल्लिक ( अनचिन्हार आखर पर " अनिल " नामसँ उपस्थित ) हिनक परिचय हिनक अपने शब्दमे------- हम अनिल कुमार मल्लिक पिता श्री सुरेन्द्र लाल मल्लिक माता श्रीमती सुशिला देबी मल्लिक l हमर जन्म २२ दिसम्बर १९६२ मे झापा जिला, मेची अंचल, नेपाल मे भेल l हमर पुर्खा ग्राम महिशारि, थाना सिंघबारा, जिला दरिभंगा सॉ छलाह, करिब ११० साल पहिने राणा शासन के समय हमर बाबा स्व. जिवनाथ मल्लिक नेपाल अयलाह, सरकारी नोकरी गोश्वारा मे भेटलन्हि आ बाद मे पटवरिका भेटलन्हि त नेपाल के भ' क' रहि गेलहूँ हम सभ l हमर १० कक्षा तक के शिक्षा झापा के इस्कुल मे भेल, स्नातक तक के शिक्षा हमरा बिरगंज आ काठमाण्डु मे भेटल, जन प्रशासन बिषय मे स्नातकोत्तर के अन्तिम बरख छल मुदा कारण बस पुरा नहि क' सकलहूँ l २ भाई छी, ४ बहिन… हम सभ सॉ जेठ छी भाई के बिबाह बिदेह ग्रुप मे सदस्य छथि श्री बृषेश चन्द्र लाल, हुनकर जेष्ठ कन्या सॉ भेल l हमर मातृक समैला, ग्राम पोष्ट पचाढी, जिला दरिभंगा भेल l हमरा मैथिली भाषा आ अपन संस्कृती प्रति के प्रेम हमरा अपन दादी स्व.जोगमाया देबी सॉ भेटल ओ हमर आदर्श छथि l हम कओलेज के समय मे नाटक सभ लिखैत छलहूँ, गीत इ सभ गबैत छलहूँ सांस्कृतीक कार्यक्रम सभ मे नेपाली, हिन्दी, बाङ्ला या त फेर राजबंशी भाषा मे l मैथिली मे लिखनाई बुझू विदेह सॉ जुडला'क बाद मात्र सुरु भेल l मास साइत अक्टूबर २०११ मे पहिल पोष्ट छल "आखर आखर शब्द लिखै छी" l २ पुत्र'क पिता छी, पत्नी संगीता कुमारी कर्ण छथि l आशिष जी'क बताओल बेसीक कॉन्सेप्ट पर सरल बर्ण पर गजल लिखैत छी, एकटा दबाई के कम्पनि मे ब्यवस्थापक छी आ अपनो नीजी ब्यवसाय अछि त समय के कने कमी रहैत अछि l अन्चिन्हार आखर त कय बेर इ सोचि भिजिट करैत रहलौं की संभवतः हमहूँ सिख जायब मुदा नै सिख सकलहूँ अखनि धरि l हमरा नेपाल मे लोक मैथिली मे लिखैथ, पढैथ, भाषा के सम्मान भेटै से नीक लगैत अछि त जे समय भेटैत अछि कोशिष करैत छी, एकर अलावा अपन जन्म स्थान के बच्चा सभ'क शिक्षा प्रति सचेत छी आ जे संभव होइत अछि करवा'क चेष्टा करैत छी गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-31 मिहिर झा ई अनचिन्हार आखरक खोज छथि। विशेष---- मिहिर जी " अनचिन्हार आखर " द्वारा आयोजित पहिल आन-लाइन मोशायराक विजेता छथि। हिनक परिचय हिनक अपने शब्दमे------- गाम - लखनौर (झंझारपुर) जन्म - २ जून १९६३ शिक्षा - स्नातक (विज्ञान) , स्नातकोत्तर (प्रबंधन) संप्रति - जे. आई. आई. टी विश्वविद्यालय. नोएडा मे डिप्टी रजिस्ट्रार परिवार - पत्नी - श्रीमती वंदना झा, पुत्री - श्रुति आ श्रिया , पुत्र - आशीष अभिरुचि - साहित्य ( पद्य ), "अनचिन्हार आखर" के प्रेरणा सों गजल विधा मे प्रारंभिक प्रयास आकांक्षा - विश्व स्तरीय साहित्य मे मैथिली साहित्य के शीर्षस्थ देखब गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-32 ओमप्रकाश हिनक परिचय हिनक अपने शब्दमे------- हमर नाम ओम प्रकाश झा अछि। हम ओम प्रकाश नाम सँ गजल लिखैत छी। हमर बाबूजीक नाम श्री पीताम्बर झा आ माताजीक नाम श्रीमती रामकुमारी झा अछि। हमर जन्म ०५ दिसम्बर १९६९ ईस्वी मे हमर नानीगाम चुन्नी, पत्रालय मधेपुर, जिला मधुबनी मे भेल अछि। हमर पैतृक गाम ड्योढ, पत्रालय घोगरडीहा, जिला मधुबनी अछि। हम छह भाई बहिन मे सब सँ जेठ छी। दसवींक इम्तहान १९८४ मे बीरपुर, जिला सुपौल सँ पास केने छी। अन्तरस्नातक १९८६ मे सी. एम. साइंस कओलेज, दरिभंगा सँ आ स्नातक १९९० मे लंगट सिंह कओलेज, मुजफ्फरपुर सँ पास केलहुँ। सरकारी सेवा मे १९९२ मे अयलहुँ। २००१ मे प्रोन्नति भेंटला पर आयकर अधिकारी भेलहुँ आ विभिन्न स्थान सँ होइत एखन भागलपुर मे पदस्थापित छी। साहित्यक प्रति प्रेम पिता सँ भेंटल अछि। ओहो साहित्य अध्ययन मे बहुत रूचि राखै छथि आ गोट आध रचना सेहो करैत रहै छथि। हमर पढाई केर विषय विज्ञान रहल मुदा साहित्यक प्रति प्रेम ओहो समय उत्कट छल आ अपन डायरी मे किछु किछु लिखैत रहै छलौं। मुदा नै ककरो ओ रचना देखेलियै आ नै सुनेलियै। हम २०१० सँ फेसबुक पर सक्रिय भेलौं आ २०११ मे विदेह ग्रुप मे शामिल कएल गेलौं। इ घटना हमरा लेल परिवर्तनक घटना छल। विदेह पर आदरणीय गजेन्द्र भाई आ अनुज आशीष भाई (हमरा सदिखन लागैए जे इ हमर हराएल अनुज छथि, जे एकाएक भेंटला) सँ सम्पर्क भेल। इ दुनू गोटे हमर भीतर मे नुकाएल गजलकार केँ बाहर आनि दुनियाक सामने ठाढ कऽ देलखिन्ह। ओहि समय आशीष भाई हमरा अनचिन्हार आखर मे योगदान लेल आमन्त्रित केलथि। अनचिन्हार आखर पर हमरा गजलशास्त्रक नियम सब पढबाक अवसर भेंटल, जे हमरा लेल बहुत उपयोगी सिद्ध भेल। आशीष भाईक प्रेरणा पर हम अरबी बहर मे गजल लिखनाई शुरू कएलौं। हमर लिखल गजल अनचिन्हार आखर ब्लाग पर पढल जा सकैए। हम गजलक अलावे कथा, पद्य आ समीक्षा सेहो लिखै छी, मुदा मुख्य रूप सँ हम गजलकार छी। गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-33 अमित मिश्र हिनक परिचय हिनकेँ शब्दमे---- बाबू जी-श्री नविन कुमार मिश्र माँ- श्रीमती विभा देवी हम सम्तीपुर जिलाक रोसड़ा थाना अंतर्गत करियन नाम क गाम के रहनिहार छी ।हमर जन्म 11 / 1/1993 मे भेल। बाबू जी एकटा किसान छथि तेँए हमर प्रारंभीक पढ़ाइ गामक इस्कूल मे भेल आ हाइ इस्कूल बैद्यनाथ पूर सँ 2008 मे मैट्रीक केलौँ । इंटर सी .एम .साइंस काँलेज दरभंगा सँ भेल आ एतै सँ गणीत सँ स्नातक क रहल छी । हमरा भाषा सँ कोनो विषेश प्रेम नै रहल । आ मैथिली आफसनल रहबाक कारण कहियो नै पढ़लौँ मुदा हमर बाबा स्बर्गीय भोला ईसर {हमर बाबा तक ईसर लिखाइ छल मुदा बाबू जी सँ मिश्र भ गेल जे की हमर फरीकक आनो चाचा सब लिखै छथि } शिक्षक छलथिन तेँए हम भाषा सँ बेसी दूरो नै छलौं । 2008 मे हम पहिल बेर लिखलौँ जे की एकटा मैथिली मे भगवती गीत छल आ तेकर बाद प्राय: मैथिली , हिन्दी , भोजपुरी मे गीत आ बाद मे मैथिली मे किछु कविता लिखलौं । हमर किछु मित्र किछु गीत सब सुनने छलथि आ किछु गामक किर्तन मे गेने छलौँ बाद बाँकी सब डायरीये मे समेटल छल मुदा 2012 के जनवरी मे विदेह सँ जुड़ला के बाद हमर रचना अपने सबहक संग भेटल । जनवरीक अन्त मे श्री आशीष अनचिन्हार जीक आशीर्वाद भेटल आ अनचिन्हार आखर सँ भेँट भेल । गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-34 चंदन कुमार झा ई अनचिन्हार आखरक खोज छथि। हिनक परिचय हिनकहि शब्दमे---- पिता-श्री अरूण झा माता-मीना देवी जन्म-०५-०२-१९८५ ग्राम-सड़रा,मदनेश्चर स्थान पोस्ट-मदना थाना-बाबूबरही जिला-मधुबनी जन्म-स्थान-सिसवार (मामा गाम मे) नाना-स्व० शुशील झा (राजाजी) आरंभिक शिक्षा-मामा गाम मे (१०वाँ धरि) आँगाक शिक्षा- अन्तर-स्नातक (वाणिज्य) एवं स्नातक (वाणिज्य) दरिभंगा सँ, चंद्रधारी महाविद्यालय.,वित्तीय-प्रबंधन मे डिप्लोमा (वेलिंगकर इन्सटीच्युट आफ मैनेजमेन्ट,मुम्बई) व्यवसायिक जीवन- एकटा बहुराष्ट्रीय कंपनी मे लेखा-विभाग मे कार्यरत परिवार-निम्न मध्यम वर्गीय कृषक परिवार रुचि-अध्ययन-अध्यापन,नाटक-संगीत,सामाजिक सरोकार सँ जुड़ब आ' साहित्यिक गतिविधि. साहित्य लेखन-२००० ईस्वी सँ.कएक गोट कविता,लेख ईत्यादि दरभंगा रेडियो स्टेशन एवं विभिन्न पत्र-पत्रिका सभ सँ प्रकाशित-प्रसारित. किछु व्यक्ति जिनकर अनुकंपा सँ कहियो उॠण नहि होयब- श्री विजयकांत मिश्र (अध्यापक)-कन्हई,श्री शंभूनाथ झा-सुसारी,श्री ताराकांत झा (संपादक,मिथिला समाद),डा० धिरेन्द्र नाथ मिश्र (मैथिली विभागाध्यक्ष,सी.एम.कालेज) (हम ई त' नहि कहि सकब जे मैथिली सँ हमरा कहियो भेँट नहि छल किएक त' हम मैट्रिक सँ स्नातक धरि सभ दिन एच्छिक विषय के रूप मे एकरा पढलहु.हाँ तखन मैथिली व्याकरण सँ कहियो भेँट नहि भेल अवश्य. हमरा कहियो मैथिली पढब आ'कि लिखबा मे बेशी दिक्कत नहि भेल किएक तए जहिना बजैत-सुनैत छी ओहिना लिखैत छी आ' सभ दिन मैथिली साहित्य रुचिकर लगैत रहल अछि...मुदा, मैथिली मे कविता ईत्यादि हम लिखनाय चालू कएलहुँ एकरा पाँछा हमर पारिवारिक आर्थिक विपन्नता छल..एकटा एहन समय आयल जखन लगैत रहय जे पढाइ बिचहि मे छोड़य पड़त किएक त' अभिभावक पढौनिक खर्चा देबय मे असमर्थ भऽ गेल रहथि ..खोलि कय कहियो नहि कहलथि..सभदिन उत्साहित करैत रहलथि..मुदा जहिया दरभंगा सँ गाम जाइत छलौ मासक खर्च अनबा लेल माँ-बाबूजीक चिन्ता स्पष्टतः दृष्टिगोचर होइत छल..लोकक धिया-पुता गाम अबैछ त' माय-बाप हर्षित होइत छैक...हमर माय कनैत छल...मुदा, खून बेचि पढेबाक जिद्द आ तइँ पढाइ नहि छोडल भेल...एहि समय मे परमादरणीय श्री ताराकांत झा जी (संपादक-मिथिला समाद) एकटा सुझाव देलनि जे दरभंगा रेडियो-स्टेशन मे हरेक-मास किछु कार्यक्रम कऽ किछु धनार्जन कयल जा सकैत अछि आ' मासक खर्छ निकालल जा सकैत अछि. हमरा ई सुझाव सूट कयलक आ' फेर सँ नव-उत्साहक संग अपने धनार्जन कय पढबाक विचार ठनलहु. तत्काल एकटा प्राइवेट स्कूल मे मास्टरी पकडि लेलहु...फेर डा. धीरेन्द्रनाथ मिश्र (तत्काळीन बिभागाध्यक्ष-मैथिली , सी.एम.कालेज) के मार्गदर्शन भेटल..केन्द्रिय पुस्तकालय, दरभंगा मे भरि दुपहरिया अगबे मैथिली के पोथी पढी ....जे मोन मे अबैत गेल लिखैत गेलहु आ' एक साल मे पचास टा सँ बेशी कविता लिखलहु....आब मोनो लागय लागल..नित नव उल्लास ......रेडियो स्टेशन सेहो ३-४ टा कार्यक्रम करबाक अवसर देलक...स्नातक खतम भेल..आगाँ पढबाक मोन छल दू टा छोट भाइक भविष्य सोचि अपन भविष्य दाँव पर लगा देलियैक...रोजी-रोजगारक अवसर मे मुम्बई चलि गेलहु..क्रमशः दिन घुरल ..फेर अपनो जहाँ धरि सकलहु आगाँ पढलहु..(फाइनान्स सँ डिप्लोमा कयलहु).....एखनहु पढतहि छी...मझिला स्नातक कयलक..छोटका भाइ एखन इंजिनीयरिंग कय रहल अछि...आब संतोष अछि....त्यागक फल भेटल...हाँ एहि झमेला मे पछिला छह बरख मे साहित्यिक रचनात्मका जेना हेराय गेल छल..मुदा संजोग जे कलकत्ता स्थान्तरित भेलहुँ..फेर ताराकांजी भेटलाह आ' नवउत्साह पाबि किछु लिखबाक प्रयास शुरू कयलहु..किछु सफलता सेहो भेटल..आ' फेर विदेह भेटल..एकर सुधि पाठक भेटल..गुरूरूप मित्र भेटल ......आ' सभटा हेरायल सपना जेना भेट गेल...अरे बाप रे ई कथा त' अनावश्यक नमहर भेल जा रल अछि..एकरा एतहि खतम करू...अहाँ सभक स्नेह बेर-बेर किछु नव लिखबाक...जिनगीक गुनबाक लेल प्रेरित करैत रहैत अछि ...एहने स्नेह सभ दिन बनल रहय एतबहि भगवती "वैदेही"सँ कामना.) गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-35 श्रीमती रूबी झा ई अनचिन्हार आखरक खोज थिकीह। पिता--स्व. ताराकान्त झा नैहर--- बेला सिमरी, जिला खगड़िया सासुर--ग्राम-पो. --- समसा मनसौरचक, जिला बेगूसराय पति---श्री कमला कान्त झा शिक्षा--- स्नातक ( संस्कृत ) गजलकार परिचय श्रृखंला भाग-36 प्रस्तुत अछि समवेत गजलकार परिचय। ऐमे कुल 27 गजलकार छथि। किछु गजलकारक विस्तृत परिचय देबाक इच्छा छल, मुदा बेर-बेर आग्रहक बबजूद ओ लोकनि नेट पर उपल्बध रहितो अपन परिचय नै पठा सकलाह तँए मात्र हुनक नामोल्लेखसँ काज चला रहल छी। ई सभ गजलकार अनचिन्हार आखरक खोज छथि। त्रिपुरारी कुमार शर्मा,सुनील कुमार झा, विकास झा रंजन,रोशन,दीप नारायण विद्यार्थी,प्रवीन नारायण चौधरी प्रतीक, विनीत उत्पल, भावना नवीन, भाष्कर झा, रवि मिश्रा भारद्वाज, जगदानंद झा मनु, अजय ठाकुर मोहन, प्रभात राय भट्ट, श्रीमती इरा मल्लिक, मनोहर कुमार झा, प्रवीन नारायण चौधरी, स्वाती लाल, नितेश झा रौशन ,कुमार पंकज झा, उमेश मंडल, मनीष झा बौआ भाइ, अभय दीपराज, नवल श्री पंकज, मनोज, कुंदन कुमार कर्ण, मुकुंद मयंक, अविनाश झा अंशु| ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। डा. अरुण कुमार सिंह, मैसूर,कर्णाटक उजड़ैत गाम : बसैत शहर? की कहू, बहुत दिन पर 1जून 2012केँ महावीर हास्पीटल गेल रही। हास्पीटल की गेलहूँ, मित्र मंडली संग कोशी कात जएबाक अवसर परि लागि गेल। अवसरो एहन जे नागो बाबू सेक्रेटरीक नातिक जन्म-दिन पटनासन शहरकेँ छोड़ि कोशीक कछेर पर बसल ‘बलुआहा’ आ पूर्वी तटबन्धक कात मे स्थापित महिषी प्रखंडक एकलौता कॉलेज, माने शिक्षकक, छात्रक, समाजक कॉलेज नहि अपितु सेक्रेटरीक वैयक्तिक सम्पत्ति, मे मनाओल जा रहल छल। एहि अवसर पर शिक्षित आज्ञाकारीक फौजमे हमहूँ समाहूत छलहुँ। जहिना ओहि ठाम पहुँचलहुँ कि सेक्रेटरीक नजरि हमरा पर पड़तहि कहि उठलाह, “ओ अरूण बाबू! कहिया अएलहुँ, खोजो- खबरि नहि रखैत छी। अपनेतँ मैसूर जाएकेँ हमरा सबकेँ बिसैरियै गेलहुँ। आब हम हिनका सभक लेल कतेक खटू। आब हमरो उमैरि भेल। अहाँ तँ जनितै छियैक, जे काज टाकासँ हैतेक ओ तँ टकै करतै ने। देखियौ ने टाकाक अभावमे कॉलेजक छतक ढलाई रूकल अछि आ, एकटा बात बुझलहुँ कि नहि, एहि बेरसँ फस्ट पार्ट मे एडमिशन सेहो होएत।” तखनहि हुनक नाति आबि कहैत छनि जे- “नानाजी हमरा पैसाब लागल अछि, हम कतए पैसाब करब, एहि ठाम कतहुँ बाथरूम कहाँ देखैत छियैक? ताहि पर ओहि ठाम जमकल बैसल एम.ए. पाससभमे सँ केओ बाजि उठलाह- ‘एतेकटा फील्ड अछि कतहु अहाँ पैसाब कए लिअ।’ ओ बच्चा कनेक काल चुप रहल आ सोचैत बाजि उठल- ‘एना कतहुँ खूजलमे बाथरूम कएल जाइत छैक, जँ इन्फेक्शन भए जाएत तँ?’ नामी-गिरामी विश्वविद्यालयसभसँ प्राप्त डिग्रीधारीक लेल एहि प्रश्नक कोनो उत्तर नहि छल। अच्छा छौड़ू, हमहूँ कोन फेरामे फँसि गेलहुँ, आधुनिकता - वैज्ञानिकता एवं प्रकृति - परंपरामे ओझराएल जा रहल छी। अखन जन्म-दिनक केक कटबामे एवं मासुक भोजमे बिलम्ब छल। भगवान जी, अरबिन्द जी, प्रांजलभाइजी एवं विजय जीक विचार भेल जे किऐक नहि एहि बीचक समयमे कोशी पर बनैत पूल देखल जाय। सभगोटे ए.सी.सँ सुसज्जित गाड़ीमे बैसि कोशी बान्ह दिस बिदा भेलहुँ जे कॉलेजसँ मात्र एक किलोमीटर पर छल। ‘बलुआहा’ बाजारमे ओ लोकनि अपन-अपन पसिन्नक हिसाबसँ खएबा-पिबाक लेल वस्तु-जात किनैत गेलाह। गाड़ीकेँ बान्ह पर लगा सबगोटे ओतुका दृश्य एवं बनैत पूलक कार्यकेर गतिशीलताक आनन्द खाइत-पीबैत लेब प्रारंभ कएल। एहि ठाम हम एकटा बात कहि दी जे विजय जी, जे अपन पंचायतक प्रधान (मुखिया) सेहो रहि चुकल छथि, सहरसा जिलाक महिषी प्रखण्डक सबसँ पैघ जमींदार स्व. गंगा बाबूक एकलौता पुत्र थिकाह। करीब सतरह वर्ष पहिने प्रो. (डॉ.) सुभाषचन्द्र सिंह (मैथिली प्राध्यापक, ए.एन.कॉलेज, पटना)जीक आवास बहादुरपुरमे हुनकासँ परिचय भेल छल एवं परिचय आत्मीयतामे परिवर्त्तित भेलोपरांत ओ कहने छलाह कहियो अहाँ हमर गाम चलू; हम अहाँकेँ कोशी नदीमे नाह पर बैसा झिलहरिक संग कोशीक ओहि पारक अपन कचहरी (कामत, बासा) देखाएब। समय सापेक्ष नहि भेलाक कारणेँ एहन संभव नहि भए सकल छल। मुदा आइ कोशी बान्ह पर गप्पक क्रममे ओतेक वर्ष पहिलुका बात चलि पड़ल। ओ बाजि उठलाह- ‘अरूण जी आब हमर कचहरी पर चारि चक्का चलि जाइत अछि।’ हम ई सुनि विस्मिततँ भेवे कएलहुँ, अविश्वसनीयता सेहो हुलकी मारि रहल छल। बान्हे पर सबगोटेक बिचार भेल जे तेसर दिन हम सब कोशीक ओहि पार कचहरी पर जाएब एवं ओहि ठाम दिन-रातिक भोजन कए रातिएमे आपस भए जाएब। विजय जी ओतहिसँ मोबाइलक माध्यमे अपन कचहरीक मैनेजरकेँ बीस-पच्चीस गोटेक दिनुका एवं रतुका भोजनक व्यवस्था करबाक लेल आवश्यक निर्देश दए देलन्हि। पछाति हम सब कॉलेज आबि भोजनोपरांत सहरसा घुरि गेलहुँ। पूर्वनिर्धारित कार्यक्रमक अनुसारेँ कोशीक पूबरिया एवं पछबरिया धारक बीच अवस्थित झारा पंचायतक शिशौना गाम जएबाक जे तिथि निश्चित छल ओकरा प्रति हम कनेक उदासीन छलहुँ, किएकतँ सूर्य भगवानक प्रकोपक कारणेँ प्रचण्ड गरमीमे घरसँ बहराएब लू केँ आमंत्रण देब सन छल। की कहू! निर्धारित तिथिकेँ फोनक घंटी बाजब प्रारंभ भए गेल एवं हमरो जाइऐ पड़ल। सहरसासँ जाइबलाक लेल दूटा ए.सी. युक्त स्कारपियो लागल एवं हम सब ओहिमे सबार भए बिदा भए गेलहूँ ‘उजड़ैत गाम आ बसैत शहर’क वास्तविकताक अवलोकनार्थ। ए.सी.युक्त गाड़ी एवं ढण्ढ़ा पेय पदार्थक कारणेँ यात्रामे कोनो बेसी तकलीफ नहि भए रहल छल। हम सब बलुआहामे कोशी पर बनै वला पूल टपि ओहि पार शिशौना गाम दिस बढ़लहुँ। ओहि पंचायतक प्रधान (मुखिया) श्री अरूण यादव जनिक पैतृक गाम शिशौने छनि, सेहो हमरा सभक स्वागतार्थ एवं रस्तामे कोनो तरहक तकलीफ नहि हो, ताहि लेल हमरासभक संग छलाह। कामत पर शीघ्रताशीघ्र पहुँचबाक लेल सड़क मार्गकेँ छोड़ि कोशी नदीक काते कात गाड़ी बढ़ए लागल। बाढ़ि अएबासँ बहुत पहिनहि कोशीक कटनियाँ एवं ओहिसँ उपटैत लोकक दृश्यसँ हृदयतँ द्रबित भेवे कएल, अपितु कोशी मैयाक एहन ताण्डवसँ डरो भेल जे कहीं हमरहुँ सभक गाड़ी कटनियाँक कारणेँ नदीमे नहि समा जाय। ओहि ठामक लोकक जीवनकेर मार्मिक चित्रण मैथिली साहित्यकेँ के कहय, भारतक आनेको साहित्य मध्य विद्वान लेखक लोकनि प्रस्तुत कए चुकल छथि, तेँ ओतुका दुरूहताक हम की बखान करू, एहन शब्द-सामर्थ्य हमरामे नहि अछि। ए.सी. युक्त गाड़ी रहलोपर हमसब सुरूज भगवानक प्रकोपक पूर्ण अनुभव कए रहल छलहुँ, परंच ओहि ठामक नेना-भुटका, वृद्ध-वणिता सभ केओ अपन-अपन काजमे मस्त छल। कोशीमैयाक धारमे छोट-छोट नेना-भुटकाकेँ उमकैत देखलहुँ तँ हमर देहक रोइयाँ डरसँ भुटकए लागल जे कही ई सब भासि ने जाए। ओ सबतँ जेना एहन स्थितिसँ अनभिज्ञ अपनामे मस्त भए कोशीमैयाक धारमे निश्चित भए उमकैत छल जेना मायक कोरामे नेना। खेत वा खेतक बीच टायर गाड़ी एवं ट्रैक्टरक लीख पर चलैत हमरहुँ सभक गाड़ी धूरा उड़बैत, खीरा, ककरी, परोड़, सजमनि, कदीमा, मुंग एवं मकईक भुट्टाक ठाम-ठाम लागल ढ़ेरीक अनुपम दृश्य देखि लागल जेना अनपूर्णा स्वतः एहि ठाम बास करैत होथि, गंगा बाबूक कचहरी एवं युवा प्रधान अरुण यादवक गाम पहुँचि गेल। शिशौना पहुँचतहि सम्पूर्ण गामक लोक स्वागतार्थ एवं जिज्ञासार्थ आबि गेलाह। महपुरा निवासी श्री रामनरेश सिंह उर्फ ‘मुखियाजी’ आकाशवाणी पटना, विजयजी, प्रांजल भाईजी एवं अरबिन्दजीकेँ ओतुक्का लोक पहिनहिसँ चिन्हैत छलतेँ हुनका सभकेँ ओ लोकनि नाम एवं सम्बन्धक आधार पर प्रणाम करैत गेलाह। हम, मदनेश्वर ठाकुर उर्फ ‘भगवान जी’ (महिषी), मिथिलेश, लक्ष्मण एवं सिकन्दरकेँ औपचारिकता एवं आतिथ्यवश प्रणाम करैत बैसाओल गेल। अरूण यादव जे ओहि गामक बेटाक अतिरिक्त विकासपुत्र प्रधान (मुखिया) एवं विजयजी, जे ओहि गामक जमीन्दार छथि, दुनूक लोकप्रियता ओहि ठाम एकत्रित ग्रामीणक आवभगतसँ बुझना गेल। किछु समयोपरांत विजयजीक इशारा पर खस्सीक मासु, भात, रोटी, सलाद एवं दहीक संग भोजन लगाओल गेल एवं हम सब भोजनोपरांत आरामक मुद्रामे आबि गेलहुँ। पाँच-छओ बजे साँझक लकधक हम सब कोशीक पछबरिया धार, जे बेलदाबर नदीक नामसँ जानल जाइछ एवं एहि नदीमे कोशीक कोनो धारसँ पैघ माछ पाओल जाइछ, क कात गेलहुँ, जतए हटिया लागल छल। हम सब ओहि बेलदाबर नदीक कछेर पर छोट-छीन हटियाक अवलोकन कएलहुँ एवं पान खाइत ओतुक्का स्थिति पर बात करैत रहलहुँ। हम एवं मुखिया जी (आकाशवाणी, पटना)केँ छोड़ि सभ गोटे बेलदावर नदीमे उतरि खूब उमकैत गेलाह एवं भगवान जी ओहि क्रममे अपन गरक सोनाक बनल मायतारा मैयाक चकती सेहो गमा देलनि। झलफल भेलोपरांत हम सब कचहरी पर आपस अबैत गेलहुँ। गरमीक अधिकताक कारणेँ ओहि गामक दुइ मंजिला स्कूलक छत पर ओछाओन लगाओल गेल एवं हमसब ओहि ठाम आराम करए लगलहुँ। शिशौनाक पूव भागमे एकटा पैघ भवनक निर्माणकार्य देखि हम पूछि बैसलहुँ जे एतेक पैघ पक्का के बनबा रहल अछि, ताहि पर ओतुक्का मुखियाजी अरुण यादव कहलनि जे ई बाढ़ि राहत सेन्टरक रूपमे सभ गाममे बनाओल जा रहल अछि। कोशीक ढ़ेबमे बसल गाममे दू महला स्कूल, बाढ़ि राहत भवन, कतहु सौलिंग युक्त सड़क तँ कतहुँ-कतहु कच्ची सड़क, जे एक गामसँ दोसर गामकेँ जोड़ैत, एतबे नहि गामक बीचो-बीच सिमेन्टसँ ढ़ालल सड़क देखि एवं ओतुक्का लोकक मुँहसँ नीतिश राज्यक सुशासनक बखान सुनि बिहारक कल्याणक संभावना जगैत देखलहुँ। रातिमे हमसब फेर भात-रोटी, माछ, सलाद एवं दहीक संग भोजन कएलहुँ एवं पान खाए सहरसा आपस जाए देबाक आग्रह कएल तँ ओहि ठामक लोक कहए लगलाह जे एना कतो भेले यै, जे एतेक रातिकेँ द्वारि परसँ अतिथि बिदा होएत। गौंआ सबकेँ मनबैत हम सभ बिदा भए सहरसा अपन-अपन आवास पर पहुँचि गेलहुँ । मुदा हमर मनमे बसल‘उजड़ैत गामःबसैत शहर’क संगक संग, जे ओही ठाम सभ तरहेँ खारिज होइत प्रतीत भेल, सद्यः देखल कोशीक बीच बसैत गाम शिशौना, ओहि ठाम निवास करैत निश्च्छल लोकक सम्पूर्ण विकास दिस उठाओल सरकारक डेग आओर तेज कोना हो ताही बीच ओझरा गेल। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। चंदन कुमार झा सररा, मदनेश्वर स्थान मधुबनी, बिहार मिथिला-मैथिली आंदोलन मिथिला मे मिथिला-मैथिली-मैथिल के लेल जे कोनो संघर्ष एखनधरि भेल अछि ओहि मे सभसे बेशी साहित्यकारेक भागीदारी देखल गेल अछि. लोकनेता आ'कि आम जनता कहियो मूल आंदोलन वा संघर्ष (किएक तऽ आंदोलन शाइद भेबे नहि केलैए एखनधरि कोनो) से नहि जोड़ल गेल जकर नतीजा छैक जे आइधरि अधिकतर मांग के सत्ता द्वारा ठोकराओल गेलै, संघर्ष अपन मूल उद्देश्य सँ भटकैत रहल आ' संस्था सभ पारिवारिक बनि के रहि गेल अछि. दुष्प्रभाव एहन पड़ल छैक समाज पर जे आमजन आंदोलनकारी सभकेँ चाटुकार सँ बेशी किछु नहि बुझैत छथि. जँ कियो कत्तौ मैथिल अस्मिताक रक्षार्थ कोनो तरहक नव कार्यक्रम ठनैत छथि तऽ ओहि मे लोक के व्यवसाय सँ बेशी किछु नहि देखाय छैक.एहि दुर्गति के लेल मूल रूप से दू टा बात जिम्मेदार छैक. पहिल जे जखन सत्ता समाजक उच्चवर्गक हाथ मे रहै तखन ओ कतिआएल आ' पछुआएल वर्गक लोक के उत्थानक लेल कोनो उल्लेखनीय काज नहि केलक.सभदिन ओहि उपेक्षित वर्ग के जोन-चाकर बना खटबैत रहल.ओकर शोषण करैत रहल.एहि समय मे मिथिला मे सामंतवादी सोचक प्रसार तेहन ने भेल जे एखनोधरि ई अधिकांश लोकक पछोड़ नहि छोड़लक अछि.स्पष्ट छैक जे एहि सँ मिथिलाक विकास अवरोधित भेलै.लोक मे वैमनस्यता बढ़लैक आ क्रमशः उपेक्षित वर्ग मे प्रतिशोधक बीजारोपण केलक. फेरो जखन ई उपेक्षित समाज एकत्रित भेलै आ' सत्ता हाथ लगलै तऽ एहू समयक राजनेता सभ लऽग प्रायः आमजनताक दुख-दर्द सँ कोनो सरोकारे नहि रहलै.कमोबेश ओहो सभ अपन पूर्ववर्तीक नकले केलक आ' समाज के विभिन्न वर्ग मे बाँटि सत्तासीन रहबाक जोगार करैत रहल अछि.ओम्हर सत्ताच्यूत भेल सामंतवादी लोकक जुन्ना तऽ जड़ि गेलै मुदा ऐँठन एखनो नहि गलैए.एहना मे फाँक-फाँक मे बँटल समाज ककरो आश्चर्यचकित नहि करैत अछि आब, हँ एहि बाँटल समाज के चुचकारि-पुचकारि सभ अपन-अपन स्वार्थ सिद्धि मे लागि गेल चाहे ओ अगरा वर्गक प्रतिनीधि हो किंवा पिछड़ा वर्गक. शासन-प्रशासनक सहयोग सँ निराश आमजन सेहो एहना मे उदासीन भऽ अपन-अपन रोजी-रोजगार के ईष्ट बुझि दहोदिश छिड़िआय लागल.फलस्वरूप,खण्ड-खण्ड भेल मैथिल समाज दिनानुदिन कमजोर होइत जा रहल अछि.एखनहुँ मैथिली आंदोलनक सरन अधिकांशतः साहित्यकारे वर्ग टेकने छथि वा कियो एनाहियो कहि सकैत अछि जे सरन टेकबाक भौन केने छथि.मैथिली साहित्यकारक विपन्नता आ गुटबाजी क्रमशः हुनकर सभक संघर्षक विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगबैत रहल अछि. आ' जखने अपने घर मे ककरो मोजन नहि रहतै तखन दुनियाक लोक कतऽ से ओकरा मोजर देतै. तइँ ई साहित्यकार आंदोलनकारी सभ सभदिन अपन प्रयास मे विफल होइत रहलाह अछि. आंदोलन सभक दुर्गतिक दोसर कारण अछि जे एखनधरि जे कोनो आंदोलन चलाओल गेल अछि ओकर मूल उद्देश्य, ओहि सँ समाज के होइ बला फायदा आ' नहि भेलापर होइबला नोकसान, आ आंदोलन विस्तृत रूपरेखा आइधरि कहियो आमजनताक सोँझा नहि राखल गेल वा बेशी काल एहि सभ पर समग्र रुपे आपस मे चर्चा-परिचर्चा नहि कराओल गेल आ' बेशीकाल हरबड़िए मे निर्णय लऽ किछु दसेक लोक आंदोलन ठानि दैत छथि.फेर यदि सामान्य नागरिक अपना के एकात बुझैत अछि तऽ ताहि मे ओकर कोन दोष छैक. जहिना कारणसभ स्पष्ट छैक तहिना एकर समाधानो एकदम स्पष्ट छैक.कोनो आंदोलन तखने सफल होयत जखन नेतृत्वकर्ता सभ अपन सामंती सोच, आपसी द्वेशक त्याग करताह, समाजक सभवर्गक लोक के ओहि आंदोलन सँ जोड़ताह आ' आंदोलन मूल उद्देश्यक प्राप्ति हेतु ठोस नीति बना ओकरा आमजनक सरोकार सँ जोड़ताह. ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदानन्द झा 'मनु' ग्राम पोस्ट- हरिपुर डीह्टोंल, मधुबनी दूटा विहनि कथा १.जबाड भोज एकादशाक भोज, गामक डीलर साब केँ बाबूक एकादशा | डील-डोल सँ सम्पूर्ण जेबाड केँ नोतल गेल | दसो गामक लोक सभ कियो बैल गाड़ी सँ कियो साईकिल सँ कियो पएरे, साँझक छ ए ' बजे सँ लोकक करमान एनाइ शुरू | नोथारी सब आबि-आबि कँ बैसति | बैसअ केँ पूर्ण व्यबस्था | करीब पेंतीस हाथक तँ डीलर साब केँ दलाने छनि आ आबैबला आगुन्तक केँ धियान राखि दलानक आगाँक बारी-झारी केँ साफ सुथरा कए कँ एहेन सामियाना लागल जे ओहि में पाँच सए लोग एक संगे बैस सकैत अछि | व्यबस्थाक कोनो कमी नहि | भोजन सँ पूर्ब सब व्यबस्था देखि रमणजी स्वं केँ रोकि नहि सकला आ अपन लग में बैसल सुबोधजी सँ बजला - "कीयौ दोस्त डीलर तँ कोनो तरहक कमी नहि छोरलनि, एतेकटा सामियाना, एतेक लोक केँ नोतनाइ........." सुबोध - "हाँ" रमण - "जबाड नोतनाइ कोनो मामूली गप्प छैक ओहू में एतेक डील-डोल सँ, खाजा, मूँगबा, पेन्तोआ, रसगुल्ला आ सभ नोथारी केँ एक-एकटा लोटा सेहो |" सुबोध - "सुनलहुँ तँ हमहुँ इहे सभ | " रमण - " कि अपने की कहै छीयैक, सभटा कतेक खर्चा डीलर केँ लागि जेतैन |" सुबोध - "हम कोना कहु, हम तँ नहि कहियो जबाड खुवेलहुँ |" रमण - "छोरु अहाँ केँ तँ सदिखन मुह फुलले रहैए, ओना हमारा हिसाबे आठ-दस लाख रुपैया तँ लगबे करतैन |" सुबोध - "आठ-दस लाख रुपैया डीलर केँ लेल कोन भारी ओनाहितो हुनकर बरखो केँ लौलसा छ्लैंह जे कहिया बाबू मरथि आ ओ दिन आबि गेलहि तँ खुश तँ हेबे करता, ख़ुशी में आठ लाख की आ दस लाख की..... |" २. अनाथ अस्सी बरखक सोमनाथजी भरल-पुरल संसार छोरि अपन प्राण विशर्जन कए लेला | सभ मनोकामना पूर्ण तैयो सांसारिक मोह माया सँ बान्हल, सभ कियो हुनक मृत देह केँ चारू कात सँ घेरने, दुखी, व्याकुल, कनैत | दुटा बेटा, दुनूक पुतौह, पोता-पोती सब संगे, खाली बड़का बेटा मुंबई में नोकरी करैत | हुनको तिन चारि दिन पहिले सोमनाथजीक बिगरल स्वास्थ केँ बाबत फोन भए गेल रहनि आ ओ गाम हेतु बिदा सेहो भए गेल रहथि | आब कोनो घड़ी आबि सकैत छलथि | सोमनाथजी बड़का बेटाक आगमन | हुनका आबैत देरी सभ समांगक कननारोहट में बिरधि भए गेलनि | हुनकर छोट भाई हुनका देखते देरी भरि पाँज कँ पकरि कनैत - "भईया --- बाबू छोरि चलि गेला हुं-हुं ..... आब केँ देखत ... " बड़का छोटका केँ करेज सँ लगेने हुनक पीठ केँ सहलाबैत स्नेह सँ -"नै रे तूँ किएक कनै छें, तोरा लेल तँ एखन हम जीबैत छीयौक तोहर सब कीछ | अनाथ तँ आई हम भए गेलहुँ, मए चारि बर्ख पहिले चलि गेली आ आई बाबूओ...." ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.किशन कारीगर ३.२.डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” ३.३.जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल ३.४.अमित मिश्र ३.५.चंदन कुमार झा ३.६.जगदानन्द झा 'मनु' किशन कारीगर मुखिया जी देथहिन (हास्य कविता)
बेमतलब के कोनो काज राज करैत छि हम त कहब एक्को टा खरहो ने खोंटू अहाँ हुनका वोट द दिऔन सब किछु त मुखिया जी देथहिन.
जबनका के बिरधा पिलसिन बुढ़बा सब के जबनका पिलसिन व्यर्थ समय गमाऊ त बेकारी पिलसिन सभटा पिलसिन त मुखिया जी देथहिन.
डिग्री डिप्लोमा नहि अछि तै सँ की ? आब पढाई लिखाई एकदम नहि करू हरदम हुनके संपर्क में रहू शिक्षामित्र के नोकरी त मुखिया जी देथहिन.
सरकारी खरांत हाई रे पंचायती राज आब रही नहि गेल कोनो काज राज बिरधा पेसन पास कराऊ कामिसन खाऊ रुप्पैयाक बंदरबांट त मुखिया जी करथिन.
ईंटाघर वाला के इंदिरा आवास टूटलाहा घर वाला के लागल तरास भुखले मरी जायब त बी. प. एल. अन्तोदय योजना में फेल भेलौहं की पास ?
अप्पन काज राज छोडि के ब्लोकक चक्कर लगाऊ मुखिया जी त भेंट भए जेताह चाहो पान के खर्च त उहे देथहिन.
कमाए खटाए के अहाँ करब की ? फुसियाँहिक हर कियक जोतब बँटा रहल अछि सरकारी खरांत अहाँ दौगल जाउ बाद में हमरा नहि टोकब.
मंगनी के चाउर दाइल सँ पेट भरी जायत कहियो भुखले नहि अहाँ मरब कोई ने अहाँ के टोके मुखिया जी ओ.के. मुखीये जी के कहल टा अहाँ करब.
राहत पैकेज के हेरा फेरी केलन्हि आब आंखि हुनकर चोन्हरेलैंह सरकारी लिस्ट में अहींक नाम टा अछि ओई पर साइन त मुखिया जी करथिहीन. ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह” एम॰डी॰(आयु॰) – कायचिकित्सा कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एण्ड रिसर्च सेण्टर, निगडी – प्राधिकरण, पूणा (महाराष्ट्र) – ४११०४४ सुन्नरि प्रिया सुन्नरि प्रिया तेँ सुप्रिया, मम् उर बसल तेँ उर्वशी । कहबे करत सभ शशिप्रिया, हम शशि हमर अहँ प्रेयषी ।। चलैत मरु जिनगीक निर्मम्, कत’ मरीचि छकबैत छल । निरस एकसरि बाट जिनगीक, मोन केँ थकबैत छल । थाकल - प्यासल ई बटोही, घाम सञो अपस्याँत छल । पानि मिसियो, छाँह कनिञो, कतऽ भेटत अज्ञात छल । एक दिन एहिना तँ किछु सनि, लिखि देलक भाग्यक मसी । जाऽ पढ़ल, देखल – लिखल छल, संग आगाँ एक सखी ।। नीक कि अधलाह ? पहिने, पढ़ि कऽ से नञि बुझि पड़ल । मन सशंकित छल अनेरो, जानि ने विधि की लिखल । की हमर मनोभाव केँ ओ, अपरिचित सखि बुझि सकत ? वा अपन छवि – दर्प – उबडुब, अपन बाटेँ ओ चलत । छलहुँ गुनधुन मे देखल ता, संग बैसलि रूपसी । एकटक देखैत हमरा, ठोर पर मुस्की – हँसी ।। की दिवस – सपना देखल हम, पर बूझल, नञि साँच छी । नञि जरए, शीतल लगए जे, ई तँ तेहने आँच छी । प्यासल पथिक केँ पानि भेटल, छाँह घनगर प्रेम केर । लऽग हीरक स्वच्छ आभा, के ताकए, मृग हेम केर । कविक मन भावक पियासल, अहीं छी मोर उर्वशी । अहीं उर - अन्तर समाहित, काव्य – पटलक शोड़षी ।। साओन मे विरह रिमझिम - रिमझिम साओन बरिसय, हहराबय अछि हिया सखि मोर । कारी – कारी बादर गरजय, सिहराबय अछि पोरे – पोर ।। दिन दुपहरिया, राति निवीड़तम, झंकृत मन – मृदंग बड़ जोड़ । पी संग ओहिना हमहूँ नचितहुँ, नाचय जहिना हर्षित मोर ।। पिक – रव, पी – पी मदन जगाबय, गति मोर जहिना चन्द्र चकोर । सखि हे ! भाग्य हमर बड़ निष्ठुर, निर्दयि केहेन अछि चितचोर ।। सुरभित धरणि – रमणि – रुचि सुन्नर, दादुर टर्र – टर्र करइछ जोर । सिहकय पुरिबा, रहि – रहि पछबा, तरसैत राति होइछ सखि भोर ।। अहीं सञो कहै छी अहीं सञो कहै छी । अहाँ नञि सुनै छी । पता नञि किए, आइ निष्ठुर बनल छी ।। अहँ इजोरिये रही । हम अन्हरिये सही । हे अए (ऐ) चन्ना, कहाँ हऽम चानी मँगै छी ।। प्रीति नहिञे सही । अनाशक्ते रही । मुदा घृणित मनेँ, किए नैना फेरै छी ?? छी हमहूँ मनुक्खे । मुदा दोष एतबे । हृदय मे अहँक, प्रेम प्रतिमा पूजै छी ।। डऽर चोरिक किए ? बरजोरीक किए ? एहेन छी ने पतित, अहाँ व्यर्थेँ डरै छी ।। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल की भेटल आ की हेरा गेल ( आत्म गीत ) जीवनकेर आंगनमे वसंत आयल कहियो हंसिते-हंसिते किछु कोंढी छल से फूल बनल झड़ि गेल मुदा छुबिते-छुबिते से टीस हृदयमे अछि एखनहुं किछु तप्पत-सन किछु सेरा गेल हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । ऽ बाबा छलाह खिस्सा कहइत सुनि-सुनि कऽ छल अजगुत लगइत ई झूठ छलै कि सत्ये छल रहि गेल मोन गुन-धुन करइत ओइ कृष्ण-कन्हैया केर हाथे छल नाग कोनाकऽ नथा गेल हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । ऽ मोने अछि एखनहुँ ओ बिहाड़ि मोने अछि ओ फूही-पाथर मोने अछि ओ रौदी-दाही मोने अछि एखनहुँ भनसा-घर चुल्हा लग मायक चुप्पी पर कए बेर आँखि छल नोरा गेल हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । ऽ अंगनामे पमरिया नचइत छल सभ कबुला-पाती करइत छल ओ भोज-भात आ भार-दौर पाहुन वरियाती चलइत छल मूड़न- उपनयन- बियाहेमे छल सभक चेतना खिया गेल हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । मोटका-मोटका पोथी पढलौं पोथी केर सभ पन्ना रटलौं छल प्रश्न कतेको सोझाँमे नहि तकर निदान कतहु देखलौं हम पौलहुँ एकदिन अपनाकेँ सय-सय बिर्रोमे घेरा गेल हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । ऽ हमरा सोझाँमे छल पर्वत हमरा सोझाँमे छल इनार हम कतऽ जाउ हम कोम्हर जाउ चहुँदिस पसरल टा छल अन्हार छल अनचिन्हार रस्ता सभटा छल पयर आगि पर धरा गेल हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । ऽ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अमित मिश्र गीत
नैना कने मिला ले दिल मे अपन बसा ले /2/ हमरा भ' गेलौ तोरे सँ प्यार सजनी . . . नैना कने मिला ले . . . . . . . . .
दिन रहै छी सोचैत .राति रहै छी जागल हेतै मधुर मिलन इ आश रहै यै लागल /2/ नैना के बाट ध' क' दिल मे उतरि जो प्रेम नगर मे बसि जो जिनगी गुजरि जो तोरे नैन मे हमर संसार सजनी नैना कने मिला . . . . . . . . .
दुनियाँ के रीत केहन .भेल बिपरीत छै जानि नै तैयो किए लागल प्रीत छै /2/ साथ जे तोहर रहत दुनियाँ सँ लड़ि लेब एक दू बेर नै सए बेर मरि लेब नैन मिला क' प्रेम कर स्वीकार सजनी नैना कने मिला . . . . . . . ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। चंदन कुमार झा सररा, मदनेश्वर स्थान मधुबनी, बिहार गजल-1 आखर आखर सजा लिखै छी गीत अहाँ ले सजनी चाँचर पाँतर हम तकै छी प्रीत अहाँ ले सजनी अपन करेजा कोड़ि माटि, सौरभ पुनि मिझरेलौ नेहक रस मे भीजा गढ़ै छी भीत अहाँ ले सजनी अहाँक रूप के आगाँ हम हारि गेलहु अपना के अप्पन हारि बिसारि लिखै छी जीत अहाँ ले सजनी मधुर मिलन के बेला कहियो तऽ मधुघट पीबै सोचि-सोचि घट-घट पिबै छी तीत अहाँ ले सजनी अँगना, घर, दलान, सजा, बाट तकैत छी बैसल "चंदन"नेहक बुन्न तकै छी शीत अहाँ ले सजनी -----------वर्ण-१९---------- गजल-2 रोटी महग, महगे नून भेल छै बोटी सुलभ सस्ता खून भेल छै सौँसे शहर सहसह लोक गज्जले गामक दलानो-घर सून भेल छै प्रगतिक पथ भ्रष्टाचार अड़ल छै नेता समाजक जनु घून भेल छै खेती करय जे से दीन भेल छै बइमान बेपारी दून भेल छै करनी अपन नहि देखैत लोक छै "चंदन"फुसिक खातिर खून भेल छै २२१२ २२२१ २१२ बाल-गजल-1 भैया के नबका बुशर्ट आ हमरा दीदी के फेरन ओ'तऽ सौंसे गाम घूमै छौ हमरा अंगनो मे बेढ़न चूल्हा-चेकी,बर्तन-बासन, आगाँ से नै करबौ हम हमरो चाही कापी-पिल्सिन, बेटा के देलही जेहन बौआ छुच्छे छाल्हि खेतौ हमरा नै दूधो परपइठ जौँ नै करबौ टहल तखन लगतौ मोन केहन बहुत सहलियौ आब नै चलतौ तोहर दूनेती हमरो चाही बखरा आब नै चलतौ कलछप्पन गै माय युग बदलि गेलैए बेटी नै बेटा से कम "चंदन" गमकैत भविष्य रचबै हमहूँ अपन ---------------वर्ण-१९--------------- रुबाइ-1 देखलौँ माँझ अँगना ओगरैत सपना देखलौँ चौबटिया पर लोढैत सपना देखलौँ हाट ककरो मोलबैत सपना ककरो झूठक दोबर तौलबैत सपना । रुबाइ-2 नील नैन बिच साजल काजर करिया रूप लगैए अनमन धवल इजोरिया निश्चय अहाँ जनैत छी टोना-टापर भेल बताह छै तैँ गामक नवतुरिया.| रुबाइ-3 कखनो बनि विपक्षी चित्कार करै छै सत्ता हाथ लगितहि फुफकार भरै छै नेता वोटक लेल कतबा रूप धरै छै कत्तहु अनशन कत्तहु इफ्तार करै छै । 1.) अकान चुप्पहि रहैत छी हरदम बस सुनैत छी- लोकक बाजब, किदन-कहाँदन, अंटशंट, बिनु पेनीक बात, उतरा-चौड़ी, थुक्कम-फज्जति, फुसिक पंचैती, क्षणिक कुटमैती............ । बस देखैत रहैत छी टुकुर-टुकुर- मारा-पिट्टी, कुकुरक कटौझी, देयादि भतबारि, सासु-पुतोहुक अड़ारि, खेतक दड़ारि, बेबस्थाक तियारि, कनैत पुतोहु आ' पुजति कुमारि, धधकैत लहास,हास-परिहास, भोजक उल्लास, महाजन के त्रास............। चौक परहुक चाहक चुस्की, घूर लगहक कनफुसकी, चौबनिया मुस्की, बपौती वैभव केर दंभ, पुरखाक कीर्ति-स्तंभ, नेहक सीमान..........., बस हरदम रहैत छी अकानति, बनले बकान, किछु नहि बजैत छी, चुप्पहि रहैत छी, बनिकऽ अकान । 2.) झमझम बरसै छै बून्नी झमझम बरसै छै बून्नी छै नाचि रहल गरचून्नी सुनि के बेंगक टिटकारी फँसलीह कबई कुमारी ।। बगुला टकध्यान लगौने बैसल छल आस लगौने बुझू भेलै जबारी ओकरा भरि पोख पेलकै टेंगरा ।। कौआ केर भेटलैक चाली बुझू जेना नूडल्स पाताली घसि-घसि लोल पिजबैछै खने खत्ता पानि उपछै छै ।। जखने चमकल बिजलौका साकांक्ष भेल घोंघही डोका केयो जोड़ऽ लागल कुटमैती केयो करय गेल पंचैती ।। काँकोड़ बिल सँ बहरायल ओ लगैछ कने अगुतायल चाँगुर सँ महल बनेलक रचि-रचि केहन सजेलक ।। छै झूर-झमाने मूसरी सोचै जे कोना के ससरी घर-दुआरि ओकर दहेलै बुझू अपटी खेत मे फँसलै ।। केयो गाबि रहल चौमासा ककरो लेल खेल तमाशा हरखित छै खेत-पथार जंगल,पहाड़ सभ धार ।। 3.)निर्लज्जा के आब भगाबू ।। कविगोष्ठी मे हमहीं जेबइ कथो रातिभरि हमहीं बचबै पागो माथ पर हमरीं सजबै सभठाँ आगाँ हमहीं बजबै ।। मंचक मध्य मे हमही बैसबै सभठाँ भाषण हमहीं करबै बाबू छलखिन्ह हमहूँ रहबै बेटो संगहि कुथबै-पदबै ।। तगमा सभटा हमरे चाही हमरे कलम बस रहै स्याही सभ करियौ हमरे वाह-वाही नहि करबै तऽ लेब हम ढाही ।। मिथिला-मैथिल हमर बपौती ऐपार-ओहिपार हमरे कुटमैती तइँ हमही करबै पंचैती हमरे टा चलतै जेठरैती ।। पछुआ सभ ने आगू आबय देखू, केयो ने गाल बजाबय केयो ने कतौ कल्ला अलगाबय बस हमरे सभ जय-जय गाबय ।। जागू मैथिल आबहु जागू हे पछिला सभ आबू आगू मिथिला-मैथिल मान बचाबू निर्लज्जा के आब भगाबू ।। 4.)हे, बुझलियै की ? हे, बुझलियै की ? युग युग बदलि गेलैए । आब लिखनिहार-पढ़निहार, नीक-बेजायके गुननिहार, मोटगर पोथी छपेनिहार, कोनो नवका बात बतौनिहार, आलोचक किंवा चुप्पहि रहनिहार, सभक कोनो मोजर नहि छै । आब मोजर छैक ओकरे जे- बजार मे घुमथि, मंच पर सुतथि, माइक धऽ कुथथि, चंदा उघथि, अनका लुझथि, गामे-गाम बुलथि, नोत-हकार पुरथि, झट अकास छूलथि, पट पएर चुमथि, चौक पर बैसथि, अपना के सैंतथि, फुसि सगरो परसथि, आ'खा-पी के ससरथि ।। हाइकु 1.) लालहि लाल अरुणोदय काल नील अकास । 2.) मसुरी दालि सूर्यास्त-काल मेघ एक्कहि रंग । 3.) सुखले आर्द्रा पुखो राखल रुखे बरिसत के ? 4.) बितलै राति उगलै भोरुकबा जगलै आस । 5.) अगबे कौआ निपत्ता छै कोइली पराती-भास । 6.) अरिया नाञ्घ जलोदीप सगरो दाहीक छाह । शेर्न्यु 1.) ठाँहि-पठाँहि जँ कहबै ककरो जड़तै देह ! 2.) भऽ गेल छैक मरखाह मनुख मालहि सन । 3.) एक भेल छै मुद्दई-मुदालह पंच एकात । 4.) पिया विदेशी अनमन उर्मिला मिथिला-नारी । 5.) बेटीक बाप बन्हलकै रुपैया किनतै वर !! 6.) दिन देखार केहन अतत्तह खून-खुनामे । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदानन्द झा 'मनु' ग्राम पोस्ट- हरिपुर डीह्टोंल, मधुबनी गजल-१ देख मुह मूंगबा बहुतो बटाई छै नाम ककरो गरीबक नहि सुहाई छै चाहि निर्धन कए नहि योगरा बाबा पेट भरि जाइ सब दीनक दबाई छै मीठ भाषण बरख पाँचे कते दै छै जीत केँ बाद नेतो सब नुकाई छै घूस खा 'खा ' कँ बनलै भोकना पारा आन दमड़ी सँ चमड़ी बड चबाई छै भ्रष्ट नेता घुमे बीएमडब्लू में एखनो हक गरीबक 'मनु' बटाई छै ( बहरे-मुशाकिल, २१२२ १२२२ १२२२) ------------------------------- गजल-२ कान नै अपन देखब कौआ खिहारब कहु-कहु कोना आहाँ मिथिला सुधारब घोघ तर कनियाँ कोठी तरहक माछ मोन होइतो कहु कियो कोना निघारब लागल आगि जीवनक मिझाएब कोना की जीवन भरि खड़ेल खड़े पजारब कहियो तँ बसब आ ककरो बसाएब भटकैत सीथ कतेक आरो उजारब पानि केखनो 'मनु' पियासलो केँ पियेब की बनि नादान परती पर टघारब (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१५) -------------------------------------------------------------------- गजल-३ सभकेँ हम करि सम्मान सभ बुझैत अछि गदहा सभकेँ गप्प हम सुनै छी सभ कहैत अछि गदहा सभतरि मचल हाहाकार मनुख खाय गेल चाडा भ्रष्टाचार में डूबि आई देश चलबैत अछि गदहा नवयुवक फँसल भमर में साधू करए कबड्डी देखू गाँधी टोपी पहिर किछ कहबैत अछि गदहा भगवा चोला पहिर-पहिर आँखि में झोँकै मिरचाई धर्माचार बनल बैसल धर्म बेचैत अछि गदहा जंगल बनल समाज में, सोनित सँ भिजल धरती शेर सगरो पडा गेलै चैन सँ सूतैत अछि गदहा (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२०) ---------------------------------------------------------------------- गजल-४ हमर अहाँकेँ प्रीतक खिस्सा आब दुनियाँ बिसरत नहि युग-युग तक लोकक मोन सँ अपन नाम घटत नहि सूर्य चान केँ प्रेमालाप सँ ई दुनियाँ प्रकाशित अछि भेल हुनकर संग बिनु कखनहुँ ई दुनियाँ चमकत नहि भोला शंकर डमरू बजाबथि पारवती नाचैत अँगना हुनकर दुनू केँ इक्षा बिनु कएखनो श्रृष्टि चलत नहि कृष्ण नचाबथि सगरो गोकुल गोबरधन पर्वत उठा बिनु राधिका संग कएखनो हुनक मुरली बजत नहि फूल भोंडा केँ प्रीतक खिस्सा सभतरि बहुत पुरान भेलै 'मनु' 'सुगँधाक' नाम बिनु प्रेम कथा आब गमकत नहि (सरल वार्णिक बहर, वर्ण-२२) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत १.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) २. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी) राजनाथ मिश्र चित्रमय मिथिला स्लाइड शो चित्रमय मिथिला (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) २. उमेश मण्डल मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव जन्तु/ मिथिलाक जिनगी (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण बालानां कृते अमित मिश्र बाल गजल
भनसा धर दिश दौड़लनि बौआ अपन जलखइ माँगलनि बौआ
बीच आँगन मे ऊँच पिढ़ी लगेला छरपला , डोलल खसलनि बौआ
देखलनि माँ के ठाढ़ हाथ फैलेने चोट बिसरि कोरा बैसलनि बौआ
दादी एलखिन लेने बाटी बौआ के दूध देख क' बाटी फेकलनि बौआ
बाबू खेलखिन मिरचाइ सोहारी हुँनको चाही से जीद धेलनि बौआ
गेँद गुड्डा हाथी , देब मोटर कार बहुते मनेलौँ नै मानलनि बौआ
संग मे जाएब घुमै लए सर्कस "अमित" सँ चारि लड्डू लेलनि बौआ
बर्ण-13
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सखी सब गेल लागल छैक रेला चल चलेँ गै माइ घूमै लेल मेला चल
कहै छल सरबतीया सजल छै सर्कस कुकुर बानरक देखै लेल खेला चल
कते छै भीड़ छोड़े नै पकड़ आँङुर उठा ले अपन गोदी तखन मेला चल
स सीँ पू पीँ करत बड पीपही फूक्का गुड़ीया कीन दे सब भरल ठेला चल
कने छै भूख झिल्ली देख लागल गै गरम कचरी कने मुरही ल' केला चल
मफाईलुन[1222 तीन बेर सब पाँतिमे] बहरे_हजज
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कुकुर उनटल पड़ल लार पर बंदरो बैसलै चार पर
मूस दौगै गहुँम भरल घर कोइली तन दै तार पर
नादि पर गाय दै दूध छै नजर देने श्रवन ढार पर
स्वागत लेल बौआ कए फूल मुस्कै गुथल हार पर
भोर भेलै उठल राजा यौ "अमित " बौआ चढ़ल कार पर
*दीर्घ _हर्स्व _दीर्घ ३ बेर* बहरे -मुतदारिक
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आइ तारा केर नगरीसँ एथिन माँ अपन कोरा झट द' हमरा उठेथिन माँ
खेलबै माँ संग आ रूसबै हँसबै पकड़ि आँङुर गाम-घर मे बुलेथिन माँ
थाकि जेबै जखन भोजन करा हमरा गाबि लोड़ी आँचरक त'र सुतेथिन माँ
राम कक्का के परू छैक मरखहिया सुरज के बकरी सँ हमरा बचेथिन माँ
हमर संगी संग माँ के घुमै सर्कस आबि घर हमरो सिनेमा ल' जेथिन माँ
कत' सँ एलै मेघ कारी इ अंबर मे "अमित" मन डेराइ यै कखन एथिन माँ
फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन 2122-2122-1222 बहरे-कलीब
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सूगा कहलकै जुनि बाज तोड़िये देबौ लोल रोड़ासँ
गाछी-बिरछी तूँ घुमै छहीँ कारी रूप देख ले ऐनासँ
कोइली तुनकि क' बाजल मीठ बाजै छी हम तोरासँ
हम घुमै छी अप्पन मोनेँ बान्हल रहेँ तूँ पिँजरासँ
उठम-बजड़ा , धक्का -मुक्की खूने-खूनाम भेल पैनासँ
मोर जी तखन कहलनि नै ल'ड़ तूँ अपने भैयासँ
सूगा "अमित" राम गाबै छेँ सीख ले कोइली गबैयासँ वर्ण- 10
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माँटिक चाउर पानिक दूध पातक थारी बनेबै माँटिक चुल्हि पर खीर राइन्ह तरकारी बनेबै
बालुक चिन्नी कादो के दही गेना फूलक चूरा हेते घैलक चकुला सनठी के बेलना सँ पूरी बनेबै
मैया के फोटो आनि झूठ-मूठ के पूजा-पाठ करब बाबी सँ एकरंगा माँगि कुमारि लेल साड़ी बनेबै
फेर करब गुड्डा के वियाह गुड़िया खूब सजेबै साजि एतै बरियाती बाबा के लाठी के गाड़ी बनेबै
नै डर मास्टर के आइ छुट्टी छै चल मीता खेलब आइ ''अमित'' नाचबै-गेबै बड़का खेलाड़ी बनेबै
वर्ण -१९
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संग चल ने मिल क' सब खेल खेलेबै एक दोसर के पकड़ि रेल देड़ेबै
कोइली के गीत बंदर नचेबै हम चान तारा धरि पहुँचि आइ देखेबै
कागजक नैया बना फूल कमलक चल चल बड़ी पोखरि भसा नाव नेहेबै
दीप माटिक गढ़ि क' सब देबता पूजब रोपि अरहुल खेत मे चल पटा एबै
माँटि लोटाएब आ साँझ धरि खेलब "अमित" पढ़बै मन सँ बड़का त' बनि जेबै
फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन बहरे-कलीब
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बौआ एहिठाम कानै छै माँ जलखइ बनबै छै
बाबा आनलनि टिकुला बाबी चटनी बनबै छै
कक्का लगाबै छथि सानी काकीयो अंगना नीपै छै
बलहा बाली पानि भरै जुगेसरो चेरा फारै छै
पापा छथि परदेश मे ट्रिन-ट्रिन फोन बाजै छै
दीदी पढ़' गेल इस्कुल सोनू भैया खेत जोतै छै
सब लागल छै काज मे तेँ "अमित" बौआ कानै छै
वर्ण-9 ********************** *****************
भोरे-भोरे मुर्गा बाजै छै सोना बौआ के उठाबै छै
नबकी बाछी दूध देतै तीरो कक्का दूध दूहै छै
माँ देलनि चुसनि भरि गुटुर-गुटुर पिबै छै
दूये दाँत के हँसै बौआ आ हपकुनियाँ काटै छै
भरल कठौत पानि मे बौआ नहाइ छै कूदै छै
पाउडर काजर ठोप्पा नव कपड़ा चमकै छै
हाथी घोड़ा आ झुनझुना "अमित" बौआ बजबै छै
वर्ण-9
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डरकडोरि मे झुनझुना बड मीठ बाजै छै जुता मे लागल पिपहू पीँ पीँ राग सुनाबै छै
तीन टंगा गुरकुन्ना धेधै बौआ घूमै अंगना बकरी के बच्चा देखिते कूदि कूदि क' नाचै छै
भालू वला नाच देखाबै बौआ के दलान पर दू टाँग पर नाचल भालू बौओ नाचि हँसै छै
भरि कटोरी दूध पिबै लेए ढंग ध' कानै छै जखन पूछौँ नाम त' माएक नाम बताबै छै
नाचैत रहैए सब ललना एहि संसार मे बोआ के हँसी देख "अमित" कलम चलाबै छै
वर्ण-17
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आइ नौला* मे माछ चल मारब कने जाल मच्छरदानी वला फेकब कने
बहुत टिकुला छै खसल गाछी भरल छै ओकरो झोरी भरि क' चल आनब कने
माछ चटनी खाएब रोटी भात रौ डोलपाती चल संग मे खेलब कने
छोट बौआ छी पैघ सन छै सोच रौ आब कखनो संसार नै बाँटब कने
एक छी हम सब एक थारी मे रहब " अमित" नवका मिथिला अपन माँगब कने
फाइलातुन-मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन 2122-2212-2212 बहरे-हमीम
*नौला{पोखरि के नाम}
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सूगाके आइ वियाह हेतै मैना रानी कनियाँ बनलै
पेड़ा वर्फी और रसगुल्ला पूरी सब्जी पलाऊ बनतै
कोइली बहिन गीत गेतै जुगनू संगी बाँल्ब जरेतै
बंदर मामा ढोल बजेतै मोर चाची झूमि क' नाचतै
हाथी दादा लड़का ल' जेतै खरहा खूब बम फोड़तै
जंगल के सब बरियाती भालू भैया सब के बैसेतै
शेर देतै आशीष "अमित" गीदर सब मंत्र पढ़ेतै
सरल वार्णिक बहर वर्ण-10
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बहै छै पवन केहन मीठगर छै मन भयानक रौद जड़बै छै चामके गै
कने ले बरफ बोतल मे पानि भरि ले करब वनभोज छै बड़का जामके गै
झहड़तै मारतै चोभा जखन कौआ ठकै छै फेँकि ढेपा नव नामके गै
अपन झोरी भरल हेतै साँझमे गै "अमित" कतरा कते हेतै दामके गै
मफाईलुन-मफाईलुन-फाइलातुन 1222-1222-2122 वहरे-करीब-
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पीठ पर छै बैग बौआ चलल इस्कुल लाल पियर ड्रेस चमकै भरल इस्कुल
मांथ टोपी घेँट मे छै लंच लटकल दाइ संगे चलल मोने रमल इस्कुल
खेल सेहो नीक खेलै छोट बौआ वर्ग छै मैदान खेलक बनल इस्कुल
चित्र पाड़ै मे लगै छै मोन ओकर मीठ झगड़ो पर त' खूबे हँसल इस्कुल
नै पहाड़ा पढ़ब नै सीखब ककहरा आब छै कंपुटर सीखा रहल इस्कुल
भेल छुट्टी संग हल्ला घर चलल ओ नाम जहिया "अमित" अपनो लिखल इस्कुल फाइलातुन 2122 तीन बेर बहरे-रमल
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माँ धरा मामा चान छै
सूर्य दादा नै आन छै
छै बिलाई मौसी चतुर
लैत मूसा के जान छै
कुकुर खेहारे चोर के
उड़ल चोरक त' प्राण छै
आम सब बनरा खेलकै डाढ़ि तोड़ै शैतान छै
चलल हाथी जी ट्रेन चढ़ि सूढ़ बड़का टा कान छै
बाघ छै हम सब छी तखन शेर जंगाल के शान छै
फाइलातुन-मुस्तफाइलुन 2122-2212
दौरू कक्का दौरू काकी देखू बौआ छीनै बाटी
दाँतो काटै केशो घीचै मारै छै लेने ओ लाठी
चिन्नी लेतै चूरा लेतै छाली लेए माँगै चाभी
दीदी छी तोरे रौ बौआ तोरे लेए कीनै राखी
कोरा मे तूँ शोभै छेँ रौ मानेँ खेबै संगे रोटी
आठ टा दीर्घ सब पाँति मे
अमित मिश्र
************************ बाल गजल
फूलल कचौरी छै मीठगर छै खीर सुअदगर छै छोला छौँक मे छल जीर
रूसल किए सोना आब खेबै संग जल्दी चलू खा जाएत कौआ खीर
टाँछी ल' इस्कूलो चलब खेलब पढ़ब ओतौ अहाँ सन नेनाक लागल भीड़
छै लाल कक्काके लाल पाकल आम जामुन खसल कारी , भेल कारी चीर
दिनकर अहाँ चन्ना राम आ लक्षमण जीतब अहाँ माँछक आँखि मारू तीर
मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मफऊलातु 2212-2221-2221 बहरे-- सलीम
अमित मिश्र ************************8 बाल गजल
बौआ पानि बरसै कखन फाटै जखन मेघक वसन
नाचै मोर बजबै ढोल गाबै कोइली नव भजन
हरियर गाछ फूलाएत देता रौद दिनकर जखन
खरहा तखन जीतत दौड़ आलस छोड़ि काजे मगन
छै एरोपलेनक आश पढ़ि लिख लिअ त' चानो अपन
धरती के बसेलनि राम भोरे भोर करियौ नमन
आँङुर पकड़ि बढ़बै डेग राखू "अमित" खुजले नयन
मफऊलातु{2221} दू बेर सब पाँतिमे
अमित मिश्र
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बाल गजल
उड़ल सबटा चिड़ैयाँ गाछपर फुर्रसँ जँ बैसल चारपर चारो खसल चुर्रसँ
हमर गाड़ी लतामक डाढ़ि आ सनठी चलै छै तेज अपने मुँह करै हुर्रसँ
गिलासक दूध मिसियो नीक नै लागै भरल तौला दही आँङुर लगा सुर्रसँ
अपन बाछी अपन गैया त ता थैया अपन झबरा करै अपनपर नै गुर्रसँ
फटक्का फूटलै ब्राम ब्रम ब्रूमसँ जड़ै छै छूरछूरी छूर्र छू छुर्रसँ
मफाईलुन 1222 तीन बेर बहरे हजज
अमित मिश्र
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बाल गजल
कारी महिस के दूध उज्जर छै कते भरि मोन पारी पीबि दुब्बर छै कते
रसगर जिलेबी गरम नरमे नरम छै लड्डू बनल बेसनक बज्जर छै कते
छै पात हरियर फूल शोभित गाछ छै जामुन लिची आमक इ मज्जर छै कते
दू एक दू आ चारि दूनी आठ छै अस्सी कते नै जानि सत्तर छै कते
भालू बला देखाब' सबके नाँच हौ झट आगि छड़पै दौड़ चक्कर छै कते
बाल गजल
फाटले पहिरब भूखले हम रहब गै माइ गै हम इस्कूल जेबे करब गै
महिस पोसब सब दिन चराएब साँझक' बैस ओकर पीठपर पोथी पढ़ब गै
खेत जोतब कोरब पटाएब मोनसँ मस्त पानिक धारा जकाँ हम बहब गै
चान के पूजै छै सगर लोक जग मे नाम चमकाबै लेल चन्ना बनब गै
छीन ले खेलौना हमर ढोल डमरू आब हम काँपी कलम बिन नै रहब गै
फाइलातुन-मुस्तफइलुन-फाइलातुन 2122-2212-2122 बहरे-खफीफ
अमित मिश्र
****************** बाल गजल
रानी मेघ सगरो जल पटाएत ना बौआ हमर खेलत आ नहाएत ना
चलतै ढेह पानिक बीच सड़कपर ना तै पर कागजक नैया बहाएत ना
देहसँ घाम चूबै रौद छै काल ना हीटर आब तन के नै बनाएत ना
रोपत धान बैसल खेत के आड़ि ना कादो करत पालो ह'र चलाएत ना
हेलत साल भरि पोखरि भरल पानि ना बौआ "अमित" माँछक झोर खाएत ना
मफऊलातु-मफऊलातु-मुस्तफइलुन 2221-2221-2212 बहरे--कबीर
अमित मिश्र
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बाल गजल
पाकल पियर पियर केरा खाएत सब मीठ पेड़ा
खाजा मिठाई जिलेबी बौआ भरल छै चगेँरा
मुँह मोर राजाक सुन्नर चन्ना लजा गेल डेरा
डाँरक त' घुँघरु छनकलै लेलक जखन घरक फेरा
माएक ओ करत सेबा फाड़त "अमित" खूब चेरा
मुस्तफइलुन-फाइलातुन 2212-2122 बहरे मुजस्सम बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.) Output: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) English to Maithili Maithili to English इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड़ / बड़ी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढ़इन बढ़न्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2012-13) (१४२० फसली साल) Marriage Days: Nov.2012- 25, 26, 28, 29, 30 Dec.2012- 5,9, 10, 13, 14 January 2013- 16, 17, 18, 23, 24, 31 Feb.2013- 1, 3, 4, 6, 8, 10, 14, 15, 18, 20, 24, 25 April 2013- 21, 22, 24, 26, 29 May 2013- 1,2,3,5,6,9,12,13,17,19,20,22,23,24,26,27,29,30,31 June 2013- 2,3 July 2013- 11, 14, 15 Upanayana Days: January 2013- 16 February 2013- 14, 15, 20, 21 April 2013- 22 May 2013- 20, 21 Dviragaman Din: November 2012- 25, 26, 28, 29 December 2012- 2, 3, 14 February 2013- 14, 15, 18, 20, 21, 22, 27, 28 March 2013- 1 April 2013- 18, 22, 24, 26, 28, 29 May 2013- 12, 13 Mundan Din: November 2012- 26, 30 December 2012- 3 January 2013- 18, 24 February 2013- 1, 14, 15, 20, 28 April 2013- 17 May 2013- 13, 23, 29 June 2013- 13, 19, 26, 27, 28 July 2013- 10, 15 FESTIVALS OF MITHILA (2012-13) Mauna Panchami-08 July Madhushravani- 22 July Nag Panchami- 24 July Raksha Bandhan- 02 Aug Krishnastami- 10 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 17 August Vishwakarma Pooja- 17 September Hartalika Teej- 18 September ChauthChandra-19 September Karma Dharma Ekadashi-26 September Indra Pooja Aarambh- 27 September Anant Caturdashi- 29 Sep Agastyarghadaan- 30 Sep Pitri Paksha begins- 30 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-08 October Matri Navami- 09 October SomvatiAmavasya Vrat- 15 October Kalashsthapan- 16 October Belnauti- 20 October Patrika Pravesh- 21 October Mahastami- 22 October Maha Navami - 23 October Vijaya Dashami- 24 October Kojagara- 29 Oct Dhanteras- 11 November Diyabati, shyama pooja-13 November Annakoota/ Govardhana Pooja-14 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 15 November Chhathi -19 November Devotthan Ekadashi- 24 November ravivratarambh- 25 November Navanna parvan- 25 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 28 November Vivaha Panchmi- 17 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 08 February Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 15 February Achla Saptmi- 17 February Mahashivaratri-10 March Holikadahan-Fagua-26 March Holi- 28 March Varuni Trayodashi-07 April Chaiti navaratrarambh- 11 April Jurishital-15 April Chaiti Chhathi vrata-16 April Ram Navami- 19 April Ravi Brat Ant- 12 May Akshaya Tritiya-13 May Janaki Navami- 19 May Vat Savitri-barasait- 08 June Ganga Dashhara-18 June Somavati Amavasya Vrata- 08 July Jagannath Rath Yatra- 10 July Hari Sayan Ekadashi- 19 July Aashadhi Guru Poornima-22 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha VIDEHA केर सदस्यता लिअ Top of Form Bottom of Form ईमेल : एहि समूहपर जाउ २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ Top of Form Subscribe to VIDEHA Powered by us.groups.yahoo.com Bottom of Form २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइट http://www.shruti-publication.com/ पर । महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे। कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७ Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding: Language:Maithili ६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india) (add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)
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Details for purchase available at print-version publishers's site website: http://www.shruti-publication.com/ or you may write to e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com विदेह: सदेह : १: २: ३: ४ तिरहुता : देवनागरी "विदेह" क, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। विदेह:सदेह:१: २: ३: ४ सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com २. संदेश- [ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ] १.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत। २.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी। ३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत। ४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन। ५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी। ६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। १०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। १२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। १४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी। १५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी। १६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अंक जखन प्रिंट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे। मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)... अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग। १७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल। १८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई। १९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत। २०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ। २१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ। २२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य। २३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई। २४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि। २५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर) २६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक। २७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत। २८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी। २९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना। ३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी। ३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि। ३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई। ३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई। ३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई। ३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक। ३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ। ३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम। ३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना। ३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ। ४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल। ४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई। ४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य। ४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना। ४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि। ४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक। ४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत। ४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि। ४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रशंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत। ४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना। ५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना। ५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना। ५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल। ५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना। ५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक अनेक धन्यवाद; कतेक बरखसँ हम नेयारैत छलहुँ जे सभ पैघ शहरमे मैथिली लाइब्रेरीक स्थापना होअए, अहाँ ओकरा वेबपर कऽ रहल छी, अनेक धन्यवाद। ५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना। ५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल। ५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई। ५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि। ५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी। ६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि। ६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब। ६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी। ६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही। ६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय। ६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना। ६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय। ६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह। ६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना । ६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ। ७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक) ७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि। ७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि। ७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि। ७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना। ७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि। ७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि। ७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि। ७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल। ७९. श्री हीरेन्द्र कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ एहिमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-12 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in www.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ११० म अंक १५ जुलाइ २०१२ (वर्ष ५ मास ५५ अंक ११०) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in www.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका 'विदेह' ११० म अंक १५ जुलाइ २०१२ (वर्ष ५ मास ५५ अंक ११०) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA
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