VIDEHA — Issue 123 / अंक १२३

Publication: VIDEHA · Issue: 123
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ISSN 2229-547X VIDEHA 'विदेह' १२३ म अंक ०१ फरबरी २०१३ (वर्ष ६ मास ६२ अंक १२३) ऐ अंकमे अछि:- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१.ज्योति झा चौधरी- एक युग़: टच वुड २.२.जगदीश प्रसाद मण्‍डल-उपन्‍यास- बड़की बहि‍न/ सधवा-वि‍धवा २.३.बिन्देश्वर ठाकुर- भुखाएल जानवर सभ २.४.अमित मिश्र-  हारल विजेता २.५.गजेन्द्र ठाकुर- नाटक- गंगा ब्रिज २.६.१.रिपोर्ट- पूनम मण्डल- महा वि‍द्यालय सांस्‍कृति‍क कार्यक्रम-2013 २.संवाद-सुमित आनन्द- शोध-पत्रिका मैथिली केर लोकार्पण २.७.ई० सत्य नारायण झा- स्मरण २.८.जगदानन्द झा ‘मनु’- दूटा विहनि कथा- जुग-जुग जीबए/ समय चक्र ३. पद्य ३.१.१.जितेन्द्र ‘जितु’२.रामवि‍लास साहुक दूटा कवि‍ता- पुसक रात/ केना कहब भारत महान ३.शि‍व कुमार झा “टि‍ल्‍लू”-कवि‍ता- पुरीक यात्रा ३.२.अमित मिश्र- जीवन एहिना चलैत रहै छै/  जागू/ मित्र/ समयक संग/ नारीक रूप ३.३.१.शिव कुमार यादव-गजल १-४ २.जगदानन्द झा ‘मनु’ गजल १-४ ३.४.१.आशीष अनचिन्हार गजल १-२ २.सुमित मिश्र  गजल १-३ ३.५.कामिनी कामायनी- आधुनिक   स्त्रीगण ३.६.१.राजदेव मण्‍डलक दू गोट कवि‍ता २.जगदीश प्रसाद मण्‍डलक तीनटा गीत ३.७.बाल मुकुन्द पाठक- गजल१-५ ३.८.१.बिन्देश्वर ठाकुर "नेपाली"-प्रेमक फल/ पिया अहाँक यादमे  २. किशन कारीगर- मनुक्ख बनब कोना? गद्य-पद्य भारती:१.मूल तेलुगु कविता:पसुपुलेटि गीता; तेलुगुसँ हिंदी अनुवाद:आर.शांता सुंदरी; हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद: विनीत उत्पल (दिल्लीक बलात्कारक घटनापर)- दुमर्जा २. मन्त्रद्रष्टा ऋष्यश्रृङ्ग- हरिशंकर श्रीवास्तव “शलभ"- (हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद विनीत उत्पल) बालानां कृते-१.जगदानन्द झा 'मनु'- बाल गजल२.अमित मिश्र- बाल गजल १-४ विदेह मैथिली पोथी डाउनलोड साइट VIDEHA MAITHILI BOOKS FREE DOWNLOAD SITE विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

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"वेटिंग फॉर गोडो” दू अंकीय ट्रेजी-कॉमेडी अछि। सैमुअल बैकेट द्वारा ई 1952 ई. मे फ्रेंच भाषामे लिखल गेल आ एकर पहिल प्रदर्शन पेरिसमे 1953 ई. मे भेल। एकर अंग्रेजी संस्करणक प्रदर्शन लंदनमे 1955 ई. मे भेल आ अंग्रेजी संस्करण 1956 ई. मे प्रकाशित भेल। हैरोल्ड पिंटरक अंग्रेजी नाटक “द बर्थडे पार्टी” कैम्ब्रिजमे 1958 ई. मे मंचित भेल आ 1960 ई. मे प्रकाशित भेल। बादल सरकारक बांग्ला नाटक “एवम् इन्द्रजीत” 1962 ई. मे लिखल गेल आ ई 1965 ई. मे कलकत्तामे मंचित भेल। उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’क “नो एण्ट्री: मा प्रविश” 2008 ई. मे ई-प्रकाशित आ फेर ओही बर्ख प्रकाशित भेल। 19 फरबरी 2011 केँ कुणालक निर्देशनमे कालिदास रंगालय, पटनामे ई डेढ़ घण्टाक नाटक मंचित भेल। फ्रेंच, अंग्रेजी, बांग्ला आ मैथिलीक ई चारू नाटक पोस्ट-मॉडर्न नाटकक श्रेणीमे गानल जाइत अछि। जखन सैमुअल बैकेटक “वेटिंग फॉर गोडो” देखि क’ लोक सभ घुरल रहथि तँ हुनका लोकनिकेँ एकटा विचित्र अनुभवसँ साक्षात्कार भेल छलन्हि। ऐ नाटकमे मात्र पाँचटा पात्र अछि- एस्ट्रागोन, व्लादीमीर, लकी, पोजो आ एकटा छौड़ा। एकटा कण्ट्री रोडपर साँझमे एकटा गाछ लग एस्ट्रागोन एकटा ढिमकापर बैसल अछि आ अपन जुत्ता दुनू हाथसँ निकालबाक प्रयास क’ रहल अछि आ अपस्याँत अछि, आ थाकि जाइए। व्लादीमीर संगे ओ गपक प्रारम्भ होइ छै, एम्हर ओम्हरक फुसियाँहीक नमगर गपशप होइ छै। पोजो आ लकी अबैए। पोजो बुझाइए मालिक अछि आ लकी दास। दासो तेहेन जकरा गर्दनिमे नमगर रस्सा पोजो लगेने अछि। पहिने लकी अबैए, फेर रस्सा पकड़ने पोजो। लकी बड़का बैग, एकटा फोल्डिंग स्टूल, एकटा पिकनिक बास्केट आ ग्रेटकोट उघने अछि। पोजो लग चाबुक छै। लकी आदेशपालक अछि। मालिकक गप मानि फेर सभ बोझ उठा क’ ठाढ़ भ’ जाइए। एस्ट्रागोन आ व्लादीमीरकेँ ओकर बोझा उघनाइ नीक नै लगै छै। मुदा पोजो जखन कहै छै जे ओ ओहिने छै तँ एस्ट्रागोन पोजोकेँ आततायी बुझै छै। एस्ट्रागोन लकीक नोर पोछैए तखन ओकरा लकी मुक्का मारै छै। पोजो कहै छै जे तोरा कहलियौ ने जे लकीकेँ अनचिन्हार लोक पसिन्न नै छै।  आ एस्ट्रागोन आ व्लादीमीर ओत’ की क’ रहल अछि? ओ दुनू गोटे कोनो गोडो नाम्ना व्यक्तिक बाट जोहि रहल अछि। पोजो आ लकी चलि जाइए। एस्ट्रागोन आ व्लादीमीर लग एकटा छौड़ा अबै छै आ कहै छै जे गोडो आइ नै आबि सकता, काल्हि एता। फेर एम्हर ओम्हरक फुसियाँहीक गपशप होइए आ ओहो छौड़ा चलि जाइए। तखने मंचपर सँ बिजली चलि जाइ छै आ फेर राति भ’ जाइ छै, चन्द्रमा उगल छै। व्लादीमीर आ एस्ट्रागोनक गपशप शुरू होइ छै। फुसियाँहीक गपमे किछु अर्थपूर्ण गपशप सेहो होइ छै। दुनू गोटे जेबाक निर्णय करै छथि मुदा हिलै नै छथि। पहिल अंकक पर्दा खसैए। दोसर अंक, वएह समए आ स्थान। व्लादीमीरकेँ सभ किछु मोन छै मुदा एस्ट्रागोन बिसरि गेल अछि। एस्ट्रागोन कहैए जे ओ सभ किछु तुरत्ते बिसरि जाइए बा कहियो नै बिसरैए। ओकरा किछु-किछु मोनो पड़ै छै। पोजो आ लकी अबैए। पोजो आन्हर भ’ गेल अछि, लकी ओहिना बोझा उघने अछि। रस्सा सेहो छै मुदा किछु छोट। पोजो आ लकी खसि पड़ैए। पोजो सहायता लेल कहैए मुदा एस्ट्रागोन आ व्लादीमीर गपशप करैए। एस्ट्रागोन व्लादीमीरकेँ पहिल अंक जेकाँ “दीदी” कहैए। व्लादीमीर बाजैए जे “हमरा सभकेँ फुसियाँहीक गपशपमे समय नै बर्बाद करबाक चाही।“ पोजोक “सहायता”क आर्तनाद नियत अंतरालपर बेर-बेर होइ छै। मुदा तइपर एस्ट्रागोन आ व्लादीमीर ध्यान नै दैए। पोजो आब सहायता लेल सए फ्रैंक फेर दू सए फ्रैंकक लालच दैए। व्लादीमीर ओकरा उठबैले जाइए, प्रयासमे अपनो खसि पड़ैए आ सहायताक पुकार करैए। फेर किछु गपशपक बाद व्लादीमीरकेँ उठेबाक प्रयासमे एस्ट्रागोन खसि पड़ैए। व्लादीमीर पोजोकेँ मारैए, पोजो घुसकुनिया दैए। तखन व्लादीमीर ओकरा ताकैए, कहैए- आबि जो, तोरा नोकसान नै पहुँचेबौ। एस्ट्रागोन आ व्लादीमीर उठबाक प्रयास करबाक सोचैए आ उठि जाइए। एस्ट्रागोन कहैए- उठनाइ बच्चाक खेल सन हल्लुक अछि आ व्लादीमीर बजैए- ई मात्र आत्मशक्तिक प्रश्न अछि। पोजो सहायता लेल कहैए। दुनू पोजोकेँ उठबैए, फेर छोड़ैए, पोजो खसि पड़ैए। फेर दुनू ओकरा उठबैए आ पकड़ने रहैए। किछु कालमे कने छोड़ि क’ जाँचैए मुदा जखन पोजो खस’ लगैए तँ पकड़ि लैए। पोजो सेहो बुझा पड़ैए जे काल्हिक घटना बिसरल सन अछि। ओ कहैए जे ओ एक दिन सुति क’ उठल तँ अपनाकेँ आन्हर देखलक, ओ कहैए जे ओकरा लगै छै जे ओ अखनो सुतले तँ नै अछि। ओ लकीक विषयमे पूछैए। लागैए जे कोना ओ दुनू खसल, से ओकरा मोन नै छै। पोजो कहैए जे लकीक गर्दनिक रस्साकेँ जोरसँ खीचू बा मुँहपर जूतासँ मारू तँ ओ उठि जाएत। व्लादीमीर एस्ट्रागोनकेँ कहैए जे ओकरा लेल बदला लेबाक नीक अवसर छै। एस्ट्रागोन पुछैए (ओकर स्मृति घुरै छै!) जे जँ लकी अपन रक्षा करए तखन? तइपर पोजो बाजैए जे लकी कखनो अपन रक्षा नै करैए। मुदा एस्ट्रागोन नै व्लादीमीर लकीकेँ पएरसँ मार’ लगैए मुदा अपने ओकरा चोट लागि जाइ छै। घटनाक्रमसँ लगै छै जे पोजो आब अपनासँ ठाढ़ भ’ गेल अछि। पोजो जे लकीकेँ कोनो हाटमे बेचैले ल’ जा रहल अछि, केँ ने काल्हिक किछु मोन छै आ नहिये काल्हि आजुक किछु मोन रहतै। ओ लकीकेँ उठैले कहैए आ लकी उठि जाइए आ अपन बोझ उठा लैए। पोजो अपन चाबुक मांगैए। लकी सभ बोझ राखैए, आ चाबुक पोजोक हाथमे द’ क’ सभ बोझ उठा लैए। पोजो रस्सा मांगैए, लकी सभ बोझ राखि रस्सा पोजोकेँ पकड़ा क’ सभ बोझ उठा लैए! लकी आ पोजो चलि जाइए। ओ छौंड़ा अबैए। ओ व्लादीमीरकेँ अल्बर्ट कहि सम्बोधित करैए। व्लादीमीर पुछै छै जे की ओ ओकरा नै चिन्हलक, की ओ काल्हि नै आएल छल। छौड़ा कहैए जे आइ ओ पहिल बेर आएल अछि। संदेश वएह छै, गोडो आइ नै आएत मुदा काल्हि अवश्य आएत। व्लादीमीर पुछैए जे “गोडो” करैए की? तँ छौड़ा कहैए जे गोडो किछु नै करैए। व्लादीमीर पुछैए जे छौड़ाक भाए केहन छै। तँ उत्तर भेटै छै , ओ दुखित छै। व्लादीमीर पुछैए जे की काल्हि ओकर भाए आएल छलै- तँ से छौड़ाकेँ नै बुझल छै। छौड़ा उत्तर दैत कहैए जे गोडोकेँ दाढ़ी छै आ ओ कारी नै गोर छै। छौड़ा (पहिल अंक जकाँ) पुछैए जे ओ गोडोकेँ की जा क’ कहतै। व्लादीमीर कहैए- जा क’ कहू जे तोरा हमरा सभसँ भेँट भेलउ। व्लादीमीर छौड़ापर छड़पैए मुदा ओ पड़ा जाइए। सूर्यास्त होइ छै। चन्द्रमा देखा पड़ै छै। एस्ट्रागोन कहैए जे जँ दुनू गोटे अलग भ’ जाए तँ ई दुनू लेल नीक हेतै। जँ काल्हि गोडो नै एतै तँ ओ दुनू गोटे रस्सासँ लटकि जाएत (व्लादीमीर कहैए) आ जँ एतै तँ बचि जाएत। व्लादीमीर लकीक हैटमे ताकैए, हिलबैए, फेर पहिरैए। दुनू जेबाक निर्णय करैए मुदा कियो नै हिलैए। पर्दा खसैत अछि। ............ हैरोल्ड पिंटरक तीन अंकीय नाटक “द बर्थडे पार्टी” पीटे, मेग, स्टैनले, लुलु, गोल्डबर्ग आ मैककान एकर पात्र छथि। पहिल अंक- मेग पीटेकेँ जलखै दैए, पुछैए जे स्टेनली उठलै आकि नै। स्टेनली अबैए, ओकरो मेग जलखै दैए। पीटे काजपर चलि जाइए। मेग आ स्टैनलेमे अंतरंग गप होइए, हँसी मजाक होइए। पीटे मेगसँ कहने रहै जे दू गोटे एतै आ किछु दिन ओकरा घरमे रहतै। ओकर घर सूची (बोर्डिंग हाउस)मे छै। स्टैनली ई सुनि पूछ-पाछ करै छै, ओ चिंतित भ’ जाइए। स्टैनली कहैए जे ओकरा पेरिसमे नाइट क्लबमे पियानो बजेबाक नोकरीक ऑफर आएल छै। फेर एथेंस, कॉंन्सटेनटिनोपल, जाग्रेब, व्लादीवोस्टक सेहो। ई सम्पूर्ण विश्वक दर्शनबला नोकरी अछि। पुछलापर ओ कहैए जे ओ संपूर्ण विश्व, संपूर्ण देशमे पियानो बजेने अछि। एक बेर ओ कंसर्ट सेहो केने रहए। फेर ओ कहैए जे पहिल कंसर्ट मे ओ स्थानक पता हरा देलक आ नै पहुँचि सकल। दोसर कंसर्टमे जखन ओ पहुँचल तँ स्थलपर ताला लागल रहै। मेगक इच्छा नै छै जे स्टेनली कतौ जाए। स्टेनलीकेँ लागै छै जे ओ दुनू गोटे ककरो खोजमे अछि। लुलुक अबाज अबैए। मेग खरीदारीक झोरा ल’ क’ बहरा जाइए, कियो ओकरासँ मिसेज बोल्स सम्बोधित क’ गप करै छै। लुलु अबैए आ स्टैनलीसँ गप करैए। लुलु बहराइए तँ गोल्डबर्ग आ मैककेन अबैए। मैककेन गोल्डबर्गकेँ नैट कहि सम्बोधित करैए। स्टैनली चोरा क’ पहिनहिये बहरा जाइए। मेग अबैए, गोल्डबर्ग ओकरा मिसेज बोल्स कहि सम्बोधित करैए आ अपनाकेँ गोल्डबर्ग आ संगीकेँ मैककेन कहि परिचय दैए। गपशपक क्रममे गोल्डबर्ग पुछै छै जे ओइ रहनिहारक नाम की छै आ ओ की करैए। मेग कहैए जे ओकर नाम स्टैनले वेबर छै आ ओ एक बेर कंसर्ट देलक मुदा केयरटेकरक गलतीसँ रातिमे ओ ओतै बन्द रहि गेल आ भोर धरि बन्द रहल। आ फेर “टिप” ल’ क’ ट्रेन पकड़ि एत’ आबि गेल। तखने मेग कहैए जे आइ ओकर “बर्थडे” छिऐ। आ फेर “बर्थडे पार्टी” निर्धारित होइ छै 9 बजे। लुलुकेँ सेहो बेरू पहर नोति देल जेतै। तीनू बहराइए आ स्टैनली खिड़कीसँ ताकैए। मेग अबैए। स्टैनली ओइ दुनूसँ आशंकित अछि। नाम पुछैए तँ मेग नाम बिसरि जाइए आ ओकरा गोल्ड.. मोन पड़ै छै तँ स्टैनली मोन पाड़ै छै- गोल्डबर्ग। मेग पुछैए जे की स्टेनली ओकरा चिन्हैए तँ स्टैनली गुम्म रहैए। फेर स्टैनली कहैए जे आइ ओकर बर्थडे नै छिऐ। मेग ओकरा लेल बच्चाक ड्रम उपहारमे अनने अछि आ तकर बदलामे ओ स्टैनलीसँ चुम्मा मांगैए। अंक 2 मे स्टैनली आ मैक्कानक गपशप भ’ रहल छै। स्टैनली बाहर जाए चाहैए। ओ मैक्कानकेँ कहै छै जे ई बोर्डिंग हाउस नै छी, नहिये कहियो रहै। पीटे आ गोल्डबर्ग अबैए। गोल्डबर्ग पीटेकेँ मिस्टर बोल्स कहि सम्बोधित करैए। पीटेक गेलाक बाद स्टैनली कहैए जे ऐ घरक लोकक सुंघबाक शक्ति चलि गेल छै तेँ ओ गोल्डबर्ग आ मैक्कानक खतरा नै चीन्हि पाबि रहल छथि, हुनका सभक प्रति ओकर (स्टैनलीक) जिम्मेवारी छै। मैक्कान ओकरासँ चश्मा छीनि लैए। मैक्कान आ गोल्डबर्ग ओकरासँ पुछैए जे ओ किए अपन पत्नीक हत्या केलक। ओ नाम बदलने अछि आ चरित्रहीन अछि, स्त्रीकेँ दूषित करैए। झगड़ा शुरू होइ छै। मुदा झगड़ा रुकलाक बाद (प्रायः मेगकेँ नै बुझल छै) मेग पार्टी ड्रेसमे अबैए। सामान्य गप होइ छै। लुलु अबैए, गोल्डबर्ग ओकरा कोरामे बैसबैए। लुलुक पुछलापर जे ओकरा तँ होइ छलै जे ओ “नैट” छी, गोल्डबर्ग कहै छै जे ओकर पत्नी ओकरा “सिमे” कहि बजबै छै। पार्टीमे खेल शुरू होइए, आँखिमे पट्टी बान्हि क’। मिसेज बोल्सकेँ लुलु स्कार्फसँ आँखि बान्हैए। ओ जकरा छू देत तकरा आँखिपर पट्टी बान्हल जाएत। ओ मैक्केनकेँ छुबैए। फेर स्टैनली छुआइए। ओकर चश्मा लेल जाइ छै। स्टेनलीकेँ पट्टी बान्हल जाइ छै। मैक्केन स्टेनलीक चश्मा तोड़ि दैए। मैक्केन ड्रमकेँ स्टेनलीक रस्तामे राखैए, ओ खसि पड़ैए आ मेगक गर्दनि दबब’ चाहैए, मैक्केन आ गोल्डबर्ग बचबै छै। अन्हार पसरैए। स्टैनलीकेँ अबैत देखि लुलु बेहोश भ’ जाइए। स्टैनले लुलुकेँ टेबुलपर राखैए। मैक्कानकेँ टॉर्च भेटै छै। ओ टेबुल आ स्टैनलीपर टॉर्च बाड़ैए। अंक 3: पीटे आ मेगमे गप होइ छै। मेग स्टैनलीक विषयमे पीटेसँ पुछैए। लुलु अबैए, गोल्डबर्गसँ पुछैए जे ओकर पिता बा एडी (ओकर पहिल प्रेमी) की सोचत जँ ओ ई सुनत। ओ कहैए जे गोल्डबर्ग अपन दुष्ट पियास तृप्त केलक, ओ लुलुकेँ से सभ सिखेलक जे एकटा युवती तीन बेर बियाहल जेबाक बादे सीखत। गोल्डबर्ग कहैए जे ओ ई केलक कारण लुलु ओकरा ई कर’ देलक। लुलु जाइए। मेगक अनुपस्थितिमे गोल्डबर्ग आ मैक्कान स्टेनलीकेँ ल’ जाइए। पीटे ओकरा छोड़ैले कहैए। गोल्डबर्ग आ मैक्कान पीटेकेँ सेहो संगमे चलैले कहैए, कारमे जगह छै। पीटे स्थिर रहैए। पीटे असगरे रहि जाइए, मेग अबैए। पुछैए, ओ सभ गेल? पीटे कहैए- हँ। स्टेनलीक विषयमे मेग पुछैए- ओ सुतले अछि? पीटे कहैए- ओ सुतल अछि। -सुत’ दियौ। मेग पुछैए- की ई नीक पार्टी नै छल तँ पीटे कहैए- ओ बादमे आएल। पर्दा खसैए। ....... बादल सरकारक “एवम् इन्द्रजीत” “एवम् इन्द्रजीत” मे लेखक, काकी, मानसी, अमल, विमल, कमल, इन्द्रजीत आ इन्द्रजीतक पत्नी ( नाटकमे बादमे) दोसर मानसी पात्र अछि। अंक 1- लेखक एकटा नाटकक खोजमे अछि। ओकर काकी ओकर खेनाइ-पिनाइ छोड़ि लिखैत रहबापर तमसाएल छै। मानसी पुछैए जे ओ पढ़त जे किछु ओ लिखलक। लेखक कहैए, ओ किछु नै लिखलक। मानसी ओकरा प्रयास करैले कहै छै। लेखक दर्शकमेसँ चारिटा बादमे आबैबलाकेँ स्टेजपर बजबैए, अमल, विमल, कमल। चारिम अपन नाम निर्मल कुमार कहैए। लेखक कहैए- ई नै भ’ सकै छै, अपन असली नाम बताउ। ओ कहैए- इन्द्रजीत राय। अमल, विमल, कमल एवम् इन्द्रजीत। मानसी (असली नाम दोसर मुदा लेखक कहैए मानसीये) ओकर ममियौत बहिन छिऐ। ओ ओकरासँ प्रेम करैए, परम्परा तोड़’ चाहैए अंक 2: बादमे ओकरा लागै छै जे की जँ ई प्रेम सफल भइयो जेतै तँ ओकरा उत्तर भेटतै? नै ने। ओ लंदन सेहो जाएत। मृत्यु चाहैए, नै क’ पाबैए। लेखक द्वारा नामित इन्द्रजीतक मानसी अविवाहित अछि, हजारीबागमे पढ़बैए। मुदा अमल, विमल, कमलक विपरीत इन्द्रजीत लीखपर नै चलैए। अलग किछु कर’ चाहैए। काका, जकरा ओ माए कहैए, खाइले कहै छै आ मानसी लिखैले। मुदा जखन एक बेर मानसी लेखककेँ खाइले कहि दैए तँ लेखक दुखी भ’ जाइए, नै, अहूँ? नै। मुदा फेर मानसीकेँ गलतीक भान होइ छै, ओ ओकर लेखनक विषयमे पुछैए। लेखक चिंतित अछि, ई इन्द्रजीत वास्तविकताकेँ नै मानैए, कोनो प्रतिबद्धता ओकरामे नै छै। मुदा मानसी से नै मानैए। ओ सपना तँ देखैए ने। इन्द्रजीत लंदनसँ कोलकाता घुरैए, एकटा दोसर स्त्रीसँ बियाह करैए, ओकरो नाम मानसी छिऐ (इन्द्रजीत एकरा मानसी कहैए, पहिलुका मानसी जेकरा लेखक मानसी कहैए ओ इन्द्रजीतक ममियौत छिऐ, जकरासँ इन्द्रजीत प्रेम करैए मुदा ओ भाएक रिश्तासँ ओकरासँ बियाह नै करैए जे लोक की कहतै, आ इन्द्रजीत लेखककेँ कहैत रहैए जे ओकर नाम मानसी नै छिऐ। ) इन्द्रजीत बुझ’ लगैए (मानसीकेँ ओ कहैए) जे व्यक्तिक भिन्नताक मात्र भ्रम अछि। स्वप्न स्वप्न अछि ओ वास्तविकता नै बनि सकैए।  मानसी, मानसी, मानसी, सभ मानसी, जेना अमल, विमल, कमल। लेखक पूछैए तँ इन्द्रजीत कहैए- अमल, विमल, कमल एवम् इन्द्रजीत (सेहो!)। लेखकक यात्राक कोनो लक्ष्य नै, कोनो उद्देश्य नै, फुसियाँहीक यात्रा जकर कोनो कारण नै। लेखक इन्द्रजीतकेँ कहैए, हमरा सभकेँ जीबाक अछि, चलबाक अछि, कोनो धर्मस्थल नै तैयो तीर्थयात्रा करबाक अछि। उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’क “नो एण्ट्री: मा प्रविश” प्रथम कल्लोल: ई नाटक ज्योतिरीश्वरक परम्परामे कल्लोलमे (हुनकर वर्ण रत्नाकर कल्लोलमे विभक्त अछि जे नाटक नहि छी, धूर्त-समागम जे ज्योतिरीश्वर लिखित नाटक अछि- अंकमे विभक्त अछि) विभाजित अछि। चारि कल्लोलक विभाजनक प्रथम कल्लोल स्वर्ग (वा नरक) केर द्वारपर आरम्भ होइत अछि। ओतए बहुत रास मुइल लोक द्वारक भीतर प्रवेशक लेल पंक्तिबद्ध छथि। क्यो पथ दुर्घटनामे शिकार भेल बाजारी छथि तँ संगमे युद्दमे मृत भेल सैनिक आ चोरि करए काल मारल गेल चोर, उच्चक्का आ पॉकिटमार सेहो छथि। ज्योतिरीश्वरक धूर्तसमागममे जे अति आधुनिक अब्सर्डिटी अछि से नो एण्ट्री: मा प्रविश मे सेहो देखबामे अबैत अछि। प्रथम कल्लोलमे जे बाजारी छथि से, पंक्ति तोड़ि आगाँ बढ़ला उत्तर, चोर आ उचक्का दुनू गोटेकेँ, कॉलर पकड़ि पुनः हुनकर सभक मूल स्थानपर दए अबैत छथि। उचक्का जे बादमे पता चलैत अछि जे गुण्डा-दादा थिक मुदा बाजारी लग सञ्च-मञ्च रहैत अछि, हुनकासँ अंगा छोड़बाक लेल कहैत अछि। मुदा जखन पॉकेटमार बाजारी दिससँ चोरक विपक्षमे बजैत अछि तखन उचक्का चक्कू निकालि अपन असल रूपमे आबि जाइत अछि आ पॉकेटमारपर मारि-मारि कए उठैत अछि। मुदा जखन चोर कहैत छनि जे ई सेहो अपने बिरादरीक अछि जे छोट-छीन पॉकेटमार मात्र बनि सकल, ओकर जकाँ माँजल चोर नहि, आ उचक्का जेकाँ गुण्डा-बदमाश बनबाक तँ सोचिओ नञि सकल, तखन उचक्का महराज चोरक पाछाँ पड़ि जाइत छथि, जे बदमाश ककरा कहलँह। आब पॉकेटमार मौका देखि पक्ष बदलैत अछि आ उचक्काकेँ कहैत छन्हि जे अहाँकेँ नहि हमरा कहलक। संगे ईहो कहैत अछि जे चोरि तँ ई तेहन करए जनैत अछि, जे गिरहथक बेटा आ कुकुर सभ चोरि करैत काल पीटैत-पीटैत एतऽ पठा देलकए आ हमर खिधांश करैत अछि, बड़का चोर भेला हँ। भद्र व्यक्ति चोरक बगेबानी देखि ई विश्वास नहि कए पबैत छथि जे ओ चोर थिकाह। ताहिपर पॉकेटमार, चोर महाराजकेँ आर किचकिचबैत छन्हि। तखन ओ चोर महराज एहि गपपर दुख प्रकट करैत छथि जे नहि तँ ओहि राति एहि पॉकेटमारकेँ चोरिपर लए जएतथि आ ने ओ हुनका पिटैत देखि सकैत। एम्हर बजारी जे पहिने चोर आ उच्क्काकेँ कॉलर पकड़ि घिसिया चुकल छलाह, गुम्म भेल सभटा सुनैत छथि आ दुख प्रकट करैत छथि जे एकरा सभक संग स्वर्गमे रहब, तँ स्वर्ग केहन होएत से नहि जानि। आब बजारी महराज गीतक एकटा टुकड़ी एहि विषयपर पढ़ैत छथि। जेना धूर्तसमागममे गीत अछि तहिना नो एण्ट्री: मा प्रविश मे सेहो, ई एहि स्थलपर प्रारम्भ होइत अछि जे एहि नाटककेँ संगीतक बना दैत अछि। ओम्हर पॉकेटमारजी सभक पॉकेट काटि लैत छथि आ बटुआ साफ कए दैत छथि। आब फेर गीतमय फकड़ा शुरू भए जाइत अछि मुदा तखने एकटा मृत रद्दीबला सभक तंद्राकेँ तोड़ि दैत छथि, ई कहि जे यमालयक बन्द दरबज्जाक ओहि पार, ई बटुआ आ पाइ-कौड़ी कोनो काजक नहि अछि। आब दुनू मृत भद्र व्यक्ति सेहो बजैत छथि, जे हँ दोसर देसमे दोसर देसक सिक्का कहाँ चलैत अछि। आब एकटा रमणीमोहन नाम्ना मृत रसिक भद्र व्यक्तिक दोसर देसक सिक्का नहि चलबाक विषयमे टीप दैत छथि, जे हँ ई तँ ओहिना अछि जेना प्रेयसीक दोसरक पत्नी बनब। आब एहि गपपर घमर्थन शुरू भए जाइत अछि। तखन रमणी मोहन गपक रुखि घुमा दैत छथि जे दरबज्जाक भीतर रम्भा-मेनका सभ हेतीह। भिखमंगनी जे तावत अपन कोरामे लेल एकटा पुतराकेँ दोसराक हाथमे दए बहसमे शामिल भऽ गेल छथि, ईर्ष्यावश रम्भा-मेनकाकेँ मुँहझड़की इत्यादि कहैत छथि। मुदा पॉकेटमार कहैत अछि जे भीतरमे सुख नहि दुखो भए सकैत अछि। एहिपर बीमा बाबू अपन कार्यक स्कोप देखि प्रसन्न भए जाइत छथि। आब पॉकेटमार इन्द्रक वज्र पर रुपैय्याक बोली शुरू करैत अछि। एहि बेर बजारी तन्द्रा भंग करैत अछि आ दुनू भद्र व्यक्ति हुनकर समर्थन करैत कहैत अछि, जे ई अद्भुत नीलामी अछि, जे करबा रहल अछि से पॉकेटमार आ ओहिमे शामिल अछि चोर आ भिखमंगनी, पहिले-पहिल सुनल अछि आ फेर संगीतमय फकड़ा सभ शुरू भए जाइत अछि। मुदा तखने नंदी-भृंगी शास्त्रीय संगीतपर नचैत प्रवेश करैत छथि। आब नंदी-भृंगीक ई पुछलापर जे दरबज्जाक भीतर की अछि, सभ गोटे अपना-अपना हिसाबसँ स्वर्ग-नरक आ अकास-पताल कहैत छथि। मुदा नंदी-भृंगी कहैत छथि जे सभ गोटे सत्य कहैत छी आ क्यो गोटे पूर्ण सत्य नहि बजलहुँ। फेर बजैत-बजैत ओ कहए लगैत छथि, क्यो चोरि काल मारल गेलाह (चोर ई सुनि भागए लगैत छथि तँ दु-तीन गोटे पकड़ि सोझाँ लए अनैत छन्हि!) तँ क्यो एक्सीडेन्टसँ, आ एहि तरहेँ सभटा गनबए लगैत छथि, मुदा बीमा-बाबू कोना बिन मृत्युक एतए आयल छथि से हुनकहु लोकनिकेँ नहि बुझल छन्हि ! बीमा बाबू कहैत छथि जे ओ नव मार्केटक अन्वेषणमे आएल छथि ! से बिन मरल सेहो एक गोटे ओतए छथि ! भृंगी नंदीकेँ ढ़ेर रास बीमा कम्पनीक आगमनसँ आएल कम्पीटिशनक विषयमे बुझबैत छथि ! एम्हर प्रेमी-प्रेमिकामे घोंघाउज शुरू होइत छन्हि, कारण प्रेमी आब घुरि जाए चाहैत छथि। रमणी मोहन प्रेमीक गमनसँ प्रसन्न होइत छथि जे प्रेमिका आब असगरे रहतीह आ हुनका लेल मौका छन्हि। मुदा भृंगी ई कहि जे एतएसँ गेनाइ तँ संभव नहि मुदा ई भऽ सकैत अछि जे दुनू जोड़ी माय-बाप (!) केँ एक्सीडेन्ट करबाए एतहि बजबा लेल जाए। मुदा अपना लेल माए-बापक बलि लेल प्रेमी-प्रेमिका तैयार नहि छथि। तखन नंदी भृंगी दुनू गोटेक विवाह गाजा-बाजाक संग करा दैत छथि आ कन्यादान करैत छथि बजारी। दोसर कल्लोल: दोसर कल्लोलक आरम्भ होइत अछि एहि आभाससँ, जे क्यो नेता मरलाक बाद आबएबला छथि, हुनकर दुनू अनुचर मृत भए आबि चुकल छथि आ नेताजीक अएबाक सभ क्यो प्रतीक्षा कए रहल छथि, दुनू अनुचर छोट-मोट भाषण दए नेताजीक विलम्बसँ अएबाक (मृत्युक बादो !) क्षतिपूर्ति कए रहल छथि, गीतक योग दए। एकटा गीत चोर नहि बुझैत छथि मुदा भिखमंगनी आ रद्दीबला बुझि जाइत छथि, ताहि पर बहस शुरू होइत अछि। चोरकेँ अपनाकेँ चोर कहलापर आपत्ति अछि आ भिखमंगनीकेँ ओ भिख-मंग कहैत अछि तँ भिखमंगनी ओकरा रोकि कहैत छथि जे ओ सरिसवपाहीक अनसूया छथि, मिथिला-चित्रकार, मुदा दिल्लीक अशोकबस्ती आबि बुझलन्हि जे एहि नगरमे कला-वस्तु क्यो नहि किनैत अछि आ तखन चौबटियाक भिखमंगनी बनि रहि गेलीह। चोर कहैत अछि जे मात्र ओ बदनाम छथि, चोरि तँ सभ करैत अछि। नव बात कोनो नहि अछि, सभ अछि पुरनकाक चोरि। तकर बाद नेताजी पहुँचि जाइत छथि आ लोकक चोर, उचक्का आ पॉकेटमार होएबाक कारण समाजक स्थितिकेँ कहैत छथि। तखने एकटा वामपंथी अबैत छथि आ ओ ई देखि क्षुब्ध छथि जे नेताजी चोर, उचक्का आ पॉकेटमारसँ घिरल छथि। मुदा चोर अपन तर्क लए पुनः प्रस्तुत होइत अछि आ नेताजीक राखल “चोर-पुराण” नामक आधारपर बजारी जी गीत शुरू कए दैत छथि। तेसर कल्लोल: आब नेताजी आ वामपंथीमे गठबंधन आ वामपंथी द्वारा सरकारक बाहरसँ देल समर्थनपर  चरचा शुरू भए जाइत अछि। नेताजी फेर गीतमय होइत छथि आकि तखने स्टंट-सीन करैत एकटा मुइल अभिनेता विवेक कुमारक अएलासँ आकर्षण ओम्हर चलि जाइत अछि। टटका-ब्रेकिंग न्यूज देबाक मजबूरीपर नेताजी व्यंग्य करैत छथि। वामपंथी दू बेर दू गोट गप- नव गप कहि जाइत छथि, एक जे बिन अभिनेता बनने क्यो नेता नहि बनि सकैत अछि आ दोसर जे चोर नेता नहि बनि सकैछ (ई चोर कहैत अछि) मुदा नेता सभ तँ चोरि करबामे ककरोसँ पाछाँ नहि छथि। तखने एकटा उच्च वंशीय महिला अबैत छथि आ हुनकर प्रश्नोत्तरक बाद एकटा सामान्य क्यूक संग एकटा वी.आइ.पी.क्यू बनि जाइत अछि। अभिनेता, नेता आ वामपंथी सभ वी.आइ.पी.क्यूमे ठाढ़ भऽ जाइत छथि ! ई पुछलापर जे पंक्ति किएक बनल अछि (?) ताहिपर चोर-पॉकेटमार कहैत छथि जे हुनका लोकनिकेँ पंक्ति बनएबाक (आ तोड़बाक सेहो) अभ्यास छन्हि। चतुर्थ कल्लोल: यमराज सभक खाता-खेसरा देखि लैत छथि आ चित्रगुप्त ई रहस्योद्घाटन करैत छथि जे एक युग छल जखन सोझाँक दरबज्जा खुजितो छल आ बन्न सेहो होइत छल। नंदी भृंगी पहिनहि सूचित कए देलन्हि जे सोझाँक दरबज्जा स्वप्न नहि, मात्र बुझबाक दोष छल। दरबज्जाक ओहि पार की अछि ताहि विषयमे सभ क्यो अपना-अपना हिसाबसँ उत्तर दैत छथि। चित्रगुप्त कहैत छथि जे सभक वर्णनक सभ वस्तु छै ओहिपार। नंदी-भृंगी सूचित करैत छथि जे एहि गेटमे प्रवेश निषेध छै, नो एण्ट्री केर बोर्ड लागल छै। आहि रे ब्बा! आब की होअए ! नेताजीकेँ पठाओल जाइत छन्हि यमराजक सोझाँ, मुदा हुनकर सरस्वती ओतए मन्द भए जाइत छन्हि। बदरी विशाल मिश्र प्रसिद्ध नेताजी, केर खिंचाई शुरू होइत छन्हि असली केर बदला सर्टिफिकेट बला कम कए लिखाओल उमरिपर। पचपन बरिख आयु आ शश योग कहैत अछि जे सत्तरि से ऊपर जीताह से ओ आ संगमे मृत चारू सैनिककेँ आपिस पठा देल जाइत अछि। दूटा सैनिक नेताजीक संग चलि जाइत छथि आ दू टा अनुचर सेहो जाए चाहैत अछि। मुदा नेताजीक अनुचर सभक अपराध बड़ भारी, से चित्रगुप्तक आदेशपर नंदी-भृंगी हुनका लए, कराहीमे भुजबाक लेल बाहर लए जाइत छथि तँ बाँचल दुनू सैनिक हुनका पकड़ि केँ लए जाइत छथि आ नंदी-भृंगी फेर मंचपर घुरि अबैत छथि। तहिना तर्कक बाद प्रेमी-प्रेमिका, दुनू भद्र पुरुष आ बजारीकेँ सेहो त्राण भेटैत छन्हि ढोल-पिपहीक संग हुनका बाहर लए गेल जाइत अछि। आब नन्दी जखन अभिनेताक नाम विवेक कुमार उर्फ...बजैत छथि तँ अभिनेता जी रोकि दैत छथि, जे कतेक मेहनतिसँ जाति हुनकर पाछाँ छोड़ि सकल अछि, से उर्फ तँ छोड़िए देल जाए। वामपंथी गोष्ठीकेँ अभिनेता द्वारा मदति केर विवरणपर वामपंथी प्रतिवाद करैत छथि। हुनको पठा देल जाइत छनि। वामपंथीक की हेतन्हि, हुनकर कथामे तँ ने स्वर्ग-नर्क अछि आ ने यमराज-चित्रगुप्त। हुनका अपन भविष्यक निर्णय स्वयं करबाक अवसर देल जाइत छन्हि। मुदा वामपंथी कहैत छथि जे हुनकर शिक्षा आन प्रकारक छलन्हि, मुदा एखन जे सोझाँ घटित भए रहल छन्हि ताहिपर कोना अविश्वास करथु? मुदा यमराज कहैत छथि जे- भऽ सकैत अछि, जे अहाँ देखि रहल छी से दुःस्वप्न होअए, जतए पैसैत जाएब ओतए लिखल अछि नो एण्ट्री। आब यमराज प्रश्न पुछैत छथि जे विषम के, मनुक्ख आकि प्रकृति ? वामपंथी कहैत छथि जे दुनू, मुदा प्रकृतिमे तँ नेचुरल जस्टिस कदाचित् होइतो छै मुदा मनुक्खक स्वभावमे से गुन्जाइश कतए ? मुदा वामपंथी राजनीति एकर (समानताक, सुधार केर) प्रयास करैत अछि। ताहिपर हुनका संग चोर-उचक्का आ पॉकेटमारकेँ पठाओल जाइत अछि, ई अवसर दैत जे हिनका सभकेँ बदलू। चोर कनेक जाएमे इतस्तः करैत अछि आ ई जिज्ञासा करैत अछि जे हम सभ तँ जाइए रहल छी मुदा एहिसँ आगाँ ? नंदी-चित्रगुप्त-यमराज समवेत स्वरमे कहैत छथि- नो एण्ट्री। भृंगी तखने अबैत छथि, अभिनेताकेँ छोड़ने। यमराज कहैत छथि - मा प्रविश। भृंगी नीचाँमे होइत चरचाक गप कहैत अछि, जे एतुक्का निअम बदलल जएबाक आ कतेक गोटेकेँ पृथ्वीपर घुरए देल जएबाक चरचा सर्वत्र भए रहल अछि। यमदूत सभ अनेरे कड़ाह लग ठाढ़ छथि क्यो भुजए लेल कहाँ भेटल छन्हि (मात्र दू टा अनुचर छोड़ि)। आब क्यो नहि आबए बला बचल अछि, से सभ कहैत छथि। चित्रगुप्त अपन नमहर दाढ़ी आ यमराज अपन मुकुट उतारि लैत छथि आ स्वाभाविक मनुक्ख रूपमे आबि जाइत छथि! मुदा चित्रगुप्तक मेकप बला नमहर दाढ़ी देखि भिखमंगनी जे ओतए छलीह, हँसि दैत छथि। भृंगी उद्घाटन करैत छथि जे भिखमंगनी हुनके सभ जेकाँ कलाकार छथि ! कोन अभिनय ! तकर विवरण मुहब्बत आ गुदगुदीपर खतम होइत अछि, तँ भिखमंगनी कहैत छथि जे नहि एहि तरहक अभिनय तँ ओतए (देखा कए) भऽ रहल अछि। ओत्तऽ रमणी मोहन आ उच्चवंशीय महिला निभाक रोमांस चलि रहल अछि। मुदा निभाजी तँ बजिते नहि छथि। भिखमंगनी यमराजसँ कहैत छथि जे ओ तखने बजतीह जखन एहि दरबज्जाक तालाक चाभी हुनका भेटतन्हि, बुझतीह जे अपसरा बनबामे यमराज मदति दए सकैत छथि, ई रमणीक हृदय थिक एतहु नो एण्ट्री ! यमराज खखसैत छथि, तँ चित्रगुप्त बुझि जाइत छथि जे यमराज “पंचशर”सँ ग्रसित भए गेल छथि ! चित्रगुप्तक कहला उत्तर सभ क्यो एक कात लए जाओल जाइत छथि मात्र यमराज आ निभा मंचपर रहि जाइत छथि। यमराज निभाक सोझाँ- सुनू ने निभा... कहि रुकि जाइत छथि। सभक उत्साहित कएलापर यमराज बड़का चाभी हुनका दैत छथि, मुदा निभा चाभी भेटलापर रमणी मोहनक संग तेना आगाँ बढ़ैत छथि जेना ककरो अनका चिन्हिते नहि होथि ! ओ चाभी रमणी मोहनकेँ दए दैत छथि मुदा ओ ताला नहि खोलि पबैत छथि। फेर निभा अपने प्रयास करए लेल आगाँ बढ़ैत छथि मुदा चित्रगुप्त कहैत छथि जे ई मोनक दरबज्जा थिक, ओना नहि खुजत। महिला ठकए लेल चाभी देबाक (!) गप कहैत छथि। सभ क्यो हँसी करैत छनि जे मोन कतए छोड़ि अएलहुँ ? ताहिपर एकबेर पुनः रमणी मोहन आ निभा मोन संजोगि कए ताला खोलबाक असफल प्रयास करैत छथि। नंदी-भृंगी-भिखमंगनी गीत गाबए लगैत छथि जकर तात्पर्य ईएह जे मोनक ताला अछि लागल, मुदा ओतए अछि नो एण्ट्री। मुदा ऋतु वसन्तमे प्रेम होइछ अनन्त आ करेज कहैत अछि मैना-मैना । तँ एतहि नो एण्ट्री दरबज्जापर धरना देल जाए। नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१३ क घोषणा मुख्य अभिनय- (1) सुश्री आशा कुमारी सुपुत्री श्री रामावतार यादव, उमेर- १८, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) मो. समसाद आलम सुपुत्र मो. ईषा आलम, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (3) सुश्री अपर्णा कुमारी सुपुत्री श्री मनोज कुमार साहु, जन्‍म ति‍थि‍- १८-२-१९९८, पता- गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) हास्‍य–अभिनय- (1) श्री ब्रह्मदवे पासवान उर्फ रामजानी पासवान सुपुत्र- स्‍व. लक्ष्‍मी पासवान, पता- गाम+पोस्‍ट- औरहा, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) टाॅसि‍फ आलम सुपुत्र मो. मुस्‍ताक आलम, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (मांगनि खबास समग्र योगदान सम्मान) शास्‍त्रीय संगीत सह तानपुरा : श्री रामवृक्ष सि‍ंह सुपुत्र श्री अनि‍रूद्ध सि‍ंह, उमेर- ५६, गाम- फुलवरि‍या, पोस्‍ट- बाबूबरही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मांगनि‍ खबास सम्‍मान: मिथिला लोक संस्कृति संरक्षण: श्री राम लखन साहु पे. स्‍व. खुशीलाल साहु, उमेर- ६५, पता, गाम- पकड़ि‍या, पोस्‍ट- रतनसारा, अनुमंडल- फुलपरास (मधुबनी) नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान (समग्र योगदान सम्मान): नृत्‍य - (1) श्री हरि‍ नारायण मण्‍डल सुपुत्र- स्‍व. नन्‍दी मण्‍डल, उमेर- ५८, पता- गाम+पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) सुश्री संगीता कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव पासवान, उमेर- १६, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) चि‍त्रकला- (1) जय प्रकाश मण्‍डल सुपुत्र- श्री कुशेश्वर मण्‍डल, उमेर- ३५, पता- गाम- सनपतहा, पोस्‍ट– बौरहा, भाया- सरायगढ़, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री चन्‍दन कुमार मण्‍डल सुपुत्र श्री भोला मण्‍डल, पता- गाम- खड़गपुर, पोस्‍ट- बेलही, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) संप्रति‍, छात्र स्‍नातक अंति‍म वर्ष, कला एवं शि‍ल्‍प महावि‍द्यालय- पटना। हरि‍मुनि‍याँ / हारमोनियम (1) श्री महादेव साह सुपुत्र रामदेव साह, उमेर- ५८, गाम- बेलहा, वार्ड- नं. ०९, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री जागेश्वर प्रसाद राउत सुपुत्र स्‍व. रामस्‍वरूप राउत, उमेर ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) ढोलक/ ठेकैता/ ढोलकि‍या (1) श्री अनुप सदाय सुपुत्र स्‍व.   , पता- गाम- तुलसि‍याही, पोस्‍ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री कल्‍लर राम सुपुत्र स्‍व. खट्टर राम, उमेर- ५०, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) रसनचौकी वादक- (1) वासुदेव राम सुपुत्र स्‍व. अनुप राम, गाम+पोस्‍ट- ि‍नर्मली, वार्ड न. ०७  , जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) शिल्पी-वस्तुकला- (1) श्री बौकू मल्‍लि‍क सुपुत्र दरबारी मल्‍लि‍क, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री राम वि‍लास धरि‍कार सुपुत्र स्‍व. ठोढ़ाइ धरि‍कार, उमेर- ४०, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मूर्तिकला-मृर्तिकार कला- (1) घूरन पंडि‍त सुपुत्र- श्री मोलहू पंडि‍त, पता- गाम+पोस्‍ट– बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री प्रभु पंडि‍त सुपुत्र स्‍व.   , पता- गाम+पोस्‍ट- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) काष्ठ-कला- (1) श्री जगदेव साहु सुपुत्र शनीचर साहु, उमेर- ३६, गाम- ि‍नर्मली-पुरर्वास, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री योगेन्‍द्र ठाकुर सुपुत्र स्‍व. बुद्धू ठाकुर उमेर- ४५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) किसानी- आत्मनिर्भर संस्कृति- (1) श्री राम अवतार राउत सुपुत्र स्‍व. सुबध राउत, उमेर- ६६, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) (2) श्री रौशन यादव सुपुत्र स्‍व. कपि‍लेश्वर यादव, उमेर- ३५, गाम+पोस्‍ट– बनगामा, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) अल्हा/महराइ- (1) मो. जीबछ सुपुत्र मो. बि‍लट मरहूम, उमेर- ६५, पता- गाम- बसहा, पोस्‍ट- बड़हारा, भाया- अन्‍धराठाढ़ी, जि‍ला- मधुबनी, पि‍न- ८४७४०१ जोगि‍रा- श्री बच्‍चन मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. सीताराम मण्‍डल, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री रामदेव ठाकुर सुपुत्र स्‍व. जागेश्वर ठाकुर, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) पराती (प्रभाती) गौनि‍हार आ खजरी/ खौजरी वादक- (1) श्री सुकदेव साफी सुपुत्र श्री   , पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) पराती (प्रभाती) गौनि‍हार - (अगहनसँ माघ-फागुन तक गाओल जाइत) (1) सुकदेव साफी सुपुत्र स्‍व. बाबूनाथ साफी, उमेर- ७५, पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) लेल्हु दास सुपुत्र स्‍व. सनक मण्‍डल पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) झरनी- (1) मो. गुल हसन सुपुत्र अब्‍दुल रसीद मरहूम, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) (2) मो. रहमान साहब सुपुत्र...., उमेर- ५८, गाम- नरहि‍या, भाया- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नाल वादक- (1) श्री जगत नारायण मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. खुशीलाल मण्‍डल, उमेर- ४०, गाम+पोस्‍ट- ककरडोभ, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री देव नारायण यादव सुपुत्र श्री कुशुमलाल यादव, पता- गाम- बनरझुला, पोस्‍ट- अमही, थाना- घोघड़डीहा, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) गीतहारि‍/ लोक गीत- (1) श्रीमती फुदनी देवी पत्नी श्री रामफल मण्‍डल, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) (2) सुश्री सुवि‍ता कुमारी सुपुत्री श्री गंगाराम मण्‍डल, उमेर- १८, पता- गाम- मछधी, पोस्‍ट- बलि‍यारि‍, भाया- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) खुरदक वादक- (1) श्री सीताराम राम सुपुत्र स्‍व. जंगल राम, उमेर- ६२, पता- गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री लक्ष्‍मी राम सुपुत्र स्‍व. पंचू मोची, उमेर- ७०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) काँरनेट- (1) श्री चन्‍दर राम सुपुत्र- स्‍व. जीतन राम, उमेर- ५०, पता- गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) मो. सुभान, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) बेन्‍जू वादक- (1) श्री राज कुमार महतो सुपुत्र स्‍व. लक्ष्‍मी महतो, उमेर- ४५, गाम- ि‍नर्मली वार्ड नं. ०४, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्री घुरन राम, उमेर- ४३, गाम+पोस्‍ट- बनगामा, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) भगैत गवैया- (1)  श्री जीबछ यादव सुपुत्र स्‍व. रूपालाल यादव, उमेर- ८०, पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) (2)  श्री शम्‍भु मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. लखन मण्‍डल, पता- गाम- बढि‍याघाट-रसुआर, पोस्‍ट– मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) खि‍स्‍सकर- (खि‍स्‍सा कहैबला)- (1) श्री छुतहरू यादव उर्फ राजकुमार, सुपुत्र श्री राम खेलावन यादव, गाम- घोघरडि‍हा, पोस्‍ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल, पि‍न- ८४७४५२ (2) बैजनाथ मुखि‍या उर्फ टहल मुखि‍या- (2)सुपुत्र स्‍व. ढोंगाइ मुखि‍या, पता- गाम+पोस्‍ट- औरहा, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) मिथिला चित्रकला- (1) सुश्री मि‍थि‍लेश कुमारी सुपुत्री श्री रामदेव प्रसाद मण्‍डल ‘झारूदार’ पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट-– मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) (2) श्रीमती वीणा देवी पत्नी श्री दि‍लि‍प झा, उमेर- ३५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) खजरी/ खौजरी वादक- (2) श्री कि‍शोरी दास सुपुत्र स्‍व. नेबैत मण्‍डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट-– मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) तबला- श्री उपेन्‍द्र चौधरी सुपुत्र स्‍व. महावीर दास, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री देवनाथ यादव सुपुत्र स्‍व. सर्वजीत यादव, उमेर- ५०, गाम- झाँझपट्टी, पोस्‍ट- पीपराही, भाया- लदनि‍याँ, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) सारंगी- (घुना-मुना) (1) श्री पंची ठाकुर, गाम- पि‍पराही। झालि‍- (झलि‍बाह) (1) श्री कुन्‍दन कुमार कर्ण सुपुत्र श्री इन्‍द्र कुमार कर्ण पता- गाम- रेबाड़ी, पोस्‍ट- चौरामहरैल, थाना- झंझारपुर, जि‍ला- मधुबनी, पि‍न- ८४७४०४ (2) श्री राम खेलावन राउत सुपुत्र स्‍व. कैलू राउत, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) बौसरी (बौसरी वादक) श्री रामचन्‍द्र प्रसाद मण्‍डल सुपुत्र श्री झोटन मण्‍डल, उमेर- ३०, बौसरी/बौसली/बासुरी बजबै छथि‍। पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) श्री वि‍भूति‍ झा सुपुत्र स्‍व. कनटीर झा, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- कछुबी, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) लोक गाथा गायक श्री रवि‍न्‍द्र यादव सुपुत्र सीताराम यादव, पता- गाम- तुलसि‍याही, पोस्‍ट- मनोहर पट्टी, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) श्री पि‍चकुन सदाय सुपुत्र स्‍व. मेथर सदाय, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) मजि‍रा वादक (छोकटा झालि‍...) श्री रामपति‍ मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. अर्जुन मण्‍डल, पता- गाम- रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, ि‍जला- सुपौल (बि‍हार) मृदंग वादक- (1) श्री कपि‍लेश्वर दास सुपुत्र स्‍व. सुन्नर दास, उमेर- ७०, गाम- लक्ष्‍मि‍नि‍याँ, पोस्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, थाना- लौकही, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) (2) श्री खखर सदाय सुपुत्र स्‍व. बंठा सदाय, उमेर- ६०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) तानपुरा सह भाव संगीत (1) श्री रामवि‍लास यादव सुपुत्र स्‍व. दुखरन यादव, उमेर- ४८, गाम- सि‍मरा, पोस्‍ट- सांगि‍, भाया- घोघड़डीहा, थाना- फुलपरास, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) तरसा/ तासा- श्री जोगेन्‍द्र राम सुपुत्र स्‍व. बि‍ल्‍टू राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री राजेन्‍द्र राम सुपुत्र कालेश्वर राम, उमेर- ५८, गाम- मझौरा, पास्‍ट- छजना, भाया- नरहि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) रमझालि‍/ कठझालि‍/ करताल वादक- श्री सैनी राम सुपुत्र स्‍व. ललि‍त राम, उमेर- ५०, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री जनक मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. उचि‍त मण्‍डल, उमेर- ६०, रमझालि‍/ कठझालि‍/ करताल वादक,  १९७५ ई.सँ रमझालि‍ बजबै छथि‍। पता- गाम- बढि‍याघाट/रसुआर, पोस्‍ट- मुंगराहा, भाया- ि‍नर्मली, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) गुमगुमि‍याँ/ ग्रुम बाजा श्री परमेश्वर मण्‍डल सुपुत्र स्‍व. बि‍हारी मण्‍डल उमेर- ४१, १९८० ई.सँ गुमगुि‍मयाँ बजबै छथि‍। श्री जुगाय साफी सुपुत्र स्‍व. श्री श्रीचन्‍द्र साफी, उमेर- ७५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) डंका/ ढोल वादक श्री बदरी राम, उमेर- ५५, पता- गाम इटहरी, पोस्‍ट- बेलही, भाया- ि‍नर्मली, थाना- मरौना, जि‍ला- सुपौल (बि‍हार) श्री योगेन्‍द्र राम सुपुत्र स्‍व. बि‍ल्‍टू राम, उमेर- ५५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) डंफा (होलीमे बजाओल जाइत...) श्री जग्रनाथ चौधरी उर्फ धि‍यानी दास सुपुत्र स्‍व. महावीर दास, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) श्री महेन्‍द्र पोद्दार, उमेर- ६५, पता- गाम+पोस्‍ट- चनौरागंज, भाया- तमुरि‍या, जि‍ला- मधुबनी (बि‍हार) नङेरा/ डि‍गरी- श्री राम प्रसाद राम सुपुत्र स्‍व. सरयुग मोची, उमेर- ५२, पता- गाम+पोस्‍ट- बेरमा, भाया- तमुरि‍या, थाना- झंझारपुर (आर.एस. शि‍वि‍र), जि‍ला- मधुबनी पि‍न- ८४७४१० (बि‍हार) गजेन्द्र ठाकुर ggajendra@videha.com अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। २. गद्य २.१.ज्योति झा चौधरी- एक युग़: टच वुड २.२.जगदीश प्रसाद मण्‍डल-उपन्‍यास- बड़की बहि‍न/ सधवा-वि‍धवा २.३.बिन्देश्वर ठाकुर- भुखाएल जानवर सभ २.४.अमित मिश्र-  हारल विजेता २.५.गजेन्द्र ठाकुर- नाटक- गंगा ब्रिज २.६.१.रिपोर्ट- पूनम मण्डल- महा वि‍द्यालय सांस्‍कृति‍क कार्यक्रम-2013 २.संवाद-सुमित आनन्द- शोध-पत्रिका मैथिली केर लोकार्पण २.७.ई० सत्य नारायण झा- स्मरण २.८.जगदानन्द झा ‘मनु’- दूटा विहनि कथा- जुग-जुग जीबए/ समय चक्र ज्योति झा चौधरी एक युग़: टच वुड वक्रतुंड महाकाय सुर्यकोटिः समप्रभ. निर्विघ्नः कुरुमे देव सर्व कार्येषु सर्वदा । आजुक दिन 22 नवम्बर 2012 हमर जिनगीक बड़ विशिष्ट दिन छल। संयोग सँ हमरा अपन आफिसमे एकटा बहुत स्टाइलिस्ट फाइल उपहारमे भेटल जइमे बारह टा विभाजन छलै, हमर निजी मासिक बिलक सम्हार लेल बड़ उपयुक्त छल। जे कियो ई देने छलथि तिनका बुझल छलनि जे हम अखन आत्मनिर्भर हुनके प्रयासमे छलौं आ हमरा सामने जँ विश्वक सभसँ सुन्नर गहनाक दुकान आ स्टेशनरीक दुकान होइ तँ हम स्टेशनरीक दुकानमे जाएब। मुदा हुनका ई नै बुझल रहनि जे आइ हमर विवाहक बारहम वर्षगॉंठ अछि, टचवुड। हम कहबो नै केलियनि कारण एतुक्का रहन-सहनमे हमर विवाह जेना चलि रहल छल से किछु प्राचीन बुझाइत छल, ई बात अलग छै जे हम अपन पिछड़ापनमे संतुष्ट छलौं। कहक गप्प नै जे हमर मोनमे पहिल विचार आएल अपन विवाहक बारह वर्षक अम्मत आ मिठगर स्मृतिकेँ सँवारी। ओना हमरा अपन बिल राखै लेल पेपर फाइलक जरूरत कम पड़ैत अछि। हम बेसी काल काज ऑनलाइन करैत छी । ऐ रचना लेल सेहो हमर छोट नोटबुक काफी अछि मुदा ई फाइल एकटा प्रेरणा अछि। ई रचना लिखबाक लेल हम स्वयंकेँ भाग्यशालिनी मानैत छी जे अपन विवाहक बारह साल हम अपन पति संगे बितेलौं। कोनो आश्चर्य नै जे बहुत याद असौहाद्र्रपूर्ण सेहो छल मुदा हमर अपन विवेचन ई कहैत अछि जे अइ कऽ मुख्य कारण छल हमर दुनुक बड्ड अलग व्यक्तित्व। हमर नौकरी करबाक इच्छा आ सबतरि बहावक संग बहइ कऽ बदले अपन तर्कपूर्ण दिमाग लगेबाक आदति। ईहो सच अछि जे दुर्भाग्यवश हमरा लोकक मार्गदर्शनमे चलैक अवसर भेटबे नै कएल। बहुत बेर हम अभिभावक आ मार्गदर्शकक दुःखद कमी भोगने छी। ई कमी समाप्तप्राय लागैत अछि अखन, टचवुड, जखन हम अपन व्यवसाय बनाबैक प्रयासमे छी। हम किछु एहेन लोक सभसँ भेँट केलौं जे वास्तवमे सहायक आ प्रेरणावर्धक छथि आ ऐ क्रममे जे हमरा ई फाइल देली से सभसँ ऊपर छथि। अन्ततः. हम आइ खुश छी आ अपन पति आ परिवारक निरन्तर खुशीक प्रार्थना कऽ रहल छी। मोन पड़ि रहल अछि जे हमरा बच्चामे पारम्परिक मैथिल तरीकासँ विवाह करै लेल कतेक ललक छल। हम हमेशा घोघ तानैक अभ्यास करैत रहैत छलौं। अतऽ जखन कखनो जैकेटक हुड माथपर चढ़ाबै छी तँ हँसी आबि जाइत अछि। हमरा घोघ तानि कऽ झात करैमे बड्ड मजा आबैत छल। सभ छुट्टीमे मियाँक दौड़ मस्जिद गामे जाइत छलौं आ सभसँ गँवार बनि कऽ लौटै छलौं। गेटपर तौनी बा शालसँ घोघ तानि कऽ बैसि जाइ छलौं आ बाबुजीकेँ ताबे नै घर घुसऽ दैत छलियनि जाबे ओ हमर घोघ हटा कऽ नै कहि दैथि जे बड्ड सुन्नर कनियाँ छह। हमरा पूरा विश्वास छल जे बाबुजी हमरा लेल एकटा खूब सुन्नर लम्बा गोर बड़ कऽ देता। ओना हम लोककेँ ओकर व्यवहारसँ चिन्हनाइ जल्दिये सीख लेलौं। कतेक हास्यास्पद छै जे हम पैघो भेलापर ई कहियो नै सोचलिऐ जे हमर पति लेल सेहो हम ओतबे महत्वपूर्ण हेबाक चाही। हमर सपना छल जे हमर बरियातीमे खूब फटक्का फोड़ल जाए। हम कहै छलिऐ जे दीदीक बियाह गाममे करबियौन, सभ बुढ़बा सभ फटक्कासँ डेरा कऽ घरमे नुका जेतै आ हमर बियाह शहरमे कराउ। हमर ई सपना तँ बढ़ि चढ़ि कऽ पूरा भेल। खूब बाजा फटक्का सभ भेल, संगे बूढ़-बूढ़ ससुर सभ सेहो बरियातीमे खूब नचला। हम ईहो कहिऐ जे हमर बियाहमे हमरा ३० टा साड़ी देब की नै। तइपर हमर छोटका भायक कहब छनि जे दीदीकेँ तखन तीसे तक गीनऽ आबै छलनि। जखन कखनो हम अपन पतिक कल्पना करी तँ हम हमेशा स्वप्न देखलौं संगे पूजा केनाइ, एके रंगक कपड़ा पहिरनाइ। आंगनमे खुजल आकाशमे बैसनाइ। मुदा चाह पिनाइक सपना नै छल, कारण चाय कॉफी हमर नजरिमे एकटा खराब हिस्सक छल। हमर ईहो सपना छल जे हमर पति हमर भाइक बढ़िया दोस्त बनथिन कारण ओ सभ बचपनसँ बड्ड सुकमार छलथि। हँ, हमरा एकटा छोट घरक इच्छा छल जइमे बस जरूरतक सभ सामान होइ। एकबेर हम अपन बहिन संगे पार्क गेलौं। बहिन कहलथि जे एहेन बड़का बगान अप्पन हुअए तँ कतेक मजा हेतै। हम कहलियनि जे बाप रे बाप, साफ के करतै। दीदी कहलखिन, जकरा लग बड़का बगान हेतै से नौकरो तँ राखि लेतै। हमर मतलब छल जे घरमे एक दिन काजवाली नै आबै तँ कोहराम मचि जाइत छल। सभ भन्साघरक काजमे लागैत छलथि आ हमरा बाहरी काज भेटैत छल। हँ, तँ हमर सपना हमर छोट घरक दिवारपर सम्पूर्ण परिवारक फोटो लागल हुअए जइमे सभसँ महत्वपूर्ण पैघ हुअए हमर मॉं-बाबूजी आ सास-ससुरक फोटो। हमरा खूब घुमनाइ-फिरनाइक शौक सेहो छल जे बड़ कम पूरा भेल मुदा तकर कुनो अफसोस नै अछि। बस कमी लागल तँ परिवारक जुटानक। यद्यपि कखनो कऽ परिवारक जुटान भेल छल जखन माँ-बाबूजी, दाइजी आ दीदीक सास-ससुर केँ लऽ कऽ आएल छलथि। फेर मौसीक परिवार तऽ जान छलथि हमरा ओतए। हमर सास-ससुर सेहो आएल छलथि मुदा तखन हम काज लेल १२ घण्टा घरसँ बाहर रहै छलौं। ओ छोट सनक दू कमरा आ एकटा बड़का बेडरूम जतेक पैघ किचेन-कम-डायनिंगबला फ्लैट हमर स्वप्न महल छल, जतए हमरा अपन सभ सपना लगभग पूरा होइत देखाएल। (जारी…) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश प्रसाद मण्‍डल उपन्‍यास- बड़की बहि‍न/ सधवा-वि‍धवा १ बड़की बहि‍न उपन्‍यास चारि‍ भाए-बहि‍नक बीच सुलोचना, पहि‍ल रहने बड़की बहि‍नक नाओंसँ गाम भरि‍मे जानल जाइत छथि‍। बीघा दू-अढ़ाइक जमीनबला परि‍वार। छि‍यासी बर्खक अवस्‍थामे जि‍नगीक ढलानक आखि‍री सीढ़ीमे पहुँचल सुलोचना भातीजक संग बि‍लसपुर-मध्‍य प्रदेशसँ अपने गाड़ीसँ गाम पहुँचली। गाम पहुँचते हलचल भऽ गेल सुलोचना बहि‍न एली। ओना पछि‍ला पीढ़ीक अनुकरण करैत अगि‍लो पीढ़ी, दीदीक जगह बहि‍ने कहै छन्‍हि‍। एक्के-दुइये टोलक धि‍या-पुता आ जनि‍-जाति‍यो पहुँचए लगली। डेढ़ि‍यापर गाड़ी रोकि‍ रघुनाथ (छोट भाइक जेठ बेटा) उतरि‍ एका-एकी सभकेँ उतारए लगल। दू बर्खक पोताकेँ सुलोचना कोरामे नेने गाड़ीसँ उतरली। रि‍ष्‍ट-पुष्‍ट शरीर, चानीक बल्‍ला दुनू हाथमे, महीन, सादा साड़ी पहि‍रने। थुल-थुल देह। उतरि‍ते चारू दि‍स आँखि‍ उठा तकलन्‍हि‍ तँ बूझि‍ पड़लन्‍हि‍ जे जेबा कालसँ वि‍परीत सभ कि‍छु बूझि‍ पड़ैए। जि‍नगीक आशा तोड़ि‍ घरो-दुआर आ गामोकेँ गोड़ लागि‍ कहने रहि‍यनि‍ जे अंति‍म दर्शन केने जाइ छी। कहाँ आशा छल जे गामक मुँह फेर देखब। तइ बीच जेठ भौजाइपर नजरि‍ पड़लन्‍हि‍। नजरि‍सँ नजरि‍ मि‍लि‍ते दुनूकेँ बघजर लागि‍ गेलन्‍हि‍। मुँहक बोल बन्ने रहलन्‍हि‍ तइ बीच झुनकुट चेहरा, ठेंगा हाथे बसमति‍या दीदी सेहो पहुँचली। जहि‍ना सुलोचना गामक बेटी तहि‍ना बसमति‍या दीदी सेहो। एक उमेरि‍ये दुनू गोटे, मुदा सुलोचना बहि‍न तीन मास जेठ छथि‍। बसमति‍या दीदीकेँ देखि‍ते सुलोचना बजली- “साले भरि‍मे एते लटैक गेलैं?” दुनूक जि‍नगी बच्‍चेसँ एकठाम बीतने बजैमे कोनो कमी रहबे ने करए। नि‍धोक भऽ बसमति‍या दीदी बजली- “तूँ ने भाए-भाति‍जक कमेलहा खा कऽ गेंड़ा बनि‍ गेलैं, हमरा के देत?” सुलोचना- “कि‍अए भगवान तोरा थोड़े बेपाट छथुन जे नै देनि‍हार छौ?” बसमति‍या- “हँ से तँ अछि‍ये, मुदा जएह कमाएत तेहीमे ने देत। अच्‍छा, कह जे टुटलाहा लग कज्‍जी ने तँ रहलौं। नीक जकाँ हड्डी जूटि‍ गेलौं कि‍ने?” “हँ। आब तँ बाल्‍टीनो उठबै छी, पोतोकेँ कोरो-काँखमे लऽ कऽ खेलबै छि‍ऐ। अपने गाड़ि‍यो छी, आब गामेमे रहब।” “ऐ उमेरमे असकरे रहि‍ हेतौ?” “छोट भाए- मुनेसरो रहत कि‍ने? काल्हि‍ ओहो आओत। ताबे कहुना अही टुटलाहा घरमे रहि‍ पजेबाक घर बनाओत। हम सभ कते जीबे करब। मुदा जाबे आँखि‍ तकै छी, ताबे तकक ओरि‍यान तँ करए पड़त कि‍ने?” चौदह बर्खक अवस्‍थामे सुलोचनाक बि‍आह भेलन्‍हि‍। जहि‍ना पि‍ताक साधारण कि‍सान परि‍वार तेहने परि‍वारमे बि‍आहो भेलन्‍हि‍। समाजमे अखन धरि‍ धन नै कुले-मूलक महत अधि‍क रहल मुदा लेनो-देन तँ चलि‍ते छल। नीक-मूलक कन्‍याक माङो बेसी। ओना अपन-पि‍ताक कुल-मूलसँ दब परि‍वारमे बि‍आह भेलन्‍हि‍, मुदा कोनो हि‍नके टा नै, समाजमे कतेको गोटेकेँ भेल छन्‍हि‍ आ होइतो अछि‍। कोनो प्रश्ने नै उठल। मि‍थि‍लांचलक ओइ गाममे सुलोचनाक जन्‍म भेल छलन्‍हि‍ जइ गाम होइत एकटा धारो अछि‍ आ पूबसँ कोसीक पानि‍ आ पछि‍मसँ कमलाक पानि‍ सेहो बरसातक मौसममे बाढ़ि‍ बनि‍ अबि‍ते अछि‍। ओना कोसी-कमलाक बान्‍ह नै रहने अबैत-अबैत बाढ़ि‍ पतरा जाइत मुदा बरखोक तँ कोनो नि‍श्चि‍त ठेकान नहि‍ये छै। जइ साल बरखा बेसी भेल तइ साल बाढ़ि‍यो नमहर-नमहर आएल आ जइ साल कम बरखा भेल बाढ़ि‍यो छोट अबैत। खेतीक लेल बरखा छोड़ि‍ दोसर कोनो साधन नै छल। लकड़ीक करीनसँ कि‍छु खेती होइत छल मुदा ओ तँ पोखरि‍सँ होइत छल जे बैशाख-जेठमे अपने सुखि‍ जाइत। जे पोखरि‍ गहींर रहैत ओइ पोखरि‍क पानि‍ ऊपर अनैमे तीन-चारि‍ गाड़ करीन लगि‍ जाइत। गहुमक खेती नहि‍येँक बराबर होइत छल, कि‍यो-कि‍यो दू-चारि‍ कट्ठा कऽ लैत छलाह। छह गोटेक परि‍वार चलबैमे सुलोचनाक पि‍ता हरि‍हरकेँ कठि‍नाइ तँ रहबे करनि‍ मुदा गाममे मात्र हरि‍हरे एहेन नै बहुतो एहेन छलाह जे हुनकोसँ भारी जि‍नगी जीबैत छलाह। एक तँ महि‍ला शि‍क्षाक चलनि‍‍ नै, दोसर गाममे साधनोक अभाव। ओना बाहरसँ कम सम्‍पर्क रहने गाममे शि‍क्षाक ओते जरूरतो नहि‍येँ छल। बेवहारि‍क ज्ञानक जरूरत छल जे सभमे छलैक, अखनो छैक। स्‍कूलक मुँह सुलोचना नै देखली। बि‍आहक तीन साल पछाति‍ सुलोचनाक दुरागमन भेल, सासुर गेली। बर्ख-पाँचे-छबेक पछाति‍ सासुरसँ सुलाचनाकेँ भगा देलकन्‍हि‍‍। भगबैक कारण रहैक जे सन्‍तान नै भेलन्‍हि‍। ओना ने कहि‍यो डॉक्‍टरी जाँच कराओल गेलन्‍हि‍ आ ने सन्‍तान नै हेबाक दोष कि‍नकामे छन्‍हि‍, से फड़ि‍छाओल गेल। समाजमे एहेन धड़ल्लेसँ होइत जे कोनो महि‍लाकेँ कुरुप कहि‍ सासुरसँ ठोंठि‍या कऽ भगाओल जाइत तँ कोनोकेँ सौति‍न तर बसा भगाओल जाइत। इत्‍यादि‍-इत्‍यादि‍। वैदि‍क पद्धति‍ एक-पुरुष एक नारीक सम्‍बन्‍धकेँ पहि‍ल श्रेणीक वि‍चार समाज मानने अछि‍, तइठाम रंग-रंगक बाधा बना नारीकेँ अगुआइसँ रोकल गेल। रंग-रंगक सगुन-अपसगुन कहि‍, तँ उढ़री-ढढ़री बना दबाओल गेल। एहेन स्‍थि‍ति‍केँ जँ रोगक जड़ि‍ बि‍ना तकने आ ओइठामसँ वैचारि‍क बाट बनौने बि‍ना आइ एक्कैसम शताब्‍दीमे पहुँचल छी। ई बि‍लकुल सत्‍य छैक जे कि‍यो शेर होइ आकि‍ सि‍यार सभकेँ अपन कालखण्‍डक लेखा-जोखा होइ छै। तँए ओ अगि‍ला-पछि‍ला दोखक भागी भेला, बूझब ई ननमति‍ भेल। हँ, जँ कि‍यो अपना हाथे कि‍छु केलन्‍हि‍ तेकर जबावदेह तँ भेबे कएल। सुलोचनाक पि‍ता हरि‍हर समाजक ओहन व्‍यक्‍ति‍ जे आँखि‍क सोझामे कि‍यो गाछक आम तोड़ि‍ लैत वा खेतक धान नोचि‍ लैत तँ एतबे चेतावनी दैत बजैत छलाह जे जाइ िछयौ बापकेँ कहए जे ई छौड़ा धान नोचलक कि‍ आम तोड़लक। बुझि‍अहन्‍हि‍ जे जखन तोरा कनैठी पड़तौ। समाजमे सहयोगक वि‍चार छल। अपन गारजन अपने बच्‍चाकेँ सि‍खबैत छल। मुदा एकटा जबरदस गुण परि‍वारमे छलन्‍हि‍ जे महीनाक चारि‍-पाँच रवि‍, चारि‍-पाँच सोमक सोमवारी संग कतेको पावनि‍क उपाससँ सोलो छोट कऽ नेने छलाह। सरस्‍वतीक आगमन परि‍वारमे भऽ गेल छलन्‍हि‍‍। ि‍सर्फ अपने हरि‍हरेटा नै पढ़ने। कारणो छल समंगर परि‍वारमे एक समांग गि‍रहस्‍थि‍यो करैत छलाह। तँए शुरुहेसँ पढ़ाइ दि‍स नै लगाओल गेलन्‍हि‍। काल-क्रमे ओहन-ओहन भैयारी पछुआएल। ई दीगर भेल। ओना कि‍छु समाज एहनो छल जे एहेन-एहेन अवस्‍था (सुलोचनाक संग जेहेन भेल तेहेन) केँ बाहुबलसँ रोकलक मुदा समाजोक कटनि‍याँ तँ बड़का मूस कति‍ते छै। जाति‍-जाति‍केँ बाँटि‍ सभ रोगसँ रोगाएल छी। कि‍यो कम कि‍यो बेसी। मुदा एहेन-एहेन अपराध समाजक मुद्दा नै बनि‍ बनि,‍ जाति‍य मुद्दा बनि‍ कमजोर पड़ैत गेल। काल-क्रमे जाति‍योसँ परि‍वारमे पहुँच गेल। एक जाति‍केँ नीच देखाएब वा जाति‍क भीतर कोनो परि‍वारकेँ नि‍च्‍चाँ मनोरंजनक साधन बनि‍ गेल अछि‍। सरस्‍वतीक आगमनसँ हरि‍हरक परि‍वारक वि‍चारमे कि‍छु नवीनता तँ आबि‍ये गेल अछि‍। सासुरसँ भगाओल सुलोचनाकेँ परि‍वार सहर्ष अपना लेलन्‍हि‍। अपनबैक कारण भेल जे परि‍वारक सभ अपने गल्‍ती मानि‍ लेलन्‍हि‍ जे ओहन कुल-मूलमे डेगे नै उठबैक चाही। ओहनसँ मुँहो लगाएब नीक नै हएत। बापक दुलरूआ बेटा दोसर बि‍आह कऽ लेलन्‍हि‍। मुदा सुलोचना अपनाकेँ वैधव्‍य नै बुझलन्‍हि‍। हाथक चुड़ी रखनहि‍ रहली। समए आगू बढ़ल। लक्ष्‍मी जहि‍ना दरबज्‍जापर हँसी-खुशीसँ आबि‍ जाइ छथि‍न तखन केतबो ताड़ी-दारूक खर्चा हराएले रहै छै। तहि‍ना ने सरस्‍वति‍यो रगड़ी-झगड़ी छथि‍। सुलोचना जकाँ नै ने छथि‍ जे मने-मन संकल्‍पक संग जीबैक बाट पकड़ैत, ओ तँ तेहेन रगड़ी छथि‍ जे एकटा सौि‍तनक कोन गप जे हजारो सौति‍नकेँ झोंटि‍या अपन हि‍स्‍सा लैये कऽ छोड़ैत। पुरुखक कहने भऽ जेतै जे जेठकीक जेठुआ जोश कमा देतै। सरस्‍वतीक रूप परि‍वारमे बदलल। संस्‍कृत पद्धति‍क जगह नव-नव पद्धति‍ शुरू भेल। संस्‍कृतोक पद्धति‍ रहबे कएल। मुदा शि‍क्षाक बुनि‍यादी पद्धति‍सँ उछालि‍ देलक। सुलोचनाक पीठ परक जेठ भाए युगेसर मैट्रि‍क पास तमुरि‍या स्‍कूलसँ केलन्‍हि‍। गरीबी बेकारीसँ त्रस्‍त परि‍वार। नोकरीक तलासमे कलकत्ता गेला। दू साल रहलाह। भाषाक दूरी, शहर-गामक दूरी तँ स्‍पष्‍टे रहै। दू साल पछाति‍ युगेसर टीचर्स ट्रेनि‍ंग केलन्‍हि‍। लोअर प्राइमरीक शि‍क्षक बनलाह। युगेसरसँ छोट मुनेसर सेहो मैट्रि‍क पास तमुरि‍या स्‍कूलसँ केलन्‍हि। साइंस पढ़ैत। जनता काओलेजमे साइंसक पढ़ाइ नै होइत। गर लगबैत खगड़ि‍याक गर लगौलन्‍हि‍। ओही ठामक संस्‍कृत वि‍द्यालय‍मे वि‍द्यार्थीकेँ भोजन-डेराक बेवस्‍था सेहो करैत अछि‍। कोसी कओलेज सेहो छैहे। साइंसक वि‍द्यार्थी, नीक जकाँ बी.एस.सी केलन्‍हि‍ तइ बीच बि‍आहो अफसरक परि‍वारमे भऽ गेलन्‍हि‍। चारि‍ भाँइक भैयारी हरि‍हरक छलन्‍हि‍, तइमे बँटवारा भऽ गेलन्‍हि‍। दुनू परानी हरि‍हरो मरि‍ गेलखि‍न। दुनू भाँइक परि‍वार...। (जारी..) 2 सधवा-वि‍धवा उपन्‍यास सत्तरि‍ वर्षीय सरोजनी मैयाँकेँ अखनो वएह सुधि‍-बूधि‍ छन्‍हि‍ जेना पहि‍ने छलन्‍हि‍। अखनो ओहने झोंकाह जकाँ जि‍नगीकेँ झोंकि‍ चलै छथि‍ जेना जुआनीमे सभ चलैत अछि‍। तहूमे मरणक अगि‍ला बेठेकान सीमा रहने अगि‍ला सीमे हराएल छन्‍हि‍। नर्क-नि‍वारण चतुर्दशीक दि‍न। मरद तँ कमो-सम मुदा अधि‍कांश स्‍त्रीगण पावनि‍क उपास केने। एक तँ कि‍सान-बोनि‍हारक बैसारीयेक दि‍न दोसर दि‍नोक आँट-पेट छोट रहने उपासो असान। देखते-देखते दि‍न कटि‍ जाइत अछि‍, तहूमे सूर्योदयसँ अस्‍ते भरि‍क ने उपास। कि‍रि‍ण डुमि‍ते फलहार कऽ पावनि‍क वि‍सर्जन कए लेल जाइत अछि‍। बेर झुकि‍ते सरोजनी-मैयाँ दि‍नक वाँकी काज दि‍स नजरि‍ उठौलन्‍हि‍ तँ भक दऽ मन पड़लन्‍हि‍ जे आन दि‍न समए पाबि‍ खा वि‍द्यालय देखि‍ अबै छलौं, मुदा बि‍सरैक कारण भरि‍सक उपासे तँ ने भेल। एक-सँ-सए धरि‍क गि‍नतीमे एकाएकी अगि‍ला संख्‍या अबैत जाइत अछि‍, भरि‍सक पैछला काज छुटने अगि‍ला ने तँ भोति‍या गेल। मुदा छोड़लो तँ नै जा सकैत अछि‍। तखन उपाए? हँ उपाए यएह जे, जे समए शेष बचल अछि‍ ओहीमे बीच-बचा कऽ देख आएब नीक हएत। अंगनाक काजमे वि‍राम लगबैत सरोजनी मैयाँ घुमौन रस्‍ता छोड़ि‍ गाछि‍येक एकपेरि‍या पकड़ि‍ वि‍द्यालय पहुँचली। भकोभन देखि‍ हि‍या-हि‍या चारू दि‍स देखए लगली। पाँचो वि‍द्यार्थी नै अछि‍ शि‍क्षकोमे नउएँ-काउएँक एक गोटे छथि‍। मन चौंकलन्‍हि‍। जाधरि‍ अपन बेवस्‍था छल, ताधरिक‍ रूतबा आ अखुनकामे अकास-पतालक अन्‍तर भऽ गेल अछि‍। खैर अनका लेल जे होउ, अपन तँ वएह छी जे मानि‍ ठाढ़ केलौं। पइँति‍स वर्षीय शि‍क्षि‍का रूक्‍मि‍णी, मैयाँकेँ देखि‍ते उठि‍ कऽ ठाढ़ भऽ दोसर कुरसीपर बैसबैत कहलखि‍न- “मैयाँ, पावनि‍क दि‍न दुआरे एकोटा वि‍द्यार्थी नै आएल स्‍टाफो सभ उपास केने, तँए चलि‍ जाइ गेला।” वि‍द्यालयक पक्ष देख रूक्‍मि‍नीकेँ मैयाँ पुछलखि‍न- “अहीं, कि‍अए रहि‍ गेलौं?” मैयाँक प्रश्न सोझ-साझ छलन्‍हि‍, मुदा रूक्‍मि‍नीकेँ लत्ती लतड़ल बूझि‍ पड़लन्‍हि‍। जहि‍ना आन-आन वि‍द्यालयमे प्रधानाध्‍यापक छोड़ि आन दरमहे उठबैले अबैत तँ दोसर दि‍स आॅफि‍सक हाकि‍मे नै अबैत। दुनू तँ सरकारि‍ये संस्‍था छी तखन एना कि‍अए? स्‍पष्‍ट उत्तर नै पाबि‍ संयासी जकाँ रूक्‍मि‍णी उत्तर देलखि‍न- “ओ सभ उपासल छलाह, हम उपास केनहि‍ ने छी।” रूक्‍मि‍णीक उत्तर सुनि‍ दादी चौंकली। वि‍द्यार्थीसँ शि‍क्षक धरि‍ एक भाग आ असकरे रूक्‍मि‍णी एक भाग। जरूर धारक नाव जकाँ आकि‍ गाड़ीक जुआ जकाँ वामी-दहि‍नी कि‍छु बात हेतै। आँखि‍ उठा दि‍नकर दि‍स देखलन्‍हि‍ तँ बूझि‍ पड़लन्‍हि‍ भरि‍सक दू-अढ़ाइ घंटा अस्‍त होइमे वाकी अछि‍। भने एक गोटे भेटि‍ये गेली, कि‍अए ने पारि‍वारि‍के गप-शपमे समए खटि‍या ली। कोनो कि‍ बहुत ओरि‍यानो-बात करैक अछि‍। बइर पछुआरेमे अछि‍, केशौर सेहो उखाड़ि‍ कऽ रखनहि‍ छी। बजली- “ऐठाम जे असकरे बैसल छी तइसँ नीक होइत जे घरपर जा बालो-बच्‍चाक देख-भाल करि‍तौं।” मैयाँक प्रश्नसँ रूक्‍मि‍णी ठमकि‍ गेली। बजली कि‍छु नै मुदा आँखि‍मे जि‍नगीक धार चलए लगलन्‍हि‍। चुप देख मैयाँ दोहरा देलखि‍न- “चुप कि‍अए छी? हमहूँ कि‍यो आन छी जे घरक बात बजैमे संकोच होइए। परि‍वार तँ परि‍वार छी जेहने अपन तेहने दाेसराक। सभ परि‍वारमे बाबा-दादासँ लऽ कऽ जनमौटी बच्‍चा धरि‍ रहैत अछि‍। सबहक जि‍नगी छै जि‍नगी अनुकूल काज छै। तइमे संकोचक कोन बात?” मैयाँक दोहराएल प्रश्नसँ रूक्‍मि‍णीक छाती चड़चराए लगलन्‍हि‍। जहि‍ना पानि‍ भरल घैल फुटने पानि‍ छि‍ड़ि‍या जाइत तहि‍ना रूक्‍मि‍णीक हृदैक वि‍चार छि‍ड़ि‍याए लगलन्‍हि‍। मुदा घैलोक पानि‍ कि‍ एक्के रंग चारू कात छि‍ड़ि‍आइ छै। जेमहर ढलान रहै छै ओमहर धार जकाँ बहए लगै छै आ जेमहर ढलान नै रहल ओमहर पतराइत चलै छै। पोखरि‍क कि‍नछड़ि‍ जकाँ मैयाँ जेत्ते रूक्‍मि‍णीक लग आबए चाहथि‍ तत्ते थाल-पानि‍ बेसि‍आइते जाइत। पाश बदलैत मैयाँ पुछलखि‍ल- “पुरुख-पुरुखमे पुरुखपाना लऽ कऽ भेद भऽ सकै छै मुदा नारीक तँ नारीत्‍व एके होइत, भलहिं परि‍स्‍थि‍ति‍ लऽ कऽ भि‍न्न-भि‍न्न रूपमे कि‍अए ने होय। तखन सकुचाइक कोन काज?” बजैत-बजैत दादीक मन अपने ठमकि‍ गेलन्‍हि‍। घरक बात कि‍अए ने लोक छि‍पाऔत बाहरसँ एक-रंगाह रहि‍तो भीतरसँ बेदरंग रहै छै। रंग तँ रंग भेल मुदा बेदरंग कि‍ भेल? जँ बेदरंगकेँ छि‍पाऔल नै जाए तँ लोक कि‍ कहतै। मुदा अपनाकेँ संयत करैत पुन: मैयाँ बजली- “अखैन तँ दुइऐ छी, तखन सकुचाइ-घकुचाइक कोन बात अछि‍? जे मुँह नै खोलै छी?” बजि‍ते छेली आकि‍ रूक्‍मि‍णीक दुनू हाथपर नजरि‍ गेलन्‍हि‍। एक हाथमे चुड़ी, दोसरमे घड़ी। अचंभि‍त भऽ मैयाँ पुछलखि‍न- “एक हाथमे चुड़ी देखै छी दोसर हाथ खाली अछि‍, एना कि‍अए अछि‍?” जहि‍ना बहैत धाराकेँ आगू बन्‍हि‍ते पानि‍ मोटा कऽ बान्‍ह तोड़ि‍ नि‍कलए चाहैत तहि‍ना रूक्‍मि‍णीक वि‍चार आगू मुँहेँ बढ़ल- “मैयाँ, हम ने वि‍धवे छी आ ने सधवे छी।” रूक्‍मि‍णीक उत्तर सुनि‍ मैयाँ बौआ गेली। मर ई की भेल? ने वि‍धवे छी आ ने सधवे छी! नवतुरि‍याकेँ एहेन प्रश्नो केना दोहराओल जाए। दुनि‍याँ कतए-सँ-कतए बदलि‍ गेल। पुरुख-पुरुखसँ आ नारी-नारीसँ सम्‍बन्‍ध बनबए लगल अछि‍। मुदा कोनो बात केकरो थोपैसँ पहि‍ने तृण-मूल ओकर बूझि‍ लेब नीक होइत। से तँ बि‍ना पुछने आ उत्तर पौने नै हएत। मुदा सोझे-सोझी पुछबो नीक नै हएत। घुमबैत मैयाँ पुछलखि‍न- “उमेर कत्ते अछि‍?” रूक्‍मि‍णी- “पेंइतीसम छी।” पेंइति‍सम सुनि‍ते मैयाँक मन उड़ि‍ गेलन्‍हि‍। आगूक बात सुनैसँ पहि‍ने एते दूर चलि‍ गेलन्‍हि‍ जे सुनबे ने केलक। अकासमे उड़ैत कौआ जकाँ ऊपरेसँ टाँहि‍ देलकन्‍हि‍‍- “अहाँक एकटा हाथमे तँ चुड़ि‍यो देखै छी, हमर दुनू हाथ भगवान हरि‍ नेने रहथि‍।” आगू कि‍छु बजैले बाँकि‍ये रहनि‍ आकि‍ बोली थकथका गेलन्‍हि‍। जहि‍ना रास्‍ता चलैत बटोहीक आगूक रस्‍ता  बोनाह, टुटल, अति‍क्रमि‍त वा अन्‍य कोनो कारणे झँपाएल रहने थकथका चारू दि‍स तकए लगैत तहि‍ना दुनू गोटे, मैयाँ आ रूक्‍मि‍णी थकथका गेली। मुदा, की ओहन बाटपर पहुँचला पछाति‍ बटोही कि‍ बुझैत जे हरा गेलौं। हराइत तँ लोक ओतऽ अछि‍ जतऽ बाटक बोध नै रहैत अछि‍। मुदा आेहो तँ हराएब नहि‍येँ भेल? कारण जे जेत्ते दूर धरि‍ बाट बनल छल ओतबे ने देखब भेल तइसँ आगू तँ बुझए पड़त जे आगू बनबे ने कएल वा बनि‍ कऽ बोनाओल गेल कि‍ अति‍क्रमण भेल आकि‍ बाढ़ि‍मे टूटि‍ कऽ दहा गेल। इत्‍यादि‍-इत्‍यादि‍। ने मैयाँ कि‍छु बजैत आ ने रूक्‍मि‍णी। घरहटि‍या जहि‍ना कोनो-बत्तीक अगि‍ला बान्‍ह बन्‍हैसँ पहि‍ने पछि‍ला वा बगलमे छुटल वा टुटल बान्‍ह देख पहि‍ने सरियाबए चहैत, जँ से नै हएत तँ अगि‍ला वानि‍ उवानि‍ हेवाक डर रहैत। मैयाँ अपन पेंइतीस बर्खक भूतमे भुति‍आइत तँ रूक्‍मि‍णी वर्त्तमान पेंइतीसम बर्खक दि‍न महि‍नाक बन्‍हन बन्‍है-खोलैमे लगल। थैरक माल जकाँ एक दोसरकेँ खाली देखैत, बजैत कि‍छु ने। तँए कि‍ ओकरा बोल नै छैक। बाजि‍ कऽ केकरो बाधा नै दि‍अए चाहैत। मुदा बि‍नु बजनौं तँ काज नहि‍येँ चलत। नै कि‍छु करब तँ बजबो नै करब, जँ बजबेक मन हएत तँ कि‍ बाजब, मुदा भूख-पि‍यास तँ से नै मानत। जखन कंठ जरतै तँ मुँहक मुँहठी फूटि‍ बोमि‍एबे करत। मनुष्‍य तँ से नै छी। बुधि‍क मालि‍क छी। नीक-अधलाक वि‍चार तँ करबे करत। जि‍नगी तँ जि‍नगी छी, नीक कि‍ अधला चलबे करत। तहूमे नव काजमे सोलहनी नीक असंभव। नइकेँ हँ बनैमे दूरी छइहे। नीचाँ-ऊपर दुनूक नजरि‍ उठबो करैत आ खसबो करैत। कखनो एकक खसल रहैत दोसरकेँ उठैत तँ कखनो दोसरकेँ खसल रहैत तँ एकक उठैत। तइ संग ईहो भऽ जाइत जे कखनो दुनूक धरती दि‍स खसल रहैत तँ कखनो अकास दि‍स उठैत। धरती दि‍स खसल रहने एक-दाेसरक चेहरा नै देख पबैत मुदा अकास दि‍स उठि‍ते भक-इजोत जकाँ देखबो करैत आ नहि‍योँ देखैत। बौआइत मैयाँक मन जि‍नगीक पेंइतीसम गाछ लग पहुँचते कि‍छु देखलकन्‍हि‍‍। देखि‍ते मन चनचनेलन्‍हि‍। ओही बर्ख हाथक चुड़ी फूटल। एना कि‍अए भेल? बि‍नु चुड़ीक पुरुखक हाथ जि‍नगीक हथि‍यार उठा चलैत अछि‍ आ नारीक दुनू हाथक चुड़ी कखनो सौन्‍दर्य सजबैए तँ कखनो अपसगुन कहबैए। जे प्रकृति‍ पुरुष-नारीक बीच भेद बना सृष्‍टि‍ सृजनक बाट बनौलक ओ की दुनूकेँ जीबैक बाट नै बनौने हएत। मुदा...? अपन पेंइतीसम बर्खक परि‍वार देखलन्‍हि‍। पि‍ता पढ़ल-लि‍खल कि‍सान छलाह। एक कि‍सान ओहनो हाेइत जे पढ़ल-लि‍खल नै छथि‍। मुदा पि‍ता ओहन पढ़ल-लि‍खल छलाह जे वि‍द्यालय, महावि‍द्यालयक सेवा कऽ सकै छलाह मुदा इच्‍छा रहि‍तो अवसर नै भेटलन्‍हि‍। कारणो स्‍पष्‍ट अछि जे ‘गनल कुटि‍या नापल झोर’‍ छलैक। गनल-गूथल जगह रहने दोसराकेँ अवसर कि‍अए आ कतए भेटत? हंशराजक स्‍वभावो एहेन जे बीत भरि‍क पेट कोन असाध अछि‍ जे जि‍नगीकेँ एते भयावह बुझै छी। तहूमे मरौसी खेत जखन अछि‍ये तँ ओकरे सेवा कि‍अए ने कऽ कऽ परि‍वारक फुलवाड़ी लगाएब। जइ दि‍न जमाए मुइलखि‍न (सरोजनीक पति‍) तइ दि‍न घरक केवाड़ जहि‍ना भीतर-बाहरकेँ जोड़ैत अछि‍, मुदा अन्‍हारमे चोटो लगैत अछि‍ तहि‍ना हंशराजक मनमे उठलन्‍हि‍। बेटी-सरोजनीक उमेरे कि‍ भेल? अधोसँ कम। जतबो अपने दुनू परानी संग देखलौं ततबो बेटी कहाँ देख सकत। तहूमे अगि‍ला सहारा सेहो नै छैक। भगवानक केहेन लीला छन्‍हि‍‍ जे दुनू सन्‍तानो हरि‍ लेलखि‍न आ आइ स्‍वामीकेँ सेहो हरि‍ लेलखि‍न। मनमे उठलन्‍हि‍ जे जहि‍ना अपन बेटी छी तहि‍ना ने मदनेसरक बहि‍न सेहो छि‍ऐ। आइ जीबै छी तँए बेटीक ममता अछि‍, जँ मरि‍ गेल रहि‍तौं तँ नीक कि‍ बेजाए मदनेसरे करैत। तहूमे संयोगो नीके अछि‍ जे दुनू परानीक संग बेटो-पुतोहु तँ अछि‍ये। पोता-पोती जँ अछि‍यो तँ पूछब ओते जरूरी नहि‍येँ अछि‍। से नै तँ मदनेसरकेँ पुछैसँ पहि‍ने ओकरा माइयेकेँ पूछब उचि‍त हएत। जहि‍ना दुनूक पि‍ता छि‍ऐ तहि‍ना तँ माइयो दुनूक छथि‍न। सोर पाड़ि‍ पुछलखि‍न- “आब सरोजनीक जि‍नगी केना आगू बढ़तै?” पति‍-हंशराज जहि‍ना पढ़ल-लि‍खल रहथि‍ तहि‍ना पत्नी वि‍द्यालयक आँखि‍ नै देखने। मुदा तँए कि‍ परि‍वारकेँ आगू बढ़ैमे वाधा भेल आकि‍ होइए। किअए हएत। मुदा कोनो काजक ओझरी छोड़बैक दुनूकेँ अपन-अपन नजरि‍ तँ छन्‍हि‍येँ। जे काज सभदि‍ना अछि‍ ओ तँ दि‍नक गि‍नती जकाँ अछि‍। अबैत रहत पाछू ससरैत रहत। मुदा जे सभदि‍ना नै अछि‍ ओकर महत तँ अलग होइते छैक। पति‍क मुँह दि‍स देखैक हूबा सावि‍त्रीकेँ हेबे ने करैत। आँखि‍ जँ उठबो करैत तँ बेटीक पाछू जमाए आगूमे ठाढ़ भऽ जाइत। मि‍थि‍लानी जकाँ, जतए ि‍नर्मल, कोमल नयन रहैत ततए ि‍नर्झर ि‍नरन्‍तर सबुरक गाछकेँ सेवा केनि‍हार सबूर-दानाक घाैंदाक बीच रहि‍ अपन पूर्ण वय व्‍यतीत करैत फलाहार बनैत अछि‍। सावि‍त्रीक मनमे कि‍अए पति‍क वि‍चार अँटि‍तनि‍ अपने बेथे बेथाएल। कि‍छु हँ हूँ नै बाजि‍ सकली। कि‍छु उत्तर नै पाबि‍ हंशराज बेटा मदनेसरकेँ सोर पाड़लन्‍हि‍। मदनेसर एम.ए. पास। हाइ स्‍कूलक शि‍क्षक। हंशराज कहलखि‍न- “बौआ, सरोजनीक अगि‍ला जि‍नगी केना कटतै?” पि‍ताक प्रश्नक जबाब दइसँ पहि‍ने मदनेसर मने-मन वि‍चारए लगल जे, प्रश्न जते सोझ-साझ केलन्‍हि‍ उत्तर ओते सोझ-सााझ नै छैक। तहूमे भाय-भौजाइक बेवहार जग-जाहि‍र अछि‍। तेहेनठाम आगू बढ़ि‍ बाजब धड़फड़ बाजब हएत। पुन: प्रश्न दोहरबैत हंशराज कहलखि‍न- “बौआ, जहि‍ना दुनि‍याँक सभ काजक लिंक बनल अछि‍ तहि‍ना ने सामाजो आ परि‍वारोमे अछि‍। अखन जे समस्‍या परि‍वारमे उपस्‍थि‍त भऽ गेलह, ओ तँ परि‍वारेक सभ मि‍लि‍ ने समाधानो करबह।” मदनेसर उत्तर देलकन्‍हि‍- “बाबू, जहि‍ना अहाँ पुछब उचि‍त बुझलौं तहि‍ना बहि‍न-सरोजनीसँ सेहो जरूरी अछि‍?” हंशराज- “वि‍चारणीय उत्तर देलह। मुदा आगू?” मदनेसर- “जेहन जि‍नगी ओ जीबए चाहत तइले जतए मदति‍ संभव हेतै, सएह ने कऽ सकै छि‍ऐ।” जहि‍ना रूमाल चाेरक गेन पति‍आनीक एक गोटे पाछू राखि‍ खेलल जाइत तहि‍ना धरतीक पति‍आनी लगल मनुष्‍यमे हरेकक अपन पाछू गेन राखल छैक। रूक्‍मि‍णीक जि‍नगी मैयाँ जकाँ नै जे भूत दि‍स देखलासँ लोहि‍याक जि‍लेबी जकाँ पेनसँ ऊपर उठि‍ जाइत तेना अछि‍ जेना केकरो पाछूक भोग भोगल आ आगूक भोग सोझमे राखल रहैत। गामक सुभ्‍यस्‍त परि‍वार रहने रूक्‍मि‍णी मैट्रि‍क पास केने रहथि‍। ओना हाइ-स्‍कूलक नि‍यमि‍त छात्राक रूपमे नै पढ़लन्‍हि‍ मुदा घरेपर पढ़ैक बेवस्‍था पि‍ता कऽ देने रहनि‍। अपनो पढ़ै-लि‍खैसँ वि‍शेष रूचि‍ तइ संग एकटा पारि‍वारि‍क शि‍क्षक सेहो रखने रहथि‍। प्राइवेटेसँ पढ़ि‍ रूक्‍मि‍णी जि‍ला स्‍कूलमे मैट्रि‍क प्रथम श्रेणीसँ पास केने रहथि‍। एक होइत पास करब आ दोसर होइत नीक रि‍जल्‍ट करब आ तेसर होइत कोनो खास वि‍षयमे भरपूर नम्‍बर आनब। गृह-वि‍ज्ञानमे रूक्‍मि‍णीकेँ देखनुक नम्‍बर रहनि‍। अठरह बर्खक अवस्‍थामे जखन रूक्‍मि‍णीक बि‍आहक चर्च उठल तखने परि‍वारमे मतभेदक जोरन सेहो पड़ि‍ गेल। रूक्‍मि‍णीक पि‍ता देवाननक वि‍चार जे बेटीक बि‍आह अपने सन परि‍वारमे करब। जइसँ रूक्‍मि‍णीक जि‍नगीमे कहि‍यो अलढ़पन नै औतै। सभ जि‍नगीक सभ काजक लूरि‍ छइहे अपन करैत रहत। कि‍अए हमरे कलंक लागत जे साउसो-ससुरक मुँहसँ कहि‍यो नै सुनत जे जेहने ढहलेल-बकलेल बाप-माए रहतै तेहने ने बेटो-बेटी हेतै। बेटीक बि‍आह केहेन घरमे हुअए तइ सम्‍बन्‍धमे पति‍सँ भि‍न्न वि‍चार माए-दमयन्‍तीक। दमयन्‍तीक वि‍चार जे संक्षेपमे छलन्‍हि‍ मुदा गंभीर। ओ ई जे बर-कन्‍याक मि‍लान आ पाँच कर भोजन पाँच हाथ वस्‍त्रक दुख नै होय। जँ से नै हेतै तँ परि‍वारमे रगड़े-झगड़े कि‍अए हेतै। भने चैनसँ दि‍वस गुदस कऽ लैत, भगवान बाल-बच्‍चा देबे करथि‍न ओकरो अपने जकाँ जहि‍ना अरि‍आइत कऽ आनत तहि‍ना करै जोकर बना अपन...। तँए धन्‍य–सन जखन बि‍आहक बात पक्का हुअए लगत तखन अपन वि‍चार राखब। मुदा मामक वि‍चार कि‍छु भि‍न्न छलन्‍हि‍। बैंकमे नोकरी करैत, तँए बैंकमे नोकरी केनि‍हारक संग भगि‍नीक बि‍आह करब उचि‍त बुझैत। जँ पाइयो-कौड़ीक मदति‍क जरूरत पड़तै तँ बूझल जेतै। अपनो परि‍वार तँ तेहेन नहि‍येँ छै जे खर्च नै कऽ पाओत। एक दि‍स जहि‍ना डाॅक्‍टर लड़का डाॅक्‍टर लड़की संग बि‍आह करए चाहैत अछि‍, जइसँ एक जति‍या परि‍वार (काजक एकरूपता रहने) बनि‍ रहल अछि‍, तँ दोसर दि‍स कि‍सान परि‍वारसँ डाॅक्‍टर, इन्‍जीनि‍यर, वकील, प्रोफेसर, शि‍क्षक इत्‍यादि‍ पैदा लऽ रहल अछि‍। तँ दोसर दि‍स कि‍सानी जि‍नगीसँ भि‍न्न अनेको जि‍नगी ठाढ़ो तँ भेले जाइ छै। सार-बहि‍नोइक (रूक्‍मि‍णीक पि‍ता आ मामक) मतभेद नीक जकाँ सोझामे आबि‍ गेल। देवानन पेशोपेशमे पड़ि‍ गेलाह। कन्‍यादान सन यज्ञ परि‍वारमे हएत तइठाम एक पक्षे वि‍रोधमे ठाढ़ भऽ जाएत। मुदा फेर मनमे उठि‍ जान्‍हि‍ जे अपन परि‍वार अपना ढंगे नै चला सकलौं तँ पुरुखे कि‍ भेलौं एके पीपही ने ढोल-नङेरा संग सेहो बजैए आ वीणा संग सेहो बजैए। खाली कनी रूपे ने बदलै छै। अपन पुरुखपना‍ दुनि‍याँकेँ की देखाएब? मुदा मन ठमकलन्‍हि‍। पत्नीकेँ जानकारी देब जरूरी बूझि‍ पड़लन्‍हि‍। जहि‍ना देवानन पेशोपेशमे पड़ल छलाह तहि‍ना पत्नि‍यो पड़ि‍ गेली। कि‍एक तँ दुर्वासा जकाँ भाए-यशोधर कहि‍ देलखि‍न जे जँ हमर वि‍चार नै रहत तँ हमरा कोनो मतलब बहि‍न-बहि‍नोइ अर भागि‍न-भगि‍नीसँ नै रहत। थूक फेकए दरबज्‍जापर नै आएब। एक दि‍स नैहर दोसर दि‍स सासुर, एक दि‍स जन्‍मसँ अठारह बर्खक परि‍वार आ दोसर दि‍स अठारह बर्खक पछाति‍क परि‍वार, एक दि‍स पति‍ दोसर ि‍दस भाय, कि‍ करब? अपन सभ बात दमयन्‍ती खोलि‍ कऽ पति‍केँ कहि‍ देलखि‍न। द्वन्‍द्वमे पड़ल पत्नीक वि‍चार सुनि‍ देवानन झोंकमे कहि‍ देलखि‍न- “जँ पुरुख भऽ कऽ जन्‍म नेने छी, पुरुषारथक सवारीसँ परि‍वारकेँ पार उतारब। जँ से नै तँ जाबे जीबै छी ततबे दि‍नक कर्ता-धर्ता छी, पछाति‍ देखए आएब।” रूक्‍मि‍णीक बि‍आह होइसँ पहि‍ने बपहर-मात्रि‍कक बीच कसमकस वि‍वाद फँसि‍ गेल। मुदा पत्नी आ अपन सहोदर-बहि‍नक वि‍चार सुनि‍ देवानन पघि‍ल गेला। जहि‍ना पाथर शील पैदा करैए तहि‍ना ने पानि‍यो-हवा करैए। भाइक सि‍नेह जीवि‍त रखैत बहि‍न देवाननकेँ कहलकन्‍हि‍‍- “भैया, आइक युगमे कन्‍यादान परि‍वारक सभसँ पैघ मोटा बनि‍ गेल अछि‍, ओना काजक हि‍साबे परि‍वारक सभसँ पैघ काज नै छी। ओहूसँ पैघ-पैघ काज अछि‍। मुदा भारी मोटा उठबैमे दोसराक सहारा लि‍अए पड़ै छै नै तँ मोटाकेँ खसै-पड़ैक डर रहै छै।” बहि‍नक वि‍चार देवानन मानि‍ गेला। बि‍आहक भार सार (यशोधर)केँ सुमझा देलखि‍न। दू बीघा खेत देवाननक बेचा रूक्‍मि‍णीक बि‍आह कमर्शियल बैंकक किरानी संग यशोधर करा देलखि‍न। बैंकक नोकरीक तीन बर्ख पछाति‍ सुखदेव मि‍लल-जुलल रहल। गामसँ, कि‍सान परि‍वारसँ पहि‍ले-पहि‍ल शहर पहुँचल रहए। ओना असकरूआ परि‍वार तँए दुइये कोठरीक भाड़ाक मकानसँ काज चलबैत। अपने भानसो करैत आ हाटो-बजार। नोकरी करि‍तो असगरूआ जि‍नगी जीबैत रहए। तीन बर्ख पछाति‍ सुखदेवक दुरागमन रूक्‍मि‍णीक संग भेल। परि‍वारसँ लऽ कऽ दुनू बेकती -सुखदेवो आ रूक्‍मि‍णि‍यो- लेल पर्याप्‍त वस्‍तु–जातसँ लऽ कऽ नगदो आ द्रव्‍यो बि‍आहमे भेटले रहै। बि‍आहक कि‍छुए दि‍न पछाति‍ सुखदेवक परमोशन सेहो भेल। सार्वजनि‍क जि‍नगीसँ भि‍न्न व्‍यक्‍ति‍गत जि‍नगीक क्रि‍या-कलाप सेहो होइत अछि‍। प्राइवेट बैंक रहने सुखदेवक परमोशन कि‍रानीसँ कि‍रानी नै भऽ क्षेत्र बदलि‍ गेल। फील्‍डक काज भेटलै। व्‍यापारी, उद्योगपति‍क संग आरो-आरो कतेक रंग-वि‍रंगक लोकक बीच जाइ-अबैक अवसर भेटलै। भेँट-घाँट, उपहार, भोज-भातक संग आरो-आरो अवसर सुखदेवकेँ हाथ लगलै। दू कोठरीक मकान, वस्‍तु–जातसँ तेना भरि‍ गेल जे उठब-बैसब, चलब-फि‍ड़बमे असोकर्ज हुअए लगलै। बैंकक लेन-देनक नव-नव जानकारी सेहो भेलै। अँटाबेशक जगह दुआरे मकान बदलैक वि‍चार करि‍ते सुखदेव जमीन-कीनि‍ अपन मकान बनबैक वि‍चार केलक। दुनू दि‍सक आमदनी देख मकान बनाएब हल्लुके बूझि‍ पड़लै। भारी तँ ओतए होइत अछि‍ जतए पेटक भूख, बेटीक बि‍आह आ बाल-बच्‍चाकेँ पढ़बैक समस्‍या पकड़ने अछि‍। भूखल पेटक जि‍नगी पहि‍ने अन्न पानि‍ मंगैत, भलहिं ओ नि‍वस्‍त्रे टुटले घरमे कि‍अए ने रहैत हुअए से तँ सुखदेवकेँ नै। जइ परि‍वारमे जनम भेलै सेहो मध्‍यम परि‍वार छलैक, तँए भूख-पि‍यास, वस्‍त्र-घरक दुखसँ अपरि‍चि‍त रहबे करए। बैंकक लोन आ बाजारक वस्‍तुक सहयोग भेटबे केलै, नीक घर बनौलक। घर बनबि‍ते जीवनोपयोगी आरो-आरो वस्‍तु-जातसँ भरए लगल। भरबो केलक। जि‍नगीक क्रि‍या दि‍नाे-दि‍न बदलए लगलै। ने खाइक ठेकान आ ने पीबैक। ने रहैक ठेकान आ ने बजैक। सभ तरहक काज बेठेकान हुअए लगलै। पढ़ल-लि‍खल रूक्‍मि‍णी पति‍क सभ आकलन करैत। मकान, गाड़ी, बेटाक पढ़ैक इत्‍यादि‍ कर्जसँ दबल सुखदेव दि‍स नजरि‍ उठबि‍ते रूक्‍मि‍णीक मन कनए लगैत। नोकरीक दरमाहा भलहिं कर्जक कि‍स्‍त चुकबैमे जाइत होन्‍हि‍ कमीशनक आमदनी आ उपहारसँ कर्जक महसूस नै होइत होन्‍हि‍, मुदा जि‍नगीयो तँ बेठेकाने अछि‍। कखन अछि‍ आ कखन ढन दऽ चलि‍ जाएत तेकर कोन ठीक छै। एहन स्‍थि‍ति‍मे कर्जक देनदार के बनत? की‍ नोकरी अछि‍ जे दरमाहासँ पुराएब। सुखदेव आ रूक्‍मि‍णी दुनूक वि‍चारधारा सदति‍ टकराइत। टकड़ेबो केना नै करैत। एक दि‍स कि‍सानी संस्‍कार आ संस्‍कृति‍मे पलल मि‍थि‍लांगना, दोसर दि‍स हाल-सालमे बसल भदवरि‍या माछ सदृश जि‍नगी। बि‍आहक चौदहम बर्खक आक्रमण रूक्‍मि‍णीकेँ बरदास नै भेल, जेकर फल दुनू ि‍दस भऽ गेल। आक्रमण भेल जे अखन धरि‍ सुकदेव वि‍परीत दि‍शामे एते आगू पहुँच गेल छल जतए मि‍थि‍लाक धरोहरकेँ खेलक गेन जकाँ गुड़का लति‍औल जाइत। जे सुखदेव पहि‍ने बैंक समैसँ जाइत-अबैत छल ओ मास-मास दि‍न डेरासँ हराए लगल। असकरे रूक्‍मि‍णी गुमसरि‍ गुमसरि‍ घरक बीच गमबैत। मनमे सदति‍ काल उठैत जे ई कोन जि‍नगी भेल? बेटा देहरादूनमे पढ़ैए, अपने (पति‍) भरि‍ दि‍न नि‍पत्ते, असकरे माटि‍क मुरुत बनि‍ ओगरबाहि‍क भाँजमे रहब, की यएह एक पढ़ल-लि‍खल नारीक कर्तव्‍य भेल? हजारो मील दूरसँ आबि‍ बसल छी, बोली-वाणीसँ लऽ कऽ क्रि‍या-कलापमे अन्‍तर अछि‍। एहना स्‍थि‍ति‍मे केकरो-ऐठाम जाएब-आएब कते उचि‍त हएत? अखन धरि‍ घरसँ नै नि‍कललौं, तइठाम लोककेँ लगले चीन्‍हि‍ केना लेब? तहूमे लुटि‍हारा समै से आबि‍ गेल अछि‍। धन-धर्म सबहक लुट्टीस दि‍न-देखार भऽ रहल अछि‍। बत्तीसम बर्खक अवस्‍थामे सुखदेव आ रूक्‍मि‍णीक सम्‍बन्‍ध वि‍च्‍छेद भऽ गेल। एकटा बेटा रहने (जे दूनमे पढ़ैए) तँइ भेल जे अपन ि‍नर्णए बेटा स्‍वयं करत। वाकी सम्‍पति‍मे अपन नैहरक देल जे कि‍छु छलैक से लऽ कऽ रूक्‍मि‍णी पति‍क घरसँ नि‍कलि‍ गेल। मुदा हाथक चुड़ी चुनचुनाइते छैक। अपन सासुरक अंति‍म परावक लग रूक्‍मि‍णी गुमे-गुम पहुँच गेली, मैयाँकेँ वि‍स्‍मि‍त चेहरा देख रूक्‍मि‍णी उत्तेजि‍त अवाजमे बाजलि‍- “मैयाँ, पावनि‍क दि‍न छि‍ऐ। तहूमे नर्क-नि‍वारण चतुर्दशी। औझुके उपास ने नर्कक बेड़ी काटक। आकि‍ श्राद्ध-कर्मक भरोसे रहत। की मने-मन सोचै छथि‍न?” मने-मन कि‍ सोचैत छथि‍न, सुनि‍ सरोजनी-मैयाँक अलसाइत मन फुड़फुड़ा कऽ जागल। बजली- “रूक्‍मि‍णी, अखन अहाँ दुनि‍याँक तीत-मीठ ओते कहाँ बुझलौं हेन...।” आगू बजैक बात सरोजनी-मैयाँक पेटेमे रहनि‍ तइ बीच रूक्‍मि‍णी चाँइ दऽ चनचना गेली- “से कि‍अए कहै छथि‍न, मैयाँ?” बाल-बोध बूझि‍ मैयाँकेँ मि‍सि‍यो भरि‍ लहड़ि‍ नै उठलन्‍हि‍‍। पोखरि‍क शान्‍त पानि‍ जकाँ मन असथि‍रे रहलन्‍हि‍‍। बजली- “रूक्‍मि‍णी, मनमे उठि‍ गेल छल जे पेंइतीसे बर्खक अवस्‍थामे वि‍धवा भेल रही आ अहँूकेँ देखै छी जे अही उमेरमे पति‍सँ सम्‍बन्‍ध वि‍च्‍छेद भेल।” मैयाँक बात सुनि‍ते रूक्‍मि‍णी चमकि‍ कऽ चमचमेली- “मैयाँ, हि‍नकर अखन कते उमेर छन्‍हि‍?” “सत्तरि‍म छी।” “परि‍वारमे के सभ छन्‍हि‍?” “कि‍यो ने। असकरे।” मैयाँक असकर सुनि‍ रूक्‍मि‍‍णीक मनमे ठहकल अपनो जि‍नगी तँ भरि‍सक तहि‍ना अछि‍। बाजलि‍- “असकर लेल लोक घर-दुआर बना कि‍अए रहत, ओ परि‍वार केना भेल?” रूक्‍मि‍णीक प्रश्न सुनि‍ ठहाका मारि‍ मैयाँ हँसली। प्रश्न उठबैत बजली- “परि‍वार कि‍अए ने भेल। परि‍वारेक समूह ने समाज छी। तइले ई कहाँ फुटाओल अछि‍ जे एक गोटेक परि‍वार परि‍वार नै भेल आ दस-बीस गोटे रहने परि‍वार भेल। एक गोटेक असकरूआ परि‍वार भेल। मुदा जरूरतो तँ परि‍वारोक ओकरे हेतै कि‍ने।” मैयाँक वि‍चारकेँ सुहकारैत रूक्‍मि‍णी बाजल- “मैयाँ, ईहो असकरे छथि‍ आ हमहूँ असकरे छी। तइ बीच ई पूर्ण जि‍नगी जीब लेलन्‍हि‍‍ आ हम लसकि‍ गेल छी। तँए हमरो हाथ पकड़ि‍ अपना दि‍स खींच लोथु जइसँ हि‍नके जकाँ टहलैत-बुलैत जि‍नगी रहत।” रूक्‍मि‍णीक आत्‍मा-रामकेँ अकानि‍ मैयाँ बजली- “रूक्‍मि‍णी, अपन जि‍नगीक लोक अपने माि‍लक छी। जेहेन बना जीबए चाहब तेहेन बना जीब सकै छी। मुदा समाजक बीच परि‍वार आ परि‍वारक बीच व्‍यक्‍ति‍ होइत अछि‍ जइ दूरीकेँ टपि‍ आगू बढ़ब असान नै अछि‍। अपने बात कहै छी जे, माता-पि‍ता बि‍आह करा घरसँ अलग कऽ देलन्‍हि‍‍, जइठाम केलन्‍हि‍‍ ओ ठौर ढहि‍ गेल। तइठाम अहीं कहू जे दुनि‍याँमे के अपन रहल। कतए जैतौं कोनो कि‍ हमहींटा एहेन छी आकि‍ पुरुखो सभ छथि‍। गोसाँइयो अस्‍त होइपर भेल, दोसर दि‍न नि‍चेनसँ आरो गप करब।” (जारी…) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बिन्देश्वर ठाकुर, धनुषा, नेपाल। हाल-कतार। भुखाएल जानवर सभ {लघुकथा}

कतेको दिन बाद आइ फेर सप्तरङ्गी आकाश देखऽ मे आएल । मौसम पूरा साफ आ बुलन्द। ऊपरसँ टिप-टिप पानि पड़ि रहल, जेना बसन्तक आगमन भेल हुअए। मुदा मन्टुटियाक आँखि नोरसँ भरल। पिजड़ामे कैद भेल सुगा जेहन छटपटा रहल। सच मानू तँ ऐठाम सँ भागि जएबाक प्रयासमे मुदा ई असम्भव।  मन्टुटिया एकटा नेपाली नारी अछि जे १ साल पहिने कमएबाक लेल कतार आएल रहए। गामपर घरबला दोसर महिला संगे विवाह कऽ एकरा छोड़ि देलाक बाद अपन एकटा बेटीकेँ माए-बाप लग राखि दर-दर ठोकर खाइत कतार पहुँचलीह। एतौ ओतेक नीक काम नै मुदा एगोट शेख[माली]क घरमे कामकाज मिललै। दु:ख तँ बड छलै, तैयो अपन बाध्यता आ विवशता देखि दिन काटऽ लागल।  मन्टुटिया देखऽमे पातरे-छितरे, श्याम रङ्ग, ने बेसी नम्हर, ने बेसी छोट। लगभग २५ बर्षक कड़ा जवानी। छोट-छोट आँखि आ दहिना गालपर तिलबा ततेक ने शोभै जे लोक सभ पछाड़ी लागि जाथि। ओना काम घरक करितो शरीरक सिटसाट कम नै करै। कतेक दिन तँ ड्राइभर लोकनि सेहो रुपैयापर प्रस्ताव आगू बढौने रहै पर ओ सभ सफल नै भेलाह, कारण इज्जत बेचि खाएब मन्टुटियाकेँ पसन्द नै छनि।  कतारक राजधानी दोहासँ २ किलोमीटर पश्चिम नजमा जाएबला बाटमे होली डे बिल्ला होटलक पछाड़ीमे मन्टुटिया मालिकक घर छै। अपने बुढबा २ टा शादी कएने छथि आ एखन ५५ सालक भऽ गेलाह। बुढबाकेँ १ बेटी आ ४ बेटा मिला कुल ५ गोट धियापुता छनि। जइमे जेठ बेटीक विवाह भेल छै, सउदीये रहै छै कहाँदन। बाँकी सभ कुमारे। खुल्ला साँढ़ जकाँ।  हिनकर बेटा सभ ततेक ने छिचोरा जे शुरुए दिनसँ मन्टुटियाक पछाड़ी हाथ धो कऽ पड़ल छै। अतेक दिन तँ कोनो विधी बचि गेलाह। मुदा आजुक दिन मालिक दुनू मल्कानिक संग हुमरा करबाक लेल सउदी गेल। एहने मौकाक इन्तजार छलै ओइ कौआ-चिल सभकेँ।  भरि दिन कतऽ रहै नै पता मुदा साँझ पड़िते धमधम चारु भाइ आएल। प्रमुख गेट बन्द कएलक। अपन कोठामे जा खाना देबाक लेल किलोल कएलक। मन्टुटिया खाना लऽ जखने आएल ओहो गेट बन्द भऽ गेल। निच्चामे पान-परागक पौच, मेग्डोनेल शराबक बोतल तैयार, जेना पूर्व योजना रहए। साथे टी.भी मे थ्री एक्स प्लेयर लगा काम उत्तेजनाक प्रयासमे। एकर अतिरिक्त एकटा कोनो गोली रहै जे जूसमे धऽ कऽ मन्टुटियाकेँ पिया देलकै। मन्टुटियाक माथापर कामदेब ताण्डव करए लागल। रङ्गमंच रन्कैत गेल। नाटक क्लाइमेक्स तरफ लम्कैत गेल। धीरे-धीरे सभपर जवानीक भूत चढ़ैत गेल आ भुखाएल जानवर सभ मन्टुटियाकेँ लुटैत रहल। मन्टुटिया लुटाइत रहल, लुटाइत रहल...... बस लुटाइत रहल। 

रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अमित मिश्र करियन ,समस्तीपुर मिथिला ,बिहार हारल विजेता

                                    पात्र

 1 . रोहित-  20 साल 2.मानू-    20 साल-   रोहितक दोस्त 3.चिट्ठी चाचा-  45 साल-  डाकिया 4.डाँक्टर बाबू -35 साल-  डाक्टर

( रोहितक दलान परक दृश्य एक कोणमे मौसमी फसलक किछु बोझ राखल अछि ।माँझमे टाटक घरपर हरियर तिलकोरक लत्ती लतरल अछि ।एकटा पुरान साइकिल टाटसँ सटा कऽ राखल अछि ।भऽ सकैए तँ एकटा नादि आ खुट्टा देल जा सकैछ ।रोहित साधारण कपड़ामे घरक आगू ,सोचैक मुद्रामे एक कातसँ दोसर कात टहलि रहल अछि ।रोहितसँ नीक परिधानमे मोनू पर्दाक पाछूसँ "रोहित-रोहित" चिकरैत मंचपर आबैत अछि ।आवाज सूनि रोहितक धियान टूटैत अछि आ फेर दुनू गला मिलैत अछि ।)

रोहित- मोनू ,ई क्रिचदार कपड़ा पहिर दुपहरियामे कतऽ जा रहल छें ।की कोनो खास गप छै की?

मोनू- खास गप की रहतै ।मोन भऽ गेलै ,पहिर लेलौं।ओना रहित ,आगूक की प्लान छौ? रोहित- (आश्चर्यसँ)प्लान।तोहर गप नै बुझलियौ ,कने फरिछा कऽ कह । मोनू- अरे मूर्ख करियरकेँ प्लान । रोहित- अच्छे-अच्छे बूझि गेलियै । मोनू- इएह तँ तोहर प्रोबलेम छौ ,तूँ बुझिते बड देरसँ छेँ ।कने सोच ,इन्टर केला दू वर्ष भऽ गेलै आ एखन धरि बेरोजगारे बैसल छी ।कोना पार हेतै जीवनक डगरिया रे भेया ।

रोहित- ठीके कहलें तूँ ।पिछला एक घण्टासँ हमहूँ इएह सोचै छलौं ।तोरा तँ बाबुओ जीक सहारा छौ मुदा हमर के? एकटा बूढ़ माए जे खाटो परसँ नै उठै छै ।कतौसँ एक्को टाकाक आमदनी नै छै हमरा ।बटैया करै छी ,दूध बेचै छी आ दवाइ-दारूक बाद जँ टाका बचै अछि तँ पोथी कीन पढ़ै छी ।तोरा की कहबौ ,हमर हालत तँ जानिते छें ।

मोनू- हँ हमरा बुझल अछि  तेँ ने दुनू गोटाकेँ आब नोकरीक बारेमे सोचऽ पड़तै ।जँ नोकरी नै भेल तँ जीनाइ मोशकिल भऽ जेतै । रोहित-  गप तँ सत्ते कहलें दोस ।दोस ,चरि चक्किया ए.सी बला गाड़ी देख मोन होइत अछि जे एक बेर हमहूँ चढ़ितौँ ।बजारक गप सूनि बजारेमे अपन छोट परिवार संग रहबाक मोन होइत अछि ।मुखिया जीक हाथमे मोबाइल देख कोनो नेना जकाँ मोन कानि जाइत अछि ।मुदा ई सब एकटा मरनासन्न सपना जकाँ लागैत अछि ,दोस ।भागमे लिखल छै दिल्ली-बम्बइमे बोरा उठेनाइ तँ चरिचक्किया कतऽसँ भेटत ।

मोनू- गलत बात ,बिल्कुल गलत बात ।मनुखकेँ एते उदास नै हेबाक चाही ,जँ जीलाकेँ तेसर टाँपर ,तोरा सन मनुख एते नकारात्मक सोच रखतै तँ बूझें प्रलय आबि गेलै । रोहित- सोच नकारात्मक नै छै भाइ ,मुदा हालत एहन नै छै जे सकारात्मक सोचब ।ई घोर मँहगाइक युगमे जीनगी जीबाक लेल टाका चाही आ टाकाक लेल बोरा उठबैये पड़तै । मोनू- फेर वएह बात ।अरे हम कहै छीयौ ,तोरा बोरा नै उठबऽ पड़तौ ,तोरा एहन गुणीकेँ तँ नोकरी डिबिया लऽ कऽ ताकै छै । रोहित-  एहनो कतौ भेलै यै ।आइ-काल्हि सरकारी नोकरी तँ ईदक चाने बनल छै । मोनू-  आ प्राइवेट । रोहित-  ओकरो लेल पहुँच चाही ।

मोनू- ( कर जोड़ैत) चूप रहू महराज ,चूप रहू ।एते भाषण जुनि मारू ।नोकरी लेल फारम भरऽ पड़ै छै ,अहाँ कतौ भरलौँ की नै? रोहित- हँ ,एकटा परीक्षा देने छी  ।अपन एक सालक बचाओल टाकाक हवण कऽ कऽ । मोनू- तँ फिकिर कथी के ?प्रतिक्षा करू ।एहि हवणक कुण्डसँ अमृतक घैल जरूर बहरेतै ।हमरा विश्वास अछि अहाँ जरूर पास करब । रोहित- तोहर मुँहमे मिश्री ।(गम्भीर होइत)जँ अमृत नै बहरेलै तँ बूझ हमर जीवन बेकार भऽ जेतै ।

(मंचक पाछूसँ साइकिलक घण्टी धिरेसँ बजनाइ शुरू होइत अछि आ धिरे-धिरे ध्वनी तीव्र होइत अछि ।रोहित आ मोनू उम्हरे देखऽ लगैत अछि ।पोस्टमैनक ड्रेसमे ।एक हाथमे किछु चिट्ठी आ कन्हपर एकटा बैग ,दोसर हाथसँ साइकिलक हेण्डिल पकड़ने ,मंचक एक कोणसँ चिट्ठी चाचाक प्रवेश होइत अछि ।)

रोहित ,मोनू- (एक साथ ,एक स्वरमे) प्रणाम चिट्ठी चाचा । चिट्ठी चाचा - खुश रहऽ बौआ । मोनू- कक्का ,आइ हम एकटा बात जानिये कऽ रहब । चिट्ठी चाचा- हँ हँ ,किएक नै जानबऽ ,जानि लए ।कोन बात जानबाक छऽ । मोनू- रोहित अहाँकेँ चिट्ठी चाचा किए कहै यै?

चिट्ठी चाचा-  बड पुरान गप छै ।(रोहित दिश इशारा करैत) ई तीन-चारि वर्षक हेतै ।हम सब दिन चिट्ठी बाँटैक लेल इएह बाटे जाइ छलियै आ एहिना जोरसँ घण्टी बजबैत छलियै ।हमर घण्टीक आबाज सूनि ई नाङटे गाँरि ,हँसैत -कूदैत सड़क धरि आबि जाइ ।

(रोहित लजा जाइत अछि)

मोनू- फेर की होइत छलै । चिट्ठी चाचा- पहिने ई सड़क कच्ची छलै ।पैघ-पैघ खाधि छलै सड़कपर ।साउन-भादो सौँसे सड़कपर थाल-कादोक शासन भऽ जाइ ।जखन ई कूदैत आबै तँ चुभ दऽ ओहि खाधिमे खसि पड़ै आ थाल-कादोमे सना कऽ भूत बनि जाइ छलै ।हा . .हा . .हा . . (सब हँसऽ लागैत अछि आ रोहित लाजे मूड़ि गोँति लैत अछि )

रोहित -  छोरू ने चाचा ,अहूँ कोन गप उठा देलौँ । मोनू-  नै नै ,हुअ दिऔ । चिट्ठी चाचा-  तकरा बाद जखन कखनो इ कानै तँ एकर बाबी कहथिन जे चिट्ठी बाला चाचा आबै छथुन ।ई बात सुनिते ई हँसऽ लागै आ वएह दिनसँ हमर नाम चिट्ठी चाचा पड़ि गेलै ।की हौ रोहित ,इएह गप छै ने? (रोहित स्वीकार करैत उपर-नीच्चा दू बेर मूड़ि डोलबैत अछि)

मोनू-चाचा ,तखन तँ अहाँक घण्टीमे बड पैघ जादू छै जे एकरा सनक उदास रहै बला मनुखकेँ हँसा दै छलै । चिट्ठी चाचा-  (आश्चर्यसँ ) उदास ।उदास किए रहै छै । मोनू-  इएह नोकरी चाकरीक चिन्तामे । चिट्ठी चाचा-  ले बलैया ।हम तँ गपक चक्करमे ओरिजने गप बिसरि गेलौँ ।नोकरीसँ इयादि आएल ,तोरा दुनूक नामे चिट्ठी एलै यै ।(दू टा चिट्ठी निकालि ,रोहित दिश घूमि) ई तोहर (मोनूकेँ दैत) आ ई तोहर । (दुनू लिफाफा फाड़ि , चिट्ठी पढ़ऽ लागैत अछि ।धिरे-धिरे रोहितक मौलाइल मुँहपर हर्षक रेखा आबऽ लागै छै ।एहने सन मोनूक मुँहपर सेहो ) मोनू- (खुशीसँ चिकरैत) मीता ,हमरा नोकरि लागि गेल । रोहित- (खुशीसँ) मीता ,हमहूँ परीक्षा पास कऽ गेलौँ ।इन्टरभ्यू परसू अछि । चिट्ठी चाचा- भगवानक घर देर छै ,अन्हेर नै ।तोरा दुनूकेँ नोकरी लगाइये देलखुन मैया रानी । रोहित-  चाचा ,एखन नोकरी नै लागल ।एकटा मौखिक परीक्षा एखनो बाँकिए अछि । चिट्ठी चाचा-  अरे जखन लिखित निकलि गेलै तँ मौखिको निकलिए जेतै ।चिन्ता जुनि करऽ ।नीके नीके जा ,परीक्षा दऽ ,नोकरी लऽ कऽ आबऽ ।मैया रानी भला करथुन ।अच्छेए ,हमरा और चिट्ठी बँटबाक अछि हम जाइ छीअ । रोहित-  ठीक छै चाचा । (घण्टी बजबैत चिट्ठी चाचा चलि जाइत छथि )

रोहित-  मीता ,तोरा कतऽसँ चिट्ठी एलौ ,कोन ठाम ,कोन कम्पनीमे ,केहन नोकरी लागलौ? मोनू-  कने साँस लऽ कऽ बाज ।एना जँ एक्के बेर प्रश्नक बाढ़ि आनबें तखन तँ हम भसिआइये जाएब । रोहित-  बुझलियै ,बुझलियै ।नै एक फेर ,बेरा-बेरी तँ उत्तर दे । मोनू-  दिल्लीसँ चिट्ठी आएल छलै ।जाहि कम्पनीमे बाबू काज करै छथिन ,ओहि कम्पनीमे सुपरवाइजरकेँ जरूरति छलै ,वएह पोस्ट हमरा भेटल अछि । रोहित-  मुदा कोना? मोनू-  ओकर ठिकेदार अपने इम्हरकेँ छलै ।बाबूजी ओकरा हमर पैरवी केलखिन तँ ओ तैयार भऽ गेलै ।बाबू जी दिल्ली एबाक लेल चिट्ठी भेजने छथिन । रोहित-  मीता ,जखन एगो दोस्त कामयाब होइ छै तखन दोसर दोस्तक करेजक एक कोणमे खुशीक वर्षा होइ छै आ दोसर कोणमे दुखक ठनका खसै छै ।खैर ,तोहर कामयाबीसँ हम खुश छी ,बड खुश छी ।हमर कामयाबी तँ एखनो माँझ सागरमे हेल रहल छै ,जानि नै भेटतै कि नै भेटतै ।

मोनू-  अपनेक बहुत-बहुत धन्यवाद खुश हेबाक लेल ।आब अहूँ इन्टरभ्यू देबाक ओरियान करू ,हमहूँ जाइ छी दिल्लीक लेल रिजर्वेसन कराबऽ । रोहित-  ठीक छै ।फेर इन्टरभ्यूसँ एलाक बाद भेँट हेतै । मोनू-  बेस्ट आफ लक । रोहित-  रूक ।एकटा बात और हमरा आबै धरि तूँ गामेमे रहिहेँ । मोनू-  से किएक ? रोहित-  जँ हम कामयाब भऽ जेबै तँ खुश हेबाक लेल । मोन-  हम तँ सदिखन खुश रहै छी ।ओना तोरा आबै धरि हम दिल्ली नै जेबौ । रोहित-  धन्यवाद । मोनू-(गाबैत अछि) हम होगेँ कामयाब ,हम होगेँ कामयाब ।

(दुनू पर्दाक पाछू चलि जाइत अछि )

                               *************** पट-परिवर्तन **********************

(मंचपर बाटक दृश्य अछि ।पर्दाक एक कोणसँ रोहित मंचपर आबैत अछि ।पीठपर एकटा बैग लादल छै ,केश छिड़ियाएल ।उदास ,कननमुँह केने ,मंद चालसँ चलि रहल अछि ।तखने गीत गाबैत मोनूक मंचपर प्रवेश)

मोनू-   आबि गेलें नोकरी लऽ कऽ । (रोहित बिनु किछु बाजने चलिते रहैत अछि)

मोनू-  अरे रोहित ,तोरे कहै छीयौ ।रूक . .रूक ने । (रोहित फेर बिनु बाजने चलिते रहैत अछि ।मोनू दौड़ कऽ रोहित लऽग पहुँचैत अछि आ रोहितक हाथ पकरि लैत अछि ।रोहित रूकि जाइत अछि ।)

मोनू- कते देरसँ तोरा सोर करै छीयौ ।तूँ किछु सुनिते नै छें ।किछु तँ बाज ।कि भेलौ । (रोहित चूप अछि)

मोनू-  धन्य छी महराज ।एक दिश बाजैत-बाजैत हमर मुँह दुखा गेल आ दोसर दिश अहाँ फेविकाँलसँ अपन ठोर साटि लेने छी ।ठीके कहै छै परचारमे ,एक बार सट गया तो सौ साल धरि नै उखड़ेगा । (रोहित बिनु उत्तर देने चलबाक कोशिश करैत अछि ।मुदा मोनू बाँहि पकड़ि रोकि लैत अछि ।)

मोनू-  लगैत अछि बौआ नोकरी लऽ लेलनि । ई जीतक खुशीमे बौक भऽ गेलनि ।की महराज ,जीतैये बला गप छै ने? रोहित-  (दुख भरल आवाजमे ,धिरेसँ) नै ,हम ई खेल हारि गेलौं मीता ,हम नाकामयाब भऽ गेलौँ । मोनू- झूठ ,सरासर झूठ ।हम मानिये नै सकै छी ।तोरा सन मेधावी छात्र ई परीक्षामे फेल नै भऽ सकै छै ,किन्नौह नै । रोहित-  हम सत्त कहै छी मीता। एहि रेसमे जीतलौँ तँ मुदा सबसँ पाछु रहि कऽ । (मोनूक हँसैत मुँह उदास भऽ जाइत अछि )

मोनू- मूदा ई भेलै कोना? रोहित- टाका और पैरवीक चलते । मोनू- नै बुझलियौ ।कने फरिछा कऽ कह । रोहित-  संगमे पाइ नै छल । दस किलोमीटर धरि पैदल चलऽ पड़ल । मोनू-  की ओतऽ देरीसँ पहुँचलहीं । रोहित-   नै ,पहुँचलियै तँ सबेरे मुदा अंग-अंग थाकि गेल । मोनू -  तखन की भेलै | रोहित-  सब छात्रकेँ बेरा-बेरी बजाओल जाइत छलै ।इन्टरभ्यू कक्षसँ किओ मुस्कैत  तँ किओ काननमुँह केने निकलै छलै ।बेसी कानिते निकलै ।थाकल तँ पहिनेसँ छलौं ओकरा सबकेँ देख हम बड डरि गेलौं । मोनू- अच्छए ,से बात ।आब बुझलौं ।महराज डरि कऽ भागि एलनि । रोहित- नै नै ,एहन गप नै छै ।

मोनू-  तँ केहन छै से ने कह । रोहि-  पहिने पूरा सुन तँ बीच्चेमे लोकि लै छेँ । मोनू-  कह । रोहित-  साँझ होइत-होइत सबहक इन्टरभ्यू भऽ गेलै ।सबसँ अंतीममे हमर बारी एलै ।हमरा बजाओल गेल ।डेराइत-डेराइत हम अंदर गेलौं ।एकटा बड़का टाबूलक एक दिश तीन टा अफसर बैसल छलै ।दोसर दिश एकटा  कुर्सी खाली छलै ।हमरा बैसै लेल कहलकै तँ हम ओहि कुर्सीपर बैस गेलौं ,मुदा थाकल मोन एखनो डेराएले छल ।हम अपन सबटा सार्टिफिकेट देलियै ।ओ तीनू अफसर सार्टिफिकेट देखऽ लागलै । मोनू-सार्टिफिकेट देख तँ प्रसन्न भऽ गेल हेतै अफसर सब ।

रोहित-  हँ ।ओकर बाद तीनू बेरा-बेरी प्रश्न पूछऽ लागल ।अलग-अलग क्षेत्रसँ अलग-अलग तरहकेँ प्रश्न ।पहिने तँ हम घबरा गेलौं मुदा बादमे हमहूँ सब प्रश्नक उत्तर फटाक-फटाक देबऽ लगलियै ।जतबे जबाब दियै ततबे प्रश्न पूछै ।हमर जबाब सूनि तीनू अफसरक ठोरपर मुश्कान नाचऽ लागलै ।दस-पनरह मीनट धरि प्रश्न पुछिते गेलै आ हम जबाब दैत गेलियै ।अन्तमे ओ सब चुप भऽ गेल आ अपनामे तीनू कानाफूसी करऽ लागल ।ओहिमेसँ एकटा एजगर अफसर उठि कऽ हमरा लग आबि गेल ।हमहूँ ठाढ़ भऽ गेलौं ।ओ हमर पीठ ठोकि देलक आ बाहर जाइ लेल कहलक ।हम अपन सार्टिफिकेट सब समटि बाहर आबऽ लागलौं ।

मोनू-  जखन एते नीक इन्टरभ्यू गेलौ ।अफसर तोहर पीठ ठोकि देलकौ तखन नौकरी किएक नै भेटलौ ?तूँ फेल कोना कऽ गेलेँ ?शाइद तूँ मजाक करै छें ।झूठ बाजै छेँ ।

रोहित-  नै नै ।ने हम मजाक करै छी आ ने झूठ बाजै छी ।हम बिल्कुल सत्त बाजि रहल छी । मोनू-  तखन असलमे भेलै की? रोहित-   जखन हम बाहर आबै छलियै तखने एकटा अफसरक मोबाइल बाजलै ।ओ फोन उठा कऽ बतियाए लागलै ।ओकर बार्तालापसँ बुझना गेल जे कोनो बड़का नेताक फोन छै ।ओम्हरसँ किछु कहलकै तँ ओ अफसर कहलकै जे "सर ,आपका कनडिडेट इस लड़का से बहुत ज्यादा कमजोर है ।एक हीं सीट बचा है इसलिए नौकरी इसी लड़के को मिलेगा ।"उम्हरसँ और किछु किछु कहल गेलै मुदा अफसर ना-नुकुर करैत रहल ।अन्तमे अफसर कहलकै"अब सर आप नहीँ मानियेगा तो आपका काम करना हीँ पड़ेगा लेकिन दाम दस लाख लगेगा ।" ई कहि ओ फोन काटि देलकै ।तखन धरि हम बाहर आबि गेल छलौं ।

मोनू-  लागै छै पैरवीकेँ दानव पहुँच गेल छलै । रोहित-  शाइद ।एकर बाद जखन पास भेल छत्रक लिस्ट साटल गेलै तँ ओहिमे हमर नाम नै छलै । मोनू-  आब सब गप हम साफ-साफ बूझि गेलियै ।जा धरि टाका आ पैरवी बला रहतै ,जा धरि घूस लै बला लोभी अफसर रहतै ,ता धरि कोनो गरीबक कल्याण नै भऽ सकै छै । रोहित-  हम तँ पहिने कहने छलियौ , हमर कर्ममे सरकारी नोकरी नै ,बोरा उठेनाइ लिखल छै । मोनू-  चिन्ता जुनि कर ।मेहनत आ इन्तजारक फल मीठ होइ छै ।आइ नै तँ काल्हि तूँ सफल हेबे करबेँ ।

रोहित-  मोनू ।आब नै टाका अछि आ नै साहस बचल अछि ।आब कतौ कोनो परीक्षा देबाक इच्छा नै बचल अछि ।एतबेमे हमर जिनगी तहस-नहस भऽ गेल ।

मोनू-   एना जुनि फाज ।सदिखन अपन सोच पोजीटीभ बना कऽ राख । रोहित-   पोजीटीभ नै बनि पाबै छै यार ।माएक दबाइ खतम छै ।हाथमे एक्को टाका नै छै ।पहिनेसँ कर्जाक बोझ तऽर दबल छी ।आब तँ किओ कर्जो-पैंचो नै दै छै ।की करब ,कोना जीयब ,किछु नै फुराइत अछि ।एहनमे तूँ कहै छें पोजीटीभ सोचैक लेल ।एतऽ जीवन नीगेटीभ भेल अछि ,पोजीटीभ सोच कोन कुम्हारक चाकपर गढ़ब ।

मोनू-  मीता टाकाक चिन्ता जुनि कर ।काल्हि हम दिल्ली जा रहल छी ।हम अपन दरमाहा भेज देल करबौ ।तूँ खाली मेहनत कर ।मोन लगा कऽ पढ़ आ सरकारी नोकरी ले । रोहित   -- तूँ भेजबेँ वा किओ और देत ,हएत तँ कर्जे ने? मोनू-    हमर मदतिकेँ कर्जा नै मान ।एते दिन पढ़ैमे तूँ हमर मदति अपन ज्ञानसँ केलें  ,हमर टास्क बना कऽ केलें ,आइ हम तोहर मदति पाइसँ करबौ ।हिसाब बराबर । रोहित-  तैयो । मोनू-   तैयो ,तैयो की? तैयो-बैयो किछु नै ।मोन बेसी छोट नै कर ।सफरसँ थाकल हेबेँ ।जो स्नान -धियान कऽ ,पेट पूजा कर ।कने कालमे हमहूँ आबै छीयौ । रोहित-  की करबै पेट पूजा ।चाउरो-दालि तँ नै छै घरमे ।जीनगी गाराक घेघ भऽ गेल अछि ।कखनो कऽ होइत अछि एहन जीनगीसँ मरनाइ नीक । मोनू-   बेसी बात नै बना ।खुशी खुशी जो ।आराम कर ।थाकल देह छौ तेँ अल-बल सोचाइ छौ ।जो . . .जो . . . । (दुनू पर्दाक पाछू चलि जाइत अछि)

                                                    ********************** पट -परिवर्तन ********************

(रोहितक दलानक दृश्य ।रोहित धरतीपर बेहोश पड़ल अछि ।वायाँ हाथक कलाइसँ खून बहि रहल अछि ।दायाँ हाथक लऽग एकटा चक्कू राखल अछि ।पर्दाक पाछूसँ रमेशकेँ सोर पाड़ैत मोनूक प्रवेश)

मोनू-  देखू ।यात्रासँ एतेक थाकि गेलै जे बीच्चे दलानपर सूति रहलै ।(रोहितक लऽग आबि ।घबराएल) ।अरे बाप रे बाप ।ई की भेलै? एकरा हाथसँ तँ खून बहै छै । (झूकि कऽ चक्कू उठा लैत अछि) अशांत मोनमे शाइद आत्महत्या करबाक प्रयास केलक ।अपनेसँ हाथक नस काटि लेलक ।अरे बाप रे बाप ।आब की करियै हम . . .डाँक्टर . . .डाँक्टर . . .किओ डाँक्टर के बजा . . .के . . .के . . .के जे . . .हमरे जाए पड़तै ।(चिकरैत) डाँक्टर बाबू ,यौ डाँक्टर बाबू ,दौरू यौ डाँक्टर बाबू . . .अनर्थ भऽ गेलै ,अनर्थ ।

(डाँक्टर बाबूकेँ सोर करैत मोनू मंचक एक कोणसँ पर्दाक पाछू जाइत अछि आ दोसर कोणसँ डाँक्टर बाबूक संग मंचपर आबैत अछि ।)

डाँक्टर बाबू- की भेलै? मरीज कतऽ छै? मोनू-  (रोहित दिश इशारा करैत अछि) इएह छै मरीज डाँक्टर बाबू । डाँक्टर बाबू-  की भेलै एकरा? मोनू-  हाथक नस काटि लेलकै ।बड खून बहि रहल छै ।जल्दी करू नै तँ मरि जेतै । डाँक्टर बाबू-   हम एकर इलाज नै कऽ सकै छी ।ई पुलिस केस अछि ,हम फँसि जाएब ।

(डाँक्टर बाबू बैग उठा जाए लागै छथि ,मोनू लपकि कऽ हुनक गट्टा पकड़ि लैत अछि )

मोनू-  (कानैत) अहाँ एहि धरती परक भगवान छी ।अहाँ एना जुनि बाजू ।एकर इलाज कऽ दिऔ । कर प्राण बचा लिऔ ।(डाँक्टर बाबूक पएर पकड़ैत) हम अहाँक पएर पकड़ै छी ,हमर मीतकेँ जीया दिअ ।अहाँकेँ हमर सप्पत ।इलाज शुरू करू ।

डाँक्टर बाबू-   पएर छोड़ हमर ।हम एकर इलाज कोनो कीमतपर नै करबै ।एकर इलाज कऽ कोनो संकट मोल नै लेब ।पहिने पुलिसकेँ बजा ।ओकरा एलाक बादे किछु हेतै । (डाँक्टर बाबू पएर छोड़बैक लेल जोरसँ झटका दैत अछि ।मोनू कने दूर गुरकि जाइ छै ।डाँक्टर बाबू जाए लागै छथि ।मोनू फेर हुनक बैग पकड़ि लैत अछि ।)

मोनू- जखन धरि पुलिस एतै तखन धरि हमर मीता मरि जेतै । डाँक्टर बाबू-  मरि जेतै तँ हम की करी?अपन प्राण दऽ दी ।मरि जेतै तँ मरऽ दहीं ई हमर टेन्सन नै छै । मोनू-  (जोरसँ बाजैत) धिक्कार अछि एहन डाँक्टरीपर ।एतऽ लोक मरि रहल छै आ अहाँ प्रवचण दऽ रहल छी ,कानून पढ़ा रहल छी ।की इएह सिखाओल गेल छल डाँक्टरी कालेजमे ।धिक्कार अछि एहन डिग्रीपर ।धिक्कार अछि मनुखतापर ।जाहि मनुखकेँ करेजमे मसियो दरेग नै हेतै ।जकरामे मनुखताकेँ सड़लो-गलल अंश नै बचल हेतै ,हमरा हिसाबसँ ओ एक माए-बापक जनमल भैये नै सकै छै ।

डाँक्टर बाबू-   (पिनकैत) रे छौड़ा ,तूँ हमरा गारि पढ़लें ।थम्ह तोरा देखबै छीयौं । मोनू-  (उपहास करैत) गारि ककरो उमरि देख नै पढ़ल जाइ छै ।किओ अपन नीक कर्मक प्रतापे इज्जत पाबै छै तँ किओ अपन खराप कर्मक प्रतापसँ गारि सुनै छै ।मुदा अफसोस अहाँ दुनूमे सँ एक्को टामे नै छी ।मनुखते नै तँ कर्म कतऽसँ ।

(तखने साइकिलक घण्टी बजबैत चिट्टी चाचाक प्रवेश)

चिट्ठी चाचा -  की भेलै ।एते हल्ला किए करै छऽ । मोनू-  हित आत्महत्या करबाक प्रयास केलक ।ओ वेहोश अछि ,आ ई (डाँक्टर बाबू दिश इशारा करैत) डाँक्टर इलाज करैसँ मना करै छथिन । चिट्ठी चाचा-   हौ डाँक्टर ।तोरा लऽग लूरि छऽ तखन तँ लोक पूछारि करै छऽ ।समाजक प्राणी भऽ समाजसँ एते कतिआएल रहनाइ नीक नै छै ।(हाथ जोड़ैत) हम तोरा आगू हाथ जोड़ै छीअ ।तोरासँ जेठ भऽ विनती करै छीअ ।एकरा जीया दहक ।एकरा गरीबक कल्याण कऽ दहक ।

डाँक्टर बाबू-   नै कक्का ।हमरा माँफ करू ।कोर्ट कचहरीक चक्करमे हम नै पड़ब । (डाँक्टर चलनाइ शुरू करैत अछि ।मोनू पाछूसँ डाँक्टरक गर्दनपर चक्कू राखि दैत अछि ।)

मोनू- (चिकरैत) डाँक्टर बाबू ।आइ जँ एतऽसँ हमर मीताक लहाश उठतै तँ हम अहूँक राम नाम सत्य कऽ देब ।

डाँक्टर बाबू-  (घबराइत) हे ,हे ,चक्कू हटा ,चक्कू हटा ।ई गलत कऽ रहल छें । मोनू-   आब सही -गलत फरिछेबाक शक्ति नै अछि हमरामे ।हम बस एतबे जानै छी ।आइ जँ एकर इलाज नै हेतै तँ हम एखने तोहर इलाज कऽ देबौ ।

(डाँक्टर घूरि कऽ रोहित लऽग आबैत अछि ।बैगसँ रूइ निकालि खून साफ करैत अछि ।मरहम पट्टी करैत अछि ।)

चिट्ठी चाचा-   केहन युग आबि गेलै ।युवा वर्गमे आब लड़ैक साहस बचबे नै केलै ।छोट-छोट सन दुख भेलापर आत्महत्या ।लागैछ एहि यांत्रिक युगमे लोको सब रोबोट बनि गेलै ,जकरामे कोनो संवेदना नै होइ छै ।नीक- बेजाए सोचबाक शक्ति नै होइ छै ।प्रतिस्पर्धाक दौड़मे जानि नै कते युवा मृत्युक माला पहिर लै छै ।छोट-छोट विपतिसँ डारा कऽ प्राण तियागि दै छै ।जानि नै कतऽ जा रहल छै ई देश ।जानि नै कहिया जागतै युवामे चेतना ।

(रोहितकेँ होश आबै छै ।ओ उठि कऽ ठाढ़ हुअ लागै छै ।मोनू सहारा दऽ कऽ उठबै छै ।)

रोहित-   (चारू कात  घूमि)  की हम स्वर्गमे छी ? की हमरा संग पूरा समाज मरि गेलै ? मोनू-  (चिट्टी चाचा दिश घूमि ।) चाचा होश आबि गेलै ।देखियौ ,देखियौ ,हमर मीत बचि गेलै ।जी गेलै । (डाँक्टर बाबू आ चिट्ठी चाचा रोहित लऽग आबि जाइ छथि ।)

रोहित-  हम मरऽ चाहै छी । हमरा किए जीएलें ।हमरा मरऽ दे । डाँक्टर बाबू-   भगवान जीवन देलखिन जीबाक लेल ,मरबाक लेल नै ।जँ मरनाइ नीक बात रहितै तँ आइ दुनियाँमे एक्को टा मनुख नै रहितै ।सब स्वर्गवासी भऽ गेल रहितै ।जीवनमे सदिखन खुश रहबाक चाही ,मरबाक नै ।देखै छऽ ,तोहर केस तँ हमर आँखि खोलि देलक ,तोरा सन युवाक आँखि आब कहिया खुलतै ?जानि नै ।

रोहित-   खुश ,कोना रहब खुश ।जीनगीमे जखन हारक सामना होइ छै तँ हँसी-खुशी ओहि हारक संग हेरा जाइ छै ,तखन मरनाइये नीक लागै छै । चिट्ठी चाचा-    एक बेर हारि जेबाक मतलब ई तँ नै छै जे जीवन भरि लेल हारि गेलियै ।एकटा घोंघा बेर-बेर देवालपर चढ़ैत अछि ,बेर-बेर खसैत अछि ,मुदा हारि नै मानैत अछि ।लगातार प्रयास करैत अछि आ एक दिन ओ देबालपर चढ़िये जाइत अछि ।हारि कऽ जीतैमे जे मजा छै से और किछुमे नै ।

डाँक्टर बाबू-   जे सब दिन जीतै छै ओ अपना-आपकेँ बलगर समझि लै छै ।ओकरा घमण्ड भऽ जाइ छै आ फेर ओ कहियो मेहनत नै करै छै ।मुदा जे सब दिन हारै छै ,ओ सब दिन मेहनत करै छै आ ओ जखन जीतै छै तँ विश्वविजेता बनै छै ।बुझलऽ । मोनू -   अरे ,एकटा परीक्षामे फेल भेलासँ कोनो प्रलय नै आबि जेतै ।जीवनमे एखन कतेको परीक्षा बाँकिए छै । मनुखक जिनगीत दोसर नाम थिक परीक्षा ।मनुख कते परीक्षासँ भागत ।डेग-डेगपर एकटा नव चुनौती भेटै छै ।तेँ हिम्मर राख आ सब किला फतह कर ।

चिट्ठी चाचा-   दू सए साल धरि प्रत्येक दिन ,प्रत्येक क्षण अंग्रेजसँ हम सब हारैत एलौं ।मुदा एक ने एक दिन जीत भेटबे केलै ।मनुखक जीवनमे हार जीत तँ चलिते रहै छै ।एहिमे आश्चर्यक कोन गप ? घबराइकेँ कोन गप ?

डाँक्टर बाबू-   मनुखकेँ अपन सब हारसँ सीख लेबाक चाही ।अपन कमजोरी दूर करबाक चाही ,नै अनुतिर्ण भेलापर परेशान भऽ आत्महत्या सन खराप डेग उठेबाक चाही । अजुक युवाकेँ ई सोच दिमागसँ निकालऽ पड़तै जे कोनो काजमे फेल भेलाक बाद एकर समाधान मात्र आत्महत्या छै ।

चिट्ठी चाचा-   रोहित । ई हार तोहर हार नै छलौ ।ई हार तँ ओ पैरवी बलाकेँ हार छलै जे तोहर ज्ञानक आगू हारि गेलै ।तूँ आब नव उर्जा संग ठाढ़ हो ,नव शक्तिक संग चोट कर ।तोहर विजय जरूर है ।कहाबत तँ सुनने हेबेँ , सए सोनारकेँ तँ एक लोहारकेँ ।एक ने एक दिन जिनगीक सब बाधा ,सब परीक्षा तूँ उतिर्ण हेबेँ ।

मोनू-   हँ मीता ,तूँ एखनो जीतल छेँ ।सब दिन जीतल रहबेँ ।

रोहित-   क्षमा करू ।माँफ करू ।हमर आत्मबल डोलि गेल छल ।हम भटकि गेल छलौं ।मुदा आब हम देबर मेहनत करब ।तखन धरि मेहनत करब जखन धरि ओ जीतल टाका आ पैरवी बलाक गालपर ई हारल विजेताक जीतक थप्पर नै पड़ि जाइ ।हम हमरा सन सब युवासँ कहऽ चाहब जे हमरा जकाँ आत्महत्या सन डेग किओ नै उठबू ।फेल भेलापर और बेसी जोशक संग जीतक मार्गपर आगू बढ़ैत चलू ।जीत भेटबे करत ।जाइ छी हमहूँ आब बेसी मेहनत कऽ अपन लक्ष्य धरि पहुँचब । हँ ,ई कहाबत सदिखन मोन राखब ,सए दिन सोनारकेँ तँ एक दिन लोहारकेँ ।

मंचपर सब हँसऽ लागैत अछि आ धिरे-धिरे पर्दा खसऽ लगैत अछि।                                      समाप्त ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गजेन्द्र ठाकुर नाटक- गंगा ब्रिज गंगा ब्रिज पात्र: बच्चा १ जे अभियन्ता बनैए बच्चा २ अभियन्ताक मित्र (बादमे मुख्य अभियन्ता बनैए) बच्चा ३ (जे बादमे मजदूर बनैए) मुख्यमंत्री मीत बाउ लाला दादा बिलट इन्जीनियरक पत्नी ठिकेदार मजदूर शिक्षक (वा शिक्षिका)१ शिक्षक (वा शिक्षिका)२ किछु छात्र-छात्रा ढोलहो देनहार डंका बजेनहार (दूटा लोक) बतही माए पैघ भाए पल्लव एक स्टेजक एक कात किछु मजदूर सभ खट-खुट कऽ गिट्टी पजेबा तोड़ि रहल छथि लगैए जे गंगापुलक मरोम्मति भऽ रहल अछि, कारण किछु मजदूर जय माँ गंगे कहि मंचक नीचाँ प्रणाम सेहो कऽ रहल छथि। स्टेजक दोसर कात दूटा लोक नीचाँ राखल नगाड़ा-ढोलपर चोट दऽ रहल अछि। तखने एकटा ढोलहो देनहारक प्रवेश। ढोलहो देनहार : गंगा ब्रिज। पवित्र गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि। (ढोलहो दैत) सुनै जाउ, सुनै जाउ।… गंगा ब्रिज। पवित्र गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि। एकटा लोक (डंका बजेनाइ छोड़ि काज करैत मजदूर सभकेँ अकानैत ढोलहो देनहार लग अबैए , मुदा दोसर लोक आस्ते आस्ते डंका बजबिते रहैत अछि): देखै छिऐ जे काज तँ चलिये रहल छै, तखन फेर? ढोलहो देनहार: (ओइ लोक दिस ध्यान नै दैत कृत्रिम रूपसँ बजैत) एतबे मजदूरसँ काज नै चलतै। पूरा पुल हिल रहल छै। (ढोलहो दैत) सुनै जाउ, सुनै जाउ।… गंगा ब्रिज। पवित्र गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि। दोसर लोक (डंका बजेनाइ छोड़ि कऽ ढोलहो देनहार लग अबैए): एतबे दिनमे कोना ई हाल भऽ गेलै। सुनै छिऐ जतेक पाया ऐ पुलमे छै ततेक कताक करोड़ टाका एकरा बनबैमे खर्च भेल रहै। ढोलहो देनहार: (अहू लोक दिस ध्यान नै दैत कृत्रिम रूपसँ बजैत) काज ढंगसँ नै भेल रहै। सुनै जाउ, सुनै जाउ...। गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि। सुनै जाउ, सुनै जाउ। एकटा लोक: (दर्शक दिस तकैत) देखै छिऐ, जहिया बनिये रहल छलै, बनि कऽ तैयारो नै भेल रहै, तहियेसँ ऐ पुलक मरोम्मति शुरू छै। दोसर लोक: (ओइ लोकपर ध्यान नै दैत दर्शक दिस तकैत) चिप्पीपर चिप्पी पड़ि रहल छै। उद्घाटनसँ पहिनहिये सँ चिप्पी पड़नाइ शुरू भऽ गेल रहै। ढोलहो देनहार: (दुनू लोकपर ध्यान नै दैत आँखि मुनैत बजैत) सरकारी पुल छिऐ, चिप्पी नै पड़तै तँ इन्जीनियर आ ठिकेदारक घरपर छज्जा कोना पड़तै। सुनै जाउ, सुनै जाउ...। एकटा लोक: (ढोलहो बल दिस आब मुँह करैत बजैए) हौ ढोलहोबला, से तँ बुझलिऐ, मुदा से ने कहऽ जे दुनियाँ मे आनो ठाम पुल बनै छै, से ओतुक्का इन्जीनियर आ ठिकेदारक घरपर छज्जा पड़ै छै आकि नै हौ। ढोलहो देनहार: (ओइ लोक दिस अचकचा कऽ तकैत) किजा ने गेलिऐ, मुदा सुनै छिऐ अंग्रेजबला पुल मजगूत होइ छलै। (दर्शक दिस तकैत) सुनै जाउ, सुनै जाउ...। दोसर लोक: (पहिल लोक दिस आब मुँह करैत बजैए) हौ, अनेरक पाइ आबै छलै लूटिक तँ जे एकाध टा पुल अंग्रेज बनेलकै से मजगूते ने हेतै हौ। एकटा लोक: (दोसर लोक दिस आब मुँह करैत बजैए) ई इन्जीनियर आ ठिकेदार सभ लूटिमे अंग्रेजसँ कम नै छै, मुदा पुल मजगूत किए नै बनबै छै हौ। ओइ बनबैमे अंग्रेज सन किए नै छै हौ। दोसर लोक: (पहिल लोक दिस मुँह करैत बजैए) मजगूत बना देतै तँ फेर मरोम्मतिक ठेका कोना भेटतै हौ। (ढोलहो बल दिस आब मुँह करैत बजैए) की हौ ढोलहोबला.. ढोलहो देनहार: (दोसर लोकक गपपर ध्यान नै दैत) किजा ने गेलिऐ। सुनै जाउ, सुनै जाउ...। गंगापर बनल ऐ पुलक मरोम्मति लेल मजदूर चाही। स्त्री-पुरुष, बाल-वृद्ध सभ कियो आवेदन दऽ सकै छथि। सुनै जाउ, सुनै जाउ। (ढोलहो बला चलि जाइए।) पहिल लोक:आब सरकारो की करतै, लोके सभ गड़बड़ छै। दोसर लोक:लोक ककरा कहै छिहीं, हम आ तूँ। पहिल लोक: नै रौ। इन्जीनियर आ ठिकेदार। दोसर लोक:धुर बूड़ि, आब अंग्रेजक सरकार थोड़बे छै। पहिल लोक:तँ की अर्थ बदलि जेतै। दोसर लोक:हँ रौ। पहिल लोक:तँ इन्जीनियर आ ठिकेदार लोक नै भेलै। दोसर लोक:नै। पहिल लोक:तँ की भेलै। दोसर लोक:ओ सभ भेलै सरकार। पहिल लोक: धुत्, सरकार मनुक्ख थोड़े होइ छै। दोसर लोक:मनुक्खे होइ छै। राजो महराजा सभ जखन मनुक्खे होइ छलै, अंग्रेजो सभ जखन मनुक्खे होइ छलै तखन ई तँ स्वतंत्र भारतक सरकार छिऐ। पहिल लोक:अच्छा, तखन पटना आ दिल्ली मे सरकार छै से की छिऐ रौ। दोसर लोक:ओहो सरकारे छिऐ। पहिल लोक:धुर्, ई इन्जीनियर तँ गामेक लोक छै। गामक लोक कतौ सरकार भेलै हँ, गाममे तँ जमीन्दारक अमला टा केँ लोक सरकार कहै छै। दोसर लोक:आदति छै लोककेँ तेँ जमीन्दारक अमलाकेँ अखनो सरकार कहै जाइ छै। किछु दिन बिततै, ओकरा सभकेँ लोक सरकार नै कहतै। पहिल लोक:तूँ तँ अन्तर्यामी बुझाइ छेँ। आर सभ की हेतै रौ। दोसर लोक:सरकार इन्जीनियरकेँ बहाल केने छै, ठिकेदारसँ काज करबै छै, ई सभ सरकार छिऐ। ई सभ जे चाहते सएह हेतै। पहिल लोक:हमरा आ तोरासँ किछु नै हेतै? दोसर लोक:हम आ तूँ किछु लोककेँ चुनबै। ई सभ ओकरा सभक कहलमे रहतै। पहिल लोक:रौ, सरकारी कर्मचारीमे तँ गामक चौकीदारो छै, ऑफिसक चपरासीयो छै। तँ ओहो सभ सरकार भऽ गेलै। दोसर लोक:हँ रौ। पहिल लोक:तखन अपने सभ खाली लोक भेलिऐ। जे करतै यएह सभ करतै। दोसर लोक:अपने सभ चुनबै, आ ओकरा सभक कहलमे ई सभ रहतै। पहिल लोक:माने अपने सभक कहल मे रहतै (किछु ओकरा बुझाइ नै छै, मुँहपर भाव अबै-छै जाइ छै।) दोसर लोक:हँ, सएह ने भेलै। पहिल लोक: (किछु ओकरा बुझाइ नै छै, मुँहपर भाव अबै-छै जाइ छै।) देखा चाही सरकारक राज…. पाछाँसँ दू-दूटा तिरंगा झण्डा लेने बच्चा सभ अबैए। संगमे दूटा शिक्षक छै। एकटा शिक्षक (बा शिक्षिका) आगाँ-आगाँ आ एकटा शिक्षक (बा शिक्षिका) पाछाँ-पाछाँ चलि रहल छथि। सभ मजदूरकेँ एक-एकटा झण्डा दऽ देल जाइ छै। “ओइ दुनू टा लोककेँ सेहो एक-एकटा झण्डा देल जाए”- ई गप शिक्षक इशारामे कहै छथि, मुदा झण्डा घटि गेलै, से ओ दुनू खाली हाथ रहि जाइ छथि आ सभक मुँह ताकऽ लगै छथि। मजदूरक सोझाँ ओ दुनू लोक ठाढ़ भऽ जाइए आ फेर डंके लग आबि ठाढ़ भऽ जाइए आ आश्चर्यसँ देखऽ लगैए। त्रिवार्णिक झण्डा लऽ कऽ बाकी सभ गोटे मंचपर छितरा जाइ छथि आ स्टेजपर ठाढ़ भऽ जाइ छथि। उल्लासक वातावरण सगरे पसरल अछि, दुनू लोककेँ छोड़ि सभक मुँहपर (मजदूर सभक सेहो) हँसी-प्रसन्नता आबि जाइ छै। जखन सभ ठाढ़ भऽ जाइ छथि तखन दुनू शिक्षक (वा शिक्षिका) बच्चा सभक आगाँ आ दर्शक सभक सोझाँ ठाढ़ भऽ जाइ छथि। “१५ अगस्त” ई नारा दुनू शिक्षक बाजै छथि आ “स्वतंत्रता दिवस” ई सभ मिलि कऽ (दुनू लोक केँ छोड़ि कऽ) बाजै छथि। शिक्षक (वा शिक्षिका) १: बौआ-बुच्ची। आइ ई त्रिवार्णिक झण्डा हमरा सभक हाथमे फहरा रहल अछि। पहिने हम सभ दोसराक अधीन छलौं, पराधीन छलौं, ई झण्डा झुकल छल, फहरा नै सकै छलौं। झण्डा फहराइत रहए ओइ लेल हमरा सभकेँ जोर लगाबैत रहऽ पड़त। (चारू दिस हाथ पसारैत) ऐ इलाकामे आब खुशी पसरत। जमीन्दारक राज खतम भऽ गेल। सभ कियो पढ़ि सकै छथि। झगड़ा-झाँटी, युद्ध, आब सभ खतम भऽ गेल। हमरा सभक जीवनमे एकटा नवका भोर आएल अछि। नवका शिक्षा, नवका खेतीक चलनि हएत। शिक्षक (वा शिक्षिका) २: बड़का चिमनीक धुँआ आ बड़का-बड़का बान्ह। बिलैंतसँ आबैबला सभ समान चिमनीबला फैक्ट्रीमे तैयार हएत। बड़का-बड़का बान्ह ओइ धारकेँ बान्हि-छेक कऽ सञ्जत कऽ देत। खूब उपजत खेत, बर्खा बरखत इन्द्रक नै, हमरा सभक प्रतापसँ। खेते-खेत बहत धार, हएत पटौनी। छोट-पैघक भेद मेटा जाएत। शिक्षक (वा शिक्षिका) १: छोट-पैघक भेद मेटा जाएत? बड़का चिमनीक धुँआ आ बड़का-बड़का बान्ह छोट-पैघक भेद मेटाएत? शिक्षक (वा शिक्षिका) २: हँ। पटौनी हएत खेते-खेत। बिलैंतसँ आबैबला सभ समान आब एतै चिमनीबला फैक्ट्रीमे तैयार हएत। शिक्षक (वा शिक्षिका) १: बड़का बान्ह आ बड़का फैक्ट्रीसँ ढेर रास समस्या सेहो आबै छै। ओकर निदान जरूरी छै। विकास एकभग्गू भऽ जाएत। शिक्षक (वा शिक्षिका) २: विकास एकभग्गू कोना हएत? शिक्षक (वा शिक्षिका) १: बड़का फैक्ट्री सभ ठाम नै लागि सकत, कतौ-कतौ लागत, ओतऽ बोनिहारक पड़ैन हएत। बड़का बान्ह बनलासँ ओकर भीतरक गामसँ सेहो लोकक पड़ैन हएत। बड़का बान्ह जँ मजगूत नै हएत तँ ओ टूटत आ प्रलय आएत। बड़का फैक्ट्री आ बड़का बान्ह लोकक जिनगीकेँ छहोछित कऽ देत। शिक्षक (वा शिक्षिका) २:एक पीढ़ीकेँ तँ बलिदान देबैए पड़त। बच्चा सभ, बाजै जाउ। अहाँ सभ देश लेल अपनाकेँ समर्पण करब आकि नै। शिक्षक (वा शिक्षिका) १: बच्चा सभ, बाजै जाउ, अहाँ सभ की बनऽ चाहै छी। समाजकेँ की देबऽ चाहै छी। बच्चा १: हम इन्जीनियर बनब आ सड़क, पुल, नहर बनाएब। जइसँ लोकक दुःख दूर हेतै। बच्चा २: हमहूँ इन्जीनियर बनब। बड़का-बड़का बान्ह, बड़का-बड़का चिमनीक धुँआ। धुँआ सुंघैमे हमरा बड्ड नीक लागैए। कतेक नीक दिन आएत, बड़का-बड़का बान्ह, बड़का-बड़का चिमनी देश भरिमे पसरि जाएत। बच्चा १: मुदा धुँआसँ खोँखी होइ छै। हमर माए खोँखी करैत रहैए। हमरा धुँआसँ परहेज अछि। बच्चा २:मुदा हमर माए तँ भनसाघर जाइतो नै अछि। मुदा हम जाइ छी, चोरा-नुका कऽ, आ धुँआक गंध, बड़का देवार, ई सभ हमरा बड्ड नीक लगैए। (एकटा बच्चाक धरफड़ाइत प्रवेश) बच्चा-३: हमर बकड़ी देखलिऐ यौ। (सभ चुप्प भऽ ओकरा दिस देखऽ लागैए।) बच्चा ३: (मुँहपर हाथ रखैत, कने हँसैत) पढ़ाइ होइ छै एतऽ यौ। जय भारत, जय भारत, जय भारत.. हमर बकड़ी (पाछाँ दिस तकैत).. ओम्हर देखै छी। (बच्चा ३ क प्रस्थान) शिक्षिका २: नीक गप। मुदा विकास केहन हुअए, ई सभ हमरा सभक हाथमे नै अछि। पटना आ दिल्लीमे ई निर्णय हएत जे हमरा सभ लेल केहन विकास हेबाक चाही। शिक्षिका १: नीक गप। नीक गप जे हमरा सभक विकास लेल पटना आ दिल्लीमे सोचल जा रहल अछि। मुदा ओतऽ बैसि कऽ वा एकाध दिनक हलतलबीमे कएल दौड़ासँ ओ सभ उचित निर्णय लऽ सकता? जे से, मुदा हम सभ समाज लेल काज करी, से सतत ध्यान रहए। पूरा इमानदारीसँ, जान जी लगा कऽ ऐ देशक इतिहास हमरा सभकेँ बनेबाक अछि, से ध्यान रहए। आइ १५ अगस्त १९४७ केँ हम ई प्रण ली, वचन दी। सभ बच्चा: हम सभ वचन दै छी, हम सभ पूरा इमानदारीसँ जान जी लगा कऽ ऐ देशक नव इतिहास लिखब। (“१५ अगस्त” ई नारा दुनू शिक्षक बाजै छथि आ “स्वतंत्रता दिवस” ई सभ मिलि कऽ (दुनू लोक केँ छोड़ि कऽ) बाजै छथि, दुनू लोक मंचक कोनमे कतिआएल सन ठाढ़ छथि। बच्चा आ शिक्षक सभ मजदूर सभसँ झण्डा आपस लऽ लै छथि। मजदूर सभ फेर बैसि कऽ ठक-ठुक करऽ लगैए। दुनू लोक ओतै हतप्रभ ठाढ़ रहैए। फेर पर्दाक पाछाँ कोनमे देखऽ लगैए जेना ककरो एबाक प्रतीक्षा कऽ रहल हुअए। तखने दुनू हरबड़ा कऽ जाइए आ एकटा कुर्सी आनि कऽ राखैए। एकटा ४०-४५ बर्खक अभियन्ता मंचपर अबैए। अभियन्ता कनेक हाँफि रहल अछि, कुर्सी देखिते ओ धबसँ ओइ कुर्सीपर बैसि जाइए। फेर साँस स्थिर कऽ ठाढ़ होइए। ठक-ठुक बन्द भऽ जाइ छै आ मजदूर सभ फ्रीज भऽ जाइए, ओ दुनू लोक कोन दिस डंका लग चलि जाइए आ फ्रीज भऽ जाइए। अभियन्ता बाजऽ लगैए।) अभियन्ता: (कुर्सीकेँ झमाड़ैत) एना। एना हिलि रहल अछि ई, ई गंगा ब्रिज। सीमेन्ट, बालु, गिट्टीक कंक्रीटसँ बनल ई पुल कठपुलासँ बेशी हिलैए। जहिया आबै छी, मरोम्मतियेक काज चलैत रहै छै। वन-वे, एक दिस; एक्के दिसुका मात्र भऽ कऽ रहि गेल अछि ई। एक्के दिस पुल खुजल छै, दोसर दिस कोना चलत, अदहा पुलपर मरोम्मतिक काज भऽ रहल अछि। (तखने ओ आभासी रूपमे हिलऽ लगैए आ ओकर बाजब थरथरा उठै छै।) ई पुल तँ एत्ते हिलि रहल अछि जत्ते गामक कठपुलो नै हिलैए। (तखने एकटा ठिकेदार अबैए।) ठिकेदार (अभियन्तासँ): हइ इन्जीनियर। तोहूँ वएह कऽ वएह रहि गेलेँ। बालुकेँ एना कऽ चालनिसँ चालू, ओना कऽ चालू, जेना ओ चाउर दालि हुअए मुदा हम सेहो चाललौं। ठीक छै ठीक छै। तूँ कहै छलेँ जे रोटी बनेबा लेल जेना चालै छी तहिना पुल बनेबा लेल चालू, तखने नीक रोटी सन नीक पुल बनत। ठीक छै ठीक छै। फेर एतेक सीमेन्ट, एतेक बालु, एतेक.. हम कहने रही जे हम तोहर सभ गप मानब, मुदा तखन नेता, दोसर इन्जीनियर, गुण्डा, एकरा सभकेँ कमीशन कतऽ सँ देबै? तोरा कहलासँ बालु चालऽ लगलौं आ कमीशन बन्द कऽ देलिऐ। हमर तँ किछु नै भेल मुदा तोहर बदली भऽ गेलौ, तोहर दरमाहा बन्न भऽ गेलौ। बच्चा सभक नाम स्कूलसँ कटाबऽ पड़लौ, गाम पठाबऽ पड़लौ बच्चा सभकेँ। हम कहने रहियौ तोरा, जे बालु चालब, एतेक सीमेन्ट, एतेक बालु, सभ निअमसँ देबै। हमरा की? इलाकाक पुल, सड़क… जतेक मजगूत रहतै ततेक ने नीक। हमरो लेल नीके। मुदा हमरा बूझल छल जे तोहर बदली भऽ जेतौ। चीफ इन्जीनियर, नेताक दहिना हाथ.. पहिने हमरे कहने रहए तोरा रोलरक नीचाँमे पिचड़ा कऽ दैले.. बइमान चीफ इन्जीनियर। देख, पहिने हमरो होइ छल जे तोहूँ ओकरे सभ जेकाँ छेँ, अपन रेट बढ़ाबैले ई सभ कऽ रहल छेँ। मुदा बादमे हम देखलौं जे नै, तूँ अलग छेँ। मुदा हम की करू? हम अपन बच्चाक नाम स्कूलसँ नै कटबा सकै छी। मुदा जौँ तोरा सन चीफ इन्जीनियर आबि जाए.... कहियो से दिन आबए... तखन हम फेरसँ बालु चालब शुरू करब आ वएह चालल बालु, एत्ते बालु एत्ते सीमेन्टमे मिलाएब। एत्ते बालु, एत्ते सीमेन्ट, सभटा ओहिना जेना अहाँ तूँ कहै छलेँ। मुदा जखन तोरा सन कियो आबए तखने किने। ताधरि तँ... (अभियन्ता आ ठिकेदारक प्रस्थान। लागल जेना फ्रीज लोककेँ अभियन्ता आ ठिकेदारक गपक विषयमे बुझल नै भेलै जेना ई सभ आभाषी छल। दुनूटा लोक फ्रीज स्थितिसँ घुरि असथिरसँ डंका बजबऽ लगैए आ तखन मजदूर सभ सेहो फ्रीज स्थितिसँ आपस आबि जाइए आ फेरसँ ठकठुक करऽ लगैए। दुनू लोक डंकाक अबाज आस्ते-आस्ते तेज करऽ लगैए आ फेर ठक-ठुकक अबाज मद्धिम पड़ि जाइए आ डंकाक अबाजक संग पर्दा खसैए।) पल्लव दू (इन्जीनियरिंग कॉलेजक दीक्षान्त समारोह, विद्यार्थी सभ ठाढ़ अछि आ शिक्षक (बा शिक्षिका) भाषण दऽ रहल छथि। अभियन्ता आ अभियन्ताक मित्र सेहो विद्यार्थी सभ मध्य ठाढ़ अछि।दुनू लोक डंकाक संग कोनमे बैसल अछि।) शिक्षक/ शिक्षिका १: अहाँ सभक आइ ऐ इन्जीनियरिंग कॉलेजमे अंतिम दिन अछि। एतुक्का जीवन आ असल जीवनमे बड्ड अन्तर छै। आब अहाँ सभकेँ धूरा-गर्दामे जेबाक अछि। काज करबाक अछि। मोन लगा कऽ काज करबाक अछि। एतेक काज करबाक अछि जे ई खेत सोना उपजाबऽ लागए। लोकक जीवनमे समृद्धि आबि जाए। दिन-राति नै देखबाक अछि। यएह हमर दक्षिणा हएत। ऐ दीक्षान्त समारोहमे अहाँ सभसँ हम यएह आग्रह करै छी। हमर देश, हमर लोक बड्ड मुश्किलसँ स्वतंत्र भेल अछि। मुदा ई स्वतंत्रता मानसिक रूपसँ आबि जाए तखन ने। आर्थिक रूपसँ हम दोसरासँ स्वतंत्र भऽ जाइ, ककरो आगाँ हाथ नै पसारऽ पड़ए, बजबाक स्वतंत्रता तखने आबि सकत। अभियन्ता माने बनेनहार, सर्जक। सड़क बनेनहार, नहर बनेनहार, पुला बनेनहार। अभियन्ता माने जोड़ैबला। ई पुल लोककेँ लोकसँ जोड़त। सड़क सभ बनत। लोकक जीवनमे गति आएत, दौगत जिनगी। नहरि, पोखरिसँ भरल इलाकामे सोना उपजत। (विद्यार्थी सभक करतल ध्वनि।) शिक्षक/ शिक्षिका २:अहाँ सभकेँ बड़का-बड़का काज करबाक अछि। बड़का-बड़का बान्ह बनेबाक अछि। ओहीसँ विकास हेतै, ओहीसँ तेजीसँ विकास हेतै। सगरे विश्वमे अही तरहेँ विकास भेल छै। भारतकेँ स्वतंत्रता भेटल छै, आ ई स्वतंत्रता तखने काएम रहि सकत जखन तेजीसँ विकास हएत। आ तेजीसँ विकास हएत बड़का-बड़का फैक्ट्री आ बड़का-बड़का बान्हसँ। शिक्षक/ शिक्षिका १: ओना तँ हमरा विकासक ओइ बड़का पथसँ मतभिन्नता अछि, कारण बड़का फैक्ट्रीमे हमर लोक मजदूरे बनि कऽ ने रहि जाए, बड़का मजगूत पक्का बान्ह बनबैमे जतेक पाइ चाही तत्ते ऐ देश लग छैहो नै, तखन बड़का कच्ची बान्ह कतेक गामकेँ अपन पेटमे लेतै, ओतेक मजगूत नै रहतै, टुटैत भंगैत रहतै, सदिखन ओकर मरोम्मतिये होइत रहतै। शिक्षक/ शिक्षिका २: मुदा मुजफ्फरपुरक ऐ दीक्षान्त समारोहमे विकासक पथक दिशा नै तय कएल जा सकैए। ओ तँ दिल्ली आ पटनेमे तय हएत। आब…(जोरसँ बजैत) ऐ दीक्षान्त समारोहमे सभसँ बेशी नम्बर लऽ कऽ पास केनिहार छात्रकेँ हम बजबऽ चाहै छियन्हि। (अभियन्ताकेँ हाथक इशारासँ बजबैए आ मेडल पहिराबैए)। (विद्यार्थी सभक करतल ध्वनि। शिक्षक/ शिक्षिकाक प्रस्थान।) अभियन्ताक मित्र: दोस। अभियंत्रणक पढ़ाइमे तँ तूँ बाजी मारि गेल छेँ। आब असल जिनगी शुरू हएत। देखी ओतऽ के बाजी मारैए। अभियन्ता: अभियन्ताक जीत छै जे ओकर बनाएल पुल कतेक मजगूत छै, ओकर बनाएल नहरि आ बान्ह पानिक निकासीमे बाधा तँ नै दै छै। ओ लोकक जिनगी सुखी बना पाबैए आकि नै। काज समयसँ पूर्ण होइ छै आकि नै। ओइ परीक्षामे ककरा कतेक नम्बर अबै छै तहीसँ ओकर जीत-हारि निर्धारित हेतै। अभियन्ताक मित्र: बड़का काजमे कने-मने गलती तँ होइते रहै छै, हेबे करतै। जे कहीं भाइ, हमरा तँ बड़का छहर, बड़का फैक्ट्री, बड़का चिमनी बड्ड नीक लगैए। धुँआक सुगन्ध तँ हमरा बच्चेसँ नीक लगैए, तोरा तँ बुझले छौ। अभियन्ता:आ हमर माएकेँ धुँआसँ खोँखी होइ छै, हमरा धुँआ नीक नै लगैए। तोरा तँ बुझले छौ। अभियन्ताक मित्र:देख भाइ, हमरा आ तोरामे की अन्तर अछि। हम तँ ओइ पथपर आगाँ बढ़ि जाएब जे दिल्ली बा पटना हमरा लेल निर्धारित करत। मजगूत बड़का पक्का बान्ह बनाबैले कहत तँ से बनेबै, कमजोर बड़का कच्चा बान्ह बनाबैले कहत तँ से बनेबै। जे उपरका हाकिम कहत से करबै। अभियन्ता: चाहे ओ नीक हुअए बा खराप। अभियन्ताक मित्र: ऊपरमे बैसल छै तँ कोनो गुण छै तेँ नै बैसल छै। आ गुणी लोक अधला गप किए कहतै? अभियन्ता:तखन एतऽ पढ़ि कऽ, ज्ञान अर्जित कऽ कऽ की फाएदा? अभियन्ताक मित्र:छोड़ भाइ। अभियन्ता:जीत आ हारिमे बड्ड कम अन्तर होइ छै। जीत आ हारिक परिभाषामे सेहो बड्ड अन्तर छै। जे काज हम गलत बुझै छिऐ, जे मार्ग हम गलत बुझै छिऐ ओइ काजकेँ हम कोना करब, ओइ मार्गपर हम कोना बढ़ब। अभियन्ताक मित्र: भाइ, जेना जीत आ हारिक परिभाषा अलग होइ छै तहिना तँ सही आ गलत काज, सही आ गलत मार्गक सेहो अलग-अलग परिभाषा होइत हेतै। अभियन्ता: होइत हेतै ककरो लेल, सही तँ सही रहतै आ गलत गलते रहतै। अभियन्ताक मित्र: देख भाइ। हम तँ सुखितगर परिवारसँ छी, मुदा तूँ तँ साधारण परिवारसँ छेँ। हम तँ कमाइ-धमाइ नै करब, गलत-सलत नै करब तैयो हमर परिवारकेँ फर्क नै पड़तै। मुदा तोरापर तँ पूरा परिवार निर्भर छै, आस लगेने छौ। अभियन्ता: भाइ, ई स्वतंत्रता तँ सभ लेल आएल छै। तोरा लागै छौ जे हम गरीब छी, आ कियो तेहनो छै जे हमरोसँ बेशी गरीब आ लचार अछि। किछु एहनो छै जे तोरासँ बेशी धनीक आ सामर्थ्यवान छै। अभियन्ताक मित्र: जेना.. अभियन्ता: ओ सभ जे सभ आदेश देतै आ तूँ आँखि मूनि कऽ तकर बात मानबेँ। अभियन्ताक मित्र:देखहीं। आब पुरनका जमीन्दारी तँ गेलै। आब जे नबका देश सभ छै ओइमे ओही लोक सभक चलती हेतै जे नवका व्यवस्थामे पैसि पेतै। जे नवका जमीन्दार चुनावमे जीत जेतै, से बचतै, बा जकर बच्चा नवका सरकारमे आगाँ जेतै से बचतै। तकरे धन बचते, तकरे ऐश्वर्य काएम रहतै। अभियन्ता: आ आगाँ बढ़ब माने? अभियन्ताक मित्र: माने सत्ताक ऊपर, सत्ताक सीढ़ीक ऊपर, जतेक ऊपर जे चढ़तै से ततेक पैघ सत्ताबला हेतै। तोरा लग ई मौका आएल छौ आ हमरो लग आएल अछि। मुदा दुनूमे कनी अन्तर सेहो छै। तोरा सत्ता प्राप्त करबाक छौ आ हमरा सत्ता बचेबाक अछि। अभियन्ता:की ओइसँ तूँ तृप्त भऽ जेमे। अभियन्ताक मित्र:से आइ कोना कहियौ? से तँ जिनगीक अन्त कालेमे कहल जा सकैए। अभियन्ता:मुदा जिन्गीक अन्तकालमे जँ तोरा बुझाउ जे ई सभ सत्ता भ्रम रहए, जे असल तृप्ति नै भेटल, तखन? अभियन्ताक मित्र: तखन तखने सोचबै? अखन तँ सएह सोचाएल अछि जे कहलियौ। अभियन्ता: आ तहिया जँ घुरबाक मोन हेतौ तखन कोना घुरबेँ? अभियन्ताक मित्र: चल, पश्चाताप कऽ लेब तहिया। मुदा जँ से तोरा संग हौ? तखन तूँ कोना घुरबेँ? अभियन्ता:सही गलत केना भऽ जेतै भाइ। अभियन्ताक वर्ग: यएह जिद ने तोरा खा जाउ। आइ खुशीक मौका छै, आइ तूँ जीतल छेँ तेँ आइ तोरे गप सही, मुदा आइये धरि। (तखने दुनू लोक डंका बजबऽ लगैए। अभिन्ता, अभियन्ताक मित्र संग सभ विद्यार्थी मंचसँ बहरा जाइए।) (बच्चा ३ जे आब पैघ भऽ गेल अछि आ ठेला चलबैए, प्रवेश करैए।) ठेलाबला: हमर ठेला कियो गुरका कऽ लऽ गेल। (दुनू लोकसँ) ई भीड़ कतऽ गेलै हौ। पैघ पढ़ाइ बला कॉलेज छिऐ, की बदलतै पढ़ि कऽ, देखा चाही। (दुनू लोकसँ) ठेला देखलहक हौ हमर। कियो लऽ गेल गुरका कऽ। (प्रस्थान) पहिल लोक: (दोसर लोकसँ) रौ, ई कोन कॉलेज छै रौ। दोसर लोक:सरकार बनबै छै ई कॉलेज। पहिल लोक:सरकार बनबै छै? दोसर लोक:हँ रौ सरकार बनबै छै। पहिल लोक:मुदा ओ इन्जीनिअर तँ कहै छलै जे ओ सरकार नै बनत। लोके रहत। दोसर लोक:मुदा ओकर संगी की कहै छलै से नै सुनलहीं। पहिल लोक:सुनलिऐ, ओकरा तँ कनी बेसिये हरबड़ी छलै। दोसर लोक:एहेन आनो स्कूल कॉलेज छै रौ, सरकार बनाबैबला। पहिल लोक:ठीके रौ। दोसर लोक:हँ रौ ठीके। पहिल लोक:ओतौ दू तरहक विद्यार्थे तँ नै हेतै रौ? दोसर लोक:सभ ठाम दू तरहक विद्यार्थी रहै छै। एकटा जे सरकार बनि जाइ छै आ दोसर जे लोके बनल रहऽ चाहै छै। पहिल लोक:आ से सरकारोमे रहै छै की? आ लोकमे? दोसर लोक:सरकारोमे लोक रहै छै आ लोकोमे सरकार। पहिल लोक: (ओकरा किछु नै फुराइ छै) एक्के कॉलेज, एक्के स्कूल आ दू तरहक विद्यार्थी? दोसर लोक: सभ स्कूल आ कॉलेजमे दू तरहक मास्टर रहै छौ रौ बूड़ि। दू तरहक विचार घुरमैत रहै छै ओइ स्कूल कॉलेजमे। तरा-उपड़ी.. पहिल लोक:विद्यार्थी सभकेँ तँ घुरमा लागि जाइत हेतै रौ। दोसर लोक:घर-पड़ोसी, सेहो तँ स्कूले छिऐ ने रौ बूड़ि। सेहो असरि करतै की नै। पहिल लोक: (डंकापर एकटा चोट दैए आ फेर सोच लगैए) असरि करतै? (फेर डंकापर एकटा चोट दैए) असरि करबे करतै।(सोचऽ लगैए) देखा चाही की होइ छै। (दोसर लोक डंकापर एकटा चोट दैए। पहिल लोक दोसर दिस ताकऽ लगैए। फेर एकटा चोट पहिल लोक दैए, फेर दोसर लोक डंकापर चोट दैए। आ फेर दुनूक मुँहपर हँसी आ बेरा-बेरी डंकापर चोट दैत डंकाक गति बढ़ऽ लगैए। पर्दा खसैत अछि।) पल्लव तीन (गामक दृश्य। अंगनामे अभियन्ताक बतही माए आ कनियाँ काकी बैसल छथि, आ अभियन्ता ठाढ़ अछि।) कनियाँ काकी: (अभियन्तासँ) आबऽ बाउ, एतऽ बैसऽ। बतही माए: आइ अहाँ ऐ गामक पहिल इन्जीनियर बनि गेलौं। पिता रहितथि तँ कत्ते खुशी होइतथि। कनियाँ काकी:की करबै कनियाँ, मुदा अहाँक बेटा अछि धरि बापे सन जिदियाह। बतही माए: से तँ अछिये। कनियाँ काकी:कियो कतबो भाङठ लगेलकै मुदा पढ़ाइ पूरा केबे केलक। बतही माए: गाममे एकटा एम.एल.ए. भेबो कएल तँ सेहो चण्डाल भऽ गेल। नै जानि कोन अराड़ि ठाढ़ कऽ लेलक। एकटा दसखत कऽ दितए तँ एतेक कष्ट जे हमर बाबूकेँ पढ़ाइमे भेल से नै होइतए। कनियाँ काकी:खाली भोट कालमे मोन रहै छै। तखन कतेक मीठ बोल भऽ जाइ छै यै। बतही माए: आ बादमे लोककेँ कहै छै, की होइ छह तोरे भोटसँ जीतल छी। कनियाँ काकी: से एम.एल.ए.केँ हम सुना एलियनि हेँ। बतही माए:कहिया यै। कनियाँ काकी: से नै बुझलिऐ। बेटाक दुरागमनमे पीअर बच्चा एम.एल.ए.क अंगनामे ओलबा-दोलबा उठा दै गेलै जे कनियाँक कानबला हरा गेलै। सिपहिया गेटे बन्न कऽ देलकै जे जावत कानबला नै भेटतै तावत कियो बाहर नै जा सकैए। मार बाढ़नि। बतही माए:देखू तँ। कनियाँ काकी: आ सुनू ने। फेर कानबला कनियाँक केशमे भेटलै, तखन गेट खोललकै। झाँट बाढ़नि गै दरबारकेँ। मुदा टटीबाकेँ खूब सुनेलिऐ आ तइ लाथे अपन बाउक कागचपर जे पीअर बच्चा दसखत नै केलक सेहो सुना देलिऐ। बतही माए: हमरा बतहिया कहऽ जाइ लागल अछि। आब बुझौ, बतहियेक बेटा ने इन्जीनियर भेलै। अभियन्ता: जे भेलै से आब गुजरि गेलै। गामक लोक पढ़ि जेतै से एम.एल.ए. केँ नै ने सोहेतै। के टहल टिकोरा करतै? लोक आगाँ नै बढ़ए, की ऐ लेल देश स्वतंत्र भेल छै? बतही माए: सभ अपन-अपन काज जतनसँ करए, जान-जी लगा कऽ करए। कनियाँ काकी: की ई गप एम.एल.ए. लऽ नै छै यै? बतहिया कहतै, देखू तँ.. अभियन्ता: काकी, माएकेँ लोक बतहिया कहै छै तँ काल्हि हमरो लोक बतहा कहऽ लागत। तैँ डरि कऽ की हम कर्तव्यक पालन नै करी, बेइमान बनि जाइ? कनियाँ काकी: नै बच्चा, से तँ आब सभ बुझि गेल छै जे कतेक जिदियाह छह तूँ। जान-जी लगा कऽ काज करत, से सभकेँ बुझल छै। (नेपथ्यसँ अबाज- हाकिम आएल अछि कि?) (पैघ भाए प्रवेश करैत अछि।) पैघ भाए- बौआ, दलानपर लोक सभ जुमल अछि। कनी बहार दिस ऐब। अभियन्ता- अच्छा भाइ। (माए आ कनियाँ काकीक प्रस्थान आ लोक सभक आगमन।) दादा:(अभियन्तासँ) हाकिम, आइ कहऽ तोरा की चाही? टोल, गाम, इलाकामे शोर भऽ गेलै। बड़का-बड़का लोक मुँह तकिते रहि गेल। मुदा गामक, इलाकाक पहिल इन्जीनियर अपन गामेक भेल। पहिने हाकिम सभ फिरंगी सभ होइ छलै, ई पीअर बच्चा, एम.एल.ए., ई सभ छोटका जमीन्दार छल, बड़का जमीन्दार सभ एकरा सन-सन जमीन्दारकेँ जखन मोन जोकही पोखरिमे भरि-भरि राति ठाढ़ कऽ दै छलै। ई हमर हाकिमक कागचपर दसखत नै केलक! भोट दऽ कऽ जितबै जाइ गेलिऐ, जे गामक, इलाकाक कल्याण करत, मुदा केलक किछु नै। आब तँ पाँच साल ओकरो पुरि जेतै, आब देखबै छिऐ। पटना विधानसभामे एक्को बेर नै बाजल इलाकाक कल्याणक लेल। लाला: हइ दादा, से नै कहक। एक बेर बाजल रहए पटना विधासभामे ओ। (व्यंग्यसँ नकल करैत बजैत) हुजूर, हमर खेत नील गाय चरि जाइए, से ओकरा मारै लेल, डरबै लेल बन्दूकक लाइसेंस देल जाए। (सभ ठहक्का लगबैए।) बाउ: हौ लाला। ओहो जमाना छलै, खतम भेलै। कहियो देहसँ बलगर लोकक चलती छलै, फेर कुल-खानदानक चलती एलै। आब हाथसँ काज करैबलाक समए आएल छै। पढ़ाइ-लिखाइपर रोक लगेने आब रोक लगतै हौ? बिलट: हौ बाउ। ठीके कहै छह। जे हवा बहल छै हौ से कियो रोकि देतै हौ। बाउ: हौ बिलट। प्रयास तँ केबे ने केलकै रोकबाक। मुदा हमर इन्जीनियर हाकिम बड्ड जिद्दी छै हौ। आइ हमर भैयारी जिबैत रहितै तँ देखितहक शान। टोलकेँ माथपर उठा लैतै हौ। गर्द कऽ दैतै हौ। मुदा बापक कमी कक्का सभ पूरा करतै हौ। रौ मीत, बाउ बच्चाक दोकानपर जो आ कहिहैं चारि अढ़ैया चिन्नी दरबज्जापर पठाएत, जल्दी। हमर नाम लिखबा दिहैं। लाला: से नै हेतऽ, हम्मर नाम लिखबा दिहैं रौ। दादा- नै रौ, हम्मर नाम। बिलट- हे, बाउ बच्चा कोनो तोरा सभक टोलक छिअ। हम्मर नाम लिखबा दिहैं रौ छौड़ा। मीत- (एक हाथ मोड़ने) एक-एक अढ़ैया चारू गोटेक नामपर लिखबा देबऽ। (सभ हँसऽ लगैए।) ढोलहो देनहार: नवका इन्जीनियर हाकिम आइसँ गामक बाहरक धारक पुल बनाओत, छोटका पुल। ओकरा सड़कसँ जोड़ल जाएत। सभ अपन-अपन खेतक माँटि जौँ सड़कपर काटि कऽ देबै तँ जे काज साल भरिमे हेबाक से एक मासमे भऽ जाएत। सुनै जाउ, सुनै जाउ....। नवका इन्जीनियर हाकिम आइसँ गामक बाहरक धारक पुल बनाओत, छोटका पुल। (तखने मजदूर सभ कोदारि लऽ कऽ आबि जाइए, चारिटा कोदारि एक गोटेक हाथमे बेशी छै, लाला, दादा, बिलट आ बाउकेँ ओ एक-एकटा कोदारि दऽ दै छै। सभ काल्पनिक रूपसँ माटि उखारऽ लगै जाइए। मीत सभकेँ देखैत इशारा दैत ढोलहो देनहारक संग प्रस्थान करैए। अभियन्ता जेबीसँ इन्ची टेप निकालैए आ नाप-जोख करऽ लगैए।) पल्लव चारि (पटनामे मुख्यमंत्रीक कार्यालय। मुख्यमंत्री कुर्सीपर बैसल छथि आ मुख्य अभियन्ता कल जोड़ि कऽ ठाढ़ छथि।) मुख्यमंत्री- देशकेँ स्वतंत्र भेना कतेक साल भऽ गेल मुदा पटनामे गंगा नदीपर एकोटा पुल नै बनल। बड्ड प्रयास केलापर ऐबेर एकरा लेल फण्डक व्यवस्था भेल अछि। अहाँ संग बैसकी ऐ लेल बजाओल गेल अछि जे एकरा लेल जे टेण्डर देल जाएत तकर छार-भार मुख्य अभियन्ते पर ने रहै छै। अखबारमे विज्ञापन दऽ दियौ मुदा.. (मुख्य अभियन्ताकेँ बजबै छथि आ कानमे किछु फुसफुसा कऽ कहै छथि) ..बुझि गेलिऐ ने। अपन मोनमाफिक लोककेँ एकर ठेका भेटए। आ अहाँ संगे इन्जीनियरिंग कॉलेजसँ कतेक रास विद्यार्थी बहरेला, हुनका सभकेँ आब नीक अनुभव भऽ गेल छन्हि। ओइमे सँ ढङक अभियन्ता सभकेँ आनू जे अपन काज नीक जेकाँ जनैत होथि। मुख्य अभियन्ता: हँ, से तँ करैए पड़त। नै तँ ऐ ठिकेदार सभपर लगाम केना कसल हएत। (मुख्य अभियन्ताक प्रस्थान।) मुख्यमंत्री: (दर्शक दिस ताकि) ई गंगा ब्रिज विकासक गति बढ़ा देत। लोक जे शिथिल भऽ बैसल अछि, आवाजाही करऽ लागत। लोकक दिमाग आवाजाहीसँ खुजतै। (नेपथ्यसँ तालीक गरगड़ाहटि) बड्ड मोश्किलसँ स्वतंत्र भेल अछि लोक। मुदा ऐ स्वतंत्रता लेल जतेक बलिदान देबऽ पड़ल अछि, ओइसँ बेशी बलिदान देमए पड़त ओकरा बचेबा लेल। ई धार, ई पुल, सभ बलिदान मंगैत अछि। (मंचक दोसर दिस हाथसँ संकेत करैत) ई गंगा, की बुझाइए बिनु बलिदाने ऐपर पुल बनि सकत? खून चाही एकरा। की दऽ सकब अहाँ? (नेपथ्यसँ- हम सभ खून देब, जतेक चाही खून देब।) मुख्यमंत्री- यएह सुनऽ चाहै छलौं हम। यएह देखऽ चाहै छी। हम अपन भविष्यक पीढ़ी लेल जतेक बलिदान देब, ततेक बेशी सुखी भविष्यक पीढ़ी हएत। (मुख्य अभियन्ता अबैए। मुख्यमंत्री दर्शक दिससँ मुँह घुमा कऽ ओकरा दिस मुँह कऽ लैए।) मुख्य अभियन्ता: गप भऽ गेल अछि। ठिकेदार कमीशन दै लेल तैयार अछि। मुख्यमंत्री: आ लोक बलिदान दै लेल। (दुनूक ठहक्का।) मुख्य अभियन्ता: इन्जीनियरक लिस्ट तैयार कऽ रहल छी। काज करैबला लोक चाही नै तँ ई ठिकेदरबा सभटा लूटि खाएत। मुख्यमंत्री: कमीशन गछि कऽ कोनो खरीद लेने अछि ठिकेदरबा। सवारी कसने रहए पड़त। नै तँ लोकक बलिदान खाली चलि जाएत। (दुनूक ठहक्का) पल्लव पाँच (हैल्मेट पहीर कऽ अभियन्ता आ मुख्य अभियन्ताक प्रवेश, हेल्मेट पहिरने मजदूर सभक प्रस्थान।) अभियन्ता: काजक प्रगतिसँ, काज करबाक तरीकासँ हम खुशी नै छी। नै तँ कोनो प्रकारक सुरक्षाक इन्तजाम अछि आ ने समानक गुणवत्तापर कोनो ध्यान अछि। काज सेहो सभटा दू नम्बरक भऽ रहल अछि। सुरक्षाक इन्तजाम रहितए तँ एतेक मजदूर धारमे खसि कऽ, खधाइमे खसि कऽ मशीनपर खसि कऽ नै मरितए। घाइल मे सँ कतेको केँ बचाओल जा सकै छल। फर्स्ट-ऐड धरिक व्यवस्था नै अछि। पछिला मास तीस टा मजदूर मरि गेल। एक सालमे तीन सए मजदूर मरि गेल। मात्र दस गोटेक परिवारकेँ अनुकम्पाक अनुशंसा भेलै। दोसर सभक फाइल जे हम बढ़ेलौं, तकर की भेलै। मुख्य अभियन्ता:देखू, अहाँ हमरा संगे पढ़ै छलौं। अहाँ काबिल इन्जीनियर छी मुदा अहाँ इन्जीनियरिंग धरि अपनाकेँ सीमित किए नै राखै छी? अहाँ बिना बातक अनुकम्पा आ अनुदानक मुद्दा किए उठा रहल छी। अहाँ बड़-बरनी फाइल बढ़ा देलिऐ, आब आगाँ की भेलै, किए भेलै, ओइसँ अहाँकेँ की मतलब अछि? अभियन्ता: माने? इन्जीनियरिंग माने मजदूर जानक कोनो मोल नै। बोनिहारक जिनगी चलि गेलै मुदा ओकर परिवार? ओकर की हेतै? ओकर भोजन केना चलतै? ओकर बच्चाकेँ माए-बापक स्नेह कोना भेटतै? काल्हि तँ दुनू बोनिहार-बोनिहारिन वर-कनियाँ पुलक पायासँ नीचाँ खसि कऽ मरि गेलै। ओकर बच्चाक भार की सरकारपर नै छै। आ ओ पाइ सरकारक जेबीसँ जेतै, ओइमे अहाँकेँ कोन नोकसान अछि। मुख्य अभियन्ता: देखू। एतेक मृतकक संख्या जँ सोझाँ एतै तँ हमरा आ मुख्यमंत्रीपर आरोप लागत। गधमिसान मचि जेतै। मजदूर सभ ठाम-ठामक अछि, मुदा जँ समाचार बहरेतै तँ पूरा देशमे आगि लागि जेतै। विश्वमे बदनामी हेतै। खूनी मोकदमा चलतै। नै हमहीं बचब, नहिये मुख्यमंत्री बचता। अहाँक चलते ई सभ हेतै। अही दुआरे हम अहाँकेँ अनने रहौं ऐ प्रोजेक्टमे? एतेक पैघ प्रोजेक्टमे दुइयो हजार बलि गंगा मैया नै लेथिन्ह? मुदा ऐ प्रोजेक्टक समाप्तिक बाद जे सम्मान हमरा भेटत ओइमे अहूँक हिस्सा रहत। अभियन्ता: ओही हिस्सासँ डरा रहल छी हम। सम्मानक हिस्साक संग ऐ बलिक बा हत्याक हिस्सा सेहो भेटत, ओकर हिस्सा नै चाहै छी हम। मुख्य अभियन्ता: अहाँ जे करऽ चाहै छी ओइसँ विकास रुकत। अभियन्ता: कोन विकास। कोन मोलपर हएत ई विकास। आ कतेक दिनक लेल अछि ई विकास। मुख्य अभियन्ता: दुनियाँमे सभ ठाम अहिना विकास भेल छै। अभियन्ता: तेँ ऐ पुलक मरोम्मति उद्घाटन भेलासँ पहिनहियेसँ हेबऽ लागल छै। तेहेन मजगूत अछि ई विकास। मुख्य अभियन्ता: (कने जोरसँ) दुनियाँमे सभ ठाम अहिना विकास भेल छै। अभियन्ता: तेँ लोक कहऽ लागल अछि जे अंग्रेजक पुल ठाढ़े छै आ स्वतंत्र भारतक पुल बनैसँ पहिनहिये टूटि रहल छै! मुख्य अभियन्ता: (जोरसँ) दुनियाँमे सभ ठाम अहिना विकास भेल छै। अभियन्ता: तखन तँ लोक बाजऽ लागत जे अंग्रेजेक राज नीक रहै। मुख्य अभियन्ता: बाजऽ दियौ। अभियन्ता: लोक कहत जे सभटा पाइ अभियन्ता खा गेलै। मुख्य अभियन्ता: बाजऽ दियौ। अभियन्ता की अपन जेबीमे राखत, एतै खर्चा करत। बरखा भारतेमे हेतै इंग्लैण्डमे नै। अभियन्ता: इन्जीनियरिंगक अलाबे अर्थशास्त्रक सेहो अहाँ अध्ययन केने छी । पोवर्टी एण्ड अनब्रिटिश रूल ऑफ इण्डिया- दादाभाइ नौरोजी। ड्रेन ऑफ वेल्थक सिद्धान्त। दादाभाइ सोचनहियो नै हेता जे स्वतंत्र भारतक अभियन्ता लेल ओ ई सिद्धान्त देने छथि। मुख्य अभियन्ता: माने अहाँक अलाबे सभ गलत छै? अभियन्ता: नै, हमरा तँ लगैए जे हमरा अलाबे सभ सही छै। मुदा तखन छोट-छोट चीजकेँ पैघ किए बना रहल छी? मुख्य अभियन्ता: अहाँ जकरा छोट गप कहै छी, बुझै छी, से छोट नै छै। अभियन्ता: अहाँक हाथमे शक्ति अछि। मुख्यमंत्री धरि अहाँक मुट्ठीमे छथि। बदली कऽ दिअ हमर। मुख्य अभियन्ता: बदली नै कऽ सकै छी। लोक अहाँक संग अछि। मजदूर अहाँक संग अछि। चुनाव आबैबला छै। मुख्यमंत्रीक आदेश छन्हि, अहाँक बदली हम नै कऽ सकै छी। अभियन्ता: तखन? मुख्य अभियन्ता: अहाँक कोनो गप हम नै मानि सकै छी। अभियन्ता: तखन? मुख्य अभियन्ता: तखन देखै छी, बुझब तँ अहाँ नहिये। पल्लव छह (मुख्यमंत्री आ मुख्य अभियन्ता बैसल छथि) मुख्य मंत्री: काजकेँ डिस्टर्ब कऽ रहल अछि। प्रगतिक विरोधी अछि। एहेन लोक सभकेँ की कहू। मुख्य अभियन्ता: बदली कऽ दियौ। चुनावमे देरी छै। लोक बिसरि जाएत। मुख्यमंत्री: लोक तँ बिसरि जाएत मुदा विपक्षी पार्टी गप खोधत। एकरा तँ मोन होइए गोली मरबा दिऐ। मुख्य अभियन्ता: एहेन गलती जुनि करब। भगत सिंह बनि जाएत। मुख्यमंत्री: कोना भगत सिंह बनि जाएत? आब अंग्रेजक शासन थोड़बे छै। प्रगति विरोधी अछि ई इन्जीनियर। आतंकवादी बना देबै। मुख्य अभियन्ता: आतंकवादी नै बना सकै छिऐ। सरकारी कर्मचारी छी, इन्जीनियर छी। पब्लिक थोड़बे छी जे आतंकवादी बना देबै। मुख्यमंत्री: करप्शन चार्जमे फँसा दियौ। छापा मरबा दियौ। मुख्य अभियन्ता: दू नम्बर पाइ लैते नै अछि, छापामे खाट टा घरमे भेटत। मुख्यमंत्री: कोनो तँ कमी हेतै। से ताकू। मुख्य अभियन्ता: जिदियाह अछि, यएह कमी छै। मुख्यमंत्री: तखन मरबाइए दै छिऐ। कोनो कमी नै छै तँ जीबि कऽ की करत? मुख्य अभियन्ता: एहेन गलती जुनि करब। महात्मा गाँधी बनि जाएत। जीजस क्राइस्ट बनि जाएत। मुख्यमंत्री: कमी ताकू। अहाँ संगे तँ ओ शुरूसँ पढ़ल अछि। ओकरा नै मारऽ चाहै छी तँ ओकरामे कमी ताकू। आ कमी नै ताकि सकै छी मारि नै सकै छी तखन की करू। आत्महत्या करबा दियौ? मुख्य अभियन्ता: आत्महत्या करैबला जीब नै अछि ओ। जिदियाह अछि। मुख्यमंत्री: तँ ओकरा मरबा कऽ आत्महत्या केलक से हल्ला कऽ दियौ। मुख्य अभियन्ता: ई गप कियो कियो नै मानत। सभ यएह कहत जे हत्या भेलै। मुख्यमंत्री: तखन? मुख्य अभियन्ता: ओकरा मरऽ पड़तै। ओकर हत्या हेतै। मुख्यमंत्री: आ से नै हत्या लगबाक चाही आ नहिये आत्महत्या, तखन तँ ओकर बुढारी तक रुकऽ पड़त। मुख्य अभियन्ता: (क्रूर हँसी हँसैत) नहिये ओ हत्या हत्या लगतै आ नहिये आत्महत्या। ओ दुर्घटना लगतै। दुर्घटना… ऐ स्वतंत्र देशमे पब्लिककेँ आतंकवादी बना कऽ मारल जेतै आ ऐ तरहक लोककेँ दुर्घटनामे। मुख्यमंत्री: (क्रूर हँसी हँसैत) धऽ दियौ तखन रोलरक निच्चाँमे। मुदा ई समुच्चा घटना एकदम दुर्घटना लगबाक चाही, लोक जँ बुझि गेल जे मारल गेल छै तँ ठीके अनेरे ओ हीरो बनि जाएत। मुख्य अभियन्ता: बहुत दुख हएत हमरा ओकर मृत्युसँ। हमरे संग पढ़ै छल। बड्ड काबिल इन्जीनियर छल। (पर्दा) पल्लव सात (लाश राखल छै, दूटा बच्चा आ इन्जीनियरक विधवा हिचुकि रहल अछि।) बतही माए: छोड़ि गेल...हौ देब। बतहीक बेटा बतहा। (लाश उघाड़ि कऽ देखैत बेहोश भऽ खसि पड़ैए।) बाउ-भैयारी गेल। पहलमान कक्काक रहैत भातिज पिचड़ा भेल पड़ल अछि। हौ भैयारी, की जवाब देबऽ तोरा हौ। दादा- कहै जाइ छै जे दुर्घटना छिऐ। दुर्घटनामे एना कऽ पिचड़ा होइ छै। रोलर तँ ओनाहियो अस्थिरसँ चलै छै। लाला-आइ धरि सुनने छलहक रोलरसँ पिचा कऽ कियो मरल होइ, रोलरसँ दुर्घटना होइ छै हौ। बिलट-ककरा बले छाती फुलेबै हौ, ककरा कहबै संघर्ष करै लेल। के करतै मेहनति हौ, के करतै कानूनक पालन। मीत-के सत्य बजतै हौ, मुदा नै बजबै तँ हाकिम की कहत हौ बिलट काका। नै संघर्ष करबै तँ हाकिम की कहतै हौ। नै मेहनति करबै तँ, नै कानूनक पालन करबै तँ, तँ कोना फुलेबै हाकिमपर छाती हौ। पैघ भाए: केहेन चण्डाल भऽ गेल। पैघ भाए जिबिते छै, आ छोटका छोड़ि गेल। बतहा.. चाटी उठबैले चन्ना गाछी चलि जाइ छल।हौ, ई पृथ्वी छिऐ, एतऽ बाहरक शक्ति नै आबै छै। एतुक्के लोकक हाथमे छै नीक आ अधला। बेसी अधले छै तँ अधले नै बनल भेलऽ? पृथ्वी, अकास ओहिना ठाढ़ छै। ई अन्याय देखियो कऽ भूकम्प नै एलै, अन्हर बिहाड़ि नै एलै। दुनियाँ अहिना चलैत रहतै। (जेना अन्हर-बिहाड़ि आएल छै, सभ हाथपर मुँह लऽ लैत अछि।) (बच्चा ३ जे आब मजदूर बनि गेल अछि धरफड़ा कऽ प्रवेश करैत अछि। आँखि कारी आ नोराएल आ कपड़ा लत्ता फाटल छै।) मजदूर: नोकरी लेल गेलौं। ठेला चलबैत थाकि गेलौं। नोकरी लेल ठकि-फुसिया कऽ लै जाइ गेल। भदोही। (भदोही नाम अबिते कूही भऽ जाइए, थरथड़ाइत कानैत स्वरमे बजैए) काज रुकिते लोहाक छड़सँ मारै छल। एक टाइम खेनाइ। आँखिमे निन्न आएल आकि थापड़। स्वतंत्र देश। स्वतंत्र स्कूल। स्वतंत्र कॉलेज। (पैघ भाएसँ) की भेलै हौ। मरि गेलै। पैघ भाए: मारि देलकै। मजदूर: मारि देलकै बा मरि गेलै, जान तँ निकलिये गेलै ने हौ। किए मारलकै? पैघ भाए: गंगा पुल, बलि लेलकै ई गंगा पुल। मजदूर: ढोलहो पीटै छलै, मजदूर चाही, मजदूर चाही। गंगा पुलक मजदूरे बनि जइतौं, अनेरे भदोही गेलौं, से मोनमे हुअए मुदा आब तँ। पैघ भाए: भने चलि गेलऽ भदोही, नै तँ मजदूर सभक ढेर बलि चढ़ल छै। मरि जइतह। आ तकर विरोध ई इन्जीनियर करितै आ ओहो पिचड़ा भऽ जइतै। मजदूर: मुदा भदोही सँ जे हमरा सभकेँ छोड़ेलक? पैघ भाए: ओहो पिचड़ा भऽ गेल हेतै। मजदूर: पिचड़ा भऽ गेल हेतै। जाए दैह, जाए दैह भदोही। जौं नै पिचड़ा भेल हेतै तँ बचेबै ओकरा। (मजदूरक प्रस्थान। फेर आगमन।) मजदूर: कनी पुल देखितिऐ। कनी पटना देखितिऐ। जाए दैह, जाए दैह भदोही। जौं नै पिचड़ा भेल हेतै तँ बचेबै ओकरा। (पर्दा) पल्लव आठ (एक्के पोथीक ढेर रास प्रति लोकार्पण लेल राखल अछि। किताब मुख्य अभियन्ता द्वारा लिखल छै आ मुख्य मंत्री एकरा रिलीज कऽ रहल छथि। कोनमे डंका राखल अछि आ दुनू लोक ठाढ़ छथि।) मुख्यमंत्री: हमरा खुशी अछि। (विश्राम) हमरा खुशी अछि जे बत्तीस सालक सरकारी सेवाक उपरान्त “गंगा ब्रिज”, ई पोथी मुख्य अभियन्ता मात्र लिखि सकै छथि। कवर नीक, पन्ना नीक, छपाइ नीक। एक-एक पाँती निष्पक्ष। कोनो इतिहासकार ऐपर आँखि मुनि कऽ विश्वास कऽ सकै छथि। लिखितम्, लिखितकेँ काटि सकत? गंगा ब्रिजक जे मूल भावना छलै, माने लोककेँ लोकसँ जोड़नाइ, ओकरा मुख्य अभियन्ता पूरा केलन्हि। आब नै हमहीं मंत्री छी, आ ईहो रिटायर भऽ गेल छथि। मुदा गंगा ब्रिज ठाढ़ अछि, मुदा गंगामे आब पानिये कम भऽ गेल अछि। ठीक छै, ई ब्रिज हिल रहल छै, जर्जर भऽ गेल छै। मुदा आइबला तकनीक तखन कहाँ रहै। नबका मुख्यमंत्री अही गंगाब्रिजक बगलमे दोसर गंगा ब्रिज बनेबाक घोषणा कऽ देलनि अछि। दुनियाँमे कोन चीज अजर-अमर छै। ऐ पोथी “गंगा ब्रिज”क लेखककेँ हम नीकसँ, व्यक्तिगत रूपेँ चिन्है छियन्हि। हमरे मुख्यमंत्रित्व कालमे ई मुख्य अभियन्ता रहथि। अपन ईमानदारी लेल जानल जाइत रहथि। (मुख्य अभियन्ता हाथ जोड़ि मुस्की दै छथि।) हिनके निर्देशनमे ई पुला बनलै। ठीक छै, ठाक छै। (विश्राम) ठीक छै जे ई पुला किछु दिनमे टूटि जेतै आ बगलेमे नव पुल ठाढ़ भऽ जेतै। मुदा ओइ टुटल पुलकेँ ई पोथी “गंगा ब्रिज” इतिहासमे अमर कऽ देतै। ऐ पोथीमे हमरो चर्चा मुख्य अभियन्ता केने छथि (मुस्की दैत) किछु बेशिये बड़ाइ कऽ देने छथि। मुदा हम तँ जनसेवक छी, जनताक सेवा लेल हम जे किछु केलौं तकर वर्णनक कोनो खगता नै छल, ओ तँ हमर कर्तव्य छल। (विश्राम) फेरसँ मुख्य अभियन्ताकेँ अपन कर्मठ जीवन, ईमानदार चरित्र लेल एकबेर बधाइ दै छियन्हि। मुख्य अभियन्ता: मुख्यमंत्री जी हमर मेन्टर रहथि। हिनका लेल हमरा हृदैसँ श्रद्धा अछि। ऐ पोथीमे किछु किछु गोटे द्वारा कएल किछु अशोभनीय घटनाकेँ छोड़ि देल गेल अछि। इतिहास घृणा पसारबाक माध्यम ने बनि जाए तैँ। प्रकृतिमे बदलाव एलै, धार सुखा गेल छै, ई सभ आ आर किछु चीज, जे तकनीकी मुद्दा छै, ऐ पुलपर असरि केलकै। नवका पुल जाधरि बनतै, ताधरि पुरनका पुल चलिते रहतै। आ ई पोथी पुरनका पुलकेँ अमर कऽ देतै। ओकर पायासँ लऽ कऽ अन्तिम पुल धरिक फोटो ब्लैक एण्ड ह्वाइट आ रंगीनमे ऐ पोथीमे छै। (विश्राम) ईमानदारी तँ हेबाके चाही। (मुस्की दैत) मुख्यमंत्रीजी हमरा अनेरे लज्जित कऽ रहल छथि। जँ ईमानदारी रहै तैँ ने ई पुल एतबो दिन टिकलै। ऐ पोथीमे तीसे गोटेक नाम परिशिष्टमे देलाछि जे ऐ पुल निर्माणमे अपन बलि देलन्हि। हुनके लोकनिक स्मृतिमे ई पोथी समर्पित अछि। एकटा लोक: (डंकापर चोट दैत) आ … (मजदूर धरफड़ा कऽ प्रवेश करैए।) मजदूर: कतेकोकेँ मारि देल गेलै, तकर विवरण कतऽ भेटत। मुख्य मंत्री: (मुस्की दैत) धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद। दोसर लोक: (डंकापर चोट दैत) मनुक्खक बलि देनिहार लोकक बलि गंगा मैया मांगि रहल छथि, तेँ ने सुखाएल जा रहल छथि। मुख्य अभियन्ता: (मुस्की दैत) धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद। (ढोलहो देनहारक प्रवेश) ढोलहो देनहार: सुनू-सुनू, सुनै जाउ। गंगा ब्रिजपर मजदूरक जरूरी छै। एक दिसका रस्ता बन्न कऽ कए दोसर दिसका रिपेयर चलि रहल छै। मजदूर: (डंकापर चोट दैत) हौ, जहियासँ ऐ पुलक उद्घाटन भेल छै तहियेसँ रिपेयरक ठक-ठुक शुरू भऽ गेल छै। ढोलहो देनहार: सुनै जाउ, सुनै जाउ। (मजदूर सभ ठक-ठुक कऽ रहल अछि, कोनो आँकड़ पाथर स्टेजक पाछाँ अन्हारमे फेकैत अछि। कोनो मजदूर जय गंगे बाजि उठैत अछि।) दोसर लोक: (डंकापर चोट दैत) आ… मजदूर: कियो भदोहीसँ मजदूरकेँ आजाद कऽ जाइ छै। कियो गंगा पुलक सोझाँ पिचड़ा भऽ जाइ छै। यएह सभ असल जुल्मी छै। (हाक्रोश करैत) यएह सभ असल जुल्मी छै हौ, असल जुल्मी। अरे ओइ इन्जीनियर सन लोक आबि कऽ आशा दिया जाइ छै। नै तँ कहिया ने परिवर्तन आबि जइतै। लोक परिवर्तन आनि दैतै हौ। (हाक्रोश करैत) असल जुल्मी छै इन्जीनियर सन लोक आबि कऽ आशा दिया जाइ छै। मुख्य अभियन्ता: (मुस्की दैत) धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद। मुख्य मंत्री: (मुस्की दैत) धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद। (पटाक्षेप।) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.रिपोर्ट- पूनम मण्डल- महा वि‍द्यालय सांस्‍कृति‍क कार्यक्रम-2013 २.संवाद-सुमित आनन्द- शोध-पत्रिका मैथिली केर लोकार्पण 1 रिपोर्ट- पूनम मण्डल महा वि‍द्यालय सांस्‍कृति‍क कार्यक्रम-2013 एकांकी- तामक तमघैल- नाटककार- जगदीश प्रसाद मण्‍डल ि‍नर्देशक- हेम नारायण साहु। सह ि‍नर्देशक- कपि‍लेश्वर साहु। मंच उद्घोषक- उमेश मण्‍डल। नृत्‍य ि‍नर्देशन- रामवि‍लास साहु। तबला वादक- श्री प्रमोद कुमारी साह। नाल वादक- अशोक जी एवं पि‍न्‍टूजी। ऑगेन वादक- जीबछ कुमार छोटू। हारमोनि‍यम वादक- शेखर कुमार। ध्‍वनि‍ विस्‍तारक यंत्र- पवन कुमार मण्‍डल। मंच सज्‍जा- मदन प्रसाद साहु ‘तरूणा टेन्‍ट हाउस।’ वि‍डि‍योग्राफी- अरूण कुमार साहु। कार्यक्रम अध्‍यक्ष- प्रो. जय प्रकाश साहु। कार्यक्रम उपाध्‍यक्ष- मनोज कुमार साहु। अवसर- 64म गंणतंत्र दि‍वस। स्‍थान- अशर्फी दास साहु-समाज इण्‍टर महि‍ला महावि‍द्यालय- ि‍नर्मली (सुपौल) दि‍नांक- 26 जनवरी 2013 कार्यक्रम- गोसाओनि‍ गीत- जय-जय भैरवि‍सँ प्रस्‍तुति- सुश्री अपर्णा कुमारी भाव नृत्‍य- प्रस्‍तुति- सुश्री अपर्णा कुमारी आ ि‍नधि‍ कुमारी। देश भक्‍ति‍ गीत- प्रस्‍तुति- सुश्री सरीता कुमारी। भाव संगीत- सुश्री अपर्णा कुमारी आ नि‍धि‍ कुमारी। नारी शि‍क्षापर आधारि‍त संगीत- प्रस्‍तुति- सुश्री कंचन कुमारी, लाली कुमारी आ नि‍धि‍ कुमारी। देश भक्‍ति‍ गीत- प्रस्‍तुति- सुश्री लाली कुमारी आ लक्ष्‍मी कुमारी। नारी शि‍क्षापर आधारि‍त- बकरी नै चरेबो माए गइ... प्रस्‍तुति‍- सुश्री लक्ष्‍मी कुमारी, कंचन कुमारी। एकांकी ‘तामक तमघैल’ पात्र-परि‍चय केर प्रस्‍तुति- स्‍त्री पात्र- रागि‍नी- भूमि‍कामे सुश्री अपर्णा कुमारी। बलाटबाली- भूमि‍कामे- सुश्री नि‍धि‍ कुमारी। पीपरावाली- भूमि‍कामे- सुश्री नि‍धि‍ कुमारी। अनुराधा- भूमि‍कामे- सुश्री मोनि‍का कुमारी। पुरुष पात्र- रवि‍न्‍द्र- भूमि‍कामे- सुश्री चन्‍दन कुमारी। चन्‍द्रदेव- भूमि‍कामे- खुशबू कुमारी। सुन्नरलाल- भूमि‍कामे- प्रि‍यंका कुमारी। नशा मुक्‍ति‍पर आधारि‍त गीत- सुश्री सोनी कुमारी। नाटकक पहि‍ल दृश्‍यक प्रस्‍तुति- साम्‍प्रदायि‍क एकतापर आधारि‍त समूह गीत- प्रस्‍तुति‍- सुश्री साधना कुमारी, आशा कुमारी, कंचन कुमारी, लाली कुमारी, संजू कुमारी, लक्ष्‍मी कुमारी, सुमन कुमारी आ नीतू कुमारी द्वारा....। नारी शि‍क्षापर आधारि‍त गीत प्रस्‍तुति‍- सुश्री रूबी कुमारी। लोक गाथा- लोक संगीत जट-जटि‍न प्रस्‍तुति‍- सुश्री लक्ष्‍मी कुमारी, साधना कुमारी, नीतू कुमारी, लाली कुमारी, कंचन कुमारी, आशा कुमारी आ संजू कुमारी द्वारा...। तामक तमघैल केर दोसर दृश्‍य प्रस्‍तुति- नारी सशक्‍ति‍करणपर आधारि‍त गीत- प्रस्‍तुति‍- सुश्री कंचन कुमारी आ लाल कुमारी द्वारा....। भाव संगीत- प्रस्‍तुति‍- सुश्री सरीता कुमारी। समूह गीत- देश भक्‍ति‍- प्रस्‍तुति‍- सुश्री लक्ष्‍मी कुमारी, लाली कुमारी, नीतू कुमारी, साधना कुमारी आ आशा कुमारी द्वारा....। तामक तमघैल केर तेसर दृश्‍य- नारी शि‍क्षापर आधारि‍त समूह गीत- प्रस्‍तुति‍- सुश्री साधना कुमारी, आशा कुमारी, कंचन कुमारी आ कवि‍ता कुमारी द्वारा...। देश भक्‍ति‍ गीत- प्रस्‍तुति‍- सुश्री लक्ष्‍मी कुमारी। तामक तमघैल केर अंति‍म दृश्‍यक प्रस्‍तुति- मि‍थि‍लाक प्रसि‍द्ध झरनी गीत- प्रस्‍तुति‍- सुश्री लक्ष्‍मी कुमारी, साधना कुमारी, नीतू कुमारी, लाली कुमारी, कंचन कुमारी, संजू कुमारी आ आशा कुमारी द्वारा...। भाव संगीत- प्रस्‍तुति‍- सुश्री अपर्णा कुमारी, चंदन कुमारी, खुशबू कुमारी, ि‍नशा कुमारी, नि‍धि‍ कुमारी आ मोनि‍का कुमारी द्वारा...। देश भक्‍ति‍ गीत- प्रस्‍तुति‍- सुश्री अपर्णा कुमारी आ साधना कुमारी द्वारा...। अंतमे, पारि‍तोषि‍क वि‍तरन सत्र मंचासि‍न महानुभाव- श्री जगदीश प्रसाद मण्‍डल, राजदेव मण्‍डल, रामवि‍लास साहु, प्रो. जय प्रकाश साहु, श्री मनोज कुमार साहु, श्री हेम नारायण साहु, श्री कपि‍लेश्वर साहु आ श्री भागवत साहु। 2 संवाद-सुमित आनन्द शोध-पत्रिका मैथिली केर लोकार्पण शोध-पत्रिकाक लगातार आठ अंकक प्रकाशन एकटा महत्वपूर्ण गप्प थिक। ऐसँ भाषा साहित्यक विकास हएत। ई गप्प ल. ना. मिथिला विश्वविद्यालयक कुलपति डॉ. समरेन्द्र प्रताप सिंह कहलनि। ओ ऐ सराहनीय कार्यक हेतु विभागाध्यक्षा डॉ. वीणा ठाकुर एवं अन्य विभागीय शिक्षक लोकनिकेँ धन्यवाद देलनि। ऐ अवसरपर प्रति कुलपति डॉ. ध्रुव कुमार कहलनि जे मैथिलीक विकासेसँ मिथिलाक विकास हएत। ऐ हेतु सभकेँ गम्भीरतासँ डटल रहए पड़त। वित्तीय परामर्शी सी. आर. डीगवाल कहलनि जे शोध-पत्रिकासँ भाषा साहित्यक विकासक संग ओकरा नव दिशा सेहो भेटैत छैक। ऐ अवसरपर डॉ. सुरेश्वर झा चिंता व्यक्त कएलनि जे सामान्यतया लेखक लोकनि अपन प्रकाशित सामग्री शोध-पत्रिकाकेँ दए दैत छथि से नीक बात नै। ओ लोकनि नव लेखन करथु  ओतहि डॉ. भीमनाथ झा शोध-पत्रिकाक चयनित रचनाकेँ पुस्तकाकार करबापर बल देलनि संगहि ऐमे डॉ. रामदेव झा सन विद्वानक शब्दकोषकेँ संकलित करबाक हेतु प्रसन्नता व्यक्त कएलनि। ऐ अवसरपर मिथिला आवाजक सी. ई. ओ. श्री अजित कुमार आजाद शोध-पत्रिकाक प्रकाशनपर प्रसन्नता व्यक्त करैत मिथिला आवाजक हेतु रचनाकार लोकनिसँ सहयोगक बात सेहो कहलनि। कार्यक्रममे विचार व्यक्त कएनिहार अन्य वक्ता लोकनि छलाह डॉ. धीरेन्द्रनाथ मिश्र, डॉ. शशिनाथ झा, डॉ. रमाकान्त मिश्र, डॉ. मित्रनाथ झा एवं डॉ. कृष्णचन्द्र झा मयंक। ऐ कार्यक्रममे उपस्थित अन्य प्रमुख व्यक्ति सभ छलाह- डॉ. वैद्यनाथ चौधरी वैजू, डॉ. फूलचन्द्र मिश्र रमण, डॉ. नीता झा, डॉ. रमेश झा, श्री अमलेन्दु शेखर पाठक, डॉ. विभूति चन्द्र झा इत्यादि। कार्यक्रमक अध्यक्षता, स्वागत भाषण एवं अध्यक्षीय भाषण विश्वविद्यालय मैथिली विभागक अध्यक्षा डॉ.  वीणा ठाकुर कएलनि तथा मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन ऐ विभागक प्राचार्य डॉ. रमण झा कएलनि। अमृृता, अर्चना एवं शीतल केर समवेत मंगलाचरणसँ प्रारम्भ भेल कार्यक्रममे श्री सुमित आनन्द स्वागत गीत प्रस्तुत कएलनि। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। ई० सत्य नारायण झा, ग्रा० -पिलखवाड़,मधुबनी

स्मरण आइ एकटा पुरान फोटोक एल्बम भेटल |जिज्ञासुबस उलटाकय देखय लगलौ \तीन चारिटा फोटो एहन भेटल जेकरा देखि स्मृति पटल पर एखनो ओ दृश्य उपस्थित भ’ गेल |मोतीलाल नेहरु रीजिनल  इंजिनियरिंग कओलेज ,इलाहाबाद मे पढ़ैत रही |हम सभ मैथिल विद्यार्थी मिलिकय कओलेज मे मैथिली साहित्य परिषदक स्थापना केने रही | मास मे दु बेर नियमितरूप सं बैसक होयत छलैक आ  बैसकीक विवरण मिथिला मिहिर मे  छपबाक लेल पटना पठा देल जाइत छलैक आ मिथिला मिहिर मे सबटा विवरण छपैत छलैक |हमरा लोकनि मिथिला मिहिर कओलेज मे मंगबैत छलौ |कओलेज मे ओना चारिटा शिक्षक मैथिल छलाह मुदा नियमित बैसक मे भाग लैत छलाह तत्कालीन इलेक्ट्रोनिक्सक  प्रोफ़ेसर डा० बी० डी० चौधरी ,जे प्रायः  ओहि कओलेजक एखन  वर्तमान डायरेक्टर छथि |चौधरी जी नियमित बैसक मे भाग लेथि आ हमरा सभ क’ मार्गदर्शन सेहो करथि \परिषदक हम अध्यक्ष रही | परिषद नीक जकाँ चलि रहल छल |परिषद ततेक बढ़िया चलैत छल जे कतेक ननमैथिल बिहारी छात्र संस्था सं जुरय लगलाह आ  आयोजन सभ  मे भाग लैत छलाह |मैथिली छोडि कोनो दोसर भाषाक प्रयोग नहि कएल जाइत छलैक फलस्वरूप बहुत ननमैथिल सभ मैथिली छिट फुट बाजय लगलाह | मैथिली भाषाक रीढ़ प्रो० डा० श्री जयकांत मिश्र ओहि समय इलाहाबाद विश्वविद्यालय मे अंग्रेजीक  बरिष्ठ शिक्षक छलाह |मैथिली भाषाक कर्ता धरता ,साहित्य अकादमीक मैथिली भाषाक प्रतिनिधि |डाक्टर मिश्रक मैथिली प्रेम आ हुनक काज जग जाहिर छल |मैथिली भाषा कोना आगा बढ़त ताहि लेल ओ अपन सभ शक्ति लगा देने छलाह |हम हुनकर ख्याति  बहुत पहिने सं जनैत छलौ |डा० मिश्र अखिल भारतीय मैथिली साहित्य परिषदक अध्यक्ष छलाह |तै जखन इलाहाबाद मे नाम लिखायल त’ मैथिली लेल एकटा ललक छल |इलाहाबाद डा० मिश्रक नगरी छनि ,तैं मैथिली मे बहुत किछु जनबाक ,सिखबाक सुअवसर प्राप्त होयत ?सत्य पुछी त’  एहि नगरी मे मैथिलक  एकटा खास प्रतिष्ठा छलैक |मैथिल क’ एहिठाम बहुत इज्जत सं देखल जाइत छलैक |जखन ओहि नगर मे पहुचलौ त’ मैथिल त’ भेटथि मुदा मैथिली नहि भेटय |कोनो खास एक्टिभिटी नहि देखियैक |आश्चर्य लागे ?अपना मोन नहि माने जे एहि नगरी में मैथिलीक कोनो एक्टिभिटी नहि ?नव लोक एबं नव छात्र रहने कतौ नीक सं संपर्क नहि होयत छल मुदा जहिना जहिना समय बितैत गेलैक आ हमरा सबहक परिषद जहिना नीक जकाँ स्थापित भ; गेल ,धीरे धीरे संपर्को बढ़य लागल, तहन एतबा बुझबा मे भांगट नहि रहल जे एहि ठाम मैथिली साहित्यक काज त’ जरुर होयछ मुदा मैथिलक संगठन बहुत कमजोर छैक |एहिठाम मैथिल संगठन मृत प्राय छैक | जखन हमरा ई बात मोन मे दृढ़ भ’ गेल त’ हम एकटा लेख लिखलौ |लेख क’ शीर्षक छलैक ‘मैथिलीक दुर्दशा आ प्रयाग “|लेखक आशय यैह रहैक जे प्रयाग मे मैथिलक कोनो संगठन नहि छैक |एहिठामक मैथिली मरणासन अवस्था मे छैक | लेख मिथिला मिहिर क’ भेज देलियैक |मिथिला मिहिर में लेख अक्षरशः छपलैक |ओहि समय मे हमहू त’ छात्रे रही तै संगठन क’ विषय मे ओतेक ज्ञान नहि छल ,तै ई बात नहि बुझि सकलियैक जे ई लेख सं किनका दुःख हेतनि | एकदिन क’ बात छैक |भोरे भोर लगभग ५बजे  रूमक दरवाजा खटखटेबाकक अवाज सुनबा मे आयल |नींद टूटि गेल |सोचल कोनो संगी होयत |इंजीनियरिंग कओलेज मे छात्र लोकनि राति मे देर तक जगैत छथि कारण अगिला दिनक काज रातिये मे करय परैत छैक |भोर मे ८.३० सं क्लास प्रारम्भ भ’ जाइत छलैक  |तै बर अनमनस्कक संग उठलौ आ दरवाजा खोलि देलियै | आश्चर्य सं आँखिक पुतली उपरे उठल रहि गेल |एक महानुभाव धोती पहिरने ,पायर मे कपड़ाक जुत्ता आ मौजा आ उपर सं ओभरकोट आ माथ मे मोफलर बन्हने |हमरा आश्चर्यचकित देखि ओ पुछलनि ,आप सत्य नारायण झा हैं ?हम अपन मुड़ी सहमति मे डोला देलियैन |ओ महानुभाव मैथिली मे बजलाह ,हमर नाम थीक प्रो० डा० जयकांत मिश्र ,इलाहाबाद विश्वविद्यालय |किछु क्षणक लेल हम विस्फारित नेत्र सं हुनका दिस तकैत रहलौ मुदा तुरत प्रकृतस्थ होयत गोर लगलियनि आ कुर्सी दय बैसय लेल आग्रह केलियनि |वास्तव मे हमरा खुशीक ठेकान नहि छल |एतबे मोन मे आबे,  सामने जे बैसल छथि ओ विश्वविद्यालयक वरिष्ठ प्रोफ़ेसर आ मैथिलीक योद्धा डा० श्री जयकांत मिश्र छथि |हम अगल बगल सं कइएक संगी सभ क’ बजा लेलियैक |६-७ गोटा हमरा रूम मे पहुँच गेलाह | डा० मिश्र हमरा पुछलनि जे मिथिला मिहिर मे अहीं “मैथिलीक दुर्दशा आ प्रयाग”नामक आलेख लिखल अछि|  मिथिला मिहिर  कोटक जेबी सं निकालि देखेलनि |हम कहलियैन ,जी हमही लिखने छी |ओ सीधा प्रश्न पुछलनि ,”आहाँ मैथिली क’ बिषय मे की जनैत छियैक ,प्रयाग में किनका किनका जनैत छियैक ?हमरा बुझा गेल जे मामला किछु टेढ़ छैक तै हम चूपे रहलौ |ओहुना मैथिलीक भीष्म पितामह लग हमर औकाते की छल ?जे मैथिली भाषाक इतिहास पर डी०फ़िल० केने छलाह ,हुनका लग हमरा सन तुच्छ लोक जेकरा वास्तव मे मैथिलीक इतिहासक कोनो अध्ययन नहि छलै ,की बजितै ?ओहुना आइ काल्हिक युवक जकाँ हमर समय मुहफट नहि छल ,जे हमही सभ सं बेसी काविल छी |ओहन उदभट विद्वान लग हम की जिरह करितौ ?ओ कहलनि चुप रहने काज नहि चलत ?,आहाँ सं गलती भेल अछि |आहाँ माफीनामा लिखि मिथिला मिहिर  के भेजू |हम कहलियैन ,सर ,हम त’ मैथिली भाषा द’ नहि लिखल अछि |हमर स्पस्ट लेख मैथिल संगठन सं सम्बंधित अछि ,जे वास्तव मे संगठित नहि छैक \जखन संगठने नहि तखन भाषा ,समाज आ क्षेत्रक उत्थान कोना हेतैक ? ओ कहलनि संगठन लेल काज करब ?हम कहलियैन ,निश्चय काज करब |कहलनि माफी नामा नहि लिखब ?हम कहलियैन ,हम अपनेक विश्वविद्यालयक छात्र छी ,हमरा सं जौं भूल भ’ गेल होय त’ माफ कएल जाय |कहलनि ,अच्छा ,ठीक छैक |मुदा आहाँ अपना टीमक संग अगिला रवि दिन गंगा नाथ झा रिसर्च संस्थान मे  ४बजे साझ मे भेट करू |चलू ,आब आहाँ सबहक संग प्रयाग मे एकटा सशक्त संगठन तैयार करी |ओ चलि गेलाह | हमरा सभहक देह मे एकटा नव संचार जन्म लेलक |अगिला रबि क’ हम ५-६संगीक संग रिसर्च संस्थान पहुचलउ |ओ ओतहि रहथि |ओहिठाम आओर लोक सभ रहथि मुदा मुख्य छलाह डा० किशोर नाथ झा |ओहिठाम संगठन पर चर्चा भेलैक आ संगहि एकटा कमिटीक गठन कएल गेलैक |आब हम सभ पुरा शहर हरेक रबि क’ घुमय  लगलौ |हम ओहुना हुनका आबास पर जाय लगलौ |हमरा बहुत अंतरंगता भ’ गेल |मैथिलीक इतिहास भूगोल सभ हुनका मुहें सुनी |कहियो कहियो मैथिलीक पुस्तक सेहो हुनका सं ली आ पढ़ी |एहि तरहे संगठन सं लोक सभ जुरय लागल |बहुत दिनक बाद एकटा बैठक मे निर्णय भेल जे विद्यापति पर्व समारोह मनायल जाय ,जाहि सं दुटा बात होयत |पहिल मैथिल सभ क’ एक सूत्र मे जोड़ल जायत आ दोसर  संगठन कतेक मजबूत भेल तेकरो आकलन भ’ सकतैक | विद्यापति पर्व सफल हुए ताहि मे हम सभ जी जानि सं जुटि गेलौ |एहि काज लेल पुरा शहर क’ भ्रमण पुनः कएल गेलैक |डा० मिश्र अपनहु बेसी काल हमरा सबहक संग घुमैत छलाह |एक एक लोक सं संपर्क कएल गेलैक |इंजिनियरिंग कओलेज ,एग्री कलचर कओलेज ,कुलभास्कर आश्रम कओलेज ,मेडिकल कओलेज ,युनिभर्सिटी ,केनटोमेंट एरिया ,वमरौली एयर फ़ोर्स तथा रेलबेक संग नगर क’ कइएक मुहल्लाक हम सभ कतेको बेर घुमलौ |नीक संख्या मे लोक उपस्थित होयबाक सम्भावनाक अनुमान लगायल गेल |सभ दिन घूमी आ साँझ मे डाक्टर साहेब क’ रिपोर्ट दैत छलियैन |ओ कतेक खुशी होयथि तेकर वर्णन नहि  क’  सकैत छी |एक मैथिल क’ दोसर सं खुब संपर्क भ’ गेलैक |आब विद्यापति समारोहक रूप रेखा तैयार होमय लगलैक |निर्णय भेलैक जे उदघाटन कर्ता हास्य सम्राट श्री हरिमोहन झा जी ,मुख्य अतिथि कवि वर श्री राम कुमार वर्मा केर निमंत्रण पठायल जाय |स्वागताध्यक्ष डा० श्री एस० एन० सिन्हा ,एच० ओ० डी० ,इंजिनियरिंग कओलेज क’ बनायल गेल |महासचिव हमरा बनायल गेल ,सचिव श्री सुरेश चन्द्र झा ,हमर प्रिय संगी,  संगहि  कार्यकारणीक सदस्य सभ बहुत गोटे  रहथि |ओहि समय क’ तमाम कलाकार ,कवि सभ क’ निमंत्रण पठायल गेल |ओहि समय क’ मिथिलाक लोक प्रिय जोड़ी रविन्द्र –महिंद्र क’ आमंत्रित कएल गेल आ ई लोकनि आयलो रहथि |निमंत्रित सबहक रहबाक ब्यबस्था इंजिनियरिंग कओलेज मे कएल गेल रहैक |सांस्कृतिक कार्यक्रम मे गीतनादक अलाबा एकांकी नाटक सेहो राखल गेल रहैक |नाटक रहैक “ उपनयनाक भोज” जे विशुद्ध हास्य नाटक छलैक |नाटक मे हम   ब्राह्मण बनल रही ,जमींदार बनल रहथि हमर प्रिय सहपाठी पुरुषोत्तम झा जी  ,टूनटूनमा ,जमीन्दारक नौकर बनल रहथि श्री हीरा कान्त झा ,अन्य कलाकार युनिभर्सिटी क’ रहथि | निर्धारित दिन क’ विद्यापति पर्वक कार्यक्रम प्रारम्भ भेलैक |अपूर्व सफलता भेटलैक |अथाह जन समूह उपस्थित छल |नाटक सभ कार्यक्रम  सं बेसी सफल भेलैक |नाटकक कथानक पूर्ण रूपे हास्य छलैक |’बहुरी झाक बेटा क’ उपनयन छलनि |समूचा गाम क’ नोत रहैक मुदा धोखा सं ब्राह्मण क’ नोत छुटि गेलनि |समूचा गाम खुब कच्ररमकुट क’ भोज  खयलक मुदा ब्राह्मण भुखले रहि गेलाह |आब ब्राह्मण सोचलनि जे एहन तिकरम लगाबी जे हुनको नोत भेटनि |ओ बहुरी झाक एकटा कुटुम्बक घोड़ा चोरा क’ कतौ जंगल मे नुका देलखिन्ह |घोड़ा ताकल गेल मुदा नहि भेटलैक |ब्राह्मण अपन पत्नी द्वारा प्रचार करबा देलखिन जे ब्राह्मण बहुत पैघ गुनी छथि ,ओ नह  पर काजर लगा चोर क’ पकरि लैत छथिन |अपने चोरायल घोड़ा क’ तंत्र बल सं कोना क’ ताकि दैत छथिन आ कोना फेर सं नोत परैत छनि ,यैह नाटकक मुख्य कथानक छलैक | हमरा सब जखन जखन नाटक क’ अभ्यास करी ,डा० साहेब ओतहि रहैत छलखिन आ जहाँ त्रुटि भेल तुरत सुधार करथीन |नाटक बढ़िया होबक  चाही , ताहि लेल नीक दिशा निर्देश देथिन |साज श्रृगार करय लेल एकटा बंगाली रंग कर्मी क’ मंगायल गेल रहैक |ओहि मोशायक नाम माया दास रहनि मुदा हम हुनका मेकप सं संतुष्ट नहि रही तै हम अपन मेकप अपने केलौ |हमरा याद अछि हम जहिना स्टेज पर गेलौ ,हमरा देखिये क’ दर्शक भभा क’ हंसय लागल |नाटक अत्यंत सफल भेलैक |लोक हँसैत हँसैत  लोट पोट भ’ गेलैक | नाटक ततेक सफल भेलैक जे हर साल नाटकक मंचन होमय लगलैक |दोसर साल “हथ टुट्टा कुर्सी “आ हिचकीक टोटमा “क’ मंचन भेलैक |बहुत दिन तक डा० जयकांत मिश्रजी सं सम्बन्ध रहल मुदा राउरकेला स्टील प्लांट मे नौकरी करबाक बाद धीरे धीरे संपर्क कम होयत गेल आ बाद मे लगभग संपर्क खतम भ’ गेल | एखनो इलाहाबादक स्मरण भ’ जाइत अछि |इलाहाबाद हमरा लेल सभ सं पैघ गुरु घराना अछि |आइ १९७२ ई० मे मनायल गेल विद्यापति पर्व समारोहक किछु फोटो एल्बम मे देखबाक सुअवसर भेटल आ स्मृतिपटल पर सभटा चल चित्र जकाँ उभरि आयल |कतेक सुखद दिन छल ओ | ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदानन्द झा ‘मनु’ ग्राम पोस्ट- हरिपुर डीहटोल, मधुबनी दूटा विहनि कथा- जुग-जुग जीबए/ समय चक्र १.जुग-जुग जीबए...

“एखन ओ कतए अछि, कोना अछि, की करैत अछि, हमरा किछु पता नै, बस एतबेए बुझल अछि जे आइ ओकर जन्म दिन छैक |” पचपन बर्खक, उज्जर सारीमे लपटल बूढ़ बिधबा माएक दिमागक ई गप्प | एककेँ बाद एक खोल हुनक इआदक केथरीसँ निकैल-निकैल कए इन्द्रधनुषी आकाशमे हिलकोर मारि रहल छल | बैसल, हुनक सामने माटिक एकचूल्हीयापर चढ़ल भातक हाँड़ीसँ बरकैकेँ खड़-खड़-खड़केँ अबाज आबि रहल छल | भात जड़ि कए कोयला भऽ गेल रहति जँ चेराक आँच अपने जड़ैत-जड़ैत चूल्हासँ निकैल कए बाहर नहि जड़ए लगितै | “पन्द्रह बर्ख पहिने कहि गेल दिल्ली जाइ छी, खूब पाइ कमाएब | नीक घर बनाएब | तोरा नीक नीक सारी कीन कऽ आनि देबौ | बाबूक लेल सुन्नर साईकिल कीनब | मुदा ! सभ बिसैर गेल | शुरू-शुरूमे दू-तिन मासपर चिठ्ठीयो आबेए, छह महिना बरखपर किछु पाइयो आबेए मुदा बादमे सभ बन्द | कोनो खोज खबरे नै | ओकर गेलाक छह बरखक बाद बलचनमा मुँहे सुनलहुँ जे ओ दिल्ली बाली मेमसँ बियाह कए लेलक | आर कोनो समाद नाहि | बापोकेँ मुइला आइ पाँच बरख भऽ गेलन्हि, ओइहोमे नहि आएल | ओकरा तँ बापक दिया बुझलो हेतै की नै---- | आइ ओकर जन्म दिन छैक, लऽगमे रहैत तँ बड्ड रास आशीर्वाद दैतियैक मुदा दुरे बड्ड अछि | जतए अछि खुश रहेए.... जुग-जुग जीवेए... हमर लाल |”   

२.समय चक्र 

किशुनक विशाल ड्राइंग रूम । तीन बीएचके फ्लेटमे आलीशान २५० वर्गफूटक हॉल नूमा ड्राइंग रूम ओहिमे ४८ इंचक सोनीक एलसीडी  टीवी लागल । डीस टीवी, म्यूजिक प्लेयर, फर्सपर जड़ीदार लाल रंगक विदेशी  क़ालीन । दवाल सभपर मनभावन मधुबनी पेंटिंग घरक सोभामे चारि चान लगाबैत । मोट- मोट गद्दाक बनल मखमली सोफा सेट, ओहिपर किशुनक मामा-मामी ओकर वेसबरीसँ बाट जोहैत, जे कखन ओ आएत आ ओकरासँ दूटा गप्प कए अपन समस्याक समाधन करी । हुनक दुनू प्राणीक  दू घंटाक प्रतीक्षा बाद किशुन, बोगला सन उज्जर चमचमाइत  बरका कारसँ आएल । घरक डोरवेल बजेलक घर खुजल । भीतर प्रवेश कएलक । भीतर पएर धरैत देरी ओकर नजैर अपन मामा- मामीपर परलैक । तुरन्त आगू बढ़ि हुनकर दुनू पएर छुबि आशीर्वाद लेलक । हाल समाचार पुछैत अपनो एकटा सोफापर बैसैत - "कएखन एलीऐ" । मामी - "इहे करीब दू घंटा भएले" । किशुन अप्पन कनियाँकेँ आवाज़ दैत - "यै, सुनैछीयै ! किछु चाह पानि नास्ता देलियैन्हेकी" । मामा - "ओसभ भए गेलै, बस अहाँसँ किछु जरूरी गप्प करैक  छल" । किशुन - "हाँ हाँ कहु ने, हमर सोभाग्य जे अपनेक किछु सेबाक मोंका भेटत" । मामा कनखीसँ इसारा कए मामीक दिस देखलाह, आ ओकर बाद मामी - " बौआ ! अहाँ तँ सभटा बुझिते छियै जे मामाक नोकरीक आइ- काल्हि की दशा छनि । कएखनो छनि तँ कएखनो नहि । रहलो उत्तर ई सात- आठ हजार रुपैया महिनाक नोकरीसँ की है छैक ...... (कनी काल चूप, आगू  सोचैत ) अहाँकेँ तँ बुझले अछि, बरुण आइ आइ टीक प्रवेश परीक्षा पास कए लेलक । आब ओकर एडमिशनकेँ आ किताब आदी लेल दू लाख रुपैया चाहीऐ । हिनका अपना लग तँ एको रुपैया नहि छनि, आ अहाँ तँ बुझिते छियै दियाद बाद कएकराकेँ दै छैक । बहुत आशा लए कए अहाँ लग एलहुँहेँ , अहाँ किछु रुपैयाक व्यवस्था कए देबै तँ छौड़ाक जिनगी बनि जेतै" ।   सभ चूप्प । पिन ड्राप सैलेन्श । किशुन अपन आँखिसँ चश्मा निकालि दुनू आँखिक कोन कए सभसँ नूका कए पोछ्लक । कियो ओकर आँखिक कोनसँ खसैत नोरकेँ नहि देखने हेतै मुदा ओकर दुनू आँखिक कोनसँ नोरक दू दू टा मोती सरैक कए ओकर रुमालमे हड़ा गेलै । पुनः अपन चश्मा पहिरलक आ अपन आँखिक नोरक पाँछाँ करैत बीस बर्ख पाछू चलि गेल । जखन किशुनक माए बाबू आ मामा मामी एके झोपड़पट्टीक एके गलीमे रहैत छला । एक दिन ! महिनाक अन्त तक ओकर बाबूक हाथ खाली भए जेबाक कारण घरमे अन्नक अभाबे ओ अपन माएकेँ कहलापर एहि मामीसँ जा कहने रहनि दू सेर चौर देबएक लेल । मामी चौर तँ देलखिन मुदा ओहिसँ पहिने ठोर चिब्बैत कहने रहथिन - " की बाप पाइ नहि दए क गेलाह, एहिठाम कोन बखाड़ी लागल छैक " । ओ गप्प किशन आइ तक नहि बिसरल । आ ओकर आँखिक नोरक कारण इहे गप्प छल । ओहि  गप्पक कारणे आइ ओ झोपरपट्टीसँ निकैल एकटा नव दुनियाँमे पएर रखलक । पुनः अपनाकेँ वर्तमानमे आनैत किशन चट्टे अपन कोटक जेबीसँ चैक बुक निकालि, ओहिपर दू लाख रुपैया भरि मामाक दिस बढ़ेलक । मामा चैक लैत - "बौआ अहाँक ई उपकार हम कहियो नहि बिसरब, एखन तँ नहि चारि वर्खक बाद वरुणक नोकरी लगलापर सभसँ पहिने अहींक पाइ वापस करत" । किशन - "की मामा अहुँ लज्जित करै छी ई सभ कएकर छैक, की वरुण हमर भाइ नहि अछि । ई हमरा दिससँ एकटा छोट भेंट अछि । एकर चिंता अहाँ नहि करब । ***** ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ। ३. पद्य ३.१.१.जितेन्द्र ‘जितु’२.रामवि‍लास साहुक दूटा कवि‍ता- पुसक रात/ केना कहब भारत महान ३.शि‍व कुमार झा “टि‍ल्‍लू”-कवि‍ता- पुरीक यात्रा ३.२.अमित मिश्र- जीवन एहिना चलैत रहै छै/  जागू/ मित्र/ समयक संग/ नारीक रूप ३.३.१.शिव कुमार यादव-गजल १-४ २.जगदानन्द झा ‘मनु’ गजल १-४ ३.४.१.आशीष अनचिन्हार गजल १-२ २.सुमित मिश्र  गजल १-३ ३.५.कामिनी कामायनी- आधुनिक   स्त्रीगण ३.६.१.राजदेव मण्‍डलक दू गोट कवि‍ता २.जगदीश प्रसाद मण्‍डलक तीनटा गीत ३.७.बाल मुकुन्द पाठक- गजल१-५ ३.८.१.बिन्देश्वर ठाकुर "नेपाली"-प्रेमक फल/ पिया अहाँक यादमे  २. किशन कारीगर- मनुक्ख बनब कोना? १.जितेन्द्र ‘जितु’२.रामवि‍लास साहुक दूटा कवि‍ता- पुसक रात/ केना कहब भारत महान ३.शि‍व कुमार झा “टि‍ल्‍लू”-कवि‍ता- पुरीक यात्रा १ यथार्थ जितेन्द्र ‘जितु’ यथार्थ शर्मा जी चलि गेलाह घर, परिवार समाजसेवा राजनीति धर्म सभ छोड़िकऽ शून्य अछि घर परिवार स्तब्ध सहकर्मी, सहपाठी आ समाज शुन्यता आ स्तब्धताक बिच पञ्चतत्वमे विलीन विलीन भऽ गेला शर्माजी बड़का आलीसान कोठा चमचमौआ कार नोकर चाकर राजसी ठाठबाठ सभ आइ भतोभंग ई सब अरजबाक लेल की नै केने छल मुनचुन बाबु मुदा किछु नहि अपन दु हाथक चेथराक साग विलीन विलीन भऽ गेलाह पञ्चतत्वमे ओहो ‘सभ जाएत, सभ चलि जाएत एक दिन’ मंगली एतबै रटैत छली आ लोक ओकरा बताहि कहैत छल बतैहिया, सेहो नहि रहलीह सभ मिलि ओकरो दऽ एलै कोसी कात आ विलीन विलीन भऽ गेलि पञ्चतत्वमे ओहो २ रामवि‍लास साहुक दूटा कवि‍ता- पुसक राति‍ पुसक राति‍ जाड़क मारल थरथराइत देह केना बचाएब प्राण। फुइसक घर खोपड़ी सन केना िबताएब पुसक राति‍ घरक टाट-ठाठ झलफाँफी कनकनी हवा छुबैए प्राण घुराड़ी जरा-जरा बचबै छी कहुना प्राण मुदा धि‍या-पुताक केना बचतै प्राण। नार-पुआरक बि‍छौना गोनरि‍क छै ओढ़ना पजरेमे सटि‍ बि‍लाइ दुबकल छै अबगरहमे छै ओकरो जान सबहक मुँहेँ सुनै छी पुसक राति‍केँ फूसि‍ नै बुझि‍यौ कतेकोकेँ लइ छै प्राण माघो मास अगुआएले छै सुनि‍ कऽ करेजा दरकैए केना भेटत ऐसँ त्राण आब लगैए नै बचत प्राण के करत गरीबक कल्‍याण। केना कहब भारत महान जे देशक लेल ति‍याग करैए ओकरे जि‍नगी नरक सन बनल-ए गरीबक दुख कोइ नै बुझैए हाथ रहि‍तो नै छै कोनो काम सुखल खेत नै भेलै धान जि‍नगी बि‍तै छै बैसल मचान तौनी कोपीन पहि‍र जे रहलै गाम-समाजकेँ पकड़ि‍ चललै आफतमे मि‍ल देशकेँ बचैलकै गोली खा देलकै बलि‍दान देश अजाद भैलै मुदा दि‍न-दुखि‍याक दुख कि‍यो ने बटलकै गरीब बनल छै अखनो गुलाम सभ धन सरकारे लेल छै गरीब जनताक हक छि‍नलकै आइ धरि‍ नै भेलै गरीबक उत्‍थान भुखले पेट तेजै छै प्राण जे लहू पसि‍ना सभ दि‍न बहबै छै आगू बढ़ि‍ सीना तानि‍ ओकरे दुख नै सरकार बुझलकै ठेल देलकै नरकमे जानि‍ मरलकेँ मारैत रहलै जानि‍ बूझि‍ बि‍नु लाभ-हानि‍ देशक समस्‍या बढ़ैत जाइए सरकार ओकरा दबबैत जाइए समस्‍या बनल अछि‍ ज्‍वालामुखी समान केना कहब भारत महान। ३ शि‍व कुमार झा “टि‍ल्‍लू” कवि‍ता पुरीक यात्रा जीवन यात्रा थि‍क जैव पथि‍क अजैव दर्शक शरीर शाश्वत नै ई क्षणभंगुर-नाश्वर आत्‍मा मौलि‍क तत्व जइपर पंच रचि‍त- शरीरक कोनो ि‍नयंत्रण नै ऐ अधम शरीरक एक्को क्षणक कोनो गारंटी वा वारंटी नै तँए सदि‍खन अपन पथपर चलैत रहू- चलैत रहू जतेक क्षणक जीवन जतेक दि‍न उगैत सुरुजक दर्शन आनंद उठबैत रहू सभ भगवत कृपा थि‍क बूढ़-बुढ़ानुसक मुखसँ सुनैत छलौं आब देख रहल छी मोबाइल खरीदैत काल एक बरखक वारंटी कार्ड भेटल सोचए लगलौं भगवान हमरा जनमैकाल कि‍अए ने मायकेँ हमरा संग मि‍नटो भरि‍क वारंटी कार्ड देलनि‍...? एकर उत्तर देनि‍हारि‍ माय हमर बौद्धि‍क वि‍काससँ पूर्वहि “अरुप” भऽ गेली मर्त्‍य भुवनमे पठबैबला पर ब्रह्म तँ सहजे ि‍नरंकार छथि‍ केकरासँ पूछब...? ‍अंत कालमे बाबाकेँ खोआ खएबाक सख लगलन्‍हि‍.. जेना दुरगमनि‍याँ कनि‍याँ होथु आश्चर्य... कफ, पि‍त्त आ वायुक त्रि‍वेणी कंठकेँ घेर नेने छल तैयो मुइलाक कोनो जि‍ज्ञासा नै कोनो इच्‍छा नै- केना हएत- कतए जाएब? गरुड़ पुराण आ श्राद्ध समाज स्‍वीकार कऽ रहल मृतात्माकेँ स्‍वर्ग पठा रहल मुदा मरनि‍हार- अचंभि‍त ओकरा केना पता लागए जे ओ कतए जाएत...? सभ अन्‍हारेमे वाण चलबैछ- तँए बेटा-पुतोहुक गारि‍-मारि‍ खाइयो कऽ बाबा जीबए चाहैत छला हुनक यात्रासँ आजुक यात्राक- कोनो तुलना नै बाबाक अंति‍म यात्रासँ पथि‍क सभ जतरा बनौने छल- आजुक यात्रा केकरो पसि‍झा देत प्रस्‍तुत अछि‍ “पुरीक यात्रा”क गाथा कोनो जगन्नाथ परी वा द्वारि‍का पुरी नै हमर सहकर्मी सहधर्मी पुरी पहि‍ने सरुप छल आब अनूपसँ अरूप भऽ गेल अछि‍ की मनुक्ख... एतेक आनंदि‍त रहि‍ सकैत अछि‍...? युवावस्‍थामे ि‍नर्वाणक लगि‍च आबि‍ कऽ जीवन पथक शि‍खर लग नै-नै अधगेरसँ पूर्वहि‍ “स्‍थाय वि‍श्राम अवश्‍य हएत” ई जनैत एतेक शांत मंद मुस्‍कान आब! भ्रम दूर भऽ गेल “आनंद” सि‍नेमा देखैत काल बाबूजी सँ पुछने छलि‍यनि‍ “की ऐ तरहक घटना संभव छैक...?” हम तँ नै देखने छी भऽ सकैछ अहाँ देख लेब! साहि‍त्‍येसँ सि‍नेमा बनल भलहिं ई व्‍यवसायि‍क साहि‍त्‍य अछि‍ परंच साहि‍त्‍यकारक परि‍कल्‍पना सेहो ईह लौकि‍के होइत अछि‍ एकटा साहि‍त्‍यकारक तर्ककेँ तखन तँ काटि‍ देने छलौं... मुदा! आब तँ भ्रम अवश्‍य दूर भऽ गेल तीन-तीन अवोधक पि‍ता “अनूप” अरूप हएत जनैत छल केकरो नै कहलक जीबाक भुभुक्षामे व्‍याधि‍सँ मुक्ति‍क आशमे अपन अर्जित सभटा धन पि‍तृ धर्म आ कंत धर्मक रक्षा हेतु नष्‍ट कऽ देलक जीवाक पि‍आसकेँ बढ़बैत गेल मृत्‍युसँ लड़ैत गेल अपनहि‍मे सि‍मटि‍ दोसर लग हँसैत चलि‍ देलक अंति‍म यात्रामे केकरोसँ यात्रामे केकरोसँ नै कहलक अपन अंर्तव्‍यथा अपन अंत:करणक पथराएल पि‍पासा वा उच्‍छवास अंति‍म आश्चर्य... जेकरासँ अन्नय सि‍नेह करैत छल ओइ अर्द्धांगि‍नीसँ केना नुका लेलक...? हमरो जीवनक तमाम सत्‍यकेँ ओइ सबला- जे आब अवला!! कहि‍ नुका सकल ओकरासँ ओकरे अधि‍कार केना छीन लेलक...? बि‍नु कि‍छु कहने छोड़ि‍ चलि‍ देलक कनैत कोनो गप्‍पकेँ हुनकासँ नै छल नुकबैत अथाह व्‍यथाक इनारमे कनि‍याँकेँ कनैत... की ओ पाथर छल एतेक कठोर तँ पाथरो नै सद्य: ओ छल-हीरा कठोर टीससँ भरल हीरा ऊपरसँ चमकैत रहल कि‍रणक संग हँसैत रहल हारि‍ गेल तँ चलि‍ देलक हँसि‍ते चलि‍ देलक एक बून नोर जौं खसबो कएल तँ अपन जेठकी अबोध कन्‍याकेँ देख वाह रौ साहसी तोहर जबाव नै ऐ अदम्‍य साहसकेँ कोटि‍-कोटि‍ नमन!!! गृहस्‍थ धर्मक एहेन पालन देख “धर्मराज” जौं हएत तँ अवश्‍य लजा गेल हएत ऊपर जा कऽ ओकरा संग-संग आन दैवा सभसँ पूछि‍ तँ लि‍हैं आब तीन-तीन अबोधक संग-संग ऐ अवलाक झाँझ बनल नाह केना ऐ कुटि‍ल अथाह भव सागरमे वि‍चरण करतै...? एहेन अन्‍यायकेँ दैवि‍क चक्र लोक केना कहतै...? ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। अमित मिश्र करियन ,समस्तीपुर मिथिला ,बिहार जीवन एहिना चलैत रहै छै/  जागू/ मित्र/ समयक संग/ नारीक रूप १. जीवन एहिना चलैत रहै छै

कखनो घटाउ आ कखनो जोड़ै छै कखनो गुणा कखनो भाग करै छै कखनो आगू कखनो पाछू घुसकै छै जीवन एहिना सतत चलैत रहै छै

कखनो दुखक भूकंप सुनामी आबै छै कखनो सुखक गमगम फूल बरसै छै कखनो भीड़मे कखनो एकान्त जीबै छै जीवन एहिना सतत चलैत रहै छै

कखनो पिछरै कखनो दौड़ै छै कर्मक पथपर काँट-रोड़ो भेटै छै नदी नाला सब बाधा लाँघै छै जीवन एहिना सतत चलैत रहै छै

किछुए दिनकेँ साँस भेटै छै जे किओ एक्को पल नै रुकै छै घड़ीक सुइया संग जे किओ बढ़ै छै वएह मानव एतऽ अमर रहै छै जे बैसल समय व्यर्थ करै छै वएह मनुख सब दिन कानै छै एहन लोक लेल किओ नै रूकै छै जीवन एहिना सतत चलैत रहै छै

२ जागू

कान्हपर धेने झोरा-झपटा सौँसे माँथ चानन-ठोप्पा हाथ कमण्डल आरो चुट्टा दाढ़ी लटकल कोशो जट्टा नङ-धरङ रगरने भभूत नेने भागै बूझि कऽ भूत टाका-अन्न माँगैथ लऽ रामक नाम पैदल जाथि घर घर सब गाम एहिमे किछु छथि सत्ते भक्त आ किछु छथि ढोंगी ससक्त गलत काज आ अंधविश्वास हुनक खूनमे केने छै वास सब रोगक उपचारक दावा एह भेषमे ई सब छथि गामक बाबा ए .सी घर आ फूलक ओछेनपर धुमन आगरबत्तीक महक  आठो पहर शिष्य मण्डलीमे नर कम बेसी नारी सरकारी वा नीजी लागल पहरेदारी ई छथि सब शहरक बाबा हिनको छै बड पैघ पैघ दाबा सब समस्याक हिनका लग उपचार लाखक-लाख टाका देलापर भेटत साक्षात्कार किओ फेकबेलनि घरसँ बाहर मूर्ति किओ अपनेकेँ बतबै छथि अवतरित देवी अंधविश्वासक हिनको लग हल्ला पढ़ल जनताकेँ मूर्ख बनाबथि खुल्लम खुल्ला

जागू जागू एखनो यौ भाइ बादमे की हएत पछताइ दऽ दिऔ भूखलकेँ दूध-मेवा बाँटि दिऔ गरीबमे सब टाका नाङटकेँ पहिरा दिऔ कपड़ा एकरे दुआसँ शान्त हएत ग्रह-नछतरा तखने करताह भगवानो भलाइ जागू जागू एखनो यौ भाइ

३. मित्र

किछु पुरना मित्र जेकर बस इयादे टा छल बचल बाधक गीत इस्कूलक खेल क्षणमे झगड़ा क्षणमे मेल किछु नीक किछु बेजाए गपशप बाल दिनक खून करै रपरप जेकरे संगे होइ छल साँझ-भोर ओ चन्ना आ हम चकोर मुदा समयक संग सब किछु बदलल सबपर आब टाकाक रंग पोतल सबहक मोन एना बदलि देलक आब देखिते ओ मित्र मुँह फेर लेलक ।

४. समयक संग

नै शेष बचल कोनो उमंग ठमकल सन जिनगीक तरंग कोना कऽ उड़तै मोनक पतंग आशक डोर बीच्चेमे भेल भंग सब ठाम राजनीतिक बड़का जंग अपनौती भैयारी भेल अपंग सालक साल एक्के ठाम सब प्रसंग टूटल छै देशक समाजक विकासक अंग

मुदा सदिखन बदलै छै जीवनक रंग बैसल रहलासँ नै जीतब कोनो जंग छोरू सबहक चिन्ता बनबू अपन एक ढंग अपन विकासक लेल करू अपनेकेँ तंग रूकू नै बढ़ैत रहू सदिखन समयक संग

५. "नारीक रूप" सब दिन देखैत छी सब अखबारक पहिल पन्नापर आइ एतऽ तँ काल्हि ओतऽ छीन लेल गेल नारिक इज्जत डाहि देल गेल कोमल कायाकेँ वा चापि देल गेल घेँट कोनो निसबद रातिमे हाट बजार सब ठाम देखैत छी छेड़छाड़ होइत कोनो नवयौवना संग आ ओहि नवयौवनाक राँगल चामपर आबै छै कने लाजक वा क्रोधक लाली सुरमासँ कारी भेल आँखि आ रंगीन पिपनीपर खीँच जाइ छै गोस्साक चेन्ह संगहि राँगल ठोरसँ निकलैछ मीठ तरंग "की तोरा घरमे बहिन नै छौ?" कहबाक मने रहै छै एक्के टा जे हमर सम्मान कर भऽ सकै यै ,हमरा बहिन नइ होइ भऽ सकै यै ,हम कहियो पति बनबे नै करी तखन नारिक ई दुनू रुपकेँ हम सम्मान नै करब तँ की हम नारिक अपमान करब? नै ।हम एखनो नारिक एकटा रूपकेँ मानै छी जे रुप हमरा जीवन देलक ओ रूप जेकर कोरामे खेलल छी ओ रूप थिक माएक रूप तेँ हम नारिक इज्जत कोनो पत्नी-बहिन रूपमे नै बल्कि अपन जननीक रूपमे करब ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.शिव कुमार यादव-गजल १-४ २.जगदानन्द झा ‘मनु’ गजल १-४ १ जगदानन्द झा ‘मनु’ ग्राम पोस्ट- हरिपुर डीहटोल, मधुबनी गजल - १ भूतलेलहुँ किए एना मित बना लिअ छोड़ि सगरो बहानाकेँ  प्रित लगा लिअ वचन नै देब हम नै किछु मोल एकर आउ चलि संगमे  हमरो अप्पना लिअ काँट पसरल बिछ्ब कहु एतेक कोना फूलकेँ लय कs मोनक संसय हटा लिअ जुनि बुझू आन जगमे सपनोसँ कखनो बूझि अप्पन कनी छू ठोरसँ सटा लिअ रूप सुन्नर अहाँकेँ ई ओहिपर बदरा जीब कोना करेजामे "मनु" बसा लिअ (बहरे - असम, मात्रा क्रम - २१२२-१२२२-२१२२ ) गजल-२ जीवन कखन तक छैक नै बुझलक कियो कखनो करेजक गप्प   नै जनलक कियो भेटल तँ जीवनमे सुखक संगी बहुत देखैत दुखमे आँखि नै तकलक कियो दुखकेँ अपन बेसी बुझै किछु लोक सभ भेलै जँ दोसरकेँ तँ नै सुनलक कियो सदिखन रहल भागैत सभ काजे अपन आनक नोर घुइरो कs नै बिछ्लक कियो जीवन तँ अछि जीवैत 'मनु' सभ एतए मइरो कs जे जीवैत नै बनलक कियो (बहरे- रजज, २२१२ तीन-तीन बेर सभ पांतिमे) गजल-३ जखन खगता सभसँ बेसी तखन ओ मुँह मोड़ि लेलनि जानि आफत छोरि हमरा सुखसँ नाता जोड़ि लेलनि देखि चकमक रंग सभतरि ओहिमे बहि ओ तँ गेली जानि खखड़ी ओ हमर हँसिते करेजा कोड़ि लेलनि बन्द केने हम मनोरथ अप्पन सदिखन चूप रहलहुँ पाञ्च बरखे आबि देख फेर सपना तोड़ि लेलनि दुखसँ अप्पन अधिक दोसरकेँ सुखक चिन्ता कएने आँखि जे फूटै दुनू तैँ एक अप्पन फोड़ि लेलनि चलक सप्पत संग लेलहुँ जीवनक जतराक पथपर मेघ दुखकेँ देखते ओ संग 'मनु'केँ छोड़ि लेलनि (बहरे - रमल, मात्राक्रम- २१२२ चारि-चारि बेर सभ पांतिमे) गजल -४ किए तीर नजरिसँ अहाँकेँ चलैए  हँसी ई तँ घाएल हमरा करैए 

मधुर बाजि खन-खन पएरक पजनियाँ  हमर मोन रहि रहि कए डोलबैए   

छ्लकए हबामे अहाँकेँ खुजल लट  कतेको तँ  दाँतेसँ   आङुर कटैए ससरि जे जए जखन आँचर अहाँकेँ जिला भरि  करेजाक धड़कन रुकैए अहीँकेँ तँ मुँह देखि जीबैत 'मनु' अछि बिना संग नै साँस मिसियो चलैए (बहरे - मुतकारिब, मात्राक्रम -१२२-१२२-१२२-१२२) २ शिव कुमार यादव गजल १ कथिक उसार छै लोकक बैसार छै

जिनगी हमरे छै बोनक उजार छै

लोकक करनी छै तेकरे अचार छै

घरक उठान छै लोकक बिचार छै

धधरा उठल छै आगिक पजार छै

हमरे जड़ान छै राखक पसार छै

"शिकुया" मरल छै तेकरे हेंजार छै

भइया मोने हम बड नीक भौजीक मोने हम बड तीत

भइया सोझाँ हमहीं काबिल भौजीक मोने हम बड बीख

भइया हमर बात मानए भौजीक मोने हम बड हीठ

भइया सँ अछि सबकेँ रीत भौजीकेँ नै सोहाइ बड प्रीत

एक दिन घर सँ भागि गेलौँ भौजीकेँ लगलनि बड नीक

३ सब अछि बनल हीत अहाँके छी हम एकेटा तीत अहाँके

हमरा सँ ऐना किएक बजै छी छी नए हम की मीत अहाँके

पजरामे रहए छी हम तैयो छी नइ घरक भीत अहाँके

किएक कचोटै छी मोन हमर नीक नइ छी ई पीत अहाँके

सर-समाज सँ कात भेलौँ हम तैयो नइ अछि प्रीत अहाँके

एना किएक भसियाइ छी अहाँ "शिकुया" कनए पतीत अहाँके ४ भइया हमर छथि बड कहबैका यौ गामक सभ केओक काज करबैका यौ

गाम-गमाइत खूब नाम चलैत अछि भोजमे चूड़ा-दही केँ बड सुड़बैका यौ थाना-ब्लौकमे सभ केओ जानैत अछि कोट-कचहरी सेहो बड जनबैका यौ मीठ बाजिकऽ सभकेँ हीत बनाबए छै लोक समाजमे संगे-संग रहबैका यौ "शिकुया"क भइया छै बड हितलग्गु सभ केओकेँ नीमन बाट सुझबैका यौ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.आशीष अनचिन्हार गजल १-२ २.सुमित मिश्र  गजल १-३ १ आशीष अनचिन्हार गजल १ हाथ बढ़लै दुन्नू दिससँ डेग उठलै दुन्नू दिससँ थरथराइत देहक भास ठोर सटलै दुन्नू दिससँ कहि रहल ई गर्मी आब आगि लगलै दुन्नू दिससँ लात फेकै छै जनतंत्र लोक फँसलै दुन्नू दिससँ घोघ उठलै साँझे राति चान उगलै दुन्नू दिससँ बान्ह टुटलै एलै पानि लोक भगलै दुन्नू दिससँ दीर्घ-लघु-दीर्घ-दीर्घ + दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-लघु हरेक पाँतिमे २ गजल काशी काबा एक छै सभहँक दाता एक छै मतलब छै काजहिसँ ने खुरपी खाता एक छै धधकै छै स्त्री घरहिमे चुल्हा जाँता एक छै बँचले रहिअह सदति तों. नेता नारा एक छै ई छै दोसर सभ मुदा धरती माता एक छै हरेक पाँतिमे-- दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-लघु-दीर्घ मतला सधुक्करी पाँतिक अनुवाद अछि। २ सुमित मिश्र गजल १ प्रेमक पवन बहै दर्द हेबे करत शीतक समीर तँ सर्द हेबे करत

बाटक दिक नै भुतिया गेलौं संसारमे कि श्वप्नक खजाना गर्द हेबे करत

जखन भाग्यक ठोकर लागत मनुख केँ कर्तव्य-कर्मक पथ फर्द हेबे करत

जँ बीच बजार लुटतै केकरो इज्जत आगू बढ़ि जनानियों मर्द हेबे करत

तोड़ि देलौँ करेजक नस एक झूठ सँ आब अपनो समांग बेदर्द हेबे करत

गामक लोक बसि रहल शहर जाकऽ निज संबंध सुमित फर्द हेबे करत

२ चंचल चलै बसंत बहि आयल हर्षित मोन चिहुँक कहि जागल

हुनकर रूप देख मोन व्याकुल जेना चिड़ैयाँ वाण सहि कऽ घायल

दुख केर देख मनुख किए कानै मयूर घटा कारियो देखि नाचल

अनकर पीड़ देखि खुश होइ छी निज दुख मे मनुख किए कानल

चाँदनी कें संग चान बहरायल "सुमित" प्रेमक छटा देखि पागल

वर्ण-13

बीतल समय नै घुरि कऽ आबै छै सबटा लोक बैस एतबे गाबै छै

समय सँ बड़का नै कोनो खजाना जिनगी मे जीतल जीत हराबै छै

मोल एकर जे बूझि नै सकलनि तँ किए नहुँ-नहुँ नोर बहाबै छै

कपट द्वेष सँ मोन आन्हर अछि आँखि मुनि भाग्य ठोकर पाबै छै

झुलसि दुपहरिया बाट चलै छै थम्हि कऽ मीठगर राग सुनाबै छै

समय संगहि सब दौड़ लगाबै "सुमित"कर्मक फल फरियाबै छै

वर्ण-13 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। कामिनी कामायनी आधुनिक   स्त्रीगण 1 एसगरि ओ चलैत/ निहारैत खेत, पथार, मचान  / आँकैत अपन बल/ झुकौने नहि धड़ / तकैत सीधा / चौकन्ना आँखि स्थिर मुखमंडल/ जाइत अछि स्कूल / खेलाइत अछि  / डोला पाती / गोटरस/ कबड्डी/ खो-खो / टेनिस / बैडमिंटन / आबै छै जोड़ऽ हिसाब / पढ़ै छै विज्ञान / आब नै  ओ छै अज्ञान। 2 दलान पर राखल लालटेम / नै छै खाली बौआ  भाय सभक लेल / जाँत/ चक्की /, गोबर /, गोइठा,/ चूल्ही /, बासन /,छौड़ ,/ नहि डराबे छै आब /करबाक ओकरो छै होम वर्क / जनबाक छै प्रकाश वर्ष / समय आ दूरी पर / बनेबाक छै ढेर रास सवाल । पोखरि सँ भरैत काल डोल, मन करैत छै किल्लोल, की छै आर्कमिडीजक सिद्धांत। आनै छै पेठियासँ बेसाहि कऽ नून/ तेल/ तरकारी/ घरक समान/ करै छै होम वर्क, माएक काज आसान। बेलै छै चकलापर, उनटाबै छै  ताबा परका सोहारी, रटै छै एच टू एस ओ फोर। लगबै छै मइयाक फाटल बेमायमे / मरहम । देखै छथि दादी ,/ पिंजरासँ बहराएल सुगनीकेँ/ ऊपर पसरल ,/  उड़बा लेल /नील आसमान / धिया ने बोझ  /जुड़ाइत  छनि छाती आब । 3 पिकी पाड़ैत छौड़ाकेँ / नोचलक  टीक जखन/ किओ ने दूर छी कहलकै ,/ सब धैलकै  ओकर मान / आबै छै ओकरा मचबए सोर/ देखिकऽ चोर । करै छै निधोक भऽ भाय ,बाबूसँ गप्प / देखै छै टीवी / बुझै छै / कानून /दंड संहिता  / छेड़छाड़ ,बलात्कारी केँ / ताड़ै छै दस लग्गी फराके सँ/ चलै छै झुण्डमे / जेना मृग ,गज / धुक धुकी करेजक ,भगबे छै स्वासक जोरसँ / नाचै मजूर बनि , मुदा ओहिने चौकन्ना। नइ  सुनबै छै किओ आब / फकड़ा सभ ,सोन बराबरि हेबाक/ देखैत छै  सपना ओहो / जीवन सुधारबाक/ सोचै छै वैज्ञानिक, समाजशास्त्रीक धारपर संघर्ष जीवनकेँ आगाँ बढ़ेबाक नाम छै/ तखन ओ किए नै निहारe पूर्ण चान केँ । नव संविधानक प्रस्तावना लए जे बेकल / ओ समाज आइ ओकर भूमिका गढ़ि रहल । साम सँ नै दाम सँ दंड सँ नै भेद सँ/ दीपदान करि रहल बाटकेँ प्रकाशमान। पीठ पर ओकर अछि गार्गी /,मैत्रेयी/,सीताक अतीत / नब जुगक कथा जागृतिक सूर्य भेल / हाथमे रुमाल छै/ तँ दोसरमे मशाल सेहो/ आँखिमे आँखि देने / समयसँ ओ पूछि रहल/ कोन एहेन  विषम  मार्ग / जइ पर हम नै चलि सकब ? 4 संपत्ति ओ नै आब संपत्ति / ओकरो चाहि संपत्ति । खेत मे /पथार मे / मकान मे /दोकान मे / ज्ञात  आ अज्ञात मे / देथिन पिता हिस्सा ओकर / ओहो तँ हुनके तनज़ बुढ़ापेक लाठी ओहो / सेवाक ओहो हकदार / पठौतन्हि नै हुनका/ भयौन ओल्ड होम मे। 5 आदेस लऽ /विदेशमे/ पतिक गृह प्रदेशमे/ आएल अछि देबएले सुख / चाही ओकरो डगरा भरि सुख। प्रताड़णा वा लांछना / कटु /तिक्त वेदना /केँ ताप मे भस्म करि/ तखन ई कोन जिंदगी ? सिनेहकेँ सिनेहसँ/ कर्तव्यकेँ कर्तव्यसँ/ प्रेमकेँ प्रेमसँ/ सींचब तँ बाजत बाँसुरी / कुरुक्षेत्र ने बनए /छत /देवाल सँ घेरल जगह / प्रयास  इहै रहै / सभ ठाम हो रोशनी । नहि वीभत्स रूप हो / वसन्ते वसंत हो सदा / कर्तव्यक अधिकारक  /सूली पर / नहि चढ़ए पड़ैक। संकुचित विचार पर/ पद  प्रहार करि रहल / नब जुगक, नब कुसुम, नब चेतनासँ भरल। बातरसक दर्दसँ/ लोथ बनल सौस लेल/ बेकल बनल ओ ताकि रहल/ बातरसक दबाइ/ ससुरक मोतियाबिंद/ जोहि रहल बाट ओकर/ देखाबक छै सम्पूर्ण खेत खरिहान/ समस्याक जा नहि समाधान/ ताधरि नै ओकरा विराम/ सम्पन्न करब छै  होमवर्क/ एतबै ओकरा भान छै। कॉलेजक प्रांगण हो/ वा  घरसँ फराक कतौ/ चिंतन विशाल छै/ हटेबाक अंधकार छै/ धरती स्वर्ग बनै/ बूनै छै सपना जे/ आधुनिक समाजक रचनामे लागल ओ/ ओकरा कत्तऽ पलखति छै/ सुनबा के आलोचना । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.राजदेव मण्‍डलक दू गोट कवि‍ता २.जगदीश प्रसाद मण्‍डलक तीनटा गीत १ राजदेव मण्‍डलक दूटा कविता- बाबा केर लाठी ठरल हवामे टौआ रहल छी टोले-टोले बौआ रहल छी बाबाक देल घण्‍टी गलामे टाँगने छी गामक मुँहपुरखी हम नै कोनो माँगने छी घण्‍टी टनटनाइते भूकए कुकुड़ लुच्‍चा छौड़ा सभ तकए भुकुर-भुकुर हुनके देल छलै तेल पि‍आओल लाठी दूध-भात खेबाक लेल फूलही बाटी छुच्‍छे बाटी भटकि‍ रहल अछि‍ सूखले भात अटँकि‍ रहल अछि‍ लाठी हाथमे देखते लोक करए सन-सन इशारा करैत बजैत अछि‍ मने-मन “देखि‍यौ देह हाथ सूत सन लगै छै हाथमे बन्‍दूक सन।” मि‍त्र कहैत अछि‍- “नै करू फर-फर तामसे कि‍अए कँपै छी थर-थर छै सभकेँ समानताक अधि‍कार लड़बै तँ उजरि‍ जाएत घर-दुआर नै चलत आब पुरना लाट ओ भऽ गेल कुबाट एकर अछि‍ एकटा काट चलए पड़त आब नवका बाट।” गीतक पूर्व संगीत नै भेल दरस तँ केना हएत परस कहाँ जनलौं अहाँक प्रीत पूर्वमे नै सुनलौं पद्य ध्‍वनि‍ संगीत हे यौ मीत दूरसँ सुनलौं गीत बुझलौं गीतक पूर्व बजै छै संगीत अहि‍ना होइत हेतै नि‍त आब तँ अवधि‍ गेल बि‍त कहाँ भेल हमर जीत पहि‍ने जँ जानि‍तौं एना नै कानि‍तौं आदरसँ अरि‍आइत अानि‍तौं छतीसो व्‍यंजन छानि‍तौं कतए चलि‍ गेलौं भऽ कऽ अनेर नै पाबि‍ रहल छी अहाँक टेर जेना टूटि‍ गेल पुरना घेर फेर जनम भेल एकबेर। २ जगदीश प्रसाद मण्‍डलक तीनटा गीत- गणतंत्र दि‍वस- २०१३क अवसरपर अजादीक उमंग उमकि‍ घाटे-बाट छि‍छि‍या गेलौं। सत्-समुद्र पहाड़ बीच पगे-पग बौआ गेलौं। भाय यौ, घाटे-बाट......। तल मोड़ि‍ तम पताल छुबूधि‍ भऽ छुछि‍या गेलौं। अजादीक उत्‍साह उमंग पाबि‍ दि‍न-राति‍ बौआ गेलौं। भाय यौ, घाटे-बाट......। प्रशान्‍त-शान्‍त लाल-कारी जोर पकड़ि‍ डि‍रि‍या गेलौं। डि‍रियाइत पताल-अकासमे डोह डाबर झाड़ कहेलौं। अजादीक उत्‍साह उमकि‍ घाटे-बाट बौआ गेलौं। भाय यौ, घाटे-बाट......। बोन-बोनैया गीत गाबि‍ बनि‍ शि‍कारी वीन बजेलौं। मोड़ि‍ मनुआ तोड़ि‍ जि‍नगी दि‍ने-देखार बहकि‍ गेलौं। बाटे-घाट भोति‍या गेलौं भाय यौ, घाटे-बाट......। ठाढ़े-ठाढ़ ठि‍ठु ठि‍ठुरि‍ रौद पाबि‍ लू-लुआ गेलौं। बनि‍ बरखा बरसाती बनि‍ तरे-ऊपरे दहा गेलौं। अजादीक उमंग उमकि‍ घाटे-बाट बौआ गेलौं। भाय यौ, घाटे-बाट......। ओल ओड़ि‍...... ओल ओड़ि‍ ओलि‍-ओलि‍ रब-रब, कब-कब गाड़ि‍ देलकै। कन्‍द–केशौर मुँह मुंगबा दऽ दऽ तड़ि‍-तड़ि‍ तड़ुआ बनौलकै। मीत यौ, तड़ि‍-तड़ि‍......। बेधि‍ सि‍र डभ-कुश कुशि‍यार तड़तड़ाइत तर तामि‍ देलकै। उनटा-पुनटा सुखा-अबा मुंगरी मारि‍ सोझ केलकै। मीत यौ, मुंगरी मारि‍......। बेवहार वि‍धि‍ सजि‍ सहजि‍ तर-ऊपरा रंग मढ़ि‍ देलकै। कचे-बचे फल-फूल लटका हवामे उड़ि‍या देलकै। हावामे उड़ि‍या......। हीय चढ़ि‍ हाथ-पएर पसारि‍ नापि‍-नापि‍ मनुख बना देलकै। कंट गुल गुलाब सजि‍-धजि‍ कीच कमल कोखि‍या देलकै। मीत यौ, कीच कमल......। कोसा कोख रगड़ि‍-रगड़ि‍ तानी-वाणी रंग चढ़ौलकै। नख-सि‍ख, सि‍ख-नख रचि‍-बसि‍ नचनी-नाच नचा देलकै। मीत यौ, नचनी-नाच......। नि‍रजन वन...... नि‍रजन वन ि‍नरजल पक्षी गुड़-गृह गुरु गुहारि‍ रहल छै। सतरंगी-बहुरंगी संसारमे अपन पएर पखाड़ि‍ रहल छै। अपन पएर......। सुरूजो एक धरति‍यो एक्के अग-जल हवा सि‍हकि‍ रहल छै। खल-खल खलि‍ खलि‍या टूक-टूक टुकड़ी तोड़ि‍ रहल छै। टूक-टूक टुकड़ी......। जइसन जल-थल जतए सि‍रजन सि‍र ततए रचै छै। मन-तन धधकि‍-धधकि‍ ततए पछ सरि‍ पंछी बनैत रहै छै। नि‍रजन वन......। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बाल मुकुन्द पाठक 1 गजल

आँखि सूतल छै मोन जागल कियै छै गाछ सूखल छै पात लागल कियै छै

भटकि रहलौँ हम नौकरी लेल जुग मेँ भाग भूटल छै आस लागल कियै छै

प्रेम मेँ हुनकर टूटि गेलै करेजा शांत मन तैयोँ आगि लागल कियै छै

गाम रहि रहि केँ याद आबैत रहतै मोन विचलित छै फेर भागल कियै छै

अपन पीड़ा बेसी बुझाएत तैयोँ शीश काटल छै देह लागल कियै छै

राति दिन ई सोचैत बाजै मुकुन्दा नाम ई ओकर आब पागल कियै छै

बहरे - खफीफ ,मात्रा क्रम २१२२-२२१२-२१२२

(2)

गजल

साहीक कांट घटैत गेलै रुप सोहागक बरहैत गेलै तेल आ बाती सठैत गेलै भूख प्रकाशक बरहैत गेलै

लूट काट दंगा फसादसँ समाज एतोँऽ बनल कुलषित लोक जतै कटैत गेलै समाज सुधारक बरहैत गेलै

धर्मक व्यापार करै लोक एतोँऽ ठगै निज भेष बदलि कऽ लोकक आस्था घटैत गेलै काज पंडितक बरहैत गेलै

छैन मातृभूमिक नै कोनो चिँता धन लेल ई नेता बनथि आ मुद्रास्थिति खसैत गेलै गरीबी देशक बरहैत गेलै

लोक एतोँऽ अछि बनल हत्यारा बेटी जानि भूर्ण हत्या करै स्त्रीक संख्या घटैत गेलै आ राशि दहेजक बरहैत गेलै

देखि सिनेमा बढ़ल फैसन देखूँ मिथिला यूरोप बनल संस्कार कियै घटैत गेलै नग्नता देहक बरहैत गेलै

सरल वार्णिक बहर ,वर्ण 22

(3)

गजल

हमरासँ जौँ दूर जाएब अहाँ रहि रहि इयादि आएब अहाँ

सिनेह लेल अहीँके बेकल छी छोड़ि कऽ हमरा कि पाएब अहाँ

खोजि खोजि के तँ पागल बनलौँ बताउ कि कतऽ भेँटाएब अहाँ

किएक लेल एहन प्रेम केलौँ जौँ ई बुझलौँ नै निभाएब अहाँ

बदलि गेलियै अहाँ कोना कऽ यै हमरासँ नै बिसराएब अहाँ

हमरा छोड़ि गेलौँ मुकुन्द संग आब कतेक के फसाँएब अहाँ

सरल वर्णिक बहर ,वर्ण12

(4) गजल 

सुनु अहाँ कियै हमरा सँ दूर गेलौँ यै अहीँक चलतै हम तँ नाको कटेलौँ यै

रुप अहाँक देखिकऽ हम तँ मुग्ध भेलौँ ओहि परसँ कियै ई कनखी चलेलौँ यै

मगन छलौँ अहाँ मेँ काज धाज छोड़िकऽ प्रेम मेँ तँ हे प्रेयसी जग बिसरेलौँ यै

पढ़बाक उमरि छल छलौँ इक्कीस के काँलेज के छोड़िकऽ अहाँमेँ ओझरेलौँ यै

मुकुन्द अछि प्रेमी अहाँकँ सभ जानैये जानसँ बेसी चाहे जे तकरा गंवेलौँ यै

सरल वर्णिक बहर ,वर्ण 15

(5)

गजल

बिना दागक हमर छल ई चान सन मुँह कुकर्मी नोचि लेलक मिल राण सन मुँह

कि सपना देखलौँ आ लुटि गेल जिनगी घटल एहन बनल देखूँ आन सन मुँह

रमल रहियै अपन धुनमेँ आ कि एलै चिबा गेलै हमर सुन्नर पान सन मुँह

बनल नै स्त्री समाजक उपभोग चलते किए तैयो मनुख नोचै चान सन मुँह

हमर सभ लूटि गेलै ईज्जत व चामोँ कि करबै जी कऽ लेने छुछुआन सन मुँह

बहरे-करीब मने  "मफाईलुन - मफाईलुन-फाइलातुन" मात्रा क्रम-1222 - 1222 - 2122 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.बिन्देश्वर ठाकुर "नेपाली"-प्रेमक फल/ पिया अहाँक यादमे  २. किशन कारीगर- मनुक्ख बनब कोना? १ बिन्देश्वर ठाकुर "नेपाली" धनुषा नेपाल , हाल:कतार १ प्रेमक फल 

शीसा फुटल दिल टुटल सकनाचुर भऽ छिड़िया गेल  डोलीमे ओ गेली पिया घर  हाथमे दारु थमा गेल। 

दारुए हमर साथी-संगी  बिनु ओकर सहारा नै  कखनो ठर्रा कखनो प्याक  बिनु ओकर गुजारा नै। 

जिनगी अपन नरक बनेलौं  ओइ लजबिज्जीक प्यारमे  मरणासनमे सास अछि लटकल  ओ मजा करए ससुरालमे। 

प्यार करब पैघ बात नै  निभाएब बड़का बात छै  प्रेमसँ ककरो जीवन सबरल  ककरो जीवनमे घात छै ।

२ पिया अहाँक यादमे 

मेघसन कारी केशपर  गोर गोर गाल यौ  आमक रस सन लाल ओठपर  पिया अहाँके नाम यौ।। 

हम दु जोड़ी संग-संग जियब  गायब प्रेमक गुणगान यौ  मरऽ सँ पहिने आ मरलाक बाद  बस रहब अहाँक गुलाम यौ।। 

हे प्राणेश्वर लौटब कहिया  करब कखन आराम यौ  घाइल दिलके मल्हम अहाँ  दिल अछि अहाँक मकाम यौ।। 

राति-राति भरि निन्द नै आबए  बड जोर झकझोरए याद यौ  बिन अहाँके जिनगी बीतल  अहाँ दिल्ली, अरब, असाम यौ।।

नोर बहैए नयनसँ हमर  राह देखैत सौ बार यौ  अपने भेलहुँ परदेशी बाबु  हम छी एतऽ बेकार यौ।। 

बिनु पानिक मछली बुझु  फुटल अल्मुनियम थाली यौ  बिनु रोहितके जिन्दा लाश  भेल यऽ अहाँक रुपाली यौ।। २ किशन कारीगर आकाशवाणी, दिल्ली मनुक्ख बनब कोना? छीः छीः धूर छीः आ छीः मनुक्ख भ’ मनुक्ख सँ घृणा करैत छी ओही परमेश्वर के बनाउल माटिक मूरत हमहूँ छी अहूँ छी। केकरो देह मे भिरला सँ कियो छुबा ने जाइत अछि आबो संकीर्ण सोच बदलू ई गप अहाँ बुझहब कोना? अहिं कहू के ब्राह्मण के सोल्हकन? के मैथिल के सभ अमैथिल सभ त’ मिथिलाक मैथिल छी आबो सोच बदलू मनुक्ख बनब कोना? अपना स्वार्थ दुआरे अहाँ जाति-पाति के फेरी लगबैत छी मुदा ई गप कहिया बुझहब सभ त’ माँ मिथिले के संतान छी। पाग दोपटा मोर-मुकुट सभटा त’ एक्के रंग रूप छी मिथिलाक लोक मैथिल संस्कार एसकर केकरो बपौती नहि छी। एकटा गप अहाँ करु धियान सभ गोटे मिथिलाक संतान जाति-पातिक रोग दूर भगाउ सभ मिली कए लियअ गारा मिलान। अपने मे झगरा-झांटी बखरा-बांटी एहि सँ किछु भेटल नहि ने? सोचब के फर्क अछि नहि कोनो जादू टोना अहिं कहू आब मनुक्ख बनब कोना? बेमतलब के गप पर यौ मैथिल अहाँ एक दोसरा स’ झगरा करैत छी माए जानकी दुखित भए कानि रहल छथि ई गप किएक नहि अहाँ बुझहैत छी? सामाजिक-आर्थिक विकास लेल काज करु मिथिलाक माटि-पानि उन्नति करत कोना केकरो स’ कोनो भेदभाव नहि करु सप्पत खाउ अहाँ मनुक्ख बनब कोना? ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण १.मूल तेलुगु कविता:पसुपुलेटि गीता; तेलुगुसँ हिंदी अनुवाद:आर.शांता सुंदरी; हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद: विनीत उत्पल (दिल्लीक बलात्कारक घटनापर)- दुमर्जा २. मन्त्रद्रष्टा ऋष्यश्रृङ्ग- हरिशंकर श्रीवास्तव “शलभ"- (हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद विनीत उत्पल) 1 मूल तेलुगु कविता:पसुपुलेटि गीता; तेलुगुसँ हिंदी अनुवाद:  आर.शांता सुंदरी; हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद:विनीत उत्पल (दिल्लीक बलात्कारक घटनापर) दुमर्जा देह भऽ गेल अछि एकटा इतिहास-दोख दूटा ठोढ़, दूटा गाल दूटा स्तन, दूटा जांघ जोड़ा चुहचुही दुइए युगमे एहन जेना जिनगी भऽ गेल खतम जिनगी एत्ते संकीर्ण भऽ गेल जे कनियो टा डोलू तँ उघड़ए लागैत अछि भीतक रहस्य बिनु खुजनहिये ग्राफिती भटरंग हुअए लागैत अछि काल्हि नै जानि केकर बेर अछि? खराप नै मानब, लागए लागल अछि लगमे ठाढ़ सभटा पुरुख जेना जांघक बीच अप्पन भाला लऽ कऽ चलि रहल अछि समुद्र आ अकासकेँ मिला कऽ बुनलापर सेहो ऐ अदौक पाथर-युगक उघारकेँ झपबा लेल हाथ भरि लत्ता नै भेटैत अछि आँखि खुजलेपर तँ बुझाएत जे भोर भऽ गेल जइ अंगमे आँखिये नै ओकरा लेल आन्हरक-अन्हारे आनंद अछि अँतड़ीये टा नै हृदएकेँ सेहो उधेसैत देहमे अन्हार सोझे खन्ती बनैए धँसि जाइए खराप नै मानब, कीड़ीसँ कीड़ीक नाशक आशा करैत मृत्युसँ अमृत मांगैत मालजाल भऽ मालजालक बहिष्कार के करैत अछि? मानवताक भ्रमजालमे सिग्नल सभक बीच बड़का सड़क जखैन बनि जाइत अछि आक्रंदनक गुमकी कान फाड़ैबला प्रश्नक गोली जनमि रहल अछि तँ की भेल? विवेकपर लाठी बजरि रहल अछि फुसियाहींक भरोस, बिकट्ठ गारि नोर पोछि रहल अछि। प्रहरी-दलक पसार नोरबला गैसक मेघ बनि विश्वासपर आच्छादित भऽ रहल अछि। नग्र एकटा मृत्युक ओजार बनि गेल अछि अप्पन आ आस-पड़ोसक घर नव घा बनि औनाए लगैत अछि हमरा दूनू गोटेक अस्तित्व काएम रहबाक हुअए तँ अहाँकेँ हमरामे मनुष्यता बनि झहरऽ पड़त हमरा अहाँमे पैसि मातृत्व बनि बहए पड़त देहक दोखी भेलाक बाद प्राणक हिलकोर मिझा गेलाक बाद चण्ठमे अनूदित भेलाक बाद बालुक पानिक झिल्हरिक बाँझ स्थितिमे प्रवासी भऽ प्रवेश केलाक बाद... माँ सेहो अहाँ लेल एकटा गलत सम्बन्ध बनि कऽ रहि जाएत... खराप नै मानब, आब एतए मुर्दाघरक अलाबे सौरी-घरक कोनो खगता नै! 2 मन्त्रद्रष्टा ऋष्यश्रृङ्ग- हरिशंकर श्रीवास्तव “शलभ"- (हिन्दीसँ मैथिली अनुवाद विनीत उत्पल) ब्राह्मचर्य एवं अध्ययन श्री भागवत दर्शक अनुसार, विभांडक सोचैत छला जे अप्सरा उर्वशीक देखलेसँ हुनकर तेज नष्ट भेल। तइसँ ओ अप्पन नेनाकेँ गलतीयोसँ कोनो स्त्रीक दर्शन नै कराएत। ओकरा विशुद्ध ब्रह्मचारी बनाएब, ई सोचि कऽ ओ अप्पन नेना ऋष्यश्रृंगकेँ आश्रमसँ बाहर नै जाइले दै छल। ओ हुनकासँ तप, अग्निहोत्र कराबैत छल, वेद पढ़ाबैत छल आ पैघ-पैघ ऋषिकेँ छोड़ि कऽ ओकरा केकरोसँ भेँटो नै करऽ दै छल। स्त्रीकेँ तँ ओ अप्पन आश्रमक परिधि धरिमे पएरो नै राखऽ लेल दै छल। कोनो बूढ़ ऋषिक स्त्री सेहो ओतए नै आबि सकैत छल। आबैक गप तँ दूर, ओ अपन नेनाक आगू कोनो स्त्रीक नाम धरि नै लैत छल। ऋष्यश्रृंग जानितो नै छल जे मुनिक अलाबे कोनो अओर स्त्री-पुरुख होइत अछि। ओ नै तँ कोनो नग्र देखने छल आ नहिये नग्रक कोनो वस्तुए।9 ऋष्यश्रृंगक समय अग्नि आ अप्पन तपस्वी पिताक सेवामे बितैत छलै। स्त्रीक अस्तित्वक तँ हुनका पतो नै छलनि। तकर बादो ओ वेदक परगामी विद्वान छल।10 रामायणकार हुनका शक्तिशाली महर्षि कहने छथि। हुनका विषय-सुखक कनियो टा ज्ञान नै छल। ओ अखंड ब्रह्मचारी छल। अप्पन समाजमे एहन मान्यता अछि जे बच्चा सभकेँ विषय-सुखक कनियो ज्ञान नै दियौ तखने ओ पक्का ब्रह्मचारी बनि सकैत अछि। ई विचार प्राकृतिक निअमक विपरीत अछि। ऐ ढोंगसँ जइ दुर्गक रक्षा कएल जाइत अछि, ओ बड़ आसानीसँ शत्रुक हाथ मे चलि जाइत अछि। ऋष्यश्रृंग वृतांत सेहो एहने अछि। हुनकामे काम चेतना सुप्त छल, ओकर संबंधमे रामायणकारक ई टिप्पणी द्रष्टव्य अछि।– “राजन! लोकमे ब्रह्मचर्यक दूटा रूप विख्यात अछि आ ब्रााह्मण सदा ओइ दुनू स्वरूपक वर्णन केने अछि। एक तँ अछि दंड, मेखला आदि धारण रूप बला मुख्य ब्राह्मचर्य आ दोसर अछि ऋतुकालमे स्त्री समागम रूप गौण ब्रह्मचर्य। ऋष्यश्रृंग जेहन महात्मा ऐ दुनू प्रकारक ब्रह्मचर्यक पालन केने हएत।"11 अप्पन विद्वान पिताक कठोर अनुशासन मे रहि कऽ ऋष्यश्रृंग कतेक रास व्यवहारिक ज्ञान सेहो प्राप्त केने छल। कौशिकीक तट पर निवास करबाक कारण एकर जलक समुचित उपयोग आ व्यवस्थामे हुनका विशेषज्ञता प्राप्त छल। आश्रमक चारू कात ओहिना नदीक जल-प्रवाहकेँ व्यवस्थित कऽ ओ रंग-बिरंगक फूल-मूल उपजाबै छल, सेहो पर्याप्त मात्रामे। वाल्मीकि रामायणक बालकांडक “चित्राण्यत्र बहूनिस्र्यमूलानि च फलानि" 10/27 मे उपयुक्त गप रेखांकित अछि। अंग नरेश रोमपाद वृत्तांत ओइ काल रोमपाद अंग प्रदेशक नरेश छल। ओ राजा दशरथक मित्र छल। हुनका कोनो संतान नै छल। हुनकर दुख देखि कऽ दशरथ अप्पन पहिलुक रानी कौशल्याक गर्भसँ उत्पन्न शान्ता नामक पुत्रीकेँ हुनकर पुत्रीक रूपमे दऽ देने छल।12 रोमपाद शान्ताकेँ पुत्रीक रूपमे पाबि नेहाल भऽ गेल छल। ओकर लालन-पालन महाशक्तिशाली अंग नरेशक राजकीय गरिमाक अनुरूप राज प्रासाद मे भेल। राजा रोमपाद ययाति वंशक क्षत्रिय छल। “वंशोमन्मन्तरानि च" कऽ मुताबिक, पुराणमे ऐ वंशक राजाक संबंधमे सूचना अछि। विष्णुपुराण 4/18 क मुताबिक, ययातिक चारिम पुत्र “अनु" केँ तीन पुत्र भेल, समानल, चक्षु आ परमेषु। ई वंश अनुवंश कहैलक। समानलक पुत्र कालानल भेल आ कालानलक सृंजय, संृजयक पुरंजय, पुरंजयक जनमेजय, जनमेजयक महाशाल, महाशालक महामना, महामनाक उशीनर आ तितिक्षु नामक दूटा पुत्र भेल। उशीनरक शिवि, नृग, नर, कृमि आ वर्म नामक पाँचटा पुत्र भेल। ऐ मे शिविक वृषदर्भ, सुवीर, केकय आ मद्रक नामक चारि टा पुत्र भेल। विविक्षुक पुत्र रूशद्रथ भेला। हुनकर हेम, हेमक सुतपा अओर सुतपाकेँ बलि नामक पुत्र भेल। ऐ राजा बलिक रानी सुदेक्षणासँ आन्हर ऋषि दीर्घतमा पाँच पुत्रकेँ जन्म देलक, जे अंग, बंग, कलिंग, पुण्ड्र आ सुहा भेल। राजा बलिमे पुत्र उत्पन्न करबाक क्षमता नै छल। हुनकर प्रथम पुत्र अंगसँ अनपान, अनपान सँ दिविरथ, दिविरथसँ धर्मरथ आ धर्मरथसँ चित्ररथक जन्म भेल। ऐ चित्ररथक दोसर नाम रोमपाद छल। श्रीमदभागवतक अनुसार, वस्तुत: शान्ता महाराज दशरथ आ कौशल्याक पुत्री छल आ अंग नरेश रोमपाद दशरथक सखा छल।13 “भवभूति" सेहो अप्पन “उत्तर रामचरित..." मे ऐ गपक उल्लेख केने अछि। कन्या दशरथो राजा शान्ता नाम व्यजीजनत। अपत्य कृतिका राज्ञे रोमपादाय या ददौ।। उत्तर रामचरित प्रथमांग अपत्य शब्द संतान लेल प्रयुक्त होइत अछि आ कृतक (स्त्रीलिंग कृतिका) केर अर्थ अछि कृत्रिमा। ऐसँ स्पष्ट अछि जे शान्ता राजा रोमपादक कृत्रिम (दत्तक) पुत्री छल। ऋष्यश्रृंगक मालिनी प्रस्थान रामायणमे रोमपादकेँ महाप्रतापी आ बलवान राजा कहल गेल अछि।14 एहन कहल गेल अछि जे ऐ राजाक धर्मक उल्लंघनक कारण हुनकर राज्य मे घोर अनावृष्टि भऽ गेल छल। ऐसँ जनता भयभीत भऽ गेल। मालिनी सेहो गंगा कात अवस्थित छल। अंगमे जल संसाधनक प्रचुरता छल। तकर बादो जलक समुचित उपयोग नै हेबाक कारणसँ अकालक स्थिति आबि गेल छल। राजा ऐ लऽ कऽ बड़ दुखी छल। ओ एकर निवारणक लेल वेदज्ञ पंडितसँ मंत्रणा केलक। सभटा पंडित, सर्वमतसँ अनुशंसा केलक जे महर्षि विभाण्डक पुत्र ऋष्यश्रृंग वेदक पारगामी विद्वान अछि। हुनका कोनो तरहे ऐ राज्यमे बजा कऽ नीकसँ सत्कार कएल जाए आ वैदिक विधिक अनुसार अप्पन कन्या शान्ताक ब्याह कऽ देल जाए। दूरदर्शी राजा रोमपाद सहर्ष ऐ प्रस्तावक अनुमोदन कऽ देलक। मुदा हुनका ऐ गपक चिंता छल जे ऐ शक्ति संपन्न ऋषिकुमारकेँ कोना ओतए आनल जाए? ओ अप्पन मंत्री आ पुरोहितकेँ पठा ऋष्यश्रृंगकेँ सत्कारपूर्वक मालिनी अनबाले चाहै छल। मुदा ऐ दबंग ऋषिक स्वभावकेँ ओ जानैत छला तइसँ ओ राजाकेँ स्पष्ट कहि देलनि जे ओ ऐ ऋषिसँ डरैत अछि, तइसँ हुनका ई कार्य नै देल जाए। तकर बादो मंत्रीगण सोचि-समझि राजाकेँ जे उपाय बतौलखिन, ओकरा करएमे कोनो दोष नै छल। संगे-संग ऐ कार्यमे कोनो विध्न-बाधा अएबाक कोनो संभावना सेहो नै छल। वनचर जीवन व्यतीत करऽ बला ऋषिकुमार श्रृंग कहियो कोनो स्त्री केँ नै देखने छल। ओ स्त्रीकेँ चिन्हितो नै छल आ विषय सुखसँ अनभिज्ञ छल। एहन कठोर चित्तकेँ मथि दैबला मनोवांछित विषयक प्रलोभन दऽ कऽ हुनका मालिनीमे अनबाक योजना बनए लागल। ऐ योजनाक सफलताक लेल तय कएल गेल जे सुंदर आभूषणसँ विभूषित मनोहर रूपवाली वेश्या ऋष्यश्रृंग कतय जा कऽ अनेकानेक उपायसँ हुनका लोभा कऽ मालिनी आनए। राजाज्ञासँ एहने व्यवस्था कएल गेल। कतेक रास नाओकेँ जोड़ि कऽ बेड़ा बनाओल गेल। ओकरा मनोरम पातसँ सजाओल गेल। नाओमे कतेक रास मिष्ठान आ मधुर फल राखल गेल। नगरक मुख्य-मुख्य रूपवती वेश्याकेँ सभ मंत्रणासँ अवगत करेलाक बाद जलमार्गसँ आश्रम दिस पठा देल गेल। आश्रमसँ कनी दूर ठाम कोशीक पावन कात बेड़ा रोकि देल गेल। वेश्या ओतएसँ ऋषिकुमारसँ मिलय कऽ उपाय करए लागल। अंतर्मुखी स्वभावबला ऋष्यश्रृंग बड़ धीर-गंभीर छल। हुनका अप्पन पिताक सानिध्य बेसी सुखकर लागैत छल। यएह कारण छल जे ओ आश्रमसँ बाहर नै कऽ बराबर निकलैत छल। ओ एत्ते एकांतशील व्यक्ति छल जे वन मे रहि कऽ अप्पन पिताक अलावा स्त्री सभक गप तँ छोड़ू, कोनो दोसर पुरुख धरि केँ नै देखने छल। तखैन भला ऐ ऋषिमे चेतना कोना आैतिऐ? कोनो अज्ञात प्रेरणासँ ऋषिकुमार घुमैत-फिरैत कोशीक ओइ धारक कात पहुँचल, जतए रूपवती वेश्याक बेड़ा ठाढ़ छल। मंद-सुगंध पवनक संग मीठ आवाजमे संगीत सुनाइ दऽ रहल छल। अगरू धूम आ दोसर सुगंधित द्रव्यसँ वातावरण बड़  रमणीय भऽ रहल छल। ऋषिकुमार सुन्नर वेश आ बड़ आकर्षक रूपवाली वनिता सभकेँ देखलक। ऋषिकुमारकेँ अप्पन एतए आएल देखि कऽ वनिता सभ हर्षोत्फुल भऽ गेल। ओ मंद मानक स्वरमे गाबैत ऋषिकुमार लग आएल। ऋषिकुमार सेहो हतप्रभ छल। वनिताक कल्पना तँ ओ केने नै छल। हुनका भान भेल जे ई ऋषिगणे अछि, जे कोनो दोसर लोकसँ आएल अछि। एखैन धरि ओ स्त्री केँ देखने नै छल तँ ओकरा संबंधमे ओ की सोचतिऐ? वनिता हुनकर सत्कार केलक आ स्नेह प्रदर्शित करैत कहलक, हे ब्रााह्मण! अहाँ के छी? की करैत छी? स्त्रीक कमनीयता देखि कऽ ऋषिकुमार मंत्रमुग्ध छल। हुनकर अंतर्मनसँ स्नेहक धारा फूटए लागल। ओ अप्पन पिताक आ अप्पन परिचय देलक। ऋष्यश्रृंग बाजल जे महर्षि कश्यप वंशक महर्षि विभाण्डक हमर पिता छथि। भूमंडलमे प्रसिद्ध छथि। ठामे हमर आश्रम अछि। अहाँक दर्शन हमरा लेल कतेक रास सुखक मूल अछि। अहाँ सभ देखयमे बड़ सुनर छी आ देह सँ आभा सेहो फूटि रहल अछि। अहाँ सभकेँ हम प्रणाम करैत छी। ऋषिकुमार वनिताकेँ अप्पन आश्रम लऽ कऽ आएल। संजोगवश हुनकर पिता आश्रममे नै छल। ऋषि हुनका ऋष्योचित सत्कार आ विधिवत पूजन कऽ कन्दमूल फल-फूल दऽ कऽ संतुष्ट केलक। वनिता सभकेँ ऋषिकुमारक पिता विभाण्डकक एबाक डर सेहो लागि रहल छल। तइसँ ओ तुरंत आश्रमसँ जाइ लेल उत्सुक छल। (क्रमश:) ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बालानां कृते १.जगदानन्द झा 'मनु'- बाल गजल२.अमित मिश्र- बाल गजल १-४ 1 जगदानन्द झा 'मनु' ग्राम पोस्ट- हरिपुर डीहटोल, मधुबनी बाल गजल तिला संक्रातिकेँ खिच्चैर खाले रौ हमर बौआ ल’जेतौ नै तँ कनिए कालमे ओ आबिते कौआ चलै बुच्ची सखी सभ लाइ मुरही किन कऽ  आनी अपन माएसँ झटपट माँगि नेने आबि जो ढौआ बलानक घाट मेलामे कते घुमि घुमि मजा केलक किए घर अबिते मातर बुढ़ीया गेल भय थौआ कियो खुश भेल गुर तिल पाबि मुरही खुब कियो फाँकेँ ललन बाबा किए झूमैत एना पी कए पौआ सगर कमलाक धारक बाटमे बड़ रमणगर मेला सभ कियो ओतए गेलै कि भेलै ‘मनु’ कुनो हौआ (बहरे रमल, मात्रा क्रम १२२२-१२२२-१२२२-१२२२) 2 अमित मिश्र करियन ,समस्तीपुर, मिथिला ,बिहार 1. बाल गजल

लहरि सागरक गाबै छै गीत कल कल सुनाबै छै

पानि सदिखन मचोरै ओ ढेह जे बनि कऽ आबै छै

कात आनै कते दूरसँ शीप मोती बहाबै छै

सूर्यकें जतऽ डुबाबै ओ चान ओतै उगाबै छै

ई तँ कखनो रुकै नै छै बढ़ब आगू सिखाबै छै

पानिमे जे लवण घोरल नीक भोजन बनाबै छै

मान छै ई तँ उपकारी अपन नदिकेँ बनाबै छै

फाइलातुन-मफाईलुन 2122-1222

2

आइ दीदी लेल एलै बरियात गै चल सहेली देखबै फेरा सात गै

देख हमरा लेल एलै नव लंहगा एहिमे लागैछ  सुन्नर सन गात गै

चारि जनरेटर कते मचबै शोर गै मरकरीमे गाछकेँ चमकै पात गै

लाल छै पंडाल लागल छै भीड़ गै हाथमे माला लऽ दीदी एकात गै

गारि दै छै समधिकेँ भौजी देख ने तीन बाजल रातिकेँ भेलै प्रात गै

भेल की कानै हमर माँ परिवार गै संग छूटल "अमित" आश्चर्यक बात गै

फाइलातुन-फाइलातुन-मुस्तफइलुन 2122-2122-2212 बहरे-जदीद

3.

बाबी कहै पाकड़िपर रहै छै भूत झटकैत चलि एतै नै तऽ जल्दी सूत

देखै छथिन नीनक देब घर घर जा कऽ जागल जँ किओ भेटै पकड़ि लै दूत

मालिश करै तेलक गाबि नव नव गीत काबिल कहै छथि आ नीक छी हम पूत

डिबिया जड़ै छै आ होइ झलफल आँखि नै आब उठबै भेलै सपन मजगूत

भोरे किए उठबै छथि करै छथि शोर यदि रातिमे "अमित"सँ ओ कहै छथि सूत

मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मफऊलातु 2212-2221-2221 बहरे-सलीम

4.

काँपि रहलै मोबाईल बाजि रहलै ओकर टोन देख कुचरै छै कौआ जकाँ पड़ल ओ टेलीफोन

गीत गाबै चमकै भूक भाक लागै छै बड नीक झूमि रहलै सबहक देह नाँच करबै हम भरि मोन

छौंक लागल भनसाघर गमकल बनलै तरुआ फेर लेर अपने बाहर होइ पड़ल नै छै बेसी नोन

एक बीतक चाली छै पसरल आँगन कादो कीच आब कोना करबै खेल बचल नै छै कोना कोण

आब नै खेबौ बासी बचल भऽ जेबै हम बेमार काल्हि कहलनि डाक्टर सबसँ "अमित" जीवन सबहक सोन

फाइलातुन-मफऊलातु 2122-2221 दू बेर सब पाँतिमे ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। 8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS 8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH 8.1.1.The Comet   -GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.2.The_Science_of_Words- GAJENDRA THAKUR translated by the author himself 8.1.3.On_the_dice-board_of_the_millennium- GAJENDRA THAKUR translated by Jyoti Jha chaudhary 8.1.4.NAAGPHANS (IN ENGLISH)- SHEFALIKA VERMA translated by Dr. Rajiv Kumar Verma and Dr. Jaya Verma Send your comments to ggajendra@videha.com विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष  प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक  उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक। अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक। पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि

अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ ,  हटा क’ नहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६

  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/  कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड़ / बड़ी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍  ... समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍। जइ/ जाहि‍/ जै जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि‍/ अहि‍/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि‍/ ऐछ तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍ ओहि‍/ ओइ सीखि‍/ सीख जीवि‍/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहि‍ं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि‍/ नै/ नइ गइ/ गै छनि‍/ छन्‍हि‍ चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि‍ बढ़इन बढ़न्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍ १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍ १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍ १८३. लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बि‍तौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/ करेलखिन्ह/ करेलखि‍न १८९. करएलन्हि/ करेलनि‍ १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍ २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍ २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि‍/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2012-13) (१४२० फसली साल) Marriage Days: Nov.2012- 25, 26, 28, 29, 30 Dec.2012- 5,9, 10, 13, 14 January 2013- 16, 17, 18, 23, 24, 31 Feb.2013- 1, 3, 4, 6, 8, 10, 14, 15, 18, 20, 24, 25 April 2013- 21, 22, 24, 26, 29 May 2013- 1,2,3,5,6,9,12,13,17,19,20,22,23,24,26,27,29,30,31 June 2013- 2,3 July 2013- 11, 14, 15 Upanayana Days: January 2013- 16 February 2013- 14, 15, 20, 21 April 2013- 22 May 2013- 20, 21 Dviragaman Din: November 2012- 25, 26, 28, 29 December 2012- 2, 3, 14 February 2013- 14, 15, 18, 20, 21, 22, 27, 28 March 2013- 1 April 2013- 18, 22, 24, 26, 28, 29 May 2013- 12, 13 Mundan Din: November 2012- 26, 30 December 2012- 3 January 2013- 18, 24 February 2013- 1, 14, 15, 20, 28 April 2013- 17 May 2013- 13, 23, 29 June 2013- 13, 19, 26, 27, 28 July 2013- 10, 15 FESTIVALS OF MITHILA (2012-13) Mauna Panchami-08 July Madhushravani- 22 July Nag Panchami- 24 July Raksha Bandhan- 02 Aug Krishnastami- 10 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 17 August Vishwakarma Pooja- 17 September Hartalika Teej- 18 September ChauthChandra-19 September Karma Dharma Ekadashi-26 September Indra Pooja Aarambh- 27 September Anant Caturdashi- 29 Sep Agastyarghadaan- 30 Sep Pitri Paksha begins- 30 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-08 October Matri Navami- 09 October SomvatiAmavasya Vrat- 15 October Kalashsthapan- 16 October Belnauti- 20 October Patrika Pravesh- 21 October Mahastami- 22 October Maha Navami - 23 October Vijaya Dashami- 24 October Kojagara- 29 Oct Dhanteras- 11 November Diyabati, shyama pooja-13 November Annakoota/ Govardhana Pooja-14 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 15 November Chhathi -19 November Devotthan Ekadashi- 24 November ravivratarambh- 25 November Navanna parvan- 25 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 28 November Vivaha Panchmi- 17 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 08 February Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 15 February Achla Saptmi- 17 February Mahashivaratri-10 March Holikadahan-Fagua-26 March Holi- 28 March Varuni Trayodashi-07 April Chaiti  navaratrarambh- 11 April Jurishital-15 April Chaiti Chhathi vrata-16 April Ram Navami- 19 April Ravi Brat Ant- 12 May Akshaya Tritiya-13 May Janaki Navami- 19 May Vat Savitri-barasait- 08 June Ganga Dashhara-18 June Somavati Amavasya Vrata- 08 July Jagannath Rath Yatra- 10 July Hari Sayan Ekadashi- 19 July Aashadhi Guru Poornima-22 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक

विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक  http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज  :  http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ"  : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स  : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI  FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इ‍डेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT

https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/   http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com  or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डॉ. जया वर्मा आ डॉ. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु 19 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ  www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal  विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका''विदेह' १२३ म अंक ०१ फरबरी २०१३ (वर्ष ६ मास ६२ अंक १२३) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA