VIDEHA — Issue 121 / अंक १२१

Publication: VIDEHA · Issue: 121
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ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १२१ म अंक ०१ जनवरी २०१३ (वर्ष ६ मास ६१ अंक १२१) ऐ अंकमे अछि:- ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.पंकज चौधरी (नवलश्री)- विहनि कथा : पुरस्कार २.२.जगदीश प्रसाद मण्‍डल-दूटा लघुकथा-पटि‍याबला/ सनेस २.३.बिन्देश्वर ठाकुर- प्रेम-पत्र / सपनाक अबसान २.४.उमेश मण्डल- मिथिलाक खाँटी संस्कृतिक संकलन २.५.गजेन्द्र ठाकुर- जगदीश प्रसाद मण्डल :एकटा बायोग्राफी- आगाँ २.६.नवेंदु कुमार झा- गाम मे विज्ञान केँ लोकप्रिय बनबऽ मे लागल छथि मानस बिहार २.७.सत्यनारायण झा- विहनि कथा- भोल ३. पद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- की भेटल आ की हेरा गेल  (आत्म गीत)- (आगाँ) ३.२.१.पंकज चौधरी (नवलश्री)- भक्ति गजल/ भक्ति गीत : दिय ने दरस जगदंब दिय/ गजल 1-3/हाइकू-शेनर्यू/ हजल/ कविता : माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!/ २.मनोज कुमार मण्‍डलक प्रश्न ३. मो. गुल हसन- उदास लागै.. ३.३.अमित मिश्र- गीत 1-3 ३.४.१.आशीष अनचिन्हार- नुकाएल बलात्कारी रूप २.किशन कारीगर- डिनर डिप्लोमेसी ३.५.१.मुन्नी कामत केर दुइ गोट कविता- बेटी-लहास/ बाल-श्रम २.प्रीति‍ प्रि‍या झा- कवि‍ता-कऽ देलखि‍न उपकार महाशय ३.६.१.राजदेव मण्‍डलक तीन गोट कवि‍ता-शि‍शुक स्‍वर/ बोलती बन्न/ दि‍लक आवाज २.जगदीश प्रसाद मण्‍डलक सातटा गीत ३.७.१.राम वि‍लास साफी- पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ २.सन्तोष कुमार मिश्र- गुलामी डे ३.जितेन्द्र ‘जितु’- गरीबीक जाड़/ कथी लए...? ४.राजेश कुमार झा- जों अहाँ नै छी ३.८.१.बिनीता झा- अही देशक बेटी हम २.कामिनी कामायनी -खिलैत पलास वन३. ज्योति झा चौधरी- शब्दमे उत्सव बालानां कृते-पंकज चौधरी (नवलश्री)- बाल गजल विदेह मैथिली पोथी डाउनलोड साइट VIDEHA MAITHILI BOOKS FREE DOWNLOAD SITE विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

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Join Videha googlegroups विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ मैथिली देवनागरी वा मिथिलाक्षरमे नहि देखि/ लिखि पाबि रहल छी, (cannot see/write Maithili in Devanagari/ Mithilakshara follow links below or contact at ggajendra@videha.com) तँ एहि हेतु नीचाँक लिंक सभ पर जाउ। संगहि विदेहक स्तंभ मैथिली भाषापाक/ रचना लेखनक नव-पुरान अंक पढ़ू। http://devanaagarii.net/ http://kaulonline.com/uninagari/  (एतए बॉक्समे ऑनलाइन देवनागरी टाइप करू, बॉक्ससँ कॉपी करू आ वर्ड डॉक्युमेन्टमे पेस्ट कए वर्ड फाइलकेँ सेव करू। विशेष जानकारीक लेल ggajendra@videha.com पर सम्पर्क करू।)(Use Firefox 4.0 (from WWW.MOZILLA.COM )/ Opera/ Safari/ Internet Explorer 8.0/ Flock 2.0/ Google Chrome for best view of 'Videha' Maithili e-journal at http://www.videha.co.in/ .) 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स्टेटस कोइस्ट युवाकेँ, वैज्ञानिक (नव) ब्राह्मणवादी युवा जे अहाँक जातिवादी विचारधाराकेँ चैलेन्ज केनाइ तँ दूर, ओइमे सहयोग करए, की ऐ तरहक तत्वकेँ बढ़ावा दऽ अहाँ मैथिली साहित्यक पुनर्जागरण बाधक तत्व नै बनि रहल छी। "निश्तुकी" कविता संग्रहकेँ पुरस्कार नै भेटए ओइ लेल महेन्द्र झाकेँ सहरसा" सँ, देवेन्द्र झाकेँ मधुबनी (संप्रति मुजफ्फरपुर)सँ आ योगानन्द झाकेँ बदनाम कबिलपुर गैंगसँ बजाओल गेल आ ई भार देल गेल। आ ओ सभ चुनलन्हि अरुणाभ "झा" सौरभ केँ। सायास "निश्तुकी" कविता संग्रह साहित्य अकादेमी द्वारा नै मंगाओल गेल, जे एकटा इलीगल काज अछि। हरबर-दरबरमे निर्णय कएल गेल, आब जएह पोथी आबि सकल ओही मध्यसँ ने निर्णय हएत, से तर्क देल गेल। पूर्ण रूपसँ फार्म हाउस चिकेन (उज्जर, ब्राह्मण आ नपुंसक) मैथिल ब्राह्मण जूरी चुनल गेल जे कोनो रिस्क नै रहए। ऐ इलीगल काजकेँ हर स्तरपर चुनौती देल जाएत। मूल पुरस्कार लेल शेफालिका वर्माकेँ चुनल गेल छन्हि आ अनुवाद पुरस्कार लेल महेन्द्र नारायण रामकेँ- दुनू गोटेकेँ बधाइ। संगमे नचिकेताक "नो एण्ट्री: मा प्रविश", सुभाष चन्द्र यादवक "बनैत बिगड़ैत" आ जगदीश प्रसाद मण्डलक "गामक जिनगी"क विरुद्ध "निश्तुकी" विरोधी तत्व जे तीन सालसँ जान प्राण लगेने अछि जे ऐ पोथी सभकेँ मूल पुरस्कार नै भेटैक, से घोर निन्दनीय अछि। "नो एण्ट्री: मा प्रविश" २००८ मे प्रकाशित रहै आ ई किताब अगिला सालसँ पुरस्कारक रेसमे नै रहत, ऐ पोथीकेँ मूल साहित्य अकादेमी नै भेटि सकत। मुदा की एकर स्थान मैथिलीक पहिल आ एखन धरिक एकमात्र पोस्टमॉडर्न ड्रामाक रूपमे बरकार नै रहत, की ब्राह्मणवादी विचारधारा ई स्थान ऐ पोथीसँ छीनि सकत? सुभाष चन्द्र यादवक "बनैत बिगड़ैत" आ जगदीश प्रसाद मण्डलक "गामक जिनगी" अगिला साल सेहो रेसमे रहत। मुदा तारानन्द वियोगी आ महेन्द्र नारायण राम किए (नव वैज्ञानिक) ब्राह्मणवाद द्वारा स्वीकृत छथि आ सुभाष चन्द्र यादव आ मेघन प्रसाद अस्वीकृत ओइ आलोकमे सुभाष चन्द्र यादवक "बनैत बिगड़ैत" क विरुद्ध रामदेव झा- योगानन्द झा- महेन्द्र मलंगिया- मोहन भारद्वाज- मायानन्द मिश्र- चन्द्रनाथ मिश्र "अमर" आदिक षडयंत्र सफल भैयो जँ जाए तँ की सुभाष चन्द्र यादवक मैथिली पाठकक हृदए मे जे स्थान छै, से की कम कऽ सकत ई षडयंत्रकारी सभ? जगदीश प्रसाद मण्डलक "गामक जिनगी"क स्थान मैथिलीक आइ धरिक सर्वश्रेष्ठ लघुकथा संग्रहक रूपमे बनि गेल अछि, की ओ स्थान कियो दोसर छीनि सकत? पढ़ू निश्तुकी आ चमेटा मारू महेन्द्र झा, देवेन्द्र झा आ योगानन्द झाकेँ - निश्तुकी http://books.google.co.in/books?id=CuB1Lih1WDIC&lpg=PP1&pg=PP1#v=onepage&q&f=false २ विदेहक सम्बन्धमे धीरेन्द्र प्रेमर्षिकेँ एकटा फकड़ा मोन पड़ल छलन्हि- "खस्सी-बकरी एक्कहि धोकरी"। राजा सलहेसक गाथामे जतऽ सलहेस राजा रहै छथि चूहड़मल चोर भऽ जाइ छथि आ जतऽ चूहड़मल राजा रहै छथि सलहेस चोर भऽ जाइ छथि। साहित्यक ब्राह्मणवाद जातिक आधारपर समीक्षा करैए, समानान्तर परम्पराक उदारवाद कट्टरता विरोधी अछि। समानान्तर परम्परा मिथिला आ मैथिलीक उदार परम्पराकेँ रेखांकित करैए तँ ब्राह्मणवादी समीक्षाकेँ मिथिलाक  कट्टर तत्व प्रभावित करै छै। समानान्तर परम्पराक घोड़ा ब्राह्मणवादी समीक्षामे गधा बनि जाइए, आ ब्राह्मणवादी साहित्यमे तँ गधा छैहे नै, सभ घोड़ाक खोल ओढ़ने छै। आ सएह कारण रहल जे मैथिलीक सुखाएल मुख्य धाराक साहित्य दब अछि। आ सएह कारण रहल जे अतुकान्त कविता हुअए बा तुकान्त, बहरयुक्त गजल हुअए बा आजाद गजल; रोला, दोहा,कुण्डलिया, रुबाइ, कसीदा, नात, हजल, हाइकू, हैबून बा टनका-वाका सभ ठाम समानान्तर परम्परा कतऽ सँ कतऽ बढ़ि गेल; नाटक-उपन्यास-समीक्षा, विहनि-लघु-दीर्घ कथा सभ क्षेत्रमे अद्भुत साहित्य मैथिलीक समानान्तर परम्परामे लिखल गेल मुदा ब्राह्मणवादी सुखाएल मुख्यधारा आ जातिवादी रंगमंच छल-प्रपंच आ सरकारी संस्थापर नियंत्रणक अछैत मरनासन्न अछि। गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। २. गद्य २.१.पंकज चौधरी (नवलश्री)- विहनि कथा : पुरस्कार २.२.जगदीश प्रसाद मण्‍डल-दूटा लघुकथा-पटि‍याबला/ सनेस २.३.बिन्देश्वर ठाकुर- प्रेम-पत्र / सपनाक अबसान २.४.उमेश मण्डल- मिथिलाक खाँटी संस्कृतिक संकलन २.५.गजेन्द्र ठाकुर- जगदीश प्रसाद मण्डल :एकटा बायोग्राफी- आगाँ २.६.नवेंदु कुमार झा- गाम मे विज्ञान केँ लोकप्रिय बनबऽ मे लागल छथि मानस बिहार २.७.सत्यनारायण झा- विहनि कथा- भोला पंकज चौधरी (नवलश्री) विहनि कथा : पुरस्कार

मैथिलीमे स्नातकोत्तर के उपाधि ग्रहण केलाक उपरान्त मृदुल साहित्य सृजनमे लागि गेला। नीक आ प्रभावी लेखनी हेबाक कारणे महाविद्यालय स्तर पर खूब ख्याति बटोरलन्हि।

रोजगारक ताकमे दिल्ली च'ल गेला मुदा शहरिया तड़क-भड़क नै सोहेलन्हि। शहरक भीड़-भरक्का आ ताम-झाममे साहित्यक संग छुटैत बुझना गेलनि त' गाम आपस आबि गेलाह आ मधुबनिएमे एकटा निजि विद्यालयमे शिक्षकक पद सम्हारि साहित्यक प्रति समर्पित भ' गेला। शिक्षकक नौकरीसँ जतेक आमद होनि ताहिसँ घ'रो चलब कठिन। घरमे सभ दिन लल्ला-छुच्छी लगले रहित छलनि। मुदा हारि नै मानलन्हि। साहित्यक खुट्टा धेने रहि गेला। जिनगीक गाड़ी जेन-तेना खींचने जा रहल छलाह।

साहित्यिक क्षेत्रमे हुनक प्रसिद्धि दिन-प्रतिदिन बढ़ल जा रहल छल। भरिसके कोनो पत्र-पत्रिका छल जाहिमे हुनक रचना नहि छपैत छल। कतेको पोथीक प्रकाशन भ' गेल छल। तीन बेर मैथिली भाषा लेल "साहित्य अकादमी" पुरस्कारक हेतु सेहो नामित भेला मुदा भेटलनि नहि। एहि बरख हुनक एक गोट पोथी के अमरीकामे सेहो सम्मानित कएल गेल छल। देशभरिमे पोथीक खूब चर्चा चलल। खूब सराहना भेल। एतए तक की एहि पोथी के मैथिली साहित्यमे मील के पाथर सेहो कहल जाए लागल। एहि बरखक मैथिली भाषामे "साहित्य अकादमी" पुरस्कारक लेल ओ प्रबल दावेदार छथि। सभके भरोस आ अपेक्षा जे एहि बेरक ई पुरस्कार लेल मृदुल जी सभसँ उपयुक्त लोक छथि।

बेस ... ओहो दिन आएल। पुरस्कारक घोषणा कएल गेल। मुदा ... ई की !!!??? पुरस्कारक घोषणा अचंभित करए वला छल। पुरस्कार लेल जखन साहित्यकारक नाउ घोषित भेल त' शंका जागल जे ई पुरस्कार मैथिली भाषाक लेल अछि आ की ....? सभ गोटे अपन-अपन तर्क लगा एहि घोषणाक तुक ताकि रहल छलाह। .....मृदुल अहू बेर छटा गेलाह !

पत्रकारक समूहमेसँ एक गोटे मृदुलसँ प्रश्न केलनि, "मृदुल की एकरा मैथिली साहित्यक उदारता कहब? की अहाँ संग न्याय भेल"? मृदुल नमहर स्वाँस छोड़ैत बजलाह, "एहि प्रश्नक बेशी महत्व नै जे पुरस्कार हमरा भेटल आ की नै, एकरो महत्व नै जे हमरा संगे न्याय भेल आ की नै; महत्वपूर्ण ई जे की पुरस्कार संगे न्याय भेल !?" कोनो भाषाक लेल "साहित्य अकादमी पुरस्कार" यदि एहन गोटे के देल जाएत अछि जे ओहि भाषासँ जुड़ले नहि छथि, त' की एकरा ओहि भाषाक व्यापकता वा उदारता कहल जाए? जे मैथिली आ अगबे मैथिली धेने बैसल छथि हुनका प्रसंगमे ई केहन उदारता अछि? की सिमित साधनक ई कथित व्यापकता या उदारता असीमित साधना पर प्रहार नहि अछि? यदि ई व्यापकता या उदारता प्रथा बनि गेल त' जे अगबे मैथिलीमे लिखैत छथि तनिका ई साहित्यिक समाज की जबाब देत? 

(तिथि: 21.12.2012) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश प्रसाद मण्‍डल दूटा लघुकथा-पटि‍याबला/ सनेस पटि‍याबला जेठ मास, दि‍नक तीन बजैत। देखैमे राति‍सँ बहुत बेसी नमहर दि‍न बनैत मुदा जहि‍ना कायाक संग माया आ रौदक संग छाया चलि‍ते रहैत तहि‍ना नमहर दि‍नक संग धूपो एते बढ़ि‍-चढ़ि‍ जाइत जे मझोलको दि‍नसँ, श्रमशक्‍ति‍क दौड़मे छोट बनि‍ जाइत। सूर्यक शक्‍ति‍वाण एते उग्र रूप पकड़ि‍ लइत जे धरति‍यो ताबा जकाँ आगि‍ उगलैपर उताहुल भऽ जाइत। धरती-अकास बीच लुलुआएल लू एक-ताले बाधमे नचैत। जेना राम-रावणक बीच वा महाभारतक सत्तरहम दि‍न भेल, तहि‍ना। तेहने तीरसँ बेधि‍त सुलेमान बेहोश भेल ओइ चि‍ड़ै जकाँ श्‍याम सुनरक दरबज्‍जापर आबि‍ दावामे साइकि‍ल ओंगठा ओसारक भुँइयेपर चारू नाल चीत खसि‍ते आँखि‍ मूना गेलै। जहि‍ना बन्न आखि‍ साँस चलैत अधमड़ूक होइत तहि‍ना भेल। बेरूका चाह पीबैक अभ्‍यास श्‍याम सुनरकेँ, तीन बजेक। बगलक घरक ओसारपर चाह बनबैत रहथि‍ तँए साइकि‍लक खड़खड़ाएबसँ नै परेखि‍ सकलाह जे वाण लगल बाझ जकाँ कि‍यो छथि‍। साइकि‍लक बात सामान्‍य तँए समुद्र उपछबसँ नीक जे जइ काजमे हाथ लागल अछि‍ अोकरा पूरा ली। सएह केलनि‍। चाह पीबैत दरबज्‍जापर अबि‍ते देखलनि‍ जे ई अधमड़ू भेल के छि‍याह। मुँह नि‍हारलनि‍ तँ चि‍न्‍हल चेहरा सुलेमानक। आँखि‍ बन्न, कुहरैत मनबलाक तँ बोलि‍यो अस्‍पष्‍टे जकाँ भऽ जाइ छै, तँए बाल-बोध वा पशु जकाँ दुख बूझब कठि‍न भऽ जाइत, तथापि‍ छाती थीर करैत श्‍याम सुनर टोकलखि‍न- “सुलेमान भाय, सुलेमान भाय?” पानि‍क तहक अवाज जहि‍ना ऊपर नै अबैत मुदा पानि‍क ऊपरक अवाज कम्‍पि‍त होइत, लहरि‍क अनुकूल ततए धरि‍ जाइत जतए ओ पूर्ण अस्‍थि‍र नै भऽ जाइत। श्‍याम सुनरकेँ उत्तर अबैसँ पहि‍नहि‍ मन पड़ि‍ गेलनि‍ भि‍नसुरका अवाज। “पटि‍या लेब पटि‍या, पटि‍या लेब पटि‍या।” मुदा लगले मनकेँ नअ घंटा उचटि‍ कहलकनि‍। भरि‍सक रौदक चोट आ मेहनति‍क मारि‍सँ एते बेथा गेल छथि‍ जे आँखि‍ खोलैक साहसे नै होइत छन्‍हि‍। चि‍न्‍हल दरबज्‍जा आ चि‍नहार बोली अकाि‍न करोट फेड़ैत अध-खिल्‍लू आँखि‍ उठा सुलेमान बाजल- “श्‍याम भाय, केकर मुँह देखि‍ घरसँ नि‍कललौं जे एको पाइक बोहनि‍ नै भेल। उधार-पुधार ऐ उमेरमे खाएब नीक नै बुझै छी, कखन छी कखन नै छी, केकरो खा कऽ मरब तँ कोसत। जलखै खा कऽ जे नि‍कललौं, सहए छी। खाली पेटमे पानि‍योँ भोंकबे करै छै। पेटमे बगहा लगैए।” सुलेमानक बात सुनि‍ श्‍याम सुनरकेँ भेलनि‍ जे भरि‍सक एकरे बि‍लाइ कुदब कहै छै। भुखाएल बि‍लाइ जहि‍ना छटपटाइत अपनो बच्‍चाकेँ कंठ चभैले तैयार हुअए लगैत तहि‍ना भरि‍सक होइत-हेतइ। मुदा रोगो तँ असान नै एक संग कते तीर लागल छन्‍हि‍। कोनो घुट्ठीमे तँ कोनो बाँहि‍मे कोनो छातीमे तँ कोनो माथमे। भूख-पि‍यास, थकान इत्‍यादि‍सँ बेधल छथि‍। तोसैत श्‍याम सुनर कहलखि‍न- “सुलेमान भाय, आँखि‍ नीक जकाँ खोलू। एके कप चाह बनौने छलौं जे आँइठ भऽ गेल अछि‍। बाजू पहि‍ने चाह पीब आकि‍ खेनाइ‍ खाएब?” पाश भरल बातमे आस लगबैत सुलेमान बाजल- “भाय, ऐ घरकेँ कहि‍यो दोसराक बुझलौं जे कोनो बात बजैमे संकोच हएत। देहमे तते दर्द भऽ रहल अछि‍‍ जे कनी पीठि‍पर चढ़ि‍ खुनि‍ दि‍अ पहि‍ने, तखन बूझल जेतै।” सए घरक जुलाहा परि‍वार गोधनपुरमे। झंझारपुरसँ पूब सुखेत पंचायतक गाम गोधनपुर। जइठाम मरदे-मौगि‍ये मि‍लि‍ बि‍छानक कारोबार करैत अछि‍। गाम-गामसँ मोथी कीनि‍, अपनेसँ सोनक डोरी बाँटि‍ बि‍छान बीनि‍, उत्तरमे अंधरा ठाढ़ी, दछि‍न घनश्‍यामपुर, पूब घोघरडीहा आ पछि‍म मेंहथ-कोठि‍या-रैमा धरि‍क बजार बना कारोबार करैत अछि‍। ओना जुलाहा खाली गोधनपुरे टामे नै आनो-आनो गाममे अछि‍ मुदा बि‍छानक कारोबार गोधनपुरे टामे होइत। शहर-बाजरमे जहि‍ना रंग-बि‍रंगक वस्‍तु-जात बि‍काइत तहि‍ना गामो-समाजक बजारमे चलैत अछि‍। जइमे रंग-बि‍रंगक वस्‍तु-जातक बि‍‍क्री-बट्टा चलैत अछि‍। कि‍छु वस्‍तुगत आ अछि‍ कि‍छु भावगत। साइयो परि‍वार अपन-अपन क्षेत्र बना भि‍नसरे जेर बना-बना नि‍कलि‍ जाइत अछि‍। ओना कहि‍यो काल सुलेमानो जेरेमे नि‍कलैत, मुदा आइ असगरे नि‍कलल छल। अपनामे सीमाक अति‍क्रमण करबो करैत आ नहि‍यो करैत। खुल्‍ला बजार तँ ओहए ने टि‍काउ होइत जे बि‍सवासू वस्‍तुक वि‍क्री करए। नै तँ घटि‍या माल आ बेसी दाममे वस्‍तुक वि‍क्री हएत। मुदा गोधनपुरक पटि‍याबलामे से नै एकरंगाह वस्‍तु, एक रंगाहे दाममे बि‍काइत। पीठ-सँ-घुट्ठी धरि‍ जखन श्‍याम सुनर दस बेर बुललाह तखन सुलेमान पड़ले-पड़ल बाजल- “भाय, आब उतरि‍ जाउ। एह, अरे बाप रे आेइ जि‍नगीसँ घुरलौं। मन हल्‍लुक भेल।” कहि‍ फुड़फुडा कऽ उठि‍ बैसैत बाजल- “भाय, अचेत जकाँ भऽ गेल छलौं। आँखि‍ चोन्‍हि‍या गेल छलए। सौंसे अन्‍हारे बूझि‍ पड़ए लगल छलए। ई तँ रच्‍छ रहल जे दरबज्‍जाक पछि‍ला देबालक ठेकान रहल, नै तँ कतए बौआ कऽ मरि‍तौं तेकर ठीक नै।” श्‍याम सुनर सुलेमानक बातो सुनैत आ मने-मन वि‍चारबो करैत जे हो-न-हो दरबज्‍जापर मरि‍ जाइत तँ मुँहदुस्‍सी चि‍ड़ै जकाँ लोक केना मुँह दुसैत तेकर कोनो ठीक नै। जइठाम घरपर चि‍ड़ै बैसने घरक सभ कि‍छु चलि‍ जाइ छै तइठाम कि‍ होइत। मुदा जइ दुर्गति‍क दुर्गपर सुलेमान पहुँचि‍ गेल छल ओइठाम मनुखक मनुखपना केहेन होइ, ईहो तँ अछि‍। सत्तरि‍-पचहत्तरि‍ बर्खक सुलेमान सभ दि‍न पचास कि‍लो मीटर बि‍छानक बोझ लऽ कऽ टहलि‍ बेचि‍ जीवि‍कोपार्जन करैत अछि‍, ओहनकेँ कि‍ कहल जाए। जे खून-पसीना एकबट्ट कऽ जीब रहल अछि‍। ओकर अंतीम बोलो कि‍यो परि‍वारक सुनि‍ पबि‍तै? मन ठमकि‍ते पुछलखि‍न- “सुलेमान भाय, आब केहेन मन लगैए, कि‍छु खाइ-पीबैक इच्‍छा होइए?” मुस्‍की दैत सुलेमान बाजल- “भाय, आब जीब गेलौं। आब खेबे करब कि‍ने। कि‍छु दि‍न आउरो दुनि‍याँक खेल-बेल देखि‍ लेब।” जहि‍ना गुड़-घाउक टनक जते बहैसँ पहि‍ने रहैत अछि‍ मुँह बनि‍ नि‍कलि‍ते कि‍छु बेसि‍या जाइत मुदा मूल-खि‍ल नि‍कलला पछाति‍ सुआस पड़ए लगैत, जइसँ रूप बदलि‍ जाइ छै, पाशा आस लगबए लगै छै, तहि‍ना सुलेमान बाजल- “भाय, सरेलहा भात-रोटी खाइक मन नै होइए।” “तखन?” “टटका जे गहुमक चारि‍टा रोटी भऽ जाइत तँ मन ति‍रपि‍त भऽ जइतए। ताबे नहा सेहो लेब।” सुलेमानक बात सुनि‍ श्‍याम सुनर कहलखि‍न- “कल देखल अछि‍? वाल्‍टीन-लोटा आनि‍ दइ छी, नीक जकाँ नहा लेब।” श्‍याम सुनरक बात सुनि‍ हँसैत सुलेमान बाजल- “भाय, एना कि‍अए बजै छी। पचासो दि‍न पानि‍ पीने हएब, आ कतेको दि‍न नहेने हएब, तखन कल देखल नै रहत। लोटा-बाल्‍टीन कथीले आनब, अांगनमे काज हएत। हम सभ तरहक लूरि‍ रखने छी ओहुना ठाढ़े-ठाढ़ वा बैसि‍ कऽ नहा लइ छी आ जँ सासुर-समधि‍और गेलौं तँ लोटो-बाल्‍टीन लऽ कऽ नहा लेलौं। ओना भाय, की कहू लोको सभ अजीब-अजीब अछि‍। ने माल-जाल जकाँ नागरि‍ छै‍ आ ने मनुखपना छै। एक दि‍न अहि‍ना रौदमे मन तबधि‍ गेल। एक गोरेक दरबज्‍जापर कल देखलि‍ऐ, साइकि‍ल अड़का नहाइले गेलौं। मन भेल पहि‍ने चारि‍ घोँट पानि‍ पीब ली। तही बीच एकटा झोंटहा आबि‍ झटहा फेकलक जे कल छुबा जाएत।” सुलेमानक बात सुनि‍ श्‍याम सुनरक मनमे वाल्‍मीकि‍ आबि‍ गेलखि‍न। तमसा नदीक तटपर वाण लगल क्रोंच पक्षी। मुदा अपनाकेँ सम्‍हारि‍ कहलखि‍न- “अहूँ सुलेमान भाय कोन खि‍स्‍सा भुखाएलमे पसारै छी। झब दे नहाउ, आंगनमे ताबे रोटी बनवबै छी।” सुलेमान कल दि‍स आ श्‍याम सुनर आंगन दि‍स बढ़लाह। जहि‍ना भोजनक पूर्व स्‍नानसँ खुशी होइत तहि‍ना सुलेमान कल दि‍स बढ़ला। मुदा श्‍याम सुनरक मनमे प्रश्न-पर-प्रश्न उठए लगलनि‍। पहि‍ल प्रश्न उठलनि‍ जे मृत्‍युसज्‍जापर पड़ल यात्रीकेँ वा फाँसीपर चढ़ैत यात्रीकेँ पूछि‍ भोजन देल जाइत अछि‍ तइठाम अपना मुँहेँ सुलेमान कहलक जे गहुमक रोटी। बि‍नु मेजनक गहुमक रोटी ओहने होइत जेहेन डम्‍हाएल मालदह आम। जँ सोझे रोटी कहैत तँ मड़ुआ रोटीक मेजन अचार, पि‍आजु, नून-मि‍रचाय, तेल सेहो होइत, मुदा टटका गहुमक रोटी केहेन हएत? सभकेँ अपन-अपन प्रेमी होइ छै। जँ से नै होइ छै तँ जूरशीतलमे बसि‍या अरबा चाउरक भात लेल पहि‍ने लोक तड़ूआ-भुजुआ कि‍अए बना लइए मुदा तँए कि‍ मोटका चाउरक बसि‍या भातक प्रेमी नून-पि‍आजु-अँचार नै हेतै। मुदा जते जल्‍दि‍वाजीक जरूरति‍ अछि‍ -जल्‍दि‍वाजी ऐ लेल जे भुखाएल पेट स्‍नानक पछाति‍ दोसर रूप पकड़ैत- तइमे रसदार तरकारी बनाएब संभव नै, तँए दूटा घेरा पका चटनी आ रोटीसँ काज चलि‍ सकैए। सएह केलनि‍। स्‍नान कएल नोतहारी जकाँ दरबज्‍जापर अबि‍ते सुलेमानक भुखाएल मन प्रेमी भोजनक बाट तकए लगल। बेर-बेर आंगन दि‍स‍ तकैत। आगूमे थारी देखि‍ते सुलेमानक मन साओनक सुहावन जकाँ हरषि‍ उठलनि‍। रोटीक पहि‍ल टूक चटनीक संग मुँहमे अबि‍ते दँति‍या कऽ दाँत पकड़ि‍ जीह रस चूसए लगलनि‍। रस पबि‍ते वि‍हुँसैत सुलेमान बाजल- “भाय, दुनि‍याँमे कतौ कि‍छु ने छै। छै सबटा अपना मनमे। जाबे आँखि‍ तकै छी ताबे बड़बढ़ि‍याँ, आँखि‍ मुनि‍ते दुनि‍याँ धि‍या-पुताक खेल जकाँ उसरि‍ जाइ छै। अपने मुइने सृष्‍टि‍क लोप भऽ जाइ छै।” सुलेमानक गंभीर वि‍चार सुनि‍ श्‍याम सुनरक मनमे उठलनि‍ जे भोजैत जँ भोजहरि‍क रसगर बात सुनैत तँ ओ आरो बेसी आनन्‍दि‍त होइत छै। मुदा अपन बात तँ बि‍नु प्रश्न पुछने नै हएत। द्वैतमे दुनि‍याँ हेराएल छै। बाढ़ि‍ आएल धार जकाँ कतए-सँ-कतए भसि‍या जाएत तेकर ठेकान रहत। श्‍याम सुनर पुछलखि‍न- “सुलेमान भाय, ऐ उमेरमे एत्ते भारी काज कि‍अए करै छी?” श्‍याम सुनरक प्रश्न सुनि‍ सुलेमान वि‍ह्वल भऽ गेल। जि‍नगीक हारल सि‍पाही जकाँ तरसैत बाजल- “भाय, जखन अहाँ घरक बात पुछि‍ये देलौं तखन कि‍अए ने सभ बात कहि‍ये दी।” सुलेमानक बात सुनि‍ श्‍याम सुनर बूझि‍ गेला जे बरि‍आतीक भोज हुअए चाहैत अछि‍, से नै तँ चरि‍आ दि‍यनि‍- “सुलेमान भाय, कहने छलौं जे गरम-गरम रोटी खाएब सराएल नै खाएब आ अपने गपक पाछू सरबै छी?” श्‍याम सुन्‍दक बात सुनि‍ हाँइ-हाँइ दूटा रोटी आ अधा चटनी खा एक घोंट पानि‍ पीब सुलेमान बाजल- “भाय, माए-बापक बड़ दुलारू बेटा छेलिऐ। खाइ-पीबैक कोनो दुख-तकलीफ परि‍वारमे नै रहए। कपड़ाक कारोबार छल। चरखा चलबैसँ लऽ कऽ खादी भंडारसँ हाट धरि‍क कारोबार छल।” श्‍याम सुनरक मनमे उठलनि‍- मोबाइल, टी.बी, कम्‍प्‍यूटर, कपड़ा, जूतासँ घर भरल रहै छै मुदा सबुरक कतौ ठेकान नै। भरि‍ पेट अन्न नै, फटलो वस्‍त्र नै, छुच्‍छहो घरमे सवुर केना फड़ि‍ जाइ छै!! सुलेमानक परि‍वारि‍क जि‍नगीक ललि‍चगर गप सुनि‍ श्‍याम सुनर जि‍ज्ञासा केलनि‍- “ओ कारोबार कि‍अए छोड़ि‍ देलि‍ऐ। मेहनतो आ आमदोक खि‍यालसँ तँ नि‍के छलए?” बामा हाथ चानि‍पर ठोकैत सुलेमान बाजल- “गाम-गामक बाबू-भैया सभ गरीबक कारखाना उजाड़ि‍ देलक। खादी भंडारकेँ लूटि‍ लेलक। छुच्‍छे हाथे कि‍ करि‍तौं।” फेर जि‍ज्ञासा करैत श्‍याम सुनर पुछलखि‍न- “कोन-कोन तरहक कपड़ा बनबै छेलि‍ऐ?” सुलेमान- “पहि‍रन वस्‍त्रसँ लऽ कऽ ओढ़ैक सलगा धरि‍ बनबै छेलि‍ऐ।” डुबैत नाव देखि‍ जहि‍ना नइया -नावि‍क- नि‍राश भऽ जाइत जे जँ जि‍नगी बचि‍यो जाएत, तँ जीब केना। तहि‍ना सुलेमानक तरसैत मन काँपए लगल। आगू बढ़बैत श्‍याम सुनर पुछलखि‍न- “ई तँ धि‍या-पुताक खेल भेल, जाए दि‍औ।” श्‍याम सुनर सुलेमानकेँ तँ कहि‍ देलखि‍न मुदा मन ठमकलनि‍। काजक रूपमे समाज बटल अछि‍। ओइ काजक लूरि‍ तँ ओकरा लेल सुरक्षि‍त अछि‍। जँ कागजी ज्ञानक अभावो रहतै आ वि‍कसि‍त बेवहारि‍क ज्ञान देल जाइ तँ कि‍ घर-घर पाठशाला नै बनतै। जरूरत छल समायानुकूल ओकरा बनबैक। से नै भेल। तेसर रोटी खाइत सुलेमान बाजल- “भेल तँ सहए, मुदा परि‍वार बि‍लटि‍ गेल।” परि‍वारक बि‍लटब सुनि‍ श्‍याम सुनर आगू बढ़ि‍ पुछलखि‍न- “अपन परि‍वारक कारोबार मरि‍ गेल तेकर पछाति‍ कि‍ केलि‍ऐ?” श्‍याम सुनरक प्रश्न सुनि‍ उत्‍साहि‍त होइत सुलेमान बाजल- “कि‍ केलि‍ऐ? हमरो जुआनीक उठानि‍ रहए। मनमे अरोपि‍ लेलि‍ऐ जे दुनि‍याँमे कतौसँ कमा कऽ परि‍वार जीवि‍त रखबे करब।” सुलेमानक संकल्‍पि‍त बात सुनि‍ वाह-वाही दैत श्‍याम सुनर पुछलखि‍न- “दोसर कोन काज केलि‍ऐ?” सुलेमान- “गाम-गामक कपड़ा बुनि‍नि‍हार बम्‍बई चलि‍ ऐलि‍ऐ।” “बम्‍बईमे कतए?” “भि‍वंडी। भि‍वंडीमे लूम चलै छै। ओइमे कपड़ा बुनाइ होइ छै। गमैया लूरि‍ तँ रहबे करए, लगले नोकरी भऽ गेल। ओना मजदूरी रेट कम रहए मुदा काजक माप सेहो रहै। जते करब तते हएत। जुआन-जहान रहबे करी दि‍नकेँ ने दि‍न आ राति‍केँ ने राति‍ बुझि‍ऐ। खूब कमेलौं।” श्‍याम सुनर- “तखन ओकरा कि‍अए छोड़ि‍ देलि‍ऐ?” श्‍याम सुनरक बात सुनि‍ सुलेमानकेँ ओहि‍ना भेलनि‍ जहि‍ना चोटेपर दोहरा-तेहरा कऽ चोट लगलासँ होइत। कुम्‍हलाएल फूल जकाँ मुँह मलि‍न आ ठोरमे फुड़फुड़ी आबए लगलनि‍ नमहर साँस छोड़ैत बाजल- “भाय, चारि‍ साल खूब कमेलौं, पाँचम साल बि‍हारी-मराठीक हल्‍ला उठल। हल्‍ले नै उठल कतेकेँ जान गेल, कतेकेँ बहु-बेटी छि‍नाएल, कतेकेँ कमाइ लुटाएल। सभ कि‍छु छोड़ि‍ जान बचा गाम अाबि‍ गेलौं।” श्‍याम सुनर- “गाममे आबि‍ फेर कि‍ केलि‍ऐ?” सुलेमान- “तेही दि‍नसँ पटि‍याक ई कारोबार शुरू केलि‍ऐ। सभ परानी लागल रहै छी, घीचि‍-तीड़ि‍ कऽ कहुना दि‍न बीतबै छी।” श्‍याम सुनर- “सुलेमान भाय, हम ई नै कहब जे अहाँ नै काज करू, मुदा काजक ओकाति‍ तँ देखए पड़त कि‍ने। कहुना-कहुना तँ चालीस-पचास कि‍लोमीटर साइकि‍ल चलबि‍ते हेबै?” “हँ से ने कि‍अए चलबैत हेबै। आब कि‍ ओ कोस रहल जे घंटामे एक कोस लोक चलै छलै।” “एक तँ अोहि‍ना शरीर ढील भऽ रहल अछि‍ तइपर साइकि‍ल चलबै छी। ततबे नै हो-न-हो कतौ रस्‍ता-पेरामे गीरि‍ये परब आ हाथ-पएर टूटि‍ जाएत तँ के देखत?” एक तँ सुलेमानक जरल मन ठंढ़ाएल तइपर सँ परि‍वारक लेल हाथ-पएर टुटब सुि‍न बाजल- “भाय, केतबो अन्‍हारमे अनचि‍न्‍हार लोक ढेरि‍या कि‍अए ने गेल, मुदा हमहूँ कोनो समाजक लोक छी तँए सभ समाज अपन-अपन धर्मक पालन करैत अछि‍। तहूमे हम तँ चि‍न्‍हार छी, गोटे-गोटे अनठा कऽ आगू बढ़ि‍ जाइत मुदा सभ तेहने तँ नहि‍ये अछि‍। तहूमे जागल लोककेँ थोड़े वि‍नास होइ छै।” सुलेमानक जागल बात सुनि‍ श्‍याम सुनर ठमकलाह। बात तँ बड़ सुनर अछि‍ मुदा जागलक की अर्थ बुझै छथि‍, से बि‍नु जनने बात नै बूझि‍ सकब। एके चीजक नाओं-शब्‍द ढेर अछि‍, नाओंक संग काज जुड़ल अछि‍। तइठाम बि‍नु पुछने काज नै चलत। पुछलखि‍न- “भाय, जागल केकरा कहै छि‍ऐ?” जेना सुलेमानकेँ रटले होइ तहि‍ना धाँइ-दऽ बाजल- “भाय, जखन आँखि‍ मूनल देखै छि‍ऐ तँ बूझि‍ जाइ छि‍ऐ जे सूतल अछि‍ आ आँखि‍ तकैत रहैए तँ बूझि‍ जाइ छि‍ऐ जे जागल अछि‍।” फेर ताकब आ मुनबक ओझरी श्‍याम सुनरकेँ लगलनि‍। मुदा ओझरीमे नै आगू बढ़ैत पुछलखि‍न- “कते गोटेक परि‍वार अछि‍।” सुलेमान- “अछि‍ तँ बहुत मुदा चारू बेटीकेँ सासुर बसेने अखन तीनि‍ये गोरेक अछि‍।” श्‍याम सुनर- “बेटासँ ने कि‍अए ई काज करबै छी। ओ तँ जुआन हएत?” बेटाक नाओं सुनि‍ सुलेमान वि‍ह्वल भऽ गेल। जेना कतौ सुख-दुख दुनू बहि‍न गारा-जोड़ी कऽ सामाक गीत गबैत तहि‍ना सुलेमान बाजल- “भाय, उमेरक ढलानेमे बेटा भेल। सभसँ छोट अछि‍। ओकरो दू अक्षर नै पढ़ा देबै, तँ लोक कि‍ कहत?” लोक लाज सुनि‍ श्‍याम सुनर हरा गेला। एहनो जि‍नगीमे लोक-लाज जीवि‍त अछि‍। वि‍हुँसैत पुछलखि‍न- “मन लगा कऽ पढ़ैए कि‍ने?” केकरा मनक बात ऐ युगमे के कहत। सभ अपने बेथे बेथाएल अछि‍। सुलेमान बाजल- “भाय, से तँ ओकरे मन कहतै जे मन लगा कऽ पढ़ै छी कि‍ मन उड़ा कऽ पढ़ै छी।” “अहाँ कि‍ देखै छि‍ऐ?” “भाय, हम तँ अपना धंधामे लागल रहै छी। तखन केना देखबै?” “संगी-साथी सभ कहैत हएत कि‍ने?” “हँ, से तँ कहैए जे जाइए पढ़ैले आ चलि‍ जाइए सि‍नेमा देखए, मैच देखए।” “परीछामे पास करैए कि‍ने?” “हँ से तँ ढौऔ-कौड़ी लगने पास कइये जाइए।” “तब तँ आशा अछि‍?” “हँ, से तँ ओकरेपर टक लगौने छी। जँ कहीं नोकरी भेलै तँ दि‍ने बदलि‍ जाएत।” बेटाक बात छोड़ि‍ श्‍याम सुनर पुछलखि‍न- “घरवाली कि‍ सभ करै छथि‍?” पत्नीक नाओं सुनि‍ सुलेमान पसि‍ज गेल। पत्नी, पत्नी रहल? संग चलनि‍हारि‍, काँट-कुशक परवाह केने बि‍ना कखनो गुरुक काज करैत तँ कखनो संगीक, कखनो प्रेमीक, जि‍नगीक अंति‍म क्षण धरि‍ रहैक प्रतिज्ञा...। बाजल- “भाय, कहुना कऽ बुढ़ि‍या भानस भात कऽ लइए। वेचारी दमासँ पीड़ि‍त अछि‍।” “इलाज कि‍अए ने करा दइ छि‍यनि‍?” “गरीब घरक लोकक इलाज कि‍ हेतै। जते पथ होइ छै तइसँ बेसी कुपथ होइ छै। तखन तँ चाहै छी जे वेचारी पहि‍ने मरए।” “से कि‍अए?” “एतेटा जि‍नगीक सभ कमाइ लुटा जाएत, जखन हम मरि‍ जेबै आ ओइ वेचारीक भीखक कलंक लागत।” सुलेमानक बात सुनि‍ श्‍याम सुनर गुम भऽ गेलाह। कि‍छु काल पछाति‍ कहलखि‍न- “आइ रहि‍ जाउ। काल्हि‍ ऐम्‍हरेसँ बेचैत-वि‍कनैत चलि‍ जाएब।” हँसैत सुलेमान बाजल- “भाय, जेना आइ एको पाइ बोहनि‍ नै भेल तेना नीके हएत। मुदा, बेमरयाह घरवालीकेँ एक नजरि‍ नै देख लेब से केहेन हएत।” (बि‍छान, पटि‍या, चटाइ आ गोनरि‍ बुननि‍हार एवं बेचि‍नि‍हार लेल...) सनेस लक्ष्‍मण रेखाक बीच सीता नहाँति‍ बैसल सनक काका, प्रेम रस पीब प्रेमीक संग अधरूपि‍या चालि‍ पकड़ि‍, अधखि‍लू फूलक गंधमे गमि‍आइते मुँहक मुस्‍की सौझुका सि‍ंगहार जकाँ महमहेलनि‍। अजीब ईहो दुनि‍याँ अछि‍। ने सत्ति‍ये अछि‍ आ ने वेश्‍ये अछि‍। बनौनि‍हारकेँ धन्‍यवाद दी जे एक दि‍स वि‍वेकक वि‍न्‍यास बाँटि‍ पाँति‍ये-पाँति‍, पाते-पात परसि‍‍ देलनि‍ तँ दोसर दिन-राति‍ बना आगूमे ठाढ़ कऽ देलनि‍। धरमक संग पाप, सुकर्मक संग कुकर्म, वि‍द्वानक संग मूर्ख आ पुरुष मौगीक जोड़ा लगा-लगा, पति‍आनी बीच पात्रेक पते-पते सेहो परसि देलनि‍। जते आगू दि‍स सनक काका देखैत छलाह ओते छगुन्‍ता लगैत छलनि‍। एक दि‍स पानि‍क ठोप चन्‍द्रोदक कहबैत, तँ दोसर दि‍स असीम अथाह क्षीरसागर, मुदा चन्‍द्रोदको तँ कतौ दूधक तँ कतौ पानि‍क तँ कतौ दूधपनि‍या सेहो होइते अछि‍। कहू जे ई केहेन दुनि‍याँक खेल छी जे कि‍यो असकरेमे सोलहो ताल धऽ नचबो करैत, गेबो करैत आ देखबो करैत‍ तँ कि‍यो भीड़-भाड़ तकैत। जते देखि‍नि‍हार तते नीक नाच। दुनि‍याँक चक्कर-भक्कर देख सनक काकाक मन तरे-तर उदास भेल जाइत रहनि‍। जहि‍ना धुरती बरि‍आती रंग-रंगक बात करैत तहि‍ना मनमे उठैत रहनि‍। अनेरे मनुख बनि‍ जन्‍म लेलौं। मनुखपना जखन एबे ने कएल तखन मनुख कि‍अए भेलौं। मुदा पना आऔत केना? बाँसक पना ओधि‍ होइत अबैत छै, केरा-मोथी-अड़ि‍कोच इत्‍यादि‍क सेहो ओहि‍ना अबैत मुदा मनुखमे से कहाँ भेल। बि‍नु पनेक मनुख ठाढ़ हएत। ठाढ़ तँ हएत मुदा शुद्ध ठाढ़ हएत की अशुद्ध? जखन जानवरोमे फेंट-फाँट होइते छै, तखन अपन हि‍स्‍सा मनुखे कि‍अए छोड़ि‍ देत। अनेरे दुनि‍याँक महजालमे फँसि‍ मरैले छड़पटाइ छी। दुनि‍याँमे के एहेन अछि‍ जे सुख-सागरमे बैस आनन्‍द नै चाहैए मुदा दुनि‍योँ तँ दुनि‍येँ छी कि‍ने? रंग-बि‍रंगक सागर सभ सेहो बसल अछि‍। क्षीर सागर, सुख सागर, लाल सागर, कारी सागर। सनक काकाक मन ठमकलनि‍। जीबैतमे जतए बौआइ मुदा समाधि‍ तँ ठौरपर लेब। जँ से नै तँ हि‍टलर जकाँ थूकक धारमे भसि‍आइत रहब। उदास मन, बि‍रहाइत बगए सनक काकाक रहनि‍। तखने भातीज-मनमोहन पोलीथि‍नक झोरामे कि‍लो आधेक अंगूर आ सेब आगूमे रखि‍ देलखि‍न। झोरा आगूमे देखि‍ते ठहाका मारि‍ काका हँसलाह। काकाक ठहाकाक चोट मनमोहनकेँ नै लगलनि‍, जना आमक गाछपर गोला फेकलापर कोनोकेँ खसने गोलवाहकेँ खुसी होइत सहए खुशी मनमोहनकेँ भेल। मुदा नि‍शान साधल आमक महत कि‍छु आरो। ठहाका मारि‍ बाजल- “काका, ई अहींक सनेस छी।” सनेस सुनि‍ सनक काका चौंकलाह जे सनेस कहि‍ की कहैए। पुछलखि‍न- “कतक सनेस छी?” मनमोहन- “कश्‍मीरी सेब छी आ पूनाक चमन अंगूर।” सनक काकाकेँ मन तरे-तर सनकल जाइत जे ई छौड़ा कि‍ बूझि‍ मजाक करए आएल। जहि‍ना बाप एकोटा कुकर्म नै छोड़लकै तही उतारक अपनो भेल अछि‍ आ सेव-अंगूर देखबए आएल अछि‍। तामसकेँ तरेमे दबैत काका कहलखि‍न- “हौ मनमोहन, एक दि‍नक भोजे की आ एक दि‍नक राजे की! बच्‍चा सभकेँ दऽ दि‍हक। अपने अनरनेबा आ लताम दुइर होइए। जते तोहर लेब तते अपन दुरि‍ये हएत। अच्‍छा बौआ, एकर भाउ की छै?” “एकर भाउ बुझैक कोन जरूरति‍‍ पड़ि‍ गेल काका?” मनमोहन बाजल। मने-मन सनक काका सोचलनि‍ जे छौड़ा नमहर छि‍नार-लुटार जकाँ बूझि‍ पड़ैए। कहलखि‍न- “बौआ, आब तँ सहजहि‍ चल-चलौए छी मुदा अपनो देश-कोसक हाल बूझब कोनो अधला हएत?” एक तँ सनक काकाक बदनामी शुरूहेसँ रहलनि‍ जे घरो लोक सनकले कहै छन्‍हि‍। केना नै कहनि‍ सभ अपन परि‍वारक बाल-बच्‍चा ले करैए आ ई सनक काका से बुझबे ने करै छथि‍। परि‍वारोमे सनक काकाक सनकी यएह रहनि‍ जे अपन-परि‍वार आ दोसर परि‍वारमे भेदे नै बुझथि‍न। जहि‍ना अपन परि‍वार तहि‍ना दोसराक। अखन धरि‍ मनमोहन यएह बुझैत जे परि‍वारोसँ बाड़ले-बेरौले छथि‍ तँए सभ चीजक दुख-तकलीफ होइते छन्‍हि‍। मनमोहनक नजरि‍ कड़ुआए लगल। सनक काका बुझैक कोशि‍श करए लगलाह, कारण कि‍ छै। मनमे मि‍सि‍यो भरि‍ सन्‍देह अपनापर नै भेलनि‍। मन गवाही दैत रहनि‍ जे नि‍नानबे प्रति‍शत राक्षसक देश लंका तइठाम वि‍भीषण केना भक्‍ति‍-भजन करैत जि‍नगी गुदश करै छलाह। केहनो सघन बोन सुकाठ-कुकाठक कि‍अए ने होउ मुदा आमक गाछ आम आ लतामक गाछ लताम फड़ब बि‍सरि‍ जाएत! दोहरा कऽ मनमोहनकेँ पुछलखि‍न- “हौ बौआ, जहि‍ना एके गोरे डाॅक्‍टरो आ इंजीनि‍यरो नै भऽ सकैए कि‍एक तँ दुनूक दि‍शा अलग-अलग छै। मुदा सेबक जगह जँ अपनासँ नीक लताम आ अंगूरक जगह अनरनेबा नेने अबि‍तह तँ फले नै बीओ रोपि‍ देति‍ऐ।” सनक काकाक प्रश्न सुनि‍ मनमोहन उछलैत बाजल- “काका, दुनि‍याँ आब घर-आंगन बनल जा रहल अछि‍। आ अहाँ पुस्‍तैनी वि‍चार रखनहि‍ छी।” मनमोहनक साँसक गरमीकेँ अंकैत सनक काकाक सनकी तेज नै भेलनि‍। मि‍ड़मि‍ड़ाइत कहलखि‍न- “बौआ, जँ दुनि‍याँ घर-आंगन बनि‍ गेल तँ ओ नीक बात छी, मुदा ई तँ नीक बात नै जे कि‍यो नौड़ी-छौड़ी बना भाषा, साहि‍त्‍य-संस्‍कृति‍केँ ओझरा मटि‍या मेट कऽ दि‍अए। से कने बुझा दाए जे कि‍ भऽ रहल छै?” “काका, दुनि‍याँ आब नव पीढ़ीक अछि‍ तँए केतबो दुसबै ओ चढ़बे करत।” गुम्‍हरैत मनमोहन बाजल। मनमोहनक प्रश्नसँ सनक काकाक सनकी पाछू मुँहेँ ससरलनि‍। पछुआ पकड़ि‍ कहलखि‍न- “बौआ, जर्मनी-जापानी आ अंग्रेजी शब्‍द ऐ लेल चढ़-चढ़ौ भऽ गेल जे ओकर वि‍कास अगुआ मशीनमे पहुँचि‍ गेल आ मशीनक नाओं राखि‍-राखि‍ अहाँक घर-अंगनामे छि‍ड़ि‍या देलक। अहाँ ऋृषि‍-मुनि‍क राज मि‍थि‍ला कहि‍-कहि‍ ओतए पहुँचि‍ गेलौं जे ओ सभ की कहलनि‍ तेकर डि‍क्‍शनरि‍ये चोरा लेत। तखन अहाँ बुझबै जे केहेन नव युगक नव लोक बनि‍ गेलौं?” सनक काकाक बात सुनि‍ मनमोहन ठमकल मुदा पाछू हटैले तैयार नै भेल। बाजल- “काका, बजारमे अखन एक-सँ-एक खाइयो-पीबैक आ फलो-फलहरी तेहन आबि‍ गेल अछि‍ जे अपना ऐठामक फल-फलहरीकेँ के पूछत?” मनमोहनक प्रश्न सुनि‍ सनक काका, सनकी आगू मुँहेँ ससरि‍ते, कहलखि‍न- “बौआ, कोनो देश-कोसक वि‍कासमे ओइठामक माटि‍, पानि‍, हवा इत्‍यादि‍ पंच भूत मुख्‍य तत्व भेल। अनुकूल गति‍ये सृष्‍टि‍ चलैत अछि‍। अपना ऐठामक लताम वा कोनो आन फल अछि‍, ऐठामक काल-क्रि‍याक गति‍ये जे जरूरी छल ओ प्रकृति‍ पैदा केलक। अपना ऐठाम एकरे अभाव भेल, जइसँ पहाड़ी फलकेँ मैदानी क्षेत्रमे नीक मानल जाइत अछि।” अपनाकेँ मनमोहन नि‍रुत्तर देखि‍ मैदानसँ हटैक वि‍चार करए लगल। मुदा सेव-अंगुरक पोलीथीन बीचक सीमा बनल। रूमाल चोर जकाँ सीमा पहि‍ने के टपत। पाछू हटैत मनमोहन बाजल- “काका, आशा लगा अनने छलौं जे काकाकेँ नीक फल खुएबनि‍।” मनमोहनक बात सुनि‍ सनक काका तारतम्‍यमे पड़ि‍ गेलाह जे अखन धरि‍ जे हम बुझै छेलि‍ऐ तइसँ भि‍न्न ने तँ मनमोहन अछि‍। आशाक दोहाइ लगा बजैए जे आशा लगा अनने छलौं। आशा तँ सभकेँ अपन-अपन होइ छै। सबहक देहेटा अलग-अलग नै अछि‍, मनक उड़ान सेहो होइ छै। पि‍जरामे बन्न सुग्‍गोकेँ पोसि‍नि‍हार सि‍खबैए जे आत्‍मा राम पढ़़ू- चि‍त्रकूट के घाटपर, भए संतन के भीड़। तुलसी दास चानन रगड़े, ति‍लक करे रघुवीर...। मुदा सेहो तँ ने बूझि‍ पड़ैए। तखन? ओ तँ पुछनहि‍ पता चलत। कहलखि‍न- “हौ बौआ, जहि‍ना घरक लोक हमरा बताह कहैए तहि‍ना ने ओकरो सभकेँ सनकपनि‍ये फल खुएबै।” कहि‍ मने-मन सोचए लगलाह। भाँग पीब कि‍यो बाजि‍ चुकल छथि‍ आकि‍ असथि‍र मोने सोचि‍ कहने छथि‍ जे जेहेन खाए अन्न तेहेन बने मन। मुदा अहू छौड़ाकेँ तँ छि‍छा-बीछा नीक नहि‍येँ छै। भरि‍ दि‍न देखै छि‍ऐ जे ऐठामसँ ओइठाम, ओइठामसँ ऐठाम ढहनाइते रहैए। तइपर सँ दि‍नो-दि‍न आगूए मुँहे ससरि‍ रहल अछि‍। से केना? बहुरूपि‍या ने तँ छी! सलाइ रि‍ंच जकाँ सभ नट पकड़ै बला! तही बीच मनमोहन बाजल- “काका, अहाँ अपने हाथे बाँटि‍ दि‍औ।” मनमोहनक बात सुनि‍ सनक काका ठमकि‍ गेला। जहि‍ना कोनो टपारि‍ कुदैले दू डेग पाछू हटि‍ दौड़ कऽ टपि‍ जाइत तहि‍ना काका पाछूसँ आगू बढ़ि‍ कहलखि‍न- “हौ बौआ, बतरसि‍या हाथ भऽ गेल, ओहुना हरदम थरथराइए तइपर कोनो काज करै काल तँ आरो बेसी थरथराए लगैए। अपन चीज जे थोड़-थाड़ छि‍ड़ि‍आइयो गेल तँ नै कोनो, मुदा तोहर जे एकोटा अंगूर खसि‍ पड़त तँ तोरे मन कि‍ कहतह। यएह ने जे सनकाहक ठेकान कोन। तँए हमरा चलैत तोरा मनकेँ ठेँस लगऽ, से नीक नै बुझै छी।” काकाक बात सुनि‍ मनमोहन बाजल- “तँ की काका, घुमा कऽ लऽ जाइ?” अनेरे ओझरीमे ओझराएल अपनाकेँ देखि‍ सनक काका, ठाँहि‍-पठाँहि‍ कहलखि‍न- “ई तोहर खुशी छि‍अह जे घुमा कऽ घरपर लऽ जा वा दोकानदारेकेँ घुमा दहक वा रस्‍ता-पेरामे कोनो धि‍ये-पुतेकेँ दऽ दहक। हम कि‍छु ने कहबह। एते दि‍नक पछाति‍ दरबज्‍जापर एलह सहए खुशी अछि‍।” सनक काकक बात सुनि‍ जहि‍ना जाड़सँ कठुआ कि‍यो देह-हाथ तानि‍ अचेत भऽ जाइत तहि‍ना मनमोहनकेँ भेल। मुदा....? ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बिन्देश्वर ठाकुर, धनुषा, नेपाल। हाल-कतार। प्रेम-पत्र / सपनाक अबसान प्रेम-पत्र 

हमर प्राणप्यारी नम्रता  मनभरिके माया आ स्नेह मात्र अहाँकेँ।  हम ऐठाम कुशल रहि अहाँक कुशलताक कामना करैत छी। अहाँक वियोगमे बिना पानिक माछ आ बिना नेहु कऽ माँस बनल हम एतऽ परिवारक भरण-पोषण लेल श्रमजीवीक टोपी लगा दिन काटि रहल छी।  काल्हिक फोनसँ साच्चे हमर मन बड दुखित अछि। अहाँक उपराग छल जे हमरा बिसरि गेलौं, बराबर फोन नै करैत छी। अहाँकेँ हमर ख्याले नै अछि। मुदा सत्य ई नै छै। किएक तँ हम तँ बस शरीर छी जहिकऽ आत्मा अहाँ छी। जौँ श्वास लेबऽबला फोक्सो हम छी तखन ऑक्सीजन तँ अहाँ छी। आब अहीं कहू जकरा बिना हम एक पल बाँचि नै सकब, ओकरासँ अलग रहबाक कल्पना कोना करब? मुदा तैयो परिस्थिति लोककेँ दोसर कऽ सामने विवश कऽ दै छै। आन लग काम करब, ओहो प्रचण्ड गर्मीमे, बड पैघ बात छै। घरमे बसिया-कुबसिया किछु नै खाइ छलौं। मुदा एतऽ सुखल खबुस चिबाएब लत भऽ गेल अछि। नेपालमे रहैत काल विदेश माने स्वर्ग हएत से कल्पना करैत छलौं। ओतुक्का लोक सभ आनन्दसँ, खुशी साथ जीवन व्यतीत करैत हेताह, से भ्रम छल। पैसा जेना गाछसँ हिला कऽ लाख- दू लाख पठबैत अछि, तहिना बुझाइत छल। शायद एखन अहूँ ओहे सोचैत हएब। मुदा देखू ह्रिदेश्वरी, सत्य ई नै छै। स्वर्ग कहल ई जगह वियोगाभासमे तड़पि-तड़पि मरऽबला स्थान छै। एतऽ पैसाक महत्व संगे मनुष्यक खरीद-बिक्री होइ छै। दोसर दिस रातिमे अहाँ संग बिताएल ओ पल सभ,स्नेहक तीत-मीठ गप-सप बिढ़नीक खोता जकाँ हमरा मानस पटलमे आबिकऽ निन्द तोड़ि दैए। कखनो-कखनो विदेश छोड़ि कऽ अहीं संग ओइठाम साग-पात खा दिवस गमएबाक इच्छा होइए। मुदा विगतक दु:ख-दर्दसँ मन तरसि जाइए। सच्चे, नीक खाना, नीक कपड़ा आ नीक गहना लेल कतेक तरसि गेल छलौं। नीक खाएब आ नीक लगाएब सपना भऽ गेल छल।  एतऽ आबि परिवार टेबब एकटा किनर मिलल अछि। दायित्व पूरा करबाक एकटा सहारा अछि। हम एतबेमे खुशी छी। मुदा तैयो फोन करबाक पर्याप्त पैसा आ समय नै हएब, दोसरक वशमे बड़द जकाँ जोताएब, घर- परिवारसँ दूर रहब चिन्ताक विषय थिक।  एहन विषम परिस्थितिमे हमर साथ देब, आत्मविश्वास बढ़ाएब, अपनामे धैर्यताक बान्ध मजगूत राखब अहाँक कर्तव्य अछि। कारण अहाँक धैर्यता आ आत्मविश्वासे प्रवासमे हमरा हौसला प्रदान करत।  अन्तमे समय-समयमे फोन करैत रहब से वाचाक संग एखन विराम। बाँकी दोसर पत्रमे। 

अहाँक स्नेही  एकान्त राम मरुभूमि टोल,कतार २ सपनाक अबसान एक दिन रमलोचना आंगनमे सँ महेश महेश... किलोल करै छथि। तखन चौकिये परसँ काकी कहै छथिन, बौआ एम्हरे आउ- काकीक मन बड पिड़ाएल आ मन खिन्न रहए। रमलोचना गामक बेटा आ महेसक संगी छल। बुढ़िया रमलोचनाकेँ बजा कऽ महेशकेँ वृतान्त सुनबैत छथिन। महेश जे तीन साल पहिने गेल छलाह कतार, अपन सपना पूरा करबाक लेल। जयबाक बेर अत्यन्त हर्षित- माएला घर बनाएब, पत्नीक लेल नीक कपड़ा, बच्चा-बुच्चीकेँ नीक स्कूलमे पढ़ाएब आ जबान बहिनक शादी करब। हतपतमे पास्पोर्ट बनौलक। अपन कियो नै रहै विदेशमे। तैयो घरक पड़ोसी मदनक सहयोगमे हुनकर मामासँ वीजा मङौलक। पहिने कनिए पैसामे भऽ जाएत कहितो प्लेनपर चढ़ऽसँ पहिने १ लाख नगद लेबाक जिद करऽ लागल। पैसा नै भेलाक कारणे दोबर कऽ कागज बनबा लेलक। आब दूध-माछ दुनू बातर भऽ गेलै महेशकेँ। की करत घरमे, सभ सदस्यक आँखिक नोर पोछैत ओ गेलाह कतार। मुदा हुनका सभकेँ नै चाही एना, काम नाथुरकेँ कैहक दिन-राति धूपमे तबुक उठाएब आ देह धुनि बिल्डिङ कन्सट्रक्शनमे काम करब। नै खएबाक नीक व्यवस्था, नै सुतबाक। कम्पनी सेहो सप्लाइ।  घरक याद बड सतबैक महेशकेँ। मुदा प्रतिज्ञाक अटल रहथिन महेश। कतबो दु:ख पीड़ा होइतो काम नै छोड़थिन। ओइठाम ब्याज बढ़ि कऽ घर गिरवी रखबाक स्थिति आबि गेलै। एतऽ पगार जहिनाक तहिना। दिन-दिन सोचि-सोचि कमजोर भऽ गेल बेचारा महेश। एक दिन काम करैत काल करेन्ट लागि गेल हुनका। साथी-संगीक सहयोगमे अस्पताल लऽ जा बचलथि। मुदा हाथ बिना काम कऽ भऽ गेल। ऊपरसँ कम्पनी तोरा गल्तीसँ करेन्ट लागल आ कम्पनीक समान सभ नोकसान भेल कहैत माँस सेहो काटि लेलक। शरीर बिना कामकेँ भेलासँ उपचार करएबाक बदला महेशकेँ घर पठा देलक। महेशक आँखिसँ नोर बर्-बर् टपकैत रहल।  घर पहुँचलाक बाद ओ माएक स्थिति देखि बौक भऽ गेलाह। जेना मुँहसँ किछु अबाज नै निकलल। माय सेहो अन्तिम साँस रोकने बस महेशक लेल। बौआ-बुच्ची बाबुक सनेसक प्रतीक्षामे। पत्नीक लेल सेहो किछु नै। हाथ खाली। बड ग्लानि भेलनि महेशकेँ।  किछु दिन बाद उपराग सभसँ महेशक धैर्यताक बान्ध टुटि गेलै। ई बान्ध बड मजगूत होइ छै आ टुटलापर सर्वनाश होइ छै। यएह भेल महेशक साथ। अपन जबान बहिनक विवाह दहेजक कारण नै भऽ सकल आ गामक लोकक ताना सुनि-सुनि ओ पागल भऽ गेलाह।  महेश बनि कऽ सृष्टिक रक्षा करब उद्देश्य रखने हमर बेटा ऐ गरीबीक चपेटामे जिनगी नरक बना लेलक। आ हम सभ दर-दर भटकि रहल छी। अते कहैत बुढ़ियाक आँखिमे नोर भरल आ जोर-जोरसँ चिचिया उठल आ धिया-पुता जकाँ हुचकि-हुचकि कानऽ लगलीह। रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। उमेश मण्डल मिथिलाक खाँटी संस्कृतिक संकलन नाच पाटी- मि‍थि‍ला नाट्यकला परि‍षद- पकड़ि‍या कम्‍पनी- श्री राम लखन साहु पे. स्‍व. खुशीलाल साहु पता, गाम- पकड़ि‍या, पोस्‍ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) मैनेजर- श्री ठकाई यादव पे. स्‍व. फुसन यादव पता, गाम- मुसहरनि‍याँ, पोस्‍ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाच- (1) अल्‍हा रूदल (2) लछि‍या रानी (3) शीत वसंत (4) गुगली घटमा (5) राजा कुँवर वृजभान अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- श्री भाेगी लाल दास-           स्‍व- भायलाल दास            लछमि‍नि‍याँ (मधुबनी) श्री रामचन्‍द्र शर्मा-             श्री जंगल शर्मा               नेमुआ (मधुबनी) श्री नथुनी शर्मा-              श्री वनमाली शर्मा             नेमुआ (मधुबनी) श्री सुन्‍दर मुखि‍या-            श्री नागेश्वर मुखि‍या            हरि‍याही (सुपौल) श्री वासदेव सदाय-            स्‍व. कुजाय सदाय            सखुआ (ि‍नर्मली) श्री नारायण सदाय-            श्री गंगा सदाय               बेलही (सुपौल) मो. जाहि‍द उर्फ राजा          मो. डोमी नदाफ              सुदै द्वारम (मधुबनी) श्री रंजीत राम               श्री लखन राम               खुटौना (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- आर्गन-        श्री छेदी पंडि‍त         स्‍व. चन्‍द्र पंडि‍त        बरहारा (सुपौल) नाल-         श्री परमेश्वर भारती      स्‍व. जगरूप भारती      मुसहरनि‍याँ (मधुबनी) काँरनेट-       श्री चन्‍दर राम         श्री जीतन राम         लछमि‍नि‍याँ (मधुबनी) नङेरा-        श्री लाल राम          स्‍व. फुसन राम        लछमि‍नि‍याँ (मधुबनी) ढोलक-       श्री कलानंद राम        स्‍व. खट्टर राम        लछमि‍नि‍याँ (मधुबनी) ड्रमसेट-       श्री भोलट दास        श्री योगेन्‍द्र दास        ि‍नर्मली (सुपौल) आन सहयोगी- श्री याेगेन्‍द्र यादव        श्री ठकाई यादव        मुसहरनि‍याँ घुरन दास            श्री भायलाल दास (ताॅति)‍ लछमि‍नि‍याँ दि‍नेश राम            श्री सीताराम राम       लछमि‍नि‍याँ नाच पाटी- श्री श्री 108 श्री भगवती नाचपार्टी- सि‍मराहा सप्तरी कम्‍पनी- श्री रामचन्‍द्र मण्‍डल पे. श्री वृजलाल मण्‍डल पता, गाम- सि‍मराहा, पोस्‍ट- बरसाइन, जि‍ला- सप्‍तरी (नेपाल) मैनेजर- श्री राम सुन्‍दर राम पे. श्री सुवी राम पता, गाम- दउरी, पोस्‍ट- बरसाइन, जि‍ला- सप्‍तरी (नेपाल) नाच- (1) अल्‍हा रूदल (2) लछि‍या रानी अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- श्री शैनी पासवान             श्री दुखी पासवान            खड़कपुर (बरसाइन) श्री लक्ष्‍मण राम              श्री कैलू राम                दउरी (बरसाइन) श्री बेचू राम                श्री श्रीप्रसाद राम              दउरी (बरसाइन) श्री सत्‍य नारायण राम-         श्री नथुनी राम               दउरी (बरसाइन) श्री देव नारायण यादव-         श्री नथुनी यादव              दउरी (बरसाइन) श्री परमेश्वर मण्‍डल-            श्री तेजी मण्‍डल              सि‍मराहा (बरसाइन) श्री रघु मण्‍डल-                    स्‍व. थारू मण्‍डल             सि‍मराहा (बरसाइन) श्री चरि‍त्तर मण्‍डल-            स्‍व. कारी मण्‍डल             सि‍मराहा (बरसाइन) श्री जोगी मण्‍डल-             श्री बच्‍चाई मण्‍डल             सि‍मराहा (बरसाइन) श्री बेचू राम                श्री प्रसाद राम               दउरी (सप्‍तरी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- काँरनेट-       श्री देव नारायण राम     स्‍व. नाथो राम         दउरी (बरसाइन) काँरनेट-       श्री दुखी राम         स्‍व. कारी राम         खड़कपुर (बरसाइन) ढोलक-       श्री नशीवलाल राम      श्री कैलू राम          दउरी (बरसाइन) नङेरा-        श्री राम प्रसाद राम      श्री सुवी राम          दउरी (बरसाइन) हारमोनि‍यम-     श्री चरि‍त्तर मण्‍डल      श्री कारी मण्‍डल        दउरी (बरसाइन) आन सहयोगी- शि‍व नारायण दास      श्री ठकाइ दास        दउरी (बरसाइन) कोसी नाट्य कला परि‍षद- सि‍मराहा-सुपौल कम्‍पनी- श्री गया प्रसाद मण्‍डल पे. श्री राम नारायण मण्‍डल पता, गाम- सि‍मराहा, पोस्‍ट- नौआबाखैर, भाया- थरबि‍टि‍या, जि‍ला- सुपौल मैनेजर- श्री दया नन्‍द मण्‍डल पे. श्री राम लखन मण्‍डल पता, गाम- सि‍मराहा, पोस्‍ट- नौआबाखैर, भाया- थरबि‍टि‍या, जि‍ला- सुपौल। नाच- (1) अल्‍हा रूदल (2) सती लछि‍या अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- श्री अरूण कुमार मण्‍डल        श्री नथु मण्‍डल              सि‍मराहा (सुपौल) श्री रून्‍दी पासवान             स्‍व. बहादुर पासवान           परसा माधो (सुपौल) श्री राम प्रसाद शर्मा            स्‍व. बि‍लट शर्मा              परसाहा (सुपौल) श्री देवराज शर्मा              स्‍व. तपेश्वर शर्मा             सि‍मराहा (सुपौल) श्री चन्‍द्र नारायण मण्‍डल        स्‍व. रघुनाथ मण्‍डल           सि‍मराहा (सुपौल) श्री दुखी पासवान                   श्री बेचन पासवान             परसा माधो (सुपौल) श्री वि‍जय कुमार राय          श्री राम स्‍वरूप राय           सि‍मराहा (सुपौल) श्री बेचन शर्मा               स्‍व. रामसुन्‍दर शर्मा            परसाहा (सुपौल) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री सत्‍य नारायण मण्‍डल स्‍व. खुशीलाल मण्डल    सि‍मराहा (सुपौल) ढोलक-       श्री गणेश राम         श्री वि‍न्‍देश्वर राम        एकडारा, थरवि‍टि‍या (सुपौल) काँरनेट-       श्री शि‍व नारायण सदा    स्‍व. .............       एकडारा, थरवि‍टि‍या (सुपौल) नङेरा-डि‍ग्री-     श्री गुनेश्वर राम         श्री ...............        परसाहा, नाैआ बाखैर (सुपौल) झाइल-        श्री हरि‍नारायण पासवान   स्‍व. नकछेदी पासवान    सि‍मराहा (सुपौल) झाइल-        श्री तेज नारायण मण्‍डल स्‍व. खुशीलाल मण्‍डल    सि‍मराहा, नौआबाखैर (सुपौल) भड़ि‍या-        श्री लालदेव मण्‍डल      श्री बच्‍चा मण्‍डल        सि‍मराहा, नौआबाखैर (सुपौल) जोकर-        श्री सीताराम राम       ..................         परसाहा, नाैआ बाखैर (सुपौल) अन्‍य सहयोगी- श्री सुभाष कुमार राय   श्री कन्‍हैया लाल राय          बौराहा, थरवि‍टि‍या (सुपौल) रामलीला नाट्य कला परि‍षद- रसुआर जि‍ला-सुपौल कम्‍पनी- श्री झोटन मण्‍डल पे. स्‍व. नथुनी मण्‍डल पता, गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) मैनेजर- श्री त्रि‍लोक नाथ झा पे. स्‍व. रामेश्वर झा पता, गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) नाच- (1) अल्‍हा रूदल (2) सती लछि‍या (3) राजा सलहेश (4) वि‍द्यापति‍ (5) धुलक फूल (6) सुल्‍ताना डाकू (7) राजा हरि‍षचन्‍द्र (8) कृष्‍ण लीला (9) रामायण अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- श्री रामू मण्‍डल               स्‍व. गोपी मण्‍डल            रसुआर (सुपौल) स्‍व. राज कुमार ठाकुर         श्री रामजी ठाकुर             रसुआर (सुपौल) श्री धनि‍क लाल मण्‍डल         स्‍व. रामजी मण्‍डल            रसुआर (सुपौल) श्री देव नारायण मण्‍डल         स्‍व. बलदेव मण्‍डल            रसुआर (सुपौल) स्‍व. भोला झा               स्‍व. जयदेव झा              रसुआर (सुपौल) स्‍व. जि‍लेब मण्‍डल            स्‍व. नथुनी मण्‍डल            रसुआर (सुपौल) श्री शैनी मण्‍डल                    स्‍व. लालजी मण्‍डल           रसुआर (सुपौल) श्री सीताराम मण्‍डल            स्‍व. रूपलाल मण्‍डल           रसुआर (सुपौल) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री त्रि‍लोक नाथ झा पे.   स्‍व. रामेश्वर झा       रसुआर (सुपौल) ढोलक-       स्‍व. रामगुलाम मण्‍डल    स्‍व. संती मण्‍डल       रसुआर (सुपौल) नङेरा-डि‍ग्री-     श्री झड़ीलाल राम       स्‍व. हि‍या लाल राम     रसुआर (सुपौल) झाइल-        देवीलाल मण्‍डल        स्‍व. खुशीलाल मण्‍डल    रसुआर (सुपौल) झालड़        श्री कि‍शोरी मण्‍डल      स्‍व. नेवैत मण्‍डल       रसुआर (सुपौल) डि‍ग्री सदैबला-   स्‍व. रामकि‍शुन मण्‍डल    स्‍व. शक्‍ति‍ मण्‍डल      रसुआर (सुपौल) भड़ि‍या-        श्री नारायण मुखि‍या      स्‍व...............         रसुआर (सुपौल) जोकर-        श्री सीताराम राम       ..................         परसाहा, नाैआ बाखैर (सुपौल) डान्‍सर-       श्री छोटेलाल मण्‍डल     श्री बुधु मण्‍डल         रसुआर (सुपौल) जोकर-        श्री रामअधि‍न मण्‍डल     स्‍व. धनि‍क लाल मण्‍डल रसुआर (सुपौल) इटहरी नाच कला परि‍षद- इटहरी जि‍ला-सुपौल कम्‍पनी- श्री जगदीश साहु पे. स्‍व. गंगा प्रसाद साहु पता, गाम- इटहरी, पोस्‍ट- ि‍नर्मली, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) मैनेजर- श्री रामवि‍लास साहु पे. स्‍व. भोला साहु पता, गाम- इटहरी, पोस्‍ट- ि‍नर्मली, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) नाच- (1) कुमर वृजभान (2) राजा नल (3) राजा सलहेश (4) गुगली घटमा (5) शीत-वसंत अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नायक-        रामवि‍लास साहु        स्‍व. भोला साहु             इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      बैजू सदाय           स्‍व. सोती सदाय             इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      अशोक सि‍ंह          श्री बलराम सि‍ंह              इटहरी (सुपौल) मुख्‍य खलनायक- दुखी मण्‍डल           स्‍व. श्रीलाल मण्डल            इटहरी (सुपौल) जोकर-        वि‍जय साहु           स्‍व. केसो साहु              इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      रघुनाथ सदाय         स्‍व. मोती सदाय              इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       सुकुमार मण्‍डल        ..................               मुसहरनि‍याँ-रतसारा (मधुबनी) अभि‍नय-       रामअधि‍न मण्‍डल       स्‍व. धनि‍कलाल मण्‍डल         मुंगराहा (सुपौल) अभि‍नय-       हरि‍ नारायण मण्‍डल     .....                      छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       राम बहादुर मुखि‍या      स्‍व. बच्‍चा मुखि‍या             ननपट्टी फुलपरास (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री साधु दास         स्‍व. ..............              पि‍पराही-वनगामा (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री जगदीश साहु       स्‍व. गंगा प्रसाद साहु     इटहरी (सुपौल) ढोलक-       श्री जुगल साफी        स्‍व. दाहुर साफी       इटहरी (सुपौल) नङेरा-डि‍ग्री-     श्री रामकि‍सुन सदाय     स्‍व. सोती सदाय       इटहरी (सुपौल) झाइल-        श्री सुकदेव साफी       .....                इटहरी (सुपौल) झाइल-       श्री रामेश्वर साहु        स्‍व. मुकुन्‍द साहु       इटहरी (सुपौल) डि‍ग्री सदैबला-   श्री रामकि‍शुन सदाय     ...................         इटहरी (सुपौल) भड़ि‍या-        झड़ी लाल सदाय       श्री सरयुग सदाय       इटहरी (सुपौल) ढोलकि‍या-2     रामाशीष  यादव        ..............           ननपट्टी-फुलपरास  (मधुबनी) हारमोनि‍यम-2    श्री तनुकलाल मण्‍डल     ................          हरि‍याही-ि‍नर्मली (सुपौल) आदर्श वाल-कला नि‍केतन- ि‍नर्मली-पुनर्वास (जि‍ला-सुपौल) कम्‍पनी- श्री राम शरण कामत पे. स्‍व. शि‍वधर कामत पता, गाम- सुरयाही, भाया- मुजि‍यासी, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- श्री अशोक सि‍ंह पे. स्‍व. वलराम सि‍ंह पता, गाम- इटहरी-पुरर्वास, पोस्‍ट- ि‍नर्मली, भाया- ि‍नर्मली, अनुमण्‍डल- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) मंचन- (1) काँच ताग (2) आन्‍हर कानून (3) लोहा सि‍ंह (4) माइक कलेजा (5) चुड़ी आ सि‍नूर अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नायक-        हेम नारायण साहु             स्‍व. लक्ष्‍मी साहु             इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      राम वि‍लास साफी       स्‍व. शोभि‍त लाल साफी         इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      अशोक सि‍ंह          श्री बलराम सि‍ंह              इटहरी (सुपौल) नारी पात्र-      हरि‍ नारायण साहु       श्री मि‍श्री लाल साहु           इटहरी (सुपौल) नारी पात्र      हरि‍ नारायण साहु       श्री लक्ष्‍मी साहु               इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       राम सागर साफी       श्री शोभि‍त साफी             इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       सत्‍य नारायण साहु      श्री लक्ष्‍मी साहु               इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       जगत नारायण साहु      श्री लक्ष्‍मी साहु               इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       रोहि‍त साहु           श्री राम लखन साहु           इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       हीरा लाल साहु        स्‍व. सुकदेव साहु            इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       जि‍रा लाल  साहु       स्‍व. सुकदेव साहु             इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       रामावतार यादव        श्री नुजाइ यादव              इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       गंगा पासवान          स्‍व. कुसुमलाल पासवान         इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       रामचन्‍द्र यादव         स्‍व. सुखी यादव              इटहरी (सुपौल) अभि‍नय-       शत्रुध्‍न साहु           स्‍व.............                इटहरी (सुपौल) गायक-        मदन प्रसाद साहु        स्‍व. गंगा प्रसाद साहु           इटहरी (सुपौल) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     जगत नारायण साहु      श्री लक्ष्‍मी साहु               इटहरी (सुपौल) ठेकैता-        राम वि‍लास साफी       स्‍व. शोभि‍त लाल साफी         इटहरी (सुपौल) ठेकैता-        श्री शि‍बू साफी         ...................               इटहरी (सुपौल) झाइल-        श्री राम नारायण साहु    स्‍व. बच्‍चा लाल साहु          लक्ष्‍मीपुर-धबही (मधुबनी) हारमोनि‍यम-2    अशोक सि‍ंह          श्री बलराम सि‍ंह              इटहरी (सुपौल) कला नि‍केतन नाचपाटी- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (जि‍ला-मधुबनी) (1945-1965) कम्‍पनी- श्री झमेली साहु पे. स्‍व. मंगल साहु पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- स्‍व. महेश्वरी पाठक पे. स्‍व. कारी पाठक पता, गाम- मझोरा, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) जंगली वादशाह (2) वंश-उजारन (3) वि‍देशि‍या (4) शीत-वशंत (5) लोड़ि‍क मनि‍यार (6) राजा नल अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नारी पात्र-      स्‍व. अचकी गोसाँइ            ....................             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      स्‍व. बहुरी मण्‍डल             स्‍व. सुनर मण्‍डल             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री रामदास साफी             स्‍व. सुवंश साफी                   लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     स्‍व. घौली साफी             स्‍व. सुनर साफी              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र      स्‍व. वसुदेव ठाकुर(उर्फ बतहु ठाकुर)    स्‍व. कैलू ठाकुर              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) जोकर-        स्‍व. खट्टर मुखि‍या            .....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अभि‍नय-       स्‍व. दुखाय साहु              .....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      स्‍व. रतन मण्‍डल                   .....................              मझौरा (मधुबनी) अभि‍नय-       स्‍व. बि‍लम साफी             स्‍व. रूपा साफी              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     स्‍व. तुलसी मण्‍डल      ....................              मझौरा (मधुबनी) ठेकैता-        स्‍व. रघुनाथ ठाकुर      ....................              छजना (मधुबनी) नागार्ची-       स्‍व. फुसन राम        स्‍व. कंचन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) झाइल करताल-  स्‍व. बच्‍चा मण्‍डल       स्‍व. पंची मण्‍डल             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    स्‍व. अशर्फी गोसाँइ      ....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) भड़ि‍या-        स्‍व. अशर्फी गोसाँइ      ....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अन्‍य सहयोगी- स्‍व. नेबाजी साहु       स्‍व. भैरव साहु         लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) आदर्श नाचपाटी- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (जि‍ला-मधुबनी) (1968-1977) कम्‍पनी- स्‍व. गर्भू गोसाँइ पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- स्‍व. नेबाजी साहु पे. स्‍व. भैरव साहु पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) बापक हत्‍या (2) दमाद वध (3) नि‍सााद वध (4) वंस-उजारन (5) गोपीचन (6) शंकर शोसि‍ला (7) उति‍म चन। अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- पुरुष पात्र-     स्‍व. बहुरी मण्‍डल             स्‍व. सुनर मण्‍डल            लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री राम अधि‍न दास           स्‍व. जहुरी दास              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     स्‍व. झोली दास              स्‍व. धुत्तर दास              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री नथुनी दास               स्‍व. सोनाइ दास              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र      स्‍व. रघुनी दास              स्‍व. सुनर दास              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री शि‍व नारायण मंडल         .....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अभि‍नय-       स्‍व. डुब्‍बी मुखि‍या             .....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     स्‍व. बहुरी मण्‍डल       स्‍व. सुनर मण्‍डल             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) ठेकैता-        स्‍व. श्री लाल गोसाँइ     स्‍व. बुधु गोसाँइ              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नागार्ची-       स्‍व. रामेश्वर राम        स्‍व. नेबी राम               मझौरा (मधुबनी) झाइल करताल-  स्‍व. बच्‍चा मण्‍डल       स्‍व. पंची मण्‍डल             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    स्‍व. चमकलाल गोसाँइ    ....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) भड़ि‍या-        स्‍व. सुनर दास        ....................              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) लक्ष्‍मि‍नि‍याँ नाचपाटी- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (जि‍ला-मधुबनी) (1970-1982) कम्‍पनी- श्री राजेन्‍द्र प्रसाद साहु पे. स्‍व. सुन्‍दर लाल साहु पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- स्‍व. बहुरी मण्‍डल पे. स्‍व. सुनर मण्‍डल पता, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) कुमर वृजभान (2) लछि‍या रानी (3) सुन्‍दर वनक सुन्‍दर फूल (4) अल्‍हा-रूदल (5) वि‍जय सि‍ंह (6) गुगली घटमा। अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- पुरुष पात्र-     श्री सीताराम राम             स्‍व. जंगल मोची             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     स्‍व. रसि‍क लाल गोसाँइ        स्‍व. बुधु गोसाँइ              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री गोसाँइ मुखि‍या             स्‍व. डुब्‍बी मुखि‍या             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री मलभोगी दास             स्‍व. भायलाल दास            लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र      श्री कल्‍लर राम              स्‍व. खट्टर राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री मूसन साहु               स्‍व. अशर्फी साहु             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री राम खेलावन राम           स्‍व. फूसन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री राम शरण साहु      स्‍व. हि‍रो साहु               लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) ठेकैता-        स्‍व. लक्ष्‍मण राम        स्‍व. जीतन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) नागार्ची-       स्‍व. फूसन राम        स्‍व. कंचन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) झाइल करताल-  श्री शि‍व नारायण मण्‍डल   (गामक भगि‍नमान)             लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    कपि‍लेश्वर राम         स्‍व. सगम राम               करहरी, फूलपरास (मधुबनी) भड़ि‍या-        स्‍व. नि‍रसन राम       स्‍व. कंचन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) काँरनेटि‍या-     श्री चन्‍दर राम         स्‍व. जीतन राम              लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) कला नाचपाटी- छजना (जि‍ला-मधुबनी) (1945-1980) कम्‍पनी- श्री लालदेव मण्‍डल पे. स्‍व. चतुरी मण्‍डल पता, गाम- छजना, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- श्री राम प्रसाद राम पे. स्‍व. गंगाय राम पता, गाम- छजना, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) बि‍हुला शती (2) लछि‍या रानी (3) सुन्‍दर वनक सुन्‍दर फूल (4) पि‍ता हत्‍या (5) दमाद वध (6) वंश-उजारन (7) कुमर वृजभान (8) वि‍देशि‍या (9) जंगली वादसाह (10) रास लि‍ला। अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नारी पात्र-      श्री कारी मण्‍डल              स्‍व. नंदी मण्‍डल             छजना (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री हरि‍ मण्‍डल               स्‍व. नंदी मण्‍डल              छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री बच्‍ची लाल चौपाल          स्‍व. दसाँइ चौपाल            छजना (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री छुतहरू चौपाल            स्‍व. सुनर खतबे              छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र      स्‍व. नथुनी मण्‍डल            स्‍व. रामफल मण्‍डल           छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री झोली चौपाल             स्‍व. ननधर चौपाल            छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री छोटकनि‍ चौपाल           स्‍व. बौकू चौपाल             छजना (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री रामजस राम              स्‍व. उचि‍त राम              छजना (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री हरि‍हर राम               स्‍व. दसाँइ राम              छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री रामकि‍सुन मुखि‍या          स्‍व. सहदेव मुखि‍या            छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र      श्री दुर्गा नंद ठाकुर            स्‍व. नेंगर ठाकुर              छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री मटन चौपाल              स्‍व. सेमु चौपाल              छजना (मधुबनी) नृत-          श्री शि‍व नारायण चौपाल        श्री छोटकनि‍ चौपाल           छजना (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     श्री राम प्रसाद चौपाल    स्‍व. बि‍हारी                 छजना (मधुबनी) ढोलकि‍या-      श्री जनकधारी चाैपाल    स्‍व. खुशीलाल चौपाल          छजना (मधुबनी) नागार्ची-       श्री छोटकनि‍ राम       स्‍व. सुनर राम               छजना (मधुबनी) झाइल करताल-  श्री नथुनी चौपाल       स्‍व. मधुकर चौपाल            छजना (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    स्‍व. रोगहा चौपाल      स्‍व. तेतर चौपाल             छजना (मधुबनी) भड़ि‍या-        श्री सुनर चौपाल        स्‍व. नथुनी चौपाल            छजना (मधुबनी) काँरनेटि‍या-     श्री राम प्रसाद राम      स्‍व. मंगल राम               लक्ष्‍मि‍नि‍याँ (मधुबनी) अन्‍य सहयोगी- श्री बालेश्वर ठाकुर                   स्‍व. लखन ठाकुर             छजना (मधुबनी) श्री रामवि‍लास मुखि‍या                स्‍व. बलदेव मुखि‍या            छजना (मधुबनी) श्री बि‍सो मण्‍डल                    स्‍व. अजोधी मण्‍डल           छजना (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) गि‍रधारी नाचपाटी- छजना (जि‍ला-मधुबनी) (1956-2008) कम्‍पनी- स्‍व. गि‍रधारी साहु वर्त्तमान कम्‍पनी- जलेश्वर दास पे. स्‍व. खटर दास पता, गाम- छजना, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मैनेजर- जलेश्वर दास पे. स्‍व. खटर दास पता, गाम- छजना, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, अनुमण्‍डल- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाचक मंचन- (1) बि‍हुला शती (2) गोपी चन्‍द (3) अल्‍हा-रूदल (4) गुगली घटमा (5) रूणा-झुणा (6) सामा-चकेबा (7) पि‍ता हत्‍या (8) दमाद वध (9) कबि‍र लि‍ला (10) कलयुग प्रेम (9अम एवं 10सम वर्त्तमानमे जारी) अभि‍नय कर्त्ताक नाओं/पता- नारी पात्र-      श्री गोसाँइ मण्‍डल             ...................              धबौली, वनगामा (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री राजेश्वर यादव             स्‍व. तनुक लाल यादव         बेरयाही (मधुबनी) पुरुष पात्र-     श्री हरि‍हर चौपाल             स्‍व. मोहन चौपाल             छजना (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री रघुनाथ चौपाल            स्‍व. मुंगालाल चौपाल           छजना (मधुबनी) पुरुष पात्र      श्री कुसुमलाल चौपाल          स्‍व. नथुनी चौपाल            छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री शि‍वजी चौपाल            स्‍व. फुसि‍याही चौपाल          छजना (मधुबनी) नृत-          श्री राजेन्‍द्र चौपाल             स्‍व. धीरज चौपाल            बि‍क्रम शेर,अंधरामठ (मधुबनी) नारी/पुरुष पात्र- श्री नेहाली चौपाल             स्‍व. जहुरी चौपाल            छजना (मधुबनी) नारी पात्र-      श्री संतलाल  साहु            स्‍व. दसाँइ साहु              छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री कपि‍लेश्वर राम             स्‍व. नेबी राम               मझौरा (मधुबनी) अभि‍नय       स्‍व. राम प्रसाद चौपाल         स्‍व. बि‍हारी चौपाल            छजना (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री धर्मी मण्‍डल              स्‍व. ................             रतन सारा (मधुबनी) अभि‍नय-       श्री यशोलाल यादव            ....................              बेरि‍याही (मधुबनी) वाद्य एवं वादक नाओं/पता- हारमोनि‍यम-     स्‍व. ठीठर मण्‍डल       स्‍व. ......                  रतनसारा (मधुबनी) ढोलकि‍या-      स्‍व. भुटाइ चाैपाल       स्‍व. फेकन चौपाल            छजना (मधुबनी) नागार्ची-       स्‍व. रामेश्वर राम        स्‍व. नेबी                   छजना (मधुबनी) झाइल करताल-  श्री नथुनी चौपाल       स्‍व. मधुकर चौपाल            छजना (मधुबनी) डि‍गरी सेद्दा-    स्‍व. रोगहु चौपाल       स्‍व. तेतर चौपाल             छजना (मधुबनी) भड़ि‍या-        स्‍व. नथुनी चौपाल      स्‍व. चुमन चौपाल             छजना (मधुबनी) काँरनेटि‍या-     श्री जालेश्वर दास       स्‍व. खट्टर  चौपाल            छजना (मधुबनी) अन्‍य सहयोगी- श्री गंगाय साहु                     स्‍व. दुखाय साहु              छजना (मधुबनी) स्‍व. गोवि‍न्‍द लाल साहु               स्‍व. झगरू साहु              छजना (मधुबनी) श्री लोदाय चौपाल                   स्‍व. गुणेश्वर चौपाल            छजना (मधुबनी) श्री भुगती चौपाल                   स्‍व. बलदेव चौपाल            छजना (मधुबनी) (संकलन सहयोग- रामवि‍लास साहु, लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, मधुबनी) मि‍थि‍लाक लोक संगीत/ लोक कला भगैत गबैया-

(धर्मराज, ज्‍योति‍श महराज, अंदू मालि‍, उदय साहु, हरि‍या डोम, बेनी, शती अवला, कारूबाबा इत्‍यादि‍ भगैत नि‍म्नलि‍खि‍त ‘रसुआर-भगैत पार्टी’ 1980 ई.सँ गबै छथि‍।)

श्री शम्‍भु प्रसाद मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. लखन मण्‍डल भगैत गायन सह खजरी वादन उमेर- 42 साल 1980 ई.सँ भगैत गबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल।

श्री गंगाराम मण्‍डल सुपुत्र श्री अशर्फी मण्‍डल-  झालि‍ वादक  उमेर- 40 1980 ई.सँ झालि‍ बजबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल।

श्री जनक मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. उचि‍त मण्‍डल उमेर- 60 रमझालि‍/ कठझालि‍/ करताल वादक 1975 ई.सँ रमझालि‍ बजबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल।

श्री रवि‍न्‍द्र मण्‍डल सुपुत्र श्री खट्टर मण्‍डल उमेर- 32 नाल वादक पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल।

श्री परमेश्वर मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. बि‍हारी मण्‍डल उमेर- 41 ग्रुमबाजा/ गुमगुि‍मयाँ 1980 ई.सँ गुमगुि‍मयाँ बजबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल।

श्री महेन्‍द्र प्रसाद मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. छेदी मण्‍डल उमेर- 48 कठझालि‍ वादक बचपनसँ गेबो करै छथि‍ आ रमझालि‍/कठझालि‍ बजेबो करै छथि‍। पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- नि‍र्मली, जि‍ला- सुपौल। सरस्‍वती पूजा 2010 केर अवसरपर मंचि‍त नाटक- बाप भेल पि‍त्ती स्‍थान- जे. एम. एस. कोंचि‍ंग सेन्‍टर- चनौरागंज (मधुबनी) दि‍नांक- 20/ 01/ 2010 (बुध दि‍न) नाटककार सह ि‍नर्देशक- बेचन ठाकुर पात्र, कलाकार, पि‍ता आ गामक नाओं... 1. लखन  ‍          आशा कुमारी          श्री राम अवतार यादव    कनकपुरा 2. मोतीलाल          सरस्‍वती कुमारी        श्री वि‍पीन कुमार साह    चनौरागंज 3. बौहरू            सरस्‍वती कुमारी        श्री ....................      सि‍मरा 4. बच्‍चा मनोज        श्वेता कुमारी           श्री वालेश्वर कामत      पौराम (चनौरागंज) 5. सि‍यान मनोज       शि‍ल्‍पी कुमारी         श्री लक्ष्‍मण झा        चनौरागोठ 6. संतोष            प्रियंका कुमारी         श्री बैद्यनाथ साह       ि‍समरा 7. मदन             सुलेखा कुमारी         श्री हरेराम यादव        चनौरागंज 8. मीना             नेहा कुमारी           श्री बोध कृष्‍ण दास      चनौरागोठ 9. गणेश            अंजली प्रि‍यदर्शिनी       श्री गणेश ठाकुर       चनौरागंज 10. रामलाल          पुनम कुमारी          श्री बाबू साहेब साह     चनौरागंज 12. सोनी            कामि‍नी कुमारी         श्री .............         ............. 13. रमाकांत          प्रीति‍ कुमारी           श्री रमेश प्रधान        चनौरागंज 14. बलदेव           रि‍ंकु कुमारी           श्री अशर्फी महतो             बेरमा सहयोगकर्त्ता- अध्‍यक्ष-             श्री शशि‍ रंजन        चनौरागंज (मधुबनी) उपाध्‍यक्ष-            श्री दुर्गानन्‍द ठाकुर      चनौरागंज कोषाध्‍यक्ष-            श्री वेद प्रकाश         पौराम उपकोषाध्‍यक्ष-          श्री अमि‍त रंजन       पौराम स्‍वागताध्‍यक्ष-          श्री रमेश कुमार       बेरमा उपस्‍वागताध्‍यक्ष-        श्री राम कुमार ठाकुर    चनौरागंज वाद्य संगतकर्ता- नाल-               श्री रमेश कुमार        वि‍शौल (मधुबनी) पैड-               श्री गणेश महतो        झंझारपुर ऑर्गेन-              श्री राजू कुमार राम     चनौरागंज सरस्‍वती पूजा 2010 केर अवसरपर मंचि‍त नाटक- संकर्षण स्‍थान- जे. एम. एस. कोंचि‍ंग सेन्‍टर- चनौरागंज (मधुबनी) दि‍नांक- 20/ 01/ 2010 (बुध दि‍न) नाटककार- गजेन्‍द्र ठाकुर ि‍नर्देशक- बेचन ठाकुर पात्र, कलाकार, पि‍ता आ गामक नाओं... 1.  संकर्षण-             कृष्‍ण कुमार यादव-      श्री राज कुमार यादव-    चनौरागंज। 2.  भाष्‍कर-             अशोक कुमार पासवान-   श्री लक्ष्‍मी पासवान-      चनौरागंज। 3.  भाष्‍करक बाबू जीक संगी-       ि‍कशोर कुमार यादव-     श्री जगन्नाथ यादव-      चनौरागंज। 4.  बंगाली बाबू-          पवन कुमार पंजि‍याद-    श्री शंभू पंजि‍यार-       चनौरागंज। 5.  कलक्‍टर-            कृष्‍णानंद कुमार-        श्री सीताराम कारण-     चनौरागंज। 6.  पहि‍ल कुकुर-         दुर्गानंद कुमार-         श्री बैद्यनाथ महतो-      बेरमा। 7.  दोसर कुकुर-          सुरेश कुमार महतो-      श्री श्‍यामानंद महतो-      चनौरागंज। 8.  तेसर कुकुर-          रमेश कुमार महतो-      श्री इंद्रदेव महतो-       बेरमा। 9.  मधुरक दोकानक मालि‍क- मनोज कुमार महतो-     श्री प्रमोद महतो-        बेरमा। 10. लुत्ती झा-            सुरेश कुमार महतो-      श्री गंगाप्रसाद महतो-     बेरमा। 11.  जयराम-            राम रतन साह-        श्री नारायण साह-       चनौरागंज। 12.  नि‍त्‍याकाका-          मि‍थि‍लेश कुमार राम     श्री चौठी राम-         मछधी। 13.  महींसबार-           संतोष कुमार साह-      श्री रामचन्‍द्र साह-       चनौरागंज। 14. गोनर झा-            बैजू साफी-           श्री महेन्‍द्र साफी-       चनौरागंज। 15.  घटक-             मि‍थि‍लेश कुमार यादव-   श्री राम कि‍शुन यादव-    चनौरागंज। 16. संकर्षणक बाबू-        प्रभाष कुमार          श्री बाबू साहेब साह-     चनौरागंज। 17.  मीत भाय-           प्रशांत कुमार-          श्री राम नारायण महतो-   चनौरागंज। 18. बुढ़ी-               बलराम कुमार-         श्री राज कुमार यादव-    चनौरागंज। 19.  पहि‍ल सि‍पाही-        गणेश कुमार-          श्री बैद्यनाथ मण्‍डल      चनौरागंज। 20.  दोसर सि‍पाही-        संजय कुमार-         श्री महादेव महतो-       चनौरागंज। 21.  सि‍पाहीक अफसर-     रोहि‍त कुमार-         श्री प्रमोद यादव-        चनौरागंज। 22.  लाल काका-         शि‍व कुमार-          श्री भाईजी मुखि‍या       सि‍मरा। 23.  लालकाकी-          राजेश कुमार-         श्री रासधारी महतो-      चनौरागंज। 24.  चोर बजारक दोकानदार- आनन्‍द कुमार-         श्री राम अवतार यादव-   चनौरागंज। सरस्‍वती पूजा 2011 केर अवसरपर मंचि‍त एकांकी- अधि‍कार स्‍थान- जे. एम. एस. कोंचि‍ंग सेन्‍टर- चनौरागंज (मधुबनी) दि‍नांक- 18/ 02/ 2011 (मंगल दि‍न) नाटककार सह ि‍नर्देशक- बेचन ठाकुर पात्र, कलाकार, पि‍ता आ गामक नाओं... 1. चन्‍दन  ‍          मि‍थि‍लेश कुमार महतो    श्री रासधारी महतो      चनौरागंज 2. अमरनाथ          रमेश मण्‍डल          श्री ..................       सि‍मरा 3. मंजूर             रमनजी              श्री दया कान्‍त पेद्दार     चनौरागंज 4. वि‍नोद            शोभाकान्‍त महतो       श्री राम अवतार महतो    कोरि‍यापट्टी (चनौरागंज) 5. सुनील            वि‍वेक कुमार सागर      श्री हनुमान पोद्दार       चनौरागंज 6. बहादुर            मो टॉफि‍क           मो. मुस्‍ताक आलम      चनौरागंज 7. हंशराज           शशि‍कान्‍त सि‍ंह        श्री ................        नौलखा (महरैल) 8. नजीमा            मो. टॉफि‍क           मो. मुस्‍ताक आलम      चनौरागंज 9. अनजार           अनबर              मो. कि‍स्‍मत           चनौरागंज 10. ब्रह्मदेव          मनोज कुमार          श्री जालेश्वर महतो       कोरि‍यापट्टी (चनौरागंज) 12. अखि‍लेश         सुनील कुमार महतो      श्री वि‍नोद महतो        कोरि‍यापट्टी (बेरमा) 13. सलमा           रमेश महतो           श्री इन्‍द्रदेव महतो       कोरि‍यापट्टी (बेरमा) 14. अजहर          कुणाल कि‍शोर ‘धीरज’   श्री बेचन ठाकुर        चनौरागंज 15. अस्‍फाक         कमल कि‍शोर पंकज     श्री बेचन ठाकुर        चनौरागंज सहयोगकर्त्ता- श्री शशि‍ रंजन         श्री नन्‍द कि‍शोर गुप्‍ता    चनौरागंज (मधुबनी) श्री दुर्गानन्‍द ठाकुर      स्‍व. भरत ठाकुर       चनौरागंज श्री अमि‍त रंजन        श्री नागेश्वर कामत       पौराम श्री रमेश कुमार        श्री भागवत महतो       चनौरागंज श्री संजय कुमार        श्री बैद्यनाथ साह       सि‍मरा सरस्‍वती पूजा 2011 केर अवसरपर मंचि‍त नाटक- मि‍थि‍लाक बेटी स्‍थान- जे. एम. एस. कोंचि‍ंग सेन्‍टर- चनौरागंज (मधुबनी) दि‍नांक- 18/ 02/ 2011 (मंगल दि‍न) नाटककार- जगदीश प्रसाद मण्‍डल ि‍नर्देशक- बेचन ठाकुर पात्र, कलाकार, पि‍ता आ गामक नाओं... 1.   कर्मनाथ-             पुनम कुमारी-          श्री बाबू साहेब साह-           चनौरागंज। 2.   सोमनाथ-            प्रीति‍ कुमारी-          श्री रमेश प्रधान-              चनौरागंज। 3.   रामवि‍लास-           बि‍भा कुमारी-          श्री अमर राम-               चनौरागंज। 4.   वि‍कास-                   सुलेखा कुमारी-        श्री हरेराम यादव-             चनौरागंज। 5.   नुनू-                नेहा कुमारी-          श्री बोध कृष्‍ण दास-           चनौरागंज गोठ। 6.   लालबाबू-            सोना कुमारी-          श्री रामसेवक पोद्दार-           चनौरागंज। 7.   श्रीधन-              संगीता कुमारी-         श्री सत्‍य नारायण महतो-        चनौरागंज। 8.   फुलेसर-             लक्ष्‍मी रंभा-           श्री हरि‍ नारायण महतो-         चनौरागंज। 9.   राधेश्‍याम-            आशा कुमारी-         श्री राम अवतार यादव-         चनौरागंज। 10. चमेली-              दुखनी कुमारी-         श्री महेन्‍द्र साफी-             चनौरागंज। 11.  आशा-             सोनम कुमारी-         स्‍व. भरत ठाकुर-             चनौरागंज। 12.  माधुरी-             अनि‍ता कुमारी-         स्‍व. राम लखन महतो-         चनौरागंज। 13. चम्‍पा-               रेखा कुमारी-          श्री अशर्फी महतो-             चनौरागंज। 14. जुही-               मुन्नी कुमारी-          श्री शंभू मण्‍डल-              चनौरागंज। सरस्‍वती पूजा 2012 केर अवसरपर मंचि‍त नाटक- उल्‍कामुख स्‍थान- जे. एम. एस. कोंचि‍ंग सेन्‍टर- चनौरागंज (मधुबनी) दि‍नांक- 28/ 01/ 2012 (शनि‍, राति‍क सत्र) नाटककार- गजेन्‍द्र ठाकुर ि‍नर्देशक- बेचन ठाकुर पात्र, कलाकार, पि‍ता आ गामक नाओं... 1. गंगेश  ‍           अंजली प्रि‍यदर्शिनी       श्री गणेश ठाकुर       चनौरागंज 2. वल्‍लभा           प्रीति‍ कुमारी           श्री रमेश प्रधान       चनौरागंज 3. देवदत्त            सुलेखा कुमारी         श्री हरेराम यादव        चनौरागंज 4. वर्द्धमान           ललि‍ता कुमारी         श्री मक्‍खन महतो बेरमा 5. उदयन            आशा कुमारी          श्री रामा अवतार यादव  बेरमा 6. दीना             प्रि‍यंका कुमारी         श्री वैद्यनाथ साह       सि‍मरा 7. भदरी            सोनम कुमारी          स्‍व. भरत ठाकुर       चनौरागंज 8. आचार्य व्‍याध्र       पूजा कुमारी           श्री महेन्‍द्र साह         चनौरागंज 9. आचार्य सि‍ंह        स्‍वेता कुमारी          श्री बालेश्वर कामत      पौराम 10. आचार्य सरम       सरस्‍वती कुमारी        श्री वि‍पीन कुमार साह    चनौरागंज 11. शि‍ष्‍य साही        आरती कुमारी         श्री लाल बहादुर यादव    चनौरागंज 12. शि‍ष्‍य खि‍खि‍र      रागि‍नी कुमारी         श्री वि‍ष्‍णुदेव साह       चनौरागंज 13. शि‍ष्‍य नढ़ि‍या       सुबि‍ता कुमारी         श्री गंगाराम मण्‍डल      मछधी 14. शि‍ष्‍य बि‍ज्‍जी       मीना कुमारी           श्री राम प्रसाद मण्‍डल    मछधी 15. भगता           पूजा कुमारी           श्री बैद्यनाथ ठाकुर      चनौरागंज 16. भगताक शि‍ष्‍य-     वि‍भा कुमारी          श्री अमर कुमार राम     चनौरागंज 17. गंगाधर          शि‍ल्‍पी कुमारी         श्री लक्ष्‍मण झा         चनौरागंज गोठ 18. आनन्‍दा          सवि‍ता कुमारी         श्री महेन्‍द्र साफी        चनौरागंज 19. सोहागो          ज्‍योि‍त कुमारी          श्री राम अवतार यादव    चनौरागंज 20. मेघा            प्रीति‍ कुमारी           श्री रमेश प्रधान        चनौरागंज 21. रूद्रमति‍          सुधीरा कुमारी         श्री श्‍यामानंद महतो      चनौरागंज 22. जीवे            अंजू कुमारी           श्री बेचन मण्‍डल        मछधी 23. मीतू            सरस्‍वती कुमारी        श्री कुशेश्वर मण्‍डल      सि‍मरा 24. माधव           उजमा नि‍कहत         श्री मो. मुर्तजा         मछधी 25. माधवक सहयोगी-1 फूल कुमारी           श्री सबधलाल यादव     चनौरागंज 26. माधवक सहयोगी-2 सुधीरा कुमारी         श्री बि‍लट यादव        चनौरागंज 27. मनसुख          बबि‍ता कुमारी          श्री सीताराम साह       चनौरागंज 28. हरि‍कर          द्रोपदी कुमारी          श्री कपि‍लदेव यादव      चनौरागंज 29. कीर्ति सि‍ंह        नेहा कुमारी           श्री बोध कृष्‍ण दास      चनौरागंज गोठ 30. हरि‍पति‍          संगीता कुमारी         श्री रामदेव पासवान      चनौरागंज 31. अर्थमंत्री नारायण    अर्चना कुमारी         श्री राम नारायण महतो    चनौरागंज 32. पहि‍ल दरबारी      सुबि‍ता कुमारी         श्री गंगाराम मण्‍डल      मछधी 33. दोसर दरबारी      मीना कुमारी           श्री राम प्रसाद मण्‍डल    मछधी 34. ऋृषि‍ जटा        पूजा कुमारी           श्री बैद्यनाथ ठाकुर      चनौरागंज 35. हीरू            बि‍भा कुमारी          श्री अमर कुमार राम     चनौरागंज अन्‍य सहयोगी- श्री उमेश मण्‍डल        श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल       बेरमा (मधुबनी) श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल      श्री रामदेव मण्‍डल             गोधनपुर श्री अमि‍त रंजन        श्री नागेश्वर कामत             पौराम श्री रमेश कुमार        श्री भागवत महतो             चनौरागंज श्री संजय कुमार        श्री बैद्यनाथ साह             सि‍मरा सरस्‍वती पूजा 2012 केर अवसरपर मंचि‍त एकांकी- वीरांगना स्‍थान- जे. एम. एस. कोंचि‍ंग सेन्‍टर- चनौरागंज (मधुबनी) दि‍नांक- 29/ 01/ 2012 (रवि‍‍, राति‍क सत्र) नाटककार- जगदीश प्रसाद मण्‍डल ि‍नर्देशक- बेचन ठाकुर पात्र, कलाकार, पि‍ता आ गामक नाओं... 1.   सोनमा काका-         कृष्‍ण कुमार यादव            श्री राजकुमार महतो     कनकपुरा 2.   रूपनी दादी-          कि‍शोर कुमार यादव           श्री जगन्नाथ यादव      कनकपुरा 3.   जुगेसर-             मि‍थि‍लेश कु. यादव            श्री राम कि‍शुन यादव    चनौरागंज 4.   अयोधी-             मि‍थि‍लेश कु. राम             श्री चौठी राम          मछधी 5.   जीवन-              पवन कुमार यादव             श्री छोटकैन यादव      चनौरागंज 6.   कुसेसरी                   राम रतन साहु               श्री नारायण साहु       चनौरागंज 7.   कोशि‍ला-            कमल कि‍शोर पंकज           श्री बेचन ठाकुर        चनौरागंज अन्‍य सहयोगी- श्री उमेश मण्‍डल        श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल       बेरमा (मधुबनी) श्री दुर्गानन्‍द मण्‍डल      श्री रामदेव मण्‍डल             गोधनपुर श्री अमि‍त रंजन        श्री नागेश्वर कामत             पौराम श्री रमेश कुमार        श्री भागवत महतो             चनौरागंज श्री संजय कुमार        श्री बैद्यनाथ साह             सि‍मरा सरस्‍वती पूजा 2012 केर अवसरपर मंचि‍त नाटक- बि‍सवासघात स्‍थान- जे. एम. एस. कोंचि‍ंग सेन्‍टर- चनौरागंज (मधुबनी) दि‍नांक- 28/ 01/ 2012 (शनि‍‍‍, दि‍नक सत्र) नाटककार- बेचन ठाकुर ि‍नर्देशक- बेचन ठाकुर पात्र, कलाकार, पि‍ता आ गामक नाओं... 1.  रामकि‍शुन-           दुर्गानन्‍द ठाकुर         स्‍व. भरत ठाकुर       चनौरागंज। 2.  राम सेवक           प्रशांत कुमार          श्री राम ना. महतो      चनौरागंज। 3.  सि‍याराम-            मो. अनवर-           मो. कि‍स्‍मत-          चनौरागंज। 4.  लखन-              मनोज कुमार-         श्री जालेश्वर महतो       चनौरागंज। 5.  लक्ष्‍मी-              नवीन कुमार          श्री उपेन्‍द्र कामत       सि‍मरा। 6.  जीतेन्‍द्र-             सुनील कु. महतो       श्री वि‍नोद महतो        बेरमा। 7.  मनोहर-              संजीव कुमार          श्री बि‍हारी मण्‍डल       चनौरागंज। 8.  जगन्नाथ-             शोभा कु. महतो        श्री रामचन्‍द्र महतो       बेरमा। 9.  बीरू-               श्रवण कु. महतो        श्री अशर्फी महतो             चनौरागंज। 10.  सुशील-            मि‍थि‍लेश कुमार        श्री रासधारी महतो      चनौरागंज। 11.  श्‍यामलाल-           चेतनारायण सिंह-       श्री योगेन्‍द्र महतो        चनौरागंज। 12.  उमाशंकर-           अमि‍त रंजन-          श्री नागेश्वर कामत-      चनौरागंज। 13.  बि‍न्‍देश्वर-            राजनीश कुमार-        श्री वि‍पि‍न कुमार साह    चनौरागंज। 14.  रामलाल-            रमेश कुमार-          श्री भागवत महतो-       बेरमा। 15.  झामलाल-           राघव कुमार झा-             श्री लक्ष्‍मण झा-        चनौरागंज गोठ। 16.  गंगाराम-            सर्व नारायण कुमार-     श्री रामकि‍शुन महतो-     चनौरागंज। 17.  मोहन-             देवन मण्‍डल-          स्‍व. छेदी मण्‍डल-       चनौरागंज। 18.  पंचु-              अवि‍नाश कुमार साह-    स्‍व. श्रवण साह-        चनौरागंज। 19.  रामभद्र-            ब्रह्मदेव यादव-         श्री मदन यादव-        चनौरागंज। 20.  बलदेव-             सुभाष कुमार-         श्री बाबू साहेब साह-     चनौरागंज। 21.  बीजेन्‍द्र-            नवीन कु. मण्‍डल-       श्री कामेश्वर मण्‍डल-     चनौरागंज। 22.  मजलूम-            भोला कर्ण-           स्‍व. लाल बहादुर शास्‍त्री- रेवाड़ी। 23.  ओम प्रकाश-         अभि‍नव कु. सागर-      श्री हनुमान पौद्दार-       चनौरागंज। 24. पवन-               वि‍क्की कु. कर्ण-        श्री इन्‍दुनाथ कर्ण-       रेवाड़ी। 25.  बीलट-             मो. टॉसि‍फ-          मो. मुस्‍ताक आलम-     चनौरागंज। 26.  नदीम-             सुबोध कुमार यादव-     श्री कुलानंद यादव-      चनौरागंज। 27.  लालू-              मो. टॉफि‍क-          मो. मुस्‍ताक आलम-     चनौरागंज। 28.  राजा-              रमेश कु. यादव-       श्री रामनन्‍दन यादव-     चनौरागंज। 29.  सलीम-             शशि‍कान्‍त सि‍ंह-        श्री अशोक महतो             नौलखा। 30. मोस्‍तकीम-            लालू कु. यादव-        श्री सहदेव यादव-       चनौरागंज। 31.  बौधु-              शि‍व कु. ‘शि‍व’        श्री बचनु मण्‍डल-       सि‍मरा। 32.  मनोज-             गंुजन कुमार-          श्री गोपाल साह-        सि‍मरा। 33.  चमेली-             लालू कुमार यादव-      श्री वि‍ष्‍णुदेव यादव-      चनौरागंज। 34.  बुधन-              बैद्यनाथ ठाकुर-        श्री महाकान्‍त ठाकुर-     चनौरागंज। 35.  घूरन-              कृष्‍णानंद कुमार-        श्री संतोष कारक-      चनौरागंज। 36.  भूटन-              प्रदीप कु. मण्‍डल-       श्री राजेन्‍द्र मण्‍डल-      चनौरागंज। 37. पलटू-              रंजीत कु. मण्‍डल-      श्री पवन मण्‍डल-       ि‍समरा। 38. चि‍नमा-              रमेश कुमार महतो-      श्री इन्‍द्रदेव महतो-       बेरमा। 39.  लक्ष्‍मण-            संतोष कु. महतो-       श्री सूरत महतो-        चनौरागंज। 40. हरि‍केशर-            जीतेन्‍द्र कुमार पासवान-   श्री उतीम लाल पासवान- रेवाड़ी। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर जगदीश प्रसाद मण्डल :एकटा बायोग्राफी आगाँ रामपट्टीक जहल बनि‍ गेल छल। मुदा उद्घाटन नै भेने ओहि‍ना पड़ल छल। नरकोमे कि‍ कम ठेलम-ठेल होइ छै। मधुबनी चक्की वार्डमे जे दसो-बीस दि‍न रहल हेताह, हुनका मोने हेतनि‍। तइठाम साल के कहए जे कतेको सालसँ कतेको गोटे छलाह। आजादीसँ पहि‍नौं आ पछोँ मधुबनी जेलक चलती रहबे कएल। तइमे मुदा एकटा जरूर भेल रहै जे जेलक भीतरो वि‍भाजि‍त रहए, वार्ड न. ०२ राजनीति‍ पार्टीबला सभकेँ रहै, बाँकी सहरगंजा। सहरगंजा ऐ लेल जे ने अपराध एक रंगक छै आ ने अपराधी। मुदा जेल तँ जेल छी मठाधीशसँ लऽ कऽ फुलतोड़ा धरि‍ एकेठाम रहता। मुदा जहलोक कारोबारमे चोरी-चपाटी रहबे करै, कि‍यो जलखैक बदाम चोरा लै तँ कि‍यो गुड़। कि‍यो करू तेल हेर फेर कऽ दै, कि‍यो कि‍छु। आजादीक समए मधुबनी जि‍ला (तइ दि‍नक सवडि‍वीजन) जखन आजादीक सीमापर आबि‍ गेल तखन कने भाषा-प्रेमी-अंग्रेजक देखि‍ये ली। एकटा एस.डी.ओ. भेला ग्रि‍यर्सन। जे गाम-गाम घूमि‍ भाषाक मर्मकेँ बुझैक कोशि‍श केलनि‍। कोशि‍शे नै केलनि‍ भोलूमक-भोलूम पोथि‍यो लि‍खने छथि‍। पैघ-पैघ पुस्‍तकालयक सि‍ंगारक वस्‍तु बनि‍ जेवर-जेवरात जकाँ आलमारी धेने अछि‍। भाषा-साहि‍त्‍यक लेल सरकारि‍यो-गैर-सरकारि‍यो संस्‍था सभ खूब काज केलक‍, मुदा ग्रि‍यर्सनक कएल मैथि‍ली सेवा आलमारीक दराजमे फँसि‍ गेल अछि‍! जहि‍ना साहि‍त्‍य सृजन अनुभावात्‍मक आ बौधात्‍मक होइत अछि‍ तहि‍ना भाषाक सेहो अछि‍। मैथि‍ली शब्‍दकेँ ि‍सर्फ संस्‍कृतसँ आएल शब्‍द बुझै छी तँ मैथि‍ली संग अन्‍याय होइ छै। न्‍याय तखन हेतै जखन मैथि‍ली शब्‍दकेँ वैदि‍क जीवन-पद्धति‍क शब्‍द रूपमे देखल जेतइ। एक-एक शब्‍द एक-एक जीवनक काजक नक्‍शा तैयार करैक शक्‍ति‍ रखैए। संस्‍कृतक प्रभाव ऐ लेल मानल जाएत जे वैदि‍क भाषा संस्‍कृत रहल। ओना भाषाक दौड़मे आगू नै बढ़ब मुदा एकटा बात आवश्‍यक बूझि‍ पड़ैए तँए वैदि‍क संस्‍कृतक शैली अनुभवात्‍मक अछि‍ जखन कि‍ लौकि‍क संस्‍कृतक भावात्‍मक बेसी। भावात्‍मक दि‍शा कल्‍पनाशील बनैत गेल। जेना-जेना भावात्‍मक दि‍शा मजबूत होइत गेल तेना-तेना साहि‍त्‍य जि‍नगीसँ (जीवन पद्धति‍) दूर हटैत गेल। रामपट्टी जेलक उद्घाटन नै होइक कारण रहै जे प्रशासनसँ ठीकेदार धरि‍ कि‍यो फाइनल करैले तैयारे नै। कि‍छु काज पछुआएल तँ कि‍छु बि‍ल-भुगतान पछुआएल। मुदा नजरि‍ सबहक योजना खाइक पाछू। राज्‍य वामपंथी (भाकपा-माकपा) पार्टी अपन ज्‍वलंत समस्‍या सभ लऽ कऽ जेलभरो आन्‍दोलन केलक। ओना सौंसे राज्‍यक ज्‍वलंत समस्‍या सभ मुद्दा रहए मुदा मि‍थि‍लांचलक लेल दूटा प्रमुख मुद्दा छल। पहि‍ल कोसी नहरि‍क संग नूनथर, शीशापानी आ बराहक्षेत्रमे डैम बना पनि‍बि‍जली उत्‍पादन कएल जाए जइसँ कृषिक संग उद्योगो धंधा बढ़तै। कि‍छु गोटेक एहेन धारणा अखनो छन्‍हि‍ जे कारखानाक जरूरति‍ खाने क्षेत्रटा मे होइ छै। मुदा से नै, ईहो होइ छै जे जते-रंगक कारखाना अछि‍ तइमे ५५ प्रति‍शत जँ खान क्षेत्रक मालसँ चलैत तँ ४५ प्रति‍शत कृषि उत्‍पादि‍त वस्‍तुसँ सेहो चलैत। दोसर मुद्दा छल मैथि‍ली भाषाकेँ सरकारी मान्‍यता भेटौ अर्थात् अष्‍टम अनुसूचीमे शामि‍ल हाेउ। जइसँ मि‍थि‍लाक वि‍कासमे एक कड़ी जुड़त। मधुबनी जि‍ला बढ़ि‍-चढ़ि‍ कऽ ओइ आन्‍दोलनमे हि‍स्‍सेदारी दर्ज करौलक। दर्जनो वकील सेहो रहथि‍। हजारसँ ऊपर कार्यकर्त्ता जेलमे रहथि‍। जइ दि‍न मधेपुर-लखनौर ब्‍लौकक समए (प्रदर्शनक संग जेल) रहै तइ दि‍न वि‍स्‍फीक सेहो रहए। जगदीश प्रसाद मण्डल सभ जि‍ला-कार्यालय (डी.एम. ऑफि‍स)क गेटक बाहर रहथि। पूर्वेजी (स्‍व. राजकुमार पूर्वे) कार्यालयक पैछला गेट देने आबि‍, पाछूमे ठाढ़ भेल एस.पी.केँ कालर पकड़ि‍ लेलखि‍न। भीतर-बाहर हूड़-बड़ेरा भऽ गेल। लाठी चार्च भऽ गेलै। मुदा बहुत नै भेलइ। जगदीश प्रसाद मण्डल रामपट्टी जेल पहुँचला। बेरमाक अट्ठारह गोटे रहथि। नागेन्‍द्रजी (डॉ. नागेन्‍द्र  कुमार झा, पैटघाट) आ जगदीश प्रसाद मण्डल सभ लेडी वार्डक ओसारा पकड़ने रहथि। जि‍लाक सभ वि‍धायको आ वि‍धान पार्षदो रहथि‍। वि‍धायक रहथि‍ पूर्वेजी (स्‍व. राज कुमार पुर्वे) तेजनारायण जी (श्री तेज नारायण झा) लाल बि‍हारीजी (श्री लाल बि‍हारी यादव) रमणजी (राम लखन ‘रमण’ भाकपा.क वि‍धायक) पूर्व वि‍धायक बैजनाथजी (श्री वैद्यनाथ यादव) चौधरीजी (श्री कृष्‍ण चन्‍द्र चौधरी)। जेलक भीतर दू बेर भाषण-भूषण चलै। मुख्‍य वक्‍ता रहथि‍ चौधरीजी। माँजल वि‍द्वान। भाषापर एते पकड़ रहनि‍ जे एकाे शब्‍द कम-बेसी नै होन्‍हि‍। कोनो वि‍षयकेँ यथास्‍थि‍त व्‍याख्‍या करैक अद्भुत क्षमता रहनि‍। ओइ समए पार्टीक जनशक्‍ति‍ दैनि‍क पत्रि‍का नि‍कलैत छल। सम्‍पादक रहथि‍ चौधरीजी। जगदीश प्रसाद मण्डल जनशक्‍ति‍ पत्रि‍काक संवाददाता रहथि। स्‍व. कृष्‍णचन्‍द्र चौधरी नीक वक्‍ता छलाह। लि‍खबो नीक करैत छलाह। मैथि‍लीमे तँ भरि‍सक नै मुदा हि‍न्‍दी-अंग्रेजीमे कतेको पोथी लि‍खने छथि‍। जेहने वि‍द्वान तेहने सुभ्‍यस्‍त परि‍वारक सेहो छलाह। पानो खूब खाइ छलाह आ सि‍गरेटो पीबैत छलाह। जेल तँ छुच्‍छे देहे आबि‍ गेलाह मुदा भि‍नसरू पहर चाह पीला पछाति‍ पान खाइले मन छटपटाए लगलनि‍। जगदीश प्रसाद मण्डल सभ पानक ओरि‍यान कऽ कऽ रखने रहथि। जहलो कोनो जहल जकाँ नहि‍येँ रहै। ने सरकारी पर्याप्‍त स्‍टाफ रहै आ ने सरकारी बेवस्‍था। अपने सभ सभ कि‍छु। गेटो खुजले रहै। भीतर बाहर प्रदर्शनकारी लोक सौंसे टहलैत। बेरू पहर ढोलकपर अल्‍हा होइ। चौधरीजीकेँ चाहोक हि‍साब नहि‍येँ रहनि‍। आबथि‍ तँ जगदीश प्रसाद मण्डल चाह पिआ पान खुअबथिन‍। तेकर बाद गप-सप शुरू होइ। ओना बि‍हारक कतेको जि‍लाक प्रदर्शनकारी दुइये दि‍नक पछाति‍सँ नि‍कलए लगलाह। मुदा मधुबनीक मारि‍-पीट केस भरि‍या देलकै। दू दि‍नक पछाति‍ भोगेन्‍द्रजी सेहो दरभंगा जेलसँ नि‍कलि‍ मधुबनी जेल चलि‍ एलाह। तेरह दि‍नक पछाति‍ नि‍कलैक आदेश आएल रहै। मुदा सभक नै। ३५ गोटेकेँ मुजफ्फरपुर जेल पठबैक आदेश सेहो आएल रहै। तेरहम दि‍न नि‍कलै बेर कि‍यो नि‍कलैले तैयारे नै भेलाह। कि‍छु वि‍दाइ भेने बि‍ना केना नि‍कलताह। गप उठल धोती-कुर्ता, गंजी-गमछा आ चद्दरि‍क मुदा से नै भेलै। होइत-हबाइत एकटा लूंगी आ एकटा गमछा सभकेँ भेटलनि‍। पार्टी आन्‍दोलनक अंति‍म जेल यात्रा छलै। तेकर बाद जे जगदीश प्रसाद मण्डल गेबो केला तँ एक-दि‍ना-दु-दि‍नामे। जे कएक बेर थानेसँ चलि आबथि। ओना जगदीश प्रसाद मण्डल सभ दोहरी जेलक यात्री रहथि। अपनो गाममे तते मुकदमा भऽ गेल रहनि जे एक ने एकटा वारंट सभ दि‍न रहबे करनि। दू हजार ईस्‍वी अबैत-अबैत सभ केश समाप्‍त भऽ गेलनि, खाली दूटा शेष बँचल रहलनि। एकटा ३०७ (हत्‍याक प्रयास) जे हाई कोर्टमे छलनि, दोसर ४३६ (अगि‍लग्‍गी) जे डि‍स्‍टि‍क जजक कोर्टमे छलनि। जहि‍ना बाढ़ि‍क पानि‍ पोखरि‍मे प्रवेश करैकाल सौंसे पोखरि‍क पानि‍ गति‍शील भऽ जाइए आ घुमती बेर (बाढ़ि‍ सटकैक समए) धीरे-धीरे गति‍हीन हुअए लगैए तहि‍ना मुकदमाक दौड़मे भऽ गेलनि। मुदा अस्‍थि‍र नै भेल छलै। कारण दुनू केश शेसन छलै। असथि‍र ई भेलै जे जि‍लाक केश (अगि‍लग्‍गीक) क फाइले तरमे पड़ि‍ गेल आ हाईकोर्टमे दौड़-बरहा कम होइ छलै। अखन धरि‍ माने २०००ई.सँ पूर्व जगदीश प्रसाद मण्डल देशक आधासँ बेसी भ्रमण कऽ नेने छलथि। एक दि‍स देशक आर्थिक राजधानी मुम्‍वई देख नेने छलथि तँ दोसर दि‍स नागालैंड-अरूणाचल सेहो देखने छलथि। रवि‍न्‍द्र बाबूक (महर्षि रवि‍न्‍द्र नाथ टैगौर) शान्‍ति‍ नि‍केतनक संग सुन्‍दर वन, गंगासागर, कबीर दासक गाड़ल खन्‍ती  समुद्रक कात, तँ सूर्य मंदि‍र सेहो देखने छला। रंग-रंगक द्वैत (द्वन्‍द्व) एक दि‍स जँ हजारी बाबूक (आचार्य हजारी प्रसाद द्वि‍वेदी) जे शान्‍ति‍ नि‍केतनमे १९३० ई.सँ १९५० ई. धरि‍ हि‍न्‍दीक अध्‍यापक रहलाह। सि‍रीसक फूलक महमहीसँ मुग्ध होइत रहथि तँ दोसर दि‍स मि‍थि‍लांचलमे ई सि‍रीस बर्जित अछि‍! ने घरक काजमे आऔत आ ने चौकी, कुरसीक काजमे! ततबे नै, फलक गति‍ सेहो सएह। गाछ तँ बड़का-बड़का होइ छै जहि‍ना कहबी छै “मनुख तँ बलवीर मुदा मोछ ने तँ कि‍छु ने।” तहि‍ना। मन मानि‍ गेलनि जे पुरबा-पछि‍याक लहड़ि‍ छी। फूलक लेल केहेन गाछ लगाओल जाए, फूलक संग फलक लेल केहेन गाछ लगाओल जाए आ बि‍नु फूल-फलक गाछ कतए लगाओल जाए, ई तँ प्रश्न भेलनि। मुदा पछि‍याकेँ पूर्वाक लपेट तर कऽ दइ छै। जँ से नै करै छै तँ मि‍थि‍लांचलक भूमि‍मे कतए कहाँसँ आबि‍ बोन-झाड़ लागि‍ गेल छै, जइठाम एक-सँ-एक फल, एक-सँ-एक फूल आ एक-सँ-एक सुकाठ लकड़ीक बास भूमि‍ छी। मि‍थि‍लांचलक वि‍कास तखन हएत जखन मि‍थि‍लांचलकेँ गहराइसँ अध्‍ययन कऽ अनुकूल परि‍स्‍थि‍ति‍ बना उपयोग हएत। यात्राक दौड़मे राजस्‍थान सन दर्शनीय जगह सेहो छुटले छलनि। यात्रा तँ गरपर छलनि मुदा समैओ आ पाइओक तंगी छलनि। ममि‍यौत भाति‍ज राजस्‍थानक पाली जि‍ला अन्‍तर्गत डी.एल.एफ. सि‍मेंट कारखानामे सुपर-वाइजर छलखिन‍ जे बेर-बेर अबैक बात करैत रहथिन। ओना ओ (तेज नारायण मण्‍डल) पढ़ल-लि‍खल नै। कोसि‍कन्‍हा भेने गामक स्‍कूलो नष्‍ट भऽ गेलनि आ गामो। जमीन-जत्‍था गुजर करैबला जरूर छै मुदा कोसी-कमलाक बीच पड़ि‍ गेल छै। भागि‍ कऽ ओ राजस्‍थान चलि‍ गेला। डी.एल.एफ. सिमेंट कारखानामे उट्ठा मजदूरक रूपमे नोकरी भऽ गेलनि। एन.के. पारीख नाओंक एक गोटे जे चारि‍ कोठरी मकानो बनौने छलाह आ ओही सि‍मेंट कारखानामे नीक पदपर सेहो छलाह, हुनके मकानमे एकटा कोठरी भाड़ा लऽ तेज नारायण रहए लगला। धीरे-धीरे दुनू गोटेक बीच संबंध बढ़ैत गेलनि‍। हुनकर (एन.के. पारीखक) सासुर नेपालक काकरभि‍ट्टा तँए पत्नी मि‍थि‍लांचलसँ परि‍चि‍त, सम्‍बन्‍धक मजबूतीक कारण वएह भेल। भाए-बहि‍न जकाँ दुनूक सम्‍बन्‍ध बनि‍ गेलनि‍। एक-दोसरक पारि‍वारि‍क जि‍नगीक सम्‍बन्‍ध बढ़लनि। एन.के. पारीख तेजनारायणकेँ कहलखि‍न जे बैसारीमे पढ़ा देब। सचमुच पढ़ा कऽ कारखानाक सुपर-बाइजर बना देलखि‍न। जगदीश प्रसाद मण्डल मनमे अँटकारि लेलनि जे मात्र जाइ धरि‍क समस्‍या छनि‍। जखन जेता तँ एतबो ओ नै करत? देखैबला जगहो देख लेता आ ओइठामक माटि‍-पानि‍-हवाक क्षेत्रो देख लेता। एक दि‍न एहि‍ना कि‍छु पारि‍वारि‍क आमदनी भेलनि, उठि‍ कऽ वि‍दा भेला। असगरे घुमैक स्‍वभावो छलन्हिये। दि‍ल्‍ली होइत राजस्‍थान पहुँचला। सुपर-वाइजर भेला पछाति‍ तेजनारायण अपना परि‍वारो (पत्नी) आ एकटा भाइयोकेँ गामसँ लऽ गेला। भाएकेँ ओइ कारखानामे नोकरी धड़ा देलखिन। एन.के. पारीखक मकानसँ हटि‍ तीन कोठरीक मकान भाड़ा लऽ रहए लगला। पैखाना कोठरीक ओतेक जरूरी नै, एक तँ क्षेत्रक हि‍साबसँ पातर जनसंख्‍या दोसर झाड़दार सांगरीक (बगूर जकाँ पातो आ काँटो होइ छै) छि‍टफुट गाछक परदा। बससँ उतरि‍ सोझे कारखाना गेला आ ऑफि‍समे भातीजक सम्‍बन्‍धमे पुछलखिन। तेजनारायण ड्यूटीमे नै रहथि। एक गोटे पटनाक संग भेलखिन आ तेजनारायणक डेरापर दोसरि‍ साँझ होइत पहुँचा देलखिन‍। बि‍जलीक इजोत। बगलमे तीस-चालीस दोकानक छोट-छीन बाजार। जइ बीच होइत बसक रास्‍ता। अन्‍हार रहने बेसी नै देखि‍ पेला। चैत मास रहने गरमी खूब पड़ै, दस बजेक बाद घरसँ ि‍नकलैक मन नै होइ। मुदा बारह बजे राति‍क पछाति‍ (जेना-जेना राति‍ ढलै) मोटगर चदरि‍क जरूरति‍ भऽ‍ जाइ छलै। रहैले एकटा खाट, सि‍रकक संग भेटल छलनि। भि‍नसर होइत देखैक अवसर भेटलनि। डेराक आगूमे चारि‍-पाँचटा अशोकक गाछ लागल, मझोलके गाछ। मकान मालि‍कक घर अधा कि‍लोमीटर हटि‍ कऽ रहै। मुदा मालक घर बगलेमे बनौने रहए। मालो कि‍ बिनु बच्‍चा दूटा तौड़ि‍या महींस। तीन बापूत मकान मालि‍क। पि‍ता बुढ़े जे बेसीकाल महींसक ताक-हेरि‍ करैत छल। एक भाँइ ओही सि‍मंेट कारखानामे नोकरी करैत छलाह। आ दोसर खेती-गि‍रहस्‍तीसँ लऽ कऽ महींस दुहनाइ आ मोटर साइकि‍लपर दूध बेचनाइ धरि‍‍। तीन-कि‍लो मीटरपर एकटा दोकानदारकेँ प्रति‍दि‍न दूध दइत। साइठ बीघा जमीनो रहनि‍ आ एकटा बोरि‍ंग सेहो। शुद्ध दोखरा बालुक खेत। पहाड़-बालुक क्षेत्र। गाछक रूपमे मात्र सांगरी। पहाड़क अति‍रि‍क्‍त खेत सभमे पाथरक छोट-पैघ टुकड़ा ओंघराएल। पराते भने मकान मालि‍कसँ चि‍न्‍हा-परि‍चय भऽ गेलनि। पँइसठि‍-सत्तरि‍क उमेर, देहमे मात्र एकटा धोती। परात भने जखन बेटा महींस दुहए लगलनि‍ तँ जगदीश प्रसाद मण्डल देखलनि जे दूध तँ कमे भेलै‍ मुदा ओइमे पानि‍ ढारि‍ देलकै। पुलखिन‍ जे पानि‍ कि‍अए देलि‍ऐ? जबाव देलकनि‍ जे जँ दूधमे पानि‍ नै देबै तँ महींसक थन जरि‍‍ जाएत! जबाव सुनि‍ कि‍छु फुड़बे ने कएलनि। आेहो चलि‍ गेलाह। तेसर दि‍न अजमेर दरगा देखैक कार्यक्रम बनलनि। बहुत सुन्‍दर स्‍थान। पहाड़ी इलाका तँए बेसी चि‍क्कनो-चुनमुन। स्‍थानक पूबारि‍ भाग ऊँचगर पहाड़। पहि‍ने तँ मनमे भेलनि जे हि‍न्‍दूकेँ रोक हेतै मुदा से नै। देखि‍नि‍हारमे बेसी हि‍न्‍दू। कबूलो-पाती बेसी। स्‍थानक भीतरे रहथि कि‍ गांजा-बाजाक संग एकटा जुलुस देख‍लनि। हाथी, ऊँटक संग मनुखकेँ चलबैत चरि‍पहि‍या गाड़ी (बि‍नु इंजि‍नक, आगू-पाछू आदमी ठेलैत) मर्द-औरतसँ सजल जुलुस। रंग-रंगक बबाजि‍योक समूह। नंगासँ लऽ कऽ रइस धरि‍। दरगा देखलाक पछाति‍ पुष्‍कर गेला। अजमेरमे आम, जामुन, लताम इत्‍यादि‍क गाछ सेहो देखलनि। गुलाब फूलक खेती बहुत बेसी। पुष्‍कर एकटा नमहर पोखरि‍नुमा अछि‍। जइपर ब्रह्माक मंदि‍र अछि‍। अनेको धर्मशाला आ अनेको घाट बनल अछि‍। जहि‍ना दरगामे भीड़ तहि‍ना पुष्‍करोमे रहए। ओना जेबाकाल जयपुरेमे बससँ उतरला। मुदा राति‍मे गेला। भोरे अन्‍हरगरे दोसर बस पकड़ि‍ लेलनि तँए देखैक अवसर ओइ दि‍न कि‍छु नै भेटलनि। अजमेरक तेसरा दि‍न पछाति‍ जयपुर पहुँचला। सचमुच कला-कृत्ति‍ श्रेष्‍ठ छै‍ खास कऽ प्राचीनक। मीराक स्‍थान (मैरता) सेहो गेला। बसनुमा रेलक गाड़ी चलै छै‍। एकटा मंदि‍र अछि‍ जइमे अनेको मूर्ति अछि‍। मंदि‍र बहुत नमहर नै मुदा छि‍पगरो नै। ढोलपेटा जकाँ अछि‍। अोना भीतर एबा-जेबा लेल लोहाक केबाड़ी लागल‍। मुदा सदि‍खन लगले रहै छै। छाती भरि‍ ऊपर चारू कात नमगर-चौड़गर खि‍ड़कीनुमा मोटगर लोहाक सरी लागल छै। जइ होइत चारू कात घूमि‍ कऽ देखल जाइत अछि‍। भीतरमे राजदरबारक दृश्‍य बनल छै। जहि‍ना राजदरबारमे सभ कि‍छु सजल रहै छै तहि‍ना सभ कि‍छु सोनाक बनल छै। ओना देशमे एक-पर-एक स्‍थानो अछि‍ आ मंदि‍रो अछि‍। जहि‍ना कलाक क्षेत्रमे अछि‍‍ तहि‍ना आर्थिक क्षेत्रमे। मुदा मूल वस्‍तु अधि‍कांश स्‍थानक गाइब अछि‍। ओ छी ओकर महात्‍म्‍य। उदाहरणक रूपमे “कामरूप कामाख्‍या” कामरूप कामाख्‍यामे सभ कथूक बलि‍ प्रदान होइत छै, मुदा दोसर-तेसरमे अंतर छै। कि‍छु स्‍थानमे खास चीजक बलि‍ पड़ै छै। तहि‍ना परसादो अछि‍। जगन्नाथक परसादक अलग रूप-गुण अछि‍। ओना कोनो स्‍थानक महगाइक परि‍चय बारहो मास रहलापर होइ छै, से तँ राजस्‍थानमे नै रहला, मुदा जतबे दि‍न रहला तइमे देखलनि जे बीतभरि‍क सजमनि‍क दाम, जेकर दाम अपना ऐठाम आठो आना नै हेतइ ओ दस रूपैयामे बि‍‍काइत। १९९९ ई.मे गेल रहथि। तीन रूपैये चाह बि‍काइत छल। तहि‍या अपना ऐठाम एक रूपैये कप बि‍काइत छलै। तीन रूपैये पान बि‍काइत छल अपना ऐठाम बारह आना रहै। एक तँ अपना सभ जकाँति‍ सैकड़ो अन्न दोकानमे नै देखलनि मुदा अन्नक भाउमे अपना सभसँ कम अन्‍तर छलै। किछु सस्‍तो छलै। जना चीनि‍या बदाम। चीनि‍या बदामक खेती होइ छै। खएब-पीअब अपना सभ जकाँ नै, सीमि‍त जि‍नगी सीमि‍त भोजन। गरीबी सेहो छै। मुदा अपना ऐठामक कारण भि‍न्न अछि‍ ओइठामक कारण भि‍न्न छै। जहि‍ना नाओं मरूभूमि‍ तहि‍ना सचमुच मरलो अछि‍। ने अपना सभ सन मौसम सुहावना आ ने गाछ-बि‍रीछक आनन्‍द। मुदा राजाघराना आ औद्योगि‍क घरानाक बसने कलो-कारखाना आ आरामदेह गाड़ि‍यो-सवारी। ओना ठीक-ठीक नै बूझल छलनि‍ मुदा चारू कात जे छहरदेवाली देने रहै‍ ओ दस कि‍लो मीटरसँ बेसि‍येमे बूझि‍ पड़लनि। बीचमे सि‍मेंटक कारखाना बनल। पानि‍, बि‍जलीक बेवस्‍थाक खास बेवस्‍था सेहो। कारखानासँ दछि‍न नमगर चौड़गर पहाड़ छै। जइमे सँ डायनामाटि‍सँ तोड़ि‍ पाथर अबै छै। ओना तीन हजारसँ ऊपर श्रमि‍क कार्यरत मुदा बि‍ना ठौर-ठेकानक। कि‍छु गोटे छथि‍ जि‍नका दरमहो नीक छन्‍हि आ आनो आन सुवि‍धा छन्‍हि‍ मुदा अधि‍कांश श्रमि‍कक जि‍नगीक कोनो ठौर-ठेकान नै छन्‍हि‍। ने कर्मचारीकेँ रहैले आवासक बेवस्‍था छै आ ने नीक मजूरीक। कारखानाक जे मुख्‍य प्रबंधक छलाह ओ सेवा-ि‍नवृत्ति‍ आइ.ए.एस छलाह। कारखानाक भीतरे नीक आवासक बेवस्‍था छलनि‍। दरमहो नीक। मि‍थि‍लांचलक दुर्भाग्‍य ईहो अछि‍ जे सेवा-नि‍वृत्ति‍ नीक-नीक पदाधि‍कारि‍यो आ अध्‍यापको दोहरा-दोहरा नोकरी करए लगलाह अछि‍। आँइ यौ, अहाँले वानप्रस्थ आश्रम/ सन्‍यास अवस्‍था कहि‍या आओत आकि‍ अबै-ने देबइ! जइठाम मिथि‍-मालि‍नक एहेन स्‍थि‍ति‍ रहत तइठाम भगवान मालि‍क छोड़ि‍ के हेताह? काँच माटि‍क एकटा दि‍आरी बना लि‍अ। फाटल-पुरान साड़ी फाड़ि‍ टेमी बना लि‍अ। कड़ू तेलक मालीमे मखा दि‍औ आ साँझू पहर डि‍हवार स्‍थानमे लेसि‍ दि‍औ आ एकटंगा दऽ दुनू हाथ जोड़ि‍ मांगि‍ लि‍अ जे वि‍द्या दि‍अ, धन दि‍अ, समांग दि‍अ!! मुख्‍य प्रबंधककेँ देखि‍ मनमे उठलनि जे कि‍ सेवा-ि‍नवृत्ति‍क पछाति‍ जे नोकरी केनि‍हार छथि‍ ओइसँ भ्रष्‍टाचारकेँ बल भेटै छै। चौथाइयोसँ कम कर्मचारीकेँ स्‍थायी नोकरी भेटल छलनि‍। जि‍नका कि‍छु-कि‍छु सुवि‍धो छलनि‍। बाकी तीन-चौथाइ ठीकेदारक अन्‍तर्गत काज करैत। ओना दरमाहा कम जरूर छलनि‍ मुदा गामक बोनि‍यातसँ बेसी छलनि‍हेँ। काजक ढंगो बेवहारि‍क। जना दूटा सुपर-बाइजर छलाह। दुनूक बीच एकटा मोटर साइकि‍ल। चौबीसो घंटा कारखाना चलैत अछि‍। जइ सुपार-बाइजरक ड्यूटी समाप्‍त भेलनि‍ ओ मोटर साइकि‍लसँ डेरा जेता, ओही गाड़ीसँ जइ गाड़ीसँ ड्यूटी करैबला सुपर-बाइजर आएल छलाह। तँए ड्यूटीक हि‍साव लेनि‍हार संगी भऽ जाइ छलनि‍। तँए सभ अपन ड्यूटीक पक्का छलाह। दोखरा बालु सभठाम एके रंग नै। कतौ-कतौ मेही बालु सेहो छै जेकरा खेतीक उपयोगमे आनल गेल छै। बहुत तरमे पानि‍ (लेअर) तँए बोरि‍ंगो महग। गहुम, बदाम, चीनि‍या बदाम, बाजरा, ताेरक खेती ठाम-ठीम रहै। अपना सभ जकाँ ने रंग-रंगक पशु आ ने पक्षी। गोटि‍ पंगरा-मोर। अपना ऐठाम जेरक-जेर कौआ, मेना, बगरा-बुगरी अछि‍ से नै। वातावरणो अनुकूल नै। ने रहैले गाछ-बि‍रीछ आ खाइक रंग-रंगक वस्‍तु आ ने पीवैक पानि‍क बेवस्‍था। गोटि‍-पंगरा गाइयो मुदा खढ़-पानि‍क अभाव जेर बनौने‍। भि‍नसरू पहरकेँ ट्रैक्‍टरपर हरि‍अरो आ सुखलो ठठेर नेने अबै आ छीटि‍ दइ। गाए-सभ अपन-अपन खाए। परबा सेहो छै मुदा खाएब वर्जित‍। जँ खेबै आ पकड़ा जाएब तँ जुर्माना लागत। राजस्‍थान जाइसँ डेढ़ बर्ख पूर्व पनचानबे बर्खक अवस्‍थामे जगदीश प्रसाद मण्डलक माए मरि‍ गेली। माइक अंति‍म दर्शन। दि‍नक बारह बजैत। जगदीश प्रसाद मण्डलक पत्नीकेँ ओ कहलखि‍न- “तूँ सभ खाइ-पीबै गेलह?” पुतोहु- “हँ।” “बच्‍चा, गाममे अछि‍ कि‍ने?” खाइ कालमे देखि‍ने‍हि‍ रहथि‍न, मुदा लगले वि‍सरि‍ गेली। मनमे शंका भेलनि। “हमरो कने बि‍छान कऽ दाए।” पुतोहु ओसारेपर बगलेमे बि‍छान कऽ देलकनि‍। बैसले-बैसल घुसुकि‍ कऽ बि‍छानपर पहुँचि‍ते पड़ि‍ रहली से पड़ले रहि‍ गेलीह! एकादशीक दि‍न। अंति‍म समए धरि‍ माएकेँ आशा नै टुटलनि‍। जि‍नगीमे नमहर-नमहर दुर्दिन सेहो एलनि‍, तँ सेवो एते मजगूत रहलनि‍ जे आशाक बाट पकड़नहि‍ रहलनि‍। सुभ्‍यस्‍त परि‍वारमे माइक जन्‍म भेल छलनि‍। दू भाए-बहीनि‍क बीच पि‍ताक परि‍वार छलनि‍। बहीनि‍क बेटा नर्सिग मण्‍डल दीप गामक छलखि‍न। जि‍नका १९४२ ई.मे झंझारपुर सर्कलक आन्‍दोलनमे गोली लागल छलनि‍। दुनू गोटेक (जगदीश प्रसाद मण्डल आ हुनको) मात्रि‍क मनसारा (दरभंगा जि‍ला, घनश्‍यामपुर ब्‍लौक) एके परि‍वार। बेरमामे माइक सासुर, दीपमे पीसक (दीदीक, जि‍नकर बेटा नरसि‍ंग मण्‍डल) सासुर, गोधनपुरमे जेठ बहि‍न जे सात भाए-बहि‍नमे सभसँ जेठ। मनसारा परि‍वार सम्‍पत्ति‍येमे अगुआएल नै समांगोमे अगुआएल। माइक मौसीक सासुर बेरमे। हुनके परि‍वारक पोखरि‍ अधि‍कारी पोखरि‍क नाओंसँ जानल जाइत अछि‍, जे जगदीश प्रसाद मण्डलक घरक बगलेमे अखनो कारगर अछि‍। घरे-घरे कल भेने नहाएब तँ कमि‍ गेल छै मुदा माछ-मखानक बखारी छै। तहि‍ना एक लकीरमे तीनटा इनार सेहो छलनि‍, जे भग्‍नावशेष मात्र रहि‍ गेल छै‍। तीन भाँइक भैयारीक बटबारामे चानीक रूपैया गनि‍ कऽ नै तराजूपर तौल कऽ बारह-बारह पसेरीक बटबारा भेलनि। आेइ परि‍वारक लागि‍मे जगदीश प्रसाद मण्डलक पि‍ताक बि‍आह हेबाक कारण छल पैछला इति‍हास। जइमे कूल-मूलसँ लऽ कऽ पारि‍वारि‍क बेवहार धरि‍ अबैत अछि‍। जगदीश प्रसाद मण्डल सँ ऊपर सीढ़ी धरि‍ परि‍वारमे हर जोतब आ गाए दूहब वर्जित छल। मुदा आब नै। मौसीक (माइक मौसी) अनुशंसासँ माइक बि‍आह एक साधारण परि‍वारमे भेलनि‍। घरदेखीमे पाँच गोटे जे एलखि‍न से पाँचो पाँच रंगक। अपन-अपन नजरि‍ये सभ परि‍वार देखलनि‍। एकटा नमगर-छड़गर खलीफा सेहो रहथिन‍। खेला पछाति‍ घरसँ जखन नि‍कलए लगलाह तँ चौकठि‍मे कसि‍ कऽ चोट लगलनि‍। ओइ तामसपर बाजि‍ गेलाह जे एहनो ठाम कुटुमैती करब। जेकरा घर ने दुआर छै। मुदा सभ चुपचाप सुनि‍ लेलनि‍। मौसीक (माइक मौसी) जि‍ज्ञासा रहनि‍ जे अपना सम्‍पति‍ नहि‍येँ छै तँ कि‍ हेतै। अपना खेत-पथार, पोखरि‍-इनार तखन दुख कथीक हेतइ। कारणो छलनि‍ जे सासुर कि‍छुए दि‍न बसला पछाति‍ वि‍धवा भऽ गेल रहथि‍। दोसर सि‍फारि‍श (माएक बि‍आहक) मौसीक रहनि‍। माइक जेठ बहि‍न गोधनपुरमे। गोधनपुर बेरमा सटले अछि‍। सात भाए-बहि‍नमे मौसी सभसँ जेठ आ माए सभसँ छोट। करीब तीस बर्खक दूरी। ओना ओहो पुत्र वि‍ही‍न वि‍धवा भऽ गेल छलखि‍न। मुदा दूटा सन्‍तान तँ छलनि‍हेँ। हुनको सि‍फारि‍श भेलनि‍। तेसर सि‍फरि‍श दीपक (नरसिंह भाइक) दीदीक भेलनि‍। परि‍वारमे महि‍ला समूहक वि‍चार काटब कठि‍न भऽ गेलै। माएक बि‍आह भऽ गेलनि‍। ३५ बर्खक आयुसँ पहि‍ने वि‍धबा भऽ गेलीह। पि‍ता मृत्‍युक पछाति‍ करीब साठि‍ बर्ख जीवि‍त रहली। ऐ साठि‍ बर्खमे एकटा (नैहरक) सुभ्‍यस्‍त परि‍वारकेँ उजड़ल-उपटल देखलखि‍न। कोसी-कमलाक चपेटमे मनसारा गाम उजड़ि‍ गेल। बीच बस्‍ती (पुरना बस्‍ती) देने कमला बहि‍ रहल अछि‍। तीनू भातिज आ दुनू पोताकेँ एक-एक साल जहलमे बन्न देखलनि‍। वि‍धवा मौसी देखलनि, वि‍धवा दीदी आ बहि‍न देख अपनो वैधव्‍य स्‍वीकार केलनि‍। नरसिंह भायकेँ गोली लागल देखलनि‍। ततबे नै देखलनि‍, परि‍वारक भागि‍नक उजड़ल परि‍वार (हरि‍नाही) सेहो देखलनि‍। जि‍नगीक धक्के ने पंजा मजगूत करै छै! मनसारा उजड़लासँ दीप, गोधनपुर आ बेरमाक एक परि‍वारसँ सम्‍बन्‍धि‍त रहने सम्‍बन्‍ध मजगूत भऽ गेल‍। परि‍वारक दू सूत्र अछि‍। एक वंशगत दोसर बेवहारगत। एकठाम रहने आ एकठाम नै रहने (हटि‍ कऽ रहने) सम्‍बन्‍ध प्रभावि‍त होइते अछि‍। नरसि‍ंह मण्‍डलक परि‍वार आ बेरमाक परि‍वारमे मात्रि‍कक सम्‍बन्‍ध बनि‍ गेल अछि‍। जखन नरसि‍ंह मण्‍डलकेँ गोली लगलनि‍, इलाजक दरमि‍यान बहुत दि‍न धरि‍ बेरमेमे रहलाह। माएक मुइला पछाति‍ सराधक सवाल उठलनि। स्‍थि‍ति‍ नीक नै छलनि, मुदा समाजो तँ ऐ समस्‍याकेँ मेटा चुकल अछि‍ तँए तेहेन समस्‍या नहि‍येँ बूझि‍ पड़लनि। मुदा मनमे दूटा सवाल अपनो उठल रहनि, बाजथि नै। कारण स्‍पष्‍ट, बरि‍आतीक मरजादी भोजक ठहाका तँ नै, तीस-चालीस हजारक काज। प्रश्न रहै जे एक बेर खेलहो-बि‍नु-खेलहोकेँ खुआ सम्‍बन्‍ध तोड़ि‍ लेता। भेरि‍ पेट भोज खाइ दुआरे दि‍न-राति‍क समए लुटा देल जाए, ई नीक नै भेल। मुदा डर ईहो रहनि, एहनो लोकक तँ कमी नै जे अनका ऐठाम पल्‍था मारि‍ दइ छथि‍न आ अपना बेरमे...। दोसर कारण मनमे नचैत रहनि जे कर्मकांडकेँ तँ हटेलनि, मुदा भोज तँ लधले रहि‍ गेलनि। एक दि‍स दि‍स होइनि जे एक बेर भोज खुआ हरदा बजा दैथि‍, कम-सँ-कम एतबो तँ हएत जे पाँच गामक पंचो आ समाजो आँखि‍क सोझमे देख लेथि‍न। मुदा कि‍छु बाजथि नै। मुदा अखढ़ुआ मेघ तड़तड़ाएल। तेराति‍ (सारा बनौला पछाति‍) ि‍दन सराधक गप-सप उठल, पि‍सि‍औत भाय (गोनर मण्‍डल) आबि‍ कऽ (हरि‍नाहीसँ बेरमा) चालि‍ देलखि‍न जे मामी तँ बेटे जकाँ पोसलनि‍ तँए हम भोज करबै। आठ बर्ख पहि‍ने गाया सेहो लऽ गेल रहथि‍न। अपन स्‍थि‍ति (गोनर मण्‍डलक) ओते नीक नै, मुदा छोट भाएक बेटा सभ (पाँचो भाँइ) कमासुत तेकर हूबा रहबे करनि‍। भातिजकेँ पि‍ताक बिमारीक खि‍स्‍सा बेर-बेर सुना तैयार (भोज करैले) कऽ नेने रहथि‍। ओ सभ (भातिज) गछि‍ लेलकनि‍। जहि‍ना पोखरि‍मे माछ चाल दैत तहि‍ना भैयाक चाल देखि (जेठ भाय, जे पहि‍नहि‍ मरि‍ गेल छलाह) भौजी परि‍वारसँ चाल देलखि‍न जे जते ओ (पि‍सि‍औत भाय गोनर मण्‍डल) करथि‍न तते हमहूँ करबै। कारण छलनि‍ जे दूटा बेटा दि‍ल्‍लीमे नौकरी करए लागल रहनि‍। जगदीश प्रसाद मण्डल हि‍साब जोड़थि तँ देखथि जे दूटा भोज पचगामामे भेल जइमे तीस-पइतीस हजार खाइ-पीबैमे आ तीस-पइतीस हजार क्रि‍या-कर्ममे होइ छै। अपन हि‍साब आधामे जोड़थि। एकटा नव बीमारी गामक भोजमे सेहो पकड़ि‍ लेने रहै जे मि‍ठाइक भोज रसगुल्‍लाक भोज भऽ गेल रहए। भोजपर नजरि‍ जाइनि तँ मन भटकि‍ जाइनि। होइनि जे अनेरे फेरामे पड़ता। कर्मकांड अजसक कांड छी। भनसि‍याक गलती वा बारिकक गलती भोजैतकेँ चटैत अछि‍। तइ संग मनमे एकटा ईहो उठैत रहनि जे अखुनका जे पचगामा बनल अछि‍, ई तँ हालमे बनल अछि‍। एकर खेबे कते केलिनि। भोज खेने छथि ननौर, भोज खेने छथि लकसेना, परसा इत्‍यादि‍मे। से तँ आब फुटि‍ कऽ ओहो दोसर दि‍स चलि‍ गेलै आ जगदीश प्रसाद मण्डल सभ दोसर दि‍स भऽ गेला। अपन आँट-पेट देखथि तँ चौथाइपर बूझि‍ पड़नि। भात-दालि‍क भोज केलनि। जहि‍ना कथा गोष्‍ठी “सगर राति‍ दीप जरय”मे भाय-बंधुकेँ करौने रहथि‍, तेहने भोज केलनि, नीक जस भेलनि। भोज खुआ भोज खाएब छोड़ि‍ देलनि। माइक मुइला पछाति‍, जना कुम्‍हारक आबामे ढबाि‍ह लगै छै तहि‍ना ढबाहि‍ लगि‍ गेलनि। कि‍छुए दि‍नक पछाति‍ सासु मरि‍ गेलनि। हुनको उमेर करीब नब्‍बे बर्ख छलनि‍। ओहू भोजकेँ छोट केलनि। छोट एना जे तीन-भाए एक बहि‍नक बीच सासुक सराध। जेठ भाय सरकारी नोकरी करैत तँए सरकारी धाही। पत्नीसँ तकरार हेबे करतनि। मुदा सुतरलनि। नैहर लग रहने पत्नी माएक जीवि‍त मुँह देखए गेलीह से भरि‍ सराध रहि‍ये गेलीह। जगदीश प्रसाद मण्डल अनठा देलनि। मुदा सासुरेसँ समाद पहुँचलनि जे एक-सवा सए कठि‍आरी गेल रहै, तेकर खर्च अपने लागत कि‍ने। सुनि‍ कऽ अनठा देलनि। जखन आठ दि‍न बितलै, परसुए नह-केश हएत तँ समाद पठा देलनि जे अहाँ सभ अशौचक भोज नह-केश दि‍न करै छी। हम सभ (बेरमा) छोड़ि‍ देने छि‍ऐ तखन अहीं कहू जे हमर आएब उचि‍त हएत। मुदा खूब घौचाल भेलै। दुइये दि‍नमे कते घौचाले हएत, अनठा देलनि। सासुर बि‍सरलो ने रहथि आकि‍ नरसि‍ंह मामा (करीब ८०-८५ बर्खक रहथिन‍) मरि‍ गेलखिन‍।  मुदा दीपक भोज नमहर होइतो छोट होइ छै। गाम नमहर तँए सौंसे गामक भोज करैत-करैत भोजैतक दम खड़ा जाइ छै। मुदा आन गाम तँ एको घरक कि‍अए ने हुअए ओ तँ गामे कहाएत। संयोग थोड़ेक नीक भेलनि‍ जे मृत्‍युसँ करीब आठ बर्ख पूर्व स्‍वतंत्रा सेनानी भेट गेल रहनि‍। जइसँ दू-अढ़ाइ बीघा खेत कीनि‍ लेलनि‍। स्‍वतंत्रता सेनानी भेटैसँ पूर्व गामेमे एक गोटे ऐठाम नौकरी करए लागल रहथि‍। जे पेंशन भेटलापर छोड़लनि‍। चारि‍म भेलनि जे पत्नीक मामा (ममि‍औत ससुर) सेहो ओही पति‍आनीमे चलि‍ गेलनि। ओना हुनको उमेर अस्‍सी पार कऽ गेल रहनि‍। मुदा ओइठामसँ आबा-जाही नै रहने कोनो भारे ने पड़लनि। एक पीढ़ीक (पुरान पीढ़ीक) अन्‍त भऽ गेलै। जगदीश प्रसाद मण्डल लेल १९९९ ई. अबैत-अबैत आशा-ि‍नराशाक बीच संक्रमणक स्‍थि‍ति‍ बनए लगल रहनि‍। १९९८ ई.मे दफा ३०७क केसमे सजाए भऽ गेल रहनि‍। हाइ कोर्ट अपील होइमे २०-२५ दि‍न लागि‍ गेलनि‍। तइ समैमे रामपट्टी जेलमे रहथि‍। मने-मन आश्चर्य होन्हि‍ जे बि‍ना कि‍छु केनौं जहलमे छथि‍। तहि‍यो आ अखनो मन नै मानि‍ रहल छलनि‍‍ जे कोनो गलती हुनकासँ भेल हुअए। खएर, अपील भेल, जमानत भेलनि‍। वर्माजी (माननीय न्‍यायमूर्ति वीरेन्‍द्र प्रसाद वर्मा, पटना हाइकोर्ट) केँ फोन केलखि‍न तँ कहलकनि‍‍ जे कि‍छु ने हएत, नि‍चेनसँ अपन काज करू। सएह भेल। केस समाप्‍त भेल गेलनि से चारि‍ मासक पछाति‍ बुझलखि‍न। तेकर कारण रहए जे केस पैरवी करैक जिम्मा नै रहनि‍। जखन बहुत अधि‍क केस भऽ गेल रहनि‍ तखन अपनामे वि‍चारि‍ लेलखि‍न जे एक-एक केसक भार सभ कोइ आपसमे लऽ लि‍अ। जखन केस खुजत आ खर्च बढ़त तखन चन्‍दा कऽ लेब तइ बीच एक आदमीक जिम्मामे रहत। हाइ कोर्टबला ३०७-केस पहि‍नहि‍ जजमेंट तकक खर्च जमा भऽ गेल रहै। तँए नै बूझि‍ सकलाह। दोसर केस जे बचल रहै तइमे समझौताक बात भऽ गेल रहनि‍। ओना तैयो कि‍छु गोटे छह-पाँच कऽ देबे केलकनि‍। तँए केसक चि‍न्‍ता मनसँ हटि‍ गेल रहनि‍। ओना तीन बर्खक वारंटक पछाति‍ केसक भाँज तखन लगलनि‍ जखन थानासँ सूचना भेटलनि‍। झंझारपुर-मधुबनीक बीच जे कोर्टक हेरा-फेरी भेल तइमे केस हरा गेल छलै। फास्‍ट-ट्रेक कोर्ट खुजला पछाति‍ जखन ताक-हेर भेल तखन भेटलै। कि‍छु गोटे (२८गोटेमे) मरि‍ गेल रहथि‍, जइमे तीनटा मुद्दालह आ दूटा गवाह सेहो। संगठनक रूप सेहो छि‍ड़ि‍या जकाँ गेल रहनि‍। तेकर बहुत रास कारण छलै। सामाजि‍क, आर्थिक, साम्‍प्रदायि‍क इत्‍यादि‍। जहि‍ना अंति‍म केस छलै तहि‍ना समाजक अंति‍म अस्‍त्रक प्रयोग नीक जकाँ भेलै। मुदा जे भेलनि‍, दि‍नांक ५-५-२००५ ई.केँ समाप्‍त भऽ गेलनि‍। तइ बीच जगदीश प्रसाद मण्‍डलकेँ दोसर दि‍स बढ़ब उचि‍त नै बूझि‍ पड़नि‍। उपदेशक सभ तँ कहबे करनि‍‍ जे अनेरे परेशान होइ छी। मुदा सि‍मरि‍या पंडाक उपदेशे की। धार गंगा आ वि‍चारधाराक घाट सि‍मरि‍या छी आकि‍ की छी से तँ एके धारमे देखाइ छै। एक घाट (उत्तर) दोसर (दछि‍न) मग्‍गह। जगदीश प्रसाद मण्‍डलकेँ नव काल्हि‍ देखैक इच्‍छा शुरूहेसँ रहलनि‍। ओहि‍ना नै केलाक पछाति‍ आरो मजगूत भेलनि‍। उदाहरण, परि‍वारमे साधारण शि‍क्षाक आगमन भेल छलनि‍। तइठाम एम.ए. तक पढ़लनि। परि‍वारे नै गामेमे पहि‍ल एम.ए. भेलाह। ओना पछिला पीढ़ीमे संस्‍कृतक माध्‍यमसँ एक-पर-एक वि‍द्वान बेरमा भेलाह मुदा जेनरलमे जगदीश प्रसाद मण्‍डलेटा रहथि‍। दोसर, बोरि‍ंग-करौने खेति‍ओमे कि‍छु नवता आबि‍ गेल छलै गाममे। दुनू रंगक खेती करै छलाह मण्‍डलजी। दुनू रंगकसँ मतलब- अन्नो आ नगदि‍योक। नगदी खेतीमे तरकारी आ फलक खेती सेहो करए लगलाह। ओना जइ रूपे करए चाहैत छलाह ओइ रूपे नै होइक कारण छल, कि‍छु समैओक अभाव आ कि‍छु उपद्रवो। खेतीक एहेन उजाड़ि‍ होइत रहनि‍ जे जँ मारि‍-झगड़ा करए लगि‍तथि‍ तँ दि‍नमे तीन बेर होइतनि‍। पैघ समस्‍याक आगू छोट गौण पड़ि‍ जाइ छै। मुदा मन तोड़ैक तँ अस्‍त्र भेबे कएल। उपद्रवो चाहे जतए होउ मुदा मनकेँ प्रभावि‍त तँ करि‍ते अछि‍। तहूमे खेतीक उजाड़ि‍ मेहनत, पूँजी, समए सबहक क्षति‍। जइ दि‍न मधुबनी कोर्टमे ३०७ केसक जजमेंटमे सजा भेलनि‍ ओइ दि‍नक घटना- गामक जते देखार वि‍रोधी रहनि‍ ओकरा सभकेँ ई बूझल रहै जे सजा हेतनि‍, जहल जेताह। जखने जेताह तखने दस बर्खसँ पहि‍ने थोड़े नि‍कलता। सजाए भेलनि‍ जहल गेलाह। तीन कट्ठा बंधा कोबी बोरि‍ंगबला चौमासमे केने रहथि‍। हाँ एकटा बात आरो बीचमे कहि‍ दि‍अए चाहै छी जे १९७०-७१सँ १९८६-८७ धरि‍ बेरमाक खेती आगू ससरैत रहल। अनेको दमकल, बोरि‍ंग भऽ गेल। हालर चक्की, थ्रेशर इत्‍यादि‍ सेहो सभ भऽ गेल। मुदा १९८६-८७क बाढ़ि‍-भुमकम खेतीकेँ पाछू धक्का मारि‍ देलक। एक तँ सरकारी राशनक चहटि‍ बाढ़ि‍-भुमकमक पछाति‍ लागि‍ गेल दोसर अनेको बोरि‍ंग माटि‍क तरमे टूटि‍-फूटि गेल। गामक खेती पाछू ससरि‍ गेल। मुदा हि‍नकर तँ जीवि‍का भेलनि,  छोड़ने केना हेतनि‍? जइ दि‍न ३०७क जजमेंट भेलनि‍ ओइ समए जे कोबी छलनि ओ २ कि‍लोसँ लऽ कऽ चारि‍ कि‍लो धरि‍क फूल १८ सए गाछ रहनि। बंधा कोबीक भाव २-५ रूपैये किलो रहै। अन्‍दाजि‍ लि‍औ जे केहेन नोकसान भेलनि‍। अट्ठारहो सए गाछ दि‍न-देखार उखाड़ि‍ कऽ लऽ गेलनि। दाेसर, जहल‍ नि‍कललाक तीन मास पछाति‍ कछुबी गेलाह। कछुबी उत्तरवारि‍ टोलमे एकटा चाहक दोकानदार, जे बि‍शौलसँ कछुबी आबि‍ बसि‍ गेल अछि‍, चाहेक दोकानपर जना कते भारी अपराध कऽ जहलसँ आएल होथि‍ तही ढंगक बेवहार हि‍नका संग केलकनि‍। आ से ओ जेकरा अपने ठेकान नै छै, मुदा कि‍ करि‍तथि‍। कछुबीक रत्न काली बाबूक (काली कान्‍त झा, आइ.पी.एस.) परि‍वार संग खेनाइ-पीनाइ आबा-जाही छन्‍हि‍‍। ओना अखन धरि‍ कछुबीमे दुइये गोटे आइ.पी.एस केलनि‍ अछि‍, तइमे काली बाबू पहि‍ल। तहूमे वि‍द्यार्थिये जीवनसँ मंचक वक्‍ता बनि‍ गेल रहथि‍, गीताक मंच (गीता प्रवचन) पर अधि‍क बैसैत छलाह। राजनीति‍ सेहो ठमकि‍ गेलै। १९६० ई.क पछाति‍ मधुबनी जि‍ला कम्‍युनिस्ट पार्टीक मुख्‍य आन्‍दोलन कोशी नहरि‍, नूनथर, शीशा पानी, बराह क्षेत्रक डैमपर केन्‍द्रि‍त भऽ गेल। ओना आनो मुद्दा रहबे करै। बटाइदारी जमीनक लड़ाइ जोर पकड़नहि‍ रहै। नहरि‍क पानि‍ आ पनि‍बि‍जली जना कम्‍युनिस्टे पार्टीक होइ तहि‍ना लोकक धारणा बनि‍ गेल छलै। जेकरा समाधान भेने मि‍थि‍लांचलक उद्धार भऽ जाइत। खेतीसँ उद्योग धरि‍ बढ़ि‍ जाइत, से नै भेल। जते वि‍रोधी (कम्‍युनिस्ट  वि‍रोधी) ताकत छल रंग-रंगक आन्‍दाेलन, षड्यंत्र कऽ योजनाकेँ अखन धरि‍ सफल नै हुअए देलक। पार्टियोक राजनीति‍मे ठहराव आबि‍ गेल। एतबे नै जेकरा सभकेँ बटाइ-जमीन भेल ओहो सभ ओकरा (ओइ खेतकेँ) भरना लगा पंजाब-दि‍ल्‍ली जाए लागल। परि‍णाम ओहन आबए लगलनि‍ जे कि‍ केलाह तँ कि‍छु नै। ि‍सर्फ जि‍लेक राजनीति‍ नै। गामोमे सएह भेलनि‍। मनमे उठलनि‍ जे हजारो बर्खक गाछ कि‍छु ने कि‍छु अपनामे नवीनता अनि‍ते रहैए। चाहे नव टुसा होउ आकि‍ नव मुड़ी आकि‍ नव पात आकि‍ नव कलश। वि‍चार तँ उठल मुदा मनमे दुनू केस तँ रहबे करनि‍। जाइ-अबैक परेशानी नै, केसक सजाएक परेशानी। दुनू सेशन केस। दू-दि‍ना-चारि‍-दि‍ना तँ छी नै जे बुझबै पहुनाइ करए जहल गेल छलाह। सालक-साल दस साल, बारह साल। दुनू मि‍ला बीस सालसँ बेसी। तइ बीच कि‍ कएल जाए। जाधरि‍ केससँ छुटकारा नै पाबि‍ लेता ताधरि‍ दोसर दिस‍ बढ़ब नीक नै हेतनि‍। केसक छुटकारा पछाति‍ करबे कि‍ करि‍तथि‍। गुजर लेल खेती करि‍ते छलाह। नोकरी दि‍स कहि‍यो मनसँ तकबे ने केलाह, बेपार कएले ने हेतनि‍। मुदा जि‍नगि‍यो तँ छोट नै अछि‍। कठही साइकि‍ल (काठक पाइडि‍ल लगाओल साइकि‍ल) तँ नै जे थालो-कादो आकि‍ रस्‍ताक कटारि‍योमे कन्‍हापर उठा लेता आ टपि‍ जेता। जि‍नगीक गाड़ी छी। एक पटरीपर सँ दोसर पटरीपर आनब। एकर अर्थ ई नै जे जइठाम पाहि‍ कटैक जोगार छै तइठाम गाड़ीकेँ लऽ जा कऽ दोसर पटरीपर चढ़ा दि‍यौ। दोसर पटरीपर आनैक अर्थ ई जे छोटी लाइन (मीटर गेज लाइन) सँ बड़ी लाइनपर चढ़एबाक अछि‍। ओकर आँट-पेट छोट छै मुदा कि‍छु पार्ट- धुरी-चक्का बदलने तँ डि‍ब्‍बा आ आनो-आनो वस्‍तु उपयोगी बनि‍ जाइ छै। प्रश्न एतबे नै अछि‍, ऐसँ आगूओ अछि‍। ओ ई अछि‍ जे अदौसँ अबैत ई जि‍नगीक गाड़ी छी। जते रंगक पटरी तते रंगक पटरीक गति‍। तइठाम गाड़ीकेँ दोसर पटरीपर लऽ जाएब, असान नै। साहि‍त्‍यो जगतक जे दशा-दि‍शा अछि‍ ओ छपि‍त नहि‍येँ अछि‍। तहूमे लाठी सबहक हाथ पड़ल अछि‍। कोनो वस्‍तु मंगलापर नै दऽ छि‍पा लेब, लाथ कहबैत अछि‍। मैथि‍ली साहि‍त्‍य जगत समाजसँ एते दूर हटि‍ गेल अछि‍ जे जहि‍ना मनुष्‍य-देवताक बोट बि‍ला गेल छै। ई ि‍सर्फ मैथि‍लि‍येमे नै अछि‍ आनो-आन साहि‍त्‍यमे भरपूर अछि‍। जना- कबीर दासक चर्च मैथि‍ली साहि‍त्‍यमे कम अछि‍ मुदा कबीर दासक जे जि‍नगीक (जीवन पद्धति‍) इति‍हास प्रस्‍तुत कएल गेल अछि‍ ओ वि‍वेकपूर्ण जकाँ नै अछि‍। वि‍वेकपूर्ण नै हेबाक कारणे कबीर दर्शन समाजसँ हटि‍ गेल अछि‍। जेहो सभ दर्शनक प्रचार-प्रसार कऽ रहल छथि‍ ओहो सभ या तँ अपनो गुमराहे छथि‍ नै तँ लाथी छथि‍ जे गुमराह केने छथि‍। तहि‍ना तुलसी दास गोस्‍वामी कहबैत छथि‍, मुदा कतेक गाए पोसने छलाह? जरूरति‍ अछि‍ युगानुसार साहि‍त्‍यक ि‍नर्माण करब। तहि‍ना जाधरि‍ मैथि‍लि‍यो साहि‍त्‍य समाजक वस्‍तु (समाजक साहि‍त्‍य) नै बनत ताधरि‍ के केकरा कि‍ कहै छि‍ऐ से भाँज थोड़े लागत? तँए शुभेक्षु साहि‍त्‍यकारक दायि‍त्‍व बनैए जे एक आँखि‍ समाजपर राखि‍ दोसर आँखि‍ कागज कलमपर रखताह तखने मैथि‍ली साहि‍त्‍ये नै मि‍थि‍लाक कल्‍याण हएत। राज्‍यक अर्थ जँ राजधानीक एकटा कार्यालयसँ लैत छी तँए मि‍थि‍लाक समाज छूटि‍ जाइए। मि‍थि‍लाक समाजि‍क पद्धति‍ वैदि‍क पद्धति‍सँ आगू बढ़त तखने सर्वांगी‍न वि‍कास हएत। जगदीश प्रसाद मण्‍डल जीक, हाइ स्‍कूलक एकटा स्‍मृि‍त, केजरीवाल हाई स्‍कूलमे नाआें लि‍खेने छलाह। स्‍पेशल नाइनक (हायर सेकेण्‍ड्री) सि‍लेबसक वि‍स्‍तार भेल। मुदा तैयो आनर्स जकाँ वि‍षय नै भेलनि‍, समटाएले रहलनि। पुरने सेकेण्‍ड्री पद्धति‍क रहलनि‍। मुदा वि‍षयक वि‍स्‍तार तँ भेबे कएल। अर्थोशास्‍त्रक पढ़ाइ होइत छलनि‍। शुरूहक छह-मास पछाति‍ (हायर सेकेण्‍ड्री  कोर्सक) अर्द्धवार्षिक परीक्षा भेलनि‍। केजरीवाल स्‍कूलक बेवहार छल जे अर्द्धावार्षिक परीक्षाक काँपि‍ये वि‍द्यार्थीकेँ दऽ देल जाइ छल। कि‍छु वि‍द्यार्थी जे परीक्षा पछाति‍ दोहरा कऽ जे प्रश्नक उत्तर पढ़लनि‍ तँ ओ तँ पढ़ि‍ये कऽ मुदा जे से नै केलनि‍ तँ घरपर पोथीसँ मि‍ला देख लैत छलाह। ने शि‍क्षकक बीच कोनो मलानता छलनि‍ आ ने वि‍द्यार्थीकेँ होन्‍हि‍ जे मास्‍टर सहाएब जति‍आरए केलनि‍। ततबे नै लत्ती बाबूक (स्‍व. यदुनन्‍दन साहु) अलग सोच रहनि‍। हुनकर नम्‍बर दइक अलग कसौटी रहनि‍। हुनकर समझ रहनि‍ कम नम्‍बर देने वि‍द्यार्थी आरो मेहनति‍ करत। कि‍एक तँ सभ वि‍द्यार्थी पास करैक जि‍ज्ञासासँ पढ़ैत अछि‍। फेलक डर हेतै। तइ संग ईहो शि‍क्षकसँ वि‍द्यार्थी धरि‍-सभ बुझैत जे लत्ती बाबू हाथसँ जँ बीसो प्रति‍शत नम्‍बर आबि‍ जाएत तँ बोर्डमे पास हेबे करब। हँ, अर्थशास्‍त्रक चर्च केने छलौं। स्‍पेशल नाइन्‍थमे पचास प्रति‍शतसँ अधि‍क नम्‍बर एलनि‍। सभ वि‍षयसँ बेसी। क्‍लासमे जखन श्‍याम बाबू (स्‍व. श्‍यामा नन्‍द झा) जोर सँ पढ़ि‍ कॉपी देलकनि‍ तखन जना अर्थशास्‍त्र मनकेँ एना पकड़ि‍ लेलकनि‍ जे दास कैपि‍टलसँ लऽ कऽ बादमे अमर्त्‍य सेन धरि‍क परि‍चय करा देलकनि‍। अोना हायर सेकेण्‍ड्री टपला पछाति‍ मनक दूटा वि‍षय- अर्थशास्‍त्र आ भूगोल तँ हटि‍ गेलनि‍ मुदा मनसँ नै हटलनि‍। वि‍षय समटा कऽ अंग्रेजी, हि‍न्‍दी आ राजनीति‍ शास्‍त्र धरि‍ रहि‍ गेलनि‍। ओहो एम.ए.मे घटि‍ गेलनि‍। प्रश्न उठैए कि‍यो एक वि‍षयसँ वि‍शेषज्ञ छथि‍ आ कि‍यो बहु वि‍षयी छथि‍, दुनूमे जि‍नगीक गाड़ी कि‍नकर समटल चलतनि‍? बीसम शताब्‍दीक मृत्‍यु आ एकैसम शताब्‍दीक जन्‍म बुझबे ने केलाह। गुनधुनेमे रहि‍ गेलाह जे कि‍ करी की‍ नै करी। ने बीसम सदीक सराध कऽ पेलाह आ ने एकैसम सदीक जन्‍मोत्‍सव। मुदा एकटा लाभ तँ जरूर भेलनि‍ जे सराधोक खर्च बँचलनि‍ आ जनम दि‍नोक। पंचवर्षीय चुनाव पद्धति‍क आगमन भेल। मन्‍हुआएल मन शि‍शि‍रक सि‍ताएल भौम्‍हरा खुजल। पंचायतसँ जि‍ला-परि‍षद धरि‍क योजना बना समाजकेँ ठाढ़ करए चाहलनि‍। आठ पंचायतक चुनाव जि‍ला परि‍षदक। आन समाजमे जाइसँ पहि‍ने अपन समाज मजगूत बनाएब आवश्‍यक बुझलनि‍। अंचल सम्‍मेलन गंगापुरक स्‍कूलमे भेल। पंचायत चुनावक कार्यक्रम बनल। बेरमाक योजना रखलखि‍न। सर्वमान्‍य भऽ गेलनि‍। मुदा एक नै अनेको सूत्र राजनीति‍क लागि‍ गेलनि‍। जइसँ चारि‍टा जि‍लो परि‍षदमे पार्टीक आ चारि‍टा पंचायतो मुखि‍याक लेल पार्टीक (कम्‍युनिस्ट पार्टी) उम्‍मीदवार बनि‍ कऽ ठाढ़ भऽ गेलनि‍। खएर जे भेल। पंचायत चुनाव (मुखि‍याक लेल) हारलथि‍। चुनाव भरि‍ तँ उत्‍साह रहलनि‍ मुदा समाजसँ जि‍ला पार्टीक बहुत बात बुझैमे आबि‍ गेलनि‍। एक दि‍स सरकारी योजना (चुनावमे आरक्षण) देखथि‍ तँ बूझि‍ पड़नि‍ जे अनेरे ऐ चुनावक भाँजमे पड़लाह। आरक्षणक एहेन तरीका अछि‍ जे एक चुनावसँ दोसर चुनावक रस्‍ते बन्न भऽ जेतै। पचास प्रति‍शत महि‍ला आरक्षणमे एक-एक टर्म हेबाक चाहै छलै। मुदा से नै भेल। जँ दू-दू टर्मपर चुनाव होइए तँ पूर्ण राउण्‍ड कते दि‍नमे हएत। खएर जे होउ, मुदा सरकारी लूट तँ बढ़ि‍ये गेल। जइ गति‍ये समाजकेँ ठाढ़ भऽ चलैक गति‍ हेबाक चाही से अखनो धरि‍ नै आबि‍ सकल अछि‍। अनेको कारणमे मुख्‍य  भ्रष्‍टाचार बनि‍ गेल अछि‍। भ्रष्‍टाचारी ओहन-ओहन अछि‍ जेकर सरकार छि‍ऐ। के केकरा देखार करत। जँ देखारे करत तँ कानूने कि‍ करतै। वि‍चि‍त्र महजालमे समाज फँसि‍ गेल अछि‍। आम आदमीकेँ आर्थिक तंगी छै। ओ केना पूर्ति हएत? पूर्तिक जे पद्धति‍ अछि‍ ओ एहेन बनल अछि‍ जे चरवाहि‍येमे गाइयो बि‍का जाइए! तइपर सँ देखौआ-चोरौआ फुट्टे!! जेकरा लेल अट्ठारह दि‍न जहलमे रहला ओ आगू आबि‍ ठाढ़ भऽ गेलनि‍। मन पड़लनि‍ महाभारतक ओ कथा जे महाभारतक उपरान्‍त भेल। मनमे मि‍सि‍यो भरि‍ शंकाक जन्‍म नै भेलनि‍। वि‍परीत भेलनि‍। पाछू उनटि‍ देखलनि तँ बूझि‍ पड़लनि‍ जे अखन धरि‍क जे मोटा कपार लादल छन्हि‍ ओकरा हेट करैक ऐसँ नीक अवसर नै भेटि‍तनि‍। सएह केलन्हि। मुदा एकटा प्रश्न तैयो रहबे केलनि‍ जे आगूसँ उसारी आकि‍ पाछूसँ आ दुनू दि‍ससँ आकि‍ एक्के बेर। आगूसँ उसारैक वि‍चार भेलनि‍। संयोगो नीक रहलनि। मधुबनी जि‍लाक वासोपट्टीमे पार्टीक (भाकपा) राज्‍य सम्‍मेलन भेलै। पार्टीक महासचि‍व वर्द्धन (ए.बी. वर्द्धन) सहाएबक संग-संग बंगालोक कामरेड सभ रहथि‍। ि‍बहारक सभ जि‍लाक रहबे करथि‍। नीक सम्‍मेलन भेल। जि‍लाक एकटा कार्यकर्त्ता होइक नाते रहबे करथि‍। राज्‍यक (पार्टीक) जे साहि‍त्‍य प्रेमी छथि‍ हुनका सभकेँ कहि‍ देलखि‍न‍- “जे आब अहीं सबहक संग आबि‍ रहल छी।” ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। नवेंदु कुमार झा गाम मे विज्ञान केँ लोकप्रिय बनबऽ मे लागल छथि मानस बिहारी मिथिलांचलक पिछड़ल क्षेत्र मे नेना सभक मध्य विज्ञानक प्रति जागरूक करबाक लेल अभियान चलाओल जा रहल अछि। ऐ अभियानक अंतर्गत नेना सभ खेल-खेल मे विज्ञान केँ समझि-बुझि रहल छथि। महत्वबला ऐ अभियानक नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलामक सहयोगी रहल भारत सरकारक पूर्व वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा कऽ रहल छथि। बाढ़ि प्रभावित दरभंगा जिला मे ऐ अभियानक सफलताक बाद आब एकरा पूरा प्रदेशमे चलेबाक योजना अछि। दरभंगा जिलाक घनश्यामपुर प्रखंडक छपेर गाम भोउरक निवासी श्री वर्माक मोबाइल विज्ञान प्रयोगशाला (एमएसएल)क प्रशंसा पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर कलाम तँ करबे कएलनि संगहि बिहारमे एकरा लोकप्रिय बना ओ नेना आ शिक्षक सभक आँखिक तारा सेहो बनि गेल छथि। वैज्ञानिक आ बुद्धिजीवी सभक संस्था विकसित भारत फाउंडेंशनक नींव रखनाहार श्री वर्मा वर्ष 2010 मे बाढ़ि प्रभावित कमला बलान क्षेत्र सँ मोबाइल विज्ञान प्रयोगशाला प्रारंभ कएने छलाह। बाढ़ि प्रभावित दरभंगा, मधुबनी आ सुपौल जिलाक मे ई प्रयोगशाला चौबीस हजार छात्रक मध्य विज्ञानकेँ लोकप्रिय बनौलक अछि आ 758 शिक्षक केँ प्रशिक्षित सेहो कएलक अछि। ई प्रयोगशाला 2100 गामक दौरा सेहो कएलक अछि। अगिला वर्ष प्रयोगशालाक संख्या तीन सँ बढ़ा कऽ दस करबाक योजना अछि। श्री वर्माक अनुसार 1990 मे आन्ध्र प्रदेशक कुप्पम मे विज्ञान केन्द्रक मे गुड़ीबंका गामसँ प्रारंभक बाद मोबाइल प्रयोगशाला महत्वपूर्ण काज कएलक अछि। एखन धरि गोटेक 30 लाख छात्र ऐ मोबाइल प्रयोगशालासँ विज्ञानसँ संबंधित संवाद स्थापित कएलनि अछि। अगस्त्य फाउंडेंशन आ विकसित भारत फाउन्डेशन बिहार द्वारा प्रदेशमे मोबाइल प्रयोगशालाक कारण नेना सभ विज्ञानक प्रति जागरूक भेलाह अछि। जइ विद्यालय मे ऐ प्रयोगशालाक दौरा भेल अछि ओतए छात्र सभक उपस्थिति बेसी बढ़ल अछि। श्री वर्मा जनौलनि जे एक विद्यालयमे छओसँ सात बेर एम एम एल केँ लऽ जएबाक लक्ष्य अछि। एखन धरि तीन-चारि बेर एक विद्यालयक दौरा भेल अछि। प्रारंभिक अनुभव जनतब दैत अछि जे छात्र सभमे विज्ञानक प्रति आ ऐ विषयक प्रति सोच बदलल अछि। छात्र सभ मे प्रश्न पूछब, विश्लेषणात्मक सोच अपन सहपाठीसँ विचार-विमर्श करबाक क्षमता बढ़ल अछि, एम एस एल मे कक्षा छओ सँ बारह धरिक छात्र केँ ध्यान मे राखि विज्ञान मॉडल तैयार कएल गेल अछि। एन सी ई आर टी क पाठ्यक्रम पर आधारित एकर एक सय साठि विज्ञान मॉडल विषय केँ बुझबाक अंतर दृष्टि पैदा कऽ रहल अछि। ऐ अभियानक उद्देश्य बिहारमे बेसी नेना केँ वैज्ञानिक बनाएब अछि। ऐ सँ छात्र सभमे विज्ञानक प्रति रूचि बढ़ल अछि। शिक्षक सभ सेहो मांग करैत छथि जे बेसीसँ बेसी बेर प्रयोगशाला हुनक विद्यालय मे आबए जइसँ विद्यालय मे विज्ञानक शिक्षकक जे कमी अछि ओकरा दूर कएल जा सकए। लाइट कांबेट एयरक्राफ्ट परियोजनाक सुपरसोनिक जहाज तेजसक सफलताक संग तैयार करबा मे प्रोजेक्ट डायरेक्टर (जेनरल सिस्टम)क पद पर काज कऽ चुकल 69 वर्षक श्री वर्मा जनौलनि जे बिहार प्रतिभाक जमीन अछि। विज्ञानक प्रति नेना सभ मे रूचि जगेबाक अछि। विद्यालय सभ मे जमीनक स्तर पर संरचनाक अभाव मे ई एकटा चुनौतीबला काज अछि मुदा इमानदारीसँ प्रयास कएल जाए तँ ऐ मे सफलता अवश्य भेटत। श्री वर्मा विज्ञानकेँ लोकप्रिय बनेबाक संगहि उतर बिहारमे कोसी आ ओकर सहायक नदी सभक आबएबला बाढ़िक समस्याक क्षेत्रमे जियोमार्फो डायनेमिज्मक अध्ययन कऽ रहल छथि। हुनक उद्देश्य बिहारमे बाढ़िक समस्याक वैज्ञानिक अध्ययन करबाक अछि। श्री वर्मा मानैत छथि जे केन्द्र आ राज्य सरकार द्वारा बाढ़ि प्रभावित क्षेत्र मे नदी सभक हाइड्रोलॉजिकल विशेषताक अनदेखी कऽ पुल आ बान्ह आदि बनाएब भूल अछि। भारत सरकारक पूर्व वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा दरभंगा जिला मे प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण कएलाक बाद मधुबनीक जिला मधेपुरक जवाहर उच्च विद्यालय सॅ मैट्रिक परीक्षा पास कयलनि। पटना अभियंत्रण महाविद्यालयसॅ मैकेनिकल इंजीनियरिंगक पढ़ाइ पूरा कएलनि। पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर कलामसँ हुनक पहिल भेँट इंटीग्रेटेड मिसाइल प्रोग्रामक सिलसिलामे रक्षा अनुसंधान विकास संगठनमे कार्यरत रहलाक दरमियान भेल छल। दरभंगा मे बिहार सरकार द्वारा स्थापित वीमेन्स इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजीक संचालन मे सेहो हुनक महत्वपूर्ण योगदान अछि। दिसम्बर मास मे दरभंगा मे आयोजित विज्ञान मेला मे पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम उपस्थित भऽ श्री वर्माक लगन आ योगदानक प्रशंसा सेहो कएने छलाह। मोबाइल विज्ञान प्रयोगशाला बिहारक संगहि आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उड़ीसा आ महाराष्ट्र मे सफलताक संग काज कऽ चुकल अछि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। सत्यनारायण झा विहनि कथा- भोला बैरक न० ९ आ कैदी न० ९ |भोला एकटा दुर्दांत कैदी छैक |आजीवन काराबासक दंड देल गेल छैक |१२ बरख सं जहल मे अछि |आइ हाजरीक बाद जेलर साहेब भोला क’ बजेलखिन |भोला आबि गोर लगलकनि आ मुँह दिस ताकय लगलनि ?जेलर साहेब कहलखिन ,भोला ,तोहर चरित्र आ काज देखि सरकार निर्णय लेलक अछि जे तोरा आँठ बरख पहिने रिहाई क’ देल जेतय आ जीवन यापन चलाबय लेल २ एकड़ जमीन आ इन्द्रा आबास सं एकटा घर आबंटन कयल जेतय |तोरा जल्दी छोरि देल जेतह | भोलाक चेहरा पर कोनो भाव नहि अयलैक |ओ उठि बैरक मे आबि गेल |चुप चाप परि रहल आ एकटक सं छत दिस ताकय लागल ?की भेटल हमरा ?एकटा छोट गलती हमरा कत’ पहुँचा देलक ?मुखिया जी सं कोटाक अन्न लेबय गेल रही |हुनकर बईमानी देखि नहि रहल भेल |कहलियैन ,मुखियाजी सभटा अन्न त’ कालाबाजारी क’ देलियैक ,आब २ किलो गहुम ल’ हमरा सभक पेट कोना चलत |मुखिया जी गरजि उठलाह ,सार ,कानून पढ़ैत छह ?हम कहलियैन गारि नहि पढू ?एहि पर ओ दनादन लात जूता चलबय लगलाह |कतेको लोक छल |कियो नहि बचेलक |अपमानक ज्वाला मे हम धधक’ लगलौ |मुखिया सं बदला लेबाक धुनि सबार भ’ गेल |एहने समय में एकटा नक्सली सं भेट भ’ गेल |ओकर बात सुनि बुझायल एकरा सं हितेषी दोसर कियो नहि |उपेक्षित ,शोषित आ प्रताड़ित लोकक मददि केनाइ ओकर संगठनक मुख्य काज छैक |हम ओ संगठन पकरि लेलौ |बदलाक भावना सं हमरा देह मे आगि लागल छल |मुखियाक पूरा परिबार के गोली मारि देलियैक |ओहि दिन सं कतेक ह्त्या कयल से अपनो गिनती नहि अछि |बेसी निर्दोषे मारल जायत छल |संगठनक काज सं हमर मोन नहि मिलैत छल |संगठनक काज नीरस लागे \भरि दिन लूट आ   ह्त्या |फायदा किछु नहि |कोनों सामाजिक काज नहि |मुखिया जकाँ संगठनों गलत लगैत छल |एहि लूट –ह्त्या सं ने समाज बदलल आने लोक |एक दिन पुलिसक हाथ परि गेलौ |आजीवन काराबास भ’ गेल |ताहि दिन सं जेल में छी |अपन गलती एतहि बुझलियैक|मुखिया मारलक त’ की भेलैक ?ओकर जवाव हम दोसर तरीका सं देने रहितियैक त’ आइ ई दशा नहि ने होयत ? जीवनक कोन रसक हम आनन्द लेलौ ? आइ बारह बरख सं जेल में छी |सभक सेवा  जेल मे कयल | लोक हमर नाम भोला गाँधी राखि देने अछि |भोला एक बेर करउट फेरलक |बाहर सं कियो उठेलकै |जेलर साहेब रहथिन |एकटा कागज़ पर दस्तखत करेलखिन आ जेल सं आजाद हेबाक कागज़ देलखिन | जेलक बरका फाटक फुजलैक |भोला बाहर आयल |बरबस आँखि ऊपर आकाश दिस चलि गेलैक |बहुत ऊपर किछु पक्षी क’ उड़इत देखैत रहल बरी काल धरि | ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’- की भेटल आ की हेरा गेल  (आत्म गीत)- (आगाँ) ३.२.१.पंकज चौधरी (नवलश्री)- भक्ति गजल/ भक्ति गीत : दिय ने दरस जगदंब दिय/ गजल 1-3/हाइकू-शेनर्यू/ हजल/ कविता : माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!/ २.मनोज कुमार मण्‍डलक प्रश्न ३. मो. गुल हसन- उदास लागै.. ३.३.अमित मिश्र- गीत 1-3 ३.४.१.आशीष अनचिन्हार- नुकाएल बलात्कारी रूप २.किशन कारीगर- डिनर डिप्लोमेसी ३.५.१.मुन्नी कामत केर दुइ गोट कविता- बेटी-लहास/ बाल-श्रम २.प्रीति‍ प्रि‍या झा- कवि‍ता-कऽ देलखि‍न उपकार महाशय ३.६.१.राजदेव मण्‍डलक तीन गोट कवि‍ता-शि‍शुक स्‍वर/ बोलती बन्न/ दि‍लक आवाज २.जगदीश प्रसाद मण्‍डलक सातटा गीत ३.७.१.राम वि‍लास साफी- पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ २.सन्तोष कुमार मिश्र- गुलामी डे ३.जितेन्द्र ‘जितु’- गरीबीक जाड़/ कथी लए...? ४.राजेश कुमार झा- जों अहाँ नै छी ३.८.१.बिनीता झा- अही देशक बेटी हम २.कामिनी कामायनी -खिलैत पलास वन३. ज्योति झा चौधरी- शब्दमे उत्सव जगदीश चन्द्र ठाकुर ‘अनिल’ की भेटल आ की हेरा गेल  (आत्म गीत)- (आगाँ) झंकार उठल,    टंकार उठल ओंकार उठल,  जैकार उठल जनकक आंगनसं दिल्ली धरि ‘जै मैथिली’      हुंकार उठल प्राप्त भेल  अधिकार अपन जे मंगनीमे छल छिना गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । नहि द्रोण थिका    आदर्श हमर नहि श्लोक रटल हम गीता केर हमरा अन्तस्थलमे  सदिखन अछि नाम कैकटा सीताकेर जे स्वयं समाकऽ धरतीमे दुनिया भरिकें छथि जगा गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । जतबा धरि जीवनमे शुभ अछि से अछि प्रसाद  सतसंगतिकेर आहार-विहारक    नियमितता शुभ चिन्तनकेर आ सदमतिकेर गुरूजन आ प्रियजन आशीषक अनमोल रत्न छथि लुटा गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । नहि दौड़ी हम काशी-प्रयाग नहि केलहुं हम   कबुला-पाती कयलनि जीवनभरि व्रत-उपव्रत दादी आ माए सबहक साती हुनकहि आशीषक गंगामे भरि पोख मोन अछि नहा गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल । क्षमा करू  हे पिता हमर बरखी-तरखी नहि करब ह’म नहि केश कटायब बेर-बेर नहि भोज-भातमे पड़ब ह’म हम मानब ओकरहि क्रिया-कर्म जे तृप्त जीबितहिं करा गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल। क्षमा करू हे मित्र हमर नहि आंखि मूनिकऽ चलब ह’म जे सहज, सरल आ सुन्दर हो ओही रस्तापर बढब ह’म अपनहि इतिहासक पन्ना किछु आंगुर हमरा पर उठा गेल, हम सोचि रहल छी जीवनमे की भेटल आ की हेरा गेल। (क्रमशः) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.पंकज चौधरी (नवलश्री)- भक्ति गजल/ भक्ति गीत : दिय ने दरस जगदंब दिय/ गजल 1-3/हाइकू-शेनर्यू/ हजल/ कविता : माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!/ २.मनोज कुमार मण्‍डलक प्रश्न ३. मो. गुल हसन- उदास लागै.. १ पंकज चौधरी (नवलश्री)- भक्ति गजल/ भक्ति गीत : दिय ने दरस जगदंब दिय/ गजल 1-3/हाइकू-शेनर्यू/ हजल/ कविता : माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!/ भक्ति गजल

माए हम आराधक बनल छी सुनु याचना याचक बनल छी

बस साधन भेटए आशीष के करी साधना साधक बनल छी

सुर-तान के अवगति ने किछु वरदानसँ वादक बनल छी 

नौग्रहसँ लड़ैत नवरातिमे सप्त्शतिक पाठक बनल छी

ममता भरल आँचरि भेटल "नवल" हम बालक बनल छी      

*आखर-१२ (तिथि-२१.०८.२०१२) भक्ति गीत : दिय ने दरस जगदंब दिय

कखनसँ छी हम शरण में बैसल कखन देबय दर्शन मैया अहिंक भजन में रमल रहै छी राति-दिवस सदिखन मैया

दिय ने दरस जगदंब दिय सुनु विनती अविलंब दिय दिय ने दरस जगदंब दिय } २

की गलती भेल कियै रुसल छी हमरा पर तमशायल छी सगरो जगसँ थाकल-हारल अहिंक शरणमे आयल छी करू क्षमा हम छी अज्ञानी ज्ञानक वर माँ अंब दिय... दिय ने दरस ...

हे जगजननी हे जगमाया क्षण-क्षणमे बस अहिंके छाया नेहक दृष्टि दिय भवानी कुंदन बनतै माटिक काया अन्तर्यामी हे सज्ञानी जुनि करू आब विलंब दिय... दिय ने दरस ...

जगविदित छी जगविख्याता ऐलहुं दौड़ल सुनितहिं गाथा अहिंक शरणमे जीवन अर्पित अहिंक चरणमे झूकल माथा शरणागत छी हम भवानी टूवर के अवलंब दिय...

दिय ने दरस जगदंब दिय सुनु विनती अविलंब दिय दिय ने दरस जगदंब दिय } ३

©पंकज चौधरी (नवलश्री) (तिथि-०९.१०.२००१) गजल-1

पकडू रेल चलू दिल्ली भरबै जेल चलू दिल्ली

नेता लूटि रहल सभके बुझि बकलेल चलू दिल्ली

बैसल बाट कते जोहब सभ लुटि गेल चलू दिल्ली

सभ छै भूखल कुर्सी के रोकब खेल चलू दिल्ली

पापक कुण्ड भरल सगरो सभटा हेल चलू दिल्ली

लागल भीड़ पमरिया के सभके ठेल चलू दिल्ली

अपनेमे जुनि झगडू यौ राखू मेल चलू दिल्ली

धरना देब करब अनशन मिथिला लेल चलू दिल्ली

क्रांतिक धार "नवल" बहलै लड़बा लेल चलू दिल्ली

*मात्राक्रम : २२२१+१२२२ (तिथि-१०.११.२०१२) गजल-2

आब मिथिलाराज चाही मैथिली के ताज चाही

बाढ़ि आ रौदीसँ मारल मैथिलो के काज चाही

बड़ रहल बेसुर इ नगरी सुर सजायब साज चाही

गर्जना गुंजित गगन धरि दम भरल आवाज चाही

संयमित सहलौं उपेक्षा "नवल" नव अंदाज चाही

*बहरे रमल/मात्राक्रम-२१२२ (तिथि-०७.१२.२०१२)

गजल-3

सगतरि बखान मिथिला के महिमा महान मिथिला के

युग-युगसँ छै जनक नगरी गौरव पुरान मिथिला के

गंगासँ अछि हिमालय धरि पसरल सिमान मिथिला के

रखने सहेज आँचरि मे कमला बलान मिथिला के

चन्दा प्रदीप नागार्जुन चमकैत चान मिथिला के

मंडन कणाद विद्यापति संतति महान मिथिला के

गाथा गबै करै वंदन वेदो-पुराण मिथिला के

परसै सनेश सदभावक कीर्तन अजान मिथिला के

शत-शत नमन "नवल" करियौ माए समान मिथिला के

वर्ण क्रम: २२१२+१२२२ (तिथि: १२.१२.२०१२) हाइकू

तप्पत माटि तड़पि रहल छै बरखा लेल ।

बुन्नी झहरै सगरो पसरल माटिक गंध ।

गरदा-बुन्नी दुनु संग सानल  माटिक लड्डू ।

देखू देखिते पोखरि बनि गेल खेत-पथार ।

डोका- कांकौड़ लऽ लऽ छपकुनिया बीछय सभ ।

धानक बीया उजरल बिड़ार खेत रोपेतै ।

खूब उपजा भरि जैत बखारी रीन-उरीन ।

(तिथि-०६.०७.२०१२) शेर्न्यू

कृत्रिमतामे अभागल मनुख अभोगे गेल

घून-गड़ाड़ लागि रहल अछि मानवतामे

घोर अदिन्ता घेरने सगतरि जायब कतऽ

कंठमे कन्ठी शोणित के प्यासल मौसक भूख

भूखे आन्हर मनुख-मनुख के चिबा रहल

(तिथि-१०.०७.२०१२) हजल

कनिया सुन्नर देशी चाही ठाठ   मुदा  परदेसी चाही

बंगला - गाड़ी नोकर संगे दरमाहो किछु  बेशी चाही 

कूलरसँ   नै   देह  शीतेतै शौचालय तक एसी चाही

सिगारे टा नै हो अंग्रेजिया  मदिरा  सेहो  विदेशी चाही

गाए-महीश पोसै में लाज कुक्कुर-घोड़ा मवेशी चाही   

देशक  मर्यादा  नै  बिगड़ै     छूट  मुदा  परदेसी  चाही

पश्चिम  पैर   पसारै  रोकू "नवल"सोच स्वदेशी चाही 

*आखर-१० (तिथि-२५.०८.२०१२)

कविता : माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!

बिख घोंटि-घोंटि छथि पीबि रहल मैथिली छथि हिचकैत जीबि रहल आकुल भऽ आइ विवशतावश देखू माए नै विषपान करथि माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!

नै कम छी एकहु गोट किओ सभ पैघे छी नै छोट किओ बेरा - बेरी सभ राज करू मस्तक पर कीर्तिक ताज धरू अपनहिमे रहू जुनि ओझरायल ई मिथ्या मतदान करैत ! माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!

माए कानथि सुत निश्चिंत पड़ल सुधि-बुधि बिसरल अचिंत पड़ल चलू पोछब माएक नोर कियो चलू लायब सुख केर भोर कियो नहि देखि दुर्दशा जननी केर चलू छाती अपन उतान करैत ! माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!

कते कष्ट सहि माय जनम देलक बाजू की ममता कम देलक ? निर्ल्लज बनू नै, कने लाज करू जुनि स्वयं पर एतबा नाज करू जुनि करू एना अभिमान अहाँ अपनहि-अप्पन गुणगान करैत ! माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!

छी मैथिल एहि पर शान करू अहाँ मैथिलीक सम्मान करू सभ मिलि मैथिलीक प्रचार करू मिथिलाक कीर्ति विस्तार करू सुखद नूतन इतिहास बनत चलु डेग मिला सहगान करैत ! माए मैथिली छथि आह्वान करैत !!

(तिथि-२४.०१.२००१)

२ मनोज कुमार मण्‍डलक प्रश्न हिमालयक शुद्ध बसात सन पसरल मिथिलाक भू-भाग सभ वर्गक मुँहसँ निकलैत सु-मधुर भावसँ भरल अमृत सदृश भाषा-मैथि‍ली। मैथिलिक इतिहास कहैछ बड्ड पुरान छी हम अप्पन लिपी, अप्पन शैली पसरल शब्दक भंडार हमर नित सृजन होइत हमर शब्द मोटाइत रहैत अछि एक्कर शब्दकोषक पन्ना केना बिला गेल एक्कर पाठक बजत किछु लिखत किछु किएक घूसि गेलै लाज? अप्पनसँ आँखि‍ मिचौनी दोसरसँ मिलबैत हाथ के छथि जिम्मेदार एक्कर मिथिलाक बुद्धि-जीवी पर उठि रहल अछि प्रश्न दुखी छथि मैथिली दुखी छथि मैथिलिक सेवक जिनक जीवन बि‍त गेलनि‍ मैथिलीक साधनामे के कहत? कहिया मिलतनि‍ हुनकर सेवा-फल के ई कहत? ३ मो. गुल हसन उदास लागै..... जरि‍ गेलै सुखि‍ गेलै बौक भऽ गेलै धान उदास लागै भैया कि‍सानक खढ़ि‍यान उदास लागै......। मेहनत बेकार भेलै बोनि‍-बुत्ता सेहो गेलै हाथो तरक गेल भैया लातो तरक सेहो गेलै केना कऽ करतै कि‍सान भाय लेबान उदास लागै भैया कि‍सानक......। कि‍सानक मनोरथ मोनेमे रहलै बि‍आह-दुरागमनक दि‍न पतरेमे रहलै नै जानि‍ कि‍अए सुखि‍ गेलै अासमान उदास लागै भैया कि‍सानक......। कि‍सानक पीड़ाकेँ कि‍यो नै बुझै छै धि‍या-पुता-बाल-बच्‍चा केना लि‍खतै-पढ़तै केना समस्‍याक हेतै नि‍दान उदास लागै भैया कि‍सानक......। बि‍हार सरकारसँ अर्जी गुल हसन करैए गीत माध्‍यमसँ सूचि‍त करैए सरकारे समस्‍याकेँ करतै नि‍दान उदास लागै भैया कि‍सानक......। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अमित मिश्र, करियन ,समस्तीपुर गीत 1-3 1

निरमोहिया अहाँ भेलियै पिया गामसँ किए चलि गेलियै पिया आँखिमे नोर दऽ गेलियै पिया इयादि अपन छोड़ि गेलियै पिया

भोर भेलै आ बाजल मुरूगबा कली खिल कऽ बनि गेलै फूल चहुँ दिश इजोतक भेलै राज्य चलल परीन्दा बान्हि हुजूम एहनमे इयादि आबि अहाँ सब किछु भऽ गेल धुआँ धुआँ आँखिमे नोर दऽ . . . . .

एलै वसंत आ एतै फागुन आम महुआ गेलै मजरि कू कू कुहकऽ लागल कोयलिया मधुसँ मधुकर गेलै तरि जाड़ बितल तरसैत ओछैना इहो मास बितत अहाँ बिना आँखिमे नोर दऽ . . . . . . .

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पुरुष-बाड़ीमे आबू लताम      तऽर बैसू    खाउ लताम आ फेर         बतियाबू   बनतै अपन प्रेम पिहानी   हम बनब राजा अहाँ बनू हमर रानी

महिला- बाड़ीमे आएब       लताम तऽर बैसब खेबै लताम आ फेर बतियाएब बनतै अपन प्रेम पिहानी अहाँ बनू राजा हम बनब अहाँकेँ रानी

महिला-बाड़ीमे एथिन कक्का यौ सजना लगतै मारि तखन पक्का यौ सजना पुरुष-  घर घरबैयासँ किए    डेराइ छी  प्रेममे जड़ि सजनी किए सेराइ छी हेतै ने कोनो परेशानी हम बनब राजा अहाँ बनू हमर रानी

पुरुष-  पोखरि मोहार चलू    ओतै बतिएबै माछेकेँ अपन सुख दुख सुनेबै महिला-  बाधसँ बाबू जी आबैत हेथिन देखिते कोदारीसँ घेँट काटि देथिन  सोचू सोचू यौ दोसर कहानी अहाँ बनू राजा हम बनब अहाँकेँ रानी

महिला- दुनियाँ छै देखैत     दुरबिन लगेने प्रेमकेँ नाश कऽरऽ दल बल सजेने पुरुष- एकेटा दिल जे सुरक्षित अछि बचल हम अहाँक अहाँ हमरमे आबि जाउ चलतै नै तखन मनमानी हम बनब राजा अहाँ बनू हमर रानी अहाँ बनू राजा हम बनब अहाँके रानी

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प्रेम पाँति परसलौँ पलकपर पढ़ै छी अहाँ बाजू ने बाजू हम एतबे बुझै छी हम अहाँकेँ अहाँ हमर छी

अछि हमरे पवन जाहिमे वास अहाँकेँ ओ गीत हमरे जाहिमे भास अहाँकेँ हम सब ठाम भेटब जे बाट धऽ आबू देब प्रेमक परिक्षा अहाँ सोचि राखू अहाँ बाजू ने बाजू हम एतबे बुझै छी हम अहाँकेँ अहाँ हमर छी

कोनो नव गप नै जँ पत्र नै लिखब मुदा नैनक आखर मेटा नै सकब अहाँ कतबो नुकाउ आएब हम सपनामे जहिना आबै छी अहाँ हमर सपनामे अहाँ बाजू ने बाजू हम एतबे बुझै छी हम अहाँकेँ अहाँ हमर छी ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.आशीष अनचिन्हार- नुकाएल बलात्कारी रूप २.किशन कारीगर- डिनर डिप्लोमेसी १ आशीष अनचिन्हार नुकाएल बलात्कारी रूप हरेक मर्दक भित्तर नुकाएल रहैत छै एकटा बलात्कारी रूप जकरा चाही समय आ सहयोग, आ हरेक घटनाकेँ पछाति बदलि जाइ छै दृष्टिकोण महिलाक चाहे ओ हमर माए-बहीनि होथि की महिला सहकर्मी वा की बाटपर चलैत कोनो अन्य स्त्री ओकरा सभ लेल घटनाक पछाति कोनो सम्बन्ध इयाद नै रहै आ रहै जाइ छै मोन जे हम स्त्री छी आ ओ पुरुष माए-बहीनि सेहो कनछिया कए देखए लगैत अछि आ महिला सहकर्मी सेहो.... ओना हमर माए-बहीनि केर परिवेश आ हमर महिला सहकर्मी केर परिवेश भिन्न छै मुदा एहन घटनाक पछाति ओकर सभहँक मनोवृति एकै भए जाइत छै हरेक स्त्री केर नजरिमे बनि जाइत छी अपराधी सन आ नै रहि जाइए घमण्ड अपन मोछपर लगैए जे जँ लागि जेतै आगि मोछमे तँ कतेक नीक रहितै आ पहिल बेर हमरा अपन मोछपर घृणा होइए आ हम कहियो ने कहि सकै छी जे बलात्कारी हम नै छी दोसर पुरूष छै कारण ई अपन जिम्मेदरीसँ भागब हएत हँ हम आइ इ स्वीकार करै छी जे हरेक मर्दक भित्तर नुकाएल रहैत छै एकटा बलात्कारी रूप हम अपनाकेँ साधू-महात्मा बनेबाक लेल हरेक स्त्रीकेँ माए-बहीनि नै कहबै मुदा हे स्त्री अहाँ जै स्वरूपमे हमरा लेल छी चाहे माए-बहीनि रूपमे वा प्रेमिका, पत्नी, बाटपर चलैत आन कोनो वा हरेक रातिमे जागि क' अपना माथापर वेश्याक चिप्पी सटने आइ हम लज्जित छी अपन मर्द होमएपर हम समवेत रूपसँ माफी मँगैत छी अहाँ सभसँ २ किशन कारीगर डिनर डिप्लोमेसी (हास्य कविता) डिनर टेबल पर परोसल अछि मटर पनीर आ शाही पनीर छौंकल अछि घी देसी आउ-आउ ई छी डिनर डिप्लोमेसी। हम सतारूढ़ दल वला छी आई सहयोगी दल वला लेल डिनर माने भोज आयोजित भेल हमरा समर्थन भेटल खूम बेसी। आब बाहर सँ समर्थन देनिहार बाकि रहि गेल छथि त आई हुनके नामे राजनीतिक डिनर ई छी डिनर डिप्लोमेसी। अहाँ सभ जे खाएब हम अहाँक फरमाईस पुराएब मुदा एकटा गप कहि दि हम बाहरि समर्थन के कहाबद्धि कराएब। भरि पेट खाई जाई जाउ अहाँ जे खाएब से हम खुआएब मुदा ई कहू त चुपेचाप रहब आ की मध्यावधि चुनाव करबाएब। धू जी महराज अहूँ त एकदम ताले करैत छी खाइत-पीबैत काल ई गप नहि पहिने दारू मँगाउ अहाँ बिदेशी। डिनर टेबुल के नीचा मे देखू बोतल राखल अछि देसी-बिदेशी भरि छाक पीब लियअ ई छी डिनर डिप्लोमेसी। अच्छा ई कहू त सरकार एतेक खर्चा अपना जेबी आ कि सरकारी खजाना सँ हमरा ध लेलक बेहोशी। होश मे आउ गठबंधन बचाउ हम सत्ता मे छी की कहू अपनो खर्चा सरकारी भेल बड्ड बेसी ई छी डिनर डिप्लोमेसी।। कवि:- किशन कारीगर आकाशवाणी दिल्ली। फोनः- 9990065181 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.मुन्नी कामत केर दुइ गोट कविता- बेटी-लहास/ बाल-श्रम २.प्रीति‍ प्रि‍या झा- कवि‍ता-कऽ देलखि‍न उपकार महाशय १ मुन्नी कामत केर दुइ गोट कविता- बेटी-लहास/ बाल-श्रम बेटी-लहास एक-एक दिन बितल पुरल एक मास, अन्‍हार घरमे सूतल छेलौं हम नअ मास। देखै‍क बहुत जिज्ञासा छल हमरा ऐ घरक मालिककेँ जे नअ मास तक बिनु कहले मेटबैत अएल हमर सभ भूख पि‍यास। आइ भेटत रौशनी हमरा देखब हम संसारक चेहरा, लेब हम आइ नव जीवनक साँस पुरा हएत हमर आइ सभ आस। आँखि‍ बंद अछि किछो देख नै सकै छी हम मुदा महसुस भऽ रहल-ए एगो ब्रज हाथ, जे दबौचि‍ रहल अछि हमर कंठकेँ एगो अवाज जे बार-बार हमरा कान तक पहुँि‍च रहल अछि बेटी छि‍ऐ माइर दहि‍न! बस रूकि‍ गेल हमर साँस बनि‍ गेलूँ हम लहास। बाल-श्रम कुड़ा-कड़कट बीछ कऽ बाबू नै हम कोनो पाप करै छी, अहाँकेँ गन्दगी पहिले साफ करि‍ फेर अपन पेटक जोगार करै छी। बाल-श्रम अछि जुलुम बड़का-बड़का पोस्‍टरमे पड़लौं पर अफसर आ नेतेक घरमे नित काज करैत एलैं जब पेटक आगि‍ धधकैत अछि तब ने कोनो कागज-कलम सोहाइत अछि। चोरी-चपाटीसँ तँ नीक मेहनति‍ करि‍ दूगो रोटी खाइ छी। २ प्रीति‍ प्रि‍या झा कवि‍ता-कऽ देलखि‍न उपकार महाशय कऽ देलखि‍न उपकार महाशय बेटा बनि‍ जनम की लेलखि‍न लगैछ जेना अश्वमेघ यज्ञक वि‍श्ववि‍जेता- श्रीराम वा पुष्‍यमि‍त्र पाग-मौर मुरेठा ओ पगरी पहि‍रबाक उमेर भेलनि‍ नै की महाराजक भाव राजकुमारक ताउ वि‍कबाक लेल तैयार सत्‍य हरि‍श्चन्‍द्र वचन खाति‍र सेहो बि‍कल छलाह मुदा! तैयो माथ नि‍चाँ छलनि‍ एहेन वरदक कोन इज्‍जति‍ कोन मान....? बचबू भगवान एहेन दैत्‍यसँ आर्यावर्त्तक नारीकेँ चाम मोट, बोल चाखगर तराजू कमजोर पासंग भरि‍गर लाखक लाख टकाक संगे-संग सोनाक गरदाम चारि‍ चक्का चाही कि‍छु दि‍न पछाति‍ एरोप्‍लेन मांगतथि‍ कनि‍याँ चाहि‍यनि‍ वि‍श्वसुन्‍दरी डूमि‍ रहल समाज काटरक लीलामे दुर्भाग्‍य जे नारीक शत्रु नारी बापसँ बेसी माय पसारथि‍ गोरथारी जखन बेटीक माय तखन कनैत अछि‍ जखन बेटाक माय तँ मंगरैल बेटाकेँ “वासमती” सन कनि‍याँ चाहि‍यनि‍ एक्केटा कन्‍यामे सोल्होकला छत्तीसो गुण समाजक अद्योगति‍ उग्र भऽ गेल...। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.राजदेव मण्‍डलक तीन गोट कवि‍ता-शि‍शुक स्‍वर/ बोलती बन्न/ दि‍लक आवाज २.जगदीश प्रसाद मण्‍डलक सातटा गीत १ राजदेव मण्‍डलक तीनटा कवि‍ता- शि‍शुक स्‍वर/ बोलती बन्न/ दि‍लक आवाज शि‍शुक स्‍वर बन्न परसौति‍ घर चि‍चि‍आइत शि‍शुक स्‍वर नि‍कलैत सुगन्‍ध मन्‍द–मन्‍द शान्‍ति‍मे स्‍पन्‍द मधुर आवाज सजौने साज कनैत बारम्‍बार खोलत अनन्‍त संभावनाक दुआर बनत नि‍त-नूतन सि‍रजनहार ऐ हेतु होए एहेन आधार बढ़ै बुधि‍, वि‍वेक, वि‍चार तत्काल चाही सुरक्षाक ढाल देखू पाछू नचै छै काल लेने छै वएह पुरना जाल क्रन्‍दन स्‍वर पुछै सवाल “की हरण कऽ सकब अहाँ हमर दुख देख रहल छी घातीक रूख ताकि‍ सकब अहाँ चि‍न्‍हल मुख हएत कोनो मनुखे सन मनुख?” बोलती बन्न अभि‍भावककेँ सीख कानकेँ सुनाइत हवामे चारू-भर गुनगुनाइत “सम्‍हारि‍ कऽ चलि‍हेँ अपन चाल नै तँ बाटेमे धऽ लेतौ काल।” देश-दुनि‍याँ आगू बढ़ल हम रहब ओझरा कऽ पड़ल तैयो पैसल रहैत छल डर काँपैत रहैत छलौं थर-थर सुरक्षाक एतेक अछि‍ समान तँए ने देलि‍ऐ गपपर धि‍यान आइ जाएत बे-वजह जान राह भेल अछि‍ सुन्न-मसान आगू ठाढ़ भेल जमदूत समान कर्कश स्‍वर सुनि‍ ठाढ़ भेल कान “मुँहसँ जे नि‍कलतौ अावाज कि‍यो ने देतौ अखन काज।” हमर की गलती कि‍अए भेल नाराज “आइ गि‍रत हमरेपर गाज नजरि‍ उठा देखलौं जी उड़ल सन्न हमर भऽ गेल बोलती बन्न।” दि‍लक आवाज अन्‍तरमे रहैत अछि‍ अमृत बाहर बीख भरल अनघोल प्रेमक नै कोनो मोल भीतर शान्‍ति‍क खजाना अनमोल दि‍लक बोलकेँ जारि‍-मारि‍ बजै छी हम दोसर बोल शब्‍द दैत अछि‍ दि‍लकेँ धोखा खोजैत अछि‍ बारम्‍बार मौका कखनो शब्‍द दि‍लपर होइत अछि‍ नाराज कखनो दि‍लक बात कहैत शब्‍दकेँ होइत लाज शब्‍द होइत जे दि‍लक आवाज सभठाम होइत सत्‍यक राज अन्‍तरमे बहुत सजबए पड़त साज तखैन बनत शब्‍द दि‍लक आवाज। २ जगदीश प्रसाद मण्‍डलक सातटा गीत- सालक वि‍दाइ भाव-अभाव बि‍नु केना फुटतै फुटलोपर लेतै के यौ। अभाव-भाव सुभाव सुधरि‍ दर्पण-दर्शन देखौतै यौ। दर्पण-दर्शन......। दर्पण साहि‍त्‍य समाज कहि‍ दृष्‍ट–दर्शन छि‍पौलकै यौ। एना-केना बाट बना बटोही बाट भोति‍औलकै यौ। बेटोही......। एक्कैस-बीस समए ससरि‍ नचि‍नी नाच नचै छै यौ। बि‍नु अखि‍यासे जन-मरम जि‍नगी भसान भसै छै यौ। जि‍नगी......। मोनि‍ मन...... मोनि‍ मन उमड़ि‍-घुमड़ि‍ बि‍ढ़नी गीत गबैत रहै छै। सि‍ंह-बाघ धरती धमकि‍ पानि‍ गोहि‍ मोहैत रहै छै। बढ़नी गीत......। घटनी-बढ़नी कहि‍-सुनि‍ बढ़नी घटनी करैत रहै छै। बढ़नी झाँट झाड़ि‍-झटि‍या मारि‍ बढ़नी मारैत रहै छै। भाय यौ, बि‍ढ़नी गीत......। सेवा कहि‍-कहि‍ सभ ठक ठेका रस पीबैत रहै छै। मुदा कि‍, पबि‍ते जि‍नगीक रस सेवा स्‍पद-प्रेम मि‍लि‍ मीलि‍ गबै छै। स्‍पद-प्रेम......। बि‍ढ़नी गीत......। सेड़ाइते...... मीत यौ, सेराइते सड़ै छै। हेराइते हरै छै, डेराइते डरै छै। मीत यौ, सेराइते सड़ै छै। भात-बात बासि‍ बसि‍या बसि‍या-लसि‍या रूप धड़ै छै। बसि‍या-टटका कहि‍-सुनि‍ दारू नि‍शा चढ़बैत रहै छै। दारू नि‍शा......। मीत यौ, सेराइते सड़े छै। हेराइते हरै छै, डेराइते डरै छै। वाह रे मन, इच्‍छि‍त जीवन चाहक हाल बुझैत रहै छै। पानि‍ कहि‍ सेराएल चाह हटा कात फेकैत रहै छै। हटा कात......। मीत यौ, सेराइते सड़ै छै। हेराइते हरै छै, डेराइते डरै छै। दि‍न-राति‍क...... दि‍न-राति‍क आँखि‍ मि‍चौनी अन्‍हरा-ि‍दठड़ा खेल खेलै छै। दि‍न-सुदि‍न कहि‍ सुनि‍ नि‍सभरि‍ राति‍ रमैत रहै छै। अन्‍हरा-दि‍ठरा......। दि‍न दुख घि‍सि‍या-ति‍रि‍या नि‍त-नीन नश-नश भरै छै। अधा जि‍नगी उला-पका अधे आँखि‍क बीच उड़ै छै। अधे आँखि‍क......। दि‍ठड़ा डेग बढ़ि‍-बढ़ा लपकि‍ बाँहि‍ अन्‍हरा पकड़ै छै। पकड़ि‍ बाँहि‍ नूनू-दूनू राति‍ काटि‍ प्रभाती गबै छै। राि‍त काटि‍......। अन्‍हरा दि‍ठड़ा......। अबि‍ते आंगन...... अबि‍ते आंगन अलकि‍‍-झलकि दोग-सान्‍हि‍ देखए लगै छै। दोगे-दोग दौड़ देखि‍ अलकक चान दौड़ए लगै छै। अलकक......। सोनि‍-सानि‍ शून सन्‍हि‍या उगडुम डुमउग करए लगै छै। उगि‍-डूमि‍ डुककुनि‍या मारि‍-काटि‍ चि‍तंग हेल हेलए लगै छै। चि‍तंग......। जहि‍ना लहास धरि‍ भसि‍ चीत-पट परि‍चय करए लगै छै। अलकि‍-फलकि‍ अलि‍-अल कहि‍ अलकक चान देखए लगै छै। अलकक......। समाज सजल...... समाज सजल छै छि‍पाड़-उकट्ठी छीप-उकठपना बेवसाय बनल छै। रंग-बि‍रंग समाज गढ़ि‍-मढ़ि‍ रंग-रंग छीप कटैत रहै छै। भाय यौ, रंग-रंग......। आस-वि‍यास बनि‍ते जहि‍ना चोर-माखन कृष्‍ण कहै छै। गोप-गोपी बीच उमकि‍ कहि‍ उमकि‍ उकठपन कहै छै। भाय यौ, कहि‍ उमकि‍......। भावो लोक तहि‍ना भवए मारि‍ सेन्‍ह काटि‍ कहै छै। शास्‍त्री, शब्‍दशास्‍त्री कहि‍ कर्ता-धर्ता ब्रह्म कहै छै। मीत यौ, कर्ता......। सभ मि‍लि‍...... सभ मि‍लि‍ हमरा बाड़ि‍ देलकै। अपना समाजसँ टारि‍ देलकै। सभ मि‍लि‍ हमरा बाड़ि‍ देलकै। बनि‍-बनि‍ बदलि‍-बदलि‍ वारि‍स वर्ष बादल कहौलकै। माटि‍-छोड़ि‍ बालु पकड़ि‍ अपने मुँह अपने भरलकै। मीत यौ, अपने मुँह......। अपना समाजसँ टारि‍ देलकै। बाड़ि‍ चोरवत्ती देख अन्‍ह अन्‍है जलधर बसौलकै। बास बासुकि‍ कहि‍-कहि‍ सि‍र शि‍व मलि‍ मललकै। मीत यौ, शि‍व मलि‍......। अपना समाजसँ टारि‍ देलकै। चास-बास-अगवास बनि‍ वन सि‍रा आगू पीड़ा सजौलि‍ऐ। सि‍र आगू पीड़ सजौलि‍ऐ। पंच-एकक फन्‍द फड़ि‍ फल मेव पंच प्रसाद बँटलि‍ऐ मीत यौ, मेव......। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.राम वि‍लास साफी- पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ २.सन्तोष कुमार मिश्र- गुलामी डे ३.जितेन्द्र ‘जितु’- गरीबीक जाड़/ कथी लए...? ४.राजेश कुमार झा- जों अहाँ नै छी १ राम वि‍लास साफी पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ कैसन-कैसन ढोंगी रचए उपाए कत्‍थरकेँ टुकरि‍या जखन पहाड़ पर रहलै तब टुकरि‍या पत्‍थले कहाय। वहए रे टुकरि‍या जखन पंडि‍त घर अइलै ठाकुरजी हो हुनकर नाम कहाय। जब ई ठाकुरजी पंडि‍त घरे रहि‍येँ महि‍नो-महि‍नों रहि‍ये खुंटीमे टंगाय। जखने ओ न्‍योता जजमान घरे एलाह खुटि‍योसँ ठाकुरजी झोड़ामे धड़ाय। पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ। जखने पंडि‍त जजमान घरे पहुँचलाह तुरन्‍त देलकनि‍ ओडर हो सुनाय गइयाकेँ दुघवामे कुलकुलि‍या हो जाय पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ। एम.ए, बी.ए बि‍टबासँ गोबर पुजेथुन। ऊपरसँ लेथुन एकावन टका मंगाय। ठाकुरजीकेँ झपे खाति‍र सवा गज कपड़ा लेथुन सि‍याइ लेथुन पंडि‍ताइनक आंगी। पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ। जखने ओ सत् नारायणक कथा सुनौता बनि‍याँ नामक कथा ओ सुनोतुहुन बनि‍याँ जखन पूजा कऽ प्रसाद नै खेलकै लादल जहाज जँ हुनकर डुमि‍ जाय। पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ। लकड़हारा जखने पूजा कऽ प्रसाद नै खैलकै खेलैत बेटा वहीं जाय। जखन ओ पंडि‍त अछुत घर पूजा ओ कराबे तखने पंडि‍त अछुत घरक प्रसाद नै खेलकै पंडि‍तक बेटा ि‍कअए नै परि‍ जाइ। पढ़ल-लि‍खल तनि‍ गौर करि‍यो बबूआ। २ सन्तोष कुमार मिश्र, काठमाण्डू, नेपाल गुलामी डे

अवाद छलहुँ बरवाद भेलहुँ स्वाद लेलहुँ तरकारीके नोकरी तँ निके छल मुदा नहि छल सरकारीके ।

अवाद छलहुँ बरवाद भलहुँ स्वाद लेलहुँ तरकारीके नोकरी तँ निके छल तैयो, इडियट अन्तरवार्ता लऽकऽ देलनि छाप गुलामीके नोकरी तँ निके छल मुदा नहि छल सरकारीके ।

अवाद छलहुँ बरबाद भेलहुँ स्वाद लेलहुँ तरकारीके खर्च बढ़ल चर्च बढ़ल खालियो जेब केर सर्च बढ़ल मुदा, नइ बढ़ल बाट आमदनीके नोकरी तँ निके छल मुदा नहि छल सरकारीके ।

अवाद छलहुँ बरवाद भेलहुँ लाज कम समाज कम बाल बच्चा दर्जनमे छल देख–भाल करैत–करैत बितल दिन गुलामीमे नोकरी तँ निके छल मुदा नहि छल सरकारीके ।

कजन सभ दर्जनमे छल गर्जन करैत दिन आ राति अपन सेहो थप–थाप भऽकऽ गनती चलि गेल सोरहीमे चैन परिणत भऽ गेल बेचैनी मे नोकरी तँ निके छल मुदा नहि छल सरकारीके ।

जनम दिन किनको, मरन दिन किनको पावनि–तिहारक लाइन चलैत अपनो एक बेर बरबादी डे नोकरी छोड़ि धुमधामसँ मना रहल छी बरबादी डे आशीर्वाद देनिहार सबहे लोक कहलनि आइ–काल्हि आ नित दिन, सबहे महिना, सबहे शाल आ सबहे जुगमे मनैबैत रहू गुलामी डे नोकरी तँ निके छल मुदा नहि छल सरकारीके । ३ जितेन्द्र ‘जितु’- गरीबीक जाड़/ कथी लए...? गरीबीक जाड़ – आरिपर ठाढ़ बुचकुन बाबू देख रहल छथि ननुवाकेँ नुनुवा हुनक हरवाह काज कऽ रहल अछि अपन कनिया आ बालबच्चाक संग पुसक कुहेसा आ बिसबिस्सीक बिच फाटल चेथराक बलपर खटैत ओकर परिवार

अनायास अपना दिन ताकै छथि ओ मोट–मोट ऊनी कपड़ा, कोट गुलबन्द आ टोपी तइपर ओसबालक ऊनी चादर मुदा तैयो हवाक प्रत्येक वेगसँ शरीरमे उत्पन्न भऽ रहल कम्पन हुनका सोचबाक लेल बाध्य करैत अछि जे कोना चेथराक बलपर खटि रहल अछि नुनुवा आ ओकर नेना सभ

स्तब्ध नजरिसँ ओ देखै छथि पुनः नुनुवा दिस आ नुनुवा सेहो नजर उठा देखैत अछि हुनका दिस नुनुवाक हँसमुख मुखार बृन्द आ सन्तुष्ट नजरि जेना कहि रहल हौ मालिक ई तँ गरिबीक जाड़ थिकै अहिना आबैत छै, अहिना कटैत छै अहिना आबैत छै, अहिना कटैत छै २ कथी लए...?

औ किएक ई बन्दूक...? ई लाठी कथी लए...? किएक मशाल...? ई आन्दोलन कथी लए...?

अहाँकेँ मधेश आ थरुहट अहँाक? अहाँक चुरेभावर आ खम्बु लिम्बु अहाँक? आखिर किए ई मारि? आ ई आन्दोलन कथी लए...?

अस्तित्वक लेल संघीयता मुदा ओतहु विभाजन अधिकारक नामपर किएक ई द्वन्द्व...? ई द्वन्द्वपूर्ण आन्दोलन कथी लए...?

औ ई तँ कुर्सीक खेल थिकै, सत्ताक लेल थिकै राजनेताक दाव थिकै राजनीतिक घाव थिकै ओ तँ लड़ेबे करताह ओ तँ भिड़ेबे करताह हुनकर तँ बाते छोड़ू ओ तँ ओझरेबे करताह मुदा अहूँ स्वविवेकी छी अपन विवेक कथी लए...? कथी लए बन्दुक...? किए मशाल...? हे हौ विखण्डन कथी लए...?

हम मैथिल छी, नै पहिने नेपाली हम थारु छी, नै पहिने नेपाली हम पहाड़ी, नै पहिने नेपाली हम मधेशी, नै पहिने नेपाली हमहूँ नेपाली, अहूँ नेपाली  तखन विभेद कथी लए...? कथी लए बन्दुक...? किएक मशाल...? हे हौ विखण्डन कथी लए...?

ध्वस्त भेल अफगानकेँ देखू उजडि गेल इराक ओतए मिटा रहल ओइ पाककेँ देखू भातृद्वन्द्वक बिज तर अपन राष्ट्र थिक, अपन धरोहर तखन ई झगड़ा कथी लए...? कथी लए बन्दुक...? किए मशाल...? हे हौ विखण्डन कथी लए...?

भागलै राजा गणतन्त्र एलै हौ जाग जाग परतन्त्र गेलै हौ छऽ कि तोरा...? बाटबऽ तोँ की...? कि अरजलहा...? फाटबऽ तोँ की...? जेहने ओ अछि, तेहने हमहूँ तखन ई रगड़ा कथी लए...? कथी लए बन्दुक...? किए मशाल...? हे हौ विखण्डन कथी लए...?

ओकर बपौती नेपाल नै छिऐ वएह टा कोनो नेपाली नै छिऐ हमर नेपाल छी हमहूँ नेपाली तखन विभाजन कथी लए...? कथी लए बन्दुक...? किएक मशाल...? हे हौ विखण्डन कथी लए...?

मिलि सम्वृद्ध नेपाल बनाबी अपन नवीन इतिहास रचाबी उठू जागू बन्हा जाउ एक सूत्रमे एकताक संस्कार जगाबी नब नेपालमे सभ नेपाली जेहने मधेशी, ओहिने पहाड़ी ककरो बिच नै रहत विखण्डन विभेद, विभाजन कथी लए...? कथी लए बन्दुक...? किए मशाल...? हे हौ विखण्डन कथी लए...? ४ राजेश कुमार झा- जों अहाँ नै छी जों अहाँ नै छी, दिलमे धरकन नै यऽ मरल समान लागै छी, शरीरमे जाने नै यऽ निठला बैसल रहै छी, किछु करइक जोशे नै यऽ

जों अहाँ नै छी, फूलो मे महक नै यऽ दिन बजर समान लगैए, रातियोमे नींद नै यऽ मौसम ठहरि सन गेल, बहार मे ख़ुशी नै यऽ

जों अहाँ नै छी, आँखिमे ओ चमक नै यऽ मुस्कुराइक कोशिश करै छी, ठोर पर हँसी नै यऽ अहाँ सँ दूर रहैक, जीबैक चाहत नै यऽ

जों अहाँ नै छी, घर मे ओ दमक  नै यऽ कान तरसि गेलह, ओ पायलक आवाज नै यऽ हर पल विरान लगैए, कतौ विरहक उदासी तँ नै यऽ

जों अहाँ नै छी, ई जिन्दगी- जिन्दगी नै यऽ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.बिनीता झा- अही देशक बेटी हम २.कामिनी कामायनी -खिलैत पलास वन३. ज्योति झा चौधरी- शब्दमे उत्सव १ बिनीता झा अही देशक बेटी हम

अही देशक बेटी हम ने होमए देबै ककरो अपमान

किए क्षमा करिऐ ओकरा जे नै कए सकैत अछि नारीक सम्मान? किए भरोस करिऐ ओकरा पर जे नै भऽ सकल मनुखक संतान?

नै होइतथि नारी  तँ जन्म कोना लैतौं, नै होइतथि नारी  तँ बहिन के होइतथि नै होइतथि नारी  तँ कनियाँ कतएसँ तकितौं  नै होइतथि नारी तँ बेटी ककरा कहितिऐ नै होइतथि नारी तँ सृष्टि कि चलैत?

जागू, सोचू, विचारू  सभ नर, नारी  की होमए देबै अहाँ नारीक अपमान?

अही देशक बेटी हम  नै चुप बैसि कानब, करब ओकर प्रतिकार  जे करत हमरा संग अतिचार  ऐ लड़ाइमे हम एकसरे ने  संगे छथि हमर सखी, सखा  जे करै छथि  नारीक सम्मान l

२ कामिनी कामायनी खिलैत पलास वन खिलैत पलास वन । धरती सँ उनचास हाथ ऊपर/ उठल जे /प्रदीप्त मशाल/ भक, भुक, करैत/ मिझा गेल हुअए/ तँ ऐ मे बसातक कोन  दोष ? ओकर तँ अप्पन प्रवृत्ति/ ओ, समर्थ/ ओ शक्तिमान। मुदा, मिझैल मशाल/ ठाढ़ तँ ओहिना/ अप्पन, दुर्गतिक खिस्सा कहैत/ खसा रहल अछि/ दुनु आँखि सँ झर-झर नोर/ ई केहेन इजोर/ नै राति/ नै भोर/ चारू दिस / बिछल/ बर्फक सफेद चादरि/ छोट छोट/मोमक बाती/ आ कत्तेक पैघ उदासी/ ई कोन व्रत/ ई कोन उपास/ मुदा तैयो/ मोनमे जमल जा रहल  छै आस/ कि जे देवता/ पितर केँ /अप्पन निष्ठा आ प्रेम सँ/ गोहराबैत /आस्था केँ जीवित राखल / मानवीय संबंध केँ /मन प्राण मे सइतने / जुग जुग सँ ओकर कुशल भाखैत/ आइ फेर ओ जागि उठल अछि/ मनबै ले ब्रम्हा केँ/ चाही ओ रक्षा कवच/ लिखल ताड़ पत्र पर/ जे दनुज, दैत्य ,राकस केँ  दंड हुअए निश्चित/ नारीक चीर हरण/ करै नै दुष्ट जन/ रूप दिअ दुर्गा केँ / शक्ति दिअ काली केँ / काँपि उठैक सोचि कऽ धृष्टता  असुर जन / कतबो अनहर हुअए/ विश्वास आब संग छै/ पात पात  झड़ल /डाढ़ि पर/ खिलतै पलास वन/ एतबे मे/ आबए बाला ऋतु / कहि गेलै कान मे/ पाछाँ करू  नै आब अपन वाण/ तैयार दधीचि ओ  छथि/ देबए फेर सँ/ अपन  अस्थि दानमे। ३ ज्योति झा चौधरी शब्दमे उत्सव प्रयासक अमृत रससँ सींचित रहय सदैव विदेहक फुलवाड़ी आखर मे अभिव्यक्त कय उत्सव केँ शब्द मे उतारी तिला संक्रान्तिक घूर तापैत खोली नव सुबोधक  पेटारी वसन्तक धवल आवरण पर प्रार्थनाक सुमन सस्नेह सँवारी साहित्यक विविध शैली भरने इन्द्रधनुषी फगुआक पिचकारी शीतल शब्दक औषधि लऽ गरमीक सूरज पन्ना मे निहारी बरसातमे विचारक बूँदा बूँदी सँ अपन लेखनी सिक्त करी जाड़क त्राहि सँ त्राण पाबै लेल नवल उत्साहक ऊष्मा पसारी ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते पंकज चौधरी (नवलश्री) बाल गजल

बोहनि के बेर छै बटुआ ओरियेने जाएत छल फुकना लिअ' फुकना लिअ' चिचियेने जाएत छल

सभटा फुकना के फूंकि-फूंकि डोरा लए बान्हि-बान्हि ओकरा ठेंगामे खोंसि-खोंसि सरियेने जाएत छल

मगन मस्त भेल झूमि-झूमि गामे-गाम घूमि-घूमि फूलल - फूलल फुकना के उड़ियेने जाएत छल

गहिंकीक बड़ भीड़ छलै नेन्ना सभ अधीर छलै तइयो सौदा सभसँ धरि फरियेने जाएत छल

अनमन लागैत छैक सींग पुछरी आ पाँखि सन  एना फुकनामे फुकने के सन्हियेने जाएत छल

बेसी नमहर फुलाबयमे फुकना जे फूटि गेलै ओ मोने-मोन सभके आब गरियेने जाएत छल

एकटा फुकना के फुटलासँ चारि आना छूटि गेलै रहि - रहिकऽ केश "नवल" कुड़ियेने जाएत छल

*आखर-१९ (तिथि-११.०९.२०१२) बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet   -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma Send your comments to ggajendra@videha.com विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष  प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक  उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि

अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ ,  हटा क’ नहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६

  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/  कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड़ / बड़ी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍  ... समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍। जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍ चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि‍ बढ़इन बढ़न्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍ १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍ १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍ १८३. लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बि‍तौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/ करेलखिन्ह/ करेलखि‍न १८९. करएलन्हि/ करेलनि‍ १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍ २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍ २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि‍/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2012-13) (१४२० फसली साल) Marriage Days: Nov.2012- 25, 26, 28, 29, 30 Dec.2012- 5,9, 10, 13, 14 January 2013- 16, 17, 18, 23, 24, 31 Feb.2013- 1, 3, 4, 6, 8, 10, 14, 15, 18, 20, 24, 25 April 2013- 21, 22, 24, 26, 29 May 2013- 1,2,3,5,6,9,12,13,17,19,20,22,23,24,26,27,29,30,31 June 2013- 2,3 July 2013- 11, 14, 15 Upanayana Days: January 2013- 16 February 2013- 14, 15, 20, 21 April 2013- 22 May 2013- 20, 21 Dviragaman Din: November 2012- 25, 26, 28, 29 December 2012- 2, 3, 14 February 2013- 14, 15, 18, 20, 21, 22, 27, 28 March 2013- 1 April 2013- 18, 22, 24, 26, 28, 29 May 2013- 12, 13 Mundan Din: November 2012- 26, 30 December 2012- 3 January 2013- 18, 24 February 2013- 1, 14, 15, 20, 28 April 2013- 17 May 2013- 13, 23, 29 June 2013- 13, 19, 26, 27, 28 July 2013- 10, 15 FESTIVALS OF MITHILA (2012-13) Mauna Panchami-08 July Madhushravani- 22 July Nag Panchami- 24 July Raksha Bandhan- 02 Aug Krishnastami- 10 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 17 August Vishwakarma Pooja- 17 September Hartalika Teej- 18 September ChauthChandra-19 September Karma Dharma Ekadashi-26 September Indra Pooja Aarambh- 27 September Anant Caturdashi- 29 Sep Agastyarghadaan- 30 Sep Pitri Paksha begins- 30 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-08 October Matri Navami- 09 October SomvatiAmavasya Vrat- 15 October Kalashsthapan- 16 October Belnauti- 20 October Patrika Pravesh- 21 October Mahastami- 22 October Maha Navami - 23 October Vijaya Dashami- 24 October Kojagara- 29 Oct Dhanteras- 11 November Diyabati, shyama pooja-13 November Annakoota/ Govardhana Pooja-14 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 15 November Chhathi -19 November Devotthan Ekadashi- 24 November ravivratarambh- 25 November Navanna parvan- 25 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 28 November Vivaha Panchmi- 17 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 08 February Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 15 February Achla Saptmi- 17 February Mahashivaratri-10 March Holikadahan-Fagua-26 March Holi- 28 March Varuni Trayodashi-07 April Chaiti  navaratrarambh- 11 April Jurishital-15 April Chaiti Chhathi vrata-16 April Ram Navami- 19 April Ravi Brat Ant- 12 May Akshaya Tritiya-13 May Janaki Navami- 19 May Vat Savitri-barasait- 08 June Ganga Dashhara-18 June Somavati Amavasya Vrata- 08 July Jagannath Rath Yatra- 10 July Hari Sayan Ekadashi- 19 July Aashadhi Guru Poornima-22 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक  http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज  :  http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ"  : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स  : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI  FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इ‍डेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT

https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/   http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com  or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१२. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-12 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु 191 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका'विदेह' १२१ म अंक ०१ जनवरी २०१३ (वर्ष ६ मास ६१ अंक १२१) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA

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