ISSN 2229-547X VIDEHA ‘विदेह' १३८ म अंक १५ सितम्बर २०१३ (वर्ष ६ मास ६९ अंक १३८) ऐ अंकमे अछि:- ऊँच-नीच- बेचन ठाकुर भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली] विदेह मैथिली पोथी डाउनलोड साइट VIDEHA MAITHILI BOOKS FREE DOWNLOAD SITE विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link. विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक ↑ विदेह आर.एस.एस.फीड एनीमेटरकेँ अपन साइट/ ब्लॉगपर लगाऊ। ब्लॉग "लेआउट" पर "एड गाडजेट" मे "फीड" सेलेक्ट कए "फीड यू.आर.एल." मे http://www.videha.co.in/index.xml टाइप केलासँ सेहो विदेह फीड प्राप्त कए सकैत छी। गूगल रीडरमे पढ़बा लेल http://reader.google.com/ पर जा कऽ Add a Subscription बटन क्लिक करू आ खाली स्थानमे http://www.videha.co.in/index.xml पेस्ट करू आ Add बटन दबाउ। Join official Videha facebook group. 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(शान्त भऽ) मरनी- अप्पन काजमे लगल रहक। जे किछु कण-साग भगवान देथिन ओकरा भरि मन खाहक। ताड़ी-दारू नै पीहक। बेसीसँ बेसी साफ-सुथरा रहक। नीरोग रहबे करबह। मंगल- एते दिन तँ नै पुछलियौ। मुदा आइ पुछै छियौ- तूँ पढ़ल-लिखल छेँ की? मरनी- नै हौ, अमरुखे छी। मंगल- तँ एते केना बुझै छिही? मरनी- देखै छहक, हम जल्दी बेराम पड़ै छी। एक दिन सुगर चरबैले गेलौं तँ हाइ इसकूलपर एगो मुनसा पाँच हाथक छेलै, उ भाषणमे यएह सभ कहै छेलै। कनी काल ठाढ़ भऽ सुनलौं। बड़ नीक लगल। ओहिना करए लगलौं। बड़ फेदा बुझाइए। पाँच-छह बर्ख पहुलका गप छिऐ। जखनि सुगरपर धियान गेल तँ सुगर बड़ दूर चलि गेल छल। दौग कऽ सुगर लग गेलौं। भाषण छूछि गेल। मंगल- आरो जे किछु कहबेँ से तँ मानि लेबौ। मुदा ताड़ी-दारू बिना रहल नै हेतौ। मरनी- से किअए, ताड़ी-दारू अमृत छिऐ? मंगल- बानर जानए आदी सुआद। तूँ नै पीऐ छेँ तँए बेसी फुराइ छौ। जखनि पीने रहै छी तखनि दुनियाँमे हमरासँ नम्हर के रहै छै। कियो नै। बड़ मन लगै छै। मरनी- बड़ मन लगै छह तँ ओकरा तियागल नै हेतह तोरा? मंगल- ऊँह, ओइ बिना हमरा रहल नै हेतौ। अन्न-पानि बिना रहियो सकै छियौ। मरनी- एगो करह, दारू साफे छोड़ि दहक आ साँझहे-साँझ एक फुच्ची ताडीएटा पीअह। अपना सभ गरीब छी। मंगल- हँ, बड़ बेसी तँ ई चलैबला छौ। अहूमे हमरा बड़ बरदास करए पड़त। खैर, ई करबौ। मरनी- तब तोहर इज्जत डोममे जरूर बढ़तह। फेर बौआ दुखनक पढ़ाइपर सेहो धियान देबहक किने। एक दिन रस्तामे मास्टर कहै छेलखिन- अहाँक बौआ बड़ चन्सगर अछि। एकरा मनसँ पढ़ाउ। मंगल- से तँ ठीके कहै छेँ। छौड़ा मनसँ पढ़त-लिखत तँ सरकारी नोकरी अबस्स हेतै। अपना सभकेँ सरकार छूट देने छै। मुदा आइ-काल्हि पढ़ाइमे बड़ खरचा लगै छै। ओते खरचा कतएसँ अनबीही? मरनी- हिम्मत नै हरह। नै तँ सभटा काज चौपट भऽ जेतह। तोहर दारूक खरचासँ बौआ पढ़ि लेत। दर-दुनियाँमे एगो बेटा अछि। बेटीक कोनो चिन्ते नै। उ सभ अपन-अपन सोसराइरमे अछि। बौआकेँ पढ़ाबह। बड़ सख लगल अछि। बड़ लोककेँ पढ़ैत देखै छिऐ। मंगल- (मुस्की दैत) एगो बात कहिऔ दुखन माए? मरनी- कहक ने। मंगल- गै एक दिनका भोज कोन आ एक दिनका राजा कोन। एगो टाका कोन, एगो बेटा कोन। मरनी- से की? मंगल- मन होइए एगो आरो बेटा होइतए। मरनी- चुपह-चुपह लोक सुनतह तँ की कहतह? आठ गो छैहे से बिसरि गेलहक। खाली जनमेने होइ छै आकि ओकर पतिपालो करए पड़ै छै। बेटा-बेटी दुनूकेँ अपना-अपना जगहपर बड़ महत छै। कियो केकराेसँ कम नै छै। तोरा तँ एगो बेटा छह। केकरो किच्छो नै रहै छै से। उ केना रहै छै? मंगल- से तँ ठीके कहै छेँ। खैर, छोड़ बेटा-बेटीक लपौड़ी। छौड़ेकेँ मनसँ पढ़ाएब आ बड़का हाकिम बनाएब। मरनी- अाब बजलह एक लाखक गप। पटाक्षेप। दोसर दृश्य (स्थान- मंगलक घर। मंगल कोनियाँ बीनि रहल छथि।) मंगल- हमर सरबेटा उपीमे बड़का हाकिम छै। इस.डी.ओ हँ हँ इस.डी.ओ। बिना पढ़ने भेल हेतै। सोसराइर जाइ छी तँ हुनकर मकान देखि कऽ चकबिदोर लगि जाइए। हमरो बेटा पढ़ि-लिखि कऽ ओहने हाकिम बनतै। (दुखनक प्रवेश) दुखन- बाउ, काल्हि फर्म भरेतै। काल्हिए अंतिम डेट छै। पाँच सए टाका लगतै। मंगल- (आश्चर्यसँ) बाप रे बाप, पाँच सए टाका। पाँच सए टाका। दू-चारि दिन पछाति भरबीही तँ नै हेतै। दुखन- हेतै तँ, मुदा फाइन लगतै। फाइन लऽ कऽ चारम दिन धरि फार्म भरेतै। एक सए टाका फाइन लगतै। दुनू मिला कऽ छह सए लगतै। मंगल- एते पाइ कहियो नै लगल छल। मैट्रिकमे बड़ खरचा लगै छै बौआ। पेटकेँ देखबै की फारम भरइ देखबै। खैर, तूँ इसकूल जो। कनी माएकेँ पठा दिहनि। (दुखनक प्रस्थान) मत तँ होइए बेटाकेँ खूम पढ़ा-लिखा बड़का हाकिम बनैबितौं। मुदा बिना मालक कमाल केना हेतै। (मंगल माथपर हाथ लऽ कोनियाँ बिननाइ बन्न कऽ दइ छथि। मरनीक प्रवेश।) मरनी- की कहलकह? (मंगल कनीकाल गुम्म रहै छथि।) की कहलहक? मंगल- की कहबौ, बौआकेँ फारम भरैमे छह सए टाका लगतै। से किछु नै फुराइए। की करबिही? कहिहनि ऐबेर छोड़ि दइले। पौरु साल देखल जेतै। मरनी- परियास करहक ने। नै हेतै तँ बूझल जेतै। घरमे छिट्टा आ कोनियाँ छै ने, ओकरे बेचि कऽ दऽ देबै। छह गो छिट्टा छै आ पाँच गो कोनियाँ छै। एक-एको सएमे छिट्टा बिकतै आ तीसो-तीसोमे काेनियाँ तँ छह सएसँ बेसीए भऽ जेतै। मंगल- फेर खेबही की आ बाँसबलाकेँ कथी देबही? मरनी- कहुना कऽ दिन-गुदस कऽ लेबै आ बाँसबला मालिककेँ नेहोरा-विनती कऽ लेबै। कहबनि एना-एना बात भऽ गेलै मािलक। उ अबस्स मानि जेथिन। मंगल- तूँ बेसी बुझै छिही। हुनका हम चिन्है छियनि। उ मक्खीचुसक ओइध छथिन। ताड़ीओवालीकेँ अझुका ना कहने छेलिऐ। पचास टाका ओकरो भऽ गलै। मरनी- हुनको कहिहक एना एना भऽ गेलै। से कनी दिन थम्हू। मंगल- बेस, कहबै। गै, कोनियाँ-पथियाक कोनो गिरहत भँजियाएल छौ की? मरनी- एक दिन आहए बाँसबला मािलक कहने छेलखिन किछु कोनियाँ-पथिया दइले। जाइ छिऐ हुनके दऽ देबनि। मंगल- जो, मालिकसँ पटतौ की नै पटतौ। मरनी- किअए नै पटतै। अपने पसारी छथिन। नअ-छह कए कऽ दऽ देबनि। मंगल- बाँसक पाइ काटि लेथुन तब की करबिही? मरनी- पएर-दारही पकड़बनि जे ऐबेर नै लेथुन। बौआकेँ फारम भरैले पाइ देबाक छै। कनी-मनी लगाइए कऽ देथुन सधाए देबनि। मंगल- जो, झब दऽ जो। नै हेतौ तँ ओम्हरेसँ ओम्हरे हटिया चलि जइहेँ। आकि हमहूँ चलियौ? मरनी- तूँ कथीले जेबह। एक आदमीक काजमे दू आदमी किअए बरदेबह। फेर सुगरो चरबैले जाइक छह ने। मंगल- हँ से तँ ठीके। देरी नै कर झब दऽ जो। मरनी- बेस, जाइ छिअ। (प्रस्थान) मंगल- जइ दिनसँ दारू पीनाइ छोड़ि देलौं तइ दिनसँ कोनो काजमे मन नै लगैए। कहुना-कहुना काज-उदम करै छी। लोक सभकेँ पीऐत देखै छिऐ तँ मन चटपट करए लगैए। मुदा पढ़ाइक खातिर हम एते मजबूर छी। के की लऽ कऽ आएल आ की लऽ कऽ जाएत। खेलहा-पीलहा ने संग जाएत आरो कथी। जदी अपना लग पाइ रहितए तँ आइ कनी देखतीऐ दारू दिस। एक्कोटा कोनियाँ बीकि जैतै तँ दारू जोग भऽ जैतै। ऐ बीचमे कोनो सार गौंहकी नै ने आएत। भगवानो हमराले अखनि बड़ दूर गेलखिन हेँ। कहिया एथीन कहिया नै। दारूबला सार तेहेन खच्चर अछि से एक्को टाका उधारी नै देत। (कोनियाँ लइले बुधनक प्रवेश।) बुधन- (प्रसन्न भऽ) की हौ मंगल काका, एगो कोनियाँ लेबाक छेलए। छै अपना लग? मंगल- हाथेबला दऽ देबह। कनीए रहि गेलै। बढ़ियाँसँ बीनि दइ छिअ। बुधन- पाइ केते लेबहक? मंगल- कोनो हाथी-घोड़ाक दाम लगतह? पचासे टाका दऽ दिहक। बुधन- बड़ बेसी कहै छहक। उहो दिन हटियापर ऐसँ नम्हर आ डिजेनगर बीस टाकामे बिकाइ छेलै। पाइ नै रहए नै लेलौं। सोचलौं गामपर अपन डोमसँ लेब तँ सस्तामे हएत। मुदा तूँ बड़ महग कहै छहक। मंगल- की करबै मालिक महगाइ केते बढ़ि गेलै। बाँसो महगमे कीनए पड़ैए। फेर मेहनतो बड़ लगै छै। लाबह ने जे देबहक से। तूँ हमर पसारी छिअ ने। बुधन- (बीस टकही निकालि कऽ) लैह, हम एतबे देबह। मंगल- (बीस टाका लऽ कऽ प्रसन्न मने) इहए एगो पन्नीओक पाइ नै? दसो गो आरो दहक मालिक। बुधन- आ नै हेतह। देबहक तँ दहक नै तँ जाइ छी हटिएपर कीनि लेब। मंगल- से तँ नै हेतह मालिक। हमरा तोरापर दाबी अछि। आब पाइ दहक की नै दहक। मुदा घूमि कऽ नै जाए देबह। (गिड़गिड़ाइत) हे हे, कक्काकेँ अपना दिससँ खाइ पीऐले पाँचो टाका दहक मालिक। बुधन- जा तूहीं जीतलह। पाँच गो खाइ पीऐले दइ छिअह। (पँचटकही बुधन मंगलकेँ देलखिन आ उ पाइ लऽ कोनियाँ हुनका देलनि। बुधनक प्रस्थान) मंगल- (प्रसन्न मने) भगवान बड़ीटा छथिन। सबहक जोगार लगबै छथिन। आइ एगो पन्नी पीबेटा करबै। जे हेतै से हेतै। पटाक्षेप। तेसर दृश्य- (स्थान- चन्द्रेश झाक हबेली। अपन दलानपर कुरसीपर बैस सिकरेट पीबै छथि। दलानपर चारि-पाँचटा कुरसी आ एगो टेबुल लगल छन्हि।) चन्द्रश- (सिकरेट मीझा कऽ रखि खिसियाइत) ओइ डोमीनियाँकेँ कहने छेलिऐ छिट्टा-कोनियाँ देबाक लेल। कहलक नेने आएब मािलक। से आइ धरि अबिते अछि। धान सभ राइ-छित्ती होइत रहैए। गोबर-करसी जतए-ततए पड़ल अछि। सभटा बरसातेमे टूटि-टाटि गेल। आब ओइ डोमीनियाँकेँ देखबै तहन ओकरा सिखेबै जे कोन बाँसक दाहा होइ छै। (फेर ठुट्ठी बीड़ी लगा कऽ पीबए लगै छथि। तखने पाँचटा छिट्टा आ पाँचटा कोनियाँ लऽ कऽ मरनीक प्रवेश। चन्द्रश बीड़ी मीझा कऽ रखि लइ छथि।) मरनी- (दलानपर कोनियाँ-पथिया रखैत दूरेसँ) गोर लगै छी मािलक। चन्द्रेश- (खिसिया कऽ की गोर लगै छेँ। कहिया कहलियौ छिट्टा-कोनियाँ दऽ जाइले से आइ एलेँहेँ। सभटा समान राइ-छित्ती भऽ जाएत तँ लऽ कऽ की करब। जे तूकपर नै से कथीदुनपर। मरनी- की करबै मालिक, दुखना बाउकेँ मन खराप भऽ गेल छेलै। तँए देरी भऽ गेलनि। चन्द्रेश- हमरा सीखबै छेँ, हमरा ठकै छेँ। कही ने, दारू पीऐसँ फुरसत नै भेलै। मरनी- नै मालिक, आब कहाँ पीऐ छै दारू। खाली साँझेटामे एक बोतल ताड़ी पीबै छै। (चन्द्रेश हँसि दइ छथि।) चन्द्रेश- बिलाइ केतौ वैष्णो भेलैए। खैर, दारू छोड़ि देलकौ से तँ बड़ नीक केलकौ। ताड़ी ओतेक खतरनाक नै छै आ पाइओ कम लगै छै। अच्छा होड़ ई गप-सप्प। कह कएगो कोनियाँ आ कएगो पथिया छौ? मरनी- पाँच गो कोनियाँ आ पाँच गो पथिया छन्हि। चन्द्रेश- सभटाकेँ कएगो पाइ भेलौ? मरनी- डेढ़ सए टके पथिया आ पचास टके कोनियाँ जोड़ि देथुन। चन्द्रेश- बड़ महग कहै छिही। मरनी- की करबै मालिक, बाँस बड़ महग भऽ गेलै। हिनकेमे सँ बीस-पच्चीस टके कटै छेलियनि। मुदा अखनि इहए सौंसे नमरी लऽ लइ छथिन। तैपरसँ मेहनतो बड़ लगै छै। से कोनो ई नै बुझै छथिन। देथुन ने दस टाका कमे। चन्द्रेश- (ठुट्ठी सिकरेट लगा कऽ पीऐत) हम मोलाइ-तोलाइ नै करै छिऐ। हम एक्के बेर कहै छिऐ। देबाक हेतौ तँ दिहेँ, नै तँ लऽ जइहेँ। मरनी- कहियौ मालिक। कनी सोचि कऽ कहथुन। हमहूँ अहीपर छी ने। चन्द्रेश- पचास टके छिट्टा आ बीस टके कोनियाँ। सभटा मिला कऽ सारहे तीन सए टाका भेलौ। मरनी- बड़ कम्म भेलै मालिक। हटियापर बेचबै तँ बड़ कम्म हेतै तँ आठ सए। ई साते सए दऽ देथुन। चन्द्रेश- (खिसिया कऽ) कहलियौ ने हम एक्केबेर बजै छिऐ। देबाक छौ तँ दही नै तँ लऽ जो अपन कोनियाँ-पथिया। मरनी- ओते नै खिसियाथुन। एकबेर ईहो बजथुन। चन्द्रेश- पचास टाका आरो देबौ। देबाक छौ तँ दही नै तँ लऽ जो। मरनी- बड़ आशासँ हिनका आएल रहियनि जे मालिक किछु लगा कऽ देथिन। बेटाकेँ मैटरिकक फारम भरैक छै। मुदा ई उचितोमे बड़ कम्म दइ छथिन। चन्द्रेश- बेटा मैट्रिकक फार्म भरतौ! (आश्चर्यसँ) मरनी- हँ मालिक। छौड़ा छह सए टाका मंगै छै। आखिरी छओ सए टाका दऽ देथुन। चन्द्रेश- (खिसिया कऽ) भगलेँ की नै एतएसँ। कप्पार खाइले एलेँहेँ जो, लऽ जो, अपन बेचि लिहेँ। अखनि तुरन्त भाग। नै तँ हमर नरसिंह तेज हेतौ तँ बापसँ भेँट कराए देबौ। मरनी- कोनो हिनका राजमे बसल छियनि जे हमरा बापसँ भेँट करेता। कोनो करजा नै मांगए आएल छियनि जे हमरा बापसँ भेँट करेता। कोनो एक-बरकेँ दू-बर नै मंगै छियनि जे एहेन कथा कहता। अपन गिरहत जानि कऽ एते खेखनियाँ करै छेलियनि। चन्द्रेश- तूँ करजा ना लेलेँ तँ अखनि बाँसक एक सए टाका निकाल नै तँ एतएसँ ससरए नै देबौ। (िसकरेट लगा पीऐ छथि।) मरनी- मालिककेँ एहेन बुधि होइ छन्हि जे गरीब-लचारकेँ मजबूरीक फेदा उठाबी। अखनि जाए दथु। इहए कोनियाँ-पथिया बेचि कऽ हिनका पाइ दऽ जेबनि। अखनि हम कतएसँ पाइ देबनि। चन्देश- हम तँ किच्छो नै बुझै छिऐ। हमरा पाइ चाही अक्खनि। नै तँ ससरि नै सकै छेँ। (मरनी कोनियाँ-पथिया माथपर उठा जाए चाहैत मुदा चन्द्रेश कुरसीपर सँ उठि बेंत देखबैए।) एक्को डेग तँू ससरि कऽ देख लही। की दशा होइ छौ। (मरनी डरसँ नै ससरि रहली अछि।) मरनी- (कनैत-कनैत) नै पाइ छेलै तँ मुड़ीमचरूआ किअए बाँस लेलकै। भुखले रहितौं तँ सुतले रहितौं। ओइले हमरा बेज्जति करैए। जेबै घरपर सातो पुरखाकेँ उकटबै सरधुआकेँ। बज्जर खसौना ने हमरा एते बात-कथा सुनबैए। चन्द्रेश- एतए गारि देबही तँ अखनि बेंतसँ ससारि देबौ। (मारैले उठलथि।) (चन्द्रेशक एकलौती बेटी चन्द्रप्रभाक प्रेवेश। अबिते अपन पिताकेँ भरि पाँज पकड़ि मरनीकेँ बँचौलनि।) चन्द्रप्रभा- गै डोमिनियाँ, एते गारि किनको दुरापर किअए दइ छिही ई नीक बात नै भेलौ। जो बाटमे गारि पढ़िहेँ जेते मन हेतौ तेते। मरनी- हम अपन घरबलाकेँ गारि दइ छिऐ। आनकेँ तँ नै दइ छिऐ। चन्द्रप्रभा- से तँ हम अन्दरेसं सुनलियौ। मुदा एतए गारि नै दही घरपर दिहनि। जो एतएसँ। तूँ सभ नै ने सुधरबेँ। मरनी- हमरा सरधुआ खातिर अहाँक बाबू हमरा नै जाए दइ छथि। चन्द्रप्रभा- की भेलै से? कोनो कारण हेतै ने? मरनी- की कारण रहतै। इहए जे हमरा बेटाकेँ मैटरीकक फारम भरैक छै। छह सए टाका लगतै। कहलिऐ कोनियाँ-पथिया बेचि कऽ दऽ देबै। मालिको कहने छेलखिन दऽ जाइले। लऽ कऽ एलौं तँ मालिक बड़ कम दाम लगौलखिन। हमरा पड़ता नै पड़ल। कहलियनि कनी आरो देथुन। अपन-अपन नफ्फा तँ नै चाहै छै। कम-सँ-कम बेटाक फारम भराइ छह सए देथुन। तहीपर खिसिया गेलखिन आ कहलखिन जे बाँसक पाइ एक सए टाका अखनि राख तब जइहेँ। चन्द्रप्रभा- दुखन अहींक बेटा छी? मरनी- हँ, हमरे बेटा छी। चन्द्रप्रभा- बड़ तेज अछि बेटा। खूब मनसँ पढ़ाउ। मरनी- गरीब बुते पढ़ाएल हेतै? फारम भरैक पाइ नै जुमै छै। चन्द्रप्रभा- (प्रसन्न मने) पापा, अहाँ डोमीनकेँ छह सए टाका दियनु आ कोनियाँ-पथिया रखि लियनु। फारम भरैक सबाल छै। ऐमे मदति करबाक चाही। अपने गामक मालिक छेएे। चन्द्रेश- (खिसिया कऽ) जाउ, मम्मीसँ आनि कऽ दऽ दियनु। (चन्द्रप्रभा अन्दर जा कऽ मम्मीसँ छह सए टाका आनि कऽ मरनीकेँ देली।) चन्द्रप्रभा- डोमीन, कोनियाँ-पथिया अन्दर दऽ दियौ तहन जाएब। मरनी- बेस, दऽ दइ छिऐ। (मरनी कोनियाँ-पथिया अन्दर दऽ एली।) जाइ छी बुच्ची। चन्द्रप्रभा- बेस जाउ। (मरनीक प्रस्थान) (चन्द्रेश तामसे बिभाेर छथि। उ चन्द्रप्रभापर आँखि लाल-पीअर कऽ रहल छथि।) पापा, डोमीन चलि गेली। आब पुछै छी, एन किअए केकरो हाथ उठा लइ छिऐ? उ जतए-ततए बजतै। अहींक प्रतिष्ठापर पड़त किने? चन्द्रेश- (खिसिया कऽ) हमर प्रतिष्ठाकेँ अहाँ किअए सोचै छी? हमरासँ किनको बेसी प्रतिष्ठा छन्हि ऐ परोपट्टामे? चन्द्रप्रभा- पापा, ई घमंडक बात भेल। घमंड रावणोकेँ नै छोड़लकै। चन्द्रश- (ठहक्का मारि कऽ) हा हा हा हा हा हा...। रावणक बात करै छेँ। अखनि तूँ बच्चा छेँ। नै बुझबिही। ओकरामे बड़ रहस्य छेलै। चन्द्रप्रभा- रहस्य किछु होन्हि पापा। मुदा उ घमंडेक कारण मारल गेला। चन्द्रेश- आइ जौं तूँ हमर बेटी नै रहितेँ तँ तोरो बिना बेँत देने नै रहितियौ। मुदा करी तँ करी की? जुग जमाना नीक नै छै। एक्केटा छेँ तँए गम खा लइ छी। चन्द्रप्रभा- (हिचुकैत) जुगे-जमानाकेँ देखैत हम कहलौं पापा। चन्द्रेश- जुग जमाना हमरा मुट्ठीमे छै मुट्ठीमे। जे चाहबै जखनि चाहबै से हेतै। कान खोलि कऽ सुनि लही आ तों अखनि हमरा सामनेसँ हटि जो। तोँ हमरा डोमीनियाँ लग बड़ बेकूफ बनेलेँ। (चन्द्रप्रभाक प्रस्थान) केना-कोना पाइ बटज्ञेरलौं आ आइ पाइबला कहबै छी। से हमहींटा बुझै छी। चन्द्रप्रभा मम्मी, चन्द्रप्रभा मम्मी, चन्द्रप्रभा मम्मी। मनीषा- (अन्दरसँ) हइए एलौं। हइए एलौं। (चन्द्रेशक पत्नी मनीषाक प्रवेश।) की कहलौं। चन्द्रेश- की कहब? अहाँक बेटी ओइ डोमीनियाँक कारणे हमरा बुरबक बना देलक। डाँटैले नै चाहलिऐ मुदा डाँटए पड़ल। मनीषा- हँ देखिलिऐ मन बिधुआएल आ हिचुकैत। की भेलै से? चन्द्रेश- की हेतै? ओइ कोनियाँ-पथियामे हमरा नै कम तँ दू सए टाका बँचितए। से आबि कऽ पंचैती करए लगली। उ कतए जैइतै? जे कहितिऐ से करितै। मजबूर छेलै। ओकरा बेटाकेँ फारम भरैक छेलै, तइसँ अहाँ बेटीकेँ कोन मतलब? ओकर बेटा बड़ तेज छै, तइसँ अहाँ बेटीकेँ कोन मतलब? उ जे दू सए टाका बँचितै, से अपने सभकेँ ने नफ्फा होइतै। मनीषा- खैर, छोड़ू ई गप-सप्प। धिया-पुता छैलै। उ सभ ओते नअ-छअ नै बुझै छै। चन्द्रेश- अहाँ कहै छी धिया-पुता छै। मैट्रिकमे पढ़ैए आ धिए-पुता अछि। मनीषा- माए-बापक नजरिमे उ केतबो नम्हर भऽ जाएत तँ धिए-पुता रहत। चन्द्रेश- से तँ ठीके। मुदा हम जे किछु बँचाएब ओकरेले ने बँचाएब। हमरा आन के छै? हम चाहै छी ओकरा पढ़ा-लिखा कऽ बड़का डाक्टर बनाबी। बिना पाइए हएत? बून-बूनसँ तलाब भरै छै। हम एगो सिकरेट पाँच बेर पीऐ छी। लोक सभ देखि कऽ हँसैत हएत। कपड़ा-लत्ता केहेन पहिरै छी से देखिते छी। भगवान हमरा ओते नै देने छथि जे हम स्टैण्डर जिनगी जीबी। अहूँ सभकेँ ओते नीक कपड़ा-लता नै दइ छी। खेनाइ-पीनाइ एकदम साधारण खाइ छी। किअए से बुझै छिऐ? मनीषा- कहिऔ ने? हम ओते नै बुझै छिऐ। चन्द्रेश- एक्केटा गप छै- बेटीकेँ बड़का डाक्टर बनेनाइ आ ओकर पाइक जोगार केनाइ। डाक्टर बना ओकर बिआह जातिमे राजा घरमे करब। दुनियाँ देखत आ सुनत तँ सोचमे पड़ि जाएत। जतए-ततए र्चा हएत जे चन्द्रेश बाबू एतेक बड़का लोक छथि। बिना घेँट कटने वा पेट कटने बेसी सम्पति नै भऽ सकै छै। से बूझि लियौ चन्द्रप्रभा मम्मी। मनीषा- तँ ऽ ऽ एहनो नै नीक जे सभ सरापिते रहए। चन्द्रेश- कौआ सरापने बेग नै मरै छै। अहां एकर चिन्ता नै करू। अपना-अपनाले सभ हरान छै। सालमे एकबेर बाबाधाम अबस्स जाइ छी। से केना? तँ सुलतानगंजमे उत्तरवाहिनी गंगामे स्नान कऽ गंजाजल भरि कामर सजा बोल-बम करैत-करैत पाँव-पैदल। ई बड़ पैघ पूण्यक काज छी। सभटा पाप बाबा हरै छथिन। मनीषा- एकर माने ई भेल चन्द्रप्रभा बाबू जे केतबो पाप करी आ कामर लऽ कऽ बाबाधाम पएरे चलि जाइ तँ बाबा सभ पाप हरि पूण्य भरि देता। चन्द्रेश- सएह बुझू। ई सभ बात केतौ बजबै नै। हमर पत्नी छी तँए अपन दिलक बात कहि देलौं। मुदा डोमीनियाँकेँ जे दू सए टाका बेसी लगि गेल। तइसँ हमरा कखनो-कखनो बड़ आहि अबैए। जाउ अहूँ नै सम्हारलौं। (चिन्तित मुद्रामे बैस सौंसका सिकरेट धरा पीअए लगै छथि।) पटाक्षेप। चारिम दृश्य- (स्थान- मंगलक घर। मंगल चंगेरा बीनै छथि।) मंगल- कखनि गेल मौगी कोनियाँ-पथिया लऽ कऽ। से अखनि धरि नै आएल। लगैए हटिया चलि गेल हएत। सुगरोकेँ छोड़ि आएल छिऐ गाछीमे। उ कखनो एकठाम रहै छै। हरदम हूल-हूल करैत रहैए। कनी जल्दी अबितै तँ देखतिऐ केम्हर गेलै केम्हर नै। लोक सबहक बारी-झाड़ीमे चलि जाइ छै तँ उ सभ मारि की कहाँ बजए लगै छै। (मंगलक पितियौत भाए रबीयाक प्रवेश।) रबीया- भैया, भैया, तोहर सुगर कतए छौ? मंगल- की भेलै से? बड़ हरबरी देखै छियौ। रबीया- भैया रउ, पथिया बेचि कऽ अबैत रहिऐ ने तँ एगो डोमबाकेँ देखलिऐ बड़ रेशमे सुगर भगौने जाइत। लागल जे तोरे सुगर छौ। हम तँ पउरे साल बेचि लेलौं। कनी पीऐओक मन छल, नै पीलौं दौगल एलौं। से देखतिही गऽ? मंगल- कनी तूहूँ चल तँ। दुखन दुखन दुखन। दुखन- (अन्दरसँ) हँ बाउ, हएह एलौं। मंगल- जल्दी आ। बड़ जरूरी छै। (दुखनक प्रवेश) दुखन- की बाउ? मंगल- कनी तूँ एतै बैस आ चंगेरा बीनल हेतौ तँ बीनि। दुखन- नै हेतौ। मंगल- कोशिश करही। कला कोनो बेकार नै होइ छै। हम जाइ छियौ सुगर देखैले। चल रबीया दुनू भाँइ। (मंगल आ रबीयाक प्रस्थान) दुखन- हम तँ कहियो ई काज केलिऐ नै। तँ हेतै केना? हमर खनदानी काज छी। करबै तँ जल्दी सीखि जाएब। मुदा एक्के-दुइए दिन केने तँ नै सीखब। पढ़ाइमे पछुआ जाएब तँ सरजी मारता। देखल जेतै पछाति। अखनि पढ़ाइपर धियान देबाक अछि। (मरनीक प्रवेश।) मरनी- (खिसिया कऽ) आ गेलौ कतए? दुखन- सुगरमे गेलौ। किअए खिसियाएल छेँ माए? मरनी- तोरापर नै, ओकरपर। ओकर चालिपर। दुखन- की भेलै से? मरनी- की हेतै? तोहर बाप चन्द्रेश मालिकसँ उधारी एगो बाँस लऽ लेलकै। तइले हमरा घेर नेने छेलए। तइपरसँ बेंतो देखबै छेलए। धनि ओकर बेटी कहाँदून तोरे किलासमे पढ़ै छै, से बँचेलक आ कोनियाँ-पथिया लऽ माएसँ छह सए टाका आनि कऽ देलक। अच्दा तू इसकूल जो हम भनसा करैले जाइ छी। (दुनूक प्रस्थान) मंगल- (प्रवेश कऽ) हीर्र र र रऽ। हीर्र र र रऽ। हीर्र र र रऽ। भैया, कहाँ केतौ देखै छिऐ। लगैए उहए सार डोमबा लऽ गेलौ। सारकेँ चिन्हबो ने केलिऐ। पकड़बै सारकेँ तँ ओकरा माएसँ बिआह कऽ लेबै। मंगल- हमरो लगै छौ, आब सुगरसँ हाथ धुअ पड़त। उहए सार अही गाछीमे सँ हाँकि कऽ भागि गेलौ। आइ जे सार भेट जइतै तँ अही कातीसँ भोंटी निकालि लैतिऐ। रबीया- भैया राउ, चल ने सारकेँ देखिऐ कतए गेलै? भेटतै तँ ओकरा माएसँ हम बिहा कऽ लेब आ बहिनसँ तूँ कऽ लिहेँ। दुनू सारहू ओतै रहि जाएब। नवका सोसराइरमे मानो-दान खूम होइ छै। मंगल- चोरबा सार पकड़ए देतौ। गामेपर चल। आब संतोखे करए पड़त। चल केते दिनसँ किछु नै भेलै। आइ हेतै। तोरो संगमे किछु माल-पानी हेबे करतौ आ किछु हमरो संगमे छैहे। मन बड़ चट-पट करैए दारूले। दारू पीना बहु दिन भऽ गेल। रबीया- जे गति तोरो से गति मोरो, रामा हौ रामा। चल भैरूा आइ हेतै भरि मन दारू। मंगल- आइ थाकलो बड़ छी। सार सुगरो नै भेटल आ हरानो बड़ भेलौं दुनू भाँइ। एगो आशा छेलए जे अग्गी-खग्गीमे सुगर बेचि कऽ काम करब, सेहो हरा गेल। खैर, चल, संतोखे गाछमे मेबा फड़ै छै। भगमान बड़ीटा छै। रबीया- छोड़ भैया, ई खिस्सा–पिहानी। दारूले मन बड़ चटपट करै छौ। मंगल- चल। मुदा रबीया, एगो बात कहियौ? रबीया- कही ने भैया। मंगल- दुखना माए खिसियाएत तँ। उ मनाही केनेए। रबीया- एगो बात कह तँ भैया। तूँ ओकर बहु आकि उ तोहर बहु? मंगल- उ हमर बहु। रबीया- तब उ तोरापर शासन करतौ। जे जे कहतौ से से करबिही? धूर सार, ऐसँ बढ़ियाँ एक चुरुक पानिमे डूमि कऽ मरि जो। हम अपना बहुकेँ जे कहबै जखनि कहबै से करतै। नै तँ हाथ-पएर बान्हि सटकासँ पाँती-पाँती दागि देबै आ दगिते रहै छिऐ। मंगल- तँए ने दुनू परानीमे हरदम खटपट होइ रहै छौ। मिला कऽ चलबिही तँ किच्छो अधला नै हेतौ। हमरा घरमे देखै छिही कहियो हल्ला-गुल्ला। घरक लक्ष्मी बहु होइ छै। उ भंगठतौ तँ बुझही लक्ष्मी बगदि गेलौ। रबीया- ओकरापर चलब तँ उ मुँहमे जाबीए लगा देत। मंगल- नै, से केतौ करै। मिल-जूलि कऽ रहबिही तँ ऊहो बुझतै ई हमर घरबला छी आ परिवारले हरान रहै छै। रबीया- अच्छा चल भैया, आइएटा पीले। आन दिन नै पीहेँ। मंगल- तँ, बजिहेँ नै भौजी लग। नै तँ उ हमरा फज्झति करत। रबीया- नै बजबै, चल ने तूँ। हइए दारू दोकान आबिए गेलौ। (पर्दा हटैए आ दारू दोकान देखाइए। काउन्टरपर शशिकांत बैसल छथि।) जो भैया तूँहीं जो। मंगल- तूँहीं जो रबीया। पाइ ले। रबीया- तूँहीं जो भैया। पाइ लऽ ले। हमरापर सार खिसियाएल रहैए। एक-दिन कहा-कही भऽ रहए। बेसी पाइ लै छेलए। मंगल- अच्छा ला, हमहीं जाइ छी। (मंगल रबीयासँ पाइ लऽ कऽ दारू काउन्टरपर दूगो पोलीथिन लेल पहुँचल। रबीया बाहर ठज्ञढ़ अछि।) मालिक, दूगो पलोथीन दहक। शशिकांत- की हौ मंगल, बहुत दिनपर एलह हेन? मंगल- हम छोड़ि देलिअ मालिक। साँझकेँ एक बोतल ताड़ीएटा पीऐ छी। आब बड़ परहेजमे रहै छिअ। शशिकांत- एकबागि एना बदलि गेलहक? किछु भेलह से? मंगल- नै, किच्छो भेल नै। हमर घरनी बड़ खिसिआइए। बेटा मैट्रिकमे पढ़ैए। ओकर पाइ नै जुमैए। तहीले। शशिकांत- ट्यूशन पढ़ै छह से केतौ? मंगल- नै, टीशन कहाँ पढ़ै छै केतौ। किताब-कोपीमे बड़ पाइ लगै छै हौ। अहू बीचमे फारम भराइ कहलक छ सए लगतै। शशिकांत- बढ़ियाँ बात। खूम मनसँ बेटाकेँ पढ़ाबह। तोरा सभकेँ आरक्षण छह। केतौ-ने-केतौ नोकरी भैए जेतह। ओना नोकरी भेटौ वा नै भेटौ, अपना लेल पढ़नाइ सभकेँ परमावश्यक छै। रबीया- भैया, भैया रउ, जँ कटैले गेलेँ तँ सतुआइन केने एबेँ की? जे तूकपर नै, से किदनिपर। नै होइ छौ तँ छोड़िए दही। मंगल- एतै केतौ लोक पटपटाएल हेन? एहेन छौंक नीक नै। रबीया- से तँ बुझिते हेबही। आनबेँ तँ आन, नै तँ चललियौ। (रबीया जाए लगैए।) मंगल- रूक, रूक, रूक। हइए एलौं। मालिक दियौ। जल्दीसन दियौ। बड़ी कालसँ ठाढ़ छी। लिअ पाइ। शशिकांत- (पाइ लऽ कऽ) पाइ तँ कम्मे छह। आरो दहक। मंगल- बढ़ि गेलै दाम से। शशिकांत- हँ, एगोपर पाँच टाका। मंगल- किअए बढ़ा देलहक? शशिकांत- हम बढ़बै छिऐ से? सरकारे बढ़ा देलकै। मंगल- सरकार बताह भऽ गेलै। एते केतौ महगी होइ। गरीबहा नै जीअत। भने हम दारू छोड़ि देलौं। ताड़ीमे पाइओ कम आ कोनो खरापीओ नै। अच्छा दैह मालिक, दस टाका दोसर दिन लऽ लिअह। शशिकांत- रबीया, दस गो आरो दही। दाम बढ़ि गेलै। रबीया- आ लऽ जो। (मंगल रबीया लग जा कऽ दस टाका आनि शशिकांतकेँ दऽ दूटा पोलिथीन लऽ कऽ ओतै पीऐले बैस गेल। दुनू पी रहल अछि।) मंगल- की रबीया? आब संतोख भेलौ ने? रबीया- हँ भैया आब मन शांत भेलौ। आ तोरा? मंगल- हम तँ बेसी दिनपर पीऐ छी से केनादन लगैए। रबीया- दू-चारि दिन पीबही ने, तँ फेर नीक लागए लगतौ। मंगल- हमरा दारू नै पीबाक अछि। हम ताड़ीएटा पीअब। ओना आइटा पी लै छी। हो हो, जल्दी हो। जल्दी सधा। गामपर काज बहुते छै। (दुनू गोटे दारू सधेलक आ उठि कऽ विदा भेल)। रबीया, लगै छौ हमरा लागि गेलौ। रबीया- भैया, हमरो लगै छौ लागि गेलौ। (दुनू झुमैत-झामैत जा रहल अछि।) सार आइ दस रूपैया बेसी लऽ लिया। जाएगा थानापर आ कहेगा पुलिसबाकेँ ई दारूबला गरीब सभसे बेसी पैसा किअए लऽ लेता है। अपने सार बुझेगा केहेन महिरम होता है। मंगल- हमरा तँ बहुक चिन्ता लागल है। उ जे हमरा देखेगा दारू पीने तँ हमरा बढ़नीसँ झाँटेगा। बेकारमे पीया। उए उए उए। उल्टीओ नै होता है। जे दारू निकलि जाएगा तँ निसाँ टूटि जाएगा। बहुसँ बँचि जाएगा। रबीया- भैया, तोरा बहुसँ एते डर होता है। ओहेन बहुकेँ गोली मारि देगा। मंगल- बहु मरि जाएगा तँ केकरा लऽके रहेगा? रबीया- सार भैया, ईहो नै बुझता है। दुनियाँमे बहु का कोनो कमी हाय। जेकरेसँ चाहेगा तेकरेसँ बिआह कऽ लेगा। मािर खाइले आ जेहल जाइले बेटा तैयारे है। लेकिन एकटा बात कान खोलि कऽ सुनि लो भैया काल्हि पहिले अपने गोली मारि लेगा तब ओइ दारूबलाकेँ मारेगा। सरबाकेँ जिन्दा नै छोड़ेगा। मंगल- रबीया, एगो बात होगा हम कनियाँकेँ कहेगा जे रबीया जबरदस्ती हमरा पीया दिया। तैसँ हम बँचि जाएगा। रबीया- तु गारि काहे देता है सार? (दुनू खिसिया जाइए।) रबीया- अखनि घरपर जाएगा तँ तोरा बहुकेँ लऽ रहेगा। मंगल- हमरा से कहेगा तँ हमहूँ कहेगा हम तोरा बहुकेँ लऽके रहेगा। रबीया- लाज नै होता है सार भावो लऽके रहेगा। एक्के थापर मारेगा न कि सब दारू निकलि जाएगा। मंगल- हमरा छोट भऽके मारेगा तँ हमहूँ नै छोड़ेगा। तोरा माए दूध पीयाया है आ हमरा नै पीयाया है। मारि कऽ देखो। (रबीया मंगलकेँ एक थापर लगबैत अछि। मंगलो एक थापर रबीयाकेँ लगौलक। दुनूमे झगड़ा फँसि गेल। दुनू हाथपाइ कऽ रहल अछि। फेर दुनूमे उठा-पटक भऽ रहल अछि।) रबीया- (छातीपर चढ़ि) सार भैया खून पी लेगा। आब बाजो कोन बाप काज देगा। मंगल- हम तरमे है तै दुआरे। नै तँ तोरा देखा देता। तैयो कहि देता है आइ नै काल्हि तोरो खून पी लेगा। (मरनीक प्रेश। रबीया देखिते मातर पड़ा जाइए। मंगल उठि कऽ बैसैए। मरनी- की भेलै दुखन बाउ? तँू दुनू भाँइ एना किअए केलह एना तँ कहियो नै करै छेलह। मंगल- (कनी भँसिआइत) सुगर तकैले गेलौं दुनू भाँइ। ऊहो नै भेटल। कतए-कतए ने बौएलौं। कोनो था-पता नै। रस्तामे रबीया नै मानलक दारू पीया देलक आ अपनो पीलक सार। निसाँमे गारि दिअ लगल। कहलिऐ तँ मारि-पीट शुरू कऽ देलक। मरनी- एकर माने तूँहू दारू पीलह। जँ तूँ हमर कहल नै केलह तँ हमरा तोरा कोनो नाता नै। आब हम तोरा घरपर घूमि कऽ नै जेबह। तोरे तकैले आएल छेलिअ। जाइ छिअ जतए मन हएत ततए। (खिसिया कऽ पड़ाएल जा रहल अछि। पाछू-पाछू मंगल सेहो जा रहल अछि।) मंगल- घूमि जो दुखन माए घूमि जो। आब तोहर कहल करबै। मरनी- से करितह तँ इएह दशा होइतए। जा, हमरा-तोरा कोनो मतलब नै। मंगल- हे हे एना नै करही। केतौ भऽ कऽ नै रहब। दुगो रहितए तँ छोड़िओ दैतिऔ। मरनी- जा, दोसर कऽ लिहह। मंगल- से तँ नै हेतै। तोरा बिना हम नै रहि सकै छियौ। हे हे दुखन माए घूमि जो। आब गलती नै हेतै। (भरि-भरि पाँज कऽ मंगल मरनीकेँ पकड़ैए। मुदा छुहलि-छुहलि भागि जाइए।) बेटा दुखन केना पढ़तै? हमरा बुते नै हेतौ। मरनी- तोहर बेटा छिअ। जे मन हेतह से करिअ। मंगल- हे हे तोरा दुखनक सप्पत, घूमि जो। (मरनी ठाढ़ भऽ जाइए।) मरनी- तूँहू दुखनक सप्पत खा जे एहेन गलती नै करब। मंगल- हे हे एहेन सप्पत खाइले नै कह। दर-दुनियाँमे एक्केगो बेटा छौ। कान पकड़ि उठि-बैस दइ छियौ। मरनी- बेसी नै पाँचे बेर। मंगल- से जाएबेर कहबेँ ताए बेर। मरनी- दुइए बेर। (मंगल दूबेर कान पकड़ि उठि-बैस देलक। मरनी लजाए गेली।) मंगल- आब की कहै छेँ, कह। मरनी- निसाँ टूटलह पहिने? मंगल- हँ आब ठीक छियौ। मरनी- रबीया जे ओना केलकह, से थानापर जइहह? मंगल- नै जो। निसाँमे दुनू भाँइ छेलिऐ तँए ओना भऽ गेलै। हमरे मदति करैले गेल छेलए। दिनक दोख छेलै भऽ गेलै। बेसी धरबीही तँ बात बढ़ि जेतै। बरबरि झगड़ होइ रहतौ। से देखही एना कहाँ कहियौ होइ छेलै। कहियो देखिहेँ नीक मनमे तँ बुझाए-समझाए दिहनि। अच्छा चल आब घर। (आगू-आगू मरनी आ पाछू-पाछू मंगल जा रहल अछि।) मरनी- एगो कहह जे चन्द्रेश मालिककेँ बाँस उधारी किअए लेलहक जे उ हमरा ओते फज्झति केलक। मंगल- उधारी दुआरे नै केने हेतौ। कम-सँ-कम पाइमे मंगने हेतौ तूँ ओते कम नै केने हेबही। तहीपर उकटा-पैंची केने हेतौ। तोरा पहिने कहने छेलियौ उ कंजूशक ओइध छै। पथिया-कोनियां लेलकौ की नै, से कह। मरनी- लेलकै तँ, मुदा छअए सए टाका देलकै। ऊहो ओकर बेटी उ नै। मंगल- खैर, छोड़। कहुना लेलकै ने। काजेसँ काज छै। (अन्दरमे दुखन पढ़ि रहल छै। पर्दा उठै छै।) दुखन- कतए जाइ गेल छेलही? मरनी- बाए, सुगर हरा कऽ एलौ हेन। जेहो आश छल सेहो चलि गेल। भगमानेकेँ गरीबहा देखल छै। दुखन- पाइ दही ने इसकूल जेबै। सभ फारम भरि लेलकै। हमहींटा बँचल छी। मंगल- दऽ दही, जल्दी चलि जेतै। (मरनी छह सए टाका दुखनकेँ देलक।) मरनी- बौआ, ठीकसँ पाइ रखिहेँ, हराउ नै। भगमानक ना लऽ कऽ फारम भरिहह। मास्टर साहैब सभकेँ गोर सेहो लागि लिहक। दुखन- बेस। (दुखन माता-पिताकेँ पएर छूबि गोर लागि स्कूल गेल। दुनू माथपर हाथ दऽ असीरवाद देलकनि।) पटाक्षेप। पाँचम दृश्य- (चन्द्रेश झाक हबेली। चन्द्रेश मन्हुआएल बैसल छथि। कनीकाल पछाति ठुट्ठी सिकरेट लगा कऽ पी रहल छथि।) चन्द्रेश- ओह! बेकारे अपन डोमिनियाँक चक्करमे पड़लौं। आनसँ लइतौं तँ बेसी पाइ नै लगिताए। तहूपर सँ हमर बेटी आरो छौंक देलक। मजबूर भऽ कऽ हमरा हमर दाममे कोनियाँ-पथिया दऽ कऽ जइताए। ओह! दू सए टाका चलि गेल पानिमे। दू सए टाका कमाइमे केते भीड़ पैड़ै छै से हमहीं बुझै छी। (माथपर हाथ रखि चिन्तामग्न भऽ जाइ छथि) (चन्द्रप्रभाक प्रवेश।) चन्द्रप्रभा- पापा, खेनाइ बनि गेल छै। चलू खा लिअ। (चन्द्रेश किछु नै बजै छथि।) चलू ने, खेनाइ सरा जाएत। हमरो इसकूल जेबाक अछि। चन्द्रेश- जो ने, तोरा हम मनाह करै छथ्यौ। अपन खइहेँ आ जइहेँ तोरे राज छियौ तँ हमर कोन मोजर। चन्द्रप्रभा- (आश्चर्यसँ) हमर राज छिऐ। नै बुझलौं पापा एकर माने। चन्द्रेश- अखनि बच्चा छेँ। तूँ नै बुझबिही। जो मम्मीकेँ पठा दिहनि। (चन्द्रप्रभाक प्रस्थान) एक्को रत्ती नै सोहाइए छौड़ी। कहैले केना आएल छेलए, पापा, खेनाइ खा लिअ। सरा जाएत। जेकराले हम एते करै छी, से हमरापर शासन करत। हमर मालिक। (मनीषाक प्रवेश) मनीषा- की भेल? किअए नै गेलिऐ खाइले? मन बड़ उदास देखै छी। (चन्द्रेश गुम्म छथि।) किछु होइए? आकि बुच्ची किछु उझ्झट बात बाजि देलक? चन्द्रेश- (खिसिया कऽ) ओइ दिनसँ हमरा अन्न-पानि नै नीक लगैए। मनीषा- कइ दिनसँ? चन्द्रेश- जइ दिनसँ डोमीनियाँ दू सए टाका बेसी दऽ देलक। मनीषा- उ गप अखनि धरि धेनहिए छी। हम ओही दिन बिसरि गेलौं। चन्द्रेश- गूड़क मारि धाकरा जनै छै। बानर जानए आदी सुआद। अहाँकेँ कमाए पड़ितए तहन ने बुझितिऐ, कोन बाँसकेँ दाहा होइ छै। मनीषा- धिया-पुता छै। जदी एकठा हुसिए गेलै तइले एते आमील पीने छी। ई बात आन कोइ सुनत तँ कियो नीक नै कहत। चन्द्रेश- लोक नीक कहै वा अधला। अपने नीक तँ संसार नीक। मनीषा- अच्छा जे भेलै से भेलै आब नै हेतै। हम ओकरा बुझा-समझा देबै। अहाँ चलू खाइले। ऊहो इसकूल जेतै। हमरो भुख लगल अछि। रातिमे नै खेलौं। मन नै नीक रहए। चन्द्रेश- जाउ अहाँ सभ खाइ-पीऐ जाउ। हम बादमे खा लेब। मनीषा- जदी अहाँ घरपर छिऐ तँ से केना हेतै? चन्द्रेश- जदी हमरा खाइक मन नै होइ तहन? मनीषा- गप-सपसँ मन बुझा जाइ छै ने। छोड़ू लटारम, चलू खाइले। बुच्ची आब गलती नै करतै। सएह ने? चन्द्रेश- हँ सएह। अच्छा चलू अबै छी। एक आदमी काल्हि पाइ दइले औझका टेम देने रहए। मनीषा- कनी जल्दी एबै। (मनीषाक प्रस्थान) चन्द्रेश- भुखै हमरा जान जाए रहल अछि। मुदा ऐ बीचमे जदी सीताराम पाइ दइले आबि जाएत तहन हमरा नै पाबि घूमि जाएत ा फेर पाइमे आना-कानी करत। बड़ िलझरिया छै। खाइ कालमे हम लेनी-देनी करिते नै छी। (सीतारामक प्रवेश) सीताराम- (कर जोड़ि) मालिक प्रणाम।) चन्द्रेश- खुश रह। दनदनाइत रह। अहिना हमरासँ लेन-देन करैत रह। सीताराम- मालिक, तनी हियाब देथतिऐ। ती-तेना भेलै? चन्द्रेश- (डायरी निकालि देखि कऽ) दू हजार आठ सए अट्ठावन टाका सूदि-मुरि लगा कऽ भेलौ। सीताराम- बाप ले बाप, बड भऽ देलै। ओते तेना भेले मालिक? चन्द्रेश- आठ सए मुरि छेलै। कही हँ। सीताराम- थीके छेलै। चन्द्रेश- दस टके चारि अने सैकड़ सुदि छेलै। कही हँ। सीताराम- छेलै, थीके छिऐ। चन्द्रेश- पच्चीस महिना तीन दिन भेलै। कही हँ। सीताराम- (कनीकाल गुम्म पड़ि) ओते नै भेल हेतै। थीकसँ देखियौ मािलक। चन्द्रेश- देखले देखल छै। ओना हम एकबेर फेर देख लइ छिऐ। (डायरी देखि जोड़ि-जाड़ि कऽ) देखही सीताराम, लिखतनक आगू वक्तन कोनो काज नै करै छै। हमरा डायरीमे इहए लिखल छौ आ ईहो बूझि लही हम गलती नै लिखबौ। केकरा संगे के एलै आ के जेतै। सीताराम- तब हेतै। हम गरीब छी। हमरा तेते थोड़ि देबै। चन्द्रेश- छोड़ै-छाड़क ना नै ले। ओते लगबे करतौ। कनी तूँ अप्पन खैनी दही। सीताराम- हमरो तहाँ थैनी हेतै। तैयो देथै थिऐ। (सीताराम खैनीक डिब्बी निकालि) तनी थेलै, लिअ। चन्द्रेश- तूँहीं चुना। तोहर हाथक बढ़ियाँ होइ छै। सीताराम- थैनीओ बद महद भऽ देलै। मालिक। एत ताका ते देबो नै तरै थै। चन्द्रेश- चुना ने, कते गप छँटै छेँ। (सीताराम डिब्बीसँ खैनी निकालि चुनबैए।) सीताराम- लिअ मालिक थैनी। (दुनू आदमी खैनी खेलथि।) चन्द्रेश- आब ला पाइ। (सीताराम फाँढ़सँ तीन हजार टाका निकाललथि।) तीनू हजरिया छै। (तीनू हजार टाका सीताराम चन्द्रेशकेँ देलनि।) कतएसँ आमदनी एलौ हेन। तीनू कड़करौए छौ। सीताराम- मालिक, बेता डिल्लीसँ भेदलकै। (मनीषाक प्रेवेश) मनीषा- खाइक बेर नै भेलै हेन। कखनि कहलिऐ हइए अबै छी से अबिते छी। भेलै ने बुच्चीओक इसकूल कामे भऽ गेलै। चन्द्रेश- की करिऐ, हमहूँ कोनो बैसल-सूतल छी? काजे करै छी ने? अही पाइले दुनियाँ बाप-बाप करै छै। चलू, तुरंत एलौं। मनीषा- पेटमे रहै छै तहने पाइओ नीक लगै छै। चन्द्रेश- मुदा पाइ अबैत रहै छै तँ भुखे हरा जाइ छै। ओना पेट तँ पेटे छै। जइले दुनियाँ हरान छै। अहाँ बढ़ू, हम अबै छी। (मनीषाक प्रस्थान) सीताराम- बड़ीकाल भऽ देलै मालिक। घरपर ताजो छै। चन्द्रेश- हइए ले सीताराम, अपना फिरता पाइ। (पाइ फिरौलनि।) सीताराम- तेते फेरलिऐ मालिक? चन्द्रेश- जे तोहर फिरतौ। सीताराम- मालिक, गरीब आदमीपर किच्छो दया-माया नै? चन्द्रेश- हम की दया करबौ। दया तँ भगवान करै छथिन। सीताराम- एगो खैनीक पुरिओक पाइ दियौ मालिक। चन्द्रेश- आब किछु नै हेतौ। बेकारमे बकर-बकर बकै छेँ। उन्ैस पाइ छोड़िए देने छियौ। उन्नीस पाइकेँ महत तूँ कम बुझै छिही। बेसी जिद्द करबिही तँ एक टाका आरो दिअए पड़तौ। कारण पाइ आब नै चलै छै। सीताराम- तऽ ऽ ऽ, लइए लिअ एकटाका। किअए मन लागल रहत उन्नैस पाइले। चन्द्रेश- हम तँ छोड़ि देने छेलिओ मुदा तोरा मन छौ तँ ला। सीताराम- लऽ लिअ मालिक। (सीताराम एक टाका चन्द्रेशकेँ देलनि। ओ सहर्ष लऽ लेलनि। सीतारामक आँखिमे नोर आबि गेल।) धनि छी मालिक। धनि छी मालिक। पटाक्षेप। छअम दृश्य- (स्थान- मंगलक घर मंगल पथिया बीनि रहल छथि। मरनी कोनियाँ बीनि रहल छथि।) मंगल- गइ दुखन माए, पहिने हम जे जनितौं, पढ़ाइमे एते खरचा होइ छै तँ दुखनकेँ नै पढ़़ैबितौं। मरनी- देखहक, पढ़ल-लिखलक जुग एलैए। सभ पढ़तै आ उ नै पढ़तै तँ ऊहोले बौआ जिनगी भरि अबजश दैत रहत। कम-सँ-कम मैटृरिको करा दहक तेकर बाद छोड़ि दिहक। ओना हमर विचार अछि जे जाधरि बौआ पढ़त ताधरि दुखो-तकलीफ काटि पएर पाछू नै करब। बेसी पढ़तै तँ आरो ना हेतह। पढ़ाइ सड़ैबला चीजो नै छिऐ जे सड़ि जाएत। मंगल- मैट्रिक परीक्षा कहिया हेतै? मरनी- एक दिन बौआ बजल छेलै, अही बीचमे होइबला छै। से पाइक ओरियान करही। पुछलिऐ केते तँ कहलक दू सए। मंगल- घरमे छौ ने पाइ? मरनी- छै सारहे तीन सए। मंगल- आरो पाइ की केलही? ऐ बीचमे तँ बहुते कोनियाँ-पथिया बीकलौ? मरनी- से हम कहाँ कहै छी नै। छह सए बौआकेँ फारम भरैले देलिऐ आ तीन सए किराना दोकानबलाकेँ देलिऐ। पाइ खाइबला खाइबला जीत तँ नै छै जे खा गेलिऐ। मंगल- से हमरा तोरापर बिसवास अछि। तोरा सनक घरवाली भगमान सभकेँ दै। तऽ ऽऽ ओहीमे सँ बौआकेँ दऽ दिहनि आ डेढ़ सए टाका घर-बेद रहए दिहनि। मरनी- नै, एक सए टाका चन्द्रेश मािलककेँ बाँसबला दऽ दहक आ पचास टाका ताड़ीवालीकेँ। बेसी लझ्झर रखबहक तँ तुकपर समान नै भेटतह। (दुखनक प्रवेश।) दुखन- माए, आइए जेबै परीक्षा दइले। हमर एगो संगी डेरा भँजिया आएल छै। ऊहो आइए जाइ छै। परीक्षा काल्हिसँ छिऐ। मरनी- केते पाइ लेबही? दुखन- दू सए दही। मंगल- दही जे कहै छौ से। तूँ जो दुखन, अपन सामन सभ ओरियाले। (मरनी अन्दरसँ साढ़े तीन सए टाका अनलथि। दुनू माइ-पूतक प्रस्थान।) (पीठेपर दुखन एगो झोरामे सभ समान सैंत कऽ अनलक।) मरनी- ले बौआ, दू सए टाका। (दुखन दू सए टाका लेलक। माता-िपताकेँ पएर छूबि प्रणाम करैए आ ओ दुनू आदमी असीरवाद दइए।) बौआ, ठीकसँ जइहह। ठीसँ परीक्षा दिहक। उचक्का छौड़ा सभ संगे एम्हर-ओम्हर नै घूमिहह। मधमन्नीमे बड़ गाड़ी चलै छै। काते-काते अपन साइडसँ अबिहह-जइहह। मंगल- माए ठीके कहै छौ। ओरिया कऽ सभ काज करिहेँ आ अक्कर-अक्कर बौसु नै खैइहेँ सधारनीए खेनाइ खैइहेँ। दुखन- सहए करबै बाउ। (दुखनक प्रस्थान।) मरनी- हौ, दुखन बाउ, तूँ ई डेढ़ सए टाका लऽ लैह आ चन्द्रेश मालिककेँ एक सए टाका आ ताड़ीवालीकेँ पचास टाका दऽ आबहक। मंगल- ला दऽ अबै छिऐ। (मंगल डेढ़ सए टाका लऽ प्रस्थान।) तूँ अँगना जो। हम दइए अबै छिऐ। (मरनीक प्रस्थान।) (अन्दरमे चन्द्रेश अपन दलानपर बैसल छथि। पर्दा तुरंत हटैए आ फेर लगि जाइए।) प्रणाम मािलक। चन्द्रेश- अखनि जो। दू चारि दिनक पछाति अबिहेँ। अखनि उधारी-पुधारी नै हेतौ। पछिला पाइ बाँकीए छौ। मंगल- आइ बाँस लइले नै एलौं हेन। पछिला पाइ दइले एलौं हेन। चन्द्रेश- तहन तूँ बड़ नीक लोक छेँ। गैंहकी एहने हेबाक चाही जे बिा तगेदे पाइ दऽ दिअए। मंगल- अहाँ तँ ओइ दिन कहाँदुन दुखन माएकेँ पाइले फझ्झति कऽ देलिऐ मालिक। चन्द्रेश- ओइ दिन अपन-अपन नफ्फाक मारि रहै। ओना हमर बेटी तोरे कनियाँकेँ जीता देलकौ। हमरा हिसाबसँ दू सए टाका बेसी लगि गेल। खैर, केतौ आनठाँ गेलै, अपने घरमे गेलै। मंगल- मालिक, अहाँ हमरा घरकेँ अपन घर बुझलिऐ। तइसँ छाती सूप जकाँ भऽ गेल। पाइ लिअ मािलक। (चन्द्रेश मंगलसँ एक सए टाका लेलनि।) चन्द्रेश- मंगल, बड़ बेगरतापर तूँ ई पाइ देलेँ। काल्हिसँ हमरा बेटीकेँ मैट्रिकक परीक्षा छी। ऐ बीचमे हाथ साफे खाली रहए। ओना बैंकसँ आनए पड़ितए। डेली एतै-जेतै, तइले पाइ चाही ने आ ओकरा संगोमे किछु चाही। आजे किछु खाइ-पीऐक मन होइ। मंगल- बेस मालिक, आब हम जाइ छी। ताड़ीवालीकेँ सेहो पाइ देबाक छै। चन्द्रेश- आइ खाली पाइए बाँटि रहल छेँ। की आइ-काल्हि बेसी आमदनी भेलै हेन? चन्द्रेश- नै मालिक। सिरिफ सारहे तीन सएक कोनियाँ-पथिया हटियापर बिकलै। ओइमे सँ दू सए टाका बेटाकेँ देलौं। उ आइ मैट्रिककेँ परीक्षा दइले मधमन्नी गेल। एक सए अहाँकेँ देलौं आ पचास गो ताड़ीवालीकेँ देबै। चन्द्रेश- आ घर-बेद? मंगल- घर-बेद किच्छो नै। दुखन माए कहलक, बेसी लिझ्झर रखबहक तँ तूकपर समान नै भेटतह। चन्द्रेश- एकदम ठीक कहलकौ। बड़ बुधियारि आ चालू-पूर्जा छौ। फेर बाँसक खगता हेतौ तँ लऽ जइहेँ। मंगल- बेस मालिक, जाइ छी, प्रणाम। (पर्दा खसैए। चन्द्रेशक प्रस्थान। मंगल ताड़ीवाली शीला ओइठाम जा रहल अछि। अन्दरमे शीला अपन ताड़ी दाेकान लगा उपस्थित अछि। तीनटा गैंहकी सेहो ताड़ी पी रहल अछि। देबन, सुकराती आ छट्ठू गैंहकी अछि। पर्दा उठैए।) मंगल- की भौजी, की हाल-चाल? शीला- ठीक छै। पछिला पाइकेँ बिसरि गेलिऐ। केते दिन भऽ गेल। हमरो तँ महाजनकेँ दइक छै। अहाँ कोनो नै बुझै छिऐ जे हमहूँ पैकारसँ ताड़ी लऽ कऽ बेचै छी। भैया हरदम ताशे-जुआमे हरान रहैए। कहुना-कहुना हम छह आदमीक परिवार चलबै छी। देबन- ठीके कहै छह भाय। भौजी बड़ खगल छै। ई तँ इहए छै जे अपन मुहेँ-ठोरे ताड़ी बेचि कऽ परिवार चलबैए आ धियो-पुतोकेँ पढ़बैए। मंगल- गरीब ने गरीबक दुख बुझै छै। हम सभटा बुझै छी। तँए ने आइ पाइ दइले एलिऐ हेन। सुकराती- भैया, तँ बेकारेमे एते बात सुनलहक। मंगल- सुकराती, बात कोनो बेकार नै होइ छै। खाली ओकर अमल करबाक चाही। हम सएह करै छेलौं। भौजी, पछिला पचास टाका लिअ। (शीला मंगलसँ पचास टाका लऽ कऽ रखलथि।) शीला- अहाँ ठीके कहलिेऐ मंगल बौआ, गरीब गरीबक दुख बुझै छै। उधारी लइले कोनो बात नै छै। उधारी-नगद दुनियेँ छै। खाली धियानमे रहए जे बेवस्था खराब नै होइ। पीबै-तीबै तँ पी लिअ, तब जाएब बौआ। मंगल- अखनि नै पीअब भौजी। हमर टेम नै भेलै हेन। साँझमे आएब। छट्ठू- धू, मंगल भाय, तूहूँ केहेन लोक छह जे एकबेर आएल आ एकबेर एब्ब गऽ। समैक महत दहक। मंगल- हम तोरे जकाँ थोरहे करै छी जे जखनि देखू तखनि ताड़ीए दोकानमे नै तँ दारू दोकानमे निश्चिते। ओना पहिने हमहूँ तोरे जकाँ छेलौं। मुदा हमर मौगीक किरपा जे अखनि बड़ परहेजमे छी। मन होइए जे साफे छोड़ि दिऐ। भौजी, हम जाइ छी। साँझमे आएब। शीला- बेस जाउ। साँझमे जरूर आएब। (मंगलक प्रस्थान) देबन- सुकराती भाय, एगो गप बुझलहक की? सुकराती- नै भाय, की भेलै हेन कतए? देबन- उ डिल्लीबला गप। सुकराती- ओहए ने, छौड़ा-छौड़ीबला। जइमे छौड़ी मरि गेल। देबन- हँ हँ, ओहएबला। सुकराती- उ गप तँ पुरान भऽ गेल। भौजी, अहाँ ई गप बुझलिऐ की? शीला- हँ, पोपरमे निकलल छेलै। सौंसे दुनियाँ अनघोल भऽ गेल रहै। सुकराती- अहाँकेँ केहेन लगल? शीला- केहेन लगत, बड़ खराप। ऐसँ घिनास्टेबला गप औरो की भऽ सकै छै। ऐसँ बढ़ियाँ तँ ई होइतै जे उ छौड़ा सभ अपन माए-बहिन-बेटीक संग ओना-ओना करितए। छट्ठू- भौजी, हम जे सरकार हरितऐ तँ ओइ सभटा छौड़ा आकि मरदाबाकेँ पकड़ि सौंसे देहक चमड़ी घीच ओइमे भूसा भरि बीचला चौकपर टाँगि दैतिऐ जेतए उ सभ एहेन काम केलक। मुदा एतुक्का निअमे-कानून हद छै। हमरा तँ मन होइए जे हमर बश चलितै तँ सभ छौड़ा-मरदाबाकेँ मरबा ओकर माए-बापकेँ सेहो मरबा दैतिऐ जे फेर एहेन धिया-पुता नै जनिमितै। पटाक्षेप। दोसर अंक पहिल दृश्य- (स्थान- झिंगुरक चाह दोकान। बी.ए. पास झिंगुर नीक चाह दोकान चला रहल अछि।) झिंगुर- बाप रे बा, महगाइ एते चरम सीमा पार केने जा रहल अछि जे चाहक दाम बढ़ा दी। हमहूँ की करबै? हमरो तँ समान महग कीनए पड़ै छै। मुदा हमहीं केना आगू बढ़ीऐ? कमपीटीशनक महौल छै। सोचि कऽ नै चलब, तरीकासँ नै चलब तँ फेंका सकै छी। ओना सौदा ठीक रहतै आ पाइ कनी बेसीओ लगतै तँ गैंहकी एब्बे करतै। हमर दोकान गाम-घरक दोकान छी। एतुक्का आदमीकेँ शहरक अपेक्षा कम आमदनी होइ छै। तही हिसाबसँ हमरा चलक चाही। की करबै, एक्के टाका आइसँ बढ़बै छिऐ। मात्र चारिसँ पाँच कऽ दइ छिऐ। (संजीता, हरीश आ भोलूक प्रवेश) संजीत- की हाल-चाल छै काका? झिंगुर- बड़ खराप। संजीत- से की? पहिने सभ दिन नीक कहै छेलौं। झिंगुर- इहए जे चाहक दाम चारिसँ पाँच भऽ गेल आइएसँ। संजीत- ई कोन खराप बात भेलै। महगाइ बढ़तै तँ सभ समानक दाम बढ़तै। ई तँ स्वभाविक छै। हरीश- तूँ बेसी बुझै छिही संजीत। तीस दिनमे एक साँझमे तीन टाका बेसी लगतै आ दुनू साँझमे साठि टाका। एकरा तूँ कम बुझै छिही। भोलू- बेसी बुझाइ छौ तँ चाह साफे नै पी, हरीश। नीक समान कीनबिहिन तँ नीक पाइ लगबे करतौ। हिनकर चाहक जोड़ा ऐ एरियामे केतौ छै, से कह तँ? हरीश- से तँ नै छै आ नै हेतै। भोलू- तहन बकबास बन्न कर। यौ झिंगुर काका, तीनटा चाह दियौ बढ़ियासँ। झिंगुर- एकर चिन्ता तूँ सभ नै करह। हमहूँ कोनो अमरुख नै छी। (झिंगुर चाह बना रहल छथि।) संजीत- हरीश, अपना सबहक रिजल्ट कहिया एतै? हरीश- अही बीचमे अबैबला छै। रिजल्टक पछाति तूँ की करबिहिन? संजीत- परीक्षा तँ खूम बढ़ियाँ गेल छै। चोरीओ बड़ चलै छेलै। लिख नै सकै छेलौं। जौं पास करब तँ पापा जेतए कहथिन पढ़ैले तेतए पढ़ब। नै तँ हम दिल्ली भागि जाएब। आ तोहर की प्लानिंग छौ? हरीश- हमर प्लानिंग इहए छौ जे हम पढ़ाइ साफे छोड़ि देबौ। कारण हम फाइल हेब्बे करबौ। से किअए तँ बुझलिहन हम चारि दिन एक्कोटा कोपीमे रौले नम्बर नै लिखलिऐ। संजीत- से एना किअए केलही? हरीश- से कोनो जानि कऽ केलिऐ। धोखासँ छूटि गेलै। परीक्षा दइले जाइ छेलिऐ तँ रस्तामे सभ दिन भाँग खा लइ छेलिऐ। लगैए ओही दुआरे छूटि जाइ छेलै। की करबै भाँग हमर प्रिय अमल छी। ओइ बिना हम काेनो काज नै कऽ सकै छी। नै हेतै तँ रिजल्टक बाद हमहूँ भाँगेक दोकान खोलब। भाेलू भाय, तूँ किच्छो नै बजै छह। भोलू- तँू सभ बजिते छह तँ हम की बाजी? संजीत- किच्छो तँ बाजह अपन प्लानिंग? भोलू- हम तँ गेल्ले घर छिअह। तेते टाइट परीक्षा भेलै से जुनि पूछह। सभ चंठ गार्ड हमरे रूममे रहै छेलए। पढ़ैमे हम गार्जनकेँ हम बड़ ठकलिऐ। हमर गार्जन पढ़ैक कोनो खर्चमे कोताही नै केलखिन। हमहीं कनी एम्हर-ओम्हर बेसी करै छेलिऐ। कोनो नै कोनो गरे हम सिलेमा बरबरि देखै छेलिऐ। परीक्षोमे सिलेमा मारि दइ छेलिऐ। संजीत- तहन तँ तीनू गोटे एक्के रंग। चोर-चोर मसियौत भाय। नै हेतै ने तँ तीनू गोटे रिजल्टक पछाति दिल्लीए भागि जाएब। नै तँ गामपर लोक सभ बड़ खिदौंस करत। यौ झिंगुर काका, आइ अहाँक चाह, पाइ बढ़ने बज्जर नै तँ भऽ गेल? झिंगुर- नै बौआ सभ, बज्जर नै भेल, तैयार अछि। आइ भीड़ नै छेलै आ तोरासबहक गप सुनैमे नीक लगै छेलए। तँए अनठा कऽ सुनै देलौं। पहिने तूँ सभ चाह लैह। तकर पछाति हमहूँ किछु अपन विचार देबह। (झिंगुर चाह छानि कऽ तीनूकेँ देलक। तीनू चाह पी रहल अछि।) कहै जाइए बौआ सभ? संजीत- हँ काका, अबस्स कहियौ। झिंगुर- केते छौड़ा सभकेँ देखै छिऐ कखनो ताश जोति देलक। नै पढ़ैक समए बुझै छै आ ने खेलै-कुदैक। अढ़मे जा-जा कऽ मोबाइलपर कनफुस्की करैत रहै छै। गेल इसकूल आ रहल सिलेमा हाँलमे वा गाछी-बिरछीए बौआइत रहल। तूँहीं सभ कहह उ सभ जिनगीमे नीक रिजल्ट आँखि कहियो देख सकत? हरीश- अपने लगती कहबै काका। झिंगुर- हमरा आरो जकाँ जौं तोरा सभकेँ परीक्षा करगर होइतौ तँ बड़का मुँगबा बट्टा खाजापर दूटा मुँगबा नंबर अबितौ। सरकारक बेवस्थे तेहेन भऽ गेलै जे पढ़ुआकेँ कम नंबर आ एम्हर-ओम्हर करैबलाकेँ बेसी नम्बर अबै छै। भोलू- तहन हमरा सभकेँ बेसी नम्बर एबाक चाही? झिंगुर- आबि सकै छौ। कोनो भारी बात नै। भोलू- काका, जदी हमरा सभ ऐबेर पासो कऽ गेलौं तँ अहाँकेँ रसगुल्लासँ दहाबोर कऽ देब। अहाँक मुँहमे अमृत बसए। झिंगुर- हमरा एहेन रसगुल्ला नै चाही। हम तँ भगवानसँ मनेबै जे एहेन विद्यार्थी कम-सँ-कम ऐबेर जरूर फएल कऽ जाए। संजीत- काका, एहेन असीरवाद देबै तँ हम सभ अहाँक देाकन छोड़ि देब। झिंगुर- हम कोनो सिद्ध पुरुख छी जे हमर असीरवाद काज करत। तखनि एते तँ अबस्स कहबौ जे तूँ सभ बड़ लापरवाही बरतलही तँ ओकर फल भेटक चाही आ ठोकर लगक चाही। ठोकर लगने बुधि बढ़ै छै। बुधि बढ़ने सतर्कता अबै छै। आ सतक्रतासँ सफलता भेटै छै। हरीश- बात तँ ठीके कहै छिऐ काका। अपनेक एकौटा बात कटैबला नै अछि। (तीनू गोटा चाह पीब कऽ गिलास रखलक।) झिंगुर- हम अपन अनुभव कहै जाइ छियौ। खराप लगतौ तँ आपस कऽ दिहेँ। तूँ सभ बजै छेलही जे फएल भेलापर तीनू गोटा दिल्ली भागि जाएब। ई तँ नीक बात नै भेलौ। जिनगी हारि-जीतक छिऐ। एक दिन हारमे तँ दोसर दिन जीतो सकै छिऐ जदी मेहनति करबै तहन। ऊपरेमे अल्हुआ नै फड़ै छै। देखही, असफलते सफलताक जननी छिऐ। असफलतासँ घबरेबाक नै चाही। बल्कि सफलता लेल अथक प्रयास करक चाही। हमर बातपर तूँ सभ अमल करबेँ तँऽ ऽ जिनगी सफल रहतौ। आब छोड़ ई गप-सप्प। चाहक पाइ ला आ जाइ जो अपन-अपन काज कर। (तीनू गोटे अपन-अपन चाहक पाइ झिंगुरकेँ देलक। तखने पेपरबला गौरीक प्रवेश।) गौरी- पेपर, पेपर, ऐ पेपर, आजुक टटका समाचार। मैट्रिकक रिजल्ट, रिजल्टक बौछार, रिजल्टक बौछार। संजीत- यौ पेपरबला, एगो पेपर दिअ। (गौरी पाइ लऽ कऽ पेपर देलक। संजीत पेपर लऽ माथसँ सटौलक। तीनू रिजल्ट देखैए।) गौरी- पेपर, पेपर, ऐ पेपर, आजुक टटका समाचार। मैट्रिकक रिजल्ट, रिजल्टक बौछार, रिजल्टक बौछार। (गौरीक प्रस्थान।) संजीत- इसकूलक नाओं तँ देखै छिऐ। हम अपन रौल नम्बर कहाँ देखै छिऐ। लगैए छूटि गेल हेतै। हरीश- दोस, हम अपनो रौल नम्बर नै देखै छिऐ। पेन्डिंगोमे नै देखै छिऐ। भोलू- दोस, लगैए लोटिया बुड़लौ। हमरो रौल नम्बर नै छै। झिंगुर- की बौआ सभ, सम्हरलै की बुड़लै? भोलू- तीनू गोटाक रौल नम्बर नै छै आ इसकुलक नाओं छै। एकर की माने भेलै काका? झिंगुर- एकर माने फेर मैट्रिकक तैयारी केनाइ भेल। यानी सभ फएल। फेर मेहनति करै जाइ जाउ। संजीत- की हरीश? की भोलू? मन नै होइ छौ जे माए-बापकेँ मुँह देखाबी। एम्हरे-सँ-एम्हरे चलै जाइ जेमे दिल्ली? हरीश- एकबेर माएओकेँ कहि देतिऐ। संजीत- माए कहि सकै छौ जे भागि जाे? भोलू- धूर सार सभ, चलै चल एम्हरे-सँ-एम्हरे। मुदा भाड़ा कतएसँ अनबिही? संजीत- सार दोस, ईहो नै बुझै छिही। अपना सबहक डेरा डाँरेपर रहै छै। बड़ बेसी तँ टी.टी. पकड़ि लेतै तँ जहलेमे रहब आरो की? भोलू- नै हेतै ने तँ टी.टी.केँ गप-सप्प दैत गेँटपर जाएब आ मौका पाबि चलती गाड़ीसँ बाहर ठेल देबै। लैत रहत सार, टकट आ टकटक पाइ। टकटक घूस लऽ लऽ सार सभ पेट नमरौने रहैए। हरीश- आ जदी चिक्कन जकाँ फँसि गेलेँ, ठेलैक मौका नै भेटौ, तहन की करबिही? संजीत- ओते सोचबिही तऽऽऽ नै जाएल हेतौ। चलैक छौ तँ चल, देखल जेतै जे हेतै से हेतै। राम भरोसे हिन्दू होटल। (एकटा ग्रामीण राम प्रवेशक प्रवेश।) रामप्रवेश- (खूद) एहेन सुन्दर रिजल्ट बहु िदनपर भेलैए। दू सए विद्यार्थीमे तीन गो फेल। पास भेलहामे मंगलाक बेटा इसकूलमे स्टूड फस्ट आ चन्द्रेश बाबूक बेटी स्टूड सकेण्ड। एगो चाह दहक झिंगुर भाय। (संजीत, हरीश आ भोलूक प्रस्थान।) झिंगुर- दइ छिअ भाय। कोन मंगला बेटा दऽ कहलहक? रामप्रवेश- डोमबा मंगला। कहाँदुन ओकर बेटा बड़ चन्सगर छै। सौंसे स्कूलमे सभकेँ पछारि देलक। (झिंगुर रामप्रवेशकेँ चाह देलक। उ चाह पीबैए।) झिंगुर- उ तीनू छौड़ा बेकाबू छल। सभ दुर्गुणसँ भरल छल। तँए तीनू गेल रसातलमे। तीनू भने फाएल भऽ गेल। रामप्रवेश- वएह तीनू छल फेलहा? झिंगुर- हँ वएह छल। रामप्रवेश- सौंसे स्कूलमे तीनेटा फेल भेल। सेहो वएह तीनू करमजरूआ छल। देखियौ भाय, चन्द्रेश बाबूक बेटी सौंसे स्कूलमे नाओं केलक। ओहो बड़ चन्सगर छै। झिंगुर- जौं ओकरा सभकेँ मनसँ पढ़ाएल जाए तँ अबस्से नाओं करत। (चाहक पाइ दऽ रामप्रवेशक प्रस्थान।) चन्द्रेश बाबू तँ अपना बेटीकेँ पढ़ा सकै छथि। मुदा मंगला बुते नै हेतै अपना बेटाकेँ पढ़ाएल। पटाक्षेप। दोसर दृश्य- – (स्थान- चन्देशक हबेली। मैट्रिकक रिजल्टक खुशीक माहौल छै। चन्द्रेश आ मनीषा बेटी चन्द्रप्रभाक नीक रिजल्टक संबन्धमे चर्चा करै छथि तथा ओकर अगिला पढ़ाइक संबन्धमे सोचै छथि।) चन्द्रेश- चन्द्रप्रभा मम्मी, हमरा आश नै छल जे हमर बेटी एते बढ़ियाँ रिजल्ट आनि सकत। फस्ट डिवीजन आ अपन इसकुलमे स्टूड सकेण्ड। हमर पाइ रत्ती-रत्ती ओसला गेल। हम आइ बड़ खुख छी आ अहाँ? मनीषा- हम अहाँसँ बेसी खुश छी। चन्द्रश- बजै ने भुकै छी आ बड़ खुशी छी। मनीषा- हम बजरंगबली तँ नै छी जे छाती चीर कऽ देखा दिअ। एतबे बुझियौ जे बेटी माएकेँ होइ छै। चन्द्रेश- एकर माने बेटा बापकेँ होइ छै आ हमरा बेटा भेल नै तहिन बेटीक उपतनिमे मेहनति अछि सएह ने? मनीषा- धूर जाउ, अहाँ जड़ि धऽ लेलिऐ। चन्देश- अहाँ बाते सहए बजलौं तँ धरबै नै। मनीषा- धूर, अहाँसँ के जीतत। बेटी अहींकेँ छी। चन्द्रेश- अदहा भेल, पूरा नै भेल। कहियौ बेटी दुनूकेँ छी। मनीषा- बेटी दुनूकेँ छी। चन्द्रेश- हँ, अाब पूरा भेल। बेटीक रिजल्टक खुशीमे किछु कटाब। मनीषा- खाली हमहींटा कटेबै, अहाँ नै। अदहा अहूँकेँ लगत। चन्द्रेश- कहियौ ने, अहाँकेँ पूरा लगत। कारण, अहूँ तँ हमरे माथा-हाथ देब। मनीषा- सभ गप तँ अहाँ बुझिते छिऐ। की खाएब, बाजू? चन्द्रेश- की बाजू, सभकेँ अपन-अपन पसीन होइ छन्हि। तइमे हमर पसीन गरम-गरम पातर-पातर जिलेबी अछि। आ अहाँकेँ? मनीषा- अहाँकेँ जे पसीन, से हमरा अहूँसँ बेसी पसीन। चन्द्रेश- आ बुच्चीकेँ? मनीषा- बुच्चीबला बात हम केना कहौं? उ तँ उ ने बजतै। चन्द्रेश- तहन बजबियौ बुच्चीकेँ। पुछै छिऐ। मनीषा- बुच्ची, बुच्ची, चन्द्रप्रभा, चन्द्रप्रभा। चन्द्रप्रभा। मुस्कुराइत चन्द्रप्रभाक प्रवेश) की मम्मी? मनीषा- किअए नै बजै छेलौं? चन्द्रप्रभा- एगो हमर बहिना आबि गेल छेली हमरा बधाइ दइले। हुनके संग गपमे लगल रही। नै सुनि सकलौं। सुनलौं तँ दौगलौं। की मम्मी, हमरापर खिसिआएल छी की? मनीषा- (मुस्कुराइत) खिसिआएल किअए रहब? खुश छी, बड़ खुश। तँइ बजेलौं, की खाएब? खाइमे अहाँकेँ कोन चीज पसीन अछि? चन्द्रप्रभा- हमर मम्मी–पापाक खुशी हमर खुशी छी। ओइमे आगू खाइक सभ चीज तुच्छ अछि। पापा खिसिआएल छथिन की? मनीषा- से हमरासँ पुछै छी, की पापासँ पुछबनि? चन्द्रप्रभा- किअए नै पुछबनि पापासँ। अबस्स पुछबनि। पापा, पापा। किअए नै किछु बजै छी? (प्रेमसँ दाढ़ी पकड़ि) पापा, पापा। हमरापर खिसिआएल छिऐ की? चन्द्रेश- (मुस्कुराइत) दू सए टाका तूँ डोमीनियाँकेँ बेसी लगा देलेँ तइसँ हमरा तकलीफ छल। मुदा तोरा रिजल्टसँ हम अपन तकलीफकेँ आइसँ बिसरि रहल छी आ तोरापर बड़ प्रसन्न छियौ। बाज तूँ, रिजल्टक खुशीमे की खेमेँ? चन्द्रप्रभा- पापा, अहाँ हमर लगतीकेँ माफ कऽ हमरापर प्रसन्न छी। ओइसँ पैघ औरो की भऽ सकैए? ओही प्रसन्नतासँ हमर मन गदगद अछि। आब हमरा किछु खेबाक इच्छा नै अछि। चन्द्रेश- (प्रसन्न मने) हमर बेटी, आउ हमरा लग। (चन्द्रप्रभा अपन पापा लग आबि गेली। प्रेमसँ चन्द्रेश चन्द्रप्रभाकेँ सहला दुलार कऽ रहल छथि।) मनीषा- (मुस्कुराइत) हे, एहेन बात जुनि बाजू जे हमर बेटी। नै तँ फेर झग्गड़ भऽ जाएत। से बूझि लिअ। चन्द्रेश- अहाँकेँ जे करबाक हुअए से करू। मुदा हम अपन बेटीकेँ नै छोड़ब। ओइक बदलामे आ जुरमानामे हम अहाँकेँ गरम-गरम आ पातर-पातर जिलेबी दऽ दइ छी। मनीषा- सेहो जल्दी लाउ ने। तहन माफ कऽ देब। चन्द्रेश- तहिन जाउ, नेने आउ ओइ टेबुलपर पोलिथीनमे राखल हेतै झाँपि कऽ। रिजल्ट सुनिते मातर आनने छेलौं। मनीषा- हम नै जाएब। अहींकेँ जाए पड़त। तखने मानब। चन्देश- हे हे, गोर लागए दइ छी, नेने आउ। मनीषा- जहन गोर लागि लेलौं तँ जाइ छी। देखलौं गोर लगेलौं। (चन््द्रप्रभा मुस्किया रहल अछि। मनीषा अन्दरसँ जिलेबीक पोलिथिन अनलनि।) लिअ। आब कहू, के हारलै? चन्द्रेश- बेटीकेँ पुछियौ, के हारल? मनीषा- बेटी, उचित बजिहेँ, के हारल? चन्द्रप्रभा- तूँ। मनीषा- से केना? चन्द्रप्रभा- पापा कहलखुन गोर लागए दइ छी, नै की गोर लगै छी। मनीषा- जो, तोहर पापा चलाको कम नै छथुन। हमरा कहियो उ जीतए देथुन। तहन जिलेबीओ कहुन बाँटथिन। चन्द्रेश- से हम बाँटिए ने देब अपितु मुँहमे खुआ देब। ई भऽ सकैए। (एक-दोसराक मुँहमे जिलेबी खुआ रहल छथि। अत्यंत खुशीक माहौल अछि।) बुच्ची, आब कहू अहाँक जिनगीक उदेस की अछि? चन्द्रप्रभा- हमर जिनगीक उदेस अछि- डाक्टर बननाइ। चन्देश- डाक्टर बनैक कारण? चन्द्रप्रभा- कारण इहए जे डाक्टरक स्थान भगवानक ठीक निच्चाँ होइत अछि। ओ अस्सल समाजसेवक होइ छथि। चन्द्रेश- बुच्ची, अहाँक उदेस नीक अछि। ओइमे विद्यार्थी आ अभिभावक दुनूकेँ तन-मन-धनक आवश्यकता छै। हम तन-मन-धन अबस्स लगाएब। मुदा अहाँ लगा पएब की नै? चन्द्रप्रभा- पापा, हम अपन कर्तव्यमे कखनो तिरोट नै करब। हम दाबा तँ नै कऽ सकै छी। मुदा बिसवास दिया सकै छी जे अहाँक तन-मन-धनकेँ बेकार नै जाए देब। ई निश्चित छै जे काजक मुताबिक जदी मेहनति कएल जाए तँ उ काज अबस्स सिद्ध हेतै। चन्द्रेश- एक दिन सर किलसमे बजै छेलखिन जे विशेष पढ़ाइक बेवस्था ग्रामीण क्षेत्रमे नै देखै छिऐ। अइले बाहरे ठीक। जेना, दरभंगा, पटना, दिल्ली आदि। ऐमे अहाँक जेहेन विचार। चन्द्रेश- दिल्ली दूर छै। पटना लग छै। दरिभंगा अोहूसँ लग छै। हमर विचार दरिभंगा रहए दियौ। एतए हमरो सभकेँ आन-जान रहत। एगो मोबाइल दऽ देब आ कोनो तरहक असुविधा हएत तँ फोन करब, हम चलि आएब। चन्द्रप्रभा- पापा, रहबै केतए? चन्द्रेश- कतए रहब, लड़िकीक छात्रावासमे रहब। एक-पर-एक बेवस्था छै। हम चलि कऽ आइ.एस.सी.मे नाओं लिखा देब आ नीक छात्रपावासमे रखबा देब। सएह ने? चन्द्रप्रभा- हँ सएह। चन्द्रेश- चन्द्रप्रभा मम्मी, अहाँ गुम्म छी, किछु नै बाजि रहल छी। अहाँक की विचार? अहँू तँ बुच्चीक माए छिऐ। मनीषा- हमर विचार पुछै छी तँ हम इहए कहब जे बुच्ची केतौ नै जेतै, गामेमे पढ़तै। पढ़ैबला केतौ पढ़ि सकैए। जुग-जमाना नीक नै छै। दोसर दर-दुनियाँमे एक्केटा अछि। ऊहो चलि जाएत तँ नीक लगत? चन्द्रेश- एगो कहबी छै, आप भला तो जग भला। हमर बेटी कोनो आन तरहक नै अछि। एकर लगन आ लक्षण नीक देखै छिऐ। ई कोनो तरहक गड़बर-सड़बर नै कऽ सकैए। एकरापर हमरा पूर्ण बिसवास अछि। मनीषा- बुच्ची, कनी चाह बनेने आउ। चन्द्रप्रभा- बेस, तुरन्त गेलौं-एलौं। (चन्द्रप्रभाक प्रस्थान) मनीषा- अखनि उ सभ तरहेँ नीक लगैए। ओतए गेलाक पछाति ओकरा केहेन माहौल भेटतै केहेन नै। नीक भेटलै तँ नीको भऽ सकैए आ जदी खराप भेटलै तहन की हेतै? चन्द्रेश- खराब माहौलमे देबे नै करबै। चिक्कन जकाँ बूझि-सूझि कऽ देबै। मनीषा- अखनि उ कुमारि छै, देखनुस छै। किछु भऽ सकैए किछु कऽ सकैए। मने छिऐ। ऐ मनक कोनो ठेकान नै जे कखनि केहेन हएत। चन्द्रेश- (खिसिया कऽ) एते कियो लोक सोचए। बेसी बुधिसँ वियाधि भऽ जाइ छै। मनीषा- सएह बुझियौ ने। हमहूँ सएह कहै छी। चन्द्रेश- अहाँ इनारक बेंग छी बेंग। बुझै छिऐ एतबेटा दुनियाँ छै। दुनियाँ बड़ीटा छै। किछु पबैले किछु गमबए पड़ै छै। हम चाहै छी एकरा पढ़ा-लिखा कऽ एकटा जगहपर पहुँचा नाओं करी आ जातिमे तेहेन घरमे बिआह करी जे लोक दंग रहि जाएत। कहै छै नामी मरए नामले आ पेटू मरए पेटले। मनीषा- नाम नीकोकेँ होइ छै आ खरापोकेँ। जाउ अहाँकेँ अपना जे फुरैए से करू। हम किछु नै बाजब। चन्द्रेश- (गंभीर मने) हमहूँ नइ बुझै छिऐ नीक-अधला। अधले नाओं करैले हम एते परेशान छिऐ? से अहाँ नै बुझै छिऐ। मनीषा- से हम बूझि कऽ की करबै? अहाँक मन जे कहए से करू। (चन्द्रप्रभाकेँ चाह लऽ कऽ प्रवेश। चन्द्रेश आ मनीषा चाह पीऐ छथि।) चन्द्रेश- बुच्ची, अहाँक एडमिशन दरिभंगामे करा दइ छी। आतै बढ़ियाँसँ पढ़ब-लिखब आ अपन काजसँ मतलब रखब। चन्द्रप्रभा- बेस पापा। पटाक्षेप। तेसर दृश्य- (स्थान- मंगलक घर। मंगल, मरनी आ दुखन अगिला पढ़ाइक संबन्धमे विचार कऽ रहल अछि। दुनू परानी भुइयाँपर बैसल अछि दुखन ठाढ़ अछि।) मंगल- बौआ, तोहर रिजल्टसँ आइ हमर मन बड़ हरखित अछि। मुदा आब आगू पढ़बैक हिम्मत एक्कोरती नै छौ। (दुखनक आँखि नोरसँ ढबढबा जाइए।) मनरी- मन तँ हमरो बड़ हरखित छह बौआ। मुदा अगिला पढ़ाइमे आरो खरचा लगतै। एतबेमे केना-केना पुरेलौं से तूँ जनिते छहक। हमर विचार अछि जे आब तूँ पढ़ाइ छोड़ि दहक। बाउओ बूढ़ भेलह। आब ऊहो नै सकै छह। कमेबहक नै तँ हमहूँ सभ केना जीअब? दुखन- (कानि कऽ) माए-बाबू छेँ। तूँ सभ जे कहबिही सएह करए पड़तै। मुदा, मुदा, मुदाऽऽऽ। मंगल- मुदा की बाज ने? दुखन- मुदा मुदा मुदाऽऽऽ। मन होइए आरो पढ़ितौं। मंगल- तूँहीं कह, हमरा बुते हेतै पुराएल। एगो आश छल सुग्गर सेहो हरा गेल। खतो-पथार नै अछि। देखैमे देखै छियौ माएकेँ एगो हौंसली आ दू कट्ठा बासडीह। ऐसँ भऽ जेतौ तँ बेचि कऽ पढ़। तब रहबेँ केतए से सोचि ले। (दुखन आरो कनए लगैए।) दुखन- बाउ, नै हेतै तँ ताबे हौंसली बन्हक रखि नाओं लिखा लइ छी। ट्यूशन भँजियबै छी। भऽ जेतै तँ ओही पाइसँ पढ़ब आ रसे-रसे हौंसली छोड़ा लेब। मरनी- आ जौं टीशन नै हेतै तब हाथे तरक गेल आ लातो रहसँ चलि जाएत। नै हौंसली हम नै देबौ। हमरा माए-बापक इहएटा निशानी अछि। पइत छल, नाकमे छल औंठी छल। सभटा बन्हकीमे बुड़ि गेल। आब एहेन काज नै करब। दुखन- (कनैत) माए तूहूँ कठोर भऽ गेलेँ हमराले। कनी सेचही माए। तूँ जे किछु बचेबेँ से हमरे हेतै। अखनि ओइसँ हमरा काज हेतै, जिनगी बनतै। ओइसँ तोरो सभकेँ ने सुख हेतौ। (मरनी कनए लगैए।) मरनी- पानिमे मछरी आ नअ-नअ कुटिया बखरा। हौंसली बूड़त की रहत, से के जनैए? दुखन- माए, जदी ऐ बेटाक प्रति कनियोँ ममता छौ तँ एकर गप आ जिद्दपर अमल करही। नै तँ ऐ बेटासँ हाथ धोइले। हमरा जेतए मन हएत तेतए चलि जाएब आ ओतए पढ़ब धरि अबस्स। (मरनी आरो कानए लगैए।) माए, की कहै छेँ? हँ वा नै कह। (मरनी हँ वा नै किछु नै कहि रहल अछि। खाली कानि रहल अछि।) बाउ, अहाँ की कहै छी? (मंगल गुम्म अछि।) किअए ने किछु कहै छीही? मंगल- (खिसिया कऽ) तोरा ओते जिद्द किअए लगल छौ? जे सकलियौ से पढ़ेलियौ, आब अपन जोगार कर। (दुखन आरो कनए लगैए) दुखन- दुनू जने एक्के रंग। खैर, अहाँ सभ अपन हौंसली रखू। हम चललाैं। (दुखनक प्रस्थान) मरनी- कनी देखहक ने, केतए गेलै? मंगल- हम नै जेबै, तूहीं जो। मरनी- जाहक ने। आखिर बेटा छिअ ने? मंगल- आ तोहर दुश्मन छियौ। मरनी- हमरा नै गुदानतै। मंगल- हमरो नै गुदानतै। हम नै जेबौ। मरनी- एहेन कठोर बाप केतौ नै देखलौं। मंगल- तोरे बड़ ममता छेलौ तँ उ किअए भगलौ? बेटा चलि जाए तँ चलि जाए मुदा हौंसली नै जाए। हे भगमान, एहेन कठोर माए केकरो नै दिहक। बहु छी, की करितौं? हमरो कठोर बनए पड़ल। मरनी- (अपने आप ऊपर ताकि) हे भगमान, एहेन कठोर माए केकरो नै दिहक। हे भगमान, एहेन कठोर माए केकरो नै दिहक। हे भगमान, एहेन कठोर माए केकरो नै दिहक। (कनैत-कनैत मरनी दुखनकेँ घुमाबए जाइए। फेर मंगल सेहो मरनीक पाछू-पाछू जाइए।) बौआ, बौआ। केतए गेलेँ बौआ? बौआ रौ बौआ। (गामक एकटा प्रतिष्ठित वेकती मणिकांत दासक प्रवेश घुमैत-फिरैत।) मालिक, हमरा बेटाकेँ भागल जाइत देखलिऐ? मणिकांत- हँ, देखलिऐ एगो छौड़ा कनैत-कनैत भागल जाइ छेलै। उ तोहर बेटा छेलै की नै, से हमरा नै बूझल अछि। नम्हर छेलै। की भेलै से? मंगल- केते दूर गेल हेतै उ? मणिकांत- कनियेँ दूर गेल हेतै। भेलै की से? मंगल- तूँ देखही गऽ। हम पीठेपर अबै छियौ। कनी मालिककेँ बता दइ छिऐ। (मरनी झटकि कऽ जा रहल अछि। बौआ बौआ चििचआइए।) मािलक की कहब। छौरा बड़ जिद्दी छै। अही बीचमे मैट्रिक पास केलक हेन। हमरा कहैए, हम पढ़ब आबू। हम दुनू परानी कहै छिऐ, नै पढ़ाइमे बड़ खरचा लगै छै। मणिकांत- तों सभ बुरबक छह जे पढ़ैबला बेटाकेँ नै पढ़बए चाहै छह। लोक सभ बेटा-बेटीकेँ पढ़बैले हरान रहैए। हौ, सुनलिऐ ऐ हाइ स्कूलमे एगो डोमक बेटा स्टूड फस्ट केलकै, ओहए छल की? मंगल- हँ मालिक। मणिकांत- तों सभ साफ खतम छह। एहेन विद्यार्थीकेँ तों सभ पढ़ाइ मनाही करै छहक, जुलुम करै छहक। विद्यार्थी होनहार छह। तोरा सभकेँ सरकार आरक्षणो देने छह। जौं पढ़ि-लिखि लेतह तँ केतौ-ने-केतौ अबस्स सरकारी नोकरी पाबि जेतह। तों सभ तरि जेबह। मंगल- मालिक, अगिला पढ़ाइमे बड़ पाइ लगतै। केतए से पुरबै? सुग्गरो हरा गेल। पहिने जकाँ कोनियोँ-पथिया नै बिकै छै। पसारिओ सभ हटियेपर जा कऽ कीनि लइ छै। हम केते डोमकेँ मनाही करबै आ गारि-फझ्झति देबै जे हमरा पसारी हाथे नै बेच, हमहीं देबै। मणिकांत- से तँ ठीके कहै छह। मुदा तूहूँ किअए नै टटियेपर चलि जाइ छह? मंगल- मालिक, आब हटियोपर रस नै छै। छेलै हमरा बाउक समैमे रस। तब ने बाउ डेढ़ कट्ठा डीह कीनलकै। मुदा आब हटियोपर तेते डोम अबै छै जे केतेकेँ बोहनिओपर आफत। अपन-अपन समान बेचैमे मारि कऽ लइ जाइए आ कमेमे बेच लइ जाइए। मणिकांत- जा, बापबला जमीनो बेचि कऽ बेटाकेँ पढ़ाबह। मंगल- से तँ हमर घरनीकेँ एगो हौंसलीओ छै। बेटा कहै छेलै, हौंसली बन्हक रखि हमरा नाओं लिखा दैह। हम ट्यूशनो कऽ कऽ पढ़ब। ओकर माइए नै गछलकै। बड़ जिद्द केलकै माएकेँ। मुदा नै गछलकै। तही दुआरे खिसिया कऽ भागि गेलै आ कहलकै हमरा जेतए मन हएत तेतए चलि जाएब आ पढ़ब अबस्स। मणिकांत- जा जा, चुपचाप चलि जा। बेटाकेँ पढ़ाबह। नशीबकेँ तेज छह जे एहेन होनहार बेटा भगवान देलकह। हम जाइ छिअ। लेट भऽ रहलए। (मणिकांतक प्रस्थान) (अन्दरमे मरनी आ दुखनमे गप-सप भऽ रहल अछि।) (मंचपर सँ मंगल अन्दरक गप-सपकेँ अकानि रहल अछि।) मरनी- चल ने, चल ने। किअए ओते हरान करै छेँ। हमरा ओते दम नै अछि जे घीचल हएत आकि उठाएल हएत। चकेठबा जे कहलकै पीठेपर अबै छी तूँ चल, से अबिते अछि। चल ने बौआ, चल ने। चल, जे जेना कहबीही से हम देबौ। दुखन- से दैतही तँ एना हेबे करितौ? तोरा बेटा थोरहे प्रिय छौ, हौंसली प्रिय छौ। जो, हम नै जेबौ। जो हौंसलीकेँ धोइ-धोइ चाट गऽ। तोरा बेटासँ कोन मतलब छौ? दुश्मन बेटाकेँ घरसँ भागिए गेनाइ नीक। सभकेँ शांति भेटतै। (मरनी बोम पाड़ि कऽ कनए लगैए।) मरनी- मुड़ीमचरूआ कखनि कहलकै, चल अबै छी पीठेपर से अबिते छै। बड़ गपक्कड़ भऽ गेल हेन। चल ने, चल ने। दुखन- हम नै जेबौ। नै जेबौ। माएक हिरदे एहेन कठोर होइ छै? लोक सुनत तँ हँसत। (मरनी हिचकि-हिचकि कनए लगैए।) मरनी- तूँ नै जेबेँ तँ हमहूँ जेतए मन हएत तेतए चलि जाएब। मरि जाएब, कटि जाएब। (मंगल रेसमे चलि दुनू माए-बेटा लग पहुॅचल।) मंगल- चल ने बौआ। किअए एना कनै-खीजै जाइ छेँ? (पर्दा हटल। तीनू गोटे दर्शकक सोझा आएल।) दुखन- बाउ, तूहूँ वएह छह, माएक पटलपर चलैबला। तूँ ताड़ी-दारूमे जेते पाइ देने हेबहक, ओइमे हमर पढ़ाइ बढ़ियाँ जकाँ भऽ जेतै। तोहर बेटा छिअह। कहबह तँ तकलीफ हेतह। तँए मुँहमे ताला लगेने छी। मंगल- आब तोरे दुआरे ताड़ीएटा पीऐ छी, दारू छोड़ि देलिेऐ। दुखन- ऊहो दिन दुनू भाँइ दारू पी कऽ उठा-पटक केलौं। ईहो जे किछु बजलौं गलती भेल। (हाथ जोड़ि कऽ) बाउ गलती माफ करू। मंगल- बौआ, हमरा मणिकांत मालिकसँ अखनि तोरे संबन्धमे बहुत रास गप भेल। बहुत ज्ञानबला गप कहलखिन। हम सोचि लेलौं जे कोनो धरानी तोरा पढ़ेबाक छै। चाहे जे भऽ जाए। हौंसली बिकौ, डीह बिकौ आकि हम दुनू परानी बिकी। की गै, तोहर की विचार? मंगल- हमरो इहए विचार छह। आब हमहूँ इहए अबधारि लेलौं हेन। मंगल- बौआ, गामपर चल। तूँ जे जेना कहबीही सएह हेतै। बड़कीटा हाथी होइ छै, ऊहो कहियो चुकि जाइ छै। दुखन- माए-बाप छी। बेटाक कहलपर अमल करियौ। जदी गलती कहै छी आ करै छी तँ डाँटबे नै करू, पीटू। हम एक्को बेर किछु कहब तँ कए बापक बेटा नै। मंगल- हमरा तोरापर बिसवास अछि। तूँ अधला नै कऽ सकै छेँ। चल गामपर चल। तोहर पढ़ाइक सभ बेवस्था हेतै। दुखन- चलू। (सबहक प्रस्थान।) पटाक्षेप। चारिम दृश्य- (चन्द्रेशक हवेली। समए सौझुका। चन्द्रेश आ मनीषा चन्द्रप्रभाक संबन्धमे आपसी गप-सप्प कऽ रहल अछि। ठुट्ठी सिकरेट लगा कऽ पीबै छथि।) चन्द्रेश- चन्द्रप्रभा नामी-गामी छात्रावासमे रहि रहली हेन। छात्रावासक मालिक एतेक टाइट छथिन जे जुनि पुछू। एकोटा एम्हर-ओम्हर नै कऽ सकैए। सभकेँ दैनिक रुटिन बनल छै। ओहीक अनुसार सभकेँ चलैक छै। नै तँ गार्जनकेँ बजा हुनके संग लगा देल जाइए। मनीषा- बेवस्था तँ बड़ नीक छै। मुदा जुग-जमाना खराप छै। चन्द्रेश- अहाँकेँ जइ बातक डर होइए, ओ अपना सबहक अखितियारक नै छै। ओ बुच्चीएक अखितियारक छै। उ गप ओकरे चरित्रपर िनर्भर करै छै। एगो गप बुझै छिऐ? मनीषा- की, कहियौ ने? चन्द्रेश- ओकर मन जदी एम्हर-ओम्हर करैक हेतै तँ हम-अहाँ मुँह तकिते रहि जाएब आ से केतौ भऽ सकैए। ओना एहेन चरित्रहीनताबला घटना किनको संगे नै होन्हि से प्रार्थना हम सदिखन भगवतीसँ करैत रहै छियनि। (हौंसली लऽ कऽ मरनीक प्रवेश।) मरनी- मालिक, हिनके लग एलियनि हेन। चन्द्रेश- की बात छियौ जे एतेक मुनहरि साँझमे एलेँ हेन? चन्द्रेश- हे, हम जाइ छी। बड़ साँझ भऽ गेलै। साँझो-बाती नै देलिऐ हेन। गप-सप्पमे लगल रही। तहन जाइ छी तँ? चन्द्रेश- बेस जाउ। (मनीषाक प्रस्थान। मंचपर अन्हार अछि। डिबिया लऽ कऽ मनीषाक प्रवेश।) नै नै। डिबियाक जरूरी नै अछि। गप-सप्प अन्हारोमे भऽ सकै छै। बेकारमे मटिया तेल किअए जरतै? जाउ, डिबिया नेने जाउ। (डिबिया लऽ कऽ मनीषाक प्रस्थान।) आब तों कह, केतए एलेँ हेन? (मरनी चन्द्रेशक लग जाए चाहैए।) हाँ हाँ हाँ हाँ, ओम्हरे रह। ओतैसँ बाज। मरनी- (ठामहि रूकि) एगो हौंसली लऽ कऽ एलियनि हेन। बौआकेँ नाओं लिखेबाक छै। चन्द्रेश- बेचबिही आकि बन्हँक रखबिही? मरनी- बेच लेबै तँ आश खतम भऽ जेतै आ बन्हकी रखबै तँ फेर छोड़ा सकै छिऐ। चन्द्रेश- बन्हँकमे बड़ कम पाइ हेतौ आ बेचनामे बेसी पाइ हेतौ। हमरा विचारसँ बेचीए ले आ ओइ पाइसँ बेटाकेँ सुग्गर कीनि दही। ओइमे बड़ नफ्फा छै। बढ़ियाँसँ परिवारो चलतौ। मरनी- बौआ, कहै छै हम पढ़ब। ओइ दुआरे उ रुसि कऽ भागिओ गेल छेलै। दुनू परानी कहुना-कहुना ओकरा घुमा कऽ गामपर अनलौं। चुनद्रेश- सुन, पढ़ाइ आब ओते सस्ता नै रहि गेलै। बड़ खरचा लगै छै। तहूमे मैट्रिकसँ ऊपर तँ आरो बेसी। तूँ बेटाकेँ पढ़बैक चक्करमे नै पड़। गरीब आदमी छेँ। बीको जेबेँ तैयो पार नै लगतौ। नीक कहै छियौ। मरनी- मालिक, अपने ठीके कहै छिऐ। खाइपर तँ आफद अछि आ बेटाकेँ पढ़ैले ओते पाइ केतएसँ आनब। कनी रुकौथु, घरपर सँ पुछने अबै छी। चन्द्रेश- जो, से कै कहतौ नै। कोनो काज विचारि कऽ करी तँ बढ़ियाँ बात। (मरनीक प्रस्थान।) अपन-अपन जोगारमे सभ रहैए। सुतरि गेलै तँ बड़ नीक आ नै तँ घाटा थोरहे लगए देबै। जालमे माँछ फँसल तँ छैहे। ओइबेर वएह दू सए टाका बेसी लऽ गेल रहए। (मनीषाक प्रवेष।) मनीषा- की बात छेलै जे एते साँझमे डोमीनियाँ आएल रहए? चन्द्रेश- (मुस्कुराइत) बेटाकेँ नाओं लिखबैले हौंसली बन्हँक राखए आएल छेली। कहलिऐ तों ऐ फेरीमे नै पड़। बेचि कऽ सुग्गर कीनि दही। बड़ नफ्फा हेतौ। सएह बुझए गामपर गेली। मनीषा- बेचैक छै उमेद की? चन्द्रेश- उमेद तँ पूरा लगै छै। तहन तँ ओकर अप्पन विचार। जबर्दस्ती करैबला जुग तँ आब नै छै। जहिया छल तहिया कम नै सुतारलौं। तँए ने आइ मालिक कहबै छी। मनीषा- हे भगवती, ई हौंसली भऽ जेतै तँ एगारह टाकाक मधुर चढ़ेबह। चन्द्रेश- कखनो-कखनो अहूँ हुसि जाइ छी। भगवती लोभी नै होइ छथिन। एगारह टाकाक काज एकोमे भऽ सकैए। भगवती कोनो एस.डी.ओ. थोरहे छथिन। (मरनीक प्रवेश।) मरनी- मालिक, बेचैक विचार नै भेलै। बन्हँके रखबै। बौआ कहलकै, हम पढ़बेटा करबै। मनीषा- हम जाइ छी। भानस-भातक जोगार करबाक अछि। चन्द्रेश- बेस, जाउ। (मनीषाक प्रस्थान।) तहन तूँ अपन समान देखा। (मरनी हौंसली निकालि कऽ देखैले देली।) बाज केते पाइ लेबही? मरनी- केते पाइ लेबै मालिक? कम्मे लेबै जइसँ बौआक नाओं लिखा जाइ। चन्द्रेश- से तँ तूँही ने बजबिही आकि हम बजबै? मरनी- से तँ हमहीं बजबै। कम्मे देथुन, दुइए हजार। किताबो सभ कीनैक छै। चन्द्रेश- पहिने कहलेँ खाली नाओं लिखबैले लेबै आ आब कहै छेँ किताबो सभ कीनैक छै। मरनी- की करबै मालिक, जे जरूरी छै से तँ लिहे पड़तै। आखिर ओही दुआरे तँ बन्हकी रखै छिऐ। पेट तँ कोनियाेँ-पथियासँ कहुना चला लेब। दूइए जहार देथुन। चन्देश- दू हजार नै हेतौ पाँच सए हेतौ। मरनी- ओइसँ काज नै हेतै। डेढ़ो हजार देथुन। चन्द्रेश- डेढ़ हजार तँ नै देबौ। बड़ करमेँ तँ दू सए आरो देबौ। बेसी लेबही तँ सूदिओ ने बेसी लगतौ। मरनी- की करबै मालिक, जे लगतै से लगतै। पहिने तँ हम जरूरीकेँ देखबै। चन्द्रेश- देखही, सात सए धरि लेबही तँ तीन टके सैकड़ लगतौ, एक हजार धरि लेबही तँ चारि टके सैकड़ डेढ़ हजार धरि पाँच टके सैकड़ आ दू हजार धरि छह टके सैकड़ लगतौ। ऊहो समानपर। नै तँ उलफीक रेट आरो बेसी छै। मरनी- हमरा डेरहे हजार दथु। चन्द्रेश- ठीक छै डेरहे हजार ले। मुदा तोरा कनी आरो सूदि लगतौ। मरनी- किअए मालिक? हम गरीब छी तँए? चन्द्रेश- नै नै, से बात नै छै। तूँ हमरासँ कोनियाँ-पथियामे दू सए टाका बेसी लऽ नेने छेँ, तँए। मरनी- नै मालिक बेसी नै लेलौं। पसारी जानि उचितोसँ कम लेलौं। फूसि नै कहै छी मालिक। हिनके सप्पत कहै छियनि। चन्द्रेश- हमर सप्पत खेमेँ तँ आरो सूदि बढ़ा देबौ। मरनी- अपन बेटा सप्पत कहै छी, बेसी नै लेलियनि। कम्मे लेलियनि। चन्द्रेश- केताबो किछु करमेँ तँ हमरा मुँहसँ जे निकलि गेलौ से लगबे करतौ। डेढ़ हजार लेबही तँ छह टके सैकड़ लगतौ। मरनी- मालिक, अखनिते कहने छेलिऐ पाँच टके आ तुरन्ते छह टके कऽ देलिऐ? चन्द्रेश- बेसी बजबेँ तँ आरो बढ़ा देबौ। लेबाक छौ तँ ले नै तँ जो। मरनी- मालिक, अपना गामे बन्हकीबला काज कोइ नै करै छथिन। खाली इहएटा करै छथिन। तँए ने मनमाना करै छथिन? चन्द्रेश- (खिसिया कऽ) आबो मुँहमे ताला लगा नै तँ फेर बढ़ा देबौ। चुपचाप पाइले आ जो। मरनी- गलती भेलै मालिक। आब किछु ने बाजब। देथुन पाइ (चन्द्रेश अन्दर जा कऽ पाइ आ डायरी अनलनि। पहिने डायरीपर पाइ लिखलनि। तेकर पछाति मरनीकेँ डेढ़ हजार टाका हौंसली लऽ कऽ देलनि।) जाइ छियनि मालिक। जदी हौंसली बेचैक विचार हेतै तँ हिनके देबनि। चन्द्रेश- ठीक छै अभिहेँ। लगा देबौ बेसीए। गरीब आदमी छेँ। मजबूर छेँ। हमर डोमीन सेहो छेँ। (मरनीक प्रस्थान।) पटाक्षेप। पाँचिम दृश्य-– (स्थान- मंगलक घर। मंगल कोनियाँ बीनि रहल अछि।) मंगल- साँझे गेल, से अखनि धरि नै आएल। पकड़ि तँ नै लेलकै बभना? केते राति भऽ गेल। फेर कखनि भानस-भात हएत। (दुखनक प्रवेश।) दुखन- बाउ, माए नै एलै की? काल्हिएटा अंतिम डेट अछि। सेहो लेट फाइन लऽ कऽ। केते राति भऽ गेलै। कनी देखिऔ गऽ? मंगल- देखही। (दुखनक प्रस्थान।) लगैए, उ बभना हिज्जो करैत हेतै। एहेन कंजूश देखल नै। एगो सिकरेट छह महिना चलै छै आकि नअ महिना से नै कहि। (दुखन आ मरनीक प्रवेश।) (खिसिया कऽ) तोरा एते देरी किअए भेलौ? बभना पकड़ि नेने छेलौ की? मरनी- बड़ सस्ता छै जे पकड़ि लेत। खापड़िसँ मुँह भसका देबै। बड़ पाइबला अछि तँ अपना जगहपर। मंगल- एते देरी किअए भेलौ से बाज ने? मरनी- मालिक बड़ हिज्जो करै छेलै। एतबे देबौ, एतबे ले, एतेमे एते सूदि, ओते लेबही तँ ओते सूदि। इहए सभमे बसी टेम लगि गेल। मंगल- खैर, छोड़ ई गप-सप। पाइ केते देलकौ? मरनी- डेढ़ हजार ऊहो छह टके सैंकरपर। मंगल- तोरा नाअों लिखाइ केते लगतौ? दुखन- बाउ, सभकेँ एक हजार लगै छै। मुदा हमरा सभकेँ कनी छूट छै। लेट फाइन लगा कऽ नअ सए। मंगल- दऽ दही नअ सए टाका। काल्हि नाओं लिखा लेत। आैर पाइ तूँ अपने लग बढ़ियाँसँ राख। (मरनी नअ सए टाका दुखनकेँ देलक।) दुखन- बाउ, किताबो कीनबै। ओहूमे पाँच सए लगतै। मरनी- पाँच सए आरो लऽ ले। भेलौ ने? (पाँच सए आरो देलक) दुखन- कहाँ भेलै? कोंपी-कलम सेहो ने कीनबै। सभटा सदहल छै। मंगल- ऊहो दए दही। नै तँ रमा-खटोला फेर देखेतौ। बौआ हम तँ छियौ करिया अच्छर भैंस बरबरि। अपन नीकसँ पढ़-लिखि। पाइ बेरबाद नै करिहेँ। केना पुरबै छियौ से बुझिते छिही। मरनी- ऐ ले नै कहए पड़त एकरा। ई अपने बुधियार छै। मंगल- बेटा केतबो बुधियार रहतै तँ बाप लग बेटे रहतै आ बाप ओकरा उचित-अनुचित कहबे करतै। दुखन- बाउ, ऐ ले तँू निफिकीर रहह। ओना तूँ अपन करतब करिते छहक आ करबाको चाही। माए, भूख लगि गेलौ। कनी ओम्हरौ देखही। मरनी- बेस, हम जाइ छी भनसा-भात करैले। ई एक सए टाका लऽ ले। (मरनी एक सए टाका आरो देलक दुखनकेँ। आ उ चलि गेली।) मंगल- (मुस्कुराइत) बौआ, एगो बात पुछै छियौ। आब ओते पाइ नै ने लगतै। दुखन- लाइगो सकै छै। ओना कनी-मनी तँ लगिते रहत। मंगल- से केतएसँ अनबै? दुखन- औगताहक नै। रसे-रसे सभटा हेतै। हमहूँ परियासमे लगल छी जे केतौ ट्यूशन पकड़ि लेब अपना जेगारसँ नै हेतै तँ कोनो दोकानमे नोकरी कऽ लेब। मंगल- तूँ तँ अपने बुझनुक छेँ। जइसँ साँपो मरि जाए आ लाठीओ ने टूटए। से काज करिहेँ। (मंगलक सार ओपीनदरक प्रवेश।) ओपीनदर- पहुना गोड़ लगै छी। (दारू पीब कऽ झुमैत) मंगल- बौआ, मामा एलौ। पानि नेने आ। माएओकेँ कहि दिहनि। (दुखन ओपीनदरकेँ गोड़ लागि अन्दर जा कऽ पानि अनलक।) ओपीनदर- भगिना खूम दनदनाइत रह। बड़ीटा भऽ गेलही। आबो भोज खीया। नै तँ दारूए पीआ। मंगल- एते रातिमे केतए सँ? ओपीनदर- चललौं पहुना दुपहरे। कहलिऐ एक कोस पएरे जाइमे केते काल लगतै। रस्तामे कनी दारू पीअ लगलौं। तहीमे देरी लगि गेल। चललो नै होइ छलए। कहुना-कहुना खसैत-पड़ैत एलौं। (झुमैत) पहुना, दारूक जोगार कनी आरो लगाउ। मंगल- अखनि सार, ई सभ छोड़। बड़ राति भऽ गेलै। खाइक टेम भऽ गेलै। ओपीनदर- सार पहुना, ईहो नै बुझै छिही, दारू भऽ जेतै तँ खाइक कोन काज। सार अमरुख अछि। बेकारमे एकरासँ बहिनक बिआह केलौं। पितीऔत बहिन अछि तँए छोड़ि दइ छियौ। नै तँ कुटुमैती छोड़ा लैतियौ। सार पहुना, तूँ कहियो नै सुधरमेँ। मंगल- सार, हूँहीं सुधर। हमरा नै सुधरबाक अछि। एलेँ केतएसँ से ने कह सार? एते रातिमे कोन जरूरी भेलौ? ओपीनदर- कथा-कुटुमैती ले एलियौ, सार पहुना। हम भगिनाक बिआह करबै अपन साइरसँ। केते दिनसँ तँग केने अछि सार ससुर। आइ छुट्टी भेल तँ एलौं। दारूक खरचा ओकरे छै। सार ससुर बड़ धनीक अछि। जे कहबै से देतै। (झूमि रहल अछि) (दुखनक प्रस्थान। परनीक प्रवेश।) मरनी- (मुस्कुराइत) भैया, गोर लगै छिअ। ओपीनदर- खूब नीके रह दाय। आैर हाल-चाल बढ़ियाँ छौ ने? मरनी- हँ भैया, बड़ बढ़ियाँ छै। राति बड़ भऽ गेलै। पहिने खा लइ जाइ जा। तब कोनो गप-सप्प करिहेँ। ओपीनदर- दाय, चल, अबै छी। (मरनीक प्रस्थान।) सार पहुना, खाइले जाही ने? मंगल- किअए तूँ नै जेबही से? ओपीनदर- नै, हमरा खाइक मन नै छज्ञै। कनी भऽ जेतै तँ दारूए भऽ जइतै। मंगल- एते रातिमे दारू केतएसँ औतै? अखनि छोड़, काल्हि देखल जेतै। जइ काजसँ एलेँ, से काज कर। ओपीनदर- तँ सएह बात कर। आ खाइले नै जेबही? नै तँ एतै मंगा ले। खेबो करहिहेँ आ गपो-सपो हेतै। मंगल- ठीके कहै छेँ। दुखन माए, दुखन माए। मरनी- (अन्दरसँ) की कहै छै? मंगल- खेनाइ एतै नेने आ। मरनी- किअए घर-अँगना नै छै? मंगल- ओपीनदर कहै छै एतै खाइले आ गप-सप्प करैले। मरनी- अच्छा, नेन अबै छिऐ। मंगल- जल्दी नेन आ। (खेनाइ लऽ कऽ मरनीक प्रवेश।) खो सार। ओपीनदर- नै खाइक मन छौ। तूँहीं खो। मंगल- बहिन दरबज्जापर जे किछु कण-साग भेटै ओकरा अबस्स कनियोँ-ने-कनियाेँ गरहाज करक चाही। ओपीनदर- तूँ तेहेन गप कहै छेँ जे खाइए पड़त। एगो चीज देखए दे। जेबीमे रखने छेलिऐ। छै की नै? (जेबीमे हाथ दऽ) हँ छौ। हमरा होइ छेलए केतौ खसि पड़लै। (जेबीसँ पन्नी निकालि) सार पहुना, एत्तेकाल कहै छेलियौ तँ अगधाइ छेलेँ। आब भेलै न। देखलिही, हमरा केते पामर छै? मंगल- खेनाइओ सराइ छौ। खेबो कर। गरम खेनाइ सुअदगर होइ छै। ओपीनदर- एगो गप बूझि लही सार पहुना, दारू सड़लो खेनाइकेँ नीमन बना दइ छै। मंगल- छोड़ लबर-लबर केनाइ। जे करमेँ से कर। (ओपीनदर दारू पीनाइ आ खेनाइ दुनू काज कऽ रहल अछि।) ओपीनदर- सार पहुना, तूँ अपन बेटाक बिआह हमरा साइरसँ करबिही की नै? मंगल- अखनि नै। कारण ओकर धियान पढ़ैपर बड़ छै। बड़ संसगर छै। ओपीनदर- तइसँ की? चंसगर आदमीकेँ बिआह नै होइ छै आकि नै करैए? तूँ सभ बूढ़ भेलेँ। बूढ़ सभ पाकल आम होइ छै। कखनि खसत कखनि नै। कोनो ठेकान नै। अपन जीता-जिनगीमे पुतोहुकेँ देख ले आ नेन जुड़ा ले। मंगल- हमरा मनो हेतौ तँ तोहर भगिना नै मानतौ। ओपीनदर- किअए, घरमे तोहर जूति नै चलै छौ की? मंगल- जूति तँ हमरे चलै छै। मुदा बेटा नम्हर भेलै। ओकरो कहल करए पड़ै छै। नै करै छिऐ तँ भागए लगैए। की करबै एगो बेटा अछि। माया घेर लइए। भगिनेकेँ पुछही। ओपीनदर- भागीन, भागीन। दुखन- (अन्दरसँ) हइए अबै छी मामा। (दुखनक प्रवेश) की मामा, की कहलहक? ओपीनदर- सुनै छिअह, तूँ बड़ चंसगर छह। सभटा गप बुझिते हेबहक। बच्चो नै छह। जुआन भऽ गेलह। माए-बाप बूढ़ भेलह। हमर विचार छह जे तूँ बिआह कऽ लए। हमर साइर बड़ सुन्नरि छै। हेमामालीन आ हमर साइरकेँ एकठाम ठाढ़ कऽ दइ तँ हेमामालीन फाइल भऽ जेतै। (मंगल आ ओपीनदर खा-पी कऽ हाथ-मुँह धोलनि।) दुखन- ई बात बाउएकेँ पुछहक। हम किछु नै कहबह। गारजियर वएह छथिन। ओपीनदर- की वैंह पहुना, छिरहारा खेलै जाइ छेँ। ओकरा पुछहक तँ ओकरा पुछहक। हँ की नै कह? मंगल- अखनि नहियेँ बुझही। अखनि पढ़ए दही भागिनकेँ। दू-चारि बर्खमे देखल जेतै। ओपीनदर- जौं बात नै मानलेँ सार, तँ जाइ छी। (उठि कऽ जाइले तैयार होइत।) मुदा एगो गप बूझि ले जे तूकपर नै, से कथीदूनपर। अँए रौ सार, तोरा बेटाकेँ उमेरमे हमरा चारि गो धिया-पुता रहए। अखनि अठारह गो छौ। तूँ अपन बेटाकेँ बुढ़ाड़ीमे बिआह करिहेँ आ कटहर लीहेँ। मंगल- मामा भऽ कऽ तूँ एहेन बात नै कही, सार? ओपीनदर- आब हम ओहिना कहबौ सार। नै हेतै न, तँ हमहीं कऽ लेबै। और की? साइरसँ हमरा लोभ अइछे। सार ससुर-सासु बुझिते अछि। कोनो चाेरा कऽ लोभ भेल छै? नै। देखा कऽ। एगो बच्चो भेल छेलै। लाज दुआरे धारमे हम अपने फेंक एलौं। हमरा कम बुझे छिही सार। हम बड़ पहुँचल फकीर छिऐ। मंगल- वाह सार, धिनौना काज करैमे पहुँचल फकीर छेँ। ई आदत बड़ खराप छौ। ओपीनदर- हमरा एहिना रहए दे। हमर बात नै मानै जाइ गेलेँ तँ तूँहू घर आ हमहूँ घर। हमरा तोरा कोनो मतलब नै, कोनो संबन्ध नै। आइसँ कुटुमैती खतम। चललियौ। (ओपीनदरक प्रस्थान।) पटाक्षेप। छअम दृश्य- (स्थान- चन्द्रेशक हवेली। चन्द्रेश ठुट्ठी सिकरेट पीऐ छथि। चन्द्रेश आ मनीषा चन्द्रप्रभाक बिआहक संबन्धमे गप-सप कऽ रहल छथि।) मनीषा- आब अपन चन्द्रप्रभाक उमेर अठाहर भेल अबैए। कन्यादानक संबन्धमे की सोचै छिऐ? चन्द्रेश- की सोचबै अखनि? सोचलाहा गप कखनो भैयो जाइ छै आ कखनो नहियोँ होइ छै। भगवतीक जे इच्छा हेतै सएह हेतै। अइले अख्नेसँ हमरालोकनि किअए अफसियाँत होइ? मनीषा- से तँ ठीके। मुदा कन्यादान बड़ पैघ जग छी। बहुत पहिनेसँ एकर ओरियान-बात करए पड़ै छै। चन्द्रेश- ईहो बात कियो नै काटत। (चन्द्रेशक पड़ोसी आ शुभचिन्तक ब्रह्मानंदक प्रवेश।) ब्रह्मानंद- भैया, गोर लगै छी। चन््द्रेश- जीबू, जागू आ दनदनाइत रहू। आइ केन्नए सुरूज उगलै हेन? ब्रह्मानंद- सुरूज तँ सभ दिन एक्के रंग उगै-डुमै छै करीब करीब। मुदा करबै की? फुरसतिक बड़ अभाव रहै छै। ताशक खेलाड़ी जकाँ भरि दिन ओहीमे लगल रहनाइ नीक नै लगैए। अपन दुख-धंधामे लागल रहलौं। ई हो जे आइ एलौं से पेपरमे एगो बड़ खराब बात पढ़लिऐ। चन्द्रेश- की यौ? की पढ़लौं यौ? ब्रह्मानंद- की पढ़ब भैया? देखै आ सुनै छी तँ बड़ छगुन्ता लगैए। छौड़ा-छौड़ी सभ तेतेक उड़ाँत भऽ गेलैए पढ़िते-पढ़िते दुनू फराड़। दरिभंगेक एगो कोनदीन छात्रावाससँ एगो छौड़ाक संग फराड़ भऽ गेलैए। जिज्ञासा भेल जे अहूँक पुत्री तँ दरिभंगेमे पढ़ि रहली हेन। चन्द्रेश- ब्रह्मानंद, हमरा पूर्ण बिसवास अछि जे हमर बेटी एना नै कऽ सकैए। ब्रह्मानंद- से तँ हमरो बिसवास अछि। मुदा छिऐ मने। एकर कोनो ठेकान नै। कखनि की करत की नै। जखनि पेपरमे पढ़ै छी तँ छगुन्तामे पड़ि जाइ छी जे दुनियाँ केते बेशर्म भऽ गेलै। कहू तँ पचास बर्खक बुढ़बा केतौ आठ बर्खक छौड़ी संग रहै। कहु तँ हाथी आ चुट्टीक मेल केहेन हेतै? मनीषा- अहाँ सभ खाली अनकर इन्ना-मीन्ना करै छी। अपना-अपनापर धियान दियौ। चन्द्रप्रभा पापा, कनी फोनसँ छात्रावासक मालिकसँ पुछियनु जे अपन बुच्चीक की केना हाल-चाल छै। आ नै तँ एक लपकन चलिए जाउ। चन्द्रेश- जाइमे तँ बेसी पाइ खरचा हेतै आ फोनसँ कम्मे। पहिने फोनसँ बुझै छिऐ। तहन देखल जेतै। मनीषा- तऽऽ सहए जल्दी करू। (चन्द्रेश मोबाइलसँ छात्रावासक मालिकसँ गप करै छथि।) चन्द्रेश- हेल्लो लक्ष्मण भाय? लक्ष्मण- (नेपथ्यसँ) हेल्लो चन्द्रेश भाय। कहल जाउ की बात? चन्द्रेश- भाय कहलौं जे हमर बेटी चन्द्रप्रभा रूप नं. 15 ठीक-ठाक अछि किने? लक्ष्मण- एकदम ठीक अछि। जखने पाँच मिनट पहिने छात्रावासँ घूमि-घामि कऽ एलौं हेँ। चन्द्रेश- भाय, पेपरमे देखलिऐ गड़बड़ सरबड़बला बात। ऊहो दरिभंगेक छात्रावाससँ। ठीके बात छिऐ की? लक्ष्मण- बात तँ ठीके छिऐ भाय। मुदा हमर छात्रज्ञवासक बात-बेवस्था किछु आैर अछि। चिन्ताक कोनो बात नै। चन्द्रेश- हमरा तँ कोनो चिन्ता नै। मुदा चन्द्रप्रभाक मम्मीकेँ भऽ गेल छेलनि हेन। ओना आब नै हतनि हुनको। लक्ष्मण- अपने सभ निश्चिन्त रहियौ, नाफिकिर रहियौ। भाय हम तँ ई बुझै छी जेहेन अपन बेटी तेहने अनकरो। तहिन ने हमर छात्रावासक नाओं चलैए। केते छात्रावास खूजल आ बन्न भेल। मुदा हमर छात्रावास दनदनाइत अछि। तहूमे अखनि बारहमीक परीक्षा चलि रहल अछि से आरो कड़ाइ कऽ देने छी। हम कोनो मुर्ख नै छी। पुरान एम.ए. छी। चन्द्रेश- लक्ष्मण भाय, अहाँक बहुत-बहुत धन्यवाद। लक्ष्मण- अहूँकेँ बहुत धन्यवाद। (दुनू गोरे मोबाइलसँ गप बन्न केलनि।) चन्द्रेश- ब्रह्मानंद आ चन्द्रप्रभाक मम्मी, अहाँ सभ मोबाइलपर अवाज तेज सुनबे केलिऐ सभ गप। अहीं सभ दुआरे अवाज तेज कऽ देने रही। छात्रावासक बेवस्थासँ अहाँ सभ संतुष्ट कछी कीने? मनीषा- हँ, संतुष्ट छी। ब्रह्मानंद- संतुष्ट तँ छी मुदा। चन्द्रेश- मुदा की? ब्रह्मानंद- मुदा इहए जे चन्द्रप्रभाक उमेरो बिआह गोज होइत हेतै। चन्द्रेश- हँ, अठारहसँ कमी बेसी। ई तँ बिआहक निम्न सीमा अछि। मुदा पढ़ैबलाकेँ बिआह कऽ कंुठित नै बना दी। जे जिनगीमे किछु करए चौए, ओकरा प्रोत्साहित करक चाही। हमर बेटीक पढ़ाइपर बड़ जोर छै आ हमरो प्रबल इच्छा अछि जे ओकरा डाक्टर बनाबी तथा जातिमे राजा खनदानमे बियाही। ब्रह्मानंद- भैया, बेसी उमेरमे बिआह करैमे लड़िका-लड़िकीक काट-छाँट हुअए लगै छै से? चन्द्रेश- उ होइ छै, निठल्ला सभकेँ वा अमरुख सभकेँ। योग्यकेँ योग्य चाही। ई, सभ चाहै छै आ उोइमे समाए लगै छै। तहिन एकटा बातक धियान अबस्स रखक चाही जे सभ किछुक तूक होइत अछि। ब्रह्मानंद- सएह कहलौं भैया। ओना अपने तँ बुझनुक छीहे। आब भैया जेबाक आज्ञा दिअ। कोर्टक टाइम भऽ गेलै। चन्द्रेश- जाउ, अहाँकेँ अबेर भऽ जाएत। (ब्रह्मानंदक प्रस्थान।) लक्ष्मण- (नेपथ्यसँ) हेल्लो, भाय चन्द्रेश। चन्द्रेश- हेल्लो लक्ष्मण भाय। कहू, की हाल-चाल? लक्ष्मण- पहिने अपने मिठाइ लऽ कऽ दरिभंगा जल्दी आउ। तहिन हाल-चाल बूझब फलिसँ। चन्द्रेश- कनियोँ इशारा करू ने? लक्ष्मण- गप एतेक सुन्नर छै जे एबै तहने कहब। चन्द्रेश- कम-सँ-कम गपक विषय कहि दिअ आ कहैए पड़त। लक्ष्मण- नै मानब तँ गपक विषय बूझि लिअ, परीक्षाक रिजल्ट। चन्द्रेश- बेस, हम दुनू परानी आबी आकि असगरे आबी। लक्ष्मण- दुनू परानी आबि तँ घीओसँ चिक्कन। नै असगरे आबी तँ ऊहो बढ़ियाँ। चन्द्रेश- दुनू परानी आबि रहल छी। ऊहो बहुत दिनसँ कहै छेली जे दिरभंगा जाएब दरिभंगा जाएब। लक्ष्मण- आउ, दुनू परानीकेँ स्वागत अछि। (दुनू परानी दरिभंगा जाए रहल छथि।) चन्द्रेश आ मनीषा अन्दर जा कऽ बहरेलथि। मंचपर घूमि रहल छथि। अन्दरमे लक्ष्मण बैसल छथि। पर्दा हटैए। लक्ष्मण ठाढ़ भऽ चलि जाइए।) लक्ष्मण- नमस्कार चन्द्रेश भाय। चन्द्रेश- नमस्कार, नमस्कार लक्ष्मण भाय। लक्ष्मण- नमस्कार मैडम। मनीषा- नमस्कार नमस्कार। (तीनू बैस जाइ छथि।) चन्द्रेश- कहू भाय, किअए बजेलौं? लक्ष्मण- पहिने मिठाइ लाउ तहिन कहब। चन्द्रेश- नै मानता भाय। दियनु रखने छी से। (मनीषा झोरासँ मिठाइक डिब्बा निकालि लक्ष्मणकेँ देलनि। लक्ष्मण- आब भेल। आब सुनू। अहाँक चन्द्रप्रभा हमर छात्रावासक दू सए विद्यार्थीमे पहिल स्थानपर रहली बारहवींक परीक्षामे तथा कौलेजमे तेसर स्थानपर रहली। चन्द्रेश- आ डिवीजन कोन भेलनि? लक्ष्मण- डिविजन फस्ट भेलनि। (चन्द्रेश आ मनीषा मुस्की दइ छथि।) चन्द्रेश- कनी बेटीकेँ बजबियौ तँ? लक्ष्मण- चन्द्रप्रभा, चन्द्रप्रभा, चन्द्रप्रभा। चन्द्रप्रभा- (अन्दरसँ) जी सर, अबै छी। लक्ष्मण- मम्मी-पापा एला हेन। कनी जल्दी आउ। (चन्द्रप्रभाक प्रवेश।तीनूकेँ पएर छूबि गोर लगली। चन्द्रप्रभा अति प्रसन्न छथि।) अपन मम्मी-पापाकेँ परीक्षाक रिजल्ट बतबियनु। चन्द्रप्रभा- बारहमीक परीक्षामे हम फस्ट डिविजन केलौं छात्रज्ञवासमे पहिल स्थान आ कौलेजमे तेसर स्थानपर छी। मेडिकलक रिजल्ट अही बीचमे अबैबला अछि। लक्ष्मण- पहिने रिजल्टक खुशीमे सभ कियो मिठाइ खाइ जाउ। तहन अगिला कोनो गप करब। चन्द्रेश- भाय, अपनेक जे विचार। लक्ष्मण- विचारे विचार। (ओही डिब्बामे सँ सभ कियो मिठाइ खा रहल छथि। सभ एक-दोसरकेँ मिठाइ खुआ रहल छथि।) बेटी, कनी पानि नेन आउ। चन्द्रप्रभा- जी सर, तुरंत अनलौं। (चन्द्रप्रभा अन्दरसँ पानि अनली। सभ कियो हाथ-मुँह धोलनि।) लक्ष्मण- भाय, हमरा पूर्ण आशा अछि जे चन्द्रप्रभा मेडिकल सेहो निकालि लेती। चन्द्रेश- बेटी, परीक्षा नीक भेल छेलह? चन्द्रप्रभा- परीक्षा मेडियम भेल छल पापा। ऐ बेरुका क्वैचन बड़ हार्ड छल। उम्मीद तँ छै। मुदा होइ जे। (पेपरबला लूटनक प्रवेश।) लूटन- पेपर पेपर, ऐ पेपर। आझुका ताजा समाचार। नवका समाचार। मेडिकलक रिजल्ट। लक्ष्मण- एगो पेपर देब बौआ। लूटन- जी सर। अबस्स लेल जाउ। (लूटन लक्ष्मणकेँ पेपर दऽ पाइ लऽ प्रस्थान।) (लक्ष्मण आ चन्द्रप्रभा गौरसँ रिजल्ट देखि रहल छथि।) चन्द्रप्रभा- सर, हमर रिजल्ट छै पाँच नम्मरमे। लक्ष्मण- इएह छी ने? चन्द्रप्रभा- जी सर। (खुशीसँ विभोर छथि चन्द्रप्रभा। फेर सभकेँ पएर छूबि गोर लगै छथि।) लक्ष्मण- जाउ, चन्द्रेश भाय, अहाँ जीतलौं। पहिल खेपमे मेडिकल-इंजीनियरिंग निकालनाइ लोहाक चना चिबेनाइ छी। अहाँ बहुत भाग्यशाली छी। जाउ, अहाँक बेटी आब डाक्टर भऽ गेली। चन्द्रप्रभा- अखनि कोन आशा पापा? रस्ता बड़ नम्हर छै। लक्ष्मण- रस्ता केतबो नम्हर छै। मुदा हमरा बिसवास अछि किने? हमर बिसवास जल्दी फेन नै करैए। चन्द्रेश- आगू की केना खर्च लगतै भाय? लक्ष्मण- आगू खर्च तँ छैहे बेसी। मुदा जिनगीओ बनि जाइ छै किने। कहल जाइ छै, मनी बिगेट्स मनी। यानी धनसँ धन कमाएल जाइ छै। की अपने सक्षम नै छिऐ की? चन्द्रेश- एकटा किछु अंदाज अपने बता देतौं। तँ बढ़ियाँ रहितै। लक्ष्मण- कम-सँ-कम दस लाख तँ मानबे करियौ। चन्द्रेश- चलू, तहन देखल जेतै। बीसो धरि खरचा हेतै तँ चिन्ता नै। ओइसं आगू सोचए पड़िताए। बीस तँ अखनि हमरा एकाउन्टमे अछि। चन्द्रप्रभा मम्मी एक बेर दिल खोलि कऽ हँसू। गुमसुम किअए बैसल छी। अहाँ डाक्टरक माए भेलीऐ। ई बड़ पैघ गर्वक बात छी। एक बेर हँसू। (मनीषा हँसली ठहक्का मारि कऽ।) पटाक्षेप। सातम दृश्य-– (स्थान मंगलक घर। मंगल पथिया आ मरनी कोनियाँ बीिन रहल अछि।) मरनी- दुखन बाउ, काल्हि हम मणिकांत मालिकक अंगना गेल रही कोनियाँ-पथिया लऽ कऽ। मालिक अपन बेटापर खीसियाइ छेलखिन जे तीन बेरसँ मैट्रिक फएल करै छेँ। तूँ केहेन सड़ल विद्यार्थी छेँ। केते पाइ तूँ खरच केलेँ हेन। देखही तँ डोमीनक बेटाकेँ। सौंसे इसकूलमे नाओं केलक। सएह देखहक। पाइबलाक धिया-पुता पढ़बे नै करै छै आ गरीबहाक धिया-पुता पढ़ैले डौं-डौं करै छै। हँ, पाइबलामे चन्द्रेश मालिकक बेटी कहाँदून बड़ नीक जकाँ पढ़ै छै। मंगल- कहै छै, बुड़बक मूइला अनका खातिर। अपन काज कर आ अपन चिन्ता कर। मरनी- से तँ ठीके कहै छहक। (मरनी आ मंगल अपन-अपन काजमे लगि जाइए। दुखनक प्रवेश। माता-पिताकेँ पएर छूबि कऽ गोर लगैए।) मंगल- बौआ, की बात छिऐ? आइ बड़ खुशी छेँ। दुखन- बाउ, हम दूगो परीक्षामे पास भेलिअ। मंगल- कोन-कोन दूगो परीक्षा? मरनी- तूँ बुझबहक से? मंगल- नै बुझबै तँ नै बुझबै। कोइ पुछतै तँ कहबै किने? मरनी- तोरा मने नै रहतह। मंगल- नै मन रहतै तँ तोरे बजा कऽ लऽ जेबौ कहैले। बौआ कोन दूगो परीक्षा पास केलेँ? दुखन- बारहवीं आ इंजिनियरिंगक। मंगल- की कहलिही? बारमी आ इंजिरिंग? दुखन- नै बारहवीं आ इंजिनियरिंग। मंगल- की होइ छै ई दुनू परीक्षा पास कए कऽ? दुखन- इंजीनियर बनै छै। हम इंजीनियर बनबै। मंगल- कहिया बनबिही? दुखन- अखनि बड़ देरी छै। पहिने कौलेजमे नाओं लिखेबै। पास करबै। तेकर पछाति इंजीनियर बनबै। मंगल- नाओं लिखबैमे फेर पाइ लगतै? दुखन- हँ, पहिने हजारमे लगै छेलै। मुदा आब लाखमे लगतै। (माथपर हाथ रखि मंगल गुम्म भऽ गेलथि।) मरनी- किअए गुम्म भऽ गेलहक? कम-सँ-कम गपो तँ बूझि लहक। नै हेतह तँ छोड़ि दिहक। बौआ, केते पाइ लगतै सभटा मिला क? दुखन- बड़ कम तँऽऽ छह लाख। मंगल- छ लाख छ लाख, छ लाख। (मंगलकेँ चौन्ह आबि जाइ छन्हि। खसि पड़ै छथि। मरनी अँचरासँ मंगलक मुँहपर हवा दइए। दुखन अन्दरसँ पानि आनि मुँह पोछैए।) (कनीकाल पछाति मंगल होशमे अबैए।) मरनी- तोरा चिन्ता किअए होइ छह? मंगल- चिन्ता किअए नै हएत आ चौन्ह किअए नै आएत? छ लाख टाका कम भेलै। बाप रे बाप, छह लाऽऽख। मरनी- नै हेतै ने तँ हौंसली बेचीए देबै। आ डीहो बेचि देबै। मंगल- नै पुरतै तँ देखल जेतै। जगक मालिक जगदीश होइ छै। तँू चिन्ता नै करह। बौआ, इंजीयर भऽ जेबही तँ पाइ केते कमेबही? दुखन- कम-सँ-कम पचास हजार महिना। लाखो भऽ सकै छै। मरनी- तब तँ हिम्मत नै हारब। तूहूँ हिम्मत नै हारह दुखन बाउ। मंगल- खाली कहलासँ हेतौ आकि उपाए सोचबिही। मरनी- नै हेतै तँ हौसली बेचि लेब, दू-चारि धूर डीह छोड़ि कऽ सभटा डही बेचि लेब आ तहूसँ नै हएत तँ बौआक बिआहक गप कऽ लेब धनिकहा कुटुमसँ। बिआह इंजीयर बनला बादे हएत। तइले ओपीनदर हमर छैहे। दुखन- माए, एकर माने नै बुझलियौ। मरनी- एकर माने ई भेल जे ओपीनदरक साइरसँ बिआहक गप कऽ लेब आ ताबे ओकर ससुर तोहर पढ़ैक बाँकी खरच देथिन। इंजीयर बनला पछाति तोहर बिआह ओपीनदर साइरसँ हेतै। दुखन- आ जौं भविसमे बिआहमे कोनो तरहक बेवधान आबि जाए तब की हेतै? मरनी- की हेतै। किछु नै हेतै। ओपीनदरेकेँ समझा-बुझहा कऽ कहबै एना-एना बेवधान छै, से की केना करबहक। कोनो नै कोनो उपए हेब्बे करतै। दुखन- बाउ किछु बजिते नै छथिन आ तोहर विचार हमरा नीक नै लगैए। मरनी- एकटा कर बौआ, दुनू माय-पूत मणिकान्त मालिक ऐठाम चल। हुनकेसँ विचार पुछबनि। बड़ काबिल आदमी छथिन। दुखन- चल माए, हुनके लग। अपन गाममे बुजुर्ग आदमी मानल जाइ छथिन। मरनी- दुखन बाउ, तूँ गामेपर रहह। हम दुनू माइ-पूत कनी मणिकान्त मालिक ऐठाँसँ अबै छी। मंगल- बेस, तूँ सभ जो, जल्दी अभिहेँ। हम जाइ छियौ सुतैले। हमरा मन खराब लगै छौ। (मंगलक प्रस्थान। मरनी आदुखन मणिकांत ऐठाम जा रहल अछि। अन्दरमे मणिकांत बैसल छथि। पर्दा हटैए। गप सप शुरू होइए। फेर पर्दा खसैए।) मरनी- मालिक, गोर लगै छी। (दुखन सेहो पएर छूबि प्रणाम केलक।) मणिकांत- कहू डोमीन, आइ की बात छै जे दुनू माइ-पूत ऐलौं हेन? मरनी- बौआ कोनदीन परीक्षा पास केलक। ओइमे नाओं लिबए चाहैए। सएह विचार पूछए एलियनि हेन। मणिकांत- कथीमे नाओं लिखबए चाहै छीही बौआ? दुखन- इंजीनियरिंगमे। पाँचम रैंक अछि। मणिकांत- (उठि कऽ पीठ ठोकैत) वाह! वाह! वाह बेटा!! बहुत सुन्नर। ऐ समाजकेँ तूँ प्रतिष्ठा बढ़ाए देहलीन। तइले हमर हार्दिक असीरवाद आ हार्दिक शुभ कामना। आब बाज, तोरा समस्या की छौ? दुखन- मालिक, समस्या तँ बड़ पैघ छै। एडमिशन आ पढ़ाइक खर्च। गारजियन कहै छथिन- हौंसली आ डीह बेचि देबौ। तइसँ नै हेतै तऽऽ कोनो धनिकहा कुटुमसँ बिआहक गप कऽ हुनकासँ पाइ लऽ कऽ पुरेबौ। बिआह पढ़ाइक बाद हेतै। मणिकांत- (किछु सोचि कऽ) हारल नटुआ झुटका बिछए। मजबूरीमे किछु भऽ सकै छै, किछु करए पड़ै छै। मुदा कुटुमसँ पाइ लऽ कऽ पढ़ेनाइ नीक नै होइ छै। कारण एगो खिसा मन पड़ैए। एक आदमीकेँ अपन बेटाकेँ मेडिकलमे नामांकन करेबाक रहै। पाइक अभावमे उ कुटुमसँ बिआहक नाओंपर पाइ लऽ कऽ नामांकन करेलक। पढ़ाइ पुरो ने भेलै आकि ओइ भावी डाक्टरकेँ बिआह करए पड़लै। पढ़ै दिसिसँ ओकर धियान कमलै। परिणाम भेलै जे उ परीक्षामे फेल भऽ गेल। कुटुम खर्च देनाइ बन्न कऽ देलनि। उ डाक्टर नै घरक आ घाटक रहल। हारि-थाकि कऽ कुटुम कअए बेर खर्चा देलनि आ कअए बेर बन्न केलनि। बारह लाख कुटुम खर्च केलनि। पंचैतीमे थुक्कम-फज्झम भेल। लड़िकी छोड़ा-छोड़ी भेल। केश-फौदारी भेल। अन्तमे लड़िकीकेँ ओकरा राखए पड़लै। दुखन- फेर उ पढ़लकै की नै? डाक्टर बनलै की नै? मणिकांत- हँ बनलै। दुखन- केना बनलै? मणिकांत- सरकारसँ लोन लऽ कऽ। दुखन- की हमरा लोन भेट सकैए छै? मणिकांत- हँ, अबस्स भेटतै। लोनक निअम छै तँ किअए ने भेटतै? मुदा शुरूमे नै भेटै छै। किछु बादमे भेटै छै। हमर विचार इहए जे पहिने जेना-तेना एडमिशन लऽ ले। फंर लोन लऽ कऽ पढ़ाइ पूर्ण करिहेँ। मुदा बिआहक चक्करमे नै पड़ आ ने कुटुमसँ पाइ लऽ कऽ पढ़। ई जोगार बड़ लफराबला होइ छै। ऐसँ आगू अपन विचार। दुखन- अहींक विचार रहतै। मालिक, हम सभ जाइ छी। (दुखन मुँहसँ प्रणाम केलक। दुनू माइ-पूतक प्रस्थान।) मणिकांत- ई छौड़ा गुदरीक लाल छी। पढ़ैक एहेन सुन्नर जिज्ञासा भगवान केकरो-केकरो दइ छथिन। आब िउ इंजीनियर हेब्बे करतै। हमरा सभ एतए पचास घर छी तइमे एक्कोटा हाकिम-हुकुम नै छथि। मुदा दू घर डोममे एगो इंजीनियर राखू भाइए गेल। हमरा सबहक धिया-पुता रईसीमे चूर रहैए। तहन एहेन लक्ष्य धरि केना पहुँच सकत। खैर, भगवान सभकेँ भला करथुन। पटाक्षेप। आठम दृश्य- – (सथान- चन्द्रेशक हवेली। चन्द्रेश दुनू परानी बेटीक संबन्धमे गप-सप्प कऽ रहल छथि। सिकरेट धरा कऽ पीबै छथि।) चन्द्रेश- चन्द्रप्रभा मम्मी, बुच्ची एत्ते दूर पढ़ए चलि गेली जे मन होइए भेँट करी तँ मुश्किल। कनी दूर छै बेंगलूर। बाप रे बाप, जाइत-जाइत-जाइत पतन पड़ि गेल। ट्रेनमे बैसल-बैसल सुलवाइ उखरि गेल। तखनि एगो अछि जे मोबाइल दऽ देलिऐ हेन। ओइसँ गप-सप्प होइत रहत। मनीषा- मोबाइल तँ भने दऽ दलिऐ हेन। मुदाऽऽऽ। चन्द्रेश- मुदाकी? मनीषा- मुदा इहए जे मोबाइलक प्रयोग लोक अधलो-सँ-अधलो काजमे करैए जइसँ केतेठाम केते रंगक दुर्घटना भेलए। चन्द्रेश- सभ कियो अपन-अपन बुधि-विवेकक अनुसार मोबाइलक प्रयोग करैए। तइले केते समुद्र उपछब। हमरा अपन बेटीपर भरोस अछि जे उ मोबाइलक गलत प्रयोग नै करती। की अहाँकेँ ओकरापर भरोस नै अछि की? मनीषा- हमर बेटी डाक्टरी पढ़ाइ पढ़ैए। कोनो अमरुख अछि जे उ अधला काज करत। हमरो ओकरापर पूरा भरोस अछि। (मरनीक प्रवेश।) मरनी- मालिक, गोर लगै छी। मलिकाइन, गोर लगै छी। चन्द्रेश- बाज की बात छौ? मरनी- मालिक, हमर छौड़ा पढ़ै खातिर हमरा परेशान कऽ देलक। कोनो दशा बाँकी नै अछि। फेर कहै छै कोनदीन पढ़ाइ करब। चन्द्रेश- कोनदीन पढ़ाइ नै, इंजीनियरिंगक पढ़ाइ। मरनी- हँ हँ, सएह। चन्द्रेश- सुनलौं तँ बड़ मन प्रसन्न भेल। मुदा सोचलौं तँ सोचिते रहि गेलौं जे ओते पाइ उ सभ केतएसँ आनत जे बेटाकेँ इंजीनियरिंग पढ़ाएत। मरनी- तहीले एलौं मालिक। की उपाए हेतै? चन्द्रेश- उपाए हम की बता देबौ। हम जे कहबौ से तूँ सभ थोड़हे करमेँ। मरनी- मालिक, विचार लेबाक चाही दससँ। मुदा करक चाही सोचि-विचारि कऽ अपना मनसँ। चन्द्रेश- सुन, तँ सभ ऐ पढ़ाइक लपौड़ीमे नै पड़। बड़ खर्च छै बड़। हमर बेटी डाक्टरी पढ़ाइ पढ़ैए। से, हमरा सभकेँ ऊपर-नीचाँ सुझाइए। आ तोरा की हेतौ? तोहर बेटा तेज छौ। कोनो तरहेँ कोनो धंधा गामेमे करा दही। बढ़ियाँ पाइ कमा कऽ देतौ। नै तहूसँ होइ छौ तँ एगो कर ओकरा पैंजाब-दहोही पठा दही, बड़ पाइ कमा कऽ देतौ। दुइए-चारि बर्खमे धनिक भऽ जाइ जेमेँ। मनीषा- ठके तँ कहै छथि। पहिने पेट देखब की पढ़ाइ देखब? हम जाइ छी, बरतन-बासन ओहिना अछि। (प्रस्थान। मरनी- मालिक, नै हेतै ने तँ हौंसली बेचि लेतीऐ। चन्द्रेश- तइसँ केते हेतौ। नाओं लिखबै जोग नै हेतौ। मरनी- कहाँदनि चानी बड़ महग छै, तैयो नै पुरतै? चन्द्रेश- नै पुरतौ। जदी डीहो बेचि लेबही तँ कहुना पुरतौ। मरनी- मालिक, हम सभ अमरुख छी। नअ-छअ किच्छो ने बुझै छिऐ। नै हेतै तँ, कनी राखि डीहो बेचि देबै। चन्द्रेश- जदी से विचार छौ तऽऽऽ घरवला आ बेटा दुनूकेँ बजा आन। ई सभ काज मुँहजवानी नै होइ छै। मरनी- बेस, बजेने अबै छथ्ऐ। (मरनीक प्रस्थान।) चन्द्रेश- जुलुम भऽ रहल अछि। डोम भऽ कऽ इंजीनियर बनत। ऐ इलाकामे एक्कोटा इंजीनियर नै छै। डाक्टरो हमरेटा बेटी हएत। साठि-सत्तरि घर ब्राह्मण अछि। केकरो कोनो लाज नै जे धिया-पुताकेँ पढ़ाएत-िलखाएत आ काबिल बनाएत। कहै जाइ जाएत हम बड़का जाति छी बड़का। ब्राह्मण छौड़ा सभकेँ देखै छिऐ भाँग खाइत, दारू पीऐत, गाँजा पीऐत, ताश-ताश खेलैत। लाजसँ अपने मुड़ी घुमा लइ छी। कहबै तँ झगड़ा हएत। एहेन काज किअए करब। खास कऽ ब्राह्मण टोलमे देखै छी जाति ऊँच आ कर्म नीच। (मंगल, मरनी आ दुखनक प्रवेश।) मंगल- मालिक, गोर लगै छी। दुखन- मालिक प्रणाम। चन्द्रेश- की बौआ, तूँहीं इंजीनियरिंगमे एडमिशन करबए चाहै छेँ? दुखन- जी मालिक। चन्द्रेश- मंगल, तोहर घरनी हमरा लग हौंसली बन्हक रखने छौ। उ बेचतै आ डीहो बेचतै एकरा एडमिशन लेल। ठीके बात छौ? मंगल- ठीके छिऐ। चन्द्रेश- विचार पक्का छौ किने? मंगल- हँ मालिक। खाली डीहमे सँ पाँच धूर रखबै। चन्द्रेश- पाइ केते लेबही? मंगल- जइसँ एकर पढ़ाइ पूरा भऽ जाइ। चन्द्रेश- ओइमे कम-सँ-कम सात-आठ लाख चाही। दुनू मिला कऽ ओतेक चीज कहाँ छौ? हम बड़ बेसी तँ दू लाख देबौ। मंगल- ऐमे केना हेतै मालिक। अपने गामक मालिक छिऐ। गरीबपर दयो करियौ। कम-सँ-कम पाँचो दियौ। चन्द्रेश- नै, ओइसँ बेसी नै हेतौ। बड़ करमेँ बड़ करमेँ तऽऽ अढ़ाइ दऽ देबौ। उ सुग्गर खोबहारबला जमीन के लेतौ गऽ? मंगल- मालिक, ओहीक बगलमे चारि लाख टके कट्ठा बिकलै हेन। चन्द्रेश- जो, ओकरे दऽ दिहैन। मंगल- सभ दिन हम अहींसँ लेनी-देनी केलौं। हम अहाँ छोड़ि केकरो नै देबै। किछु आरो किरपा करियौ मािलक सोना कटोरा जमीन छै। दुखन- मालिक, उचित आ उपकार दुनू हएत। चारियो पूरा दियौ। चन्द्रेश- तूँ कहै छेँ तऽऽ तीन कऽ दइ छियौ। दुखन- मािलक, अपने पढ़ाइक महत बुझै छी। तँए ने बेटी चन्द्रप्रभाकेँ एते दूर एते पाइ खर्च कऽ डाक्टरी पढ़ाइ करबा रहल छी। उ हमरे क्लासमेल्लो रहए। हमहूँ बेंगलूरेमे एडमिशन करा रहल छी। मालिक, ऐ मजबूरपर दया करियौ। चन्द्रेश- तूँ बात हेहेन बाजि देलेँ जे हमरा किछु सोचहे पड़त। खैर, हम चारि पूरा देबौ मुदा अपन सौंसे डीह लिखए पड़तौ। मंगल- तब हम सभ रहबै केतए मालिक? चन्द्रेश- से तँ तूँ बुझबिही। नै हेतौ तँ सरकारी गाछीमे रहिहेँ। मंगल- मािलक, अपनेक सएह विचार? चन्द्रेश- हमहीं की करबै? हम तँ पाइ देबौ। तहूँ कम-सम नै। पुरे चारि लाख। हमरा तँ समान चाही। ऐसँ आगू तँ तूँ सभ बुझही। मरनी- दऽ देथुन। हम सभ ओही सरकारी गाछीमे कहुना रहब। की दुखन बाउ? की दुखन? मंगल- ठीक छै। दुखन- ठीक छै। चन्द्रेश- जौं सबहक विचार छौ तऽऽऽ तँ सभ एगो कागतपर दसखत आ निशान दऽ दही। तहन पाइ देबौ। जुग-जमाना नीक नै छै। मंगल- लाउ मािलक, कागत आ कजरौटी। (चन्द्रेश अंदर जा कऽ कागत, कजरौटी आ पाइ अनलथि। तीनूसँ दसखत-निशान लेलनि आ चारि लाख टज्ञका मंगलकेँ देलनि।) चन्द्रेश- लिखबिही कहिया? मंगल- अहाँ जहिया कहबै तहिया। चन्द्रेश- ठीक छै। एडमिशनबला काजसँ निचेन हो। तेकर पछाति देखल जेतै। मंगल- ओम्हरसँ आबए दिअ। अहाँ जखनि कहबै हम तैयार छी। आब हम सभ जाइ मालिक? चन्द्रेश- जो। (तीनू गोटे चन्द्रेशकेँ प्रणाम कऽ प्रस्थान।) चन्द्रप्रभा मम्मी, चन्द्रप्रभा मम्मी। मनीषा- (अन्दरसँ) अबै छी। तुरन्त एलौं। (मनीषाक प्रवेश।) की कहलौं? चन्द्रेश- मंगलाबला हौंसली आ डीह अपन भऽ गेल। कागत बनि गेल छै। बड़ नफ्फामे रहलौं। अखनो भजाएब तँ दस लाख हेब्बे करतै। से चारि लाखमे लेलौं। ओकरो बड़ जरूरी छेलै। बेटाक नाओं लिखेबाक छेलै। तँए बेचलाक। नै तँ किअए बेचितए? पटाक्षेप। नअम दृश्य- (स्थान- सरकारी गाछी। मंगलक सिरकी। दुनू परानी कोनियाँ-पथिया बीनै छथि।) मंगल- दुखन माए, बौआक नाओं तँ लिखा गेलौ। दूरे बड़ छै। तीन दिन जाइमे आ तीन दिन अबैमे लगल। कहै तँ छियौ कौलेज तेतेटा छै से की कहबौ। बाप जनमे ओतेटा मकान नै देखने रहिऐ। विद्यार्थी सभ रंग-बिरंगक गाड़ीसँ पढ़ैले अबै-जाइ छै। लगै छेलै जेना उ सभ मास्टर होइ। एगो मुंशासँ पुछलिऐ तँ उ कहलक विद्यार्थी सभ छिऐ। मरनी- ओते बड़का लोक सबहक बीचमे दुखन केना रहतै आ केना पढ़तै-लिखतै? मंगल- रसे-रसे सभ ठीक भऽ जेतै। अपने सभ गर लगि जेतै। (मणिकांतक प्रवेश। मणिकांत- की हौ मंगल? तूँ तँ तेते कातमे चलि एलह जे दूर बुझाइए। मंगल- की कहबै मालिक? लिखलाहाकेँ के मेटेतै? अहीं कहने रहिऐ बौआक नाओं लिखबैले। ओहीमे हमर डीहो बीिक गेल। चन्द्रेश मालिक लेलनि। मणिकांत- भगवान गाम नै गेलखिन हेन। कनी दिन आरो कष्ट काट। बहुत जल्दी तोहर दिन-दुनियाँ बदलि जेतौ। ऐ समाजमे ातेहर हाथ पकड़ैबला कियो नै रहतौ। मंगल- अहाँक मुँहमे अमृत बसए। मालिक, आइ हम केना मन पड़लौ? मणिकांत- मन नै पड़लह। जरूरी छल। तँए एलौं। मंगल- की जरूरी छल मालिक? मणिकांत- एगो पथिया लेबाक छल। केते पाइ दियौ? मंगल- अहाँकेँ जे देबाक अछि से दियौ आ नै तँ सेहो ठीक। मणिकांत- बिकाइ छै केतेमे? मंगल- एक सए-सबा सएमे बिकाइ छै। अहाँकेँ जे देबाक अछि से दियौ आ जे पसीन होइए से लिअ। मणिकांत- हेऽऽ सभ सए टाका लैह आ एगो चिक्कन पथिया दैह। (दारू पी कऽ झुमैत-झामैत रबीयाक प्रवेश।) रबीया- भैया रौ, हम दुनू परानी विचार केलौं जे भैयाकेँ अपने ऐठाँ रखि ली, बड़ दिक्कत होइत हेतै गाछीमे। मंगल- रबीया, विचार तँ बड़ बढ़ियाँ छौ, मिल्लतबला छौ। मुदा तोरो तँ बड़ दिक्कत छौ। एक दिनुका तँ बात नै छै जे दिक्कत-सिक्कत रहि जाएब। छोड़, प्रेम छै तँ सभ किछु छै। हमरा एतै रहए दे। अहिना धियान रखिहे। ओहए कम नै भेलै। रबीया- भौजी, ओइ दिन हमरा दुनू भाँइमे उठ्ठम-पटका भऽ गेल रहए। कोनो कारण नै रहए। दुनू भाँइ खेने-पीने रही। तहीमे भऽ गेल रहए। निसाँ टुटल तँ सोचलौं। बड़ तकलीफ भेल भौजी। मरनी- नै पचैए तँ किअए पीबै जाइ छी? रबीया- हे भौजी, माफ करियौ। बड़ गलती भेल हमरासँ। मरनी- माफ तखने करब जखनि फेर एहेन गलती नै हएत। रबीया- भौजी, दारू-ताड़ी तँ हम पीबे करब। तखनि झगड़-दन नै करब, से गछै छी। मरनी- बौआ, एम्हर-ओम्हर केनाइ छोड़ू आ धिया-पुताक पढ़ाइ-लिखाइपर धियान दियौ। पढ़ल-लिखलक जुग एलैए। बिनु पढ़ने केकरो गुंजाइश नै हेतै। रबीया- ई बैंह भौजी, अहाँ बड़ चलाक छी। अपने जकाँ बोनक पता तोड़बैले चाहै छी। एहेन सड़ल काज हम नै कऽ सकै छी। धिया-पुताकेँ पढ़ाइ खातिर डीहो बेचि ली। ई कोनो नीक काज नै। मरनी- बुझलौ, अहाँ बड़ नीकवाली छी तैं सरकारी गाछीमे सिरकी तनने छी। अहाँ अपन नीक अपने लग रखू। भैया, हम जाइ छियौ। तोरा सभकेँ कोनो तरहक दिक्कत हेतौ तँ हम ओकर बेवस्था करब। बेटा, तैयार छै। (रबीयाक प्रस्थान।) मरनी- दुखन बाउ, देखहक, भला जुग संसार नै। मंगल- तोरा कोन जरूरी छौ ओतेक लबर-लबर करैक। रारकेँ सुख बलए होइ छै। पीलहाकेँ दिन-दुनियाँ दोसर होइ ैछ। उ हरिदम पी कऽ बुच्च रहैए। ओकरासँ बसी बाते नै करक चाही। मरनी- ठके कहलहक। पटाक्षेप। तेसर अंक- पहिल दृश्य- स्थान- बंगलूरक एकटा पार्क। साँझक समए। डाक्टर पार्कमे घूमि रहली अछि। पार्कमे किछु लोक घूमि रहल अछि आ किछु लोक बैस कऽ गप-सप्प कऽ रहल अछि।) डाक्टर- हमर पापाक उदेस पूर्ण भेल। हम आइ डाक्टर बनलौं। रिजल्टो नीक अछि। भगवतीसँ प्रार्थना करै छियनि जे हमर सेवा नीक रहए। सेवा पैघ धर्म होइए। हे भगवती। हमरा उ शक्ति दिअ जइसँ हम जनसेवामे नीक प्रतिष्ठा पाबि सकी। (इंजीनियरक प्रवेश। ऊहो पार्कमे घूमि रहल अछि। दुनू एक-दोसर दिस ताकि-ताकि टहलि रहल अछि। दुनू एक-दोसरकेँ नै चिन्हैए, भटकि रहल अछि।) यौ विद्यार्थी, यौ विद्यार्थी। इंजीनियर- की? (दुनू एक-दोसर दिस टक-टक ताकि रहल अछि।) की कहलौं? (डाक्टर किछु नै बाजि रहली अछि।।) किअए टोकलौं? किछु किअए नै बजै छी? डाक्टर- (मुस्की दैत) हम अहांकेँ चिन्है छी आ भटकै छी। अपनेक परिचए? इंजीनियर- हमर नाओं दुखन मल्लिक, पिता श्री मंगल मल्लिक। डाक्टर- बस करू, बस करू। बूझि गेलौं, चिन्ह गेलौं। इंजीनियर- तहन हमहूँ चिन्ह गेलौं। अहाँ चन्द्रप्रभा छी ने? डाक्टर- अबस्स छी। चिनहल लोक केतौ अनचिन्हार होइ। इंजीिनयर- परिस्थिति अनचिन्हार बना दइ छै चन्द्रप्रभा। (डाक्टर संगी शांति पार्कमे घुमैए आ दुनूपर धियान रखैए।) डाक्टर- दुखन, मनुक्ख परिस्थितिक दास होइत अछि आ परिस्थिति अन चिन्हारोकेँ चिन्हार बना दैत अछि। स्थिति-परिस्थितिक गप छोड़ दुखन। एकर क्षेत्र बड़ पैघ छै। आब अपना सभ किछु अप्पन गप-सप्प करी। आइ-काल्हि की सभ करै छेँ? इंजीनियर- गरीब आदमी की कऽ सकैए चन्द्रप्रभा? कौहुना जीबै छी। तोरा दऽ तोहर पापा कहने छेलखुन जे बंगलूरमे डाक्अरी पढ़ाइ पढ़ैए। भरिसक तोहर पढ़ाइ खतम भऽ गेल हेतै? डाक्टर- एम.बी.बी.एस. पूर्ण भऽ गेल। कम-सँ-कम एम.डी. अबस्स करब आ तूं अपन कह ने, की कऽ रहल छेँ? इंजीनियर- हमरो इंजीनियरिंग पूर्ण भऽ गेल एतै। हमर घरक स्थिति एतेक खराब अछि जेकर वर्णन नै। तूहूँ बुझिते हेबहीं। माता-पिता केना रहैत हेथीन से नै कहि। हमर पढ़ाइ खातिर हमर डीहो बीकि गेल। तोरे पापा लेलखुन। डाक्टर- हमरे पापा लेलखिन? इंजीनियर- हँ, हमरा सामनेक गप अछि। हुनका कागतपर माता-पिताक संग हमहूँ दसखत आ निशान देने छी। डाक्टर- हमरो पापा जे छथिन, से अजीब किसिमक लोक छथिन। इंजीनियर- नै चन्द्रप्रभा, जुगक अनुसारे ठीक छथिन। आइ-काल्हि एहेने लोकक पूछ होइ छै। डाक्टर- तोहर अगिला विचार की केना छौ? इंजीनियर- नोकरी-चाकरी भेट जेतै तँ कऽ लेबै। मतो-पिताकेँ ने देखबाक अछि? हमरा खातिर हुनका सभकेँ केते तकलीफ भेल हेतनि आ केते होइत हेतनि? डाक्टर- से तँ ठीके। माता-पिता अपन बाल-बच्चा लेल की की ने करैए। बाल-बच्चा नम्हर भेलापर ओकरा सभकेँ बिसरि जाइए। इंजीनियर- ओतबे नै, मारबो-पीटबो करैए। देखै आ सुनै छी तँ होइए माता-पिता धिया-पुताक जनम किअए दइ छै? डाक्टर- लगैए जेना तों मातृभक्त आ पितृभक्त होइ। इंजीनियर- माता-पिताक धिया-पुता जदी डाक्टर-इंजीनियर भऽ गेलै तँ उ धिया-पुता माता-पिता भऽ गेलै आ उ माता-पिता धिया-पुता भऽ गेलै की? डाक्टर- से केतौ होइ। इंजीनियर- एगो बात बुझही चन्द्रप्रभा, मातृदेवो भव:। पितृदेवो भव:। गुरु देवो भव:। अतिथि देवो भव:। जदी ऐ सभपर गंभरतापूर्वक विचार करबीहीं तहन रहस्य स्पष्ट हेतौ। चन्द्रप्रभा, एते काल हम तोहर समए लेलियौ। तइले क्षमा चाहै छियौ। कारण समए मूल्यवान होइ छै। डाक्टर- से तँ होइ छै। मुदा सभ ठाम नै होइ छै। एतए नै हेतै। कारण अपना सभ जीवनोपयोगी गप-सप्प केलौं। ओना तोरा बेसी जरूरी छौ तँ जा सकै छेँ। इंजीनियर- जरूरीए नै बड़ जरूरी अछि। हमर हरेक काज समैसँ होइए। आब जेबाक आज्ञा दे। डाक्टर- बेस जो। मुदा। इंजीनियर- मुदा की? डाक्टर- मुदाक जवाब बादमे। अखनि तोरा समैक अभाव छौ। इंजीनियर- समैक अभावमे मुदाक जवाब हमरा अखनि दे। नै तँ हमरा नीन्न नै हएत। डाक्टर- तोहर गप अतिभावपूर्ण होइ छौ। मन होइए सुनिते रहूँ। इंजीनियर- आब दासर दिन चन्द्रप्रभा। अखनि चललियौ। (इंजीनियरक प्रस्थान।) डाक्टर- दुखन इंजीनियर बनल। ई पाथरपर दुबि जनमेनाइ भेल। एते गरीब विद्यार्थी इंजीनियर बनल। ई बड़ पैघ बात भेल। धन्यवाद ओकर माता-पिताकेँ जे एते पैघ काजक बीड़ा उठा आेकरा सफल केलक। शांति- (मुस्काइत) की चन्द्रप्रभा, मामला किछु गड़बड़ छै की? डाक्टर- किछु गड़बड़ नै शांति। तोरा शक केना भेलौ शांति? शांति- शक किअए ने हएत? बड़ी कालसँ तूँ सभ गप करै छेलेँ। डाक्टर- उ हमर लंगोटिया संगी छल। मैट्रिकक पछाति पहिल बेर भेटल छल। तँए बेसी काल गप-सप्प भेल। शांति- उ करै की छै? डाक्टर- इंजीनियर अछि। शांति- जोड़ी तँ बड़ नीक छौ। डाक्टर- (मुसकुराइत) तूहूँ खूम छेँ। जे बात हम सोचनौं ने रहिऐ से बात आइ हमरा सोचैसँ मजबूर करै छेँ। ई फाइल मम्ी-पापाक छिऐ। ऐमे हमर कोनो डिसीजन नै। शांति- से किअए? तूँ बच्चा छिहिन की? डाक्टर- मम्मी-पापाक नजरिमे बच्चा छिहे। शांति- मुदा तूँ अपन नजरिमे आकि हमरा नजरिमे कथी छिहिन? डाक्टर- डाक्टर छी। शांति- तोहर उमेर केते छौ? डाक्टर- पच्चीस मानि ले। शांति- अठारहसँ सात बेसी भेलौं। कानूनक नजरिमे सेहो योग्य छेँ। डाक्टर- हमहूँ ई सभ बुझै छिऐ। बच्चा जकाँ नै बुझा। छोड़ ई गप-सप्प। जाधरि सरकारी नोकरी नै करब ताधरि हम ऐ विषयमे किछु ने सोचब। शांति- भगवान करए, तोरा सरकारी नोकरी जल्दी होउ आ ओइ लड़काकेँ सेहो होइ। संगी-साथी छेँ। तँए मजाक केलियौ। माफ करिहेँ। (डाक्टर आ शांति हँसए लगैए।) पटाक्षेप। दोसर दृश्य- (स्थान- रेलमंत्री नित्यानंद मिश्रक आवास। आवासपर नित्यानन्द आ अंगरक्षक वरूण झा रेल मंत्रज्ञलयक संबन्धमे गप-सप्प कऽ रहल छथि।) नित्यानंद- वरूण, जखनि हमरा रेल मंत्रालय भेटल तखनि बड़ प्रसन्नता भेल। मुदा आब तंग छी। वरूण- से किअए मंत्री साहैब? नित्यानंद- मंत्रालयक अंदरमे बड़ घूसखोरी छै। तेहेन तेहेन पैरबी अबैए जे नहियोँ चाहि कऽ ओकर काज करए पड़ैए। बदलामे पाइ केते होइए से अहाँ बुझिते छिऐ। वरूण- से किअए नै बुझबै। कारण बहुत काज हमरो हाथसँ होइए। की करबै साहैब सभ मंत्रालयक ओहए स्थिति छै। कोनो उन्नैस छै तँ कोनो बीस। नित्यानंद- हँ, से तँ छै। मुदा तकलीफ ओतए होइए जेतए योग्यक काज नै होइ छै आ अयोग्यकेँ भऽ जाइ छै। ई सभ मालक कमाल छिऐ। कखनो-कखनो होइत रहैए जे जनप्रतिनिधि भऽ कऽ पब्लिक संग बड़ गद्देदारी करै छी। फेर जनिते छी जे लोभ पापक कारण होइ छै। वरूण- अहूँ की करबै? ई मौका बेर-बेर भेटबे करत, से कोनो निश्चित छै। नै, अनिश्चित। तहन जे अबै छै आबए दियौ। (इंजीनियरक प्रवेश।) इंजीनियर- (नित्यानंदकेँ) सर प्रणाम। (नित्यानंद ऊपर-निच्चाँ निहारि कऽ गुम्म छथि।) (वरूणकेँ) सर प्रणाम। वरूण- की बात हउ, बाजह? इंजीनियर- रेलबेक इंजीनियर लेल एगो पैरवीक जरूरी छेलै। वरूण- साहैबसँ बात कर। इंजीनियर- सर, रेलबे इंजीनियरक पी.टी. आ मेन्स निकालि गेल अछि। ज्वाइनिंग लेल दू लाख टाका मांगै छथि। हम गरीब लोक। ओते पाइ केतएसँ आनब? नित्यानंद- पढ़ले केना? इंजीनियर- माता-पिता डीहो धरि बेचि देलखिन। एगो सरकारी गाछीमे सिरकी तानि रहैत हेतै। नित्यानंद- नाम की छियौ? इंजीनियर- दुखन मल्लिक। नित्यानंद- कोन मल्लिक? इंजीनियर- डोम मल्लिक सर। (नित्यानंद आ वरूणक नाक-भौं सिकुड़ि जाइए।) नित्यानंद- अच्छा, हुनकासँ गप कर। हम कनी अबै छी। (नित्यानंदक प्रस्थान।) इंजीनियर- सर, एकटा गरीबपर कृपा करितिऐ। वरूण- हम का किरपा करी। किरपा तँ ऊपरबला करत हई। गरीब आदमी इंजीनियर बनअ ता। बिनु मालके कमाल कैसे होई? तहूमे डोम बा। जातो गमाई, सुआदो ना पाई। ई कैसे हो सकअ तँ? इंजीनियर- अहूँ सभ जाित-पाति आ ऊँच-नीचक भेदभाव रखै छिऐ सर? भारत धर्म निरपेक्ष राट्र अछि। ऐ राष्ट्रक शीर्षपर बैस एकर गरिमा नष्ट कऽ रहल छी। वरूण- हमरा एतना भाषण अच्छा नाही लगत हई। अपन-अपन जाति ले सभ हरान हई। कम-सँ-कम एको लाख हऊ तँ तोहर काज होइ जाई। इंजीनियर- सर, नै छै। वरूण- कोइ उपए देखअ, तँ होइ जाई। इंजीनियर- सर, हमरा कानो उपए नै छै। सर एगो गरीबकेँ कल्याण कऽ दैतिऐ। आजीवन कृतज्ञ रहितौं। वरूण- बक बक काहे करह ता? टाका ना, नोकरी ना। (नित्यानंदक प्रवेश। दुखन िनत्यानंदक पएर पकड़ि लइए) नित्यानंद- की भेलौं बौआ? की दिक्कत छौ? इंजीनियर- सर कहलखिन, कम-सँ-कम एक लाख टाकाक ओरियान करैले। तहिन हएत। सर, हम एक लाख टाका केतएसँ आनब? डीहो बीिक गेल अछि। कोनो आशा नै अछि। नित्यानंद- गरीब छेँ तँए एके लाख। नै तँ ऐ नोकरी लेल दस-दस लाख टाका पार्टी पएर पर रखि जाइए। इंजीनियर- सर, लोक सभ बजैत रहै छै, एकटा घर डयनो बकसै छै। वरूण- जा, डयने बकस देई। हमरा लोगन डायन नै न बा। (इंजीनियर कनैत-कनैत प्रस्थान।) साहैब, लड़िकन तेज बा। लेकिन गरीब बा। अपने लोगन के भी पेट हई, बाल-बच्चा हई। (चन्द्रेश आ चन्द्रप्रभाक प्रवेश।) चन्द्रेश- मंत्री साहैब प्रणाम। नित्यानंद- प्रणाम प्रणाम। कहू की बात? चन्द्रेश- अहाँक समधिक सारहूक भाए हमर लंगोटिया संगी। ओहए पठेलथि जे मंत्री साहैबकेँ हमर नाओं कहबनि। भऽ जेतै पैरवी। हमर बेटी अहाँक बेटी छी। (चन्द्रप्रभा कर जोड़ि प्रणाम करैए।) नित्यानंद- की पैरवी अछि बाजू? चन्द्रेश- ई हमर बेटी छी। एम.बी.बी.एस. कमप्लीट भऽ गेल छन्हि। एम.डी. करैले चाहैए। मुदा नोकरी करैत। रेलबे डाक्टरक पी.टी. निकलि गेल छन्हि। मेन्स आ ज्वाइन लेल पैरवी। आर किछु नै। नित्यानंद- अपनेक नाओं? चन्द्रेश- चन्द्रेश झा। वरूण- झा हऽ स्वजातीय हऽ तँ पैरवी काहे ने होई? तोहार पैरवी ना होई तँ केकर होई। नित्यानंद- वरूण, अन्दरसँ चाह आनि कऽ दियनु कुटुमकेँ। (वरूण अन्दर जा कऽ चारि गो चाह अनलक। चारू गोटे चाह पीऐए।) चन्द्रेश बाबू, अपने वरूणसँ गप करू। हम कनी अबै छी। चन्द्रेश- हम तँ गरीब छी। कमाइ छी तँ खाइ छी। बाप-दादाबला जमीन बेचि कऽ बेटीकेँ डाक्टर बनेलौं। इहएटा संतान अछि। प्रबल इच्छा छल बेटीकेँ डाक्टर बनाबी। वरूण- बेटी, डाक्टर बा। ई कम भारी बात बा। दस-दस लाख टाका भेटत हई। तूँ अप्पन लोग हऽ। कम-से-कम एक लाख तँ लगबे करी। चन्द्रेश- सर, हम नै सकबै। कनी मंत्री साहैबकेँ बजबियनु। हुनकासँ भेँट कऽ चलि जाएब। बेकारमे एलौं। (वरूण नित्यानंदकेँ अन्दरसँ बजा अनलनि।) नित्यानंद- की कहता? कहलनि अहाँले कम-सँ-कम एक लाख। नै राधाकेँ मन घी हेतनि आ ने राधा नचती। (नित्यानंदक पएर पकड़ि) मंत्री साहैब, पएर पकड़ै छी। कृपा कएल जाउ। बड़ आशासँ आएल रही। अपने कुटुम छी। स्वजातीय छी। बड़ गरीब छी। एकटा गरीबकेँ ताड़ियौ साहैब। नित्यानंद- अच्छा पएर छोड़ू। चन्द्रेश- पएर तँ नै छोड़ब। जाधरि हँ नै कहबै। नित्यानंद- कुटुम आ स्वजातीय छी तँए हँ कहि दइ छी। वरूण बाबूकेँ किछु दऽ देबनि। (चन्द्रेश नित्यानंदक पएर छोड़ि देलनि।) चन्द्रेश- जे सकबनि तइमे कोताही नै करबनि। नित्यानंद- हम जाइ छी। जरूरी अछि। चन्द्रेश- प्रणाम मंत्री साहैब। (नित्यानंदक प्रस्थान।) वरूण बाबू, एक हजार टाका मिठाइ खाइले लेल जाउ। वरूण- लाबऽ। तूँ जीत गेलह। बड़ी भाग्यकेँ तेह हऽ। जातिक नाम पर जीत गेलह। (चन्द्रेश वरूणकेँ एक हजार टाका देलनि।) तूँ सभ जा। चन्द्रेश- वरूण बाबू, प्रणाम। (चन्द्रेश आ चन्द्रप्रभाक प्रस्थान।) वरूण- ऐमे पूरा घाटा बा। खैर, जाति बा। पटाक्षेप। तेसर दृश्य- (स्थान- इंजीनियरक डेरा। साँझक समए। प्रसन्न मुद्रामे इंजीनियर बैस कऽ भविसक संबन्धमे सोचि रहल छथि।) इंजीनियर- जइ देशक मंत्री घूसखोर रहतै आ जाति-पातिपर चलतै, ओइ देशक कल्याण केना संभव छै। उ देश गर्तमे जेबे करतै। ध्रुव सत्य छै। कारण उ घूस लऽ कऽ अधलाकेँ नीक बनेतै। काज अधला हेतै। प्राय: सभ सरकारी तंत्र सभ फेल भऽ रहलैए। खाली कागत टाइट रहए। जगहपर किच्छो होउ पब्लिक जानए। केना ओकरा बाजल गेलै, टाका ना, नोकरी ना। खैर, नै रेलबे तँ मारुतीए कंपनी सही। नै सरकारी नोकरी तँ प्राइवेटे नोकरी सही। एक-सँ-एक प्राइवेट कंपनी छैल लाख-लाख टाका तनखा छै। ओकर तुलना कहियो सरकारी नोकरी करतै। खाली एस-आराम छै सरकारी नोकरीमे। तँए लोक एते हरान रहै। (डाक्टरक प्रवेश) डाक्टर- की हाल-चाल छौ दुखन? इंजीनियर- ठीक छौ। केम्हर-केम्हर एलेँ हेन मुनहारि साँझमे? डाक्टर- एकटा टटका खुशखबरी देबाक रहए तोरा। तँए एलौं। इंजीनियर- की? डाक्टर- रेलबे डाक्टमे हमरा भऽ गेलौ। पापा आएल छेलखिन। मंत्री साहैबसँ गप भऽ गेलै। इंजीनियर- की केना माल लगलौ? डाक्टर- किछु नै, मात्र एक हजार टाका। इंजीनियर- मंगनीमे भऽ गेलौ। लगैए बाभन छेलेँ तँए तोरा भऽ गेलौ चन्द्रप्रभा। कारण मंत्रीओ साहैब बाभने छथिन। डाक्टर- से तँ हुनकर बडीगाडो ब्राह्मणे छथिन। हँ, तूँ ठीके कहलेँ। हमरा ब्राह्मणे दुआरे भेल। तूँ केना बुझलिही ई भाँज? इंजीनियर- हम ओकर भुक्तभोगी छी। हमरा ओहए मंत्री साहैब डोम दुआरे नै केलथि। अपन सभ मजबूरी सुनेलियनि। पएर धरि पकड़लियनि। मुदा टस-सँ-मस नै भेला। बडीगार्ड कहलनि “ना टाका, ना नोकरी।” तनखा केते भेटतौ तोरा चन्द्रप्रभा? डाक्टर- अठारह हजारसँ बहाली छै। इंजीनियर- तहने हमहूँ कोनो बेजाए नै छी। हमहूँ मारूती कंपनीमे ज्वाइन कऽ लेलौं आइ। डाक्टर- तोरा केते भेटतौ? इंजीनियर- पैंतालीस हजारसँ बहाली अछि। मुदा नोकरी प्राइवेट अछि। तूहीं ठीक छेँ चन्द्रप्रभा। डाक्टर- तूहीं ठीक छेँ दुखन। इंजीनियर- तूहीं ठीक तँ तूहीं ठीक। यानी सभ ठीक। डाक्टर- दुखन, अपना-अपना जगहपर कोइ केकरोसँ कम नै अछि। खैर, ई बात आब छोड़। आब हम एगो नबका बात कहए चाहै छियौ। इंजीनियर- अबस्स कह। डाक्टर- कहैक हिम्मत जे नै होइए। इंजीनियर- एहेन कोन गप छै जे कहैक हिम्मत नै होइए? डाक्टर- जिनगीसँ संबन्धित अछि। (मुस्कुराए लगैए।) इंजीनियर- जिनगीमे कोनो एगो गप अछि। अनन्त गप अछि। तइमे कोन? डाक्टर- मम्मी-पापाक डर होइए। हुनका सभकेँ हमरापर बड़ बिसवास छन्हि। इंजीनियर- पहिने बात खोलि कऽ बाज ने, तहन विचार हेतै। डाक्टर- हमर संगी पार्कमे तोरा दऽ किछु-किछु कहै छल। सएह गप। इंजीनियर- की कहै छेलखुन? हमरासँ किछु गलती भेलै हेन की? डाक्टर- नै नै, गलती-सहीबला गप नै छै। दोसर गप छै। इंजीनियर- कोन दोसर गप छै? डाक्टर- कोनो गप नै छै। (मुस्कुराए लगैए।) इंजीनियर- नै कोनो गप छै, तँ जो अपन डेरापर। राति भऽ गेलै। डाक्टर- तूहीं जो अपन डेरापर। राति भऽ गेलै। इंजीनियर- बताहि भऽ गेलेँ की? डाक्टर- तूहीं बताह भऽ गेलेँ। इंजीनियर- हम बताह नै भेलौं। हम तँ पूरा ठीक छी। डाक्टर- हमहूँ तँ पूरा ठीक छी। इंजीनियर- चन्द्रप्रभा, एकटा डाक्टरकेँ एते बेसी झिझक शोभा नै दइ छै। डाक्टर- से तँ हमहूँ बुझै छी। मुदा गपे तेहने छै। (मुस्कुराए लगैए।) इंजीनियर- आब हम निकलि जेबौ डेरासँ। डाक्टर- हमहूँ निकलि जेबौ तोरे संग। (नजरिसँ नजरि मिलबए लगल।) इंजीनियर- तोहर नजरि हमरा एकटा नब संदेश दऽ रहल अछि। (डाक्टर इंजीनियर दिस एकटक तकैत गुसुम अछि।) संदेश दूटा दिलक मिलान लगैए। की हमर अनुमान सत्य अछि? डाक्टर- (मुड़ी डोलबैत) हूँ। (फेर नजरिसँ नजरि मिलबैत) इंजीनियर- आबो बाज ने? डाक्टर- आब बजैए पड़त। बड़ समए नष्ट भेल। बड़ राति भऽ गेल। डेरो जेबाक अछि। इंजीनियर- बात तँ बुझाइए गेल। तैयो जे किछु बजबाक छौ से जल्दी बाजि दही आ चलि जो। डाक्टर- किअए, हम तोरा जानपर छियौ? इंजीनियर- (मुस्कुरा कऽ) नै नै, से बात नै छै। आब लगै छौ हमराऽऽऽ। (इंजीनियर डाक्टरसँ नजरि मिला रहल अछि। दुनू एक-दोसर दिस एकटक तकैत गुमसुम अछि। दुनू उठि जाइए।) आइ आइ आइ। (हाथ फैला कऽ।) डाक्टर- लऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽ ऽव। (हाथ फैला कऽ) इंजीनियर- यू। (दुनू एक-दोसरसँ आइ लव यू, आइ लव यू कहि चिपकि गेल, फेर दुनू हटि गेल।) इंजीनियर- जा, ई की भऽ गेल? की कऽ लइ जाइ गेलौं? डाक्टर- होनीकेँ कियो रोकि सकलै हेन? होनी तँ हाथ धरा कऽ होइ छै। दुखन, आब हमर एकटा विचार अछि। से कहियौ? इंजीनियर- अबस्स कही। डाक्टर- हमर विचार अछि जे दुनू गोटे गाम जइतौं आ अपन गौआँ-समाजकेँ दर्शन करितौं। इंजीनियर- विचार तँ उत्तम छौ। मतो-पिताकेँ देखना बहू दिन भऽ गेल। तोरो बहू दिन भऽ गेल हेतौ। जेबही केना? डाक्टर- संगे चलब। इंजीनियर- गामसँ दूर तँ नै कोनो बात। मुदा गाममे कियो संगे जाइत देखता तँ की कहता? डाक्टर- के की कहता? इंजीनियर- लोक सभ कहता जे चन्द्रेश बाबूक बेटी मंगला बेटा संगे एलै। डोमसँ ब्राह्मणी छुआ गेलै। लोक सभ ईहो कहि सकै छथि जे जे दुनू एक्के संग किअए आएल। दालिमे किछु कारी छै। (दुनू बैसल) डाक्टर- गाम-घर तँए ने एते पछुआएल छै। लोक सभ हरिदम अनकर इ्रना-मीनामे लगल रहैए। अपना दिस तकैक फुरसत नै रहै छै। इंजीनियर- चल, देखल जेतै। हाथी चलए बजार कुत्ता भुकए हजार। एगो कह तँ चन्द्रप्रभा, अपना सबहक जोड़ी केहेन हेतै? डाक्टर- लोककेँ तँ बड़ खराब लगतै। मुदा हमरा बड़ नीक लगत आ तोरा? इंजीनियर- हमरा नीक नै लगत। डाक्टर- से किअए? इंजीनियर- कारण हम डोम छी आ तूँ ब्राह्मणी छेँ। तूँ ऊँच छेँ हम नीच। डाक्टर- इहए मानसिकता समाजकेँ डाँड़ तोरि कुहरा रहलए। अहीपर काबू पेनाइ छै। तहन ने समाजक विकास हएत। समाजेक विकाससँ राष्ट्रक विकास हएत। देशक रग-रगमे ऊँच-नीचक भावना घोंसियाएल अछि। ई भावना झट दऽ नै हटि सकैए। रसे-रसे हटत। देखही, बीड़ा उठेनिहारकेँ कनी बेसी भीर होइते छै। इंजीनियर- अपना सबहक जोड़ी तँ सचमुच बड़ नीक हेतै। खैर, गाम चल। देखल जेतै। हमरा तँ एक्के सप्ताहक छुट्टी अछि आ तोरा? डाक्टर- हमरो तँ सएह छौ। चल, फेर जल्दी एबाको छै। देखही दुखन, जाधरि सभ जाति एक नै हएत, ऊँच-नीचक भावना नै हटत ताधरि लोकमे इर्ष्या-द्वेषक भावना जकड़ल रहत। तइसँ मानवता हटत आ देशक विकास रूकत। इंजीनियर- गप तोहर ओराइते नै छौ। आब छोड़ बादमे हेतै। काल्हि सबेरे निकलबाक छै। पटाक्षेप। चारिम दृश्य– (स्थान- चन्द्रेशक हवेली। चन्द्रेश आ मनीषा चन्द्रप्रभाक बिआहक संबन्धमे गप-सप्प करै छथि।) चन्द्रेश- चन्द्रप्रभा मम्मी, आइ चन्द्रप्रभाक अबैया अछि। आब जौं आेकरा देखबै तँ चिन्हबो नै करबै। दोसरे रंग भऽ गेलए। बंगलूर हम गेल रही ऐ बेर तँ चिन्हैमे हमरो धोखा भेल। ओतुक्का जलवायु अपना औरसँ अलग छै। मनीषा- तहन तँ ओकर बिआह सेहो जल्दी करए पड़तै। कारण सभ किछु समैपर नीक होइ छै। उमेरो छै आ सरकारी नोकरी सेहो छै। मुदा एगो बात पूछी? चन्द्रेश- पूछू ने। मनीषा- डाक्टर बर चाही वा इंजीनियर बर चाही वा कोनो आइ.ए.एस. ऑफीसर। मनीषा- मुदा ऐ बर सबहक मांग केते हएत, से बुझै छिऐ? चन्द्रेश- केते हएत, दस पेंटीसँ ऊपरे हएत। तेकर चिन्ता हमरा अछिए नै? कारण बैंकमे ओते राखल छै। मनीषा- ब्राह्मणमे दहेज बड़ बेसी होइ छै। जौं बीस पेंटीमे ओहन कुटुम पकड़ाएत तं की करबै? चन्द्रेश- जमीन बेचि कऽ लगा देबै। जौं ओइसँ आगू बढ़तै तँ कोनो जमीनदारे घरमे कऽ देबै। हमर बेटी ओइ घरमे रानी बनि राज करती। मनीषा- तहन डाक्टर भऽ कऽ कोन फेदा? चन्द्रेश- हुनर केतौ बेर्थ गेलैए। गामेपर क्लिनिक खोलि लेतै। खू पाइ कमेतै। बड़ प्रतिष्ठा भेटतै। (डाक्टरक प्रवेश। मम्मी-पापाकेँ पएर छूबि प्रणाम कऽ मम्मी लग बैस गेल। मम्मी ऊपर-निच्चाँ निहारि रहल अछि।) मनीषा- (चन्द्रप्रभाक देह सहलाबैत) बेटी, तूँ तँ दोसरे रंग भऽ गेलही। पापा कहै छेलखुन। हमरा बिसवास नै होइ छल। केना एहेन भऽ गेलही? कथी खाइ छेलही ओतए? डाक्टर- मम्मी कथी खेबै। जे तूँ सभ खाइ छीहे, सएह। ओतुक्का जलवायु दुआरे एहेन परिवर्तन भेलै हेन। मनीषा- आकि कोनो दबाइ खाइ छेलही? डाक्टर- नै गै मम्मी, सभ किछु एतुक्के जकाँ छेलै। एकदम साधारण रहन-सहन छल। चन्द्रेश- बेटी, सर्विसक हाल-चाल कह। डाक्टर- पापा, हॉस्पीटलमे बड़ प्रतिष्ठा अछि। चन्द्रेश- बेटी, एकटा विचार पूछै छियौ? डाक्टर- अबस्स पापा। चन्द्रेश- तोहर बिआहक संबन्धमे किछु सोचल जाए? डाक्टर- ई बात तँ मम्मीसँ पूछक चाही। चन्द्रेश- नै बेटी, तूँ सभ तरहसँ नम्हर छिही। जदी हमरासँ कोनो अनुचित िनर्णए भऽ जेतै तँ हम पाउल जाएब। जखनि बेटा-बेटी अठारहसँ टपल तखनि ओकरासँ मित्रवत् बेवहार हेबाक चाही। डाक्टर- से तँ ठीके। चन्द्रेश- बेटी, हमर शुरूएसँ विचार अछि जे तोहर बिआह जातिमे राजा कुलमे करी। आ तोहर विचार? डाक्टर- हमर विचार अछि सीता आ सावित्री जकाँ बिआह करी। चन्द्रेश- जेना सीता आ सावित्री अपन मन-पसीन बरसँ बिआह केली तहिना होइतै तहन नीक रहतै। जाति-पाति कोनो बड़ पैघ चीज नै छिऐ। अस्सल जाति एक्केटा अछि, मनुख जाति। खाली बेवहार नीक होइक चाही, विचार नीक चाही आ कर्म नीक चाही। चन्द्रेश- तोहर कहब इहए ने छौ जे डोमोक बेवहार-विचार-कर्म नीक होइ तऽऽऽ ओकरासँ ब्राह्मणी बिआह कऽ सकैए। सएह ने? डाक्टर- सोलहन्नी। भगवान राम शबरी ऐठाम अँइठ बैर खने रहथिन की नै? च्नद्रेश- हँ, से तँ ठीके छिऐ। डाक्टर- से किअए? बिना कारणे। शबरीमे प्रेम-श्रद्धाक गुण छेलै। उ गुण भगवानकेँ आकर्षित केलक आ उ आकर्षित भेला। चन्द्रेश- भगवानकेँ तँ लोककेँ तारैक रहै छन्हि। तँए उ किछु कऽ सकै छथि। मुदा हम जे हुनकर देखौंस करब से हमरा बुते संभव नै छै। हम अपना जकाँ करब। जातिक प्राथमिकता हम देब्बे करबै। हम सभसँ पैघ जाति छी ब्राह्मण। जदी हमहीं हूसि जाएब तँ दुनियाँ अनहेर भऽ जेतै। रस्ता-पेरा लोक चलए देत। हमरा जे एते प्रतिष्ठा अछि से माटिमे मीलि जाएत। डाक्टर- पापा, अहाँ भगवानकेँ मानै छिऐ की नै। (मुस्कुराइत) चन्द्रेश- नै किअए मानबै। हुनकेपर तँ दुनियाँ चलै छै। डाक्टर- जखनि अनेक जाति भगवान वा भगवतीक पूजा करै छथि तँ कहाँ कियो कोढ़िया भऽ जाइ छथि वा कियो राजा भऽ जाइ छथि? चन्द्रेश- तूँ जनमल हमरे सीखबए चललेँ। डाक्टर- नै पापा, से बात नै छै। (मुस्कियाइत अछि।) धिया-पुता केतबो काबिल भऽ जाए मुदा माए-बापक आगूमे ओ बच्चे रहतै। चन्द्रेश- (प्रसन्न भऽ) हँ, ई तोहर कहब जाइज छौ। जे बसी काबिल रहै छै, ओ तीनठाम गूँह मखै छै, पएर, हाथ आ नाकमे। डाक्टर- से सभसँ भऽ सकै छै। अहूँसँ भऽ सकै छै। चन्द्रेश- (खिसिआ कऽ) बेटी, फेर तूँ हूसि रहल छेँ। हमरासँ हूसल काज नै भऽ सकै छौ, नै भऽ सकै छौ, नै भऽ सकै छौ। बेटी, तोरा डाक्टर बनबैमे हमरा की खरच अछि से हमहींटा बुझै छी। गूरक मारि धोकरा जनै छै। तोरा नोकरीले हमरा मंत्री साहैबक पएर पकड़ए पड़ल जे तोरा सामनेक गप छै। आइ हमर कहल करैले तैयार नै छेँ। बापक तूँ अवहेलना करै छेँ अवहेलना अवहेलना अवहेलना। मनीषा- (गंभीर मुद्रामे) बुच्ची, कनी चाह बनेने आउ। (डाक्टरक प्रस्थान।) चन्द्रप्रभा पापा, बेटी डाक्टर अछि। ओकरापर ओते किअए खिसिआ जाइ छिऐ? जुग ठीक नै अछि। आ जँ तामसे-पित्ते किछु कऽ लिअए। चन्द्रेश- ओहीक डरे हम खाली खिसिआ रहल छी। नै तँ मारैत-मारैत मारि दैतिऐ आ माटिक तरमे गाड़ि दैतिऐ। मुदा दर-दुनियाँमे अछि तँ एगो। माया-मोह घेर लइए। चन्द्रप्रभा मम्मी, हमरा लगैए उ केतौ हूसि गेल अछि वा हूसएवाली अछि। तँए ओकर एहेन बात होइ छै। चाह लऽ कऽ आबए दियौ। हम चाह पी कऽ अंदर चलि जाएब। अहाँ ओकरासँ पियारसँ मनक बात लेब। मनीषा- हमरा कहतै से? आब उ बच्चा नै ने छै। चन्द्रेश- बेटीकेँ माएसँ बड़ सिनेह रहै छै। अहाँकेँ भेद कहि देत। हमरा पूरा बिसवास अछि। (डाक्टरकेँ चाह लऽ कऽ प्रवेश। मम्मी-पापाकेँ चाह देली। दुनू परानी चाह पीऐ छथि। शीघ्र चाह पी कऽ कप रखलनि।) चन्द्रप्रभा मम्मी, हम कनी अबै छी। एक गोरक हिसाब देखबाक अछि। मनीषा- बेस जाउ। ताबे हम दुनू माइ-धीन गप-सप्प करै छी। (चन्द्रेशक प्रस्थान) बुच्ची, पापा लकीरक फकीर छथुन। पहुलका गपकेँ रीतिक मोटरी जकाँ उघै छथुन। आब ओइ मोटरीकेँ उघैमे फेदा नै छै। ई समैक फेड़ छिऐ। जदी तूँ आनो जातिसँ बिआह कऽ लेबही तँ कोनो अनरगल नै हेतै। खाली लड़िका गुणगर होइ। बुच्ची, तोरा नजरिमे जदी कोनो गुणगर लड़िका छै तँ बाज। हम तोरा पापाकेँ समझा-बुझा कऽ कहबनि। आशा अछि जे ओ मानि जेता। डाक्टर- मम्मी छेँ। तोरासँ की छुपेबै आ केते दिन छुपेबै। उगल सुरूजकेँ वादल केते दिन झाँपि सकैए? पापाकेँ नै कहबीन तँ कहै छियौ। मनीषा- पापासँ केते दिन छुपेबनि? बात बढ़ि गेला पछाति जदी ओ बुझथिन तहन तँ ओ औरो आगि बबुला भऽ जेथुन। तूँ साँच बात बाज। हम हुनका मना लेबनि। डाक्टर- कहै तँ लाज होइए। (मुस्कियाए लगैए।) मनीषा- लाजसँ काज नै चलतौ। डाक्टर भऽ कऽ एते लाज। डाक्टर- बात कहबौ तँ तोरा घृणा बुझेतौ। ओना हमरा घृणा नै बुझाइए आ ने अछि। हेबाको नै चाही। मनीषा- तूँ हमरो ओझराबए लगलेँ। बेसी ओझरौठ नीक नै लगै छै। (खिसिआ कऽ) कहबाक छौ तँ कह। नै तँ तूँ बुझही आ तोहर पापा बुझथुन। डाक्टर- मम्मी खिसिया नै, कहै छियौ। (मुस्की दैत।) मम्मी, हमरा हमरा, दुखन दुखन, से सँ। मनीषा- बाज ने, लाजक बात नै छिऐ। जिनगीक बात छिऐ। डाक्टर- हमरा दुखनसँ लव भऽ गेल अछि। (मुड़ी झूका लइए।) मनीषा- दुखन के छिऐ? डाक्टर- अपन डोमीनक बेटा। इंजीनियर छिऐ। मारूती कंपनीमे पैंतालिस हजार तनखा पबैए। दुनू गोरे संगे गाम एलौं। मनीषा- किछु छै। मुदा छै तँ डोम। केतए राजा भोज, केतए गंगू तेली। पढ़ि-लिखि कऽ तूँ खनदानक नाक कटेलेँ। तूँहीं कह ब्राह्मणमे डाक्टर-इंजीनियर लड़िकाक अभाव छै? डाक्टर- मम्मी, अखने तूँ कहलेँ जाति-पाति कोनो चीह नै छिऐ आ तुरन्त गप पलटि कऽ कहै छेँ जे ब्राह्मणमे डाक्टर इंजीनियर लड़िकाक अभाव नै छै। एकर माने तोरा मनमे कटारी छौ। मनीषा- हम की जानए गेलिऐ जे तूँ पढ़ि-लिखि कऽ एते नीच खसि पड़मेँ। मम्मी छियौ, तँए घटोसि लइ छियौ। मुदा काज नीक नै केलेँ। जिनगीक फैसला सोचि-समझि कऽ लेबाक चाही। डाक्टर- मम्मी, हम बड़ सोचि-समझि कऽ ई फैसला लेलौं। आखिर ई फैसला हमरे जिनगीकेँ उगाएत-डुमाएत किने? से कोनो हम नै बुझै छी? मनीषा- तूँ लाल बुझक्करि छेँ किने लाल बुझक्करि। पटाक्षेप। पाँचम दृश्य- (स्थान- चन्द्रेशक हवेली। दुनू परानी बेटीक संबन्धमे विचार-विमर्श कऽ रहल छथि।) चन्द्रेश- (प्रसन्न मने) चन्द्रप्रभा मम्मी, किछु रहस्यक भाँज लगल की नै? मनीषा- लगल तँ, मुदाऽऽऽ। चन्द्रेश- की मुदा? मनीषा- बजैबला गप नै छै। बड़ हूसि गेल अछि। चन्द्रेश- से की? मनीषा- कहैत तँ लाज होइए। मुदा कहब नै तँ बुझबै केना? चन्द्रेश- एते कियो गपकेँ चौथारए। जे रहस्य छै से बाजू। मनीषा- चन्द्रप्रभाकेँ डोमीनक बेटा दुखनसँ प्रेम भऽ गेल छै। चन्द्रेश- (आँखि लाल-पिअर करैत) अखनि बजा आनू तँ पाँती-पाँती अही बेंतसँ दागि दइ छिऐ। मनीषा- अहाँकेँ कहै छेलौं तँ हमर गपक कोनो मोजरे नै दइ छेलौं। कहै छेलौं, हमर बेटी बड़ बुझनुक अछि। आब की भेल? चन्द्रेश- हम की जानए गेलिऐ जे विद्यार्थी बाहर पढ़ैले जाइए आ छौड़ा-छौड़ीक खेल करैए। (कनीकाल गुम्म भऽ जाइ छथि। फेर खिसिआ कऽ।) डाक्टर भऽ गेल तइसँ की? मुदा हमरा ओहेन बेटी नै चाही, नै चाही, नै चाही। जे हेतै से हेतै। मुदा ओकरा जीअ नै देबै। लेाक प्रतिष्ठा लेल हरान अछि। बड़ी कठिनसँ प्रतिष्ठा भेटैए। तेकरा ई छौड़ी माटिमे मिला देलक। कहू तँ, लोक हमरा मालिक कहैए आ ओइ मालिकक बेटी एना करए? धनि हम जे उ डोमबा छौड़ा इंजीनियर बनल आ हमरे बेटीपर हाथ फेर देलक। ओहू सारकेँ नै जीअ देब। नै रहतै बाँस आ नै बजतै बौसरी। (खिसिआ कऽ उठि अन्दर जाइले तैयार भेला।) पहिने ओइ छौड़ीक जान लेबै। तहन ओइ छौड़ाक। मनीषा- हाँ हाँ हाँ हाँ। औगताउ नै। बुधि-विवेकसँ काज लिअ। धैर्यसँ काज लिअ। (चन्द्रेश रूकि गेला।) गाड़ल मुर्दाकेँ किअए उखाड़ै छी? ओइपर औरो माटि दियौ। चन्द्रेश- अच्छा, एगो गप कहू तँ उ छौड़ा डोमबा गाम एलै हेन की नै? मनीषा- हँ, एलै हेन चन्द्रप्रभे संगे। चन्द्रेश- आँइ, लोक देखने हएत तँ कि कहत? अच्छा, ओइ सारले किछु उपए सोचए पड़त। (ब्रह्मानंदक प्रवेश। चन्द्रेश आँखि लाल-पीअर करैत गुम्म भऽ बैसल छथि।) मनीषा- बैसू बौआ। (ब्रह्मानंद बैसला।) ब्रह्मानंद- भौजी, भैयाकेँ बड़ तमसाएल देखै दियनि? मनीषा- हँ, बेटीपर खिसिआएल छथिन। ब्रह्मानंद- की भेलै से ओकरा अबिते-अबिते? मनीषा- अहाँ अप्पन लोक छी तँए कहए पड़त। ओना इ्र सभ गप गुप्त रहबाक चाही। केतौ बजबै नै। ब्रह्मानंद- एहनो केतौ बाजल जाइ। मनीषा- हमर बेटी बंगलूरेमे मंगला डोमबाक बेटासँ फँसि गेल अछि। कहू तऽऽऽ केतए ब्राह्मण आ केतए डोम? कनियोँ मेल खाइ छै। ब्रह्मानंद- एको मिसिआ नै। कहू तँ दुनू पढ़ल-लिखल छै। तहूमे डाक्टर-इंजीनियर। लोक पढ़ि-लिखि कऽ और बेकूप बनि जाइए। ऐसँ नीक अमरूखे। चन्द्रेश- बौआ, आब की हेतै? (शांत भऽ कऽ।) ब्रह्मानंद- एकर किछु कारगर उपए सोचए पड़तै। चन्द्रेश- हमर विचार अछि ओइ डोमबाकेँ मरबा कऽ सिस्से खतम कऽ दिऐ। नै रहतै बाँस आ ने बजतै बौसरी। ब्रह्मानंद- ई कनी बेसी भऽ गेलै। मंगला गरीब आदमी छै। उजड़ल-उपटल छै। एक्के गो बेटा छै। तेकरा बड़ी कठिनसँ पढ़ा-लिखा कऽ इंजीनियर बनौलक। हमरा विचारसँ ओइ छौड़ाकेँ कनी बेसी पीटाइ देल जाए जे ओकरा मन रहतै आ फेर एहेन गलती नै करतै। मनीषा- हमरा विचारसँ ई नीक नै हेतै। कारण सौंसे गाम हल्ला भऽ जेतै। गाम-गाम बात पसरि जेतै। तहन आरो अपना सबहक प्रतिष्ठापर पड़त। ऐसँ बढ़ियाँ केस कऽ दियौ। ब्रह्मानंद- नै भौजी, केसमे दुनू पाटी पेराइ छै। बेसी मालेबला पेराइ दै। कारण पुलिसकेँ माल चाही माल। उ वेचारा घर-घराड़ी बेचि बेटाकेँ इंजीनियर बनौलक। सेहो जेहल चलि जाएत। ओकरासँ पलिसकेँ की भेटतै? किछु नै। दोसर गप उ हरिजन छिऐ। हम जे कहलौं पीटैबला गप, सएह करू। चन्द्रेश- ओइमे जदी उ केस कऽ देत तहन? ब्रह्मानंद- ओत्ते पीटेबे नै करबै। बचा कऽ पीटबै जे देखार नै होइ आ चोट खूम रहै। तइमे ग्राम-कचहरीसँ काज चलि जेतै। सरपंच तँ ग्रामीण होइ छथि किने। उ ममिला सलटिया लेथिन। चन्द्रेश- तहन केना जोगार सेट हेतै? ब्रह्मानंद- जोगारे जोगार छै। पाँच-सात गोरे चलू ओकरा ऐठाम। तीन परानी अछि। उकट-पुकट बात बजबै, गारि-फझ्झति देबै। ओइपर कनियाेँ नै कनियोँ खिसियाएत। तहीपर धुइन देबै। झगड़ा फँसेनाइ तँ अपना हाथमे छै। चन्द्रेश- बेस तँ अहाँ जाउ चारि-पाँचटा खच्चर छौड़ाकेँ बजेने आउ। ब्रह्मानंद- ओकरा सभकेँ किछु माल-पानी दिअ पड़ै छै। चन्द्रेश- से लिअ। (एकटा पँचसौआ जेबीसँ निकालि कऽ चन्द्रेश ब्रह्मानंदकेँ सिकरेट पीबए लगैत।) (ब्रह्मानंदक प्रस्थान।) आइ सारकेँ बापसँ भेँट करेबै। सारकेँ कनियोँ आँखिमे पानि नै जे ओही मालिकक किरपासँ हम इंजीनियर बनलौं आ हुनके बेटीपर हम केना हाथ फेरै छिऐ। (ब्रह्मानंदक संग नरेश, भद्रेश, उग्रेश, सुरेश आ महेशक प्रवेश। छओ निसाँमे चूर अछि।) ब्रह्मानंद- चलू भैया। आइ सारकेँ छठी रातिक दूध बोकरेबै। बड़ आगि मुतैए सार। चन्द्रेश- चलै चलू। (चन्द्रेश ब्रह्मानंद, नेरेश, भद्रेश, उग्रेश सुरेश आ महेशक प्रस्थान। फेर मनीषाक प्रस्थान। अन्दरमे मंगल आ मरनी अपन बेटासँ गप-सप्प कऽ रहल अछि पर्दा उठैए। तीनू परानी आगू बढ़ि जाइए। फेर पर्दा खसैए।) मरनी- बौआ, हम तँ तोरा काल्हि चिन्हबो ने केलियौ। मंगल- हमहूँ अकचकाएले रहि गेलौं। जखनि गरसँ देखलौं तब बुझलिऐ हमरे बौआ छी। एतने दिनमे केना एहेन भऽ गेलही? इंजीनियर- एतुक्का पानि आ ओतुक्का पानिमे बड़ अंतर छै। शुरूमे ओतुक्का पानि हमरो नै नीक लगै छल। बादमे नीक लागए लगल। सभ पानिक कमाल छी। मरनी- नोकरी-तोकरी भेलै की नै? इंजीनियर- भेलै की। मरनी- केते महिना कमाइ छिही? इंजीनियर- माए, तोरा सबहक असिरवादसँ पैंतालिस हजार महिना कमाइ छियौ। मरनी- एलही तँ बाउक हाथमे पाइ कहाँ देलही? इंजीनियर- रखने िछऐ। आइ दऽ देबनि। मंगल- आबो घरपर धियान नै देबही तँ केना हेतै? आब तूँ हाकीम भेलही। कए आदमी एतै-जेतौ तोरा गल। की कहै जेतै? इंजीनियर- से तँ ठीके। केतौ नीक ठाम जमीन भँजियाउ। हम पाइ पठा देब। अहाँ जमीन कीनि ओइपर बढ़ियाँ घर बना लेब। बाउ, अहाँ ई काज छोड़ि दियौ आब? मंगल- से किअए बौआ? अपन काज करैमे कोन हरजा? इंजीनियर- से हरजा कोनो नै। मुदा अहाँ सभकेँ उमेर बसी भऽ गेल। लोक की कहत जे इंजीनियर भऽ कऽ माए-बापकेँ खटबै छै? मंगल- बौआ, बैसारी भऽ जाएब तँ मन आ देह असोथकित भऽ जाएत। रंग-बिरंगक बेमारी हएत। तइसँ सभ परानी परेशान रहब। इंजीनियर- ईहो गप तँ कटैबला नै अछि। तँ एगो हएत जे कोनो धंधे खोलि देब आ ओहीमे लगल-भीड़ल रहब। अपन काजमे लाज किअए? मुदा उमेर भेने हल्लुको काज भारी भऽ जाइ छै। बांस काटि कनहापर आनब से आब अहाँ बुते पार नै लगत। मंगल- ठके छै। कोनो धंधे खोलि दिहेँ। (चन्द्रेश, सभ कियोक प्रवेश। इंजीनियर कुरसीपर सँ उठि गेलथि। मंगल आ मरनी सेहो उठि गेल।) इंजीनियर- मालिक प्रणाम। (चन्द्रेश गुम्म छथि।) बैसल जाउ, मालिक सभ। गरीब आदमी देबाल बरबरि। (मरनी अन्दरसँ चटाइ आनि बिछा देलक।) मंगल- मालिक सभ प्रणाम। आइ केम्हर सुरूज लगलै हेन? बैसै जाइ जाउ, मालिक सभ। (कियो नै बजै छथि।) चन्द्रेश- (खिसिआ कऽ।) मंगला, पहिने तूँ अपन बेटाकेँ पूछ-की केलकौ हेन? मंगल- की केलही मालिककेँ? इंजीनियर- हम कहाँ किछु केलियनि मालिककेँ? ब्रह्मानंद- मालिककेँ नै, मालिकक बेटीकेँ? इंजीनियर- से मालिक, अपन बेटीकेँ पूछथुन जे ककर दोख? ब्रह्मानंद- केकरो दोख छै ने रउ? इंजीनियर- प्रेमसँ केकरो दोख नै होइ छै। जेतए प्रेम छै तेत्तै ईश्वर छै। नरेश- हमहूँ एतए एकरा माएसँ प्रेम करबै। तँ ईश्वर रहतै ने? भद्रेश- अखनि प्रेमसँ तोरा बापक मुँहपर दू चाट दिऐ। तँ ईश्वर रहतै किने? उग्रेश- प्रेमसँ केरो बहुकेँ लऽ कऽ भागि जाइ। तँ ईश्वर रहतै किने ओतए? सुरेश- हम तोरा बहिनसँ बिआह कऽ लेबौ। तँ ईश्वर रहतै की नै? मंगल- मालिक सभ, अहाँ सभ एना किअए बजै छिऐ अर्र-बर्र बताह जकाँ। महेश- जखनि हम सभ बताहे छी तखनि हरामी बच्चा इंजीनियरबाकेँ दू चाट दिऐ तँ केहेन मन हेतै सारकेँ। (महेश कहैत मातर इंजीनियरकेँ दू चाट गालपर बैसा देलक। सभ कियो लुधकि गेल। चन्द्रेश आ ब्रह्मानंद ठाढ़ छथि। मरनी हमरा बेटाकेँ मारि देलक मारि देलक चिचिआ रहल अछि। इंजीनियर बेहोश भऽ खसि पड़ल। तैयो मानाइ नै छोड़ै जाइए। बढ़ियाँ जकाँ मारि भऽ रहल अछि।) चन्द्रेश- मंगला दुनू परानीकेँ छोड़ि दइ जाही। एकरा सबहक कोनो दोख नै छै। (दुनू परानीकेँ कियो ने मारैए। इंजीनियर मरनासन भऽ गेल।) आब हरामीकेँ छोड़ि दही। सारकेँ कनियोँ दिमाग हेतै तँ आब एहेन काज केतौ नै करत। हरामी बच्चा, जही पातमे खेलक ओही पातमे छेद केलक। (सभ कियो छोड़ि देलक। सभ हकमि रहल अछि।) महेश- बेकारे मारै जाइ गेलही। सार अही बेत्थे मरि जेतै। आब हमरा एकरापर बड़ दया अबै छौ। चन्द्रेश- मरए दही, हरामी बच्चाकेँ। अपना सभ चलै चल। (सातो गोटेक प्रस्थान।) पटाक्षेप।
छअह दृश्य- (स्थान- मंगलक घर। मंगल आ मरनी चिन्तित मुद्रामे बैसल छथि। इंजीनियर रोगी जकाँ बैसल छथि।) मंगल- बौआ, काल्हि एना किअए भेलै, से किछु नै बूझि सकलिऐ? की केने छेलही हुनका? इंजीनियर- हुनकर बेटीसँ हमरा प्रेम भऽ गेलै और कोनो बात नै। मरनी- ई नीक बात तँ नै भेलै। उ ब्राह्मण छथिन आ अपना सभ डोम। उ बड़ अमीर छथिन आ अपना सभ बड़ गरीब छी। अपना जातिमे लड़िकी नै छै जे तूँ ओते ऊँच जातिमे पैसलेँ। इंजीनियर- माए, प्रेममे ऊँच-नीच नै देखल जाइ छै। मरनी- हौ दुखन बाउ, उ जे अपना सभकेँ एते मारलक हेन से हमर विचार अछि जे थाना जाइ आ तोहर की विचार? मंगल- रूक, हम कनी मणिकांत मालिककेँ बजेने अबै छी। एहेन तरहक कोनो काज बिना सोचने-विचारने नै करबाक चाही। तूँ दुनू माइ-पूत गप-सप्प कर आ हम अबै छी। (मंगलक प्रस्थान।) मरनी- तूँ जे कहलिही प्रेममे ऊँच-नीच नै देखल ाजइ छै, से किअए? इंजीनियर- कारण आन्हर होइ छै। मरनी- लोक धिया-पुताकेँ अहीले पढ़बै-लिखबै छै? इंजीनियर- नै माए, प्रेम मुर्खोमे होइ छै। प्रेमक कोनो सीमा नै छै। मरनी- ऐसँ फेदा की छै? इंजीनियर- ऐसँ मानवता अबै छै। ऊँच-नीचक भेद-भाव हटै छै। बड़का-छोटका एक हेतै। तब समाजक विकास हेतै। मरनी- एकर चिन्ता तोरे किअए छौ? इंजीनियर- जाबे एकर चिन्ता केकरो हेतै नै आ उ बीड़ा उठेतै नै ताबे समाजक विकास केना हेतै? मरनी- बीड़ा उठबैक फल भेटलौ। बढ़ियाँ भेलै ने? इंजीनियर- कोनो बीड़ा उठबैबलाकेँ ई सभ परेशानी झेलैए पड़ै छै। महात्मा गाँधीकेँ देश स्वतंत्र करबैमे कोन-कोन परेशानीक सामना करए पड़लनि। (मंगलक संग मणिकांतक प्रवेश।) मालिक प्रणाम। बैसल जाउ। (इंजीनियर कुरसीपर उठि निच्चाँ बैसलथि आ मणिकांत कुरसीपर बैसला।) मणिकांत- कह बौआ, एना किअए भेलौं? इंजीनियर- चन्द्रेश मालिकक बेटी आ हम बंगलूरमे रहै छी अपन-अपन डेरामे। दुनू गोटे एक दिन अचानक पार्कमे मिल गेलौं। गप-सप्प भेल। ऊहो प्रेम संबन्धी नै, एकदम सामान्य। तूँ की करै छेँ तँ तूँ की करै छेँ? फेर हम अपन डेरा चलि गेलौं। दूर दृष्टि रहने एक दिन उ हमरा डेरापर पहुँच प्रेम संबन्धी गप-सप्प करए लगली। हमहूँ दूर दृष्टिक आदर करैत ओकरा हँ कहि देलिऐ। तेकरे सजा हम भोगि रहल छी। अस्सल गप इहए छै। मणिकांत- बात बुझा गेल। तोरा सबहक बात बुझए बला समाज अखनि नै भेलै हेन। रसे-रसे हेतै। तूँ सभ जाित-प्रथाकेँ तोड़ैक दृष्टि रखि ई काज करै जाइ गेलेँ। की हमर अनुमान गलत छै? इंजीनियर- हण्ड्रेड परसेन्ट सत्य। अपने सभ बड़ अनुभवी छिऐ। अहीं सभ जकाँ जौं समाजक कर्णधार हुअए तँ समाजक आशातीत कल्याण हएत। मणिकांत- तूँ सभ भरिसक बड़का यानी ऊँच आ छोटका यानी नीचकेँ एक करैक परियास कऽ रहल छिही। इंजीनियर- जी, जी। लगैए, अपने अंतर्यामी होइ। मणिकांत- नै नै। अंतर्यामी तँ ईश्वर छथिन। समाजक जे समस्या देखै सुनै छी आ अनुभव करै छी। तइ अधारपर बजलौं। मंगल, एकरा सबहक परियास एकटा पैघ बीड़ा छै उ बीड़ा भविसक लेल नीक छै। आब की कहै छह से कहह। मंगल- मालिक, दुखन माएक विचार छै जे थाना जाइ। अहाँक की विचार? मणिकांत- हमरा विचारे थानाक चक्करमे नै पड़ह। गरीब आदमी छह। हरान-हरान भऽ जेबह। उ सभ पाइबला छै। सभकेँ जहल खटा देतह। उचित-अनुचितक फैसला होइमे बड़ समए लगै छै। उजड़ल-उपटल छह। कनी बर्दाशे कऽ कऽ चलल। समाजेमे सरपंच साहैबसँ फैसला करा लैह। ऊहो बड़ अनुभवी छथि। एम.ए.,एल.एल.बी. छथिन। तँए ने अपन रामनगर पंचाइतमे िनर्विरोध चुनल गेलखिन। दूध-पानि बेरबैक उद्भुत क्षमता हुनकामे छन्हि। अपन पंचाइतक टी.एन.सेशन छथिन ओ। ऐसँ आगू तोरा सबहक अपन विचार। मंगल- मालिक, हम अपनेकेँ सभ दिन मानैत रहलौं आ मानैत रहब। अपनेक देखाएल रस्तापर चललौं। तँए बेआ, आइ इंजीनियर अछि। हम अहाँक कहल अबस्स करब। मणिकांत- तहन काल्हि पंचैती करा लैह। मंगल- बेस मालिक। मुदा पंचैतीमे अहां रहबेटा करबै। मणिकांत- बेस, काल्हि अबस्स रहबै। अखनि जाए दैह। (मणिकांत दासक प्रस्थान।) मंगल- दुखन माए, आब काल्हि देखही की होइ छै? पटाक्षेप। सातम दृश्य- (स्थान- गामक मिडिल स्कूलक। पंचैतीक तैयारी। स्कूलपर मंगल, इंजीनियर, रबीया आ मणिकांत उपस्थिति छथि।) मणिकांत- की हौ मंगल, नअ बजेक समए छेलै आ साढ़े नअ बजि रहल अछि। अखनि धरि ओ सभ कहाँ कियो एला। सरपंच साहैब सेहो नै पहुँच सकला।) मंगल- कहने तँ छियनि आ ऊहो कहने छथि जे अबस्स आएब। (सरपंच साहैब-मोतीलालक प्रवेश। सभ कियो उठि गेला। प्रणाम-पाती भेल। मोतीलाल कुरसीपर बैसला। मणिकांत सेहो कुरसीपर बैसला। मंगल, इंजीनियर आ रबीया निच्चाँमे बैसला।) मोतीलाल- मंगल, हम अदहा घंटा लेट छीअ से हमरा माफ करिहअ। की करबै, बड़ फाइल रहै छै। टुनटुनमा बकरीसँ उनटे कलम खिआ लेलकै आ कलमबलाकेँ मारबो केलकै। तहीक पंचैतीमे देरी लगि गेल। ओइ पाटीकेँ नै देखै छिऐ। मंगल- की जानए गलिऐ, उ सभ किअए ने आएल? रबीया- भैया रौ, नै बुझै छिहीन चोर केतौ इजोत सहैए। मोतीलाल- केतौ किछु नै बाजि दी। अबिते हेता। कोनो जरूरी काजमे बाझि गेल हेता। (चन्द्रेश आ ब्रह्मानंदक प्रवेश। प्रणाम-पाती भेल। दुनू आदमी कुरसीपर बेसला।) चन्द्रेश, बड़ देरी भेल? चन्द्रेश- ब्रह्मानंदक पत्नीकेँ बच्चा होइबला छै। पत्नीकेँ अस्पताल पठबैक जोगारमे ई लागल रहथि। कहै छला, हम अस्पताल जाएब। हम हिनका जबरदस्ती अनलियनि। मोतीलाल- हिनका नै अनक चाही अहाँकेँ। कारण हिनका कोन जरूरी हेतनि कोन नै। आखिर पति छथिन ने? चन्द्रेश- ठीक छै हिनका जल्दीए छोड़ि देबनि। मोतीलाल- चन्द्रेश बाबू, और कियो एता अहाँ दिसक? चन्द्रेश- कहने तँ कएक गोटेकेँ छियनि। मुदा ओइमे जे सभ अबथि। रबीया- सरपंच साहैब, उ गुंडा सार सभ कहाँ एलै जे हमरा भैया-भौजी आ भतीजाकेँ अधमौगति कऽ मारलक? मोतीलाल- चूप बुरबक, पंचैतीमे लोक अंट-संट नै बजै छै। रबीया- हँ यौ सरपंच साहैब (मुडी डोला कऽ) हम डोम छी, छोटका छी तँ बड़ बुरबक आ जे हमरा घर पैस हमरा सभकेँ मारलक-पीटलक से बड़ काबिल। मोतीलाल- नै बौआ, से बात नै छै। अस्सल बात ई छै जे कर्म गुणे लोक बुरबक-काबिल होइ छै। (रामानंद, कृष्णानंद, चन्द्रकांत, उमाकांत, शोभाकांत आ इन्द्र नारायणक प्रवेश। सभ कियो प्रणाम-पाती कऽ निच्चाँमे बैसला।) और कियो एता, चन्द्रेश बाबू? चन्द्रेश- आइबो सकै छथि। ताबे पंचैती शुरू करू। बड़ लेट भऽ रहल अछि। अहूँकेँ बड़ फाइल रहैए। मोतीलाल- आब पंचैती शुरू कएल जाए? सभ कियो- जी, कएल जाए। मोतीलाल- मंगल, तूँ पंचैती किअए बैसेलहक? मंगल- चन्द्रेश मालिक हमरा सभ परानीकेँ पाँचटा गुंडासँ पीटबौलथि आ अपने ठाढ़ रहथि। हमर बेटाकेँ अखनि धरि होश नै अछि। पकड़ि कऽ अनलौं हेन। मोतीलाल- की यौ चन्द्रेश बाबू, ठीक बात छिऐ? चन्द्रेश- बिल्कुल ठीक अछि। मुदा, मंगलासँ पुछियनु जे ओकर बेटा हमरा बेटीसँ प्रेम करै छै। से किअए? अँए यौ सरपंच साहैब, धनि हम जे आकर बेटा पढ़ि-लिखि कऽ इंजीनियर बनि सकल आ से हमरे बेटीपर हाथ फेर दिअए। मंगल- सरपंच साहैब, हिनका पुछियनु जे हमरा बेटाकेँ इंजीनियर बनैमे केते पाइ अपना दिससँ मदति केलखिन। हँ एगो गुण नै बिसरबनि जे बेरपर किछु समान लऽ कऽ जाइ छेलियनि तँ उचित सँ बड़ कममे जरूर लऽ लइ छेलखिन। चन्द्रेश- हम तँ उचितसँ बेसी दइ छेलिऐ। मुदा एकरा कम बुझाइ छेलै। तहन हमरा ऐठाम किअए अबै छल? मंगल- हमर पसारी छथिन आ गामक मािलक छथिन तँए। मोतीलाल- अहाँ सभ ई उकटा-पैंची छोड़ै जाइ जाउ। मंगल, तोरा बेटासँ पुछै छिअ जे उ हिनका बेटीसँ प्रेम करै छै की नै? इंजीनियर- जी करै छिऐ। मोतीलाल- चन्द्रेशक बेटी तोरासँ प्रेम करै छह की नै? इंजीनियर- ई जवाब हिनकर बेटीसँ लेल जाए श्रीमान्। मोतीलाल- चन्द्रेश, अपन बेटीकेँ बजाएल जाए। चन्द्रेश- ब्रह्मानंद अहाँ घर चलि जाउ। बुच्चीकेँ किनको संगे जल्दी पठा देब आ अहाँ अस्पताल चलि जाएब। ब्रह्मानंद- बेस हम जाइ छी। (ब्रह्मानंदक प्रस्थान।) चन्द्रेश- सरपंच साहैब, कहू तँ, केतए ब्राह्मण आ केतए डोम। जमीन असमानक फरक छै। हमर प्रतिष्ठा आ मंगलाक प्रतिष्ठा दुनू कहियो एक रंग भऽ सकैए? डोम आ ब्राह्मणमे बिआह केकरो सोहेतै? तइमे हमर जातिमे केहेन लगतै। उ सभ हमरा जीअ देता? जाति प्रबल होइ छै आ प्रतिष्ठा बड़ी कठिनसँ भेटै छै। मोतीलाल- अच्छा, बेटीकेँ आबए दियनु। स्थिति-परिस्थिति कबूझब तहन ने कोनो िनष्कर्ष निकलत। ओना आजूक समाजक जे बेवस्था छै, तइमे अहाँक कहब ठीक अछि। ममिला तँ अहां आ मंगलबला नै छै। अहाँ दुनू आदमी समाजक बेवसथा बुणे ठीक छी। मुदा दुनूक बेटा-बेटीमे कोन तरपेस्की छै, से तँ दुनू प्रत्यक्ष हएत, तहने बुझबै। (डाक्टर आ डाक्टरक पितियौत बहिन उमाक प्रवेश। दुनूकेँ मोतीलाल कुरसीपर बैसैक आदेश देलनि। दुनू कुरसीपर बैस गेली।) बुच्ची, अहाँ आ दुखनक बीच कोनो संबन्ध अछि? डाक्टर- जी, उ हमर प्रेमी छथि। मोतीलाल- एकतरफा आकि दूतरफा? डाक्टर- दूतरफा। कोइ केकरोसँ कम नै। मोतीलाल- तहन ओइ वेचाराकेँ किअए पीटबौलिऐ? डाक्टर- (अकचकाइत) हम, नै तँ, नै, हमरा किछु नै बूझल अछि। मोतीलाल- की दुखन, बात सत्य छिऐ? हाथ एकरे भऽ सकै छै? इंजीनियर- बात तँ बिल्कुल सत्य छै। मुदा चन्द्रप्रभाक हाथ नै भऽ सकै छै, नै भऽ सकै छै, नै भऽ सकै छै। चन्द्रेश मालिकक प्रत्यक्षक घटना छी। डाक्टर- हमर पापा एहेन घटिया काज केलथि, एहेन घटिया काज केलथि, एहेन घटिया काज केलथि? नीक नै केलथि, नीक नै केलथि, नीक नै केलथि। (अचेत भऽ खसि पड़ै छथि। चन्द्रेशक समांग चन्द्रप्रभामे लगि जाइ छथि। दुखन चन्द्रप्रभाक मुँहपर अपन बापक गपछासँ हौंकए लगै छथि। चन्द्रेश दुखन आँखि लाल-पीअर कऽ रहलए। उमा पानि आनि आकर मुँह पोछैए। कनीकाल पछाति चन्द्रप्रभा होशमे एली। की भेलै, की भेलैक हल्ला शांत भेल।) मोतीलाल- बुच्ची, आब ठीक छी? डाक्टर- (मुड़ी डोला कऽ) हँ। मोतीलाल- किछु और सवालक जवाब दऽ सकै छी? डाक्टर- जी, बढ़ियाँ जकाँ। मोतीलाल- अहाँकेँ ओना किअए भऽ गेल छल? डाक्टर- ई घटना जे हमर पापा दुआरा कएल गेल, हमरा एक्को रत्ती पसीन नै। हमर दिल ओकरा बरदास नै कऽ सकल। मोतीलाल- अहाँ सभ डाक्टर-इंजीनियर छी। जातिक वा आर्थिक दृष्टिसँ बहुत ऊँच-नीच छी। तइमे प्रेम किअए भेल? डाक्टर- श्रीमान्, प्रेममे जाति-पाति वा अमीर-गरीव नै देखल जाइ छै। मोतीलाल- किछु उदेस अछि की? डाक्टर- बड़ पैघ उदेस अछि। बड़ पैघ बीड़ा अछि। मोतीलाल- की उदेस अछि? डाक्टर- जाति-प्रथाकेँ खतम केनाइ। मोतीलाल- दुखन, अहूँक किछु उदेस अछि? इंजीनियर- जी, अबस्स अछि। ऊँच-नीचकेँ एक केनाइ। मोतीलाल- बात बुझा गेल। ई सभ अही दुआरे प्रेमक दुनियाँमे पएर देलक हेन। आब अगिला कार्यक्रम की अछि? इंजीनियर- अगिला कार्यक्रम हमरा सबहक बिआह अछि। मोतीलाल- की बुच्ची, अहाँकेँ ई उचित बुझाइए? डाक्टर- उचिते नै, महा उचित। मोतीलाल- की चन्द्रेश बाबू? अहाँ किछु नै बजै छी? चन्द्रेश- की बाजी, किछु नै फुराइए। मोतीलाल- बुच्ची अहाँ आ दुखन अपन-अपन घर जाउ। (डाक्टर, उमा आ दुखनक प्रस्थान।) चन्द्रेश बाबू, ममिला बड़ गड़बड़ अछि। ई सभ नै मानैबला अछि। एकरा सबहक संग कोनो परियास काज नै करत। बेकारमे बेज्जति हएत। कानूनो एकरे संग देतै। चन्द्रेश- किछु हेतै, हम एकरा नै मानब, नै बरदास कऽ सकब। मोतीलाल- तहन पंचैतीक कोनो महत नै। सएह ने? चन्द्रेश- नै, महत तँ बड़ छै। अपने बुजुर्ग छिऐ, बड़ अनुभवी छिऐ। उचित फैसला करिऔ। मोतीलाल- देखियौ, हम तँ अपना भरि उचितोचित फैसला करब। पाटीकेँ पीक लगै वा अधला, ओइसँ हमरा कोनो मतलब नै? की हौ मंगल, तोहर की विचार? मंगल- मालिक, नअ करिऐ आकि छअ करिऐ। सभ मंजूर। मोतीलाल- आब हम फैसला देमए चाहै छी। ऐ बीचमे किनको किछु बाजबाक अछि तँ बाजि सकै छी। (कनीकाल कियो किछु नै बजै छथि।) अखनि धरि अहाँक फैसला सराहनीय रहल अछि। अहाँपर सभकेँ बिसवास छन्हि। चन्द्रकांत- अहाँक फैसलामे दूध-पानि बेरा जाइए। अहाँक फैसला जे काटत, से दोखी भऽ सकैए। रबीया- अहाँक फैसला ले लोक केतए-केतएसँ अबैत रहैए। बिना कारणे टिटही नै लगै छै। मोतीलाल- तहन हमर फैसला सुनै जाइ जाउ। जाति एक्केटा अछि, मनुक्ख जाति। वैज्ञानिक लोकनि एकरा होमोसेपिएन्स कहै छथि। हम सभ अपन वर्चस्व लेल जाति अलग-अलग बनबै छी जेइमे अपन-अपन स्वार्थ लेल हरिदम झगड़ होइत रहैए। जाति-प्रथासँ मानसिक तनाव बढ़ैए आ समाजक विकास रूकैए। कर्मक प्रधानता छै। कर्मसँ ऊँच-नीच होइ छै। जइ मनुक्खक कर्म नीक छन्हि, ओ गुणगर छथि, ओहए ऊँच छथि। गुणक प्रधानता रहक चाही। डाक्टर आ इंजीनियरक सोच ऊँच छन्हि। तँए दुनूक प्रेमकेँ हम स्वागत करै छियनि। सहर्ष दुनूक बिआह हेबाक चाही। (थोपरीक बौछार भऽ रहल अछि।) मुदा बिआहोपरांत दुनूक संबन्ध राम-सीता जकाँ हुअए। लिखो-फेंको पेन जकाँ नै। (थोपरीक बौछार भेल।) धनिक लोक यानी ऊँच लोक गरीब लोक यानी नीच लोकक परिश्रमसँ ऊँच होइ छथि। बदलामे उ गरीबक शोषण करै छथि। ई मानवताक विरूद्ध भेल। हमरा विचारे ऊँच-नीच दुनू एक-दोसरक उपकारकेँ मानथि आ अपन-अपन अधिकार-करतबमे तिरोटी नै करथि। तहने समाजक विकास संभव हएत। (थोपरीक बौछार भेल।) मंगल दुनू परानीकेँ चन्द्रेश पीटबेलखिन। ई हिनकर गलती भेलनि। ऐ प्रेम प्रसंगमे मंगल दुनू परानीक कोनो दोख नै छन्हि। ऐ गलती लेल चन्द्रेशकेँ जुर्माना लगतनि। (थोपरीक बौछार भेल। चन्द्रेशक मुड़ी निच्चाँ भऽ जाइए। रबीया- सरपंच साहैब, पंचैती खतम भऽ गेल ने? मोतीलाल- नै कनी और छै। रबीया- कनी जल्दी करियौ। हमरा कनी पोखरि दिस जाइक अछि। मोतीलाल- तँ पहिने पोखरि दिससँ भऽ आबह। तहन पंचैती सुनिहअ। रबीया- सार सभकेँ ओकाइत रहै छै नहियेँ आ पुड़ी-जिलेबीक भोज करत। सड़लाहा डलडामे पुड़ी छानत तँ कमो-समो खाएब तँ पेट खराब हेबे करत। अहाँक पंचैती सुनैमे बड़ नीक लगै छै। जाधरि बरदाश हएत अबस्स सुनब। मोतीलाल- देखिहअ, धोतीमे नै भऽ जा। पंचैतीमे उपस्थित महानुभावसँ हमर आग्रह जे हमर फैसलापर जदी कियो टिप्पणी करता हुनका हम स्वागत करबनि। रबीया- सरपंच साहैब, हमरा कहलिऐ कनी और दै, से कहाँ कहलिऐ? ओइ दुआरे हम पोखरि दिस नै जा रहल छी। मोतीलाल- हँ, जुर्माना की केना लगतनि? से छुटलै अछि आ फैसलाक कागत बनेनाइ छुटल अछि। किनको कोनो तरहक विरोध बेक्त करबाक हुअए तँ बेहिचक बेक्त करी। (सभ कियो गुम्म रहै छथि।) की चन्द्रेश, अपनेकेँ ई फैसला मान्य अछि? चन्द्रेश- (कनीकाल गुम्म भऽ) रहब तँ समाजेमे। जदी संपूर्ण समाजकेँ मान्य छन्हि तँ हम केना कही जे हमरा अमान्य अछि। हमरो मान्य अछि। (मुड़ी झूका लइ छथि।) मोतीलाल- तहन बिआहक की केना करबै? चन्द्रेश- अपने जे जेना कहिऐ। मोतीलाल- मंगल, तूँ बिआहकेँ की केना करबहक? मंगल- हम किच्छो नै बाजब, सरपंच साहैब। अपने सबहक विचारे विचार। मणिकांत- श्रीमान्, अपने जे कहबै, ओकर आदर सभ कियो करता। मोतीलाल- तहन हमर विचार अछि जे डाक्टर-इंजीनियरक बिआह आइए, अखनि आ एत्तै भऽ जाए। (थोपरीक बौछार भऽ गेल।) दुनू पक्ष तत्काल कम-सँ-कम खर्चमे निमहि जेता। भोज-भात बिआहोपरान्त करै जाइ जेता। (थोपरीक बौछार भेल।) मुदा एकटा आवश्यक बात चन्द्रेश बाबूकेँ कहए चाहै छियनि। ओ ई जे गुणगर बेटीकेँ गुणगर बर भेटलनि तँए डालीमे एककट्ठा बास-डीह दिअ पड़तनि। (थोपरीक बौछार भेल।) और जुर्मानामे ओइपर काज चलैबला घर बनाबए पड़तनि। (थोपरीक बौछार भेल।) गोर लगाइमे अपन जमाएकेँ जे देथुन वा नै देथुनहम किछु नै कहबनि। की चन्द्रेश, मनोमान अछि किने? चन्द्रेश- श्रीमान्, जाइतो गमेलौं, सुआदो ने पेलौं। मोतीलाल- अस्सल सुआद तँ अहाँ पेलौं आ पएब। योग्य बेटीकेँ योग्य बर भेटलनि। ई सभसँ पैघ सुआद भेल। दोसर समाजमे मानवता एत्तै। ऊहो सुआद कम नै बुझियौ। चन्द्रेश- जे कहिऐ अपने। मोतीलाल- औपचारिक तौरपर एगो कागत बनेनाइ आवश्यक अछि जे दुनू पक्षकेँ समैपर काज आबए। (मोतीलाल कागत लिखलनि। दुनू पक्षसँ हस्ताक्षर/निशान लेलनि। किछु गवाहीक हस्ताक्षर/निशान सेहो भेल। एक प्रति कागत चन्द्रेशकेँ देलखिन आ दोसर प्रति मंगलकेँ देलखिन।) दुनू पक्ष बिआहक तैयारी करू। चट मंगनी पट बिआह। (मंगल आ चन्द्रेशक प्रस्थान।) जाधरि समाजमे ई सभ परिवर्तन नै हएत ताधरि समाज पछुआएल रहत। आ समाजे पछुआएल रहत तँ देश कहियो आगू नै बढ़ि सकैए। रबीया- सरपंच साहैब, आब बरदाश नै हएत। कनी अबै छी पोखरि दिससँ। चाह-नाश्ता हमरोले रहए देबै। मोतीलाल- जा, जाल्दी आबह। (रबीयाक प्रस्थान। मंगल मरनी आ इंजीनियरक प्रवेश। चन्द्रेश आ ब्रह्मानंदक प्रवेश। चन्द्रेशक पक्षमे चाह-पान-जलखैक जोगार अछि। डाक्टरक संग उमा, आ चारि-पाँचटा दाइ-माइक प्रवेश। बर-कनियाँ कुरसीपर बैसलथि।) चन्द्रेश बाबू, आब अपने सभ अगिला कार्यक्रम देखियौ। हमरा चलबाक आज्ञा देल जाए। करीमनगर जेबाक अछि पंचैतीमे। चन्द्रेश- ई नै भऽ सकैए। अहाँकेँ रहै पड़त। (परमानन्द आ कृष्णानंदक प्रवेश।) मोतीलाल- जदी हमरा रहै पड़त तँ जे करब से जल्दी करू। चन्द्रेश- ब्रह्मानंद, जलखै चलाउ। (ब्रह्मानंद, परमानंद आ कृष्णानंद जलखै चला रहल छथि। फेर पानि चलल। चाह चलल। रबीयाक प्रवेश।) रबीया- सरपंच साहैब, हमरो ले छै आकि सधि गेलै? मोतीलाल- तूँ बड़ देरी लगा देलहक। लगैए सधि गेल हेतै। रबीया- अँए यौ, भरि मन पोखैरो दिस नै केलौं आ नश्तो छूटि गेल। एहने बेवस्था? मोतीलाल- चन्द्रेश बाबू, एगो जलखै छूटि गेल अछि। चन्द्रेश- के छूटल छथि? रबीया- हम छूटल छी। चन्द्रेश- ब्रह्मानंद, रबीया जलखैमे छूटल छथि। (परमानंद रबीयाकेँ जलखै देलनि। खाइते-खाइते कछमछाइत धोतीक ढेका पकड़ि रबीयाक प्रस्थान।) मोतीलाल- चन्द्रेश बाबू, आब बड़ देरी भऽ रहल अछि हमरा। अगिला कार्यक्रम जल्दी कएल जाए। चन्द्रेश- जनानी सभ, जयमाला करबै जाइ जाउ। ब्रह्मानंद, अहाँ सभ पान चलाउ। (जनानी सभ जयमाला करबै छथि। ब्रह्मानंद परमानंद आ कृष्णानंद पान चलबै छथि। जयमाला भेल। थोपरीक बौछार भेल। रबीयाक प्रवेश। चन्द्रेश-मंगल आ ब्रह्मानंद-रबीयामे फुटा-ॅफुटा समधी मिलन भेल। थोपरीसँ सभा गूंजि रहल अछि। बर-कनियाँ श्रेष्ठ जनकेँ पएर छूबि प्रणाम केलनि। सभ कियो असीरवाद देलखिन। बर-कनियाँ दर्शककेँ कर जोड़ि प्रणाम कऽ रहल छथि।) पटाक्षेप। इति शुभम्। ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ। विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती १. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल) मोहनदास (मैथिली-देवनागरी) मोहनदास (मैथिली-मिथिलाक्षर) मोहनदास (मैथिली-ब्रेल) २.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद छिन्नमस्ता ३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि) भगता बेङक देश-भ्रमण ४.तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद डॉ. शम्भु कुमार सिंह द्वारा पाखलो बालानां कृते बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक १.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही। कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥ करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक। २.संध्या काल दीप लेसबाक काल- दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः। दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार। ३.सुतबाक काल- रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्। शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥ जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ४. नहेबाक समय- गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥ हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ। ५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि। ६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा। पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥ जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि। ७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥ अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि। ८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः। सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥ ९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती। अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥ १०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२) आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥ आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥ मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव। ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव। हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥ मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि। एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि। अन्वय- ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म रा॒ष्ट्रे - देशमे ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए रा॑ज॒न्यः-राजा शुरे॑ऽ–बिना डर बला इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली) धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित सप्तिः॒-घोड़ा पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर स॒भेयो॒-उत्तम सभामे युवास्य-युवा जेहन यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे नः-हमर सभक प॒र्जन्यों-मेघ वर्षतु॒-वर्षा होए फल॑वत्यो-उत्तम फल बला ओष॑धयः-औषधिः पच्यन्तां- पाकए योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा नः॑-हमरा सभक हेतु कल्पताम्-समर्थ होए ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पडला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी। विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ। Top of Form १.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली आ २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम १.नेपाल आ भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली (भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन १.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना- अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।) पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।) खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।) सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।) खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।) उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि। नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ। २.ढ आ ढ : ढक उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना- ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि। ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि। उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि। ३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि। ४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही। ५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि। प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि। नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि। सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि। ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि। ६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि। ७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि। ८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि: (क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक। अपूर्ण रूप : पढ’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पडतौक। पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक। (ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह। अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह। (ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि। अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल। (घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि। अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि। (ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना- पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक। अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ। (च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना- पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि। अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै। ९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि। १०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। -(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित) १.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली
१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-
ग्राह्य
एखन ठाम जकर, तकर तनिकर अछि
अग्राह्य अखन, अखनि, एखेन, अखनी ठिमा, ठिना, ठमा जेकर, तेकर तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य) ऐछ, अहि, ए।
२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।
३. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।
४. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।
५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।
६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।
७. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।
८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।
९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।
१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।
११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।
१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।
१३. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।
१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।
१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।
१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।
१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।
१८. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ , हटा क’ नहि।
१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।
२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।
२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।
ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम २.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):- दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य शमे जीह तालुसँ , षमे मूर्धासँ आ दन्त समे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे ष केँ वैदिक संस्कृत जकाँ ख सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि। ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी। अछि- अ इ छ ऐछ (उच्चारण) छथि- छ इ थ – छैथ (उच्चारण) पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण) आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि। फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र । उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू। रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)। मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए। छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो। संयोगने- (उच्चारण संजोगने) केँ/ कऽ केर- क ( केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। ) क (जेना रामक) –रामक आ संगे (उच्चारण राम के / राम कऽ सेहो) सँ- सऽ (उच्चारण) चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ) रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)। केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ सऽ , तऽ , त , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित। के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति “क”क बदला एकर प्रयोग अवांछित। नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)। राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै) सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन) पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै) ओइ/ ओहि ओहिले/ ओहि लेल/ ओही लऽ जएबेँ/ बैसबेँ पँचभइयाँ देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित) जकाँ / जेकाँ तँइ/ तैँ/ होएत / हएत नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै सौँसे/ सौंसे बड / बडी (झोराओल) गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।) रहलेँ/ पहिरतैँ हमहीं/ अहीं सब - सभ सबहक - सभहक धरि - तक गप- बात बूझब - समझब बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ हमरा आर - हम सभ आकि- आ कि सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै) होइन/ होनि जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन) पइठ/ जाइठ आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ । एकटा , दूटा (मुदा कए टा) बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ , आ/ दिय’ , आ’, आ नै ) अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)। अइमे, एहिमे/ ऐमे जइमे, जाहिमे एखन/ अखन/ अइखन केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित) भऽ मे दऽ तँ (तऽ, त नै) सँ ( सऽ स नै) गाछ तर गाछ लग साँझ खन जो (जो go, करै जो do) तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति कतेक दिनसँ कहैत रहैत अइ लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे लहँ/ लौं गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि ... समए शब्दक संग जखन कोनो विभक्ति जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्यादि। असगरमे हृदए आ विभक्ति जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्यादि। जइ/ जाहि/ जै जहिठाम/ जाहिठाम/ जइठाम/ जैठाम एहि/ अहि/ अइ/ ऐ अइछ/ अछि/ ऐछ तइ/ तहि/ तै/ ताहि ओहि/ ओइ सीखि/ सीख जीवि/ जीवी/ जीब भले/ भलेहीं/ भलहिं तैं/ तँइ/ तँए जाएब/ जएब लइ/ लै छइ/ छै नहि/ नै/ नइ गइ/ गै छनि/ छन्हि चुकल अछि/ गेल गछि २.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही: बोल्ड कएल रूप ग्राह्य: १.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक २. आ’/आऽ आ ३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए ४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल ५. कर’ गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह ६. लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/ ७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला / करैवाली ८. बला वला (पुरूष), वाली (स्त्री) ९ . आङ्ल आंग्ल १०. प्रायः प्रायह ११. दुःख दुख १ २. चलि गेल चल गेल/चैल गेल १३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन १४. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह १५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि १६. चलैत/दैत चलति/दैति १७. एखनो अखनो १८. बढ़नि बढइन बढन्हि १९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) ओ २० . ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ २१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ २२. जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर २४. केलन्हि/केलनि/कयलन्हि २५. तखनतँ/ तखन तँ २६. जा रहल/जाय रहल/जाए रहल २७. निकलय/निकलए लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल २८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए २९. की फूरल जे कि फूरल जे ३०. जे जे’/जेऽ ३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन) ३२. इहो/ ओहो ३३. हँसए/ हँसय हँसऽ ३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस ३५. सासु-ससुर सास-ससुर ३६. छह/ सात छ/छः/सात ३७. की की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित) ३८. जबाब जवाब ३९. करएताह/ करेताह करयताह ४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस ४१ . गेलाह गएलाह/गयलाह ४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर ४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल ४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि जाइत छल ४५. जबान (युवा)/ जवान(फौजी) ४६. लय/ लए क’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए ४७. ल’/लऽ कय/ कए ४८. एखन / एखने / अखन / अखने ४९. अहींकेँ अहीँकेँ ५०. गहींर गहीँर ५१. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए ५२. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ ५३. तहिना तेहिना ५४. एकर अकर ५५. बहिनउ बहनोइ ५६. बहिन बहिनि ५७. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ ५८. नहि/ नै ५९. करबा / करबाय/ करबाए ६०. तँ/ त ऽ तय/तए ६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ, ६२. गिनतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ ६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत ६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता ६५. देन्हि/ दइन दनि/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि ६६. द’/ दऽ/ दए ६७. ओ (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम) ६८. तका कए तकाय तकाए ६९. पैरे (on foot) पएरे कएक/ कैक ७०. ताहुमे/ ताहूमे ७१. पुत्रीक ७२. बजा कय/ कए / कऽ ७३. बननाय/बननाइ ७४. कोला ७५. दिनुका दिनका ७६. ततहिसँ ७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि/ गरबेलन्हि/ गरबेलनि ७८. बालु बालू ७९. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध) ८०. जे जे’ ८१ . से/ के से’/के’ ८२. एखुनका अखनुका ८३. भुमिहार भूमिहार ८४. सुग्गर / सुगरक/ सूगर ८५. झठहाक झटहाक ८६. छूबि ८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ ८८. पुबारि पुबाइ ८९. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि ९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे ९१. खेलएबाक ९२. खेलेबाक ९३. लगा ९४. होए- हो – होअए ९५. बुझल बूझल ९६. बूझल (संबोधन अर्थमे) ९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह ९८. तातिल ९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ १००. निन्न- निन्द १०१. बिनु बिन १०२. जाए जाइ १०३. जाइ (in different sense)-last word of sentence १०४. छत पर आबि जाइ १०५. ने १०६. खेलाए (play) –खेलाइ १०७. शिकाइत- शिकायत १०८. ढप- ढ़प १०९ . पढ़- पढ ११०. कनिए/ कनिये कनिञे १११. राकस- राकश ११२. होए/ होय होइ ११३. अउरदा- औरदा ११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand) ११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि/ बुझयलन्हि (understood himself) ११६. चलि- चल/ चलि गेल ११७. खधाइ- खधाय ११८. मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखिन/ मोन पारलखिन्ह ११९. कैक- कएक- कइएक १२०. लग ल’ग १२१. जरेनाइ १२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/ जरेनाइ १२३. होइत १२४. गरबेलन्हि/ गरबेलनि गरबौलन्हि/ गरबौलनि १२५. चिखैत- (to test)चिखइत १२६. करइयो (willing to do) करैयो १२७. जेकरा- जकरा १२८. तकरा- तेकरा १२९. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे १३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं १३१. हारिक (उच्चारण हाइरक) १३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज १३३. आधे भाग/ आध-भागे १३४. पिचा / पिचाय/पिचाए १३५. नञ/ ने १३६. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय १३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत १३८. कतेक गोटे/ कताक गोटे १३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई १४० . लग ल’ग १४१. खेलाइ (for playing) १४२. छथिन्ह/ छथिन १४३. होइत होइ १४४. क्यो कियो / केओ १४५. केश (hair) १४६. केस (court-case) १४७ . बननाइ/ बननाय/ बननाए १४८. जरेनाइ १४९. कुरसी कुर्सी १५०. चरचा चर्चा १५१. कर्म करम १५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए १५३. एखुनका/ अखुनका १५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ १५५. कएलक/ केलक १५६. गरमी गर्मी १५७ . वरदी वर्दी १५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ १५९. एनाइ-गेनाइ १६०. तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि १६१. नञि / नै १६२. डरो ड’रो १६३. कतहु/ कतौ कहीं १६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर १६५. भरिगर १६६. धोल/धोअल धोएल १६७. गप/गप्प १६८. के के’ १६९. दरबज्जा/ दरबजा १७०. ठाम १७१. धरि तक १७२. घूरि लौटि १७३. थोरबेक १७४. बड्ड १७५. तोँ/ तूँ १७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य) १७७. तोँही / तोँहि १७८. करबाइए करबाइये १७९. एकेटा १८०. करितथि /करतथि १८१. पहुँचि/ पहुँच १८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि १८३. लगलन्हि/ लगलनि लागलन्हि १८४. सुनि (उच्चारण सुइन) १८५. अछि (उच्चारण अइछ) १८६. एलथि गेलथि १८७. बितओने/ बितौने/ बितेने १८८. करबओलन्हि/ करबौलनि/ करेलखिन्ह/ करेलखिन १८९. करएलन्हि/ करेलनि १९०. आकि/ कि १९१. पहुँचि/ पहुँच १९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा) १९३. से से’ १९४. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए) १९५. फेल फैल १९६. फइल(spacious) फैल १९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि/हेतनि/ हेतन्हि १९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब १९९. फेका फेंका २००. देखाए देखा २०१. देखाबए २०२. सत्तरि सत्तर २०३. साहेब साहब २०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि २०५. हेबाक/ होएबाक २०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ २०७. किछु न किछु/ किछु ने किछु २०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं २०९. एलाक/ अएलाक २१०. अः/ अह २११.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक २१३.सबहक/ सभक २१४.मिलाऽ/ मिला २१५.कऽ/ क २१६.जाऽ/ जा २१७.आऽ/ आ २१८.भऽ /भ’ (’ फॉन्टक कमीक द्योतक) २१९.निअम/ नियम २२० .हेक्टेअर/ हेक्टेयर २२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़ २२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं २२३.कहिं/ कहीं २२४.तँइ/ तैं / तइँ २२५.नँइ/ नइँ/ नञि/ नहि/नै २२६.है/ हए / एलीहेँ/ २२७.छञि/ छै/ छैक /छइ २२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २२९.आ (come)/ आऽ(conjunction) २३०. आ (conjunction)/ आऽ(come) २३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना २३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि २३३.हेबाक- होएबाक २३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं २३५.किछु न किछ- किछु ने किछु २३६.केहेन- केहन २३७.आऽ (come)-आ (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह २३८. हएत-हैत २३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें २४०.एलाक- अएलाक २४१.होनि- होइन/ होन्हि/ २४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/ओ २४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ २४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ २४५ .शामिल/ सामेल २४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं २४७.जौं / ज्योँ/ जँ/ २४८.सभ/ सब २४९.सभक/ सबहक २५०.कहिं/ कहीं २५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/ २५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल २५३.कोना/ केना/ कन्ना/कना २५४.अः/ अह २५५.जनै/ जनञ २५६.गेलनि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन) २५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि/ २५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन) २५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी २६०.पठेलन्हि पठेलनि/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि/ २६१.निअम/ नियम २६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर २६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ २६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित २६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -क/ कऽ/ के २६६.छैन्हि- छन्हि २६७.लगैए/ लगैये २६८.होएत/ हएत २६९.जाएत/ जएत/ २७०.आएत/ अएत/ आओत २७१ .खाएत/ खएत/ खैत २७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पियेबाक २७३.शुरु/ शुरुह २७४.शुरुहे/ शुरुए २७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह २७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/ २७७.जाइत/ जैतए/ जइतए २७८.आएल/ अएल २७९.कैक/ कएक २८०.आयल/ अएल/ आएल २८१. जाए/ जअए/ जए (लालति जाए लगलीह।) २८२. नुकएल/ नुकाएल २८३. कठुआएल/ कठुअएल २८४. ताहि/ तै/ तइ २८५. गायब/ गाएब/ गएब २८६. सकै/ सकए/ सकय २८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल) २८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत (पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि। बुझैत-बुझैत आब बुझलिऐ। हमहूँ बुझै छी। २८९. दुआरे/ द्वारे २९०.भेटि/ भेट/ भेँट २९१. खन/ खीन/ खुना (भोर खन/ भोर खीन) २९२.तक/ धरि २९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ) २९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ) २९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य २९६.बेसी/ बेशी २९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला) २९८ .वाली/ (बदलैवाली) २९९.वार्त्ता/ वार्ता ३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय ३०१. लेमए/ लेबए ३०२.लमछुरका, नमछुरका ३०२.लागै/ लगै ( भेटैत/ भेटै) ३०३.लागल/ लगल ३०४.हबा/ हवा ३०५.राखलक/ रखलक ३०६.आ (come)/ आ (and) ३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप ३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै। ३०९.कहैत/ कहै ३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different) ३११.तागति/ ताकति ३१२.खराप/ खराब ३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि ३१४.जाठि/ जाइठ ३१५.कागज/ कागच/ कागत ३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए) ३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय DATE-LIST (year- 2013-14) (१४२१ फसली साल) Marriage Days: Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29 Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13 January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31. Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27. March 2014- 2, 3, 5, 7, 9. April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24. May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30. June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25. July 2014- 2, 3, 4, 6, 7. Upanayana Days: February 2014- 2, 4, 9, 10. March 2014- 3, 5, 11, 12. April 2014- 4, 9, 10. June 2014- 2, 8, 9. Dviragaman Din: November 2013- 18, 21, 22. December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13. February 2014- 16, 17, 19, 20. March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12. April 2014- 16, 17, 18, 20. May 2014- 1, 2, 9, 11, 12. Mundan Din: November 2013- 20, 22. December 2013- 9, 12, 13. January 2014- 16, 17. February 2014- 6, 10, 19, 20. March 2014- 5, 12. April 2014- 16. May 2014- 12, 30. June 2014- 2, 9, 30. FESTIVALS OF MITHILA (2013-14) Mauna Panchami-27 July Madhushravani- 9 August Nag Panchami- 11 August Raksha Bandhan- 21 Aug Krishnastami- 28 August Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September Hartalika Teej- 8 September ChauthChandra-8 September Vishwakarma Pooja- 17 September Anant Caturdashi- 18 Sep Pitri Paksha begins- 20 Sep Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep Matri Navami-28 Sep Kalashsthapan- 5 October Belnauti- 10 October Patrika Pravesh- 11 October Mahastami- 12 October Maha Navami - 13 October Vijaya Dashami- 14 October Kojagara- 18 Oct Dhanteras- 1 November Diyabati, shyama pooja-3 November Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November Chhathi -8 November Sama Poojaarambh- 9 November Devotthan Ekadashi- 13 November ravivratarambh- 17 November Navanna parvan- 20 November KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December Vivaha Panchmi- 7 December Makara/ Teela Sankranti-14 Jan Naraknivaran chaturdashi- 29 January Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February Achla Saptmi- 6 February Mahashivaratri-27 February Holikadahan-Fagua-16 March Holi- 17 March Saptadora- 17 March Varuni Trayodashi-28 March Jurishital-15 April Ram Navami- 8 April Akshaya Tritiya-2 May Janaki Navami- 8 May Ravi Brat Ant- 11 May Vat Savitri-barasait- 28 May Ganga Dashhara-8 June Harivasar Vrata- 9 July Shree Guru Poornima-12 Jul VIDEHA ARCHIVE १.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions विदेह ई-पत्रिकाक पहिल ५० अंक
विदेह ई-पत्रिकाक ५०म सँ आगाँक अंक http://sites.google.com/a/videha.com/videha/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-i/ https://sites.google.com/a/videha.com/videha-archive-part-ii/ २.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download http://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi ३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads http://sites.google.com/a/videha.com/videha-audio ४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-video ५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos http://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ "विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। ६.विदेह मैथिली क्विज : http://videhaquiz.blogspot.com/ ७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : http://videha-aggregator.blogspot.com/ ८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित http://madhubani-art.blogspot.com/ ९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" : http://gajendrathakur.blogspot.com/ १०.विदेह इंडेक्स : http://videha123.blogspot.com/ ११.विदेह फाइल : http://videha123.wordpress.com/ १२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग) http://videha-sadeha.blogspot.com/ १३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा http://videha-braille.blogspot.com/ १४.VIDEHA IST MAITHILI FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE http://videha-archive.blogspot.com/ १५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव http://videha-pothi.blogspot.com/ १६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव http://videha-audio.blogspot.com/ १७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव http://videha-video.blogspot.com/ १८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला http://videha-paintings-photos.blogspot.com/ १९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त) http://maithilaurmithila.blogspot.com/ २०.श्रुति प्रकाशन http://www.shruti-publication.com/ २१.http://groups.google.com/group/videha २२.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/ २३.गजेन्द्र ठाकुर इडेक्स http://gajendrathakur123.blogspot.com २४. नेना भुटका http://mangan-khabas.blogspot.com/ २५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट http://videha123radio.wordpress.com/ २६.Videha Radio २७. Join official Videha facebook group. २८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव http://maithili-drama.blogspot.com/ २९.समदिया http://esamaad.blogspot.com/ ३०. मैथिली फिल्म्स http://maithilifilms.blogspot.com/ ३१.अनचिन्हार आखर http://anchinharakharkolkata.blogspot.com/ ३२. मैथिली हाइकू http://maithili-haiku.blogspot.com/ ३३. मानक मैथिली http://manak-maithili.blogspot.com/ ३४. विहनि कथा http://vihanikatha.blogspot.in/ ३५. मैथिली कविता http://maithili-kavita.blogspot.in/ ३६. मैथिली कथा http://maithili-katha.blogspot.in/ ३७.मैथिली समालोचना http://maithili-samalochna.blogspot.in/ महत्त्वपूर्ण सूचना: The Maithili pdf books are AVAILABLE FOR free PDF DOWNLOAD AT
https://sites.google.com/a/videha.com/videha/ http://videha123.wordpress.com/ http://videha123.wordpress.com/about/ विदेह:सदेह:१: २: ३: ४:५:६:७:८:९:१० "विदेह"क प्रिंट संस्करण: विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/) क चुनल रचना सम्मिलित। सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। Details for purchase available at publishers's (print-version) site http://www.shruti-publication.com or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन (c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा, राम विलास साहु आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल। रचनाकार अपन मौलिक आ अप्रकाशित रचना (जकर मौलिकताक संपूर्ण उत्तरदायित्व लेखक गणक मध्य छन्हि) ggajendra@videha.com केँ मेल अटैचमेण्टक रूपमेँ .doc, .docx, .rtf वा .txt फॉर्मेटमे पठा सकैत छथि। रचनाक संग रचनाकार अपन संक्षिप्त परिचय आ अपन स्कैन कएल गेल फोटो पठेताह, से आशा करैत छी। रचनाक अंतमे टाइप रहय, जे ई रचना मौलिक अछि, आ पहिल प्रकाशनक हेतु विदेह (पाक्षिक) ई पत्रिकाकेँ देल जा रहल अछि। मेल प्राप्त होयबाक बाद यथासंभव शीघ्र ( सात दिनक भीतर) एकर प्रकाशनक अंकक सूचना देल जायत। ’विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका अछि आ ऐमे मैथिली, संस्कृत आ अंग्रेजीमे मिथिला आ मैथिलीसँ संबंधित रचना प्रकाशित कएल जाइत अछि। एहि ई पत्रिकाकेँ श्रीमति लक्ष्मी ठाकुर द्वारा मासक ०१ आ १५ तिथिकेँ ई प्रकाशित कएल जाइत अछि। (c) 2004-13 सर्वाधिकार सुरक्षित। विदेहमे प्रकाशित सभटा रचना आ आर्काइवक सर्वाधिकार रचनाकार आ संग्रहकर्त्ताक लगमे छन्हि। रचनाक अनुवाद आ पुनः प्रकाशन किंवा आर्काइवक उपयोगक अधिकार किनबाक हेतु ggajendra@videha.com पर संपर्क करू। एहि साइटकेँ प्रीति झा ठाकुर, मधूलिका चौधरी आ रश्मि प्रिया द्वारा डिजाइन कएल गेल। सिद्धिरस्तु 1 वि दे ह विदेह Videha বিদেহ www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका www.videha.com Videha Ist Maithili Fortnightly ejournal विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ‘विदेह'१३८ म अंक १५ सितम्बर २०१३ (वर्ष ६ मास ६९ अंक १३८) मानुषीमिह संस्कृताम् ISSN 2229-547X VIDEHA