VIDEHA — Issue 114 / अंक ११४

Publication: VIDEHA · Issue: 114
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290 289 ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' ११४ म अंक १५ सितम्बर २०१२ (वर्ष ५ मास ५७ अंक ११४) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.१.अरविन्द श्रीवास्तव-‘मणिपद्मक काव्यकृतिक आलोचनात्मक अध्ययन’ पुस्तकक लोकार्पण२.मुन्नी कामत- कतऽ जा रहल छी हम!/ नाटकः- शिक्षित बेटी २.२.१.पूनम मण्डल- मणिपद्म जयन्तीपर दिल्लीमे मिथिलांगन द्वारा कवि गोष्ठी ९ सितम्बर २०१२ केँ सम्पन्न्स २.नवेंदु कुमार झा-नीतीशक सोंझा मोदीक समर्पण/ ठंडाक मौसम मे गर्मायत बिहारक राजनीति/ ३ अक्टूबरकँे राष्ट्रपतिक बिहार दौरा दरभंगा, सेहो जेताह मुखर्जी/ जापान आ कनाडाक दौरा पर जयताह मोदी/ मैथिल ब्रहमणकँे किनार लगौैलक भाजपा कीर्ति कयलनि सोनिया सॅ भेंट/ बिहारमे निवेशक इच्छा जनौलक रैनबैक्सी/ मधुबनी सहित तीन जगह पर बनत पीपा पूल/ पंचायत प्रतिनिधि २.३.शि‍वकुमार झा ‘टि‍ल्‍लू’- मैथि‍ली उपन्‍यास साहि‍त्‍यक वि‍कासमे हरि‍मोहन झाक योगदान २.४.जगदीश प्रसाद मण्डल- किछु विहनि कथा २.५.बेचन ठाकुर- बाप भेल पि‍त्ती‍ २.६.कुमार भास्कर-लघुकथा- लछमिनीया २.७.१.ओम प्रकाश-भोथ हथियार/विहनि कथा- बीस टाका २.शत्रुधन प्रसाद साह- मैथिली महिला आ जिद्दी ३.कैलास दास-महिलाक प्रेरक कथा संग्रह ‘जिद्दी’ २.८.हम पुछैत छी: गुणनाथ झासँ चन्दन कुमार झाक गपशप ३. पद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- की भेटल आ की हेरा गेल  (आत्म गीत)- (आगाँ) ३.२.१.मिहिर झा-हौ रामचंदर२.राम वि‍लास साहु जीक दूटा कवि‍ता ३.३.जगदीश प्रसाद मण्डल-१० गोट गीत ३.४.१. राजदेव मण्‍डल २.ओमप्रकाश झा ३.५.मुन्नी कामत ३.६.नन्‍द वि‍लास राय जीक दूटा कवि‍ता ३.७.जगदानन्द झा 'मनु' ३.८.किशन कारीगर ४. मिथिला कला-संगीत १. ज्योति झा चौधरी २.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) ३. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी) ५. गद्य-पद्य भारती:१.प्रो. चम्पा शर्माक डोगरी कविताक हिन्दी अनुवाद: श्रीमती रजनी शर्मा आ मैथिली अनुवाद : डॉ. शंभु कुमार सिंह ६.बालानां कृते-१.जगदीश प्रसाद मण्डल-बाल विहनि कथा- बुढ़ि‍या दादी २.मुन्नी कामत- दूटा बाल कविता भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित-Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.] विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a  Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमेhttp://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add  बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. 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Go to the link below for download of old issues of VIDEHA Maithili e magazine in .pdf format and Maithili Audio/ Video/ Book/ paintings/ photo files. विदेहक पुरान अंक आ ऑडियो/ वीडियो/ पोथी/ चित्रकला/ फोटो सभक फाइल सभ (उच्चारण, बड़ सुख सार आ दूर्वाक्षत मंत्र सहित) डाउनलोड करबाक हेतु नीचाँक लिंक पर जाउ। VIDEHA ARCHIVE विदेह आर्काइव भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू। गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज' मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण" विदेह जालवृत्तक डिसकसन फोरमपर जाउ। "मैथिल आर मिथिला" (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) पर जाउ। ऐ बेर मूल पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ? Thank you for voting! श्री राजदेव मण्डलक “अम्बरा” (कविता-संग्रह)  12.71% श्री बेचन ठाकुरक “बेटीक अपमान आ छीनरदेवी”(दूटा नाटक)  10.77% श्रीमती आशा मिश्रक “उचाट” (उपन्यास)  6.35% श्रीमती पन्ना झाक “अनुभूति” (कथा संग्रह)  4.7% श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”क “नो एण्ट्री:मा प्रविश (नाटक)  5.25% श्री सुभाष चन्द्र यादवक “बनैत बिगड़ैत” (कथा-संग्रह)  4.97% श्रीमती वीणा कर्ण- भावनाक अस्थिपंजर (कविता संग्रह)  5.25% श्रीमती शेफालिका वर्माक “किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा)  8.56% श्रीमती विभा रानीक “भाग रौ आ बलचन्दा” (दूटा नाटक)  6.63% श्री महाप्रकाश-संग समय के (कविता संग्रह)  5.52% श्री तारानन्द वियोगी- प्रलय रहस्य (कविता-संग्रह)  4.97% श्री महेन्द्र मलंगियाक “छुतहा घैल” (नाटक)  9.67% श्रीमती नीता झाक “देश-काल” (कथा-संग्रह)  5.52% श्री सियाराम झा "सरस"क थोड़े आगि थोड़े पानि (गजल संग्रह)  7.18% Other:  1.93% ऐ बेर युवा पुरस्कार(२०१२)[साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन कोन लेखक उपयुक्त छथि ? Thank you for voting! श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह)  27.71% श्री विनीत उत्पलक “हम पुछैत छी” (कविता संग्रह)  7.83% श्रीमती कामिनीक “समयसँ सम्वाद करैत”, (कविता संग्रह)  6.02% श्री प्रवीण काश्यपक “विषदन्ती वरमाल कालक रति” (कविता संग्रह)  4.22% श्री आशीष अनचिन्हारक "अनचिन्हार आखर"(गजल संग्रह)  21.69% श्री अरुणाभ सौरभक “एतबे टा नहि” (कविता संग्रह)  6.02% श्री दिलीप कुमार झा "लूटन"क जगले रहबै (कविता संग्रह)  7.23% श्री आदि यायावरक “भोथर पेंसिलसँ लिखल” (कथा संग्रह)  6.02% श्री उमेश मण्डलक “निश्तुकी” (कविता संग्रह)  11.45% Other:  1.81% ऐ बेर अनुवाद पुरस्कार (२०१३) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे के उपयुक्त छथि? Thank you for voting! श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर)  33.33% श्री महेन्द्र नारायण राम "कार्मेलीन" (कोंकणी उपन्यास श्री दामोदर मावजो)  12.04% श्री देवेन्द्र झा "अनुभव"(बांग्ला उपन्यास श्री दिव्येन्दु पालित)  12.04% श्रीमती मेनका मल्लिक "देश आ अन्य कविता सभ" (नेपालीक अनुवाद मूल- रेमिका थापा)  16.67% श्री कृष्ण कुमार कश्यप आ श्रीमती शशिबाला- मैथिली गीतगोविन्द ( जयदेव संस्कृत)  13.89% श्री रामनारायण सिंह "मलाहिन" (श्री तकषी शिवशंकर पिल्लैक मलयाली उपन्यास)  11.11% Other:  0.93% फेलो पुरस्कार-समग्र योगदान २०१२-१३ : समानान्तर साहित्य अकादेमी, दिल्ली Thank you for voting! श्री राजनन्दन लाल दास  50% श्री डॉ. अमरेन्द्र  28.72% श्री चन्द्रभानु सिंह  19.15% Other:  2.13% 1.संपादकीय १ राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ (सुभाष चन्द्र यादव) जे साहित्य अकादेमी द्वारा रामदेव झा आ मोहन भारद्वाजक कृपासँ प्रकाशित नै भऽ सकल। https://docs.google.com/a/videha.com/viewer?a=v&pid=sites&srcid=dmlkZWhhLmNvbXx2aWRlaGEtcG90aGl8Z3g6NDNiMmVhYThlOTNiMDA5Zg राजकमल चौधरी: मोनोग्राफ (सुभाष चन्द्र यादव) download link https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/Rajkamal_Monograph.pdf?attredirects=0&d=1 https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/Rajkamal_Monograph.pdf?attredirects=0&d=1 dbb13891-a-96a2f0ab-s-sites.googlegroups.com September 11 at 11:28pm · Like · 1 · Remove Preview Gangesh Gunjan राजकमल जी (विनिबंध)क प्रकरण कान मे पडल तं छल, से कतोक वर्ख भ गेलै आब| मुदा से एहन कुरूप छैक से अहींक एहि फेस बुकिया समाद मे स्पष्ट भेलय| तें एकर धन्यवाद अहीं कें दैत छी गजेन्द्र जी |... ओना वास्तविक तं ई जे सम्पूर्ण पढबा सं पहिने मोन "विरक्त" भ' गेल | नै पढि भेल आगाँ ! नीक केलौहें नेट पर द' क'| समकालीन आ आगत पीढ़ी सेहो बुझओ ई कारी-कथा! हमरा सन लोकक विडम्बना देखू जे पूरा प्रकरण अपन अनुज- मित्र- अग्रज सं जुडल अछि| से एहन ऐतिहासिक दुर्घटना भ' गेल अछि ! उत्तरदायी व्यक्तिगत हम कतहु सं नै | मुदा साहित्यिक पीढ़ीक नैतिकता सं "अपराध बोध" सहबा लेल अभिशप्त छी| उपाय ? सस्नेह,

11 सितम्बर 2012 11:26 pm को, Gajendra Thakur < Thursday at 2:13pm via  · Unlike · 4 Gajendra Thakur गंगेश गुंजन जीक हिम्मत प्रशंसनीय अछि। जँ स्टेटस-को केर विरोध शुरूसँ भेल रहितै तँ परिस्थिति भिन्न रहितै, सए अछि उपाए। २ साहित्य अकादेमीमे समन्वयक पद लेल कालाबाजारी (ब्लैक मार्केटिंग)- एकटा रिपोर्ट साहित्य अकादेमी दिल्लीक मैथिली समन्वयक चुनाव लेल जे संस्था सभ निर्धारित अछि ओकर नाम अछि:- विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा; सचिव वैद्यनाथ चौधरी “बैजू” आ अध्यक्ष- पं. चन्द्रनाथ मिश्र अमर। अखिल भारतीय मैथिली साहित्य परिषद, दरभंगा; सचिव डा. गणपति मिश्र , अध्यक्ष रहथि स्व. जयमन्त मिश्र। चेतना समिति, पटना, सचिव श्री विवेकानन्द ठाकुर, अध्यक्ष श्रीमति प्रमीला झा। राँटी मधुबनीक कोनो संस्था, सम्भवतः वर्तमान अध्यक्ष श्री हेतुकर झा। किशोरीकान्त मिश्रक मिथिला सांस्कृतिक परिषद (जे संस्था विद्यापतिकेँ पाग पहिरा कऽ हुनका ब्राह्मण घोषित करबाक कुकृत्य केलक), वर्तमान अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र नारायण झा आ सचिव गंगाधर झा। पंचानन मिश्रक अखिल भारतीय मैथिली साहित्य समिति, इलाहाबाद; आ मैथिली लोक साहित्य परिषद, कोलकाता, सम्भवतः वर्तमान अध्यक्ष- अणिमा सिंह। ऐ मे सँ किछु संस्थाक नाम आ वर्तमान अध्यक्ष आदिमे परिवर्तन सम्भव अछि।

ऐ मे सँ अधिकतर संस्था कागजी अछि वा साहित्यिक नै राजनैतिक अछि आ जातिवाद, क्षेत्रवाद आ आनुवंशिक आधारपर संचालित अछि। ३ सरसठि‍क पछाति‍ गामसँ लऽ कऽ देश भरि‍मे दोरस हवा उठल। मुदा हवोक रूखि‍क सीमा तँ भि‍न्न-भि‍न्न अछि‍, कतौ रेत बला भूमि‍मे अपनो रस चटबैत अछि‍, तँ कतौ समुद्रमे ज्‍वार उठबैत अछि‍, कतौ पहाड़सँ टकरा या तँ मेघे दि‍स उड़ि‍ जाइत अछि‍ वा पजरबाहि‍ ताकि‍-ताकि‍ पड़ाइत अछि‍। कतौ समतल भूमि‍मे गाछ-वि‍रीछ उखाड़ैत तँ कतौ सरोवरक हल्‍फी, तँ कतौ मन्‍द गति‍क सुहावन हवा सेहो दैत अछि‍। अवसरक लाभ जेकरा जते भेटैक चाहि‍ये से नै भेटि‍ पेलै। जँ से नै पेलक तँ औद्योगि‍क क्षेत्रक अपेक्षा कृषि‍ क्षेत्र कि‍अए पछुआ गेल। भलहिं तमसाएलपर बाजि‍ दि‍अए जे महाराष्‍ट्र कर्नाटक औद्योगि‍क क्षेत्रमे अगुआ गेल आ बि‍हार पछुआ गेल, ई तामसपर बाजल भेल। मुदा महाराष्‍ट्र वा कर्नाटकक उद्योगकेँ देखै छि‍ऐ तँ ईहो देखए पड़त जे ओइठाम जमीनपर जीनि‍हारक दशा की‍ छै। की ई बात झूठ जे बि‍हारक अपेक्षा ओइठामक कि‍सानकेँ आत्महत्‍याक नौवत छन्‍हि‍। तँए देशक सभ राज्‍यक अपन-अपन समस्‍या छै। अपना-अपना ढंगसँ देखए पड़तै। मुदा की‍ ई उचि‍त नै जे बि‍हारो स्‍वतंत्र भारतक अंग छी, एकरूपता हेबाक चाहि‍ऐ। आइ बि‍हारे नै, आनो-आनो राज्‍यकेँ बि‍हारोसँ बेसी समस्‍या छै जेकर समाधान जरूरी अछि‍। भलहिं बंगाल, केरल जकाँ नै, मुदा आनो-आन राज्यमे देखौंस तँ लगबे कएल। मि‍थि‍लांचलो ऐ दोरस हवासँ अलग नै रहल। पुरना दरभंगा जि‍लाक मधुबनी सवडि‍वीजनमे, जे अखन जि‍ला अछि‍, जमीनक भरपूर एकरूपता आएल, मुदा खेत तँ तखन खेत जखन ओकरा भरपूर पानि‍ भेटै। उचि‍त बीआ, उचित खादक संग मशीन नेने कुशल कि‍सान सेहो भेटै। दस बर्ख पूर्वहि‍सँ कोसी नहर योजनाक पाछू प्रगति‍शील कि‍सानो आ वुद्धि‍जीवि‍यो उठि‍ कऽ ठाढ़ रहलाह, मुदा कियो सुनि‍नि‍हार नै। जँ सुनौलो गेल तँ काजक तेहेन रूप धेलक जे पचास बर्खोमे योजना नै पूर्ति भऽ सकल अछि‍। धार-धुरक संग एहेन लापरवाही भेल जे मि‍थि‍लांचलक अधासँ बेसी जमीन माटि‍सँ बालु बनि‍ गेल अछि‍। ओना धार बहुतो अछि, जइमे कि‍छु एहनो अछि‍ जे हजारो बर्खसँ अपन दि‍शा नै बदललक, मुदा कोसी-कमला-बलानकेँ तँ भगैतो खेला-खेला, आ गीतो गाबि‍-गाबि‍ तते सुआगत होइत रहल अछि‍ जे अधासँ बेसी जमीनकेँ कमजोर माने शक्‍ति‍हीन बना देलक अछि‍। बालु केना उपजाउ भूमि‍ बनत, छोट सवाल नै अछि‍। राजनीति‍क दशा एहेन जे मुँहपुरुखि‍आइयेक पाछू पड़ि‍ सभ अपनेमे ओझराएल अछि‍। मि‍थि‍लांचलक कोनो समस्‍या मि‍थि‍लेक नै अपि‍तु देशक छी। समस्‍याक समाधान केना हएत तेहीमे सभ ओझरा-ओझरा राजनीति‍ कऽ रहला अछि‍। आठ बजे राति‍केँ सि‍तारपर सुनताह जे “पवन प्रि‍य पावन मि‍थि‍ला देश!” जहि‍ना बेरमा देशक अंग छी तहि‍ना तँ देशो बेरमाक अंग छि‍ऐ। तँए देशक दाेरस हवा बेरमोमे बहल। साइकि‍लक ओभर-वाइलि‍ंग जकाँ गामक वाइलि‍ंग शुरू भेल। एक संग रंग-बि‍रंगक हवाक प्रवेश भेल। अड्डा बन्‍दी हुअए लागल। कि‍छु लुत्ती गामोसँ उठैए तँ कि‍छु बाहरोसँ पसहि‍-पसहि‍ आबए लागल। अखन धरि‍ गाममे जाति‍-सम्‍प्रदायक हवा नै आएल छल। जहि‍या कहि‍यो मारि‍-दंगा हुअए ओ या तँ आन गामसँ हुअए, वा एक-टोल दोसर टोलक बीच। बीसो जाति‍सँ ऊपरबला गाम बेरमा। पावनि‍-ति‍हारमे गजपट होइते आएल अछि‍। मुदा तैयो तँ चलि‍ते रहलै। गजपटो केना ने होउ, अधासँ बेसी स्‍त्रीगण भादवक रवि‍ करि‍ते छथि‍। मुदा पावनि‍क वि‍धानो भि‍न्न-भि‍न्न। कि‍यो दुनू साँझ नि‍खंड करै छथि‍, तँ कि‍यो एक संझू। कि‍यो नोनेटा परहेज करै छथि‍, तँ कि‍यो अन्न छोड़ि‍ फलेटा सेवन करै छथि‍। तहि‍ना घड़ी पावनि‍। एक तँ सालक दू-तीन मास, साओन, आसीन चैतमे होइए तँ दोसर बुधवारि‍, सोमवारि‍ आ शुक्रवारि‍ सेहो होइए। कबीर पंथक प्रवचनकर्ता आबि‍-आबि‍ माया-जालक नि‍न्‍दा करैत आ सेवक सभकेँ चेतेबो करैत छथि‍। सेवको रंग-बि‍रंगक। तहूमे बेरमामे आरो गजपट। एक दि‍स सए घरक ब्रह्मण बस्‍ती टोल, टोल ऐ दुआरे नै जे गोठि‍या नै फुटझाड़ा अछि‍, मे एकोटा बैष्‍णव नै। ओना समाजक पंथनि‍रपेक्षक खि‍यालसँ नीके अछि‍। तहि‍ना दोसर दि‍स दलितोक टोल अछि‍। थाल-पानि‍सँ लऽ कऽ अकास धरि‍क शि‍कारी। बीचक जे जाति‍ अछि‍ ओ धार्मिक पंथ (साम्‍प्रदायि‍क) सँ जुड़ल अछि‍। जाति‍क भीतर वैष्‍णव-साकठ केर बीच बि‍वाद चलैत अछि‍ तँ एक जाति‍क दोसराक बीच। कबीर पंथक बीच समझौता भेल। समझौता भेल जे श्राद्ध-कर्मक पछाति‍, सत्‍यनारायण पूजाक पछाति‍ कबीर पंथी भनडारा सेहो हुअए, से हुअए लागल। एक दि‍स दोसर सम्‍प्रदायक वि‍रोधमे बजबो करैत आ दोसर दि‍स संग मि‍लि‍ रहबो करैत अछि‍। तहि‍यो कबीर पंथ मजगूज छल, अधि‍क समर्थक अछि, आइयो अछि‍। तइ बीच एकटा घटना मंडल (धानुक) जाति‍मे फँसल। द्वालख सुबे दासक प्रभाव, मंडलो-मुखि‍यो (धानुक-मलाह) आ बरैइयोमे रहनि‍। रमौतक चला-चलती गाममे कम। ननौरमे बुद्दी दास रमौतक महंथ बनि‍ गेलाह। दि‍यादि‍क लाटसँ बेरमा आबि‍ अपने दि‍यादमे एक गोटेकेँ कंठी दऽ सेवक बना लेलनि‍। दि‍याद सेवक बनि‍ गेलनि‍। ओना सालमे एक बेर सुबेदास मास दि‍नक लेल एबो करैत छलाह मुदा बीचमे जँ कतौ भनडारा भेल तँ दल दऽ बजाइयो लेल जाइत छलनि‍। ननौरबलाक चेलाकेँ अपन चेला (रमौतसँ कबीर पंथी) बना लेलनि‍। एक दि‍स बि‍नु वैष्‍णव (साकठ) केँ चेतैबतो तँ दोसर दि‍स लुटो-पाट चलैत। सेवक लुटेलासँ ननौरबला वुद्दी दास फरमान जारी केलनि‍- “जहि‍ना ओकर (घुरण दासक सेवक) कानमे मंत्र देलि‍ऐ आ ओ दोसर मंत्र लऽ लेलक तहि‍ना कड़ूतेल टहका कऽ ओकरा कानमे देबै आ ओइ संग लागल मंत्रो नि‍कालि‍ देबै।” डंकापर चोट पड़ल। द्वालखबला जबाब देलखि‍न जे हुनकर (वुद्दी दासक) पंथे कमजोर छन्‍हि‍। ओइसँ जीवकेँ थोड़े गति‍-मुक्‍ति‍ हेतै। पहि‍ने वरदान कऽ लौथु। जँ से नै करताह तँ सेवकक कानमे तेल ढारि‍ देताह, से नै चलतनि‍। कसम-कस हुअए लागल। गामक दुआर-दरबज्‍जाक मुख्‍य मुद्दा यएह बनि‍ गेल। समाजक कि‍छु लोक खुशी जे भने धानुक-धानुकक बीच लड़ाइ अछि‍ तँ दोसर दि‍स जाति‍-पाति‍पर चोट पड़ि‍ गेल छल। कारण जे जहि‍ना कम्‍युनिस्ट पार्टीक रैली, धाक छोड़ सड़कपर अनैत अछि,‍ तहि‍ना समाजक बीच जे कबीर पंथ माननि‍हार छलाह, हुनका सबहक बीच खेनाइ-पीनाइमे एकरूपता आबि‍ गेल छलै। कबीर पंथीमे भनडाराक महत्‍वपूर्ण आधार छै। जहि‍ना जगन्नाथमे अँटका परसाद होइ छै तइ सदृश कबीर पंथक बीच एक-दोसराक बीच परसादीक चलनि‍ अछि‍। कबीर पंथ-रमौत दुनू पंथक तना-तनीमे गाम बटाए लागल। तीन-चारि‍ टुकड़ीमे गाम बँटि‍ गेल। कबीर पंथ (सम्‍प्रदाय) सँ कमजोर संगठन रमौत सम्‍प्रदायक छल। एक गाम दू गाम कतेको गामक कबीर पंथबला सभ मैदानमे उतरैक तैयारी करए लगलाह। बेरमाक बगलेक गाम जगदर अछि। ओना परोपट्टामे जगदर-बेरमाक नाओंसँ जानल जाइत अछि‍। जगदर छोटेटा गाम अछि‍। भूमि‍हार ब्रह्मण आ राजपूत बहुसंख्‍यक अछि‍। ओना बरही, यादव, तेली, दुसाध, धुनि‍या, सोनार, मल्लाह सेहो अछि‍ मुदा अल्‍पसंख्‍यक। जगदरमे नथुनी सि‍ंहक सरदारी छलनि‍, आ अस्‍सी प्रति‍शत भूमि‍हार हुनकर लठैत छलनि‍। जइसँ पचकोसीमे झगड़ा-झंझटि‍क कारोबार चलैत छलनि‍। जगदरक नथुनी सि‍ंह सेहो कबीर पंथी। ओ लोहि‍या पट्टीक राजपूते महात्‍माक सेवक। ओ संख्‍यामे कम मुदा शक्‍ति‍शाली रहथि‍। सम्‍प्रदायक रूपमे जगदर कतेको टुकड़ीमे बँटल। राजपूत कबीर पंथी दि‍स तँ भूमि‍हार राधा-कृष्‍ण सम्‍प्रदाय दि‍स, यादव-बरही, दुसाध कबीर पंथ दि‍स। तँ धुनि‍याँ इस्‍लाम दि‍स। मल्‍लाह तँ सहजहि‍ थाल-पानि‍मे रहनि‍हार छी तँए वैष्‍णव सम्‍प्रदायमे कि‍अए जाएत। कबीर पंथीक झंझटक हल्ला सूनि‍ लोहि‍यापट्टीबला महात्‍मा जगदरमे आबि‍ कऽ आसन लगा देलनि‍ आ आन-आन सेवकान सभकेँ अबैले सेहो कहि‍ देलखि‍न। महाभारत लड़ाइ जकाँ बेरमाक धरती सन-सन करए लागल। शास्‍त्रार्थक समए ि‍नर्धारि‍त भेल। मेला जकाँ गाम भऽ गेल। परोपट्टाक आँखि‍ बेरमा दि‍स टकटकी लगौने, मुदा उचि‍त भेल, सही भेल ननौरबला वुद्दी दास कनी पाछू हटि‍ मारि‍-दंगासँ गामकेँ बचा लेलनि‍। जगदीश प्रसाद मण्डल जीक परि‍वार आरो सतरंगी। एक दि‍स समाजक सभ पावनि‍, देवस्‍थानसँ जुड़ल तँ पि‍ताजी सुबे दासक पि‍ताक सेवक (कबीर पंथमे जेकरा सेवक कहल जा छै ओकरे दोसर ठाम चेलाे कहल जाइ छै।) जगदीश प्रसाद मण्डल जीक पि‍ताजीपर कबीर पंथी वि‍चारधाराक प्रभाव। मास-मास दि‍न दरबज्‍जापर सतसंग-भजन चलि‍ते रहैत छलन्हि। तेसर दि‍स जगदीश प्रसाद मण्डल जीक माए, समस्‍तीपुर जि‍लाक साहो-पटनि‍या बलाक सेवक। नहि‍रेसँ सीख भऽ आएल रहथि‍, हुनकर तेसरे  सम्‍प्रदाय, गुरु वैष्‍णवो बनबैत आ साकठो चेला मंत्र दऽ बनबैत, सालमे एक बेर घुमैत-घामैत ऊहो आबि कऽ पान-सात दि‍न रहैत छलाह। ब्राह्मण छलाह, अपने हाथे भोजन बनबै छलाह। बेरमा दुर्गास्‍थानमे बलि‍-प्रदान नै हेबाक यएह कारण छल जे एक स्‍थानक समाज वैष्‍णव सम्‍प्रदायसँ जुड़ल तँ दोसर स्‍थानमे नथुनी सि‍ंहक वर्चस्‍व रहनि‍ तँए से नै भेल। जहि‍ना चुल्हि‍पर चढ़ल बर्तनमे चाउर-पानि‍ देला पछाति‍ मड़सटको, मड़बझुओ, गुड़-खीरो खि‍चड़ि‍यो आ सुन्‍दर भात सेहो बनैत अछि‍ तहि‍ना बरतन देल चाउर-पानि‍ जकाँ बेरमाक दुर्गा-पूजा एक संग कतेको वस्‍तु बनौलक। अखन धरि‍ इलाकामे दुर्गा-पूजा एक जाति‍क वा महनथानाक पूजा छल ओइपर चोट पड़ल। संग ईहो चोट पड़ल जे सभ जाति‍क कुमारि‍क पहुँचक संग साँझ सेहो पहुँचौल (दीप लेसि‍ साँझ देब) गेल। जेकर प्रचार आनो-आन गाममे भेल। दोसर दि‍स बलि‍ प्रदान नै हएब सेहो एकटा रंग पकड़लक। यएह परि‍स्‍थि‍ति‍ बेरमा दुर्गापूजाकेँ राजनीति‍क रूप पकड़ौलक। दुनू स्‍थानक बीच एकटा जबरदस्‍त खाधि‍ बनौलक। एक स्‍थान छेहा समाजक बनल रहल तँ दोसर सत्तासँ जुड़ि‍ गेल। सत्तासँ जुड़ैक कारण भेल जे मधेपुरक मधेपुर ब्‍लौक प्रमुख। अट्ठाइस पंचायतक ब्‍लौक मधेपुर। ओना मि‍ला-जुला कऽ जाति‍क आधार नै राजनीति‍क आधार ठाढ़ भेल। साैंसे मधेपुरमे कते जाति‍क मुखि‍या छल। ि‍सर्फ मुसलमान मुखि‍या हटल रहल। नै तँ सबहक समर्थन रहनि‍। कारणो छल जे जाति‍ कोनो‍ कि‍एक ने हुअए मुदा मुखि‍याक माने कांग्रेसी छल। तइसँ आॅफि‍सो एकछाहा छल। दुनू हथि‍यारक प्रयोग ओ सभ केलनि‍। जतए जाति‍क गर लहनि‍ ततए जाति‍क आ जतए से नै ततए राजनीति‍क रंग चढ़बथि‍। जइसँ चन्‍दाक रूप रोजगार दि‍स बढ़ल। ब्‍लौक ऑफि‍स उठि‍ कऽ सेहो दुर्गा स्‍थान पहुँचए लागल। जइ दि‍न मेला होइ तइ दि‍न या तँ कोनो नव योजनाक आवेदन लि‍अए पहुँच जाइत वा कोनो बँटवारा करए। ओना दुर्गापूजाक पहि‍ल लाभ गौंआँकेँ ई भेल जे कि‍छु गोटे छोड़ि‍ अधि‍कांश परि‍वारमे वृद्धावस्‍था पेंशन भेटि‍ गेल। ब्‍लौकक सभसँ छोट पंचायत बेरमा आ सभसँ बेसी गोटेकेँ पहि‍ल बेर वृद्धा पेंशन भेटल। मुदा भीतरे-भीतर जबरदस्‍त प्रति‍क्रि‍या भेल। कि‍छु गोटे बलि‍क प्रसाद दुआरे रूसि‍ रहलाह तँ कि‍छु गोटे फज्‍झति‍ सुनि‍ गाम-गाम चर्चक मुद्दा बनल। गामक राजनीति‍मे सेहो मोड़ आएल। मोड़ अबैक कारण भेल जे गामक भीतर जे जाति‍क बनाबटि‍ अछि‍ ओहो कते रंगक अछि‍। ओना दुर्गापूजामे बाह्मण बँटा गेल रहथि‍। दुनू स्‍थानकेँ हुनकर समर्थन रहनि‍। एक दि‍स पंडि‍त व्‍याकरणाचार्य उदि‍त नारायण झा पंडि‍त भेलाह तँ दोसर दि‍स वैदि‍क, व्‍याकरणाचार्य पंडि‍त कामेश्वर झा भेलाह। १९६२ ई.क मुखि‍या (पंचायत मुखि‍या) चुनावमे ब्राह्मणे मुखि‍या हारबो केलाह आ जीतबो केलाह। बचनू मि‍श्र, जि‍नका अक्षरक बोध नै रहनि‍ मुदा इमानदारीसँ काज करैक चलैत गामे नै अंचलक नेताक श्रेणीमे छलाह। अपने तँ मुखि‍या नै बनलाह मुदा अपन समर्थक मुखि‍या रहनि‍। हारला उत्तर राजनीति‍मे पछार खेलनि‍। सरसठि‍क चुनावमे काँग्रेसकेँ जबरदस्‍त धक्का लगल रहए। मधेपुर ब्‍लौकक नेता जानकी बाबू (श्री जानकीनन्‍दन सि‍ंह) छलाह, जे वि‍धायक रहि‍ प्रति‍नि‍धि‍त्‍व कऽ चुकल छलाह। ओ टूटि‍ कऽ महामाया बाबूक संग जनक्रान्‍ति‍ दलमे आबि‍ चुकल छलाह। जे लाभ सोशलि‍स्ट पार्टीकेँ भेटल आ वासुदेव बाबू (श्री वासुदेव प्रसाद महतो) एम.एल.ए. भेलाह। जाि‍तक बनाबटि‍- बेरमाक ब्राह्मण पाँच खण्‍डमे वि‍भाजि‍त अछि। ओना चुनावक नाओंपर एक रहै छल मुदा सामाजि‍क व्‍यवहारमे दूरी बनल छलनि‍। कम्‍युनिस्ट पार्टी जे १९६२ ई.मे पहि‍ने बनल छल ओइमे ब्राह्मण सभ टूटि‍ कम्‍युनि‍स्ट पार्टी बनेने रहथि‍। पाँचो खण्‍डक अलग-अलग सामाजि‍कता छलनि‍। कथो-कुटुमैती आ खानो-पीनमे दूरी छलनि‍। बरइ, कोइर, कि‍योटमे एकरूपता छल। एकरूपता ई जे खेनाइ-पीनाइ, पावनि‍-ति‍हार एकरंगाह छलनि‍। धानुक दू खण्‍डमे वि‍भाजि‍त छल, अखनो अछि‍। दुनूक बीचक दूरी अधि‍क अछि‍। तेकर कारण अछि‍ जे बहुत पहि‍नेसँ धानुक खबासि‍यो करैत आएल अछि‍ आ कि‍सानि‍यो जि‍नगी बना जीबैत आएल अछि‍। तहि‍ना मल्लाहो वि‍भाजि‍त अछि‍। मुसहर परि‍वार जेरगर अछि‍ मुदा ओकरामे सेहो फुटफाट होइते रहै छै। तेकर कारण होइ छै जे कोनो भोज-काजमे सभकें सभ नै खुआ पबैत अछि‍ जइसँ अपनामे वि‍भाजि‍त रहैए। मधेपुर ब्‍लौकसँ लऽ कऽ गाम धरि‍क चोटसँ बचनू मि‍श्र चोटा गेलाह। पुरना संगी सभ जे रहनि‍ ओ सभ सन्‍यास लऽ लेलनि‍। सि‍द्धान्‍तक नाओंपर अपन वोट अर्पित केने रहलाह। बचनू मि‍श्रक ब्रेन प्रभावि‍त भऽ गेलनि‍। जइसँ यत्र-कुत्र बाजए लगलाह। नतीजा भेलनि‍ जे पोखरि‍मे डुबा-डुबा एत्ते मुकि‍यौलकनि‍ जे पीठीमे जबरदस्‍त घा भऽ गेलनि‍। दरभंगामे ऑपरेशन भेलनि‍ तखन घा ठीक भेलन्हि। सन् सैंतालीस... भारतक स्वतंत्र त्रिवार्णिक झण्डा फहरा रहल छल। मुदा कम्यूनिस्ट पार्टीक माननाइ छल जे भारत स्वतंत्र नै भेल अछि। असली स्वतंत्रता भेटब बाँकी छै... मिथिलाक एकटा गाम… जन्म भेल रहए एकटा बच्चाक.. ओही बर्ख ... ओइ स्वतंत्र वा स्वतंत्र नै भारतमे... पिताक मृत्यु...गरीबी.. केस मोकदमा... वंचितक लेल संघर्षमे भेटलै स्वतंत्र भारतक वा स्वतंत्र नै भेल भारतक जेल.... आइ बेरमामे पाँच-दस बीघासँ पैघ जोत ककरो नै.. ओइ गाममे जीवित अछि आइयो किसानी आत्मनिर्भर संस्कृति... पुरोहितवादपर ब्राह्मणवादक एकछत्र राज्यक जतऽ भेल समाप्ति.. संघर्षक समाप्तिक बाद जिनकर लेखन मैथिली साहित्यमे आनि देलक पुनर्जागरण... जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी...गजेन्द्र ठाकुर द्वारा (अनुवर्तते...) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com http://www.maithililekhaksangh.com/2010/07/blog-post_3709.html २.गद्य २.१.१.अरविन्द श्रीवास्तव-‘मणिपद्मक काव्यकृतिक आलोचनात्मक अध्ययन’ पुस्तकक लोकार्पण२.मुन्नी कामत- कतऽ जा रहल छी हम!/ नाटकः- शिक्षित बेटी २.२.१.पूनम मण्डल- मणिपद्म जयन्तीपर दिल्लीमे मिथिलांगन द्वारा कवि गोष्ठी ९ सितम्बर २०१२ केँ सम्पन्न्स २.नवेंदु कुमार झा-नीतीशक सोंझा मोदीक समर्पण/ ठंडाक मौसम मे गर्मायत बिहारक राजनीति/ ३ अक्टूबरकँे राष्ट्रपतिक बिहार दौरा दरभंगा, सेहो जेताह मुखर्जी/ जापान आ कनाडाक दौरा पर जयताह मोदी/ मैथिल ब्रहमणकँे किनार लगौैलक भाजपा कीर्ति कयलनि सोनिया सॅ भेंट/ बिहारमे निवेशक इच्छा जनौलक रैनबैक्सी/ मधुबनी सहित तीन जगह पर बनत पीपा पूल/ पंचायत प्रतिनिधि २.३.शि‍वकुमार झा ‘टि‍ल्‍लू’- मैथि‍ली उपन्‍यास साहि‍त्‍यक वि‍कासमे हरि‍मोहन झाक योगदान २.४.जगदीश प्रसाद मण्डल- किछु विहनि कथा २.५.बेचन ठाकुर- बाप भेल पि‍त्ती‍ २.६.कुमार भास्कर-लघुकथा- लछमिनीया २.७.१.ओम प्रकाश-भोथ हथियार/विहनि कथा- बीस टाका २.शत्रुधन प्रसाद साह- मैथिली महिला आ जिद्दी ३.कैलास दास-महिलाक प्रेरक कथा संग्रह ‘जिद्दी’ २.८.हम पुछैत छी: गुणनाथ झासँ चन्दन कुमार झाक गपशप १.अरविन्द श्रीवास्तव-‘मणिपद्मक काव्यकृतिक आलोचनात्मक अध्ययन’ पुस्तकक लोकार्पण२.मुन्नी कामत- कतऽ जा रहल छी हम!/ नाटकः- शिक्षित बेटी १ अरविन्द श्रीवास्तव ‘मणिपद्मक काव्यकृतिक आलोचनात्मक अध्ययन’ पुस्तकक लोकार्पण - मणिपद्म मैथिली साहित्यक पहिल जासूसी उपन्यासकार रहथि - मणिपद्म मिथिला क्षेत्रक लोकदेवताकेँ पहिल बेर साहित्यिक स्वरूप प्रदान केलनि - मैथिलीक गंभीर कविक रूपमे सेहो स्मरण कएल जाइत छथि मणिपद्म डा. ब्रजकिशोर वर्मा ‘मणिपद्म’ पौराणिक संस्कृतिक लोकगाथा अथवा कथाक रूपमे रचनाक संरचनामे अपन जीवनकालक अधिकांश भाग लगेलनि। परिणामस्वरूप- लोरिक मनियार, दीनाभद्री, राजा सलहेस, दुलरा दयाल, नैका बनिजारा, कुसुमा मालिन, मल्लवंश, चुहरमल इत्यादि पात्र जे अनादि कालसँ लोक कंठमे रचल-बसल रहथि, केँ साहित्यक रूप प्रदान कऽ लोक साहित्यकेँ मैथिली साहित्य सागरक द्वारा आम जन धरि पहुँचेलनि। लोक गाथा हमर पौराणिक संस्कृतिक आइक चिन्हासी छी। मैथिली साहित्य श्रृंगार तांत्रिक, आंचलिक विषयकेँ आधार मानि ओ कतेको उपन्यासक रचना केलनि। दर्जनसँ ऊपर हिनकर कथा, नाटक, एकांकी, महाकाव्य, मुक्तक काव्य आ निबंध सेहो छन्हि। गत बुधवार १२ सितम्बर २०१२ केँ सहरसामे ‘मणिपद्मक काव्यकृतिक आलोचनात्मक अध्ययन’ विषयक पुस्तकक लोकार्पण साहित्य अकादमी सम्मानसँ पुरस्कृत साहित्यकार प्रो. मायानन्द मिश्र द्वारा भेल। कार्यकमक अध्यक्षता मैथिली साहित्यकार डा. महेन्द्र झा केलनि। मुख्य अथिति डा. राजाराम प्रसाद, विशिष्ट अतिथि डा. शैलेन्द्र कुमार झा, डा. ललितेश मिश्रा, डा. विश्वनाथ विवेका, डा. के. एस. ओझा, डा. रेणु सिंह आदि रहथि। कार्यक्र्रमक शुभारंभ पुस्तकक लेखक डा. देवनारायण साह द्वारा आगत अतिथियक स्वागत भाषणसँ भेल आ ओ स्वयं लिखित पुस्तक ‘मणिपद्मक काव्यकृतिक आलोचनात्मक अध्ययन’ क महत्वपूर्ण बिन्दुपर प्रकाश देलनि। साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ पुरस्कृत विद्वान प्रो. मायानन्द मिश्र कहलनि जे डा. मणिपद्म बहुविद् साहित्यकार रहथि। ओ बहुविलक्षण कथा, उपन्यास आ काव्य लिखलनि जे लोकगाथापर आधारित रहए। मैथिली आ मिथिलाक संस्कृतिक विकासक लेल संघर्षमे ओ योगदान दैत रहथि। एहेन साहित्यकारक समग्र रचनाक आलोचनत्मक अध्ययन लिखि  डा. देवनारायण साह प्राध्यापक एम. एल. टी. कालेज सहरसा श्रमपूर्वक कार्य कऽ एकरा चिरस्मरणीय बनेलनि। डा.महेन्द्र झा कहलनि जे ई मात्र संयोग अछि जे साहित्य अकादमीसँ पुरस्कृत डा. मणिपद्मपर डा. देवनारायण साह द्वारा लिखित पुस्तकक लोकापर्ण सेहो साहित्य अकादमीसँ पुरस्कृत  साहित्यकार प्रो. मायानन्द मिश्रक हाथसँ भेल। डा. शैलेन्द्र कुमार रचनाक गंभीरतापर प्रकाश दैत कहलनि जे आइक समएमे मैथिली लेखन कला कम भेल अछि लेकिन डा. देवनारायण साह शोधार्थी छात्रक लेल उपयोगी पुस्तक लिखि मैथिली साहित्य जगतकेँ नव आयाम देलनि अछि। डा. ललितेश मिश्र पुस्तकक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि दिस ध्यान केन्द्रित कऽ कहलनि जे मैथिलीमे जासूसी उपन्यास सर्वप्रथम मणिपद्म लिखलनि। ऐ अवसर पर डा. राजाराम प्रसाद, डा. रामनरेश सिंह, डा. कुलानन्द झा, डा. दीपक गुप्ता, डा. एस. के. ओझा आ डा. रेणु सिंह लोकार्पित पुस्तककेँ समीचीन बतेलनि आ अपन विचार व्यक्त केलनि। २ मुन्नी कामत १ कतऽ जा रहल छी हम! कतऽ जा रहल छी हम! कतौै तपि रहल अछि, कतौै गलि रहल अछि, कतौै धँसि रहल अछि, तँ, कतौ उठि रहल अछि आइ धरती! तपा रहल अछि अकरा मनुखक बढ़ैत भूख, जे दिन-प्रतिदिन गाछ-वृक्ष काटि अकरा छत्रहीन बनबैत अछि। समाजक कुरीति अकरा गला रहल अछि। अपन बेटी पर देख अत्याचार ई बेबस भऽ धँसि रहल अछि। देख ई सभ विडम्बना मॉं धरती क्रोधसँ पहाड़ बनि संकल्प करैत अछि कि सम्पूर्ण जहाँक अइ विशाल चोटीसँ झाँपि अकर सर्वनाश कैर दी। मुदा ओ कुछ नै करै लेल मजबूर अछि। जेना आइ धरती बेबस लाचार आ कड़ीसँ बानहल देखाइत अछि ओहिना हमरा समाजमे नारीक स्थिति अछि। आइ भाइ जल्लाद बनल अछि आ बाप पापक रूप लेने अछि। प्राचीन कालसँ जइ रिश्ताकेँ भगवानसँ पहिल जगह मिलल अछि आइ ओकर नामो लइ सँ घृणाक बोध होइए। आइ हमरा समाजमे सभसँ अधिक नजाइज सम्बन्ध गुरू आ शिष्याक बीच अछि। हम एगो अरमान मनमे बसा अपन बच्चामे अच्छा संस्कार आ उच्च शिक्षाक अभिलाषा लेने गुरू लग जाइ छी मुदा वएह गुरू हमर आत्मसम्मान केँ ठेस पहुँचाबैत हमर बच्चाक साथ शोषण करैत अछि। भाइ शब्द अतेक पावन, अतेक पवित्र अछि कि सभ बहिन भाइ शब्दकेँ सम्बोघित करैत ई सोचैत अछि कि ई हमर केवल भाई नइ कृष्णक रूप अछि जे युग-युग तक हमर आबरू आ सम्मानक रक्षा करत। चाहे ओ चचेरा ममेरा फुफेरा भाइ किएक नइ हुअए। पर वएह भाइ जब अपन बहिनक विश्वास तार-तार करैत ओकरा संगे बलात्काकार करैए तँ ओकरा की नाम देल जाएत। जन्म देनहार बाप जकरा पिता परमेश्वर कहल जाइत अछि वएह बाप अपन जनमल बेटी संग पाप करैत अछि यएह समाजमे। आखिर कतऽ खडा छी हम, कतऽ जाइले डेग बढ़ा रहल छी एक पलक लेल, सोचलेसँ अहि गंदा पैर सँ चलि हम अपन स्वच्छ आ पवित्र समाजक निर्माण कऽ सकैत छी? केवल सादा कागज पर कलम दौड़ेनाइ सिखनेसँ संस्कार आ सोच नइ बदलैत अछि। अपन जमीर आ अपन आत्माक अवाज सुनु आ कहू कि बेटी कलंकक पुरिया अछि कि हमर समाज ओकरा कलंकित करैत अछि। २ नाटकः- शिक्षित बेटी प्रथम-दृश्य दुलारी- माय..................बाबू...... देखियौ, हमर परिक्षाफल ऐल। जइमे हम सभसँ अघिक अंक सँ उतीर्ण भेलौं। फूलदाय- एना किए चिकरैय छऽ। लगैए जेना कानक झिल्ली फाटि जएत। सभ काज राज छोड़ि कऽ मुँह केँ अगोरने रहै छऽ किताबेमे। आब ई चिटठा लऽ कऽ डकरने फिरै छऽ। सभ तोहर बापक सनकी छियौ जे तूँ एना उधियाइ छी। ला अनऽ, आइ अकरा चुल्हामे झौकि दै छिऐ। दुलारी- माय, ई एक टुकरा कागज नइ, हमर साल भरक मेहनत छिऐ, हम नइ देब। फूलदाय- तूँ नइ देबही तँ आइ ई झारू तोरा पीिठ पर टुइट जेतौ। (फूलदाय झारू लात घुसा दुलारी पर बरसाबैत भद्दा-भद्दा गारि दैत आ हुनकर हाथसँ अंकपत्र लऽ कऽ खुण्डी-खण्डी कऽ दैत अछि।) पटाक्षेप दोसर दृश्य खट्ठर-दुलारी बेटा, दुलारी कतऽ छहक। दुुलारी-अबै छी बाबू जी! खट्ठर- आइ तँ तोहर परीक्षाफल अबैबाला छेलऽ, कि भेलऽ? अच्छा जा तूँ अपन अंक-पत्र नेने आबऽ। हम तोरा लऽ एगो तोउफा आनलिअ, जकरा देख तूँ खुश भऽ जेबहक। हम तोरा लऽ कलम आनलिअ, आब जल्दी जा कऽ हमर उपहार नेने आबऽ। (दुलारी चुपचाप ओतै बैठ दुनू आँखि सँ नोर बहाबैत यऽ, तखने फूलदायक प्रवेश।) फूलदाय-अहींक दुलार अकरा बिगाड़ि कऽ राखि देलकैए। जेना पढ़ि-लिख कऽ हमरा कमा कऽ खिऐत बड़का मसटरैन बनबै लऽ चलल, के करतै बियाह। कतौ बिएबहक तँ पहिले चुल्हा लग घुसकेतऽ बेटीकेँ। कॉपी-कलम पकड़ा नै ओकिली करै लऽ लए जेतऽ, बुजलहक कि नै। खट्ठर-बेटा, तोहर मायक तँ आदते छऽ बजै कऽ। छोड़ऽ, तूँ कहऽ की भेलऽ स्कूलमे। (दुलारी नोराइल आँखिसँ चुपचाप माय आ बाबू दिस निहारैत रहैए।) फूलदाय-गइ सून, दुआर पर गोबरक ढेर,ी जो उठाकऽ महार पर पाथने आ। आ अकर बात सुनमे तँ अहिना कुहल जेमऽ। बर ऐल पढ़ै-लिखै बाली। देखै छियौ, आब तोरा के पढ़बै छौ। खट्ठर-अहॉं बताह छिऐ कि! अपनो जनमल आन लगैए अहाँकेँ। तँइ तँ तूँ निपुत्र छी। डाइन कहाँकऽ। भगवान तोरा बाँझे रखितौ तँ नीक होइत। पटाक्षेप तेसर दृश्य (किछु दिन बाद दुलारीक शिक्षकक हुनकर घरपर आगमन।) शिक्षक-खट्ठर................यौ खट्ठर...... कतऽ छी यौ। खट्ठर-मास्टर साहेब प्रणाम। शिक्षक- प्रणाम-प्रणाम! लिअ, आइ हम अहाँ कऽ मुँह मीठ करै लऽ एलौंए। खट्ठर- की खुशीमे! शिक्षक- किए, अहाँ कऽ नै बुजहल अछि जे अहाँक बेटी अहि गामक संगे अपन जिलोक नाम रौशन केलक। आइ हमरा गर्व भऽ रहल अछि जे हम दुलारी जेकाँ होनहार छात्राक शिक्षक छी। खट्ठर-पर दुलारी तँ हमरा किछु नै कहलक। हम तँ ई बुझै छेलौं कि दुलारी बोड परीक्षामे असफल भऽ गेल। दुलारी..........बेटा दुलारी........ दुलारी- जी बाबूजी! खट्ठर-बेटा, हमरासँ अतेक खुशीक बात केना छुपा कऽ राखि लेलौं। दुलारी-बाबूजी, ऊ माय हमर अंकपत्रकेँ.. (कहैत दुलारी कानऽ लगैए।) शिक्षक-दुलारी, आइ तूँ गर्वसँ हमरा सभक सर ऊँच कऽ देलऽ। खट्ठर! दुुलारीकेँ सरकार १० हजार रूपैया आ इंटर कॉलेजमे दाखिला संगे दू सालक पढ़ै-रहै आ खाए कऽ खर्चा सभ देत। आ हम शिक्षकगण स्कूलक तरफसँ ५ हजार रूपैया अहाँ केँ देब जे अहाँ अपन बागमे अतेक सुन्दर फूल उगेलौं, पूरे समाजसँ लड़ि अपन बेेटीकेँ आगू बढ़ेलौं। आब सभ अपन बेटीकेँ बेटा जेकाँ पढ़ैत। पटाक्षेप चौथा दृश्य (अपन पत्नीसँ) खट्ठर-आब कहू बेटी कमाकऽ देलक कि नै! हम एहन दीप जरेलौं जकर प्रकाश पुरे जिलाक लोक देखलक। कि अहाँक मन अखनो अनहार यऽ? फूलदाय-हमरा माफ कऽ दिअ दुलारी बाबु, हमरा सँ गलती भऽ गेल, हम अनपढ़ नै। बुझलौं शिक्षाक की मोल होइए। जब हम घर सँ निकलै छेलौं तँ लोग सभ ताना मारै छेल, कहै छेल, बेटीकेँ बेटा जकाँ स्कूल भेजनेसँ देखबै, नाक कटैत। आइ जाइ छी हम, वएह लोग केँ कहै लऽ कि देखियौ, हमर बेटी नाक नै कटौलक बल्कि सर ऊँच केलक। खट्ठर-अच्छा चलू, दुलारी आब दू साल पढ़ै लऽ पटना जएत, तकर तैयारी करू। फूलदाय- हऽ दुलारी बाबु, जरूर। पटाक्षेप अंतिम दृश्य (दू सालक बाद।) खट्ठर-बेटा, आब आगू कि करबहक? और पढ़बहक! दुलारी-बाबु आगाँ तँ पढ़ब मुदा अहि संगे हम एगो काम सेहो करब, अपन गाममे प्रोढ-शिक्षा अभियान शुुरू करब। खट्ठर- ई की होइ छै! दुलारी-बाबू जाबऽ तक जड़ि नै स्वच्छ हौत तँ निक डारि केना पनपत। जबतक नारी शिक्षाक मोलक एहसास नै हएत तब तक कोय अपन बेटीकेँ नै पढ़ैैत। बाबू हम अपन गामक सभ बेटीकेँ दुलारी बनैत देखऽ चाहै छी। खट्ठर-हँ बेटी, अहिमे हम अहाँक संग छी। अक्षर-अक्षर दीप जलत कक्का-काकी,बाबा-दाय सभ मिल कऽ पढ़त तबे बेटा-बेटीक भेद मिटत आ समान हक सँ दुनू आगू बढ़त। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.पूनम मण्डल- मणिपद्म जयन्तीपर दिल्लीमे मिथिलांगन द्वारा कवि गोष्ठी ९ सितम्बर २०१२ केँ सम्पन्न्स २.नवेंदु कुमार झा-नीतीशक सोंझा मोदीक समर्पण/ ठंडाक मौसम मे गर्मायत बिहारक राजनीति/ ३ अक्टूबरकँे राष्ट्रपतिक बिहार दौरा दरभंगा, सेहो जेताह मुखर्जी/ जापान आ कनाडाक दौरा पर जयताह मोदी/ मैथिल ब्रहमणकँे किनार लगौैलक भाजपा कीर्ति कयलनि सोनिया सॅ भेंट/ बिहारमे निवेशक इच्छा जनौलक रैनबैक्सी/ मधुबनी सहित तीन जगह पर बनत पीपा पूल/ पंचायत प्रतिनिधि १ पूनम मण्डल मणिपद्म जयन्तीपर दिल्लीमे मिथिलांगन द्वारा कवि गोष्ठी ९ सितम्बर २०१२ केँ सम्पन्न -मणिपद्म जयन्तीपर दिल्लीमे मिथिलांगन द्वारा कवि गोष्ठी ९ सितम्बर २०१२ केँ सम्पन्न -कवि गोष्ठीक संचालन मानवर्धन कण्ठ केलनि। -कुमार शैलेन्द्रक कविता पाठक दौरान दर्शक दीर्घासँ अभद्रतापूर्ण टोका-टोकी भेल। शुरूमे कुमार शैलेन्द्र टिप्पणी केने रहथि जे महेन्द्र मलंगिया जी कविता नै लिखै छथि। मंचपर कुमार शैलेन्द्रक टिप्पणी छल जे कविता नै लिखिनिहार नीक नाटक नै लिखि सकैए। तकर बाद महेन्द्र मलंगियाजी बिनु कविता पढ़ने  उठि कऽ चलि गेलाह। तकरे बदलामे कुमार शैलेन्द्रक कविता पाठक दौरान दर्शक दीर्घासँ अभद्रतापूर्ण टोका-टोकी भेल। जातिवादी रंगमंचक दू ग्रुपक बीच भऽ रहल ऐ घटनाक्रमक बाद संचालक शान्ति बनेबाक अपील केलन्हि। तकर बाद टोका-टोकी केनिहार पाँचो व्यक्ति सेहो किछु कालमे चलि गेला। -रवीन्द्रनाथ ठाकुर, मुन्नाजी, विनीता मल्लिक, मानवर्धन कण्ठ , कुमार शैलेन्द्र, रमण कुमार सिंह आदि कविता पाठ केलन्हि। ·        Satya Narayan Jha, Poonam Mandal and Indra Bhushan Kumar like this. · Sanjay Choudhary जे कियो ई रिपोर्ट लिखने छथि ओ सभागार मे उपस्थित नई छलाह । कार्यक्रम बहुत नीक वातावरण आ नीक माहौल मे संपन्न भेल । कुमार शैलेंद्र जी महेंद्र मलंगिया जीक नामो तक नई लेलखिन्ह । रिपोर्ट लिख' बला सं अनुरोध जे आँखि मुईन क' झटहा नई फेकू , अहांक विश्वसनीयता समाप्त भ' जैत । Thursday at 7:03am · Like · 1 · Rawindra Das je kyo ehan reporting karet chi o chahait chi je maithil sab jati ke larai me ojhraol rahathi aa ehin kaj ta bahuto lok ka rahal chathi kala me pit ptrakarita ke kono jagah nai chaik o rajnitikik patrakarita karu aa chadm nam sa nahi likhu Thursday at 10:41am · Like · 1 · Rawindra Das मुदा एक टा काज ओ बखूबी क रहल अछि आ दिन प्रतिदिन क रहल अछि . ओ काज अछि जातिवादिताक नाम पर झगरा केनाइ साहित्यकार सभ केर खुलेआम फसबूक आ ब्लोगक माध्यम स गारि पढ्नाई Thursday at 11:43am · Like · 1 · Poonam Mandal संजय चौधरी जी, कुमार शैलेन्द्र जी रवीन्द्र सुमनकेँ कहने रहथिन्ह दुनूमे सँ कोनो एक गोटा सँ पुछि लेब, हमर समदिया ओतए उपस्थित छल। अहाँ जातिवादी रंमंचसँ जुड़ल छी तेँ अहाँक छटपटाएब निश्चिते, मिथिलांगन केँ जँ अपन प्रतिष्ठा बचेबाक छै तँ अहाँ सन लोकसँ दूरा बनाबए पड़तै। मलंगिया जे मणिपद्मक विषयमे एकांकी संग्रह (साहित्य अकादेमी) मे जे लिखने छथिन्म्हह से अहाँकेँ नै बुझल हएत। पढ़ू आ मलंगिया जीक चरित्रक विषयमे बुझू। 3 hours ago · Unlike · 1 · Poonam Mandal रवीन्द्र दास जी। आँखि मुनि लेलासँ जँ समाधान निकलितै तँ दुनियाँमे कोनो समस्ये नै रहितै। काला आ साहित्यमे मैथिला ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थ जै तरहेँ जातिवादी राजनीति कऽ रहल छथि/ केने छथितकर विरोध पीत पत्रकारिता छै। अहाँ आइ.डी. हमरा छद्म बुझा रहल अछि कारण जे अहाँ कॉपी-पेस्ट केने छी (साहित्यकार सभ केर खुलेआम फसबूक आ ब्लोगक माध्यम स गारि पढ्नाई) आदि, से एकटा चोर का "राड़ केँ सुख बलाय" केर लेखक "रोशन कुमार झा"क पोस्ट छिऐ। ओइ चोरकेँ पहिनहिये समदियासँ बैन कऽ देल छै। ओकर कुकृत्य नीचाँक लिंकपर देल अछिhttp://esamaad.blogspot.in/2012/09/blog-post_502.html 3 hours ago · Unlike · 1 · Gajendra Thakur जातिवादी रंगमंच आ ओकर संगी साथी सभक निर्लज्जता आँखि खोलएबला अछि। Poonam Mandal जातिवादी रंगमंच जीवन झाक सुन्दर संयोगक मंचन २०१२ मे करैए आ कहैए जे ई पहिल मंचन छिऐ, जखनकि मलंगियाजीक जन्मसँ पहिने एकर मंचन भऽ चुकल अछि। संजय चौधरीजी अहाँ आ अहाँक संगी सभक जातिवादी रंगमंचक आ ओकर संगी साथीक विश्वसनीयता आ रवीन्द्र दासक पीत पत्रकारिता कहिया ने खत्म भऽ गेल देखू लिंक http://maithili-drama.blogspot.in/2012/06/blog-post_29.html Kumar Shailendra samadiya me chapal riport ekdam galat anuchit aa bhramak achi.Ehan galat prachar nai karbaak chahi. malangiyajee bimar rahathi o aayalo nahi rahathi. ham aa sanjay choudhry hunka ghar par dekhi aayal rahi.Hamar kawitak khoob swagat bhel rahay karan o hamar doo masak darbhanga prawas par kendrit rahay. Samadiya me chapal ripot pardhlak baad hamra pahil khep e bujhba me aayel je videh sa jural lok sab katek grinit abhiyan chala rahal achi. Poonam Mandal जातिवादी रंगमंचसँ जुड़ल कुमार शैलेन्द्रक झूठ घृणित, आ डरपोक जातिवादी रंगमंच जे चोर रोशन कुमार झा (राड़के सुख बलाए केर लेखक)सन कॉपीराइट चोरक संगी अछि, केर असली चेहरा अछि, जे प्रोग्राम सभमे अभद्रता करैए, एक दोसरासँ लड़ैए मुदा विदेहक विरुद्ध एक भऽ जाइए। http://esamaad.blogspot.in/2012/09/blog-post_502.html Gajendra Thakur कुमार शैलेन्द्र आ आन जातिवादी रंगमंचकर्मीक ई पुरान आदति छन्हि, भोजपुरी-मैथिली अकादेमीक सेमीनार मे कुमार शैलेन्द्र आ किछु आर गोटेक मंचेपर वाक युद्ध हम आँखिसँ देखने छी (प्रायः देवशंकर नवीन संगे), मुदा अगिले सेमीनारमे माहान मलंगिया, महान देवशंकर, महान गुंजन, महान सुभाष चन्द्र यादव आदिक जयघोष सेहो शैलेन्द्र लगेने रहथि, आ तैपर मलंगियाजी देवशंकर नवीनकेँ कहने रहथिन्ह- की भऽ गेलै आइ कुमार शैलेन्द्रकेँ, उलटा धार बहा रहल अछि। about a minute ago · Like Gajendra Thakur झूठपर टिकल अछि जातिवादी रंगमंच। किछु वीडियो ऐ दुनू कार्यक्रमक विदेह वीडियोमे भेटि जाएत, भऽ सकैए नरम-गरम दुनू घटना भेटि जाए। a few seconds ago · Like Gajendra Thakur रोशन कुमार झा नाम्ना जातिवादी चोरक संग जातिवादी रंगमंच आ कुमार शैलेन्द्रक साँठ-गाँठ सोझाँ अछि। तखन ककर गप ठीक मानल जाए, झूठ आधारित जातिवादी रंगमंचक वा सत्य आधारित समदियाक?? Poonam Mandal ऐ चोरक संगी साथी (शंकरदेव झा, कुमार शैलेन्द्र, अमलेन्दु शेखर पाठक आदि) सभक गपपर विश्वास कएल जा सकैए? a few seconds ago · Like Poonam Mandal अखनो जगदीश प्रसाद मण्डलक रचना जातिवादी रंगमंचक सहयोगीक सह पर ई चोर रोशन झा ऊपरक देल लिंकपर चोरेने अछि। http://esamaad.blogspot.in/2012/09/blog-post_502.html Sanjay Choudhary गजेंद्र ठाकुर जी आ पूनम मंडल जी अहाँ सब गैर जातिवादी रंगमंच ल' क' दुनियाँ के सामने कियेक नई अबई छी 11 hours ago · Like Sanjay Choudhary अहाँ सब लग जतेक गैर जातिवादी नाटक अछि हमरा पठा दिय आ संगहि जतेक गैर जातिवादी कलाकार सब छथि तिनको कहियो जे हमरा सब संग आबि क' नाटक करैथ तखने जातिवाद समाप्त हैत । अगर जातिवाद छैक त' ओकरा समाप्त कर' के प्रयास हेबाक चाही ताही लेल सब जाति के लोक सब के मंच पर आब' पड़तय । हमरा सब लग जे कलाकार आ नाटक उपलब्ध रहैत अछि ओही सं काज चलब' पड़ेयै । अहाँ सब गैर जातिवादी कलाकार हमरा खोजि क' दिय अपन गैर जातिवादी कलाकार सब के कहियो जे हमरा सब संग मिल क' काज करत । दिल्ली सन शहर मे नाटक केनाई बहुत जोखिम के काज छैक आरोप लगेनाई बहुत छोट गप होईत छैक अपन रोजी रोटी छोड़ि क' नाटक मे लाग' पडैत छैक । और अहाँ सब सबटा चीज के मटियामेट कर' मे लागल रहै छी । एना हल्ला मचब' सं नीक हैत जे एकटा विकल्प दियौ मैथिली रंगमंच के जे गैर जातिवादी होईक । जातिवाद समाप्त भ' रहल छैक मुदा अहाँ सब ओकरा हावा देब' मे लागल रहै छी । जखन देखू जातिवाद शब्दक ढिंढोरा पिटैत रही छी । अगर सामर्थ अछि त' दिल्ली मे एकटा गैर जातिवादी रंगमंच स्थापित करू हमहूँ ओही रंगमंच सं जुड़ि जैब । 10 hours ago · Like Priyanka Jha http://maithili-drama.blogspot.in/ विदेह मैथिली नाट्य उत्सव maithili-drama.blogspot.com 47 minutes ago · Unlike · 2 · Remove Preview Gajendra Thakur संजय जी, उपरका लिंकपर समानान्तर रंगमंच ( गैर जातिवादी समानान्तर रंगमंच) आ नाटक भेटि जाएत, अहाँ केहेन रंगमंचसँ जुड़ल लोक छी जे अहाँकेँ ई बुझलो नै अछि? ओना ई अहीं टाक नै सम्पूर्ण जातिवादी रंगमंचक समस्या अछि अहाँक ई प्रश्न "अहाँ सब गैर जातिवादी रंगमंच ल' क' दुनियाँ के सामने कियेक नई अबई छी" कूपमंडूकताक द्योतक अछि वा जातिवादी कट्टराक। अहाँ लग गएर ब्राह्मण-गएर कायस्थ किए नै आबि रहल अछि ओइपर सोचू, लोककेँ पठेबै तँ ओ जाएत? पहिने भरोसा कायम करू, की भरोसा काएम कऽ सकल छी? दिल्ली सन शहर मे नाटक केनाइ "विदेह समानान्तर रंगमंचक" मूल उद्देश्य नै छै, कारण विदेहसँ जुड़ल लोक भरि विश्वमे छथि, आ मिथिलामे "विदेह समानान्तर रंगमंचक" होइत अछि, होइत रहत। मैथिली रंगमंचकेँ विकल्प देल जा चुकल छै। जे जातिवादी शब्दावली अहाँक आ अहाँ सन दोसर जातिवादी नाटककारक नाटकमे छन्हि तकर बाद अहाँ सोचियो केना लेलिऐ जे लोक अहाँ सभक घृणाक रंगमंचसँ जुड़त? रोजी-रोटी छोड़ि कऽ समाजकेँ बँटबाक काजमे लगनाइ जँ अहाँक प्रियोरिटी अछि तँ ओकरा (जातिवादी रंगमंचकेँ) जड़िसँ खतम केनाइ हमर प्रियोरिटी अछि, आ से प्रियोरिटी हमरा सभक गामसँ शुरू भेल अछि जतए नेटिव स्पीकर बसै छथि, फण्ड आधारित दिल्ली नै। मराठी नाटक शोलापुर आ मुम्बै आ गुजराती नाटक अहमदाबाद आ भरूच निर्धारित करैत अछि। अहाँकेँ कोना शक भऽ गेल जे मैथिली नाटक दिल्ली निर्धारित करत आ साम्प्रदायिक नाटककार निर्धारित करता? हमरा सभक सामर्थ्य आस्ते-आस्ते अहाँ लोकनिकेँ देखाइ पड़िये रहल अछि, पड़िते रहत, .. फूल्स पाराडाइजसँ हमरा लोकनिकेँ कोनो मतलब नै। 32 minutes ago · Unlike · 1 Gajendra Thakur आब ऐ रिपोर्टपर घुरी- जातिवादी रंगमंच आ ओकर संगी साथी सभक निर्लज्जता आँखि खोलएबला अछि। गिरगिट सेहो हिनका लोकनिक रंग बदलबाक आ झूठ बजबाक क्षमता देखि लजा जाएत। 18 minutes ago · Unlike · 1 Poonam Mandal संजय जी, पहिने तँ कुमार शैलेन्द्र, रवीन्द्र दास आदि जे झूठ बाजल छथि ओइ लेल ओ सभ माफी मंगथु, अहूँकेँ सभ गप बूझल छल मुदा अहाँ गपकेँ झाँपै-तोपैक प्रयास केलौं, किए? फेर कुमार शैलेन्द्र , अमलेन्दु शेखर पाठक, रवीन्द्र दास आदि जै चोर रोशन कुमार झा (जकर डायलोग रवीन्द्र दास कॉपी केने छथि) केँ जातिवादमे झोंकि जगदीश प्रसाद मण्डलक रचनाक चोरिक बादो पाछासँ सह दऽ रहल छथिन्ह, तकरा लेल की सजा छै? की एकर बादो अहाँ लोकनि सहयोगक आशा रखै छी? २ नवेंदु कुमार झा- नीतीशक सोंझा मोदीक समर्पण/ ठंडाक मौसम मे गर्मायत बिहारक राजनीति/ ३ अक्टूबरकँे राष्ट्रपतिक बिहार दौरा दरभंगा, सेहो जेताह मुखर्जी/ जापान आ कनाडाक दौरा पर जयताह मोदी/ मैथिल ब्रहमणकँे किनार लगौैलक भाजपा कीर्ति कयलनि सोनिया सॅ भेंट/ बिहारमे निवेशक इच्छा जनौलक रैनबैक्सी/ मधुबनी सहित तीन जगह पर बनत पीपा पूल/ पंचायत प्रतिनिधि नीतीशक सोंझा मोदीक समर्पण बिहारक उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पीएमक मेटेरियल जना भाजनाक भीतर पीएम इन वेटिंगक परेशानी बढ़ा पार्टीक भीतर नव रणनीतिक संकेत देलनि अछि। भाजपा मे कतेको योग्य नेता छथि। मुदा मोदी के नीतीश कुमार मे पीएम मेटेरियल बुझि पड़ैत अछि तऽ ई कोनो संयोग भाग नहि अछि। राजनीतिक जानकार एकरा पार्टीक भीतर गुजरातक मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदीक बढ़ैत प्रभाव के धार के भोथर करबाक मोदी विरोधी खेमाक रणनीति मानैत छथि। सुशील मोदीक एहि बयान बाद पार्टीक वरिष्ठ नेता आ बिहार मे भाजपा-जदयूक सरकार प्रमुख रणनीतिकार अरूण जेटली द्वारा फोन सॅ नीतीश कुमार सॅ भेल गपसप सॅ एहि बात के बल भेटि रहल अछि। हुनक बयान से प्रदेश भाजपा सुरक्षात्मक मुद्रा मे अछि आ कोनो नेता एहि पर खुलिक किछु बजबा पर परहेज कऽ रहल छथि। कि एक तऽ बिहार भाजपा मे सुशील कुमार मोदीक भर्सी सॅ सभ किछु होइतन अछि आ वर्तमान परिस्थिति मे नीतीश कुमारक मार्ग दर्शन पर भाजपाक डेग उठैत अछि। एक तरहे प्रदेश मे भाजपा मोदीक आगा ठेहून रोपने अछि तऽ मोदी नीतीश कुमारक चांगूर मे छथि। मोदी आ नीतीशक एहि कदम ताल सॅ विपक्षी दल के एकरा मुद्दा हाथ लागि गल अछि आ ओ नीतीश कुमार पर निशाना लगा रहल अछि। लोक सभाक चुनाव मे एखन तीन वर्षक समय अछि मुदा जे राजनीतिक परिदृश्य बनि रहल अछि ओहि मे चुनावक संभावना सेहो नजरि आबि रहल अछि तें एखने स ॅप्रधानमंत्रीक पद पर अपन-अपन दावेदारी मजगूत करबाक रणनीति मे राजगक घटक दलक नेता लागि गेल अछि। एहि मे राजगक प्रमुख घटक जदयूक वरिष्ठ नेता नीतीश कुमारक नाम पर लगातार चर्चा सॅ हुनक दावेदारी दिन पर दिन मजगूत भऽ रहल अछि। आब तऽ एक तरहे भाजपाक भीतर सेहो नीतीश कुमारक स्वीकार्यरता धीरे-धीरे बढ़ि रहल अछि। एहि सॅ पहिने भाजपाक मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघक वरिष्ठ नेता मोहन भागवत सेहो नीतीश कुमारक प्रसंशा कऽ संघ परिवार हलचल बढ़ा देने छलाह। सुशील कुमार मोदीक बयानक बाद रक्षात्मक भेल भाजपाक नेता सभ ओना तऽ समर्थन आ विरोध सॅ बचि रहल छथि मुदा नीतीश कुमारक काजक प्रशंसा सॅ नहि चुकैत छथि। पार्टी नेताक मानब अछि जे मोदीक बयान नीतीश कुमारक व्यक्तित्वक संदर्भ मे अछि आ केन्द्र सरकारक भ्रष्टाचारक चर्चा सॅ लोक सभक ध्यान हटैबाक लेल एहि मामिला के बिना कोनो कारण हवा देल जा रहल अछि। मुदा एहि बातक कोनो उतर पार्टी नेता लग नहि अछि जे भाजपा मे नरेन्द्र मोदी, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह सन् कुमशल मुख्यमंत्री मे पीएम मेटेरियल मोदी के किएक नहि देखाई पड़ि रहल अछि। मोदी के गंभीर आ परिपक्व नेता मानल जाईत अछि आ हुनक बयान सेहो महत्वपूर्ण होइत अछि। ओ कोनो बयानवीर नहि छथि जे सभ मामिला पर चर्चा मे रहबाक लेल बयानबाजी करैत छथि। तें प्रधानमंत्री पदक संदर्भ मे सुशील मोदीक बयान पैघ राणनीतिक रूप् मे देखल जा रहल अछि। मोदीक बयान पर नीतीश कुमारक प्रतिक्रिया जे ई संयोगमात्र अछि ओहि रणनीति के मजगूत आधार दऽ रहल अछि। प्रदेश मे सक्रिय नीतीश विरोधी उपेन्द्र कुशवाहा प्रधानमंत्रीक दावेदारक रूप् मे नीतीश कुमार के पूरा तरहें खारिज कऽ रहल छथि तऽ राजदक वरिष्ठ नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी मानैत छथि जे मोदीक बयान पार्टीक प्रति हुनक निष्ठाक प्रदर्शन आ एक तरहें जदयूक आगा भाजपाक समर्पण मानल जा सकैत अछि। ओना लोक सभाक चुनाव मे देरी अछि आ वर्तमान परिस्थिति मे भाजपा आ कांग्रेस दूनू मध्यावधि चुनाव सॅ बचऽ चाहैत अछि तथापि नीतीश आ सुशीलक कैमेस्ट्रीक मध्य राजनीतिक मैथेमैटिक्स सोझराओल जा रहल अछि। ठंडाक मौसम मे गर्मायत बिहारक राजनीति सितम्बर मास मे मौसम ठंढाएलाक संगहि बिहार मे राजनीतिक पारा गर्म होयत। सŸाारूढ़ जदयूक संगहि विपक्ष दिस सॅ यात्राक दौर प्रारंभ होयत। एक दिस सुशासनक गुणगान करैत प्रदेशवासीक हक आ सम्मानक लेल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अधिकार यात्रा पर निकलताह तऽ प्रदेश मे परिवर्तनक लड़ाईक लेल राष्ट्रीय जनता दलक सुप्रीमो लालू प्रसादक परिवर्तन यात्राक चारिम चरण प्रारंभ होयत। कोइलाक कारिल लागल दाग के छोड़ैबाक लेल कांग्रेस सेहो मैदान मे उतरत। केन्द्र सरकार पर लगातार भऽ रहल हमलाक उतर देबा आ अपन पक्ष राखल आ नीतीश सरकारक असफलता के जनता धरि पहूचैबाक लेल कांग्रेस पोल खोल यात्रा प्रारंभ करत तऽ नीतीश विरोधी आ बिहार नव निर्माण मंच सम्पर्क यात्रा के माध्यम सॅ नीतीश सरकारक सुशासनक हवा निकालत। लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान सेहो जनसम्पर्क यात्राक माध्यम सॅ अपन उपस्थिति दर्ज करा रहल छथि। राजग सरकार के उखाड़ि फेंकबाक संकल्पक संग राजद परिवर्तन यात्राक चारिम चरण 19 सितम्बर सॅ प्रारंभ होयत। एहि दरमियान राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद 19 सितम्बर के बेगूसराय सॅ यात्रा प्रारंभ करताह आ 20 सितम्बर के खगड़िया, 21 सितम्बर के भागलपुर, 22 सितम्बर के मुंगेर आ 23 सितम्बर के लखीसरायक यात्राक क्रम मे जनसभाक माध्यम सॅ नीतीश सरकार पर हमला कऽ बिहार मे परिवर्तनक लेल जनता के सजग करताह। यात्राक दरमियान रात्रि विश्राम सेहो ओहि जिला मे होयत आ भिनसर दलक कार्यकर्ता सॅ भेंट करताह। हुनक यात्रा मे विपक्षक नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी, राष्ट्रीय महासचिव रामकृपाल यादव, सांसद जगतानंद, विधान परिषद मे विपक्षक नेता गुलाम गौस, विधानसभा मे पार्टीक मुख्य सचेतक सम्राट चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आ सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव, आ पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी संग रहताह। दोसर दिस कांग्रेस सेहो अपन हेरायल राजनीतिक जमीनक खोजक लेल अभियान चलाओत। पार्टी द्वारा पहिने के कोइला अवंटन मामिला पर विपक्ष द्वारा संसद के ठप्प करबाक कार्रवाईक उतर देबाक लेल मैदान मे उतरत। कोलगेट कांड पर मचल बबालक पर विपक्ष के उतर देब आ सरकारक पक्ष रखबाक लेल बिहार मे उद्योग आ वाणिज्य राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मैदाम मे उतारत। श्री सिधिया दू दिनक बिहार यात्रा पर सितम्बर के प्रदेशक दौरा कयलनि। एकर बाद कांग्रेस केन्द्रीय योजना सभ मे बिहार मे भऽ रहल भ्रष्टाचारक विरूद्ध पोल खोल राष्ट्रपिता महात्मा गांधीक प्रतिमा पर माल्यार्पणक बाद ई अभियान प्रारंभ होयत। ओहि दिन नरकटियागंज आ रामनगर मे जन सभा आयोजित कयल जायत। 22 सितम्बर के प0 चम्पारणक हरसिद्धी आ मोतीहारी नगर 23 सितम्बर के मुजफ्फरपुरक मोतीपुर आ कुढ़नी आ 24 सितम्बर के बेगूसराय जिला मुख्यालय मे जनसभा आयोजित कयल जयत। मुख्यमंत्री नीतीश कुमारक विरूद्ध लगातार अभियान चला रहल बिहार नव निर्माण मोर्चा सेहो यात्राक एहि राजनीति मे कूदलक अछि। मोर्चा प्रदेश मे सम्पर्क यात्रा आयोजित करबाक घोषणा कयलक अछि। ई यात्रा 9 सितम्बर सॅ कैमूर जिला सॅ प्रारंभ होयत। कैमूर जिला मे तीन दिन यात्राक बाद ई यात्रा तीन दिन धरि नवादा जिला मे चलत आ 22 से 28 सितम्बर धरि पूर्वी चम्पारण यात्रा होयत। बिहार के विशेष राज्यक दर्जा देबाक लेल जनता दल यू लगातार आंदोलनक माध्यम सॅ केन्द्र पर दबाव बना रहल अछि। एहि मांगक समर्थन मे दल 4 नवम्बर के पटना मे अधिकार रैली आयोजित कऽ रहल अछि। एहि रैली मे समर्थन जुटैबाक लेल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अधिकार यात्रा पर निकलि रहल छथि। मुख्यमंत्री एहि यात्राक लेल पटना सॅ बेतियाकक लेल 18 सितम्बर के विदा हेताह। हुनक यात्रा औपचारिक रूप सॅ 19 सितम्बर सॅ बेतिया सॅ प्रारंभ होयत। ओ 14 अक्टूबर धरि प्रतिदिन दू जिलाक यात्रा कऽ जन सभा के संबोधित करताह। एहि दरमियान ओ यात्राक लेल सरकारी गाड़ी आ सरकारी अतिथि शालाक उपयोग नहि करताह। दल द्वारा आयोजित यात्रा मे ओ दलक गाड़ी आ दल द्वारा व्यवस्था कयल गेल जगह पर राशि विश्राम करताह। सितम्बरक मास एक दिस मौसम बदललाक संगहि बिहारवासी गर्मी सॅ राहतक सांस लेताह तऽ दोसर दिस बिहारक राजनीति मे गर्माहट आओत। सभ प्रमुख दल आ नेता प्रदेशक यात्रा पर निकलि रहल छथि। ते स्वाभाविक अछि जे सभ जनता के अपना-अपना हिसाब सॅ अपन पक्ष रखताह। जखन राजनीति करबाक अछि तऽ रणनीति बनाएल आवश्यक अछि। ओना एखन लोक सभा आ विधान सभाक चुनाव मे देरी अछि मुदा राजनीतिक रणनीतिक बिना दल आ नेताक कोनो महत्व नहि अछि। अधिकार, परिवर्तन, पोल-खोल आ सम्पर्क सॅ जनता के कतेक प्रभावित कयलक ई तऽ जनादेशक परीक्षाक बादे पता चलत। सम्पर्कक माध्यम सॅ पोल खोलि परिवर्तनक विपक्षक आशाक मध्य अधिकार देयैबाक सŸााधारी दलक संकल्प सॅ जनताक मूल समस्याक कतबा समाधान होयत ई तऽ भविष्यक गर्त से अछि मुदा एहि मास मे जनता के टाइम पास करबाक लेल पूरा अवसर अछि। सŸााक वादा आ विपक्षक इरादाक संग जनता के ठंढाक मौसम मे सिहरनक संग राजनीतिक गर्मी महसूस होएत। --- 3 अक्टूबर के राष्ट्रपतिक बिहार दौरा दरभंगा सेहो जताह मुखर्जी राष्ट्रपतिक प्रणव मुखर्जीक 3 अक्टूबर के बिहारक दौरा करताह। श्री मुखर्जीक राष्ट्रपति बनलाक बाद पहिल बेर भऽ रहल बिहार यात्राक दरमिया ओ पटनाक संगहि दरभंगा सेहो जयताह। 3 अक्टूबर के राष्ट्रपति विशेष जहाज सॅ दूपहर मे पटना पहूचताह। पटना हवाई अड्डा पर हुनका गार्ड ऑफ ऑनर देल जायत। ओकर बाद ओ बिहार सरकारक कृषि रोड मैपक लोकार्पण श्रीकृष्ण स्मारक भवन मे करताह। श्री मुखर्जीक सम्मान मे मुख्यमंत्री आवास पर भोज आयोजित कएल गेल अछि। एहि मे सम्मिलित भेलाक बाद ओ दरभंगा विदा भऽ जेताह। ओतए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालयक दीक्षांत समारोह मे भाग लेलाक बाद पटना आपस आबि जयताह आ राजभवन मे रात्रि विश्राम करताह। हुनक सम्मान मे राजभवन मे रात्रि भोज आयोजित कयल गेल अछि। --- जापान आ कनाडाक दौरा पर जयताह मोदी प्रदेशक विŸा मंत्रीक प्राधिकृत समितिक अध्यक्ष सह प्रदेशक उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदीक नेतृत्व मे एकटा दल 13 सॅ 25 सितम्बर धरि कनाडा आ जापानक टोरंटो, ओटावा, वैनकूवर आ टोकियाक दौरा कऽ वस्तु आ सेवा कर प्रणालीक अध्ययन करत। एहि द लमे 12 प्रदेशक वित्त मंत्री आ 17 प्रदेशक वित्त सचिव आ वाणिज्य कर आयुक्त सम्मिलित रहताह। एहि सॅ पहिने श्री मोदी वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम द्वारा 11-13 सितम्बर धरि चीन मे आयोजित भविष्यक अर्थव्यवस्था विषयक सम्मेलन मे भाग लेताह आ व्याख्यान सेहो देताह। --- मैथिल ब्रहमण के किनार लगैलक भाजपा कीर्ति कयलनि सोनिया सॅ भेंट कोयला आवंटनाक मामिला मे संसदक मानसून सत्रक हंगामाक मध्य दरभंगाक भाजपा सांसद कीर्ति आजादक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधीक संग भेल भेट सॅ प्रदेश भाजपाक कान ठाढ़ भऽ गेल अछि। श्री आजादक पिता स्व0 भागवत झा आजाद कांग्रेसक सम्मानित नेता छलाह आ प्रदेशक मुख्यमंत्रीक रूप मे सेहो हुनका कांग्रेस अवसर देने छल। कीर्ति आजाद एहि भेटक बाद भने सफाई दऽ रहल होथि मुदा एहि भेटक किछु नहि किछु राजनीतिक चालि मानक जा रहल अछि। ओना ओ समाजवादी पार्टी आ तृणमुल कांगेसक अध्यक्ष सॅ सेहो भेट कएने छलाह। मुदा एहि पर ककरो ध्यान नहि गेल छल। कांग्रेस अध्यक्ष सॅ भेटक बाद हुनक पार्टी बदलबाक चर्चा पर ओ सफाई देलनि जे पार्टी कि किछु नेता हुनक विरूद्ध ई अफवाह पसारि रहल छथि। दरअसल प्रदेशक राजनीति मे कतियाएल मैथिल ब्राहमण नेता अपन अस्तित्व बचैबाक लेल संघर्ष कऽ रहल छथि। राजनीतिक हैसियत कम भेलाक कारण भाजपा सेहो एहि समाजक उपेक्षा कऽ रहल अछि। पूर्व मे कांग्रेस-राजद गठबंधनक बाद ई समाज भाजपाक पक्ष मे गोलबंद भेल आ लोक सभा आ विधान सभाक चुनाव मे राजगक सर्मािन मे आगा आयल। राजगक घटक भाजपाक प्रति मैथिल ब्रहमणक विशेष रूप् झुकाव भेल। मुदा पार्टी एहि समाजक भेटल समर्थन के समाजक मजबुरी बुझि एकर उपेक्षा कऽ रहल अछि तऽ एहि समाजक नेता सेहो आब दबाव बन बऽ लगलाह अछि। भाजपाक प्रति भऽ रहल मोहभंग पर ओकर सहयोगी नजरि गड़ौने अछि आ एहि दिस ओकरा सफलता सेहो भेटल। भाजपा मे उचकद वला नेता मानल जाय वला संजय झा के द लमे सम्मिलित करा पार्टी के झटका सेहो देलक अछि। आब जदयूक नजरि बिहार विधान परिषद्क सभापति ताराकान्त झा दिस अछि। हालहि मे श्री झा द्वारा शिक्षक नियोजनक चलि रहल प्रक्रिया मे मैथिली शिक्षकक नियोजनक मांग उठाओल गेल छल आ एहि दिस सक्रिय भऽ सरकार मैथिली शिक्षकक नियोजन घोषणा कऽ हुनक मिथिलांचल मे अपन पकड़ बनैबाक संकेत देलक अछि। भाजपा जतय ताराकांत झा के सभापति रहैत विधान परिषद्क टिकट सॅ वंचित कयलक ओतहि विधानसभाक उपाध्यक्षक प्रबल दावेदार विजय कुमार मिश्रा आ विनोद नारायण झा के कतिया देलक। हालांकि विनोद नारायण झा के मंत्री स्तरक पदक लालीपॉप दऽ हुनक नाराजगी कम करबाक प्रयास कयलक अछि। बिहार विधानसभाक चुनावक दरमियान भाजपा पहिने टिकटक बॅटवारा मे मैथिल ब्रहमण के कात लगा देलक आ आब सत्ता मे भागीदारीक बाट सेहो रोकि रहल अछि। एहि स्थिति मे समाजक सक्रिय नेता मे असंतोष होयब स्वाभाविक अछि। कीर्ति आजादक सोनिया गांधी सॅ भेल भेट के असंतोषक जड़ि रहल आगिक धुंआं मानल जा सकैत अछि। असल मे राजनीति ताकतक पूछ होइत अछि। ओ चाहे समाजक ताकतओ अथवा अपन व्यक्तिगत ताकत आ हैसियत। सब सॅ पैघ विडम्बना ई अछि जे मैथिल समाज एकजूट भऽ अपन राजनैतिक हैसियत नहि देखबैत अछि। एहि समाज के एकठाम राखब आ बेंक के तराजु पर तौलब बरोबरि अछि। एहि स्थितिक लाभ भाजपा पूरा तरहें उठा रहल अछि। संगठन आ सत्ता दूनू मे मैथिल ब्राहमणक उपेक्षा कऽ आधारविहीन मैथिल ब्राहमण नेता के आगो आनि भाजपा अपन चेहरा बचा रहल अछि। (रिपोर्टमे व्यक्त विचार लेखकक छन्हि।– सम्पादक) --- बिहार मे निवेशक इच्छा जनौलक रैल बैक्सी देशक प्रसिद्ध दवाई कम्पन रैनबैक्सी लेबोरेट्रीज बिहार मे दवाईक कारखाना लगैबाक योजना बनौलक अछि। कम्पनी ई निवेश जनेरिक दवाई बनैबाक लेल करत। कम्पनी एहि वास्ते सरकार सॅ किछु मदतिक इच्छा जनौलक अछि। कम्पनीक वैश्विक दवाई कारोबारक अध्यक्ष राजीव गुलाटी जनौलनि अछि जे प्रदेश मे पछिला किछु वर्ष मे तेजी सॅ विकास भेल अछि। देशभरि मे तेजी सॅ विकास कऽ रहल बिहार मे पैघ अवसर अछि। ओ कहलनि जे कम्पनी जनेरिटक दवाईक बेसी सॅ बेसी प्रचार-प्रसार करऽ चाहैत अछि। बिहार सरकारक जेनेरिक दवाईक बढ़ावा देबाक प्रयासक नीक परिणाम सोझा आओत। एहि लेल सरकार सॅ जमीन आ बिजली सन जमीनी सुविधाक मदति भेटबाक आशा अछि। प्रदेश मे सुपर स्पेशलिटि अस्पताल पर सरकारक जोरक विषय मे श्री गुलाटी कहलनि जे एखन अस्पतालक लाभ समाजक उच्च वर्गक धरि सीमित रहैत अछि। सरकार के एखन जमीनक स्तर पर स्वास्थ्य सेवा के बढ़ैबा पर काज करबाक चाही। प्रदेश पैघ आबादी एखनो गरीबी रेखा सॅ नीचा अछि। एहि वर्ग के स्वास्थ्य सेवाक बेसी आवश्यकता अछि। ओ कहलनि जे देश भरि मे एखन गोटेक बीस हजार सॅ बेसी दवाई कम्पनी अछि मुदा देश मे नीक आ सस्त दवाईक पैघ आभाव अछि। एखनो पचास प्रतिशत आबादी धरि दवाई नहि पहूचि रहल अछि। तें राज्य सरकार सभ के एहि दिस डेग उठैबाक चाही। ज्यों बिहार सरकार एहि दिस डेग उठौलक आ कम्पनीक संग काज करबाक लेल तैयार भेल तऽ एहि मे कोनो परेशानी नहि होएत। --- मधुबनी सहित तीन जगह पर बनत पीपा पूल पथ निर्माण विभाग प्रदेश मे तीन जगह पर नव पीपा पूल बनैबाक निर्णय लेलक अछि। पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव जनतब देलनि अछि जे नव पीपा पूल मधुबनी, पटना आ बक्सर जिला मे बनाओल जायत। ओ जनौलनि जे मधुबनी जिलाक मधेपुर प्रखंडक कमला नदी पर पूर्वी धार भीठ भगवानपुर मे आठ सेटक नव पीपा पूल स्वीकृति देल गेल अछि। एहि पूलक निर्माण निर्माण पर 2.66 करोड़ टाका खर्च होयत। एकर सीधा लाभ पचास हजारक आबादी के होयत। ओ जनौलनि जे पटना जिला मे ग्यासपुर (बख्तियारपुर) सॅ काला दियारा घाट पर तीस सेटक पीपा पूलक लेल 8.10 करोड़ टाकाक स्वीकृति देल गेल अछि। पचास हजारक आबादीक लाभ एहि पीपा पूल सॅ होयत। एकर अलावा बक्सर जिलाक ब्रहमपुर प्रखंडक नैनीजोर गाम स्थित बिहार घाट सॅ उतरी दियारा धरि साठि सेटक नव पीपा पूलक लेल 15.62 करोड़ टाका स्वीकृत कयल गेल अछि। एहि सॅ नैनीजोर आ उतर प्रदेशक बलिया आपस मे जुड़ि जायत आ एकर दूरी 75 किलोमीटर सॅ घटि कऽ पांच किलोमीटर भऽ जायत। एहि सॅ उत्तर प्रदेश आ बिहार दूनू क्षेत्रक किसान के लाभ होयत। --- पंचायत प्रतिनिधि पंचायत के सशक्त आ जवाबदेह बनैबाक लेल पंचायतीराज संस्था सभक निर्वाचित प्रतिनिधि आ ओहि मे कार्यरतकर्मी सभक चारि दिनक प्रशिक्षण कार्यक्रम सभ जिला आ प्रखंड मे अक्टूबर मास पहिल सप्ताह मे होएत। एहि क्रम मे राज्य स्तरीय प्रशिक्षण समारोह 13 सितम्बर के पटना मे होयत जकर उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करताह। पंचायतीराज आ ग्रामीण कार्य मंत्री डाक्टर भीम सिंह जनतब देलनि अछि जे एहि समारोह मे प्रदेशक सभ पंचायत सॅ चूनल गेल 2000 निर्वाचित प्रतिनिधिक कार्यरत कर्मी भाग लेताह। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। शि‍वकुमार झा ‘टि‍ल्‍लू’ मैथि‍ली उपन्‍यास साहि‍त्‍यक वि‍कासमे हरि‍मोहन झाक योगदान मैथि‍ली उपन्‍यास साहि‍त्‍यक इति‍हास बेसी प्रचीन नै अछि‍। ऐ भाषाक पहि‍लुक मान्‍य उपन्‍यासकार जनसीदन छथि‍। ओना तँ हरि‍मोहन झा बि‍म्‍व ओ शि‍ल्‍पाच्‍छादि‍त आवरणसँ युक्‍त कथाकारक रूपेँ चर्चित छथि‍, कि‍एक तँ चर्चरी सन हास्‍य ओ मर्मक समागम हि‍नक अन्‍य वि‍धाक कृति‍मे नै भेटैछ, परंच साहि‍त्‍यक जगतमे हि‍नक पदार्पण पाठकगणकेँ जइ कृति‍सँ झंकृत केलक ओ थि‍क सन् 1933 ई.मे हि‍नक लि‍खल उपन्‍यास कन्‍यादान ओ सन 1945 ई.मे हि‍नक दोसर उपन्‍यास- द्वि‍रागमन। जखन उपन्‍यास वि‍धामे हरि‍मोहनक पदार्पण भेलनि‍ तँ ई वि‍धा काँच छल। अखन धरि‍ जनसीदनक ि‍नर्दयी सासु, शशि‍कला, कलि‍युगी सन्‍यसी, पुनर्विवाह, द्वि‍रागमन रहस्‍य जीवछ मि‍श्रक रामेश्वर, पुण्‍यानंद झाक मि‍थि‍ला दर्पण आ डाॅ. काँची नाथ झा कि‍रणक चन्‍द्रग्रहण सन कि‍छु जनप्रि‍य आ साहि‍त्‍योपयोगी उपन्‍यास सभ पाठक लग पसरल गेल छल। मुदा कोनो उपन्‍यासमे ओ शक्‍ति‍ वा आकर्षण नै छल जेकरा मैथि‍ली पाठक पूर्णत: आत्‍मसात करथि‍। कि‍एक तँ पोथी कीनि‍ कऽ पढ़बाक दृष्‍टि‍सँ जौं मूल्‍यांकन कएल जाए तँ मैथि‍लीकेँ आन भाषाक पाठकसँ बेसी उदासीन मानल जाए। जइ भाषा साहि‍त्‍यक प्रति‍ पाठकमे ओ भक्‍ति‍-समागम नै ओइ भाषामे हरि‍मोहन सन उपन्‍यासकारक पदार्पण अवश्‍य क्रांति‍कारी मानल जाए कि‍एक तँ हि‍नक रचना शैलीमे ओ आकर्षण तँ अवश्‍य अछि‍ जेकरा कारणें उदासीन पाठक वर्ग सेहो पोथ्‍ज्ञी कीनि‍ कऽ पढ़बाक लेल वाध्‍य भऽ जाइत छथि‍। कथा बि‍म्‍वक आधारपर जौं ि‍नर्णए लेल जाए तँ कन्‍यादान कोनो वि‍शेष कथाक वाचक नै। मि‍थि‍ला समाजक एकटा वि‍कट मुदा सभसँ महत्‍वपूर्ण संस्‍कार वि‍अाहकेँ केन्‍द्र बि‍न्‍दु बना कऽ लि‍खल गेल ऐ उपन्‍यासमे कथानक बड़ कमजोर अछि‍। बेटी जन्‍म लैत देरी मायकेँ ओकर वि‍आहक चि‍न्‍ता भऽ जाइत छन्‍हि‍। तँए संभवत: वर भेटल नै मुदा कनि‍याँ माइक ओरि‍आओनसँ उपन्‍यासक आदि‍ भेल। बारह अध्‍यायमे वि‍भक्‍त ऐ उपन्‍यासकेँ कनि‍याँ माइक ओरि‍आओन, सभागाछीक दृश्‍य, तार केना पढ़ल गेल, जहाज परक गप्‍प-सप्‍प, गोसाँओनि‍क गीत, मि‍स्‍टर सी.सी. मि‍श्रा जटि‍ल समस्‍या, गुप्‍प परामर्श, कौतुक, कन्‍यादान, चतुर्थीक राति‍ आदि‍ शीर्षकमे बॉटल गेल अछि‍। अंति‍म शीर्षक प्रश्नवाचक कि‍एक तँ दर्शनशास्‍त्रक ज्ञाता हरि‍मोहन झा धरि‍ एकटा प्रश्न छोड़ि‍ उपन्‍यासक इति‍ श्री कएलनि‍। लालकका आ लालकाकीक कन्‍या बुचि‍या उपन्‍यासक नायि‍का छथि‍ जनि‍क बि‍आह चण्‍डीचरण मि‍श्रा सन मात्र कहबाक लेल मैथि‍लसँ होइत अछि‍। सी.सी. मि‍श्रा अपन संस्‍कृति‍सँ वि‍लग वहसल एडभान्‍स लोक छथि‍। जि‍नका अपन अर्द्धांगि‍नीसँ बहुत रास आश छन्‍हि‍। बुचि‍याक जेठ भाय रेवती रमण ई जनैत छलाह, मुदा अपन बहि‍नक भवि‍ष्‍य उज्जलव करबाक लेल मि‍थ्‍याक डोरि‍मे लटकि‍ सी.सी. मि‍श्रासँ अपन बहि‍नक पाणि‍ग्रहण तँ करबा लेलनि‍, मुदा चतुर्थीक राति‍मे नव वि‍वाहि‍त दंपति‍ बि‍नु आत्‍मि‍क वरण केने वि‍लग भऽ जाइत छथि‍। सी. सी. मि‍ज्ञा जे अपनाकेँ कखनो कान्‍ट तँ कखनो कालि‍दास सन वद्वत मानैत छथि‍ सत्‍य जानि‍ लेलाक बाद बुचि‍याकेँ छोड़ि‍ भागि‍ गेलाह। कोबरघरमे रहि‍ गेलीह कनैत बुचि‍या ओइ पत्रक संग जे सी. सी. मि‍श्रा रेवती रमणक नाओंसँ लि‍खि‍ छोड़ि‍ गेलनि‍। पत्रमे अशि‍क्षि‍त कन्‍याक संग शि‍क्षि‍त पुरुषक वि‍ष्‍ज्ञमताकेँ लि‍पि‍त कएल गेल अछि‍। ऐ तरहेँ अंत करबाक लेल हरि‍मोहन जीक बड़ आलोचना भेलनि‍ तँए समाधान करैत द्वि‍रागमन लि‍खबाक लेल उपन्‍यासकार वि‍वश भऽ गेलखि‍न। हरि‍मोहनजी मि‍थि‍लाक सामाजि‍क अवस्‍थापर प्रहार करैत बुचि‍या सन अशि‍क्षि‍त नारीमे चेतना अनबाक प्रयास तँ करैत छथि‍, मुदा ई बि‍सरि‍ गेलखि‍न जे सी. सी. मि‍श्रा सन पात्र आ ओकर संवादक जे रूप ऐ उपन्‍यसमे प्रस्‍तुत कएल गेल ओ “मैथि‍ली”पर आधार मानल जाए। ओहेन पात्रकेँ नायक बनेबाक कोनो प्रयोजन नै जेकरा मैथि‍ली संस्‍कृति‍सँ लेस मात्र सि‍नेह वा ऐठामक बेवस्‍थाक कोनो ज्ञान नै हुअए। हि‍नक “ग्रेजुएट पुतोहु” कथाक नायाि‍का सेहो वि‍दुषी आ एडभान्‍स महि‍ला छथि‍ परन्‍च हुनक संवाद सभठाम खँटी मैथि‍लीमे छन्‍हि‍। सी.सी. मि‍श्रा अंग्रेजी आ हि‍न्‍दी मात्र बजैत छथि‍। मैथि‍ली उपन्‍यासमे आन भाषक एतेक बेसी प्रयोगसँ एकर अपन संस्‍कार केना बाँचत....? हरि‍मोहनक सभसँ पैघ कमी ऐ उपन्‍यासक महतपर अवश्‍य ग्रहण लगा देलक। कि‍छु मैथि‍ली साहि‍त्‍यकारक ई प्रवृत्ति‍ रहल छन्‍हि‍ जे जौं हि‍न्‍दीक प्रयोग कएल जाए तँ रचना आर सारगर्भित मानल जाएत आ लोक योग्‍य बुझताह। हरि‍मोहन वि‍षय मर्ममे झाँपल यथार्थक हृदैस्‍पर्शी साहि‍त्‍यकार छथि‍ तँए हि‍नकासँ पाठक ई अपेक्षा तँ कथमपि‍ नै रखलक। हास्‍य समागमसँ युक्‍त कन्‍यादानक संवाद उच्‍च कोटि‍क अछि‍। सी. सी. मि‍त्रा हि‍न्‍दू वि‍श्ववि‍द्यालयक साहि‍त्‍यक शोधार्थी तँ छथि‍ मुदा कन्‍यादानमे हुनक स्‍थान एकटा पाश्चात्‍य संस्‍कृति‍केँ जानय बला जोकरसँ बेसी नै। बुचि‍या तँ बुचिये छथि‍। मि‍. मि‍श्र जखन जि‍ज्ञाशा केलनि‍ जे क्‍या तुम नर्सिग जानती हो...? बुचि‍या मनमे सोचलीह नरसि‍ंह तँ गामक कोतबालक नाम छैक, देखू तँ भला हमरा कोतबाल लगा कऽ गारि‍ पढ़ैत अछि‍....। ऐ अज्ञ अवलाकेँ रेवती रमण सन भाय केना सी. सी. मि‍श्रा सन “पाश्चात्‍य-जोकर”क हाथमे सौंपि‍ देबाक ि‍नर्णए केलक। ऐ लेल रेवती रमण जीकेँ अपन अर्द्धांगि‍नी बड़गामवाली सन नारी द्वारा मि‍. मि‍श्राक संग छल करबए पड़ैत छन्‍हि‍। ऐ तथ्‍यमे सत्‍यता झलकैत अछि‍। हमरा सबहक समाजमे बड़का गामवाली सन नारीकेँ कतेक बालाक पैतराखनि‍ बनए पड़ैत छन्‍हि‍। एक अर्थमे ई उपन्‍यासक सबल स्‍थि‍ति‍ सेहो मानल जाए जे सन् 1933 ई.मे जखन पुरुष वर्गक अधि‍कांश लोक हमरा सबहक समाजमे अशि‍क्षि‍त छलथि‍ ओइ कालक नारीमे शि‍क्षा-वि‍कासक एहेन कल्‍पना हरि‍मोहनसँ पूर्व मैथि‍लीमे नि‍श्चि‍त नै भेल। हि‍नक कथा वा उपन्‍यास कि‍छु हुअए एकटा बड़ सकारात्‍मक तथ्‍य भेटैछ जे हि‍नक कृति‍क महि‍ला पात्र सदि‍खन गति‍शील रहैत छथि‍, बैसि‍ कऽ सोचैत नरीक चर्च बड़ कम ठाम देखएमे आएल। कन्‍यादानमे सेहो लालकाकी झट दऽ आवेश रानीक पैरक कनगुरि‍या आंगुरकेँ दाबि‍ देलखि‍न, मुनि‍याँ माय चमकि‍ कऽ घैल उठेलक आ लालकाकी द्वपसि‍ कऽ मोटरी खोलय लगलीह सन क्रि‍याशील महि‍ला समाजक दर्शन हरि‍मोहन झाक मैथि‍ल संस्‍कृति‍क आत्‍म आवलोकनक संग-संग नारी चेतनाक दर्पण मानल जाए। ठुनमुनकाकी आ लालकाकी दुनू दि‍आदि‍नी खूब लड़ैत छथि‍। भोलानाथ झाक पत्नी ठुनमुनकाकी गर्भवती छथि‍न। लड़बाक क्रममे गर्भ लगा कऽ शप्‍पत सेहो खाइत छथि‍न, मुदा बुचि‍याक बि‍आहक लेल ओरि‍आओनमे हुनक सहभागि‍ता कने कनि‍याँ मायसँ कम नै। एकटा “संयुक्‍त परि‍वारक” महत्‍वपूर्ण सक्‍ल पक्ष मानल जाए। लालकाकीक पुतोहु बड़कागामवाली शि‍क्षि‍त नारी छथि‍ सदि‍खन कि‍ताबे संग लटपटाएल रहैवाली बड़कागाम वाली कनि‍याँ बि‍आहक लेल चंगेरा नै साँठतीह। आ ने चूल्हि‍ये लग बैसतीह, मुदा जखन महीन काज अर्थात् सी. सी. मि‍श्राकेँ बि‍आहक पूर्व कनि‍याँसँ गप्‍प करेबाक लेल नाटक करबाक आवश्‍यकता भेल तँ रेवती रमण हि‍नकेसँ कनि‍याँक अभि‍नय करेलनि‍। ठकबा जे ऐ उपन्‍यासक अदना पात्र अछि‍ ओकर माथक मोटरीमे भोलानाथ झाक पनही सेहो बान्‍हल छन्‍हि‍। ई समाजक कटु सत्‍रू केकरो पएरक पनही केकरो माथपर ई समन्‍वयवाद समाजक लेल कलंक कि‍ए नै मानल जसए। तखन जौं वएह ठकबाक पुत्र जखन अधि‍कारी बनि‍ भोलानाथ झाक संतानक संग बदला लैत अछि‍ तँ अग्र आसनपर बैसल लोक अकुला जाइत छथि‍। ओना एहेन बदलल परि‍स्‍थि‍ति‍ तँ हरि‍मोहनक उपन्‍यासमे कथपति‍ नै भेटत कि‍एक तँ हरि‍मोहन झाक कृति‍ ब्राह्मवादी समाजक वृत्ति‍चि‍त्र छन्‍हि‍। ऐमे समाजक कात लागल वर्गमे मुनि‍याँ माय सन पैनभरनी आ ठकवा सन खबास मात्र अछि‍ तँए हि‍नक उपन्‍यास सम्‍पूर्ण समाजक प्रति‍नि‍धि‍ कृति‍ कथमपि‍ नै भऽ सकल। उपन्‍यासकार दलि‍त वा परदलि‍तक मर्मक स्‍पर्श तँ नै केलनि‍ मुदा ब्राह्मणेमे ऊँच-नीच आ उत्तर-दक्षि‍णसँ क्षुब्‍ध अवश्‍य छथि‍। हरि‍मोहन जीक मातृक अवश्‍य भलमानुषक गाममे छन्‍हि‍ मुदा पैतृक भूमि‍ कुमर बाजि‍तपुर वैशली भदेसमे, तँए भदेसक मर्मसँ आकुल तँ अवश्‍य छथि‍। सभागाछीक दृश्‍मे टुन्नी झा कनेक खखसि‍ कऽ बजलाह- “मानि‍ लि‍यऽ वरक घऽर दक्षिणे भर छन्‍हि‍ तऽ हर्ज की...?‍ सेहो बेसी दूर नहि‍- दलसि‍ंह सराय सँ चौदह कोसपर घऽर छन्‍हि‍।” मूलक चर्च भेलापर बि‍आहक अगुआ अर्थात सभागाछीक दलाल कहैत छथि‍ जे मानि‍ लि‍अ शुरगने छथि‍..., ऐ सभ कटु सत्‍यसँ प्रमाणि‍त होइत अछि‍ जे जखन ब्राह्मण-ब्रह्मणक मध्‍य मौलि‍क वि‍षमता तँ मि‍थि‍लामे समन्‍वयवाद केना आबय...? गंभीर चि‍न्‍तनयोग्‍य वि‍षयकेँ हरि‍मोहन जी हास्‍यक माध्‍यमसँ चर्च कऽ उपन्‍यासकेँ लोकप्रि‍य तँ अवश्‍य बना देलनि‍ मुदा गंभीर चि‍न्‍तनकेँ हास्‍यक बोरि‍सँ लि‍प्‍त कएलासँ एकर उद्देश्‍य अवश्‍य लुप्‍त भऽ गेल। एकरा सुयोग्‍य उपन्‍यासकारक अदूरदर्शिता मानल जाए। कि‍छु समालोचकक तर्क भऽ सकैत छन्‍हि‍ जे हरि‍मोहन जीक ऐ कृति‍क उद्देश्‍य समाजक वि‍कृति‍केँ नागट करबासँ बेसी “हास्‍य समागम” करबाक लेल छलनि‍, मुदा ऐ तर्कसँ हम सहमति‍ नै रखैत छी। कोनो हास्‍य जे समाजि‍क आ पारि‍वारि‍क समता आ शांति‍केँ बाधि‍त करए ओ समाजक लेल कखनो स्‍वीकारर्य नै भऽ सकैत अछि‍। कालीदासचरित्रसँ प्रभावि‍त सी. सी. मि‍श्रा बुच्‍चीदायकेँ “वि‍धोत्तमा” बना कऽ स्‍वीकार करताह, ई परि‍स्‍थि‍ति‍ उपन्‍यासक कमजोर पक्ष थि‍क। कहबी छैक- “बड़ो से ने कीजि‍ए ब्‍याह-प्रति‍ और वैर” ऐ वि‍स्‍मयकारी उपन्‍यासमे वि‍षम परि‍स्‍थि‍ति‍ जौं मात्र हास्‍य समागमक लेल अाएल तैयाे उचि‍त नै। एक उपन्‍यासमे समस्‍या आ दोसरमे जा कऽ ओकर नि‍दान ई रचनाकारक कलात्‍मक कृति‍ कखनो नै मानल जा सकैछ। मात्र हँसबाक लेल झारखण्‍डीनाथ, बटुक आ तोतराह पंडि‍त नमोनाथ झा सन पात्रक उपस्‍थि‍ति‍ तँ प्रासंगि‍क मुदा हँसीक पात्र बना कऽ बुचि‍याकेँ कोवरमे कनैत छोड़ि‍ उपन्‍यासक अंत देखाएब नारी जाति‍क अपमानसँ बेसी कि‍छु नै। ऐ सभ कमजोर तथ्‍यसँ भरल रहलाक बादो “कन्‍यादान” मैथि‍ली साहि‍त्‍यमे महत्‍वपूर्ण स्‍थान रखैत अछि‍ कि‍एक तँ पाठकगण ऐ कृति‍केँ हि‍आसँ स्‍वीकार कऽ नेने छन्‍हि‍। कन्‍यादानक लोकप्रि‍यताक मौलि‍क कारण थि‍क ग्राम्‍य जीवनक आधारभुत घटनाक चि‍त्रणमे सहज मौलि‍कताक अनुपालन। हास्‍य समागम तँ स्‍वाभावि‍क कि‍एक तँ ई रचनाकारक प्रकृति‍ ओ प्रवृित रहल छन्‍हि‍। हास्‍यक क्रममे गंभीर दर्शन तँ हँसीमे उधि‍या गेल मुदा कोनो ठाम साहि‍त्‍यि‍क मर्यादा ओ अनुगासनपर ग्रहार नै देखए मे आएल। ई उपन्‍यासकारक प्रांजल आ प्रवीण रचनाशीलताक द्योतक मानल जाए। जखन वर अर्थात् सी. सी. मि‍श्रा  महि‍ला मंडलीक मध्‍य बि‍आहसँ पूर्व परीक्षण हेतु अबैत छथि‍ तँ अपन नाओं सी. सी. मि‍श्रा कहैत छथि‍न। क्षणेमे महि‍ला मंडलीक एकटा बालि‍का सदस्‍याक चुटकी... तखन तँ बापक नाओं बोतल मि‍श्रा हेतन्‍हि‍। अति‍वादी प्रवृति‍क लोक पर हास्‍यक माध्‍यमसँ अनुशासि‍त प्रहार गामक रीति‍-रि‍वाजक अति‍क्रमणक प्रयासपर सहज रूपसँ कएल गेल। कनि‍याँ माइक ओरि‍आओन अध्‍ययाय पूर्णत: सहज मैथि‍ल नारी समूहक झलकि‍ देखबैत अछि‍। ऐठाम ई पूर्णत: मौलि‍क आ वास्‍तवि‍क लगैछ। संवादक भाषा आ शैलीसँ स्‍पष्‍ट भऽ जाइछ जे हरि‍मोहनजी अपन संस्‍कृति‍ आ रीति‍-रि‍वाजकेँ आत्‍मसात केने छथि‍। क्रमश......। रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश प्रसाद मण्डल किछु विहनि कथा पटोटन अद्राक पहि‍ल बरखा। मास्‍टर सहाएब आ बड़ाबाबू, दुनू गोटे एक्के मोटर साइकि‍लसँ गामसँ झंझारपुर जाइत रहथि‍। साते कि‍लोमीटर झंझारपुर तँए दुनू गोटे गामेसँ जाइ अबै छथि‍। थानाक बड़ाबाबू नै कोर्टक बड़ाबाबू देवनन्‍दन आ हाइस्‍कूलक शि‍क्षक प्रेमनन्‍दन। ओना दुनू गोटे शहरूआसँ बेसी गमैइये छथि‍ मुदा तैयो कलप कएल कपड़ा पहीरि‍ कऽ ऐबे-जेबे करै छथि‍। पँचकोशीमे सि‍ंहेश्वरक नाओं एकटा नीक घरहटि‍याक रूपमे लोक जनैत। ओना नाउऍं तँ नाआें छी, तइमे तँ कमी नै भेलनि‍ अछि‍ मुदा परदेशि‍याक कमाइ आ इन्‍दि‍रा आवासक चलैत काजमे कमी तँ भइये गेलनि‍ अछि‍। उमेर बेसी भेने मनमे खुशि‍ये होइत रहै छन्‍हि‍ जे भने काज कमि‍ रहल अछि‍। एक तँ परदेश भगने नव घरहटि‍या नै बनि‍ रहल अछि‍, दोसर हमहीं सभ जे पुरना पाँच गोटे छी सएह कते सम्‍हारब। ब्रह्मपुर गाममे प्रवेश करि‍ते बुन्‍दाबुन्‍दी पानि‍ शुरू भेल। बड़ाबाबू ड्रइवरी करैत आ मास्‍टर सहाएब पाछूमे बैसल। बुन तँ गोटगर पड़ैत रहै मुदा कम-सम। बीत-डेढ़ बीतक दूरीपर बुन खसै तँए कपड़ा सोखनहि‍ चलि‍ जाइत मुदा जते आगू बढ़ैत छलाह तते मानि‍यो बेशि‍आएल जाइत। बढ़ैत-बढ़ैत सि‍ंहेश्वर घर लग अबि‍ते अँटकि‍‍ जाएब नीक बुझलनि‍। सड़केपर गाड़ी लगा दुनू गाटे सि‍हेश्वरक दरबज्‍जापर पहुँचलाह। दरबज्‍जा कि‍ मालक घर। अाधा घरमे माल बन्‍हैत आधामे दरबज्‍जा बनौने। दरबज्‍जा कि‍ एकटा चौकी मात्र। सि‍ंहेश्‍वर अपने दरबज्‍जेपर। चारसँ चुबैत बुन्नकेँ नि‍हारि‍-नि‍हारि‍ देखैत जे रौदमे फाटि‍ गेल अछि‍ आ कि‍ कौआ खोदने अछि‍। मुदा लगले मन पड़ि‍ गेलनि‍ आद्रा आबि‍ गेल, घर कहाँ छाड़लौं। तखने दुनू गोटे पहुँचलाह। चौकीपर उठि‍ सि‍ंहेश्वर दुनू गोटेकेँ बाँहि‍ पकड़ि‍ चौकीपर बैसबैत अपनो बैसलाह। तड़तड़ौआ बरखा शुरू भेल। कलप कएल कपड़ापर खढ़क चुबाटसँ कपड़ा दुइर होइए। एक तँ बेचारेकेँ अपने मनमे दुख होइत हेकतनि‍ जे केना साल खेपब तइपरसँ हमहूँ भारी बना दि‍अनि‍ ओ उचि‍त नै। दागे लगत तँ कि‍ हेतै, कोनो कि‍ केरा-दारीमक दाग छी जे नै छूटत। मुदा बड़ाबाबूकेँ मुँहसँ बजा गेलनि‍- “अहाँक नाओं पँचकोसीमे अछि‍ सि‍ंहेश्वर भाय, मुदा अपना घरक हालत एहेन बनौने छी?” बड़ाबाबूक वि‍चारसँ सहमत होइत सि‍ंहेश्वर बाजल- “बड़ाबाबू, गामसँ लोककेँ भगने गाममे काज बढ़ि‍ गेल अछि‍, मुदा काजक धुनि‍ तेहेन पकड़ि‍ लेलक जे ठेकाने ने रहल जे बरखा मास आबि‍ गेल। आब पानि‍ छुटैए तँ नै छाड़ल हएत तँ पटोटनो तँ दइये देबै।” मुसाइ पंडि‍त गाममे वि‍ख्‍यात मुसाइ पंडि‍त छथि‍। ओहन पंडि‍त जि‍नकर बात मुसाइये पंडि‍तक नाओंसँ वि‍ख्‍यात अछि‍। मध्‍यम् जाति‍क मुसाइ पंडि‍त, माए-माएक कोरपच्‍छु बेटा भेने, दौजी फड़ जकाँ तीन सालमे माए आ सात सालमे पि‍ताक श्राद्ध केलनि‍। मुदा बाल-वि‍वाहक शुभ फल भेटि‍ गेल रहनि‍। पि‍ताक श्राद्धसँ तीन मास पहि‍ने बि‍आह भऽ गेलनि‍। जँ कहीं तीन मास पछुऐतथि‍ तँ सि‍मरि‍या गाड़ी जकाँ मास नै कऽ पबि‍तथि‍, मुदा भाग्‍य तँ भाग्‍य छी, से मुसाइ पंडि‍तकेँ सुतरलनि‍। जेकरा माए-बाप रहै छै तेकरा तँ पोथी-पतरा काज दइते छैक जे बि‍नु-भाइयो-बापबलाकेँ सुतरल। मुसाइ पंडि‍त पि‍ताक श्राद्धक तीन दि‍न पछाति‍ ससुरकेँ अरि‍आतए काल पुछलनि‍- “बाबू, आब तँ यएह सभ ने माता-पि‍ता भेला, हमरा कि‍ हएत? भाय-भौजाइक हालत अपनो गाममे देखि‍ते हेथि‍न।” जमाइक प्रश्न सुनि‍ कमलाकान्‍त गुम्‍म भऽ गेलाह। मने-मन वि‍चारए लगलाह जे बेटी-जमाइक भार उठाएब भारी होइ छै। फेर मन घुमलनि‍ जे भगि‍नमान तँ कुलश्रेष्‍ठ होइए। मुदा लगले मन बदलि‍ गेेलनि‍। घी-जमाए भगि‍ना, जहि‍ना घरमे सि‍दहामे नै रहने भूखक लहरि‍ जोर पकड़ै छै तहि‍ना आगूक जि‍नगी मुसाइकेँ जोर मारलक। दोहरबैत बाजल- “बाबू, कि‍छु बजलखि‍न नै?” कमलाकान्‍तक मन फेर बहटलनि‍। पत्नीसँ पूछि‍ लेब जरूरी अछि‍, मुदा से खोलि‍ कऽ केना समधि‍यौरमे जमाए लग बाजब। बेटोकेँ तँ पूछि‍ लेब अछि‍। मुदा पुतोहु बेरमे पुछबे ने केलौं आ बेटी-जमाए बेरमे कि‍अए पुछबै। मन बनि‍ते बजलाह- “दुनू भाय-भौजाइकेँ बजबि‍औ। आखि‍र माता-पि‍ताक परोछ भेने तँ वएह सब ने माता-पि‍ता भेलाह।” मुसाइ दुनू भाँइकेँ पुछलक। एक तँ ओहना लोकक घराड़ी घटल जाइ छै तइपर जँ बढ़ि‍ जाए, ई के नै चाहत। दुनू भाँइयो आ भौजाइओ मुसाइकेँ सासुर जाइक आदेश दऽ देलक। गाए-नेरूक मि‍लान तँ ठेहुने-पानि‍ दुहान। कमलाकान्‍त संगे चलए कहि‍ पुछलखि‍न- “कपड़ो-लत्ता लेब।” मुसाइ- “हँ, हँ, जते सरधुआ कपड़ा अछि‍ ओ जँ नै लऽ लेब तँ ऐठाम मूसे-दि‍वार खा जाएत।” एक तँ ओहि‍ना मुसाइ सहलोल, तइपर सासुरक वि‍द्यालय पहुँचि‍ गेल। सासुरँ जँ सारि‍-सरहोजि‍सँ गलथोथरि‍मे हाि‍र जाएब तँ कोन डोराडोरि‍बला भेलौं। जहि‍ना वि‍षुवत रेखाक समान दूरीपर दुनू दि‍शा समान मैसम होइत तहि‍ना अन्‍हार-इजोतक बीच सेहो होइत अछि‍। पच्‍चीस बर्खक अवस्‍थामे मुसाइ सासुरसँ मुसाइ पंडि‍त भऽ दूटा धि‍या-पुता नेने गाम आबि‍ गेलाह। जहि‍ना फुटलो खपटाक जरूरति‍ समए पाब होइ छै तहि‍ना मुसाइ पंडि‍तक जरूरति‍ गाममे आइ भेल। मौसमी बेमारीक जानकारी दि‍अ गाममे बहरबैया सभ औताह जखने सँ मुसाइ पंडि‍त सुनलक तखनेसँ मटि‍या तेल देलहा कुत्ता जकाँ मनमे उड़ी-बीड़ी लगि‍ गेलनि‍। जहि‍ना समए ि‍नर्धारि‍त छल तहि‍ना कार्यक्रम शुरू भेल। अभ्‍यागती सुआगत सभकेँ भेलनि‍। बारहो मासक मौसमी बेमारी आ ओइसँ पथ-परहेजक नीक जानकारी देलखि‍न। गाममे नव फल भेटल। बीचमे बैसल मुसाइ पंडि‍त सुनैपर कम धि‍यान देने रहए। संगसोरमे जहि‍ना लोक हरेलहो जगहपर गपे-गपमे पहुँचि‍ जाइत अछि‍ तहि‍ना मुसाइ पंडि‍त सेहो पहुँचि‍ गेलाह। हड़लनि‍ ने फुड़लनि‍ उठि‍ कऽ बीचमे ठाढ़ भऽ गेला। ठाढ़ होइते बैसि‍नि‍हारक आँखि‍ पड़ै लगलनि‍। दुनू हाथसँ शान्‍ति‍ बना रखैक इशारा दैत बजलाह- “अभ्‍यागत लोकनि‍क वि‍चार उत्तम अछि‍, सभकेँ अनुकरण करैक चाहि‍यनि‍।” अपन समर्थन पाबि‍ बाहरी लोकनि‍ आरो अगि‍ला बात सुनैले जि‍ज्ञासा जगौलनि‍। मुदा जे पहि‍ने बाजत ओ चोर गाम-घरक खेलक मंत्र छै। तँए आँखि‍, कान तँ मुसाइ पंडि‍त दि‍स सभ देलनि‍ मुदा मुँह घुमौनहि‍ रहला। मुसाइ पंडि‍त लेल धनि‍ सन। कहि‍या लोक हमर बात सुनलक आ देखलक। सुनह नै सुनह, मनक उदगार छी, बजबे करब। मुदा सइयो आँखि‍ भीष्‍म–पि‍तामह जकाँ गड़ल देखि‍ सम्‍हरैत मुसाइ पंडि‍त बजलाह- “आम-जामुन इलाकाक हाड़-पाँजर टुटब, कि‍सानी ज्ञानमे साँप-कीड़ा काटब, हाड़मे पैसल जाड़केँ सेहो तँ देखए पड़त?” गौंआँ वक्‍ता बूझि‍ जोरसँ सभ थोपड़ी बजौलक मुदा थोपड़ी सुनि‍ मुसाइ पंडि‍त अकवकमे पड़ि‍ गेलाह जे लोकक थोपड़ीक अवाज की छल। हास हँसी आकि‍ हँसी हास। देखल दि‍न मृत्‍युसँ छह मास पूर्व मुनेसर काकाकेँ बेटा लग मन उबि‍एलनि‍ तँ असगरे दि‍ल्‍लीसँ गाम वि‍दा भेलाह। परि‍वारसँ समाज धरि‍ सभकेँ अचरज लगलनि‍ जे मनमे कि‍ चढ़ि‍ गेलनि‍ जे असगरे एते साहस केलनि‍। असगरे वि‍दा होइक कारण भेलनि‍ जे बेटाकेँ पाँच दि‍न समए नै, एक तँ ओहुना बैंकमे कम छुट्टी होइ छै तइपर अपनो कारोवार ठाढ़ केने छथि‍। पुतोहु सहजे पुतोहुए छन्‍हि‍, भरि‍ दि‍न एयर-कंडीशनमे बैसि देख-वि‍देशक खेल देखब आ साज-श्रृंगार छोड़ि‍ दुनि‍याँमे कि‍छु देखब ने करै छथि‍। मुदा मुनेसर काकाक सहासक कारण ईहो भेलनि‍ जे एकेटा गाड़ी ि‍दल्‍लीसँ सकरी पहुँचा देतनि‍। सकरी तँ ओहुना घरे-अंगना भेलनि‍। गाम अबि‍ते मुनेसर काका देखलनि‍ जे घर-अंगना तँ खंडहर भऽ गेल, कतए रहब। अंडी-बगहंडी, भाँग-धथुरसँ भरल अछि‍। जखने बोनाह भेल तखने साँप-छुछुनरि‍क संग बि‍ढ़नी-पचैहि‍या हेबे करत। बाप-पुरुखाक डीहक दशा देखि‍ दुख भेलनि‍ जे जखन घरे नै तखन मनुख केना रहत। जखन मनुक्‍खे नै रहत तँ बाप-पुरूखाकेँ के चि‍न्‍हत। मने-मन वि‍चार ऊपर-नि‍च्‍चा होइते रहनि‍ कि‍ एक गोरेकेँ रस्‍ता धेने जाइत देखलनि‍। ओना दस साल पहि‍ने देखनहि‍ रहथि‍ मुदा मनुष्‍योक बुनाबटि‍ तँ अजीव अछि‍। जहि‍ना बीस बर्खक अवस्‍था धरि‍ बाढ़ि‍क आगमन रहैत अछि‍ तहि‍ना साठि‍ बर्खक पछाति‍ रौदि‍याहक। दुनू सएह तँए पुछैक जरूरत दुनूकेँ भेलनि‍। कमलेशकेँ ऐ लेल पुछैक जरूरत भेलै जे आन-गामक जँ रहि‍तथि‍ तँ रस्‍ते-रस्‍ते एला, चलि‍ जइतथि‍। ठाढ़ भऽ नि‍हारि‍ कि‍अए रहला अछि‍। जखन कि‍ मुनेसर काकाकेँ जरूरी भेलनि‍ जे जखन पुस्‍तैनी गाम एलौं, परि‍वार चलि‍ गेल तँ चलि‍ गेल, समाजो अछि‍ कि‍ ओहो मेटा गेल। मोवाइल जकाँ नै भेल जे अगुआ कऽ कि‍अए फोन करब। पाइ चरचा होइ छै कि‍ नै। ओइ सम्‍प्रदाय सदृश्‍य अछि‍ कि‍ नै जे अगुआ कऽ जेकर नजरि‍ पड़त ओ पहि‍ने अभि‍वादन करत। मुदा भेल दोसरे, जहि‍ना पनचैतीमे एक संग अनेको बजनि‍हार बाजए लगैत वा मोवाइलेपर दुनू दि‍ससँ दुनू परानी बाजए लगैत, तहि‍ना मुनेसरो काका आ कमलेशो एके बेर दुनू दि‍ससँ बाजल। आग्रह करैत कमलेश अपना ऐठाम तीन दि‍नक अभ्‍यागतीमे लऽ गेलनि‍। गाम-समाजक कुशल-समाचारक संग मुनेसर काकाक मनक जड़ि‍मे अपन परि‍वार नचए लगलनि‍। कोन धरानी बाबू, एकटा साधारण पोस्‍ट मास्‍टर रहि‍ तीस बीघा खेत बनौलनि‍। दस गाम बीच एकटा पोस्‍ट आफि‍स मनि‍आडरक रूपैया अगुआ-पछुआ, संग-संग जि‍नकर रूपैया दि‍अ जाथ दू-चारि‍ आना ओहो देबे करनि‍। आमदनी बढ़ने मुनेसरोकेँ पढ़ा-लि‍खा हाकि‍म बनौलनि‍। तेसर पीढ़ी चलि‍ रहल छन्‍हि‍। डंडी तराजू जकाँ परि‍वारकेँ तौल रहला अछि‍ जे एक पीढ़ी (पि‍ता) समाजमे की‍ सभ केलनि‍। बीचक की भेल आ आइ उजड़ि‍-उपटि‍ गेल। जहि‍ना  चढ़ैत जुआनी जि‍नगी हेरा जाइ छै तहि‍ना ने अबैत मृत्‍युकेँ रोग-भागक सेहो भेटए लगै छै। कमलेशक घर देखि‍ मुनेसर काका चीन्‍ह गेलखि‍न जे ई तँ संगीऐक घर छी। पुछलखि‍न- “बाउ, परि‍वारमे के सभ छथि‍?” कमलेश बजलाह- “तीन पीढ़ीक सभ छथि‍।” मुनेसर काकाकेँ आगू बकार नै फुटलनि‍। जहि‍ना तकि‍तो आँखि‍मे ज्‍योति‍ नै रहै छै तहि‍ना भेलनि‍। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बेचन ठाकुर महान सामाजि‍क मैथि‍ली नाटक बाप भेल पि‍त्ती बेचन ठाकुर पहि‍ल अंक दृश्‍य- एक (स्‍थान- लखनक घर। दलानपर लखन, लखनक कक्का मोतीलाल, भाए बौहरू बड़का बेटा मनोज आ छोटका बेटा संतोष उपस्‍थि‍त छथि‍। लखन चि‍न्ति‍त मुद्रामे छथि‍। सभ कि‍यो चौकीपर बैस वि‍चार-वि‍मर्श कए रहल छथि‍। बारह वर्षीय मनोज आ दस बर्षीय संतोष दलानपर माटि‍-माटि‍ खेल रहल अछि‍। मोतीलाल-     लखन, चि‍न्‍ता-फीकीर छोड़ू। की करबै? भगवानकेँ जे मर्जी होइत अछि‍, ओकरा के बदलि‍ सकैत अछि‍? अहाँ कनि‍याँकेँ एतबे दि‍नका भोग छेलै। आब अहाँक की वि‍चार भऽ रहल अछि‍? लखन-       कक्का, अपने सभ जे जेना वि‍चार देबै। मोतीलाल-     हम सभ की वि‍चार देब? पहि‍ने तँ अहाँक अपन इच्‍छा। लखन-       दूटा छोट-छोट बौआ अछि‍। ओकर पति‍पाल केना हाएत? जँ कुल-कनि‍याँ नीक भेटत तँ दोसर कऽ लइतौं। मोतीलाल-     भातीज, अहाँक नीक वि‍चार अछि‍। ऐ उमेरमे अहाँक ि‍नर्णए हमरो उचि‍त बुझना जाइत अछि‍। बौहरू-       कक्का, एगो कहबी जे छै ‘सतौत भगवानोकेँ नै भेलै’ से? मोतीलाल-     बौआ, तोहर की कहब छह? लखनकेँ बि‍आह नै करबाक चाही की? बौहररू-      हँ, हमर सहए कहब रहए। भैया कनी ति‍याग कऽ दुनू छौंराकेँ पढ़ा-लि‍खा कऽ बुधि‍यार बनाबि‍तथि‍। ओना भैयाकेँ कनि‍याँ केहेन भेटतनि‍ केहेन नै। मोतीलाल-     हमरा वि‍चारसँ लखनक परि‍स्‍थि‍ति‍ बि‍आह करैबला अवस्‍स अछि‍। लखन-       कक्का, नजरि‍मे दऽ देलौं। जदी सुर-पता लगए तँ जोगार लगाएब। मोतीलाल-     बेस देखबै। पटाक्षेप। दृश्य- 2 (स्‍थान- मदनक घर। ओ अपन बि‍आहल बेटीक बि‍आहक चि‍न्‍तामे लीन छथि‍। कातमे पत्नी-गीता दलान झाड़ि‍ रहल छथि‍। मोतीलालक समधि‍क समधि‍ हरि‍चन मोतीलालकेँ मदनक ऐठाम कुटुमैतीक संबंधमे लऽ जाए रहल छथि‍। हरि‍चन मदनक ग्रामीण छथि‍ हि‍नका दुनूक पहुँचैत मातर गीता घोघ तानि‍ अन्‍दर चलि‍ जाइत छथि‍। दलानपर तीन-चारि‍टा कुर्सी लागल अछि‍। मोतीलाल आ हरि‍चनक प्रवेश।) हरि‍चन-      (कर जोड़ि‍) नमस्‍कार मदन भाय। मदन-        नमस्‍कार नमस्‍कार। मोतीलाल-     नमस्‍कार कुटुम। मदन-        नमस्‍कार नमस्‍कार। बैसै जाइ जाउ। (दुनू जन बैसलाह। संजय, संजय, बेटा संजय, संजय। संजय-       (अन्‍दरसँ) जी पि‍ताजी, हइए ऐलौं। (संजयक प्रवेश।) (हरि‍चनकेँ मदन पकड़ि‍ कऽ अंदर लऽ जाइत छथि‍।) मदन-        लड़ि‍काकेँ बेटा दुगो छै आ अस्‍था-पाती? हरि‍चन-      गोटेक बीघाक अन्‍दरे छै। अपना भरि‍ कोनो दि‍क्कत नै छै। मदन-        की करी की नै, कि‍छु नै फुराइए। हरि‍चन-      हमरा सभकेँ लट होइए। यदि‍ वि‍चार हुअए तँ हुनका लड़ि‍की देखाए दि‍यनु। नै तँ कोनो बात नै। मदन-        बेस अपने दलानपर चलू। हम बुच्‍चीकेँ लेने आबै छी। (हरि‍चन दलानपर आबि‍ गेलाह कि‍छुए काल बाद मदन सेहो आबि‍ गेलाह।) मदन-        चलू, देखल जेतै। कऽ लेबै। आगू भगवानक मर्जी। हम लड़ि‍कीक बाप छि‍ऐ। तँ हमरा लड़ि‍का देखबाके चाही। मुदा हम सभ दि‍न अहाँपर वि‍श्वास करैत रहलौं। आइ कोना नै करब? हरि‍चन-      हम अहाँक संग बि‍सवासघात केलौं? मदन-        से तँ कहि‍यो नै। ओना दुनि‍याँ बि‍सवासेपर चलै छै। (वीणाक संग मीनाक प्रवेश। मीना सभकेँ पएर छूबि‍ गोर लगैत अछि‍।) हरि‍चन-      कुर्सीपर बैसू बुच्‍ची। (मीना कुर्सीपर बैसैत अछि‍। वीणा ठाढ़े अछि‍।) मोतीलाल बाबू, लड़ि‍कीकेँ कि‍छु पूछबो करबनि‍, तँ पुछि‍यौ। मोतीलाल-     की पुछबनि‍, कि‍छु नै। हरि‍चन-      बुच्‍ची अहाँ चलि‍ जाउ। (मीना सभकेँ गोर लागि‍ अन्‍दर गेलीह।) मदन-        हरि‍चन भाय, लड़ि‍की अपने सभकेँ पसीन भेलीह? मोतीलाल-     हँ, लड़ि‍की हमरा लोकनि‍केँ पसीन अछि‍। मदन-        तहन अगि‍ला कार्यक्रम की हेतै? हरि‍चन-      जे जेना करीऔ। ओना हम वि‍चार दैतौं जे बि‍आह मंदि‍रमे कऽ लैतौं। चीप एण्‍ड बेस्‍ट। मदन-        कहि‍या तक? हरि‍चन-      कहि‍या तक, चट मंगनी पट बि‍आह। काल्हि‍ये कऽ लि‍अ। बढ़ि‍या दि‍न छै। कुटुमैती लगा कऽ नै रखबाक चाही। मदन-        भाय, ओरि‍यान कहाँ कि‍च्‍छो छै? हरि‍चन-      जे भेलै सेहो बढ़ि‍या, जे नै भेलै सेहो बढ़ि‍याँ। आदर्शेमे आदर्श। मदन-        बेस, काल्हुके रहए दि‍औ। हरि‍चन-      जाउ, जे भऽ सकए, ओरि‍यान करू। हम सभ सेहो जाइ छी। जय रामजी की। मदन-        जय रामजी की। (हरि‍चन आ मोतीलालक प्रस्‍थान।) होनी जे हेबाक हेतै, सएह ने हेतै। आप इच्‍छा सर्वनाशी, देव इच्‍छा परमबल:। पटाक्षेप। दृश्‍य- 3 (दूश्‍य- लखनक बरि‍आतीक तैयारी। वर-लखन, मोतीलाल, बौहरू, मनोज आ संतोष मदनक ओइठाम जा रहल छथि‍। मदन अपन घरक कातमे एकटा शि‍व मंदि‍रक प्रांगणमे बि‍आहक पूर्ण तैयारी केने छथि‍। सात गोट कुर्सी आ एक गोट टेबूल लगल अछि‍। पंडीजी गणेश महादेवक पूजा कए रहल छथि‍। मदन, मीना, गीता हरि‍चन, संजय आ वीणा मंदि‍रक प्रांगणमे थहाथही कए रहल छथि‍ तथा बरि‍यातीक प्रतीक्षा कए रहल छथि‍। मीना कनि‍याँक रूपमे पूर्ण सजल अछि‍। बरि‍याती पहुँचलाह। डोलमे राखल पानि‍सँ सभ बरि‍याती हाथ-पएर धोइ कऽ कुर्सीपर बैसलाह आ लखन बरबला कुर्सीपर बैसलाह। बापेक कातमे एक्के कुर्सीपर मनोज आ संतोष बैसलाह। मदन प्रांगणमे आबि‍ जलखैक बेवस्‍था केलनि‍। सभ कि‍यो जलखै कऽ रहल छथि‍।) मनोज-       पापा, पापा, नाच कखैन शुरू हेतै? लखन-       धूर बूरबक, अखैन कि‍छु नइ बाज। लोक हँसतौ। मनोज-       कि‍अए हौ, लो हँसतै तँ हमहूँ हँसबै। कहऽ न नटुआ कखैन औतै? लखन-       चुप चुप, नटुआ नै कही। लड़ि‍की औतै। मनोज-       कए गो लड़ि‍की औतै? कार्केस्‍ट्रा कखैन शुरू हेतै? लड़ि‍की संगे हमहूँ नचबै, गेबै आ रूमाल फाड़ि‍ कऽ उड़ेबै। पापा हौ, लड़ि‍कीकेँ कहबै खाली रेकाँडि‍ंगे हांस करैले। अगबे भोजपूरीयेपर। लखन-       चूप बड़ खच्‍चर छेँ रौ। आर्केस्‍ट्रा नै हेतै। डंस नै हेतै। मनोज-       तखन एतए की हेतै हौ पापा? लखन-       हमर बि‍आह हेतै बि‍आह। संतोष-       पापा हौ, तोहर बि‍आह हेतै आ हमर नै। लखन-       हँ हँ, तोरो हेतै। संतोष-       कहि‍या हेतै? लखन-       नमहर हेबहीन तहन हेतौ। संतोष-       हम नमहर नै छि‍ऐ। एत्तेटा तँ भऽ गेलि‍ऐ। आब बि‍आह कहि‍या हेतै? लखन-       बीस साल बाद हेतौ। संतोष-       बीस साल बाद बुढे भऽ जेबै तँ बि‍आह कए कऽ की हेतै? हम आइये करब। लखन-       आइ तोरा ले लड़ि‍की कहाँ छै? संतोष-       आँइ हौ पापा, तोरा ले लड़ि‍की छै आ हमरा ले नै छै। केकरोसँ कऽ लेबै। लखन-       केकरासँ करबि‍हीन? संतोष-       मौगी सभ औतै न तँ ओइमे जे सभसँ मोटकी मौगी हेतै, ओकरेसँ करबै। दूधो खूब पीबै नम्‍हरो हेबै आ मोटेबो करबै। पापा हौ, हमरा लोकनि‍यामे तोरे रहए पड़तह। लखन-       बेस रहबौ बौआ। (जगमे पानि‍ आ गि‍लास लऽ कऽ संजयक प्रवेश। सभ कि‍यो पानि‍ पीलनि‍ आ हाथ-मुँह धोइ अपन-अपन जगहपर बैसलाह। पंडीजी पूजा पूर्णाहुति‍क पश्चात बर लग बैस जलखै केलाह।) गणेश-       अहाँ सभ वि‍लंब कि‍अए करै छी? बि‍आहक मुहुर्त्त हुसि‍ रहल अछि‍। हौ, हौ, जल्‍दी चलै चलू। कोनो चीजक टेम होइ छै कि‍ने? (लड़ि‍कीक संग सरयातीक प्रवेश। सभ कि‍यो मंदि‍रपर गेलाह। सतहपर बि‍छाएल दरीपर बैसलाह।) गणेश-       आउ लड़ि‍का-लड़ि‍की, हमरा लग बैसू। (लखन आ मीना पंडीजी लग बैसैत छथि‍। पंडीजी दुनूकेँ अपन रामनामबला चद्दरि‍ ओढ़ा दैत छथि‍न। दुनूकेँ हाथमे अरबा चाउर आआेर कुश दइ छथि‍न।) गणेण-       लड़ि‍का-लड़ि‍की पढ़ू- मंगलम् भगवान विष्‍णु, मंगलम् गरूड़ध्‍वज: मंगलम् पुण्‍डरीकाक्ष मंगलाय तनोऽहरि‍:।। लखन, मीना-   मंगलम्.....। (पंडीजी तीन बेर ई मंत्र पढ़ा कऽ अपना बगलमे राखल सेनूरक पुड़ि‍यामे सँ एक चुटकी सेनूर लड़ि‍काक हाथमे देलनि‍।) गणेश-       बि‍आहक मुहुर्त्त बीति‍ रहल छल। तँए हम एक्केटा मंत्र बि‍आह करा दै छी। आब सि‍न्‍दुरदान होइए। लड़ि‍का, लड़ि‍कीक मांगमे सेनूर दि‍अनु। (लखन मीनाक मांगमे सेनूर देलनि‍।) आब अपने सभ दुर्वाक्षत दि‍अनु। (पंडीजी पैघ सबहक हाथमे दुर्वाच्‍छत देलखि‍न।) मंत्र- ऊँ. अाब्रह्न ब्राह्मणो। मि‍त्राणामुदयस्‍तव। (मंत्रक बाद सभ कि‍यो लड़ि‍का-लड़ि‍कीकेँ दुर्वाक्षत देलखि‍न।) लाउ, दुनू समधि‍ दक्षि‍णा-पाती। सस्‍तेमे अहाँ सभ नि‍महि‍ गेलौं। (दुनू समधि‍ एकावन-एकावन टका दक्षि‍णा देलखि‍।) इएह यौ, एक्को कि‍लो रहुक दाम नै। खाइर जाउ। मदन-        पंडीजी लड़ि‍की-लड़ि‍कीकेँ असीरवाद दि‍अनु। (लड़ि‍का-लड़ि‍की पंडीजीकेँ पएर छूबि‍ प्रणाम करैत छथि‍। पंडीजी असीरवाद दइ छथि‍न।) मोतीलाल-     पंडीजी मोनसँ असीरवाद देबै। गणेश-       हँ यौ, दक्षि‍णे गुणे ने असीरवाद भेटत। (सभ कि‍यो जा रहल छथि‍।) पटाक्षेप। दृश्‍य- चारि‍ (स्‍थान रामलालक घर। रामलालक दुनू पत्नी लक्ष्‍मी आ संतोषी घरमे हुनका सेवा कऽ रहल छथि‍। लक्ष्‍मी पक्षमे दूगो बेटी-एगो बेटा छन्‍हि‍। तथा संतोषी पक्षमे एगो बेटी-दूगो बेटा छन्‍हि‍। छओ भाए-बहि‍न एक्के पब्‍लि‍क स्कूलमे पढ़ए गेल छथि‍।) रामलाल-     लड़की सभ धि‍या-पुता नीक जकाँ घरपर पढ़ै-लि‍खै अछि‍ न? हम तँ भि‍नसर जाइ छी से राति‍येमे अबै छी। पेटक पूजा तँ बड़ पैघ पूजा छै कि‍ने? हम नै पढ़लौं से अखैन पछताइ छी। लक्ष्‍मी-       छौड़ाक लक्ष्‍ण अखैन बड़ नीक देखै छि‍छे, अग्रि‍म जे हुअए। हमरा सभकेँ पढ़ैले कहए नै पढ़ै अछि‍। रामलाल-     छोटकी, अहाँ कि‍छु नै बजै छी। संतोषी-      दुनू गोटे एक्के बेर बाजि‍ देब तँ अहाँ की सुनबै आ की बुझबै? रामलाल-     कोनो तकलीफ अछि‍ की? संतोषी-      जेकरा अहाँ सन घरबला रहतै, तेकरा तकलीफो हेतै आ अहुँसँ होशगर बड़की छथि‍। स्‍वामी, एगो गप्‍प पूछी? रामलाल-     एक्के गो कि‍अए, हजार गो पूछि‍ते रहू। संतोषी-      अहाँ, एहेन चि‍क्कन घरवालीकेँ रहैत दोसर बि‍अाह कि‍अए केलि‍ऐ? रामलाल-     बड़कीसँ बेटा होइमे कि‍छु बि‍लंब देखलि‍ऐ तँए दोसर केलि‍ऐ। संतोषी-      नै यौ, दोसर गप्‍प भऽ सकै छै। रामलाल-     हमरा तँ नै बूझल अछि‍, अहीं बाजू दोसर की भऽ सकै छै? संतोषी-      अहाँकेँ अहाँकेँ अहाँकेँ एगोसँ मोन नै भरल। रामलाल-     बस करू, बस करू, अहाँ तँ लाल बुझक्करि‍ छी। अहाँ तँ अंतर्यामी छी। ओना मोनकेँ जतए दौगेबै, ओतए दौगतै। मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोइ। मन उजि‍यारा जब जब फैले, जग उजि‍यारा होय।। (इसकूल पोशाकमे सोनीक प्रवेश।) सोनी-       पापा, पापा, इसकूलक फीस दि‍यौ। रामलाल-     माएकेँ कहि‍यौ बुच्‍ची। सोनी-       माए, इसकूलक फीस दहि‍न। लक्ष्‍मी-       कत्ते फीस लगतौ? सोनी-       तों नै बुझै छीही छअ गो वि‍द्यार्थीक छअ सए टाका। लक्ष्‍मी-       छोटकी, जाउ, दऽ दियौ ग। संतोषी-      बेस लेने अबै छी। (संतोषी अन्‍दर जा कऽ छअ सए टाका आनि‍ सोनीकेँ देलनि‍ आ फेर पति‍ सेवामे भीर गेलीह।) रामलाल-     छोड़़ै जाइ जाउ आब। अंगना-घर देखि‍यौ। अहुँ सभकेँ कनी काज होइ छै। (दुनू पत्नी चलि‍ गेलीह।) पटाक्षेप दृश्‍य- पाँच (स्‍थान- रामलालक घर। रमाकान्‍त मुखि‍याक संग बलदेब वार्ड सदस्‍यक प्रवेश।) बलदेव-      (दलान परसँ) रामलाल रामलाल भाय। रामलाल-     (अन्‍दरेसँ) हइए एलौं भाय। दलानपर ताबे बैसु। जलखै कएल भऽ गेल। बलदेव-      मुखि‍योजी एलाह, कने जल्‍दि‍ये एबै। रामलाल-     तहन तुरन्‍त एलौं। (हाथ-मुँह पोछि‍ते प्रवेश। प्रणाम-पाती कऽ अन्‍दरसँ दूटा कुर्सी अनलनि‍। रमाकान्‍त आ बलदेब कुर्सीपर बैसलाह मुदा रामलाल ठाढ़े छथि‍।) रामलाल-     मुखि‍याजी, आइ केम्‍हर सूरूज उगलै? आइ रामलाल तरि‍ गेल सरकार। कहि‍यौ सरकार हम केना मन पड़लौं। इनरा आवासबला कोनो गप्‍प छै की? बलदेव-      गप्‍प तँ इएह छै। मुदा पहि‍ने कुशल-छेम, तहन ने अगि‍ला गप-सप्‍प। कहु अपन हाल-समाचार। रामलाल-     अपने सबहक कि‍रपासँ हमर हाल-समाचार बड्ड बढ़ि‍याँ अछि‍। भाय, अपन हाल-चाल कहु। बलदेव-      भाय, एकदम दनदनाइ छै। रामलाल-     आ मुखि‍याजी दि‍शि‍का। रमाकान्‍त-     हमरो हाल-चाल बड़ बढ़ि‍या अछि‍। वएह एलेक्‍शन नजदीक छै तँए पंचायतमे घुमनाइ अावश्‍यक बुझलौं। संगे संग अहुँक काज रहए। रामलाल-     तहन अपने कि‍अए एलि‍ऐ, हमहीं चलि‍ अबि‍तौं। रमाकान्‍त-     देखि‍यौ, जनता जानार्दन होइ छै। पहि‍ने जनता तहन हम। जनता मुखि‍याकेँ बड़ आशासँ चुनै छै। ओइ आशाक पूर्ति केनाइ हमर परम कर्त्तव्‍य छै। रामलाल-     अपने महान छि‍ऐ। अपनेक आगू हम की बजबै? बलदेव-      मुखि‍याजी, कने ओकरो ऐठाम जाइक  छै। हि‍नकर काज जल्‍दी कऽ दि‍यनु। रमाकान्‍त-     तहन दऽ दि‍यनु। (बलदेव बेगसँ बीस हजार टाका नि‍कालि‍ रामलालकेँ देलखि‍न।) रामलाल-     (पाँच सए टाका नि‍कालि‍) मुखि‍याजी, ई अपने राखि‍ लि‍औ। रमाकान्‍त-     नै, ई नै भऽ सकैए। ई अपने रखि‍यौ। हमरा पेट ले बहुते फंड छै। कहबी छै- ओतबे खाइ जइसँ मोंछमे नै ठेकए। रामलाल-     भगवान, एहेन मुखि‍या सगतर होइ छै। बलदेव-      रामलाल भाय, जतए-ततए सुनै छी अहाँक परि‍वारक संबंधमे। तँ मन हर्षित भऽ जाइए। एहेन सुन्‍दर ढंगसँ परि‍वार चलेनाइ आइ-काल्हि‍ असंभव अछि‍। रामलाल-     सभ भगवानक कि‍रपा छनहि‍ आ अपन करतब तँ चाहबे करी। रमाकान्‍त-     हमरा लोकनि‍ जाइ छी। जाउ, अहुँ अपन काम-काज देखि‍यौ। (रमाकान्‍त आ बलदेवक प्रस्‍थान) रामलाल-     धन्‍यवाद बलदेव भाय, धन्‍यवाद मुखि‍याजी एहि‍ना सभ जनतापर खि‍आल रखबै। पटाक्षेप। दृश्‍य- छह (स्‍थान- लखनक घर। मीना अपन बेटी रामपरी आ बेटा कृष्‍णाक संग बैडमि‍ंटन खेल रहल अछि‍। रामपरी-      मम्मी, कसि‍ कऽ मारहीन ने। काँर्क नै उड़ै छौ। मीना-        बेसी कसि‍ कऽ नै लगै छै। कम-सँ-कम बौओ जकाँ बमकाही ने? (मनोजक प्रवेश) मीना-        ओएह, एलौ सरधुआ भांड़ैले। रामपरी-      आबए दहीन ने मम्‍मी। भायजी छथि‍न। मीना-        भायजी छथि‍न। कप्‍पार छथि‍न। काँर्क फूटि‍ जेतौ तँ आनि‍ कऽ देतौ? रामपरी-      मम्‍मी, भायजी कतए सँ आनि‍ कऽ देतै, तोंही कह तँ। आकि‍ पापा आनि‍ देथि‍न। मीना-        पापाकेँ हम जे कहबै, से करथुन। तोहर कहल नै करथुन। रामपरी-      मम्‍मी, ई गप्‍प तोहर नीक नै भेलौ आ पापोकेँ नीक नै भेलनि‍। मीना-       तों पंचैती करैले एलँह की बैडमि‍ंटन खेलैले? खेलबाक छौ तँ खेल नै तँ जो एत्तएसँ। रामपरी-      तोंही सभ खेल, हम जाइ छी। (खीसि‍या कऽ रामपरीक प्रस्‍थान। रामपरीबला बैटसँ मनोज बैडमि‍ंटन खेलए लगैत अछि‍। मीना बएटेसँ ओकरा मारैले छुटैत अछि‍। फेर दुनू माय-पुत बैडमि‍ंटन खेलए लगैत अछि‍।) कृष्‍णा-       मम्‍मी, तोरा दीदी जकाँ खेलल नै होइ छौ। कने पापाकेँ कहबीन सीखा दइले से नै। मीना-        बौआ, पापा हमरा की सि‍खेलखुन, हमहीं सीखा दइ छि‍ऐ। कृष्‍णा-       तेकर माने तों पापासँ जेठ छीही? मीना-        उमरमे भलहि‍ं छोट हएब मुदा अकलमे नि‍श्चि‍ते जेठ। (संतोषक प्रवेश) संतोष-       हमहूँ खेलबै कृष्‍णा। (बैट लऽ कऽ खेलए लगैत अछि‍। झटसँ मीना संतोषक हाथसँ हाथ मोचारि‍ कऽ बैट लऽ लैत अछि‍। टुनकीबला आ मुड़ीमचरूआ कहि‍ बैटसँ मारैले दौगैत अदि‍। संतोष भागि‍ जाइत अछि‍। ओइपर खीसि‍या कऽ कृष्‍णा एक बैट मम्‍मीकेँ बैसा दैत अछि‍।) कृष्‍णा-       तों बड़ खच्‍चर छेँ मम्‍मी। खेलल-तेलल होइ छौ नहि‍येँ आ जमबै छेँ। अखैन संतोष भायजी रहि‍ते तँ खूम बैडमि‍ंटन खेलतौं की नै। मीना-        संतोशबा तोहर भायजी नै छि‍औ। जेकर छि‍ऐ से बुझतै। तोरा ओकरासँ कोनो मतलब नै। कृष्‍णा-       कि‍अए मम्‍मी? उहो तँ हमरे पापाक बेटा छि‍ऐ ने? मीना-        मुदा तोहर मम्‍मीक बेटा नै ने छि‍ऐ। कृष्‍णा-       बुझबीहीन तँ कि‍अए नै हेतै? नै बुझबीहीन तँ हमहूँ-हमहूँ तोहर दुश्मन छि‍औ। मीना-        बकबास नै कर। काल्हि‍ जनमलेँ आ बुढ़बा जकाँ गप्‍प करै छेँ। सभ बात तों अखैन नै बुझबीहीन। आब काल्हि‍ खेलि‍हेँ चल। (बैट-काँर्क लऽ कऽ मीना-कृष्‍णाक प्रस्‍थान।) पटाक्षेप। अंक दोसर दृश्य- एक (स्‍थान- रामलालक घर। संतोषी बि‍स्‍तरपर पड़ल अछि‍। पाँच भाय-बहि‍न इसकूल गेल अछि‍। मुदा सोनी घरेपर अछि‍ सोनीक तबीयत ठीक नै अछि‍।) संतोषी-            सोनी बुच्‍ची, कनी देह दबा दि‍अ तँ? सोनी-       हमरा अपने माथ दुखाइए। तँए इसकूलो नै गेलौं। अखन धरि‍ बासि‍ये मुँहेँ छी। खैर अहाँ तँ छोटकी माए छी। अहाँक अज्ञाक पालन केनाइ हमर परम कर्त्तव्‍य छी। संतोषी       बुच्‍ची अहाँ बुधि‍यार छी ने। (सोनी संतोषीक देह दबाए रहल अछि‍।) साेची-       छोटकी माए, बड़ भुख लागल-ए, कनी खाइले दि‍अ। संतोषी-            हमरा नै हएत। जाउ अपनेसँ लऽ लि‍अ गऽ। सोनी-       एक दि‍न अहीं कहने छेलि‍ऐ, अपनेसँ खाइले कहि‍यो नै लइले। धि‍या-पुताकेँ घटि‍ जाइ छै। तँए हम अपनेसँ नै लेब। संतोषी-      लि‍अ वा नै लि‍अ। हमरा बुते नै हएत देल। अपना देहमे करौआ लागल अछि‍। सोनी-       जाइ छि‍ऐ बड़की माएकेँ कहैले। (सोनी, लक्ष्‍मीकेँ कहैले अन्‍दर गेलीह एम्‍हर संतोषी और गबदि‍आ कऽ पड़ि‍ रहलीह। सोनी आ लक्ष्‍मीक प्रवेश।) लक्ष्‍मी-       छोटकी, छोटकी, छोटकी। सोनी-       अखने जगले छेलै। तुरन्‍ते देखही। गै माए सूतल लोक ने जगैए, जागल की जगतै। लक्ष्‍मी-       (जोरसँ) छोटकी, छोटकी, छोटकीऽ ऽ ऽ ऽ। (संतोषी फुरफुरा कऽ उठै छथि‍।) संतोषी-            की कहलि‍ऐ दीदी? लक्ष्‍मी-       सोनीकेँ अहाँ कि‍अए कहलि‍ऐ, देहमे करौआ लागल अछि‍? संतोषी-            हम से कहाँ कहलि‍ऐ। हम अपना दऽ कहलि‍ऐ जे हमरा देहमे करौआ लागल अछि‍ की। एतबेपर बुच्‍ची भागि‍ गेलीह। सोनी-       अपन बेटाक माथपर हाथ रखि‍ कऽ कहबै? संतोषी-            हम बजबे नै केलि‍ऐ। एतेक आगि‍ कि‍अए उठबै छी सोनी। साेनी-       आगि‍ तँ अहाँ उठबै छी आ लगबै छी। हमरे माथपर हाथ रखि‍ कऽ बाजू तँ। संतोषी-      हँ यै साँच बात कि‍एक ने बाजब। आउ, लग आउ। लक्ष्‍मी-       बूझि‍ गेलौं अहाँ कत्ते साँच बजै छी। अनकर बेटा-बेटी उपरेमे अबै छै आ अपन बड़ कसेब कऽ छै। ि‍नर्लज्‍जी नहि‍तन। झूठ बजैत कोनो गत्तरमे लाजो नै होइ छन्‍हि‍। संतोषी-      ि‍नर्लज्‍जी तँ अहाँ छी जे बेटीक पक्ष लऽ कऽ फेफि‍या कऽ उठै छी। लक्ष्‍मी-       ि‍नर्लज्‍जी ि‍नर्लज्‍जी करब तँ अखैन झोंटा पकड़ि‍ कऽ पोटा ि‍नकालि‍ देब। संतोषी-      कनी देखि‍यौ तँ झोंटा पकड़ि‍ कऽ। (रामलालक प्रवेश) रामलाल-     अहाँ सभ कतीले हल्‍ला-फसाद करै छी? चुपै जाउ। छोटकी, की बात छै? संतोषी-      दुनू माइ-धीन हमरा कहैए, झोंटा पकड़ि‍ कऽ पोटा नि‍कालि‍ देब। रामलाल-     बड़की, अहाँ से कि‍अए कहलि‍ऐ? लक्ष्‍मी-       हँ हँ, हमरा सींग बढ़ि‍ गेलै तँए दुआरे। ओकरे पुछि‍ऐ तँ। रामलाल-     की बात छै छोटकी? संतोषी-      ओकरे सभकेँ पुछि‍यौ। रामलाल-     की भेलै बुच्‍ची? सोनी-       हमरा माथा दुखाइ छेलए। इसकूलो नै गेलौं। बासि‍ये मुँहेँ रही। छोटकी माएकेँ कहलि‍यनि‍ खाइले दि‍अ। तँ ओ कहलनि‍, अपनेसँ लऽ लि‍अ। देहमे करौआ लगल अछि‍। ई बात बड़की माएकेँ कहलि‍यनि‍ तँ ओ माएसँ लड़ैले तैयार छथि‍। रामलाल-     हमरा तोरापर वि‍श्वास अछि‍ बुच्‍ची। तों फूसि‍ नै बाजि‍ सकै छेँ। हम बात बूझि‍ गेलौं। छोटकी, सोलहन्नी अहाँक गलती अछि‍। बड़कीसँ अहाँ लगती मानू। नै तँ एहेन घारवाली हमरा नै चाही। अपन जोगार देखू। जेहने हमर परि‍वारक सुबेवस्‍थाक चर्चा सौंसे गाम होइ छेलए तेहने परि‍वारक प्रति‍ष्‍ठाकेँ माटि‍मे मि‍लबए चाहैत अछि‍। तुरन्‍त सोचि‍ कऽ बाजू, की चाहै छी? संतोषी-      (कि‍छु सोचि‍ कऽ, बड़कीक पएर पकड़ि‍) हमरेसँ गलती भेलै। आब गलती कहि‍यो नै हेतै। रामलाल-     बड़की, आइ माफ कऽ दि‍यनु। आइ दि‍नसँ गलती नै करतै। सदि‍खन मीलि‍ कऽ रहै जाइ जाउ। “जहाँ सुमति‍ वहाँ सम्पत्ति‍ नाना। जहाँ कुमति‍ वहाँ वि‍पत्ति‍ नि‍धाना।” पटाक्षेप। दृश्‍य- दू (स्‍थान- लखनक घर। लखन दलानपर बैसल छथि‍ आ पारि‍वारि‍क स्‍थि‍ति‍क संबंधमे सोचि‍ रहल छथि‍।) लखन-       की करी नै करी, कि‍छु ने फुराइत अछि‍। बेटी रामपरी सेहो ताड़ जकाँ बढ़ि‍ रहल अछि‍। आमदनी कम छै आ परि‍वारमे खर्चा बड़ छै। (मनोज आ संतोषक प्रवेश।) मनोज-       पापा, बहुते छौंड़ा सभ इसकूल जाइ छै पढ़ैले। हमहूँ सभ जाएब। हमरो सभकेँ नाम लि‍खा दि‍अ ने सरकारी इसकूलमे। लखन-       नाम लि‍खबैमे पाइ लगतै, कि‍ताब-कोंपीमे पाइ लगतै, टीशन पढ़ैमे पाइ लगतै। हमरा ओतेक सकरता नै अछि‍। हमरा बुते नै हेतौ। पहि‍ने पेटक चि‍न्‍ता कर। संतोषी-      पापा, रामपरी आ कृष्‍णा जे पब्‍लि‍क इसकूल जाइ छै से? ओकरा सभकेँ पाइ नै लगै छै? लखन-       से मम्‍मीसँ पुछही गऽ। पाइ कोनो हम दइ छि‍ऐ। संतोषी-      मम्‍मीकेँ बजा कऽ एत्तऽ आनू। कनी अपनेसँ कहबनि‍। लखन-       जो बजा आन। (संतोष शीघ्र मीनाकेँ बजा कऽ अनैत अछि‍।) मीना-        की कहै छी? लखन-       की कहब। मनोज-संतोष कहैए हमहूँ पढ़ब, से की करबै। मीना-        कप्‍पार करबै, अंङोरा करबै, धधकलहा करबै। लखन-       एना कअए बजै छी? बोलीमे कनि‍यो लसि‍ नै अछि‍। हरदम निशाँमे चूर रहै छी। मीना-        बड़ फटर-फटर बजै छी। मुँह बन्न करू नै तँ बूझि‍ लि‍अ। जाउ अहाँ एत्तएसँ। एकरा सभकेँ हम जबाब दइ छि‍ऐ। (लखनक प्रस्‍थान) की कहलेँ मनोज? मनोज-       मम्‍मी, हमरो सभकेँ इसकूलमे नाम लि‍खा दि‍अ बहुते छौड़ा सभ इसकूल जाइ छै। मीना-        बड़ पढ़ुआ भऽ गेलेँ तो सभ? गाँड़ि‍मे गूँह नै माए गै हग्‍गब। बि‍ना ढौए के पढ़ाइ छै की खेनाइ होइ छै? पेट भरै छौ तँए फुराइ छौ। एत्तऽ सँ अक्खैन भाग। नै तँ बढ़नी देखै छीहीन। कमा कऽ लाऽ तँ खो वा पढ़। नै तँ घर नै टपि‍ सकै छेँ तों सभ। मनोज-       मम्‍मी, हमरा सभकेँ कमाएल हेतै। जन मे के रखतै? मीना-        नै कमाएल हेतौ तँ भीखे मँगि‍हेँ आ ओम्‍हरे खँहिहेँ। संतोष-       अपना बेटा-बेटीकेँ पढ़ाबै ले होइए आ हमरा बेरमे की होइए? मीना-        भगलेँ सरधुए सभ की? (बढ़नी लऽ कऽ मारैले दौगल। संतोष भागि‍ गेल। मनोज पकड़ा गेल। “पढ़ुआकेँ सार अछि‍ भगलेँ एत्तए से” कहि‍ कहि‍ मनोजकेँ मीना बढ़नीसँ झँटलक। अन्‍तमे हाथसँ छूटि‍ कऽ कनैत-कनैत भागि‍ गेल।) पढ़ैए। फोकटेमे पढ़ाइ होइ छै। (हकमैत-हकमैत) ऊपरेमे अल्हुआ फड़ै छै। पटाक्षेप ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। कुमार भास्कर लघुकथा लछमिनीया अनमन सासुसे सनके लछमिनीयाँ ! बूढिया–पुरैनियाँ सनके सबटा छिच्छा भाषा नवकनिए सऽ छै। साउस अजिया सबउस सब बड़ काया-कष्टसऽ धनवीत अरजने छै, आ ओहिू सऽ बेसी जे ओ सब ओकरा बचा संयोगि कऽ रखने छै। दै-दियादमके सब खेत-पथार विका गेल छै आ एकर बूढिया सब रौदियो अकालमे, शादीयो विवाहमे एकौ ओंठा जमीन बेचने नै छै। तेसरमे अपन सबटा गुण लुरि एकरा पढ़ा कऽ पास करा देने छै। तैं ईहो आइ एतेक कौजली चौतरी। ऐ बातके गुण ई अपन दुनू  पुतौहके पुस्तैनीके रुपमे दिअ चाहै छै, से पढ़लाही–लिखलाही सब अपने ढाठी चलि कऽ, एकरा बात पर काने-ध्यान नै दै छै। जेहने रहै लछमिनीयाँ साउस, बात–बात पर फकरा सुनबऽ बाली, तेहने ढाठी–छिच्छा एकरो छै।  ओहिना बात-बात पर मुँह सऽ फकरा-फदका निकलि जाइ छै। ओना लछमिनीयाँके घरबला परफेसर, बेटा कमैआ तैयो लछमिनीयाँके बड़ दुख। दुख खाय पियऽके, पहिरऽ–ओढ़ऽके नइ, दुख काज–राजके। जनकपुरमे रहए तऽ गामके आ गाममे रहए त जनकपुरके चिन्ता। इहे दुख रहै छै। ‘आइ गामके सब आम होतै तोड़ि लेने, सब रवी–राई होतै चरा–लेने, आ कहि जे साँचे किछ तोड़ि लेने, चरा लेने रहए त जतै सऽ देखेए ततैसऽ शुरु भऽ जाए होलियाबऽके— “कहै छलियै मरदबा के हम आइये गाम जाइ छी तऽ रोकि देलक, नइ हमरा मिटिङ्गमे जाए पड़तै कनि धोती–कुरता धो दिअ। झुठोके मिटिङ्ग–माटिङ्गमे जाइत रहैए। एको रुपैया त दै नै हइ आ ओहि मिटिङ्गला दू–दू दिन अगते सँ अपनो लिखा–पढ़ी करैत, फोन–फान करैत, बेहाल रहैय आ हमरो धोती–कुरता त इ खोजी दे त ऊ निकालि क ध दे करैत–करैत पेड़ने रहैय। हम काल्हिए आएल रहिती त अते राइ–छिइ होइत, जेहे खैति सेहो त कया–मनुवा जुड़ैति से नइ। एगो छरो जे हइ ओकरा कहैत रहै छियै से रे बौआ जो कनी गाछी–विरछी, रवी–राइ सव देखलीहे आ तुरन्ते अपन चलि अइहे से ओकरा गाम अबैत तेना बाघ गिरैत रहै हइ कि कथी से नै जाइन। लछमिनीयाँके घरबला परफेसर हइ तहुके ओकरा बड़ दुख। ओकरा हिसाबे जते काले मिटिङ्ग करतै ओते कालमे त खेत जोता लेतै किछ वाग क देतै जाहिसऽ किछ उवजो-बारी होतै, ओकरे बेचिकऽ ढौओ रुपैया होतै। अहिना सवदिन जकाँ कुहि होइत भनभनाइत जनकपुर आएल। घर लग पहुचते घरक आगू–पाछुमे रहल गाछ, लत्ती सभके ठेकानैत, बिचारैत आएत आ  कहूँ कोइ किछु तोड़ने त नइ हए। आ कहि जे कोनो किछु घटल रहल तऽ घरके दुहाइरे सँ बाजऽ के शुरु करऽ लागल “देखी कहि क गेल छलियै एकरा सबके अपन अगोरा पछोड़ा तकै रहिये। तैयो अतेक लोक घरमे हइ आ एगो लक्ष्मिनिया नै हइ त सब ‘जरम–जरी सब चरा लेलक ! सबहे तोड़ि लेलकै”। सबटा हमर कएल–धएल नाश भऽ गेल। अते सुनिते बेटा–पुतहू सब हाँइ–हाँइ कऽ दौगल आब की भेलै? जेठकी पुतहू कहै— हम तकिते छीऐ। कहाँ,  केउ नै किछुमे भिड़लैए। —“नै कोइजे भिरलै त ओइ लुहरीमे एगो कम केना हइ।” लक्ष्मिनिया बाजल “गाम जाए बेरमे हम देख कऽ गेल छली  तऽ तिनटा छलै आ अखनि दुइएटा हइ”? बूढिया आरो नै खिसिया जाए तै डरे छोटकी पुतहू बाजल— ”ए उ त हम ओकरा सरियाबऽ गेलिऐ तऽ एगो डाढ़ि टुटि गेलै । तब जाऽ कऽ लछमिनीयाँ किछ ठण्ढाएल। भन भेलै जे तों अपने सरियाबऽ गेल छला, हे रनियाँ! नाँ गुणे लछमिनियाँ अतेक बेहाल बेटे–पुतहु ला रहए। किछ लाबए त बिछल–बिछल घरबला, बेटा–पुतहू लागि राखए।  अपना कनहे–कोतरे, बसीआएल, बिगरलहे खाँ लिए। बेटाके नोकरी दोसर सहरमे भेलै त चारि–पाँच दिन अगतेसँ सर–समानके मोटा, बोरा ओरिआबऽ लागल। नून–हरदी, दालि–चाउर, बर्तन–बासन, ओछान–बिछान माने कते कहू घर परिवारमे जे जतेक चिउज-वित लगै छै तेकरा सबके ओरिआयोन बुढिआ फकरा पर फकरा पढैत कएने गेल। “एल लएली बेल लएली, छ घैला तेल लएली........ । नुन तेल सँ लऽ कऽ कपड़ा–लत्ता तक ओरिआ–ओरिआ धरऽ लागल जे कहि किछ बेटा–पुतहूके छूटि नए जाए। बेटा–पुतहू कहए कि जे चिज-वित छुटि जएतै से ओतै किन लेवै। लछमिनिया अनमनएले “ले त धर तोरा ओतै सब चिज भेटतौ त” कहलक। लछमिनीयाँके सैतल किछ कहि छुटे, मात्रे एगो घर दुहारि पोछ लागि पुरान–धुरान कपड़ा कतऽ स लाउँ। बेटा सोचलक आब घरेसऽ कोइ अएतै त ओकरे स मङा लेव जे माइके कहि दै छियै। पुतहू कहे नइ माइ कहि पित्ता जएतै। बेटा कहए एह नइ पित्तैतै। बेटा लछमिनीयाँके फोन कएलक “माइ कानो पुरान–धुरान कपड़ा घर दुहारी पोछ ला चाहि केउ अएतै त पठा दिहे” । लछमिनीयाँ बाजके शुरु कएलक “उँ तहिया कहलियौ ठकानी–ठेकानी कऽ समान सव राखऽ त नइ आखिर छुटिए गेलौ। जेहो फाटल–पुरान नुआ छलै जे हम जायनगरमे किनने रहियै सेहोके तऽ दोकानबला ठकिए लेने रहए से बला नुआके त काल्हिए ओइ बर्तनवालीसँ बदलि लेलिऐ। तेहन चुट रहै उहो बर्तनवालीसे ओतेकटाके नँ सायमे किनने रहि तेकरा एगो कटोरा मात्रे देलक उहो कते झगड़ि तब जाऽ कऽ देलक। तों पहिने कहिते। अच्छा थमः अइ छराके गंजी हइ जे उँ नै पेन्है हइ जेकरा कहै बड़ पुरान भऽ गेलै से हम पठा देवौ। आब राख फोनके बिल वेस उठतौ। एम्हर लछमिनीयााँ के बेटा जे आधा घंटा सँ पुरान कपड़ा ला फोन कएने छल से कहलक “अच्छा होतै”, ओकरो आब कोनो दोसर विषयपर किछु पुछके मन नै भेल आ फोन राखि देलक। आ अपन कनिया जे तखनसऽ लछमिनिया माइ कि कहलकै से बुझऽ लेल उत्सुक छल। तकरा दिसी घुमि कऽ अपन जेबी मेके रुमाल ओकरा दऽ कऽ कहलक “होउ ताबे अहि लऽ कऽ काम चलाउ”। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.ओम प्रकाश-भोथ हथियार/विहनि कथा- बीस टाका २.शत्रुधन प्रसाद साह- मैथिली महिला आ जिद्दी ३.कैलास दास-महिलाक प्रेरक कथा संग्रह ‘जिद्दी’ १ ओम प्रकाश १ भोथ हथियार श्री सुरेन्द्र नाथक कहल मैथिली गजलक संग्रह अछि "गजल हमर हथियार थिक"। ऐ पोथी मे हुनकर अडसठि टा गजल प्रकाशित भेल अछि। ई संग्रह २००८ मे आएल अछि जकर आमुख श्री अजीत आजाद जी लिखने छथि। ऐ पोथी केँ आदि सँ अन्त धरि पढबाक बाद हमर यैह अभिमत अछि जे गजलक व्याकरणक दृष्टिसँ ऐ संग्रह मे अनेको कमी अछि, जाहि सँ बचल जा सकैत छल। पृष्ठ संख्या १३, ६७ आ ७० परहक गजल मे चारिये टा शेर छै, जखन की कोनो गजल मे कम सँ कम पाँच टा शेर हेबाक चाही। संग्रहक कोनो गजल बहर मे नै अछि। हमर ई स्पष्ट मनतब अछि जे गजलकार केँ प्रत्येक गजल मे बहरक उल्लेख करबाक चाही आ जँ आजाद गजल कहने छथि तँ इहो स्पष्ट रूपेँ लिखबाक चाही। ऐ पोथी मे काफियाक गलती भरमार अछि। कतौ कतौ तँ ई बूझना जाइ छै जे गजलकार बिना काफिया आ रदीफक मतलब बूझने गजल कहबा लेल बैस गेल छथि। एकर उदाहरण पृष्ठ १५ परहक गजल पढबा पर भेंट जाइ छै। ई तँ हम एकटा उदाहरण कहि रहल छी। आरो गजल ऐ दोख सँ प्रभावित छै, जतय काफियाक नियमक धज्जी उडा देल गेल अछि। जेना पृष्ठ १८, १९, २०, २१, २७, २९, ३१, ३४, ३५, ३६, ३९, ४०, ४१, ४३, ४४, ४५, ४६, ४७, ५२, ५३, ५६, ५७, ५८, ६६, ६७, ६८,७०, ७१, ७२, ७४, ७५,७७, ७९ आदिमे काफिया तकलासँ नै भेंटैत अछि आ ऐ खोजमे मोन अकच्छ भऽ जाइत छै। ओना आनो पृष्ठ काफिया दोखसँ ग्रसित अछि, मुदा ई उदाहरण हम ओइ पृष्ठ सभक देने छी, जतय काफियाक झलकियो तक नै भेंटै छै। मैथिली गजल आइ जाहि सोपान पर चढि चुकल अछि, ओइ हिसाबेँ ऐ तरहक रचना गजलक नामसँ स्वीकृत होइ बला नै अछि। कियाक तँ बिना दुरूस्त काफियाक गजल नै भऽ सकैत अछि। ई संग्रह "अनचिन्हार आखर" युगक शुरूआत भेलाक बाद लिखल गेल अछि, तैँ हमरा ई आस छल जे गजलकार कमसँ कम काफिया आ रदीफक नियमक पालन ठीकसँ केने हेताह, कियाक तँ "अनचिन्हार आखर" जुग मे आब गजलक व्याकरणक सभ नियम चिन्हार भऽ चुकल अछि। मुदा गजलकार काफिया आ रदीफक नियम पालन करबामे पूरा असफल रहलथि। ओना ऐ संग्रहक काफिया दोखकेँ पोथीक आमुख लेखक श्री अजीत आजाद पोथीक आमुखमे दाबल आवाजमे स्वीकार करैत कहै छथि जे कतेको ठाम काफिया "गडबडायल सन" बुझना जाइत अछि। ओना ई अलग गप थिक जे काफिया "गडबडायल सन" नै अपितु पूरा पूरी गडबडायल अछि। फेर श्री आजाद ऐ गलतीकेँ झाँपबा लेल इहो कहैत छथि जे "रचनाकारकेँ अपन सीमासँ बाहर आबि शब्द-व्यापार करबाक चाही"। मुदा गजलक अपन व्याकरण छै, जकर पालन केने बिना रचना गजल नै भऽ कऽ पद्य मात्र रहि जाइत छै। गजल आ कविताक बीचक अंतर जे अंतर छै, से ऐ तरहक तर्कसँ समाप्त नै भऽ जाइ छै। काफिया, रदीफ आ गजलक व्याकरणक अनुपालन नै हेबाक कारणेँ श्री सुरेन्द्र नाथक ई संग्रह गजल संग्रह नै भऽ कऽ एकटा पद्यक संग्रह भऽ कऽ रहि गेल अछि। संवेदनाक स्तर पर किछु रचना नीक अछि आ जँ गजलकार गजलक व्याकरण पर धेआन देने रहतथिन्ह, तँ नीक गजल लिखि सकैत छलाह। गजलकारक ई पहिलुक मैथिली गजल संग्रह बहुत आस तँ नै जगबैत अछि, मुदा हुनकर संवेदनात्मक प्रतिभा देखैत हम ई आस जरूर करै छी जे ओ गजलक व्याकरणक पालन करैत आगू नीक गजल कहताह आ "गजल हमर हथियार थिक" केँ चरितार्थ करताह। गजल तँ हथियार होइते अछि, मुदा बिनु काफिया, रदीफ आ बहरक नियमक पालन केने रचना गजल नै होइत अछि आ भोथ हथियार भऽ जाइत अछि। पद्यक हथियार पर काफिया आ बहरक सान चढल हुनकर नब गजल-हथियारक प्रतीक्षा रहत। २ विहनि कथा बीस टाका हम भोरे भोर उठि कऽ अपन बगीचा मे फूलक गाछ सब केँ पटबै छलहुँ। करीब सात-सवा सात बाजैत हेतै। तावत सडक दिस सँ हो-हल्ला सुनायल। हमर निवास मुख्य सडकक काते मे अछि, तैं सडक पर होय बला सब घटना आ दुर्घटना देखाइत आ सुनाइत रहैए। हम हल्ला सुनि सडक दिस ताकलहुँ। देखै छी जे हमर फाटकक ठीक सामने मे एकटा मिनी ट्रक लागल अछि आ ओकरा आगाँ एकटा सिपाही मोटरसाईकिल लगा कऽ ठाढ अछि। ओ सिपाही ट्रकक ड्राईवर केँ गरियौने जाईत छल आ ट्रक जब्त करबाक धमकी सेहो दऽ रहल छल। सिपाही कहलक- "नो इंट्रीक टाईम भऽ गेल छै आ तों सब ट्रक शहर मे ढुका देलही। आब चल थाना, जब्ती हेतौ ट्रकक। तोरा सबकेँ बूझल नै छौ जे सात बजेक बाद नो इंट्री भऽ जाइ छै।" ट्रक पर पाछाँ मे एकटा महीस छल आ ओइ महीसक संग एक गोटे ठाढ छल जे कने कडगर भऽ बाजल- "यौ सिपाही जी, एखनी सात बाजि कऽ पाँचे मिनट भेल छै आ हम सब शहर मे जखन ढुकल छलियै तखनी पौने साते बाजै छलै। आब ई नो इंट्री कोना भऽ गेलै। शहर मे ढुकबा काल ओतुक्का सिपाही जी केँ नजराना सेहो देने छियै, अहाँ मोबाईल सँ फोन कऽ कऽ बूझि लियौ।" आब तँ सिपाही जे बमकल से नै पूछू। सोझे ड्राईवर लग गेल आ बाजल- "पाछाँ मे ओकील चढेने छी की? सार हमरा कानून झाडैए। ओकरा तँ जे हम करबै से केलाक बादे बूझतै ओ .................., तू चाभी ला, ट्रक जब्त हेतौ। सात बाजि कऽ दस मिनट भऽ गेल छै आ नो इंट्री मे ट्रक ढुका कऽ कानून छाँटै जाइए।" ड्राईवर ऐ लाइनक पुरान खेलाड छल। ओ हाथ जोडैत कहलकै- "सरकार, कथी लए तमसाई छी। ओ मूर्ख छै। अहाँ हमरा सँ गप करू ने। हे ई लियऽ दस टाका चाह पानक खर्चा आ हमरा जाई दियऽ बड्ड दूर जेबाक छै।" सिपाही कने नरम होईत ओकर हाथक टाका दिस लुब्धता सँ ताकैत कहलक- "हे रौ तू होशियार बूझाईत छैं, मुदा दस टाका सँ काज नै चलतौ। बड्ड महगी छै, बीस टाका निकाल।" ड्राईवर बाजल- "पछिलो चौक पर पाई लेलखिन्ह सिपाही जी आ अगिलो चौक पर लेबे करथिन्ह। एकटा महीसक पाछाँ कतेक जगह काटब अहाँ सब। सरकार पएर पकडै छी, अहाँ एहि सँ काज चला लियऽ।" सिपाही गरमाईत कहलक- "चल थाना। टाईम खराप नै कर। बोहनी बेर मे भोरे भोर सबटा नाश नै कर। तोहर दिमाग ठेकाना पर नै छौ।" आब ओ ड्राईवर बूझि गेल रहै जे ई सिपाही मानै बला नै छै। ओ तुरत बीस टाका निकाललक आ सिपाही दिस बढेलक। सिपाही चारू कात देखैत मुट्ठी मे बीस टाका दाबलक आ चेतावनि दएत कहलक- "जो भाग जल्दी, तोहर नसीब ठीक छौ। बडा बाबूक नजरि मे जँ आबि गेलही बाउ तँ ओ बिनु एक सय केँ नै छोडथुन्ह। हुनकर मौर्निंग वाकक समय भऽ गेल छैन्ह। आबिते हेथुन्ह केम्हरो सँ।" ई कहैत ओ सिपाही अपन मोटरसाईकिल इस्टार्ट कएलक आ विदा भेल आ ट्रक सेहो दस मिनटक घेंघाउज आ बीस टाकाक दक्षिणाक बाद गन्तव्य दिस चलि देलक। २ शत्रुधन प्रसाद साह मैथिली महिला आ जिद्दी

मैथिली भाषामे पुस्तक प्रकाशनक अभाब रहल समयमे युवा पत्रकार सुजीत कुमार झा मैथिली साहित्यक क्षेत्रमे एकटा नव आयामक रुपमे स्थापित भऽ रहल छथि । पत्रकारिता सन व्यस्त पेशा सँ जुड़ल अवस्थामे सेहो साहित्यक क्षेत्रमे सेहो डेग राखव अपने आपमे कम भारी बात नहि रहल अछि । ओतबे नहि तीन–तीन महिनामे पुस्तक प्रकाशन करवाक उद्घोष करव आ सफलता सेहो प्राप्त करब आजीगुजी बात नहि अछि । पहिल कथा संग्रह ‘चिडै’क माध्यम सँ मैथिली साहित्यमे प्रवेश कएने सुजीतक दोसर कृति ‘रिपोर्टर डायरी’ आ एकर किछुए दिनमे प्रकाशित भेल कथा संग्रह ‘जिद्दी’ सेहो ओतबे लोकप्रिय रहल अछि । जिद्दीक पहिल कथा “फुल फुलाइए कऽ रहल” कथामे मैथिली नारी संग भऽ रहल व्यवहारकँे प्रष्ट रुपमे देखाओल गेल अछि । एहि कथामे महिला संग हुनक पति झुठक नाटक कऽ विवाह करैत छथि मुदा पतिक वास्तविक अवस्था आ हैसियत देखलाक बाद कथाकँे नायिका अन्तरद्वन्द्वमे परैत अछि मुदा अन्तमे गम्भीर भऽ सोँचलाक बाद महत्वपुर्ण निर्णय लऽ हुनक पतिद्वारा देखल गेल सपनाकँे पुरा करय ओ सफल भेल छथि । ई कथा पढलाक बाद हमरा काली दास स्मरण आबि जाइत छथि । हुनको जीवनकेँ महत्वपूर्ण बनाबएमे हुनक पत्नीक महत्वपूर्ण भूमिका रहल अछि । मिथिलाञ्चलक कतेको व्यक्तिकेँ काली दास वनाबएमे एखनो हुनकर कनिया सहायक भऽ रहल अछि । तहिना ‘नव व्यापार’ कथामे रोगी पात्र जितेन्द्र प्रसाद आ आधुनिकताक फैशनमे डुबल कनिया बीचक अवस्थाकँे स्पष्ट चित्रण अछि । एहि कथाक माध्यम सँ परिवारिक कलह आ कथित आधुनिकता परिवारकेँ तहसनहस कऽ सकैत अछि तएँ परिवारमे मेलमिलापक वाताबरण होबए पर जोड देल गेल अछि । तेसर कथा ‘खाली घर’ परिवारिक जीवनमे होबयबला उतार चढाब आ उथल पुथलकेँ देखाओल गेल अछि । खाली घर कथामे परिवारिक जीवनक महत्व नीक जेकाँ कथाकार देखाबए सफल भेल छथि । जोशमे होस नहि गुमाबक चाही एहि कथाक संदेश अछि । ‘लाल किताव’ कथामे समाजक पुरान सोच आ भुतप्रेत प्रतिकँे विश्वासकँे सेहो देखौने छथि । मुदा सुजीतक कहबाक अन्दाज गजब अछि । जिद्दी कथामे एकटा महिलाक महत्वकाँक्षा आ ओहि सँ उत्पन्न होबयबला परिस्थितिक देखौने अछि । तएँ ओहिठाम हुनक माए अपन ईच्छाकेँ पुरा करय लेल बेटीकेँ आगा बढबैत छथि । अभिभावककेँ धियापुतापर नियन्त्रण आवश्यक अछि ई संदेश करिव करिव एहि कथापर लागु होइत अछि । मुदा कथाकार ई स्थिति महिलेपर किए चुनलथि से नहि बुझिसकलहुँ । ओ महिलाकेँ बेटाकेँ सेहो एहि घटनामे सहभागि करा सकैत छलथि । ‘निष्ठा की देखाबा’ कथा समाजमे आधुनिकताक नाममे पसरल विकृतिकँे नीक जेकाँ प्रस्तुत करय सफल भेल छथि । एहि ठाम महिलाक अपन पतिक मृत्यु सँ बेसी पतिक मृत्युक बाद कोना सुरक्षित आ नीक जेकाँ रहब ताही बातक चिन्ता रहैत छन्हि । तहिना ‘केहन सजाय’ कथा सेहो बहुत नीक अछि । एहि कथामे समाजमे रहल अपराधी सभ उपर होबए बला सजाय आ देशक कानुनी व्यवस्थाके देखावय खोजने अछि । तहिना ‘मेनका’ आ अन्य कथासभ सेहो एक पर एक रहल अछि । कोनो कथा आलोचना करय जेहन नहि अछि । सुजीतक कथा संग्रहमे रहल भाषा शैली, कथाक बनाबट बहुत नीक अछि आ आम मैथिली प्रेमी सभक लेल बहुत बेसी लोकप्रिय कथा संग्रह बनए से आशा करैत छी । ओना हमरा विश्वास तऽ अछिए । मैथिली भाषाक कितावक अभाब रहल समयमे आबि रहल सुजीतक कथा संग्रह सभ अहिना लोकप्रिय बनैत रहत से कामना अछि । एहि सँ मैथिली साहित्यप्रति युवा सभ प्रेरित तऽ हेबे करत संगहि मैथिली पाठककेँ संख्यामे सेहो बढोत्तरी हएत । सुजीतक चारिम कृतिक प्रतिक्षामे हमरा तऽ रहबे करत । लेखक खोज पत्रकारिता केन्द्र काठमाण्डू सँ आवद्ध छथि । ३ कैलास दास पत्रकार, जनकपुरधाम महिलाक प्रेरक कथा संग्रह ‘जिद्दी’

समाजके परिपक्व, विकृति आ विसंगति रहित वातारणक निर्माणमे साहित्यके महत्वपूर्ण योगदान होइत अछि । हमरा एतेक भूमिका लिखएके पाछु मैथिली भाषाक युवा साहित्यकार एवं पत्रकार सुजीत कुमार झा तेसर कृति कथा संग्रह ‘जिद्दी’ पढ़लाक बाद लागल । हुनकाद्वारा लिखित कथा संग्रह ‘जिद्दी’मे १२ टा कथा राखल गेल अछि । ओना कथा लिखबाक काज गहन अध्ययन चिन्तन आ लम्बा समयक साधना बिना सम्भव नहि होइत अछि । मुदा कथा लिखैतकाल लेखककेँ लेखन समय सन्दर्भ, सामाजिक वातावरण आदी इत्यादिसभकेँ ध्यान देबए पड़ैत अछि । ताहिमे युवा पत्रकार तथा कथाकार सुजीतकुमार झा लगभग सफल देखल गेल छथि । ओ एकटा कथाकार मात्र नहि छथि, विभिन्न सञ्चारमाध्यममे काज कऽ कऽ अनुभव प्राप्त करवाक गन्ध एहि कथा संग्रहमे देखल गेल अछि । कथा संग्रह ‘जिद्दी’ मनोवैज्ञानिकढ़ङ्ग सँ सत्यक खोजी करैत अछि । प्रत्येक कथाकेँ एहिना बढाओल गेल अछि जे पाठक पढैत—पढैत आब आगा कि हएत कहैत आश्चर्यमे पड़ि जाइत अछि आ कथाक अन्त होइत अछि । डा. राजेन्द्र विमलक शब्दमे सुजीतक कथाक घटना परिघटना ज्यामितिय चित्र जेकाँ एक दोसरकेँ कटैत, ओझरबैत सोझरबैत आगा बढैत रहैत अछि । कथाक तीर सनसनाइत जाइत अछि आ अर्जूनक लक्ष्य भेद जेकाँ सुगाक आँखिमे मात्र भेदन करैत अछि । ‘फूल फुलाइए कऽ रहल’ कथा उच्च कुलशील, सुशिक्षिता नायिका पिंकी अन्तरद्वन्दमे फसल रहैत अछि । पिंकी एमए पास कएने अछि । बेटी कतबो पढल लिखल किए नहि होइक दोसरकेँ घरमे जाए पड़ैत छैक वएह बुझि बेटी बेसी पढाबएकेँ आवश्यकता ई समाज नहि बुझैत अछि । मुदा पिंकीक मायबाबु बेटा बेटी समान होइत अछि कहि एहि प्रथाकेँ तोडवाक प्रयास कऽ अपन बेटी पिंकीकेँ एमए धरि पढबैत अछि । जखन पिंकीक मायबाबु विवाहक लेल समतुल्य बरक खोजी करैत छथि तऽ लडका पक्षक अभिभावकसभ पिंकीक पढाइक महत्व नहि बुझि दहेज मांगैत अछि । पिंकीक मायबाबु मांग अनुसार दहेज नहि दऽ सकलापर पिंकीक विवाहक उमेर वितैत जाइत अछि । एक दिन पिंकीक बाबु रेल यात्रा कएने रहथि । ओहि क्रममे स्वजाति युवा सँ भेटघाट होइत अछि आ ओ लडका अपने सहायक स्टेशन मास्टर रहल परिचय दैत अछि । पिंकीक माय बाबु पिंकीक सम्बन्धक चर्चा ओ लडका सँग करैत अछि आ सहायक स्टेशन मास्टर रहल लडका ओ कथा स्वीकार करैत अछि । इम्हर पिंकी सेहो सहायक स्टेशन मास्टर सुनिकऽ अपने भाग्यमानी छी समझि हर्षित रहैत अछि आ विवाह सेहो होइत अछि । किछु महिनामे पिंकीकेँ सभ यथार्थ जानकारी भऽ जाइत अछि । जे लडका हुनका सँ सहायक स्टेशन मास्टर कहि कऽ विवाह कएने रहैत अछि अपन सम्पूर्ण समर्पण कएने रहैत अछि ओ लडका स्टेशन मास्टर नहि एकटा साधारण पैटमैन रहैत अछि । सुनलाक बाद पिंकी किछु समयक लेल क्षतविक्षत भऽ पागल जेकाँ करय लगैत अछि । ओकरा आँखि सँ निन्न गाएब भऽ जाइत अछि आ रात भरि सोचिते रहि जाइत अछि । पिंकी अपन मोनमे ठानि लैत अछि जे धोखेबाज लडका संग नहि रहब ? व्याकुल भऽ जाइत अछि । रातभरि ओ नहि सुतैत अछि । फेर भोर होइते सोचैत अछि आब हम कि करु ? सम्बन्ध विच्छेद कएलाक बाद कतए जाउ ? घरक लोकसभ कि कहत ? एहिमे मायबाबुक कि दोष ? धीरे–धीरे हिम्मत जुटा संकल्प लैत अछि केहनो भेलाक बादो अपन श्रीमानकेँ स्टेशन मास्टर बनाए कऽ छोडब । हुनक श्रीमान् एसएलसी धरि मात्र पढल रहैत अछि । हुनका क्याम्पसमे नाम एडमिशन करा अपनो एकटा बोर्डिङ्ग स्कुलमे नोकरी करय लगैत छथि । सात वर्षमे ओ श्रीमानकेँ एमए पास करबैत अछि तकरबाद हुनका स्टेशन मास्टरमे नियुक्त होइत अछि । सात वर्षमे हुनकासभकेँ एकटा बेटा सेहो होइत अछि । ई कथा पढलाक बाद काली दासक घटना स्मरण अबैत अछि । काली दासक सेहो प्रेरणाक स्रोत कनिए छल ।एहि कथामे सेहो करीब—करीब एहने संदेश रहल अछि । ‘नयाँ व्यापार’ कथामे रोगग्रस्त नायक जितेन्द्र प्रसाद आ महत्वकाँक्षी हुनक श्रीमती बीचक अवस्थाकेँ चित्रण कएल गेल अछि । अतिमहत्वाकाँक्षाक कारण लोक कतए चलि जाइत अछि से एहि कथामे देखाओल गेल अछि । तहिना तेसर कथा ‘खाली घर’मे परिवारिक जीवनमे होबएबला उथल—पुथलकेँ बढिया सँ चित्रण कएल गेल अछि । संगहि एकर निष्कर्ष परिवार संस्थाकेँ बढाओल गेल अछि । एहन कथा ‘आर्दश’मे सेहो अछि । विवाह संस्थाकेँ तोडला पर अन्ततः पछताए पडैत अछि । दुनू कथाक निष्कर्ष रहल अछि । ‘लाल किताब’ कथाक माध्यम सँ भुतप्रेतक बातकेँ देखाओल गेल अछि । विज्ञान कतए सँ कतए पहुँच गेलाक बादो भूतप्रेतक कथासभ आबि रहल अछि । ‘जिद्दी’ कथा एकटा महिलाक महत्वकांक्षा आ ओतए सँ उत्पन्न परिस्थितिकेँ देखाओल गेल अछि । अपने नहि कऽ सकल काज बेटीक माध्यम सँ कएल जा रहल अछि । एहि कारण माय बेटीकेँ हरेक इच्छा पुरा करैत अछि । ई हरेक इच्छा बेटी व्याभिचारिणी आ दुव्र्यसनी भऽ जाइत अछि । ‘निष्ठा की देखावा’ कथा आधुनिकताक नाममे देखल गेल बिकृति दिस संकेत कएने अछि । एक गोटे महिलाकेँ पति सँ बेसी पतिक मृत्युक बाद अपने कोना सुरक्षित रहब तकर चिन्ता रहैत अछि । वर्तमान समयमे समाज कतए चलि गेल आ ओकर नहि नीक अवस्थाकँे चित्रण कएल गेल अछि । ‘केहन सजाय’ कथा संग्रहक सभ सँ बढिया आ कमजोर दुनू अछि । जे कथ्य एहिमे उठाओल गेल अछि ओ गजबकँे अछि । मुदा एकर अन्तिम निष्कर्षकेँ कथाकार सुजीत सुकान्त बनेबाक प्रयासमे आगिकेँ ठण्डा कऽ देने छथि । ‘मेनका’ आ ‘जादु’ कथा सेहो बढिया अछि । समग्रमे कहल जाए तऽ सुजीत कुमार झाक कथाक विषय चयन, बनावट तथा भाषा शैली बढिया अछि । हुनक पहिल कथा संग्रह चिडैÞ सँ शुरु भेल यात्रा उडान भड़ि रहल संकेत दऽ रहल अछि । मुदा साहित्य साधनाक विषय अछि । जतेक साधना कएल जाए फल ओतक बढिया प्राप्त होइत अछि । तएँ साधनाकेँ निरन्तरता देबए पड़तन्हि ।

ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। हम पुछैत छी: गुणनाथ झासँ चन्दन कुमार झाक गपशप चन्दन कुमार झा: अपनेक जुड़ाव साहित्यक संग कोना भेल ? गुणनाथ झा : साहित्यसँ जुड़ाव तऽ छात्र-जीवने सँ छल । हमर पिताजी पं॰घनानाथ झा सेहो साहित्यकार छलाह । हुनकर तीनटा कृति प्रकाशित सेहो भेल छलन्हि । हुनकर लिखल "भक्त गोविन्ददास" आ' "धरु गोविन्दक पएर" ग्रन्थालय सँ प्रकाशित भेल छलन्हि । ई दुनू पोथी गोविन्ददासक जीवनी छलैक । एकर अलावे "सहोदर वृहत गल्प" सेहो प्रकाशित भेल छलन्हि । हुनकर लिखल "चामुण्डा" आ' "सैव्या हरिश्चन्द्र" एखनो अप्रकाशित अछि मुदा पाण्डुलीपि एखनो उपलब्ध भऽ सकैत छैक । ई पोथी सभ आब हमरो ल'ग उपलब्ध नहि अछि । भऽ सकैत छैक जे दरभंगाक पुस्ताकलयमे कतहु होइ वा पं.चन्द्रनाथ मिश्र"अमर"जी ल'ग सेहो भऽ सकैत छन्हि । ई पोथीसभ जखन प्रकाशित भेलैक तखन हम स्नातकमे पढ़ैत रही आ' हमहीँ एकर प्रूफ देखने रही । ओहि समयमे साहित्य पढ़बाक रुचि तऽ रहए मुदा साहित्य-लेखन हम कोलकाता एलाक बाद प्रारंभ कएलहुँ । चन्दन कुमार झा: अहाँ कोलकाता कहिया ऐलहुँ आ' एतय मैथिली साहित्य आ'रंगमंच सँ कोना जुड़लहुँ ? गुणनाथ झा : हम दिसम्बर १९६३ ईस्वीमे कलकत्ता आयल छलहुँ । तारीख हेतैक २३ वा २४ दिसम्बर । ओहि समयमे हम एम.ए. द्वितीय बरखक छात्र रही आ' एतय एबाक मुख्य-प्रयोजन छल आगाँक पढ़ाइ करब । जीवनमे पहिल बेर कोनो महानगर देखलियैक । कलकत्ता प्रथम दृष्टिए बड़ नीक लागल । ऐठाम हमर प्रथम ठेकान वा बासा छल भवानीपुर । जतए स्व. जयदेव लाभक ठेक रहन्हि । हम हुनके लग रही । ओतए हम मात्र तीन-चारि दिन रहलहुँ आ' एहि क्रममे स्व.श्रीकांत मण्डल भेँट भेल रहथि आ फेर ओ हमर परममित्र भऽ गेलाह । फेर किछु मास हुनके संग बीतल आ कालक्रममे कतेको बासा बदलल तकर आब ठेकानो नहि अछि ।ओही समयमे श्रीकांतजी सँ जे गप्प-सप भेल रहए तकर निचोर जँ कही तऽ यएह छल जे मैथिलीमे आधुनिक नाटकक परम अभाव छलैक जखन कि बङलामे सब प्रकारक नाटक लिखल गेल आ' मंचित होइत छलैक । श्री प्रवीर मुखर्जीक नाट्यदल"राजा-साजा" सँ श्रीकांत जी जुड़ल छलाह । प्रवीरबाबू स्वयं नाटककार, अभिनेता आ निर्देशक छलाह । ओ मैथिली नाटक सभक निर्देशन सेहो करैत छलाह । हमर "पाथेय"के सेहो ओ निर्देशन कएने छलाह आ एकर उल्लेख यादवपुर विश्वविद्यालय सँ प्रकाशित नाट्य-संकलनमे सेहो अछि । प्रवीरदाके नाटकक नीक परख रहन्हि । एहि तरहेँ हुनका सभक गोष्ठीमे श्रीकांतजीक संगे अबरजात भऽ गेल आ कलकत्ता अयलाक बाद शीघ्रे हम मैथिली नाट्य गोष्ठी " मिथिला कला केन्द्र" सँ जुड़ि गेलहुँ । बादमे एकर मंत्री सेहो भेलहुँ ।मुदा एहिक्रममे परमश्रद्धेय प्रबोधबाबूक अथक प्रयासक बादो हमर अपूर्ण पठन-पाठन चिरदिनेक लेल अपूर्ण रहि गले आ एलआइसीमे कार्यरत भऽ गेलहुँ । चन्दन कुमार झा: अहाँ नाट्य-लेखन दिश कोना आकर्षित भेलहुँ ? गुणनाथ झा : कलकत्ता अएलाक बाद एहिठामक मैथिलजनक स्थिति देख मोनमे जेना उड़ि-बीड़ी लागि गेल रहए । दरभंगा धरि हमरा ई ज्ञान नहि रहए जे हमर समाजक लोक एतेक निराखर,एतेक अकिञ्चन आ परदेशोमे एतेक अवहेलित सन जिनगी जिबैत छथि । एहिठामक मैथिल-मैथिलीक ई दृश्य हमर निन्न जेना तोड़ि देलक । मोनमे बेर-बेर हुअए जे स्वजनक एहि दुर्दशाक प्रतिकार हेतु किछु करी । एहन संयोग भेलैक जे एकदिन रासबिहारी मोड़ पर फेर वएह बात उठलै जे कहियो श्रीकांत जी कहने छलाह । स्व.सुखदेव ठाकुर चर्च कए देलखिन्ह जे मैथिली भाषामे आधुनिक नाटकक लेखन नहि भऽ सकैछ । ओहिदिन ई बात जेना हमरा मोनमे गड़िगेल । मोनहि मोन प्रण लेलहुँ जे हम लिखब मैथिलीक आधुनिक विषय पर नाटक । विषय हमरा ल'ग रहबे करए । आ' से एक्कहि मासक अवधिमे हम मधुयामिनी आ पाथेय लिखलहुँ ।ओना एहिसँ पूर्व हम कनिञा-पुतरा लिखने रही मुदा ओकरा हम अपनहुँ आधुनिक नाटकक श्रेणीमे नहि गनैत छी । हमर आधुनिक नाटक-लेखन यात्रा "मधुयामिनी"सँ प्रारंभ भेल । फेर हम कनिञा-पुतरा, शेष नञि, आजुक लोक, लाल बुझक्कर, सातम चरित्र आ' जय मैथिली लिखलहुँ । महाकवि विद्यापति नामक एकटा एकांकी सेहो लिखने छी मुदा आब सोचैत छी जे एकरा पूर्णांक नाटक बना दियैक । एहि नाटक सभक कतेको बेर मंचन भेल । एकर अलावे हालहिमे बाङ्गला एकाङ्की नाट्य-संग्रह जाहिमे बांग्लाक २४ टा नाटककारक २४ टा एकांकीक संकलन अछि,तकर बांग्लासँ मैथिली अनुवाद कएलहुँ । ई पोथी साहित्य अकादमी दिल्ली सँ प्रकाशित अछि । मुदा अपन लिखल नाटक सभमे मात्र “पाथेय” प्रकाशित अछि सेहो आब बजारमे पोथी उपलब्ध नहि छैक । हमरो ल'ग मात्र एक्कहिटा प्रति बाँचल अछि । मधुयामिनी आ सातम चरित्र लोकमंच नामक नाट्य-पत्रिकामे प्रकाशित भेल रहए । चन्दन कुमार झा: नाटकक अलावे अपने कोनो आन विधा मे किछु लिखलियैक ? गुणनाथ झा : हाँ नाटकक अलावे हम किछु कविता आ आलेख सेहो लिखलहुँ । ई सभ विभिन्न पत्र-पत्रिकादिमे छपल जेना पटना सँ प्रकाशित "मिथिला मिहिर"मे आ' देवघरसँ प्रकाशित "स्वदेशवाणी" मे । चन्दन कुमार झा: अहाँ मिथियात्री नामक नाट्य संस्था सेहो शुरु कएने रही तकर मादेँ किछु जानकारी देल जाउ । गुणनाथ झा : जखन हम कलकत्ता आएल रही तहियो आइए जकाँ मिथिला-मैथिली सँ संबंधित अनेक संस्थासभ छलैक । ओहि समयमे दयानंद ठाकुर एकटा नव नारा देने रहथिन्ह जकर चर्चा एखन कतहु नहि होइत देखैत छी । ओ कहलथिन्ह जे सभसंस्थाके एकीकरण कएल जाए मुदा ओहि समयमे हम एहिबातक विरोध कएने रहियैक । हमर मानब रहय जे सभ संस्था सब यदि अलग-अलग थोड़बो-थोड़बो काज करतैक तऽ मैथिलीक लेल कुल मिलाके बेशी काज हेतैक आ एहि सँ मैथिलीक बेशी प्रचार-प्रसार हेतैक । एहि क्रममेँ आपसी मतांतरक चलते मिथिला कला केन्द्र बंद भऽ गेल । हम स्व. फुलेश्वर झा, स्व. विश्वंभर ठाकुर,निरसन लाभ, दयानाथ झा, सूर्यकांत झा,आ' राजेन्द्र मल्लिककेँ संगे मिथियात्रिक स्थापना केलहुँ । दोसरदिश सीताराम चौधरी सेहो मैथिली रंगमंचक स्थापना केलाह । मिथियात्री बेशी दिन नहि चललै मुदा एकर नाट्य प्रस्तुति सालमे दू बेर होइत छलैक आ' आन-आन संस्था सभ प्रायः सालाना आयोजन करैत छल से कम्मो समयमे एकर नाट्यमंचनक संख्या एतेक भऽ गेलैक जे ई मैथिली रंगमंचक इतिहासक एकटा अभिन्न अंग बनि गेल रहैक । मुदा अपन मध्यायुक अबितहि हम आकस्मिक रूपेँ बीमार भऽ गेलहुँ आ' अपेक्षित सहयोगक अभाव मे बुझू तऽ दिवालिया भऽ गेलहुँ ।फलतः ने अभिष्ट दिशामे कोनो काज भऽ सकल आ ने आने किछु । लेकिन सभसँ बेशी जे बातक कचोट अछि से जे आन-आन संस्था सभ तऽ चलिते रहलैक लेकिन फेर हमर कोनो प्रयासक कतहु चर्चो तक किएक नहि भेलैक ? एहिसाल फेर किछु युवासभ सक्रिय भेलाह अछि आ' आशा करैत छी जे पूर्वक “मिथियात्री” आ “झंकार” आपसमे मीलि "मिथियात्रीक झंकार"केँ तत्वाधानमे अगिला दिसंबर तक गोटेक नाटकक मंचन करत । चन्दन कुमार झा: गुणनाथ झा मैथिली रंगमंच सँ कतिआएल गेलाह तकर कोन कारण अहाँक नजरि मे अबैत अछि ? गुणनाथ झा : ओना तऽ हमर जन्मो दरबारेक परिवेशमे भेल छल मुदा बचपने सँ हमरा कहियो दरबारीपन नहि सोहाएल । शाइद तइँ हम एकात कऽ देल गेलहुँ । सभदिन हमर मूलमंत्र रहल अछि -"एकला चलो" लेकिन अपन काज करैत रहू । बीचमे कतेको संस्था वा रंगमंच हमरा सम्मानित करबाक आ'कि कहियौ जे अपना गुटमे सम्मिलित करबाक प्रयास कएलनि मुदा हम अपनाभरि एहिसभ सँ बचबाक प्रयास कएलहुँ । हम बुझैत छी जे एखन तक हम कोनो एहन काज करबे नहि कएलहुँ जाहि हेतु हमरा सम्मानित कएल जाए । हमर सोचल बहुत रास काज एखनो अपूर्ण अछि । ई सभ काज जहिया पूर्ण होयत तहिए हम मैथिलीके किछु सेवा कए सकलहुँ से बूझब । ओना कोनो संस्था हमरा सम्मानित केलक कि नहि एहिबातक हर्ष-विषाद हमरा मोनमे कहियो नहि रहल । हमरा लेल असली सम्मान हमर नाटकक दर्शकक थोपड़ी अछि । एकबेर "पाथेय" केर संबंध मे रामलोचनजी कतहु लिखने रहथिन्ह जे पाथेय तऽ एहन नाटक छैक जकरा यदि मंच पर सँ केयो एकगोटे पढ़ि मात्र देतैक तइयो दर्शक नहि हिलत । हमरा लेल एहन तरहक समीक्षा सभसँ पैघ सम्मान थिक । ओना कुल मिलाकऽ कहब जे क्रमशः लोकक धारणा बदलि रहल छैक । आस्था कतहु ने कतहु छैक मुदा कष्ट होइत अछि जखन काजके आगाँ बढैत नहि देखैत छी । संस्था सभसँ साहित्य आ' समाजकेँ कल्याण होइत नहि देखैत छी । चन्दन कुमार झा: अपने कहल जे एखनहु किछु काज अपूर्ण अछि । कोन काज छैक ई सभ ? गुणनाथ झा : सभसँ पहिने तऽ जे किछु लिखने छी से समाजक लेल लिखने छी । तैँ समाजक चीज समाजक हाथमे पहुँचि जाइ से प्रयासमे लागल छी । एकरा अलावे मैथिली रंगमंचक उत्थान होइ ताहि खातिर सेहो काज करब । अहाँ मैथिली नाटकक भविष्य केहन देखैत छी ? नाटक एकटा पैघ आ' क्लिष्ट विधा छैक । एकरा लेल रंगमंच चाही संगहि दर्शक सेहो चाही । मुदा, वर्तमान मे नाटकक स्तर आ कलाकारक गुटबाजीमे दर्शक कमि गेलैए । एहनामे कखनो काल तऽ बुझाइत अछि जे मैथिलीमे नाटक कहीँ खतमे ने भऽ जाइ । फेर जखन कखनो नवतुरियाक सक्रियता देखैत छिऐक तऽ एकटा आस सेहो जगैत अछि । चन्दन कुमार झा:  फेर मैथिली नाटकक विकास कोना हेतइ ? गुणनाथ झा : नाटकक विकासके लेल आवश्यक छैक जे सम-सामयिक विषय पर केन्द्रित भऽ नाट्य-लेखन कएल जाए । नाटक बिना गुटक वा मंडलीक संभव नहि मुदा रंगमंचक गुटके रचनात्मक हेबाक चाही । नाटकमे संवादक भाषा पर सेहो धेयान देब आवश्यक होइत छैक । भाषा ओहन होइ जकरा पात्र सुगमतापूर्वक उच्चारण कए सकय आ' दर्शकके सेहो तत्काल भाव स्पष्ट होइ। एहिसँ ओवर-एक्टिंग सेहो नहि हेतैक । लेकिन भाषाक सुगमता माने एकदम्मसँ बोलचालक भाषा सेहो नहि हेबाक चाही । साहित्यक गरिमाकेँ सेहो धेयानमे राखल जेबाक चाही । एहिठाम हमरा एकटा बात मोन पड़ैत अछि जे बहुत दिन पहिनेके बात छैक । एकटा नाटककार, जिनकर स्थान वर्तमान मैथिली रंगमंच पर सर्वश्रेष्ठ कहल जाइत छन्हि, के पहिल नाटकक मंचन होइ बला रहैक । संयोग सँ हमर एकटा परिचित कलाकार ओहि रिहर्सल मे रहथि । रिहर्सलेके क्रममे निर्देशक ओहि नाटककारके सूचित कएलखिन्ह जे अहाँक एहि नाटकमे बड्ड गारि छैक से कने कम्म कऽ दियैक । तकर प्रत्युत्तर दैत ओ नाटककार कहलखिन्ह जे हमरा अपना जतेक गारि अबैत अछि ओकर दसांशो नहि एहि नाटकमे छैक । हमरा हुनकर ई बात सुनि छगुन्ता लागि गेल । आब कहू जे एहि सँ नाटकक स्तर केहन बचतैक ? नाट्यकारके हरदम ई प्रयास करबाक चाही जे मैथिली नाटक सर्वभारतीय मंच पर प्रतिष्ठित होइ । मैथिलीक नाटकक पोथीके भारतक आन-आन भाषामे अनुवाद कएल जाए आ' मंचन कएल जाए । तखने मैथिली नाटकक विकास हेतैक । चन्दन कुमार झा: तकनीकी दृष्टिकोण सँ मैथिली नाटक कतेक पछुआएल छैक ? गुणनाथ झा : बहुत..बहुत पछुआएल छैक । एतय आइधरि कोनो एहन संस्था नहि छैक जतए नाटकक समुचित पढ़ाइ आ ट्रेनिंग देल जाए । बंगाली रंगमंच सँ कतेको गोटे सिनेमामे गेल लेकिन मैथिली रंगमंचमे कतहु एहन व्यवस्था नहि छैक । संगीत आ मंच परहुक प्रकाश व्यवस्था सेहो नाटक मंचनक हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण होइत छैक आ से एहि क्षेत्र सभक विकास हेतु सेहो प्रयासक जरुरति छैक । रंगमंच सँ जुड़ल संस्था सभकेँ नाट्यगृह बनेबा पर सेहो धेयान देबाक चाही । चन्दन कुमार झा: वर्तमान मे कोन नाटककार अहाँकेँ सभसँ बेशी प्रभावित करैत छथि ? गुणनाथ झा : आधुनिक मंच पर हम जतेक नाटककारके पढने-देखने छी ताहिमे कियो हमरा प्रभावित नहि करैत छथि । पुरानमे ईशनाथ झाक “उगना” आ “चीनीक लड्डू” एवं गोविन्द झाक “बसात” हमरा बेस प्रभावी लगैत अछि । चन्दन कुमार झा: कहल जाइत छैक जे मैथिली रंगमंच पर गुटबाजी के संगे जातिवादिता सेहो छैक । अहाँक केहन अनुभव अछि ? गुणनाथ झा : हाँ...हम एहि सँ सहमत छी । ओना हमरा व्यक्तिगत रूपे कहियो एहिसँ (जातिवादिता) पाला नहि पड़ल अछि मुदा छैक ..निश्चिते छैक से हम अनुभव कएल । लेकिन ई सभटा नाटकक विकासक बाटमे बाधक छैक । एहिसभसँ हमरा सभकेँ खासकऽ नवतुरियाकेँ बचबाक चाही । रंगकर्मी के जाति-पाति से कोनो लेना-देना नहि हेबाक चाही । ओकरा लेल तऽ रंगमंचे मंदिर हेबाक चाही । ओना एहन तरहक बात बेबहार किछु पाइक लोभमे सेहो किछु लोक करैत छथि । मुदा ई सर्वथा निंदनीय अछि । चन्दन कुमार झा: अहाँक अगिला योजना की सभ अछि ? गुणनाथ झा : अगिला योजना कहबे केलहुँ जे सर्वप्रथम अपन अप्रकाशित कृतिसभकेँ प्रकाशित करेबाक चेष्टा करब बादबाँकि आब अपना तऽ किछु बचल नहि अछि ।कोनो ने कोनो विधि सभटा एहिसभमे उत्सर्ग भऽ गेल ।से आब जीवनो मात्र समाज आ' साहित्येक बलेँ व्यतीत करबाक अछि । चन्दन कुमार झा: नवतुरिया के किछु कहए चाहबनि ? गुणनाथ झा : नवतुरिया केँ एतबे कहबनि जे ओ अपन काज करथि । गुटबाजी आ' जातिवादक फेरमे नहि पड़थि । जौं गुटबाजी रचनात्मक उद्देश्य के लेल हो तऽ गुटबाजियो नीक । जीवनमे कखनो घबरेबाक नहि चाही । समाजक लेल सदति क्रियाशील रही । हमर जीवन एकटा पाठ अछि आ हम एहिसँ जतबा सिखलहुँ ताहि आधार पर कहब जे बाधा-विघ्न जिजीविषाकेँ मात्र तीव्र आ' जाग्रत करैत छैक । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- की भेटल आ की हेरा गेल  (आत्म गीत)- (आगाँ) ३.२.१.मिहिर झा-हौ रामचंदर२.राम वि‍लास साहु जीक दूटा कवि‍ता ३.३.जगदीश प्रसाद मण्डल-१० गोट गीत ३.४.१. राजदेव मण्‍डल २.ओमप्रकाश झा ३.५.मुन्नी कामत ३.६.नन्‍द वि‍लास राय जीक दूटा कवि‍ता ३.७.जगदानन्द झा 'मनु' ३.८.किशन कारीगर जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ की भेटल आ की हेरा गेल  (आत्म गीत)- (आगाँ) हमरहि खातिर उनहत्तरिमे छल बैंकक राष्ट्रियकरण भेल, भेल तपस्या फलीभूत आ लागल जे नव जनम भेल

सभ रातिक होइए भोर अपन अस्तित्व पाठ ई पढ़ा गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल ।

एक दिस चाकरीक सुख-दुख छल दोसर दिस साहित्यक धारा तेसर दिस छूटल गाम-घर छल उड़ल-उड़ल मन बेचारा सपनामे छल हरियर धरती आ फूल कते नव फुला गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । ओ मूल,गोत्र आ गाम हमर बाबाक धएल ओ नाम हमर ओइ माइक शीतल छाहरि केर आठो पल, आठो याम हमर

कर्तव्यक पावन धारामे क्रमशः सभ किछु छल बिला गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल ।

पढलहुँ बच्चन आ दिनकरकें नजरूल, विमल आ शंकरकें आशापूर्णा,तसलीमा आ गुरूदेव रवीन्द्रक आखरकें

नागार्जुन आओर निराला केर खुट्टा छल मनमे गड़ा गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल ।

मिथिलाकें देखल मिथिलामे देखल मिथिला सीवानोमे पावनि-तिहार आ भोज-भात भेटल समता परिधानोमे

छल एतहु दसानन केर लंका रहिते-रहिते से बुझा गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल ।

हिमगिरि समान किछु पुरूष छला किछु भेटला गंगाजल समान दुविधामे जखन-जखन पडलहुँ हुनकहि चरित्रकें कएल ध्यान

हुनकहि सिनेह केर छाहरिमे मोनक सभ दुविधा मेटा गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.मिहिर झा-हौ रामचंदर२.राम वि‍लास साहु जीक दूटा कवि‍ता १ मिहिर झा हौ रामचंदर हौ रामचंदर की दिन छैक जी सरकार ओ दीन छैक

जमाना देखही तंग करै य जी दुखी मोन के चंग करै य दलान किया खाली पडल छै चाहक लोभ जे नै बचल छै

ठाढ सोझाँ अछि पहिर के चट्टी सरकार ओकर चलै छै भट्ठी

बेचैन मोन कोना रहू गाम सरकार अपने के दियौ त्राण

सब छोडब त लोक की कहत मोन साधब त वाह वाह करत २ राम वि‍लास साहु जीक दूटा कवि‍ता- सि‍म्मर केर फूल लाल-लाल सि‍म्मर-फूल देखि‍ सुग्गा ललचाइ फूल रंग भोगार भेल सुगा गेल लुभाइ अपन उद्देश्‍य बि‍सरि‍ सि‍म्मरकेँ सोइरी लेलक बनाइ सोइरी सेबैत-सेबैत सुग्‍गाकेँ चि‍ल्‍का गेल हेराइ फूलसँ फलसँ बनैत धरि‍ सुग्‍गा रहल उपास फल एहेन ललि‍चगर लोल मारि‍ते उड़ि‍ जाए सुग्‍गाक उपास नै टुटल पारनमे की खाएत आश लगौने सुग्‍गा सि‍म्मरपर भेल ि‍नरास लोभमे फँसि‍ सुग्‍गा अपने कर्मपर पचताए शोगाएल सुग्‍गा बाजल रूप रंग देखि‍ नै लोभाउ रूपक माया जाल फँसि‍ भुखले तेजब प्राण। ओलंपि‍क बच्‍चासँ बूढ़ भेलौं बड़-बड़ खेल देखैत रहलौं पैंसठ बरख आजादि‍योक भेल मुदा पूर्ण आजादी कहि‍यो ने देखलौं आइ धरि‍ सरकारक कठखेलमे ओलंपि‍क खेल शुरू भेल जनताक वि‍केट गि‍र गेल देसक रूपैया खेल-खेलमे मूड़ि-सूधि‍ सभ सधि‍ गेल सभ शहरमे स्‍टेडि‍यम बनि‍ गेल गाममे बेरोजगारी बढ़ि‍ गेल आजाद देशमे के आजाद भेल आजादीक झंडा फहरौने की ओलंपि‍क तगमासँ गरीबी-बेरोजगारी मि‍ट गेल जखन आजाद देशक जनता अखनो बाटीमे भीख मंगैए तखन सरकार ओलंपि‍कमे अरबो रूपैया कि‍अए लगबैए एतेक रूपैया खेती-उद्योग आ रोजगारमे कि‍अए ने लगबैए जखन देशमे एतेक गरीबी छै आलंपि‍ककेँ की जरूरी छै जखन देशक आत्‍मा गाम-घरमे बसै छै तँ गाम-वासी कि‍अए एतेक उपेक्षि‍त छै जे गामक लोक नरकमे जीबै-मरै छै गामवासीक लहु बेचि‍ सरकार ओलंपि‍क खेलै छै ओइसँ गरीबकेँ की भेटलै जखन खोदै छै पहाड़ तँ मूस भागि‍ जाइ छै। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश प्रसाद मण्डल १० गोट गीत जगदीश प्रसाद मण्‍डलक 10 गोट गीत- चढ़ि‍ अन्‍हार...... चढ़ि‍ अन्‍हार पख भरि‍-भरि‍ अमवसि‍या कहबैत अबै छै। तहि‍ना ने इजोरो बढ़ि‍-बढ़ि‍ मास पूब कहबैत चलै छै। चढ़ि‍ अन्‍हार......। काटि‍ इजोर कपचि‍-सपचि‍ पून प्रकाश पाबैत कहै छै। खेल जि‍नगीक खेलाड़ी चढ़ि‍-चढ़ि‍ रंगमंच कहै छै। चढ़ि‍-चढ़ि‍......। जस-जसोदा भेद बि‍नु बुझने लीला धड़धड़बैत करै छै। तीत-मीठ फल फलाफल सि‍र चढ़ि‍ सि‍रताज कहै छै। सि‍र चढ़ि‍......। दुनि‍याँक जेहने...... दुनि‍याँक जेहने मंच मंचबै, तेहने ने रंगमंचो बनै छै। पाट बनि‍ जेहेन पाट खेलबै देखि‍नि‍हारो तेहने देखै छै। दुनि‍याँक जेहने......। चाहै सभ छै चैन चीत दुख-भुख दुनि‍याँ सेहो कहै छै। सुख सुखाएल सूतल-पड़ल सि‍र संजीवनी भेटै कहाँ छै। सि‍र संजीवनी......। दुनि‍याँक जेहने......। हरि‍ अनंत हरि‍ कथा अनंता हँसि‍ गीत भागवत गबै छै। हेरि‍ शक्‍ति‍ शक्‍ति‍ हरीक बाघ चढ़ि‍ भगवती कहै छै। बाघ चढ़ि‍......। दुनि‍याँक जेहने......। रहल नै तकनि‍हार...... रहल नै तकनि‍हार। मीत यौ रहल नै तकनि‍हार। तकति‍यान अपने सि‍र देखए रहल नै देखि‍नि‍हार। मीत यौ सभ दि‍न रहल ताक तकए रहल नै बूझि‍-बुझि‍आर। हेर हेरि‍ हरण हरैण रहल दि‍न दुर-काल, मीत यौ हराएल-ढराएल वन बीच संगीक रहल अकाल। पहाड़ बीच समुद्र तहि‍ना आनए ज्‍योति‍ सकाल, मीत यौ आनए ज्‍योति‍ सकाल। पेटक ताप...... पेटक ताप जहि‍ना तपै छै तपै छै तहि‍ना मनक ताप। वेद-पुरण मि‍लि‍त मीलि‍ एक वरदान एक अभि‍शाप। भाइ यौ......। तपैक तप तपस्‍या जहि‍ना सभकेँ तपैक अछि‍ दरकार। बि‍नु तापे तप केना तड़तै पेते केना उचि‍त-उपकार। भाइ यौ......। वि‍लपि‍-वि‍लपि‍ भगवत मंगै छै बीच व्‍यास भागवत देखै छै। शक्‍ति‍ पाबि‍ शालीनी जहि‍ना सि‍ंह सवार शंख फूकै छै। भाय यौ......। जेहन मुँह...... जेहन मुँह तेहन हँसी सभ दि‍न हँसैत एलैए। मुँहक जेहन गढ़नि‍-मढ़नि‍ तेहने तान भरैत एलैए। तेहने......। जाधरि‍ डोर नै बनि‍-बनि‍ घास साबे कहबैत एलैए। बनि‍ते डोरी समेटि‍-बटोरि‍ गृह-वास कहबैत एलैए। गि‍रह-वास कहबैत एलैए। गि‍रह-वास......। जीह-दाँत सभ संग पूरै छै आँखि‍-कान सभ संग एलैए। लहरि‍ बीच लहरि‍-लहरि‍ हास-हँसी हँसैत एलैए। हास-हँसी......। धार संग नाह...... धार संग नाव तखने चलै छै जल जलदार बनल रहै छै। जल-जलदार......। देख मानसून लपकि‍-झपकि‍ धरा-धार बनबैत रहै छै। ओद्र आद्रा पाबि‍ पबि‍ते मजि‍ मजरि‍ मोजर धड़ै छै। मजि‍ मजरि‍......। जेना-जेना मनसून पबै छै तेना-तेना नाव धार चलै छै। पूरबा-पछबा झोंक पाबि‍-पाबि‍ मन-तेज गति‍आइत चलै छै। मन्‍द–तेज......। गति‍ धार जलधार जहि‍ना मति‍यो तहि‍ना मनसून चलै छै। गति‍-मति‍ कखनो संग-साथ तँ कखनो झहरैत रहै छै। तँ कखनो......। मन मशीन...... मन मशीन मंत्रणा करै छै युग-परि‍वर्तित हेबे करतै। सभ दि‍नसँ होइते एलैए सभ दि‍न हेबे करतै। मन मशीन......। मथि‍-मथि‍ मन मशीन बनि‍ गति‍ तेज हेबे करतै साधन युक्‍त परि‍वार जहि‍ना धरा-धार बहबै करतै। धरा-धार.....। एक अलंग मशीन जि‍नगीक दाेसर नीति‍ कहबे करतै नीति‍-अनीति‍ कुनीति‍ बनि‍ते एक-सँ-एक लड़बे करतै। एक-सँ-एक......। खट-मीठ...... खट-मीठ बनि‍-बनि‍ चटलौं सुआद आम केना पेबै यौ खट-मट खरकैट-खरकैट चि‍क्कन केना बनेबै यौ। चि‍क्कन केना......। तेतरि‍ रोपि‍ तेहेन लगेलौं गुड़-आम संग पेलौं यौ रंग बदलि‍ सुआदो बदलि‍ कृत्रि‍म प्रकृति‍ कहेलौं यौ कृत्रि‍म......। जेहने फल पेलौं तेतरि‍क तेहने गढ़ि‍ हवा बनेलौं यौ चर्क-कुष्‍ट नि‍मंत्रि‍त कऽ कऽ रोग-मराएल बनेलौं यौ रोग-मराएल......। झोंकमे...... झोंकमे झोंका गेलौं, मीत यौ छोड़ि‍ जि‍नगी उड़ि‍या गेलौं। झोंकमे......। पार नै पाबि‍ गुन-गुना धन-धरम कि‍छुओ ने पेलौं। मान-दान घाट घटि‍-घटि‍ अपसोचमे नहा गेलौं झोंकमे......। नै जानि‍ दुनि‍याँ-दि‍वाना भरल दि‍वाना दुनि‍याँ पेलौं। प्रेमी-प्रेम पकड़ि‍-पकड़ि‍ अपने तँ कि‍छुओ ने पेलौं। मीत यौ, झोंमे......। बि‍नु प्रेम खाली नै दुनि‍याँ राधि‍-अराधि‍ कि‍छुओ ने पेलौं मूंडे-मूंडे मति‍-वि‍मति‍ बीच सुमति‍-कुमति‍ सगतरि पेलौं। मीत यौ, झोंकमे.......। पबि‍ते पैग...... पबि‍ते पैग पि‍आलि‍क घोड़चालि‍ चालि‍ धड़ए लगै छै। छान-पगहा बीच घोड़ाएल घोड़छान चालि‍ चलै छै। घोड़छान......। उठि‍ते दोसर पैग-पग सि‍ंह-सि‍ंहासन सजबए लगै छै। कुदैक-कुदैक फानि‍-फना फन-फना डुमबए लगै छै। फन-फना......। चढ़ि‍-चढ़ि‍ डंक डकडका गद-गधैया पकड़ए लगै छै ता-थइ, ता-थइ नाच-नाचि‍ गाम गदह करए लगै छै। गाम गदह......। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. राजदेव मण्‍डल २.ओमप्रकाश झा १ राजदेव मण्‍डल दूटा कवि‍ता- महफा आ अरथी कारी आ उज्जर वस्‍त्र अछि‍ पसरल नापैत-जोखैत जा रहल छी ससरल पैघ भेल जा रहल अछि‍ दूरी धेने कड़ी आ गोंतने मुड़ी ऊँच-गहींर आ समतल नव-नव दृश्‍य बनए पल-पल काठ-कठोर बनल हरपल छन मात्र होइत अछि‍ चंचल टपैत देस-कोस बनैत दुसमन-दोस दुखमे होश सुखमे बेहोश काल जीत रहल अछि‍ उमेर बीत रहल अछि‍ तैयो जोड़ैत घटी-बढ़ती आगू शेष ऊसर-परती कतबो नापब नै होएत नापल धरती महफा शुरू केलक अन्‍त करत अरथी। काटैत बीआ छुटैत नि‍साँस जेना नि‍कलए जान ऊपर ताकए खाली आसमान नीचा डहि‍ रहल पोसल बीआ देखि‍-देखि‍ फाटै छै हीया हँसुआसँ काटि‍ रहल फसल केर सीना देह भीजल अछि‍ घाम-पसीना करए पड़त आगूक आस अपनहि‍ काटैत लगाओल चास थरथराइत हाथ जानैत अछि‍ बीआ रहि‍-रहि‍ केना कानैत अछि‍ हँसुआ कहै आ सुनै कान फुलकी फुला गेल बहि‍ गेल नि‍शान आब कि‍ रोपबह हे कि‍सान जेतबे बोझ बीआ ततबे धान। २ ओमप्रकाश झा गजल भीख नै हमरा अपन अधिकार चाही हमर कर्मसँ जे बनै उपहार चाही कान खोलिकऽ राखने रहऽ पडत हरदम सुनि सकै जे सभक से सरकार चाही प्रेम टा छै सभक औषध एहिठाँ यौ दुखक मारल मोनकेँ उपचार चाही सभ सिहन्ता एखनो पूरल कहाँ छै हमर मोनक बाटकेँ मनुहार चाही "ओम" करतै हुनकरे दरबार सदिखन नेह-फूलसँ सजल ओ दरबार चाही बहरे-रमल दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ (फाइलातुन) - प्रत्येक पाँतिमे तीन बेर ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। मुन्नी कामत भ्रष्टाचारक प्रसाद एगो खेल खेलैत देखलौं स्कूलमे हरा गेल छल खिचरी सभ प्लेटमे। देख कऽ भेल अचम्भा पुछलौं सर ई कोन अछि जादू-टोना सर कहलखिन कि कहब हम केहन अछि भ्रष्टाचारक मारि अबैए तँ यऽ भरल प्लेट मुदा मिलैत अछि यएह जादूक खेल। एक मुट्ठी बरका बाबू एक मुट्ठी छोटका बाबू दू मुट्ठी अफसर साहेब आ झपटैत अछि तीन मुट्ठी कलर्क बाबू देखते-देखते गाममे फकाइत अछि मुट्ठी-मुट्ठी अहिना बटैत अछि। जकरा देखू टक लगेने अछि कहैत छथि हमरा दिअ ई तँ सत्यनरायण भगवानक प्रसाद अछि।

तब हँसत तुलसी हम एक पुरूषक बेटी छी एक पुरूषक बहिन एक पुरूषक पत्नी तँ एक पुरुषक मॉं हर पग-पग पर हर संघर्षक बीच हर सुख-दुखमे हर रूपमे हम पुरूषक संगे ठार छी हमरो मुँहमे वएह जुवान अछि हमरो दृष्टि वएह देखैत अछि हमरो दिमाग वएह सोचैत अछि हमरो जिगर मे वएह साहस आ हौसला अछि आइ पुरुषक संगे चलैमे हम समर्थ छी तँ फेर किए आइयो १००मे सँ ७५ महिला घरेलू हिंसाक शिकार अछि ई हमरा लेल नै हे बद्धिजीवी अहॉं लेल शर्मक बात अछि। आबो जागु हे मानुस विकसित अपन विचार करू नारीकेँ परितारित करनइाइ छोड़ूू नव युगक निर्माण करू। जतऽ नै हएत नारीक इज्जत ओइ समाजक केना विकास हएत केना रहत हँसैत तुलसी केना आंगन मुस्कुरैत माँक पूजा पहिले करि नतमस्तक भऽ मन झुकाए देखयौ फेर काल्हि अपन कतेक सुन्दर अछि हँसैत खेलाइत। शिल्पकार आइ हम देखै छी जइ दिस वएह दिस ठार एगो शिल्पकार अछि दौड़ रहल यऽ सभक सभ अइ रेसमे लऽ कऽ अपन औजार कहि रहल अछि देव हम संसारकेँ नव रूप रंग आकार। मुदा ककरो नै टटोलैत देखै छी खुदकेँ नै निखारैत अपन प्रतिभा आ गुणकेँ। ई संसार तँ परिपूर्ण अछि सभ लोभ मोह आ भय सँ दूर अछि फेर अकरा हम कि देव अकार रूप रंग आ प्रकार। बनाबै कऽ यऽ तँ बनाउ अपन प्रतिमा अपन ओजार सँ निखारू मानवता खुदमे अपन उच्च विचारसँ।

याद गामक गामक बर मन पड़ै यऽ पिपरक गाछ पुरबा बसात पिअर सरसो मन पड़ै यऽ। लटकल आम मजरल जम गमकैत महुआ मन पड़ै यऽ। धारक खेल कदबा खेत रोटी-चटनी मन पड़ै यऽ। बाधक झिल्ली मुठिया धान पुआरक बिछौैन मन पड़ै यऽ। घुरक आगि पकैल अलुहा ओ गपशप मन पड़ै यऽ। गामक बर मन पड़ै यऽ।

आसक किरण अखार बितल सौन बितल बितल जाइ यऽ भादबक बहार सुइख गेल सभ इनार-पोखैर नै बरसल अबकि एको अछार। बजर भेल मॉं धरती कारी सभ गाछ-पात कोन पाप भेल हमरा सब सँ आबो तँ बताबऽ हौ सरकार। नै खाइ लऽ अन्न नै बुझबै लऽ तरास अहिना तक बितेबएय और कतेक मास आब समटऽ अपन भाभट दए हमरा सभकेँ जिऐ कऽ आसार हे भगवान तूँ बरसाबऽ पानिक बोछार।

नारीक पहचान देख कऽ चिड़ै-चुनमुन मन होइत छल कि हमहुँ उड़ी अम्बरमे। जा कऽ देखी घरक अलावा की अछि अइ संसारमे। भइया संगे हमहूँ जाइतौं स्कूल उलझल रहितौं किताबमे। मुदा जब निहारलौं अपन दिस छल बानहल जंजीर पएरमे। माय कहलक हमर मान आ बाबुक पगरी छै दुनू तोरे हाथमे। नैन टा हमर उछलैत मन मरि गेल विडम्बनाक अइ संसारमे। सपना देखैसँ पहिले जगा देलनि सुनि मायक वचन बहुत कचोट भेल मनमे। हम बेटी छी आकि अवला जे चुप रहैक यएह इनाम मिलैत अछि पुरूष सत्तातमक अइ समाजमे।

आजाद गजल १ मनमे आस सफर लम्बा अनहार बहुत पनपि रहल अछि मनमे सुविचार बहुत

नै डर अछि मिटै कऽ हमरा एको रती बढ़ैत ने रहए चाहे ई अत्याचार बहुत

सर उठा कऽ चलैत रहब हम सदिखन दिलमे अछि घुरमि रहल धुरझार बहुत

बेदाग रहत चुनरी सीताक बुझल अछि से देहमे अछि अखनो प्राण आ इनकार बहुत

चिड़ैैत रहब अनहारक कलेजा छी ठनने मुन्नीकेँ मिलत अइसँ आगू प्रकार बहुत

२ मुदत्ते बाद महफिलसँ मुँह झाम निकलल बेकार छल निकलल जेना काम‍ निकलल हरा गेल भीड़मे आबि कऽ ताकी निङ्गहारि नतीजा जे छलै निकलबाक सरे-आम निकलल छिन गेल सरताज हमर खाली माथ हँसोथी बेबस बनि लाचार शर्मसार अवाम निकलल फेर सत्तामे अबैक उम्मीद नै एक्को रती घुरब नै फेर आइ ओ देने पैगाम निकलल

सच तँ ई अछि राजनीतिमे दाग लागल मुन्नी अपनेे करमसँ कत्लेआम निकलल ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। नन्‍द वि‍लास राय जीक दूटा कवि‍ता- कन्‍याँदान हम छी बड़ परेशान यौ बाबू हम छी बड़ परेशान। हमरा माथपर लादल अछि‍ तीन-तीन कन्‍याँदान। खेत-खरि‍हाँन बेचि‍ जेकरा पढ़ेलौं पढ़ा-ि‍लखा कऽ मनुक्‍ख बनेलाैं ऊहो भऽ गेल वि‍रान। राति‍-दि‍न एतबे सोचैत रहै छी केना बचत हमर मान हमरा माथपर लादल अछि‍ तीन-तीन कन्‍याँदान। आइक युगमे बेटी बि‍आहब रहि‍ नै गेल आसान। ओकरा लेल तँ पहाड़ बनल अछि‍ जे छथि‍ कोनो कि‍सान मनमे घुरि‍आइत रहैत अछि‍ केना हएत ऐ समस्‍या केर नि‍दान। डर रहैए हरि‍दम मनमे इज्‍जत ने हुअए नि‍लाम जेकरा-जेकरा अप्‍पन बुझैत छलौं सभ भऽ गेल आन। अाँखि‍क सामने नचैत रहैत अछि‍ बेटी तीनू जवान हमरा माथपर लादल अछि‍ तीन-तीन कन्‍याँदान। दहेज खाति‍र मानव भऽ गेल दानव के पोछत हमर नोर हम केकरा लग कानब सबहक हृदए भऽ गेल कठोर वि‍द्वानो सभ भऽ गेल बैमान हमरा माथपर लादल अछि‍ तीन-तीन कन्‍याँदान। जहि‍यासँ बरतुहार गेल आपस हमर कनि‍याँ धऽ लेलीह ओछान। वर खोजैत-खोजैत चप्‍पल हमर घँसि‍ गेल पड़लौं हम बेराम। हमरा माथपर लादल अछि‍ तीन-तीन कन्‍याँदान। एहेन मनुक्‍ख आइ धरि‍ नै भेटल जे करत हमरापर उपकार बि‍ना दहेजक बेटा बि‍आहि‍ कऽ हमरा माथसँ उतारत भार। एहेन मनुक्‍ख जौं हमरा भेटताह जे करताह एहेन शुभ काम। चादरि‍-मुड़ेठा मखानक मालासँ हुनकर करब सम्मान। बेपार एक दि‍न कनि‍याँ हमर बाजलि‍- “यौ, पढ़लौं-लि‍खलौं मुदा नै भेल कोनो नौकरी तँ अहि‍ना रहब बेकार कि‍एक नै शुरू करैत छी कोनो छोटो-छि‍न बेपार हे! कहाबत छै जे ने करए कपार से करए बेपार।” हम कहलि‍ऐ- “पूजी केर केना हएत जोगार?” ओ बजलि‍- “हम नैहरसँ आनि‍ देब पचीस-पचास हजार तहीसँ शुरू कए लेब कोनो छोट-मोट रोजगार। जौं परि‍स्‍थि‍ति‍सँ अखन जाएब हारि‍ तँ अबैबला धि‍या-पुता देत अपना सभकेँ गारि।” हम कहलि‍ऐ- “अहाँक बड़ नीक अछि‍ वि‍चार जल्‍दीसँ नैहर जाउ आ ओतएसँ ढौआ मांगि‍ लाउ।” भरि‍ दउरा सनेस लऽ ओ नैहरा गेलीह भोरे बैरंग आपस एलीह। हम पुछलि‍यनि‍- “की यै, भऽ गेल ढौआक जोगार?” हमर कनि‍याँ बजलीह- “हम बाबू-मायसँ कहलि‍यनि‍ हमरा कि‍छु टकाक अछि‍ दरकार सोचैत छी शुरू करैले कोनो बेपार। ओ सभ बजलाह, हम अपने छी लाचार कतएसँ देब तोरा टाका पचीस-पचास हजार।” हम कहलि‍ऐ- “ओ सभ छथि‍न अमीर हम सभ छी गरीब अमीरकेँ कहि‍या गरीबसँ रहलनि‍ सरोकार।” ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदानन्द झा 'मनु' ग्राम पोस्ट- हरिपुर डीह्टोंल, मधुबनी गीत- १   

नैहरसँ एलै नै कोनो संदेश   पिया घर बसलहुँ दूर परदेश भैया बिसरलहुँ  बाबू नहि एलहुँ  दुनियाँकेँ रीतमे किएक भगेलहुँ सखी बहिनिपा सभटा छूटल  नेनपनकेँ जोड़ल सभटा सपना टूटल रानी कहि कहि मए अहाँ पोसलहुँ बर्खसँ आइ मुँहो नहि देखलहुँ छूटल टोल आ बाट सभ छूटल  अपन गामक कौओ नै भेटल नै  आब  बेसी हम सहि सकबै आउ भैया 'मनु' नै तँ हम नै जीबै | ---------------------------------------- गीत-२ 

भोलेबाबा हौ खोलबअ केखन अपन द्वार ) -२ 

हम दुखिया जन्मे कए दुखल  एलहुँ तोहरे द्वार  भोलेबाबा हो - - - - - अपन द्वार 

तन दुखिया अछि मन अछि दुखिया  दुखिए जन्म हमार सुनि महिमां भोले  एलहुँ तोरे द्वारे  करबअ केखन हमर उद्धार  भोलेबाबा हो - - - - - अपन द्वार 

मुनलह तु अपन नयना  मुनलह हमर कपार  एलहुँ  भटकैत,भटकैत तोरे द्वारे  मुनलह किएक अपन केबार 

 भोलेबाबा हो - - - - - अपन द्वार ) -२ 

-------------------------------------------------- गीत-३ 

लगबियौन-लगबियौन हिनकर बोली ई, दूल्हा आजुकेँ  हिनकर बड्ड  मोल छैन, ई  तँ दूल्हा आजुकेँ  हिनकर बाबू  बिकेलखिन लाखे, बाबा कए हजारी लगबियौन मिल जुइल कs बोली ई दूल्हा आजुकेँ 

हिनकर गुण छैन बरभारी, ई रखै छथि दूटा बखारी दरबज्जा पर जोड़ा बडद,रंग जकर छैन कारी भैर दिन ई पाउज  पान करैत छथि, जेना करे पारी भोरे उठि  ई लोटा लs कs पीबए जाए छथि तारी

साँझु-पहर चौक पर जेता, चाहीयनि  हिनका सबारी ई छथि माएक बड्ड -दुलरुआ,हिनका दियौंह एकटा गाड़ी हिनकर गुण छैन बरभारी ई पिबई छथि खाली तारी हिनका पहिरs आबै छैन नहि धोती, दियौन जोर भैर सारी 

लगबियौन-लगबियौन हिनकर बोली ई,दूल्हा आजुकेँ  हिनकर बर मोल छैन, ई  तँ दूल्हा आजुकेँ 

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गीत-४ 

(आलू  कोबी मिरचाई यै,  की  लेबै यै दाय यै / दाय यै )-२

कोयलखकेँ  आलू, राँचीकेँ  मिरचाई यै  बाबा करता बड्ड, बड़ाई यै / बड़ाई यै आलू  कोबी - - - - - - -दाय यै 

नहि लेब तँ  कनी देखियो लियौ  देखएकेँ  नहि कोनो पाई यै / पाई यै  आलू  कोबी - - - - - - - - दाय यै

दरभंगासँ अन्लौंह विलेतिया ई कोबी  खाए कs तs कनियाँ बिसरती जिलेबी 

कोयलखकेँ  आलू  ई चालू  बनेतै धिया-पुताकेँ  बड्ड  ई सुहेतै राँचीसँ अन्लौंह मिरचाई यै  की  लेबै यै दाय यै / दाय यै 

( आलू  कोबी मिरचाई यै,  की  लेबै यै दाय यै / दाय यै )-२

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गीत-५ 

यै  सुंदर-सुंदर कनियाँ, अहाँकेँ  बाजे बड्ड  नीक पैजनियाँ | ई झुमकी,लाली,बिंदियाँ, चम्-चम् चमके अहाँकेँ  ओधनियाँ ||

कनिको तँ  संहालू अपन, ओ मुस्की चौबन्नी बाली | नै तँ लs लेत हमर जान , यै कनियाँ -झिटकी  बाली ||

ई कल्पतरु सन बिखरल , मनोहारी कंचन-वेश | बिषधरसँ बेसी मादक , ई सुंदर अहाँक केश ||

रहितों जँ  हम कवी , रचितहुँ  सुन्नर  कविता | बस मोने-म़ोन देखै छी, हम अहाँक छबिता || ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। किशन कारीगर फुसियाँहिक झगड़ा (हास्य कविता) जतैए देखू ततैए देखब झगड़ा बेमतलबो के होइए रगरम-रगड़ा जातिवाद त कियो क्षेत्रवाद के नाम पर लोक करै फुसियाँहिक झगड़ा। चुनावी पिपही बजैते मातर की गाम घर, आ की शहर-बज़ार एहि सँ किछु होना ने जोना मुदा लोक करै फुसियाँहिक झगड़ा। फरिछा लेब, हम ई त तूं ओ हम एहि ठामहक तूं ओई ठामहक एक्के देशवासी रहितहु हाई रे मनुक्ख लोक करे फुसियाँहिक झगड़ा। अपने देश मे एक प्रांतक लोक दोसर प्रांतक लोक के घुसपैठी कहि खूम राजनीतिक वाहवाही लूटैए दंगा-फसाद, आ कि-की ने करैए। नेता सबहक करनामा देखू ओ करैथ वोट बैंक पॉलिसी के नखरा हुनके उकसेला पर भेल धमगिज्जर आ लोक केलक फुसियाँहिक झगड़ा। लोक भेल अछि अगिया बेताल नेता नाचए अपने ताल कछमछि धेलक चुप किएक बैसब आऊ-आऊ बझहाउ कोनो झगड़ा। जातिवाद के नाम पर वोट बटोरू दंगा-फसादक मौका जुनि छोड़ू अपना स्वार्थ दुआरे भेल छी हरान क्षेत्रवादक आगि पर अहाँ अप्पन रोटी सेकू। की बाबरी आ की गोधरा कांड बेमतलब के भेल नरसंहार कतेक मरि गेल, कतेको खबरि नहि मुदा एखनो बझहल अछि सियासी झगड़ा। देश समाज जाए भांड़ मे नेता जी के कोन छनि बेगरता जनता के बेकूफ बनाउ हो हल्ला आ कराऊ कोनो झगड़ा। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत १.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) २. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी) १. राजनाथ मिश्र चित्रमय मिथिला स्लाइड शो चित्रमय मिथिला (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) २. उमेश मण्डल मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव जन्तु/ मिथिलाक जिनगी  (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ ) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते १.जगदीश प्रसाद मण्डल-बाल विहनि कथा- बुढ़ि‍या दादी २.मुन्नी कामत- दूटा बाल कविता १ जगदीश प्रसाद मण्डल बुढ़ि‍या दादी नै जानि‍ दादीकेँ एहेन तामस कि‍अए भऽ गेलनि‍। एक तँ ओहुना बैशाख-जेठक सुखाएल जारनि‍ चरचराइत रहैए, खढ़क छौड़ैत-छार पटपटाइत रहैए, तइ हि‍साबे दादीयोक खटखटाएब अनुकूले भल। दादी माने तीन पीढ़ी ऊपर नै कि‍ गामक बनौआ दादी। नवो-नौताड़ि‍ बनौआ दादी होइते छथि‍, उचि‍तो छैक। गुड़-चाउर जे जते खेने हेतीह। आठ-दस बर्खक पोता अपन कुत्ताकेँ अनठि‍यासँ लड़ा देलक जइसँ कोनचरक सजमनि‍क गाछ टूटि‍ गेलनि‍, तेकरे तामस दादीकेँ पोतापर रहनि‍। जखन टुटलनि‍ तखन बाधमे रहथि‍ तँए नै देखलखि‍न। तखन ततबे, कुत्तेक झगड़ा भरि‍। बारह बजे बाधसँ अबि‍ते, जहि‍ना हजारो चेहराक बीच प्रेमी-प्रेमि‍कापर जा अँटकैत, तहि‍ना दादीक नजरि‍ सजमनि‍क गाछपर पहुँचि‍ गेलनि‍। लटुआएल-पटुआएल पड़ल देखलखि‍न। नरसि‍ंह तेज भेलन, मुदा परि‍वारक सभ गबदी मारि‍ देलक। तँए अधडरेड़ेपर तामस अँटकि‍ गेलनि‍। जँ अकासक पानि‍केँ धरती नै रोकए तँ पताल जाइमे देरी लगतै? दोसरि‍ साँझ जखन बाधसँ घूमि‍ कऽ दादी एलीह तँ नीक जकाँ भाँज लगि‍ गेलनि‍ जे पोताक कि‍रदानीसँ गाछ नोकसान भेल। तामस लहड़ए लगलनि‍। छौड़ाकेँ सोर पाड़लखि‍न- “अगति‍या छेँ रौ, रौ अगति‍या?” नाओं बदलल बूझि‍ गोवि‍न्‍दोकेँ अवसर भेटलै। अन्‍हारे गरे चौकी-दोगमे अन्‍हारे गरे चौकी दोगमे नुका रहल। अपने फुड़ने दादी भट-भटाए लगली- “भरि‍ दि‍न छौड़ा एम्‍हर-सँ-ओम्‍हर ढहनाइत रहैए आ कुत्ता-वि‍लाइ तकने घुड़ैए।” मुदा लगले मन ठमकि‍ गेलनि‍। भरि‍सक अंगनामे नै अछि‍, खाइ-बेर भेल जाइ छै, कतए छि‍छि‍आइ ले गेल अखन धरि‍ अंगनामे नै अछि‍। पुतोहुकेँ पुछलखनि‍- “कनि‍याँ, बौआ कहाँ अछि‍।” बेटाकेँ अपन जान सुरक्षि‍त बूझि‍ पुतोहु बजली- “बड़ी कालसँ नै देखलि‍ऐ।” पोताकेँ तकैले बुढ़ि‍या दादी वि‍दा भेली। सुतै बेर जखन गोवि‍न्‍दा अलि‍साएल आबि‍ दादीकेँ कहलक- “दादी बि‍छान बीछा दे।” गोवि‍न्‍दक बात सुनि‍ दादी पि‍घलि‍ गेली। ओछाइन ओछा कऽ सुता देलखि‍न। सेन्‍धपर पकड़ल चोर जकाँ, क्रोध फेर कड़ुआ गेलनि‍। मुदा नि‍नि‍याँ देवीक करोरामे देखि‍ क्रोध घोंटए लगली। अखन छोड़ि‍ दइ छि‍ऐ, भोरहरबामे पेशाब करैले उठेबे ने करब। बुझतै केहेन होइ छै सजमनि‍क गाछ तोड़नाइ। जाबे सभ करम नै कराएब ताबे चालि‍ नै छुटतै। भाेरहरबामे जखन गोवि‍न्‍द दादीकेँ उठबैत बाजल- “दादी-दादी।” दादी गबदी मारैक वि‍चार केलनि‍। मुदा तीन बेरक बाद तँ गरि‍ऐबे करत, तइसँ नीक जे तेसर हाकमे अपने बाजि‍ देबइ। की हेतै, एकटा सजमनि‍येँक गाछ ने टुटल। फेर रोपि‍ लेब। २ मुन्नी कामत १ बउआ देखहक चांदकेँ बउआ देखहक चांदकेँ। चंदा मामा दूर छै देखहक कतेक मजबूत छै नित कटै-छटै छै तइयो हंसैत छै कतेक अटल निर्भय छै। बउआ तुहो अहिना बनिहक दुखसँ नै कहियो घबरैहक गिरबहक तबे तँ चलनाइ सिखबहक लगतऽ चोट तँ सम्भलनाइ सिखबहक देखऽ अइ चांदकेँ जे घटैत-घटैत मिट जाइ छै पर एक बेर नै घबड़ाइ छै धीरे-धीरे फेर आगा बढ़ि परपूर्ण भऽ कऽ पुनः आसमान मे खिलखिलइ छै। २ भोरक सनेस उठऽ हौ बउआ उठू यइ बुच्चिया देखियौ नजारा भिनसरक भागल अनहरिया भेल इजोत करू स्वागत दादा सूरजक। जतेक भिनसर उठबहक बउआ ओतेक नमहर हेतऽ दिन कुल्ला-आछमन कैर लए आशीष अपन नमहरक। भिनसरे नहेने सँ मन तरो-ताजा हएत निरोग बनल रहब अहाँ नै दरकार हएत कोनो डॉक्टरक। खुब पढ़ि-लिख बउआ-बुच्ची आगू-आगू दौड़ैैत चलू अछि अहीं कंधा पर भार अपन देसक। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet   -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma Send your comments to ggajendra@videha.com विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.) Output: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.) English to Maithili Maithili to English इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष  प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक  उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि

अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ ,  हटा क’ नहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६

  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/  कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड़ / बड़ी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍  ... समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍। जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍ चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि‍ बढ़इन बढ़न्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍ १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍ १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍ १८३. लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बि‍तौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/ करेलखिन्ह/ करेलखि‍न १८९. करएलन्हि/ करेलनि‍ १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍ २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍ २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि‍/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2012-13) (१४२० फसली साल) Marriage Days: Nov.2012- 25, 26, 28, 29, 30 Dec.2012- 5,9, 10, 13, 14 January 2013- 16, 17, 18, 23, 24, 31 Feb.2013- 1, 3, 4, 6, 8, 10, 14, 15, 18, 20, 24, 25 April 2013- 21, 22, 24, 26, 29 May 2013- 1,2,3,5,6,9,12,13,17,19,20,22,23,24,26,27,29,30,31 June 2013- 2,3 July 2013- 11, 14, 15 Upanayana Days: January 2013- 16 February 2013- 14, 15, 20, 21 April 2013- 22 May 2013- 20, 21 Dviragaman Din: November 2012- 25, 26, 28, 29 December 2012- 2, 3, 14 February 2013- 14, 15, 18, 20, 21, 22, 27, 28 March 2013- 1 April 2013- 18, 22, 24, 26, 28, 29 May 2013- 12, 13 Mundan Din: November 2012- 26, 30 December 2012- 3 January 2013- 18, 24 February 2013- 1, 14, 15, 20, 28 April 2013- 17 May 2013- 13, 23, 29 June 2013- 13, 19, 26, 27, 28 July 2013- 10, 15 FESTIVALS OF MITHILA (2012-13) Mauna Panchami-08 July Madhushravani- 22 July Nag Panchami- 24 July Raksha Bandhan- 02 Aug Krishnastami- 10 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 17 August Vishwakarma Pooja- 17 September Hartalika Teej- 18 September ChauthChandra-19 September Karma Dharma Ekadashi-26 September Indra Pooja Aarambh- 27 September Anant Caturdashi- 29 Sep Agastyarghadaan- 30 Sep Pitri Paksha begins- 30 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-08 October Matri Navami- 09 October SomvatiAmavasya Vrat- 15 October Kalashsthapan- 16 October Belnauti- 20 October Patrika Pravesh- 21 October Mahastami- 22 October Maha Navami - 23 October Vijaya Dashami- 24 October Kojagara- 29 Oct Dhanteras- 11 November Diyabati, shyama pooja-13 November Annakoota/ Govardhana Pooja-14 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 15 November Chhathi -19 November Devotthan Ekadashi- 24 November ravivratarambh- 25 November Navanna parvan- 25 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 28 November Vivaha Panchmi- 17 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 08 February Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 15 February Achla Saptmi- 17 February Mahashivaratri-10 March Holikadahan-Fagua-26 March Holi- 28 March Varuni Trayodashi-07 April Chaiti  navaratrarambh- 11 April Jurishital-15 April Chaiti Chhathi vrata-16 April Ram Navami- 19 April Ravi Brat Ant- 12 May Akshaya Tritiya-13 May Janaki Navami- 19 May Vat Savitri-barasait- 08 June Ganga Dashhara-18 June Somavati Amavasya Vrata- 08 July Jagannath Rath Yatra- 10 July Hari Sayan Ekadashi- 19 July Aashadhi Guru Poornima-22 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज  :  http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ"  : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स  : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI  FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha VIDEHA केर सदस्यता लिअ Top of Form Bottom of Form ईमेल : एहि समूहपर जाउ २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ Top of Form Subscribe to VIDEHA Powered by us.groups.yahoo.com Bottom of Form २३.गजेन्द्र ठाकुर इ‍डेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक  निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइट http://www.shruti-publication.com/ पर । महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे। कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७ Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding: Language:Maithili ६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india) (add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)

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Details for purchase available at print-version publishers's site website: http://www.shruti-publication.com/ or you may write to e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com विदेह: सदेह : १: २: ३: ४ तिरहुता : देवनागरी "विदेह" क, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। विदेह:सदेह:१: २: ३: ४ सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com  or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com २. संदेश- [ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ] १.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत। २.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी। ३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत। ४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन। ५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन  भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी। ६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि। ७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू। ८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना। ९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना। १०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब। ११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ। १२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि। १३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत। १४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी। १५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी। १६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रिं‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे।  मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण-  श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)...   अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग। १७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल। १८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई। १९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत। २०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ। २१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ। २२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य। २३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई। २४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि। २५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधनक जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर) २६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक। २७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत। २८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी। २९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना। ३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी। ३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि। ३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई। ३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई। ३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई। ३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक। ३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ। ३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम। ३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना। ३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ। ४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल। ४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई। ४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य। ४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना। ४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि। ४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक। ४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत। ४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि। ४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रश‍ंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत। ४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना। ५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना। ५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना। ५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखि, ओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल। ५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेल, एतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रही, शुभकामना। ५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तार, छपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक अनेक धन्यवाद; कतेक बरखसँ हम नेयारैत छलहुँ जे सभ पैघ शहरमे मैथिली लाइब्रेरीक स्थापना होअए, अहाँ ओकरा वेबपर कऽ रहल छी, अनेक धन्यवाद। ५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछि, शुभकामना। ५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछि, बहुत मार्मिक छल। ५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखल, बधाई। ५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि। ५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी। ६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्ग, एकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि। ६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखल, बहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब। ६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी। ६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही। ६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछि, से चकित कएलक, एहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछि, से प्रशंसनीय। ६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना। ६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय। ६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित ‘विदेह’आ ‘कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमे? एहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह। ६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजी, अपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल , हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना । ६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ। ७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्, प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारे, एहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक) ७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि। ७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछि, एहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि। ७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मे  समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागल, अहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि। ७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना। ७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअए, से बहुत दिनसँ आकांक्षा छल, ओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछि, एहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि। ७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजी, अहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि। ७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजी, अहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि। ७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल। ७९. श्री हीरेन्द्र कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना। विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ एहिमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-12 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.co.in पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in www.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' ११४ म अंक १५ सितम्बर २०१२ (वर्ष ५ मास ५७ अंक ११४) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in www.videha.com विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' ११४ म अंक १५ सितम्बर २०१२ (वर्ष ५ मास ५७ अंक ११४) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X 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