ISSN 2229-547X VIDEHA ‘विदेह'१३२ म अंक १५ जून २०१३ (वर्ष ६ मास ६६ अंक १३२) ऐ अंकमे अछि:- गद्य .जगदानन्द झा ‘मनु’- विहनि कथा- वसिअतनामा/ बुढ़ारीक डर अमित मिश्र-विहनि कथा-दरमाहा/हँसी/अधिकार/ भूख जवाहर लाल कश्यप-विहनि कथा- सीता .जगदीश प्रसाद मण्डल-लघुकथा-सड़ल दारीम पद्य .१.अमित मिश्र २.कुन्दन कुमार कर्ण- गजल .१. जगदीश प्रसाद मण्डल २.रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ जीक गीत एवं झारू .१.राजदेव मण्डल- दू टा कविता २.राजीव रंजन मिश्र १.बिन्देश्वर ठाकुर- प्रवासक वेदना/ सुनि लिअ दू बात हमर/ अन्हार जिनगी २.अब्दुल रजाक- गणतान्त्रिक देश १.कुन्दन कुमार कर्ण- बाल गजल २.अमित मिश्र-नेङगरा दरबान विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन विदेह मैथिली पोथी डाउनलोड साइट VIDEHA MAITHILI BOOKS FREE DOWNLOAD SITE विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढबा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. 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-नमस्कार घनश्याम बाबू, सब नीके ने? -नमस्कार, नमस्कार ।सब कुशल अछि ।अपन बताउ? -की कहौं, हालत पस्त अछि । -से किए यौ? हम तँ मजामे छी । - छऽ माससँ दरमाहा नै भेटल ।ओना अहाँ तँ अनुबन्धपर छी तखन एते ठाठ-बाठ कोना ? -असलमे सरकारी दरमाहा नै अछि तँ की भेल, जनताक दरमाहमे कोनो कमी नै अछि । -जनता अहाँकें पाइ किए देत? -आब मूर्खकें के समझेतै? टेबुलपर नै जा कऽ हमरा मार्फत काज करबाएत तँ दरमाहा देबैये पड़तै ने ?
२
हँसी
-कतऽ गेलियै यै ? किछु बाजू तँ । -दुर . . .हमर बाँहि छोरू ।अहाँसँ बात नै करब हम । -हे हे एना जुनि करू ।अहाँ बतिआएब नै तँ हमर प्राणे चलि जाएत । -जाए दिऔ ।बढ़ियें हेतै । -आखिर हमरापर एतेक तामस कोन बातक अछि ? -सभक पति अपन पत्निकें सिनेमा-सर्कस घुमाबै छै आ अहाँ दिन-राति दर्शनो नै दैत छी ।काजो करैक एकटा सीमा होइ छै । -अच्छे, एकर तामस छै ।कने लऽग आउ . . .हम पाइ कामाइ छी जाहिसँ नून-हरदि चलैत रहए आ अहाँ चिन्ता मुक्त भऽ सदिखन हँसैत रहू ।असलमे अहाँक हँसी किनबाक लेल घरसँ बाहर रहै छी । ३ अधिकार
- रौ कोनमा ,काल्हि कने रधियाक सासुर भार दऽ आबिहें । - मालिक, ककरो आर कहियौ ।काल्हि हमरासँ नै हएत । - से किएक रौ ? - अहाँकें नै बूझल अछि काल्हि एलेक्सन छै । - ओहिसँ की ? पेट तँ तोरा हमरे देल पाइसँ भरतौ ।नेता तँ नै एतौ । - तैयो मालिक जहिना हमर अधिकार अछि जे काज केलाक बाद अहाँसँ पाइ लेब तहिना भारत माता आ संविधानक अधिकार लेबैये पड़त ।छोड़ि कोना देब ।
४ भूख
ओ पगली छलै ।पच्चिस-छब्बिस वर्षक भरल-पूरल देह मुदा दिमाग घसकल ।नित दिन टीसनपर इम्हरसँ उम्हर टहलनाइ ओकर मुख्य काज छलै । फेकल पन्नी वा अखबारक टूकड़ामे सटल अन्नक किछु दाना ओकर भोजन छलै ।आबैत-जाइत ट्रेन दिश एकटक देखैत ,कखनो कऽ कोनो खिड़की लऽग चलि जाइ ।फेर की टी॰टी॰क दबाड़ सुननाइ आ पुलिसक लाठी सहनाइ ,ओकरा लेल सबदिना छलै ।किओ ओकरा छूअ नै चाहै । एक दिन भोरे-भोर अखबारमे छपल एकटा खबरपर नजरि अटकि गेल ।काल्हि राति किओ ओहि पगली संग बलात्कार कऽ ओकर घेंट चापि देने छलै ।हमर मोनमे एकटा प्रश्न बेर-बेर उठि रहल छल ।की वासनाक भूख एते ताकतबर होइ छै जे जाति-पाति ,धर्म-कर्म आ मनुखक स्थिती धरि नै देखै छै ?लागि रहल छल जँ भूख एहिना बढ़ैत रहत तँ महाप्रलय आबैमे कम्मे दिन शेष छै । ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जवाहर लाल कश्यप विहनि कथा- सीता सीता वाह ! कि सुखद संयोग अछि , वियाहक नवम वर्ख मे मिथिलेश मिसर के एकटा बेटी भेलन्हि आ ओहो जानकी नवमी दिन / खुशी स मोन गदगद भेल रहैन्ह्, स्वंय देवी अबतरित भेलीह / नामाकरन के दिन बच्चा के नाम सीता राखल जाय / अधिकांश लोकक विचार भेल / मुदा बच्चा के माय सुनयना देवी सहमति नहि भेलीह / मि0- अहॉ कि नाम राखय चाहैत छी ? सु 0- किछु हो मुदा सीता नहि / मि0- कियैक , सीता नाम मे दिक्कत अछि ? किछु उत्तर नहि भेतल ... मिथिलेश मिसर और जोर स कहलथि, हम पुछैत छी कियैक ? सुनयना देवी शांति स उत्तर देलखिन्ह " हम नहि चाहैत छी जे हम्मर बेटी के नाम एहन स्त्री के नाम पर राखल जाय जे अपना संग भेल अन्याय के प्रतिकार नहि क सकलीह /" ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। जगदीश प्रसाद मण्डल लघुकथा सड़ल दारीम नीन टुटिते कुमराकाकाक मन ओछाइनेपर चनकलनि। भगवानकेँ हृदैसँ प्रणाम करिते मन रमकलनि। रमकल रमैत मन दिनक फलाहारपर अँटैक गेलनि, भोजन अबैए केना? मुदा प्रश्नसँ पहिने उत्तर ताकब चलाक शिकारीक पहिचान छी, कुमरो काका तँ सहए। अजीव ई दुनियाँ सजल अछि। बारहो मास फल-पात बनि-बनि बिलहाइत अछि तँ तहिना ने अन्नोक हिस्सा छै। बारहो मासक बारहो रंगेमे सजि-सजि अबैए। मन ठमकलनि। ठमकिते चन्द्र कौशिक धारकेँ सूर्य कौशिकीय धार दिस टघरैत देखि मन टघरि गेलनि। दारीम फलक समए आबि गेल। दारीमपर नजरि पड़िते दारिमक दानाबला छत्तापर पड़लनि। मधुमाछी छत्ता जकाँ ओहो वसहा कागतक आड़ि दऽ दऽ छत्ता सजबैए। चौराएल दानापर नजरि पड़िते रससँ भरल डब-डबाएल तक पहुँचलनि। मनमे खुशी रमकलनि खुशी ई रहनि जे उपजौनिहारे ने चौराएलसँ डबडबाएल धरिक रस पीअत आकि कोल्ड स्टोरक बासि छी जे एके रस भेटत। कहुना-कहुना तँ दू मासक जगह भगवानक घर अपनो बनौने अछि। चौराएल-सँ-रसाएल धरिक समए। लगले मन उनटि गेलनि। फल तँ भेटल मुदा गोबरक लेबा कहाँ ऐबेर लगौलिऐ। नव-नव हवा बनने नव-नव किड़ी-फतिंगीक जनम होइ छै। जखने जनम हेतै आकि खाइले दौगत। भलहिं किछु उपकारो कऽ दिअए मुदा बेल छोड़ि कहाँ कोनो फल अछि जेकरा किड़ी-फतिंगी दुइर नै करैए। बेलो तँ अपन जान बचा चाननक रूप धेलक तँए, ने तँ कि नारिकेलसँ मोट खोंइचा होइ छै? गाछमे गुण छै जे जहर-बातकेँ लग अबै ने दइ छै। रभसि मन कुमरा कक्काक बरसए लगलनि। कतए गेल सएओ किसिमसँ ऊपर बेलक बोन, कतए गेल बम्बै-मालदह-फैजली-राइरिक बोन। कतए गेल लताम-नेबोक बोन। जेहेन फल तेहने ने फूलो आकि जेहने फूल तेहने फलो। मुदा फूल तँ गाछक अनुकूल होइत। बेलक गाछे सुगन्धिक नै फूलो तहिना। मुदा धरती तँ धरती छिऐ बोन लगा बनवासी रामक कुटी बनाबी नै तँ जंगल-झार ने भऽ जाए ई तँ मालिए बुते संभव अछि...। भिनसुरका मन लगले अकछि गेलनि कुमरा काकाकेँ। बेडो टी हाथ नै लागल रहनि। अकछि कऽ ओछाइनसँ उठि मनमे रोपि लेलनि। जे दारीममे हाथ लगाएब। खाइक समए तारीखक हिसाबसँ काल्हिए चढ़ि गेल। फेर मन ठमकलनि। आठो गाछमे एक्केबेर हाथ लगाएब आकि आगू-पाछू। जौं आगू-पाछू लगाएब तखन तँ अधडरेरे-अधडरेर सभ रहि जाएत तइसँ नीक जे आठोमे एक्केबेर लगाएब। किअए वेदानाकेँ अनाड़क खनदानसँ झगड़ा हेतै आकि नारंगीकेँ दारीमसँ। किअए ने सभ एक्केठाम बैस विचारि लेत जे भाय सभ एक्के खनदानक छिअ। मिथिला अपन जनमबास भेल, खनदान जे उपटल जाइ छह तइले सभ चलह राजधानी आ कहबै जे दू मासक जे हमर हिस्सा अछि से लेबे करबह। जंगल राज नै बोनक राज बनेबे करबह। जलखै करैसँ पहिने कुमरा काका चाह पीब पथिया नेने दारीमक बाड़ी पहुँचला। आड़िपर पथिया राखि आठो गाछकेँ एका-एकी हिया-हिया देखए लगला। फलक गिनतीसँ बूझि पड़लनि जे पाँच गोटे परिवारक दू मासक अछिए। तोड़ैले हाथ जखने बढ़ौलनि आकि फलक पीठपर नजरि पड़लनि। कारी ढिमकाक संग मोटगर भूर। भूर देखि मन कानि उठलनि। फल सड़ल अछि। दिवारक ढेरे देखि दिवरलग्गुक परिचय होइ छै। दोसर देखलनि सेहो छेदाएल, दुनू फल तोड़ि पथियामे लेलनि। दोसर-तेसर चारिम आठो गाछसँ आठो किसिमक फल तोड़ि आड़िपर बैसला। फलक रंग-रूप देखि सोल्हन्नी मन नै कमलनि मुदा कमलनि जरूर। गाछपर सँ नजरि उठिते कुमरा कक्काक सोझाँ बाबा आबि गेलखिन। पहिल गाछ बाबेक रोपल छियनि। हुनके बनाएल मचानो-खोपड़ीक जग्गह छियनि। गाछक तँ पुरना डारि सुखि गेल मुदा जड़ियो अपन जगह बनबैत जीविते अछि आ नव-नव गाछ बनैबते अछि। जनकक फुलवाड़ीक अमूल्य फल दारीम। देशक विकास तेजीसँ भऽ रहल अछि आ जनकक फुलवाड़ी तहिना तेजीसँ घटि रहल अछि मुदा मुँहक मुस्की पाने खाएल दाँत जकाँ बूझि पड़ैए। नजरि आगू बढ़िते दोसर गाछपर कुमरा काकाक अँटलनि। ई गाछ बाबूक रोपल छियनि। ओही गाछमे -बाबाबला गाछ- कलम लगा रोपलनि। ओना बाबाबला गाछ अखनो अछिए मुदा अपना तक अबैत-अबैत तीन पीढ़ीक फलक गाछ छी। मिथिलाक अदौक फल दारीम। ओइबेर अगते आद्रा बरिसल रहए। मनसून जागल। हाल रसाइते गाछक डारि माटिमे गाड़ि देलिऐ। ओना बाबा कहनाैं रहथि जे बौआ दारीम, लताम, नेबो इत्यादिक गाछ डारिएसँ होइ छै। जेठ-अखारमे आद्रा होइ छै, गरमी मास जुआ कऽ पकि जाइ छै तखन आद्राक समए अबै छै। ओना मौसमक शत-प्रतिशत िनर्धारित समए नै अछि। आनो-आनो समैमे एक-दोसराक रूप पकड़ि लइए। माटिमे भरि बरसात गाड़ल रहत तँ अपने ओइमे सीर निकलि माटि पकड़ि लइ छै। पाछूसँ ओइ डारिकेँ काटि किछु दिन ठेमाइ-ले छोड़ि देल जाइ छै। अगते कातिकमे उखाड़ि रोपल जाइ छै। मिथिलांचलक कातिक धरम मासक गिनतीमे अछि। मुदा ओकर महत तँ तखन ने जखन धर्म स्थल जकाँ सजाएब। ओना अपन सभ अनुकूलता पसारि दइए मुदा बिनु हाथ-पएर बुते हएत की? अनेको फलक खेती, अनेको फुलक खेती अनेको अन्नक जन्म देनिहार पोसिनिहार मिथिलाक मास कातिक छी। मनमे छगुन्ता लगलनि जे केहेन करामाती सृष्टिकर्ता छथि जे केतौ बीआसँ गाछ तँ केतौ लत्तीसँ गाछ, केतौ लत्तीमे फल तँ केतौ गाछमे तरकारी, केतौ डारिसँ गाछ तँ केतौ डारिएमे सीर। केतौ फूलसँ गाछ तँ केतौ पत्तेसँ गाछ। सृष्टिकर्ता केना बूझि गेलखिन जे बेल सन फल जखन बनबै छी तखन ओगरबाहि लेल काँटो लगा देब नीक हएत। नै तँ धिया-पुता गुलाबो फूल आ दारिमो सन फलकेँ दुइर कऽ देत। दोसर पतिआनीपर नजरि पड़िते धक् दऽ मन पड़लनि, द्वारका। द्वारका गेल रही ओ इलाका देखैक मन भेल तँ नागपुर सेहो गेलौं। ओत्तै जखनि नर्सरीमे गेलौं तँए रंग-रंगक दारीमक गाछ सभ रहै। सनेस रूपमे वेदाना कहि दूटा गाछ अनलौं। ओना मन भेल जे एकेटा गाछ किनब किएक तँ एकेटा गाछ रोपैक रहए। मुदा जहिना अपन बात कहलिऐ, तहिना गाछोबला कहलक- “नब्बेसँ पनचानबे प्रतिशत गाछक गारंटी करै छिऐ। एकटा लेब आ ओ पाँच आकि दस प्रतिशत जे बिनु गारंटीक अछि से कहीं अहीं सिर ने बिसा जाए, एकर गारंटी तँ नै करब।” जँचल, कहलिऐ- “जखनि दूटा गाछ एकक गारंटीमे लेब तखन तँ एकर दामो कम हेतै?” प्रश्न सुनि गाछबला ठमकैत बाजल- “डेढ़ गाछक दाम दऽ दिअ।” आनि कऽ रोपलौं। मुदा ठीके कहलक। एकेटा गाछ लागल। एके संग दुनू किसिमक गाछ, एके-जीवनमे जीबैए। फलमे किछु अन्तर दुनूक बीच अछि मुदा एकरंगाहे खेती-बाड़ीक बीच उपजैए। ओना माटिक गुण, पानिक रस फूट-फूट भेने सुआदो आ गुणोमे किछु फुटता आनियेँ दइ छै मुदा सए नै पुरने शत नै भेल सेहो तँ नहियेँ अछि। सतोक जनम तँ सएमे एकेसँ होइ छै। खैर जे होउ...। जहिना बाबाधामक बिसवासू फल सोले-साल कामौर उठबा वएह मुंगेर घाट, सूइया पहाड़, शिवगंगा पोखरि, चन्द्रकूप नेपाली माकन जकाँ छोट-छोट मंदिर, नौलक्खा दर्शनकक संग बासुकीनाथक दर्शन। मुदा फल-फूलक -शविलिंग फूल- दर्शन भइए ने पबैत। जौं होइत तँ जरूर साग-मिरचाइ खेनिहारि पतरका पहाड़ी मिरचाइक बीआ आनि लगैबतथि। किएत तँ चूड़ा-दही खाइकाल जरूर ओइ मिरचाइक दर्शन केने हेती। दर्शन तँ दर्शन छी, ओहुना तीमन-तरकारीमे मिरचाइ देल जाइए मुदा ओकर मात्र एक गुण, कड़ुपन शेष बँचैए। मुदा चूड़ा-दही तँ मरिचाइएक सवारीपर चलैए। अखड़ा चूड़ा, दोखड़ा दही, तेखरा चीनाीक संयोगे ने चूड़ा-दही भोजन भेल। जौं चीनी मुँह मिठौलक तँ दही खटिऔलक। सम-गम जीहे ने मिरचाइक असल सुआदो आ गुणो पाबि सकैए। मुदा ई तँ स्थान विशेष गुणक शक्ति छी जे आकार्षित करैए। वेदाना गाछ बाबाक फुलवाड़ीमे साले भरि पछाति फूला कऽ फल दिअए लगल। ओना पहिल खेप एकेटा फड़़लनि। फलक आकांक्षा जगौलक। बाबेधाम जकाँ स्थानो-स्थान देखबो आ करैऔक उत्कंठा बढ़ौलक। विचार भेल जे द्वारकाक फल-फुलबाड़ी आबिये गेल से नै तँ अगिला सल प्रयागमे कुम्भ मेला हएत ओतए जाएब आ नर्सरीक सनेस आनब। सएह केलौं। ओहीठामक अनार छी। गाछोक झाड़ ओहिना जहिना दारीमक, पातो तहिना फुलो तहिना फलो तहिना। जेना एक्के कुलखुटक हुअए। पाँचम गाछपर नजरि अँटैकते कुमरा काकाक मन अनारक भीतर प्रवेश कऽ गेलनि। मोती सदृश्य दानाक छत्ता, मधु सदृश्य रस, बसहा कागतमे लपेटल, देवघरक पेड़ा जकाँ। पथियाक फल िनहारलनि। यएह छी अनार, ईहो छेदाइए गेल अछि, भरिसक एकरो दाना...। मन तुरूछि गेलनि, पथियामे राखल छठम फल निकालनि। यएह छी नारंगी। सभ हार-काठ एक रहितो किछु तँ अपनो गुण-धर्म रखनै अछि। ओना कुमरा काकाक मनसँ अनार हटि गेल छेलनि मुदा पथियामे जे छेद गरे राखल छल से ओहिना आँखिमे गड़ैत रहनि। हरिद्वारसँ नारंगी अनने रही...। फलक प्रति जिज्ञासा औरौ बढ़लनि मुदा हरिद्वार तँ हरि दुआर छी। जहिना एकटा गाछ नर्सरीबलासँ मांगलिऐ तहिना ओहो बिसवासक संग कहलक, अपन नर्सरीक गाछ मरै नइए। ठीके कहलक। वएह छठम गाछ छी। मुदा आगिमे जेते घी देल जाइ छै तेते ओकर लहास बढ़ै छै तहिना मनक लहास जागल, सातम गाछ कश्मीरसँ अनने रही। अमरनाथक दर्शन आ अनारक गाछ ओहिना अखनो आँखिक सोझहामे अछि जहिना आनि कऽ रोपै दिन रहए। जहिना अमरनाथक कश्मीर तहिना झंझटियो राज्य छीहे। सभ दिन ओइठाम झंझटे होइत आएल अछि। बिहार जकाँ कहाँ असथिर अछि। अकबरे लगसँ तमाशा होइत आएल अछि। अखनो कनी-मनी बीसे भऽ गेल अछि जे उन्नैस नै भेलहेँ। खैर जे होउ...। मुदा जे होउ बागक बोन आ झीलक झिलहोरि बिहारसँ बेसी खेलिते अछि। जेहने शालीमार निशातक बोन तेहने डल झील। धानक भात-चूड़ा, गहुमक रोटी, मकइ भूजा जहिना अपना सभ खाइ छी तहिना ओहो सभ खाइए मुदा मलड़ैए अपना सभसँ बेसी। किअए ने बेसी मलड़त, अपना सभ पानिक बीचो आ सुखलोमे पानि ढारि नहाइ छी मुदा ओ सभ बेसी बरफेमे नहाइए। ओना अकास गंगाक जलधार सेहो होइ छै, मुदा अपना सभसँ कम। अपना सभ एकटामे जरूर पछुआएल छी जे फल सड़ा कऽ नै खाइ-पीबै छी...। तबधल मन कुमरा काकाक तँए बेसी सेरियाम दिस नजरि नै टिकलनि। कोनो वस्तुपर नजरि टिकाएब धिया-पुताक खेल नै छी, जिनगी छी। जिनगीक बाट बनौनाइ सिखबैए। मुदा जहिना बक्सा-पेटीमे तहिआएल कपड़ाक बीचमे निचला तह तक जाइत-जाइत मन ओङहाए लगैत तहिना ओङहाइत मन काकाक आठम फलपर गेलनि। अनचोकमे जहिना गाढ़ो नीन टूटि जाइत तहिना भक्क खुजलनि, ई तँ जगरनाथक सनेस छी। एक दिस समुद्रक लहरि तँ दोसर दिस अकास ठेकल पहाड़ सेहो ठाढ़ अछि। समुद्रक बीच जिनगी जहिना हँसैत-खैलैत चलैत तहिना दोसर दिस पहाड़क बीचो चलैत। जेकरा ने खेत छै आ ने अपन किछु आन वस्तु। मिथिलांचलक मुख्य सम्पदाक आधार खेत रहल अछि, अखनो अछि। मुदा पंगु भेल अछि, जइ मिथिलाक दिशा दृष्टि टक्कर दैत आएल अछि ओ मिथिलांचल माटि-पानि सएओ किसिमक फल-फूल आ अन्न उपजबैक शक्ति सेहो रखने अछि। बेरोजगारीओ पसरल अछि आ काजो पसरल अछि, मुदा...। बारहो मासक खेती, बारहो मास जोत-कोरसँ लऽ कऽ रातिक नव भोजन धरि मौसमीसँ लऽ कऽ बरहमसिया फल-तरकारीक संग दूध-माछ सबहक आधार रहितो बीरान भेल जा रहल छी। आठो गाछक सोल्हो फल कुमरा काका कत्तासँ कटलनि। सबहक भीतर खोइचाक तरमे कोयला जकाँ कारी तइबीच कीड़ो मरल देखलनि। छिड़िआएल टुकड़ीकेँ पथियामे समेटि कात जा फेकब नीक बुझलनि। एक तँ ओहुना जेहने फल तेहने दागो लगै छै। तैपर आरो कारी-खोरना भेल अछि, तेहन दगनियाँ देत जे फटलो वस्त्र धेनै रहत। पथियामे उठा कातमे फेक आबि गुम भेल विचारए लगला, जखन एकटा चाउर सिद्ध भेने लोक बूझि जाइए तहिना सड़ल फल देखने तँ अनुमान कएले जा सकैए जे अहिना सभ सड़ल हएत। मुदा एकरो तँ पहिचान अछि, जइमे भूर हेतै ओ सड़ल भेल जइमे नै हेतै वा छोट हेतै ओइमे तँ आशा कएले जा सकैए...। मुदा टुटैत हूबासँ मन असकता गेलनि। काल्हुका लेल अगिला काज टारि लेला। काजक निचेनी कुमरा कक्काक मनकेँ असथिर केलकनि। असथिर होइते मनमे उठलनि, जहिना दारीमक दाना मोती जकाँ सजल रहैए तहिना ने मनुख रूपी दानासँ समाजो अछि। दोसर दिन फल तोड़ि अनैसँ नीक कुमरा काका झाड़ीयेक बीच कत्तासँ काटि देखब नीक बुझलनि। आठो गाछक सभ फल सड़ि गेल अछि। मुदा कि ओकरा काटि कऽ फेक देल जाए आकि समयानुकूल बनौल जाए? ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। पद्य .१.अमित मिश्र २.कुन्दन कुमार कर्ण- गजल .१. जगदीश प्रसाद मण्डल २.रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ जीक गीत एवं झारू .१.राजदेव मण्डल- दू टा कविता २.राजीव रंजन मिश्र १.बिन्देश्वर ठाकुर- प्रवासक वेदना/ सुनि लिअ दू बात हमर/ अन्हार जिनगी २.अब्दुल रजाक- गणतान्त्रिक देश १.अमित मिश्र २.कुन्दन कुमार कर्ण- गजल १ अमित मिश्र आइ मिथिलामे सीया सीया शोर भऽ गेलै राति कारी छलै से इजोर भऽ गेलै
जनकक धिया जानकी एली घर घर बाजए बधैया छम छम नाचए बरखा रानी दूर भऽ गेलै बलैया धरती उज्जर, हरियर कचोर भऽ गेलै राति कारी . . . . .
उमरिक संग संग ज्ञानो बढ़ल बनली चंचल धिया आँगुर कंगुरिया शिव धनुष उठेलनि सगरो एकर चर्चा सीया धिया जगतमे बेजोर भऽ गेलै राति कारी . . . .
नित दिन गौरीक पूजा कएलनि वर परमेश्वर पएलनि त्याग तपस्या एहन देखू महलछोड़ि विपिन बौएलनि लव-कुशक प्रेम पुरजोर भऽ गेलै राति कारी . . . .
जानकी उत्सव आउ मनाबी बैसाखक शुक्ल नवमी जिनकर ऋणसँ उऋण ने हेतै ई मिथिलाक धरती "अमित" जागू नव दिवसक भोर भऽ गेलै राति कारी . . . . . २ कुन्दन कुमार कर्ण गजल -------------------------- मोनके बात कहि दिअ प्रेमके संग बहि दिअ
दिल हमर अखन खाली ताहिमें प्रिय रहि दिअ
मीठगर चोट नेहक कनि अहाँ प्रिय सहि दिअ
ठोरपर हँसिक मोती हँसि हँसिक प्रिय गहि दिअ
भावना हमर लिअ बुझि दर्द मधुरसन नहि दिअ -------------------------- फायलुन्-फाइलातुन्. २१२-२१२२ ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १. जगदीश प्रसाद मण्डल २.रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ जीक गीत एवं झारू १ जगदीश प्रसाद मण्डल चान कौसिकीय...... चान कौसिकीय धड़ि धार डूमि जखन मोती पेलक। अड़ैक मन तरपि-तरकि अरपित-सँ-तरपित पेलक। चन्द्र कौसिकीय धड़ि धार डूमि जखन......। लाभ-लोभ ससरि-पसरि जिनगी धार बहि पेलक। पटे-पट पटि पट पटिया गंग अकसि-हकसि धेलक। चन्द्र कौसिकीय धड़ि धार डूमि जखन......। शिखर शीश सरणि सेज खुनि धरती धार बनेलक। धारे-धार धड़ि धड़िया सागर-गंगा पाटि पेलक। चन्द्र कौसिकीय.......। सगर सागर संग संगोड़ि चीत शान्त चेतन पेलक। कमल नील अकास चढ़ि सत् सागर अकास फुलेलक। चन्द्र कौसिकीय......। अधम-धम-सुधम बोन सुधम-धम डेगैत धेलक। गीत जिनगीक गाबि गबिया हार हरि चढ़ैत पेलक। चन्द्र कौसिकीय......। परदेश जेतै..... भैया यौ, परदेश जेतै। नै छै लज्जति गाम-घरमे नै छै चालि-बेवहारमे। बोली-वाणी एकोमे नै छै नै छै आस-बिसवासमे। अहीं कहू भाय, केना कऽ रहतै भैया यौ, परदेश जेतै। मर्त बनि भूमि मर्द जखने धड़ि धड़ लज पट-पेटमे। हँसि-हँसि छाती चढ़ि-चढ़ि कू लजति सू रणक्षेत्रमे। अहीं कहू भाय, केना कऽ जेतै भैया यौ, परदेश जेतै। छेलै भूमि कहियो भूमा सून बास-सुबास सजल छेलै देव-दानव मानव बनि बन अरूप-सरूप बनैत गेलै। जिनगी केना टक टिक पौतै भैया यौ, परदेश जेतै। दूर बसि दुर्वासा देखि-देखि ललकारी ललकारि भरै छै। दूर देश दुर-दुर दुरदुरा अपन पौरुष पाबि कहै छै। अहीं कहू भाय, दम केना अँटतै भैया यौ, परदेश जेतै। कमल सगर किलकारी भरि-भरि बेथा-कथा हिल-हिल कहै छै। भूम-कुभूम भूमहुर बनि-बनि त्राहि-माम कंश कृष्ण कहै छै। अहीं कहू भाय, केना नै लीबतै भैया यौ, परदेश जेतै। आन अपन अपना-अपना मद बोतल-शीशी भरै छै। पीविते मद मदहोश बनि-बनि चीन-पहचीन बिसरए लगै छै। अहीं कहू भाय, बिसरल मन केना पड़तै भैया यौ, परदेश जेतै। घोड़ा-हाथी, ऊँट बनि बन रह-राही रणबास चलै छै। योद्धा-युद्ध सरसिज सिरजि भूमिवीर नाओं धड़बए लगै छै। अहीं कहू भाय, किअए ने रहतै नै यौ भैया, जेबे करतै, जेबे करतै। ओज ओझरी..... ओज ओझरी सोझ आबि-आबि पछुआ पोझरी पएर पकड़लक। ओज-सोझ सोझरी करैमे सोझरी पएर पोझरी पकड़लक। सोझरी पएर पोझरी पकड़लक पछुआ पोझरी......। घीचि-घीचि पाछू पछुआ पकड़ि टिकासन चढ़ि आसन जमौलक कखनो चीत मुँहभर कखनो चालि चलि चौताला मारलक। चालि चलि चौताला मारलक। पछुआ पोझरी......। पोझरी केना ओझरी बनि-बनि सोझरी बाट सोझिया भगौलक। छाती हाथ धीर धकेल-धकेल पोझरा-सोझरा सरसिज चढ़ौलक। पोझरा-सोझरा सरसिज चढ़ौलक। पछुआ पोझरी......। अपने रोपल गाछी भुताइ आकि पोखरि नाओं चढ़ौलक पोखरि भुताइ आकि गाछी मन मंदिर बिस-बिसा कहलक। मन मंदिर बिस-बिसा कहलक। पछुआ पोझरी.......। पानि बीच...... पानि बीच समुद्र बसल छै आकि समुद्र पानि कहबै छै? सजि-सजि साजि सरोवराे-झीलो तहिना संग सगरो सजबै छै। पानि-बीच समुद्र बसल छै आकि समुद्र पानि कहबै छै। बनि धुँआ धुँधकारी बनि-बनि अकास नील सजबए लगै छै। धड़-धड़ि धार धड़ि-धड़ि धरती कमल नील खिलबए लगै छै। पानि बीच...। बूने-बून बड़-बड़ बनि-बनि धड़ धरती धन राशि धड़ै छै। दस दुआरी लक्ष्मी बनि-बनि अकास-पताल बखार बनै छै। पानि बीच...। मन मंडल धनमंडल बनि-बनि हीय पताल हीय अकास बसै छै मह-मह महि-महि मुखमंडल मक्खन बनि अमृत बसै छै। पानि बीच...। कखनो मधु कटि कट कखनो नम-नम नाम धड़बए लगै छै। चढ़ि अकास अकैस झकैस धड़-धरती धन राशि धड़ै छै। पानि बीच...। सुवास-अकास मह महा-महा सिम-सिर समीर सजबए लगै छै। जूही-बेली संग सहेली लटपट-खटपट करए लगै छै। पानि बीच...। एबा-जेबा बाट बनि-बनि गंग अकास बहए लगै छै। धड़-धड़़ा धरती तेज-गैत नाभि कमल सिलबए लगै छै। पानि बीच...। नरम-गरम सरम बनि-बनि सिंगार सजि सिर चलए लगै छै पेब प्रेम पहिया प्रसून बनि भक्त प्रेम रस पबए लगै छै। पानि बीच...। बंसी धार...... किनहरि बैसि कन्ह-कन्हुआ बंसी धार लगौने छिऐ। चेल्हबा-पोठी बोर बना रेहुक सिरा चभने छिऐ। रेहुक सिरा चभने छिऐ। बंसी धार...। लहकि-लहकि लहकी लहका घिड़नी चाइल धड़ौने छिऐ धारे बीच खेला-खेला हेला हेल हेलबै छिऐ। हेला हेल हेलबै छिऐ। बंसी धार...। बिनु छिपे छीप छीप-छीप उनटा पटैक मारै छिऐ। पुछड़ी-पूछ पकड़ि-पकड़ि हरदा-हरदी भरै छिऐ। हरदा-हरदी भरै छिऐ। बंसी धार...। सुआद-कुआद बुझने बिना धारा जिनगी हेलै छिऐ। हारि थाकि मन मारि-मारि उदय-अस्त देखै छिऐ। उदय-अस्त देखै छिऐ। बंसी धार...। जीबठ बान्हि...... जीबठ बान्हि जिनगी जखन आगू डेग उठबए लगै छै। धड़ धरती अस-असा अकास सहर-सिहरि डोलए लगै छै। सहर-सिहरि डोलए लगै छै। आगू डेग......। भरल वायु वायुमंडल जहिना कसम-कस भरल पड़ल छै। बिनु हिलकोरे बाँटि ने पाबए समर सगर पड़ल छै। समर सगर पड़ल छै। आगू डेग......। मृत भूमि अमृत भूमि बनबए अगुआ डेग हुअए लगै छै। पछुआ पछ पछाड़ि-पछाड़ि छाती सिर मढ़ए लगै छै। छाती सिर मढ़ए लगै छै। जीबठ बान्हि......। मढ़िते छाती सिर जखन सिर-सिर, सिर-सिर करए लगै छै। पबिते पुन्ज प्रकाश जखनि पुष्प कमल सजबए लगै छै। पुष्प कमल सजबए लगै छै। जीबठ बान्हि......। पाबि पुष्प पुष्प बाटिका जन-जनक फुलवाड़ी कहै छै। नित्या-नन्द संग-संग सीता जानकी जनक कहबए लगै छै। जानकी जनक कहबए लगै छै। जानकी जनक......। बिनु िजनगानी जिनगी ओहने तार बिनु सितार कहै छै। एकतारा कखनो सितार बनि पौरुष बुद्ध लहरए लगै छै। पौरुष बुद्ध लहरए लगै छै। जीबठ बान्हि......। राति-दिन...... लगल पाँति पतिआनी गाड़ि-गाड़ि राति-दिन बिचड़ैत रहै छी। भद्र-भद्रता तँ यएह ने भेल मरि मुँह कुहरैत रहै छी। मरि मुँह कुहरैत रहै छी। राति-दिन......। करनी-धड़नी बढ़नी बानि बनि घटनी-बढ़नी कहैत रहै छी कोयल बोल मुँह ककह ककैह मुँह बाझ अमरीत घोड़ै छी। मुँह बाझ अमरीत घोड़ै छी। राति-दिन......। बनि माली थल-मैल मैल मृत सिंगार सजबैत रहै छी। मुँह देखि मुंगबा बाँटि-बाँटि बाड़ी सिर सजबैत रहै छी। बाड़ी सिर सजबैत रहै छी। राति-दिन......। फूइस-फाइस बाँटि-बाँटि अनिष्ट-इष्ट कहैत रहै छी भूख मन भूक-भूका भूका सजमन सिर सजबैत रहै छी। सजमन सिर सजबैत रहै छी। राति-दिन......। तेहरौनी...... तेहरौनी जोत-इजोत पाबि उठा हाथ छह चास कहै छै। पबिते हर हरहरा हरहरा रूप सिंगार परकीत कहै छै। रूप सिंगार परकीत कहै छै। तेहरौनी......। असिया आस आस असिया सजि सेज श्रृंग शेर कहै छै। पबिते पौरुष प्रकृति प्रेम भजन भक्त भजि-भजि कहै छै। भजन भक्त भजि-भजि कहै छै। तेहरौनी......। रूप बहुरूप सरूप गढ़ि-गढ़ि साले-साल उसरैत कहै छै। अहिना आगू असिया-असिया चौसठि सिंगार सजैत रहै छै। चौसठि सिंगार सजैत रहै छै। तेहरौनी......। प्रेम परकीत सोभाव गुण बरैस-बरैस बेरसैत रहै छै। तोष-आसु घोड़ि-घोड़ि घोड़ अमृत रस विषपान करै छै। अमृत रस विषपान करै छै। तेहरौनी......। गेल उमरिया...... गेल उमरिया बित फुसिए मायामे दगल-दाग लगलै कंचन कायामे। देख-देख दुनियाँ मन भड़छलै रंग-रूप रस पीबामे भूक भौक भौकिया-भौकिया चोकड़ि गेल फल खेबामे। गेल उमरिया......। असिया आस आश मारै छै कुन्ज–निकंुज बोन भटकैमे कद-कद कदम गाछ हिलै छै कृष-कृष कृष्णकेँ पेबामे। कृष-कृष कृष्णकेँ पेबामे। दगल दाग......। राधा पाश पकड़ि-पकड़ि झुलना कृष्ण झुलबै छै। बात-बाट संग मीलि मिल एकबट्ट बनि बन झुलै छै। एकबट्ट बनि बन झुलै छै। कद-कद कदम गाछ हिलै छै। कृष-कृष......। कर-करनाम...... डिबिया ऊपर मोमरी इजोत कर-करनाम करैत एलै। बनि फूल खेल खेलि मोमरी मन भरैत एलै। मोमरी मन भरैत एलै। कर-करनाम......। जेहेन तेल तेहेन इजोत रसि रस राशि रसैत एलै। कठ-कठगैनी हँसि-हँसि कटि डिबिया रासि जरैत एलै। डिबिया रासि जरैत एलै। कर-करनाम......। बनि इजोत बन-बन करए गन्ह हवा गन्हकैत एलै। सिक्त-सिक्त शिखा पकड़ि परिचए अपन धड़ैत एलै। परिचए अपन धड़ैत एलै। कर-करनामा......। पात बीच फूल फूलि फुला करिया झुमैड़ खेलैत एलै। बिनु पाते मगर पसीद रंग-रभस करैत एलै। रंग रभस करैत एलै। कर-करनाम......। मनुख कहाँ...... मनुख कहाँ हम बनि पेलिऐ मीत यौ, मनुख कहाँ हम बनि पेलिऐ। नै भेल लूड़ि-बूधि जीबै केर नै बदलल चाइल-प्रकृति अपने जेना जे अबैत गेल तनलिऐ तहिना तानि गीत। तनलिऐ तहिना तानि गीत। ताल-मात्र बूझि नै पेलिऐ मनुख कहाँ हम बनि पेलिऐ। चालनि चाल चालि नै ताबे गुर-चौल कात केना रखबै। आँकर-पाथर जा नै बेरतै सुआद-कुआद केना बुझबै। अखनो धरि से कहाँ बुझलिऐ मनुख कहाँ हम बनि पेलिऐ। उत्तर-पूब सोपान सजल छै अकास-पताल पकड़ि बैसल छै। सत तल जेना उत्तर बसल छै अतल-पतल सेहो बनल छै। आइयौ कहाँ से बूझि पेलिऐ मनुख कहाँ हम बनि पेलिऐ। ढहि केतौ ढनमन केतौ ढनमन-टनमन होइते एलिऐ मन मनुआ मन्हुआँ महुरा अमृत-मृत पीबैत एलिऐ। अमृत-मृत पीबैत एलिऐ। मनुख कहाँ हम बनि पेलिऐ। जहिया दुनियाँ-जहान जनबै मनसुख तहिया बनि जेबै। सोंखि-सोंखि सुख-चाइन पेबै आनन-कानन भड़मैत पेबै। आनन-कानन भड़मैत पेबै। जीता जी जिनगानी पेलिऐ जीता जी जिनगानी पेलिऐ। 2 रामदेव प्रसाद मण्डल ‘झारूदार’ जीक गीत एवं झारू झारू सुति उठि लागू भोरे बाबू माए-बाबूकेँ गोड़ यौ। एकड़ा सन जगमे नै कियो सेवापर दिऔ जोर यौ। गीत- माए गइ बोल तोहर छौ, बाइबिल वेद कुरान गइ। शान्तिकेँ बरदान गइ ना-2 तूँ तँ जगमे अनुपम, केकर उपमा देबै हम। सौंसे दुनियाँमे नै, कियो तोरा समान गइ। शान्ति...। आगू तूँ पाछू भगवान, जगमे तुहीं एक महान। तोरे नाओंसँ पुज्जित मंदिरक भगवान गइ। शान्ति...। तूँ तँ ममता केर अकास। पहिल गुरु केर प्रकाश। तुहीं जगमे देखेलही, जीबै केर समान गइ। शान्ति...। तूँ तँ अल्ला, ईषू, महेश, कार्तिक गणपति और गणेश। माए गइ चरण तोहर छौ, गंगामे स्नान गइ। शान्ति...। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.राजदेव मण्डल- दू टा कविता २.राजीव रंजन मिश्र १ राजदेव मण्डल दू टा कविता- १ पसरैत प्रशाखा जर्जर बूढ़ अनचिन्हारक गाछ हवा नचा रहल छै नाच लटकल असंख्य डारि-पात चारूभर आ काते-कात सहने हएत कतेक अधात केतेक छूटल केतेक साथ करैत एक दोसरसँ बात परेमसँ भेल स्नात। हमर चलैत अन्तिम साँस स्वजन-परिजन आस-पास एकेटासँ बढ़ि केतेक रास सँगे चलैत सिरजन विनाश झूठ-साँच मध्य नचैत नाच हम बन छी अनचिन्हक गाछ। २ खसैत बुन्द खसैत बून-बून गाबै गुन-गुन चिड़ै चुन-चुन झिंगुर झुन-झुन बरसैत मगन धन देखैत मन नयन नाचैत सुमन मन तृषित भीजैत तन सूखल कण-कण अमृतसँ मिलन। चलैत रहत आखेट नै टुटत जिनगीक गेँठ आबि गेल जेठ दुख गेल मेट सभ किछु समेटि आब हएत भेँट। २ राजीव रंजन मिश्र गजल
माए सदति अनमोल लगैत छथि मिठगर अमृत सन बोल बजैत छथि
सदिखन सहल सभ बात कचोट ने गाए बनल अहलाद बँटैत छथि
मोनक अपन सभ बात दबौवलथि सन्तान लै सुख चैन रचैत छथि
दमसब हुनक नित बाट सुझैत टा बिहुँसथि मनुख जे नेह करैत छथि
माए सुनर उपहार सनेश थिक खनहन रहथि "राजीव" रटैत छथि
२२१२ २२१ १२१२
२ जानकी गीत
माँ जानकीक जनमदिन घर घर मे हम मनाबी सभ मिलि ख़ुशी मनाबी अ-क्षत दीप हम जराबी माँ जानकीक जनमदिन...........
मिथिला जिनक छल नैहर,मैथिल अपन छलथि यौ हम मैथिलक धरम बुझि,करतब अपन पुराबी माँ जानकीक जनमदिन...........
मिथिलेशनंदनी छथि सदति ममताक रूप सुन्नर चललीह जे बाट सत्तक हम गीत हुनक नित गाबी माँ जानकीक जनमदिन...........
धियाक रूपे गुनगर,भार्याक रूपे लुरिगर दुहि कुलकँ लाज रखलीह गहि मान हम बढाबी माँ जानकीक जनमदिन...........
हे माए हम छी बुरिबक,महिमा ने जानि सकलहुँ रही ने आब निरसल नब रूप धए देखाबी माँ जानकीक जनमदिन...........
"राजीव" यैह बिनबैथ,जग जननि जानकीसँ मैथिलकँ ज्ञान जागय,इतिहास पुनि रचाबी माँ जानकीक जनमदिन........... ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। १.बिन्देश्वर ठाकुर- प्रवासक वेदना/ सुनि लिअ दू बात हमर/ अन्हार जिनगी २.अब्दुल रजाक- गणतान्त्रिक देश १ बिन्देश्वर ठाकुर, गिद्धा ७ योगियारा, धनुषा नेपाल, हाल :कतार। प्रवासक वेदना/ सुनि लिअ दू बात हमर/ अन्हार जिनगी १ प्रवासक वेदना
हमर जिनगीक कोनो हिसाब नै रहल पढ़बाक लेल कोनो किताब नै रहल बैसल छी एखनो असगरे एकान्तमे किन्तु पीबाक लेल कोनो शराब नै रहल ।।
सपनामे ओहे चेहरा अबैए अबैत अछि वएह ठाम आ गाम कतबो बिसरऽ चाही दिलसँ नै बिसरि पाबी जनकपुर धाम।।
छी मैथिल हम मिथिलाक बासी दूर छी तैयो अपन प्रदेशसँ विवशताक मारल,परताड़ल पत्र लिखै छी अलग देशसँ।।
माए बाबूकेँ चरण वन्दना दोस्तकेँ हमर सलाम रहल अनजान-सुनजानपर ध्यान नै देबै माफ करब सभ कहल सुनल।।
मन लगाबी कतबो एतऽ जिउ टाङ्गल अछि दुरापर दिन कटै छी राति यै भारी सदखैन जान अस्तुरापर।। प्रेमक मल्हम फोन बनल अछि जीबाक माध्यम दु बात अछि थाकल ठेहयाएल आबी जौँ कखनो लागै नै केओ साथ अछि।।
कते कहू प्रवासक वेदना लिखैत सेहो शरम लगैए नोर आँखिसँ टपटप चुबए कलम पकड़ैत हाथ कपैए।।
बस ईएह विनती नीकसँ रहब नीकसँ राखब गाँउ समाज एक दिन हमहूँ लौट कऽ आएब जगमग करतै मिथिला राज।।
२ सुनि लिअ दू बात हमर
भला करब तँ भला मिलत बुरा करब तँ बुरा मिलत ई छै जगत जननीक धरती कर्मक फल अवश्य मिलत।।
हे मानव नीक कर्म करु करै छी किएक खिसिआएल सन चोरीक धन नै रहत सभ दिन करै छी किएक धधियाएल सन ।।
ऐठाम सभ किछु नाशवान छै जाए पड़त ई जग छोड़ि कऽ बिनु भक्तिक सुख नै भेटत रहब कते मुँह मोड़ि कऽ।।
सुनै छी जानकी मन्दिरमे गिट्टी बालु गिरबै छी अपन स्वार्थ पुरा हेतु जनताकेँ घिसियबै छी।।
एखनो ज्ञानक ताला खोलू आबि जाउ नीक पथपर दुर्दशासँ बचौथिन मैया आसन हएत स्वर्ग रथपर।।
हम सभ मैथिल एक रही एकजुट भऽ साथ चली पहिचान बनाबी अपन मिथिलाक इतिहासक पन्नापर चमकैत रही।।
३ अन्हार जिनगी
चिड़ै चुनमुन चिरबिर कएलकै चारु दिस भोर भेलै प्रकाशक किरण पृथवीपर उतरलै घर-आङ्गन इजोर भेलै मुदा हुनका चेहरापर कारी पर्दा लगलै कोनो बन्दी जकाँ कोनो चोर जकाँ अथबा,कोनो निरीह बस्तु जकाँ जकर महत्व किछु नै।
सड़कपर अपन कमर हिलबैत फिलिपिनी परीकेँ देखि ओकर मन धुजा-धुजा भऽ गेलै तन सिहैर गेलै आ सपना चकनाचुर भऽ गेलै मुदा विवशता छै बाध्यता छै अपन सुन्दर आ लचकदार शरीरकेँ देखएबाक स्वतन्त्रता नै छै हुनका सुन्दरताक बयान सुनब अधिकारसँ वंचित छै ओ जेना कोनो जेलमे रहल प्राणी होइ वा,कोनो पिजड़ामे बान्हल सुगा।
बाहरक रङ्गीचङ्गी वातावरणमे अपनाकेँ तिरस्कृत भेल महशुस करैत जखन अबै छथि ओ अपन घरमे आ देखै छथि टि.भी पर सनीलियोनकेँ हट सिन प्रियङ्का चोपड़ाकेँ अर्धनग्न वस्त्रमे ठीक ओहने निहारै छथि अपना शरीरकेँ कतेक मिलल कतेक सुन्दर शरीर ! मुदा नै कियो तारीफ करऽ बला ऐ फूलकेँ नै कियो सुगन्ध लेबऽ बला ऐ वासनाकेँ मन खिन्न भऽ जाइ छै खाड़ीकेँ रानी सभकेँ मन बेपिरीत भऽ जाइ छै एहन समाज आ संस्कारसँ जकर सीमा बस पर्दाक भीतर एकटा कैद जिनगी जकाँ केवल अन्हार... अन्हार.... २ अब्दुल रजाक, हरिपुर ४, धनुषा (नेपाल), हाल : कतार गणतान्त्रिक देश
राणा शासनक बाद राजा शासन भेलै निर्दलसँ फेर बहुदल भेलै जब-जब लोकक बुद्धि फैलैत गेलै बहुदलसँ देश गणतन्त्र भेलै।।
गणतन्त्रक गन्ध जब खतम नै भेलै नेताक स्वार्थमे तब बेमेल भेलै जनता जनार्दनक हालत देखियौ गरीबी, रोजगारी सबकेँ सन्देश भेलै।।
विज्ञानक बिदद्वारा गतिमान भऽ जब जब कपड़ा बनएबाक बिस्तार भेलै कपड़ा बड़का की पहिरथिन कन्या लोकनि चट्टी सजा अत्याधुनिक भऽ गेलै ।।
शिक्षा संगे सभ्यताक बिकास भऽ लोग कहै छथि समाज होशियार भेलै मुदा मर्द बिना के परिवार छै केहन अपङ्ग समाजक एक उपहार भेलै।।
चौक चौराहाक हानि भेलै तास जुआक अखाड़ा भेलै भला कहू तँ बुरिबक छी बुरिबक काज कएनिहार भला आदमी भेलै।।
परिवार डुबल तँ की डुबल ? समाज डुबल तँ किछु भेलै देशक चिन्ता कएनिहारकेँ चिन्ता केहन परदेश आबि देशक चिन्ता भेलै।। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण ४.तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद डॉ. शम्भु कुमार सिंह द्वारा पाखलो बालानां कृते १.कुन्दन कुमार कर्ण- बाल गजल २.अमित मिश्र-नेङगरा दरबान १ कुन्दन कुमार कर्ण बाल गजल ---------------------------------------- फुल फुललै फुलबारीमें, बनल जतरा ताही ऊपर खेलैछै कते भमरा
नाचै मयुर डुबिक अपने मनक धुनमें लागै बड निक चुन चुन जे करै बगरा
सब गाछीपर जे बानर कुदै छरपै बर गाछीपरसं सुनबै सुगा फकरा
कोर्इली कुचरै गाछपर भिनसरमें बोली मधुर बहुत निक लागलै हमरा
खेलब कुदब अहीना फुलक सँग सदिखन हम बांटब नितदिन पंक्षी क खुब अहरा
---------------------------------------- मफ्ऊलात्-मफार्इलुन्-मफार्इलतुन् २२२१-१२२२-१२११२ २ अमित मिश्र नेङगरा दरबान
राजा जीक गाछीमे, दरबान बनि एलै चोर भरि राति खेलक आम चलि गेल भोरे-भोर कहियो लीची कहियो आम कहियो जामुन, कटहर बदलि-बदलि कऽ सब दिन खाए अंगुर आ बरहर मालीकें जे पता चलल तँ ओ बहुते तमसाएल आइ रातिमे सब सिखेबै, मुदा चोरबे नै आएल दोसर दिन जे चोरबा एलै, माली फोंफ काटै छल एकटा पुरना गाछपर चोरबा चुप्पेचाप चढ़ै छल एकटा ठाढ़ि कोकनल छलै पड़लै जखने टाँग ठाढ़ि सहित धरतीपर खसल टूटल हाथ आ टाँग ओ बुझै छल किओ नै देखै मुदा देखै छथि भगवान देलनि सजाय एहन जे बनि गेल ओ नेङगरा दरबान ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पडला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ : ढक उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक। अपूर्ण रूप : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक। पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड / बडी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढइन बढन्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2012-13) (१४२० फसली साल) Marriage Days: Nov.2012- 25, 26, 28, 29, 30 Dec.2012- 5,9, 10, 13, 14 January 2013- 16, 17, 18, 23, 24, 31 Feb.2013- 1, 3, 4, 6, 8, 10, 14, 15, 18, 20, 24, 25 April 2013- 21, 22, 24, 26, 29 May 2013- 1,2,3,5,6,9,12,13,17,19,20,22,23,24,26,27,29,30,31 June 2013- 2,3 July 2013- 11, 14, 15 Upanayana Days: January 2013- 16 February 2013- 14, 15, 20, 21 April 2013- 22 May 2013- 20, 21 Dviragaman Din: November 2012- 25, 26, 28, 29 December 2012- 2, 3, 14 February 2013- 14, 15, 18, 20, 21, 22, 27, 28 March 2013- 1 April 2013- 18, 22, 24, 26, 28, 29 May 2013- 12, 13 Mundan Din: November 2012- 26, 30 December 2012- 3 January 2013- 18, 24 February 2013- 1, 14, 15, 20, 28 April 2013- 17 May 2013- 13, 23, 29 June 2013- 13, 19, 26, 27, 28 July 2013- 10, 15 FESTIVALS OF MITHILA (2012-13) Mauna Panchami-08 July Madhushravani- 22 July Nag Panchami- 24 July Raksha Bandhan- 02 Aug Krishnastami- 10 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 17 August Vishwakarma Pooja- 17 September Hartalika Teej- 18 September ChauthChandra-19 September Karma Dharma Ekadashi-26 September Indra Pooja Aarambh- 27 September Anant Caturdashi- 29 Sep Agastyarghadaan- 30 Sep Pitri Paksha begins- 30 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-08 October Matri Navami- 09 October SomvatiAmavasya Vrat- 15 October Kalashsthapan- 16 October Belnauti- 20 October Patrika Pravesh- 21 October Mahastami- 22 October Maha Navami - 23 October Vijaya Dashami- 24 October Kojagara- 29 Oct Dhanteras- 11 November Diyabati, shyama pooja-13 November Annakoota/ Govardhana Pooja-14 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 15 November Chhathi -19 November Devotthan Ekadashi- 24 November ravivratarambh- 25 November Navanna parvan- 25 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 28 November Vivaha Panchmi- 17 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 08 February Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 15 February Achla Saptmi- 17 February Mahashivaratri-10 March Holikadahan-Fagua-26 March Holi- 28 March Varuni Trayodashi-07 April Chaiti navaratrarambh- 11 April Jurishital-15 April Chaiti Chhathi vrata-16 April Ram Navami- 19 April Ravi Brat Ant- 12 May Akshaya Tritiya-13 May Janaki Navami- 19 May Vat Savitri-barasait- 08 June Ganga Dashhara-18 June Somavati Amavasya Vrata- 08 July Jagannath Rath Yatra- 10 July Hari Sayan Ekadashi- 19 July Aashadhi Guru Poornima-22 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT
https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/ http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु 101 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ‘विदेह'१३२ म अंक १५ जून २०१३ (वर्ष ६ मास ६६ अंक १३२) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA